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<title>अभिव्यक्ति: साहित्य का सुरुचिपूर्ण साप्ताहिक</title>
<description>अभिव्यक्ति ३० मार्च २०१५ </description>
<link>http://www.abhivyakti-hindi.org</link>
<language>hi</language>

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<title>निर्मल वर्मा की कहानी परिंदे </title>
<description>अँधेरे गलियारे में चलते हुए लतिका ठिठक गयी। दीवार का सहारा लेकर उसने लैम्प की बत्ती बढ़ा दी। सीढ़ियों पर उसकी छाया एक बैडौल कटी-फटी आकृति खींचने लगी। सात नम्बर कमरे में लड़कियों की बातचीत और हँसी-ठहाकों का स्वर अभी तक आ रहा था। लतिका ने दरवाजा खटखटाया। शोर अचानक बंद हो गया। “कौन है?"</description>
<link>http://www.abhivyakti-hindi.org/gauravgatha/2015/parinde.htm</link>
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<title>दीपक दुबे का व्यंग्य- नो उल्लू बनाईंग </title>
<description>वैसे तो हम पूरे साल ही मूर्ख बनते रहते हैं, मगर पिछले कई सालों से हमने अपने लिए एक दिवस ही निर्धारित कर लिया है। बल्कि कहें तो फिरंगियों के कारण हमने मूर्ख बनने का एक दिवस निर्धारित किया है।</description>
<link>http://www.abhivyakti-hindi.org/vyangya/2015/na_ullu.htm</link>
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<title>प्रमोद कोव्वप्रत का आलेख- परिंदे- नियति का अँधेरा और उजाले की तलाश</title>
<description>निर्मल वर्मा की कहानियों में एक प्रकार की रोमांटिक संवेदना एवं पीड़ा प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप में व्याप्त है। अस्तित्ववादी मनोवृत्ति, अनिश्चय बोध, मृत्यु-बोध तथा अजनबीपन उनकी कहानियों को अधिक संवेदनशील बना देते हैं।</description>
<link>http://www.abhivyakti-hindi.org/snibandh/2015/parinde-nirmal-verma.htm</link>
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<title>डॉ. अनिल के साथ पर्यटन- समृद्ध परंपराओं का प्रदेश हरियाणा </title>
<description>हरियाणा भारत का वह भू-भाग है, जहाँ भारतीय सभ्यता फली-फूली। यहाँ के गौरवमय इतिहास का वर्णन मनुस्मृति, महाभाष्य, महाभारत तथा पुराणों में भी हुआ है। मनुस्मृति में उल्लेख है कि सरस्वती एवं दृषद्वती नदियों के बीच जो प्रदेश स्थित है, वह ‘ब्रह्मावर्त’ अर्थात् हरियाणा है। </description>
<link>http://www.abhivyakti-hindi.org/paryatan/2015/haryana.htm</link>
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<title>राजेन्द्र तिवारी का संस्मरण- शिमला में घुला निर्मल </title>
<description>निर्मल वर्मा का हिमाचल प्रदेश के साथ गहरा रिश्ता रहा है, इसीलिए इस देवभूमि का उनकी रचनाओं पर गहरा असर दिखाई देता है। सुन्नी के राजा 'राणाभज्जी की कैथू' स्थित लाल–टीन–वाली–छत के जिस मकान 'भज्जी हाउस' में इस महान रचनाकार का जन्म ३ अप्रैल १९२९ को हुआ, वह विवादास्पद मकान अन्नाडेल से ऊपर की तरफ़ लोवर कैथू में आज भी सरकार के आधीन है।</description>
<link>http://www.abhivyakti-hindi.org/sansmaran/2005/nirmal_verma.htm</link>
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<title>संजीवदत्त शर्मा की कहानी- नानी कितनी खुश होतीं </title>
<description>आखिरकार नानी चल बसीं। कंधा देने वाले चार लोग थे और साथ में छह-सात लोग और। कुल मिलाकर एक दर्जन से कम। वो इसलिए कि नानी कोई बड़ी हस्ती तो थीं नहीं। नानी जैसे लोग बगैर हल्ले-गुल्ले के निकल जाते हैं। अखबार में न तो उठावने का विज्ञापन छपाने की जरूरत होती है, न ही उनकी फोटो के साथ क्रिया का विज्ञापन छपाने की।</description>
<link>http://www.abhivyakti-hindi.org/kahaniyan/2015/nani.htm</link>
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<title>ज्योतिर्मयी पंत की लघुकथा- प्रायश्चित </title>
<description>विवाह बाद सभी मेहमान जा चुके थे। अब घर में सिर्फ परिवार के लोग थे। सीमा नई बहू को लेकर जितनी उत्साहित थी, अब उतनी ही चिंताग्रसित भी हो रही थी। उनका ताल मेल कैसा होगा? बहू बहुत पढ़ी लिखी भी थी। </description>
<link>http://www.abhivyakti-hindi.org/kahaniyan/mahanagar_ki_kahaniyan/2015/prayashchit.htm</link>
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<title>डॉ. अशोक उदयवाल से स्वास्थ्य चर्चा- जिमिकंद लोगों की पसंद</title>
<description>जिमिकंद एक गुणकारी व उपयोगी वनस्पति है। इसके पत्ते २-३ फुट लम्बे, गहरे हरे रंग के व हल्के हरे धब्बे वाले होते हैं। इसकी पत्तियाँ अनेक छोटी छोटी लंबोतरी गोल पत्तियों से गुच्छों में घिरी होती हैं।</description>
<link>http://www.abhivyakti-hindi.org/ss/2015/zamikand.htm</link>
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<title>रामलाल शर्मा का आलेख-वाल्मीकि रामायण में शकुन चर्चा </title>
<description>मानवीय सभ्यता अपने विकास के चरम-उत्कर्ष पर पहुँचकर भी शकुनों के घेरे से बाहर, नहीं निकल पाई। विश्व की सभी जातियों में, किसी न किसी रूप में, शकुनों पर विचार चलता ही रहता है। स्वयं को आधुनिकतम कहने वाली जातियों के बीच में भी इनका प्रचलन, थोड़े-बहुत अंतर के साथ, दृष्टिगोचर होता है।</description>
<link>http://www.abhivyakti-hindi.org/snibandh/sanskriti/2015/ramayan.htm</link>
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<title>राम नवमी के अवसर पर- दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों में बसी रामकथा </title>
<description>भारतीय संस्कृति के प्राणाधार भगवान राम दक्षिण-पूर्व एशिया के मुस्लिम देशों की संस्कृति में भी रचे बसे हैं। वहाँ रामकथा विभिन्न रूपों में प्रचलित है और लोक-जीवन से इतनी गहराई तक जुड़ी हुई है कि वह उनकी संस्कृति का अभिन्न अंग बन गई है।</description>
<link>http://www.abhivyakti-hindi.org/snibandh/sanskriti/2009/ramkatha.htm</link>
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<title>गोविन्द उपाध्याय की कहानी- एक टुकड़ा सुख </title>
<description>रिक्शा स्टैण्ड पर उसने रिक्शा खड़ा करके अपना पसीना पोंछा। नगरपालिका के नल से चंद घूँट पानी निगलने के पश्चात उसके गले की जलन तो शांत हो गई, लेकिन खाली पेट में पानी का प्रवेश पाकर, आमाशय विद्रोह कर उठा। </description>
<link>http://www.abhivyakti-hindi.org/kahaniyan/2015/ets.htm</link>
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<title>शशिकांत गीते की लघुकथा- आस्था </title>
<description>बस के चलने में अभी देरी थी। उसने सोचा तब तक एक कट चाय पी ली जाये। उसने चाय पीकर अठन्नी काउंटर पर दी तो चाय वाले ने अठन्नी खोटी कह कर लौटा दी। चाय वाले ने यह न सोचा हो कि उसने जानबूझ कर खोटी अठन्नी दी है। न भी सोचा हो, किसी ने उसे बेवकूफ तो बनाया ही है। उसने सोचा। </description>
<link>http://www.abhivyakti-hindi.org/kahaniyan/mahanagar_ki_kahaniyan/2015/astha.htm</link>
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<title>प्रो. हरिमोहन के साथ पर्यटन- माँझीवन का सौंदर्य </title>
<description>प्राकृतिक परिवेश में खूबसूरत तस्वीर-सा जड़ा एक नया पर्यटक स्थल धीरे-धीरे अपनी पहचान बनाकर उभरा है, जिसका नाम है- ‘माँझीवन’। ‘माँझी’ यानि मध्य और ‘वन’- हरे-भरे मुलायम घास वाले चारागाह (बुग्याल) एवं सघन जंगलवाला इलाका। गढ़वाल तथा हिमालय प्रदेश की सीमा के बीच में होने से ही यह ‘माँझी’ है।</description>
<link>http://www.abhivyakti-hindi.org/paryatan/2015/manjhivan.htm</link>
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<title>विजय बहादुर सिंह का आलेख- एक और निराला </title>
<description>निराला के काव्य-विकास पर नज़र दौडाता हूँ तो विलक्षण मोड़ और उतार-चढाव नज़र आते हैं। छन्दमुक्त को कविता की मुक्ति मानने वाले कवि निराला पाँच-सात सालों में ही हमें संगीतमय तुकान्त छंदों की सौगात ‘गीतिकाङ्क में देते हैं। यही समय है जब वे ‘राम की शक्ति पूजा' जैसी महत् सृष्टि भी करते हैं किन्तु छंदमुक्त में नहीं।</description>
<link>http://www.abhivyakti-hindi.org/snibandh/2015/nirala.htm</link>
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<title>सुषम बेदी की कहानी- कितने कितने अतीत</title>
<description>इधर कुछ दिनों से कौशल्या बस एक ही शिकायत करती थकती न थी। हर किसी से वही कहानी दुहरायी जाती। पहले तो निजी परिचारिका से कहा- हाय हाय मुझसे नहीं देखा जाता वह आदमी। मेरी टेबल पर ही बिठा दिया है उसको।</description>
<link>http://www.abhivyakti-hindi.org/kahaniyan/vatan_se_door/2015/kka.htm</link>
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<title>प्रेरक प्रसंग- बंदरों का मनोविज्ञान </title>
<description>एक बार कुछ वैज्ञानिकों ने एक बड़ा ही अद्भुत प्रयोग किया। उन्होंने ५ बंदरों को एक बड़े से पिंजड़े में बंद कर दिया और बीचों-बीच एक सीढ़ी लगा दी, जिसके ऊपर केले लटक रहे थे। जैसे कि उम्मीद थी, एक बन्दर की नज़र केलों पर पड़ी। </description>
<link>http://www.abhivyakti-hindi.org/prerakprasang/2015/bandaron.htm</link>
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<title>देवी नागरानी की कलम से- रचनाकार राधेश्याम शुक्ल </title>
<description>राधेश्याम शुक्ल व्यक्ति नहीं, गीत नवगीत ग़ज़ल, दोहा, के एक विद्यालय हैं। उनके रचना संसार का क्षितिज विस्तृत व अत्यंत व्यापक है। उनकी भाषा विचलनपरक शब्दों तथा लक्षणिक शब्दावली के कारण रसमयी और विलक्षण हो उठती है। </description>
<link>http://www.abhivyakti-hindi.org/snibandh/2015/radheshyam_shukla.htm</link>
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<title>अंबरीष श्रीवास्तव का आलेख- कहानी बाँसुरी की </title>
<description>भगवान श्रीकृष्ण और वंशी एक दुसरे के बिना अधूरे हैं, प्रभु श्रीकृष्ण की वंशी तो शब्दब्रह्म का प्रतीक है। ऐसा भी समझा जाता है कि बाँस निर्मित वंशी के आविष्कारक संभवतः कन्हैया जी ही हैं।</description>
<link>http://www.abhivyakti-hindi.org/snibandh/sanskriti/2015/bansuri.htm</link>
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<title>राजेन्द्र प्रसाद सिंह का आलेख- भोजपुरी में नीम, आम और जामुन </title>
<description>डॉ भ़ोलाशंकर व्यास ने प्रो प्रजीलुस्की के हवाले से बताया है कि "म्ब" "बु" ध्वनिवाले संस्कृत शब्दों में से अधिकतर शब्द मुंडा भाषाओं से आए हैं। "निंब, अंब और जंबु ऐसे ही शब्द हैं।</description>
<link>http://www.abhivyakti-hindi.org/prakriti/2005/bhojpuri.htm</link>
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