<?xml version='1.0' encoding='UTF-8'?><?xml-stylesheet href="http://www.blogger.com/styles/atom.css" type="text/css"?><feed xmlns='http://www.w3.org/2005/Atom' xmlns:openSearch='http://a9.com/-/spec/opensearchrss/1.0/' xmlns:blogger='http://schemas.google.com/blogger/2008' xmlns:georss='http://www.georss.org/georss' xmlns:gd="http://schemas.google.com/g/2005" xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'><id>tag:blogger.com,1999:blog-8040736284594536912</id><updated>2026-04-03T06:59:14.477+05:30</updated><title type='text'>दीक्षा</title><subtitle type='html'>चुप रहना बेहद खतरनाक है। दीक्षा एक ऐसा मंच है  जहाँ चुप्पी टूटती है।</subtitle><link rel='http://schemas.google.com/g/2005#feed' type='application/atom+xml' href='http://dikhsa.blogspot.com/feeds/posts/default'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dikhsa.blogspot.com/'/><link rel='hub' href='http://pubsubhubbub.appspot.com/'/><link rel='next' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default?start-index=26&amp;max-results=25'/><author><name>Anonymous</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07065981802189787445</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='https://img1.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><generator version='7.00' uri='http://www.blogger.com'>Blogger</generator><openSearch:totalResults>211</openSearch:totalResults><openSearch:startIndex>1</openSearch:startIndex><openSearch:itemsPerPage>25</openSearch:itemsPerPage><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8040736284594536912.post-8172553599481152217</id><published>2017-05-15T21:21:00.002+05:30</published><updated>2017-05-15T21:22:54.916+05:30</updated><title type='text'>भाजपा सरकार में कैबिनेट के फैसले </title><content type='html'>&lt;div dir=&quot;ltr&quot; style=&quot;text-align: left;&quot; trbidi=&quot;on&quot;&gt;
&amp;nbsp; -- दूसरी कैबिनेट बैठक --&lt;br /&gt;
&amp;nbsp;गांव-किसान पर मेहरबान योगी सरकार&lt;br /&gt;
नोट: थोड़ी देर में अपडेट खबर जारी की जा रही है।&lt;br /&gt;
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- दूसरी कैबिनेट की बैठक में दर्जन भर से ज्यादा फैसले &lt;br /&gt;
-------&lt;br /&gt;
राज्य ब्यूरो, लखनऊ : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दूसरी कैबिनेट की बैठक में भी सरकार ने गांव, किसान और आमजन को अहमियत दी। बिजली, पानी, फसल खरीद और घर-गृहस्थी ठीक करने की दिशा में कई महत्वपूर्ण फैसले किए। इसके लिए मंगलवार को लोकभवन में हुई बैठक में मंत्रियों ने दर्जन भर से ज्यादा प्रस्तावों को मंजूरी दी है।&lt;br /&gt;
&amp;nbsp; प्रदेश सरकार के प्रवक्ता और ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा और स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का संकल्प है कि उप्र के हर खेत को पानी, हर घर को बिजली पहुंचे। शर्मा ने कहा कि योगी सरकार आने के बाद यह पहली गर्मी होगी जिसमें आम जनता को बिजली की किल्लत नहीं होगी। प्रवक्ताद्वय ने कहा कि भ्रष्टाचार पर मोदी और योगी की सरकार जीरो टालरेंस पर काम कर रही है।&lt;br /&gt;
--&lt;br /&gt;
गांवों को 18 व तहसील मुख्यालय को 20 घंटे बिजली&lt;br /&gt;
कैबिनेट ने तय किया है कि अगले वर्ष अक्टूबर तक सभी को 24 घंटे बिजली मिलेगी। ग्रामीण अंचल को 18, तहसील मुख्यालय को 20 और बुंदेलखंड को 20 घंटे बिजली मिलेगी। इसके अलावा जिला मुख्यालयों को अब 24 घंटे बिजली मिलेगी। यह भी सख्त हिदायत है कि रात्रि में छात्रों के पढऩे के समय और दिन में स्कूल के समय बिजली जरूर रहेगी। ऊर्जा मंत्री ने इस फैसले की जानकारी देते हुए तंज किया कि पहले भी इस तरह के आदेश हुए लेकिन शक्ति भवन में कागजों तक ही सीमित रहे। कुछ वीआइपी क्षेत्रों को ही लाभ मिला, पर अब इस सरकार का वीआइपी गांव का गरीब है। इसके क्रियान्वयन में कहीं कोताही हुई तो सभी एमडी और संबंधित अफसरों के खिलाफ कार्रवाई होगी।&lt;br /&gt;
----------&lt;br /&gt;
अब 48 घंटे में बदले जाएंगे जले ट्रांसफार्मर&lt;br /&gt;
अभी तक ट्रांसफार्मर जलने पर बदले जाने की प्रक्रिया 72 घंटे में पूरी होती थी लेकिन सरकार ने तय किया है कि 48 घंटे में जले ट्रांसफार्मर बदले जाएंगे। पहले किसान खुद ट्रैक्टर-ट्राली पर लादकर जला ट्रांसफार्मर ले जाते थे। यह हिदायत है कि बिजली विभाग के अधिकारी सूचना मिलते ही अपना साधन लेकर जाएंगे और निर्धारित अवधि में ट्रांसफार्मर बदलेंगे। 24 घंटे के भीतर शहरी क्षेत्रों में ट्रांसफार्मर बदले जाने का प्रावधान होगा। लापरवाही मिली तो संबंधित अफसरों की खैर नहीं होगी। मुख्यमंत्री की यह सख्त हिदायत है कि ऊर्जा विभाग के लोग अब खेतों में भी दिखने चाहिए।&lt;br /&gt;
-----&lt;br /&gt;
&amp;nbsp;487 रुपये प्रति क्विंटल आलू खरीदेगी सरकार&lt;br /&gt;
&amp;nbsp;कैबिनेट ने एक लाख मीट्रिक टन आलू खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। किसानों के आलू खरीद के लिए 487 रुपये प्रति क्विंटल की दर निर्धारित की गई है। भारत सरकार के नेफेड संस्था, उप्र सरकार की पीसीएफ, यूपी एग्रो तथा नाफेड को आलू खरीद के लिए अधिकृत किया गया है। सभी जिलाधिकारियों को जरूरत के हिसाब से क्रय केंद्र खोलने की जिम्मेदारी दी गई है। कैबिनेट ने यह फैसला मंत्री समूह की सिफारिशों के आधार पर किया है।&lt;br /&gt;
-------&lt;br /&gt;
14 दिन के भीतर होगा गन्ना मूल्य भुगतान&lt;br /&gt;
कैबिनेट ने तय किया है कि 14 दिन के भीतर वर्तमान पेराई सत्र और पहले का गन्ना मूल्य भुगतान 120 दिन के भीतर किया जाएगा। अगर इसमें कोई लापरवाही हुई तो संबंधित अफसरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री ने गन्ना मूल्य भुगतान के प्रति ढिलाई बरतने वाली मिलों के खिलाफ वैधानिक कार्यवाही की चेतावनी दी है। प्रवक्ता के मुताबिक वर्तमान सीजन में 81 फीसद गन्ना मूल्य भुगतान कर दिया गया है।&lt;br /&gt;
------&lt;br /&gt;
बिजली बिल का सरचार्ज माफ&lt;br /&gt;
ऊर्जा विभाग में बिलों के भुगतान को लेकर सरकार को शिकायतें मिली थी। पिछले भुगतान की रकम भी बकाए में दिख रही है। सरकार ने आमजन को राहत देते हुए सरचार्ज माफ करने का फैसला किया है। ग्रामीण, शहरी, मध्यम, घरेलू और कामर्शियल के लिए योजना शुरू होगी। इसमें जो भी सरचार्ज होगा उसे माफ किया जाएगा। उपभोक्ता को सिर्फ मूलधन का भुगतान करना होगा। किसानों के हित में एक कदम आगे बढ़ते हुए सरकार ने तय किया है कि जिन किसानों को दस हजार रुपये से ज्यादा बकाया है उन्हें चार आसान किस्तों में भुगतान की सहूलियत मिलेगी। इस योजना से छोटे उद्यमियों को भी लाभ मिलेगा।&lt;br /&gt;
--------&lt;br /&gt;
केंद्र से बिजली खरीद को होगा करार&lt;br /&gt;
पॉवर ऑफ ऑल योजना के तहत केंद्र और राज्यों के बीच समझौते हो रहे हैं लेकिन, अभी तक उप्र सरकार के बीच करार नहीं हो सका है। कैबिनेट ने करार के लिए आए प्रस्ताव को अनुमोदित कर दिया है। ऊर्जा मंत्री ने बताया कि 14 अप्रैल को सायं साढ़े पांच बजे केंद्रीय ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में यहां करार होगा। 2019 से पहले उप्र के हर गांव में रोशनी पहुंचे इसलिए यह व्यवस्था की जा रही है।&lt;br /&gt;
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सीएजी से प्राधिकरणों की आडिट को अनुमति&lt;br /&gt;
कैबिनेट ने विकास प्राधिकरणों की आडिट सीएजी से कराने की अनुमति दे दी है। सूबे में 29 प्राधिकरण हैं। इसके आडिट की प्रक्रिया राज्य सरकार की एजेंसी पूरी करती रही है। पिछली बार सीएजी ने गाजियाबाद विकास प्राधिकरण समेत कुछ प्राधिकरणों के आडिट की मांग की लेकिन राज्य सरकार ने मंजूरी नहीं दी। तब राज्यपाल ने भी इस मामले में हस्तक्षेप किया था। कैबिनेट ने फैसला किया है कि अगर सीएजी आडिट का प्रस्ताव रखेगी तो राज्य सरकार अनुमति देगी।&lt;br /&gt;
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नेपाल सीमा के जिलों का होगा विकास&lt;br /&gt;
बार्डर एरिया डेवलपमेंट के तहत नेपाल सीमा पर उत्तर प्रदेश के सात जिलों महराजगंज, सिद्धार्थनगर, श्रावस्ती, बलरामपुर, बहराइच, खीरी और पीलीभीत के विकास के लिए कैबिनेट में नोट प्रस्तुत किया गया जिसे अनुमोदन मिला है।&lt;br /&gt;
-----&lt;br /&gt;
15 जून तक सड़कें होगी गड्ढामुक्त&lt;br /&gt;
कैबिनेट ने तय किया है कि 15 जून तक प्रदेश की सभी सड़कें गड्ढामुक्त हो जाएंगी। गड्ढे वाली 85943 किलोमीटर सड़क चिह्नित की गई हैं। चेतावनी दी गई है कि अगर बरसात से पहले सड़कों का सिर्फ रंगरोगन किया गया और फिर खराब स्थिति दिखी तो कार्रवाई की जाएगी। गांव और कस्बों का पानी सड़क पर आने से भी टूटती है इसलिए ड्रेनेज सिस्टम दुरुस्त करने की हिदायत दी गई है।&lt;br /&gt;
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दिमागी बुखार के मरीजों को राहत&lt;br /&gt;
सरकार ने जापानी इंसेफेलाइटिस के पीडि़तों को राहत देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। इस बीमारी के रोकथाम के लिए फागिंग की कार्रवाई किए जाने की हिदायत के साथ ही निगरानी की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। जिला अस्पतालों में बीमारी को देखते हुए दस और बेड बढ़ाए जाएंगे। मेडिकल कॉलेज गोरखपुर में पूर्वी उत्तर प्रदेश के जिलों के पीएचसी और सीएचसी के चिकित्सकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। पीएचसी और सीएचसी में यह उपचार की व्यवस्था पहले उपलब्ध होगी। स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह और स्वास्थ्य राज्य मंत्री डॉ. महेंद्र सिंह को ग्रामीण इलाकों में अधिकारियों के साथ प्रवास पर जाने को कहा गया है।&lt;br /&gt;
------&lt;br /&gt;
ई टेंडङ्क्षरग के जरिये डीएम देंगे छह माह का खनन पट्टा&lt;br /&gt;
अवैध खनन पर अंकुश लगाने की दिशा में सरकार द्वारा उठाए गए सख्त कदम के बाद बालू-मौरंग की किल्लत हो गई है। इससे निर्माण प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। कैबिनेट की पिछली बैठक में मंत्री समूह को कारगर योजना बनाने की जिम्मेदारी दी गई थी। इसके तहत अल्पकालीन योजना और दीर्घकालीन योजना बनी है। अल्पकालीन योजना के तहत बाजार में तत्काल बालू-मौरंग की व्यवस्था सुनिश्चित हो, इसके लिए पड़ोसी राज्यों की परमिट प्राप्त गाडिय़ों को बालू-मौरंग लेकर आने की छूट मिलेगी। मतलब मध्य प्रदेश या उत्तराखंड के जिन वाहनों के पास वैध ट्रांजिट परमिट होगा, वह स्वीकार किया जाएगा। जिलाधिकारी के जरिये छह माह के लिए ई-टेंडङ्क्षरग के जरिए अधिकतम दस एकड़ में खनन के पट्टे दिए जाएंगे। डेढ़ माह में इसकी प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। दीर्घकालिक योजना के तहत अगले पांच साल के लिए पट्टे किए जाने हैं। इसकी प्रक्रिया पूरी करने में आठ- दस माह लगेंगे।&lt;br /&gt;
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बुंदेलखंड में पेयजल योजना&lt;br /&gt;
कैबिनेट ने बुंदेलखंड की स्थिति देखते हुए पेयजल योजना समयबद्ध ढंग से पूरा करने का निर्णय किया है। मंत्री डॉ. महेंद्र सिंह को बुंदेलखंड और नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना को शहरी अंचलों में प्रवास कर प्रभावी कदम उठाने की जिम्मेदारी दी गई है। पेयजल संकट दूर करने के लिए नलकूप लगाने और रीबोङ्क्षरग से लेकर टैंकर की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है।&lt;br /&gt;
--------&lt;br /&gt;
प्रतियोगी परीक्षार्थियों को मिलेगी राहत&lt;br /&gt;
संघ लोक सेवा आयोग ने सीसैट लागू किया था। उसी तर्ज पर उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग ने भी परीक्षा की व्यवस्था कर दी। उसके बाद दो पेपर होने लगे। इसको हटाने की मांग तेज हुई। संघ लोकसेवा आयोग ने 2014 में अपना आदेश वापस ले लिया लेकिन, उप्र सरकार ने दो अतिरिक्त अवसर की मांग खारिज करते हुए यह दलील दी कि 35 वर्ष से उम्र बढ़ाकर 40 वर्ष कर दी गई है इसलिए लाभ नहीं मिल सकता। सरकार के इस नए फैसले से प्रतियोगी परीक्षाओं को खासतौर से 2013 और 2014 में ओवरएज हो चुके प्रतियोगियों को लाभ मिलेगा।&lt;br /&gt;
-------&lt;br /&gt;
- तीसरी कैबिनेट-&lt;br /&gt;
- योगी सरकार के पांच फैसलों में से दो किसानों के लिए&lt;br /&gt;
- 21 दिन के भीतर किसानों को देना होगा बीमा भुगतान&lt;br /&gt;
--------&lt;br /&gt;
राज्य ब्यूरो, लखनऊ : चुनाव के दौरान भाजपा ने &#39;कृषि विकास का बने आधारÓ नारा दिया था। संकल्प पत्र में भी किसानों के हित में कई वायदे किए गए थे और अब भाजपा की सरकार उस दिशा में निरंतर कदम बढ़ा रही है। मंगलवार को योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में लोकभवन में हुई तीसरी कैबिनेट की बैठक में पांच फैसले किए गए। इसमें दो प्रमुख फैसले किसानों के हित में हैं। इसके तहत 20 जिलों में कृषि विज्ञान केंद्र खोले जाएंगे और किसानों को फसल बीमा का 21 दिन में भुगतान न होने पर बीमा कंपनी को जुर्माना देना पड़ेगा।&lt;br /&gt;
------&lt;br /&gt;
20 जिलों में खुलेंगे कृषि विज्ञान केंद्र&lt;br /&gt;
कृषि विज्ञान केंद्र खोलने की योजना केंद्र सरकार की है लेकिन, पिछली सरकार ने इस दिशा में कदम नहीं उठाए। सरकार के प्रवक्ता और ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा व स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने बताया कि प्रदेश में 69 कृषि विज्ञान केंद्र हैं। 20 कृषि विज्ञान केंद्र खोलने के लिए भारत सरकार ने स्वीकृति दी है। कैबिनेट को प्रदेश में कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालयों के तहत 20 नए कृषि विज्ञान केन्द्र खोलने के बारे में अवगत कराया गया। यह केन्द्र लखीमपुर-खीरी, हरदोई, आजमगढ़, जौनपुर, बदायूं, सुलतानपुर, बहराइच, मुरादाबाद, गोण्डा, गाजीपुर, मुजफ्फरनगर, रायबरेली, हापुड़, शामली, सम्भल, अमेठी, कासगंज, श्रावस्ती, अमरोहा एवं इलाहाबाद में स्थापित किये जा रहे हैं। हर कृषि विज्ञान केंद्र को 30 एकड़ जमीन चाहिए। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा पूर्ण वित्त पोषित कृषि विज्ञान केन्द्रों की स्थापना के लिए राज्य सरकार द्वारा नि:शुल्क भूमि उपलब्ध करायी जाती है। कृषि विज्ञान केन्द्रों की स्थापना के लिए 14 जिलों के डीएम द्वारा भूमि की उपलब्धता से अवगत कराया गया है। मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को दस दिन के भीतर जमीन खोजने की जिम्मेदारी दी है। सात नए जिले हैं जहां कृषि विज्ञान केंद्र नहीं थे। इस व्यवस्था से अब कुछ जिलों में दो-दो कृषि विज्ञान केंद्र खुल जाएंगे और सूबे के सभी जिलों में यह केंद्र होगा।&lt;br /&gt;
-------&lt;br /&gt;
दो वर्षों के लिए बीमा योजना लागू&lt;br /&gt;
कैबिनेट ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना तथा पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना को दो वर्षों 2017-18 और 2018-19 के लिए लागू करने का निर्णय किया है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ उत्तर प्रदेश में किसानों को ठीक से नहीं मिल पा रहा था। बीमा कंपनी को 21 दिन के भीतर क्लेम देना जरूरी होता है। कैबिनेट ने तय किया है कि बीमा कंपनी ने अगर 21 दिन में निर्धारित भुगतान नहीं किया तो सात-सात दिन में पेनाल्टी बढ़ाई जाएगी। अगर इसके बाद भी भुगतान नहीं किया तो बीमा कंपनी को ब्लैक लिस्ट किया जाएगा। कैबिनेट ने यह भी गाइड लाइन दी है कि हर कंपनी को एक ब्लाक में एक एजेंट बनाना होगा। प्रदेश में संचालित फसल बीमा योजना के तहत प्रदेश के सभी 75 जिलों को 12 समूहों में बांटा जाएगा तथा निविदा के माध्यम से बीमा कंपनियों का चयन करते हुए योजना को संचालित कराया जाएगा। योजना में खरीफ मौसम में धान, मक्का, ज्वार, बाजरा, उर्द, मूंग, मूंगफली, तिल, सोयाबीन व अरहर की फसल तथा रबी मौसम में गेहूं, चना, मटर, मसूर, लाही, सरसों व आलू फसल के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर प्रदेश के सभी जिलों में लागू किया जाएगा। योजना में फसल की बुवाई से कटाई की समयावधि में प्राकृतिक आपदा व रोगों, से फसल के नष्ट होने की स्थिति तथा फसल की कटाई के बाद अगले 14 दिनों में खेत में कटी हुई फसल की क्षति की स्थिति में किसानों को बीमा कवर के रूप में वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। इसी तरह खाद्य फसलों, अनाज व दलहन, तिलहन के लिए भी गाइड लाइन तैयार की गई है। पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना के तहत कुशीनगर, गोरखपुर, बहराइच, बाराबंकी, कौशांबी व महराजगंज में केले की फसल तथा फतेहपुर, फीरोजाबाद, लखीमपुर-खीरी, बाराबंकी, मीरजापुर व बरेली में मिर्च की फसल को ब्लॉक में स्थापित मौसम केन्द्र स्तर पर बीमित किया जाएगा।&lt;br /&gt;
-------&lt;br /&gt;
&#39;एक थी रानी ऐसी भीÓ फिल्म टैक्स फ्री&lt;br /&gt;
कैबिनेट ने &#39;एक थी रानी ऐसी भीÓ फिल्म को टैक्स फ्री करने का फैसला किया है। यह फिल्म गोवा की राज्यपाल मृदुला सिन्हा की लिखी पुस्तक पर बनी है। सिन्हा ने राजमाता विजयराजे सिंधिया के जीवन पर एक पुस्तक लिखी है जिस पर यह फिल्म बनी है। इस संदर्भ में आयुक्त मनोरंजन कर द्वारा अवगत कराया गया कि यह फिल्म राजमाता विजयाराजे सिंधिया का राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पण के साथ-साथ देशवासियों को समाज सेवा एवं महिला सशक्तिकरण के लिए प्रेरित करती है।&lt;br /&gt;
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अब महायोगी गोरखनाथ सिविल टर्मिनल&lt;br /&gt;
कैबिनेट ने गोरखपुर और आगरा सिविल टर्मिनल का नाम बदलने का फैसला किया है। गोरखपुर में सिविल टर्मिनल का नाम बदलकर महायोगी गोरखनाथ टर्मिनल रखा जाएगा जबकि आगरा के टर्मिनल का नाम पं. दीनदयाल उपाध्याय टर्मिनल होगा। इस सिलसिले में विधानसभा में पारित किए जाने के प्रस्ताव को भी कैबिनेट ने अनुमोदित किया है। यह प्रस्ताव विधानसभा में पारित कराकर केन्द्र सरकार को भेजा जाएगा। ध्यान रहे कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर के गोरक्षपीठ के महंत हैं।&lt;br /&gt;
--------&lt;br /&gt;
विकलांग कल्याण विभाग का नाम दिव्यांगजन सशक्तिकरण&lt;br /&gt;
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले वर्ष ही विकलांग शब्द को नया नाम दिव्यांग दिया था और इससे जुड़े विभागों को भी विकलांग की जगह दिव्यांग कर दिया गया था। राज्य सरकार ने भी महत्वपूर्ण फैसले के तहत विकलांग कल्याण विभाग की जगह नाम बदलकर दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग कर दिया है। मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने बताया कि इस निर्णय से विकलांगजन में हीनभावना कम होगी और वह स्वयं को सशक्त महसूस करेंगे।&lt;br /&gt;
--------&lt;br /&gt;
अब दफ्तर में कार्यकर्ता नहीं, सिर्फ षड्यंत्र : शर्मा&lt;br /&gt;
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सुरक्षा से मुस्लिम पुलिसकर्मियों के हटाए जाने के सवाल पर प्रदेश सरकार के प्रवक्ता और ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा के तेवर तीखे हो गए। बोले, अफवाहों पर ध्यान मत दो। बिना नाम लिए समाजवादी पार्टी की ओर इशारा करते हुए शर्मा ने कहा कि बौखलाहट में मोदी और योगी सरकार के खिलाफ कुछ लोग दिन भर षड्यंत्र में लगे हैं, क्योंकि अब उनके दफ्तर में कार्यकर्ता आते नहीं हैं। शर्मा ने कहा कि योगी सरकार प्रगति पथ पर है और हर तरफ खुशहाली है। एंटी रोमियो अभियान से महिलाएं सुरक्षित महसूस कर रही हैं।&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
&amp;nbsp;चौथी कैबिनेट&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अपडेट -महत्वपूर्ण लीड - कैबिनेट 2 - ब्यूरो : एंटी भू-माफिया टास्क फोर्स को मंजूरी&lt;br /&gt;
नोट--अपडेट खबर में नए तथ्य जोड़ते हुए&lt;br /&gt;
-----&lt;br /&gt;
- चार स्तरीय होगी टास्क फोर्स, दो माह में चिह्नित होंगे कब्जेदार&lt;br /&gt;
- अवैध कब्जे की ऑनलाइन दर्ज करा सकेंगे शिकायत&lt;br /&gt;
-----&lt;br /&gt;
राज्य ब्यूरो, लखनऊ : भाजपा के लोक कल्याण संकल्प पत्र में किये गए चुनावी वादे को निभाते हुए योगी सरकार ने सरकारी व निजी संपत्तियों को अवैध कब्जों से मुक्त कराने व दोषियों को सजा दिलाने के लिए मंगलवार को चार स्तरीय एंटी भू-माफिया टास्क फोर्स गठित करने का फैसला किया है। एंटी भू-माफिया टास्क फोर्स तहसील, जिला, मंडल और राज्य स्तर पर गठित होगी।&lt;br /&gt;
कब्जे चिह्नित करने को दो महीने चलेगा अभियान : सरकारी संपत्तियों पर अवैध कब्जों को चिह्नित करने के लिए दो महीने का अभियान चलाया जाएगा। जिलाधिकारी की अगुआई में जिला स्तरीय टास्क फोर्स गठित की जाएगी। सभी सरकारी विभाग, स्थानीय निकाय, प्राधिकरण, निगम, सार्वजनिक उपक्रम, आदि अवैध कब्जे का शिकार अपनी जमीनों व परिसंपत्तियों की सूची जिला स्तरीय टास्क फोर्स को सौंपेंगे। वे यह जानकारी भी मुहैया कराएंगे कि परिसंपत्तियों पर किसने कब्जा किया है, कब्जा हटाने के लिए विभाग की ओर से क्या कार्रवाई की गई है और कब्जा न हट पाने में क्या समस्या आड़े आ रही है। उप जिलाधिकारी (एसडीएम) तहसीलों के अंतर्गत ग्राम समाज की परिसंपत्तियों पर हुए अवैध कब्जे की पड़ताल तहसील स्तरीय टास्क फोर्स के जरिये कराएंगे। अवैध कब्जे चिह्नित किये जाने के बाद संबंधित विभाग अपने शासनादेशों के अनुसार उन्हें खाली कराने की कार्यवाही करेंगे। कब्जे में &amp;nbsp;सरकारी अधिकारी-कर्मचारी की मिलीभगत पाये जाने पर उनके खिलाफ विभागीय कार्यवाही की जाएगी। शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी/निगम/प्राधिकरण/उपक्रम की जमीनों पर भविष्य में कोई अनधिकृत निर्माण न हो, इसके लिए संबंधित जिला व मंडल स्तरीय अधिकारी जिम्मेदार होंगे।&lt;br /&gt;
----&lt;br /&gt;
पेशेवर भू-माफिया को चिह्नित करेगी पुलिस : वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों/पुलिस अधीक्षकों को पेशेवर भू-माफिया की श्रेणी में आने वाले लोगों को चिह्नित करने के निर्देश दिये जाएंगे। उन्हें ऐसे लोगों को चिह्नित करना होगा जिनके बारे में संपत्तियों पर अवैध कब्जे करने की शिकायतें अमूमन मिलती रहती हैं। यह वे लोग होंगे जो राजनीतिक संरक्षण में और सरकारी विभागों के अधिकारियों-कर्मचारियों की सांठगांठ से आये दिन सरकारी, निजी व धार्मिक संस्थाओं की संपत्तियों पर कब्जे करते रहते हैं। पुलिस ऐसे पेशेवर भू-माफिया की सूची जिला स्तरीय टास्क फोर्स को सौंपेगी। ऐसे लोगों पर गैंगस्टर एक्ट, गुंडा एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी।&lt;br /&gt;
----&lt;br /&gt;
कब्जे की शिकायत में लापरवाही पर नपेंगे थाना प्रभारी : पुलिस को सख्त निर्देश दिये जाएंगे कि अपनी संपत्ति पर अवैध कब्जे की शिकायत लेकर पहुंचने वाले फरियादियों की थानों पर उचित सुनवाई हो। यदि कब्जा हो रहा हो या होने की आशंका हो तो पुलिस फौरन हस्तक्षेप कर उसे रोकें। कब्जा करने वाले के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई करें। कब्जे की शिकायतों में पुलिस की ओर से लापरवाही या ढिलाई बरते जाने पर थाना प्रभारी को सीधे जिम्मेदार मानते हुए उनके खिलाफ कार्यवाही होगी।&lt;br /&gt;
----&lt;br /&gt;
कानूनी पचड़े में फंसी संपत्तियों को मुक्त कराने की होगी पहल : जिला स्तरीय टास्क फोर्स देखेगी कि कौन सी संपत्तियां कानूनी विवाद के कारण कब्जे से मुक्त नहीं हो पा रही हैं। ऐसी संपत्तियों को अवैध कब्जे से मुक्त कराने के लिए अदालत में प्रभावी पैरोकारी की जाएगी।&lt;br /&gt;
----&lt;br /&gt;
सार्वजनिक संपत्ति पर धार्मिक स्थलों के निर्माण पर होगी कार्रवाई : सार्वजनिक गलियों/मार्गों/पार्कों व अन्य स्थानों पर धार्मिक स्थल के निर्माण को लेकर हाईकोर्ट द्वारा 29 सितंबर 2009 को दिये गए आदेश के क्रम में गृह विभाग द्वारा 18 अक्टूबर 2009 को जारी शासनादेश के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। सार्वजनिक संपत्तियों पर हुए अवैध कब्जों के मामलों में पब्लिक प्रेमाइसेस एविक्शन एक्ट के तहत दर्ज मुकदमों की स्थिति की नियमित समीक्षा की जाएगी।&lt;br /&gt;
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मुख्य सचिव होंगे राज्य स्तरीय टास्क फोर्स के अध्यक्ष : अवैध कब्जों को भू-माफिया के चंगुल से मुक्त कराने की कार्यवाही की राज्य स्तर पर समीक्षा करने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय टास्क फोर्स गठित की जाएगी। प्रमुख सचिव राजस्व इसके सदस्य-सचिव होंगे। राज्य स्तरीय टास्क फोर्स की बैठक हर दो महीने में होगी। जिला स्तरीय टास्क फोर्स के कामकाज की समीक्षा कर मंडलायुक्त की अध्यक्षता में गठित मंडल स्तरीय टास्क फोर्स हर महीने अपनी रिपोर्ट राज्य स्तरीय टास्क फोर्स को सौंपेगी। तहसील स्तरीय टास्क फोर्स शिकायतों पर 15 दिन में कार्यवाही कर उसे वेबपोर्टल पर दर्ज कराएगी।&lt;br /&gt;
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पोर्टल पर ऑनलाइन दर्ज करा सकेंगे शिकायतें : सरकारी व निजी संपत्तियों पर अवैध कब्जे की शिकायतें तहसील दिवस पर या सीधे किये जाने के अलावा ऑनलाइन भी दर्ज करायी जा सकेंगी। इसके लिए राजस्व परिषद स्तर पर ऑनलाइन पोर्टल तैयार कराया जाएगा। जब तक यह पोर्टल तैयार नहीं हो जाता, तब तक लोग शिकायतें राज्य सरकार द्वारा एकीकृत शिकायत निवारण प्रणाली के तहत संचालित जनसुनवाई पोर्टल पर दर्ज करायी जा सकेंगी। शिकायतकर्ता अपनी शिकायतों पर हुई कार्यवाही से एसएमएस के जरिये अवगत हो सकेंगे।&lt;br /&gt;
अपडेट महत्वपूर्ण : कैबिनेट1- ब्यूरो : महापुरुषों के नाम की 15 छुट्टियां रद&lt;br /&gt;
नोट : इन छुट्टियों की हो गई छुट्टी समेत कई इनसेट हैं।&lt;br /&gt;
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- योगी सरकार की चौथी कैबिनेट में कई अहम फैसले&lt;br /&gt;
- महापुरुषों के नाम पर स्कूल-कालेजों में होगी परिचर्चा&lt;br /&gt;
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राज्य ब्यूरो, लखनऊ : योगी सरकार की चौथी कैबिनेट की बैठक में कई अहम फैसले किए गए। संकल्प पत्र के वादे के अनुरूप भू-माफिया पर नकेल कसने के लिए एंटी भू-माफिया टास्क फोर्स गठित करने और सार्वजनिक स्थलों पर धर्म के नाम पर कब्जा रोकने की पहल के साथ ही महापुरुषों के नाम पर 15 छुट्टियां रद कर दी गई हैं। कैबिनेट ने 15 सार्वजनिक अवकाशों को निर्बंधित अवकाश की श्रेणी में सम्मिलित किए जाने संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी दी है। सरकार ने तय किया है कि जीएसटी बिल को पास कराने के लिए 15 मई से एक विशेष सत्र का आयोजन होगा।&lt;br /&gt;
&amp;nbsp;मंगलवार को लोकभवन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में करीब दो घंटे चली कैबिनेट की बैठक के बाद सरकार के प्रवक्ता और ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने पत्रकारों से जानकारी साझा की। शर्मा ने बताया कि सरकार के पास काम करने के दिन कम बचते हैं क्योंकि अवकाश बढ़ गए हैं। कैबिनेट ने सार्वजनिक छुट्टियों को समाप्त कर निर्बंधित अवकाश के रूप में कर दिया है। इसमें कोई भी कर्मचारी किन्हीं दो छुट्टियों को ले सकता है। यह फैसला कैलेंडर वर्ष 2017 के लिए लागू होगा। कैबिनेट ने फैसला किया है कि महापुरुषों के जन्मदिन और बलिदान दिवस के दिन महापुरुषों के बारे में स्कूल और कालेजों में एक घंटे के लिए परिचर्चा और निबंध प्रतियोगिता होगी। सरकार ने तय किया है कि स्वाधीनता संग्राम में जितने भी क्रांतिकारी रहे हैं उनके बलिदान दिवस पर सभी शिक्षण संस्थाओं में विशेष आयोजन होंगे। उन्हें स्मरण करते हुए उनके बारे में विद्यार्थियों को विशेष जानकारी दी जाएगी। सरकारी दफ्तरों में भी उस दिन अवकाश नहीं रहेगा। संस्थान अपने विवेक से इनके नाम पर कार्यालय में कार्यक्रम आयोजित कर सकेंगे। महापुरुषों की जयंती एवं पुण्यतिथि के दिन रविवार या किसी अन्य कारण से अवकाश होने की स्थिति में उसके एक दिन पूर्व उनकी याद में सभा, गोष्ठी और सेमिनार का आयोजन होगा।&lt;br /&gt;
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अंबेडकर जयंती पर योगी ने किया था एलान&lt;br /&gt;
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 14 अप्रैल को अंबेडकर जयंती पर अंबेडकर महासभा परिसर में एक समारोह को संबोधित करने गए थे। तब उन्होंने महापुरुषों के नाम पर होने वाली छुट्टियों को समाप्त करने का एलान किया था। दरअसल, उनका कहना यह था कि छुट्टियां तो होती हैं लेकिन जिन महापुरुषों के नाम पर होती उनके बारे में बच्चे कुछ जान नहीं पाते हैं। एक वाकया भी बताए कि एक बार स्कूल न जाने पर बच्चे से वजह पूछी तो बताया कि आज इतवार है जबकि उस दिन मंगलवार था। उस दिन किसी महापुरुष की जयंती थी। इसीलिए महापुरुषों के बारे में बच्चों को जानकारी मुहैया कराने के लिए योगी ने अवकाश के दिन स्कूलों में परिचर्चा कराने की प्रक्रिया शुरू करने की बात रखी जिसे कैबिनेट ने मंगलवार को मंजूरी दे दी है।&lt;br /&gt;
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इन छुट्टियों की हो गई छुट्टी&lt;br /&gt;
महापुरुष - अवकाश की तारीख&lt;br /&gt;
1.कर्पूरी ठाकुर जयंती - 24 जनवरी&lt;br /&gt;
2. महर्षि कश्यप एवं महाराज गुहा - पांच अप्रैल&lt;br /&gt;
3. चेटी चंद - 29 मार्च&lt;br /&gt;
4. हजरत ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती अजमेरी का उर्स - 14 अप्रैल&lt;br /&gt;
5. चंद्रशेखर जयंती - 17 अप्रैल&lt;br /&gt;
6. परशुराम जयंती - 28 अप्रैल&lt;br /&gt;
7. महाराणा प्रताप जयंती - नौ मई&lt;br /&gt;
8. रमजान का अंतिम शुक्रवार - 23 जून&lt;br /&gt;
9. विश्वकर्मा पूजा - 17 सितंबर&lt;br /&gt;
10. अग्रसेन जयंती - 21 सितंबर&lt;br /&gt;
11. बाल्मिकी जयंती - पांच अक्टूबर&lt;br /&gt;
12. छठ पूजा पर्व - 26 अक्टूबर&lt;br /&gt;
13. बल्लभ भाई पटेल और नरेन्द्र देव जयंती - 31 अक्टूबर&lt;br /&gt;
14. ईद-उ-मिलादुन्नवी - दो दिसंबर&lt;br /&gt;
15. चौधरी चरण सिंह जयंती - 23 दिसंबर&lt;br /&gt;
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15 मई से विधानमंडल सत्र&lt;br /&gt;
योगी सरकार में विधानमंडल सत्र की शुरुआत 15 मई से होगी। सत्र एक सप्ताह तक चलेगा। यह सत्र विशेष रूप से जीएसटी बिल पास कराने के लिए बुलाया जा रहा है। सरकार की मंशा है कि एक देश-एक कानून का फार्मूला सब जगह रहे। अभी हाल में संसद से जीएसटी पारित हो गया है। जीएसटी के लिए सत्र बुलाने पर कैबिनेट ने संस्तुति दी है। इसके पहले मंगलवार को ही मुख्यमंत्री ने राज्यपाल से मिलकर सत्र चलाने के संदर्भ में विमर्श किया था।&lt;br /&gt;
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धर्म की आड़ में सार्वजनिक स्थलों पर कब्जा नहीं&lt;br /&gt;
सुप्रीम कोर्ट ने गाइड लाइन दी थी कि धर्म के नाम पर सार्वजनिक स्थलों का अतिक्रमण हटाया जाए लेकिन, यह दिशा निर्देश प्रभावी नहीं हो सका। कैबिनेट ने फैसला किया है कि सार्वजनिक स्थलों पर यदि कोई कब्जा करता है तो उस पर कार्रवाई होगी। ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने कहा कि चाहे वह किसी धर्म का हो लेकिन, अगर गैर कानूनी ढंग से धर्म स्थल का निर्माण करेगा तो उसे हटाया जाएगा और कार्रवाई होगी।&lt;br /&gt;
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सुकमा में उप्र के दो शहीदों को 30-30 लाख&lt;br /&gt;
कैबिनेट ने छत्तीसगढ़ के सुकमा हमले में शहीद सीआरपीएफ जवानों को श्रद्धांजलि देते हुए उनके परिवारीजन के प्रति संवेदना प्रकट की है। कैबिनेट ने इस कायराना हमले की निंदा भी की है। कैबिनेट की बैठक में तय हुआ कि सुकमा में मारे गए जवानों में उप्र के दो जवानों के आश्रितों को 30-30 लाख रुपये दिए जाएंगे। इसमें एटा के जवान केपी सिंह और मुजफ्फरनगर के मनोज कुमार के परिवारीजन को सांत्वना देने के लिए राज्य सरकार के मंत्री जाएंगे। एटा के लिए पशुधन मंत्री प्रोफेसर एसपी बघेल और खाद्य एवं रसद राज्यमंत्री अतुल गर्ग तथा मुजफ्फरनगर जाने के लिए औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना और गन्ना विकास राज्य मंत्री सुरेश राणा को अधिकृत किया गया है। ये मंत्री शहीदों के परिवारों को सांत्वना देंगे।&lt;br /&gt;
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रेल परियोजना को ट्रांसफर होगी सिंचाई विभाग की जमीन&lt;br /&gt;
कैबिनेट ने डेडीकेटेड फ्रेट कॉरीडोर रेल परियोजना के लिए चंदौली जिले में स्थिति सिंचाई विभाग की कुल 0.1898 हेक्टेयर भूमि ट्रांसफर करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसके लिए सिंचाई विभाग को 97 लाख 62 हजार 400 रुपये का भुगतान होगा। भुगतान के बाद ही जमीन ट्रांसफर होगी।&lt;br /&gt;
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गोरखपुर में प्रेक्षागृह निर्माण को नि:शुल्क हस्तांतरित होगी भूमि&lt;br /&gt;
कैबिनेट ने गोरखपुर विकास प्राधिकरण की कारपोरेट पार्क परियोजना के मध्य स्थित 3.54 एकड़ क्षेत्र में सिंचाई विभाग के जीर्ण-शीर्ण निरीक्षण भवन व भूमि को प्रेक्षागृह के निर्माण के लिए संस्कृति विभाग को नि:शुल्क हस्तांतरित किए जाने संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी दी है। भवन व भूमि की उपयोगिता सिंचाई विभाग के लिए शून्य है। प्रेक्षागृह के निर्माण से सांस्कृतिक गतिविधियों का संचालन होगा, जिससे जनसामान्य लाभांवित होंगे।&lt;br /&gt;
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&amp;nbsp;पांचवीं कैबिनेट&lt;br /&gt;
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अपडेट-महत्वपूर्ण-कैबिनेट-ब्यूरो : एक जिले में तीन वर्ष से ज्यादा नहीं रह सकेंगे अफसर&lt;br /&gt;
नोट : सभी फैसलों को विस्तार दिया गया है। फैसलों को अलग-अलग भी प्रकाशित किया जा सकता है।&lt;br /&gt;
नोट : पहले पेज पर प्रमुखता से लगाएं।&lt;br /&gt;
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- पांचवीं कैबिनेट बैठक में योगी सरकार के छह बड़े फैसले&lt;br /&gt;
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राज्य ब्यूरो, लखनऊ : योगी सरकार ने मंगलवार को छह बड़े फैसले किए। लोकभवन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में पांचवीं कैबिनेट बैठक में नई तबादला नीति को मंजूरी दी गई। इसके तहत अब एक जिले में तीन वर्ष से ज्यादा अफसर नहीं रह सकेंगे। सरकारी विभागों में ठेके-पट्टे के नाम पर होने वाले भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए ई-टेंडरिंग, प्रतिवर्ष 24 जनवरी को उत्तर प्रदेश दिवस मनाने, गोरखपुर के फर्टिलाइजर कारखाने के लैंड ट्रांसफर में लगने वाले 210 करोड़ रुपये की स्टांप ड्यूटी में छूट का फैसला लिया गया। जिला खनिज फाउंडेशन न्यास के गठन को भी मंजूरी मिली है।&lt;br /&gt;
एनेक्सी के मीडिया सेंटर में सरकार के प्रवक्ता व स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह और नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना ने पत्रकारों को कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए सरकार की मंशा जाहिर की। ई-टेंडरिंग को खास पहल बताते हुए उन्होंने कहा कि सपा सरकार में &#39;क्रोनी कैप्टलिज्मÓ चला था, जिसका अब अंत हो गया है। इसे स्पष्ट करते हुए कहा कि पालिटीशियन, ब्यूरोक्रेट और बिजनेस हाउस का गठजोड़ समाप्त हो गया है।&lt;br /&gt;
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नई तबादला नीति को मंजूरी&lt;br /&gt;
नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों की तबादला नीति 2017-18 को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। इसके तहत व्यवस्था दी गई है कि शासन, विभागाध्यक्ष, मंडल एवं जिला स्तर के सभी स्थानांतरण 30 जून, 2017 तक पूर्ण कर लिए जाएंगे। नई नीति के अनुसार समूह क और ख के ऐसे अधिकारियों के तबादले किए जा सकेंगे जो जिले में तीन वर्ष एवं मंडल में सात वर्ष का कार्यकाल पूर्ण कर चुके हैं। समूह ख का तबादला विभागाध्यक्ष कर सकेंगे। विभागाध्यक्ष को 20 फीसद तबादले का अधिकार दिया है। दिव्यांगजन इस फैसले से प्रभावित नहीं होंगे। समूह ख के ऊपर के अधिकारियों का तबादला शासन से होगा। दो वर्ष के भीतर सेवानिवृत्त होने वाले समूह ग और घ के कर्मचारी को अपने गृह जिले तथा समूह क और ख के अधिकारियों को गृह जिला छोड़कर इच्छित जिले में तैनाती का मौका मिलेगा। खन्ना ने बताया कि तबादले की अंतिम तारीख 30 जून होगी। समूह ग के कर्मियों का हर तीन वर्ष पर पटल परिवर्तन होगा। इनका तबादला विभागाध्यक्ष कर सकेंगे। तबादले के अवधि के निर्धारण के लिए 31 मार्च, 2017 कट आफ डेट निर्धारित की गई है। विभागीय आवश्यकता की दृष्टि से स्थानांतरण नीति में मुख्यमंत्री का अनुमोदन प्राप्त कर विचलन किए जाने का प्रावधान किया गया है। जनहित एवं प्रशासनिक दृष्टिकोण से मुख्यमंत्री द्वारा कभी भी किसी भी कार्मिक को स्थानांतरित किए जाने का आदेश दिया जा सकता है। स्थानांतरण नीति में संशोधन की कार्रवाई मुख्यमंत्री से अनुमोदन प्राप्त कर की जा सकेगी। नीति में यह स्पष्ट किया गया है कि संदिग्ध सत्य निष्ठा वाले कार्मिकों की तैनाती संवेदनशील पदों पर कतई नहीं की जाएगी। मंदित बच्चों के माता-पिता की तैनाती अधिकृत सरकारी चिकित्सक के प्रमाण-पत्र के आधार पर विकल्प प्राप्त करके ऐसे स्थान पर की जा सकेगी, जहां चिकित्सा की समुचित व्यवस्था उपलब्ध हो। समूह &#39;कÓ के अधिकारियों को उनके गृह मंडल में तैनात नहीं किया जाएगा। सरकारी सेवकों के मान्यता प्राप्त सेवा संघों के अध्यक्ष/सचिव, जिनमें जिला शाखाओं के अध्यक्ष एवं सचिव भी सम्मिलित हैं, के स्थानांतरण उनके द्वारा संगठन में पदधारित करने की तारीख से दो वर्ष तक नहीं किए जाएंगे। यदि स्थानांतरण किया जाना अपरिहार्य हो तो स्थानांतरण हेतु प्राधिकृत अधिकारियों से एक स्तर उच्च अधिकारी का पूर्व में अनुमोदन प्राप्त किया जाएगा। जिला शाखाओं के पदाधिकारियों के स्थानांतरण प्रकरणों पर जिला अधिकारी की पूर्वानुमति प्राप्त की जाएगी।&lt;br /&gt;
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हर वर्ष 24 जनवरी को मनेगा उत्तर प्रदेश दिवस&lt;br /&gt;
सरकार अब हर साल 24 जनवरी को उत्तर प्रदेश दिवस मनाएगी। सिद्धार्थनाथ सिंह का कहना था कि राज्य या देश की जन्मतिथि उसकी पहचान है। इस पहचान और स्वाभिमान के लिए जन्मतिथि उत्सव दिवस के रूप में मनाने के प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दी है। प्रदेश की जिन महान विभूतियों ने देश की आजादी में योगदान दिया है, उत्तर प्रदेश दिवस के अवसर पर उन्हें प्रचारित-प्रसारित किया जाएगा। साथ ही, प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर एवं विविधता को भी प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाएगा। नई पीढ़ी को प्रदेश के विकास एवं परिवेश से जोडऩे के लिए विविध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। यह भी निर्णय लिया गया है कि राज्य के बाहर अन्य प्रांतों में वहां रहने वाले प्रवासी प्रदेश वासियों के बीच भी उत्तर प्रदेश दिवस संबंधी कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, जिससे उनकी प्रतिबद्धता उत्तर प्रदेश के प्रति बढ़ सके। उत्तर प्रदेश दिवस के आयोजन के लिए कैबिनेट की एक समिति गठित होगी जो एक माह में दिवस आयोजन की कार्ययोजना को अंतिम स्वरूप प्रदान करेगी। पहले उत्तर प्रदेश को यूनाइटेड प्राविंस के रूप में जाना जाता था लेकिन, 24 जनवरी 1950 को उत्तर प्रदेश का नाम दिया गया। कैबिनेट ने 24 जनवरी को ही उत्तर प्रदेश दिवस मनाने का फैसला किया है। यह आयोजन सूचना विभाग करेगा लेकिन संस्कृति और पर्यटन विभाग भी सहयोगी होंगे। इसमें ग्राम्य विकास, नगर विकास, आवास एवं शहरी नियोजन तथा औद्योगिक विकास विभाग सहित अन्य विभागों की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। &amp;nbsp;उल्लेखनीय है कि राज्यपाल राम नाईक ने काफी पहले उत्तर प्रदेश दिवस मनाने की पहल की थी।&lt;br /&gt;
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तीन माह में ई-टेंडरिंग&lt;br /&gt;
कैबिनेट ने प्रशासनिक और शासकीय विभाग को मैन्युअल टेंडरिंग खत्म करने के लिए बाध्य किया है। पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा के लिए सभी तरह के ठेकों में ई-टेंडरिंग और ई-प्रोक्योरमेंट की व्यवस्था लागू होगी। तीन माह के भीतर यह कार्यप्रणाली शुरू हो जाएगी। आइटी विभाग इसमें मददगार होगा। सरकारी प्रवक्ता के अनुसार यह व्यवस्था लागू होने से विदेशी कंपनियों का भी यहां कारोबार में रुझान बढ़ेगा क्योंकि उन्हें ई-टेंडरिंग पसंद है। इस निर्णय के तहत प्रदेश के सभी शासकीय विभागों, सार्वजनिक उपक्रमों, विकास प्राधिकरणों, नगर निगमों, स्वायत्त शासी संस्थाओं, निकायों इत्यादि में एनआइसी के ई-प्रोक्योरमेंट प्लेटफार्म का प्रयोग करते हुए सभी निर्माण कार्यो, सेवाओं, जॉब वर्क, सामग्री क्रय के लिए ई-प्रोक्योरमेंट प्रणाली को लागू किया जाएगा। निर्माण कार्यो, सेवाओं, जॉब वर्क, सामग्री क्रय के लिए निविदा प्रक्रिया मैनुअल विधि से संपादित की जाती है। उन निविदाओं को ई-प्रोक्योरमेंट एवं ई-टेंडरिंग के माध्यम से कराया जाना प्रत्येक विभाग के लिए अनिवार्य होगा। संबंधित विभागों, उपक्रमों द्वारा ई-टेंडरिंग तथा ई-प्रोक्योरमेंट प्रणाली लागू करने को आवश्यक हार्डवेयर, प्रशिक्षण, सॉफ्टवेयर कस्टमाइजेशन, डिजिटल सिग्नेचर आदि व्यवस्था तीन माह में पूर्ण करायी जायेगी। निविदा शुल्क (टेण्डर फीस)के भुगतान तथा धरोहर राशि (ईएमडी) के भुगतान एवं वापसी की प्रक्रिया भी भौतिक प्रारूप में न करके ऑनलाइन की जायेगी। समस्त कार्य इलेक्ट्रानिक माध्यम से किए जायेंगे। ई-प्रोक्योरमेंट के बिड्स एवं डाटा की गोपनीयता, सुरक्षा तथा अनुरक्षण का दायित्व एनआइसी का होगा। ई-प्रोक्योरमेंट प्रणाली में नियमों एवं प्रक्रिया में कोई परिवर्तन नहीं किया जा रहा है। अपितु वर्तमान नियमों एवं प्रक्रिया के अन्तर्गत ही केवल इलेक्ट्रानिक मीडिया का उपयोग करते हुए टेण्डरिंग की कार्यवाही की जायेगी। आइटी एवं इलेक्ट्रानिक विभाग, उत्तर प्रदेश शासन के अधीनस्थ यूपी इलेक्ट्रानिक्स कारपोरेशन लिमिटेड, पूर्ववत् प्रदेश में ई-टेंडरिंग/ई-प्रोक्योरमेंट लागू करने हेतु नोडल एजेंसी होगी। ई-प्रोक्योरमेंट/ई-टेंडरिंग में प्रतिभाग करने वाले ठेकेदारों और विभागीय अधिकारियों एवं टेण्डर समिति के सदस्यों को डिजिटल सिग्नेचर प्राप्त करने होंगे। कैबिनेट ने इस संबंध में अन्य फैसलों के लिए मुख्यमंत्री को अधिकृत किया है।&lt;br /&gt;
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स्टांप ड्यूटी में 210 करोड़ रुपये की छूट&lt;br /&gt;
&amp;nbsp;कैबिनेट ने गोरखपुर फर्टिलाइजर प्लांट को पुनर्जीवित करने के लिए फर्टिलाइजर कारपोरेशन ऑफ इण्डिया लिमिटेड (एफसीआइएल) से हिन्दुस्तान उवर्रक एवं रसायन लिमिटेड को भूमि के ट्रांसफर के लिए अनुमानित स्टांप शुल्क 210 करोड़ रूपये की छूट के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है। सिद्धार्थनाथ सिंह ने बताया कि हिन्दुस्तान उवर्रक और रसायन लिमिटेड, एनटीपीसी, कोल इंडिया लिमिटेड तथा इंडियन ऑयल कारपोरेशन का संयुक्त उपक्रम है। भारत सरकार द्वारा 13 जुलाई, 2016 को इस संयुक्त उपक्रम द्वारा गोरखपुर स्थित उवर्रक प्लांट को पुनर्जीवित किये जाने का प्रस्ताव अनुमोदित किया गया है। सरकार ने जुलाई 2016 में 6500 करोड़ रुपये निवेश का निर्णय लिया लेकिन, पिछली सपा सरकार इस कार्यक्रम को गति नहीं दे पा रही थी। अब कैबिनेट के इस फैसले से पूर्वी उत्तर प्रदेश में एक नई क्रांति की पहल हुई है। वहां रोजगार और विकास की संभावना बढ़ी है। किसानों को इससे सीधा लाभ मिलेगा। उवर्रक उत्पादन से आपूर्ति में वृद्धि होने से देश में उवर्रक आयात में कमी आयेगी और विदेशी मुद्रा भण्डार की बचत होगी। इस उवर्रक प्लांट की स्थापना फर्टिलाइजर कारपोरेशन ऑफ इण्डिया लिमिटेड (एफसीआइएल) की मौजूदा भूमि के &amp;nbsp;630 एकड़ पर की जानी है। जिसका चिन्हांकन कर लिया गया है। यह भूमि फर्टिलाइजर कारपोरेशन ऑफ इण्डिया लिमिटेड से हिन्दुस्तान उवर्रक और रसायन लिमिटेड को 55 वर्ष की अवधि के लिए लीज पर दी जानी है।&lt;br /&gt;
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जिला खनिज फाउंडेशन न्यास को मंजूरी&lt;br /&gt;
कैबिनेट ने जिला खनिज फाउंडेशन न्याय-2017 को मंजूरी दी है। इसके तहत खनिज से मिलने वाले राजस्व का एक हिस्सा क्षेत्रीय लोगों के विकास पर खर्च होगा। इससे विशेष रूप से बुंदेलखंड को लाभ मिलेगा। बुंदेलखंड ने भाजपा को एकतरफा बहुमत दिया तो भाजपा सरकार ने रिटर्न गिफ्ट दिया है। इसके तहत जिला खनिज फाउंडेशन की निधि के 60 प्रतिशत फंड का उपयोग प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना के तहत उच्च प्राथमिकता वाले क्षेत्र यथा-पेय जल आपूर्ति, पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण उपाय, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, महिला एवं बाल कल्याण, स्वच्छता, कौशल विकास पर खर्च किया जाएगा। इसके अलावा 40 प्रतिशत अन्य प्राथमिकता वाले क्षेत्रों भौतिक संरक्षण, सिंचाई आदि पर व्यय किया जाएगा। जिला खनिज निधि में पट्टाधारक द्वारा जमा की जाने वाली धनराशि रॉयल्टी के अतिरिक्त होगी और रॉयल्टी के एक तिहाई से अधिक नहीं होगी। न्यास की निधि में प्राप्त होने वाली धनराशि वाणिच्यिक राष्ट्रीयकृत बैंक में रखी जाएगी, जिसका संचालन संबंधित खान अधिकारी व प्रबंध समिति द्वारा नामित सदस्य के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जाएगा। जिला खनिज फाउंडेशन की स्थापना 25 अप्रैल, 2017 को अधिसूचना के माध्यम से की गयी है। इस फाउंडेशन की संरचना एवं क्रिया-कलाप के लिए उत्तर प्रदेश जिला खनिज फाउंडेशन न्यास नियमावली, 2017 का प्रख्यापन किया जा रहा है। नियमावली के अनुसार फाउंडेशन की निधि में मुख्य खनिज के प्रत्येक पट्टा धारक द्वारा खनिज की निकासी के सापेक्ष देय रॉयल्टी के ऐसे प्रतिशत की धनराशि, जिसका निर्धारण भारत सरकार द्वारा किया जाएगा एवं जो रॉयल्टी के अतिरिक्त होगा, जमा की जाएगी। इसी प्रकार उप खनिज के पट्टा धारकों द्वारा खनिज की निकासी के सापेक्ष देय रॉयल्टी के 10 प्रतिशत की धनराशि या ऐसी धनराशि, जो राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर निर्धारित की जाएगी, जिला खनिज फाउण्डेशन की निधि में जमा होगी। खान मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जिला खनिज फाउंडेशन की निधि के उपयोग सबंधी निर्देश &#39;प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजनाÓ में दिए गए हैं।&lt;br /&gt;
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विधानमंडल से पारित होगा जीएसटी बिल&lt;br /&gt;
सुरेश खन्ना ने बताया कि कैबिनेट ने माल व सेवाकर विधेयक (जीएसटी) का अनुमोदन किया है। अगले विधान मंडल सत्र में इसे पारित किया जाएगा। लोकसभा और राज्यसभा ने इसे पारित किया है। इसी को विधानसभा में भी पारित किया जाना है।&lt;br /&gt;
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&amp;nbsp;छठवीं कैबिनेट&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
(पुन: अपडेट) महत्वपूर्ण-कैबिनेट- ब्यूरो : अयोध्या और मथुरा-वृंदावन अब नगर निगम&lt;br /&gt;
नोट : ठेले-खोमचे वालों के हक में नई नियमावली, खबर में पथ विक्रय समिति में व्यापार मंडल और पार्षदों को शामिल किया जाएगा, जोड़ा गया है।&lt;br /&gt;
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&amp;nbsp;कैबिनेट की मंजूरी&lt;br /&gt;
- आने वाले निकाय चुनाव में यहां भी चुने जाएंगे महापौर&lt;br /&gt;
- रेल, सड़क और हवाई सुविधाओं का होगा विकास&lt;br /&gt;
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&amp;nbsp;राज्य ब्यूरो, लखनऊ : पर्यटन की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण और भगवान राम व कृष्ण की जन्मस्थली अयोध्या और मथुरा-वृंदावन पर भाजपा सरकार मेहरबान दिखी है। मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की छठवीं बैठक में चार नगर पालिका परिषदों को जोड़कर दो नगर निगम बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई है। आने वाले निकाय चुनाव में यहां महापौर के लिए चुनाव होगा। भाजपा ने लोक कल्याण संकल्प पत्र में भी इन नगरों के विकास के लिए प्रतिबद्धता दिखाई है। वैसे पूर्व की सपा सरकार में भी अयोध्या-फैजाबाद और मथुरा को नगर निगम बनाए जाने की घोषणा तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने की थी।&lt;br /&gt;
मंगलवार को लोकभवन में कैबिनेट की बैठक के बाद सरकार के प्रवक्ता और ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा तथा स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने पत्रकारों को कैबिनेट के फैसलों की जानकारी दी। शर्मा ने बताया कि अयोध्या और फैजाबाद नगर पालिका परिषदों को मिलाकर अयोध्या नगर निगम और मथुरा नगर पालिका परिषद तथा वृंदावन नगर पालिका परिषद को मिलाकर मथुरा-वृंदावन नगर निगम के गठन के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। राम के प्रति आस्था की वजह से हर वर्ष देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु यहां आते हैं। इस वजह से रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं। सरकार श्रद्धालुओं को रेल, सड़क और हवाई सुविधा देने के लिए प्रयासरत हैं। नगर निगम बनने से इसमें सहूलियत होगी और बिजली, पानी समेत तमाम बुनियादी ढांचों को मजबूत करने में सहूलियत होगी। साथ ही, दोनों नए नगर निगमों के लिए अधिसूचना में संशोधन या परिवर्तन के लिए नगर विकास मंत्री सुरेश कुमार खन्ना को अधिकृत किया गया है।&lt;br /&gt;
&amp;nbsp;शर्मा ने बताया कि राज्य सरकार की प्राथमिकता धार्मिक नगरों का विकास करना है। कृष्ण की नगरी मथुरा-वृंदावन में भी देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालु आते हैं। मथुरा-वृंदावन जैसे नगर में तमाम बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। नगर निगम बनने से बिजली, पानी, सड़क, रोजगार की दिशा में बढ़ावा मिलेगा। शर्मा ने बताया कि मथुरा और वृंदावन को नगर निगम बनाने में आम जनता की सुविधा का भी ख्याल रखा जाएगा। मथुरा व वृंदावन प्रमुख धार्मिक नगर हैं और श्रीकृष्ण की जन्म स्थली होने की वजह से राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर पर्यटन के क्षेत्र में इसका महत्वपूर्ण स्थान है। शर्मा ने कहा कि नगर निगमों के गठन से निकाय की आय में वृद्धि होगी और वहां अवस्थापना सुविधाओं के विकास के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता होगी।&lt;br /&gt;
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इस बार 16 नगर निगमों के होंगे चुनाव&lt;br /&gt;
कैबिनेट से अयोध्या और मथुरा-वृंदावन को नगर निगम का दर्जा मिलने के बाद अब निकाय चुनाव की तस्वीर बदली दिखेगी। 2012 में हुए निकाय चुनाव में प्रदेश में सिर्फ 12 नगर निगमों में चुनाव हुए थे। इस बीच राज्य सरकार ने सहारनपुर और फीरोजाबाद को भी नगर निगम का दर्जा दिया लेकिन, यहां चुनाव नहीं हुए। अब 2012 के मुकाबले सहारनपुर, फीरोजाबाद, अयोध्या और मथुरा-वृंदावन के नगर निगम बनने से कुल 16 नगर निगमों में महापौर के चुनाव होने हैं।&lt;br /&gt;
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ठेले-खोमचे वालों के हक में नई नियमावली&lt;br /&gt;
-अब गठित होगी नगर पथ विक्रय समिति&lt;br /&gt;
कैबिनेट ने फुटपाथ पर ठेला-खोमचा लगाकर रोजी-रोटी कमाने वालों के हक में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। उत्तर प्रदेश पथ विक्रेता (जीविका संरक्षण एवं पथ विक्रय विनियमन) नियमावली, 2017 को कैबिनेट ने मंजूरी दी है। सरकार के प्रवक्ता और स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने बताया कि केंद्र ने 2014 में इनके लिए एक अधिनियम बनाया था लेकिन पिछली सपा सरकार ने इसमें रुचि नहीं ली। सरकार तब सिर्फ वसूली के धंधे में लगी थी और सपा सरकार के डीएनए में ही वसूली शामिल थी। योगी सरकार ने गरीबों के हित में कदम बढ़ाया है। भारत सरकार के पथ विक्रेता (जीविका संरक्षण एवं पथ विक्रय विनियमन) अधिनियम, 2014 (अधिनियम संख्या-सात सन 2014) की धारा-36 के अधीन प्रदत्त शक्तियों के अन्तर्गत नगरीय पथ विक्रेताओं के अधिकारों का संरक्षण और पथ विक्रय की गतिविधियों तथा इससे सम्बद्ध या अनुषंगिक मामलों के विनियमन के दृष्टिगत यह फैसला लिया गया है।&lt;br /&gt;
नियमावली के मुताबिक प्रत्येक निकाय में यथास्थिति नगर आयुक्त/अधिशासी अधिकारी की अध्यक्षता में नगर पथ विक्रय समिति का गठन किया जाएगा। समिति का कार्यकाल प्रथम बैठक से पांच वर्ष की अवधि के लिए होगा। किन्तु नियमावली के अनुरूप कार्य नहीं करने पर राज्य सरकार समिति को भंग कर सकती है। भंग किए जाने की तारीख से तीन माह के भीतर नई नगर पथ विक्रय समिति का गठन किया जाएगा। नगर पथ विक्रय समिति सभी विद्यमान पथ विक्रेताओं का सर्वेक्षण, पथ विक्रय परिक्षेत्र की धारण क्षमता और पथ विक्रय परिक्षेत्र में पथ विक्रेताओं को स्थान देना सुनिश्चित करेगी। पथ विक्रय प्रमाण पत्र दिए जाने के पश्चात् पथ विक्रेताओं को समिति द्वारा परिचय पत्र भी जारी किया जाएगा। नई अवस्थापना विकास योजनाओं द्वारा हटाए गए पथ विक्रेताओं को समायोजित किया जाएगा, ताकि वह नई अवस्थापना द्वारा उत्पन्न आजीविका अवसरों का उपयोग कर सकें। प्रत्येक नगर पथ विक्रय समिति में नगर आयुक्त या अधिशासी अधिकारी अध्यक्ष होगा। समिति की सदस्य संख्या नगर पंचायत के मामले में अधिकतम 10, नगर पालिका परिषद के मामले में कम से कम 10 और अधिक से अधिक 20 तथा नगर निगम के मामले में कम से कम 20 और अधिकतम 40 होगी। समिति में महिला, पिछड़ा, अनुसूचित जाति और सभी का प्रतिनिधित्व रहेगा। मंत्री श्रीकांत शर्मा ने बताया कि इस समिति में व्यापार मंडल और पार्षदों को शामिल किया जाएगा। विक्रेताओं को अलग जगह भी दी जाएगी।&lt;br /&gt;
समिति में नगर पालिका क्षेत्र के पथ विक्रेताओं का प्रतिनिधित्व करने वाले सदस्यों की संख्या 40 प्रतिशत से कम नहीं होगी। 14 वर्ष से कम आयु के लोगों को पथ विक्रेता के रूप में पंजीकृत नहीं किया जाएगा। प्रत्येक स्थिर पथ विक्रेता को पथ विक्रय परिक्षेत्र में, ऐसे जगह उपलब्ध कराई जाएगी जिससे पैदल यातायात में बाधा उत्पन्न न हो। पैदल सेतुओं, ऊपरिगामी सेतुओं और फ्लाईओवर के ऊपर पथ विक्रय क्रिया-कलाप नहीं किया जाएगा। राज्य स्तर पर पथ विक्रय से संबंधित समस्त मामलों के समन्वय के लिए निदेशक, स्थानीय निकाय या उसके द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत कोई अधिकारी राज्य नोडल अधिकारी होगा।&lt;br /&gt;
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भारतीय स्टांप की अधिसूचना में संशोधन का निर्णय&lt;br /&gt;
कैबिनेट ने स्टाम्प के मामलों के निस्तारण के लिए जिम्मेदारी बांटी है। जो मामले अपील में आते हैं उनके निस्तारण के लिए धनराशि को आधार बनाया है। कैबिनेट ने भारतीय स्टांप की 16 सितंबर 2016 की जारी अधिसूचना में संशोधन का निर्णय किया है। इस फैसले से स्टांप शुल्क की सुनवाई के लिए &#39;न्यायिक सदस्य राजस्व परिषदÓ के स्थान पर &#39;सदस्य/न्यायिक सदस्य राजस्व परिषदÓ किया गया है। साथ ही उपायुक्त, स्टांप, संबंधित मंडल/वृत्त की स्टांप शुल्क के विवादों की अधिकारिता की सीमा में भी संशोधन किया गया है। इसके तहत मुख्य नियंत्रण राजस्व प्राधिकारी की शक्तियां विभागीय उपायुक्त, स्टांप के अतिरिक्त मंडलायुक्त एवं अपर मंडलायुक्त को अपीलों के निस्तारण के लिए नामित किया गया है। साथ ही, सदस्य/न्यायिक सदस्य, राजस्व परिषद को 25 लाख रुपये से अधिक, मंडलायुक्त को 25 लाख रुपये तक तथा अपर मण्डलायुक्त/उपायुक्त स्टाम्प को 10 लाख रुपये तक की सीमा तक स्टांप वाद के मामलों में सुनवाई का अधिकार दिया गया है। उपायुक्त स्टाम्प, संबंधित &amp;nbsp;मण्डल/वृत्त की स्टांप शुल्क के विवादों की अधिकारिता में संशोधन करते हुए 10 लाख रुपये तक की सीमा तक का अधिकार दिया गया है। सिद्धार्थनाथ सिंह ने बताया कि इससे निस्तारण में तेजी आएगी।&lt;br /&gt;
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</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://dikhsa.blogspot.com/feeds/8172553599481152217/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment/fullpage/post/8040736284594536912/8172553599481152217' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/8172553599481152217'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/8172553599481152217'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dikhsa.blogspot.com/2017/05/blog-post.html' title='भाजपा सरकार में कैबिनेट के फैसले '/><author><name>Anonymous</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07065981802189787445</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='https://img1.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8040736284594536912.post-5115482440340946675</id><published>2012-11-08T12:16:00.002+05:30</published><updated>2012-11-08T12:16:35.095+05:30</updated><title type='text'>घोटालों पर पर्दा </title><content type='html'>&lt;div dir=&quot;ltr&quot; style=&quot;text-align: left;&quot; trbidi=&quot;on&quot;&gt;
आनन्द राय, लखनऊ &lt;br /&gt;
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उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम लिमिटेड (यूपीएसआइडीसी) के मुख्य अभियंता अरुण कुमार मिश्रा सिर्फ ट्रोनिका सिटी और मनी लांडिं्रग के आरोपों से ही नहीं घिरे हैं, बल्कि सड़कों के निर्माण में संशोधित प्रवेश विधि (एमपीएम) के मद से करोड़ों रुपये की हेराफेरी के आरोपी हैं। राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने इसकी जांच के आदेश दिए हैं, लेकिन सच्चाई यही है कि जांच को गति देने के बजाय अफसर मिश्रा के घोटालों पर पर्दा डाल रहे हैं। औद्योगिक विकास विभाग ने नौ अक्टूबर को यूपीएसआइडीसी के प्रबंध निदेशक को पत्र लिखकर अरुण मिश्रा द्वारा वर्ष 2008 से 2011 के मध्य एमपीएम मद से किये गये फर्जी भुगतान के संदर्भ में जांच का निर्देश दिया। कहा गया कि मुख्यमंत्री खुद इस मामले पर गंभीर हैं इसलिए प्राथमिकता में जांच कराकर 15 दिनों के भीतर आख्या भेजें। इस निर्देश के बावजूद अब तक जांच शुरू होना तो दूर, उल्टे अरुण मिश्रा को पिकप के प्रबंध निदेशक कार्यालय से सम्बद्ध कर दिया गया है। यह सब अरुण मिश्रा की पहुंच का कमाल बताया जा रहा है। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम लिमिटेड इम्प्लाइज यूनियन के प्रांतीय महामंत्री बीके तिवारी ने राज्यपाल और मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मिश्रा के काले कारनामों की शिकायत की थी। राज्यपाल ने इस मामले में सम्बंधित विभाग को जांच कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए थे। कमेटी कर चुकी है प्रारंभिक जांच : बीते वर्ष यूपीएसआईडीसी इंप्लॉइज यूनियन की शिकायत पर अभियंता दिनेश्र्वर दयाल की अध्यक्षता में बनी कमेटी मामले की प्रारंभिक जांच कर चुकी है। कमेटी ने औद्योगिक क्षेत्र बंथर, रूमा, मंधना, मलवा में आठ करोड़ से अधिक का घोटाला पकड़ा। फैजाबाद में बिना काम कराये 16 करोड़ रुपये भुगतान का मामला भी जांच के दौरान सामने आया। टीम ने देवरिया, जगदीशपुर, उटेलवा औद्योगिक क्षेत्रों में भी एक करोड़ से अधिक के घोटाले पकड़े थे। लेकिन इससे पहले की और क्षेत्रों में जांच होती राजनीतिक दबाव के कारण इसे रोक दिया गया। आरोप है कि वर्ष 2008 से 2010 के बीच मुख्य अभियंता रहते अरुण मिश्रा ने जगदीशपुर, कुर्सी रोड, बस्ती, फैजाबाद, देवरिया, मलवा व अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में सड़कों के निर्माण में कागज में एमपीएम का कार्य करा करीब एक अरब का घोटाला किया।&lt;br /&gt;
&amp;nbsp;..तो इस तरह से हुआ एमपीएम घोटाला &lt;br /&gt;
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यूपीएसआइडीसी में सड़कों के निर्माण का कार्य लोक निर्माण विभाग के मानक के अनुरूप किया जाता है। पीडब्ल्यूडी की सड़कों के निर्माण में मोटाई बढ़ाने के लिए एमपीएम का कार्य नहीं किया जाता है। बावजूद इसके निगम की सड़कों के निर्माण में एमपीएम का प्रावधान कर इस मद में करीब करोड़ों रुपये का भुगतान किया गया। बीके तिवारी का आरोप है कि एमपीएम का प्रावधान पूरी तरह अवैध है और यह यूपीएसआइडीसी में मान्य नहीं है। &lt;br /&gt;
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</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://dikhsa.blogspot.com/feeds/5115482440340946675/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment/fullpage/post/8040736284594536912/5115482440340946675' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/5115482440340946675'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/5115482440340946675'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dikhsa.blogspot.com/2012/11/blog-post.html' title='घोटालों पर पर्दा '/><author><name>Anonymous</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07065981802189787445</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='https://img1.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8040736284594536912.post-111578813021512190</id><published>2012-03-12T19:49:00.000+05:30</published><updated>2012-03-12T19:49:48.620+05:30</updated><title type='text'>किचन के भी मास्टर हैं अखिलेश यादव</title><content type='html'>&lt;div dir=&quot;ltr&quot; style=&quot;text-align: left;&quot; trbidi=&quot;on&quot;&gt;&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjGt0fVYpj342AjZwuaR4-z9BviJ_XwQRHEiTOfD0BSGx2itnD3jTjD4ratZJdsY97uNAaPHW-DBjNOmE618gn0XtfzdTYTuZFwW-GKemb_LMDFFFVSjwSVshEVAuUZUu652ff2ACNzYZc/s1600/11kan-upd01.jpg&quot; imageanchor=&quot;1&quot; style=&quot;clear: left; cssfloat: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;&quot;&gt;&lt;img border=&quot;0&quot; height=&quot;200&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjGt0fVYpj342AjZwuaR4-z9BviJ_XwQRHEiTOfD0BSGx2itnD3jTjD4ratZJdsY97uNAaPHW-DBjNOmE618gn0XtfzdTYTuZFwW-GKemb_LMDFFFVSjwSVshEVAuUZUu652ff2ACNzYZc/s200/11kan-upd01.jpg&quot; width=&quot;176&quot; yda=&quot;true&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;आनन्द राय&lt;br /&gt;
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लखनऊ, 11 मार्च : सैंतीस साल के चन्द्रशेखर सिंह के अलबम में यूपी के होने वाले मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से जुड़ी अनगिनत यादें हैं। आस्ट्रेलिया में पढ़ते समय दोनों एक साथ अगल-बगल पेइंग गेस्ट बनकर रहे। दोनों ने सुख-दुख साझा किया। उन दिनों मुलायम सिंह यादव भारत सरकार के रक्षा मंत्री थे, लेकिन अखिलेश ने अपनी सादगी से कभी चन्द्रशेखर को अहसास नहीं होने दिया कि उन दोनों की हैसियत में जमीन-आसमान का अंतर है। उनके इसी बड़प्पन को चन्द्रशेखर आज तक भूल नहीं पाए हैं और अब भी उनकी दोस्ती की गांठ उतनी ही मजबूत है। 1/2 फैजाबाद रोड, शिवस्थली में रहने वाले चन्द्रशेखर बैंकिंग ट्रेड से जुड़े हैं। &lt;br /&gt;
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&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhIEbl9OdgM1F6ySBp9pYXd9Y39t-7H5oGtshyphenhyphenNe2sUw9HXbLwoqhRswI7a58vmPYZTEvSjyfhfUpiA8oXJlK0dHeG-aPps9WU7tHFFLCqWLVTaO2ERMoZaslJquQZkY13BF4Y7iV_8VG0/s1600/11upd04-c-2.jpg&quot; imageanchor=&quot;1&quot; style=&quot;clear: right; cssfloat: right; float: right; margin-bottom: 1em; margin-left: 1em;&quot;&gt;&lt;img border=&quot;0&quot; height=&quot;176&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhIEbl9OdgM1F6ySBp9pYXd9Y39t-7H5oGtshyphenhyphenNe2sUw9HXbLwoqhRswI7a58vmPYZTEvSjyfhfUpiA8oXJlK0dHeG-aPps9WU7tHFFLCqWLVTaO2ERMoZaslJquQZkY13BF4Y7iV_8VG0/s200/11upd04-c-2.jpg&quot; width=&quot;200&quot; yda=&quot;true&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;पहली मुलाकात : 1996 में चन्द्रशेखर यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टर्न सिडनी से एमबीए करने गए थे। उन्हीं दिनों अखिलेश यादव ने यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी में एमटेक में दाखिला लिया। अखिलेश के हास्टल के रूम पार्टनर दीपक और चन्द्रशेखर के रूम पार्टनर सुनील धींगरा दिल्ली के रहने वाले थे। अखिलेश ने आस्ट्रेलिया पहंुचते ही भारतीयों को एकत्र करना शुरू किया। तभी दीपक और सुनील ने अखिलेश और चन्द्रशेखर की मुलाकात कराई। फिर धीरे-धीरे दोनों एक दूसरे से मिलने जुलने और फोन पर बातें करने लगे। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
छोड़ा हॉस्टल : उस समय चन्द्रशेखर डेनट्रे ड्राइव में पेइंग गेस्ट थे। दोनों के बीच अपनी दिनचर्या को लेकर बातें होती। लगभग ढाई तीन महीने बाद अखिलेश ने हास्टल छोड़ दिया। चन्द्रशेखर के संदर्भ से वह उनके पड़ोस में आस्ट्रेलियन और फिजी इंडियन दंपती डेविड और रश्मि के पेइंग गेस्ट बन गए। अगल-बगल आने के बाद दोनों की नजदीकियां बढ़ती गई। तभी पता चला कि इस नौजवान के दिल में जो ख्वाब पल रहे हैं, उसका सिरा उत्तर प्रदेश की तकदीर से जुड़ा है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आलू की रसेदार सब्जी और भारतीय प्रेम : आस्ट्रेलिया में अखिलेश का भारतीय प्रेम हर दिन बढ़ता गया। देसी खाने की याद उन्हें खूब आती और उन्होंने किचन में भी अपना दखल दिया। आलू-मटर की रसेदार सब्जी इतनी अच्छी बनाते कि सभी दोस्त तारीफ किए बिना नहीं रहते। उनकी हर पार्टी में यह सब्जी जरूर होती। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
संवेदनशील व्यक्तित्व और मुश्किल के साथी : उस दिन बेहद मुश्किल का क्षण था। चन्द्रशेखर के मकान मालिक सैम का अचानक एक्सीडेंट हो गया। उस समय चन्द्रशेखर आटोमेटिक गाड़ी चलाना जानते थे। अस्पताल जाने के लिए अपने एक परिचित की गाड़ी मांगी। खूब बारिश हो रही थी और वह घबराहट में भी थे। तभी अखिलेश को पता चला तो वह भी साथ चल दिए। ड्राइविंग करते समय चन्द्रशेखर से गाड़ी का संतुलन बिगड़ गया। अखिलेश ने उनको तसल्ली दी और खुद ड्राइव कर अस्पताल तक ले गए। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बच्चों से लगाव : अखिलेश को बच्चों से बहुत लगाव है। चन्द्रशेखर के मकान मालिक सैम के बच्चों के जन्मदिन पर अखिलेश और वह मिल जुलकर केक काटते और उनको गिफ्ट देते। इसी तरह डेविड के बच्चों के जन्म दिन पर भी वह लोग मिलकर आयोजन करते। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेधावी विद्यार्थी और सादा जीवन : चन्द्रशेखर बताते हैं कि अखिलेश पढ़ाई में बहुत रुचि लेते थे। अपना हर असाइनमेंट पूरा करते थे। उनका जीवन इतना सादा था कि मेट्रो जैसी सेवा का प्रयोग करते थे। वह टंगारा से ही यात्रा करते थे। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पर्यावरण में गहरी रुचि : अखिलेश की पर्यावरण में गहरी रुचि है। आस्ट्रेलिया में क्रीक (नहरों) के किनारे पेड़ पौधे और फूलों को देखकर वह बहुत खुश होते और भारत के लिए उसी तरह की परिकल्पना करते।&lt;br /&gt;
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&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://dikhsa.blogspot.com/feeds/111578813021512190/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment/fullpage/post/8040736284594536912/111578813021512190' title='1 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/111578813021512190'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/111578813021512190'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dikhsa.blogspot.com/2012/03/blog-post_12.html' title='किचन के भी मास्टर हैं अखिलेश यादव'/><author><name>Anonymous</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07065981802189787445</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='https://img1.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjGt0fVYpj342AjZwuaR4-z9BviJ_XwQRHEiTOfD0BSGx2itnD3jTjD4ratZJdsY97uNAaPHW-DBjNOmE618gn0XtfzdTYTuZFwW-GKemb_LMDFFFVSjwSVshEVAuUZUu652ff2ACNzYZc/s72-c/11kan-upd01.jpg" height="72" width="72"/><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8040736284594536912.post-1325294368876920558</id><published>2012-03-12T18:31:00.001+05:30</published><updated>2012-03-12T18:31:22.616+05:30</updated><title type='text'>UP Election 2012 Perception| Post Issues, Views at Dainik Jagran</title><content type='html'>&lt;a href=&quot;http://elections.jagran.com/uttar-pradesh-election-nazariyaarticle.php?q=article8964094&quot;&gt;UP Election 2012 Perception| Post Issues, Views at Dainik Jagran&lt;/a&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://dikhsa.blogspot.com/feeds/1325294368876920558/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment/fullpage/post/8040736284594536912/1325294368876920558' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/1325294368876920558'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/1325294368876920558'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dikhsa.blogspot.com/2012/03/up-election-2012-perception-post-issues.html' title='UP Election 2012 Perception| Post Issues, Views at Dainik Jagran'/><author><name>Anonymous</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07065981802189787445</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='https://img1.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8040736284594536912.post-4078198084619818183</id><published>2012-03-01T20:35:00.000+05:30</published><updated>2012-03-01T20:35:03.876+05:30</updated><title type='text'>मैं इतना स्वार्थी भी नहीं हूं कि सिर्फ अपने लिए सोचूं</title><content type='html'>&lt;div dir=&quot;ltr&quot; style=&quot;text-align: left;&quot; trbidi=&quot;on&quot;&gt;&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiX_dzouTMFR6NETrEY8zZXKuR_fqEmYIy12QNFyDiW21U1m-xxrS3w_aZHUaDMnKrVG5oo8ak3frEgubCFBfOPyHLuGTSMW0rJySFdxNKqaUb0Ltot-EH3fkWe9iU_lnhYF7vj7p3z5gM/s1600/kushvaha.jpg&quot; imageanchor=&quot;1&quot; style=&quot;margin-left: 1em; margin-right: 1em;&quot;&gt;&lt;img border=&quot;0&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiX_dzouTMFR6NETrEY8zZXKuR_fqEmYIy12QNFyDiW21U1m-xxrS3w_aZHUaDMnKrVG5oo8ak3frEgubCFBfOPyHLuGTSMW0rJySFdxNKqaUb0Ltot-EH3fkWe9iU_lnhYF7vj7p3z5gM/s1600/kushvaha.jpg&quot; uda=&quot;true&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;बाबू सिंह कुशवाहा&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
एक समय था जब बाबू सिंह कुशवाहा बसपा प्रमुख मायावती के गिने चुने राजदारों में शुमार होते थे। एनआरएचएम में जब हत्याओं का दौर शुरू हुआ तो खून की छीटे बाबू सिंह कुशवाहा के भी दामन पर आए लेकिन तब बसपा और पूरी सरकार उनके बचाव में खड़ी हुई। भले ही उनका मंत्री पद चला गया था लेकिन सत्ता के गलियारों में उनकी हनक और धमक खत्म नहीं हुई लेकिन न जाने अचानक ऐसा क्या हुआ कि बसपा के अंदर ही बाबू सिंह कुशवाहा अपने को असुरक्षित महसूस करने लगे और नौबत यहां तक आ गई कि उन्हें सार्वजनिक तौर पर यह कहना पड़ा कि कैबिनेट मंत्री नसीमुद्दीन, कैबिनेट सचिव शशांक शेखर और प्रमुख सचिव गृह फतेहबहादुर उनकी हत्या करा देना चाहते हैं। उसके बाद उन्हें बसपा से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। कुछ समय तक उनकी कांग्रेस के साथ खिचड़ी पकी लेकिन बात नहीं बनी तो उन्होंने भाजपा से हाथ मिला लिया। वह आज कल भाजपा के लिए वोट मांग रहे हैं। मंगलवार को दैनिक जागरण के साथ बातचीत में उन्होंने अपने दिल की बात रखी है। प्रस्तुत है आनन्द राय के साथ हुई उनकी बातचीत के प्रमुख अंश :&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
0बसपा से आपका मोहभंग क्यों हो गया? &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
- मेरे खिलाफ तमाम षडयंत्र हुए और मैं चुप रहा। 28 नवंबर को मुझे बसपा से बाहर कर दिया गया तो भी खामोश रहा। लेकिन जब हद हो गयी.... (फिर खामोश हो जाते हैं)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
0&amp;nbsp;क्या हद हो गयी ?&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
- मेरे खिलाफ बड़ी साजिशें हुई। अचानक बांदा में मेरे खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया और जिसने मुकदमा किया उसकी सुरक्षा बढ़ाई गयी। उसे टिकट दिया गया। मेरे लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज कराकर मुझे तहस-नहस करने की कोशिश की गई। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
0यह सब क्यों किया गया!&lt;br /&gt;
- मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी, कैबिनेट सचिव शशांक शेखर और प्रमुख सचिव गृह फतेहबहादुर मेरी हत्या की साजिश में लगे थे। मुकदमे इसलिए दर्ज करवाए जा रहे थे कि जेल भेजकर वहां मेरी हत्या करा दी जाए। इसकी तैयारी हो चुकी थी। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
0&amp;nbsp;क्या इसी खौफ और सीबीआइ की डर से आप कांग्रेस में जाना चाह रहे थे? &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
- यह तो अफवाह है। सीबीआइ जांच से बचने के लिए बसपा ने आठ साल से कांग्रेस को समर्थन दिया है। यह कौन नहीं जानता है। मैं तो यह भी जानता हूं कि बसपा ने किसको बचाने के लिए कब किससे समझौता किया है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
0राहुल गांधी से तो आपकी मुलाकात हुई? &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
-राहुल से मेरी कोई मुलाकात नहीं हुई। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
0&amp;nbsp;तो क्या वह गलत बोल रहे हैं? &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
- मैं यह कैसे कह सकता हूं। वह बड़े नेता हैं, लेकिन मेरी उनसे मुलाकात नहीं हुई, यही सच है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
0भाजपा वालों ने आपसे सम्पर्क किया था या आपने किया था?&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
- ओबीसी के आरक्षण की कटौती के खिलाफ भाजपा पिछड़ों के साथ थी, इसलिए हम उसके साथ हो गए। सपा और बसपा तो कांग्रेस के पक्ष में थीं और एक बार भी विरोध में जुबान नहीं खोली। यह दोनों दल सही मायने में पिछड़ों के विरोधी हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
0लेकिन भाजपा विपक्ष के दबाव में आ गई और आपकी सदस्यता भी स्थगित हो गई?&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
- विपक्ष नहीं, मीडिया ने मेरा इतना बाजा बजा दिया कि .. और मैं इतना स्वार्थी भी नहीं हूं कि सिर्फ अपने लिए सोचूं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
0तो फिर इतना त्याग मायावती के साथ क्यों नहीं किए? &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
- मुझे तीखा बोलने पर मजबूर न करें। मुझे बसपा अध्यक्ष के चरित्र की नहीं, अपनी चिंता है। 20 साल किसी के साथ रहा हूं तो सोचता हूं कि ऐसी बात न निकले जिससे मुझे पछतावा हो। लेकिन 20 साल की वफादारी की उन लोगों ने कोई कीमत नहीं समझी। मेरी पीठ में छुरा घोंप दिया। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
0एनआरएचएम घोटाले में तो आपके खिलाफ सीबीआइ के पास सबूत हैं? &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
-पहले यह जानकारी करिए कि वाकई घोटाला कहां हुआ। एनआरएचएम के प्रोसीजर मिस्टेक को जानिए। इसमें मंत्री की कोई भूमिका नहीं होती। मुख्यमंत्री पदेन अध्यक्ष हैं और सभी फैसले उनकी अध्यक्षता में होने वाली बैठकों में होते हैं। उनकी अनुपस्थिति में विभागीय मंत्री को अध्यक्षता करनी होती है। पौने दो साल के कार्यकाल में मुझे तो कभी अवसर ही नहीं मिला। मेरा इस घोटाले से कोई लेना देना नहीं है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
0फिर आपके खिलाफ सीबीआइ का मुकदमा और बार-बार पूछताछ? &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
- देखिए यह तो शशांक शेखर और फतेहबहादुर ने पूरा होमवर्क किया। इन्हीं लोगों ने सारी पीआइएल कराई। सभी पेपरवर्क ऐसे कराया, जिससे मैसेज जाए कि कुछ गड़बड़ है। इसमें नीता चौधरी ने भी उन लोगों का साथ दिया। यह लोग तो मुझे सचान मामले में जेल भेजने की तैयारी कर चुके थे। (यह बताते हुए कुशवाहा रोने लगे) .... वे लोग अभी भी मेरी हत्या की साजिश कर रहे हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
0दो-दो सीएमओ की हत्याएं? इसकी वजह? &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
-यह तो मुझे फंसाने और बदनाम करने का षड्यंत्र रहा। कुछ बड़े लोगों का नाम नहीं लेना चाहूंगा, लेकिन हत्याएं इसीलिए कराई गई कि मैं बदनाम हो जाऊं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
0&amp;nbsp;कहा जाता है कि बसपा सरकार में कोई काम बगैर पैसे के नहीं होता? &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
(अनमना होकर) दूसरा सवाल पूछिए। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
0&amp;nbsp;लेकिन यह तो बता सकते हैं कि सरकार में पैसों के लेन-देन में कौन लोग शामिल रहते हैं? &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बहुत सारी चीजें कहने की नहीं होती हैं। कौन सी ऐसी चीज है जो मीडिया से छिपी है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://dikhsa.blogspot.com/feeds/4078198084619818183/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment/fullpage/post/8040736284594536912/4078198084619818183' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/4078198084619818183'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/4078198084619818183'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dikhsa.blogspot.com/2012/03/blog-post_3555.html' title='मैं इतना स्वार्थी भी नहीं हूं कि सिर्फ अपने लिए सोचूं'/><author><name>Anonymous</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07065981802189787445</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='https://img1.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiX_dzouTMFR6NETrEY8zZXKuR_fqEmYIy12QNFyDiW21U1m-xxrS3w_aZHUaDMnKrVG5oo8ak3frEgubCFBfOPyHLuGTSMW0rJySFdxNKqaUb0Ltot-EH3fkWe9iU_lnhYF7vj7p3z5gM/s72-c/kushvaha.jpg" height="72" width="72"/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8040736284594536912.post-5692364595321045908</id><published>2012-03-01T20:25:00.000+05:30</published><updated>2012-03-01T20:25:10.803+05:30</updated><title type='text'>अवधेश के आंसू का असर बता पाना मुश्किल</title><content type='html'>&lt;div dir=&quot;ltr&quot; style=&quot;text-align: left;&quot; trbidi=&quot;on&quot;&gt;&lt;div style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;सीतापुर-शाहजहांपुर रोड पर चकभिटारा चौराहा है। यहीं से एक सड़क निकलती है जो रेलवे क्रासिंग पार कर कहलिया तक जाती है। कहलिया प्रदेश सरकार के बर्खास्त मंत्री अवधेश वर्मा का गांव है। वही अवधेश वर्मा जो बसपा से टिकट कटने पर फूट-फूट कर रोने लगे और उनका आंसू देखकर भाजपा पिघल गई। पर कहलिया जाकर भी यह बता पाना मुश्किल है कि अवधेश के आंसू मतदाताओं के दिल पर कितना असर कर पाये हैं। सियासी रुख को लेकर उठे सवाल पर रास्ते में ही मिले मुंशीलाल कहते हैं कि अभी कोई पतो नहीं, सब गुप्ते दान हो। गांव के कई लोग तो कुछ भी कहने से इंकार कर देते हैं। &lt;/div&gt;&lt;div style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;ददरौल में बसपा के टिकट पर दो बार जीते और मंत्री बनने वाले अवधेश वर्मा अक्सर सुर्खियों में रहे हैं। वर्मा की हैट्रिक न बने, इसलिए सभी दलों ने समीकरण बिठाए हैं। मसलन सपा ने उनकी ही जाति के कद्दावर नेता, पूर्व मंत्री और पूर्व सांसद राममूर्ति वर्मा को सामने खड़ा कर दिया है, जबकि बसपा ने इस दफा मुस्लिम फेस पर दांव लगाते हुए रिजवान अली को मौका दिया है। कांग्रेस से कौशल मिश्रा, पीस पार्टी ने अरविन्द पाल और महान दल ने पूर्व विधायक देवेन्द्र पाल सिंह को टिकट दिया है। यहां छोटे दलों और निर्दलियों समेत कुल 16 उम्मीदवार हैं। &lt;/div&gt;&lt;div style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;ददरौल की सियासी लड़ाई भी जातियों के बीच सिमटी हुई है। अवधेश वर्मा भाजपा के उम्मीदवार हो गये हैं, लेकिन इस दल के परंपरागत ब्रांाण मतों पर कांग्रेस के कौशल मिश्रा अपना हक जता रहे हैं। बसपा के रिजवान अली ने दलित और मुसलमानों के गठजोड़ से लड़ाई को रोमांचक कर दिया है। लेकिन सर्वाधिक सेंधमारी पीस पार्टी के अरविन्द पाल कर रहे हैं। इलाके में गड़रिया मतदाताओं की भी अच्छी संख्या है, इसलिए पाल अपनी जाति के साथ पीस पार्टी के मुस्लिम मतों पर भरोसा किये बैठे हैं। महान दल के साथ कुशवाहा और मौर्या जाति का आधार है, जबकि इसके उम्मीदवार देवेन्द्र पाल सिंह ने ठाकुरों को लामबंद करना शुरू किया है। जातीय गोलबंदी के बीच दलीय जनाधार के भी मायने तलाशे जा रहे हैं। सभी दलों के बड़े नेता भी उम्मीदवारों का माहौल बनाकर जा चुके हैं, लेकिन किसी के आने से कोई हवा नहीं बनी है। बहादुरपुर के वेदराम वर्मा कहते हैं कि कोई आए और कोई जाए, हवा नहीं बहनी है। मर्जी है वोटर की, चाहे जिस ओर ले जाए। यकीनन वोटर की मर्जी से हवा बहनी है, लेकिन उसकी खामोशी ने कयासों की बुनियाद हिला दी है। खेतिहर रामचंद्र वर्मा से जब उनकी जाति का हवाला देकर अवधेश के बारे में बात की गयी तो वह राममूर्ति वर्मा का भी नाम गिनाते हैं। पर किसके पक्ष में हैं, यह नहीं बताते। लेकिन दुकानदार महीपाल का कहना है कि हम तो साफ कहों, इहां दुइए की हवा है। एक ठो साइकिल और दूसरी हाथी। ददरौल में चुनाव को लेकर कोई उत्साह नहीं दिखता है, लेकिन सड़कों पर दौड़ रही उम्मीदवारों की गाडि़यां सियासी गर्मी पैदा करने की कोशिश कर रही हैं। एक निर्दल उम्मीदवार की शिकायत रहती है कि मैं इतना मजबूत प्रत्याशी हूं, लेकिन मीडिया मेरी नोटिस नहीं ले रहा है। हालांकि उनके जाते ही पीछे खड़े कई युवा उनको खारिज कर देते हैं। बड़े दलों के बारे में मतदाता अपना मंतव्य भले स्पष्ट न करें, लेकिन निर्दलीय और छोटे दलों के कई उम्मीदवारों को लोग वोटकटवा कहने से भी नहीं चूक रहे हैं। कहलिया, अकबरपुर, कटरा, जलालाबाद, मदनापुर, कांठ, सेहरामऊ समेत हर जगह एक ही जैसा माहौल दिखता है। अंतर सिर्फ यही कि कहीं किसी का प्रभाव ज्यादा तो कहीं किसी का। &lt;/div&gt;&lt;div style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjBvz1-UT_wwJpp30bs85ndqB1TG9VaYiQSlIOOa59LOPk4iF9GK81NxW0qFGIK5eYB9W52DDwVta8peMIOOaGELjjUMNiSGmMW_r58TGUcXZiOFvvX7yVSeQ9uYvPAwSL4tnOP2bKDJ88/s1600/awdesh%2520verma.jpg&quot; imageanchor=&quot;1&quot; style=&quot;margin-left: 1em; margin-right: 1em;&quot;&gt;&lt;img border=&quot;0&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjBvz1-UT_wwJpp30bs85ndqB1TG9VaYiQSlIOOa59LOPk4iF9GK81NxW0qFGIK5eYB9W52DDwVta8peMIOOaGELjjUMNiSGmMW_r58TGUcXZiOFvvX7yVSeQ9uYvPAwSL4tnOP2bKDJ88/s1600/awdesh%2520verma.jpg&quot; uda=&quot;true&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://dikhsa.blogspot.com/feeds/5692364595321045908/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment/fullpage/post/8040736284594536912/5692364595321045908' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/5692364595321045908'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/5692364595321045908'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dikhsa.blogspot.com/2012/03/blog-post_01.html' title='अवधेश के आंसू का असर बता पाना मुश्किल'/><author><name>Anonymous</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07065981802189787445</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='https://img1.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjBvz1-UT_wwJpp30bs85ndqB1TG9VaYiQSlIOOa59LOPk4iF9GK81NxW0qFGIK5eYB9W52DDwVta8peMIOOaGELjjUMNiSGmMW_r58TGUcXZiOFvvX7yVSeQ9uYvPAwSL4tnOP2bKDJ88/s72-c/awdesh%2520verma.jpg" height="72" width="72"/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8040736284594536912.post-3299332561208397179</id><published>2012-03-01T20:20:00.000+05:30</published><updated>2012-03-01T20:20:08.599+05:30</updated><title type='text'>लखीमपुर खीरी में सियासी गूंज</title><content type='html'>&lt;div dir=&quot;ltr&quot; style=&quot;text-align: left;&quot; trbidi=&quot;on&quot;&gt;&lt;strong&gt;आनन्द राय &lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पड़ोसी देश नेपाल की सरहद से सटे लखीमपुर खीरी जिले का भौगोलिक दायरा काफी बड़ा है, लेकिन इसके सापेक्ष जिले में सियासी गूंज नहीं सुनाई पड़ती। दल और पसंद का उम्मीदवार जाहिर करने में यहां के मतदाता भी औरों की तरह ही है। सलेमपुर पालिटेक्निक के सामने सीमेंट की दुकान चला रहे संजय से हवा का रुख पूछने पर कोई साफ जवाब नहीं मिलता है। बस टालमटोल और सभी की जय-जय। चतुराई भरे इस अंदाज से कोई कयास लगाए भी तो क्या। लेकिन यहां निर्दल चुनाव लड़ रहे अन्ना आंदोलन के सिपाही, राष्ट्रीय कबड्डी खिलाड़ी और वाइडी कालेज के प्रवक्ता डाक्टर योगेश कुमार से जब कुछ लोग उनकी जाति और क्षेत्र पूछते हैं तो लगता है कि यहां भी जाति की कसौटी पर ही सियासी सूरमा परखे जा रहे हैं। &lt;br /&gt;
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साहित्यकार डाक्टर सत्येन्द्र दुबे कहते हैं कि जनता माशाअल्लाह है। पांच साल मुद्दों की बात करती है, लेकिन नेता पता नहीं क्या डमरू बजा देते हैं कि चुनाव में जातियों की बात सुनाई पड़ने लगती है। जिले में ब्रांाणों की अच्छी संख्या है, लेकिन सबसे प्रभावशाली कुर्मी बिरादरी है। इस बिरादरी को सहेजने के लिए सभी दलों के बड़े नेता भावनाओं की लहर चला चुके हैं। वैसे चुनावी नतीजों का रुख मोड़ने के लिए दलितों की खासी तादाद भी कम महत्वपूर्ण नहीं है। सिख, यादव, कुशवाहा, कहांर समेत कई और जातियां हैं। मुसलमान वोटर भी निर्णायक भूमिका में हैं। राजनीति विज्ञान के शिक्षक डाक्टर एससी मिश्र जातियों की सियासत पर दुख प्रकट करते हुए कहते हैं कि अगर ऐसा नहीं रहता तो वर्षो से यह जिला रेल की बड़ी लाइन के लिए नहीं तरसता। लखीमपुर में शारदा और घाघरा नदी की बाढ़ तथा उजड़ते चीनी उद्योग जैसे बुनियादी मसले वजूद में हैं, लेकिन इन पर आवाज उठाने वाला कोई नहीं है। &lt;br /&gt;
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पिछले चुनाव तक इस जिले में सात विधानसभा क्षेत्र थे जो परिसीमन में बढ़कर आठ हो गये हैं। निघासन, श्रीनगर सुरक्षित, मोहम्मदी, कस्ता सुरक्षित, पलिया, लखीमपुर, गोला और धौरहरा। इनमें तीन सीटें धौरहरा, मोहम्मदी और कस्ता सुरक्षित केन्द्र सरकार के राज्यमंत्री कुंवर जितिन प्रसाद के संसदीय क्षेत्र में पड़ती हैं। कुंवर जितिन की साख इस चुनावी कसौटी पर है। बाकी पांच सीटें कांग्रेस सांसद जफर अली नकवी के क्षेत्र की हैं। पिछली बार सात सीटों में चार सीटों पर काबिज रही समाजवादी पार्टी अबकी जनाक्रोश को वोट में बदलने की मुहिम में जुटी है और वह अपना आंकड़ा बढ़ाने की जंग लड़ रही है। सपा जिलाध्यक्ष शशांक यादव कहते हैं कि इस बार हमारी सीटें बढ़ेगी। यहां पिछली बार दो सीट बसपा को और एक भाजपा को मिली थी। &lt;br /&gt;
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मोहम्मदी : धौरहरा से बसपा से जीते बाला प्रसाद अवस्थी अबकी मोहम्मदी में चुनाव लड़ रहे हैं। यह सीट पहले सुरक्षित थी। भाजपा के लोकेन्द्र प्रताप सिंह, कांग्रेस के अशफाकउल्लाह खान और सपा के इमरान खान भी यहां पर अपना कब्जा करने में लगे हैं। मोहम्मदी में भाजपा के टिकट पर चुनाव जीतीं कृष्णाराज अबकी नई बनी कस्ता सुरक्षित सीट पर आ गयीं। कस्ता में प्रभावशाली पासी नेत्री कृष्णाराज के सामने सौरभ सिंह सोनू हैं, लेकिन प्रतिष्ठा उनके पिता बसपा के जोनल कोआर्डिनेटर जुगल किशोर की ही दांव पर लगी है। यहां कुर्मी, कुशवाहा, लोध, पासी और सवर्णो को भाजपा कृष्णा राज के पक्ष में करने में जुटी है, जबकि जुगल किशोर ने भी प्रतिष्ठा बचाने को पूरी ताकत लगा दी है। यहां पर कांग्रेस से पूर्व मंत्री वंशीधर राज और सपा से सुनील भार्गव तस्वीर बदलने में जुटे हैं। ज्यादातर लोग यही कहते हैं कि सभी कृष्णाराज से ही लड़ रहे हैं। इलाके में दौरा कर रहे भाजपा के प्रदेश मंत्री दयाशंकर सिंह दावा करते हैं कि भाजपा कई सीटें जीत रही है। &lt;br /&gt;
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निघासन : श्रीनगर से सपा से जीते आरए &lt;br /&gt;
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उस्मानी निघासन से तकदीर आजमा रहे हैं। निघासन क्षेत्र ने लखीमपुर को सुर्खियों में ला दिया था। यहां की एक नाबालिग मुस्लिम बालिका सोनम के साथ थाने में सिपाहियों ने दुराचार कर उसकी हत्या कर दी। दो दिन पूर्व निघासन पहंुचे सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव सोनम के मुद्दे को हवा दे गये हैं। निघासन में भाजपा से अजय मिश्रा, कांग्रेस ने अजय वर्मा और बसपा से दारोगा सिंह संघर्ष में हैं। श्रीनगर के सुरक्षित हो जाने के बाद पैला से बसपा से जीते राजेश गौतम पीस पार्टी के सिंबल पर मैदान में हैं। सपा से पूर्व विधायक रामसरन हैं, जबकि कांग्रेस ने पूर्व मंत्री मायावती उर्फ माया प्रसाद पर दांव लगाया है। श्रीनगर में बसपा हराओ अभियान में सभी दल जुटे हैं। सुरक्षित सीट होने की वजह से सवर्ण मतदाताओं के बूते भाजपा उम्मीदवार मंजू त्यागी हवा बनाने में जुटी हैं। पीस पार्टी से एक और दावेदार राजाराम ने राजेश के लिए मुश्किल खड़ी कर दी है। पीस पार्टी की तेजी की वजह से हिन्दू मतों का ध्रुवीकरण हा रहा है। जहां मुस्लिम आरक्षण के मुद्दे को भुनाने की कोशिश सपा कर रही है, वहीं इसी मुद्दे पर भाजपा पिछड़ों को प्रभावी ढंग से गोलबंद कर रही है।&lt;br /&gt;
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लखीमपुर में उप चुनाव में जीते उत्कर्ष वर्मा फिर सपा के उम्मीदवार हैं। यहां बसपा से नगर पालिका अध्यक्ष ज्ञान प्रकाश वाजपेयी, कांग्रेस से राघवेन्द्र सिंह और भाजपा से विनोद मिश्र अपनी अपनी जीत सुनिश्चित करने में लगे हैं। &lt;br /&gt;
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गोला में कई बार सपा के टिकट पर जीते अरविन्द गिरी अबकी कांग्रेस उम्मीदवार हैं। उनके सामने सपा ने विनय तिवारी, बसपा ने हरदोई जिले के विधायक दाऊद अहमद की पत्नी सिम्मी बानो और भाजपा से ईश्र्वरदीन मुकाबले में हैं। &lt;br /&gt;
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पलिया में भाजपा ने पूर्व मंत्री रामकुमार वर्मा और कांग्रेस ने पूर्व मंत्री विनोद तिवारी को आमने सामने कर लड़ाई तेज कर दी है, लेकिन किसान नेता बीएम सिंह ने तृणमूल कांग्रेस से यहां ताल ठोंककर सबको पशोपेश में डाल दिया है। बसपा से रोमी साहनी मैदान में हैं। धौरहरा में सपा से पूर्व विधायक यशपाल चौधरी, कांग्रेस से समरप्रताप सिंह, भाजपा से विनोद अवस्थी और बसपा से शमशेर बहादुर मैदान में लड़ रहे हैं। इस सीट पर कुंवर जितिन प्रसाद की सर्वाधिक दिलचस्पी दिख रही है।&lt;br /&gt;
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&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://dikhsa.blogspot.com/feeds/3299332561208397179/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment/fullpage/post/8040736284594536912/3299332561208397179' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/3299332561208397179'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/3299332561208397179'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dikhsa.blogspot.com/2012/03/blog-post.html' title='लखीमपुर खीरी में सियासी गूंज'/><author><name>Anonymous</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07065981802189787445</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='https://img1.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8040736284594536912.post-723847971433459552</id><published>2011-12-15T20:07:00.000+05:30</published><updated>2011-12-15T20:07:02.240+05:30</updated><title type='text'>भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने वाले हाथ बंधे</title><content type='html'>&lt;div dir=&quot;ltr&quot; style=&quot;text-align: left;&quot; trbidi=&quot;on&quot;&gt;&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEh6FgUFZVapSzJTo6TKuiKFFl4hPUsqnmD8pvlWqiWmPYgnSGSb3oiNcKbcEWzOn8jv7W0P2xXB_NwJizSfOqk9GTKmcQhLU5qScympOacIR0HhfEfx_MSbQC6pS02cvRsT_xL3BsgsvMY/s1600/G22.jpg&quot; imageanchor=&quot;1&quot; style=&quot;clear: left; cssfloat: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;&quot;&gt;&lt;img border=&quot;0&quot; height=&quot;320&quot; oda=&quot;true&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEh6FgUFZVapSzJTo6TKuiKFFl4hPUsqnmD8pvlWqiWmPYgnSGSb3oiNcKbcEWzOn8jv7W0P2xXB_NwJizSfOqk9GTKmcQhLU5qScympOacIR0HhfEfx_MSbQC6pS02cvRsT_xL3BsgsvMY/s320/G22.jpg&quot; width=&quot;229&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;आनन्द राय &lt;br /&gt;
लखनऊ, 11 दिसंबर : भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए जा रहे अन्ना हजारे के आंदोलन को लेकर पूरा देश उद्वेलित है, लेकिन सूबे की सरकार ने भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने वाले हाथ बांध दिए हैं। भ्रष्टाचार निवारण संगठन (एसीओ) ने एलडीए, केडीए और स्वास्थ्य समेत विभिन्न विभागों के भ्रष्टाचार की 35 फाइलें सरकार के पास भेजकर खुली जांच की अनुमति मांगी है पर सरकार इनको दबाए बैठी है। &lt;br /&gt;
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एसीओ, सीबीसीआइडी व विजिलेंस को खुली जांच की अनुमति सरकार देती है। सूत्रों के मुताबिक एसीओ ने विभिन्न विभागों की शिकायतों, अभिसूचना संकलन और सर्वेक्षण के आधार पर खुली जांच के लिए इस वर्ष 35 फाइलें तैयार कीं। साल बीतने को है मगर सरकार की ओर से केवल 12 मामलों की खुली जांच की अनुमति मिल सकी है। बताते हैं कि एसीओ व सरकार के बीच सब कुछ सामान्य नहीं चल रहा है। बीते दिनों उच्चाधिकारियों की एक बैठक हुई जिसमें एसीओ के महानिदेशक अतुल भी शामिल हुए। इस बैठक में एसीओ की भूमिका को लेकर कई सवाल खड़े हुए और एक शीर्ष अधिकारी ने दायरे में रहने तक की नसीहत दे डाली। एसीओ के बारे में बैठक में कहा गया कि वह सरकार के संज्ञान में मामला डाले बिना अपनी रिपोर्ट भेजते हैं, जबकि विजिलेंस और सीबीसीआइडी के लोग सभी सूचनाएं मुहैया कराते हैं। एसीओकी ओर से कहा गया कि जब किसी मामले में मुकदमा दर्ज हो जाता तो पूरा मामला एसीओ व कोर्ट के बीच हो जाता है। सूत्रों के अनुसार एसीओ के महानिदेशक के अधिकार क्षेत्र को लेकर सरकारी तंत्र विचार-विमर्श कर रहा है और खबर यह भी है कि विजिलेंस एक्ट की तरह इस संगठन में भी कुछ बदलाव की भूमिका बन रही है। नजर डालें तो वर्ष 2010 में करीब 300 मामलों की जांच, विवेचना और सूचनाओं का सत्यापन एसीयू ने किया है। इस साल एसीओ अभी तक 230 मामलों की ही जांच, विवेचना और सूचनाओं का सत्यापन कर सका है। अभी इनके पास 160 मामले लंबित हैं, जिसमें शासन की ओर से दी गई 12 जांचें भी शामिल हैं। बताते हैं कि 1977 के एक शासनादेश के तहत यह व्यवस्था दी गई कि किसी विभाग का प्रमुख सचिव और यहां तक कि जिलाधिकारी भी एसीओ को जांच दे सकता है, लेकिन मौजूदा समय में सब कुछ पहरे में है! &lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://dikhsa.blogspot.com/feeds/723847971433459552/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment/fullpage/post/8040736284594536912/723847971433459552' title='1 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/723847971433459552'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/723847971433459552'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dikhsa.blogspot.com/2011/12/blog-post_7139.html' title='भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने वाले हाथ बंधे'/><author><name>Anonymous</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07065981802189787445</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='https://img1.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEh6FgUFZVapSzJTo6TKuiKFFl4hPUsqnmD8pvlWqiWmPYgnSGSb3oiNcKbcEWzOn8jv7W0P2xXB_NwJizSfOqk9GTKmcQhLU5qScympOacIR0HhfEfx_MSbQC6pS02cvRsT_xL3BsgsvMY/s72-c/G22.jpg" height="72" width="72"/><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8040736284594536912.post-1046725245313039297</id><published>2011-12-15T20:03:00.001+05:30</published><updated>2011-12-15T20:03:49.505+05:30</updated><title type='text'>छद्म नामों से संपत्ति बनाई बाबू ने!</title><content type='html'>&lt;div dir=&quot;ltr&quot; style=&quot;text-align: left;&quot; trbidi=&quot;on&quot;&gt;लखनऊ, 14 दिसंबर (जाब्यू) : आप भले ही पूर्व मंत्री व एमएलसी बाबू सिंह कुशवाहा को बस इसी नाम से जानते हों, लेकिन उनका एक नाम राम चरन कुशवाहा भी है। इतना ही नहीं उनकी पत्नी का नाम सुकन्या के साथ ही शिवकन्या देवी भी है। लोकायुक्त ने कुशवाहा के मंत्री पद का दुरुपयोग कर इन नामों से खरीदी गई अकूत संपत्ति संबंधी दो और शिकायतों को पंजीकृत कर जांच कराने का फैसला किया है। इस संबंध में मुख्यमंत्री को सूचना भेजने के साथ ही कुशवाहा से 26 दिसंबर तक जवाब तलब किया गया है। &lt;br /&gt;
झांसी के अरविंद कुमार सोनी की बाबू सिंह कुशवाहा के खिलाफ की गई शिकायत पर अभी जांच चल ही रही थी कि शिव पूजन सिंह कछवाह, अरुण देव द्विवेदी तथा कुलदीप सिंह ने भी पूर्व मंत्री के खिलाफ लोकायुक्त से शिकायत की है। लोकायुक्त न्यायमूर्ति एनके मेहरोत्रा ने बताया कि शिव पूजन व अरुण देव द्विवेदी की शिकायत में पहले के आरोप तो हैं ही, कई नए आरोप भी हैं। आरोपों के संबंध में करीब एक हजार पेज के दस्तावेज भी दिए गए हैं। कहा गया है कि बाबू सिंह व राम चरन कुशवाहा एक ही व्यक्ति है। उनकी पत्नी सुकन्या व शिव कन्या देवी भी एक ही महिला। निर्वाचन पर्चे में तो बाबू सिंह कुशवाहा नाम लिखा गया है लेकिन पिता स्व. भागवत प्रसाद के अभिलेखों में एक मात्र राम चरन कुशवाहा को ही पुत्र बताया गया है। हाई स्कूल की अंक तालिका में भी राम चरन नाम है। मतदाता सूची में भी यही नाम लिखा है। यह भी कहा गया है कि बाबू सिंह की बीए की डिग्री भी फर्जी है। बीते माह अरविंद सोनी ने कुशवाहा पर मंत्री पद का दुरुपयोग कर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप लगाया था। कहा गया था कि मंत्री बनने से पहले उनके पास मात्र कुछ बीघा जमीन थी, लेकिन अब उनके सगे-संबंधियों के नाम से करोड़ों की संपत्ति है। कुशवाहा ने खनिकर्म मंत्री रहते बांदा-महोबा, चित्रकूट-हमीरपुर जिले में जमीन के खनन पट्टे परिवारिक सदस्यों के साथ ही कुछ खास लोगों को आवंटित किया है। बांदा में मेसर्स श्रीनाथ प्रापर्टीज, पिता के नाम भागवत प्रसाद एजुकेशनल वेलफेयर ट्रस्ट व पत्नी सुकन्या कुशवाहा के नाम तथागत शिक्षास्थली बनाकर उसमें करोड़ों रुपये का कालाधन लगाया गया है। &lt;br /&gt;
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आरोपों के संबंध में कैबिनेट सचिव, विधान परिषद सचिव व भारत निर्वाचन आयोग से जानकारी हासिल करने की भी बात कही गई है। लोकायुक्त ने बताया कि दोनों नई शिकायतों को भी पंजीकृत कर उनमें दिए गए तथ्यों की भी अब जांच कराने का निर्णय किया है। &lt;br /&gt;
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&lt;strong&gt;(अब करीबी अफसरों पर नजर- पेज 9)&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;
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एनआरएचएम घोटाले की जांच कर रही सीबीआइ के निशाने पर पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा के कई करीबी अधिकारी भी शामिल हैं। इनमें पैकफेड के अभियंता से लेकर आइएएस अधिकारी तक शामिल हैं। सीबीआइ बहुत जल्द इनकी भी पड़ताल शुरू करेगी। &lt;br /&gt;
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सूबे में वर्ष 2005 से 2011 तक के राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) घोटाले की जांच कर रही सीबीआइ ने जांच में उनका भी ब्योरा हासिल किया है, जिनकी इस घोटाले में भूमिका रही। अब तक दर्जन भर ठेकेदारों व आपूर्तिकर्ताओं से हुई पूछताछ में इनका नाम सामने आया है। सीबीआइ ने ठेकदारों से जब उनको काम मिलने के साथ ही अन्य पहलुओं तथा पेमेंट की बाबत पूछताछ की तो तो माननीयों के साथ आइएएस अधिकारी और अभियंताओं का नाम सामने आया। सीबीआइ ने अभिसूचना संकलन में भी खास लोगों की भूमिका की जानकारी हासिल की है। स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने तो कमीशन खाने में रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। बताते हैं उन्होंने छोटे-छोटे ठेकेदारों को काम दिया, लेकिन इतना भारी कमीशन लिया कि उन्हें कुछ बचा ही नहीं। यह एक दूसरे पूर्व मंत्री के कृपा पात्र थ! &lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://dikhsa.blogspot.com/feeds/1046725245313039297/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment/fullpage/post/8040736284594536912/1046725245313039297' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/1046725245313039297'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/1046725245313039297'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dikhsa.blogspot.com/2011/12/blog-post_4699.html' title='छद्म नामों से संपत्ति बनाई बाबू ने!'/><author><name>Anonymous</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07065981802189787445</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='https://img1.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8040736284594536912.post-3153687722258338654</id><published>2011-12-15T19:54:00.000+05:30</published><updated>2011-12-15T19:54:33.726+05:30</updated><title type='text'>नजर अब कुशवाहा के करीबी अफसरों पर</title><content type='html'>&lt;div dir=&quot;ltr&quot; style=&quot;text-align: left;&quot; trbidi=&quot;on&quot;&gt;लखनऊ, 14 दिसंबर (जाब्यू) : एनआरएचएम घोटाले की जांच कर रही सीबीआइ के निशाने पर पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा के कई करीबी अधिकारी भी शामिल हैं। इनमें पैकफेड के अभियंता से लेकर आइएएस अधिकारी तक शामिल हैं। सीबीआइ बहुत जल्द इनकी भी पड़ताल शुरू करेगी। &lt;br /&gt;
सूबे में वर्ष 2005 से 2011 तक के राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) घोटाले की जांच कर रही सीबीआइ ने जांच में उनका भी ब्योरा हासिल किया है, जिनकी इस घोटाले में भूमिका रही। अब तक दर्जन भर ठेकेदारों व आपूर्तिकर्ताओं से हुई पूछताछ में इनका नाम सामने आया है। सीबीआइ ने ठेकदारों से जब उनको काम मिलने के साथ ही अन्य पहलुओं तथा पेमेंट की बाबत पूछताछ की तो तो माननीयों के साथ आइएएस अधिकारी और अभियंताओं का नाम सामने आया। सीबीआइ ने अभिसूचना संकलन में भी खास लोगों की भूमिका की जानकारी हासिल की है। स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने तो कमीशन खाने में रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। बताते हैं उन्होंने छोटे-छोटे ठेकेदारों को काम दिया, लेकिन इतना भारी कमीशन लिया कि उन्हें कुछ बचा ही नहीं। यह एक दूसरे पूर्व मंत्री के कृपा पात्र थे।&lt;br /&gt;
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&lt;strong&gt;छद्म नामों से संपत्ति बनाई बाबू ने&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;
लखनऊ, 14 दिसंबर (जाब्यू) : आप भले ही पूर्व मंत्री व एमएलसी बाबू सिंह कुशवाहा को बस इसी नाम से जानते हों, लेकिन उनका एक नाम राम चरन कुशवाहा भी है। इतना ही नहीं उनकी पत्नी का नाम सुकन्या के साथ ही शिवकन्या देवी भी है। लोकायुक्त ने कुशवाहा के मंत्री पद का दुरुपयोग कर इन नामों से खरीदी गई अकूत संपत्ति संबंधी दो और शिकायतों को पंजीकृत कर जांच कराने का फैसला किया है। इस संबंध में मुख्यमंत्री को सूचना भेजने के साथ ही कुशवाहा से 26 दिसंबर तक जवाब तलब किया गया है। &lt;br /&gt;
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झांसी के अरविंद कुमार सोनी की बाबू सिंह कुशवाहा के खिलाफ की गई शिकायत पर अभी जांच चल ही रही थी कि शिव पूजन सिंह कछवाह, अरुण देव द्विवेदी तथा कुलदीप सिंह ने भी पूर्व मंत्री के खिलाफ लोकायुक्त से शिकायत की है। लोकायुक्त न्यायमूर्ति एनके मेहरोत्रा ने बताया कि शिव पूजन व अरुण देव द्विवेदी की शिकायत में पहले के आरोप तो हैं ही, कई नए आरोप भी हैं। आरोपों के संबंध में करीब एक हजार पेज के दस्तावेज भी दिए गए हैं। कहा गया है कि बाबू सिंह व राम चरन कुशवाहा एक ही व्यक्ति है। उनकी पत्नी सुकन्या व शिव कन्या देवी भी एक ही महिला। निर्वाचन पर्चे में तो बाबू सिंह कुशवाहा नाम लिखा गया है लेकिन पिता स्व. भागवत प्रसाद के अभिलेखों में एक मात्र राम चरन कुशवाहा को ही पुत्र बताया गया है। हाई स्कूल की अंक तालिका में भी राम चरन नाम है। मतदाता सूची में भी यही नाम लिखा है। यह भी कहा गया है कि बाबू सिंह की बीए की डिग्री भी फर्जी है। बीते माह अरविंद सोनी ने कुशवाहा पर मंत्री पद का दुरुपयोग कर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप लगाया था। कहा गया था कि मंत्री बनने से पहले उनके पास मात्र कुछ बीघा जमीन थी, लेकिन अब उनके सगे-संबंधियों के नाम से करोड़ों की संपत्ति है। कुशवाहा ने खनिकर्म मंत्री रहते बांदा-महोबा, चित्रकूट-हमीरपुर जिले में जमीन के खनन पट्टे परिवारिक सदस्यों के साथ ही कुछ खास लोगों को आवंटित किया है। बांदा में मेसर्स श्रीनाथ प्रापर्टीज, पिता के नाम भागवत प्रसाद एजुकेशनल वेलफेयर ट्रस्ट व पत्नी सुकन्या कुशवाहा के नाम तथागत शिक्षास्थली बनाकर उसमें करोड़ों रुपये का कालाधन लगाया गया है। &lt;br /&gt;
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आरोपों के संबंध में कैबिनेट सचिव, विधान परिषद सचिव व भारत निर्वाचन आयोग से जानकारी हासिल करने की भी बात कही गई है। लोकायुक्त ने बताया कि दोनों नई शिकायतों को भी पंजीकृत कर उनमें दिए गए तथ्यों की भी अब जांच कराने का निर्णय किया है। &lt;br /&gt;
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&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://dikhsa.blogspot.com/feeds/3153687722258338654/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment/fullpage/post/8040736284594536912/3153687722258338654' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/3153687722258338654'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/3153687722258338654'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dikhsa.blogspot.com/2011/12/blog-post_8785.html' title='नजर अब कुशवाहा के करीबी अफसरों पर'/><author><name>Anonymous</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07065981802189787445</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='https://img1.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8040736284594536912.post-7156685879834433723</id><published>2011-12-15T19:51:00.001+05:30</published><updated>2011-12-15T20:02:52.194+05:30</updated><title type='text'>सीबीआइ के सर्विलांस पर माननीय और नौकरशाह</title><content type='html'>&lt;div dir=&quot;ltr&quot; style=&quot;text-align: left;&quot; trbidi=&quot;on&quot;&gt;आनन्द राय &lt;br /&gt;
लखनऊ, 13 दिसंबर : यूपी में एनआरएचएम घोटाला और डबल सीएमओ मर्डर की जांच में जुटी सीबीआइ तह तक पहंुचने की हर मुमकिन कोशिश में जुटी है। उसके सर्विलांस पर सूबे के 40 प्रमुख लोग हैं। इनमें जनप्रतिनिधि, अफसर और सरकार के कुछ खास दिग्गज शामिल हैं। सीबीआइ को इससे कई अहम सूचनाएं हासिल हो रही हैं। &lt;br /&gt;
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सूत्रों के मुताबिक दिल्ली में सीबीआइ की एक स्पेशल यूनिट पिछले चार महीने से प्रदेश सरकार के चार मंत्रियों, दो पूर्व मंत्रियों, दर्जन भर विधायक, सांसद, कई आइएएस और स्वास्थ्य विभाग के शीर्ष अधिकारियों का फोन हर दिन रिकार्ड कर रही है। बताते हैं कि सीबीआइ की यह कार्यशैली कुछ लोगों को पता चल गयी है। इससे वे सावधान हो गये हैं, लेकिन शुरुआती दौर में कई अहम चीजें सीबीआइ को फोन टेप के जरिए ही पता चली हैं। इनमें सरकार के एक चर्चित नौकरशाह की बातें भी हैं, जिसमें एक पूर्व मंत्री द्वारा सीएमओ की पोस्टिंग में भारी पैसा खाने की बात है। शुरुआती दौर में सचान के सुसाइड नोट के बारे में भी सीबीआइ को ऐसे ही जानकारी मिली थी। सीबीआइ के पास कई महत्वपूर्ण सूचनाएं हैं, जिन्हें सबूत के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। &lt;br /&gt;
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इस संवाददाता से बातचीत में एक सांसद ने बताया कि उनको चार माह से पता है कि सीबीआइ उनका फोन टेप कर रही है। किसी शिकायत की बजाय वह अपने फोन पर सारी बातचीत कर रहे हैं और चाह रहे हैं कि सीबीआइ उनकी बात सुने और सच जाने। सीबीआइ 40 नहीं, 200 लोगों का फोन टेप कर रही है। इस दहशत में कई लोगों ने अपना फोन इस्तेमाल करना बंद कर दिया है। जांच के दायरे में आये एक विधायक काफी समय से अपने साथ मोबाइल फोन नहीं रखते। वे बातचीत करने के लिए दूसरों का फोन इस्तेमाल कर रहे हैं। सीबीआइ चिह्नित लोगों का लोकेशन जानने से लेकर उनकी गतिविधियों पर भी नजर रखे है।&lt;br /&gt;
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(नपेंगे खरीद और निर्माण की हेराफेरी करने वाले- पेज 9)&lt;br /&gt;
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लखनऊ, 13 दिसंबर (जाब्यू) : राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) के घोटाले की जांच में सीबीआइ खरीद और निर्माण की हेराफेरी करने वालों पर केंद्रित हो गई है। महराजगंज जिले में स्वास्थ्य उपकरणों की खरीद स्टेशनरी की दुकान से किए जाने का मामला सामने आने के बाद सीबीआइ को अंदेशा है कि जिलों में कुछ हेरफेर के साथ एक ही तरह का गोरखधंधा किया गया है। टीम बनाकर खरीददार और विक्रेता का भौतिक सत्यापन शुरू हो गया है। निर्माण एजेंसियों की गड़बड़ी भी सीबीआइ जांच में सामने आ रही है। इन सभी के खिलाफ साक्ष्य जुटाकर कार्रवाई की तैयारी हो रही है। मदद करने वालों को सरकारी गवाह बनाने पर भी सीबीआइ विचार कर रही है। &lt;br /&gt;
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सूत्रों के मुताबिक सीबीआइ मुख्यालय से आए अतिरिक्त निदेशक सलीम अली ने मंगलवार को समीक्षा के दौरान यह हिदायत दी कि अभिलेखों की पड़ताल के दौरान क्रय करने वाली फर्म और विक्रेता की जांच अवश्य करें और प्रमाणिक सबूत मिलने के साथ ही विधिक कार्रवाई शुरू करें। अधिकारियों ने कहा कि टीम इसी दिशा में काम कर रही है, लेकिन स्टाफ की कमी की वजह से जांच कार्य में दिक्कतें आ रही हैं। उन्होंने इस घोटाले में शामिल बड़े लोगों, अधिकारियों और ठेकेदारों को चिन्हित कर उनसे प्रारंभिक पूछताछ का भी निर्देश दिया। पहले चरण की बैठक के बाद शाम को सलीम अली दिल्ली चले गए।&lt;br /&gt;
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सूत्रों के मुताबिक दूसरे चरण की बैठक में सीबीआइ मुख्यालय से आए डीआइजी सतीश गोलचा, नीरजा गोत्रू, एसपी एमसी साहनी, देहरादून एसीबी के एसपी नीलाभ किशोर और लखनऊ एससीबी के एसपी एसके खरे समेत कई अधिकारियों ने एनआरएचएम घोटाला, डबल सीएमओ मर्डर और जिला कारागार में डिप्टी सीएमओ डॉ.वाइएस सचान की रहस्यमयी मौत की जांच की समीक्षा की और सभी घटनाओं की आपस में जुड़ रही कडि़यों पर फोकस किया। अधिकारियों ने समय से जांच पूरा करने और अब तक मिले सबूतों का एक बार फिर सत्यापन करने की भी नसीहत दी। जांच टीमों ने अपनी दिक्कतें भी बताई।&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://dikhsa.blogspot.com/feeds/7156685879834433723/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment/fullpage/post/8040736284594536912/7156685879834433723' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/7156685879834433723'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/7156685879834433723'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dikhsa.blogspot.com/2011/12/blog-post_8555.html' title='सीबीआइ के सर्विलांस पर माननीय और नौकरशाह'/><author><name>Anonymous</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07065981802189787445</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='https://img1.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8040736284594536912.post-1138831149525179895</id><published>2011-12-15T19:50:00.001+05:30</published><updated>2011-12-15T20:02:22.849+05:30</updated><title type='text'>चुनाव में  मुसीबत बनेंगे अवैध असलहे</title><content type='html'>&lt;div dir=&quot;ltr&quot; style=&quot;text-align: left;&quot; trbidi=&quot;on&quot;&gt;&lt;strong&gt;आनन्द राय&lt;/strong&gt; &lt;br /&gt;
लखनऊ, 12 दिसंबर : सूबे में बड़े पैमाने पर अवैध असलहों की खेप उतारी जा रही है। इसमें बिहार के देशी तथा इटली और यूएसए के बने असलहे भी शामिल हैं। खबर है कि 2012 के विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटे दबंग किस्म के लोग ये असलहे खरीद रहे हैं। अभिसूचना संकलन में बराबर इसकी आमद की खबर मिल रही है, लेकिन असली संचालकों तक पुलिस के हाथ नहीं पहंुच रहे हैं। इससे सरकार की नींद उड़ी है, क्योंकि चुनाव आयोग ने असलहा रखने की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता जताई है। इन दिनों असलहों की बरामदगी पर पुलिस का जोर है। &lt;br /&gt;
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अभी तक बिहार के मुंगेर जैसे इलाकों में बने कंट्री मेड असलहों की आपूर्ति हो रही थी, लेकिन बीते कुछ दिनों में अत्याधुनिक अवैध असलहों की बरामदगी ने नए नेटवर्क का राजफाश किया है। अब नेपाल और इंदौर से भी अवैध असलहे लाए जा रहे हैं। इस महीने मेरठ पुलिस ने छह असलहा तस्करों को गिरफ्तार कर इटली और यूएसए की बनी 32 बोर की छह पिस्टल बरामद कीं। मुजफ्फरनगर में भी इटली की छह और यूएसए निर्मित चार पिस्टल के साथ एक अभियुक्त गिरफ्तार किया गया। उसने बताया कि नेपाल से लाकर वह मुजफ्फरनगर, बागपत और मेरठ में असलहे बेचता है। मथुरा पुलिस ने मध्यप्रदेश के इंदौर से असलहा लाकर बेचने वाले गिरोह के चार सदस्यों को असलहों के साथ पकड़ा। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खरीदारों तक नहीं पहंुच रहे हाथ : आए दिन किसी न किसी जिले की पुलिस तस्करी में लगे कैरियरों को पकड़ती है और उनका चालान कर देती है। छूटने के बाद वे फिर धंधे में लग जाते हैं, लेकिन पुलिस न असली संचालक और न ही असली खरीदार तक पहंुच पाती है। चुनाव के दौरान होने वाली हिंसक घटनाओं पर गौर करें तो ज्यादातर मामलों में अवैध असलहों का ही प्रयोग होता है। इस बात से पुलिस महकमा भली भांति परिचित है। &lt;br /&gt;
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कैसे मिलते हैं कारतूस : सबसे बड़ा सवाल असलहों के लिए मिलने वाले कारतूस का है। अवैध असलहे तो कहीं बन सकते हैं, लेकिन कारतूस तो वैध फैक्टि्रयों में ही बनते हैं। पिछली घटनाओं पर नजर डालें तो पुलिसकर्मियों और शस्त्र विक्रेताओं ने ही अवैध तरीके से कारतूस मुहैया कराया है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गौर करें 2004 में मिर्जापुर के पीएसी शस्त्रागार के हेड कांस्टेबल ने 99589 कारतूस गायब किए थे। 2008 में गोरखपुर, रामपुर, बस्ती और बलिया समेत कई जिलों में शस्त्रागारों से कारतूस गायब होने का खेल उजागर हुआ और कई आरमोरर पकड़े गए। पिछले साल एसटीएफ ने लखनऊ के मोहनलालगंज से हिमाचल प्रदेश के लाइसेंसी शस्त्र विक्रेता मनवीर कैथू और रामप्रताप भदौरिया को गिरफ्तार किया तो पता चला कि कारोबार की जड़ पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, मध्यप्रदेश और हिमाचल तक जुड़ी है। &lt;br /&gt;
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&lt;strong&gt;अब पुलिस भी रखेगी चुनावी खर्च का ब्योरा&lt;/strong&gt; &lt;br /&gt;
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लखनऊ, 12 दिसंबर (जाब्यू) : इस बार के चुनाव में पुलिस पर कानून व्यवस्था पर नियंत्रण के साथ ही प्रत्याशियों के चुनावी खर्च पर भी नजर रखने की जिम्मेदारी होगी। अधिक से अधिक सूचनाएं हासिल करने के लिए चुनाव आयोग इनकी मदद लेगा। आयोग ने प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारियों को इस बारे में जरूरी निर्देश दे दिए हैं। वे जिलों में तैनात अधिकारियों को इस नई भूमिका के बारे में 14 दिसंबर को बैठक बुलाकर समझाएंगे। 23 दिसंबर को लखनऊ में कार्यशाला का आयोजन भी होगा ताकि सभी विभागों में समन्वय बना रहे। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आयोग का मानना है कि पुलिस को स्थानीय समझ अधिक होती है, इसलिए वे कहां कौन प्रत्याशी किसे प्रलोभन दे रहा है, इस बारे में सहजता से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। आयोग उनकी इसी क्षमता का लाभ उठाना चाहता है। शासन के सूत्रों के अनुसार मुख्य निर्वाचन अधिकारी उमेश सिन्हा ने पिछले दिनों पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक कर उन्हें इस बाबत जानकारी दे दी है। कहा है कि हर विधानसभा क्षेत्र में पुलिस के बड़े अफसरों से लेकर सिपाही तक की मदद ली जाए। पुलिसकर्मियों को यह पता करना होगा कि प्रत्याशियों के चुनाव प्रचार में कितनी गाडि़यां लगी हैं, कितने कार्यकर्ता किस प्रत्याशी के पक्ष में प्रचार कर रहे हैं, प्रतिदिन किस प्रत्याशी और उसके समर्थकों ने कहां-कहां पर चुनावी सभाएं की, जनसम्पर्क के दौरान प्रत्याशी एवं उसके समर्थक कहां-कहां और किन किन वाहनों से गए, किस प्रत्याशी ने क्षेत्र में कहां-कहां कुल कितने पोस्टर-बैनर आदि लगवाए, किस प्रत्याशी ने मोटरसाइकिल या कार रैली निकाल कर प्रचार किया और किस प्रत्याशी ने अपने क्षेत्र में कंबल, साड़ी, अनाज आदि बांटा। पुलिस यह सूचनाएं निर्वाचन आयोग के प्रेक्षक को देगी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
14 दिसंबर को जिलों में तैनात एएसपी को आयोग की अपेक्षा से अवगत कराया जाएगा। इसके बाद सभी पुलिस कप्तानों तथा रेंज आइजी एवं डीआइजी को इसकी जानकारी दी जायेगी। पुलिसकर्मियों को अवैध शराब एवं शस्त्र आदि की धरपकड़ के लिए क्षेत्र में अभियान चलाने के भी निर्देश दिए जाएंगे।&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://dikhsa.blogspot.com/feeds/1138831149525179895/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment/fullpage/post/8040736284594536912/1138831149525179895' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/1138831149525179895'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/1138831149525179895'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dikhsa.blogspot.com/2011/12/blog-post_1827.html' title='चुनाव में  मुसीबत बनेंगे अवैध असलहे'/><author><name>Anonymous</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07065981802189787445</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='https://img1.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8040736284594536912.post-4188839811284330639</id><published>2011-12-15T19:46:00.003+05:30</published><updated>2011-12-15T20:01:49.989+05:30</updated><title type='text'>जांच को लेकर मुश्किल में सीबीआइ</title><content type='html'>&lt;div dir=&quot;ltr&quot; style=&quot;text-align: left;&quot; trbidi=&quot;on&quot;&gt;&lt;br /&gt;
आनन्द राय&lt;br /&gt;
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लखनऊ, 8 दिसंबर : डिप्टी सीएमओ डाक्टर वाइएस सचान की रहस्यमय मौत की जांच कर रही सीबीआइ की मुश्किलें अब तक मिले सबूतों और साक्ष्यों ने बढ़ा दी हैं। सचान के सुसाइड नोट की छाया प्रति सीबीआइ को आत्महत्या की बात सोचने पर मजबूर कर रही है, वहीं परिस्थितियां और घटनास्थल के साक्ष्य हत्या की ओर इशारा कर रहे हैं। इस दुविधा में सीबीआइ दोराहे पर आकर खड़ी हो गई है और उसे जांच को गति देने के लिए कोई नया सिरा नहीं मिल रहा है। फिर भी सीबीआइ को भरोसा है कि वह तय समय में इसका राजफाश कर देगी। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राजधानी के डबल सीएमओ मर्डर और एनआरएचएम घोटाले के आरोपी डाक्टर सचान की लाश 22 जून को लखनऊ जिला कारागार के शौचालय में पाई गई। तब जेल प्रशासन और पुलिस ने कहा कि सचान ने आत्महत्या की है। उनके पास से सुसाइड नोट भी मिला, लेकिन जब रहस्यमय परिस्थितियों में हुई मौत को लेकर हंगामा शुरू हुआ तो सुसाइड नोट गायब हो गया। जेल विभाग के एक उच्चाधिकारी के जरिए होकर यह सुसाइड नोट कहां गया, इस सवाल का जवाब सीबीआइ को भी नहीं मिल सका है। सूत्रों के मुताबिक सुसाइड नोट की तलाश में काफी समय से जुटी सीबीआइ को गत दिनों छाया प्रति मिली। यह सुसाइड नोट सचान की ही लिखावट में है। सीबीआइ इस विषय पर अनुसंधान कर रही है कि क्या वाकई सचान ने सुसाइड नोट लिखा है, या उनका टार्चर करके लिखवाया गया है। असल में उनके शरीर पर जिस तरह जख्मों के निशान मिले, वह उनके उत्पीड़न की ही दास्तां बयां करते हैं, इसीलिए सीबीआइ वह मूल प्रति हासिल करने के लिए शीर्ष अधिकारी से लेकर कई महत्वपूर्ण लोगों से पूछताछ कर चुकी है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जेल प्रशासन की कहानी पर विश्र्वास नहीं : उधर, घटनास्थल के साक्ष्यों ने सीबीआइ को हत्या पर भी सोचने को मजबूर कर दिया है। चूंकि जिस तरह सर्जिकल ब्लेड से उनके शरीर पर कटे के 8 निशान और शौचालय में बेल्ट से फंदा डालकर आत्महत्या करने की कहानी जेल प्रशासन ने सुनाई, वह अभी भी सीबीआइ के गले के नीचे नहीं उतर रही है। शौचालय में मिले खून और बिना पुलिस को सूचित किए लाश को बरामदे में रख देना भी सीबीआइ को तफ्तीश की एक और दिशा देने पर मजबूर कर रहा है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सीसीटीवी फुटेज में छेड़छाड़ भी एक वजह : संशय की एक और वजह यह भी है कि सीबीआइ को घटना के दिन का मिला सीसीटीवी फुटेज अस्पष्ट है। अंदेशा है कि सीसीटीवी फुटेज के साथ छेड़छाड़ हुई है, क्योंकि घटना के दिन जेल परिसर में 23 घंटा विद्युत आपूर्ति हुई है। &lt;br /&gt;
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पालीग्राफी टेस्ट से बंदी के इंकार पर भी शक बढ़ा : जेलर समेत सात जेलकर्मियों और दो कैदियों के पालीग्राफी टेस्ट के लिए सीबीआइ ने अदालत में अर्जी डाली थी। बिचाराधीन बंदी सोनू दारा सिंह द्वारा टेस्ट कराने से इंकार करने से सीबीआइ का शक बढ़ गया है। चूंकि घटना के दिन सोनू दारा सिंह जेल अस्पताल में मंडरा रहा था, इसलिए वह शक के दायरे में है। &lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://dikhsa.blogspot.com/feeds/4188839811284330639/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment/fullpage/post/8040736284594536912/4188839811284330639' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/4188839811284330639'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/4188839811284330639'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dikhsa.blogspot.com/2011/12/blog-post_3389.html' title='जांच को लेकर मुश्किल में सीबीआइ'/><author><name>Anonymous</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07065981802189787445</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='https://img1.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8040736284594536912.post-4517454003555866949</id><published>2011-12-15T19:45:00.006+05:30</published><updated>2011-12-15T20:01:22.289+05:30</updated><title type='text'>कॉल डिटेल भी बनेगी फांस</title><content type='html'>&lt;div dir=&quot;ltr&quot; style=&quot;text-align: left;&quot; trbidi=&quot;on&quot;&gt;&lt;br /&gt;
लखनऊ, 7 दिसंबर (जाब्यू) : राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) घोटाले की जांच कर रही सीबीआइ को अहम सुबूत मिल रहे हैं। सीबीआइ ने जिलों में काम करने वाली फर्मो के ठेकेदारों व माननीयों की कॉल डिटेल पर भी नजर टिका दी है। यही कॉल डिटेल उनके गले की फांस बनेगी। &lt;br /&gt;
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एनआरएचएम घोटाले का मामला प्रकाश में आने के बाद इस्तीफा देने वाले मंत्री सीबीआइ के निशाने पर हैं। सीबीआइ पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा व अनंत मिश्रा उर्फ अंटू मिश्रा के करीबी अधिकारी, सांसद, विधायकों और ठेकेदारों की सूची बना चुकी है। माननीयों, ठेकेदारों व अधिकारियों का मोबाइल नंबर लेकर उसके कॉल डिटेल निकाले जा चुके हैं। कई लोगों के कॉल डिटेल निकालने की प्रक्रिया जारी है। दवा की आपूर्ति करने और निर्माण कार्य में लगे उन दबंग ठेकेदारों का भी ब्योरा तैयार हो रहा है, जिनकी पहंुच सांसद या विधायक के जरिए विभागीय मंत्रियों तक रही है। जौनपुर समेत पूर्वाचल के विभिन्न जिलों में काम करने वाले गुडडू खान और मलिक समेत कई अन्य आपूर्तिकर्ताओं के संबंधों की खास पड़ताल की जा रही है। सीबीआइ वैसे तो सभी जिलों की जांच में जुटी है, लेकिन अभिसूचना संकलन के दौरान पूर्व मंत्री के करीबियों के जो नाम सामने आए हैं, उनकी फर्मो से लेकर आर्थिक साम्राज्य की विशेष जांच हो रही है। सुबूत जुटाने में लगी सीबीआइ निर्माण कार्य और दवा खरीद की गड़बडि़यों के तह तक जाने में लगी है। इस बीच यह भी खबर मिली है कि कई जिलों में दबंगों और प्रभावी लोगों के इशारे पर दस्तावेज भी गायब किए जा रहे हैं। दस्तावेज गायब होने पर गोरखपुर जिले में गुमशुदगी की रिपोर्ट भी दर्ज कराने का मामला प्रकाश में आया है। सीबीआइ का शिकंजा कसता देख कुछ लोग अपने बचाव की पेशबंदी में भी जुट गए हैं।&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://dikhsa.blogspot.com/feeds/4517454003555866949/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment/fullpage/post/8040736284594536912/4517454003555866949' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/4517454003555866949'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/4517454003555866949'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dikhsa.blogspot.com/2011/12/blog-post_9080.html' title='कॉल डिटेल भी बनेगी फांस'/><author><name>Anonymous</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07065981802189787445</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='https://img1.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8040736284594536912.post-3923913467529955306</id><published>2011-12-15T19:45:00.004+05:30</published><updated>2011-12-15T20:00:21.163+05:30</updated><title type='text'>बाबू सिंह पर सीबीआइ का शिकंजा</title><content type='html'>&lt;div dir=&quot;ltr&quot; style=&quot;text-align: left;&quot; trbidi=&quot;on&quot;&gt;आनन्द राय &lt;br /&gt;
लखनऊ, 5 दिसंबर : एनआरएचएम घोटाले में पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा पर सीबीआइ का शिकंजा कसता जा रहा है। उनके करीबी रहे सांसद, विधायक व ठेकेदारों की भी जांच-पड़ताल चल रही है। सीबीआइ जिलों और विभिन्न इकाइयों से मिले दस्तावेजों की पड़ताल कर यह ब्योरा तैयार कर रही है कि किन-किन सांसद-विधायक के करीबी ठेकेदारों ने एनआरएचएम के तहत निर्माण, आपूर्ति व दवा खरीद का कार्य किया है और अवैध कमाई कहां पहुंचाई गई है।&lt;br /&gt;
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बाबू सिंह कुशवाहा के बेहद करीबी रहे पीसीएफ चेयरमैन, एमएलसी रामचंद्र प्रधान की पत्नी के नाम पर बने फर्म पर ठेकेदारी का मामला प्रकाश में आने के बाद सीबीआइ ने जिलों की ओर रुख कर दिया है। सीबीआइ को खबर है कि बाबू सिंह कुशवाहा के प्रभाव में करोड़ों के कार्य चहेतों में बांटे गए हैं। हफ्ते भर में पचास से अधिक जिलों के दस्तावेज सीबीआइ के पास आये हैं। सीबीआइ ने पैक्सफेड के जरिए काम करने वालों का भी ब्यौरा हासिल किया है। &lt;br /&gt;
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सीबीआइ को अंदेशा है कि जिस तरह एनआरएचएम के पैसे का भुगतान नमित टंडन की फर्म के नाम पर हुआ और उसे एमएलसी तक पहंुचाया गया, उसी तरह का कार्य सूबे के कई जिलों में अलग-अलग फर्मो से हुआ है। इसी कारण सीबीआइ की ध्यान अब जनप्रतिनिधियों और बिचौलियों पर केन्दि्रत है। सूत्रों के मुताबिक सीबीआइ एनआरएचएम के तहत कार्य करने वाले ठेकेदारों के विधायक रामप्रसाद जायसवाल व मुख्तार अंसारी, एमएलसी प्रदीप सिंह व रामू द्विवेदी तथा सांसद धनंजय सिंह के अलावा दो दर्जन से अधिक विधायकों व सांसदों से रिश्तों की पड़ताल कर रही है। रामप्रसाद जायसवाल का नाम सीबीआइ की खास सूची में हैं। जांच एजेंसी जानने में जुटी है कि क्या ठेकेदारों की लेनदेन का कोई सिरा जनप्रतिनिधियों से जुड़ा है।&lt;br /&gt;
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प्रधान से होगी पूछताछ : सीबीआइ एमएलसी रामचंद्र प्रधान से भी पूछताछ करेगी। प्रधान ने अपने प्रभाव में किसको-किसको ठेका दिलवाया। नमित टण्डन से उनके क्या रिश्ते रहे हैं। ठेकेदार को अपनी फर्म देने का उनका उद्देश्य क्या रहा है। क्या नाम छिपाने के लिए उन्होंने नमित टण्डन पर वाकई दबाव डाला। &lt;br /&gt;
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आगा रिजवान को हिरासत में लेने की तैयारी : सूत्रों के मुताबिक सीबीआइ दूसरों के नाम पर ठेकेदारी करने वाले आगा रिजवान को हिरासत में लेने की तैयारी कर रही है। इसके अलावा हफ्ते भीतर पूछताछ के लिए दो दर्जन से अधिक ठेकेदारों और पैक्सफेड के अभियंताओं समेत कई अन्य लोगों से पूछताछ करेगी। &lt;br /&gt;
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(माननीयों की अकूत संपत्ति पर भी नजर- पेज 11)&lt;br /&gt;
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लखनऊ, 5 दिसंबर (जाब्यू) : सीबीआइ के निशाने पर माननीयों की आय से अधिक संपत्ति भी है। सीबीआइ ने होमवर्क में एक दर्जन से अधिक जनप्रतिनिधियों की हैसियत आंकी है, जो एक दशक में कई गुना बढ़ गयी है। सीबीआइ की टीम कभी भी इनके यहां छापेमारी कर सकती है। &lt;br /&gt;
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कौन हैं रामचंद्र प्रधान : लखनऊ के मलिहाबाद क्षेत्र के निवासी रामचंद्र प्रधान के सार्वजनिक जीवन की शुरुआत लखनऊ विश्र्वविद्यालय की छात्र राजनीति से हुई। फिर उन्होंने बसपा की राजनीति शुरू की और लखनऊ का उन्हें जिलाध्यक्ष बनाया गया। प्रधान ने न केवल एमएलसी बनने से लेकर पीसीएफ चेयरमैन तक का सफर किया, बल्कि अपने भाई को जिला पंचायत अध्यक्ष बनवाने में भी कामयाब रहे। &lt;br /&gt;
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प्रधान की पत्नी भी एक सहकारी बैंक की अध्यक्ष हैं। बाबू सिंह कुशवाहा की जब सरकार में तूती बोलती थी, तब उनके हमकदम के रूप में प्रधान का भी जलवा कम नहीं था। अभी भी प्रधान को अपनी हैसियत का गुमान है और उनका आर्थिक साम्राज्य भी राजनीतिक रुतबे की तरह ही बढ़ा है।&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://dikhsa.blogspot.com/feeds/3923913467529955306/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment/fullpage/post/8040736284594536912/3923913467529955306' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/3923913467529955306'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/3923913467529955306'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dikhsa.blogspot.com/2011/12/blog-post_15.html' title='बाबू सिंह पर सीबीआइ का शिकंजा'/><author><name>Anonymous</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07065981802189787445</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='https://img1.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8040736284594536912.post-2756894279532510886</id><published>2011-12-15T19:42:00.000+05:30</published><updated>2011-12-15T19:42:59.881+05:30</updated><title type='text'>ठेकेदारी में बड़े चेहरे उजागर</title><content type='html'>&lt;div dir=&quot;ltr&quot; style=&quot;text-align: left;&quot; trbidi=&quot;on&quot;&gt;&lt;br /&gt;
आनन्द राय&lt;br /&gt;
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लखनऊ, 4 दिसंबर 2011&amp;nbsp;: एनआरएचएम घोटाले की जांच के घेरे में आए ठेकेदार नमित टंडन के आत्महत्या के प्रयास के बाद भले परिवारीजनों ने सीबीआइ पर उत्पीड़न के आरोप लगाए हों, लेकिन एनआरएचएम की ठेकेदारी में शामिल बड़े लोगों का भी चेहरा उजागर कर दिया है। दरअसल नमित टंडन ठेके में मोहरा मात्र थे। असली ठेकेदारी पीसीएफ के चेयरमैन, एमएलसी रामचंद्र प्रधान की पत्नी की फर्म पर उनके खास सहयोगी आगा रिजवान कर रहे थे। नमित टंडन पर सीबीआइ का दबाव इन सबका नाम उजागर करने के लिए था, लेकिन ऐसे लोगों के खिलाफ मुंह खोलने का खामियाजा टंडन को भी बखूबी मालूम है।&lt;br /&gt;
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रमा इंटरप्राइजेज के जरिए नमित टंडन ने जननी सुरक्षा योजना के तहत 27 एएनएम केंद्र बनवाने का काम पैक्सफेड से लिया। इस कार्य में श्रेया इंटरप्राइजेज भी शामिल है। सूत्रों के अनुसार काम दिलाने की भूमिका पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा के सबसे करीबी पीसीएफ चेयरमैन और एमएलसी रामचंद्र प्रधान ने निभाई। प्रधान के करीबी आगा रिजवान इसमें माध्यम थे। सूत्रों के मुताबिक 22 फरवरी 2010 से दिसंबर 2010 तक रमा इंटरप्राइजेज के खाते में एक करोड़ रुपये आए और नमित टंडन ने 50 लाख रुपये नकद और 50 लाख रुपये कई लोगों के नाम के चेक के जरिए आगा रिजवान को ही दे दिए। सीबीआइ को खबर मिली है कि पैसे रामचंद्र प्रधान को दिए गए। मामले में नमित टंडन से 28 नवंबर व दो दिसंबर को सीबीआइ ने पूछताछ की तो सबसे बड़ा सवाल श्रेया इंटरप्राइजेज के बारे में उठा, जिसकी प्रोपराइटर प्रधान की पत्नी अनीता प्रधान हैं। चूंकि पैसों का लेन-देन फर्म के नाम पर भी है, इसलिए सीबीआइ इनकी घेरेबंदी के लिए नमित की गवाही चाहती थी, लेकिन नमित टंडन पर प्रधान की फर्म का नाम न लेने का दबाव था। सीबीआइ और सत्ता पक्ष के नेताओं के दबाव में नमित परेशान हो गए। फिलहाल वे ट्रामा सेंटर में भर्ती हैं और होश में आने के बाद ही सच सामने आएगा। वैसे जो भी कार्य हुए उसे आगा ने कराया और वर्कआर्डर पर भी नमित टंडन के हस्ताक्षर नहीं हैं। &lt;br /&gt;
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- बैंकाक में मारा गया भगवंत सिंह उर्फ भरत नेपाली&lt;br /&gt;
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- दत्ता सामंत, जमीम, तानशा और शाहिद आजमी की हत्या नेपाली ने कराई&lt;br /&gt;
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लखनऊ, 16 फरवरी। उत्तर प्रदेश, मुंबई और नेपाल में आपराधिक गिरोह चला रहे डान भगवंत सिंह उर्फ भरत नेपाली के बैंकाक में मारे जाने की बात सूत्रों ने पुष्ट कर दी है। गुजरे दिसम्बर के आखिरी हफ्ते में नेपाली के बैंकाक में मारे जाने की खबर चर्चा में आयी, लेकिन तबसे इस खबर को लेकर संशय बरकरार था। नेपाली के मारे जाने से यूपी पुलिस को राहत मिली है, क्योंकि यहां के हाइप्रोफाइल नए शूटरों का रिमोट उसके ही हाथों में था। वह शूटरों को हथियार, सुपारी और पनाह भी देता था। &lt;br /&gt;
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भरत नेपाली का नाम यूं तो अण्डरवल्र्ड में तबसे कायम है, जबसे दाऊद इब्राहिम और छोटा राजन का गैंगवार शुरू हुआ, लेकिन मुंबई में मजदूर नेता दत्ता सामंत की हत्या के बाद वह सुर्खियों में आ गया। मुंबई के मलाड इलाके में रहकर कभी छोटा राजन गैंग के लिए ड्राइवर की भूमिका निभाने वाले नेपाली की महत्वाकांक्षा इतनी तेज बढ़ी कि उसने छोटा राजन से बगावत कर खुद का गैंग खड़ा कर लिया। फिर नेपाल में भी उसने अपना साम्राज्य खड़ा किया। भरत नेपाली ने जून 2010 में छोटा राजन के साथी फरीद तानशा की हत्या चेंबूर के तिलकनगर में यूपी के शूटरों से कराई। उसने इलाहाबाद के चर्चित अपराधी राजेश यादव गैंग को हत्या की सुपारी दी। यह बात तब खुली जब एसटीएफ ने अगस्त 2010 में जौनपुर निवासी ओसामा उर्फ राहुल राय को बादशाहनगर रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया। ओसामा भी तानशा की हत्या में शामिल था। मुंबई बम विस्फोट के एक आरोपी के वकील शाहिद आजमी की हत्या 11 फरवरी 2010 को भरत नेपाली गैंग के विजय शेट्टी उर्फ बाबा और जौनपुर, आजमगढ़ के शूटरों ने की। &lt;br /&gt;
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वियतनाम तक आपराधिक गतिविधि संचालित करने वाले प्रकाश पाण्डेय उर्फ बंटी के साथी उत्तरांचल के भूपेन्द्र सिंह वोहरा को अभी महराजगंज जिले के सोनौली बार्डर से गिरफ्तार किया गया, तब भी भरत नेपाली के यूपी में बढ़ती गतिविधियों की बात सामने आयी। भूपेन्द्र भी भरत नेपाली के लिए काम कर चुका है। नेपाल में भी भरत नेपाली ने अपने हाथ दिखाए। उसने सात फरवरी 2010 को काठमाण्डू में स्पेस टाइम्स नेटवर्क समूह के सीइओ जमीम शाह की हत्या करा दी। यह हाई प्रोफाइल हत्या जाली नोटों के अन्तर्राष्ट्रीय कारोबार में वर्चस्व के लिए हुई और इसमें मुख्य भूमिका नेपाल के पूर्व मंत्री सलीम मियां अंसारी के बेटे यूनुस अंसारी ने निभाई, जो हत्या के कुछ दिन पहले 25 लाख रुपये जाली नोटों के साथ काठमाण्डूू में गिरफ्तार हुआ था। इसके पूर्व जमीम शाह से जुड़े जाली नोटों के कारोबार में शामिल डान माजिद मनिहार की 6 अक्टूबर 2009 को नेपालगंज तथा परवेज टाण्डा की 25 दिसंबर 2009 को बुटवल में हत्या हुई। इस हत्या में भी भरत नेपाली के गुर्गे शामिल थे। लखनऊ, आजमगढ़, जौनपुर, मिर्जापुर और गोरखपुर के अपराधियों से भरत नेपाली के रिश्ते जगजाहिर हैं। &lt;br /&gt;
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&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://dikhsa.blogspot.com/feeds/4926034420463114517/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment/fullpage/post/8040736284594536912/4926034420463114517' title='1 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/4926034420463114517'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/4926034420463114517'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dikhsa.blogspot.com/2011/02/blog-post_16.html' title='नेपाली के हाथ था यूपी के शूटरों का &#39;रिमोट'/><author><name>Anonymous</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07065981802189787445</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='https://img1.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8040736284594536912.post-7669001891485094045</id><published>2011-02-10T02:14:00.000+05:30</published><updated>2011-02-10T02:14:23.506+05:30</updated><title type='text'>क्या जवाब दूं मैं !</title><content type='html'>&lt;div dir=&quot;ltr&quot; style=&quot;text-align: left;&quot; trbidi=&quot;on&quot;&gt;एक आदमी ने पूछा आज हमसे तुम्हारा ब्लॉग खामोश क्यूँ है. आप बताओ क्या जवाब दूं मैं ! &lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://dikhsa.blogspot.com/feeds/7669001891485094045/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment/fullpage/post/8040736284594536912/7669001891485094045' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/7669001891485094045'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/7669001891485094045'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dikhsa.blogspot.com/2011/02/blog-post.html' title='क्या जवाब दूं मैं !'/><author><name>Anonymous</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07065981802189787445</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='https://img1.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8040736284594536912.post-8792887870536652761</id><published>2010-07-17T22:17:00.000+05:30</published><updated>2010-07-17T22:17:59.245+05:30</updated><title type='text'>लखनऊ: यूपी में सियासी जंग में खून बहने का सिलसिला बड़ा पुराना है। वर्चस्व की लड़ाई और जर-जमीन के चक्कर में यहां कई जनप्रतिनिधि अपनी जान गंवा चुके हैं। जनप्रतिनिधियों के खून से यूपी पुलिस की डायरी रंगी पड़ी है। सूबे के मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी के ऊपर हुए जानलेवा हमले के बाद यह रंग और गाढ़ा हो गया है।</title><content type='html'></content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://dikhsa.blogspot.com/feeds/8792887870536652761/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment/fullpage/post/8040736284594536912/8792887870536652761' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/8792887870536652761'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/8792887870536652761'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dikhsa.blogspot.com/2010/07/blog-post.html' title='लखनऊ: यूपी में सियासी जंग में खून बहने का सिलसिला बड़ा पुराना है। वर्चस्व की लड़ाई और जर-जमीन के चक्कर में यहां कई जनप्रतिनिधि अपनी जान गंवा चुके हैं। जनप्रतिनिधियों के खून से यूपी पुलिस की डायरी रंगी पड़ी है। सूबे के मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी के ऊपर हुए जानलेवा हमले के बाद यह रंग और गाढ़ा हो गया है।'/><author><name>Anonymous</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07065981802189787445</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='https://img1.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8040736284594536912.post-7321728156088682524</id><published>2010-03-04T07:39:00.002+05:30</published><updated>2010-03-04T07:44:12.671+05:30</updated><title type='text'>नेपाल की मीडिया में  इण्‍टरनल गैंगवार !</title><content type='html'>नेपाल में होली की शाम जनकपुर टुडे के प्रकाशक अरुण सिंघानियां की गोली मारकर हत्‍या कर दी गयी। मेरे एक दो मित्रों ने मुझे फोन किया और पिछली घटनाओं से मामले को जोडने लगे। लोग कई तरह का तर्क दे रहे थे। कुछ लोग घटनाओं की तह में पहुंचकर बहुत कुछ दावा भी करने लगे। मैं इस घटना पर और कुछ लिखूं या कयास लगाऊं उससे पहले दो तीन प्रमुख बातों की याद दिलाना जरुरी समझ रहा हूं। सभी मामले इसी साल के हैं और सबके तार आपस में एक दूसरे से जुडे हुये हैं।&lt;br /&gt;
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&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; सबसे पहले यूनुस अंसारी की गिरफ़तारी की चर्चा जरूरी है। नेपाल में राजा ज्ञानेन्‍द्र वीर विक्रम शाह के शासन में मंत्री रहे सलीम मियां अंसारी के बदनाम बेटे और मीडया के क्षेत्र में पैर जमा चुके आईएसआई परस्‍त, जाली नोटों के कारोबारी और दाऊद के खास सहयोगी यूनुस अंसारी की 1 जनवरी 2010 को गिरफ़तारी हुई। यूनुस के साथ दो पाकिस्‍तानी नागरिक और लगभग 25 लाख भारतीय जाली नोट भी पकडा गया। इस घटना के बाद भारत में बडे पैमाने पर जाली नोटों के धंधों का खुलासा हुआ और विभिन्‍न शहरों से लोग पकडे गये। इस मामले के कुछ दिन बाद नेपाल में सन्‍नाटा छा गया और लोग यूनुस अंसारी की चर्चा करना भूल गये। पर यह सब कुछ तूफान आने से पहले की खामोशी थी।&lt;br /&gt;
&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; सात फरवरी को नेपाल के मीडिया मुगल, दाऊद के सहयोगी और जाली नोटों के धंधे में अरसे से लिप्‍त जमीम शाह को काठमाण्‍डू में गोलियों से भून दिया गया। नेपाल के एक पूर्व नौकरशाह के पुत्र जमीम शाह ने अम्बिका प्रधान से प्रेम विवाह किया था। अम्बिका नेपाल में एफ एम चैनल की शुरुआत करने वाले प्रसन्‍न मानचिंग प्रधान की बेटी हैं। मीडिया के क्षेत्र में अपनी ससुराल के लोगों का प्रभाव देखकर ही जमीम ने अपना दांव लगाया। लोग कहते हैं कि बाद में दाऊद इब्राहिम ने साढे चार करोड रुपये की पूंजी लगाकर रातों रात जमीम शाह का प्रभाव बढा दिया और नेपाली मीडिया में स्‍पेस टाइम्‍स का वर्चस्‍व हो गया। इस समय स्‍पेस टाइम्‍स ग्रुप का कारोबार 500 करोड रुपये का है।&lt;br /&gt;
&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; जमीम की हत्‍या के बाद 15 फरवरी को काठमाण्‍डू के एआईजी मदन खडका ने जमीम शाह मर्डर का खुलासा किया। उन्‍होंने बताया कि बरेली जेल में बंद डान बबलू ने भरत नेपाली, दीपक शाही उर्फ बबलू और अन्‍य कई लोगों के साथ मिलकर इस मामले की साजिश रची। नेपाल के कई मंत्रियों ने इस मामले को अन्‍तर्राष्‍ट्रीय साजिश करार दिया। इस खुलासे के बाद नेपाल में मामले पर बहुत कुछ खास चर्चा नहीं हो रही थी। इस बीच 2 मार्च की शाम को होली मनाकर लौट रहे भारतीय मूल के मीडियामैन जनकपुर टुडे के प्रकाशक अरुण सिंघानियां की गोली मारकर हत्‍या कर दी गयी।&lt;br /&gt;
&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; दरअसल अरुण सिंघानिया की हत्‍या के बाद मुझसे कुछ लोग जो सवाल कर रहे थे वह मेरी लिखी तीन चार खबरों की वजह से है। जब जमीम शाह की हत्‍या हुई तो अगले ही दिन- यूनुस ने खत्‍म करा दिया जमीम का खेल, प्रकाशित हुई। मेरे सूत्रों ने बताया था कि जमीम की हत्‍या के पीछे मुख्‍य भूमिका यूनुस अंसारी की है और इस मामले में कई भारतीय डान लगे हैं। शुरु में छोटा राजन और भरत नेपाली का नाम आया। इसके कुछ घण्‍टे बाद बबलू का भी नाम मुझे बताया गया। पहले तो मुझे लगा कि बडबोले बबलू ने यह झूठ बोला लेकिन कयास लगाते हुये और यह आशंका जाहिर करते हुये 9 फरवरी को ही मैंने मामले में बबलू का नाम शामिल करते हुये एक रपट लिखी। उस समय तक नेपाल की मीडिया या भारतीय मीडिया में बबलू के नाम की चर्चा नहीं थी। 15 फरवरी को जब नेपाल के एआईजी मदन खडका ने पूरे मामले में बबलू का ही नाम शामिल किया तब मुझे उन सूत्रों की याद आयी जिन लोगों का कहना था कि बबलू ने एक करोड रुपये के लिए यूनुस अंसारी से यह डील की। जहां तक भरत नेपाली की बात है तो वह सेना से स्‍वैच्छिक अवकाश लेकर छोटा राजन के लिए काम करता है। भगवंत सिंह उर्फ भरत नेपाली के अलावा यूपी मूल के दीपक शाही उर्फ बबलू सिंह समेत और कई नाम सामने आये। मामले का दूसरा पक्ष यहीं से शुरू होता है। जैसे सियासत में रिश्‍ते बदलते रहते हैं उसी तरह अपराधियों की कौम कभी रिश्‍ते नहीं पहचानती हैं। होंगे कुछ लोग जो समझते होंगे कि जमीम और यूनुस जब एक ही मिशन के लिए काम करते हैं तो उनके बीच कैसी दुश्‍मनी लेकिन इसके उदाहरण तो सैकडों पडे हैं कि एक ही पार्टी के लिए काम करने वाले लोग भी आपस में एक दूसरे को फूटी आंखों देखना नहीं चाहते। दरअसल आईएसआई, नेपाल के पाक दूतावास और दाऊद की नजर में सर्वाधिक महत्‍व हासिल करने की चाह ने ही यूनुस को जमीम का प्रतिद्वंदी बना दिया। यूनुस ने मीडिया के क्षेत्र में जमीम का प्रभाव देखकर ही कदम रखा। जमीम के चलते कारोबार में उसका वह स्‍थान नहीं बन रहा था जिसकी उसे चाह रही। जैसाकि यह बात सामने आयी कि अपनी राह का कांटा हटाने के लिए ही यूनुस ने जमीम का खेल खत्‍म करा दिया।&lt;br /&gt;
&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; अब सबसे महत्‍वपूर्ण और आखिरी बात। बात यह कि 20 फरवरी के अंक में मेरी एक रपट बहुत प्रमुखता से छपी। डान की जान खतरे में। जी हां, इसी शीर्षक से छपी खबर में नेपाल के मापिफयाओं और पाक परस्‍त तथा आईएसआई से जुडे लोगों के बीच मची खलबली और प्रतिशोध में बबलू और उससे जुडे लोगों पर हमले की तैयारी का जिक्र किया था। इस रपट को लोगों ने खूब मन से पढा और मुझसे कई सवाल जवाब हुये। मंगलवार से ही भाई लोग पूछ रहे हैं कि क्‍या अरुण सिंघानियां बबलू के मददगार थे। एक सज्‍जन ने दिल्‍ली में एमबीए कर रहे संघानियां के पुत्र राहुल से बात कराने का प्रयास किया लेकिन बात नहीं हो पायी। नेपाल के एक मित्र ने इस पर अपने देश का ही नजरिया रखा। यह भी पता चला कि अरुण सिंघानियां के यहां काम करने वाली उमा नाम की कोई महिला पिछले साल रहस्‍यमय हालत में मारी गयी थी। उनके आपसी विवाद का भी कुछ लोगों ने जिक्र किया लेकिन मेरे एक साथी ने यह सवाल उठाया कि कहीं अरुण सिंघानियां बौखलाये हुये लोगों के तो शिकार नहीं हैं। अब यह बात इसलिए भी कि नेपाल की आपराधिक गतिविधियों में लिप्‍त और दाऊद खेमे से प्रभावित लोग जमीम की हत्‍या में यूनुस की भूमिका से इंकार करते हैं। ऐसा इसलिए कि उन सभी के मन में यह बात भर दी गयी कि भारत के प्रति सद़भावना रखने वाले लोग हमारे खिलाफ हैं और एक एक करके हमारी जडों पर हमला बोला जा रहा है। इसके पीछे 29 जून 1998 को काठमाण्‍डू में मारे गये नेपाल के पूर्व मंत्री मिर्जा दिलशाद बेग से लेकर 6 अक्‍टूबर 2009 को नेपालगंज में मारे गये डान माजिद मनिहार और 25 दिसम्‍बर को बुटवल में मारे गये डान परवेज टाण्‍डा की मौत को भी जोडा जा रहा है। सभी हत्‍याओं को रॉ, आईबी, यूपी एटीएस और भारतीय मूल के मधेशियों या उनकी आर्मी के मत्‍थे मढ रहे हैं। नेपाल की पुलिस अपने हित के लिए और इण्‍टरनल गैंगवार रोकने की मंशा से इसी बात को प्रचारित करने में जुटी है। तो क्‍या मीडिया के क्षेत्र में प्रभावी कदम बढा रहे भारतीय मूल के अरुण सिंघानियां इसी मानिसकता के शिकार हो गये। वर्चस्‍व और नफरत के लिए किसी ने अरुण की जान ले ली या पिफर वे अपने किसी निजी विवाद की वजह से मारे गये। जागरण जंक्‍शन के इस ब्‍लाग को नेपाल के मेरे कई साथी पढते हैं और समय समय पर उनका गोपनीय मेल भी मुझे मिलता है। मैं अपने उन मित्रों का आभारी हूं। अरुण सिंघानियां की मौत के पीछे कि असली सच्‍चाई के लिए उन सबकी सूचनाओं का मुझे इंतजार है। मैं चाहता हूं कि जैसे जमीम और यूनुस वाले मामले की सच्‍चाई मेरे पास तक आयी वैसे ही अरुण सिंघानियां का भी सच सामने आये। दैनिक जागरण दुनिया का सबसे बडा अखबार है। इसके पाठकों की सबसे बडी संख्‍या है इसीलिए मैंने सार्वजनिक तौर पर आहवान किया है। अब और बातें तो बाद में लेकिन कहीं न कहीं कुछ न कुछ तो है। देर सवेर मामले का खुलासा होगा ही। पर यह सवाल तो है ही कि नेपाल के मीडिया मुगलों पर आखिर फंदा क्‍यों कस रहा है। क्‍या मीडिया के क्षेत्र में भी कोई इण्‍टरनल गैंगवार चल रही है।</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://dikhsa.blogspot.com/feeds/7321728156088682524/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment/fullpage/post/8040736284594536912/7321728156088682524' title='3 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/7321728156088682524'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/7321728156088682524'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dikhsa.blogspot.com/2010/03/blog-post.html' title='नेपाल की मीडिया में  इण्‍टरनल गैंगवार !'/><author><name>Anonymous</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07065981802189787445</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='https://img1.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>3</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8040736284594536912.post-3794012102681336077</id><published>2010-03-04T07:19:00.001+05:30</published><updated>2010-03-04T07:19:19.099+05:30</updated><title type='text'>Check out नेपाल की मीडिया में कहीं इंटरनल गैंगवार तो नहीं « अनुभूति</title><content type='html'>Title: नेपाल की मीडिया में कहीं इंटरनल गैंगवार तो नहीं « अनुभूति&lt;br/&gt;Link: http://gotaf.socialtwist.com/redirect?l=209213383117093116411</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://dikhsa.blogspot.com/feeds/3794012102681336077/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment/fullpage/post/8040736284594536912/3794012102681336077' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/3794012102681336077'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/3794012102681336077'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dikhsa.blogspot.com/2010/03/check-out.html' title='Check out नेपाल की मीडिया में कहीं इंटरनल गैंगवार तो नहीं « अनुभूति'/><author><name>Anonymous</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07065981802189787445</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='https://img1.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8040736284594536912.post-1845916696588405216</id><published>2010-02-20T09:04:00.000+05:30</published><updated>2010-02-20T09:04:06.940+05:30</updated><title type='text'>डॉन  की जान खतरे में</title><content type='html'>गोरखपुर। बड़बोले माफिया डॉन बबलू श्रीवास्तव और उसके गुर्गो की जान खतरे में है। ये लोग नेपाली माफियाओं की आंख की किरकिरी हो गये हैं। इनकी हस्ती मिटाने के लिए अण्डरव‌र्ल्ड में &#39;बोली&#39; लगनी शुरू हो गयी है। बबलू की पेशी के दौरान कभी भी यह &#39;बोली&#39; &#39;गोली&#39; में तब्दील हो सकती है। खुफिया एजेंसियों ने भी सरकार और सुरक्षा तंत्र को इससे अवगत करा दिया है। &lt;br /&gt;
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काठमाण्डू में 7 फरवरी को मारे गये मीडिया किंग और दाऊद के खास जमीम शाह की हत्या का इल्जाम बरेली जेल में बंद डान बबलू और उसके साथियों पर है। इसके पहले भी मिर्जा दिलशाद बेग की हत्या से लेकर फजलूर्रहमान की गिरफ्तारी तक कई मामलों में बबलू का नाम उछलता रहा है। बबलू ने हमेशा फोन के जरिये एक-दूसरे गैंग से तार जोड़ने की भूमिका निभायी है। वह कुछ खास पुलिसकर्मियों का मददगार है। लंबी रकम लेकर आईएसआई के इशारे पर काम करने वालों की हत्या में भी सक्रिय है। इसीलिए पाक दूतावास के एक अफसर, जमीम के रिश्तेदार और आईएसआई परस्त कई बड़े माफिया बबलू का विकेट गिराने की योजना बना रहे हैं। उधर भारतीय फेक करेंसी के साथ पकड़ा गया नेपाल के पूर्व मंत्री सलीम मियां अंसारी का पुत्र यूनुस अंसारी भी बबलू से खफा है। &lt;br /&gt;
यूनुस ने अपने साइलेंट प्रतिद्वंदी जमीम शाह को निपटाने की डील एक करोड़ रुपये में बबलू से की थी। बबलू के चलते ही इस डील को अमलीजामा पहनाया जा सका। यूनुस के लोगों को शक है कि जमीम की हत्या के बाद खुद बड़बोले बबलू ने ही यह राज जाहिर कर दिया। अण्डरव‌र्ल्ड की सूचना के मुताबिक अब खुद को सच्चा साबित करने के लिए यूनुस कोई भी जोखिम उठाने को तैयार है। बबलू को निपटाने में वह उन भारतीय अपराधियों की मदद ले सकता है जिन्हें समय समय पर पनाह देता रहा है। &lt;br /&gt;
जमीम के खून के छींटे धोना चाहता यूनुस &lt;br /&gt;
यूनुस अंसारी ने सोचा था कि जमीम शाह की हत्या से उसकी राह का कांटा निकल जायेगा लेकिन हुआ ठीक उल्टा। एक तरफ उसकी मुश्किलें बढ़ीं तो दूसरी तरफ वह अपने ही लोगों की निगाह में दागी हो गया। इससे न सिर्फ उसकी ताकत कमजोर हुई बल्कि अपने सहयोगियों का भी निशाना बन गया। पाक दूतावास इस मामले पर पर्दा डालते हुये अपने सभी सहयोगियों को एक साथ रखने की मुहिम में जुटा है। काठमाण्डू सेंट्रल जेल में बंद यूनुस इस मुहिम में सक्रिय होकर जमीम के खून के छींटों को धोना चाहता है। &lt;br /&gt;
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यूनुस को बचाने में जुटी नेपाल पुलिस&lt;br /&gt;
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गोरखपुर, 16 फरवरी। नेपाल के मीडिया किंग और दाऊद इब्राहिम के सहयोगी जमीम शाह की हत्या के हफ्ते भर बाद पुलिस ने रहस्य से पर्दा उठाने का दावा कर दिया है लेकिन इस पूरे घटना क्रम में वह यूनुस अंसारी को बचाने में जुट गयी है। नेपाल पुलिस अपने यहां के कुछ लोगों का नाम जोड़कर सिर्फ भारतीय अपराधियों के नाम की लकीर पीट रही है। बबलू श्रीवास्तव, भगवंत सिंह उर्फ भरत नेपाली, दीपक शाही उर्फ बबलू सिंह और छोटा राजन का कनेक्शन जोड़कर पुलिस ने कमोवेश जमीम शाह मर्डर केस की तफ्तीश पूरी कर दी है। &lt;br /&gt;
नेपाल के एआईजी कदम खड़का ने मीडिया के समक्ष शाह मर्डर केस की फाइल खोलते हुये बबलू श्रीवास्तव और भरत नेपाली को कसूरवार ठहराया। इस मामले में नेपाल के पुलिस कर्मी प्रकाश क्षेत्री को संदिग्ध करार दिया जबकि घटना में छह अन्य नेपालियों की भी संलिप्तता बतायी। शूटर के तौर पर मोहम्मद वकार और उसके साथी का नाम उजागर हुआ। जमीम की हत्या के तत्काल बाद दैनिक जागरण ने अपनी रपट में यह आशंका जाहिर की कि वर्चस्व की लड़ाई और अपनी गिरफ्तारी के शक के चलते पूर्व मंत्री सलीम मियां अंसारी के बेटे यूनुस अंसारी ने जमीम का खेल खत्म करा दिया। अगले दिन दस फरवरी के अंक में &#39;यूनुस व भरत के संबंध तलाश रही पुलिस&#39; शीर्षक से बबलू श्रीवास्तव, भरत नेपाली और यूनुस अंसारी के कनेक्शन जोड़ते हुये एक और खबर प्रकाशित की जिसमें इस बात का भी उल्लेख किया गया कि यूनुस को बचाने में पुलिस सक्रिय हो गयी है। &lt;br /&gt;
प्रारंभ में नेपाल पुलिस ने अपनी तफ्तीश के केन्द्र में यूनुस को रखा और काठमाण्डू सेण्ट्रल जेल में उससे कई च्रकों में पूछताछ की। बाद में पुलिस ने यह तर्क गढ़ा कि हत्यारे पहले यूनुस अंसारी पर ही हमला बोलने वाले थे लेकिन उसके जेल जाने के बाद इरादा बदल दिये और निशाने पर जमीम आ गये। सूत्रों का कहना है कि भगोड़े सैनिक भरत नेपाली और बदायूं के दीपक शाही की आमदरफ्त बबलू श्रीवास्तव के जरिये यूनुस से रही है। घटना की पृष्ठभूमि तैयार करने में इनकी भूमिका भले रही हो लेकिन पुलिस कर्मी प्रकाश क्षेत्री और शूटर मोहम्मद वकार से यूनुस के संबंधों पर पर्दा क्यों डाला जा रहा है। दरअसल नेपाल पुलिस इण्टरनल गैंगवार रोकने के लिए पूरा मामला भारतीय अपराधियों के हवाले कर रही है। इस हाई प्रोफाइल मर्डर मिस्ट्री में नेपाल के कुछ और प्रमुख लोगों की भूमिका है। वैसे इस मामले में वाराणसी जेल में बंद एक व्यक्ति पर भी नेपाल पुलिस शक की निगाह लगाये है।&lt;br /&gt;
यूनुस व भरत के रिश्तों का सिरा तलाश रही पुलिस&lt;br /&gt;
गोरखपुर। स्पेस टाइम्स ग्रुप के प्रबंध निदेशक जमीम शाह की हत्या की गुत्थी सुलझाने में जुटी नेपाल पुलिस पूर्व मंत्री सलीम मियां अंसारी के बेटे यूनुस अंसारी और भरत नेपाली के बीच तालमेल की जड़ तलाश रही है। भरत नेपाली द्वारा जमीम शाह की हत्या की जिम्मेदारी लिये जाने के बाद ही पुलिस की तफ्तीश में कई नये आयाम जुड़ गए हैं। बरेली जेल में बंद अंडरव‌र्ल्ड डॉन बबलू श्रीवास्तव के रिश्तों पर भी पुलिस की नजर है। &lt;br /&gt;
छोटा राजन गैंग के महत्वपूर्ण अंग रहे भरत नेपाली ने यह कहकर सनसनी फैला दी कि जमीम की हत्या उसने करवायी है। पुलिस मान रही है इस हत्या में कई चैनल शामिल हैं। &lt;br /&gt;
29 जून 1998 को मिर्जा दिलशाद बेग की हत्या, छह अक्टूबर 2009 को नेपालगंज में डॉन माजिद मनिहार की हत्या और 25 दिसम्बर को बुटवल में परवेज टांडा की हत्या की कड़ी में ही पुलिस जमीम की हत्या को भी जोड़ रही है। ये सभी आईएसआई और दाऊद के मोहरे रहे, इसलिए इनकी हत्या के तार कहीं न कहीं भारतीय अपराध जगत से जुड़ गये। वैसे नेपाल पुलिस की सबसे चौकस निगाह भारतीय जाली करेंसी के साथ पकड़े गये आईएसआईपरस्त यूनुस अंसारी पर ही है। इस खेल में यूनुस और भरत की भूमिका कहां तक हो सकती है इसके लिए अंडरव‌र्ल्ड के कुछ नामी मोहरों से उनके कनेक्शन की जांच हो रही है। केंद्र में बबलू श्रीवास्तव का भी नाम उभरकर सामने आया है। जगजाहिर है कि छोटा राजन, बबलू श्रीवास्तव और भरत नेपाली के बीच बेहतर रिश्ते रहे हैं। मुम्बई बम विस्फोट के बाद दाऊद और छोटा राजन के बीच तनातनी बढ़ी तो बबलू छोटा राजन खेमे में आ गया। तब भी सलीम मियां से उसके सम्पर्क बने रहे। अपने अधूरा ख्वाब उपन्यास में भी उसने सलीम का जिक्र किया है। &lt;br /&gt;
पुलिस इस बात को मान रही है कि इधर, जबसे यूनुस अंसारी पकड़ा गया तबसे वह शक के कारण जमीम से खार खाये था। माना जा रहा है कि जमीम शाह और उसकी प्रतिद्वंदिता का लाभ उठाते हुए जेल में बंद बबलू ने यूनुस अंसारी की मंशा को हवा देकर डील करायी और जमीम का खेल खत्म हो गया।</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://dikhsa.blogspot.com/feeds/1845916696588405216/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment/fullpage/post/8040736284594536912/1845916696588405216' title='1 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/1845916696588405216'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/1845916696588405216'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dikhsa.blogspot.com/2010/02/blog-post_20.html' title='डॉन  की जान खतरे में'/><author><name>Anonymous</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07065981802189787445</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='https://img1.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8040736284594536912.post-7907914606783280544</id><published>2010-02-09T20:46:00.000+05:30</published><updated>2010-02-09T20:46:03.352+05:30</updated><title type='text'>यूनुस ने खत्म करा दिया जमीम का खेल!</title><content type='html'>आनन्द राय, गोरखपुर &lt;br /&gt;
&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEh95uQc9KVwr-DwvmjW9Y3vVK3cidVEcLwXr1ikxSJmi36NEiMvMNP1kLfLdzYVEDgqaJ620RUFD333W3qTGp6lycdhMY2ElcxQzs8QAi7l__3b1pVWbtcfvu9uNYoqcbDTaM-j0lpcR4w/s1600-h/JAMIM-SHAH-1_20100208090558.jpg&quot; imageanchor=&quot;1&quot; style=&quot;clear: left; cssfloat: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;&quot;&gt;&lt;img border=&quot;0&quot; kt=&quot;true&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEh95uQc9KVwr-DwvmjW9Y3vVK3cidVEcLwXr1ikxSJmi36NEiMvMNP1kLfLdzYVEDgqaJ620RUFD333W3qTGp6lycdhMY2ElcxQzs8QAi7l__3b1pVWbtcfvu9uNYoqcbDTaM-j0lpcR4w/s320/JAMIM-SHAH-1_20100208090558.jpg&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;नेपाल में जाली नोटों के कारोबारी यूनुस अंसारी की गिरफ्तारी के एक माह के अंदर स्पेस टाइम्स समूह के प्रबंध निदेशक जमीम शाह की हत्या से कई सवाल खड़े हो गये हैं। उसकी हत्या के पीछे किसी बड़े षड्यंत्र के कयास लग रहे हैं। यह बात भी सामने आ रही है कि जमीम का खेल खत्म कराने में यूनुस अंसारी ने एक महत्वपूर्ण सूत्रधार की भूमिका निभायी है। &lt;br /&gt;
दबी जुबान से यह बात सामने आयी कि नेपाल के पूर्व मंत्री सलीम मियां अंसारी के बेटे यूनुस अंसारी की गिरफ्तारी जमीम शाह की योजना के चलते हुई। अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए यूनुस ने हमेशा जमीम की नकल की और मीडिया के क्षेत्र में उसका वर्चस्व देखकर ही आया इसलिए दोनों के बीच बराबर प्रतिद्वंदिता बनी रही। आईएसआई और दाऊद तक पहंुच बनाने के बाद तो वह जमीम शाह की आंख की किरकिरी बन गया। इसीलिए माना यही जा रहा है कि जमीम ने यूनुस को जेल भिजवाया तो उसने उसकी इस दुनिया से छुट्टी करवाने में खास भूमिका निभायी। ध्यान रहे कि जमीम शाह नेपाल के पूर्व नौकरशाह मोइन शाह का बेटा है। विराटनगर में सबसे पहले रेडियो की शुरूआत करने वाले प्रसन्न मानचिंग प्रधान की बेटी अम्बिका से उसने शादी की। फिर वह मीडिया के क्षेत्र में आ गया। बाद में पाक दूतावास के एक अफसर ने जमीम का सम्बंध दाऊद इब्राहिम से करा दिया। दाऊद ने साढ़े चार करोड़ रुपये की पूंजी लगाकर स्पेस टाइम्स नेटवर्क की शुरूआत करवायी। फिर जमीम का प्रभाव बढ़ता गया और वह काले कारोबार में शामिल होकर अरबों रुपये का मालिक हो गया। &lt;br /&gt;
&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgard11VXefxWvEUXmKyEGTdq4kvexAeNSjEVkAPOLtM2L0wpeZ8cDcQmngt7Qp_O2ntWsNwNKtDXaQj8U9XKAw3x6wBJH-clg47x4X2hKf8HVU9PQefVguC6VV7mYqxyzTbRTChPQ0vkI/s1600-h/babloo1_fix-1_1236187817_m.jpg&quot; imageanchor=&quot;1&quot; style=&quot;clear: right; cssfloat: right; float: right; margin-bottom: 1em; margin-left: 1em;&quot;&gt;&lt;img border=&quot;0&quot; kt=&quot;true&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgard11VXefxWvEUXmKyEGTdq4kvexAeNSjEVkAPOLtM2L0wpeZ8cDcQmngt7Qp_O2ntWsNwNKtDXaQj8U9XKAw3x6wBJH-clg47x4X2hKf8HVU9PQefVguC6VV7mYqxyzTbRTChPQ0vkI/s320/babloo1_fix-1_1236187817_m.jpg&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&amp;nbsp;जब दाऊद ने काठमाण्डू में एक बंगला खरीदने की जिम्मेदारी जमीम शाह पर डाली तो पैसों के लिए उसने हाथ खड़े कर दिये। फिर दोनों के बीच तनाव बढ़ गया। तब पाक दूतावास ने भारत विरोधी गतिविधियों के लिए दोनों का समझौता करवाया। हालांकि समझौते के बाद भी वह दाऊद से डरा हुआ था। उसने दार्जिलिंग में पढ़ रहे अपने बेटे जैकी को काठमाण्डू बुलवा लिया था। उसके पहले जमीम ने ऋत्विक रोशन का इण्टरव्यू अपने अखबार में तोड़ मरोड़ कर छापा और एक भडकाऊ कैसेट बनाकर रोशन विरोधी अभियान शुरू कर दिया। वर्ष 2004 में नेपाल के भारतीय दूतावास ने जमीम की सभी करतूतों का जिक्र करते हुये नकेल कसने के लिए भारत सरकार को एक रिपोर्ट भेजी। तभी आईएसआई ने जमीम के विकल्प के तौर पर यूनुस अंसारी को उभार दिया। भारत के भगोड़े अपराधियों को पनाह देने की वजह से यूनुस का नेटवर्क प्रभावी हो गया। इसीलिए वह दाऊद के लिए महत्वपूर्ण हो गया और जमीम की उपयोगिता कम हो गयी। जमीम के निपटारे में दाऊद की सहमति है या जेल में बंद होने का लाभ उठाने के लिए यूनुस ने खुद अपनी मर्जी से अपनी राह का रोड़ा हटा दिया, इस तरह के कई कयास लग रहे हैं।&lt;br /&gt;
&lt;span style=&quot;font-size: large;&quot;&gt;छोटा राजन का भी नाम उछला&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
गोरखपुर : स्पेस टाइम्स नेटवर्क समूह के प्रबंध निदेशक जमीम शाह की हत्या में छोटा राजन के हाथ होने की भी चर्चा तेज हो गयी है। अण्डरव‌र्ल्ड का एक खेमा इस बात की चर्चा में लगा है कि जमीम की हत्या छोटा राजन ने करवायी है। हालांकि एक दूसरा खेमा इसे उड़ती खबर बता रहा है। अपराध जगत के कुछ जानकारों का कहना है कि जब भी ऐसी वारदात होती तो अण्डरव‌र्ल्ड में अपनी धमक कायम करने के लिए कुछ माफिया खुद ही अपना नाम प्रचारित करवा देते हैं। इस तरह कई महत्वपूर्ण मसले अफवाहों की भेंट चढ़ जाते हैं और असली गुत्थी सुलझ नहीं पाती है। बहरहाल इस बात की भी चर्चा जोरों पर है कि जमीम की हत्या में छोटा राजन और उसके शूटरों की प्रमुख भूमिका है।माना यह जा रहा है कि बरेली जेल में बंद बबलू श्रीवास्तव ने इसमें सबसे अहम् रोल निभाया है.</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://dikhsa.blogspot.com/feeds/7907914606783280544/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment/fullpage/post/8040736284594536912/7907914606783280544' title='1 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/7907914606783280544'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/7907914606783280544'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dikhsa.blogspot.com/2010/02/blog-post_09.html' title='यूनुस ने खत्म करा दिया जमीम का खेल!'/><author><name>Anonymous</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07065981802189787445</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='https://img1.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEh95uQc9KVwr-DwvmjW9Y3vVK3cidVEcLwXr1ikxSJmi36NEiMvMNP1kLfLdzYVEDgqaJ620RUFD333W3qTGp6lycdhMY2ElcxQzs8QAi7l__3b1pVWbtcfvu9uNYoqcbDTaM-j0lpcR4w/s72-c/JAMIM-SHAH-1_20100208090558.jpg" height="72" width="72"/><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8040736284594536912.post-711089115488474231</id><published>2010-02-02T21:02:00.001+05:30</published><updated>2017-05-15T21:23:06.229+05:30</updated><title type='text'></title><content type='html'></content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://dikhsa.blogspot.com/feeds/711089115488474231/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment/fullpage/post/8040736284594536912/711089115488474231' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/711089115488474231'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/711089115488474231'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dikhsa.blogspot.com/2010/02/blog-post_2.html' title=''/><author><name>Anonymous</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07065981802189787445</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='https://img1.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8040736284594536912.post-5239638179584922771</id><published>2010-02-02T20:55:00.001+05:30</published><updated>2010-02-02T21:05:05.503+05:30</updated><title type='text'>सोहगौरा- कभी फिजा में गूंजते थे वेदमंत्र मगर ..</title><content type='html'>&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhK7X7qwr34LeETWnispAo0yRuMtNtGG_ahA3R0ce_PJp0XLLxl1q4pGqSIJ1j7iU3DirJPgPumo7J3Uu5lsO2uhSLeAbqB1PBu3NczA37Jli7AHzrV-xEgTBYAW7Zxj3whc_P7iPgkp7s/s1600-h/GKP23ahv14-1_1264980865_m.jpg&quot; imageanchor=&quot;1&quot; style=&quot;clear: right; cssfloat: right; float: right; margin-bottom: 1em; margin-left: 1em;&quot;&gt;&lt;img border=&quot;0&quot; height=&quot;214&quot; kt=&quot;true&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhK7X7qwr34LeETWnispAo0yRuMtNtGG_ahA3R0ce_PJp0XLLxl1q4pGqSIJ1j7iU3DirJPgPumo7J3Uu5lsO2uhSLeAbqB1PBu3NczA37Jli7AHzrV-xEgTBYAW7Zxj3whc_P7iPgkp7s/s320/GKP23ahv14-1_1264980865_m.jpg&quot; width=&quot;320&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;आनन्द राय, गोरखपुर &lt;br /&gt;
पांच हजार साल पुराने ऐतिहासिक सोहगौरा गांव के पं. धनंजय राम त्रिपाठी 84 बसंत पार कर चुके हैं। देश के गणतंत्र होने पर उनके दिल में विकास की बेइंतहा उम्मीदें जगी मगर साठ साल बाद भी विकास की बयार उनके गांव को छू नहीं पायी। अब तो इस गांव के लोग खुद को स्थापित करने के लिए पलायन करने लगे हैं। कौड़ीराम से चार किलोमीटर दूर आमी और राप्ती नदी के संगम पर बसे सोहगौरा गांव में कुछ पुश्तैनी मकान टूटकर भव्य इमारतों में तब्दील हो गये हैं लेकिन बाकी खण्डहर हो रहे हैं। &lt;br /&gt;
&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEitB_khRix5iUcCA6flBfOSYKoAgv6Vb61BMlDPgDqMu1RKNFRg3Ob7RKSRevlM7YIuLKEPORfJk1qiwgUVKV_wf9zOfl5CiBtoB1mwTjpDlkd1n-yK93QKFeQ8A15r_JUyg_k4tR16wc0/s1600-h/GKP23ahv19-1_1264980865.jpg&quot; imageanchor=&quot;1&quot; style=&quot;clear: left; cssfloat: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;&quot;&gt;&lt;img border=&quot;0&quot; height=&quot;200&quot; kt=&quot;true&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEitB_khRix5iUcCA6flBfOSYKoAgv6Vb61BMlDPgDqMu1RKNFRg3Ob7RKSRevlM7YIuLKEPORfJk1qiwgUVKV_wf9zOfl5CiBtoB1mwTjpDlkd1n-yK93QKFeQ8A15r_JUyg_k4tR16wc0/s200/GKP23ahv19-1_1264980865.jpg&quot; width=&quot;158&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;गांव की युवा पीढ़ी रोजगार की तलाश में महानगरों की ओर हो गयी है। इसीलिए गांव में सुबह और शाम को भी सन्नाटा दिखता है। दुनिया के सबसे पुराने इस गांव में अब पहले की तरह वेदमंत्रों की आवाज नहीं गूंजती है। बारुदी गंध ने यहां की फिजा बदल दी है। गैंगवार के चलते यहां अब तक 38 लोगों की जानें जा चुकी हैं। इसीलिए पण्डित धनंजय राम त्रिपाठी क्षोभ से भरे हैं। उनके पितामह पण्डित परमार्थी राम त्रिपाठी ने इच्छा मृत्यु पायी। यह कहते समय उनका चेहरा गौरवान्वित रहता है लेकिन गांव की बदहाली ने उन्हें दुखी कर दिया है। भारतीय इतिहास अनुसंधान केन्द्र के पूर्व चेयरमैन प्रोफेसर दयानाथ त्रिपाठी ने इस गांव में खुदाई करवाकर यहां की ऐतिहासिकता प्रमाणित की है।&lt;br /&gt;
&amp;nbsp;प्रोफेसर त्रिपाठी के मुताबिक सोहगौरा विश्र्व का प्राचीनतम ग्राम है जो 5000 वर्षो से एक ही स्थल पर अपने होने का साक्ष्य प्रस्तुत करता है। इस गांव में खुदाई के समय चित्रित धूसर मृदभाण्ड, चन्द्रगुप्त मौर्य के समय का ताम्रपत्र, अकाल के समय दुर्भिक्ष को दान देने का प्रमाण और अन्य कई साक्ष्य मिले हैं। प्राचीन इतिहास के शोधार्थी आशुतोष राम त्रिपाठी कहते हैं कि पुरातत्व विभाग ने भी इस गांव को उपेक्षित कर दिया वरना यह तो पूरी दुनिया के लिए एक धरोहर है। इन दिनों गांव की आभा बिगड़ गयी है। दाग इतने लग गये कि गांव के लोग ही झेंपते हैं। बड़े बड़े जमींदारों और राजाओं को दीक्षा देने वाले इस गांव में अब बदनामी के निशान पड़ने लगे हैं। हालांकि 67 साल के शास्त्रार्थ महारथी कैप्टन रामचंद्र राम त्रिपाठी इसे खारिज करते हैं। उनका दावा है कि सोहगौरा के जीन में वेद है, संस्कार है और यह कभी खत्म नहीं हो सकता। लेकिन वे भी यह मानते हैं कि सरकार ने इस ऐतिहासिक गांव के लिए कुछ नहीं किया। &lt;br /&gt;
&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEikjnhEC6bQ-5foAteQPBILjfYSNEPTlK0sporNVUg758xaFB_27F4PlDyyV3t6I7z-80ZDTsN5HbJzdK2EwQu7T3MLPaMDawCY-gk2RV7mDh1ypmQcLhf_3VRw092NgtEXKGx8OiTUvjc/s1600-h/GKP23ahv18-1_1264980865.jpg&quot; imageanchor=&quot;1&quot; style=&quot;clear: right; cssfloat: right; float: right; margin-bottom: 1em; margin-left: 1em;&quot;&gt;&lt;img border=&quot;0&quot; height=&quot;200&quot; kt=&quot;true&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEikjnhEC6bQ-5foAteQPBILjfYSNEPTlK0sporNVUg758xaFB_27F4PlDyyV3t6I7z-80ZDTsN5HbJzdK2EwQu7T3MLPaMDawCY-gk2RV7mDh1ypmQcLhf_3VRw092NgtEXKGx8OiTUvjc/s200/GKP23ahv18-1_1264980865.jpg&quot; width=&quot;165&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;सचमुच इस गांव में प्रदूषण और पिछड़ेपन का पांव पसरता गया है। 20 गांवों के केन्द्र में होने के बावजूद यहां आठवीं के बाद कोई स्कूल नहीं है। लड़कियों को शिक्षा के लिए कौड़ीराम जाना पड़ता है। पेयजल की कोई व्यवस्था नहीं है। हैण्डपम्प में प्रदूषित जल आता है। कोई स्वास्थ्य केन्द्र भी नहीं बन पाया है। आमी-राप्ती की बाढ़ से तबाही आती ही है। बाढ़ न रहने पर कटान होने के बाद सैकड़ों एकड़ भूमि रेत में तब्दील हो जाती है। शिक्षक शिवाकर राम त्रिपाठी और युवा नेता राकेश राम त्रिपाठी गांव के बंधे पर बन रही पीएमआरवाई की अधूरी सड़क की ओर इशारा करते हैं। सरकार अभी तक एक मुकम्मल सड़क भी नहीं दे पायी है। गांव की बदहाली के अभी और भी किस्से बाकी हैं।</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://dikhsa.blogspot.com/feeds/5239638179584922771/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment/fullpage/post/8040736284594536912/5239638179584922771' title='1 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/5239638179584922771'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/5239638179584922771'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dikhsa.blogspot.com/2010/02/blog-post.html' title='सोहगौरा- कभी फिजा में गूंजते थे वेदमंत्र मगर ..'/><author><name>Anonymous</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07065981802189787445</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='https://img1.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhK7X7qwr34LeETWnispAo0yRuMtNtGG_ahA3R0ce_PJp0XLLxl1q4pGqSIJ1j7iU3DirJPgPumo7J3Uu5lsO2uhSLeAbqB1PBu3NczA37Jli7AHzrV-xEgTBYAW7Zxj3whc_P7iPgkp7s/s72-c/GKP23ahv14-1_1264980865_m.jpg" height="72" width="72"/><thr:total>1</thr:total></entry></feed>