<?xml version="1.0" encoding="UTF-8" standalone="no"?><?xml-stylesheet href="http://www.blogger.com/styles/atom.css" type="text/css"?><rss xmlns:itunes="http://www.itunes.com/dtds/podcast-1.0.dtd" version="2.0"><channel><title>SUNIL MOGA</title><description></description><managingEditor>noreply@blogger.com (SUNIL MOGA)</managingEditor><pubDate>Sat, 14 Sep 2024 07:52:43 +0530</pubDate><generator>Blogger http://www.blogger.com</generator><openSearch:totalResults xmlns:openSearch="http://a9.com/-/spec/opensearchrss/1.0/">269</openSearch:totalResults><openSearch:startIndex xmlns:openSearch="http://a9.com/-/spec/opensearchrss/1.0/">1</openSearch:startIndex><openSearch:itemsPerPage xmlns:openSearch="http://a9.com/-/spec/opensearchrss/1.0/">25</openSearch:itemsPerPage><link>http://sunilmoga.blogspot.com/</link><language>en-us</language><itunes:explicit>no</itunes:explicit><itunes:subtitle/><itunes:owner><itunes:email>noreply@blogger.com</itunes:email></itunes:owner><item><title>हिंदुओ के पाखंड के खिलाफ बोलो तो इस्लामिक कट्टरपंथी खुश होते है और इस्लाम के पाखंड के खिलाफ लिखो तो हिन्दू कट्टरपंथी तालियां बजाते है।</title><link>http://sunilmoga.blogspot.com/2020/04/blog-post.html</link><author>noreply@blogger.com (SUNIL MOGA)</author><pubDate>Thu, 2 Apr 2020 11:32:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-676848417829322667.post-2386292764966833584</guid><description>&lt;div&gt;हिंदुओं के पाखंड की प्रशंसा करो तो अंधभक्त हिन्दू खुश व मुसलमानों के पाखंड का समर्थन कर दो तो अंधभक्त मुसलमान तालियां बजा लेते है।बस धर्मनिरपेक्षता का रायता इन दोनों के पाखंड के इर्द-गिर्द ही घूमता रहता है।&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;असली धर्मनिरपेक्षता का मतलब है कि संवैधानिक पदों पर बैठे लोग धर्म के आधार पर भेदभाव/समर्थन/सहायता किसी भी स्वरूप में न करे।जो जनता के पैसे से वेतन लेते है वो किसी धार्मिक संगठन का हिस्सा बनकर धर्म का प्रचार-प्रसार नहीं कर सकते!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;जो संविधान में अपने धर्म की पूजा/इबादत व प्रचार-प्रसार की छूट दी गई है वो गैर-संवैधानिक लोगों व गैर-सरकारी खजाने से जीवनयापन करने वाले लोगों से है।आरएसएस की सेवा भारती व इस्लाम के मदरसों की शिक्षा संविधान की बुनियाद के खिलाफ है।देश मे एक तरह की सार्वजनिक शिक्षा प्रणाली लागू न होने के कारण ये दुष्प्रभाव के रूप में हमारे सामने है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;मुस्लिम मदरसों के अनुदान से लेकर शिक्षकों के वेतन तक हमेशा सवाल खड़े किए जाते है मगर सरकारी स्कूलों में जो सुबह-सुबह सरस्वती वंदना के पाखंड से दिन की शुरुआत होती है उनपर सवाल क्यों नहीं खड़े किए जाते?मैं इसलिए सरकारी स्कूल में सरस्वती वंदना को पाखंड कहता हूँ क्योंकि धर्मनिरपेक्ष संविधान के खिलाफ है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;मोदी सरकार को चाहिए कि शिक्षा का पूर्ण रूप से सार्वजनीकरण करे,पूरे देश के लिए एक मॉडल शिक्षा नीति लेकर आये व इन डीएवी में लकड़ियां फूंकने वालों,सेवाभारती में बच्चों के दिमाग मे जहर भरने वालों,इन मदरसों में देश से ऊपर धर्म की कट्टरता का जहर फैलाने वालों पर ताला लगाएं।अल्पसंख्यक की सारी सुविधाएं खत्म करके सिर्फ अपनी आस्था व शांतिपूर्वक प्रचार प्रसार के खुला मैदान छोड़ दें।बहुसंख्यक एकता के नाम पर जो उन्मादी जहर दूसरे समुदायों के खिलाफ उगलते है उनको देशद्रोह की श्रेणी में डाल दें।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;नफरत का बीज शिक्षण संस्थानों में डाला जाता है,मीडिया व धर्मखोर मिलकर इनकी सिंचाई करते है और राजनेता व पूंजीपति मिलकर फसल काटते है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;देश की धर्मनिरपेक्षता सिर्फ कुछ चरमपंथी लोगों द्वारा अल्पसंख्यकों को निशाने पर लेने से ही खतरे में नहीं पड़ती है बल्कि इनकी आड़ में उन करोड़ों आदिवासियों,ओबीसी,एससी, एसटी के लोगों को बरगलाकर हिंदुत्व की ब्रिगेड घोषित करने से भी पड़ती है!जो लोग आदिवासियों से,ओबीसी-एससी-एसटी से यह कह रहे है कि जनगणना में धर्म के कॉलम में हिन्दू भरा जाए उससे भी धर्मनिरपेक्षता खतरे में पड़ती है!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;देश कोरोना के गंभीर संकट से जूझ रहा है और एक सरकारी स्कूल का प्रधानाध्यापक स्कूल के बच्चों को क्या&amp;nbsp; सीखने का निर्देश दे रहा है उसकी बानगी देखिये....&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;समस्त संस्था प्रधान&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;एवं अभिभावकगण&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;ब्लॉक श्रीमाधोपुर&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&#127775;रामायण एवं महाभारत&#127775;&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;पर आधारित ब्लॉक स्तरीय&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; *सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता*&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;योग्यता :-&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;कक्षा - 6 से 12 तक के&amp;nbsp; विद्यार्थी&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;परीक्षा आयोजन का संभावित समय - मई 2020&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;लॉक डाउन पश्चात् तिथि बाद में घोषित कर प्रसारित कर दी जाएगी.&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;समस्त संस्था प्रधानों, अभिभावकों एवं विद्यार्थियों से आग्रह है कि रामायण और महाभारत पर होने वाली प्रतियोगिता के प्रश्नों का आधार दूरदर्शन पर दिखाए जाने वाले रामायण और महाभारत के एपिसोड होंगे।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;पुरस्कार :-&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;प्रथम तीन तीन विद्यार्थी प्रत्येक कक्षा से होंगे।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;100 छात्रों को सांत्वना पुरस्कार&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;आयोजक -&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;सांस्कृतिक उत्थान एवं प्रचार समिति&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;गायत्री परिवार एवं समस्त धर्मप्रेमी आमजन श्रीमाधोपुर.&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;यह कौनसा गायत्री परिवार है जो देश के संविधान के ऊपर बैठकर स्कूलों के संस्थाप्रधानों को निर्देशित कर रहा है?ये संस्था प्रधान सोशल मीडिया के माध्यम से खुलेआम पेरेंट्स को मजबूर कर रहे है कि आप बच्चों को रामायण व महाभारत दिखाओ?ये कौन जाहिल लोग है जो वेतन सरकारी खजाने से उठा रहे है और काम अपना धार्मिक एजेंडा सेट करने का कर रहे है?&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;
  &lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhV_d1mNeeJsCD3mCI9WXkTMXG9dgNJD-XuDXpT2b6tK6PrY_jSv3nd2h4xUgnpmpGpkmplIDdZT0ouW_oMcnhLqzYKNpeGXtqghCW5dnuk11T_QdW8rYJQVfLGEYU5RbCP_JffBPX3ESh_/s1600/1585807337823511-0.png" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;
    &lt;img border="0"   src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhV_d1mNeeJsCD3mCI9WXkTMXG9dgNJD-XuDXpT2b6tK6PrY_jSv3nd2h4xUgnpmpGpkmplIDdZT0ouW_oMcnhLqzYKNpeGXtqghCW5dnuk11T_QdW8rYJQVfLGEYU5RbCP_JffBPX3ESh_/s1600/1585807337823511-0.png" width="400"&gt;
  &lt;/a&gt;
&lt;/div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;</description><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhV_d1mNeeJsCD3mCI9WXkTMXG9dgNJD-XuDXpT2b6tK6PrY_jSv3nd2h4xUgnpmpGpkmplIDdZT0ouW_oMcnhLqzYKNpeGXtqghCW5dnuk11T_QdW8rYJQVfLGEYU5RbCP_JffBPX3ESh_/s72-c/1585807337823511-0.png" width="72"/><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>माफी नहीं फैसलों की दरकार है...</title><link>http://sunilmoga.blogspot.com/2020/03/blog-post_54.html</link><author>noreply@blogger.com (SUNIL MOGA)</author><pubDate>Sun, 29 Mar 2020 21:52:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-676848417829322667.post-4982594732838895072</guid><description>&lt;div&gt;साहब देश के गरीबों से माफी मत मांगिये!भूख से बिलखते बच्चों के लिए,गोद मे तड़पते बच्चों को लेकर आंसू पोंछती माताओं के लिए,होंठ कंपकंपाते लाचार-बेबस बाप के लिए इस माफी के क्या मायने है?&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;साहब आपको कठोर फैसले लेने के लिए कुर्सी पर बैठाया है।आप गरीबों के साथ भावुकता का मजाक मत करिए!एक तरफ मुनाफाखोरी-कालाबाजारी करके तिजोरियां भरी जा रही है और दूसरी तरफ गरीब लोग भूख से तड़प रहे है!एक तरफ अमीरों ने अपने घरों के दरवाजे बंद कर लिए तो दूसरी तरफ सड़कों पर भूखा-प्यासा भारत भटक रहा है!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;बड़ी मिठास होती है,गरीबों के खून मे साहब,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;जिसे मौका मिलता है वो पीता जरूर है!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;साहब धनाढ्य परिवारों के शहजादों को भर-भरकर विदेशों से ला रहे थे तब आपको पता था कि ये लोग देश के लिए मुसीबत लाएंगे मगर आपने कठोर फैसला नहीं लिया।अपने पूर्वजों सावरकर आदि की तरह माफीनामा भर-भरकर के गुनाहों को छिपाने की कोशिश मत करिए।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;देश के सभी क्रिकेट स्टेडियम को तुरंत आइसोलेशन सेन्टर में बदल डालिये।देश के कॉलेजों/स्कूलों को आइसोलेशन/जांच केंद्रों में बदल डालिये!जो लोग सड़कों पर है उनको बसों में भरकर इन स्टेडियम/कॉलेज/स्कूल में ले जाकर समुचित देखभाल की व्यवस्था करिये।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;अगर धन की कमी आ रही है तो उदाहरण बता रहा हूँ।1969 व 1980 में जब देश आर्थिक संकट में फंसा था तब तत्कालीन प्रधानमंत्री ने माफी मांगने के बजाय 14 व 7बैंकों का राष्ट्रीयकरण कर दिया था।आज देश संकट में है और आपसे कठोर फैसले की उम्मीद कर रहा है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;आज जो धनकुबेर लाखों की नेटवर्थ बनाये बैठे है उन कंपनियों को कब्जे में लीजिये!अगर पैसे की कमी आड़े आ रही है तो लाखों करोड़ रुपये धार्मिक स्थलों के पास पड़े है।एक फैसला लीजिये साहब और इनका राष्ट्रीयकरण करते हुए जनता के लिए दरवाजे खोल दीजिये।पैसे है,जगह है,बिल्डिंग है!ठहरने की हर सुविधा उपलब्ध है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;साहब बात संसाधनों की है ही नहीं!बात व्यवस्था की है ही नहीं!न बात गरीबों की है!बात नियत की है साहब!रोम जल रहा था तब नीरो बांसुरी बजा रहा था उसी तर्ज पर भविष्य आपको इतिहास के रूप में दर्ज करेगा....&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;वो अपने गुनाहों को माफी मांगकर धो देता था!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;जब देश गंभीर संकट में होता तो वो रो देता था!!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;
  &lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgTedxMJV_32vtqCw5RO6KrVe0qwoTmI_SdprknzpuSnOP8MyBzsKnACH-qRqzQ-5sOH-SNAMT66IaIa23RmQRJK0ySUOJSRGNSMQb7lEUc9QiMRI6UL89QQLrRuuNgMAhzrA2T8MNV1Wbq/s1600/1585498857968562-0.png" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;
    &lt;img border="0"   src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgTedxMJV_32vtqCw5RO6KrVe0qwoTmI_SdprknzpuSnOP8MyBzsKnACH-qRqzQ-5sOH-SNAMT66IaIa23RmQRJK0ySUOJSRGNSMQb7lEUc9QiMRI6UL89QQLrRuuNgMAhzrA2T8MNV1Wbq/s1600/1585498857968562-0.png" width="400"&gt;
  &lt;/a&gt;
&lt;/div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;</description><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgTedxMJV_32vtqCw5RO6KrVe0qwoTmI_SdprknzpuSnOP8MyBzsKnACH-qRqzQ-5sOH-SNAMT66IaIa23RmQRJK0ySUOJSRGNSMQb7lEUc9QiMRI6UL89QQLrRuuNgMAhzrA2T8MNV1Wbq/s72-c/1585498857968562-0.png" width="72"/><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>जिंदा हो तो जिंदा नजर आना जरूरी है...</title><link>http://sunilmoga.blogspot.com/2020/03/blog-post_29.html</link><author>noreply@blogger.com (SUNIL MOGA)</author><pubDate>Sun, 29 Mar 2020 19:26:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-676848417829322667.post-6877518389977256914</guid><description>&lt;div&gt;लाज़िम है संकट की घड़ी में शहरों ने दुत्कार दिया तो मजदूर अपने घरों की तरफ ही रुख करेंगे।असल मे सरकारों ने इन्हें वोटर लिस्ट के अलावा अन्य सरकारी आंकड़ों में लेना मुनासिब ही नहीं समझा इसलिए फौरी तौर पर राहत का कोई रास्ता नहीं तलाश पा रही है।&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;रेन बसेरों या सामूहिक भोजन वितरण भी इस बीमारी को रोकने के एकमात्र उपाय को पलीता ही लगायेगी।लॉक डाउन बिना तैयारी के लिया तात्कालिक निर्णय था।सरकारों को यह अहसास तक नहीं था कि सेंसेक्स,जीडीपी,उद्योगपतियों के महलों,हुक्मरानों के लुटियन जॉन के बंगलों से परे भी एक भारत बसता है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;मध्यम वर्ग को नोचकर उद्योगपतियों की तिजोरियां भरकर देश का विकास बताने का खेल मध्यम वर्ग को जिम्मेदार नागरिक बनाने के बजाय निहायत ही स्वार्थी तत्वों में बदल कर रख दिया।धन कुबेरों ने अपने दरवाजे बंद किये ही किये,साथ मे मध्यम वर्ग ने भी अपना पल्ला झाड़ लिया।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;सरकारों का गरीब,ग्रामीण-देहाती भारत से मुँह मोड़कर चलना संकट की इस घड़ी में भारी पड़ गया है।इस तरह लॉक डाउन का मकसद ही ध्वस्त होता नजर आ रहा है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;विदेशों से तकरीबन 15लाख लोग भारत मे आये व जो फंसे उनको खुद भारत सरकार लेकर आई।ऐसे में भारत के गरीब मजदूरों का सवाल वाजिब है कि हवाई जहाज भर-भरकर के विदेशों से महामारी सरकार खुद ही लेकर आई है तो हमे घर जाने से क्यों रोक रही है?&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;सरकार ने खुद अपने कुकर्मों से इस बीमारी को शहरों-कस्बों में फैलाया है।अब ये मजदूर अपने गांवों में जाएंगे तो इस बीमारी को घर-घर ले जाएंगे।सरकार ने जो विदेशों से आये लोगों को बिना जांच,क्वारण्टाइन के घर भेजा था और बहुत बड़ी गलती की थी वो गलती दुबारा न हो इसका ख्याल जरूर रखा जाएं।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;जो भी प्रवासी लोग घर जाना चाहे उनके लिए सरकार बसों की सुविधा करें और गृह जिले के स्टेडियम/कॉलेज को जांच व आइसोलेशन केंद्र के रूप में उपयोग करें।खाने-पीने की व्यवस्था करें।ध्यान रहे सबकी स्क्रीनिंग व कोरोना जांच की जाएं।7दिन बाद जो नेगेटिव हो उनको तहसील के कॉलेज/स्कूल में बनाये जाँच/आइसोलेशन केंद्र पर शिफ्ट कर दें।14दिन तक वहां रहने-खाने की व्यवस्था करें व दुबारा जांच के बाद गांव की स्कूल में बनाये केंद्र पर शिफ्ट कर दें।गांव स्तर पर सुविधा सरपंच गांव के लोगों के सहयोग से करें और 7 दिन बाद तीसरे चरण की जांच के बाद घर जाने दें।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;इस तरह की व्यवस्था से इन प्रवासी लोगों में भरोसा जागेगा कि हम गांव की तरफ लौट रहे है और इन चार सप्ताह की प्रक्रिया में गांव सुरक्षित बच जाएंगे।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;जो राजनेता घरों में छुपकर प्रशासन पर दबाव बनाते हुए प्रवासी लोगों को घरों तक सीधे लाने का इंतजाम कर रहे है वो गांव/समाज के दुश्मन है।जो सक्षम लोग भय में भावुक होकर गांव लौटना चाहते है उनको समझना चाहिए कि यह एक-दो महीने का समय है,अस्थायी दौर है जो एक दिन खत्म होकर रहेगा।वो इस बात पर जरूर गौर करें कि दौर लौटने के बाद आपकी बुद्धि,सोच व कर्मों का भी लोग विश्लेषण करेंगे।इसलिए जल्दबाजी में भावुक होकर निर्णय न ले।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;भारत सरकार व राज्य सरकारों से निवेदन है कि त्वरित गति से,बिना आरोप-प्रत्यारोप के व्यवस्था स्थापित करें।इतने दिनों में मात्र 30हजार के करीब कोरोना जांच होना बिल्ली को देखकर कबूतर द्वारा आंखे बंद करने के समान है।रईसों से निवेदन है कि आपके लिए घरों में आइसोलेट रहना ही काफी है इसलिए ग्लव्स,मास्क व सेनेटाइजर की जमाखोरी न करें।अस्पतालों में लड़ रहे स्वास्थ्य कर्मी,सड़कों पर खड़े पुलिस के जवान आदि इसकी कमी से जूझ रहे है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;व्यापारियों से निवेदन है कि कालाबाजारी-मुनाफाखोरी आपका राष्ट्रीय चरित्र रहा है मगर इस संकट की घड़ी में मानवता बचेगी तभी तुम्हारा कारोबार चलेगा,इसलिए अपना चरित्र बदलने का मौका प्रकृति ने उपलब्ध करवाया है,इसे यूँ जाया न करें।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;उद्योगपतियों-समृद्ध लोगों से निवेदन है कि इस संकट की घड़ी में गरीब-लाचार-बेबस लोगों की दिल खोलकर मदद को आगे आये।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;"इस जगत सराय में मुसाफिर रहना दो दिन का&lt;/div&gt;&lt;div&gt;क्यूँ झूठा करे गुमान धन और जोभन का.."&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;एक दिन दुनियाँ से रुखसत होना ही है इसलिए लौटो तो नेकियों का झोला लेकर लौटो।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;कोरोना से घबराएं नहीं।हौंसला रखकर लड़ें।छपने अकाल,चेचक,प्लेग आदि आपदाओं पर भी हमने विजय पाई थी और इस पर भी विजयी होंगे मगर इस घड़ी में खुद की उपयोगिता ही भविष्य के उदाहरण बनकर मानवता को राह दिखाएगी इसलिए उपयोगी बनो,बोझ नहीं।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;
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    &lt;img border="0"   src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjwt1K6c3nmTMPqQA08FBMOfjarlYlq-0EgcYKpeKfR3Qt-7qbKt6DhJ-yB5toivCpcmhOzuLvZQ5jHh6z3mdy6gZfBvmapVNF0ASp5GLfYtKM6iwRiCqrUE0nPY4je-pXSnJ2dYxzqsvBC/s1600/1585490158260869-0.png" width="400"&gt;
  &lt;/a&gt;
&lt;/div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;</description><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjwt1K6c3nmTMPqQA08FBMOfjarlYlq-0EgcYKpeKfR3Qt-7qbKt6DhJ-yB5toivCpcmhOzuLvZQ5jHh6z3mdy6gZfBvmapVNF0ASp5GLfYtKM6iwRiCqrUE0nPY4je-pXSnJ2dYxzqsvBC/s72-c/1585490158260869-0.png" width="72"/><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>धर्म मे लिपटी सियासत का कहर!</title><link>http://sunilmoga.blogspot.com/2020/03/blog-post_95.html</link><author>noreply@blogger.com (SUNIL MOGA)</author><pubDate>Sat, 28 Mar 2020 08:28:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-676848417829322667.post-2601588997144945817</guid><description>&lt;div&gt;&amp;nbsp;एक तिहाई आबादी सदा पाखंड यात्राओं व पाखंड के अड्डो पर सदा भटकती रही!लाख समझाओ मगर बुद्धिहीनों की भीड़ कहाँ समझने वाली!हर प्राकृतिक आपदा के समय लुटेरे मुनाफाखोरी,कालाबाजारी पर उतर जाते है और धर्मखोर हालात सुधरने पर दुबारा दुकानें कैसे सजे,उसकी तैयारी में लग जाते है!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;मैंने धार्मिक पाखंडी,जाहिल नेताओं व सत्ता पर वर्ग विशेष के कब्जे को लेकर अनगिनत लेख लिखे,जिनको अगर प्रिंट करवाकर किताबों के रूप में बेचता तो देश की हर स्टॉल पर किताब नजर आती!मगर मैंने तय किया कि जीवन मे कभी किताब नहीं लिखूंगा क्योंकि मेरा भारत किताबें पढ़ता नहीं है और इंडिया वाले मुझे पढ़कर सतर्क हो जाएंगे और भारत पर नियंत्रण की जंजीरे कठोर करते जाएंगे!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;आज कोरोना ने साबित कर दिया कि झूठे है तुम्हारे भगवान,ठगौरी है तुम्हारे सियासतदान और देश की व्यवस्था में तुम कहीं टिकते हो!विदेशों में पढ़ने वाले लुटेरों के बच्चों बोइंग विमानों से निःशुल्क लाकर घर पहुंचा दिए गए और इलाहाबाद,पटना,भोपाल, जयपुर ,मुखर्जीनगर में पढ़ने वाले गांव-देहात के,किसान-कमेरों के,भारत के बच्चे सड़कों पर रेलमपेल हुए जा रहे है!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;जो विदेशों में इंडिया के लोग मोटा माल बना रहे थे उनको खुद सरकार विमानों में भर-भरकर ले आई और दिल्ली,सूरत,बैंगलोर, मुम्बई,चेन्नई आदि में गांव-गरीब तबके के लोग जो दो जून की रोटी के लिए आज पीठ पर थैला लटकाए,सिर पर गठरी लिए पैदल जत्थों में चले जा रहे है।कोई 200किमी,कोई 500किमी,तो कोई 1000किमी के सफर पर निकल चुका है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;जब यही गांव-गरीब तबके के लोग,किसान-कमेरे वर्ग के लोग पाखंड यात्राओं पर निकलते थे तब लिखता था मैं!तुम्हारा यह रास्ता नहीं है,तुम्हारी यह मंजिल नहीं है,तुम गलत दिशा में जा रहे हो!आज कोरोना का कहर बरपा तो भी पैदल यात्रा पर यही तबका है।दुःखों की अनवरत यात्राओं का सैलाब है,कभी शौक से तो कभी मजबूरी में,मगर सिलसिला जारी है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;जब राजनेताओं के पीछे भीड़ के रूप में भटक रहे थे तब कहता था कि भेड़ मत बनो!भेड़ों का नेतृत्व गधे करते है।आज भेडें भटक रही है और गधे मौज मार रहे है,महलों में मस्ती कर रहे है!उनके लिए होम आइसोलेशन ऐशो-आराम का नया प्रयोग है!तुम्हारे हिस्से भूख-भय का संयोग है।खूब झुंड के रूप में उछल-उछलकर नेताओं को मजबूत कर रहे थे मगर अब मजबूत नेता आराम फरमा रहे है और तुम कंटेनर में,पानी के टैंकर में,दूध के टैंकरों में भेड़ों की मानिद ठूंस-ठूंसकर ठेले जा रहे हो!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;जब कहता था कि सियासत को धर्म का जहर मत पीने दो तब गुर्राते थे,धमकाते थे,गालियां देते थे।सियासत के माध्यम से धर्म को मजबूत करने की हुंकारे भर रहे थे।आज संकट की घड़ी में सबसे पहले धर्मखोर अपने अड्डों के ताला लगाकर भाग खड़े हुए!धर्म सियासत की हुंकारों से मजबूत नहीं हुआ करते बल्कि धर्मखोरों ने सियासत में आकर सियासत को ही निगल लिया।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;मैं जिस भारत के बारे में लिखता रहा,मैं जिस गांव-देहात के बारे में लिखता रहा,जिस किसान-कमेरे के बारे में लिखता रहा वो आज सड़कों पर है।मैं जिसके हक-हिस्सेदारी की बात करता रहा वो सिर पर पोटली उठाये पैदल अपनी जड़ों की ओर चलता जा रहा है।आज&amp;nbsp; भूखा प्यासा भारत रोटी मांग रहा है और इंडिया पोस्ट डेटेड पैकेज दे रहा है,आंकड़ों के हेरफेर में उलझा रहा है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;आज भारत गंभीर संकट में है,भूख-भय से तड़प रहा है और इंडिया वाले ढोंगी मंदिर निर्माण शुरू कर चुके है।जिस गौरखनाथ के लिए भरत जैसे महान राजा अपना राजसिंहासन त्याग देते थे उसी गौरखनाथ मठ से निकला ढोंगी राजसिंहासन पर बैठता है तो गरीबों के भोजन के लिए नहीं राममंदिर के लिए चेक काट रहा है!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;आज भारत रोटी मांग रहा है तो मंत्री महोदय कह रहे है कि भारत वाले रामायण मांग रहे है और सुबह 9 बजते ही सप्लाई कर दी जायेगी!नेपाल में भूकंप आया तो वेटिकन वाले बाबा बोले कि नेपाल बाइबिल मांग रहा है,दुनियाँ के बुद्धिजीवियों ने लपेटा तो माफी मांग ली मगर इंडिया वालों में कोई शर्म नहीं है,कोई नैतिकता नहीं है,इंसाफ की तो बात ही मत करिए।भेदभाव,इंसानियत का कत्ल तो इंडिया का न्यायिक चरित्र है!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;बस भारत के लोग अभी भी समझ ले।अब भी देर नहीं हुई है!हजारों सालों के कोरोना के साथ इस नव कोरोना को एक साथ भी हराया जा सकता है मगर सबसे पहले खुद पर भरोसा करना होगा,हौंसला बुलंद करना होगा।वो चरित्र,वो बल,वो पुरुषार्थ,वो सामर्थ्य आज भी भारत के लोगों में है जिसके बूते ऐसे 5-10 कोरोना से एकसाथ लड़कर जीत सकते है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;
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  &lt;/a&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;
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&lt;/div&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;
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  &lt;/a&gt;
&lt;/div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;</description><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiomRHHe5KLpGaidbkYHbq2ejWuQ81XwgCJ3hMzEO-fcUQuHEowD5loW5d7U0WgPAE0YI-mgUWyd56lVj0ty_dmQOLlvR9vsmpNSMaxRlYK8RO-mE7kzIGSTtByJZFI5hZLINkVEuRIBvpz/s72-c/1585364285443767-0.png" width="72"/><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>धर्म बड़ा या विज्ञान?</title><link>http://sunilmoga.blogspot.com/2020/03/blog-post_28.html</link><author>noreply@blogger.com (SUNIL MOGA)</author><pubDate>Sat, 28 Mar 2020 08:26:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-676848417829322667.post-2631581162482690217</guid><description>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;
  &lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjgRwyTfaaVFY600WzC2GiVZBQugEvqDQvtwfgF7oKybWvNxMBkStdDGTqUPjXRYq-ruS3gpAFcwguhCzJWF3rcZp4w7bgCjTKTOMVV16iXpTp0x2CV9JSbD2-06-fPfaPQeV-dk8Sjo0xc/s1600/1585364205209721-0.png" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;
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  &lt;/a&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div&gt;आज दुनियाँ संकट में है।कोरोना के कहर से पूरी मानवता घुटनों पर है।दुनियाँ के सबसे बड़े धर्म यानी क्रिश्चियन की सबसे पवित्र कही जाने वाली वेटिकन सिटी पर ताला लटक गया है।सबसे बड़ा धर्मगुरु अर्थात पॉप कहीं छुप गया है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;दुनियाँ का दूसरा बड़ा धर्म है इस्लाम है।पवित्र कही जाने वाली भूमि अर्थात काबा भी लॉकडाउन हो गया है मुल्ला लोग कहीं नजर नहीं आ रहे है।तीसरा बड़ा धर्म है हिन्दू उसके भी चारो धाम और वैष्णों देवी से लेकर तिरुपति, उज्जैन से लेकर शिरडी तक लॉक-डाउन है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;इन चर्च,मस्जिद,मंदिरों को बंद करने के पीछे तर्क दिया गया कि जनहित में बंद किया जा रहा है।अगर जनता के हित मे बंद करना था तो इनको किसके हित मे खोला गया था?आज मानवता पर गंभीर संकट आया तो यीशु,अल्लाह,ईश्वर सब भाग खड़े हुए।खुले है तो सिर्फ अस्पताल और अस्पताल को धर्म ने नहीं विज्ञान ने बनाया है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;महान वैज्ञानिक रिचर्ड हॉकिन्स ने ईश्वर के अस्तित्व को कभी स्वीकार नहीं किया।उन्होंने ब्रह्मांड को लेकर ब्लैक होल सिद्धांत प्रतिपादित किया।उन्होंने ब्रह्मांड निर्माण की प्रक्रिया बताई।21वीं सदी के नास्तिकों की बात करें तो सबसे बड़ा नाम आता है किस्तोंपर हीचेन।हीचेन ने "God is not great" नाम से एक किताब लिखी।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;"God is not great"नामक किताब में हीचेन ने सैंकड़ों उदाहरण देकर बताया कि मानवता पर जब भी बड़ी आपदा आई तब ये यीशु,अल्लाह,भगवान रोकने/बचाने में पूरी तरह नाकामयाब रहे।त्रासदी के बाद भी मानवता की सेवा में कहीं नजर नहीं आये।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;उत्तराखंड में जब बाढ़ आई तो केदारनाथ खुद अपना मंदिर बचाने में असफल हो गए।गुजरात के भुज में जब भूकंप आया तो द्वारकाधीश कहीं नजर नहीं आये।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;मानव जाति में जो खुद को यीशु,अल्लाह,ईश्वर का प्रतिनिधि समझते है और किसी बगैर काल्पनिक सहारे के&amp;nbsp; जी नहीं सकते उन्होंने 95%बुद्धिहीनों की जमात तैयार कर रखी है।जब भी मानवता पर गंभीर संकट आता है तो धर्मखोर प्रतिनिधि छुप जाते है और इनके द्वारा जाल में फंसाई बुद्धिहीनों की भीड़ किसी सहारे को प्राप्त करने के लिए इधर-उधर भागने लगती है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;दुनियाँ पर जब भी संकट आता है तब वैज्ञानिक सोच के 5%लोग इनका तारणहार बनते है।बाढ़, भूकंप,कोरोना आदि को प्रकृति पैदा करती है,यीशु,अल्लाह,गॉड इनका कुछ नहीं कर सकते है।इन पर नियंत्रण करने के लिए विज्ञान आगे आता है।आज अल्लाह,ईश्वर,गॉड कहीं नजर नहीं आ रहे है।मैदान में खड़ी नजर आती है तो सिर्फ और सिर्फ विज्ञान।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;5%लोग विज्ञान की छड़ी लेकर मानवता को बचाने के प्रयास में लगे हुए है।सब धर्म स्थल ताला लगाकर भागने लगे तो विज्ञान द्वारा स्थापित अस्पताल ने आव्हान किया कि जब भी परेशानी महसूस करो तो आओ हमारी दर पर।कोरोना का विज्ञान अभी तक सहारा है समाधान नहीं मगर वैज्ञानिक सोच को पूर्ण रूप से आश्वस्त है कि इसका इलाज खोज लिया जायेगा।आस्तिकता बुद्धिहीनों द्वारा निर्मित काल्पनिकता में भटककर माथा फोड़ने में नहीं, बल्कि मानवता पर गंभीर संकट आये तो हकीकत के धरातल पर खड़े होकर समाधान खोजने के प्रति आश्वस्त होने में है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;आज दुनियाँ के वैज्ञानिक कोरोना की दवा खोजने में चौबीसों घंटे लगे हुए है और धर्मखोर पीछे छुपकर इस इंतजार में है कि जैसे ही इलाज खोजने की खबर मिल जाएं वैसे ही अपनी काल्पनिक कहानियां रचने की दुबारा शुरुआत करें!प्रकृति बुद्धिहीनों को आइना दिखाती है और धर्म की नींव हिला देती है।विज्ञान समाधान खोजती है और धर्मखोर फिर से हिली हुई नींव को जमाने के षड्यंत्र में लग जाते है!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;प्रेमाराम सियाग&lt;/div&gt;</description><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjgRwyTfaaVFY600WzC2GiVZBQugEvqDQvtwfgF7oKybWvNxMBkStdDGTqUPjXRYq-ruS3gpAFcwguhCzJWF3rcZp4w7bgCjTKTOMVV16iXpTp0x2CV9JSbD2-06-fPfaPQeV-dk8Sjo0xc/s72-c/1585364205209721-0.png" width="72"/><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना!</title><link>http://sunilmoga.blogspot.com/2020/03/blog-post_79.html</link><author>noreply@blogger.com (SUNIL MOGA)</author><pubDate>Sat, 7 Mar 2020 12:01:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-676848417829322667.post-4609527744744326494</guid><description>&lt;div&gt;दिल्ली विधानसभा चुनावों के बाद एक चर्चा देशभर में जोर पकड़ रही है कि काम करने वाले की जीत हुई है व इससे बाकी राज्यों के नेताओं पर भी दबाव कायम होगा!देशभर से जुड़े हुए लोग अपने-अपने राज्यों में क्षेत्रीय क्षत्रपों में मसीहा ढूंढने लग गए है!आकलन,कल्पना,हवा बनाना अच्छी बात है मगर लोगों को एक बात पर गौर जरूर करना चाहिए कि जीत के बाद केजरीवाल जिस मंच पर खड़े होकर धन्यवाद दे रहे थे उस पर सिर्फ केजरीवाल की फोटो थी व साइड में देशभर के लोगों को सदस्य बनने के आमंत्रण देते बड़े-बड़े अक्षरों में मोबाइल नंबर दिए गए थे!यह साफ संकेत है कि राष्ट्रीय स्तर पर बीजेपी का विकल्प इधर से ही बनेगा!&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;शहर धर्म व जाति के साथ लगाव को कम करके आर्थिक हालातों पर ध्यान केंद्रित करता है अर्थात दिल्ली के नतीजे साफ बता रहे है कि धर्म-जाति का कोई महत्व नहीं,बस सरकारें आर्थिक स्तर में सुधारों की तरफ देखें!दूसरी बात,केजरीवाल एक राष्ट्रीय आंदोलन से निकले नेता है और दिल्ली में पिछली बार मिले प्रचंड बहुमत के बाद दूसरे राज्यों में लड़े चुनावों व आम लोकसभा चुनावों में बुरी तरह हार गए थे!इस बार बड़ी रणनीति के तहत केजरीवाल आगे बढ़ेंगे या बढ़ाये जाएंगे!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;इतिहास सबक का विषय होता है इसलिए मैं मुख्यतया दो लोकसभा चुनावों का संक्षिप्त में जिक्र करूँगा!1977 के चुनाव जनसंघ,भारतीय लोकदल,सोशलिस्ट पार्टी व कांग्रेस छोड़कर आये मोरारजी देसाई की पार्टी "कांग्रेस ओ"ने मिलकर चुनाव लड़ा था।बाबू जगजीवन राम जनाधार वाले बड़ा दलित चेहरा थे व चौधरी चरणसिंह यूपी सहित उत्तर भारत के किसानों के बड़े नेता था।मगर जनसंघ ने ऐसा खेल खेला कि मोरारजी देसाई को प्रधानमंत्री बना दिया गया।जेपी निराश हुए!आडवाणी के सामने नाराजगी जताई कि हमारी तय शर्तों के मुताबिक आरएसएस को दूर रखना था!आपने मंच का दुरुपयोग किया!आरएसएस ने अपना खेल खेल दिया व बाद में चौधरी चरणसिंह ने खूब प्रयास किया मगर आरएसएस व कांग्रेस ने मिलकर उभरे क्षेत्रीय नेताओं को खत्म कर दिया।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;1980 में संघ मंच से उतरकर पर्दे के पीछे चला गया व जनसंघ से भारतीय जनता पार्टी बनी।1984 में मात्र 2लोकसभा सीटें हासिल हुई!राजीव गांधी के खिलाफ कांग्रेस छोड़कर आये वीपी सिंह,लोकदल व भारतीय जनता पार्टी ने 1989 का चुनाव मिलकर लड़ा!चौधरी देवीलाल बड़े जनाधार वाले नेता थे मगर देवीलाल,शरद यादव,लालू यादव,मुलायम सिंह यादव ने मिलकर वीपी सिंह को प्रधानमंत्री बना दिया।दबाव डालकर मंडल आयोग की रिपोर्ट लागू करवा दी!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;भाजपा ने समर्थन वापिस लेकर सरकार गिरा दी।मध्यावधि चुनावों में राजीव गांधी दुबारा चुनकर आये और भाजपा के साथ मिलकर रामलला के ताले खुलवाकर कमंडल आंदोलन को ईंधन दे दिया!पूरे उत्तर भारत मे भाजपा ने इसका बखूबी उपयोग किया और खुद को उस स्तर पर ले आये कि या तो वो सरकार बनाये या उसके समर्थन से बने!आगे जाकर हुआ भी यही कि क्षेत्रीय पार्टियां भाजपा की पिछलग्गू बनने को मजबूर हो गई!भाजपा हारी तो कांग्रेस की पिछलग्गू बनना पड़ गया!कुल-मिलाकर कांग्रेस-बीजेपी ने मिलकर क्षेत्रीय पार्टियों के खात्मे की लड़ाई ही लड़ी है!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;लगातार दो चुनावों में शिकस्त खाई कांग्रेस अब भविष्य में दुबारा खड़ी नहीं हो सकती क्योंकि क्षेत्रीय नेताओं की पिछलग्गू बन चुकी है।आरएसएस अब कांग्रेस को दुबारा खड़ा करना चाहता नहीं है क्योंकि कांग्रेस अब खड़ी होगी भी तो क्षेत्रीय जनाधार वाले नेताओं के बूते ही और क्षेत्रीय जनाधार वाले नेता आरएसएस की बात मानते नहीं है!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;मैंने राष्ट्रीय चुनावों के संक्षिप्त इतिहास का जिक्र इसलिए किया क्योंकि दिल्ली में बीजेपी की हार व केजरीवाल की जीत के बाद बाकी राज्यों की युवा पीढ़ी को केजरीवाल भविष्य का विकल्प नजर आने लगा है वो ठीक से समझ सके कि केजरीवाल विकल्प बनकर उभरा नहीं है बल्कि चतुराई के साथ उभारा गया है!बीजेपी की हार पर हास्य-व्यंग्य ठीक है मगर इस जीत में हम कहीं नहीं है!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;दो बातें हम लोगों को साफ-साफ समझ लेनी चाहिए कि बीजेपी की हार पर हम खुश है,कांग्रेस के डूबने पर हम खुश है मगर बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना बनकर नाचने की कोई जरूरत नहीं है!केजरीवाल को विकल्प मान लेना फिर से 1977,1989 की तरह के धोखे का अग्रिम आमंत्रण है!केजरीवाल की जीत में न सोशल जस्टिस की जीत है,न हिस्सेदारी के अनुरूप भागीदारी की जीत है!शहरी अमीरों द्वारा गरीबों पर राज करने के लिए एक वर्ग विशेष के शातिर समूह की जीत है!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;कुछ साथी कह रहे है फलाने नेता को आम आदमी पार्टी जॉइन कर लेनी चाहिये!यही आवाज़ें अन्य राज्यों से भी उठने लगी है!अगर किसी पार्टी में जाकर वर्ग विशेष की सेवा में ही लगना है तो कांग्रेस-बीजेपी में क्या बुराई है?दिल्ली से निकलकर जब अन्य राज्यों में आम आदमी पार्टी आयेगी तो इनको भी धार्मिक व जातीय दलालों की खुद ही जरूरत पड़ जायेगी और यह अपने हिसाब से खुद ही चयन कर लेगी,आप खुद बेचने के लिए क्यों उतावले हो रहे हो!जब तक अपने लोग मिलकर,अपनी विचारधारा के अनुरूप,अपने नेता तैयार करके खुद नहीं लड़ेंगे तब तक कोई बदलाव नहीं आने वाला!नेता किसी की भी लटकन बने क्या फर्क पड़ता है!हम दूसरों की जीत को अपनी जीत मानकर आज भी तालियां बजा ही रहे है!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;दिल्ली के चुनाव राष्ट्रीय प्रोपगेंडा का चुनाव था।एक प्रोपगेंडा जीता है व दूसरा हारा है मगर हमारे लिए यह सबक है,सीखने का अवसर है जिसको समझते हुए हम मिलकर अपना एजेंडा सेट कर सकते है व आगे बढ़ सकते है!मनोरंजन करिये मगर इतने भी उतावले पड़कर मत उछलिये की जड़ों को ही काट बैठें!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;
  &lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjf8BhcIKcANcH68MQV-pYTB9rbLNav3ZTBrRGNJ9oREc1yDhgGRvT5inCokZm23GiqZ27ywM9JLthl2J88EkbTV8s1saIJ2gbJAJ8Y9ZikW8shIuP5foAUE-ooSktLJFXk9_NjhJBBekUY/s1600/1583562701564828-0.png" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;
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&lt;/div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;</description><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjf8BhcIKcANcH68MQV-pYTB9rbLNav3ZTBrRGNJ9oREc1yDhgGRvT5inCokZm23GiqZ27ywM9JLthl2J88EkbTV8s1saIJ2gbJAJ8Y9ZikW8shIuP5foAUE-ooSktLJFXk9_NjhJBBekUY/s72-c/1583562701564828-0.png" width="72"/><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>कश्मीरी पंडितों का विस्थापन!</title><link>http://sunilmoga.blogspot.com/2020/03/blog-post_7.html</link><author>noreply@blogger.com (SUNIL MOGA)</author><pubDate>Sat, 7 Mar 2020 12:01:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-676848417829322667.post-6871585097287717415</guid><description>&lt;div&gt;व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी व फेसबुक ग्रुपों में कश्मीरी पंडितों की रूदाली कहानियों के लंबे-लंबे मैसेज चल रहे है और कश्मीरी पंडितों की समस्या को लेकर कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है!लाज़िम है कांग्रेस ने आक्रामक तरीके से इतिहास का सच सामने रखकर इन पर विराम लगाने की कोई कोशिश नहीं की जिसके कारण ऐसे संदेशों की स्वीकार्यता बढ़ती गई!&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;कश्मीर आंदोलन की शुरुआत 1989 में हुई थी और उस समय देश मे लोकसभा के चुनाव चल रहे थे!कश्मीरी नेताओं ने भी चुनावों के मद्देनजर नफरत का जहर घोलकर अपनी जीत सुनिश्चित करने का प्रयास किया था!कश्मीरी नेताओं को यह अहसास कतई नहीं था कि कश्मीरी पंडितों की धार्मिक लूट के कारण जनता में इतना आक्रोश जमा है कि उनके भड़काऊ भाषण घाटी को नासूर बना देंगे!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;1989 के चुनावों में बीजेपी 85 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी और जनता दल के नेता वीपी बीजेपी के समर्थन से प्रधानमंत्री बने।कांग्रेस छोड़कर जनमोर्चा में शामिल हुए मुफ़्ती मोहम्मद सईद देश के पहले मुस्लिम गृहमंत्री बने!उस समय जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल बीजेपी नेता जगमोहन थे और जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन था।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;राज्य व केंद्र में दोनों जगह एकतरह से बीजेपी की ही सरकार थी।जो कश्मीरी पंडितों के जुल्म की कहानियां आज सुनाई जा रही है वो 19जनवरी 1990 से शुरू होती है जब कश्मीरी पंडितों पहला जत्था जम्मू से होते हुए दिल्ली की तरफ कूच करता है!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;यह भी याद रखा जाना चाहिए कि कश्मीरी पंडितों के तथाकथित इतने बड़े नरसंहार के बाद भी बीजेपी ने वीपी सिंह के खिलाफ कोई नाराजगी जाहिर नहीं की बल्कि इसको मुद्दा बनाकर पूरे देश मे दुष्प्रचार का कार्य शुरू किया!बीजेपी ने वीपी सिंह सरकार से समर्थन उस समय वापिस लिया जब वीपी सिंह ने मंडल आयोग की रिपोर्ट को लागू कर दिया!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;बीजेपी के हाथ मे एक मुद्दा तो कश्मीरी पंडितों का आ ही चुका था और दूसरा मुद्दा खुद राजीव गांधी ने पहले ही रामलला का ताला खोलकर उपलब्ध करवा दिया था!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;एक छोटा सा लॉजिक समझिए!कश्मीरी मुस्लिम पंडितों ने हिन्दू पंडितों को कहा कि तुम भाग जाओ और ये भागकर दिल्ली आ गए!बाकी संघर्ष होता तो हिन्दू पंडित भी हथियार उठा सकते थे!सेना को बम-बारूद सप्लाई करने का दावा करने वाला आरएसएस इनके साथ खड़ा हो सकता था!हिंदुत्व वाली पार्टी इनके ऊपर अत्याचार देखकर वीपी सिंह की सरकार गिरा सकती थी मगर ऐसा कुछ नहीं किया गया!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;1990 के बाद कश्मीरी पंडितों के लिए हर सरकार ने पंच-वर्षीय योजनाओं के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध करवाया हो या न करवाया हो मगर कश्मीरी पंडितों के लिए हजारों करोड़ के राहत पैकेज जरूर उपलब्ध करवाए है और आज भारत मे जैन समुदाय के बाद दूसरा बड़ा समृद्ध समुदाय कश्मीरी पंडित है!राजनीति,मीडिया,बॉलीवुड से लेकर उद्योगों तक मे इनकी तूती बोलती है!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;एक रोना-धोना डिपार्टमेंट दिल्ली में खोला हुआ है जो हर सरकार को ब्लैकमेल करते हुए पैकेज जुटाने का कार्य करता है!आज केंद्र में मजबूत व हिंदुत्व की रखवाली मोदी सरकार है इसलिए इनको दी जाने वाली सारी सहूलियतें खत्म करके वापिस घाटी में भेजने का कार्य करे!राष्ट्रीय आपदा बन चुके इन जख्मों का इलाज करें ताकि गरीबों,मजदूरों,आदिवासियों,किसानों आदि के असली जख्मों के पता चलने का मार्ग प्रशस्त हो!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;
  &lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjqoFAZqAOhWWBwpdzgdS1WFTCuQqEDqsugYYEPb5fAMexFkUTqhztUJcXv_P9qI_EtY88DdSyVnQpxXZvX5Q-dRG6zppAlXeCRb5F3eGqleuT7nnrit2OiNetY_LeuFbP1XDQxKNawOBZS/s1600/1583562697179537-0.png" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;
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  &lt;/a&gt;
&lt;/div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;</description><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjqoFAZqAOhWWBwpdzgdS1WFTCuQqEDqsugYYEPb5fAMexFkUTqhztUJcXv_P9qI_EtY88DdSyVnQpxXZvX5Q-dRG6zppAlXeCRb5F3eGqleuT7nnrit2OiNetY_LeuFbP1XDQxKNawOBZS/s72-c/1583562697179537-0.png" width="72"/><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>कंपनियों का डूबना!</title><link>http://sunilmoga.blogspot.com/2020/03/blog-post.html</link><author>noreply@blogger.com (SUNIL MOGA)</author><pubDate>Sat, 7 Mar 2020 12:01:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-676848417829322667.post-2477112587192709984</guid><description>&lt;div&gt;किसी कंपनी के डूबने का मतलब यह कतई नहीं है कि 5-7 लुटेरों का व्यापार डूब गया है!जो देश का सूचना तंत्र है वो आपको भ्रमित कर रहा है।यस बैंक के दिवालिये होने की जो खबरे बताई जा रही है वो एक सफेद झूठ है।&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;आपको बताया गया कि किंगफ़िशर कंपनी डूब गई और विजय माल्या का दिवाला निकल गया मगर वो हकीकत नहीं थी।असल मे देश के मेहनतकशों का द्वारा निर्मित पूंजी बैंकों ने विजय माल्या को उपलब्ध करवाई!कारण यह बताया गया कि इस कर्ज पर माल्या ब्याज देगा और यह पैसा देश के विकास में अर्थात जनता के भले के लिए खर्च किया जाएगा!खराब मैनेजमेंट व खुद के ऐशो आराम/विलासिता पर पानी की तरह पैसा खर्च किया और बैंकों को बता दिया कि पूंजी डूब गई है!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;बैंकों ने इसको एनपीए घोषित कर दिया।इस पूरी प्रक्रिया नजदीक से देखोगे तो आपको अहसास हो जायेगा कि भ्रष्ट बैंक अधिकारियों ने मोटा माल कमाया,प्रोमोटर/ट्रस्टी/ऑडिटर/रेगुलेटर सब फाइव स्टार बंगलों,महंगी गाड़ियों,दुनियाँ के सैर-सपाटों का लुत्फ उठाते रहे और कंपनी के तथाकथित डूबने के बाद भी ये सब मौज में है!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;विनिवेश,एनपीए, राइट ऑफ आदि ऐसी घुमावदार बातें है जिसके माध्यम से इन डकैतियों पर पर्दा डाला जाता है!कुज्ञानी उद्योगपति व बकैत बुद्धिजीवी हर दम देश को भय परोसते है कि ऐसे लोगों को कानून के कठघरे में खड़ा करोगे तो उद्योग जगत में भय का माहौल पैदा हो जायेगा,पूंजीपति धंधा करने से डरेंगे व अर्थव्यवस्था चरमरा जाएगी!यानि देश का विकास खतरे में आ जायेगा!सत्ताधारी नेताओं के बहीखातों में पर्दे के पीछे से कुछ ऐड हो जाता है इसलिए फिर से जनता की आंखों में धूल झोंकने के लिए नये शब्द गढ़ने में लग जाते है!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;जनता का पैसा चंद लुटेरों के हवाले करने की परिक्रिया को ही निजीकरण कहा जाता है!जनता के खून-पसीने से खड़े किए गए सार्वजनिक उपक्रमों को अपने चहेते लुटेरों&amp;nbsp; के हाथों में सौंपने की प्रक्रिया को ही विनिवेश कहा जाता है!जनता की बैंकों में जमा पूंजी को लुटाने के समूह को कंपनी कहा जाता है!ये जितनी भी बड़ी-बड़ी कंपनियां है वो सब की सब बैंकों से कर्ज लेकर खड़ी की गई है और बैंकों में जमा पूंजी देश की जनता की है!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;अगर आपको लग रहा है कि निजी पीएमसी बैंक या निजी यस बैंक डूबा है व इससे हमें क्या मतलब है तो सोच का दायरा बढ़ाने की जरूरत है!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;डूबना क्या होता है वो ओलावृष्टि व बेमौसम बारिश में डूबे किसानों को पूछिये!विजय माल्या व नीरव मोदी सरीखे&amp;nbsp; 5000से ज्यादा भगोड़े विदेशों में आलीशान बंगलों में ऐशो-आराम की जिंदगी काट रहे है!यस बैंक वाले राणा कपूर की दिन चर्या पर भी कोई फर्क नहीं पड़ेगा!बाकी भक्तों के पापा की सरकार जब से आई है तब से इस डूब में लुटेरे मस्ती से डुबकियां लगाकर निकलते जा रहे है और भक्त गा रहे है "क्या लेके आया बंदा क्या लेके जाएगा"और पापा गा रहे है "चाय बेचकर आया भक्तों,देश बेचकर जाऊंगा!"&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;राम भी रूठा, राज भी रूठा&lt;/div&gt;&lt;div&gt;सीमा नहीं अपमान की!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;टूटी डोर टूटा धागा&lt;/div&gt;&lt;div&gt;मंजिल रही न किसान की!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;कैसी कीमत,कैसी राहत&lt;/div&gt;&lt;div&gt;सत्ता है बेईमान की!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;हालत बहुत बुरी है भाई&lt;/div&gt;&lt;div&gt;धरती के भगवान की&#128546;&#128546;&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;
  &lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhtVMGk7PfqpqXiwzAaBe9-yR9EwD49_L6_jiNejgM2M7AiaVABKDM5hBNu3l1fRirGaOighsXby8wdQx35ppSQrSdHpBUclK9VhV968ZQqHVRVrMu3IdYq-4FFtk2CBMLC6zeUriTVqqGW/s1600/1583562686257530-0.png" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;
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  &lt;/a&gt;
&lt;/div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;</description><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhtVMGk7PfqpqXiwzAaBe9-yR9EwD49_L6_jiNejgM2M7AiaVABKDM5hBNu3l1fRirGaOighsXby8wdQx35ppSQrSdHpBUclK9VhV968ZQqHVRVrMu3IdYq-4FFtk2CBMLC6zeUriTVqqGW/s72-c/1583562686257530-0.png" width="72"/><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>मेहनतकशों के धर्मभीरु बनने के दुष्प्रभाव!</title><link>http://sunilmoga.blogspot.com/2020/02/blog-post_93.html</link><author>noreply@blogger.com (SUNIL MOGA)</author><pubDate>Tue, 11 Feb 2020 07:59:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-676848417829322667.post-6373432345972870586</guid><description>&lt;div&gt;जब हम लोग नब्बे व 2हजार के दशक में सरकारी स्कूल जाते थे तो एक सम्मान भरी नजर से देखा जाता था।गांव के बच्चों में आपस में पढ़ाई को लेकर पूरी प्रतियोगिता होती रहती थी।जिसके अच्छे नंबर आते थे उनको गांव में सम्मान मिलता था।गांव के बड़े-बुजुर्ग हर पढ़ने वाले बच्चे के संरक्षक होते थे।कहीं गलती करते थे तो कोई भी पकड़कर थप्पड़ मार देता था!घरवाले भी उनका आभार जताते थे कि मेरे बच्चे का ख्याल रख रहे है!&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;आज गांवों के सरकारी स्कूलों को देखता हूँ व पढ़ने वाले बच्चों की तरफ देखता हूँ तो मन मे बहुत पीड़ा होती है।जो गांव परिवार बनकर हमे प्यार व सरंक्षण देते थे वो गांव अपनत्व की भावना खोते जा रहे है।आज गांवों में स्टैण्डर्ड की जंग शुरू हो चुकी है।सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को दोयम दर्जे का समझा जाता है,हेय दृष्टि से देखा जाता है।ये गरीबों के बच्चे है।जिनके पास थोड़ा पैसा आया उन्होंने अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों से निकालकर निजी स्कूलों में दाखिला करवा दिया है।गरीब हम भी थे व गरीब आज भी सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे है।बच्चे वहीं खड़े है मगर समाज अपना कर्तव्य भूल गया!गांव ने अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ लिया!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;यह बदलाव किस स्तर पर व किस स्वरूप में आया उसको हमे जानने की जरूरत है।क्यों स्कूल के मैदान से हंसते-खेलते बच्चे गायब हुए और कैसे निराशा के भाव मे लिपटे बच्चे मिड डे मील का कटोरा लेकर खड़े हो गए!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;स्कूल नहीं जाने पर घर के दरवाजे पर दस्तक देने वाले अध्यापक आज स्कूल से अपने घर व घर से स्कूल की चारदीवारी में सिमट चुके है।गांव के मुख्या लोग जो बीच-बीच मे स्कूल का दौरा कर लेते थे वो अब धर्म व राजनीति के स्वनिर्मित अड्डों पर बहसबाजी करते नजर आते है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;जो गांव के सक्षम लोग सब बच्चों को अपना समझ स्कूल में सुविधाओं के लिए सहयोग करते थे वो अब मंदिरों के निर्माण में बोलियां लगाने लग गए!गांव के सक्षम लोगों ने आलीशान मंदिर बनाने में ध्यान केंद्रित करके स्कूल से बेरुखी दिखाई और स्कूल देखते ही देखते पाठशाला से भोजशाला बनते गए!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;जब समाज वैज्ञानिक दृष्टिकोण से आगे बढ़ता है तो सरकारी स्कूल गुलजार होता है और जब समाज धर्म भीरु बनता है तो सरकारी स्कूल खंडहरों में तब्दील होते जाते है।जब हम पढ़ते थे तो गांव में कोई मंदिर है भी या नहीं,इसकी जानकारी भी नहीं थी क्योंकि हमारे बुजुर्गों ने शिक्षा पर जोर दिया था और हर बच्चे को अपना बच्चा माना।आज छोटे से छोटे बच्चे को भी स्कूल की जानकारी हो न हो मंदिरों की पूर्ण जानकारी है क्योंकि वर्तमान पीढ़ी&amp;nbsp; बच्चों को शिक्षा के बजाय धर्म की जानकारी उपलब्ध करवा रही है!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;सक्षम लोगों ने अपने बच्चों को निजी स्कूलों में दाखिल करवाकर बाकी बच्चों को अपने समाजसेवी बनने,नेता बनने के लिए उपयोग करना शुरू कर दिया है।गांव-गवाड़ में बैठकर ताश के पत्तों के साथ देश की सत्ता बदलने का दावा करने वाले लोग नीचे से खिसकती जमीन को नहीं रोक पा रहे है!बड़ी विकट परिस्थितियां है गांव के बच्चों के सामने!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;उस दौर के नेताओं ने लड़कर मंडल आयोग की रिपोर्ट लागू करवा ली,बाद में भी लड़कर आरक्षण ले लिया!आज नेताओं से लेकर सामाजिक संगठनों के लोगों तक की मति पर धूल जम चुकी है!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;गांव की इन स्कूलों में विकट हालातों के बावजूद अगर कोई पढ़कर कॉलेज तक का सफर तय कर लेता है और नौकरी के काबिल बन भी जाता है तो आगे का रास्ता लगभग खत्म किया जा चुका है मगर सक्षम लोगों ने मुँह पर ताला लगा लिया है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;चूहों की मौत पर खामोशी बरतने वाले लोगों को समझना चाहिए कि आग पूरी बस्ती में लगी है जिसके बीच खुद का आलीशान मकान बना हुआ है!इन गरीब बच्चों के भविष्य को दरकिनार करने वाले लोगों को समझना होगा कि उनका बेटा पौता भी बिना माहौल मिले तारे तोड़कर नहीं ले आयेगा और माहौल पूरे गांव व समाज से बनता है!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;जो अध्यापक इन विकट परिस्थियों में भी व्यक्तिगत प्रयास कर रहे है उनको सैलूट करता हूँ व जो गिने-चुने लोग सरकारी स्कूलों को संजोने,संवारने में लगे है उनको सलाम करता हूँ।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;जो नेता,सामाजिक संगठनों के मुख्या, सक्षम लोग इस बनी बनाई बग्गियां को उजड़ती देखकर खामोश बैठे है उनको लानत भेजता हूँ।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;</description><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>मीडिया का रोना-धोना शुरू!</title><link>http://sunilmoga.blogspot.com/2020/02/blog-post_19.html</link><author>noreply@blogger.com (SUNIL MOGA)</author><pubDate>Tue, 11 Feb 2020 07:57:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-676848417829322667.post-2848987088437805798</guid><description>&lt;div&gt;भारतीय मीडिया के बारे में लिखने का अब मेरा मन नहीं करता और इनके लिए शायद मेरी यह अंतिम पोस्ट ही हो जाएं!वैसे भी मैंने 4साल से टीवी देखना छोड़ रखा है!इधर-उधर से मित्र वीडियो भेज देते है तो हास्य-मनोरंजन हो जाता है व पता चलता रहता है कि गिरावट का दौर चलता ही जा रहा है।टीवी चैनलों को लोग मुख्यधारा का मीडिया कहते है!बड़ी अजीब बात है कि जो मीडिया भारत की जनता के खिलाफ खड़ा है,जनता को लड़ा रहा है,जलील कर रहा है उनको मुख्यधारा का मीडिया कहा जाता है!&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;मैं भारतीय मीडिया को मानसिक आतंकी कहता हूँ, लश्कर-ए-मीडिया ने आज देश का जो माहौल बनाया है उसके हिसाब से ये चैनल मालिक व कुपढ-अनपढ़ एंकरों की जगह तिहाड़ जेल में होनी चाहिए।फर्जी राष्ट्रवाद पर चीखते-चीखते आज देश को आर्थिक गड्ढे में डाल बैठे है!जनता को विश्व गुरु का सपना दिखाते-दिखाते खुद पैंदे में जा गिरे है।पिछले साल वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम डे पर जो इंडेक्स आई उसमे 2रैंक गिरते हुए 140वें स्थान पर रहा!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;न्यायपालिका के बाद मीडिया में क्लासिक मेरिटधारी बैठे है!पूंजी से लेकर दिमाग तक का निवेश मेरिट धारी कर रहे है!आरक्षण मुक्त मेरिट से भरमार मीडिया की हालत इतनी खस्ता कैसे हो गई?मीडिया खुद तो अपने गिरेबाँ में झांकेगा नहीं और जनता के पास सुधार का कोई विकल्प नहीं है!तो जनता क्या करें?जनता के पास एक ही विकल्प है कि देखना बंद करे!इनकी जान टीआरपी में अटकी होती है!भारत का मीडिया शुद्ध रूप से एक ट्रेड बन गया है,एक व्यापार बन गया है जो खबरे बेचता है!मैं तो इसे व्यापार भी नहीं कहता क्योंकि व्यापार के कुछ नियम होते है,कुछ तय मानक होते है!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;भारतीय मीडिया सत्ता का दलाल बनकर फ्रॉड की फैक्ट्री चला रहा है,जनता के पक्ष में पत्रकारिता करने के दिन लद चुके है!मुट्ठीभर लोग मीडिया पर कब्जा करके बैठे है और बहुसंख्यक आबादी को नये-नये हथकंडों के माध्यम से बरगलाते है!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;देश मे सच बोलने वाले को मीडिया ट्रोल करता है,हक मांगने वालों को गद्दार बताकर कंगारू कोर्ट लगाकर ट्रायल करता है!मीडिया राजनेताओं की तरह बेबाकी से झूठ बोलता है!न कोई कार्यवाही करने की स्वतंत्र संस्था न कोई स्वघोषित नैतिकता!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;भारतीय मीडिया मूलभूत मुद्दों से ध्यान हटाकर फर्जी व प्रायोजित मुद्दों पर जनता का ध्यान केंद्रित करती है,रोज हवा देने के लिए लंबे-लंबे प्राइम टाइम करता है,कई-कई घंटों डिबेट करता है,सर्कस की तरह 5-5हजार रुपये देकर चार-पांच मुर्गों को बुलाकर लड़ाता है!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;मीडिया साम्प्रदायिकता,लिंगभेद,अंधविश्वास,पाखंड आदि का रोज लाइव टेलकास्ट के माध्यम से प्रचार-प्रसार करता है!आज हमारे पास सोशल मीडिया जैसा सशक्त माध्यम है जिसके द्वारा भारतीय मीडिया को औकात बता सकते है।सोशल मीडिया को मुख्यधारा का मीडिया बना सकते है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;टीवी पर चल रही खबरों के हिसाब से सोशल मीडिया को पिछलग्गू न बनने दें!सोशल मीडिया का इस तरह उपयोग किया जाएं कि यह फर्जी मुख्यधारा का मीडिया खुद हमे फॉलो करने लग जाएं।अपने बुनियादी मुद्दों को,मूलभूत मुद्दों को उठाने का उपयोग सोशल मीडिया में करना चाहिए!न हमारे पास सत्ता है और इतना मोटा माल है कि भारतीय मीडिया पर कब्जा कर सके!इसलिए सोशल मीडिया को अपना मीडिया बनाओ व व्यवस्था परिवर्तन की जंग लड़ो!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;कल तमाम टीवी चैनल्स ने दिल्ली चुनावों का एग्जिट पोल किया जिसमें बीजेपी की साफ हार नजर आ रही है!उसके बाद जी न्यूज का डीएनए देखिये!जब जनता ने तमाम तरह की प्रोपगेंडा मशीनरी को नकार दिया तो जनता को ही जलील करना शुरू कर दिया!लगता है मीडिया में तीन दिवसीय राष्ट्रीय शोक की घोषणा कर दी गई है!यह सोशल मीडिया की ताकत है कि इनके तमाम फ्रॉड धराशायी हो गए!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;गुस्सा मत होइए!इनका इलाज गुस्से में नहीं बल्कि विवेक से सोशल मीडिया के उपयोग में है।मीडिया के मातम पर दुःखी मत होइए!जश्न मनाइये!इनका रोना-धोना सुकून देता है!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;</description><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>मध्यकालीन समाजवाद के जनक कबीर...</title><link>http://sunilmoga.blogspot.com/2020/02/blog-post_11.html</link><author>noreply@blogger.com (SUNIL MOGA)</author><pubDate>Tue, 11 Feb 2020 07:55:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-676848417829322667.post-6081030273775524189</guid><description>&lt;div&gt;कबीर के बारे में वर्तमान भारत को बस इतनी ही जानकारी है कि कबीर एक संत थे व निर्गुण भक्ति अर्थात निराकार ईश्वर/राम के उपासक थे!असल मे धार्मिक जंजीरों में जकड़े इस देश के लोगों ने कबीर के व्यक्तित्व का विश्लेषण मात्र धर्म के नजरिये से किया है!मुस्लिम कबीर को सूफी मानने लगे व हिन्दू संत!जबकि कबीर दोनों धर्मों के सांचे में नहीं बैठते है!&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;प्रशा में 1818 में एक व्यक्ति पैदा होता है और उनकी विचारधारा को लेकर जर्मनी से निष्काषित कर दिया जाता है।वह व्यक्ति पेरिस से होते लंदन पहुंचता है।लोगों को एकजुट करने के बहुत से प्रयास करता है मगर हर बार असफल हो जाता है।वो व्यक्ति राजनैतिक अर्थशास्त्र पर कलम चलाता है!"दास कैपिटल"के रूप में एक किताब सामने आती है।दुनियाँ उस विचार को सम्मान देती है और वो व्यक्ति दुनियाँ का महानतम विचारक कार्ल मार्क्स बन जाता है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;ऐसा क्या हुआ है कि 1818 में पैदा हुआ पोस्ट ग्रेजुएट,रीसर्च स्कॉलर अपने विचार से मरणोपरांत आधी दुनियाँ को बदल देता है मगर 1440 में लहरतारा, वाराणसी में पैदा हुआ,अनपढ़ आदमी जो कार्ल मार्क्स से 400साल पहले इनसे भी बेहतरीन विचार दे गया उनको दुनियाँ वो सम्मान नहीं दे पाई जिसका वो हकदार था!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;कबीरदास जी ने खुद कहा "मसि कागद छूवो नहीं, कलम गही नहिं हाथ।" अर्थात जिन्होंने कलम कागज को छुआ नहीं उन्होंने अपने अनुभव व विवेक के आधार पर वो विचार दिया जो कार्ल मार्क्स भी नहीं दे पाया।कार्ल मार्क्स वर्ग संघर्ष के माध्यम से हिंसा को जायज ठहराते है मगर कबीर जागरूकता द्वारा स्वतः स्फूर्त समाजवाद की बात करते हुए कहते है...&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;साईं इतना दीजिये,जा में कुटुम्ब समाय!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;मैं भी भूखा न रहूं,साध ने भूखा जाय!!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;भारतीय इतिहास में जितने भी बड़े संघर्ष हुए है वो या तो धर्म को लेकर हुए है या सत्ता पर कब्जा करके धर्म के प्रचार-प्रसार को लेकर है।हर बड़े भारतीय दार्शनिक ने जन चेतना को जगाने के लिए धर्म के नाम पर पाखंड व अंधविश्वास की लूट में फंसी जनता को ध्यान में रखते हुए अपने विचार दिए!बुद्ध से लेकर कबीर तक एक लंबी श्रृंखला रही है जिन्होंने ब्राह्मणवाद के कर्मकांडों का विरोध करते हुए जागरूकता के अभियान चलाए।बुद्ध ने "अप्पो दीपो भव" अर्थात मानने के बजाय जानने पर जोर दिया तो कबीर ने कहा...&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;कस्तूरी कुंडली बसै ,मृग ढूँढै बन माँहि।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;ऐसैं घटि- घटि राँम है , दुनियां देखै नाँहिं।।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;कबीर ने ईश्वर के अस्तित्व को नकारा तो नहीं मगर रूप,आकार, कालखंड से मुक्त बताकर कण-कण में,घट-घट में निवास बताया!कुल मिलाकार कबीर भारतीय जनता जिस तरह आडंबरों में फंसी थी उसको बाहर निकालकर समानता,स्वतंत्रता व बंधुता के पटल पर लाने का प्रयास कर रहे थे।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;कार्ल मार्क्स के समय मे पूंजीपति व मजदूर वर्ग पूर्णतया उभर चुके थे इसलिए मजदूरों के शोषण को देखकर समाजवाद की परिकल्पना पेश कर दी थी मगर कबीर के समय भारत मे धर्म का शोषण चरम पर था।यहां आर्थिक स्तर की अवधारणा के मूल में धर्म मुख्य कारक था।धार्मिक सत्ता पर काबिज लोग आम जनता के शोषक थे और जनता पीड़ित।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;कबीर ने आमजन को धर्म पर काबिज लोगों की लूट के खिलाफ आमने-सामने के संघर्ष के लिए भड़काया नहीं बल्कि जन जागरूकता के माध्यम से विरक्त करने का प्रयास किया।कबीर ने ईश्वर व मोक्ष के लिए लालायित जनता को खुद उस स्तर पर खड़ा करने की कोशिश की जहां बिचौलियों के लिए कोई जगह न हो अर्थात धर्म के नाम पर लूट की चैन को खत्म कर दिया जाएं।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;मजदूरों की तरह धर्म मे भी पूंजी का उत्पादक मेहनतकश गरीब तबक़ा ही होता है इसलिए लूट की यह श्रृंखला जिस दिन गड़बड़ाई उसी दिन से गरीबों के जीवन मे सुधार आने लग जाता है।परिस्थितियों व कालखंड के हिसाब से देखा जाए तो कबीर मध्यकालीन विश्व के पहले समाजवादी विचारक रहे है!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;ऐसा क्या हुआ है कि भारत ने ऐसे महानतम विचारक को लगभग भुला दिया है या मात्र धर्म के सांचे में डालकर एक संत/सूफी/गुरु तक सीमित करके डाल दिया?शायद कबीर को भी इसका अहसास था इसलिए कहा था...&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;बन ते भागा बिहरे पड़ा,करहा अपनी बान।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;करहा बेदन कासों कहे,को करहा को जान।।'&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;वन से भाग कर बहेलिये के द्वारा खोये हुए गड्ढे में गिरा हुआ हाथी अपनी व्यथा किस से कहे ?यानि कबीर को जिन्होंने मात्र धर्म का विकल्प समझा उन्होंने ही कबीर के समाजवादी आंदोलन का,विचारों का कत्ल कर दिया।जिन्होंने कबीर को मात्र धर्मगुरु मानकर उनके "गेय शब्दों"को लेकर निकले व जगह-जगह आश्रमों की स्थापना की उन्होंने कबीर को पीछे छोड़ दिया और व्यक्तित्व के एक हिस्से को,विचारों के अंश को लेकर आगे बढ़ गए।ऐसे लोगों ने कबीर को वापिस ले जाकर धर्म के बाड़े में फेंक दिया!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;कबीर के अनुयायी अगर समाजवादी कबीर को लेकर आगे बढ़ते तो तुलसी के संगठित धार्मिक गिरोह से मुकाबला कर पाते मगर कबीर के धार्मिक पहलू को लेकर आगे बढ़ा असंगठित समूह उसका मुकाबला नहीं कर पाया।धर्म की लूट के खिलाफ लड़ाई नया धर्म बनाकर या दूसरे धर्म मे जाकर नहीं लड़ी जा सकती।अगर ऐसा होता तो यहूदी धर्म मे पैदा हुआ,ईसाई धर्म मे पला-पढ़ा मार्क्स नास्तिक नहीं होता!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;अगर कबीर भी 15-20 साल और जिंदा रहते तो शायद अंतिम पड़ाव नास्तिकता ही होता!जब कबीर को शुरू से लेकर अंत तक बढ़ते है तो एक धर्म भीरु कबीर से नास्तिक कबीर की तरफ का गमन साफ नजर आता है!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;आज कबीर के बीजक में से साखी, रमैनी गायब हो चुकी है और "शब्द"अर्थात गाये जाने वाले पद्य बचे है!भारत के सारे धर्म गुरु अपने अंतिम समय मे काशी में अपना जीवन त्यागकर मोक्ष की प्राप्ति हेतु आते थे और कबीर अपने अंतिम समय मे काशी से निकलकर मगहर चले गए!दुनियाँ के महानतम समाजवादी की समाधि मगहर में है जो दुनियाँ का प्रेरणास्थल होना था उसको दुर्भाग्य से भारत के लोगों ने ही भुला दिया!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;</description><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>बिचौलिए की भूमिका में भारत सरकार, मुर्दा विपक्ष और जनता बेबस-लाचार!</title><link>http://sunilmoga.blogspot.com/2020/02/blog-post_8.html</link><author>noreply@blogger.com (SUNIL MOGA)</author><pubDate>Sat, 8 Feb 2020 12:29:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-676848417829322667.post-6470383440078641441</guid><description>&lt;div&gt;मोदी सरकार ने एक-एक करके सारे सरकारी उपक्रम बेच दिए है या निविदाएं हो रही है!आजादी के बाद देश के करोड़ों मेहनतकशों के खून पसीने से बने इन उपक्रमों का बिकना कोई सामान्य प्रक्रिया नहीं है!ऐसे देश मे जहाँ एक तिहाई आबादी गरीबी की रेखा से नीचे जीवनयापन कर रही हो उनको सरकारी सरंक्षण मिलने के बजाय निपट लुटेरे पूंजीवादीयों के हवाले कर दिया गया!&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;भारत माता सिर्फ नारों से नहीं बनती है बल्कि सरकारों में मातृत्व की भावना होनी चाहिए।ऐसी माता किस काम की जो अपने भूखे बच्चों को भेड़ियों के आगे फेंक दें!लोकतंत्र में लफंगे सरकार में आ जाते है तो इस तरह के दृश्य आम हो जाते है!भारत कोई भूगोल का टुकड़ा नहीं बल्कि 130करोड़ नागरिकों का देश है और नागरिक के बेहतर भविष्य के लिए सरकारें चुनी जाती है!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;आज भारत सरकार चला रहे लोगों को यकीन हो गया है कि विपक्ष नाम की इस देश मे कोई चीज बची नहीं है।विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस है और उनका दायित्व बनता था कि जब पहले उपक्रम को बेचने की तैयारी की तो देश की जनता के बीच जाती और देशभर में आंदोलन खड़ा करती मगर कांग्रेस ने ऐसा करने के बजाय मात्र मीडिया बाईट को विपक्ष भी भूमिका मानकर बाईपास दे दिया।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;कुछ क्षेत्रीय दल अपने वजूद के लिए जूझ रहे है तो कुछ बिखर चुके है।ये अपने-अपने कबीलों के नेता होने का दावा जरूर कर रहे है मगर कबीलों को लेकर कहाँ जाएंगे यह खुद को ही पता नहीं है।दिल्ली की तरफ कुछ करने की न सोच है और न कोई विचारधारा!कुछ हासिल करने के बजाय बचाने के प्रयास में ही निपट रहे है।आपस मे कोई तालमेल नहीं है!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;इतना बड़ा देश है,हजारों पार्टियां है,लाखों नेता है मगर एक-एक कर बिकते इन उपक्रमों के खिलाफ कोई जन आंदोलन खड़ा नहीं कर पाया!पिछले छह साल में राष्ट्रीय परिदृश्य व हालातों को देखते हुए इन लोगों को हमेशा सड़कों पर होना चाहिए था!ये मीडिया में दावा कर रहे है कि संविधान बचाओ,लोकतंत्र बचाओ!संविधान डिब्बे में बंद पड़ा है व लोकतंत्र कोई तोता नहीं है कि पिंजरे में दाना देने से सुरक्षित बचा रहेगा!जब सड़के सुनी हो जाती है तो लोकतंत्र का क्षरण होने लग जाता है!जब विपक्ष खामोश हो जाता है तो सत्ताधारी व्यवस्था तानाशाही पर उतर जाती है!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;सत्ता ने भेल से शुरुआत करके विपक्ष व जनता के दिमागी लेवल का परीक्षण किया था उसके बाद भारत पेट्रोलियम से लेकर रेल तक हाथ आजमाया!आज हालात इस कदर हो गए कि "जिंदगी के साथ भी जिंदगी के बाद भी"का स्लोगन लिए घूमने वाली एलआईसी जो भारत सरकार को कमाकर देती थी वो खुद सत्ताधारी लुटेरों के आगे जिंदगी की जंग हार गई!सुनने में आ रहा है कि अगला नंबर सेबी का है,मतलब देश का पूरा अर्थतंत्र निजी हाथों में सौंपा जा रहा है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;आज सुबह दो खबरें पढ़ी!एक मे लिखा हुआ था कि सरकार 40हजार करोड़ में राष्ट्रीय राजमार्ग बेचेगी जिस पर 200 टोल नाके लगाकर निजी कंपनियां जनता से वसूली करेगी!दूसरी खबर में एक किसान गलती से फ़ास्ट-टैग से टोल टैक्स वसूले जाने वाली लाइन में चला गया उसे टोलकर्मियों ने पीट-पीटकर मार डाला!जो हालात भविष्य के लिये बनाये जा रहे है वो देश को गंभीर जख्म देने वाले होंगे!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;एक गलती 1967 में नक्सलबाड़ी गांव में की गई उसकी सजा 14 राज्य भुगत रहे है!न देश 1991 मे पूंजीवादी अर्थव्यवस्था अपनाने के लायक था और न अब इस तरह भूंगडों की तरह बेचे जा रहे उपक्रमों के बाद परिणाम झेलने लायक होगा।इसी दौर में देश मे 3.15लाख किसानों ने आत्म हत्या कर ली है!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;जिस प्रकार आदिवासियों को खदेड़कर निपट लुटेरे प्राकृतिक संसाधनों को लूट रहे है उसी प्रकार किसान यह क्यों न समझे कि देश के विकास के लिए अनिवार्य बताकर हमारी जमीनों का राजमार्गों के लिए अधिग्रहण किया गया वो सरासर झूठ का पुलिंदा था असली मकसद तो जमीने छीनकर लुटेरों को हमारे ऊपर थोपने का ही है!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;अगर अब भी जनता सतर्क नहीं हुई व मुर्दा विपक्ष के भरोसे बैठी रही तो देश हाथ से निकल जायेगा और दुबारा हासिल करने के लिए पुरखों की तरह लाखों कुर्बानियां देनी पड़ेगी!बस हवा बिकनी बाकी है,सब जगह पहरेदार बिठा दिए गए है।जिओ के पर्यावरण में सांस लेने का चार्ज ठोकना बाकी है!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; 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  &lt;/a&gt;
&lt;/div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;</description><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjCfNAjuO1bf6Cl5n_Zcv_-SDGlD3VqTCKs16GjThzY_BNDs1ubW5RIqZ6bsVCfs7PzEK70GEr1Hv_o-_B794jnLNhRXYBSmOozLMNyWaiL-vGU7uahCEZec-PWo29wXY8PHk8cuwLIZ43e/s72-c/1581145178292239-0.png" width="72"/><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>आर्डर-आर्डर-आर्डर एंड 1करोड़ नक्सली रेडी!</title><link>http://sunilmoga.blogspot.com/2020/02/1.html</link><author>noreply@blogger.com (SUNIL MOGA)</author><pubDate>Fri, 7 Feb 2020 21:29:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-676848417829322667.post-1575219833849050269</guid><description>&lt;div&gt;जब वेदांता समूह के स्टील प्लांट के खिलाफ स्थानीय आदिवासी समुदाय लामबंद हुआ और आंदोलन हिंसक होने लगा तो कुछ गैर-सरकारी संगठन इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट गए।सुप्रीम कोर्ट ने अपने जजमेंट में वेदांता समूह के इस प्लांट पर रोक लगाते हुए लिखा "न लोकसभा,न विधानसभा सबसे बड़ी ग्राम सभा।"यह वाक्य एक सामान्य वाक्य लगता हो मगर पांचवी व छट्ठी अनुसूची का सार है।इससे पहले 1969 में रामकृपाल भगत बनाम बिहार स्टेट के मामले में इसी सुप्रीम कोर्ट ने अपने जजमेंट में लिखा कि जब तक&amp;nbsp; राज्यपाल राष्ट्रपति की अनुमति से लोक अधिसूचना जारी करके आदिवासी क्षेत्रों में कुछ निर्देश न दें या नियुक्तियां न दें तब तक आदिवासी क्षेत्र में कलेक्टर भी सामान्य नागरिक होगा और इन क्षेत्रों में घूम रहा प्रशासन व पुलिस असंवैधानिक है।जब कार्यपालिका संविधान को लागू करने में आनाकानी करे तो लोग सुप्रीम कोर्ट से संविधान लागू करवाने की मांग करते है व पहले के मामलों में आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों को रक्षार्थ फैसले भी दिए गए मगर इस फैसले से 14राज्यों के आदिवासी समुदाय को गहरी निराशा हुई है और आदिवासी समुदाय मोदी सरकार पर आरोप लगा रहा है कि सरकार ने कोर्ट में ठीक से पैरवी नहीं की।यह काफी हद तक सही प्रतीत होता जब इस मामले की सुनवाई की पूरी प्रक्रिया देखी जाएं तो सुनवाई के दौरान कई दफा सरकारी वकील अनुपस्थित रहे है।&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;आदिवासी समुदाय के संघर्ष व उनकी समस्याओं को समझने के लिए हमे आजादी से पीछे जाना पड़ेगा।आदिवासी समुदाय का संघर्ष अंग्रेजों के आने के बाद शुरू था और 185साल लंबे संघर्ष के बाद भारत सरकार अधिनियम 1935 में अनुच्छेद 91व अनुच्छेद 92में ट्राइबल एरिया के लिए प्रावधान किए गए जिसमे आदिवासी क्षेत्र का शासन,न्याय आदि का अधिकार खुद आदिवासी समुदाय को दिया गया था।इस मामले में पूना पैक्ट 1932 भी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।पूना पैक्ट 1932 में अनुसूचित क्षेत्रों अर्थात ट्राइबल क्षेत्रों के चुनाव संबंधी कोई चर्चा नहीं की गई इसलिए इन क्षेत्रों में सामान्य चुनाव प्रक्रिया अपना ली गई थी इसलिए आदिवासी समाज के नेता चुनाव तो सामान्य प्रक्रिया से लड़ते है मगर दावा आदिवासी हितों की रखवाली का करते है और इसी से समस्या ज्यादा उलझती जाती है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;भारत सरकार अधिनियम 1935 के सेक्शन 311में भारत को 3क्षेत्रों में बांटा गया है&lt;/div&gt;&lt;div&gt;1.भारत&lt;/div&gt;&lt;div&gt;2.भारत का राज्य क्षेत्र&lt;/div&gt;&lt;div&gt;3.ट्राइबल एरिया अर्थात आदिवासी क्षेत्र&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;आजादी के बाद संविधान की पहली अनुसूची में भारत व भारत के राज्यक्षेत्र को डाला गया और ट्राइबल एरिया की धारा 91 व 92 को घुमाकर संविधान के अनुच्छेद 244(2) में 4 राज्य व 244(1)में 10राज्य अर्थात&amp;nbsp; 5वीं व 6वीं अनुसूची में डाला गया।6वीं अनुसूची में अनुसूचित क्षेत्र के राज्यों को डाला गया जो समय समय पर नए राज्य बनने के साथ ही अब संख्या में 10 है।आंध्र प्रदेश,तेलंगाना,झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश,महाराष्ट्र, गुजरात,राजस्थान,बिहार व हिमाचल प्रदेश आते है।5वीं अनुसूची में 4राज्यों को ट्राइबल एरिया बताकर डाला गया।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;समस्या बस यहीं से खड़ी हुई है।ट्राइबल एरिया के अधिकारों से वंचित करने के लिए इन आदिवासी क्षेत्रों को अनुसूचित क्षेत्र के रूप में घोषित करके सामान्य प्रशासन के हवाले कर दिया गया।भारत सरकार अधिनियम 1935 के हिसाब से ट्राइबल एरिया में IPC व CRPC लागू नहीं होते है इससे बचने के लिए यह खेल खेला गया और पुलिस-प्रशासन को बाहरी लोगों की ढाल बनाकर आदिवासी क्षेत्रों में भेज दिया गया।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;संविधान के अनुच्छेद 13(3)भी आदिवासी समाज को इस मामले में संरक्षण प्रदान करता है।तमाम उलझनों के बावजूद माना जाना चाहिए कि पांचवीं व छठी अनुसूची संविधान के अंदर एक बहुत बड़ी आबादी का अपना रखवाला संविधान है।पांचवी अनुसूची के पैरा 5(1) के तहत राष्ट्रपति की अनुमति से राज्यपाल जो लोक अधिसूचना जारी करते है उनके अलावा न संसद विशेष छेड़छाड़ कर सकती और न विधानसभा।पांचवी अनुसूची के अनुच्छेद 244(1)में शेड्यूल्ड एरिया व ट्राइबल एरिया के प्रशासन व नियंत्रण के बारे में बताया गया है जिसमे इन क्षेत्रों की संस्कृति से लेकर प्राचीन न्याय व्यवस्था व अपने शासन को मान्यता दी गई व इनसे बिना ग्राम सभा की सहमति से कोई छेड़छाड़ नहीं की जा सकती।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;पेसा कानून 1996की धारा 4(0)के तहत हर राज्य में 20सदस्यों की एक स्वायतशासी परिषद का गठन करना था जिसमे 15विधानसभा के लिए चुने गए आदिवासी समाज के विधायक सदस्य होंगे मगर एक भी राज्य में या तो इस परिषद का गठन ही नहीं हुआ या गठन हुआ तो कोई मीटिंग नहीं हुई!संविधान के अनुच्छेद 275के तहत आदिवासी क्षेत्रों के विकास के लिए एक केंद्रीय कोष बनाना था मगर वो कोष कहाँ खो गया किसी को कुछ पता नहीं है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;इन तमाम प्रावधानों से यह साबित होता है कि सामान्य प्रशासन इन आदिवासी क्षेत्रों में लागू नहीं होते है।जब कानून-व्यवस्था से संबंधित मसला उठता है तो सियासतदां, हुक्मरान व न्यायपालिका एक सुर में बोलते है कि संविधान सर्वोपरि है तो मेरा सवाल यह है कि आजादी के 71सालों में ये आदिवासी लोगों के संवैधानिक प्रावधान लागू क्यों नहीं हुए?क्या न्यायपालिका ने 13लाख लोगों को जल,जंगल,छोड़ने का आदेश देते समय इन प्रावधानों को लागू न कर पाने की कार्यपालिका की व लागू न करवा पाने की खुद की नाकामी का विश्लेषण किया है?&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;1967में पश्चिम बंगाल के एक छोटे से गांव नक्सलबाड़ी से चारू मजूमदार व कान्हू सान्याल के नेतृत्व में भूमि से गरीब लोगों को उजाड़ने से शुरू हुआ एक आंदोलन कैसे इन पांचवी व छठी अनुसूची में शामिल लगभग 14 राज्यों में फैल गया उसका विश्लेषण कभी हुक्मरानों ने बैठकर किया है!मानते है इन क्षेत्रों में प्राकृतिक संसाधनों का अकूत भंडार है और उसका दोहन देश के विकास के लिए जरूरी है मगर उनके लिए यह जरूरी तो नहीं कि दिल्ली से कलेक्टर/आईपीएस व पैरामिलिट्री फ़ोर्स भेजकर स्थानीय आदिवासी लोगों को बंदूक के दम पर खदेड़ दिया जाए और गुजरात,राजस्थान या हरियाणा के पूंजीपतियों को जमीन सौंप दी जाए!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;क्या जो लड़ाई आदिवासी लोगों ने 185सालों तक अंग्रेजों के खिलाफ लड़ी और संवैधानिक प्रावधान हासिल करके अर्जित की उनके साथ आजादी के बाद हमने न्याय किया?1947से ठीक 20साल बाद 1967 में नक्सलबाड़ी गांव में जो 20सालो की दिशा देखकर गुस्सा फूटा था उससे हमने सबक क्यों नहीं लिया?यह आग फैलती गई और सत्ता अपने ही नागरिकों के खिलाफ जंग लड़ती रही।जो संवैधानिक प्रावधान लागू करने थे वो ठंडे बस्ते में डाल दिये और पूंजीपतियों के आगे अर्धसैनिक बलों की टुकड़ियां उन क्षेत्रों में भेज दी जहां लोग हजारों सालों से जल,जंगल और जमीन के मालिक थे।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;गुजरात से आदिवासी समाज के विधायक छोटुभाई वसावा ने एक कहानी शेयर की है जिसे पढ़कर आप समझ सकते है कि यह संघर्ष किस मोड़ पर खड़ा है!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;एक बार एक आदिवासी की ज़मीन किसी दबंग ने हड़प ली|आदिवासी अदालत में गया|&lt;/div&gt;&lt;div&gt;●जज साहब ने रिश्वत खाकर आदिवासी की ज़मीन छीनने वाले दबंग के पक्ष में फैसला दे दिया|&lt;/div&gt;&lt;div&gt;◆आदिवासी अदालत में हार गया|अगले दिन आदिवासी एक झोला लेकर अदालत पहुंचा|&lt;/div&gt;&lt;div&gt;●जज साहब ने आदिवासी को देख कर कहा अरे तुम्हारे मामले का फैसला तो कल हो गया जाओ अपने वकील से फैसले की नकल ले लो|&lt;/div&gt;&lt;div&gt;◆आदिवासी ने कहा साब कल फैसला हुआ था इन्साफ नहीं हुआ, मैं इन्साफ लेकर आया हूँ|&lt;/div&gt;&lt;div&gt;●जज साहब ने कहा क्या मतलब?&lt;/div&gt;&lt;div&gt;आदिवासी ने झोले से उस दबंग का कटा हुआ सर निकाल कर जज की टेबल पर रख दिया और बोला आपने कल फैसला दिया था मैंने इन्साफ कर दिया|&lt;/div&gt;&lt;div&gt;आदिवासी को आपकी दलीलें समझ नहीं आती|&lt;/div&gt;&lt;div&gt;●आदिवासी को इन्साफ का अच्छे से पता है&lt;/div&gt;&lt;div&gt;इन्साफ यह है कि आदिवासी जंगल में पैदा हुआ है&lt;/div&gt;&lt;div&gt;और आदिवासी को जंगल से आप किसी भी फैसले से नहीं निकाल सकते&lt;/div&gt;&lt;div&gt;◆आप अपना फैसला अपने पास रखिये&lt;/div&gt;&lt;div&gt;आदिवासी के पास इन्साफ है जब आदिवासी आपसे लडेगा&lt;/div&gt;&lt;div&gt;●मैं आदिवासी की तरफ से आपसे लड़ने आऊँगा&lt;/div&gt;&lt;div&gt;अगर आप इन्साफ नहीं समझते&lt;/div&gt;&lt;div&gt;◆तो आपके लम्बे चोगे और मोटी मोटी कानून की किताबें हमारे लिये दो कौड़ी की हैं|&lt;/div&gt;&lt;div&gt;●देखते हैं किस माई के लाल में दम है जो आदिवासियों को जंगल से बाहर निकालेगा&lt;/div&gt;&lt;div&gt;◆एक एक पेड़ और एक इंच ज़मीन के लिए लड़ाई होगी&lt;/div&gt;&lt;div&gt;आप इस देश के आदिवासियों को जंगल से निकाल सकते हैं आपने सोच भी कैसे लिया ?&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;प्रेमाराम सियाग&lt;/div&gt;</description><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>आस्था का राजनैतिक भ्रम!</title><link>http://sunilmoga.blogspot.com/2020/02/blog-post_24.html</link><author>noreply@blogger.com (SUNIL MOGA)</author><pubDate>Fri, 7 Feb 2020 21:28:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-676848417829322667.post-1905551420561206594</guid><description>&lt;div&gt;1922 मुस्तफा कमाल अतातुर्क ने तुर्की में लोकतंत्र की नींव रखी।24घंटे के भीतर खलीफा को देश निकाला दे दिया।मौलानाओं को मस्जिदों तक सीमित कर दिया।सुल्तान की सारी प्रॉपर्टी को राष्ट्रीय संपत्ति घोषित कर दिया!&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;मुल्लाओं के विरोध को दरकिनार करते हुए कहा कि राजा को जनता चुनेगी कोई सुल्तान या खलीफा नहीं!सारे धार्मिक मदरसों पर ताले लगा दिए!लड़कियों के लिए स्कूल खोले।पता है खलीफा के खिलाफ भारत के मुल्लाओं ने खिलाफत आंदोलन चलाया था व महात्मा गांधी ने उनको समर्थन दिया था।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;मुस्तफा कमाल ने सबको दरकिनार करते हुए बुर्के पर पाबंदी लगा दी थी।आज तुर्की के स्कूल-कॉलेज देखते है तो लगता है किसी समृद्ध यूरोपियन देश मे आ गए है!ऐसा संभव हुआ एक दूरदर्शी सोच के नेता की जिद्द से!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;महात्मा गांधी ने भारत के मुसलमानों को यह समझाने का प्रयास नहीं किया था आगे दुनियाँ किस तरफ जाएगी?भारत के मुसलमानों को यह नहीं समझाया कि तुम्हारा भविष्य कट्टरता में नहीं मुस्तफा के कमाल में है!विरोध के बजाय उनसे सीख लेने की जरूरत है!महात्मा गांधी विशेष समूह के हाथों में सत्ता चाहते थे!यह कहना कठिन है कि उस विशेष समूह को सत्ता सौंपकर गांधीजी चाहते क्या थे!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;भारत के मुसलमानों को मुल्लावाद से बाहर निकलना पड़ेगा!भारत मे आरएसएस के चंगुल में जो बहुसंख्यक समुदाय फंसा है उसकी जिम्मेदार कांग्रेस है मगर कांग्रेस ने यह बवंडर मुसलमानों का उपयोग करते हुए खड़ा करने में मदद की है!भारत के मुसलमानों को गांधी द्वारा तैयार नेतृत्व ने मात्र वोट बैंक समझा और कट्टरता बढ़ाने वाले मौलानाओं को आगे बढ़ाती रही!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;धर्म कभी हिंसक नहीं होते है बल्कि धर्मों का उपयोग करने वाले धर्मखोर व राजनेता उनको हिंसक बनाते है!हिंसा कट्टरता से पैदा होती है और कट्टरता राजनेताओं से वाया मुल्लों से आती है!भारत के मुसलमानों को कट्टरता की नहीं रोजगार,शिक्षा व गुरबत से मुक्ति की जरूरत है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;जिस मुल्लावाद से मुस्तफा कमाल ने 1922 में ऑटोमन साम्राज्य खत्म करके तुर्की को मुक्ति दे दी थी उसी मुल्लावाद की तरफ भारत का हिन्दू लौट रहा है!एक तरफ भारत के मुल्ला बुर्के व शरीयत को देश व अपने समाज से ऊपर बताने में लगा है तो दूसरी तरफ हिंदुत्व के झंडाबरदार लोकतंत्र व संविधान को नोचकर खाने को टूट पड़ा है!पूरी सत्ता पर पंडे-पुरोहितों का कब्जा हो गया है!तिरंगा शो पीस व दोमुंहा भगवा झंडा इनका आदर्श है!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;मुसलमानों के पास मुल्लावाद से उभरने के पर्याप्त उदाहरण है!दुर्भाग्य से भारत के हिंदुओं के पास ऐसे उदाहरण नहीं है!भारत के हिंदुओं को समझने के लिए सिर्फ खुद का इतिहास है।अगर तार्किक तरीके से इतिहास को पढ़ लिया जाएं तो भविष्य के लिए सबक लिया जा सकता है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;ऐसा नहीं है कि पश्चिम के देशों ने ऐसे दंश नहीं झेले हो!लेकिन उन्होंने 16सदी में ही पादरियों को चर्च में बंद करना शुरू कर दिया था और यह भसड़ मचाने के लिए वेटिकन के रूप में एक निश्चित एरिया दे दिया!सत्ता से धर्म की बेदखली ही जनता के उद्धार का रास्ता खोलती है!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;दुर्भाग्य से भारत मे सत्ता धर्म को दरकिनार नहीं कर पाई क्योंकि सत्ता सदैव साम्प्रदायिक बनी रही!प्रथम राष्ट्रपति पंडों के चरणों मे रहते थे तो वैज्ञानिक राष्ट्रपति कलाम ने पंडों के चरणों मे बैठने से कभी गुरेज नहीं किया!भारत के प्रधानमंत्री से लेकर पार्षद तक मंदिरों-मस्जिदों में भटकते नजर आते है!मुसलमानों को हिन्दू तो चौधरी छोटूराम जैसा चाहिए मगर मुसलमान बुर्के की हिफाजत के लिए लड़ने वाला ओवैसी जैसा चाहिए!हिंदुओ को मुसलमान तो अब्दुल कलाम जैसा चाहिए मगर हिन्दू प्रज्ञा ठाकुर या गोडसे जैसा चाहिए!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;दुर्भाग्य से दोनों के रास्ते गलत है!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;काश आस्था को लोग दानपात्र के बजाय गरीब के पेट से जोड़ देते तो सारा झगड़ा ही ख़त्म था....&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;</description><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>धर्म बहुत उपयोगी है!</title><link>http://sunilmoga.blogspot.com/2020/02/blog-post_95.html</link><author>noreply@blogger.com (SUNIL MOGA)</author><pubDate>Fri, 7 Feb 2020 21:18:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-676848417829322667.post-4447925594666662243</guid><description>&lt;div&gt;आप मानों या न मानो लेकिन कम से कम इस देश मे धर्म बहुत काम की चीज है।अगर किसी को मुफ्त में जमीन पर शांतिपूर्वक कब्जा करना हो तो एक भगवान की अदद सी तस्वीर की जरूरत होती है!किसी भी जगह खाली जगह पर पेड़ के पास/दीवार के सहारे रखकर महीने भर दूर से नजर रखते रहिये!अगर महीने भर ठीकठाक पड़ी रह गई तो फिर अगली कड़ी में एक रात में छोटा सा चबूतरा बना दीजिये और उस तस्वीर को चबूतरे के ऊपर शिफ्ट कर दीजिए या तस्वीर की जगह एक छोटी सी मूर्ति भी रख सकते है!महीने भर सुबह-सुबह दो-दो अगरबत्ती करते रहिए और एक महीना पूरा हो जाये तो एक रात में एक छोटा सा कमरा टाइप ढांचा तैयार कर दीजिए!फिर कहीं दूर से किसी अपराधी प्रवृति के धूर्त एक आदमी को इम्पोर्ट करके उसके अंदर बैठा दीजिये और चार-पांच दूत टाइप के लोगों को तैयार करके पूरे क्षेत्र में प्रचार करवा दीजिये कि एक बहुत पहुंचे हुए चमत्कारिक महात्मा अति प्राचीन मंदिर में आये है व जिसको आशीर्वाद सच्चे मन से देते है उसकी तो जिंदगी ही बदल जाती है!&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;धर्म की भांग में मदहोश लोग चमत्कारों की आड़ में जुटने लग जाएंगे।फिर कोई कमरा दान में दे देगा,कोई गुम्बज बनवा देगा तो कोई महात्मा के लिए टॉयलेट व आधुनिक गुफा का निर्माण करवा देगा!मतलब अच्छी खासी जगह पर कब्जा हो जाएगा।फिर महात्मा के चमत्कारों के प्रचार से अच्छी खासी भीड़ जुटने लग जायेगी तो अपने रिश्तेदारों की पूजा सामग्री,चमत्कारिक किताबों की स्टॉल,खाने-पीने की दुकान आदि की दुकान खुलवा दीजिये!जमीन पर कब्जा भी हो गया व पूरे कुनबे को रोजगार भी मिल जाएगा।बिना निवेश के सतत आय का स्रोत पैदा हो जाएगा।शहरों में जमीन कब्जाने का यह अनूठा व शांतिप्रिय तरीका है जहां पर करोड़ों की कीमत की जमीन मुफ्त में हथियाई जा सकती है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; गांवों में यह सब करने के लिए आपको तस्वीर की भी जरूरत नहीं होती।बस किसी अनजान गांव में जाकर किसी पहाड़ी या जंगल क्षेत्र में पेड़ या गुफा बनाकर रहना शुरू कर दीजिए!थोड़े दिनों तक तो तपस्या का ढोंग करना पड़ेगा लेकिन जब चार-पांच चमचे टाइप लोगों का इंतजाम हो जाएगा तो फिर राह आसान हो जाती है।वैसे भी गांव के लोग भोले-भाले होते है।जल्द ही चमत्कारिक बातों में आ जाते है इसलिए बाद में ढांचा खड़ा करने में कोई दिक्कत नहीं होती है!चार-पांच जीप/कार वालों से सेटिंग हो गई तो चमत्कार रातों-रात पूरे क्षेत्र में फैल जाएंगे!फिर गाड़ियों के काफिलों/पैदल यात्राओं का हुजूम सा उमड़ पड़ेगा।थोड़ा बीमारी का इलाज व गृह-क्लेश मिटाने का नुस्खा बता दिया तो सतत आय का भी बढ़िया स्रोत तैयार हो जाता है।गरीब लोग इलाज व भाग्य बदलवाने के लिए आते रहेंगे व पैसे वाले राजनीतिक चाहत में वोट बैंक के लिए महात्मा जी का आशीर्वाद लेने आ जाएंगे और भरपूर दान देंगे बस आशीर्वाद में कमी न रखियेगा।जीत गया तो फिर मंत्री बनकर आपको राज्यस्तरीय महात्मा बनने में पूरी मदद कर देगा।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; फिर आप जितना चाहो उतना जमीनों पर कब्जा करते जाना व नये-नये आश्रम खोलते जाना!जब मंत्रीजी आपके चरणों मे झुकेंगे तो उस फोटो को खूब प्रचारित कर दीजिए ताकि कोई अफसर आपके कब्जे की प्रक्रिया के खिलाफ बोलने की हिम्मत भी नहीं जुटा पायेगा!जनता तो बेचारी होती है!जब मंत्री व महात्मा का संगम बन जायेगा तो बाकी बचे लोगों की क्या बिसात कि विरोध करने का हौंसला कर लें!सदियों से इसी तरीके से जमीनों पर कब्जा किया गया है व आज भी किया जा रहा है।जैसे-जैसे जमीनों की कीमत बढ़ती जा रही है वैसे-वैसे मंदिर निर्माण प्रक्रिया भी तेजी से बढ़ती जा रही है।50साल पहले गांवों में कहीं-कहीं इक्के-दुक्के मंदिर नजर आते थे लेकिन आज हर गांव में दर्जनों मंदिर बन चुके है और रोज नया निर्माण चल रहा है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;है न धर्म उपयोगी!धर्म के नाम पर मुफ्त में कीमती जमीन कब्जाई जा सकती है!खुद महात्मा बनकर वीआईपी वाली फीलिंग ली जा सकती है!जब मंत्री/मुख्यमंत्री चरणों मे झुकते है तो क्या आनंद का अनुभव होता है आह! उसका बखान शब्दों में नहीं किया जा सकता है!कोई भी सरकार आये या जाएं लेकिन मुफ्त में भक्तों की फौज धर्म की भांग में झूमती आपके पास होती है तो कोई कुछ भी नहीं बिगाड़ सकता!अपनी सुध-बुध खोकर गुलामों के रूप में मरने-मारने को उतारू गैंग आपके पास होगी तो कानून भी काम अपने हिसाब से करने लग जाता है!इसलिए इस धर्म का उपयोग करते रहिए और रोजगार सृजन की प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाते रहिये!बड़े काम की चीज है!मेरे कार्यस्थल के गेट के सामने अति प्राचीन मंदिर का विकास चबूतरे तक पहुंच चुका है व घर के पास वाली नई बन रही मेट्रो लाइन के नीचे खंभे के सहारे अति-प्राचीन हनुमान मंदिर का विकास भी चबूतरे से निकलकर कमरा निर्माण की प्रक्रिया में पहुंच चुका है।आप भी अपने आस पास नजर रखिये और इस पूंजी निर्माण की प्रक्रिया को ठीक से समझ लीजिए ताकि जब सरकारों की तरफ से रोजगार देने का हर विकल्प बंद सा नजर आएगा तो यही काम आएगा!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;
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  &lt;/a&gt;
&lt;/div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;</description><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj05BWSb9OAaFFY4d9ZkOkoNvlm4b0ReFcyoSaWRsXvSiKcrbhJVYXLNOVYo4YknuOVrs4KyFPlsULt51xocCVHLO7sa_IvHPa4ZfLk-ye8Ji_ndApcgQh79VM52homKvy1qVvyUORYbFJF/s72-c/1581090492135025-0.png" width="72"/><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>मातादीन भंगी और 1857</title><link>http://sunilmoga.blogspot.com/2020/02/1857.html</link><author>noreply@blogger.com (SUNIL MOGA)</author><pubDate>Fri, 7 Feb 2020 21:17:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-676848417829322667.post-2901047321558746808</guid><description>&lt;div&gt;चाटुकार स्वर्ण इतिहासकारों ने इतिहास में मात्र उन घटनाओं को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जहां सवर्णों का नाम आता हो बाकी किसान-कमेरों को क्रांतिकारी नायकों को नायकों गायब कर दिया।इसका जीता-जागता उदाहरण है मातादीन भंगी।&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;1857 की क्रांति में अंग्रेज अफसरों को गोली मारने वाले को महान बता दिया जबकि वो देश के लिए नहीं बल्कि ब्राह्मण धर्म के लिए लड़ा था। मंगल पांडे की महानता पर कई किताबें मिल जाएंगी पर दलित क्रांतिकारी शहीद मातादीन भंगी की बारी आई तो इतिहासकारों की कलम की स्याही सूख गई।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;बैरकपुर छावनी में कारतूस बनाने का कारखाना था,जिसमे ज्यादातर दलित समुदाय के लोग काम करते थे।एक दिन बहुत प्यास लगने पर कारखाने में काम करने वाले मातादीन भंगी ने ब्राह्मण सैनिक मंगल पांडे से पानी पीने के लिए लोटा मांगा।जातिय श्रेष्ठता के नशे में चूर मंगल पांडे ने ब्राह्मणत्व की रक्षा करते हुए एक दलित को लोटा देने से मना कर दिया।नाराज मातादीन ने कहा कि-'ओ पांडे! बड़ा आया ब्राह्मण का बेटा!जिन कारतूसों का तुम उपयोग करते हो उन पर गाय की चर्बी लगाई जाती है, जिसे तुम दाँतों से तोड़ कर बंदूकों में भरते हो! उस समय तुम्हारा ब्राह्मणत्व कहाँ चला जाता है?"&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;मातादीन उस कारखाने के कर्मचारी थे जहाँ नए कारतूस बनाए जा रहे थे।उनकी इस चोट से भड़के मंगल पांडे ने 29 मार्च 1857 को अपने वरिष्ठ अधिकारी को गोली मार दी जिसके कारण क्रांति तय समय से पहले शुरू हो गई।अंग्रेजों की सेना के आगमन को देखते हुए मातादीन ने छावनी में पड़े बारूद को चिंगारी दे दी जिससे सारा बारूद खत्म हो गया।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;इस विप्लव का दोषी मानते हुए कई क्रांतिकारियों की गिरफ्तारियाँ की गई। 8 अप्रैल 1857 को पहली फाँसी मातादीन भंगी को हुई, उसके बाद मंगल पांडे और बाकी गिरफ्तार सैनिकों को। इस केस में फाँसी पहले दी गई और बाद में कोर्ट मार्शल किया गया। इस मुकदमे का नाम ही "ब्रिटिश सरकार बनाम मातादीन " था। इस गिरफ्तार चार्जशीट में पहला नाम मातादीन भंगी का ही था और फाँसी पर झूलने वाला भी वही था।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;सवर्णवादी जातिय इतिहासकारों ने मातादीन भंगी को ना ही शहीद माना और न सम्मान योग्य समझा क्योंकि वो दलित थे।1857 का संग्राम किसान-कमेरों का संग्राम था क्योंकि देशी राजा व स्वर्ण लोग अंग्रेजों के सहयोगी बनकर लड़ रहे थे।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;महान शहीद मातादीन भंगी के जन्मदिवस पर नमन करता हूँ।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;
  &lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhJ8GLxaXtwTdMmGpzpkIqcp8jIblPBK1EPqE4Xz-gfsbO-VFnraQzYgiPm7pK4fcdq9zH60nPehic0p5Sx7tsQGKCf4ZKsvHjVgIS0PtQVsCmhSdNZuajf5fTAhOqHRAb4oF42BXuxMa8j/s1600/1581090416509455-0.png" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;
    &lt;img border="0"   src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhJ8GLxaXtwTdMmGpzpkIqcp8jIblPBK1EPqE4Xz-gfsbO-VFnraQzYgiPm7pK4fcdq9zH60nPehic0p5Sx7tsQGKCf4ZKsvHjVgIS0PtQVsCmhSdNZuajf5fTAhOqHRAb4oF42BXuxMa8j/s1600/1581090416509455-0.png" width="400"&gt;
  &lt;/a&gt;
&lt;/div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;</description><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhJ8GLxaXtwTdMmGpzpkIqcp8jIblPBK1EPqE4Xz-gfsbO-VFnraQzYgiPm7pK4fcdq9zH60nPehic0p5Sx7tsQGKCf4ZKsvHjVgIS0PtQVsCmhSdNZuajf5fTAhOqHRAb4oF42BXuxMa8j/s72-c/1581090416509455-0.png" width="72"/><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">1</thr:total></item><item><title>बेबाकी का दूसरा नाम सतपाल मलिक!</title><link>http://sunilmoga.blogspot.com/2020/02/blog-post_33.html</link><author>noreply@blogger.com (SUNIL MOGA)</author><pubDate>Fri, 7 Feb 2020 21:15:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-676848417829322667.post-5433670562624217931</guid><description>&lt;div&gt;मान्यवर सतपाल मलिक जी का जन्म 24जुलाई 1946 को बागपत जिले की खेकड़ा तहसील के हिसावदा गांव के साधारण किसान बुधसिंह के घर हुआ।डेढ़ साल की उम्र में इनके पिताजी का देहांत हो गया और माँ जगबिरी देवी ने इनका पालन पोषण किया।&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;श्री सतपाल मलिक जी कई बार जिक्र करते है कि उस समय खेती में गेहूं के बीजों में जो ब्रेक थ्रू हुआ था उसी का नतीजा रहा है कि मैं मेरठ कॉलेज पहुंच पाया।मेरठ कॉलेज से बीएससी व एलएलबी की शिक्षा अर्जित की व डॉ लोहिया के समाजवादी छात्र संगठन से दो बार छात्रसंघ अध्यक्ष भी रहे।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;1974 में चौधरी चरणसिंह के भारतीय क्रांति दल से बागपत से विधानसभा चुनाव लड़ा और विजयी हुए।विधायक के रूप में खेती के विजन व चिंतन के रूप में अपनी विद्वता का परिचय दिया।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;1980 व 1986 में दो बार उत्तरप्रदेश से राज्यसभा के लिए चुने गए मगर दूसरे कार्यकाल में सरकार पर लगे बोफोर्स घोटाले के कारण राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया।ज्ञात रहे 1984 में कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए थे।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;1989 में जनता दल के टिकट पर अलीगढ़ से सांसद चुने गए।1996 मे अलीगढ़ से समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा मगर चौथे स्थान पर रहे!2004में भाजपा में शामिल हो गए।उन्हें किसान मोर्चा प्रभारी बनाया गया व बाद में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;उसके बाद बिहार,उड़ीसा व जम्मू-कश्मीर का राज्यपाल बनाया गया व अब गोआ के राज्यपाल है।जीवन वृत बताने का इतना ही मकसद है कि कठोर संघर्ष व अपने विजन और चिंतन के बल पर इंसान कैसी ही परिस्थितियां आये मगर उनके लिए रास्ते कभी बंद नहीं होते।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;जिंदगी किसी भी पद पर रहे हो मगर ईमानदारी ऐसी की कोई उनके जीवन पर अंगुली नहीं उठा सकता।इंसान की ईमानदारी और अपने समाज से जुड़ाव,ये दो ऐसी ताकत होती है कि बेबाकी से बोलने की हिम्मत स्वतः ही पैदा हो जाती है!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;जिस भी मंच पर गए हो इन्होंने सदैव गांव,गरीब,किसान,मजदूर व युवा की बात जरूर की है।शिक्षा व युवा को मलिक साहब देश का भविष्य कहते है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;वित्त मंत्री रहते प्रणव मुखर्जी ने कॉमनवेल्थ खेलों के लिए बजट आवंटन किया तो श्री सतपाल मलिक साहब ने कहा था कि देशभर के किसानों के लिए 11करोड़ रुपये सिंचाई के लिए व अकेले कलमाडी के लिए 17हजार करोड़ रुपये!शीला दीक्षित के लिए अलग से हजारों करोड़ रुपये!ढेला ही नहीं मिलने वाला तुम्हे इन खेलों से!किसानों के लड़के व आदिवासियों की लड़कियां कहीं भी खेल होंगे तो मैडल ले आएंगे!बाकी के हिस्से कुछ नहीं आना!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;सतपाल मलिक साहब का मोबाइल 24घंटे चालू रहता है।व्हाट्सएप तक पर भेजी शिकायत का निवारण करते है।कश्मीर में जब राज्यपाल थे तो एक 10वीं में पढ़ने वाले बच्चे ने व्हाट्सएप पर मैसेज किया कि डेढ़ महीने बाद मेरे व मेरी बहन के एग्जाम है और घर मे लाइट नहीं है।मलिक साहब ने अगली सुबह एक जनरेटर व 6बल्ब घर भिजवा दिए व 15दिन में डेढ़ किलोमीटर लंबी बिजली की लाइन बिछवा दी।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;मलिक साहब जहां कहीं भी बोलते है तो ऐसा लगता है कि घर का बुजुर्ग हमे सलाह दे रहा है व खुद को तोप समझने वाले बड़े-बड़ों को आइना दिखा देते है।सतपाल मलिक साहब सदा कहते है कि देश पुलों-सड़कों-ऊंची इमारतों से नहीं बनता बल्कि देश शिक्षित युवाओं से बनता है!देश किसानों से बनता है,देश जवानों से बनता है,देश मजदूरों से बनता है!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;गोआ में फ़िल्म फेस्टिवल चल रहा है और मलिक साहब को आमंत्रित किया गया।क्या कहा उसको ध्यान से सुनिए!यह जीवनभर के लंबे संघर्ष व दोगलेपन की व्यवस्था के कारण पैदा हुआ दर्द है जो हर मंच पर बोलते है।किसी को बुरा लगे या अच्छा मगर बेबाकी से व डंके की चोट पर कहते है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;</description><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>नारी अस्मिता के दोगले रक्षक !</title><link>http://sunilmoga.blogspot.com/2020/02/blog-post_61.html</link><author>noreply@blogger.com (SUNIL MOGA)</author><pubDate>Fri, 7 Feb 2020 21:14:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-676848417829322667.post-7474270570710537490</guid><description>&lt;div&gt;ये जो जिंदा जला दो,सरेआम फांसी दे दो आदि के रूप में जस्टिस फ़ॉर फलाना,जस्टिस फ़ॉर ढिमकाना हैश टैग चला रहे है,पता नहीं ये कौनसे समाज के लोग है जो घटना विशेष पर एकदम इंसाफ के दौरे पड़ने लग जाते है!&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;ये झूठी नैतिकता,झूठा ढोंग,दोहरा चरित्र इस देश की हजारों सालों से सभ्यता रही है!आप क्या सोच रहे हो कि सीता के लिए लंका विजय की गई थी!अगर ऐसा होता तो सीता की अग्नि परीक्षा नहीं होती!गर्भवती सीता को जंगलों को न भेज दिया जाता!गलत सोचते हो कि द्रोपदी के चीरहरण को लेकर महाभारत का युद्ध हुआ था!यह राज्य को लेकर लड़ाई थी और इसमें एक औरत को जुए में दांव पर यूँ ही लगा दिया गया था!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;इस देश के शास्त्र,पुराण,साहित्य भरे पड़े है जो यह सिखाते है कि स्त्री पुरुष नियंत्रित धन है।ऋग्वेद की गार्गी से लेकर तुलसी के रामचरितमानस मानस की नारी तक के हालत देख लीजिए!जिस समाज के लोग मनुस्मृति को आदर्श मानते हो उस समाज मे कैसी नैतिकता?बलात्कार पर कैसा बवाल?मत्स्यगंधा से लेकर अहिल्या,कुंवारी कुंती से लेकर शादीसुदा पार्वती के मेल तक से इस देश मे ऋषि-मुनि,देवता पैदा होते रहे है!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;नित्यानंद,चिन्मयानंद, गुरमीत आशारामों की शिक्षा का स्रोत क्या है?ये कौनसे शास्त्र,धार्मिक ग्रंथ पढ़ रहे थे!4हजार साल पहले भी गार्गी सवाल जवाब करने पर लताड़ी जाती रही थी और आज भी देर शाम घर से बाहर निकाले जाने पर लताड़ी जाती है!जब दिल्ली में निर्भया कांड हुआ था तब लोगों की सोच में यह था कि देर रात दोस्त के साथ सिनेमा देखने गई ही क्यों थी मगर वो शाम होते ही इंडिया गेट पर कैंडल पकड़े नजर आ जाते थे!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;यहां बलात्कार भी जाति देखकर होते है,यहां निंदा भी जाति धर्म देखकर होती है,यहां इंसाफ भी जाति धर्म देखकर ही होता है!निर्भया कांड में हम लोग सरकार से इंसाफ मांग रहे थे और प्रियंका कांड में हम लोग धर्मविशेष का एंगल खोज रहे है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;इस देश मे रोज 132 बलात्कार होते है!मगर कहीं कोई हलचल नहीं मगर किसी अपराध विशेष को लेकर जब घटना हाईलाइट होती है तब दुःख होता है कि क्या बाकी पीड़िताएं इस देश की नहीं है,उनको जीने का हक नहीं है,उन्होंने जातिविशेष या धर्मविशेष में पैदा होकर कोई गुनाह तो नहीं कर दिया!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;याद रखिये स्त्री को धन व उपभोग की वस्तु समझने का ज्ञान हमारी अति प्राचीन महान संस्कृति व इनके शास्त्र/साहित्य देते है!अगर फूंकने ही है तो गंदी सोच पैदा करती ये धार्मिक किताबें फूंको,ऊंचे-ऊंचे मंचो पर बैठकर जो शास्त्रों का हवाला देकर स्त्री को पुरुष की प्रॉपर्टी बताते है इन धर्मखोरों को फूंको!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;अपनी बहन-बहन व दूसरे की बहन माशूका समझने की सोच घर-परिवार से पैदा होती है।ये हुर्र/परियों का लालच&amp;nbsp; देकर इंसानी मानसिकता को विकृत करने वाले धंधे पर लगाम लगाओ!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;समाज को रेडिकल सर्जरी की जरूरत है जो इन हैशटैग व जस्टिस-फ़सटिस वाले मूर्खता पूर्ण हंगामे से संभव नहीं है।एक तरफ तुम ऐतिहासिक कुकर्मों को महान बताकर विश्वगरु बनने की हुंकार भर रहे हो तो दूसरी तरफ नारी समानता,नारी स्वतंत्रता,नारी सम्मान की बचकानी बातें करते हो!तुम्हारे ऋषि मुनि रामराज्य में महिलाएं खरीदते थे और तुम राम राज्य स्थापित करने जा रहे हो!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;आज ऋषि-मुनि का स्वरूप बदलकर पूंजीपति बन गए है और महिलाओं की बोली लगा रहे है!धर्मगुरुओं से लेकर राजनेताओं तक के वीडियो सामने आ रहे है!जैसा समाज होगा वैसा ही नेतृत्व होगा और उसी अनुरूप कर्म कांड फलक पर आते रहेंगे!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;</description><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">1</thr:total></item><item><title>गोरे जाएंगे और काले आ जाएंगे-भगतसिंह</title><link>http://sunilmoga.blogspot.com/2020/02/blog-post_3.html</link><author>noreply@blogger.com (SUNIL MOGA)</author><pubDate>Fri, 7 Feb 2020 21:11:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-676848417829322667.post-373419576924458975</guid><description>&lt;div&gt;आजादी के आंदोलन को जब पढ़ा तो ऐसा लग रहा था असल मे वो आजादी की लड़ाई थी नहीं बल्कि लड़ाई यह थी कि गौरों की अनुपस्थिति में कुर्सियों पर कब्जा किसका हो?&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;जब भी ज्ञात भारतीय इतिहास की घटना पढ़ता हूँ तो लगता है कि मैं वर्तमान पढ़ रहा हूँ।क्या बदला है?राजाओं की सेना के पैरों तले गांव के गांव उस समय भी बर्बाद हो रहे थे और आज भी पाकिस्तान का भय दिखाकर सीमावर्ती गांव के खेतों को उजाड़ दिया जाता है,संसद में बैठे लोग भू-अधिग्रहण के नाम पर,शहरीकरण के नाम पर गांव के गांव उजाड़ रहे है!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;उस समय भी पाखंड व अंधविश्वास में फंसाकर आम लोगों को लूटा जाता था और आज भी लूटा जा रहा है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;उस समय भी महाजन-सूदखोर आमजन का खून चूसने वाली झोंक थे और आज इस संगठित गिरोह को बैंकिंग कहा जा रहा है!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;राजा गए,अंग्रेज आये,लोकतंत्र आया मगर क्या बदला?&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;शिक्षा व चिकित्सा उस समय भी निजी शिक्षकों-राजवैदयों के माध्यम से वर्ग-विशेष के लिए उपलब्ध थे और अब उनकी जगह कान्वेंट स्कूल-फाइव स्टार अस्पतालों ने ले ली!आमजन के हिस्से क्या आया?&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;भुखमरी,बेबसी,लाचारी इस देश की सदियों पुरानी संस्कृति रही है और आज भी हमे नहीं कचौटती है क्योंकि हम मुर्दा कौम है!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;भगतसिंह का परिवार आर्यसमाजी था मगर भगतसिंह ने अपने घर,परिवार,समाज,भारत की सोच के खिलाफ बगावत कर दी थी!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;भगतसिंह ने कहा था कि जब तक भारत के युवाओं की सोच नहीं बदल जाती तब तक सत्ता परिवर्तन होते रहेंगे मगर आमजन के जीवन मे कोई बदलाव नहीं आ सकेगा!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;भगतसिंह ने ईश्वर के अस्तित्व को नकारते हुए कहा था कि जब अपराध होते है तो ईश्वर कहाँ होता है!कई सवाल खड़े किए!आज भी हम पूछ रहे है कि वहशी दरिंदे मासूम बच्चियों को नोच रहे होते है उस समय ईश्वर कहाँ गायब हो जाता है?&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;आज करोड़ों लोग देश मे भूखे है,कुपोषित है,इलाज के अभाव में है,अनपढ़ है और दूसरी तरफ काले अंग्रेजों ने करोड़ों लोगों की लाशों पर मुल्क के अंदर अपना नया,चमकता मुल्क बना लिया है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;एक तरफ बेबस,लाचार रेंगता भारत है तो दूसरी तरफ इन काले अंग्रेजों का शाइनिंग इंडिया है,एकतरफ झुग्गियों में भूख से तड़पता भारत है तो दूसरी तरफ बहुमंजिला इमारतों में चमकता इंडिया!एक तरफ 100रुपये की दिहाड़ी को तड़पता भारत है तो दूसरी तरफ बुलियन पर बैठकर 5ट्रिलियन की तरफ भागता इंडिया!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;आज भगतसिंह हमारे बीच नहीं है मगर उनके विचार हमारे बीच है।आज शारीरिक रूप से युवा भारत है मगर मानसिक रूप से अपंग भारत है और इस अपंगता का इलाज भगतसिंह है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;भाई धर्मवीर जाखड़ जैसे युवा ही भगतसिंह के असली वारिस है,इनके जीवन मे भगतसिंह के विचार जिंदा है इसलिये झुग्गियों के बच्चों के हाथों से मांगने का कटोरा हटाकर कलम पकड़ा रहे है।&lt;/div&gt;</description><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>साम्प्रदायिक अपराध से देशविरोधी तानाशाही की ओर!</title><link>http://sunilmoga.blogspot.com/2020/02/blog-post_57.html</link><author>noreply@blogger.com (SUNIL MOGA)</author><pubDate>Fri, 7 Feb 2020 21:09:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-676848417829322667.post-1748509617548138058</guid><description>&lt;div&gt;हिंदी पट्टी के लोग सोच रहे थे कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मंदिर-मस्जिद का साम्प्रदायिक अपराध खत्म हो जायेगा मगर उनके स्थान पर NRC-CAB यानी नागरिकता संशोधन विधेयक के रूप में देश-विरोधी हथियार उपलब्ध करवा दिया गया है!&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;संघ एक मुद्दे के खत्म होने से पहले ही दूसरे मुद्दे से स्थानापन्न करने की योजना पर काम शुरू कर देता है!असम जैसे उत्तर-पूर्व के राज्य में परीक्षण कर रहे थे और मंदिर-मस्जिद के मुद्दे के खत्म होते ही हिंदी पट्टी की युवा पीढ़ी की बर्बादी के लिए लागू किया जा रहा है!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;मनुस्मृति के रक्षक,संविधान व तिरंगा जलाने वाले लोग जोर-शोर से संविधान दिवस मनाने लगे तो समझा जाना चाहिए कि संविधान इनके कब्जे में ले रहे है!जब संविधान इनके कब्जे में होगा तो जो मर्जी जोड़ेंगे,जो मर्जी तोड़ेंगे!"रजिया फँस गई गुंडों में"कहावत पुरानी हो गई है अब "संविधान फँस गया संघियों में"ताजा उपलब्ध हो रही है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;संविधान की प्रस्तावना में ही पंथ निरेपक्ष शब्द बचा हुआ है बाकी तो ज्यादातर काम कर दिया गया है!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;हमारे जैसे लोग सवाल खड़े करें तो सरकार को जवाब देने की कोई जरूरत नहीं क्योंकि संघियों ने हमारे घरों में ही भक्त तैयार कर दिए है!सवाल सरकार से करोगे और आपसे लड़ने-भिड़ने के लिए आपके गांव,मोहल्ले, क्लास,समाज,परिवार से ही भक्त निकल पड़ेंगे!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;सरकार के हर कांड के समर्थन में मीडिया खड़ा रहा! सवाल पूछने वालों को टुकड़े-टुकड़े गैंग,देशद्रोही, पाकिस्तान प्रेमी गैंग,अर्बन नक्सली करार देने की जो शुरुआत मीडिया ने की वो आईटी सेल से होते हुए हमारे घरों तक पहुंच चुकी है!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;यह सिर्फ मुसलमानों के खिलाफ है,ऐसा सोचकर जो लोग खुश हो रहे है उनको बताना चाहता हूँ कि NRC के लिए आपको भी पूछा जायेगा।विदेशी लोग हम मूलनिवासी लोगों को कहेंगे कि तुम्हारे राशन कार्ड,वोटर आईडी,पासपोर्ट,आधार कार्ड,ड्राइविंग लाइसेंस,मूल निवासी प्रमाण पत्र आदि सब बकवास है तुम बताओ कि NRC में तुम्हारा नाम है कि नहीं?आने वाले 5 साल इसी में कट जाएंगे!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;तुम शिक्षा,चिकित्सा,रोजगार आदि को भूलकर भारतीय घोषित होने की जंग में ही उलझ जाओगे!5साल बर्बाद हो चुके है!युवा पीढ़ी की जिंदगी में 10साल बहुत मायने रखते है।हमारी एक पीढ़ी मंदिर-मस्जिद के झगड़े में बर्बाद हो चुकी है!हिंदी पट्टी के युवाओं!तुम्हारे हाथ मे तुम्हारा भविष्य व चयन है!संभल जाओ!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;</description><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>'एनआरसी हमारी बहुत बड़ी गलती है'</title><link>http://sunilmoga.blogspot.com/2020/02/blog-post_99.html</link><author>noreply@blogger.com (SUNIL MOGA)</author><pubDate>Fri, 7 Feb 2020 20:58:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-676848417829322667.post-6125979570010376922</guid><description>&lt;div&gt;जिस आदमी ने अपनी सारी जवानी आसाम से घुसपैठियों को निकालने की मुहिम में लगा दी हो और अंत में वही निराश होकर कहे कि हमने एक पागलपन में जिंदगी बर्बाद कर दी तो इसे आप क्या कहेंगे?&amp;nbsp;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;यह आदमी हैं&amp;nbsp; मृणाल तालुकदार, जो आसाम के जाने-माने पत्रकार हैं और एनआरसी पर इनकी लिखी किताब 'पोस्ट कोलोनियल आसाम का विमोचन' चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने हफ्ता भर पहले दिल्ली में किया है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;इनकी दूसरी किताब,जिसका नाम है - 'एनआरसी का खेल' कुछ दिनों बाद आने वाली है।वह एनआरसी मामले में केंद्र सरकार को सलाह देने वाली कमेटी में भी नामित हैं।वे आल असम स्टूडेंट यूनियन (आसु) से जुड़े रहे।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;दस्तक के लिए उनसे लंबी और बहुत खुली चर्चा हुई। उन्होंने कहा मेरी और मेरे जैसे हजारों लोगों की जवानी आसाम से घुसपैठियों को निकालने कि आंदोलन की भेंट चढ़ गई।हममें जोश था मगर होश नहीं था।पता नहीं था कि हम जिनको आसाम से बाहर निकालने के लिए आंदोलन कर रहे हैं उन्हें किस तरह पहचाना जाएगा और उन्हें बाहर करने की प्रक्रिया क्या होगी।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;1979 में हमारा आंदोलन शुरू हुआ और 1985 में हम ही आसाम की सरकार थे।प्रफुल्ल महंत हॉस्टल में रहते थे हॉस्टल से सीधे सीएम हाउस में रहने पहुंचे। 5 साल कैसे गुजर गए हमें पता ही नहीं चला।राजीव गांधी ने सही किया कि हमें चुनाव लड़ा कर सत्ता दिलवाई।सत्ता पाकर हमें एहसास हुआ कि सरकार के काम और मजबूरियां क्या होती हैं।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;अगला चुनाव हम हारे मगर 5 साल बाद फिर सत्ता में आए।इन दूसरे 5 सालों में भी हमें समझ नहीं आया कि बांग्लादेशियों को पहचानने की प्रक्रिया हो। लोग हमसे और हम अपने आप से निराश थे।मगर घुसपैठियों के खिलाफ हमारी मुहिम जारी थी। बहुत बाद में हमें इसकी प्रक्रिया सुझाई भारत के होम सेक्रेटरी रहे गोपाल कृष्ण पिल्लई ने।उन्होंने हमें समझाया कि आप सब की नागरिकता चेक कराओ।अपने आप की भी नागरिकता चेक कराओ और जो रह जाएं वह बाहरी।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;चोर को पकड़ने के लिए क्लास रूम में सभी की तलाशी लेने वाला यह आइडिया हमें खूब जँचा मगर तब नहीं मालूम था कि सवा तीन करोड़ लोग जब कागजों के लिए परेशान इधर-उधर भागेंगे तब क्या होगा?&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;बाद में रंजन गोगोई ने कानूनी मदद की और खुद इसमें रुचि ली। इसमें आसाम के एक शख्स प्रदीप भुइँया की खास भूमिका रही। वे स्कूल के प्रिंसिपल हैं उन्होंने ही सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की और अपनी जेब से 60 लाख खर्च किए।बाद में उन्हीं की याचिका पर संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट एनआरसी के आदेश दिए एक और शख्स अभिजीत शर्मा ने भी एनआरसी के ड्राफ्ट को जारी कराने के लिए खूब भागदौड़ की।तो इस तरह एनआरसी वजूद में आया और वजूद में आते ही हम सब सोचने लगे कि यह हमने क्या कर डाला?&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;खुद हमारे घर के लोगों के नाम गलत हो गए।सोचिए कैसी बात है कि जो लोग&amp;nbsp; घुसपैठियों को बाहर निकालने के लिए आंदोलन कर रहे हैं उन्हीं के घर वालों के नाम एनआरसी की लिस्ट में नहीं आएं?&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;बहरहाल यह गलतियां बाद में दूर हुईं। बयालीस हज़ार कर्मचारी 4 साल तक करोड़ों कागजों को जमा करते रहे और उनका वेरिफिकेशन चलता रहा।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;आसाम जैसे पागल हो गया था।एक एक कागज की पुष्टि के लिए दूसरे राज्य तक दौड़ लगानी पड़ती थी। जैसे किसी के दादा 1971 के पहले राजस्थान के किसी स्कूल में पढ़े तो उसे दादा का स्कूल सर्टिफिकेट लेने के लिए कई बार राजस्थान जाना पड़ा।लोगों ने लाखों रुपया खर्च किया। सैकड़ों लोगों ने दबाव में आत्महत्या कर ली।कितने ही लाइनों में लगकर मर गए। कितनों को ही इस दबाव में अटैक आया दूसरी बीमारियां हुई।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;मैं कह नहीं सकता कि हमने अपने लोगों को कितनी तकलीफ दी।और फिर अंत में हासिल क्या हुआ?पहले चालीस लोग एनआरसी में नहीं आए।अब19 लाख लोग नहीं आ रहे हैं।चलिए मैं कहता हूं अंत में पांच लाख या तीन लाख लोग जाएंगे तो हम उनका क्या करेंगे?&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;हमने यह सब पहले से नहीं सोचा था।हमें नहीं पता था कि यह समस्या इतनी ज्यादा मानवीय पहलुओं से जुड़ी हुई है।मुझे लगता है की हम इतने लोगों को ना वापस बांग्लादेश भेज सकेंगे जेल में रख सकेंगे और ना ही इतने लोगों को ब्रह्मपुत्र में फेंका जा सकता है।तो अंत में यह निर्णय निकलेगा की वर्क परमिट दिया जाए और एनआरसी से पीछा छुड़ा लिया जाए। केंद्र सरकार दूसरे राज्यों में एनआरसी लाने की बात कर रही है लेकिन उसे आसाम का अनुभव हो चुका है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;--&lt;/div&gt;&lt;div&gt;मृणाल तालुकदार के अनुभव-दीपक असीम की कलम से&lt;/div&gt;</description><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>हकीकत का फसाना!</title><link>http://sunilmoga.blogspot.com/2020/02/blog-post_12.html</link><author>noreply@blogger.com (SUNIL MOGA)</author><pubDate>Fri, 7 Feb 2020 20:53:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-676848417829322667.post-6298048011201078239</guid><description>&lt;div&gt;आपने कभी जापानी संसद में चाइनीज बोलते हुए सुना है?कभी आपने चाइनीज संसद में जापानी बोलते हुए सुना है?जर्मन संसद में इंग्लिश या फ्रांस की संसद में स्पेनिश बोलते हुए सुना है?&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;भारत की संसद में इंग्लिश बोलते हुए रोज सुनते है!इसे क्या कहा जाए?आज महान सांस्कृतिक विरासत की रक्षक पार्टी की प्रचंड बहुमत की सरकार है,क्या यह आदेश पारित नहीं कर सकती कि भारतीय संघ के सारे राज्यों में भारतीय भाषा मे ही कार्यवाही हो?&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;भारत भाषाई विविधता वाला संघ है व ज्यादातर आबादी मात्र साक्षर है जो अपनी भाषा के अलावा कोई दूसरा भाषा न पढ़ सकते है,न लिख सकते है और न वार्तालाप कर सकते है!ऐसे में सरकारों व अदालतों की कार्यवाही अंग्रेजी में क्यों?क्या गुलामी की मानसिकता को ढोना ही हमारी आदत व प्राइड सिंबल बन गया है?&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;आज देश मे अंग्रेजी बोलने-लिखने वाला इंडिया स्थानीय भाषा बोलने वाले भारत पर धौंस जमा रहा है,जलील कर रहा है,भाषाई बेरियर बनाकर देश को लूट रहा है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;सबसे बड़ी बात तो यह है कि अंग्रेजी के पत्रकारों की एक बड़ी लॉबी है जो सोशल मीडिया पर भी हावी रहती है और देश की कमजोरी की हर खबर खुलकर लिखती है व विश्वभर में भारत की कमजोरी का प्रदर्शन करती है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;अंग्रेजी के अखबारों,टीवी चैनल्स व वेबसाइट पर सोशल जस्टिस के मुद्दों से लेकर रक्षा मामलों तक पर बड़े-बड़े लेख छापे जा रहे है और पूरी दुनियाँ पढ़ रही है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;अंग्रेजी हायर एजुकेशन के लिए ठीक है व हमे सीखनी चाहिए क्योंकि यह अंतराष्ट्रीय भाषा है और हमारा सम्प्रेषण इसमें होना जरूरी है मगर भारत के गरीब लोगों से सरकार-अदालत को दूर रखने का बेरियर है इसलिए सरकारी कार्यवाही,अदालत से इनको हटा देनी चाहिए।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;अंग्रेजी मीडिया सिर्फ अंतराष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर ही दिखाए!भारत के अंदर क्या हो रहा है वो भारतीय भाषाओं में प्रसारित होना चाहिए।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;अब अंग्रेजी की गुलामी का रोग सोशल मीडिया ग्रुपों में भी ऐसे फैला है कि अंग्रेजी जानने वाले लोग सिर्फ अपनी धौंस जमाने के लिए अंग्रेजी में लिखते है।भाषा किसी को न उच्च बनाती है और न नीचा।भाषा संवाद का जरिया मात्र है मगर हमारी सैंकड़ों सालों की गुलाम मानसिकता इसमें भी प्राइड सिंबल खोजती है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;अगर अपनी भाषा से प्यार नहीं करोगे तो संस्कृति/परंपरा बचाने की हर लड़ाई दिखावा मात्र होगी।हर देश अपनी भाषाओं को महत्व देता है व सारी कार्यवाही अपनी भाषाओं में करता है मगर भूखों/नंगों के इस देश मे जाहिल लोग अंग्रेजी में अपना भविष्य देख रहे है!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;</description><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>चिली से शाहीन बाग तक....</title><link>http://sunilmoga.blogspot.com/2020/02/blog-post_36.html</link><author>noreply@blogger.com (SUNIL MOGA)</author><pubDate>Fri, 7 Feb 2020 20:43:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-676848417829322667.post-7500630231029576431</guid><description>&lt;div&gt;समुद्र तट पर बसे हुए सबसे अमीर दक्षिण अमेरिकी देश चिली की सरकार ने मेट्रो का किराया 4%बढ़ा दिया जिसे छात्रों ने अस्वीकार कर दिया।बेरिकेड लांघकर मेट्रो में घुसने लगे जिससे पुलिस के साथ झड़पें हुई।गुस्से में छात्र सड़कों पर उतर गए!&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;चिली के राष्ट्रपति सेबेस्टिन पिन्येरा ने इमरजेंसी लगा दी।आम जनता छात्रों के समर्थन में उतर गई और बात मेट्रो के किराए से आगे बढ़ गई और पूरा देश कुलीन वर्ग के भ्रष्टाचार व गैर-बराबरी के विरोध में सड़कों पर आ गया।राष्ट्रपति ने पूरी कैबिनेट बर्खास्त कर दी व देश से इमरजेंसी लगाने के लिए माफी मांगी।फिलहाल पद पर बने हुए है मगर जनता का भरोसा खो बैठे है!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;फ्रांस में पेंशन नीति में बदलाव का बिल सरकार लेकर आई है जिसमे निजी व सरकारी कर्मचारियों के लिए एक ही तरह की पेंशन योजना प्रस्तावित है जिससे मिलती जुलती पेंशन स्कीम भारत सरकार 2004 में लागू कर चुकी है।फ्रांस की ट्रेड यूनियन के नेतृत्व में लाखों लोग सड़कों पर उतरे है।फ्रांस में एक अच्छी आपसी समझ है कि एक यूनियन हड़ताल करती है तो बाकी यूनियन तुरंत समर्थन कर देती है जिससे पूरा देश ठप्प हो जाता है और सरकार को झुकना पड़ता है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;फ्रांस से आजादी के बाद अल्जीरिया में सरकार पर एक वर्ग विशेष कब्जा रहा है।अल्जीरिया के राष्ट्रपति अब्देलअजीज बोटलिक ने जब पांचवी बार राष्ट्रपति चुनाव लड़ने की घोषणा की तो आर्थिक गैर-बराबरी,रोजगार की कमी व वर्ग विशेष के भ्रष्टाचार से त्रस्त जनता का धैर्य जवाब दे गया और सड़कों पर उतर गई!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;अक्टूबर 2019 के चुनावों में धांधली को लेकर बोलिविया के लोग सड़कों में उतर गए।बात चुनाव धांधली को लेकर शुरू हुई और आर्थिक,विषमता, आर्थिक मंदी,रोजगार,महंगाई आदि तक फैलती गई और हालात इतने बदतर हो गए कि राष्ट्रपति इवो मोरालेस को इस्तीफा देकर पड़ौसी देश मेक्सिको में शरण लेनी पड़ी।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;सूडान में एक रोटी की कीमत 1सूडानी पौंड से बढ़ाकर 3 सूडानी पौंड करने के सरकारी फैसले से सूडान के छात्र सड़कों पर उतरे जिसमे एक छात्र की मौत के बाद सूडान की जनता सड़कों पर उतर गई।बात रोटी की कीमत से शुरू हुई और फिर महंगाई-रोजगार की तरफ फैलती गई और अंत मे राष्ट्रपति उमर अल बशीर को इस्तीफा देना पड़ा।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;पूरा हांगकांग महीनों से एक कानून को लेकर ठप्प है।इराक,लेबनान में भी ऐसे ही नजारे देखने को मिले है।पाकिस्तान के कई सूबों से आटे की कीमत में तीन गुना तक वृद्धि की खबरे आ रही है!नॉन बनाने वाले बेकर हड़ताल पर चले गए है।सरकार से मांग है कि 150ग्राम आटे के नॉन की कीमत 15 रुपये की जाएं।महंगाई,बेकारी, भ्रष्टाचार से त्रस्त पूरा पाकिस्तान है।कभी भी एक चिंगारी भड़क सकती है और इमरान खान की सरकार डांवाडोल हो सकती है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;भारत की मोदी सरकार ने आर्थिक गैर-बराबरी,बेरोजगारी,भ्रष्टाचार से मुक्ति के लिए भारत की जनता को सब्जबाग 2014 में दिखाए थे।हर साल 2करोड़ रोजगार,ईंधन की कीमतों में भारी कमी,किसानों की आय दुगुनी सहित तमाम दावे किए गए थे!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;100स्मार्ट सिटी,मेक इन इंडिया,सांसद आदर्श गांव योजना सहित 164 योजनाओं की घोषणा कर डाली मगर सरकारी आंकड़े बता रहे है कि किसी भी योजना में 15- 20%से ज्यादा काम नहीं हुए है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;भुखमरी से लेकर डेमोक्रेसी इंडेक्स तक मे भारत लगातार पिछड़ता गया।किसान आत्महत्या के आंकड़ों को बेरोजगार आत्महत्या के आंकड़े कड़ी चुनौती दे रहे है!खाद्य महंगाई दर लगातार बढ़ रही है।तेल की कीमतें बढ़ रही है,लाखों लोग नौकरियां गंवा चुके है,उद्योग-धंधे ठप्प हो रहे है!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;आज CAA व NRC को लेकर एक तिहाई देश सड़कों पर है मगर देश का गृहमंत्री गुंडई अंदाज में कहता है कि जो करना हो कर लो मगर हम एक इंच भी पीछे नहीं हटेंगे!इनको इतना हौंसला मिलता है ईवीएम मशीन से,एकछत्र भ्रष्टाचार से,बेईमान चुनाव आयोग से,बिकाऊ मीडिया से,भ्रष्ट व लालची न्यायपालिका से!मगर जनता है जनता का क्या?&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;अब लग रहा है कि भारत मे भी बात CAA से आगे बढ़ चुकी है।भारत की जनता को सत्ता पर भरोसा नहीं रहा है!अब सारे मुद्दे जनता की जुबान पर आ चुके है।तमाम विरोध-प्रदर्शनों में उठती आवाजों को सुनिए!बेरोजगारी से आजादी,महंगाई से आजादी,गैर-बराबरी से आजादी,मनुवाद से आजादी,संघवाद से आजादी से लेकर मोदी-शाह से आजादी तक के नारे गूंजे रहे है!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;जैसे-जैसे आंदोलन आगे बढ़ता जायेगा वैसे-वैसे तमाम मुद्दे व वर्ग इस आंदोलन से जुड़ते जाएंगे।तमाम आंदोलनों में एक बात विशेष तौर से देखी गई है वो यह है कि सत्ता व मीडिया से जनता ने पहले भरोसा खोया और सोशल मीडिया ने एकजुट किया है।दूसरा पहलू यह रहा कि छात्रों/युवाओं से शुरुआत हुई व जनता पीछे खड़ी हो गई।विपक्ष नेतृत्व के बजाय समर्थन की भूमिका में है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;</description><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>हम कहाँ हार रहे है?</title><link>http://sunilmoga.blogspot.com/2020/02/blog-post_27.html</link><author>noreply@blogger.com (SUNIL MOGA)</author><pubDate>Fri, 7 Feb 2020 20:37:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-676848417829322667.post-1915866390536236354</guid><description>&lt;div&gt;शिक्षा मानव सभ्यता की बेहतरी की बुनियाद है।समृद्ध व विकसित समाज का रास्ता शिक्षा से होकर गुजरा है।जिन देशों को आज हम बेहतर व विकसित कहते है उन्होंने सबसे पहले अपने देश को शिक्षा के मंच पर खड़ा किया था।&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;तमाम यूरोपियन देशों की शिक्षा व्यवस्था का अध्ययन करते है तो पाते है कि उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में समर्पण के साथ भारी निवेश किया था जिससे वहां के युवाओं में वैज्ञानिक सोच पैदा हुई,नए-नए अनुसंधान हुए और वहां के समाज को इसका फायदा मिला।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;देश सीमाओं,सेनाओं,बारूद के ढेरों,ऊंची इमारतों,पुलों,सड़कों से नहीं बनता है,देश शिक्षित व समृद्ध नागरिकों से बनता है।आज भारत मे वो हर चीज वैश्वीकरण से हासिल हो गई जो दुनियाँ के समृद्ध समाजों/देशों के पास है मगर जो चीज समाज/देश खुद को पैदा करनी होती है उसमें बिल्कुल हारा हुआ देश है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;दुनियाँ की टॉप 300यूनिवर्सिटी में भारत की कोई यूनिवर्सिटी नहीं है और टॉप 500 में 6 है जिसमे 5 आईआईटी संस्थान है व एक बेंगलुरु साइंस इंस्टीट्यूट।जनसंख्या की दृष्टि से देखा जाए तो पूरे यूरोप-अमेरिका को भारत अकेला कवर कर लेता है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;अशिक्षित समाज पूंजीवादी व्यवस्था में कभी खुशहाल नहीं हो सकता।1991के बाद भारत मे तेजी से निजीकरण व शहरीकरण बढ़ा है।इसके दुष्परिणाम देखे जाएं तो हमारी बढ़ती बदहाली को निरूपित करते है।आज शहरों में चमचमाती कान्वेंट/निजी स्कूल है तो दूसरी तरफ जर्जर सरकारी स्कूलें है।उच्च वर्ग के लोगों की शिक्षा की व्यवस्था अलग व गरीब लोगों की शिक्षा व्यवस्था अलग यानि शिक्षा से वंचित रखने का उपाय नजर आता है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;एक तरफ पॉश कॉलोनियां बसी है तो दूसरी झुग्गियों का क्लस्टर है।पॉश इलाकों में बड़े-बड़े निजी अस्पताल है तो झुग्गी बस्तियों में झोला छाप डॉक्टर।यह ऐसा सरंचनात्मक विभेद है जो आगे से आगे समाज को बांटता जाता है।आज शहरों की गरीब बस्तियां व गांव चिकित्सा व्यवस्था से महरूम है क्योंकि उच्च वर्गीय समाज के कान्वेंट स्कूलों में पढ़े बच्चे देश के गरीबों,गांव में बसने वाले भारत को समाज का हिस्सा मानने के बजाय कमाई का ग्राहक मात्र समझता है।दुःख की बात यह है कि वो भी उनके बीच जाकर नहीं खुद के पास बुलाना चाहते है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;पिछले साल भारत की तरह विकासशील देश ब्राजील ने गांवों में डॉक्टर नियुक्त करने के लिए 50हजार डॉक्टर की भर्ती निकाली मगर आवेदन मात्र 938 आये।फिर दूसरे देशों से डॉक्टर नियुक्त करने शुरू किए तो सबसे आगे क्यूबा के डॉक्टर आये।भारत मे भी ब्राजील की तरह सरकार कोशिश कर रही है कि डॉक्टर गांवों में सेवाएं दें मगर सफलता नहीं मिल पा रही है क्योंकि गलती बुनियाद में है और समाधान सतही ढूंढे जा रहे है।कान्वेंट स्कूल में पढ़े उच्चवर्गीय लोग देश/समाज को कूड़ा समझते है!यह सोच हमारी शिक्षा व्यवस्था पैदा करती है जिसे नारों/योजनाओं से खत्म नहीं किया जा सकता।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;शिक्षा समाज की मूलभूत आवश्यकता है व समाज को खड़ा करने का मूल भी।भारत जैसे देश मे जब तक समाजवादी व्यवस्था हावी रही तब तक शिक्षा का प्रसार होता रहा मगर पूंजीवादी व्यवस्था के आगमन के साथ शिक्षा सिमटने लग गई!चंद स्कूल या कॉलेजों के आउटपुट को सामने रखकर गुणगान भले ही कर लिया जाएं मगर साक्षरता से आगे शिक्षा नहीं बढ़ पा रही है।शिक्षित भारत के बजाय हम साक्षर भारत मे ही फंस गए और साक्षर भारत भविष्य का निरक्षर भारत ही होगा!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;शिक्षा के प्रसार में सरकारी शिक्षा व्यवस्था ही कारगर रही है।निजी शिक्षा व्यवस्था अमीरों के बच्चों तक सीमित रह जाती है।19वीं सदी में यूरोप व अमेरिका की सरकारी शिक्षा व्यवस्था ने वहां के समाज का कायापलट कर दिया था।फिर जापान,सोवियत संघ व कई साम्यवादी सरकारों ने इसे सरकार की जिम्मेदारी माना और अपने बच्चों को उपलब्ध करवाया।चीन हमारा पड़ौसी देश है।चीन की सस्ती चीजें हमारे यहां यूँ ही नहीं आई है बल्कि चीन ने अपने बच्चों को सरकारी शिक्षा व्यवस्था के माध्यम से समृद्ध किया और ये शिक्षित बच्चे नई-नई तकनीक ईजाद करके देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहे है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;लातिन अमेरिकी देश क्यूबा का ही उदाहरण ले लीजिए!1969 के बाद फिदेल कास्त्रो ने सरकारी शिक्षा व्यवस्था के माध्यम से अपने देश के नागरिकों को इतना मजबूत बना दिया कि आधी सदी से अमेरिका उसे तोड़ने का अभियान चलाए हुए है मगर हर नागरिक एक मिसाइल मैन की तरह खड़ा है।बिना बड़े हथियारों के एक छोटा सा द्वीपीय देश दुनियाँ के सबसे ताकतवर देश के सामने डटकर खड़ा है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;इसलिए कहा जाता है कि देश शिक्षित व समृद्ध नागरिकों से मजबूत होता है।किसी भी देश को विदेशी खतरा हथियारों से अपने कमजोर नागरिकों से होता है।दिमाग व पेट से कमजोर नागरिक सदा बिकने को तैयार रहेंगे।देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त लोगों का विश्लेषण करके देख लीजिए।इसलिए हथियारों की होड़ में फंसकर बजट खराब करने के बजाय शिक्षा में निवेश किया जाना चाहिए।भारत का शिक्षा बजट हमेशा 2%के आसपास ही रहा है।इसमें से भी हायर एजुकेशन के नाम पर कुछ यूनिवर्सिटीज हड़प लेती है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;शिक्षा व चिकित्सा रोटी-कपड़ा-मकान के साथ वो बुनियादी अधिकार है जिनके बिना रोटी-कपड़े-मकान का दुष्चक्र तोड़ना संभव नहीं है।चिकित्सा उपलब्ध करवाने के लिए हमे समर्पित डॉक्टर चाहिए वो हमें सरकारी शिक्षा व्यवस्था ही उपलब्ध करवा सकती है।सरकार को बाकी सब विभागों के बजट में कटौती करके शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए व नई शिक्षा नीति नई बोतल में पुरानी दारू परोसने समान है जिसे कूड़ेदान में फेंककर&amp;nbsp; निजी स्कूलों का राष्ट्रीयकरण करके कारगर शिक्षा पद्धति की शुरुआत करनी चाहिए।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;आज जिस राह पर सरकार चल रही है,शिक्षा का बड़े पैमाने पर निजीकरण किया जा रहा है,शिक्षा महंगी की जा रही है वो मुल्क के अंदर कई मुल्क खड़े करने वाली है।अखंड नहीं खंड-खंड भारत की तरफ रास्ता जा रहा है।विकसित नहीं अराजक भारत बन रहा है।आजादी के समय 80%भारतीयों के पास शिक्षा हासिल करने की सुविधा नहीं थी और आज 80%भारतीय मात्र साक्षर हो रहे है।मतलब साफ है कि घूम-फिरकर हम उसी जगह खड़े है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;</description><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>गांधी-गोडसे से लेकर गोपाल तक का चक्रव्यूह!</title><link>http://sunilmoga.blogspot.com/2020/02/blog-post_80.html</link><author>noreply@blogger.com (SUNIL MOGA)</author><pubDate>Fri, 7 Feb 2020 20:37:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-676848417829322667.post-6119730223118064590</guid><description>&lt;div&gt;मैंने आरएसएस के बारे में खूब लिखा है व यकीन मानिए जब तक जिंदा हूँ तब तक लिखता जाऊंगा।अगर मेरे लिखने से 5-7 बच्चे भी इस चरमपंथी गिरोह के जहर से बच जाएंगे तो मेरा लिखा सफल मान लूंगा।&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;मैंने हमेशा लिखा है आरएसएस का हिंदुओं से कोई मतलब नहीं है।यह शुद्ध रूप से ब्राह्मणवादी संगठन है और ब्राह्मणवाद मानवता पर सबसे बड़ा कलंक है।यहूदी नस्ल व थाईलैंडी आदर्श की खिचड़ी यूँ ही नहीं पकाई गई है।परशुराम जैसे माँ के हत्यारों को आदर्श रूपी पूजने वाले लोग अगर हिंदुओं के घट-घट के राम को निकालकर धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाए श्रीराम को सड़कों पर पोस्टर बॉय बनाकर युवाओं के दिमाग मे अवतरित करने लगे तो ये ही परिणाम सामने आने थे!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;गोडसे द्वारा गांधी की हत्या के बाद जब सरदार पटेल ने आरएसएस पर प्रतिबंध लगाया तो वो आजाद भारत का सबसे बड़ा फैसला था मगर पंडित नेहरू ने जो प्रतिबंध हटाने की गलती की थी उस समय क्या पता था कि भविष्य के भारत के लिए नासूर बन जायेगी!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;गोडसे से गोपाल तक के सफर ने इस देश की जनता को इतना बरगलाया/बर्बाद किया कि इनका इतिहास पढ़ा जाएं तो समझ मे आता है कि कैसे आरएसएस ने सुनहरे भविष्य की तरफ बढ़ते भारत के कदमों में नफरतों की बेड़ियां डालकर आगे बढ़ने की गति शिथिल कर दी थी।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;26जनवरी 2013 को गणतंत्र दिवस पर गुजरात के मुख्यमंत्री द्वारा दिये उस भाषण को याद कीजिये जिसमे अपने देश के प्रधानमंत्री की खिलाफत की गई थी!उस समय मित्र व वरिष्ठ पत्रकार अवधेश कुमार ने कहा था कि यह दिन भारतीय राजनीति व सत्ता के लिए बहुत बड़े परिवर्तन का दिन है।आरएसएस का प्रशिक्षित कार्यकर्ता आज सारी मर्यादाएं लांघ चुका है और आगे संसदीय, सभ्य,मर्यादा आदि मात्र मजाकिया शब्द होकर रह जाएंगे!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;उसके बाद पूरे देश ने देखा कि किस तरह सियासत बदली व आज किस मोड़ पर खड़े है!प्रधानमंत्री से लेकर इनके छुटभैये नेता तक की भाषा का स्तर देखिये!यह देश ऐसा नहीं था मगर यथा राजा तथा प्रजा के उसूलों पर चल पड़ा है!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;आरएसएस कोई भारत का सुपर पावर नहीं है!कांग्रेस की राजनीति का विपक्ष यही तैयार करता रहा है।आजादी के बाद का आरएसएस,हिन्दू महासभा,जनसंघ से लेकर भाजपा तक हर जगह इनको खड़ा करने में कांग्रेस ने अतुलनीय योगदान दिया है।कांग्रेस ने मुसलमानों को इनका डर दिखाकर असली विपक्ष खड़ा होने से रोके रखा था।मुसलमानों को सहूलियतें देने के बजाय यह समझाया गया कि चुपचाप हमे वोट देते रहो नहीं तो आरएसएस खा जायेगा!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;अगर 1977 में कांग्रेस की मृत्यु शैया पर आरएसएस के अलावा कोई तीसरा विकल्प मजबूती के साथ सत्ता पर काबिज हो जाता तो कांग्रेस व आरएसएस दोनों की राजनीति खत्म हो जाती मगर कांग्रेस-आरएसएस के गठजोड़ ने मिलकर असली विपक्ष की हत्या कर दी।1989 में भी यही दोहराया गया!1996,1997,1998 में भी यही जारी रहा।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;दशकों तक कांग्रेस ने आरएसएस का डर दिखाकर सत्ता का भोग किया व अब आरएसएस मुसलमानों का डर दिखाकर सत्ता सुख भोग रही है!देश को असली मुद्दों पर आने के लिए कांग्रेस या आरएसएस दोनों में से एक को खत्म करना होगा!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;क्रोनोलॉजी समझिए।पूरा देश आरएसएस के खिलाफ सड़कों पर है मगर कांग्रेस कहीं नहीं है।पता है कि आरएसएस सत्ता से हटा तो हमारा ही नंबर है!दोनों के गठबंधन की सलामती में ही भारत की दुर्गति है!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;आज जामिया के गोलीकांड को लेकर ज्यादा विचलित मत होइए!जितना जहर बनाने में मेहनत आरएसएस करता है उससे ज्यादा जहर को फैलाने में कांग्रेस मेहनत करती है!बेशक आज सत्ता में आरएसएस है और संघर्ष की प्राथमिकता में है मगर यह ख्याल जरूर रखा जाना चाहिए कि इसका फायदा कांग्रेस न उठा पाएं!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;दिल्ली में गोली चली व एक लड़के को लगी इसलिए मीडिया व सियासत ने इसे उठाकर गोडसे बनाम गांधी बना दिया मगर याद रखिये कांग्रेस के राज में करोड़ों आदिवासियों को उजाड़ा गया,तुम्हारी माँ बहनों की अस्मत लूटी गई व आज भी यह कार्य बीजेपी राज में बदस्तूर जारी है!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;पूर्णियां भागलपुर के दंगे हुए थे तब कांग्रेस सरकार में थी,1984 में सिक्खों के कत्ले-आम में कांग्रेस शामिल थी,मुज्जफरनगर दंगों के समय केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी मगर कोई एक्शन नहीं लिया!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;गाली, गोली,दंगा आरएसएस का ब्रह्मास्त्र है और इसका उपयोग कांग्रेस ने जमकर किया है और आज बीजेपी कर रही है!देश के 85%लोगों अर्थात किसान-कमेरों को एकजुट होकर इनके षड्यंत्रों को बेनकाब करके सत्ता पर कब्जा करना होगा।अगर इससे जुदा कोई विचार है तो गोडसे-गोपाल के चक्रव्यूह में फंसकर अपने बच्चों की बर्बादी के सिवाय कोई चारा नहीं है!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;
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&lt;/div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;</description><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhWto2I9kFSyDRGQkAPKKxvklRDEEDqTT2PNKoly4Ds4SI42atsWrXQHCxM_Rn0n2L3i_Y6W3dc6fKzMcD2WYUmB1DkHYCTiiRTmtEK7X5vNDJX111l8D6Uvo-SB9Og7SRfrAeeEIMIVLpN/s72-c/1581088049889283-0.png" width="72"/><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item></channel></rss>