<?xml version='1.0' encoding='UTF-8'?><rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:openSearch="http://a9.com/-/spec/opensearchrss/1.0/" xmlns:blogger="http://schemas.google.com/blogger/2008" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:gd="http://schemas.google.com/g/2005" xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0" version="2.0"><channel><atom:id>tag:blogger.com,1999:blog-8475792039111759199</atom:id><lastBuildDate>Mon, 17 Nov 2025 14:23:36 +0000</lastBuildDate><category>कुण्डलिनी जागरण</category><category>मूलाधार चक्र</category><category>जुड़वाँ लौ (ट्विन फ्लेम )</category><category>ध्यान</category><category>अध्यात्म परिचय</category><category>कुण्डलिनी चक्र</category><category>अध्यात्मिक कथाएँ</category><category>गुरुज्ञान</category><category>गुरुवाणी</category><title>Adhyatmik Jagat </title><description>आपका समय अब आ चुका है इन सब बातों को जानने का खुद के अंदर झांखने का रुबरु होने का. आप इसलिए नही इतनी देर तक मेरा लेख पढ़ रहे है की क्या है ये सब?आप इसलिए पढ़ रहें है की अब आपको अपनी आत्मा एक नयी दिशा की और खींच रही है.</description><link>https://www.adhyatmikjagat69.co/</link><managingEditor>noreply@blogger.com (Unknown)</managingEditor><generator>Blogger</generator><openSearch:totalResults>40</openSearch:totalResults><openSearch:startIndex>1</openSearch:startIndex><openSearch:itemsPerPage>25</openSearch:itemsPerPage><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-8475792039111759199.post-4565601289231237943</guid><pubDate>Fri, 25 Aug 2023 15:32:00 +0000</pubDate><atom:updated>2024-09-28T15:50:33.616+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">जुड़वाँ लौ (ट्विन फ्लेम )</category><title>जुड़वाँ आत्मा के दिव्यपुरुष कैसे होते हैं?</title><description>आज हम जानेंगे की जुड़वाँ आत्मा के दिव्यपुरुष कैसे होते हैं? पिछले लेख में आपने दिव्यस्त्री के बारें में अच्छी तरह से जान लिया होगा. इस बात की खेद हैं मुझे की आप लोगों को मेरे लेख का इंतज़ार करना पड़ा उसके लिए मैं आपसे क्षमा प्रार्थी हूँ. ज्यादा वक़्त न लेते हुए हम आज जानते हैं की जुड़वाँ आत्मा के दिव्यपुरुष कैसे होते हैं?
&lt;div&gt;अगर मैं यह कहूँ की &lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2022/10/judwa-aatma-ki-divyastree-kaisi-hoti-hain..html&quot; target=&quot;_blank&quot;&gt;दिव्यस्त्री के गुण और अवगुण लक्षण&lt;/a&gt; आपने पढ़े होंगे तो कोई ज़्यादा अंतर नहीं&amp;nbsp; रहता दिव्यपुरुष को समझने के लिए। ये उनका ही हिस्सा होते हैं किन्तु मन में प्रश्न तो उठ ही रहे होंगे अंततः दिव्यपुरुष होते कैसे हैं ? ये भी शिव और नारायण के ही स्वरुप होते हैं जैसे दिव्यस्त्री शक्ति का स्वरुप होती हैं। अप्सरा, यक्षिणी, भैरवी होते हैं वैसे ही दिव्यपुरुष भी गन्धर्व, यक्ष, भैरव होते हैं. ये किस जाती के देवता होंगे ये कोई नहीं बता सकता यह सिर्फ इन्हे ज्ञात होता हैं और ना भी ज्ञात हो तो समय उन्हें अपने अस्तित्व के बारें में सारे उत्तर दे देता हैं. पर हाँ इनके जन्म लेने का उद्देश्य बहुत बड़ा होता हैं जैसे की प्रेम का पाठ सिखाना, समाज में नया परिवर्तण लाना, मानवता कल्याण करना, पृथ्वी का संतुलन करना, मानव समाज में रूढ़िवादी विचारों से मुक्त कराना और स्वयं के साथ साथ दूसरों के लिए भी मोक्ष के रास्ते खोलना। यूं कह सकते हैं की ये उत्कृष्ठ व्यक्तित्व के व्यक्ति होते हैं इसलिए तो इन्हे दिव्यपुरुष कहते हैं।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;h3 style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;जुड़वाँ आत्मा दिव्यपुरुष के अवगुण&amp;nbsp;&lt;/h3&gt;&lt;div&gt;मैंने अपने ज्ञान और अनुभव से इस यात्रा की शोध की हैं सारे दिव्यपुरुष ऐसे होंगे ये मैं क़दापि नहीं कहती इनके प्रकार भी होते हैं जिस कारण कोई ज़्यादा अवगुण से भरा होता हैं कोई कम अवगुण से। अब जो ये लेख पढ़ेगा उसे अपने दिव्यपुरुष के अवगुण समझ आएंगे की कितना सच और कितना अभी सच आना बाकि हैं आपके सामने। हो सकता हैं की कुछ अवगुण अब दिखे कुछ बाद में क्या पता ? किन्तु कहने का ताप्तर्य यही हैं की गुण होते हैं तो अवगुण भी होते हैं इसे स्वीकार करे और ये एक ज्ञान के लिए ही नहीं अपितु इन्हे सुधारने की दृष्टि से भी बता रही हूँ ताकि आप अपने गुण अवगुणो पर कार्य करें। अलग अलग जुड़वाँ आत्मा के जोड़े अलग अलग स्तर के होते हैं अब ये किस स्तर के होंगे ये खुद आप सोचे और अपना आंतरिक कार्य शुरू करे जिन्हे हम इनर वर्क भी कहते हैं। अब बात रही अवगुणों की तो उत्कृष्ठ गुणों के साथ साथ मानव देह में कोई न कोई तो अवगुण होते ही हैं। क्यों होते हैं ? क्योंकि आत्मा पर पिछले संचित कर्मो का भार भी होता हैं अगर ये अच्छे कर्मा लेकर आएं हैं तो बुरे कर्मा भी स्वतः आ जाते हैं जो इस जनम में इनमें साफ़ नज़र आती हैं। इनके कुछ अवगुण लक्षण हैं जो इस प्रकार हैं।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;ol style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;li&gt;&amp;nbsp;ये हमेशा किसी भी बातों को पहले बहुत तोलते हैं और कभी कभी बहुत बोलते हैं.&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&amp;nbsp;इन्हे तर्क-वितर्क करना बहुत पसंद होता है और न भी पसंद हो तभी इनका एक स्वाभाव होता हैं जिस कारण से बाकि लोगों पर इनका बुरा प्रभाव भी पड़ता हैं और अच्छा प्रभाव भी. ये बुरा किसी का भी नहीं करते पर इनके हरकतों से अक्सर आस पास ले लोगों को परेशानियां उठानी पड़ती हैं।&amp;nbsp;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&amp;nbsp;ये कभी कभी बहुत ही भावनात्मक हो जाते हैं जिस कारण इन्हे आसानी से कोई भी छल जाता हैं।&amp;nbsp;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&amp;nbsp;पर ये बहुत कड़क स्वाभाव के और रूढे वादी भी होते हैं जिस कारण अन्य लोगों को भी इनके कारण&amp;nbsp; समस्याओं का सामना करना पड़ता हैं.&lt;/li&gt;&lt;li&gt;अभद्र भाषाओँ का प्रयोग करना अभद्र व्यव्हार रखना और कभी कभी स्वाभाव से इतने सक्त हो जाना की इनका ही इसमें हानि हो जाता हैं.&amp;nbsp;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&amp;nbsp;इनमे आत्मविश्वास की कमी भी हो जाती हैं तो कभी कभी ये धोकेबाज़ी के शिकारी भी बन जाते हैं.&lt;/li&gt;&lt;li&gt;इन्हे बुरी आदतें बहुत जल्द लग जाती हैं जैसे मांसाहरी, शराब, बीड़ी, नशा करना लड़कीबाज होना और बहुत ही बार तो ये अपने ऊर्जा को गलत दिशा में लगाकर खुद का और दूसरों का भी नुक्सान कर देते हैं।&amp;nbsp;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;घुस्सा करना, झूठ बोलना, सामने वाले पे कभी कभी दया न दिखाना कभी क्रूर हो जाना।&amp;nbsp;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;अगर ये जागरूक नहीं हैं तो जलन की भावनाएं तो बहुत होती हैं खास कर अपने दिव्यस्त्री को लेकर जिस कारण इन दोनों के बीच में अलगाव हो जाता है और इसी कारण से इनके बाकि सम्बन्धियों से भी सम्बन्ध ख़राब हो जाते हैं।&amp;nbsp;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;इन्हे बस अपना वर्चस्व बढ़ाना होता हैं क्योंकि इनमें घमंड की कोई कमी नहीं होती, कभी कभी ये समझ नहीं पातें की ये घमंड हैं या आत्मसम्मान ?&lt;/li&gt;&lt;li&gt;इन्हे भी डर बहुत होता हैं किसी न किसी चीज़ या बात को लेकर और ये कभी अपनी गलतियां स्वीकार करते ही नहीं क्योंकी ये अपनी कमज़ोरी किसी को भी नहीं दिखाना चाहते। हमेशा इनकी मनमानी चलाते हैं और जहा न चलाएं वहां झगड़े फसाद शुरू कर देते हैं।&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/li&gt;&lt;/ol&gt;&lt;/div&gt;&lt;table align=&quot;center&quot; cellpadding=&quot;0&quot; cellspacing=&quot;0&quot; class=&quot;tr-caption-container&quot; style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto;&quot;&gt;&lt;tbody&gt;&lt;tr&gt;&lt;td style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;जुड़वाँ आत्मा के दिव्यपुरुष कैसे होते हैं&quot; style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto;&quot;&gt;&lt;img alt=&quot;जुड़वाँ आत्मा के दिव्यपुरुष कैसे होते हैं&quot; border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;369&quot; data-original-width=&quot;640&quot; height=&quot;185&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEi_OGR1mB4Zms8004vSDGz9O1R-XMGQawHPXUBthFNvR_Bw7YJCpWYOeNJjBA7KVovirF0ssqX69-ak7Q0cSzWCiz_w-4hIDmVUDPoQ6uSMtkCpmhhAk-m7JNsWEKVr_dsT1k4CdZz57XmIYqzmriwzALfh1Ss0lMR4-jCf8M8JfCGJX09KZCg4jY89rEnf/w320-h185/judwa-aatma-divyapurush-ke-goon.jpg&quot; title=&quot;जुड़वाँ आत्मा के दिव्यपुरुष कैसे होते हैं&quot; width=&quot;320&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;&lt;tr&gt;&lt;td class=&quot;tr-caption&quot; style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;image source:vecteezy.com&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;&lt;/tbody&gt;&lt;/table&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;h3 style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;b&gt;जुड़वाँ आत्मा दिव्यपुरुष के गुण&amp;nbsp;&lt;/b&gt;&lt;/h3&gt;&lt;div&gt;१. दिव्यपुरुष भगवान के स्वरुप होते है, जिस तरह से दिव्यस्त्री के अलग अलग रूप होते हैं ये ठीक उसी प्रकार उन्ही के स्वरुप होते हैं. यह महानता, न्याय और दया के मूरत होते हैं। पर ये उतने ही सक्त स्वाभाव के होते हैं।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;२. ये इतने तेजस्वी और दिव्य आत्मा होते हैं की इनका तेज सामान्य लोग नहीं समझ पातें ना हि संभाल पाते हैं। इनके तेज़ से समाज में एक नया परिवर्तन घटित होता हैं. दिव्यपुरुष जहा खड़े हो जाते हैं वही से एक नया परिवर्तन आना शुरू हो जाता हैं। इसे युग परिवर्तन भी कह सकते हैं। लोग इन्हे भगवान कहते भी हैं और मानते भी हैं।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;३. बचपन से इनके अंदर दिव्यता और शालीनता होती हैं पर जब ये जागरूक हो जाते हैं तब इनमे ये गुण तेजी से जागरूक हो जाते हैं और अपने मोक्ष के साथ साथ ये अन्य लोगों को भी अध्यात्मिक तौर से जागरूक करते हैं।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;४. इनमें निर्णय लेने की अच्छी क्षमता होती हैं ज़्यादा तौर पर ये न्याय के दृश्टिकोण से ही निर्णय लेते हैं इसलिए ये भगवान भी कहलाते हैं। ये कम बीमार पड़ते हैं जो की इनमें दिव्यता होती हैं तो ये खुद ही अपने रोग को बहुत हद तक सुधार देते हैं या नष्ट कर देते है।&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;५. दिव्यपुरुष एक उच्च कोटि के वैद्य [ हीलर ] भी होते हैं. जिस कारण ये समाज में एक प्रतिष्ठित व्यक्ति और अच्छे वैद्य भी कहलाते हैं।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;६. ये दिखने में शायद आपको मॉडर्न या साधारण से लगे परन्तु ये अंदर से एक योगी होते हैं, इनमे आकर्षण बहुत होता हैं तो स्वभाविकता ही लोग इनके वश में रहते हैं ये कुछ ना भी करें तो भी लोग इनसे या तो जलते हैं या प्रभावित रहते हैं। इन्हे हमेशा अपनी भक्ति पूरी करनी की चिंता रहती हैं , साथ में इन्हें अपनी दिव्यस्त्री की भी बहुत आवश्यकता होती हैं। जिसके बिना इनकी भक्ति और मोक्ष अपूर्ण रहती हैं।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;७. दिव्यस्त्री के बिना ये हमेशा ही अपने आप को अपूर्ण महसूस करते हैं। दिव्यस्त्री के अलावा इन्हे कोई पा भी नहीं सकता। कर्म संबंध में चाहे जितना अटके हो परन्तु प्रेम तो केवल दिव्यस्त्री से ही प्राप्त होता हैं , बाकियो से तो बस कर्म का सम्बन्ध होता हैं। और ये बात यह अच्छे से जानते हैं तभी ये हमेशा दिव्यस्त्री को ही चुनते हैं।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;८. इनकी जागरूकता के बाद किसी भी रिश्ते पर ये सिर्फ और सिर्फ अपने दिव्यस्त्री को ही चुनते हैं। चाहे इनके जीवन में जो भी हो इन्हें ये ज्ञात रहता हैं की दिव्यस्त्री के बिना इनका जीवन, भक्ति और मोक्ष अपूर्ण ही रहती हैं.&lt;/div&gt;&lt;div&gt;९. इनमे भी इंटुइशन बहुत अच्छी होती हैं जिन्हे हम सहज पाठक भी कहते हैं। जिस कारण ये समाज में अच्छे कार्य करते हैं और नए विचारों से नयी दिशा समाज के लिए बनाते है।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;१०. इनमें इतनी शुभता होती हैं की ये जहा जाए वहाँ के बिघडे काम सवर जाते हैं।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;११. इनमें सम्भोग की भावना बहुत ज़्यादा होती हैं जिस कारण इनके जीवन में दो से अधिक पत्नियां भी होती हैं परन्तु जब ये जागरूक हो जाते हैं तो ये सिर्फ अपने दिव्यस्त्री के ही होते हैं और अपने वासना को शुद्ध रुपी प्रेम में परिवर्तित करते हैं।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;१२. जिस प्रकार दिव्यस्त्री दिव्यपुरुष के बिना अपूर्ण हैं, ठीक उसी प्रकार दिव्यपुरुष भी दिव्यस्त्री के बिना अपूर्ण हैं इसलिए तो ये एकदूसरे के पूरक हैं।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;१३.सिर्फ दिव्यस्त्री ही होती हैं जो इन्हे पूरा कर पाती हैं और इनकी ऊर्जा को पूरी तरीके से शांत करती हैं तब ये अपने आप में एक पूर्णता अनुभव करते हैं फिर ये अपनी भक्ति पूरी कर पाते हैं.&lt;/div&gt;&lt;div&gt;१४. यह झूठ, फरेबी, धोखाधाड़ी, अपमान और अपनी ऊर्जा को व्यर्थ नष्ट करना कदापि पसंद नहीं करते।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;१५. ये हर परिस्थिति में बहुत शांत आनंदित रहते हैं। और किसी विकट स्थिति में अगर ये घिर गए हो तो ये बहुत जल्दी से अपना रास्ता ढूंढ लेते हैं या रास्ता बना ही लेते है। यह बोलने में महारथी होते हैं इसलिए किसी से भी अपना कार्य आसानी से करवा ही लेते हैं।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;१६. इनके पास गुप्त विद्याएं भी होती हैं जो की सिर्फ और सिर्फ एक अच्छे शिष्य को ही ये प्रदान करते हैं।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;१७. इन्हें समाज से कोई लेना देना नहीं होता हैं परन्तु अपना कार्य बहुत अच्छी करते हैं और साथ में समाज की निस्वार्थ सेवा भी करते हैं तभी तो ये भगवान भी कहलाते हैं।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;१८. इनमें निस्वार्थ की भावना बहुत होती हैं इसलिए ये अच्छे समाजसुधारक भी बनते हैं और अच्छे राजनैतिज्ञ भी और जब भी ऐसा मौका आता हैं तो ये हमेशा ही एक बहुत अच्छे पद पे बैठे होते हैं। यह राजाओं जैसे ज़िन्दगी जीते हैं।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;१९. ये लोगों में आपसी प्रेम, समर्पण भावना, धर्मस्थापना, पूजापाठ भी सिखाते हैं समाज में सही गलत का पांठ भी पढ़ाते हैं क्योंकि यह बहुत साहसी होते हैं इनमे डर नहीं होता इनमे डर बहुत कम मात्रा में होता हैं जिस कारण&amp;nbsp; लोगों के ये प्रिय व्यक्ति भी बनते हैं और निडर योद्धा भी कहलाते हैं।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;२०. ये साफ़ सफाई ज्यादा पसंद करते हैं, इनमे सिखने और सिखाने की क्षमता अपार होती हैं, ये एक अच्छे शिष्य होते हैं जिस वजह से ये समाज में एक सच्चे और अच्छे उच्च कोटि के गुरु भी बनते हैं, ये अध्यात्मिक गुरु, धरम गुरु, प्रोफेसर, अध्यापक, न्यायधीश और समाजसुधारक भी बनते हैं।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;२१. ये इतने सौभाग्यशाली होते हैं की इनके जन्म के समय से ही ब्रह्माण्ड की शक्तियां साथ होती हैं, पूरा सहयोग होता हैं और समय समय पर इनके सारी इच्छाएं पूरी होती रहती हैं। ये अपने आप में एक उच्च कोटि की आत्मा होती हैं तो इनके मंज़िलें भी बहुत संघर्ष से भरे होते हैं और ये आसानी से उन समस्याओं से बाहर भी निकल जातें हैं और निखर आते हैं।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;२२. ये अपने साथ साथ लोगों का भी अच्छा परिवर्तन करते हैं, इनमें ये कला जन्म से ही उपस्थित होती हैं बस शर्त इतना की इनमे ये सही दिशा में सही गुरु के मार्गदर्शन में जगाना होता हैं। किसी किसी में ये पहले से ही जागरूक होते हैं बस दिशा की और आज्ञा की आवश्यकता होती हैं। अपने गुरु के शब्दों का पालन करना और समय पर जान न्योछावर करना पड़े तो कभी दोबारा दोबारा सोचेंगे भी नहीं ऐसी क्षमता इनमें अपार होती हैं।&amp;nbsp; &amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;२३. इनमें योग, ध्यान, तंत्र विद्या सिखने और सिखाने की क्षमता बहुत होती हैं दिव्यपुरुष अपना औदा आध्यात्मिक जगत में भी अच्छे पद पर स्थापित करते हैं। जिस वजह से ये सद्गुरु भी कहलाते हैं। ज्यादातर दिव्यपुरुष अपना जीवन साफ़ सुथरा, शांति पूर्वक और साधारण तरीके से ही जीना पसंद करते हैं।&amp;nbsp; &amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;२४. दिव्यपुरुष नीडर, पराक्रमी, सुन्दर, आकर्षित, आवाज़ में तेज़, पूर्ण पौरुषता लिए, मजबूत भुजाएं, साहस भरा सीना, आँखों में संमोहन चेहरे पे १२ सूर्य का तेज, शांतचित्त मन, बुद्धिमान, दयालु, प्रकृति के रक्षक, कोमल ह्रदय, कठोर निर्णायक, कामकला से संपूर्ण, उच्च कोटि के योगी, महान, धैर्यवान, शूरवीर, सौभाग्यशाली, पुण्यवान, एकनिष्ठ और मर्यादित होते हैं।&amp;nbsp; &amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;table align=&quot;center&quot; cellpadding=&quot;0&quot; cellspacing=&quot;0&quot; class=&quot;tr-caption-container&quot; style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto;&quot;&gt;&lt;tbody&gt;&lt;tr&gt;&lt;td style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiA4vOEIAR31c4_22H-M_-IHJyFqmmeLZ7FaNFX7yxRkboTaBqSdrOZ_8J9aDkWhaGrkmdgCYEggWfGc5PVufr1Xm7fxn_U_UFyMoAeqgUyGBWXcP5sShXNnY3It1gocTaD_CPJtaKPwpp0YCI6W8o03UjxRq4Myoigp0_uxtyFSICTmMuBOxB9IRgH-T8e/s640/judwa-aatma-jagruk-divyapurush.jpeg&quot; style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto;&quot;&gt;&lt;img alt=&quot;जुड़वाँ आत्मा के दिव्यपुरुष कैसे होते हैं&quot; border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;427&quot; data-original-width=&quot;640&quot; height=&quot;214&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiA4vOEIAR31c4_22H-M_-IHJyFqmmeLZ7FaNFX7yxRkboTaBqSdrOZ_8J9aDkWhaGrkmdgCYEggWfGc5PVufr1Xm7fxn_U_UFyMoAeqgUyGBWXcP5sShXNnY3It1gocTaD_CPJtaKPwpp0YCI6W8o03UjxRq4Myoigp0_uxtyFSICTmMuBOxB9IRgH-T8e/w320-h214/judwa-aatma-jagruk-divyapurush.jpeg&quot; title=&quot;जुड़वाँ आत्मा के दिव्यपुरुष कैसे होते हैं&quot; width=&quot;320&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;&lt;tr&gt;&lt;td class=&quot;tr-caption&quot; style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;image source:vecteezy.com&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;&lt;/tbody&gt;&lt;/table&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;यदि मैं कहूँ की आज के युग में ऐसा कौन होगा, तो मेरी नज़र में श्री संत गुरु राधा स्वामी, सद्गुरु वासूदेव जग्गी, गुरु सूरज प्रताप जी, गुरु धीरेन्द्र शास्त्री जी जिन्हे हम बागेश्वर धाम के नाम से जानते हैं, गुरुदेव श्री नंदकिशोर श्रीमाली जी, गुरुदेव श्री कैलासचंद्र श्रीमाली जी, गुरुदेव श्री अर्विंद श्रीमाली जी हैं। उनका चरित्र और उनका जीवन आप देखोगे तो आप भी विश्वास कर लोगे। और मानव सेवा और विचार परिवर्तन में कहु तो श्री रतन जी टाटा और आचार्य प्रशांत हैं। यह मैंने अपने दृष्टिकोण की बात कही हैं आपके दृष्टिकोण से कोई और होगा किन्तु उदाहरण के दृष्टि से मैंने आपको समझाने का प्रयास किया हैं। और यदि मैं भूतकाल की बात करू तो ऐसे बहोत नाम हैं आपको बताने के लिए। जैसे की भगवान में श्री रामचंद्र जी, श्री कृष्ण, श्री गुरु आदिशंकराचार्य, महावीर जैन , गौतम बुद्धा , योद्धा में छत्रपति शिवाजी महाराज, संभाजी महाराज, पोरस, चंद्रगुप्त मौर्य, अशोका, पंचपांडव, फिर संतों में श्री संत ज्ञानेश्वर देव, श्री संत तुकाराम महाराज, परमहंस श्री रामकृष्ण, स्वामी विवेकानंद, श्री संत वामखेपा, संत कबीर, दास, गुरु वों में गुरु नानक जी, गुरु गोबिंद सिंह, गुरु ओशो, डॉ. श्री नारायण दत्त श्रीमाली जी जो परमहंस श्री सदगुरुदेव निखिलेश्वरानंद जी ही हैं। आप इनके जीवन का इतिहास उठाकर देखिये कही भी सहज नहीं था इनके लिए अपना व्यक्तित्व ऊँचा करने के लिए किन्तु इन्होने कर के दिखाया और आज हम सभी इन्हे भगवान के रूप में पूजते हैं, कभी योद्धा के रूप में हमारा सीना गर्व से चौड़ा करते हैं, तो कभी संतों के समक्ष अपना शीश झुकाकर अपने आप को समर्पित करते हैं। यदि आप दिव्यपुरुष हैं और जागरूक नहीं या आपको भी ऐसा बनना हैं तो आज से अभी से अपने कर्मों को हाथ लो और बुरे कर्मो को नष्ट करने की ज़िम्मेदारी उठाओ आपके नसीब में चाहे जो लिखा हो पर आपके कर्मों को बदलना आपके हाथों में हैं और नसीब तब बदलता हैं जब आप अपने कर्मा बदलते हो। आप सोए हुए हैं तो जाग जाओ और अपने अशुद्धियों पर कार्य कीजिये आप देखोगे की आप कब श्रेष्ठ बन गए आपको ज्ञात ही नहीं। ये प्रक्रिया एक दिन की नहीं परन्तु एक दिन में अवश्य घटित हो जाएगी और वो क्षण आपको अपने जीवन में लाना हैं। समय तब बदलता हैं जब आप बदलते हो और अब आप सभी के पास समय बहुत कम हैं इसे व्यर्थ न गवाएं इसे उपयोग में लाये। अन्त में इतना ही कहना पर्याप्त मात्र समझती हूँ की आपके जीवन के उद्देश्य, मानव कल्याण, भक्ति पथ, मोक्ष और आपकी दिव्यस्त्री आपकी राह देख रहे हैं। आप सभी अपने जीवन के उद्देश्यों को बिना रुके बिना थके पूर्ण कीजिये और पूर्ण करने की क्षमता परमात्मा आपको शक्ति और सही मार्गदर्शन करें। मुझे विश्वास हैं की आपको इस लेख से बहुत कुछ प्राप्त हो गया हैं और यदि कुछ प्रश्न हैं तो आप मुझे सोशल मीडिया के पेज से, कमैंट्स बॉक्स से , ईमेल से संपर्क कर सकते हैं। मैं अवश्य ही आपकी ह्रदय से सहायता करुँगी। आज के लेख में बस इतना ही अपने वाणी को विश्राम देते हुए आपसे फिर मिलने की आज्ञा लेती हूँ और बहुत जल्द एक नए विषय पे लेख लाती हूँ तब तक आप अपना और अपनों का ध्यान रखे आनंदित रहिये और अपने जीवन के उद्देश्य को पूर्ण करते रहिये।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;h4 style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;🙏&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;जय गुरुदेव, हर हर महादेव।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;🙏&amp;nbsp;&lt;/h4&gt;</description><link>https://www.adhyatmikjagat69.co/2023/08/blog-post.html</link><author>noreply@blogger.com (Unknown)</author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEi_OGR1mB4Zms8004vSDGz9O1R-XMGQawHPXUBthFNvR_Bw7YJCpWYOeNJjBA7KVovirF0ssqX69-ak7Q0cSzWCiz_w-4hIDmVUDPoQ6uSMtkCpmhhAk-m7JNsWEKVr_dsT1k4CdZz57XmIYqzmriwzALfh1Ss0lMR4-jCf8M8JfCGJX09KZCg4jY89rEnf/s72-w320-h185-c/judwa-aatma-divyapurush-ke-goon.jpg" height="72" width="72"/><thr:total>0</thr:total></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-8475792039111759199.post-5128691035948467829</guid><pubDate>Fri, 25 Aug 2023 15:32:00 +0000</pubDate><atom:updated>2023-08-25T21:02:34.421+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">जुड़वाँ लौ (ट्विन फ्लेम )</category><title>जुड़वाँ आत्मा के दिव्यपुरुष कैसे होते हैं?</title><description>आज हम जानेंगे की जुड़वाँ आत्मा के दिव्यपुरुष कैसे होते हैं? पिछले लेख में आपने दिव्यस्त्री के बारें में अच्छी तरह से जान लिया होगा. इस बात की खेद हैं मुझे की आप लोगों को मेरे लेख का इंतज़ार करना पड़ा उसके लिए मैं आपसे क्षमा प्रार्थी हूँ. ज्यादा वक़्त न लेते हुए हम आज जानते हैं की जुड़वाँ आत्मा के दिव्यपुरुष कैसे होते हैं?
&lt;div&gt;अगर मैं यह कहूँ की &lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2022/10/judwa-aatma-ki-divyastree-kaisi-hoti-hain..html&quot; target=&quot;_blank&quot;&gt;दिव्यस्त्री के गुण और अवगुण लक्षण&lt;/a&gt; आपने पढ़े होंगे तो कोई ज़्यादा अंतर नहीं&amp;nbsp; रहता दिव्यपुरुष को समझने के लिए। ये उनका ही हिस्सा होते हैं किन्तु मन में प्रश्न तो उठ ही रहे होंगे अंततः दिव्यपुरुष होते कैसे हैं ? ये भी शिव और नारायण के ही स्वरुप होते हैं जैसे दिव्यस्त्री शक्ति का स्वरुप होती हैं। अप्सरा, यक्षिणी, भैरवी होते हैं वैसे ही दिव्यपुरुष भी गन्धर्व, यक्ष, भैरव होते हैं. ये किस जाती के देवता होंगे ये कोई नहीं बता सकता यह सिर्फ इन्हे ज्ञात होता हैं और ना भी ज्ञात हो तो समय उन्हें अपने अस्तित्व के बारें में सारे उत्तर दे देता हैं. पर हाँ इनके जन्म लेने का उद्देश्य बहुत बड़ा होता हैं जैसे की प्रेम का पाठ सिखाना, समाज में नया परिवर्तण लाना, मानवता कल्याण करना, पृथ्वी का संतुलन करना, मानव समाज में रूढ़िवादी विचारों से मुक्त कराना और स्वयं के साथ साथ दूसरों के लिए भी मोक्ष के रास्ते खोलना। यूं कह सकते हैं की ये उत्कृष्ठ व्यक्तित्व के व्यक्ति होते हैं इसलिए तो इन्हे दिव्यपुरुष कहते हैं।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;h3 style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;जुड़वाँ आत्मा दिव्यपुरुष के अवगुण&amp;nbsp;&lt;/h3&gt;&lt;div&gt;मैंने अपने ज्ञान और अनुभव से इस यात्रा की शोध की हैं सारे दिव्यपुरुष ऐसे होंगे ये मैं क़दापि नहीं कहती इनके प्रकार भी होते हैं जिस कारण कोई ज़्यादा अवगुण से भरा होता हैं कोई कम अवगुण से। अब जो ये लेख पढ़ेगा उसे अपने दिव्यपुरुष के अवगुण समझ आएंगे की कितना सच और कितना अभी सच आना बाकि हैं आपके सामने। हो सकता हैं की कुछ अवगुण अब दिखे कुछ बाद में क्या पता ? किन्तु कहने का ताप्तर्य यही हैं की गुण होते हैं तो अवगुण भी होते हैं इसे स्वीकार करे और ये एक ज्ञान के लिए ही नहीं अपितु इन्हे सुधारने की दृष्टि से भी बता रही हूँ ताकि आप अपने गुण अवगुणो पर कार्य करें। अलग अलग जुड़वाँ आत्मा के जोड़े अलग अलग स्तर के होते हैं अब ये किस स्तर के होंगे ये खुद आप सोचे और अपना आंतरिक कार्य शुरू करे जिन्हे हम इनर वर्क भी कहते हैं। अब बात रही अवगुणों की तो उत्कृष्ठ गुणों के साथ साथ मानव देह में कोई न कोई तो अवगुण होते ही हैं। क्यों होते हैं ? क्योंकि आत्मा पर पिछले संचित कर्मो का भार भी होता हैं अगर ये अच्छे कर्मा लेकर आएं हैं तो बुरे कर्मा भी स्वतः आ जाते हैं जो इस जनम में इनमें साफ़ नज़र आती हैं। इनके कुछ अवगुण लक्षण हैं जो इस प्रकार हैं।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;ol style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;li&gt;&amp;nbsp;ये हमेशा किसी भी बातों को पहले बहुत तोलते हैं और कभी कभी बहुत बोलते हैं.&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&amp;nbsp;इन्हे तर्क-वितर्क करना बहुत पसंद होता है और न भी पसंद हो तभी इनका एक स्वाभाव होता हैं जिस कारण से बाकि लोगों पर इनका बुरा प्रभाव भी पड़ता हैं और अच्छा प्रभाव भी. ये बुरा किसी का भी नहीं करते पर इनके हरकतों से अक्सर आस पास ले लोगों को परेशानियां उठानी पड़ती हैं।&amp;nbsp;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&amp;nbsp;ये कभी कभी बहुत ही भावनात्मक हो जाते हैं जिस कारण इन्हे आसानी से कोई भी छल जाता हैं।&amp;nbsp;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&amp;nbsp;पर ये बहुत कड़क स्वाभाव के और रूढे वादी भी होते हैं जिस कारण अन्य लोगों को भी इनके कारण&amp;nbsp; समस्याओं का सामना करना पड़ता हैं.&lt;/li&gt;&lt;li&gt;अभद्र भाषाओँ का प्रयोग करना अभद्र व्यव्हार रखना और कभी कभी स्वाभाव से इतने सक्त हो जाना की इनका ही इसमें हानि हो जाता हैं.&amp;nbsp;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&amp;nbsp;इनमे आत्मविश्वास की कमी भी हो जाती हैं तो कभी कभी ये धोकेबाज़ी के शिकारी भी बन जाते हैं.&lt;/li&gt;&lt;li&gt;इन्हे बुरी आदतें बहुत जल्द लग जाती हैं जैसे मांसाहरी, शराब, बीड़ी, नशा करना लड़कीबाज होना और बहुत ही बार तो ये अपने ऊर्जा को गलत दिशा में लगाकर खुद का और दूसरों का भी नुक्सान कर देते हैं।&amp;nbsp;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;घुस्सा करना, झूठ बोलना, सामने वाले पे कभी कभी दया न दिखाना कभी क्रूर हो जाना।&amp;nbsp;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;अगर ये जागरूक नहीं हैं तो जलन की भावनाएं तो बहुत होती हैं खास कर अपने दिव्यस्त्री को लेकर जिस कारण इन दोनों के बीच में अलगाव हो जाता है और इसी कारण से इनके बाकि सम्बन्धियों से भी सम्बन्ध ख़राब हो जाते हैं।&amp;nbsp;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;इन्हे बस अपना वर्चस्व बढ़ाना होता हैं क्योंकि इनमें घमंड की कोई कमी नहीं होती, कभी कभी ये समझ नहीं पातें की ये घमंड हैं या आत्मसम्मान ?&lt;/li&gt;&lt;li&gt;इन्हे भी डर बहुत होता हैं किसी न किसी चीज़ या बात को लेकर और ये कभी अपनी गलतियां स्वीकार करते ही नहीं क्योंकी ये अपनी कमज़ोरी किसी को भी नहीं दिखाना चाहते। हमेशा इनकी मनमानी चलाते हैं और जहा न चलाएं वहां झगड़े फसाद शुरू कर देते हैं।&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/li&gt;&lt;/ol&gt;&lt;/div&gt;&lt;table align=&quot;center&quot; cellpadding=&quot;0&quot; cellspacing=&quot;0&quot; class=&quot;tr-caption-container&quot; style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto;&quot;&gt;&lt;tbody&gt;&lt;tr&gt;&lt;td style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;जुड़वाँ आत्मा के दिव्यपुरुष कैसे होते हैं&quot; style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto;&quot;&gt;&lt;img alt=&quot;जुड़वाँ आत्मा के दिव्यपुरुष कैसे होते हैं&quot; border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;369&quot; data-original-width=&quot;640&quot; height=&quot;185&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEi_OGR1mB4Zms8004vSDGz9O1R-XMGQawHPXUBthFNvR_Bw7YJCpWYOeNJjBA7KVovirF0ssqX69-ak7Q0cSzWCiz_w-4hIDmVUDPoQ6uSMtkCpmhhAk-m7JNsWEKVr_dsT1k4CdZz57XmIYqzmriwzALfh1Ss0lMR4-jCf8M8JfCGJX09KZCg4jY89rEnf/w320-h185/judwa-aatma-divyapurush-ke-goon.jpg&quot; title=&quot;जुड़वाँ आत्मा के दिव्यपुरुष कैसे होते हैं&quot; width=&quot;320&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;&lt;tr&gt;&lt;td class=&quot;tr-caption&quot; style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;image source:vecteezy.com&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;&lt;/tbody&gt;&lt;/table&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;h3 style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;b&gt;जुड़वाँ आत्मा दिव्यपुरुष के गुण&amp;nbsp;&lt;/b&gt;&lt;/h3&gt;&lt;div&gt;१. दिव्यपुरुष भगवान के स्वरुप होते है, जिस तरह से दिव्यस्त्री के अलग अलग रूप होते हैं ये ठीक उसी प्रकार उन्ही के स्वरुप होते हैं. यह महानता, न्याय और दया के मूरत होते हैं। पर ये उतने ही सक्त स्वाभाव के होते हैं।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;२. ये इतने तेजस्वी और दिव्य आत्मा होते हैं की इनका तेज सामान्य लोग नहीं समझ पातें ना हि संभाल पाते हैं। इनके तेज़ से समाज में एक नया परिवर्तन घटित होता हैं. दिव्यपुरुष जहा खड़े हो जाते हैं वही से एक नया परिवर्तन आना शुरू हो जाता हैं। इसे युग परिवर्तन भी कह सकते हैं। लोग इन्हे भगवान कहते भी हैं और मानते भी हैं।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;३. बचपन से इनके अंदर दिव्यता और शालीनता होती हैं पर जब ये जागरूक हो जाते हैं तब इनमे ये गुण तेजी से जागरूक हो जाते हैं और अपने मोक्ष के साथ साथ ये अन्य लोगों को भी अध्यात्मिक तौर से जागरूक करते हैं।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;४. इनमें निर्णय लेने की अच्छी क्षमता होती हैं ज़्यादा तौर पर ये न्याय के दृश्टिकोण से ही निर्णय लेते हैं इसलिए ये भगवान भी कहलाते हैं। ये कम बीमार पड़ते हैं जो की इनमें दिव्यता होती हैं तो ये खुद ही अपने रोग को बहुत हद तक सुधार देते हैं या नष्ट कर देते है।&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;५. दिव्यपुरुष एक उच्च कोटि के वैद्य [ हीलर ] भी होते हैं. जिस कारण ये समाज में एक प्रतिष्ठित व्यक्ति और अच्छे वैद्य भी कहलाते हैं।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;६. ये दिखने में शायद आपको मॉडर्न या साधारण से लगे परन्तु ये अंदर से एक योगी होते हैं, इनमे आकर्षण बहुत होता हैं तो स्वभाविकता ही लोग इनके वश में रहते हैं ये कुछ ना भी करें तो भी लोग इनसे या तो जलते हैं या प्रभावित रहते हैं। इन्हे हमेशा अपनी भक्ति पूरी करनी की चिंता रहती हैं , साथ में इन्हें अपनी दिव्यस्त्री की भी बहुत आवश्यकता होती हैं। जिसके बिना इनकी भक्ति और मोक्ष अपूर्ण रहती हैं।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;७. दिव्यस्त्री के बिना ये हमेशा ही अपने आप को अपूर्ण महसूस करते हैं। दिव्यस्त्री के अलावा इन्हे कोई पा भी नहीं सकता। कर्म संबंध में चाहे जितना अटके हो परन्तु प्रेम तो केवल दिव्यस्त्री से ही प्राप्त होता हैं , बाकियो से तो बस कर्म का सम्बन्ध होता हैं। और ये बात यह अच्छे से जानते हैं तभी ये हमेशा दिव्यस्त्री को ही चुनते हैं।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;८. इनकी जागरूकता के बाद किसी भी रिश्ते पर ये सिर्फ और सिर्फ अपने दिव्यस्त्री को ही चुनते हैं। चाहे इनके जीवन में जो भी हो इन्हें ये ज्ञात रहता हैं की दिव्यस्त्री के बिना इनका जीवन, भक्ति और मोक्ष अपूर्ण ही रहती हैं.&lt;/div&gt;&lt;div&gt;९. इनमे भी इंटुइशन बहुत अच्छी होती हैं जिन्हे हम सहज पाठक भी कहते हैं। जिस कारण ये समाज में अच्छे कार्य करते हैं और नए विचारों से नयी दिशा समाज के लिए बनाते है।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;१०. इनमें इतनी शुभता होती हैं की ये जहा जाए वहाँ के बिघडे काम सवर जाते हैं।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;११. इनमें सम्भोग की भावना बहुत ज़्यादा होती हैं जिस कारण इनके जीवन में दो से अधिक पत्नियां भी होती हैं परन्तु जब ये जागरूक हो जाते हैं तो ये सिर्फ अपने दिव्यस्त्री के ही होते हैं और अपने वासना को शुद्ध रुपी प्रेम में परिवर्तित करते हैं।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;१२. जिस प्रकार दिव्यस्त्री दिव्यपुरुष के बिना अपूर्ण हैं, ठीक उसी प्रकार दिव्यपुरुष भी दिव्यस्त्री के बिना अपूर्ण हैं इसलिए तो ये एकदूसरे के पूरक हैं।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;१३.सिर्फ दिव्यस्त्री ही होती हैं जो इन्हे पूरा कर पाती हैं और इनकी ऊर्जा को पूरी तरीके से शांत करती हैं तब ये अपने आप में एक पूर्णता अनुभव करते हैं फिर ये अपनी भक्ति पूरी कर पाते हैं.&lt;/div&gt;&lt;div&gt;१४. यह झूठ, फरेबी, धोखाधाड़ी, अपमान और अपनी ऊर्जा को व्यर्थ नष्ट करना कदापि पसंद नहीं करते।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;१५. ये हर परिस्थिति में बहुत शांत आनंदित रहते हैं। और किसी विकट स्थिति में अगर ये घिर गए हो तो ये बहुत जल्दी से अपना रास्ता ढूंढ लेते हैं या रास्ता बना ही लेते है। यह बोलने में महारथी होते हैं इसलिए किसी से भी अपना कार्य आसानी से करवा ही लेते हैं।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;१६. इनके पास गुप्त विद्याएं भी होती हैं जो की सिर्फ और सिर्फ एक अच्छे शिष्य को ही ये प्रदान करते हैं।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;१७. इन्हें समाज से कोई लेना देना नहीं होता हैं परन्तु अपना कार्य बहुत अच्छी करते हैं और साथ में समाज की निस्वार्थ सेवा भी करते हैं तभी तो ये भगवान भी कहलाते हैं।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;१८. इनमें निस्वार्थ की भावना बहुत होती हैं इसलिए ये अच्छे समाजसुधारक भी बनते हैं और अच्छे राजनैतिज्ञ भी और जब भी ऐसा मौका आता हैं तो ये हमेशा ही एक बहुत अच्छे पद पे बैठे होते हैं। यह राजाओं जैसे ज़िन्दगी जीते हैं।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;१९. ये लोगों में आपसी प्रेम, समर्पण भावना, धर्मस्थापना, पूजापाठ भी सिखाते हैं समाज में सही गलत का पांठ भी पढ़ाते हैं क्योंकि यह बहुत साहसी होते हैं इनमे डर नहीं होता इनमे डर बहुत कम मात्रा में होता हैं जिस कारण&amp;nbsp; लोगों के ये प्रिय व्यक्ति भी बनते हैं और निडर योद्धा भी कहलाते हैं।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;२०. ये साफ़ सफाई ज्यादा पसंद करते हैं, इनमे सिखने और सिखाने की क्षमता अपार होती हैं, ये एक अच्छे शिष्य होते हैं जिस वजह से ये समाज में एक सच्चे और अच्छे उच्च कोटि के गुरु भी बनते हैं, ये अध्यात्मिक गुरु, धरम गुरु, प्रोफेसर, अध्यापक, न्यायधीश और समाजसुधारक भी बनते हैं।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;२१. ये इतने सौभाग्यशाली होते हैं की इनके जन्म के समय से ही ब्रह्माण्ड की शक्तियां साथ होती हैं, पूरा सहयोग होता हैं और समय समय पर इनके सारी इच्छाएं पूरी होती रहती हैं। ये अपने आप में एक उच्च कोटि की आत्मा होती हैं तो इनके मंज़िलें भी बहुत संघर्ष से भरे होते हैं और ये आसानी से उन समस्याओं से बाहर भी निकल जातें हैं और निखर आते हैं।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;२२. ये अपने साथ साथ लोगों का भी अच्छा परिवर्तन करते हैं, इनमें ये कला जन्म से ही उपस्थित होती हैं बस शर्त इतना की इनमे ये सही दिशा में सही गुरु के मार्गदर्शन में जगाना होता हैं। किसी किसी में ये पहले से ही जागरूक होते हैं बस दिशा की और आज्ञा की आवश्यकता होती हैं। अपने गुरु के शब्दों का पालन करना और समय पर जान न्योछावर करना पड़े तो कभी दोबारा दोबारा सोचेंगे भी नहीं ऐसी क्षमता इनमें अपार होती हैं।&amp;nbsp; &amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;२३. इनमें योग, ध्यान, तंत्र विद्या सिखने और सिखाने की क्षमता बहुत होती हैं दिव्यपुरुष अपना औदा आध्यात्मिक जगत में भी अच्छे पद पर स्थापित करते हैं। जिस वजह से ये सद्गुरु भी कहलाते हैं। ज्यादातर दिव्यपुरुष अपना जीवन साफ़ सुथरा, शांति पूर्वक और साधारण तरीके से ही जीना पसंद करते हैं।&amp;nbsp; &amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;२४. दिव्यपुरुष नीडर, पराक्रमी, सुन्दर, आकर्षित, आवाज़ में तेज़, पूर्ण पौरुषता लिए, मजबूत भुजाएं, साहस भरा सीना, आँखों में संमोहन चेहरे पे १२ सूर्य का तेज, शांतचित्त मन, बुद्धिमान, दयालु, प्रकृति के रक्षक, कोमल ह्रदय, कठोर निर्णायक, कामकला से संपूर्ण, उच्च कोटि के योगी, महान, धैर्यवान, शूरवीर, सौभाग्यशाली, पुण्यवान, एकनिष्ठ और मर्यादित होते हैं।&amp;nbsp; &amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;table align=&quot;center&quot; cellpadding=&quot;0&quot; cellspacing=&quot;0&quot; class=&quot;tr-caption-container&quot; style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto;&quot;&gt;&lt;tbody&gt;&lt;tr&gt;&lt;td style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiA4vOEIAR31c4_22H-M_-IHJyFqmmeLZ7FaNFX7yxRkboTaBqSdrOZ_8J9aDkWhaGrkmdgCYEggWfGc5PVufr1Xm7fxn_U_UFyMoAeqgUyGBWXcP5sShXNnY3It1gocTaD_CPJtaKPwpp0YCI6W8o03UjxRq4Myoigp0_uxtyFSICTmMuBOxB9IRgH-T8e/s640/judwa-aatma-jagruk-divyapurush.jpeg&quot; style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto;&quot;&gt;&lt;img alt=&quot;जुड़वाँ आत्मा के दिव्यपुरुष कैसे होते हैं&quot; border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;427&quot; data-original-width=&quot;640&quot; height=&quot;214&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiA4vOEIAR31c4_22H-M_-IHJyFqmmeLZ7FaNFX7yxRkboTaBqSdrOZ_8J9aDkWhaGrkmdgCYEggWfGc5PVufr1Xm7fxn_U_UFyMoAeqgUyGBWXcP5sShXNnY3It1gocTaD_CPJtaKPwpp0YCI6W8o03UjxRq4Myoigp0_uxtyFSICTmMuBOxB9IRgH-T8e/w320-h214/judwa-aatma-jagruk-divyapurush.jpeg&quot; title=&quot;जुड़वाँ आत्मा के दिव्यपुरुष कैसे होते हैं&quot; width=&quot;320&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;&lt;tr&gt;&lt;td class=&quot;tr-caption&quot; style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;image source:vecteezy.com&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;&lt;/tbody&gt;&lt;/table&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;यदि मैं कहूँ की आज के युग में ऐसा कौन होगा, तो मेरी नज़र में श्री संत गुरु राधा स्वामी, सद्गुरु वासूदेव जग्गी, गुरु सूरज प्रताप जी, गुरु धीरेन्द्र शास्त्री जी जिन्हे हम बागेश्वर धाम के नाम से जानते हैं, गुरुदेव श्री नंदकिशोर श्रीमाली जी, गुरुदेव श्री कैलासचंद्र श्रीमाली जी, गुरुदेव श्री अर्विंद श्रीमाली जी हैं। उनका चरित्र और उनका जीवन आप देखोगे तो आप भी विश्वास कर लोगे। और मानव सेवा और विचार परिवर्तन में कहु तो श्री रतन जी टाटा और आचार्य प्रशांत हैं। यह मैंने अपने दृष्टिकोण की बात कही हैं आपके दृष्टिकोण से कोई और होगा किन्तु उदाहरण के दृष्टि से मैंने आपको समझाने का प्रयास किया हैं। और यदि मैं भूतकाल की बात करू तो ऐसे बहोत नाम हैं आपको बताने के लिए। जैसे की भगवान में श्री रामचंद्र जी, श्री कृष्ण, श्री गुरु आदिशंकराचार्य, महावीर जैन , गौतम बुद्धा , योद्धा में छत्रपति शिवाजी महाराज, संभाजी महाराज, पोरस, चंद्रगुप्त मौर्य, अशोका, पंचपांडव, फिर संतों में श्री संत ज्ञानेश्वर देव, श्री संत तुकाराम महाराज, परमहंस श्री रामकृष्ण, स्वामी विवेकानंद, श्री संत वामखेपा, संत कबीर, दास, गुरु वों में गुरु नानक जी, गुरु गोबिंद सिंह, गुरु ओशो, डॉ. श्री नारायण दत्त श्रीमाली जी जो परमहंस श्री सदगुरुदेव निखिलेश्वरानंद जी ही हैं। आप इनके जीवन का इतिहास उठाकर देखिये कही भी सहज नहीं था इनके लिए अपना व्यक्तित्व ऊँचा करने के लिए किन्तु इन्होने कर के दिखाया और आज हम सभी इन्हे भगवान के रूप में पूजते हैं, कभी योद्धा के रूप में हमारा सीना गर्व से चौड़ा करते हैं, तो कभी संतों के समक्ष अपना शीश झुकाकर अपने आप को समर्पित करते हैं। यदि आप दिव्यपुरुष हैं और जागरूक नहीं या आपको भी ऐसा बनना हैं तो आज से अभी से अपने कर्मों को हाथ लो और बुरे कर्मो को नष्ट करने की ज़िम्मेदारी उठाओ आपके नसीब में चाहे जो लिखा हो पर आपके कर्मों को बदलना आपके हाथों में हैं और नसीब तब बदलता हैं जब आप अपने कर्मा बदलते हो। आप सोए हुए हैं तो जाग जाओ और अपने अशुद्धियों पर कार्य कीजिये आप देखोगे की आप कब श्रेष्ठ बन गए आपको ज्ञात ही नहीं। ये प्रक्रिया एक दिन की नहीं परन्तु एक दिन में अवश्य घटित हो जाएगी और वो क्षण आपको अपने जीवन में लाना हैं। समय तब बदलता हैं जब आप बदलते हो और अब आप सभी के पास समय बहुत कम हैं इसे व्यर्थ न गवाएं इसे उपयोग में लाये। अन्त में इतना ही कहना पर्याप्त मात्र समझती हूँ की आपके जीवन के उद्देश्य, मानव कल्याण, भक्ति पथ, मोक्ष और आपकी दिव्यस्त्री आपकी राह देख रहे हैं। आप सभी अपने जीवन के उद्देश्यों को बिना रुके बिना थके पूर्ण कीजिये और पूर्ण करने की क्षमता परमात्मा आपको शक्ति और सही मार्गदर्शन करें। मुझे विश्वास हैं की आपको इस लेख से बहुत कुछ प्राप्त हो गया हैं और यदि कुछ प्रश्न हैं तो आप मुझे सोशल मीडिया के पेज से, कमैंट्स बॉक्स से , ईमेल से संपर्क कर सकते हैं। मैं अवश्य ही आपकी ह्रदय से सहायता करुँगी। आज के लेख में बस इतना ही अपने वाणी को विश्राम देते हुए आपसे फिर मिलने की आज्ञा लेती हूँ और बहुत जल्द एक नए विषय पे लेख लाती हूँ तब तक आप अपना और अपनों का ध्यान रखे आनंदित रहिये और अपने जीवन के उद्देश्य को पूर्ण करते रहिये।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;h4 style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;🙏&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;जय गुरुदेव, हर हर महादेव।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;🙏&amp;nbsp;&lt;/h4&gt;</description><link>https://www.adhyatmikjagat69.co/2023/08/judwa-aatma-ke-divyapurush-kaise-hote-hain .html</link><author>noreply@blogger.com (Unknown)</author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEi_OGR1mB4Zms8004vSDGz9O1R-XMGQawHPXUBthFNvR_Bw7YJCpWYOeNJjBA7KVovirF0ssqX69-ak7Q0cSzWCiz_w-4hIDmVUDPoQ6uSMtkCpmhhAk-m7JNsWEKVr_dsT1k4CdZz57XmIYqzmriwzALfh1Ss0lMR4-jCf8M8JfCGJX09KZCg4jY89rEnf/s72-w320-h185-c/judwa-aatma-divyapurush-ke-goon.jpg" height="72" width="72"/><thr:total>0</thr:total></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-8475792039111759199.post-9191632136914650588</guid><pubDate>Tue, 25 Oct 2022 16:07:00 +0000</pubDate><atom:updated>2024-09-28T15:50:34.034+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">जुड़वाँ लौ (ट्विन फ्लेम )</category><title>जुड़वाँ आत्मा की दिव्य स्त्री कैसी होती हैं?</title><description>&lt;p&gt;&amp;nbsp;आपका बहुत बहुत स्वागत हैं आपके अपने ब्लॉग पर। सबसे पहले तो आप सभी से क्षमा प्रार्थी हूँ की बडी लंबी&amp;nbsp; प्रतिक्षा करवाई आपको और बड़े लम्बे समय बाद मेरा लेख आपको मिला हैं। मेरी भी कुछ समस्याएँ थी जिस कारण आप सबको मैं लेख नहीं दे पाई। आपका निश्चल प्रेम और अटूट विश्वास जो आपने मुझपे बनाये रखा इसके लिए मैं ह्रिदय से आभार प्रकट करती हूँ। आप सब का बहुत बहुत धन्यवाद। अब आपका ज़्यादा समय न लेते हुए मैं आपको आज की लेख की और ले चलती हूँ। आज की लेख जुड़वाँ आत्मा की&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt; &lt;b&gt;दिव्य स्त्री&lt;/b&gt; &lt;/span&gt;पर हैं। जिन्हे हम&lt;b&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt; ट्विनफ्लेम की डिवाइन फेमिनाईं&lt;/span&gt; &lt;/b&gt;मतलब &lt;b&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;डी. एफ&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/b&gt; भी कहते हैं। आने वाले दिनों में आपको दिव्य पुरुष और जुड़वाँ आत्मा की ज़िन्दगी कैसे होती हैं इसपे आप सभी को गहराई से लेख पढ़ने को मिलेंगे तो आप मेरे साथ इस ब्लॉग से जुड़े रहिये।&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;जो कभी विकट से विकट परिस्थिति के भी सामने हार न माने जो हरपल सत्य के राह पर चलती रहें जो सबको एकसमान रूप से प्रेम करें दूसरों के भूल पर तक्षण क्षमा करें और गुन्हाओं के विरुद्ध बिना भय खाये जो दूसरों के हक़्क़ में और खुद के अस्तित्व के लिए लड़ने से नहीं डरती जो साधारण लोगों के तुलना में एक ज़्यादा सुलझी हुई&amp;nbsp; समझदार वो प्रेममई, वो विश्वासू, वो निडर, एकनिष्ठ, महत्वकांक्षी, कोमल हृदय, ममतामई, कला से भरी, एक ऊँचा व्यक्तित्व लिए, चरित्रवान, पुण्यवान, स्वाभिमानी, आत्मसम्मानी, निश्चल मन की, महकती हुई, चहकती हुई, वो सत्यप्रिया, शांतिप्रिय, चंचला, धैर्यशील, बुद्धिमान, सशक्त, न्यायप्रिय, सुन्दर सा आभामंडल, तीव्र सकारात्मक आकर्षण लिए हुए इस पृथ्वी पर एक ऊँचा और गहरा लक्ष्य लेकर जो जन्म लेती हैं वो होती हैं दिव्यस्त्री डिवाइन्फेमिनाईं [Divine Feminine - DF ].&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;table align=&quot;center&quot; cellpadding=&quot;0&quot; cellspacing=&quot;0&quot; class=&quot;tr-caption-container&quot; style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto;&quot;&gt;&lt;tbody&gt;&lt;tr&gt;&lt;td style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2022/10/judwa-aatma-ki-divyastree-kaisi-hoti-hain..html&quot; target=&quot;_blank&quot;&gt;&lt;img alt=&quot;जुड़वाँ आत्मा की दिव्य स्त्री कैसी होती हैं&quot; border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;350&quot; data-original-width=&quot;349&quot; height=&quot;200&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhNDtEtzpzTyfU7foC8Hfo5NbXh083-mBGyx-kZeE0DO6bU-emdVMtlmoqP58UJoDJMRBIPx3MZgp_CvNIY8mWSLLj7oboe40GrVvw6aSBJB5_Uu_-eQGVxMql2Glp2VWhCdqnrogOOiIvqN1wJ3fBM6vf14Dcxq96-bkHR6uM1mruv9YHNDNZbUcXgrQ/w199-h200/divine-feminine-1.jpg&quot; title=&quot;जुड़वाँ आत्मा की दिव्य स्त्री कैसी होती हैं&quot; width=&quot;199&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/span&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;&lt;tr&gt;&lt;td class=&quot;tr-caption&quot; style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2022/10/judwa-aatma-ki-divyastree-kaisi-hoti-hain..html&quot; target=&quot;_blank&quot;&gt;दिव्यस्त्री / divine feminine&amp;nbsp;&lt;/a&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;&lt;/tbody&gt;&lt;/table&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;h3 style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;दिव्या स्त्री के गुण और अवगुण :&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/h3&gt;&lt;p&gt;दिव्यस्त्री के ये सारे गुण होते हैं किन्तु अवगुण भी होती हैं पर तब तक जब तक की वो अपने अस्तित्व को जान न ले पहचान न ले एक बार दिव्यस्त्री अगर अपने जीवन के लक्ष्य को जान ले प्राप्त कर ले तो शायद ही कोई ऐसी कमिया उसमे दिखाई दे सकती हैं। इसके कही न्यूनता होती हैं जैसे की दूसरों पे जल्दी भरोसा रखना, जल्दी क्षमा करना, दूसरों के लिए अपनी परवाह न करना, अपने आप पर लक्ष्य न देना, अपना समय व्यर्थ बातों में गवाना और&amp;nbsp; बड़े जल्दी मायूस हो जाना। कभी कभी आलसी होना, निर्णय जल्दी न लेना, खुल कर दिल की बातें न बताना पर एक आशा में जीना की कोई आकर इन्हे समझे, इनकी बातों को बिना कहें सुने इन्हे जाने और वैसे ही करे जैसे इनके दिल में हैं तो फिर ये उनके लिए अपना सब कुछ लूटाने को तत्पर रहती हैं। अच्छी कमियाँ हैं न? पर यही सत्य हैं। पर ये इनके जागरूकता से पहले के लक्षण होते हैं। ये भी साधारण सी स्त्री जैसे दिखाई पड़ती हैं पर खास इन्हे वो बातें बनाती है जब ये जागरूक होती हैं जो आपने अभी ऊपर लेख में पढ़ा। दिव्यस्त्री भी खुद को तब तक साधारण सा ही समज़ती रहती हैं जब तक की इनके जीवन में कोई बड़ा तूफ़ान न आ जाये जहा इन्हे अपने अंदर के गुणों की क्षमताओं की शक्तियों की पहचान न हो जब तक ये उस परिस्थितियों&amp;nbsp; से न लड़ ले। या फिर तब तक इनका दिव्यपुरुष या इनके सद्गुरु न आ जाएं। इनकी जागरूकता साधारण सी नहीं होती अताह कष्ठ सहने पड़ते हैं। तब तक ये बड़े ही जटिल परिस्थितियों से झुंझती रहती हैं। पर इनमे कुछ ख़ास ऐसे बातें और लक्षण होते हैं जो इन्हे भी खुद अपने आप पर मामूली या साधारण सा न होना ये बता देता हैं। ये कितना भी अपने आपको प्रयास करले किसी वातावरण में ढालने का पर ये भीड़ में जल्दी ढलती नहीं हैं कुछ वक़्त के लिए ही ये लोगों के साथ रहती हैं घुमती फिरती हैं। पर फिर ये बहुत जल्दी ऊब जाती हैं। ये हमेशा ही अपने आप को अकेला सा ही महसूस करती रहती हैं। और कही न कहीं इनकी यही सोच इन्हे ये सोचने पे मज़बूर कर देती हैं की ये औरों से कुछ अलग हैं। यही से इनकी आत्मा की खोज धीरे धीरे शुरू होती हैं और यही से इनका अध्यात्मिक सफ़र शुरू हो जाता हैं।&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;h3 style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;script async=&quot;&quot; crossorigin=&quot;anonymous&quot; src=&quot;https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-7074881198889056&quot;&gt;&lt;/script&gt;
&lt;ins class=&quot;adsbygoogle&quot; data-ad-client=&quot;ca-pub-7074881198889056&quot; data-ad-format=&quot;fluid&quot; data-ad-layout-key=&quot;-gc-2i-5p-b3+1q0&quot; data-ad-slot=&quot;7066449108&quot; style=&quot;display: block;&quot;&gt;&lt;/ins&gt;
&lt;script&gt;
     (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({});
&lt;/script&gt; 
  
  &lt;/span&gt;&lt;/h3&gt;&lt;h3 style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;b&gt;आखिर कैसे होती हैं दिव्यस्त्री ?&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/h3&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;सही शब्दों में बताऊ तो ये एक उच्च कोटि की दिव्यस्त्री हैं जिन्हे हम अप्सरा, यक्षिणी, योगिनी, भैरवी, देवदूत, परी भी कहते हैं। जी, आपने सही पढ़ा मैं इन्हीं का वर्णन कर रही हूँ। रुकिए, आगे जानिए मैंने ऐसा क्यू कहा? इसका मतलब ये नहीं की ये अवतारित नहीं हो सकते जन्म नहीं ले सकते। ये होते हैं साधारण मनुष्यों की तरह इनका भी रहें सेहन होता हैं पर कुछ अलौकिक शक्तियां इनमे सुप्त होती है और कुछ हद्द तक जागरूक होती हैं। आम लोगों के तुलना से इनमे शक्तियां थोड़ी जागरूक होती हैं जो समय पर ही इन्हे जागरूक करनी होती हैं। तभी ये दिव्य बन पाति हैं। बहुत सी स्त्रीयोँ को ज्ञात हैं की हमारी जागरूकता हो गयी। अब ? अब आगे क्या? वो आगे बढ़ती ही नहीं उन्हें ये पता ही नहीं होता की जागरूक होने के बाद करना क्या होता हैं ? जागरूक होना मतलब चेतना जागरूक होना -आत्मजागरण होना अपने लक्ष्य की खोज करना उसपे कार्य करना अपने अंदर की शक्तियों को जागरूक करना अच्छे गुरु से दीक्षित होकर साधना और तपस्या करना जीवन को जीने की कला को सीखना। साधना मतलब खुद को साध लेना ये, ये होती हैं सच्ची और वास्तविक दिव्यस्त्री। और जो ये नहीं करती तो वो बस कुछ पल के लिए ही जागरूक होती हैं फिर सुप्त अवस्था में चली जाती हैं। क्योंकी वे कुछ करती ही नहीं। और फिर कही मोहमाया में फस जाती हैं। और अपने आपको ट्विन जुड़वाँ आत्मा कहते हैं।&amp;nbsp;बस एक घमंड में रहती हैं की हां मैं जुड़वाँ आत्मा हूँ दिव्यस्त्री हूँ। जो दिव्यस्त्री होती हैं वो कभी भी किसी को खुद का बखान नहीं करती। न ही जल्दी किसी को समझने देती हैं। ऐसे ही दिव्यस्त्री को ट्विन जुड़वाँ आत्मा कहते हैं। ऐसी लुलिपुच्कि नहीं होती हैं जुडवाँ आत्मा जो अपने दिव्यपुरुष के लिए रोते बैठे घंटों घंटों उसकी याद में कोई भी कार्य न करे। ट्विनफ्लैम क्यू आते हैं पता हैं? अपने मोक्ष के लिए अपनी ऊर्जा का स्तर बढ़ाने के लिए अपने लोक में एक ऊँचा लोक प्राप्त करने के लिए। कुछ अपना श्राप पूरा करने के लिए आते हैं, कोई जीवन का अनुभव लेने के लिए इस पृथ्वी पर आते हैं। कुछ बड़ा लक्ष्य को पूरा करने के लिए आते हैं तो कुछ अपने मुक्ति के लिए मोक्ष के लिए आते हैं। पर ऐसा क्यू ? बताती हूँ। पृथ्वी एक कर्मा भूमि है जिसे मृत्यु लोक भी कहते हैं। यहाँ शरीर धारण किया जाता हैं जो पंचतत्वों से बना होता हैं। जल,अग्नि,वायु,पृथ्वी,आकाश इनके समावेश से ये शरीर प्राप्त होता हैं और इन्ही में ७२००० नाड़ीयां होती हैं जिसमे से मुख्य ३ नाड़ियाँ होती हैं जिन्हे हम इडा, पिंगला, सुषुम्णा कहते हैं जो महाशक्ति कुण्डलिनी के आधार होते हैं। इनमे भी जो सुषुम्णा नाड़ी हैं उसी में कुण्डलिनी शक्ति का वास होता हैं उसे ही कुण्डलिनी शक्ति कहते हैं और जो इड़ा नाड़ी पुरुषतत्त्व का दायाँ भाग और पिंगला नाड़ी स्त्रीतत्त्व का बायाँ भाग होता हैं और जो दोनों नाड़ियों के ऊर्जा को संतुलन रखे तो सुष्मणा नाड़ी के द्वारा कुण्डलिनी जागरण होती हैं। तब व्यक्ति महामानव बन जाता हैं। यही प्रक्रिया ट्विनफ्लेम की होती हैं। जो स्त्री भाग हैं वही डिवाईन फेमिनाईं दिव्यस्त्री हैं। जब ये जागरूक हो जाती हैं तो ये पुरुष नाड़ी को भी जागरूक कर देती हैं तब ये साधारण नहीं रहती। इसलिए इन्हे दिव्यस्त्री कहते हैं। इसका वर्णन मैंने &lt;b&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2021/06/kundalini-shhatchakra-saat-chakra-bhedan-kaise-hota-hai-.html&quot;&gt;कुण्डलिनी शक्ति कैसे जागरूक होती हैं &lt;/a&gt;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;पिछले लेख में लिखा हैं। आप वो भी पढ़ लीजिये। आगे और जानते हैं, ये पृथ्वी एक पाठशाला हैं जहा हर जीव अपने कर्मो से कुछ सीखता हैं कुछ सिखाता हैं। इसलिए यहाँ शरीर मिलने के कारण देवी, देवता, दानव भी जन्म लेने के लिए ललायित रहते हैं। जिससे की उन्हें अपने कर्मो से मोक्ष मिल सके। देखिये कुछ किस्सों को आप किस्से ही समझेंगे और कोई इसे सत्य भी समझेंगे पर जो इस रास्ते पे हैं मैं उनके लिए सत्य का प्रकाश डाल रही हूँ न की भटका रही हूँ और यदि आप में से कोई ये कहें की ये सब मनघडण हैं तो उन्हें मैं सीधा कहूँगी की फिर जाईए और सत्य की खोज कीजिये मेरी बातों में मत आइये। क्यूकी ये कोई संसारी आँखों देखि बातें नहीं चल रही हैं की जिसपे भावनाओं का प्रमाण दूँ।&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;यह अध्यात्मिक जगत की बात हो रही है और ये एक विज्ञान हैं। अध्यात्मिक को समझना आसान नहीं यहाँ अलौकिक घटनाएं होती हैं अध्यात्मिक ऐसे ही हैं आपके मानने न मानने से अध्यात्मिक बदलने नहीं वाला ये ऐसे ही रहने वाला हैं जिस तरह से विज्ञानं को नहीं बदला या झूठा जा सकता हैं उसी प्रकार अध्यात्मिक को भी झूठा कहना गलत हैं विज्ञानं को देखने के लिए संसारी दो आँखें हैं और अध्यात्मिक बातों को देखने के लिए तीसरी आँख हैं उसे खोलो तो सब कुछ जान जाओगे। अध्यात्मिक एक विज्ञानं हैं जिसमे आत्मा के स्तर पर नए नए शोध होते रहते हैं। और मेरी बातों से वही सहमत होगा जो अध्यात्मिक जगत से जुड़ा हैं अर्थात जो अध्यात्मिक रास्ते पे हैं। जिसने अलौकिक घटनाएं बचपन से अनुभव किये हैं वही समझ पायेगा मेरी बातों को। बुद्धि जीवी लोग अपना सत्य खुद खोज ले हम अध्यात्मिक लोग कुछ ज़्यादा ही ज़िद्दी होते हैं अपने लक्ष्य को लेकर सो हमें इन सब से फरक नहीं पड़ता की क्या यहाँ सोचा जा रहा हैं ? कुछ बातों पे बस विश्वास करना अत्यंत आवश्यक होता हैं। जैसे की खुद के ऊपर भरोसा रखना क्या ये सत्य नहीं हैं? क्या हम हमारी भावनाओं के प्रमाण देते हैं? नहीं न? तो ये कुछ शोध कर्ताओं ने शोध की हैं और ये मेरी शोध हैं। जो भी मेरे जीवन अनुभव हैं जो कुछ भी मेरे सद्गुरु से मैंने प्राप्त किया वही बता रही हूँ। बिना अनुभव के मैं कुछ भी नहीं बोलती। चाहे आप माने या न माने आपके मानने न मानने से सत्य नहीं बदलता पर सत्य हैं क्या? खुद शोध लगाए मैं यही कहूँगी क्यू की अध्यात्मिक भी एक शोध लगाने का प्रयोग हैं।&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;table align=&quot;center&quot; cellpadding=&quot;0&quot; cellspacing=&quot;0&quot; class=&quot;tr-caption-container&quot; style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto;&quot;&gt;&lt;tbody&gt;&lt;tr&gt;&lt;td style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2022/10/judwa-aatma-ki-divyastree-kaisi-hoti-hain..html&quot; style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto;&quot;&gt;&lt;img alt=&quot;जुड़वाँ आत्मा की दिव्य स्त्री कैसी होती हैं?&quot; border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;551&quot; data-original-width=&quot;556&quot; height=&quot;198&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEid7Eox86eh_V1h43a4KcuZ1yfEkj27kON-EKiGj-Id_58VozE4L8YzcxjCvBdyj9uMbdbQ3a0mWoW72c_pPCydQthv_KXXsOIDXvpQmat-p0RDX3tJhXW3_O-zr70Vk3gddzknDxRnr0mFcsv2fchQZ4Me6hEtM1ZZu5Yqw_1OsEHKbqzRyFu81v_lUg/w200-h198/devi-parvati-divyastree-divine-feminine.webp&quot; title=&quot;जुड़वाँ आत्मा की दिव्य स्त्री कैसी होती हैं?&quot; width=&quot;200&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;&lt;tr&gt;&lt;td class=&quot;tr-caption&quot; style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;Arpita Sinha: Story of the first love in the world.&lt;br /&gt;Image source: blognox.com&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;&lt;/tbody&gt;&lt;/table&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;सरल सी बात हैं दिव्यस्त्री कैसी हो सकती है आप ही सोचिये ? क्या वो साधारण सी हो सकती हैं? क्या इसीलिए ही उसे दिव्यस्त्री कहते हैं? कुछ तो असाधारण सी बात हैं उसमे तभी तो वो सबसे हटकर दिव्यस्त्री कहलाती हैं। कुछ उदाहरण रख रही हूँ आपके सामने जिस तरह माँ पारवती, सीता माता, राधारानी, मीराबाई, जनाबाई, अक्कादेवी ये सब कौन थी? यही तो दिव्य स्त्री हैं&amp;nbsp; जिनका वर्णन आज आपको दे रही हूँ। पर इससे ट्विनफ्लैम क्या साबित हो जाता हैं ? यही बता रही हूँ की जिस तरह से सती माता ने पुनः पाँर्वती माता के रूप में जन्म लिया जो की सती की पूर्व यात्रा अपूर्ण होने के कारन वो अपना लक्ष्य न साध सकी इसलिए सती ने पुन्हा पाँर्वती माता के रूप में जन्म लेकर अपने लक्ष्य को साध लिया। माता पाँर्वती ने एक मनुष्य जाती में जन्म लिया और अपने लक्ष्य मतलब शिव को पाने के लिए जो एक साल तक गुफ़ा में पत्तों और पानी पे रहकर घोर तपस्या की जिनके तपस्या से शिवजी का आसन हिला तो उन्हें भी उनका प्रस्ताव स्वीकार करना पड़ा और जब उनका विवाह हुआ तो शिव की आदि शक्ति पाकर बाएं भाग में जुड़कर उनकी अर्धांगिनी आदिशक्ति माँ पाँर्वती महाकाली कहलायी। धीरे धीरे उनकी शक्तियां उन्हें प्राप्त हुई और एक एक कर के उनके रूप बाहर आते गए। क्या ये संभव नहीं हैं ? संभव हैं यदि मन में ठान लिया जाये। माँ पाँर्वती हम सब स्त्रियों के लिए एक उच्च कोटि का उदाहरण हैं की कैसे मानव जाती में जन्म लेकर कठोर तपस्या कर वे आदि शक्ति बने। उनके लिए भी सहज नहीं था ये सब करना। पर जनकल्याण के लिए और सही मार्ग साधना मार्ग प्रशस्त करने के लिए उन्हें भी सारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। ताकि साधारण व्यक्ति भी नर से नारायण बनने की कला जाने। उन्हें ये कोई कह न सके की आप तो भगवान हैं आपको क्या पता हमारी पीड़ा? पर सबसे ज़्यादा पीड़ा तो इन स्त्रियों ने इन दिव्यपुरुषों ने ही सहन किया हैं। उसी प्रकार सीता माता जो साक्षात् महालक्ष्मी थे जो मिथिला की राज कुमारी थी पर श्री राम जी के साथ भी उन्हें वन में भटकना पड़ा फिर रावण के वटी में रहकर अपने पति का वियोग और कही पीड़ा को सहना पड़ा, उसके बाद भी उनका त्याग करना और सारा जीवन पीड़ा में ही निकालना। राधारानी वे लक्ष्मीछाया मतलब लक्ष्मी ही थे जो बरसाने की राजकुमारी कैसे एक ग्वाले के प्रेम में पड़कर अपना सारा जीवन अपने प्रेमी के प्रतीक्षा में और बरसाने&amp;nbsp; लोगों के देख भल में बिताया। क्या वो पीड़ा नहीं थी ? क्या उन गोपियों की पीड़ा नहीं थी ? मीराबाई जो महलों की राजकुमारी थी पर वे भी विवाहित होने के बाद अपना सब कुछ कृष्ण को सौपने के बाद कैसे वे भी अपराधी साबित हुयी और अंततः उन्हें विष का प्याला देकर मृत्युदंड दिया। जनाबाई जो विट्ठल भक्त थी उसपे भी विट्ठल के हार का चोरी के इलज़ाम में सूली पे चढ़वाना चाहा था पर अंत समय में प्रभु ने आकर सब वर्णन बताया की वो भक्त है उनकी वो निर्दोष हैं अपने आप विट्ठल के गले की माला जनाबाई के गले में पोहोची क्या वो दिव्यस्त्री नहीं थी? क्या उन्हें पीड़ा नहीं हुयी? अक्कादेवी जो खुद एक भैरवी थी पर उनका विवाह भी एक साधारण से पुरुष से हुआ पर अक्कादेवी की भक्ति उन्हें खटकने लगी फिर उनहोंने अपने पति का सबकुछ त्याग कर यहाँ तक कपडे भी त्याग कर वे भैरवी बन कर शिव के भक्ति में लीन हो गयी। क्या उनके लिए सरल था ये सब? चलो शास्त्रों की छोडो लता दीदी, मैरी कॉम, कल्पना चावला, इंदिरा गाँधी, अम्माँ जयललिता क्या ये दिव्य स्त्री नहीं थे ? इनके लिए अपना लक्ष्य साधना सहज था ? नहीं पर उन्होंने अपने लक्ष्य को साध लिया यही उनका उद्देश्य था। आज भी लोग इन दिव्यस्त्रीयों को पूजते हैं। उन्होंने कही भी नहीं कहां की हमें पूजे पर उनकी करनी ही ऐसी थी की जग अपने आप उन्हें पूजने लगा। जब तक वे जीवित थे तब तक उन्हें बस तकलीफ ही दिए बहुत सताया और आज भी कही न कही कोई न कोई उनके अस्तित्व पे ऊँगली उठाते ही हैं। बोलने वाला तो समझ आता हैं की कितना ज्ञानी और संस्कारी हैं। इससे उसे ऐसा लगता हैं की वो सच बोल रहा हैं तो उसे यही कहूँगी शास्त्र पे मत जाओ अपने अंदर खोज करो उत्तर वही हैं पर याद रखिये उसके लिए भी गुरु का होना आवश्यक हैं। आपकी डीग्रीयाँ मरने के बाद काम नहीं आएगी, बल्कि आपके संस्कार और कर्मा काम आएंगे। कुछ पल के जीवन में इतना खो गए हैं लोग की खुद पर भी समय नहीं मिलता सत्य की खोज करने के लिए। और सत्य की खोज के लिए ही ट्विनफ्लेम आते हैं इसलिए जागरूकता होती हैं उनमे की आस पास के लिए उदाहरण बनिए इसलिए साधारण व्यक्ति के तुलना में ज़्यादा पीड़ा और दुःख ट्विनफ्लेम के हिस्से में ही आती हैं। ताकि वो लोगों के लिए आदर्श बन सके।&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2022/10/judwa-aatma-ki-divyastree-kaisi-hoti-hain..html&quot; style=&quot;margin-left: 1em; margin-right: 1em;&quot;&gt;&lt;img alt=&quot;जुड़वाँ आत्मा की दिव्य स्त्री कैसी होती हैं?&quot; border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;863&quot; data-original-width=&quot;600&quot; height=&quot;200&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg6wB-s6JzIyBr-EpO6ANMFPPPgTWrabqcwyLgggvMrXGrFx7_w-jzWyPq1kU2csEaWa5XHtoTKDjBFjxo8Me9MYUqBs3jR96JLe8h0twGO_NS9xS62ytniAMeJKuDPI37FoTHvBylrfARJi1XZZe8Qk_G1WvCfvtl7UcVVANdaihSz6GFkn51EE1iAsg/w139-h200/judwa-aatma-ki-divyastree-2.jpg&quot; title=&quot;जुड़वाँ आत्मा की दिव्य स्त्री कैसी होती हैं?&quot; width=&quot;139&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;h3 style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;b&gt;दिव्यस्त्री के लक्षण :&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&amp;nbsp;&lt;/h3&gt;&lt;p&gt;१. जो कभी झूठ बोलना और सुन्ना पसंद नहीं करती। जो अगर कुछ गलतियां कर भी ले तो पुर्ण पश्चाताप करती हैं। और ऐसा करने से वो कभी चुकती नहीं।&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;२. जो सहनशीलता से और आत्मसम्मान से भरी होती हैं।&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;३.&amp;nbsp; जो कभी भी किसीको चोट पहुचाने का विचार भी नहीं करती जो मृदुल, सुलझी हुई और शांत स्वाभाव की होती हैं।&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;४. प्रकृति से बहुत प्रेम होता हैं। ज़्यादा तर ये शाकाहरी ही होती हैं और लोगों की, प्रकृति की सेवा भी ज़्यादा से&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; ज़्यादा करती हैं। निरंतर प्रकृति को बचाने के लिए कोई न कोई शोध और प्रयास करती ही रहती हैं।&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;५. हो सकता हैं की कोई कोई असाधारण सी दिखने में हो पर उनका व्यक्तित्व अजीब सा आकर्षण लिए हुए रहता&amp;nbsp; हैं। पर बहुत ही बार ये शरीर से सुन्दर और आकर्षित होती हैं। असाधारण ढृढ़ मन होता हैं इनका। चहरे पर १०० चाँदनी की चमक लिए हुए ये जन्मी हुई होती हैं। इनको देखने मात्र से भी बहुत से रुके काम बन जाते हैं। यह बहुत ही शुभ दायक होती हैं। कल्याणकारी होती हैं। इनके कदम जहा पड़े वह हलचल सी मच जाती हैं। बुरी शक्तियां वहाँ ज्यादा देर तक वास नहीं करती। बुरी शक्तियां इनका हमेशा नुकसान करने के हेतु में ही रहती हैं पर नाकामियाब ही रहती हैं। क्योंकि एक समय के बाद ये उन शक्तियों को काबू करना भी सिख जाती हैं।&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;६. घुस्सा बहुत कम करती हैं खुद पे बहुत नियंत्रण रखती हैं, पर यदि घुस्सा आ जाये तो प्रकृति को भी हिला दे ऐसे इसकी शक्ति होती हैं।&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;७. जो हमेशा सत्य की खोज करें और दूसरों का दुःख दूर करने में सक्षम होती हैं।&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;८. सदैव मन में सद्धभावना, धरम और भक्ति के मार्ग में चलने वाली होती हैं। ईर्ष्या, लोभ, मोह, बंधन, काम, क्रोध,&amp;nbsp; द्वेष इन विकारों से बहुत दूर रहती हैं ये निरंतर ही अपने इस कमियों पर कार्य करती रहती हैं।&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;९. साधाहरण लोगों के तुलना में ये एकांत में वास करना, साधना करना, तपस्या करना, नयी कलायें सीखना ध्यान करना, नए बातों का शोध करना, योग करना बच्चों के साथ ज़्यादा समय बिताना जहा से नया ज्ञान प्राप्त हो ऐसे जगह ऐसे लोगों से संपर्क रखना।&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;१०. निरंतर अपने लक्ष्य पर केंद्रित रहती हैं और साथ में अपने आस पास का वातावरण का भी ख्याल रखती हैं।&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;script async=&quot;&quot; crossorigin=&quot;anonymous&quot; src=&quot;https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-7074881198889056&quot;&gt;&lt;/script&gt;
&lt;ins class=&quot;adsbygoogle&quot; data-ad-client=&quot;ca-pub-7074881198889056&quot; data-ad-format=&quot;fluid&quot; data-ad-layout-key=&quot;-gc-2i-5p-b3+1q0&quot; data-ad-slot=&quot;7066449108&quot; style=&quot;display: block;&quot;&gt;&lt;/ins&gt;
&lt;script&gt;
     (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({});

  &lt;/script&gt;
  ११. इनकी ऊर्जा बहुत अधिक मात्रा में उच्च स्तर की होती हैं इसलिए साधाहरण लोग इनके आस पास ज़्यादा देर&amp;nbsp; तक नहीं रह पाते। ईच्छाशक्ति इनकी आकाश के ऊँचाई को छू ले ऐसी संकल्प वादी और मेहनती होती हैं. दिव्यस्त्री प्रकृति की प्रिय होती हैं इसलिए इनका वैसे ही लालन पालन और संरक्षण भी प्रकृति के ओर से होता हैं।&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;१२. इनके विश्वास का कोई तोड़ नहीं बहुत अधिक और अटूट विश्वास इनका प्रकृति और अपने इष्ट अपने जोड़ीदार पे अधिक मात्रा में होता हैं। तभी तो इनकी प्रार्थनाएं भी जल्दी सफल होती हैं। इनकी खासियत ये होती हैं की जितनी इनकी परीक्षा कड़क होगी उतना ही इनका विश्वास गहरा होते जाता हैं। आवुमन लोगों के साथ ऐसा नहीं होता पर इसलिए ही ये ख़ास होती हैं इनका विश्वास स्वयं भगवन भी नहीं हिला पाते। ये इतनी दृढ़ निश्चयी और एकनिष्ठ होती हैं। वाकई में विश्वास कैसे करना ये इनसे सीखना चाहिए।&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;१३. आकर्षण और अजीब शक्तियां इनमे होती हैं पर ये साधाहरण लोगों में उनके जैसा ही रहना पसंद करती हैं ताकि इन्हे ही तकलीफ न हो। अगर ये किसी को पसंद नहीं करती तो वो सरल मुंह पे बोल देगी, या कुछ इशारों में समझायेगी या चुपचाप अपना रास्ता नापेगी या फिर ज़्यादा हुआ तो फिर अपने शस्त्र को उठाये बगैर नहीं रहती इनका घुस्सा भी तेज़ होता हैं सामान्य व्यक्ति इन्हे संभल नहीं सकता। इनकी आँखों में भयंकर सम्मोहन शक्ति होती हैं जो कोई भी व्यक्ति ज्यादा देर तक इनसे वार्तालाप नहीं कर सकता। ये शब्दों के जादूगर भी होते हैं इसलिए इनसे जितना भी कठिन हैं। इनकी प्रार्थना ही इनकी ताक़त होती हैं। ये अगर ठान ले की ये नहीं चाहिए तो वो बात उनके पास रहती ही नहीं और अगर ये कह दे की ये चाहिए तो वो बात उनसे दूर कभी होती ही नहीं जब तक ये न चाहे तब तक।&amp;nbsp; &amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;१४. ये हमेशा अपने लक्ष्य पर और अपने कमियों पर गुप्त तरीके से कार्य करना पसंद करती हैं। ये किसी और की दखल अंदाज़ी पसंद नहीं करती। ऐसा करने मात्र से ये दण्डित भी करती हैं चाहे वो जो भी हो। इनका लक्ष इनके लिए सब कुछ होता हैं। एक बार ये अपने आप को तक न्यौछावर कर दे। ऐसी कठोर भी होती हैं अपने लक्ष्य को लेकर।&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;१५. ये अपनों से बहुत प्रेम करती हैं पर किसी के बंधन में नहीं रहती ना हीं इसे बंधन में रहना पसंद होता हैं। मतलब की मोहमाया में रहना। ये जल्दी प्रकृति से जुड़ जाती हैं तभी ये अच्छी वैद्य भी कहलाती हैं। स्वतंत्र रहना, खुशबू , साफसुथरा रहना, प्रकृति में निवास करना, उनके साथ समय बिताना, गुरु अपने इष्ट अपने प्रेमी अथवा पति के प्रति एकनिष्ठ और समर्पित रहना इन्हेबहुत पसंद होता हैं।&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;१६. दिव्यस्त्री सक्षम और संतुलन रहती हैं। बच्चे और पशु-पक्षी इनके ऊर्जा में खुद को सुरक्षित सा अनुभव करते हैं तभी ये पशु-पक्षी प्रेमिका भी कहलाती हैं।&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;१७. जब ये जागरूक हो जाती हैं और संतुलन हो जाती हैं तब इनके चहरे पर बहुत तेज होता हैं और ये सदैव ही प्रसन्न चित्त रहती हैं चाहे परिस्थिति कितनी भी जटिल क्यू न हो। लोग अक्सर इन्हे देख के जलते भी हैं और उनका बुरा करने का सोचते भी हैं क्यू की ये उनकी तरह नहीं होती पर ये अपने आप में एक योगिनी एक भैरवी होती है। इनके पास हर प्रश्न का समाधान होता हैं। ये स्वयं तंत्र पारंगत होती हैं इसलिए किसीका तंत्र भी इन्हे जल्दी असर नहीं करता। भगवान स्वयं ही इनकी बुरी और दुष्ट शक्तियों से रक्षण करता रहता हैं। ये भगवान की सबसे प्रिय होती हैं इन्हे दुखाना मतलब खुद पर मुसीबत ओढ़ लेना होता हैं। प्रकृति उन्हें क्षमा नहीं करती जो इन्हे दुखाये।&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;१८. इन्हे भगवान की और से हर तरह की सुरक्षता प्रदान होती रहती हैं और खुद प्रकृति इनकी गुरु होती हैं जो इन्हे सब समय समय पे सिखाती हैं। इनका इंटुइशन मतलब आत्मशक्ति बहुत उच्च होता हैं, इसलिए ही ये जल्दी से जागरूक हो जाती हैं और प्रकृति से भी जल्दी जुड़ जाती हैं दिव्यपुरुषों के तुलना में।&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;१९. ये अपना रास्ता अपने चिकित्सा और अपना मार्ग स्वयं खोजती हैं इसमें इनकी कोई सहायता नहीं करता सिर्फ प्रकृति ही इनकी सहायता करती है इनकी ऊर्जा स्तर के अनुसार वैसे लोग भेजकर इनसे कार्य करवाती हैं। ये लोगों के कार्य सहज ही कर देती हैं पर इनके कार्य इनके सिवाय कोई नहीं कर पाता। किसी भी कार्य को ये पूर्ण किये बिना स्वस्थ नहीं बैठती। इनके कार्य ही ऐसे होते हैं की इनके बिना कोई न कर पाये। असीम धैर्य होता हैं इनमे। अपने आत्मबल और विश्वास के बल पे ये असंभव से लगने वाले कार्य को भी पूर्ण कर दिखाती हैं।&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;२०. एक शोधकर्ता, सक्षम आध्यात्मिक गुरु, ज्योतिषशात्राज्ञ, सहज पाठिका [इन्टुइटिव रीडर ], ढृढ़ संकल्प वाली सक्षम नेता, कलाकार, संगीतकार, सुग्रण पाक सिद्धी और भी बहुत कुछ होती है। जो कुछ भी आपको पता हो और गुप्त हो वो भी ये उन क्षेत्रों में पारंगत होती हैं।&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;२१. छल कपट से हमेशा दूर ही रहती हैं और ऐसे लोगों से भी दूर रहना ज्यादा पसंद करती हैं। परेशानी जो भी हो जड़ से उखाड फेकना इनका पेशा होता हैं। ये परेशानियों से घबराती नहीं अपितु ये डटकर और बड़े उत्साह के साथ इनका सामना करती हैं तभी तो ये दिव्यस्त्री कहलाती हैं।&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;ऐसा नहीं हैं की आज के युग में ऐसी स्त्रियां नहीं हैं। हैं पर वे सामने नहीं आना चाहती क्यू की उनके लक्ष्य पर वे कार्य कर रही हैं और कुछ अपनों के बीच में रहकर भी अपने शक्तियों को गुप्त रखे हुए रह रही हैं। समय आने पर ये भी सामने आ जाएगी। इनकी खासियत हैं, ये आपको शांत, एकांत में वास करने वाली और ज़्यादातर साधना तपस्या करते वक़्त दिखाई देगी अगर आपको ये दिखाई दे तो दूर से ही इनको नमन कर लेना क्यू की इनका स्पर्श मात्र ही एक औषधि होती हैं जो सौभाग्य से प्राप्त होती हैं, ये बहुत दुर्लभ होती हैं ये ज़्यादातर अपनी पहचान गुप्त ही रखती हैं। अगर दिखे तो इनके सानिध्य में रहकर आप बहुत कुछ सिख लेना। ये आपको निराश नहीं करेगी पर इन्हे नाराज कभी मत करना वार्ना आपके आशीर्वाद भी आपके श्राप में बदलते वक़्त देरी नहीं लगेगी। इन्हे धैर्यशील , कठोर सिद्धांत, मज़बूत सीना [सख्त आत्मविश्वास ] सहनशील लोग ही पसंद आते हैं। ये उनकी वैसी परीक्षाएं भी लेती हैं यदि कोई सफल हो गया तो वे उसे वो सब कुछ प्रदान करती हैं जो व्यक्ति सोच भी नहीं सकता। अगर ऐसी कोई स्त्री दिखे तो समझ जाना की ये साधारण नहीं हैं। ये ट्विनफ्लेम डिवाइन फेमिनाईं जुड़वाँ आत्मा की दिव्यस्त्री हैं।&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;script async=&quot;&quot; crossorigin=&quot;anonymous&quot; src=&quot;https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-7074881198889056&quot;&gt;&lt;/script&gt;
&lt;ins class=&quot;adsbygoogle&quot; data-ad-client=&quot;ca-pub-7074881198889056&quot; data-ad-format=&quot;fluid&quot; data-ad-layout-key=&quot;-gc-2i-5p-b3+1q0&quot; data-ad-slot=&quot;7066449108&quot; style=&quot;display: block;&quot;&gt;&lt;/ins&gt;
&lt;script&gt;
     (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({});

  &lt;/script&gt;
    
    विश्वास हैं मुझे की आपको सभी प्रश्नो के उत्तर प्राप्त हो गए होंगे। यूट्युब पे पता नहीं क्या क्या बताते हैं। पर जो सच्चे ट्विनफ्लेम होंगे जो दिव्यस्त्री होगी वही ये सब जान सकती हैं बता सकती हैं और ज़्यादातर ये अपना बखान नहीं करती ये लोगों पर छोड़ देती हैं। इन्हे बस अपना लक्ष्य साधना होता हैं ये ज़्यादा लोगों के बातों को साबित नहीं करती बैठती। दिव्यस्त्री बहुत अधिक सहनशील होती हैं जब तक हैं तब तक ठीक हैं वर्णा इनके घुस्से का सामना करके देखना आप, आप वहाँ पे खड़े भी नहीं रह पाओगे। आप झगड़ा तो कर लोगे पर बाद में आपकी ही ग्लानि आपको खाने लग जाएगी। अच्छा जी, तो अब मैं अपने वाणी को विराम देते हुए अपने लेख को यही रोकती हूँ आज्ञा दीजिये की अगला लेख जल्दी से लेकर आऊ। अगले लेख में हम जानेंगे की दिव्यस्त्री का जीवन कैसा होता हैं। तब तक आप अपना ख्याल रखे और शोध लगाईये अपने अंदर क्या आपमें भी वो गुण हैं ? यदि हैं तो समय व्यर्थ न गवाएँ। क्या आपके भी पास ऐसी स्त्री हैं? यदि हैं तो उनका शरण लीजिये और अपने जीवन को सौभाग्य में बदले।&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;h4 style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;🙏&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;b&gt;जय गुरुदेव। हर-हर महादेव। &lt;/b&gt;&lt;/span&gt;🙏&lt;/h4&gt;</description><link>https://www.adhyatmikjagat69.co/2022/10/blog-post.html</link><author>noreply@blogger.com (Unknown)</author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhNDtEtzpzTyfU7foC8Hfo5NbXh083-mBGyx-kZeE0DO6bU-emdVMtlmoqP58UJoDJMRBIPx3MZgp_CvNIY8mWSLLj7oboe40GrVvw6aSBJB5_Uu_-eQGVxMql2Glp2VWhCdqnrogOOiIvqN1wJ3fBM6vf14Dcxq96-bkHR6uM1mruv9YHNDNZbUcXgrQ/s72-w199-h200-c/divine-feminine-1.jpg" height="72" width="72"/><thr:total>0</thr:total></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-8475792039111759199.post-4255562981805350432</guid><pubDate>Tue, 25 Oct 2022 16:07:00 +0000</pubDate><atom:updated>2023-03-20T21:47:46.349+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">जुड़वाँ लौ (ट्विन फ्लेम )</category><title>जुड़वाँ आत्मा की दिव्य स्त्री कैसी होती हैं?</title><description>&lt;p&gt;&amp;nbsp;आपका बहुत बहुत स्वागत हैं आपके अपने ब्लॉग पर। सबसे पहले तो आप सभी से क्षमा प्रार्थी हूँ की बडी लंबी&amp;nbsp; प्रतिक्षा करवाई आपको और बड़े लम्बे समय बाद मेरा लेख आपको मिला हैं। मेरी भी कुछ समस्याएँ थी जिस कारण आप सबको मैं लेख नहीं दे पाई। आपका निश्चल प्रेम और अटूट विश्वास जो आपने मुझपे बनाये रखा इसके लिए मैं ह्रिदय से आभार प्रकट करती हूँ। आप सब का बहुत बहुत धन्यवाद। अब आपका ज़्यादा समय न लेते हुए मैं आपको आज की लेख की और ले चलती हूँ। आज की लेख जुड़वाँ आत्मा की&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt; &lt;b&gt;दिव्य स्त्री&lt;/b&gt; &lt;/span&gt;पर हैं। जिन्हे हम&lt;b&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt; ट्विनफ्लेम की डिवाइन फेमिनाईं&lt;/span&gt; &lt;/b&gt;मतलब &lt;b&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;डी. एफ&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/b&gt; भी कहते हैं। आने वाले दिनों में आपको दिव्य पुरुष और जुड़वाँ आत्मा की ज़िन्दगी कैसे होती हैं इसपे आप सभी को गहराई से लेख पढ़ने को मिलेंगे तो आप मेरे साथ इस ब्लॉग से जुड़े रहिये।&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;जो कभी विकट से विकट परिस्थिति के भी सामने हार न माने जो हरपल सत्य के राह पर चलती रहें जो सबको एकसमान रूप से प्रेम करें दूसरों के भूल पर तक्षण क्षमा करें और गुन्हाओं के विरुद्ध बिना भय खाये जो दूसरों के हक़्क़ में और खुद के अस्तित्व के लिए लड़ने से नहीं डरती जो साधारण लोगों के तुलना में एक ज़्यादा सुलझी हुई&amp;nbsp; समझदार वो प्रेममई, वो विश्वासू, वो निडर, एकनिष्ठ, महत्वकांक्षी, कोमल हृदय, ममतामई, कला से भरी, एक ऊँचा व्यक्तित्व लिए, चरित्रवान, पुण्यवान, स्वाभिमानी, आत्मसम्मानी, निश्चल मन की, महकती हुई, चहकती हुई, वो सत्यप्रिया, शांतिप्रिय, चंचला, धैर्यशील, बुद्धिमान, सशक्त, न्यायप्रिय, सुन्दर सा आभामंडल, तीव्र सकारात्मक आकर्षण लिए हुए इस पृथ्वी पर एक ऊँचा और गहरा लक्ष्य लेकर जो जन्म लेती हैं वो होती हैं दिव्यस्त्री डिवाइन्फेमिनाईं [Divine Feminine - DF ].&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;table align=&quot;center&quot; cellpadding=&quot;0&quot; cellspacing=&quot;0&quot; class=&quot;tr-caption-container&quot; style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto;&quot;&gt;&lt;tbody&gt;&lt;tr&gt;&lt;td style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2022/10/judwa-aatma-ki-divyastree-kaisi-hoti-hain..html&quot; target=&quot;_blank&quot;&gt;&lt;img alt=&quot;जुड़वाँ आत्मा की दिव्य स्त्री कैसी होती हैं&quot; border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;350&quot; data-original-width=&quot;349&quot; height=&quot;200&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhNDtEtzpzTyfU7foC8Hfo5NbXh083-mBGyx-kZeE0DO6bU-emdVMtlmoqP58UJoDJMRBIPx3MZgp_CvNIY8mWSLLj7oboe40GrVvw6aSBJB5_Uu_-eQGVxMql2Glp2VWhCdqnrogOOiIvqN1wJ3fBM6vf14Dcxq96-bkHR6uM1mruv9YHNDNZbUcXgrQ/w199-h200/divine-feminine-1.jpg&quot; title=&quot;जुड़वाँ आत्मा की दिव्य स्त्री कैसी होती हैं&quot; width=&quot;199&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/span&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;&lt;tr&gt;&lt;td class=&quot;tr-caption&quot; style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2022/10/judwa-aatma-ki-divyastree-kaisi-hoti-hain..html&quot; target=&quot;_blank&quot;&gt;दिव्यस्त्री / divine feminine&amp;nbsp;&lt;/a&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;&lt;/tbody&gt;&lt;/table&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;h3 style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;दिव्या स्त्री के गुण और अवगुण :&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/h3&gt;&lt;p&gt;दिव्यस्त्री के ये सारे गुण होते हैं किन्तु अवगुण भी होती हैं पर तब तक जब तक की वो अपने अस्तित्व को जान न ले पहचान न ले एक बार दिव्यस्त्री अगर अपने जीवन के लक्ष्य को जान ले प्राप्त कर ले तो शायद ही कोई ऐसी कमिया उसमे दिखाई दे सकती हैं। इसके कही न्यूनता होती हैं जैसे की दूसरों पे जल्दी भरोसा रखना, जल्दी क्षमा करना, दूसरों के लिए अपनी परवाह न करना, अपने आप पर लक्ष्य न देना, अपना समय व्यर्थ बातों में गवाना और&amp;nbsp; बड़े जल्दी मायूस हो जाना। कभी कभी आलसी होना, निर्णय जल्दी न लेना, खुल कर दिल की बातें न बताना पर एक आशा में जीना की कोई आकर इन्हे समझे, इनकी बातों को बिना कहें सुने इन्हे जाने और वैसे ही करे जैसे इनके दिल में हैं तो फिर ये उनके लिए अपना सब कुछ लूटाने को तत्पर रहती हैं। अच्छी कमियाँ हैं न? पर यही सत्य हैं। पर ये इनके जागरूकता से पहले के लक्षण होते हैं। ये भी साधारण सी स्त्री जैसे दिखाई पड़ती हैं पर खास इन्हे वो बातें बनाती है जब ये जागरूक होती हैं जो आपने अभी ऊपर लेख में पढ़ा। दिव्यस्त्री भी खुद को तब तक साधारण सा ही समज़ती रहती हैं जब तक की इनके जीवन में कोई बड़ा तूफ़ान न आ जाये जहा इन्हे अपने अंदर के गुणों की क्षमताओं की शक्तियों की पहचान न हो जब तक ये उस परिस्थितियों&amp;nbsp; से न लड़ ले। या फिर तब तक इनका दिव्यपुरुष या इनके सद्गुरु न आ जाएं। इनकी जागरूकता साधारण सी नहीं होती अताह कष्ठ सहने पड़ते हैं। तब तक ये बड़े ही जटिल परिस्थितियों से झुंझती रहती हैं। पर इनमे कुछ ख़ास ऐसे बातें और लक्षण होते हैं जो इन्हे भी खुद अपने आप पर मामूली या साधारण सा न होना ये बता देता हैं। ये कितना भी अपने आपको प्रयास करले किसी वातावरण में ढालने का पर ये भीड़ में जल्दी ढलती नहीं हैं कुछ वक़्त के लिए ही ये लोगों के साथ रहती हैं घुमती फिरती हैं। पर फिर ये बहुत जल्दी ऊब जाती हैं। ये हमेशा ही अपने आप को अकेला सा ही महसूस करती रहती हैं। और कही न कहीं इनकी यही सोच इन्हे ये सोचने पे मज़बूर कर देती हैं की ये औरों से कुछ अलग हैं। यही से इनकी आत्मा की खोज धीरे धीरे शुरू होती हैं और यही से इनका अध्यात्मिक सफ़र शुरू हो जाता हैं।&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;h3 style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;script async=&quot;&quot; crossorigin=&quot;anonymous&quot; src=&quot;https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-7074881198889056&quot;&gt;&lt;/script&gt;
&lt;ins class=&quot;adsbygoogle&quot; data-ad-client=&quot;ca-pub-7074881198889056&quot; data-ad-format=&quot;fluid&quot; data-ad-layout-key=&quot;-gc-2i-5p-b3+1q0&quot; data-ad-slot=&quot;7066449108&quot; style=&quot;display: block;&quot;&gt;&lt;/ins&gt;
&lt;script&gt;
     (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({});
&lt;/script&gt; 
  
  &lt;/span&gt;&lt;/h3&gt;&lt;h3 style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;b&gt;आखिर कैसे होती हैं दिव्यस्त्री ?&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/h3&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;सही शब्दों में बताऊ तो ये एक उच्च कोटि की दिव्यस्त्री हैं जिन्हे हम अप्सरा, यक्षिणी, योगिनी, भैरवी, देवदूत, परी भी कहते हैं। जी, आपने सही पढ़ा मैं इन्हीं का वर्णन कर रही हूँ। रुकिए, आगे जानिए मैंने ऐसा क्यू कहा? इसका मतलब ये नहीं की ये अवतारित नहीं हो सकते जन्म नहीं ले सकते। ये होते हैं साधारण मनुष्यों की तरह इनका भी रहें सेहन होता हैं पर कुछ अलौकिक शक्तियां इनमे सुप्त होती है और कुछ हद्द तक जागरूक होती हैं। आम लोगों के तुलना से इनमे शक्तियां थोड़ी जागरूक होती हैं जो समय पर ही इन्हे जागरूक करनी होती हैं। तभी ये दिव्य बन पाति हैं। बहुत सी स्त्रीयोँ को ज्ञात हैं की हमारी जागरूकता हो गयी। अब ? अब आगे क्या? वो आगे बढ़ती ही नहीं उन्हें ये पता ही नहीं होता की जागरूक होने के बाद करना क्या होता हैं ? जागरूक होना मतलब चेतना जागरूक होना -आत्मजागरण होना अपने लक्ष्य की खोज करना उसपे कार्य करना अपने अंदर की शक्तियों को जागरूक करना अच्छे गुरु से दीक्षित होकर साधना और तपस्या करना जीवन को जीने की कला को सीखना। साधना मतलब खुद को साध लेना ये, ये होती हैं सच्ची और वास्तविक दिव्यस्त्री। और जो ये नहीं करती तो वो बस कुछ पल के लिए ही जागरूक होती हैं फिर सुप्त अवस्था में चली जाती हैं। क्योंकी वे कुछ करती ही नहीं। और फिर कही मोहमाया में फस जाती हैं। और अपने आपको ट्विन जुड़वाँ आत्मा कहते हैं।&amp;nbsp;बस एक घमंड में रहती हैं की हां मैं जुड़वाँ आत्मा हूँ दिव्यस्त्री हूँ। जो दिव्यस्त्री होती हैं वो कभी भी किसी को खुद का बखान नहीं करती। न ही जल्दी किसी को समझने देती हैं। ऐसे ही दिव्यस्त्री को ट्विन जुड़वाँ आत्मा कहते हैं। ऐसी लुलिपुच्कि नहीं होती हैं जुडवाँ आत्मा जो अपने दिव्यपुरुष के लिए रोते बैठे घंटों घंटों उसकी याद में कोई भी कार्य न करे। ट्विनफ्लैम क्यू आते हैं पता हैं? अपने मोक्ष के लिए अपनी ऊर्जा का स्तर बढ़ाने के लिए अपने लोक में एक ऊँचा लोक प्राप्त करने के लिए। कुछ अपना श्राप पूरा करने के लिए आते हैं, कोई जीवन का अनुभव लेने के लिए इस पृथ्वी पर आते हैं। कुछ बड़ा लक्ष्य को पूरा करने के लिए आते हैं तो कुछ अपने मुक्ति के लिए मोक्ष के लिए आते हैं। पर ऐसा क्यू ? बताती हूँ। पृथ्वी एक कर्मा भूमि है जिसे मृत्यु लोक भी कहते हैं। यहाँ शरीर धारण किया जाता हैं जो पंचतत्वों से बना होता हैं। जल,अग्नि,वायु,पृथ्वी,आकाश इनके समावेश से ये शरीर प्राप्त होता हैं और इन्ही में ७२००० नाड़ीयां होती हैं जिसमे से मुख्य ३ नाड़ियाँ होती हैं जिन्हे हम इडा, पिंगला, सुषुम्णा कहते हैं जो महाशक्ति कुण्डलिनी के आधार होते हैं। इनमे भी जो सुषुम्णा नाड़ी हैं उसी में कुण्डलिनी शक्ति का वास होता हैं उसे ही कुण्डलिनी शक्ति कहते हैं और जो इड़ा नाड़ी पुरुषतत्त्व का दायाँ भाग और पिंगला नाड़ी स्त्रीतत्त्व का बायाँ भाग होता हैं और जो दोनों नाड़ियों के ऊर्जा को संतुलन रखे तो सुष्मणा नाड़ी के द्वारा कुण्डलिनी जागरण होती हैं। तब व्यक्ति महामानव बन जाता हैं। यही प्रक्रिया ट्विनफ्लेम की होती हैं। जो स्त्री भाग हैं वही डिवाईन फेमिनाईं दिव्यस्त्री हैं। जब ये जागरूक हो जाती हैं तो ये पुरुष नाड़ी को भी जागरूक कर देती हैं तब ये साधारण नहीं रहती। इसलिए इन्हे दिव्यस्त्री कहते हैं। इसका वर्णन मैंने &lt;b&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2021/06/kundalini-shhatchakra-saat-chakra-bhedan-kaise-hota-hai-.html&quot;&gt;कुण्डलिनी शक्ति कैसे जागरूक होती हैं &lt;/a&gt;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;पिछले लेख में लिखा हैं। आप वो भी पढ़ लीजिये। आगे और जानते हैं, ये पृथ्वी एक पाठशाला हैं जहा हर जीव अपने कर्मो से कुछ सीखता हैं कुछ सिखाता हैं। इसलिए यहाँ शरीर मिलने के कारण देवी, देवता, दानव भी जन्म लेने के लिए ललायित रहते हैं। जिससे की उन्हें अपने कर्मो से मोक्ष मिल सके। देखिये कुछ किस्सों को आप किस्से ही समझेंगे और कोई इसे सत्य भी समझेंगे पर जो इस रास्ते पे हैं मैं उनके लिए सत्य का प्रकाश डाल रही हूँ न की भटका रही हूँ और यदि आप में से कोई ये कहें की ये सब मनघडण हैं तो उन्हें मैं सीधा कहूँगी की फिर जाईए और सत्य की खोज कीजिये मेरी बातों में मत आइये। क्यूकी ये कोई संसारी आँखों देखि बातें नहीं चल रही हैं की जिसपे भावनाओं का प्रमाण दूँ।&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;यह अध्यात्मिक जगत की बात हो रही है और ये एक विज्ञान हैं। अध्यात्मिक को समझना आसान नहीं यहाँ अलौकिक घटनाएं होती हैं अध्यात्मिक ऐसे ही हैं आपके मानने न मानने से अध्यात्मिक बदलने नहीं वाला ये ऐसे ही रहने वाला हैं जिस तरह से विज्ञानं को नहीं बदला या झूठा जा सकता हैं उसी प्रकार अध्यात्मिक को भी झूठा कहना गलत हैं विज्ञानं को देखने के लिए संसारी दो आँखें हैं और अध्यात्मिक बातों को देखने के लिए तीसरी आँख हैं उसे खोलो तो सब कुछ जान जाओगे। अध्यात्मिक एक विज्ञानं हैं जिसमे आत्मा के स्तर पर नए नए शोध होते रहते हैं। और मेरी बातों से वही सहमत होगा जो अध्यात्मिक जगत से जुड़ा हैं अर्थात जो अध्यात्मिक रास्ते पे हैं। जिसने अलौकिक घटनाएं बचपन से अनुभव किये हैं वही समझ पायेगा मेरी बातों को। बुद्धि जीवी लोग अपना सत्य खुद खोज ले हम अध्यात्मिक लोग कुछ ज़्यादा ही ज़िद्दी होते हैं अपने लक्ष्य को लेकर सो हमें इन सब से फरक नहीं पड़ता की क्या यहाँ सोचा जा रहा हैं ? कुछ बातों पे बस विश्वास करना अत्यंत आवश्यक होता हैं। जैसे की खुद के ऊपर भरोसा रखना क्या ये सत्य नहीं हैं? क्या हम हमारी भावनाओं के प्रमाण देते हैं? नहीं न? तो ये कुछ शोध कर्ताओं ने शोध की हैं और ये मेरी शोध हैं। जो भी मेरे जीवन अनुभव हैं जो कुछ भी मेरे सद्गुरु से मैंने प्राप्त किया वही बता रही हूँ। बिना अनुभव के मैं कुछ भी नहीं बोलती। चाहे आप माने या न माने आपके मानने न मानने से सत्य नहीं बदलता पर सत्य हैं क्या? खुद शोध लगाए मैं यही कहूँगी क्यू की अध्यात्मिक भी एक शोध लगाने का प्रयोग हैं।&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;table align=&quot;center&quot; cellpadding=&quot;0&quot; cellspacing=&quot;0&quot; class=&quot;tr-caption-container&quot; style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto;&quot;&gt;&lt;tbody&gt;&lt;tr&gt;&lt;td style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2022/10/judwa-aatma-ki-divyastree-kaisi-hoti-hain..html&quot; style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto;&quot;&gt;&lt;img alt=&quot;जुड़वाँ आत्मा की दिव्य स्त्री कैसी होती हैं?&quot; border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;551&quot; data-original-width=&quot;556&quot; height=&quot;198&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEid7Eox86eh_V1h43a4KcuZ1yfEkj27kON-EKiGj-Id_58VozE4L8YzcxjCvBdyj9uMbdbQ3a0mWoW72c_pPCydQthv_KXXsOIDXvpQmat-p0RDX3tJhXW3_O-zr70Vk3gddzknDxRnr0mFcsv2fchQZ4Me6hEtM1ZZu5Yqw_1OsEHKbqzRyFu81v_lUg/w200-h198/devi-parvati-divyastree-divine-feminine.webp&quot; title=&quot;जुड़वाँ आत्मा की दिव्य स्त्री कैसी होती हैं?&quot; width=&quot;200&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;&lt;tr&gt;&lt;td class=&quot;tr-caption&quot; style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;Arpita Sinha: Story of the first love in the world.&lt;br /&gt;Image source: blognox.com&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;&lt;/tbody&gt;&lt;/table&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;सरल सी बात हैं दिव्यस्त्री कैसी हो सकती है आप ही सोचिये ? क्या वो साधारण सी हो सकती हैं? क्या इसीलिए ही उसे दिव्यस्त्री कहते हैं? कुछ तो असाधारण सी बात हैं उसमे तभी तो वो सबसे हटकर दिव्यस्त्री कहलाती हैं। कुछ उदाहरण रख रही हूँ आपके सामने जिस तरह माँ पारवती, सीता माता, राधारानी, मीराबाई, जनाबाई, अक्कादेवी ये सब कौन थी? यही तो दिव्य स्त्री हैं&amp;nbsp; जिनका वर्णन आज आपको दे रही हूँ। पर इससे ट्विनफ्लैम क्या साबित हो जाता हैं ? यही बता रही हूँ की जिस तरह से सती माता ने पुनः पाँर्वती माता के रूप में जन्म लिया जो की सती की पूर्व यात्रा अपूर्ण होने के कारन वो अपना लक्ष्य न साध सकी इसलिए सती ने पुन्हा पाँर्वती माता के रूप में जन्म लेकर अपने लक्ष्य को साध लिया। माता पाँर्वती ने एक मनुष्य जाती में जन्म लिया और अपने लक्ष्य मतलब शिव को पाने के लिए जो एक साल तक गुफ़ा में पत्तों और पानी पे रहकर घोर तपस्या की जिनके तपस्या से शिवजी का आसन हिला तो उन्हें भी उनका प्रस्ताव स्वीकार करना पड़ा और जब उनका विवाह हुआ तो शिव की आदि शक्ति पाकर बाएं भाग में जुड़कर उनकी अर्धांगिनी आदिशक्ति माँ पाँर्वती महाकाली कहलायी। धीरे धीरे उनकी शक्तियां उन्हें प्राप्त हुई और एक एक कर के उनके रूप बाहर आते गए। क्या ये संभव नहीं हैं ? संभव हैं यदि मन में ठान लिया जाये। माँ पाँर्वती हम सब स्त्रियों के लिए एक उच्च कोटि का उदाहरण हैं की कैसे मानव जाती में जन्म लेकर कठोर तपस्या कर वे आदि शक्ति बने। उनके लिए भी सहज नहीं था ये सब करना। पर जनकल्याण के लिए और सही मार्ग साधना मार्ग प्रशस्त करने के लिए उन्हें भी सारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। ताकि साधारण व्यक्ति भी नर से नारायण बनने की कला जाने। उन्हें ये कोई कह न सके की आप तो भगवान हैं आपको क्या पता हमारी पीड़ा? पर सबसे ज़्यादा पीड़ा तो इन स्त्रियों ने इन दिव्यपुरुषों ने ही सहन किया हैं। उसी प्रकार सीता माता जो साक्षात् महालक्ष्मी थे जो मिथिला की राज कुमारी थी पर श्री राम जी के साथ भी उन्हें वन में भटकना पड़ा फिर रावण के वटी में रहकर अपने पति का वियोग और कही पीड़ा को सहना पड़ा, उसके बाद भी उनका त्याग करना और सारा जीवन पीड़ा में ही निकालना। राधारानी वे लक्ष्मीछाया मतलब लक्ष्मी ही थे जो बरसाने की राजकुमारी कैसे एक ग्वाले के प्रेम में पड़कर अपना सारा जीवन अपने प्रेमी के प्रतीक्षा में और बरसाने&amp;nbsp; लोगों के देख भल में बिताया। क्या वो पीड़ा नहीं थी ? क्या उन गोपियों की पीड़ा नहीं थी ? मीराबाई जो महलों की राजकुमारी थी पर वे भी विवाहित होने के बाद अपना सब कुछ कृष्ण को सौपने के बाद कैसे वे भी अपराधी साबित हुयी और अंततः उन्हें विष का प्याला देकर मृत्युदंड दिया। जनाबाई जो विट्ठल भक्त थी उसपे भी विट्ठल के हार का चोरी के इलज़ाम में सूली पे चढ़वाना चाहा था पर अंत समय में प्रभु ने आकर सब वर्णन बताया की वो भक्त है उनकी वो निर्दोष हैं अपने आप विट्ठल के गले की माला जनाबाई के गले में पोहोची क्या वो दिव्यस्त्री नहीं थी? क्या उन्हें पीड़ा नहीं हुयी? अक्कादेवी जो खुद एक भैरवी थी पर उनका विवाह भी एक साधारण से पुरुष से हुआ पर अक्कादेवी की भक्ति उन्हें खटकने लगी फिर उनहोंने अपने पति का सबकुछ त्याग कर यहाँ तक कपडे भी त्याग कर वे भैरवी बन कर शिव के भक्ति में लीन हो गयी। क्या उनके लिए सरल था ये सब? चलो शास्त्रों की छोडो लता दीदी, मैरी कॉम, कल्पना चावला, इंदिरा गाँधी, अम्माँ जयललिता क्या ये दिव्य स्त्री नहीं थे ? इनके लिए अपना लक्ष्य साधना सहज था ? नहीं पर उन्होंने अपने लक्ष्य को साध लिया यही उनका उद्देश्य था। आज भी लोग इन दिव्यस्त्रीयों को पूजते हैं। उन्होंने कही भी नहीं कहां की हमें पूजे पर उनकी करनी ही ऐसी थी की जग अपने आप उन्हें पूजने लगा। जब तक वे जीवित थे तब तक उन्हें बस तकलीफ ही दिए बहुत सताया और आज भी कही न कही कोई न कोई उनके अस्तित्व पे ऊँगली उठाते ही हैं। बोलने वाला तो समझ आता हैं की कितना ज्ञानी और संस्कारी हैं। इससे उसे ऐसा लगता हैं की वो सच बोल रहा हैं तो उसे यही कहूँगी शास्त्र पे मत जाओ अपने अंदर खोज करो उत्तर वही हैं पर याद रखिये उसके लिए भी गुरु का होना आवश्यक हैं। आपकी डीग्रीयाँ मरने के बाद काम नहीं आएगी, बल्कि आपके संस्कार और कर्मा काम आएंगे। कुछ पल के जीवन में इतना खो गए हैं लोग की खुद पर भी समय नहीं मिलता सत्य की खोज करने के लिए। और सत्य की खोज के लिए ही ट्विनफ्लेम आते हैं इसलिए जागरूकता होती हैं उनमे की आस पास के लिए उदाहरण बनिए इसलिए साधारण व्यक्ति के तुलना में ज़्यादा पीड़ा और दुःख ट्विनफ्लेम के हिस्से में ही आती हैं। ताकि वो लोगों के लिए आदर्श बन सके।&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2022/10/judwa-aatma-ki-divyastree-kaisi-hoti-hain..html&quot; style=&quot;margin-left: 1em; margin-right: 1em;&quot;&gt;&lt;img alt=&quot;जुड़वाँ आत्मा की दिव्य स्त्री कैसी होती हैं?&quot; border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;863&quot; data-original-width=&quot;600&quot; height=&quot;200&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg6wB-s6JzIyBr-EpO6ANMFPPPgTWrabqcwyLgggvMrXGrFx7_w-jzWyPq1kU2csEaWa5XHtoTKDjBFjxo8Me9MYUqBs3jR96JLe8h0twGO_NS9xS62ytniAMeJKuDPI37FoTHvBylrfARJi1XZZe8Qk_G1WvCfvtl7UcVVANdaihSz6GFkn51EE1iAsg/w139-h200/judwa-aatma-ki-divyastree-2.jpg&quot; title=&quot;जुड़वाँ आत्मा की दिव्य स्त्री कैसी होती हैं?&quot; width=&quot;139&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;h3 style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;b&gt;दिव्यस्त्री के लक्षण :&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&amp;nbsp;&lt;/h3&gt;&lt;p&gt;१. जो कभी झूठ बोलना और सुन्ना पसंद नहीं करती। जो अगर कुछ गलतियां कर भी ले तो पुर्ण पश्चाताप करती हैं। और ऐसा करने से वो कभी चुकती नहीं।&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;२. जो सहनशीलता से और आत्मसम्मान से भरी होती हैं।&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;३.&amp;nbsp; जो कभी भी किसीको चोट पहुचाने का विचार भी नहीं करती जो मृदुल, सुलझी हुई और शांत स्वाभाव की होती हैं।&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;४. प्रकृति से बहुत प्रेम होता हैं। ज़्यादा तर ये शाकाहरी ही होती हैं और लोगों की, प्रकृति की सेवा भी ज़्यादा से&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; ज़्यादा करती हैं। निरंतर प्रकृति को बचाने के लिए कोई न कोई शोध और प्रयास करती ही रहती हैं।&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;५. हो सकता हैं की कोई कोई असाधारण सी दिखने में हो पर उनका व्यक्तित्व अजीब सा आकर्षण लिए हुए रहता&amp;nbsp; हैं। पर बहुत ही बार ये शरीर से सुन्दर और आकर्षित होती हैं। असाधारण ढृढ़ मन होता हैं इनका। चहरे पर १०० चाँदनी की चमक लिए हुए ये जन्मी हुई होती हैं। इनको देखने मात्र से भी बहुत से रुके काम बन जाते हैं। यह बहुत ही शुभ दायक होती हैं। कल्याणकारी होती हैं। इनके कदम जहा पड़े वह हलचल सी मच जाती हैं। बुरी शक्तियां वहाँ ज्यादा देर तक वास नहीं करती। बुरी शक्तियां इनका हमेशा नुकसान करने के हेतु में ही रहती हैं पर नाकामियाब ही रहती हैं। क्योंकि एक समय के बाद ये उन शक्तियों को काबू करना भी सिख जाती हैं।&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;६. घुस्सा बहुत कम करती हैं खुद पे बहुत नियंत्रण रखती हैं, पर यदि घुस्सा आ जाये तो प्रकृति को भी हिला दे ऐसे इसकी शक्ति होती हैं।&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;७. जो हमेशा सत्य की खोज करें और दूसरों का दुःख दूर करने में सक्षम होती हैं।&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;८. सदैव मन में सद्धभावना, धरम और भक्ति के मार्ग में चलने वाली होती हैं। ईर्ष्या, लोभ, मोह, बंधन, काम, क्रोध,&amp;nbsp; द्वेष इन विकारों से बहुत दूर रहती हैं ये निरंतर ही अपने इस कमियों पर कार्य करती रहती हैं।&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;९. साधाहरण लोगों के तुलना में ये एकांत में वास करना, साधना करना, तपस्या करना, नयी कलायें सीखना ध्यान करना, नए बातों का शोध करना, योग करना बच्चों के साथ ज़्यादा समय बिताना जहा से नया ज्ञान प्राप्त हो ऐसे जगह ऐसे लोगों से संपर्क रखना।&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;१०. निरंतर अपने लक्ष्य पर केंद्रित रहती हैं और साथ में अपने आस पास का वातावरण का भी ख्याल रखती हैं।&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;script async=&quot;&quot; crossorigin=&quot;anonymous&quot; src=&quot;https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-7074881198889056&quot;&gt;&lt;/script&gt;
&lt;ins class=&quot;adsbygoogle&quot; data-ad-client=&quot;ca-pub-7074881198889056&quot; data-ad-format=&quot;fluid&quot; data-ad-layout-key=&quot;-gc-2i-5p-b3+1q0&quot; data-ad-slot=&quot;7066449108&quot; style=&quot;display: block;&quot;&gt;&lt;/ins&gt;
&lt;script&gt;
     (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({});

  &lt;/script&gt;
  ११. इनकी ऊर्जा बहुत अधिक मात्रा में उच्च स्तर की होती हैं इसलिए साधाहरण लोग इनके आस पास ज़्यादा देर&amp;nbsp; तक नहीं रह पाते। ईच्छाशक्ति इनकी आकाश के ऊँचाई को छू ले ऐसी संकल्प वादी और मेहनती होती हैं. दिव्यस्त्री प्रकृति की प्रिय होती हैं इसलिए इनका वैसे ही लालन पालन और संरक्षण भी प्रकृति के ओर से होता हैं।&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;१२. इनके विश्वास का कोई तोड़ नहीं बहुत अधिक और अटूट विश्वास इनका प्रकृति और अपने इष्ट अपने जोड़ीदार पे अधिक मात्रा में होता हैं। तभी तो इनकी प्रार्थनाएं भी जल्दी सफल होती हैं। इनकी खासियत ये होती हैं की जितनी इनकी परीक्षा कड़क होगी उतना ही इनका विश्वास गहरा होते जाता हैं। आवुमन लोगों के साथ ऐसा नहीं होता पर इसलिए ही ये ख़ास होती हैं इनका विश्वास स्वयं भगवन भी नहीं हिला पाते। ये इतनी दृढ़ निश्चयी और एकनिष्ठ होती हैं। वाकई में विश्वास कैसे करना ये इनसे सीखना चाहिए।&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;१३. आकर्षण और अजीब शक्तियां इनमे होती हैं पर ये साधाहरण लोगों में उनके जैसा ही रहना पसंद करती हैं ताकि इन्हे ही तकलीफ न हो। अगर ये किसी को पसंद नहीं करती तो वो सरल मुंह पे बोल देगी, या कुछ इशारों में समझायेगी या चुपचाप अपना रास्ता नापेगी या फिर ज़्यादा हुआ तो फिर अपने शस्त्र को उठाये बगैर नहीं रहती इनका घुस्सा भी तेज़ होता हैं सामान्य व्यक्ति इन्हे संभल नहीं सकता। इनकी आँखों में भयंकर सम्मोहन शक्ति होती हैं जो कोई भी व्यक्ति ज्यादा देर तक इनसे वार्तालाप नहीं कर सकता। ये शब्दों के जादूगर भी होते हैं इसलिए इनसे जितना भी कठिन हैं। इनकी प्रार्थना ही इनकी ताक़त होती हैं। ये अगर ठान ले की ये नहीं चाहिए तो वो बात उनके पास रहती ही नहीं और अगर ये कह दे की ये चाहिए तो वो बात उनसे दूर कभी होती ही नहीं जब तक ये न चाहे तब तक।&amp;nbsp; &amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;१४. ये हमेशा अपने लक्ष्य पर और अपने कमियों पर गुप्त तरीके से कार्य करना पसंद करती हैं। ये किसी और की दखल अंदाज़ी पसंद नहीं करती। ऐसा करने मात्र से ये दण्डित भी करती हैं चाहे वो जो भी हो। इनका लक्ष इनके लिए सब कुछ होता हैं। एक बार ये अपने आप को तक न्यौछावर कर दे। ऐसी कठोर भी होती हैं अपने लक्ष्य को लेकर।&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;१५. ये अपनों से बहुत प्रेम करती हैं पर किसी के बंधन में नहीं रहती ना हीं इसे बंधन में रहना पसंद होता हैं। मतलब की मोहमाया में रहना। ये जल्दी प्रकृति से जुड़ जाती हैं तभी ये अच्छी वैद्य भी कहलाती हैं। स्वतंत्र रहना, खुशबू , साफसुथरा रहना, प्रकृति में निवास करना, उनके साथ समय बिताना, गुरु अपने इष्ट अपने प्रेमी अथवा पति के प्रति एकनिष्ठ और समर्पित रहना इन्हेबहुत पसंद होता हैं।&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;१६. दिव्यस्त्री सक्षम और संतुलन रहती हैं। बच्चे और पशु-पक्षी इनके ऊर्जा में खुद को सुरक्षित सा अनुभव करते हैं तभी ये पशु-पक्षी प्रेमिका भी कहलाती हैं।&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;१७. जब ये जागरूक हो जाती हैं और संतुलन हो जाती हैं तब इनके चहरे पर बहुत तेज होता हैं और ये सदैव ही प्रसन्न चित्त रहती हैं चाहे परिस्थिति कितनी भी जटिल क्यू न हो। लोग अक्सर इन्हे देख के जलते भी हैं और उनका बुरा करने का सोचते भी हैं क्यू की ये उनकी तरह नहीं होती पर ये अपने आप में एक योगिनी एक भैरवी होती है। इनके पास हर प्रश्न का समाधान होता हैं। ये स्वयं तंत्र पारंगत होती हैं इसलिए किसीका तंत्र भी इन्हे जल्दी असर नहीं करता। भगवान स्वयं ही इनकी बुरी और दुष्ट शक्तियों से रक्षण करता रहता हैं। ये भगवान की सबसे प्रिय होती हैं इन्हे दुखाना मतलब खुद पर मुसीबत ओढ़ लेना होता हैं। प्रकृति उन्हें क्षमा नहीं करती जो इन्हे दुखाये।&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;१८. इन्हे भगवान की और से हर तरह की सुरक्षता प्रदान होती रहती हैं और खुद प्रकृति इनकी गुरु होती हैं जो इन्हे सब समय समय पे सिखाती हैं। इनका इंटुइशन मतलब आत्मशक्ति बहुत उच्च होता हैं, इसलिए ही ये जल्दी से जागरूक हो जाती हैं और प्रकृति से भी जल्दी जुड़ जाती हैं दिव्यपुरुषों के तुलना में।&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;१९. ये अपना रास्ता अपने चिकित्सा और अपना मार्ग स्वयं खोजती हैं इसमें इनकी कोई सहायता नहीं करता सिर्फ प्रकृति ही इनकी सहायता करती है इनकी ऊर्जा स्तर के अनुसार वैसे लोग भेजकर इनसे कार्य करवाती हैं। ये लोगों के कार्य सहज ही कर देती हैं पर इनके कार्य इनके सिवाय कोई नहीं कर पाता। किसी भी कार्य को ये पूर्ण किये बिना स्वस्थ नहीं बैठती। इनके कार्य ही ऐसे होते हैं की इनके बिना कोई न कर पाये। असीम धैर्य होता हैं इनमे। अपने आत्मबल और विश्वास के बल पे ये असंभव से लगने वाले कार्य को भी पूर्ण कर दिखाती हैं।&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;२०. एक शोधकर्ता, सक्षम आध्यात्मिक गुरु, ज्योतिषशात्राज्ञ, सहज पाठिका [इन्टुइटिव रीडर ], ढृढ़ संकल्प वाली सक्षम नेता, कलाकार, संगीतकार, सुग्रण पाक सिद्धी और भी बहुत कुछ होती है। जो कुछ भी आपको पता हो और गुप्त हो वो भी ये उन क्षेत्रों में पारंगत होती हैं।&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;२१. छल कपट से हमेशा दूर ही रहती हैं और ऐसे लोगों से भी दूर रहना ज्यादा पसंद करती हैं। परेशानी जो भी हो जड़ से उखाड फेकना इनका पेशा होता हैं। ये परेशानियों से घबराती नहीं अपितु ये डटकर और बड़े उत्साह के साथ इनका सामना करती हैं तभी तो ये दिव्यस्त्री कहलाती हैं।&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;ऐसा नहीं हैं की आज के युग में ऐसी स्त्रियां नहीं हैं। हैं पर वे सामने नहीं आना चाहती क्यू की उनके लक्ष्य पर वे कार्य कर रही हैं और कुछ अपनों के बीच में रहकर भी अपने शक्तियों को गुप्त रखे हुए रह रही हैं। समय आने पर ये भी सामने आ जाएगी। इनकी खासियत हैं, ये आपको शांत, एकांत में वास करने वाली और ज़्यादातर साधना तपस्या करते वक़्त दिखाई देगी अगर आपको ये दिखाई दे तो दूर से ही इनको नमन कर लेना क्यू की इनका स्पर्श मात्र ही एक औषधि होती हैं जो सौभाग्य से प्राप्त होती हैं, ये बहुत दुर्लभ होती हैं ये ज़्यादातर अपनी पहचान गुप्त ही रखती हैं। अगर दिखे तो इनके सानिध्य में रहकर आप बहुत कुछ सिख लेना। ये आपको निराश नहीं करेगी पर इन्हे नाराज कभी मत करना वार्ना आपके आशीर्वाद भी आपके श्राप में बदलते वक़्त देरी नहीं लगेगी। इन्हे धैर्यशील , कठोर सिद्धांत, मज़बूत सीना [सख्त आत्मविश्वास ] सहनशील लोग ही पसंद आते हैं। ये उनकी वैसी परीक्षाएं भी लेती हैं यदि कोई सफल हो गया तो वे उसे वो सब कुछ प्रदान करती हैं जो व्यक्ति सोच भी नहीं सकता। अगर ऐसी कोई स्त्री दिखे तो समझ जाना की ये साधारण नहीं हैं। ये ट्विनफ्लेम डिवाइन फेमिनाईं जुड़वाँ आत्मा की दिव्यस्त्री हैं।&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;script async=&quot;&quot; crossorigin=&quot;anonymous&quot; src=&quot;https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-7074881198889056&quot;&gt;&lt;/script&gt;
&lt;ins class=&quot;adsbygoogle&quot; data-ad-client=&quot;ca-pub-7074881198889056&quot; data-ad-format=&quot;fluid&quot; data-ad-layout-key=&quot;-gc-2i-5p-b3+1q0&quot; data-ad-slot=&quot;7066449108&quot; style=&quot;display: block;&quot;&gt;&lt;/ins&gt;
&lt;script&gt;
     (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({});

  &lt;/script&gt;
    
    विश्वास हैं मुझे की आपको सभी प्रश्नो के उत्तर प्राप्त हो गए होंगे। यूट्युब पे पता नहीं क्या क्या बताते हैं। पर जो सच्चे ट्विनफ्लेम होंगे जो दिव्यस्त्री होगी वही ये सब जान सकती हैं बता सकती हैं और ज़्यादातर ये अपना बखान नहीं करती ये लोगों पर छोड़ देती हैं। इन्हे बस अपना लक्ष्य साधना होता हैं ये ज़्यादा लोगों के बातों को साबित नहीं करती बैठती। दिव्यस्त्री बहुत अधिक सहनशील होती हैं जब तक हैं तब तक ठीक हैं वर्णा इनके घुस्से का सामना करके देखना आप, आप वहाँ पे खड़े भी नहीं रह पाओगे। आप झगड़ा तो कर लोगे पर बाद में आपकी ही ग्लानि आपको खाने लग जाएगी। अच्छा जी, तो अब मैं अपने वाणी को विराम देते हुए अपने लेख को यही रोकती हूँ आज्ञा दीजिये की अगला लेख जल्दी से लेकर आऊ। अगले लेख में हम जानेंगे की दिव्यस्त्री का जीवन कैसा होता हैं। तब तक आप अपना ख्याल रखे और शोध लगाईये अपने अंदर क्या आपमें भी वो गुण हैं ? यदि हैं तो समय व्यर्थ न गवाएँ। क्या आपके भी पास ऐसी स्त्री हैं? यदि हैं तो उनका शरण लीजिये और अपने जीवन को सौभाग्य में बदले।&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;h4 style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;🙏&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;b&gt;जय गुरुदेव। हर-हर महादेव। &lt;/b&gt;&lt;/span&gt;🙏&lt;/h4&gt;</description><link>https://www.adhyatmikjagat69.co/2022/10/judwa-aatma-ki-divyastree-kaisi-hoti-hain..html</link><author>noreply@blogger.com (Unknown)</author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhNDtEtzpzTyfU7foC8Hfo5NbXh083-mBGyx-kZeE0DO6bU-emdVMtlmoqP58UJoDJMRBIPx3MZgp_CvNIY8mWSLLj7oboe40GrVvw6aSBJB5_Uu_-eQGVxMql2Glp2VWhCdqnrogOOiIvqN1wJ3fBM6vf14Dcxq96-bkHR6uM1mruv9YHNDNZbUcXgrQ/s72-w199-h200-c/divine-feminine-1.jpg" height="72" width="72"/><thr:total>0</thr:total></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-8475792039111759199.post-3123324436263057078</guid><pubDate>Tue, 06 Jul 2021 12:33:00 +0000</pubDate><atom:updated>2024-09-28T15:50:34.221+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">कुण्डलिनी चक्र</category><title>स्वाधिष्ठान चक्र क्या हैं ?</title><description>&lt;div style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&amp;nbsp; आपका बहोत बहोत स्वागत हैं आध्यात्मिक जगत के ज्ञान भरे लेख मे और आपका ह्रदय से धन्यवाद् करती हूँ की आप अपना कीमती समय निकल कर यहाँ आये। आप यहाँ अपने विचार व्यक्त करने के लिए सहेज मेहसूस कर सकते हैं। आज हम &lt;b&gt;&lt;span style=&quot;color: #ffa400;&quot;&gt;स्वाधिष्ठान चक्र&lt;/span&gt;&lt;/b&gt; जो की कुण्डलिनी षट्चक्र में से निचे से २ स्थान का चक्र हैं। पिछले विषय में मैंने आपको &lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2021/06/kundalini-shhatchakra-saat-chakra-bhedan-kaise-hota-hai-.html&quot;&gt;कुण्डलिनी षट्चक्र&lt;/a&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&amp;nbsp; के बारें में समझाया था की ये मानव जीवन या किसी भी जिव में इनका क्या महत्व हैं। मैंने बहुत कम शब्दों में आपको समझाया था की आपको उस से थोड़ा ज्ञात हो की आगे हम इसी पर बात करेंगे इसलिए। आज हम इस चक्र को विस्तार से ज्ञात करने का प्रयत्न करेंगे।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;h2 style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: #ffa400;&quot;&gt;स्वाधिष्ठान चक्र&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/h2&gt;&lt;div&gt;&lt;ul style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;li&gt;&lt;span&gt;इस चक्र का स्थान&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span&gt;लिंगस्थान&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span&gt;के सामने हैं, और यह चक्र रीढ़ में होता हैं।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span&gt;इसके कमल के पंखुड़ियाँ ६ वर्ग में हैं।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span&gt;वर्ग में&amp;nbsp;&lt;span style=&quot;color: #ffa400;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;बँ, भँ, मँ, यँ, रँ, लँ&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;बीज मंत्र हैं।&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span&gt;&amp;nbsp;यह अर्धचंद्र के आकर में हैं और चन्द्रशुभ्रा वर्ण यन्त्र हैं इस चक्र का रंग सिंदूर वर्ण (नारंगी) हैं।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span&gt;चक्र का बीज मंत्र&lt;span style=&quot;color: #ffa400;&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span&gt;&lt;b&gt;&lt;span style=&quot;color: #ffa400;&quot;&gt;&#39; वँ &#39;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;हैं और वाहन मकर हैं।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span&gt;चक्र में देव तथा देव शक्ति देव विष्णु देवता और राकिनी जो की लक्ष्मि देवी ही हैं उन्ही का निवास हैं।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span&gt;यह जल तत्त्व चक्र हैं।&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span&gt;&amp;nbsp;यह इच्छाशक्ति, भावनाएँ, मैथुन क्रिया, और कला से सम्बंधित होता हैं।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;वाहन मकर पर वरुण देव का निवास हैं।&amp;nbsp;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span&gt;&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2021/07/swadhisthan-chakra-kya-hain-post.html&quot; style=&quot;margin-left: 1em; margin-right: 1em;&quot;&gt;&lt;img alt=&quot;स्वाधिष्ठान चक्र क्या हैं ?&quot; border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;360&quot; data-original-width=&quot;360&quot; height=&quot;200&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEh-D_CKseKJRwmU1Vvkd6D9BDK9UOGnDDy5zuxAHXQkRtH4AGu-FcJ_fQbvKY48C82rOgo1EhNL55W5YBToj-hHWrduyIICtLfl8ppwe55cnE7MC7SmIhRcZQxH3B_V9aZduZbtOVV0SQR4/w200-h200/%25E0%25A4%25B8%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B5%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25A7%25E0%25A4%25BF%25E0%25A4%25B7%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25A0%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25A8-%25E0%25A4%259A%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B0-%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25AF%25E0%25A4%25BE-%25E0%25A4%25B9%25E0%25A5%2588%25E0%25A4%2582..jpg&quot; title=&quot;स्वाधिष्ठान चक्र क्या हैं ?&quot; width=&quot;200&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;b style=&quot;color: #ffa400;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span&gt;&lt;b style=&quot;color: #ffa400;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span&gt;&lt;b style=&quot;color: #ffa400;&quot;&gt;&quot; स्व &quot; - स्वयं और &quot; अधिष्ठान &quot; - नितंब निवास&amp;nbsp; &lt;/b&gt;&lt;span&gt;यह हमारे जल तत्त्व से सम्बंधित होता हैं और जल तत्त्व हमारे भावनाओं से। जो हमारे अंदर ग़ुस्सा, बेचैनी, डर, पश्चाताप होते हैं वे इसी चक्र से आतें हैं।&lt;/span&gt;&lt;b&gt;&amp;nbsp;&lt;/b&gt;पूर्व के जो युग थे उनमें बहुत संख्या में लोगों का यह चक्र खुला रहता था जिससे की आदि के लोगों की भावनाएं और इच्छाएं मैथुन और कला का सही प्रयोग करते थे। परंतू अभी के समय में अर्थात कलियुग में यह चक्र की शक्ति मूलाधार में हैं क्योंकि मानव जीवन बदल चूका हैं। अभी मानव स्वार्थ और भौतिक जीवन जी रहा हैं और उसी मे ही अपना सुख और सौभाग्य खोज रहा हैं।स्वयं से दूर होकर अपने अस्तित्व अपने प्रभु से दूर होकर जीवन जी रहा हैं मोह माया में फसा हैं जो की काल्पनिक जग हैं उसीको सच मानकर जी रहा हैं। वो यह भूल जाता हैं की एक दिन म्रुत्यु सबको आणि हैं और यह सब यही रह जाना हैं और जाएगी तो सिर्फ उसकी भावनाएं उसके करम ही। इसी कारण से ही हर जगह कोई भी व्यक्ति भावनात्मक रुप से सुखी सम्पन्न और शांत नहीं दिखाई देगा। मूलाधार चक्र में हमारे संचित कर्मा भरे रहते हैं और स्वाधिस्ठान चक्र में हमारी भावनाएं इसी से हमें ऊपर उठना होता हैं। मूलाधार और स्वाधिस्ठान चक्र का हमारे अचेतन मन से जुड़ा हुआ रहता हैं यही वे चक्र हैं जिनसे हमारी कमज़ोरियाँ और शक्तियां प्रदर्शित होती हैं। जब कर्मा ऊपर की और उठते हैं तो यही सही संधि होती हैं की हम इन चक्रों को साफ़ करें। अपने आचरण, आहार विहार, मैथुन, भय, योग, ध्यान, साधना, तप, जाप, सेवा इत्यादि से हम अपने इस चक्रों को सुधार कर फिर जीवन के सही मायने में हर भावना को उतने ही शुद्ध भाव से जीवन का आनंद उठा पाएंगे। इसी चक्र में हमारे पश्चाताप की भावना भी होती हैं अगर जीवन में कोई गलत कार्य किया होगा तो उसका पश्चाताप हमेशा आपको सताएगा तो आपको वो पश्चाताप पूरा करना होगा अपने उस भूल को फिर से न दोहराकर। अगर हमने इस चक्र को साफ़ कर दिया तो हम हमारी भावनाओं को वश में कर सकते हैं और खुद में बदलाव देख सकते हैं। स्वाधिस्ठान चक्र का सीधा सम्बन्ध हमारे मन से होता हैं चेतन, अवचेतन और अचेतन मन से। हमारी जागने और सोने की जो अवस्था होती हैं वो चेतन और अवचेतन मन से होती हैं। जब हम सो रहे होते हैं तो ये तब भी काम करती हैं और जब हम जाग अवस्था में होते हैं तब हमें ज्ञात होता हैं की क्या सही भावना हैं और क्या गलत पर कुछ बातें जो हमारे अचेतन मन से आती हैं जिसे हम एक दृश्य कहते हैं वे हमें सबसे ज़्यादा विचलित करते हैं कोई भी निर्णय लेने में हमें ज्ञात तो होता हैं भीतर से परंतू हम समझ नहीं पातें और यही से जीवन के कुछ महत्व पूर्ण निर्णय लेने में असमर्थ होते हैं। हम चूक जातें हैं।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span&gt;स्वाधिष्ठान चक्र में देव विष्णु और राकिनी देवी हैं जो की महालक्ष्मी ही हैं और इनका मुख्य कार्य संसार का पालन करना और सुखी सम्पन्न संसार करवाने के लिए होता हैं। पति पत्नी के बीच जो प्रेम सम्बन्ध होता हैं वे यही देव देवी सँभालते हैं। इसलिए बहुत से लोग अपने संसारी जीवन संभाल नहीं पातें क्योंकि भावनाओं को समझना और संभालना हर किसी के बस की बात नहीं होती। विष्णु देव जो आकर्षण और पालनहार के देवता हैं और महालक्ष्मी जो धन समृद्धि ऐश्वर्या और एकनिष्ठा प्रेम की देवी हैं। और हम जब भी किसी जोड़े को देखते हैं तो हम यही कहते हैं की लक्ष्मीनारायण की जैसे जोड़ी बने रहे। हमारी इस चक्र में २ मुख्य ऐसे शक्ति है जिन्हे हम&lt;span style=&quot;color: #ffa400;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&amp;nbsp;&quot;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;color: #ffa400;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;इच्छा शक्ति&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&amp;nbsp;&lt;span style=&quot;color: #ffa400;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&quot;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;और &lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #ffa400;&quot;&gt;&quot;क्रिया शक्ति &quot;&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&amp;nbsp; कहते हैं। इनमें भी तीन शक्तियां महत्व होती हैं जिसे हम&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style=&quot;color: #ffa400;&quot;&gt;&lt;b&gt;प्राण शक्ति - जो हमारे शरीर को जीवित रखती हैं।&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style=&quot;color: #ffa400;&quot;&gt;&lt;b&gt;धारना शक्ति - जो हम बातें भावनाएं, आचरण धारण करते हैं।&amp;nbsp;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span&gt;&lt;span style=&quot;color: #ffa400;&quot;&gt;&lt;b&gt;चेतना शक्ति -जो हमारे चेतन, अवचेतन, और अचेतन मन को विकसित रखती हैं।&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span&gt;अगर इन शक्तियों का हम सही प्रयोग करें जैसे की हमारे आचरण को शुद्ध रखना , भगवान के प्रति, गुरु के प्रति, ब्रह्माण्ड के प्रति, प्रकृति के प्रति निस्वार्थ सेवा भाव रखना, सही समय पर सही और एक ही जोड़ीदार से सम्भोग करना, उनके प्रति समर्पित रहना, उन्हें प्रेम करना, ज्ञान से &lt;span style=&quot;color: #ffa400;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2020/10/dhyan-kya-hain-kyun-karna-chahiye-akhand-anand-post32.html&quot;&gt;ध्यान&lt;/a&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&amp;nbsp; से चेतना को विकसित करना, योग और प्राणायाम से शरीर को संतुलन रखना और भय और अन्य भावनाओं को संतुलन रखना। इन सारे बातों को ध्यान में रखते हुए हम यदि ऐसा जीवन अपना ले तो हमारे संचित कर्मों का असर भी हमारे ऊपर कम रहता हैं। और हमें उतनी पीड़ाएँ भी नहीं सहनी पड़ती। यदि इन बातों को हम संतुलन रखते हैं तो सुख हो या दुःख हम कभी विचलित नहीं होते और ना ही हम कभी गलत निर्णय ले पाएंगे। पर यदि आप शराब मदिरापान, धूम्रपान, नशा, गलत समय में गलत व्यक्तियों से या बहुत लोगों से सम्भोग करते रहेंगे या करने से ये चक्र आपका बंद हो जाता हैं, और आप पहले के कर्मा को इस जनम के कर्मा से जोड़ देते हैं। अनजाने में तो और भी पीड़ाएँ जीवन में उठाना पड़ता हैं। जवानी में चाहे आप कितने भी गलतियां या चेस्टा करले पर आपके कर्मों का फल कभी आपसे नस्ट नहीं होगा। वो समय पर ही आता हैं। आपका कर्मा कभी आपको चैन से नहीं जीने देगा और नाही आपकी आत्मा शांत बैठने देगी यदि आपने गलत बातें की हैं तो। और अगर की भी हैं तो प्रयत्न करें की आप ऐसी गलतियां अपने जीवन में फिर न करें खुद की ज़िम्मेदारी स्वयं उठाइएं और अपने जीवन में कुछ अच्छे कार्य करके आपने जीवन को शांत और सुखी बनाने का प्रयास करते रहिये। और इतना ही कहूँगी की विचार क्षण भर के होते हैं वे कभी थमते नहीं ना ही समय किसी के लिए रुकता हैं पर उन विचारों में खुद का आपा&amp;nbsp; मत गवायें जिससे की आपको बाद में पछताना पड़े । शांत रहे और सोच विचार करके ही कोई सही निर्णय ले। आपका जीवन सुखी रहेगा। जीवन को अच्छा रखने के लिए कुछ कठिन नियम भी बनाने पड़ते हैं तो बनाये। होती हैं पीड़ा शुरुवात में पर इसकी आपको धीरे धीरे आदत लग जाएगी। अच्छे जीवन के लिए निरंतर गुरुसेवा या देव भक्ति करना अनिवार्य हैं। और आपके करम कटाने के क्षमता सिर्फ योग्य गुरु में ही होती हैं। इसलिए गुरु के शरण में ही रहे वे हमेशा आपको सही मार्ग पर ही रखेंगे। स्वाधिस्ठान चक्र के बारे में जितना कहूँ उतना कम हैं, पर समय का भी भान रखना पड़ता हैं। तो आज के इस विषय में बस इतना ही आपने यदि&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #ffa400;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2020/10/muladhar-chakra-varnan.html&quot;&gt; मूलाधार &lt;/a&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;के बारें में पढ़ा नहीं हैं तो अवश्य पढियेगा। अब मैं आपके कीमती समय को प्रणाम और अपने वाणी को यही विराम देते हुए आपसे विदा लेना चाहती हूँ। फिर इसी विषय में आगे और समझाने का प्रयास करुँगी। और आगे भी इस लेख को भेज दीजियेगा। क्या पता आपकी एक छोटीसे प्रयास से किसकी सहायता हो जाएं ? तो प्रभु आप सभी पर अपनी कृपा आशीर्वाद और प्रेम बरसायें आपके घर में बरकत रहे और आपका जीवन आबाद रहे।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;h4 style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000; font-size: medium;&quot;&gt;🙏&lt;i&gt;जय गुरुदेव हर-हर महादेव।&amp;nbsp;&lt;/i&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000; font-size: large;&quot;&gt;🙏&lt;/span&gt;&lt;i style=&quot;color: #cc0000; font-size: large;&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/i&gt;&lt;/h4&gt;&lt;div&gt;&lt;span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;</description><link>https://www.adhyatmikjagat69.co/2021/07/blog-post.html</link><author>noreply@blogger.com (Unknown)</author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEh-D_CKseKJRwmU1Vvkd6D9BDK9UOGnDDy5zuxAHXQkRtH4AGu-FcJ_fQbvKY48C82rOgo1EhNL55W5YBToj-hHWrduyIICtLfl8ppwe55cnE7MC7SmIhRcZQxH3B_V9aZduZbtOVV0SQR4/s72-w200-h200-c/%25E0%25A4%25B8%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B5%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25A7%25E0%25A4%25BF%25E0%25A4%25B7%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25A0%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25A8-%25E0%25A4%259A%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B0-%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25AF%25E0%25A4%25BE-%25E0%25A4%25B9%25E0%25A5%2588%25E0%25A4%2582..jpg" height="72" width="72"/><thr:total>0</thr:total></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-8475792039111759199.post-7952518683205403034</guid><pubDate>Tue, 06 Jul 2021 12:33:00 +0000</pubDate><atom:updated>2023-01-17T13:20:45.240+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">कुण्डलिनी चक्र</category><title>स्वाधिष्ठान चक्र क्या हैं ?</title><description>&lt;div style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&amp;nbsp; आपका बहोत बहोत स्वागत हैं आध्यात्मिक जगत के ज्ञान भरे लेख मे और आपका ह्रदय से धन्यवाद् करती हूँ की आप अपना कीमती समय निकल कर यहाँ आये। आप यहाँ अपने विचार व्यक्त करने के लिए सहेज मेहसूस कर सकते हैं। आज हम &lt;b&gt;&lt;span style=&quot;color: #ffa400;&quot;&gt;स्वाधिष्ठान चक्र&lt;/span&gt;&lt;/b&gt; जो की कुण्डलिनी षट्चक्र में से निचे से २ स्थान का चक्र हैं। पिछले विषय में मैंने आपको &lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2021/06/kundalini-shhatchakra-saat-chakra-bhedan-kaise-hota-hai-.html&quot;&gt;कुण्डलिनी षट्चक्र&lt;/a&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&amp;nbsp; के बारें में समझाया था की ये मानव जीवन या किसी भी जिव में इनका क्या महत्व हैं। मैंने बहुत कम शब्दों में आपको समझाया था की आपको उस से थोड़ा ज्ञात हो की आगे हम इसी पर बात करेंगे इसलिए। आज हम इस चक्र को विस्तार से ज्ञात करने का प्रयत्न करेंगे।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;h2 style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: #ffa400;&quot;&gt;स्वाधिष्ठान चक्र&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/h2&gt;&lt;div&gt;&lt;ul style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;li&gt;&lt;span&gt;इस चक्र का स्थान&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span&gt;लिंगस्थान&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span&gt;के सामने हैं, और यह चक्र रीढ़ में होता हैं।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span&gt;इसके कमल के पंखुड़ियाँ ६ वर्ग में हैं।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span&gt;वर्ग में&amp;nbsp;&lt;span style=&quot;color: #ffa400;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;बँ, भँ, मँ, यँ, रँ, लँ&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;बीज मंत्र हैं।&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span&gt;&amp;nbsp;यह अर्धचंद्र के आकर में हैं और चन्द्रशुभ्रा वर्ण यन्त्र हैं इस चक्र का रंग सिंदूर वर्ण (नारंगी) हैं।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span&gt;चक्र का बीज मंत्र&lt;span style=&quot;color: #ffa400;&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span&gt;&lt;b&gt;&lt;span style=&quot;color: #ffa400;&quot;&gt;&#39; वँ &#39;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;हैं और वाहन मकर हैं।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span&gt;चक्र में देव तथा देव शक्ति देव विष्णु देवता और राकिनी जो की लक्ष्मि देवी ही हैं उन्ही का निवास हैं।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span&gt;यह जल तत्त्व चक्र हैं।&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span&gt;&amp;nbsp;यह इच्छाशक्ति, भावनाएँ, मैथुन क्रिया, और कला से सम्बंधित होता हैं।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;वाहन मकर पर वरुण देव का निवास हैं।&amp;nbsp;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span&gt;&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2021/07/swadhisthan-chakra-kya-hain-post.html&quot; style=&quot;margin-left: 1em; margin-right: 1em;&quot;&gt;&lt;img alt=&quot;स्वाधिष्ठान चक्र क्या हैं ?&quot; border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;360&quot; data-original-width=&quot;360&quot; height=&quot;200&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEh-D_CKseKJRwmU1Vvkd6D9BDK9UOGnDDy5zuxAHXQkRtH4AGu-FcJ_fQbvKY48C82rOgo1EhNL55W5YBToj-hHWrduyIICtLfl8ppwe55cnE7MC7SmIhRcZQxH3B_V9aZduZbtOVV0SQR4/w200-h200/%25E0%25A4%25B8%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B5%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25A7%25E0%25A4%25BF%25E0%25A4%25B7%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25A0%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25A8-%25E0%25A4%259A%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B0-%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25AF%25E0%25A4%25BE-%25E0%25A4%25B9%25E0%25A5%2588%25E0%25A4%2582..jpg&quot; title=&quot;स्वाधिष्ठान चक्र क्या हैं ?&quot; width=&quot;200&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;b style=&quot;color: #ffa400;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span&gt;&lt;b style=&quot;color: #ffa400;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span&gt;&lt;b style=&quot;color: #ffa400;&quot;&gt;&quot; स्व &quot; - स्वयं और &quot; अधिष्ठान &quot; - नितंब निवास&amp;nbsp; &lt;/b&gt;&lt;span&gt;यह हमारे जल तत्त्व से सम्बंधित होता हैं और जल तत्त्व हमारे भावनाओं से। जो हमारे अंदर ग़ुस्सा, बेचैनी, डर, पश्चाताप होते हैं वे इसी चक्र से आतें हैं।&lt;/span&gt;&lt;b&gt;&amp;nbsp;&lt;/b&gt;पूर्व के जो युग थे उनमें बहुत संख्या में लोगों का यह चक्र खुला रहता था जिससे की आदि के लोगों की भावनाएं और इच्छाएं मैथुन और कला का सही प्रयोग करते थे। परंतू अभी के समय में अर्थात कलियुग में यह चक्र की शक्ति मूलाधार में हैं क्योंकि मानव जीवन बदल चूका हैं। अभी मानव स्वार्थ और भौतिक जीवन जी रहा हैं और उसी मे ही अपना सुख और सौभाग्य खोज रहा हैं।स्वयं से दूर होकर अपने अस्तित्व अपने प्रभु से दूर होकर जीवन जी रहा हैं मोह माया में फसा हैं जो की काल्पनिक जग हैं उसीको सच मानकर जी रहा हैं। वो यह भूल जाता हैं की एक दिन म्रुत्यु सबको आणि हैं और यह सब यही रह जाना हैं और जाएगी तो सिर्फ उसकी भावनाएं उसके करम ही। इसी कारण से ही हर जगह कोई भी व्यक्ति भावनात्मक रुप से सुखी सम्पन्न और शांत नहीं दिखाई देगा। मूलाधार चक्र में हमारे संचित कर्मा भरे रहते हैं और स्वाधिस्ठान चक्र में हमारी भावनाएं इसी से हमें ऊपर उठना होता हैं। मूलाधार और स्वाधिस्ठान चक्र का हमारे अचेतन मन से जुड़ा हुआ रहता हैं यही वे चक्र हैं जिनसे हमारी कमज़ोरियाँ और शक्तियां प्रदर्शित होती हैं। जब कर्मा ऊपर की और उठते हैं तो यही सही संधि होती हैं की हम इन चक्रों को साफ़ करें। अपने आचरण, आहार विहार, मैथुन, भय, योग, ध्यान, साधना, तप, जाप, सेवा इत्यादि से हम अपने इस चक्रों को सुधार कर फिर जीवन के सही मायने में हर भावना को उतने ही शुद्ध भाव से जीवन का आनंद उठा पाएंगे। इसी चक्र में हमारे पश्चाताप की भावना भी होती हैं अगर जीवन में कोई गलत कार्य किया होगा तो उसका पश्चाताप हमेशा आपको सताएगा तो आपको वो पश्चाताप पूरा करना होगा अपने उस भूल को फिर से न दोहराकर। अगर हमने इस चक्र को साफ़ कर दिया तो हम हमारी भावनाओं को वश में कर सकते हैं और खुद में बदलाव देख सकते हैं। स्वाधिस्ठान चक्र का सीधा सम्बन्ध हमारे मन से होता हैं चेतन, अवचेतन और अचेतन मन से। हमारी जागने और सोने की जो अवस्था होती हैं वो चेतन और अवचेतन मन से होती हैं। जब हम सो रहे होते हैं तो ये तब भी काम करती हैं और जब हम जाग अवस्था में होते हैं तब हमें ज्ञात होता हैं की क्या सही भावना हैं और क्या गलत पर कुछ बातें जो हमारे अचेतन मन से आती हैं जिसे हम एक दृश्य कहते हैं वे हमें सबसे ज़्यादा विचलित करते हैं कोई भी निर्णय लेने में हमें ज्ञात तो होता हैं भीतर से परंतू हम समझ नहीं पातें और यही से जीवन के कुछ महत्व पूर्ण निर्णय लेने में असमर्थ होते हैं। हम चूक जातें हैं।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span&gt;स्वाधिष्ठान चक्र में देव विष्णु और राकिनी देवी हैं जो की महालक्ष्मी ही हैं और इनका मुख्य कार्य संसार का पालन करना और सुखी सम्पन्न संसार करवाने के लिए होता हैं। पति पत्नी के बीच जो प्रेम सम्बन्ध होता हैं वे यही देव देवी सँभालते हैं। इसलिए बहुत से लोग अपने संसारी जीवन संभाल नहीं पातें क्योंकि भावनाओं को समझना और संभालना हर किसी के बस की बात नहीं होती। विष्णु देव जो आकर्षण और पालनहार के देवता हैं और महालक्ष्मी जो धन समृद्धि ऐश्वर्या और एकनिष्ठा प्रेम की देवी हैं। और हम जब भी किसी जोड़े को देखते हैं तो हम यही कहते हैं की लक्ष्मीनारायण की जैसे जोड़ी बने रहे। हमारी इस चक्र में २ मुख्य ऐसे शक्ति है जिन्हे हम&lt;span style=&quot;color: #ffa400;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&amp;nbsp;&quot;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;color: #ffa400;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;इच्छा शक्ति&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&amp;nbsp;&lt;span style=&quot;color: #ffa400;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&quot;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;और &lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #ffa400;&quot;&gt;&quot;क्रिया शक्ति &quot;&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&amp;nbsp; कहते हैं। इनमें भी तीन शक्तियां महत्व होती हैं जिसे हम&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style=&quot;color: #ffa400;&quot;&gt;&lt;b&gt;प्राण शक्ति - जो हमारे शरीर को जीवित रखती हैं।&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style=&quot;color: #ffa400;&quot;&gt;&lt;b&gt;धारना शक्ति - जो हम बातें भावनाएं, आचरण धारण करते हैं।&amp;nbsp;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span&gt;&lt;span style=&quot;color: #ffa400;&quot;&gt;&lt;b&gt;चेतना शक्ति -जो हमारे चेतन, अवचेतन, और अचेतन मन को विकसित रखती हैं।&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span&gt;अगर इन शक्तियों का हम सही प्रयोग करें जैसे की हमारे आचरण को शुद्ध रखना , भगवान के प्रति, गुरु के प्रति, ब्रह्माण्ड के प्रति, प्रकृति के प्रति निस्वार्थ सेवा भाव रखना, सही समय पर सही और एक ही जोड़ीदार से सम्भोग करना, उनके प्रति समर्पित रहना, उन्हें प्रेम करना, ज्ञान से &lt;span style=&quot;color: #ffa400;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2020/10/dhyan-kya-hain-kyun-karna-chahiye-akhand-anand-post32.html&quot;&gt;ध्यान&lt;/a&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&amp;nbsp; से चेतना को विकसित करना, योग और प्राणायाम से शरीर को संतुलन रखना और भय और अन्य भावनाओं को संतुलन रखना। इन सारे बातों को ध्यान में रखते हुए हम यदि ऐसा जीवन अपना ले तो हमारे संचित कर्मों का असर भी हमारे ऊपर कम रहता हैं। और हमें उतनी पीड़ाएँ भी नहीं सहनी पड़ती। यदि इन बातों को हम संतुलन रखते हैं तो सुख हो या दुःख हम कभी विचलित नहीं होते और ना ही हम कभी गलत निर्णय ले पाएंगे। पर यदि आप शराब मदिरापान, धूम्रपान, नशा, गलत समय में गलत व्यक्तियों से या बहुत लोगों से सम्भोग करते रहेंगे या करने से ये चक्र आपका बंद हो जाता हैं, और आप पहले के कर्मा को इस जनम के कर्मा से जोड़ देते हैं। अनजाने में तो और भी पीड़ाएँ जीवन में उठाना पड़ता हैं। जवानी में चाहे आप कितने भी गलतियां या चेस्टा करले पर आपके कर्मों का फल कभी आपसे नस्ट नहीं होगा। वो समय पर ही आता हैं। आपका कर्मा कभी आपको चैन से नहीं जीने देगा और नाही आपकी आत्मा शांत बैठने देगी यदि आपने गलत बातें की हैं तो। और अगर की भी हैं तो प्रयत्न करें की आप ऐसी गलतियां अपने जीवन में फिर न करें खुद की ज़िम्मेदारी स्वयं उठाइएं और अपने जीवन में कुछ अच्छे कार्य करके आपने जीवन को शांत और सुखी बनाने का प्रयास करते रहिये। और इतना ही कहूँगी की विचार क्षण भर के होते हैं वे कभी थमते नहीं ना ही समय किसी के लिए रुकता हैं पर उन विचारों में खुद का आपा&amp;nbsp; मत गवायें जिससे की आपको बाद में पछताना पड़े । शांत रहे और सोच विचार करके ही कोई सही निर्णय ले। आपका जीवन सुखी रहेगा। जीवन को अच्छा रखने के लिए कुछ कठिन नियम भी बनाने पड़ते हैं तो बनाये। होती हैं पीड़ा शुरुवात में पर इसकी आपको धीरे धीरे आदत लग जाएगी। अच्छे जीवन के लिए निरंतर गुरुसेवा या देव भक्ति करना अनिवार्य हैं। और आपके करम कटाने के क्षमता सिर्फ योग्य गुरु में ही होती हैं। इसलिए गुरु के शरण में ही रहे वे हमेशा आपको सही मार्ग पर ही रखेंगे। स्वाधिस्ठान चक्र के बारे में जितना कहूँ उतना कम हैं, पर समय का भी भान रखना पड़ता हैं। तो आज के इस विषय में बस इतना ही आपने यदि&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #ffa400;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2020/10/muladhar-chakra-varnan.html&quot;&gt; मूलाधार &lt;/a&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;के बारें में पढ़ा नहीं हैं तो अवश्य पढियेगा। अब मैं आपके कीमती समय को प्रणाम और अपने वाणी को यही विराम देते हुए आपसे विदा लेना चाहती हूँ। फिर इसी विषय में आगे और समझाने का प्रयास करुँगी। और आगे भी इस लेख को भेज दीजियेगा। क्या पता आपकी एक छोटीसे प्रयास से किसकी सहायता हो जाएं ? तो प्रभु आप सभी पर अपनी कृपा आशीर्वाद और प्रेम बरसायें आपके घर में बरकत रहे और आपका जीवन आबाद रहे।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;h4 style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000; font-size: medium;&quot;&gt;🙏&lt;i&gt;जय गुरुदेव हर-हर महादेव।&amp;nbsp;&lt;/i&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000; font-size: large;&quot;&gt;🙏&lt;/span&gt;&lt;i style=&quot;color: #cc0000; font-size: large;&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/i&gt;&lt;/h4&gt;&lt;div&gt;&lt;span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;</description><link>https://www.adhyatmikjagat69.co/2021/07/swadhisthan-chakra-kya-hain-post.html</link><author>noreply@blogger.com (Unknown)</author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEh-D_CKseKJRwmU1Vvkd6D9BDK9UOGnDDy5zuxAHXQkRtH4AGu-FcJ_fQbvKY48C82rOgo1EhNL55W5YBToj-hHWrduyIICtLfl8ppwe55cnE7MC7SmIhRcZQxH3B_V9aZduZbtOVV0SQR4/s72-w200-h200-c/%25E0%25A4%25B8%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B5%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25A7%25E0%25A4%25BF%25E0%25A4%25B7%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25A0%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25A8-%25E0%25A4%259A%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B0-%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25AF%25E0%25A4%25BE-%25E0%25A4%25B9%25E0%25A5%2588%25E0%25A4%2582..jpg" height="72" width="72"/><thr:total>0</thr:total></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-8475792039111759199.post-3292548950104491535</guid><pubDate>Wed, 23 Jun 2021 14:00:00 +0000</pubDate><atom:updated>2024-09-28T15:50:34.403+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">अध्यात्मिक कथाएँ</category><title>वट सावित्री पौर्णिमा की कथा </title><description>&lt;p&gt;आपका बहोत बहोत स्वागत हैं आध्यात्मिक जगत में। आपके प्रेम और आशीर्वाद के लिए आपका पुनः पुनः ह्रदय से मैं धन्यवाद् करती हूँ।&amp;nbsp;जो आप मेरे लेख में अपनी रूचि व्यक्त कर रहे हैं आपका एक बार धन्यवाद् करती हूँ।&amp;nbsp; आज आपके लिए मैंने वट पौर्णिमा के अवसर पर वट सावित्री पौर्णिमा माँ की कथा लेकर आयी हूँ। यह व्रत ज्येष्ठ माह में अमावस के दिन भी मानते हैं और कोई पूर्णिमा को भी मानते हैं। यहाँ महाराष्ट्र में पूर्णिमा के दिन यह व्रत मानते हैं। इस दिन सुहागने अपनी पति के स्वतः और लम्बी आयु की कामना के लिए ये व्रत धारण करती हैं ताकि उन्हें अखंड सौभाग्यवती का वरदान प्राप्त हो और हर जनम में इसी पति को प्राप्त करें। इस कारण से भी यह व्रत होता हैं। परन्तु स्त्री के व्रत से ही ये संभव नहीं होता इसमें पति पुरुष का भी उतना ही स्नेह, सहयोग, विश्वास, भी होना चाहिए तभी ये दोनों बराबर मात्रा में व्रत सफल होता हैं। बात यहाँ एक पति व्रता की हैं की कैसे एक स्त्री ने अपने पति के प्राण यमराज से छीन लाये थे ? ताकि इनके जैसा प्रेम, निष्ठा, विश्वास और सैय्यम हर व्यक्ति में रहे चाहे वे स्त्री हो या पुरुष। यदि आपका प्रेम और विश्वास और निश्चय दृढ हैं तो आप भी अपने जीवन में खोया हुआ प्रेम पुनः प्राप्त कर सकते हैं। आज इनकी कथा पढ़कर आपके भी मन में सावित्री माँ जैसा विश्वास और दृढ निश्चय मन में प्रकट होगा। और मुझे यह पूर्ण मुझे विश्वास हैंकी ऐसा ही होगा।&amp;nbsp; &amp;nbsp;&lt;gwmw style=&quot;display: none;&quot;&gt;&lt;/gwmw&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;&lt;table align=&quot;center&quot; cellpadding=&quot;0&quot; cellspacing=&quot;0&quot; class=&quot;tr-caption-container&quot; style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto;&quot;&gt;&lt;tbody&gt;&lt;tr&gt;&lt;td style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2021/06/vat-savitri-pornima-ki-katha .html&quot; target=&quot;_blank&quot;&gt;&lt;img alt=&quot;वट सावित्री पौर्णिमा की कथा&quot; border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;414&quot; data-original-width=&quot;329&quot; height=&quot;200&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEh0IOwwDIeGWYTzut6aOQIjkxO3cyJYXOIhloERmwjFdU5y4NNDetrhQjhyjedYhSGAc_5APNz1eaSbM_YhUZC0VA_M2GAfuIiUNxXFB2g5XFydjggYGXzJ2YrmztbbrJ5egXyfdcHiKQhL/w159-h200/vat-vriksha-puja-1.jpg&quot; title=&quot;वट सावित्री पौर्णिमा की कथा&quot; width=&quot;159&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/span&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;&lt;tr&gt;&lt;td class=&quot;tr-caption&quot; style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000; font-size: medium;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2021/06/vat-savitri-pornima-ki-katha .html&quot; target=&quot;_blank&quot;&gt;वट सावित्री पूजा&amp;nbsp;&lt;/a&gt;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;&lt;/tbody&gt;&lt;/table&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;span style=&quot;font-family: Arial; white-space: pre-wrap;&quot;&gt;यह कथा द्वापरयुग की प्रसिद्ध कथा हैं की मध्यप्रदेश में एक अश्वपति नाम के परम ज्ञानी राजा थे। धन-वैभव से पूर्ण होने पर भी वे संतान के अभाव में बड़े दुखी रहते थे। राजा ने पंडितों की सलाह से पुत्र प्राप्ति के लिए सावित्री की अराधना की सावित्री ने प्रसन्न होकर राजा रानी को दर्शन देकर आशीर्वाद दिया और कहा कि तुम्हारे भाग्य में पुत्र तो नहीं है पर मैं स्वयं कन्या रूप में तुम्हारे यहां जन्म लूंगी इतना कहकर सावित्री देवी अंतर्ध्यान हो गई। उस समय बाद रानी के गर्भ से साक्षात सावित्री का जन्म हुआ राजा रानी ने उनका नाम भी सावित्री ही रखा सावित्री सर्वगुण संपन्ना थी। वह अति सुन्दर और मनमोहक चंद्रमा की कला के समान नित्य प्रति बढ़ने लगी। जब विवाह के योग्य हुई तब माता-पिता ने उससे कहा कि अब तुम अपने योग्य मनचाहा वर खोज लो। राजा ने उसे एक बूढ़े मंत्री के साथ वर खोजने के लिए भेज दिया। सावित्री यात्रा पर रवाना हो गई इधर एक दिन अचानक नारद जी मंत्री राष्ट्रपति से भेंट करने के लिए आए तभी सावित्री भी अपने लिए वर पसंद करके लौट आई। उसने आदर पूर्वक नाराद जी को प्रणाम किया नाराद जी ने उसे विवाह योग्य देखकर राजा अश्वपति से पूछा कि आपने इसके लिए योग्य वर खोजा है या नहीं, राजा ने बताया कि मैंने सावित्री को वर खोजने के लिए भेजा था। वह भी लौट कर आई है और अब वही बताएगी कि उसने अपने पति रूप में किसे पसंद किया है। सावित्री ने बताया &lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: Arial; white-space: pre-wrap;&quot;&gt;कि, साल्व देश के महाराज राजा द्युमत्सेन का राज्य उनके शत्रु ने छीन लिया है और राजा और रानी अंधे होकर रानी के साथ वन में रहते हैं।  उनके एकमात्र पुत्र सत्यवान को देख मुझे वे पति के रूप में योग्य दिखे और उन्ही को &lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: Arial; white-space: pre-wrap;&quot;&gt;मैंने अपना पति बनाने का निश्चय किया है। सावित्री के ऐसा कहने पर नारद जी ने राजा अश्वपति से कहा कि आपकी कन्या ने उचित वर खोजा हैं निसंदेह भारी परिश्रम किया है। सत्यवान गुणवान और धर्मात्मा है वह रूपवान और समस्त शास्त्रों का ज्ञाता है। वह अपने माता पिता के भांति सदा सत्य बोलने वाला है। इसी कारण उसका नाम सत्यवान हुआ। वह सब प्रकार से सावित्री के योग्य है वह सब बातों में सावित्री के साथ क्षमता रखता है। किन्तु उसमें एक भारी दोष है। वह अल्पायु है और 1 वर्ष की समाप्ति पर उसकी मृत्यु हो जाएगी। नारद जी के मुख से यह वचन सुनकर राजा अश्वपति का चेहरा उदास हो गया और उन्होंने सावित्री को समझाया कि ऐसे अल्पायु व्यक्ति के साथ विवाह करना कल्याण कारक नहीं है। इसलिए कोई अन्य वर पसंद कर लो। पिता की बात सुनकर सावित्री ने कहा कि अब मैं अन्य पति को खोजने का विचार नहीं कर सकती। मैंने जिसे एक बार अपने मन से पति स्वीकार कर लिया है वही मेरा पति होगा मैं किसी दूसरे का वरण किस प्रकार कर सकती हूं। राजा एक ही बार आज्ञा देता है पंडित एक ही बार प्रतिज्ञा करते हैं और कन्यादान भी एक ही बार होता है जैसा भी है अब वो मेरा पति है। मुझे उसके दीर्घायु या अल्पायु होने से कोई हर्ष विषाद नहीं है। मैं पुर्ण दृढ़ता पूर्वक कहती हूं कि सत्यवान ही मेरा पति होगा। सावित्री का ऐसा संकल्प सुनकर राजा ने सावित्री का विवाह सत्यवान के साथ ही कर देना चाहिए यही उचित होगा यह सोचकर वे मान गए। राजा अश्वपति ने विवाह की समस्त सामग्री इखट्टी की और कन्या तथा बूढ़े मंत्री को साथ लेकर द्युमत्सेन की तपोभूमि में पहुंच गए। वहां पर राजा द्युमत्सेन अपनी रानी और राजकुमार सत्यवान के साथ रहते थे। तो अश्वपति ने उनके पास पहुंचकर अपने पुत्री सावित्री का विवाह उनके पुत्र सत्यवान से करवाने का प्रस्ताव रखा। परन्तु राजा ध्रुमत्सेन ने उनका सारा सत्य बताकर उन्हें समझाया परन्तु सावित्री को सब ज्ञात होने के पश्च्यात भी सावित्री का निर्णय टस से मस न हुआ और सावित्री का दृढ़ निर्णय को देखकर उन्हें ने भी इस विवाह के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया और विवाह की स्वीकृति दे दी।&lt;/span&gt;&lt;div&gt;&lt;span style=&quot;font-family: Arial;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;white-space: pre-wrap;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style=&quot;font-family: Arial;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;white-space: pre-wrap;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;table align=&quot;center&quot; cellpadding=&quot;0&quot; cellspacing=&quot;0&quot; class=&quot;tr-caption-container&quot; style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto;&quot;&gt;&lt;tbody&gt;&lt;tr&gt;&lt;td style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2021/06/vat-savitri-pornima-ki-katha .html&quot; target=&quot;_blank&quot;&gt;&lt;img alt=&quot;वट सावित्री पौर्णिमा की कथा&quot; border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;449&quot; data-original-width=&quot;512&quot; height=&quot;176&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj2SLj8U_Rg1dkxXyW2Be-dXCp_d4X_dusaIynITwnPknGBQwblcszHQMPJMKo3NhD0ha0FJEabzppKTOjccStMhul0N_fodyZnRZx5c7_Fe4gdffgGKAbim40R7BCR56wiLbxqhGdLUNyx/w200-h176/sati-savitri..jpg&quot; title=&quot;वट सावित्री पौर्णिमा की कथा&quot; width=&quot;200&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/span&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;&lt;tr&gt;&lt;td class=&quot;tr-caption&quot; style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;b style=&quot;color: #cc0000; font-size: large;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2021/06/vat-savitri-pornima-ki-katha .html&quot; target=&quot;_blank&quot;&gt;सती सावित्री और पति सत्यवान&lt;/a&gt;&lt;/b&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;&lt;/tbody&gt;&lt;/table&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;p&gt;&lt;span style=&quot;font-family: Arial; white-space: pre-wrap;&quot;&gt;शास्त्र सम्मत रीति से सावित्री का विवाह सत्यवान के साथ करके राजा अश्वपति अपनी राजधानी को लौट गए और उधर सावित्री मनचाहे पति सत्यवान को पाकर सुख पूर्वक वन में रहने लगी। नारद जी के वचन हर समय सावित्री के कानों में गूंजते रहते थे। वह एक-एक दिन गिन रही थी उसने जब पति की मृत्यु का दिन निकट आया यह जाना तो 3 दिन पहले से ही उसने उपवास आरंभ कर दिया। तीसरे दिन अपने पितरों का पूजन किया वही दिन नारद जी ने सत्यवान की मृत्यु का बताया था। रोज की भांति उस दिन भी सत्यवान अपने समय पर कुल्हाड़ी और टोकरी लेकर लकड़ी काटने के लिए वन में जाने लगा तो सावित्री ने स्वयं भी उसके साथ चलने का आग्रह किया। सत्यवान ने उसे माता पिता की सेवा के लिए वही ठहरने की सहमति दी तब सावित्री अपने सास-ससुर से सत्यवान के साथ वन में जाने की आज्ञा ले आई और उसके साथ वन को चलने को तैयार हुई सत्यवान ने वन पहुंचकर फल फूल तोड़े और बाद में लकड़ी काटने के लिए वृक्ष पर चढ गया। वृक्ष के ऊपर ही सत्यवान के सिर में भारी पीड़ा होने लगी वृक्ष से नीचे उतरा और सावित्री की गोद में अपना सिर रख कर लेट गया। कुछ देर बाद सावित्री ने यमराज को हाथ में पास लिए हुए अपनी ओर आते देखा। पहले तो यमराज ने सावित्री देवी विधान सुनाया और फिर भी सत्यवान के अंकुश मात्र जीव को लेकर दक्षिण दिशा की ओर चले गए। सावित्री यमराज के पीछे पीछे चलने लगी जब बहुत दूर तक भी उसने यमराज का पीछा ना छोड़ा तो उन्होंने उससे कहा कि हे पतिव्रता जिस सीमा तक एक मनुष्य दूसरे मनुष्य का साथ दे सकता है, वहां तक तुमने पति का साथ दिया अब तुम घर लौट जाओ सावित्री ने कहा धर्मराज जहां मेरे पति जा रहे हैं वहां मुझे भी जाना चाहिए यही सनातन धर्म है। पति व्रत के प्रभाव और आपकी कृपा से कोई भी मेरी गति नहीं रोक सकता सावित्री के ऐसे धर्म पूर्ण वचन सुनकर यमराज ने प्रसन्न होकर उसे एक वर मांगने के लिए कहा &lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;सावित्री बोली कि मेरे सास-ससुर वन में रहते हैं और अंधे हैं मैं आपसे यही मांगती हूं की उनकी दृष्टि पुनः लौट आये  यमराज ने तथास्तु कहा  &lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;और उसे पुनः लौट जाने की सलाह दी। यमराज की बात सुनकर सावित्री ने कहा भगवान जहां मेरे पतिदेव जाते हो वहां उनके पीछे-पीछे चलने में मुझे भी कष्ट या परिश्रम नहीं है, पति परायण होना मेरा कर्तव्य है। सावित्री के ऐसे धर्म युक्त और श्रद्धा पूर्ण वचन सुनकर यमराज ने फिर कहा सावित्री मैं तुम्हारे वचनों से बहुत प्रसन्न हूं। तुम मुझसे एक वरदान और मांग सकती हो। सावित्री ने कहा&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt; हमारा राज्य छिन गया है उसे पुनः प्राप्त करें और धर्म में हमारी सदैव प्रीति रहे यही वरदान मुझे दीजिए  &lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;यमराज ने तथास्तु कहकर उसे लौट जाने को कहा किंतु वह न मानी और बराबर पीछा करती रही। उसकी ऐसी पति भक्ति देख यमराज ने प्रसन्न होकर उसे तीसरा वरदान देने की इच्छा प्रकट की तब सावित्री ने &lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;अपने कुल की भलाई को दृष्टि में रखकर १०० भाई होने का वरदान मांगा  &lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;यमराज ने यह वरदान भी दे दिया। सावित्री से आगे ना बढ़ कर लौटने का आग्रह किया किंतु सावित्री अपने प्राण पर अडिग रही। सावित्री की निष्ठा और दृढ़ संकल्प देखकर यमराज का हृदय पसीज गया और विनम्र वाणी में बोले सावित्री धर्म युक्त और गंभीर युक्ति पूर्ण वचन कहती हो कि मेरे ह्रदय में तुम्हारे लिए और सम्मान बढ़ता है। अतः तुम सत्यवान के जीवन को छोड़कर एक और वरदान मुझसे ले लो और अपने घर लौट जाओ। सावित्री ने विलम्ब न करते हुए &lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;सत्यवान से 100 पुत्र होने का वरदान मांगा  &lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;और कहा की मैं एक पतिव्रता नारी हूँ और सती भी, तो मेरे लिए किसी पर पुरुष का विचार भी पाप हैं तो मैं अपने पति के बिना १०० पुत्र कैसे प्राप्त करुँगी ? सावित्री के संयुक्त पूर्ण वचन सुनकर यमराज बहुत संतुष्ट हुए और उन्होंने उसे वरदान देते हुए सत्यवान को पास से मुक्त कर दिया और कहा सत्यवान से तुम्हें निश्चय ही 100 पुत्र होंगे। सावित्री को मनोवांछित वरदान देकर यमराज वही अंतर्ध्यान हो गए। सावित्री लौटकर वटवृक्ष के नीचे आई वटवृक्ष के नीचे सत्यवान का मृत शरीर पड़ा हुआ था। उसमें जीवन का संचार हो गया और वह उठ कर बैठ गया सावित्री ने सत्यवान को सारा वृत्तांत सुनाया और फिर वे दोनों खुशी-खुशी आश्रम की ओर चलें गए। सत्यवान के माता-पिता को दृष्टि प्राप्त हो गई थी और उन्हें अपना राज पांठ भी अब मिल चूका था। सारे देश में सावित्री के अनुपम पतिव्रत का समाचार फैल गया परिजनों ने महाराज द्युमत्सेन को ले जाकर आदर पूर्वक आसन पर बैठाया सावित्री के पिता अश्वपति को भी 100 पुत्र प्राप्त हुए और सावित्री सत्यवान ने भी 100 पुत्र प्राप्त करके दीर्घायु तक राज्य भोगा और अंत में बैकुंठ पधारे। एक कथा ऐसी भी थी की वटवृक्ष ही माँ सावित्री हैं और उनकी इस दिन पूजा करने से वे सुहागन स्त्रीयोँ को अखंड सौभाग्यवती का वरदान देती हैं और जिस पति की कामना के लिए व्रत किया हो वो उसीके को साथ जनम प्राप्त करती हैं। एक सौभाग्यवती स्त्री के लिए यह व्रत करना आवश्यक है। वट सावित्री की व्रत कथा एक पवित्रता और सती की था है जो यह उदहारण देती हैं की प्रेम और आपका विश्वास सच्चा है और पक्का हैं आप कोई भी बात को संभव क्र सकती हैं किन्तु यह सिर्फ नारियों के लिए ही नहीं किन्तु पुरुषों के लिए भी हैं की जितनी नारी पतिव्रता हो उतना ही पुरुष अपने पत्नी क लिए पत्नीव्रता हो तभी रिश्ता एक अटूट बंधन में बांधता हैं। आशा करती हूं की आपको कथा पसंद आई होगी पसंद आई होगी तो आप भी अपने रिश्ते में उतना ही प्रेम और विश्वास और साथ स्थिर रहें। इसी के साथ अब मैं विदा लेती हु और पुनः किसी एक नायें विषय के साथ आपसे मिलती हूँ तब तक आप अपना और अपनों का ध्यान रखे। प्रभु आप सभी पर कृपा, आशीर्वाद, प्रेम और आनंद प्रदान करें। आपके घर में बरकत रहे और आपका जीवन आबाद रहे। &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style=&quot;font-family: Arial; font-size: 11pt; white-space: pre-wrap;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;h4 style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-family: Arial; white-space: pre-wrap;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-size: 11pt;&quot;&gt;🙏&lt;/span&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000; font-size: medium;&quot;&gt;जय गुरुदेव  हर-हर  महादेव। &lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;span style=&quot;font-size: 11pt;&quot;&gt;🙏  &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/h4&gt;&lt;div&gt;&lt;span style=&quot;font-family: Arial; font-size: 11pt; white-space: pre-wrap;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;</description><link>https://www.adhyatmikjagat69.co/2021/06/blog-post.html</link><author>noreply@blogger.com (Unknown)</author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEh0IOwwDIeGWYTzut6aOQIjkxO3cyJYXOIhloERmwjFdU5y4NNDetrhQjhyjedYhSGAc_5APNz1eaSbM_YhUZC0VA_M2GAfuIiUNxXFB2g5XFydjggYGXzJ2YrmztbbrJ5egXyfdcHiKQhL/s72-w159-h200-c/vat-vriksha-puja-1.jpg" height="72" width="72"/><thr:total>0</thr:total></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-8475792039111759199.post-7990613611079043190</guid><pubDate>Wed, 23 Jun 2021 14:00:00 +0000</pubDate><atom:updated>2023-01-17T13:19:55.256+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">अध्यात्मिक कथाएँ</category><title>वट सावित्री पौर्णिमा की कथा </title><description>&lt;p&gt;आपका बहोत बहोत स्वागत हैं आध्यात्मिक जगत में। आपके प्रेम और आशीर्वाद के लिए आपका पुनः पुनः ह्रदय से मैं धन्यवाद् करती हूँ।&amp;nbsp;जो आप मेरे लेख में अपनी रूचि व्यक्त कर रहे हैं आपका एक बार धन्यवाद् करती हूँ।&amp;nbsp; आज आपके लिए मैंने वट पौर्णिमा के अवसर पर वट सावित्री पौर्णिमा माँ की कथा लेकर आयी हूँ। यह व्रत ज्येष्ठ माह में अमावस के दिन भी मानते हैं और कोई पूर्णिमा को भी मानते हैं। यहाँ महाराष्ट्र में पूर्णिमा के दिन यह व्रत मानते हैं। इस दिन सुहागने अपनी पति के स्वतः और लम्बी आयु की कामना के लिए ये व्रत धारण करती हैं ताकि उन्हें अखंड सौभाग्यवती का वरदान प्राप्त हो और हर जनम में इसी पति को प्राप्त करें। इस कारण से भी यह व्रत होता हैं। परन्तु स्त्री के व्रत से ही ये संभव नहीं होता इसमें पति पुरुष का भी उतना ही स्नेह, सहयोग, विश्वास, भी होना चाहिए तभी ये दोनों बराबर मात्रा में व्रत सफल होता हैं। बात यहाँ एक पति व्रता की हैं की कैसे एक स्त्री ने अपने पति के प्राण यमराज से छीन लाये थे ? ताकि इनके जैसा प्रेम, निष्ठा, विश्वास और सैय्यम हर व्यक्ति में रहे चाहे वे स्त्री हो या पुरुष। यदि आपका प्रेम और विश्वास और निश्चय दृढ हैं तो आप भी अपने जीवन में खोया हुआ प्रेम पुनः प्राप्त कर सकते हैं। आज इनकी कथा पढ़कर आपके भी मन में सावित्री माँ जैसा विश्वास और दृढ निश्चय मन में प्रकट होगा। और मुझे यह पूर्ण मुझे विश्वास हैंकी ऐसा ही होगा।&amp;nbsp; &amp;nbsp;&lt;gwmw style=&quot;display: none;&quot;&gt;&lt;/gwmw&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;&lt;table align=&quot;center&quot; cellpadding=&quot;0&quot; cellspacing=&quot;0&quot; class=&quot;tr-caption-container&quot; style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto;&quot;&gt;&lt;tbody&gt;&lt;tr&gt;&lt;td style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2021/06/vat-savitri-pornima-ki-katha .html&quot; target=&quot;_blank&quot;&gt;&lt;img alt=&quot;वट सावित्री पौर्णिमा की कथा&quot; border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;414&quot; data-original-width=&quot;329&quot; height=&quot;200&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEh0IOwwDIeGWYTzut6aOQIjkxO3cyJYXOIhloERmwjFdU5y4NNDetrhQjhyjedYhSGAc_5APNz1eaSbM_YhUZC0VA_M2GAfuIiUNxXFB2g5XFydjggYGXzJ2YrmztbbrJ5egXyfdcHiKQhL/w159-h200/vat-vriksha-puja-1.jpg&quot; title=&quot;वट सावित्री पौर्णिमा की कथा&quot; width=&quot;159&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/span&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;&lt;tr&gt;&lt;td class=&quot;tr-caption&quot; style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000; font-size: medium;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2021/06/vat-savitri-pornima-ki-katha .html&quot; target=&quot;_blank&quot;&gt;वट सावित्री पूजा&amp;nbsp;&lt;/a&gt;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;&lt;/tbody&gt;&lt;/table&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;span style=&quot;font-family: Arial; white-space: pre-wrap;&quot;&gt;यह कथा द्वापरयुग की प्रसिद्ध कथा हैं की मध्यप्रदेश में एक अश्वपति नाम के परम ज्ञानी राजा थे। धन-वैभव से पूर्ण होने पर भी वे संतान के अभाव में बड़े दुखी रहते थे। राजा ने पंडितों की सलाह से पुत्र प्राप्ति के लिए सावित्री की अराधना की सावित्री ने प्रसन्न होकर राजा रानी को दर्शन देकर आशीर्वाद दिया और कहा कि तुम्हारे भाग्य में पुत्र तो नहीं है पर मैं स्वयं कन्या रूप में तुम्हारे यहां जन्म लूंगी इतना कहकर सावित्री देवी अंतर्ध्यान हो गई। उस समय बाद रानी के गर्भ से साक्षात सावित्री का जन्म हुआ राजा रानी ने उनका नाम भी सावित्री ही रखा सावित्री सर्वगुण संपन्ना थी। वह अति सुन्दर और मनमोहक चंद्रमा की कला के समान नित्य प्रति बढ़ने लगी। जब विवाह के योग्य हुई तब माता-पिता ने उससे कहा कि अब तुम अपने योग्य मनचाहा वर खोज लो। राजा ने उसे एक बूढ़े मंत्री के साथ वर खोजने के लिए भेज दिया। सावित्री यात्रा पर रवाना हो गई इधर एक दिन अचानक नारद जी मंत्री राष्ट्रपति से भेंट करने के लिए आए तभी सावित्री भी अपने लिए वर पसंद करके लौट आई। उसने आदर पूर्वक नाराद जी को प्रणाम किया नाराद जी ने उसे विवाह योग्य देखकर राजा अश्वपति से पूछा कि आपने इसके लिए योग्य वर खोजा है या नहीं, राजा ने बताया कि मैंने सावित्री को वर खोजने के लिए भेजा था। वह भी लौट कर आई है और अब वही बताएगी कि उसने अपने पति रूप में किसे पसंद किया है। सावित्री ने बताया &lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: Arial; white-space: pre-wrap;&quot;&gt;कि, साल्व देश के महाराज राजा द्युमत्सेन का राज्य उनके शत्रु ने छीन लिया है और राजा और रानी अंधे होकर रानी के साथ वन में रहते हैं।  उनके एकमात्र पुत्र सत्यवान को देख मुझे वे पति के रूप में योग्य दिखे और उन्ही को &lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: Arial; white-space: pre-wrap;&quot;&gt;मैंने अपना पति बनाने का निश्चय किया है। सावित्री के ऐसा कहने पर नारद जी ने राजा अश्वपति से कहा कि आपकी कन्या ने उचित वर खोजा हैं निसंदेह भारी परिश्रम किया है। सत्यवान गुणवान और धर्मात्मा है वह रूपवान और समस्त शास्त्रों का ज्ञाता है। वह अपने माता पिता के भांति सदा सत्य बोलने वाला है। इसी कारण उसका नाम सत्यवान हुआ। वह सब प्रकार से सावित्री के योग्य है वह सब बातों में सावित्री के साथ क्षमता रखता है। किन्तु उसमें एक भारी दोष है। वह अल्पायु है और 1 वर्ष की समाप्ति पर उसकी मृत्यु हो जाएगी। नारद जी के मुख से यह वचन सुनकर राजा अश्वपति का चेहरा उदास हो गया और उन्होंने सावित्री को समझाया कि ऐसे अल्पायु व्यक्ति के साथ विवाह करना कल्याण कारक नहीं है। इसलिए कोई अन्य वर पसंद कर लो। पिता की बात सुनकर सावित्री ने कहा कि अब मैं अन्य पति को खोजने का विचार नहीं कर सकती। मैंने जिसे एक बार अपने मन से पति स्वीकार कर लिया है वही मेरा पति होगा मैं किसी दूसरे का वरण किस प्रकार कर सकती हूं। राजा एक ही बार आज्ञा देता है पंडित एक ही बार प्रतिज्ञा करते हैं और कन्यादान भी एक ही बार होता है जैसा भी है अब वो मेरा पति है। मुझे उसके दीर्घायु या अल्पायु होने से कोई हर्ष विषाद नहीं है। मैं पुर्ण दृढ़ता पूर्वक कहती हूं कि सत्यवान ही मेरा पति होगा। सावित्री का ऐसा संकल्प सुनकर राजा ने सावित्री का विवाह सत्यवान के साथ ही कर देना चाहिए यही उचित होगा यह सोचकर वे मान गए। राजा अश्वपति ने विवाह की समस्त सामग्री इखट्टी की और कन्या तथा बूढ़े मंत्री को साथ लेकर द्युमत्सेन की तपोभूमि में पहुंच गए। वहां पर राजा द्युमत्सेन अपनी रानी और राजकुमार सत्यवान के साथ रहते थे। तो अश्वपति ने उनके पास पहुंचकर अपने पुत्री सावित्री का विवाह उनके पुत्र सत्यवान से करवाने का प्रस्ताव रखा। परन्तु राजा ध्रुमत्सेन ने उनका सारा सत्य बताकर उन्हें समझाया परन्तु सावित्री को सब ज्ञात होने के पश्च्यात भी सावित्री का निर्णय टस से मस न हुआ और सावित्री का दृढ़ निर्णय को देखकर उन्हें ने भी इस विवाह के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया और विवाह की स्वीकृति दे दी।&lt;/span&gt;&lt;div&gt;&lt;span style=&quot;font-family: Arial;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;white-space: pre-wrap;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style=&quot;font-family: Arial;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;white-space: pre-wrap;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;table align=&quot;center&quot; cellpadding=&quot;0&quot; cellspacing=&quot;0&quot; class=&quot;tr-caption-container&quot; style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto;&quot;&gt;&lt;tbody&gt;&lt;tr&gt;&lt;td style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2021/06/vat-savitri-pornima-ki-katha .html&quot; target=&quot;_blank&quot;&gt;&lt;img alt=&quot;वट सावित्री पौर्णिमा की कथा&quot; border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;449&quot; data-original-width=&quot;512&quot; height=&quot;176&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj2SLj8U_Rg1dkxXyW2Be-dXCp_d4X_dusaIynITwnPknGBQwblcszHQMPJMKo3NhD0ha0FJEabzppKTOjccStMhul0N_fodyZnRZx5c7_Fe4gdffgGKAbim40R7BCR56wiLbxqhGdLUNyx/w200-h176/sati-savitri..jpg&quot; title=&quot;वट सावित्री पौर्णिमा की कथा&quot; width=&quot;200&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/span&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;&lt;tr&gt;&lt;td class=&quot;tr-caption&quot; style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;b style=&quot;color: #cc0000; font-size: large;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2021/06/vat-savitri-pornima-ki-katha .html&quot; target=&quot;_blank&quot;&gt;सती सावित्री और पति सत्यवान&lt;/a&gt;&lt;/b&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;&lt;/tbody&gt;&lt;/table&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;p&gt;&lt;span style=&quot;font-family: Arial; white-space: pre-wrap;&quot;&gt;शास्त्र सम्मत रीति से सावित्री का विवाह सत्यवान के साथ करके राजा अश्वपति अपनी राजधानी को लौट गए और उधर सावित्री मनचाहे पति सत्यवान को पाकर सुख पूर्वक वन में रहने लगी। नारद जी के वचन हर समय सावित्री के कानों में गूंजते रहते थे। वह एक-एक दिन गिन रही थी उसने जब पति की मृत्यु का दिन निकट आया यह जाना तो 3 दिन पहले से ही उसने उपवास आरंभ कर दिया। तीसरे दिन अपने पितरों का पूजन किया वही दिन नारद जी ने सत्यवान की मृत्यु का बताया था। रोज की भांति उस दिन भी सत्यवान अपने समय पर कुल्हाड़ी और टोकरी लेकर लकड़ी काटने के लिए वन में जाने लगा तो सावित्री ने स्वयं भी उसके साथ चलने का आग्रह किया। सत्यवान ने उसे माता पिता की सेवा के लिए वही ठहरने की सहमति दी तब सावित्री अपने सास-ससुर से सत्यवान के साथ वन में जाने की आज्ञा ले आई और उसके साथ वन को चलने को तैयार हुई सत्यवान ने वन पहुंचकर फल फूल तोड़े और बाद में लकड़ी काटने के लिए वृक्ष पर चढ गया। वृक्ष के ऊपर ही सत्यवान के सिर में भारी पीड़ा होने लगी वृक्ष से नीचे उतरा और सावित्री की गोद में अपना सिर रख कर लेट गया। कुछ देर बाद सावित्री ने यमराज को हाथ में पास लिए हुए अपनी ओर आते देखा। पहले तो यमराज ने सावित्री देवी विधान सुनाया और फिर भी सत्यवान के अंकुश मात्र जीव को लेकर दक्षिण दिशा की ओर चले गए। सावित्री यमराज के पीछे पीछे चलने लगी जब बहुत दूर तक भी उसने यमराज का पीछा ना छोड़ा तो उन्होंने उससे कहा कि हे पतिव्रता जिस सीमा तक एक मनुष्य दूसरे मनुष्य का साथ दे सकता है, वहां तक तुमने पति का साथ दिया अब तुम घर लौट जाओ सावित्री ने कहा धर्मराज जहां मेरे पति जा रहे हैं वहां मुझे भी जाना चाहिए यही सनातन धर्म है। पति व्रत के प्रभाव और आपकी कृपा से कोई भी मेरी गति नहीं रोक सकता सावित्री के ऐसे धर्म पूर्ण वचन सुनकर यमराज ने प्रसन्न होकर उसे एक वर मांगने के लिए कहा &lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;सावित्री बोली कि मेरे सास-ससुर वन में रहते हैं और अंधे हैं मैं आपसे यही मांगती हूं की उनकी दृष्टि पुनः लौट आये  यमराज ने तथास्तु कहा  &lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;और उसे पुनः लौट जाने की सलाह दी। यमराज की बात सुनकर सावित्री ने कहा भगवान जहां मेरे पतिदेव जाते हो वहां उनके पीछे-पीछे चलने में मुझे भी कष्ट या परिश्रम नहीं है, पति परायण होना मेरा कर्तव्य है। सावित्री के ऐसे धर्म युक्त और श्रद्धा पूर्ण वचन सुनकर यमराज ने फिर कहा सावित्री मैं तुम्हारे वचनों से बहुत प्रसन्न हूं। तुम मुझसे एक वरदान और मांग सकती हो। सावित्री ने कहा&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt; हमारा राज्य छिन गया है उसे पुनः प्राप्त करें और धर्म में हमारी सदैव प्रीति रहे यही वरदान मुझे दीजिए  &lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;यमराज ने तथास्तु कहकर उसे लौट जाने को कहा किंतु वह न मानी और बराबर पीछा करती रही। उसकी ऐसी पति भक्ति देख यमराज ने प्रसन्न होकर उसे तीसरा वरदान देने की इच्छा प्रकट की तब सावित्री ने &lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;अपने कुल की भलाई को दृष्टि में रखकर १०० भाई होने का वरदान मांगा  &lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;यमराज ने यह वरदान भी दे दिया। सावित्री से आगे ना बढ़ कर लौटने का आग्रह किया किंतु सावित्री अपने प्राण पर अडिग रही। सावित्री की निष्ठा और दृढ़ संकल्प देखकर यमराज का हृदय पसीज गया और विनम्र वाणी में बोले सावित्री धर्म युक्त और गंभीर युक्ति पूर्ण वचन कहती हो कि मेरे ह्रदय में तुम्हारे लिए और सम्मान बढ़ता है। अतः तुम सत्यवान के जीवन को छोड़कर एक और वरदान मुझसे ले लो और अपने घर लौट जाओ। सावित्री ने विलम्ब न करते हुए &lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;सत्यवान से 100 पुत्र होने का वरदान मांगा  &lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;और कहा की मैं एक पतिव्रता नारी हूँ और सती भी, तो मेरे लिए किसी पर पुरुष का विचार भी पाप हैं तो मैं अपने पति के बिना १०० पुत्र कैसे प्राप्त करुँगी ? सावित्री के संयुक्त पूर्ण वचन सुनकर यमराज बहुत संतुष्ट हुए और उन्होंने उसे वरदान देते हुए सत्यवान को पास से मुक्त कर दिया और कहा सत्यवान से तुम्हें निश्चय ही 100 पुत्र होंगे। सावित्री को मनोवांछित वरदान देकर यमराज वही अंतर्ध्यान हो गए। सावित्री लौटकर वटवृक्ष के नीचे आई वटवृक्ष के नीचे सत्यवान का मृत शरीर पड़ा हुआ था। उसमें जीवन का संचार हो गया और वह उठ कर बैठ गया सावित्री ने सत्यवान को सारा वृत्तांत सुनाया और फिर वे दोनों खुशी-खुशी आश्रम की ओर चलें गए। सत्यवान के माता-पिता को दृष्टि प्राप्त हो गई थी और उन्हें अपना राज पांठ भी अब मिल चूका था। सारे देश में सावित्री के अनुपम पतिव्रत का समाचार फैल गया परिजनों ने महाराज द्युमत्सेन को ले जाकर आदर पूर्वक आसन पर बैठाया सावित्री के पिता अश्वपति को भी 100 पुत्र प्राप्त हुए और सावित्री सत्यवान ने भी 100 पुत्र प्राप्त करके दीर्घायु तक राज्य भोगा और अंत में बैकुंठ पधारे। एक कथा ऐसी भी थी की वटवृक्ष ही माँ सावित्री हैं और उनकी इस दिन पूजा करने से वे सुहागन स्त्रीयोँ को अखंड सौभाग्यवती का वरदान देती हैं और जिस पति की कामना के लिए व्रत किया हो वो उसीके को साथ जनम प्राप्त करती हैं। एक सौभाग्यवती स्त्री के लिए यह व्रत करना आवश्यक है। वट सावित्री की व्रत कथा एक पवित्रता और सती की था है जो यह उदहारण देती हैं की प्रेम और आपका विश्वास सच्चा है और पक्का हैं आप कोई भी बात को संभव क्र सकती हैं किन्तु यह सिर्फ नारियों के लिए ही नहीं किन्तु पुरुषों के लिए भी हैं की जितनी नारी पतिव्रता हो उतना ही पुरुष अपने पत्नी क लिए पत्नीव्रता हो तभी रिश्ता एक अटूट बंधन में बांधता हैं। आशा करती हूं की आपको कथा पसंद आई होगी पसंद आई होगी तो आप भी अपने रिश्ते में उतना ही प्रेम और विश्वास और साथ स्थिर रहें। इसी के साथ अब मैं विदा लेती हु और पुनः किसी एक नायें विषय के साथ आपसे मिलती हूँ तब तक आप अपना और अपनों का ध्यान रखे। प्रभु आप सभी पर कृपा, आशीर्वाद, प्रेम और आनंद प्रदान करें। आपके घर में बरकत रहे और आपका जीवन आबाद रहे। &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style=&quot;font-family: Arial; font-size: 11pt; white-space: pre-wrap;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;h4 style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-family: Arial; white-space: pre-wrap;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-size: 11pt;&quot;&gt;🙏&lt;/span&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000; font-size: medium;&quot;&gt;जय गुरुदेव  हर-हर  महादेव। &lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;span style=&quot;font-size: 11pt;&quot;&gt;🙏  &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/h4&gt;&lt;div&gt;&lt;span style=&quot;font-family: Arial; font-size: 11pt; white-space: pre-wrap;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;</description><link>https://www.adhyatmikjagat69.co/2021/06/vat-savitri-pornima-ki-katha .html</link><author>noreply@blogger.com (Unknown)</author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEh0IOwwDIeGWYTzut6aOQIjkxO3cyJYXOIhloERmwjFdU5y4NNDetrhQjhyjedYhSGAc_5APNz1eaSbM_YhUZC0VA_M2GAfuIiUNxXFB2g5XFydjggYGXzJ2YrmztbbrJ5egXyfdcHiKQhL/s72-w159-h200-c/vat-vriksha-puja-1.jpg" height="72" width="72"/><thr:total>0</thr:total></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-8475792039111759199.post-4568460360242876582</guid><pubDate>Fri, 18 Jun 2021 13:00:00 +0000</pubDate><atom:updated>2024-09-28T15:50:34.587+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">कुण्डलिनी चक्र</category><title>कुण्डलिनी षट्चक्र या सप्तचक्र क्या होते हैं?</title><description>&lt;p&gt;&amp;nbsp;आपका बहोत बहोत स्वागत हैं आध्यात्मिक जगत के ज्ञान भरे लेख मे और आपका ह्रदय से धन्यवाद् करती हूँ की आप अपना कीमती समय निकल कर यहाँ आये। आप यहाँ अपने विचार व्यक्त करने के लिए सहेज मेहसूस कर सकते हैं। इस कोरोना के चलते हम सब जानते है की यह हम सब के लिए बहोत ही कठिन समय हैं और हमारा विश्वास ही हमारी ताक़त हैं। इन सारी परेशानियों से लड़ना एक कठिन अवस्था है हमारे लिए और हमारे परिवार के लिए भी। किंतू मुझे विश्वास हैं की आप कुशल- मंगल होंगे। मेरी यही प्रार्थना हैं आपके लिए की परमेश्वर आपको और आपके परिवार को कोरोना की कठिन घड़ियों से लड़ने की शक्ति आवश्य दे।&amp;nbsp;&lt;gwmw style=&quot;display: none;&quot;&gt;&lt;/gwmw&gt;&lt;gwmw style=&quot;display: none;&quot;&gt;&lt;/gwmw&gt;&lt;gwmw style=&quot;display: none;&quot;&gt;&lt;/gwmw&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;आज हम कुण्डलिनी षष्टचक्र / साथ चक्र भेदन के विषय में जानेंगे, की क्या ,कितने और कैसे ये चक्र होते हैं ? कैसे इन चक्र का भेदन होता है मतलब खुलते है। जैसे की मैंने पिछले कही लेख में कुण्डलिनी चक्र का पहला चक्र मूलाधार चक्र के विषय को विस्तार से बताया हैं। और भी आगे सारे चक्रों की श्रृंखला आएंगे। आज मैंने सोचा की थोड़ा इस विषय पर प्रकाश डालू की दरअसल ये कुण्डलिनी चक्र क्या हैं? और कितने होते है ? फिर उसके बाद हम बाकी के षट्/छः चक्र के बारें में जानेंगे। ताकि आपको थोडासा इस विषय में ज्ञात हो की ये क्या होते हैं? और आपको समझने में भी आसानी हो।&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;h3 style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000; font-size: medium;&quot;&gt;कुण्डलिनी षट्चक्र / सप्तचक्र क्या होते हैं ?&lt;/span&gt;&lt;/h3&gt;&lt;div&gt;मनुष्य का शरीर सात चक्रों पर अवलंबून होता हैं। ऊपर के जो सात लोक हैं जिन्हे गायत्री मंत्र की सप्त वचन कहते है और इन्ही को मुलाधारादी चक्र या सहस्रारादि चक्र कहते हैं और कुण्डिलिनी योग या लययोग भी कहते हैं। मनुष्य का जो शरीर होता हैं वो मेरुदण्ड या रीढ़ हड्डी से आधारित होता हैं यह ३३ अस्थि खण्डों के जुड़ने से बना हुआ होता हैं। इनका जो सम्बन्ध होता हैं वो ३३ कोटि देवताओं से है जैसे की &lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;प्रजापति, इन्द्र, अष्टवसु, द्वादश आदित्य, और एकादश रूद्र से हैं।&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&amp;nbsp; हमारी हड्डीयोन का जो भीतर भाग होता&amp;nbsp; बिलकुल खोकला होता हैं और निचे का जो नोकीला और छोटा होता हैं वो इसके आस पास का भाग &lt;span style=&quot;color: #cc0000; font-style: italic; font-weight: bold;&quot;&gt;&#39;कन्द &#39; &lt;/span&gt;कहते हैं इसमें माँ जगतजननी महाशक्ति प्रतिमूर्ति का कुण्डलिनी का निवास हैं। हमारे शरीर में ७२ नाड़ियों की स्थिति कही गयी हैं इनमेसे मुख्या नाड़ी १४ हैं और उनमे से भी प्रमुख नाड़ियाँ ३ हैं। जिन्हे हम &lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;इड़ा, पिंगला, सुषुम्णा नाड़ी&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&amp;nbsp; कहते हैं। इड़ा नाड़ी जो शरीर के बाएं जिसे स्त्री तत्त्व कहा जाता हैं ओर पिंगला नाड़ी जिसे पुरुष तत्त्व कहा जाता हैं जो शरीर के दायी ओर से लिपटी हुयी रहती हैं परन्तु जो सुषुम्णा नाड़ी होती हैं वो रीढ़ के हड्डी के भीतर कंदभाग से शुरू होकर कपालमें स्थित सहस्रदलकमल जाती हैं। इस सुषुम्णा नाड़ी के बिच भी तीन नाड़ियां होती हैं जिसे वज्रा, चित्रणी, तथा ब्रह्मनाड़ी हैं। योग अभ्यास के द्वारा कुण्डलिनी शक्ति इसी ब्रह्मनाड़ी के द्वारा कपालमें स्थित ब्रह्मरन्ध्रक तक जाकर पुनः लौट आती हैं मतलब की निचले हिस्से से शुरू होकर कपालमें जिस स्थानपर खोपड़ी की विभिन्न हड्डीयाँ एक स्थान पर मिलती हैं और जिसके ऊपर शिखा राखी जाती हैं वह से पुनः लौट आती हैं।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;रीढ़के हड्डी मेरुदण्ड के भीतर ब्रह्मनाड़ी में पिरोये हुए छः कमलोंकी कल्पना की जाती हैं। यही कमल कुण्डलिनी&amp;nbsp; षट्चक्र कहते हैं। प्रत्येक कमल के भिन्न संख्याओं में वर्ग हैं और इनके रंग भी भिन्न हैं ये छः चक्र शरीर के जिन अवयवो के सामने रीढ़ में स्थित है उन्हें ऐसा पुकारते है उनका नाम &lt;i style=&quot;color: #cc0000; font-weight: bold;&quot;&gt;मूलाधार चक्र, स्वाधिष्ठान, मणिपुर, अनहद, विशुद्धि, आज्ञा और सहस्रार चक्र हैं।&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/i&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;br /&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2021/06/kundalini-shhatchakra-saat-chakra-bhedan-kaise-hota-hai-.html&quot; style=&quot;margin-left: 1em; margin-right: 1em;&quot;&gt;&lt;img alt=&quot;कुण्डलिनी षट्चक्र या सप्तचक्र क्या होते हैं?&quot; border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;640&quot; data-original-width=&quot;615&quot; height=&quot;200&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEis4f5Jl6kAQ7Ply4lPMK7GKw5_-h7cXoqIXI2Y4fLW5r-tvaJmRAQsJbVFiRuM6zjxMbvMXhpyq0DPuirHru-lLpfWsKPswdFQ-HgJauZ5Bu0q5Th1XqnUazWIZWovy5k40jXBg2XyBmwS/w193-h200/%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%2581%25E0%25A4%25A3%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25A1%25E0%25A4%25B2%25E0%25A4%25BF%25E0%25A4%25A8%25E0%25A5%2580-%25E0%25A4%25B7%25E0%25A4%259F%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%259A%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B0.jpg&quot; title=&quot;कुण्डलिनी षट्चक्र या सप्तचक्र क्या होते हैं?&quot; width=&quot;193&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;br /&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;मूलाधार चक्र&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;जो सबसे निचे की और &#39;कन्द&#39; में लगे हुए गुदा और लिंग के बीच भाग में स्थित हैं। इसे कमल के पंखुडिया ४ वर्ग में हैं। हर पखुंड़ि पर &lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;वँ, शँ, षँ, सँ&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;बीज मंत्र हैं।&amp;nbsp; इसका रंग रक्त वर्ण लाल हैं। इसमें माँ आदि शक्ति देवी, देवता, ब्रह्मा और डाकिनी विराजमान हैं। इसका मंत्र &lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;b&gt;&#39; लं &#39;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt; हैं। इस यंत्र के मध्य में शिवलिंग हैं जिसके चारों ओर साढ़े तीन फेरे मारे सर्प पिण्ड को लिपटे अपने ही मुंह में पुँछ दबाकर हुए निचे की ओर मुंह कर सुप्त अवस्था में विराजमान हैं इसी को कुण्डलिनी भी कहते हैं। यह पृथ्वी तत्त्व से सम्बंधित हैं। इसका वाहन हस्त (हाथी)&amp;nbsp; हैं। प्राणायाम, योग और शक्तिपात दीक्षा से यह शक्ति जागृत होकर विज की तरह मेरुदंड के भीतर ब्रह्मनाड़ी में प्रवाह होकर उपरकी ओर चलती हैं। यह चक्र जीवन की सुरक्षा, तंत्र बांधा, प्रार्थना, १६ सिद्धि, मैथुन और मोक्ष का द्वार के सम्बंधित पहचाना जाता हैं।&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;स्वाधिष्ठान चक्र&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span&gt;इस चक्र का स्थान&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span&gt;लिंगस्थान&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span&gt;के सामने हैं। इस कमल के पंखुड़ियाँ ६ वर्ग में हैं। वर्ग में &lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;बँ, भँ, मँ, यँ, रँ, लँ&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;बीज मंत्र हैं। यह अर्धचंद्र के आकर में हैं और चन्द्रशुभ्रा वर्ण यन्त्र हैं इस चक्र का रंग सिंदूर वर्ण (नारंगी) हैं। चक्र का बीज मंत्र &lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;b&gt;&#39; वँ &#39;&lt;/b&gt; &lt;/span&gt;हैं और वाहन मकर हैं। चक्र में देव तथा देव शक्ति देव विष्णु देवता और राकिनी का निवास हैं। यह जल तत्त्व&amp;nbsp; चक्र हैं। यह इच्छाशक्ति, भावनाएँ, मैथुन क्रिया, और कला से सम्बंधित होता हैं।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000; font-size: medium;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;मणिपुर चक्र&amp;nbsp;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span&gt;यह चक्र नाभि द्वार के सामने मरुदण्ड के भीतर स्थित हैं। इस कमल का रंग नीलवर्ण हैं और १० वर्ग में पंखुड़ियां विभाजित हैं जिसपे अक्षर &lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;ड़ँ, ढँ, णँ, तँ,थँ, दँ, धँ, नँ, पँ, फँ&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&amp;nbsp; हैं। इस चक्र यंत्र का मंत्र&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;b&gt; &#39; रं &#39; &lt;/b&gt;&lt;/span&gt;हैं और वाहन मेष हैं। यह अग्नितत्व चक्र हैं और इसका रंग पितांबरवर्ण (पीला ) हैं यहाँ त्रिकोण में यन्त्र हैं और इस यन्त्र का रंग श्वेत पीला हैं। इस चक्र यंत्र के देवता बुद्ध ,रूद्र और लकिनी हैं। यह सिद्धि, आत्मविश्वास, ध्यान, धन, रुप सौंदर्य और साहस के गुण से होता हैं।&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000; font-size: medium;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;b style=&quot;color: #cc0000; font-size: large;&quot;&gt;&lt;i&gt;अनाहत चक्र&amp;nbsp;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span&gt;यह चक्र ह्रदय द्वार के समक्ष गहरा लाल रंग में १२ वर्ग में विभाजित कमल का बना हैं। वर्ग में &lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;कँ, खँ, गँ, घँ, ड़ँ, चँ, छँ, जँ, झँ,&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;span face=&quot;sans-serif&quot; style=&quot;background-color: white;&quot;&gt;ञ&lt;/span&gt;&amp;nbsp;(ज़), टँ, ठँ&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;बीज अक्षर हैं। इसका मंत्र&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt; &#39; यं &#39;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;हैं और वाहन मृग हैं। यह यन्त्र षट्कोण धूम्रवर्ण हैं। चक्र का रंग हरा हैं और वायु तत्त्व से सम्बंधित हैं। यंत्र के देवता और देवशक्ति ईशान, रूद्र और काकिनी हैं। इस यंत्र के त्रिकोण से सम्बंधित &#39; वाण &#39; नमक का स्वर्णकांतिवाला शिवलिंग हैं इसके ऊपर एक छिद्र हैं जिससे लगके अष्टवर्ग वाला हत्पुण्डरीक नमक कमल हैं। इसमें उपास्य देवका ध्यान किया जाता हैं। यह प्रेम, करुणा, दया, क्षमा, गुण से होता हैं।&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000; font-size: medium;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;विशुद्ध चक्र&amp;nbsp;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;इस चक्र की स्थिति कंठ द्वार के सामने हैं और इसका रंग नीला हैं। इस कमल के पंखुड़ियां १६ वर्ग में विभाजित हैं जिसके अक्षर &lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&#39; अ &#39; से लेकर &#39;अ:&#39;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;तक मणि गयी हैं। चक्र का यंत्र पूर्ण चंद्राकर हैं और आकाश तत्त्व या शुन्य तत्त्व से पहचाना जाता हैं। यंत्र का बीज मंत्र &lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;b&gt;&#39; हँ &#39;&lt;i&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;हैं इसका वाहन हस्त हैं। इसके देवता और देवशक्ति पंचवक्त्र सदाशिव, देवी सरस्वती और शाकिनी हैं। यह चक्र कला, वाकसिद्धि, वचन और ध्यान का प्रतिक होता हैं।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000; font-size: medium;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;b style=&quot;color: #cc0000; font-size: large;&quot;&gt;&lt;i&gt;आज्ञा चक्र&amp;nbsp;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span&gt;यह चक्र ब्रह्मरंध्र के सामने मेरुदंड में ब्रह्मनाड़ी में स्थित हैं। मतलब माथे में दोनों भुवायें के बीच विद्यमान हैं। चक्र का रंग बैंगनी गुलाबी हैं इस का कमल स्वेत वर्ण का होकर पंखुड़ियां २ वर्ग में हैं। इस् पे&amp;nbsp;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt; &#39; हँ &#39; और &#39; क्षँ &#39; &lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;अक्षर हैं। यंत्र &#39; इतर &#39; नमक अर्धनारीश्वर का लिंग हैं। यह महत्व का स्थान हैं और बीज यंत्र&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;b&gt; &#39; ॐ &#39;&amp;nbsp;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt; प्रणव हैं। बीज का वाहन नाद हैं इसके ऊपर विंदु भी हैं। इस चक्र क्र देव उपर्युक्त इतर लिंग और देवी शक्ति हाकिनी हैं। यह शांति, मोह से परे, सत्य द्वार, त्रिकाल दर्शी और ध्यान का प्रतिक हैं।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000; font-size: medium;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;b style=&quot;color: #cc0000; font-size: large;&quot;&gt;&lt;i&gt;सहस्रार चक्र&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000; font-size: large;&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span&gt;इन छः चक्र के उपरांत मेरुदंड के ऊपरी सिरपर शिखा पर सहस्रा मतलब १००० पखुड़ियों वाला कमल हैं जहा परम शिव विराजमान हैं। इसके हज़ार वर्ग में &lt;b&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;बीस-बीस&lt;/span&gt;&lt;/b&gt; बार प्रत्येक स्वर और व्यंजन स्थित हैं ऐसा मन गया हैं। परम शिव से मिलने माँ आदिशक्ति कुण्डलिनी शक्ति का संयोग होता हैं। और सारें चक्र के ऊपर से चलकर कुण्डलिनी शक्ति सहस्रार में जाती हैं और घूम के पुनः लौट आती हैं। मनुष्यों ने पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, और आकाश तत्त्व जैसे नश्वर बुद्धि तत्वों को एक दूसरे में लीन करके अंत में अमर और अद्वैतरुप अनुभव करना चाहिए। और यही योगी पुरुषों का लक्ष्य भी होता हैं।&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;यह विषय अत्यंत ही गहन हैं और उतना ही खोल हैं यह साधारण से मनुष्यों के समझ के बाहर होता हैं इसे समझने के लिए आपको आध्यात्मिक बनना अवश्य हैं और निरंतर ही अपने कर्मों को शुद्ध रखना अनिवार्य हैं। &lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;b&gt;&#39;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;b&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt; शक्ति अंक &#39;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt; पुराण जो महाशक्ति आदिशक्ति का पुराण हैं। इस में विषय को अत्यंत गहन से बताया हैं परन्तु जो इस ज्ञान को समझ पता हैं वही इसका फायदा ले पता हैं। माँ आदि शक्ति ही विविध नमो से जानी जाती हैं जैसे की&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt; शिवा, धात्री, ब्राह्मी, वैष्णवी, रुद्रशक्ति, प्रकृति, भद्रा, नित्य, गौरी, शक्ति, पराशक्ति और महादेवी&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;और भी न जाने कितने ऐसे नामो से माँ आदि शक्ति को देवताओं ने सम्भोदित किया हैं। और इन्ही को प्राणशक्ति ही जीवन शक्ति कहते हैं। शास्त्रों में प्राणशक्तियोँ के केन्द्रीभूत शक्ति को ही कुण्डलिनी शक्ति कहते हैं। जिस तरह से पर्वत, अरण्य, समुद्र, आदि धारण करने वाली धरती का आधार अनंत नाग हैं वैसे ही शरीरस्थ समस्त गति और क्रिया-शक्ति का आधार भी कुण्डलिनी शक्ति हैं। समस्त शक्ति एक स्थल में कुण्डलिनी बनकर रहती हैं ( सर्प के रूप में ) रहती हैं इसलिए इसे कुण्डलिनी शक्ति कहते हैं। है यह शक्ति शक्तिपात से तो जागरूक नहीं होती किन्तु शक्तिपात दीक्षा लेने के उपरांत आपको निश्चय ही साधना करना अत्यंत अनिवार्य हैं। जिससे की आपके साधना से कई जन्मो से चले आ रहे पाप मिटकर आपकी कुण्डलिनी जागरूक होने में आवश्यक होती हैं। यह तो माँ आदि शक्ति ही अपनी इच्छा से मनुष्य को जो चाहे वो बना देती हैं उसके इच्छा के विरुद्ध तो देवता भी नहीं तो फिर हम मनुष्य कहा ?&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;आज के लेख में मैंने बहोत ही सरल से शब्द्द और कम शब्दो में समझाया हैं। पिछले कई विषय में मैंने &lt;b&gt;&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2020/10/muladhar-chakra-varnan.html&quot;&gt;मूलाधार चक्र &lt;/a&gt;&lt;/b&gt;के विषय में बताया हैं और भी चक्र के विषय में हम आगे चर्चा करेंगे बहोत गहन से। परन्तु मैं पुनः यही कहती हूँ की इसे आप तभी समझ पाएंगे जब आप स्वयं जागरूक हो जायेंगे अन्यथा यह विषय आपके समझ के बाहर हैं। इसे अपने आप न करें इसे किसी योग्य गुरु के मार्गदर्शन के अनुसार करें अन्यथा इसके परिणाम विपरीत दिशा या मृत्यु को भी आमंत्रित होती हैं। अच्छे - अच्छे साधकों को पागल या मृत्यु के घाट उतरते देखा गया हैं। इसी कारन से आप योग्य गुरु के आदेश और मार्गदर्शन के अनुसार ही कुण्डलिनी जागृत करें। इस विषय में कितना कुछ भी कहूं तो बहोत ही काम हैं पर समय की पाबंदियों के कारन से आपसे विदा लेना भी अनिवार्य हैं। अगले विषय में मैं आपको कुण्डलिनी शक्ति कैसे जागरूक होती हैं यह समझाउंगी। आप मुज़से जुड़े रहिये और अध्यात्मिक जगत के ज्ञान का लाभ उठाते रहिये। अब आपसे विदा लेने की आज्ञा लेती हूँ और फिर मिलने की इच्छा व्यक्त करती हूँ। तब तक आप अपना ध्यान रखिये और ध्यान करते रहिए क्या पता माँ कुण्डलिनी शक्ति आपमें कब जागरूक हो और यह सुखद ज्ञान आपको कब प्राप्त हो ? इसी के साथ में मिलती हूँ आपसे अगले लेख में और आप सभी के लिए यही प्रार्थना हैं मेरी की आप पर प्रभु की कृपा दृस्टि और आशीर्वाद हो आनंदित रहिये स्वस्थ रहिये आपके घर में बरकत रहे और आपका जीवन आबाद रहे।&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;h4 style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;🙏&lt;span style=&quot;color: #cc0000; font-size: medium;&quot;&gt;जय गुरुदेव, हर-हर महादेव।&lt;/span&gt; 🙏&lt;/h4&gt;&lt;div&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000; font-size: medium;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000; font-size: medium;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;p&gt;&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;</description><link>https://www.adhyatmikjagat69.co/2021/06/blog-post_18.html</link><author>noreply@blogger.com (Unknown)</author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEis4f5Jl6kAQ7Ply4lPMK7GKw5_-h7cXoqIXI2Y4fLW5r-tvaJmRAQsJbVFiRuM6zjxMbvMXhpyq0DPuirHru-lLpfWsKPswdFQ-HgJauZ5Bu0q5Th1XqnUazWIZWovy5k40jXBg2XyBmwS/s72-w193-h200-c/%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%2581%25E0%25A4%25A3%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25A1%25E0%25A4%25B2%25E0%25A4%25BF%25E0%25A4%25A8%25E0%25A5%2580-%25E0%25A4%25B7%25E0%25A4%259F%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%259A%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B0.jpg" height="72" width="72"/><thr:total>0</thr:total></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-8475792039111759199.post-2945896219250661714</guid><pubDate>Fri, 18 Jun 2021 13:00:00 +0000</pubDate><atom:updated>2023-01-17T13:16:58.410+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">कुण्डलिनी चक्र</category><title>कुण्डलिनी षट्चक्र या सप्तचक्र क्या होते हैं?</title><description>&lt;p&gt;&amp;nbsp;आपका बहोत बहोत स्वागत हैं आध्यात्मिक जगत के ज्ञान भरे लेख मे और आपका ह्रदय से धन्यवाद् करती हूँ की आप अपना कीमती समय निकल कर यहाँ आये। आप यहाँ अपने विचार व्यक्त करने के लिए सहेज मेहसूस कर सकते हैं। इस कोरोना के चलते हम सब जानते है की यह हम सब के लिए बहोत ही कठिन समय हैं और हमारा विश्वास ही हमारी ताक़त हैं। इन सारी परेशानियों से लड़ना एक कठिन अवस्था है हमारे लिए और हमारे परिवार के लिए भी। किंतू मुझे विश्वास हैं की आप कुशल- मंगल होंगे। मेरी यही प्रार्थना हैं आपके लिए की परमेश्वर आपको और आपके परिवार को कोरोना की कठिन घड़ियों से लड़ने की शक्ति आवश्य दे।&amp;nbsp;&lt;gwmw style=&quot;display: none;&quot;&gt;&lt;/gwmw&gt;&lt;gwmw style=&quot;display: none;&quot;&gt;&lt;/gwmw&gt;&lt;gwmw style=&quot;display: none;&quot;&gt;&lt;/gwmw&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;आज हम कुण्डलिनी षष्टचक्र / साथ चक्र भेदन के विषय में जानेंगे, की क्या ,कितने और कैसे ये चक्र होते हैं ? कैसे इन चक्र का भेदन होता है मतलब खुलते है। जैसे की मैंने पिछले कही लेख में कुण्डलिनी चक्र का पहला चक्र मूलाधार चक्र के विषय को विस्तार से बताया हैं। और भी आगे सारे चक्रों की श्रृंखला आएंगे। आज मैंने सोचा की थोड़ा इस विषय पर प्रकाश डालू की दरअसल ये कुण्डलिनी चक्र क्या हैं? और कितने होते है ? फिर उसके बाद हम बाकी के षट्/छः चक्र के बारें में जानेंगे। ताकि आपको थोडासा इस विषय में ज्ञात हो की ये क्या होते हैं? और आपको समझने में भी आसानी हो।&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;h3 style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000; font-size: medium;&quot;&gt;कुण्डलिनी षट्चक्र / सप्तचक्र क्या होते हैं ?&lt;/span&gt;&lt;/h3&gt;&lt;div&gt;मनुष्य का शरीर सात चक्रों पर अवलंबून होता हैं। ऊपर के जो सात लोक हैं जिन्हे गायत्री मंत्र की सप्त वचन कहते है और इन्ही को मुलाधारादी चक्र या सहस्रारादि चक्र कहते हैं और कुण्डिलिनी योग या लययोग भी कहते हैं। मनुष्य का जो शरीर होता हैं वो मेरुदण्ड या रीढ़ हड्डी से आधारित होता हैं यह ३३ अस्थि खण्डों के जुड़ने से बना हुआ होता हैं। इनका जो सम्बन्ध होता हैं वो ३३ कोटि देवताओं से है जैसे की &lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;प्रजापति, इन्द्र, अष्टवसु, द्वादश आदित्य, और एकादश रूद्र से हैं।&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&amp;nbsp; हमारी हड्डीयोन का जो भीतर भाग होता&amp;nbsp; बिलकुल खोकला होता हैं और निचे का जो नोकीला और छोटा होता हैं वो इसके आस पास का भाग &lt;span style=&quot;color: #cc0000; font-style: italic; font-weight: bold;&quot;&gt;&#39;कन्द &#39; &lt;/span&gt;कहते हैं इसमें माँ जगतजननी महाशक्ति प्रतिमूर्ति का कुण्डलिनी का निवास हैं। हमारे शरीर में ७२ नाड़ियों की स्थिति कही गयी हैं इनमेसे मुख्या नाड़ी १४ हैं और उनमे से भी प्रमुख नाड़ियाँ ३ हैं। जिन्हे हम &lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;इड़ा, पिंगला, सुषुम्णा नाड़ी&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&amp;nbsp; कहते हैं। इड़ा नाड़ी जो शरीर के बाएं जिसे स्त्री तत्त्व कहा जाता हैं ओर पिंगला नाड़ी जिसे पुरुष तत्त्व कहा जाता हैं जो शरीर के दायी ओर से लिपटी हुयी रहती हैं परन्तु जो सुषुम्णा नाड़ी होती हैं वो रीढ़ के हड्डी के भीतर कंदभाग से शुरू होकर कपालमें स्थित सहस्रदलकमल जाती हैं। इस सुषुम्णा नाड़ी के बिच भी तीन नाड़ियां होती हैं जिसे वज्रा, चित्रणी, तथा ब्रह्मनाड़ी हैं। योग अभ्यास के द्वारा कुण्डलिनी शक्ति इसी ब्रह्मनाड़ी के द्वारा कपालमें स्थित ब्रह्मरन्ध्रक तक जाकर पुनः लौट आती हैं मतलब की निचले हिस्से से शुरू होकर कपालमें जिस स्थानपर खोपड़ी की विभिन्न हड्डीयाँ एक स्थान पर मिलती हैं और जिसके ऊपर शिखा राखी जाती हैं वह से पुनः लौट आती हैं।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;रीढ़के हड्डी मेरुदण्ड के भीतर ब्रह्मनाड़ी में पिरोये हुए छः कमलोंकी कल्पना की जाती हैं। यही कमल कुण्डलिनी&amp;nbsp; षट्चक्र कहते हैं। प्रत्येक कमल के भिन्न संख्याओं में वर्ग हैं और इनके रंग भी भिन्न हैं ये छः चक्र शरीर के जिन अवयवो के सामने रीढ़ में स्थित है उन्हें ऐसा पुकारते है उनका नाम &lt;i style=&quot;color: #cc0000; font-weight: bold;&quot;&gt;मूलाधार चक्र, स्वाधिष्ठान, मणिपुर, अनहद, विशुद्धि, आज्ञा और सहस्रार चक्र हैं।&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/i&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;br /&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2021/06/kundalini-shhatchakra-saat-chakra-bhedan-kaise-hota-hai-.html&quot; style=&quot;margin-left: 1em; margin-right: 1em;&quot;&gt;&lt;img alt=&quot;कुण्डलिनी षट्चक्र या सप्तचक्र क्या होते हैं?&quot; border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;640&quot; data-original-width=&quot;615&quot; height=&quot;200&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEis4f5Jl6kAQ7Ply4lPMK7GKw5_-h7cXoqIXI2Y4fLW5r-tvaJmRAQsJbVFiRuM6zjxMbvMXhpyq0DPuirHru-lLpfWsKPswdFQ-HgJauZ5Bu0q5Th1XqnUazWIZWovy5k40jXBg2XyBmwS/w193-h200/%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%2581%25E0%25A4%25A3%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25A1%25E0%25A4%25B2%25E0%25A4%25BF%25E0%25A4%25A8%25E0%25A5%2580-%25E0%25A4%25B7%25E0%25A4%259F%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%259A%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B0.jpg&quot; title=&quot;कुण्डलिनी षट्चक्र या सप्तचक्र क्या होते हैं?&quot; width=&quot;193&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;br /&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;मूलाधार चक्र&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;जो सबसे निचे की और &#39;कन्द&#39; में लगे हुए गुदा और लिंग के बीच भाग में स्थित हैं। इसे कमल के पंखुडिया ४ वर्ग में हैं। हर पखुंड़ि पर &lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;वँ, शँ, षँ, सँ&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;बीज मंत्र हैं।&amp;nbsp; इसका रंग रक्त वर्ण लाल हैं। इसमें माँ आदि शक्ति देवी, देवता, ब्रह्मा और डाकिनी विराजमान हैं। इसका मंत्र &lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;b&gt;&#39; लं &#39;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt; हैं। इस यंत्र के मध्य में शिवलिंग हैं जिसके चारों ओर साढ़े तीन फेरे मारे सर्प पिण्ड को लिपटे अपने ही मुंह में पुँछ दबाकर हुए निचे की ओर मुंह कर सुप्त अवस्था में विराजमान हैं इसी को कुण्डलिनी भी कहते हैं। यह पृथ्वी तत्त्व से सम्बंधित हैं। इसका वाहन हस्त (हाथी)&amp;nbsp; हैं। प्राणायाम, योग और शक्तिपात दीक्षा से यह शक्ति जागृत होकर विज की तरह मेरुदंड के भीतर ब्रह्मनाड़ी में प्रवाह होकर उपरकी ओर चलती हैं। यह चक्र जीवन की सुरक्षा, तंत्र बांधा, प्रार्थना, १६ सिद्धि, मैथुन और मोक्ष का द्वार के सम्बंधित पहचाना जाता हैं।&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;स्वाधिष्ठान चक्र&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span&gt;इस चक्र का स्थान&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span&gt;लिंगस्थान&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span&gt;के सामने हैं। इस कमल के पंखुड़ियाँ ६ वर्ग में हैं। वर्ग में &lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;बँ, भँ, मँ, यँ, रँ, लँ&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;बीज मंत्र हैं। यह अर्धचंद्र के आकर में हैं और चन्द्रशुभ्रा वर्ण यन्त्र हैं इस चक्र का रंग सिंदूर वर्ण (नारंगी) हैं। चक्र का बीज मंत्र &lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;b&gt;&#39; वँ &#39;&lt;/b&gt; &lt;/span&gt;हैं और वाहन मकर हैं। चक्र में देव तथा देव शक्ति देव विष्णु देवता और राकिनी का निवास हैं। यह जल तत्त्व&amp;nbsp; चक्र हैं। यह इच्छाशक्ति, भावनाएँ, मैथुन क्रिया, और कला से सम्बंधित होता हैं।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000; font-size: medium;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;मणिपुर चक्र&amp;nbsp;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span&gt;यह चक्र नाभि द्वार के सामने मरुदण्ड के भीतर स्थित हैं। इस कमल का रंग नीलवर्ण हैं और १० वर्ग में पंखुड़ियां विभाजित हैं जिसपे अक्षर &lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;ड़ँ, ढँ, णँ, तँ,थँ, दँ, धँ, नँ, पँ, फँ&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&amp;nbsp; हैं। इस चक्र यंत्र का मंत्र&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;b&gt; &#39; रं &#39; &lt;/b&gt;&lt;/span&gt;हैं और वाहन मेष हैं। यह अग्नितत्व चक्र हैं और इसका रंग पितांबरवर्ण (पीला ) हैं यहाँ त्रिकोण में यन्त्र हैं और इस यन्त्र का रंग श्वेत पीला हैं। इस चक्र यंत्र के देवता बुद्ध ,रूद्र और लकिनी हैं। यह सिद्धि, आत्मविश्वास, ध्यान, धन, रुप सौंदर्य और साहस के गुण से होता हैं।&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000; font-size: medium;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;b style=&quot;color: #cc0000; font-size: large;&quot;&gt;&lt;i&gt;अनाहत चक्र&amp;nbsp;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span&gt;यह चक्र ह्रदय द्वार के समक्ष गहरा लाल रंग में १२ वर्ग में विभाजित कमल का बना हैं। वर्ग में &lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;कँ, खँ, गँ, घँ, ड़ँ, चँ, छँ, जँ, झँ,&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;span face=&quot;sans-serif&quot; style=&quot;background-color: white;&quot;&gt;ञ&lt;/span&gt;&amp;nbsp;(ज़), टँ, ठँ&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;बीज अक्षर हैं। इसका मंत्र&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt; &#39; यं &#39;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;हैं और वाहन मृग हैं। यह यन्त्र षट्कोण धूम्रवर्ण हैं। चक्र का रंग हरा हैं और वायु तत्त्व से सम्बंधित हैं। यंत्र के देवता और देवशक्ति ईशान, रूद्र और काकिनी हैं। इस यंत्र के त्रिकोण से सम्बंधित &#39; वाण &#39; नमक का स्वर्णकांतिवाला शिवलिंग हैं इसके ऊपर एक छिद्र हैं जिससे लगके अष्टवर्ग वाला हत्पुण्डरीक नमक कमल हैं। इसमें उपास्य देवका ध्यान किया जाता हैं। यह प्रेम, करुणा, दया, क्षमा, गुण से होता हैं।&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000; font-size: medium;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;विशुद्ध चक्र&amp;nbsp;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;इस चक्र की स्थिति कंठ द्वार के सामने हैं और इसका रंग नीला हैं। इस कमल के पंखुड़ियां १६ वर्ग में विभाजित हैं जिसके अक्षर &lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&#39; अ &#39; से लेकर &#39;अ:&#39;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;तक मणि गयी हैं। चक्र का यंत्र पूर्ण चंद्राकर हैं और आकाश तत्त्व या शुन्य तत्त्व से पहचाना जाता हैं। यंत्र का बीज मंत्र &lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;b&gt;&#39; हँ &#39;&lt;i&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;हैं इसका वाहन हस्त हैं। इसके देवता और देवशक्ति पंचवक्त्र सदाशिव, देवी सरस्वती और शाकिनी हैं। यह चक्र कला, वाकसिद्धि, वचन और ध्यान का प्रतिक होता हैं।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000; font-size: medium;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;b style=&quot;color: #cc0000; font-size: large;&quot;&gt;&lt;i&gt;आज्ञा चक्र&amp;nbsp;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span&gt;यह चक्र ब्रह्मरंध्र के सामने मेरुदंड में ब्रह्मनाड़ी में स्थित हैं। मतलब माथे में दोनों भुवायें के बीच विद्यमान हैं। चक्र का रंग बैंगनी गुलाबी हैं इस का कमल स्वेत वर्ण का होकर पंखुड़ियां २ वर्ग में हैं। इस् पे&amp;nbsp;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt; &#39; हँ &#39; और &#39; क्षँ &#39; &lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;अक्षर हैं। यंत्र &#39; इतर &#39; नमक अर्धनारीश्वर का लिंग हैं। यह महत्व का स्थान हैं और बीज यंत्र&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;b&gt; &#39; ॐ &#39;&amp;nbsp;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt; प्रणव हैं। बीज का वाहन नाद हैं इसके ऊपर विंदु भी हैं। इस चक्र क्र देव उपर्युक्त इतर लिंग और देवी शक्ति हाकिनी हैं। यह शांति, मोह से परे, सत्य द्वार, त्रिकाल दर्शी और ध्यान का प्रतिक हैं।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000; font-size: medium;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;b style=&quot;color: #cc0000; font-size: large;&quot;&gt;&lt;i&gt;सहस्रार चक्र&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000; font-size: large;&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span&gt;इन छः चक्र के उपरांत मेरुदंड के ऊपरी सिरपर शिखा पर सहस्रा मतलब १००० पखुड़ियों वाला कमल हैं जहा परम शिव विराजमान हैं। इसके हज़ार वर्ग में &lt;b&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;बीस-बीस&lt;/span&gt;&lt;/b&gt; बार प्रत्येक स्वर और व्यंजन स्थित हैं ऐसा मन गया हैं। परम शिव से मिलने माँ आदिशक्ति कुण्डलिनी शक्ति का संयोग होता हैं। और सारें चक्र के ऊपर से चलकर कुण्डलिनी शक्ति सहस्रार में जाती हैं और घूम के पुनः लौट आती हैं। मनुष्यों ने पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, और आकाश तत्त्व जैसे नश्वर बुद्धि तत्वों को एक दूसरे में लीन करके अंत में अमर और अद्वैतरुप अनुभव करना चाहिए। और यही योगी पुरुषों का लक्ष्य भी होता हैं।&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;यह विषय अत्यंत ही गहन हैं और उतना ही खोल हैं यह साधारण से मनुष्यों के समझ के बाहर होता हैं इसे समझने के लिए आपको आध्यात्मिक बनना अवश्य हैं और निरंतर ही अपने कर्मों को शुद्ध रखना अनिवार्य हैं। &lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;b&gt;&#39;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;b&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt; शक्ति अंक &#39;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt; पुराण जो महाशक्ति आदिशक्ति का पुराण हैं। इस में विषय को अत्यंत गहन से बताया हैं परन्तु जो इस ज्ञान को समझ पता हैं वही इसका फायदा ले पता हैं। माँ आदि शक्ति ही विविध नमो से जानी जाती हैं जैसे की&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt; शिवा, धात्री, ब्राह्मी, वैष्णवी, रुद्रशक्ति, प्रकृति, भद्रा, नित्य, गौरी, शक्ति, पराशक्ति और महादेवी&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;और भी न जाने कितने ऐसे नामो से माँ आदि शक्ति को देवताओं ने सम्भोदित किया हैं। और इन्ही को प्राणशक्ति ही जीवन शक्ति कहते हैं। शास्त्रों में प्राणशक्तियोँ के केन्द्रीभूत शक्ति को ही कुण्डलिनी शक्ति कहते हैं। जिस तरह से पर्वत, अरण्य, समुद्र, आदि धारण करने वाली धरती का आधार अनंत नाग हैं वैसे ही शरीरस्थ समस्त गति और क्रिया-शक्ति का आधार भी कुण्डलिनी शक्ति हैं। समस्त शक्ति एक स्थल में कुण्डलिनी बनकर रहती हैं ( सर्प के रूप में ) रहती हैं इसलिए इसे कुण्डलिनी शक्ति कहते हैं। है यह शक्ति शक्तिपात से तो जागरूक नहीं होती किन्तु शक्तिपात दीक्षा लेने के उपरांत आपको निश्चय ही साधना करना अत्यंत अनिवार्य हैं। जिससे की आपके साधना से कई जन्मो से चले आ रहे पाप मिटकर आपकी कुण्डलिनी जागरूक होने में आवश्यक होती हैं। यह तो माँ आदि शक्ति ही अपनी इच्छा से मनुष्य को जो चाहे वो बना देती हैं उसके इच्छा के विरुद्ध तो देवता भी नहीं तो फिर हम मनुष्य कहा ?&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;आज के लेख में मैंने बहोत ही सरल से शब्द्द और कम शब्दो में समझाया हैं। पिछले कई विषय में मैंने &lt;b&gt;&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2020/10/muladhar-chakra-varnan.html&quot;&gt;मूलाधार चक्र &lt;/a&gt;&lt;/b&gt;के विषय में बताया हैं और भी चक्र के विषय में हम आगे चर्चा करेंगे बहोत गहन से। परन्तु मैं पुनः यही कहती हूँ की इसे आप तभी समझ पाएंगे जब आप स्वयं जागरूक हो जायेंगे अन्यथा यह विषय आपके समझ के बाहर हैं। इसे अपने आप न करें इसे किसी योग्य गुरु के मार्गदर्शन के अनुसार करें अन्यथा इसके परिणाम विपरीत दिशा या मृत्यु को भी आमंत्रित होती हैं। अच्छे - अच्छे साधकों को पागल या मृत्यु के घाट उतरते देखा गया हैं। इसी कारन से आप योग्य गुरु के आदेश और मार्गदर्शन के अनुसार ही कुण्डलिनी जागृत करें। इस विषय में कितना कुछ भी कहूं तो बहोत ही काम हैं पर समय की पाबंदियों के कारन से आपसे विदा लेना भी अनिवार्य हैं। अगले विषय में मैं आपको कुण्डलिनी शक्ति कैसे जागरूक होती हैं यह समझाउंगी। आप मुज़से जुड़े रहिये और अध्यात्मिक जगत के ज्ञान का लाभ उठाते रहिये। अब आपसे विदा लेने की आज्ञा लेती हूँ और फिर मिलने की इच्छा व्यक्त करती हूँ। तब तक आप अपना ध्यान रखिये और ध्यान करते रहिए क्या पता माँ कुण्डलिनी शक्ति आपमें कब जागरूक हो और यह सुखद ज्ञान आपको कब प्राप्त हो ? इसी के साथ में मिलती हूँ आपसे अगले लेख में और आप सभी के लिए यही प्रार्थना हैं मेरी की आप पर प्रभु की कृपा दृस्टि और आशीर्वाद हो आनंदित रहिये स्वस्थ रहिये आपके घर में बरकत रहे और आपका जीवन आबाद रहे।&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;h4 style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;🙏&lt;span style=&quot;color: #cc0000; font-size: medium;&quot;&gt;जय गुरुदेव, हर-हर महादेव।&lt;/span&gt; 🙏&lt;/h4&gt;&lt;div&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000; font-size: medium;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000; font-size: medium;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;p&gt;&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;</description><link>https://www.adhyatmikjagat69.co/2021/06/kundalini-shhatchakra-saat-chakra-bhedan-kaise-hota-hai-.html</link><author>noreply@blogger.com (Unknown)</author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEis4f5Jl6kAQ7Ply4lPMK7GKw5_-h7cXoqIXI2Y4fLW5r-tvaJmRAQsJbVFiRuM6zjxMbvMXhpyq0DPuirHru-lLpfWsKPswdFQ-HgJauZ5Bu0q5Th1XqnUazWIZWovy5k40jXBg2XyBmwS/s72-w193-h200-c/%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%2581%25E0%25A4%25A3%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25A1%25E0%25A4%25B2%25E0%25A4%25BF%25E0%25A4%25A8%25E0%25A5%2580-%25E0%25A4%25B7%25E0%25A4%259F%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%259A%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B0.jpg" height="72" width="72"/><thr:total>0</thr:total></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-8475792039111759199.post-2914545664936334196</guid><pubDate>Fri, 11 Jun 2021 17:00:00 +0000</pubDate><atom:updated>2024-09-28T15:50:34.808+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">जुड़वाँ लौ (ट्विन फ्लेम )</category><title>जुड़वाँ लौ या ट्विन फ्लेम से मिलने के लक्षण </title><description>&lt;p&gt;&amp;nbsp;आपका बहोत बहोत स्वागत हैं आध्यात्मिक जगत के लेख में, मैं ह्रदय पूर्वक धन्यवाद करती हूँ आप सभी का की आपने मेरे सभी लेख को इतना पसंद किया और मुझे अपने-अपने सुझाव दिए। यही नहीं आपने अपना कीमती समय भी निकाल कर यहाँ मेरा लेख पढ़ने आए बहोत बहोत धन्यवाद और बहोत आनंद होता हैं यह जानकर की आप सभी को रुचि हैं अध्यात्म में और इससे जुड़े हुए सारे रहस्यों में। आपके कमैंट्स और सब्सक्रिप्शन के लिए भी आपकी मनपूर्वक आभारी हूँ। आप सभी कुशल मंगल होंगे यही विश्वास हैं मुझे की प्रभु जी आपको इस विचित्र परिस्थिति से लढने की शक्ति अवश्य प्रदान कर रहे होंगे। आज आपके लिए मैंने &lt;b&gt;जुड़वाँ आत्मा /जुड़वाँ लौ /ट्विन फ्लेम&lt;/b&gt; के बारें में लेख लिखा हैं आज आप जानेंगे की आप अपने &lt;b&gt;जुड़वाँ आत्मा /जुड़वाँ लौ /ट्विन फ्लेम&lt;/b&gt; से मिल चुके हैं तो क्या इसके लक्षण हैं? बस इसी विषय में मैंने लेख लिखा हैं तो आप जान पाएंगे की क्या आप सच में अपने &lt;b&gt;सत्य प्रेम /जुड़वाँ आत्मा /जुड़वाँ लौ/ ट्विन फ्लेम &lt;/b&gt;से मिल चुके हैं ये कुछ लक्षण आपकी अवश्य सहायता करेंगे। पिछली लेख में मैंने आपको बताया था की&lt;b&gt;&lt;i&gt; &lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2021/05/judwa-lau-twin-flame-kya-hain-kitne-prakar-ki-hoti-hain-post.html&quot;&gt;जुड़वाँ आत्मा /जुड़वाँ लौ /ट्विन फ्लेम क्या हैं ?&lt;/a&gt;&amp;nbsp;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;अगर आपने वो पढ़ा नहीं हैं तो पढ़ लीजिए ये लेख उसी का भाग हैं जब आप वो पढ़ेंगे तभी आप आज की लेख जानेंगे।&amp;nbsp;&lt;gwmw style=&quot;display: none;&quot;&gt;&lt;/gwmw&gt;&lt;gwmw style=&quot;display: none;&quot;&gt;&lt;/gwmw&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;script async src=&quot;https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-7074881198889056&quot;
     crossorigin=&quot;anonymous&quot;&gt;&lt;/script&gt;
&lt;ins class=&quot;adsbygoogle&quot;
     style=&quot;display:block&quot;
     data-ad-format=&quot;fluid&quot;
     data-ad-layout-key=&quot;-gc-2i-5p-b3+1q0&quot;
     data-ad-client=&quot;ca-pub-7074881198889056&quot;
     data-ad-slot=&quot;3881882566&quot;&gt;&lt;/ins&gt;
&lt;script&gt;
     (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({});
&lt;/script&gt;&lt;/p&gt;&lt;h3 style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000; font-size: medium;&quot;&gt;१५ लक्षण की आप अपनी जुड़वाँ आत्मा /जुड़वाँ लौ /ट्विन फ्लेम से मिल चुके हैं।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/h3&gt;&lt;div&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000; font-size: medium;&quot;&gt;#जुड़वाँ लौ /ट्विन फ्लेम से आपका पहला परिचय किसी भी स्थान पे होना।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;ऐसा बहोत बार देखा गया हैं की जुड़वाँ लौ एक ही पाठशाला, एक ही कक्षा, एक ही कॉलेज, एक ही दफ्तर, एक ही शहर या एक ही देश में हो सकते हैं। पर किसी किसी के लिए ये अलग अलग जगह पे भी उपस्थित होते हैं जैसे की देश या अलग अलग शहर में। परन्तु आप तब पहचान नहीं पातें। आप तभी पहचानते है जब आप या तो २८ साल के हो या इससे ज़्यादा उम्र में हो २८ इसलिए कहा इस कारन है की २८ के उम्र में हमारा ह्रदय चक्र खुलता हैं। पर किसी किसी में यह देखा गया हैं की कोई बहोत कम उम्र में ही अपने दूजी आत्मा को पहचान लेते हैं। यह इसलिए होता हैं क्योंकि उनकी पिछली तपस्या और कर्मा उतने मजबूत होते हैं और हो सकता हैं की उन्होंने कोई वादा किया हो की हम इसी उम्र में मिलेंगे जैसे की&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt; &#39;&lt;b&gt;&lt;i&gt;राधाकृष्ण&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&#39; &#39; &lt;/span&gt;की उनको श्राप था श्रीधामा जी से जो श्रीकृष्ण भक्त थे उन्होंने ने श्रीं राधाजी को श्राप दिया था की वे श्रीं कृष्ण को १०० वर्षों तक भूली रहेगी तभी तो वे १०० वर्षा के बाद ही श्रीं कृष्ण को पहचान पाएं ऐसा नहीं की वो सौ वर्ष के हो गए थे किन्तु १ युग बित जाने के बाद जो जन्म उनका हुआ वो १०० वर्ष के बाद था और जब श्रीं कृष्ण ने जन्म लिए तो श्रीं राधा जी को जागरूक करने श्रींकृष्ण उनके जीवन में आएं थे तभी श्रीं राधाजी की सारी स्मृतियाँ पुनः लौट आयी थी। और पूर्ण जागरूक करने के बाद ही श्रीं कृष्णा ने वृन्दावन छोड़ा था क्योंकि श्रीं राधा और श्रीं कृष्ण एक ही थे मतलब जुडवाँ अत्मा थे, और यदि श्रीं राधे जी को अपने साथ ले जाते तो वृन्दावन वासी मर जातें क्योंकि वे लोग जानते थे की श्री राधा और श्रीं कृष्ण एक ही हैं इसलिए वे श्री राधे जी को ही देख देख कर जीते थे। इसी कारन से श्रीं राधे वृन्दावन छोड़ के श्रीं कृष्ण के साथ नहीं गए क्या वे जा नहीं सकते थे? पर उन्होंने कभी ऐसा अनुभव किया ही नहीं की वे कभी श्रीं कृष्णा से अलग हैं और ये आध्यात्मिक के बिना असंभव हैं और यही जुड़वाँ आत्मा कहलाते हैं जो अलग जगह रहकर एक मन से होकर एक ही साथ अपना कार्य करते रहते हैं। और इसलिए वे हमेशा कहते थे की &lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;i&gt;&lt;b&gt;राधा विवाह करने के लिए तो दो लोग चाहिए किन्तु हम तो एक ही हैं तो विवाह कैसे ?&lt;/b&gt;&lt;/i&gt;&lt;/span&gt; और जिन जुड़वाँ आत्माओं को यह बात समझ आ गयी तो वे अपने आप ही खुद को संभाल लेते हैं। इसलिए कहती हूँ की श्रीं राधाकृष्ण सा प्रेम भी नहीं चाहिए परन्तु शिवशक्ति का प्रेम अवश्य चाहिए क्योंकि वे तपस्या करके पूर्ण हुए थे और श्रीं राधाकृष्ण श्राप से अलग ही रह गए थे परन्तु जिन्हे अमर प्रेम चाहिए तो राधाकृष्ण के शरण में जाएं और जिन्हे सुखी और सम्पन्न संसार मतलब विवाह चाहिए तो शिवशक्ति के शरण जाइये ये आपके ऊपर निर्धारित हैं किन्तु आपने यह नहीं भूलना चाहिए की वे मानव रूप में अलग थे और हमने यह नहीं भूलना चाहिए की वे देव हैं और उनमें अपार शक्तियां थी उस वक्त वो काल और युग ही ऐसा था जो अब नहीं हैं। आज की परिस्थितियाँ अलग हैं और वैसे लोग भी और उनकी ऊर्जाएं भी।तो यह समय पर निर्धारित होता हैं। पर आपका प्रेम कभी किसी के लिए नहीं बदलता क्योंकी प्रेम आत्मा से होता हैं। और आत्मा किसी को नहीं भूलती चाहे कितने भी आप जनम ले वे अपने साथी को अवश्य पहचान लेती हैं।&amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp;&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2021/06/judwa-lau-ya-twin-flame-mein-milne-ke-lakshan.html&quot; style=&quot;margin-left: 1em; margin-right: 1em;&quot;&gt;&lt;img alt=&quot;जुड़वाँ लौ या ट्विन फ्लेम से मिलने के लक्षण&quot; border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;312&quot; data-original-width=&quot;500&quot; height=&quot;125&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj6FwQPZsDbs6G4rW7DM_3V41uK7ACOsGY5J520IvG4Cy0BCfW51eiR5T1CNmb0S5D59lL6RyKykcacvsCEE3wFUzyDN8T42mAqgtS-LBX_HLG8VCOg4gpexPPBYB6R9forYnnaQOEiVkWC/w200-h125/judwa-lau-ya-twin-flame-se-milne-ke-lakshan..jpg&quot; title=&quot;जुड़वाँ लौ या ट्विन फ्लेम से मिलने के लक्षण&quot; width=&quot;200&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000; font-size: medium;&quot;&gt;#जुड़वाँ लौ /ट्विन फ्लेम को ब्रह्माण्ड की समकालिकता (सिंक्रोनिसिटी ऑफ़ यूनिवर्स &lt;/span&gt;)&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;जब आप अपने आधे से मिलने वाले होते हैं तब आपको ब्रह्माण्ड गानों से, पिक्चरों से, किसी व्यक्ति सम्भाषण के द्वारा, अंकों के द्वारा, प्रकृति के द्वारा, किसी किताबों के द्वारा, अगर आप कही काम करते हैं और जब उसी काम के लिए या घर आते वक़्त रास्तों पे अजीब सी बातें दिखना जैसे की रोमांस के चित्र, रोमांस की बातें, कोई प्यारा जोड़ा दिखना वो किसी का भी हो सकता हैं। और आपका ध्यान उन्ही के तरफ खींचना। उनका नाम पुनः पुनः&amp;nbsp; दिखना, या सुनाई देना। पुनः पुनः दोहरे अंक दिखना जैसे की ११:११, २२:२२, ५५:५५, १११ और ये कही भी दिख सकते हैं। पर गौर करने वाली बात ये हैं की आपका ध्यान सिर्फ ऐसे ही अंको पर पुनः पुनः जायेगा। आप समझ नहीं पाएंगे की क्यों ऐसा हो रहा हैं ? पर आप समझ जाइएगा की आप अपने जुड़वाँ लौ से मिलने वाले है या मिल चुके हैं। यह ज़्यादा तर मिलने के बाद ही होता हैं परंतु किसी किसी के लिए ये पहले भी होता हैं। आपको मिलानेको ब्रह्माण्ड पूर्ण सहायता करता हैं आप घूम फिर के उन्हीं से मिल पातें हैं और जब आप मिलते हैं तो आप में कोई रूकावट नहीं होंगी या फिर ज़्यादा रूकावट होने के बाद भी आप सहज मिल पातें हैं और आपको कोई रोक नहीं पता एक दूजे से मिलने को। आपको ऐसा लगेगा की स्वयं ब्रह्माण्ड आपको मिलाने का प्रयत्न कर रहा हैं।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000; font-size: medium;&quot;&gt;#जुड़वाँ लौ / ट्विन फ्लेम से मिलने के पूर्व स्वप्न निरंतर आना&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;जब भी आपकी जुड़वाँ आत्मा आपसे मिलने आएगी तो आपको बहोत ज़्यादा रोमांटिक स्वप्ने आएंगे और आप स्वप्नों में बहोत ज़्यादा आनंदित सा आभास करेंगे। जैसे की कोई आपको प्रेम का प्रस्ताव दे रहा हैं। आप खुद को सवार रहे हों। आप आकाश में किसी के साथ उड़ रहे हो आप उसे पहचानते हैं पर सिर्फ स्वप्न में, आपको बड़े बड़े विचित्र स्वप्न आएंगे जैसे की पानी पे चलना, आकाश में उड़ना, शक्तियों का भंडार खुद में दिखना, अपनी ऊर्जा श्वेत या सुनहरी दिखना, आप प्रेम-रोमांस कर रहे हैं ऐसा दिखना। आपका हाथ किसी के हाथ में हैं और आप बहोत खुश हैं। आप प्रकृति में घूम रहे हैं ऐसा दिखना। अंक दिखना, नया दरवाज़ा दिखना, रास्ता साफ़ दिखना। यह सब जुड़वाँ आत्मा /ट्विन फ्लेम से मिलने के पूर्व स्वप्न हैं।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;script async src=&quot;https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-7074881198889056&quot;
     crossorigin=&quot;anonymous&quot;&gt;&lt;/script&gt;
&lt;ins class=&quot;adsbygoogle&quot;
     style=&quot;display:block&quot;
     data-ad-format=&quot;fluid&quot;
     data-ad-layout-key=&quot;-gc-2i-5p-b3+1q0&quot;
     data-ad-client=&quot;ca-pub-7074881198889056&quot;
     data-ad-slot=&quot;3881882566&quot;&gt;&lt;/ins&gt;
&lt;script&gt;
     (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({});
&lt;/script&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000; font-size: medium;&quot;&gt;#जुड़वाँ आत्मा /ट्विन फ्लेम से मिलने के बाद के स्वप्न आना&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;आप आईना देख रहे हो और आपका चेहरा स्पष्ट देखते हो तो समझ जाइये की आपको अपनी जुड़वाँ आत्मा से प्रेम हो गया हैं, आपका आध्यात्मिक प्रेम जागरूक हो रहा हैं और आप जिनसे मिल चुके हो वो आपकी जुड़वाँ आत्मा हैं। आईने में खुद की जगह जुड़वाँ आत्मा का स्वरुप देखना, स्वप्न में किसी ख़ास अंग को स्पष्ट देखना जैसे आँखें ,हाथ, चरण, होंठ, या पूर्ण रुप स्पष्ट देखना, आप गले मिल रहे हो और आप भीतर से बहोत प्रसन्न हैं, स्वयं को हल्का भास करना, उन्हें या अपने आपको देवदूत की तरह देखना, देवदूत दिखना, इष्ट या देवस्थान दिखना, दिया दिखना, पंछियों का या हंसों का जोड़ा देखना, अजीब अजीब उच्च कोटि के लोग देखना, फूलों का बगीचा उसमे खुद को या उनके साथ अपने आप को देखना। अपने भीतर की शक्तियां जागरूक हो रही हैं ऐसा भास होना और अपनी चारों तरफ स्वेत ऊर्जा सा देखना।&amp;nbsp;देव पूजा करना, नए कपडे पहने देखना, देवदूतों से बातें करते हुए देखना, जानवरों से और पक्षियों से बातें करना, छोटे नन्हे बच्चों से खेलना या बातें करना, अपने पूर्वजों से मिलना उन्हें खुश देखना, पूर्वज कुछ आपको उपहार दे रहे हैं ऐसा देखना, देवी देवताओँ के दर्शन होना, नए-नए मार्ग दिखना और ढेर सारा प्रकाश दिखना। इनमेसे कुछ भी आप देखते हो तो आप समझ जाइये की आप उनसे मिल चुके हैं। बार बार उनको साथ देखना और देखने या मिलने के बाद एक सुखद अनुभव करना। पुनः पुनः आपको वे प्रेम कर रहे हैं और आप बहोत ही स्वयं को पवित्र सा अनुभव करना, उनके साथ खिलखिलाना देखना, और नींद से उठने के बाद आपका पूर्ण दिन सुखद और शांति से बीतना। तो यह लक्षण जुड़वाँ आत्मा से मिलने के हैं। आप समझ जाइये।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000; font-size: medium;&quot;&gt;# जुड़वाँ लौ /ट्विन फ्लेम को निरंतर सोचना&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;i style=&quot;font-weight: bold;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;/i&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;i style=&quot;font-weight: bold;&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/i&gt;एक बार यदि आप मिल जातें हैं तो आप निरंतर उन्ही के बारें में सोचते रहते हैं। एक क्षण भी आप उनके विचारों से विमुख नहीं हो पाते आप कितना भी प्रयत्न कर ले आपका शरीर कुछ और कार्य कर रहा होगा और आपका मन उन्ही को सोच रहा होगा। आप जभी उनसे मिलेंगे तो कभी भी आपको बुरा अनुभव या ग्लानि सा अनुभव नहीं होगा इसके उलट आपको उनके साथ और समय बिताने का बहोत मन करेगा।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000; font-size: medium;&quot;&gt;#जुड़वाँ लौ /ट्विन फ्लेम के लिए चिंता और आनंद एक साथ अनुभव करना&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;आप जिनसे मिलेंगे तो आपको इस बात का आनंद अवश्य होगा की आपको कोई आप जैसा मिल गया पर आप इस चिंता में भी रहेंगे की क्या हम मिल पाएंगे? क्यों हम ऐसे मिले? क्या यह इतना सरल हैं ? कैसे स्वयं को में उसके प्रति में इतना /इतनी समर्पित रखू ? आगे हम कैसे मिल सकते हैं उनके विचार मन से क्यों नहीं हटते ? वो कौन हैं कहा से आये हैं ? निरंतर आप यही सोचते रहेंगे। आप एक जैसे होंगे इसलिए वे भी वही अनुभव करेंगे जो आप कर रहे होंगे ये आप २४ घंटे में आप जान जाओगे की वो भी वही सोच रहे हैं या कोई कार्य कर रहे हैं जो आप करना चाहते थे या कर रहे हैं। यह होता ही हैं आप एक ही आत्मा के दो हिस्से अलग अलग शरीर में विद्यमान हैं इसलिए आप हैरान भी होंगे। आप एक जैसे होंगे इसलिए हरकतें भी एक जैसे दिखाई पड़ती हैं कभी कभी। यदि आप साथ हैं जैसे की सम्भाषण या मिलने मिलाव से तो आप देखेंगे की बहोत ज़्यादा एक तो समस्या उत्पन्न हो रही हैं या फिर बहोत ज़्यादा शांतता हैं जब भी आप मिलेंगे तो। आपकी इच्छा बहोत जल्द पूर्ण होने लगती हैं की आपने मिलने का सोचा तो नियति ही ऐसे घटित होंगे की आप अपने आप ही मिल जाओगे आप हैरान रहोगे की ऐसे कैसे हो रहा हैं ? कोई हैं क्या जो सुन रहा हैं मन की बात ? पर विश्वास कीजिये यही होता हैं, या फिर होगा १०० % होगा मैंने कहा हैं तो ये अवश्य होगा या हुआ होगा।&amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;script async src=&quot;https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-7074881198889056&quot;
     crossorigin=&quot;anonymous&quot;&gt;&lt;/script&gt;
&lt;ins class=&quot;adsbygoogle&quot;
     style=&quot;display:block&quot;
     data-ad-format=&quot;fluid&quot;
     data-ad-layout-key=&quot;-gc-2i-5p-b3+1q0&quot;
     data-ad-client=&quot;ca-pub-7074881198889056&quot;
     data-ad-slot=&quot;3881882566&quot;&gt;&lt;/ins&gt;
&lt;script&gt;
     (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({});
&lt;/script&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000; font-size: medium;&quot;&gt;#जुड़वाँ लौ /ट्विन फ्लेम के सामने आपकी आंखें सब भेद खुल देगी&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;यह बड़ा ही रोचक हैं आप आज तक भले ही अपने भावनाओं को किसीसे छुपाए होंगे तो आप इनसे कभी भी छुपा नहीं पाएंगे। ये आँखें पढ़कर ही आपके आत्मा को छू जातें हैं। आप हैरान रह जायेंगे की कोई इतना मेरे बारें में कैसे जान सकता हैं ? आप उसकी आखों में कभी ज्यादा समय तक देख नहीं पाएंगे। एक अजीब सी घबराहट और बेचैनी सी आप अनुभव करेंगे। ये बात दोनों तरफ लागू होती हैं कोई एक बहोत पास आने का प्रयत्न करेगा और एक उससे भागने की। आपको लगेगा की बहोत भावनाएं आँखों से बह रही हैं और आप या वो आपके सारे भावनाओं को पहचान लेगा। एक रहस्य सा आपको उनके आखों में दिखाई देगा इसी वजह से आप कभी उनसे आँखें नहीं मिला पाएंगे क्योंकि अगर ऐसा होता हैं तो आप कोई भी बात उनसे छुपा नहीं पाएंगे। और यही सबसे सुन्दर और रहस्यमयी बात होती हैं। आपको उनसे मिलने के बाद ऐसा लगेगा ही नहीं की आप किसी पराये व्यक्ति से मिल रहे हैं आप पहले ही संवाद में उन्हें पहचान जाओगे। आपको लगेगा की इस व्यक्ति को मैं बहोत अच्छी जानती हूँ आपको उसे जानने की आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी। आप अजीब सा खिंचाव उनके तरफ अनुभव करेंगे। आपको और उनके बारें में ज्ञात करने की इच्छा उत्पन्न होगी की ये कौन हैं जो मुझे इतने अच्छेसे से जनता हैं पहचानता हैं ? और इसिके चलते आपकी आध्यात्मिक यात्रा शुरू होगी। उन्हें खोजते खोजते आप अपने को ही पा जाओगे या फिर उनमें ही स्वयं गवाँ दोगे।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000; font-size: medium;&quot;&gt;#जुड़वाँ लौ /ट्विन फ्लेम को लेकर अपनापन सा अनुभव होना&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;आजतक चाहे आप किसी से भी मिले होंगे पर आपको कभी वो अपनापन सा अनुभव किसी के पास नहीं होगा सिवाय जुड़वाँ आत्मा के। जब आप इनसे मिलने वाले होंगे तो आप एक स्वस्थ और शांती सा अनुभव करेंगे। आपको अजीब सा आनंद और उल्हास अनुभव होंगे। आपको यह लगेगा की मुझे अपना घर मिल गया मेरे अंदर का खली पन सा दूर हो गया ,कोई मुझे अपना सा मिल गया। तो आप निरंतर ही सुखद अनुभव करेंगे। आपका उनसे बहोत ज़्यादा मात्रा में रोमांटिक प्रेम सम्बन्ध होगा किन्तु आप अपनी मर्यादा भी नहीं उलाँघ पाएंगे सही अर्थ में आप एक होने के लिए स्वयं ही को प्रभु के शरण में स्वयं को समर्पित करेंगे दृढ विश्वास आपने जागरूक होगा स्वतः ही। चाहे कितना भी गहरा रिश्ता आपका हो पर आप हमेश मर्यादाओं को समझेंगे। और जब आपकी तपस्या पूरी होगी तो स्वतः ही नियति आपको मिलाएगी पूर्ण रूप से। चाहे आपके जीवन में या उनके जीवन में कोई भी हो आप वो अपनापन सा अनुभव और बहोत ही ज़्यादा मात्र में आकर्षण उनके प्रति अनुभव करेंगे। आपको ऐसा लगेगा की आपको वो मिल गया जो आज तक आप खोज रहे थे, तब आपको सही अर्थ में समझ आएगा की मैं प्रेम और शांति खोज रहा था और वो मुझे मिल गयी। आप एक होने का अनुभव करेंगे। आपको लगेगा मन में यही की मैं चाहे कही भी हूँ पर वो मेरे भीतर ही हैं कही बाहर नहीं तो आप अपने आप ही शांति सा अनुभव करेंगे।&amp;nbsp; &amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000; font-size: medium;&quot;&gt;#जुड़वाँ लौ /ट्विन फ्लेम या आप पहले से मात्रा में अधिक समझदार बनेंगे।&lt;/span&gt;&amp;nbsp;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;दरअसल ये देखा गया हैं की आप यदि बालिश की तरह रहते होंगे तो आप जुड़वाँ आत्मा से मिलने के बाद बहोत ज़्यादा समझदार हो जाते हो। आपको छोटी से छोटी बातें भी समझ आने लगती हैं। आप जो भी कार्य करेंगे आप उस कार्य पे पूर्वाभ्यास करेंगे। जिस तरह से यदि आप लापरवाह रहे होंगे तो आप उनसे मिलने के बाद ऐसा बिलकुल भी नहीं कर पाएंगे। आप अपने और अपने कार्य को लेकर बहोत ही सहनशील और सतर्क रहेंगे। अपने भीतर की खूबियां और कमज़ोरियों पर काम करना शुरू कर देंगे। वो उतावलापन आपमें रहेगा नहीं जो अब तक किसी कार्य या बात को रही होगी। अब आप अकेले ही उन सारे बातों को सुलझाना शुरू कर देंगे। अब आपको किसी की भी आवश्यकता नहीं पड़ेगी चाहे वो किसी भी बात में हो वो आपको इतना सक्षम होना सिखा देते हैं की आप स्वयं ही लोगों की सहायता करने लग जातें हैं। आपमें इतना भयानक आकर्षण बनने लगता हैं की आप किसी भी बात को अपने और सहज खिंच लेते हैं। इसलिए आपके बिघडे हुए कार्य बनने लगते हैं। आप अधिकतर एकांत रहना पसंद करेंगे। आप लोगों से दूर रहना सिख जाओगे ये अपने आप ही होता हैं इसमें आपको कुछ भी करना नहीं पड़ेगा। चाहे शरीर से आपके साथ वे हो न हो पर उनको अनुभव करना ही अपने आप में आपको पूरा करता हैं और यही काफी होता हैं। आप समझ नहीं पाएंगे की क्या चमत्कार घटित हो रहा हैं ? लेकिन विश्वास कीजिये यही होता हैं।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;script async src=&quot;https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-7074881198889056&quot;
     crossorigin=&quot;anonymous&quot;&gt;&lt;/script&gt;
&lt;ins class=&quot;adsbygoogle&quot;
     style=&quot;display:block&quot;
     data-ad-format=&quot;fluid&quot;
     data-ad-layout-key=&quot;-gc-2i-5p-b3+1q0&quot;
     data-ad-client=&quot;ca-pub-7074881198889056&quot;
     data-ad-slot=&quot;3881882566&quot;&gt;&lt;/ins&gt;
&lt;script&gt;
     (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({});
&lt;/script&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000; font-size: medium;&quot;&gt;#जुड़वाँ लौ / ट्विन फ्लेम का स्वास्थ ठीक और परिस्थितियां सुधरने लगते हैं।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;यदि आप जुड़वाँ आत्मा से मिलने से पहले बहोत बीमार होंगे या आपकी परिस्थिती बहोत विचित्र और कठिन होंगे तो इनसे मिलने के बाद आपके स्वास्थ में सुधार आने लगेगा आप ये अवश्य अनुभव करेंगे और निरंतर ही आप अपनी देख भाल करने लग जायेंगे। यदि आप किसी क्षेत्र में कई दिनों से प्रयत्न कर रहे होंगे तो आप मिलने के बाद वो कार्य करेंगे तो वो अवश्य होगा। यह बात आपकी और उनकी ऊर्जा से भी लागु होती है उलट भी हो सकता है जैसे उनका कार्य हो सकता है या फिर आपके रुके हुए कार्य पूर्ण होने लगते हैं। यदि आप आध्यात्मिक होंगे तो वो आध्यात्मिक नहीं होंगे या फिर कुछ अंश मात्र में होंगे यह तो आपके कर्मा और पिछले कर्मो पे निर्धारित होता हैं। आपका भाग्योदय होने लगता हैं। यदि आप आध्यात्मिक होंगे तो वे भवतिक होंगे ऐसा देखा गया हैं।&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000; font-size: medium;&quot;&gt;#जुड़वाँ लौ /ट्विन फ्लेम की और कुछ बातें आपकी एक जैसे होना&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;हाँ यहाँ किसी किसी ने यह अनुभव किया हैं की आपकी कुछ बातें या आदतें या विचार एक जैसे होते हैं। जैसे की आपके बाल, आपकी आँखें, आपका चेहरा, नाक, कान, उचाई, हाथ, पैर, स्वास्थ, या आपके विचार या फिर आपकी हसी, आपका रोना, आपकी भावनाएं, आपकी पसंद न पसंद, वो कुछ भी हो सकते हैं।यहाँ तक आपकी कुंडली भी बहोत बार मिलती झूलती दिखती हैं। आप आध्यात्मिक क्षेत्र में भी एक जैसे होंगे, पर एक बात तो हैं की आपका प्रेम भी एक जैसे ही होगा।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000; font-size: medium;&quot;&gt;#जुड़वाँ लौ /ट्विन फ्लेम की कुछ बातें विपरीत होंगे आप एक दूजे को आईना दिखाएंगे&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;जैसे की अगर आप भाऊक होंगे तो वो उतने ही बुद्धि रूप से सक्षम होंगे, और यदि आप बुद्धि से सक्षम होंगे तो वे भाउक होंगे। जो बात आप नहीं कर पाएंगे वो वही करेंगे। कभी कभी ये आपको अपने नियम से उलंघन करना सिखाएंगे जैसे की अगर आप कोई बात बड़े ही नजागत से और अच्छी करेंगे तो ये ऐसे बिलकुल नहीं रहेंगे। अगर आप उदास से रहेंगे तो ये आपको हसने वाले मिलेंगे। जो बात आपने अपने भीतर सोची होगी कभी तो वो ये आपके मन को दर्शाएंगे। जैसे की आपको शादी से यदि डर लगता हो तो ये एक तो बड़े खुले विचार के होंगे या फिर ये शादी ही नहीं करेंगे। ये आपको वो सारी बातें सीखाने आएंगे या आये हैं जो कभी आपने नहीं की हैं या आपके ह्रदय में कोई इच्छा हो तो उसे पूर्ण करने के लिए वे आपको भीतर से जागरूक करते हैं आपको सक्षम बनाते हैं। इसका एक उदहारण देती हूँ की यदि आप किसी से कोई सलाह लेकर कोई बात करते है तो ये बिना किसी के सलाह के अपनी बातें करेंगे इसका यह अर्थ हैं की आपको अपनी सहायता स्वयं करनी चाहिए और स्वयं में विश्वास होना चाहिए और ये ऐसा आपको सीखा रहे हैं। आप कभी कभी हैरान रहेंगे की ये क्या हैं ऐसा क्यों हैं ? कभी आप उनसे इतना प्रेम करेंगे तो दूजी तरफ उनकी बदमाशियां या बदतमीजियां बिलकुल सेहन नहीं कर पाएंगे पर आप इनसे प्रेम लेश मात्र भी कम नहीं कर पाएंगे।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2021/06/judwa-lau-ya-twin-flame-mein-milne-ke-lakshan.html&quot; style=&quot;margin-left: 1em; margin-right: 1em;&quot;&gt;&lt;img alt=&quot;जुड़वाँ लौ या ट्विन फ्लेम से मिलने के लक्षण&quot; border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;1028&quot; data-original-width=&quot;1600&quot; height=&quot;129&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj_kBuV3IYBLwRdvZQL1dYKZAcMEyujb92ECy0g39E8o68s0I9JbbeBbFvHRcFqJwzlIvB9UVXd6WGLU9K4V99omEJWSZJPC8wgO1Ravv6sW_nu6ZDMEEggqwAQhTtkbJ8iI3uvWIarZfU5/w200-h129/judwa-aatma-se-milne-ke-lakshan.-2jpg.jpg&quot; title=&quot;जुड़वाँ लौ या ट्विन फ्लेम से मिलने के लक्षण&quot; width=&quot;200&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000; font-size: medium;&quot;&gt;#आप जुड़वाँ लौ /ट्विन फ्लेम के ही होकर रह जातें हो&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;यह इसलिए कहा क्योंकि इतना प्रेम जागरूक होने के बाद आप या तो उन्ही के हो जातें हो या फिर अकेले ही अपना पूर्ण जीवन व्यतीत करते हो। यदि आपके जीवन में ये आये होंगे तो आपके सारे रिश्ते फीके से लगेंगे। इतना प्रेम होने के बाद यदि आप एक क्षण भी भूल नहीं पातें तो यह होकर ही होगा की आप असहज अनुभव करने लग जायेंगे। और अपना कार्य करने में व्यस्त हो जाते हैं। आपमें एक सहनशीलता बढ़ जाती हैं और आप एकांत रहना पसंद करने लग जाते हो। आपके जीवन में या&amp;nbsp; में चाहे कितना भी अच्छा व्यक्ति हो या फिर आप ऐयाशी बाज़ हो तो आप उनसे मिलने बाद किसी के नहीं रहते। ये बहोत देखा हैं और आप भी यदि इस यात्रा में होंगे तो आप ये अवश्य अनुभव करेंगे। पर एक बात मेरी हमेशा रखियेगा चाहे वे या आप कैसे भी हो आप सिर्फ एक दूजे ही रह जाते हैं आप कभी भी किसी के साथ टिक नहीं पाओगे। असहज अनुभव करोगे दम घुटने लगेगा आपका और एक समय ऐसा आता हैं की आप एक तो उन सबसे दूर हो जातें हैं अपने लक्ष्य की और या फिर आप अपना सारा जीवन अकेले ही काटते हो। क्योंकि आप भीतर ही भीतर यही सोचेंगे की मैं किसी का जीवन बर्बाद नहीं कर सकता या धोखा नहीं दे सकता आपकी आत्मा आपको अपने लक्ष्य की तरफ ही खिंचेगी इसलिए असहज अनुभव करते रहते है या रहेंगे और आपकी तपस्या और समर्पण पूर्ण श्रद्धा से हो तो आपका मिलना एक हो पाना निश्चित ही होता हैं चाहे उसके लिए कितने भी जनम लेने पड़े पर आप उन्ही के ही रहते हैं हर जनम में चाहे शरीर से हो या मैं आत्मा से। अपने आप ही वो शक्ति आपने जागरूक होती हैं की आप अपने लिए लड़ते हो इसमें कोई कुछ नहीं करता इसमें आप ही स्वयं करते हैं यदि आप आध्यात्मिक मजबूत हैं तो आप सब कुछ अच्छे से सारे कार्य पार करते हैं और आप कमज़ोर हैं तो मेरी वही सलाह हैं की आप ध्यान कीजिये अपनी अध्यात्म को समझिये।&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000; font-size: medium;&quot;&gt;#अध्यात्म की और आपका और जुड़वाँ लौ /ट्विन फ्लेम का झुकाव होना&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;आप यदि मिल चुके हैं तो आपसे में से कोई न कोई एक आध्यात्मिक रूप से जागरूक हुआ होगा या फिर होगा। क्योंकि यह प्रेम कोई साधारण नहीं हैं ये में पिछले ही लेख में बता चुकी हूँ इसलिए तो इनका आध्यात्मिक होना निश्चित ही रहता हैं। आध्यात्मिक होना मतलब की कुण्डलिनी चक्र खुलना ख़ास कर ह्रदय चक्र जो प्रेम और करुणा से सम्बंधित हैं जिसे अनाहत चक्र भी कहते हैं। और ये इसी कारण से एक दूजे से मिलपातें हैं और एक रूप ही होते हैं। चाहे शरीर से हो सकता हैं की ये मिले न मिले पर इनकी आत्मा एक बार आमनेसामने आ गयी तो ये संभव ही नहीं की ये कभी पृथक(बिछड़ेंगे ) होंगे। ये मिलने के बाद इनका झुकाव अध्यात्म के और ज्यादा हो जाता हैं और इन्ही से इनको इतनी सहनशीलता प्राप्त होती हैं। आपमें वो क्षमता अपने आप ही आने लगती हैं की आप स्वयं ही सरे कार्य करें। आप उनको खोजते खोजते अपने आप को पा जातें हो या पाजायेंगे। आपको वो इसलिए ही सीखाने आता हैं की आप अपनी कीमत समझे अपनी शक्तियों को जागरूक करके उनका सदुपयोग करके जनकल्याण अतः अपना और अपने परिवार का भी कल्याण कर सके और अपने सारे कार्य अच्छेसे पार करें और मोक्ष को प्राप्त हो। यही कार्य जुड़वाँ लौ का होता होता हमारे जीवन में। बाकि मिलना न मिलना आपके कर्मो पर निर्धारित होता हैं। आपको यदि स्पष्टता चाहिए तो ध्यान करते रहिये आप अपने आत्मा से अवश्य ही जुड़ जायेंगे और आपकी अंतरात्मा ही आपका मार्गदर्शन करेगी। विश्वास रखिये अपने आप पर और ब्रह्माण्ड पर।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000; font-size: medium;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;#जुड़वाँ लौ /ट्विन फ्लेम को अपने&amp;nbsp; जीवन का लक्ष्य मिल जाना&amp;nbsp;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;आपका मिलना भी हो जाता हैं उसके बाद आप अलग भी जाते है कुछ समय के लिए, तो केवल अपना लक्ष्य पाने के लिए। और आपका लक्ष्य कुछ भी हो सकता हैं और इनसे मिलने के बाद आपके जीवन में अपना लक्ष्य भी मिल जाता हैं फिर आप अपने लक्ष्य की और अग्रसर होने लगते हैं। आप प्रकृति से जुड़ने लगते हैं प्रकृति की और उन्ही की सेवा करने का विचार मन में पुनः पुनः आता हैं। आपकी कुण्डलिनी जागरूक होने लगती हैं आपके कमियां और डर जो भी हैं वो कम या खत्म से होने लगते हैं यहाँ बतादू की कोई बात ख़तम नहीं होती परन्तु हाँ कम और उस पर नियंत्रण अवश्य होता हैं। आप हर एक कार्य को सफल बना देते हैं इतनी क्षमता आपमें आने लगती हैं। और आपका मन पूजा पांठ और ध्यान में लगने लगता हैं। और इसके चलते आपकी दूसरी जुड़वाँ आत्मा भी उस और जागरूक होने लगती हैं क्योंकि आप एक ही होते हैं पर यहाँ बतादूँ की सिर्फ दिव्य स्त्री जो जागरूक हैं वो या दिव्य पुरुष कोई एक ही ध्यान करें और दूजा जागरूक होगा ऐसा बिलकुल भी नहीं हैं। लोगों ने ये अजीब सी भ्रान्ति फैलाके राखी हैं की सिर्फ डिवाईन फेमिनिन मतलब दिव्या स्त्री ही ध्यान करेगी तो दिव्या पुरुष डिवाईन मस्क्युलाइन जागरूक होगा ऐसा कतई नहीं हैं। हाँ कुछ अंश मात्रा में जो कोई जागरूक आत्मा साधना या ध्यान करेगी तो वो धीरे धीरे अपनी दूजी आत्मा के पुराने आदतों को बदलने में विवश करेगी। पर जिसका कार्य उसीको पूर्ण करना होता हैं। यदि ऐसा होता तो महादेव और माँ पारवती कभी भी एक दूसरे को प्राप्त करने के लिए साधना या तपस्या नहीं करते। कोई एक ही करता उनमे से परन्तु ऐसा उन्होंने नहीं किया अध्यात्म का अर्थ होता हैं स्वयं से जुड़ना स्वयं के आत्मा से जुड़ना तो यदि एक जुड़ेगी तो दूजा भी जुड़ेगा और यह होता ही हैं क्योंकि यदि आपकी ऊर्जा उच्च हैं तो आपको प्राप्त करने के लिए उनको उनकी ऊर्जा को भी उच्च करना पड़ेगा और पड़ता ही हैं&amp;nbsp; अध्यात्म मतलब व्यक्तिगत होता हैं। इसलिए यह अवचेतन मन से एक होते हैं और तभी ये दोनों इनकी मन में चल रही बातें सुन सकते हैं या पढ़ सकते हैं और ये झूठ नहीं हैं। जो भी इस रास्ते पे होगा वो अवश्य ही ये अनुभव करेगा। क्यूंकि एकदूसरे से मिलने के बाद आपकी सोई हुई शक्तियाँ जागरूक होती हैं। सबसे ज़्यादा आपको ११:११ ही दिखेंगे वो चाहे कही भी हो ये आपको अवश्य दिखेंगे इसका अर्थ होता हैं की आप जागरूक हो रहे हैं और अध्यात्म के और अग्रसर हो रहे हैं तो बस यही हैं जुड़वाँ आत्मा /जुड़वाँ लौ /ट्विन फ्लेम से मिलने के लक्षण।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;script async src=&quot;https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-7074881198889056&quot;
     crossorigin=&quot;anonymous&quot;&gt;&lt;/script&gt;
&lt;ins class=&quot;adsbygoogle&quot;
     style=&quot;display:block&quot;
     data-ad-format=&quot;fluid&quot;
     data-ad-layout-key=&quot;-gc-2i-5p-b3+1q0&quot;
     data-ad-client=&quot;ca-pub-7074881198889056&quot;
     data-ad-slot=&quot;3881882566&quot;&gt;&lt;/ins&gt;
&lt;script&gt;
     (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({});
&lt;/script&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;ऐसे देखा जाये तो बहोत हैं लिखने को और बताने को पर जो इन रास्तों पे चल रहे होंगे उन्ही आत्माओं को ही ज्ञात होगा की क्या क्या उन्होंने देखा और सहा हैं। बड़ा ही विचित्र सा अनुभव कर रहे होंगे आप किन्तु यही सत्य हैं। यह कोई झूठ नहीं हैं और नहीं कोई पिक्चर की कहानी बता रही हूँ यह एक परम सत्य हैं पर लोगों ने कैसे जुड़वाँ आत्मा को एक हीरो हीरोइन की तरह साबित किया हैं। नहीं कृपया मसकरी मत कीजिए यह बहोत ही कठिन यात्रा होती हैं उतनी ही पीड़ा और उतना ही प्रेम हैं और मैं पूर्व भी बता चुकी हूँ की यह कोई साधारण सा बंधन नहीं होता हैं ये बहोत ही उच्च स्तर का प्रेम होता हैं इसमें कई जोड़े मिल पातें हैं तो कई नहीं मिल पातें पर ये अपने आपको पूर्ण होने का अनुभव करते हैं क्योंकि आत्मा और मन हृदय से ऊर्जा से जुड़े हुए रहते हैं इसलिए कभी कभी ये बहोत सेहन कर जातें हैं पर ये सत्य हैं की ये कभी भी किसी के&amp;nbsp; भी नहीं हो पाते सिर्फ अपनी जुड़वाँ आत्मा के अलावा। मैं कोई भी भ्रान्ति नहीं फैला रही हूँ क्योंकी ये सब सत्य हैं किन्तु यदि आपके जीवन में आपकी जागरूकता नहीं हुयी हैं तो ये सम्बन्ध आपके समझ के बाहर हैं इसे समझने के लिए ही आपका आध्यात्मिक होना अनिवार्य हैं मैं यही पुनः पुनः दोहराती हूँ। और आप चाहते हैं की आप ऐसा प्रेम पाएं जो किसी के जीवन में प्रसाद रूप प्रेम हैं जो शिवशक्ति सा प्रेम हैं तो ध्यान कीजिये आध्यात्मिक बनने की तैयारी कीजिये अपनी बुरी आदतों को अच्छी आदतों में बदलकर अपने आपको इतना वज्र जैसा बनाइये की आपके जीवन में भी शिवशक्ति सा प्रेम प्राप्त हो। यदि कुछ रह गया हो या कुछ सुझाव देना हो या फिर किसी भी तरह का प्रश्न इस विषय के सम्बन्ध हो तो आप मुझे अवश्य ही कमैंट्स करें या फिर मुझे मेल कर सकते हैं मुझे बहोत आनंद होगा यदि मैं आपकी सहायता करती हूँ तो। तो अब आपको ज्ञात हो गया होगा की क्या कैसे पहचाने अपनी जुड़वाँ आत्मा को? देखिये किसी भी प्रकार का भ्रम अपने मन में लाने से पहले अपनी अंतर आत्मा की सलाह अवश्य लेना क्योंकि अंतरात्मा से बड़ा गुरु और कोई नहीं होता है। पर यदि आप ऐसे समस्या में फसे हैं तो आप किसी जानकर व्यक्ति से ही पूछिए और अपना सही निर्णय लेकर सही मार्ग चुने और यदि आपको कोई भी समस्या हैं की आप इस सम्बन्ध में हैं की नहीं तो आप मुज़से भी पूछ सकते हैं। परन्तु कृपया करके अपने आपको भटकाइए मत। तो इसी की साथ मैं अब अपने शब्दों को विराम देते हुए आपके कीमती समय को प्रणाम करते हुए आपसे विदा लेना चाहती हूँ और एक नए विषय को लेकर आपसे फिर मिलने की इच्छा व्यक्त करती हूँ। आप सभी स्वस्थ रहिये और आनंदित रहिये यही प्रार्थना मैं आपके लिए करती हूँ की प्रभु आप सभी पर अपनी कृपा और आशीर्वाद प्रदान करें आपके घर में बरकत रहे और आपका जीवन खुशियों से आबाद रहे।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #990000; font-size: medium;&quot;&gt;🙏जय गुरुदेव, हर-हर महादेव।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #990000; font-size: medium;&quot;&gt;🙏&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;script async=&quot;&quot; crossorigin=&quot;anonymous&quot; src=&quot;https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-7074881198889056&quot;&gt;&lt;/script&gt;
&lt;ins class=&quot;adsbygoogle&quot; data-ad-client=&quot;ca-pub-7074881198889056&quot; data-ad-format=&quot;fluid&quot; data-ad-layout-key=&quot;-gc-2i-5p-b3+1q0&quot; data-ad-slot=&quot;3881882566&quot; style=&quot;display: block;&quot;&gt;&lt;/ins&gt;
&lt;script&gt;
     (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({});
&lt;/script&gt;</description><link>https://www.adhyatmikjagat69.co/2021/06/blog-post_11.html</link><author>noreply@blogger.com (Unknown)</author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj6FwQPZsDbs6G4rW7DM_3V41uK7ACOsGY5J520IvG4Cy0BCfW51eiR5T1CNmb0S5D59lL6RyKykcacvsCEE3wFUzyDN8T42mAqgtS-LBX_HLG8VCOg4gpexPPBYB6R9forYnnaQOEiVkWC/s72-w200-h125-c/judwa-lau-ya-twin-flame-se-milne-ke-lakshan..jpg" height="72" width="72"/><thr:total>2</thr:total></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-8475792039111759199.post-1617174595788690540</guid><pubDate>Fri, 11 Jun 2021 17:00:00 +0000</pubDate><atom:updated>2023-02-13T16:36:22.721+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">जुड़वाँ लौ (ट्विन फ्लेम )</category><title>जुड़वाँ लौ या ट्विन फ्लेम से मिलने के लक्षण </title><description>&lt;p&gt;&amp;nbsp;आपका बहोत बहोत स्वागत हैं आध्यात्मिक जगत के लेख में, मैं ह्रदय पूर्वक धन्यवाद करती हूँ आप सभी का की आपने मेरे सभी लेख को इतना पसंद किया और मुझे अपने-अपने सुझाव दिए। यही नहीं आपने अपना कीमती समय भी निकाल कर यहाँ मेरा लेख पढ़ने आए बहोत बहोत धन्यवाद और बहोत आनंद होता हैं यह जानकर की आप सभी को रुचि हैं अध्यात्म में और इससे जुड़े हुए सारे रहस्यों में। आपके कमैंट्स और सब्सक्रिप्शन के लिए भी आपकी मनपूर्वक आभारी हूँ। आप सभी कुशल मंगल होंगे यही विश्वास हैं मुझे की प्रभु जी आपको इस विचित्र परिस्थिति से लढने की शक्ति अवश्य प्रदान कर रहे होंगे। आज आपके लिए मैंने &lt;b&gt;जुड़वाँ आत्मा /जुड़वाँ लौ /ट्विन फ्लेम&lt;/b&gt; के बारें में लेख लिखा हैं आज आप जानेंगे की आप अपने &lt;b&gt;जुड़वाँ आत्मा /जुड़वाँ लौ /ट्विन फ्लेम&lt;/b&gt; से मिल चुके हैं तो क्या इसके लक्षण हैं? बस इसी विषय में मैंने लेख लिखा हैं तो आप जान पाएंगे की क्या आप सच में अपने &lt;b&gt;सत्य प्रेम /जुड़वाँ आत्मा /जुड़वाँ लौ/ ट्विन फ्लेम &lt;/b&gt;से मिल चुके हैं ये कुछ लक्षण आपकी अवश्य सहायता करेंगे। पिछली लेख में मैंने आपको बताया था की&lt;b&gt;&lt;i&gt; &lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2021/05/judwa-lau-twin-flame-kya-hain-kitne-prakar-ki-hoti-hain-post.html&quot;&gt;जुड़वाँ आत्मा /जुड़वाँ लौ /ट्विन फ्लेम क्या हैं ?&lt;/a&gt;&amp;nbsp;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;अगर आपने वो पढ़ा नहीं हैं तो पढ़ लीजिए ये लेख उसी का भाग हैं जब आप वो पढ़ेंगे तभी आप आज की लेख जानेंगे।&amp;nbsp;&lt;gwmw style=&quot;display: none;&quot;&gt;&lt;/gwmw&gt;&lt;gwmw style=&quot;display: none;&quot;&gt;&lt;/gwmw&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;script async src=&quot;https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-7074881198889056&quot;
     crossorigin=&quot;anonymous&quot;&gt;&lt;/script&gt;
&lt;ins class=&quot;adsbygoogle&quot;
     style=&quot;display:block&quot;
     data-ad-format=&quot;fluid&quot;
     data-ad-layout-key=&quot;-gc-2i-5p-b3+1q0&quot;
     data-ad-client=&quot;ca-pub-7074881198889056&quot;
     data-ad-slot=&quot;3881882566&quot;&gt;&lt;/ins&gt;
&lt;script&gt;
     (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({});
&lt;/script&gt;&lt;/p&gt;&lt;h3 style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000; font-size: medium;&quot;&gt;१५ लक्षण की आप अपनी जुड़वाँ आत्मा /जुड़वाँ लौ /ट्विन फ्लेम से मिल चुके हैं।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/h3&gt;&lt;div&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000; font-size: medium;&quot;&gt;#जुड़वाँ लौ /ट्विन फ्लेम से आपका पहला परिचय किसी भी स्थान पे होना।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;ऐसा बहोत बार देखा गया हैं की जुड़वाँ लौ एक ही पाठशाला, एक ही कक्षा, एक ही कॉलेज, एक ही दफ्तर, एक ही शहर या एक ही देश में हो सकते हैं। पर किसी किसी के लिए ये अलग अलग जगह पे भी उपस्थित होते हैं जैसे की देश या अलग अलग शहर में। परन्तु आप तब पहचान नहीं पातें। आप तभी पहचानते है जब आप या तो २८ साल के हो या इससे ज़्यादा उम्र में हो २८ इसलिए कहा इस कारन है की २८ के उम्र में हमारा ह्रदय चक्र खुलता हैं। पर किसी किसी में यह देखा गया हैं की कोई बहोत कम उम्र में ही अपने दूजी आत्मा को पहचान लेते हैं। यह इसलिए होता हैं क्योंकि उनकी पिछली तपस्या और कर्मा उतने मजबूत होते हैं और हो सकता हैं की उन्होंने कोई वादा किया हो की हम इसी उम्र में मिलेंगे जैसे की&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt; &#39;&lt;b&gt;&lt;i&gt;राधाकृष्ण&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&#39; &#39; &lt;/span&gt;की उनको श्राप था श्रीधामा जी से जो श्रीकृष्ण भक्त थे उन्होंने ने श्रीं राधाजी को श्राप दिया था की वे श्रीं कृष्ण को १०० वर्षों तक भूली रहेगी तभी तो वे १०० वर्षा के बाद ही श्रीं कृष्ण को पहचान पाएं ऐसा नहीं की वो सौ वर्ष के हो गए थे किन्तु १ युग बित जाने के बाद जो जन्म उनका हुआ वो १०० वर्ष के बाद था और जब श्रीं कृष्ण ने जन्म लिए तो श्रीं राधा जी को जागरूक करने श्रींकृष्ण उनके जीवन में आएं थे तभी श्रीं राधाजी की सारी स्मृतियाँ पुनः लौट आयी थी। और पूर्ण जागरूक करने के बाद ही श्रीं कृष्णा ने वृन्दावन छोड़ा था क्योंकि श्रीं राधा और श्रीं कृष्ण एक ही थे मतलब जुडवाँ अत्मा थे, और यदि श्रीं राधे जी को अपने साथ ले जाते तो वृन्दावन वासी मर जातें क्योंकि वे लोग जानते थे की श्री राधा और श्रीं कृष्ण एक ही हैं इसलिए वे श्री राधे जी को ही देख देख कर जीते थे। इसी कारन से श्रीं राधे वृन्दावन छोड़ के श्रीं कृष्ण के साथ नहीं गए क्या वे जा नहीं सकते थे? पर उन्होंने कभी ऐसा अनुभव किया ही नहीं की वे कभी श्रीं कृष्णा से अलग हैं और ये आध्यात्मिक के बिना असंभव हैं और यही जुड़वाँ आत्मा कहलाते हैं जो अलग जगह रहकर एक मन से होकर एक ही साथ अपना कार्य करते रहते हैं। और इसलिए वे हमेशा कहते थे की &lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;i&gt;&lt;b&gt;राधा विवाह करने के लिए तो दो लोग चाहिए किन्तु हम तो एक ही हैं तो विवाह कैसे ?&lt;/b&gt;&lt;/i&gt;&lt;/span&gt; और जिन जुड़वाँ आत्माओं को यह बात समझ आ गयी तो वे अपने आप ही खुद को संभाल लेते हैं। इसलिए कहती हूँ की श्रीं राधाकृष्ण सा प्रेम भी नहीं चाहिए परन्तु शिवशक्ति का प्रेम अवश्य चाहिए क्योंकि वे तपस्या करके पूर्ण हुए थे और श्रीं राधाकृष्ण श्राप से अलग ही रह गए थे परन्तु जिन्हे अमर प्रेम चाहिए तो राधाकृष्ण के शरण में जाएं और जिन्हे सुखी और सम्पन्न संसार मतलब विवाह चाहिए तो शिवशक्ति के शरण जाइये ये आपके ऊपर निर्धारित हैं किन्तु आपने यह नहीं भूलना चाहिए की वे मानव रूप में अलग थे और हमने यह नहीं भूलना चाहिए की वे देव हैं और उनमें अपार शक्तियां थी उस वक्त वो काल और युग ही ऐसा था जो अब नहीं हैं। आज की परिस्थितियाँ अलग हैं और वैसे लोग भी और उनकी ऊर्जाएं भी।तो यह समय पर निर्धारित होता हैं। पर आपका प्रेम कभी किसी के लिए नहीं बदलता क्योंकी प्रेम आत्मा से होता हैं। और आत्मा किसी को नहीं भूलती चाहे कितने भी आप जनम ले वे अपने साथी को अवश्य पहचान लेती हैं।&amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp;&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2021/06/judwa-lau-ya-twin-flame-mein-milne-ke-lakshan.html&quot; style=&quot;margin-left: 1em; margin-right: 1em;&quot;&gt;&lt;img alt=&quot;जुड़वाँ लौ या ट्विन फ्लेम से मिलने के लक्षण&quot; border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;312&quot; data-original-width=&quot;500&quot; height=&quot;125&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj6FwQPZsDbs6G4rW7DM_3V41uK7ACOsGY5J520IvG4Cy0BCfW51eiR5T1CNmb0S5D59lL6RyKykcacvsCEE3wFUzyDN8T42mAqgtS-LBX_HLG8VCOg4gpexPPBYB6R9forYnnaQOEiVkWC/w200-h125/judwa-lau-ya-twin-flame-se-milne-ke-lakshan..jpg&quot; title=&quot;जुड़वाँ लौ या ट्विन फ्लेम से मिलने के लक्षण&quot; width=&quot;200&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000; font-size: medium;&quot;&gt;#जुड़वाँ लौ /ट्विन फ्लेम को ब्रह्माण्ड की समकालिकता (सिंक्रोनिसिटी ऑफ़ यूनिवर्स &lt;/span&gt;)&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;जब आप अपने आधे से मिलने वाले होते हैं तब आपको ब्रह्माण्ड गानों से, पिक्चरों से, किसी व्यक्ति सम्भाषण के द्वारा, अंकों के द्वारा, प्रकृति के द्वारा, किसी किताबों के द्वारा, अगर आप कही काम करते हैं और जब उसी काम के लिए या घर आते वक़्त रास्तों पे अजीब सी बातें दिखना जैसे की रोमांस के चित्र, रोमांस की बातें, कोई प्यारा जोड़ा दिखना वो किसी का भी हो सकता हैं। और आपका ध्यान उन्ही के तरफ खींचना। उनका नाम पुनः पुनः&amp;nbsp; दिखना, या सुनाई देना। पुनः पुनः दोहरे अंक दिखना जैसे की ११:११, २२:२२, ५५:५५, १११ और ये कही भी दिख सकते हैं। पर गौर करने वाली बात ये हैं की आपका ध्यान सिर्फ ऐसे ही अंको पर पुनः पुनः जायेगा। आप समझ नहीं पाएंगे की क्यों ऐसा हो रहा हैं ? पर आप समझ जाइएगा की आप अपने जुड़वाँ लौ से मिलने वाले है या मिल चुके हैं। यह ज़्यादा तर मिलने के बाद ही होता हैं परंतु किसी किसी के लिए ये पहले भी होता हैं। आपको मिलानेको ब्रह्माण्ड पूर्ण सहायता करता हैं आप घूम फिर के उन्हीं से मिल पातें हैं और जब आप मिलते हैं तो आप में कोई रूकावट नहीं होंगी या फिर ज़्यादा रूकावट होने के बाद भी आप सहज मिल पातें हैं और आपको कोई रोक नहीं पता एक दूजे से मिलने को। आपको ऐसा लगेगा की स्वयं ब्रह्माण्ड आपको मिलाने का प्रयत्न कर रहा हैं।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000; font-size: medium;&quot;&gt;#जुड़वाँ लौ / ट्विन फ्लेम से मिलने के पूर्व स्वप्न निरंतर आना&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;जब भी आपकी जुड़वाँ आत्मा आपसे मिलने आएगी तो आपको बहोत ज़्यादा रोमांटिक स्वप्ने आएंगे और आप स्वप्नों में बहोत ज़्यादा आनंदित सा आभास करेंगे। जैसे की कोई आपको प्रेम का प्रस्ताव दे रहा हैं। आप खुद को सवार रहे हों। आप आकाश में किसी के साथ उड़ रहे हो आप उसे पहचानते हैं पर सिर्फ स्वप्न में, आपको बड़े बड़े विचित्र स्वप्न आएंगे जैसे की पानी पे चलना, आकाश में उड़ना, शक्तियों का भंडार खुद में दिखना, अपनी ऊर्जा श्वेत या सुनहरी दिखना, आप प्रेम-रोमांस कर रहे हैं ऐसा दिखना। आपका हाथ किसी के हाथ में हैं और आप बहोत खुश हैं। आप प्रकृति में घूम रहे हैं ऐसा दिखना। अंक दिखना, नया दरवाज़ा दिखना, रास्ता साफ़ दिखना। यह सब जुड़वाँ आत्मा /ट्विन फ्लेम से मिलने के पूर्व स्वप्न हैं।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;script async src=&quot;https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-7074881198889056&quot;
     crossorigin=&quot;anonymous&quot;&gt;&lt;/script&gt;
&lt;ins class=&quot;adsbygoogle&quot;
     style=&quot;display:block&quot;
     data-ad-format=&quot;fluid&quot;
     data-ad-layout-key=&quot;-gc-2i-5p-b3+1q0&quot;
     data-ad-client=&quot;ca-pub-7074881198889056&quot;
     data-ad-slot=&quot;3881882566&quot;&gt;&lt;/ins&gt;
&lt;script&gt;
     (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({});
&lt;/script&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000; font-size: medium;&quot;&gt;#जुड़वाँ आत्मा /ट्विन फ्लेम से मिलने के बाद के स्वप्न आना&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;आप आईना देख रहे हो और आपका चेहरा स्पष्ट देखते हो तो समझ जाइये की आपको अपनी जुड़वाँ आत्मा से प्रेम हो गया हैं, आपका आध्यात्मिक प्रेम जागरूक हो रहा हैं और आप जिनसे मिल चुके हो वो आपकी जुड़वाँ आत्मा हैं। आईने में खुद की जगह जुड़वाँ आत्मा का स्वरुप देखना, स्वप्न में किसी ख़ास अंग को स्पष्ट देखना जैसे आँखें ,हाथ, चरण, होंठ, या पूर्ण रुप स्पष्ट देखना, आप गले मिल रहे हो और आप भीतर से बहोत प्रसन्न हैं, स्वयं को हल्का भास करना, उन्हें या अपने आपको देवदूत की तरह देखना, देवदूत दिखना, इष्ट या देवस्थान दिखना, दिया दिखना, पंछियों का या हंसों का जोड़ा देखना, अजीब अजीब उच्च कोटि के लोग देखना, फूलों का बगीचा उसमे खुद को या उनके साथ अपने आप को देखना। अपने भीतर की शक्तियां जागरूक हो रही हैं ऐसा भास होना और अपनी चारों तरफ स्वेत ऊर्जा सा देखना।&amp;nbsp;देव पूजा करना, नए कपडे पहने देखना, देवदूतों से बातें करते हुए देखना, जानवरों से और पक्षियों से बातें करना, छोटे नन्हे बच्चों से खेलना या बातें करना, अपने पूर्वजों से मिलना उन्हें खुश देखना, पूर्वज कुछ आपको उपहार दे रहे हैं ऐसा देखना, देवी देवताओँ के दर्शन होना, नए-नए मार्ग दिखना और ढेर सारा प्रकाश दिखना। इनमेसे कुछ भी आप देखते हो तो आप समझ जाइये की आप उनसे मिल चुके हैं। बार बार उनको साथ देखना और देखने या मिलने के बाद एक सुखद अनुभव करना। पुनः पुनः आपको वे प्रेम कर रहे हैं और आप बहोत ही स्वयं को पवित्र सा अनुभव करना, उनके साथ खिलखिलाना देखना, और नींद से उठने के बाद आपका पूर्ण दिन सुखद और शांति से बीतना। तो यह लक्षण जुड़वाँ आत्मा से मिलने के हैं। आप समझ जाइये।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000; font-size: medium;&quot;&gt;# जुड़वाँ लौ /ट्विन फ्लेम को निरंतर सोचना&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;i style=&quot;font-weight: bold;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;/i&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;i style=&quot;font-weight: bold;&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/i&gt;एक बार यदि आप मिल जातें हैं तो आप निरंतर उन्ही के बारें में सोचते रहते हैं। एक क्षण भी आप उनके विचारों से विमुख नहीं हो पाते आप कितना भी प्रयत्न कर ले आपका शरीर कुछ और कार्य कर रहा होगा और आपका मन उन्ही को सोच रहा होगा। आप जभी उनसे मिलेंगे तो कभी भी आपको बुरा अनुभव या ग्लानि सा अनुभव नहीं होगा इसके उलट आपको उनके साथ और समय बिताने का बहोत मन करेगा।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000; font-size: medium;&quot;&gt;#जुड़वाँ लौ /ट्विन फ्लेम के लिए चिंता और आनंद एक साथ अनुभव करना&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;आप जिनसे मिलेंगे तो आपको इस बात का आनंद अवश्य होगा की आपको कोई आप जैसा मिल गया पर आप इस चिंता में भी रहेंगे की क्या हम मिल पाएंगे? क्यों हम ऐसे मिले? क्या यह इतना सरल हैं ? कैसे स्वयं को में उसके प्रति में इतना /इतनी समर्पित रखू ? आगे हम कैसे मिल सकते हैं उनके विचार मन से क्यों नहीं हटते ? वो कौन हैं कहा से आये हैं ? निरंतर आप यही सोचते रहेंगे। आप एक जैसे होंगे इसलिए वे भी वही अनुभव करेंगे जो आप कर रहे होंगे ये आप २४ घंटे में आप जान जाओगे की वो भी वही सोच रहे हैं या कोई कार्य कर रहे हैं जो आप करना चाहते थे या कर रहे हैं। यह होता ही हैं आप एक ही आत्मा के दो हिस्से अलग अलग शरीर में विद्यमान हैं इसलिए आप हैरान भी होंगे। आप एक जैसे होंगे इसलिए हरकतें भी एक जैसे दिखाई पड़ती हैं कभी कभी। यदि आप साथ हैं जैसे की सम्भाषण या मिलने मिलाव से तो आप देखेंगे की बहोत ज़्यादा एक तो समस्या उत्पन्न हो रही हैं या फिर बहोत ज़्यादा शांतता हैं जब भी आप मिलेंगे तो। आपकी इच्छा बहोत जल्द पूर्ण होने लगती हैं की आपने मिलने का सोचा तो नियति ही ऐसे घटित होंगे की आप अपने आप ही मिल जाओगे आप हैरान रहोगे की ऐसे कैसे हो रहा हैं ? कोई हैं क्या जो सुन रहा हैं मन की बात ? पर विश्वास कीजिये यही होता हैं, या फिर होगा १०० % होगा मैंने कहा हैं तो ये अवश्य होगा या हुआ होगा।&amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;script async src=&quot;https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-7074881198889056&quot;
     crossorigin=&quot;anonymous&quot;&gt;&lt;/script&gt;
&lt;ins class=&quot;adsbygoogle&quot;
     style=&quot;display:block&quot;
     data-ad-format=&quot;fluid&quot;
     data-ad-layout-key=&quot;-gc-2i-5p-b3+1q0&quot;
     data-ad-client=&quot;ca-pub-7074881198889056&quot;
     data-ad-slot=&quot;3881882566&quot;&gt;&lt;/ins&gt;
&lt;script&gt;
     (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({});
&lt;/script&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000; font-size: medium;&quot;&gt;#जुड़वाँ लौ /ट्विन फ्लेम के सामने आपकी आंखें सब भेद खुल देगी&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;यह बड़ा ही रोचक हैं आप आज तक भले ही अपने भावनाओं को किसीसे छुपाए होंगे तो आप इनसे कभी भी छुपा नहीं पाएंगे। ये आँखें पढ़कर ही आपके आत्मा को छू जातें हैं। आप हैरान रह जायेंगे की कोई इतना मेरे बारें में कैसे जान सकता हैं ? आप उसकी आखों में कभी ज्यादा समय तक देख नहीं पाएंगे। एक अजीब सी घबराहट और बेचैनी सी आप अनुभव करेंगे। ये बात दोनों तरफ लागू होती हैं कोई एक बहोत पास आने का प्रयत्न करेगा और एक उससे भागने की। आपको लगेगा की बहोत भावनाएं आँखों से बह रही हैं और आप या वो आपके सारे भावनाओं को पहचान लेगा। एक रहस्य सा आपको उनके आखों में दिखाई देगा इसी वजह से आप कभी उनसे आँखें नहीं मिला पाएंगे क्योंकि अगर ऐसा होता हैं तो आप कोई भी बात उनसे छुपा नहीं पाएंगे। और यही सबसे सुन्दर और रहस्यमयी बात होती हैं। आपको उनसे मिलने के बाद ऐसा लगेगा ही नहीं की आप किसी पराये व्यक्ति से मिल रहे हैं आप पहले ही संवाद में उन्हें पहचान जाओगे। आपको लगेगा की इस व्यक्ति को मैं बहोत अच्छी जानती हूँ आपको उसे जानने की आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी। आप अजीब सा खिंचाव उनके तरफ अनुभव करेंगे। आपको और उनके बारें में ज्ञात करने की इच्छा उत्पन्न होगी की ये कौन हैं जो मुझे इतने अच्छेसे से जनता हैं पहचानता हैं ? और इसिके चलते आपकी आध्यात्मिक यात्रा शुरू होगी। उन्हें खोजते खोजते आप अपने को ही पा जाओगे या फिर उनमें ही स्वयं गवाँ दोगे।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000; font-size: medium;&quot;&gt;#जुड़वाँ लौ /ट्विन फ्लेम को लेकर अपनापन सा अनुभव होना&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;आजतक चाहे आप किसी से भी मिले होंगे पर आपको कभी वो अपनापन सा अनुभव किसी के पास नहीं होगा सिवाय जुड़वाँ आत्मा के। जब आप इनसे मिलने वाले होंगे तो आप एक स्वस्थ और शांती सा अनुभव करेंगे। आपको अजीब सा आनंद और उल्हास अनुभव होंगे। आपको यह लगेगा की मुझे अपना घर मिल गया मेरे अंदर का खली पन सा दूर हो गया ,कोई मुझे अपना सा मिल गया। तो आप निरंतर ही सुखद अनुभव करेंगे। आपका उनसे बहोत ज़्यादा मात्रा में रोमांटिक प्रेम सम्बन्ध होगा किन्तु आप अपनी मर्यादा भी नहीं उलाँघ पाएंगे सही अर्थ में आप एक होने के लिए स्वयं ही को प्रभु के शरण में स्वयं को समर्पित करेंगे दृढ विश्वास आपने जागरूक होगा स्वतः ही। चाहे कितना भी गहरा रिश्ता आपका हो पर आप हमेश मर्यादाओं को समझेंगे। और जब आपकी तपस्या पूरी होगी तो स्वतः ही नियति आपको मिलाएगी पूर्ण रूप से। चाहे आपके जीवन में या उनके जीवन में कोई भी हो आप वो अपनापन सा अनुभव और बहोत ही ज़्यादा मात्र में आकर्षण उनके प्रति अनुभव करेंगे। आपको ऐसा लगेगा की आपको वो मिल गया जो आज तक आप खोज रहे थे, तब आपको सही अर्थ में समझ आएगा की मैं प्रेम और शांति खोज रहा था और वो मुझे मिल गयी। आप एक होने का अनुभव करेंगे। आपको लगेगा मन में यही की मैं चाहे कही भी हूँ पर वो मेरे भीतर ही हैं कही बाहर नहीं तो आप अपने आप ही शांति सा अनुभव करेंगे।&amp;nbsp; &amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000; font-size: medium;&quot;&gt;#जुड़वाँ लौ /ट्विन फ्लेम या आप पहले से मात्रा में अधिक समझदार बनेंगे।&lt;/span&gt;&amp;nbsp;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;दरअसल ये देखा गया हैं की आप यदि बालिश की तरह रहते होंगे तो आप जुड़वाँ आत्मा से मिलने के बाद बहोत ज़्यादा समझदार हो जाते हो। आपको छोटी से छोटी बातें भी समझ आने लगती हैं। आप जो भी कार्य करेंगे आप उस कार्य पे पूर्वाभ्यास करेंगे। जिस तरह से यदि आप लापरवाह रहे होंगे तो आप उनसे मिलने के बाद ऐसा बिलकुल भी नहीं कर पाएंगे। आप अपने और अपने कार्य को लेकर बहोत ही सहनशील और सतर्क रहेंगे। अपने भीतर की खूबियां और कमज़ोरियों पर काम करना शुरू कर देंगे। वो उतावलापन आपमें रहेगा नहीं जो अब तक किसी कार्य या बात को रही होगी। अब आप अकेले ही उन सारे बातों को सुलझाना शुरू कर देंगे। अब आपको किसी की भी आवश्यकता नहीं पड़ेगी चाहे वो किसी भी बात में हो वो आपको इतना सक्षम होना सिखा देते हैं की आप स्वयं ही लोगों की सहायता करने लग जातें हैं। आपमें इतना भयानक आकर्षण बनने लगता हैं की आप किसी भी बात को अपने और सहज खिंच लेते हैं। इसलिए आपके बिघडे हुए कार्य बनने लगते हैं। आप अधिकतर एकांत रहना पसंद करेंगे। आप लोगों से दूर रहना सिख जाओगे ये अपने आप ही होता हैं इसमें आपको कुछ भी करना नहीं पड़ेगा। चाहे शरीर से आपके साथ वे हो न हो पर उनको अनुभव करना ही अपने आप में आपको पूरा करता हैं और यही काफी होता हैं। आप समझ नहीं पाएंगे की क्या चमत्कार घटित हो रहा हैं ? लेकिन विश्वास कीजिये यही होता हैं।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;script async src=&quot;https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-7074881198889056&quot;
     crossorigin=&quot;anonymous&quot;&gt;&lt;/script&gt;
&lt;ins class=&quot;adsbygoogle&quot;
     style=&quot;display:block&quot;
     data-ad-format=&quot;fluid&quot;
     data-ad-layout-key=&quot;-gc-2i-5p-b3+1q0&quot;
     data-ad-client=&quot;ca-pub-7074881198889056&quot;
     data-ad-slot=&quot;3881882566&quot;&gt;&lt;/ins&gt;
&lt;script&gt;
     (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({});
&lt;/script&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000; font-size: medium;&quot;&gt;#जुड़वाँ लौ / ट्विन फ्लेम का स्वास्थ ठीक और परिस्थितियां सुधरने लगते हैं।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;यदि आप जुड़वाँ आत्मा से मिलने से पहले बहोत बीमार होंगे या आपकी परिस्थिती बहोत विचित्र और कठिन होंगे तो इनसे मिलने के बाद आपके स्वास्थ में सुधार आने लगेगा आप ये अवश्य अनुभव करेंगे और निरंतर ही आप अपनी देख भाल करने लग जायेंगे। यदि आप किसी क्षेत्र में कई दिनों से प्रयत्न कर रहे होंगे तो आप मिलने के बाद वो कार्य करेंगे तो वो अवश्य होगा। यह बात आपकी और उनकी ऊर्जा से भी लागु होती है उलट भी हो सकता है जैसे उनका कार्य हो सकता है या फिर आपके रुके हुए कार्य पूर्ण होने लगते हैं। यदि आप आध्यात्मिक होंगे तो वो आध्यात्मिक नहीं होंगे या फिर कुछ अंश मात्र में होंगे यह तो आपके कर्मा और पिछले कर्मो पे निर्धारित होता हैं। आपका भाग्योदय होने लगता हैं। यदि आप आध्यात्मिक होंगे तो वे भवतिक होंगे ऐसा देखा गया हैं।&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000; font-size: medium;&quot;&gt;#जुड़वाँ लौ /ट्विन फ्लेम की और कुछ बातें आपकी एक जैसे होना&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;हाँ यहाँ किसी किसी ने यह अनुभव किया हैं की आपकी कुछ बातें या आदतें या विचार एक जैसे होते हैं। जैसे की आपके बाल, आपकी आँखें, आपका चेहरा, नाक, कान, उचाई, हाथ, पैर, स्वास्थ, या आपके विचार या फिर आपकी हसी, आपका रोना, आपकी भावनाएं, आपकी पसंद न पसंद, वो कुछ भी हो सकते हैं।यहाँ तक आपकी कुंडली भी बहोत बार मिलती झूलती दिखती हैं। आप आध्यात्मिक क्षेत्र में भी एक जैसे होंगे, पर एक बात तो हैं की आपका प्रेम भी एक जैसे ही होगा।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000; font-size: medium;&quot;&gt;#जुड़वाँ लौ /ट्विन फ्लेम की कुछ बातें विपरीत होंगे आप एक दूजे को आईना दिखाएंगे&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;जैसे की अगर आप भाऊक होंगे तो वो उतने ही बुद्धि रूप से सक्षम होंगे, और यदि आप बुद्धि से सक्षम होंगे तो वे भाउक होंगे। जो बात आप नहीं कर पाएंगे वो वही करेंगे। कभी कभी ये आपको अपने नियम से उलंघन करना सिखाएंगे जैसे की अगर आप कोई बात बड़े ही नजागत से और अच्छी करेंगे तो ये ऐसे बिलकुल नहीं रहेंगे। अगर आप उदास से रहेंगे तो ये आपको हसने वाले मिलेंगे। जो बात आपने अपने भीतर सोची होगी कभी तो वो ये आपके मन को दर्शाएंगे। जैसे की आपको शादी से यदि डर लगता हो तो ये एक तो बड़े खुले विचार के होंगे या फिर ये शादी ही नहीं करेंगे। ये आपको वो सारी बातें सीखाने आएंगे या आये हैं जो कभी आपने नहीं की हैं या आपके ह्रदय में कोई इच्छा हो तो उसे पूर्ण करने के लिए वे आपको भीतर से जागरूक करते हैं आपको सक्षम बनाते हैं। इसका एक उदहारण देती हूँ की यदि आप किसी से कोई सलाह लेकर कोई बात करते है तो ये बिना किसी के सलाह के अपनी बातें करेंगे इसका यह अर्थ हैं की आपको अपनी सहायता स्वयं करनी चाहिए और स्वयं में विश्वास होना चाहिए और ये ऐसा आपको सीखा रहे हैं। आप कभी कभी हैरान रहेंगे की ये क्या हैं ऐसा क्यों हैं ? कभी आप उनसे इतना प्रेम करेंगे तो दूजी तरफ उनकी बदमाशियां या बदतमीजियां बिलकुल सेहन नहीं कर पाएंगे पर आप इनसे प्रेम लेश मात्र भी कम नहीं कर पाएंगे।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2021/06/judwa-lau-ya-twin-flame-mein-milne-ke-lakshan.html&quot; style=&quot;margin-left: 1em; margin-right: 1em;&quot;&gt;&lt;img alt=&quot;जुड़वाँ लौ या ट्विन फ्लेम से मिलने के लक्षण&quot; border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;1028&quot; data-original-width=&quot;1600&quot; height=&quot;129&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj_kBuV3IYBLwRdvZQL1dYKZAcMEyujb92ECy0g39E8o68s0I9JbbeBbFvHRcFqJwzlIvB9UVXd6WGLU9K4V99omEJWSZJPC8wgO1Ravv6sW_nu6ZDMEEggqwAQhTtkbJ8iI3uvWIarZfU5/w200-h129/judwa-aatma-se-milne-ke-lakshan.-2jpg.jpg&quot; title=&quot;जुड़वाँ लौ या ट्विन फ्लेम से मिलने के लक्षण&quot; width=&quot;200&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000; font-size: medium;&quot;&gt;#आप जुड़वाँ लौ /ट्विन फ्लेम के ही होकर रह जातें हो&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;यह इसलिए कहा क्योंकि इतना प्रेम जागरूक होने के बाद आप या तो उन्ही के हो जातें हो या फिर अकेले ही अपना पूर्ण जीवन व्यतीत करते हो। यदि आपके जीवन में ये आये होंगे तो आपके सारे रिश्ते फीके से लगेंगे। इतना प्रेम होने के बाद यदि आप एक क्षण भी भूल नहीं पातें तो यह होकर ही होगा की आप असहज अनुभव करने लग जायेंगे। और अपना कार्य करने में व्यस्त हो जाते हैं। आपमें एक सहनशीलता बढ़ जाती हैं और आप एकांत रहना पसंद करने लग जाते हो। आपके जीवन में या&amp;nbsp; में चाहे कितना भी अच्छा व्यक्ति हो या फिर आप ऐयाशी बाज़ हो तो आप उनसे मिलने बाद किसी के नहीं रहते। ये बहोत देखा हैं और आप भी यदि इस यात्रा में होंगे तो आप ये अवश्य अनुभव करेंगे। पर एक बात मेरी हमेशा रखियेगा चाहे वे या आप कैसे भी हो आप सिर्फ एक दूजे ही रह जाते हैं आप कभी भी किसी के साथ टिक नहीं पाओगे। असहज अनुभव करोगे दम घुटने लगेगा आपका और एक समय ऐसा आता हैं की आप एक तो उन सबसे दूर हो जातें हैं अपने लक्ष्य की और या फिर आप अपना सारा जीवन अकेले ही काटते हो। क्योंकि आप भीतर ही भीतर यही सोचेंगे की मैं किसी का जीवन बर्बाद नहीं कर सकता या धोखा नहीं दे सकता आपकी आत्मा आपको अपने लक्ष्य की तरफ ही खिंचेगी इसलिए असहज अनुभव करते रहते है या रहेंगे और आपकी तपस्या और समर्पण पूर्ण श्रद्धा से हो तो आपका मिलना एक हो पाना निश्चित ही होता हैं चाहे उसके लिए कितने भी जनम लेने पड़े पर आप उन्ही के ही रहते हैं हर जनम में चाहे शरीर से हो या मैं आत्मा से। अपने आप ही वो शक्ति आपने जागरूक होती हैं की आप अपने लिए लड़ते हो इसमें कोई कुछ नहीं करता इसमें आप ही स्वयं करते हैं यदि आप आध्यात्मिक मजबूत हैं तो आप सब कुछ अच्छे से सारे कार्य पार करते हैं और आप कमज़ोर हैं तो मेरी वही सलाह हैं की आप ध्यान कीजिये अपनी अध्यात्म को समझिये।&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000; font-size: medium;&quot;&gt;#अध्यात्म की और आपका और जुड़वाँ लौ /ट्विन फ्लेम का झुकाव होना&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;आप यदि मिल चुके हैं तो आपसे में से कोई न कोई एक आध्यात्मिक रूप से जागरूक हुआ होगा या फिर होगा। क्योंकि यह प्रेम कोई साधारण नहीं हैं ये में पिछले ही लेख में बता चुकी हूँ इसलिए तो इनका आध्यात्मिक होना निश्चित ही रहता हैं। आध्यात्मिक होना मतलब की कुण्डलिनी चक्र खुलना ख़ास कर ह्रदय चक्र जो प्रेम और करुणा से सम्बंधित हैं जिसे अनाहत चक्र भी कहते हैं। और ये इसी कारण से एक दूजे से मिलपातें हैं और एक रूप ही होते हैं। चाहे शरीर से हो सकता हैं की ये मिले न मिले पर इनकी आत्मा एक बार आमनेसामने आ गयी तो ये संभव ही नहीं की ये कभी पृथक(बिछड़ेंगे ) होंगे। ये मिलने के बाद इनका झुकाव अध्यात्म के और ज्यादा हो जाता हैं और इन्ही से इनको इतनी सहनशीलता प्राप्त होती हैं। आपमें वो क्षमता अपने आप ही आने लगती हैं की आप स्वयं ही सरे कार्य करें। आप उनको खोजते खोजते अपने आप को पा जातें हो या पाजायेंगे। आपको वो इसलिए ही सीखाने आता हैं की आप अपनी कीमत समझे अपनी शक्तियों को जागरूक करके उनका सदुपयोग करके जनकल्याण अतः अपना और अपने परिवार का भी कल्याण कर सके और अपने सारे कार्य अच्छेसे पार करें और मोक्ष को प्राप्त हो। यही कार्य जुड़वाँ लौ का होता होता हमारे जीवन में। बाकि मिलना न मिलना आपके कर्मो पर निर्धारित होता हैं। आपको यदि स्पष्टता चाहिए तो ध्यान करते रहिये आप अपने आत्मा से अवश्य ही जुड़ जायेंगे और आपकी अंतरात्मा ही आपका मार्गदर्शन करेगी। विश्वास रखिये अपने आप पर और ब्रह्माण्ड पर।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000; font-size: medium;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;#जुड़वाँ लौ /ट्विन फ्लेम को अपने&amp;nbsp; जीवन का लक्ष्य मिल जाना&amp;nbsp;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;आपका मिलना भी हो जाता हैं उसके बाद आप अलग भी जाते है कुछ समय के लिए, तो केवल अपना लक्ष्य पाने के लिए। और आपका लक्ष्य कुछ भी हो सकता हैं और इनसे मिलने के बाद आपके जीवन में अपना लक्ष्य भी मिल जाता हैं फिर आप अपने लक्ष्य की और अग्रसर होने लगते हैं। आप प्रकृति से जुड़ने लगते हैं प्रकृति की और उन्ही की सेवा करने का विचार मन में पुनः पुनः आता हैं। आपकी कुण्डलिनी जागरूक होने लगती हैं आपके कमियां और डर जो भी हैं वो कम या खत्म से होने लगते हैं यहाँ बतादू की कोई बात ख़तम नहीं होती परन्तु हाँ कम और उस पर नियंत्रण अवश्य होता हैं। आप हर एक कार्य को सफल बना देते हैं इतनी क्षमता आपमें आने लगती हैं। और आपका मन पूजा पांठ और ध्यान में लगने लगता हैं। और इसके चलते आपकी दूसरी जुड़वाँ आत्मा भी उस और जागरूक होने लगती हैं क्योंकि आप एक ही होते हैं पर यहाँ बतादूँ की सिर्फ दिव्य स्त्री जो जागरूक हैं वो या दिव्य पुरुष कोई एक ही ध्यान करें और दूजा जागरूक होगा ऐसा बिलकुल भी नहीं हैं। लोगों ने ये अजीब सी भ्रान्ति फैलाके राखी हैं की सिर्फ डिवाईन फेमिनिन मतलब दिव्या स्त्री ही ध्यान करेगी तो दिव्या पुरुष डिवाईन मस्क्युलाइन जागरूक होगा ऐसा कतई नहीं हैं। हाँ कुछ अंश मात्रा में जो कोई जागरूक आत्मा साधना या ध्यान करेगी तो वो धीरे धीरे अपनी दूजी आत्मा के पुराने आदतों को बदलने में विवश करेगी। पर जिसका कार्य उसीको पूर्ण करना होता हैं। यदि ऐसा होता तो महादेव और माँ पारवती कभी भी एक दूसरे को प्राप्त करने के लिए साधना या तपस्या नहीं करते। कोई एक ही करता उनमे से परन्तु ऐसा उन्होंने नहीं किया अध्यात्म का अर्थ होता हैं स्वयं से जुड़ना स्वयं के आत्मा से जुड़ना तो यदि एक जुड़ेगी तो दूजा भी जुड़ेगा और यह होता ही हैं क्योंकि यदि आपकी ऊर्जा उच्च हैं तो आपको प्राप्त करने के लिए उनको उनकी ऊर्जा को भी उच्च करना पड़ेगा और पड़ता ही हैं&amp;nbsp; अध्यात्म मतलब व्यक्तिगत होता हैं। इसलिए यह अवचेतन मन से एक होते हैं और तभी ये दोनों इनकी मन में चल रही बातें सुन सकते हैं या पढ़ सकते हैं और ये झूठ नहीं हैं। जो भी इस रास्ते पे होगा वो अवश्य ही ये अनुभव करेगा। क्यूंकि एकदूसरे से मिलने के बाद आपकी सोई हुई शक्तियाँ जागरूक होती हैं। सबसे ज़्यादा आपको ११:११ ही दिखेंगे वो चाहे कही भी हो ये आपको अवश्य दिखेंगे इसका अर्थ होता हैं की आप जागरूक हो रहे हैं और अध्यात्म के और अग्रसर हो रहे हैं तो बस यही हैं जुड़वाँ आत्मा /जुड़वाँ लौ /ट्विन फ्लेम से मिलने के लक्षण।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;script async src=&quot;https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-7074881198889056&quot;
     crossorigin=&quot;anonymous&quot;&gt;&lt;/script&gt;
&lt;ins class=&quot;adsbygoogle&quot;
     style=&quot;display:block&quot;
     data-ad-format=&quot;fluid&quot;
     data-ad-layout-key=&quot;-gc-2i-5p-b3+1q0&quot;
     data-ad-client=&quot;ca-pub-7074881198889056&quot;
     data-ad-slot=&quot;3881882566&quot;&gt;&lt;/ins&gt;
&lt;script&gt;
     (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({});
&lt;/script&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;ऐसे देखा जाये तो बहोत हैं लिखने को और बताने को पर जो इन रास्तों पे चल रहे होंगे उन्ही आत्माओं को ही ज्ञात होगा की क्या क्या उन्होंने देखा और सहा हैं। बड़ा ही विचित्र सा अनुभव कर रहे होंगे आप किन्तु यही सत्य हैं। यह कोई झूठ नहीं हैं और नहीं कोई पिक्चर की कहानी बता रही हूँ यह एक परम सत्य हैं पर लोगों ने कैसे जुड़वाँ आत्मा को एक हीरो हीरोइन की तरह साबित किया हैं। नहीं कृपया मसकरी मत कीजिए यह बहोत ही कठिन यात्रा होती हैं उतनी ही पीड़ा और उतना ही प्रेम हैं और मैं पूर्व भी बता चुकी हूँ की यह कोई साधारण सा बंधन नहीं होता हैं ये बहोत ही उच्च स्तर का प्रेम होता हैं इसमें कई जोड़े मिल पातें हैं तो कई नहीं मिल पातें पर ये अपने आपको पूर्ण होने का अनुभव करते हैं क्योंकि आत्मा और मन हृदय से ऊर्जा से जुड़े हुए रहते हैं इसलिए कभी कभी ये बहोत सेहन कर जातें हैं पर ये सत्य हैं की ये कभी भी किसी के&amp;nbsp; भी नहीं हो पाते सिर्फ अपनी जुड़वाँ आत्मा के अलावा। मैं कोई भी भ्रान्ति नहीं फैला रही हूँ क्योंकी ये सब सत्य हैं किन्तु यदि आपके जीवन में आपकी जागरूकता नहीं हुयी हैं तो ये सम्बन्ध आपके समझ के बाहर हैं इसे समझने के लिए ही आपका आध्यात्मिक होना अनिवार्य हैं मैं यही पुनः पुनः दोहराती हूँ। और आप चाहते हैं की आप ऐसा प्रेम पाएं जो किसी के जीवन में प्रसाद रूप प्रेम हैं जो शिवशक्ति सा प्रेम हैं तो ध्यान कीजिये आध्यात्मिक बनने की तैयारी कीजिये अपनी बुरी आदतों को अच्छी आदतों में बदलकर अपने आपको इतना वज्र जैसा बनाइये की आपके जीवन में भी शिवशक्ति सा प्रेम प्राप्त हो। यदि कुछ रह गया हो या कुछ सुझाव देना हो या फिर किसी भी तरह का प्रश्न इस विषय के सम्बन्ध हो तो आप मुझे अवश्य ही कमैंट्स करें या फिर मुझे मेल कर सकते हैं मुझे बहोत आनंद होगा यदि मैं आपकी सहायता करती हूँ तो। तो अब आपको ज्ञात हो गया होगा की क्या कैसे पहचाने अपनी जुड़वाँ आत्मा को? देखिये किसी भी प्रकार का भ्रम अपने मन में लाने से पहले अपनी अंतर आत्मा की सलाह अवश्य लेना क्योंकि अंतरात्मा से बड़ा गुरु और कोई नहीं होता है। पर यदि आप ऐसे समस्या में फसे हैं तो आप किसी जानकर व्यक्ति से ही पूछिए और अपना सही निर्णय लेकर सही मार्ग चुने और यदि आपको कोई भी समस्या हैं की आप इस सम्बन्ध में हैं की नहीं तो आप मुज़से भी पूछ सकते हैं। परन्तु कृपया करके अपने आपको भटकाइए मत। तो इसी की साथ मैं अब अपने शब्दों को विराम देते हुए आपके कीमती समय को प्रणाम करते हुए आपसे विदा लेना चाहती हूँ और एक नए विषय को लेकर आपसे फिर मिलने की इच्छा व्यक्त करती हूँ। आप सभी स्वस्थ रहिये और आनंदित रहिये यही प्रार्थना मैं आपके लिए करती हूँ की प्रभु आप सभी पर अपनी कृपा और आशीर्वाद प्रदान करें आपके घर में बरकत रहे और आपका जीवन खुशियों से आबाद रहे।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #990000; font-size: medium;&quot;&gt;🙏जय गुरुदेव, हर-हर महादेव।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #990000; font-size: medium;&quot;&gt;🙏&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;script async=&quot;&quot; crossorigin=&quot;anonymous&quot; src=&quot;https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-7074881198889056&quot;&gt;&lt;/script&gt;
&lt;ins class=&quot;adsbygoogle&quot; data-ad-client=&quot;ca-pub-7074881198889056&quot; data-ad-format=&quot;fluid&quot; data-ad-layout-key=&quot;-gc-2i-5p-b3+1q0&quot; data-ad-slot=&quot;3881882566&quot; style=&quot;display: block;&quot;&gt;&lt;/ins&gt;
&lt;script&gt;
     (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({});
&lt;/script&gt;</description><link>https://www.adhyatmikjagat69.co/2021/06/judwa-lau-ya-twin-flame-mein-milne-ke-lakshan.html</link><author>noreply@blogger.com (Unknown)</author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj6FwQPZsDbs6G4rW7DM_3V41uK7ACOsGY5J520IvG4Cy0BCfW51eiR5T1CNmb0S5D59lL6RyKykcacvsCEE3wFUzyDN8T42mAqgtS-LBX_HLG8VCOg4gpexPPBYB6R9forYnnaQOEiVkWC/s72-w200-h125-c/judwa-lau-ya-twin-flame-se-milne-ke-lakshan..jpg" height="72" width="72"/><thr:total>2</thr:total></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-8475792039111759199.post-1977980178928773493</guid><pubDate>Sat, 05 Jun 2021 09:55:00 +0000</pubDate><atom:updated>2024-09-28T15:50:34.994+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">अध्यात्म परिचय</category><title>आध्यात्मिक प्रेम क्या हैं ?</title><description>&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;b&gt;आप सभी का फिरसे ह्रदय से स्वागत करती हूँ और धन्यवाद् करती हूँ, की आप अपना किंमती समय निकाल कर यहाँ आध्यात्मिक जगत में आये। मुझे पूर्ण विश्वास हैं की आप इस कठिन समय में भी कुशल मंगल ही होंगे और अपना और अपनों का ख्याल भी रख रहे होंगे। आज कुछ अलग ही विषय लेकर आपके समक्ष हूँ। आज बस सोच ही रही थी की प्रेम क्या होता हैं? इस पर चर्चा की जाएं ताकि आप सभी को उचित मार्गदर्शन प्राप्त हो। और आप अपने जीवन के फैसले उचित कर सके इसी कामना से में ये लेख लिख रही हूँ। &lt;/b&gt;यदि आप ये पढ़ रहे हैं तो मैं आपसे कहूँगी की शांत चित्त होकर इस लेख को अपने अंतर उतारिए क्योंकि यह सिर्फ एक लेख नहीं अपितु एक ज्ञान हैं जो आपके जीवन में चल रही बाधाओं का एक मार्ग हैं। तो आज इस विषय को मैं बहोत सरल शब्द में आपको समझाने का प्रयास करुँगी। ऐसा सोचियेगा की कोई आपका गुरु ही आपको मार्ग दिखा रहा हैं। पर मैं कोई गुरु नहीं पर हाँ,&amp;nbsp; मैं गुरु की शिष्य अवश्य हूँ और मुझे शिष्य बनकर ही रहना हैं। मैं बस सीखना ही चाहती हूँ कोई गुरु नहीं बनना चाहती क्योंकि&amp;nbsp;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;गुरु एक बहोत ही विराट शब्द है जो ब्रह्माण्ड हैं&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;और मैं उनका अंश मात्र। इसलिए मुझे गुरु न कहे बस आप अपने इष्ट का या गुरू&amp;nbsp; का ध्यान कर के ही इस लेख को पढ़िए तो आपको लगेगा की आपके इष्ट या गुरु ने आपको मार्ग दिखाया हैं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;तो समझते हैं की प्रेम क्या हैं ? प्रेम एक ऐसी बात हैं जो हर कोई अपने जीवन में पाना चाहता हैं। परंतू हर किसी के नसीब में सत्य प्रेम नसीब नहीं होता। यदि प्रेम मिल भी जाएं तो क्या आप उस प्रेम को अपने जीवन में धारण कर पातें हो? जिसे आप प्रेम करते हो वो किस प्रकार का प्रेम हैं ? ये प्रेम हैं भी या नहीं? की मोह हैं ? क्या आप प्रेम को समझते हो? कितनी गहराई से प्रेम को समजझते हो? क्या आपमें वो क्षमता हैं की प्रेम को जीवन भर समर्पित रहे? और ये ढाई आखर प्रेम के क्या हैं? हर किसी के लिए प्रेम की व्याख्या और सोच अलग-अलग हैं। कोई रिश्तों में ढूंढता हैं तो कोई किसी आदत में और कोई किसी वस्तु में। पर वास्तविक में प्रेम क्या हैं? क्या आपने प्रेम किया हैं? और वो भी पूर्ण समर्पित भाव से, पूर्ण श्रद्धा से? चाहे वो किसी से भी हो इष्ट से हो, गुरु से हो, जानवर से हो व्यक्ति से हो या आत्मा से हो। यदि नहीं तो आप अवश्य ही दुखी हो और यदि हाँ, तो फिर आप जीवन के सबसे सौभाग्यशाली व्यक्ति हैं क्योंकि प्रेम ही एक मात्र ऐसा पर्याय हैं की, बड़े से बड़े तकलीफों को और जटिल से जटिल स्वाभाव वाले&amp;nbsp; या कठिन से कठिन रास्तें भी आसान हो जाते हैं।वास्तविक में प्रेम जब हम अपने आपसे करते है तब वो प्रेम होता है इसे स्वार्थ नहीं प्रेम कहते है, क्योंकि स्वार्थ सिर्फ स्वयं का होता हैं परंतु प्रेम जब आप अपने आप से करते हो तो आप दूसरों को भी अपने भाति समझने लगते हो। कैसे कह सकता हैं कोई की प्रेम दुःख देता हैं?&lt;i&gt;&lt;b&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&amp;nbsp;प्रेम नहीं हमारी आशाएं और इच्छाएं हमें दुःख देती हैं।&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/i&gt;जिस तरह से हम किसी&amp;nbsp; की आशाएं और इच्छाएं पूरी नहीं कर पाते तो फिर हम किसी और से यह आशा क्यों लगाते हैं की वो हमारे अनुसार चलेगा? हमारी आशाएं और इच्छाएं पूरी करेगा ? सोचिए क्या यह सत्य नहीं हैं ? क्या आप ऐसा नहीं करते ? इसलिए तो आप प्रेम बाहर खोज रहे हैं किन्तु वह तो आपके भीतर हैं।&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2021/06/adhyatmik-prem-kya-hain-.html&quot; style=&quot;margin-left: 1em; margin-right: 1em; text-align: center;&quot;&gt;&lt;img alt=&quot;आध्यात्मिक प्रेम क्या हैं ?&quot; border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;498&quot; data-original-width=&quot;740&quot; height=&quot;131&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEi8jOtKnTxRvnzCiG8KaJAsRYhSvmFx-7PTSAOLMnRWxIF1ArPXaBThC3WDfICfQLascYx1_W5U72A-b7qVJrkeKgujTYfK0qfAymRQwtyQmU9kpn7NteMmZRMNWbXDkptEStU-etGZS61z/w200-h131/%25E0%25A4%2586%25E0%25A4%25A7%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25AF%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25A4%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25AE%25E0%25A4%25BF%25E0%25A4%2595-%25E0%25A4%25AA%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B0%25E0%25A5%2587%25E0%25A4%25AE-%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25AF%25E0%25A4%25BE-%25E0%25A4%25B9%25E0%25A5%2588%25E0%25A4%2582.jpg&quot; title=&quot;आध्यात्मिक प्रेम क्या हैं ?&quot; width=&quot;200&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;ब्रह्माण्ड में परमेश्वर के बाद यदि पवित्र और सत्य कुछ हैं तो वो निश्चित और निश्चित प्रेम ही हैं। इस ब्रह्माण्ड में एक मात्र प्रेम ही सत्य है, पवित्र हैं, शीतल है, शांत हैं, आनंद हैं, क्षमा, सहनशील और मोक्ष हैं। और ये &lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2020/10/adhyatma-ka-parichay-anand-prem-post.html&quot;&gt;&lt;b&gt;आध्यात्मिक&lt;/b&gt;&lt;/a&gt; के बिना असंभव हैं। और ये सारे लक्षण और गुण अध्यात्म से हैं। मैं वारंवार यही दोहराती रहती हूँ की अध्यात्म के बिना प्रेम को पाना, समझना और जीवन में प्रेम को धारण करना असंभव हैं। प्रेम एक ही होता हैं पर उसके कई रूप होते हैं जैसे की पहले भी बताया की किसी व्यक्ति से, इष्ट से, वस्तु से, आदत से और इत्यादि। किन्तु यह मोह है प्रेम नहीं। कैसे ? अब आप कहेंगे की प्रेम तो हैं आप ऐसे कैसे कह सकते हैं की प्रेम नहीं ? हाँ , बताइयें ? क्या आप जो प्रेम समझ रहे हैं क्या वो प्रेम हैं? नहीं ये प्रेम नहीं ये मोह हैं, पसंद हैं, आदत हैं, या फिर वासना हैं। ऐसा क्यों कहा मैंने ? आईए ,समझाती हूँ।&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;div&gt;&lt;b&gt;&lt;span style=&quot;color: #990000;&quot;&gt;&lt;u&gt;कबीर&lt;/u&gt;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&amp;nbsp;जी कहते हैं : &lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&quot; पोथी पढ़ पढ़ जग मुवा पंडित हुआ न कोय, ढाई आखर प्रेम का पढ़े सो पंडित होय। &quot;&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;p&gt;&lt;span&gt;चाहे आप कितने भी ज्ञानी हो, ध्यानी हो, योगी हो, या बुद्धिमान हो अगर आपने प्रेम नहीं किया तो, आपका जीवन ही व्यर्थ हैं ज्ञान पढ़ लेने से कोई पंडित नहीं होता पर जो पूर्ण ह्रदय से प्रेम करता हैं जो भावनाओं को समझता हैं वही सच्चा प्रेमी हैं वही पंडित हैं, यही प्रेम हैं। प्रेम एक नशा होता हैं जो भीतर से आनंद को बहाता हैं जो एक समाधी अवस्था जैसी हालत होती हैं। प्रेमी मतलब संत जो कभी बाहर तो कभी भीतर इस आनंद में बहते हैं, और प्रेम ही आपको समाधी की और मोक्ष की और ले जाता हैं सत्य के तरफ ले जाता हैं। तभी तो संत हमेशा समाधी में ही रहते थे। जो दो आत्मा के बीच प्रेम अनुभव होता हैं वही तो स्वयं के भीतर प्रेम अनुभव होता हैं। क्या आपने कभी संतों की आँखें देखी हैं ? देखना कभी उनकी आखें हमेशा मांथे पर ही रहती थी। इसका क्या अर्थ हैं ? अर्थ ये की वे प्रेम को, आनंद को अनुभव कर रहे हैं। और वो अपने आपमें ही पूर्ण बनने की कोशिश कर रहे हैं। वो समझते नहीं थे प्रेम को, प्रेम स्वयं उन्हें समझता था। वे बस प्रेम को बिना समझे उसमे डूब रहे थे खोए जा रहे थे वे स्वयं प्रेम बनने जा रहे थे इसलिए तो इतनी सहनशीलता उनमे कूट-कूट के भरी थी। और जग ने कभी भी संतो को जीने नहीं दिया न कभी जग समझ पाया न उन्हें समझाने दिया। इसलिए वे अपनी बस्ती कही दूर बसा लेते थे। और आज भी यही हो रहा हैं। कहा किसी को कोई जीने दे रहा हैं सब स्वार्थ से ही तो भरे हैं।&amp;nbsp;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;प्रेम कहा हैं? वो भीतर हैं।&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&amp;nbsp; और&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span&gt;प्रेम कभी भी पूर्ण नहीं होता हैं उसे पूर्ण बनाना पड़ता हैं प्रेम संपूर्ण नहीं हैं यदि वो संपूर्ण हो जाएं तो फिर जीवन जीने का अर्थ ही कहा बचता हैं। इसीलिए तो, शिवशक्ति भी एक दूसरे से पूर्ण हैं। राधाकृष्ण भी एक दूजे से पूर्ण हैं यदि भगवान ही पूर्ण नहीं प्रेम में तो आप और हम कैसे पूर्ण हो सकते हैं? कामवासना की इच्छा ख़तम हो सकती हैं किंतू&amp;nbsp; प्रेम नहीं। वो अनंत हैं निरंकार हैं निर्मयी हैं। इसलिए प्रेम ढाई आखर का हैं मतलब अपूर्ण हैं इसलिए तो वो तीन नहीं है। जिसे आपका पूरक ही पूर्ण करता हैं और जिसने सत्य को समझ लिया वो फिर कहा बच पाता हैं ? क्योंकि यही तो अंत हैं। और सृष्टि का अंत तो हैं ही नहीं, बस परिवर्तन ही चलता रहता हैं और उसे ही अनंत कहते हैं। जो ख़त्म न हो, जो पूर्ण भी न हो और जो अपूर्ण भी न हो वही तो ब्रह्मा हैं प्रेम हैं। प्रेम में आप पूर्ण हो ही नहीं सकते इसे पूरा करने के लिए आपकी दूजी आत्मा ही आपको पूर्ण करती हैं। और&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2021/05/judwa-lau-twin-flame-kya-hain-kitne-prakar-ki-hoti-hain-post.html&quot;&gt;&lt;i&gt;&lt;b&gt; जुड़वाँ आत्मा क्या हैं?&lt;/b&gt;&lt;/i&gt;&lt;/a&gt; ये मैं पिछले लेख में बता चूकी हूँ। इस विषय में बहोत कुछ तथ्य आपके समक्ष खुलूँगी।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span&gt;चाहे आप कितने भी ध्यानी, ज्ञानी, बुद्ध, साधक, तपस्वी या सेवाभावी हो अगर आपने प्रेम नहीं किया तो आपने प्रेम नहीं समझा। परन्तु प्रेम कभी समझा नहीं जाता वो बस हो जाता हैं और उसका होना ही अस्तित्व का होना हैं। प्रेम यदि समझ जाएं तो फिर वो प्रेम कैसा ? प्रेम को समझना चाहते हो तो बस अपने आप को समझिये भावनाओ को जानिए। खो जाइए उसमे डूब जाईये, अगर प्रेम को समझने गए तो फिर वो प्रेम नहीं ज्ञान, ध्यान और समाधी होती हैं। फिर आप प्रेमी कहा? परमेश्वर को पाना सरल नहीं क्योंकि परमेश्वर ही प्रेम हैं। परन्तु भगवन या अपने प्रेमी को पाना है तो प्रेम बन जाईये फिर देखिये की कैसे कोई आपको दर्शन नहीं देता ?&amp;nbsp;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;बुद्ध ने ध्यान से अपना मार्ग पाया सत्य पाया और मीरा ने प्रेम से अपने गिरधर नागर कृष्ण को पाया।&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&amp;nbsp;और दोनों भी मोक्ष को प्राप्त हुए बस उनके तरीके और रास्ते अलग थे पर प्रेम के बिना तो ह्रदय चक्र भी खुलना असंभव हैं। मीरा ने सिर्फ प्रेम किया इसलिए वो और उनका प्रेम अमर है। यदि प्रेम चाहते हैं तो समर्पण और त्याग के बिना यह संभव ही नहीं। क्या आपमें वो मीरा की भक्ति हैं ?&lt;/span&gt;&lt;span&gt;&amp;nbsp;जूनून हैं ? समर्पण हैं ? त्याग हैं ? तो फिर आप निश्चित ही प्रेमी हैं। और जो प्रेमी बन जाते हैं वो अपने आप में ही मस्त रहते हैं वो किसी भी बंधन में नहीं रहता उसके लिए सारे बंधन टूट जाते हैं मतलब मोह छूट जाता हैं। इसे विज्ञानं में समझौ तो ऐसा की प्रेमी के तरफ जो प्रेम होता है वो हॉर्मोन्स के वजह से होता है और जो अपने प्रियजन होते हैं उनके लिए हमारा प्रेम खून से डी.एन.ए से होता हैं। इसी वजह से ये प्रेम एक नशा होता हैं। तो निरंतर उसके हृदय में सिर्फ प्रेम का ही चिंतन और प्रेमी ही रहता हैं, चाहे वो प्रेमी किसी भी रूप में हो कोई भी हो कोई फरक नहीं पड़ता। एक बार आत्मा ने उसे स्वीकार कर लिया तो जग का क्या काम? एक बार कोई प्रेमी बन गया तो वो बंधन नहीं सम्बन्ध बनाता हैं। किन्तु उसके लिए कोई बंधन नहीं होते। यहाँ मैं सम्बन्ध मतलब व्याक्ति की द्रिष्टी से नहीं आत्मा के द्रिष्टी से बता रही हूँ, काम वासना के द्रिष्टी से नहीं। कामवासना भी प्रेम में ही आती हैं किन्तु जहा शुद्ध प्रेम होता हैं वह कामवासना एक साधना के रूप में परिवर्तित होती हैं। और काम वासना एक तंत्र हैं जो सबसे शुद्ध हैं। इस विषय पर भी में अवश्य प्रकाश डालूंगी ताकि आप काम वासना और प्रेम को ठीक से समझ सके और उस अनुसार खुद को ढाल सके। कामवासना शरीर की भूक और आवश्यकता होती हैं। जो अनिवार्य भी हैं क्योंकि सृष्टि का आधार ही कामवासना से हैं तो ये गंधा विषय कहा ? परन्तु प्रेम आत्मा की&amp;nbsp; भूक होती हैं जो कभी भी खत्म नहीं होती क्योंकि आत्मा अमर है तो उसके गुण भी अमर हैं उसके साथ। जो कार्य किसी मार्ग से संभव नहीं वो कार्य प्रेम से संभव हैं। इसलिए प्रेम के बिना आपको प्रभु दर्शन होना या उन्हें पाना असंभव हैं।&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&amp;nbsp;यदि आप तपस्या करते हैं और उसमे श्रद्धा ही नहीं समर्पण भाव ही नहीं त्याग नहीं प्रेम नहीं तो फिर आपकी तपस्या व्यर्थ हैं।&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&amp;nbsp; किसीको समझना कठिन नहीं बहोत सरल हैं। कैसे? बस अपने आप को समझ जाइये आप दूसरों को समझ जायेंगे। और रही बात ईश्वर को पाने की या प्रेमी-प्रेमिका को पाने की तो पहले उनके जैसा बन जाइये तो कठिनाई कहा रहती हैं ? ईश्वर को पाना हो तो उनके जैसा बनना आवश्यक हैं तभी आप उन तक पोहोचेंगे। इसलिए बस प्रेम कीजिये बिना छल कपट किये। हम किसी के पीछे या आगे छल कपट करते हैं तो दरअसल हम उन्हें ही नहीं अपितु अपने आप से छल कर रहे हैं। क्योंकि अंतरात्मा का यह स्वाभाव हैं ही नहीं। इसलिए अंतर् आत्मा ही हमें शिक्षा देती हैं। तो कभी प्रेम में मिलावट मत करना तभी आपका प्रेम आपके पास आपके साथ होगा।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2021/06/adhyatmik-prem-kya-hain-.html&quot; style=&quot;margin-left: 1em; margin-right: 1em;&quot;&gt;&lt;img alt=&quot;आध्यात्मिक प्रेम क्या हैं ?&quot; border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;281&quot; data-original-width=&quot;500&quot; height=&quot;113&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj1-5WZKvtXov-p_gORdKYdXhAJ4JzRdHdU62JilNYhBua4lHIOnK6D198MT-OtXqEAIlyDTV4H860CZZ7BJeuDn9_JaOUiWeuezUzXw-gap4OGdfZENdMmEUbDX7R8J_B6V9lT7KVTnf6w/w200-h113/%25E0%25A4%2586%25E0%25A4%25A7%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25AF%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25A4%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25AE%25E0%25A4%25BF%25E0%25A4%2595-%25E0%25A4%25AA%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B0%25E0%25A5%2587%25E0%25A4%25AE-%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25AF%25E0%25A4%25BE-%25E0%25A4%25B9%25E0%25A5%2588%25E0%25A4%2582-2.jpg&quot; title=&quot;आध्यात्मिक प्रेम क्या हैं ?&quot; width=&quot;200&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;b&gt;प्रेम या मोह&amp;nbsp;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;: प्रेम को पाने के लिए तो भगवन भी मनुष्य का जन्म कितनी बार ले चुके हैं, उसे क्या आवश्यकता थी की वो किसी को अपना भक्त बनाये या उसे प्रेम करें ? क्योंकि यही तो सत्य हैं, प्रेम। क्या वो यह सोचते हैं की ये नींच जात का हैं मैं नहीं जाऊंगा मेरी तपस्या भांग होगी मैं मैला हो जाऊंगा ? तो फिर वो भगवान कैसे ? यदि ऐसा होता तो वाल्मीक ऋषि ऋषि न कहलाते तुलसीदास संत न कहलाते। कहने का ताप्तर्य यह की प्रेम सबके लिए एक सामान है और प्रेम को सब एक समान हैं। जब भगवान किसी भक्त के घर जाने से या उसे अपनाने से नहीं चुके तो हम और आप किस अहंकार में जी रहे हैं ? शरीर के अहंकार में? क्या ये सब आपके साथ रहेगा ? यह तो नश्वर हैं पर आत्मा तो अमर है जो सत्य हैं, प्रेम हैं। और प्रेम किसी जाती से, धरम से, और संप्रदाय से, सम्बंधित नहीं होता हैं। वह सिर्फ आत्मा से सम्बंधित होता हैं। और आत्मा हर जनम यही प्रेम गुण ले आएँगी अपने साथ पर शरीर तो अलग ही रहेगा न क्या स्त्री ? क्या पुरुष? वो तो हर जनम प्रेम करेंगी। जातियों को छोड़िये खुद को जागरूक कीजिये की पहला धर्म हमारा मानव है तो मानव ही मानव से पहचाने प्रेम ही प्रेम को जाने तब आप देखेंगे की घृणा में कोई अर्थ नहीं प्रेम ही सत्य हैं। इसलिए कहा क्योंकी आप निरंतर किसी को प्रेम कर सकते हैं पर घृणा नहीं और घृणा हमारे मष्तिष्ख से उत्पन्न होती हैं और वो चंचल होती हैं और प्रेम ह्रदय से होता है आत्मा से होता हैं इसलिए प्रेम अनंत हैं। कभी न ख़तम होने वाला उसे अनंत कहते हैं। हम जिस जाती में आते हैं उस जाती धरम का भी भला करें और अन्य जाती धर्मो का भी भला करे। पर पहले मानव बने और वो संभव हैं प्रेम से अध्यात्म से। ज़रा और गहरायी में लेकर चलती हूँ आपको, बताइए पिछले जन्म में आप क्या थे क्या आपको ज्ञात हैं ? आज जिस किसी भी जाती धर्म में आप हैं और किसी विरुद्ध जाती का आप अपमान करते हैं तो क्या आपको पता चले की आप भी किसी जन्म में उसी जाती धर्म में पैदा हुए थे जिसकी आप आज घृणा कर रहे हैं, तो क्या होगा ? तो फिर आप अपने आपसे भी घृणा करेंगे ? नहीं न ? तो जिस तरह से आप अपने आपको क्षमा करते हैं प्रेम करते हैं उसी प्रकार से औरों को भी क्षमा और प्रेम कीजिये। आप देखेंगे की धीरे धीरे आप प्रेम होते जा रहे हैं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;क्या ये संभव हैं? जी संभव हैं तभी तो कह रही हूँ। मेरी न सुने अपनी आत्मा की सुनिए क्या वो प्रेम नहीं चाहती ? तो फिर किस बात को लेकर इतने चिंतित हैं आप? जिसे आप पाने की कोशिश करते हैं और वो जो आपके पास नहीं हैं तो, आपको उस बात के तरफ एक अजीब सा खिंचाव होता है। जो कभी आपको शांत रहने ही नहीं देता। यह जो जलन, ईर्ष्या, भेदभाव, अविश्वास, तड़प, बेचैनी, बेकरारी, चिंता, अपना बनाने की पागलपंती, जूनून, झटपटाहट, डर, घुस्सा, वासना और रोग यह सब विकार मोह में होता हैं।और इनमे से आप भी इस विकार के आदि होंगे। क्योंकि हम मनुष्य हैं और ये स्वभाविक हैं। पर हम बदल सकते हैं यदि हम बदलना चाहे तो। और जहा सुकून, शांती, अभय, आनंद, चिंतन, क्षमा, गहरा विश्वास, सहनशीलता, समर्पण, त्याग, मोक्ष, निरोगता, निडरता और एक गहरी समझ होती हैं वह प्रेम हैं। हम जो शरीर से करते हैं वो मोह हैं क्योंकि हम सिर्फ शरीर देखते है पर प्रेम, प्रेम तो आत्मा से आत्मा का होता हैं जहा कोई भी भेदभाव नहीं होता। शरीर से चाहे आप कितने भी दूर हो परन्तु आत्मा, आत्मा के करीब होती हैं और यह, प्रेम होता हैं। पसंद करने में और प्रेम करने में धरती-आकाश का अंतर होता हैं।&amp;nbsp;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;जहा आप एक क्षण भी दूर नहीं रहते या आपकी सोच भी क्षण भर भी दूर नहीं रहती उनके विचारों से तो, यह प्रेम है।&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&amp;nbsp; जिसमे तड़प चाहे जितनी हो पर उदंडता बिलकुल भी न हो वह प्रेम हैं। जहा दूरियां कितनी भी हो पर वहाँ सहनशीलता हो वह प्रेम हैं। जहा आप पसंद करते हैं और उसे पाने की इच्छा करते हैं वो मोह हैं। और आप जो जैसा हैं और वैसे ही रूप में उसे चाहते हैं बिना बदलाव के बिना तुलना के और जो जहा है उसे उसी हाल में खुश देखना या उसकी ख़ुशी का ध्यान रखना उसका सम्मान करना स्वतंत्र छोड़ना ही प्रेम होता हैं। जिसे निस्वार्थ प्रेम कहते हैं। आप बुरी आदत बदलने में सहायता अवश्य कर सकते हैं पर पूर्ण सैय्यम के साथ तो वो प्रेम हैं। जो जानवर के स्वाभाव वाले व्यक्ति को भी इंसान बना देता हैं वो प्रेम हैं। जो स्वतंत्र है और रहता हैं हमेशा वो प्रेम हैं। मोह बांध के रखता हैं अच्छे बदलाव को कभी-कभी स्वीकार नहीं कर पता, जिसे खोने का डर हमेशा मन में पनपता हैं जिसमे खुद का स्वार्थ छिपा हुआ रहता हैं जो बंधन को पार नहीं करने देता वो मोह हैं। पर यदि आपकी मेहनत, धृढ़ विश्वास, समर्पण भाव हो, त्याग हो, अपने गुरु के प्रति, इष्ट के प्रति, अपने प्रेम के प्रति तो आपकी जीत अटल हैं। यदि आप जिस किसीको सच्चे ह्रदय से प्रेम करते हैं तो ऐसा हो ही नहीं सकता की वो आपके पास लौट कर न आएं। मोह बंधन में रखती हैं और प्रेम स्वतंत्र। मोह अपमान करता हैं और प्रेम सम्मान। मोह सीमा में रखता हैं और प्रेम सीमा पार होता हैं। मोह छलकपट से भरा होता हैं और प्रेम निश्चल रूप से। मोह बंधन बनाता हैं और प्रेम संबंध।&amp;nbsp;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;i&gt;&lt;b&gt;जिन्हे आप प्रेम करते है उन्हें स्वतंत्र छोड़ दीजिये जाने दीजिये, अगर उनका प्रेम भी सच्चा हैं तो वो हर परिस्थिती में अवश्य लौट कर आएगा।&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/b&gt;&lt;/i&gt;&lt;/span&gt;मोह आपको अंदर ही अंदर मारता हैं और प्रेम आपको जीना सिखाता हैं। प्रेम बहोत शक्तिशाली होता हैं। इसलिए इसे पाने वाला भी व्यक्ति उतना ही मजबूत होना चाहिए। और जो प्रेम करता है वो अपने आप ही मजबूत बन जाता हैं। उसमे वो सहनशीलता अपने आप ही प्रकट होती है। प्रेम को पाने के लिए बहोत तपस्या करनी पड़ती है जैसे की अपने तपोबल से, ध्यान से, ज्ञान से, शुद्ध विचार से, शुद्ध आचरण से शुद्ध कर्मो से और सेवा-भाव से, क्षमा करने से। और ये सब संभव हैं। प्रेम में आप यदि किसी जीव को आत्मा समझकर प्रेम करते हैं तो आप अध्यात्मिक हैं। क्योंकि अध्यात्म आत्मा से जुड़ा हुआ हैं। जहा अटूट विश्वास और प्रेम होता हैं।&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2021/06/adhyatmik-prem-kya-hain-.html&quot; style=&quot;margin-left: 1em; margin-right: 1em;&quot;&gt;&lt;img alt=&quot;आध्यात्मिक प्रेम क्या हैं ?&quot; border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;426&quot; data-original-width=&quot;640&quot; height=&quot;133&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEinBGUwJ7z9hveNxIypJ5O4k2J84wiiTsWl1uN86oRUgRscdT-l4x45UudihG_GIZuqsQVdxaDLMvYw68tYq0H2uc7n4-B8B3AAwIplEjI_ZDRTt2qSaKqQHcQrYXUJQiFdalS4CiYTJRT8/w200-h133/%25E0%25A4%2586%25E0%25A4%25A7%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25AF%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25A4%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25AE%25E0%25A4%25BF%25E0%25A4%2595-%25E0%25A4%25AA%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B0%25E0%25A5%2587%25E0%25A4%25AE-%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25AF%25E0%25A4%25BE-%25E0%25A4%25B9%25E0%25A5%2588%25E0%25A4%2582-3.jpg&quot; title=&quot;आध्यात्मिक प्रेम क्या हैं ?&quot; width=&quot;200&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;आत्मा का स्वाभाव गुण ही प्रेम हैं। तो आपकी आत्मा आपको वही ले जाएगी जहा उसे प्रेम महसूस होता हैं। एक बार यदि आपने जान लिया की आपका सत्य प्रेम क्या हैं? तो आप कभी भी क्षण भर दूर नहीं रहेंगे। मैं यहाँ आत्मा की बात कर रही हूँ शरीर की नहीं जब शरीर से मिलना हो तो वक्त पर आप मिल ही जायेंगे आपको नियति भी रोक नहीं पायेगी। प्रेम कोई दो चार दिन का खेल नहीं होता हैं, ये एक तपस्या और पूंजी होती हैं। और यह विश्वास से प्रकट होता हैं। इसलिए हर क्षण आप जिस रिश्ते में है उसे हर क्षण संभालना पड़ता हैं। ये हर दिन आपको करना पड़ेगा तभी ये सफल, अटूट, और अमर बनता हैं। प्रेम पवित्र गंगा हैं जो निरंतर आत्मा से बहता हैं। जिस दिन आपकी आत्मा जागरूक हो गयी तो सबसे पहले आप अपने विचारों को समझेंगे प्रेम करेंगे जो आप चाहेंगे वही दृष्टि आप अन्य लोगों के प्रति भी रखेंगे। आप हमेशा देने के विषय में सोचेंगे लेने के नहीं। और जिसने प्रेम पा ही लिया हैं तो फिर उसे किस बात की आवश्यकता होगी ?&amp;nbsp;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;प्रेम अपने आप में एक सम्पूर्णता हैं और ये एक जीवन में असंभव हैं।&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&amp;nbsp; पर जीवन के हर प्रतिक्षण में साक्षी भाव रहना की, जो कुछ भी हो रहा हैं उससे में परिचित हूँ और साक्षी भी। कई जनम आप अपना समर्पण भाव रखेंगे तभी ये पाप कर्मो को मिटाकर किसी एक जनम में आपके जीवन में उच्च कोटि का प्रेम प्राप्त होता हैं।&amp;nbsp;तब आपको प्रेम उपलब्ध होता हैं तब आपको इतनी मेहनत नहीं करनी पड़ेगी। अगर आपको ऐसा प्रेमी या प्रेमिका मिले हैं तो जाने मत देना सम्मान करना उनका वे सदैव आपको समर्पित रहेंगे ऐसा प्रेम यदि मिल गया तो समझ लेना बहोत तपस्या की थी किसी जनम में ऐसा उच्च प्रेम पाने के लिए और आपको वो मिल गया किसी ज़्यादा मेहनत किये।&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;यदि आपसे कोई भी चूक हो गयी हो और आपका मन अशांत हैं तो प्रायश्चित कीजिये वही प्रेम हैं किंतू यह प्रायश्चित भी पूर्ण समर्पित भाव से हो तो वो प्रेम है शुद्ध प्रेम है क्योंकि आपका मन शुद्ध हैं। किसीकी गलतियों को क्षमा कर देना ही प्रेम हैं चाहे वो कितना भी बड़ा पापी हो क्षमा करना आवश्यक हैं। क्योंकि आपकी गलतियों को भी भगवान क्षमा कर देते हैं तो हमने यह समझना चाहिए की हमारी गलतियों पर भगवान यदि माफ़ी देती हैं तो हमने भी सामने वाले को क्षमा कर देना चाहिए। क्यूंकि हम और आप उनके अंश हैं, और जिस दिन आप ये गुण जागरूक कर लेंगे उस दिन आप प्रेमी बन रहे हो या बन गए हो ऐसा समझिये। क्षमा, दया, करुणा यह सब प्रेम के रूप हैं और आत्मा के गुण हैं।&amp;nbsp;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;प्रेम को पाना कठिन नहीं पर प्रेम को समझना भी कठिन नहीं तो प्रेम बन जाना कठिन होता हैं और यही जीवन का सत्य हैं।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&amp;nbsp;संतों की नज़र में और मेरी नज़र में एक ही बात हैं की जहा प्रेम नहीं, सम्मान नहीं, आदर नहीं, इज़्ज़त नहीं वह क्षण भर भी नहीं रहना चाहिए। ऐसा न किया तो जीवन भर दुखी ही रहेंगे। परन्तु अपमान तो हमारे अपने ही सबसे ज़्यादा करते है पराये लोगों में इतना साहस कहा ? क्यूंकि आपमें वो क्षमता नहीं की किसी की उदांता को सहन कर सके मुंह तोड़ प्रेम से उत्तर दे सके इसलिए हम दुखी और मायूस हो जाते हैं और जीवन ऐसा ही दुःख देता हैं और वो चक्र ख़तम नहीं होता न होगा। यदि ख़तम हो जाएं तो फिर यह प्रेम की अनुभूति कहा से होगी? कैसे होगी ? बुराई होगी तभी तो अच्छाई का मतलब होगा। अन्यथा प्रेम अर्थ कहा समझ आएगा ? और जिसे प्रेम समझ आएं वो इंसान ही कहा रहा ? वो&amp;nbsp;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;तो नर मानव से महामानव बन जाता हैं नर से नारायण हो जाता हैं&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;तो बचता क्या हैं ? कुछ भी नहीं। और यदि आपमें वो क्षमता हैं की किसी की बदतमीज़ी, उदंडता सही जाएं तो यह &lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2020/10/adhyatma-parichay-akhand-anand-jeevan%20-post16.html&quot;&gt;&lt;b&gt;आध्यात्मिक &lt;/b&gt;&lt;/a&gt;प्रेम के बिना असंभव हैं। निरंतर खुदको भी और दूसरों को भी क्षमा करने की ताक़त सिर्फ और सिर्फ आध्यात्मिक प्रेम में होती हैं तभी आप किसी का मन परिवर्तित कर सकते हैं। तो प्रेम मांगिये नहीं प्रेम स्वयं बन जाइए, तब प्रेम आपके भीतर से अतः बहेगा। जो बात आपके पास नहीं हैं वो निर्माण कीजिये और औरो को भी बाँटिये। यही प्रेम हैं और यही अध्यात्म हैं। प्रेम और अध्यात्म के ऊपर चर्चा करना यह बहोत गहन अध्ययन हैं जिसे समझ आये उसी ही समझ आती हैं इस पर जितना बोलू या लिखू उतना काम हैं। पर विश्वास हैं मुझे की आपको प्रेम और अध्यात्म समझ में आया हो, यह मैंने एक कम शब्दों में बताने की कोशिश की हैं। यदि कोई भी परेशानी या तकलीफ हो तो बेझिझक मुझे यहाँ सन्देश छोड़ सकते हैं। और अगर आप निवांत में मुज़से कुछ पूछना चाहते हैं तो आप मुझे ईमेल से संपर्क कर सकते हैं। फेसबुक, इंस्टा, या पिनटेरेस्ट से आप जुड़ सकते हैं। आप सभी को यह शुभकामनाएं देती हूँ और यही प्रार्थना हैं मेरी की आप भी अपने आपको अध्यात्म रूप से मजबूत करने की कोशिश करें और उच्च कोटि का प्रेम शिवशक्ति सा प्रेम अपने जीवन में पाएं । अगले लेख में मैं कुंडलिनी षष्टचक्र का भेदन कैसे होता हैं ये विस्तार से बताने की कोशिश करुँगी विषय बहोत लम्बा होगा इसलिए अंकों की श्रृंखलाओं में लिखूंगी तो आप धैर्य बनाये रखे और मुज़से जुड़े रहिये। आगे भी इस लेख को अवश्य भेज दीजिये क्या पता किसी की सहायता हो जाएगी आपकी एक छोटी सी कोशिश से ? तो अब मैं अपने शब्दों को विराम और आपके किंमती समय को प्रणाम करते हुए आपसे विदा लेना चाहती हूँ। प्रभु आप सभी पर कृपा आशीर्वाद बनाये रखे, आनंदित रहिये ,प्रेम कीजिये स्वस्थ रहिये। आपके घर में बरकत रहे और आपका जीवन आबाद रहे।&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp;🙏&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&amp;nbsp;जय गुरुदेव, हर-हर महादेव।&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;🙏&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;</description><link>https://www.adhyatmikjagat69.co/2021/06/blog-post_5.html</link><author>noreply@blogger.com (Unknown)</author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEi8jOtKnTxRvnzCiG8KaJAsRYhSvmFx-7PTSAOLMnRWxIF1ArPXaBThC3WDfICfQLascYx1_W5U72A-b7qVJrkeKgujTYfK0qfAymRQwtyQmU9kpn7NteMmZRMNWbXDkptEStU-etGZS61z/s72-w200-h131-c/%25E0%25A4%2586%25E0%25A4%25A7%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25AF%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25A4%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25AE%25E0%25A4%25BF%25E0%25A4%2595-%25E0%25A4%25AA%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B0%25E0%25A5%2587%25E0%25A4%25AE-%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25AF%25E0%25A4%25BE-%25E0%25A4%25B9%25E0%25A5%2588%25E0%25A4%2582.jpg" height="72" width="72"/><thr:total>3</thr:total></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-8475792039111759199.post-2074385303383921322</guid><pubDate>Sat, 05 Jun 2021 09:55:00 +0000</pubDate><atom:updated>2023-02-16T13:19:00.723+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">अध्यात्म परिचय</category><title>आध्यात्मिक प्रेम क्या हैं ?</title><description>&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;b&gt;आप सभी का फिरसे ह्रदय से स्वागत करती हूँ और धन्यवाद् करती हूँ, की आप अपना किंमती समय निकाल कर यहाँ आध्यात्मिक जगत में आये। मुझे पूर्ण विश्वास हैं की आप इस कठिन समय में भी कुशल मंगल ही होंगे और अपना और अपनों का ख्याल भी रख रहे होंगे। आज कुछ अलग ही विषय लेकर आपके समक्ष हूँ। आज बस सोच ही रही थी की प्रेम क्या होता हैं? इस पर चर्चा की जाएं ताकि आप सभी को उचित मार्गदर्शन प्राप्त हो। और आप अपने जीवन के फैसले उचित कर सके इसी कामना से में ये लेख लिख रही हूँ। &lt;/b&gt;यदि आप ये पढ़ रहे हैं तो मैं आपसे कहूँगी की शांत चित्त होकर इस लेख को अपने अंतर उतारिए क्योंकि यह सिर्फ एक लेख नहीं अपितु एक ज्ञान हैं जो आपके जीवन में चल रही बाधाओं का एक मार्ग हैं। तो आज इस विषय को मैं बहोत सरल शब्द में आपको समझाने का प्रयास करुँगी। ऐसा सोचियेगा की कोई आपका गुरु ही आपको मार्ग दिखा रहा हैं। पर मैं कोई गुरु नहीं पर हाँ,&amp;nbsp; मैं गुरु की शिष्य अवश्य हूँ और मुझे शिष्य बनकर ही रहना हैं। मैं बस सीखना ही चाहती हूँ कोई गुरु नहीं बनना चाहती क्योंकि&amp;nbsp;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;गुरु एक बहोत ही विराट शब्द है जो ब्रह्माण्ड हैं&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;और मैं उनका अंश मात्र। इसलिए मुझे गुरु न कहे बस आप अपने इष्ट का या गुरू&amp;nbsp; का ध्यान कर के ही इस लेख को पढ़िए तो आपको लगेगा की आपके इष्ट या गुरु ने आपको मार्ग दिखाया हैं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;तो समझते हैं की प्रेम क्या हैं ? प्रेम एक ऐसी बात हैं जो हर कोई अपने जीवन में पाना चाहता हैं। परंतू हर किसी के नसीब में सत्य प्रेम नसीब नहीं होता। यदि प्रेम मिल भी जाएं तो क्या आप उस प्रेम को अपने जीवन में धारण कर पातें हो? जिसे आप प्रेम करते हो वो किस प्रकार का प्रेम हैं ? ये प्रेम हैं भी या नहीं? की मोह हैं ? क्या आप प्रेम को समझते हो? कितनी गहराई से प्रेम को समजझते हो? क्या आपमें वो क्षमता हैं की प्रेम को जीवन भर समर्पित रहे? और ये ढाई आखर प्रेम के क्या हैं? हर किसी के लिए प्रेम की व्याख्या और सोच अलग-अलग हैं। कोई रिश्तों में ढूंढता हैं तो कोई किसी आदत में और कोई किसी वस्तु में। पर वास्तविक में प्रेम क्या हैं? क्या आपने प्रेम किया हैं? और वो भी पूर्ण समर्पित भाव से, पूर्ण श्रद्धा से? चाहे वो किसी से भी हो इष्ट से हो, गुरु से हो, जानवर से हो व्यक्ति से हो या आत्मा से हो। यदि नहीं तो आप अवश्य ही दुखी हो और यदि हाँ, तो फिर आप जीवन के सबसे सौभाग्यशाली व्यक्ति हैं क्योंकि प्रेम ही एक मात्र ऐसा पर्याय हैं की, बड़े से बड़े तकलीफों को और जटिल से जटिल स्वाभाव वाले&amp;nbsp; या कठिन से कठिन रास्तें भी आसान हो जाते हैं।वास्तविक में प्रेम जब हम अपने आपसे करते है तब वो प्रेम होता है इसे स्वार्थ नहीं प्रेम कहते है, क्योंकि स्वार्थ सिर्फ स्वयं का होता हैं परंतु प्रेम जब आप अपने आप से करते हो तो आप दूसरों को भी अपने भाति समझने लगते हो। कैसे कह सकता हैं कोई की प्रेम दुःख देता हैं?&lt;i&gt;&lt;b&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&amp;nbsp;प्रेम नहीं हमारी आशाएं और इच्छाएं हमें दुःख देती हैं।&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/i&gt;जिस तरह से हम किसी&amp;nbsp; की आशाएं और इच्छाएं पूरी नहीं कर पाते तो फिर हम किसी और से यह आशा क्यों लगाते हैं की वो हमारे अनुसार चलेगा? हमारी आशाएं और इच्छाएं पूरी करेगा ? सोचिए क्या यह सत्य नहीं हैं ? क्या आप ऐसा नहीं करते ? इसलिए तो आप प्रेम बाहर खोज रहे हैं किन्तु वह तो आपके भीतर हैं।&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2021/06/adhyatmik-prem-kya-hain-.html&quot; style=&quot;margin-left: 1em; margin-right: 1em; text-align: center;&quot;&gt;&lt;img alt=&quot;आध्यात्मिक प्रेम क्या हैं ?&quot; border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;498&quot; data-original-width=&quot;740&quot; height=&quot;131&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEi8jOtKnTxRvnzCiG8KaJAsRYhSvmFx-7PTSAOLMnRWxIF1ArPXaBThC3WDfICfQLascYx1_W5U72A-b7qVJrkeKgujTYfK0qfAymRQwtyQmU9kpn7NteMmZRMNWbXDkptEStU-etGZS61z/w200-h131/%25E0%25A4%2586%25E0%25A4%25A7%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25AF%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25A4%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25AE%25E0%25A4%25BF%25E0%25A4%2595-%25E0%25A4%25AA%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B0%25E0%25A5%2587%25E0%25A4%25AE-%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25AF%25E0%25A4%25BE-%25E0%25A4%25B9%25E0%25A5%2588%25E0%25A4%2582.jpg&quot; title=&quot;आध्यात्मिक प्रेम क्या हैं ?&quot; width=&quot;200&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;ब्रह्माण्ड में परमेश्वर के बाद यदि पवित्र और सत्य कुछ हैं तो वो निश्चित और निश्चित प्रेम ही हैं। इस ब्रह्माण्ड में एक मात्र प्रेम ही सत्य है, पवित्र हैं, शीतल है, शांत हैं, आनंद हैं, क्षमा, सहनशील और मोक्ष हैं। और ये &lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2020/10/adhyatma-ka-parichay-anand-prem-post.html&quot;&gt;&lt;b&gt;आध्यात्मिक&lt;/b&gt;&lt;/a&gt; के बिना असंभव हैं। और ये सारे लक्षण और गुण अध्यात्म से हैं। मैं वारंवार यही दोहराती रहती हूँ की अध्यात्म के बिना प्रेम को पाना, समझना और जीवन में प्रेम को धारण करना असंभव हैं। प्रेम एक ही होता हैं पर उसके कई रूप होते हैं जैसे की पहले भी बताया की किसी व्यक्ति से, इष्ट से, वस्तु से, आदत से और इत्यादि। किन्तु यह मोह है प्रेम नहीं। कैसे ? अब आप कहेंगे की प्रेम तो हैं आप ऐसे कैसे कह सकते हैं की प्रेम नहीं ? हाँ , बताइयें ? क्या आप जो प्रेम समझ रहे हैं क्या वो प्रेम हैं? नहीं ये प्रेम नहीं ये मोह हैं, पसंद हैं, आदत हैं, या फिर वासना हैं। ऐसा क्यों कहा मैंने ? आईए ,समझाती हूँ।&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;div&gt;&lt;b&gt;&lt;span style=&quot;color: #990000;&quot;&gt;&lt;u&gt;कबीर&lt;/u&gt;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&amp;nbsp;जी कहते हैं : &lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&quot; पोथी पढ़ पढ़ जग मुवा पंडित हुआ न कोय, ढाई आखर प्रेम का पढ़े सो पंडित होय। &quot;&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;p&gt;&lt;span&gt;चाहे आप कितने भी ज्ञानी हो, ध्यानी हो, योगी हो, या बुद्धिमान हो अगर आपने प्रेम नहीं किया तो, आपका जीवन ही व्यर्थ हैं ज्ञान पढ़ लेने से कोई पंडित नहीं होता पर जो पूर्ण ह्रदय से प्रेम करता हैं जो भावनाओं को समझता हैं वही सच्चा प्रेमी हैं वही पंडित हैं, यही प्रेम हैं। प्रेम एक नशा होता हैं जो भीतर से आनंद को बहाता हैं जो एक समाधी अवस्था जैसी हालत होती हैं। प्रेमी मतलब संत जो कभी बाहर तो कभी भीतर इस आनंद में बहते हैं, और प्रेम ही आपको समाधी की और मोक्ष की और ले जाता हैं सत्य के तरफ ले जाता हैं। तभी तो संत हमेशा समाधी में ही रहते थे। जो दो आत्मा के बीच प्रेम अनुभव होता हैं वही तो स्वयं के भीतर प्रेम अनुभव होता हैं। क्या आपने कभी संतों की आँखें देखी हैं ? देखना कभी उनकी आखें हमेशा मांथे पर ही रहती थी। इसका क्या अर्थ हैं ? अर्थ ये की वे प्रेम को, आनंद को अनुभव कर रहे हैं। और वो अपने आपमें ही पूर्ण बनने की कोशिश कर रहे हैं। वो समझते नहीं थे प्रेम को, प्रेम स्वयं उन्हें समझता था। वे बस प्रेम को बिना समझे उसमे डूब रहे थे खोए जा रहे थे वे स्वयं प्रेम बनने जा रहे थे इसलिए तो इतनी सहनशीलता उनमे कूट-कूट के भरी थी। और जग ने कभी भी संतो को जीने नहीं दिया न कभी जग समझ पाया न उन्हें समझाने दिया। इसलिए वे अपनी बस्ती कही दूर बसा लेते थे। और आज भी यही हो रहा हैं। कहा किसी को कोई जीने दे रहा हैं सब स्वार्थ से ही तो भरे हैं।&amp;nbsp;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;प्रेम कहा हैं? वो भीतर हैं।&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&amp;nbsp; और&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span&gt;प्रेम कभी भी पूर्ण नहीं होता हैं उसे पूर्ण बनाना पड़ता हैं प्रेम संपूर्ण नहीं हैं यदि वो संपूर्ण हो जाएं तो फिर जीवन जीने का अर्थ ही कहा बचता हैं। इसीलिए तो, शिवशक्ति भी एक दूसरे से पूर्ण हैं। राधाकृष्ण भी एक दूजे से पूर्ण हैं यदि भगवान ही पूर्ण नहीं प्रेम में तो आप और हम कैसे पूर्ण हो सकते हैं? कामवासना की इच्छा ख़तम हो सकती हैं किंतू&amp;nbsp; प्रेम नहीं। वो अनंत हैं निरंकार हैं निर्मयी हैं। इसलिए प्रेम ढाई आखर का हैं मतलब अपूर्ण हैं इसलिए तो वो तीन नहीं है। जिसे आपका पूरक ही पूर्ण करता हैं और जिसने सत्य को समझ लिया वो फिर कहा बच पाता हैं ? क्योंकि यही तो अंत हैं। और सृष्टि का अंत तो हैं ही नहीं, बस परिवर्तन ही चलता रहता हैं और उसे ही अनंत कहते हैं। जो ख़त्म न हो, जो पूर्ण भी न हो और जो अपूर्ण भी न हो वही तो ब्रह्मा हैं प्रेम हैं। प्रेम में आप पूर्ण हो ही नहीं सकते इसे पूरा करने के लिए आपकी दूजी आत्मा ही आपको पूर्ण करती हैं। और&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2021/05/judwa-lau-twin-flame-kya-hain-kitne-prakar-ki-hoti-hain-post.html&quot;&gt;&lt;i&gt;&lt;b&gt; जुड़वाँ आत्मा क्या हैं?&lt;/b&gt;&lt;/i&gt;&lt;/a&gt; ये मैं पिछले लेख में बता चूकी हूँ। इस विषय में बहोत कुछ तथ्य आपके समक्ष खुलूँगी।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span&gt;चाहे आप कितने भी ध्यानी, ज्ञानी, बुद्ध, साधक, तपस्वी या सेवाभावी हो अगर आपने प्रेम नहीं किया तो आपने प्रेम नहीं समझा। परन्तु प्रेम कभी समझा नहीं जाता वो बस हो जाता हैं और उसका होना ही अस्तित्व का होना हैं। प्रेम यदि समझ जाएं तो फिर वो प्रेम कैसा ? प्रेम को समझना चाहते हो तो बस अपने आप को समझिये भावनाओ को जानिए। खो जाइए उसमे डूब जाईये, अगर प्रेम को समझने गए तो फिर वो प्रेम नहीं ज्ञान, ध्यान और समाधी होती हैं। फिर आप प्रेमी कहा? परमेश्वर को पाना सरल नहीं क्योंकि परमेश्वर ही प्रेम हैं। परन्तु भगवन या अपने प्रेमी को पाना है तो प्रेम बन जाईये फिर देखिये की कैसे कोई आपको दर्शन नहीं देता ?&amp;nbsp;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;बुद्ध ने ध्यान से अपना मार्ग पाया सत्य पाया और मीरा ने प्रेम से अपने गिरधर नागर कृष्ण को पाया।&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&amp;nbsp;और दोनों भी मोक्ष को प्राप्त हुए बस उनके तरीके और रास्ते अलग थे पर प्रेम के बिना तो ह्रदय चक्र भी खुलना असंभव हैं। मीरा ने सिर्फ प्रेम किया इसलिए वो और उनका प्रेम अमर है। यदि प्रेम चाहते हैं तो समर्पण और त्याग के बिना यह संभव ही नहीं। क्या आपमें वो मीरा की भक्ति हैं ?&lt;/span&gt;&lt;span&gt;&amp;nbsp;जूनून हैं ? समर्पण हैं ? त्याग हैं ? तो फिर आप निश्चित ही प्रेमी हैं। और जो प्रेमी बन जाते हैं वो अपने आप में ही मस्त रहते हैं वो किसी भी बंधन में नहीं रहता उसके लिए सारे बंधन टूट जाते हैं मतलब मोह छूट जाता हैं। इसे विज्ञानं में समझौ तो ऐसा की प्रेमी के तरफ जो प्रेम होता है वो हॉर्मोन्स के वजह से होता है और जो अपने प्रियजन होते हैं उनके लिए हमारा प्रेम खून से डी.एन.ए से होता हैं। इसी वजह से ये प्रेम एक नशा होता हैं। तो निरंतर उसके हृदय में सिर्फ प्रेम का ही चिंतन और प्रेमी ही रहता हैं, चाहे वो प्रेमी किसी भी रूप में हो कोई भी हो कोई फरक नहीं पड़ता। एक बार आत्मा ने उसे स्वीकार कर लिया तो जग का क्या काम? एक बार कोई प्रेमी बन गया तो वो बंधन नहीं सम्बन्ध बनाता हैं। किन्तु उसके लिए कोई बंधन नहीं होते। यहाँ मैं सम्बन्ध मतलब व्याक्ति की द्रिष्टी से नहीं आत्मा के द्रिष्टी से बता रही हूँ, काम वासना के द्रिष्टी से नहीं। कामवासना भी प्रेम में ही आती हैं किन्तु जहा शुद्ध प्रेम होता हैं वह कामवासना एक साधना के रूप में परिवर्तित होती हैं। और काम वासना एक तंत्र हैं जो सबसे शुद्ध हैं। इस विषय पर भी में अवश्य प्रकाश डालूंगी ताकि आप काम वासना और प्रेम को ठीक से समझ सके और उस अनुसार खुद को ढाल सके। कामवासना शरीर की भूक और आवश्यकता होती हैं। जो अनिवार्य भी हैं क्योंकि सृष्टि का आधार ही कामवासना से हैं तो ये गंधा विषय कहा ? परन्तु प्रेम आत्मा की&amp;nbsp; भूक होती हैं जो कभी भी खत्म नहीं होती क्योंकि आत्मा अमर है तो उसके गुण भी अमर हैं उसके साथ। जो कार्य किसी मार्ग से संभव नहीं वो कार्य प्रेम से संभव हैं। इसलिए प्रेम के बिना आपको प्रभु दर्शन होना या उन्हें पाना असंभव हैं।&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&amp;nbsp;यदि आप तपस्या करते हैं और उसमे श्रद्धा ही नहीं समर्पण भाव ही नहीं त्याग नहीं प्रेम नहीं तो फिर आपकी तपस्या व्यर्थ हैं।&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&amp;nbsp; किसीको समझना कठिन नहीं बहोत सरल हैं। कैसे? बस अपने आप को समझ जाइये आप दूसरों को समझ जायेंगे। और रही बात ईश्वर को पाने की या प्रेमी-प्रेमिका को पाने की तो पहले उनके जैसा बन जाइये तो कठिनाई कहा रहती हैं ? ईश्वर को पाना हो तो उनके जैसा बनना आवश्यक हैं तभी आप उन तक पोहोचेंगे। इसलिए बस प्रेम कीजिये बिना छल कपट किये। हम किसी के पीछे या आगे छल कपट करते हैं तो दरअसल हम उन्हें ही नहीं अपितु अपने आप से छल कर रहे हैं। क्योंकि अंतरात्मा का यह स्वाभाव हैं ही नहीं। इसलिए अंतर् आत्मा ही हमें शिक्षा देती हैं। तो कभी प्रेम में मिलावट मत करना तभी आपका प्रेम आपके पास आपके साथ होगा।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2021/06/adhyatmik-prem-kya-hain-.html&quot; style=&quot;margin-left: 1em; margin-right: 1em;&quot;&gt;&lt;img alt=&quot;आध्यात्मिक प्रेम क्या हैं ?&quot; border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;281&quot; data-original-width=&quot;500&quot; height=&quot;113&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj1-5WZKvtXov-p_gORdKYdXhAJ4JzRdHdU62JilNYhBua4lHIOnK6D198MT-OtXqEAIlyDTV4H860CZZ7BJeuDn9_JaOUiWeuezUzXw-gap4OGdfZENdMmEUbDX7R8J_B6V9lT7KVTnf6w/w200-h113/%25E0%25A4%2586%25E0%25A4%25A7%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25AF%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25A4%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25AE%25E0%25A4%25BF%25E0%25A4%2595-%25E0%25A4%25AA%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B0%25E0%25A5%2587%25E0%25A4%25AE-%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25AF%25E0%25A4%25BE-%25E0%25A4%25B9%25E0%25A5%2588%25E0%25A4%2582-2.jpg&quot; title=&quot;आध्यात्मिक प्रेम क्या हैं ?&quot; width=&quot;200&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;b&gt;प्रेम या मोह&amp;nbsp;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;: प्रेम को पाने के लिए तो भगवन भी मनुष्य का जन्म कितनी बार ले चुके हैं, उसे क्या आवश्यकता थी की वो किसी को अपना भक्त बनाये या उसे प्रेम करें ? क्योंकि यही तो सत्य हैं, प्रेम। क्या वो यह सोचते हैं की ये नींच जात का हैं मैं नहीं जाऊंगा मेरी तपस्या भांग होगी मैं मैला हो जाऊंगा ? तो फिर वो भगवान कैसे ? यदि ऐसा होता तो वाल्मीक ऋषि ऋषि न कहलाते तुलसीदास संत न कहलाते। कहने का ताप्तर्य यह की प्रेम सबके लिए एक सामान है और प्रेम को सब एक समान हैं। जब भगवान किसी भक्त के घर जाने से या उसे अपनाने से नहीं चुके तो हम और आप किस अहंकार में जी रहे हैं ? शरीर के अहंकार में? क्या ये सब आपके साथ रहेगा ? यह तो नश्वर हैं पर आत्मा तो अमर है जो सत्य हैं, प्रेम हैं। और प्रेम किसी जाती से, धरम से, और संप्रदाय से, सम्बंधित नहीं होता हैं। वह सिर्फ आत्मा से सम्बंधित होता हैं। और आत्मा हर जनम यही प्रेम गुण ले आएँगी अपने साथ पर शरीर तो अलग ही रहेगा न क्या स्त्री ? क्या पुरुष? वो तो हर जनम प्रेम करेंगी। जातियों को छोड़िये खुद को जागरूक कीजिये की पहला धर्म हमारा मानव है तो मानव ही मानव से पहचाने प्रेम ही प्रेम को जाने तब आप देखेंगे की घृणा में कोई अर्थ नहीं प्रेम ही सत्य हैं। इसलिए कहा क्योंकी आप निरंतर किसी को प्रेम कर सकते हैं पर घृणा नहीं और घृणा हमारे मष्तिष्ख से उत्पन्न होती हैं और वो चंचल होती हैं और प्रेम ह्रदय से होता है आत्मा से होता हैं इसलिए प्रेम अनंत हैं। कभी न ख़तम होने वाला उसे अनंत कहते हैं। हम जिस जाती में आते हैं उस जाती धरम का भी भला करें और अन्य जाती धर्मो का भी भला करे। पर पहले मानव बने और वो संभव हैं प्रेम से अध्यात्म से। ज़रा और गहरायी में लेकर चलती हूँ आपको, बताइए पिछले जन्म में आप क्या थे क्या आपको ज्ञात हैं ? आज जिस किसी भी जाती धर्म में आप हैं और किसी विरुद्ध जाती का आप अपमान करते हैं तो क्या आपको पता चले की आप भी किसी जन्म में उसी जाती धर्म में पैदा हुए थे जिसकी आप आज घृणा कर रहे हैं, तो क्या होगा ? तो फिर आप अपने आपसे भी घृणा करेंगे ? नहीं न ? तो जिस तरह से आप अपने आपको क्षमा करते हैं प्रेम करते हैं उसी प्रकार से औरों को भी क्षमा और प्रेम कीजिये। आप देखेंगे की धीरे धीरे आप प्रेम होते जा रहे हैं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;क्या ये संभव हैं? जी संभव हैं तभी तो कह रही हूँ। मेरी न सुने अपनी आत्मा की सुनिए क्या वो प्रेम नहीं चाहती ? तो फिर किस बात को लेकर इतने चिंतित हैं आप? जिसे आप पाने की कोशिश करते हैं और वो जो आपके पास नहीं हैं तो, आपको उस बात के तरफ एक अजीब सा खिंचाव होता है। जो कभी आपको शांत रहने ही नहीं देता। यह जो जलन, ईर्ष्या, भेदभाव, अविश्वास, तड़प, बेचैनी, बेकरारी, चिंता, अपना बनाने की पागलपंती, जूनून, झटपटाहट, डर, घुस्सा, वासना और रोग यह सब विकार मोह में होता हैं।और इनमे से आप भी इस विकार के आदि होंगे। क्योंकि हम मनुष्य हैं और ये स्वभाविक हैं। पर हम बदल सकते हैं यदि हम बदलना चाहे तो। और जहा सुकून, शांती, अभय, आनंद, चिंतन, क्षमा, गहरा विश्वास, सहनशीलता, समर्पण, त्याग, मोक्ष, निरोगता, निडरता और एक गहरी समझ होती हैं वह प्रेम हैं। हम जो शरीर से करते हैं वो मोह हैं क्योंकि हम सिर्फ शरीर देखते है पर प्रेम, प्रेम तो आत्मा से आत्मा का होता हैं जहा कोई भी भेदभाव नहीं होता। शरीर से चाहे आप कितने भी दूर हो परन्तु आत्मा, आत्मा के करीब होती हैं और यह, प्रेम होता हैं। पसंद करने में और प्रेम करने में धरती-आकाश का अंतर होता हैं।&amp;nbsp;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;जहा आप एक क्षण भी दूर नहीं रहते या आपकी सोच भी क्षण भर भी दूर नहीं रहती उनके विचारों से तो, यह प्रेम है।&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&amp;nbsp; जिसमे तड़प चाहे जितनी हो पर उदंडता बिलकुल भी न हो वह प्रेम हैं। जहा दूरियां कितनी भी हो पर वहाँ सहनशीलता हो वह प्रेम हैं। जहा आप पसंद करते हैं और उसे पाने की इच्छा करते हैं वो मोह हैं। और आप जो जैसा हैं और वैसे ही रूप में उसे चाहते हैं बिना बदलाव के बिना तुलना के और जो जहा है उसे उसी हाल में खुश देखना या उसकी ख़ुशी का ध्यान रखना उसका सम्मान करना स्वतंत्र छोड़ना ही प्रेम होता हैं। जिसे निस्वार्थ प्रेम कहते हैं। आप बुरी आदत बदलने में सहायता अवश्य कर सकते हैं पर पूर्ण सैय्यम के साथ तो वो प्रेम हैं। जो जानवर के स्वाभाव वाले व्यक्ति को भी इंसान बना देता हैं वो प्रेम हैं। जो स्वतंत्र है और रहता हैं हमेशा वो प्रेम हैं। मोह बांध के रखता हैं अच्छे बदलाव को कभी-कभी स्वीकार नहीं कर पता, जिसे खोने का डर हमेशा मन में पनपता हैं जिसमे खुद का स्वार्थ छिपा हुआ रहता हैं जो बंधन को पार नहीं करने देता वो मोह हैं। पर यदि आपकी मेहनत, धृढ़ विश्वास, समर्पण भाव हो, त्याग हो, अपने गुरु के प्रति, इष्ट के प्रति, अपने प्रेम के प्रति तो आपकी जीत अटल हैं। यदि आप जिस किसीको सच्चे ह्रदय से प्रेम करते हैं तो ऐसा हो ही नहीं सकता की वो आपके पास लौट कर न आएं। मोह बंधन में रखती हैं और प्रेम स्वतंत्र। मोह अपमान करता हैं और प्रेम सम्मान। मोह सीमा में रखता हैं और प्रेम सीमा पार होता हैं। मोह छलकपट से भरा होता हैं और प्रेम निश्चल रूप से। मोह बंधन बनाता हैं और प्रेम संबंध।&amp;nbsp;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;i&gt;&lt;b&gt;जिन्हे आप प्रेम करते है उन्हें स्वतंत्र छोड़ दीजिये जाने दीजिये, अगर उनका प्रेम भी सच्चा हैं तो वो हर परिस्थिती में अवश्य लौट कर आएगा।&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/b&gt;&lt;/i&gt;&lt;/span&gt;मोह आपको अंदर ही अंदर मारता हैं और प्रेम आपको जीना सिखाता हैं। प्रेम बहोत शक्तिशाली होता हैं। इसलिए इसे पाने वाला भी व्यक्ति उतना ही मजबूत होना चाहिए। और जो प्रेम करता है वो अपने आप ही मजबूत बन जाता हैं। उसमे वो सहनशीलता अपने आप ही प्रकट होती है। प्रेम को पाने के लिए बहोत तपस्या करनी पड़ती है जैसे की अपने तपोबल से, ध्यान से, ज्ञान से, शुद्ध विचार से, शुद्ध आचरण से शुद्ध कर्मो से और सेवा-भाव से, क्षमा करने से। और ये सब संभव हैं। प्रेम में आप यदि किसी जीव को आत्मा समझकर प्रेम करते हैं तो आप अध्यात्मिक हैं। क्योंकि अध्यात्म आत्मा से जुड़ा हुआ हैं। जहा अटूट विश्वास और प्रेम होता हैं।&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2021/06/adhyatmik-prem-kya-hain-.html&quot; style=&quot;margin-left: 1em; margin-right: 1em;&quot;&gt;&lt;img alt=&quot;आध्यात्मिक प्रेम क्या हैं ?&quot; border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;426&quot; data-original-width=&quot;640&quot; height=&quot;133&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEinBGUwJ7z9hveNxIypJ5O4k2J84wiiTsWl1uN86oRUgRscdT-l4x45UudihG_GIZuqsQVdxaDLMvYw68tYq0H2uc7n4-B8B3AAwIplEjI_ZDRTt2qSaKqQHcQrYXUJQiFdalS4CiYTJRT8/w200-h133/%25E0%25A4%2586%25E0%25A4%25A7%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25AF%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25A4%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25AE%25E0%25A4%25BF%25E0%25A4%2595-%25E0%25A4%25AA%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B0%25E0%25A5%2587%25E0%25A4%25AE-%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25AF%25E0%25A4%25BE-%25E0%25A4%25B9%25E0%25A5%2588%25E0%25A4%2582-3.jpg&quot; title=&quot;आध्यात्मिक प्रेम क्या हैं ?&quot; width=&quot;200&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;आत्मा का स्वाभाव गुण ही प्रेम हैं। तो आपकी आत्मा आपको वही ले जाएगी जहा उसे प्रेम महसूस होता हैं। एक बार यदि आपने जान लिया की आपका सत्य प्रेम क्या हैं? तो आप कभी भी क्षण भर दूर नहीं रहेंगे। मैं यहाँ आत्मा की बात कर रही हूँ शरीर की नहीं जब शरीर से मिलना हो तो वक्त पर आप मिल ही जायेंगे आपको नियति भी रोक नहीं पायेगी। प्रेम कोई दो चार दिन का खेल नहीं होता हैं, ये एक तपस्या और पूंजी होती हैं। और यह विश्वास से प्रकट होता हैं। इसलिए हर क्षण आप जिस रिश्ते में है उसे हर क्षण संभालना पड़ता हैं। ये हर दिन आपको करना पड़ेगा तभी ये सफल, अटूट, और अमर बनता हैं। प्रेम पवित्र गंगा हैं जो निरंतर आत्मा से बहता हैं। जिस दिन आपकी आत्मा जागरूक हो गयी तो सबसे पहले आप अपने विचारों को समझेंगे प्रेम करेंगे जो आप चाहेंगे वही दृष्टि आप अन्य लोगों के प्रति भी रखेंगे। आप हमेशा देने के विषय में सोचेंगे लेने के नहीं। और जिसने प्रेम पा ही लिया हैं तो फिर उसे किस बात की आवश्यकता होगी ?&amp;nbsp;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;प्रेम अपने आप में एक सम्पूर्णता हैं और ये एक जीवन में असंभव हैं।&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&amp;nbsp; पर जीवन के हर प्रतिक्षण में साक्षी भाव रहना की, जो कुछ भी हो रहा हैं उससे में परिचित हूँ और साक्षी भी। कई जनम आप अपना समर्पण भाव रखेंगे तभी ये पाप कर्मो को मिटाकर किसी एक जनम में आपके जीवन में उच्च कोटि का प्रेम प्राप्त होता हैं।&amp;nbsp;तब आपको प्रेम उपलब्ध होता हैं तब आपको इतनी मेहनत नहीं करनी पड़ेगी। अगर आपको ऐसा प्रेमी या प्रेमिका मिले हैं तो जाने मत देना सम्मान करना उनका वे सदैव आपको समर्पित रहेंगे ऐसा प्रेम यदि मिल गया तो समझ लेना बहोत तपस्या की थी किसी जनम में ऐसा उच्च प्रेम पाने के लिए और आपको वो मिल गया किसी ज़्यादा मेहनत किये।&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;यदि आपसे कोई भी चूक हो गयी हो और आपका मन अशांत हैं तो प्रायश्चित कीजिये वही प्रेम हैं किंतू यह प्रायश्चित भी पूर्ण समर्पित भाव से हो तो वो प्रेम है शुद्ध प्रेम है क्योंकि आपका मन शुद्ध हैं। किसीकी गलतियों को क्षमा कर देना ही प्रेम हैं चाहे वो कितना भी बड़ा पापी हो क्षमा करना आवश्यक हैं। क्योंकि आपकी गलतियों को भी भगवान क्षमा कर देते हैं तो हमने यह समझना चाहिए की हमारी गलतियों पर भगवान यदि माफ़ी देती हैं तो हमने भी सामने वाले को क्षमा कर देना चाहिए। क्यूंकि हम और आप उनके अंश हैं, और जिस दिन आप ये गुण जागरूक कर लेंगे उस दिन आप प्रेमी बन रहे हो या बन गए हो ऐसा समझिये। क्षमा, दया, करुणा यह सब प्रेम के रूप हैं और आत्मा के गुण हैं।&amp;nbsp;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;प्रेम को पाना कठिन नहीं पर प्रेम को समझना भी कठिन नहीं तो प्रेम बन जाना कठिन होता हैं और यही जीवन का सत्य हैं।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&amp;nbsp;संतों की नज़र में और मेरी नज़र में एक ही बात हैं की जहा प्रेम नहीं, सम्मान नहीं, आदर नहीं, इज़्ज़त नहीं वह क्षण भर भी नहीं रहना चाहिए। ऐसा न किया तो जीवन भर दुखी ही रहेंगे। परन्तु अपमान तो हमारे अपने ही सबसे ज़्यादा करते है पराये लोगों में इतना साहस कहा ? क्यूंकि आपमें वो क्षमता नहीं की किसी की उदांता को सहन कर सके मुंह तोड़ प्रेम से उत्तर दे सके इसलिए हम दुखी और मायूस हो जाते हैं और जीवन ऐसा ही दुःख देता हैं और वो चक्र ख़तम नहीं होता न होगा। यदि ख़तम हो जाएं तो फिर यह प्रेम की अनुभूति कहा से होगी? कैसे होगी ? बुराई होगी तभी तो अच्छाई का मतलब होगा। अन्यथा प्रेम अर्थ कहा समझ आएगा ? और जिसे प्रेम समझ आएं वो इंसान ही कहा रहा ? वो&amp;nbsp;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;तो नर मानव से महामानव बन जाता हैं नर से नारायण हो जाता हैं&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;तो बचता क्या हैं ? कुछ भी नहीं। और यदि आपमें वो क्षमता हैं की किसी की बदतमीज़ी, उदंडता सही जाएं तो यह &lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2020/10/adhyatma-parichay-akhand-anand-jeevan%20-post16.html&quot;&gt;&lt;b&gt;आध्यात्मिक &lt;/b&gt;&lt;/a&gt;प्रेम के बिना असंभव हैं। निरंतर खुदको भी और दूसरों को भी क्षमा करने की ताक़त सिर्फ और सिर्फ आध्यात्मिक प्रेम में होती हैं तभी आप किसी का मन परिवर्तित कर सकते हैं। तो प्रेम मांगिये नहीं प्रेम स्वयं बन जाइए, तब प्रेम आपके भीतर से अतः बहेगा। जो बात आपके पास नहीं हैं वो निर्माण कीजिये और औरो को भी बाँटिये। यही प्रेम हैं और यही अध्यात्म हैं। प्रेम और अध्यात्म के ऊपर चर्चा करना यह बहोत गहन अध्ययन हैं जिसे समझ आये उसी ही समझ आती हैं इस पर जितना बोलू या लिखू उतना काम हैं। पर विश्वास हैं मुझे की आपको प्रेम और अध्यात्म समझ में आया हो, यह मैंने एक कम शब्दों में बताने की कोशिश की हैं। यदि कोई भी परेशानी या तकलीफ हो तो बेझिझक मुझे यहाँ सन्देश छोड़ सकते हैं। और अगर आप निवांत में मुज़से कुछ पूछना चाहते हैं तो आप मुझे ईमेल से संपर्क कर सकते हैं। फेसबुक, इंस्टा, या पिनटेरेस्ट से आप जुड़ सकते हैं। आप सभी को यह शुभकामनाएं देती हूँ और यही प्रार्थना हैं मेरी की आप भी अपने आपको अध्यात्म रूप से मजबूत करने की कोशिश करें और उच्च कोटि का प्रेम शिवशक्ति सा प्रेम अपने जीवन में पाएं । अगले लेख में मैं कुंडलिनी षष्टचक्र का भेदन कैसे होता हैं ये विस्तार से बताने की कोशिश करुँगी विषय बहोत लम्बा होगा इसलिए अंकों की श्रृंखलाओं में लिखूंगी तो आप धैर्य बनाये रखे और मुज़से जुड़े रहिये। आगे भी इस लेख को अवश्य भेज दीजिये क्या पता किसी की सहायता हो जाएगी आपकी एक छोटी सी कोशिश से ? तो अब मैं अपने शब्दों को विराम और आपके किंमती समय को प्रणाम करते हुए आपसे विदा लेना चाहती हूँ। प्रभु आप सभी पर कृपा आशीर्वाद बनाये रखे, आनंदित रहिये ,प्रेम कीजिये स्वस्थ रहिये। आपके घर में बरकत रहे और आपका जीवन आबाद रहे।&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp;🙏&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&amp;nbsp;जय गुरुदेव, हर-हर महादेव।&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;🙏&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;</description><link>https://www.adhyatmikjagat69.co/2021/06/adhyatmik-prem-kya-hain-.html</link><author>noreply@blogger.com (Unknown)</author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEi8jOtKnTxRvnzCiG8KaJAsRYhSvmFx-7PTSAOLMnRWxIF1ArPXaBThC3WDfICfQLascYx1_W5U72A-b7qVJrkeKgujTYfK0qfAymRQwtyQmU9kpn7NteMmZRMNWbXDkptEStU-etGZS61z/s72-w200-h131-c/%25E0%25A4%2586%25E0%25A4%25A7%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25AF%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25A4%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25AE%25E0%25A4%25BF%25E0%25A4%2595-%25E0%25A4%25AA%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B0%25E0%25A5%2587%25E0%25A4%25AE-%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25AF%25E0%25A4%25BE-%25E0%25A4%25B9%25E0%25A5%2588%25E0%25A4%2582.jpg" height="72" width="72"/><thr:total>3</thr:total></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-8475792039111759199.post-7841795681489516460</guid><pubDate>Fri, 28 May 2021 16:30:00 +0000</pubDate><atom:updated>2024-09-28T15:50:35.181+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">जुड़वाँ लौ (ट्विन फ्लेम )</category><title>जुड़वाँ  लौ / ट्विन फ्लेम क्या हैं ? और कितने प्रकार की होती हैं ?</title><description>&lt;div dir=&quot;ltr&quot; style=&quot;text-align: left;&quot; trbidi=&quot;on&quot;&gt;आपका ह्रदय के गहराई से बहोत-बहोत स्वागत करती हूँ मेरे&amp;nbsp;&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2020/10/adhyatma-ka-parichay-anand-prem-post.html&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span&gt;अध्यात्मिक&lt;/span&gt;&amp;nbsp;जगत &lt;/b&gt;&lt;/a&gt;के ज्ञान भरेलेख में।&amp;nbsp;सबसे पहले तो आपका ह्रदय से धन्यवाद। अपना कीमती समय निकाल कर आप इस लेख पर आयें है।&amp;nbsp; मुझे विश्वास हैं की आप सब कुशल मंगल होंगे। आपने मेरे पिछले लेख में जाना होगा की &lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2020/10/adhyatma-parichay-akhand-anand-jeevan%20-post16.html&quot;&gt;&lt;b&gt;आध्यात्मिक परिचय और अखंड आनद क्या हैं? &lt;/b&gt;&lt;/a&gt;आज मैं कुछ ऐसा विषय लेकर आयी हूँ जो शायद आपने सुना न होगा या फिर आप परिचित होगे। &lt;b&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;i&gt;जुड़वाँ आत्मा या जुड़वाँ लौ या ट्विन फ्लेम&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/i&gt;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;आज इसी विषय पर चर्चा होगी की क्या होते है ये जुड़वाँ आत्मा ? क्यों&amp;nbsp;और कैसे होते हैं ? इस विषय में बहुत ऐसी जानकारी हैं जो आपको पता होना अत्यंत आवश्यक हैं। तो आईये जानते हैं और समझते हैं इस पवित्र बंधन के विषय को।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div dir=&quot;ltr&quot; style=&quot;text-align: left;&quot; trbidi=&quot;on&quot;&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;table align=&quot;center&quot; cellpadding=&quot;0&quot; cellspacing=&quot;0&quot; class=&quot;tr-caption-container&quot; style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto;&quot;&gt;&lt;tbody&gt;&lt;tr&gt;&lt;td style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;b style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: #ffd966;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2021/05/judwa-lau-twin-flame-kya-hain-kitne-prakar-ki-hoti-hain-post.html&quot;&gt;&lt;img alt=&quot;जुड़वाँ लौ / ट्विन फ्लेम क्या हैं ? और कितने प्रकार की होती हैं ?&quot; border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;1600&quot; data-original-width=&quot;2000&quot; height=&quot;256&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjEd8smUL5k7ESjwGuwE9COaPapQJ_cbMSRY5JxDVtJW-k-LnRd-UsWYvomei87JYs9-zBI4k7n9x90_oYnOWH-Eiewa_CMpS5cV4Q-YoOcdmSxj7Nob4a1vCVp8cCLFDhS6UsIqoPPymir/w320-h256/%25E0%25A4%259C%25E0%25A5%2581%25E0%25A5%259C%25E0%25A4%25B5%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%2581-%25E0%25A4%2586%25E0%25A4%25A4%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25AE%25E0%25A4%25BE-%25E0%25A4%25AF%25E0%25A4%25BE-%25E0%25A4%259C%25E0%25A5%2581%25E0%25A5%259C%25E0%25A4%25B5%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%2581+%25E0%25A4%25B2%25E0%25A5%258C-%25E0%25A4%259F%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B5%25E0%25A4%25BF%25E0%25A4%25A8+%25E0%25A4%25AB%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B2%25E0%25A5%2587%25E0%25A4%25AE-%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25AF%25E0%25A4%25BE-%25E0%25A4%25B9%25E0%25A5%2588%25E0%25A4%2582.jpg&quot; title=&quot;जुड़वाँ लौ / ट्विन फ्लेम क्या हैं ? और कितने प्रकार की होती हैं ?&quot; width=&quot;320&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;&lt;tr&gt;&lt;td class=&quot;tr-caption&quot; style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span style=&quot;color: #ffd966;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2021/05/judwa-lau-twin-flame-kya-hain-kitne-prakar-ki-hoti-hain-post.html&quot;&gt;पृथ्वी पर जन्म लेने से पहले&amp;nbsp;जुड़वाँ आत्मा का स्वर्ग से विरह:&amp;nbsp;&lt;/a&gt;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;&lt;/tbody&gt;&lt;/table&gt;&lt;div&gt;&lt;h3 style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;span&gt;&lt;span&gt;जुड़वाँ आत्मा या जुड़वाँ लौ&amp;nbsp;(ट्विन फ्लेम ) क्या हैं ?&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/h3&gt;&lt;div&gt;हमने जुड़वाँ बच्चे सुने हैं जो माँ के कोंख से जनम लेते हैं ,किन्तु ये जुड़वाँ आत्मा नहीं होती पर इनके कुछ आदत या शक्ल एक जैसी होती हैं मतलब ये शारीरिक रूप से एक जैसे हो सकते हैं। मगर ये जुड़वाँ आत्मा के&amp;nbsp;विषय से अलग हैं, जुड़वाँ आत्मा एक आत्मा के दो टुकड़े होती हैं मतलब आधे आधे हिस्सों में बाटी होती हैं। ये कब होता हैं &lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;जब कोई भी आत्मा&amp;nbsp;पृथ्वी पर जन्म लेती&amp;nbsp;हैं तब उसकी आत्मा आधे भाग में बट&amp;nbsp;जाती हैं&amp;nbsp;और ये अपना आध्यात्मिक स्तर&amp;nbsp;यानि की मोक्ष पाने के लिए या फिर कुछ बड़ा और पृथ्वी के अच्छे परिवर्तन के लिए&amp;nbsp;और प्रेम सीखाने आती हैं।&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;color: #e06666;&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;ये आत्माएं कुछ ख़ास किस्म की होती हैं। यह आत्मा अपने साथ साथ अन्य लोगों का भी भला करने आती हैं। कहते हैं की न जाने कितने जनम से ये साथ होती हैं मिलते हैं और बिछड़ जाते हैं। जब तक की इनका कर्म&amp;nbsp;ख़तम न हो तब तक इनको मोक्ष प्राप्त नहीं होता। इनकी मोक्ष प्राप्ति के लिए ही इनकी जैसे ही दूसरी आत्मा इनके जीवन में प्रवेश करती हैं। इनको शिवशक्ति का प्रतिक भी कहाँ गया हैं ,जैसे शिव के बिना शक्ति नहीं शक्ति बिना शिव नहीं वैसे ही ये एक दूसरे के बिना एक नहीं। हम जैसे शिव शक्ति को अर्धनरेश्वर के रूप में देखते हैं।अक्सर इन्हें ऊर्जा के स्वरुप में देखा जाता हैं।&lt;span&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt; &lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;इनको भी शिव शक्ति का स्वरुप कहा जाता हैं&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;जैसे की हमारे शरीर का बायां भाग शक्ति यानि स्त्री का होता हैं और दाया भाग शिव का यानि पुरुष का इन्ही को हम ऊर्जा के स्तर रूप से जानते हैं और मैं इसी ऊर्जा की बात कर रही हूँ। परंतू इनके अंदर जो ऊर्जा स्तिर नहीं रहती या फिर इनमें जो कमियाँ और इच्छायें होती हैं ये उन्ही को पूरा करने आते हैं। मतलब ये उन्हें जागरूक करने आते हैं, अपना मकसद याद दिलाने आते हैं।&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;&lt;table align=&quot;center&quot; cellpadding=&quot;0&quot; cellspacing=&quot;0&quot; class=&quot;tr-caption-container&quot; style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto;&quot;&gt;&lt;tbody&gt;&lt;tr&gt;&lt;td style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2021/05/judwa-lau-twin-flame-kya-hain-kitne-prakar-ki-hoti-hain-post.html&quot; style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto;&quot;&gt;&lt;img alt=&quot;जुड़वाँ लौ / ट्विन फ्लेम क्या हैं ? और कितने प्रकार की होती हैं ?&quot; border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;1080&quot; data-original-width=&quot;1080&quot; height=&quot;320&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgphgPxiz1OKKi9LCPzqBXXxuA1q8tur7n4YbI07GBTn9HSAUUvJ639SoUyLs4jM9Gik8-GefFj4FoAMrj3NC-uEKIBlH7A3AuRtlW_ZL-nV1jSb_63OmnsRq91Hw45rfMBh0n5dh6r5x1_/w320-h320/shivshakti-ardhanarishwar.jpg&quot; title=&quot;जुड़वाँ लौ / ट्विन फ्लेम क्या हैं ? और कितने प्रकार की होती हैं ?&quot; width=&quot;320&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;&lt;tr&gt;&lt;td class=&quot;tr-caption&quot; style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;b&gt;शिवशक्ति-अर्धनारीश्वर-कामेश्वर&amp;nbsp;&lt;/b&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;&lt;/tbody&gt;&lt;/table&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;h3 style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000; font-size: medium;&quot;&gt;कैसे और क्यों होता&amp;nbsp;हैं इनका जन्म ?&lt;/span&gt;&lt;/h3&gt;&lt;div&gt;जब एक आत्मा को अगर मोक्ष पाना हो या उसके कर्म पूर्ण करने के लिए पृथ्वी पर आके&amp;nbsp;वापिस वही जाना हो जहा से वो आयी हैं और कर्म ख़त्म करके कुछ बड़ा या कुछ ख़ास मकसद से ये जन्म लेती हैं तब उस दौरान एक आत्मा दूसरे हिस्से में बट जाती हैं। ये एक तो साथ में जन्म लेती है मगर अलग अलग घर या जाती में या फिर आगे पींछे जन्म लेती हैं। ये देवदूत के श्रेणी में आते हैं ज्यादातर ऐसा देखा गया हैं।&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #e69138;&quot;&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;भगवान जब किसी ख़ास मकसद के लिए पृथ्वी पर&amp;nbsp;संतुलन के लिए कोई बड़ा काम करना होता हैं तब ये आत्माएं जन्म लेती हैं। &lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;और अपना काम पूरा करती हैं चाहें जो हो पर कुछ ऐसी आत्माएं भी होती हैं जो यही पृथ्वी पर&amp;nbsp;रह जाती हैं वो इसलिए क्यूँकि इनके कर्म ख़त्म नहीं हुए होते हैं या फिर इनकी कुण्डलिनी शक्ति जागरूक नहीं होती हैं या फिर इनको याद ही नहीं रहता की किस मकसद के लिए ये पृथ्वी पर आएं थे। कहते हैं की ये &lt;b&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&quot;दो जिस्म एक जान होते हैं &quot;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;color: #e69138;&quot;&gt; &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;और ये सही भी हैं इनको बचपन से&amp;nbsp;हमेशा से ही अंदर ही अंदर एक खालीपन सा महसूस होता रहता हैं और इनका वो खालीपन सिर्फ और सिर्फ इनकी दूसरी आत्मा ही पूरा कर सकती हैं चाहे इनकी ज़िन्दगी में कोई कितना भी अच्छा इंसान आये इनके अंदर का खालीपन और जीवन का मकसद अधूरा ही रहता है। हमारे अंदर कोई बात पूरी करने की इच्छा होगी या हमारा मकसद होगा ये उन्हें पूरा करने के लिए आती हैं मतलब की ये हमारे अंदर की सोयी हुई शक्तियों को जगाने आती हैं ,और हमें हर दशासे सम्पन्न करने के लिए आती हैं।&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2021/05/judwa-lau-twin-flame-kya-hain-kitne-prakar-ki-hoti-hain-post.html&quot; style=&quot;margin-left: 1em; margin-right: 1em;&quot;&gt;&lt;img alt=&quot;जुड़वाँ  लौ / ट्विन फ्लेम क्या हैं ? और कितने प्रकार की होती हैं ?&quot; border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;1080&quot; data-original-width=&quot;1080&quot; height=&quot;200&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEghhsdHGIGmolIGZ1cQC0_lcSi3CdNvmFj8KMO0ypJYkrv4l_YYp7sYjoyXrKPy9YKn8LjfFJkmY3BiQJ_vom5NJLaTsYpkGmUl4G6HuxoYahwt-tOSuDeqFmv5dbbcAFwykQzG8bAOain_/w200-h200/%25E0%25A4%259C%25E0%25A5%2581%25E0%25A5%259C%25E0%25A4%25B5%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%2581+-%25E0%25A4%25B2%25E0%25A5%258C+-%25E0%25A4%259F%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B5%25E0%25A4%25BF%25E0%25A4%25A8-%25E0%25A4%25AB%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B2%25E0%25A5%2587%25E0%25A4%25AE-%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25AF%25E0%25A4%25BE-%25E0%25A4%25B9%25E0%25A5%2588%25E0%25A4%2582-%25E0%25A4%2594%25E0%25A4%25B0-%25E0%25A4%2595%25E0%25A4%25BF%25E0%25A4%25A4%25E0%25A4%25A8%25E0%25A5%2587-%25E0%25A4%25AA%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B0%25E0%25A4%2595%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25B0-%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%2580-%25E0%25A4%25B9%25E0%25A5%258B%25E0%25A4%25A4%25E0%25A5%2580-%25E0%25A4%25B9%25E0%25A5%2588%25E0%25A4%2582-3.jpg&quot; title=&quot;जुड़वाँ  लौ / ट्विन फ्लेम क्या हैं ? और कितने प्रकार की होती हैं ?&quot; width=&quot;200&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;&lt;b style=&quot;font-size: large; text-align: left;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;&lt;b style=&quot;font-size: large; text-align: left;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;कितने प्रकार के रिश्ते होते हैं जुड़वाँ आत्मा के ?&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;कहते हैं की इस दुनिया में सिर्फ १,४४,००० ही जुड़वाँ आत्मा होती हैं।&amp;nbsp; मगर ऐसा नहीं हैं, हम सबकी जुड़वाँ आत्मा होती हैं पर अपनी दूसरी जुड़वाँ आत्मा से मिलना हमारे कर्म और हमारे इच्छा पर निर्भर होता हैं। जब आत्मा बहुत सारे जनम लेके थक जाती हैं और जब उसका मन&amp;nbsp;इस दुनियादारी से उठने लगता हैं और उसका झुकाव आध्यात्मिक के तरफ मुड़ने लगता हैं, या&lt;span style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt; &lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;फिर अब उसके बुरे&amp;nbsp;कर्म खत्म होने लगते हैं तब हमारी जुड़वाँ आत्मा हमारे जीवन में प्रवेश करती हैं।&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt; जब ये दूसरी आत्मा आपके&amp;nbsp;सामने आएगी तो आप खुदबखुद पहचान जाओगे। इसके विषय में आपको अगली लेख में बताउंगी। ये किसी भी रूप में आपके सामने आ सकती हैं। कभी कोई ऐसा भी रिश्ता होता हैं जो दुनिया की नज़रों में गलत हैं। जैसे की स्त्री की आत्मा पुरुष में या पुरुष की आत्मा स्त्री में या तो दोनों शारीरिक से स्त्री होगी या पुरुष पुरुष होते&amp;nbsp;हैं। और कोई ऐसा भी रिश्ता होता है, जहा&amp;nbsp;पुरुष की आत्मा स्त्री में होती हैं&amp;nbsp;और उसका साथी पुरुष हो सकता हैं। और इसका उल्टा भी होता हैं मतलब विरुद्ध शरीर में विरुद्ध आत्मा होती हैं। ऐसे में इनके रिश्ते को समाज स्वीकृति नहीं देता और ये बेचारे एक तो ज़िन्दगी भर अधूरे रहते हैं और ज़िन्दगी भर दुःख तकलीफ़ओ से गुजरती रहती हैं, या फिर दोनों पुरे भी होते हैं। ऐसे में एक तो फिर से इन्हे जनम लेना पड़ता हैं और अपने कर्मो को काटना पड़ता हैं तब शायद ये मिल पातें हैं। यहाँ बतादू की मैं आत्मा मतलब एक ऊर्जा जो अनंत हैं ब्रह्मा है ब्रह्माण्ड हैं तो उसे शरीर की जरुरत पड़ती हैं तो हमारा शरीर मिट्टी (पृथ्वी), आकाश, वायु, अग्नि, जल, जो पांच तत्वों से बानी हैं। और शरीर को लिंग होता हैं आत्मा को नहीं यहाँ&amp;nbsp; आत्मा को किसी लिंग से वास्ता नहीं हैं और नहीं उसने कभी भेद-भाव किया हैं। ये तो मनुष्यों ने अपने हिसाब से नीतिनियम, कायदे, परंपरा और भेद-भाव बना दिए हैं। जिसके चलते आत्मा को न जाने कितने बार जन्मा लेना पड़ता है अपने मोक्ष के लिए।&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000; text-align: left;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt; आत्मा सिर्फ प्रेम, आनंद, सत्य, श्वेत, स्वतंत्रता, शांत, स्वच्छ, और निरमयी निरंकार होती हैं।&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;text-align: left;&quot;&gt; कभी कभी तो हमारी जुड़वाँ आत्मा ऐसे वक़्त पे आती हैं हमारी ज़िन्दगी&amp;nbsp; में जब हम शादी शुदा हो या बच्चे होते हैं या फिर दोनों के उम्र का फासला होता है, तब भी समाज ऐसे रिश्तों को स्वीकृति नहीं देता। पर इनका मिलना और एक हो पाना बहुत मुश्किल होता हैं। इनके जीवन में आये दिन बहोत संगर्ष करना पड़ता हैं अपने आपको हर परिस्थिती में खुद को समतोल बनाये रखना अपने अंदर से भी और बाहेर परिस्थितियों में भी। और ज़्यादा तर ये आत्माएं अलग अलग जाती संप्रदाय में जनम लेती है ,ऐसा क्यों ? क्योंकी ये एकता और प्रेम की परिभाषा सीखाने आती हैं और बड़ी कठिनाईयों से गुजर कर एक साथ आकर समाज में&amp;nbsp;प्रेम और शांति&amp;nbsp;की स्थापना&amp;nbsp;करते हैं।&lt;/span&gt;&lt;b style=&quot;text-align: left;&quot;&gt; &lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;i&gt;इनके कुछ&amp;nbsp; उदहारण हैं शिवशक्ति ,राधाकृष्ण, सियाराम, रोमियो - जूलिएट, लैलामजनु, हीर-राँझा , सोहनी -महिलवाल और भी न जाने कितने ऐसे जुड़वा आत्मा थे इतिहास में, और आज भी कई ऐसे जोड़ी हैं.&amp;nbsp;&lt;/i&gt;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; कुछ सामने आते हैं कुछ अपना रिश्ता छुपाकर रखते हैं। तो ये थी आज की जानकारी आशा करती हु की आपको बहोत कुछ ज्ञात हो गया हैं। अगर आपके साथ कोई ऐसे लोग हैं तो उनकी मदद करें क्योंकी ये देवदूत होते हैं मनुष्य के रूप में और ये बड़े ही उदार स्वाभाव के और समज़दार होते है। इनकी मदद करके आप भी अपने जीवन में खुद की मदद कर रहे हैं। और वो कहते है की, किसीकी जोड़ी जोड़ने में भाग लेना किसी के तोड़ने में नहीं। अगर आप इनकी सहायता करते हैं तो आपके जीवन में भी आपका प्रेम अवश्य आपको प्राप्त होगा। यह प्रेम बहोत उच्च कोटि का होता हैं, इनका प्रेम अध्यात्म से जुड़ा हुआ होता है इसलिए इनका प्रेम आध्यात्मिक होता हैं. और ऐसा प्रेम पाने के लिए महसूस करने के लिए आपका आध्यात्मिक होना अनिवार्य हैं। आध्यात्मिक के बिना ये संभव ही नहीं। तो अगली लेख में मैं आपको बताउंगी की कैसे हम जान सकते हैं की हमारी जुड़वाँ आत्मा हमसे मिल चुकी है की नहीं ? और भी बहुत कुछ इस विषय पर चर्चा करेंगे। आपको ये जानना जरुरी हैं की &lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2020/10/muladhar-chakra-varnan.html&quot;&gt;&lt;b&gt;कुण्डलिनी जागरूक कैसे करते हैं? मूलाधार चक्र क्या हैं ? &lt;/b&gt;&lt;/a&gt;&amp;nbsp;क्योंकी अगर आप अपने जुड़वाँ आत्मा से मिल चुके है तो आपको बाकि सात चक्र कैसे नियंत्रित करे आपको पता होना चाहिए। अब मैं अपने शब्दों को विराम और आपके किंमती समय को प्रणाम करते हुए आपसे फिर लौटने की स्वीकृति लेती हूँ। तब तक आप सोचिये की क्या आप अपनी जुड़वाँ आत्मा से मिल चुके हैं या नहीं ?&amp;nbsp;&lt;span&gt;आप सभी पर प्रभु की कृपा हो&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span&gt;आपके घर में बरकत रहे और आपका जीवन आबाद रहें।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;h3 style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;span&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;🙏&amp;nbsp;&lt;span style=&quot;color: red;&quot;&gt;जय गुरुदेव ,हर -हर महादेव।&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;🙏&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/h3&gt;
&lt;gwmw style=&quot;display: none;&quot;&gt;&lt;/gwmw&gt;&lt;/div&gt;</description><link>https://www.adhyatmikjagat69.co/2021/05/blog-post.html</link><author>noreply@blogger.com (Unknown)</author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjEd8smUL5k7ESjwGuwE9COaPapQJ_cbMSRY5JxDVtJW-k-LnRd-UsWYvomei87JYs9-zBI4k7n9x90_oYnOWH-Eiewa_CMpS5cV4Q-YoOcdmSxj7Nob4a1vCVp8cCLFDhS6UsIqoPPymir/s72-w320-h256-c/%25E0%25A4%259C%25E0%25A5%2581%25E0%25A5%259C%25E0%25A4%25B5%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%2581-%25E0%25A4%2586%25E0%25A4%25A4%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25AE%25E0%25A4%25BE-%25E0%25A4%25AF%25E0%25A4%25BE-%25E0%25A4%259C%25E0%25A5%2581%25E0%25A5%259C%25E0%25A4%25B5%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%2581+%25E0%25A4%25B2%25E0%25A5%258C-%25E0%25A4%259F%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B5%25E0%25A4%25BF%25E0%25A4%25A8+%25E0%25A4%25AB%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B2%25E0%25A5%2587%25E0%25A4%25AE-%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25AF%25E0%25A4%25BE-%25E0%25A4%25B9%25E0%25A5%2588%25E0%25A4%2582.jpg" height="72" width="72"/><thr:total>0</thr:total></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-8475792039111759199.post-512174154464137347</guid><pubDate>Fri, 28 May 2021 16:30:00 +0000</pubDate><atom:updated>2023-01-17T13:41:03.625+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">जुड़वाँ लौ (ट्विन फ्लेम )</category><title>जुड़वाँ  लौ / ट्विन फ्लेम क्या हैं ? और कितने प्रकार की होती हैं ?</title><description>&lt;div dir=&quot;ltr&quot; style=&quot;text-align: left;&quot; trbidi=&quot;on&quot;&gt;आपका ह्रदय के गहराई से बहोत-बहोत स्वागत करती हूँ मेरे&amp;nbsp;&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2020/10/adhyatma-ka-parichay-anand-prem-post.html&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span&gt;अध्यात्मिक&lt;/span&gt;&amp;nbsp;जगत &lt;/b&gt;&lt;/a&gt;के ज्ञान भरेलेख में।&amp;nbsp;सबसे पहले तो आपका ह्रदय से धन्यवाद। अपना कीमती समय निकाल कर आप इस लेख पर आयें है।&amp;nbsp; मुझे विश्वास हैं की आप सब कुशल मंगल होंगे। आपने मेरे पिछले लेख में जाना होगा की &lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2020/10/adhyatma-parichay-akhand-anand-jeevan%20-post16.html&quot;&gt;&lt;b&gt;आध्यात्मिक परिचय और अखंड आनद क्या हैं? &lt;/b&gt;&lt;/a&gt;आज मैं कुछ ऐसा विषय लेकर आयी हूँ जो शायद आपने सुना न होगा या फिर आप परिचित होगे। &lt;b&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;i&gt;जुड़वाँ आत्मा या जुड़वाँ लौ या ट्विन फ्लेम&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/i&gt;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;आज इसी विषय पर चर्चा होगी की क्या होते है ये जुड़वाँ आत्मा ? क्यों&amp;nbsp;और कैसे होते हैं ? इस विषय में बहुत ऐसी जानकारी हैं जो आपको पता होना अत्यंत आवश्यक हैं। तो आईये जानते हैं और समझते हैं इस पवित्र बंधन के विषय को।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div dir=&quot;ltr&quot; style=&quot;text-align: left;&quot; trbidi=&quot;on&quot;&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;table align=&quot;center&quot; cellpadding=&quot;0&quot; cellspacing=&quot;0&quot; class=&quot;tr-caption-container&quot; style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto;&quot;&gt;&lt;tbody&gt;&lt;tr&gt;&lt;td style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;b style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: #ffd966;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2021/05/judwa-lau-twin-flame-kya-hain-kitne-prakar-ki-hoti-hain-post.html&quot;&gt;&lt;img alt=&quot;जुड़वाँ लौ / ट्विन फ्लेम क्या हैं ? और कितने प्रकार की होती हैं ?&quot; border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;1600&quot; data-original-width=&quot;2000&quot; height=&quot;256&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjEd8smUL5k7ESjwGuwE9COaPapQJ_cbMSRY5JxDVtJW-k-LnRd-UsWYvomei87JYs9-zBI4k7n9x90_oYnOWH-Eiewa_CMpS5cV4Q-YoOcdmSxj7Nob4a1vCVp8cCLFDhS6UsIqoPPymir/w320-h256/%25E0%25A4%259C%25E0%25A5%2581%25E0%25A5%259C%25E0%25A4%25B5%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%2581-%25E0%25A4%2586%25E0%25A4%25A4%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25AE%25E0%25A4%25BE-%25E0%25A4%25AF%25E0%25A4%25BE-%25E0%25A4%259C%25E0%25A5%2581%25E0%25A5%259C%25E0%25A4%25B5%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%2581+%25E0%25A4%25B2%25E0%25A5%258C-%25E0%25A4%259F%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B5%25E0%25A4%25BF%25E0%25A4%25A8+%25E0%25A4%25AB%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B2%25E0%25A5%2587%25E0%25A4%25AE-%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25AF%25E0%25A4%25BE-%25E0%25A4%25B9%25E0%25A5%2588%25E0%25A4%2582.jpg&quot; title=&quot;जुड़वाँ लौ / ट्विन फ्लेम क्या हैं ? और कितने प्रकार की होती हैं ?&quot; width=&quot;320&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;&lt;tr&gt;&lt;td class=&quot;tr-caption&quot; style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span style=&quot;color: #ffd966;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2021/05/judwa-lau-twin-flame-kya-hain-kitne-prakar-ki-hoti-hain-post.html&quot;&gt;पृथ्वी पर जन्म लेने से पहले&amp;nbsp;जुड़वाँ आत्मा का स्वर्ग से विरह:&amp;nbsp;&lt;/a&gt;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;&lt;/tbody&gt;&lt;/table&gt;&lt;div&gt;&lt;h3 style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;span&gt;&lt;span&gt;जुड़वाँ आत्मा या जुड़वाँ लौ&amp;nbsp;(ट्विन फ्लेम ) क्या हैं ?&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/h3&gt;&lt;div&gt;हमने जुड़वाँ बच्चे सुने हैं जो माँ के कोंख से जनम लेते हैं ,किन्तु ये जुड़वाँ आत्मा नहीं होती पर इनके कुछ आदत या शक्ल एक जैसी होती हैं मतलब ये शारीरिक रूप से एक जैसे हो सकते हैं। मगर ये जुड़वाँ आत्मा के&amp;nbsp;विषय से अलग हैं, जुड़वाँ आत्मा एक आत्मा के दो टुकड़े होती हैं मतलब आधे आधे हिस्सों में बाटी होती हैं। ये कब होता हैं &lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;जब कोई भी आत्मा&amp;nbsp;पृथ्वी पर जन्म लेती&amp;nbsp;हैं तब उसकी आत्मा आधे भाग में बट&amp;nbsp;जाती हैं&amp;nbsp;और ये अपना आध्यात्मिक स्तर&amp;nbsp;यानि की मोक्ष पाने के लिए या फिर कुछ बड़ा और पृथ्वी के अच्छे परिवर्तन के लिए&amp;nbsp;और प्रेम सीखाने आती हैं।&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;color: #e06666;&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;ये आत्माएं कुछ ख़ास किस्म की होती हैं। यह आत्मा अपने साथ साथ अन्य लोगों का भी भला करने आती हैं। कहते हैं की न जाने कितने जनम से ये साथ होती हैं मिलते हैं और बिछड़ जाते हैं। जब तक की इनका कर्म&amp;nbsp;ख़तम न हो तब तक इनको मोक्ष प्राप्त नहीं होता। इनकी मोक्ष प्राप्ति के लिए ही इनकी जैसे ही दूसरी आत्मा इनके जीवन में प्रवेश करती हैं। इनको शिवशक्ति का प्रतिक भी कहाँ गया हैं ,जैसे शिव के बिना शक्ति नहीं शक्ति बिना शिव नहीं वैसे ही ये एक दूसरे के बिना एक नहीं। हम जैसे शिव शक्ति को अर्धनरेश्वर के रूप में देखते हैं।अक्सर इन्हें ऊर्जा के स्वरुप में देखा जाता हैं।&lt;span&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt; &lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;इनको भी शिव शक्ति का स्वरुप कहा जाता हैं&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;जैसे की हमारे शरीर का बायां भाग शक्ति यानि स्त्री का होता हैं और दाया भाग शिव का यानि पुरुष का इन्ही को हम ऊर्जा के स्तर रूप से जानते हैं और मैं इसी ऊर्जा की बात कर रही हूँ। परंतू इनके अंदर जो ऊर्जा स्तिर नहीं रहती या फिर इनमें जो कमियाँ और इच्छायें होती हैं ये उन्ही को पूरा करने आते हैं। मतलब ये उन्हें जागरूक करने आते हैं, अपना मकसद याद दिलाने आते हैं।&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;&lt;table align=&quot;center&quot; cellpadding=&quot;0&quot; cellspacing=&quot;0&quot; class=&quot;tr-caption-container&quot; style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto;&quot;&gt;&lt;tbody&gt;&lt;tr&gt;&lt;td style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2021/05/judwa-lau-twin-flame-kya-hain-kitne-prakar-ki-hoti-hain-post.html&quot; style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto;&quot;&gt;&lt;img alt=&quot;जुड़वाँ लौ / ट्विन फ्लेम क्या हैं ? और कितने प्रकार की होती हैं ?&quot; border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;1080&quot; data-original-width=&quot;1080&quot; height=&quot;320&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgphgPxiz1OKKi9LCPzqBXXxuA1q8tur7n4YbI07GBTn9HSAUUvJ639SoUyLs4jM9Gik8-GefFj4FoAMrj3NC-uEKIBlH7A3AuRtlW_ZL-nV1jSb_63OmnsRq91Hw45rfMBh0n5dh6r5x1_/w320-h320/shivshakti-ardhanarishwar.jpg&quot; title=&quot;जुड़वाँ लौ / ट्विन फ्लेम क्या हैं ? और कितने प्रकार की होती हैं ?&quot; width=&quot;320&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;&lt;tr&gt;&lt;td class=&quot;tr-caption&quot; style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;b&gt;शिवशक्ति-अर्धनारीश्वर-कामेश्वर&amp;nbsp;&lt;/b&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;&lt;/tbody&gt;&lt;/table&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;h3 style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000; font-size: medium;&quot;&gt;कैसे और क्यों होता&amp;nbsp;हैं इनका जन्म ?&lt;/span&gt;&lt;/h3&gt;&lt;div&gt;जब एक आत्मा को अगर मोक्ष पाना हो या उसके कर्म पूर्ण करने के लिए पृथ्वी पर आके&amp;nbsp;वापिस वही जाना हो जहा से वो आयी हैं और कर्म ख़त्म करके कुछ बड़ा या कुछ ख़ास मकसद से ये जन्म लेती हैं तब उस दौरान एक आत्मा दूसरे हिस्से में बट जाती हैं। ये एक तो साथ में जन्म लेती है मगर अलग अलग घर या जाती में या फिर आगे पींछे जन्म लेती हैं। ये देवदूत के श्रेणी में आते हैं ज्यादातर ऐसा देखा गया हैं।&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #e69138;&quot;&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;भगवान जब किसी ख़ास मकसद के लिए पृथ्वी पर&amp;nbsp;संतुलन के लिए कोई बड़ा काम करना होता हैं तब ये आत्माएं जन्म लेती हैं। &lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;और अपना काम पूरा करती हैं चाहें जो हो पर कुछ ऐसी आत्माएं भी होती हैं जो यही पृथ्वी पर&amp;nbsp;रह जाती हैं वो इसलिए क्यूँकि इनके कर्म ख़त्म नहीं हुए होते हैं या फिर इनकी कुण्डलिनी शक्ति जागरूक नहीं होती हैं या फिर इनको याद ही नहीं रहता की किस मकसद के लिए ये पृथ्वी पर आएं थे। कहते हैं की ये &lt;b&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&quot;दो जिस्म एक जान होते हैं &quot;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;color: #e69138;&quot;&gt; &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;और ये सही भी हैं इनको बचपन से&amp;nbsp;हमेशा से ही अंदर ही अंदर एक खालीपन सा महसूस होता रहता हैं और इनका वो खालीपन सिर्फ और सिर्फ इनकी दूसरी आत्मा ही पूरा कर सकती हैं चाहे इनकी ज़िन्दगी में कोई कितना भी अच्छा इंसान आये इनके अंदर का खालीपन और जीवन का मकसद अधूरा ही रहता है। हमारे अंदर कोई बात पूरी करने की इच्छा होगी या हमारा मकसद होगा ये उन्हें पूरा करने के लिए आती हैं मतलब की ये हमारे अंदर की सोयी हुई शक्तियों को जगाने आती हैं ,और हमें हर दशासे सम्पन्न करने के लिए आती हैं।&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2021/05/judwa-lau-twin-flame-kya-hain-kitne-prakar-ki-hoti-hain-post.html&quot; style=&quot;margin-left: 1em; margin-right: 1em;&quot;&gt;&lt;img alt=&quot;जुड़वाँ  लौ / ट्विन फ्लेम क्या हैं ? और कितने प्रकार की होती हैं ?&quot; border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;1080&quot; data-original-width=&quot;1080&quot; height=&quot;200&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEghhsdHGIGmolIGZ1cQC0_lcSi3CdNvmFj8KMO0ypJYkrv4l_YYp7sYjoyXrKPy9YKn8LjfFJkmY3BiQJ_vom5NJLaTsYpkGmUl4G6HuxoYahwt-tOSuDeqFmv5dbbcAFwykQzG8bAOain_/w200-h200/%25E0%25A4%259C%25E0%25A5%2581%25E0%25A5%259C%25E0%25A4%25B5%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%2581+-%25E0%25A4%25B2%25E0%25A5%258C+-%25E0%25A4%259F%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B5%25E0%25A4%25BF%25E0%25A4%25A8-%25E0%25A4%25AB%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B2%25E0%25A5%2587%25E0%25A4%25AE-%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25AF%25E0%25A4%25BE-%25E0%25A4%25B9%25E0%25A5%2588%25E0%25A4%2582-%25E0%25A4%2594%25E0%25A4%25B0-%25E0%25A4%2595%25E0%25A4%25BF%25E0%25A4%25A4%25E0%25A4%25A8%25E0%25A5%2587-%25E0%25A4%25AA%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B0%25E0%25A4%2595%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25B0-%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%2580-%25E0%25A4%25B9%25E0%25A5%258B%25E0%25A4%25A4%25E0%25A5%2580-%25E0%25A4%25B9%25E0%25A5%2588%25E0%25A4%2582-3.jpg&quot; title=&quot;जुड़वाँ  लौ / ट्विन फ्लेम क्या हैं ? और कितने प्रकार की होती हैं ?&quot; width=&quot;200&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;&lt;b style=&quot;font-size: large; text-align: left;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;&lt;b style=&quot;font-size: large; text-align: left;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;कितने प्रकार के रिश्ते होते हैं जुड़वाँ आत्मा के ?&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;कहते हैं की इस दुनिया में सिर्फ १,४४,००० ही जुड़वाँ आत्मा होती हैं।&amp;nbsp; मगर ऐसा नहीं हैं, हम सबकी जुड़वाँ आत्मा होती हैं पर अपनी दूसरी जुड़वाँ आत्मा से मिलना हमारे कर्म और हमारे इच्छा पर निर्भर होता हैं। जब आत्मा बहुत सारे जनम लेके थक जाती हैं और जब उसका मन&amp;nbsp;इस दुनियादारी से उठने लगता हैं और उसका झुकाव आध्यात्मिक के तरफ मुड़ने लगता हैं, या&lt;span style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt; &lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;फिर अब उसके बुरे&amp;nbsp;कर्म खत्म होने लगते हैं तब हमारी जुड़वाँ आत्मा हमारे जीवन में प्रवेश करती हैं।&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt; जब ये दूसरी आत्मा आपके&amp;nbsp;सामने आएगी तो आप खुदबखुद पहचान जाओगे। इसके विषय में आपको अगली लेख में बताउंगी। ये किसी भी रूप में आपके सामने आ सकती हैं। कभी कोई ऐसा भी रिश्ता होता हैं जो दुनिया की नज़रों में गलत हैं। जैसे की स्त्री की आत्मा पुरुष में या पुरुष की आत्मा स्त्री में या तो दोनों शारीरिक से स्त्री होगी या पुरुष पुरुष होते&amp;nbsp;हैं। और कोई ऐसा भी रिश्ता होता है, जहा&amp;nbsp;पुरुष की आत्मा स्त्री में होती हैं&amp;nbsp;और उसका साथी पुरुष हो सकता हैं। और इसका उल्टा भी होता हैं मतलब विरुद्ध शरीर में विरुद्ध आत्मा होती हैं। ऐसे में इनके रिश्ते को समाज स्वीकृति नहीं देता और ये बेचारे एक तो ज़िन्दगी भर अधूरे रहते हैं और ज़िन्दगी भर दुःख तकलीफ़ओ से गुजरती रहती हैं, या फिर दोनों पुरे भी होते हैं। ऐसे में एक तो फिर से इन्हे जनम लेना पड़ता हैं और अपने कर्मो को काटना पड़ता हैं तब शायद ये मिल पातें हैं। यहाँ बतादू की मैं आत्मा मतलब एक ऊर्जा जो अनंत हैं ब्रह्मा है ब्रह्माण्ड हैं तो उसे शरीर की जरुरत पड़ती हैं तो हमारा शरीर मिट्टी (पृथ्वी), आकाश, वायु, अग्नि, जल, जो पांच तत्वों से बानी हैं। और शरीर को लिंग होता हैं आत्मा को नहीं यहाँ&amp;nbsp; आत्मा को किसी लिंग से वास्ता नहीं हैं और नहीं उसने कभी भेद-भाव किया हैं। ये तो मनुष्यों ने अपने हिसाब से नीतिनियम, कायदे, परंपरा और भेद-भाव बना दिए हैं। जिसके चलते आत्मा को न जाने कितने बार जन्मा लेना पड़ता है अपने मोक्ष के लिए।&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000; text-align: left;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt; आत्मा सिर्फ प्रेम, आनंद, सत्य, श्वेत, स्वतंत्रता, शांत, स्वच्छ, और निरमयी निरंकार होती हैं।&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;text-align: left;&quot;&gt; कभी कभी तो हमारी जुड़वाँ आत्मा ऐसे वक़्त पे आती हैं हमारी ज़िन्दगी&amp;nbsp; में जब हम शादी शुदा हो या बच्चे होते हैं या फिर दोनों के उम्र का फासला होता है, तब भी समाज ऐसे रिश्तों को स्वीकृति नहीं देता। पर इनका मिलना और एक हो पाना बहुत मुश्किल होता हैं। इनके जीवन में आये दिन बहोत संगर्ष करना पड़ता हैं अपने आपको हर परिस्थिती में खुद को समतोल बनाये रखना अपने अंदर से भी और बाहेर परिस्थितियों में भी। और ज़्यादा तर ये आत्माएं अलग अलग जाती संप्रदाय में जनम लेती है ,ऐसा क्यों ? क्योंकी ये एकता और प्रेम की परिभाषा सीखाने आती हैं और बड़ी कठिनाईयों से गुजर कर एक साथ आकर समाज में&amp;nbsp;प्रेम और शांति&amp;nbsp;की स्थापना&amp;nbsp;करते हैं।&lt;/span&gt;&lt;b style=&quot;text-align: left;&quot;&gt; &lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;i&gt;इनके कुछ&amp;nbsp; उदहारण हैं शिवशक्ति ,राधाकृष्ण, सियाराम, रोमियो - जूलिएट, लैलामजनु, हीर-राँझा , सोहनी -महिलवाल और भी न जाने कितने ऐसे जुड़वा आत्मा थे इतिहास में, और आज भी कई ऐसे जोड़ी हैं.&amp;nbsp;&lt;/i&gt;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; कुछ सामने आते हैं कुछ अपना रिश्ता छुपाकर रखते हैं। तो ये थी आज की जानकारी आशा करती हु की आपको बहोत कुछ ज्ञात हो गया हैं। अगर आपके साथ कोई ऐसे लोग हैं तो उनकी मदद करें क्योंकी ये देवदूत होते हैं मनुष्य के रूप में और ये बड़े ही उदार स्वाभाव के और समज़दार होते है। इनकी मदद करके आप भी अपने जीवन में खुद की मदद कर रहे हैं। और वो कहते है की, किसीकी जोड़ी जोड़ने में भाग लेना किसी के तोड़ने में नहीं। अगर आप इनकी सहायता करते हैं तो आपके जीवन में भी आपका प्रेम अवश्य आपको प्राप्त होगा। यह प्रेम बहोत उच्च कोटि का होता हैं, इनका प्रेम अध्यात्म से जुड़ा हुआ होता है इसलिए इनका प्रेम आध्यात्मिक होता हैं. और ऐसा प्रेम पाने के लिए महसूस करने के लिए आपका आध्यात्मिक होना अनिवार्य हैं। आध्यात्मिक के बिना ये संभव ही नहीं। तो अगली लेख में मैं आपको बताउंगी की कैसे हम जान सकते हैं की हमारी जुड़वाँ आत्मा हमसे मिल चुकी है की नहीं ? और भी बहुत कुछ इस विषय पर चर्चा करेंगे। आपको ये जानना जरुरी हैं की &lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2020/10/muladhar-chakra-varnan.html&quot;&gt;&lt;b&gt;कुण्डलिनी जागरूक कैसे करते हैं? मूलाधार चक्र क्या हैं ? &lt;/b&gt;&lt;/a&gt;&amp;nbsp;क्योंकी अगर आप अपने जुड़वाँ आत्मा से मिल चुके है तो आपको बाकि सात चक्र कैसे नियंत्रित करे आपको पता होना चाहिए। अब मैं अपने शब्दों को विराम और आपके किंमती समय को प्रणाम करते हुए आपसे फिर लौटने की स्वीकृति लेती हूँ। तब तक आप सोचिये की क्या आप अपनी जुड़वाँ आत्मा से मिल चुके हैं या नहीं ?&amp;nbsp;&lt;span&gt;आप सभी पर प्रभु की कृपा हो&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span&gt;आपके घर में बरकत रहे और आपका जीवन आबाद रहें।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;h3 style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;span&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;🙏&amp;nbsp;&lt;span style=&quot;color: red;&quot;&gt;जय गुरुदेव ,हर -हर महादेव।&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;🙏&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/h3&gt;
&lt;gwmw style=&quot;display: none;&quot;&gt;&lt;/gwmw&gt;&lt;/div&gt;</description><link>https://www.adhyatmikjagat69.co/2021/05/judwa-lau-twin-flame-kya-hain-kitne-prakar-ki-hoti-hain-post.html</link><author>noreply@blogger.com (Unknown)</author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjEd8smUL5k7ESjwGuwE9COaPapQJ_cbMSRY5JxDVtJW-k-LnRd-UsWYvomei87JYs9-zBI4k7n9x90_oYnOWH-Eiewa_CMpS5cV4Q-YoOcdmSxj7Nob4a1vCVp8cCLFDhS6UsIqoPPymir/s72-w320-h256-c/%25E0%25A4%259C%25E0%25A5%2581%25E0%25A5%259C%25E0%25A4%25B5%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%2581-%25E0%25A4%2586%25E0%25A4%25A4%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25AE%25E0%25A4%25BE-%25E0%25A4%25AF%25E0%25A4%25BE-%25E0%25A4%259C%25E0%25A5%2581%25E0%25A5%259C%25E0%25A4%25B5%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%2581+%25E0%25A4%25B2%25E0%25A5%258C-%25E0%25A4%259F%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B5%25E0%25A4%25BF%25E0%25A4%25A8+%25E0%25A4%25AB%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B2%25E0%25A5%2587%25E0%25A4%25AE-%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25AF%25E0%25A4%25BE-%25E0%25A4%25B9%25E0%25A5%2588%25E0%25A4%2582.jpg" height="72" width="72"/><thr:total>0</thr:total></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-8475792039111759199.post-1130329355853591866</guid><pubDate>Fri, 30 Apr 2021 15:09:00 +0000</pubDate><atom:updated>2024-09-28T15:50:35.365+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">कुण्डलिनी जागरण</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">मूलाधार चक्र</category><title>मूलाधार चक्र जागरूक करने के उपाय </title><description>&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;b style=&quot;font-size: large;&quot;&gt;&lt;span&gt;आपका बहुत बहुत स्वागत हैं मेरे आध्यात्मिक जगत के लेख में।आप जो इतने प्यारसे और अपना कीमती समय निकलकर मेरे इस लेख पर रुकते हैं ये मेरे लिए आपका सम्मान और प्यार हैं जिसके लिए मैं दिल से धन्यवाद् करती हु और मैं आपसे वादा करती हूँ की आपकी ऐसे ही&amp;nbsp;मैं अपने ज्ञान और अनुभव से आपके जीवन का अंधकार दूर करने की कोशिश करुँगी।आपका प्यार और साथ हमेशा मेरे साथ बनाये रखिये&amp;nbsp;आप मेरे साथ जुड़े रहिये और अपनी समस्या का निवारण लेते रहिये। मुझे विश्वास हैं की आप कुशल मंगल होंगे भगवान आप पर और आपके अपनों पर प्रेम ,आशीर्वाद और&amp;nbsp;कृपा बरसाएं। आज मैं आपके लिए एक और नया विषय लेकर आयी हूँ जो &lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2020/10/muladhar-chakra-varnan.html&quot; rel=&quot;nofollow&quot;&gt;&lt;i&gt;मूलाधार चक्र &lt;/i&gt;&lt;/a&gt;&amp;nbsp;से सम्बंधित हैं पिछले लेख में हमने इस चक्र का वर्णन और &lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2020/10/muladhar-chakr-fayde-nuksan-post11.html&quot; rel=&quot;nofollow&quot;&gt;&lt;i&gt;मूलाधार चक्र के फायदे नुकसान &lt;/i&gt;&lt;/a&gt;&amp;nbsp;जाने थे और भी बहुत कुछ जाना था। आज&amp;nbsp;&lt;span style=&quot;color: #990000;&quot;&gt;&lt;i&gt;&lt;span&gt;&lt;span&gt;मूलाधार&amp;nbsp;चक्र&amp;nbsp;&lt;/span&gt;को जगाने की विविध प्रकार के उपाय&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;जानेंगे और ये भी की क्या कौनसी ऐसे बातें हैं जो&amp;nbsp;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #990000;&quot;&gt;मूलाधार चक्र को जगाने&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;में और संतुलन रखने के लिए&amp;nbsp;मददगार होती हैं।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;b style=&quot;font-size: large;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: #990000;&quot;&gt;&lt;i&gt;&lt;span&gt;&lt;span&gt;मूलाधार&amp;nbsp;चक्र&amp;nbsp;&lt;/span&gt;को जगाने की विविध प्रकार के उपाय&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&amp;nbsp; .&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;b style=&quot;font-size: large;&quot;&gt;&lt;span&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;gwmw style=&quot;display: none;&quot;&gt;&lt;/gwmw&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;b style=&quot;font-size: large;&quot;&gt;&lt;span&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;table align=&quot;center&quot; cellpadding=&quot;0&quot; cellspacing=&quot;0&quot; class=&quot;tr-caption-container&quot; style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto;&quot;&gt;&lt;tbody&gt;&lt;tr&gt;&lt;td style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2020/11/muladhar-chakra-jagruk-upay-padarth-tel-crystal-post.html&quot;&gt;&lt;img alt=&quot;मूलाधार चक्र जागरूक करने के उपाय&quot; border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;267&quot; data-original-width=&quot;400&quot; height=&quot;214&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhIrJZIeIBNycFsdTR16SHITNXna-VFDEzW-tLcel8OzZtrLVEyw82Bra5b8tLWtZ9oDJOzxl49i5-Q274pOifQdHBLf-xrvb6a2WzC-baKpni8IFeTYhlcxwxJZ7m5DNw1lapXT7d9waP5/w320-h214/%25E0%25A4%25AE%25E0%25A5%2582%25E0%25A4%25B2%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25A7%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25B0-%25E0%25A4%259A%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B0-%25E0%25A4%259C%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%2597%25E0%25A4%25B0%25E0%25A5%2582%25E0%25A4%2595-%25E0%25A4%2595%25E0%25A4%25B0%25E0%25A4%25A8%25E0%25A5%2587-%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%2587-%25E0%25A4%2589%25E0%25A4%25AA%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25AF+%25281%2529.jpg&quot; title=&quot;मूलाधार चक्र जागरूक करने के उपाय&quot; width=&quot;320&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/span&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;&lt;tr&gt;&lt;td class=&quot;tr-caption&quot; style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2020/11/muladhar-chakra-jagruk-upay-padarth-tel-crystal-post.html&quot;&gt;लाल और काले पदार्थ&amp;nbsp;&lt;/a&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;&lt;/tbody&gt;&lt;/table&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;span&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000; font-size: large;&quot;&gt;मूलाधार चक्र जगाने के लिए पदार्थ का सेवन&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/h2&gt;&lt;div&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span&gt;मूलाधार चक्र जगाने&lt;/span&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;के लिए आप &lt;span&gt;&lt;span&gt;लाल&lt;/span&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;और &lt;span&gt;काले&amp;nbsp;&lt;span&gt;&lt;span&gt;पदार्थ&lt;/span&gt;&amp;nbsp; &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;खा सकते हैं &lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;,जैसे की टमाटर ,अनार ,स्ट्रॉबेरी ,लाल अंगूर, काले अंगूर ,लाल प्याज़ ,सेब ,आलूबालू फल (चेरी) ,लाल शिमला मिर्च ,चुकंदर (बीट्स ) ,मूली ,क्रैनबेरी ,मटकी ,कुलथी, ईमली ,कोकम ,काले तिल अज्वाइन।&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;table align=&quot;center&quot; cellpadding=&quot;0&quot; cellspacing=&quot;0&quot; class=&quot;tr-caption-container&quot; style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto;&quot;&gt;&lt;tbody&gt;&lt;tr&gt;&lt;td style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2020/11/muladhar-chakra-jagruk-upay-padarth-tel-crystal-post.html&quot;&gt;&lt;img alt=&quot;मूलाधार चक्र जागरूक करने के उपाय&quot; border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;426&quot; data-original-width=&quot;640&quot; height=&quot;213&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhYTmg0GvLV6oeVFVFuHphMXyRSJ23MZx8iPetC05pG2EkXaf7bBHvBzS51zriPxYLxt1S5L1JUk2X8HqrbuZ1Sq300felnBMBtY6-5nt2GhctlCfCawLUo4Y-7sTvuBH78bfBV-ESkhRVz/w320-h213/%25E0%25A4%25AE%25E0%25A5%2582%25E0%25A4%25B2%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25A7%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25B0-%25E0%25A4%259A%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B0-%25E0%25A4%259C%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%2597%25E0%25A4%25B0%25E0%25A5%2582%25E0%25A4%2595-%25E0%25A4%2595%25E0%25A4%25B0%25E0%25A4%25A8%25E0%25A5%2587-%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%2587-%25E0%25A4%2589%25E0%25A4%25AA%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25AF+%25282%2529.jpg&quot; title=&quot;मूलाधार चक्र जागरूक करने के उपाय&quot; width=&quot;320&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/span&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;&lt;tr&gt;&lt;td class=&quot;tr-caption&quot; style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: #6aa84f;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2020/11/muladhar-chakra-jagruk-upay-padarth-tel-crystal-post.html&quot;&gt;आवश्यक तेल&amp;nbsp;&lt;/a&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;&lt;/tbody&gt;&lt;/table&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;h2&gt;&lt;span&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000; font-size: large;&quot;&gt;मूलाधार चक्र जगाने के लिए आवश्यक तेल&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/h2&gt;&lt;div&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;देवदार तेल (सिदरवूड ), कामलता (सीप्रेस ), चंदन (सैंडल वूड़ ), सुगंधरा (पचौली ), ख़सख़स (वेटीवर), लोहबान (म्यररह, फ्रंकिंसन्स ), हापुषा (जुनिपर ) ,एंजेलिका (एंजेलिका रुट ) ,कपाइब (कपैबा ) ,काली मिर्च (ब्लैक पीपर ), काले स्प्रूस (ब्लैक स्प्रूस ) .&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt; &lt;span&gt;&lt;span&gt;&lt;i&gt;&lt;b&gt;मूलाधार चक्र को जागरूक&lt;/b&gt;&lt;/i&gt;&lt;/span&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt; ही नहीं अपितु सूए संतुलन में भी बनाये रखते है ये तेल इन्हे आप अत्तर, मालिश तेल, शैम्पू या किसी भी बाहिरी वस्तु में इनके रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;table align=&quot;center&quot; cellpadding=&quot;0&quot; cellspacing=&quot;0&quot; class=&quot;tr-caption-container&quot; style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto;&quot;&gt;&lt;tbody&gt;&lt;tr&gt;&lt;td style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2020/11/muladhar-chakra-jagruk-upay-padarth-tel-crystal-post.html&quot;&gt;&lt;img alt=&quot;मूलाधार चक्र जागरूक करने के उपाय&quot; border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;640&quot; data-original-width=&quot;636&quot; height=&quot;320&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgFxqSQjZLhhr1xPmkAbqGgmaKRlboF0Yx_7Ta_i_jp-9wgoSUE_rVmSfIYCU52WeSIUBubaJSu0GLQtiqWq66s-yDNOUbmfGv-itNxRWSWjutwIZF5TJnSoT1HWoZ56I-yxkakMWB3c1_P/w318-h320/%25E0%25A4%25AE%25E0%25A5%2582%25E0%25A4%25B2%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25A7%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25B0-%25E0%25A4%259A%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B0-%25E0%25A4%259C%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%2597%25E0%25A4%25B0%25E0%25A5%2582%25E0%25A4%2595-%25E0%25A4%2595%25E0%25A4%25B0%25E0%25A4%25A8%25E0%25A5%2587-%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%2587-%25E0%25A4%2589%25E0%25A4%25AA%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25AF.jpg&quot; title=&quot;मूलाधार चक्र जागरूक करने के उपाय&quot; width=&quot;318&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/span&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;&lt;tr&gt;&lt;td class=&quot;tr-caption&quot; style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2020/11/muladhar-chakra-jagruk-upay-padarth-tel-crystal-post.html&quot;&gt;क्रिस्टल्स और मणि&amp;nbsp;&lt;/a&gt;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;&lt;/tbody&gt;&lt;/table&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;span&gt;तामडा (ब्लडस्टोन ) ,सूर्यकांतमणि ,माणिक्य (रेड जेस्पर ) ,रक्तमणि (गार्नेट ) ,काला तुरमली (ब्लैक टोउरमलीन ) ,हेमटिट (हेमटिट ) ,काला हकिक (ब्लैक हकिक ) ,रूबी ,&lt;/span&gt;&lt;span&gt;काला ओब्सीडियन ( ब्लैक ओब्सीडियन )&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;white-space: pre-wrap;&quot;&gt;,काली डायोप्साइड (ब्लैक डायोप्साइड ) ,&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;गोमेदक (सरडॉनिक्स ) ,डालमेशन जैस्पर (डालमेशन जैस्पर ) ,शुंगीत पिरामिड (शुंगीत पिरामिड ). आप इन्हे अच्छे&amp;nbsp;किसी एस्ट्रोलॉजर के सहायता से अपनी कुंडली दिखा के इन &lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;क्रिस्टल्स मणि&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;color: #990000;&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;को गले या उँगलियों में धारण कर सकते हैं।&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-size: large;&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span&gt;&lt;span style=&quot;background-color: font-size: x-large; font-size: medium;&quot;&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;span&gt;&lt;span style=&quot;background-color: font-size: x-large;&quot;&gt;तो यह थी जानकारी मुझे विश्वास हैं की आपको इस लेख में बहुत सारी जानकारी प्राप्त हुई हैं। आप आपकी क्या राय है इस विषय पर आप जरुर नीचे कमैंट्स बॉक्स में बतायें और आप क्या जानना चाहते है ये भी बताये&amp;nbsp; ख़ुशी होगी ये जानकर की आप इस विषय में रूचि रखते है। अगले लेख में और भी ज्ञान को आपके साथ साँझा करुँगी उस लेख में हम &lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span&gt;मूलाधार चक्र को जगाने और संतुलन रखने&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;color: #990000;&quot;&gt; &lt;/span&gt;के लिए कोनसे योगासन और मुद्रायें हैं वो जानेंगे। गुरु शिष्य से क्या कहते है आप यहाँ &lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2020/10/guruvani-guru-gyan-post89.html&quot; rel=&quot;nofollow&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;गुरुवाणी&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/a&gt;में जान सकते हैं। अब मैं अपने वाणी को विराम और आपके कीमती समय को प्रणाम करते हुए फिर आपसे मिलने की&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span&gt;आ&lt;/span&gt;ज्ञा चाहती हूँ ,तब तक आप अपना और अपनों का ख्याल रखे मिलती हूँ अगले लेख में तब तक आप भी ध्यान कीजिये और आनंद में रहिये।आप सभी पर प्रभु की कृपा हो&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span&gt;आपके घर में बरकत रहे और आपका जीवन आबाद रहें।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;span&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;h4&gt;&lt;span style=&quot;font-size: large;&quot;&gt;&lt;span&gt;🙏&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span&gt;जय गुरुदेव ,हर- हर महादेव&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;🙏&lt;/span&gt;&lt;/h4&gt;</description><link>https://www.adhyatmikjagat69.co/2021/04/blog-post.html</link><author>noreply@blogger.com (Unknown)</author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhIrJZIeIBNycFsdTR16SHITNXna-VFDEzW-tLcel8OzZtrLVEyw82Bra5b8tLWtZ9oDJOzxl49i5-Q274pOifQdHBLf-xrvb6a2WzC-baKpni8IFeTYhlcxwxJZ7m5DNw1lapXT7d9waP5/s72-w320-h214-c/%25E0%25A4%25AE%25E0%25A5%2582%25E0%25A4%25B2%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25A7%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25B0-%25E0%25A4%259A%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B0-%25E0%25A4%259C%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%2597%25E0%25A4%25B0%25E0%25A5%2582%25E0%25A4%2595-%25E0%25A4%2595%25E0%25A4%25B0%25E0%25A4%25A8%25E0%25A5%2587-%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%2587-%25E0%25A4%2589%25E0%25A4%25AA%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25AF+%25281%2529.jpg" height="72" width="72"/><thr:total>0</thr:total></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-8475792039111759199.post-1601173604960491127</guid><pubDate>Fri, 30 Apr 2021 15:09:00 +0000</pubDate><atom:updated>2023-01-17T14:26:10.630+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">कुण्डलिनी जागरण</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">मूलाधार चक्र</category><title>मूलाधार चक्र जागरूक करने के उपाय </title><description>&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;b style=&quot;font-size: large;&quot;&gt;&lt;span&gt;आपका बहुत बहुत स्वागत हैं मेरे आध्यात्मिक जगत के लेख में।आप जो इतने प्यारसे और अपना कीमती समय निकलकर मेरे इस लेख पर रुकते हैं ये मेरे लिए आपका सम्मान और प्यार हैं जिसके लिए मैं दिल से धन्यवाद् करती हु और मैं आपसे वादा करती हूँ की आपकी ऐसे ही&amp;nbsp;मैं अपने ज्ञान और अनुभव से आपके जीवन का अंधकार दूर करने की कोशिश करुँगी।आपका प्यार और साथ हमेशा मेरे साथ बनाये रखिये&amp;nbsp;आप मेरे साथ जुड़े रहिये और अपनी समस्या का निवारण लेते रहिये। मुझे विश्वास हैं की आप कुशल मंगल होंगे भगवान आप पर और आपके अपनों पर प्रेम ,आशीर्वाद और&amp;nbsp;कृपा बरसाएं। आज मैं आपके लिए एक और नया विषय लेकर आयी हूँ जो &lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2020/10/muladhar-chakra-varnan.html&quot; rel=&quot;nofollow&quot;&gt;&lt;i&gt;मूलाधार चक्र &lt;/i&gt;&lt;/a&gt;&amp;nbsp;से सम्बंधित हैं पिछले लेख में हमने इस चक्र का वर्णन और &lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2020/10/muladhar-chakr-fayde-nuksan-post11.html&quot; rel=&quot;nofollow&quot;&gt;&lt;i&gt;मूलाधार चक्र के फायदे नुकसान &lt;/i&gt;&lt;/a&gt;&amp;nbsp;जाने थे और भी बहुत कुछ जाना था। आज&amp;nbsp;&lt;span style=&quot;color: #990000;&quot;&gt;&lt;i&gt;&lt;span&gt;&lt;span&gt;मूलाधार&amp;nbsp;चक्र&amp;nbsp;&lt;/span&gt;को जगाने की विविध प्रकार के उपाय&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;जानेंगे और ये भी की क्या कौनसी ऐसे बातें हैं जो&amp;nbsp;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #990000;&quot;&gt;मूलाधार चक्र को जगाने&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;में और संतुलन रखने के लिए&amp;nbsp;मददगार होती हैं।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;b style=&quot;font-size: large;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: #990000;&quot;&gt;&lt;i&gt;&lt;span&gt;&lt;span&gt;मूलाधार&amp;nbsp;चक्र&amp;nbsp;&lt;/span&gt;को जगाने की विविध प्रकार के उपाय&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&amp;nbsp; .&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;b style=&quot;font-size: large;&quot;&gt;&lt;span&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;gwmw style=&quot;display: none;&quot;&gt;&lt;/gwmw&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;b style=&quot;font-size: large;&quot;&gt;&lt;span&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;table align=&quot;center&quot; cellpadding=&quot;0&quot; cellspacing=&quot;0&quot; class=&quot;tr-caption-container&quot; style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto;&quot;&gt;&lt;tbody&gt;&lt;tr&gt;&lt;td style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2020/11/muladhar-chakra-jagruk-upay-padarth-tel-crystal-post.html&quot;&gt;&lt;img alt=&quot;मूलाधार चक्र जागरूक करने के उपाय&quot; border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;267&quot; data-original-width=&quot;400&quot; height=&quot;214&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhIrJZIeIBNycFsdTR16SHITNXna-VFDEzW-tLcel8OzZtrLVEyw82Bra5b8tLWtZ9oDJOzxl49i5-Q274pOifQdHBLf-xrvb6a2WzC-baKpni8IFeTYhlcxwxJZ7m5DNw1lapXT7d9waP5/w320-h214/%25E0%25A4%25AE%25E0%25A5%2582%25E0%25A4%25B2%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25A7%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25B0-%25E0%25A4%259A%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B0-%25E0%25A4%259C%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%2597%25E0%25A4%25B0%25E0%25A5%2582%25E0%25A4%2595-%25E0%25A4%2595%25E0%25A4%25B0%25E0%25A4%25A8%25E0%25A5%2587-%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%2587-%25E0%25A4%2589%25E0%25A4%25AA%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25AF+%25281%2529.jpg&quot; title=&quot;मूलाधार चक्र जागरूक करने के उपाय&quot; width=&quot;320&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/span&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;&lt;tr&gt;&lt;td class=&quot;tr-caption&quot; style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2020/11/muladhar-chakra-jagruk-upay-padarth-tel-crystal-post.html&quot;&gt;लाल और काले पदार्थ&amp;nbsp;&lt;/a&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;&lt;/tbody&gt;&lt;/table&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;span&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000; font-size: large;&quot;&gt;मूलाधार चक्र जगाने के लिए पदार्थ का सेवन&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/h2&gt;&lt;div&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span&gt;मूलाधार चक्र जगाने&lt;/span&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;के लिए आप &lt;span&gt;&lt;span&gt;लाल&lt;/span&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;और &lt;span&gt;काले&amp;nbsp;&lt;span&gt;&lt;span&gt;पदार्थ&lt;/span&gt;&amp;nbsp; &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;खा सकते हैं &lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;,जैसे की टमाटर ,अनार ,स्ट्रॉबेरी ,लाल अंगूर, काले अंगूर ,लाल प्याज़ ,सेब ,आलूबालू फल (चेरी) ,लाल शिमला मिर्च ,चुकंदर (बीट्स ) ,मूली ,क्रैनबेरी ,मटकी ,कुलथी, ईमली ,कोकम ,काले तिल अज्वाइन।&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;table align=&quot;center&quot; cellpadding=&quot;0&quot; cellspacing=&quot;0&quot; class=&quot;tr-caption-container&quot; style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto;&quot;&gt;&lt;tbody&gt;&lt;tr&gt;&lt;td style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2020/11/muladhar-chakra-jagruk-upay-padarth-tel-crystal-post.html&quot;&gt;&lt;img alt=&quot;मूलाधार चक्र जागरूक करने के उपाय&quot; border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;426&quot; data-original-width=&quot;640&quot; height=&quot;213&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhYTmg0GvLV6oeVFVFuHphMXyRSJ23MZx8iPetC05pG2EkXaf7bBHvBzS51zriPxYLxt1S5L1JUk2X8HqrbuZ1Sq300felnBMBtY6-5nt2GhctlCfCawLUo4Y-7sTvuBH78bfBV-ESkhRVz/w320-h213/%25E0%25A4%25AE%25E0%25A5%2582%25E0%25A4%25B2%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25A7%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25B0-%25E0%25A4%259A%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B0-%25E0%25A4%259C%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%2597%25E0%25A4%25B0%25E0%25A5%2582%25E0%25A4%2595-%25E0%25A4%2595%25E0%25A4%25B0%25E0%25A4%25A8%25E0%25A5%2587-%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%2587-%25E0%25A4%2589%25E0%25A4%25AA%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25AF+%25282%2529.jpg&quot; title=&quot;मूलाधार चक्र जागरूक करने के उपाय&quot; width=&quot;320&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/span&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;&lt;tr&gt;&lt;td class=&quot;tr-caption&quot; style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: #6aa84f;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2020/11/muladhar-chakra-jagruk-upay-padarth-tel-crystal-post.html&quot;&gt;आवश्यक तेल&amp;nbsp;&lt;/a&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;&lt;/tbody&gt;&lt;/table&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;h2&gt;&lt;span&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000; font-size: large;&quot;&gt;मूलाधार चक्र जगाने के लिए आवश्यक तेल&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/h2&gt;&lt;div&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;देवदार तेल (सिदरवूड ), कामलता (सीप्रेस ), चंदन (सैंडल वूड़ ), सुगंधरा (पचौली ), ख़सख़स (वेटीवर), लोहबान (म्यररह, फ्रंकिंसन्स ), हापुषा (जुनिपर ) ,एंजेलिका (एंजेलिका रुट ) ,कपाइब (कपैबा ) ,काली मिर्च (ब्लैक पीपर ), काले स्प्रूस (ब्लैक स्प्रूस ) .&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt; &lt;span&gt;&lt;span&gt;&lt;i&gt;&lt;b&gt;मूलाधार चक्र को जागरूक&lt;/b&gt;&lt;/i&gt;&lt;/span&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt; ही नहीं अपितु सूए संतुलन में भी बनाये रखते है ये तेल इन्हे आप अत्तर, मालिश तेल, शैम्पू या किसी भी बाहिरी वस्तु में इनके रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;table align=&quot;center&quot; cellpadding=&quot;0&quot; cellspacing=&quot;0&quot; class=&quot;tr-caption-container&quot; style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto;&quot;&gt;&lt;tbody&gt;&lt;tr&gt;&lt;td style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2020/11/muladhar-chakra-jagruk-upay-padarth-tel-crystal-post.html&quot;&gt;&lt;img alt=&quot;मूलाधार चक्र जागरूक करने के उपाय&quot; border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;640&quot; data-original-width=&quot;636&quot; height=&quot;320&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgFxqSQjZLhhr1xPmkAbqGgmaKRlboF0Yx_7Ta_i_jp-9wgoSUE_rVmSfIYCU52WeSIUBubaJSu0GLQtiqWq66s-yDNOUbmfGv-itNxRWSWjutwIZF5TJnSoT1HWoZ56I-yxkakMWB3c1_P/w318-h320/%25E0%25A4%25AE%25E0%25A5%2582%25E0%25A4%25B2%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25A7%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25B0-%25E0%25A4%259A%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B0-%25E0%25A4%259C%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%2597%25E0%25A4%25B0%25E0%25A5%2582%25E0%25A4%2595-%25E0%25A4%2595%25E0%25A4%25B0%25E0%25A4%25A8%25E0%25A5%2587-%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%2587-%25E0%25A4%2589%25E0%25A4%25AA%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25AF.jpg&quot; title=&quot;मूलाधार चक्र जागरूक करने के उपाय&quot; width=&quot;318&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/span&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;&lt;tr&gt;&lt;td class=&quot;tr-caption&quot; style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2020/11/muladhar-chakra-jagruk-upay-padarth-tel-crystal-post.html&quot;&gt;क्रिस्टल्स और मणि&amp;nbsp;&lt;/a&gt;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;&lt;/tbody&gt;&lt;/table&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;span&gt;तामडा (ब्लडस्टोन ) ,सूर्यकांतमणि ,माणिक्य (रेड जेस्पर ) ,रक्तमणि (गार्नेट ) ,काला तुरमली (ब्लैक टोउरमलीन ) ,हेमटिट (हेमटिट ) ,काला हकिक (ब्लैक हकिक ) ,रूबी ,&lt;/span&gt;&lt;span&gt;काला ओब्सीडियन ( ब्लैक ओब्सीडियन )&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;white-space: pre-wrap;&quot;&gt;,काली डायोप्साइड (ब्लैक डायोप्साइड ) ,&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;गोमेदक (सरडॉनिक्स ) ,डालमेशन जैस्पर (डालमेशन जैस्पर ) ,शुंगीत पिरामिड (शुंगीत पिरामिड ). आप इन्हे अच्छे&amp;nbsp;किसी एस्ट्रोलॉजर के सहायता से अपनी कुंडली दिखा के इन &lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;क्रिस्टल्स मणि&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;color: #990000;&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;को गले या उँगलियों में धारण कर सकते हैं।&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-size: large;&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span&gt;&lt;span style=&quot;background-color: font-size: x-large; font-size: medium;&quot;&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;span&gt;&lt;span style=&quot;background-color: font-size: x-large;&quot;&gt;तो यह थी जानकारी मुझे विश्वास हैं की आपको इस लेख में बहुत सारी जानकारी प्राप्त हुई हैं। आप आपकी क्या राय है इस विषय पर आप जरुर नीचे कमैंट्स बॉक्स में बतायें और आप क्या जानना चाहते है ये भी बताये&amp;nbsp; ख़ुशी होगी ये जानकर की आप इस विषय में रूचि रखते है। अगले लेख में और भी ज्ञान को आपके साथ साँझा करुँगी उस लेख में हम &lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span&gt;मूलाधार चक्र को जगाने और संतुलन रखने&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;color: #990000;&quot;&gt; &lt;/span&gt;के लिए कोनसे योगासन और मुद्रायें हैं वो जानेंगे। गुरु शिष्य से क्या कहते है आप यहाँ &lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2020/10/guruvani-guru-gyan-post89.html&quot; rel=&quot;nofollow&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;गुरुवाणी&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/a&gt;में जान सकते हैं। अब मैं अपने वाणी को विराम और आपके कीमती समय को प्रणाम करते हुए फिर आपसे मिलने की&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span&gt;आ&lt;/span&gt;ज्ञा चाहती हूँ ,तब तक आप अपना और अपनों का ख्याल रखे मिलती हूँ अगले लेख में तब तक आप भी ध्यान कीजिये और आनंद में रहिये।आप सभी पर प्रभु की कृपा हो&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span&gt;आपके घर में बरकत रहे और आपका जीवन आबाद रहें।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;span&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;h4&gt;&lt;span style=&quot;font-size: large;&quot;&gt;&lt;span&gt;🙏&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span&gt;जय गुरुदेव ,हर- हर महादेव&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;🙏&lt;/span&gt;&lt;/h4&gt;</description><link>https://www.adhyatmikjagat69.co/2020/11/muladhar-chakra-jagruk-upay-padarth-tel-crystal-post.html</link><author>noreply@blogger.com (Unknown)</author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhIrJZIeIBNycFsdTR16SHITNXna-VFDEzW-tLcel8OzZtrLVEyw82Bra5b8tLWtZ9oDJOzxl49i5-Q274pOifQdHBLf-xrvb6a2WzC-baKpni8IFeTYhlcxwxJZ7m5DNw1lapXT7d9waP5/s72-w320-h214-c/%25E0%25A4%25AE%25E0%25A5%2582%25E0%25A4%25B2%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25A7%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25B0-%25E0%25A4%259A%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B0-%25E0%25A4%259C%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%2597%25E0%25A4%25B0%25E0%25A5%2582%25E0%25A4%2595-%25E0%25A4%2595%25E0%25A4%25B0%25E0%25A4%25A8%25E0%25A5%2587-%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%2587-%25E0%25A4%2589%25E0%25A4%25AA%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25AF+%25281%2529.jpg" height="72" width="72"/><thr:total>0</thr:total></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-8475792039111759199.post-319088141866464182</guid><pubDate>Sun, 15 Nov 2020 15:56:00 +0000</pubDate><atom:updated>2024-09-28T15:50:35.547+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">कुण्डलिनी जागरण</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">मूलाधार चक्र</category><title>मूलाधार चक्र जागरण की विधियाँ -२ </title><description>&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;span&gt;आपका बहुत बहुत स्वागत हैं मेरे आध्यात्मिक जगत के लेख में।आप जो इतने प्यारसे और अपना कीमती समय निकलकर मेरे इस लेख पर रुकते हैं ये मेरे लिए आपका सम्मान और प्यार हैं जिसके लिए मैं दिल से धन्यवाद् करती हु और मैं आपसे वादा करती हूँ की आपकी ऐसे ही&amp;nbsp;मैं अपने ज्ञान और अनुभव से आपके जीवन का अंधकार दूर करने की कोशिश करुँगी।आपका प्यार और साथ हमेशा मेरे साथ बनाये रखिये&amp;nbsp;आप मेरे साथ जुड़े रहिये और अपनी समस्या का निवारण लेते रहिये।मुझे विश्वास हैं की आप कुशल मंगल होंगे भगवान आप पर और आपके अपनों पर प्रेम ,आशीर्वाद और&amp;nbsp;कृपा बरसाएं।आज मैं आपके लिए एक और नया विषय लेकर आयी हूँ जो &lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;मूलाधार चक्र&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;से सम्बंधित हैं पिछले लेख में हमने इस चक्र का वर्णन और फायदे नुकसान जाने थे और भी बहुत कुछ जाना था।आज हम इस चक्र को जगाने की विविध प्रकार की &lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;विधियाँ&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;जानेंगे और ये भी की क्या कौनसी ऐसे बातें हैं जो &lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;मूलाधार चक्र को जगाने में मददगार होती हैं।&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&amp;nbsp;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #ea9999; font-size: medium;&quot;&gt;&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/-muladhar-chakra-jagran-vidhiyan-2-saral-dhyan-.jpg&quot; style=&quot;margin-left: 1em; margin-right: 1em;&quot; target=&quot;_blank&quot;&gt;&lt;img alt=&quot;मूलाधार चक्र जागरण की विधियाँ -२ सरल सा ध्यान&quot; border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;426&quot; data-original-width=&quot;640&quot; height=&quot;213&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEh1beodhVOCdOPnO1YuQqXzwwDguS89B3vrjtWa3zjGGnFxLlBvJrq2JEGXCFQeHSJjlpr9Or8X9YvEzcAwPzQJQy8SWWT-srhGxs6vrY6KXulNvY0i-JwYJ87Zi2Fq-WahmQbXncSzG1zi/w320-h213/muladhar-chakra-jagran-vidhiyan-2-saral-dhyan-.jpg&quot; title=&quot;मूलाधार चक्र जागरण की विधियाँ -२ सरल सा ध्यान&quot; width=&quot;320&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;h3 style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000; font-size: large;&quot;&gt;&lt;span&gt;सरल सा ध्यान&lt;/span&gt;&lt;span&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/h3&gt;&lt;div&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;span&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span&gt;यहाँ आपको कुछ करने की ज़रूरत नहीं हैं बस कम्बल के&amp;nbsp;आसन पे बैठ जाना हैं या खुर्ची पे बैठ जाना हैं।कोई भी दिशा और आपके सुविधा अनुसार समय निर्धारित करले&amp;nbsp;और ध्यान लगाना हैं ,आप ये &lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;ध्यान&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;खुली हवा में या फिर किसी शांत कमरे में बैठकर कर सकते हैं।इसमें&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;b&gt; &#39;लं &#39; मंत्र &lt;/b&gt;&lt;/span&gt;का जाप करना हैं और ये सोचना हैं की सब जगह लाल रंग से भरा हुआ हैं&amp;nbsp;मतलब मनन करना हैं कम से कम १/२ घंटा ये आपको रोज़ करना हैं बिना चुके।आप मेरे पिछले लेख पे जाके&amp;nbsp;पढ़ सकते है जहाँ&amp;nbsp;मैंने पूर्ण विस्तार से बताया हैं की &lt;b&gt;&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2020/10/adhyatma-dhyan-ke-niyam-dyan-kriya-kundalini-post.html&quot; target=&quot;_blank&quot;&gt;ध्यान के नियम &lt;/a&gt;&lt;/b&gt;और &lt;b&gt;&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2020/10/adhyatma-dhyan-ke-liye-aavashyak-nirdesh-post10.html&quot; target=&quot;_blank&quot;&gt;ध्यान&amp;nbsp;के निर्देश&lt;/a&gt;&lt;/b&gt; क्या हैं आपको उस लेख में मार्गदर्शन हो जायेगा। फिर आगे क्या होता हैं की&amp;nbsp;धीरे धीरे आप महसूस करेंगे की आपके चक्र व्हायब्रेट हो रहें हैं।आपको बार बार पेशाब की समस्या हो सकती हैं उलटी जैसा मन करेगा ,बुखार भी आ सकता हैं और चक्कर भी और आपकी कामवासना भी बढ़ जाएगी पर आपको अपने मन पर काबू पाना हैं किसी भी हाल में ब्रह्मचर्य तोडना नहीं हैं चाहे कैसी भी हालत हो। ये इसलिए होगा ताकि आपकी ऊर्जा अब ऊपर की ओर&amp;nbsp;उठ रही हैं और ये आपके पूर्वजों की विरासत से आपके खून में&amp;nbsp;आये हुए डीएनए क्लींजिंग हो रही हैं।इसलिए आपकी अलग अलग परीक्षाएं भी होंगी।जैसे आपके पूर्वजों में कोई कमियां या कोई गुनाह किये होंगे तो वो सब आपके डीएनए क्लींजिंग में होंगे। &lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;आपके चक्रों के ऊपर जितने भी जन्मों की प्रतिया&amp;nbsp;चढ़ी होंगी वो सब एक एक करके उतरेंगे।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;फिर&amp;nbsp; आपको हल्का सा महसूस&amp;nbsp;होगा कुछ दिनों बाद आप देखेंगे की आपको अब डर भी नहीं लगता।महादेव कहते हैं साधक ने हमेशा वही चीज़ का सामना&amp;nbsp;करना&amp;nbsp;चाहिए जिससे वो डरता हैं भागता हैं या फिर उसकी जो कोई&amp;nbsp;कमज़ोरी हैं ऐसा करने से वो एक दिन अपने कमियों पे जीत हासिल कर ही लेता हैं, और उसके अन्य चक्र भी जागरूक हो जाते हैं।मेरी मनो तो डर बस हमरा विचार होता हैं और कुछ भी नहीं पर हमारा मन तो हमारे हाथ होता हैं तो इसे कैसे संभालना हैं ये आपको सोचना चाहिए क्यूँकि ये कही शरीर से बहार नहीं जाता फिर क्यूँ सुने इसकी। दिल की आत्मा की सुननी&amp;nbsp;चाहिए क्यूँकि आत्मा की आवाज़ ही परमात्मा की आवाज़ होती हैं।&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;span&gt;&lt;br /&gt;&amp;nbsp;&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/-muladhar-chakra-jagran-vidhiyan-2.jpg&quot; style=&quot;margin-left: 1em; margin-right: 1em;&quot; target=&quot;_blank&quot;&gt;&lt;img alt=&quot;मूलाधार चक्र जागरण की विधियाँ -२ योग निद्रा&quot; border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;433&quot; data-original-width=&quot;640&quot; height=&quot;216&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEimBBWonE_anuFnNAtIQP9DhFlu40-BSUJuSAh4-_8rLMg4AIn9m3lgsx_a81aV-X_X9FKdXZYGaJkHElcDzZdqptQkL79E4VJSBMivIh_JEALD_nciJ0Z5nxjUZUP0V9G6yxYvWxHrUk5a/w320-h216/muladhar-chakra-jagran-vidhiyan-2.jpg&quot; title=&quot;मूलाधार चक्र जागरण की विधियाँ -२ योग निद्रा&quot; width=&quot;320&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;h3 style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;span&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000; font-size: large;&quot;&gt;योग निद्रा&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;color: #93c47d; font-size: large;&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;color: #800180; font-size: large;&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/h3&gt;&lt;div&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;ये भी एक ध्यान का प्रकार है इसमें आपको लेटना पड़ता हैं और पूरा &lt;i&gt;&lt;b&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;ध्यान&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;color: #f6b26b;&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/i&gt;संगीत की धुन पर, शरीर के अंग पर या फिर गुरु के आवाज़ और शब्दों पर केंदरीत&amp;nbsp;करना पड़ता हैं इसे एक प्रकार से रेकी भी कहते हैं, जो किसी खास उपचार के&amp;nbsp;लिए भी प्रयोग किया जाता हैं।इसे &lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;साउंड थेरेपी पे भी ध्यान किया जाता हैं&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;।इसमें आपको बस लेटना पड़ता है आपके पुरे शरीर के&amp;nbsp;अंग - अंग को ढीला कर देना पड़ता हैं और कोई भी शरीर का अंग किसी अंग से चिपके न रखे ,हथेली का नरम भाग ऊपर की ओर करके लेटे पैर खुले रख क लेटे और कमरे में कम रोशनी वाली लाल बल्ब का इस्तेमाल करें और ध्यान&amp;nbsp;रखे की रूम में शांति हो।ये योग निद्रा अक्सर रातों को सोते वक़्त किया जाता हैं।याद रहे की इसमें आपको सोना नहीं हैं बल्कि पुरे अंदर तक उतरना हैं शरीर का कोई भी अंग हिलना नहीं पड़ता और पूरा ध्यान निर्देश पर करना पड़ता है।हम अगर कुछ हासिल करना&amp;nbsp;चाहे तो ये ध्यान सबसे सटीक बेहतरीन और सरल हैं और इसके फल भी जल्द प्राप्त होते हैं।इसे हम अफर्मेशन डालना भी कहते हैं।अफर्मेशन मतलब दृढ़ कथन ,अभिपुष्टि ,समर्थन जो की हम अगर कुछ पाना चाहते हैं तो हम हमरे दिमाग का रिप्रोग्रम्मिंग करते हैं और हम देखते हैं की चीज़े वहीँ हो रही हैं।&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; तो ये दो&amp;nbsp;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span&gt;ध्यान के प्रकार&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;थे&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt; और यही &lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;मूलाधार चक्र जागरण की विधियाँ&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;भी और भी वैसे कुछ विधियां है जैसे की&amp;nbsp;आप इसी के पिछले&amp;nbsp;लेख पर जायें और वहाँ&amp;nbsp;&lt;b&gt;&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2020/11/kundalini-muladhar-chakra-jagran-vidhi-1-blog-post-.html&quot; target=&quot;_blank&quot;&gt;मूलाधार चक्र जागरण विधियां -१ &lt;/a&gt;&lt;/b&gt;वो भी पढ़िये आप सब जान जाओगे। आप अन्य चक्र भी इसी ध्यान के माध्यम से खोल सकते हैं।आपको कौनसी ध्यान विधि सरल और अच्छी लगी उस प्रकार से आप ध्यान विधि अपना सकते हैं।&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span&gt;&lt;div style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;span&gt;&lt;span style=&quot;background-color: font-size: x-large;&quot;&gt;तो यह थी जानकारी मुझे विश्वास हैं की आपको इस लेख में बहुत सारी जानकारी प्राप्त हुई हैं।अगले लेख में और भी ज्ञान को आपके साथ साँझा करुँगी उस लेख में हम &lt;b&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;i&gt;मूलाधार चक्र को जगाने और संतुलन रखने के लिए कोनसे और उपाय&amp;nbsp;हैं वो जानेंगे।&amp;nbsp;&lt;/i&gt;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;अब मैं अपने वाणी को विराम और आपके कीमती समय को प्रणाम करते हुए फिर आपसे मिलने की&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span&gt;आ&lt;/span&gt;ज्ञा चाहती हूँ ,तब तक आप अपना और अपनों का ख्याल रखे मिलती हूँ अगले लेख में तब तक आप भी ध्यान कीजिये और आनंद में रहिये। आप सभी पर प्रभु की&amp;nbsp;कृपा&lt;/span&gt;&lt;span&gt;&amp;nbsp;हो आपके घर में बरकत रहे और आपका जीवन आबाद रहें।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;h4&gt;&lt;span style=&quot;font-size: x-large;&quot;&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-size: large;&quot;&gt;&lt;span&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span&gt;🙏&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span&gt;जय गुरुदेव ,हर- हर महादेव&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;🙏&lt;/span&gt;&lt;/h4&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;</description><link>https://www.adhyatmikjagat69.co/2020/11/blog-post.html</link><author>noreply@blogger.com (Unknown)</author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEh1beodhVOCdOPnO1YuQqXzwwDguS89B3vrjtWa3zjGGnFxLlBvJrq2JEGXCFQeHSJjlpr9Or8X9YvEzcAwPzQJQy8SWWT-srhGxs6vrY6KXulNvY0i-JwYJ87Zi2Fq-WahmQbXncSzG1zi/s72-w320-h213-c/muladhar-chakra-jagran-vidhiyan-2-saral-dhyan-.jpg" height="72" width="72"/><thr:total>4</thr:total></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-8475792039111759199.post-6846482921021515011</guid><pubDate>Sun, 15 Nov 2020 15:56:00 +0000</pubDate><atom:updated>2023-01-17T14:23:12.387+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">कुण्डलिनी जागरण</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">मूलाधार चक्र</category><title>मूलाधार चक्र जागरण की विधियाँ -२ </title><description>&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;span&gt;आपका बहुत बहुत स्वागत हैं मेरे आध्यात्मिक जगत के लेख में।आप जो इतने प्यारसे और अपना कीमती समय निकलकर मेरे इस लेख पर रुकते हैं ये मेरे लिए आपका सम्मान और प्यार हैं जिसके लिए मैं दिल से धन्यवाद् करती हु और मैं आपसे वादा करती हूँ की आपकी ऐसे ही&amp;nbsp;मैं अपने ज्ञान और अनुभव से आपके जीवन का अंधकार दूर करने की कोशिश करुँगी।आपका प्यार और साथ हमेशा मेरे साथ बनाये रखिये&amp;nbsp;आप मेरे साथ जुड़े रहिये और अपनी समस्या का निवारण लेते रहिये।मुझे विश्वास हैं की आप कुशल मंगल होंगे भगवान आप पर और आपके अपनों पर प्रेम ,आशीर्वाद और&amp;nbsp;कृपा बरसाएं।आज मैं आपके लिए एक और नया विषय लेकर आयी हूँ जो &lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;मूलाधार चक्र&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;से सम्बंधित हैं पिछले लेख में हमने इस चक्र का वर्णन और फायदे नुकसान जाने थे और भी बहुत कुछ जाना था।आज हम इस चक्र को जगाने की विविध प्रकार की &lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;विधियाँ&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;जानेंगे और ये भी की क्या कौनसी ऐसे बातें हैं जो &lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;मूलाधार चक्र को जगाने में मददगार होती हैं।&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&amp;nbsp;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #ea9999; font-size: medium;&quot;&gt;&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/-muladhar-chakra-jagran-vidhiyan-2-saral-dhyan-.jpg&quot; style=&quot;margin-left: 1em; margin-right: 1em;&quot; target=&quot;_blank&quot;&gt;&lt;img alt=&quot;मूलाधार चक्र जागरण की विधियाँ -२ सरल सा ध्यान&quot; border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;426&quot; data-original-width=&quot;640&quot; height=&quot;213&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEh1beodhVOCdOPnO1YuQqXzwwDguS89B3vrjtWa3zjGGnFxLlBvJrq2JEGXCFQeHSJjlpr9Or8X9YvEzcAwPzQJQy8SWWT-srhGxs6vrY6KXulNvY0i-JwYJ87Zi2Fq-WahmQbXncSzG1zi/w320-h213/muladhar-chakra-jagran-vidhiyan-2-saral-dhyan-.jpg&quot; title=&quot;मूलाधार चक्र जागरण की विधियाँ -२ सरल सा ध्यान&quot; width=&quot;320&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;h3 style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000; font-size: large;&quot;&gt;&lt;span&gt;सरल सा ध्यान&lt;/span&gt;&lt;span&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/h3&gt;&lt;div&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;span&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span&gt;यहाँ आपको कुछ करने की ज़रूरत नहीं हैं बस कम्बल के&amp;nbsp;आसन पे बैठ जाना हैं या खुर्ची पे बैठ जाना हैं।कोई भी दिशा और आपके सुविधा अनुसार समय निर्धारित करले&amp;nbsp;और ध्यान लगाना हैं ,आप ये &lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;ध्यान&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;खुली हवा में या फिर किसी शांत कमरे में बैठकर कर सकते हैं।इसमें&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;b&gt; &#39;लं &#39; मंत्र &lt;/b&gt;&lt;/span&gt;का जाप करना हैं और ये सोचना हैं की सब जगह लाल रंग से भरा हुआ हैं&amp;nbsp;मतलब मनन करना हैं कम से कम १/२ घंटा ये आपको रोज़ करना हैं बिना चुके।आप मेरे पिछले लेख पे जाके&amp;nbsp;पढ़ सकते है जहाँ&amp;nbsp;मैंने पूर्ण विस्तार से बताया हैं की &lt;b&gt;&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2020/10/adhyatma-dhyan-ke-niyam-dyan-kriya-kundalini-post.html&quot; target=&quot;_blank&quot;&gt;ध्यान के नियम &lt;/a&gt;&lt;/b&gt;और &lt;b&gt;&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2020/10/adhyatma-dhyan-ke-liye-aavashyak-nirdesh-post10.html&quot; target=&quot;_blank&quot;&gt;ध्यान&amp;nbsp;के निर्देश&lt;/a&gt;&lt;/b&gt; क्या हैं आपको उस लेख में मार्गदर्शन हो जायेगा। फिर आगे क्या होता हैं की&amp;nbsp;धीरे धीरे आप महसूस करेंगे की आपके चक्र व्हायब्रेट हो रहें हैं।आपको बार बार पेशाब की समस्या हो सकती हैं उलटी जैसा मन करेगा ,बुखार भी आ सकता हैं और चक्कर भी और आपकी कामवासना भी बढ़ जाएगी पर आपको अपने मन पर काबू पाना हैं किसी भी हाल में ब्रह्मचर्य तोडना नहीं हैं चाहे कैसी भी हालत हो। ये इसलिए होगा ताकि आपकी ऊर्जा अब ऊपर की ओर&amp;nbsp;उठ रही हैं और ये आपके पूर्वजों की विरासत से आपके खून में&amp;nbsp;आये हुए डीएनए क्लींजिंग हो रही हैं।इसलिए आपकी अलग अलग परीक्षाएं भी होंगी।जैसे आपके पूर्वजों में कोई कमियां या कोई गुनाह किये होंगे तो वो सब आपके डीएनए क्लींजिंग में होंगे। &lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;आपके चक्रों के ऊपर जितने भी जन्मों की प्रतिया&amp;nbsp;चढ़ी होंगी वो सब एक एक करके उतरेंगे।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;फिर&amp;nbsp; आपको हल्का सा महसूस&amp;nbsp;होगा कुछ दिनों बाद आप देखेंगे की आपको अब डर भी नहीं लगता।महादेव कहते हैं साधक ने हमेशा वही चीज़ का सामना&amp;nbsp;करना&amp;nbsp;चाहिए जिससे वो डरता हैं भागता हैं या फिर उसकी जो कोई&amp;nbsp;कमज़ोरी हैं ऐसा करने से वो एक दिन अपने कमियों पे जीत हासिल कर ही लेता हैं, और उसके अन्य चक्र भी जागरूक हो जाते हैं।मेरी मनो तो डर बस हमरा विचार होता हैं और कुछ भी नहीं पर हमारा मन तो हमारे हाथ होता हैं तो इसे कैसे संभालना हैं ये आपको सोचना चाहिए क्यूँकि ये कही शरीर से बहार नहीं जाता फिर क्यूँ सुने इसकी। दिल की आत्मा की सुननी&amp;nbsp;चाहिए क्यूँकि आत्मा की आवाज़ ही परमात्मा की आवाज़ होती हैं।&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;span&gt;&lt;br /&gt;&amp;nbsp;&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/-muladhar-chakra-jagran-vidhiyan-2.jpg&quot; style=&quot;margin-left: 1em; margin-right: 1em;&quot; target=&quot;_blank&quot;&gt;&lt;img alt=&quot;मूलाधार चक्र जागरण की विधियाँ -२ योग निद्रा&quot; border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;433&quot; data-original-width=&quot;640&quot; height=&quot;216&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEimBBWonE_anuFnNAtIQP9DhFlu40-BSUJuSAh4-_8rLMg4AIn9m3lgsx_a81aV-X_X9FKdXZYGaJkHElcDzZdqptQkL79E4VJSBMivIh_JEALD_nciJ0Z5nxjUZUP0V9G6yxYvWxHrUk5a/w320-h216/muladhar-chakra-jagran-vidhiyan-2.jpg&quot; title=&quot;मूलाधार चक्र जागरण की विधियाँ -२ योग निद्रा&quot; width=&quot;320&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;h3 style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;span&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000; font-size: large;&quot;&gt;योग निद्रा&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;color: #93c47d; font-size: large;&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;color: #800180; font-size: large;&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/h3&gt;&lt;div&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;ये भी एक ध्यान का प्रकार है इसमें आपको लेटना पड़ता हैं और पूरा &lt;i&gt;&lt;b&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;ध्यान&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;color: #f6b26b;&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/i&gt;संगीत की धुन पर, शरीर के अंग पर या फिर गुरु के आवाज़ और शब्दों पर केंदरीत&amp;nbsp;करना पड़ता हैं इसे एक प्रकार से रेकी भी कहते हैं, जो किसी खास उपचार के&amp;nbsp;लिए भी प्रयोग किया जाता हैं।इसे &lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;साउंड थेरेपी पे भी ध्यान किया जाता हैं&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;।इसमें आपको बस लेटना पड़ता है आपके पुरे शरीर के&amp;nbsp;अंग - अंग को ढीला कर देना पड़ता हैं और कोई भी शरीर का अंग किसी अंग से चिपके न रखे ,हथेली का नरम भाग ऊपर की ओर करके लेटे पैर खुले रख क लेटे और कमरे में कम रोशनी वाली लाल बल्ब का इस्तेमाल करें और ध्यान&amp;nbsp;रखे की रूम में शांति हो।ये योग निद्रा अक्सर रातों को सोते वक़्त किया जाता हैं।याद रहे की इसमें आपको सोना नहीं हैं बल्कि पुरे अंदर तक उतरना हैं शरीर का कोई भी अंग हिलना नहीं पड़ता और पूरा ध्यान निर्देश पर करना पड़ता है।हम अगर कुछ हासिल करना&amp;nbsp;चाहे तो ये ध्यान सबसे सटीक बेहतरीन और सरल हैं और इसके फल भी जल्द प्राप्त होते हैं।इसे हम अफर्मेशन डालना भी कहते हैं।अफर्मेशन मतलब दृढ़ कथन ,अभिपुष्टि ,समर्थन जो की हम अगर कुछ पाना चाहते हैं तो हम हमरे दिमाग का रिप्रोग्रम्मिंग करते हैं और हम देखते हैं की चीज़े वहीँ हो रही हैं।&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; तो ये दो&amp;nbsp;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span&gt;ध्यान के प्रकार&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;थे&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt; और यही &lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;मूलाधार चक्र जागरण की विधियाँ&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;भी और भी वैसे कुछ विधियां है जैसे की&amp;nbsp;आप इसी के पिछले&amp;nbsp;लेख पर जायें और वहाँ&amp;nbsp;&lt;b&gt;&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2020/11/kundalini-muladhar-chakra-jagran-vidhi-1-blog-post-.html&quot; target=&quot;_blank&quot;&gt;मूलाधार चक्र जागरण विधियां -१ &lt;/a&gt;&lt;/b&gt;वो भी पढ़िये आप सब जान जाओगे। आप अन्य चक्र भी इसी ध्यान के माध्यम से खोल सकते हैं।आपको कौनसी ध्यान विधि सरल और अच्छी लगी उस प्रकार से आप ध्यान विधि अपना सकते हैं।&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span&gt;&lt;div style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;span&gt;&lt;span style=&quot;background-color: font-size: x-large;&quot;&gt;तो यह थी जानकारी मुझे विश्वास हैं की आपको इस लेख में बहुत सारी जानकारी प्राप्त हुई हैं।अगले लेख में और भी ज्ञान को आपके साथ साँझा करुँगी उस लेख में हम &lt;b&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;i&gt;मूलाधार चक्र को जगाने और संतुलन रखने के लिए कोनसे और उपाय&amp;nbsp;हैं वो जानेंगे।&amp;nbsp;&lt;/i&gt;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;अब मैं अपने वाणी को विराम और आपके कीमती समय को प्रणाम करते हुए फिर आपसे मिलने की&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span&gt;आ&lt;/span&gt;ज्ञा चाहती हूँ ,तब तक आप अपना और अपनों का ख्याल रखे मिलती हूँ अगले लेख में तब तक आप भी ध्यान कीजिये और आनंद में रहिये। आप सभी पर प्रभु की&amp;nbsp;कृपा&lt;/span&gt;&lt;span&gt;&amp;nbsp;हो आपके घर में बरकत रहे और आपका जीवन आबाद रहें।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;h4&gt;&lt;span style=&quot;font-size: x-large;&quot;&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-size: large;&quot;&gt;&lt;span&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span&gt;🙏&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span&gt;जय गुरुदेव ,हर- हर महादेव&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;🙏&lt;/span&gt;&lt;/h4&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;</description><link>https://www.adhyatmikjagat69.co/2020/11/kundalini-muladhar-chakra-jagran-vidhiyan-2-post.html</link><author>noreply@blogger.com (Unknown)</author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEh1beodhVOCdOPnO1YuQqXzwwDguS89B3vrjtWa3zjGGnFxLlBvJrq2JEGXCFQeHSJjlpr9Or8X9YvEzcAwPzQJQy8SWWT-srhGxs6vrY6KXulNvY0i-JwYJ87Zi2Fq-WahmQbXncSzG1zi/s72-w320-h213-c/muladhar-chakra-jagran-vidhiyan-2-saral-dhyan-.jpg" height="72" width="72"/><thr:total>4</thr:total></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-8475792039111759199.post-6131500090256510003</guid><pubDate>Tue, 03 Nov 2020 12:02:00 +0000</pubDate><atom:updated>2024-09-28T15:50:35.745+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">कुण्डलिनी जागरण</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">मूलाधार चक्र</category><title>मूलाधार चक्र जागरण की विधियाँ -१ </title><description>&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;b style=&quot;font-size: large;&quot;&gt;&lt;span&gt;आपका बहुत बहुत स्वागत हैं मेरे आध्यात्मिक जगत के लेख में।आप जो इतने प्यारसे और अपना कीमती समय निकलकर मेरे इस लेख पर रुकते हैं ये मेरे लिए आपका सम्मान और प्यार हैं जिसके लिए मैं दिल से धन्यवाद् करती हु और मैं आपसे वादा करती हूँ की आपकी ऐसे ही&amp;nbsp;मैं अपने ज्ञान और अनुभव से आपके जीवन का अंधकार दूर करने की कोशिश करुँगी।आपका प्यार और साथ हमेशा मेरे साथ बनाये रखिये&amp;nbsp;आप मेरे साथ जुड़े रहिये और अपनी समस्या का निवारण लेते रहिये। मुझे विश्वास हैं की आप कुशल मंगल होंगे भगवान आप पर और आपके अपनों पर प्रेम ,आशीर्वाद और&amp;nbsp;कृपा बरसाएं। आज मैं आपके लिए एक और नया विषय लेकर आयी हूँ जो मूलाधार चक्र&amp;nbsp; से सम्बंधित हैं पिछले लेख में हमने इस&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2020/10/muladhar-chakra-varnan.html&quot; rel=&quot;nofollow&quot;&gt; चक्र का वर्णन&lt;/a&gt; और&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2020/10/muladhar-chakr-fayde-nuksan-post11.html&quot; rel=&quot;nofollow&quot;&gt; फायदे नुकसान &lt;/a&gt;जाने थे और भी बहुत कुछ जाना था। आज&amp;nbsp;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;मूलाधार&amp;nbsp;चक्र&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;को जगाने की विविध प्रकार की&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;i&gt;&lt;span&gt;विधियाँ&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/span&gt;जानेंगे और ये भी की क्या कौनसी ऐसे बातें हैं जो&amp;nbsp;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;मूलाधार चक्र को जगाने&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;में मददगार होती हैं।&lt;/span&gt;&lt;span&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;h3&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000; font-size: large;&quot;&gt;त्राटक ध्यान&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;color: #ffa400; font-size: large;&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/h3&gt;&lt;div&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; ये विधि बहुत सरल हैं या फिर कहूँ&amp;nbsp;की मुश्किल भी। मुश्किल इसलिए क्यूँकि इसमें आपकी आँखों की समस्या हो सकती है इसमें ज़्यादा देर बैठने की क्षमता शायद आपमें न हो और इसमें डर की भी समस्या होती हैं।पर अगर डर को हम काबू में रखे तो इसमें डर जैसे कोई बात ही नहीं। मैंने पिछले ही ध्यान के लेख में ही बता दिया था की डर एक विचार हैं जो हमें सिर्फ देखना हैं की ये कब तक हमपे हावी होने की कोशिश करता हैं।पर अगर आपके मन को आप वश में नहीं करेंगे तो आप कैसे कोई चीज़ हासिल कर सकते हैं और वो कहावत भी तो सही हैं की डर के आगे जीत हैं। तो डरिये मत हौसला बनाये रखे और आगे बढिए।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &lt;i&gt;&lt;b&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;span&gt;त्राटक विधि&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&amp;nbsp;हम तीसरी आँख खोलने के लिए भी करते हैं&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/i&gt; और मूलाधार चक्र को खोलने के लिए भी ,आपको बता दूँ की मूलाधार का संबंध&amp;nbsp;तीसरी आँख मतलब छठी&amp;nbsp;इंद्री से सम्बंधित हैं जिसे हम पीनियल ग्लॅंड कहते हैं। इसलिए अगर आप तीसरी आँख खोलना चाहते हैं तो आपको सबसे पहले&amp;nbsp;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span&gt;मूलाधार चक्र&amp;nbsp; को जागरूक&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;करना&amp;nbsp;होगा और सबसे ज़्यादा मुश्किल तो&amp;nbsp;&lt;span&gt;मूलाधार चक्र&amp;nbsp; को जागरूक&lt;/span&gt;&amp;nbsp; करना होता हैं। क्यूंकि इसके जागने के बाद ही सारे चक्र आसानी से खुलते हैं। क्यूँकि ये चक्र पृथ्वी तत्त्व से सम्बंधित हैं और इसका अर्थ हैं की शरीर का भौतिक यानि पृथ्वी से जुड़े रहना। इसमें कुछ नहीं करना हैं आपको बस कुछ नियम पालन करने हैं&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;ul&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;एक कोई भी खाली कक्ष चुन ले जहाँ कोई आता जाता न हो या फिर आपको कोई ज्यादा परेशान न करता हो।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;कमरा साफ़ सुथरा और सुगन्धित हो।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;कमरे में शुद्ध वातावरण के लिए आप धुप या अगरबत्ती जलाके रखदे , इससे आपका मन&amp;nbsp;शांत और प्रसन्न रहेगा।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;कोई भी आसन लेले ,या आप जिस पर साधना करते हैं वो लेले या फिर कोई भी कम्बल का आसान ले&amp;nbsp;एक मोमबत्ती या दिया जलाले।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;साफ़ सुथरे और ढीले ढाले वस्त्र पहन&amp;nbsp;ले।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;कमरे में थोड़ा अँधेरा करले इतना की थोड़ी धीमी सी रौशनी भी अंदर रहे।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;पंखा और बत्ती बंद ही रखे।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;अगर निचे बैठने में तकलीफ हैं किसी कारणवश तो आप खुर्ची या पलंग पर बैठ कर भी&amp;nbsp;&lt;span&gt;त्राटक&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;ध्यान कर सकते हैं।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;अगर आपके गुरदेव हैं तो पहले एक माला उनका मंत्र जाप करें और उनसे आज्ञा ले आशीर्वाद ले और अपनी सुरक्षा की भी प्रार्थना करें।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;सुरक्षा घेरा बना ले गुरुमंत्र से या फिर अगर आपके गुरु नहीं तो आप महादेव या फिर जो भी आपके इष्ट देवता हैं तो उनका मंत्र १०८ बार जाप ले और बुभुति या पीली सरसों की दाल हाथ में&amp;nbsp;लेकर आपके गुरु मंत्र का या फिर इष्ट मंत्र का १०८ बार जाप करले और अपने चारों ओर गोलाकार में ये विभूति या सरसों की पीली दाल से गोलाकार सुरक्षा कवच बनाले।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;आप चाहे तो हनुमान चालीसा भी पढ़ सकते हैं ये वो लोग करे जिनके कोई गुरु नहीं हैं।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;अब आप एक समय निर्धारित कर लिजिए की किस समय आप ध्यान करने बैठेंगे ? ऐसा इसलिए की इससे आपकी ऊर्जा उस समय में आपके मष्तिष्क को तैयार करती हैं ये एक प्राकृतिक सन्देश देती हैं। इसलिए समय ,आसन ,दिशा और मंत्र एक ही होना चाहिए।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;थोड़ा प्राणायाम करले अनुलोम - विलोम और भस्त्रिका।अगर आपका निम्न रक्तचाप&amp;nbsp;( बी.पी. लौ) रहता है तो भस्त्रिका न करे। सिर्फ अनुलोम - विलोम और दीर्घश्वासन ही करें।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;span&gt;मोमबत्ती या जलता दिया एकदम नज़रों के&amp;nbsp;सामने रखे न ऊपर न निचे रखे ,&lt;/span&gt;&lt;span&gt;शुरुवाती दिनों में आप सिर्फ १० -१५ मि तक एकट&lt;/span&gt;&lt;span&gt;क दिये&lt;/span&gt;&lt;span&gt;&amp;nbsp;या मोम के लौ रौशनी को देखते रहिये।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;आपकी आँखों से पानी आने तक देखते रहिये फिर थोड़ी देर आँखे बंद करले फिर यही प्रक्रिया दोहराइये.&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;धीरे धीरे आप अपना ध्यान का समय बढ़ा देना, आँखों पर ज़्यादा तान मत दीजियेगा इससे आपकी आँखो की रोशनी&amp;nbsp;भी जा सकती हैं।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;इसलिए इस&amp;nbsp;&lt;span&gt;त्राटक&lt;/span&gt;&amp;nbsp; ध्यान को निर्देशक के अनुसार ही करें।जल्दबाज़ी&amp;nbsp;न करें।&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;कुछ दिन के बाद आपको वो रोशनी दिखना बंद होगी, रोशनी&amp;nbsp;देखते ही देखते आएगी और फिर गायब हो जाएगी ,मगर घबराये नहीं वो बस आपके मन का खेल होगा जो आपको सिर्फ और सिर्फ डरायेगा आपको हिम्मत रखनी हैं घबराये नहीं।&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;आपको ऐसा महसूस होगा जैसे कमरे में कोई आपके अलावा भी हैं मगर आपको ध्यान नहीं देना हैं आप &lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;अपने&amp;nbsp;&lt;i&gt;&lt;span&gt;त्राटक&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;को करते रहना हैं उठना नहीं हैं &lt;/span&gt;जब तक आपका ध्यान पूरा नहीं होता।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;आप चाहें तो त्राटक करते करते मन में&amp;nbsp;आपके गुरु मन्त्र या इष्ट देवता का मंत्र जाप कर सकते है।&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;त्राटक से पहले और बाद में गुरु मंत्र ,इष्ट देवता मंत्र या हनुमान चालीसा पढ़ सकते हैं&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;इससे आपको सुरक्षा मिलती रहेगी ,और आपका दर भी आप पे हावी नहीं होगा।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;h3&gt;&lt;span style=&quot;color: #ffa400;&quot;&gt;&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2020/11/kundalini-muladhar-chakra-jagran-vidhi-1-blog-post-.html&quot; rel=&quot;&quot; style=&quot;margin-left: 1em; margin-right: 1em;&quot;&gt;&lt;img alt=&quot;मूलाधार चक्र जागरण की विधियाँ -१ -त्राटक&quot; border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;278&quot; data-original-width=&quot;400&quot; height=&quot;222&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj4w331_8Y08EDHAqhPFSJetiIX13XZWxR4-gtcEX0lweO1L7i_6AlwtzXwvn6ORX08AlyU3GqHfVEMX3FeHzlKOcNJSBSxSecGEkBq6AqO-cr19DARDn6UjnR6uH41RBLG00IKY1ix0gWv/w320-h222/%25E0%25A4%25AE%25E0%25A5%2582%25E0%25A4%25B2%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25A7%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25B0-%25E0%25A4%259A%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B0-%25E0%25A4%259C%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%2597%25E0%25A4%25B0%25E0%25A4%25A3-%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%2580-%25E0%25A4%25B5%25E0%25A4%25BF%25E0%25A4%25A7%25E0%25A4%25BF%25E0%25A4%25AF%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%2581-%25E0%25A5%25A7.jpg&quot; title=&quot;मूलाधार चक्र जागरण की विधियाँ -१ -त्राटक&quot; width=&quot;320&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;/span&gt;&lt;/h3&gt;&lt;h3&gt;&lt;span&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000; font-size: large;&quot;&gt;त्राटक&amp;nbsp; विधि २&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/h3&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;ul&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;जैसी&lt;b&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;i&gt; पहली&amp;nbsp;&lt;span&gt;विधि&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&amp;nbsp;है बस वैसी है ,बस आपको एक कोरा कागज़ लेना हैं&amp;nbsp; उस पर एक काले या लाल कलम से एक बड़ा सा गोलाकार बनाना हैं फिर उसे पूरा लाल या काले कलम से रंग देना हैं मतलब पूरा गोलाकार भर देना हैं।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;ध्यान रहें की उस गोलाकार के बहार स्याही न जाये।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;उस कागज़ को अपने सामने दीवार पे चिपका दे निचे भी नहीं और ऊपर भी नहीं आपके गर्दन के एक रेशा में ही चिपकाना हैं ठीक आपके आँखों के सामने&amp;nbsp;फिर उसे भी एक टक देखते रहना हैं।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;ऐसा रोज़ १/२ घंटा या उससे भी ज़्यादा समय तक त्राटक करना हैं।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;आँखों का ख्याल रखें या फिर डॉक्टर से परामर्श लेकर ही करें।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;आपको वही अनुभूति होगी ध्यान रखिये अलग अलग साधक के अलग अलग अनुभव होते हैं किसी किसी को नहीं भी होते हैं इसलिए आप चिंता न करें।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;आँखों से पानी आता रहेगा शुरुवाती दिनों में पर आपको ध्यान छोड़ना नहीं हैं हाँ , अगर आपके आँखों में जलन या दर्द कर रही हैं तो रुक जाइये जब आँखे ठीक होंगी तब करना ज़रूर।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;आपको अंतर नहीं देना हैं ध्यान करते रहना हैं।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;आप देखेंगे की आपका ध्यान भी लग रहा हैं और अलग अलग अनुभव भी होंगे पर आपको किसी से इस बारे में बात करने की ज़रूरत नहीं।&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;पर यदि आपको कोई भी परेशानी हैं तो आप किसी एक्सपर्ट से बात कर सकते हैं।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;h3&gt;&lt;span style=&quot;color: red; font-size: large;&quot;&gt;सावधानी :-&lt;/span&gt;&lt;/h3&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style=&quot;font-size: x-large;&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;त्राटक&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&amp;nbsp; के&amp;nbsp;बाद आँखों को&amp;nbsp;ठंडे&amp;nbsp;पानी से&amp;nbsp;ज़रूर धोए, और गुलाब जल से भीगी रुई या ककड़ी के टुकड़े २० मि. आँखों पर रखें।&amp;nbsp;सुरक्षा के लिए हमेशा गुरु मंत्र या इष्ट देवता&amp;nbsp;मंत्र&amp;nbsp;या हनुमान चालीसा ज़रूर पढ़े। इस विषय में किसी से चर्चा न करें आवश्यक हो तो किसी&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2020/10/guruvani-guru-gyan-post89.html&quot; rel=&quot;nofollow&quot;&gt; गुरु की सलाह &lt;/a&gt;ज़रूर ले। इसे करने के लिए या चक्रों को&amp;nbsp;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;जागरूक&amp;nbsp;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&amp;nbsp;करने के लिए किसी योग्य गुरु से दीक्षा ले फिर साधना करें।इससे आपको बहुत जल्दी और अच्छे परिणाम देखने को मिलेंग। कभी कभी आपको लगेगा की आप हवे&amp;nbsp;में उड़ रहें हैं या आपका शरीर हल्का हो रहा हैं तो ऐसे में घबराना नहीं हैं और न ही आपको ध्यान देना हैं ऐसी बातों पर नहीं तो आप जो पाना चाहते हैं वो नहीं हासिल होगा और&amp;nbsp;क्यूँकि ये अनुभव फिर बाद में भी नहीं होंगे।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;background-color: font-size: x-large;&quot;&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; तो यह थी जानकारी मुझे विश्वास हैं की आपको इस लेख में बहुत सारी जानकारी प्राप्त हुई हैं।अगले लेख में और भी ज्ञान को आपके साथ साँझा करुँगी उस लेख में हम&amp;nbsp;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;मूलाधार चक्र को जगाने&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;और संतुलन रखने के लिए कोनसे योगासन और मुद्रायें हैं वो जानेंगे।अब मैं अपने वाणी को विराम और आपके कीमती समय को प्रणाम करते हुए फिर आपसे मिलने की&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span&gt;आ&lt;/span&gt;ज्ञा चाहती हूँ ,तब तक आप अपना और अपनों का ख्याल रखे मिलती हूँ अगले लेख में तब तक आप भी ध्यान कीजिये और आनंद में रहिये।आप सभी पर&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;span&gt;प्रभु&lt;/span&gt;&lt;span&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;background-color: font-size: x-large;&quot;&gt;की&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span&gt;कृपा&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span&gt;रहें&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span&gt;आपके घर में बरकत रहे और आपका जीवन आबाद रहें।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;h3 style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-size: x-large;&quot;&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;span&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span&gt;🙏&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span&gt;जय गुरुदेव ,हर- हर महादेव&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;🙏&lt;/span&gt;&lt;/h3&gt;</description><link>https://www.adhyatmikjagat69.co/2020/11/blog-post_3.html</link><author>noreply@blogger.com (Unknown)</author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj4w331_8Y08EDHAqhPFSJetiIX13XZWxR4-gtcEX0lweO1L7i_6AlwtzXwvn6ORX08AlyU3GqHfVEMX3FeHzlKOcNJSBSxSecGEkBq6AqO-cr19DARDn6UjnR6uH41RBLG00IKY1ix0gWv/s72-w320-h222-c/%25E0%25A4%25AE%25E0%25A5%2582%25E0%25A4%25B2%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25A7%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25B0-%25E0%25A4%259A%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B0-%25E0%25A4%259C%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%2597%25E0%25A4%25B0%25E0%25A4%25A3-%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%2580-%25E0%25A4%25B5%25E0%25A4%25BF%25E0%25A4%25A7%25E0%25A4%25BF%25E0%25A4%25AF%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%2581-%25E0%25A5%25A7.jpg" height="72" width="72"/><thr:total>0</thr:total></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-8475792039111759199.post-7788348691994412942</guid><pubDate>Tue, 03 Nov 2020 12:02:00 +0000</pubDate><atom:updated>2023-01-17T14:19:55.267+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">कुण्डलिनी जागरण</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">मूलाधार चक्र</category><title>मूलाधार चक्र जागरण की विधियाँ -१ </title><description>&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;b style=&quot;font-size: large;&quot;&gt;&lt;span&gt;आपका बहुत बहुत स्वागत हैं मेरे आध्यात्मिक जगत के लेख में।आप जो इतने प्यारसे और अपना कीमती समय निकलकर मेरे इस लेख पर रुकते हैं ये मेरे लिए आपका सम्मान और प्यार हैं जिसके लिए मैं दिल से धन्यवाद् करती हु और मैं आपसे वादा करती हूँ की आपकी ऐसे ही&amp;nbsp;मैं अपने ज्ञान और अनुभव से आपके जीवन का अंधकार दूर करने की कोशिश करुँगी।आपका प्यार और साथ हमेशा मेरे साथ बनाये रखिये&amp;nbsp;आप मेरे साथ जुड़े रहिये और अपनी समस्या का निवारण लेते रहिये। मुझे विश्वास हैं की आप कुशल मंगल होंगे भगवान आप पर और आपके अपनों पर प्रेम ,आशीर्वाद और&amp;nbsp;कृपा बरसाएं। आज मैं आपके लिए एक और नया विषय लेकर आयी हूँ जो मूलाधार चक्र&amp;nbsp; से सम्बंधित हैं पिछले लेख में हमने इस&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2020/10/muladhar-chakra-varnan.html&quot; rel=&quot;nofollow&quot;&gt; चक्र का वर्णन&lt;/a&gt; और&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2020/10/muladhar-chakr-fayde-nuksan-post11.html&quot; rel=&quot;nofollow&quot;&gt; फायदे नुकसान &lt;/a&gt;जाने थे और भी बहुत कुछ जाना था। आज&amp;nbsp;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;मूलाधार&amp;nbsp;चक्र&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;को जगाने की विविध प्रकार की&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;i&gt;&lt;span&gt;विधियाँ&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/span&gt;जानेंगे और ये भी की क्या कौनसी ऐसे बातें हैं जो&amp;nbsp;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;मूलाधार चक्र को जगाने&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;में मददगार होती हैं।&lt;/span&gt;&lt;span&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;h3&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000; font-size: large;&quot;&gt;त्राटक ध्यान&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;color: #ffa400; font-size: large;&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/h3&gt;&lt;div&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; ये विधि बहुत सरल हैं या फिर कहूँ&amp;nbsp;की मुश्किल भी। मुश्किल इसलिए क्यूँकि इसमें आपकी आँखों की समस्या हो सकती है इसमें ज़्यादा देर बैठने की क्षमता शायद आपमें न हो और इसमें डर की भी समस्या होती हैं।पर अगर डर को हम काबू में रखे तो इसमें डर जैसे कोई बात ही नहीं। मैंने पिछले ही ध्यान के लेख में ही बता दिया था की डर एक विचार हैं जो हमें सिर्फ देखना हैं की ये कब तक हमपे हावी होने की कोशिश करता हैं।पर अगर आपके मन को आप वश में नहीं करेंगे तो आप कैसे कोई चीज़ हासिल कर सकते हैं और वो कहावत भी तो सही हैं की डर के आगे जीत हैं। तो डरिये मत हौसला बनाये रखे और आगे बढिए।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &lt;i&gt;&lt;b&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;span&gt;त्राटक विधि&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&amp;nbsp;हम तीसरी आँख खोलने के लिए भी करते हैं&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/i&gt; और मूलाधार चक्र को खोलने के लिए भी ,आपको बता दूँ की मूलाधार का संबंध&amp;nbsp;तीसरी आँख मतलब छठी&amp;nbsp;इंद्री से सम्बंधित हैं जिसे हम पीनियल ग्लॅंड कहते हैं। इसलिए अगर आप तीसरी आँख खोलना चाहते हैं तो आपको सबसे पहले&amp;nbsp;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span&gt;मूलाधार चक्र&amp;nbsp; को जागरूक&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;करना&amp;nbsp;होगा और सबसे ज़्यादा मुश्किल तो&amp;nbsp;&lt;span&gt;मूलाधार चक्र&amp;nbsp; को जागरूक&lt;/span&gt;&amp;nbsp; करना होता हैं। क्यूंकि इसके जागने के बाद ही सारे चक्र आसानी से खुलते हैं। क्यूँकि ये चक्र पृथ्वी तत्त्व से सम्बंधित हैं और इसका अर्थ हैं की शरीर का भौतिक यानि पृथ्वी से जुड़े रहना। इसमें कुछ नहीं करना हैं आपको बस कुछ नियम पालन करने हैं&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;ul&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;एक कोई भी खाली कक्ष चुन ले जहाँ कोई आता जाता न हो या फिर आपको कोई ज्यादा परेशान न करता हो।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;कमरा साफ़ सुथरा और सुगन्धित हो।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;कमरे में शुद्ध वातावरण के लिए आप धुप या अगरबत्ती जलाके रखदे , इससे आपका मन&amp;nbsp;शांत और प्रसन्न रहेगा।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;कोई भी आसन लेले ,या आप जिस पर साधना करते हैं वो लेले या फिर कोई भी कम्बल का आसान ले&amp;nbsp;एक मोमबत्ती या दिया जलाले।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;साफ़ सुथरे और ढीले ढाले वस्त्र पहन&amp;nbsp;ले।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;कमरे में थोड़ा अँधेरा करले इतना की थोड़ी धीमी सी रौशनी भी अंदर रहे।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;पंखा और बत्ती बंद ही रखे।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;अगर निचे बैठने में तकलीफ हैं किसी कारणवश तो आप खुर्ची या पलंग पर बैठ कर भी&amp;nbsp;&lt;span&gt;त्राटक&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;ध्यान कर सकते हैं।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;अगर आपके गुरदेव हैं तो पहले एक माला उनका मंत्र जाप करें और उनसे आज्ञा ले आशीर्वाद ले और अपनी सुरक्षा की भी प्रार्थना करें।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;सुरक्षा घेरा बना ले गुरुमंत्र से या फिर अगर आपके गुरु नहीं तो आप महादेव या फिर जो भी आपके इष्ट देवता हैं तो उनका मंत्र १०८ बार जाप ले और बुभुति या पीली सरसों की दाल हाथ में&amp;nbsp;लेकर आपके गुरु मंत्र का या फिर इष्ट मंत्र का १०८ बार जाप करले और अपने चारों ओर गोलाकार में ये विभूति या सरसों की पीली दाल से गोलाकार सुरक्षा कवच बनाले।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;आप चाहे तो हनुमान चालीसा भी पढ़ सकते हैं ये वो लोग करे जिनके कोई गुरु नहीं हैं।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;अब आप एक समय निर्धारित कर लिजिए की किस समय आप ध्यान करने बैठेंगे ? ऐसा इसलिए की इससे आपकी ऊर्जा उस समय में आपके मष्तिष्क को तैयार करती हैं ये एक प्राकृतिक सन्देश देती हैं। इसलिए समय ,आसन ,दिशा और मंत्र एक ही होना चाहिए।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;थोड़ा प्राणायाम करले अनुलोम - विलोम और भस्त्रिका।अगर आपका निम्न रक्तचाप&amp;nbsp;( बी.पी. लौ) रहता है तो भस्त्रिका न करे। सिर्फ अनुलोम - विलोम और दीर्घश्वासन ही करें।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;span&gt;मोमबत्ती या जलता दिया एकदम नज़रों के&amp;nbsp;सामने रखे न ऊपर न निचे रखे ,&lt;/span&gt;&lt;span&gt;शुरुवाती दिनों में आप सिर्फ १० -१५ मि तक एकट&lt;/span&gt;&lt;span&gt;क दिये&lt;/span&gt;&lt;span&gt;&amp;nbsp;या मोम के लौ रौशनी को देखते रहिये।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;आपकी आँखों से पानी आने तक देखते रहिये फिर थोड़ी देर आँखे बंद करले फिर यही प्रक्रिया दोहराइये.&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;धीरे धीरे आप अपना ध्यान का समय बढ़ा देना, आँखों पर ज़्यादा तान मत दीजियेगा इससे आपकी आँखो की रोशनी&amp;nbsp;भी जा सकती हैं।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;इसलिए इस&amp;nbsp;&lt;span&gt;त्राटक&lt;/span&gt;&amp;nbsp; ध्यान को निर्देशक के अनुसार ही करें।जल्दबाज़ी&amp;nbsp;न करें।&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;कुछ दिन के बाद आपको वो रोशनी दिखना बंद होगी, रोशनी&amp;nbsp;देखते ही देखते आएगी और फिर गायब हो जाएगी ,मगर घबराये नहीं वो बस आपके मन का खेल होगा जो आपको सिर्फ और सिर्फ डरायेगा आपको हिम्मत रखनी हैं घबराये नहीं।&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;आपको ऐसा महसूस होगा जैसे कमरे में कोई आपके अलावा भी हैं मगर आपको ध्यान नहीं देना हैं आप &lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;अपने&amp;nbsp;&lt;i&gt;&lt;span&gt;त्राटक&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;को करते रहना हैं उठना नहीं हैं &lt;/span&gt;जब तक आपका ध्यान पूरा नहीं होता।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;आप चाहें तो त्राटक करते करते मन में&amp;nbsp;आपके गुरु मन्त्र या इष्ट देवता का मंत्र जाप कर सकते है।&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;त्राटक से पहले और बाद में गुरु मंत्र ,इष्ट देवता मंत्र या हनुमान चालीसा पढ़ सकते हैं&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;इससे आपको सुरक्षा मिलती रहेगी ,और आपका दर भी आप पे हावी नहीं होगा।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;h3&gt;&lt;span style=&quot;color: #ffa400;&quot;&gt;&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2020/11/kundalini-muladhar-chakra-jagran-vidhi-1-blog-post-.html&quot; rel=&quot;&quot; style=&quot;margin-left: 1em; margin-right: 1em;&quot;&gt;&lt;img alt=&quot;मूलाधार चक्र जागरण की विधियाँ -१ -त्राटक&quot; border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;278&quot; data-original-width=&quot;400&quot; height=&quot;222&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj4w331_8Y08EDHAqhPFSJetiIX13XZWxR4-gtcEX0lweO1L7i_6AlwtzXwvn6ORX08AlyU3GqHfVEMX3FeHzlKOcNJSBSxSecGEkBq6AqO-cr19DARDn6UjnR6uH41RBLG00IKY1ix0gWv/w320-h222/%25E0%25A4%25AE%25E0%25A5%2582%25E0%25A4%25B2%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25A7%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25B0-%25E0%25A4%259A%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B0-%25E0%25A4%259C%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%2597%25E0%25A4%25B0%25E0%25A4%25A3-%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%2580-%25E0%25A4%25B5%25E0%25A4%25BF%25E0%25A4%25A7%25E0%25A4%25BF%25E0%25A4%25AF%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%2581-%25E0%25A5%25A7.jpg&quot; title=&quot;मूलाधार चक्र जागरण की विधियाँ -१ -त्राटक&quot; width=&quot;320&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;/span&gt;&lt;/h3&gt;&lt;h3&gt;&lt;span&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000; font-size: large;&quot;&gt;त्राटक&amp;nbsp; विधि २&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/h3&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;ul&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;जैसी&lt;b&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;i&gt; पहली&amp;nbsp;&lt;span&gt;विधि&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&amp;nbsp;है बस वैसी है ,बस आपको एक कोरा कागज़ लेना हैं&amp;nbsp; उस पर एक काले या लाल कलम से एक बड़ा सा गोलाकार बनाना हैं फिर उसे पूरा लाल या काले कलम से रंग देना हैं मतलब पूरा गोलाकार भर देना हैं।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;ध्यान रहें की उस गोलाकार के बहार स्याही न जाये।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;उस कागज़ को अपने सामने दीवार पे चिपका दे निचे भी नहीं और ऊपर भी नहीं आपके गर्दन के एक रेशा में ही चिपकाना हैं ठीक आपके आँखों के सामने&amp;nbsp;फिर उसे भी एक टक देखते रहना हैं।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;ऐसा रोज़ १/२ घंटा या उससे भी ज़्यादा समय तक त्राटक करना हैं।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;आँखों का ख्याल रखें या फिर डॉक्टर से परामर्श लेकर ही करें।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;आपको वही अनुभूति होगी ध्यान रखिये अलग अलग साधक के अलग अलग अनुभव होते हैं किसी किसी को नहीं भी होते हैं इसलिए आप चिंता न करें।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;आँखों से पानी आता रहेगा शुरुवाती दिनों में पर आपको ध्यान छोड़ना नहीं हैं हाँ , अगर आपके आँखों में जलन या दर्द कर रही हैं तो रुक जाइये जब आँखे ठीक होंगी तब करना ज़रूर।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;आपको अंतर नहीं देना हैं ध्यान करते रहना हैं।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;आप देखेंगे की आपका ध्यान भी लग रहा हैं और अलग अलग अनुभव भी होंगे पर आपको किसी से इस बारे में बात करने की ज़रूरत नहीं।&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;पर यदि आपको कोई भी परेशानी हैं तो आप किसी एक्सपर्ट से बात कर सकते हैं।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;h3&gt;&lt;span style=&quot;color: red; font-size: large;&quot;&gt;सावधानी :-&lt;/span&gt;&lt;/h3&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style=&quot;font-size: x-large;&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;त्राटक&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&amp;nbsp; के&amp;nbsp;बाद आँखों को&amp;nbsp;ठंडे&amp;nbsp;पानी से&amp;nbsp;ज़रूर धोए, और गुलाब जल से भीगी रुई या ककड़ी के टुकड़े २० मि. आँखों पर रखें।&amp;nbsp;सुरक्षा के लिए हमेशा गुरु मंत्र या इष्ट देवता&amp;nbsp;मंत्र&amp;nbsp;या हनुमान चालीसा ज़रूर पढ़े। इस विषय में किसी से चर्चा न करें आवश्यक हो तो किसी&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2020/10/guruvani-guru-gyan-post89.html&quot; rel=&quot;nofollow&quot;&gt; गुरु की सलाह &lt;/a&gt;ज़रूर ले। इसे करने के लिए या चक्रों को&amp;nbsp;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;जागरूक&amp;nbsp;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&amp;nbsp;करने के लिए किसी योग्य गुरु से दीक्षा ले फिर साधना करें।इससे आपको बहुत जल्दी और अच्छे परिणाम देखने को मिलेंग। कभी कभी आपको लगेगा की आप हवे&amp;nbsp;में उड़ रहें हैं या आपका शरीर हल्का हो रहा हैं तो ऐसे में घबराना नहीं हैं और न ही आपको ध्यान देना हैं ऐसी बातों पर नहीं तो आप जो पाना चाहते हैं वो नहीं हासिल होगा और&amp;nbsp;क्यूँकि ये अनुभव फिर बाद में भी नहीं होंगे।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;background-color: font-size: x-large;&quot;&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; तो यह थी जानकारी मुझे विश्वास हैं की आपको इस लेख में बहुत सारी जानकारी प्राप्त हुई हैं।अगले लेख में और भी ज्ञान को आपके साथ साँझा करुँगी उस लेख में हम&amp;nbsp;&lt;b&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;मूलाधार चक्र को जगाने&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;और संतुलन रखने के लिए कोनसे योगासन और मुद्रायें हैं वो जानेंगे।अब मैं अपने वाणी को विराम और आपके कीमती समय को प्रणाम करते हुए फिर आपसे मिलने की&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span&gt;आ&lt;/span&gt;ज्ञा चाहती हूँ ,तब तक आप अपना और अपनों का ख्याल रखे मिलती हूँ अगले लेख में तब तक आप भी ध्यान कीजिये और आनंद में रहिये।आप सभी पर&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;span&gt;प्रभु&lt;/span&gt;&lt;span&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;background-color: font-size: x-large;&quot;&gt;की&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span&gt;कृपा&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span&gt;रहें&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span&gt;आपके घर में बरकत रहे और आपका जीवन आबाद रहें।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;h3 style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-size: x-large;&quot;&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;span&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span&gt;🙏&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span&gt;जय गुरुदेव ,हर- हर महादेव&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;🙏&lt;/span&gt;&lt;/h3&gt;</description><link>https://www.adhyatmikjagat69.co/2020/11/kundalini-muladhar-chakra-jagran-vidhi-1-blog-post-.html</link><author>noreply@blogger.com (Unknown)</author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj4w331_8Y08EDHAqhPFSJetiIX13XZWxR4-gtcEX0lweO1L7i_6AlwtzXwvn6ORX08AlyU3GqHfVEMX3FeHzlKOcNJSBSxSecGEkBq6AqO-cr19DARDn6UjnR6uH41RBLG00IKY1ix0gWv/s72-w320-h222-c/%25E0%25A4%25AE%25E0%25A5%2582%25E0%25A4%25B2%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25A7%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25B0-%25E0%25A4%259A%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B0-%25E0%25A4%259C%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%2597%25E0%25A4%25B0%25E0%25A4%25A3-%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%2580-%25E0%25A4%25B5%25E0%25A4%25BF%25E0%25A4%25A7%25E0%25A4%25BF%25E0%25A4%25AF%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%2581-%25E0%25A5%25A7.jpg" height="72" width="72"/><thr:total>0</thr:total></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-8475792039111759199.post-8632301308930076562</guid><pubDate>Sat, 10 Oct 2020 19:13:00 +0000</pubDate><atom:updated>2024-09-28T15:50:35.928+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">कुण्डलिनी जागरण</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">मूलाधार चक्र</category><title>मूलाधार चक्र के फायदे और नुकसान </title><description>&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;h1 style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;font face=&quot;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-size: large;&quot;&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-size: x-large;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;span&gt;मूलाधार चक्र&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/font&gt;&lt;/h1&gt;&lt;div&gt;&lt;blockquote&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;font face=&quot;&quot;&gt;आपका हृदय से&amp;nbsp;बहुत बहुत स्वागत हैं मेरे&amp;nbsp;इस &lt;/font&gt;&lt;span&gt;अध्यात्मिक जगत के लेख में। आप कुशल मंगल होंगे यही कामना करती हूँ।&lt;/span&gt;&lt;span&gt;आज मैं आपके सामने फिर एक नए विषय पर चर्चा करने आयी हूँ और आशा करती हूँ की आपको इस विषय में रूचि लगे खैर ये विषय कोई रूचि लेने जैसा नहीं हैं, पर ये एक ज्ञान हैं जो शायद ही कोई इतने विस्तार से आपको बताएगा।आज में कुण्डलिनी शक्ति के पहला चक्र मूलाधार चक्र पर बात करुँगी और हम इस चक्र के&amp;nbsp;फायदे और नुकसान&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span&gt;जानेंगे।&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/blockquote&gt;&lt;/div&gt;&lt;div dir=&quot;ltr&quot; trbidi=&quot;on&quot;&gt;&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2020/10/muladhar-chakr-fayde-nuksan-post11.html&quot; style=&quot;margin-left: 1em; margin-right: 1em;&quot;&gt;&lt;img alt=&quot;मूलाधार चक्र के फायदे और नुकसान&quot; border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;342&quot; data-original-width=&quot;332&quot; height=&quot;320&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiymOgob1YZI120jcbcmSRpDOsUPbqQs6_Nf333duNbXAfM1eBW7otFeq9g_bHz3aPRH7d5Y9YbD8p412M_PjjhA6n8hXYfuCF_W-f5iT98RtCLgmJnxQ62r2z-N9Ejg-u65KuC7lkuKovp/w311-h320/%25E0%25A4%25AE%25E0%25A5%2582%25E0%25A4%25B2%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25A7%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25B0-%25E0%25A4%259A%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B0-%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%2587-%25E0%25A4%25AB%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25AF%25E0%25A4%25A6%25E0%25A5%2587-%25E0%25A4%2594%25E0%25A4%25B0-%25E0%25A4%25A8%25E0%25A5%2581%25E0%25A4%2595%25E0%25A4%25B8%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25A8-.jpg&quot; title=&quot;मूलाधार चक्र के फायदे और नुकसान&quot; width=&quot;311&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;h3 style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span style=&quot;font-size: large;&quot;&gt;मूलाधार चक्र जागने के फायदे&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-size: xx-large;&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/h3&gt;&lt;ul&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;b&gt;इस &lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;i&gt;चक्र&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/i&gt;&lt;/span&gt;के जागरूक होते ही बाहर के ऊपरी बाधाओं से सुरक्षा मिलती हैं।&amp;nbsp;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;ul&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;b&gt;काला जादू , तंत्र बाधा&amp;nbsp;और नकारात्मक ऊर्जाओं से सुरक्षा मिलती हैं।&amp;nbsp;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;ul&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;b&gt;प्रार्थना करने और जीवन में प्रार्थना पकड़ कर रखने की क्षमता मिलती हैं।&amp;nbsp;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;ul&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;b&gt;किसी भी प्रकार का भय हो ख़तम या फिर बहुत हद तक काम हो जाता हैं।&amp;nbsp;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;ul&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;b&gt;साधना में शीघ्र ही&amp;nbsp;सफलता प्राप्त होती हैं।&amp;nbsp;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;ul&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;b&gt;अष्ट&amp;nbsp;सिद्धि प्राप्त होने लगती हैं।&amp;nbsp;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;ul&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;b&gt;शरीर से सुगंध प्रवाह होने लगता हैं, पसीने की बदबू नहीं रहती।&amp;nbsp;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;ul&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;b&gt;चेहरे पर तेज निखरने लगता हैं।&amp;nbsp;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;ul&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;b&gt;बालों में चमक आने लगती&amp;nbsp;हैं और बालों की समस्या&amp;nbsp;दूर होने लगती हैं।&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;ul&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;b&gt;निरोगी काया बनने लगती हैं, और शरीर स्वस्थ रहने&amp;nbsp;लगता हैं।&amp;nbsp;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;ul&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;b&gt;समस्या चाहे जैसी भी हो निवारण मिलने लगते हैं।&amp;nbsp;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;ul&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;b&gt;देवी देवता के दर्शन होने लगते हैं, और ध्यान करने की क्षमता बढ़ने लगती हैं।&amp;nbsp;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;ul&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;b&gt;जीवन के&amp;nbsp;लक्ष्य समझने लगते हैं, मन शांत और&amp;nbsp;स्तिर रहने लगता हैं।&amp;nbsp;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;ul&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;b&gt;धन या कोई भी बात को पकड़ के रखने की क्षमता आ जाती हैं।&amp;nbsp;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;ul&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;b&gt;वासना पर विजय प्राप्त होती हैं ,प्रेम की अनुभूति होने लगती हैं।&amp;nbsp;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;ul&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;b&gt;सभी जिव एक समान दिखने लगते हैं।&amp;nbsp;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;ul&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;b&gt;कामवासना का सही अर्थ और आनंद समझने लगता हैं।&amp;nbsp;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;ul&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;b&gt;आपके काम&amp;nbsp;अपने आप बनने लगते हैं, आपका दूसरों पर दबदबा होने लगता हैं।&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;ul&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span&gt;आप अंदर से शांत होते हैं किन्तु बहार से दूसरों को आप उग्र दिखने लगते हैं।&lt;/span&gt;&amp;nbsp;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;ul&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;b&gt;मारण, मोहन, वश्यं अपने आप ही करने की क्षमता आने लगती हैं।&amp;nbsp;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;ul&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;b&gt;बातों को गहराई से समझने लगते हैं।&amp;nbsp;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;ul&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;b&gt;गुप्त अंग के रोग या समस्या समाप्त होते हैं।&amp;nbsp;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;ul&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span&gt;भगवान की कृपा होने लगते हैं और&amp;nbsp;भाग्योदय होने लगता हैं।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&amp;nbsp;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;/div&gt;&lt;div dir=&quot;ltr&quot; trbidi=&quot;on&quot;&gt;&lt;h3 style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-size: large;&quot;&gt;मूलाधार चक्र बंद होने&amp;nbsp;के नुकसान&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-size: x-large;&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/h3&gt;&lt;div&gt;&lt;p style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;/p&gt;&lt;h4 style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;p style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;/p&gt;&lt;ul style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;हरदम बेचैनिसि और अजीब सी घबराहट रहती हैं।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;ul style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;अज्ञात भय रहता हैं और अनावश्यक भय बना रहता हैं।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;ul style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;शर्मीले स्वाभाव में ही रहते हैं खुल कर बात नहीं करनी आती।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;ul style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;हर तरफ &lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;नुकसान&lt;/span&gt; ही झेलनी पड़ती हैं।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;ul style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;पूजा पाठ&amp;nbsp;में मन नहीं लगता ,हर वक़्त आलस्य बना रहता हैं।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;ul style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;देवी देवता रुष्ट हो जाते हैं ,इसलिए कोई भी प्रार्थना सफल नहीं हो पाती।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;ul style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;तंत्र बाधा ,और नज़र दोष बार बार होती रहती हैं।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;ul style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;आये दिन कोई न कोई बीमारी से लिपटे रहते हैं।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;ul style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;मन अशांत और अस्तीर रहता हैं इसलिए ध्यान भी नहीं लगता हैं।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;ul style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;अपमान और दरिद्रता झेलनी पड़ती हैं।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;ul style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;गुप्त अंग के रोगों से आप घेरे रहते हैं।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;ul style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;जंतू संक्रमण, गुप्त रोग, एड्स, पैर कमज़ोर रहना, मानसिक बीमारी, कमर में हमेशा दर्द रहना, हड्डियों की समस्या, शरीर कमज़ोर रहना, त्वचा रोग होना, बालों का झड़ना, चिड़चिड़ापन रहना किडनी की समस्याए बनी रहना गँठियाँ के&amp;nbsp;रोग होना नसों की समस्या, मोटापा, सूजन ,भूंख&amp;nbsp;न लगना ,भूख न रहना&amp;nbsp;और भी कुछ हैं.&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;ul style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;क्यूँकि हमारी किडनी के ऊपर एक ग्रंथ हैं जिसका नाम एड्रेनल ग्रन्थ हैं जो हमारी भावनाओं को वश में रखता हैं और ये हमारी पृथ्वी तत्त्व को मजबूत रखता हैं शक्ति को संचार करना और शक्ति को पकड़ के रखना इसी का कार्य होता हैं।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;ul style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;इसलिए इसके सम्बन्ध में समस्या होगी वो &lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;i&gt;मूलाधार&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/i&gt;&lt;/span&gt;के वश में होगी।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;ul style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;अकेलापन और उदास बने रहना हर काम में निराशा हाथ लगना।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;ul style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;आपका शरीर निस्तेज और कमज़ोर बल और बनी रहती हैं।&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;ul style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;क्रोध, संताप,&amp;nbsp;लालच, अपराध करने का भाव ये सब &lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;नुकसान&lt;/span&gt; झेलने पड़ते&amp;nbsp;हैं।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;तो यह था मेरा आज का ज्ञान मुझे विश्वास हैं की आपको सही से मेरे ज्ञान और अनुभव से मार्गदर्शन प्राप्त हुआ होगा।आप इससे जान सकते हैं किसी भी व्यक्ति को तो आज आपने जाना की &lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;मूलाधार चक्र के&amp;nbsp;क्या फायदे हैं क्या नुकसान हैं &lt;/span&gt;क्या सावधानी बरतनी चाहिए। हम अगले लेख में जानेंगे की कैसे &lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2020/11/kundalini-muladhar-chakra-jagran-vidhiyan-2-post.html&quot; rel=&quot;nofollow&quot;&gt;इस चक्र को जागरूक करते हैं ?&lt;/a&gt;&amp;nbsp;और&amp;nbsp;&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2020/11/kundalini-muladhar-chakra-jagran-vidhi-1-blog-post-.html&quot; rel=&quot;nofollow&quot;&gt; क्या विधियाँ हैं ? &lt;/a&gt;और भी बहुत कुछ हैं। अब मैं अपने वाणी को विराम और आपके किंमती समय को प्रणाम करते&amp;nbsp;हुए आपसे फिर मिलने की आज्ञा चाहती हूँ ,तब तक आप अपना और अपनों का ख्याल रखे मिलती हूँ अगले लेख में तब तक आप भी ध्यान कीजिये और आनंद में रहिये। आप सभी पर प्रभु की&amp;nbsp;कृपा रहें ,आपके घर में बरकत रहें&amp;nbsp;और आपका जीवन आबाद रहें।&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;/h4&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;h4&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;🙏&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;color: red; font-size: large;&quot;&gt;जय गुरुदेव ,हर हर महादेव&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-size: large;&quot;&gt;🙏&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-size: large;&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/h4&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;</description><link>https://www.adhyatmikjagat69.co/2020/10/blog-post.html</link><author>noreply@blogger.com (Unknown)</author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiymOgob1YZI120jcbcmSRpDOsUPbqQs6_Nf333duNbXAfM1eBW7otFeq9g_bHz3aPRH7d5Y9YbD8p412M_PjjhA6n8hXYfuCF_W-f5iT98RtCLgmJnxQ62r2z-N9Ejg-u65KuC7lkuKovp/s72-w311-h320-c/%25E0%25A4%25AE%25E0%25A5%2582%25E0%25A4%25B2%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25A7%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25B0-%25E0%25A4%259A%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B0-%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%2587-%25E0%25A4%25AB%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25AF%25E0%25A4%25A6%25E0%25A5%2587-%25E0%25A4%2594%25E0%25A4%25B0-%25E0%25A4%25A8%25E0%25A5%2581%25E0%25A4%2595%25E0%25A4%25B8%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25A8-.jpg" height="72" width="72"/><thr:total>0</thr:total></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-8475792039111759199.post-3175234593273024639</guid><pubDate>Sat, 10 Oct 2020 19:13:00 +0000</pubDate><atom:updated>2023-01-17T14:14:55.035+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">कुण्डलिनी जागरण</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">मूलाधार चक्र</category><title>मूलाधार चक्र के फायदे और नुकसान </title><description>&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;h1 style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;font face=&quot;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-size: large;&quot;&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-size: x-large;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;span&gt;मूलाधार चक्र&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/font&gt;&lt;/h1&gt;&lt;div&gt;&lt;blockquote&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;font face=&quot;&quot;&gt;आपका हृदय से&amp;nbsp;बहुत बहुत स्वागत हैं मेरे&amp;nbsp;इस &lt;/font&gt;&lt;span&gt;अध्यात्मिक जगत के लेख में। आप कुशल मंगल होंगे यही कामना करती हूँ।&lt;/span&gt;&lt;span&gt;आज मैं आपके सामने फिर एक नए विषय पर चर्चा करने आयी हूँ और आशा करती हूँ की आपको इस विषय में रूचि लगे खैर ये विषय कोई रूचि लेने जैसा नहीं हैं, पर ये एक ज्ञान हैं जो शायद ही कोई इतने विस्तार से आपको बताएगा।आज में कुण्डलिनी शक्ति के पहला चक्र मूलाधार चक्र पर बात करुँगी और हम इस चक्र के&amp;nbsp;फायदे और नुकसान&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span&gt;जानेंगे।&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/blockquote&gt;&lt;/div&gt;&lt;div dir=&quot;ltr&quot; trbidi=&quot;on&quot;&gt;&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2020/10/muladhar-chakr-fayde-nuksan-post11.html&quot; style=&quot;margin-left: 1em; margin-right: 1em;&quot;&gt;&lt;img alt=&quot;मूलाधार चक्र के फायदे और नुकसान&quot; border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;342&quot; data-original-width=&quot;332&quot; height=&quot;320&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiymOgob1YZI120jcbcmSRpDOsUPbqQs6_Nf333duNbXAfM1eBW7otFeq9g_bHz3aPRH7d5Y9YbD8p412M_PjjhA6n8hXYfuCF_W-f5iT98RtCLgmJnxQ62r2z-N9Ejg-u65KuC7lkuKovp/w311-h320/%25E0%25A4%25AE%25E0%25A5%2582%25E0%25A4%25B2%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25A7%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25B0-%25E0%25A4%259A%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B0-%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%2587-%25E0%25A4%25AB%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25AF%25E0%25A4%25A6%25E0%25A5%2587-%25E0%25A4%2594%25E0%25A4%25B0-%25E0%25A4%25A8%25E0%25A5%2581%25E0%25A4%2595%25E0%25A4%25B8%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25A8-.jpg&quot; title=&quot;मूलाधार चक्र के फायदे और नुकसान&quot; width=&quot;311&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;h3 style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span style=&quot;font-size: large;&quot;&gt;मूलाधार चक्र जागने के फायदे&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-size: xx-large;&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/h3&gt;&lt;ul&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;b&gt;इस &lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;i&gt;चक्र&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/i&gt;&lt;/span&gt;के जागरूक होते ही बाहर के ऊपरी बाधाओं से सुरक्षा मिलती हैं।&amp;nbsp;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;ul&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;b&gt;काला जादू , तंत्र बाधा&amp;nbsp;और नकारात्मक ऊर्जाओं से सुरक्षा मिलती हैं।&amp;nbsp;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;ul&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;b&gt;प्रार्थना करने और जीवन में प्रार्थना पकड़ कर रखने की क्षमता मिलती हैं।&amp;nbsp;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;ul&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;b&gt;किसी भी प्रकार का भय हो ख़तम या फिर बहुत हद तक काम हो जाता हैं।&amp;nbsp;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;ul&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;b&gt;साधना में शीघ्र ही&amp;nbsp;सफलता प्राप्त होती हैं।&amp;nbsp;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;ul&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;b&gt;अष्ट&amp;nbsp;सिद्धि प्राप्त होने लगती हैं।&amp;nbsp;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;ul&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;b&gt;शरीर से सुगंध प्रवाह होने लगता हैं, पसीने की बदबू नहीं रहती।&amp;nbsp;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;ul&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;b&gt;चेहरे पर तेज निखरने लगता हैं।&amp;nbsp;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;ul&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;b&gt;बालों में चमक आने लगती&amp;nbsp;हैं और बालों की समस्या&amp;nbsp;दूर होने लगती हैं।&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;ul&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;b&gt;निरोगी काया बनने लगती हैं, और शरीर स्वस्थ रहने&amp;nbsp;लगता हैं।&amp;nbsp;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;ul&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;b&gt;समस्या चाहे जैसी भी हो निवारण मिलने लगते हैं।&amp;nbsp;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;ul&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;b&gt;देवी देवता के दर्शन होने लगते हैं, और ध्यान करने की क्षमता बढ़ने लगती हैं।&amp;nbsp;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;ul&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;b&gt;जीवन के&amp;nbsp;लक्ष्य समझने लगते हैं, मन शांत और&amp;nbsp;स्तिर रहने लगता हैं।&amp;nbsp;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;ul&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;b&gt;धन या कोई भी बात को पकड़ के रखने की क्षमता आ जाती हैं।&amp;nbsp;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;ul&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;b&gt;वासना पर विजय प्राप्त होती हैं ,प्रेम की अनुभूति होने लगती हैं।&amp;nbsp;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;ul&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;b&gt;सभी जिव एक समान दिखने लगते हैं।&amp;nbsp;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;ul&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;b&gt;कामवासना का सही अर्थ और आनंद समझने लगता हैं।&amp;nbsp;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;ul&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;b&gt;आपके काम&amp;nbsp;अपने आप बनने लगते हैं, आपका दूसरों पर दबदबा होने लगता हैं।&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;ul&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span&gt;आप अंदर से शांत होते हैं किन्तु बहार से दूसरों को आप उग्र दिखने लगते हैं।&lt;/span&gt;&amp;nbsp;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;ul&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;b&gt;मारण, मोहन, वश्यं अपने आप ही करने की क्षमता आने लगती हैं।&amp;nbsp;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;ul&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;b&gt;बातों को गहराई से समझने लगते हैं।&amp;nbsp;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;ul&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;b&gt;गुप्त अंग के रोग या समस्या समाप्त होते हैं।&amp;nbsp;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;ul&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span&gt;भगवान की कृपा होने लगते हैं और&amp;nbsp;भाग्योदय होने लगता हैं।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&amp;nbsp;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;/div&gt;&lt;div dir=&quot;ltr&quot; trbidi=&quot;on&quot;&gt;&lt;h3 style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-size: large;&quot;&gt;मूलाधार चक्र बंद होने&amp;nbsp;के नुकसान&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-size: x-large;&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/h3&gt;&lt;div&gt;&lt;p style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;/p&gt;&lt;h4 style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;p style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;/p&gt;&lt;p style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;/p&gt;&lt;ul style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;हरदम बेचैनिसि और अजीब सी घबराहट रहती हैं।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;ul style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;अज्ञात भय रहता हैं और अनावश्यक भय बना रहता हैं।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;ul style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;शर्मीले स्वाभाव में ही रहते हैं खुल कर बात नहीं करनी आती।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;ul style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;हर तरफ &lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;नुकसान&lt;/span&gt; ही झेलनी पड़ती हैं।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;ul style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;पूजा पाठ&amp;nbsp;में मन नहीं लगता ,हर वक़्त आलस्य बना रहता हैं।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;ul style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;देवी देवता रुष्ट हो जाते हैं ,इसलिए कोई भी प्रार्थना सफल नहीं हो पाती।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;ul style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;तंत्र बाधा ,और नज़र दोष बार बार होती रहती हैं।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;ul style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;आये दिन कोई न कोई बीमारी से लिपटे रहते हैं।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;ul style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;मन अशांत और अस्तीर रहता हैं इसलिए ध्यान भी नहीं लगता हैं।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;ul style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;अपमान और दरिद्रता झेलनी पड़ती हैं।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;ul style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;गुप्त अंग के रोगों से आप घेरे रहते हैं।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;ul style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;जंतू संक्रमण, गुप्त रोग, एड्स, पैर कमज़ोर रहना, मानसिक बीमारी, कमर में हमेशा दर्द रहना, हड्डियों की समस्या, शरीर कमज़ोर रहना, त्वचा रोग होना, बालों का झड़ना, चिड़चिड़ापन रहना किडनी की समस्याए बनी रहना गँठियाँ के&amp;nbsp;रोग होना नसों की समस्या, मोटापा, सूजन ,भूंख&amp;nbsp;न लगना ,भूख न रहना&amp;nbsp;और भी कुछ हैं.&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;ul style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;क्यूँकि हमारी किडनी के ऊपर एक ग्रंथ हैं जिसका नाम एड्रेनल ग्रन्थ हैं जो हमारी भावनाओं को वश में रखता हैं और ये हमारी पृथ्वी तत्त्व को मजबूत रखता हैं शक्ति को संचार करना और शक्ति को पकड़ के रखना इसी का कार्य होता हैं।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;ul style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;इसलिए इसके सम्बन्ध में समस्या होगी वो &lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;i&gt;मूलाधार&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/i&gt;&lt;/span&gt;के वश में होगी।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;ul style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;अकेलापन और उदास बने रहना हर काम में निराशा हाथ लगना।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;ul style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;आपका शरीर निस्तेज और कमज़ोर बल और बनी रहती हैं।&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;ul style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;क्रोध, संताप,&amp;nbsp;लालच, अपराध करने का भाव ये सब &lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;नुकसान&lt;/span&gt; झेलने पड़ते&amp;nbsp;हैं।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;तो यह था मेरा आज का ज्ञान मुझे विश्वास हैं की आपको सही से मेरे ज्ञान और अनुभव से मार्गदर्शन प्राप्त हुआ होगा।आप इससे जान सकते हैं किसी भी व्यक्ति को तो आज आपने जाना की &lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;मूलाधार चक्र के&amp;nbsp;क्या फायदे हैं क्या नुकसान हैं &lt;/span&gt;क्या सावधानी बरतनी चाहिए। हम अगले लेख में जानेंगे की कैसे &lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2020/11/kundalini-muladhar-chakra-jagran-vidhiyan-2-post.html&quot; rel=&quot;nofollow&quot;&gt;इस चक्र को जागरूक करते हैं ?&lt;/a&gt;&amp;nbsp;और&amp;nbsp;&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2020/11/kundalini-muladhar-chakra-jagran-vidhi-1-blog-post-.html&quot; rel=&quot;nofollow&quot;&gt; क्या विधियाँ हैं ? &lt;/a&gt;और भी बहुत कुछ हैं। अब मैं अपने वाणी को विराम और आपके किंमती समय को प्रणाम करते&amp;nbsp;हुए आपसे फिर मिलने की आज्ञा चाहती हूँ ,तब तक आप अपना और अपनों का ख्याल रखे मिलती हूँ अगले लेख में तब तक आप भी ध्यान कीजिये और आनंद में रहिये। आप सभी पर प्रभु की&amp;nbsp;कृपा रहें ,आपके घर में बरकत रहें&amp;nbsp;और आपका जीवन आबाद रहें।&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;/h4&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;h4&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;🙏&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;color: red; font-size: large;&quot;&gt;जय गुरुदेव ,हर हर महादेव&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-size: large;&quot;&gt;🙏&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-size: large;&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/h4&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;</description><link>https://www.adhyatmikjagat69.co/2020/10/muladhar-chakr-fayde-nuksan-post11.html</link><author>noreply@blogger.com (Unknown)</author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiymOgob1YZI120jcbcmSRpDOsUPbqQs6_Nf333duNbXAfM1eBW7otFeq9g_bHz3aPRH7d5Y9YbD8p412M_PjjhA6n8hXYfuCF_W-f5iT98RtCLgmJnxQ62r2z-N9Ejg-u65KuC7lkuKovp/s72-w311-h320-c/%25E0%25A4%25AE%25E0%25A5%2582%25E0%25A4%25B2%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25A7%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25B0-%25E0%25A4%259A%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B0-%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%2587-%25E0%25A4%25AB%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25AF%25E0%25A4%25A6%25E0%25A5%2587-%25E0%25A4%2594%25E0%25A4%25B0-%25E0%25A4%25A8%25E0%25A5%2581%25E0%25A4%2595%25E0%25A4%25B8%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25A8-.jpg" height="72" width="72"/><thr:total>0</thr:total></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-8475792039111759199.post-8684889495821999373</guid><pubDate>Sat, 10 Oct 2020 19:00:00 +0000</pubDate><atom:updated>2024-09-28T15:50:36.142+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">कुण्डलिनी जागरण</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">मूलाधार चक्र</category><title>मूलाधार चक्र क्या हैं? </title><description>&lt;div dir=&quot;ltr&quot; style=&quot;text-align: left;&quot; trbidi=&quot;on&quot;&gt;
&lt;h1 style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;font face=&quot;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-size: large;&quot;&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-size: x-large;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: red;&quot;&gt;मूलाधार चक्र&lt;/span&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/font&gt;&lt;font face=&quot;&quot; size=&quot;5&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/font&gt;&lt;/h1&gt;&lt;div&gt;&lt;blockquote&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;font face=&quot;&quot;&gt;आपका हृदय से&amp;nbsp;बहुत बहुत स्वागत हैं मेरे&amp;nbsp;इस&amp;nbsp;&lt;/font&gt;&lt;span&gt;अध्यात्मिक जगत के लेख में. आप कुशल मंगल होंगे यही कामना करती हूँ&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span&gt;आज मैं आपके सामने फिर एक नए विषय पर चर्चा करने आयी हूँ और आशा करती हूँ की आपको इस विषय में रूचि लगे खैर ये विषय कोई रूचि लेने जैसा नहीं हैं, पर ये एक ज्ञान हैं जो शायद ही कोई इतने विस्तार से आपको बताएगा।&lt;b&gt;आज में कुण्डलिनी शक्ति के पहले चक्र &lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #e06666;&quot;&gt;मूलाधार चक्र&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;पर बात करुँगी और हम &lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;i&gt;मूलाधार&amp;nbsp;चक्र का वर्णन&lt;/i&gt;&lt;/span&gt; ,&amp;nbsp;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;color: #6aa84f; font-size: large;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;मूलाधार मंत्र के बारे में विस्तार से&amp;nbsp; और&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;b style=&quot;font-size: large;&quot;&gt;&lt;i&gt;&lt;span style=&quot;color: #f1c232;&quot;&gt;मूलाधार चक्र के संबंध में&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;b style=&quot;font-size: large;&quot;&gt;जानेंगे।&lt;/b&gt;&lt;/blockquote&gt;&lt;h2 style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;span&gt;&lt;b&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000; font-size: x-large;&quot;&gt;मूलाधार चक्र वर्णन&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span style=&quot;color: #ea9999; font-size: x-large;&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/h2&gt;&lt;blockquote&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;span&gt;यह &lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;&lt;b&gt;मूलाधार&amp;nbsp;चक्र&lt;/b&gt; &lt;/span&gt;मानव शरीर के भीतर स्तित कुण्डलिनी शक्ति ७ चक्रों में से सबसे पहिला&amp;nbsp;मूल चक्र हैं जिसे मूलाधार चक्र कहते हैं।&amp;nbsp;&lt;b&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;मूलाधार चक्र&lt;/span&gt;&lt;/b&gt; हमारे शरीर के सबसे निचले हिस्से अनुत्रिक के आधार में स्तित हैं, इस चक्र का लाल रंग हैं और चार पँखुड़ियों का होता हैं। इसके बाएं पंखुड़ि के ऊपर &#39; सँ &#39; बीज अक्षर हैं ठीक उसके निचले पँखुड़ि के ऊपर &#39; षँ &#39; बीज अक्षर हैं इसी के सामने वाले पँखुड़ि पर &#39; शँ &#39; बीज अक्षर हैं और इसके ऊपर मतलब &#39; सँ &#39; बीज अक्षर के सामने &#39; वँ &#39; बीज अक्षर हैं और इसके ठीक बीच में &#39; लँ &#39; बीज अक्षर हैं जो की इस चक्र का मूल मंत्र हैं। इस चक्र में बायीं और डाकिनी और दायीं और शाकिनी विराजमान हैं ये महाकाली देवी के स्वरुप हैं अतः ये महाकाली ही स्तित हैं और यह हमारे कामवासना, प्रार्थना मांगने और पूरी करने की क्षमता और प्रार्थना को जीवन में स्तिर रखने की क्षमता रखती हैं।मतलब&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span&gt;इनका यह पृथ्वी तत्व से सम्बंधित हैं इच्छा को पूर्ण करने की क्षमता प्रधान करती हैं।अगर कोई जिव इस चक्र और शक्ति का गलत इस्तेमाल करता हैं तो यहाँ देवी उसकी ज़िन्दगी का विनाश&amp;nbsp;कर देती हैं।जैसे की कामवासना के चलते किसी स्त्री या पुरुष के साथ दुर्व्यवहार करना सम्मान न करना खुद का और दूसरों का भी, दूसरों को खुद के सामने छोटा ,पराया ,गलत, या फिर नींच हिन् भावना रखना, या फिर खुद का सम्मान न करना अपने खुद के या दूसरों के लिंगभेद से परेशान&lt;/span&gt;&lt;span&gt;&amp;nbsp;करना ची&lt;/span&gt;&lt;span&gt;ड़ना, शर्म करना या फिर खुद को या दूसरों को कोसते रहना ये सारी&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span&gt;हरकतें करने से माँ कुण्डलिनी शक्ति मतलब महाकाली नाराज़ होकर हमें दंड देती हैं। और हमारा &lt;b&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;मूलाधार चक्र&lt;/span&gt;&lt;/b&gt; बंद हो जाता हैं और नतीजा हमें परेशानियों का सामना करना पड़ता हैं। ठीक इस चक्र में सात&amp;nbsp;सूंड वाला हाथी भी हैं जो गणपती को दर्शाता हैं मतलब सुख, शांति, समृद्धि, निरोगी काया, सिद्धि, बुद्धि और&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span&gt;मोक्ष प्रदान करते हैं। और ठीक बीच में त्रिकोण में शिवलिंग पिंड हैं जिसपे सर्प साढ़े तीन पेस मारकर निचे ज़मीन की ओर&lt;/span&gt;&lt;span&gt;&amp;nbsp;मुँह करके सोया हैं इसे कुण्डलिनी शक्ति भी कहा गया हैं। इस सर्प का जागना मतलब ही कुण्डलिनी शक्ति का जागरूक होना कहते हैं।इसके मंत्र को हमेशा शुद्ध भाव से ही जाप करना चाहिए ऐसा करने से आपको शक्ति का एहसास होगा मन शांत चित्त होगा और वातावरण भी सुगन्धित होता हैं साथ ही बुद्धि में और आयु में वृद्धि होती हैं।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/blockquote&gt;&lt;h3 style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;table align=&quot;center&quot; cellpadding=&quot;0&quot; cellspacing=&quot;0&quot; class=&quot;tr-caption-container&quot; style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto;&quot;&gt;&lt;tbody&gt;&lt;tr&gt;&lt;td style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhKoEV0TOIKwzaHpChz1TJKcng7xSHWRx9s4ZR4GJBDXR7pgoa7-bErVnKskvsZh_rf0Z0Z74mulskYcZaP3TPAKrYXVPivuOejlzfM6rykz26GFvmawFiAtIYzGOFvKe36iaBAy5Y9R785/s233/images.png&quot; style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto;&quot;&gt;&lt;img border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;216&quot; data-original-width=&quot;233&quot; height=&quot;371&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhKoEV0TOIKwzaHpChz1TJKcng7xSHWRx9s4ZR4GJBDXR7pgoa7-bErVnKskvsZh_rf0Z0Z74mulskYcZaP3TPAKrYXVPivuOejlzfM6rykz26GFvmawFiAtIYzGOFvKe36iaBAy5Y9R785/w400-h371/images.png&quot; width=&quot;400&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;&lt;tr&gt;&lt;td class=&quot;tr-caption&quot; style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;Image Source - Google | Image by - &lt;a href=&quot;https://shirleytwofeathers.com/The_Blog/chakracentral/category/chakra-image-gallery/&quot; target=&quot;_blank&quot;&gt;shirleytwofeathers&lt;/a&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;&lt;/tbody&gt;&lt;/table&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style=&quot;color: #6aa84f; font-size: x-large;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/h3&gt;&lt;h3 style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: #6aa84f; font-size: x-large;&quot;&gt;मूलाधार मंत्र के बारे में विस्तार से&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/h3&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div dir=&quot;ltr&quot; style=&quot;text-align: left;&quot; trbidi=&quot;on&quot;&gt;&lt;div style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;div&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &#39; ल&amp;nbsp;&#39; का मतलब हैं लय और उसपर जो बिंदु लगाकर &#39; लं &#39; संबोधते हैं वो महाकाल को संबोधते&amp;nbsp;हैं ये आप नहीं&amp;nbsp;जानते&amp;nbsp;होंगे ,इसलिए आप कभी भी सोच समझकर ही इस मंत्र का सही तरीके से मार्गदर्शन से उच्चार करें।क्यूँकि तंत्र का निर्माण ही शिव शक्ति से हुआ हैं आप&amp;nbsp;उनके इच्छा और कृपा&amp;nbsp;के बिना आप &lt;b&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;मूलाधार चक्र&lt;/span&gt; &lt;/b&gt;जागरूक नहीं कर सकते हैं।ये मैं नहीं&amp;nbsp;तंत्र और बड़े बड़े तपस्वी ऋषियों ने कहा&amp;nbsp;हैं।ये चक्र मोह माया से भी संबंध रखता हैं। ये हमारे श्रीर&amp;nbsp;के ७२००० नाड़ियों को वश में रखता हैं और इसी से जुड़कर ३ मुख्य नाड़ियाँ भी जुड़ी हुई रहती हैं वो इस प्रकार हैं, इंगला, पिंगला और सुषुन्मा ये अगर जागरूक हो जाए तो इंसान आम इंसान नहीं रहता वो भी देवता सामान बन जाता हैं उसमे अपार शक्तियाँ आ जाती हैं ,मतलब की उसे सिद्धियाँ हासिल होने लगती हैं।सिद्धियाँ हासिल होने का अर्थ ये हैं की अगर वो साधक कोई साधना करता हैं तो उसमे आम इंसान के मुक़ाबले में&amp;nbsp; की क्षमता ज्यादा होती हैं ,उसमे कोई भी सिद्धि हासिल करने की बहुत अधिक तक क्षमता आ जाती हैं।इसके जागने से बुद्धि में वृद्धि होती हैं।इस चक्र का रंग लाल और&amp;nbsp;काला होता हैं।काला रंग महाकाली को दर्शाता हैं और समय को भी इसे हम ब्लैकहोल भी कहते हैं जो समय से परे होता हैं यानी की साधक समय को अपने अनुसार चीज़ो को ढाल सकता हैं।महाकाली माँ को समय परिवर्तन की देवी भी कहते हैं जो वास्तव में स्तित हैं और जिनपर महाकाली माँ की कृपा हो जाये तो उसको अष्ट सिद्धियाँ हासिल होते हैं।और ये सात्विक साधना से प्राप्त होती हैं तो उसे स्वर्ग की अनुभूति होती हैं ,मगर कोई भी इंसान तामसिक साधना करेगा तो वो नरक ही पायेगा।जो व्यक्ती मोक्ष पाना चाहता हैं तो उसे सात्विक साधना ही करनी चाहिए।इसलिए &lt;b&gt;&lt;span style=&quot;color: #cc0000;&quot;&gt;मूलाधार चक्र &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;को धीमी ध्यान से अथवा मंत्र जाप से ही जागरूक करना चाहिए या फिर किसी योग्य गुरु के&amp;nbsp;निर्देशन से ही इसकी&amp;nbsp;साधना करनी चाहिए।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;h2 style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: #f1c232; font-size: x-large;&quot;&gt;मूलाधार चक्र के संबंध में&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/h2&gt;&lt;div&gt;&lt;ul style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;रंग - लाल ,काला।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;कमल - चार पंखुड़ियों वाला।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;मंत्र - &#39;लं &#39;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;तत्त्व - पृथ्वी।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;इष्ट देवता - पशुपती महादेव, महाकाली, गणेश।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;प्रतीक - कुंडलिनी , शिवलिंग ,त्रिकोण।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;ग्रह - मंगल।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;विशेष गुण - काम ( कामवासना ) .&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;चरित्र - आलस्य।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;अंग / इंद्रिय - नाक&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;स्थान - मेरुदण्ड में सबसे निचले हिस्से में , लिंग गुदा के बींच स्तित।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;जागरण होना - कल्पनाओ में रहना , अत्यधिक कामनाये होना , खुद को अलग समझना।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;चार पंखुड़ियाँ&amp;nbsp;कमल - चार मुख्य नाड़ियाँ होना।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;संबंध - मोह माया, बुद्धि , मोक्ष।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;तो यह था मेरा आज का ज्ञान मुझे विश्वास हैं की आपको सही से मेरे ज्ञान और अनुभव से मार्गदर्शन प्राप्त हुआ होगा। आज आपने जाना की &lt;span style=&quot;color: #990000;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;i&gt;मूलाधार चक्र का&amp;nbsp;क्या वर्णन होता हैं&amp;nbsp;&lt;/i&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;। हम अगले लेख में जानेंगे की&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;a href=&quot;https://www.adhyatmikjagat69.co/2020/11/kundalini-muladhar-chakra-jagran-vidhi-1-blog-post-.html&quot; rel=&quot;nofollow&quot;&gt;कैसे इस चक्र को जागरूक करते हैं क्या विधियाँ हैं &lt;/a&gt;और क्या खाना चाहिए और भी बहुत कुछ।अब मैं अपने वाणी&amp;nbsp;को विराम और आपके किंमती समय को प्रणाम करते&amp;nbsp;हुए आपसे फिर मिलने की आज्ञा चाहती हूँ। तब तक आप अपना और अपनों का ख्याल रखे मिलती हूँ अगले लेख में तब तक आप भी ध्यान कीजिये और आनंद में रहिये। आप सभी पर प्रभु की&amp;nbsp;कृपा रहें आपके घर में बरकत रहे और आपका जीवन आबाद रहें।&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;h4 style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-size: medium;&quot;&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; 🙏&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;color: red; font-size: large;&quot;&gt;&lt;b&gt;जय गुरुदेव ,हर हर महादेव&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-size: large;&quot;&gt;🙏&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-size: large;&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/h4&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;
</description><link>https://www.adhyatmikjagat69.co/2020/10/blog-post_11.html</link><author>noreply@blogger.com (Unknown)</author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhKoEV0TOIKwzaHpChz1TJKcng7xSHWRx9s4ZR4GJBDXR7pgoa7-bErVnKskvsZh_rf0Z0Z74mulskYcZaP3TPAKrYXVPivuOejlzfM6rykz26GFvmawFiAtIYzGOFvKe36iaBAy5Y9R785/s72-w400-h371-c/images.png" height="72" width="72"/><thr:total>0</thr:total></item></channel></rss>