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	<title>Monica Gupta</title>
	
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	<description>Writer, Journalist, Cartoonist &amp; a Social Worker</description>
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		<title>कहानी … नतीजा</title>
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		<pubDate>Fri, 18 May 2012 10:00:45 +0000</pubDate>
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		<description><![CDATA[आज आईआईटी का नतीजा आया. डर और धबराहट के मारे अखिल की हालत खस्ता थी.असल मे वो बहुत साधारण से परिवार से था. पिता ने उसके कहने पर अपनी एफडी खुलवा ली थी ताकि टयूशन और किताबो का खर्चा निकल जाए पर साथ ही साथ उसे हिदायत भी दे दी थी कि अगर किसी भी [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>आज आईआईटी का नतीजा आया. डर और धबराहट के मारे अखिल की हालत खस्ता थी.असल मे वो बहुत साधारण से परिवार से था. पिता ने उसके कहने पर अपनी एफडी खुलवा ली थी ताकि टयूशन और किताबो का खर्चा निकल जाए पर साथ ही साथ उसे हिदायत भी दे दी थी कि अगर किसी भी वजह से वो पास ना कर पाया तो कबाडी वाला ही बनना पडेगा क्योकि अब बैंक मे कोई रुपया पैसा नही है. मेहनत तो की थी पर आज नतीजा आने वाला है क्या होगा यही सोच सोच कर  उसका  दिल जोर जोर धडक रहा था. सुबह के आठ बजे थे.</p>
<p>अचानक सडक पर कबाड बेचने वाले की आवाज आई. रद्दी ,अखबार बेच लो. कबाड वाला &#8230;!!!</p>
<p>एक दम से सन्नाटा सा छा गया और तभी अखिल के घर से ठहाके की आवाज गूंज उठी. वो ना सिर्फ  पास हो गया था बल्कि टाप 100 मे उसका रैंक आया था. जैसे ही उसने अपने पापा मे पावं छुए. नम आखो से उन्होने उसे गले से लगा लिया.</p>
<p>मोनिका गुप्ता</p>
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		<title>व्यंग्य … स्वागत है मेहमान !!!</title>
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		<pubDate>Fri, 18 May 2012 06:36:27 +0000</pubDate>
		<dc:creator>monicagupta</dc:creator>
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		<description><![CDATA[गर्मी आई नही कि हमारे परम मित्रो का आगमन और चहल पहल शुरु हो जाती है.कही मेढक फुदकता मिल जाएगा तो कही कोकरोच अपना ही घर समझ कर इठलाता अकड के चलता मिल जाएगा.छिपकली और चूहो का तो पूछो ही मत.सब अपना ही घर समझ कर डेरा जमाए बैठ जाते हैं वो इसलिए की वाकई [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>गर्मी आई नही कि हमारे परम मित्रो का आगमन और चहल पहल शुरु हो जाती है.कही मेढक फुदकता मिल जाएगा तो कही कोकरोच अपना ही घर समझ कर इठलाता अकड के चलता मिल जाएगा.छिपकली और चूहो का तो पूछो ही मत.सब अपना ही घर समझ कर डेरा जमाए बैठ जाते हैं वो इसलिए की वाकई मे ये हमारे ना सिर्फ दोस्त है बल्कि हमारी सेहत का भी बहुत ख्याल रखते हैं. हमे चुस्त दुरुस्त बनाए रखते हैं.</p>
<p>कल्पना करे कि अचानक पलंग के नीचे से चूहा भागता हुआ आया और  मेज के नीचे जाकर छुप गया. अब उसे देख कर ना सिर्फ हम भी भागते है बल्कि कूदी मार कर कुर्सी पर भी चढ  जाते है तो देखा बनाया ना उसने हमे चुस्त दुरुस्त. अब कोकरोच की बात करे. वो हमे देख कर भागे या ना भागे पर हम उसे देख कर चिल्लाते बहुत तेज हैं और हमारी सांस तेज तेज चलने लगती है यानि हमारी आवाज तार सप्तक तक चली जाती है और दबी दबी सी हमारी आवाज  अचानक खुल जाती है साथ ही साथ हमारे फेफडे भी मजबूत हो जाते हैं.तो हुआ ना वो भी हमारा  परम हितैषी!!</p>
<p>अब लाल काली प्याली प्याली चींटियो की बात करें तो मैडम जी अक्सर रसोई मे चीनी और मिठाई पर कब्जा किए मिल जाती हैं तो वो भी फायदेमंद हैं. अब देखिए ना ऐसे मे क्या होता है कि अक्सर चीनी हम फेक देते हैं यानि शूगर हम नही खाएगे तो भी शरीर सही रहेगा और अगर हम उसे ना फेंके और बजाय फेंकने के साफ  करने लगे तो भी हमारी आखो का अच्छा व्यायाम हो जाता है हम जान जाते है कि हमारी आखे कितना बारीक देख सकती हैं और  साथ मे अगुलियो की भी कसरत हो जाती है.तो रखती है ना ये हमारा खयाल.</p>
<p>अब बात आती है सर्वप्रिय मक्खी रानी की.जब भी उडाओ तभी आ जाती है. जब भी उडाओ तभी आ जाती है. वो इसलिए आती है कि हमारे हाथो की कसरत हो सके नही तो उसे कोई शौक नही होता हमे तंग करने का. कोई दुश्मनी थोडे ही ना है उसे हमसे. वो तो बस हमारी ही सेहत का ख्याल रख कर ऐसा करती है.वो ज्यादा ना आए इस चक्कर मे हम सफाई भी रखते है तो देखा कितना ख्याल है उसे हमारा और हम भी ना !!!</p>
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<p>वही गुनगुन करते मच्छर भी हमारे अच्छे दोस्त साबित होते हैं. अब अंधेरा होते ही बल्ब आदि के आसपास मच्छरो का जमावडा लग जाता है तो क्या हुआ. अच्छा ही है ना अजी इनके डर से मेहमान ही नही आते. रात को मेहमान भी घर आने से पहले दस बार सोचते है  कि इनके घर तो बहुत मच्छर हैं क्या करेगे जाकर. तो वो तो फायदेमंद है ही बाकि अक्सर  मच्छर जाने अंजाने हमे ताली बजाने पर मजबूर कर देते हैं भले ही ताली बजाने से वो मरे या ना मरे पर ताली बजाने के फायदे तो हम सभी जानते है कि रक्त संचार बढता है.तो देखा !! हुए ना वो अच्छे दोस्त !!</p>
<p>अब बात आती है मधुमक्खियो और ततैयो की जोकि घर मे लगे फूलो पर आकर्षित होकर आ ही जाते हैं और कई बार काट भी जाते हैं तो भी कोई बात नही. ऐसे मे पडोसी हमारी चिल्लाने की  आवाज सुन कर आ जाते है और जरा वो सूजन कम करने के लिए अचार भी लगा देतें हैं बस उसकी महक इतनी अच्छी होती है कि हम उस अचार की तारीफ करते हैं और पडोसन भी खुश होकर एक कटोरी अचार उपहार स्वरुप दे जाती है कि कुछ दिन पहले ही डाला था.और बस ऐसे ही दोस्ती पक्की होती जाती है और उनसे लगातार मिलकर अपने परिवार और रिश्तेदारो की भडास और गुस्सा उससे शेयर करने लगते है और आपका ब्लड प्रेशर भी सही रहता है.</p>
<p>अरे वाह !! आप तो मेरी बात सुन कर ताली क्यो बजा रहे हैं. धन्यवाद!! धन्यवाद !! आपको मेरा लेख अच्छा लगा! क्या? आप मच्छर मार रहे है !!! जी मै समझ गई. मै चलती हू. पर  आप माने या ना माने पर ये कीट पंतग़े है हमारे मित्र ही!!! <img src='http://www.monicagupta.info/blog/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /> </p>
<p>मोनिका गुप्ता</p>
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		<title>कार्टून ….यू ही  साठ साठ चलते …!!!</title>
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		<pubDate>Thu, 17 May 2012 07:38:33 +0000</pubDate>
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			<content:encoded><![CDATA[<p>ये कहां आ गए हम यू ही 60- 60 चलते ..!!!</p>
<div id="attachment_1537" class="wp-caption aligncenter" style="width: 283px"><a href="http://www.monicagupta.info/blog/1536/%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%82%e0%a4%a8-%e0%a4%af%e0%a5%82-%e0%a4%b9%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%a0-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%a0-%e0%a4%9a%e0%a4%b2%e0%a4%a4%e0%a5%87/60-years-by-monica-gupta/" rel="attachment wp-att-1537"><img class="size-medium wp-image-1537" title="60 years by monica gupta" src="http://www.monicagupta.info/blog/wp-content/uploads/2012/05/60-years-by-monica-gupta-273x300.jpg" alt="" width="273" height="300" /></a><p class="wp-caption-text">60 साल ... मोनिका गुप्ता</p></div>

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		<title>भविष्यवाणी</title>
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		<pubDate>Wed, 16 May 2012 13:40:08 +0000</pubDate>
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		<description><![CDATA[Hmmm !! सुना था 2012 मे प्रलय आएगी लगता है कि भविष्यवाणी सच हो रही है क्योकि आज समाज मे जो कुछ हो रहा है यकीनन वो किसी प्रलय से कम नही! अब देखिए ना भ्रष्टाचार ,महंगाई जैसे गम्भीर मुद्दो पर कैंची चलनी चाहिए और कैंची चल रही है कार्टूनो पर.क्लर्क और बाबू लोग करोडो [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>Hmmm !! सुना था 2012 मे प्रलय आएगी लगता है कि भविष्यवाणी सच हो रही है क्योकि आज समाज मे जो कुछ हो रहा है यकीनन वो किसी प्रलय से कम नही! अब देखिए ना भ्रष्टाचार ,महंगाई जैसे गम्भीर मुद्दो पर कैंची चलनी चाहिए और कैंची चल रही है कार्टूनो पर.क्लर्क और बाबू लोग करोडो रुपए डकार के बैठे है और देश का सत्यानाश करने वाले आराम से कुछ पल जेल मे बिता कर शान से बाहर आ रहे हैं. सडको और गोदामो मे पडा गेहूं सड रहा है मैच फिक्स हो रहे हैं और जनता बुदु बनी देख रही है.एनजीओ जैसे आरामगाह मे बच्चियो का गलत इस्तेमाल हो रहा है.डालर के मुकाबले रुपए का स्तर गिर रहा है और अर्थव्यव्स्था और मौसम की मार को झेल रहा है आम आदमी&#8230;!!! पैट्रोल, डीजल का लगातार दाम बढे जा रहे है और आम आदमी की जान की दर सस्ती होती जा रही है&#8230;यकीनन ये शुभ संकेत नही है ..!!! है ना!!! <img src='http://www.monicagupta.info/blog/wp-includes/images/smilies/icon_sad.gif' alt=':(' class='wp-smiley' /> </p>
<p>&nbsp;</p>
<p>मोनिका गुप्ता</p>
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		<title>लेख …. थैलीसीमिया और जागरुकता</title>
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		<pubDate>Wed, 16 May 2012 12:15:11 +0000</pubDate>
		<dc:creator>monicagupta</dc:creator>
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		<description><![CDATA[लेख &#8230;. थैलीसीमिया और जागरुकता बधाई हो!!! &#160; आपको बधाई हो!! अब आप यह सोच रहे होंगे कि बधाई किस बात की. तो मै बताना चाहूगी कि बधाई इस बात की कि वाकई मे आप बहुत अच्छे इंसान है. आप निश्चित तौर पर दूसरे के दुख को देख कर दुखी हो जाते है और दूसरे [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>लेख &#8230;. थैलीसीमिया और जागरुकता</p>
<p>बधाई हो!!!</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>आपको बधाई हो!! अब आप यह सोच रहे होंगे कि बधाई किस बात की. तो मै बताना चाहूगी कि बधाई इस बात की कि वाकई मे आप बहुत अच्छे इंसान है. आप निश्चित तौर पर दूसरे के दुख को देख कर दुखी हो जाते है और दूसरे के सुख को देख कर आपको असीम खुशी मिलती है. आप भी देश और समाज की भलाई के लिए कुछ करना चाह्ते हैं कुछ योगदान देना चाह्ते हैं. हां, वो अलग बात है कि आपको ज्यादा मौका नही मिलता इसलिए जहां भी आपको कोई मौका मिलता है वही आप भी भीड का हिस्सा बन जाते हैं और बढ चढ कर योगदान देते हैं.</p>
<p>पर कई बार आपको महसूस होता है कि काश आप भीड का हिस्सा ना होकर खुद ही अपने दम पर ऐसी लहर चलाते कि बदलाव आ जाए. इस बात के लिए पुन: बधाई क्योकि बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जो ऐसी सोच रखते हैं.ऐसा जज्बा आपके भीतर है उस जज्बे को सलाम.</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>वैसे आप ही जैसे बहुत कम लोग हैं जो चुपचाप निस्वार्थ भावना से समाज सेवा के काम मे जुटे हुए है. ना उन्हे मतलब है कि वो ब्रेकिंग न्यूज बने और ना ही सुर्खियो मे आए. शीनम अपने ही दम पर कन्या भ्रूण हत्या के प्रति लोगो को जागरुक करने मे जुटी है वही एक स्कूली बच्चा मोहित जहां सडक टूटी देखता है वही बोर्ड लगा देता है ताकि वाहन चालको को दिक्कत ना हो. वही एक बुजुर्ग भागीरथ जी है वो अपने ही बल पर गंगा को साफ करने मे जुटे हैं पता है कैसे असल मे, वो जो नदी का पानी गंगा मे जा कर मिलता है वहा पानी के बीच मे पत्थर गिरा देते है उससे मोटा कूडा जैसा कि पोलेथिन, कचरा आदि उसमे अड जाता है और फिर वो उस कूडे को बाहर फेक कर दूसरी जगह पत्थर लगाते है और अपने बल पर प्रयास यही है कि कूडा, कचरा गंगा मैया मे  ना जाए. वही गीतम गरीब बच्चो की पढाई का खर्च उठा रहें है और सर्दी मे उन्हे कंबल आदि भी दान मे देता रहते  है तो रवि हर तीन महीने मे रक्तदान देते है ताकि किसी ना किसी की जिंदगी बचा सकें अभी तक वो 66 बार रक्तदान कर चुके है.</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>वहीं दूसरी ओर एक शक्स है जिन्हे जब से  पता चला कि साईप्रेस देश मे थैलीसीमिया की मात्र जागरुकता से वहां इसकी संभावना शून्य स्तर तक आ गई है बस तभी से सोच लिया कि अपने देश मे वो भी थैलीसीमिया के प्रति लोगो मे जागरुकता लाएगे और यहा भी इसे शून्य के स्तर तक ले आएगे भले ही प्रयास छोटे स्तर पर है पर प्रयास तो है. बात की तह तक गए तो जाना कि थैलीसीमिया एक घातक बीमारी है  जिसमें शरीर में हीमोग्लोबिन नहीं बनता और रक्त की अत्यधिक कमी हो जाती है. ऐसे में इस रोग से पीडि़त व्यक्ति की जान भी चली जाती है.  साथ ही साथ यह भी जाना कि अगर इस अनुवांशिक रोग की जागरुगता दिखाने से यह रोग जड से खत्म किया जा सकता है तो वो क्यो ना उसका कैरियर यानि संवाहक ही बना जाए ताकि लोगो की अज्ञानता दूर करे सके. वैसे शुरु मे  इसकी ज्यादा जानकारी नही थी पर रक्तदान के दौरान इस बीमारी का नाम जरुर सुना था. धीरे धीरे जानते गए कि हमारे देश मे लगभग 3 करोड लोग थैलीसीमिया कैरियर हैं और लगभग अज्ञानता स्वरुप 10 हजार थैलीसीमिया ग्रसित बच्चे हर साल जन्म लेते हैं. इस रोग से पीड़ित मरीज के शरीर में खून की कमी हो जाती है. शरीर में हीमोग्लोबीन जरूरत का आधा भी नहीं बनता। इस कारण आयु के अनुसार शरीर का न बढ़ना, जिगर, तिल्ली व हृदय के आकार का बढ़ जाना और मरीज की मौत तक हो जाती है. इस रोग का इलाज काफी महंगा है. उत्तर भारत में यह रोग अधिक जड़ जमा रहा है. मरीज को प्रत्येक दो से चार सप्ताह में रक्त चढ़ाना होता है. वहीं 20 से 50 हजार रुपये तक की दवाइयां खानी होती है और तो और  बोनमैरो ट्रांसप्लांट करने पर आमतौर पर  इस रोग से छुटकारा मिल जाता है, लेकिन यह ना सिर्फ बहुत जोखिम भरा है बल्कि इसका खर्च लाखों में आता है और इतना खर्चा करना  हर व्यक्ति के बस मे भी नही है.इसलिए आम आदमी हर महीने दुखी और परेशान होकर रक्त ही चढवाता रह जाता है कुला मिलाकर अगर जरा सी जागरुकता बरती जाए तो सभी दिक्कतो और मुसीबतो का सामना करने से बच सकते है.</p>
<p><strong>असल मे, जागरुकता बस इसी बात की है कि शादी से पहले जैसे कुंडली मिलाई जाती है वैसे ही दोनो का रक्त का भी मिलान होना चाहिए</strong>.</p>
<p>थैलीसीमिया  अनुवांशिक रोग है. प्रत्येक व्यक्ति के शरीर में थैलासीमिक के दो जीन होते है। एक माइनर व दूसरा मेजर. शादी के वक्त जोड़े की इलेक्ट्रोफोरेसिस नामक मशीन से थैलीसीमिक जांच जरूर की जानी चाहिए. यदि लड़के-लड़की में थैलीसीमिक माइनर है तो उनके होने वाले बच्चों में थैलीसीमिक मेजर होने की पूरी आशंका होती है यानि कैरियर की टेस्टिंग के दौरान अगर दोनो मे से एक स्वस्थ है और दूसरा कैरियर  तो दोनो की शादी मे कोई अडचन नही पर भगवान ना करे कि अगर महिला और पुरुष दोनो मे ही इसके कैरियर पाए जाते हैं तो उनके खुशहाल भविष्य के लिए यही सही रहेगा कि वो शादी बिल्कुल ना करें. ऐसे मे उनकी संतान के थैलीसीमिया ग्रस्त होने की पूरी सम्भावनाए रहती है.पल पल उस मासूम को मरते देखने से अच्छा यही है कि शादी से पहले ही रक्त का मिलान कर लिया जाए ताकि इस  मुसीबत की सम्भावना ही ना रहे और अगर अंजाने मे शादी हो गई है और महिला गर्भवती है तो 10 से 12 सप्ताह के बीच शिशु की जांच करके पता लगाया जा सकता है यदि बच्चा इस बीमारी से ग्रस्त है तो गर्भपात करवा कर परिवार को जीवन भर दुख झेलने से बचाया जा सकता है.कुछ केद्रो मे  यह गर्भपात सरकार की ओर से भी मान्य हैं. पर मुख्य बात आती है कि ऐसी नौबत ही क्यो आए.</p>
<p>श्रीमति रेणुका  जोकि स्वयं और उनके पति इसके  कैरियर हैं और उनके बेटे की इसी बीमारी के चलते मौत हुई थी उन्होने बताया कि इस बीमारी के कारण उनके बेटे ने इतने दुख झेले है कि जिसका वर्णन भी नही किया जा सकता. नन्ही सी जान को बार बार सुई लगती खून चढाया जाता बस वो देखा नही जाता था. उनकी सभी से यही प्रार्थना है कि शादी से पहले अपने रक्त को जरुर मिलवा लें ताकि इसकी नौबत ही नही आए.</p>
<p>आठ साल का वैभव वैसे तो रोज स्कूल जाता है पर जब उसका चेहरा पीला पडना शुरु हो जाता है वो बात बात पर तंग होने लगता है तो बस उसके माता पिता समझ जाते है कि अब खून चढवाने का समय आ गया और वो पल भी कठिन परीक्षा का होता है कहते कहते उनका मन भारी हो गया और वो चुप हो गए.</p>
<p>ऐसे ना जाने कितने उदाहरण है जिसकी चपेट मे परिवार दिन रात दुख परेशानी का सामना कर रहा है पर अगर जरा सी जागरुकता हो तो ये नौबत ही नही आ सकती.</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>तो एक बार फिर आपको बधाई!!! अब बधाई इसलिए कि आप ही है वो शक्स !!! अब आपको इसकी जानकारी मिल गई है और अब आप अपने नजदीक के रिश्तेदारो, दोस्तो और पडोसियो को इसकी जानकारी देकर उन्हे जागरुक बना सकते हैं ताकि उन्हे किसी परेशानी का सामना ना करना पडे. अब आप  ना सिर्फ एक अच्छे और नेक इंसान होने का फर्ज बखूबी निभा सकते हैं बल्कि समाज मे अपनी अलग पहचान भी बना सकते हैं&#8230; है ना!!!:)</p>
<p><strong>काम करो ऐसा कि पहचान बन जाए </strong></p>
<p><strong>हर कदम चलो ऐसा कि निशान बन जाए </strong></p>
<p><strong>यहां जिंदगी तो सभी काट लेते हैं </strong></p>
<p><strong>जिंदगी जीओ ऐसे कि मिसाल बन जाए</strong></p>
<p>&nbsp;</p>
<p>मोनिका गुप्ता</p>
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		<title>थैलेसीमिया</title>
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		<pubDate>Tue, 15 May 2012 12:02:21 +0000</pubDate>
		<dc:creator>monicagupta</dc:creator>
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			<content:encoded><![CDATA[<p>एक विज्ञापन आता है कि एक छोटी सी प्यारी सी लडकी सभी को थैक्यू बोल रही है. जब एक युवा उससे इस का कारण पूछ्ता है तो वो बताती है कि उसे थैलीसीमिया है&#8230; यह देख सुन कर हम चू चू करते है और दुख प्रकट करते है कि उफ ये बेचारी लडकी !!! पर ना हम बात की गहराई तक जाने की कोशिश करते और ना ही यह जानने की कोशिश करते कि आखिर थैलीसीमिया है क्या!!! कुछ दिनो पहले नासिक मे सेमिनार के अंतर्गत एक लडकी जिसकी बहन इसी की चपेट मे थी और उसका दुखद अंत हो गया स्पीच मे बोल रही थी कि हम इस बीमारी को face कर रहे है इससे fight कर रहे है पर इसे FINISH करने की बिल्कुल नही सोच रहे जबकि यह अनुवांशिक बीमारी है जोकि मात्र जागरुकता फैलाने से, जानकारी देने से जड से खत्म हो सकती है पर इस मामले मे भी बजाय खुद पहल करने के हम आमिर खान जैसे लोगो की इंतजार मे है कि वो आएगे और आवाज उठाएगे तब हम भी उनके साथ चल पडेगे!! अरे !! जागो और जगाओ !! हम सभी मे एक हीरो छुपा है !!! है ना !!!</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>मोनिका गुप्ता</p>
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		<title>बाई पुराण …!!! व्यंग्य</title>
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		<pubDate>Mon, 14 May 2012 07:54:32 +0000</pubDate>
		<dc:creator>monicagupta</dc:creator>
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		<description><![CDATA[शौक,शोक,शेक शक &#8230;..!!!! (व्यंग्य) जब से मणि ने हाई सोसाईटी मे फ्लैट लिया तब से उसने मन बना लिया था कि अब वो काम वाली बाई को जरुर  रखेगी. थक  चुकी थी वो सारा घर का काम करते करते. वैसे भी पहले जिस जगह रहते थे वहां बाई ही नही मिलती थी.वहाँ  सभी  महिलाए अपना [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>शौक,शोक,शेक शक &#8230;..!!!! (व्यंग्य)</p>
<p>जब से मणि ने हाई सोसाईटी मे फ्लैट लिया तब से उसने मन बना लिया था कि अब वो काम वाली बाई को जरुर  रखेगी. थक  चुकी थी वो सारा घर का काम करते करते. वैसे भी पहले जिस जगह रहते थे वहां बाई ही नही मिलती थी.वहाँ  सभी  महिलाए अपना काम खुद ही करती थी. वो भी उनमे से एक ही थी. बिना खिच खिच और झिक झिक के सारा काम निबटा कर  दस बजे तक तो वो फ्री ही हो जाती पर अब हाई सोसाईटी मे मकान लिया तो कुछ दिखावा भी तो करना होता है कि नही. बस अब एक शौक, एक जनून बन गया था कि जल्द से जल्द कैसे भी करके बाई को रखना है अच्छी बात तो ये हुई कि उस सोसाईटी मे एक दो काम वाली बाई आती थी इसलिए दिक्कत वाली बात लगी नही.</p>
<p>शिफ्ट करने के बाद दिन रात इधर उधर के चक्कर लगाने शुरु कर दिए और लोगो से मेल जोल करके जोर शोर से तलाश मे जुट गई. वैसे उस सोसाईटी मे ज्यादातर घरो मे फुल टाईम नौकर ही रखे हुए थे.</p>
<p>इस वजह से उसे ज्यादा भाग दौड करनी पडी. ज्यादा समय बाहर रहने के कारण उसका घर भी फैला फैला रहने लगा पर उसे बस धुन सी सवार थी कि जल्दी जल्दी से बाई मिले और वो भी चैन और सकून की जिंदगी बिता सके.</p>
<p>उसकी मेहनत रंग लाई. सपना हकीकत बना और एक दिन उसने भी काम वाली बाई रख ली. बहुत खुश थी मणि उस दिन. बाई सारा घर बार देख गई और अगले दिन से आने का बोल गई. मणि को सब मंजूर था. बस उसे सिर्फ और सिर्फ काम वाली बाई चाहिए थी ताकि वो भी सोसाईटी मे गर्दन ऊंची करके चल सके और घर पर आराम से टीवी देखते हुए सोफे पर आराम से पैर ऊपर कर के बैठ सके और वही से बैठे बैठे उसके काम मे नुक्स निकाल सके या उसे आवाज देकर यह कह सके कि एक गिलास पानी देना जरा. बोतल फ्रिज से ले आना. कभी वो चाय बना कर देगी तो कभी घर के छोटे मोटे कामो मे उसकी मदद करवा देगी.मणि मीठे मीठे सपनो मे खो गई.</p>
<p>अगले दिन बहुत खुशनुमा सुबह थी. सुबह से इंतजार शुरु हो गई. हर आहट पर लगा कि वो आई है पर शाम होने को आ गई पर वो नही आई. मन मार के उसे सारा काम खुद करना पडा. गुस्सा तो बहुत आ रहा था पर वो सारा गुस्सा बच्चो पर ही निकला. खैर मन को समझाया कि कोई परेशानी हो गई होगी नही तो वो तो ऐसी नही थी. मणि को जितना शौक था अब वो शोक मे बदलता जा रहा था. अगले दिन फिर बाहर के चक्कर लगाने शुरु किए और शाम हो गई.वो महारानी जी नही दिखाई दीं. फिर शाम को उसने आधे मन से काम करना  शुरु किया. अगले दिन उसने सुबह सुबह ही सारा काम निबटा लिया और नहा धो कर जैसे ही बैठी कि धंटी बजी. दरवाजा खोला तो सामने वो खडी थी. बिना इस बात के कि वो दो दिन नही आ पाई. घुसते ही बोली जरा चाय तो पिलाना. आज आपके काम के चक्कर मे चाय ही नही पी के आई घर से. मणि को गुस्सा तो बहुत आया पर वो पी गई अपना गुस्सा और चाय बना लाई. दो बार फिर चक्कर लगवाए बाई ने. पहले तो उसे चाय मे चीनी ज्यादा चाहिए थी और दूसरी बार  चाय मे मलाई आ गई थी.</p>
<p>वो ठाठ से साफ किए घर मे वो सफाई कर रही थी. मणि  गुस्से मे शेक कर रही थी पर कह कुछ नही पा रही थी. उधर वो तो काम कम कर रही थी और ज्यादा आर्डर कर रही थी कि अब पंखा चला दो या डिश नही है क्या वो तो फलां प्रोग्राम डेली देखती है. वगैरहा वगैरहा! बाप रे बाप, बहुत नखरे थे उसमे. मणि तो  गुस्से मे शेक ही करती रह गई. तभी  किसी का मोबाईल आया और वो अभी आने का बोल कर निकल ली. जाते जाते जब मणि ने  जब उससे उसका मोबाईल नम्बर पूछा तो वो आखॆ तरेर कर कहने लगी कि अभी तो आ ही रही हूँ क्या करोगी नम्बर लेकर.</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>अगले दो दिन तक फिर  वो नही आई और मणि के  दिमाग मे शक बैठ गया कि क्या पता वो आना ही ना चाह रही हो या क्या पता शायद वो अभी आ जाए. क्या पता वो कभी ना आए इसी बीच उसने एक दूसरी बाई से बात की तो वो कहने लगी कि आपके तो लगी हुई है. वो काम छोडेगी तभी वो काम पर लगेगी. बेवजह वो अपनी बिरादरी मे झगडा नही करना चाह्ती. मणि सिर पकड कर बैठ गई और मन ही मन सोचने लगी कि अच्छा शौक पाला कि अब वो शोक बन गया और सारा शरीर उस चक्कर मे शेक कर रहा है और तरह तरह के शक उमड घुमड कर आए चले जा रहे है.</p>
<p>हे भगवान! वो कौन सी घडी थी जब उसने बाई को रखा. क्यो अपने पैरो पर खुद कुल्हाडी मारी, क्यो ओखली मे सिर दिया .. क्यो .. क्यो &#8230; क्यो !!!</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>मोनिका गुप्ता</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>

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		<title>मन ही मन !!!</title>
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		<pubDate>Sat, 12 May 2012 13:08:15 +0000</pubDate>
		<dc:creator>monicagupta</dc:creator>
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			<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>मन ही मन .. लेख</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>आज बाजार मे एक युवा को देखा वो अपने आप से बात करता गर्दन झटकता बुदबुदाता जा रहा था. पहले मैने सोचा शायद मोबाईल पर बात कर रहा है पर वो खुद से ही बाते किए जा रहा था.वैसे हम भी अक्सर मन ही मन खुद से बात करते मिल ही जाते है. जैसे ज्यादा काम कर लिया तो खुद से कहेगे चल थोडी देर सो ही जाते हैं. भूख लगेगी तो फ्रिज खोलेगे और खुद से बात करना शुरु कर देगे कि हम्म्म्म्म!! क्या रखा है इसमे!!या कभी किसी से बात करते हुए गलती से कुछ ऐसी वैसी बात निकल जाएगी तो अपने सिर पर प्यार से चपत लगाएगे और बोलेगे धत! ये क्या क्या बोल दिया.मंदिर के सामने से निकलेगे तो मन ही मन बुदबुदाएगे. हे भगवान रक्षा करना!! आदि बहुत ऐसी बाते है जो हम खुद से करते रहते हैं वैसे इसमे कोई बुराई भी नही है.करते रहनी चाहिए खुद से बात.यह सोच ही रही थी कि तभी एक प्यारी सी लड्की दिखी वो भी शायद खुद से बात कर रही थी. मैने सोचा उसे समझाऊगी कि बीच सडक पर इतनी ऊची बोल कर खुद से बात करना ठीक नही पर तभी पता चला कि वो तो वाकई मे, मोबाईल पर बात कर रही थी <img src='http://www.monicagupta.info/blog/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' />  हे भगवान !! अब मै ही मन ही मन बुदबुदाने लगी!!! <img src='http://www.monicagupta.info/blog/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /> )</p>

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		<title>Thank  you  God</title>
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		<pubDate>Sat, 12 May 2012 12:52:22 +0000</pubDate>
		<dc:creator>monicagupta</dc:creator>
				<category><![CDATA[कविता]]></category>
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		<category><![CDATA[धन्यवाद भगवान]]></category>
		<category><![CDATA[ममता]]></category>
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		<category><![CDATA[मोनिका गुप्ता]]></category>
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		<category><![CDATA[Thank you God]]></category>

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		<description><![CDATA[मेरी एक अन्य कविता&#8230; Thank You God ..!!! धन्यवाद हे प्रभु इतना अपनापन दिया आपने हमने आपको आप नही &#8220;तू&#8221; का दिया सम्बोधन धन्यवाद हे प्रभु तुमने जो स्रष्टि रची फल,फूल, पौधो का दिया नायाब उपहार धन्यवाद हे प्रभु तेरे उस प्रतिबिम्ब के लिए जो तूने धरा को दिया &#8220;नारी&#8221; के रुप मे तूने अपनी [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>मेरी एक अन्य कविता&#8230;<br />
Thank You God ..!!!<br />
धन्यवाद<br />
हे प्रभु<br />
इतना अपनापन दिया आपने<br />
हमने आपको<br />
आप नही &#8220;तू&#8221; का दिया सम्बोधन<br />
धन्यवाद हे प्रभु<br />
तुमने जो स्रष्टि रची<br />
फल,फूल, पौधो का दिया<br />
नायाब उपहार<br />
धन्यवाद हे प्रभु<br />
तेरे उस प्रतिबिम्ब के लिए<br />
जो तूने धरा को दिया<br />
&#8220;नारी&#8221; के रुप मे तूने<br />
अपनी कमी को पूरा कर दिया<br />
धन्यवाद हे नारी !!!<br />
कभी मां कभी बहन<br />
कभी सच्ची दोस्त बन कर<br />
तो कभी विदा होती बेटी बन नम कर जाती नयन<br />
साहसी है पर भावुक क्षणो मे कमजोर भी है<br />
पर तू ताकत है इंसा की<br />
क्योकि<br />
प्रतिबिम्ब है तू उस अनंत अपार का<br />
इसलिए<br />
धन्यवाद,हे प्रभु तेरी इस अमूल्य सरंचना का<br />
अमूल्य उपहार का &#8230;!!!</p>
<p>मोनिका</p>
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		<title>माँ तो है माँ</title>
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		<pubDate>Fri, 11 May 2012 15:50:33 +0000</pubDate>
		<dc:creator>monicagupta</dc:creator>
				<category><![CDATA[लेख]]></category>
		<category><![CDATA[Social Issues]]></category>
		<category><![CDATA[मदर्स डे]]></category>
		<category><![CDATA[ममता]]></category>
		<category><![CDATA[मा]]></category>
		<category><![CDATA[मोनिका गुप्ता सिरसा]]></category>

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		<description><![CDATA[माँ तो है  माँ .. आज चारो तरफ मदर्स डे की धूम है. हर छोटा बडा या अलग अलग सोशल नेट वर्क साईट पर चारो तरफ  उत्साह देखते हुए मन मे आया कि क्यो ना हर वर्ग से मदर्स डे पर प्रतिक्रिया जानी जाए. &#160; गीता कथूरिया खुद एक मां और दादी है. उन्होने बताया कि माँ [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>माँ तो है  माँ ..</p>
<p>आज चारो तरफ मदर्स डे की धूम है. हर छोटा बडा या अलग अलग सोशल नेट वर्क साईट पर चारो तरफ  उत्साह देखते हुए मन मे आया कि क्यो ना हर वर्ग से मदर्स डे पर प्रतिक्रिया जानी जाए.</p>
<p>&nbsp;</p>
<p><strong>गीता कथूरिया</strong> खुद एक मां और दादी है. उन्होने बताया कि माँ ही बच्चे की पहली गुरु है. बच्चे का पहला स्कूल मां की गोद है.इसलिए माताओ को भी अपना बेस्ट देना चाहिए. बच्चे मे संस्कार ऐसे डालने चाहिए कि बडा होकर बच्चा एक अच्छा नागरिक बन सके और अपने परिवार की अहमियत समझ सकें. गीता जी ने बताया कि उनकी बेटी मानसिक रुप से मंद है उनका प्रयास है कि वो ऐसे विशेष बच्चो को सुरक्षित घर दे सके. जहाँ बच्चे जिंदगी भर आराम से रह सके.बस इसके लिए अविभावको को सामने आना होगा.वैसे उनकी एक एनजीओ “दिशा” संस्था है जिसमे लगभग 80 के करीब विकलांग और विशेष बच्चे रहते हैं और वहाँ वो सभी विशेष  बच्चो के लिए एक माँ की भूमिका बहुत अच्छे से निभा रही हैं.</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>60 वर्षीया <strong>कुसुम जैन</strong> ने बताया कि माँ के दर्जे का तो कोई मुकाबला ही नही किया जा सकता पर वाकई मे, माँ को सही सम्मान मिल रहा है जिसकी वो सच्ची हकदार है या नही. बच्चो को भले ही मदर्स डे पर ही सही पर इसकी अहमियत समझनी चाहिए तभी इस दिन को सार्थक माना जाएगा.</p>
<p>49 वर्षीया<strong> सुनीता</strong> ने बताया कि उनकी पहली प्राथमिकता उनका परिवार है. उनकी बिटिया दिल्ली मे कोचिंग ले रही है इसलिए वो बेटी के साथ दिल्ली ही रह रही है ताकि उसे कोई दिक्कत ना हो. जहाँ तक मदर्स डे की बात है बच्चे इसे फैशन समझ कर ना ले और जो करना है दिल से करे तो अच्छा लगेगा.</p>
<p>10वी क्लास के <strong>अक्षय </strong>ने बताया कि वो तो बचपन से ही होस्टल मे रह रहा है और छुट्टियो मे ही घर जाता है मम्मी पापा दोनो ही काम मे व्यस्त रहते हैं इसलिए उसे छुट्टियो मे भी  दोस्तो के साथ रहना ही ज्यादा अच्छा लगता है</p>
<p>35 वर्षीया <strong>नेहा</strong> ने बताया कि वो नौकरी करती है ऐसे मे घर को समय नही दे पाती पर कोई दूसरा रास्ता भी नही है.शाम को जब वो लौटती है तब तक बच्चे सो जाते हैं. बस रविवार ही मिलता है बच्चो के साथ. पर वो इस मदर्स डे पर बच्चो के लिए खास तोहफा लाई है और वो मुस्कुराने लगी.</p>
<p>32 वर्षीया <strong>दिव्या </strong>का संयुक्त परिवार है. जब उनसे मदर्स डे के बारे मे पूछा तो वो बिल्कुल अंजान थी बोली कि ये किसलिए होता है. माँ का दिन तो हर दिन होता है. उसके बिना तो घर का पत्ता तक नही हिलता कह कर वो फिर घर के काम मे लग गई.</p>
<p><strong>निक्की</strong>  6क्लास मे है उसने बताया कि उसकी मम्मी नौकरी करती हैं और आफिस दूर होने की वजह से वो जल्दी ही निकल जाती है और घर पर ताला लगाकर वो स्कूल जाती है और दोपहर को भी ताला ही मिलता है. मम्मी पापा देर शाम तक आते है और जब वो आते है तो वो ट्यूशन चली जाती है. बस उस दिन मम्मी को कार्ड दे दूगी और क्या बाकि समय ही नही है कुछ दूसरा करने का.</p>
<p>38 वर्षीया <strong>ऋतु जैन </strong>से पूछा तो वो मुस्कुरा उठी और बोली अच्छा है ये दिन. वैसे जो बच्चे शरारत या गलती करते हैं उनके लिए अपनी मम्मी को उपहार देने का अच्छा दिन है ताकि नाराजगी ना रहे. वैसे छोटे बच्चो को तो ज्यादा समझ नही होती बडे होने के बाद यानि जब बच्चा खुद मम्मी या पापा बनता है तब उसे इस रिश्ते की अहमियत का अहसास होता है.</p>
<p>प्लस टू मे पढने वाली <strong>पलक </strong>ने बताया कि उसकी मम्मी हाऊस वाईफ है पर किटी पार्टी और सोशल वर्क के साथ साथ मोबाईल और नेट पर ज्यादा रहती है इसलिए उन्हे ई कार्ड ही भेजूगी.</p>
<p>बहुत मिली जुली प्रतिक्रिया मिली. कही सुन कर अच्छा भी लगा तो कही मन उदास भी हुआ. पर कुल मिला कर यही बात सामने आई कि जहाँ माँ को देवी की उपाधि से नवाजा गया है वही किसी कदम पर वो जरा सी कमजोर भी पड रही है. घर परिवार उसकी पहली प्राथमिकता होनी चाहिए पर आज की दौड मे वो कही गुम होती जा रही है जिससे उसके परिवार पर भी नकारात्मक असर दिखाई देने लगा है.परिवार, प्यार ,रिश्ते. एकता कही गुम ना हो जाए इसलिए <strong>मदर्स डे</strong> पर उसको भी उसे वापिस सहेज कर रखने के लिए चिंतन और मनन की जरुरत है.</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>मदर्स डे की हार्दिक शुभकामनाए</p>
<div></div>
<div></div>
<div></div>
<div><span style="color: #333333; font-family: Mangal;">मोनिका गुप्ता <a href="http://www.facebook.com/linkmonicagupta">http://www.facebook.com/linkmonicagupta</a></span></div>
<div><span style="color: #333333; font-family: Mangal;"> सिरसा </span></div>

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