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<title><![CDATA[hastakshep | हस्तक्षेप]]></title>
<description><![CDATA[हस्तक्षेप एक स्वतंत्र हिंदी न्यूज़ पोर्टल है जो समसामयिक, राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय, सामाजिक, राजनैतिक, आर्थिक मुद्दों पर समाचार और विश्लेषण प्रस्तुत करता है। यहाँ दलित, वंचित, आदिवासी, महिला व छात्र अधिकारों को विशेष महत्व दिया जाता है।]]></description>
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<title>hastakshep | हस्तक्षेप</title>
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<pubDate>Thu, 11 Jun 2026 18:09:39 GMT</pubDate>
<lastBuildDate>Thu, 11 Jun 2026 18:09:39 GMT</lastBuildDate>
<copyright><![CDATA[Hastakshep]]></copyright>
<language><![CDATA[hi]]></language>
<managingEditor><![CDATA[anushka@blinkcms.ai (Hastakshep)]]></managingEditor>
<ttl>1</ttl>
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<title><![CDATA[प्रेम,प्रकृति और परम्परा की सतरंगी बारिश में भीगी डॉ. कविता अरोरा की श्रव्य - दृश्य कविताएँ]]></title>
<link>https://hastakshep.com/literature-in-hindi/dr-kavita-arora-audiovisual-poems-are-drenched-kaleidoscopic-rain-of-love-304260</link>
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<category><![CDATA[शब्द,साहित्यिक कलरव]]></category>
<dc:creator><![CDATA[Hastakshep]]></dc:creator>
<pubDate>Thu, 11 Jun 2026 18:09:38 GMT</pubDate>
<imagecaption><![CDATA[The international launch of Indian author Kavita Arora's book 'Sham Ki Tapri' took place at the Rustaveli National Theatre.]]></imagecaption>
<image><![CDATA[https://hastakshep.com/h-upload/2026/02/03/86209-the-international-launch-of-indian-author-kavita-aroras-book-sham-ki-tapri-took-place-at-the-rustaveli-national-theatre.webp]]></image>
<content:encoded><![CDATA[<img src='https://hastakshep.com/h-upload/2026/02/03/86209-the-international-launch-of-indian-author-kavita-aroras-book-sham-ki-tapri-took-place-at-the-rustaveli-national-theatre.webp' /><p style="text-align: justify; "><br></p><p style="text-align: justify; "><b><span style="font-size: 22px;">-डॉ. रमाकांत शर्मा</span>
</b></p><p style="text-align: justify; ">आज की कवयित्रियों में एक नाम ऐसा भी है जो अपनी विशेष काव्यसंवेदना और रचनाशीलता के चलते अपनी सर्वथा अलग पहचान बनाने में क़ामयाब हुआ है। जी हाँ, उस कवियत्री का नाम है डॉ. कविता अरोरा।
</p><p style="text-align: justify; "><b>डॉ.कविता अरोरा के अब तक तीन कविता - संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं :
</b></p><p style="text-align: justify; ">1.पैबंद की हँसी
</p><p style="text-align: justify; ">2.चाँद का शरगा
</p><p style="text-align: justify; ">3.कागज़ के नीले साहिल
</p><p style="text-align: justify; ">अलावा इसके, आपकी कविताएँ देश की प्रमुख पत्र - पत्रिकाओं में निरंतर प्रकाशित और आकाशवाणी - दूरदर्शन से प्रसारित होती रही हैं। अनेक वीडियो और मंचों से इनकी कविताएँ सुनी और सराही जाती रही हैं।
</p><p style="text-align: justify; ">कविता अरोरा की कविताओं से गुज़रते हुए मैंने यह महसूस किया कि इनकी एक नहीं, अनेक कविताएँ मानो प्रेमरस के सरोवर में डुबकियां लगाने वाली सद्य स्नाताएँ हैं। जहाँ अमृता प्रीतम की रचनाओं का कहीं प्रत्यक्ष तो कहीं परोक्ष रूप में प्रभाव भी लक्षित किया जा सकता है। जहाँ प्रेम का संबंध देह से नहीं, बल्कि दो आत्माओं से है। रूह से है।
</p><p style="text-align: justify; ">ये ऐसी कविताएँ हैं जो सीधे दिल में उतरने का हुनर रखती हैं। उदाहरण स्वरूप देखिए कवयित्री अपनी ' बसंत के फूल ' कविता में प्रेम में पड़ी एक अल्हड़ लड़की की मनोदशा को व्यक्त करती हुई कहती है:
</p><p style="text-align: justify; ">जब वह टहलती
</p><p style="text-align: justify; ">तब मुंडेर पर
</p><p style="text-align: justify; ">बसंत के फूल खिलते थे
</p><p style="text-align: justify; ">हवाओं में गेसू 
</p><p style="text-align: justify; ">सरसराकर पतंगों से
</p><p style="text-align: justify; ">खुलते थे
</p><p style="text-align: justify; ">                 ****
</p><p style="text-align: justify; ">उल्टी किताब थामे
</p><p style="text-align: justify; ">टहलकर 
</p><p style="text-align: justify; ">सबक याद करती लड़की
</p><p style="text-align: justify; ">सुना है इश्क़ में
</p><p style="text-align: justify; ">पागल थी।
</p><p style="text-align: justify; ">                 ****
</p><p style="text-align: justify; ">इसी प्रकार डॉ. कविता अपनी कविता ' इश्क़ का घर ' में लिखती हैं :
</p><p style="text-align: justify; ">वो सतरह साल की
</p><p style="text-align: justify; ">लड़कियाँ
</p><p style="text-align: justify; ">साड़ी के पल्लू को
</p><p style="text-align: justify; ">पिन से जोड़ती
</p><p style="text-align: justify; ">ख़्वाबों के सतरंगी 
</p><p style="text-align: justify; ">फ़लक पर दौड़ती
</p><p style="text-align: justify; ">                   ****
</p><p style="text-align: justify; ">लड़कियों की आँखें
</p><p style="text-align: justify; ">निडर हैं
</p><p style="text-align: justify; ">यहीं तो निगोड़े
</p><p style="text-align: justify; ">इश्क़ का घर है।
</p><p style="text-align: justify; ">                    ****
</p><p style="text-align: justify; ">जैसा कि मैंने पूर्व में कहा कि डॉ. कविता अरोरा को अमृता प्रीतम की प्रेम कविताएँ पसंद हैं। आत्मिक प्रेम से बढ़कर दुनिया में कुछ भी नहीं। इस संदर्भ में ' इमरोज़ ' शीर्षक कविता की इन पंक्तियों को पढ़ा जा सकता है :
</p><p style="text-align: justify; ">मैंने कभी सोचा नहीं था
</p><p style="text-align: justify; ">कि ख़्वाबों की गलियों से
</p><p style="text-align: justify; ">निकल कर
</p><p style="text-align: justify; ">तमाम शिद्दत लिए
</p><p style="text-align: justify; ">रंग भरी कूँचियों से
</p><p style="text-align: justify; ">ता उम्र तुम मुझे ही
</p><p style="text-align: justify; ">सजाते रहोगे।
</p><p style="text-align: justify; ">                ****
</p><p style="text-align: justify; ">कभी तो तुम्हें भी
</p><p style="text-align: justify; ">लगा होगा 
</p><p style="text-align: justify; ">किसी रोज़
</p><p style="text-align: justify; ">सफ़्हों की सफ़ेद पीठ पर
</p><p style="text-align: justify; ">खिला दूँ
</p><p style="text-align: justify; ">कोई एक नीला फूल
</p><p style="text-align: justify; ">तुम्हारे लिए भी।
</p><p style="text-align: justify; ">                      ****
</p><p style="text-align: justify; ">इसी प्रकार जब वे प्रकृति के विविध रूपों को अपने काव्य के कैनवस पर चित्रित करती हैं तो ऐसा लगता है कवि सुमित्रानंदन पंत अथवा कवि शमशेरबहादुर सिंह की कविताएँ  
</p><p style="text-align: justify; ">अपनी श्रव्य - दृश्य बिम्बात्मकता और प्रतीकात्मकता के साथ हमें आवाज़ दे रही हैं।
</p><p style="text-align: justify; ">इनकी कविताओं में आप देखेंगे कि कहीं बादल बुला रहे हैं तो कहीं पक्षी चहचहा रहे हैं। कहीं चाँद - चाँदनी परस्पर बतिया रहे हैं। कहीं नदी सुस्ता रही है तो कहीं वृक्ष रिफ्यूजी हो गए हैं। ऐसे अनेक बिम्ब सहृदय पाठक को अनायास ही आकर्षित करते हैं।
</p><p style="text-align: justify; ">इस तरह इनका प्रेम और प्रकृति चित्रण अपनी अनूठी धज लिए हुए है जो अमृता प्रीतम, सुमित्रानंदन पंत और शमशेर बहादुर की यादें अनायास ही ताज़ा कर देता है। बहरहाल।
</p><p style="text-align: justify; ">चाँद और चाँदनी, वृक्ष और लताएँ, समंदर और नदियाँ, आकाश और पृथ्वी, अमृता और इमरोज़ आदि इनकी कविताओं के मुख्य क़िरदार हैं। कविता जी की कविताओं में इनका आना - जाना, बोलना - बतियाना, देखना और देखते ही जाना इनकी कविताओं में बराबर बना रहता है।
</p><p style="text-align: justify; ">एक और बात। डॉ. कविता अरोरा की कविताओं में गाँव की गंध रची - बसी है। बचपन का अल्हड़पन, मेले -झूले, गलियाँ -चौबारे, छत - आँगन, माँ - दादी की कहानियाँ और सखा-सहेलियों की नोक -झौंक के अनेक प्रसंग वहाँ जीवंत हो उठते हैं।
</p><p style="text-align: justify; ">इन्हें शहर की बहुमंज़िला इमारतें, आपाधापी वाली ज़िंदगी, व्यक्तिगत स्वार्थी नज़रिया रास नहीं आता।जहाँ न अपनी छत है। चाँद भी जहाँ इमारतों के पीछे छिपा बैठा रहता है।
</p><p style="text-align: justify; ">चाँद का शरगा ( चाँद का बादामी रंग का घोड़ा ) कहानी में दौड़ता दिखाई नहीं देता।
</p><p style="text-align: justify; ">इसी प्रकार हम देखते हैं कि शहर में ' अपणायत ' का भाव नहीं है,  बल्कि एक तरह का ' अजनबीपन ' है। अपने एक गीत ' नहीं रमते शहरों में मन '  में शहरों के हालात पर कवयित्री डॉ. कविता अरोरा लिखती हैं :
</p><p style="text-align: justify; ">अपनेपन को तरसते हैं
</p><p style="text-align: justify; ">मन
</p><p style="text-align: justify; ">नहीं रमते शहरों में मन।
</p><p style="text-align: justify; ">है प्रीत अटारी 
</p><p style="text-align: justify; ">बड़ी सूनी सूनी
</p><p style="text-align: justify; ">न रिश्तों में है 
</p><p style="text-align: justify; ">भोलापन
</p><p style="text-align: justify; ">नहीं रमते शहरों में मन।
</p><p style="text-align: justify; ">                 ****
</p><p style="text-align: justify; ">परिंदे तलाशे
</p><p style="text-align: justify; ">छाँव का एक टुकड़ा
</p><p style="text-align: justify; ">हैं इमारतें बहुत पर
</p><p style="text-align: justify; ">शजर सिकुड़ा सिकुड़ा
</p><p style="text-align: justify; ">तुलसियों को नहीं आँगन
</p><p style="text-align: justify; ">नहीं रमते शहरों में मन।
</p><p style="text-align: justify; ">                   ****
</p><p style="text-align: justify; ">कविता जी समाज के कटु यथार्थ से भी आँखें चार करती हैं। सियासत के हथकंडे,नौकरशाही, भूख और ग़रीबी के दंश से भी वे बाख़बर हैं। अस्पतालों की दुर्दशा देखकर वे लिखती हैं :
</p><p style="text-align: justify; ">अस्पतालों की भीड़ में
</p><p style="text-align: justify; ">रोज़ दिखते हैं मुझे
</p><p style="text-align: justify; ">लाचार आदमी
</p><p style="text-align: justify; ">बोतलों में ख़ून
</p><p style="text-align: justify; ">सिलेण्डरों में सांस
</p><p style="text-align: justify; ">इंजेक्शन में विटामिन
</p><p style="text-align: justify; ">पेसमेकर में
</p><p style="text-align: justify; ">दिल की धड़कनें 
</p><p style="text-align: justify; ">क़ैद हैं।
</p><p style="text-align: justify; ">                    ****
</p><p style="text-align: justify; ">हाय 
</p><p style="text-align: justify; ">अब तक जोड़ जमा तो
</p><p style="text-align: justify; ">डॉक्टरों की फीस निगल गई।
</p><p style="text-align: justify; ">                  ****
</p><p style="text-align: justify; ">घर - परिवार में दरकते रिश्तों की हक़ीक़त कवयित्री डॉ. कविता अरोरा कुछ इस प्रकार बयाँ करती हैं:
</p><p style="text-align: justify; ">प्रेम 
</p><p style="text-align: justify; ">अपरिचित हो गया
</p><p style="text-align: justify; ">मजबूरियों की
</p><p style="text-align: justify; ">चादर ओढ़ कर 
</p><p style="text-align: justify; ">सारे रिश्ते मौन हो गए।
</p><p style="text-align: justify; ">कल तक 
</p><p style="text-align: justify; ">' अज़ीज़ ' थे 
</p><p style="text-align: justify; ">अब कौन
</p><p style="text-align: justify; ">हो गए।
</p><p style="text-align: justify; ">                      ****
</p><p style="text-align: justify; ">जहां तक कवयित्री कविता की काव्यभाषा और काव्यशिल्प का सवाल है, इनकी काव्यभाषा हिंदी, उर्दू, अंग्रेज़ी और पंजाबी
</p><p style="text-align: justify; ">का आफ़ताबी संगम है। यहाँ आमजन की बोली-बानी का मिठास पाठक को आकर्षित करता है। कवयित्री अपनी संवेदनाओं को पूर्ण सहजता और स्वाभाविकता के साथ शब्दों में रूपायित करती है। यद्यपि ये कविताएँ मुक्तछंदी हैं, लेकिन इसके बावजूद कवयित्री ने अपनी मुक्तछंदी कविताओं में आंतरिक लय को बराबर साधे रखा है। इसका विशेष कारण यह है कि कवयित्री स्वयं सुप्रसिद्ध गायिका भी हैं।
</p><p style="text-align: justify; ">मुझे पूरा यक़ीन है कि डॉ. कविता अरोरा की कविताओं का हिंदी के पाठक - जगत में भव्य स्वागत होगा।
</p><p style="text-align: justify; ">अंत में, मैं कवयित्री के रचनात्मक उत्कर्ष की कामना करता हूँ।
</p><p style="text-align: justify; "><b>                     <span style="font-size: 30px;">- डॉ. रमाकांत शर्मा
</span></b></p><p style="text-align: justify; "><span style="font-size: 30px;">                      
</span></p><p style="text-align: justify; ">rkramakant.sharma(at)gmail.com
</p><p style="text-align: justify; ">---------------------------------------------------------
</p><p style="text-align: justify; "><b>काग़ज़ के नीले साहिल </b>( कविता - संग्रह )
</p><p style="text-align: justify; ">डॉ. कविता अरोरा
</p><p style="text-align: justify; ">बोधि प्रकाशन, जयपुर
</p><p style="text-align: justify; ">मूल्य : ₹ 200 /-
</p><p style="text-align: justify; ">                    ****
</p><p style="text-align: justify; "><b>चाँद का शरगा ( कविता - संग्रह )
</b></p><p style="text-align: justify; ">डॉ. कविता अरोरा
</p><p style="text-align: justify; ">बोधि प्रकाशन, जयपुर
</p><p style="text-align: justify; ">मूल्य : ₹ 175 /-
</p><p style="text-align: justify; "></p>]]></content:encoded>
<source url="https://hastakshep.com/hastakshep"><![CDATA[Hastakshep]]></source>
</item>
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<title><![CDATA[चुनाव आयोग की भूमिका और विपक्ष की घेराबंदी: बंगाल से मध्य प्रदेश तक उठते सवाल | मोदी के 12 साल का विश्लेषण]]></title>
<description><![CDATA[मोदी सरकार के 12 साल, मीनाक्षी नटराजन विवाद, चुनाव आयोग की भूमिका, विपक्ष की रणनीति और बंगाल से मध्य प्रदेश तक के राजनीतिक घटनाक्रम का विश्लेषण]]></description>
<tags>लोकतंत्र,मोदी सरकार,नरेन्द्र मोदी,नरेंद्र मोदी,देश दुनिया की लाइव खबरें,headlines</tags>
<link>https://hastakshep.com/videos/election-commission-opposition-modi-12-years-meenakshi-natarajan-analysis-304207</link>
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<category><![CDATA[Videos,आपकी नज़र,राजनीति,समाचार,हस्तक्षेप]]></category>
<dc:creator><![CDATA[Hastakshep]]></dc:creator>
<pubDate>Thu, 11 Jun 2026 10:11:55 GMT</pubDate>
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<image><![CDATA[https://hastakshep.com/h-upload/videothumb/yt_full_nE_QxFDbSBc.jpg]]></image>
<content:encoded><![CDATA[<img src='https://hastakshep.com/h-upload/videothumb/yt_full_nE_QxFDbSBc.jpg' /><h2 style="text-align: justify; "><b>मोदी के 12 साल: चुनाव आयोग, मीनाक्षी नटराजन विवाद और विपक्ष की राजनीति पर बड़ा विश्लेषण
</b></h2><ul class="hocalwire-editor-list"><li style="text-align: justify;"><b>क्या चुनाव आयोग निष्पक्ष है? बंगाल से मध्य प्रदेश तक राजनीतिक विवादों की पड़ताल
</b></li><li style="text-align: justify;"><b>मोदी बनाम नेहरू: 12 साल के शासन, लोकतंत्र और चुनावी संस्थाओं पर उठते सवाल
</b></li><li style="text-align: justify;"><b>मीनाक्षी नटराजन विवाद से बंगाल तक: क्या भारतीय लोकतंत्र नए दौर में प्रवेश कर रहा है?
</b></li></ul><p style="text-align: justify; "><b>मोदी सरकार के 12 साल, मीनाक्षी नटराजन विवाद, चुनाव आयोग की भूमिका, विपक्ष की रणनीति और बंगाल से मध्य प्रदेश तक के राजनीतिक घटनाक्रम का विश्लेषण
</b></p><h3 style="text-align: justify; "><b>चुनाव आयोग की भूमिका और विपक्ष की घेराबंदी: क्या है बंगाल से एमपी तक का सच?</b></h3><p style="text-align: justify; ">लोकतंत्र या तानाशाही? मोदी के 12 साल और विपक्ष का संघर्ष। मोदी राज में लोकतंत्र दांव पर? मीनाक्षी नटराजन के बहाने बड़ा खुलासा! क्या नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ पाएंगे मोदी? संस्थाओं पर उठते गंभीर सवाल। क्या भारतीय लोकतंत्र और संविधान आज एक निर्णायक मोड़ पर खड़े हैं? इस वीडियो में हम विश्लेषण कर रहे हैं नरेंद्र मोदी के शासन के 12 साल और नेहरू जी के कार्यकाल से उनकी तुलना का असली सच।
</p><p style="text-align: justify; ">साथ ही, हम चर्चा करेंगे मध्य प्रदेश में मीनाक्षी नटराजन के नामांकन रद्द होने के विवाद पर और वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी द्वारा उठाए गए कानूनी सवालों पर। क्या चुनाव आयोग की भूमिका निष्पक्ष है? क्या विपक्ष को जानबूझकर चुनाव से दूर रखा जा रहा है? बंगाल से लेकर मध्य प्रदेश तक की राजनीतिक उथल-पुथल को समझने के लिए यह वीडियो अंत तक देखें।
</p><p style="text-align: justify; "><b>वीडियो में चर्चा के मुख्य बिंदु:
</b></p><p style="text-align: justify; ">मोदी vs नेहरू: कार्यकाल की हकीकत।
</p><p style="text-align: justify; ">मीनाक्षी नटराजन का मामला और रिटर्निंग ऑफिसर का फैसला।
</p><p style="text-align: justify; ">चुनाव आयोग और संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल।
</p><p style="text-align: justify; ">विपक्षी दलों की भविष्य की रणनीति।</p>]]></content:encoded>
<source url="https://hastakshep.com/hastakshep"><![CDATA[Hastakshep]]></source>
</item>
<item>
<title><![CDATA[मोदी की 'दखल की राजनीति' क्या है? बंगाल से राष्ट्रीय राजनीति तक प्रो. जगदीश्वर चतुर्वेदी का विश्लेषण]]></title>
<description><![CDATA[क्या भारतीय राजनीति में 'दखल की राजनीति' का नया मॉडल उभर रहा है? बंगाल, लोकतंत्र, सत्ता और संस्थाओं पर नियंत्रण को लेकर प्रो. जगदीश्वर चतुर्वेदी का विश्लेषण]]></description>
<tags>लोकतंत्र,नरेंद्र मोदी,नरेन्द्र मोदी,मोदी सरकार</tags>
<link>https://hastakshep.com/videos/modi-politics-of-intervention-bengal-jagdishwar-chaturvedi-analysis-304167</link>
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<category><![CDATA[Videos,आपकी नज़र,स्तंभ,हस्तक्षेप]]></category>
<dc:creator><![CDATA[Hastakshep]]></dc:creator>
<pubDate>Thu, 11 Jun 2026 05:03:10 GMT</pubDate>
<imagecaption><![CDATA[What is Modi's 'politics of intervention'? Prof. Jagdishwar Chaturvedi's analysis spanning from Bengal to national politics.]]></imagecaption>
<image><![CDATA[https://hastakshep.com/h-upload/2026/06/11/148029-what-is-modis-politics-of-intervention-prof-jagdishwar-chaturvedis-analysis-spanning-from-bengal-to-national-politics.webp]]></image>
<content:encoded><![CDATA[<img src='https://hastakshep.com/h-upload/2026/06/11/148029-what-is-modis-politics-of-intervention-prof-jagdishwar-chaturvedis-analysis-spanning-from-bengal-to-national-politics.webp' /><h2 style="text-align: justify; "><b>मोदी की 'राष्ट्रीय दखल' की राजनीति और बंगाल | क्या लोकतंत्र पर कब्ज़े का नया मॉडल? | प्रो. जगदीश्वर चतुर्वेदी
</b></h2><ul class="hocalwire-editor-list"><li style="text-align: justify;"><b>बंगाल से पूरे देश तक! क्या 'दखल की राजनीति' है मोदी मॉडल?
</b></li><li style="text-align: justify;"><b>बंगाल क्यों है राष्ट्रीय राजनीति की प्रयोगशाला? प्रो. जगदीश्वर चतुर्वेदी का विश्लेषण
</b></li><li style="text-align: justify;"><b>क्या लोकतंत्र की जगह 'कब्ज़े की राजनीति' ले रही है? मोदी मॉडल पर बड़ी बहस
</b></li></ul><h3 style="text-align: justify; "><b>From Bengal to the entire nation! Is the 'politics of intervention' the Modi model?
</b></h3><p style="text-align: justify; ">क्या भारतीय राजनीति में एक नया सत्ता मॉडल विकसित हुआ है? क्या बंगाल की घटनाओं को केवल राज्य की राजनीति के रूप में देखा जाना चाहिए, या यह राष्ट्रीय स्तर पर सत्ता-संरचना के विस्तार का संकेत है?
</p><p style="text-align: justify; ">इस व्याख्यान में प्रो. जगदीश्वर चतुर्वेदी "दखल की राजनीति" की अवधारणा प्रस्तुत करते हैं। उनके अनुसार वर्तमान सत्ता की राजनीति का मूल लक्ष्य केवल चुनाव जीतना नहीं, बल्कि संस्थाओं, प्रशासन, विपक्ष और सामाजिक संरचनाओं पर नियंत्रण स्थापित करना है।
</p><p style="text-align: justify; "><b>नोट: इस वीडियो में व्यक्त विचार वक्ता के अपने विश्लेषण और मत हैं। इन्हें तथ्यात्मक दावे के रूप में नहीं, बल्कि राजनीतिक विमर्श के रूप में देखा जाना चाहिए।
</b></p><p style="text-align: justify; ">क्या आज की भारतीय राजनीति का सबसे बड़ा सवाल हिंदुत्व है... या सत्ता पर 'दखल' का मॉडल?
</p><p style="text-align: justify; ">क्या बंगाल में जो कुछ हो रहा है, वह सिर्फ़ एक राज्य का राजनीतिक संघर्ष है, या पूरे देश में लागू होने वाली एक व्यापक राजनीतिक रणनीति का हिस्सा?
</p><p style="text-align: justify; ">क्या संस्थाओं, राजनीतिक दलों, प्रशासन और चुनावी प्रक्रिया पर नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश को एक नए राजनीतिक मॉडल के रूप में समझा जाना चाहिए?
</p><p style="text-align: justify; ">प्रोफेसर जगदीश्वर चतुर्वेदी का तर्क है कि वर्तमान राजनीति को केवल सांप्रदायिकता या चुनावी प्रतिस्पर्धा के दायरे में समझना पर्याप्त नहीं है। उनके अनुसार इसकी केंद्रीय अवधारणा है—"दखल की राजनीति"।
</p><p style="text-align: justify; ">इस वीडियो में हम प्रोफेसर जगदीश्वर चतुर्वेदी के इसी विश्लेषण को विस्तार से समझेंगे—बंगाल, लोकतंत्र, विपक्ष, राज्य सत्ता और फासीवाद की अवधारणा के संदर्भ में।
</p><p style="text-align: justify; ">यदि आप राजनीति को केवल खबरों से नहीं, बल्कि उसके वैचारिक ढांचे के भीतर समझना चाहते हैं, तो यह चर्चा आपके लिए है।</p><p style="text-align: justify; "><br></p><div draggable="true" class="hocal-draggable"><iframe frameborder="0" src="https://www.youtube.com/embed/V26ZgYOk32A?autoplay=0" max-width="100%" height="360" class="video-element note-video-clip"></iframe></div><p style="text-align: justify; ">
</p>]]></content:encoded>
<source url="https://hastakshep.com/hastakshep"><![CDATA[Hastakshep]]></source>
</item>
<item>
<title><![CDATA[देश दुनिया की लाइव खबरें 10 जून 2026 | Aaj Tak Live]]></title>
<description><![CDATA[दिन भर की खबरें 10 जून 2026 की देश दुनिया की आज तक लाइव खबरें यहां पढ़ें। यहां भारत की  राजनीति, अर्थव्यवस्था, खेल, विज्ञान-तकनीक, मौसम अपडेट और अंतरराष्ट्रीय घटनाओं से जुड़ी हर ताज़ा व बड़ी खबर तुरंत पाएँ। इस पेज पर दिन भर की खबरें अपडेट होंगीं..]]></description>
<tags>आज की बड़ी खबरें,सुबह की बड़ी खबरें,देश दुनिया की लाइव खबरें,news-headlines-in-hindi-for-school-assembly,News headlines in Hindi for school assembly,news headlines for school assembly in hindi,top-10-news,morning-news,todays-top-10-news,big-news-of-the-day,top-10-news-of-this-morning,latest news headlines for today,Daily School Assembly News Headlines in Hindi,headlines,top-headlines</tags>
<link>https://hastakshep.com/breaking-news/aaj-tak-breaking-news-10june-2026-303992</link>
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<category><![CDATA[Breaking News,दुनिया,देश,राजनीति,समाचार,मानवाधिकार]]></category>
<dc:creator><![CDATA[Hastakshep]]></dc:creator>
<pubDate>Wed, 10 Jun 2026 03:26:28 GMT</pubDate>
<imagecaption/>
<image><![CDATA[https://hastakshep.com/h-upload/videothumb/yt_full_Nq2wYlWFucg.jpg]]></image>
<content:encoded><![CDATA[<img src='https://hastakshep.com/h-upload/videothumb/yt_full_Nq2wYlWFucg.jpg' /><h2 style="text-align: justify; "><b>Live news of the country and the world 10 June 2026 | Aaj Tak Live
</b></h2><p style="text-align: justify; "><b>Aaj Tak Breaking News 10 जून 2026 दिन भर की खबरें 10 जून 2026 की देश दुनिया की आज तक लाइव खबरें यहां पढ़ें। यहां भारत की राजनीति, अर्थव्यवस्था, खेल, विज्ञान-तकनीक, मौसम अपडेट और अंतरराष्ट्रीय घटनाओं से जुड़ी हर ताज़ा व बड़ी खबर तुरंत पाएँ। 
</b></p><h3 style="text-align: justify; "><b>इस पेज पर दिन भर की खबरें अपडेट होंगीं.. 10 जून 2026 की देश दुनिया की आज तक लाइव खबरें यहां पढ़ें</b></h3><p style="text-align: justify; "><b>ईरान ने मध्य-पूर्व स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया
</b></p><p style="text-align: justify; ">ईरान में युद्ध प्रबंधन की ज़िम्मेदारी संभाल रहे ख़ातम अल-अनबिया मुख्यालय ने दक्षिणी ईरान के कुछ हिस्सों में अमेरिकी हमलों के एक घंटे बाद एक बयान जारी किया है।
</p><p style="text-align: justify; ">ख़ातम अल-अनबिया मुख्यालय के बयान में कहा गया, "अमेरिकी सेना की आक्रामकता के जवाब में क्षेत्र में स्थित कुछ अमेरिकी ठिकानों को ईरान की सेना और इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) के बहादुर जवानों ने एक ताक़तवार हमले के ज़रिए निशाना बनाया.।"
</p><p style="text-align: justify; ">इसके अतिरिक्त ईरान की आईआरजीसी ने भी एक बयान जारी किया है, जिसमें बहरीन स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर हमले का दावा किया गया है.
</p><p style="text-align: justify; ">ईरान की तसनीम न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, आईआरजीसी ने दावा किया है कि, "रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स की नौसेना ने सुबह 2:30 बजे बहरीन में अमेरिका के पांचवें नौसैनिक बेड़े पर ड्रोन हमला किया।"
</p><p style="text-align: justify; ">उधर ईरान की ही फ़ार्स न्यूज़ एजेंसी ने बताया कि आईआरजीसी ने जॉर्डन में एक अमेरिकी सैन्य अड्डे पर मिसाइल हमला किया है।
</p><p style="text-align: justify; ">आईआरजीसी ने कहा कि उसने 'जॉर्डन के अल-अज़राक में अमेरिकी हवाई अड्डे पर स्थित एफ़-35 लड़ाकू जेट हैंगर और सेना कमान सहित चार महत्वपूर्ण ठिकानों को अपनी लंबी दूरी की मिसाइलों से निशाना बनाया' है।
</p><p style="text-align: justify; ">बुधवार को, इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड्स कोर (आईआरजीसी) ने बताया कि कैसे "युद्ध भड़काने वाली अमेरिकी सरकार" ने दिन में पहले प्रांत के जास्क, सिरिक और केशम में कई स्थानों पर एक अमेरिकी हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने के "झूठे बहाने" के तहत हमला किया था।
</p><p style="text-align: justify; ">आईआरजीसी के अनुसार, अमेरिकी हमलों में सिरिक में एक दूरसंचार टावर क्षतिग्रस्त हो गया था और काउंटी के बेमानी जिले में दो जल भंडार नष्ट हो गए थे।
</p><p style="text-align: justify; ">अमेरिकी पांचवें बेड़े ने जवाबी कार्रवाई में अल-अज़राक अड्डे पर हमला किया।
</p><p style="text-align: justify; ">नौसेना ने कहा कि उसकी नौसेना ने बहरीन में अमेरिकी पांचवें बेड़े के मुख्यालय पर जवाबी ड्रोन हमला करके हमलों का जवाब दिया।
</p><p style="text-align: justify; ">बाद में बल ने घोषणा की कि उसने जॉर्डन में वाशिंगटन के अल-अजराक अड्डे पर भी मिसाइल हमला किया है।
</p><p style="text-align: justify; ">आईआरजीसी के एक अन्य बयान के अनुसार, एफ-35 युद्धक विमानों के आश्रय स्थलों और अल-अज़राक में "बच्चों की हत्या करने वाली अमेरिकी सेना" के कमान और नियंत्रण केंद्र सहित चार प्रमुख लक्ष्यों पर हमला किया गया और उन्हें नष्ट कर दिया गया।
</p><p style="text-align: justify; ">इस बीच, एक जानकार सैन्य सूत्र ने बताया कि ईरान ने युद्धक विमानों को आश्रय देने वाले आश्रयों को निशाना बनाने के लिए लंबी दूरी की ठोस ईंधन वाली खेइबर शेकन मिसाइलों का इस्तेमाल किया।
</p><p style="text-align: justify; ">आईआरजीसी ने आगे कहा कि जवाबी कार्रवाई के दौरान पूरे क्षेत्र में अमेरिकी वायु और नौसैनिक अड्डों पर कुल 21 लक्ष्यों को निशाना बनाया गया।
</p><p style="text-align: justify; "><b>लेबनान: टायर में हमला, 8 लोगों की मौत, अभी तक $36.5 करोड़ का नुक़सान
</b></p><p style="text-align: justify; ">संयुक्त राष्ट्र के नेतृत्व में जारी एक नए आकलन में बताया गया है कि लेबनान की राजधानी बेरूत और माउंट लेबनान क्षेत्र में हालिया युद्ध बढ़ने के बाद इमारतों को साढ़े 36 करोड़ डॉलर से अधिक का नुक़सान हुआ है. इस बीच, टायर शहर में हुए कुछ और हमलों ने युद्धविराम की नाज़ुक स्थिति को उजागर किया है, जो अब तक हिंसा और संघर्ष को पूरी तरह रोकने में विफल रहा है.
</p><p style="text-align: justify; "><b>सौरभ भारद्वाज के खिलाफ मानहानि केस: बयान दर्ज कराने कोर्ट ही नहीं पहुंच सके प्रवेश वर्मा
</b></p><p style="text-align: justify; ">दिल्ली सरकार में मंत्री और भाजपा नेता प्रवेश वर्मा द्वारा आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज के खिलाफ दायर आपराधिक मानहानि मामले में मंगलवार को राउज एवेन्यू कोर्ट में सुनवाई हुई। 
</p><p style="text-align: justify; "><b>विकलांग व्यक्तियों के अधिकारों में चुनौतियाँ बरक़रार, यूएन सम्मेलन में हुआ मन्थन
</b></p><p style="text-align: justify; ">संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने विकलांग जन के अधिकारों के बारे में कहा है कि पिछले दो दशकों में इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल की गई हैं, लेकिन किए गए वादों को पूरी तरह साकार करने और समान अधिकार सुनिश्चित करने के लिए अभी बहुत अधिक प्रयास किए जाने की आवश्यकता है.
</p><p style="text-align: justify; "><b>WFP ने 15 हज़ार किलोमीटर की यात्रा करके, अफ़ग़ान स्कूली बच्चों तक पहुँचाया भोजन
</b></p><p style="text-align: justify; ">अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल के बाहरी क्षेत्र में स्थित विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) के एक गोदाम में, कई सप्ताह की यात्रा के बाद पोषक तत्वों से समृद्ध बिस्कुटों की खेप पहुँची है. इस खेप को 15 हज़ार किलोमीटर लम्बी यात्रा पूरी करके काबुल पहुँचाया गया. यात्रा के दौरान इसे दो बार व्यवधानों का सामना करना पड़ा, जबकि अन्तिम चरण में सड़क मार्ग से 9 देशों की सीमाओं को पार करना पड़ा.</p><p style="text-align: justify; "><br></p><div draggable="true" class="hocal-draggable"><iframe frameborder="0" src="//www.youtube.com/embed/w-GqzP2jVe8" max-width="100%" class="video-element note-video-clip" height="360"></iframe></div><p style="text-align: justify; "><br></p>]]></content:encoded>
<source url="https://hastakshep.com/hastakshep"><![CDATA[Hastakshep]]></source>
</item>
<item>
<title><![CDATA[उर्दू शायरी में 'इश्क़' का असली मतलब क्या है? | ग़ालिब, फ़ैज़ और सूफ़ी परंपरा को समझाते जस्टिस मार्कंडेय काटजू]]></title>
<description><![CDATA[What is the true meaning of 'Ishq' in Urdu poetry? | Justice Markandey Katju explains Ghalib, Faiz, and the Sufi tradition.]]></description>
<tags>उर्दू,Justice Katju,काटजू,जस्टिस काटजू,जस्टिस काटजू का लेख,जस्टिस मार्कंडेय काटजू</tags>
<link>https://hastakshep.com/literature-in-hindi/true-meaning-of-ishq-in-urdu-poetry-justice-markandey-katju-303989</link>
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<category><![CDATA[आपकी नज़र,शब्द,स्तंभ,हस्तक्षेप]]></category>
<dc:creator><![CDATA[Hastakshep]]></dc:creator>
<pubDate>Wed, 10 Jun 2026 03:06:05 GMT</pubDate>
<imagecaption/>
<image><![CDATA[https://hastakshep.com/h-upload/videothumb/yt_full_S43jmosxBrQ.jpg]]></image>
<content:encoded><![CDATA[<img src='https://hastakshep.com/h-upload/videothumb/yt_full_S43jmosxBrQ.jpg' /><h2><b>क्या उर्दू शायरी का इश्क़ सिर्फ़ मोहब्बत है? जस्टिस काटजू की चौंकाने वाली व्याख्या</b></h2><ul class="hocalwire-editor-list"><li><b>ग़ालिब का इश्क़, फ़ैज़ की क्रांति और सूफ़ियों का प्रेम | इश्क़-ए-हक़ीक़ी का रहस्य
</b></li><li><b>इश्क़ या क्रांति? उर्दू शायरी के सबसे बड़े भ्रम का सच
</b></li><li><b>भगत सिंह से ग़ालिब तक: इश्क़ का वह अर्थ जो आपको नहीं बताया गया
</b></li><li><b>क्या ग़ालिब के शेरों में आने वाला "इश्क़" सिर्फ़ एक आशिक़ और माशूक़ की कहानी है?
</b></li><li><b>क्या फ़ैज़ की शायरी में फूल, बहार और गुलशन वास्तव में फूलों और बाग़ों की बात करते हैं?
</b></li></ul><h3><b>और क्या भगत सिंह, अशफ़ाक़ुल्लाह, चंद्रशेखर आज़ाद जैसे क्रांतिकारियों के भीतर भी एक तरह का "इश्क़" था?
</b></h3><p>उर्दू शायरी की दुनिया में शब्द अक्सर वह नहीं कहते जो सतह पर दिखाई देता है। उनके भीतर छिपे होते हैं गहरे अर्थ, प्रतीक और संकेत।
</p><p>आज हम सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस मार्कंडेय काटजू के उस विचार को समझेंगे, जिसमें वे बताते हैं कि<b><i> उर्दू शायरी का "इश्क़" </i></b>दरअसल किसी स्त्री-पुरुष के प्रेम से कहीं अधिक व्यापक अवधारणा है—यह ईश्वर, सत्य, आदर्श, देश और मानवता के लिए निस्वार्थ समर्पण का नाम है।
</p><p>तो आइए, ग़ालिब, फ़ैज़, सूफ़ी परंपरा और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के उदाहरणों के साथ जस्टिस काटजू से समझते हैं कि <b><i>उर्दू शायरी में इश्क़ का असली मतलब क्या है....
</i></b></p><p>सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज <b><i>जस्टिस मार्कंडेय काटजू</i></b> उर्दू शायरी में 'इश्क़' के असली मतलब को समझाते हुए कहते हैं कि इसका मतलब सिर्फ़ रोमांटिक प्यार नहीं, बल्कि आदर्शों, सच्चाई, ईश्वर और सामाजिक बदलाव के लिए निस्वार्थ जुनून है। ग़ालिब और फ़ैज़ की शायरी के ज़रिए, वे इश्क़ के गहरे सूफ़ी और क्रांतिकारी पहलुओं को समझाते हैं।
</p><p>जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने हमारी अंग्रेज़ी वेबससाइट हस्तक्षेप न्यूज़ डॉट कॉम पर "<b><a href="https://www.hastakshepnews.com/2026/06/the-concept-of-ishq-in-urdu-poetry.html" target="_blank">उर्दू शायरी में 'इश्क़' का कॉन्सेप्ट</a></b>" सीर्षक से एक लेख लिखकर कहा है कि उर्दू शायरी में 'इश्क़' (प्यार) शब्द अक्सर सुनने को मिलता है, और बहुत से लोग सोचते हैं कि इसका मतलब एक मर्द और औरत के बीच का प्यार है। लेकिन ऐसा नहीं है।
</p><p>लेख में जस्टिस काटजू समझाते हैं कि महान उर्दू शायर ग़ालिब का एक मशहूर शेर है:</p><p>"<b><i>इश्क़ ने ग़ालिब निकम्मा कर दिया
</i></b></p><p><b><i>वरना हम भी आदमी थे काम के</i></b>"
</p><p>इसका क्या मतलब है? जस्टिस काटजू कहते हैं कि इस सवाल का जवाब पाने के लिए, सबसे पहले यह समझना होगा कि उर्दू शायरी में अक्सर एक बाहरी, शाब्दिक या सतही अर्थ होता है, और एक अंदरूनी, लाक्षणिक या असली अर्थ होता है।
</p><p>मिसाल के तौर पर, फ़ैज़ का यह शेर लें :
</p><p>"<b><i>गुलों में रंग भरे बाद-ए-नौबहार चले
</i></b></p><p><b><i>चले भी आओ कि गुलशन का कारोबार चले</i></b>"
</p><p>अब इस शेर का शाब्दिक या सतही अर्थ यह है:
</p><p>"फूलों के बीच नई बहार की रंगीन हवा चल रही है
</p><p>आ भी जाओ, ताकि बाग़ का काम-काज चल सके"
</p><p>जस्टिस काटजू कहते हैं कि लेकिन फ़ैज़ असल में यह नहीं कहना चाहते। इस शेर में 'गुलशन' शब्द को शाब्दिक अर्थ में नहीं समझना चाहिए। इसका असली मतलब देश है। न ही शेर की पहली मिसरा (पंक्ति) को शाब्दिक अर्थ में समझना चाहिए।
</p><p>शेर का असली मतलब यह है:
</p><p>"देश में हालात (क्रांति के लिए) बिल्कुल तैयार हैं
</p><p>देशभक्तों, आगे आओ; देश बहुत मुश्किल में है और उसे तुम्हारी ज़रूरत है"
</p><p>जस्टिस काटजू कहते हैं कि इस तरह, उर्दू शायरी को समझने के लिए, सिर्फ़ सीधे, बाहरी या शाब्दिक अर्थ पर नहीं जाना चाहिए, बल्कि गहराई में जाकर उस अंदरूनी असली अर्थ को समझने की कोशिश करनी चाहिए जिसे शायर रूपकों, इशारों, संकेतों और सुझावों के ज़रिए अप्रत्यक्ष रूप से कह रहा होता है।
</p><p>जस्टिस काटजू कहते हैं कि 'इश्क़' शब्द, जो उर्दू शायरी में अक्सर आता है, उसे अक्सर मर्द और औरत के बीच शारीरिक प्रेम और आकर्षण के रूप में गलत समझा जाता है। लेकिन आमतौर पर इसका असली मतलब यह नहीं होता। <b><i>उर्दू शायरी पर सूफ़ियों का गहरा असर</i></b> है, और सूफ़ियों के बीच 'इश्क़' शब्द का असली मतलब किसी औरत के लिए नहीं, बल्कि ईश्वर के लिए प्रेम (इश्क़-ए-हक़ीक़ी) होता है।
</p><p>जस्टिस काटजू कहते हैं कि <b><i>फ़ारसी रहस्यवादी मंसूर अल-हल्लाज (858-922) 'अनल हक़' </i></b>(मैं ईश्वर हूँ) कहा करते थे, जिसके कारण उन्हें गलत समझा गया और उनका सिर काट दिया गया। उनका असली मतलब यह था कि उन्होंने अपने अहंकार को मिटा दिया था और सभी शारीरिक इच्छाओं को त्याग दिया था, और इसलिए उन्होंने दिव्यता प्राप्त कर ली थी। इस तरह, उर्दू शायरी में 'इश्क़' शब्द का असल मतलब किसी आदर्श या नेक उसूल के लिए ऐसा जुनून है, जिसके लिए इंसान निस्वार्थ भाव से अपनी सारी सुख-सुविधाएँ और यहाँ तक कि अपनी जान भी देने को तैयार हो जाता है।
</p><p>जस्टिस काटजू कहते हैं कि ग़ालिब लिखते हैं:
</p><p>"<b><i>इश्क़ पर ज़ोर नहीं है ये वो आतिश ग़ालिब
</i></b></p><p><b><i>कि लगाए न लगे और बुझाए न बने</i></b>"
</p><p>जस्टिस काटजू कहते हैं कि यहाँ भी, 'इश्क़' शब्द को सिर्फ़ मर्द और औरत के बीच शारीरिक आकर्षण नहीं समझना चाहिए। इसका मतलब है एक ज़बरदस्त जुनून या लगाव, जिसे तर्क से समझाया नहीं जा सकता, और जो इंसान को आग की तरह जला देता है।
</p><p>आधुनिक यूरोप के दो सबसे अहम बौद्धिक रचनाकार महान विचारक और लेखक वोल्टेयर और रूसो (दोनों फ्रांसीसी) थे। जहाँ वोल्टेयर ने तर्क पर ज़ोर दिया, वहीं रूसो ने कहा कि जुनून और जज़्बात के बिना, सिर्फ़ तर्क इंसान को एक मतलबी और हिसाब-किताब करने वाला जीव बना देता है, जो देश या दूसरों की भलाई के लिए कुछ नहीं करेगा, बल्कि सिर्फ़ अपने और अपने परिवार के आराम के बारे में सोचेगा और परवाह करेगा।
</p><p>सभी महान क्रांतिकारियों में इस अर्थ में 'इश्क़' था, यानी अपने देश की सेवा के लिए निस्वार्थ जुनून, भले ही इसके लिए अपना सब कुछ, यहाँ तक कि जान भी गंवानी पड़े।
</p><p>जस्टिस काटजू कहते हैं कि अमेरिका में, जॉर्ज वाशिंगटन एक बहुत अमीर ज़मींदार थे, लेकिन जब उन्हें अमेरिकी आज़ादी की लड़ाई (1775-81) में ब्रिटिश शासकों के ख़िलाफ़ कॉन्टिनेंटल सेना बनाने और उसका नेतृत्व करने के लिए बुलाया गया, तो उन्होंने इसे स्वीकार कर लिया, हालाँकि उन्हें फाँसी का जोखिम भी था अगर अंग्रेज़ उन्हें पकड़ लेते।
</p><p>जस्टिस काटजू आगे कहते हैं कि 17वीं सदी में आज़ादी के लिए और राजा चार्ल्स प्रथम की निरंकुश सत्ता के ख़िलाफ़ लड़ने वाले क्रॉमवेल जैसे अंग्रेज़, 1789 की फ्रांसीसी क्रांति के महान फ्रांसीसी नेता रॉबेस्पियर और मैराट, और रूसी नेता लेनिन, इन सभी में 'इश्क़' की आग थी, यानी अपने देशों की निस्वार्थ सेवा करने का ज़बरदस्त जुनून।
</p><p>हमारे अपने देश में, ब्रिटिश शासन के ख़िलाफ़ लड़ने वाले महान सेनानियों जैसे भगत सिंह, सूर्य सेन, चंद्रशेखर आज़ाद, बिस्मिल, राजगुरु, सुखदेव, अशफ़ाक़ुल्लाह, खुदीराम बोस आदि ने अपने 'इश्क़' के लिए अपनी जान दे दी, और 'सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है' आज़ादी की लड़ाई का नारा बन गया। इसलिए, ग़ालिब के उस शेर (जिसका ज़िक्र शुरू में किया गया है) का मतलब यह समझा जाना चाहिए कि "मैं भी बहुत पैसा कमा सकता था और आराम की ज़िंदगी जी सकता था, अगर मुझ पर एक ऐसा जुनून (उनके मामले में शायरी) सवार न होता, जिसने मुझे एक अव्यावहारिक इंसान बना दिया—ऐसा व्यक्ति जिसे अपनी भलाई और आराम की कोई परवाह नहीं थी।"
</p><p>जस्टिस काटजू आव्हान करते हुए कहते हैं कि आज, जब हमारा देश भारी चुनौतियों—सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक—का सामना कर रहा है, जिसमें बड़े पैमाने पर गरीबी, बेरोजगारी, बच्चों में कुपोषण और आम लोगों के लिए सही स्वास्थ्य सेवा और अच्छी शिक्षा का लगभग पूरी तरह अभाव शामिल है, तब देश के प्रति सच्चे प्रेम और जुनून वाले देशभक्तों की भारी संख्या में ज़रूरत है, जो क्रांति का नेतृत्व कर सकें और लोगों की दुर्दशा को दूर कर सकें।
</p><p><b>(जस्टिस काटजू भारत के सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज और प्रेस काउंसिल ऑफ़ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं। ये उनके निजी विचार हैं।)
</b></p><p>तो दोस्तों, जस्टिस मार्कंडेय काटजू के अनुसार उर्दू शायरी का "इश्क़" महज़ रोमांटिक प्रेम नहीं है। यह एक ऐसा जज़्बा है जो इंसान को अपने निजी स्वार्थों से ऊपर उठाकर किसी बड़े उद्देश्य—चाहे वह ईश्वर हो, सत्य हो, कला हो, देश हो या मानवता—के लिए समर्पित कर देता है।
</p><p>ग़ालिब, फ़ैज़ और सूफ़ी परंपरा हमें याद दिलाती है कि असली इश्क़ वह है जो इंसान को बदल दे, उसे संघर्ष करने की ताक़त दे और समाज के लिए कुछ करने की प्रेरणा दे।
</p><p>आपकी नज़र में "इश्क़" का सबसे गहरा अर्थ क्या है? क्या आप जस्टिस काटजू की इस व्याख्या से सहमत हैं?
</p><p>अपनी राय कमेंट बॉक्स में ज़रूर लिखिए।
</p><p>वीडियो पसंद आया हो तो लाइक करें, शेयर करें और हस्तक्षेप चैनल को सब्सक्राइब करना न भूलें।
</p><p>नमस्कार।
</p>]]></content:encoded>
<source url="https://hastakshep.com/hastakshep"><![CDATA[Hastakshep]]></source>
</item>
<item>
<title><![CDATA[खेतों में बढ़ती गर्मी छीन रही काम के घंटे, दुनिया की खाद्य सुरक्षा पर मंडराया नया जलवायु संकट]]></title>
<description><![CDATA[बढ़ती गर्मी और हीट स्ट्रेस से कृषि मजदूरों के काम के घंटे तेजी से घट रहे हैं। जानिए ECIU की नई रिपोर्ट खाद्य सुरक्षा, किसानों और जलवायु परिवर्तन को लेकर क्या चेतावनी देती है]]></description>
<tags>देश दुनिया की लाइव खबरें,मौसम का हाल,जलवायु संकट,जलवायु परिवर्तन</tags>
<link>https://hastakshep.com/samachar/climate-change/heat-stress-reducing-farm-work-hours-threatens-global-food-security-303987</link>
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<category><![CDATA[Breaking News,जलवायु परिवर्तन,दुनिया,देश,समाचार]]></category>
<dc:creator><![CDATA[Hastakshep]]></dc:creator>
<pubDate>Wed, 10 Jun 2026 02:52:25 GMT</pubDate>
<imagecaption><![CDATA[Rising heat in fields is cutting into working hours; a new climate crisis looms over global food security.]]></imagecaption>
<image><![CDATA[https://hastakshep.com/h-upload/2026/06/10/147223-rising-heat-in-fields-is-cutting-into-working-hours-a-new-climate-crisis-looms-over-global-food-security.webp]]></image>
<content:encoded><![CDATA[<img src='https://hastakshep.com/h-upload/2026/06/10/147223-rising-heat-in-fields-is-cutting-into-working-hours-a-new-climate-crisis-looms-over-global-food-security.webp' /><h2 style="text-align: justify; "><b>खेतों में बढ़ती गर्मी छीन रही काम के घंटे, दुनिया की खाद्य सुरक्षा पर नया खतरा
</b></h2><ul class="hocalwire-editor-list"><li style="text-align: justify;"><b>हीट स्ट्रेस कैसे छीन रहा है किसानों के काम के घंटे?
</b></li><li style="text-align: justify;"><b>ECIU की नई रिपोर्ट में क्या सामने आया?
</b></li><li style="text-align: justify;"><b>2024 में कृषि मजदूरों को कितना काम गंवाना पड़ा?
</b></li><li style="text-align: justify;"><b>बढ़ती गर्मी का खाद्य सुरक्षा पर क्या असर पड़ेगा?
</b></li><li style="text-align: justify;"><b>किन देशों के कृषि क्षेत्र पर सबसे अधिक खतरा है?
</b></li><li style="text-align: justify;"><b>भारत सहित विकासशील देशों में क्यों बढ़ रही है चिंता?
</b></li><li style="text-align: justify;"><b>हीट स्ट्रेस और जलवायु परिवर्तन का सीधा संबंध
</b></li><li style="text-align: justify;"><b>Lancet Countdown रिपोर्ट क्या कहती है?
</b></li><li style="text-align: justify;"><b>कृषि क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित क्यों हो रहा है?
</b></li><li style="text-align: justify;"><b>छोटे किसानों के सामने बढ़ता जलवायु संकट
</b></li></ul><h3 style="text-align: justify;"><b>El Niño और रिकॉर्ड गर्मी का खतरा : जलवायु अनुकूलन (Climate Adaptation) की चुनौती</b></h3><p style="text-align: justify; ">नई दिल्ली, 10 जून 2026. दोपहर की धूप में खेत हमेशा कठिन जगह रहे हैं। लेकिन अब कई देशों में खेत खतरनाक होते जा रहे हैं। क्योंकि गर्मी सिर्फ बढ़ नहीं रही, वह शरीर की काम करने की क्षमता छीन रही है।
</p><p style="text-align: justify; ">Energy and Climate Intelligence Unit यानी ECIU की नई analysis के मुताबिक दुनिया भर में बढ़ता heat stress अब कृषि मजदूरों और किसानों के काम के घंटों को तेजी से कम कर रहा है। इसका सीधा असर खाद्य उत्पादन और food security पर पड़ सकता है।
</p><p style="text-align: justify; ">रिपोर्ट कहती है कि 2024 में climate-vulnerable developing countries के agricultural workers ने heat stress की वजह से अनुमानित 216 billion work hours गंवा दिए। यह नुकसान सिर्फ थकान का नहीं है। इसका मतलब है खेतों में कम काम, कम productivity और बढ़ता आर्थिक दबाव।
</p><p style="text-align: justify; ">अगर इसे प्रति worker के हिसाब से देखें, तो औसतन लगभग 590 घंटे का नुकसान हुआ। यानी करीब 49 working days।
</p><p style="text-align: justify; ">लगभग डेढ़ महीने से ज्यादा का काम गर्मी की वजह से खत्म हो गया।
</p><p style="text-align: justify; ">और यह स्थिति हर साल खराब हो रही है।
</p><p style="text-align: justify; ">रिपोर्ट के मुताबिक प्रति worker heat stress से होने वाला नुकसान हर साल लगभग 4 से 5 घंटे बढ़ रहा है। यानी बढ़ती गर्मी खेतों में काम करने की क्षमता को धीरे-धीरे और तेजी से कम कर रही है।
</p><p style="text-align: justify; ">Analysis में भारत, ब्राजील, वियतनाम, केन्या, घाना, दक्षिण अफ्रीका और पेरू जैसे देशों का अध्ययन किया गया। ये वही देश हैं जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा चावल, कॉफी, चाय, कोको, फल और दूसरी कृषि उपज हासिल करती है।
</p><p style="text-align: justify; ">लेकिन अब इन देशों के खेत extreme heat के दबाव में हैं।
</p><p style="text-align: justify; ">Lancet Countdown report का हवाला देते हुए analysis बताती है कि 2024 में दुनिया भर में heat exposure की वजह से कुल 640 billion potential work hours lost हुए। यह 2023 से भी ज्यादा था और 1990 के दशक की तुलना में लगभग 98 प्रतिशत अधिक।
</p><p style="text-align: justify; ">इनमें सबसे ज्यादा असर कृषि क्षेत्र पर पड़ा।
</p><p style="text-align: justify; ">रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया में heat stress से होने वाले कुल work hour losses का लगभग 63.5 प्रतिशत हिस्सा agricultural workers से जुड़ा था। Low Human Development Index वाले देशों में यह आंकड़ा 75 प्रतिशत से ज्यादा पहुंच जाता है।
</p><p style="text-align: justify; ">यानी दुनिया का सबसे vulnerable workforce वही है जो दुनिया का खाना उगाता है।
</p><p style="text-align: justify; ">ECIU के Head of International Programme Gareth Redmond-King कहते हैं कि climate change अब सिर्फ फसलों को नहीं, बल्कि उन लोगों को भी प्रभावित कर रहा है जो खेतों में काम करते हैं। उनके मुताबिक भारत जैसे देशों में जहां तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जा रहा है, वहां बाहर काम करना खतरनाक होता जा रहा है।
</p><p style="text-align: justify; ">वे कहते हैं कि इससे स्वास्थ्य, livelihoods और steady food supplies तीनों खतरे में पड़ रहे हैं।
</p><p style="text-align: justify; ">World Meteorological Organisation यानी WMO ने आने वाले महीनों में एक शक्तिशाली El Niño बनने की संभावना 80 प्रतिशत बताई है। रिपोर्ट कहती है कि 2027 दुनिया का सबसे गर्म साल बन सकता है।
</p><p style="text-align: justify; ">यानी heat stress का संकट और गहरा सकता है।
</p><p style="text-align: justify; ">International Labour Organisation यानी ILO के मुताबिक 2024 में दुनिया के 71 प्रतिशत workers excessive heat के संपर्क में थे। एशिया में यह आंकड़ा लगभग 75 प्रतिशत, अरब देशों में 83 प्रतिशत और अफ्रीका में 93 प्रतिशत तक पहुंच गया।
</p><p style="text-align: justify; ">भारत की rice farmer और Intercontinental Network of Organic Farmers की President Shamika Mone कहती हैं कि extreme heat खेती को पहले से ज्यादा मुश्किल बना रही है। उनके मुताबिक एक “super El Niño” फसलों को नुकसान पहुंचा सकता है और छोटे किसानों के सामने बड़ा संकट खड़ा कर सकता है।
</p><p style="text-align: justify; ">वे कहती हैं कि छोटे किसानों तक climate finance पहुंचाना और nature-friendly farming को बढ़ावा देना जरूरी है ताकि खेतों का तापमान कम किया जा सके और किसानों को extreme heat से कुछ राहत मिल सके।
</p><p style="text-align: justify; ">रिपोर्ट यह भी कहती है कि दुनिया के कई vulnerable देशों के पास climate adaptation की क्षमता सीमित है। यानी जिन देशों के किसान सबसे ज्यादा गर्मी झेल रहे हैं, वही उससे निपटने के लिए सबसे कम तैयार हैं।
</p><p style="text-align: justify; ">कई सालों तक climate change की चर्चा glaciers, floods और rising sea levels के इर्द-गिर्द होती रही।
</p><p style="text-align: justify; ">लेकिन अब इसकी सबसे बड़ी तस्वीर शायद खेतों में दिखाई दे रही है।
</p><p style="text-align: justify; ">जहां किसान काम रोकने के लिए नहीं, बल्कि गर्मी से बचने के लिए छांव ढूंढ रहा है।
</p><p style="text-align: justify; ">जहां सूरज सिर्फ मौसम नहीं, productivity तय कर रहा है।
</p><p style="text-align: justify; ">और जहां बढ़ती गर्मी धीरे-धीरे दुनिया के खाने के घंटे भी कम कर रही है।
</p><p style="text-align: justify; "><b><span style="font-size: 30px;">डॉ. सीमा जावेद</span>
</b></p><p style="text-align: justify; ">
</p><p style="text-align: justify; "></p>]]></content:encoded>
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