<?xml version='1.0' encoding='UTF-8'?><?xml-stylesheet href="http://www.blogger.com/styles/atom.css" type="text/css"?><feed xmlns='http://www.w3.org/2005/Atom' xmlns:openSearch='http://a9.com/-/spec/opensearchrss/1.0/' xmlns:blogger='http://schemas.google.com/blogger/2008' xmlns:georss='http://www.georss.org/georss' xmlns:gd="http://schemas.google.com/g/2005" xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'><id>tag:blogger.com,1999:blog-7681948317863166672</id><updated>2025-10-11T00:26:51.995+05:30</updated><title type='text'>THE YOUTH</title><subtitle type='html'>THE YOUTH blogspot is forum to put FIRE in Leading Youth Community for action to eradicate existing problems at mass level and RAISE VOICE against irresponsible Politician, Citizen &amp;amp; Beurocrates to make them active in support of Public, To  Ignite YOUTH and Rural India to set landmark story in his/her expert area.</subtitle><link rel='http://schemas.google.com/g/2005#feed' type='application/atom+xml' href='http://theindianyouths.blogspot.com/feeds/posts/default'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7681948317863166672/posts/default?redirect=false'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://theindianyouths.blogspot.com/'/><link rel='hub' href='http://pubsubhubbub.appspot.com/'/><link rel='next' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7681948317863166672/posts/default?start-index=26&amp;max-results=25&amp;redirect=false'/><author><name>RATNESH MISHRA</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05433941901415165493</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='32' src='//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiUs7BrFO9DMz8ZIIVyHnnohtALZN0mxTNx9q0DeKAn6YpAIpqoNTtR4GKn-WDKAqoTx5YYKg4bXRJXigkPSIH15Kfk1N8vJV3rrc3aORy2Tf6MwBof-zyquWctyWFU4g/s113/IMG-20170219-WA0037.jpg'/></author><generator version='7.00' uri='http://www.blogger.com'>Blogger</generator><openSearch:totalResults>57</openSearch:totalResults><openSearch:startIndex>1</openSearch:startIndex><openSearch:itemsPerPage>25</openSearch:itemsPerPage><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7681948317863166672.post-5764204148728718647</id><published>2025-02-23T19:45:00.007+05:30</published><updated>2025-02-25T18:12:56.203+05:30</updated><title type='text'>प्रयागराज में माघ मेला का प्रावधान आत्मिक शुद्धि व आध्यात्मिक उन्नति का माध्यम है न कि पाप कर्मों से मुक्ति का</title><content type='html'>&lt;p dir=&quot;ltr&quot;&gt;सनातन संस्कृति के सबसे बड़े ब्रह्मांडीय महापर्व महाकुंभ अमृत स्नान, प्रयागराज के त्रिवेणी संगम तट पर १३ जनवरी पूस पुर्णिमा से शुरू हुआ और २६ फरवरी महाशिवरात्रि स्नान के साथ समाप्त होना हैं। माघ मास के अंतिम स्नान पर्व माघी पूर्णिमा का स्नान संपन्न होने तक सरकारी आंकड़ों के अनुसार ३० दिनों में लगभग ४०- ४५ करोड़ लोगों ने अमृत स्नान कर लिया था अनुमान है कि महाशिवरात्रि तक यह आंकड़ा ५०- ५५ करोड़ पार कर जाएगा। महाकुंभ में भक्तों का रेला देखकर यह प्रमाणित हो रहा है कि भारत का सनातनी समाज अपने धर्म, संस्कृति और परंपराओं के निर्वहन के संदर्भ में जागृत हो रहा है और स्वयं को आध्यामिक यात्रा से जोड़ने का प्रयास कर रहा है। बड़े गर्व की बात यह है कि महाकुंभ में स्नान केवल भारतीय नागरिक ही नहीं बल्कि विश्व के १९३ देशों के लगभग १५ लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने गंगा जमुना के पवित्र संगम जल में आस्था व विश्वास की डुबकी लगाने और सनातन संस्कृति को समझने और आत्मसात करने भारत आए।&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p dir=&quot;ltr&quot;&gt;महाकुंभ मेले में भ्रमण के दौरान ऐसा अनुभव हुआ की करोड़ों की संख्या मे स्नान और भ्रमण करने आ रहे लोगो की तीन श्रेणियां है।&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; जिनमें पहली श्रेणी है साधु संतों और सांसारिक जीवन यापन करने वाले बुजुर्ग महिला एवं पुरुष कल्पवासी की जो पुण्य अर्जन एवं आध्यात्मिक उन्नति के उद्देश्य से माघ मास में संगम तट पर लगभग ४० दिनों के प्रवास पर है।&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; दूसरी श्रेणी युवा जिज्ञासुओं की है जो सनातन संस्कृति परम्परा अखाड़ों और साधु संतों की जीवन शैली एवं चमत्कारी शक्तियों को नजदीक से देखना समझना चाहते है।&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; तीसरी श्रेणी है उन तामसिक और दुष्कर्मी लोगों की, जो इस भाव से अमृत स्नान के लिए महाकुंभ में टूट पड़े है की उन्हें उनके पाप कर्मों से मुक्ति मिल जाएगी जो महाकुंभ स्नान से जुड़ा सबसे बड़ा मिथ है।&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; दुर्भाग्य से VIP व्यवस्था से स्नान लाभ लेने वाले अधिकांश लोग इसी श्रेणी में है। इन लोगों को इस बात का सबसे ज्यादा आकर्षण है कि ज्योतिषीय गढ़ना के अनुसार १४४ वर्षों में एक बार लगने वाले इस विशेष शुभ मुहूर्त में त्रिवेणी संगम के दिव्य जल में स्नान करने से पाप कर्मों के नकारात्मक प्रभाव से मुक्ति मिल जाएगी। इससे बड़ा अज्ञानता और क्या हो सकतीं है इन&amp;nbsp; तथाकथित उच्च वर्ग के धनाढ्य समूह की जो यह मानता है की महाकुंभ स्नान, भागवत कथा और दान से पाप कर्मों के प्रभाव से मुक्ति मिल जाएगी। जबकि सत्य यह है की सनातन संस्कृति में इन सब धार्मिक आयोजनों का प्रावधान मनुष्य की आत्मिक शुद्धि, आध्यात्मिक उन्नति, प्रायश्चित करने और सदमार्ग पर चलने की प्रेरणा के उद्देश्य से बनाए गए है न की पाप कर्मों से मुक्ति के लिए क्यों कि कर्मों का तो केवल एक ही गति है कर्ता को परिणाम सुनिश्चित करना। इसी लिए संत जन और सनातन समाज के बुजुर्ग ऐसा कहा करते है कि सदैव अच्छा सुनो अच्छा सोचो अच्छा बोलो अच्छा करो जिससे की वहीं सब प्राप्त हो, बुरे विचार और कर्मों से बचना ही पाप कर्मों से बचने का सबसे बड़ा उपाय है।&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p dir=&quot;ltr&quot;&gt;आइए अब समझते है कि क्या यह सच है की लोग को केवल महाकुंभ में स्नान से पापों से मुक्ति यानी मोक्ष की गति प्राप्त हो जाती है ?&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; इस निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले हमें यह समझना होगा की पाप कर्म क्या है इनकी श्रेणियां क्या है ?&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p dir=&quot;ltr&quot;&gt;वैसे तो मन में पल पल आ रहे बुरे विचार भी एक प्रकार के पाप कर्म ही होते है जिसकी विस्तृत व्याख्या भगवतगीता में पढ़ने समझने को मिलता है जिसके अनुसार पाप कर्मों की तीन श्रेणियां है सुक्ष्म, मध्यम, वृहद ( विकृत ) कर्म या यह कह सकते है ऐसे कर्म जो षड्यंत्रकारी हों और पूरे संज्ञान में निष्पादित किए गए हो।&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; सूक्ष्म पाप कर्म जो केवल बुरे विचारों तक सीमित होते है अक्सर मन की विकृति की वजह से आते है। मध्यम पाप कर्म वाणी और व्यवहार से प्रभावित होते है जो सुक्ष्म कर्म के विचारों को रूपांतरित करने की प्लानिंग तक सीमित होते है, वृहद कर्म यानी पूर्ण कर्म शारीरिक वाह्य क्रिया के परिणाम होते है अर्थात सूक्ष्म और मध्यम श्रेणी के कर्मों का क्रियान्वयन कर देना पूर्ण कर्म बन जाता है। सूक्ष्म एवं मध्यम श्रेणी के कर्मों की शुद्धि तो प्रायश्चित से संभव है लेकिन पूर्ण कर्म यानी परिणाम में बदल चुके पाप कर्मों से मुक्ति बड़ा कठिन है ऐसे कर्मों का फल मनुष्य को भोगने ही पड़ते हैं हो सकता है उसका रूप अलग हो। कर्मफल भोग के विषय में भगवान श्री कृष्ण ने कुरुक्षेत्र के मैदान में अर्जुन को सांसारिक जीवन का उपदेश देते हुए स्पष्ट रूप से समझाया कि मनुष्य के कर्मो पर उनका कोई हस्तक्षेप नहीं होता क्योंकि वह उनके प्रारब्ध और विवेक से प्रभावित होते जिसके फल मनुष्य को स्वयं को भोगने ही होते है अर्थात् जिसका जैसा कर्म होता है उसका प्रारब्ध उसके अनुसार ही निर्धारित होता है अर्थात पूर्ण कर्म कभी नष्ट नहीं होते जब तक की उसके परिणाम कर्ता को प्राप्त न हो जाए।&lt;/p&gt;&lt;p dir=&quot;ltr&quot;&gt;फिर भी सनातन वैदिक ग्रन्थ जिसे हम साक्षात् ईश्वर के विचार और वाणी कह सकते है मनुष्य को अपने पाप कर्मों के पश्चाताप के लिए मार्गदर्शन करता है जिससे कि मनुष्य स्वयं से स्वयं की आत्म शुद्धि कर बुरे कर्मों के बुरे प्रभाव से स्वयं को बचा सके। जिनको आधार मानकर हमारे ऋषि मुनियों ने सरल और सहज तरीके से मनुष्यों को दैनिक जीवन में उस व्यवस्था को अपनाकर आत्मशुद्धि का राह दिखाया है। उन्हीं में से एक व्यवस्था है वर्ष में एक बार माघ मास में ३० दिनों का कल्पवास। जिसका पालन स्वयं राजा हर्षवर्धन भी किया करते थे जिससे की राजधर्म का पालन करते समय यदि उनसे वर्ष भर में कोई त्रुटि हुई हो तो उसका पश्चाताप हो और आगे कोई त्रुटि न हो और संत समागम से आत्मशुद्धि हो सके।&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p dir=&quot;ltr&quot;&gt;राजा हर्षवर्धन द्वारा प्रयागराज में कल्पवास प्रवास की व्यवस्था प्रमाणित करती है की माघ मास में महीने भर स्नान और संत समागम आध्यात्मिक उन्नति, आत्मशुद्धि और भविष्य में पाप कर्मों से बचने का माध्यम है न की पापों से मुक्ति का। कल्पवास की इस व्यवस्था में भी नियम संयम एवम् श्रद्धा भाव विश्वास का बडा महत्त्व है जैसे स्नान ध्यान, जप तप, दान पुण्य अर्थात जो व्यक्ति सनातन व्यवस्था के अनुरूप पश्चाताप की क्रिया को करेगा केवल वहीं पाप कर्मों के प्रभाव से स्वयं को बचा सकेगा त्रुटि की स्थिति में पश्चाताप की प्रक्रिया पूर्ण नहीं होगी। यानी माघ मास में कुंभ स्नान ध्यान- जप - तप (यानी त्याग ) के साथ ही पूर्ण हो तब जाकर पुण्य प्राप्त होगा और पाप कटेने&amp;nbsp; की संभावना बनेगी न कि केवल VIP व्यवस्था और भीड़ चाल में स्नान से।&lt;/p&gt;&lt;p dir=&quot;ltr&quot;&gt;सनातन जीवन शैली में पाप कर्मों के प्रारब्ध से मुक्ति का सीधा गणित यह समझ आता है कि पुण्य कर्म की अधिकता और पाप कर्म की शून्यता अर्थात् जितना पुण्य का पलड़ा बढ़ता जायेगा उतना पाप घटता जाएगा और धीरे धीरे जब यह शुन्य हो जाएगा केवल इसी स्थिति में पाप कर्मों से मुक्ति मिल सकती हैं न की वर्ष में केवल एक बार एक दिन या एक महीने के स्नान- ध्यान- जप- तप- दान से संभव होगा। इस प्रकार हम यह कह सकते है कि यह एक निरंतर जारी रखने वाली लम्बी प्रक्रिया है जिसके साथ व्यक्ति को दैनिक जीवन में होने वाले पाप कर्मों की पुनरावृत्ति को भी नियंत्रित रखना होता है तब जाकर पाप कर्मों से मुक्ति का यह गणित सिद्ध होता है।&lt;/p&gt;&lt;p dir=&quot;ltr&quot;&gt;इसको दुसरे तरीके से हम ऐसे समझ सकते है कि पाप कर्मों से मुक्ति आत्मिक शुद्धि से भी संभव है अर्थात् मन विचार वाणी व्यवहार की शुद्धि से। जिसके लिए आध्यात्मिक ज्ञान, सत्संग, प्राणायाम एवम् वाणी पर नियंत्रण आवश्यक है। गंगा स्नान, कल्पवास, त्याग और प्रायश्चित इसका माध्यम है। इसी लिए सनातन ऋषि मुनियों के सलाह पर सांसारिक जीवन यापन करने वाले मनुष्यों के लिए त्रिवेणी संगम तट पर कल्पवास और स्नान का प्रावधान किए गए है।&lt;/p&gt;&lt;p dir=&quot;ltr&quot;&gt;पाप कर्मों से मुक्ति और आध्यात्मिक उन्नति की निरन्तर जारी रखनी वाली प्रक्रिया में माघ मास में कल्पवास और त्रिवेणी संगम तट पर स्नान के अलावा सनातन संस्कृति के अनुसार पूरे वर्ष में महत्वपूर्ण पर्वों जैसे पूर्णिमा एकादशी त्रयोदशी शिवरात्रि अमावस्या आदि पर गंगा जमुना नर्मदा ताप्ती कृष्णा कावेरी नदियों के तट पर भी स्नान से भी आत्मिक शुद्धि और भगवत भक्ति का राह प्रशस्त होता है और मनुष्य को सदमार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलता लेकिन यह तभी संभव हो पाएगा जब व्यक्ति शुद्ध भाव, बुरे कर्मों की पुनरावृत्ति न करने के दृढ़ संकल्प, मजबूत इच्छा शक्ति के साथ नियम संयम का पालन करते हुए दिव्य नदियों के जल में स्नान को जाए केवल देखा देखि गंगा स्नान से कुछ भी नहीं प्राप्त होने वाला है।&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p dir=&quot;ltr&quot;&gt;पाप कर्म से मुक्ति तो केवल प्रायश्चित व पाप कर्म के पुनरावृत्ति से बचने के संकल्प से, स्वयं के कर्मो के सुधार और पाप कर्म भोग ( यानी कर्म पल को सहन करने ) से ही संभव होता है कोई अन्य रास्ता है ही नहीं पाप कर्म से मुक्ति का।&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p dir=&quot;ltr&quot;&gt;अतः हम यह कह सकते है की गंगा स्नान से बुरे विचारों यानी सूक्ष्म कर्म और उसकी प्लानिंग यानी मध्यम श्रेणी के कर्म के प्रभाव संभवतः नष्ट हो जाए क्योंकि प्रभु बहुत दयालु है और शुद्ध भाव से स्वयं के सुधार के संकल्प के साथ जब कोई भक्त उनके शरण में डुबकी लगाता है तो वो अपने शरण में सुधार की भावना से आए भक्तों को शुद्ध कर सदमार्ग पर चलने का मौका देते है और मनुष्य के सूक्ष्म और मध्यम श्रेणी के पाप कर्म नष्ट हो जाते है लेकिन जो पाप कर्म क्रियान्वित हो चुका होता है पूर्ण कर्म बन चुका है उसका परिणाम तो मनुष्य को भुगतना ही पड़ता है किसी न किसी रूप में। उम्र लम्बी है तो सम्भवतः वर्तमान जन्म में ही नहीं तो अगले जन्म में प्रारब्ध रूप में क्यों कि शरीर नष्ट होता है आत्मा नष्ट नहीं होती आत्मा अजर अमर है और मनुष्य कर्मों की छाप शरीर में विद्यमान आत्मा पर सदैव के लिए बन जाता है और वह तब तक बना रहता है जब तक कि वह परिणाम रूप में आत्मा को प्राप्त न हो जाए। इसी लिए जब आत्मा दूसरा जन्म लेती है तो उसे अपने उन पाप कर्म को किसी न किसी रूप में भोगना ही पड़ता है। &lt;br /&gt;
इस बात को हम इस प्रकार भी समझ सकते है कि यदि हमने कोई बीज बोया है तो वो एक निश्चित समय के बाद पौधा बनेगा और फिर कुछ निश्चित समय बाद फल देगा ही यदि किसी प्रकार से उसे नष्ट न किया जाए और उसका नष्ट होना इस बात पर निर्भर करेगा कि व्यक्ति उसको नष्ट करने का किस प्रकार से प्रयास कर रहा है। जैसे कि व्यक्ति गंगा स्नान तो इस विचार से कर रहा है जाने अनजाने में कोई पाप कर्म हुआ तो नष्ट हो जाए लेकिन गंगा स्नान करके पुनः अपने दुष्ट विचारों के अनुरूप कार्य करते रहना से तो पाप कर्म नहीं कट जाएंगे। ऐसा व्यवहार करके अज्ञानता वश अक्सर लोग भगवान को ही धोखा देने का कार्य करते है, खुद से ही सोचिए क्या ब्रह्मांड की कोई शक्ति भगवान को धोखा दे सकती है नहीं न &lt;br /&gt;
और जब साधारण मनुष्य धोखा देने वाले व्यक्ति को जल्दी क्षमा नहीं कर पाता है तो भगवान कैसे क्षमा कर देंगे ऐसा करके तो व्यक्ति भगवान को और कड़ा दंड देने के लिए प्रेरित कर रहा होता है तो केवल महाकुंभ में स्नान से किसी के पाप कर्म कैसे कट जाएंगे।&lt;/p&gt;&lt;p dir=&quot;ltr&quot;&gt;हम सभी लोग स्नान- ध्यान, जप - तप ( यानी त्याग ), दान- पुण्य शब्दों का प्रयोग अक्सर साथ साथ पढ़ा सुना होगा अर्थात गंगा स्नान तभी सफल होगा जब व्यक्ति इस प्रक्रिया को पूरा करे तभी पाप कर्म से मुक्ति या आत्मिक शुद्धि संभव हो पाएगी अन्यथा नहीं। जैसे केवल बीज बो देने से फल प्राप्त नहीं होगा उसे खाद पानी देकर पोषित भी करना होता है तभी फल प्राप्त होने की उम्मीद बनती है उसी प्रकार गंगा स्नान के साथ साथ ध्यान भी करना होगा, ध्यान तभी पूरा होगा जब मंत्र जाप हो ( मंत्र जाप की भी अपनी प्रक्रिया है ) मंत्र जाप के साथ त्याग हो यानी नियम संयम के साथ कल्पवास हो और फिर दान यानी सृजदान तब जाकर सबसे अंत में पुण्य प्राप्त होता है और यह प्रक्रिया सुधार की भावना से निरंतर जारी रखना होता तब पाप कर्म पुण्य कर्म के प्रभाव से कमजोर हो जाते है कटते नहीं बल्कि उसका प्रभाव कमजोर हो जाता है तो उसकी पीड़ा महसूस नहीं होती। यह भी इस बात पर निर्भर करेगा की पूरी प्रक्रिया के दौरान व्यक्ति का भाव कैसा रहा है यदि पूरी प्रक्रिया शुद्ध भाव से संकल्पित होकर किया जाए तो संभव है कि व्यक्ति के पाप कर्मों के प्रभाव से शरीर में विद्यमान आत्मा शुद्ध हो जाएं और वर्तमान जन्मों के पाप कर्म प्रारब्ध कर्मों से न जुडे या हो सकता है मनुष्य मोक्ष को प्राप्त हो जाए।&lt;/p&gt;&lt;p dir=&quot;ltr&quot;&gt;वैसे पाप कर्मों के प्रभाव से बचने का सबसे सरल और उचित उपाय है पाप कर्मों से बचना और पाप कर्मों से बचने का सबसे सहज तरीका है क्रोध, लोभ और मोह से बचना क्यों कि अत्यधिक पाप मनुष्य से इसी वजह से होता है और इनसे बचने का सबसे अच्छा उपाय है स्नान ध्यान, जप तप ( त्याग ), दान पुण्य, के साथ साथ ज्ञान अर्जन यानी वैदिक ज्ञान से संबंधित पुस्तकों का अध्ययन, संत संगति इत्यादि। सांसारिक जीवन में यह सब प्रत्येक दिन संभव नहीं हो सकता था इसी लिए ऋषि मुनियों ने वैदिक ज्ञान के आधार पर मनुष्य के उद्धार के लिए वर्ष में एक बार एक महीने के लिए कल्पवास का प्रावधान किया। जिसके लिए त्रिवेणी संगम का स्थल सबसे श्रेष्ठ माना गया इसी लिए प्रत्येक वर्ष प्रयाग में माघ मास में माघ मेला लगता है जिससे सांसारिक जीवन में रहने वाले मनुष्यों को संत संगति में जीवन के उद्धार का मार्ग प्राप्त हो।&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p dir=&quot;ltr&quot;&gt;Written By: Ratnesh Mishra&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;div class=&quot;blogger-post-footer&quot;&gt;TEA TOWN Cafe - Soup For The Soul, Place to enjoy the evining with friend
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rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='32' src='//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiUs7BrFO9DMz8ZIIVyHnnohtALZN0mxTNx9q0DeKAn6YpAIpqoNTtR4GKn-WDKAqoTx5YYKg4bXRJXigkPSIH15Kfk1N8vJV3rrc3aORy2Tf6MwBof-zyquWctyWFU4g/s113/IMG-20170219-WA0037.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7681948317863166672.post-4527015947038717633</id><published>2025-02-04T13:10:00.006+05:30</published><updated>2025-02-04T13:33:11.699+05:30</updated><title type='text'>देश की राजधानी दिल्ली में वर्तमान सरकार की छुट्टी लगभग निश्चित कर चुकी है जनता </title><content type='html'>&lt;div&gt;&lt;div&gt;देश के राजधानी क्षेत्र दिल्ली में विधान सभा चुनाव के लिए 5 फरवरी को मतदान होना है। आज 3 फरवरी को सभी प्रत्याशी अपने पक्ष में प्रचार अभियान को रोक मतदान कराने की तैयारी में जुट गए है।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;पिछले लगभग 11 वर्षों से दिल्ली में आप पार्टी की सरकार है और अरविंद केजरीवाल जी 3 बार मुख्यमंत्री पद का शपथ ले चुके हैं लेकिन दिल्ली के मतदाता केजरीवाल जी के कथनी और करनी में अंतर से अब स्वयं को ठगा हुआ सा महसूस कर रहे हैं............&lt;/div&gt;&lt;div&gt;इसका सबसे बड़ा कारण है केजरीवाल जी ने जिन मुद्दों को आधार बनाकर आंदोलन किया जिस पर देश और दिल्ली की करोड़ों जनता ने इन पर विश्वास करके इनको मतदान किया उन मुद्दों पर इन्होंने कोई काम ही नहीं किया। दिल्ली में इनका सबसे बड़ा मुद्दा था दिल्ली के पूर्व सरकार के मंत्रियों के भ्रष्टाचार को उजागर कर उनको जेल भेजना, जमुना नदी की सफाई करवाकर उसे स्नान करने और पीने लायक बनाना और दिल्ली को स्वछ बनाकर विश्वस्तरीय शहर बनाना लेकिन पिछले दस सालों में इन तीनों मुख्य मुद्दों पर इन्होंने कोई कार्य ही नहीं किया और हमेशा हर समस्या को लेकर केंद्र सरकार, उपराज्यपाल और दिल्ली नगर निगम को दोषी ठहराने का काम करते रहे। जबकि पिछले तीन सालों से दिल्ली नगर निगम पर आप पार्टी का ही मुखिया है इसके बावजूद भी दिल्ली के सीवर लाइन की कोई सफाई नहीं हुई और बारिश के दिनों में दिल्ली में भारी जलजमाव हो जाता है। वर्तमान में तो ये स्थिती है कि लोगों को पीने के लिए स्वछ जल भी सही समय पर नहीं मिल पा रहा है...............&lt;/div&gt;&lt;div&gt;जनता को अब ऐसा महसूस होने लगा है की केजरीवाल जी ने फ्री बिजली और पानी के नाम पर केवल बेवकूफ बनाया। देश से भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए केजरीवाल जी ने आप पार्टी बनाया, भ्रष्टाचारी व्यवस्था को देश से समाप्त करने के लिए देश में लोकपाल कानून बनाने के लिए जनता का विश्वास जीता चुनाव लड़े लेकिन स्वयं और अपने सहयोगी मंत्रीयो के साथ खुद भ्रष्टाचार के मामले में जेल यात्रा किए।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;कोई सरकारी सुख सुविधा न लेने की कसमें खाए लेकिन स्वयं के लिए करोड़ों रुपए सरकारी धन खर्च करके महल बनवाया और Y श्रेणी की सुरक्षा व्यवस्था लेकर आम आदमी से खास आदमी बनकर जनता के बीच में दिल्ली के मुखिया कहलाने लगे।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;जनता अब केजरीवाल के दोगले चरित्र को पहचान गई है जिसका परिणाम यह होगा की इस बार आप सरकार दिल्ली की सत्ता से बाहर हो जाएगी।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;संभवतः बीजेपी इस बार दिल्ली में सरकार बना लेगी उसके कई कारण है ............&lt;/div&gt;&lt;div&gt;यदि हम दिल्ली की आधी आबादी यानी की महिला मतदाताओं की बात करे तो जो उच्च वर्ग की पढ़ी लिखी मतदाताएं है वे कजरीवाल जी के झूठी बातों और कर्मों को अच्छी तरह समझ चुकी है और मोदी जी के व्यक्तित्व से अधिक प्रभावित है तो उनका वोट इस बार केजरीवाल जी को मिलना नहीं है। कमजोर वर्ग और झुग्गी झोपड़ी में रहने वाली महिलाएं आप सरकार की शराब नीति से इतना दुखी है कि अपना घर बर्बाद होता देख कसम ले रखा है कि केजरीवाल को दिल्ली सरकार से हटाना है।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;युवा मतदाताओं की बात करे तो दिल्ली का युवा वर्ग भी केजरीवाल के झूठे वादों और दोगले चरित्र की मिमिक्री हर गली चौराहों पर कर रहा है तो ऐसे में युवा केजरीवाल के नाम पर वोट कैसे कर सकता है।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;दिल्ली सरकार के कर्मचारियों का सही समय पर वेतन न मिलने से कर्मचारी वर्ग भी नाराज है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;दिल्ली के व्यापारी वर्ग को दिल्ली सरकार से कोई खास लेनदेना है नहीं उसके लिए केंद्र सरकार के बजट का प्रभाव ज्यादा होता है जो कि उनके पक्ष में ही है तो व्यापारी वर्ग भी केजरीवाल को इस वोट करने वाली नहीं है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;जातीय समीकरण की बात करे तो ...........&lt;/div&gt;&lt;div&gt;जाट मतदाता जब इनको हरियाणा चुनाव में एकदम से बहिष्कृत कर दिया तो दिल्ली में कैसे वोट करेंगे इनके लिए&lt;/div&gt;&lt;div&gt;पंजाबी मतदाता पंजाब में आप पार्टी की सरकार बनाकर पश्चाताप कर रहे है तो दिल्ली में फिर से कैसे वोट करेंगे जब की केजरीवाल जी का पिछले दस सालों में चरित्र उजागर हो चुका है की इन्होंने दिल्ली की जनता को केवल बेवकूफ बनाया है&lt;/div&gt;&lt;div&gt;पूर्वांचल यानी उत्तर प्रदेश बिहार उत्तराखंड के मतदाताओं को भी अब केजरीवाल से ज्यादा विश्वसनीय और चरित्रवान नेता मोदी जी नजर आते है ऐसे में इनका मत भी इनको नहीं मिलने वाला है।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;उपरोक्त बातों से यह तो तय है कि आप पार्टी दिल्ली में पिछले दो चुनावों की अपेक्षा इस बार कम सीटें जीतेंगी इसका एक बड़ा कारण यह भी है कि आप पार्टी के ही कई पूर्व विधायक और बड़ी संख्या में समर्थक अरविंद केजरीवाल और इनके सहयोगी मंत्रियों से बहुत नाराज है यानी कि आप पार्टी वर्तमान समय में समर्पित कार्यकर्ताओं के स्तर पर भी कमजोर नजर आ रही है। आप पार्टी के आठ वर्तमान विधायकों ने पार्टी से इस्तीफा देकर बीजेपी ज्वाइन कर लिया है।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;बीते लोक सभा चुनाव 2024 में भी दिल्ली में आप प्रत्याशियों को 2020 के विधानसभा चुनाव की अपेक्षा कम मतदान हुआ जब कि केजरीवाल जी के जेल जाने से मतदाताओं में भावनात्मक रुझान था। इसके बावजूद आप दिल्ली में एक भी लोक सभा सीट नहीं जीत पाई।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;केजरीवाल मनीष सिसोदिया से लेकर वर्तमान आप सरकार के अधिकतर मंत्री अपने विधान सभा क्षेत्र में&amp;nbsp; अपनी झूठी बातों से बहुत कमजोर नजर आ रहे है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;ऐसे में यह तो निश्चित है कि इस बार के विधानसभा चुनाव में आप पार्टी अब तक का सबसे खराब प्रदर्शन करने जा रही है। पिछली बार की अपेक्षा आधी सीट भी जीतना मुश्किल दिखाई दे रहा है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;आइए अब बात करते है कि दिल्ली में बीजेपी सरकार बनने की संभावना कैसे अधिक दिखाई दे रहीं हैं ........&lt;/div&gt;&lt;div&gt;इसका सबसे बड़ा कारण है वर्तमान में जातीय और क्षेत्रीय समीकरण बीजेपी के पक्ष में है। महिला मतदाताओं का पूर्ण समर्थन इस बार बीजेपी को मिलेगा। पूर्वांचल के मतदाता इस बार केजरीवाल के झूठे वादे में नहीं फंसने वाले है।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;पिछली बार 2020 दिल्ली विधानसभा चुनाव में बीजेपी के लगभग 15- 20 प्रत्याशी केवल 500 से 2000 मतों के अंतर से चुनाव हार गए थे जो इस बार जीत जाएंगे।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;जनता का रुझान बीजेपी के पक्ष में होने से बीजेपी का मत प्रतिशत भी इस बार बढ़ेगा तो सीटों की संख्या भी बढ़ेगी।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;जिसके प्रभाव से बीजेपी इस बार दिल्ली विधानसभा में लगभग 35- 40 सीटें जीत जाएगी.....&lt;/div&gt;&lt;div&gt;हो सकता है त्रिकोणीय लडाई में कुछ और अधिक सीटें बीजेपी जीत जाए।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;कांग्रेस का पिछले चुनाव में खाता भी नहीं खुला था लेकिन इस बार कांग्रेस दिल्ली विधानसभा में अपनी उपस्थिति सुनिश्चित कर लेगी त्रिकोणीय लडाई और आप सरकार के प्रति जनता की नाराजगी का लाभ कांग्रेस को भी होगा और कांग्रेस इस बार दिल्ली में 3- 5 सीटें जीत सकती है।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;अन्य और निर्दलीय को भी कांग्रेस की तरह लाभ मिल सकता है 1 या 2 सीट का&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;इस प्रकार आप पार्टी को इस बार दिल्ली चुनाव में 25- 30 सीट से अधिक मिलने की संभावनाएं नहीं दिखाई दे रही है।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;ऐसा मेरा आकलन है बाकी ....&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;5 फरवरी की शाम को मतदान के बाद बड़े बड़े राजनितिक विश्लेषकों का रुझान TV Channel पर हम सभी को देखने सुनने को मिलने लगेगा और 8 फरवरी को दिल्ली में अगली सरकार और मुखिया का पता भी चल जाएगा लेकिन मेरा आकलन नोट कर लीजिए परिणाम लगभग ऐसा ही होना चाहिए।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;RATNESH MISHRAA
                               
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ने यह तो नोटिस कर लिया की जियो का रिचार्ज बढ़ाकर अंबानी ने शादी के खर्चे वसूल लिए लेकिन एयरटेल वोडाफोन ने भी उतना ही टैरिफ प्लान अपने उपभोक्ताओं का बढ़ा दिया यह बात किसी ने नोटिस नही किया, दुसरी ओर अंबानी परिवार ने इतने लंबे समय तक चले कार्यक्रम में हजारों करोड़ खर्च खरने के साथ साथ भारतीय संस्कृति परंपरा, खान पान और पहनावे से कोई समझौता नहीं किया ...... इस बात को बहुत ही कम लोगो ने समझने की कोशिश किया होगा .......&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;देश के सबसे प्रतिष्ठित परिवार के इस कार्यक्रम से आज के युवा पीढ़ी को सीखने के लिए जो सबसे बड़ी बात रही वह यह की अनन्त के बड़े भाई आकाश जो जियो के CEO है उनकी पत्नी श्लोका के संस्कार पहनावे और व्यवहार पूरे कार्यक्रम के दौरान एकदम सामान्य दिखाई दे रहे थे कोई दिखावा नहीं कोई बनावटीपन नही, श्लोका के दो बच्चे है बड़ा पृथ्वी जो चार साल का है लोगो का अभिवादन &quot;जय श्री कृष्णा&quot; बोलकर करता है यहां अपने आस पास के साधारण परिवार और सामान्य स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के माता पिता Good Morning और Hello करने को सिखाते है यदि उनका बच्चा नमस्ते या प्रणाम कर ले तो अपनी बेज्जती समझते है ...... घर में सैकड़ों हेल्पर होने के बावजूद श्लोका अपने छोटे बच्चे को लगातार अपने गोद में ही लेकर नजर आ रही थी, सामान्य परिवारों में कोई महिला यदि पचास हजार की नौकरी कर रही हो या कोई सरकारी पद पर हो या उसका पति अच्छा व्यापार करता हो या अधिकारी हो तो एक पल भी वो अपने बच्चे को अपनी गोदी में नही उठाएगी, उनका ध्यान केवल लोगो को अपने महंगे कपड़े पर्स और मोबाइल दिखाने पर ही केंद्रित रहेगा ......... मैंने तो यहां तक देखा है कि कुछ अधिकारी गण की पत्नियां तो अपने बच्चों की हगिस भी सरकारी हेल्पर से साफ करवाती है क्यों कि उनको बदबू आती है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;अनंत की बहन ईशा अंबानी पीरामल ग्रुप ऑफ कंपनीज के मालिक अजय पीरामल की बहु और आनंद पीरामल की पत्नी है जो पीरामल रियल एस्टेट और पीरामल फाइनेंस के CEO है आनंद पीरामल पूरे कार्यक्रम के दौरान इतने साधारण और समान्य दिखाई दे रहे थे कोई दिखावा नहीं कोई तामझाम नही और हमारे छोटे शहरों में एक साधारण सरकारी अधिकारी, व्यापारी या नेता के बच्चे ऐसा शो करते है जैसे उनके शहर में उनसे बडा व ताकतवर कोई और है ही नही ......&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;मुकेश अंबानी के छोटे भाई अनिल अंबानी जो आजकल भले ही आर्थिक मंदी के दौर से गुजर रहे है लेकिन फिर भी उनकी व्यक्तिगत हैसीयत हजार करोड़ से उपर ही होगी लेकिन इनके बड़े बेटे अनमोल अंबानी जो आजकल Reliance Caipital के CEO है लेकिन शादी में ऐसे शामिल हुए जैसे कोई साधारण परिवार का लड़का हो जब कि अनमोल अंबानी अपनी बौद्धिक क्षमता और चतुराई से अनिल अंबानी की डूबी हुई कंपनीज को अब सवार रहे है जिसके परिणाम स्वरूप रिलायंस कैपिटल और रिलायंस पॉवर अब मंदी से उबर रही है&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;मुझे तो लगता है अंबानी परिवार के इस विवाह समारोह से यदि कुछ सीखने लायक है तो वह है भारतीय संस्कार परंपरा का निर्वहन, मेहमानों व साधु संतो का सम्मान कैसे किया जाता है यह सीखना चाहिए क्यों की कोई व्यक्ति वास्त्विक अमीर दिखावे से नही संस्कारों से होता है परंपराओं के निर्वहन से होता है .......&lt;/div&gt;&lt;div&gt;इसका एक बडा उदाहरण यह देखिए हजारों विदेशों मेहमान शादी में शामिल हुए, पूरे कार्यक्रम के दौरान हजारों प्रकार के व्यंजन परोसे गए लेकिन मांसाहार और शराब को पूर्णरूप से वर्जित किया गया था.....&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;परिवार का प्रत्येक सदस्य भारतीय परिधानों को ही पहना था महिलाओं के पहनावे में शरीर के अंगो का कोई प्रदर्शन नहीं था यहां सामान्य शादियों में दिसंबर और जनवरी के महीनों में भी महिलाएं कम से कम और भडकीले परिधानों को ही धारण करना पसंद करती है जिससे लोगो को पता चले की वो बहुत मॉडर्न और अमीर परिवार से है नही तो लोग गवार समझेंगे ........&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;पूरे शादी कार्यक्रम में ज्यादातर मौके पर केवल धार्मिक और सभ्य शब्दों वाले गाने ही बज रहे थे फूहड़ गानों का प्रयोग न के बराबर ही सुनाई दिया..... हमारे आपके सामान्य परिवारों में जब तक &quot;शीला की जवानी&quot; अंगूरी बदन, जलेबी बाई.... जैसे फूहड़ से फूहड़ शब्दों वाले भोजपुरी गानों पर घर की महिलाएं समाज के पुरुषों के सामने सड़क पर डीजे वाले के साथ नाचेंगी नहीं तब तक उनको लगेगा की कही लोग उन्हें गवार न समझ ले........&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;मुकेश और नीता अंबानी ने अनंत राधिका के भव्य विवाह समारोह से पूरे भारतीय समाज को यह संदेश दिया है की चाहें आप कितने भी अमीर क्यों न हो जाएं अमीरी गरीबी से व्यवहार पर फर्क नहीं पढ़ना चाहिए, संस्कारों और परंपराओं का सम्मान सर्वोपरी होना चाहिए। दोनो ने देश को बताया की आप गरीब है या अमीर, आपके सोच और संस्कार की श्रेष्ठता आपके व्यवहार में दिखाई देना चाहिए क्यों कि अमीर व्यक्ति के सोच और संस्कार यदि नीच है तो वह भी व्यवहार में दिख जाता है इसी प्रकार गरीब व्यक्ती यदि उच्च सोच और संस्कार का है तो वह भी उसके भाषा और व्यवहार में दिख जाता है। मतलब यह अमीरी के साथ साथ ऊंची सोच और संस्कार भी उच्च होने चाहिए नही तो केवल ब्रांडेड पहनावे और लग्जरी गाड़ी दिखाने से कोई अमीर नही होता।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;यदि कोई व्यक्ति वास्तव में किसी अमीर परिवार से है तो उसके सोच और संस्कार भी उच्च होने ही चाहिए लेकिन यह सब घर के आध्यात्मिक माहौल के बिना संभव नही है जिस घर परिवार का आध्यात्मिक माहौल और खान पान उच्च कोटि का होगा वहा संस्कार और सोच भी उच्च ही होंगे जो अंबानी परिवार ने देश को प्रमाणित रूप से दिखा दिया।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;दुर्भाग्यवश आजकल तो ज्यादातर घरों का खान पान ही&amp;nbsp; एकदम से बिगड़ गया है अच्छे अच्छे ब्राह्मण घरों के लड़के लड़कियां आजकल मांस&amp;nbsp; मदिरा और शबाब के शौकीन हो गए है, नेटफ्लिक्स पर थर्ड कैटेगरी के फिल्म देखने में व्यस्त है तो अध्यात्म और संस्कार कहा से आएगा.......&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;अंबानी परिवार में शायद ही कोई शराब मांसाहार और शबाब का शौकिन होगा आध्यात्मिकता तो इतनी है की बिना भगवान को भोग लगाए घर में कोई भोजन भी नही ग्रहण करता है।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;हमारे साधु संत और वेद पुराण भी यही कहते है जिस परिवार में भागवत प्रेम होगा वही वास्त्विक रूप में संस्कार बसेगा अन्यथा केवल दिखावा के सिवाय और कुछ नही।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;अफसोस यह है की आज की दुनिया केवल दिखावे की दुनियां है जितना अधिक दिखवा उतना अधिक वाहवाही और सम्मान।&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;RATNESH MISHRAA
                               
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for relaxation of body.&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://theindianyouths.blogspot.com/feeds/5599490506892026522/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://theindianyouths.blogspot.com/2024/07/blog-post.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7681948317863166672/posts/default/5599490506892026522'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7681948317863166672/posts/default/5599490506892026522'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://theindianyouths.blogspot.com/2024/07/blog-post.html' title='किसी व्यक्ति का सोच और संस्कार उसे वास्तविक रूप से अमीर बनाता है न की ब्रांडेड पहनावा और लग्जरी गाड़ी '/><author><name>RATNESH MISHRA</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05433941901415165493</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='32' src='//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiUs7BrFO9DMz8ZIIVyHnnohtALZN0mxTNx9q0DeKAn6YpAIpqoNTtR4GKn-WDKAqoTx5YYKg4bXRJXigkPSIH15Kfk1N8vJV3rrc3aORy2Tf6MwBof-zyquWctyWFU4g/s113/IMG-20170219-WA0037.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7681948317863166672.post-203406611603692462</id><published>2024-04-29T18:35:00.015+05:30</published><updated>2024-06-04T11:09:27.569+05:30</updated><title type='text'>दो विचारधारा की लड़ाई में लोकसभा चुनाव २०२४ का परिणाम बीजेपी के पक्ष में जाता दिखाई दे रहा है</title><content type='html'>&lt;div&gt;देश के सबसे बड़े लोकतांत्रिक पर्व लोकसभा चुनाव की चर्चा आजकाल हर गली मोहल्लों, नुक्कड़ों, गांव के चौपालों, चाय की गुमटियों और पार्कों में सुबह के सैर सपाटो से लेकर शाम के खाने के हाजमे के समय चहल कदमी करते हुए हर जुबान पर चल रहीं है। अभी तक दो चरणों के चुनाव हों चुके है विपक्षी पार्टियां पहले दो चरणों में हुए मतदान प्रतिशत को २०१९ की अपेक्षा कुछ कम&amp;nbsp; होने पर अपने विजय रथ को आगे बढ़ता देख रहे हैं लेकिन वह यह भूल जाते है की २००४, २००९ और २०१४ का समय कुछ और हुआ करता था तब सोशल मीडिया डिजिटल मीडिया का बोलबाला न के बराबर था और आज सोशल मीडिया डिजिटल मीडिया की पहुंच जन जन घर घर तक युवा हो या घर में खाना पका रही महिला या बुर्जुग, हर हाथ में एंड्रॉयड मोबाइल, हर वर्ग के मतदाताओं को इतना जागरुक बना दिया है की अब किसी परिवार या गांव को प्रत्याशियों द्वारा अपनी झुठी बातों में फसाना बहुत कठिन हो गया है आज प्रत्येक मतदाता गूगल पर केवल एक वायस कमांड देकर प्रत्याशी और उनके नेता साथ में पूर्व के जनप्रतिनिधियों का सारा कच्चा चिट्ठा पता कर&amp;nbsp; प्रत्यासियों द्वारा खेल जा रहें सह मात के खेल को अब अच्छे से समझते है। आज प्रत्येक जागरूक मतदाता क्षेत्रीय उम्मीदवारों के व्यक्तिव से लेकर प्रधानमत्री पद तक के उम्मीदवार की चर्चा कर रहा है की कौन सबसे उपयुक्त व्यक्ति होगा क्षेत्र व देश के विकास को सुनिश्चित करने के लिए लेकिन इन सभी चर्चाओं के बीच इस बार लगभग ३० - ४० वर्षो बाद लोकसभा चुनाव में सबसे बड़ी बात यह देखने को मिल रही है की जनता - मतदाता, क्षेत्रवाद जातिवाद से ऊपर उठकर देशहित में राष्ट्र की गरिमा, भारतीय संस्कृति सभ्यता के संरक्षण, आर्थिक विकास, महिला सुरक्षा जैसे मुद्दों को मतदान के लिए सर्वोपरि मान रहा है। यहीं कारण है की क्षेत्रीय पार्टियों का महत्व अब धीरे धीरे कमजोर होता दिख रहा है। जो पार्टियां पिछले कई चुनावों से जातीय समीकरण बनाकर कई दशक से राष्ट्रीय राजनीत में अपना वर्चस्व बनाए हुए थे और केंद्रीय सरकार को स्वतंत्र रूप से कार्य करने में बाधा पहुंचाते थे जिनके परिणाम स्वरूप केंद्रीय सरकार को कई पंच वर्षीय में सही नेतृत्व न मिलने से देश आर्थिक रूप कमजोर होता चला गया लेकिन पिछले १५ सालों में युवा मतदाताओ की संख्या में हुई लगभग ४०% तक की वृद्धि से, सुझबुझ के साथ मतदान करने वालो की संख्या बढ़ गई हैं जिसकी वजह से अब क्षेत्रीय पार्टियों का वजूद कमजोर हो रहा है जो एक मजबूत राष्ट्र के लिए बहुत अच्छा संकेत है। इन बदलाव के कारण अब जनता केवल यह देख रही है की देश की मजबूती किस हाथ में सुनिश्चित हो सकतीं है।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;चूंकि देश की डेमोग्राफी पिछले २० वर्षो में इतनी बदल गई की अब चुनाव परिणाम युवाओं, महिलाओं और दो समुदायों के वोट की संख्या पर निर्भर हो गया जिसे देखते हुए राजनीतिक दलों ने मतदाताओं को गुमराह करने के लिए २०२४ के आम चुनाव को क्षेत्रवाद व जातिवाद से अलग हटकर चुनाव का विषय दो समुदायों&amp;nbsp; की विचारधारा पर केंद्रित कर दिया है। जिससे वोटों का धुव्रीकरण किया जा सके। जहां ....&lt;/div&gt;&lt;div&gt;एक विचारधारा वर्तमान सत्ताधारी गठबंधन समर्थित है जो राष्ट्रीय अस्मिता ब सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करते हुऐ हजारों वर्षों की गुलामी के धब्बों को मिटाने के संकल्प के साथ भारत की प्राचीन पहचान और गरिमा को आर्थिक प्रगति के साथ पुनः वापस लौटाने और भारत को विश्व की तीसरी अर्थव्यवस्थ बनाने के लिए जनता से मतदान करने की बात कर रही है जिससे सबका साथ सबके विकास के नारे को सच साबित करते हुए भारत को २०४७ तक आज़ादी के सौवीं वर्षगांठ पर विकसित राष्ट्र के रुप में विश्व पटल पर मान्यता दिलाकर विश्व की सबसे बड़ी शक्ति बना सके।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;और दूसरी तरफ विपक्षी पार्टियों का गठबंधन अपने पार्टी की अस्मिता की रक्षा की लडाई में देश के एक समुदाय को अपना कोर मतदाता मानते हुए उनको गुमराह कर केवल उनके वोटों का ध्रुवीकरण करने का प्रयास कर अधिक से अधिक सीट जितना चाहता है जिससे पारिवारिक सत्ता की चाभी उनके हाथ में पुनः वापस लौट सके और देश की आज़ादी के समय से एक समुदाय विशेष के लिए निर्धारीत लक्ष्य को परीणाम तक पहुंचा सके इसके लिए मतदाताओं को लोक लुभावने वायदे किए जा रहे है हो सकता है इनके लुभावने वादे से प्रभावित होकर कुछ साधारण श्रेणी के मतदाता पैसे के लालच और क्षेत्रीय नेताओ के नाम पर वोट कर दे जिससे इनके पार्टी का वजूद तो बना रहेगा लेकिन सत्ता वापसी की संभावना बहुत ही कम ही नजर आ रही है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;आइए अब हम समझते है कि २०२४ का लोकसभा चुनाव परिणाम बीजेपी के पक्ष में कैसे संभव दिखाई दे रहा है। अब तक देश के विभिन्न राज्यों में दो चरणों में लगभग प्रत्येक राज्यों के ५ से १५ सीटों पर मतदान हो चुका है जिसमे कई राज्यों में २०१९ चुनाव की अपेक्षा मतदान प्रतिशत कम रहा जिसमे&amp;nbsp; मुख्यरुप से महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और बिहार राज्य है जहां&amp;nbsp; पिछले वर्ष की तुलना में लगभग २% मतदान कम हुआ है लेकिन कई राज्यों में मतदान प्रतिशत अधिक भी हुआ जैसे त्रिपुरा, असम, बंगाल, केरल, छत्तीसगढ़, झारखंड, आंध्र, तेलंगाना, कर्नाटक। जिसका पिछले चुनाव परिणामों के आधार पर तुलना करते हुए विपक्षी पार्टियां और उनके समर्थक अनुमान लगा रहे है की इसका लाभ विपक्ष को मिलेगा। हो सकता है कुछ सीटों पर कम वोटिंग प्रतिशत का कुछ लाभ विपक्षी पार्टियों को मिल जाए लेकिन इसका अर्थ यह नहीं निकलता की विपक्ष वर्तमान सरकार को बदलने में सफल हो पाएगा। जिसके तीन कारण है पहला यह कि २०२४ का चुनाव पिछले चुनावों से भिन्न है यह चुनाव दो विचार धाराओं और राष्ट्रीय अस्मिता के मुद्दे पर हो रहा है न कि क्षेत्रवाद और जातिवाद पर, दूसरा कारण यह की वर्तमान चुनाव में युवा ब महिला मतदाता निर्णायक भूमिका निभाएंगे जो यह अच्छी तरह समझते है की देश किस हाथ में सुरक्षित रहेगा और तीसरा कारण है विपक्षी पार्टी की तरफ से प्रधानमंत्री का दावेदार कौन है यह अभी तक निश्चित ही नहीं हो पाया है कांग्रेस के तरफ से कोई&amp;nbsp; हो ही नही सकता क्यों कि कांग्रेस अभी पार्टी के अस्तित्व की रक्षा में उलझा है जो केवल २३५ सीटों पर चुनाव लड़ रही है जबकि पूर्ण बहुमत के लिए कम से कम २७५ सीटों की आवश्यकता है और इनके सहयोगियों में भी मोदी जी जैसा कोई बेदाग चेहरा है कोई नही जिसे जनता प्रधानमन्त्री पद के लिए पसंद करे। इस लिए जनता स्पष्ट रूप से यह समझ रही है की प्रधनमंत्री पद का श्रेष्ठ दावेदार कौन है और&amp;nbsp; कौन सी पार्टी सरकार बनाने में समर्थ है। वर्तमान समय में बच्चा हो या जवान, महिला हो या बुर्जुग सबके दिमाग में केवल एक ही चेहरा है प्रधानमत्री पद का वह है नरेंद्र मोदी जिसका चुनाव चिन्ह है कमल निशान और जनता प्रधानमन्त्री चुनने के लिए वोट कर रही है तो उसको पहला चेहरा मोदी ही नजर आता है।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;अब २०१९ चुनाव के चुनाव परिणाम और देश के विभिन्न राज्यों में हुए मतदान प्रतिशत को आधार मानते हुए आकलन करते है की सत्ता पक्ष और विपक्ष कौन बढ़त बना रहा है।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;शुरुवात करते है देश के मुकुट राज्य जम्मू कश्मीर से, २०१९ के चुनाव में यहां ३ सीटों पर बीजेपी को जीत हासिल हुई थी और तीन ही सीटों पर विपक्ष को जब कि २०१९ की सरकार बनने के बाद पहला निर्णय मोदी सरकार ने जम्मू कश्मीर से धारा ३७० हटाने का बड़ा निर्णय लिया था और पिछले पांच सालों में केंद्र सरकार ने जम्मू कश्मीर में अलगाववादियों नेताओ की कमर तोड़कर बहुत सारे विकास कार्यों को अंजाम दिया सारे पत्थरबाज या तो घर में घुस गए या किसी काम धंधे में लग गए है पर्यटकों की राज्य में वृद्धि से रोजगार और आय के साधन में वृद्धि हुई है जिससे वहा के लोग अब बहुत खुश है और शान्ति महसूस कर रहे है इसके परिणाम स्वरूप बीजेपी अपनी तीन सीट बरकार रखते हुए हो सकता है एक दो सीट अधिक जीत ले यानी यहां बीजेपी को नुकसान की सम्भावना बहुत कम दिखाई दे रहा है हो सकता है एक दो सीट का फायदा ही मिल जाए।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;अब बात करते है हिमाचल, हरियाणा, पंजाब और दिल्ली की&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;हिमाचल में पिछली बार राज्य में बीजेपी सरकार थी और बीजेपी ने लोकसभा की चारो सीटें जीती थी अब राज्य सरकार बदल गईं है लेकिन कांग्रेस पार्टी के क्षेत्रीय नेताओ में वर्चस्व की लड़ाई और हिमाचल में विकास कार्यों की राह डगमगाने से जनता सीख लेते हुए सम्भवतः फिर से चारो सीटें बीजेपी कोटे में डाल सकती यदि बहुत अंतर आया भी तो एक या दो सीट का इससे ज्यादा नहीं जिसकी सम्भावना कम ही है तो यहां भी बीजेपी को बहुत नुकसान नहीं हो रहा हैं।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;पंजाब में बीजेपी को पिछली बार केवल दो ही सीट मिले थी और कांग्रेस को ९ सीटें क्यों की वहा तब कांग्रेस की सरकार थी और मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर के सम्मान का सवाल था लेकिन अब पंजाब में आप की सरकार है और मुख्यमंत्री भगवंत मान जिनका चरित्र बहुत अच्छा नही है और कार्यशैली भी जनता को समझ नही आ रही है फिर भी आप को पिछली बार की अपेक्षा कम से कम २- ३ सीट का लाभ मिल सकता है यानी आप यहां ५- ६ सीट जीत सकती है। कैप्टन अमरिंदर अब यहां बीजेपी में शामिल हो चुके है तो कांग्रेस को पंजाब में सबसे ज्यादा लगभग ५-६ सीटों का नुकसान होगा इसका सीधा लाभ बीजेपी को मिलेगा जिससे बीजेपी को कम से कम २ सीटों का फायदा हो सकता है। इस तरह सम्भवतः इस बार बीजेपी यहां ३-५ सीट जीत सकती है।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;हरियाणा में पिछली बार बीजेपी दस की दसों सीटें जीती थी लेकिन इस बार २-३ सीटों का नुकसान हो सकता है और कांग्रेस अपना खाता खोल लेगी राज्य में और हो सकता है एक सीट हरियाणा जनहित पार्टी के खाते में चला जाय।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;अब यदि दिल्ली की बात करे तो दिल्ली में विपक्ष के पास कोई मजबूत उम्मीदवार न होने से नरेंद्र मोदी के सामने कोई लोक लुभावन जुमला काम नही करेगा यहां भी बीजेपी को सात में से ५ सीटें मिलना तय है हो सकता है फिर से सातों सीट बीजेपी ही जीते।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;इस प्रकार पूरे नॉर्थ क्षेत्र में बीजेपी को बहुत ज्यादा नुकसान की सम्भावना नहीं दिख रही है और ना ही कांग्रेस को कोई बड़ा फायदा। ज्यादा सम्भावना है की बीजेपी इस क्षेत्र में पिछली बार की अपेक्षा एक दो सीट अधिक जीत ले।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;अब देखते है उत्तर मध्य क्षेत्र उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;वर्तमान में चारो राज्यो के बीजेपी की सरकार है जिसमे उत्तर प्रदेश में पिछली बार बीजेपी को ६२ सीट मिली थी इस बार यहां बीजेपी ३- ५ सीटें अधिक जीत सकती है और कुल मिलाकर अपने सहयोगियों के साथ ६८- ७० सीटों का आंकड़ा पहुंच सकती हैं। सपा को ७- १० सीटें मिल सकती है, कांग्रेस हो सकता है अपनी दोनो परंपरागत सीटें अमेठी व रायबरेली खो दे लेकिन वोटों के धुव्रीकरण और कुछ सीटों पर उम्मीदवार की छवि व त्रिकोणीय लड़ाई में एक दो सीट पा सकती है लगभग यही हाल बीएसपी का होगा जो पिछली बार दस सीटें जीती थी इस बार सीधे ८ सीटों का नुकसान हो सकता है सम्भावना है की बीएसपी का खाता भी नहीं खुले जिसका सीधा लाभ बीजेपी और सपा को मिलेगा। लेकिन कांग्रेस की तरह बीएसपी को भी हो सकता है १-२ सीट मिल जाए।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;उत्तराखंड में सम्भवतः बीजेपी इस बार फ़िर से पांचों सीटें जीत जाएंगी क्यों की कांग्रेस के उम्मीदवार कमजोर है और पुष्कर धामी व मोदी जी द्वारा किए जा रहे कार्यों से पहाड़ की जनता संतुष्ट दिख रही है।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;मध्य प्रदेश में पिछली बार बीजेपी लगभग सभी 29 में से 28 सीटें जीत ली थी कांग्रेस केवल एक ही सीट जीत पाई थी इस बार भी लगभग यही परिणाम रहेगा क्यों की यहां केवल बीजेपी और कांग्रेस के बीच लडाई है यदि त्रिकोणीय लडाई होती तो शायद कांग्रेस को एक दो सीट का फायदा मिल जाता और कांग्रेस में यहां बड़े नेताओं कमलनाथ व दिग्विजय की टीम में आपसी मतभेद का लाभ भी बीजेपी को मिलेगा और इस बार भी बीजेपी मध्य प्रदेश की लगभग सभी सीटें जीत लेगी।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;छत्तीसगढ़ में भी बीजेपी को २०१९ की अपेक्षा एक दो सीट का फायदा मिलेगा हो सकता है यहां भी बीजेपी सभी सीटों को जीत ले क्यों की इस बार यहां बीजेपी की सरकार है और कांग्रेसी नेताओं में ऊर्जा व उत्साह की कमी नजर आती है तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सम्भवतः अपनी राजनांदगांव की सीट भी न जीत पाए।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;इस प्रकार इस क्षेत्र में भी बीजेपी को बहुत नुकसान होता नही दिखाई दे रहा है बल्कि बीजेपी इस क्षेत्र से २०१९ चुनाव की अपेक्षा कम से कम ७- १० सीटे अधिक जीतेगी।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;अब बात करते है पूर्व और पूर्वोत्तर राज्यों की&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;बिहार झारखंड ओरिसा बंगाल असम&amp;nbsp; त्रिपुरा अरूणांचल मणिपुर मेघालय नागालैंड सिक्किम की .....&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;यदि हम बिहार की बात करे तो यहां परिणाम पिछली बार की अपेक्षा एकदम अलग हो सकता है यहां बीजेपी और एनडीए गठबंधन दोनो को नुकसान होगा जिसका लाभ राजद व कांग्रेस को मिलेगा। जिसके तीन कारण है पहला यहां पीएफआई और कांग्रेस की रणनीति काम कर सकती है क्यों की बिहार की कई सीटों पर समुदाय विशेय के मतदाता अधिक संख्या में है दूसरा नीतीश कुमार की पलटू राम वाली छवि से यादव और कुछ ओबीसी समाज भी नाराज है तीसरा कुछ सीटों पर बीजेपी और एनडीए गठबंधन का सही प्रत्याशी न मिलने से जनता नाराज है जिसका सीधा लाभ आरजेडी उम्मीदवारों को मिलेगा। पिछली बार बिहार की लगभग सभी सीटें एनडीए को मिली थी केवल एक सीट कांग्रेस को लेकिन इस बार यहां एनडीए २५ - ३० सीट के आस पास रहेंगी, यहां&amp;nbsp; इस बार ६- ८ सीट राजद को जाने की सम्भावना लग रही है, कांग्रेस २ सीट पा सकती है और दो सीटें पर निर्दलियों का भाग्य खुल सकता है। इस प्रकार बिहार में बीजेपी को लगभग ३ सीट और एनडीए गठबंधन को १० -१२ सीट का नुकसान निश्चित है।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;झारखंड में बीजेपी को न बहुत ज्यादा नुकसान होगा और न ही बहुत फायदा यहां भी बीजेपी २०१९ के परिणाम को दोहराएगी।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;ओरिसा में बीजेपी को २०१९ की अपेक्षा इस बार २- ३ सीट अधिक मिल सकती है हालंकि यहां के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की जनता पर बहुत गहरी पकड़ है और ओरिसा के विकास के लिए काम भी करते है फिर भी मोदी का काम जनता को वहा भी अच्छा लग रहा है और मोदी जी ने देश को जनजातीय महिला राष्ट्रपति देकर जन जातियों का बहुत मान बढ़ाया है इस लिए ओरिसा की जनता भी मोदी को बड़े पैमाने पर वोट कर सकती है। यहां कांग्रेस का जनाधार और पार्टी की जड़े लगभग कमज़ोर हो चुकी है इस लिए यहां बीजू जनता दल और बीजेपी का ही बोलबाला रहेगा। यहां बीजेपी पिछली बार 8 सीटें जीती थी और बीजेडी 12 हो सकता है इस बार यह परिणाम उल्टा हो जाय।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;बंगाल का परिणाम भी इस बार एक दम बदल सकता है हो सकता है यहां बीजेपी २२- २५ सीट जीत जाए और ममता दीदी २० के अंदर आ जाए क्यों कि यहां भी केवल बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस के बीच ही लडाई है। यहां भी ममता दीदी का विशेष समुदाय के प्रति प्रेम की वजह से वोटों का धुव्रीकरण हो चुका है जिससे हो सकता था बीजेपी क्लीन स्वीप कर जाती लेकिन ममता दीदी के सत्ता में होने से तृणमूल के कार्यकर्ताओ का मनोबल बहुत मजबूत है और प्रशासन की भी कुछ मजबूरियां है जिससे ममता दीदी अधिक से अधिक सीटें जीतने की कोशिश में है&amp;nbsp; फिर भी परिणाम बदलने की पूरी सम्भावना है। हों सकता है कांग्रेस भी अपनी यहां अपनी पिछली तीनों सीट बरकार रखें।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;यदि असम की बात करें तो यहां बीजेपी पिछली बार ९ सीटें जीती थी और कांग्रेस ३ सीटें और दो सीट अन्य को गया था। चूंकि यहां हेमंता विस्वास मुख्यमंत्री है और जनता के बीच में अच्छी पकड़ रखते है कुछ क्षेत्रों के मुस्लिम मतदताओ पर भी इनका अच्छा प्रभाव है इस लिए यहां भी बीजेपी को नुकसान कम दिखाई दे रहा है बल्कि हो सकता बीजेपी इस बार असम की सभी सीटें जीत ले क्यों की NRC और CAA लागू होने से वहा के मूल निवासियों को इसका बड़ा फायदा होगा और मतदान प्रतिशत भी बहुत अच्छा है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;पूर्वोत्तर राज्यों के लगभग ११ सीटों में ५ - ६ सीट बीजेपी को मिलना तय है। त्रिपुरा, सिक्किम और अरूणांचल की सभी सीटें बीजेपी जीतेगी हो सकता है इस बार मणिपुर में बीजेपी को एक सीट का नुकसान हो जाए।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;इस प्रकार इन क्षेत्रों में भी बीजेपी को नुकसान की सम्भावना बहुत कम है बल्कि बंगाल और ओरिसा और अन्य क्षेत्रों से कुल मिलाकर २०१९ की अपेक्षा १० सीटें अधिक मिल सकती है।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;अब बात करते है दक्षिण भारत की&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;तेलंगाना आंध्र तमिलनाडु, पुडुचेरी, केरला और कर्नाटका की तो इन राज्यों में पिछले पांच सालों में मोदी जी ने अपने प्रभाव को बहुत तेजी से बढ़ाया है और इस बार बीजेपी ने आंध्र में अपने गठबंधन को और मजबूत किया है जिसका सीधा लाभ बीजेपी को मिलता दिख रहा है। हालांकि तेलंगाना और कर्नाटका में इस बार सरकार कांग्रेस की है जिससे बीजेपी को कर्नाटका में थोड़ा नुकसान होगा क्यों कि यहां भी कांग्रेस विधान सभा चुनाव से ही वोटों का धुव्रीकरण करने का प्रयास कर रही है हालांकि इसका लाभ कुछ सीटों पर बीजेपी को भी मिल सकता हैं।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;तेलांगना में बीजेपी को पिछली बार की अपेक्षा २ सीट अधिक मिल सकती है कुल लगभग ६ सीटे बीजेपी को मिलेगी। यहां टीआरएस को सबसे अधिक नुकसान और कांग्रेस को सबसे अधिक फायदा दिखाई दे रहा है क्यों दक्षिण राज्यों में वोटरों को पैसे के दम पर बड़े पैमाने पर प्राभावित किया जाता है चुंकि इस बार तेलांगना में कांग्रेस की सरकार है तो कांग्रेस इसका लाभ उठाएगी। जिससे सबसे अधिक सीट यहां कांग्रेस को ही मिलेगा।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;आंध्र में इस बार बीजेपी पिछली बार की गलती को सुधारते हुए टीडीपी और पवन कल्याण के जन सेना से गठबंधन किया है, वर्तमान में जगन रेड्डी की भ्रष्टाचारी सरकार से यहां की जनता बुरी तरह त्रस्त है, सड़के बदहाल हो चुकी है, सरकारी दफ्तरों में भ्रटाचार चरम पर है, सरकारी कर्मचारियों को ५-६ महीनों तक सैलरी का इंतजार करना पड़ रहा है, हालंकि जगन निचले तबके के लोगों को अच्छा खासा पैसे हर महीने सरकारी खजाने से बाट रही है फिर भी यहां की भी शिक्षित जनता जगन को बदलना चाह रही है इस लिए जहां पिछली बार जगन रेड्डी की पार्टी को २६ सीटों पर जीत मिली थी और चंद्र बाबू नायडू की टीडीपी को केवल ३ सीटे, बीजेपी का खाता भी नहीं खुला था लेकिन इस बार यहां भी मोदी जी, पवन कल्याण और चंद्रबाबू नायडू का प्रभाव काम करेगा और जगन रेड्डी की पार्टी १०-१५ सीटों पर सिमट जाएगी जिसका सीधा १० सीटों का लाभ टीडीपी को मिलेगा पवन कल्याण की जनसेना भी यहां २ सीट पा सकती है और बीजेपी भी ३-४ सीटे जीत लेंगी।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;तमिलनाडु में इस बार जनता बड़ा बदलाव के मूड में है मोदी के राष्ट्रभक्ति व सनातन भक्ति से यहां की जनता बहुत खुश हैं इस लिए यहां डीएमके को बड़ा नुकसान हो सकता है और बीजेपी इस बार यहां लगभग ५ से अधिक सीटें जीत सकती है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;पुडुचेरी में में केवल एक ही सीट पिछली बार बीजेपी को मिली थी इस बार भी बीजेपी यहां फिर से जीत लेंगी।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;कर्नाटका में इस बार बीजेपी को कुछ सीटों का नुकसान हो सकता है जिसका सीधा फायदा कांग्रेस को मिलेगा क्यों कि यहां कांग्रेस सत्ता में है मुस्लिम मतदाताओं को एकजुट कर अधिक सीटें जीतना चाह रही है। हो सकता है यह २०१९ की अपेक्षा बीजेपी को ३-५ सीटों का नुकसान हों जाए।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;केरल में कम्युनिस्ट और कांग्रेस गठबंधन की सरकार है और यहां भी सीधे सीधे हिंदु और मुस्लिम वोटरों का धुव्रीकरण किया जा रहा है फिर भी बीजेपी यहां भी इस बार अधिक सीटें जीतेंगे। यहां पिछली बार बीजेपी केवल २ सीट ही जीत पाई थी लेकिन इस बार मोदी के चेहरे और राष्ट्रवाद के नाम पर बीजेपी लगभग ५ सीटे जीत सकती है क्यों कि राज्य के कांग्रेस और कम्युनिस्ट नेताओ में आपसी समन्वय कम है जिसका प्रभाव राहुल गांधी की वायनाड सीट पर भी देखने को मिल रहा है और कांग्रेस के दमदार नेता ए&amp;nbsp; के एंटोनी का बेटा खुद बीजेपी के सिंबल पर केरल में चुनाव लड़ रहा है जिसकी वजह से बीजेपी उम्मीदवारो को बढ़त मिलेगी।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;इस प्रकार दक्षिण भारत में इस बार बीजेपी क्षेत्रीय पार्टियां को कमजोर करते हुए अब तक का सबसे बड़ा लाभ लेगी और पिछली बार की अपेक्षा लगभग १०-१२ सीटे अधिक जीत सकती है हालांकि कांग्रेस को भी दक्षिण में पिछली बार की अपेक्षा ५ - ७ सीट अधिक मिल सकती है खास तौर पर जहां जहां मुस्लिम मतदाता ज्यादा होंगे।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;आइए अब बात करते है पश्चिम क्षेत्र, महाराष्ट्र गोवा गुजरात और राजस्थान की&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;यहां चारों राज्यों में बीजेपी की सरकार है जहां पिछली बार राजस्थान और गुजरात में बीजेपी लगभग सभी सीटें जीत गई थी, महाराष्ट्र में लगभग २२ सीटे अकेले बीजेपी जीती थी और गोवा में एक सीट बीजेपी को मिली थी एक कांग्रेस के पक्ष में चली गई थी।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;इस क्षेत्र में भी लगभग २०१९ के समान ही परिणाम आने की संभावना है बहुत ज्यादा परिवर्तन नहीं होगा लेकिन महाराष्ट्र में बीजेपी २ या ३ सीटे अधिक ला सकती है क्यों की महाराष्ट्र में विपक्ष लगभग ख़त्म हो चुका है कांग्रेस, शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस के कई बड़े बड़े धुरंधर नेता बीजेपी का दामन थाम चुके है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;हो सकता है यहां पर शिवसेना शिंदे गुट को उतना सीट न मिल पाएं जीतना पिछली बार शिवसेना उद्धव को मिला था क्यों की शिवसेना के पुराने कार्यकर्त्ता शिंदे गुट के मूल शिवसेना से विरोध की वजह से नाराज़ है।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;अब यदि पूरे देश के चुनाव परिणाम की बात करे तो बीजेपी को केवल हरियाणा बिहार कर्नाटका में स्पष्ट रुप से कुछ सीटों का नुकसान होता दिखाई दे रहा है लेकिन दक्षिण भारत में तमिलनाडु आंध्रा, बंगाल ऑरिसा और उत्तर प्रदेश में निश्चित रूप से बीजेपी को लाभ होता दिख रहा है। ऐसे में बीजेपी को २०१९ की अपेक्षा पूरे देश से यदि कुछ क्षेत्रों में १५ - २० सीटों का नुकसान होता दिख रहा है तो कुछ क्षेत्रों से जहां पिछली बार कम सीटें आए थे वहा से लगभग २०- ३० सीटों का लाभ भी दिख रहा है क्यों की वोटिंग प्रतिशत में पिछली बार की अपेक्षा इस बार बहुत ज्यादा अंतर नही दिख रहा है बस इतना है की कुछ राज्यों में कम मतदान हो रहा है तो कुछ राज्यों में अधिक मतदान भी हो रहा है। इस लिए मतदान प्रतिशत बीजेपी के सीटों पर बहुत ज्यादा प्रभाव नहीं डाल पाएगा। कम ज्यादा मतदान का लाभ हानि केवल उन्हीं सीटों पर प्रभाव डाल पायेगा जहां मुस्लिम मतदाता ज्यादा है और हिंदू मतदाता घरों से बाहर नहीं निकले। इस प्रकार बीजेपी इस बार भी लगभग २०१९ के परिणाम के आसपास ही ३०० या ३१० सीटें जीतकर फिर से मोदी जी के नेतृत्व में सरकार बनाएगी और एनडीए गठबंधन कुल मिलाकर ३७५+ सीटों का आंकड़ा पार कर जाएगी&lt;/div&gt;&lt;div&gt;लेकिन इस बार क्षेत्रीय पार्टियों का अस्तित्व कमजोर होगा जिसका फायदा सीधे सीधे कांग्रेस को मिलेगा और मुस्लिम मतदाता पूरे देश में सीधे सीधे कांग्रेस को वोट करेंगे जिससे कांग्रेस की सीटे भी इस बार कुछ बढ़ सकती है और पिछली बार की अपेक्षा ५- १० सीटों का लाभ मिल सकता है लेकिन कांग्रेस को इस बार भी ६० - ७० सीटों का अकड़ा पार करना बड़ा कठिन होगा।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;यह रहा चुनाव का रुझान लेकिन जिस तरह से पूरे देश में मोदी जी से जनता का व्यक्तिगत लगाव बढ़ा है हर वर्ग में, खासतौर पर महिलाओं, युवाओं में, दक्षिण भारत राज्यों में तो ऐसा लगता जैसे उनको कोई देव पुरुष मिल गया हो जो देश को विश्व में सबसे मजबूत राष्ट्र बना देगा यदि यह फैक्टर काम कर गया और बाकी चरणों वोटिंग प्रतिशत अच्छा रहा तो कोई बड़ी बात नहीं की मोदी जी का नारा अबकी बार ४०० सौ पर सत्य हो जाएगा।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;#OnceMoreNAMO&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;RATNESH MISHRAA
                               
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for relaxation of body.&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://theindianyouths.blogspot.com/feeds/203406611603692462/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://theindianyouths.blogspot.com/2024/04/blog-post.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7681948317863166672/posts/default/203406611603692462'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7681948317863166672/posts/default/203406611603692462'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://theindianyouths.blogspot.com/2024/04/blog-post.html' title='दो विचारधारा की लड़ाई में लोकसभा चुनाव २०२४ का परिणाम बीजेपी के पक्ष में जाता दिखाई दे रहा है'/><author><name>RATNESH MISHRA</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05433941901415165493</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='32' src='//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiUs7BrFO9DMz8ZIIVyHnnohtALZN0mxTNx9q0DeKAn6YpAIpqoNTtR4GKn-WDKAqoTx5YYKg4bXRJXigkPSIH15Kfk1N8vJV3rrc3aORy2Tf6MwBof-zyquWctyWFU4g/s113/IMG-20170219-WA0037.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7681948317863166672.post-6160613192394750868</id><published>2024-02-23T17:56:00.006+05:30</published><updated>2024-02-27T15:12:21.460+05:30</updated><title type='text'>विकसित भारत के लिए युवाओं की भूमिका  </title><content type='html'>&lt;div&gt;आईए हम बात करते है अपने देश भारत को विकसित राष्ट्र की श्रेणी में खड़ा करने में यूवाओ की भूमिका पर, विषय पर आगे बढ़ने से पहले हम देश की आर्थिक स्थिति पर थोड़ा नजर डाल लेते है क्या देश की वर्तमान स्थिति ऐसी है की भारत विकसित राष्ट्र बन पाएगा। भारत निश्चित रूप से एक विकसित राष्ट्र बन सकता है क्यों की आज देश में एक मजबूत एवम पूर्ण बहुमत की सरकार है। इसका सबसे बड़ा प्रणाम इस बात से मिलता है कि कोरोना काल के बाद से जहां विश्व के लगभग सभी यूरोपीय, पश्चिमी और एशियन देशों की अर्थव्यव्स्था लगातार नीचे की तरफ जा रही है अमेरिका ब्रिटेन चीन जापान जैसे आर्थिक रूप से मजबूत देशों की सालाना आर्थिक विकास वर्तमान में केवल 2-3 % की दर से आगे बढ़ रही है वही हमारे देश भारत की अर्थव्यवस्था 6-7% की दर से बढ़ रही है और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के विशेषज्ञों का मानना है की आने वाले वर्षो में भारत की अर्थ व्यवस्था लगातार इसी गति से आगे बढ़ती रहेगी। इसके ठीक विपरीत पूरे विश्व में सालाना महंगाई दर जहां 7-8% की दर से बढ़ी है वहीं भारत में मंहगाई दर संतुलित होकर 3-4% पर आ गई है। वर्तमान में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 700 बिलियन डॉलर पहुंच गया है और लगातार तेज गति से प्रति वर्ष वृद्धि कर रहा है। आज भारत, रूस, यूएई, मॉरिशस, श्रीलंका बांग्लादेश, फिजी,कतार, इजरायल, मलेशिया जैसे लगभग 15 महत्वपूर्ण देशों के साथ भारत अपना व्यापार अपनी मुद्रा रूपए में करने की सहमति बना चुका है और कई अन्य देशों से बातचीत का दौर जारी है भारत की प्रगति और मजबूत भविष्य को देखते हुए बहुत सारे देश भारत के साथ रुपए में व्यापार करने के लिए इच्छुक है।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;आज हम आत्मनिर्भर, स्वच्छ और ग्रीन भारत के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहे है जिससे देश में लगातार रोज़गार की बढ़ोतरी हो रहीं है हमारा आयात निर्यात सुदृढ़ और संयमित तरीके से आगे बढ़ रहा है देश में स्वास्थ्य सड़क और सुरक्षा सुदृढ़ हो रहा है क्रूड ऑयल के आयात पर निर्भरता कम हो रहा है आज भारत सौर व वायु ऊर्जा का विश्व में सबसे बड़ा उत्पादक देश बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। आज भारत अमेरिका के बाद विश्व का सबसे बड़ा स्टार्टअप वाला देश बन गया है। यही कारण है की आज भारत ब्रिटेन को चौथे स्थान से छठे स्थान पर ढकेलते हुए 4 ट्रिलियन क्षमता के साथ विश्व की पांचवी अर्थव्यवस्था बन गया और भारत सरकार नीति आयोग का लक्ष्य है की 2027 तक देश की आर्थिक व्यापारिक क्षमता को छः ट्रिलियन डॉलर के साथ विश्व की तीसरी अर्थव्यवस्था बनाना है। जिस गति से वर्तमान सरकार कार्य कर रही है यदि यही गति जारी रही तो निःसंदेह आने वाले वर्षो में भारत विश्व की तीसरी अर्थव्यवस्था बन जायेगा।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;आईए अब हम समझते है कौन विकसित राष्ट्र है और कौन विकसित राष्ट्र की श्रेणी में आ सकता है।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;सामान्य तौर पर विकसित राष्ट्र उसे कहते है जिस देश का औद्यौगिक प्रगति उच्च स्तर का हो साथ में तकनीकी व सेवा क्षेत्र भी उन्नति कर रहा हो, प्रति व्यक्ति मासिक आय उच्चतर होने के साथ लोगो का जीवन स्तर बेहतर हो, इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास ऐसा हो की उद्योग और आम जनता के लिए परिवहन व्यवस्था बहुत सुलभ और उच्च स्तर का हो, वित्तीय व्यापारिक लेन देन सुगम सरल हो, स्वास्थ्य और शिक्षा देश के प्रत्येक नागरिक को आसानी से सुलभ हो जिससे देश के नागरिकों की आयु सीमा अधिकतम सुनिश्चित हो सके।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;इस प्रकार यदि विकसित राष्ट्र की परिभाषा को आधार माने तो भारत विश्व की पांचवी अर्थव्यवस्था बनते ही ब्रिटेन को पीछे छोड़ते हुए विकासशील राष्ट्र की श्रेणी से ऊपर आ चुका है लेकिन विकसित राष्ट्र बनने से अभी बहुत पीछे हैं क्यों कि वर्तमान में देश की जनसंख्या चीन की जनसंख्या को पीछे छोड़ते हुए विश्व की सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश बन गया है जो भारत को विकसित राष्ट्र की श्रेणी से बाहर कर देता है जब की ब्रिटेन की वार्षिक अर्थव्यवस्था भारत से कम होने बावजूद आज भी विकसित राष्ट्र की श्रेणी में है क्यों की ब्रिटेन के नागरिकों की प्रति व्यक्ति आय 52 हजार डालर है और भारत की जनसंख्या के अनुसार देश का प्रति व्यक्ति आय केवल लगभग 3 हजार डालर है जिसे विकसित राष्ट्र की श्रेणी में आने के लिए वार्षिक अर्थव्यवस्था वर्तमान 4 ट्रिलियन से पांच गुना अधिक होना चाहिए यानी जब भारत की अर्थव्यवस्था 20 ट्रिलियन से अधिक और प्रति व्यक्ती आय 12000 डॉलर से अधिक हो जायेगा तब भारत विकसित राष्ट्र कहलाएगा और अमरीका को पीछे छोड़ते हुए विश्व का सर्वश्रेष्ठ राष्ट्र बनने के लिए भारत की अर्थव्यवस्था 30 ट्रिलियन डॉलर से अधिक होना चाहिए जो सम्भवतः 2045 तक हासिल किया जा सकता है यदि भारत की विकास गति बिना रुके लगातार वर्तमान गति से चलता रहे।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;अब हम बात करते है युवा भारत देश को कैसे विश्व गुरू बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है आज भारत में 35 वर्ष की आयु की जनसंख्या लगभग 65% है जो भारत को विश्व में सर्वाधिक युवा जनसंख्या वाला देश बनाता है और देश की आर्थिक प्रगति का एक बड़ा मज़बूत आधार भी आज युवा ही है क्यों कि युवाओं की जनसंख्या अधिक होने से देश में उपभोक्ताओं की संख्या के साथ ही सस्ते कामगारों की उपलब्धता भी बढ़ी है जिसकी वजह से विश्व के लगभग सभी बड़े ब्रांड आईफोन हो या टेस्ला या सिट्रोएन भारत में अपना उत्पादन शुरु कर रहे है। ऐसी सकारात्मक स्थिति में जब पूरा विश्व भारत की तरफ देख रहा है तब तो निश्चित ही भारत के युवाओं को भी भारत को विश्व गुरु बनाने की दिशा में अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;भारत विष्व गुरु कैसे बने इस बात को समझने के लिए हम सबको चीन की आर्थिक विकास की नीति को भी समझनी होगी जिसको आधार बनाके आज चीन विश्व की सबसे अधिक आबादी वाला देश होने के बावजूद 18 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था और 13000 डॉलर प्रति व्यक्ति आय के साथ विश्व की दूसरी सबसे बड़ी शक्ति बना है। जब हम चीन की आर्थिक प्रगति का गहन अध्यन करते है तो हमें पता चलता है चीन की सरकार ने घर घर गांव गांव उद्योग की स्थापना करके प्रति व्यक्ति आय को 13000 डॉलर तक पहुंचा दिया चीन की इसी नीति को अपनाते हुए भारत सरकार नीति आयोग ने भी आत्मनिर्भर भारत make in India का नारा देते हुए युवाओं को उद्योग स्थापित कर स्व रोजगार को बढ़ावा देने के लिए Startup India Mudra loan, MSME loan जैसी बहुत सी योजनाओं के तहत पीछले 8 सालो में बड़े पैमाने पर लोन दिया है जिसमे युवा उद्योग को प्राथमिकता दिया जा रहा है जिसका परिणाम यह हुआ की आज भारत में प्रति व्यक्ति आय लगभग 3 हजार डॉलर पहुंच गया जो की 2014 में पगभग 1200 डॉलर था।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;जब भारत सरकार देश को विश्व की महाशक्ति बनाने की दिशा में प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है ऐसी स्थिति में देश की युवा आबादी को भी अपनी ज़िम्मेदारी को समझते हुए सरकार को नीतियों का सहयोगी बनकर Make in India Start-up India योजनाओं को जमीन स्तर लागु करने पर अपनी भूमिका निभानी चाहिए।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;वैसे केवल आर्थिक विकास से ही कोई देश विश्व गुरु नही बन सकता इस लिए भारत जैसे युवा देश में युवाओं की जिम्मेदारी केवल रोज़गार पाने या उद्योग तक ही सीमित नहीं होती है बल्कि युवाओं को भारत का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित करने के लिए भारत के सामाजिक एवम राजनीतिक विकास,&amp;nbsp; वैज्ञानिक अन्वेषण एवम तकनीकी विकास, ( SPST - Social Political Scientific Research and Technical Development) में महत्तवपूर्ण भूमिका निभानी होगी.&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;जब हम सामाजिक विकास की बात करते है तो युवाओं को अपने धर्म, संस्कृति, कला, परंपरा को संरक्षित करने अपनाने पर जोर देना चाहिए और पश्चिमी संस्कृति की जीवन शैली के नाकारात्मक प्रभाव से लोगो को जागरूक करने के लिए सक्रिय भूमिका निभानी होगी। जातिवाद क्षेत्रवाद की सीमा की सीमा से बाहर निकलकर एक स्वच्छ हरित वातावरण विकसित करना चाहिए जिसमे हम युवा महत्वपूर्ण योगदान दे सकते है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;राजनीतिक विकास की बात करे तो युवाओं को राजनीतिक कार्यों में सक्रियता निभानी चाहिए जिससे भारत जैसे युवा देश के सदन में पढ़े लिखे ईमानदार छवि के युवा प्रतिनिधि सदन में अधिक संख्या में पहुंच सके यह इस लिए भी जरूरी है की हम सदन से बाहर रहकर भ्रष्टाचार के विषय में केवल चर्चा कर सकते है लेकिन यदि सच में हम भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म करना चाहते है और देश को विकसित राष्ट्र बनाना है तो युवाओं को आर्थिक विकास के साथ साथ राजनीतिक हिस्सेदार भी बनाना पड़ेगा अपने गांव समाज के लोगो को अधिक संख्या में जातिवाद क्षेत्रवाद की सीमा से बहार रहकर क्षेत्र व देश के विकास के लिए वोट करने के लिए लोगो को जागरूक करना होगा।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;वैज्ञानिक विकाश की बात करे तो हम युवाओं को चंद्रयान, कोरॉना वैक्सीन और नैनो यूरिया जैसी वैज्ञानिक अन्वेषण के विकास में अपनी भागीदारी बढ़ानी चहिए जिससे की देश की जनता को शुद्ध और उच्च गुणवत्ता की खाद्य सामग्री सुलभ हो सके एवम देश के नागरिको की जीवन प्रत्याशा में वृद्धि सुनिश्चित हो।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;तकनीकी विकास की बात करे तो डिजिटल,आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक तकनीकी के विकास में भी युवाओं को अपनी भागीदारी निभानी चाहिए जिससे देश में बैंकिंग सुविधाओ को सरल बनाया जा सके और सामाजिक दूरी कम कर ग्लोबल स्तर पर व्यापारिक गतिविधियों को और गति प्रदान किया जा सके।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;इस प्रकार देश के युवा सरकार के साथ स्वयं सेवक बनकर भारत को सांस्कृतिक सामाजिक राजनीतिक और आर्थिक रूप से एक समृद्ध विकसित राष्ट्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;इस लिए युवा देश के नौजवानों केवल रोजगार पाने की उम्मीद में मत बैठे रहो बल्कि उद्यमी बनो रोजगारों पैदा करो सभी समस्यायों के लिए केवल सरकार को दोष मत दो बल्कि स्वयं से समाधान खोजो और लोगो को समाधान दो।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;जय हिंद जय भारत जय युवा ।।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;RATNESH MISHRAA
                               
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for relaxation of body.&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://theindianyouths.blogspot.com/feeds/6160613192394750868/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://theindianyouths.blogspot.com/2024/02/blog-post.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7681948317863166672/posts/default/6160613192394750868'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7681948317863166672/posts/default/6160613192394750868'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://theindianyouths.blogspot.com/2024/02/blog-post.html' title='विकसित भारत के लिए युवाओं की भूमिका  '/><author><name>RATNESH MISHRA</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05433941901415165493</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='32' src='//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiUs7BrFO9DMz8ZIIVyHnnohtALZN0mxTNx9q0DeKAn6YpAIpqoNTtR4GKn-WDKAqoTx5YYKg4bXRJXigkPSIH15Kfk1N8vJV3rrc3aORy2Tf6MwBof-zyquWctyWFU4g/s113/IMG-20170219-WA0037.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7681948317863166672.post-8093188306049449535</id><published>2023-12-31T17:59:00.001+05:30</published><updated>2023-12-31T17:59:08.775+05:30</updated><title type='text'>दैनिक दिनचर्या के कार्यकारी नववर्ष 2024 की आप सभी को मंगल शुभकामनाएं।</title><content type='html'>&lt;div&gt;&lt;div&gt;&lt;div&gt;आज 31 दिसंबर 2023 कार्यकारी संवैधानिक दैनिक दिनचर्या वर्ष का अंतिम दिन है हममें से बहुत सारे लोग आज की रात धूम धड़ाका करने की तैयारी में हैं अच्छी बात है जीवन के हर पल को खुशियों के साथ व्यतीत करना चाहिए।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;श्रीमद भगवतगीता में भगवान श्री कृष्ण जी भी यही कहते है दुःख हो या किसी बात की निराशा या हो असफलता या किसी भी प्रकार के हानि से तनाव, हमेशा खुश रहना चाहिए क्यों कि अच्छा बुरा सब कुछ श्री कृष्ण की इच्छा है।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;लेकिन आज 31 दिसंबर के दिन नए वर्ष के स्वागत के साथ बीते दिनों का चिंतन - आत्म समीक्षा भी होना चाहिए की हमारा जाने वाला वर्ष कैसा रहा ? क्या गलतियां हुई हमसे, किसी भी कार्य को पुर्ण करने में कहा कमियां रह गईं ? क्या उपलब्धियां हासिल किया, दूसरो के जीवन उत्थान के लिए क्या करना चाहिए था कितना कर पाए, क्या बाकी रह गया, व्यक्तिगत जीवन में क्या नया सीखा और क्या सिखाना रह गया ? हम अपने विचारो और कार्य व्यवहार से कितने लोगो सकारात्मक तरीके से प्रभावित कर पाए और कल की सुबह से शुरू होने वाले नए वर्ष 2024 में हमें क्या करना है ?&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;हममें से बहुत लोगो को 2023 में ऐतिहासिक स्मृतियां और&amp;nbsp; उपलब्धियां मिली होगी तो कुछ को बहुत निराशा, अपमान, पीड़ा व नुकसान भी झेलना पड़ा होगा। बहुत से लोग सुख के सागर में गोते लगाए होंगे तो कई लोगों ने दु:खों के तूफान भी झेले होंगे। कभी बसंत तो कभी पतझड़ यही जीवन का मर्म है जिसमे कितने ऐसे बदनसीब भी होंगे जिनके लिए 2023 का अंतिम महीना कड़ाके की ठंड में ठिटूरन में गुजर रहा होगा जो अपने परिवारों के साथ रोते बिलखते आज की रात व्यतीत कर रहे होंगे। बहुत से बच्चो ने 2023 में ही भारत की धारा पर जन्म लिया होंगा जिनको कुछ पता ही नही चला होगा की उन्होंने इस धरा पर एक वर्ष व्यतीत कर लिया। वर्ष 2023 का 365 दिन कुछ लोगो के लिए सुरम्य-घाटियों से होकर गुजरा होगा तो कुछ लोगो का ऊबड़-खाबड़ दुर्गम रास्तों से भी गुजारा होगा, पूरे वर्ष सुखद संभावनाओं के साथ दु:खद परिस्थितियों का भी सामना करना पड़ा।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;इस लिए यदि आज के दिन हम धूम धड़ाका करने के बजाय अपने बीते 364 दिन की समीक्षा करें तो शायद हम बीते दिनों से बहुत कुछ सीखकर आने वाले नए वर्ष को बहुत सुखमय और उपलब्धियों से भरा बना सकेंगे।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;इन्हीं शब्दों के साथ मैं अपने सम्पर्क में रहे लोगो से बीते 364 दिनों में हुए किसी भी प्रकार की गलत व्यवहार, अपशब्द और अपमान के लिए क्षमा मांगता हूं जिससे किसी की आत्मा को ठेस पहुंचा हो या दुःख महसूस हुआ हो।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;इसी के साथ बीते वर्ष 2023 को नमस्कार&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;और आगामी नववर्ष 2024 की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं यह नववर्ष भारत धारा पर राम राज्य की स्थापना का वर्ष बने भारत प्रत्येक नागरिक राष्ट्र की अस्मिता और गरिमा को स्वर्णिम बनाने के लिए हर संभव प्रयास करे और प्रत्येक परिवार खुशियों के साथ जीवन यापन करे।।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;जय श्री राम 💐💐🙏&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;RATNESH MISHRAA
                               
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for relaxation of body.&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://theindianyouths.blogspot.com/feeds/8093188306049449535/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://theindianyouths.blogspot.com/2023/12/2024.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7681948317863166672/posts/default/8093188306049449535'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7681948317863166672/posts/default/8093188306049449535'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://theindianyouths.blogspot.com/2023/12/2024.html' title='दैनिक दिनचर्या के कार्यकारी नववर्ष 2024 की आप सभी को मंगल शुभकामनाएं।'/><author><name>RATNESH MISHRA</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05433941901415165493</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='32' src='//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiUs7BrFO9DMz8ZIIVyHnnohtALZN0mxTNx9q0DeKAn6YpAIpqoNTtR4GKn-WDKAqoTx5YYKg4bXRJXigkPSIH15Kfk1N8vJV3rrc3aORy2Tf6MwBof-zyquWctyWFU4g/s113/IMG-20170219-WA0037.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7681948317863166672.post-6365448308201918686</id><published>2023-10-15T18:49:00.012+05:30</published><updated>2023-10-16T10:35:41.169+05:30</updated><title type='text'>किसी देव स्थान में दर्शन के पश्चात मंदिर की सीढ़ियों पर कुछ क्षण के लिए ज़रूर बैठे। </title><content type='html'>&lt;div&gt;&lt;div&gt;हमारी पीढ़ी और पहले की दो तीन पीढ़ियां या हम यह कह सकते है की ६० के दशक से लेकर इक्कीसवीं सदी की शुरूवात तक पिता पुत्र और परिवार के अन्य बड़े बुजुर्गों के बीच संवाद हीनता की वजह से दैनिक जीवन के सनातन संस्कारों को ना तो हमारे बड़े बुजुर्गो या माता पिता ने अपने बच्चो को बताया, न ही हमे देखने सुनने को मिला जिसका सबसे बड़ा कारण हजारों वर्षों के विदेशी सत्ता से आजादी के बाद भारतीय समाज इतना भ्रमित हों चुका था की अपनी वास्त्विक पहचान और संस्कृति भूलकर, मिश्रित संस्कार और संस्कृति के साथ आगे बढ़ रहा था, भारत की मूल वैदिक शिक्षा तहस नहस हो चुकी थी जिसकी वजह से आजादी के बाद खासतौर पर ६० के दशक के बाद की पीढ़ी की परवरिश बहुत ही संकीर्ण व संयमित माहौल में हुआ, परिणाम यह हुआ की इस दौर में जन्म लेने वाले बच्चे कभी ऐसे प्रश्नों का किसी से संकोच वश जवाब ही नहीं&amp;nbsp; पूछ पाए। इस दौर में बच्चों का आपने समाज के बड़े बुजुर्गो से ज्यादा सवाल जवाब करना भी अच्छा नहीं माना जाता था जो बच्चे ज्यादा सवाल जवाब करते लोग ऐसे बच्चों को संस्कारहीन बताने लगते और ऐसा अक्सर ऐसे ही बुजुर्ग किया करते जिन्हे बच्चों के गुढ़ प्रश्नों का उत्तर नहीं पता होता।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;ऐसे बहुत सारे प्रश्नों का उत्तर मेरे पीढ़ी और बाद की पीढ़ी के लोगो को भी नही पता क्यों कि कभी सुना पढ़ा जाना ही नहीं। ऐसा इस लिए की हमारे समाज में लोगो का मानना है बच्चों का स्कूल में अच्छा मार्क्स जरुर आना चाहिए भले ही वह खेल या अन्य विषय में रुचि ना ले, दुर्भाग्य वश लोगो को यह नही समझ था कि खेल प्रतियोगिता में भाग ना लेने से बच्चा शारिरिक रूप से कमजोर होता है बच्चे का मानसिक विकास भी धीमी गति से होता है। मेरा मानना है कि ऐसे माहौल के पीछे एक बहुत प्रचलित लोककोक्ति का प्रभाव भी रहा है अक्सर घर के मुखिया या माता पिता को हम सबने अपने बच्चों को यह कहते सुना है कि&quot;पढ़ोगे लिखोगे बनोगे नवाब, खेलोगे कूदोगे होगे खराब&quot; कुछ हद तक यह लोककोक्ती तो सही है लेकिन लोग यह नहीं समझ पाते की जीवन के हर पड़ाव पर संतुलन होना बहुत जरुरी होता है। यानी कि बच्चे का सर्वांगीण विकास जरुरी होता है ना कि केवल स्कूल में अच्छे मार्क्स आना।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;भारतीय सनातन समाज मोदी जी का ऋणी है जो उन्होंने सूचना तकनीकी तंत्र को गाँव गांव तक पहुंचकर डिजिटल शिक्षा के माध्यम से लोगो को इतना जागरुक करने का कार्य किया की आज डिजिटल और सोशल मीडिया के माध्यम से भारतीय संस्कृति और सभ्यता के गुढ़ विषयों के बारे में जन जन तक जानकारी पहुंच रहीं है जिससे वर्तमान व आने वाली पीढ़ी ऐसी जानकारियों से अनभिज्ञ नही रहेगी और हमारी भारतीय संस्कृति जड़ मजबूत होगी।&amp;nbsp; भारतीय संस्कृति में देव स्थान दर्शन से सम्बन्धित एक महत्त्वपूर्ण जानकारी यह है कि जब भी किसी मंदिर में दर्शन के लिए जाएं तो दर्शन करने के बाद बाहर आकर मंदिर की पेडी या चौखट पर थोड़ी देर ज़रूर बैठे।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;क्या आप जानते हैं इस परंपरा के पीछे का गुढ़ रहस्य क्या है ?&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;आइए जानते है वास्तव में मंदिर की पैड़ी पर बैठ करके हमें एक श्लोक को क्यों पढ़ना चाहिये और अपनी आने वाली पीढ़ी को भी यह क्यों बताना चाहिये....&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;अनायासेन मरणम् ,बिना देन्येन जीवनम्।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;देहान्त तव सानिध्यम्, देहि मे परमेश्वरम् ।।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;इस श्लोक का अर्थ है-&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;अनायासेन मरणम्...&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;अर्थात बिना तकलीफ के हमारी मृत्यु हो और हम कभी भी बीमार होकर बिस्तर पर पड़े पड़े, कष्ट उठाकर मृत्यु को प्राप्त ना हो चलते फिरते ही हमारे प्राण निकल जाएं !!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;बिना देन्येन जीवनम्...&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;अर्थात परवशता का जीवन ना हो मतलब हमें कभी किसी के सहारे ना पड़े रहना पड़े, जैसे कि लकवा हो जाने पर व्यक्ति दूसरे पर आश्रित हो जाता है वैसे परवश या बेबस ना हो, ठाकुर जी की कृपा से बिना भीख के ही जीवन बसर हो सके !!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;देहांते तव सानिध्यम..&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;अर्थात जब भी मृत्यु हो तब भगवान के सम्मुख हो, जैसे भीष्म पितामह की मृत्यु के समय स्वयं ठाकुर जी उनके सम्मुख जाकर खड़े हो गए, उनके दर्शन करते हुए प्राण निकले !!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;देहि में परमेशवरम्...&lt;/div&gt;&lt;div&gt;हे परमेश्वर ऐसा वरदान हमें देना !!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;यह प्रार्थना करें।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;गाड़ी, घर, धन, नौकरी,लड़का, लड़की, अच्छा पति-पत्नी, यह मांगना नहीं पड़ता है यह तो भगवान आप की पात्रता के हिसाब से खुद आपको देते हैं इसीलिए जब भी कभी कही भी देव स्थान पर दर्शन करने जाए तो उपरोक्त श्लोक के अनुसार भाव लेकर जाए और मंदिर में दर्शन के बाद कुछ समय मंदिर की पैड़ी पर बैठकर उपरोक्त भाव की प्रार्थना करिएगा।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;उपरोक्त श्लोक प्रार्थना है, याचना नहीं।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;क्यों कि याचना सांसारिक पदार्थों के लिए होती है जैसे कि घर, व्यापार, नौकरी, पुत्र, पुत्री, सांसारिक सुख, धन या अन्य बातों के लिए जो मांग की जाती है वह याचना है वह भीख है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;प्रार्थना का अर्थ विशिष्ट, श्रेष्ठ निवेदन से है न कि याचना से अर्थार्थ जब भी किसी शक्ति पीठ या देव स्थान पर जाए तो प्रभु से प्रार्थना करें ना की याचना सबसे श्रेष्ठ प्रार्थना यही होगा की ऊपर लिखित श्लोक को मन ही मन दोहराएं।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;लेकिन दुर्भाग्य यह है कि आजकल लोग यदि मंदिर की पैड़ी पर बैठते भी है तो वहा भी अपने घर, व्यापार व राजनीति की चर्चा करते हैं और केवल अपना थकान मिटाने के लिए ही बैठते है परंतु यह प्राचीन परंपरा एक विशेष उद्देश्य के लिए बनाई गई।&amp;nbsp;को बार बार दोहराना।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;सब से जरूरी बात... जब भी मंदिर में दर्शन करने जाए तो खुली आंखों से भगवान को देखना चाहिए, निहारना चाहिए, उनके दर्शन करना चाहिए। कुछ लोग वहां आंखें बंद करके खड़े रहते हैं, आंखें बंद क्यों करना हम तो भगवान का दर्शन करने जाते हैं, तो भगवान के स्वरूप का, श्री चरणों का, श्रंगार का, संपूर्णानंद लें। आंखों में उस मोहक दृश्य भर ले भगवान के उस स्वरूप को और दर्शन के बाद जब बाहर आकर बैठे तब नेत्र बंद करके जो दर्शन किए हैं उस स्वरूप का ध्यान करें। जब ठाकुर जी का ध्यान करें तब नेत्र बंद करें और अगर ठाकुर जी का स्वरूप ध्यान में नहीं आए तो दोबारा मंदिर में जाएं और भगवान का दर्शन करें, नेत्रों को बंद करने के पश्चात उपरोक्त श्लोक का पाठ करें, यहीं शास्त्र और बड़े बुजुर्गो का कहना हैं ...&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;जय माता दी 💐🙏&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;RATNESH MISHRAA
                               
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width='32' height='32' src='//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiUs7BrFO9DMz8ZIIVyHnnohtALZN0mxTNx9q0DeKAn6YpAIpqoNTtR4GKn-WDKAqoTx5YYKg4bXRJXigkPSIH15Kfk1N8vJV3rrc3aORy2Tf6MwBof-zyquWctyWFU4g/s113/IMG-20170219-WA0037.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7681948317863166672.post-389748025138012131</id><published>2023-05-05T23:00:00.001+05:30</published><updated>2023-05-18T13:36:52.511+05:30</updated><title type='text'>एक राजा जिसने बोधिसत्व प्राप्त कर स्वयं को चिरंजीव बना लिया। </title><content type='html'>&lt;div&gt;&lt;div&gt;&lt;div&gt;हम सब बचपन से देखते आए है महात्मा गौतम बुद्ध की तस्वीरे और स्टैच्यू सर्वत्र विश्व में शांति और ध्यान की मुद्रा में ही उपलब्ध है। जो हमे यह सन्देश देती है की ज्ञान और ध्यान से ही जीवन में शांति व सद्भावना सम्भव है जहा इसकी कमी है वहा अशांति ही अशांति है। इस लिए ज्ञानार्जन और ध्यान का निरंतर अभ्यास जीवन में बहुत आवश्यक है।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;भारतीय पंचांग के अनुसार वैशाख मास की पूर्णिमा के दिन नेपाल के लुम्बिनी क्षेत्र में ५६३ ईशा पूर्व में भगवान श्री राम के पुत्र कुश के कुल में कपिलवस्तु के महाराजा शुद्धोदन की धर्मपत्नी महारानी महामाया देवी के पुत्र के रूप में गौतम बुद्ध का जन्म हुआ था जिनको उनके जन्म से लेकर सन्यास धारण करने से पहले तक सिद्धार्थ के नाम से जाना जाता था आगे चलकर इन्हें गौतम बुद्ध के नाम से पहचान मिली। बुद्ध के जन्म, बोध और निर्वाण के संदर्भ एक महत्त्वपूर्ण संयोग यह है कि वैशाख पूर्णिमा के ही दिन ३५ वर्ष की आयु में ५२८ ईशा पूर्व मे बोध गया बिहार में वटवृक्ष के नीचे आपको आत्मज्ञान प्राप्त हुआ जो वटवृक्ष आज भी बोधगया में मौजूद है और इसी दिन ४८३ ईशा पूर्व ८० वर्ष की आयु में कुशीनगर उत्तर प्रदेश में महापरिनिर्वाण प्राप्त हुआ था।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;देह छोड़ने के पूर्व बुद्ध के अंतिम वचन थे&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&#39;अप्प दिपो भव:...सम्मासती।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;अपने दीये खुद बनो...स्मरण रखो कि तुम भी एक बुद्ध हो।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;आज के दिन का दैवीय महत्व है क्यों कि इसी दिन देवी छिन्नमस्तिका और श्री हरि विष्णु ने कूर्म अवतार लिया था। आज के ही दिन ब्रह्मदेव ने काले और सफ़ेद तिलों का निर्माण भी किया था इसी लिए आज के दिन तिलों का प्रयोग करना शुभ माना जाता है।&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;div&gt;गौतम बुद्ध शाक्यवंशी छत्रिय थे। शाक्य वंश में जन्मे सिद्धार्थ का सोलह वर्ष की उम्र में दंडपाणि शाक्य की कन्या यशोधरा के साथ विवाह हुआ। यशोधरा से उनको एक पुत्र मिला जिसका नाम राहुल रखा गया। बाद में यशोधरा और राहुल दोनों बुद्ध के भिक्षु हो गए थे। बुद्ध का लालन पालन उनकी मौसी गौतमी किया क्योंकि सिद्धार्थ के जन्म के सात दिन बाद ही उनकी मां का देहांत हो गया था। बुद्ध के जन्म के बाद एक भविष्यवक्ता ने राजा शुद्धोदन से कहा था कि यह बालक चक्रवर्ती सम्राट बनेगा लेकिन यदि वैराग्य भाव उत्पन्न हो गया तो इसे महात्मा सन्यासी होने से कोई नहीं रोक सकता और इसकी ख्‍याति समूचे संसार में अनंतकाल तक कायम रहेगी। राजा शुद्धोदन सिद्धार्थ को चक्रवर्ती सम्राट बनते देखना चाहते थे इसीलिए उन्होंने सिद्धार्थ के आस-पास भोग-विलास का भरपूर प्रबंध कर दिया ताकि किसी भी प्रकार से वैराग्य उत्पन्न न हो लेकिन राजा शुद्धोदन की यही गलती सिद्धार्थ के मन में वैराग्य उत्पन्न कर दिया। वैराग्य भाव उत्पन्न होने के बाद एक बार सिद्धार्थ शाक्यों के संघ में सम्मलित होने गए। जहां उनका संघ के गुरुवों से विचारिक मतभेद हो गया। क्षत्रिय शाक्य संघ से वैचारिक मतभेद के चलते संघ ने उनके समक्ष दो प्रस्ताव रखे थे या तो वे फांसी पर चढ़ जाए या देश छोड़कर चले जाए। सिद्धार्थ ने कहा कि जो भी दंड उन्हें मिले स्वीकार है लेकिन शाक्यों के सेनापति ने सोचा कि दोनों ही स्थिति में कौशल नरेश को सिद्धार्थ से हुए विवाद का पता चल जाएगा और उन्हें दंड भुगतना होगा तब सिद्धार्थ ने कहा कि आप निश्चिंत रहें मैं संन्यास लेकिन चुपचाप ही देश से दूर चला जाऊंगा आपकी इच्छा भी पूरी होगी और मेरी भी आधी रात को सिद्धार्थ अपना महल त्यागकर 30 योजन दूर गोरखपुर के पास अमोना नदी के तट पर जा पहुंचे। वहां उन्होंने अपने राजसी वस्त्र उतारे और केश काटकर खुद को संन्यस्त कर लिया। उस वक्त उनकी आयु 29 वर्ष थी। छः वर्षो की कठिन तपस्या के पश्चात् सिद्धार्थ को बोधिसत्व 528 वर्ष पूर्व 35 वर्ष की आयु में बिहार प्रदेश के बोधगया में वटवृक्ष के नीचे प्राप्त हुआ था जो आज भी विद्यमान है जिसे अब बोधीवृक्ष कहा जाता है। सम्राट अशोक इस वृक्ष की एक शाखा श्रीलंका ले जाकर स्थापित किया यह शाखा भी आज मौजूद है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;श्रीमद्भागवत महापुराण और विष्णुपुराण में भी शाक्यों की वंशावली के बारे में उल्लेख पढ़ने को मिलता है। कहते हैं कि राम के 2 पुत्रों लव और कुश में से कुश का वंश ही आगे चल पाया। कुश के वंश में ही आगे चलकर शल्य हुए, जो कि कुश की 50वीं पीढ़ी में महाभारत काल में उपस्थित थे। इन्हीं शल्य की लगभग 25वीं पीढ़ी में ही गौतम बुद्ध हुए थे। शल्य के बाद बहत्क्षय, ऊरुक्षय, बत्सद्रोह, प्रतिव्योम, दिवाकर, सहदेव, ध्रुवाश्च, भानुरथ, प्रतीताश्व, सुप्रतीप, मरुदेव, सुनक्षत्र, किन्नराश्रव, अंतरिक्ष, सुषेण, सुमित्र, बृहद्रज, धर्म, कृतज्जय, व्रात, रणज्जय, संजय, शाक्य, शुद्धोधन और फिर सिद्धार्थ हुए, जो आगे चलकर गौतम बुद्ध कहलाए। इन्हीं सिद्धार्थ के पुत्र राहुल थे। राहुल के बाद प्रसेनजित, क्षुद्रक, कुलक, सुरथ, सुमित्र हुए।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;बुद्ध के प्रमुख गुरु गुरु विश्वामित्र, अलारा, कलम, उद्दाका रामापुत्त थे जबकि बुद्ध के प्रमुख दस शिष्य- आनंद, अनिरुद्ध (अनुरुद्धा), महाकश्यप, रानी खेमा (महिला), महाप्रजापति (महिला), भद्रिका, भृगु, किम्बाल, देवदत्त, और उपाली (नाई) थे और बौद्ध धर्म के प्रचारकों में प्रमुख रूप से अंगुलिमाल, मिलिंद (यूनानी सम्राट), सम्राट अशोक, ह्वेन त्सांग, फा श्येन, ई जिंग, हे चो, बोधिसत्व या बोधिधर्मा, विमल मित्र, वैंदा (स्त्री), उपगुप्त (अशोक के गुरु), वज्रबोधि, अश्वघोष, नागार्जुन, चंद्रकीर्ति, मैत्रेयनाथ, आर्य असंग, वसुबंधु, स्थिरमति, दिग्नाग, धर्मकीर्ति, शांतरक्षित, कमलशील, सौत्रांत्रिक, आम्रपाली, संघमित्रा आदि का नाम लिया जाता है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;बुद्ध के धर्म प्रचार से उनके भिक्षुओं की संख्या बढ़ने लगी तो भिक्षुओं के आग्रह पर बौद्ध संघ की स्थापना की गई। बौद्ध संघ में बुद्ध ने स्त्रियों को भी लेने की अनुमति दे दी। बुद्ध के महापरिनिर्वाण के बाद वैशाली में द्वितीय बौद्ध संगीति सम्पन्न हुआ था जिसमे संघ के दो हिस्से हो गए थे हीनयान और महायान। सम्राट अशोक ने तृतीय बौद्घ संगती का आयोजन 249 ई.पू. में पाटलिपुत्र में कराया था उसके बाद भी सभी भिक्षुओं को एक ही तरह के बौद्ध संघ के अंतर्गत रखे जाने के बहुत प्रयास किए गए किंतु देश और काल के अनुसार इनमें बदलाव को रोक पाना सम्भव नहीं हो पाया।&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;गौतम बुद्ध ने अपने उपदेशों में लोगो को शांतिपूर्ण जीवन जीने के लिए व्यक्तिव में संतुलन की धारणा को मजबूत बनाए रखने पर बहुत बल दिया और कहा की मनुष्यों को भोग की अति से बचना जितना आवश्यक है उतना ही योग की अति अर्थात तपस्या की अति से भी बचना जरूरी है क्यों कि भोग की अति से चेतना का बिखराव हो जाता है विवेक लुप्त और संस्कार सुप्त हो जाते हैं। परिणामस्वरूप व्यक्ति के दिल-दिमाग की पर विनाश का पहरा मदराने लगता है ठीक इसी प्रकार तपस्या की अति से देह दुर्बल और मनोबल कमजोर हो जाता है परिणामस्वरूप आत्मज्ञान की प्राप्ति संभव नही हो पाती है क्योंकि कमजोर और मूर्च्छित मनोबल के आधार पर आत्मज्ञान प्राप्त करना वैसा ही है जैसा कि रेत की बुनियाद पर भव्य भवन निर्माण करने का स्वप्न संजोना।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;गौतम बुद्ध का कहना है कि चार आर्य सत्य हैं&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;पहला यह कि दुःख है।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;दूसरा यह कि दुःख का कारण है।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;तीसरा यह कि दुःख का निदान है।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;चौथा यह कि वह मार्ग है जिससे दुःख का निदान होता है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;गौतम बुद्ध के अनुसार अष्टांगिक मार्ग ही वह मध्यम मार्ग है जिससे दुःख का निदान होता है। अष्टांगिक मार्ग चूंकि ज्ञान, संकल्प, वचन, कर्मांत, आजीव, व्यायाम, स्मृति और समाधि के संदर्भ में सम्यकता से साक्षात्कार कराता है, अतः मध्यम मार्ग है। मध्यम मार्ग ज्ञान देने वाला है, शांति देने वाला है, निर्वाण देने वाला है अतः कल्याणकारी है और जो कल्याणकारी है वही श्रेष्ठ जीवन के लिए श्रेयस्कर है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;गौतम बुद्ध विश्वकल्याण के लिए मैत्री भावना पर बल देते हैं। ठीक वैसे ही जैसे महावीर स्वामी ने मित्रता के प्रसार की बात कही थी। गौतम बुद्ध मानते हैं कि मैत्री की महक से ही संसार में सद्भाव का सौरभ फैल सकता है। वे कहते हैं कि बैर से बैर कभी नहीं मिटता यह केवल मैत्री से ही बैर मिटता सकता है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;शोध बताते हैं कि दुनिया में सर्वाधिक प्रवचन बुद्ध के ही रहे हैं। यह रिकॉर्ड है कि बुद्ध ने जितना कहा और जितना समझाया उतना किसी और ने नहीं। सैकड़ों ग्रंथ है जो उनके प्रवचनों से भरे पड़े हैं और आश्चर्य यह कि उनमें कहीं भी दोहराव नहीं है। 35 की उम्र के बाद बुद्ध ने जीवन के प्रत्येक विषय और धर्म के प्रत्येक रहस्य पर जो ‍कुछ भी कहा वह त्रिपिटक में संकलित है। त्रिपिटक अर्थात तीन पिटक- विनय पिटक, सुत्त पिटक और अभिधम्म पिटक। सुत्तपिटक के खुद्दक निकाय के एक अंश धम्मपद को पढ़ने का ज्यादा प्रचलन है। इसके अलावा बौद्ध अनेक जातक कथाएं विश्व प्रसिद्ध हैं। जिनके आधार पर ही ईशा की कथाएं निर्मित हुई। यही कारण है कि पश्चिम के बुद्धिजीवी और वैज्ञानिक बुद्ध और योग को पिछले कुछ वर्षों से बहुत ही गंभीरता से ले रहे हैं। चीन, जापान, श्रीलंका और भारत सहित दुनिया के अनेक बौद्ध राष्ट्रों के बौद्ध मठों में पश्चिमी देशों के लोगो की तादाद बढ़ी है। सभी अब यह जानने लगे हैं कि पश्चिमी धर्मों में जो बाते हैं वे बौद्ध धर्म से ही ली गई है क्योंकि बौद्ध धर्म, ईसा मसीह से 500 साल पूर्व पूरे विश्व में फैल चुका था। दुनिया का ऐसा कोई हिस्सा नहीं बचा था जहां बौद्ध भिक्षुओं के कदम न पड़े हों। दुनिया के हर इलाके में खुदाई में भगवान बुद्ध की प्रतिमा निकलती है। दुनिया की सर्वाधिक प्रतिमाओं का रिकॉर्ड भी बुद्ध के नाम दर्ज है। बुत परस्ती शब्द की उत्पत्ति ही बुद्ध शब्द से हुई है। बुद्ध के ध्‍यान और ज्ञान पर बहुत से राष्ट्रों में आज भी शोध जारी है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;ऐसा प्रमाण मिलता है कि भगवान बुद्ध ने भिक्षुओं के आग्रह पर उन्हें वचन दिया था कि मैं &#39;मैत्रेय&#39; से पुन: जन्म लूंगा। तब से अब तक 2500 साल से अधिक समय बीत गया। कहते हैं कि बुद्ध ने इस बीच कई बार जन्म लेने का प्रयास किया लेकिन कुछ कारण ऐसे बने कि वे जन्म नहीं ले पाए। थियोसॉफिकल सोसाइटी ने जे. कृष्णमूर्ति के भीतर उन्हें अवतरित होने के लिए सारे इंतजाम किए लेकिन वह प्रयास भी असफल सि‍द्ध हुआ। अंतत: ओशो रजनीश ने उन्हें अपने शरीर में अवतरित होने की अनुमति दे दी थी। उस दौरान जोरबा दी बुद्धा नाम से प्रवचन माला ओशो के कहीं।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;RATNESH MISHRAA
                               
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&lt;p dir=&quot;ltr&quot;&gt;सूर्य भगवान ने पांडवों को &lt;b&gt;अक्षय पात्र&lt;span style=&quot;color: #e9edef;&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;दिया और कनकधारा स्तोत्र की रचना भी श्री आदि शंकराचार्य ने आज के ही दिन किया था।&lt;/p&gt;&lt;p dir=&quot;ltr&quot;&gt;वेदव्यास जी ने &lt;b&gt;महाकाव्य महाभारत की रचना&lt;span style=&quot;color: #e9edef;&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;गणेश जी के साथ शुरू किया था और महाभारत का युद्ध भी आज ही समाप्त हुआ था।&lt;/p&gt;
&lt;p dir=&quot;ltr&quot;&gt;प्रथम तीर्थंकर &lt;b&gt;आदिनाथ ऋषभदेवजी भगवान&lt;span style=&quot;color: #e9edef;&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;के 13 महीने का कठीन उपवास का &lt;b&gt;पारणा इक्षु (गन्ने) के रस से किया&lt;/b&gt;&amp;nbsp;था।&lt;/p&gt;
&lt;p dir=&quot;ltr&quot;&gt;प्रसिद्ध तीर्थ स्थल &lt;b&gt;श्री बद्री नारायण धाम&lt;span style=&quot;color: #e9edef;&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;का कपाट भी आज के ही दिन खोले जाते है और वृंदावन के बाँके बिहारी मंदिर में &lt;b&gt;श्री कृष्ण चरण के दर्शन&lt;/b&gt;&amp;nbsp; वर्ष में केवल एक बार चैत्र शुक्ल तृतीया को होते है।&lt;/p&gt;
&lt;p dir=&quot;ltr&quot;&gt;भगवान जगन्नाथ के सभी &lt;b&gt;रथों को बनाना भी आज के दिन प्रारम्भ&amp;nbsp;&lt;/b&gt;किया जाता है।&lt;/p&gt;
&lt;p dir=&quot;ltr&quot;&gt;इस प्रकार अक्षय तृतीया की तिथि सनातन संस्कृति सभ्यता के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है।&lt;/p&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;RATNESH MISHRAA
                               
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&lt;p dir=&quot;ltr&quot;&gt;अच्छी खबर यह है की लड़की वालों ने लड़के की सभी मांगे मानते हुए सनातन संस्कृति सभ्यता को मजबूती प्रदान करने के लिए&amp;nbsp; सहर्ष तैयार हो गए और विवाह समारोह वैदिक परंपरा से संपन्न हुआ..!&lt;/p&gt;
&lt;p dir=&quot;ltr&quot;&gt;सनातन धर्म की जय हो। &lt;br /&gt;
&lt;span style=&quot;background-color: #1877f2;&quot;&gt;#SayNoForDowry&lt;/span&gt; &lt;span style=&quot;background-color: #1877f2;&quot;&gt;#NADA&lt;/span&gt; &lt;br /&gt;
Dowry is will It can&#39;t be demand&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;/div&gt;RATNESH MISHRAA
                               
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जिसके परीणाम स्वरूप, 1947 से लगातार देश के खजाने से प्रतिवर्ष 10 अरब रुपये पेंशन के रूप में ब्रिटेन की महारानी के कोष में उनके जीवन काल तक जा रहा था जो उनके मृत्यू के पश्चात अब कानूनी प्रक्रिया की वजह से रुका है और यदि मोदी जी वापस लौटते है तो निश्चाय ही इस व्यव्स्था को संविधान संशोधन कर हमेशा के लिए रोक दिया जाएगा।&lt;br /&gt;
 समझौते के तहत भारत प्रति वर्ष 30 हजार टन गौ-माँस भी ब्रिटेन को देने के लिए बाध्य है।&lt;br /&gt;
भारत अपना राजदूत (एम्बबेसड) अमेरिका, जापान, चीन, रूस, जर्मनी जैसे देशों में तो नियुक्त करता है… ..... लेकिन श्रीलंका, पाकिस्तान, कनाडा, आस्ट्रेलिया, इंडोनेेशिया, सिंगापुर आदि देशों में राजदूत नही यहां केवल उच्चायुक्त ही नियुक्त कर सकता है।&lt;/p&gt;
&lt;p dir=&quot;ltr&quot;&gt;आखिर ऐसा क्यों.? ऐसा इस लिए, क्यों कि &lt;br /&gt;
भारत समेत 54 देशों को कॉमनवेल्थ कंट्री के नाम से जाना जाता है, इंडिपेंडेंट नेशन के नाम से नहीं ? क्यों कि &lt;br /&gt;
ब्रिटिश नैशनैलिटी अधिनियम 1948 के अन्तर्गत कॉमनवेल्थ का अर्थ होता है &quot;सयुंक्त सम्पत्ति&quot; जिसके तहत हर भारतीय,आस्ट्रेलियाई, कनेडियन,चाहे हिन्दू हो मुसलमान या ईसाई, बौद्ध या सिक्ख आज भी कानूनन ब्रिटेन की क्वीन एलिजाबेथ के ग़ुलाम हैं और उनके मरने के बाद अब उनकी जगह किंग चार्ल्स 3 के गुलाम हैं।&lt;/p&gt;
&lt;p dir=&quot;ltr&quot;&gt;सन् 1997 में &quot;ट्रांसफर ऑफ पावर&quot; सहमति पत्र ( जो एक गोपनीय समझौता ) के 50 साल पूरे होने से पहले ही इसको सार्वजनिक होने से रोकने हेतु सोनिया गांधी ने तत्कालीन प्रधानमन्त्री इन्द्र कुमार गुजराल द्वारा इसकी अवधि 2024 तक बड़ा दी थी जिसे 2024 में पुन: सार्वजनिक होने के डर से भारत विरोधी शक्तियां मोदी जी का विरोध कर रही हैं ताकि 2024 में भी यह सार्वजनिक न हो पाये और देश के खजाने से 10 अरब रुपये पेंशन प्रतिवर्ष ब्रिटेन जाता रहें। &lt;br /&gt;
इसके अलावा और भी बहुत रहस्य गोपनीय है जो पूर्वार्ति सरकारों ने छुपा रखा है जिसका पता चलना देश हित में बहुत आवश्यक है इसलिए मोदी जी का २०२४ में प्रधाममंत्री बनना अतिआवश्यक है।&lt;br /&gt;
स्वतन्त्र भारत का इतिहास गवाह है कि जब भी भारत में मजबूत नेताओं ने सत्ता संभाली जैसे लाल बहादुर शास्त्री जी तो उनकी हत्या करवाई गई यह सभी को पता है कि उन्हे कैसे ताशकंद में खाने में जहर दिया गया.. ,सुभाष चंद्र बोस की मौत आदि रहस्य बनकर रह गई........ &lt;br /&gt;
इसी तरह हमारी स्वतंत्रता भी एक रहस्य बनी है&lt;br /&gt;
इस लिए राष्ट्रहित में सभी देश भक्तों का एकजुट होना बहुत आवश्यक है।&lt;br /&gt;
इसलिए सभी सनातनी भारतवासियों से अपील है कि अपना निज स्वार्थ, ऊंच नीच, जातिवाद, क्षेत्रवाद, प्रांतवाद के भेदभाव मिटाकर, देश धर्म और आनेवाली पीढ़ी की रक्षा, सुख शांति समृद्धि के लिए 2024 मे मोदी जी को भारी जनादेश देकर प्रधानमंत्री बनाने के लिए अपना १००% योगदान करे..,यह आज के समय की मांग समझिए और दूसरा कोई विकल्प ही नही है। &lt;br /&gt;
वरना देश के स्वार्थी, भ्रष्टाचारी नेताओ और टुकड़े टुकड़े गैंग के समर्थक भारत को बर्बाद कर देंगे। देश जो आज मोदी जी के दस साल के प्रयास से विश्व की पांचवीं अर्थव्यवस्था बनकर&amp;nbsp; विश्व शक्ति बनने की राह पर चल रहा है उसे फिर से विपक्षी नेता और पार्टियां आकंठ भ्रष्टाचार में लिप्त होकर दसवीं पायदान पर पहुंच देंगे।&lt;br /&gt;
इसीलिए हमें सतर्क और सावधान भी रहने की जरुरत है नही तो स्वार्थी&amp;nbsp; विपक्षी दल और कुकुर मुत्ते की तरह फैले सोशल मीडिया न्यूज चैनल चंद रुपयों की लालच में जी जान लगाकर जनता को गुमराह करने की मुहिम में लगे है और मोदी जी को बदनाम करने की पूरी कोशिश कर रहे है जिससे मोदी जी दुबारा सत्ता में ना लौटे l...…&lt;/p&gt;&lt;p dir=&quot;ltr&quot;&gt;इस लिए हर भारतीय को अपनी आने वाली पीढ़ी को सुरक्षित और शांतिपूर्ण जीवन देने के उद्देश्य से मोदी जी को प्रचंड बहुमत से पुनः प्रधानमन्त्री बनाने के लिए सभी भारतीयों को.मोदी लाओ देश सुरक्षित बनाए रखो का नारा जन जन तक पहुंचना है।&lt;/p&gt;&lt;p dir=&quot;ltr&quot;&gt;
&lt;span style=&quot;background-color: #1877f2;&quot;&gt;#OnceMoreNAMO&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;background-color: #1877f2;&quot;&gt;#VoteForNAMO&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p dir=&quot;ltr&quot;&gt;जय हिन्द जय भारत।। जय हो सनातन संस्कृति की।।&lt;/p&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;RATNESH MISHRAA
                               
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नाम का मानव जीवन में दो निहतार्थ हैं,&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p dir=&quot;ltr&quot;&gt;सुखी होना.. और स्थिर - शान्त हो जाना&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p dir=&quot;ltr&quot;&gt;अर्थात राम नाम में ही सुख है और आत्मज्ञान का साक्षात्कार भी राम नाम में ही है&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p dir=&quot;ltr&quot;&gt;जब व्यक्ति सांसारिक जीवन में मर्यादा पुरुषोत्तम राम के देवत्व को अपनाने का प्रयास मात्र शुरु करता है तब अपने मार्ग से भटका हुआ तनाव से ग्रसित अशांत मन किसी शान्ति पूर्ण स्थान को देखकर ठहर जाता है जीवन के इस सुखद ठहराव को अर्थ देने वाले शब्दों में भी &quot;राम&quot; ही अंतर्निहित है....जैसे आराम.! विराम.! विश्राम.! अभिराम.! ग्राम.! प्रणाम ... ! अर्थात&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p dir=&quot;ltr&quot;&gt;जो &quot;रमने&quot; के लिए विवश कर दे वह &quot;राम..! ही है&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p dir=&quot;ltr&quot;&gt;आजकल जीवन की भाग दौड़ में उलझा मन जिस आनंददायक गंतव्य की सतत तलाश में है वह गंतव्य भी राम.. नाम में ही निहित है।&lt;/p&gt;&lt;p dir=&quot;ltr&quot;&gt;राम नाम की महिमा इतनी है कि भारतीय सनातन संस्कृति में  हर स्थिति में मनुष्य मन राम को साक्षी बनाने का आदी है जैसे दुःख और पीड़ा में &quot; हे राम.! लज्जा में &quot;हाय राम.! अशुभ स्थिति में &quot;राम रे राम.! अभिवादन में जब दोनो हाथ जुड़ जाते है तब प्रणाम भी राम राम..! बन जाता है, यही शपथ के समय &quot;राम कसम.! अज्ञानता में राम जाने.! अनिश्चितता में राम भरोसे..! अचूकता के लिए रामबाण इलाज..! मृत्यु के लिए &quot;रामनाम सत्य...! वही सुशासन के लिए &quot;रामराज्य...! और मनुष्य जीवन का अंतिम शब्द भी राम राम ... ही होता है जो जीवन की अन्तिम यात्रा में सद्गति का राह प्रशस्त करता है। महात्मा गांधी जी के अन्तिम शब्द &quot;हे राम ... ही थे। रावण जैसा ज्ञानी पराक्रमी तपस्वी भी अंतिम समय में राम नाम लेने में देर नहीं किया उसको पता था राम के द्वारा और राम नाम से ही उसको मोक्ष प्राप्ति होगी।&lt;/p&gt;&lt;p dir=&quot;ltr&quot;&gt;भारतीय समाज में ऐसी अभिव्यक्तियाँ, दैनिक जीवन पथ में पग-पग पर राम को साथ खड़ा करतीं हैं और राम भी इतने सरल व सहज हैं की हर जगह अपने भक्तों के साथ खड़े हो जाते हैं। हर भारतीय उन पर अपना अधिकार मानता है उनको अपना मानता है जिसका कोई नहीं उन सबके लिए राम ही राम..! है।&lt;/p&gt;&lt;p dir=&quot;ltr&quot;&gt;राम नाम का इतना प्रभाव है की हजारों बार देखी सुनी पढ़ी जा चुकी रामकथा की रोचकता कभी खत्म ही नहीं होती अभी कोरोना काल के दौरान जब मोदी जी ने रामायण सीरियल का प्रसारण दिन में तीन बार विभिन्न चैनलों पर करवाया तो रामायण का प्रसारण देखने का लोगो में इतना उत्साह था कि तीन महीने तक जनता सभी कार्य छोड़कर अपने आदर्श पुरूषोत्तम राम के देवत्व रूप को देखने सुनने के लिए तन्मयता के साथ टीवी के सामने समय से बैठे जाती है और राम के द्वारा बोले गए एक एक संवाद व व्यवहार को समझने का प्रयास करता जो साधारण मनुष्य में देवत्व के विकाश की राह प्रशस्त करता है।&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p dir=&quot;ltr&quot;&gt;हमारे भीतर जो कुछ भी अच्छा है वह राम.....ही है।&lt;/p&gt;&lt;p dir=&quot;ltr&quot;&gt;राम केवल एक शब्द ही नहीं राम सत्य निष्ठा, धर्म कर्तव्य, शुद्ध आचरण, आस्था, नैतिक मूल्यों, स्वाभिमान और श्रेष्ठ जीवन दर्शन का नाम है। राम भारतीय सनातन संस्कृति की आत्मा है राम शाश्वत है राम शिवांश है राम तपस्वी है।&lt;/p&gt;&lt;p dir=&quot;ltr&quot;&gt;राम एक श्रेष्ठ व आज्ञाकारी पुत्र है राम त्याग व पुरुषार्थ का नाम है।&lt;/p&gt;&lt;p dir=&quot;ltr&quot;&gt;राम एक आदर्श भाई है राम दया क्षमा के प्रतिरूप है।&lt;/p&gt;&lt;p dir=&quot;ltr&quot;&gt;राम धर्मनिष्ठ राजा है राम अनादि है अनंत है!&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p dir=&quot;ltr&quot;&gt;राम नाम से ही जीवन के भ्रम भटकाव अंहकार मद मोह का अंत है।&lt;/p&gt;&lt;p dir=&quot;ltr&quot;&gt;राम सनातन आस्था के प्रतीक भारतीयों के आराध्य है।&lt;/p&gt;&lt;p dir=&quot;ltr&quot;&gt;जीवन में सब कुछ अंत हो जाने के बाद भी जो बचा रह जाता है वह भी राम ही है राम हमारी आत्मा है हम राम के है और राम हमारे है।&lt;/p&gt;&lt;p dir=&quot;ltr&quot;&gt;जब कोई व्यक्ति घोर निराशा से गुजरते हुए उठ खड़ा होता है तो वह आत्मबल भी राम ही है। अनन्त सीमाओं के बीच छुपे हुए गूढ़ को, जो समझ पाए वो भी राम ही है ..!&lt;/p&gt;&lt;p dir=&quot;ltr&quot;&gt;राम वह है जिसको ये पता है की जन्म का उद्देश्य क्या है और जो जीवन के धर्म पथ पर सुख का मोह नहीं रखता और दुख में किंचित विचलित नहीं होता है। राज्याभिषेक की खबर सुनकर बहुत खुश भी नही जाहिर करता और वनवास की ख़बर को बिना दुख के बिना किसी प्रतिक्रिया के स्वीकार कर लेता है।&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p dir=&quot;ltr&quot;&gt;इसीलिए राम मर्यादा पुरूष पुरूषोत्तम राम है ।।&lt;/p&gt;&lt;p dir=&quot;ltr&quot;&gt;जय श्री राम..🌹🙏&lt;/p&gt;&lt;/div&gt;RATNESH MISHRAA
                               
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for relaxation of body.&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://theindianyouths.blogspot.com/feeds/7280305371356628961/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://theindianyouths.blogspot.com/2023/03/blog-post_16.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7681948317863166672/posts/default/7280305371356628961'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7681948317863166672/posts/default/7280305371356628961'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://theindianyouths.blogspot.com/2023/03/blog-post_16.html' title='राम कौन हैं राम मर्यादा पुरूषोत्तम है राम देवत्व जीवन के आदर्श है '/><author><name>RATNESH MISHRA</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05433941901415165493</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='32' src='//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiUs7BrFO9DMz8ZIIVyHnnohtALZN0mxTNx9q0DeKAn6YpAIpqoNTtR4GKn-WDKAqoTx5YYKg4bXRJXigkPSIH15Kfk1N8vJV3rrc3aORy2Tf6MwBof-zyquWctyWFU4g/s113/IMG-20170219-WA0037.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7681948317863166672.post-1763103546742195333</id><published>2023-03-06T18:59:00.006+05:30</published><updated>2023-03-06T19:06:50.569+05:30</updated><title type='text'>धर्म शब्द का प्रयोग किसी समुदाय समाज समूह के साथ जोड़कर करना तर्कसंगत नहीं है।</title><content type='html'>&lt;div&gt;साधारणतः जब भी हम चर्चा में धर्म शब्द का उपयोग करते सुनते है हम इसे समुदाय विशेष जैसे हिन्दू धर्म या बौद्ध जैन सिख या मुस्लिम धर्म, ईसाई धर्म से ही जोड़कर देखते है जबकि धर्म शब्द को समुदाय विशेष से प्रत्यक्ष रुप से जोड़ का बोलना कहीं से तर्कसंगत नहीं है क्योंकि धर्म का वास्ताविक संबंध कर्तव्य से, नैतिक मूल्यों से, मानवता से, परंपराओं का समायानुसार, नैतिक व मानवीय मूल्यों के समन्वय के साथ निर्वहन से है न की हिंदू मुस्लिम ईसाई समूह आदि से है .........&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;धर्म का संबंध केवल व्यक्ति व व्यक्तित्व से है ना कि हिन्दू मुस्लिम ईसाई समुदाय से, हिन्दू धर्म मुस्लिम धर्म आदि एक राजनैतिक शब्द है जो विदेशी आक्रमणकारियों द्वारा समाज को विभाजित कर सत्ता में बने रहने के लिए हजारों वर्षों तक किया गया और स्वतंत्रता के बाद इस शब्द का इस्तेमाल वोट बैंक की राजनीत के लिए किया जा रहा है जबकि वास्तविक रूप से समझने का प्रयास करे तो पाएंगे की हिन्दू धर्म नही बल्कि विश्व की एक विशिष्ट संस्कृति - संस्कार- परम्परा है जो ब्रह्माण्ड के देवपुरुषों ऋषियो मनीषियों महामानवों द्वारा पीढ़ी दर पीढ़ी पालन की गई स्मृतियों, परंपराओं, संस्कारों पर आधारित है जिसका निर्वहन त्रेता युग में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम, ऋषि वशिष्ठ, माता सीता, रुद्रावतार राम भक्त हनुमान और द्वापर युग में श्री कृष्ण, माता यशोदा, श्री राधा, मित्र सुदामा, पितामह भीष्म, गुरु द्रोणाचार्य, विदुर आदि द्वारा किया गया और उन्ही स्मृतियों परंपराओं संस्कृतियों पर आधारित जीवन शैली को हिन्दू संस्कृति कहा गया। इस प्रकार हिन्दू एक संस्कृति है ना कि धर्म, इसे धर्म कहना अनुचित है .........&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;हिन्दू संस्कृति एक प्रकार से वैदिक संस्कृति है क्योंकि यह वैदिक श्रुति स्मृति परंपराओं पर आधारित है इसे हिन्दू संस्कृति इसलिए कहा गया क्योंकि इसका पालन हिंदू कुश पर्वत परिक्षेत्र में रहने वाले मानवीय समुदायों द्वारा किया जाता है और पौराणिक ग्रंथों से यह पता चलता है कि इसी क्षेत्र में देव पुरुषों द्वारा पृथ्वी पर अवतार लेकर मानवीय जीवन के धर्म कर्तव्यों का निर्वाहन किया गया.... कुरुक्षेत्र के मैदान में कौरवों और पांडवों के बीच हुए युद्ध को श्री कृष्ण ने धर्मयुद्ध का नाम दिया क्यों कि वह लड़ाई अन्याय अनीति लोभ ईर्ष्या द्वेष अनाचार व अत्याचार के विरुद्ध धर्म की स्थापना की लड़ाई थी ना कि दो समुदायों या हिन्दू या मुस्लिम संस्कृति की .....&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;धर्म का संबंध सकारात्मक सोच और कर्म से है ना कि नकारात्मक विचारों व व्यवहार से या समुदाय विशेष से। तप त्याग क्षमा दया सेवा व कर्तव्य भाव धर्म निर्वहन के साधन है जिसका पालन व्यक्ति द्वारा संस्कार रूप में आदर्श जीवन के लिए किया जाता है चाहे वह किसी भी समुदाय से संबंधित हो। जिसका उल्लेख वैदिक ग्रंथो में मिलता है। धर्म पालन हिन्दू संस्कार का अभिन्न हिस्सा है जीवन शैली है जिसकी शिक्षा गुरुकुलो में ऋषि मुनियों द्वारा नैतिक शिक्षा के रूप में प्रदान किया जाता था। इसी प्रकार मुस्लिम ईसाई समुदायों की संस्कृती है संस्कार है जो की उनके समाज के विद्वानों महापुरुषों गुरुओं द्वारा पीढ़ी दर पीढ़ी पालन करने की शिक्षा दिया गया ना कि धर्म है। इसलिए किसी भी समुदाय या समाज के साथ धर्म शब्द जोड़कर प्रचारित करना या निर्दोष अशिक्षित जनता को गुमराह करके धर्म के नाम पर राजनिति करना एकदम गलत है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;वैसे भी हिन्दू धर्म मुस्लिम धर्म ईसाई धर्म शब्द का कोई पौराणिक प्रमाण नहीं मिलता है ये सब एक राजनैतिक शब्द है धर्म जीवन निर्वहन का एक संस्कार है जिसका उल्लेख सनातन वैदिक संस्कृति में संस्कार रूप में मिलता है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;मुझे लगता है कि हिंदू समाज सनातन अनुयायियो को सनातन या हिन्दू संस्कार या संस्कृति शब्द का प्रयोग व संबोधन करना चाहिए न कि सनातन या हिन्दू धर्म, अन्य समुदाय के लोगो को भी इस्लाम या मुस्लिम धर्म की जगह इस्लामिक संस्कृति या ईसाई यहुदी संस्कृति बोलना चाहिए न कि धर्म ।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;RATNESH MISHRAA
                               
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ही है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड के कण कण में है शिव, शिव अनंत ऊर्जा है शिव के बिना ब्रह्माण्ड की संकल्पना ही नहीं की जा सकती है सूर्य चंद्र पृथ्वी जल आकाश नभ नव ग्रह सप्तर्षि, सप्त नदिया और ब्रह्माण्ड की समस्त दिव्य शक्तियां व ऊर्जा &quot;शिव&quot; के अंश मात्र है&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;शिव अनंत ऊर्जा है शिव ही &quot;शंकर&quot; शिव ही &quot;विष्णु&quot; शिव ही &quot;ब्रह्मा&quot; है&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;शिव ही रचनाकार पालनहार और संहारक है&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;शिव &quot;आदिपुरुष&quot; और प्रकृति &quot;आदिशक्ति&quot; के संयोजन से निराकार शिव, शहस्त्राब्दी वर्ष पूर्व त्रिदेव ब्रह्मा विष्णु महेश की इच्छा व प्रेम से वशीभूत होकर आदिशिव महादेव ने फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष के चतुर्दशी तिथि की रात्रि, प्रदोष काल में मानव कल्याण के लिए अपने भक्तों में योग उपासना व भक्ति भाव जागृत करने के लिए &quot;लिंग&quot; आकार लिया ...............&lt;/div&gt;&lt;div&gt;वैसे तो सनातन संस्कृति में विक्रम संवत् के अनुसार प्रत्येक माह कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि शिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है जो की अमावस्या तिथि के एक दिन पूर्व आता है चूंकि फाल्गुन मास कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि को मानव कल्याण हेतु स्वयं भू लिंग आकार में महादेव शिव ने त्रिदेव भक्तों को दर्शन दिया और इस ब्रह्माण्ड में सर्वप्रथम श्री हरि विष्णु और ब्रह्मा जी ने ही शिवलिंग आकार महादेव का दिव्य दर्शन और पूजन किया इसी लिए फाल्गुन मास की शिवरात्रि &quot;महा शिवरात्रि&quot; कहलाती है। महाशिवरात्रि आदि शिव के प्रकटोत्सव का दिवस है आदि शिव व आदि शक्ति के प्राकृतिक संयोजन का दिन है। मान्यता है महाशिवरात्रि पर सभी देवतागण और दिव्य आत्माएं पृथ्वी पर स्वयं भू शिव लिंग का साक्षात दर्शन करने सूक्ष्म रुप में आते है इसीलिए महाशिवरात्रि पर रात्रि जागरण व मंत्र जाप का भी बहुत है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;शिवलिंग हमे यह संदेश भी देता है कि आदिशिव व आदिशक्ति एक ही है अलग अलग नहीं और यही महादेव और प्रकृति स्वरूपा आदिशक्ति के अर्धनारीश्वर रूप&amp;nbsp; का आधार भी है..............&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;महाशिवरात्रि महापर्व को लोग शंकर भगवान और पार्वती माता के विवाह वर्षगांठ के रूप भी में मनाते है इसमें कोई बुराई नही लोग अपने आराध्य देव महादेव और जगत जननी की भक्ति महाशिवरात्रि पर विवाह वर्षगांठ मनाकर करते है अच्छी बात है लेकिन &quot;शिव&amp;nbsp; महापुराण&quot; के&amp;nbsp; सती खण्ड के अनुसार सच्चाई यह है कि भगवान शंकर - माता सती का विवाह चैत्र मास की त्रयोदशी तिथि को हुआ था और पार्वती खण्ड के अनुसार माता पार्वती और शंकर का विवाह मार्गशीर्ष चतुर्दाशी को हुआ था। इस लिए महाशिवरात्रि को यदि हम योगसाधना ध्यान व मंत्र सिद्धि अथवा आत्म साक्षात्कार के माध्यम से ह्रदय में उपस्थित शिव के दिव्य अंश दिव्य आत्मा को जागृत करने और अध्यात्मिक चेतना के विकाश के लिए करे तो और अच्छा होगा.....&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;तीन पत्तो वाले बेलपत्र महादेव को प्रिय है क्यो कि बेल पत्र के तीन पत्तो वाली टहनियां ब्राह्म विष्णु महेश के प्रतीक रूप है जो मानव कल्याण के लिए प्रकृति की अमूल्य निधि है वैसे भी शिव पुराण में बेल वृक्ष को साक्षात शिव का व पीपल के वृक्ष में श्री हरि विष्णु का वास बताया गया है इसी लिए तीन पत्तो वाले बेलपत्र को शिवलिंग पर चढ़ाने से शिव की कृपा प्राप्त होती है&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;महादेव यानि शिव जो निराकार है सर्वश्रेष्ठ है उनका एक ही आकार है वो है शिवलिंग और शिव के शरीर धारी रूप है ब्राह्म विष्णु महेश व सप्तऋषि है, महेश ही शंकर है शंकर योगी है संन्यासी है संत है साधु है त्यागी है दानी है अघोरी है विनाशक है मृत्युदाता और जीवन रक्षक भी है और यमराज इनके सेनापति, भूत प्रेत पिशाच डांकिनी शाकिनी निशाचर सब इनके सहयोगी है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;बेलपत्र के अलावा महादेव को जल धारा बहुत प्रिय हैं क्यों कि जल से महादेव को शीतलता प्राप्त होती है ऐसा इस लिए की जब समुद्र मंथन से निकले विष को महादेव ने मानव कल्याण हेतु ब्रह्माण्ड की रक्षा के लिए स्वयं ग्रहण कर लिया था तब शिवशंकर का शरीर नीला पड़ गया और हिमालय के नीलकंठ पर्वत पर विश्राम करने गए तब श्री ब्रह्मा विष्णु के साथ सभी देवतागण उनका जलाभिषेक किया जिससे उनके शरीर को शीतलता प्राप्त हुई और महादेव को&amp;nbsp; नीलकंठ के नाम से पुकार गया। आज भी नीलकंठ महादेव का शिवलिंग ऋषिकेश के पास नीलकंठ पर्वत पर स्थित है जहां जलाभिषेक का बहुत महत्त्व है। महादेव के अभिषेक करने कई अन्य विधियां भी है जैसे दूध से अभिषेक लेकिन ऐसा विशेष उद्देश्य या कार्य के संकल्प के लिए प्रयोग करना चाहिए ना कि जब भी मंदिर जाए एक लीटर दूध ही चढ़ाके आ जाए।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;हर हर महादेव ॐ नमः शिवाय&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;RATNESH MISHRAA
                               
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for relaxation of body.&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://theindianyouths.blogspot.com/feeds/5068349330466934059/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://theindianyouths.blogspot.com/2023/02/blog-post_24.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7681948317863166672/posts/default/5068349330466934059'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7681948317863166672/posts/default/5068349330466934059'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://theindianyouths.blogspot.com/2023/02/blog-post_24.html' title='महाशिवरात्रि सनातन संस्कृति का महापर्व आदि शिव का प्रकटोत्सव दिवस है  '/><author><name>RATNESH MISHRA</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05433941901415165493</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='32' src='//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiUs7BrFO9DMz8ZIIVyHnnohtALZN0mxTNx9q0DeKAn6YpAIpqoNTtR4GKn-WDKAqoTx5YYKg4bXRJXigkPSIH15Kfk1N8vJV3rrc3aORy2Tf6MwBof-zyquWctyWFU4g/s113/IMG-20170219-WA0037.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7681948317863166672.post-8803954954205435334</id><published>2023-02-11T23:33:00.001+05:30</published><updated>2023-02-12T18:27:33.057+05:30</updated><title type='text'>पुरानी पेंशन बहाली की मांग देशहित में तर्कसंगत है या केवल सत्ता वापसी की राजनीति?</title><content type='html'>&lt;div&gt;&lt;div&gt;हिमाचल प्रदेश में पुरानी पेंशन बहाली के सहारे कांग्रेस पार्टी को सत्ता में वापसी के बाद से देश के अन्य हिस्सों में ये मुद्दा और गरम हो रहा है। कांग्रेस पार्टी की २०२३ में होने दस राज्यों विधान सभा चुनाओं में सफलता की उम्मीदें और बढ़ गई है यदि परिणाम कुछ सकारात्मक रहा तो २०२४ के आम चुनाव में भी इसको हवा दिया जाएगा। मजेदार बाद यह है कि इस मुद्दे को सबसे पहले अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी ने २०१७ के विधान सभा चुनाव के घोषणा पत्र में शामिल किया और २०१९ के लोकसभा चुनाव में भी इसको मुद्दा बनाया लेकिन कांग्रेस ने इसे छत्तीसगढ़ और राजस्थान में अपनी पार्टी की सरकार द्वारा राज्य स्तर पर लागु करवाके हिमाचल प्रदेश में सत्ता वापसी कर लिया ........&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;लेकिन सबसे बड़ा प्रश्न तो ये हैं कि यदि पेंशन बहाली जनहित में इतना आवश्यक था तो २००४ से लेकर २०१४ तक में यूपीए सरकार के सत्ता में रहते हुए क्यों नहीं बहाल किया गया जबकि मनमोहन सिंह जी देश के बड़े अर्थशास्त्री के तौर पर प्रधामनंत्री की भुमिका निभा रहे थे और तब इसे बड़ी आसानी से किया जा सकता था क्यों कि पुरानी पैंशन योजना खत्म करने का कानून २००४ से ही लागू होना था ......&lt;/div&gt;&lt;div&gt;यदि मनमोहन सिंह जी ने उस समय पुरानी पैंशन योजना को बहाल नहीं किया इसका मतलब उनके दृष्टिकोणों से ये उचित नही रहा होगा और यदि तब कांग्रेस पार्टी और यूपीए सरकार के सहयोगी दलों ने मनमोहन सरकार पर दबाव नहीं बनाया तो आज लगभग बीस साल बाद क्यो पुरानी पेंशन बहाली की मांग कर रहे है ......&lt;/div&gt;&lt;div&gt;इसका एक अर्थ तो यह निकलता है कि तब देश की आर्थिक स्थित इस लायक नही थी कि सरकार पेंशन का बोझ उठा पाए और मनमोहन जी को लगा होगा कि पेंशन के मद में जा रहे धन को देशहित जनहित के अन्य कार्यों में उपयोग किया जाएगा जिस उद्देश्य से अटल बिहारी जी की सरकार ने २००० में पेंशन योजना खत्म करने का कानून सदन में पास किया था जिसमे यह व्यवस्था किया गया था कि २००४ के बाद से नई भर्तियों में पेंशन व्यवस्था का रूप बदल जाएगा और वो पूर्णतः कर्मचारियों के ऊपर निर्भर करेगा।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;एक दूसरा प्रश्न यह उठता है कि क्या २००० में जब पेंशन खत्म करने के कानून सदन में अटल बिहारी जी की सरकार द्वारा पास करवाया जा रहा था तो विपक्ष के नेता सदन में मौजूद नहीं थे या राहुल गांधी जी, सोनिया जी, अखिलेश यादव जी सांसद नही बने थे तब विरोध नही कर पाए और आज अचानक २०१९ आम चुनाव के बाद जागृत हो गए है कि कर्मचारियों के साथ अन्याय हुआ और फिर से पेंशन बहाली की जाए।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;मुझे तो लगता है कि पेंशन बहाली और महंगाई का मुद्दा केवल सत्ता वापसी के लिए एक ढाल है और कुछ नही। अटल जी कि सरकार २००४ में महंगाई के मुद्दे पर ही चली गईं थी जब कि अटल जी राष्ट्रहित में देश के विकाश के लिए दृढ़ संकल्प के साथ काम कर रहे थे २००४-२०१४ तक महंगाई और बेरोजगारी का डाटा उठाके देख लिया जाए तो कुछ खास परिर्वतन नहीं कर पाई थीं यूपीए सरकार महंगाई और रोजगार सृजन के मामले में ......... ....&lt;/div&gt;&lt;div&gt;असलियत तो यह है कि भारत से महंगाई और बेरोजगारी की समस्या तब तक नही खत्म हो सकती जब तक कि जनसंख्या वृद्धि दर को संतुलित न किया जाए और कृषि उत्पादन को ना बढ़ाया जाए क्यों कि रोजगार सृजन की एक सीमित वार्षिक क्षमता है उससे अधिक सम्भव नही है लेकिन जनसंख्या वृद्धि की कोई निश्चित सीमा ही नहीं है । सीधी बात है कि मांग और उपलब्धता में संतुलन बनाए बगैर महंगाई बेरोजगारी की समस्या कभी नहीं खत्म हो सकती चाहे किसी भी पार्टी की सरकार आ जाए या कोई भी देश का प्रधानमन्त्री बन जाए&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;हास्यास्पद बात यह है कि देश में नेशनल पेंशन स्कीम एनपीएस की व्यवस्था करचारियो के लिए उपलब्ध है जिस कर्मचारी को जितना पेंशन चाहिए उतना प्लान कर ले तो ऐसे में पुरानी पेंशन बहाली की क्या जरूरत है लेकिन नही कर्मचारियों के नेता किसी न किसी पार्टी के समर्थक होते है उन्हे अपना नंबर पार्टी मुखिया के दिमाग में बढ़ाना और वरदहस्त प्राप्त करना है तो मांग तो उठाएंगे ही, हर साल महगई भत्ता में बढ़ोत्तरी के लिए, प्रत्येक साल वेतन वृद्धि भी के लिए, वेतन आयोग की अनुसंशा के अनुसार प्रत्येक पांच साल में एकमुश्त बड़ी वेतन वृद्धि के लिए, साल में १५० दिन से अधिक छुट्टियां, घर गाड़ी और बच्चों की शिक्षा के लिए ब्याज मुक्त ऋण भी , सालाना एलटीए और सुबह केवल दस बजे से ३ बजे तक ही काम चाहिए और जब आम आदमी के हित में जिमेदारी और कर्तव्यनिष्ठा के साथ काम करने को कहा जाय तो उसमे में भ्रष्टाचार इतना व्याप्त है कि बिना कुछ जेब गरम हुए कदम व कलम आगे नहीं बढ़ेगा लेकिन सरकार ने एक पेंशन ख़त्म कर दिया तो उसके वापसी के लिए राजनीति हो रही है&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;बेहतर होता कि देश के समस्त कर्मचारी राजनेताओं के पेंशन को देशहित में ख़त्म करने के लिए एकजुट होकर आवाज उठाते ना कि पुरानी पेंशन बहाली की मांग के लिए।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;वैसे ईमानदारी से पूछा जाए तो पेंशन का वास्तविक अधिकारी केवल देश के आम वृद्धजन, विधवा महिलाएं और अनाथ बच्चे है जिन्होंने कभी सरकारी नौकरी नहीं किया व जिसके पास मासिक आय का कोई श्रोत नही है। इस लिए देश के वृद्धजनों और विधववाओ का मासिक पेंशन बढ़ाके सीधे ६००० से अधिक कर देना चाहिए।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;यदि देश की राजनितिक पार्टियां वास्त्विक रूप से जनहित की देशहित की सोचते है तो पुरानी पेंशन बहाली की मांग के जगह जनसंख्या नियंत्रण, वृद्ध व महिला पेंशन वृद्धि की मांग करे जो जनहित देशहित में है&amp;nbsp; अन्यथा सत्तानीति और जातिवाद क्षेत्रवाद की राजनीति बंद करे।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;वैसे भी देशहित जनहित और विकाशहित में बात करना&amp;nbsp; ही केवल राजनिति कहलाती है अन्यथा सत्तानित और स्वार्थनीत के अलावा और कुछ नही।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;RATNESH MISHRAA
                               
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for relaxation of body.&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://theindianyouths.blogspot.com/feeds/8803954954205435334/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://theindianyouths.blogspot.com/2023/02/blog-post_11.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7681948317863166672/posts/default/8803954954205435334'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7681948317863166672/posts/default/8803954954205435334'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://theindianyouths.blogspot.com/2023/02/blog-post_11.html' title='पुरानी पेंशन बहाली की मांग देशहित में तर्कसंगत है या केवल सत्ता वापसी की राजनीति?'/><author><name>RATNESH MISHRA</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05433941901415165493</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='32' src='//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiUs7BrFO9DMz8ZIIVyHnnohtALZN0mxTNx9q0DeKAn6YpAIpqoNTtR4GKn-WDKAqoTx5YYKg4bXRJXigkPSIH15Kfk1N8vJV3rrc3aORy2Tf6MwBof-zyquWctyWFU4g/s113/IMG-20170219-WA0037.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7681948317863166672.post-5085115815468620587</id><published>2023-02-07T17:01:00.002+05:30</published><updated>2023-02-07T18:52:23.455+05:30</updated><title type='text'>संघ प्रमुख मोहन भागवत जी का संदेश क्या अब जातिवादी और क्षेत्रवादी राजनीति खत्म होनी चाहिए </title><content type='html'>&lt;div&gt;&lt;div&gt;संत रविदास जयंती के अवसर पर संघ प्रमुख श्री मोहन भागवत जी महाराष्ट्र में रविदास जयंती कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रुप में शामिल हुए थे जहा उनके उद्बोधन के कुछ अंश को लेकर देश के राजनितिक गलियारे में बडी चर्चा का विषय बना है ......&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;राजनितिक गलियारा शब्द मैं इस लिए बोल रहा हूं क्यों कि आम जनता तो अपने रोजी रोटी और दैनिक जीवन के समस्याओं में इतना उलझी हुई है कि दिन भर मेहनत करके थका हारा शाम को आम आदमी जब घर लौटता है तो दो रोटी खाकर जल्दी सो जाता है कि सुबह उठकर उसे अगले दिन की तैयारी करनी होती है कौन कहा क्या बोल रहा है क्यों बोल रहा है ये तो उसे गली नुक्कड़ चौराहों पर पान चाय की दूकानों पर अपने अपने नेताओं की शेखी बखार रहे लोगो से पता चलता है और वही उन्हे समझाते भी है कि कौन नेता क्या बोला और उसका क्या मतलब है वो भी अपने पार्टी और नेता के हित के अनुसार .........&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;इस लिए आम जनता को कोई फर्क नहीं पड़ता कि मोहन भागवत जी क्या बोल रहे हैं या कोई अन्य नेता क्या बोल रहा है.....&lt;/div&gt;&lt;div&gt;फिलहाल आइए बात करते है मोहन भागवत जी के व्यत्व्य की जिसकी चर्चा चल रही है मुझे लगता है भागवत जी जिस मंच से जिस महान व्यतित्व की जयंती पर बोल रहे थे और जो भी बोला उनका तात्पर्य सनातन समाज के विघटन को दूर करने की दूरदृष्टि का उदबोधन था न कि किसी वर्ग विशेष या समुदाय को नाराज करना या आरोपित करना.......... .....&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;वैसे इस बात में पुरी सत्यता है कि सनातन वैदिक व्यवस्था में जाति सूचक शब्द को कहीं भी ज्यादा महत्ता नही दिया गया है। ये तो समाज के कुछ मठाधीश लोगों ने समय समय पर अपने निहित स्वार्थ और अपनी महत्ता बनाए रखने के लिए समाज में नाकारात्मक माहौल पैदा किया वैसे पंडित और ब्राह्मण दोनों शब्दों का अर्थ स्थान कर्म और परिस्थिति के अनुसार बदल जाता है। जैसे पंडित शब्द आम बोल चाल में लोग बहुत जानकार अनुभवी व ज्ञानी व्यक्ति को भी बोलते है &quot;चल बड़ा आई है पंडित बने आपन ज्ञान मत दा &quot; ऐसे ही बहुत से अन्य शब्द है जिनका अर्थ संदर्भ बदल जाता है वाक्या अनुसार ........&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;वैसे भी जाति सूचक शब्द हमेशा से राजनितिक और व्यक्तिगत स्वार्थ साधने का माध्यम रहा है जिसका पिछले लगभग 1500 वर्षो से परंपरागत तरीके से भारत पर आक्रमण करने वाले विदेशी आक्रमणकरियों ने अपने स्वार्थ के लिए प्रयोग किया, संतानियो को जाति में विभाजित करके लाभ उठाया और हजारों वर्षों तक राज किया, भारत की समृद्धि लुटा, संस्कृति संस्कार को तोड़ा मडोड़ा तहस नहस कर दिया और भारतीय सनातनी हजारों वर्षो तक ये समझ ही नही पाया, अपनी&amp;nbsp; समृद्धि और श्रेष्ठता के अहंकार से अपने आपको बाहर ही नहीं निकाल पाया ....... जो देश की स्वतंत्रता के बाद भी लगातार जारी रहा, अलग अलग राजनितिक नेता और पार्टियां समय समय पर सनातन समाज को एकजुट करने की बजाए अपने स्वार्थ और सत्ता के लालच में विघटित बनाए रखा जो देश और समाज के विकाश को प्रभावती किया और कमज़ोर बनाया है ............&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;आज आजादी के 75वे वर्ष बाद भी भारत संघर्ष कर रहा है विकसित देश की श्रेणी में अपना स्थान बनाने के लिए जिसे विक्रमजीत मौर्य के समय में पूरा विश्व सोने की चिड़िया के नाम से जानता था। बड़ा दुर्भाग्य यह है भारत से एक दो साल पहले या बाद में आजाद हुए कई देश आजादी के ३०-४० वर्षो के ही आर्थिक विकाश की ऊंचाई छू लिए थे और उत्तरोत्तर प्रगति के साथ आज़ एक विकसित राष्ट्र के रूप में विश्व में अपना परचम फहरा रहे है जिसका सबसे बड़ा उदहारण हमारा निकटम पड़ोसी चीन है ...........&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;यदि भारत आज भी संघर्ष कर रहा है तो उसके पीछे एक मुख्य कारण भारत की जातिवादी और क्षेत्रवादी राजनीत है इसी जातिवादी क्षेत्रवादी राजनीत के गठबंधन को तोड़ने और सनातन समाज को जोड़कर एक छत के नीचे खड़ा करने का प्रयास संघ प्रमुख की सोच है .............&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;संघ प्रमुख की इसी सोच में सनातन समाज का और भारत देश का हित है जो भारत को विश्व के समृद्धशाली राष्ट्र की श्रेणी में पुनः खड़ा कर सकता है। इस लिए देश के प्रत्येक नागरिक को अपने दृष्टिकोण का दायरा बढ़ाना होगा अपनी सोच को बड़ा करना होगा जाति और क्षेत्रवाद की संकीर्णता से बहार आना होगा। पूरा सनातन समाज का एक ही जाति है, वो है, सनातनी भारतीय। बस यही एक ही परिचय है समस्त भारतवासियो का सनातनियो का और कुछ नही। ये भावना भारत के प्रत्येक नागरिक की होनी चाहिए तभी एक सशक्त और समृद्धिशाली राष्ट्र का विकाश संभव हो पाएगा ........&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;हालाकि मोहन भागवत जी ने जो बात कहीं वो निश्चय ही बड़ा आश्चर्य का विषय है की इतना विद्वान सुलझा हुआ परिपक्व व्यक्ति देश के एक सर्वश्रेष्ठ संगठन का प्रमुख इतना गैर जिम्मेदारीपूर्ण व्यक्तव्य कैसे दे सकते है जबकि वे स्वयं एक ब्राह्मण परिवार से है लेकिन इतना बड़ा व्यक्तित्व यदि ऐसा बोल दिए तो उन शब्दों के आगे पीछे के वक्तव्यों और विषय स्थान व परिस्थिति को भी समझने की कोशिश करनी चाहिए और उन संदेशों का वास्तविक संदर्भ क्या है उसको भी समझना चाहिए .......&lt;/div&gt;&lt;div&gt;भागवत जी के व्यकव्यो का विस्ताविक संदर्भ यही है की जो सनातनी अपने धर्म को छोड़कर किसी और धर्म को अपना लिया है वो घर वापसी करे जाती धर्म के कीड़े से बाहर निकले अपने सनातन समाज व धर्म का सम्मान करे। जिन लोगों से पहले कुछ गलतियां हुईं उसको सुधारे और सनातन समाज की एकता अखंडता को मजबूत बनाएं रखने के लिए अपना सर्व श्रेष्ठ योगदान करे। वैसे भी जाती धर्म से ऊपर मानवता और इंसानियत हैं जिसका जीवन में अनुकरण करना प्रत्येक सनातनी का कर्तव्य है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;इसलिए हम सबको राष्ट्रहित में जाति क्षेत्र के दायरे से बाहर निकल समाज में एकजुटता स्थापित करना चाहिए।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;जय हिंद। जय भारत।।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;RATNESH MISHRAA
                               
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for relaxation of body.&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://theindianyouths.blogspot.com/feeds/5085115815468620587/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://theindianyouths.blogspot.com/2023/02/blog-post_7.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7681948317863166672/posts/default/5085115815468620587'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7681948317863166672/posts/default/5085115815468620587'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://theindianyouths.blogspot.com/2023/02/blog-post_7.html' title='संघ प्रमुख मोहन भागवत जी का संदेश क्या अब जातिवादी और क्षेत्रवादी राजनीति खत्म होनी चाहिए '/><author><name>RATNESH MISHRA</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05433941901415165493</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='32' src='//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiUs7BrFO9DMz8ZIIVyHnnohtALZN0mxTNx9q0DeKAn6YpAIpqoNTtR4GKn-WDKAqoTx5YYKg4bXRJXigkPSIH15Kfk1N8vJV3rrc3aORy2Tf6MwBof-zyquWctyWFU4g/s113/IMG-20170219-WA0037.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7681948317863166672.post-8062474108662352547</id><published>2023-02-04T14:01:00.006+05:30</published><updated>2023-02-04T15:27:11.772+05:30</updated><title type='text'>रामचरित मानस पर टिप्पणी केवल एक तुच्छ वोटबैंक राजनीत के अलावा और कुछ नही है </title><content type='html'>&lt;div&gt;&lt;div&gt;आजकल भगवान श्री राम के अनन्य भक्त और श्री हनुमान जी स्वामी के प्रत्यक्ष दर्शन करने व उनकी ही प्रेरणा से ऋषि वाल्मीकि द्वार संस्कृत भाषा में लिखित रामायण का हिंदी या कहें की अवधी में अनुवाद करने वाले संत तुलसीदास जी द्वारा लिखित रामचरितमानस पर कुछ मूढ राजनेताओं&amp;nbsp; द्वारा निम्नस्तर की टिप्पणी की जा रही है जो बड़ी चर्चा का विषय बन गया है।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;वैसे आजकल के नेताओं को राजनेता कहना भी गलत होगा क्यों कि आजकल के नेता राजनीत नही करते है बल्कि स्वार्थनीति कूटनीति सत्तानिति वोटनिति करते हैं जो केवल सत्ता और समय के साथ चलते है ना कि जनता के साथ आज़ के नेताओं के लिए अपना स्वार्थ सर्व प्रथम और जनता व उनका हित सबसे अंत में ऐसे नेता तुलसीदास जी द्वारा रचित रामचरित मानस पर टिप्पणी करते है जो केवल हास्य उपहास&amp;nbsp; का विषय हो सकता इससे अधिक और कुछ नही ,.... .....&lt;/div&gt;&lt;div&gt;उत्तर प्रदेश के स्वामी प्रसाद मौर्य और बिहार के शिक्षा मंत्री द्वार हाल ही में की गई टिप्पणी केवल यह प्रणाम देती है कि ये कितने बड़े मूढ़ व अनपढ़ है इनकी पास केवल नाम मात्र की डिग्री है वास्तविक शिक्षा के नाम पर ये एकदम शून्य है मुझे तो संदेह है कि इन लोगो के घर में रामचरित मानस की एक प्रतिलिप भी रखी होगी और जब इनके घर में रामचरित मानस की प्रतिलिप नही तो इन्होंने ना तो कभी ध्यान से स्वयं पढ़ा होगा न ही परिवार के किसी सदस्य ने और बिना पढ़े व सही अर्थ समझे यदि ऐसी टिप्पणी स्वामी प्रसाद मौर्या ने किया तो यह केवल सत्ता नीति और वोटनिति से प्रेरित बयाना कहा जा सकता है ...........&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;सामान्य रूप इसे पब्लिक और मीडिया स्टंट कह सकते है क्यों कि स्वामी प्रसाद मौर्या बसपा से भाजपा और फिर सपा में केवल उपमुख्यमंत्री या मुख्यमंत्री बनने के लालच में उछाल कूद कर रहे है और सफल नहीं हो पा रहे है और इनकी इसी तरह की गलत बयानबाज़ी अनर्गल आरोप प्रत्यारोप ने इनके असली चेहरे को जनता के सामने उजागीर कर दिया है तो जनता में भी इनका असर अब कम होता नजर आ रहा है अब चूकि महत्त्वाकांछा बड़ी है और जनता में प्रभाव कम होता जा रहा हैं तो आने वाले समय में सभी पार्टियों में इनका महत्त्व एकदम खत्म हो जाएगा इस बात इस भी दर सता रहा है ऊपर से आजकल सत्ता से बाहर है तो जनता में भी कहीं उतना महत्त्व नहीं मिल रहा है जिससे इनको तथा कथित अपना वोट बैंक भी धीरे धीरे भूल रही है तो इनकी बेचैनी बढ़नी स्वाभिक है, हो भी क्यों नही जो व्यक्ति 1996 से लेकर 2017 तक अधिकतम समय में उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट का हिस्सा रहा भरपूर दौलत कमाया वास्तविक हैसियत 200 करोड़ से अधिक ही होगा ऐसा अनुमान है, तो अब मंत्रिपरिषद का हिस्सा न होने की पीड़ा भी है, बावजूद इसके इतना बड़ा वोहदा रखते हुए 2017 विधान सभा का चुनाव भी हार गए ये तो अखिलेश यादव जी ने मान रखा और विधान परिषद में भेज दिया नहीं तो शायद अब तक राजनीत भूल चुके होते।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;अब चूंकि लोकसभा नजदीक आ रहा है हो सकता है चुनाव लडने तैयारी कर रहे हो तो अपने वोटबैंक को याद दिलाना भी जरूरी था कि स्वामी प्रसाद मौर्या अभी प्रदेश की राजनीति में जीवित है तो इससे बड़ा गरम मुद्दा और कुछ हो ही नही सकता था तो इस मूढ़ ने बिना गहन अध्ययन किए अपने सलाहकारों के कहने पर इतना मूढ़ता भरा बयान दे दिया जबकि ये कई वर्षो पहले ही बौद्ध धर्म अपना चुके है।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;सही ही कहा गया है अधिक महत्त्वाकांछ व्यक्ति को अक्सर अंधा बना देता है या ये कहें कि विनाश काले विपरीत बुद्धि यही हो रहा है स्वामी प्रसाद के साथ ..... यही कारण है कि 2017 विधानसभा से पहले मंत्रिपरिषद से त्यागपत्र देकर सपा में शामिल हुए और अब इतना बड़ा गलत बयानबाज़ी वो भी सनातन धर्म के सबसे बड़े महाकाव्य रामचरित मानस पर टिप्पणी .....&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;इस मूढ़ ने रामचरित मानस के पंचम खंड सुंदरकांड के ५८ वें दोहा के अंतर्गत आने वाले ३ चौपाई&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;ढोल गंवार शूद्र पशु नारी। सकल ताड़ना के अधिकारी।।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;पर अपनी टिप्पणी की है&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;इन मूर्खो को शूद्र और ताड़ना शब्द का विरोध है तो सबसे पहले तो ये ऋषि वाल्मीकि का ही विरोध कर रहे है जो कि स्वयं शूद्र जाति से थे और इतने बड़े विद्वान थे कि भगवान श्री राम के जन्म से पहले से ही रामायण लिखना उन्होंने शुरु कर दिया था और लव कुश के जन्म और बाल्यकाल तक का पूरा विवरण लिख दिया था तो क्या रामायण का बहिष्कार इस लिए कर देना चाहिए की वो एक शुद्र कुल में जन्मे ऋषि ने लिखा था जिसका हिंदी अनुवाद रामचरित मानस है जिसके बारे ये कहा जाता है कि स्वयं हनुमान जी ने एक तोता के रूप में तुलसीदास जी को सुनाया और उन्होंने लिखा प्रभू श्री राम का भी दर्शन प्राप्त किया था जो केवल ५०० वर्ष पुरानी घटना है।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;और दूसरी बात ताड़ना का अर्थ किसी को पीटने पीड़ा देने या प्रताड़ित करने से नही है बल्कि ताड़ना का वास्तविक अर्थ है&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;गवार शुद्र पशु और स्त्री पर हमेशा ध्यान दृष्टि बनाए रखना सामान्य भाषा में कहे तो निगरानी रखना क्यों कि इस संसार में प्रत्येक प्राणी के अपने अपने कुछ नैसर्गिक गुण व संस्कार होते है जिसके अनुसार उनका व्यवहार होता है और कहीं उनसे कोई गलती न हों जिससे हमें पीड़ा हो इस लिए उनके ऊपर दृष्टि बनाए रखना और समय पर समय पर उचित शिक्षा देना आवश्यक होता है इस लिए ताड़न के अधिकारी शब्द का प्रयोग किया गया है ।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;स्वामी प्रसाद मौर्या के बयान से अधिक तो इस बात को ध्यान देने की जरूरत है कि समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव जी ने उनको इस बयान पर पुरस्कृत करते हुए पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव बना दिया, इसी को कहते है वोटनीति&amp;nbsp; कूटनीति अब यदि सवर्ण समुदाय या भगवान राम भक्त स्वामी प्रसाद के बयान पर विरोध प्रदर्शन करे तो मौर्य जाति के व्यक्ति का अपमान मतलब की पूरे मौर्य समाज का अपमान जिसे मुद्दा बनाके मौर्या समाज के वोट बैंक को विभाजित करना और स्वामी प्रसाद को समाज का बड़ा नेता साबित करना जिसका कुछ फायदा सपा को मिले आगामी लोकसभा चुनाओ में संभवतः ..........&lt;/div&gt;&lt;div&gt;लेकिन इन मूढ़ को कौन समझाए की आज के डिजिटल सोशल मीडिया के जमाने में जनता या किसी समाज को बहलाना आसान नहीं रहा और वो भी सनातन धर्म की बखिया उखेड़ के तब जब ५०० सौ वर्ष पुराना राम मंदिर निर्माण शुरु हो गया है सनातन धर्म के श्रद्धालु बड़ी संख्या में इस बात को लेकर खुश है जो रामलला के दर्शन की राह देख रहे जो संभव है लोकसभा चुनावों से पहले शुरु हो जाएगा ऐसी स्थिति में सनातन समुदाय को तोड़ना आसान नहीं&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;वैसे भी स्वामी प्रसाद मौर्य ने विधान सभा चुनाव से पहले राम भक्त श्री हनुमान जी के चालीसा पर गलत बयान देकर अखिलेश और स्वयं दोनो को चुनाव में पराजित कराया और अब श्री राम चरित मानस पर टिप्पणी करके पहले से ही लोकसभा चुनाव में सपा को हराने की तैयारी कर लिया उससे भी बड़ी संभावना है बेटी संघमित्रा की राह कठिन पिछली बार तो मोदी जी के नाम पर चुनाव जीत संसद में पहुंच गई थी इस बार तो लग रहा है स्वामी बेटी को भी हार की राह दिखा देंगे।&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;स्वामी प्रसाद जैसे नेताओं को आत्मिक शुद्धि की जरुरत है इन्हे किसी अध्यात्मिक गुरु के शरण में कुछ महीने व्यतीत करना चाहिए जिससे इनका सनातन धर्म के बारे में ज्ञान बढ़े और स्वयं से ये रामचरित मानस और इनसे जुड़े ग्रंथो का अध्यन करना चाहिए और यदि सही से न समझ आए तो किसी विद्वान व्यक्ति से रामचरित मानस के लिखे चौपाइयों का अर्थ समझना चाहिए।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;RATNESH MISHRAA
                               
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२४ साफ दिखाई दे रहा जो आने वाले समय में विकसित व आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देने वाला साबित होगा। इसका एक बड़ा उदहारण वित्त मंत्री ने सरकार पर सब्सिडी का बोझ कम करते हुए ऐतिहासिक निचले स्तर पर ला दिया है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन द्वारा प्रस्तुत बजट २०२३-२४ भारत को स्वावलंबी आत्मनिर्भर नव भारत के निर्माण को सुनिश्चित करने वाला बजट है जो भारत को स्वतंत्रता वर्ष २०४७ में विश्वपटल पर एक विकसित और शसक्त राष्ट्र के रुप में स्थापित कर वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा। बजट में समाज के अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्ति को लाभ पहुंचाने से लेकर चहुंमुखी विकास को गांव देहात तक पहुंचने की भरपूर प्रयास किया गया है चाहे गरीब हो, मजदूर हो या किसान या मध्यमवर्गीय वर्ग से संबंध रखने वाला देश का कोई भी नागरिक हो सबका ध्यान रखा गया है युवाओं के लिए रोजगार सृजन से लेकर महिलाओं के लिए किसान विकास पत्र के तर्ज पर महिला बचत सम्मान पत्र की व्यवस्था जिसमें ७.५% व्याज के साथ पार्शियल विड्रवाल का प्रावधान किया गया है और बुजर्गो के लिए बचत इनकम को टैक्स फ्री करने के साथ ही देश को ग्रीन एनर्जी समृद्ध राष्ट्र बनाने के लिए महत्वपूर्ण व्यवस्था किया गया है जो भारत को विश्व में एक मजबूत पहचान दिलाने में अहम भूमिका अदा करेगा।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;४५ लाख करोड़ रुपए के बजट में राजकोषीय घाटे को पिछले वर्ष की अपेक्षा ६.५ से घटाकर ५.९% करना एक महत्वपूर्ण दूरदृष्टि परक कदम है जो यह दर्शाता हैं की भारत की अर्थव्यवस्था मजबूती से आगे बढ़ रहा है जिसे २०२५_२६ के बजट में ४.५% रखने की व्यवस्था अभी से किया गया है जो आने वाले समय में देश की अर्थव्यवथा को और मजबूत करने का मोदी सरकार का दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है केवल इतना ही नहीं ७५ हजार करोड़ से एक नए फ्रेट कॉरिडोर बनाने व देश की परिवहन व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए ९ हजार करोड़, एमएसएमई सेक्टर को क्रेडिट गारंटी योजना और २० लाख करोड़ पशुपालन डेरी एवं मत्स्य उद्योग को मजबूत करने की व्यवस्था यह बताती है की मोदी सरकार देश के व्यापारियों को हर कदम पर सहयोग करने के लिए संकल्पित है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;देश की सीमा सुरक्षा हो या नागरिक सुरक्षा उसको मजबूत बनाए रखने के लिए रक्षा बजट में पिछले वर्ष की अपेक्षा १३% की बढ़ोत्तरी कर ५.९४ करोड़ कर दिया जिससे देश रक्षा क्षेत्र में भी आत्मनिर्भर बने और सीमा पर तैनात सैनिकों को अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस बनाया जा सके साथ में गृह मंत्रालय को १.९४ लाख करोड़ के बजट का प्रावधान कर सरकार नागरिक सुरक्षा को भी और मजबूत करने के लिए संकल्पित है।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;सड़क परिवहन व राजमार्ग के नेटवर्क को और मजबूत करने के लिए २.७० लाख करोड़ का प्रावधान न केवल देश के इन्फ्रास्ट्रक्चर को मज़बूत करेगा बल्कि बड़े पैमाने पर देश के कोने कोने में रोजगार का सृजन करेगा। फार्मा उद्योग में निर्यात को प्रोत्साहित करने के लिए १२५० करोड़ का प्रावधान, प्रधानमन्त्री गरीब आवास योजना में लगभग ६६% की बढ़ोत्तरी कर ७९ हजार करोड़ कर दिया गया जिससे अधिक से अधिक गरीबों को आवास मुहैया कराया जा सके।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;कार्बन एमिशन को कम करने के लिए संकल्पित मोदी सरकार फेम योजना को २२०० करोड़ से बढ़ाकर लगभग ५२०० करोड़ कर दिया जिससे इलेक्ट्रिक विहकल के उत्पादन को बढ़ावा मिले साथ ही इलेक्ट्रिक व्हीकल ने प्रयोग होने वाले उत्पादों जैसे लिथियम बैटरी पर टैक्स कम करके यह कोशिश किया है कि इलेक्ट्रिक व्हीकल खरीदारों को सस्ते दामों पर गाडियां उपलब्ध हो पाए। नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन २०७० के लक्ष्य को पाने के लिए ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए ३५ हजार करोड़ का प्रावधान हरित भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है जो देश में हाईड्रोजन से चलने वाली पहली ट्रेन का परिवहन २०२४ तक शुरू करने का लक्ष्य प्राप्त करने में लाभदायी होगा।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;मध्यमवर्गीय परिवार के बच्चो की शिक्षा को मजबूती प्रदान करने के लिए सरकार ने राष्ट्रीय डिजिटल पुस्तकालय स्थापित करने का प्रावधान किया है साथ ही साथ पंचायत स्तर पर पुस्तकालय को स्थापित करने के लिए ग्राम स्तर पर प्रोत्साहन करने की योजना बनाई गई है जो निःसंदेह कमजोर व मध्यम वर्गीय छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण व्यवस्था है। ४७ लाख युवाओं को अगले तीन वर्षों में राष्ट्रिय अप्रेंटीशिप प्रोत्साहन योजना के तहत भत्ता का प्रवधान स्किल्ड बेरोजगार युवाओं के लिए एक बड़ी सहायता साबित होगा।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;जल ही जीवन है जल संरक्षण के लिए जनजीवन मिशन योजना के लिए ७० हजार करोड़ का प्रावधान कर घर घर नल से जल सुनिश्चित करने की दिशा में सरकार का दृढ़ संकल्प स्पष्ट दिखाई दे रहा हैं। जनजातीय बच्चो के लिए एकलव्य आवासीय विद्यालय योजना के तहत २००० विद्यालयों की संख्या ५९४३ कर दिया गया जिसके तहत ३८००० नए शिक्षको के भर्ती का प्रावधान किया गया है जिससे पिछड़े जनजातीय समुदाय के बच्चो को देश के कोने कोने में अच्छी शिक्षा सुनिश्चित हो सके।&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;इस प्रकार से यह बजट मोदी जी के सपनो का आत्मनिर्भर स्वावलंबी भारत की परिकल्पना को जमीनी स्तर पर स्थापित करने का एक सुदृढ़ बजट है जिसमे हर वर्ग के लिए लाभ को सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है जिससे देश की अर्थव्यवस्था भी मजबूत हो रही है और विकास की रफ्तार भी तेज होती दिखाई दे रही है।&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;RATNESH MISHRAA
                               
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for relaxation of body.&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://theindianyouths.blogspot.com/feeds/635855252691904138/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://theindianyouths.blogspot.com/2023/02/blog-post.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7681948317863166672/posts/default/635855252691904138'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7681948317863166672/posts/default/635855252691904138'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://theindianyouths.blogspot.com/2023/02/blog-post.html' title='बजट २०२३-२४ भारत को विश्व पटल पर वर्ष २०४७ में विकसित देश की श्रेणी में स्थापित करने का पहला कदम है '/><author><name>RATNESH MISHRA</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05433941901415165493</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='32' src='//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiUs7BrFO9DMz8ZIIVyHnnohtALZN0mxTNx9q0DeKAn6YpAIpqoNTtR4GKn-WDKAqoTx5YYKg4bXRJXigkPSIH15Kfk1N8vJV3rrc3aORy2Tf6MwBof-zyquWctyWFU4g/s113/IMG-20170219-WA0037.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7681948317863166672.post-1862517963555180787</id><published>2023-01-14T17:05:00.001+05:30</published><updated>2023-01-14T17:06:05.883+05:30</updated><title type='text'>क्या भारत जोड़ो यात्रा के सहारे सत्ता वापसी का राहुल गांधी का जीवट प्रयास सफल होगा </title><content type='html'>&lt;div&gt;&lt;div&gt;भारत जोड़ो यात्रा अब लगभग अपने अन्तिम पड़ाव पर पहुंच चुकी है वर्तमान में देश के पंजाब राज्य से गुजर रही है जहां सत्ता में पुनः लौटने के उद्देश्य से कांग्रेस ने 2019 में एक बड़ा किसान आंदोलन किसान बिल वापसी को लेकर किया था लेकिन उड़ता पंजाब के प्रभाव में वह निष्प्रभावी रहा और जनता ने कांग्रेस को सत्ता से बेदखल कर दिया लेकिन दुर्भाग्यवश मदहोश व्यक्तित्व को सत्ता मिल गईं जो पंजाब को और तीव्र गति से उड़ा रहा है फिलहाल यात्रा अब अपने अंतिम पड़ाव जम्मू काश्मीर में पहुंचने वाली है जहां अनुच्छेद 370 का प्रभाव खत्म हो चुका है और अब यह क्षेत्र दो हिस्सों जम्मू कश्मीर और लद्दाख में बंट चुका है तो निश्चय ही राहुल जी कुछ बड़ा उद्बोधन जम्मू कश्मीर की धरती से लाल चौक पर झण्डा फहराने के समय करने वाले होंगे जिसे सुनने को देश बेसब्री से इंतज़ार कर रहा है.........&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;निःसंदेह राहुल जी की यह यात्रा सुषुप्त अवस्था में पड़ी ए ओ हुम द्वारा स्थापित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस जिसे इंदिरा जी के नेतृत्व में एक नया नाम कांग्रेस (आई ) मिला, के कार्यकताओं को नई ऊर्जा और उम्मीद की किरण देगा लेकिन राहुल जी और उनके मेंटोर जयराम रमेश, रघुराम राजन व शुभचिंतकों का यह प्रयास 2023 में होने वाले 10 राज्यों मध्य प्रदेश राजस्थान छत्तीसगढ़ कर्नाटक तेलांगना मेघालय मिजोरम त्रिपुरा सिक्किम और जम्मू काश्मीर लद्दाख के चुनाव और 2024 के आम चुनाव में कितना लाभ दिला पाएगी ये तो आने वाला समय ही बताएगा ..............&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;जो भी हो 2012 से लगातार लगभग 40 से अधिक चुनावी शिकस्त खाने के बाद भी राहुल जी भारत जोड़ो यात्रा का नेतृत्व कर रहे है यह उनके मजबूत इरादे, इच्छाशक्ति, संघर्षशीलता और जीवटता का एक अनूठा उदाहरण है जो लगभग हासिये पर पहुंच चुकी कांग्रेस पार्टी को केंद्रीय सत्ता में पुनः लौटाने में महत्वपूर्ण योगदान साबित हो सकती है लेकिन राहुल जी की यह यात्रा कितनी सकारात्मक परिणाम देंगी यह तो आगामी महीनों में होने वाले विधानसभा चुनाव के परिणाम से ही पता चल पाएगा और तभी यह तय हों पाएगा की कांग्रेस 2024 में केंद्रीय सदन में कितनी मजबूती से अपनी उपस्थिति दर्ज करा पायेगी ........&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;फिलहाल कांग्रेस का केंद्रीय सत्ता में लौटाने की उम्मीद तो कम ही लग रही है क्योंकि जनता जनार्दन उतनी उत्सुकता और भारी मात्रा में भारत जोड़ो यात्रा से नही जुड़ पाई जितना आवश्यकता थी ......&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;वैसे मुझे लगता है यात्रा का नाम &quot;भारत जोड़ों यात्रा&quot; रखने की बजाए यदि केवल &quot;भारत यात्रा&quot; रखा होता तो ज्यादा अच्छा रहता क्योंकि &quot;जोड़ो&quot; शब्द ने जनता में नकारात्मक राजनीति का संदेश दिया और भारत के कई राज्य उत्तराखंड उत्तर प्रदेश बिहार झारखंड पश्चिम बंगाल उड़ीसा नॉर्थ ईस्ट और गुजरात तमिलनाडु गोवा जैसे राज्यों में यात्रा का एक भी पड़ाव नहीं रहा जो राहुल जी के यात्रा रूट मैप से बाहर रह गए इस प्रकार भारत का लगभग आधा राज्य तो यात्रा से अछूता रह गया तो भारत जोड़ो का सकारात्मक निहतार्थ ही ख़त्म हो गया ....... और एक बड़ा प्रश्न यह कि भारत जोड़ो नाम का तात्पर्य देश जोड़ना था या जाति धर्म व विभिन्न सम्प्रदाय को, जो भी रहा हो जब देश के सभी राज्यों में राहुल जी अपना पड़ाव नहीं लगा सके तो भारत जोड़ो का कार्य कहा पूरा हो पाया और यदि कांग्रेस को लगता है की पूरा हुआ है तो दूसरा बड़ा प्रश्न यह कि सरदार पटेल जी ने 1947 में क्या अधूरा छोड़ा था जो कि अब पूरा करने की जरूरत पड़ी राहुल जी को जिसे नेहरु इंदिरा और राजीव जी नही कर पाए। यदि कुछ छूट भी गया था तो मनमोहन जी के नेतृत्व में यूपीए सरकार के दौरान 2004 से 2014 में क्यों पूरा नहीं कर पाए जबकि मनमोहन जी तो सोनिया और राहुल जी के नेतृत्व में ही कार्य कर रहे थे। फिर भी यदि भारत जोड़ने का कार्य करना ही था तो यात्रा का रूट मैप पूर्व में पश्चिम बंगाल से शुरू करके पश्चिम में गुजरात होते हुए महाराष्ट्र गोवा कर्नाटका केरल तमिलनाडु तेलंगाना आंध्र छत्तीसगढ़ मध्य प्रदेश उत्तर प्रदेश राजस्थान हरियाणा पंजाब हिमाचल होते हुए अंतिम पड़ाव जम्मू रखना था जिसमे भारत के लगभग 90% हिस्से की यात्रा सुनिश्चित हो जाती और जनता में एक सकारात्मक संदेश जाता कि देश का एक जुझारू नेता देश की अधिकतम आबादी तक अपनी पहुंच बनाने का संभव प्रयास कर रहा है&amp;nbsp; जिससे अधिक से अधिक जनता जुड़ पाती .... ......&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;खैर यात्रा रूट मैप से उत्तर प्रदेश बिहार झारखंड पश्चिम बंगाल उड़ीसा जैसे बड़े आबादी वाले भूभाग को बाहर रखकर देश की 65% आबादी से सम्पर्क न कर पाना कहा से भारत जोड़ो अभियान पूरा कर पा रहा है जहां से लोकसभा में लगभग 200 से अधिक सांसद सदस्य सदन का प्रतिनिधि करते है ....... ....&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;वैसे राहुल जी ने यात्रा के दौरान महत्मा गांधी जी के रियल उत्तराधिकारी की भुमिका निश्चित तौर पर अदा की है राहुल जी के हर पड़ाव पर उनके मुख्य सहयात्रियों में अक्सर महिला सहयात्री ही ज्यादा रही जैसे गांधी जी अपने यात्रा में हमेशा दो चार महिला सह यात्रियों के कंधो पर हांथ रखकर चलते थे जो राहुल जी के विरोधियों के लिए एक अच्छा मसाला बन गया ....... इसके अलावा यात्रा के दौरान ठंड के मौसम में राहुल जी का एक पतले t-shirt में यात्रा करना जनता के लिए एक अच्छा मजाक बन गया है ठंड न लगने के कारण पर भी बहुत सारी चर्चाएं जनता में हो रही है .... .&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;जो भी हो यात्रा का निर्णय तो अच्छा था लेकिन यात्रा का नामकरण, यात्रा की शुरुवात स्थान, रूट मैप, महिला सहयात्रियों की संख्या, एक बड़े भूभाग को अधूरा छोड़ना, यात्रा का ड्रेस कोड, सब कुछ नकारत्मक रहा है जिससे मुझे लगता है यात्रा की सफ़लता अधूरी रही है ..............&lt;/div&gt;&lt;div&gt;फिर भी ईश्वर से प्रार्थना है की वो राहुल जी संघर्ष जारी रखने आत्मबल प्रदान करते रहे और राहुल जी का संघर्ष सफल हो।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;RATNESH MISHRAA
                               
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जो भी हो मोदी जी ने पिछले आठ सालों में पूरे देश की युवा पीढ़ी और समस्त जनमानस को मातृत्व प्रेम आशीर्वाद व अस्तित्व का जो संस्कार देश के प्रधानमंत्री के रूप प्रेषित किया है वो&amp;nbsp; निःसंदेह सराहनीय है और मैंने ऐसा महसूस किया है कि देश में मातृशक्ति के प्रति लोगो का दृष्टि पिछले कुछ वर्षों में बदला और सम्मान भी बढ़ा है। हीराबेन के सांसारिक जीवन के अंतिम यात्रा में एक प्रधानमंत्री के रुप में उनके अर्थी को कांधा देकर मोदी जी ने देश वासियों को अपने कर्तव्य निर्वहन का बहुत बड़ा संदेश दिया है।&lt;/p&gt;
&lt;p dir=&quot;ltr&quot;&gt;वैसे तो सनातन संस्कृति में मातृत्व का बहुत आदर सत्कार और सम्मान एक जननी के रूप में वैदिक काल से ही बताया गया है लेकिन मोदी जी ने आज इक्कीसवीं सदी में मातृत्व के सम्मान में अपने व्यवहार से देश व समाज को जो सन्देश दिया है वह निःसंदेह प्रेरणादायक है। &lt;br /&gt;
मोदी के अनुसार हीराबेन ने अपने अंतिम मुलाकात में मोदी से &quot;अपने कर्तव्यों को बौद्धिक क्षमता से और जीवन को शुद्धता से जीने का मंत्र दिया &quot; &lt;/p&gt;
&lt;p dir=&quot;ltr&quot;&gt;ईश्वर पुण्य आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान प्रदान करे।&lt;br /&gt;
ॐ शांति। ॐ शांति। ॐ शांति।।&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;RATNESH MISHRAA
                               
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सही पूछिए तो हिन्दी के बिना कोई भी भारतीय अपनी भावनाओं को सही मायने में नहीं व्यक्त कर पता है .... हम ये भी कह सकते है दिल की बात प्यार दुलार अपनेपन की बात जितना सरल और अच्छे तरीके से हम अपने क्षेत्रीय भाषा चाहे वो पंजाबी गुजराती मराठी हो या बंगला हो, या उड़िया या तमिल तेलगू या हो अवधी या मैथिली या हो मलयाली या कन्नड़ में व्यक्त कर सकते है उतना आंग्ल या अंग्रेज़ी भाषा में नहीं ........&lt;br /&gt;
हिन्दी या क्षेत्रीय भाषा में जो आत्मीयता या अपनापन है वो किसी और में नहीं उदाहरण के तौर पर देखे कि अंग्रेजी भाषा में केवल एक ही शब्द Uncle - Aunty से ही चाचा चाची मामा मामी फूफा बुआ मौसा मौसी सबको संबोधित कर दिया जाता है सब एक ही समान है चाहे बड़े हो या छोटे कोई सम्मान या प्यार या लगाव का भाव नहीं और मजेदार बात यह है की यदि सारे लोग एक साथ खड़े हो तो एक बड़ी फजीहत हो जाती है पांच बार बोलो और इशारे करो तब समझ आएगा की किस Uncle - Aunty को बुला रहे है आप .........&lt;br /&gt;
इसी प्रकार अन्य रिश्तों में है पिता जी माता जी कहने में जो आत्मीयता, प्यार व सम्मान का भाव हैं वो Daddy, Mummy कहने में नहीं है। वैसे भी Daddy Mummy दोनो शब्द मृत भाव को प्रेषित करते है कहने का अर्थ है की अंग्रेजी भाषा में हम माता पिता को ऐसे शब्दों से पुकार कर उनके सकारात्मक ऊर्जा को दूषित ही कर रहे होते है इससे उनकी आयु व स्वास्थ्य को प्राभावित कर रहे होते है आप...........&lt;br /&gt;
क्या अध्यापक को Teacher कहना और Teacher नाम का दारू पीना दोनों में कोई अपनापन लगाव व सम्मान है जो आचार्या जी या गुरु जी कहने में ..........&lt;/p&gt;&lt;p dir=&quot;ltr&quot;&gt;अब यदि बात करे दैनिक जीवन में व्यवहारिक रूप से प्रयोग होने वाले कुछ अन्य अंग्रेजी शब्दो का जैसे......&lt;br /&gt;
Congratulations, Best Wishes &quot; हार्दिक बधाई मित्र, बहुत बहुत शुभकामनाएं &quot;&lt;br /&gt;
Thank You को &quot;आभार भाई साहब&quot; / मित्र &lt;br /&gt;
Wish You Happy Birthday, God Bless You or Stay Blessed को &quot; जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं मित्र/ भाई, ईश्वर आपको दीर्घायु बनाए &quot; कहते है।&lt;br /&gt;
आप महसूस करेंगे की ज्यादा अपनापन किस भाषा में लग रहा है।&lt;br /&gt;
इसी तरह किसी के मृत्यु पर दुःख प्रकट करने के लिए व्यवहारिकता निभाने के लिए लोग अक्सर RIP Rest in Peace बोल देते है या लिख देते है वैसे तो अब लोगों को social media के माध्यम से इस शब्द का सही अर्थ तो पता चल गया है फिर भी लोग यही शब्द प्रयोग करते है लेकिन जब यही हम अपने भाषा में बोले तो भाव बदल जाता है &quot; बहुत दुखद घटना, ईश्वर पुण्य आत्मा को अपने श्री चरणों मे स्थान प्रदान करे&quot; ॐ शांति ॐ शांति ॐ शांति।।&lt;br /&gt;
जरा पढ़ के देखिए कितनी आत्मीयता हिन्दी शब्दो में महसूस हो रहा हैं।&lt;br /&gt;
ऐसे बहुत उदाहरण है जिसकी हम यहां चर्चा कर सकते है लेकिन बहुत लंबा हो जायेगा&lt;br /&gt;
यहीं नहीं मैने स्वयं कई बार ऐसा महसूस किया है यहां facebook पर लिखते समय जब मैं अंग्रेज़ी में कुछ लिखता हूं तो वो भाव नहीं प्रेषित कर पता हूं जो हिन्दी भाषा में .......&lt;br /&gt;
मैं ही नही मैने बड़े बड़े पत्रकारों और अधिकारियो को देखा है वे अपने भाव हिंदी भाषा में ही व्यक्त करना ज्यादा सुगम समझते है जो स्वाभाविक ही है ......&lt;br /&gt;
यही नहीं आप संस्कृत के श्लोक को या हिन्दी गीत को सुनकर ज्यादा शांत और आनंदित महसूस करते है बजाय अंग्रेज़ी गीत के ..........&lt;br /&gt;
केवल यही नहीं मैने कई बार ऐसा देखा है जब job interview के लिए कोई उम्मीदवार HR Manager ya Team Manager के सामने ज्याता है वो कोशिश करता है की कितना जल्दी वह अंग्रेज़ी से हिंदी में संवाद शुरू कर सके क्यों कि हिंदी में वो अपने बातो कामों हुनर और उपलंधियो को ज्यादा सरलता से भावात्मक रूप से कह पता है और सामने वाले को प्रभिवित करने में उसे ज्यादा आसानी होती यही नहीं अंग्रेजी की अपेक्षा हिन्दी में वो ज्यादा संवाद स्थापित कर पता हैं साक्षात्कार लेने वाले व्यक्ति से,..........&lt;/p&gt;&lt;p dir=&quot;ltr&quot;&gt;

&lt;/p&gt;&lt;p dir=&quot;ltr&quot;&gt;वैसे भी आप अंग्रेजी में लिखकर या बोलकर कुछ लोगो को प्राभावित तो कर सकते है लेकिन संवाद स्थापित करने वाले व्यक्ति को अपना तभी बना पाएंगे जब आप उनसे हिन्दी में भाव व्यक्त करेंगे, संवाद करेंगे, क्यो कि अपनी भावनाओं को आप जितनी सहजता सुगमता सरलता से हिंदी में व्यक्त कर पाएंगे जो सामने वाले के दिल और दिमाग में आपकी एक अच्छी छवि बना सके वो अन्य भाषा में संभव नहीं है &lt;br /&gt;
इस लिए मेरा तो यही कहना है कि अंग्रेजी भाषा को केवल official भाषा तक ही सीमित रखें और व्यावहारिक ब वक्तिगत जीवन में हिन्दी भाषा या मातृ भाषा को ही उपयोग में लाए तो ज्यादा अच्छा है और ये केवल अपने तक ही सीमित ना रखें बल्कि अंग्रेजी माध्यम से पढ़ रहे बच्चो को भी समझाए की अंग्रेजी स्कूल और प्रतियोगिता तक ही सीमित रखें।&lt;br /&gt;
जय हिंद जय भारत ।।&lt;br /&gt;
आप सभी मित्रों को हम भारतीयों की मातृ भाषा हिन्दी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।। 💐💐🙏&lt;/p&gt;&lt;/div&gt;RATNESH MISHRAA
                               
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क्या आपने कभी देखा </title><content type='html'>&lt;div&gt;&lt;div&gt;कौन चलाता है इस पूरे संसार को ? कहाँ है ईश्वर ? क्या कभी देखा, कभी महसूस किया ? नही ना&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;आइए समझने की कोशिश करते है&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;जब हम माँ के पेट में नौ महीने तक थे, कोई हाथ—पैर न थे कि हम भोजन कर ले।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;श्वास लेने का भी उपाय न था,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;फिर भी जिए।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;न कोई दुकान चलाते, न कोई काम धंधा करते थे, फिर भी जिए।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;नौ महीने माँ के पेट में हम थे, कैसे जिए ?&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;किसकी मर्जी से जिए ?&lt;/div&gt;&lt;div&gt;तुम्हारी मर्जी क्या थी ?&lt;/div&gt;&lt;div&gt;कुछ नही पता ?&lt;/div&gt;&lt;div&gt;फिर माँ के गर्भ से जन्म हुआ , जन्मते ही, जन्म के पहले ही माँ के स्तनों में दूध भर आया, कैसे&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;किसकी मर्जी से ?&lt;/div&gt;&lt;div&gt;अभी दूध को पीनेवाला&lt;/div&gt;&lt;div&gt;आने ही वाला है कि&lt;/div&gt;&lt;div&gt;पहले से ही दूध तैयार है,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;किसकी मर्जी से ? कौन है वो ?&lt;/div&gt;&lt;div&gt;गर्भ से बाहर होते ही&lt;/div&gt;&lt;div&gt;तुमने सांस ली कभी इसके पहले&lt;/div&gt;&lt;div&gt;साँस नहीं ली थी&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;जब माँ के पेट में&lt;/div&gt;&lt;div&gt;तो माँ की साँस से ही&lt;/div&gt;&lt;div&gt;काम चलता था—&lt;/div&gt;&lt;div&gt;लेकिन जैसे ही तुम्हें&lt;/div&gt;&lt;div&gt;माँ के पेट से बाहर होने का&lt;/div&gt;&lt;div&gt;अवसर आया,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;तत्क्षण तुमने साँस ली,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;किसने सिखाया ? कौन है वह&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;जब की पहले कभी सांस नहीं लिया था&lt;/div&gt;&lt;div&gt;किसी पाठशाला में नहीं गए थे,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;किसने सिखाया कि कैसे साँस लो ?&lt;/div&gt;&lt;div&gt;किसकी मर्जी से ?&lt;/div&gt;&lt;div&gt;जो तुम दूध पीते थे कौन पचाता था , तुम्हारे भोजन को ?&lt;/div&gt;&lt;div&gt;तुम्हारे ग्रहण किए हुए भोजन को हड्डी—मांस—मज्जा में कौन बदलता है ? कैसे तुम साल दर साल तुम बड़े होते जाते हो तुम्हारा शारीरिक सौष्ठव बनने लगता है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;किसने तुम्हें जीवन की&lt;/div&gt;&lt;div&gt;सारी प्रक्रियाएँ दी हैं ?&lt;/div&gt;&lt;div&gt;जब तुम थक जाते हो&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;तो कौन तुम्हें सुला देता है?&lt;/div&gt;&lt;div&gt;और कौन जब तुम्हारी&lt;/div&gt;&lt;div&gt;नींद पूरी हो जाती है तो&lt;/div&gt;&lt;div&gt;तुम्हें उठा देता है?&lt;/div&gt;&lt;div&gt;कौन चलाता है चाँद—सूर्यों व अन्य ग्रह नक्षत्र को ? सूर्योदय से सूर्यास्त फिर सूर्योदय&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;किसकी इच्छा से सब संभव हो रहा है सदियों से&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;पौधों वृक्षों को हरा कौन रखता है ?&lt;/div&gt;&lt;div&gt;कौन खिलाता है पौधों वृक्षों में फूल फल को&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;अनंत—अनंत रंगों के&lt;/div&gt;&lt;div&gt;और गंधों के ?&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;कौन भरता उनमें सुगंध व स्वाद ?&lt;/div&gt;&lt;div&gt;संसार की प्राकृतिक गतिविधियों को कौन संचालित करता है&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;कभी सोचा ? नहीं ना&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;जिस स्रोत से ये पूरा ब्रह्माण्ड संचालित हो रहा है,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;क्या उसके बिना सहारे के&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;एक पल भी हमारी छोटी—सी जिंदगी चल सकेगी ?&lt;/div&gt;&lt;div&gt;कभी कार को ड्राइव करते सोचा है की थोड़े से अंदाज से गाड़ी कैसे निकल जाती है आगे&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;कोई न कोई अदृश्य शक्ति ऊर्जा ड्राइवर को मार्गदर्शन कर रही होती है&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;थोड़ा सोचो,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;थोड़ा ध्यान करो।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;अगर इस विराट संसार को&lt;/div&gt;&lt;div&gt;बिना किसी व्यवधान के&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;चलते हुए हम देख रहे है,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;सब सुंदर तरीके से चल रहा है,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;कोई न कोई अदृश्य शक्ति तो है&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;वो कौन है ?&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;जिसे हम देख नहीं सकते केवल महसूस कर सकते है&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;ईश्वर वही है जो&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;ईश्वर दिखता नही देता बल्कि दिखाता है&lt;/div&gt;&lt;div&gt;ईश्वर सुनता नही बल्कि सुनने की शक्ति देता है&lt;/div&gt;&lt;div&gt;ईश्वर बोलता नहीं है लेकिन जन्म के बाद बिना किसी गुरुकुल में गए बोलने की शक्ति देता है बोलना सीखता है&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;इस संसार में कोई भी वस्तु बिना बनाये नही बनती अतः संसार भी किसी ने अवश्य बनाया है&lt;/div&gt;&lt;div&gt;जिसने इस सुंदर प्रकृति की रचना किया है&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;वही तो ईश्वर है !!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;इस संसार में हम तुक्ष्य मनुष्य पड़े पौधे नही उगा सकते&lt;/div&gt;&lt;div&gt;किसी को सांसे नही दे सकते इसका प्रत्यक्ष उदाहरण हम सबने कोरोना महामारी में देख और महसूस किया&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;हम हमारे जैसे मनुष्य नहीं बना कर सकते न ही पुरुष के शरीर से महिलाओं की तरह प्रजनन की क्षमता उत्पन्न कर सकते है&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;दूध तो गाय भैंस बकरी ऊट सब देते है लेकिन सभी की पौष्टिक क्षमता अलग अलग होता है क्यों कैसे कभी सोचा दूध का रंग तो लगभग समान सफेद ही होता है फिर स्वाद और तत्व सब में अगल अलग क्यों और कैसे&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;कोई विज्ञान नहीं है इसमें&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;विज्ञान से हमे केवल वही पता चल पा रहा है जो पहले से ही सर्वशक्तिमान परमेश्वर ने रचना कर रखा है या जो उनकी इच्छा है और जब उनकी इच्छा है तभी विज्ञान कुछ खोज पता है अन्यथा वर्षो लग जाता है एक छोटी चीज भी खोजने में&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;यही ईश्वर है मित्रों&lt;/div&gt;&lt;div&gt;इस लिए अपने आप को सनातन धर्म संस्कृति से जोड़े&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;भगवान दिखाते नही , न हि दिखाते है वो तो केवल भाव देखते है भावना और प्रेम श्रद्धा व विश्वास को देखते है&lt;/div&gt;&lt;div&gt;स्वयं को भागवत भजन में लगाए जीवन सरल लगने लगेगा शांति मिलेगी लालच माया मोह से विशोभ होने लगेगा&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;आप ईश्वर के नजदीक होने लगेंगे यही जीवन का मूल उद्देश्य है।।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;जय श्री राम जय श्री सनातन धर्म।।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;RATNESH MISHRAA
                               
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for relaxation of body.&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://theindianyouths.blogspot.com/feeds/994399231540268301/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://theindianyouths.blogspot.com/2022/09/blog-post.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7681948317863166672/posts/default/994399231540268301'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7681948317863166672/posts/default/994399231540268301'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://theindianyouths.blogspot.com/2022/09/blog-post.html' title='कौन है ईश्वर ? क्या आपने कभी देखा '/><author><name>RATNESH MISHRA</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05433941901415165493</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='32' src='//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiUs7BrFO9DMz8ZIIVyHnnohtALZN0mxTNx9q0DeKAn6YpAIpqoNTtR4GKn-WDKAqoTx5YYKg4bXRJXigkPSIH15Kfk1N8vJV3rrc3aORy2Tf6MwBof-zyquWctyWFU4g/s113/IMG-20170219-WA0037.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7681948317863166672.post-6450676511325003303</id><published>2022-06-15T11:17:00.004+05:30</published><updated>2022-06-16T10:43:41.677+05:30</updated><title type='text'>युवा भारत के भविष्य को संवारने के लिए अग्निपथ के अग्निवीर योजना </title><content type='html'>&lt;div&gt;&lt;div&gt;अपने बच्चों को IAS, IPS, PCS, Bank Manager बाद में बनाइयेगा पहले उन्हे सशक्त संवेदनशील जुझारू व्व्यक्ति बनाए जिसके लिए भारत सरकार द्वारा आयोजित अग्निपथ के अग्निवीर नियुक्ति प्रक्रिया मे युवाओ की भागीदारी सुनिश्चित कराए।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;कल रक्षामंत्री श्री राजनाथ सिंह ने देश के तीनो सेनाओं के अध्यक्षों के साथ भारतीय सेना मे भर्ती के लिए #AgnipathKeAgniveer योजना की घोषणा किया है जिसके अंतर्गत साढ़े 17 वर्ष से लेकर 21 वर्ष तक के युवक युवतियों को सेना के तीनो अंग थलसेना, वायुसेना और नौसेना में 4 वर्ष के लिए भर्ती की जाएगी, जिन्हे #Agniveer के नाम दिया गया है।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;इस भर्ती प्रक्रिया के प्रथम चरण में आगामी 90 दिनों में, 40000 युवा व युवतियों को चुना जाएगा जिसके लिए शैक्षणिक योग्यता किसी भी विषय से केवल 10वी व 12वी पास रखा गया है । सभी चयनित अभ्यर्थियों को प्रथम वर्ष में 30000, द्वितीय वर्ष में 33000 तृतीय वर्ष में 36000 और चतुर्थ वर्ष में 40000 रुपए मासिक वेतन व अन्य भत्ता मिलेंगे। जिसमें से पूरे चार वर्ष मे 5.02 लाख फंड के रूप मे कटेगा और 4 वर्ष बाद जब इनको सेवा मुक्त किया जायेगा तब उन्हे कुल 10.04 लाख + 8% चक्रविधि व्याज जोड कर मिलेंगे क्योंकि कटे फंड के बराबर का योगदान भारत की सरकार भी उसे देगी जो लगभग 15 लाख के बराबर होगा। भारतीय सैन्य विभाग इन चुने हुए अभ्यर्थीयो मे से ही 25% लोगो को&amp;nbsp; सीधे भर्ती के माध्यम से चार साल के Performance के आधार पर Permanent नियुक्ति देगा बाकि शेष बचे लोग जब 4 वर्ष बाद भारतीय सेना छोड़ेंगे तब उनके पास योग्यता अनुसार शैक्षिक शिक्षा का सर्टिफिकेट तो मिलेगा ही जो सभी जगह मान्य होगा, साथ में जिस हुनर में वे प्रशिक्षित होंगे या अपनाया होगा उसका स्किल डेवलपमेंट का प्रमाणपत्र भी मिलेगा। भारत सरकार इतना करने के साथ ही उन्हें स्वयं का उद्यम शुरू करने के लिए बैंक से ऋण देने की संतुति देगी और उनके पास अपना खुद का 15-20 लाख बचत पूँजी होगी जिसके सहयोग से एक अच्छे नागरिक के रूप मे जीवन यापन कर सकेंगे और संभवतः कुछ लोगो को रोजगार भी उपलब्ध करा पायेंगे, साथ मे समाज मे गुमराह युवा पीढ़ी को प्रशिक्षण भी दे सकेंगे जो अच्छे सामाजिक विकास के लिए एक महत्वपूर्ण योगदान होगा।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;मैं समझता हूँ यह घोषित योजना देश व समाज के लिए आने वाले वर्षो मे अभूतपूर्व सामाजिक बदलाव लाएगी व विकास परक सिद्ध होगी । यदि प्रत्यक्ष लाभों को देखे तो 10वी, 12वी या फिर भेड़िया धसान की तरह नकल के सहारे डिग्री पाए लोगो के लिए अपने स्किलों को पहचानने और उसमे भारतीय सेना के अनुरूप अनुशासन सीखने का यह स्वर्णिम अवसर है। जो भटके हुए युवाओ को एक तरफ आत्मविश्वास व स्वाभिमान देगा एवं स्वालम्बी बनाएगा वहीं जब ये युवा सेवामुक्त होगे तो कम ही उम्र में स्वतः लोगो को रोजगार देने वाला उद्यमी बनने का सुअवसर भी प्रदान करेगा।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;अब इससे हट कर एक गंभीर विचार की तरफ बढ़ते है। इस योजना के पीछे एक महत्वपूर्ण कारण भारतीय सेना में बढ़ते हुए पेंशन व सेना के स्थायित्व को बनाए रखने में बढ़ रहे खर्चों के दबाव को कम करने का भी है, लेकिन यह भारत सरकार की केवल एक समस्या के लिए निकला गया हल नहीं है बल्कि मोदी सरकार द्वारा आने वाले भविष्य की मजबूत सैन्य तैयारी का भी संकेत है। मेरा मानना है की भारत को क्षितिज पर आसन्न संकट के बादल दिखने लगे है। भारत एक लंबे अंतराल तक चलने वाले, भविष्य के एक बड़े महायुद्ध की पूर्व तैयारी कर रहा है। जो युद्ध सिर्फ भारत की सीमाओं या बाहर ही नहीं होगा बल्कि आंतरिक भी होने की संभावनाए है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;भारत इसीलिए कम समय में, भारतीय युवाओं की एक शृंखला तैयार कर रही है जो भारतीय सेना की छत्रछाया में अनुशासन व उद्यम में प्रशिक्षित होंगे। वे 75% युवा,&amp;nbsp; युवती जो सेना में समायोजित न हो कर भारतीय समाज में जायेंगे, वे आपातकालीन स्थिति में भारत के लिए एक प्रशिक्षित व रक्षित बल के रूप में उपलब्ध होंगे जो भारत को एक लंबे उथलपथल के काल में या फिर खिंचते हुए युद्ध की परिस्थित मे सरकार को अक्समिक भर्तियों के दोराहे पर नही खड़ा होना होगा क्योंकि उसके पास स्वयं में एक प्रशिक्षित वा अनुशासित मानव संसाधन उपलब्ध होगा।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;मैं समझता हूँ की भारत की जनता को आने वाले समय मे एक लंबे संघर्ष के लिए स्वयं को मानसिक रूप से तैयार रहना चाहिए क्योकि आने वाला समय विध्वंस से पुनर्निर्माण और स्थापित मूल्यों व व्यवस्थाओं के बदलाव का होगा। मेरा दृढ़ विश्वास है की इसमें भारत सफलतापूर्वक अवश्य निकल जायेगा लेकिन इसके लिए हमे मन, तन व धन तीनो ही स्पतर पर सरकार का सहयोग के लिए तैयार रहना चाहिए।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;इसलिए मेरा देश के सभी प्रबुद्ध नागरिको मित्रो व महिलाओ से निवेदन है कि इस योजना मे स्वयं अपने परिवार के बच्चो को लाभ लेने लिए तो प्रोत्साहित करे ही साथ मे मित्रो रिश्तेदारो व आसपास के लोगो के बच्चो को भी इस भर्ती प्रक्रिया मे भाग लेने के लिए बोले।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;आभार धन्यवाद 🙏🏻&lt;/div&gt;&lt;div&gt;जय हिंद, जय भारत।।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;#RatneshMishra #GlobalYouthAwardee2016&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;RATNESH MISHRAA
                               
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Visit to stimulate mind and body with the new flavor of tea on the basis of occasion,season,time and environment.&lt;div class=&quot;blogger-post-footer&quot;&gt;TEA TOWN Cafe - Soup For The Soul, Place to enjoy the evining with friend
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for relaxation of body.&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://theindianyouths.blogspot.com/feeds/6450676511325003303/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://theindianyouths.blogspot.com/2022/06/blog-post.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7681948317863166672/posts/default/6450676511325003303'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7681948317863166672/posts/default/6450676511325003303'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://theindianyouths.blogspot.com/2022/06/blog-post.html' title='युवा भारत के भविष्य को संवारने के लिए अग्निपथ के अग्निवीर योजना '/><author><name>RATNESH MISHRA</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05433941901415165493</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='32' src='//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiUs7BrFO9DMz8ZIIVyHnnohtALZN0mxTNx9q0DeKAn6YpAIpqoNTtR4GKn-WDKAqoTx5YYKg4bXRJXigkPSIH15Kfk1N8vJV3rrc3aORy2Tf6MwBof-zyquWctyWFU4g/s113/IMG-20170219-WA0037.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7681948317863166672.post-3913119330704870918</id><published>2021-12-17T19:42:00.006+05:30</published><updated>2021-12-17T19:42:51.187+05:30</updated><title type='text'>विवाह एक संस्कार है जो पारिवार सामाज व परम्पराओ के अनुसार सम्पादित होता है ना कि कानून के मुताबिक। </title><content type='html'>&lt;div&gt;&lt;div&gt;देश के उच्च सदन मे महिलाओ के विवाह के संदर्भ मे शादी के लिए उम्र सीमा को निर्धारित करने का कानून पास हुआ जिसके अनुसार अब लडकियो की शादियाँ&amp;nbsp; 21 वर्ष से पहले कानूनन अवैध मानी जाएगी। मेरे समझ से आज के समय मे ऐसे कानून का कोई औचित्य ही नही है क्योकि शादी विवाह एक व्यक्तिगत, पारिवारिक व विशेषकर सामाजिक विषय है जो कि परिवार की सामाजिक आर्थिक व परम्परागत व्यवस्थाओ पर निर्भर करता है। इसके भी अधिक महत्वपूर्ण यह है कि विवाह जैसी सामाजिक परंपरा का प्रावधान मनुष्य जीवन मे होने वाली शारिरीक विकास व प्राकृतिक आवश्यकता के अनुरूप किया गया है जो कि सनातन धर्म का एक प्रमुख संस्कार भी है और भारत जैसा देश, जो विश्व मे सबसे अधिक विभिन्नताओ भाषाओ व सांस्कृतिक परम्पराओ से भरा देश है जहाँ हर दस किलोमीटर पर बोली भाषा, बात व्यवहार बदल जाता जहाँ वैवाहिक रिश्ते दादा - दादी, बुआ- फूफा व अन्य सगे - संबंधियो, गुरुजनो के आशीर्वाद, ग्रह नक्षत्रो, कुटुंब के रीति-रिवाजो, परम्पराओ और भावनाओ से तय होता है वहाँ पर उम्र सीमा का बंधन सामाजिक संबंधो मे कवल असहजता ही उत्पन्न करेगा न कि कोई सुगमता होगी लोगो को इससे।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;मेरा मानना है कि जब पहले से ही महिलाओ के लिए 18 वर्ष व पुरुषो के लिए 21 वर्ष की सीमा विवाह के लिए निर्धारित है और आजकल तो लडकियो की शादियाँ चाहे गरीब हो या अमीर सबके घर, समाज मे सामान्यतः देर से ही हो रही तो ऐसे मे समाज को कानून के बंधन मे बाधने की कोई आवश्यकता नही है ऐसे कानून का लोगो लाभ तो कुछ नही होगा बल्कि दुष्प्रभाव यह होगा कि समाज के दुष्टप्रवृत्ति के लोग समाज मे कई अन्य तरह की समस्याए पैदा करेगे इससे सभ्य व कमजोर लोगो के लिए जीवन मे असहजता ही उत्पन्न होगा। निस्संदेह आज भी समाज मे 5-10% ऐसे परिवार है जो अपनी लड़की की शादी 18-20 साल से कम उम्र मे कर रहे है लेकिन इसके पीछे उनकी अपनी परिवारिक सामाजिक व आर्थिक मजबूरियाँ भी है अन्यथा आज तो लगभग हर परिवार मे चाहे वो अमीर है या गरीब लड़की की शादी 22-23 साल मे और लड़के की शादी 25-27 साल मे ही हो रहा है तो ऐसे मे जिस उद्देश्य से कानून बनाया गया है वो अपने आप पुरा हो रहा है। रही बात लडकिया के परिपक्वता की तो उन्हे ईश्वर व प्रकृति का ऐसा वरदान है कि वे लडको से कम ऊम्र मे ज्यादा समझदार व परिपक्व हो जाती है बाकि वास्तविक परिपक्वता तो मनुष्य जीवन मे अनुभव व समय से ही आती है इसके लिए किसी कानून की आवश्यक नही है।।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;वैसे अत्यधिक कानून से समाज मे असंतुष्टि व विषमताए ही पैदा होती है लोग अपनी स्वतन्त्रता को बाधित होने पर उसे तोडने का प्रयास करते है जिससे कानून व्यवस्थाओ पर असर पडता है। इसलिए मेरा मानना है कि सरकार को इस कानून को लागू करने से पहले एक बार जरूर सोचना चाहिए। ।&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;RATNESH MISHRAA
                               
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Visit to stimulate mind and body with the new flavor of tea on the basis of occasion,season,time and environment.&lt;div class=&quot;blogger-post-footer&quot;&gt;TEA TOWN Cafe - Soup For The Soul, Place to enjoy the evining with friend
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for relaxation of body.&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://theindianyouths.blogspot.com/feeds/3913119330704870918/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://theindianyouths.blogspot.com/2021/12/blog-post_17.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7681948317863166672/posts/default/3913119330704870918'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7681948317863166672/posts/default/3913119330704870918'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://theindianyouths.blogspot.com/2021/12/blog-post_17.html' title='विवाह एक संस्कार है जो पारिवार सामाज व परम्पराओ के अनुसार सम्पादित होता है ना कि कानून के मुताबिक। '/><author><name>RATNESH MISHRA</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05433941901415165493</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='32' src='//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiUs7BrFO9DMz8ZIIVyHnnohtALZN0mxTNx9q0DeKAn6YpAIpqoNTtR4GKn-WDKAqoTx5YYKg4bXRJXigkPSIH15Kfk1N8vJV3rrc3aORy2Tf6MwBof-zyquWctyWFU4g/s113/IMG-20170219-WA0037.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry></feed>