<?xml version="1.0" encoding="UTF-8" standalone="no"?><rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:blogger="http://schemas.google.com/blogger/2008" xmlns:gd="http://schemas.google.com/g/2005" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:itunes="http://www.itunes.com/dtds/podcast-1.0.dtd" xmlns:openSearch="http://a9.com/-/spec/opensearchrss/1.0/" xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0" version="2.0"><channel><atom:id>tag:blogger.com,1999:blog-6722033917999163069</atom:id><lastBuildDate>Sun, 01 Sep 2024 05:24:36 +0000</lastBuildDate><category>हिंदी सेक्सी स्टोरी</category><category>hindi sex</category><category>vedio</category><category>हिंदीसेक्स कहानिया</category><category>नजदीकियाँ-1</category><category>नजदीकियाँ-2</category><category>वेब से बेड तक- 2</category><category>वेब से बेड तक- 3</category><category>वेब से बेड तक-1</category><title>sexisalipunem</title><description>18+only free 

कथा प्रेषकों के लिए आवश्यक सूचना :  सर्वर में खराबी के कारण आपके द्वारा भेजे गए अधिकतर पत्र जिनमें आपकी कहानियाँ भी थी, अब हमारे पास नहीं है। वैसे कुछ पत्र, जिनमें कुछ कहानियाँ भी है, हम दोबारा प्राप्त कर सके हैं। आप सभी से अनुरोध है कि फ़रवरी से लेकर अब तक आपने जो कहानियाँ भेजी थी, उन्हें पुनः भेजें। आप नई कहानियाँ भी भेज सकते हैं !

आपको हुई असुविधा के लिए हमें खेद है।</description><link>http://sexisalipunem0.blogspot.com/</link><managingEditor>noreply@blogger.com (sexisalipunem)</managingEditor><generator>Blogger</generator><openSearch:totalResults>20</openSearch:totalResults><openSearch:startIndex>1</openSearch:startIndex><openSearch:itemsPerPage>25</openSearch:itemsPerPage><language>en-us</language><itunes:explicit>no</itunes:explicit><itunes:summary>18+only free कथा प्रेषकों के लिए आवश्यक सूचना : सर्वर में खराबी के कारण आपके द्वारा भेजे गए अधिकतर पत्र जिनमें आपकी कहानियाँ भी थी, अब हमारे पास नहीं है। वैसे कुछ पत्र, जिनमें कुछ कहानियाँ भी है, हम दोबारा प्राप्त कर सके हैं। आप सभी से अनुरोध है कि फ़रवरी से लेकर अब तक आपने जो कहानियाँ भेजी थी, उन्हें पुनः भेजें। आप नई कहानियाँ भी भेज सकते हैं ! आपको हुई असुविधा के लिए हमें खेद है।</itunes:summary><itunes:subtitle>18+only free कथा प्रेषकों के लिए आवश्यक सूचना : सर्वर में खराबी के कारण आपके द्वारा भेजे गए अधिकतर पत्र जिनमें आपकी कहानियाँ भी थी, अब हमारे पास नहीं है। वैसे कुछ पत्र, जिनमें कुछ कहानियाँ भी है, हम दोबारा प्राप्त कर सके हैं। आप सभी से अनुरोध है कि फ़रवरी</itunes:subtitle><itunes:owner><itunes:email>noreply@blogger.com</itunes:email></itunes:owner><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-6722033917999163069.post-1893477308120221247</guid><pubDate>Mon, 07 Feb 2011 11:53:00 +0000</pubDate><atom:updated>2011-02-07T17:23:03.462+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">हिंदीसेक्स कहानिया</category><title>पूरी सन्तुष्टि</title><description>&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;iframe allowfullscreen='allowfullscreen' webkitallowfullscreen='webkitallowfullscreen' mozallowfullscreen='mozallowfullscreen' width='320' height='266' src='https://www.blogger.com/video.g?token=AD6v5dwNGnsRKthkZV05YUjuFFEjfyJtCCpT_dWQjF4M2LMxneik95jnnjL5eu2bsewvQTumXH307GW5FD1yZY-Fmw' class='b-hbp-video b-uploaded' frameborder='0'&gt;&lt;/iframe&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रेषिका : &lt;span class="Apple-style-span" style="color: red; font-size: 16px;"&gt;पूनम सक्सेना&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेरा नाम रेशमा है। मैं इस्लामाबाद पाकिस्तान से हूँ। मैं विवाहित हूँ । मेरी उम्र 26 वर्ष है। यह बात तब की है जब मैं कालेज में थी। मुझे अपने क्लास के एक लड़के मोइन से प्यार हो गया। हम दोनों अकसर कालेज से घूमने के लिये निकल जाते थे। फिर दोनों पिक्चर देखने के लिये भी जाने लगे। हम दोनों धीरे धीरे बहुत करीब आते गये। मोइन मुझे हमेशा हाथों पर और फिर धीरे धीरे गालों पर चूम लेता था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
एक दिन उसने मुझे मेरे होठों पर चूम लिया। अब वह थोड़ा निडर हो गया था। एक दिन उसने मुझे कस कर पकड़ लिया और मेरे होठों को चूम लिया, फिर उसने मेरे कन्धों पर, फिर मेरी गर्दन को चूम लिया। उसने मेरे उरोजों को छू लिया। पहली बार किसी ने मेरे वक्ष को छुआ था मुझे बहुत अच्छा लगा था। धीमे धीमे वह और आगे बढ़ गया था। अब वह अपने हाथों से मेरी जांघों को, कभी कभी वह अपने हाथों से मुझे पीछे से कमर के नीचे के भाग को दबा देता था। मुझे बहुत मजा आता था, मैंने कभी विरोध नहीं किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
एक दिन हम दोनों पिक्चर देखने गये। हम सबसे पीछे की सीट पर बैठे थे। हॉल में भीड़ बहुत कम थी और हमारे आस पास कोई नहीं बैठा था। पिक्चर शुरू होने के 10 या 15 मिनट बाद मोइन ने अपना हाथ मेरे कन्धों पर रखा और अपनी तरफ खींचा। थियेटर में काफी अन्धेरा था। वह मेरे गालों पर चूमने लगा उसने मेरे होठों पर अपने होंठ रख दिये उसकी सांसें बहुत गर्म थी। हम दोनों ने एक दूसरे को बहुत बेताबी से चूमना शुरू कर दिया। तभी मैंने उसका हाथ अपने दुपट्टे के नीचे महसूस किया। उसका हाथ मेरे उरोजों को कमीज के ऊपर से दबाने लगा। इस दौरान भी वह मुझे चूम रहा था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैंने अपनी आँखें बन्द कर ली मुझे बहुत मजा आ रहा था। अचानक मुझे महसूस हुआ कि उसका हाथ मेरी कमीज के ऊपर के दो बटनों को खोल चुका था। उसका हाथ मेरी ब्रा के कोनों के अन्दर मेरे स्तनों को सहला रहे थे। धीरे धीरे उसका हाथ मेरे चुचूकों को अंगुलियों से छेड़ने लगा जिससे वे एकदम कठोर हो गये। मैं कुछ सोच नहीं पा रही थी कि मैं क्या करूँ। मेरे पूरे शरीर में अजीब सी तरंगें दौड़ रही थी जो कि मेरी जिन्दगी में पहली बार हुआ था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उसने अपने हाथ को मेरी कमीज से निकाला और मेरे पेट पर रखा और इधर उधर घुमाता रहा। फिर उसका हाथ नीचे की ओर बढ़ने लगा। मेरे अन्दर अजीब सी फीलिंग हो रही थी। उसने अपना हाथ मेरी जांघों पर रखा और धीरे धीरे ऊपर की ओर ले गया। उसने मेरे प्राइवेट भाग को मेरी सलवार के ऊपर से ही छूआ। मेरे मुँह से उॅहहहहह करके आवाज निकली मेरे पैर फैल गये और उसकी हथेली ने उस जगह को भर लिया। अपनी अंगुलियों से वह मेरे प्राइवेट अंग को रगड़ रहा था। उसका ऐसा करना मुझे पागल बना रहा था। मेरा बदन मेरे वश में नहीं था, मैं अपनी कमर को आगे पीछे करने लगी थी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अचानक उसने मुझसे अपनी कमीज के बटन बन्द करने और उसके साथ बाहर चलने को कहा। मैंने वैसा ही किया। हमने टैक्सी ली और कॉलेज की ओर चल पड़े। शाम हो गई थी, कॉलेज बन्द हो चुका था केवल एक-दो बच्चे थे। हम दोनों कॉलेज के पीछे की ओर से कॉलेज की छत की ओर गये। कॉलेज बन्द हो चुका था किसी के उधर आने की उम्मीद नहीं थी। हमने ऐसी जगह चुनी जहाँ से हमें कोई देख नहीं पाये। हम दोनों दीवार के सहारे खड़े हो गये और बगैर वक्त बर्बाद किये एक दूसरे को बेसब्री से चूमना शुरू कर दिया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उसने मेरे दुपट्टे को उतार दिया। मेरी कमीज के सारे बटन खोल डाले और अपना हाथ मेरी कमीज में डालकर मेरे उरोजों को हाथ में ले लिया। उसने इतनी जल्दी में यह सब किया कि मुझे कुछ समझ ही नहीं आ पाया। उसके इस तरह से छूने से मुझे करंट सा लगा। उसने मेरी ब्रा को खोल दिया और बड़ी बेदर्दी से मेरे स्तनों को मसलने लगा। मेरे स्तन एकदम सख्त हो गये। वह अब मेरे उरोजों को चूमने लगा और मेरे एक चुचूक को मुँह में ले लिया और बड़ी सख्ती से उन्हें चूसने लगा। उसका एक हाथ मेरे चूतड़ को मसल रहा था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उसने मुझे पीछे से अपनी बाहों में जकड़ लिया और मेरे वक्ष को दबाने लगा। उसका सख्त हो चुका अंग मेरे पीछे चूतड़ों में चुभने लगा। उसका हाथ मेरी कमीज के नीचे मेरे पेट पर टहल रहा था। शलवार के ऊपर से ही वह मेरे प्राइवेट भाग को रगड़ रहा था। मेरी शलवार का वह हिस्सा गीला हो गया जहाँ उसने अपना हाथ रखा था और मेरी चूत को रगड़ रहा था। मोइन ने मेरी शलवार खोल दी और मैंने उसे नीचे गिर जाने दिया। उसकी अंगुलियाँ सीधे मेरी पैंटी के अन्दर पहुँच गई और अगले ही पल उसकी अंगुलियाँ मेरी चूत के अन्दर पहुँच गई, वह उन्हें वह अन्दर बाहर करने लगा।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैंने महसूस किया कि उसका सख्त लण्ड मेरी कमर में चुभ रहा है और धक्के लगा रहा था। उसने मेरी पैंटी को नीचे खींच दिया। मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था, मैंने पलट कर उसकी पैंट खोल डाली और उसके अन्डरवियर में हाथ डालकर मैंने उसके अंग को हाथों में ले लिया। उसने अपना पैंट नीचे गिरा दिया और मेरी पैंटी को उतार दिया। उसने मुझे अपनी गोद में उठा लिया। मैंने अपनी टांगों को उसकी कमर में लपेट लिया। उसका कठोर अंग मेरी चूत के मुँह को ढूंढने लगा। मैंने उसे अपने हाथ से पकडा और अपनी चूत का रास्ता दिखाया और एक झटके से उसका मोटा और कठोर लण्ड मेरे अन्दर प्रवेश कर चुका था। मुझे लगा कि कोई जलती हुई चीज मेरे अन्दर घुस गई। मैं दर्द से तड़प उठी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उसने मेरे मुँह को एक हाथ से दबाया और मेरी कमर को एक हाथ से थाम लिया। अगले ही पल मेरे चुचूक उसके मुँह में थे। वह उन्हें जोर से चूसने लगा। उसका लण्ड अभी भी मेरे अन्दर ही था। उसने मेरी कमर को कस कर पकड़ रखा था जिससे मैं ऊपर ही नहीं उठ पा रही थी। धीरे धीरे मुझे मजा आने लगा मेरा दर्द जाने कहाँ चला गया। मैं अपने आप को ऊपर नीचे करने लगी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फ़िर उसने वहीं जमीन पर मुझे लिटाया और मेरे पैरों को फैलाया और उसका लण्ड अगले ही पल मेरी चूत में था। उसका पूरा लण्ड मेरे अन्दर तक समा रहा था। उसने मेरी कमर को हाथों से पकड़ा और जोरों से धक्के देने लगा। इस बीच मेरी चूत से पानी निकल गया। उसने अपनी स्पीड बढ़ा दी। उसके लण्ड का ऊपर का सिरा मेरे अन्दर तक पहुँच रहा था। उसका लण्ड मेरे अन्दर और कठोर और सख्त होता जा रहा था। हम दोनों एक दूसरे को बहुत जबरदस्त धक्के दे रहे थे। अचानक हम दोनों ने एक दूसरे को कसकर पकड़ लिया, उसने अपनी स्पीड चालू रखी और अगले ही पल उसका वीर्य मेरी चूत में भर गया, तभी मैं भी एक बार फिर झर गई। वह मेरे ऊपर ही निढाल हो कर गिर गया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हम दोनों बुरी तरह से हांफ रहे थे। हम दोनों ने कपड़े पहने एक दूसरे को देख कर मुस्कुराये। हम दोनों एक दूसरे से पूरी तरह से सन्तुष्ट थे।&lt;br /&gt;
punemsexsena@yahoo.in&lt;br /&gt;
﻿&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;</description><link>http://sexisalipunem0.blogspot.com/2011/02/blog-post_07.html</link><author>noreply@blogger.com (sexisalipunem)</author><thr:total>0</thr:total></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-6722033917999163069.post-708685986386244040</guid><pubDate>Thu, 03 Feb 2011 18:29:00 +0000</pubDate><atom:updated>2011-02-03T23:59:54.458+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">vedio</category><title>अंग्रेजन को साड़ी पहनाई</title><description>&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;&lt;iframe allowfullscreen="" frameborder="0" height="390" src="http://www.youtube.com/embed/EzdKFCwaM0k" title="YouTube video player" width="480"&gt;&lt;/iframe&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;
प्रेषक : ऋषि&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैं अन्तर्वासना का नया पाठक हूँ। कुछ कहानियाँ पढ़ने के बाद ऐसा लगा कि मुझे भी अपनी कहानी लिखनी चाहिए क्योंकि आजकल कोई भी सेक्स से अछूता नहीं है, हर किसी की ज़िन्दगी में सेक्स आ कर ही रहता है। अब मैं अपनी सच्ची कहानी आप सबके सामने पेश कर रहा हूँ।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेरा नाम ऋषि है मेरा घर दिल्ली में है। मैंने अपनी बी टैक जयपुर से की। मेरे दादा जी की साड़ियों की दुकान है। कभी-कभी मैं वहाँ जाकर गल्ले पर बैठ जाता था। हमारी दुकान पर विदेशी भी बहुत आते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
एक दिन दो विदेशी महिलाएँ हमारी दुकान पर आई, दोनों की उम्र लगभग 30 साल होगी। उन दोनों ने जींस-टॉप पहना था। उनमें से एक ने हमारी दुकान से एक साड़ी पसंद की और ब्लाऊज़ का नाप दिया, साथ में अपने होटल का पता दिया और कहा- ब्लाऊज़ हमारे होटल में दे जाना !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैंने उनसे कहा- ठीक है ! दो दिन लगेंगे सिलने में ! मैं दो दिन बाद आ जाऊंगा।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब ब्लाऊज़ सिल गया तो मैं होटल में ब्ल्लूज़ देने पहुँचा, मुझसे मैनेजर ने पूछा- किधर जा रहे हो?&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैंने विनम्रता से जबाब दिया- मैं 16 नम्बर कमरे में मैडम का सामान देने आया हूं, उन्होंने मंगवाया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैनेजर ने मैडम को कॉल करके पूछा- कोई लड़का आया है सामान लेकर ! आपने मंगवाया था क्या?&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैडम ने कहा- हाँ, उसको भेज दो मेरे कमरे में !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैं कपड़े लेकर कमरे में गया तो मैंने देखा कि वो अंग्रेजन टॉप और ट्राऊज़र में बैठी हुई है। उसने मुझे अन्दर बुलाया और मैंने उसको गुड-आफ़्टरनून कहा।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उसने भी मुझे गुड आफ़्टरनून कहा। उसने मुझे पानी के लिए पूछा। मैंने पानी पिया और पोली बैग उसको दे दिया, उसने पोली बैग में से अपना ब्लाऊज़ निकाला और देखने लगी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उसने मुझसे कहा- आई डोंट नो हाउ कैन आई वीयर दीज़ क्लोद्स !(मुझे ये कपड़े पहनने नहीं आते)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उसने इससे पहले कभी साड़ी-ब्लाऊज़ नहीं पहनी थी, उसको साडी पहनी नहीं आती थी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तब मैंने उससे पूछा- वो मैडम कहाँ है जो आपके साथ दुकान पर आई थी?&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उसने कहा- उनका कमरा अलग है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उसने मुझसे पूछा- आप मुझे इसको पहनना सिखा सकते हैं कि इसको पहनते कैसे हैं?&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैंने कहा- क्यों नहीं !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैंने कहा- पहले आप अपनी साड़ी लेकर आइए जो आपने खरीदी थी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वह अपनी साड़ी लेकर आई, फिर मैंने कहा- पहले आप ब्लाऊज़ पहनिए और फिर यह पेटिकोट पहनें ! फिर उसके बाद यह साड़ी पहननी है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उसने कहा- ठीक है !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तभी मुझे अंग्रेजन ने कमरे से बाहर जाने को कहा। थोड़ी देर में ब्लाऊज़-पेटिकोट पहन कर उसने मुझे अन्दर आने को कहा !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उस समय वो क्या माल लग रही थी ! उसकी कमर मुझे साफ़ दिख रही थी। उसका साइज़ 34-26-34 था !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैंने उससे कहा- आपने ब्लाऊज़ सही नहीं पहना !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उसने मुझे कहा- तुम सही कर दो !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैं उसके पास गया और अपने हाथ उसके कंधे पर रख दिए और ब्लाऊज़ सही करने लगा। यह मेरा पहली बार था कि मैंने किसी अंग्रेजन को छुआ था। उसको छूते ही मेरा लौड़ा जोर मारने लग गया। मैंने उसका ब्लाऊज़ ठीक किया फिर मैंने उसको साड़ी पहनना सिखाया। साड़ी पहनाते हुए मैं उसको कभी इधर कभी उधर छू रहा था, वह मेरे छूने का बुरा भी नहीं मान रही थी। मेरा खड़ा लंड उसको कभी गांड पर स्पर्श करता कभी उसकी नाभि पर ! उसको भी अब तक महसूस हो चुका था कि मेरा लंड बुरी तरह खड़ा हो चुका है !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अब वो साड़ी पहन चुकी थी ! वो इतनी सेक्सी लग रही थी कि मेरा उसको भोगने का मन कर रहा था, परन्तु वो मुझे लाइन नहीं दे रही थी !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैं उसको चोदने के सपने ले रहा था, तभी वो अपना बैग खोलने लगी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैंने उसे कहा- मैम ! आप क्या खूबसूरत लग रही हो इस साड़ी में !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उसने मुझे थैंक्स कहा और उसने बैग में से एक कैमरा निकाल कर मुझे दिया और कहा- तुम मेरा एक फोटो ले सकते हो ?&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैंने कहा- ठीक है !तभी मुझे अंग्रेजन ने कमरे से बाहर जाने को कहा। थोड़ी देर में ब्लाऊज़-पेटिकोट पहन कर उसने मुझे अन्दर आने को कहा !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उस समय वो क्या माल लग रही थी ! उसकी कमर मुझे साफ़ दिख रही थी। उसका साइज़ 34-26-34 था !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैंने उससे कहा- आपने ब्लाऊज़ सही नहीं पहना !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उसने मुझे कहा- तुम सही कर दो !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैं उसके पास गया और अपने हाथ उसके कंधे पर रख दिए और ब्लाऊज़ सही करने लगा। यह मेरा पहली बार था कि मैंने किसी अंग्रेजन को छुआ था। उसको छूते ही मेरा लौड़ा जोर मारने लग गया। मैंने उसका ब्लाऊज़ ठीक किया फिर मैंने उसको साड़ी पहनना सिखाया। साड़ी पहनाते हुए मैं उसको कभी इधर कभी उधर छू रहा था, वह मेरे छूने का बुरा भी नहीं मान रही थी। मेरा खड़ा लंड उसको कभी गांड पर स्पर्श करता कभी उसकी नाभि पर ! उसको भी अब तक महसूस हो चुका था कि मेरा लंड बुरी तरह खड़ा हो चुका है !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अब वो साड़ी पहन चुकी थी ! वो इतनी सेक्सी लग रही थी कि मेरा उसको भोगने का मन कर रहा था, परन्तु वो मुझे लाइन नहीं दे रही थी !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैं उसको चोदने के सपने ले रहा था, तभी वो अपना बैग खोलने लगी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैंने उसे कहा- मैम ! आप क्या खूबसूरत लग रही हो इस साड़ी में !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उसने मुझे थैंक्स कहा और उसने बैग में से एक कैमरा निकाल कर मुझे दिया और कहा- तुम मेरा एक फोटो ले सकते हो ?&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैंने कहा- ठीक है !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वैसा कैमरा मैंने सिर्फ मूवी में ही देखा था, कभी छुआ नहीं था। उसने मुझे कैमरे को प्रयोग करने का तरीका बताया, फिर मैंने उसका फोटो खींचा। उसने मुझे फोटो खींचने के लिए थैंक्स कहा और बाकी की पेमेंट करने लगी क्योंकि वो पूरे पैसे दुकान पर देकर नहीं आई थी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैंने उससे कहा- अगर साड़ी पहनने में दिक्कत हो तो मुझे बुला सकती हो। मैं दोबारा आ जाऊंगा !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यह मैंने इसलिए कहा कि वो अब तक मेरी बातों में नहीं फंसी थी !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैंने उसको अपना नंबर दिया और चला आया। मैं अफ़सोस कर रहा था कि मैं उसके साथ कुछ नहीं कर पाया !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दो दिन बाद उसका मेरे पास कॉल आया। उसने अपना नाम बताया तो मैं समझ गया कि यह वही है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उसने कहा- आप मेरे होटल आ सकते हो क्या ? मुझे साड़ी पहननी है ! साड़ी कैसे पहनते हैं, यह मैं भूल गई !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैंने कहा- ठीक है ! मैं थोड़ी देर में आता हूं !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैं उसके होटल पहुँचा ! इस बार मैं कंडोम भी ले गया था कि शायद जरूरत पड़ जाए ! उसने मुझे इसलिए बुलाया था क्योंकि वो जयपुर साड़ी पहन कर घूमना चाहती थी अपने ग्रुप के साथ ! वह फ़्रांस से आई हुई थी। जब मैं उसके होटल पंहुचा तो मैंने देखा कि वह साड़ी पहनने की कोशिश कर रही थी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैंने उसे कहा- ऐसे नहीं पहनते !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैंने उसकी साड़ी उतार दी ! तभी मैंने देखा कि उसने ब्लाऊज़ भी गलत पहना हुआ है। मैं उसका ब्लाऊज़ ठीक करने लगा और उससे कहा- आज आप बहुत खूबसूरत लग रही हो !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उसने मुझे धन्यवाद ! में उसका ब्लाऊज़ सही करने लग गया ! कभी मैं उसकी बगल में हाथ लगाता और कभी उसकी पीठ पर !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
धीरे से मैंने अपना एक हाथ उसके एक वक्ष पर रख दिया और कहा- यह वाला हिस्सा इधर खिसक गया है इसको बीच में करना पड़ेगा !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उसने मेरी इस हरकत का बुरा नहीं माना। अब तक मेरा खड़ा हो चुका था। मैंने तभी अंग्रेजन को कह दिया- आज आप बहुत सेक्सी लग रही हैं !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उसने मेरी इस बात का भी बुरा नहीं माना और मैं उसके वक्ष पर हाथ मलने लगा और अपने लंड को उसकी गांड से छुआने लगा। उसको मेरा लंड महसूस हो चुका था और वह मुझे देख कर मुस्कुरा रही थी। धीरे से मैंने एक साथ उसकी पीठ पर रखा और मेरा दूसरा हाथ उसके वक्ष पर था। उसने काले रंग की ब्रा पहन रखी थी। धीरे धीरे मेरा हाथ उसकी गांड को मसलने लगा।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
और मैंने उसे कहा- आई लाइक यू !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उसने भी मेरे से कह दिया- आई लाइक यू !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फिर मैं उसके स्तन जोर से मसलने लगा और भी मेरा साथ देने लगी !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैंने उसको बिस्तर पर लिटा दिया और उसका ब्लाऊज़ उतार कर ज़मीन पर फेंक दिया ! फिर उसकी ब्रा उतार दी और उसके गोरे गोरे स्तन चूसने लगा ! मैंने कभी इतने गोरे स्तन नहीं देखे थे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फिर मैंने उसका पेटिकोट उतार दिया। अब सिर्फ पेंटी पहने हुए थी। मैं उसकी पेंटी के ऊपर से ही उसकी चूत मसलने लगा। वो बहुत चालू थी- उसने मेरी पैंट की जिप खोली और मेरे लंड को सहलाने लगी। फ़िर उसने मेरी पैंट उतार दी और मैंने उसकी पेंटी ! अब वो पूरी नंगी हो चुकी थी !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैंने अपनी दो उंगलियाँ उसकी चूत में डाल दी और अपने हाथों से उसके स्तन दबाने लगा और उसे चूमने लगा ! उसने मेरा अंडरवीयर उतारा और मेरे खड़े लंड को देख का हैरान हो गई ! वह 7 इन्च लम्बा और तीन इंच मोटा था। फिर उसने मेरा लंड मुँह में लिया और चूसने लगी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कभी मैं उसकी चूत में उंगली करता कभी उसके स्तन दबाता ! वो एक बार झड़ चुकी थी ! मैंने अपना लंड उसके मुँह में से निकाला, लंड पर कंडोम चढ़ाया और उसकी टाँगें चौड़ी की और उसकी चूत पर अपना लंड रख दिया! वो इतनी हसीन लग रही थी कि मैं क्या बताऊँ ! उसकी वो गुलाबी चूत अब चुदने ही वाली थी ! वो विर्जिन नहीं थी ! मैंने अपना लंड उसकी चूत से छूआया और धीरे से धक्का लगाया ! मेरा आधा लंड उसकी चूत में जा चुका था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वो मुझसे कह रही थी- फक्क मी फक्क मी !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैंने एक और जोर से धक्का दिया और मेरा पूरा लंड उसकी चूत में जा चुका था और मैं जोर जोर से धक्के लगाने लगा। वो भी मेरा साथ दे रही थी। मैं उसको बुरी तरह चोद रहा था, वो भी मज़ा ले रही थी। मैंने उसको 15 मिनट तक जम कर चोदा और फिर मेरा झड़ गया ! वो भी अब तक दो बार झड़ चुकी थी !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैंने लंड उसकी चूत में से निकाला, कंडोम उतारा और लंड पर लगा माल उसको चाटने को बोला ! उसने मेरा लंड मुँह में लेकर साफ़ कर दिया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैं उसकी बगल में लेट गया। थोड़ी देर में मेरा लंड फिर खड़ा हो गया, मैंने उसको फिर जम कर चोदा। इस बार मैंने उसको अपने ऊपर बैठाया और वोह ऊपर नीचे होकर मुझे मजे देने लगी। मेरा पूरा लंड उसकी चूत में था ! यह सिलसिला एक बार और चला, फिर मैं अपने घर पर आ गया उसको अकेला होटल में छोड़ कर !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फिर उसका मेरे पास दो दिन बाद फ़ोन आया, उसने मुझसे फिर चुदने को कहा। यह कहानी मैं आपको बाद में बताऊंगा !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुझे मेल करना !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
manojjaiswalo@yahoo.com</description><link>http://sexisalipunem0.blogspot.com/2011/02/blog-post_03.html</link><author>noreply@blogger.com (sexisalipunem)</author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="https://img.youtube.com/vi/EzdKFCwaM0k/default.jpg" width="72"/><thr:total>0</thr:total></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-6722033917999163069.post-6526014181708356318</guid><pubDate>Thu, 03 Feb 2011 17:50:00 +0000</pubDate><atom:updated>2011-02-03T23:20:37.911+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">vedio</category><title>मेरे लंड की प्यास</title><description>&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;&lt;iframe allowfullscreen="" frameborder="0" height="390" src="http://www.youtube.com/embed/EzdKFCwaM0k" title="YouTube video player" width="480"&gt;&lt;/iframe&gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रेषक : &lt;span class="Apple-style-span" style="color: red; font-size: 16px;"&gt;प्रेम सक्सेना&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैं दिल्ली का रहने वाला हूँ, मेरी उम्र 24 साल है। मैं बचपन से ही गर्म किस्म का इंसान हूँ, हसीन लड़की या औरत मेरी कमजोरी है ! मेरा लंड 9 इंच बड़ा है, जिसकी प्यास बुझाना सबके बस की बात नहीं !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैं अपनी पहली कहानी लेकर आपके सामने आ रहा हूँ, क्योंकि मैं चाहता हूँ कि आप मुझे मेरे लंड की प्यास बुझाने का कोई उपाय बताएँ ! मेरा पहला सेक्स आपके सामने हाज़िर है !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैं गुडगाँव से अपने कमरे पर जा रहा था जहाँ मैं अकेला रहता हूँ। मैंने कभी कोई साथी कमरे में नहीं रखा क्योंकि रात में मेरे सेक्स की आग जाग जाती है और मैं आग में जलने लगता हूँ और आप सोच ही सकते हैं कि मेरे साथ में रहने वालों का क्या हाल होगा ?&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेरे कई दोस्त मेरे लंड का स्वाद ले चुके हैं ! ये तो मेरी यौनेच्छा की बात है। मुझे कमरे तक पहुँचने के लिए बस या काल सेंटर की गाड़ी पकड़नी पड़ती है। मैं सड़क पर खड़े होकर गाड़ियों को हाथ दे रहा था कि तभी एक लम्बी कार मेरे सामने आकर रुकी, शीशा खुला, मैं देखते ही मानो होश खो बैठा ! ऐसा फिगर मैंने आज तक नहीं देखा- 36-24-32, क्या चूचियाँ थी ! गोरे गाल बिल्कुल दूध की तरह, गुलाबी होंठ जैसे बुला रहे हों कि आओ हमें चूस लो ! काले और लम्बे बाल, जो खुले हुए थे, उसकी उम्र लगभग 25 साल होगी, वो इतनी सेक्सी लग रही थी कि मुझे लगा कि मैं खड़े-खड़े झड़ जाऊँगा।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उसने पूछा- कहाँ जाना है आपको?&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
.........नेहरू प्लेस !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उसने अंदर आने का इशारा किया और मैं चुम्बक की तरह आगे वाली सीट पर बैठ गया। मेरी नज़र उसकी चूचियों से हट ही नहीं रही थी, उसके गोरे गालो को चूमने का मन कर रहा था। उसने लाल रंग का शॉर्ट टॉप और काले रंग की जींस पहन रखी थी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
........क्या देख रहे हो? उसने कहा।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तो मैं झिझक गया ....नहीं कुछ तो नहीं ! आप इतनी सुन्दर हैं कि कोई भी आपको देखता ही रह जाएगा !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उसने अपना हाथ गेयर की तरफ बढ़ाया और मेरी घुटने पर रख दिया। तभी मेरा लौड़ा और तन गया ! मैंने अपने लंड को दोनों हाथों से छिपा रखा था ताकि वो देख ना ले !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उतारते समय उसने अपना विज़िटिंग कार्ड देकर अगले दिन आने को कहा।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सॉरी, मैं उसका नाम बताना भूल गया- उसका नाम कोमल था,&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगले दिन मैं दिए पते पर पहुँच गया !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दरवाजा खुला, आज कोमल कल से ज्यादा स्मार्ट लग रही थी !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उसने मुझे चाय के लिए पूछा, मैंने मना कर दिया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कोमल उंगली का इशारा करके अपने बेडरूम में चली गई। पीछे पीछे मैं भी चला गया। वो अपने कपड़े उतारने लगी !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
........तुम कल क्या देख रहे थे ?&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैंने सोचा कि तुम्हें आज सब कुछ दिखा देती हूँ.....&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इतना सुनते ही मैंने उसके होंठ चूस लिए, वो तड़प उठी जैसे बिन पानी मछली !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कोमल ने आज काले रंग की ब्रा और काले रंग की ही पैंटी पहन रखी थी। उसका जिस्म फूलों की तरह महक रहा था !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उसने अपने काले और लम्बे बाल खोल कर कहा- देख लो, जो देखना चाहते हो ! जितना करीब से चाहो !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैं भूखे शेर की तरह टूट पडा !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैं उसकी गोल-मटोल चूचियों को ब्रा के ऊपर से ही दबाने लगा। वो मुझसे लिपट गई।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुझे लगा कि मुझसे भी ज्यादा लोग गर्म हैं इस दुनिया में, जो जिस्म की आग में तप रहे हैं !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैंने कोमल के जिस्म से आखिरी कपड़े भी अलग कर दिए !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अब वो मेरे कपड़े उतारने लगी तो मैं उसकी पीठ सहलाने लगा।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैंने धीरे से उसके कान को काट लिया, उसके मुँह से उफ्फ्फ्फफ्फ़ की आवाज़ आई। वो मुझसे सांप की भांति लिपट गई।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैंने उसे उठा कर उसकी चूचियों को मुँह में लेना चाहा तो उसने पहले चूत की तरफ इशारा किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैं तभी चूत की तरफ मुड़ गया ! कोमल की चूत बिलकुल टमाटर की तरह लाल और अंगूर की तरह छोटी थी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैंने चूत को मुँह में ले लिया और जोर जोर से चाटने लगा ! उसके मुँह से आह आह आह आह आह आह आह आह की आवाज़ निकलने लगी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उसने एक हाथ से मेरा लण्ड सहलाना शुरु कर दिया। उसका एक हाथ मेरे सर पर था, वो मुझे ऐसे दबा रही थी कि मानो कह रही हो- मेरी चूत में घुस जाओ !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इतनी कामुक औरत मैने अपनी जिंदगी में नहीं देखी !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैं कोमल के ऊपर आ गया। अब मेरा लंड उसके मुँह में था और मैं उसकी चूत का स्वाद ले रहा था !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वो लंड को ऐसे चूस रही थी कि जैसे लग रहा था कि काट कर खा जाएगी !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मै उसे मना नहीं कर पाया, मुझे बहुत मज़ा आ रहा था !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
20-25 मिनट तक हम एक दूसरे को चाटते रहे ! इस बीच वो दो बार पानी छोड़ चुकी थी मगर मेरा निकल ही नहीं रहा था !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैंने अपना लण्ड उसके मुँह से निकालना चाहा तो जिद करने लगी- मुझे पानी पीना है !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैंने समझाया- चूत में डालेंगे तो पी लेना !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वो मान गई !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैंने उसके होंट चूसना शुरु कर दिए और एक हाथ से कोमल की चूची मसलने लगा। वो मेरा पूरा पूरा साथ दे रही थी। उसका हाथ मेरी पीठ को सहला रहा था। वो जिस्म की आग से तप रही थी। उसने मुझे अपनी ओर खींचा जैसे कह रही हो- मेरे जिस्म मे समा जाओ !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैंने उसके जिस्म को ऐसे चाटना शुरु किया जैसे वो कोई लॉलीपॉप हो !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वो उफ़ उफ़ उफ़ किये जा रही थी और कह रही थी- फाड़ दो ! मेरी चूत फाड़ दो ! मेरी प्यास बुझा दो ! जानू मेरी चूत को चोद कर भोसड़ी बना दो ! मेरी प्यास बुझा दो ! मेरे जिस्म को ठंडा कर दो ! मेरी आग बुझा दो !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
करीब 30 मिनट तक मैं उसे चाटता रहा ! उसने मुझे ऊपर खींच लिया- डाल दो, डालो न ! क्यों तड़पा रहे हो ? प्लीज डाल दो जानू ! मेरी जान, मेरी चूत में घुस जाओ !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रखा ही था कि वो दर्द के मारे रो उठी, मैं समझ गया कि वो कुंवारी बुर थी !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बिस्तर पर खून ही खून !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वो डर गई !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैंने उसे समझाया कि ऐसा पहली बार में होता है, बस थोड़ी देर में सब ठीक हो जायेगा।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैं जोर जोर से झटके मार रहा था और कोमल भी मेरा साथ दे रही थी। ऐसा लग रहा था कि जैसे उसे दर्द हो ही न रहा हो !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैंने पूछा तो बोली- दर्द से बड़ी प्यास है ! पहले मेरी प्यास बुझ जाये ! प्लीज फाड़ डालो ! होने दो दर्द ! फट जाने दो मेरी चूत को !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेरा 9 इंच का लंड उसकी योनि के अंदर ऐसे जा रहा था जैसे कोई गर्म छड़ हो ! और वो बार बार कह रही थी- साली को फाड़ दो ! मेरी चूत को फाड़ दो ! मेरी जान, मेरे प्यारे राजा !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैं उसकी चूत चोद ही रहा था कि अचानक दरवाज़ा खुला !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अब मेरे पैरों तले जमीन नहीं रही !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आगे की कहानी आपके मेल मिलने बाद ! कि मेरा क्या हुआ ? दरवाज़े के पीछे कौन था जानने के लिए मुझे मेल करें !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
punemsexesena@gmail.com&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
﻿               &lt;/div&gt;</description><link>http://sexisalipunem0.blogspot.com/2011/02/blog-post.html</link><author>noreply@blogger.com (sexisalipunem)</author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="https://img.youtube.com/vi/EzdKFCwaM0k/default.jpg" width="72"/><thr:total>0</thr:total></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-6722033917999163069.post-9214071342523373959</guid><pubDate>Sat, 15 Jan 2011 13:20:00 +0000</pubDate><atom:updated>2011-01-15T18:50:25.436+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">hindi sex</category><title>दोस्ती करा दो-2</title><description>&lt;h1 style="color: #663300; font-family: 'Trebuchet MS', Georgia, serif; font-size: 32px; margin-bottom: 10px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 5px;"&gt;दोस्ती करा दो-2&lt;/h1&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;प्रेषक : प्रेम सक्सेना&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgzlSp4-hLNCcXB3tNBrlst-szW1Lnrg8uGrk1Up4HfFGUKfRdLV5wcD81ojCe0VW9mLBow3mXs5mG1YtS_P9pg-G0vbsN76nvdGpVVwWKOQ0hj86mXEsl4Ylej9CQGKN2cJq60XRCALMMk/s1600/punem+sexena.gif" imageanchor="1" style="clear: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgzlSp4-hLNCcXB3tNBrlst-szW1Lnrg8uGrk1Up4HfFGUKfRdLV5wcD81ojCe0VW9mLBow3mXs5mG1YtS_P9pg-G0vbsN76nvdGpVVwWKOQ0hj86mXEsl4Ylej9CQGKN2cJq60XRCALMMk/s1600/punem+sexena.gif" /&gt;&lt;/a&gt;प्रथम भाग से आगे......&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;...... कोमल को बेड पर लेटा कर उसके पैंटी को उतार दिया। उसकी बिना बाल वाली चिकनी चूत को देखकर मैं बेकाबू हो गया। मैंने उसकी बूर पर हाथ फेरते हुए एक ऊँगली बूर में डाल दी जिससे उसकी सिसकारियाँ निकल पड़ी। धीरे धीरे उसकी बूर से पानी रिसना शुरू हो गया। मैं अपना मुँह उसकी बूर पर रखकर चाटने लगा। कभी कभी अपने जीभ उसके बूर में भी डाल देता जिससे वह चीख पड़ती।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;तभी एकदम से भाभी आ गई …&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;उन्होंने हमें देखा और डाँटने लगी। हम दोनों ने फटाफट कपड़े पहने। भाभी ने कोमल को घर जाने को कहा। कोमल डर के मारे घर चली गई।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;भाभी मुझे समझाने लगी।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;वो बोली- ऐसे काम किसी भी समय करने के नहीं होते ! यह तो मैं थी ! अगर कोई और आ जाता तो क्या करते तुम दोनों?&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;तो मैंने पूछा- तो कब करते हैं?&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;भाभी बोली- रात को !&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;मैंने सोचा कि भाभी को हमें मिलाने में कोई आपत्ति नहीं है, मैंने तब जान कर पूछा- भाभी, रात को कहाँ?&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;वो बोली- यहीं पर ! जब तेरे भईया न हो ! वो हफ्ते में एक दिन दिल्ली जाते हैं कम्पनी के काम के लिए ! तब रात को कोमल ही मेरे पास सोती है, तब कर लेना तुम दोनों।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;मैंने कहा- ठीक है !&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;फिर मैं घर चला गया।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;अगले दिन जब मैं भाभी के घर गया तो वो बोली- तुम्हारा काम आज रात को हो जाएगा ! तेरे भैया आज ही दिल्ली जा रहे हैं।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;तो मैंने कहा- मैं कितने बजे आऊँ?&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;भाभी ने कहा- दस बजे !&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;मैंने कहा- ठीक है।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;मैंने घर में दोस्त की पार्टी का बहाना बनाया और पूरे दस बजे भाभी के घर आ गया।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;भाभी ने मेरे आते ही अन्दर से कुंडा लगा लिया।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;मैंने पूछा- भाभी ! कोमल नहीं आई?&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;वो बोली- उसने कहा था, पर आई नहीं अभी तक !&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;वो बोली- आ जाएगी ! इतना तड़पता क्यों है?&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;मैंने कहा- नहीं ! ऐसी कोई बात नहीं ! मैं इन्तज़ार कर लेता हूँ।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;मैं और भाभी बातें करने लगे। फिर 11 बजे मैंने भाभी से कहा- भाभी, वो अभी तक नहीं आई?&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;भाभी बोली- पता नहीं !&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;तब फ़िर भाभी बोली- लगता है कि वो आज नहीं आयेगी।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;तो मैंने कहा- भाभी, मैंने घर में पार्टी का बहाना बनाया है ! कम से कम एक बजे तक मुझे यहाँ रुकना पड़ेगा !&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;वो बोली- कोई बात नहीं ! तू यही रह जा ! हम दोनों बातें करते हैं !&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;फिर मैं और भाभी बातें करने लगे।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;भाभी ने मुझसे दिन वाली बात पूछते हुए कहा- मैं तो तुम्हें भोला समझती थी ! तुम तो बहुत तेज निकले?&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;मैंने जानबूझ कर भाभी से कहा- भाभी ! मैंने क्या किया?&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;तो भाभी मुझे छेड़ते हुए बोली- पन्द्रह-बीस मिनट में तूने उसे बिलकुल नंगी कर दिया और उसकी चूत पर आ गया ? वाह ! तू कमाल है।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;तो मैंने शर्म से मुँह नीचे कर लिया।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;तो वो बोली- मुझसे क्यों शर्माता है? मैं तेरी भाभी हूँ।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;फिर वो बोली- तेरा औजार बहुत बड़ा है ! इतना तो तेरे भाई का भी नहीं।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;मैं समझ गया भाभी की बातें !&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;कि उन्हें मेरा लौड़ा चाहिए !&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;तो मैं भी शरारती स्वर में बोला- भाभी ! आपको कैसा लगा?&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;तो भाभी बोली- मेरा दिल तो उसी समय उस पर आ गया था ! मैं चाहती थी कि कोमल को हटा कर वहाँ मैं लेट जाऊँ !&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;तो मैंने भाभी से कहा- तो रोका क्यों ? आप भी आ जाती !&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;तो उन्होंने कहा- कोमल के सामने नहीं कर सकती थी ! इसीलिए तुम्हें रात को बुलाया और कोमल को नहीं।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;मैंने कहा- तो यह आपकी कारस्तानी थी?&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;वो बोली- हाँ ! अगर मैं ऐसा न करती तो तू मुझे कैसे मिलता?&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;फिर मैंने कहा- अब मैं कोमल को कैसे चोदूँगा?&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;तो वो बोली- तू मुझे खुश कर दे ! मैं कोमल को मना दिया करुँगी और बदले में तुम्हें मेरे से भी करते रहना होगा !&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;मैंने तुरंत कहा- ठीक है भाभी जी ! जैसा आप कहें !&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;उसके बाद हम दोनों ने शुरु कर दिया। मुझसे बिल्कुल भी रूका ना गया, मैंने उन्हें जल्दी से दोनों हाथों से पकड़ा और बिस्तर पर लिटा दिया और अधीर होकर भाभी के होंठों को चूमने लगा। उन्होंने कुछ भी नहीं कहा और मैं गर्म हो गया। फ़िर तो मैंने प्रगाढ़ चुम्बन भी किया। मेरा लण्ड तो पूरा सख्त हो गया।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;उन्होंने भी मेरे मुँह पर बहुत चुम्बन लिए। उनके मम्मे तो कमीज़ में भी थोड़े थोड़े नज़र आ रहे थे। वो भी गरम हो गए और मेरी चूमा-चाटी उन्हें और गरम करती गई। उन्होंने गद्दा सख्ती से पकड़ लिया और मुझे वो सब करने दिया जो मैं करना चाहता था। मैंने उनकी कमीज़ उतारी और अपनी भी। वो इतनी गर्म हो चुकी थी कि उनका चेहरा लाल हो रहा था।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;मैंने उनकी सलवार उतारी और उनके बड़े बड़े चूतड़ों को दबाने लगा। उन्होंने अपने पूरे बदन की वैक्सिंग की हुई थी, शायद मेरे लिए खास !&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;उन्होंने अन्दर एक लाल रंग की पैंटी पहनी हुई थी। फ़िर मैंने उसकी पैंटी को भी उतार दिया, क्या मज़ेदार चीज थी उनकी चूत !&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;उनकी चूत को देखते ही मेरा लंड खड़ा हो गया। उनकी चूत पर एक भी बाल नहीं था और उनकी चूत के होंठ भी गुलाबी थे।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjA10SLOYEj5yqWy8crZDRyImKopu94nxYVvW-LUjdzKRVXzF8OPfgctaJa7YeOhDVtBXD2Q3zosYMQXCfnTdJsC3mT58PHuhvFBOQqF2d0Ulh_FzXsoBsMY59v2IlMh08x5JGVizXZ2fKk/s1600/p1295.jpg" imageanchor="1" style="clear: right; float: right; margin-bottom: 1em; margin-left: 1em;"&gt;&lt;img border="0" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjA10SLOYEj5yqWy8crZDRyImKopu94nxYVvW-LUjdzKRVXzF8OPfgctaJa7YeOhDVtBXD2Q3zosYMQXCfnTdJsC3mT58PHuhvFBOQqF2d0Ulh_FzXsoBsMY59v2IlMh08x5JGVizXZ2fKk/s1600/p1295.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;मैंने जैसे ही उनकी चूत को छुआ, वो एकदम से कराह उठी। मैंने धीरे से उनकी चूत में ऊँगली डाली और उसके होंठों को रगड़ा ! उनकी चूत बहुत कसी लग रही थी।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;फ़िर मैंने उनकी चूत को चूमा और मुझसे रहा नहीं गया, मैं उसकी चूत को चूसने लगा......&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;वो पागलों की तरह आवाजें निकालने लगी, पूरा कमरा सेक्सी आवाजों से गूंज रहा था कुछ इस तरह- ऊऊऊह्ह्ह्ह् आआह्ह्ह ऊऊफ़्फ़्फ़् म्म्म्म्स्स्स प्ल्ज्ज धिरेईईईए!&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;इतने में मुझे अपने लंड पर कुछ महसूस हुआ, उनका हाथ मेरे लंड को टटोल रहा था। मैंने अपनी जींस उतार दी और लंड उनके हाथ में दे दिया। फ़िर उन्होंने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया और नीचे झुक कर मेरे लंड को चूमा और उसे मुँह में ले लिया। वो मेरे लंड को ऐसे चूस रही थी जैसे कोई छोटा बच्चा लॉलीपोप को चूसता है। मुझे बहुत ही मजा आ रहा था। काफी देर तक उन्होंने मेरा लंड चूसा!&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;फ़िर हम दोनों 69 की पोज़िशन में थे और एक दूसरे को चूस रहे थे। वो 2 बार झड़ चुकी थी।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;फ़िर उसने मुझसे कहा- प्लीज़, अब बर्दाश्त नहीं होता फक्क मी वैरी हार्ड ! अपना लंड मेरी प्यासी चूत में घुसा दो।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;और फिर मैंने कहा- भाभी ! उल्टी हो जाएँ।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;उन्होंने मुझसे कहा- पीछे से चोदोगे मुझे?&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;मैंने कहा- अब कण्ट्रोल नहीं होता।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;उनके मम्मे सोफे पर दब गए और मैं और अपना धैर्य खोते हुए भाभी की कमर पर चूमने लगा, उनकी कमर पर हाथ फेरा, उन्हें मज़ा आया। मैं उनकी कमर पर लेट गया और मेरा लंड उनकी योनि से छू गया। फ़िर सीधा करके उनके चुचूकों को चूसना शुरू किया और पैरों को ऊपर की ओर कर दिया और अपना लंड उनकी चूत में डाला।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;क्या तंग योनि थी। फिर भी मैंने आसानी से अंदर किया, थोड़ा गया और उन्हें मज़ा आया। वो आह ऽऽ.. ओह ऽऽ.. औरऽऽ और ऽऽ जैसी आवाजें निकाल रही थी। मैंने और जोर लगाया और पूरा लंड अन्दर डाल दिया, वो चीखी लेकिन उन्होंने मुझे नहीं रोका। मैंने अब अंदर-बाहर, अंदर-बाहर करना शुरू किया।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;मैंने उन्हें 20-25 मिनट चोदा, मेरा वीर्य निकल आया और भाभी का भी .. उफ्फ्फ्फ़ क्या दिन था । मैंने सोचा भी न था।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;भाभी ने मुझे कहा- अब तुम चूचों के बीच में डालो !&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;अपना लंड मैंने चूचों के बीच में रख कर आगे-पीछे किया। मुझे बहुत मज़ा आया। मैंने उनके पूरे जिस्म पर चूमा-चाटी की और फिर कपड़े पहने।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;फिर जब भी भैया जाते हैं तो हम दोनों खूब मस्ती करते ! मैंने उनको बहुत बार चोदा !&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;बाकी सब मैं अपनी नई कहानी में बताऊंगा। उसके बाद मैंने कोमल की कुँवारी चूत की भी मारा ! वो भी मैं अपनी अगली कहानी में बताऊंगा।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;यह मेरी सच्ची कहानी है, आप अपनी राय मुझे जरुर बताना।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;punemsexsena@yahoo.in&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;
&lt;span class="Apple-style-span" style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;﻿&lt;/span&gt;</description><link>http://sexisalipunem0.blogspot.com/2011/01/2_1979.html</link><author>noreply@blogger.com (sexisalipunem)</author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgzlSp4-hLNCcXB3tNBrlst-szW1Lnrg8uGrk1Up4HfFGUKfRdLV5wcD81ojCe0VW9mLBow3mXs5mG1YtS_P9pg-G0vbsN76nvdGpVVwWKOQ0hj86mXEsl4Ylej9CQGKN2cJq60XRCALMMk/s72-c/punem+sexena.gif" width="72"/><thr:total>0</thr:total></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-6722033917999163069.post-6327889187724901951</guid><pubDate>Sat, 15 Jan 2011 12:56:00 +0000</pubDate><atom:updated>2011-01-15T18:26:16.677+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">hindi sex</category><title>दोस्ती करा दो-1</title><description>&lt;h1 style="color: #663300; font-family: 'Trebuchet MS', Georgia, serif; font-size: 32px; margin-bottom: 10px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 5px;"&gt;दोस्ती करा दो-1&lt;/h1&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiZhY7Rgaigb4OxQoPCC62I1mxx5cMEdkig1lZqW6CsS04_wzlvsDF5TJde6ULpRNXk-Y7KeCR1oLkDCr0EBKqV3vGBCyD8cGRcrim2jfJZ00i-RBdeEB7FKJ66oCR4ZDFkGM5M2TfaVUrP/s1600/punem+sexena.gif" imageanchor="1" style="clear: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiZhY7Rgaigb4OxQoPCC62I1mxx5cMEdkig1lZqW6CsS04_wzlvsDF5TJde6ULpRNXk-Y7KeCR1oLkDCr0EBKqV3vGBCyD8cGRcrim2jfJZ00i-RBdeEB7FKJ66oCR4ZDFkGM5M2TfaVUrP/s1600/punem+sexena.gif" /&gt;&lt;/a&gt;प्रेषक : प्रेम सक्सेना&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;मेरा नाम प्रेम&amp;nbsp; है। मैं लुधियाना (पंजाब) का रहने वाला हूँ। मेरी आयु तेईस साल है। मैं पहली अपने साथ बीती को पाठकों के सामने पेश करना चाहता हूँ।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;यह तब की बात है जब मैं बारहवीं में था, नवम्बर की। हमारे घर के पड़ोस में एक भाभी रहती थी उनसे मेरी खूब बनती थी। वहीं हमारे पड़ोस में एक खूबसूरत लडकी कोमल भी रहती थी। वह जवानी की दहलीज पर कदम रख चुकी थी। जब भी मैं उसकी संतरे जैसी चूचियों को देखता था तो मेरे मन में एक ही ख्याल आता था कि अभी जाकर उनका सारा रस निकालकर पी जाऊं। स्कर्ट पहने हुए उसकी कमर एवं जांघों को देखकर मुँह में पानी आ जाता था। वह कभी भी अपने होंठों पर लिपस्टिक नहीं लगाती थी, फिर भी उसके होंठ गुलाबी लगते थे। हर वक्त उसके होंठों को चूसने का दिल करता था।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;वो भी भाभी के पास खूब आया जाया करती थी। मुझे वो बहुत प्यारी लगती थी। धीरे धीरे कोमल मेरे से भी बहुत बातें करने लगी। हम दोनों की खूब बनने लगी।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;एक दिन मैंने भाभी से उसके साथ मित्रता करवाने के लिए कहा। पहले तो भाभी ने थोड़ी आनाकानी की पर बाद में कुछ सोच कर बोली- पूछ लूँगी !&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;मैं अगले दिन जब भाभी के पास गया तो मैंने भाभी से पूछा- आपने उससे बात की?&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;तो भाभी ने कहा- मैं क्यों करूँ? मेरा क्या फायदा?&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;मैंने कहा- आप मेरे भाभी हो ! आप मेरी मदद नहीं करोगी तो कौन करेगा?&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;मैंने कहा- आपको क्या चाहिए? आप जो मांगोगी मैं आपको दूंगा।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;तो वो बोली- पक्का?&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;मैंने कहा- हाँ ! पक्का !&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;वो बोली- उसने हाँ कर दी !&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;मैं मन ही मन बहुत खुश हुआ।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;तब मैंने भाभी से कहा- उसे बुला दो ! मैंने उससे बातें करनी हैं।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;भाभी मेरी उत्सुकता समझने लगी थी तो भाभी ने उसे बुला दिया।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;उसने गुलाबी सूट पहन रखा था, जिसमें वह बहुत सुंदर लग रही थी।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;वो आई, मेरे से खूब बातें की।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;तभी भाभी बोली- तुम दोनों बैठो ! मैं दुकान से दूध लेकर आती हूँ।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;भाभी को वहाँ जाकर आने में तक़रीबन बीस मिनट लगने थे।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;कोमल भाभी के जाते ही मेरे और पास आ गई।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;मैंने कहा- मुझे जफ्फी डालनी है !&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;तो उसने फ़ौरन मुझे अपनी बाहों में ले लिया। मैंने आगे बढ़कर उसके हाथों को चूम लिया, फिर उसके गुलाबी और कोमल होंठों को अपने होंठों से सटाया तो उसकी गर्म साँसे महसूस हुई जोकि काफी तेज चल रही थी।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;मुझे भी जोश आने लगा मैं उसके होंठों को चूमने लगा। धीरे धीरे उसको भी जोश आने लगा और वो भी मेरे साथ प्यार करने लगी। उसके होंठों को मैं करीब दस मिनट तक चूसता रहा हूँगा। वह भी अपनी जीभ मेरे मुँह में डालकर चाट रही थी। फिर मेरे हाथ उसके सर पर से सरक कर उसकी चूचियों पर आ गए।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgVRCP2sHRNMQVUAv6qhtLBb_MwFPoBM4uowHNIujlW28ak6maQOgbcCWUC7iEZyS7B06um3q8pJdRgD7-8HqkY-d1HUuabbZ8F5k-8IJSqMTFaWSTHSOq2O5AJggHzhphhhoKZZcQkK_jh/s1600/ADL.jpg" imageanchor="1" style="clear: right; float: right; margin-bottom: 1em; margin-left: 1em;"&gt;&lt;img border="0" height="320" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgVRCP2sHRNMQVUAv6qhtLBb_MwFPoBM4uowHNIujlW28ak6maQOgbcCWUC7iEZyS7B06um3q8pJdRgD7-8HqkY-d1HUuabbZ8F5k-8IJSqMTFaWSTHSOq2O5AJggHzhphhhoKZZcQkK_jh/s320/ADL.jpg" width="277" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;जब मैंने उसकी चूचियों को हाथों से दबाया तो वह सिसिया कर बोली- नहीं हैरी, आज नहीं ! आज मुझे बहुत डर लग रहा है।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;मैंने उसकी एक न सुनी और धीरे धीरे उसके कपड़े उतारने लगा। कुछ देर बाद उसके बदन पर केवल पैंटी और छोटी सी ब्रा ही बच गई। फिर मैंने उसके गले पर चूमते हुए उसके पीछे जाकर ब्रा के हुक खोल दिए।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;वाह ! क्या नज़ारा था। वह मेरे सामने लगभग नंगी खड़ी थी। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि अब मैं इसके साथ क्या करूँ !&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;वह केवल सर झुकाए खड़ी थी।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;फिर मैं आगे जाकर उसकी चूचियों को धीरे धीरे मसलने लगा जिस कारण उसके छोटे-छोटे से चुचूक कड़े लगने लगे। उसके चुचूकों को मैं अपनी जीभ से चाटने लगा जिससे उसके मुँह से सी…सी….की आवाजें आने लगी। मैं समझ गया कि अब वह गर्म होने लगी है।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;फिर अचानक मैंने उसका हाथ अपने 8 इंच खड़े लण्ड पर महसूस किया, वह उसे पैंट के ऊपर से ही सहला रही थी।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;मैंने फट से अपनी पैंट और अंडरवियर खोल दिया। वह मेरे लण्ड को आगे पीछे कर रही थी और मैं उसके चूचियों को बारी बारी से चाट रहा थ। फिर मैंने उसे घुटने के बल बैठाया और अपने लण्ड को चाटने को कहा। पहले तो उसने मना कर दिया पर मेरे जोर देने पर कोमल ने अपने कोमल होंठ मेरे लण्ड पर रख दिए। फिर धीरे धीरे उसे अपने मुँह में अन्दर बाहर करने लगी। पहली बार कोई मेरे लण्ड को अपने मुँह से चाट रही थी। मानो एक अजीब सी दुनिया में अपने आपको महसूस कर रहा था।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;धीरे धीरे उसकी स्पीड बढ़ रही थी। एक समय ऐसा लगा कि मैं झड़ने वाला हूँ। मैंने फट से लण्ड को बाहर निकाला और कोमल को बेड पर लेटा कर उसके पैंटी को उतार दिया। उसकी बिना बाल वाली चिकनी चूत को देखकर मैं बेकाबू हो गया। मैंने उसकी बूर पर हाथ फेरते हुए एक ऊँगली बूर में डाल दी जिससे उसकी सिसकारियाँ निकल पड़ी। धीरे धीरे उसकी बूर से पानी रिसना शुरू हो गया। मैं अपना मुँह उसकी बूर पर रखकर चाटने लगा। कभी कभी अपने जीभ उसके बूर में भी डाल देता जिससे वह चीख पड़ती।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;तभी एकदम से भाभी आ गई …&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;इससे आगे की कहानी दूसरे भाग में !&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;punemsexsena@yahoo.in&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;
&lt;span class="Apple-style-span" style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;﻿&lt;/span&gt;</description><link>http://sexisalipunem0.blogspot.com/2011/01/1_9583.html</link><author>noreply@blogger.com (sexisalipunem)</author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiZhY7Rgaigb4OxQoPCC62I1mxx5cMEdkig1lZqW6CsS04_wzlvsDF5TJde6ULpRNXk-Y7KeCR1oLkDCr0EBKqV3vGBCyD8cGRcrim2jfJZ00i-RBdeEB7FKJ66oCR4ZDFkGM5M2TfaVUrP/s72-c/punem+sexena.gif" width="72"/><thr:total>0</thr:total></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-6722033917999163069.post-7675731499104539808</guid><pubDate>Sat, 15 Jan 2011 12:14:00 +0000</pubDate><atom:updated>2011-01-15T17:44:30.994+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">hindi sex</category><title>हवाई जहाज में चुदाई-2</title><description>﻿&lt;br /&gt;
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हवाई जहाज में चुदाई-2&lt;br /&gt;
&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhQQsvO1kNOWZbMfy4mC8OjWXqhwlO3jNhAkGjMIKLKgIYG5y3cNwN1Xp7IulJUEyqBO2pa7aj1CGZnhMKQV2XilREp2SgQS6cciHOEWpc9FaaY9XcjJglLMcaCmTR7ZnpicB0h20cSgbXK/s1600/p1295.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhQQsvO1kNOWZbMfy4mC8OjWXqhwlO3jNhAkGjMIKLKgIYG5y3cNwN1Xp7IulJUEyqBO2pa7aj1CGZnhMKQV2XilREp2SgQS6cciHOEWpc9FaaY9XcjJglLMcaCmTR7ZnpicB0h20cSgbXK/s1600/p1295.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhjIqza0gjVBNgAxe95Lzi6mqFf8P9NMhy5jZXWJiI8p7wwug88G-hrhu_isFrjqmGLg7NRTtKHmzpiCR0uTaQx8oY3_-0EcVjLSorziJ1XBQHq4n0Rj8DPiEX5iDI1MlqKFoQXyMe1GySW/s1600/punem+sexena.gif" imageanchor="1" style="clear: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhjIqza0gjVBNgAxe95Lzi6mqFf8P9NMhy5jZXWJiI8p7wwug88G-hrhu_isFrjqmGLg7NRTtKHmzpiCR0uTaQx8oY3_-0EcVjLSorziJ1XBQHq4n0Rj8DPiEX5iDI1MlqKFoQXyMe1GySW/s1600/punem+sexena.gif" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgMfI53RPZB01qdofs44T_IacN3relnxYJquNvhgrzZ4Dh7m9XoCLSJkpUOwgSFzGQM3LntDcZo4yg4cXqcEvVhmQWPJrDWnDQtZjg7ndjWIZ_dwTWpyl_BqpUc1-Wy_lwo6Qq99Xzy8Gty/s1600/puja.jpg" imageanchor="1" style="clear: right; float: right; margin-bottom: 1em; margin-left: 1em;"&gt;&lt;img border="0" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgMfI53RPZB01qdofs44T_IacN3relnxYJquNvhgrzZ4Dh7m9XoCLSJkpUOwgSFzGQM3LntDcZo4yg4cXqcEvVhmQWPJrDWnDQtZjg7ndjWIZ_dwTWpyl_BqpUc1-Wy_lwo6Qq99Xzy8Gty/s1600/puja.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;प्रेषक : &lt;span class="Apple-style-span" style="color: blue;"&gt;पूनम सक्सेना&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अब मैं खुश था कि एक विदेशन सुन्दरी मेरी गोद में लेटी हुई है। अब उसका सिर मेरे लण्ड पर टिका हुआ था तो मुझे ऐसा लग रहा था कि उसकी हालत ठीक वैसी ही होगी जैसे की महाभारत युद्ध में बाणों की शैया पर लेटे हुए भीष्म की हुई होगी। मुझे लग रहा था कि मेरा खड़ा लण्ड उसके सिर में बिल्कुल बाण की तरह चुभ रहा होगा। एक बार देखने में तो ऐसा लग रहा थी कि वह गहरी नींद में होगी। अब लगभग पांच मिनट का इन्तजार करने के बाद मैंने अपना दायां हाथ इस प्रकार से उसके पेट की ओर रखा कि जैसे किसी छोटे बच्चे को सीट से नीचे नहीं गिर आये तो सम्भालने के लिये रखना पड़ता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अब थोड़ी देर तक मैंने नज़र रखी कि क्रिस्टीना ने कोई हलचल नहीं की तो मैंने अपना हाथ आहिस्ता से उसके उन्नत-शिखरों की ओर खिसका दिया। अब मेरी बाहें उसके स्तन के निचले हिस्से को छूने लगी। मेरी हालत तो बिल्कुल मेरे बस में नहीं थी, हर क्षण मैं यही कोशिश कर रहा था कि कही मैं पागल होकर उस पर टूट नहीं पडूँ। पर मैंने अपना होश नहीं खोया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अब कुछ समय रुक कर मैंने अपना बायां हाथ उसके उन्नत स्तन पर आहिस्ता से रख दिया कि मेरी भुजाएँ उसके दोनों स्तनों को छू कर निकलें और मेरे हाथ का पंजा उसके स्तनों के पार, जैसे मैंने उसे सीट से गिरने से बचाने के लिये ऐसा किया हो, रख दिया। फिर कुछ देर इन्तजार कर अपना दायां हाथ उसकी चूत के ऊपर उसी प्रकार रख दिया। उसने कोई हलचल नहीं की।ऐसा लग रहा था कि वह गहरी नींद में है। अब बिल्कुल हौले हौले से मैंने अपने बांए हाथ का दबाव उसके स्तनों पर बढ़ाना शुरु कर दिया। अब तो मुझे मेरे हाथ व उसके स्तनों के बीच आ रही शाल बहुत खटकने लगी। अब मैंने भी अपनी शाल निकालकर अपने शरीर पर इस प्रकार डाल ली कि मेरे दोनों हाथ उसमें छुप जायें। अब मैंने अपना हाथ आहिस्ता से उसकी शाल में घुसा कर फिर से उसके स्तनों पर रख दिया। उसने सोते समय अपनी ऊनी जर्सी निकाल दी थी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अब मेरे पंजे और उसके स्तनों के बीच मात्र एक टॉप ही था। अब मैंने उसके लो कट टाप के गले के अंदर हाथ डाला तो मेरा पहला स्पर्श उसकी सिल्की ब्रा का हुआ, पर इससे तो मुझे सन्तुष्टि नहीं हुई। फिर मैंने आहिस्ता से अपना हाथ उसकी स्तनों के बीच की घाटी में प्रविष्ट करा दिया और आहिस्ता आहिस्ता उसके दोनों स्तनों पर अपने हाथ घुमाने लगा। मैं उसकी दूध की दोनों टोंटियो से खेलने लगा। यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अब मेरे दिमाग ने काम करना बिल्कुल बंद कर दिया। मैं बिल्कुल कामातुर हो चुका था, मैं यह भूल चुका था कि यदि क्रिस्टीना ने जागकर शोर मचा दिया तो पता नहीं किस देश की जेल में सजा काटनी पड़ेगी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इतना करने के बाद मुझे लगा कि क्रिस्टीना सोने का नाटक कर रही है क्योंकि मेरी ऐसी उत्तेजित करने वाली हरकत के बाद वह सो नहीं सकती थी, किन्तु अब मेरे पास जानने का कोई साधन नहीं था कि वह क्या सोच रही है। मैं तो उसके मौन को ही सहमति मान कर अपने हाथों को लगातार व्यस्त रखे हुए था। मुझे उसके स्तनों तक पहुँचने तक लगभग आधा घण्टा लगा होगा। हमारे इस्तन्बुल पहुँचने में करीब साढ़े चार घण्टे बाकी थे, किन्तु मेरे पास ढाई घण्टे ही बाकी थे क्योंकि गन्तव्य पर पहुँचने के पहले सभी यात्रियों को एक बार सुबह का नाश्ता दिया जाना था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अब मैं क्रिस्टीना के स्तनों के साथ उसकी चूत को भी मसलना चाहता था। मैंने आहिस्ता से से उसकी टाइट जीन्स का बटन व चेन खोल कर उसकी मखमली पैंटी पर हाथ रख दिया और कोई प्रतिक्रिया न देखकर फिर अंदर चूत को सहलाने के लिये हाथ बढ़ाया तो मेरा हाथ एक छोटी सी कान की बाली जैसे छल्ले से टकराया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तो क्रिस्टीना जी ने नये चल रहे फैशन के अनुसार अपनी चूत को सजाने के लिये एक बाली पहन रखी थी !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बहुत ही मादक स्पर्श था !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फिर मैंने झांटों की उम्मीद में हाथ नीचे सहलाया, तो मैं नाउम्मीद नहीं हुआ, बिल्कुल छोटी मखमली झांटों को सहलाने का लुत्फ उठाने लगा। अब लगा मेरे दोनों हाथों में जन्नत है, मेरा बायां हाथ तो उसके वक्षों से खेल रहा था और दायां हाथ उसके वस्ति-क्षेत्र का भ्रमण कर रहा था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अब मुझे यह तो सुनिश्चित हो चुका था कि वह नींद में नहीं है तो मैं हौले से उसके भग्नासा के दाने को सहालाकर उत्तेजित करने की कोशिश करने लगा। पर पट्ठी वह भी आँखें मींचकर पड़ी हुई थी। मैंने सोचा कि अब यह गर्म है तो समय भी तो तेजी खिसका जा रहा है, इसके लिये दूसरा उपाय करना होगा। इधर उसका सिर मेरे लण्ड के ऊपर रखा था तो मेरा लण्ड भी दर्द करने लगा था। अब मैंने अपनी पैंट खोलकर उसमे से लण्ड आजाद कर उसके दायें गाल से सटा दिया, उसमें से चिपचिपाहट भी निकल रही थी जो उसके गाल को छू रही थी। अब दोबारा मैंने अपने दोनों हाथों को व्यस्त रखते हुए उसकी चूत में अपनी उंगली प्रविष्ट कराई तो देखा वहाँ गीला-गीला सा था, मतलब वह गर्म हो चुकी थी। स्तन मर्दन के साथ जैसे ही मैंने उंगली चूत में अंदर-बाहर करनी शुरु की तो क्रिस्टीना छटपटाने लगी और उसने अपनी नींद का नाटक छोड़ा और मेरी तरफ करवट बदलकर मेरे लण्ड पर हाथ फिराने के बाद उसे अपने मुँह में ले लिया। मैं तो अपने होशोहवास खो चुका था, वह भी पागलों की तरह लण्ड मुँह में अंदर-बाहर कर रही थी। उधर मैं भी उसे अपने दोनों हाथों से बराबर उसे उत्तेजित कर रहा था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैंने विमान में अपने चारों तरफ देखा, सभी यात्री आराम से सोए हुए थे और सम्पूर्ण अंधेरा था, तो कोई डर नहीं था कि कोई देख लेगा।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हम दोनों किसी भी किस्म की आवाज नहीं निकाल रहे थे क्योंकि कोई भी जाग सकता था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अब क्रिस्टीना की लगातार मेहनत के कारण दस मिनट में ही मेरा लण्ड स्खलित होने की कगार पर पहुँच गया, तो मैंने उसे हाथ के इशारे से समझाने की कोशिश की पर उसने इस पर ध्यान नहीं दिया। तो मैं भी क्या करता, मैंने भी वीर्य का फव्वारा उसके मुंह में छोड़ दिया। उसने भी हिम्मत दिखाते हुए पूरा का पूरा गटक लिया। अब मैं तो खाली हो गया किन्तु उसकी उत्तेजना शांत नहीं हुई थी, वह मेरे निर्जीव पड़े लण्ड को खड़ा करने की कोशिश करने लगी। मात्र पाँच मिनट में ही हम दोनों सफल हो गये। मेरा लण्ड फिर कड़क होकर फुंफकारने लगा।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अब क्रिस्टीना उठी और अपनी जींस की चेन बन्द करते हुए उसने अपने पीछे आने का इशारा किया। हम वैसे भी विमान के आखिरी हिस्से में बैठे तो, टायलेट वहाँ से नजदीक ही थे। पहले वह अंदर घुसी, फिर उसके दो मिनट बाद मैं भी अंदर पहुंच गया, अंदर जाकर दरवाजा लगा लिया। हम दोनों कामातुर होकर एक दूसरे के गले लग गये, फिर एक दूसरे के शरीर को चूमने-सहलाने लगे। विमान के टायलेट बहुत छोटे होते हैं पर उसी में काम चलाना था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैंने उसे पैंट और टॉप से आजाद कराया, अब वह जामुनी रंग के अन्तः वस्त्रों में मेरे सामने खडी थी और इतनी मादक लग रही थी कि उसे शब्दों में बयान करना बहुत मुश्किल था। उस पर उसी रंग से मिलती हुई लिपस्टिक और नेल पालिश ! ऐसा लग रहा था कि मेनका खड़ी हो जो किसी भी विश्वामित्र की तपस्या भंग कर दे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अब उसने भी देर ना करते हुए मुझे भी नंगा कर दिया। हम दोनों पागलॉ की तरह लिपट गये और एक दूसरे के शरीर को टटोल कर आनंद लेने लग गये।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अब मैंने उसकी चोली खोल दी और पैंटी भी उतार दी, उसके तन व मेरे बीच में कोई नहीं था। मैं अब लेट्रीन सीट का ढक्कन लगा कर बैठ गया, वह मेरी गोद में दोनों टांगे बाहर की ओर निकालकर इस प्रकार बैठ गई कि उसकी चूत मेरे लण्ड को स्पर्श करने लगी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फिर हौले-हौले शुरु हुआ दुनिया का सबसा पहला खेल, जिसे पलंग-पोलो के नाम से भी जाना जाता है। पर आज हम दोनों ने उसे टायलेट-पोलो के नाम से जमीन से लगभग 35000 फीट की ऊंचाई पर खेलना शुरु कर दिया था। वह मेरे सीने से लग कर बैठी थी, नीचे चुदाई चालू थी, वह भी हिलकर अपने शरीर को ऊपर नीचे होकर पूर्ण सहयोग कर रही थी। फिर मैं बारी बारी से उसको दोनों स्तनों पर अपनी जीभ फिराने लगा। उसके बाद मैंने उसकी गर्दन की दोनों तरफ कामुकता बढ़ाने वाली नस के साथ उसके कान की लोम व आँखों की भोहों पर भी अपनी जीभ फिराई। वह मदमस्त होकर पागल हो उठी। दोनों की सांसें एक दूसरे में विलीन हो रही थी। यदि हम किसी कमरे में होते तो पागलपन में न जाने कितनी आवाजें निकालते। पर जगह और समय का ध्यान रखते हुए बिल्कुल खामोश रहने की कोशिश करते रहे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अब इस मदहोश करने वाली अनवरत चुदाई को लगभग आधा घण्टा हो चुका था। अब एक ही आसन में चोदते हुए थकान होने लगी थी। तभी क्रिस्टीना ने अपनी गति बढ़ा दी और कुछ ही क्षण में हांफते हुए वह चरमसीमा पर पहुँच गई। फिर वह पस्त होकर मेरी बाहों में थक कर लेट गई।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैं तो अभी तक भरा बैठा था, मैंने कुछ समय रुककर इशारा किया कि अब मैं भी पिचकारी छोड़ना चाहता हूँ तो उसने कहा- रुको !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वह मेरी गोद में से खड़ी हुई और बेसिन पर हाथ और सिर झुकाकर खड़ी हो गई। मैंने भी पीछे से उसकी चूत में लण्ड पेल दिया और अपने दोनों हाथों से उसके उन्न्त स्तनों को मसलते हुए उसे चोदने लगा। फिर जन्नत की यात्रा शुरु हुई। फिर मदमस्त होकर वह भी आगे पीछे होकर मुझे सहयोग देने लगी। हम दोनों ने अपनी गति और बढ़ा दी और लगभग दस मिनट बाद मेरी पिचकारी छुट गई, हम दोनों पस्त हो गये।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैंने घड़ी देखी, हमें टायलेट में घुसे अब लगभग पौन घण्टा हो चुका था, मैंने उसे इशारा किया कि अब हमें जल्दी बाहर निकलना चाहिये।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पहले मैं बाहर निकला और वह कुछ समय रुक कर सफाई कर अपनी सीट पर आ गई।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भगवान का लाख-लाख शुक्र था कि सब अभी तक सोए हुए थे और किसी को भी इस चुदाई के बारे में शक नहीं हुआ। क्रिस्टीना मुझसे चिपक कर लेट गई। पूर्ण सन्नाटा होने के कारण हम मुँह से कोई शब्द नहीं निकाल पा रहे थे किन्तु उसके होंठ मेरे होंठों से मिलकर को बहुत कुछ कह रहे थे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैंने अपनी जिंदगी में कई लड़कियों से सम्भोग किया लेकिन क्रिस्टीना के साथ इस अभूतपूर्व आनन्द का अनुभव शब्दो में लिखना बहुत मुश्किल है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अब हमारे गंतव्य स्थल पर पहुँचने में लगभग डेढ घण्टा बाकी था। विमान की बत्तियाँ जलना शुरु हो चुकी थी, यात्री जाग चुके थे, परिचारिकाएँ ने नाश्ता देने लगी थी। ऐसा कतई नहीं लग रहा था कि हम विगत आठ घण्टों से साथ थे, ऐसा लग रह था कि हमें मिले मात्र आठ मिनट ही हुए थे। अंततः वह निष्ठुर क्षण भी आ ही गया जब हमारा विमान इस्तन्बुल के अतातुर्क एयर पोर्ट पर उतर चुका था। मुझे तो यहाँ दो दिन रुक कर फिर बर्लिन जाना था, पर क्रिस्टिना को तो मात्र तीन घंटे बाद की उड़ान से पेरिस जाना था। हम दोनों एक दूसरे का हाथ पकड़े विमान से उतरे। हम दोनों ने निश्चय किया कि अभी मैं अपनी होटल नहीं जाकर कुछ वक्त और क्रिस्टीना के साथ एयरपोर्ट पर बिताउंगा, फिर उसकी उड़ान के समय उसे गुडबाय कह कर ही जाऊंगा। एअरपोर्ट पर ही बने एक रेस्टोरेंट में एक दूसरे के हाथ में हाथ डाले निस्तेज चुपचाप बैठे रहे। हम दोनों में से कोई भी बिछुड़ने के लिये तैयार नहीं था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस घटना को लगभग तीन वर्ष बीत चुके हैं लेकिन यह घटना मेरे मन-मस्तिष्क पर एक चलचित्र की तरह स्पष्ट अंकित है। हालांकि क्रिस्टीना ने उस दिन अंतिम समय पर अपना निर्णय बदला और वह दो दिन मेरे साथ इस्तन्बुल में ही रुकी और फिर उसके पास मैं अगले साल पेरिस भी गया। वह आज भी मेरी बहुत अच्छी दोस्त है। क्रिस्टीना ने मुझे बॉडी-मसाज सिखलाई और बदले में मैंने उसे और उसके मित्रों को योग और सम्भोग (कामशास्त्र) की क्लास लगाकर विभिन्न आसन सिखलाये। वह भी एक अद्वितीय अनुभव था।मैं आपके पत्र का इन्तजार करुंगा, कृपया मुझे यह बतलाने का कष्ट करें कि मेरे जीवन का यह अनोखा अनुभव आपको कैसा लगा। कृपया मुझसे punemsexsena@yahoo.in पर मेल कर बतलाएँ ताकि मेरी हिम्मत अपने अगले संस्मरण लिखने की हो।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हाँ, एक बात और- इस वर्ष क्रिस्टीना की भारत आने की योजना है। चूंकि वह एक बहुत अच्छी कलाकार है तो वह कामसूत्र को माडर्न जमाने के हिसाब लिख कर उसके लिये सभी आसनों की पेंटिंग बनाना चाहती है। हमने इस हेतु हिमालय पर जाने का विचार किया है ताकि हिमालय की खूबसूरत वादियों में इस कार्य को किया जा सके। इसके लिये हमें एक महिला साथी की भी जरूरत होगी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
﻿&lt;/span&gt;</description><link>http://sexisalipunem0.blogspot.com/2011/01/2_7934.html</link><author>noreply@blogger.com (sexisalipunem)</author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhQQsvO1kNOWZbMfy4mC8OjWXqhwlO3jNhAkGjMIKLKgIYG5y3cNwN1Xp7IulJUEyqBO2pa7aj1CGZnhMKQV2XilREp2SgQS6cciHOEWpc9FaaY9XcjJglLMcaCmTR7ZnpicB0h20cSgbXK/s72-c/p1295.jpg" width="72"/><thr:total>0</thr:total></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-6722033917999163069.post-2176686686387682344</guid><pubDate>Sat, 15 Jan 2011 11:52:00 +0000</pubDate><atom:updated>2011-01-15T17:22:29.128+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">hindi sex</category><title>हवाई जहाज में चुदाई-1</title><description>हवाई जहाज में चुदाई-1&lt;br /&gt;
&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg40IKuKyW5m2rTR0wIk3EWVIAmgsUEIxcnrYQgjhN1VEA7XDK0NDS8mHEMxYSEz4IENugEls9WzfDtLRQegoEuSsu_P20NenJOtAC5TCcY-iC6fW6IXwWS-BxSrrCHwrEIfr8RC4J7MQ22/s1600/puja.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg40IKuKyW5m2rTR0wIk3EWVIAmgsUEIxcnrYQgjhN1VEA7XDK0NDS8mHEMxYSEz4IENugEls9WzfDtLRQegoEuSsu_P20NenJOtAC5TCcY-iC6fW6IXwWS-BxSrrCHwrEIfr8RC4J7MQ22/s1600/puja.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;प्रेषक : &lt;span class="Apple-style-span" style="color: blue;"&gt;पूनम सक्सेना&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
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&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEh9ZBf69mTcGUjiAc6BqyM_4c8OKSN8PAs-hOPp7QRYsnLHmAwvYJJORfVeET45OB_x17ozv60-8_K8yAHzUaCiRV1pmAFOKcpPpgRBtssb3ixl3qvA-6DGw_ThUlqlksAhJRBBdycq-WRx/s1600/punem+sexena.gif" imageanchor="1" style="clear: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEh9ZBf69mTcGUjiAc6BqyM_4c8OKSN8PAs-hOPp7QRYsnLHmAwvYJJORfVeET45OB_x17ozv60-8_K8yAHzUaCiRV1pmAFOKcpPpgRBtssb3ixl3qvA-6DGw_ThUlqlksAhJRBBdycq-WRx/s1600/punem+sexena.gif" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: blue;"&gt;सेक्सीसालीपूनम&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&amp;nbsp;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: blue;"&gt;के सभी पाठकों को मेरा प्यार भरा नमस्ते ! हर व्यक्ति की जिन्दगी में कुछ ऐसे हसीन पल आते हैं, जिन्हें याद कर वह प्रसन्नता का अनुभव करता है। ऐसा ही एक खुशनुमा अनुभव मैं आपके साथ बांटना चाहता हूँ।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैं एक कम्पनी के अन्तर्राष्ट्रीय विभाग में मार्केटिंग का कार्य देखता हूँ। हालांकि मैं एक इन्जीनियर हूँ किन्तु मुझे घूमना-फिरना व नये-नये लोगों से मिलना बहुत अच्छा लगता है, अतः मैंने जीवन-यापन के लिये मार्केटिंग का कार्य पसन्द किया। इस कम्पनी से पहले मैं जिस कम्पनी में था, उसके कार्य से मैंने पूरा भारत कई कई बार घूमा है, अतः उसमें मुझे बोरियत होने लग गई थी। अब मैं कुछ नया चाहता था, जब मुझे इस नई कम्पनी में मुझे अन्तर्राष्ट्रीय मार्केटिंग विभाग में ऑफर मिला तो मैं बहुत खुश हुआ कि चलो दुनिया देखने को मिलेगी। अल्प समय में ही मैंने अपने बॉस को अपने बेहतरीन कार्य से खुश कर लिया, उसके फलस्वरुप मैं अब तक दुनिया के सभी महाद्वीपों में 35 से ज्यादा देश घूम चुका हूं। कुल मिलाकर एक शानदार जिन्दगी जी रहा हूँ।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लगभग तीन वर्ष पूर्व एक ऐसी यादगार घटना हुई जो मैं कभी भूल नहीं सकता हूँ।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुआ यह कि एक कार्य के सिलसिले में मुझे बर्लिन जाना था। तो मैंने अपना विमान नई दिल्ली स्थित इन्दिरा गान्धी इन्टरनेशनल एयरपोर्ट से ही लिया। हर बार विदेश आते समय मैं एक ही तरीका अपनाता हूँ कि किसी भी देश जाना होता है तो मैं यात्रा के मध्य में एक बार अपनी फ्लाईट ट्रान्सफर जरूर करता हूँ ताकि उस नये देश में रुक कर उस नगर को भी देखता चलूँ। इस प्रकार एक नये देश, नई संस्कृति को लगभग निशुल्क देखने का मौका मिल जाता है। इस बार यदि मैं चाहता तो बर्लिन जाने के लिये जर्मन एयर लाइन लुफ्तहन्सा से भी जा सकता था, लेकिन मेरा मन तुर्की के खूबसूरत शहर इस्तन्बुल को देखना का हो रहा था, अतः मैंने अपना टिकट टर्किश एयर लाईन से बुक कराया ताकि मैं इस्तन्बुल होकर बर्लिन जा सकूँ।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस्तन्बुल के लिये मेरी उड़ान का समय सुबह के चार बजे था, किंतु मैं रात लगभग बारह बजे ही एयरपोर्ट पहुँच गया क्योंकि होटल में मुझे नींद नहीं आ रही थी तो मैंने सोचा कि इससे तो एयरपोर्ट पर ही चलकर समय बिताउँगा, क्योंकि वहाँ का नजारा बहुत रंगीन होता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैं एक जगह बैठ कर देशी-विदेशी लड़कियों को देख कर नयन-सुख का आनंद ले रहा था। यदि कोई लड़की पसंद आ जाती तो उसका चक्षु चोदन भी कर लेता था। अब बैठे बैठे और कर भी क्या सकता था। नई दिल्ली से इस्तन्बुल का यात्रा समय लगभग आठ घंटे का था। अब इंतजार करते करते मैं भगवान से यही खैर मना रहा था कि बगल में कोई जवान विदेशन बैठा देना। लेकिन मेरे पुराने अनुभवों को देखकर ऐसा लगता था कि हो सकता है कि कोई सत्तर वर्ष की देशी बुढ़िया आ जाये। लेकिन समस्या यह थी कि यहाँ मेरी कोई मर्जी नहीं चल सकती थी क्योंकि बोर्डिंग पास बनाने वाले लोगों से तो मेरी कोई जान पहचान तो थी नहीं !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तभी मेरे दिमाग में एक ख्याल आया। अन्तर्राष्ट्रीय यान छुटने के लगभग तीन घंटे पहले एयरलाइन के काउंटर शुरु हो आते हैं। तो मैं करीब एक बजे टर्किश एयर लाईन के काउंटर के पास में एक तरफ हट कर खड़ा हो गया ताकि उस यान से जाने वाले यात्रियों पर नजर रख सकूँ।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लगभग पौने घंटे तक खड़े रहने के बाद मेरी हिम्मत भी जवाब देने लगी क्योंकि मेरी मनपसन्द कोई लड़की या औरत अकेली आती नहीं दिख रही थी। मैं निराश हो चला था कि तभी अचानक मेरा दिल व दिमाग दोनों की घंटियाँ बजने लग गई। एक बेहद खूबसूरत ब्लांड विदेशन लाईन में लगने की ओर अग्रसर हुई, तो मैं भी एक पल गवांए बगैर उसके पीछे खड़ा हो गया क्योंकि एक सेकंड की देरी का मतलब था कि उसके और मेरे बीच में किसी और का आकर खड़े हो जाना।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अब वह गौरी-चिट्टी विदेशन ठीक मेरे आगे लाइन खड़ी थी। मैं सोचने लगा कि अब कैसे उसका ध्यान अपनी तरफ आकर्षित कर उससे दोस्ती का सिलसिला शुरु करूँ। लेकिन उसका ध्यान तो आगे की तरफ था, वह पीछे पलट कर नहीं देख रही थी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लगभग दस मिनट के बाद ऐसे ही लाईन आगे खिसकी तो मैंने अपनी सामान वाली ट्राली से उसे हल्की सी टक्कर मार दी। तो उसने पलट कर पीछे देखा तो मैंने उससे माफी मांग कर कहा- आपको चोट तो नहीं आई? यह सब मेरी गलती से हुआ है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उसने भी कहा- नहीं, कोई बात नहीं ! मुझे चोट नहीं लगी है !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उसके बाद मैंने उससे कहा- आप मेरे सामान का ध्यान रखना, मैं इमिग्रेशन के फार्म लेकर आता हूँ, क्या मैं एक फार्म आपके लिये भी एक ले आऊँ?&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तो उसके हाँ करने पर उसके लिये भी एक फार्म लेकर आ गया। अब उसके पास लिखने के लिये पैन नहीं था अतः मैंने उसका यात्रा विवरण उससे पूछकर इमिग्रेशन फार्म में भरा तो पता चला कि उसका नाम क्रिस्टीना है, वह फ्रेन्च है और वह नई दिल्ली से इस्तन्बुल होकर पेरिस जा रही है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फार्म भरने के दौरान मेरी उससे थोड़ी जान-पहचान तो हो ही चली थी कि इतने में उसका नम्बर आ गया था। जब तक उसको बोर्डिंग-पास इश्यु हुआ, तब तक मैं यही खैर मनाता रहा कि उसके पास की सीट खाली हो।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जैसे ही मेरा नम्बर आया तो टिकट काउंटर पर खडी आफिसर से मैंने कहा- कृपया मेरी सीट क्रिस्टीना के पास वाली ही देना !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तो उसने पूछा- क्या आप साथ में हो ?&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तो मैंने कहा- हाँ !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उसने भी ज्यादा पूछ्ताछ नहीं की क्योंकि शायद उसने हम दोनों को बात करते हुए देख लिया था। मुझे यह तो पता चल गया कि क्रिस्टीना की सीट खिड़की वाली है और मेरी उसके पास बीच वाली। अब समस्या मात्र कार्नर में गली वाली सीट के यात्री की थी। मैंने सोचा- अब यहाँ तक ठीक हुआ है, शायद आगे भी अच्छा ही होगा।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अब प्रफुल्लित मन से अपना सामान जमा करा कर व बोर्डिंग पास लेकर क्रिस्टीना को ढूंढने दौड़ा। हालांकि मुझे पता था कि वह कहीं नहीं जा रही, आखिरकार उसे मेरे पास ही तो बैठना है, लेकिन मेरा बावरा मन एक भी पल नहीं गंवाना चाहता था। मुझे वह आगे ही खड़ी मिल गई, वह इमिग्रेशन काउंटर ढूंढ रही थी कि मुझे देखकर खुश होती हुई बोली- अब किधर से आगे जाना है?&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैंने कहा- चलो मेरे साथ !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हम फिर इमिग्रेशन लाइन में खड़े हो गये, मात्र पाँच मिनट में ही हम अपने पासपोर्ट पर ठप्पा लगवाकर, फिर अपनी सेक्योरिटी चेकिंग के बाद अंदर हो गये। अब भी हमारे पास एक घण्टा और बाकी था। मैंने उसे काफी की पेशकश की तो उसने भी खुशी से स्वीकार कर लिया क्योंकि रात के तीन बज चुके थे और थकान हो चली थी। यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अब हम लाउंज के अन्दर बने एक काफी हाउस में बैठे थे। क्रिस्टीना ने अपने बारे में बताया कि वह एक आर्टिस्ट है, पेन्टिंग बनाती है और पेरिस में रहती है। वह अभी मात्र तीन दिन पहले ही दिल्ली आई थी। यह उसकी भारत की पहली यात्रा थी। वह एक दिल्ली में लगी अन्तर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी में फ्रान्स का प्रतिनिधित्व करने के लिये आई थी। कल वह इस्तन्बुल पहुंचने के बाद पेरिस के लिये अगली फ्लाईट लेकर चली जायेगी। उसे दुख था कि वह दिल्ली के अलावा भारत में कोई अन्य शहर नहीं घूम पाई। उसकी ताजमहल देखने की बहुत इच्छा थी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
काफी पीते-पीते हमारी अच्छी दोस्ती हो चुकी थी। मैं क्रिस्टीना के फीगर के बारे में आपको बताना ही भूल गया। वह इतनी खूबसूरत थी जैसे कोई माडल हो, उम्र लगभग तीस वर्ष, एकदम संगमरमरी गौरी चमड़ी, जैसे नाखून गड़ा दो तो खून टपक जायेगा, ब्लांड (सर पर गोल्डन कलर के लम्बे बाल), अप्सराओं जैसा अत्यन्त खूबसूरत चेहरा, बड़ी-बड़ी नीली आँखें जिनमें डूबने को दिल चाहे, तीखी नाक, धनुषाकार सुर्ख गुलाबी रंगत लिये हुए होंठ, अत्यन्त मनमोहक मुस्कान जो सामने वाले को गुलाम बना दे, लम्बाई लगभग पांच फीट छह इंच, टाईट जींस, लो कट टाप जिसमें वक्षरेखा साफ दिख रही थी। ऊपर से एक हल्की ऊनी जर्सी क्योंकि सर्दियों के दिन थे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ओह क्षमा करें, मैं खास बात तो बताना ही भूल गया कि उसके स्तन 34, कमर 26 और गाण्ड 36 ईंची थी। इन सब बातों का सारांश यह निकलता था कि उसे पहली बार देखने पर किसी भी साधु सन्यासी का लण्ड भी दनदनाता हुआ खड़ा होकर फुंफकारे मारने लगे। सोने पर सुहागा यह कि वह एक शानदार जिस्म की मालिक होने के साथ साथ ईटेलिजेंट भी थी क्योंकि उसका सामान्य ज्ञान भी बहुत अच्छा था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अब काफी पीने के बाद वायुयान में जाने के लिए निर्धारित गेट की ओर चले, तभी रास्ते में एक बुक-शॉप देखी तो मेरे दिमाग में एक विचार आया। मैंने क्रिस्टीना से कहा- तुम्हारे जैसी कलाकार जब भारत आई है तो मैं अपने देश की तरफ से तुम्हें एक उपहार देना चाहता हूँ।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तो उसने पूछा- क्या दोगे?&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तो मैंने कहा- अब तुम कलाकार हो तो निश्चित रूप से तुम्हें उसी प्रकार का उपहार ही दूंगा।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फिर उसे लेकर मैं बुक-शॉप में घुसा और पेंटिंग की कुछ किताबें देखी, लेकिन मेरा मन तो उसे वात्स्यायन की विश्व प्रसिद्ध कामसूत्र की पुस्तक देने का था। फिर मैंने कामसूत्र पर आधारित दो-तीन किताबें छांटी और उसे दिखाई कि क्रिस्टीना, यह भी विश्व प्रसिद्ध हैं, क्या तुम इसके बारे में जानती हो?&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तो वह नाम देखकर चहुंकी और बोली- हाँ, मैंने इसका नाम सुना है पर कभी पढ़ी नहीं हैं और मैं इसे लेना पसंद करूंगी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आखिरकार मैं भी तो यही चाहता था। मैंने 2800 रुपये देकर पुस्तक खरीद ली। हालांकि विदेशी लोग थोड़े उन्मुक्त होते ही है और क्रिस्टीना तो एक कलाकार भी थी, अतः मैं कोई गलतफहमी नहीं पाल सकता था कि वह पट गई है। हाँ इसकी जगह कोई देशी लड़की होती और उसे अगर मैंने कामसूत्र की किताब दी होती तो शायद दूसरी बात होती। उसके इस प्रकार के उपहार को स्वीकार करने का मतलब ही यही होता कि वह मेरे साथ बिस्तर पर लेटने को तैयार है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अब यान में प्रवेश करने का समय भी हो चला था तो हम अपने निर्धारित गेट तक आ पहुँचे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तब क्रिस्टीना ने पूछा- आपकी सीट नम्बर क्या है?&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्योंकि मैंने उसे यह नहीं बताया था कि हम दोनों की सीट आसपास है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैंने दोनों के बोर्डिंग पास मिलाकर चेक करने का नाटक किया और बताया कि हम दोनो साथ साथ ही बैठेंगे तो उसने खुशी जाहिर की। थोडी देर बाद हम वायुयान के अंदर थे। हमारी सीट यान के पिछले हिस्से में थी। बोईंग यान की एक लाइन में कुल दस सीटें थी, दोनों तरफ खिड़कियों की तरफ तीन-तीन व बीच में चार सीट थी। अब सबसे पहले खिड़की की तरफ क्रिस्टीना बैठी, फिर उसके पास वाली सीट पर मैं, व मेरे बाईं तरफ की फिर गलियारे वाली सीट के अलावा बीच वाली चारों सीटें भी खाली ही पड़ी थी। सिर्फ उस पार खिड़की की तरफ एक बुजुर्ग दम्पत्ति बैठे थे। उस दिन भीड़ कम थी। अब तक तो सब कुछ मेरे हिसाब से ही हो रहा था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अब तक सुबह के चार बज चुके थे और उड़ान शुरु हुई। कुछ ही मिनटों में दिल्ली की लाईटें ओझल हो गई। क्रिस्टीना बातूनी किस्म की लड़की थी, अतः मुझे उसके साथ दोस्ती करने के लिये बहुत मेहनत नहीं करनी पड़ी। मैंने सोचा कि बातें करते करते तो अभी समय निकल जायेगा और मैं हाथ मलता रह जाउंगा। तो मैंने फिर उसे कामसूत्र की याद दिलाई कि यह वात्स्यायन द्वारा करीब दो हजार वर्ष पहले लिखी गई थी और यह पेंटिंग तकरीबन पिछले 400 से 600 वर्षों के दौरान बनाई गई थी। इतना कहते ही उसके अंदर का कलाकार जाग उठा और उसने कामसूत्र की किताब का पैकेट खोल लिया। चून्कि कामशास्त्र मेरा पढ़ा हुआ था, अतः उसे समझाने में कोई विशेष परेशानी नहीं हुई। वह बड़ी रुचि से सुनती रही और पेटिंग भी देखती रही।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हालांकि कामशास्त्र के बारे में लोगों को गलतफहमी है कि यह पूरी किताब ही स्त्री-पुरुष सम्भोग के बारे में लिखी हुई है। उसमें ज्यादातर पाठ तो मानव-जीवन व सामाजिक व्यवहार के बारे में लिखे हुए है। इसमें मात्र एक पाठ ही सम्भोग कला और विभिन्न आसनों के बारे में है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तो यान में मेरी कामशास्त्र की क्लास चल रही थी। इसी दौरान मैंने हम दोनो की सीटों के बीच लगा हुआ हत्था (आर्म रेस्ट) खड़ा कर कमर वाले हिस्से की तरफ चिपका दिया ताकि हम दोनों के बीच की दूरी खत्म हो जाये। अब थोड़ी ही देर में बातचीत करते हुए वह इतनी नजदीक आ चुकी थी कि होले-होले उसका जिस्म मुझे छूने लगा था। एक तरफ तो कामसूत्र की सम्भोग करती हुई पेंटिंग्स और दूसरी तरफ उसके गोरे जिस्म का स्पर्श ! मेरा लण्ड तो बिलकुल नब्बे डिग्री पर खड़ा होने लग गया पर मैं बहुत सम्भल कर बैठा था कि कहीं मेरी किसी छोटी गलती से वह नाराज ना हो जाए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तब तक यान लगभग 35000 फीट की ऊँचाई तक पहुँच चुका था। फिर खूबसूरत तुर्की परिचारिकाओं ने लज़ीज़ खाना परोसा।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खाना खाने के बाद परिचारिका सबको औढ़ने के लिये कम्बल जैसी मोटी शाल दे कर चली गई। अब तक लोगबाग एक मूवी देख चुके थे, अतः थक कर धीरे धीरे अंदर की लाईटे बंद होने लगी, क्योंकि यात्री रात भर के जगे होने के कारण थके हुए थे। फिर एक दम अंधेरा हो गया. अब क्रिस्टीना ने भी शाल निकाली और ओढ़ कर बैठ गई और मुझसे बोली- अब नींद आ रही है, मैं थोड़ी देर झपकी लूंगी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैंने जी.पी.एस. मॉनीटर पर देखा कि हमारा विमान अफगानिस्तान की पहाड़ियाँ लांघ कर ईरान की सीमा में प्रवेश कर रहा था और विमान के इस्तंबुल पहुँचने में पांच घंटे का समय था। मैंने भी उसे गुड नाईट कहा, हालांकि मेरी इच्छा थी कि हम बैठे बैठे बातें करते रहें क्योंकि पता नहीं यह समय बाद में वापिस आयेगा या नहीं। मैं तो सिर्फ नाश्ते-पानी की सोच रहा था, लेकिन कहते हैं कि ऊपरवाला किसी को भूखा नहीं सुलाता है, ठीक उसी प्रकार उसने मेरे लिये 36 पकवान लगी हुई थाली का इन्तज़ाम कर रखा है तो निश्चित रुप से जमीन से 36000 फ़ीट की ऊँचाई पर तो ऊपर वाला याद आयेगा ही।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अब विमान में लगभग सम्पूर्ण अंधेरा था क्योंकि विमान के भीतर की बत्तियाँ बंद थी, दूसरी और विमान-परिचारिका आकर खिड़की भी बन्द कर गई थी। हालांकि बाहर अभी भी अंधेरा था क्योंकि जैसे जैसे हम पश्चिम की ओर जा रहे थे, तो हमें अंधेरा ही मिल रहा था, क्योंकि भारत में सूर्य पहले उगता है और पश्चिम में बाद में। कुल मिलाकर विमान में एकदम सन्नाटा छाया था, कहीं कहीं से खर्राटे की आवाज आ रही थी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अब चूंकि मैंने सीतों के बीच का हत्था हटा दिया था, अतः हम दोनों के बीच कोई दूरी नहीं थी। थोड़ी ही देर में क्रिस्टीना नींद में झोंके खाती हुई मेरे दाहिने कन्धे पर सिर टिका कर सो गई, उसकी जांघें पहले से ही मेरी जांघों से सटी हुई थीं। हमारी सीट के सामने लगा हुआ जी. पी. एस. सिस्टम बता रहा था की बाहर का तापमान -05 डिग्री है, लेकिन मेरे अंदर तो भयानक आग लगी हुई थी, लग रहा था कि उस वक्त मेरे भीतर का तापमान हज़ार डिग्री से भी अधिक होगा। मेरा दिल बहुत तेज गति से धड़क रहा था, मुझे लग रहा था कि इसकी धड़कन की आवाज पूरे विमान में गूँज रही हो। अब मैंने सीट के सामने लगे छोटे से टीवी पर चल रही इंगलिश मूवी भी बन्द कर दी क्योंकि उससे भी हल्का प्रकाश आ रहा था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अब क्रिस्टीना का सिर मेरे कंधे से फिसलने लगा, मैंने अपने हाथ का सहारा देकर उसे रोकने की सोची पर यह डर लगा कि कही इसकी नींद खुल गई तो हो सकता वह मेरे कन्धे से अपना सिर हटाकर दूसरी ओर खिड़की की तरफ नहीं कर ले, तो यात्रा का सारा मजा ख्रराब हो जायेगा।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अब मुझे लगा कि यदि मैंने क्रिस्टीना के सिर को नहीं सम्भाला तो उसकी नींद खुल आयेगी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैंने होले से अपने दाहिने कन्धे से उसका सिर मेरे सीने की तरफ लुढ़कने दिया और उसे अपने बायें हाथ के सहारे से बहुत धीरे धीरे से नीचे अपनी गोद की ओर ले आने लगा। इसी दरम्यान एक बार मैंने उसके कान में हल्के से बोला- क्रिस्टीना, यदि नींद आ रही हो तो आराम से सो जाओ !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तो वह कुनमुना कर बोली- मुझे बहुत नींद आ रही है, सोने दो।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अब मैंने अपनी बाईं तरफ की गलियारे की तरफ की सीट का हत्था भी ऊपर उठा कर सीट की बैक से मिला दिया। इस प्रकार अब मैंने तीनों सीटों को मिलाकर एक लम्बी सीट बना ली। अब मैं धीरे धीरे अपनी बाईं सीट की तरफ खिसक आया और अपने साथ क्रिस्टीना को भी आहिस्ता से अपने साथ ले आया। अब मैं सबसे बाई सीट पर बैठा था और क्रिस्टीना गहरी नींद में आराम से तीनों सीतों पर लेटी हुई थी क्योंकि उसका सिर अब मेरी गोद में था। इतना आहिस्ता आहिस्ता करने में मुझे लगभग 15 मिनट का वक्त लग गया क्योंकि मैं नहीं चाहता था कि उसकी नींद में कोई खलल पड़े और वह उठ कर बैठ जाये।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अब मैं खुश था कि एक विदेशन सुन्दरी मेरी गोद में लेटी हुई है। अब उसका सिर मेरे लण्ड पर टिका हुआ था तो मुझे ऐसा लग रहा था कि उसकी हालत ठीक वैसी ही होगी जैसे की महाभारत युद्ध में बाणों की शैया पर लेटे हुए भीष्म की हुई होगी। मुझे लग रहा था कि मेरा खड़ा लण्ड उसके सिर में बिल्कुल बाण की तरह चुभ रहा होगा। एक बार देखने में तो ऐसा लग रहा थी कि वह गहरी नींद में होगी। अब लगभग पांच मिनट का इन्तजार करने के बाद मैंने अपना दायां हाथ इस प्रकार से उसके पेट की ओर रखा कि जैसे किसी छोटे बच्चे को सीट से नीचे नहीं गिर आये तो सम्भालने के लिये रखना पड़ता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अब थोड़ी देर तक मैंने नज़र रखी कि क्रिस्टीना ने कोई हलचल नहीं की तो मैंने अपना हाथ आहिस्ता से उसके उन्नत-शिखरों की ओर खिसका दिया। अब मेरी बाहें उसके स्तन के निचले हिस्से को छूने लगी। मेरी हालत तो बिल्कुल मेरे बस में नहीं थी, हर क्षण मैं यही कोशिश कर रहा था कि कही मैं पागल होकर उस पर टूट नहीं पडूँ। पर मैंने अपना होश नहीं खोया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आगे क्या हुआ, दूसरे भाग में पढ़ें !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
punemsexsena@yahoo.in&lt;/span&gt;</description><link>http://sexisalipunem0.blogspot.com/2011/01/1_3725.html</link><author>noreply@blogger.com (sexisalipunem)</author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg40IKuKyW5m2rTR0wIk3EWVIAmgsUEIxcnrYQgjhN1VEA7XDK0NDS8mHEMxYSEz4IENugEls9WzfDtLRQegoEuSsu_P20NenJOtAC5TCcY-iC6fW6IXwWS-BxSrrCHwrEIfr8RC4J7MQ22/s72-c/puja.jpg" width="72"/><thr:total>0</thr:total></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-6722033917999163069.post-9029457769736698041</guid><pubDate>Sat, 15 Jan 2011 10:09:00 +0000</pubDate><atom:updated>2011-01-15T15:39:32.376+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">hindi sex</category><title>मेरी मामी की गलती से चुदाई</title><description>&lt;h1 style="color: #663300; font-family: 'Trebuchet MS', Georgia, serif; font-size: 32px; margin-bottom: 10px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 5px;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/h1&gt;&lt;div style="font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: #333333;"&gt;प्रेषक : &lt;/span&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: red;"&gt;पूनम सक्सेना&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg1BIytC9Idwmg1XJLHncGh0gqrOb6KgX8S_TspdTeohomBiFzhT9zF2VFh6yUhyphenhyphenX39LkiKriY4d0t1kx7FjSw5q_0LFD2FlLDRc5ReR2wA0JUZmtoCWQPtk4fznF0fQc4GPT7UKSs-gUSr/s1600/Copy+of+Lady.gif" imageanchor="1" style="clear: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg1BIytC9Idwmg1XJLHncGh0gqrOb6KgX8S_TspdTeohomBiFzhT9zF2VFh6yUhyphenhyphenX39LkiKriY4d0t1kx7FjSw5q_0LFD2FlLDRc5ReR2wA0JUZmtoCWQPtk4fznF0fQc4GPT7UKSs-gUSr/s1600/Copy+of+Lady.gif" /&gt;&lt;/a&gt;मुझे मेरे दोस्त की शादी में मामा के गाँव जाना था। रात को बहुत मस्ती की, नाचना-गाना हुआ फिर सब लोग सोने चले गये। मैं भी मामा के घर सोने चला गया। मामाजी की रात की नौकरी थी तो वो गए हुए थे। मामाजी की एक लड़की ही थी 18 साल की। जब मैं घर में गया तो वो दोनों ( मामीजी और मामाजी की लड़की ) अपनी खटिया पर थी। मेरे लिए भी उनके बाजू में ही खटिया लगा दी थी। एक तरफ मैं सोया था, एक तरफ मामीजी और बीच में मेरी ममेरी बहन सोई हुई थी। रात को तक़रीबन ढाई बजे मेरी नींद खुल गई। मैंने देखा कि पूरे कमरे में अंधेरा था। मैंने अपने लंड पर हाथ रखा तो वो एकदम खड़ा हो चुका था तक़रीबन आठ इन्च का। मुझ पर सेक्स सवार हो गया था !&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;फिर मुझे याद आया कि गाँव के लड़के बात कर रहे थे कि तेरे मामा की लड़की बड़ी खराब हो रही है और पता चला है कि वो कई बार सेक्स कर चुकी है।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;तो मैंने सोचा कि क्यों न आजमाया जाये बहन पर कुछ नया तरीका !&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;तो मैंने नींद में ही होने का नाटक करते हुए अपना हाथ बहन की टांग पर रख दिया! फिर धीरे धीरे सहलाने लगा, वो नींद में थी। मुझमें और हिम्मत आ गई तो मैं अपना हाथ धीरे से सरकाते हुए ऊपर ले गया। अब मेरा हाथ उसकी चड्डी के पास था। मैंने उसके कपड़ों पर से ही उसकी चूत पर हाथ रख दिया। फिर ऊपर से ही हाथ घुमाने लगा वो अभी तक नींद में ही थी। मुझे थोड़ा डर भी लग रहा था लेकिन गाँव के लड़कों की बात याद कर के मुझ में हिम्मत आ गई और मैंने उसका नाड़ा खोल दिया। लाइट बंद थी इसलिए यह सब मेरी मामी को नहीं दिख रहा होगा या फिर वो भी गहरी नींद में होगी, यह सोच कर मैंने अपना काम चालू रखा।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;उसका नाड़ा खोलते ही मैंने अपना हाथ अंदर दाल दिया उसने चड्डी नहीं पहनी थी और मेरे हाथ में सीधी ही उसकी चूत आ गई। में बहुत उत्तेजित हो गया, मेरे रोंगटे खड़े हो गए और मेरा लंड लगता था फटने ही वाला हो !&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;मैंने अपना हाथ थोड़ा और नीचे जाने दिया तो उसकी चूत के दाने पर मैं अपनी उंगली से मसल पा रहा था। तभी अचानक कुछ हरकत हुई, मुझे लगा कि वो जाग गई है। और मैं तुरंत अपना मुँह दूसरी तरफ घुमाकर सो गया।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;थोड़ी देर बाद मैं फिर से उठा। कमरे में अभी भी अँधेरा ही था, मैंने सोचा, चलो कुछ हो-हल्ला नहीं हुआ। और मेरी बहन शायद सू-सू करने गई होगी और आकर फिर सो गई होगी। यह सोच कर मैंने सोचा कि उसको भी शायद मज़ा आया हो। तो मैंने आगे का कार्यक्रम फिर चालू करने के बजाय सीधा ही हाथ उसकी चूत के पास रख दिया और सहलाने लगा। फिर मैंने सोचा कि चलो नाड़ा फिर से खोला जाये तो मैंने हाथ ऊपर की तरफ नाड़े की ओर खिसकाया, लेकिन नाड़ा मिल नहीं रहा था। मैं सीधा हाथ उसके मम्मे की ओर ले गया।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;मुझे कुछ अजीब ही लगा, मम्मे एकदम बड़े थे ! मैं दंग रह गया, सोचा कि मेरी बहन के मम्मे तो छोटे सी थे, लेकिन यह क्या ! मेरी बहन की जगह पर मामी जी आकर सो गई थी। मैं एक बार तो रुक गया, घबरा भी गया। फिर सोचा कि मैंने मामी की चूत को छुआ तो वो कुछ नहीं बोली, मम्मों को पकड़ा तो कुछ नहीं बोली, तो अब क्या बोलेगी। सोचकर सीधे ही फिर से चूत की ओर बढ़ा ! मामी ने नाइटी पहनी हुई थी तो चूत को ऊपर से ही सहलाने लगा। फिर लगा कि मामी कुछ बोल नहीं रही तो धीरे से नीचे हाथ डालकर मामी की नाइटी को कमर तक ऊपर उठाया और मामी की चूत को उनकी चड्डी के ऊपर से सहलाता गया।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;आगे की कहानी जल्द ही लिखूंगा।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;punemsexsena@yahoo.in&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;﻿&lt;/span&gt;</description><link>http://sexisalipunem0.blogspot.com/2011/01/blog-post_15.html</link><author>noreply@blogger.com (sexisalipunem)</author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg1BIytC9Idwmg1XJLHncGh0gqrOb6KgX8S_TspdTeohomBiFzhT9zF2VFh6yUhyphenhyphenX39LkiKriY4d0t1kx7FjSw5q_0LFD2FlLDRc5ReR2wA0JUZmtoCWQPtk4fznF0fQc4GPT7UKSs-gUSr/s72-c/Copy+of+Lady.gif" width="72"/><thr:total>0</thr:total></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-6722033917999163069.post-9125786745362431461</guid><pubDate>Sat, 15 Jan 2011 09:52:00 +0000</pubDate><atom:updated>2011-01-15T15:22:08.066+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">नजदीकियाँ-2</category><title>नजदीकियाँ-2</title><description>&lt;h1 style="color: #663300; font-family: 'Trebuchet MS', Georgia, serif; font-size: 32px; margin-bottom: 10px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 5px;"&gt;नजदीकियाँ-2&lt;/h1&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;लेखक : &lt;span class="Apple-style-span" style="color: red;"&gt;प्रेम सक्सेना&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj5VW2RKO1hXPO7ECE0oaYlYGClbsRf5FzUcF56hvvXBIayDgBr3ldsK4Ud2YDMRFiJXwRXQhyd2o-DGwOAvFEQLJw6s9L3GxABV1CQ3J8t9d4ajUkYp4swH3n1xox4TvB7v8ssClVrMDhr/s1600/Copy+of+Lady.gif" imageanchor="1" style="clear: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj5VW2RKO1hXPO7ECE0oaYlYGClbsRf5FzUcF56hvvXBIayDgBr3ldsK4Ud2YDMRFiJXwRXQhyd2o-DGwOAvFEQLJw6s9L3GxABV1CQ3J8t9d4ajUkYp4swH3n1xox4TvB7v8ssClVrMDhr/s1600/Copy+of+Lady.gif" /&gt;&lt;/a&gt;अगली सुबह मुझे बहुत ग्लानि और शर्मिन्दगी महसूस हो रही थी कि मैं अपनी बहन के साथ ही मस्ती कर रहा था। रह रह कर मुझे उसकी मस्त चूचियों की चुसाई भी याद आती।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;तभी सुमन मेरे पास आई तो मैं कुछ बोल नहीं पा रहा था। सुमन मेरे पास बैठ गई। मैं उठ कर जाने लगा तो उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और बैठने के लिए कहा।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;मैं चुपचाप किसी चोर के तरह सिर झुका कर बैठ गया।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;अचानक वो हुआ कि मैं सोच भी नहीं सकता था सुमन मेरे नजदीक आई और मेरे होठों पर होंठ रख दिए। कहाँ तो मैं शर्म से मरा जा रहा था पर अचानक हुए यह हमला मेरी शर्म पर भारी पड़ गया और मैं भी सुमन के होंठ चूसने लगा। कोई पांच मिनट एक दूसरे के होंठ चूसने के बाद सुमन मुझ से दूर हुई और बोली- राज तुम्हें किसी बात पर शर्मिंदा होने की कोई जरूरत नहीं है। मैं खुद यही चाहती थी।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;सुमन के मुँह से यह बात सुनने के बाद रही सही शर्मिन्दगी और झिझक भी खत्म हो गई।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;मैंने सुमन को पकड़ा और उसकी चूचियाँ दबाते हुए उसके होठों पे होंठ रख दिए। अगर किसी के आ जाने का डर नहीं होता हो शायद मैं उसे वही नंगी कर लेता, पर शादी वाला घर था, कोई भी आ सकता था।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;खैर किसी तरह शादी निपट गई।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;इस दौरान जब भी मौका मिला सुमन और मैं लिपट लिपट कर प्यार करते रहे। रात को बड़ी देर तक सुमन की चूचियाँ चूसी, होंठ चूसे, बस चूत नहीं मारी। किरण आज हमारे साथ नहीं आई थी। कमरे में हम दोनों अकेले थे।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;दो दिन ऐसे ही निकल गए।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;तीसरे दिन भाभी (चाचा के लड़के की बीवी) के मायके में जागरण का कार्यक्रम था। सब लोग वहाँ जा रहे थे कि अचानक सुमन के पेट में दर्द होने लगा। उसने जाने से मना कर दिया। उसे अकेले नहीं छोड़ सकते थे इस लिये मैं भी रुक गया। बाकी सब लोग चले गए। अब घर में मैं ओर सुमन अकेले थे। उन लोगो को गए अभी पांच मिनट भी नहीं हुए थे कि सुमन के पेट का दर्द गायब हो गया। मुझे समझते देर नहीं लगी के सुमन ने नाटक किया था।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;मैं सुमन के पास गया तो वो मुझ से लिपट गई और बोली- मेरी जान राज ! मैं कई दिनों से एक अजीब सी आग में जल रही हूँ। प्लीज मेरी आग को ठंडा कर दो।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;कहते ही उसने अपने गर्म गर्म होंठ मेरे होंठों पर रख दिए। मैं खुद भी तो एक आग में जल रहा था। मैं भी उसके होंठ चूसने लगा। आज पूरी रात थी हमारे पास अकेले रहने के लिए क्यूंकि सब सुबह ही आने वाले थे।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;मैंने सुमन को गोद में उठाया और भैया के कमरे में ले गया।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;कमरे में मैंने सुमन को भैया की शादी वाले नए बेड पर लिटा दिया। इसी बेड पर भैया अपनी नई बीवी के साथ सुहागरात मना चुके थे। आज मेरी सुहागरात थी अपनी बहन के साथ।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;हम फिर एक दूसरे के होठ चूसने लगे मेरे हाथ सुमन की चूचियाँ टटोल रहे थे।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;तभी सुमन उठी और दो मिनट में आने का कह कर चली गई।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;दस मिनट के बाद सुमन आई।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;मैं सुमन को देखता ही रह गया। उसने नई भाभी की साड़ी पहन रखी थी और घूंघट भी निकला हुआ था। मैं उसके नजदीक गया तो वो झुक कर मेरे पाँव छूने लगी और बोली- सुहागरात पर यही सब करना होता है।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;मैंने उसे फिर से गोद में उठाया और बेड पर ले आया। आते ही मैंने उसका घूंघट उठाया और उसके रसीले होंठ चूम लिए। वो मुझ से लिपट गई और मैं उसकी चूचियाँ दबाने लगा। फिर शुरू हुआ कपड़े उतारने का सिलसिला।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;पहले मैंने उसकी साड़ी उतारी। पेटीकोट और ब्लाउज में सुमन बहुत सेक्सी लग रही थी। मैंने उसके चुचूक ब्लाउज के ऊपर से ही चूम लिए। सुमन के मुँह से सिसकारी निकल गई। मैं समझ गया कि सुमन इस समय पूरी गर्म हो चुकी है। दिक्कत यह भी थी कि ना तो सुमन ने और ना ही मैंने पहले कभी सेक्स किया था। पर मैंने एक बार ब्लू फिल्म देखी थी। उसी अनुभव के दम पर मैंने सुमन के सारे कपड़े उतार दिए। सुमन मेरे सामने बिलकुल नंगी खड़ी थी।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;मैंने सुमन की टाँगें खोल कर देखा तो पहली बार एक कुँवारी चूत मेरे सामने थी। जिंदगी में आज पहली बार चूत के दर्शन कर रहा था। छोटा सा छेद जिसे रेशम की तार जैसे झांटों ने ढक रखा था। मैं झुक गया और अपने होंठ सुमन की चूत पर रख दिए। सिसकारी और आहें कमरे में गूंजने लगी। मैं कुछ देर उसकी चूत चाटता रहा। सुमन इतनी गर्म हो चुकी थी कि वो मेरी जीभ की चुदाई से ही झड़ गई। उसका गर्म गर्म पानी मेरे मुँह में घुल गया। नमकीन और कसैला सा स्वाद था।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;सुमन ठंडी हो चुकी थी।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;सुमन उठी और मेरे कपड़े उतारने लगी। कुछ ही देर में मैं ही अपने छ: इंच के लंड के साथ सुमन के सामने नंगा खड़ा था। सुमन मेरे तन कर खड़े छ: इंच के लंड को बड़ी उत्सुकता से देख रही थी। मैंने उसका हाथ पकड़ कर अपने लंड पर रख दिया तो सुमन उसे धीरे धीरे सहलाने लगी। लंड इतना कड़क हो गया था कि मुझे दर्द होने लगा था। मैंने सुमन को लंड चूसने के लिए कहा तो वो बिना कुछ बोले मेरे लंड को मुँह में ले कर चूसने लगी। क्योंकि मैंने पहले कभी सेक्स नहीं किया था और प्रेशर भी ज्यादा हो रहा था मैं काबू नहीं रख पाया और एक मोटी धार सुमन के मुँह पर मार दी।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;हम दोनों उठे और बाथरूम में जा कर शावर के नीचे खड़े हो गए और एक दूसरे को चूमने लगे। मेरे हाथ उसके बदन पर और उसके हाथ मेरे बदन पर अपनी-अपनी पसंद के अंग ढूंढ रहे थे। दोनों बदन फिर से सेक्स की गर्मी में जलने लगे। लंड खड़ा हो चुका था। मैंने सुमन के गीले बदन को अपनी गोद में उठाया और फिर से बेड पर लिटा दिया।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;सुमन तड़प रही थी, वो बोली : आजा मेरी जान, अब इस छेद की खुजली मिटा दे।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;मैंने अपना टनटनाया हुआ लंड सुमन की चूत प रखा और एक जोरदार धक्का दे दिया। लंड का सुपारा फक की आवाज के साथ चूत में घुस गया। सुमन दर्द के मारे छटपटा उठी। पहले तो मैं डर गया फिर मुझे कुछ याद आया। भैया की शादी से पहले भैया के दोस्त भैया को बता रहे थे कि भाभी कितना मर्जी दर्द से तड़पे, तुम रहम मत करना क्योंकि पहली बार सभी लड़कियों को दर्द होता है। लेकिन अगर तुमने उसके दर्द को देख कर उसे छोड़ दिया तो वो फिर कभी तुम्हारे नीचे नहीं आएगी। सारी उम्र लंड हाथ में लेकर घूमना। यह बात याद आते ही मैंने एक और जोरदार धक्का लगा दिया। लंड करीब दो इंच तक चूत में घुस गया।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;सुमन चिल्लाई- राज मैं मर गई.... मुझे बहुत दर्द हो रहा है ! प्लीज अपना लंड बाहर निकालो... आआआआ... ईईईई मररर.... गई।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;पर मैंने फिर भी रहम नहीं किया और एक धक्का और लगा दिया। सुमन की आँखों से आँसू निकल रहे थे। धक्का इतना जोरदार था कि लंड सुमन की सील तोड़ता हुआ चूत में अंदर तक घुस गया। अगले ही धक्के में पूरा लंड सुमन की चूत में था। सुमन तड़प रही थी, बेचैन हो रही थी, उसकी आवाज भी नहीं निकल रही थी। उसकी कसी चूत में लंड घुसाते-घुसाते मैं भी थक गया था। मैंने कुछ देर इंतजार किया और फिर धीरे धीरे लंड अंदर-बाहर करने लगा।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;सुमन थोड़ी कसमसाई, फिर आहें भरने लगी। धीरे-धीरे सुमन का दर्द कम होता चला गया और वो मुझे अपनी ओर खींचने लगी। मैंने भी धक्कों की गति बढ़ा दी। पांच मिनट की हल्की चुदाई के बाद सुमन ने भी अपने चूतड़ उछालने शुरू कर दिए जो उसके मस्त होने की निशानी थी।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;फिर शुरू हुआ घमासान। बेड के नए नए गद्दे नीचे से हमें उछाल रहे थे, मस्त चुदाई हो रही थी। वो सुमन जो दो मिनट पहले दर्द से तड़प रही थी अब मस्ती से गांड उछाल रही थी, पूरा लंड कसी चूत में अंदर-बाहर हो रहा था।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;सुमन जोर जोर से चिल्ला रही थी- आहऽऽ आहऽ मजा आ गयाऽऽ चोदो ! जोर से चोदो !&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;बीस मिनट की चुदाई के बाद सुमन झड़ गई पर क्योंकि मेरा एक बार पानी निकल चुका था इसलिए मेरा अभी बाकी था। मैं उसे चोदता रहा और करीब तीस मिनट के बाद मैं और सुमन एक साथ झड़ गए। क्या मस्त चुदाई थी। सुमन दो बार झड़ी थी इसलिए वो एकदम सुस्त बेड पर पड़ी थी। मैं भी उसके ऊपर चिपक कर लेटा हुआ था। बीस मिनट के बाद हम दोनों उठे तो चादर पर लगे खून के धब्बे देख कर दोनों की जान निकल गई।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;इस मस्त चुदाई के बाद सुमन ने बताया कि उसने भैया-भाभी की सुहागरात देखी थी, तभी से उसे चुदवाने की इच्छा हो रही थी। वो मुझ से चुदवा कर बहुत खुश थी। उसके बाद उस रात हम दोनों ने तीन बार और चुदाई करी। फिर थक कर सो गए।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;मेरे दोनों हाथों में लड्डू थे। जिन्दगी मस्त हो गई थी क्योंकि लंड और चूत की नजदीकियां जो बढ़ गई थी।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;किरण की चुदाई अगली बार ! आज के लिए सिर्फ इतना ही।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;premsexsena9897515075@gmail.com&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;﻿&lt;/span&gt;</description><link>http://sexisalipunem0.blogspot.com/2011/01/2_15.html</link><author>noreply@blogger.com (sexisalipunem)</author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj5VW2RKO1hXPO7ECE0oaYlYGClbsRf5FzUcF56hvvXBIayDgBr3ldsK4Ud2YDMRFiJXwRXQhyd2o-DGwOAvFEQLJw6s9L3GxABV1CQ3J8t9d4ajUkYp4swH3n1xox4TvB7v8ssClVrMDhr/s72-c/Copy+of+Lady.gif" width="72"/><thr:total>0</thr:total></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-6722033917999163069.post-4962949865593487746</guid><pubDate>Sat, 15 Jan 2011 09:24:00 +0000</pubDate><atom:updated>2011-01-15T14:54:59.525+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">नजदीकियाँ-1</category><title>नजदीकियाँ-1</title><description>&lt;h1 style="color: #663300; font-family: 'Trebuchet MS', Georgia, serif; font-size: 32px; margin-bottom: 10px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 5px;"&gt;नजदीकियाँ-1&lt;/h1&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;लेखक : &lt;span class="Apple-style-span" style="color: red;"&gt;प्रेम सक्सेना&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgAzPJsZ7kgymGg39CAxrgMsstwMYengKr30FGGeByV52B9NSM7rsJh4iET8Fk7eSW80EMfjs6PwsAJe7vAwIQflfiF4kga-dMCrY5kW_Z0_Eb5yt4T_JknbLeW1bebQFRc2yFWCIyRC_Vq/s1600/Copy+of+Lady.gif" imageanchor="1" style="clear: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgAzPJsZ7kgymGg39CAxrgMsstwMYengKr30FGGeByV52B9NSM7rsJh4iET8Fk7eSW80EMfjs6PwsAJe7vAwIQflfiF4kga-dMCrY5kW_Z0_Eb5yt4T_JknbLeW1bebQFRc2yFWCIyRC_Vq/s1600/Copy+of+Lady.gif" /&gt;&lt;/a&gt;मस्ती करने की उम्र होती है 17-18 से 21 साल तक। चाहे लड़का हो या लड़की इस उम्र में सेक्स की तरफ इतने ज्यादा आकर्षित होते हैं कि पूछो मत। मेरा भी कुछ ऐसा ही हाल था। आज मेरी उम्र 38 साल हैं। जब मैं 18 साल का था तब मुझे भी कुछ कुछ होता था। अक्सर रात को मेरा हाथ भी मेरे अंडरवियर के अंदर चला जाता था। मैं अनजाने में ही काफी काफी देर अपना हथियार (लंड) सहलाता रहता था। जवान लड़कियों को देख कर अक्सर तन जाता। फिर रात को उन्हें याद करके अपना लंड सहलाता।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;जिंदगी में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। इन्हीं उतार-चढ़ाव के बीच जिन्दगी चल रही थी कि एक दिन मेरी जिंदगी में भी सेक्स भरा तूफ़ान आया जिसने मुझे पल भर में जवान बना दिया।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;शादी की रात थी। मेरे चाचा के बेटे की शादी थी। वो भी आई थी बहुत बन-ठन के। उम्र उसकी भी 18 या 19 साल की ही थी। पर वो मुझ से एक क्लास आगे थी। नाम था किरण। उसकी खूबसूरती का वर्णन करना लिख कर बताना मुश्किल है- एक दम गोरा रंग, कसा हुआ शरीर, तनी हुई चूचियाँ ज्यादा बड़ी नहीं थी पर इतनी आकर्षक थी कि मेरा लंड उसे देखते ही सलामी देने लगता था।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;मैं उसे अपने दिल का हाल बता चुका था पर वो मेरी बात का कोई जवाब नहीं देती थी।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;मेरे चाचा की लड़की है सुमन। मैंने सुमन को किरण से बात करने को कहा। सुमन मेरी हम-उम्र थी। हम दोनों एक दूसरे से खुल कर बात करते थे। कोई भी बात नहीं छुपाते थे। इस लिए मैंने किरण को लेकर अपने दिल की बात सुमन को बता दी। और उससे मदद भी मांग ली।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;शादी की रात नाच-गाना खत्म होने के बाद सब सोने की तैयारी कर रहे थे। जिसको जहाँ जगह मिली, वो वहीं लेट गया। पर मेरी नजर तो किरण का पीछा कर रही थी।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;तभी सुमन मेरे पास आई और कहा- मैं और किरण ऊपर वाले स्टोर-रूम में सोने जा रहे हैं, तुम भी वहीं आ जाना।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;मुझे मेरा काम बनता नजर आ रहा था। मैं उनसे पहले ही स्टोर में जा कर लेट गया। तभी खनकती आवाज के साथ किरण और सुमन स्टोर में आई। दोनों किसी बात पर जोर-जोर से हंस रही थी।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;आपको बता दूँ कि सुमन किरण से भी ज्यादा सेक्सी थी। वो ज्यादा गोरी तो नहीं थी पर उसका फिगर बहुत मस्त था। एक दम तनी हुई किरण से बड़ी चूचियाँ थी सुमन की। पर क्योंकि वो मेरी चचेरी बहन थी तो कभी उसके बारे में नहीं सोचा था।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;कमरे में आते ही दोनों बातें करने लगी। स्टोर में लाइट तो थी पर मैंने ऑन नहीं की थी। सुमन किरण को कह रही थी कि तुमने तो राज (मैं) पर जादू कर दिया है तुम्हारा दीवाना बना फिरता हैं। तुम हो कि उसे घास ही नहीं डालती।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;किरण बोली- यार, राज पसंद तो मुझे भी है पर एक समस्या है, वो मुझ से उम्र में छोटा है। कल जब शादी की बात आयेगी तो सब मना कर देंगे।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;सुमन : यार तू भी कहाँ शादी तक पहुँच गई, अभी तो प्यार करने की उम्र है शादी में तो बहुत समय बाकी है। अभी तो तुम सिर्फ प्यार करो और जिंदगी के मजे लो। एक बात बता, अगर राज तुम्हें चूमना चाहे तो तुम करने दोगी?&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;किरण : सोचना पड़ेगा। अगर तू उसकी इतनी सिफारिश कर रही है तो कल सोचती हूँ उसके बारे में, अब तो सोने दे। नाच-नाच कर बदन टूट रहा है। एक काम कर, मेरा बदन ही दबा दे।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;इतना सुनते ही सुमन किरण से लिपट गई और दोनों एक दूसरे का बदन दबाने लगी। जिसे देख कर मेरा बुरा हाल हो रहा था। मैं भी अपने अंडरवियर में हाथ डाल कर अपना लंड हिलाने लगा।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;थोड़ी देर बाद वो दोनो सो गई।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;कमरे में बहुत अंधेरा था। हम तीनों की अलावा कमरे में कोई नहीं था। जब लगा कि वो सो गई हैं तो मैं उनके बगल में जाकर लेट गया। दोनों लिपट कर सो रही थी। अँधेरे के कारण पता ही नहीं चल रहा था कि कौन किरण है और कौन सुमन है। दोनों एक उम्र की और लगभग एक ही फिगर की थी और आज दोनों ने कपड़े भी एक जैसे पहने हुए थे। मैं काफी देर लेटा सोचता रहा, मैं क्या करूँ क्या ना करूँ !&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;फिर मैंने हिम्मत करके दोनों में से एक की चूचियों पर हाथ रख दिया। मुझे कुछ नंगापन सा महसूस हुआ जब हाथ को पूरा सरका के देखा तो पता लगा कि पूरी चूची बाहर थी। जीवन में पहली बार किसी की नंगी चूची को छुआ था। मेरी तो हालत खराब हो रही थी। पर हिम्मत करके मैंने उस नंगी चूची को सहलाना शुरु कर दिया।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;वो थोड़ा सा कसमसाई पर मैंने चूची को सहलाना चालू रखा क्योंकि मैं अपने पर काबू नहीं रख पा रहा था। थोड़ा और नजदीक जाकर मैंने उसके होठों पर उंगली फेरना शुरू कर दिया। अचानक उसने मेरी ऊँगली अपने मुँह में ले ली। पहले तो मैं थोड़ा घबराया पर जब वो मेरी उंगली को चूसने लगी तो मेरा डर निकल गया। मैंने उसकी चूची जोर जोर से दबानी शुरू कर दी। उसके मुँह से सिसकारियाँ निकल रही थी।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;मैं पूरी मस्ती में था, मैंने आवाज पहचानने की कोशिश भी नहीं की। अगर करता तो पता चल जाता कि वो किरण नहीं सुमन थी। पर मैं तो मस्ती में उसकी चूचियाँ दबा रहा था, वो भी तो मस्त हो कर दबवा रही थी। मेरी हिम्मत बढ़ी तो मैंने उसकी चूची को मुँह में ले लिया और चूसने लगा। वो मस्त हुई जा रही थी और मैं भी मदहोश था, पहली बार किसी की चूची मसल और चूस कर।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;अचानक किरण ने अंगडाई ली तो मुझे पता लगा कि जिसे किरण समझ कर में मस्ती कर रहा था वो मेरी अपनी चचेरी बहन थी। मुझे बहुत शर्म आई और मैं वहाँ से भाग लिया।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;अगली सुबह मुझे बहुत ग्लानि और शर्मिन्दगी महसूस हो रही थी कि मैं अपनी बहन के साथ ही मस्ती कर रहा था। रह रह कर मुझे उसकी मस्त चूचियों की चुसाई भी याद आती।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;तभी सुमन मेरे पास आई तो मैं कुछ बोल नहीं पा रहा था। सुमन मेरे पास बैठ गई। मैं उठ कर जाने लगा तो उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और बैठने के लिए कहा।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;मैं चुपचाप किसी चोर के तरह सिर झुका कर बैठ गया।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;शेष कहानी अगले भाग में !&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;premsexsena9897515075@gmail.com&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;</description><link>http://sexisalipunem0.blogspot.com/2011/01/1_15.html</link><author>noreply@blogger.com (sexisalipunem)</author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgAzPJsZ7kgymGg39CAxrgMsstwMYengKr30FGGeByV52B9NSM7rsJh4iET8Fk7eSW80EMfjs6PwsAJe7vAwIQflfiF4kga-dMCrY5kW_Z0_Eb5yt4T_JknbLeW1bebQFRc2yFWCIyRC_Vq/s72-c/Copy+of+Lady.gif" width="72"/><thr:total>0</thr:total></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-6722033917999163069.post-2438510208588854663</guid><pubDate>Sat, 15 Jan 2011 07:43:00 +0000</pubDate><atom:updated>2011-01-15T13:13:46.513+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">वेब से बेड तक- 3</category><title>वेब से बेड तक- 3</title><description>&lt;h1 style="color: #663300; font-family: 'Trebuchet MS', Georgia, serif; font-size: 32px; margin-bottom: 10px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 5px;"&gt;वेब से बेड तक&lt;span class="Apple-style-span" style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: medium;"&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="font-size: 16px; font-weight: normal;"&gt;&amp;nbsp;_&lt;/span&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="font-weight: normal;"&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: red;"&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="font-size: large;"&gt;3 &amp;nbsp;प्रेम सक्सेना&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/h1&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;फिर मैंने कहा- माँ, मुझको तुम्हारे शरीर के सारे कपड़े भी अच्छे लगते है।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;रीमा ने कहा- अच्छा बता, इनमें भला तुझे क्या अच्छा लगता है?&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;मैंने कहा- इनकी मादक खुशबू। इन कपड़ों से निकलने वाली मस्तानी सुगंध। इस सुगंध में कपड़ों की गंध के साथ साथ तुम्हारे बदन और तुम्हारे पसीने की सोंधी गंध भी शामिल है जोकि इसको और भी मादक बना देती है।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjQICG_bJ-xupoz7dPB6eQErihbbiZbCXdYAYiQ3RxYYXsaoVtL9jUTrELKNs_NzTwQWnhEz-R1PiZ2WI3P773_rzghdC8cMidKQmPSMZxLMzJvo9otDGkfMer9Ec-Q7bUFQsuiEbOC9Zzi/s1600/she38a.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" height="240" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjQICG_bJ-xupoz7dPB6eQErihbbiZbCXdYAYiQ3RxYYXsaoVtL9jUTrELKNs_NzTwQWnhEz-R1PiZ2WI3P773_rzghdC8cMidKQmPSMZxLMzJvo9otDGkfMer9Ec-Q7bUFQsuiEbOC9Zzi/s320/she38a.jpg" width="320" /&gt;&lt;/a&gt;फिर मैंने कहा- मुझे तुम्हारे पैरों में ये उँची ऐड़ी के सैंडल भी बहुत अच्छे लगते हैं। जब तुम इनको पहन कर चल रही थी तो तुम्हारे भारी भरकम चूतड़ क्या मस्त मटक रहे थे और 5 इन्च हील की वजह से चूतड़ और भी उभर कर शरीर के बाहर की ओर निकल आये हैं जो कि इन बड़े बड़े चूतड़ों को और भी मस्त बना देते हैं जिसकी वजह से ये और भी बड़े लगते हैं और ऊँची हील की वजह से चाल और भी मस्तानी हो जाती है क्योंकि तुम्हारे मम्मे इतने बड़े हैं, इसलिये ये हर कदम के साथ उछलते हैं और यह दृश्य देख कर किसी मुर्दे का लंड भी खड़ा होने को मजबूर हो जाये।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;तुमसे चैट-रूम में मिलने से पहले मैं उँची ऐड़ी के सैंडल नहीं पहना करती थी। जब तुमने मुझे बताया था कि तुमको उँची ऐड़ी के सैंडल पसन्द हैं और अगर ऐड़ी करीब 5 या 6 इन्च हो तो क्या कहने। तब पहले तो कुछ दिन तक मैंने सोचा कि इनका सेक्स में क्या काम। लेकिन मैं एक बार एक शॉप पर गई और सैंडल देख कर सोचा क्यों न मैं पहन कर देखूँ और जब मैंने शीशे में अपने चूतड़ देखे तो मैंने सोचा कि तुम गलत नहीं हो, मेरे मस्त चूतड़ और भी बाहर निकल आये थे और आस पास के कई मर्द मेरे चूतड़ों को घूर घूर कर देख रहे थे। तब से मैंने कई जोड़ी सैंडल खरीदे हैं और मैं कई सारे जोड़ी ले कर आई हूँ।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;फिर मैं बोला- माँ, सबसे अच्छा अंग तो मुझे तुम्हारे चूतड़ लगते हैं। औरत के चूतड़ मेरा सबसे पंसन्दीदा अंग है और तुम्हारे चूतड़ों के तो क्या कहने ! इतने बड़े बड़े हैं और तुम्हारी कमर पतली होने की वजह से और भी बड़े लगते हैं। तुमने पेटीकोट भी इतना नीचे पहना है कि तुम्हारे चूतड़ों की दरार कहाँ से शुरू होती है वो भी दिखाई देती है। और क्या तारीफ करूँ इन चूतड़ों की, ये इतने सेक्सी हैं कि मेरे पास कोई शब्द ही नहीं है।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjYu7EOYKIS7CmFdaOJ3jcQRo49Lrk2keeIWIk0ECCYjkI7CICVlO-kePftOach9TJxIoIKXSJg9F4U1lUgB4w76e1zbg-xGKtOd2Q0Zt_x6ucUL-3yoHE4RUsTNexc0VebxXZhiOcSz43C/s1600/ADL.jpg" imageanchor="1" style="clear: right; float: right; margin-bottom: 1em; margin-left: 1em;"&gt;&lt;img border="0" height="320" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjYu7EOYKIS7CmFdaOJ3jcQRo49Lrk2keeIWIk0ECCYjkI7CICVlO-kePftOach9TJxIoIKXSJg9F4U1lUgB4w76e1zbg-xGKtOd2Q0Zt_x6ucUL-3yoHE4RUsTNexc0VebxXZhiOcSz43C/s320/ADL.jpg" width="277" /&gt;&lt;/a&gt;मेरी बात सुन कर रीमा ने कहा- तुम सही बोल रहे हो या मेरे को रीझाने के लिये ऐसा कह रहे हो ? मुझे नहीं पता पर तुम तारीफ करना खूब जानते हो।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;मैंने कहा- मैं कोई झूठी तारीफ नहीं कर रहा हूँ, माँ, तुम हो ही इतनी सुन्दर ! मैंने जितना भी तुम्हारे रूप के बारे में कहा है वह तो तुम्हारी सुन्दरता का सिर्फ़ दस प्रतिशत ही है।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;रीमा ने कहा- चल झूठा कहीं का। माँ के साथ खेल करता है?&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;और ऐसा कह कर रीमा ने एक हल्की सी चपत मेरे गाल पर लगा दी और बोली- चल बता और क्या क्या अच्छा लगा तुझे तेरी माँ में?&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;मैं बोला- मैंने सब कुछ तो बता दिया। और तो कुछ नहीं बचा। बोली- कैसे नहीं ! मेरी सबसे कीमती चीज तो अभी बची है।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;मैं बोला- पर वह तो तुम्हारे कपड़ों से ढकी है।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;तो फिर ऐसे देख क्या रहा है? उतार दे मेरे कपड़े ! मैंने तुझे मना थोड़े ही किया है। तूने ही नहीं उतारे मेरे कपड़े ! मैंने तो सोचा था कि जैसे ही आयेगा वैसे ही मेरे रूप को देख कर मेरे कपड़े फाड़ देगा।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;माँ की बात सुन कर मैंने कहा- नहीं माँ पहले मैं तुम्हारे होंठो का रस पियूँगा फ़िर तुम्हारे कपड़े उतारूँगा।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;रीमा बोली- अरे पहले कपड़े उतार के मुझे नंगा कर दे। फिर मेरे होठों का रस पी लेना। मैं भागी थोड़ी ही जा रही हूँ।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;मैने कहा- नहीं माँ, चाहे थोड़ी देर ही सही पर मैं पहले तुम्हारे होंठो कर रस पीयूँगा। इस पर रीमा ने कहा- ठीक है, पी ले मेरे होंठ। माँ हूँ, क्या करूँ बेटे की बात माननी ही पड़ेगी।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;मैं बोला- ओह माँ, तुम कितनी अच्छी हो।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;इस पर रीमा बोली- बस 5 मिनट ही।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;मैंने कहा- ठीक है।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;फिर मैंने अपने होंठ रीमा के होंठ से लगा दिये और एक चुम्बन ले लिया। फिर मैं अपने हाथ उसकी गर्दन के पीछे ले गया और उसके मुँह को अपनी तरफ खींचा और अपनी जीभ निकाल कर उसके होंठों पर जीभ फिराने लगा। थोड़ी देर इसी तरह से जीभ फिराने के बाद मैंने उसका निचला होंठ अपने होंठों के बीच पकड़ लिया और फिर उस पर जीभ फिराने लगा।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;उसके होंठों को चूसने से पहले मैं गीला कर देना चाहता था। थोड़ी देर तक इसी तरह उसके होंठो को गीला करने के बाद मैंने उसके होंठ चूसने शुरू कर दिये। मैं बहुत जोर जोर से उसके होंठों को चूस रहा था। रीमा भी अपनी जीभ निकाल कर मेरे उपरी होंठ के ऊपर फिरा रही थी और साथ ही साथ अपना बहुत सा थूक अपने निचले होंठ के पास जमा कर रही थी जिससे मैं ज्यादा से ज्यादा उसके स्वादिष्ट थूक को पी सकूँ। मैं भी हर थोड़ी देर में निचले होंठ को छोड़ कर उसका थूक अपनी जीभ की मदद से उसके होंठों पर मलने लगता और अच्छी तरह से मल कर फिर से उसके होंठ को चूसने लगता। करीब दो मिनट तक मैं ऐसा ही उसके साथ करता रहा। मैं इतनी जल्दी नहीं छोड़ना चाहता था पर क्या करता मेरे पास सिर्फ़ 5 मिनट थे और मैं भी रीमा को जल्दी से जल्दी नंगा कर देना चाहता था।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;फिर मैंने उसका निचला होंठ छोड़ कर उसका ऊपरी होंठ अपने दोनों होंठों के बीच पकड़ लिया और उसको भी अपने थूक से गीला कर दिया। रीमा ने भी मेरा निचला होंठ अपने थूक से गीला कर दिया था। थोड़ी देर तक मैं उसके होंठ को गीला करता रहा और और चूसता रहा फिर एकदम से मैंने अपनी जीभ को नुकीला करके उसके दाँतों और होंठों के बीच डाल दी और उसके दाँतों पर फिराने लगा। वो भी अपनी जीभ को नुकीली बना कर मेरे जीभ के नीचे गोल गोल घुमाने लगी। जिससे उसकी जीभ से लार निकल कर मेरे मुँह में गिरने लगी और मेरी जीभ के नीचे जमा होने लगी।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;थोड़ी देर इसी तरह से उसके दाँत और होंठ के बीच की और उसके जीभ से टपकती लार मेरे मुँह में जमा हो गई। फिर मैंने रीमा के होंठ मुँह में लेकर चूसने लगा तथा साथ ही साथ मुँह के अन्दर जमी स्वादिष्ट लार को भी मैं पी गया। ये लार मेरे लिये अमृत थी। फिर थोड़ी देर तक इसी तरह मैं उसका होंठ चूसता और लार पीता रहा। और जैसे ही करीब 5 मिनट हुये, मैंने आखरी बार उसके होंठों पर अपने होंठ रखे और एक गहरा चुम्बन लेकर उससे अलग हो गया।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;फिर मैंने पूछा- मजा आया माँ?&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;तो रीमा बोली- हाँ बेटा, बहुत मजा आया। तुम तो बहुत ही अच्छी किस करते हो बेटा। मैं तो सोच रही थी तुमको किस करने की भी ट्रेनिंग देनी पड़ेगी लेकिन ऐसा लगता तो नहीं है।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;मैंने कहा- माँ, ट्रेनिग की जरूरत तो मुझे है क्योंकि चाहे जितना भी अच्छा किस मैं करता हूँ पर तुमसे अच्छा तो नहीं हो सकता।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;रीमा बोली- वो तो तुम ठीक ही कह रहे हो मेरे राजा बेटा ! ठीक है, मैं तुम को पूरी तरह ट्रेन्ड कर दूँगी !&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;ठीक है?&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;मैंने कहा- हाँ माँ।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;फिर रीमा बोली- चल अब जल्दी से मेरे कपड़ो को उतार कर फेंक दे। मेरी मस्ती होंठ चुसाई के कारण बढ़ चुकी है और अब मुझे ये कपड़े अपने बदन पर बहुत ही बुरे लग रहे हैं।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;इस पर मैंने कहा- माँ, तुम मुझको उसी तरह नंगा नाच करके दिखाओ जैसा तुमने एक बार बताया था चाट पर।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;करुँगी बेटा, वो भी करुँगी लेकिन सबसे पहले मै तेरे हाथों से नंगी होना चाहती हूँ। जिससे तुझे धीरे धीरे मेरे नंगे होते शरीर को देखने का नजारा जिन्दगी भर याद रहे।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;बात तो तुम ठीक कह रही हो माँ। मैं जब तुम्हारे कपड़े धीरे धीरे उतारुँगा और तुम्हारे बदन का एक एक हिस्सा नग्न हो कर मेरी आँखों के सामने प्रकट होगा तो पहली बार उस नग्न हिस्से को देखने में जो मजा आयेगा उसकी छवि तो कभी भी मेरी आँखों से नहीं जा सकती।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;रीमा- तू बहुत ही समझदार है बेटा ! तेरे जैसा बेटा पा कर कोई भी माँ धन्य हो जाये।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;उसकी बात सुनकर मैं थोड़ा सा शरमा गया। इस पर रीमा ने कहा- हाय देखूँ तो ! ऐसे शरमा रहा है जैसे कोई लौंडिया हो। चल अब लग जा काम पर और कर दे अपनी माँ को नंगी। तेरी इस रंडी माँ को कितने ही ग्राहकों ने नंगा किया है, तू भी कर दे नंगा।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;देख ले अपनी रंडी माँ का नंगा बदन। तेरी इस रंडी माँ का कोई भी दल्ला नहीं है। तेरी माँ को खुद ही मेहनत करनी पड़ती है ग्राहक को ढूंढने में। आखिर रंडी हूँ ! एक दिन धंधा ना करूँ तो चूत की खुजली रात भर सोने नहीं देती। तू मेरा दल्ला बनेगा बेटा? मेरी दलाली करेगा? हाय रे क्या मस्त जोड़ी होगी हमारी ! रंडी माँ और दलाल बेटा। तेरी यह माँ तुझको दलाली के सारे गुण सिखा देगी और तुझको अपनी कमाई का आधा हिस्सा भी दूँगी और तेरे को और नई नई रंडियों की चूत भी दिलवाऊँगी, उनकी भी दलाली तू ही करना बेटा। बोल बेटा ! बोल, करेगा अपनी माँ की दलाली?&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;रीमा की इतनी गंदी गंदी बाते सुनकर मेरा लंड मचल उठा था।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;रीमा फिर बोली- बोल रंडी की औलाद भोसड़े के ! पैदाईशी हरामी ! साले तेरी माँ को दस कुत्तों ने चोदा तो तू पैदा हुआ ! बोलता क्यों नहीं ? करेगा अपनी इस रंडी माँ की दलाली?&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;यह सुनकर मेरी हालत बिल्कुल ही खराब हो गई, पूरा बदन मस्ती में गरम हो गया, मेरा लंड मस्त हो कर प्री-कम बहाने लगा और मैंने बोला- हाँ माँ ! मैं करूंगा तेरी दलाली।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;सुनकर रीमा बहुत ही खुश हुई, मुझको अपने गले से लगा लिया और बोली- तू सही में मेरा बेटा होता तो अब तक मैं तुझसे अपनी दलाली करवा रही होती ! पर तू चिन्ता मत कर अगर मुझे मौका मिला तो तुझसे अपनी दलाली जरूर करवाऊंगी।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;फिर वो मुझसे अलग हो गई और बोली- चल अब खड़ा खड़ा क्या देख रहा है? उतार मेरे कपड़े, साले रंडी की औलाद।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;मैंने सोचा कि अब माँ के भरपूर बदन को नंगा देखने का वक्त आ गया है। मैंने सोचा, रीमा के कपड़े उतारने से पहले आखरी बार उसको गर्म कर दूँ। और यही सोच कर मैंने रीमा से कहा- माँ, तुम वह पहली औरत होगी जिसको मैं नंगा देखूँगा। तुम्हारे भारी चूचियाँ पहली चूचियाँ होगी जिनको मैं मसलूँगा, तुम्हारी घुंडियाँ पहली घुंडियाँ होंगी जिनको मैं चूसूंगा और खींचूंगा। तुम्हारे चूतड़ वह पहले चूतड़ होंगे जिनको मैं प्यार करूंगा। तुम्हारी गाँड वह पहली गाँड होगी जिसको मारने से पहले मैं चाट चाट कर गीली कर दूंगा और तुम्हारी चूत पहली चूत होगी जिसको मैं चाट चाट कर झड़ाऊंगा और फिर उसमे अपना लम्बा लंड डाल कर चोदूंगा और तुम ही वह पहली औरत होगी जो मेरा कुवाँरापन लेगी।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;हाय रे मेरे लाल ! तूने तो मुझको इतना गरम कर दिया है कि अगर और कुछ पल ये कपड़े मेरे शरीर पर रहे तो इनमे आग लग जायेगी। बेटा, अपनी माँ को और मत तड़पा ! पहले ही वह तुझसे इतने सालों दूर रह कर तड़पी है। बेटा अब उतार दे मेरे कपड़े।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;मैंने सोचा- अब रीमा के कपड़े उतार ही देने चाहियें, ज्यादा तड़पाना ठीक नहीं है। कहीं माँ अपने कपड़े उतार कर खुद ही न फेंक दे जो मैं नहीं चाहता था। और अब मेरा लंड भी रीमा को नंगा देखने के लिये बेताब हुआ जा रहा था। पर साथ ही साथ मुझको यह भी डर था कि रीमा बहुत ही मस्तानी औरत है, कहीं उसके मस्ताने नंगे बदन को देख कर मेरा लंड बिना छुये ही झड़ जाये। और मुझे पता था कि इसके लिये मुझे बहुत मेहनत करनी पड़ेगी।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;फिर मैं आगे बढ़ा और रीमा के हाथ पकड़ लिये और उठा कर चूम लिये और बोला- ठीक है, लाओ माँ, उतार देता हूँ मैं तुम्हारे कपड़े।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;यह सुन रीमा ने अपना पल्लू जो कि उसने शुरू में अपने पेटीकोट में खोंस लिया था, निकाला और मुस्कुराते हुये मेरे हाथ में पकड़ाया और शरमाते हुये बोली- लो बेटा।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;वह कुछ इस तरह से शरमाई थी जैसे कि नई नवेली दुल्हन हो जो सेक्स के बारे बिल्कुल अंजान है।रीमा सही में एक खेली खाई औरत थी, उसे सब पता था कि कब और कैसे मर्द के साथ बर्ताव किया जाना चहिये। उसके इस शरमाने ने मेरे शरीर में मस्ती भरा जोश भर दिया।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;वैसे भी अब मेरा हाल भी बुरा हो चुका था। मुझको इस कमरे में आये हुये करीब एक घंटा हो चुका था और तभी से मेरा लंड खड़ा था। और मेरे आने के थोड़ी देर बाद ही रीमा ने मेरे कपड़े उतार दिये थे। मैंने उसका पल्लू पकड़ा और मन में यह निश्चय कर लिया था कि उसके बदन के साथ पूरा न्याय करूँगा और धीरे धीरे उसका एक एक अंग निर्वस्त्र करूगाँ।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;सबसे पहले मैंने उसका पल्लू पकड़ कर सूंघ लिया। जैसे कि मैं रीमा को बता चुका था कि मुझे कपड़ों की गंध सूंघना पसन्द है। मैं उसके हर कपड़े को उतारते हुये उसकी खुशबू सूंघना चाहता था।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;उसकी साड़ी में से बहुत मादक गंध आ रही थी। इस गंध में उसकी बदन की खुशबू और पसीने की गंध मिली हुई थी। और फिर मैंने उसका पल्लू चूम लिया। जब मैं उसका पल्लू चूम रहा था तो उसकी आँखों में आँख डाल कर देख रहा था। उसकी आँखो में वासना के लाल डोरे दिखाई दे रहे थे। फिर मैंने उसका पल्लू छोड़ दिया और उसके सामने अपने घुटनों के बल बैठ गया और आगे बढ़ कर उसकी नाभि का चुम्बन ले लिया। मेरे इस तरह से अचानक चुम्बन ले लेने से उसके मुँह से एक सिसकारी निकल गई। उसका पल्लू कालीन पर पड़ा था और उसके पेटीकोट से जुड़े हिस्से को मैंने अपने हाथ में पकड़ लिया।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;उसने साड़ी में करीब 8 प्लीट डाल रखी थी। मैंने उसका पल्लू पकड़ कर अपने बदन के ऊपर डाल लिया। उसकी साड़ी नायलॉन की थी, मेरे नंगे बदन पर उसका स्पर्श काफ़ी अच्छा लग रहा था। रीमा खड़ी हुई मेरी हरकतों को देख रही थी।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;फिर मैंने धीरे से उसकी साड़ी को खींचा जिससे उसकी एक प्लीट निकल कर बाहर आ गई। मैंने साड़ी के उस छोटे हिस्से को अपने चेहरे पर रखा और सबसे पहले एक गहरी साँस लेकर उसे सूंघा फिर उसके 3-4 चुम्बन ले लिये। रीमा मुझको अपने कपड़े उतारते हुये देख रही थी। उसके चेहरे में मेरे लिये वासना और मातृ प्रेम के मिले जुले भाव थे। अब मेरा लंड भी उसकी साड़ी से टकरा रहा था जिसकी वजह से प्री-कम से भीगा हुआ मेरा लंड उसकी साड़ी को गीला कर रहा था।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;इसक बाद तो बस वही सब हुआ जो होता है।&lt;/div&gt;&lt;div style="font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: red;"&gt;premsexsena9897515075@gmail.com&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;﻿&lt;/span&gt;</description><link>http://sexisalipunem0.blogspot.com/2011/01/3.html</link><author>noreply@blogger.com (sexisalipunem)</author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjQICG_bJ-xupoz7dPB6eQErihbbiZbCXdYAYiQ3RxYYXsaoVtL9jUTrELKNs_NzTwQWnhEz-R1PiZ2WI3P773_rzghdC8cMidKQmPSMZxLMzJvo9otDGkfMer9Ec-Q7bUFQsuiEbOC9Zzi/s72-c/she38a.jpg" width="72"/><thr:total>0</thr:total></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-6722033917999163069.post-6594646431270949855</guid><pubDate>Sat, 15 Jan 2011 07:18:00 +0000</pubDate><atom:updated>2011-01-15T12:48:53.715+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">वेब से बेड तक- 2</category><title>वेब से बेड तक- 2</title><description>&lt;span class="Apple-style-span" style="color: red;"&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="font-size: large;"&gt;प्रेम सक्सेना&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjiAkM2QTtCrzvH7hC1XkbCk-X6hbpAcCknRi6tpVDQXXU8hoLyD8SyiX70jFxti4wWZJ7trAQx3X0v6yk9QsMvI2pCUCeWauYX6hrXNEBDUhO43pGxOaH1pszFpF-R_-nfumoUoq9UaxNE/s1600/she38a.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" height="240" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjiAkM2QTtCrzvH7hC1XkbCk-X6hbpAcCknRi6tpVDQXXU8hoLyD8SyiX70jFxti4wWZJ7trAQx3X0v6yk9QsMvI2pCUCeWauYX6hrXNEBDUhO43pGxOaH1pszFpF-R_-nfumoUoq9UaxNE/s320/she38a.jpg" width="320" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;
&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiMzCJAb-sy9lX6nFFCJOM55-spuDKcsrCQlO1LgvFL35fGOVfCCmQzoAXrTR5_pHW9PGMwfzpT71O_Oj9G6zK_eR__PWUw8pLXuGbcR85im1MKvufepkRqgYufIzLQBPTB7XQ_PVmRdlgB/s1600/ADG.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" height="216" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiMzCJAb-sy9lX6nFFCJOM55-spuDKcsrCQlO1LgvFL35fGOVfCCmQzoAXrTR5_pHW9PGMwfzpT71O_Oj9G6zK_eR__PWUw8pLXuGbcR85im1MKvufepkRqgYufIzLQBPTB7XQ_PVmRdlgB/s320/ADG.jpg" width="320" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;
&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhNUw7ymTjcVi2pjRs1C0k0ilb4paakEpV6oBqexi2E4yio9iw437ilA3lnA2CR7lNlMKjCvpm3iaIFgw84h3b0S80INVu2KZqHilQ-TuWQVq0YUKPgCsNTP1yzBxy0TPywb4wwyiMWtVWz/s1600/she38a.jpg" imageanchor="1" style="clear: right; float: right; margin-bottom: 1em; margin-left: 1em;"&gt;&lt;img border="0" height="240" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhNUw7ymTjcVi2pjRs1C0k0ilb4paakEpV6oBqexi2E4yio9iw437ilA3lnA2CR7lNlMKjCvpm3iaIFgw84h3b0S80INVu2KZqHilQ-TuWQVq0YUKPgCsNTP1yzBxy0TPywb4wwyiMWtVWz/s320/she38a.jpg" width="320" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiMzCJAb-sy9lX6nFFCJOM55-spuDKcsrCQlO1LgvFL35fGOVfCCmQzoAXrTR5_pHW9PGMwfzpT71O_Oj9G6zK_eR__PWUw8pLXuGbcR85im1MKvufepkRqgYufIzLQBPTB7XQ_PVmRdlgB/s1600/ADG.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" height="216" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiMzCJAb-sy9lX6nFFCJOM55-spuDKcsrCQlO1LgvFL35fGOVfCCmQzoAXrTR5_pHW9PGMwfzpT71O_Oj9G6zK_eR__PWUw8pLXuGbcR85im1MKvufepkRqgYufIzLQBPTB7XQ_PVmRdlgB/s320/ADG.jpg" width="320" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhYBLwTD5DFfPxrqC_0zmNYbSIcHAEYjssqoTPcjhR3OM0KbXDymEcQ1nEnBVmtAeZKq7i6EnbcNGJ5TQMMBlRoFBHvPjjHCU9NoqCnEvyL0n0I4mwjhVD0VewRXjBNVepjjw9lC2sN2mqK/s1600/ADL.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhYBLwTD5DFfPxrqC_0zmNYbSIcHAEYjssqoTPcjhR3OM0KbXDymEcQ1nEnBVmtAeZKq7i6EnbcNGJ5TQMMBlRoFBHvPjjHCU9NoqCnEvyL0n0I4mwjhVD0VewRXjBNVepjjw9lC2sN2mqK/s1600/ADL.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhNUw7ymTjcVi2pjRs1C0k0ilb4paakEpV6oBqexi2E4yio9iw437ilA3lnA2CR7lNlMKjCvpm3iaIFgw84h3b0S80INVu2KZqHilQ-TuWQVq0YUKPgCsNTP1yzBxy0TPywb4wwyiMWtVWz/s1600/she38a.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" height="240" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhNUw7ymTjcVi2pjRs1C0k0ilb4paakEpV6oBqexi2E4yio9iw437ilA3lnA2CR7lNlMKjCvpm3iaIFgw84h3b0S80INVu2KZqHilQ-TuWQVq0YUKPgCsNTP1yzBxy0TPywb4wwyiMWtVWz/s320/she38a.jpg" width="320" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: red;"&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="font-size: large;"&gt;वेब से बेड तक- 2&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वह मेरे दूसरे चुचूक को अपने हाथ के नाखून से जोर जोर से कुरेद रही थी। एक तो चुचूक चूसे जाने की मस्ती दूसरा चुचूक कुरेदे जाने की वजह से होता दर्द ! इससे मैं तो स्वर्ग में पहुँच गया था। इस बेइंताह मस्ती के कारण मेरे मुँह से आह ओह की आवाज निकल रही थी। मैंने अपने हाथ उसकी पीठ और एक बाँह पर रख रखा था। एक हाथ से उसकी बाँह मसल रहा था और दूसरा हाथ उसकी पीठ और कमर पर फेर रहा था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वो करीब 3-4 मिनट तक ऐसे ही करती रही। फिर रीमा बायाँ चुचूक छोड़ कर दायाँ चुचूक चूसने लगी और बाएँ चुचूक को नाखून से कुरेदने लगी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दूसरे चुचूक को अच्छी तरह से चूसने के बाद ही उसने मेरे को छोड़ा। फिर मेरी ओर देख कर आँखो में आँखे डाल कर पूछा- कैसा लगा बेटा माँ का तुम्हारा चुचूक चूसना?&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैं बोला- क्या बताँऊ माँ ! बस इतना कह सकता हूँ कि तुम्हारे इस बेटे को तुमसे बहुत कुछ सीखना है। सीखाओगी ना माँ अपने इस अनाड़ी बेटे को?&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रीमा बोली- जरूर बेटा, आखिर माँ होती किस लिये है। माँ का तो यह कर्तव्य है कि उसके बेटे की शादी से पहले उसे सेक्स की पूरी शिक्षा दे, प्रेक्टिकल के साथ जिससे कि उसकी पत्नी सुहागरात को यह ना कह सके कि उसकी माँ ने उसको कुछ भी नहीं सिखाया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उसके मुँह से यह बात सुन कर मैं बोला- माँ, तुम्हारे विचार कितने उत्तम हैं। अगर तुम जैसी सबकी माँ हो तो किसी भी बेटे को रंडी के पास जाने की जरूरत ही नहीं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सुन कर उसने मेरे होंठों को चूम लिया और बोली- तुम बिल्कुल मेरे बेटे कहलाने के लायक हो। चलो मैं अब तुम्हारा लंड पैन्ट से बाहर निकाल देती हूँ। यह भी मुझको गाली दे रहा होगा कि बात तो लंड को बाहर निकालने की कर रही थी और चुचूक को मजा देने लगी। कह रहा होगा कितनी निर्दयी है तुम्हारी माँ।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नहीं माँ, मेरा लंड तो बहुत खुश है कि मेरी माँ तुम हो। वह तो कह रहा है कि जिस तरह से तुम मेरी माँ हो, तुम्हारी चूत उसकी माँ हुई और जब तुम इतनी मस्त हो तो उसकी माँ और भी मस्त होगी । वो भी अपनी माँ से मिलने और उसकी बाँहों में जाने के लिये बेचैन है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रीमा बोली- उसके लिये तो उसको थोडा इंतजार करना पड़ेगा। पहले मैं अपने बेटे को और उसके लंड को तो जी भर के प्यार कर लूँ और अपने बेटे से अपने आप को और लंड की माँ को प्यार करा लूँ, तब कहीं जाकर वो अपनी माँ से मिल सकता है ! समझे?&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैंने कहा- हाँ माँ, तुम ठीक कह रही हो।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इतना कह कर रीमा ने मेरी पैन्ट खोलनी शुरु कर दी। जब रीम मेरी पैन्ट खोल रही थी तो उसकी नजर मेरी तरफ थी। वह मेरी तरफ देख कर मन्द मन्द मुस्कुरा रही थी। सबसे पहले उसने मेरी बेल्ट को निकाल कर फेंक दिया, फ़िर मेरी पैन्ट का बटन खोलने लगी। बटन ओर चैन खोल कर उसने कमर से पकड़ कर एक ही झटके में मेरी पैन्ट नीचे कर दी और साथ में खुद भी नीचे बैठ गई। मैंने भी अपने पैर उठा कर पैन्ट निकालने में उसकी मदद की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उसने पैन्ट निकाल कर उसको भी एक कोने में फेंक दिया। मैंने अन्डरवीयर पहन रखा था। रीमा का मुँह बिल्कुल मेरे लंड के सामने था। मेरा लंड पूरी तरह से खड़ा था जो कि मेरे अन्डरवीयर के उभार से पता चल रहा था। उसने मेरी तरफ़ देखा और अपनी जीभ बाहर निकाल कर अपने होठों पर फिराने लगी जैसे कोई बहुत ही स्वादिष्ठ चीज देख ली हो।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
और फिर एक दम से आगे बढ़ कर मेरे लंड को अन्डरवीयर के ऊपर से चूमने लगी। अन्डरवीयर की इलास्टिक से लेकर नीचे जाँघो के जोड़ तक।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फिर रीमा ने मेरे अन्डरवीयर की को कमर से पकड़ कर एक ही झटके में खींच कर उतार दिया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेरा लंड उत्तेजना के कारण मस्त होकर बुरी तरह से खड़ा हो गया था। जैसे ही रीमा ने मेरा अन्डरवीयर उतारा, मेरा लंड उसके मुँह के सामने एक लम्बे साँप की तरह फुँफ़कार मारते हुए नाचने लगा। मेरा लंड देख कर रीमा बोली- हाय रे ! इतना बडा लंड है मेरे बेटे का ?&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फिर उसने मेरे लंड को अपने हाथ में पकड़ लिया। जैसे ही उसने मेरे लंड को अपने कोमल हाथो में पकड़ा, मुझे ऐसा लगा 440 वोल्ट का करंट लगा हो। मेरे लंड का यह हाल तब था जबकि उसने अभी तक एक भी कपड़ा अपने बदन से नहीं उतारा था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैं सोचने लगा कि जब मैं उसको नंगा देखूंगा तो मेरा क्या हाल होगा।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रीमा मेरे लंड को अपनी एक हथेली में रख कर दूसरे हाथ से उसको सहला रही थी जैसे किसी बच्चे को प्यार से पुचकारते हैं। थोड़ी देर तक इसी तरह मेरे लंड को पुचकारने के बाद रीमा उठ कर खड़ी हो गई और बोली- लो निकाल दिया मैंने तुम्हारे लंड को बाहर। अब हम चल कर बैठते हैं और थोड़ी प्यार भरी बातें करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फिर मैं सोफे पर बैठ गया और रीमा से बोला- आओ माँ, मेरी गोदी में बैठ जाओ।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हम लोग जब चैट किया करते थे तब भी सबसे पहले मैं रीमा को अपनी गोदी में बिठा लेता था। रीमा थोड़ी सी मुस्कुराई और आकर मेरी गोदी में बैठ गई।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रीमा इस तरह से मेरी गोदी में बैठी थी कि मेरा लंड उसकी गाँड की दरार में फंसा था, जैसा कि मुझको मेरे लंड पर महसूस हो रहा था। उसने अपनी पीठ मेरे कंधे से लगा ली थी और अपनी गोरी दाईं बाँह मेरे गले के पीछे से निकाल कर दूसरे हाथ से पकड़ ली और मैंने पीछे से अपने हाथ उसके कमर में डाल कर उसके नंगे पेट को पकड़ लिया। उसके इस तरह से बैठने के कारण उसकी भारी भरकम चूचियाँ मेरे मुँह के सामने आ गई। साथ ही साथ उसके मस्ताने चूतड़ों का दवाब मेरे लंड पर पड़ रहा था। मैं अपने आपको बडा ही खुशकिस्मत समझ रहा था कि इतनी मस्तानी औरत मेरी गोद में बैठी थी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेरी नजर उसकी बड़ी-बड़ी गोलाइयों की तरफ़ थी। चूचियों के बीच की दरार ऐसी थी जैसे कि निमंत्रण दे रही हो कि आओ और घुसा दो अपना मुँह इस खाई के अन्दर।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फिर रीमा ने पूछा- अब बताओ बेटा, कैसी लगी तुमको अपनी यह बेशर्म माँ?&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैंने कहा- बहुत ही मस्तानी, सेक्सी, महा-चुदक्कड़ चुदासी और रस से भरपूर !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस पर रीमा मुस्कुरा दी और बोली- ऐसे शब्द कोई भी औरत किसी मर्द से अपने बारे में सुने तो बस निहाल हो जाये और तुमने तो ये सब मेरे लिये कहा, अपनी माँ के लिये, सुनकर मेरा दिल गदगद हो गया। इसका मतलब है की मैं तुमको रिझाने में सफ़ल रही।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तुमने मुझको बताया था कि तुम्हारी उम्र 48 साल है पर देखने से तुम उससे दस साल छोटी दिखती हो।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यह तो तुम्हारी मुझे देखने की नजर है बेटा ! नहीं तो उम्र तो मेरी 48 ही है। लेकिन तुम्हारे मुँह से अपनी तारीफ सुन कर मुझे बड़ा अच्छा लगा।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फिर मैं बोला- माँ, तुमसे एक बात पूछना चाहता हूँ।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रीमा बोली- पूछो !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैं जब से आया हूँ, मैंने गौर किया है कि तुम्हारा ब्लाउज़ काफी तंग है, जिसकी वजह से तुम्हारी चूचियाँ ब्लाउज को फाड़ कर बाहर आने को तैयार हैं। लगता है कि एक हफ़्ते मुम्बई में रह कर चूचियाँ मसलवाने से बड़ी हो गई हैं जिसकी वजह से तुम्हारा ब्लाउज़ छोटा हो गया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेरी बात सुनकर रीमा खिलखिला कर हँस पड़ी और बोली- नहीं बेटा ! ब्लाउज़ तो मेरा एक दम नया है। मुम्बई आने से पहले सिलवाया है। मैंने जानबूझ कर एक इन्च छोटा बनवाया था जिससे मैं इसे तुमको रिझाने के लिये इस्तमाल कर सकूँ। जिससे मेरी चूचियाँ और भी बड़ी-बड़ी लगें। मुझे पता है कि तुमको ब्लाउज़ में से झाँकती चूचियाँ कितनी पंसन्द हैं। इसीलिये गले का कट भी थोड़ा ज्यादा रखा है। इस ब्लाउज़ को पहन कर मैं बाहर तो जा ही नहीं सकती, नहीं तो लोग मेरा सड़क पर ही बलात्कार कर देगें। यह तो खास ब्लाउज़ है जो मैंने अपने बेटे के मस्ती बढ़ाने के लिये बनवाया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ओह माँ ! तुम अपने बेटे का कितना ख्याल रखती हो !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रीमा ने कहा- अगर माँ अपने बेटे का ख्याल नही रखेगी तो कौन रखेगा।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फिर मैंने कहा- कि तुम ठीक कह रही हो माँ। मैंने तुम्हारे काँख के बाल भी देखे, ऐसा लग रहा है कि जैसा तुम एक महीने पहले छोटे कराने को कह रही थी पर तुमने छोटे किये नहीं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रीमा बोली- बेटा, मैं छोटे करना तो चाहती थी पर 2-3 दिन मेरे बॉस के कुछ कलाइन्ट आ रहे थे, तो मुझे उनको खुश करना था। इसलिये काट नहीं पाई, फिर मेरे बॉस ने बोला कि मुम्बई जाने का प्रोगाम बन सकता है, तो मैंने सोचा कि फिर तुमसे भी मिलना हो सकता है तो क्यों ना और बढ़ा लूँ। वैसे भी तुमको मेरे काँख के बाल बहुत पसन्द हैं और इतने बड़े बाल देख कर तो तुम बहुत खुश होगे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हाँ माँ ! मैं बहुत ही खुश हूँ कि तुमने बाल नहीं काटे। माँ तुम्हारे होंठ भी बडे सुन्दर हैं, तुमने कभी बताया नहीं कि तुम्हारे होंठ बड़े-बड़े और इतने उभारदार हैं। मुझको इस तरह के होंठ बहुत पसन्द हैं। रीमा बोली- मैं सोचती थी कि सब मर्दों को पतले होंठ पसन्द होते हैं। अगर मैं तुम को बता दूंगी तो शायद तुम मुझसे बात करना पंसन्द करो या नहीं। तुम जैसे बेटे कहाँ मिलते हैं। मैं तुमको खोना नहीं चाहती थी इसलिये नहीं बताया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैंने पूछा- यह भी तो हो सकता था कि मैं यहाँ आकर तुम्हारे होंठ पसन्द नहीं करता और चला जाता।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रीमा ने कहा- मुझे उसका थोड़ा सा डर था इसलिये ही मैंने तुमको लुभाने के लिये कसा हुआ ब्लाउज़ बनवाया था। तुमको बुरा लगा क्या बेटा ? आई एम सॉरी बेटा।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ऐसा कह कर उसने अपनी आँखे नीची कर ली और उसका चेहरा उदास हो गया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैंने कहा- माँ, इसमें इतना उदास होने की बात क्या है। तुमको तो खुश होना चाहिये कि मुझे तुम्हारे होंठ पसन्द आये।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उसने मेरी तरफ़ देखा और मुस्कुरा दी और मुझको गले से लगा लिया और बोली- बेटा, तुम्हारी माँ अपनी असली जिन्दगी में चाहे जितनी भी बड़ी रंडी हो, पर तुमको बहुत प्यार करती है। मेरे अपना तो कोई बेटा है नहीं, लेकिन मैंने तुमको ही अपना बेटा माना है। अपनी माँ से कभी भी नफ़रत मत करना बेटा।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नहीं माँ ! कभी नहीं !&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कह कर मैंने भी रीमा को अपनी बाँहो में जकड़ लिया और उसकी पीठ पर हाथ फेरने लगा।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अब तक मैं यही सोच रहा था कि हम दोनों के बीच सिर्फ वासना का रिश्ता पनप रहा है। लेकिन मुझे आज पता चला कि चाहे हम दोनों एक दूसरे के पास वासना कि वजह से आये हों पर रीमा सच में मुझे एक बेटे की तरह प्यार करने लगी थी और असली जिन्दगी में वह बहुत ही अकेली थी। अकेली होने की वजह से ही शायद इस समाज से लड़ने के लिये वो अपने बॉस की रंडी बनी हुई थी। मैंने भी सोच लिया था कि इन चार दिन में उसको इतना प्यार दूंगा कि वो इन दिनों को कभी भी नहीं भूल पाये email-premsexsena9897515075@gmail.com&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;</description><link>http://sexisalipunem0.blogspot.com/2011/01/2.html</link><author>noreply@blogger.com (sexisalipunem)</author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjiAkM2QTtCrzvH7hC1XkbCk-X6hbpAcCknRi6tpVDQXXU8hoLyD8SyiX70jFxti4wWZJ7trAQx3X0v6yk9QsMvI2pCUCeWauYX6hrXNEBDUhO43pGxOaH1pszFpF-R_-nfumoUoq9UaxNE/s72-c/she38a.jpg" width="72"/><thr:total>0</thr:total></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-6722033917999163069.post-6637902504985012635</guid><pubDate>Sat, 15 Jan 2011 06:59:00 +0000</pubDate><atom:updated>2011-01-15T12:29:58.636+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">वेब से बेड तक-1</category><title>वेब से बेड तक-1</title><description>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgw1-vMDLouFs-xXe7yKpLuywkEx-z_JqmYV9p_6WBPfoY53p-tLO5LoZlkyCATH58FyDyRrORt1CMFrLiQytPM0a8ewsfGFl4Gi9x1tXKOwOacvh7e0W1oPd-rZiMcwRR6pugwk42ckYHH/s1600/ADL.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" height="320" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgw1-vMDLouFs-xXe7yKpLuywkEx-z_JqmYV9p_6WBPfoY53p-tLO5LoZlkyCATH58FyDyRrORt1CMFrLiQytPM0a8ewsfGFl4Gi9x1tXKOwOacvh7e0W1oPd-rZiMcwRR6pugwk42ckYHH/s320/ADL.jpg" width="277" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;h1 style="color: #663300; font-family: 'Trebuchet MS', Georgia, serif; font-size: 32px; margin-bottom: 10px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 5px;"&gt;वेब से बेड तक-1&lt;/h1&gt;&lt;br /&gt;
&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;प्रेषक : &lt;span class="Apple-style-span" style="color: red;"&gt;प्रेम सक्सेना&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjnV2VgEHsnkJXb92OuttmsdzL70J2BzCRIvKUMTlbNZWwIEN8fPJYUTT4g0kHH1NnpLYHDI1IYi27Nq-KcWAl0QvOjodscaHcZ_9H_1MThxf5w1TvQoiFpjwjC2wlUuCirw_g330efm_A2/s1600/Copy+of+Lady.gif" imageanchor="1" style="clear: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjnV2VgEHsnkJXb92OuttmsdzL70J2BzCRIvKUMTlbNZWwIEN8fPJYUTT4g0kHH1NnpLYHDI1IYi27Nq-KcWAl0QvOjodscaHcZ_9H_1MThxf5w1TvQoiFpjwjC2wlUuCirw_g330efm_A2/s1600/Copy+of+Lady.gif" /&gt;&lt;/a&gt;मेरी यह कहानी काल्पनिक है। इस कहानी का आधार एक औरत पर है जिससे मैंने एक चैट-साइट पर कई बार बात की। उसके साथ कई बार चैट-रुम में चुदाई भी की। मैं उसको माँ बुलाता हूँ और वह मुझको बेटा।। हम दोनों अलग अलग शहर में रहते है और कभी भी मिले नहीं हैं। मेरा नाम दीपक है और मैं 26 साल का हूँ । मेरे लन्ड का आकार 8 इंच है।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;उसका नाम रीमा है। उसने जो मुझको बताया उसके अनुसार वह एक तलाकशुदा औरत है। उसकी उमर 48 साल की है और उसकी फ़िगर 38 डी 30 42 है और वह दिल्ली में रहती है। रीमा को कम उमर के लड़कों से चुदाने में बड़ा मजा आता है। उसकी एक नौकरानी भी है जो 20 साल की है। वह सेक्स में उसका साथ देती है। उसको जवान लौन्डों की कोई कमी नहीं है।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;वह जिस ऑफ़िस में काम करती है उसके बॉस के साथ उसके संबन्ध हैं। उसका बॉस शादीशुदा है और कोई 26 साल की उमर का है। वह अपने बॉस के साथ बहुत टूर पर जाती रहती और टूर पर वह अपने बॉस और कलाईन्ट के साथ चुदाई के मजे लेती है।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;चैट-साईट पर हम लोगों में चुदाई की बातें होने लगी। मैंने उसको बताया कि मुझे बड़ी उमर की औरतें बहुत पसन्द हैं। उसने मेरे से पूछा कि मैं किस बड़ी उमर की औरत के बारे में सोच कर हस्तमैथुन करता हूँ ।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;मैने कहा- अपनी माँ के बारे में !&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;उसने पूछा कि मेरी माँ का नाम क्या है और वह कैसी दिखती है तो मैंने बताया कि मेरी माँ का नाम निर्मला है और उसका रंग गोरा है, उसके नयन-नक्श बहुत ही तीखे हैं, उसकी फिगर 36 सी 30 40 है।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;फिर हमने इस बारे में बहुत सारी बातें की जो आपको आगे पता चलेंगी। वो मुझसे चैट करके बहुत मजा लेती थी। मुझे भी उसके साथ बड़ा मजा आता था।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;एक दिन उसने मुझसे कहा कि वह सचमुच में मुझसे चुदाना चाहती है। पर मैं मुम्बई में रहता हूँ और उसका बॉस का मुम्बई में कोई टूर नहीं होता, जिसकी वजह से हम लोग कभी भी मिल नहीं पाये थे। पर हम दोनों ने अपने फोन नम्बर और घर का पता एक दूसरे को बता दिया था और एक दूसरे को कार्ड भी भेजते थे और हम चैट-रुम में ही चुदाई का मजा लेते थे।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;फिर एक दिन जब हम चैट कर रहे थे तो वह बोली कि उसका बॉस मुम्बई में एक नई शाखा खोलने की सोच रहा है और इसके लिये वे टूर पर मुम्बई आ रहे हैं। और उसने अपने बॉस से बात की कि वह टूर समाप्त होने के बाद चार दिन के लिये मुम्बई में अकेले रुकना चाहती है होटल में, कम्पनी के खर्चे पर। उसका बॉस इस बात के लिये राजी हो गया है।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;मैं तो यह खबर सुन कर बहुत खुश हुआ क्योंकि अब हम वह सब कर सकते थे जो कि हमने करने की चैट-रूम में बात की थी। उसने कहा कि वह ताज होटल में रुकने वाली है और उसका कमरा नम्बर वह बाद में मुझको फोन पर बतायेगी। उसने कहा कि वह 4 फरवरी को मुम्बई आ रही है और 8 फरवरी को मुझको फोन करेगी।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;पर 4 तारीख को उसका फोन आया कि वह मुम्बई पहुँच गई है और बाद में मुझ को फोन करेगी।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;मैंने उसको कहा- मैं तुम्हारे फोन का इंतजार करूँगा।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;पर 8 तारीख को उसका फोन नहीं आया। मैंने सोचा कि शायद काम पूरा नहीं हुआ होगा। लेकिन फिर 9 और 10 तारीख को भी उसका फोन नहीं आया अब तो मैं बहुत ही उतावला हो रहा था । सोचने लगा कि कहीं वह मजाक तो नहीं कर रही थी। पर मैं कर भी क्या सकता था उसके फोन के इंतजार के अलावा।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;फिर अगले दिन बुधवार था दोपहर को करीब एक बजे रीमा का फोन आया उसकी अवाज सुनते ही मेरा लंड खड़ा हो गया। मैंने पूछा- तुमने फोन क्यों नहीं किया ? मैं तो सोच रहा था कि तुम फोन ही नहीं करोगी।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;रीमा ने कहा कि ब्रान्च खोलने के बात पक्की हो गई है इसलिये वह, उसका बॉस और यहाँ का मैनेजर मिल कर दो दिन से मौज कर रहे थे। दोनों ने मिल कर उसको दो दिन तक बहुत जम कर चोदा था। इसलिये दो दिन वह फोन नहीं कर पाई आज सुबह ही उसका बॉस वापस दिल्ली गया है और वह सुबह से आराम कर रही थी जिससे कि मेरे साथ पूरी तरह से मजा ले सके। लेकिन उसको पहले से ही पता था कि वह मुझको 11 तारीख से पहले फोन नहीं कर पायेगी।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;मैने पूछा- फिर तुमने बताया क्यों नहीं?&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;रीमा बोली- मैं तुमको कुछ देर तड़पाना चाहती थी। मुझको जवान लड़कों को तड़पाने में बड़ा मजा आता है।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjQcwmHxYkpIihLQSXZI8ZAgotHsJANC63yzKmGKxZs4U0dA89-52bftChYU4uLUXmlhYnwnYjK2WJDv45yQrwXszEYGGAcqWHDxTCPRDLPm4Xz0lBnwGuLRsxhsdyDlOU6KmKuqjWedGwE/s1600/ADQ.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjQcwmHxYkpIihLQSXZI8ZAgotHsJANC63yzKmGKxZs4U0dA89-52bftChYU4uLUXmlhYnwnYjK2WJDv45yQrwXszEYGGAcqWHDxTCPRDLPm4Xz0lBnwGuLRsxhsdyDlOU6KmKuqjWedGwE/s1600/ADQ.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;मैंने पूछा- अब तो बताओ कि तुम्हारा रूम नम्बर क्या है।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;रीमा बोली- मुझ से मिलने के लिये तड़प रहे हो?&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;मैंने कहा- हाँ !&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;ठीक है, बता देती हूँ तुमको ! तुम भी क्या याद करोगे। मेरा रूम नंम्बर 514 है।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;मैंने कहा- ठीक है, मैं अभी वहाँ पहुँच रहा हूँ।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;रीमा ने कहा कि वह भी बड़ी बेसबरी से मेरा इंतजार कर रही है और जैसे हो, वैसे ही चले आओ क्योंकि वैसे भी इन चार दिनों में मैं तुमको कोई कपड़े तो पहनने दूंगी नहीं। बस अब चले आओ दौड़ कर अपनी माँ के पास।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;मैंने कहा- ठीक है माँ, आता हूँ अभी।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;रीमा बोली- मैंने अपने कमरे के बाहर "डू नॉट डिस्टर्ब" का साईन लगा दिया है जिससे कि जब घंटी बजेगी तो मैं समझ जाऊँगी कि तुम हो।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;मैंने कहा- ठीक है।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;फिर मैंने फोन रख दिया और अपने बॉस के पास गया। मैंने छुट्टी के लिये पहले से ही बोल रखा था इसलिये कोई परेशानी नहीं हुई। नहीं तो जिस तरह की मेरी बॉस थी छुट्टी मिलना बिल्कुल ही नामुमकिन था।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;फिर जल्दी से मैं टैक्सी पकड़ कर होटल पहुँच गया। मेरा दिल धक धक कर रहा था। मैं आज तक कुवाँरा था आज मेरे इस कुंवारे लंड को चुदाई-चुसाई का मजा मिलने वाला था। फिर मैं लिफ़्ट से पाँचवे माले पर गया जहाँ पर रीमा का कमरा था। जैसे ही मैं गलियारे से निकल कर रीमा के कमरे की तरफ़ जा रहा था तो दीवार पर लगे साईन को देख कर मैं समझ गया कि उसका कमर होटल के आलीशान रूम में से एक था।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;थोड़ी देर में मैं कमरे तक पहुँच गया, मैंने धड़कते हुये दिल से घण्टी बजाई।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;अन्दर से रीमा की आवाज आई- आ रही हूँ दीपक बेटा।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;कुछ पल बाद कमरे का दरवाजा खुला। और मेरे सामने रीमा खड़ी थी।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;मैं अभी उसे ठीक से देख भी नहीं पाया था कि उसने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे अन्दर खींच लिया। और एक झटके के साथ दरवाजा बन्द कर दिया। मैं उसकी इस हरकत से एक दम सकपका गया।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;रीमा ने कहा- अगर मैं तुमको इस तरह से अन्दर नहीं खींचती तो तुम बाहर खड़े खड़े ही मुझ देखते रहते जो कि मैं नहीं चाहती थी। तुमको मुझको देखना हे तो लो मैं तुम्हारे सामने खड़ी हो जाती हूँ, जी भर के देख लो।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;ऐसा कह कर वह मेरे सामने अपने दोनों हाथ कमर पर रख कर खड़ी हो गई। खड़ी होने से पहले उसने अपनी साड़ी का पल्लू उतार कर अपनी कमर से नीचे गिरा दिया। यह सब इतनी ज्लदी में हुआ था कि मुझे उसको देखने का मौका भी नहीं मिला था। अब वह मेरे सामने थी और मैं जी भर कर उसको देख सकता था।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;फिर मैंने अपनी नजर उस पर गड़ा दी। उसका रंग गोरा था। उसने अपनी उमर मुझको 48 साल बताई थी पर वो अपनी उमर से करीब दस साल छोटी दिखती थी। उसकी आँखे बड़ी-बड़ी थी जिनमें वासना भरी हुई थी। उसके होंठ बड़े-बड़े थे। जैसे कि अभिनेत्री सुमन रंगनाथन के हैं। मुझे इस तरह के होंठ बहुत ही पसन्द हैं। उस पर उसने गहरे लाल रंग की लिपस्टिक लगा रखी थी। जो उसकी सुन्दरता को और बढ़ा रही थी।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;उसके चेहरे पर एक आमत्रंण का भाव था, जैसे कह रही हो- आओ और चूम लो मेरे होठों को।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;फिर मेरी नजर उसके बदन पर गई, बड़ा ही भरपूर बदन था उसका। उसका गदराया बदन देख कर मेरा लंड पैन्ट के अन्दर ही उछलने लगा था।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;उसने हल्के गुलाबी रंग की साड़ी पहन रखी थी। उसका ब्लाऊज़ स्लीवलेस था। और उसमें काफ़ी गहरा कट था जिसकी वजह से उसके बड़े बड़े मम्मे आधे से ज्यादा ब्लाउज़ से बाहर झाँक रहे थे। रीमा ने शायद बहुत ही टाईट ब्लाउज़ पहन रखा था क्योंकि उसके मम्मों की दोनों बड़ी बड़ी गोलाईयाँ आपस में चिपक गई थी। और एक गहरा कट बना रही थी। जो कि बड़ा ही सेक्सी लग रहा था।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;इस नजारे को देख कर मैं उत्तेजना से पागल हो रहा था। मेरे लंड का उभार मेरी पैन्ट से साफ़ दिखाई दे रहा था।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;फिर मेरी नजर उसके पेट पर गई। उसने साड़ी अपनी नाभि के काफ़ी नीचे पहनी थी। जिससे उसकी गहरी नाभि साफ़ दिखाई दे रही थी। उसकी नाभि की गहराई देख कर मेरा मन उसको चूम लेने का हुआ। फिर मैं थोड़ी देर तक उसको ऐसे ही निहारता रहा।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;कुछ देर बाद रीमा ने कहा- क्या हुआ बेटे? कैसी लगी तुमको अपनी माँ?&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;मैंने कहा- बहुत ही अच्छी।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;रीमा ने कहा- वो तो तुम्हारे पैन्ट में उभरते तुम्हारे लंड को देख कर पता चल रहा है।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;मैं उसको देख कर इतना गर्म हो गया था कि मेरा गला सूखने लगा और मुझ को प्यास लगने लगी।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;रीमा मेरे को देख कर शायद समझ गई कि मेरे को प्यास लगी है, बोली- पानी चाहिये बेटा?&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;मैंने कहा- हाँ।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;" ठीक है अभी लाती हूँ " कह कर उसने अपनी साड़ी का आँचल उठा कर पेटीकोट में ठूंस लिया और पलट कर पानी लेने चल दी।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;जैसे ही वह पलटी, सबसे पहले मेरी नजर उसके भारी भरकम चूतड़ों पर गई। औरत के चूतड़ मेरा सबसे पसन्दीदा अंग है। और रीमा के चूतड़ तो बहुत ही बड़े थे। उसने ऊँची ऐड़ी की सैंडल पहन रखी थी, जिसकी वजह से जब वह चल रही थी तो उसके चूतड़ बहुत ही मस्ताने ठंग से मटक रहे थे जैसे किसी फैशन शो में मॉडल अपने चूतड़ों को मटका के चलती है वैसे ही।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;एक तो उसको आगे से देख कर ही मेरा बुरा हाल था, अब तो मैंने उसको पीछे से भी देख लिया था, मेरा लंड तो बिल्कुल ही आपे से बाहर हो गया। वो भी शायद जानती थी कि उसके चूतड़ों का मुझ पर क्या असर होगा क्योंकि मैं उसको बता चुका था कि भारी चूतड़ मुझ को कितने पसन्द हैं। इसलिये मेज तक जाने में, जहाँ पर पानी का जग रखा था, उसने बहुत देर लगाई जिससे मैं जी भर कर उसके चूतड़ और उनका मटकना देख सकूं।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;फिर उसने जग उठाया और मेरी तरफ़ देखते हुये उसने गिलास में पानी भरना शुरू किया। वह मुझ को देख कर मस्ती भरी नजरों से मुस्कुरा रही थी। पानी भरकर वह मेरी तरफ़ चल दी। उसके मस्त बदन ने मेरे उपर ऐसा असर किया था कि मैं अभी तक दरवाजे पर ही खड़ा था। उसने ऊँची ऐड़ी के सैंडल पहन रखे थे और जिस तरह से वह चूतड़ मटका के चल रही थी उसकी वजह से उसके बड़े बड़े मम्मे उसके कसे ब्लाउज़ में फंसे हुए जोर जोर से उछल रहे थे।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;उसने पूरी तरह से मुझको अपने अधेड़ उम्र के हुस्न के जाल में फंसा लिया था।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;लो ! पानी पी लो ! कह कर उसने गिलास मेरे हाथ में थमा दिया। मैं पानी पीने लगा और पानी पी कर मैंने गिलास उसको दे दिया।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;"जो देखा पसन्द आया?"&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;मैं मुस्कुरा कर बोला- हाँ ! बहुत पसन्द आया।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;"फिर यहाँ क्यों खड़े हो ? चलो अन्दर बैठते हैं।"&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;फिर मैं उसके साथ चल दिया, अन्दर आकर मैं सोफ़े पर बैठ गया। अन्दर आने से पहले मैंने अपने जूते बाहर ही उतार दिये। रीमा भी मेरे पास आ कर बैठ गई।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;मैंने उसका हाथ अपने हाथों में लिया और बोला- माँ ! तुम बहुत सुन्दर हो। जैसा तुमने बताया था तो मैने सोचा था कि तुम सेक्सी हो पर तुम तो महा-सेक्सी हो माँ। मेरा लंड तो तुमको देखते ही खड़ा हो गया था माँ और अभी तक पूरी तरह टनटनाया हुआ है, देखो ! कैसे पैन्ट फाड़ कर बाहर आने को तैयार है।&lt;/div&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgw1-vMDLouFs-xXe7yKpLuywkEx-z_JqmYV9p_6WBPfoY53p-tLO5LoZlkyCATH58FyDyRrORt1CMFrLiQytPM0a8ewsfGFl4Gi9x1tXKOwOacvh7e0W1oPd-rZiMcwRR6pugwk42ckYHH/s1600/ADL.jpg" imageanchor="1" style="clear: right; float: right; margin-bottom: 1em; margin-left: 1em;"&gt;&lt;img border="0" height="320" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgw1-vMDLouFs-xXe7yKpLuywkEx-z_JqmYV9p_6WBPfoY53p-tLO5LoZlkyCATH58FyDyRrORt1CMFrLiQytPM0a8ewsfGFl4Gi9x1tXKOwOacvh7e0W1oPd-rZiMcwRR6pugwk42ckYHH/s320/ADL.jpg" width="277" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;" फिर तुमने इसको पैन्ट के अन्दर रखा ही क्यों है पैन्ट उतार कर अपने प्यारे लंड को मुझको दिखाओ। लाओ मैं तुम्हारे कपड़े उतरने में तुम्हारी मदद करती हूँ।"&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;मैंने कहा- नहीं माँ ! मैं खुद ही उतार देता हूँ।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;तो वह बोली- हर माँ बचपन में अपने बेटे के कपड़े उतारती और पहनाती है। माँ ही होती है जो बेटे को कपड़े पहनना और उतारना सिखाती है। मुझे तो वो मौका आज ही मिला है तुम इस तरह से मुझसे यह मौका नहीं छीन सकते।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;रीमा की बात सुन कर मैं बोला- ठीक है माँ, तुम ठीक कह रही हो ! मैं इस तरह से तुम्हारा हक नहीं छीन सकता। मैं तैयार हूँ उतार दो मेरे कपड़े। आज से जब तक मैं तुम्हारे साथ हूँ और जब भी हम मिलेंगे, मेरे कपड़े तुम ही उतारोगी और तुम ही पहनओगी।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;यह सुन कर वह बहुत खुश हो गई और मेरे माथे पर चूम लिया जैसे एक माँ अपने बेटे को करती है।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;फिर वह मेरी कमीज के बटन खोलने लगी। उसके भरी पूरी गोरी बाँहे मुझको बहुत अच्छी लग रही थी। फिर उसने सारे बटन खोल दिये और बोली- बेटा खड़े हो जाओ जिससे मैं तुम्हारी कमीज उतार सकूँ।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;मैं खड़ा हो गया, रीमा भी मेरे साथ खड़ी हो गई और पीछे कर के मेरी कमीज उतार दी। मैंने नीचे बनियान पहन रखी थी। मेरी कमीज उतार कर रीमा मेरी छाती पर हाथ फेरने लगी और बोली- तुम्हारी छाती कितनी चौड़ी है। तुम भी कोई कम हैडसम नहीं हो। तुम इतने सालों अपनी माँ से दूर रहे हो जिसकी वजह से तुम्हारी ये माँ तुमको कुछ प्यार भी नहीं कर पाई। चिन्ता मत करो अब तुम मेरे पास आ गये हो, अब मैं तुमको अपना सारा प्यार दूंगी।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;ऐसा कहते वक्त उसके आँखो में वासना भरी थी। ऐसा कह कर उसने मेरी बनियान भी उतार दी।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;बनियान उतरते वक्त उसने अपने हाथ ऊपर किये। उसने स्लीवलैस ब्लाउस पहन रखा था जिसकी वजह से उसकी काँख मुझको दिखाई दी। उसकी काँख के बाल काले और घने थे। मुझे काँख के बाल बहुत पसन्द हैं। उसकी काँख देखकर मेरी मस्ती और बढ़ गई। बनियान उतार कर उसने कमरे के एक कोने मै फेंक दी। अब मेरी छाती पूरी नंगी हो गई और वो अपने गोरे गोरे हाथ मेरी छाती पर धीरे धीरे फिराने लगी। जिसकी वजह से मेरी उत्तेजना बढ़ने लगी और मेरे चुचूक कड़े हो गये।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;फिर रीमा ने अपनी एक उँगली को अपने थूक से गीला करके मेरे बायें चुचूक पर फिरने लगी और उसका दूसरा हाथ मेरी छाती पर धीरे धीरे चल रहा था। वो अच्छी तरह से जानती थी कि किस तरह मर्द को मस्त किया जाता है।&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;थोड़ी देर इसी तरह से मेरी छाती पर हाथ फेरने के बाद उसने अपना मुँह मेरे चुचूक पर रख दिया और उसे अपने होंठों के बीच लेकर चूसने लगी। उसके ऐसा करने से मेरे मुँह से एकदम से एक आह निकल गई। इसका सीधा असर मेरे लंड पर हुआ, वो मस्ती में एक दम कड़ा हो गया। अब उसका मेरी पैन्ट में रहना बड़ा ही मुश्किल था !&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;क्रमशः......................&lt;/div&gt;&lt;div style="font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: red;"&gt;premsexsena9897515075@gmail.com&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;</description><link>http://sexisalipunem0.blogspot.com/2011/01/1.html</link><author>noreply@blogger.com (sexisalipunem)</author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgw1-vMDLouFs-xXe7yKpLuywkEx-z_JqmYV9p_6WBPfoY53p-tLO5LoZlkyCATH58FyDyRrORt1CMFrLiQytPM0a8ewsfGFl4Gi9x1tXKOwOacvh7e0W1oPd-rZiMcwRR6pugwk42ckYHH/s72-c/ADL.jpg" width="72"/><thr:total>0</thr:total></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-6722033917999163069.post-3584167863913508806</guid><pubDate>Fri, 14 Jan 2011 18:32:00 +0000</pubDate><atom:updated>2011-01-15T00:06:30.586+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">हिंदीसेक्स कहानिया</category><title>दोस्त दोस्त ना रहा</title><description>&lt;h1 style="color: #663300; font-family: 'Trebuchet MS', Georgia, serif; font-size: 32px; line-height: 25px; margin-bottom: 10px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 5px;"&gt;दोस्त दोस्त ना रहा&lt;/h1&gt;&lt;div style="font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px; line-height: 25px;"&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_31pDggaOVCs/TTCSmDNfCOI/AAAAAAAAAE0/ogtoa7W1518/s1600/Copy+of+Lady.gif" imageanchor="1" style="clear: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" src="http://4.bp.blogspot.com/_31pDggaOVCs/TTCSmDNfCOI/AAAAAAAAAE0/ogtoa7W1518/s1600/Copy+of+Lady.gif" style="cursor: move;" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: #333333;"&gt;प्रेषक :&amp;nbsp;प्रेम सक्सेना&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: red;"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; हिंदीसेक्स कहानिया&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: red;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: red;"&gt;यह उस समय की बात है जब मैं कुछ दिनों के लिए दिल्ली रहने के लिए गया था। रोहिणी में मैंने किराये पर एक कमरा और रसोई ले रखी थी। खुद ही पका कर खाता था। नौकरी की तलाश चल रही थी। मेरा एक दोस्त था कबीर। उम्र मेरे जितनी ही थी चौबीस साल। वो अपनी माँ के साथ मेरे बगल वाले कमरे में रहता था। उसके पास भी एक कमरा और रसोई ही थे। उसकी नौकरी एक प्राइवेट कंपनी में लगी हुई थी और वो मेरी नौकरी के लिए भी मेरे साथ था। मुझे दिल्ली आये तीन महीने हो चुके थे और पर नौकरी थी कि मिल ही नहीं रही थी। मैं अक्सर इस बात के लिए परेशान रहता था।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px; line-height: 25px;"&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;फिर एक दिन ......&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px; line-height: 25px;"&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;दिन के ग्यारह बजे थे। सब अपने अपने काम पर जा चुके थे। पूरी बिल्डिंग खाली हो चुकी थी। सिर्फ एक दो औरतें ही थी जो अपने अपने काम में लगी हुई थी। सिवाय मेरे सबके पास करने के लिए कुछ न कुछ काम था। खाली पड़े पड़े बोर हो रहा था सो उठ कर टीवी देखने के लिए कबीर के कमरे की तरफ चल पड़ा।&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px; line-height: 25px;"&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;जाकर जैसे ही मैंने दरवाजा खटखटाया, कबीर की माँ संतोष जो हरियाणा के सोनीपत जिले के किसी गाँव से थी, की आवाज आई- कौन है ?&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px; line-height: 25px;"&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;मैंने कहा- आंटी, मैं राज।&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px; line-height: 25px;"&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;तो वो बोली- बेटा, दो मिनट रुक ! अभी आती हूँ।&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px; line-height: 25px;"&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;मैं सोच रहा था कि आंटी ऐसा क्या कर रही हैं कि दरवाजा खोलने के लिए उन्हें दो मिनट का समय चाहिए।&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px; line-height: 25px;"&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;मैंने दरवाजे के छेद में से देखने की कोशिश की तो देखा- संतोष आंटी कपड़े बदल रही थी। आंटी ने केवल सलवार पहनी हुई थी उनका ऊपर का हिस्सा नंगा था। आंटी के दो बड़े बड़े खरबूजे जैसी चूचियाँ बिलकुल नंगी थी।&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px; line-height: 25px;"&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;आंटी के बारे में मैं बता दूँ कि आंटी की उम्र करीब चालीस साल थी। आंटी ने बताया था कि उनकी शादी पन्द्रह साल की उम्र में ही हो गई थी और एक साल के बाद ही कबीर पैदा हो गया था। यानि आंटी मात्र सोलह साल की उम्र में ही माँ बन गई थी। कबीर के पैदा होने के सात साल बाद कबीर के बापू की एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। इस दौरान आंटी ने एक लड़की भी पैदा करी थी जिसकी अब शादी हो चुकी थी। कबीर की भी शादी हो चुकी होती अगर वो नौकरी की तलाश में दिल्ली न आ गया होता। संतोष आंटी ने केवल सात-आठ साल सेक्स का मजा लिया था। आंटी ने अपने शरीर का पूरा ध्यान रखा था। तभी तो इस उम्र में भी आंटी की चूचियाँ एकदम से तनी हुई थी। बड़े बड़े तने हुए खरबूजे के साइज की चूचियाँ बेहद आकर्षक थी।&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px; line-height: 25px;"&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;पहले भी मैंने एक दो बार गौर से इन चूचियों को देखा था पर ज्यादा समय वो चुन्नी के नीचे छिपी रहती थी। आज जब आंटी की चूचियों को नग्न देखा तो लंड एकदम से तन कर कच्छा फाड़ने को हो गया।&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px; line-height: 25px;"&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;आंटी चूचियों के ऊपर कुछ लगा रही थी जिस के कारण दोनों चूचियाँ कमरे की रोशनी में चमक रही थी। आंटी ने अपना कमीज पहन लिया। मैंने देखा कि आंटी ने ब्रा नहीं पहनी थी।&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px; line-height: 25px;"&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;आंटी ने आकर दरवाजा खोला और बोली- क्या बात है बेटा ?&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px; line-height: 25px;"&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;"बस आंटी खाली बैठा बोर हो रहा था तो सोचा कुछ देर आपके पास बैठ कर टीवी देख लूँ ! इस बहाने कुछ देर आप के साथ भी गप-शप हो जायेगी।" मैंने कहा और आंटी के बिल्कुल बगल में बैठ गया।&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px; line-height: 25px;"&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;आंटी की नंगी चूचियाँ देख कर मेरी तो पहले ही हालत खराब हो रही थी। लंड में अभी थी तनाव था। अगर आंटी एक-दो मिनट और दरवाजा न खोलती तो शायद मैं वहीं मुठ मार लेता।&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px; line-height: 25px;"&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;आंटी ने मेरे सर पर हाथ फेरा और पूछा- क्या बात अभी तक कोई काम नहीं मिला ?&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px; line-height: 25px;"&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;आंटी के हाथ फेरने से मेरे लंड और उछलने लगा था। अपने आप पर काबू पाते हुए मैंने कहा- अभी नहीं आंटी।&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px; line-height: 25px;"&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;आंटी बोली- कोई बात नहीं बेटा ! मिल जायेगा।&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px; line-height: 25px;"&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;आंटी की सहानुभूति लेने के लिए मैं रोनी सी सूरत करके झूठ-मूठ का रोने सा लगा।&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px; line-height: 25px;"&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;आंटी ने बड़े प्यार से मुझे अपनी ओर खींचा और बोली- बेटा चिंता नहीं करते, जब सही वक्त आयेगा तो अपने आप कुछ काम मिल जायेगा।&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px; line-height: 25px;"&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;मैं भी आंटी से चिपकता जा रहा था। आंटी मेरे सर और कमर पर हाथ फेर कर सहला रही थी जिसका मैं भरपूर आनंद ले रहा था। आंटी की वो भरपूर चूचियाँ बिल्कुल मेरे मुँह के पास थी। एक बार तो मन कर रहा था कि मुँह में पकड़ कर चूम लूँ पर डर भी लग रहा था। मैंने अपना एक हाथ आंटी की कमर पर बिल्कुल चूची के नीचे रख दिया। आंटी का दायाँ हाथ भी मुझे सहलाता हुआ नीचे की तरफ जा रहा था। मैं एकदम से चिंहुक उठा जब आंटी का हाथ अचानक मेरे लंड से टकराया। लंड तो पहले ही बिजली का खम्बा बना हुआ था। जैसा करंट आंटी के लंड छूने से मुझे लगा था कुछ वैसा ही करंट आंटी को भी लगा। तभी तो आंटी का बदन कुछ काँप सा उठा था। मैंने नजर उपर करके देखा तो आंटी की आँखे बंद थी। माथे पर पसीना था।&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px; line-height: 25px;"&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;मैंने उठाने की कोशिश करते हुए जानबूझ कर एक हाथ से आंटी की दाईं चूची दबा थी। इस उम्र में भी आंटी की चूची कुछ कठोर सी लगी जैसे के तनी हुई चूची। मुझे इसका बहुत अनुभव था क्योंकि मैं कई चूतें फाड़ चुका था तब तक। जैसे ही मैंने चूची दबाई आंटी के मुँह से एक आह से निकली और उनका हाथ सरक कर मेरे लंड पर चला गया लेकिन बिल्कुल ऐसे जैसे कि अनजाने में सब हुआ हो। जैसे ही मैं अलग हुआ, आंटी का चेहरा कुछ परेशान सा लगा।&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px; line-height: 25px;"&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;मैंने पूछा- आंटी क्या हुआ?&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px; line-height: 25px;"&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;तो बोली- राज बेटा, अब तुम जाओ, मुझे कुछ काम है, बाद में आना।&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px; line-height: 25px;"&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;मैंने कहा- ठीक है ! और उठकर बाहर आ गया।&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px; line-height: 25px;"&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;आंटी ने जल्दी से दरवाजा बंद कर लिया। इस तरह जल्दी से दरवाजा बंद करने के कारण मुझे कुछ शक हुआ तो मैं एकदम से दरवाजे के पास पहुँचा और उसी छेद में से झाँकने लगा जिसमें से पहले देखा था। मेरा शक सही था। आंटी गर्म हो चुकी थी और आंटी अपनी सलवार नीचे कर रही थी। सलवार नीचे करके आंटी अपनी चूत में ऊँगली करने लगी जोर जोर से।&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px; line-height: 25px;"&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;मुझे शरारत सूझी और मौका भी था, मैंने दरवाजा खटखटा दिया।&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px; line-height: 25px;"&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;आंटी चौक उठी, झट से सलवार ऊपर करके आंटी ने दरवाजा खोला। आंटी के चेहरे पर पसीना साफ़ नजर आ रहा था।&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px; line-height: 25px;"&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;क्या हुआ आंटी ? मैंने पूछा।&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px; line-height: 25px;"&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;आंटी के मुँह से कोई आवाज नहीं निकली। मैंने आंटी को थोड़ा अंदर धकेला और दरवाजा बंद कर दिया।&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px; line-height: 25px;"&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;आंटी बोली : यह तू क्या कर रहा है?&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px; line-height: 25px;"&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;मैं बोला- आंटी, थोड़ी देर पहले आपने मेरी परेशानी दूर करी थी, अब मैं आपकी परेशानी दूर करना चाहता हूँ।&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px; line-height: 25px;"&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;आंटी थोड़ा सकपका गई, उनकी आवाज लडखडा रही थी- मुझे क्या परेशानी है ....&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px; line-height: 25px;"&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;मैंने आंटी के कंधे पर हाथ रखा और आंटी को अपनी तरफ खींचा और अपने होंठ आंटी के होठों पर रख दिए।&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px; line-height: 25px;"&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;आंटी ने मुझे एक दम से धक्का दिया और बोली- यह तुम क्या कर रहे हो ?&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px; line-height: 25px;"&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;आंटी, मुझे मालूम है कि आपको इसकी बहुत जरूरत है। वरना आप वो न करती जो अभी कुछ देर पहले कर रही थी।&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px; line-height: 25px;"&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;मैं क्या कर रही थी ? आंटी ने चौंकते हुए पूछा।&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px; line-height: 25px;"&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;मैं थोड़ा बेशर्म होते हुए बोला- आंटी, अभी आप अपनी चूत में उंगली नहीं कर रही थी क्या ?&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px; line-height: 25px;"&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;आंटी चुप रही और मेरे मुँह की तरफ देखती रही।&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px; line-height: 25px;"&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;मैं फिर बोला- आंटी, मैं आपकी यह जरूरत पूरी कर सकता हूँ।&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px; line-height: 25px;"&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;आंटी बोली- नहीं राज, तुम मेरे बेटे जैसे हो बेटा। मैं तुम्हारे साथ नहीं कर सकती।&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px; line-height: 25px;"&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;आंटी की आवाज में लंड की जरूरत साफ़ झलक रही थी। आंटी ने मुँह दूसरी तरफ कर लिया था। मैं आगे बढ़ा और आंटी की कमर में हाथ डाल कर आंटी को अपनी तरफ खींचा। मेरा तना हुआ लंड आंटी की मस्त गांड में चुभने लगा। आंटी के मुँह से सिसकारी निकल गई। मैंने दोनों हाथ ऊपर करके आंटी की दोनों चूचियाँ पकड़ ली।&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px; line-height: 25px;"&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;हाय क्या मस्त चूची थी आंटी की। कब से इन्हें हाथों में लेने को तड़प रहा था।&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px; line-height: 25px;"&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;आंटी अब भी मुझ से छुटने का हल्का प्रयास कर रही थी पर मेरी पकड़ इतनी कमजोर नहीं थी। मैं प्यार से आंटी की गर्दन पर चूमते-चूमते आंटी की मस्त चूचियाँ मसल रहा था। आंटी के मुँह से एक ही आवाज आ रही थी- छोड़ दे बेटा ! भगवान के लिए ऐसा मत कर।&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px; line-height: 25px;"&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;इसी आवाज के बीच में मस्ती भरी सिसकारियाँ भी निकल रही थी। जिस से मुझे पता लग रहा था कि आंटी भी चूची मसलवाने का मजा ले रही हैं।&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px; line-height: 25px;"&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;मैंने धीरे धीरे आंटी की कमीज उठानी शुरू की तो आंटी ने मेरा हाथ पकड़ लिया और धीरे से बोली- प्लीज, कपड़े मत उतारो ! कोई आ गया तो मुश्किल हो जायेगी।&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px; line-height: 25px;"&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;मैंने आंटी की बात को अनसुना कर दिया और आंटी की कमीज को उतार कर एक तरफ़ फेंक दिया। आंटी के मस्त खरबूजे अब बिल्कुल नंगे मेरी आँखों के सामने थे। एक पल के लिए तो मैं उन्हें देखता रह गया क्योंकि आज तक इतनी बड़ी बड़ी चूचियाँ मैंने नंगी नहीं देखी थी। मैंने एक चूची को पकड़ा और मुँह में लेकर चूसने लगा। आंटी के मुँह से सेक्स भरी सिसकारी फ़ूट पड़ी। अब आंटी भी चुदने के लिए बिल्कुल तैयार थी।&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px; line-height: 25px;"&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;मैं एक चूची मसल रहा था और दूसरी को चूस रहा था। आंटी ने भी अब हरकत करनी शुरू कर दी थी। आंटी ने हाथ बढ़ा कर मेरा लगभग आठ इंच का तना हुआ लंड पजामे के ऊपर से ही पकड़ लिया और धीरे धीरे सहलाने लगी। मैंने भी चूची चूसते चूसते आंटी की सलवार का नाड़ा खोल दिया। सलवार जमीन चूमने लगी। आंटी ने नीचे कोई अंडरवियर नहीं पहना हुआ था। सलवार नीचे जाते ही आंटी बिल्कुल नंगी हो गई थी। आंटी की चूत पर बड़ी बड़ी झांटे थी काली काली।&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px; line-height: 25px;"&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;मैं एक हाथ से आंटी की चूत को सहलाने लगा। झांटें आंटी की चूत के रस से गीली हो चुकी थी। मैंने एक उंगली आंटी की चूत में सरका दी। आंटी एकदम से चिहुंक उठी। आंटी के मुँह से आआआह निकल गई।&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px; line-height: 25px;"&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;कुछ देर चूत में उंगली पिलवाने के बाद आंटी ने मुझे अपने से दूर किया और मेरे लंड पर झपट पड़ी। मेरे पजामे को पकड़ कर नीचे सरका दिया। फिर अंडरवियर को भी उसी गति से नीचे खींच दिया। मेरा तना हुआ लंड अब आंटी के मुँह के बिल्कुल सामने था। आंटी ने बिना देर करे लंड को मुँह में ले लिया और जीभ घुमा घुमा कर लंड को चूसने लगी। अब सिसकारी निकलने की बारी मेरी थी। मेरी भी मस्ती के मारे आह्ह्ह निकल गई। आंटी मस्त हो कर लंड चूस रही थी।&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px; line-height: 25px;"&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;पांच मिनट के बाद आंटी बोली- बेटा अब देर मत कर ! चोद दे मुझे। जल्दी कर अगर कोई आ गया तो सारा मजा खराब हो जायेगा।&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px; line-height: 25px;"&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;मैंने कहा- आंटी तुम बस मजे लो ! कोई आएगा तो मैं अपने आप देख लूँगा।&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px; line-height: 25px;"&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;आंटी अब बिस्तर पर टाँगें खोल कर लेट गई, आंटी की खुली हुई लाल लाल चूत साफ़ दिख रही थी। मैं आंटी की टांगों के बीच में बैठ गया और आंटी की बड़ी बड़ी झांटो को सहलाने लगा। आंटी की सिसकारियाँ चालू थी। मैं आंटी की चूत पर झुक गया। मैं बता दूँ कि मुझे चूत की खुशबू बहुत अच्छी लगती है। मैंने अपनी जीभ आंटी की चूत के लाल लाल दाने पर रख दी। आंटी एकदम उछल पड़ी। आंटी बोली- बेटा यह क्या कर रहा है? तेरे अंकल ने तो कभी भी ऐसा नहीं किया।&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px; line-height: 25px;"&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;क्या बात करती हो मेरी जान ! इस अमृत के लिए तो दुनिया तरसती है ! और मैं फिर से चूत चाटने में लग गया।&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px; line-height: 25px;"&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;आंटी ज्यादा देर बर्दाश्त नहीं कर पाई और उसने ढेर सारा रस मेरे मुँह पर उछाल दिया जिसे मैं चाट गया। रस निकलने के बाद आंटी थोड़ी सुस्त सी पड़ गई। मैं उठा और मैंने एक बार फिर अपना लंड आंटी के मुँह में घुसेड़ दिया। आंटी लंड चुसती रही और मैं आंटी की चूची से खेलता रहा।&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px; line-height: 25px;"&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;दो मिनट के बाद ही आंटी बोल पड़ी- बेटा, अब लंड का मजा भी देगा या नहीं इस चूत को। पूरे सोलह साल बाद लंड नसीब हुआ है निगोड़ी को।&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px; line-height: 25px;"&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;क्या बात करती हो आंटी ! आपने इतने साल से लंड का स्वाद नहीं लिया?&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px; line-height: 25px;"&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;हाँ बेटा, तेरे अंकल के मरने के बाद से लंड देखा भी नहीं सही से।&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px; line-height: 25px;"&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;सच ?&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px; line-height: 25px;"&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;हाँ बेटा, तेरे अंकल के मरने के बाद एक बार कबीर के दादा जी ने मेरे साथ बलात्कार करने के कोशिश की तो मैं कबीर और सुमन को लेकर शहर आ गई। उनको पालने पोसने में ही जिंदगी गुजर गई। कभी सेक्स के बारे में सोचा ही नही। हाँ, कभी कभी जब ज्यादा दिल करता तो ऊँगली या मोमबत्ती से इस चूत को शान्त कर लेती थी।&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px; line-height: 25px;"&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;मैंने पूछा- फिर आज कैसे?&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px; line-height: 25px;"&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;आंटी बोली- जब तुम रोते हुए मुझसे लिपटे तो तुम्हारे बदन का स्पर्श ना जाने क्यों मुझे बहुत अच्छा लगा और बदन में एक आग सी लग गई और मैं अपने आप को रोक ही नहीं पाई। फिर तुमने मेरी चूची दबा कर उस आग में घी का काम कर दिया। जब तुम्हारे इस लोहे की रॉड जैसे लंड को छुआ तो मैं बेबस हो गई। ऊँगली से आग बुझाना चाहती थी कि तुमने दरवाजा खटखटा दिया। फिर तो तुम्हें मालूम ही है मेरी जान।&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px; line-height: 25px;"&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;सुनते हुए मैं आंटी की चूचियों से खेल रहा था। आंटी फिर से गर्म हो चुकी थी। अब मैं भी देर नहीं करना चाहता था क्योंकि सच में कोई आ भी सकता था।&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px; line-height: 25px;"&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;मैं आंटी की टांगों के बीच में पहुँचा और अपना लंड आंटी की गर्म गर्म चूत के मुँह पर रख दिया।&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px; line-height: 25px;"&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;आंटी बोली- बेटा, अब और ना तड़पा।&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px; line-height: 25px;"&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;मैंने भी जोश में एक जोरदार धक्का लगा किया। मैं यह भूल गया कि आंटी की चूत बहुत सालों से चुदी नहीं है।&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px; line-height: 25px;"&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;आंटी की चीख निकल गई, बोली- बेटा आराम से डाल ! फाड़ डालेगा क्या?&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px; line-height: 25px;"&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;बहुत सालों से चुदी न होने के कारण आंटी की चूत एक दम कोरी चूत की तरह से टाईट हो चुकी थी। मुझे मेरी गलती का एहसास हुआ और मैं फिर धीरे धीरे लंड को आंटी की गर्म चूत में घुसाने लगा। और अगले दो धक्कों में मैंने पूरा लंड आंटी की मस्त चूत में घुसा दिया। फिर शुरू हुआ धक्कों का मुकाबला। आंटी नीचे से अपनी गांड उठा-उठा कर चुद रही थी, मैं भी पूरे जोश से धक्के लगा कर आंटी की चूत का भुरता बना रहा था। मस्ती भरी आहें और सिसकारियाँ कमरे में गूंज रही थी।&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px; line-height: 25px;"&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;दोनों मस्त हो कर चुदाई का मजा ले रहे थे। आंटी आह्हह्ह आह्हह्ह करके मेरा जोश बढ़ा रही थी, हर धक्के के साथ आंटी बोल उठती- और जोर से मेरी जान ! और जोर से लगा धक्का ! फाड़ दे साली को ! इसे भी बहुत सालों बाद लंड नसीब हुआ है। मार बेटा मार ! और जोर से धक्के मार। सारा रस निकल दे इस चूत का। जल्दी जल्दी कर ! मेरा निकलने वाला हैं।&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px; line-height: 25px;"&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;मैं भी पूरे जोश में था। पूरा आधा घंटा आंटी की चूत का बाजा बजाया। फिर मैं झड़ने के कगार पर पहुँच गया। इस बीच आंटी तीन बार चूत का रस उगल चुकी थी यानि झड चुकी थी। फिर मैं भी अपने आप पर काबू नहीं कर सका। मैंने आंटी से पूछा- कहाँ पानी निकालूँ ?&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px; line-height: 25px;"&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;तो आंटी बोली- बेटा, इस चूत ने सालो से लंड का पानी नहीं पिया है तो बेटा इस चूत में ही डाल दे अपना अमृत। बहुत तरसी हूँ इस अमृत के लिए।&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px; line-height: 25px;"&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;फिर मैंने धक्कों की गति दुगनी कर दी और दस बारह धक्कों के बाद पूरा लंड आंटी की चूत में निचोड़ दिया। जैसे ही मेरा वीर्य आंटी की चूत में गिरा, आंटी ने जोर से मुझे भींच लिया अपने बाहों और टांगों में।&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px; line-height: 25px;"&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;करीब पांच से दस मिनट तक आंटी और मैं इसी तरह पड़े रहे फिर जाकर आंटी ने अपनी पकड़ कुछ ढीली की। आंटी सोलह साल की प्यास को पूरी तरह से मिटाना चाहती थी। कम से कम आधा घंटा आंटी ने मुझे अपने से लिपटाये रखा। आंटी की आँखों में आंसू थे।&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px; line-height: 25px;"&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;मैं बेशर्म इंसान आंटी के बगल में पड़ा यह सोच रहा था कि आज से मैं कबीर के लिए दोस्त नहीं रहा था बल्कि उसकी माँ को चोद कर उसका बाप बन गया था। कबीर को अगर कल पता लगेगा कि मैं उसका बाप बन चुका हूँ तो वो तो बस यही गाना गाता फिरेगा- दोस्त दोस्त न रहा................&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px; line-height: 25px;"&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;आपका प्रेम सक्सेना&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px; line-height: 25px;"&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;premsexsena9897515075@gmail.com&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px; line-height: 25px;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="font-size: 14px; line-height: 25px; margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: red; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;﻿&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;</description><link>http://sexisalipunem0.blogspot.com/2011/01/blog-post_5066.html</link><author>noreply@blogger.com (sexisalipunem)</author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="http://4.bp.blogspot.com/_31pDggaOVCs/TTCSmDNfCOI/AAAAAAAAAE0/ogtoa7W1518/s72-c/Copy+of+Lady.gif" width="72"/><thr:total>0</thr:total></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-6722033917999163069.post-2070253079538254506</guid><pubDate>Fri, 14 Jan 2011 08:25:00 +0000</pubDate><atom:updated>2011-01-14T14:00:40.056+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">हिंदी सेक्सी स्टोरी</category><title>शादी के बाद भी न बुझी प्यास</title><description>&lt;div align="right" style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;select id="selectSize"&gt;&amp;nbsp;&lt;option selected="" value="16px"&gt;साइज़ बदलो&lt;/option&gt;&amp;nbsp;&lt;option value="12px"&gt;Smallest&lt;/option&gt;&amp;nbsp;&lt;option value="14px"&gt;Small&lt;/option&gt;&amp;nbsp;&lt;option value="16px"&gt;Medium&lt;/option&gt;&amp;nbsp;&lt;option value="18px"&gt;Big&lt;/option&gt;&amp;nbsp;&lt;option value="20px"&gt;Biggest&lt;/option&gt;&amp;nbsp;&lt;/select&gt;&lt;/div&gt;&lt;div id="story-content" style="color: #333333; font-family: verdana, Arial, Tahoma, sans-serif; font-size: 16px; padding-left: 5px; padding-right: 5px;"&gt;﻿&lt;br /&gt;
&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg8vinVkqZEiEtioa8i98bz4eBYG__EpFuH6fsVK4cw8FpWvVvE6iTgYnPHHVYHAMQIBh7xJsqK2vnpd9lgrhwrI0JiNqZMqUZqCYSm_uyqOeei_z1_6oasWzwoYs6GHePFWET39NluRany/s1600/ADL.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg8vinVkqZEiEtioa8i98bz4eBYG__EpFuH6fsVK4cw8FpWvVvE6iTgYnPHHVYHAMQIBh7xJsqK2vnpd9lgrhwrI0JiNqZMqUZqCYSm_uyqOeei_z1_6oasWzwoYs6GHePFWET39NluRany/s1600/ADL.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;h1 style="color: #663300; font-family: 'Trebuchet MS', Georgia, serif; font-size: 32px; margin-bottom: 10px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 5px;"&gt;शादी के बाद भी न बुझी प्यास&lt;/h1&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjJYoAUOKfYsXhxY3-xhiIeQBu5c7eluFV36oU5JRQrRZI5HkUNmF4IZH7AqNw0xO5YIays11zNh-ju7PtISWOmGGxIqWpQJjzkD0L9MvrqdsfLUxVuVklMVhYxvjQaU5VkY2X7RKLfETfK/s1600/ADQ.jpg" imageanchor="1" style="clear: right; float: right; margin-bottom: 1em; margin-left: 1em;"&gt;&lt;img border="0" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjJYoAUOKfYsXhxY3-xhiIeQBu5c7eluFV36oU5JRQrRZI5HkUNmF4IZH7AqNw0xO5YIays11zNh-ju7PtISWOmGGxIqWpQJjzkD0L9MvrqdsfLUxVuVklMVhYxvjQaU5VkY2X7RKLfETfK/s1600/ADQ.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgoXgXKuMPC5bdmr_kNq977kXEKH_06CTgk79FGacPiNWQJ4p1_4ZCbiTQPENdLGD61a77-vbYzhtsC6gRbEnV3BZzGFuHN5shOu3qbFxyR_6bSyygTAL_uEo2IC6ldadbqEQHhovzJ3u4x/s1600/KarishmaAF.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" height="320" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgoXgXKuMPC5bdmr_kNq977kXEKH_06CTgk79FGacPiNWQJ4p1_4ZCbiTQPENdLGD61a77-vbYzhtsC6gRbEnV3BZzGFuHN5shOu3qbFxyR_6bSyygTAL_uEo2IC6ldadbqEQHhovzJ3u4x/s320/KarishmaAF.jpg" width="204" /&gt;&lt;/a&gt;प्रेषिका : &lt;span class="Apple-style-span" style="color: red;"&gt;पूनम सक्सेना&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: red;"&gt;&lt;br /&gt;
सभी अन्तर्वासना पढ़ने वालों को व प्यारे गुरु जी को मेरा प्रणाम !&lt;br /&gt;
मेरा नाम है परमजीत, मैं अमृतसर की रहने वाली हूँ, मेरा घर अन्तरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास एक गाँव में है, मेरी उम्र बीस साल है, मेरी शादी हो चुकी है लेकिन मैं अभी कंप्यूटर का दो साल का कोर्स कर रही हूँ।&lt;br /&gt;
वैसे तो मैं शुरु से मनचली और चंचल लड़की हूँ, मेरे घर का वातावरण अच्छा नहीं था क्योंकि मैं गाँव में जन्मी हूँ और वहीं पढ़ी हूँ, माँ को गैर मर्दों के साथ देख-देख मेरी कलि उम्र से पहले खिलने लगी, जब मैं स्कूल में थी तभी से मेरे उभारों का विकास शुरु हो गया था, देखते ही देख्ते समय से पहले मुझ पर जवानी का सैलाब आ गया, मुझे लगता कि मेरे अन्दर बाकी लड़कियों से कुछ अलग है। मेरा बदन तब से ही लड़कों को देख कर जलने लगा, जब भी नहाने लगती जब मेरा ध्यान मेरे उभारों पर जाता, मुझे कुछ कुछ होने लगता, जब अपने हाथ से वहाँ साबुन लगाती, मुझे अलग सी तरंग छिड़ती, लहर सी छाने लगती।&lt;br /&gt;
माँ तो माँ ! मेरी बड़ी बहन मनप्रीत मेरे से दो साल बड़ी है, इतना मुझे मालूम था कि स्कूल के एक सबसे गुंडा टाइप लड़के से उसका चक्कर ज़ोरों पर है, उसकी जवानी भी बहुत भयानक थी। हम दोनों माँ पर गईं थी।&lt;br /&gt;
फिर एक दिन माँ घर नहीं थी, उस दिन ऐन मौके पर उसने कहा- मेरे पेट में बहुत दर्द है, मैं स्कूल नहीं जा रही।&lt;br /&gt;
मैंने कहा- मैं भी रुक लेती हूँ !&lt;br /&gt;
लेकिन उसने कहा- नहीं, तू जा !&lt;br /&gt;
मुझे उस पर कुछ शक हुआ, लेकिन मैं चली गई, स्कूल गई और बीमारी का बहाना लगा वहाँ से छुट्टी लेकर जल्दी लौट आई।&lt;br /&gt;
मेन-गेट तो खुला था लेकिन एक कमरे का दरवाज़ा बंद था। मुझे यकीन था कि दीदी का इरादा नेक नहीं था, मैं पिछली खिड़की के पास गई, अन्दर का दृश्य देख मेरी खुद की कच्छी गीली होने लगी। दीदी पूरी नंगी हुई बिस्तर पर पड़ी थी और हमारे खेतों में काम करने वाले दोनों नौकर भी नंगे अपने अपने लौड़े दीदी के पास लेकर घुटनों के बल बैठे थे।&lt;br /&gt;
दीदी को अचानक क्या हुआ कि उसने एक का मुँह में ले लिया। दूसरा दीदी के मम्मे चूस रहा था। फिर दीदी ने बारी से दोनों से अपनी चूत मरवाई। वो चले गए, मेरी हालत पतली हो गई।&lt;br /&gt;
उसी दिन शाम को मैं खेतों की तरफ निकली और वहाँ उस वक़्त उनमें से एक ही था। मैंने बिना कुछ कहे पीछे से उसको जफ्फी डाल दी,&lt;br /&gt;
वो मुड़ा- तू?&lt;br /&gt;
हां ! क्यूँ ? बस दीदी से करेगा ? सुबह से तेरा वो मेरी आँखों के सामने घूम रहा है !&lt;br /&gt;
तू अभी छोटी है, तेरी लेकर मुझे मरना नहीं अभी ! तैयार हो जा ! चल वैसे तेरी मस्ती उतार देता हूँ !&lt;br /&gt;
वह मुझे वहीं घास पर लिटा मेरे मम्मे पीने लगा और मेरी चूत छेड़ने लगा, मैं सिसक रही थी।&lt;br /&gt;
वह बोला- इसमें मैं नहीं डालूँगा !&lt;br /&gt;
कोई बात नहीं ! तूने वैसे ही मुझे मस्त कर दिया !&lt;br /&gt;
उसके बाद से मेरे मम्मे तेज़ी से बढ़ने लगे। उसने दूसरे को बताया, फिर मौका देख दोनों मेरे मम्मे पीते, जिस्म से खेलते लेकिन चूत का जोखिम नहीं लेते।&lt;br /&gt;
फिर पूरी विकसत हो गई, एक दिन उनमें से एक ने आखिर मेरी सील तोड़ दी और उससे चुदवाने के बाद अभी मैंने कपड़े ठीक किये थे, माँ ने मुझे खेत से निकलते देख लिया। जब माँ ने मुझे फटकार लगाई घर आकर तो मेरे मुँह से अंदर का उबाल निकल आया- क्या करूँ - जैसी माँ वैसी बेटी निकलगी ना ! जब माहौल वैसा मिला, मुझसे जवानी नहीं संभलती !&lt;br /&gt;
माँ चुपचाप सुनती रही।&lt;br /&gt;
मैंने माँ को कह दिया- मेरी शादी करवा दे वरना मेरे से और भी गलत कदम उठ जायेंगे !&lt;br /&gt;
माँ को दीदी के बारे में भी सब पता चल गया था, दीदी की भी जल्दी शादी कर दी गई।&lt;br /&gt;
दसवीं की परीक्षा देते ही पास के गाँव में मेरा रिश्ता तय हो गया, मेरा रिश्ता गुरनाम सिंह नाम के किसान के बेटे के साथ हुआ, वो ज्यादा पढ़ा नहीं था लेकिन ज़मीन काफी थी, तीन भाई थे, एक जेठ था, जेठानी की कार हादसे में मौत हो चुकी थी, पहले मेरा रिश्ता उससे ही तय हो रहा था लेकिन मैंने शादीशुदा से शादी करने से मना कर दिया था, जिसकी वजह से मेरा रिश्ता गुरनाम से हो गया, वो मुझे काफी दमदार मर्द दिखा था, वो ही शायद मेरी जवानी संभाल पायेगा क्योंकि जितने आग मेरे अंदर है, आम मर्द की बस की बात नहीं थी।&lt;br /&gt;
शादी हुई, उसकी दुल्हन बन कर उसके गाँव चली गई मैं !&lt;br /&gt;
लड़की के साथ उसका भाई जाता है, पहली रात हमारे यहाँ पति-पत्नी एक साथ नहीं सोते। दो दिन बाद मुकलावे की रस्म के बाद मिलन की रात आती है। अगले ही दिन मुझे फेरे के लिए मायके जाना था।&lt;br /&gt;
वहाँ गई तो किसी काम से मुझे छत पर जाना पड़ा, माँ ने मुझे ऊपर स्टोर से प्याज लाने को कहा था, वहाँ काला सिंह, मेरा नौकर और आशिक पिछले रास्ते आ धमका। उसने मुझे बाँहों में लेकर चूमना शुरु किया- कैसी रही सुहागरात पम्मी ?&lt;br /&gt;
मैं बोली- कहाँ हुई है अभी ? आज मिलन की रात है ! उसको उस कमरे, मुझे दूसरे में सुलाया कमीनों ने !&lt;br /&gt;
आय हाय ! तेरा तो बुरा हाल होगा जानेमन !&lt;br /&gt;
काला, तुम ज़ख्मों पर नमक मत डालो ! और जाओ कोई आ गया तो बवाल मच जाएगा !&lt;br /&gt;
पहले वादा करो कि रात को छत पर मिलेगी !&lt;br /&gt;
आज नहीं !&lt;br /&gt;
उसने मुझे वहीं स्टोर में धर-दबोच लिया, मेरे लहंगे में हाथ डाल कर मेरी चूत मसलने लगा।&lt;br /&gt;
हाय काले ! छोड़ ! मैं बहक रही हूँ ! नीचे सभी हैं ! वादा रहा आऊंगी !&lt;br /&gt;
दो मिनट सहला दे मेरा पकड़ कर !&lt;br /&gt;
नहीं ! रात को !&lt;br /&gt;
मुझे पता था कि मैं आज नहीं रुकने वाली, मुझे वापस ससुराल जाना था, मैं नये माल का स्वाद लेना चाहती थी, काला सिंह अब बासा था, पुराना !&lt;br /&gt;
वो चला गया, शाम हुई, सभी मुझे विदा करवाने लगे !&lt;br /&gt;
रात हुई मुझे छत पर एक कमरे में बिठा दिया गया। मैं गुरनाम का इंतज़ार करने लगी। करीब एक घंटे बाद वो आया मेरे पास, मैं खड़ी हो गई, उसने दारु पी रखी थी, तीखी गन्ध आ रही थी लेकिन काला अक्सर मुझे पी कर ही चोदता था इसलिए मुझे कुछ अलग नहीं लगा।&lt;br /&gt;
वाह मेरे चाँद के टुकड़े ! ज़रा घूंघट उठा ! देखूं तो मेरा चाँद कैसा है ?&lt;br /&gt;
खुद उठा लो !&lt;br /&gt;
उसने मेरा घूंघट उठाया- वाह क्या बात है !&lt;br /&gt;
दरवाज़ा खुला है, मैंने कहा, क्योंकि उसने हाथ मेरे लहंगे की डोरी पर डाला था सीधे ही। डोरी खिंचते ही मैं नंगी हो जाती।&lt;br /&gt;
हाय ! अभी लो !&lt;br /&gt;
लगा कि गुरनाम बहुत रंगीन मर्द है ! लगता है आज गृह-प्रवेश के बाद वो मेरे ग्रह को शांत भी कर देगा।तभी उसको बाहर से किसी ने आवाज़ दी, वो बोला- मैं अभी आया !&lt;br /&gt;
उसने जाते-जाते बत्ती बुझा दी। कुछ देर में लौटा, लगता था कि एक और मोटा पेग खींच कर आया था।&lt;br /&gt;
उसने अपनी शर्ट उतारी, फिर अपनी पैंट, सिर्फ अंडरवीयर और बनियान में था। उसकी बॉडी ठीक-ठाक थी।&lt;br /&gt;
आकर उसने मेरी चोली खोली, लहंगे की डोर खींची। मैं बेड पर खड़ी थी, लहंगा नीचे गिर गया। मेरी जांघें देख उसका दिल डोलने लगा, दूध से गोरी थी, चिकनी पंजाबन के मखमली पट्ट थे- वाह क्या रन्न(औरत) है !&lt;br /&gt;
वो मेरी जांघें चूमने लगा। उसका हाथ मेरे फड़फड़ाते कबूतरों पर जा टिका। मैंने अपने आप ही हुक़ खोल दिए, मेरे स्तन आज़ाद होकर और फड़फड़ाने लगे।&lt;br /&gt;
क्या माल है साली तेरा !&lt;br /&gt;
उसने जैसे मेरा चुचूक पीना शुरु किया, मैं आपा खो बैठी, मैं उसके अंडरवीयर को खींच कर उसके लौड़े पर टूट पड़ी। खूब सहलाया, इतना बड़ा नहीं था, लेकिन मोटा था !&lt;br /&gt;
बोला- खेल लो इसके साथ !&lt;br /&gt;
मैंने चूमा, फिर धीरे से मुँह में लेकर दो तीन चुप्पे लगा दिए। उसने मेरी टाँगें खोलीं और बीच में आकर आसन लगा लिया और अन्दर डालने के लिए झटका दिया। मैंने सांस अंदर खींच ली ताकि उसको लगे कि इसकी बहुत टाईट है।&lt;br /&gt;
दो झटकों में आधा घुस गया, तीसरे में पूरा मैंने नाटक करते हुए चीख लगा दी।&lt;br /&gt;
क्या हुआ ?&lt;br /&gt;
बहुत तीखा दर्द है !&lt;br /&gt;
अभी मस्ती आएगी ! एक बार सेट होने दे !&lt;br /&gt;
लेकिन मेरी चूत की गर्मी से वो पिघल गया और जल्दी मुझे पर ढेरी हो गया। मेरी उमंग-कामनाएँ वहीं ख़त्म हो गई। मैंने काफी प्रयास किये लेकिन बोबारा दम नहीं पकड़ा उसने और वो सो गया।&lt;br /&gt;
मैं पूरी रात जलती रही अपनी कामाग्नि में !&lt;br /&gt;
फिर सोचा- पहली रात थी, मेरी जवानी है भी बहुत गर्म, हो गया होगा ! कल ठीक होकर करेगा तो मुझे ग्रह-शान्ति तक पहुंचा देगा।&lt;br /&gt;
लेकिन ऐसा वैसा कुछ नहीं हुआ, कभी बाद में उंगली से ठंडी करता, कभी जुबान से !&lt;br /&gt;
लेकिन मैं बहुत खफा थी उससे !&lt;br /&gt;
दस दिन बाद मुझे माँ लेने आई, उसके साथ मुझे तोर(भेज) दिया गया।&lt;br /&gt;
मैंने सोच लिया कि मैं माँ से सब बता दूँगी और वापस नहीं आउंगी।&lt;br /&gt;
अगले दिन माँ को बताने लगी थी कि मां बोली- शाम को बताना !&lt;br /&gt;
उसके जाते ही कुछ देर बाद काला और चंचल अंदर घुस आये। मैं काला से चिपक गई, सब कुछ बताया, वो बोला- यह तेरी सजा है ! मुझे जो धोखा दिया था !&lt;br /&gt;
कुछ ही पल में हम तीनों नंगे थे, एक मेरा दूध पीने लगा, दूसरा मेरी चूत चाटने लगा।&lt;br /&gt;
मैं खुलकर दोनों को शाबाशी देने लगी- वाह मेरे आशिको ! तुम ही मर्द हो !&lt;br /&gt;
पहले काले ने चोदा, फिर चंचल ने जी भर कर नज़ारे लिए। वो एक बार झड़े, मैं चार बार !&lt;br /&gt;
रोज़ दोनों से चुदवाती। छत पर बुलाती कभी एक को कभी दूसरे को !&lt;br /&gt;
एक रात चंचल ने मेरे साथ बिना निरोध कर दिया।&lt;br /&gt;
जब गुरनाम मुझे लेने आया तो मैंने माँ से कह दिया- मुझे वहाँ नहीं बसना !&lt;br /&gt;
लाख समझाने पर भी मैं नहीं मानी। गुरनाम को वापस भेज दिया, यहाँ मुझे चुदाई का हर सुख मिल रहा था। गुरनाम के घर वाले उससे वजह पूछते तो क्या कहता वो !&lt;br /&gt;
उधर काला को चोट लग गई, उसकी टांग टूट गई, वो बिस्तर पर था, चंचल मुझे संतुष्ट करता था, मैं उसको प्यार करने लगी और उससे इज़हार भी कर दिया। लेकिन उसकी बीवी थी, एक बच्चा था, फिर भी वो मुझे लेकर उड़ने को तैयार हो गया।&lt;br /&gt;
ऐसे एक महीना बीत गया, मैं चंचल के साथ भाग गई एक दिन ! लेकिन मैं वापस आ गई उसी दिन ! मैं नहीं चाहती थी उसके बच्चे मेरे कारण प्रभावित हों।&lt;br /&gt;
उसके बाद जब मैं गुरनाम के साथ वापस नहीं जाती थी तो एक दिन मुझे लेने जेठ जी आये। उन्होनें मेरे साथ अकेले में बात करने को कहा। पहले मैं राज़ी नहीं हुई लेकिन फिर मैं मान गई। उनसे मेरी जो बातचीत हुई उसे मैं बाद में लिखूंगी। email-premsexsena9897515075@gmail.com&lt;br /&gt;
&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;span class="Apple-style-span" style="color: red;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;span class="Apple-style-span" style="color: red;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;span class="Apple-style-span" style="color: red;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;span class="Apple-style-span" style="color: red;"&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;</description><link>http://sexisalipunem0.blogspot.com/2011/01/blog-post_14.html</link><author>noreply@blogger.com (sexisalipunem)</author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg8vinVkqZEiEtioa8i98bz4eBYG__EpFuH6fsVK4cw8FpWvVvE6iTgYnPHHVYHAMQIBh7xJsqK2vnpd9lgrhwrI0JiNqZMqUZqCYSm_uyqOeei_z1_6oasWzwoYs6GHePFWET39NluRany/s72-c/ADL.jpg" width="72"/><thr:total>0</thr:total></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-6722033917999163069.post-4600316975287757837</guid><pubDate>Fri, 07 Jan 2011 17:25:00 +0000</pubDate><atom:updated>2011-01-07T22:55:24.768+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">हिंदी सेक्सी स्टोरी</category><title>मॉस्को ki बला</title><description>&lt;section id="image"&gt;        &lt;img alt="मॉस्को  ki बला" src="http://static.sucksex.com/assets/timthumb.php?src=media/2010/07/pof_4c30864a6e205.jpg&amp;amp;w=460&amp;amp;h=300&amp;amp;zc=1" width="460" /&gt;      &lt;/section&gt;              &lt;br /&gt;
&lt;div class="posted-info"&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: red; font-size: large;"&gt;प्रेम सक्सेना&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;span class="Apple-style-span" style="color: red; font-size: large;"&gt;पहले मैं अपने बारे में कुछ बता दूँ। मेरा नाम रोबिन है और मैं बीस वर्ष   का नौजवान हूँ। दिखने में मैं बिलकुल सामान्य सा ही हूँ। भीड़ में पहचाना   भी नहीं जा सकता। मैं इस समय भारत के एक विख्यात इंजिनीयरिंग कॉलेज में   तृतीय वर्ष का छात्र हूँ। पिछले साल परीक्षाओं के बाद मुझे रूस के मॉस्को   विश्वविद्यालय में ईटर्नशिप करने का मौका मिला। मन फ़ूला नहीं समा रहा था,   आखिरकार पहली बार विदेश जाने का मौका जो मिला था।&lt;br /&gt;
मैं मई के महीने में मॉस्को पहुंचा था। हमारा यहाँ भारत में तो   चिलचिलाती धूप थी पर वहाँ का मौसम बेहद सुहावना था। मॉस्को छोड़कर वापस आने   का मन नहीं करता था मेरा। मॉस्को में उतरते के साथ ही मुझे इतनी सुंदरियों   के दर्शन होने लगे थे। वहाँ लड़कियों में खूबसूरती की कमी नहीं थी, पर  हाँ,  कपड़ों की कमी जरूर थी। खैर अपने लिए तो यही अच्छा था। जिधर देखो उधर  कोई न  कोई बला देखने को मिलती थी। लगता था जैसे भगवान् ने सारी हसीनाओं को  यहीं  भेज दिया हो। बड़ी मुश्किल से अपने मन को संभाल पाता था मैं।&lt;br /&gt;
मुझे जिस प्रोजेक्ट पर काम करने को मिला उस पर मॉस्को विश्वविद्यालय की   ही एक और लड़की को भी काम करना था। लड़की क्या थी, किसी हूर से कम नहीं थी।   नाम था उसका मारिया ! मारिया तमारानोव ! जितना हसीं नाम था, वो उससे भी   अधिक हसीं थी। हम-उम्र ही थी वो मेरी। पर विदेश में लोग जल्दी जवान होते   हैं, पता नहीं क्यूँ ? बड़ी बड़ी आँखें, तीखी नाक, पतले गुलाबी होंठ, चांदी   जैसे दमकते कमर तक लम्बे बाल, चेहरा बस ऐसा कि जो देख ले उसका दिन बन जाए   बस। उसकी फिगर तो बिलकुल 36-24-36 की थी। उरोजों को देखकर तो एक बार हाथ   लगाने का मन करता ही था मेरा। कमर तो कमाल थी। जब वो अदा से बल खाकर चलती   थी तो उसके भरे हुए नितम्बों को देखकर मेरा पसीना छुट जाता था। सच कहूँ तो   मुझे उससे प्यार हो गया था।&lt;br /&gt;
क्यूंकि हमारा काम साथ में था इसलिए हम जल्दी ही दोस्त बन गए। धीरे धीरे   उसे मेरे प्यार का आभास भी होने लगा और हम आगे ही बढ़ते चले गए। मैं थोड़ा   सीधा था इसलिए मैं कभी उससे अपनी शारीरिक इच्छाओं के बारे में नहीं बोलता   था। पर पता नहीं लड़कियों को सब कैसे पता चल जाता है। इसी बीच उसने बताया   कि वो कॉलेज से पहले मॉडेलिंग करना चाहती थी पर उसके पिता ने उसे पढ़ने को   कहा और वो यहाँ चली आई। मॉस्को में वो भी अकेली ही रहती थी पर उसकी यहाँ   कुछ सहेलियाँ भी थीं।&lt;br /&gt;
मैं भले ही कुछ नहीं बोलता था पर मन में इच्छा तो थी ही। मैं अभी तक   कंवारा ही था, इसलिए जिज्ञासा और भी थी। कभी कभी तो उसकी मदमस्त कर देने   वाली जवानी का स्पर्श पाकर मैं बिल्कुल बेकाबू ही हो जाता था।&lt;br /&gt;
एक दिन रविवार को उसने मेरे साथ घूमने की योजना बनाई। उसने फ़ोन करके   मुझे सुबह 11 बजे बुलाया था। उससे पहले वाली रात तो मैं ख़ुशी के मारे सो   ही नहीं पाया कि मैं उसके साथ डेट पर जा रहा हूँ।&lt;br /&gt;
रविवार को सुबह जब मैं उसके फ्लैट पर पहुंचा तो वो बोली कि अभी उसे  नहाना था। मैं बैठा रहा।&lt;br /&gt;
थोड़ी देर बाद उसने मुझे अपने ड्रेसिंग रूम से आवाज़ दी,"रोबीन,प्लीज़  हेल्प मी आउट !"&lt;br /&gt;
मैं अन्दर गया तो सामने का नज़ारा देख कर तो मेरे दिल ने धड़कना बंद कर   दिया। वो सामने बस काले अंडरवीयर-ब्रा में खड़ी थी। मैं दरवाज़े पर ही ठिठक   गया और जी भर के उसके हुस्न का मुजायरा करने लगा। किसी हसीं लड़की को पहली   बार इस हालत में देखा था। उसके अर्धनग्न उरोज जैसे बाहर ही निकलना चाहते   हों ! उसकी गहरी नाभि जैसे मुझे आमंत्रण दे रही हो ! उसकी लम्बी, चिकनी,   गोरी टांगें जैसे स्वर्ग की सीढ़ियाँ हों। मैं उसकी गहराइयों में उसी पल खो   जाना चाहता था।&lt;br /&gt;
मुझे गौर से देखते हुए देखकर उसकर होंठों पे कातिलाना मुस्कान उभर आई।   वो मेरे करीब आई, मुझे दरवाज़े से टिकाया और बोली, "वुड यू हेल्प मी हूक माय   ब्रा?"&lt;br /&gt;
हाथ अपने आप उठ गए और उसके मखमली जिस्म को स्पर्श करने लगे। मेरी   उंगलियाँ उसके नग्न पीठ पर फिसलने लगीं। मैंने उसे जरा अपने पास खींचा तो   उसके स्तन मेरी छाती से चिपट गए। उसके मुँह से एक ठंडी आह निकली, जैसे कि   वो भी उतनी ही प्यासी हो जितना मैं था। पर अगले ही पल उसने मुझे जरा तेवर   से देखा और मैंने जल्दी से काम तमाम करके उसको अपनी आगोश से आज़ाद कर दिया।   वो दो कदम पीछे हटी और अपना मुँह फेर लिया। मुझे लगा कि वो गुस्सा हो गई  है  और मैं उसे मनाने की सोचने लगा। पर सामने के आईने ने उसका राज़ खोल  दिया।  मैंने देखा कि उसके होठों पे शरारत भरी हंसी तैर रही है।&lt;br /&gt;
अचानक वो मुड़ी और तेज़ी से बोली,"नॉउ, गेट आउट फ्रॉम हियर, कांट यू सी,  आई ऍम चेंजिंग?"&lt;br /&gt;
मैं बिना कुछ बोले बाहर निकल आया। बाहर निकला तो देखा कि मेरा लिंग पूरा   कड़ा हो गया था। शायद यही देखकर मारिया मुस्करा रही थी। अब मुझे पता चला  कि  यह तो मेरा इम्तहान था, अब मेरी कामनापूर्ति जल्द ही होने वाली थी। पर  अभी  इस लिंग महाशय का क्या करूँ? इसे तो बैठाना ही था। इतने में मारिया भी   वैसे ही बाहर आ गई। उसकी नजर सीधे मेरे तने हुए लिंग पर गई। मुझे झिझक  हुई  पर वो अदाओं से चलती हुई मेरे पास आई और बोली,"शुड आई सी यू डाउन  दयर?"&lt;br /&gt;
मैं तो जोश के मारे बस हाँ ही बोल पाया। वो इठलाती हुई बैठ गई और उसने   मेरी पैन्ट की जिप खोली। पिंजरे से बाहर निकलते ही लिंग फनफना उठा। उसने   मेरे मोटे लिंग को देखकर बस इतना कहा, "ओह, इट्स ह्यूज ! आई लव इट !"&lt;br /&gt;
इतना कहकर उसने मेरे लिंग पर ही अपने रसीले होठों से एक चुम्मा जड़   दिया। हाय, वो चुम्मा तो जैसे मेरी जान ले गया। 440 वोल्ट का झटका लगा जैसे   मुझे। उसने मेरा पूरा पैन्ट नीचे कर दिया और लगी मेरे लिंग और अन्डकोशों   को चाटने और चूमने। "आह ऊह्ह ,आह्ह आआआअ, ऊऊओ, आआह्ह्ह्ह, आआह्ह्ह्ह "  मेरे  से ज्यादा आवाजें तो वो कर रही थी। उसकी मधुर सीत्कारों से जैसे कमरा  भर  गया था। मेरा लिंग पूरे जोश में था। उसने पहले मेरे सुपारे को धीर  धीरे  चाटा, फिर उसे अपने मुँह में लेकर पूरा ही चूसने लगी। उसके जीभ की  लगातार  रगड़ से मेरा सारा संयम छुटने लगा। प्री-कम की एक जबरदस्त धार  मैंने उसके  मुँह में ही निकाल दी। वो और मस्त होकर चूसने लगी मुझे। मेरा  लिंग ८ इंच  लम्बा और ४ इंच मोटा था। उसे भी लेकर चूसने में उसे कोई दिक्कत  नहीं हो रही  थी। उसने इशारे से मुझे साथ देने को कहा और मैं लगा धक्के  मारने।&lt;br /&gt;
"अआह्ह, ओह, उन्म्मम्म्म्म , आह्ह्ह्हह्ह बेबी, येस , येस।।।।ऊऊऊ " बस   इन्हीं आवाजों से वो मेरे होश लिए जा रही थी। मैं जैसे उसका मुँह ही चोदने   लगा था। इतना मजा आज तक मुठ मारने में नहीं आया था जितना मारिया ने एक पल   में दे दिया था। मैंने मारिया के स्तनों को पकड़ लिया और उन्हें दबाने और   मसलने लगा। ब्रा की कैद से आज़ाद कर मैं उसके चुचूकों को मरोड़ने और चूसने   लगा। मारिया बड़ी तेज़ी से अपनी नाज़ुक उंगलियाँ मेरे लिंग पर फिराने लगी।   मैं काबू से बाहर हो गया। मैं और तेज़ धक्के मारने लगा और अपने पूरा लिंग   जड़ तक उसकी मुँह में डाल दिया। इतने पर भी मारिया बड़े मजे से चूसे जा रही   थी।&lt;br /&gt;
"आः, आः , आअ , आअ ,आआअह्ह्ह , उम्म्मम्म, येस येअह बेबी, येअह ,   ऊऊऊऊऊऊऊऊऊओ, आः अआह " जैसे शब्दों ने मुझे पागल ही कर दिया था। करीब पंद्रह   मिनट तक हम ऐसे ही चिपके रहे। मारिया के होंठों, जीभ और उँगलियों की  करामत  से मैं झड़ने तक पहुँच गया था। मैं अपना वीर्य उसके मुँह मैं नहीं  निकलना  चाहता था। पर अब खुद पर मेरा कोई वश नहीं था। मारिया ने मेरे लिंग  तो ऐसे  जकड़ा हुआ था की छुड़ाना मुश्किल था। आख़िरकार मैंने अपने सारा मुठ  उसके मुँह  में ही उगल दिया। वो मजे से अपने उरोजों को उछालती हुई मेरे मुठ  को पीने  लगी। कुछ बूँदें उसके बड़े बड़े स्तनों पे भी गिरीं। मैंने उसके  दोनों  स्तनों को हाथ में लेकर एक बार फिर मसल दिया।&lt;br /&gt;
उसकी गर्म आहों ने सारा माहौल गर्म कर दिया था। अब मैं आराम से कुर्सी   पर बैठ गया। पहले मुख मैथुन की ख़ुशी को मैंने पूरा समा लेने दिया खुद में।   इसी बीच मारिया खुद को साफ़ करके कपड़े पहन आई। मुझे देख कर एक नशीली   मुस्कान के साथ बोली,"कम ऑन, लेट्स गो आउट नॉओ।"&lt;br /&gt;
बाहर बाज़ार-मॉल घूमने में अब मेरी दिलचस्पी नहीं रह गई थी। अब तो लग   रहा था कि कब मारिया को अकेले में दबोच लूँ। हर पल जैसे पहाड़ बन गया था।   उसने मूवी देखने का प्रस्ताव रखा, पर मेरी आँखों में भूख देखकर शायद वो भी   गरम हो गई। उसने झट गाड़ी घुमाई और हम वापस उसके फ्लैट पर पहुँच गए। फ्लैट   की सीढियां चढ़ते चढ़ते ही हम दोनों अर्ध-नग्न हो गए थे, इतना जोश था।  दरवाज़ा  खोलते ही मैंने उसे गोद में उठाया और सीधा बेड-रूम में ले जाकर  बिस्तर पर  पटक दिया।&lt;br /&gt;
उसने हवस भरी नज़रों से देखा मुझे। उसकी गुलाबी फ़्रॉक को खोल फेंका तो   पता चला कि उसने नई सफ़ेद रंग की ब्रा और गुलाबी रंग की थोंग-पैटी पहनी हुई   थी। देख कर दिल बाग़ बाग़ हो गया। मैंने उसके शराबी होंठों को चूमा। उसने   अपने जीभ मेरे मुँह के अन्दर डाल दी और मैं उसके जीभ और होंठ चूसने लगा।&lt;br /&gt;
वो अपनी कलाइयाँ मेरी छाती से होकर मेरे लिंग पर फिराने लगी। कुछ ही   पलों में मेरा लंड आज़ाद होकर उसकी आगोश में झूमने लगा। वो हलके हाथों से   मेरा मुठ मारने लगी। मैं एक हाथ से उसके स्तनों को दबाने और मसलने लगा और   दूसरे हाथ की उंगलियाँ उसकी योनि पर फिराने लगा। वो पहले ही बहुत गीली हो   चुकी थी। उसकी चूत से मधुर खुशबू आ रही थी। जैसे मुझे बुलावा दे रही हो   अपनी चूत का। मैंने अपनी एक ऊँगली से उसकी पैंटी किनारे की और अब उसकी नंगी   चूत पर उंगलियाँ चलने लगा। उसके होठों को छोड़कर मैं नीचे आने लगा। पहले   उसकी भरी हुई चूचियाँ मैंने अपने मुँह में ली जिसका अरमान न जाने कब से पाल   रहा था मैं दिल में। उसके चुचूकों पर दांत से काटा मैंने।&lt;br /&gt;
एक मदमस्त आह से स्वागत हुआ मेरा। और अब मैं उसकी नाभि चाटने लगा। रुका   मुझसे भी नहीं जाता था पर उसे तड़पाने में अलग ही मजा था। जब मैं उसकी चूत   पर पहुंचा तो उसे देख कर तो मेरा रोम रोम खिल गया। मारिया की योनि इतनी   सुन्दर और मन-मोहक होगी मैं नहीं जानता था। बिलकुल साफ़, बस छोटे छोटे   सुनहरे बाल। उसकी चूत किसी गुलाब की पंखुड़ियों की तरह ही गुलाबी थी।&lt;br /&gt;
रहा न गया और मैंने भी एक जबरदस्त चुम्मा उसकी चूत पर जड़ ही दिया। उसकी   एक लम्बी सीत्कार ने मेरे जोश को दोगुना कर दिया। अब तो रहा नहीं जाता  था।  मैंने झट उसी चूत में अपनी दो उंगलियाँ डाल दी। उसे उँगलियों से ही   जबरदस्त ढंग से चोदने लगा। उसने सीत्कारों, और कराहों की जैसे छड़ी लगा दी।&lt;br /&gt;
" ओऊ य़ा, उम्म्म्मम्म्म्मम्म्म्म, याआआआआआआ, येस, येस, येस " जैसे  शब्दों से मेरे कान गूंज गए।&lt;br /&gt;
मेरी कामेच्छा और बढ़ने लगी। मैंने उसकी टांगों को ऊपर किया और उसकी   पतली सी पैंटी को निकाल कर अलग किया। उसकी गोरी संगमरमर जैसी जाँघों को   चूमा और सहलाया। अब वो पूरी नग्न थी मेरे सामने।&lt;br /&gt;
मैंने उसकी चूत को चाटना शुरू किया, पहले धीरे धीरे, सिर्फ जीभ से उसके   दाने को चूसा, फिर रहा न गया तो मैं अपनी जीभ से उसकी चूत को चोदने लगा।   तेज़ी से उंगलियाँ और जीभ चला चला कर मैंने उसे पागल कर दिया।&lt;br /&gt;
" अआह। अआह, याह्ह्ह, फक मी बेबी, फक माय पुस्सी, फक इट। फक येअह, फक इट  हार्ड , ऊऊ येअह , येःह "&lt;br /&gt;
वो पूरी तरह गरम हो गई थी। मारिया मेरी उँगलियाँ अपनी चूत से निकालकर   चाटने लग गई, जैसे अपनी ही चूत का स्वाद चखना चाहती हो। फिर उसने अपनी गांड   उछाल-उछाल कर मुझसे अपनी चूत चटवाना शुरू किया।&lt;br /&gt;
अब मुझसे भी रहा नहीं जाता था। उसकी चुदाई के ख्वाब न जाने कब से देख  रहा था।&lt;br /&gt;
अब मैंने मारिया को गोद में उठाया और पलट कर बिस्तर पर उल्टा लिटा दिया।   वो झट से कुतिया स्टाइल में आ गई। पीछे से खुली उसकी मस्त चूत और गांड   देखकर लंड और कड़ा होने लगा। मैंने उसकी चूत के मुहाने पर अपने लंड लगाया और   एक ही धक्के में अपने आधा लंड उसकी चूत में उतार दिया। मारिया कुँवारी   नहीं थी पर अभी भी उसकी चूत बहुत टाईट थी।&lt;br /&gt;
उसकी चूत रस से बिल्कुल तर हो गई थी। अन्दर जाते ही वो बड़े ही जोश से   मेरे लंड को चोदने लगी। हम दोनों मिलकर धक्के मारने लगे। जोश के मारे दोनों   को कोई ख्याल नहीं था। दूसरे धक्के में तो मेरे सारा लंड उसकी चूत में  जड़  तक बैठ गया। वो अपनी चूत से जैसे मेरे लंड को निचोड़ने लगी। हाय, इतनी   टाईट चूत को चोदने में मजा इतना आता था, बता नहीं सकता। आज भी याद करके  एक  बार मुठ मारना पड़ता है मुझे।&lt;br /&gt;
वो पूरे जोश में चुद रही थी। जैसे पूरा मुझे ही अन्दर ले लेना चाहती हो।   मैंने झुक कर उसके रसीले होंठों का चुम्बन किया, और उसके लटके हुए गोल और   मस्त स्तनों को दबाने लगा। धक्के पे धक्का लगते हुए हम दोनों हांफ रहे थे   पर न मैं झड़ा था न वो।&lt;br /&gt;
"फक मी। फक मी, ऊऊऊ येः , ऊऊ येस, फक मी रोबिन, फक मी हार्डर, फास्टर,   फक मी प्लीज़, फक इट, फक, फक, येआह्ह्ह !" वो तो बस यही सुर लगाये हुए थी।   अपने रेशमी बालों को झटका झटका का वो अपनी कमर को आगे पीछे फेंके जा रही   थी। मेरा लंड उसकी कसी हुई चूत में जैसे अमृत पान कर रहा था। उसकी चूत इतनी   कसी हुई थी कि अब तो मैं अपने कामरस को निकलने से रोक नहीं सकता था।&lt;br /&gt;
मैंने धक्के और तेज़ कर दिए। वो मेरे जोश का अंत जान कर खुद भी और तेज़  धक्के मारने लगी। अंत मैं हम दोनों साथ साथ झड़े।&lt;br /&gt;
मैंने अपने लंड को झड़ने से पहले ही उसकी चूत से निकाल लिया। वो मुड़ी और   झट से मेरे लंड को पकड़कर अपनी हाथों से निचोड़ने लगी और फिर मुँह में लेकर   उसने मेरा मुठ मार दिया।&lt;br /&gt;
आह ! लावा की तरह मेरा मुठ निकल पड़ा और उसके मुँह से निकलकर उसके   स्तनों के ऊपर से बहता हुआ नीचे आ गिरा, उसने अंतिम बूँद तक चूसा मेरे लंड   को। फिर हम अलग होकर गिर पड़े बिस्तर पे।&lt;br /&gt;
मुझे बड़ी गहरी नींद आई। जब मैं उठा तो देखा कि वो रसोई में है, वो कुछ  बना रही थी। मैंने अपने कपड़े पहन लिए और उसके पास गया।&lt;br /&gt;
वो बोली," सो, हाउ डीड यू लाइक यौर फर्स्ट टाइम???"&lt;br /&gt;
मैं उसे बस चूम सका और बोला,"आई वांटेड टू लिव आल माय लाइफ विद यू, बट  आई नो दैट इस नॉट पौसिबल ! सॉरी, बेबी !"&lt;br /&gt;
मेरा गला रुंध गया पर वो मुस्करा कर बोली,"इट वाज़ ओनली फॉर दीज   मोमेंट्स दैट वी हैड मेट। इट्स ओके (शायद हम इन्हीं खास क्षणों के लिए मिले   थे)" पता नहीं ये लड़कियां इतने भारी लम्हों में भी ऐसा कैसे बोल लेती हैं  !&lt;br /&gt;
खैर, हमारा प्रोजेक्ट ख़त्म हुआ और मैं उसे छोड़कर वापस आ गया। आज भी वो   मेरी यादों में जिन्दा है पर अब न मैं उससे मिलने की कोशिश करता हूँ न वो   मुझे याद करती है।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;span class="Apple-style-span" style="color: red; font-size: large;"&gt;premsexsena9897515075@gmail.com&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;span class="Apple-style-span" style="color: red; font-size: large;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;</description><link>http://sexisalipunem0.blogspot.com/2011/01/ki.html</link><author>noreply@blogger.com (sexisalipunem)</author><thr:total>2</thr:total></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-6722033917999163069.post-6877960236234529156</guid><pubDate>Fri, 07 Jan 2011 16:47:00 +0000</pubDate><atom:updated>2011-01-07T22:17:47.333+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">हिंदी सेक्सी स्टोरी</category><title>बम्बई वाली मौसी की चुदाई</title><description>&lt;div class="posted-info"&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: red;"&gt;प्रेम सक्सेना&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEh4mOq3_pq1izZ4RzsFOlpSxlZUWb00YmWjAab_n4sStDtyfFwVCZS8iX5tlQSFjTetidl0_j1Gz8vIwqT8jKms8wZoDinEshJMyKK3aLZnNf8CqYSKIqtZi4Q8nnJ0hB4fKVuijdaIjRM3/s1600/p1295.jpg" imageanchor="1" 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,गप्पे मारना  और मस्ती करना. अभी 3 महीने पहले ही मेरे बड़े भैया की भी नई&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: red;"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: red;"&gt;नई शादी हुई  थी. भाभी बहुत अच्छी थी.मेरा भी वह बहुत ध्यान रखती थी.मुझे फिल्म देखने का  बहुत शौक था.मैं कभी अपने दोस्तो के साथ, तो कभी अपने घर पर लाकर फिल्म  देखता था.अभी कुछ दिन हुवे थे की मेरी एक दूर की मौसी जो बॉम्बे रहती थी,  वो हमारे यॅन्हा घूमने आई और कुछ दिन रहने के लिए भी. मैने उनके बारे मॅ  सुना तो था , पर देखा आज पहली बार ही था.जब मैं उनसे मिला तो वो मुझे थोड़ी  देर तक उपर से नीचे तक निहारती रही. फिर अचानक वह मेरे पास आकर मेरे दोनो  गालो को अपने हाथो से खेंचते हुवे बोली, तुम बहुत क्यूट हो तुम. और फिर  हंसते हुवे वो अंदर चली गई और मैं तो उन्हे देखता ही रहा. रात को खाना खाने  के बाद मैं छत के उपर एक बिस्तर पर लेटा -लेटा आसमान मॅ तारो को देख रहा  था और उसी द्रिश्य को याद कर रहा था जब मौसी ने मेरे गाल पकड़े थे. हाँलाकि  उस वक़्त मुझे ये सब कुछ अजीब लगा, पर अच्छा भी. और लगे भी क्यों ना आख़िर  पहली बार किसी लड़की के हाथो ने मुझे छुआ था. वो मेरी मौसी तो थी पर एकदम  यंग लड़की. उनकी उम्र 28-29 के आसपास थी .बदन बिल्कुल कोमल था . रंग भी  एकदम गौरा था. दिन मैं कई कई बार मैं मौसी को देखकर रोमांचित हो उठता था.  मेरी मौसी भी मुझे नज़रे मिलने पर बड़ी स्टाइल से देखती थी. यूँ तो    घर में और भी कई थे पर मौसी का प्यार मुझ पर ज़्यादा ही बरस रहा था.              अब मै आपको वह बात बताता हूँ ,जिससे मेरी जिंदगी मे बदलाव  आया.गर्मियों के दिन थे हम सभी घर के लोग खाना खाने के बाद रात को घर की छत  पर ही सोते थे.केवल मेरे भैया-भाभी के अलावा . उस रात भी सब छत पर ही सो  रहे थे .ऐसे मॅ रात के करीब 1.30 बजे मुझे अचानक प्यास लगी थी. मै पानी  पीने के लिये नीचे आ गया था. मैने रसोई घर मे से फ्रिज मे से पानी की बोतल  ली और वापस उपर की और जाने लगा. तभी मुझे कुछ कुसफुसाहट सी सुनाई दी, वह  आवाज़े भैया और भाभी के कमरे से आ रही थी.में उनके कमरे के पास जाकर दरवाजे  से कान सटा कर सुनने लगा , भाभी- भैया से कह रही थी--- थोड़ा और उपर  आओ.रूको एक मिनट , हाँ अब डालो ,हाँ डालो, ज़ोर से डालो.थोड़ा धक्का दो ना,  आह ,करो यार, अच्छी तरह से करो..आह मज़ा आ रहा है...... यह सब सुन कर मुझे  कुछ अजीब सी फिलिंग होने लगी उनकी बाते सुन कर मुझसे रहा नही गया.अंदर  क्या चल रहा है, यह जानने के लिये में उत्सुक था,इसलिए मै उनके कमरे की  खिड़की से अंदर झाँकने लगा, किस्मत अच्छी थी की खिड़की खुली हुई थी, और  मुझे अन्दर का नज़ारा देखने को मिला.अन्दर जब मैने देखा तो भैया पूरे नंगे  होकर भाभी के ऊपर चढ़े हुवे थे और भाभी ने अपनी दोनो टाँगे फैलाकर भैया को  अपनी मस्त मस्त बाँहो में जकड़ा हुवा था. और भैया ज़ोर-ज़ोर से भाभी को  धक्के दे रहे थे,और भाभी कह रही थी की--हाँ बस इसी तरह करते रहो , मुझे  बड़ा मज़ा आ रहा है, थोड़ा निकल कर सीधा डालो, हाँ अब सही है, अब करो ,ज़ोर  से करो बड़ा मज़ा आ रहा है.,आह...आहह...आह्ह्ह्ह.....उहह. भाभी के मुँह से  ऐसी मद होश भारी चीखे सुनकर, और अन्दर का नज़ारा देख कर मुझसे रहा नही गया  , मुझे कुछ होने लगा, मेरा लिंग अपने आप खड़ा हो गया, तब मैने पानी की  बोतल को एक तरफ रख कर अपने हाथ से अपने लिंग की चमड़ी को उपर नीचे करना  शुरू किया. ऐसा करने में मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था, धीरे -धीरे मेरी  उपर-नीचे करने की ये रफ़्तार बढ़ती गई और अंत मे एक सफेद रंग का द्रव्य  लिंग को झटके देता हुवा बाहर निकला और लिंग ढीला पड़ गया. अब मुझे बहुत  रिलेक्स महसूस हो रहा था. मै उस द्रव्य को पोंछ रहा था की , तभी, एक हल्की  सी हँसी मुझे सुनाई दी. मैने नज़रे उठा कर देखा तो कोई और नही बल्कि मेरी  बॉम्बे वाली मौसी खड़ी थी.वो मुझे देखकर मुस्कुराने लगी. लेकिन मुझे थोड़ी  शर्म आई तो मैं बिना कुछ कहे उपर छत पर चला गया और सो गया. सुबह जब आँख  खुली तो देखा की घर के सभी सदस्य कुछ तैयारियों मे लगे थे.बाद मैं पता चला  की वे सब मेरे चाचा जी के लड़के की सगाई -समारोह मे जाने की तैयारी कर रहे  थे. पर मुझे घर की देखभाल के लिये वही रहना था जब सब जाने लगे तो मेरी  मम्मी ने मेरे पास आकर कहा- बेटा घर का ध्यान रखना और तुम दोनो बाहर से कुछ  लाकर खा लेना.हमे आने मे देर हो जायेगी. जब मैने पूछा की दूसरा कौन है तो  मम्मी ने कहा की दूसरी तेरी मौसी है. उसकी तबीयत खराब है इसलिए हम उसे साथ  लेकर नही जा रहे है. तुम घर का और मौदी का ध्यान रखना. यह कहकर सब वहाँ से  विदा हो गये और घर पर सिर्फ़ मैं और बॉम्बे वाली मौसी ही बचे थे. मैं नहा  धोकर बाहर से खाना ले आया . हम दोनो ने खाना खाया और मौसी तो बेडरूम मॅ  जाकर सो गई और मैं टी.वी. देखने लग गया.टी.वी. देखते देखते शाम के  चार बज  चुके थे. मौसी की तबीयत खराब होने की वजह से मैने ही चाय बनाकर पी और  पिलाई. तभी पापा का फोन आया की लंबा रास्ता होने की वजह से ,वो लोग लोग लेट  हो जाएँगे और कल सुबह ही आ पाएँगे. यह सुनकर मौसी के चेहरे पर एक हल्की सी  मुस्कान थी वह बिस्तर से उठी, और मेरे पास आकर बैठ गई,और पूछा क्या कर रहे  हो? मैं उस वक़्त टी.वी.देख रहा था तो उन्होंने कहा की क्या यार तुम ऐसी  फ़िल्मे देखते हो, बोर नही होते क्या, देखो, आज रात को हम लोग खाना खाकर एक  ही कमरे मैं सोएंगे. क्योंकि मुझे अकेली सोते डर लगता है,और बॉम्बे से कुछ  फ़िल्मे लाई हूँ वही देखेंगे ऐसा कहकर वह उठी और मेरे गाल पकड़कर मेरे  होठों पर एक लंबी सी पुच्चि ले ली,और हंसते हुए चली गई. ये मेरे लिए एक नया  अनुभव था.मुझे बड़ा मज़ा आया. अब तो मुझे भी रात का ही इंतजार था.मैं अपने  काम मे लग गया था.धीरे -धीरे शाम होने लगी,शाम का खाना मौसी ने ही बनाया  था. मौसी ने मुझे बड़े प्यार से खाना खिलाया .अब हम खाना खाकर और सारा काम  निपटाकर अपने रूम मे चले गये.कमरे मे मौसी ने अपने सूटकेस से एक बैग निकाला  और मुझे कहा की इन वी सी डी'स मे से कोई एक चलाकर देखो तब तक मैं थोड़ी  देर मे आती हूँ.यह कहकर वह अपना बैग लेकर बाथरूम मे चली गई .मैने जब सी डी  लगाई तो फिल्म शुरू हुई. उस फिल्म के शुरुआती द्रिश्य देखकर तो मैं दंग रह  गया.फिल्म के नायक और नायिका बिल्कुल नंगे थे और एक दूसरे को चूम रहे  थे,फिल्म चलती जा रही थी और मेरा दिल धड़कता जा रहा था. मुझे वापस वैसा ही  एहसास हो रहा था ,जैसा भैया और भाभी को देखकर हो रहा था.तभी मौसी ने कमरे  मे प्रवेश किया, मैने उन्हे देखा तो देखता ही रह गया.मौसी ने काले रंग की  जाली दार नाइटी(जो उनकी छातियों से लेकर घुटनो से उपर तक ही थी),पहन रखी  थी.उस नाइटी मे उनका गौरा और कोमल बदन ऐसे झलक रहा था,जैसे अंधेरे मे  प्रकाश... मैं तो मौसी को देखता ही जा रहा था, की मौसी धीरे-धीरे चलकर मेरे  पास आई,और मेरे सामने खड़ी होकर अपने होठों को मेरे होठों के पास ले आई और  चूमने लगी. मैं बड़ा आनंदित हो रहा था,पर अचानक मैं संभला,मैने कहा,मौसी  ये सब ग़लत है आप रिश्ते मे मेरी मौसी लगती हो और.......मेरे कुछ कहने से  पहले ही मौसी बोल पड़ी,- तुम जो सोच रहे हो ,वो ग़लत है राजीव .अपने दिमाग़  से बाते,और्र मन  से ये डर बिल्कुल निकल दो को हम जो कर रहे है वो ग़लत कर  रहे है.हम एक दूसरे की ज़रूरत है राजीव.और हाँ ,तुम मुझे अकेले मे सिर्फ़  कामिनी ही कहा करो.और अभी सारी बातो को भूलकर सिर्फ़ मुझे देखो.ऐसा कहकर  मौसी ने मुझे धक्का देकर बिस्तर पर लिटा दिया और खुद मेरे उपर आकर मुझे  चूमने लगी.फिर मैने भी सोचा की जब खुद कुआँ प्यासे के पास आ रहा है तो तो  पीने मे क्या बुराई है.यह सोचकर मैने मौसी को अपनी बाँहो मे ज़कड़ लिया.अब  हम दोनो ही एक दूसरे मे खो चुके थे.धीरे-धीरे हम दोनो ने ही अपने बदन से  सारे कपड़े उतार फेंके, हम दोनो बिल्कुल नंगे थे.मौसी का भरा-भरा ,गौरा  ,कोमल बदन देखकर मैं और उत्तेजित हो रहा था ,मैं उसे पाने को लालायित हो  रहा था.मैं खड़ा था और मौसी पलंग पर लेटी  थी और मुझे अपनी आँखो से गुप्त  इशारे कर रही थी.मैने टी.वी. बंद किया और मौसी पर टूट पड़ा. मौसी के गुलाबी  होठों को चूसने का मज़ा ही कुछ और था.मौसी ने तो मुझे खुला निमंत्रण दे  रखा था.और वो भी मेरा साथ दे रही थी.तभी मौसी बोली.---राजीव आज मैं  तुम्हारी हूँ, तुम मेरे साथ जो करना चाहो करलो , मेरा अंग-अंग तुम्हे पाने  के लिये तड़प रहा है.मैने जब पहले दिन जब तुम्हे देखा तब ही मन मे ठान लिया  था की मैं तुम्हे अपना बनके रहूंगी.ना जाने तुम्हारे अंदर ऐसी कौनसी बात  है की मैं तुम्हारी तरफ आकर्षित हो रही हूँ. आज तुम मेरे इस मांसल बदन का  भरपूर मज़ा लो.मुझे अपनी रखैल्  ,अपनी रंडी समझ कर करो. तभी मैने कहा मैं  तो तुम्हे घोड़ी बनाकर करूँगा मेरी जान.......तो मौसी मुस्कुराकर बोली,  अरे, मैं तो तेरे लिये घोड़ी क्या कुत्ति भी बनने को तैयार हूँ . वाह मेरी  कुत्ति चल टाँगे चौड़ी कर और भौंक.ऐसे कह कर हम दोनो हँसने लग गये. तब मौसी  ने कहा ,देख राजीव मैं शुरू करती हूँ ,-तुझे ऐसा मज़ा दूँगी की तू तो मस्त  हो जायेगा. फिर करने का मज़ा भी दुगुना आयेगा. यह कहकर कामिनी मौसी ने  मेरा लिंग अपने हाथ मे पकड़ लिया और उसे मुँह मे लेकर चूमने लगी.वो चूमती  जा रही थी और मैं आनंदित हो रहा था.उसके मुँह से साबड-चुपर की आवाज़ से एक  अलग ही मज़ा आ रहा था. वह चुस्ती जा रही थी और मेरे मुँह से अनायास ही ये  शब्द निकल रहे थे.......... आह चूस , मज़ा आ रहा है, और चूस साली कुतिया  चुस्ती रह ,ज़ोर ज़ोर से चूस ना हराम जादि ,पूरा लेकर चूस..आअहह.  सच.....कितना मज़ा आ रहा है.तभी चुसते चुसते मौसी रुकी, अपने बैग से एक तेल  की शीशी निकली और हँसती हुई मेरे पास आई.उसे देखकर मैने कहा-साली तू सच मे  रंडी तो नही है पूरा जुगाड़ लेकर चलती है,तो वो बोली --अरे नही यार !!!  रखना पड़ता है, चलो अब एक काम करो.इस शीशी से हथेली मे तेल लेकर अपने दूसरे  हाथ की उंगली को तेल मे पूरा डुबो लो और (धीरे से हंसते हुये ).... उस   उंगली को मेरी गांद मे घुसादो ,और दो-तीन उंगली तेल की मेरी गांद मे  फिरादो,जब मैने मौसी की गांद मे तेल लगा  दिया तो उसने भी अपनी हथेली मे तेल लेकर मेरे लिंग पर मालिश कर दी और बोली-  आओ राजीव मे कुत्ति बनती हूँ और तुम मेरी गांद मे अपना लिंग घुसेड  दो.देखना बड़ा मज़ा आयेगा,अब जल्दी करो.मौसी के इतना कहते ही मैने अपना काम  शुरू कर दिया,जब मैं अपना लिंग मौसी की गांद मे डाल रहा था तो एक पल के  लिये वह ज़ोर से चीखी,पर तेल की चिकनाई से लिंग अंदर जाता रहा और मैं भी  आगे पीछे होता रहा. सच मे उसकी गांद मे लिंग डालने के बाद ऐसा लग रहा था की  किसी ने कोई कठोर पाइप किसी नरम निप्पल मे डाल दी हो.सच बहुत मज़ा आ रहा  था.मैं ज़ोर ज़ोर से मौसी की गांद मार रहा था. और मौसी भी मेरा जोश बढ़ा  रही थी, वह कह रही थी--आहह..... राजीव जितना दम है उतना दम लगा दो मेरा  पूरा शरीर तुम्हारे लिये है, तुम्हारे मोटे-मोटे लिंग से ज़ोर ज़ोर से  धक्के मारो ,मार -मार कर मेरी गांद सुजादो, आहह ..... करो राजीव करो  ,दिखादो अपनी मर्दानगी इस तुम्हारी प्यारी कुत्ति को ,मैं करता जा रहा था  और मौसी कहती जा रही थी .हम दोनो ही मदहोशी मे पागल हो रहे थे.मौसी की  कच्चे माँस की नरम गांद मारने का मज़ा ही कुछ और था. वो भी अपनी गांद को  पीछे से उठा -उठा कर मेरे पूरा का पूरा ले रही थी और पूरा साथ दे रही थी.   धीरे-धीरे मेरी धक्के मारने की रफ़्तार तेज होती जा रही थी.मौसी कह रही थी  -वाह राजीव वाह , तुम तो गांद मारने मे एक्सपायर्ट हो,मैने बोला,-चुप रह  साली गंदमरी रांड़ , बस कुत्ति बनी रह और गांद मरवाती रह.आह,आह बड़ा मज़ा आ  रहा है मेरी रांड़.......अहह......... और तभी मेरी रफ़्तार के साथ मेरा  लिंग और कड़ा हो गया, दो-तीन अंतिम झटको के साथ ही मेरा वीर्य बाहर निकल  गया,जब मैने अपने सूजे हुए लंड को बाहर निकाला तो मौसी ने फुर्ती से पलट कर  उसे चाटना शुरू कर दिया. ऐसा लग रहा था जैसे वह कई दिनो से प्यासी थी.मौसी  बोली- आह राजीव सच मज़ा आ गया ,तुम्हारा वीर्य तो बहुत गाढ़ा और टेस्टी  है, इसे चाटना बहुत अच्छा लगा.मौसी की ऐसी बाते सुनकर और चाटते देखकर मुझे  बहुत अच्छा लग रहा था , पर, सच कहूँ तो मुझे मौसी को चाटते देख कर , मुँह  मे ऊबाक आ रहे थे. मौसी ने मेरे लिंग को पोंछ दिया और कहा चलो राजीव अब  सोते है थोड़ी देर बाद मे दूसरा राउंड लेंगे. और इस तरह हम दोनो नंगे ही  एक-दूसरे से लिपट कर सो गये. सुबह के 4 बज रहे थे. अचानक मेरी नींद खुली, मैने देखा की मेरे लिंग के साथ  कुछ हरकत हो रही है.सामने देखा तो मौसी मेरे लोड्े को चाट रही थी. मैने  कहा-क्या कामिनी सुबह -सुबह शुरू हो गई ?, तब मौसी हंस कर बोली ,क्या करूँ  रहा नही जा रहा था .चलो न राजीव तुम्हारे घर वाले आ जाय उससे पहले एक बार  और करते है. इतना कहकर वा मेरे लोड्े को और ज़ोर -ज़ोर से चूसने लगी. और  में भी उत्तेजित होने लगा.फिर मौसी बोली रात को तूने मेरी गांद मारी थी ,चल  अब मेरी चूत का मज़ा ले ले. इतना कहकर मौसी ने लेटकर अपनी टाँगे चौड़ी करी  और मेरे लंड को अपनी चूत के छिल्को से भिड़ाया.मैने भी जोश मे आकर एक ज़ोर  का झटका मारा तो लंड सीधा मलाईदार चिकनी चूत मे घुस गया. लंड के अंदर  घुसते ही मौसी तो तड़प उठी .उसके मुँह से सिसकारियाँ  निकलने लगी .मौसी  बोली - आ राजीव ज़ोर से चोदो ,आज अपनी इस रंडी की प्यास बुझा दो. कितने दिन  हो गये  ऐसे लंड का स्वाद चखे बिना. चोदो आज ज़ोर-ज़ोर से चोदो.उसकी ऐसी  बातो से में भी जोश मे आ रहा था, सो मैने अपने झटको की रफ़्तार और तेज कर  दी. में पूरा जोश मे था. में अपने लंड को आयेज-पीछे करके मौसी की चूत मे  पेल रहा था. मौसी ने भी मुझे अपनी गौरी जाँघो के बीच मे फँसा रखा था और  अपने कूल्हे उठा -उठा कर मेरा जोश बढ़ा रही थी.और कह रही थी चोद ,ज़ोर से  चोद अपनी रंडी को, आज मौका मिला है जी भर के कसर निकाल ले, मेरी चूत की  धज्जियाँ उड़ा दे, फाड़ दे मेरी चूत, फाड़-फाड़  के खून निकाल दे.चोद राजीव  चोद. मौसी के मुँह से ऐसी जोश भारी बाते सुनकर मुझे मज़ा आ रहा था.में और  जोशीला हो रहा था.आख़िर मे मैने अपनी रफ़्तार बढ़ा कर अपनी मौसी की चूत मे  ही पानी छोड़ दिया.मेरी पिचकारी अंदर जाते ही मौसी मचल उठी.और मेरे लोड्े  को और लोड्े के पानी को चप-चप करके चाटने लगी. मैं मौसी को देख रहा था और  मौसी लोड्ा चाटने मे मस्त थी. तो दोस्तो बॉम्बे वाली मौसी की चुदाई की  कहानी. मेरा मानना  है की हर स्त्री -पुरुष को चुदाई का मज़ा लेना चाहिये ,  इसमे केवल सगे रिश्ते -नातो को छोड़कर सबके साथ सेक्स का आनंद लेना  चाहिये. आपको ये कहानी कैसी लगी मुझे मेरी mail id -- premsexsena9897515075@gmail.com पर ज़रूर लिखे. और कोई सेवा हो तो भी लिखे . स्त्रियों के लिए मैं हाजिर  हूँ. धन्यवाद .&lt;/span&gt;</description><link>http://sexisalipunem0.blogspot.com/2011/01/blog-post_7341.html</link><author>noreply@blogger.com (sexisalipunem)</author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEh4mOq3_pq1izZ4RzsFOlpSxlZUWb00YmWjAab_n4sStDtyfFwVCZS8iX5tlQSFjTetidl0_j1Gz8vIwqT8jKms8wZoDinEshJMyKK3aLZnNf8CqYSKIqtZi4Q8nnJ0hB4fKVuijdaIjRM3/s72-c/p1295.jpg" 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&lt;div class="posted-info"&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: red;"&gt;प्रेम सक्सेना &amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;
&lt;span class="Apple-style-span" style="color: red;"&gt;मेरा&amp;nbsp; नाम सीमा, उम्र 26 साल है। मैं एक शादीशुदा औरत हूँ।  मैं सेक्स में  बहुत रुचि रखती हूँ। मेरे पति सुनील एक अध्यापक हैं। वो  लंबे और सुन्दर  दीखते हैं। वो मेरे सौन्दर्य के कायल हैं। मैं और मेरे पति  ब्लू फिल्म  देखते हैं और इन्टरनेट पर मुझे काफी लड़कों ने नंगा भी देखा  है, वह मेरे  पति की महेरबानी है। मेरे पति अक्सर मैसेन्ज़र पर चैटिंग करते  हैं और लड़कों  को मुझे  नंगा दिखाते हैं। इससे उनको मज़ा आता है, हालांकि  मुझे भी कोई  फर्क नहीं पड़ता।&lt;br /&gt;
एक दिन की बात है जब शाम को मेरे पति पॉँच 18 से 20 साल के लड़कों के   साथ चैट कर रहे थे। वो सब एक ही कैम पर थे और मेरे पति ने मुझे उनके सामने   नंगा होने को कहा। मैं फटाफट अपने कपड़े उतारकर नंगी हो गई। उस वक़्त जैसे   मेरे मन में कुछ नया विचार आ रहा था, मैं उन पांचों से चुदवाना चाहती थी।   मैंने उनका आईडी याद रखकर दूसरे दिन जब सुनील स्कूल गए तब मैंने मैसेन्ज़र   में आईडी डाला। इत्तिफाक से उनमें से एक लड़का ऑनलाईन था। मैंने उससे चैट   किया और मैंने उसे बताया कि मैं सुनील की पत्नी हूँ। फिर उसने मुझे कैन पर   नंगा होने को कहा।&lt;br /&gt;
मैंने ऐसा ही किया।&lt;br /&gt;
फिर मैंने उससे कहा- मैं तुम पांचों से एक साथ चुदवाना चाहती हूँ।&lt;br /&gt;
वह मान गया और उसने मुझे दो दिन के बाद रात को उसके घर आने को कहा। पर   मैं रात को नहीं जा सकती थी, तो हमने जब सुनील स्कूल जायें तब मेरे घर पर   अगले दिन ही आने का कार्यक्रम बनाया। मैंने उसका फोन नंबर ले लिया और कहा-   जब सुनील स्कूल के लिए निकलेंगे, तब मैं मिसकॉल कर दूंगी।&lt;br /&gt;
तो हमारी बात पक्की हो गई।&lt;br /&gt;
उस दिन मैं खूब उत्साहित थी। मैंने काफी लड़कों को उस दिन अपना नंगा बदन   दिखाया। मुझे इसकी आदत हो चुकी थी। मैं हर वक्त कल का इंतज़ार कर रही थी।   उस दिन रात को सुनील के लंड का जी भर के मज़ा लिया पर मैं उस वक्त दूसरे  दिन  के बारे में सोच कर सेक्स में इतना सहयोग दे रही थी।&lt;br /&gt;
अगली सुबह हुई और मैंने सुनील के लिए नाश्ता बनाया। सुनील नाश्ता कर के  कपड़े पहनने लगे और बोले- आज स्कूल में ऐक्स्ट्रा क्लास है।&lt;br /&gt;
मैं मन ही मन खुश हुई और नहाने चली गई। मैंने नहाने के बाद एकदम तंग   ब्रा पहनी जिससे मेरे स्तन एकदम सिकुड़ गए। फिर मैंने गुलाबी रंग की साड़ी   पहनी और एकदम उत्तेजक परफ़्यूम लगाया। फिर मैंने उस लड़के को मिसकॉल दिया।&lt;br /&gt;
उसने फोन किया और मैंने कहा- पीछे के रास्ते से आ जाना !&lt;br /&gt;
मैंने उसको पता तो दे ही दिया था।&lt;br /&gt;
दस मिनट के बाद वो सब आ गए। पांचों एकदम हैंडसम दिख रहे थे। मैंने सब को  बिठाया और उनको पानी दिया फिर चाय नाश्ता कराया।&lt;br /&gt;
मैंने उन सबसे नाम पूछा तो उनके नाम अंकित, सलीम, सुरेश, जय और ज़ॉन थे।   उनमें से ज़ॉन मुझे सबसे अच्छा लगा था। हमने पहले सामान्य घर-बार की बातें   की फिर अंकित बोला- मैं ब्लू फिल्म की सीडी लाया हूँ।&lt;br /&gt;
मैंने कहा- ठीक है ! चलो बेडरूम में चलते हैं।&lt;br /&gt;
फिर जय ने ब्लू फिल्म लगाई। उसमें भी एक लड़की को पाँच मर्द चोद रहे थे।  मैं बिस्तर पर ज़ॉन के आगे और आजू-बाजू बाकी के बैठे थे।&lt;br /&gt;
अचानक ज़ॉन ने मेरी पीठ पर हाथ फेरना चालू कर दिया। मैंने बगल में बैठे   अंकित की जांघ पर हाथ रखा, अंकित ने मेरा हाथ पकड़कर उसके लंड पर रख लिया   जो काफी बड़ा था। फिर मैंने उसका लंड निकाला और उसे हिलाने लगी।&lt;br /&gt;
तभी सुरेश बोला- रुको, अभी नहीं !&lt;br /&gt;
उसने जय को आंख मारते हुए कहा- मैं कुछ लाता हूँ !&lt;br /&gt;
मैंने कहा- क्या ?&lt;br /&gt;
तो सलीम बोला- रुक तो सही रंडी !&lt;br /&gt;
मुझे उसकी गाली से मजा आ रहा था, मैं कुछ बोली नहीं !&lt;br /&gt;
थोड़ी ही देर में सुरेश कैमरा और दो आदमी लाया।&lt;br /&gt;
मैंने कहा- यह सब क्या है?&lt;br /&gt;
तो जॉन ने मेरे स्तन दबाते हुए कहा- यह दोनों हमारी ब्लू फिल्म बनायेंगे  !&lt;br /&gt;
मैंने मना किया पर वो लोग नहीं माने।&lt;br /&gt;
सलीम बोला- रंडी, चुदवाना है तो बोल ! नहीं तो हम चलते हैं?&lt;br /&gt;
मुझमें वासना कूट-कूट कर भरी थी, तो मैंने कहा- ठीक है !&lt;br /&gt;
हालांकि मैं मन ही मन चाहती थी कि मेरी ब्लू फिल्म बने।&lt;br /&gt;
फिर वो आदमी बोले- अब शुरु करो ! हम कैमरा ऑन करते हैं !&lt;br /&gt;
वो बोले- ठीक है !&lt;br /&gt;
फिर कैमरा-मैन ने सुरेश के सामने कैमरा रखा, उसने हम सबका परिचय दिया।   फिर ज़ॉन आगे बढ़ा और मेरे होंठों पे चूमने लगा। पीछे से सलीम मेरे स्तन   दबाने लगा। फिर जॉन ने मेरी साड़ी उतारी, मैं अब सिर्फ ब्लाउज़ और पेटीकोट   में ही थी।&lt;br /&gt;
फिर सुरेश ने मेरे वक्ष पर किस किया और मेरा ब्लाउज़ एक ही झटके में फाड़  डाला।&lt;br /&gt;
तभी कैमरा-मैन बोला- उस रंडी को बोल कि थोड़े नखरे दिखाए !&lt;br /&gt;
मैंने अपने स्तनों को पकड़कर कर वासना से भरी हुई हंसी निकाली। फिर जय   ने मुझे बिस्तर पर बैठने को कहा। मैं बैठ गई और जय ने लम्बा सा लण्ड मेरे   मुँह में धर दिया। मैं उसे चूसने लगी। फिर सलीम ने मेरी ब्रा खोल दी मेरे   बड़े बड़े स्तन लहरा कर बाहर आ गये। फिर सुरेश और सलीम मेरी चूचियों को   चूसने लगे। जय का लंड मैंने फिर से मुँह में ले लिया। अंकित एक तरफ़ खड़ा था।   जॉन ने मेरे पेटीकोट का नाड़ा खोल कर पेटीकोट निकाल दिया और मेरी पेंटी को   चूसने लगा। फिर उसने मेरी पेंटी निकाल दी। कैमरा-मैन ने नजदीक से मेरी   बाल-रहित चूत को शूट किया।&lt;br /&gt;
अब मैं बिलकुल नंगी थी। तब एक कैमरा-मैन बोला- हरामजादी, तू तो नंगी हो  गई ! अब उन लोगों को नंगा तेरा बाप करेगा ?&lt;br /&gt;
मैंने सब को जुदा करके बारी बारी से सब को नंगा किया। मैंने पाया कि  सलीम का लंड सबसे लम्बा था, मेरे पति के लंड से भी लम्बा !&lt;br /&gt;
फिर मैं बारी बारी से सबके लंड चूस रही थी। फिर अंकित ने मुझे उठाया और   बिस्तर पर पटक दिया। सलीम मेरे पास में आकर लेट गया और उसने मुझे लंड को   चूत में डालकर बैठने को कहा। मैंने धीरे से वही किया, सलीम का लंड फटाक से   अन्दर चला गया। मैं चिल्लाई, फिर मेरे मुँह से अह्ह्ह्ह्ह्ह् अग्ग....   आवाजें आने लगी तो अंकित ने अपना छोटा पर मोटा लंड मेरे मुँह में डाला। मैं   अब आवाज़ नहीं कर रही थी।&lt;br /&gt;
फिर ज़ॉन ने पीछे से मेरी गांड पर लंड रखा और एक ही झटके में गांड में   लंड डाल दिया। मुझे बहुत मीठा सा दर्द हुआ। सुरेश और जय के लंड मेरे हाथों   में थे और मैं हाथ से उनके लंड को हिला रही थी। फिर बारी बारी से सबने  मेरी  गांड, चूत, मुँह और हाथों को चोदा। फिर वो सब अलग हो गए और बारी बारी  से  मेरे मुँह में अपना पानी छोड़ा। मैं सारा पानी गटक गई। फिर सलीम ने  मुझे  कपड़े पहनाये और हमारी ब्लू फिल्म ख़त्म हुई।&lt;br /&gt;
मेरी प्यास बुझ गई थी। मैं मुस्कुरा रही थी क्योंकि मुझे जन्नत का आनंद  मिला था।&lt;br /&gt;
अचानक दोनों कैमरा-मैन अपने कपड़े निकलने लगे।&lt;br /&gt;
मैंने कहा- यह क्या कर रहे हो?&lt;br /&gt;
तो वो बोले- चल रानी, अब हमारा मजा ले !&lt;br /&gt;
मैं कुछ नहीं बोल सकी और उन्होंने ने भी मुझे चोदा और उन्होंने तो मेरे   स्तनों और चूत को काट-काट कर जख्मी कर दिया था। पर मुझे उसमें मजा आया था।   फिर  सबने कहा- तेरी ब्लू फिल्म हम तुझे मेल कर देंगे और एक महीने में  सारे  मुंबई के ब्लू फिल्म के दिवाने यह देख चुके होंगे।&lt;br /&gt;
मैंने कहा- ठीक है ! आज से मैं ब्लू फिल्म की रंडी बन गई !&lt;br /&gt;
सब हंसने लगे। फिर सब एक बार फिर मेरी चूत को चाट कर और उसकी फोटो खींच  कर चले गए।&lt;br /&gt;
मैं वो दिन कभी नहीं भूलूंगी।&lt;br /&gt;
premsexsena9897515075@gmail.com&lt;br /&gt;
&lt;/span&gt;</description><link>http://sexisalipunem0.blogspot.com/2011/01/meri.html</link><author>noreply@blogger.com (sexisalipunem)</author><thr:total>0</thr:total></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-6722033917999163069.post-4554352516267262694</guid><pubDate>Fri, 07 Jan 2011 16:19:00 +0000</pubDate><atom:updated>2011-01-07T21:49:48.527+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">हिंदी सेक्सी स्टोरी</category><title>नशीली चूत का रस</title><description>&lt;section id="image"&gt;        &lt;img alt="नशीली चूत का रस" src="http://static.sucksex.com/assets/timthumb.php?src=media/2010/07/pof_4c307c4c6f1b3.jpg&amp;amp;w=460&amp;amp;h=300&amp;amp;zc=1" width="460" /&gt;      &lt;/section&gt;              &lt;br /&gt;
&lt;div class="posted-info"&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: red;"&gt;प्रेम सक्सेना &amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;
&lt;span class="Apple-style-span" style="color: red;"&gt;बात उन दिनो की है जब मैं १२वीं की बोर्ड की परीक्षा देकर  फ़्री हुआ था और रिजल्ट आने में तीन महीने का समय था। ये वो समय होता है जब  हर लड़का अपने बढ़े हुए लंड के प्रति आकार्षित रहता है साथ-साथ बढ़ती हुई  काली-काली घुंघराली झांटे उसका मन जल्दी से किसी नशीली चूत का रस पान करने  को प्रेरित करती हैं। मैने फ़्री टाइम को सही इस्तेमाल करने के लिये एक  इंगलिश स्पीकिंग कोर्स ज्वाइन कर लिया। हमारे घर से थोड़ी दूर पर एक नये  इंगलिश कोचिंग सेंटर खुला था जहां मैं अपना एडमीशन लेने पहुंच गया। मेरे  लौड़े की किस्मत अच्छी थी वहां जाते ही मेरा सामना एक कमसिन, अल्हड़, मदमस्त,  जवान, औरत से हुआ जो पता चला वहां की टीचर है। उसके गोरे-गोरे तन बदन को  देखते ही मेरा तो लौड़ा चड्ढी में ही उचकने लगा। उसकी खुशबूदार सांसो ने मन  मे तूफ़ान पैदा कर डाला था। मन तो उसके तुरंत चोदने को कर रहा था पर क्या  करता वहां तो पढ़ने गया था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
एडमीशन देते हुए वो भी मुझे आंखों ही  आंखों में तौल रही थी। वो २७ साल की भरे बदन वाली मैडम थी। शादी-शुदा, उसकी  दोनो बूब्स (चूचियां) आधा किलो की थी और उसके गद्देदार मोटे चूतड़ (गांड)  उभार लिये संगमरमर की मूरत से तराशे हुए हिलते ऐसे लगते थे जैसे कह रहे हो-  “आजा राजा इस गांड को बजा जा”&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैने एडमीशन लेकर पूछा “कितने बजे  आना है मैडम?” वोह मुस्करा कर बोली “सुबह ७ बजे आना।” “साथ क्या लाना है?”  “वो बोली एक कोपी बस”। मैं घर वापस आ गया पर सारी रात सुबह होने के इंतज़ार  में सो न सका। रात भर मैडम की हसीन मुस्कान और चेहरा सामने था। मैं बार-बार  उनके ब्लाउज़ में कैद उन दो कबूतरों का ध्यान कर रहा था जो बाहर आने को  बेताब थे। उनकी चूत कैसी होगी? गुलाबी चूत पे काला सिंघाड़ा होगा, उनकी चूत  का लहसुन मोटा होगा या पतला, मुलायम मीठा या नमकीन, कितना नशा होगा उनके  चूत के रस में? उनकी बुर की फांके गुलाब की पत्तियों सी फैला दूं तो क्या  हो? ये कल्पना और मदहोश कर रही थी जिससे मेरे लंड फूल कर लम्बा और मोटा हो  गया था और मेरी चड्ढी में उसने गीला पानी छोड़ दिया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगले दिन सुबह,  जल्दी से नहा कर मैं इंगलिश की कोचिंग में टाइम से पहुंच गया। उस क्लास में  और भी कुछ हसीन लड़कियां थीं। कुछ खूबसूरत शादी-शुदा औरतें भी थी जो हाई  क्लास सोसाइटी में अपनी धाक जमाने के लिये इंगलिश सीखना चाह रही थीं ताकि  हाई क्लास की रंगीनियों का मज़ा उठाया जा सके। मैं पीछे की सीट पर बैठ गया।  थोड़ी देर में मैडम वहां आयी और गूड मोर्निंग के साथ मुझ पर नज़र पड़ते ही  बोली –“तुम आगे आकर बैठो”। उनके कहने पर मैं आगे की सीट पर बैठ गया। वो  सबको अपना परिचय हुए बोली – हाय मै निशा हूँ। अब आप लोग अपना परिचय दीजिये।  हम सबने अपना-अपना परिचय दिया। फिर वो ब्लैक बोर्ड की तरफ़ मुड़कर लिखने  लगी। जैसे ही वो मुड़ी उनकी गांड मेरे सामने थी और मन फिर उनकी गांड मारने  के ख्याल में खो गया। क्या करुं जवानी १८ साल की कहां शांत रहती।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वो  बहुत सुंदर लाइट कलर की साड़ी पहने थी। लाइट पिंक ब्लाउज़ के नीचे उनका काला  ब्रा साफ़ दिख रहा था। साड़ी के पल्लु से उनकी चूची का बोर्डर ज़बान पे पानी  ला रहा था। लालच मन में जगा रहा था। दोनो चुचियों के बीच की गहरी लाइन ब्रा  के ऊपर से लंड को मस्ती दिला रही थी। वो मुड़ कर वापस क्लास को बोलने लगी  ग्रामर के बारे में और मेरे एकदम पास चली आयी। मैं बैठा था और वो मेरे इतने  करीब खड़ी थी कि उनका खुला पेट वाला हिस्सा मेरे मुंह के पास आ चुका था  जिसमे से उनकी गोल-गोल गहरी टोंडी (नाभि) की महक मेरे नथुनो मे मीठा ज़हर  घोल रही थी। फिर उनका पेन हाथ से गिरकर मेरे सामने टपक गया जिसे लेने वो  नीचे झुकी तो दोनो चुचियां मेरे मुंह के सामने परस गये। उस दिन क्लास ऐसे  ही चलता रहा। फिर जब क्लास खत्म हुआ तो जब सब चलने लगे तो मैडम ने मुझे  रुकने को कहा। मैं अपनी कुरसी पर बैठा रहा। सबके चले जाने के बाद मैडम मेरे  पास आयी और बोली-“ हेंडसम लग रहे हो” मैने कहा “थैंक यू”। तुम अभी क्या  करते हो? मैं बोला- अभी १२वीं का एक्साम दिया है अब मैं फ़्री हूं। मैडम  बोली –मतलब अब तुम बालिग (एडल्ट) हो गये हो।” “यस मैडम”, मैं बोला।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
“हूऊऊऊउम……।  वो कुछ सोच कर बोली, तुम्हारा केला तो काफ़ी काफ़ी बड़ा है। ‘केला???’ मैं  समझ तो गया था कि मैडम मेरे लंड की तरफ़ इशारा कर रही हैं पर मैं अंजान बना  रहा। मैने पूछा किस केले की बात कर रही हैं आप? “अरे अब इतने अंजान मत बनो  मेरे राजा, तुम्हारा लौड़ा जो काफ़ी बड़ा है और जो इस पैंट के नीचे से फूल कर  बाहर हवा खाने को बेताब है। शायद इसने अभी तक गुझिया (चूत) का स्वाद नहीं  चखा। असल में मैं क्लास जल्दी पहुंचने के चक्कर में नहा कर पैंट के नीचे  अंडरवेअर पहनना भूल गया था जिससे मोटा लौड़ा तन कर पैंट में अपनी छाप दिखा  रहा था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैडम को फ़्री और फ़्रेंक होता देख कर मैने भी कह दिया “हां  मैडम अभी तक किसी की चूत का स्वाद नहीं चखा है।” वो बोली शनिवार की सुबह ६  बजे मेरे घर आ सकते हो, मैं अकेली रहती हूं। दर असल मेरे पति नेवी में हैं  और हमारे कोई औलाद नहीं हैं। तुम आजाओगे तो मुझे कम्पनी हो जायेगी। मैने  फ़ौरन हामी भर दी। मैं जानता तो था कि मैडम को मेरी कम्पनी क्यों चाहिये थी।  उनको अपनी बुर की खुजली मिटानी थी और फिर जब पति नेवी में गांड मराये तो  पत्नी दिन भर जब टीचिंग से लौट कर आये तो चूत चोदने को कोई लौड़ा तो चाहिये  ही। इसमे कुछ गलत नहीं हैं। हर औरत की, हर लौंडिया की चूत में गरमी चढ़ती है  और उसकी चूत की आग सिर्फ़ और सिर्फ़ लंड ही शांत कर सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सारी  रात मैडम का ध्यान कर मैं सो न सका। सुबह घड़ी में अलार्म लगा दिया ५ बजे  का। मम्मी भी सुबह अलार्म की आवाज़ से उठ गयी और बोली इतने सुबह कहां जा रहे  हो?? मैने कहा सुबह रोज़ अब मैं जल्दी उठ कर जोगिंग करने जाउंगा और फिर  वहीं से क्लास अटेंड कर वापस आउंगा। अब उनसे क्या कहता कि मैडम की चूत की  खुजली शांत करने जा रहा हूं। सुबह चाय पीकर मैं तुरंत टैक्सी कर मैडम के  पते पर कोपी लिये पहुंच गया। डोरबेल की घंटी बजायी तो थोड़ी देर बाद मैडम  ब्लैक नाइटी पहने मुस्करा कर दरवाजा खोलती नज़र आयी। उनके नाइटी के दो बटन  ऊपर के खुले थे और ब्रा नहीं पहने होने के कारण दोनो चूचियां मुझे साफ़ दिख  रहीं थीं। नीचे पेटीकोट भी नहीं था क्योंकि उन्होने मेरा हाथ कमर पे रख  मुझे अंदर बुलाया जिससे उनका बदन मेरे हाथ में आ गया था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सामने खुला  हुआ सीना मेरे दिल की धड़कन बढ़ा रहा था। वो मुसकरा कर बोली अब ऐसे ही  खड़े-खड़े मेरी सूरत देखते रहोगे या मुझे अपनी बाहों में उठा कर बिस्तर पे भी  ले चलोगे। मेरी जवानी कबसे मोटे लंड की आग में जल रही है, मेरी जवानी के  मज़े नहीं लूटोगे??? मैने तुरंत कोपी पास पड़ी टेबल पर फेंक दी और मैडम को झट  से अपनी बाहों में उठा लिया। उनके खुले बाल मेरे हाथ पर थे और उन्होने  मेरे होंठों को अपने लिप्स में कैद कर लिया। उनका बेडरूम सामने ही था। मौसम  थोड़ा गरम था इसलिये मैं उनको पहले बाथरूम में ले आया जहां उनको थोड़ा नहला  कर मालिश कर गरम कर सकुं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैने मैडम को बाथरूम में खड़ा कर दिया और  फिर उनकी काली नाइटी के ऊपर से पूरा मांसल बदन दबाया फिर सहलाया। उनके हाथ  ऊपर कर उनकी काली नाइटी धीरे से उतार दी। अब वो पूरी नंगी मेरे सामने खड़ी  थी। दूधिया बदन गोरी-गोरी-मोटी चूचियां और हल्के काले घुंघराले बालों के  बीच गुलाबी मुलायम चूत। मैने शोवर चालु कर दिया पानी ऊपर से नीचे हर अंग को  भिगो रहा था। मैने उनको चूमना चाटना शुरु कर दिया। होंठों से होंठ फिर गाल  सब पर ज़बान फेर कर मज़ा देता गया। दोनो चूचियां बार बार दबा कर निप्पलों को  मुंह में भर लिया। उनके पिंक निप्पल मोटे और बहुत सोफ़्ट थे। ज़बान निकाल कर  गोल-गोल निप्पल पर घुमा कर चाट कर पिया। वो  आअह्हह्हह…।।उह्हह्हह…ईईस्सस्सस…मज़ा आ गया बोली। और पियो ये निप्पल कब से  तरस रहे थे कि कोई इनको पिये।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैने कस कर चूची मर्दन किया दबा दबा  कर निप्पलों उकेर कर दोनो निप्पलों पर जबान से खूब खुजली की। मैडम भी अपनी  ज़बान निकाल कर मेरे ज़बान के साथ अपने निप्पलों चाट रहीं थी। उनकी चूचियां  फूल कर बड़ी हो गयी थी और मैं नीचे उनके नाभि पर आ गया था। गोल नाभि की  गहरायी नापने में २ मिनट लगा इससे पहले चूचियों का मसाज और निप्पलों को चूस  कर १० मिनट तक उनको प्यार के नशे में डुबाता चला गया। इस क्रिया से मेरा  लौड़ा भी नागराज की तरह फुंकारता हुआ खड़ा हो कर ७इंच का हो चुका था जिस पर  मैडम का हाथ पहुंच गया था। मैने धीरे से मैडम को बाथरूम के फ़र्श पर लिटाया  ताकि उनकी चूत खुल कर मेरे सामने आ सके और मैं उनकी गुलाबी गुझिया में  उंगली डाल सकूँ।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैं धीरे से उनकी चूत का रस पीने के इरादे से नीचे  गया। उनकी झांटों पर पड़ी पानी की बूंदों ने मुझे उनके झांटों पर चांदी की  तरह चमकती बूंदों को पीने की चाह जगा दी। मैं उनकी काली, मुलायम घुंघराली  झांटों को अपने होंठों में कैद कर अपने लिप्स से पीने लगा। उनकी जब झांटें  खिंचती तो वो अह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्ह……।।ऊऊऊऊऊह्हह्हह  …।।ह्हहाईईइ………।ज्जज्जजाआअन्नन्नन्नन्नन्न…।।स्सस्सस्सस्सस्सस्सस्सस… करती  जिससे मेरा लंड और कड़क हो जाता। उनकी झांटों से पानी साफ़ करने के बाद मैने  दोनो उंगलियों से उनकी चूत की गहरायी को नापा मतलब दोनो उंगलियां अंदर  गुलाबी छेद में डाल दी गहरायी तक। फिर ज़बान पास लाकर उनके चूत का सिंघाड़ा  अपने मुंह में कैद कर लिया। करीब १० मिनट तक उनकी नशीली चूत का रस अपनी  ज़बान से पीता रहा और उनकी गरम चूत में अपनी ज़बान चलाता रहा। ऊपर से नीचे  फिर नीचे से ऊपर और फिर ज़बान को कड़ा कर अंदर बाहर भी। ज़बान से चूत रस चाटते  वक्त मैने एक उंगली नीचे खूबसुरत से दिख रहे गांड के छेद पे लगा दी। उनको  तैयार कर मैने अपना अंडरवेअर उतारा जिससे मैडम बाथरूम के फ़र्श पर उठ कर  मेरे ऊपर मेरी तरफ़ गांड कर ६९ की पोजीशन में लेट गयी और मेरा लंड अपने मुंह  में डाल लिया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैं मैडम की चूत मैं नीचे से पीछे से ज़बान डाल कर  उनका रस चाटे जा रहा था और मैडम को मेरा गुलाबी सुपाड़ा बहुत मज़ा दे रहा था।  वो बच्चो की तरह उसे चूसे जा रहीं थी। क्योंकि उनको लंड बहुत दिनो बाद  नसीब हुआ था। मेरा तना लंड उनको बहुत मज़ा दे रहा था वो ५ मिनट तक मेरा लौड़ा  अपने होंठों में कैद कर चूसती रहीं ज़बान से लंड के सुपाड़े को चाट-चाट कर  लाल कर दिया था और लंड तन कर रोड की तरह पूरा कड़ा हो गया था पर मैडम छोड़ ही  नहीं रहीं थी। मैने बोला मैडम मैं झड़ने वाला हूं तो उन्होने मुझे खड़ा कर  दिया और खुद भी मेरे ऊपर से हट गयी। बोली-आओ राजा मेरी ज़बान पर गिरा दो। वो  मेरे लंड के पास मुंह खोल कर ज़बान निकाल कर बैठ गयीं। मैने अपने हाथ से  हिला कर जल्दी से अपना सारा गरम गरम शहद उनकी ज़बान पे गिराया जिसे उन्होने  अपनी आंखे बंद कर जन्नत का मज़ा लिया। वो मेरे गरम वीर्य की आखिरी बूंद तक  चाट गयी। फिर उन्होने अपना मुंह धोया और मुझे बोली अब मुझको बेडरूम में ले  चलो राजा। मैं भी उनकी चूत चोदने को बेताब था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैने उनको उठा लिया  और बेड पर चित लिटा दिया। उनकी दोनो गोरी टांगो को खूब फैला दिया ताकि उनकी  गुलाबी चूत मेरे सामने खुल जाये और मुझे उनकी चूत को चाटने में ज़रा भी  कठिनाई न हो। वो फिर से मेरे लंड को अपने हाथ से पकड़ कर आगे पीछे हिलाने  लगी। उनके ये करने से मेरा लंड फिर से खड़ा होने लगा। मैने उनकी नशीली चूत  को चाट कर अपने थूक से चिकना किया। वैसे उनकी चूत बहुत मक्खन सी मुलायम और  मलमल सी चिकनी थी। वो गरम-गरम मलाई से भरपूर चूत मुझे अब जन्नत सी लग रही  थी जिसको अब चोदना बहुत ज़रूरी हो गया था। मेरे लप-लप कर उनकी चूत को चाटने  से वो अपने मुंह से सी…सी…ऊऊऊओ…।अह्हह्हह्हह्हह्ह कर रही थी। बोली मेरे  राजा जल्दी से अपना ७ इंच का शेर मेरी प्यार की गुफ़ा में घुसा दो। जल्दी से  इस चूत की खुजली शांत करो। बहुत तड़प रहीं हूं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैने जल्दी से उनकी  गोरी मांसल जांघो को दूर दूर किया और लौड़ा पकड़ कर अपना सुपाड़ा चूत के मुंह  पे टिका कर सहलाया। फिर एक धीरे से ज़ोर लगाया जिससे लंड खच की आवाज़ से  अंदर गरम गरम चूत में अंदर तक समा गया। वो आंखें बंद कर मस्त होने लगी। मैं  बोला निशा तुम बहुत मस्त हो। वो मुस्कुरा दी। मैने अपने लंड का वेग बढ़ा  दिया। लंड जल्दी जल्दी अंदर बाहर चलने लगा। लंड पूरे ज़ोर से अंदर बाहर आ जा  रहा था जिससे निशा की चूचियां भी हिल रही थीं। दोनो बूब्स को मैने हाथ में  भर कर मसलना शुरु कर दिया था और उनके निप्पल भी अपने होंठों में चूसने  लगा। निशा की जवानी लूट कर १० मिनट तक गरम लंड रोड सा उसकी बुर को फाड़ता  रहा। फिर मैने उसकी चूत से लंड बाहर निकाला और अपना गरम वीर्य उसकी चूत के  ऊपर और टोंढी के छेद में डाल दिया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अब वो शांत हो चुकी थीं और मेरा पहला प्यार का क्लास १ घंटे में खतम हुआ था। सेक्स की इस क्लास में मुझको मज़ा मिला था। अनोखा मज़ा।&lt;br /&gt;
आपको मेरी कहानी कैसी लगी जरुर लीखीये गा मै इन्तेजार करुगा।&lt;br /&gt;
premsexsena9897515075@gmail.com&lt;br /&gt;
&lt;/span&gt;</description><link>http://sexisalipunem0.blogspot.com/2011/01/blog-post_07.html</link><author>noreply@blogger.com (sexisalipunem)</author><thr:total>0</thr:total></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-6722033917999163069.post-5125882191950158230</guid><pubDate>Fri, 07 Jan 2011 12:49:00 +0000</pubDate><atom:updated>2011-01-07T18:19:29.481+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">हिंदी सेक्सी स्टोरी</category><title>नए साल का उपहार</title><description>&lt;div class="navigation" id="nav-above"&gt;&lt;div class="nav-previous"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="post-99 post type-post status-publish format-standard hentry category-uncategorized" id="post-99"&gt;&lt;h1 class="entry-title"&gt;नए साल का&amp;nbsp;उपहार&lt;/h1&gt;&lt;div class="entry-meta"&gt;&lt;span class="meta-prep meta-prep-author"&gt;Posted on&lt;/span&gt; &lt;a href="http://sexisalipunem.wordpress.com/2011/01/06/%e0%a4%a8%e0%a4%8f-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%89%e0%a4%aa%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b0/" rel="bookmark" title="5:30 अपराह्न"&gt;&lt;span class="entry-date"&gt;जनवरी 7, 2011&lt;/span&gt;&lt;/a&gt; &lt;span class="meta-sep"&gt;by&lt;/span&gt; &lt;span class="author vcard"&gt;&lt;a class="url fn n" href="http://sexisalipunem.wordpress.com/author/sexisalipunem/" title="View all posts by sexisalipunem"&gt;sexisalipunem&lt;/a&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="entry-content"&gt;&lt;img alt="नए साल का उपहार" src="http://static.sucksex.com/assets/timthumb.php?src=media/2010/07/pof_4c4216e10bfe8..jpg&amp;amp;w=460&amp;amp;h=300&amp;amp;zc=1" width="460" /&gt;&amp;nbsp;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: red; font-size: large;"&gt;प्रेम सेक्स्सेना&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;span class="Apple-style-span" style="color: red; font-size: large;"&gt;मेरी उम्र इक्कीस साल है, कद ५’११” है। दीप्ति मेरे पड़ोस में रहती है,  दिखने में वो बहुत ही सुन्दर है, हमेशा हँसता हुआ चेहरा, गोरा रंग,  बड़ी-बड़ी आँखें, और ५ फुट ७ इंच कद है। उसकी फ़िगर ३१-२५-३४ है और उम्र  में मुझसे २ साल छोटी है।&lt;br /&gt;
मेरी माँ उसे बहुत पसन्द करती है, इसलिए वो अक्सर हमारे घर आती रहती थी। हम छत पर भी मिलते थे। &lt;a href="http://sexisalipunem.files.wordpress.com/2011/01/adl2.jpg"&gt;&lt;img alt="" height="461" src="http://sexisalipunem.files.wordpress.com/2011/01/adl2.jpg?w=400&amp;amp;h=461" title="ADL" width="400" /&gt;&lt;/a&gt;दिन  गुज़रते रहे और कब हमारी दोस्ती प्यार में बदल गई, वो मुझे मना नहीं कर  पाई, क्योंकि वो पहले से ही चाहती थी। हम मज़बूरी में ज़्यादातर फोन पर  बातें करते थे। साल का आख़िरी दिन आया। हम फोन पर बातें कर रहे थे, वो और  उसके घरवाले कुछ देर पहले ही बाहर से आए थे, इसलिए जल्दी सो गए। मेरे  घरवाले भी सो चुके थे।&lt;br /&gt;
बातों-बातों में मैंने पूछा “क्या, मुझे नए साल का उपहार मिलेगा?&lt;br /&gt;
पहले तो उसने मना कर दिया, फिर मान गई। रात को ठीक १२ बजते ही मैं उसके  घर पहुँच गया, उसने दरवाज़ा खोल। वो मुझसे नज़रें नहीं मिला पा रही थी,  शायद शरमा रही थी… उस रात उसके चेहरे पर एक नई खुशी थी।&lt;br /&gt;
उसने दरवाज़ा लगाया और मेरे सीने से चिपक गई और बोली “हैप्पी न्यू ईयर  मेरी जान…” पहले तो मैं थोड़ा डर गया, फिर उसने बिस्तर पर बिठा दिया। हम  फोन पर कई बार सेक्स कर चुके थे, पर हकीक़त में कभी मौक़ा नहीं मिला था,  सिर्फ चूमना छोड़कर।&lt;br /&gt;
अब भी हिम्मत नहीं हो रही थी कुछ करने की। बस दोनों बातें कर रहे थे  प्यार भरी! एक-दूसरे को निहार रहे थे, एक-दूसरे के आगोश में, बिना कुछ किए  ही दोनों तड़प रहे थे। मैं उसके पैरों पर सिर रख कर लेटा हुआ था, वो मेरे  बालों और होंठों पर हाथ फेर रही थी।&lt;br /&gt;
आख़िरकार मेरे सब्र का बाँध टूट गया, और मैं उस पर टूट पड़ा। उसे चूमने  लगा, वो भी यही चाहती थी, इसलिए मेरा साथ देने लगी। हम दोनों की हालत ख़राब  हो रही थी… उस वक़्त दिमाग ने काम करना बन्द कर दिया…।&lt;br /&gt;
सच में क्या होंठ थे…! एकदम गुलाबी और रसीले… मज़ा आ गया, फिर मैं उसे  गर्दन पर चूमने लगा। वो मस्त होने लगी और सिसकारियाँ लेने लगी… आह…  उउउउह्हह्हहहह… शह्हहह… उसकी सिसकारियाँ मुझमें जोश भर रहीं थीं।&lt;br /&gt;
बोलने लगी “विक्रम प्लीज़ हट जाओ…” वरना मैं पागल हो जाऊँगी, पर मैं कहाँ मानने वाला था।&lt;br /&gt;
थोड़ी ही देर में हम नंगे हो गए…। कसम से, क्या चूत थी… एकदम गुसाबी।  मेरा एक हाथ उसकी चूचियों पर चल रहा था और दूसरा उसकी चूत पर। चूत भट्ठी हो  रही थी और पूरी गीली हो चुकी थी… उसकी साँसें तेज़ और गरम थीं जो मुझे  महसूस हो रही थीं। सपनों में तो उसे कितनी बार चोद चुका था, पर आज सपना सच  लग रहा था।&lt;br /&gt;
हम पागलों की तरह एक-दूसरे को चूम रहे थे, जीभ से जीभ मिला कर एक-दूसरे का रस पी रहे थे और एक-दूसरे के अंगों को चूम रहे थे।&lt;br /&gt;
उसने अपने पैरों से मेरे लण्ड को सहलाना शुरु किया, और अपने चूतड़ों को  ऊपर उठा रही थी। मैं समझ गया कि अब वो चुदने के लिए तैयार है। मैंने लण्ड  उसकी चूत पर रख कर ज़ोर का धक्का लगाया। उसकी चीख निकल गई… “आह्ह्हह्हह  विक्रम लग गई” मैं बुरी तरह डर गया। मुझे लगा कि कोई जाग गया है। मैंने  जल्दी से लाईट बन्द कर दी।&lt;br /&gt;
फिर हम दोनों चुप हो गए। दीप्ति रो रही थी। मैंने पूछा क्या हुआ तो बोली “…प्लीज़ मैं अब नहीं कर सकती…. मेरे बहुत दर्द हो रहा है।”&lt;br /&gt;
फिर थोड़ी देर बाद जब बत्ती जलाई तो देखा, पूरी बेडशीट खून से सनी थी।  वो बहुत रोई, बोली “सुबह अगर माँ ने देख लिया तो मुझे मार ही डालेगी! जान  प्लीज़ अपने घर जाओ।” वो कराह रही थी।&lt;br /&gt;
मुझे उसकी हालत पर तरस आ रहा था, मैं बोला, “सेक्स नहीं कर सकती तो मेरा  लण्ड तो चूस सकती हो…।” वो मान गई और मुझे फर्श पर लिटा दिया और हाथ में  लेकर हिलाने लगी। कुछ देर देखती रही और चूसने लग गई… कसम से दोस्तों, मैं  तो जन्नत में था, मेरा शरीर अकड़ने लगा।&lt;br /&gt;
वो बुरी तरह से काँप रही थी, थोड़ी देर में मैंने अपना वीर्य उसके मुँह में निकाल दिया… हम दोनों निढाल से पड़ गए।&lt;br /&gt;
फिर उसे भी जोश आने लगा, बोली “विक्रम मेरी भी चूसो ना…। मैंने उसके पैर  चौड़े किए और उसे जीभ से चोदने लग गया…। उसने अपने पैरों से मुझे जकड़  लिया। उसकी सिसकारियाँ तेज़ होने लगीं। तरह-तरह की आवाज़ें निकलना लगीं…  आह…………आह……उह्ह्ह्…उह्ह्ह्…उह्ह्ह्…उह्ह्ह्…शह्ह्ह्ह्ह्ह्हशह्ह्ह्ह्ह्ह्हशह्ह्ह्ह्ह्ह्ह….आहह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह………हाय्……  मै तो गई यार! और वो झड़ गई।&lt;br /&gt;
थोड़ी देर में हम दोनों फिर शुरु हो गए। वह बोली “थोड़ा धीरे करना… दर्द  होता है… इस बार मैंने जल्दबाज़ी नहीं की और उसे चोदने लगा। वो भी सारा  दर्द भूल कर मेरा साथ देने लगी… उसने मुझे कस कर पकड़ लिया… बोली “और ज़ोर  से… जल्दी-जल्दी करो……आहह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह………उह्ह्ह् ष्ह्ह्ह्ह्ह उह्ह्ह्  पूरा अन्दर तक डाल दो।&lt;br /&gt;
पागलों की तरह चूमने लगी और वो फिर से झड़ गई। उसकी आँखों से खुशी झलक  रही थी… साथ ही आँसूँ भी निकल पड़े। बोलने लगी “मैं तुम्हारे लिए कुछ भी कर  सकती हूँ।”&lt;br /&gt;
मैं उसकी चूत में ही झड़ गया। उस रात मैंने उसे चार बार चोदा।&lt;br /&gt;
हमें जब भी अवसर मिलता है हम सम्भोग करते हैं। हमने छत, बाथरुम, गार्डन  में ना जाने कितनी बार सम्भोग किया है… पर एक दिन वो यहाँ से चली गई।email-premsexsena9897515075@gmail.com&lt;br /&gt;
&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;ul&gt;&lt;/ul&gt;&lt;div id="ilikeposts"&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;</description><link>http://sexisalipunem0.blogspot.com/2011/01/blog-post.html</link><author>noreply@blogger.com (sexisalipunem)</author><thr:total>1</thr:total></item></channel></rss>