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<title><![CDATA[hastakshep | हस्तक्षेप]]></title>
<description><![CDATA[हस्तक्षेप एक स्वतंत्र हिंदी न्यूज़ पोर्टल है जो समसामयिक, राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय, सामाजिक, राजनैतिक, आर्थिक मुद्दों पर समाचार और विश्लेषण प्रस्तुत करता है। यहाँ दलित, वंचित, आदिवासी, महिला व छात्र अधिकारों को विशेष महत्व दिया जाता है।]]></description>
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<title>hastakshep | हस्तक्षेप</title>
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<pubDate>Sat, 13 Jun 2026 17:22:05 GMT</pubDate>
<lastBuildDate>Sat, 13 Jun 2026 17:22:05 GMT</lastBuildDate>
<copyright><![CDATA[Hastakshep]]></copyright>
<language><![CDATA[hi]]></language>
<managingEditor><![CDATA[anushka@blinkcms.ai (Hastakshep)]]></managingEditor>
<ttl>1</ttl>
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<title><![CDATA['शुगर मॉमी' संबंध क्यों बढ़ रहे हैं? शोध में सामने आए सामाजिक, आर्थिक और यौन कारण]]></title>
<description><![CDATA[दक्षिण अफ्रीका के एक अध्ययन में 'शुगर मॉमी' संबंधों के सामाजिक, आर्थिक और मनोवैज्ञानिक कारणों का विश्लेषण किया गया। शोध ने HIV जोखिम पर भी चिंता जताई]]></description>
<tags>दक्षिण अफ्रीका,देश दुनिया की लाइव खबरें,AIDS</tags>
<link>https://hastakshep.com/health/south-africa-sugar-mommy-relationships-study-reasons-hiv-risk-304590</link>
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<category><![CDATA[दुनिया,देश,लाइफ़ स्टाइल,समाचार,स्वास्थ्य,जेंडर जस्टिस]]></category>
<dc:creator><![CDATA[Hastakshep]]></dc:creator>
<pubDate>Sat, 13 Jun 2026 17:14:27 GMT</pubDate>
<imagecaption><![CDATA[Reasons for relationships between older women and younger men]]></imagecaption>
<image><![CDATA[https://hastakshep.com/h-upload/2026/06/13/149355-reasons-for-relationships-between-older-women-and-younger-men.webp]]></image>
<content:encoded><![CDATA[<img src='https://hastakshep.com/h-upload/2026/06/13/149355-reasons-for-relationships-between-older-women-and-younger-men.webp' /><h2 style="text-align: justify; "><b>शुगर मॉमी रिश्तों पर बड़ा अध्ययन : क्यों बढ़ रहे हैं बड़ी उम्र की महिलाओं और युवा पुरुषों के संबंध?
</b></h2><ul class="hocalwire-editor-list"><li style="text-align: justify; "><b>प्रेम, पैसा या यौन संतुष्टि? 'शुगर मॉमी' संबंधों पर शोध में चौंकाने वाले खुलासे
</b></li><li style="text-align: justify; "><b>दक्षिण अफ्रीका में 'शुगर मॉमी' संस्कृति का विस्तार: अध्ययन ने बताए इसके पीछे के असली कारण
</b></li><li style="text-align: justify; "><b>बड़ी उम्र की महिलाओं और युवा पुरुषों के रिश्तों पर शोध: HIV जोखिम को लेकर भी बढ़ी चिंता
</b></li></ul><p style="text-align: justify; "><b>दक्षिण अफ्रीका में 135 प्रतिभागियों पर आधारित एक अध्ययन बताता है कि बड़ी उम्र की महिलाओं और युवा पुरुषों के बीच बढ़ते संबंध केवल प्रेम का मामला नहीं हैं। आर्थिक जरूरत, यौन संतुष्टि, सामाजिक दबाव और HIV संक्रमण के खतरे जैसे कई पहलू इस प्रवृत्ति से जुड़े हैं....
</b></p><p style="text-align: justify; ">नई दिल्ली, 13 जून 2026. भारत में भी 'शुगर मॉमी' को लेकर सोशल मीडिया पर काफी चर्चा है, लेकिन दक्षिण अफ्रीका में किए गए एक अध्ययन में सामने आया है कि बड़ी उम्र की महिलाओं और युवा पुरुषों के बीच बनने वाले तथाकथित 'शुगर मॉमी' संबंध केवल व्यक्तिगत पसंद का मामला नहीं हैं, बल्कि इनके पीछे सामाजिक, आर्थिक और मनोवैज्ञानिक कारणों का जटिल तंत्र काम करता है। 135 प्रतिभागियों पर आधारित एक गुणात्मक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि ऐसी अंतर-पीढ़ी (Intergenerational) संबंधों की प्रवृत्ति दक्षिण अफ्रीका में व्यापक है। अध्ययन के अनुसार इन संबंधों की स्वीकार्यता के पीछे प्रेम, आर्थिक अस्तित्व और सामाजिक औचित्य जैसे कारण हैं, जबकि शोधकर्ताओं ने HIV/AIDS के प्रसार पर इसके संभावित प्रभाव को भी गंभीर चिंता का विषय बताया।
</p><ul class="hocalwire-editor-list"><li style="text-align: justify; "><b>•	दक्षिण अफ्रीका में कितना प्रचलित है 'शुगर मॉमी' संबंधों का चलन?
</b></li><li style="text-align: justify; "><b>•	अध्ययन कैसे किया गया और किन लोगों को शामिल किया गया?
</b></li><li style="text-align: justify; "><b>•	लोग इन संबंधों को स्वीकार क्यों करते हैं?
</b></li><li style="text-align: justify; "><b>•	बड़ी उम्र की महिलाएं युवा पुरुषों के साथ संबंध क्यों बनाती हैं?
</b></li><li style="text-align: justify; "><b>•	युवा पुरुष 'शुगर मॉमी' संबंधों में क्यों शामिल होते हैं?
</b></li><li style="text-align: justify; "><b>•	क्या ऐसे संबंध HIV संक्रमण का खतरा बढ़ा सकते हैं?
</b></li><li style="text-align: justify; "><b>•	शोधकर्ताओं ने क्या निष्कर्ष निकाला?
</b></li></ul><p style="text-align: justify; ">"<b><a href="https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/?term=%22Phaswana-Mafuya%20N%22[Author]" target="_blank">Nancy Phaswana-Mafuya</a></b>, <b><a href="https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/?term=%22Shisana%20O%22[Author]" target="_blank">Olive Shisana</a></b>, <b>Adlai Davids</b>, <b><a href="https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/?term=%22Davids%20A%22[Author]" target="_blank">Cily Tabane</a></b>, <b><a href="https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/?term=%22Mbelle%20M%22[Author]" target="_blank">Margaret Mbelle</a></b>, <b><a href="https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/?term=%22Matseke%20G%22[Author]" target="_blank">Gladys Matseke</a></b>, <b><a href="https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/?term=%22Banyini%20M%22[Author]" target="_blank">Mercy Banyini</a></b>, <b><a href="https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/?term=%22Kekana%20Q%22[Author]" target="_blank">Queen Kekana</a></b>" उस शोध पत्र के लेखक हैं जिसका शीर्षक है "<b><a href="https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC4226421/" target="_blank">Perceptions of sugar mommy practices in South Africa</a></b>" (दक्षिण अफ्रीका में शुगर मॉमी प्रथाओं की धारणाएँ)।
</p><p style="text-align: justify; ">यह अध्ययन “Perceptions of sugar mommy practices in South Africa” दक्षिण अफ्रीका में "शुगर मॉमी" प्रथाओं की धारणाओं का एक गुणात्मक अध्ययन प्रस्तुत करता है। 135 प्रतिभागियों के साथ 11 फोकस समूहों का उपयोग करते हुए, अध्ययन का उद्देश्य इन संबंधों की व्यापकता, स्वीकार्यता और अंतर्निहित कारणों का पता लगाना था।
</p><p style="text-align: justify; ">अध्ययन में पाया गया कि ये प्रथाएँ दक्षिण अफ्रीका में प्रचलित हैं।
</p><p style="text-align: justify; "> स्वीकार्यता के कथित कारणों में प्रेम, अस्तित्व और औचित्य शामिल थे।
</p><p style="text-align: justify; "><b> बड़ी महिलाओं और युवा पुरुषों के बीच संबंधों के कारणों&nbsp;</b>(<b>Reasons for relationships between older women and younger men)&nbsp;</b>में यौन संतुष्टि, प्रभुत्व, तनाव में कमी, भौतिक आकर्षण और युवा महसूस करना शामिल थे, जबकि युवा पुरुषों के लिए, यह भौतिक लाभ, तनाव में कमी और साथियों के प्रभाव के कारण था।</p><p style="text-align: justify; ">प्रस्तुत संदर्भ के आधार पर, दक्षिण अफ्रीका में "शुगर मॉमी" (<b>sugar mommy</b>) प्रथाओं—यानी बड़ी उम्र की महिलाओं और युवा पुरुषों के बीच यौन संबंधों—को लेकर लोगों की धारणाओं, इसके कारणों और स्वीकार्यता पर किए गए अध्ययन का विस्तृत विवरण नीचे दिया गया है:
</p><p style="text-align: justify; "><b>1. अध्ययन की पृष्ठभूमि और पद्धति
</b></p><p style="text-align: justify; "><b>अध्ययन का उद्देश्य: </b>इस गुणात्मक अध्ययन का उद्देश्य दक्षिण अफ्रीका में शुगर मॉमी प्रथाओं की उपस्थिति, उनकी स्वीकार्यता और इन संबंधों में प्रवेश करने के पीछे बड़ी उम्र की महिलाओं और युवा पुरुषों के कथित कारणों का पता लगाना था।
</p><p style="text-align: justify; "><b>प्रतिभागी:</b> इस अध्ययन में दक्षिण अफ्रीका के सभी 9 प्रांतों के 11 विविध फोकस समूहों (Focus Groups) के कुल 135 प्रतिभागियों ने भाग लिया। इनमें से 27% महिलाएं थीं।
</p><p style="text-align: justify; "><b>डेटा संग्रह और विश्लेषण</b>: डेटा एकत्र करने के लिए फोकस समूह चर्चाओं (FGDs) का उपयोग किया गया, जिन्हें रिकॉर्ड और ट्रांसक्राइब किया गया। इसके बाद डेटा का विषयगत विश्लेषण (Thematic Analysis) किया गया।
</p><p style="text-align: justify; "><b>2. शुगर मॉमी प्रथाओं की उपस्थिति (Occurrence)
</b></p><p style="text-align: justify; ">अधिकांश प्रांतों और समूहों के प्रतिभागियों ने पुष्टि की कि उनके समुदायों में शुगर मॉमी प्रथाएं मौजूद हैं।
</p><p style="text-align: justify; ">प्रतिभागियों का मानना था कि अधिकांश शुगर मॉमी साधन संपन्न महिलाएं होती हैं जो विशेष रूप से सरकारी विभागों में वरिष्ठ पदों पर कार्यरत हैं।
</p><p style="text-align: justify; ">हालांकि, कुछ ग्रामीण क्षेत्रों के प्रतिभागियों ने कहा कि उनके समुदायों में यह प्रथा नहीं होती है, क्योंकि इसे एक अपमान और स्वास्थ्य के लिए खतरा (जैसे कि किडनी की बीमारी होना या भविष्य में बच्चे पैदा न कर पाना) माना जाता है।
</p><p style="text-align: justify; "><b>3. स्वीकार्यता और अस्वीकार्यता के कारण
</b></p><p style="text-align: justify; "><b>स्वीकार्यता के कथित कारण:
</b></p><p style="text-align: justify; ">प्यार की कोई उम्र नहीं होती: प्रतिभागियों का मानना था कि प्यार में उम्र की कोई सीमा नहीं होती और उम्र केवल एक संख्या है।
</p><p style="text-align: justify; "><b>जीविका और आर्थिक लाभ (Survival): </b>कुछ परिवारों या माता-पिता द्वारा इसे स्वीकार कर लिया जाता है क्योंकि इससे उनका जीवन स्तर सुधरता है। युवा पुरुष इस पैसे का उपयोग अपने परिवार की मदद के लिए करते हैं। कुछ पत्नियां भी अपने पतियों को अधिक पैसे वाली महिलाओं के पास जाने देती हैं ताकि वे पैसे बचा सकें।
</p><p style="text-align: justify; "><b>समानता (Correctness):</b> यदि बड़ी उम्र के पुरुष युवा महिलाओं (शुगर डैडी) के साथ संबंध रख सकते हैं, तो बड़ी उम्र की महिलाओं को भी युवा पुरुषों के साथ संबंध रखने का अधिकार होना चाहिए।
</p><p style="text-align: justify; "><b>अस्वीकार्यता के कथित कारण :
</b></p><p style="text-align: justify; "><b>वासना (Lust) :</b> कुछ लोगों का मानना है कि यह संबंध केवल शारीरिक इच्छा या वासना से प्रेरित होते हैं।
</p><p style="text-align: justify; "><b>वित्तीय लाभ :</b> युवा पुरुष केवल पैसे के लिए इन संबंधों में जाते हैं। कुछ युवा पुरुष इन संबंधों में जाने से पहले अपनी अंतरात्मा की आवाज को दबाने के लिए ड्रग्स का सहारा लेते हैं क्योंकि वे जानते हैं कि समाज इसे स्वीकार नहीं करता।
</p><p style="text-align: justify; "><b>अनुचित सामाजिक व्यवहार :</b> इसे नैतिक मूल्यों की कमी, आत्म-सम्मान की कमी और 'उबुंटू' (मानवतावाद) को बढ़ावा देने में विफलता के रूप में देखा जाता है।
</p><h3 style="text-align: justify; "><b>4. बड़ी उम्र की महिलाएं युवा पुरुषों के साथ संबंध क्यों बनाती हैं? (कथित कारण)
</b></h3><p style="text-align: justify; "><b>यौन संतुष्टि (Sexual fulfilment):</b> यह सबसे प्रमुख कारण बताया गया। प्रतिभागियों के अनुसार, उनके हमउम्र साथी या पति बीमारी (जैसे मधुमेह या उच्च रक्तचाप), कम यौन इच्छा या खराब शारीरिक प्रदर्शन के कारण यौन संतुष्टि नहीं दे पाते। इसके विपरीत, युवा पुरुष अधिक सक्रिय, ऊर्जावान, स्वस्थ और बेहतर यौन सुख देने वाले माने जाते हैं।
</p><p style="text-align: justify; "><b>वर्चस्व या प्रभुत्व (Domination):</b> शुगर मॉमी अपने संसाधनों का उपयोग युवा पुरुषों पर नियंत्रण या प्रभुत्व स्थापित करने के लिए करती हैं। युवा पुरुष लाभ खोने के डर से उनके निर्देशों का पालन करते हैं (जैसे किराने का सामान लाना, सैलून छोड़ना या बच्चों को स्कूल से लाना)।
</p><p style="text-align: justify; "><b>तनाव में कमी (Reduction of stress):</b> काम या परिवार के तनाव से बचने के लिए, या फिर ऐसे विवाह से मुक्ति पाने के लिए जहां पति धोखा देते हैं या शारीरिक/ भावनात्मक शोषण करते हैं, महिलाएं युवा पुरुषों का सहारा लेती हैं।
</p><p style="text-align: justify; "><b>शारीरिक आकर्षण (Physical attraction):</b> युवा पुरुषों की शारीरिक फिटनेस और मांसपेशियां महिलाओं को आकर्षित करती हैं, जबकि उम्र बढ़ने के साथ उनके हमउम्र पुरुष बेडौल हो जाते हैं।
</p><p style="text-align: justify; "><b>संतानोत्पत्ति (Procreation):</b> कुछ महिलाएं गर्भवती होने और बच्चा पैदा करने के लिए भी युवा पुरुषों के साथ संबंध बनाती हैं।
</p><p style="text-align: justify; "><b>आत्म-नियंत्रण की कमी:</b> शराब के प्रभाव में आत्म-नियंत्रण खो देना भी एक कारण बताया गया।
</p><p style="text-align: justify; "><b>युवा होने का अहसास (Youthful feeling):</b> युवा पुरुषों के साथ रहने से महिलाएं खुद को फिर से युवा और वांछित महसूस करती हैं।
</p><p style="text-align: justify; "><b>प्रवासन (Migrancy):</b> जब पति काम के सिलसिले में घर से दूर (जैसे गौतेंग प्रांत में) रहते हैं, तो महिलाएं हमउम्र पुरुषों के बजाय युवा पुरुषों को यौन विकल्प के रूप में चुनती हैं।
</p><p style="text-align: justify; "><b>हमउम्र साथी मिलने में कठिनाई: </b>हमउम्र पुरुषों द्वारा खारिज किए जाने या उनके उपलब्ध न होने के कारण महिलाएं युवा पुरुषों की ओर रुख करती हैं।
</p><p style="text-align: justify; "><b>युवा पुरुषों का कम मांगना होना:</b> युवा पुरुष बड़ी उम्र के पुरुषों की तुलना में कम मांग वाले होते हैं और जो कुछ भी उन्हें दिया जाता है, उसी में संतुष्ट हो जाते हैं।
</p><h4 style="text-align: justify; "><b>5. युवा पुरुष बड़ी उम्र की महिलाओं के साथ संबंध क्यों बनाते हैं? (कथित कारण)
</b></h4><p style="text-align: justify; "><b>भौतिक या आर्थिक लाभ (Material gain):</b> युवा पुरुष अपनी व्यक्तिगत और पारिवारिक जरूरतों को पूरा करने के लिए शुगर मॉमी को "एटीएम" (ATM) की तरह इस्तेमाल करते हैं। शुगर मॉमी उन्हें महंगे कपड़े, कार, मोबाइल फोन, पॉकेट मनी और क्रेडिट कार्ड देती हैं।
</p><p style="text-align: justify; "><b>तनाव में कमी:</b> युवा पुरुषों का मानना है कि उनकी उम्र की लड़कियां उन्हें बहुत तनाव देती हैं, जबकि बड़ी उम्र की महिलाएं अधिक परिपक्व, अनुभवी और समझदार होती हैं जो उन्हें प्यार और सम्मान देती हैं।
</p><p style="text-align: justify; "><b>प्रलोभन (Being enticed):</b> बड़ी उम्र की महिलाओं द्वारा छोटे कपड़े पहनना या उन्हें घर पर किसी बहाने (जैसे रेडियो ठीक करने) बुलाकर आकर्षित करना।
</p><p style="text-align: justify; "><b>हमउम्र लड़कियों द्वारा अस्वीकार किया जाना:</b> अपनी उम्र की लड़कियों द्वारा खारिज किए जाने पर वे बड़ी उम्र की महिलाओं की ओर जाते हैं।
</p><p style="text-align: justify; "><b>साथियों का प्रभाव (Peer influence):</b> अपने दोस्तों को शुगर मॉमी से मिले पैसों और महंगी चीजों के साथ देखकर अन्य युवा पुरुष भी इस जीवनशैली की ओर आकर्षित होते हैं।
</p><p style="text-align: justify; "><b>पवित्रता का विश्वास (Belief that older women are purer):</b> युवा पुरुषों में यह धारणा है कि बड़ी उम्र की महिलाएं "बच्चे की तरह साफ" होती हैं और उनके साथ रहने से कोई बीमारी (यौन संचारित रोग) नहीं होगी क्योंकि उनके कई यौन साथी नहीं होते।
</p><p style="text-align: justify; "><b>निष्कर्ष और चिंताएं
</b></p><p style="text-align: justify; "><b>दक्षिण अफ्रीका में शुगर मॉमी प्रथाएं </b>तेजी से आम और स्वीकार्य हो रही हैं। हालांकि, <b>एचआईवी/एड्स (HIV/AIDS) </b>के दौर में यह प्रथा गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा करती है। चूंकि महिलाएं आर्थिक रूप से अधिक शक्तिशाली होती हैं, इसलिए <b><i>युवा पुरुषों के लिए सुरक्षित यौन संबंध</i></b> (जैसे कंडोम का उपयोग) के लिए बातचीत करना कठिन होता है। इसके अलावा, ये युवा पुरुष अपनी हमउम्र लड़कियों के साथ भी संबंध रख सकते हैं, जिससे युवा आबादी में एचआईवी फैलने का खतरा और बढ़ जाता है। इसलिए, इस प्रथा के पीछे की धारणाओं को समझकर सांस्कृतिक रूप से प्रासंगिक हस्तक्षेप कार्यक्रम विकसित करना आवश्यक है।
</p><p style="text-align: justify; ">दक्षिण अफ्रीका में किए गए इस अध्ययन से स्पष्ट होता है कि <b><i>'शुगर मॉमी' संबंधों को केवल व्यक्तिगत आकर्षण या प्रेम के आधार पर नहीं समझा जा सकता</i></b>। इनके पीछे आर्थिक असमानता, सामाजिक परिस्थितियां, भावनात्मक जरूरतें, यौन संतुष्टि और शक्ति-संतुलन जैसे कई कारक एक साथ काम करते हैं। 
</p><p style="text-align: justify; ">शोधकर्ताओं का कहना है कि ऐसी अंतर-पीढ़ी संबंधों की बढ़ती प्रवृत्ति जन-स्वास्थ्य, विशेषकर HIV/AIDS की रोकथाम के संदर्भ में नई चुनौतियां पैदा कर सकती है। इसलिए केवल नैतिक बहस के बजाय सामाजिक जागरूकता, लैंगिक समानता और वैज्ञानिक स्वास्थ्य शिक्षा पर आधारित हस्तक्षेप कार्यक्रम विकसित करना आवश्यक है।
</p>]]></content:encoded>
<source url="https://hastakshep.com/hastakshep"><![CDATA[Hastakshep]]></source>
</item>
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<title><![CDATA["विपक्ष को फांसी दे दो!": सांसद का सुप्रीम कोर्ट से बड़ा आग्रह, मची खलबली]]></title>
<description><![CDATA[राहुल गांधी के वायरल बयान और INDIA गठबंधन की रणनीति पर वरिष्ठ पत्रकारों की विस्तृत चर्चा। चुनाव प्रक्रिया, विपक्ष के आरोप, लोकतंत्र और राजनीतिक घटनाक्रम पर तथ्य आधारित विश्लेषण देखिए]]></description>
<tags>देश दुनिया की लाइव खबरें,पश्चिम बंगाल,लोकतंत्र,नरेन्द्र मोदी,मोदी सरकार,headlines,नरेंद्र मोदी,राहुल गांधी</tags>
<link>https://hastakshep.com/videos/rahul-gandhi-vote-chori-claim-india-alliance-analysis-hindi-304510</link>
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<category><![CDATA[Videos,कानून,दुनिया,देश,राजनीति,समाचार]]></category>
<dc:creator><![CDATA[Hastakshep]]></dc:creator>
<pubDate>Sat, 13 Jun 2026 05:45:51 GMT</pubDate>
<imagecaption/>
<image><![CDATA[https://hastakshep.com/h-upload/videothumb/yt_full_vpf_H2PL0vw.jpg]]></image>
<content:encoded><![CDATA[<img src='https://hastakshep.com/h-upload/videothumb/yt_full_vpf_H2PL0vw.jpg' /><h2 style="text-align: justify; "><b>राहुल गांधी के '100% वोट चोरी' वाले दावे पर क्या है पूरा विवाद?
</b></h2><ol class="hocalwire-editor-list"><li style="text-align: justify;"><b>INDIA गठबंधन की बैठक में क्या संदेश दिया गया?
</b></li><li style="text-align: justify;"><b>चुनाव प्रक्रिया और लोकतंत्र पर उठे सवालों का विश्लेषण
</b></li><li style="text-align: justify;"><b>पप्पू यादव के बयान और विपक्ष की राजनीतिक रणनीति
</b></li><li style="text-align: justify;"><b>मीनाक्षी नटराजन के नामांकन विवाद की पृष्ठभूमि
</b></li></ol><h3 style="text-align: justify; "><b>वरिष्ठ पत्रकारों की नजर में देश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति
</b></h3><p style="text-align: justify; "><b><i>राहुल गांधी के वायरल बयान, INDIA गठबंधन की रणनीति, चुनाव प्रक्रिया पर उठे सवाल और विपक्ष की राजनीति पर वरिष्ठ पत्रकारों का गहन विश्लेषण। जानिए किन मुद्दों पर सबसे अधिक चर्चा हो रही है और उनका राजनीतिक महत्व क्या है....</i></b></p><p style="text-align: justify; ">राहुल गांधी का 100% वोट चोरी वाला खुलासा: विपक्षी दलों को दिखाया आईना!INDIA गठबंधन की गुप्त बैठक का सच: राहुल गांधी ने बताया बीजेपी को हराने का फॉर्मूला। इस वीडियो में देखिए कैसे देश में विपक्ष के साथ अन्याय की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। पप्पू यादव ने सुप्रीम कोर्ट से क्यों की विपक्ष को फांसी देने की मांग? मीनाक्षी नटराजन के राज्यसभा नामांकन रद्द होने के पीछे का असली खेल क्या है?
</p><p style="text-align: justify; ">राहुल गांधी का वो वायरल ऑडियो/पॉडकास्ट क्या है जिसने इंडिया गठबंधन के नेताओं को झकझोर दिया? क्या वाकई 100% चुनाव चोरी हो रहे हैं? बंगाल में ईवीएम जलने की खबर के पीछे का राज क्या है?
</p><p style="text-align: justify; ">देखिए वरिष्ठ पत्रकारों का तीखा विश्लेषण और देश के लोकतंत्र पर मंडराते खतरे पर बड़ी बहस।</p>]]></content:encoded>
<source url="https://hastakshep.com/hastakshep"><![CDATA[Hastakshep]]></source>
</item>
<item>
<title><![CDATA[विश्व रक्तदाता दिवस 2026: रक्त की सुरक्षा और उपलब्धता में सुधार के बावजूद निम्न-आय वाले देशों में संकट बरकरार – WHO रिपोर्ट]]></title>
<description><![CDATA[WHO की नई रिपोर्ट के अनुसार रक्तदान में प्रगति हुई है, लेकिन निम्न और मध्यम आय वाले देशों में सुरक्षित रक्त की उपलब्धता अब भी बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई है]]></description>
<tags>स्वास्थ्य,स्वास्थ्य समाचार,विश्व स्वास्थ्य संगठन,रक्त</tags>
<link>https://hastakshep.com/health/who-report-world-blood-donor-day-2026-safe-blood-access-inequality-hindi-304481</link>
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<category><![CDATA[Breaking News,दुनिया,देश,समाचार,स्वास्थ्य]]></category>
<dc:creator><![CDATA[Hastakshep]]></dc:creator>
<pubDate>Sat, 13 Jun 2026 03:23:25 GMT</pubDate>
<imagecaption><![CDATA[World Blood Donor Day 2026: WHO Report]]></imagecaption>
<image><![CDATA[https://hastakshep.com/h-upload/2026/06/13/149167-world-blood-donor-day-2026-who-report.webp]]></image>
<content:encoded><![CDATA[<img src='https://hastakshep.com/h-upload/2026/06/13/149167-world-blood-donor-day-2026-who-report.webp' /><h2 style="text-align: justify; "><b>WHO रिपोर्ट: सुरक्षित रक्त तक समान पहुँच अब भी चुनौती, करोड़ों लोगों की जान जोखिम में
</b></h2><ul class="hocalwire-editor-list"><li style="text-align: justify;"><b>विश्व रक्तदाता दिवस 2026: रक्तदान बढ़ा, लेकिन सुरक्षित रक्त की उपलब्धता में भारी असमानता
</b></li><li style="text-align: justify;"><b>रक्तदान में प्रगति के बावजूद सुरक्षित रक्त की कमी क्यों बनी हुई है? WHO की नई रिपोर्ट
</b></li></ul><h3 style="text-align: justify; "><b>WHO की चेतावनी: सुरक्षित रक्त तक पहुँच में वैश्विक असमानता बनी हुई है
</b></h3><p style="text-align: justify; "><b>एक यूनिट रक्त कई ज़िंदगियाँ बचा सकता है। WHO की नई रिपोर्ट बताती है कि दुनिया में स्वैच्छिक रक्तदान बढ़ा है, लेकिन सुरक्षित रक्त तक समान पहुँच अब भी करोड़ों लोगों के लिए चुनौती बनी हुई है। आखिर किन देशों में सबसे अधिक संकट है और इसके पीछे क्या कारण हैं?&nbsp;<a href="https://news.un.org/hi/story/2026/06/1088277" target="_blank">संयुक्त राष्ट्र समाचार </a>की इस खबर से जानिए रिपोर्ट की प्रमुख बातें।
</b></p><h4 style="text-align: justify; "><b>रक्त की सुरक्षा व उपलब्धता में धीमी प्रगति, मगर मौजूदा कमियाँ चिन्ता की वजह
</b></h4><p style="text-align: justify; "><b>12 जून 2026 स्वास्थ्य
</b></p><p style="text-align: justify; ">हर दिन, सुरक्षित रक्त के ज़रिए प्रसव के दौरान जटिलताओं का सामना कर रही महिलाओं, दुर्घटना में घायल हुए लोगों, कैंसर मरीज़ों और लम्बी बीमारियों की चपेट में आए व्यक्तियों के जीवन की रक्षा करने में मदद मिलती है. मगर, जीवनरक्षक रक्त तक पहुँच सुनिश्चित करने की दिशा में कई दशकों से हो रहे प्रयासों के बावजूद अब भी असमानता बरक़रार है और अक्सर निम्न-आय वाले देशों में इस स्थिति में ज़िन्दगियों के लिए जोखिम बढ़ जाता है.
</p><p style="text-align: justify; ">विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा 14 जून को ‘विश्व रक्त दान दिवस’ से ठीक पहले जारी की गई एक नई रिपोर्ट में इस विषय में नवीनतम जानकारी साझा की गई है. 
</p><p style="text-align: justify; ">इस वर्ष, विश्व रक्तदाता दिवस की थीम है: मानवता की एक बूँद. रक्त दान कीजिए. ज़िन्दगियाँ बचाइए. 
</p><p style="text-align: justify; ">संगठन के अनुसार, विश्व भर में रक्त दान प्रक्रिया की देखरेख व्यवस्था की यह अब तक की सबसे व्यापक समीक्षा है, जिसमें 168 देशों से आँकड़े लिए गए हैं, यानि वैश्विक आबादी का लगभग 97 प्रतिशत हिस्सा. 
</p><p style="text-align: justify; ">रिपोर्ट के अनुसार, रक्त दान और सुरक्षा में काफ़ी हद तक प्रगति दर्ज की गई है. दुनिया भर में रक्त दान के 85 प्रतिशत से अधिक मामले, स्वैच्छिक, बिना किसी भुगतान के किए जाते हैं. यह रक्त दान का सबसे सुरक्षित और सतत स्रोत माना जाता है.
</p><p style="text-align: justify; "><b>असमान प्रगति
</b></p><p style="text-align: justify; ">अनेक देशों में राष्ट्रीय रक्त प्रणालियों को मज़बूती दी गई है और सुरक्षित ढंग से रक्त चढ़ाने के लिए भी व्यवस्था की गई है, लेकिन कमज़ोर रखरखाव, प्रक्रियाओं और अपर्याप्त वित्तीय संसाधनों की वजह से निम्न- और मध्य-आय वाले देशों में इसकी क़िल्लत भी है.
</p><p style="text-align: justify; ">यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के अनुसार, पिछले एक दशक में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है, लेकिन अनेक देशों में हर एक व्यक्ति की सुरक्षित रक्त और रक्त उत्पादों तक पहुँच नहीं है. 
</p><p style="text-align: justify; ">कई प्रकार की स्वास्थ्य अवस्थाओं में प्रभावित व्यक्ति को रक्त देना अनिवार्य हो जाता है. जैसेकि बच्चे के जन्म के दौरान गर्भवती महिला या कैंसर की आपात सर्जरी के दौरान होने वाला रक्तस्राव. इसके अलावा, रक्त की कमी और अन्य व्याधियों की वजह से भी ख़ून चढ़ाने की आवश्यकता होती है.   
</p><p style="text-align: justify; ">दान किए गए प्लाज़मा का इस्तेमाल दवाएँ बनाने में किया जाता है. यह रक्त का तरल हिस्सा होता है, जोकि रक्तस्राव विकारों, प्रतिरक्षण तंत्र की कमियों, और अन्य गम्भीर स्थितियों में सहायक साबित हो सकता है.
</p><p style="text-align: justify; ">यदि सुरक्षित रक्त जल्द उपलब्ध नहीं होता है, तो व्यक्ति की उपचार योग्य बीमारियों या चोट से मौत हो सकती है.
</p><p style="text-align: justify; ">एक बड़ी चुनौती
</p><p style="text-align: justify; ">यूएन एजेंसी के अनुसार, अनेक देशों में ठोस शासन व्यवस्था का अभाव और वित्तीय संसाधनों की अनुपलब्धता, राष्ट्रीय रक्त सेवों के कमज़ोर होने की एक बड़ी वजह है.
</p><p style="text-align: justify; ">WHO के अनुसार, सभी तक समान पहुँच सुनिश्चित करने के लिए यह ज़रूरी है कि राजनैतिक संकल्प लिया जाए, राष्ट्रीय प्रणालियों को मज़बूती दी जाए और अन्तरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा मिले.</p><div class="twitter-tweet twitter-tweet-rendered" style="display: flex; max-width: 550px; width: 100%; margin-top: 10px; margin-bottom: 10px;"><iframe id="twitter-widget-0" scrolling="no" frameborder="0" allowtransparency="true" allowfullscreen="true" class="" style="position: static; visibility: visible; width: 550px; height: 945px; display: block; flex-grow: 1;" title="X Post" src="https://platform.twitter.com/embed/Tweet.html?dnt=false&amp;embedId=twitter-widget-0&amp;features=eyJ0ZndfdGltZWxpbmVfbGlzdCI6eyJidWNrZXQiOltdLCJ2ZXJzaW9uIjpudWxsfSwidGZ3X2ZvbGxvd2VyX2NvdW50X3N1bnNldCI6eyJidWNrZXQiOnRydWUsInZlcnNpb24iOm51bGx9LCJ0ZndfdHdlZXRfZWRpdF9iYWNrZW5kIjp7ImJ1Y2tldCI6Im9uIiwidmVyc2lvbiI6bnVsbH0sInRmd19yZWZzcmNfc2Vzc2lvbiI6eyJidWNrZXQiOiJvbiIsInZlcnNpb24iOm51bGx9LCJ0ZndfZm9zbnJfc29mdF9pbnRlcnZlbnRpb25zX2VuYWJsZWQiOnsiYnVja2V0Ijoib24iLCJ2ZXJzaW9uIjpudWxsfSwidGZ3X21peGVkX21lZGlhXzE1ODk3Ijp7ImJ1Y2tldCI6InRyZWF0bWVudCIsInZlcnNpb24iOm51bGx9LCJ0ZndfZXhwZXJpbWVudHNfY29va2llX2V4cGlyYXRpb24iOnsiYnVja2V0IjoxMjA5NjAwLCJ2ZXJzaW9uIjpudWxsfSwidGZ3X3Nob3dfYmlyZHdhdGNoX3Bpdm90c19lbmFibGVkIjp7ImJ1Y2tldCI6Im9uIiwidmVyc2lvbiI6bnVsbH0sInRmd19kdXBsaWNhdGVfc2NyaWJlc190b19zZXR0aW5ncyI6eyJidWNrZXQiOiJvbiIsInZlcnNpb24iOm51bGx9LCJ0ZndfdXNlX3Byb2ZpbGVfaW1hZ2Vfc2hhcGVfZW5hYmxlZCI6eyJidWNrZXQiOiJvbiIsInZlcnNpb24iOm51bGx9LCJ0ZndfdmlkZW9faGxzX2R5bmFtaWNfbWFuaWZlc3RzXzE1MDgyIjp7ImJ1Y2tldCI6InRydWVfYml0cmF0ZSIsInZlcnNpb24iOm51bGx9LCJ0ZndfbGVnYWN5X3RpbWVsaW5lX3N1bnNldCI6eyJidWNrZXQiOnRydWUsInZlcnNpb24iOm51bGx9LCJ0ZndfdHdlZXRfZWRpdF9mcm9udGVuZCI6eyJidWNrZXQiOiJvbiIsInZlcnNpb24iOm51bGx9fQ%3D%3D&amp;frame=false&amp;hideCard=false&amp;hideThread=false&amp;id=2065445766781452582&amp;lang=en&amp;origin=https%3A%2F%2Fadmin.hastakshep.com%2Fstory%2Fadd%3FstoryId%3D28798&amp;sessionId=f6854c4222b6f22353d98eb2e82b834d20eccfa4&amp;theme=light&amp;widgetsVersion=6a3ad42b224df%3A1778106238597&amp;width=550px" data-tweet-id="2065445766781452582"></iframe></div><p style="text-align: justify; "> <script async="" src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>]]></content:encoded>
<source url="https://hastakshep.com/hastakshep"><![CDATA[Hastakshep]]></source>
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<title><![CDATA[प्रेम,प्रकृति और परम्परा की सतरंगी बारिश में भीगी डॉ. कविता अरोरा की श्रव्य - दृश्य कविताएँ]]></title>
<link>https://hastakshep.com/literature-in-hindi/dr-kavita-arora-audiovisual-poems-are-drenched-kaleidoscopic-rain-of-love-304260</link>
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<category><![CDATA[शब्द,साहित्यिक कलरव]]></category>
<dc:creator><![CDATA[Hastakshep]]></dc:creator>
<pubDate>Thu, 11 Jun 2026 18:09:38 GMT</pubDate>
<imagecaption><![CDATA[The international launch of Indian author Kavita Arora's book 'Sham Ki Tapri' took place at the Rustaveli National Theatre.]]></imagecaption>
<image><![CDATA[https://hastakshep.com/h-upload/2026/02/03/86209-the-international-launch-of-indian-author-kavita-aroras-book-sham-ki-tapri-took-place-at-the-rustaveli-national-theatre.webp]]></image>
<content:encoded><![CDATA[<img src='https://hastakshep.com/h-upload/2026/02/03/86209-the-international-launch-of-indian-author-kavita-aroras-book-sham-ki-tapri-took-place-at-the-rustaveli-national-theatre.webp' /><p style="text-align: justify; "><br></p><p style="text-align: justify; "><b><span style="font-size: 22px;">-डॉ. रमाकांत शर्मा</span>
</b></p><p style="text-align: justify; ">आज की कवयित्रियों में एक नाम ऐसा भी है जो अपनी विशेष काव्यसंवेदना और रचनाशीलता के चलते अपनी सर्वथा अलग पहचान बनाने में क़ामयाब हुआ है। जी हाँ, उस कवियत्री का नाम है डॉ. कविता अरोरा।
</p><p style="text-align: justify; "><b>डॉ.कविता अरोरा के अब तक तीन कविता - संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं :
</b></p><p style="text-align: justify; ">1.पैबंद की हँसी
</p><p style="text-align: justify; ">2.चाँद का शरगा
</p><p style="text-align: justify; ">3.कागज़ के नीले साहिल
</p><p style="text-align: justify; ">अलावा इसके, आपकी कविताएँ देश की प्रमुख पत्र - पत्रिकाओं में निरंतर प्रकाशित और आकाशवाणी - दूरदर्शन से प्रसारित होती रही हैं। अनेक वीडियो और मंचों से इनकी कविताएँ सुनी और सराही जाती रही हैं।
</p><p style="text-align: justify; ">कविता अरोरा की कविताओं से गुज़रते हुए मैंने यह महसूस किया कि इनकी एक नहीं, अनेक कविताएँ मानो प्रेमरस के सरोवर में डुबकियां लगाने वाली सद्य स्नाताएँ हैं। जहाँ अमृता प्रीतम की रचनाओं का कहीं प्रत्यक्ष तो कहीं परोक्ष रूप में प्रभाव भी लक्षित किया जा सकता है। जहाँ प्रेम का संबंध देह से नहीं, बल्कि दो आत्माओं से है। रूह से है।
</p><p style="text-align: justify; ">ये ऐसी कविताएँ हैं जो सीधे दिल में उतरने का हुनर रखती हैं। उदाहरण स्वरूप देखिए कवयित्री अपनी ' बसंत के फूल ' कविता में प्रेम में पड़ी एक अल्हड़ लड़की की मनोदशा को व्यक्त करती हुई कहती है:
</p><p style="text-align: justify; ">जब वह टहलती
</p><p style="text-align: justify; ">तब मुंडेर पर
</p><p style="text-align: justify; ">बसंत के फूल खिलते थे
</p><p style="text-align: justify; ">हवाओं में गेसू 
</p><p style="text-align: justify; ">सरसराकर पतंगों से
</p><p style="text-align: justify; ">खुलते थे
</p><p style="text-align: justify; ">                 ****
</p><p style="text-align: justify; ">उल्टी किताब थामे
</p><p style="text-align: justify; ">टहलकर 
</p><p style="text-align: justify; ">सबक याद करती लड़की
</p><p style="text-align: justify; ">सुना है इश्क़ में
</p><p style="text-align: justify; ">पागल थी।
</p><p style="text-align: justify; ">                 ****
</p><p style="text-align: justify; ">इसी प्रकार डॉ. कविता अपनी कविता ' इश्क़ का घर ' में लिखती हैं :
</p><p style="text-align: justify; ">वो सतरह साल की
</p><p style="text-align: justify; ">लड़कियाँ
</p><p style="text-align: justify; ">साड़ी के पल्लू को
</p><p style="text-align: justify; ">पिन से जोड़ती
</p><p style="text-align: justify; ">ख़्वाबों के सतरंगी 
</p><p style="text-align: justify; ">फ़लक पर दौड़ती
</p><p style="text-align: justify; ">                   ****
</p><p style="text-align: justify; ">लड़कियों की आँखें
</p><p style="text-align: justify; ">निडर हैं
</p><p style="text-align: justify; ">यहीं तो निगोड़े
</p><p style="text-align: justify; ">इश्क़ का घर है।
</p><p style="text-align: justify; ">                    ****
</p><p style="text-align: justify; ">जैसा कि मैंने पूर्व में कहा कि डॉ. कविता अरोरा को अमृता प्रीतम की प्रेम कविताएँ पसंद हैं। आत्मिक प्रेम से बढ़कर दुनिया में कुछ भी नहीं। इस संदर्भ में ' इमरोज़ ' शीर्षक कविता की इन पंक्तियों को पढ़ा जा सकता है :
</p><p style="text-align: justify; ">मैंने कभी सोचा नहीं था
</p><p style="text-align: justify; ">कि ख़्वाबों की गलियों से
</p><p style="text-align: justify; ">निकल कर
</p><p style="text-align: justify; ">तमाम शिद्दत लिए
</p><p style="text-align: justify; ">रंग भरी कूँचियों से
</p><p style="text-align: justify; ">ता उम्र तुम मुझे ही
</p><p style="text-align: justify; ">सजाते रहोगे।
</p><p style="text-align: justify; ">                ****
</p><p style="text-align: justify; ">कभी तो तुम्हें भी
</p><p style="text-align: justify; ">लगा होगा 
</p><p style="text-align: justify; ">किसी रोज़
</p><p style="text-align: justify; ">सफ़्हों की सफ़ेद पीठ पर
</p><p style="text-align: justify; ">खिला दूँ
</p><p style="text-align: justify; ">कोई एक नीला फूल
</p><p style="text-align: justify; ">तुम्हारे लिए भी।
</p><p style="text-align: justify; ">                      ****
</p><p style="text-align: justify; ">इसी प्रकार जब वे प्रकृति के विविध रूपों को अपने काव्य के कैनवस पर चित्रित करती हैं तो ऐसा लगता है कवि सुमित्रानंदन पंत अथवा कवि शमशेरबहादुर सिंह की कविताएँ  
</p><p style="text-align: justify; ">अपनी श्रव्य - दृश्य बिम्बात्मकता और प्रतीकात्मकता के साथ हमें आवाज़ दे रही हैं।
</p><p style="text-align: justify; ">इनकी कविताओं में आप देखेंगे कि कहीं बादल बुला रहे हैं तो कहीं पक्षी चहचहा रहे हैं। कहीं चाँद - चाँदनी परस्पर बतिया रहे हैं। कहीं नदी सुस्ता रही है तो कहीं वृक्ष रिफ्यूजी हो गए हैं। ऐसे अनेक बिम्ब सहृदय पाठक को अनायास ही आकर्षित करते हैं।
</p><p style="text-align: justify; ">इस तरह इनका प्रेम और प्रकृति चित्रण अपनी अनूठी धज लिए हुए है जो अमृता प्रीतम, सुमित्रानंदन पंत और शमशेर बहादुर की यादें अनायास ही ताज़ा कर देता है। बहरहाल।
</p><p style="text-align: justify; ">चाँद और चाँदनी, वृक्ष और लताएँ, समंदर और नदियाँ, आकाश और पृथ्वी, अमृता और इमरोज़ आदि इनकी कविताओं के मुख्य क़िरदार हैं। कविता जी की कविताओं में इनका आना - जाना, बोलना - बतियाना, देखना और देखते ही जाना इनकी कविताओं में बराबर बना रहता है।
</p><p style="text-align: justify; ">एक और बात। डॉ. कविता अरोरा की कविताओं में गाँव की गंध रची - बसी है। बचपन का अल्हड़पन, मेले -झूले, गलियाँ -चौबारे, छत - आँगन, माँ - दादी की कहानियाँ और सखा-सहेलियों की नोक -झौंक के अनेक प्रसंग वहाँ जीवंत हो उठते हैं।
</p><p style="text-align: justify; ">इन्हें शहर की बहुमंज़िला इमारतें, आपाधापी वाली ज़िंदगी, व्यक्तिगत स्वार्थी नज़रिया रास नहीं आता।जहाँ न अपनी छत है। चाँद भी जहाँ इमारतों के पीछे छिपा बैठा रहता है।
</p><p style="text-align: justify; ">चाँद का शरगा ( चाँद का बादामी रंग का घोड़ा ) कहानी में दौड़ता दिखाई नहीं देता।
</p><p style="text-align: justify; ">इसी प्रकार हम देखते हैं कि शहर में ' अपणायत ' का भाव नहीं है,  बल्कि एक तरह का ' अजनबीपन ' है। अपने एक गीत ' नहीं रमते शहरों में मन '  में शहरों के हालात पर कवयित्री डॉ. कविता अरोरा लिखती हैं :
</p><p style="text-align: justify; ">अपनेपन को तरसते हैं
</p><p style="text-align: justify; ">मन
</p><p style="text-align: justify; ">नहीं रमते शहरों में मन।
</p><p style="text-align: justify; ">है प्रीत अटारी 
</p><p style="text-align: justify; ">बड़ी सूनी सूनी
</p><p style="text-align: justify; ">न रिश्तों में है 
</p><p style="text-align: justify; ">भोलापन
</p><p style="text-align: justify; ">नहीं रमते शहरों में मन।
</p><p style="text-align: justify; ">                 ****
</p><p style="text-align: justify; ">परिंदे तलाशे
</p><p style="text-align: justify; ">छाँव का एक टुकड़ा
</p><p style="text-align: justify; ">हैं इमारतें बहुत पर
</p><p style="text-align: justify; ">शजर सिकुड़ा सिकुड़ा
</p><p style="text-align: justify; ">तुलसियों को नहीं आँगन
</p><p style="text-align: justify; ">नहीं रमते शहरों में मन।
</p><p style="text-align: justify; ">                   ****
</p><p style="text-align: justify; ">कविता जी समाज के कटु यथार्थ से भी आँखें चार करती हैं। सियासत के हथकंडे,नौकरशाही, भूख और ग़रीबी के दंश से भी वे बाख़बर हैं। अस्पतालों की दुर्दशा देखकर वे लिखती हैं :
</p><p style="text-align: justify; ">अस्पतालों की भीड़ में
</p><p style="text-align: justify; ">रोज़ दिखते हैं मुझे
</p><p style="text-align: justify; ">लाचार आदमी
</p><p style="text-align: justify; ">बोतलों में ख़ून
</p><p style="text-align: justify; ">सिलेण्डरों में सांस
</p><p style="text-align: justify; ">इंजेक्शन में विटामिन
</p><p style="text-align: justify; ">पेसमेकर में
</p><p style="text-align: justify; ">दिल की धड़कनें 
</p><p style="text-align: justify; ">क़ैद हैं।
</p><p style="text-align: justify; ">                    ****
</p><p style="text-align: justify; ">हाय 
</p><p style="text-align: justify; ">अब तक जोड़ जमा तो
</p><p style="text-align: justify; ">डॉक्टरों की फीस निगल गई।
</p><p style="text-align: justify; ">                  ****
</p><p style="text-align: justify; ">घर - परिवार में दरकते रिश्तों की हक़ीक़त कवयित्री डॉ. कविता अरोरा कुछ इस प्रकार बयाँ करती हैं:
</p><p style="text-align: justify; ">प्रेम 
</p><p style="text-align: justify; ">अपरिचित हो गया
</p><p style="text-align: justify; ">मजबूरियों की
</p><p style="text-align: justify; ">चादर ओढ़ कर 
</p><p style="text-align: justify; ">सारे रिश्ते मौन हो गए।
</p><p style="text-align: justify; ">कल तक 
</p><p style="text-align: justify; ">' अज़ीज़ ' थे 
</p><p style="text-align: justify; ">अब कौन
</p><p style="text-align: justify; ">हो गए।
</p><p style="text-align: justify; ">                      ****
</p><p style="text-align: justify; ">जहां तक कवयित्री कविता की काव्यभाषा और काव्यशिल्प का सवाल है, इनकी काव्यभाषा हिंदी, उर्दू, अंग्रेज़ी और पंजाबी
</p><p style="text-align: justify; ">का आफ़ताबी संगम है। यहाँ आमजन की बोली-बानी का मिठास पाठक को आकर्षित करता है। कवयित्री अपनी संवेदनाओं को पूर्ण सहजता और स्वाभाविकता के साथ शब्दों में रूपायित करती है। यद्यपि ये कविताएँ मुक्तछंदी हैं, लेकिन इसके बावजूद कवयित्री ने अपनी मुक्तछंदी कविताओं में आंतरिक लय को बराबर साधे रखा है। इसका विशेष कारण यह है कि कवयित्री स्वयं सुप्रसिद्ध गायिका भी हैं।
</p><p style="text-align: justify; ">मुझे पूरा यक़ीन है कि डॉ. कविता अरोरा की कविताओं का हिंदी के पाठक - जगत में भव्य स्वागत होगा।
</p><p style="text-align: justify; ">अंत में, मैं कवयित्री के रचनात्मक उत्कर्ष की कामना करता हूँ।
</p><p style="text-align: justify; "><b>                     <span style="font-size: 30px;">- डॉ. रमाकांत शर्मा
</span></b></p><p style="text-align: justify; "><span style="font-size: 30px;">                      
</span></p><p style="text-align: justify; ">rkramakant.sharma(at)gmail.com
</p><p style="text-align: justify; ">---------------------------------------------------------
</p><p style="text-align: justify; "><b>काग़ज़ के नीले साहिल </b>( कविता - संग्रह )
</p><p style="text-align: justify; ">डॉ. कविता अरोरा
</p><p style="text-align: justify; ">बोधि प्रकाशन, जयपुर
</p><p style="text-align: justify; ">मूल्य : ₹ 200 /-
</p><p style="text-align: justify; ">                    ****
</p><p style="text-align: justify; "><b>चाँद का शरगा ( कविता - संग्रह )
</b></p><p style="text-align: justify; ">डॉ. कविता अरोरा
</p><p style="text-align: justify; ">बोधि प्रकाशन, जयपुर
</p><p style="text-align: justify; ">मूल्य : ₹ 175 /-
</p><p style="text-align: justify; "></p>]]></content:encoded>
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