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जल्दी ही बाकी सभी किताबी धार्मिक और पंथी भी साबित करने लगेंगे की उन्हीं का धर्म सनातन है । हो सकता है, पायलट बाबा, लेपटॉप बाबा, आईफोन बाबा से लेकर रामपाल, आसाराम, रामरहीम…. सभी अपने अपने दड़बे को सनातन धर्म सिद्ध करने लगें

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मैं जानता हूँ कि मेरे इस लेख को पढ़कर आप मुझे गालियां देंगे, मुझे नारीविरोधी कहेंगे, इस लेख को स्त्री जाति का अपमान मानेंगे…..मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता…

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आपके खून पसीने की मेहनत से खड़ी की कम्पनी कुछ ही दिनों बाद आपकी नहीं रह जाती, बल्कि आप खुद उस कम्पनी के नौकर बनकर रह जाते हैं…..क्या आप इसे कम्पनी और स्वयं का उत्थान कहेंगे ?

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त्यागी, बैरागी, करोड़पति, अरबपति साधू-संतों की तरह धन, स्त्री, ऐश्वर्य, भौतिक सुखों को अछूत नहीं मानता हूँ मैं | न ही त्यागी बैरागी साधू-संतों की तरह धन को हाथ नहीं लगाता स्वयं अपितु उसके लिय सेक्रेटरी, या सेवक रखता हूँ |

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स्वयं की उपेक्षा मत कीजिए::: स्वयं ही स्वयं का आदर कीजिए ::::दूसरों के साथ भी प्रेमपूर्ण बर्ताव कीजिए

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आपसे कहा जाता है कि जो पूर्वजों ने अपने अनुभवों से लिखा या कहा वही सही है और आप अपने अनुभवों से जो कुछ भी जानते समझते हैं वह गलत | इसका अर्थ तो यह हुआ कि प्राचीन काल के लोग हमसे अधिक बुद्धिमान व विद्वान थे ? इसका अर्थ तो यह हुआ कि उन्होंने जितना जाना, समझा, उससे आगे की यात्रा हमने की ही नहीं, उन प्राचीनकालीन विद्वानों के लेवल तक भी नहीं उठ पाए, बल्कि उस लेवल पर ही टिके रह गये, जिस लेवल के लोगों को वे विद्वान समझा रहे थे ?

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इनका व्यापार इतना व्यापक है कि नेता तक खरीदे बेचे जाते हैं, वोट खरीदे बेचे जाते हैं | ये व्यापारी अपने ही देश के व्यपारियो को बर्बाद करके विदेशी व्यापारियों को लाभ पहुंचाते हैं ताकि मुनाफा अधिक मिले |

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क्या आप किसी ऐसे धर्म या सम्प्रदाय का सहयोग करते हैं जो अपने सम्प्रदाय के लोगों को अत्याचार, शोषण व भुखमरी से बचाता हो ?

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मुझे आज भी दिल्ली के अंडे के पराठें अवश्य याद आते हैं | सर्दियों के दिनों में ये पराठें मेरी पहली पसंद हुआ करती थी | लेकिन आज मैं इन परांठों के विषय में सोच भी नहीं सकता क्योंकि तब मेरा भगवा कलंकित हो जाएगा

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भ्रष्ट नेताओं, मंत्रियों, अधिकारियों में कोई आपका रिश्तेदार होगा, कोई अपनी जात, धर्म, पार्टी या गाँव का होगा । अब अपनों का बहिष्कार भला कोई कर सकता है ?

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