<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?>
<?xml-stylesheet type="text/xsl" media="screen" href="/~d/styles/atom10full.xsl"?><?xml-stylesheet type="text/css" media="screen" href="http://feeds.feedburner.com/~d/styles/itemcontent.css"?><feed xmlns="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:openSearch="http://a9.com/-/spec/opensearch/1.1/" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:gd="http://schemas.google.com/g/2005" xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0" xmlns:feedburner="http://rssnamespace.org/feedburner/ext/1.0" gd:etag="W/&quot;D0QBSX88fip7ImA9WhVTEU4.&quot;"><id>tag:blogger.com,1999:blog-8033919830443655972</id><updated>2012-02-25T07:32:38.176+05:30</updated><category term="सेना" /><category term="मतदाता" /><category term="बीडी कानून तोड़ना" /><category term="राजनीती अत्याचार" /><category term="कन्या भ्रूण हत्या" /><category term="गाँव" /><category term="क्रिकेट आतंक" /><category term="आन्दोलन" /><category term="वन्य जीव" /><category term="महिला दिवस" /><category term="टी वी" /><category term="कविता" /><category term="अख़बार" /><category term="नारी" /><category term="माँ" /><category term="विकास" /><category term="ग़ज़ल" /><category term="शिष्य" /><category term="कर" /><category term="वोटर नेता सुधार" /><category term="विरोध" /><category term="सावन" /><category term="राज्य" /><category term="हादसा" /><category term="रैली" /><category term="संविधान" /><category term="न्याय" /><category term="रेल" /><category term="अभिव्यक्ति" /><category term="सुविधा" /><category term="स्थिरता" /><category term="विज्ञापन" /><category term="अधिकार" /><category term="नेता" /><category term="बेशर्मी राजनीती दलबदल" /><category term="राजनीति" /><category term="अराजकता" /><category term="समझौता" /><category term="हिंदी" /><category term="चिकित्सा" /><category term="आयुर्वेद" /><category term="खेल" /><category term="निजता" /><category term="प्रेम" /><category term="षड्यंत्र" /><category term="योजना" /><category term="दर्शन" /><category term="घरेलू हिंसा" /><category term="शिक्षा" /><category term="फ़तवा" /><category term="दुर्घटना" /><category term="शुचिता" /><category term="सीमा" /><category term="कृषि" /><category term="अन्तरिक्ष" /><category term="उम्मीद" /><category term="व्यंग" /><category term="मुस्लिम" /><category term="जनजीवन" /><category term="नियम" /><category term="चुनाव" /><category term="विकलांग" /><category term="गाँधी" /><category term="ताज़ा मुद्दा" /><category term="आतंक" /><category term="विज्ञान" /><category term="आयोग" /><category term="रक्षा" /><category term="इस्लाम" /><category term="महिला आरक्षण" /><category term="ताज़ा मुद्दा" /><category term="मदरसा" /><category term="सरकार" /><category term="गुरु" /><category term="संसाधन" /><category term="पुनर्गठन" /><category term="भ्रष्टाचार" /><category term="अपराध" /><category term="पर्यटन" /><category term="कर्तव्य" /><category term="परंपरा" /><category term="शादी" /><category term="भविष्य" /><category term="नस्ल भेद" /><category term="धर्म" /><category term="प्रक्षेपण" /><category term="संकट" /><category term="पुनर्वास" /><category term="खोज" /><category term="फ़ोन" /><category term="पैसा" /><category term="पुलिस" /><category term="किसान" /><category term="बेटियां" /><category term="आन्दोलनअराजकतासरकारपुलिसअधिकारराजनीति" /><category term="जीव" /><category term="रंग दारी" /><category term="नोट घूस वोट" /><category term="पुलिस अत्याचार नेता" /><category term="पर्यावरण" /><category term="सड़क" /><category term="बाहुबली सुधार" /><category term="दलित" /><category term="युद्ध" /><category term="विधेयक" /><category term="खाप" /><category term="सहायता" /><category term="पानी" /><category term="बिजली" /><category term="मौसम" /><category term="संशोधन" /><category term="विचारधारा" /><category term="संत" /><category term="सूर्य ग्रहण" /><category term="चिकित्सक" /><category term="दुरूपयोग" /><category term="प्रदूषण" /><category term="कानून" /><category term="उपयोग" /><category term="पंचायत" /><category term="व्यंग फागुन" /><category term="उद्योग" /><category term="आन्दोलनअराजकतासरकारपुलिसअधिकारराजनीति" /><category term="सुधार" /><category term="कोहरा" /><category term="सुरक्षा" /><category term="मंहगाई" /><category term="विलुप्त" /><category term="बर्फ़" /><category term="विज्ञानं" /><category term="लोकपाल" /><category term="राजनीती तेल भ्रष्टाचार" /><category term="ग़ज़ल" /><category term="परमाणु" /><category term="समाज" /><category term="मत" /><category term="चिड़िया" /><category term="मेट्रो" /><category term="विरोध घटिया नेता" /><category term="ऊर्जा" /><title>सीधी खरी बात..</title><subtitle type="html">कुछ ऐसा कहने का प्रयास जो कम ही कहा जाता है ..</subtitle><link rel="http://schemas.google.com/g/2005#feed" type="application/atom+xml" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/feeds/posts/default" /><link rel="alternate" type="text/html" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/" /><link rel="next" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default?start-index=26&amp;max-results=25&amp;redirect=false&amp;v=2" /><author><name>Dr Ashutosh Shukla</name><uri>https://profiles.google.com/100257269155750831732</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel="http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail" width="32" height="32" src="//lh4.googleusercontent.com/-m8s_63KhFOs/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAIjw/Or7VxwQJcqY/s512-c/photo.jpg" /></author><generator version="7.00" uri="http://www.blogger.com">Blogger</generator><openSearch:totalResults>1056</openSearch:totalResults><openSearch:startIndex>1</openSearch:startIndex><openSearch:itemsPerPage>25</openSearch:itemsPerPage><atom10:link xmlns:atom10="http://www.w3.org/2005/Atom" rel="self" type="application/atom+xml" href="http://feeds.feedburner.com/SeedhiKhariBaat" /><feedburner:info uri="seedhikharibaat" /><atom10:link xmlns:atom10="http://www.w3.org/2005/Atom" rel="hub" href="http://pubsubhubbub.appspot.com/" /><entry gd:etag="W/&quot;D0QBSX8yfip7ImA9WhVTEU4.&quot;"><id>tag:blogger.com,1999:blog-8033919830443655972.post-2169053711425701358</id><published>2012-02-25T07:32:00.000+05:30</published><updated>2012-02-25T07:32:38.196+05:30</updated><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2012-02-25T07:32:38.196+05:30</app:edited><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="ऊर्जा" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="परमाणु" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="अधिकार" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="सरकार" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="उपयोग" /><title>कुडनकुलम संयंत्र और राजनीति</title><content type="html">&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;
&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने तमिलनाडु के कुडनकुलम &lt;span id="47_TRN_9"&gt;में रूस के सहयोग से लगने वाले परमाणु &lt;/span&gt;संयंत्र के विरोध के पीछे&lt;span id="47_TRN_lb"&gt;&lt;/span&gt; अमेरिकी मदद से चलने वाले कुछ एनजीओ के हाथ होने के बारे में कहकर अच्छा ही किया है क्योंकि अभी तक सभी जानते &lt;span id="47_TRN_1b"&gt;हैं कि इस संयंत्र का राजनैतिक और आर्थिक कारणों से विरोध किया जा रहा है. मनमोहन सिंह के इस तरह से कहने के बाद से स्वाभाविक तौर पर भाजपा ने इसके बारे में सरकार से और अधिक जांच कर सत्य को सामने लाने की मांग की है और यह भी &lt;span id="47_TRN_2u"&gt;कहा &lt;/span&gt;है कि इस मामले की पूरी तह तक जाना भी आवश्यक है. ज़ाहिर है जब ख़ुद मनमोहन सिंह इस तरह की बात कह रहे हैं तो उन्हें इस बात के सबूत भी मिले होंगें क्योंकि अमेरिका इस तरह की हरकतें करने में हमेशा से ही आगे रहा है. वह कहने के लिए तो सामजिक उत्थान के लिए काम करने वाले विभिन्न एनजीओ को पैसा देता है और फिर विकासशील देशों में अपने हितों को साधने के लिए इनके माध्यम से ही अपनी बात मनवाने की कोशिश करता है. रूस भारत का पुराना और विश्वसनीय साझेदार हमेशा से ही रहा है और उसकी अनदेखी आज तक न की गयी है और न ही आने वाले समय में की जा सकेगी पर शीत युद्ध की समाप्ति के बाद आज भी अमेरिका को रूस का भय बना रहता है जिसे वह अपने &lt;span id="47_TRN_lj"&gt;व्यापारिक &lt;/span&gt;हितों के चलते पीछे धकेलना चाहता है.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;span id="47_TRN_1b"&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &lt;/span&gt;पीएम के इस तरह के बयान के बाद अमेरिका को दिक्कत होने वाली है क्योंकि अभी तक ये बातें केवल छोटे स्तर पर ही कही जा रही थीं और देश के पीएम के बयान के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि जो आरोप अमेरिकी सहायता से चलने वाले एनजीओ पर लग रहे हैं वे &lt;span id="47_TRN_8b"&gt;सही हैं. पता नहीं क्यों अमेरिका भारत को भी अपने पिट्ठू के तौर &lt;span id="47_TRN_8q"&gt;पर देखना चाहता है जबकि स्वतंत्र गति से आगे बढ़ता भारत अमेरिका के लिए &lt;span id="47_TRN_96"&gt;हमेशा ही अधिक &lt;span id="47_TRN_9c"&gt;लाभ &lt;/span&gt;देने वाला &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span id="47_TRN_9h"&gt;&lt;/span&gt; हो सकता है. दुनिया के हर देश की ज़रूरतें अलग अलग हैं पर अमेरिका को यह लगता है कि देश अपनी ज़रूरतों पर &lt;span id="47_TRN_lq"&gt;अमेरिका&lt;/span&gt; के हितों को प्राथमिकता दें तो कोई भी संप्रभु देश उसके लिए अपने पैर पर कुल्हाड़ी क्यों मारना &lt;span id="47_TRN_aq"&gt;चाहेगा ? अमेरिका का पाला अभी तक पाक और &lt;span id="47_TRN_b2"&gt;सऊदी &lt;/span&gt;अरब जैसे देशों से ही अधिक पड़ा है जो अपने हितों &lt;span id="47_TRN_be"&gt;के लिए अमेरिका के साथ &lt;span id="47_TRN_bl"&gt;खड़े रहते हैं पर वह भारत को भी इसी पैमाने पर तौलने की असफल कोशिश हर बार करता रहता है जिसका कोई मतलब नहीं है. भारत के जल्दी में लिए गए कुछ निर्णय अमेरिका के लिए स्थिति को असहज करने वाले साबित हो रहे हैं. ईरान के मसले पर भारत ने अमेरिका के निर्णय के विरुद्ध जाकर अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए &lt;span id="47_TRN_df"&gt;तेल के आयात को जारी रखने का निर्णय लिया है जिससे भी अमेरिका को अपनी बात का खंडन होता लगा.&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;span id="47_TRN_8b"&gt;&lt;span id="47_TRN_aq"&gt;&lt;span id="47_TRN_be"&gt;&lt;span id="47_TRN_bl"&gt;&lt;span id="47_TRN_df"&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; अमेरिका को यह समझना होगा कि भारत में पूरी तरह से जीवंत और सक्रिय लोकतंत्र है यहाँ पर न तो राजशाही चल रही है और न ही सेना निर्णय लेती है जिससे यहाँ की किसी भी सरकार के लिए अमेरिका की नीतियों के हिसाब &lt;span id="47_TRN_fc"&gt;से&lt;/span&gt; चलने में हमेशा ही दिक्कत आती रहेगी ? देश का राजनैतिक तंत्र कितना भी &lt;span id="47_TRN_g8"&gt;नाकारा&lt;/span&gt;&lt;span id="47_TRN_ga"&gt;&lt;/span&gt; हो पर देश के लिए इस तरह की बातें सोचने में उसे हमेशा से ही महारत हासिल है. अमेरिका को भारत के ऊर्जा हितों की नहीं वरन अपने आर्थिक और सामरिक हितों की अधिक चिंता है जिस &lt;span id="47_TRN_gv"&gt;कारण &lt;/span&gt;&lt;span id="47_TRN_gy"&gt;&lt;/span&gt; से वह सभी को अपनी तरह से हांकना चाहता है ? भारत की ऊर्जा ज़रूरतों के बारे में दीर्घकालिक निर्णय करने के लिए &lt;span id="47_TRN_hm"&gt;भारत सरकार स्वतंत्र है और किसी भी संगठन&lt;span id="47_TRN_i4"&gt;&lt;/span&gt; या देश से भारत के हितों के &lt;span id="47_TRN_i1"&gt;ख़िलाफ़ लिए जाने वाले किसी भी निर्णय के &lt;span id="47_TRN_ih"&gt;विरुद्द नियम सम्मत कार्यवाही करने के लिए वह स्वतंत्र है. अमेरिका को अब यह समझना ही होगा कि चौधराहट ज़माने का ज़माना अब लड़ चुका है और अगर उसे आज भी लगता है कि वह दुनिया का दरोगा है तो &lt;span id="47_TRN_ju"&gt;उसे अब अपने इस सपने से बाहर निकल आना चाहिए क्योंकि जब भारत की जो भी आवश्यकताएं आयेंगीं उनके बारे में भारत सरकार निर्णय लेने और उचित &lt;span id="47_TRN_kn"&gt;कदम उठाने में हमेशा आगे रहेगी भले ही भारत के हित में उठाये वे कदम अमेरिका के ही ख़िलाफ़ क्यों न जाते हों ?&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span id="47_TRN_jt"&gt;&lt;/span&gt;&lt;span id="47_TRN_js"&gt;&lt;/span&gt;&lt;span id="47_TRN_jr"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt; &amp;nbsp; &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp;&lt;/span&gt; &amp;nbsp; &lt;br /&gt;
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8033919830443655972-2169053711425701358?l=seedhikharibaat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel="replies" type="application/atom+xml" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/feeds/2169053711425701358/comments/default" title="टिप्पणियाँ भेजें" /><link rel="replies" type="text/html" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/02/blog-post_25.html#comment-form" title="0 टिप्पणियाँ" /><link rel="edit" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/2169053711425701358?v=2" /><link rel="self" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/2169053711425701358?v=2" /><link rel="alternate" type="text/html" href="http://feedproxy.google.com/~r/SeedhiKhariBaat/~3/FZ_1M8oICr4/blog-post_25.html" title="कुडनकुलम संयंत्र और राजनीति" /><author><name>Dr Ashutosh Shukla</name><uri>https://profiles.google.com/100257269155750831732</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel="http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail" width="32" height="32" src="//lh4.googleusercontent.com/-m8s_63KhFOs/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAIjw/Or7VxwQJcqY/s512-c/photo.jpg" /></author><thr:total>0</thr:total><feedburner:origLink>http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/02/blog-post_25.html</feedburner:origLink></entry><entry gd:etag="W/&quot;AkQDRHs9fyp7ImA9WhVTEEk.&quot;"><id>tag:blogger.com,1999:blog-8033919830443655972.post-7981837379674509681</id><published>2012-02-24T07:22:00.000+05:30</published><updated>2012-02-24T07:22:55.567+05:30</updated><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2012-02-24T07:22:55.567+05:30</app:edited><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="कर्तव्य" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="कानून" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="अधिकार" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="उपयोग" /><title>आईएएस और ट्रेनिंग</title><content type="html">&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;
&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; देश की सबसे प्रतिष्ठित सरकारी सेवा &lt;span id="47_TRN_ky"&gt;आईएएस &lt;/span&gt;में चयनित हुए &lt;span id="47_TRN_b"&gt;अभ्यर्थी भी किस तरह से नियमों के तहत आवश्यक मानी जाने वाली ट्रेनिंग से विमुख रहते हैं इसका पता इसी बात से चलता है कि केंद्र को इस बारे में स्पष्ट निर्देश देने को बाध्य होना पड़ा है कि जो भी अधिकारी &lt;span id="47_TRN_1l"&gt;इसको समय से पूरा नहीं करते हैं उन्हें सेवा के दौरान मिलने वाले लाभों से वंचित रखा जाये और उन्हें ट्रेनिंग लेने वालों के बराबर न माना जाये. आख़िर &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span id="47_TRN_b"&gt;&lt;span id="47_TRN_1l"&gt;क्या कारण है कि &lt;span id="47_TRN_2q"&gt;अपने &lt;/span&gt;&lt;span id="47_TRN_2p"&gt;&lt;/span&gt; लम्बे सेवा काल में ये अधिकारी इस तरह से बर्ताव &lt;span id="47_TRN_42"&gt;करते&lt;/span&gt; हैं और जो कुछ उन्हें &lt;span id="47_TRN_44"&gt;पता&lt;/span&gt; होना चाहिए उसे भी वे जानने के इच्छुक नहीं रहते &lt;span id="47_TRN_3o"&gt;&lt;/span&gt;&lt;span id="47_TRN_3s"&gt;&lt;/span&gt; &lt;span id="47_TRN_3m"&gt;हैं &lt;/span&gt;&lt;span id="47_TRN_3q"&gt;&lt;/span&gt; ? &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;क्या सरकार उनके बिना बात के ही उन्हें ऐसी &lt;span id="47_TRN_52"&gt;ट्रेनिंग&lt;/span&gt; देने का प्रयास करती रहती &lt;span id="47_TRN_4f"&gt;है या फिर कुछ अन्य कारणों से ये अधिकारी अपने को इस तरह की ट्रेनिंग आदि से ऊपर समझने लगते हैं ? जहाँ तक सरकार के पक्ष &lt;span id="47_TRN_5b"&gt;को देखा जाये तो यह स्पष्ट है कि समय समय पर आने वाली नयी नयी प्रशासनिक चुनौतियों से निपटने के लिए ही इन अधिकारियों को तैयार रखना ही इस पूरा कार्यक्रम का आधार होता है पर जब भी इस पर उचित ध्यान नहीं दिया जाता है तभी समस्याएं सामने आने लगती हैं.&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;span id="47_TRN_4f"&gt;&lt;span id="47_TRN_5b"&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp; आज देश में हर क्षेत्र में जिस तरह से राजनैतिक &lt;span id="47_TRN_7c"&gt;हस्तक्षेप &lt;/span&gt;&lt;span id="47_TRN_7e"&gt;&lt;/span&gt; बढ़ता ही जा रहा है उसे देखते हुए कई बार कुछ &lt;span id="47_TRN_l4"&gt;अधिकारी&lt;/span&gt; अपने को किसी राजनैतिक गुरु के साथ जोड़ लेते हैं और उस स्थिति में उनको इस तरह के किसी भी काम के लिए राज्य सरकारें छोड़ती ही नहीं है जिससे वे अपने को सुरक्षित रखते हुए ट्रेनिंग से बच जाया करते &lt;span id="47_TRN_8t"&gt;हैं ? पर इस तरह &lt;span id="47_TRN_8z"&gt;से किसी भी ट्रेनिंग &lt;span id="47_TRN_a4"&gt;आदि&lt;/span&gt; से बचकर भागने से किसी को क्या मिलता है यह तो किसी को नहीं पता पर देश के जिन बहुमूल्य संसाधनों से पैसे जुटाकर इनकी ट्रेनिंग की व्यवस्था की जाती है वह बेकार हो जाती है. इसके लिए सरकार को कुछ ऐसे संशोधन करने चाहिए जिससे सभी के लिए रोटेशन के आधार पर &lt;span id="47_TRN_l6"&gt;ट्रेनिंग&lt;/span&gt; आवश्यक हो जाये और कोई भी अधिकारी इससे बचा न रह सके ? जब तक इस तरह की ट्रेनिंग को बाध्यकारी नहीं बनाया जायेगा तब तक इन बड़े बाबुओं की नकेल नहीं कसी जा सकेगी ? ऐसा भी नहीं है कि पहले सरकारों ने इस बारे में कुछ सोचा नहीं होगा &lt;span id="47_TRN_c4"&gt;पर जब निर्णय लेने की बात आती है तो सरकार को इन बड़े &lt;span id="47_TRN_dn"&gt;बाबुओं&lt;/span&gt; की बात तो रखनी ही पड़ती है और जब &lt;span id="47_TRN_dp"&gt;देश&lt;/span&gt; का पूरा &lt;span id="47_TRN_cy"&gt;प्रशासनिक &lt;/span&gt;ढांचा इनके इर्द गिर्द ही घूमता है तो कौन इनके गले में &lt;span id="47_TRN_di"&gt;घंटी&lt;/span&gt; बाँधने का साहस &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span id="47_TRN_4f"&gt;&lt;span id="47_TRN_5b"&gt;&lt;span id="47_TRN_8t"&gt;&lt;span id="47_TRN_8z"&gt;&lt;span id="47_TRN_c4"&gt;कर सकेगा ?&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;span id="47_TRN_4f"&gt;&lt;span id="47_TRN_5b"&gt;&lt;span id="47_TRN_8t"&gt;&lt;span id="47_TRN_8z"&gt;&lt;span id="47_TRN_c4"&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; अब यह व्यवस्था ऐसे ही नहीं चलनी चाहिए क्योंकि इसका सबसे बड़ा नुकसान देश को होता है जब हर जगह पर समयानुसार निरंतर ट्रेनिंग की व्यवस्था है तो किसी भी स्थिति में इन बड़े बाबुओं को इससे &lt;span id="47_TRN_f0"&gt;छूट&lt;/span&gt; कैसी दी जा सकती है ? क्या १९८५ में चुने गए अधिकारी कंप्यूटर के बारे में इतना जानते थे जितना आज उनको इन्हीं विशेष ट्रेनिंग्स के ज़रिये सिखाया गया है ?&amp;nbsp; क्या देश के विभिन्न हिस्सों में चुनाव आदि के सिलसिले में आने जाने वाले अधिकारियों के लिए देश के बारे में और अधिक जानने की आवश्यकता नहीं है ? क्यों ये आज एक स्थान पर ठहर जाना चाहते हैं ? कायदे से नियम ऐसे होने चाहिए कि इनके तय सेवा&lt;span id="47_TRN_h4"&gt;&lt;/span&gt; वर्ष पूरे होने पर इन्हें इन ट्रेनिंग केन्द्रों में &lt;span id="47_TRN_hi"&gt;रिपोर्ट&lt;/span&gt; करना आवश्यक कर दिया जाये और उस समय के पूरा होने पर इन्हें अपने काडर से स्वतः ही ट्रेनिंग सेंटर में जाना आवश्यक कर दिया जाये और जब वहां से ट्रेनिंग का प्रमाणपत्र लेकर ये वापस आयें तो ही इन्हें राज्य सरकार अपने अनुसार तैनाती दे सके. पर हर बात में &lt;span id="47_TRN_j2"&gt;अधिकारों&lt;/span&gt; के लिए चिल्लाने वाली राज्य सरकारें इस बात को नहीं होने देना चाहेंगीं क्योंकि इससे उन्हें देश के संघीय ढांचे पर &lt;span id="47_TRN_jq"&gt;प्रहार होते दिखाई देगा और वे अपने चहेते अधिकारियों को अपने अनुसार हांकती रहेंगीं ? इससे उनका कुछ तात्कालिक भला भले ही हो जाये पर देश के लिए अधिकारियों&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span id="47_TRN_4f"&gt;&lt;span id="47_TRN_5b"&gt;&lt;span id="47_TRN_8t"&gt;&lt;span id="47_TRN_8z"&gt;&lt;span id="47_TRN_c4"&gt;&lt;span id="47_TRN_jq"&gt; को तैयार करने की प्रक्रिया को झटका &lt;span id="47_TRN_ku"&gt;लगना&lt;/span&gt; तय ही है.&lt;/span&gt; &amp;nbsp; &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8033919830443655972-7981837379674509681?l=seedhikharibaat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel="replies" type="application/atom+xml" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/feeds/7981837379674509681/comments/default" title="टिप्पणियाँ भेजें" /><link rel="replies" type="text/html" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/02/blog-post_24.html#comment-form" title="0 टिप्पणियाँ" /><link rel="edit" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/7981837379674509681?v=2" /><link rel="self" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/7981837379674509681?v=2" /><link rel="alternate" type="text/html" href="http://feedproxy.google.com/~r/SeedhiKhariBaat/~3/u3c7nO6f1sM/blog-post_24.html" title="आईएएस और ट्रेनिंग" /><author><name>Dr Ashutosh Shukla</name><uri>https://profiles.google.com/100257269155750831732</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel="http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail" width="32" height="32" src="//lh4.googleusercontent.com/-m8s_63KhFOs/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAIjw/Or7VxwQJcqY/s512-c/photo.jpg" /></author><thr:total>0</thr:total><feedburner:origLink>http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/02/blog-post_24.html</feedburner:origLink></entry><entry gd:etag="W/&quot;CEUBRXkycSp7ImA9WhRaGUs.&quot;"><id>tag:blogger.com,1999:blog-8033919830443655972.post-6578393392533340084</id><published>2012-02-23T07:27:00.000+05:30</published><updated>2012-02-23T07:27:34.799+05:30</updated><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2012-02-23T07:27:34.799+05:30</app:edited><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="कानून" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="अधिकार" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="अभिव्यक्ति" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="चुनाव" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="उपयोग" /><title>चुनाव सुधार या लगाम ?</title><content type="html">&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;
&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; वर्तमान में चल रहे विधान सभा चुनावों के बीच जिस तरह से चुनाव आयोग के पर करतने जैसी बातें सामने आ रही हैं उनका कोई मतलब नहीं है क्योंकि अभी जो चुनाव चल रहे हैं उन पर इसका कोई असर नहीं पड़ने वाला है फिर जनता का ध्यान &lt;span id="47_TRN_1g"&gt;भटकाने &lt;/span&gt; के लिए नेता लोग इस तरह की बातें क्यों कर रहे हैं यह समझ से परे है ? बीच चुनावों में जब बात मूलभूत आवश्यकताओं और सुविधाओं की होनी चाहिए तो नेता आयोग और चुनाव सुधार की बातें करके जनता का ध्यान समस्याओं की तरफ़ से हटाकर दूसरी तरफ मोड़ना चाहते हैं क्योंकि इससे उनको उन असहज कर देने वाले सवालों का जवाब देने से बचने का मौका मिल जाता है ? पर अब जनता यह सारा नाटक जान चुकी है और इस तरह की किसी भी गतिविधि का कोई बड़ा असर किसी पर नहीं पड़ने वाला है. देश में चुनाव आयोग अपने आप में बहुत महत्वपूर्ण और शक्तिशाली संस्था है और इसके बारे में किसी को भी कुछ भी बोलने से पहले अपनी पार्टी लाइन और अपने विचारों को ठीक कर लेना चाहिए क्योंकि चुनाव के समय में कुर्सी फिसलते देख कर &lt;span id="47_TRN_i9"&gt;अच्छे&lt;/span&gt; &lt;span id="47_TRN_ib"&gt;अच्छे&lt;/span&gt; नेताओं की ज़बान फिसलने में देर नहीं लगती हैफिर वे बाद में आयोग और जनता के सामने यह कहते फिरते हैं कि उनकी मंशा ऐसी नहीं थी लोगों ने उनके बयान को गलत तरीके से पेश कर दिया है ?&lt;br /&gt;
&amp;nbsp; &amp;nbsp; क्या देश का राजनैतिक तंत्र इतना परिपक्व है कि वह इस बात को &lt;span id="47_TRN_67"&gt;समझ सके कि कहाँ पर क्या कहना है और कब चुप रहना है ? मेरे अनुसार तो बिलकुल भी नहीं क्योंकि जब बातें &lt;span id="47_TRN_6s"&gt;करनी &lt;/span&gt;होती हैं तो बड़े बड़े आदर्शों की बातें करने के मामले में इन्हें कोई छू भी नहीं सकता है पर जब यथार्थ पर कुछ करने का अवसर आता है तो जैसे इनके पास विचारों का अकाल ही पड़ जाता है ? संसद और विधान सभा को बाज़ार बनाकर कभी भी कोई महत्वपूर्ण काम नहीं किये जा सकते हैं यह भी अभी इन नेताओं को समझना ही होगा. विधान सभा चुनावों के दौरान चुनाव सुधारों की बातें करना देश के साथ छल है क्योंकि ख़ुद चुनाव आयोग भी अब व्यापक चुनाव सुधारों के पक्ष में &lt;span id="47_TRN_8k"&gt;&lt;span id="47_TRN_kb"&gt;है&lt;/span&gt; पर नेताओं &lt;span id="47_TRN_8q"&gt;को आयोग की उन &lt;span id="47_TRN_90"&gt;&lt;span id="47_TRN_94"&gt;सुझावों&lt;/span&gt;&lt;span id="47_TRN_93"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt; को लागू करने में दिलचस्पी ही नहीं है क्योंकि कहीं न कहीं वे इन नेताओं के गले कि फाँस ही बनने वाले हैं. ऐसे में कुछ भी करना नेताओं के लिए वर्तमान तंत्र के अस्तित्व को बचाने &lt;span id="47_TRN_kh"&gt;पर&lt;/span&gt; संकट जैसा ही होने वाला है. आयोग अगर आज की तकनीक और अन्य सुधारों की पैरवी कर रहा है तो इससे देश का ही भला होने वाला है क्योंकि समय के साथ नहीं बदलने से आयोग के काम काज में काफी परिवर्तन पीछे रह सकते हैं जो बहुत ही आवश्यक हैं.&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;span id="47_TRN_67"&gt;&lt;span id="47_TRN_8k"&gt;&lt;span id="47_TRN_8q"&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; ऐसी &lt;span id="47_TRN_bp"&gt;स्थिति&lt;/span&gt; में सरकार को चुनाव सुधारों पर व्यापक बहस करनी चाहिए और इस बारे में जनता से भी राय मांगी जानी चाहिए क्योंकि किसी को नहीं पता कि कौन किस तरह से सोच सकता है और देश के लिए जब जनता को सोचने का अवसर मिलेगा तो देश के लिए बहुत अच्छी योजनायें और नियम बनाने में काफी हद तक आसानी हो जाएगी ? पर अपने को माननीय कहलाना पसंद करने वाले हमारे नेता चुनाव जीतने के बाद जिस तरह &lt;span id="47_TRN_dw"&gt;से अपने को &lt;span id="47_TRN_kk"&gt;लोकतंत्र&lt;/span&gt; का पुरोधा समझ लेते हैं उससे बहुत बड़ी समस्याएं जन्म लेती है और उनसे निपटने में एक स्तर पर ये राजनेता पूरी तरह से विफल हो जाते हैं ? नेताओं को अपने अनुसार &lt;span id="47_TRN_km"&gt;किसी&lt;/span&gt; भी सुधार की अनुमति नहीं दी जा सकती है क्योंकि अब देश की आवश्यकता है कि किसी भी स्तर &lt;span id="47_TRN_fk"&gt;पर जनता को नेताओं को नकारने का अवसर भी वोट देते समय मिलना चाहिए और इसके एक &lt;span id="47_TRN_kp"&gt;प्रतिशत&lt;/span&gt; निर्धारित होना चाहिए जिससे उतने नकारात्मक वोट पड़ जाएँ तो चुनाव मैदान में उतरने वाले सभी नेताओं के लिए अगले १० वर्षों तक किसी भी चुनाव के लड़ने पर पाबंदी लगा दी जानी चाहिए जिससे &lt;span id="47_TRN_kt"&gt;नेताओं&lt;/span&gt; के मन में यह भय भी आये कि जनता उन्हें १० साल के लिए प्रतिबंधित भी कर सकती है. यह एकमात्र ऐसा सुधार है जो &lt;span id="47_TRN_kw"&gt;तुरंत किया &lt;/span&gt;जाना &lt;span id="47_TRN_kz"&gt;चाहिए&lt;/span&gt; जिसके दम पर बाक़ी के सुधार अपने आप ही हो जायेंगें. &lt;/span&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt; &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8033919830443655972-6578393392533340084?l=seedhikharibaat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel="replies" type="application/atom+xml" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/feeds/6578393392533340084/comments/default" title="टिप्पणियाँ भेजें" /><link rel="replies" type="text/html" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/02/blog-post_23.html#comment-form" title="0 टिप्पणियाँ" /><link rel="edit" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/6578393392533340084?v=2" /><link rel="self" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/6578393392533340084?v=2" /><link rel="alternate" type="text/html" href="http://feedproxy.google.com/~r/SeedhiKhariBaat/~3/Zf9I8FENEic/blog-post_23.html" title="चुनाव सुधार या लगाम ?" /><author><name>Dr Ashutosh Shukla</name><uri>https://profiles.google.com/100257269155750831732</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel="http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail" width="32" height="32" src="//lh4.googleusercontent.com/-m8s_63KhFOs/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAIjw/Or7VxwQJcqY/s512-c/photo.jpg" /></author><thr:total>0</thr:total><feedburner:origLink>http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/02/blog-post_23.html</feedburner:origLink></entry><entry gd:etag="W/&quot;DE8AQ385fip7ImA9WhRaGEo.&quot;"><id>tag:blogger.com,1999:blog-8033919830443655972.post-2111838466666530625</id><published>2012-02-22T07:44:00.000+05:30</published><updated>2012-02-22T07:44:02.126+05:30</updated><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2012-02-22T07:44:02.126+05:30</app:edited><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="सहायता" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="अधिकार" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="सरकार" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="उपयोग" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="उद्योग" /><title>किंगफिशर का संकट</title><content type="html">&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;
&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; जिस तरह से सार्वजनिक क्षेत्र की विमानन कम्पनी एयर इंडिया के बाद अब किंगफिशर के सामने आर्थिक संकट आ गया है उसे देखते हुए यह कहा जा सकता है कि तेज़ी बढ़ते हुए भारतीय विमानन उद्योग में कहीं न &lt;span id="45_TRN_1p"&gt;कहीं&lt;/span&gt; कुछ कमी अवश्य है जिस कारण से विमानन कम्पनियों के लिए चुनौतियाँ बढ़ती ही जा रही हैं ? ऐसा नहीं है कि इस तरह की चुनौतियाँ केवल भारत में ही हैं पर यहाँ पर जिस तरह से इससे निपटा जाता है वह वैश्विक समस्या से बिलकुल अलग होता है यहाँ &lt;span id="45_TRN_2q"&gt;पर सरकार एयर इंडिया को बचाने के लिए आर्थिक सहायता पर विचार करती है तो वहीं पर निजी क्षेत्र के सामने समस्या आने &lt;span id="45_TRN_3f"&gt;पर उसके &lt;span id="45_TRN_3p"&gt;लिए&lt;/span&gt; &lt;span id="45_TRN_3k"&gt;कोई स्पष्ट दिशा निर्देश समय रहते जारी नहीं किये जाते हैं. यह एक ऐसा मसला &lt;span id="45_TRN_67"&gt;है&lt;/span&gt; जिसके बारे में भारत सरकार को नए सिरे से सोचकर नीतियों का पुनर्निर्धारण करना ही होगा क्योंकि उसके बिना किसी न किसी कम्पनी के समक्ष इस तरह के संकट आते ही रहेंगें ? वैसी स्थिति में विमानन मंत्रलय और सरकार की सोच इनको बचाने की तरफ होनी चाहिए जिससे यह उद्योग देश में फलता फूलता रहे.&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;span id="45_TRN_2q"&gt;&lt;span id="45_TRN_3f"&gt;&lt;span id="45_TRN_3k"&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp; इस तरह के किसी भी प्रकरण में इन &lt;span id="45_TRN_69"&gt;कम्पनियों के&lt;/span&gt; कर्मचारियों के लिए बहुत बड़ी समस्या आ जाती है क्योंकि उनके सामने अचानक से ही चलती हुई कोई विमान कम्पनी बंद होने के कगार पर पहुँच जाती है ? जिसका सबसे ज़्यादा असर सबसे पहले उन यात्रियों पर पड़ता है जिन्होंने उसके टिकट खरीद रखे होते हैं क्योंकि उनके लिए अपनी यात्रा करना आवश्यक होता है तो उन्हें नए टिकटों के लिए काफी अधिक धनराशि भी खर्च करनी पड़ती है जिससे &lt;span id="45_TRN_7p"&gt;उनके लिए समस्या होती है. इसके बाद विमान कम्पनी के परिचालन से जुड़े हुए कर्मचारियों के लिए आर्थिक संकट आता है क्योंकि आख़िर वे समय पर वेतन न मिल पाने की स्थिति में किस तरह से अपने &lt;/span&gt;&lt;span id="45_TRN_7o"&gt;&lt;/span&gt;  खर्चों को पूरा करें ? उन बैंकों आदि पर भी बाज़ार का दबाव बढ़ जाता &lt;span id="45_TRN_ab"&gt;है&lt;/span&gt; जिन्होंने इस तरह की संकट ग्रस्त कम्पनियों के लिए धन क़र्ज़ के रूप में दिया होता है और उनके प्रदर्शन पर इस बात का काफी असर पड़ जाता है. जिस तरह से कार्पोरेट कार्य मंत्री वीरप्पा मोइली &lt;span id="45_TRN_ak"&gt;ने भी किंगफिशर को बचाए जाने की बात कही है उससे यही लगता है कि अब सरकार इस बारे में कुछ सोचना शुरू कर चुकी है.&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;span id="45_TRN_2q"&gt;&lt;span id="45_TRN_3f"&gt;&lt;span id="45_TRN_3k"&gt;&lt;span id="45_TRN_ak"&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; मोइली ने यह भी स्पष्ट किया है कि अब किंगफिशर पर यह ज़िम्मेदारी है कि वह कोई ऐसी कार्य योजना पेश करे जिस पर &lt;span id="45_TRN_bz"&gt;कार्पोरेट &lt;/span&gt; और वित्त मंत्रालय की सहमति मिल सके क्योंकि अब इस तरह की किसी स्पष्ट योजना के&lt;span id="45_TRN_ck"&gt;&lt;/span&gt; बिना किंगफिशर को बचाया नहीं जा सकता है. जिस तरह से कम्पनी के सीईओ ने &lt;span id="45_TRN_d6"&gt;डीजीसीए से मुलाक़ात करके एक हफ्ते में परिचालन &lt;span id="45_TRN_di"&gt;से जुड़ी &lt;/span&gt;&lt;span id="45_TRN_dk"&gt;&lt;/span&gt;&lt;span id="45_TRN_dm"&gt;&lt;/span&gt; समस्या को हल करने की बात कही है उससे यही लगता है कि अब ठोस प्रयास शुरू किये जा चुके हैं. ऐसी किसी भी स्थिति में पहले से टिकट ले चुके यात्रियों के हितों की रक्षा करने के लिए कुछ अवश्य किया जाना चाहिए क्योंकि किंगफिशर की सेवाएं बंद होने से अन्य कम्पनियों ने इसका लाभ उठाना शुरू कर दिया है ऐसे में यात्रियों के सामने संकट आ गया है. &lt;span id="45_TRN_fs"&gt;ऐसी&lt;/span&gt; किसी&lt;span id="45_TRN_fv"&gt;&lt;/span&gt; स्थिति से निपटने के लिए स्पष्ट दिशा निर्देश होने चाहिए और सेवा दे रही विमान कम्पनियों को इस बात की छूट नहीं दी जानी चाहिए &lt;span id="45_TRN_gm"&gt;कि वे इस स्थिति &lt;span id="45_TRN_gu"&gt;का&lt;/span&gt; लाभ उठाना ही शुरू कर दें ? यह सही है कि देश में यह उद्योग अभी विकास कर ही रहा है तो कोई भी अपने आर्थिक हितों &lt;span id="45_TRN_hl"&gt;को सबसे ऊपर रखना चाहता है पर इसका असर आम यात्रियों और &lt;span id="45_TRN_hz"&gt;कार्मिकों पर कैसे कम से कम हो यह देखना अब सरकार की ज़िम्मेदारी है.&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span id="45_TRN_cx"&gt;&lt;/span&gt;&amp;nbsp; &lt;/span&gt;&amp;nbsp; &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8033919830443655972-2111838466666530625?l=seedhikharibaat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel="replies" type="application/atom+xml" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/feeds/2111838466666530625/comments/default" title="टिप्पणियाँ भेजें" /><link rel="replies" type="text/html" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/02/blog-post_22.html#comment-form" title="0 टिप्पणियाँ" /><link rel="edit" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/2111838466666530625?v=2" /><link rel="self" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/2111838466666530625?v=2" /><link rel="alternate" type="text/html" href="http://feedproxy.google.com/~r/SeedhiKhariBaat/~3/asvE-MpZACQ/blog-post_22.html" title="किंगफिशर का संकट" /><author><name>Dr Ashutosh Shukla</name><uri>https://profiles.google.com/100257269155750831732</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel="http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail" width="32" height="32" src="//lh4.googleusercontent.com/-m8s_63KhFOs/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAIjw/Or7VxwQJcqY/s512-c/photo.jpg" /></author><thr:total>0</thr:total><feedburner:origLink>http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/02/blog-post_22.html</feedburner:origLink></entry><entry gd:etag="W/&quot;C08EQno_fSp7ImA9WhRaF0Q.&quot;"><id>tag:blogger.com,1999:blog-8033919830443655972.post-5368261363875357748</id><published>2012-02-21T08:06:00.000+05:30</published><updated>2012-02-21T08:06:43.445+05:30</updated><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2012-02-21T08:06:43.445+05:30</app:edited><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="सुरक्षा" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="अधिकार" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="आतंक" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="सरकार" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="उपयोग" /><title>ब्लैकबेरी और भारत</title><content type="html">&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;
&amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; काफ़ी न &lt;span id="45_TRN_9"&gt;नुकुर&lt;/span&gt; करने के बाद अपने &lt;span id="45_TRN_c"&gt;अपने&lt;/span&gt; ग्राहक बचाए रखने की क़वायद में आख़िर &lt;span id="45_TRN_m"&gt;ब्लैकबेरी ने मुंबई में अपना सर्वर लगा ही दिया है. अभी तक जो कम्पनी अपने महत्वपूर्ण ग्राहकों के दम पर यह सोच रही थी की वह किसी तरह से अपने लिए नियमों में छोट पा लेगी या फिर उसे किसी भी तरह से सुरक्षा सम्बन्धी छूट मिल जाएगी पर सुरक्षा सम्बन्धी चिंताओं को कड़े रवैये से निपटने के सरकारी रुख़ से उसको भी फिर से सोचना ही पड़ा. &lt;span id="45_TRN_2i"&gt;वैसे देखा जाये तो इससे ब्लैकबेरी की सेहत पर कोई अंतर नहीं पड़ने वाला है पर इसके बिना भारत की सुरक्षा के लिए गंभीर ख़तरा उत्पन्न &lt;span id="45_TRN_3c"&gt;हो&lt;/span&gt; &lt;span id="45_TRN_3a"&gt;सकता था. किसी भी कम्पनी के लिए यह बहुत आवश्यक होता है कि&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span id="45_TRN_m"&gt;&lt;span id="45_TRN_2i"&gt;&lt;span id="45_TRN_3a"&gt; वह किसी अन्य देश में काम करते समय वहां के कानूनों के अनुसार काम करे जिसके लिए प्रारंभ में यह कम्पनी राज़ी ही नहीं हो रही थी पर जब सरकार की तरफ़ से सख्ती दिखाई गयी तो उसने अपने व्यापारिक हितों के चलते कानून &lt;span id="45_TRN_54"&gt;का अनुपालन करना ही उचित समझा. बलिक्बेरी की सेवाएं वैसे भी विभिन्न भारतीय कम्प्नियोंके माध्यम से ही दी जा रही थीं तो सरकार उनके माध्यम से भी ब्लैकबेरी की सेवाएं बंद करने में &lt;span id="45_TRN_jp"&gt;सक्षम&lt;/span&gt; थी.&lt;span id="45_TRN_j4"&gt;&lt;/span&gt;&lt;span id="45_TRN_j3"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;span id="45_TRN_m"&gt;&lt;span id="45_TRN_2i"&gt;&lt;span id="45_TRN_3a"&gt;&lt;span id="45_TRN_54"&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp; देश में कहीं &lt;span id="45_TRN_5f"&gt;से भी उत्पन्न होने &lt;span id="45_TRN_5r"&gt;वाली &lt;/span&gt;किसी भी तरह की सुरक्षा चिंताओं के चलते ही भारत सरकार को इन सभी तक अपनी ख़ुफ़िया एजेंसियों की &lt;span id="45_TRN_66"&gt;पहुँच चाहिए थी जिसको देने में या कम्पनी &lt;span id="45_TRN_6n"&gt;शुरू&lt;/span&gt; से ही आना-कानी कर रही थी ? पता नहीं ऐसा करके ये लोग क्या दिखाना चाहते थे और अब कानून के अनुपालन के बाद उनकी प्रतिष्ठा में क्या कमी आ गयी है ? नहीं पर उसका यह सोचना था कि हो सकता है कि अपने क़दम के साथ मजबूती से खड़े रहने के बाद सरकार कुछ हद तक नरमी के संकेत जारी कर दे पर इस समय देश को अच्छी तरह से हर मोर्चे पर सुरक्षा कारणों की &lt;span id="45_TRN_8t"&gt;चिंताओं को मिटाने में लगी सरकार ने अपने पक्ष को स्पष्ट &lt;span id="45_TRN_97"&gt;कर&lt;/span&gt; दिया &lt;/span&gt;जिसके बाद कम्पनी के पास टिकने के लिए सर्वर लगाना या फिर कारोबार समेट लेने के अलावा कोई विकल्प ही नहीं बचा था. आज के प्रतिस्पर्धी युग में कोई भी कम्पनी भारत जैसे विशाल बाज़ार की अनदेखी कर ही नहीं &lt;span id="45_TRN_ag"&gt;सकती है और इसी बात के दम पर भारत सरकार ने ब्लैकबेरी को कानून के दायरे में लाने का काम कर लिया.&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;span id="45_TRN_m"&gt;&lt;span id="45_TRN_2i"&gt;&lt;span id="45_TRN_3a"&gt;&lt;span id="45_TRN_54"&gt;&lt;span id="45_TRN_5f"&gt;&lt;span id="45_TRN_66"&gt;&lt;span id="45_TRN_ag"&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp; किसी भी तरह के टेलिकॉम लाइसेंस में यह स्पष्ट है कि भारत में काम करने वाली किसी भी कम्पनी को देश के कानून को अक्षरशः मानना होगा  पर यहाँ पर कानून मानने की बात तो दूर उलटे ब्लैकबेरी खुद के तेवर दिखने से बाज़&amp;nbsp; नहीं आ रही थी ? &lt;/span&gt;&lt;span id="45_TRN_af"&gt;&lt;/span&gt;कानून के अनुपालन को किसी की जीत या किसी की हार के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए क्योंकि कानून से देश और व्यवस्थाएं चला करती हैं और &lt;span id="45_TRN_da"&gt;उनके साथ खड़े होने से आने वाले समय में काम करने के लिए अच्छे माहौल की व्यवस्था भी बनती है. इस पूरे प्रकरण में भारत सरकार ने मेल पर नियंत्रण के मामले में अभी ब्लैकबेरी को कुछ छूट दे दी है क्योंकि इसकी मेल के लिए लगभग ५ हज़ार सर्वर काम कर रहे हैं और ये सभी व्यावसायिक रूप से सक्रिय हैं तो उनके दुरूपयोग की संभावनाएं भी कम ही हैं फिर &lt;span id="45_TRN_fp"&gt;भी आने&lt;/span&gt; वाले समय में इसके दुरूपयोग की शिकायत मिलने अपर कम्पनी को अपने मेल सर्वर भी सरकार की नज़रों में लाने ही होंगें. अगर कम्पनी यह मानती है कि उसका काम गलत नहीं है तो फिर वह केवल निजता के नाम &lt;span id="45_TRN_gu"&gt;पर सुरक्षा की चिंताओं को कैसे निपटा सकेगी ? अच्छा ही हुआ कि उसने व्यासायिक रुख अपना कर अपने ग्राहकों को बचा लिया और भारत में अपनी सेवाओं को देने का मन भी बना लिया. &lt;span id="45_TRN_hn"&gt;&lt;/span&gt;&lt;span id="45_TRN_hm"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span id="45_TRN_eo"&gt;&lt;span id="45_TRN_er"&gt;&lt;/span&gt; &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span id="45_TRN_2h"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8033919830443655972-5368261363875357748?l=seedhikharibaat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel="replies" type="application/atom+xml" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/feeds/5368261363875357748/comments/default" title="टिप्पणियाँ भेजें" /><link rel="replies" type="text/html" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/02/blog-post_21.html#comment-form" title="1 टिप्पणियाँ" /><link rel="edit" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/5368261363875357748?v=2" /><link rel="self" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/5368261363875357748?v=2" /><link rel="alternate" type="text/html" href="http://feedproxy.google.com/~r/SeedhiKhariBaat/~3/2EF2yKBTruE/blog-post_21.html" title="ब्लैकबेरी और भारत" /><author><name>Dr Ashutosh Shukla</name><uri>https://profiles.google.com/100257269155750831732</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel="http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail" width="32" height="32" src="//lh4.googleusercontent.com/-m8s_63KhFOs/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAIjw/Or7VxwQJcqY/s512-c/photo.jpg" /></author><thr:total>1</thr:total><feedburner:origLink>http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/02/blog-post_21.html</feedburner:origLink></entry><entry gd:etag="W/&quot;CUEHQHc-fip7ImA9WhRaF00.&quot;"><id>tag:blogger.com,1999:blog-8033919830443655972.post-141502516390939038</id><published>2012-02-20T07:37:00.000+05:30</published><updated>2012-02-20T07:37:11.956+05:30</updated><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2012-02-20T07:37:11.956+05:30</app:edited><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="कर्तव्य" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="अधिकार" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="सरकार" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="अराजकता" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="उपयोग" /><title>आस्था के साथ भीड़ तंत्र ?</title><content type="html">&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;
&lt;span id="45_TRN_d"&gt;&lt;/span&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; गुजरात के जूनागढ़ के गिरनार पर्वत पर स्थिति भवनाथ मंदिर में जिस तरह से &lt;span id="45_TRN_kt"&gt;महाशिवरात्रि&lt;/span&gt; के अवसर पर एकत्रित हुए श्रद्धालु हादसे का शिकार हुए क्या वैसी स्थितयों को टालने के लिए हमारे देश में कोई कार्य योजना है भी या नहीं क्योंकि देश के किसी न किसी हिस्से में हर वर्ष तीन चार ऐसी घटनाएँ होती ही रहती हैं जिनमें आये हुए श्रद्धालु मौत के मुंह में समा जाते हैं ? हमारे में देश की धर्मिक विविधता और विशाल आबादी को &lt;span id="45_TRN_e"&gt;देखते&lt;/span&gt; हुए विभिन्न धर्मों के बहुत सारे बड़े आयोजन समय समय पर होते ही रहते हैं जिससे इन स्थलों पर बहुत बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्रित होते हैं. प्राचीन काल से जिस तरह से ये आयोजन बिना किसी समस्या के होते चले आये हैं उस स्थिति में किसी का ध्यान भी इस तरफ नहीं जाता है कि हमारे आस पास होने वाले किसी धार्मिक आयोजन में भी इस तरह की स्थिति &lt;span id="45_TRN_2d"&gt;उत्पन्न हो &lt;span id="45_TRN_2h"&gt;सकती&lt;/span&gt; है ? हम आम तौर पर यह मान कर ही चलते हैं कि हमारे &lt;span id="45_TRN_kv"&gt;यहाँ&lt;/span&gt; इस तरह से कोई दुर्घटना हो ही नहीं सकती जबकि भीड़ में अचानक क्या कुछ हो जाये किसी को भी नहीं पता होता है फिर भी स्थानीय &lt;span id="45_TRN_3q"&gt;आयोजक या प्रशासन इस बात की गंभीरता को नहीं समझता है और भीड़ को &lt;span id="45_TRN_48"&gt;अपने&lt;/span&gt; हिसाब से चलने की स्वतंत्रता दे देता है जिससे किसी भी समय कुछ भी होने की आशंका बनी रहती है. हर वर्ष तो नहीं पर कभी कभी इनमें ऐसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है जिससे निपटने के लिए कुछ भी नहींकिया जा रहा है.&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt; &lt;br /&gt;
&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; स्थानीय प्रशासन या राज्य सरकारें इस तरह के आयोजनों को आज तक चिन्हित नहीं कर पायीं हैं &lt;span id="45_TRN_7d"&gt;जिनमें बड़ी संख्या में लोग इकट्ठे होते हैं क्योंकि उनको इस तरह के आयोजन &lt;span id="45_TRN_7w"&gt;पर अनावश्यक ध्यान देने में &lt;/span&gt;कोई लाभ नहीं दीखता है. इस तरह के आयोजन विभिन्न पर्वों पर &lt;span id="45_TRN_8h"&gt;देश&lt;/span&gt; के विभिन्न स्थलों पर होते रहते हैं और उनमें स्थानीय जनता की मान्यता के अनुसार बहुत बड़ी संख्या में लोग आते भी हैं फिर भी जिस तरह से इनके बारे में अधिकारी और सरकारें निश्चिन्त रहा करती &lt;span id="45_TRN_9m"&gt;हैं&lt;/span&gt; उसका कोई मतलब नहीं है. इस बारे में अब एक स्पष्ट दिशा निर्देश जारी होने चाहिए कि आयोजन &lt;span id="45_TRN_a4"&gt;के आकार के अनुसार वहां &lt;span id="45_TRN_ab"&gt;पर यातायात व्यवस्था सुगम रखी जाये और &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;संकरी गली या स्थानों पर श्रद्धालुओं के दबाव को नियंत्रित किया जाये क्योंकि इसके बिना अब आगे कि योजना नहीं बनाई जा सकती है. आम तौर पर यह देखा जाता है कि ऐसे मेलों आदि में सामान बेचने वाले भी आने जाने वाले मार्गों को अपनी दुकाने लगाकर संकरा कर देते हैं जिससे भी किसी दुर्घटना के समय वहां तक पहुँचने में भी समस्या होती है और दुर्घटना की विभीषिका और बढ़ जाती है. कसी भी छोटे या बड़े मेले या पर्व विशेष पर होने वाले आयोजन के लिए &lt;span id="45_TRN_m6"&gt;स्थानीय&lt;/span&gt; प्रशासन के पास एक समूची कार्य &lt;span id="45_TRN_n5"&gt;योजना&lt;/span&gt; होनी चाहिए और आपदा प्रबंधन के बारे में यहाँ पर आने वाले दुकानदारों और &lt;span id="45_TRN_n0"&gt;स्थानीय&lt;/span&gt; &lt;span id="45_TRN_n2"&gt;निवासियों&lt;/span&gt; &lt;span id="45_TRN_mu"&gt;को भी समझाया जाना चाहिए.&amp;nbsp; &lt;/span&gt;&lt;span id="45_TRN_mt"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;span id="45_TRN_7d"&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; देश में इस तरह के आयोजन सदैव होते रहेंगें पर इन को नियंत्रित ढंग से करवाने पर पूरा ध्यान दिया जाना चाहिए क्योंकि जब दुर्घटना हो जाती है तो कुछ भी नहीं किया जा सकता है. हमेशा की तरह स्थानीय प्रशासन इस बात का रोना रो सकता है कि उसके पास सुरक्षा बलों की कमी रहती है जिस कारण &lt;span id="45_TRN_f8"&gt;से &lt;/span&gt;&lt;span id="45_TRN_fb"&gt;&lt;/span&gt; &lt;span id="45_TRN_f7"&gt;भी&lt;/span&gt; इस पर पूरा ध्यान नहीं दिया जा पाता है ? अगर धन के अभाव में कुछ नहीं किया जा सकता है &lt;span id="45_TRN_f5"&gt;तो &lt;/span&gt;स्थानीय स्तर स्वयं सेवकों को तैयार करने का प्रयास किया जाना &lt;span id="45_TRN_n7"&gt;चाहिए&lt;/span&gt; क्योंकि जो काम बड़ी संख्या में लगा हुआ प्रशासन अपने दबाव &lt;span id="45_TRN_g9"&gt;से नहीं &lt;/span&gt;&lt;span id="45_TRN_g8"&gt;&lt;/span&gt; करा पाता है वह काम इस तरह के स्वयं सेवक आसानी से कर दिया करते हैं पर अभी तक देश में इस तरह की सोच ही विकसित नहीं हो पायी है कि कोई इस तरफ़ इस तरह से सोचने का प्रयास करे ? स्थानीय प्रशासन को अपने से ही मतलब रहता है तो इन &lt;span id="45_TRN_i0"&gt;मंदिरों&lt;/span&gt; आदि का सञ्चालन करने वाली समितियां केवल परिसर के अन्दर ही सीमित रहती हैं ऐसी स्थिति में कुछ भी हो सकता है ? अब यह घटना गुजरात में हुई है और जिस तरह से राज्य के &lt;span id="45_TRN_j2"&gt;बारे में मोदी ने एक व्यापक नीति के तहत काम किया है उस स्थिति में इस दुर्घटना के बाद उनका ध्यान इस तरह के आयोजनों की सुरक्षा पर भी कितना जायेगा यह तो समय ही बताएगा &lt;span id="45_TRN_k3"&gt;पर एक छोटी सी इच्छा शक्ति इस तरह के बड़े आयोजनों को आसानी से अराजकता के &lt;span id="45_TRN_kr"&gt;चंगुल&lt;/span&gt; में जाने से रोक सकती है. &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span id="45_TRN_iw"&gt;&lt;/span&gt;&lt;span id="45_TRN_i4"&gt;&lt;/span&gt; &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;span id="45_TRN_7d"&gt;&lt;span id="45_TRN_fg"&gt;&lt;/span&gt;&amp;nbsp; &lt;span id="45_TRN_d5"&gt;&lt;/span&gt;&amp;nbsp; &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8033919830443655972-141502516390939038?l=seedhikharibaat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel="replies" type="application/atom+xml" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/feeds/141502516390939038/comments/default" title="टिप्पणियाँ भेजें" /><link rel="replies" type="text/html" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/02/blog-post_20.html#comment-form" title="1 टिप्पणियाँ" /><link rel="edit" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/141502516390939038?v=2" /><link rel="self" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/141502516390939038?v=2" /><link rel="alternate" type="text/html" href="http://feedproxy.google.com/~r/SeedhiKhariBaat/~3/_GX2jgJktCM/blog-post_20.html" title="आस्था के साथ भीड़ तंत्र ?" /><author><name>Dr Ashutosh Shukla</name><uri>https://profiles.google.com/100257269155750831732</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel="http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail" width="32" height="32" src="//lh4.googleusercontent.com/-m8s_63KhFOs/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAIjw/Or7VxwQJcqY/s512-c/photo.jpg" /></author><thr:total>1</thr:total><feedburner:origLink>http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/02/blog-post_20.html</feedburner:origLink></entry><entry gd:etag="W/&quot;DUQMQXY9fCp7ImA9WhRaFkw.&quot;"><id>tag:blogger.com,1999:blog-8033919830443655972.post-6181845943523992831</id><published>2012-02-19T07:39:00.000+05:30</published><updated>2012-02-19T07:39:40.864+05:30</updated><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2012-02-19T07:39:40.864+05:30</app:edited><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="कानून" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="सुरक्षा" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="अधिकार" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="आतंक" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="सुधार" /><title>आंतरिक सुरक्षा और राजनीति</title><content type="html">&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;
&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; आजकल जिस तरह से राष्ट्रीय आतंकवाद रोधी केंद्र का विरोध किया जा रहा है और केंद्र सरकार इसे उसके और राज्यों &lt;span id="47_TRN_q"&gt;की&lt;/span&gt; साझा  ज़िम्मेदारियों में से एक बता रही है उससे यही लगता है कि आज भी देश ने यह नहीं सीखा है कि भविष्य में आने वाली चुनौतियों से किस प्रकार निपटा जाना चाहिए ? यह भी सही है कि वैश्विक आतंक की चपेट में भारत भी है और आने वाले समय में यह किस तरह की चुनौतियाँ और समस्याएं लेकर सामने आएगा यह कोई नहीं कह सकता है इससे निपटने &lt;span id="47_TRN_2q"&gt;का एक ही तरीका है कि समय बद्ध &lt;/span&gt;&lt;span id="47_TRN_2q"&gt;तरीके से &lt;span id="47_TRN_34"&gt;इससे उत्पन्न होने वाले खतरों के बारे में नीतियां बनायीं जाती रहें और उन पर समय रहते अमल भी किया जाये. केवल&lt;span id="47_TRN_3x"&gt;&lt;/span&gt;&lt;span id="47_TRN_3w"&gt;&lt;/span&gt; चिंता करने से कुछ भी नहीं होने वाला &lt;span id="47_TRN_47"&gt;है और जिस तरह से मुंबई हमले के बाद केंद्र ने एनएसजी के चार केंद्र गठित किये जाने का फैसला किया था उससे भी &lt;span id="47_TRN_54"&gt;आतंक&lt;/span&gt; से निपटने में कुछ तेज़ी दिखाई जा सकेगी. आतंक का कोई चेहरा नहीं है &lt;span id="47_TRN_66"&gt;और वह&lt;/span&gt; अचानक ही &lt;span id="47_TRN_69"&gt;हमारे बीच में&lt;/span&gt; से निकल &lt;span id="47_TRN_k5"&gt;कर&lt;/span&gt; सामने आ जाता है और उसके इस स्वरुप के कारण ही उससे निपटने में बहुत कठिनाई होती है. अपने ख़ुफ़िया तंत्र को मज़बूत करने और सूचनाओं के तेज़ी से आदान प्रदान करने की क्षमता का विकास करने के बाद ही हम इससे अच्छे से लड़ सकते &lt;span id="47_TRN_l0"&gt;&lt;span id="47_TRN_l2"&gt;हैं पर नेता पहले&lt;span id="47_TRN_l8"&gt;&lt;/span&gt; आपस&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span id="47_TRN_m1"&gt;&lt;/span&gt; में ही तो लड़ लें ?&amp;nbsp; &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; एनसीटीसी पर जिस तरह से नाक का सवाल &lt;span id="47_TRN_6n"&gt;बनता जा रहा है उसके बाद यह नहीं लगता कि इसके लिए आने वाला समय में इस पर कुछ सार्थक प्रगति हो &lt;span id="47_TRN_7c"&gt;सकेगी ? जिस तरह से केंद्र मौजूदा प्रावधानों के तहत इस एक समन्वित केंद्र की योजना पर काम करना चाहता है वह आज की आवश्यकता बन चुका है और राज्यों को आख़िर किन मुद्दों पर यह लगता है कि इससे उनके अधिकारों का हनन होता है ? क्या संविधान में सुरक्षा की ज़िम्मेदारी केवल राज्यों को ही दी गयी है क्या केंद्र &lt;span id="47_TRN_97"&gt;ऐसे&lt;/span&gt;&lt;span id="47_TRN_96"&gt;&lt;/span&gt; किसी मसले पर राज्यों के साथ मिलकर कोई नए केंद्र स्थापित नहीं कर सकता है ? &lt;span id="47_TRN_9r"&gt;ऐसा कुछ भी नहीं है क्योंकि जब कोई आतंकी हमला होता है तो सम्बंधित राज्य सरकार तुरंत ही इसकी ज़िम्मेदारी केंद्र पर डाल देती है और यह कह कर बचने का प्रयास करती है कि &lt;span id="47_TRN_at"&gt;उसे&lt;/span&gt;&lt;span id="47_TRN_av"&gt;&lt;/span&gt; केंद्रीय सुरक्षा तंत्र से कोई सूचना &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span id="47_TRN_6n"&gt;&lt;span id="47_TRN_7c"&gt;&lt;span id="47_TRN_9r"&gt;नहीं मिली थी ? अब इस स्थिति में केंद्र की सरकार या ख़ुफ़िया एजेंसियां कहाँ से कुछ ढूंढ कर लायें जब उनका राज्यों के साथ बेहतर समन्वय ही नहीं होता &lt;span id="47_TRN_by"&gt;है और घटना के बाद दोनों ही अलग अलग दिशाओं में काम करती नज़र आती हैं ? क्या देश के किसी राज्य में होने वाली घटनाओं के लिए केवल राज्य सरकारों या केंद्र को ही ज़िम्मेदार ठहराया जा सकता है ?&amp;nbsp; क्या देश के हित के लिए केंद्र और राज्य के नेता अपने कुछ &lt;span id="47_TRN_lw"&gt;स्वार्थों&lt;/span&gt; को छोड़ पायेंगें ?&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;span id="47_TRN_6n"&gt;&lt;span id="47_TRN_7c"&gt;&lt;span id="47_TRN_9r"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp; अब समय आ गया है कि हर बात में संविधान और अधिकारों की दुहाई देना बंद कर देनी &lt;span id="47_TRN_dq"&gt;चाहिए &lt;/span&gt;और अगर कोई ऐसा अधिकार जो राज्यों या केंद्र को अभी तक मिला हुआ है और वह इस तरह के कड़े &lt;span id="47_TRN_m3"&gt;प्रावधान &lt;/span&gt; बनाने में आड़े आता है तो उसे ही बदलने का काम भी करना चाहिए क्योंकि &lt;span id="47_TRN_ew"&gt;देश अब वायदों पर नहीं चल सकता है और इन झूठे वायदों से बाहर निकल कर बदलाव को सही दिशा देने की आवश्यकता आ गयी है. इससे बचकर केवल संविधान की बातें करने से काम नहीं चलने वाला है. देश को आतंक से लड़ने,&lt;span id="47_TRN_gb"&gt;&lt;/span&gt; देश की &lt;span id="47_TRN_gc"&gt;संपत्ति और नागरिकों की &lt;span id="47_TRN_gi"&gt;सुरक्षा&lt;/span&gt;&lt;/span&gt; के लिए जिन भी प्रावधानों की आवश्यकता है उन्हें तत्काल किया जाना &lt;span id="47_TRN_gv"&gt;चाहिए अब यह कहने से काम नहीं चलने वाला ही कि क्या हो सकता है और क्या नहीं ? जब संविधान बनाया गया था तब ऐसी चरम स्थिति की कल्पना भी नहीं की गयी थी पर आज इस बारे में सोचने की आवश्यकता है तो संविधान के अनुच्छेदों में आवश्यक बदलाव भी करने चाहिए और अगर वर्तमान कानून से ही उद्देश्य की &lt;span id="47_TRN_ir"&gt;पूर्ति&lt;/span&gt; हो सकती है तो उन पर अमल किया जाना चाहिए. देश के सामने आसन्न  संकट की अब अनदेखी नहीं की जा &lt;span id="47_TRN_jc"&gt;सकती है क्योंकि इससे भले ही नेताओं का कुछ न बिगड़ रहा हो पर आने वाले समय में देश को इससे बहुत नुकसान हो सकता है.&amp;nbsp;&lt;/span&gt; &lt;/span&gt; &amp;nbsp; &lt;/span&gt;&amp;nbsp; &lt;/span&gt;&lt;span id="47_TRN_9q"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8033919830443655972-6181845943523992831?l=seedhikharibaat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel="replies" type="application/atom+xml" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/feeds/6181845943523992831/comments/default" title="टिप्पणियाँ भेजें" /><link rel="replies" type="text/html" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/02/blog-post_19.html#comment-form" title="1 टिप्पणियाँ" /><link rel="edit" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/6181845943523992831?v=2" /><link rel="self" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/6181845943523992831?v=2" /><link rel="alternate" type="text/html" href="http://feedproxy.google.com/~r/SeedhiKhariBaat/~3/2JEBD579pVk/blog-post_19.html" title="आंतरिक सुरक्षा और राजनीति" /><author><name>Dr Ashutosh Shukla</name><uri>https://profiles.google.com/100257269155750831732</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel="http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail" width="32" height="32" src="//lh4.googleusercontent.com/-m8s_63KhFOs/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAIjw/Or7VxwQJcqY/s512-c/photo.jpg" /></author><thr:total>1</thr:total><feedburner:origLink>http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/02/blog-post_19.html</feedburner:origLink></entry><entry gd:etag="W/&quot;Ck4CQHY8cCp7ImA9WhRaFU4.&quot;"><id>tag:blogger.com,1999:blog-8033919830443655972.post-4489036284989318961</id><published>2012-02-18T07:39:00.000+05:30</published><updated>2012-02-18T07:39:21.878+05:30</updated><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2012-02-18T07:39:21.878+05:30</app:edited><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="अधिकार" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="आतंक" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="अभिव्यक्ति" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="अपराध" /><title>आतंक से लड़ाई कैसे ?</title><content type="html">&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;
&amp;nbsp;&amp;nbsp; केंद्र सरकार द्वारा देश में आतंक से लड़ने के लिए बनाये जा रहे  राष्ट्रीय आतंकवाद रोधी केंद्र (एनसीटीसी) को लेकर एक बार फिर से अधिकारों की बहस शुरू हो चुकी है. पूरे विश्व में बढ़ती आतंकी घटनों का साया जिस तरह से भारत पर भी पड़ता रहता है उसे देखते हुए ही एक केंद्रीयकृत व्यवस्था की आवश्यकता महसूस की जा रही थी पर लगता है कि देश में केवल अपने अधिकारों के लिए चिल्लाने वाले नेताओं को यह समझ नहीं आता है कि अधिकारों की मांग करने से पहले अपने कर्तव्यों को ठीक ढंग से निभाने की कोशिश तो की जानी चाहिए. इस मसले पर नवीन पटनायक, ममता बनर्जी, नितीश कुमार और जयललिता अपने मत रख चुकी हैं उससे यही लगता है कि ये प्रावधान भी अन्य कानूनों की तरह ही विवादों में फंसने जा रहा है. अभी तक भाजपा शासित किसी राज्य की तरफ़ से इसका कोई औपचारिक विरोध तो नहीं किया गया है पर आने वाले समय में वह भी इस मुद्दे पर अपने को अलग से कुछ विशेष दिखने का प्रयास भी करने ही वाली है जिससे इस तरह के नए प्रयासों को झटका ही लगने वाला है. जब आतंक से लड़ने की बात की जाये तो किसी भी स्थिति में यह नहीं सोचा जाना चाहिए कि इससे किसके अधिकारों का हनन हो रहा है क्योंकि जो इस तरह से हमले करते हैं उनसे लड़ने के लिए हमें भी अपने कुछ अधिकारों पर विशेष परिस्थिति  में कुछ समझौते करने ही होंगें.&amp;nbsp; &lt;br /&gt;
&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;  &amp;nbsp; अभी तक जिस भी तरह से देश में आतंक से निपटा जाता है उस स्थिति में कोई भी समन्वित प्रयास और भी अच्छे परिणाम दे सकता है पर कोई बड़ी घटना होने पर केंद्र-राज्य के बीच जिस तरह से अलग अलग मत दिखाई देने लगते हैं उसके बाद मुख्य मुद्दा पीछे छूट जाया करता है और आतंक से लड़ने की मज़बूत चाह केवल भाषणों में ही सिमट जाती है. केंद्रीय गृह सचिव ने इस नए विवाद के बाद इस अधिसूचना का यह यह कहकर बचाव किया है कि इसमें कोई नयी बात नहीं कही गयी है अभी तक ग़ैर कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम के तहत ही   आतंक से लड़ा जा रहा था पर अब इस बात की आवश्यकता महसूस की जा रही है कि आतंक को अन्य गतिविधियों से अलग कर दिया जाये जिससे इससे प्रभावी ढंग से लड़ा जा सके. केन्द्रीय गृह सचिव ने यह स्पष्ट किया कि चूंकि इसमें कोई नए प्रावधान नहीं किये जा रहे थे इसलिए राज्यों से मशवरा करने की आवश्यकता नहीं थी क्योंकि इस तरह का कानून पहले से ही देश में मौजूद है पर आतंक से लड़ने के लिए इस केंद्र की आवश्यकता है उसे पूरा किया जा रहा है. केवल आतंक से जुड़े मसलों से निपटने के लिए एक नए केंद्र को मौजूदा कानून का तहत ही बनाया जा रहा है और किसी भी तरह से कोई अन्य कानून अस्तित्व में नहीं आने वाला है.&lt;br /&gt;
&amp;nbsp;&amp;nbsp; सैधांतिक तौर पर यह बात बिलकुल सही है कि जब कुछ काम नया नहीं किया जा रहा है तो उस बारे में विमर्श की आवश्यकता नहीं थी पर जब सभी जाँच एजेंसियों के बीच समन्वय की बात होती है तो राज्यों को लगता है कि उनके संघीय अधिकारों का हनन किया जा रहा है ? देश में आतंकी हर समय हर तरह के अधिकारों के हनन में लगे रहते हैं तो किसी राज्य को वे क्यों नहीं दिखाई देते हैं ? क्यों विभिन्न राज्यों की जांच एजेंसियां कई बार केवल हवा में ही हाथ पैर मारती नज़र आती हैं ? अगर ऐसी कोई व्यवस्था ईमानदारी से लागू की जाये तो पूरे देश की सुरक्षा चिंताओं को साझी बने जा सकता है जिससे देश के एक भाग में किसी गतिविधि में शामिल व्यक्ति के लिए पूरे देश में चेतावनी जारी हो सकती है जिससे आने वाले समय में बचकर भाग निकलने वाले आतंकियों के लिए सब कुछ करना इतना आसान नहीं रह पायेगा. क्या केंद्र सरकार द्वारा चलायी जा रही विकास और अन्य योजनायें भी राज्यों के संघीय अधिकारों का हनन करती हैं ? जब किसी योजना के अंतर्गत धनराशि आती है तो किसी को यह नहीं लगता कि उसके अधिकारों का हनन हो रहा है पर जब जवाबदेही तय करने की बात होती है तो सभी को यह लगता है कि जैसे इस तरह के कानून से सबसे पहले उन्हें ही बंद किया जाने वाला है ? नेता लोग देश को कब तक इस तरह के झगड़ों में उलझाते रहेंगें और मुख्य मुद्दों से ध्यान भटकाने का काम करते रहेंगें ?  &lt;br /&gt;
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8033919830443655972-4489036284989318961?l=seedhikharibaat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel="replies" type="application/atom+xml" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/feeds/4489036284989318961/comments/default" title="टिप्पणियाँ भेजें" /><link rel="replies" type="text/html" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/02/blog-post_18.html#comment-form" title="1 टिप्पणियाँ" /><link rel="edit" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/4489036284989318961?v=2" /><link rel="self" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/4489036284989318961?v=2" /><link rel="alternate" type="text/html" href="http://feedproxy.google.com/~r/SeedhiKhariBaat/~3/f4Abl2TUk_k/blog-post_18.html" title="आतंक से लड़ाई कैसे ?" /><author><name>Dr Ashutosh Shukla</name><uri>https://profiles.google.com/100257269155750831732</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel="http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail" width="32" height="32" src="//lh4.googleusercontent.com/-m8s_63KhFOs/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAIjw/Or7VxwQJcqY/s512-c/photo.jpg" /></author><thr:total>1</thr:total><feedburner:origLink>http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/02/blog-post_18.html</feedburner:origLink></entry><entry gd:etag="W/&quot;DkIBRn88fCp7ImA9WhRaFEk.&quot;"><id>tag:blogger.com,1999:blog-8033919830443655972.post-4146515597631003293</id><published>2012-02-17T07:39:00.000+05:30</published><updated>2012-02-17T07:39:17.174+05:30</updated><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2012-02-17T07:39:17.174+05:30</app:edited><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="सहायता" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="सुरक्षा" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="सरकार" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="अराजकता" /><title>पाक और नेटो</title><content type="html">&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;
&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; पाकिस्तान और अमेरिका के बीच रोज़ ही बनते बिगड़ते समीकरणों के बीच पाक ने नेटो के रसद पहुँचाने वाले जहाजों को अपने वायु क्षेत्र से उड़ान की अनुमति दे दी है. इस सम्बन्ध में दोनों की तरफ से यह स्पष्ट नहीं किया गया कि यह कब से शुरू हुआ और इसके लिए किस स्तर पर समझौता किया गया ? अफगानिस्तान में नेटो और अमेरिका की भागीदारी को देखते हुए यह स्पष्ट है कि दोनों देशों के लिए इस तरह की आपसी सहमति बहुत आवश्यक है क्योंकि इससे दोनों अपने तात्कालिक लाभ उठा लेना चाहते हैं. जिस तरह से वर्तमान में इस्राइल के साथ ईरान की ज़बानी झडपें चल रही हैं तो निकट भविष्य में कुछ भी हो सकता है इसके लिए अमेरिका पहले से ही इस क्षेत्र में अपने को सामरिक दृष्टि से मज़बूत करना चाहता है. इस्राइल राजनयिकों पर जिस तरह से सुनियोजित हमले किये गया उसके बाद से तनाव चरम पर है क्योंकि इस्राइल उन देशों में से नहीं है जो किसी भी तरह से मामले को रफ़ा दफ़ा करने में विश्वास करता हो उसकी एक नीति है कि वह दुश्मन को दुनिया में किसी भी हिस्से में खोजकर उसको ख़त्म करने में विश्वास करता है और यही नीति आने वाले समय में मध्यपूर्व में बड़ा संकट खड़ा कर सकती है.&lt;br /&gt;
&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; पाकिस्तान से उड़ान की अनुमति हासिल होने के बाद नेटो आने वाले समय में ईरान पर किसी भी हमले के समय अपने इस क्षेत्र से आराम से आवाजाही कर सकता है क्योंकि उसे भी हमले करने के लिए सुरक्षित मार्ग की आवश्यकता होगी ? अफगानिस्तान से उसके और नेटो के सैनिकों के लिए कुछ भी करना तभी आसान होगा जब उसके लिए पाक का मार्ग सुरक्षित रूप से खुला रहे इसके लिया उसके प्रयास अभी से दिखाई देने लगे हैं. पाक को अमेरिका की बहुत ज़रुरत हमेशा से ही रही है क्योंकि जब भी वहां संकट होता है तो अमेरिकी मदद के कारण अमेरिका जिसे चाहता हैं अपने अनुसार हाथ रखकर सत्ता कि चाभी सौंप देता है. ऐसी स्थिति में आख़िर कब तक पाक अमेरिका से दूर रह पायेगा जब वहां आज सरकार पूरी तरह से संकट में घिरी नज़र आ रही है. पिछले वर्ष ओसामा के मरने के बाद से ही पाक सेना की जो किरकिरी हुई थी उसके बाद से अभी तक उसके मन में कसक तो है पर सेना भी किसी स्थिति में अमेरिका के खिलाफ नहीं जा सकती है क्योंकि उसका पूरा दारोमदार अमेरिका पर ही टिका हुआ है.&lt;br /&gt;
&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; पाक के बनने के समय से ही अमेरिका और चीन उसका फायदा उठाते रहे हैं और यह बात पाक को भी पता जिस कारण से ये सभी देश और संगठन एक दूसरे के साथ तो हैं पर एक दूसरे पर विश्वास बिलकुल भी नहीं कर सकते हैं क्योंकि उससे इनको बहुत नुकसान होता है ? पाक जिस तरह से इनके हाथों का खिलौना बना हुआ है उससे यही लगता है कि उसके पास पाने और खोने के लिए बहुत अधिक है ही नहीं जिससे भी वह अपने वजूद को दांव पर लगाकर इस तरह के मजबूरी बारे समझौते करने पर बाध्य हो जाता है. अमेरिका और नेटो को आज ईरान के परिदृश्य में पाक के सैनिक अड्डों की आवश्यकता पड़ने वाली है इसके लिए ही उसकी तैयारियां चल रही हैं और आने वाले समय में कुछ और सुविधाएँ देकर अमेरिका पाक को अपने बस में कर ही लेगा जिसके बाद वह वहां से आराम से अपनी उड़ाने भर सकेगा. पाक हमेशा से ही जिस तरह से अमेरिका के हितों को साधने का एक साधन बनता रहा है इस बार भी वह उसी ढर्रे पर रहेगा भले ही वह अपनी जनता को दिखने के लिए चाहे जो कहता रहे पर होने वाला वही है जो अमेरिका को मंज़ूर होगा. &amp;nbsp;  &amp;nbsp; &amp;nbsp; &lt;br /&gt;
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8033919830443655972-4146515597631003293?l=seedhikharibaat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel="replies" type="application/atom+xml" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/feeds/4146515597631003293/comments/default" title="टिप्पणियाँ भेजें" /><link rel="replies" type="text/html" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/02/blog-post_17.html#comment-form" title="0 टिप्पणियाँ" /><link rel="edit" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/4146515597631003293?v=2" /><link rel="self" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/4146515597631003293?v=2" /><link rel="alternate" type="text/html" href="http://feedproxy.google.com/~r/SeedhiKhariBaat/~3/Ahx3sfI5IUk/blog-post_17.html" title="पाक और नेटो" /><author><name>Dr Ashutosh Shukla</name><uri>https://profiles.google.com/100257269155750831732</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel="http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail" width="32" height="32" src="//lh4.googleusercontent.com/-m8s_63KhFOs/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAIjw/Or7VxwQJcqY/s512-c/photo.jpg" /></author><thr:total>0</thr:total><feedburner:origLink>http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/02/blog-post_17.html</feedburner:origLink></entry><entry gd:etag="W/&quot;DU4DQH84eip7ImA9WhRaE0g.&quot;"><id>tag:blogger.com,1999:blog-8033919830443655972.post-4964893956371791983</id><published>2012-02-16T07:36:00.000+05:30</published><updated>2012-02-16T07:36:11.132+05:30</updated><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2012-02-16T07:36:11.132+05:30</app:edited><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="अधिकार" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="समाज" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="आतंक" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="सरकार" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="अराजकता" /><title>ईरान, पश्चिम और भारत</title><content type="html">&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;
&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; जिस तरह से ईरान और पश्चिमी देशों देशों के संबंधों में तेज़ी से बिगाड़ होता जा रहा है उससे यही लगता है कि अगर समय रहते इस मसले पर कुछ नहीं किया गया तो आने वाले समय में खाड़ी में एक बार फिर से अशांति पैदा हो सकती है. इस मसले में ईरान ने जिस तरह से यूरेनियम के २० % संवर्धन की बात सरकारी टीवी पर मानी है उससे यही लगता है कि वह अब अपने परमाणु कार्यक्रम को छिपाना भी नहीं चाहता है. पश्चिमी देशों की केवल तेल पर प्रभाव जमाने की कोशिश के चलते ही जिस तरह से अरब जगत और मध्यपूर्व में लगातार अशांति बनी रहती है उसका आज के समय में कोई औचित्य नहीं है. इस्लामी देशों को यह लगता है कि अमेरिका एक षड़यंत्र के तहत उनके देशों में गड़बड़ी फैलाना चाहता है जबकि इन्हीं देशों में तानाशाह या राजा लोग अपने स्वार्थों के कारण पश्चिमी देशों को लगातार अपने यहाँ काम करने की अनुमति देते रहते हैं जिसके कारण ही जनता के अधिकारों का हनन होने के साथ उसमें इस बात के लिए असंतोष बढ़ता जाता है और कोई चरमपंथी संगठन उन्हें अपने अनुसार ढालने में सफल हो जाता है. आज के वैश्विक परिदृश्य में किसी भी देश के लिए इस तरह से गैर ज़िम्मेदार रवैया अपनाने का कोई कारण नज़र नहीं आता है.&lt;br /&gt;
&amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; आज की ऊर्जा ज़रूरतों के चलते सभी देशों को इस बात की पूरी आज़ादी है कि वे अपने भविष्य के बारे में आज ही नीतियां बनायें और उनको पूरा करने के लिए किसी भी तरह से प्रयास करें पर आज के बढ़ते आतंक के परिदृश्य में परमाणु शक्ति संपन्न देशों को यह लगता है कि अब अगर किसी भी देश के पास परमाणु शक्ति आती है तो वे उसका दुरूपयोग पश्चिमी देशों के ख़िलाफ़ ही करने वाले हैं जो कि नितांत उनके विचार हैं. क्या किसी देश के पास यह उत्तर है कि आने वाले समय में आख़िर किस तरह से विश्व की ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा किया जायेगा ? इस सम्बन्ध में इस तरह के विवादों को पीछे छोड़कर कुछ प्रयास साथ में किये जाने की आवश्यकता है क्योंकि अब कोई एक देश आने वाले समय में इस चुनौती का सामना अकेला नहीं कर पायेगा. जहाँ तक ईरान के परमाणु हथियार बनाए जाने को इस्लामी परमाणु बम का नाम क्यों दिया जाता है उसका कोई जवाब किसी के पास नहीं है और जिस तरह से ईरान और पश्चिमी देश अपने अपने रुख पर अड़े रहते हैं उससे इस समस्या का समाधान नहीं निकल सकता है. पाक और ईरान के परमाणु कार्यक्रम में सबसे बड़ा अंतर यही है कि पाक के बम से पश्चिम को कोई खतरा नहीं है और ईरान का बम सीधे इस्राइल को अपनी ज़द में ले सकता है जो कि युद्ध की तरफ जाने वाला कदम होगा. &amp;nbsp; &amp;nbsp; &lt;br /&gt;
&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; आज के समय में यह सवाल भी बहुत बड़ा है कि इस स्थिति में भारत का रुख़ क्या होना चाहिए क्योंकि भारत ईरान से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल आयात करता है और उसका बड़ा व्यापारिक साझीदार है. इस्राइल के राजनयिकों पर जिस तरह से दिल्ली में भी हमला किया गया उससे भारत सरकार पर भी दबाव बना है हालांकि अभी तक ईरान के शामिल होने की कोई बात सामने नहीं आई है फिर भी शक़ की सुई उसकी तरफ ही घूमती है. जिस तरह से अल कायदा ने अपने पाँव पूरे विश्व में पसारे हैं और अगर वह किसी भी तरह से ईरान की अपरोक्ष मदद कर रहा है तो अब ईरान की ज़िम्मेदारी है कि वह अपनी मध्यपूर्व की लड़ाइयाँ और पूर्वाग्रह वहीं पर निपटाए क्योंकि भारत ने उसके ख़िलाफ़ कुछ भी नहीं किया है और हमेशा से ही भारत ने पश्चिमी देशों के दबाव के बाद भी ईरान से अपने रिश्तों को मजबूती से बनाये रखा है पर इस तरह की घटनाएँ ईरान के बारे में भारत के आम नागरिकों के बारे में संदेह उत्पन्न करती हैं क्योंकि तब यह सवाल भी उठ सकता है कि ५ हज़ार वर्षों के संबंधों का ईरान इसी तरह से क्यों जवाब दे रहा है और उस समय कुछ लोग इसे केवल इस्लामी हमले के रूप में दिखाना चाहेंगें ? इस घटना के बाद अगर ईरान के कोई भी तत्व शामिल हों तो ईरान के चेतने का समय है वरना भारत जैसा एक स्थायी और समझदार भागीदार भी उसके साथ उस मजबूती से नहीं खड़ा रह पायेगा. क्या अब ये सम्बन्ध बनाये रखने की ज़िम्मेदारी केवल भारत की ही है ? &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &lt;br /&gt;
&amp;nbsp; &lt;br /&gt;
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8033919830443655972-4964893956371791983?l=seedhikharibaat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel="replies" type="application/atom+xml" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/feeds/4964893956371791983/comments/default" title="टिप्पणियाँ भेजें" /><link rel="replies" type="text/html" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/02/blog-post_16.html#comment-form" title="1 टिप्पणियाँ" /><link rel="edit" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/4964893956371791983?v=2" /><link rel="self" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/4964893956371791983?v=2" /><link rel="alternate" type="text/html" href="http://feedproxy.google.com/~r/SeedhiKhariBaat/~3/qro8RL7_AOM/blog-post_16.html" title="ईरान, पश्चिम और भारत" /><author><name>Dr Ashutosh Shukla</name><uri>https://profiles.google.com/100257269155750831732</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel="http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail" width="32" height="32" src="//lh4.googleusercontent.com/-m8s_63KhFOs/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAIjw/Or7VxwQJcqY/s512-c/photo.jpg" /></author><thr:total>1</thr:total><feedburner:origLink>http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/02/blog-post_16.html</feedburner:origLink></entry><entry gd:etag="W/&quot;C0EBQn09eyp7ImA9WhRaEko.&quot;"><id>tag:blogger.com,1999:blog-8033919830443655972.post-6738472308056172328</id><published>2012-02-15T07:37:00.000+05:30</published><updated>2012-02-15T07:37:33.363+05:30</updated><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2012-02-15T07:37:33.363+05:30</app:edited><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="कर्तव्य" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="भ्रष्टाचार" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="अधिकार" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="समाज" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="सुधार" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="सरकार" /><title>भ्रष्टाचारी, सेवानिवृत्ति और कानून</title><content type="html">&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;
&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; केंद्र सरकार ने भ्रष्ट सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के रिटायर होने के कारण उनके ख़िलाफ़ जांच में होने वाली कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए सभी विभागों को दिशा-निर्देश जारी किये हैं और उनसे रिटायर होने के बाद जाँच में आने वाली कठिनाइयों के बारे में पूछा है. यह एक ऐसा कदम है कि अगर इस बारे में कोई सही कदम उठा लिया गया तो आने वाले समय में सेवा के अंतिम वर्षों में भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाले लोगों की शामत ही आ जाने वाली है. अभी तक किसी भी तरह से जुगाड़ करके ये भ्रष्टाचारी अपने रिटायर होने तक फाइल को दबवा देते हैं और रिटायर होने के बाद इन पर किस तरह से कार्यवाही की जाये इस बारे में कानून की ख़ामोशी ही जांच एजेंसियों के काम को और भी कठिन बना देती है. उस स्थिति में कोई भी सम्बंधित विभाग या जांच एजेंसी के पास जांच करने के अवसर बहुत कम हो जाते हैं. अब जिस तरह से जनता में भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ गुस्सा है उसे देखते हुए पूरे तंत्र में सुधार करने की बहुत आवश्यकता है क्योंकि आम लोगों का इन पुराने नियमों और इनकी कुछ कमियों के ख़िलाफ़ रोष बढ़ता ही जा रहा है. जिसे कुछ ठोस और प्रभावी पर सरल प्रयासों के द्वारा सामने लाना ही होगा.&lt;br /&gt;
&amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp; देश में एक भ्रष्टाचार को संगठित अपराध घोषित कर दिया जाना चाहिए और इसके अंतर्गत केवल सरकारी अधिकारी/ कर्मचारी ही नहीं वरन हर भारतीय नागरिक को शामिल किया जाना चाहिए. तंत्र की कमियों पर पर्दा डालने के स्थान पर सबसे पहले राजनैतिक तंत्र को ही अपने गिरेबान में झांक कर देखना चाहिए और अपने लिए ऐसा कानून बनाना चाहिए जिसमें उनके द्वारा किये जाने वाले भ्रष्टाचार की जांच भी त्वरित गति से समयबद्ध तरीके से हो सके ? जब तक देश के नेता इस काम की शुरुवात अपने से नहीं करेंगें तो भ्रष्टाचार कम नहीं होगा क्योंकि कारण चाहे कुछ भी हो भ्रष्टाचार करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों में भय सिर्फ़ इसलिए ही नहीं दिखाई देता है क्योंकि वे जानते हैं कि कहीं न कहीं से हिस्से की बंदरबांट करके अपनी खाल को बचाया जा सकता है. ऐसा करके वे न केवल अपने को सुरक्षित समझते हैं बल्कि किसी भी स्तर तक भ्रष्टाचार करने में नहीं चूकते हैं. क्या कोई ऐसी भी सरकार हो सकती है जिसको दूसरों के भ्रष्टाचार के बारे में तो सब पता चल जाये और अपने करीबी लोगों के बारे में कुछ भी न पता चले ? फिर भी ऐसे लोग महत्वपूर्ण पदों पर जमे बैठे रहते हैं और जनता की कमी को हड़पने में ही लगे रहते हैं इसके पीछे क्या मजबूरी हो सकती है ?&lt;br /&gt;
&amp;nbsp; &amp;nbsp; आज देश को भ्रष्टाचार से निपटने के लिए विशेष अदालतों की आवश्यकता है और इनका सारा काम काज हर दिन नेट पर डाला जाना अनिवार्य होना चाहिए जिससे किसी भी केस में क्या हो रहा है यह आम लोग भी कभी भी जान सकें ?कई बार ऐसा होता है कि ख़बरी दुनिया से जुड़े कुछ लोग अपने किन्हीं छिपे स्वार्थों के कारण भी मानकों की अनदेखी कर जाते हैं जो कि कहीं से कानून विरुद्ध तो नहीं होते पर उनके बारे में खुलासा हो जाने पर वह स्वार्थ जग जाहिर हो सकते हैं. क्या कारण है कि कहीं से भी किसी भी तंत्र में भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ लड़ने की कोशिश या बेचैनी अन्दर से नहीं दिखती है क्यों हमेशा ही किसी पीड़ित को किसी संघर्ष के लिए भूमि तैयार करनी पड़ती है ? देश में जो गुस्सा है वह कहीं से भी इस स्थिति में क्यों नहीं पहुँच पाता है कि कोई भी उसके ख़िलाफ़ बोलने से डरने लगे ? शयद इस तरह के अभियानों में भी हमारे लोगों के निजी स्वार्थ आड़े आ जाते हैं और हर बात का श्रेय लेने के चक्कर में हम यह भूल जाते हैं कि ऐसा काम या अभियान देश के हित में होता है न कि व्यक्तिगत हित के लिए ? गाँधी जी से आन्दोलन की प्रेरणा लेने वाले भी यह भूल जाते हैं कि वे अपनी बात को अपने विरोध करने के तरीके से रखते थे और कहीं से भी यह नहीं चाहते थे कि उनका नाम हो जाये. अब देश को आगे बढाने के लिए कुछ शुरुवात तो करनी ही होगी...&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &lt;br /&gt;
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8033919830443655972-6738472308056172328?l=seedhikharibaat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel="replies" type="application/atom+xml" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/feeds/6738472308056172328/comments/default" title="टिप्पणियाँ भेजें" /><link rel="replies" type="text/html" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/02/blog-post_15.html#comment-form" title="0 टिप्पणियाँ" /><link rel="edit" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/6738472308056172328?v=2" /><link rel="self" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/6738472308056172328?v=2" /><link rel="alternate" type="text/html" href="http://feedproxy.google.com/~r/SeedhiKhariBaat/~3/zDPyKEsGxV0/blog-post_15.html" title="भ्रष्टाचारी, सेवानिवृत्ति और कानून" /><author><name>Dr Ashutosh Shukla</name><uri>https://profiles.google.com/100257269155750831732</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel="http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail" width="32" height="32" src="//lh4.googleusercontent.com/-m8s_63KhFOs/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAIjw/Or7VxwQJcqY/s512-c/photo.jpg" /></author><thr:total>0</thr:total><feedburner:origLink>http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/02/blog-post_15.html</feedburner:origLink></entry><entry gd:etag="W/&quot;D0UNQnw9eyp7ImA9WhRaEUU.&quot;"><id>tag:blogger.com,1999:blog-8033919830443655972.post-9095998501854467653</id><published>2012-02-14T07:38:00.000+05:30</published><updated>2012-02-14T07:38:13.263+05:30</updated><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2012-02-14T07:38:13.263+05:30</app:edited><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="पुलिस" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="सुरक्षा" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="आतंक" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="सरकार" /><title>मैग्नेटिक बम और दिल्ली</title><content type="html">&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;
&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; एक बार फिर से दिल्ली में चलती हुई इस्राइली दूतावास की गाड़ी पर जिस तरह से मैग्नेटिक बम लगाकर विस्फोट कराया गया उससे यही लगता है कि कहीं न  कहीं अभी भी दिल्ली में आतंकियों के स्लीपिंग सेल काम कर रहे हैं. जिस तरह से इस्राइली दूतावास की गाड़ी को निशाना बनाया गया उससे इस विस्फोट में लेबनान और फिलिस्तीनी चरमपंथियों के हाथ होने से इनकार नहीं किया जा सकता है ? आम तौर पर इस तरह के खतरों के चलते ही पूरी दुनिया में इसराइल अपनी सभी गतिविधियों को बहुत शांत होकर चलाता है और उसके लोग कर्मचारी आसानी से किसी की नज़रों में नहीं आते हैं जिससे उन पर हमला किया जाना इतना आसान नहीं होता है पर दिल्ली में जहाँ पर इसराइल अपने पर इस तरह के ख़तरे कम करके देखता था अब यहाँ भी वह अतिरिक्त सतर्कता बरतने वाला है. दिल्ली में वैसे भी आतंकी हमेशा से कुछ न कुछ करने की फ़िराक़ में रहा करते हैं पर इधर कुछ अतिरिक्त सतर्कता के कारण उनके लिए किसी बड़ी घटना को अंजाम देना मुश्किल होता जा रहा है ऐसे में चलती गाड़ी पर इस तरह का पहला हमला करके आतंकियों ने मैग्नेटिक बम का प्रयोग किया है जिससे निपटने के लिए अभी तक बहुत कारगर तकनीकी नहीं विकसित की जा सकी है. &lt;br /&gt;
&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp; अभी तक दिल्ली में इस तरह के बम का इस्तेमाल नहीं किया गया है पर भारत में पूर्वोत्तर के कुछ आतंकी संगठन इस तरह से विस्फोट किया करते हैं इस तरह के हमले इसराइल और मध्य पूर्व में बहुत किये जाते हैं. उससे भारत में सुरक्षा चिंताएं और भी बढ़ जाने वाली हैं क्योंकि अभी तक मध्यपूर्व के किसी भी आतंकी संगठन की संलिप्तता भारत में नहीं पाई गयी हैं और अगर अब उसे अपनी रणनीति बदलते हुए आईएम या अन्य किसी भारतीय आतंकी संगठन से मिलकर इस तरह का हमला किया है तो यह भारत के लिए ख़तरनाक सन्देश हो सकता है. वैसे पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षा बलों के कुछ प्रभावी ढंग से काम कर पाने के कारण आतंकियों के लिए उस तरह से काम करना आसान नहीं रह गया है फिर भी विश्व को दिखाने के लिए वे अपनी इस तरह की हरकतों को चलाते रहना चाहते हैं जिसमें उनके कम संसाधन लगें और वे चर्चा में बने रहें. भारत में जब हर तरह की चुनौतियों से निपटने के लिए हर दिशा में काम किया जा रहा है तो ऐसी स्थिति में और अधिक चौकन्ना होने की आवश्यकता है. देश में विविधता और भागोलिक व्यापकता को देखते हुए अब इस मुद्दे पर भी नए सिरे से सोचने की आवश्यकता है.&lt;br /&gt;
&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; सुरक्षा और ख़ुफ़िया तंत्र के लोग अपना काम पूरी तरह से करने में लगे हुए हैं पर आज भी देश के ज़िम्मेदार नागरिक के तौर पर हम कितने सजग हैं यह सभी को पता है ? हम आज अपने काम में इतने व्यस्त हैं कि हमें पता ही नहीं होता हैं कि हमारे मोहल्ले और शहर में क्या हो रहा है और न ही हम अपने आस पास की गतिविधियों पर ध्यान भी रखने की आदत बनाना चाहते हैं जिससे कुछ भी संदिग्ध दिखाई देने पर हम पुलिस को सूचित कर सकें ? पुलिस के पास काम करने की एक अंतिम क्षमता है और वह उससे आगे नहीं जा सकती है क्योंकि जिस तरह से सीमित संसाधन उसके पास है वह उसमें भी बहुत अच्छे से काम करने की कोशिश कर ही रही है. किसी की आलोचना करना बहुत आसान है पर उसकी समस्या को हल करने में उसकी सहायता करना बहुत मुश्किल है ? आज भी हम आम भारतीय यह मान कर चलते हैं कि सुरक्षा की सारी ज़िम्मेदारी सरकार पर है कुछ हद तक या सही है पर सरकार या पुलिस पूरे देश पर इस तरह से नज़र नहीं रख सकते हैं जितनी आसानी से हम अपने आस पास की संदिग्ध गतिविधियों पर नज़र रख कर पुलिस की आँख और कान बन सकते हैं. अब भारत में सामाजिक पुलिसिंग को बढ़ावा देना ही होगा क्योंकि उसके बिना इस तरह की संदिग्ध गतिविधियों पर नज़र रख पाना बहुत मुश्किल होता जा रहा है.&lt;br /&gt;
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8033919830443655972-9095998501854467653?l=seedhikharibaat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel="replies" type="application/atom+xml" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/feeds/9095998501854467653/comments/default" title="टिप्पणियाँ भेजें" /><link rel="replies" type="text/html" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/02/blog-post_14.html#comment-form" title="0 टिप्पणियाँ" /><link rel="edit" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/9095998501854467653?v=2" /><link rel="self" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/9095998501854467653?v=2" /><link rel="alternate" type="text/html" href="http://feedproxy.google.com/~r/SeedhiKhariBaat/~3/ijLEdZ0IIjI/blog-post_14.html" title="मैग्नेटिक बम और दिल्ली" /><author><name>Dr Ashutosh Shukla</name><uri>https://profiles.google.com/100257269155750831732</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel="http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail" width="32" height="32" src="//lh4.googleusercontent.com/-m8s_63KhFOs/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAIjw/Or7VxwQJcqY/s512-c/photo.jpg" /></author><thr:total>0</thr:total><feedburner:origLink>http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/02/blog-post_14.html</feedburner:origLink></entry><entry gd:etag="W/&quot;AkcHQHc_cSp7ImA9WhRaEEQ.&quot;"><id>tag:blogger.com,1999:blog-8033919830443655972.post-6084251010458574067</id><published>2012-02-13T07:23:00.000+05:30</published><updated>2012-02-13T07:23:51.949+05:30</updated><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2012-02-13T07:23:51.949+05:30</app:edited><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="संविधान" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="इस्लाम" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="कर्तव्य" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="अधिकार" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="चुनाव" /><title>केवल वोटर क्यों नहीं ?</title><content type="html">&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;
&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; उत्तर प्रदेश में चल रहे चुनावों में जिस तरह से दोनों चरणों के मतदान की ख़बर लिखते समय अख़बारों ने मुस्लिम शब्द पर जोर दिया है क्या उसकी वास्तव में आज की स्थितियों में आवश्यकता है ? शायद नहीं पर लिखने वाले पता नहीं किस तरह से क्या कहना चाहते हैं कि दोनों चरणों के मतदान के बाद कम से कम सभी अख़बारों ने ख़बरों के साथ चित्र लगाने में मुस्लिम महिलाओं और पुरुषों को ही चुना ? इसमें कोई ग़लत बात नहीं है अगर देश की मुख्य धारा में शामिल मुसलमानों के वोटिंग करने के उत्साह को बढ़ चढ़ कर दिखाया जाये पर इस बात को हर बार लिखना क्या आवश्यक है ? जिस तरह से मुस्लिम मतों को लेकर राजनैतिक दलों में खींचतान मची हुई है उस स्थिति में क्या अख़बारों का इस तरह से लिखना ठीक है ? जब देश के संविधान ने सभी को एक सामान माना है तो फिर इस तरह से लिखना किस तरह से सही कहा जा सकता है और यह भी समझ से परे है कि यह विशेष ख़बर कैसे है जबकि समाज के सभी अंग एक सामान रूप से मतदान में भाग ले रहे हैं ? हाँ अगर किसी ऐसे समूह ने पहली बार मतदान किया है जो अभी तक इस बारे में सोच भी नहीं सकता था तो यह एक बड़ी ख़बर बन सकती है.&amp;nbsp; &lt;br /&gt;
&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; समाचार पत्रों में इस तरह की ख़बरें लगने से क्या इस तरह का सन्देश नहीं जा सकता है कि इस बार मुसलमान कुछ आगे बढ़कर वोट कर रहे हैं जबकि वास्तविकता यह है कि मुस्लिम समाज ने हमेशा से ही अपने इस अधिकार का बड़ी संख्या में उपयोग किया है फिर आख़िर समाचार लिखने के किस मानक पर यह बात कुछ अलग सी मानी जा सकती है कि मुस्लिम महिलाओं ने लाइन में लगकर वोट डाला ? यह ठीक है कि संपादक का यह विशेषाधिकार होता है कि वह किस पेज पर किस तरह की ख़बर को प्राथमिकता दे और किस फोटो को कहाँ पर छपवाए पर जिस तरह से इस मामले को लिया जा रहा है उससे यही लग सकता है कि इससे पहले शायद मुस्लिम मतदाता वोट डालने ही नहीं जाते थे ? बड़ी ख़बरें वे हो सकती थीं कि किन स्थानों पर मतदाताओं ने चुनाव का किन कारणों से बहिष्कार किया और उनकी समस्याएं किस हद तक हैं ? क्या कारण है कि आज भी संपादन से जुड़े हुए लोग इस बात को लिखना और दिखाना चाहते हैं कि मुस्लिम चुनाव के लिए आगे आये हुए हैं ?&lt;br /&gt;
&amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp; इस बात का सबूत पिछले चुनावों के रिकॉर्ड से भी देखा जा सकता है कि किस तरह से मुस्लिम हमेशा से ही अच्छी संख्या में अपने इस अधिकार का प्रयोग करते रहे हैं फिर केवल इस बात को ही प्रदर्शित करना कहाँ तक उचित कहा जा सकता है ? जब मुसलमानों ने काफी दिनों बाद पोलिओ ड्रॉप पिलाना शुरू किया तो वह एक बड़ी ख़बर थी और फोटो समेत पहले पन्ने की हक़दार थी पर मुस्लिम मतदान को इस तरह से रेखांकित करना क्या प्रदर्शित करता है ? अगर अख़बारों को लगता है कि इस तरह की फोटो उनकी बिक्री अपर असर डाल सकती है तो वे इन्हें छापने के लिए स्वतंत्र हैं पर क्या बुर्का पहने महिलाओं की फोटो के नीचे मुस्लिम महिला लिखा जाना आवश्यक है ? देश में सभी यह जानते हैं कि मुस्लिम महिलाएं धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बुर्का पहनती हैं तो क्या समाचार पत्र यह समझते हैं कि पाठकों को यह भी नहीं पता कि ये मुस्लिम महिलाएं हैं ? फोटो चाहे कोई भी लगायी जाये पर इस तरह से लिखा जाना क्या निष्पक्ष और मतदान करवाने की आयोग की मंशा के अनुरूप है ? शायद नहीं पर लिखने और छापने वालों को इससे कोई अंतर नहीं पड़ता क्योंकि उन पर इस तरह से किसी की नज़र भी नहीं जाती है.&amp;nbsp; &lt;br /&gt;
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8033919830443655972-6084251010458574067?l=seedhikharibaat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel="replies" type="application/atom+xml" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/feeds/6084251010458574067/comments/default" title="टिप्पणियाँ भेजें" /><link rel="replies" type="text/html" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/02/blog-post_13.html#comment-form" title="3 टिप्पणियाँ" /><link rel="edit" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/6084251010458574067?v=2" /><link rel="self" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/6084251010458574067?v=2" /><link rel="alternate" type="text/html" href="http://feedproxy.google.com/~r/SeedhiKhariBaat/~3/jpQ2bqkf0os/blog-post_13.html" title="केवल वोटर क्यों नहीं ?" /><author><name>Dr Ashutosh Shukla</name><uri>https://profiles.google.com/100257269155750831732</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel="http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail" width="32" height="32" src="//lh4.googleusercontent.com/-m8s_63KhFOs/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAIjw/Or7VxwQJcqY/s512-c/photo.jpg" /></author><thr:total>3</thr:total><feedburner:origLink>http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/02/blog-post_13.html</feedburner:origLink></entry><entry gd:etag="W/&quot;CEIDRnY5eyp7ImA9WhRaEEw.&quot;"><id>tag:blogger.com,1999:blog-8033919830443655972.post-373502149802440138</id><published>2012-02-12T07:39:00.000+05:30</published><updated>2012-02-12T07:39:37.823+05:30</updated><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2012-02-12T07:39:37.823+05:30</app:edited><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="कर्तव्य" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="कानून" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="अधिकार" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="अभिव्यक्ति" /><title>आयोग राष्ट्रपति के पास</title><content type="html">&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;
&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; केन्द्रीय कानून मंत्री सलमान खुर्शीद के अपने आरक्षण वाले बयान पर अड़े रहने और कुछ वोटों की ख़ातिर चुनाव आयोग पर टिप्पणियां करने के बाद आयोग ने जिस तरह से एक अभूतपूर्व कदम के तहत राष्ट्रपति से इस मामले में शिकायत कर हस्तक्षेप करने की मांग की है वह बिलकुल उचित है क्योंकि जब सरकार में बैठे हुए लोग ही इस तरह से संवैधानिक संस्थाओं पर टिप्पणियां करने से नहीं चूकेंगें तो इन संस्थाओं का क्या औचित्य रह जायेगा ? भारतीय लोकतंत्र में सभी नागरिकों और दलों को इस बात की पूरी छूट दी गयी है कि वे चुनाव के समय एक जैसे धरातल पर काम करें जबकि वर्तमान में केन्द्रीय कानून मंत्री संविधान की इस भावना से खिलवाड़ कर रहे हैं ? यहाँ पर कुछ लोग केवल कुतर्क करते हुए कुछ अन्य नेताओं के इस तरह के बयानों को ढाल बनाने की कोशिश भी कर सकते हैं पर इस बार मामला सीधे उस मंत्री से जुड़ा हुआ है सामान्य दिनों में बदकिस्मती से जिसके अधीन ही चुनाव आयोग भी आता है ? आयोग ने इस बारे में यह फैसला लिया जो कि बहुत ही सटीक है क्योंकि इस देश में सभी को बराबर के अधिकार मिले हुए हैं और आयोग भी अपने कर्तव्यों को नियमपूर्वक पूरा करने के लिए तत्पर रहा करता है तो इस मामले में उससे इस तरह की अपेक्षा कुछ लोग तो कर ही रहे थे. &lt;br /&gt;
&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; इस तरह का कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण था क्योंकि देश में कुछ लोगों को हर बात केवल एक ही चश्में से दिखाई देती है तो कल कोई इस बार पर भी आपत्ति कर सकता था कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त भी एक मुस्लिम हैं और मुसलमानों को आरक्षण देने की बात पर एक मुस्लिम मंत्री के बयानों पर सिर्फ़ इसलिए चुप रहे क्योंकि इससे मुसलमानों को लाभ मिलने वाला था ? मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने यह दिखा दिया है कि देश पहले और बाक़ी सारी बातें बाद में हैं. देश में आज राजनैतिक तंत्र इतना नाकारा और मौकापरस्त हो चुका है कि उसे कहीं भी इस तरह के माहौल में हमेशा लाभ उठाने की बात ही सूझती रहती है. यह सही है कि सलमान खुर्शीद का पार्टी में अपना ही महत्त्व है पर वोटों के लालच में उन्होंने जिस तरह से पार्टी को संकट में डालना शुरू किया है और देश की संवैधानिक आत्मा से खिलवाड़ करने की कोशिश की है उस स्थिति में उनका सरकार में बने रहने का कोई औचित्य नहीं है क्योंकि अब वे सरकार के लिए संकट मोचक नहीं बल्कि संकट कारक बन चुके हैं. आयोग का यह निर्णय इस बात की तरफ भी संकेत करता है कि अगर किसी भी नेता या दल ने उसे कमतर समझने की भूल की तो उसके ख़िलाफ़ कानून के दायरे में रहते हुए पूरी सख्ती से निपटा जायेगा भले ही वह देश का कानून मंत्री ही क्यों न हो जिस पर देश को कानून से चलाने की ज़िम्मेदारी है.&lt;br /&gt;
&amp;nbsp; &amp;nbsp; इस तरह की घटना के बाद जिस तरह से राष्ट्रपति ने इस मसले को तुरंत ही मनमोहन सिंह के पास भेज दिया है उससे यही लगता है कि आए वाले दिनों में सलमान के लिए कुछ अच्छा नहीं होने वाला है और इस मामले को देश के सामने एक नज़ीर के रूप में पेश करे का समय आ गया है कि कोई भी देश के संविधान से ऊपर नहीं है. यह घटना ठीक उसी तरह की लगती है जब शेषन ने अपने कार्यकाल के दौरान नेताओं के इस तरह के आचरणों पर पहली बार सख्ती करनी शुरू की थी और नेताओं को छोड़कर आम लोगों ने उसकी सराहना की थी जिसके बाद आज तक चुनाव आयोग की गरिमा बनी हुई है भले ही उस पर मोदी जैसे लोगों ने लिंगदोह के ज़माने में इटली से संपर्क होने तक की ओछी टिप्पणी की थी ? उस तरह की टिप्पणी करते समय भाजपा ने एक बार भी मोदी की आलोचना नहीं की थी क्योंकि तब वह मोदी को हीरो के रूप में पेश कर रही थी उन्हीं लिंगदोह की उस सख्ती के कारण ही मोदी फिर से सत्ता में आये तो उन्हें एहसास हुआ होगा कि उन्होंने बेकार के आरोप लगाये थे आज राजनैतिक लाभ के लिए भाजपा खुर्शीद का बलिदान चाहती है पर उस समय उसकी नैतिकता कहाँ थी ? नेता राजनीति करें तो इसमें कोई आपत्ति नहीं है पर सुविधा के अनुसार संविधान को परिभाषित करने की इनकी बपौती को जिस तरह से आयोग ने चुनौती दी है उससे पूरा देश अपने भविष्य के लिए निश्चिन्त हो सकता है. &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &lt;br /&gt;
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8033919830443655972-373502149802440138?l=seedhikharibaat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel="replies" type="application/atom+xml" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/feeds/373502149802440138/comments/default" title="टिप्पणियाँ भेजें" /><link rel="replies" type="text/html" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/02/blog-post_12.html#comment-form" title="1 टिप्पणियाँ" /><link rel="edit" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/373502149802440138?v=2" /><link rel="self" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/373502149802440138?v=2" /><link rel="alternate" type="text/html" href="http://feedproxy.google.com/~r/SeedhiKhariBaat/~3/PD7WNGNiQ4Y/blog-post_12.html" title="आयोग राष्ट्रपति के पास" /><author><name>Dr Ashutosh Shukla</name><uri>https://profiles.google.com/100257269155750831732</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel="http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail" width="32" height="32" src="//lh4.googleusercontent.com/-m8s_63KhFOs/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAIjw/Or7VxwQJcqY/s512-c/photo.jpg" /></author><thr:total>1</thr:total><feedburner:origLink>http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/02/blog-post_12.html</feedburner:origLink></entry><entry gd:etag="W/&quot;D0INQ3gzcCp7ImA9WhRbGU8.&quot;"><id>tag:blogger.com,1999:blog-8033919830443655972.post-6784305677704500072</id><published>2012-02-11T07:29:00.000+05:30</published><updated>2012-02-11T07:29:52.688+05:30</updated><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2012-02-11T07:29:52.688+05:30</app:edited><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="कर्तव्य" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="अधिकार" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="सेना" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="सरकार" /><title>उम्र विवाद और सेना</title><content type="html">&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;
&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; पूरी दुनिया में अपने गौरव और कर्तव्यों के लिए जाने जाने वाली भारतीय सेना के सेनाध्यक्ष की उम्र को लेकर जो भी विवाद चल रहे थे सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद समाप्त हो गए हैं. यह एक ऐसा मसला था जिसमें उम्र को लेकर कुछ गड़बड़ी या ग़लतफ़हमी थी जिसका निवारण किये जाने के लिए मामला कोर्ट तक पहुँच गया था. सवाल यहाँ पर यह है कि क्या ऐसी स्थिति में सरकार किसी उच्च सेनाधिकारी के कहने के अनुसार उनकी उम्र के रिकॉर्ड में बदलाव कर सकती है ?  और अगर वास्तव में ऐसी कोई ग़लती हुई है तो उसे सुधारने के इए क्या समय निर्धारित है जिसके अन्दर ही कोई अधिकारी अपनी इस परिवर्तन या सुधार की अर्जी दे सकता है ? मामला सेना का होने के कारण देश में संवेदन शीलता बढ़ गयी क्योंकि भारत में सेना केवल अपने से मतलब रखती है और किसी भी स्थिति में किसी भी सरकार के किसी भी निर्णय का अनुपालन करती है पर इस स्थिति में रक्षा मंत्रालय और सरकार की स्थिति ऐसी दिखाई देने लगी थी जैसे वे सेना के कामकाज में दखल दे रहे हैं.&lt;br /&gt;
&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; मानवीय भूल के चलते इस तरह की घटना कभी भी हो सकती है पर इस सम्बन्ध में अगर सेनाध्यक्ष ने अपने उचित प्रपत्र सौंपे हों तो भी क्या मंत्रालय को यह अधिकार है कि वह उनकी जन्मतिथि का पुनर्निर्धारण अपने रिकॉर्ड में कर सके ? इस तरह की किसी भी गड़बड़ी में अभी तक सेना प्रमुख की तरफ से कब कब आवेदन किया गया और उस पर क्या निर्णय लिए गया ? सेना प्रमुख ने इतने वर्षों तक देश की सेवा की उस पूरे कार्यकाल में उन्होंने कितने प्रयास किये और किन कारणों से उनको माना नहीं गया ? यह सारी बातें जानने का हक़ देश को है क्योंकि भारत में इस तरह से सेना के अधिकारियों के सरकार के निर्णय के ख़िलाफ़ कोर्ट जाने की परंपरा नहीं रही है इसका यह मतलब कतई नहीं है कि सेना को आम भारतीयों की तरह मिले अधिकार नहीं मिले हुए हैं पर अभी तक जिस पारदर्शिता से यह पूरा काम होता रहा है उसमें किसी भी प्रकार के असंतोष की जगह ही नहीं रही है. अगर यह विवाद उनकी उम्र के बारे में था तो पिछली सभी सरकारों को भी इस बारे में जानकारी होगी और किन कारणों से वे भी इसमें कुछ नहीं कर पाए ? शायद मामला रक्षा मंत्रालय के किसी नियम के तहत उलझ गया था. &lt;br /&gt;
&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; अब इस विवाद के थम जाने के बाद सरकार ने सेना प्रमुख से उनकी गरिमा को ध्यान रखते हुए और उनकी सेवाओं की सराहना करते हुए उनसे पद पर बने रहने का निवेदन किया है और साथ ही इस अंदेश के साथ कि कहीं वे अपना पद न छोड़ दें नए सेना प्रमुख की खोज के लिए वरिष्ठ अधिकारियों का पैनेल भी बना दिया है. यह काम काज की सामान्य परंपरा रही है पर इस मसले में सरकार अपने काम को पूरा रखने की कोशिश कर रही है कि अगर किसी स्थिति में सेना प्रमुख अपना पद छोड़ दें तो उसके पास अधिकारियों का एक पैनेल हो जिसमें से आवश्यकता पड़ने पर अगले सेना प्रमुख को नियुक्त किया जा सके. इस मसले में अब सारा दारोमदार जनरल वी के सिंह पर ही आकर टिक गया है. उनकी सेवाएं बहुत उत्कृष्ट रही हैं और उन्हें कोर्ट में हुए घटनाक्रम के अनुसार अपनी पूरी सेवा देश को देनी चाहिए जिससे किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके. उनके मन में जो भी था उन्होंने न्याय मांगने का प्रयास किया पर इस तकनीकी ग़लती का कोई हल कोर्ट में नहीं निकल पाया.&amp;nbsp; &lt;br /&gt;
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8033919830443655972-6784305677704500072?l=seedhikharibaat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel="replies" type="application/atom+xml" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/feeds/6784305677704500072/comments/default" title="टिप्पणियाँ भेजें" /><link rel="replies" type="text/html" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/02/blog-post_11.html#comment-form" title="0 टिप्पणियाँ" /><link rel="edit" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/6784305677704500072?v=2" /><link rel="self" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/6784305677704500072?v=2" /><link rel="alternate" type="text/html" href="http://feedproxy.google.com/~r/SeedhiKhariBaat/~3/ZKFwEfCeHo8/blog-post_11.html" title="उम्र विवाद और सेना" /><author><name>Dr Ashutosh Shukla</name><uri>https://profiles.google.com/100257269155750831732</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel="http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail" width="32" height="32" src="//lh4.googleusercontent.com/-m8s_63KhFOs/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAIjw/Or7VxwQJcqY/s512-c/photo.jpg" /></author><thr:total>0</thr:total><feedburner:origLink>http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/02/blog-post_11.html</feedburner:origLink></entry><entry gd:etag="W/&quot;C0YHRnc6eyp7ImA9WhRbGEk.&quot;"><id>tag:blogger.com,1999:blog-8033919830443655972.post-1996315534067299894</id><published>2012-02-10T07:44:00.000+05:30</published><updated>2012-02-10T08:02:17.913+05:30</updated><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2012-02-10T08:02:17.913+05:30</app:edited><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="कर्तव्य" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="नियम" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="अधिकार" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="सुधार" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="सरकार" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="उपयोग" /><title>२जी घोटाले का असर</title><content type="html">&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;
&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; २जी घोटाले में जिस तरह से रोज़ ही परदे के पीछे खेले जाने वाले नए खेल दिखाई दे रहे हैं उससे यही लगता है कि इस आदेश से प्रभावित कम्पनियाँ भारत सरकार पर एक तरह का दबाव बनाना चाहती हैं कि उन्हें यहाँ पर कुछ छूट के साथ काम करने की अनुमति दी जाए ? आज जिस तरह से यह  पूरा मसला सभी के सामने आ गया है वैसे में किसी भी सरकार के लिए कोई निर्णय करना बहुत मुश्किल होने वाला है क्योंकि सरकार ट्राई द्वारा जारी किये गए नए दिशा निर्देशों के लिए इंतजार करेगी और उसके अनुसार ही कोई नयी नीति निर्धारित की जाएगी. इस सम्बन्ध में जब इतना विवाद हो चुका है तो किसी के लिए कुछ भी नया कर पाना बहुत मुश्किल होने वाला है क्योंकि अब पूरे देश के साथ दुनिया भर के टेलिकॉम उद्योग की नज़रें भी भारत के बड़े बाज़ार पर टिकी रहने वाली हैं. इस स्थिति में कुछ बड़े खिलाडी अपने नेटवर्क और सेवाओं के आधार पर नंबर पोर्टेबिलिटी का सहारा लेकर बाज़ार पर अपनी पकड़ मज़बूत करना चाहेंगें वहीं कुछ नए खिलाड़ी भी कुछ सीमित क्षेत्र में इन बड़ी कम्पनियों को कड़ी टक्कर देते दिखाई देने वाले हैं. पैसे की कमी के कारण अब इनके लिए पूरे क्षेत्रों में स्पेक्ट्रम हासिल करना मुश्किल होने वाला है फिर भी वे अपने बड़े हिस्से वाले क्षेत्रों को बचने की कोशिश करने से नहीं चूकने वाले हैं.&amp;nbsp; &amp;nbsp; &lt;br /&gt;
&amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; यह सही है कि इस मामले में पुरानी नीतियों के अनुसार काम किये जाने से देश को बड़ा राजस्व नुकसान हुआ है पर इस पूरे चक्कर में कुछ ऐसी कम्पनियाँ भी लटक गयी हैं जिनका कारोबार पहले से ही चल रहा था और उनको केवल इन नयी कंपनियों के साथ कुछ क्षेत्रों में काम करने की अनुमति मिली थी ? ऐसे में कोई भी यह नहीं कह सकता है कि किसने किस बात से कितना लाभ उठा लिया है ? उस समय संचार मंत्रालय से लेकर ट्राई तक ने कानून के मसले पर देश के राजस्व को बढ़ाने के स्थान पर पुरानी नीतियों को ही चलने दिया जबकि समय के अनुसार उन्हें बदलने की बहुत आवश्यकता थी ? किसी भी क्षेत्र में सरकार द्वारा कानून बनाये जाने की एक निश्चित प्रक्रिया है और नयी नीतियां बनाने में कई स्तरों पर विचार विमर्श किया जाता है ऐसे में अगर कोई विदेशी कम्पनी सरकार से यह उम्मीद करती है कि वह जल्दी ही कोई दिशा निर्देश जारी कर देगी तो यह उनकी भूल है क्योंकि सरकार अपने हिसाब से काम करेगी उसे कम्पनियों के व्यापारिक लाभ या हानि से इस समय कोई विशेष मतलब नहीं है क्योंकि विवादों से भरी इस राह को सुलझाने एक लिए अब सरकार नए विवादों को जन्म नहीं देना चाहेगी.&lt;br /&gt;
&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp; सरकार द्वारा लिए जा रहे समय में अगर किसी विदेशी कम्पनी को लगता है कि उसका नुक्सान हो रहा है तो वह नियत प्रक्रिया को अपनाकर अपना कारोबार समेटे के लिए स्वतंत्र है पर इससे क्या होने वाला है ? हो सकता है कि विदेशी साझीदारों के चले जाने के बाद इनके भारतीय भागीदार अपने लिए फिर से आगे बढ़ने की नीति तय करें या फिर वे अपने पूरे कारोबार को किसी अन्य बड़ी कम्पनी के हाथों बेचकर इस व्यापार से बाहर निकल जाएँ ? अब जो कुछ भी होगा उसका असर पूरे दूरसंचार उद्योग पर पड़ने वाला है क्योंकि इतने बड़े बाज़ार से पूरी दुनिया में कुछ न कुछ असर तो होने ही वाला है. अब पहले आओ पहले पाओ की नीति के स्थान पर स्पेक्ट्रम की नीलामी होगी जिस स्थिति में सरकार को राजस्व तो मिलेगा पर साथ ही ये कम्पनियां अपने हितों को सुरक्षित रखने के लिए बड़ी बोलियाँ लगाने से बच भी सकती हैं. भारतीय बाज़ार में जिन बड़ी कम्पनियों का कारोबार ठीक चल रहा है वे किसी भी स्थिति में ३जी के बाद अब इस २जी स्पेक्ट्रम को खरीदने में कितनी दिलचस्पी दिखाएंगी यह तो समय ही बताएगा क्योंकि सभी बड़ी कम्पनियाँ ३जी स्पेक्ट्रम खरीदे के बाद से आर्थिक संकट का सामना कर रही हैं और उनके व्यापार पर असर भी आया है तो ऐसे में वे फिर से २जी स्पेक्ट्रम में कितनी रूचि दिखाने वाली हैं ? इसलिए इन नयी विवादों में उलझी कम्पनियों के लिए २जी स्पेक्ट्रम बाज़ार में कोई बड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिलेगी यह सम्भावना भी कम ही है.&amp;nbsp; &amp;nbsp;  &amp;nbsp; &lt;br /&gt;
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8033919830443655972-1996315534067299894?l=seedhikharibaat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel="replies" type="application/atom+xml" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/feeds/1996315534067299894/comments/default" title="टिप्पणियाँ भेजें" /><link rel="replies" type="text/html" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/02/blog-post_10.html#comment-form" title="1 टिप्पणियाँ" /><link rel="edit" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/1996315534067299894?v=2" /><link rel="self" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/1996315534067299894?v=2" /><link rel="alternate" type="text/html" href="http://feedproxy.google.com/~r/SeedhiKhariBaat/~3/2sPtXTMZyxM/blog-post_10.html" title="२जी घोटाले का असर" /><author><name>Dr Ashutosh Shukla</name><uri>https://profiles.google.com/100257269155750831732</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel="http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail" width="32" height="32" src="//lh4.googleusercontent.com/-m8s_63KhFOs/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAIjw/Or7VxwQJcqY/s512-c/photo.jpg" /></author><thr:total>1</thr:total><feedburner:origLink>http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/02/blog-post_10.html</feedburner:origLink></entry><entry gd:etag="W/&quot;Ck4BQn86eSp7ImA9WhRbGEk.&quot;"><id>tag:blogger.com,1999:blog-8033919830443655972.post-2261139848888006396</id><published>2012-02-09T09:39:00.000+05:30</published><updated>2012-02-10T07:59:13.111+05:30</updated><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2012-02-10T07:59:13.111+05:30</app:edited><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="संविधान" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="विरोध" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="अधिकार" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="चुनाव" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="उपयोग" /><title>"४९ ओ" की वास्तविकता</title><content type="html">&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;
&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;
&lt;/div&gt;
&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;
&lt;/div&gt;
&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;
&lt;/div&gt;
&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;
&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/-vTG4cdMo4Ck/TzMkjUbJPNI/AAAAAAAAIgw/eJ1U9oDrziY/s1600/331732_10150646549856754_663641753_11021626_971101350_o.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" height="200" src="http://4.bp.blogspot.com/-vTG4cdMo4Ck/TzMkjUbJPNI/AAAAAAAAIgw/eJ1U9oDrziY/s320/331732_10150646549856754_663641753_11021626_971101350_o.jpg" width="320" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;
देश के संविधान ने मतदाताओं को "४९ ओ" के अंतर्गत किसी भी प्रत्याशी को न चुन कर उन्हें नकारने का अधिकार दे रखा है कल यूपी के प्रथम चरण के मतदान में जब सीतापुर जनपद की लहरपुर विधानसभा १४८ की १८ संख्या सूची के १०१६ पर पंजीकृत मतदाता के रूप में जब मैंने कल इस अधिकार का उपयोग करने का प्रयास किया तो पीठासीन अधिकारी द्वारा दिया उत्तर अप्रत्याशित था. उन्होंने मुझे सलाह दी कि क्यों चक्करों में पड़ रहे हो अपना वोट डाल दो और  हमें भी अपना काम करने दो. सबसे पहले उन्होंने इस नियम से ही अनभिज्ञता दिखाई और मुझसे पूछा कि वोट डालना हो तो ईवीएम को ऑन करूँ ? मेरे द्वारा मना करने पर उन्होंने कहा कि वे ईवीएम का प्लग निकल कर इस वोट को समाप्त कर देंगें और मुझे ईवीएम प्रयोग करने वाली पुस्तिका भी दिखाई. इसके बाद उन्होंने अन्य लोगों के वोट डलवाने शुरू कर दिए मेरे द्वारा अड़े रहने पर उन्होंने कहा कि उनके पास इस सम्बन्ध में उचित प्रपत्र नहीं है जिन पर यह काम किया जा सकता है. क्या चुनाव आयोग जिस काम को करने में अपना पूरा जोर लगा देता है उसके द्वारा पीठासीन अधिकारी के रूप में काम करने वाले राज्य कर्मचारी इतने अनजान हैं कि वे बिना पूरे प्रपत्रों के ही मतदान केंद्र तक आ गए ? या फिर सीतापुर जिले के निर्वाचन कार्यालय ने इन अधिकारियों को इस बारे में कोई ट्रेनिंग ही नहीं दी थी ? क्या वास्तव में इसके लिए किसी प्रपत्र की आवश्यकता होती है ? आयोग के नियम के अनुसार मतदाता रजिस्टर पर मतदाता से यह लिखवा लिया जाना चाहिए कि वह किसी को भी वोट नहीं देना चाहता है जबकि मेरे मामले में पीठासीन अधिकारी ने इस बात से भी इनकार कर दिया और कहा कि उस रजिस्टर पर वे कुछ भी नहीं लिखवाएंगें ? साथ ही उन्होंने अपने किसी भी उच्चाधिकारी से बात करने से भी मना कर दिया. &lt;br /&gt;
&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; क्या इस तरह की स्थिति में मतदाता के पास कोई विकल्प रह जाता है कि वह अपने मन का काम कर सके या फिर उस जानबूझकर इस स्थिति को पैदा करने वाले या वास्तव में अनभिज्ञ पीठासीन अधिकारी को अपने मनमानी करने दे ? क्या ऐसी किसी भी स्थिति की शिकायत मौके पर करने की कोई कोई व्यवस्था है ? और है तो मतदाता को इस स्थिति के बारे में कोई कागज़ी सबूत मिल सकता है या नहीं ? मुझे नहीं पता कि मेरे वोट का क्या हुआ क्योंकि जिस तरह से पीठासीन अधिकारी मेरी इस मांग से विचलित थे तो मुझे नहीं लगता कि उन्होंने मेरे वोट को मतदान से मना करने वाली श्रेणी में रखा होगा ? जब मैंने मतदान रजिस्टर पर हस्ताक्षर कर दिए मेरी ऊँगली पर इंक लगायी जा चुकी तो फिर क्या मैं मतदान करने से मना नहीं कर सकता हूँ ? चुनाव आयोग इस बारे में स्पष्ट हैं कि इस स्थिति में मतदाता से रजिस्टर पर यह लिखवा लिया जाना चाहिए कि वह किसी को भी वोट नहीं देना चाहता है पर चुनाव का सञ्चालन करने वाले इन अधिकारियों को इस बात का पता नहीं होता है ? क्या मेरा वोट वास्तव में नहीं पड़ा या फिर मेरे वोट को संख्या पूरी करने के लिए किसी और से मशीन का बटन दबवा कर डलवा दिया गया ? मुझे इस बात का कतई अंदाज़ा नहीं था कि वहां पर ऐसा भी कुछ हो सकता है वर्ना मैं इस बारे में और अधिक तैयारी के साथ जाता और किसी भी स्थिति में अड़कर ४९ ओ का प्रयोग करके ही मानता पर मैं जानबूझकर अपना मोबाइल भी घर पर ही छोड़ गया था क्योंकि मतदान केंद्र पर मुझे उसकी कोई आवश्यकता नहीं पड़ने वाली थी ? मेरे मत देने या न देने के अधिकार का हनन हुआ है अगर मेरा वोट ४९ ओ के तहत लिख लिया गया तो ठीक है वर्ना क्या मुझे अपने अधिकार से वंचित करने वाले अधिकारी के कृत्य को देखते हुए क्या निर्वाचन आयोग इस केंद्र पर पुनर्मतदान के आदेश जारी करेगा ? शायद नहीं क्योंकि उसके लिए एक बार चुनाव कराना ही कठिन काम होता है और केवल बड़ी गड़बड़ी के कारण ही आज तक पुनर्मतदान की बात की जाती है.&amp;nbsp; &amp;nbsp; &lt;br /&gt;
&amp;nbsp; &amp;nbsp;  &amp;nbsp; &lt;br /&gt;
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8033919830443655972-2261139848888006396?l=seedhikharibaat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel="replies" type="application/atom+xml" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/feeds/2261139848888006396/comments/default" title="टिप्पणियाँ भेजें" /><link rel="replies" type="text/html" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/02/blog-post_09.html#comment-form" title="4 टिप्पणियाँ" /><link rel="edit" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/2261139848888006396?v=2" /><link rel="self" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/2261139848888006396?v=2" /><link rel="alternate" type="text/html" href="http://feedproxy.google.com/~r/SeedhiKhariBaat/~3/1-pnixqth8I/blog-post_09.html" title="&quot;४९ ओ&quot; की वास्तविकता" /><author><name>Dr Ashutosh Shukla</name><uri>https://profiles.google.com/100257269155750831732</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel="http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail" width="32" height="32" src="//lh4.googleusercontent.com/-m8s_63KhFOs/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAIjw/Or7VxwQJcqY/s512-c/photo.jpg" /></author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="http://4.bp.blogspot.com/-vTG4cdMo4Ck/TzMkjUbJPNI/AAAAAAAAIgw/eJ1U9oDrziY/s72-c/331732_10150646549856754_663641753_11021626_971101350_o.jpg" height="72" width="72" /><thr:total>4</thr:total><feedburner:origLink>http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/02/blog-post_09.html</feedburner:origLink></entry><entry gd:etag="W/&quot;DEMGRHs5eCp7ImA9WhRbFks.&quot;"><id>tag:blogger.com,1999:blog-8033919830443655972.post-1670893105967448159</id><published>2012-02-08T07:30:00.000+05:30</published><updated>2012-02-08T07:30:25.520+05:30</updated><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2012-02-08T07:30:25.520+05:30</app:edited><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="राजनीति" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="अभिव्यक्ति" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="सुधार" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="अराजकता" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="उम्मीद" /><title>चुनाव का शंखनाद</title><content type="html">&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;
&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; आज ८ फरवरी से  देश के सबसे बड़े राज्य यूपी में चुनाव प्रचार के बाद चरण बद्ध तरीके से होने वाले चुनावों का प्रारंभ होने वाला है वह आने वाले समय में देश की दिशा और दशा को बदलने में बहुत सहायक हो सकता है. चुनाव आयोग की भरपूर मेहनत के बाद जिस तरह से इस बार रिकार्ड मतदान की आशा की जा रही है उसमें पूरी रात से बरसते पानी ने कुछ हद तक रोक लगायी है पर दिन खिलने के बाद वोटर कितनी संख्या में मौसम के अनुसार बाहर निकलने वाले हैं यह तो शाम तक पता चलेगा पर इतना तो तय ही&amp;nbsp; है कि अब जनता में इस बारे में जागरूकता आ चुकी है. आज के महासंग्राम में जिस तरह से सभी दलों ने अपनी शक्ति झोंक रखी है उससे यही लगता है कि मुकाबला दिलचस्प होने वाला है. चुनाव में जहाँ बसपा की प्रतिष्ठा दांव पर है और अन्य दल चुनाव प्रचार में लगभग बराबर की चुनौती देते आये हैं उसके बाद यही लगता है कि अब प्रदेश में पूर्ण बहुमत की सरकार दूर की कौड़ी है. प्रदेश की जनता राजनैतिक तौर पर बहुत परिपक्व है क्योंकि २००७ में जहाँ सभी लोग यह अंदाज़ा लगा रहे थे कि त्रिशंकु विधासभा की स्थिति पनप रही है तो जनता ने सभी अनुमानों को झूठा साबित करते हुए बसपा को पूर्ण बहुमत तक पहुंचा दिया था.&lt;br /&gt;
&amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp; कांग्रेस ने जिस तरह से एक सोची समझी रणनीति के तहत अपने दम पर ही सरकार बनाने की बात शुरू की है उससे यही लगता है कि वह अभी जल्दी में नहीं है और भ्रमित वोटर्स को वह यह सन्देश देना चाहती है कि अगर इस बार भी वे चूक गए तो अगले चुनाव तक कांग्रेस सरकार बनाने का दावा नहीं करेगी. यह एक सोची समझी नीति का ही हिस्सा है क्योंकि जिस तरह से अभी तक पूर्वानुमान लगाये जा रहे हैं उनके अनुसार कोई भी दल स्पष्ट बहुतमत पाने की स्थिति में नहीं है. ऐसे में कोई भी दल स्थायी सरकार दे पाने की स्थिति में नहीं होगा और इस स्थिति का लाभ उठाकर कुछ नेता लोग फिर से प्रदेश में अस्थिरता का लाभ उठाकर अपने हितों को साधने का काम कर सकते हैं. जिस तरह से बसपा सरकार के ख़िलाफ़ वोट देने के लिए आम लोग मन बनाये बैठे हैं वह मतदान के प्रतिशत से ही पता चल जाने वाला है. पहले चरण में बारिश के कारण कम मत भी पड़ सकते हैं इसका सीधा लाभ बसपा को मिलने वाला है क्योंकि उसके समर्पित वोटर किसी भी स्थिति में वोट देने की भावना रखते हैं जो कि अन्य दलों की संभावनाओं पर विराम लगाकर कुछ हद तक समीकरणों में उलट फेर कर सकते हैं.&lt;br /&gt;
&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; देश के विकास के लिए अब यूपी का विकास आवश्यक है जिस तरह से पिछले कुछ वर्षों में यूपी भी विकास की रफ़्तार को पकड़ने में लगा हुआ है उसके बाद अब आने वाले समय में पूरे देश में महत्वपूर्ण योगदान देने के किये अब जनता को प्रदेश को तैयार करना ही होगा पर दुर्भाग्य से अभी तक हम बिहार से कुछ भी नहीं सीख पाए हैं जिसने जाति आधारित राजनीति से बहुत पहले ही पीछा छुड़ा लिया है और अब वह तेज़ी से आगे बढ़ने वाला प्रदेश बन चुका है. यूपी को जो भी चाहिए वह क्या हमारे नेता दे पाने में सफल हो रहे हैं ? शायद नहीं क्योंकि अभी भी इन लोगों को लगता है कि प्रदेश में जातिवाद को हवा देकर बहुत सारे काम करवाए जा सकते हैं जबकि वास्तविकता यह है कि जातिवाद के आगे विकास के मुद्दे छोटे पड़ जाया करते हैं और आने वाले समय में प्रदेश इससे बाहर निकलना चाहता है या नहीं इसकी झलक इसी चुनाव में दिखाई देने वाली है. एक महीने तक चलने वाले इस महासंग्राम या लोकतंत्र के महान पर्व में क्या निकल कर सामने आने वाला है यह तो समय ही बता पायेगा पर इस बार भी अगर यूपी ने अपनी सोच नहीं बदली तो आने वाले समय में उसे उपेक्षा ही मिलने वाली है.&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &lt;br /&gt;
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8033919830443655972-1670893105967448159?l=seedhikharibaat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel="replies" type="application/atom+xml" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/feeds/1670893105967448159/comments/default" title="टिप्पणियाँ भेजें" /><link rel="replies" type="text/html" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/02/blog-post_08.html#comment-form" title="0 टिप्पणियाँ" /><link rel="edit" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/1670893105967448159?v=2" /><link rel="self" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/1670893105967448159?v=2" /><link rel="alternate" type="text/html" href="http://feedproxy.google.com/~r/SeedhiKhariBaat/~3/RRt-2QTXcM4/blog-post_08.html" title="चुनाव का शंखनाद" /><author><name>Dr Ashutosh Shukla</name><uri>https://profiles.google.com/100257269155750831732</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel="http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail" width="32" height="32" src="//lh4.googleusercontent.com/-m8s_63KhFOs/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAIjw/Or7VxwQJcqY/s512-c/photo.jpg" /></author><thr:total>0</thr:total><feedburner:origLink>http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/02/blog-post_08.html</feedburner:origLink></entry><entry gd:etag="W/&quot;CkMMQHg8cSp7ImA9WhRbFUU.&quot;"><id>tag:blogger.com,1999:blog-8033919830443655972.post-7646462924735716704</id><published>2012-02-07T07:38:00.000+05:30</published><updated>2012-02-07T07:38:01.679+05:30</updated><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2012-02-07T07:38:01.679+05:30</app:edited><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="इस्लाम" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="कर्तव्य" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="सुरक्षा" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="आतंक" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="अराजकता" /><title>कश्मीर पर पाक का रुख</title><content type="html">&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;
&amp;nbsp;&amp;nbsp; लगता है कि पाक ने अपने अतीत से कुछ भी न सीखने की कसम खा रखी है तभी आज भी अपने मन को सहारा देने के लिए कश्मीर एकता दिवस जैसे दिन मानाने में लगा हुआ है. पाक पीएम&lt;span id="26_TRN_15"&gt; गिलानी ने इस तरह के एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि अब इस मसले को बिना जंग के सुलझाने की बातें की हैं उससे यही लगता है कि अब फिर से उन पर कोर्ट का दबाव बढ़ रहा है क्योंकि पाक में सेना और नेता कश्मीर को अपने को बचाने और जनता का ध्यान बंटाने के लिए हमेशा से ही ऐसा करते रहे हैं. पाक जनता को आजादी के समय से ही जो अफ़ीम खिलाई जा रही है उसका असर कम होते ही फिर से एक बार वहां के सभी महत्वपूर्ण लोग कश्मीर का राग गाने लगते हैं. कश्मीर पाक के लिए अनसुलझा हो सकता है पर आज भारत के लिए वह पाक समर्थित चंद लोगों की शरारत का शिकार बना इलाक़ा है. ऐसा नहीं है कि भारत के ख़िलाफ़ बोल कर पाक नेताओं को कुछ हासिल न हुआ हो पर पाक नेताओं की साज़िश के तहत कम पढ़ी लिखी जनता को फुसलाना उनके लिए हमेशा से ही बहुत महत्वपूर्ण रहा है.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;span id="26_TRN_15"&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp; भारत की कश्मीर नीति बिलकुल सही है पर पाक ने बंटवारे के समय हुए कई मसलों को सुलझने ही नहीं दिया और आज़ादी के तुरंत बाद उसने जिस तरह से कश्मीर के ख़िलाफ़ जंग छेड़ दी उससे उसे केवल नफ़रत ही हासिल हुई है और आज वह उसी नफ़रत को कट्टरपंथियों के हाथों भारत के ख़िलाफ़ इस्तेमाल कर रहा है जबकि वास्तविकता यह है कि उस नफ़रत के कारण ही आज पूरे पाक में अराजकता फैली हुई है और अगर वहां के नेता या शासन केवल विकास और तालीम की बात करें तो जनता के सामने उनके झूठ के खुल जाने का ख़तरा बढ़ जाता है तो वैसे में ये  सभी लोग केवल एक ही राग छेड़कर पाक की जनता को हसीन सपने दिखाते रहते हैं ? किसी की बद-दुआओं से बना कोई भी तंत्र या देश कभी सफल नहीं हो सकता है क्योंकि पाक के बनने के समय जिस तरह से निर्दोष लोगों और मासूमों पर जो भी ज़ुल्म किये गए थे उनका हिसाब भी तो पाक को ही देना होगा ? कश्मीर और पंजाब के लोगों की हाय भी पाक को कभी पनपने नहीं देगी.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;span id="26_TRN_15"&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp; भारत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अब किसी भी स्थिति में पाक की इस तरह की किसी भी बात पर कोई&amp;nbsp; भरोसा नहीं किया जायेगा क्योंकि १९९९ में पाक ने कारगिल में आज़ादी के नाम पर जो कुछ भी किया उसके बाद उस पर विश्वास नहीं किया जा सकता है. पाक को अगर कश्मीर पर कुछ करना है तो सबसे पहले वह अपनी उस नफ़रत वाली कश्मीर नीति को बदल ले और चीन के हाथों खेलना बंद करे क्योंकि जब चीन उसे झटका देगा तो उसके पास सँभालने का मौका भी नहीं होगा. चीन भारत की तरह नहीं है और वह किसी भी स्थिति में पाक को नहीं छोड़ने वाला है. पाक को अब अपने यहाँ से आतंक की जड़ों को खोदकर फ़ेंकना ही होगा क्योंकि अब जब तक वह वास्तव में धरातल पर कुछ नहीं करेगा भारत या कोई भी अन्य देश उस पर विश्वास नहीं करेगा. भारत ने परमाणु संपन्न होने के बाद भी जिस तरह से स्वनियंत्रण की नीति का निर्धारण किया है वैसा पाक नहीं कर सकता है क्योंकि वहां पर कश्मीर और इस्लामी आतंक फ़ैलाने के अलावा देश में किसी बात पर कोई समझौता नहीं है ? जब तक पाक अपने घर को ठीक नहीं करता है तब तक किसी भी तरह की कोई बातचीत सफल नहीं हो सकती है.&amp;nbsp;  &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &lt;/span&gt;&amp;nbsp; &lt;br /&gt;
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8033919830443655972-7646462924735716704?l=seedhikharibaat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel="replies" type="application/atom+xml" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/feeds/7646462924735716704/comments/default" title="टिप्पणियाँ भेजें" /><link rel="replies" type="text/html" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/02/blog-post_07.html#comment-form" title="2 टिप्पणियाँ" /><link rel="edit" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/7646462924735716704?v=2" /><link rel="self" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/7646462924735716704?v=2" /><link rel="alternate" type="text/html" href="http://feedproxy.google.com/~r/SeedhiKhariBaat/~3/w_3KCBTd_n4/blog-post_07.html" title="कश्मीर पर पाक का रुख" /><author><name>Dr Ashutosh Shukla</name><uri>https://profiles.google.com/100257269155750831732</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel="http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail" width="32" height="32" src="//lh4.googleusercontent.com/-m8s_63KhFOs/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAIjw/Or7VxwQJcqY/s512-c/photo.jpg" /></author><thr:total>2</thr:total><feedburner:origLink>http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/02/blog-post_07.html</feedburner:origLink></entry><entry gd:etag="W/&quot;D0cBR3s-fCp7ImA9WhRbFEQ.&quot;"><id>tag:blogger.com,1999:blog-8033919830443655972.post-8562358130379041541</id><published>2012-02-06T07:54:00.000+05:30</published><updated>2012-02-06T07:54:16.554+05:30</updated><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2012-02-06T07:54:16.554+05:30</app:edited><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="कर्तव्य" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="अन्तरिक्ष" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="अधिकार" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="उपयोग" /><title>एंट्रिक्स-देवास विवाद</title><content type="html">&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;
&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; आजकल जिस तरह से सरकार और उसके विभागों के सामान्य कामकाज में पारदर्शिता की कमी के कारण जितने संदेह रोज़ ही उत्पन्न हो रहे है उससे यही लगता है कि आने वाले समय में देश को नियमों को निर्धारित करने के नियमों के बारे में फिर से सोचना ही होगा. किसी भी विभाग द्वारा कोई भी बड़ा महत्वपूर्ण समझौता आख़िरकार विवादों में ही घिर जाता है जिस कारण से देश की भविष्य की संभावनाओं पर भी बड़ा असर पड़ता है. अभी तक जितने भी सौदे या समझौते होते रहे हैं उनके बारे में देश को फिर से विचार करने की आवश्यकता क्यों पड़ती रहती है अभी तक कोई इसका सही जवाब नहीं ढूंढ पाया है ? बात चाहे रक्षा सौदों की हो या सामान्य निविदाओं की हर तरफ से यही सुनाई देता है कि हर ख़रीद में घोटाला किया गया है या फिर हर जगह नियमों की अनदेखी किसी व्यक्ति या समूह को लाभ पहुँचाने की गरज़ से की गयी है ? क्या कारण है कि आज यह सब आम हो गया है ? कहीं ऐसा तो नहीं कि अब सरकार के पास अधिक अवसर आने लगे हैं और बेहतर कर वसूली के कारण अधिक धन उपलब्ध होने से इसके दुरूपयोग की तरफ़ भी लोगों का ध्यान जाने लगा है ? &lt;br /&gt;
&amp;nbsp;&amp;nbsp; इसरो द्वारा गठित विशेष समिति ने भी एंट्रिक्स-देवास समझौते में देश के तीन शीर्ष वैज्ञानिकों पर संदेह जताते हुए कहा है कि इस तरह के सौदों में जितनी पारदर्शिता अपनाई जानी चाहिए वह नहीं अपनाई गयी है और कई स्थानों पर खुले तौर पर नियमों की अनदेखी की गयी है. इस पूरे प्रकरण में देवास के द्वारा गलत जानकारियां दी गयी पर उनके बारे में कोई जांच नहीं की गयी और सरकार और अन्तरिक्ष विभाग के साथ बड़े सौदों के बारे में कोई सामान्य विचार विमर्श तक नहीं किया गया और न ही इसके बारे में पूरे वर्ष कोई सूचना ही दी गयी. आज इस मामले में संदेह के घेरे में आये वैज्ञानिक अपने को निर्दोष बताने में लगे हैं हो सकता है कि वे निर्दोष हों पर उनके समय में ही इस तरह की प्रक्रियागत खामियां सामने आई हैं तो उन पर संदेह करना पूरी तरह से ग़लत भी नहीं कहा जा सकता है. अब जब मामला सरकार के साथ पूरे देश के सामने है तो कैसे किसी को निर्दोष ठहराया जा सकता है जब तक पूरी जांच रिपोर्ट न आ जाएँ और ये सभी बेदाग साबित न हो जाएं. अब बड़े फैसले लेने वाले बड़े पदों अपर बैठने वालों को इस दिशा में सोचना ही होगा क्योंकि इसके बिना विकास संभव नहीं है. &lt;br /&gt;
&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; देश को देश के लिए नीतियां बनाने वाले लोगों की आवश्यकता है जो किसी भी तरह से ख़ुद को इससे मिलने वाले किसी भी प्रकार के लाभ से दूर रख पाने में सफल हों क्योंकि अब विकास की तेज़ गति में विश्व के साथ क़दम न मिला पाने वाले पिछड़ने ही वाले हैं और भारत इस तरह से किसी भी स्थिति में अब अपने को पीछे नहीं रख सकता है. इसके लिए अब अविलम्ब कुछ मुद्दों पर पूरे देश के सभी लोगों को विचार कर नयी नीतियां बनानी ही होंगी जिससे इस तरह के विवादों से देश को दूर रखा जा सके. हो सकता है कि इस मामले में भी कुछ नीतिगत कमी रही हो जिसका दुरूपयोग जाने अनजाने में देवास को लाभ पहुँचाने में किया गया हो ? २जी घोटाले में भी केवल पुराने नियमों के कारण ही देश में इस तरह की स्थिति बनी हुई है क्योंकि समय रहते नीतियों की समीक्षा नहीं की गयी या जानबूझकर नहीं करने दी गयी ? देश कोई संस्था नहीं है जिसमें कुछ ग़लत हो जाने पर संभाल लिया जाये. इतने बड़े स्तर पर होने वाली चूक कहीं से भी देश को चोट पहुंचा सकती है और अब ये हमारा सभी का कर्त्तव्य बनता है कि नीतियों को पूरी तरह से पारदर्शी बनाया जाए और किसी भी सौदे को अंतिम रूप देने से पहले सभी शर्तों को देश के सामने लाया जाना चाहिए जिससे समय रहते ग़लतियों और कमियों को पकड़ा जा सके. &amp;nbsp; &lt;br /&gt;
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8033919830443655972-8562358130379041541?l=seedhikharibaat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel="replies" type="application/atom+xml" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/feeds/8562358130379041541/comments/default" title="टिप्पणियाँ भेजें" /><link rel="replies" type="text/html" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/02/blog-post_06.html#comment-form" title="0 टिप्पणियाँ" /><link rel="edit" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/8562358130379041541?v=2" /><link rel="self" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/8562358130379041541?v=2" /><link rel="alternate" type="text/html" href="http://feedproxy.google.com/~r/SeedhiKhariBaat/~3/cuoMV9U15JQ/blog-post_06.html" title="एंट्रिक्स-देवास विवाद" /><author><name>Dr Ashutosh Shukla</name><uri>https://profiles.google.com/100257269155750831732</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel="http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail" width="32" height="32" src="//lh4.googleusercontent.com/-m8s_63KhFOs/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAIjw/Or7VxwQJcqY/s512-c/photo.jpg" /></author><thr:total>0</thr:total><feedburner:origLink>http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/02/blog-post_06.html</feedburner:origLink></entry><entry gd:etag="W/&quot;CUIGSH08cCp7ImA9WhRbFEw.&quot;"><id>tag:blogger.com,1999:blog-8033919830443655972.post-5928160134819490060</id><published>2012-02-05T09:15:00.002+05:30</published><updated>2012-02-05T09:15:29.378+05:30</updated><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2012-02-05T09:15:29.378+05:30</app:edited><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="कानून" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="अधिकार" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="सुधार" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="संशोधन" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="उपयोग" /><title>नियम, नेता और कानून</title><content type="html">&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;
&amp;nbsp; &amp;nbsp; &lt;span id="22_TRN_0"&gt;2 जी मामले में जिस तरह से सुप्रीम कोर्ट &lt;span id="22_TRN_a"&gt;ने चिदंबरम के ख़िलाफ़ स्वामी की याचिका खारिज़ की है उससे भले ही कांग्रेस को कुछ समय के लिए राहत मिल गयी पर इससे देश का कहीं से भी भला नहीं होने वाला है. देश को नयी परिस्थितियों के अनुसार सही दिशा में काम करने वाले कानूनों की आवश्यकता है न कि किसी भी तरह के पुराने कानून को ढोने की. इस मामले में यह सही है कि राजा के ख़िलाफ़ मामला बन रहा है क्योंकि उन्होंने पीएमओ और अन्य मंत्रालयों की इससे जुड़ी हुई शिकायतों की समय समय पर अनदेखी की थी जिस कारण से आज उन्हें और पूरी संप्रग सरकार को असहज स्थिति का सामना करना पर रहा है. अगर उस समय नियमों को नए मानकों के अनुसार बदल दिया गया होता तो सरकार को जो भी राजस्व का नुकसान हुआ है वह नहीं होता और साथ ही देश को कहीं न कहीं से नयी नीतियां बनाने का अवसर भी मिल जाता पर कांग्रेस आज इस बात से अपने को अलग इसलिए नहीं कर पा रही है क्योंकि उसने ही गठबंधन के साथियों पर आँख मूंदकर भरोसा किया था. गठबंधन का धर्म एक बार अटल बिहारी ने भी समझाने का प्रयास किया था पर अब इस धर्म के लिए सभी को एक समान मुद्दे पर काम करना सीखना ही होगा. &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;span id="22_TRN_0"&gt;&lt;span id="22_TRN_a"&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; जहाँ तक स्वामी की याचिका का प्रश्न है वे अपने स्थान पर बिलकुल ठीक हैं  क्योंकि केंद्रीय सतर्कता आयुक्त द्वारा २जी मामले में राजस्व की हानि के बारे में जो बातें कहीं गयीं थीं उन पर ही स्वामी ने याचिकाएं डाली थीं एक नागरिक के रूप में उन्हें देश के संविधान से यह मौलिक अधिकार मिला हुआ है कि वे भी किसी प्रकार की वित्तीय या अन्य अनियमितता के बारे में देश का ध्यान आकृष्ट कराएँ और कोर्ट में जाएँ. इस मामले में जहाँ अभी तक पीसी की संलिप्तता के कोई सबूत नहीं किले हैं वहीं स्वामी का सारा ध्यान उन्हें लपेटने में लगा हुआ है ? कोर्ट ने इस बात को आज मौजूद सबूतों के आधार पर पीसी को दोषी नहीं माना है. नीतियों के मामले में कोई भी यह नहीं कह सकता है कि वे ठीक ढंग से बनायीं गयीं या नहीं क्योंकि सभी के अनुसार विकास के अलग अलग आयाम हैं और हर दल अपने अनुसार ही विकास को देखता है जबकि आज देश की आवश्यकता के अनुसार इस तरह से नियमों को बनाने की आवश्यकता है कि आने वाली कोई भी सरकार उस के ख़िलाफ़ जाने की न सोचे.&amp;nbsp; अब नेताओं को यह समझना ही होगा कि देश बड़ा है वे नहीं इसलिए अब कुछ मामलों में उन्हें अपने को नियंत्रित करना ही होगा वर्ना कुछ भी हो सकता है. &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;span id="22_TRN_0"&gt;&lt;span id="22_TRN_a"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; देश में जिस तरह से हर बात में राजनीति हावी रहती है उसका कोई मतलब नहीं है क्योंकि वैश्विक दिशा में विकास की जो परिभाषा आज है हमें भी उस पर ही ध्यान देना चाहिए पर इसका मतलब यह भी नहीं है कि किसी को भी कुछ भी करने की छूट मिल गयी है ? देश के हित में अब सही दिशा में सोचने का समय आ गया है विकास या अन्य क्षेत्रों से जुड़ी किसी भी बात पर केवल बोलने के स्थान पर सही तरह से विशेषज्ञों की राय लेकर किसी &lt;span id="22_TRN_li"&gt;भी&lt;/span&gt; नयी नीति को बनाना चाहिए जिससे उसमें आज के समय कोई कमी न रह जाये. इस तरह की स्थायी समितियां बनायीं जानी चाहिए जो हर वर्ष नीतियों की समीक्षा कर सकें और अपने सुझाव सरकार को दे सकें साथ ही इन समितियों के सुझावों को मानने के लिए देश के राजनैतिक तंत्र को बाध्य भी किया जाना चाहिए क्योंकि राजनेता हर बात में सही सोच रखते हों यह आवश्यक नहीं है. ये समितियां केवल सुझाव देने के लिए ही हों और इनके सदस्यों को किसी भी तरह की सुविधाएँ न दी जाएँ क्योंकि जब किसी क्षेत्र विशेष के लोग अपने क्षेत्र से लाभ कमा रहे हैं तो उनसे देश के लिए इतने काम को नि:शुल्क करने की आशा तो देश करता ही है ? अच्छा हो कि इस पूरे प्रकरण में आरक्षण आदि की कोई बातें न की जाएँ बल्कि सभी को शामिल किया जाये जो इस लायक हैं.&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span id="22_TRN_0"&gt;&lt;span id="22_TRN_a"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span id="22_TRN_0"&gt;&lt;span id="22_TRN_a"&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8033919830443655972-5928160134819490060?l=seedhikharibaat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel="replies" type="application/atom+xml" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/feeds/5928160134819490060/comments/default" title="टिप्पणियाँ भेजें" /><link rel="replies" type="text/html" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/02/blog-post_05.html#comment-form" title="1 टिप्पणियाँ" /><link rel="edit" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/5928160134819490060?v=2" /><link rel="self" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/5928160134819490060?v=2" /><link rel="alternate" type="text/html" href="http://feedproxy.google.com/~r/SeedhiKhariBaat/~3/VBhqZIWqRdc/blog-post_05.html" title="नियम, नेता और कानून" /><author><name>Dr Ashutosh Shukla</name><uri>https://profiles.google.com/100257269155750831732</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel="http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail" width="32" height="32" src="//lh4.googleusercontent.com/-m8s_63KhFOs/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAIjw/Or7VxwQJcqY/s512-c/photo.jpg" /></author><thr:total>1</thr:total><feedburner:origLink>http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/02/blog-post_05.html</feedburner:origLink></entry><entry gd:etag="W/&quot;CEINRHkzeip7ImA9WhRbE08.&quot;"><id>tag:blogger.com,1999:blog-8033919830443655972.post-1056387719314666538</id><published>2012-02-04T07:59:00.000+05:30</published><updated>2012-02-04T07:59:55.782+05:30</updated><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2012-02-04T07:59:55.782+05:30</app:edited><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="अधिकार" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="समाज" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="अभिव्यक्ति" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="उम्मीद" /><title>नेट पर सेंसर ?</title><content type="html">&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;
&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; जिस तरह से पूरे विश्व में नेट पर डाले जाने वाले कंटेंट के बारे में बहस चल रही है उसी बीच गूगल ने यह निर्णय किया है कि अब वह नेट पर डाले जाने वाले किसी भी कंटेंट को किसी देश विशेष में आपत्ति किये जाने के बाद रोक लगाने की तैयारी कर रही है. इस प्रक्रिया को गूगल पहले भारत ब्राज़ील और जर्मनी जैसे देशों  से शुरू करने जा रही है क्योंकि आजकल इन देशों में इस तरह की बातें सरकारी स्तर पर भी उठाई जाने लगी हैं. कोई भी आर्थिक रूप से संपन्न कम्पनी किसी भी स्थिति में अपने लिए ऐसी स्थिति नहीं चाहेगी जिसमें वह किसी अन्य से पिछड़ जाये. गूगल के इस तरह से झुकने के पीछे शायद चीन का उदाहरण भी काम कर रहा है जहाँ से चीन और अपनी ऐंठ में कम्पनी ने अपने कारोबार को समेट लिया जिसके बाद उसको बहुत बाद नुकसान हुआ है. अब आर्थिक रूप से नुकसान देने वाली इस बात को गूगल ने समझ लिया है जिसके बाद ही वह इस तरह की कंटेंट रोकने वाली नयी नीति पर काम करना शुरू कर चुकी है.&lt;br /&gt;
&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; कुछ लोगों को इस बात से भी आपत्ति होगी कि आख़िर गूगल को इस तरह से सरकार के सामने घुटने टेकने की क्या आवश्यकता है ? गूगल को पैसे चाहिए वह कोई अधिकारों की पैरवी करने वाला समूह नहीं है और कोई भी व्यापारिक गतिविधि सरकारों से लड़ाई करके नहीं चलायी जा सकती है अब यह गूगल की समझ में आ रहा है. इस तरह का नेट आधारित आपत्तिजनक कंटेंट डालने वाले केवल कुछ हिट पाने के लिए कुछ भी लिख देते हैं जबकि स्वस्थ और प्रगतिशील समाज में इस बात की आज़ादी नहीं दी जा सकती है कि कोई भी किसी भी तरह से किसी व्यक्ति, संस्था, धर्म, जाति आदि के बारे में कुछ भी लिख दे ? लिखने वालों को अब यह समझना ही होगा कि अगर उनको यह आज़ादी मिली हुई है तो उसके साथ ही लिखने की भी कोई सीमा है मतभेद कहीं पर भी हो सकते हैं पर उनको किसी आपत्तिजनक स्थिति तक पहुँचाना आख़िर किस तरह की अभिव्यक्ति है ? अगर कोई वास्तव में इस बात के लिए संवेदनशील है तो उसे यह देखना चाहिए कि आख़िर क्या कारण है कि लिखते समय सीमाओं का ध्यान नहीं रखा जाता है ?&lt;br /&gt;
&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; भारत जैसा देश जो किसी भी मामले में अत्यधिक संवेदनशील है यहाँ पर किसी व्यक्ति को कुछ लोग गालियाँ निकलते मिल जायेंगे तो कुछ उसकी पूजा करते भी मिलेंगें ? ऐसी स्थिति में कौन सही है और कौन ग़लत यह कौन निर्धारित करेगा ? हर बार या विषय को देखने का हर व्यक्ति का अलग नज़रिया होता है और उसे किसी &lt;span id="22_TRN_7m"&gt;कानून के सहारे नहीं चलाया जा सकता है क्योंकि कानून से किसी के विचारों के प्रवाह को नहीं रोका जा सकता है पर लिखने वालों को यह ध्यान रखना चाहिए कि वे जो कुछ भी लिख रहे हैं उसका पूरे समाज पर क्या प्रभाव पड़ने वाला है ? लिखकर अपने को अलग कर देने से कोई मतलब नहीं हल होता है विचार वही कारगर होते हैं जो पूरी तरह से संतुलित तरीके से लिखे जाएँ. अपनी खीज को निकालने के लिए कही जाने वाली बातें आख़िर किस तरह की अभिव्यक्ति का प्रतिनिधित्व करती हैं ? इस अभिव्यक्ति से आख़िर समाज को क्या हासिल होता है ?अच्छा ही है कि ये बड़ी कम्पनियां सरकार और समाज की इस चिंता को समझने लगी हैं और उन्हें यह आभास हो गया है कि अभिव्यक्ति की आज़ादी दूसरों पर आक्षेप लगाने जैसी नहीं होती है. &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8033919830443655972-1056387719314666538?l=seedhikharibaat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel="replies" type="application/atom+xml" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/feeds/1056387719314666538/comments/default" title="टिप्पणियाँ भेजें" /><link rel="replies" type="text/html" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/02/blog-post_04.html#comment-form" title="0 टिप्पणियाँ" /><link rel="edit" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/1056387719314666538?v=2" /><link rel="self" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/1056387719314666538?v=2" /><link rel="alternate" type="text/html" href="http://feedproxy.google.com/~r/SeedhiKhariBaat/~3/F7lxVjE9mVs/blog-post_04.html" title="नेट पर सेंसर ?" /><author><name>Dr Ashutosh Shukla</name><uri>https://profiles.google.com/100257269155750831732</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel="http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail" width="32" height="32" src="//lh4.googleusercontent.com/-m8s_63KhFOs/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAIjw/Or7VxwQJcqY/s512-c/photo.jpg" /></author><thr:total>0</thr:total><feedburner:origLink>http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/02/blog-post_04.html</feedburner:origLink></entry><entry gd:etag="W/&quot;D0QMQXw9fSp7ImA9WhRbEk4.&quot;"><id>tag:blogger.com,1999:blog-8033919830443655972.post-2589297538532112642</id><published>2012-02-03T07:46:00.000+05:30</published><updated>2012-02-03T07:46:20.265+05:30</updated><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2012-02-03T07:46:20.265+05:30</app:edited><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="राजनीति" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="विकास" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="अधिकार" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="संशोधन" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="उपयोग" /><title>२ जी और कानून</title><content type="html">&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;
&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; आख़िरकार सुप्रीम कोर्ट ने कानून के अनुसार अपने निर्णय को सुनाते हुए २जी मामले में अपना काम कर ही दिया. इस पूरे मामले में जहाँ एक तरफ तकनीकी विशेषज्ञों की राय का बहुत महत्व है उसे ही रेखांकित करते हुए कोर्ट ने यह भी कहा कि हाईकोर्ट में चल रहे मुक़दमें वहीं पर चलते रहेंगें और तकनीकी पक्षों की बारीकी से जांच की जाएगी तथा समय पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट भी इसकी प्रगति देख सकता है. इस पूरे प्रकरण में जिस तरह से चुनाव के माहौल में सभी राजनैतिक दल एक बार फिर से इसको उछालने में लग गए हैं उसकी कोई आवश्यकता नहीं है. जिस तरह से भाजपा और कांग्रेस में एक बार फिर से आरोप प्रत्यारोप लगाए जाने लगे हैं उनकी भी कोई आवश्यकता नहीं है. यह सही है कि अगर नीतियों की समीक्षा और स्पेक्ट्रम दरों की सही जानकारी के बारे में सरकार नीलामी की सही प्रक्रिया अपनाती तो राजस्व का इतना बड़ा नुक्सान नहीं होता लेकिन भारत में मोबाइल का बाज़ार इतनी तेज़ी से बढ़ा कि उसके बारे में विचार करने के लिए किसी के पास समय ही नहीं था सभिकेवल टेलीडेंसिटी बढ़ने से ही बहुत खुश थे ? अगर उस समय नीति में कोई कमी थी तो तब से अब तक भाजपा क्यों चुप थी ? उसे यह लग रहा था कि उसकी नीतियां आगे बढ़ाई जा रही हैं यही बहुत संतोष की बात है पर देश की संवैधानिक संस्थाएं यह भूल गयीं कि जो आज बहुत अच्छा होता है कई बार समय के साथ वही बहुत ग़लत दिखाई देने लगता है.&amp;nbsp; &lt;br /&gt;
&amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; अब जब इस मामले से प्रभावित कम्पनियाँ हैरानी से कोई रास्ता ढूंढ रही हैं तो वहीं भारतीय कानून और नेताओं के रवैय्ये को देखकर पूरा बाज़ार भी अचरज में है. जिस तरह से २००८ में आई नयी कम्पनियों के लिए यह निर्णय एक बड़ी समस्या लेकर आया है उसी तरह से देश के क़ानून और संविधान के साथ संसद के सामने भी बड़े प्रश्न लगाते हुए आया है कि आने वाले समय में क्या देश इस तरह की अधकचरी नीतियों से ही आगे बढ़ेगा ?&amp;nbsp; सवाल यह भी है कि क्या हमारे संविधान में ही कोई कमी है या फिर हमारे नेता हर बात का श्रेय खुद ही लेने के चक्कर में सही गलत का एहसास ही नहीं कर पाते ? ऐसा लगता है कि अब सही समय है कि इस तरह के तेज़ी से बढ़ते हुए हर क्षेत्र के बारे में केवल संसद ही फैसला न करे क्योंकि संसद का काम कानून बनाना है पर कानून आज के समय के हिसाब से सही बन पा रहा है या नहीं यह फैसला हमारे नेता नहीं कर सकते हैं ? इस तरह के मामलों में क्षेत्र विशेष के विशेषज्ञों की राय लेना अब आवश्यक कर दिया जाना चाहिए और साथ ही इस बात का भी ध्यान रखा जाना चाहिए कि ये विशेषज्ञ किसी पार्टी या विचारधारा के साथ न हों वरना यहाँ भी वे अपनी क्षमता का दुरूपयोग करने लगेंगें. हर दल ने अपने हितों को साधने के लिए कभी न कभी ऐसे काम किये हैं ? टाटा समूह राजग पर अपनी एयरलाइन  शुरू करने में अड़ंगे लगाने की बात सार्वजनिक रूप से कह चुका है तो उसका क्या ?&amp;nbsp; &lt;br /&gt;
&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; इस बात पर विचार करने के लिए अब विभिन्न विभागों की स्थायी समितियां बनायीं जानी चाहिए जिनमें उस क्षेत्र विशेष के विशेषज्ञों को शामिल किया जाना चाहिए साथ ही यह भी ध्यान रखा जाना चाहिए कि देश के बड़े विशेषज्ञ इस समिति में देश के लिए अपनी राय हमेशा ही देना चाहेंगें पर उनको पूरे सम्मान के साथ यहाँ रखा जाए और उन्हें किसी भी तरह से प्रभावित करने का प्रयास न किया जाये. आज देश में जिस तरह का माहौल बन चुका है उसमें ये विशेषज्ञ भी अपने लाभ के लिए नीतियों को सही ढंग से बनाते समय कुछ कमियां छोड़ सकते हैं तो इसके लिए सम्बंधित नियामक आयोग अपने काम से इन्हें दुरुस्त रखने का काम करे. आज इस बात का कोई मतलब नहीं है कि राजग ने क्या नीतियां बनायीं थीं या संप्रग ने किन नीतियों का पालन किया ? मतलब इस बात का अधिक है कि अब देश आगे बढ़ने के लिए क्या करने वाला है ? क्या सभी लोग अपनी सामूहिक ज़िम्मेदारी को समझते हुए इस क्षेत्र में विभिन्न कम्पनियों के लगे हुए भारी पूँजी निवेश के बचाव की कोई कोशिश करेंगें ? क्या इन कम्पनियों को अब आगे होने वाली नीलामी में कोई छूट या प्राथमिकता दी जाएगी ? क्योंकि ऐसा भी नहीं है कि ये सभी कम्पनियां गलत थीं और ऐसा भी नहीं है कि इन्होंने इस छूट का लाभ नहीं उठाया है अगर नीतियों के पुराने होने के कारण इस तरह के विवाद सामने आते हैं तो नीति क्या होनी चाहिए अब इस पर विचार किये जाने का समय आ गया है.&amp;nbsp; &amp;nbsp; &lt;br /&gt;
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8033919830443655972-2589297538532112642?l=seedhikharibaat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel="replies" type="application/atom+xml" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/feeds/2589297538532112642/comments/default" title="टिप्पणियाँ भेजें" /><link rel="replies" type="text/html" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/02/blog-post_03.html#comment-form" title="0 टिप्पणियाँ" /><link rel="edit" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/2589297538532112642?v=2" /><link rel="self" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/2589297538532112642?v=2" /><link rel="alternate" type="text/html" href="http://feedproxy.google.com/~r/SeedhiKhariBaat/~3/PNmFc776C5o/blog-post_03.html" title="२ जी और कानून" /><author><name>Dr Ashutosh Shukla</name><uri>https://profiles.google.com/100257269155750831732</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel="http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail" width="32" height="32" src="//lh4.googleusercontent.com/-m8s_63KhFOs/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAIjw/Or7VxwQJcqY/s512-c/photo.jpg" /></author><thr:total>0</thr:total><feedburner:origLink>http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/02/blog-post_03.html</feedburner:origLink></entry><entry gd:etag="W/&quot;AkAHSHs4fyp7ImA9WhRbEUk.&quot;"><id>tag:blogger.com,1999:blog-8033919830443655972.post-3867968746889339206</id><published>2012-02-02T07:42:00.000+05:30</published><updated>2012-02-02T07:42:19.537+05:30</updated><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2012-02-02T07:42:19.537+05:30</app:edited><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="इस्लाम" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="आतंक" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="सुविधा" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="उपयोग" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="उद्योग" /><title>गुजरात और मुसलमान</title><content type="html">&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;
&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; पता नहीं क्यों देश में कुछ ऐसा क्यों होता जा रहा है कि हर बार केवल जाति,धर्म,संप्रदाय और समूह के रूप में ही लोगों की पहचान की जाने लगी है ? कश्मीर घाटी से गुजरात में अहमदाबाद के कालूपुर रेलवे स्टशन के निकट रह रहे कश्मीरी मुसलमानों के एक समूह की उपस्थिति ने ख़बरिया लोगों को ख़बर लिखने का एक और अवसर दिया है. बारामुला से आये हुए इन ५० लोगों के सामने घाटी में रोज़गार और पहचान का संकट था तो अन्य जगहों पर भी वे सर्दी के कारण नहीं रुक सके. अब जब वे अहमदाबाद में रह रहे हैं तो इससे किसी को भले ही कोई फर्क न पड़ता हो पर हर बात को राजनैतिक चश्में से देखने वाले ज़रूर ही इसका प्रचार करना चाहेंगें. जो कुछ कश्मीर में १९८९ से हुआ उसके बाद वहां की पूरी आबादी ही शंकाओं के घेरे में जीने को मजबूर हो चुकी है और जब से वहां के हालात कुछ सुधरे हैं तब से लोगों की जिंदगी भले ही कुछ अच्छी हो गयी हो पर आज भी काम की समस्या के कारण वहां के निवासी पलायन करने को मजबूर हैं. क्या कारण है कि आतंकवाद के घटने के बाद भी वहां की सरकार लोगों की अपेक्षाओं के अनुसार सुविधाएँ जुटा पाने में असफल होती जा रही है आज इस पर विचार किये जाने की आवश्यकता है.&lt;br /&gt;
&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp; मोदी का नाम जैसे मुसलमानों के लिए एक दु:स्वप्न बनाया जा चुका है और कोई भी मोदी के आज के गुजरात के बारे में न तो जानना चाहता है और न ही उसके बारे में बात करना चाहता है ? २००२ की बातों को पीछे छोड़कर धरातल की बातों पर ध्यान देने के कारण ही आज मोदी की स्वीकार्यता पूरे गुजरात में बढ़ चुकी है, नौकरशाही पर तगड़ी पकड़ होने के कारण भी पूरे देश और दुनिया भर के उद्योगपति गुजरात जाना चाहते हैं. गुजरात के पास भौगोलिक रूप से जो बढ़त थी मोदी ने उसे भी सही ढंग से भुनाने का प्रयास भी किया. ऐसे में अगर मुसलमानों का एक समूह अपने बेहतर भविष्य के लिए गुजरात जाता है तो इसे सामान्य रूप में लिया जाना चहिये. इन कश्मीरी मुसलमानों ने इस बात को भी स्वीकार किया है कि उन्हें गुजरात में कोई दिक्कत नहीं है जैसा उन्होंने सुन रखा था पर वे यह बात सबके सामने इसलिए नहीं कहना चाहते हैं क्योंकि इससे कश्मीर में बैठे उनके परिवार वाले और आतंकियों की नज़रों में वे आ जायेंगें ? क्यों आख़िर देश के मुसलमान कब तक इन झूठे डरों के घेरे में अपने को क़ैद रखेंगें जबकि पूरे देश में उनके लिए भी वही अवसर हैं जो अन्य लोगों के लिए हैं. कश्मीर के आतंक और कश्मीरी मुसलमानों को संदेह की दृष्टि पूरे देश में देखे जाने से इन लोगों को काम के अवसर तो उतने नहीं मिल रहे जितने आसानी से मिल सकते थे. जब आतंकी पूरे देश की नज़रों में हर कश्मीरी को संदेह के घेरे में लाना चाहते थे तब वहां के आम लोगों ने कुछ नहीं किया तो अब ऐसी असहज स्थिति का सामना तो उन्हें करना ही होगा.&lt;br /&gt;
&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; क्या कारण है कि कश्मीर में उतनी रफ़्तार से उद्योग धंधे नहीं लग पा रहे हैं जिनके लिए उसका हक़ बनता है ? इसके लिए सबसे पहले तो वहां की नीतियों में शंका की प्रवृत्ति को दूर करना होगा और सरकार को इस बात की गारंटी देनी होगी कि किसी भी परिस्थिति में औद्योगिक इकाइयों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जायेगा ? क्या इस बात का कोई जवाब है कि कश्मीर के किसी भी हिस्से में कोई राष्ट्रीय या बहुराष्ट्रीय कम्पनी अगर आती है तो वहां के नेता धरा ३७० का रोना नहीं रोने लगेंगें ? अब अगर कश्मीर को पूरी दुनिया के साथ आगे बढ़ना है तो उसे इस तरह की शंकाओं से खुद को बाहर निकालना होगा और जिन उद्योगों के लिए घाटी का माहौल अनुकूल है उन्हें वहां पर लगाने के बारे में सोचना भी होगा. सरकार बिना किसी विवाद में पड़े विशेष औद्योगिक क्षेत्रों को चिन्हित का सकती है जहाँ पर सुरक्षा की दृष्टि से भी कोई समस्या न हो और विकास की गति को बढाया जा सके. हो सकता है कि आज आम कश्मीरी इस बात से भड़क जाये कि घाटी में किसी बाहरी व्यक्ति या समूह का कोई उद्योग न लगे पर एक दिन उसे यह सोचना ही होगा कि अब केवल सरकारी स्तर पर ऐसा कर पाना नामुमकिन है और पूरे देश के साथ विकास की गंगा में अब झेलम को भी शामिल करने का समय आ गया है तभी जाकर घाटी में सही मायनों में विकास की बयार महसूस की जा सकेगी और कोई भी दल दिलों की दूरियों को बढाने में सफल नहीं हो पायेगा..... &amp;nbsp;  &lt;br /&gt;
&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &lt;br /&gt;
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8033919830443655972-3867968746889339206?l=seedhikharibaat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel="replies" type="application/atom+xml" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/feeds/3867968746889339206/comments/default" title="टिप्पणियाँ भेजें" /><link rel="replies" type="text/html" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/02/blog-post_02.html#comment-form" title="3 टिप्पणियाँ" /><link rel="edit" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/3867968746889339206?v=2" /><link rel="self" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/3867968746889339206?v=2" /><link rel="alternate" type="text/html" href="http://feedproxy.google.com/~r/SeedhiKhariBaat/~3/KAwIYtw3570/blog-post_02.html" title="गुजरात और मुसलमान" /><author><name>Dr Ashutosh Shukla</name><uri>https://profiles.google.com/100257269155750831732</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel="http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail" width="32" height="32" src="//lh4.googleusercontent.com/-m8s_63KhFOs/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAIjw/Or7VxwQJcqY/s512-c/photo.jpg" /></author><thr:total>3</thr:total><feedburner:origLink>http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/02/blog-post_02.html</feedburner:origLink></entry><entry gd:etag="W/&quot;CUMBQnoyfyp7ImA9WhRbEEs.&quot;"><id>tag:blogger.com,1999:blog-8033919830443655972.post-5352333916908341773</id><published>2012-02-01T08:00:00.000+05:30</published><updated>2012-02-01T08:00:53.497+05:30</updated><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2012-02-01T08:00:53.497+05:30</app:edited><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="अधिकार" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="शुचिता" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="सरकार" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="अराजकता" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="नेता" /><title>लोकसेवक और कानून</title><content type="html">&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;
&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; २ जी स्पेक्ट्रम घोटाले में ए राजा के ख़िलाफ़ मुक़दमा चलाये जाने में अनुमति देने में देर करने को लेकर केंद्र सरकार द्वारा की गयी देरी पर सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ स्वामी की याचिका को मंज़ूरी दे दी है. गठबन्धन सरकार चला रही कांग्रेस के लिए एक तरफ़ यह बड़ा झटका है साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा है कि पीएमओ &lt;span id="22_TRN_28"&gt; ने संभवतः मनमोहन सिंह को सही जानकारी नहीं दी है ? इस पूरे मसले में जहाँ केंद्र सरकार की इस घोटाले से निपटने के तरीके पर ही प्रश्न चिन्ह लग गया है वहीं कोर्ट ने इस बात को भी रेखांकित किया है कि अब समय आ गया है कि लोकसेवकों के ख़िलाफ़ की जाने वाली शिकायतों पर निर्णय लेने की एक सीमा निर्धारित की जानी चाहिए क्योंकि इस तरह से कानून को अपनी सुविधा के अनुसार चलाने से भ्रष्टाचार बढ़ता है. कोर्ट ने यह भी कहा कि किसी भी नागरिक को भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ किसी भी व्यक्ति के ख़िलाफ़ शिकायत करने का अधिकार संविधान से मिला हुआ है और इसकी अनदेखी नहीं की जा सकती है. देश में आज जिस तरह से नेताओं और अधिकारियों ने मिलकर भ्रष्टाचार को पोषित करना शुरू कर दिया है ऐसी स्थिति में कुछ कड़े कदम उठाये बिना काम नहीं चलने वाला है. &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;span id="22_TRN_28"&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp; लोकसेवकों के मामले में मुक़दमा चलाने की अनुमति दिए जाने के बारे में कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर ४ महीनों में अनुमति नहीं दी जाती है तो इसे स्वतः अनुमति के तौर पर मान लिया जाना चाहिए. कोर्ट ने इस मामले में १९९६ के विनीत नारायण केस के अनुसार काम करने की सलाह दी क्योंकि जब तक लोकसेवकों के साथ भी विशेष परिस्थितियों में सामान्य नियमों के तहत व्यवहार निश्चित नहीं किया जायेगा तब तक देश में बड़े स्तर से भ्रष्टाचार को नहीं रोका जा सकेगा. लोकसेवकों को विशेष अधिकार मिले हुए है उनका किसी भी परिस्थिति में दुरूपयोग किया जाना अंत में देश के लिए ही बहुत घातक साबित होने वाला है. आज देश में जिस स्तर पर भ्रष्टाचार फैला हुआ है उसमें कहीं न कही से अब इस तरह से काम करने की संस्कृति विकसित करनी ही होगी जिससे किसी अधिकार के पीछे छिपकर कोई भी देश के कानून से न खेल सके. कोर्ट ने इस समय सीमा को ४ महीने का बताया और कहा है अगर किसी लोकसेवक के ख़िलाफ़ की गयी शिकायत में इन ४ महीनों में कोई कदम नहीं उठाया जाता है तो उसे स्वीकृत ही माना जाये क्योंकि हर तरह की जांच आदि करने के लिए इतना समय पर्याप्त है.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;span id="22_TRN_28"&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp; आज सभी को लगता है कि भ्रष्टाचार ने देश को खोखला कर दिया है पर इस तरह के कदम भले ही किसी मजबूरी में उठाये जाते हों पर उनसे देश को होने वाले नुकसान को अब बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि जिन लोगों पर देश को आगे बढ़ाने की ज़िम्मेदारी है अगर वे ही इस तरह से काम करने लगेंगें तो देश में भ्रष्टाचार और बढ़ता ही जायेगा. आज देश में जो भी कानून हैं उन पर सख्ती से अमल करने की आवश्यकता है और कोई ऐसी व्यवस्था भी करनी होगी जिसके तहत किसी कानून का सहारा लेकर कोई भी इस तरह से समय न ले सके. देश को कानूनों के साथ स्वेच्छा से जीना सीखना ही होगा क्योंकि अब देश इस बात को नहीं बर्दाश्त कर सकता है कि कहीं से सबूत तलाशे जाएँ और फिर उन पर मुक़दमा चलने के लिए वर्षों तक प्रतीक्षा की जाये. देश को अगर अपनी शक्ति का सही उपयोग करना है तो सभी को आत्म अनुशासन से जीना सीखना ही होगा और किसी भी परिस्थिति में लोकसेवकों पर लगे किसी भी आरोप पर त्वरित कार्यवाही करने की प्रक्रिया निर्धारित करनी होगी भले ही इससे ईमानदार लोकसेवकों को कुछ परेशानी भी क्यों न हो क्योंकि अब देश किसी भी परिस्थिति में इस तरह की स्थितियों को बर्दाश्त नहीं कर सकता है. &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &lt;/span&gt;&amp;nbsp;  &lt;br /&gt;
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8033919830443655972-5352333916908341773?l=seedhikharibaat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel="replies" type="application/atom+xml" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/feeds/5352333916908341773/comments/default" title="टिप्पणियाँ भेजें" /><link rel="replies" type="text/html" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/02/blog-post.html#comment-form" title="2 टिप्पणियाँ" /><link rel="edit" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/5352333916908341773?v=2" /><link rel="self" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/5352333916908341773?v=2" /><link rel="alternate" type="text/html" href="http://feedproxy.google.com/~r/SeedhiKhariBaat/~3/ZcmayO6injo/blog-post.html" title="लोकसेवक और कानून" /><author><name>Dr Ashutosh Shukla</name><uri>https://profiles.google.com/100257269155750831732</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel="http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail" width="32" height="32" src="//lh4.googleusercontent.com/-m8s_63KhFOs/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAIjw/Or7VxwQJcqY/s512-c/photo.jpg" /></author><thr:total>2</thr:total><feedburner:origLink>http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/02/blog-post.html</feedburner:origLink></entry></feed>

