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<title><![CDATA[hastakshep | हस्तक्षेप]]></title>
<description><![CDATA[हस्तक्षेप एक स्वतंत्र हिंदी न्यूज़ पोर्टल है जो समसामयिक, राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय, सामाजिक, राजनैतिक, आर्थिक मुद्दों पर समाचार और विश्लेषण प्रस्तुत करता है। यहाँ दलित, वंचित, आदिवासी, महिला व छात्र अधिकारों को विशेष महत्व दिया जाता है।]]></description>
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<title>hastakshep | हस्तक्षेप</title>
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<pubDate>Sat, 06 Jun 2026 06:12:20 GMT</pubDate>
<lastBuildDate>Sat, 06 Jun 2026 06:12:20 GMT</lastBuildDate>
<copyright><![CDATA[Hastakshep]]></copyright>
<language><![CDATA[hi]]></language>
<managingEditor><![CDATA[anushka@blinkcms.ai (Hastakshep)]]></managingEditor>
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<title><![CDATA[शुभेंदु अधिकारी का 'प्लान B', राहुल गांधी का दावा- एक साल में गिर सकती है मोदी सरकार]]></title>
<description><![CDATA[क्या TMC में 50 से अधिक विधायक बगावत करेंगे? शुभेंदु अधिकारी के कथित प्लान B, राहुल गांधी के मोदी सरकार पर बड़े दावे और संभावित राजनीतिक बदलाव का विश्लेषण]]></description>
<tags>राहुल गांधी,नरेन्द्र मोदी,नरेंद्र मोदी,मोदी सरकार,बीजेपी,देश दुनिया की लाइव खबरें</tags>
<link>https://hastakshep.com/videos/tmc-breakup-shubhendu-adhikari-plan-b-rahul-gandhi-modi-government-analysis-303408</link>
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<category><![CDATA[Videos,देश,राजनीति,समाचार]]></category>
<dc:creator><![CDATA[Hastakshep]]></dc:creator>
<pubDate>Sat, 06 Jun 2026 06:12:18 GMT</pubDate>
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<image><![CDATA[https://hastakshep.com/h-upload/videothumb/yt_full_eO0VjOHOEz0.jpg]]></image>
<content:encoded><![CDATA[<img src='https://hastakshep.com/h-upload/videothumb/yt_full_eO0VjOHOEz0.jpg' /><h2 style="text-align: justify; "><b>पश्चिम बंगाल की सियासत में संभावित बगावत, शुभेंदु अधिकारी की रणनीति और राहुल गांधी के मोदी सरकार पर बड़े दावे का विश्लेषण
</b></h2><p style="text-align: justify; "><b>पश्चिम बंगाल में TMC के भीतर असंतोष और 50 से अधिक विधायकों की बगावत की चर्चाओं के बीच शुभेंदु अधिकारी की कथित रणनीति चर्चा में है। वहीं राहुल गांधी का दावा कि एक साल के भीतर मोदी सरकार गिर सकती है, राष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ रहा है...
</b></p><p style="text-align: justify; ">पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर से भारी उठापटक के संकेत मिल रहे हैं। क्या शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी की पार्टी (TMC) को तोड़ने के लिए कोई गुप्त 'प्लान B' तैयार कर लिया है? 50 से ज्यादा विधायकों की बगावत की खबरों के बीच, बंगाल की सियासत किस करवट बैठेगी?
</p><p style="text-align: justify; ">दूसरी ओर, राहुल गांधी के एक ताज़ा और गंभीर बयान ने देश की राजनीति में खलबली मचा दी है। उनका दावा है कि मोदी सरकार एक साल के भीतर गिर सकती है। क्या वाकई देश में समय से पहले चुनाव होने की स्थिति बन रही है? देखिए वरिष्ठ पत्रकारों और राजनीतिक विश्लेषकों की यह विशेष चर्चा।
</p><p style="text-align: justify; "><b>इस वीडियो में चर्चा के मुख्य बिंदु:
</b></p><ul class="hocalwire-editor-list"><li style="text-align: justify;">पश्चिम बंगाल में TMC के भीतर बढ़ता असंतोष और भाजपा की रणनीति।
</li><li style="text-align: justify;">शुभेंदु अधिकारी का संभावित नया राजनीतिक समीकरण।
</li><li style="text-align: justify;">राहुल गांधी की मोदी सरकार गिरने वाली भविष्यवाणी का पूरा विश्लेषण।
</li><li style="text-align: justify;">देश की वर्तमान राजनीतिक स्थिरता और आगामी चुनावों की संभावना।
</li><li style="text-align: justify;">अगले 3 दिन देश की राजनीति में बेहद अहम&nbsp;</li></ul><p style="text-align: justify;"><br></p><div draggable="true" class="hocal-draggable"><iframe frameborder="0" src="//www.youtube.com/embed/eO0VjOHOEz0" max-width="100%" class="video-element note-video-clip" height="360"></iframe></div><p style="text-align: justify;"><br></p>]]></content:encoded>
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<title><![CDATA[मोदी और कॅाकरोच का लक्ष्य है कांग्रेस का स्पेस खाओ]]></title>
<description><![CDATA[प्रो. जगदीश्वर चतुर्वेदी भारतीय राजनीति, नरेंद्र मोदी सरकार, कांग्रेस, लोकतंत्र और विपक्ष की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाते हैं। पढ़िए और सुनिए उनका विस्तृत विश्लेषण...]]></description>
<tags>राहुल गांधी,मोदी सरकार,नरेंद्र मोदी,नरेन्द्र मोदी,बीजेपी</tags>
<link>https://hastakshep.com/videos/modi-target-congress-space-prof-jagdishwar-chaturvedi-analysis-303242</link>
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<category><![CDATA[Videos,आपकी नज़र,स्तंभ,हस्तक्षेप]]></category>
<dc:creator><![CDATA[Hastakshep]]></dc:creator>
<pubDate>Fri, 05 Jun 2026 03:46:26 GMT</pubDate>
<imagecaption><![CDATA[Modi and the cockroach aim to usurp the Congress's space.]]></imagecaption>
<image><![CDATA[https://hastakshep.com/h-upload/2026/06/05/144216-modi-and-the-cockroach-aim-to-usurp-the-congresss-space.webp]]></image>
<content:encoded><![CDATA[<img src='https://hastakshep.com/h-upload/2026/06/05/144216-modi-and-the-cockroach-aim-to-usurp-the-congresss-space.webp' /><h2 style="text-align: justify; "><b>क्या विपक्ष को खत्म करने की राजनीति चल रही है?</b></h2><ul class="hocalwire-editor-list"><li style="text-align: justify;"><b>"लोकतंत्र का स्पेस खाया जा रहा है" : मोदी सरकार और कॅाकरोच जनता पार्टी पर प्रोफेसर चतुर्वेदी का तीखा हमला
</b></li><li style="text-align: justify;"><b>कांग्रेस क्यों निशाने पर है? मोदी मॉडल पर बड़ा सवाल
</b></li><li style="text-align: justify;"><b>क्या भारत में विपक्ष के लिए जगह खत्म की जा रही है?
</b></li></ul><p style="text-align: justify; "><b>प्रस्तुत पाठ में कांग्रेस के स्पेस को खत्म करने की मुहिम, नरेंद्र मोदी की राजनीति, कांग्रेस की वर्तमान भूमिका और लोकतंत्र के समक्ष चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की गई है। आज हम आपके लिए लेकर आए हैं वरिष्ठ चिंतक और मीडिया विश्लेषक प्रोफेसर जगदीश्वर चतुर्वेदी का एक महत्वपूर्ण वक्तव्य।
</b></p><p style="text-align: justify; "><b>प्रोफेसर चतुर्वेदी का तर्क है कि भारतीय राजनीति में पिछले कुछ वर्षों में एक ऐसी प्रवृत्ति उभरी है जिसका उद्देश्य केवल चुनावी जीत नहीं, बल्कि विपक्षी राजनीति के स्पेस को सीमित करना है। (संपादक)
</b></p><h3 style="text-align: justify; "><b>मामला मोदी बनाम कांग्रेस नहीं, लोकतंत्र का सवाल है!
</b></h3><p style="text-align: justify; "><b><span style="font-size: 30px;">प्रोफेसर जगदीश्वर चतुर्वेदी</span>
</b></p><p style="text-align: justify; "><b>कांग्रेस का स्पेस खाओ मुहिम:
</b></p><p style="text-align: justify; ">पिछले 15-16 सालों से "कांग्रेस का स्पेस खाओ" की मुहिम चल रही है। इसका उद्देश्य कांग्रेस द्वारा बनाए गए स्पेस और उसके कार्यों को कलंकित करना और नष्ट करना है। इस मुहिम के तहत विपक्ष को बदनाम किया जाता है, ध्वस्त किया जाता है, विपक्षी दलों में दल-बदल कराया जाता है, कांग्रेस के विधायकों और सांसदों का अपहरण किया जाता है, नेताओं के यहां छापे मारे जाते हैं, और खरीद-फरोख्त की जाती है। जब भी आम लोगों में असंतोष पैदा होता है, तो उसे वास्तविक मुद्दों से भटकाने के लिए कोई न कोई मसला खड़ा किया जाता है, ताकि असंतोष को विभाजन या कांग्रेस के स्पेस के अपहरण में लगाया जा सके।
</p><p style="text-align: justify; ">नरेंद्र मोदी की राजनीति:
</p><p style="text-align: justify; ">नरेंद्र मोदी को भारतीय राजनीतिक इतिहास में पहले ऐसे नेता के रूप में वर्णित किया गया है, जिन्होंने सुनियोजित ढंग से "कांग्रेस का स्पेस खाओ" मुहिम चलाई है। यह कहा गया है कि नरेंद्र मोदी नेहरू से अधिक ताकतवर नहीं हैं, क्योंकि नेहरू ने कभी सीबीआई या ईडी जैसे संगठनों का इस्तेमाल विपक्षी नेताओं के खिलाफ नहीं किया। इंदिरा गांधी ने आपातकाल में गलती की थी, जिसे उन्होंने स्वीकार किया और कांग्रेस ने दोबारा आपातकाल न लगाने की प्रतिज्ञा की।
</p><p style="text-align: justify; ">नरेंद्र मोदी की राजनीति को "फासिस्ट पद्धति" बताया गया है, क्योंकि वे अपने लिए वोट मांगने के साथ-साथ विपक्ष को कमजोर करने के लिए भी काम करते हैं। वे चुनाव लड़ने से पहले विपक्ष के महत्वपूर्ण नेताओं को दल-बदल कराकर बीजेपी में शामिल करते हैं, या ताकतवर उम्मीदवारों को पैसे देकर खरीद लेते हैं या डरा-धमकाकर चुनाव लड़ने से रोकते हैं। यह पद्धति दिखाती है कि नरेंद्र मोदी को अपनी राजनीति पर भरोसा नहीं है, बल्कि उन्हें "डंडे" पर भरोसा है। उन्हें खुलकर कहना चाहिए कि वे डंडे, पैसे और दल-बदल की राजनीति करना चाहते हैं, न कि डेवलपमेंट या डेमोक्रेसी का ढोल बजाना चाहिए।
</p><p style="text-align: justify; ">नरेंद्र मोदी ने एक "अलिखित घोषणा पत्र" बनाया है, जिसकी पहली प्रतिज्ञा है "कांग्रेस का स्पेस खाओ" और जहां भी चुनाव हों, वहां विपक्ष को नेस्तनाबूत करो। इसके लिए दल-बदल, दल तोड़ना या बुलडोज करना जैसे तरीके अपनाए जाते हैं। यह प्रक्रिया बिहार, उत्तराखंड, यूपी और बंगाल सहित कई राज्यों में देखी गई है।
</p><p style="text-align: justify; ">नरेंद्र मोदी की बुनियादी राजनीतिक विशेषता:
</p><p style="text-align: justify; ">नरेंद्र मोदी की बुनियादी राजनीतिक विशेषता "कांग्रेस का स्पेस खाओ" है, जिसका अर्थ केवल कांग्रेस पार्टी का स्पेस खाना नहीं, बल्कि लोकतंत्र के स्पेस को खाना है। जो नेता या पार्टी लोकतंत्र के स्पेस को निगल जाए, वह जनतांत्रिक नहीं हो सकती। बीजेपी और नरेंद्र मोदी अपनी खुराक पर नहीं, बल्कि "डेमोक्रेसी की खुराक" पर जिंदा हैं। वे डेमोक्रेसी को खाकर ही अपना पेट भरते हैं और जब तक वे विपक्षी दलों के लोकतांत्रिक स्पेस को नष्ट नहीं कर देते, तब तक उनका विकास नहीं होगा। इस मॉडल को "फासिस्ट मॉडल" बताया गया है।
</p><p style="text-align: justify; ">नरेंद्र मोदी को विपक्ष के बिना डेमोक्रेसी और चुनाव चाहिए, और उन्हें चंदा चाहिए, लेकिन विपक्ष को चंदा नहीं मिलना चाहिए। जब जनता में असंतोष पैदा होता है और सरकार जनता की समस्या हल नहीं कर पाती, तो उस असंतोष को भटकाने के लिए गैर-जरूरी मसले और संगठन खड़े किए जाते हैं, ताकि असंतुष्ट जनता कांग्रेस के साथ न जाए।
</p><p style="text-align: justify; ">लोकतंत्र के समक्ष चुनौतियां:
</p><p style="text-align: justify; ">भारत की सबसे बुनियादी समस्या 2010 के आसपास से "डेमोक्रेसी के स्पेस को खाओ" है। कांग्रेस से विद्वेष इसलिए नहीं है कि वह विपक्ष में है, बल्कि इसलिए है कि कांग्रेस लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए प्रतिबद्ध है। बीजेपी को उन सभी से परेशानी है जो लोकतांत्रिक मूल्यों और अधिकारों के लिए प्रतिबद्ध हैं।
</p><p style="text-align: justify; ">नरेंद्र मोदी का तीसरा बड़ा फिनोमिना है "डेमोक्रेसी का डेवलपमेंट हजम करो", "डेमोक्रेसी का स्पेस हजम करो" और "डेमोक्रेसी के लिए लड़ने वाले संगठनों को हजम करो या अपाहिज करो"। ये तीनों चीजें एक साथ व्यवस्थित रूप से चल रही हैं।
</p><p style="text-align: justify; ">राष्ट्रीय संपदा का निजीकरण:
</p><p style="text-align: justify; ">भारत जब आजाद हुआ था, तब यहां कुछ नहीं बनता था, लेकिन जब नरेंद्र मोदी के हाथ में आया, तब यहां हर चीज बनती थी। नरेंद्र मोदी ने सारे डेवलपमेंट को विध्वंस के कगार पर खड़ा कर दिया है। सरकारी संरक्षण में सार्वजनिक क्षेत्र में हुए विकास को नरेंद्र मोदी ने निर्ममता से निजी क्षेत्र के हवाले कर दिया है। अदानी, अंबानी या टाटा जैसे पूंजीपतियों को बंदरगाह, एयरपोर्ट और रेलवे का पूरा सिस्टम गिफ्ट में दे दिया गया है, जबकि उन्होंने कभी इन पर एक ईंट भी नहीं लगाई थी। नरेंद्र मोदी ने हिंदुस्तान की सारी संपदा उन पूंजीपतियों को सौंप दी है, जो पब्लिक सेक्टर में बनी थी और जनता की संपत्ति थी। इस प्रकार, "कांग्रेस का स्पेस खाओ" मुहिम केवल राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कांग्रेस के शासन में अर्जित राष्ट्रीय संपदा को भी खाने का काम कर रही है।
</p><p style="text-align: justify; ">अमेरिकी लॉबी और कठपुतली सरकार:
</p><p style="text-align: justify; ">कांग्रेस के खिलाफ अमेरिकी लॉबी नेहरू के जमाने से सक्रिय रही है, जो ऐसी राजनीतिक शक्तियों को खड़ा करने की कोशिश करती रही है जो कांग्रेस को ध्वस्त करें और उनके कठपुतली की तरह काम करें। नेहरू, इंदिरा और राजीव गांधी ने कठपुतली बनने से इनकार कर दिया था, लेकिन नरेंद्र मोदी ने इनकार नहीं किया। आज नरेंद्र मोदी अमेरिका की कठपुतली सरकार की तरह काम कर रहे हैं, जो विदेश नीति और गृह नीति दोनों में एक बड़ा बदलाव है।
</p><p style="text-align: justify; ">कॉर्पोरेट हाउस भी सरकारी संपदा को अपनी संपदा बनाने के लिए कटिबद्ध थे, लेकिन कांग्रेस के शासन में वे ऐसा नहीं कर पाए। नरेंद्र मोदी के शासन में यह काम चुटकी में होने लगा। प्रधानमंत्री कॉर्पोरेट हाउसेस के एजेंट की तरह विदेश यात्राएं करते हैं और समझौते कराते हैं, जो भारत के इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ। कांग्रेस के पूंजीपतियों से संबंध थे, लेकिन कांग्रेस की सरकार कभी पूंजीपतियों की कठपुतली नहीं थी।
</p><p style="text-align: justify; ">लोकतांत्रिक संस्थानों का क्षरण:
</p><p style="text-align: justify; ">नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद की स्वायत्तता को खत्म कर दिया है। सिर्फ कांग्रेस का स्पेस ही खत्म नहीं हुआ, बल्कि डेमोक्रेसी में जनता का लोकतांत्रिक स्पेस और लोकतांत्रिक संस्थानों, पदों का स्पेस और उनका अर्थ भी खत्म हो गया है।
</p><p style="text-align: justify; ">कांग्रेस की वर्तमान भूमिका:
</p><p style="text-align: justify; ">नरेंद्र मोदी को कांग्रेस और विपक्ष से इतनी नफरत है क्योंकि वे डेमोक्रेसी के स्पेस के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं। फासीवाद के जितने भी चरण हो सकते हैं, भारत अब उन्हें देखेगा, क्योंकि विपक्ष को निस्तनाबूत करने की मुहिम चल रही है। जब जनता में असंतोष होता है, तो उसे भटकाने के लिए विश्व हिंदू प्रसाद, गुर्जर आंदोलन या कॅाकरोच जनता पार्टी जैसे फ्रंट संगठन लॉन्च किए जाते हैं।
</p><p style="text-align: justify; ">कांग्रेस अब जनता की समस्याओं पर आंदोलन कर रही है, जो पहले नहीं करती थी। कांग्रेस ने अपने सांगठनिक ढांचे का कायाकल्प किया है और डेमोक्रेसी, लोकतांत्रिक मूल्यों और संस्थानों के लिए प्रतिबद्ध है। वह जनता के साथ हर स्तर पर जुड़ने की कोशिश कर रही है, चाहे जुलूस निकालकर, बयान देकर, रील बनाकर या सोशल मीडिया पर सक्रिय होकर। यह कांग्रेस की भावना लोकतंत्र की लाइफलाइन है।
</p><p style="text-align: justify; ">नरेंद्र मोदी के लिए असल चिंता की जगह यही है कि कांग्रेस आंदोलन क्यों कर रही है। कांग्रेस के आंदोलन से नरेंद्र मोदी की नींद हराम हो गई है। वे दिल्ली में जुलूस नहीं करने देते, और जहां उनकी राज्य सरकारें हैं, वहां भी जुलूसों को लाठीचार्ज, गिरफ्तारी और झूठे मुकदमों से दबाया जाता है। कांग्रेस के वकील उन लोगों की मुफ्त में कानूनी मदद कर रहे हैं, जिन पर पुलिस का दमन है। यह दमन के दौर में जनता की अदालत में मदद करने, मीडिया में कवरेज क्रिएट करने और दमन के दौर में साथ खड़े होने की कांग्रेस की कोशिश है।
</p><p style="text-align: justify; ">कांग्रेस ने अपने राजनीतिक मतभेदों को भुलाकर जनतंत्र के स्पेस और जनतांत्रिक आवाज की सुरक्षा के लिए खड़ा होना शुरू कर दिया है, जैसा कि बंगाल चुनाव के बाद टीएमसी के आरोपों और आंदोलन को राहुल गांधी के बिना शर्त समर्थन से देखा गया। कांग्रेस ने तय कर रखा है कि वह डेमोक्रेसी के साथ जाएगी।
</p><p style="text-align: justify; ">निष्कर्ष:
</p><p style="text-align: justify; ">नरेंद्र मोदी और उनके अनुयायियों को यह गलतफहमी दूर कर लेनी चाहिए कि वे लोकतंत्र और कांग्रेस के स्पेस को व्यापक दमन के बाद भी खत्म कर सकते हैं। जाति, धर्म और हेट संगठनों का इस्तेमाल करने की उनकी टैक्टिक्स अब थक चुकी हैं और उन्हें ज्यादा मदद नहीं कर पाएंगी। डेमोक्रेसी में एक रेखा खींच चुकी है, और कांग्रेस ने डेमोक्रेसी के साथ जाने का फैसला किया है। लोकतंत्र और कांग्रेस के स्पेस को बचाना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।</p><div draggable="true" class="hocal-draggable"><iframe frameborder="0" src="https://www.youtube.com/embed/J5EA5lEFP-Q?autoplay=0" max-width="100%" height="360" class="video-element note-video-clip"></iframe></div>]]></content:encoded>
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