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			<title>ईमानदारी की बड़ी-बड़ी बातें कर पत्रकारिता दिवस पर मठाधीशों ने कमाए लाखों</title>
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			<description>&lt;p&gt;पत्रकारिता दिवस पर शाहजहांपुर के मठाधीश टाइप के पत्रकार प्रत्येक वर्ष गोष्ठी का आयोजन करते हैं। इस बार भी शहर के एक होटल में इन मठाधीश पत्रकारों ने एक गोष्ठी का आयोजन किया, जिसमें वक्ताओं ने पत्रकारिता पर प्रकाश डाला। पत्रकारिता में ईमानदारी और सच्चाई पर चलने के लिए पत्रकारों को प्रेरित किया गया। पर इस गोष्ठी में बोलने वाले पत्रकार वक्ता यह भूल गए कि वह जिस ईमानदारी और सच्चाई की बात कर रहे हैं, उस पर वह स्वयं कितने खरे हैं। गोष्ठी के आयोजक ने पत्रकार साथियों को संबोधित करते हुए कहा कि युवा पत्रकार अपने वरिष्ठ साथियों का सम्मान करें और ईमानदारी के साथ पत्रकारिता कर समाज में फैले भ्रष्टाचार को मिटाने का आज संकल्प लें।&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/bhadasblog/~4/zD-2AGmKK8E" height="1" width="1"/&gt;</description>
			<author>bhadas4media@gmail.com (सौरभ दीक्षित)</author>
			<category>Featured</category>
			<category>बिजनेस-उद्योग-श्रम-तकनीक-वेब-मोबाइल-मीडिया</category>
			<pubDate>Wed, 30 May 2012 14:21:11 +0000</pubDate>
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			<title>अब पत्रकारिता के लिए सरोकार नहीं सनसनी की जरूरत है</title>
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			<description>&lt;p&gt;: &lt;strong&gt;एक पत्रकार की व्यथा &lt;/strong&gt;: फोन की घंटी बजती है और बॉस पूछते हैं कोई बड़ी खबर बताओ... मैं कहता हूं इधर से.. जी सर एक बुजुर्ग को परिवार के लोगों ने बेसहारा छोड़ दिया है ... बॉस पूछते है बुजुर्ग की प्रो फाइल क्या है.. मैंने कहा जी रेलवे में काम करता बुजुर्ग फोर्थ क्लास में था... अब रिटायर हो गया है... दो बेटे हैं दोनों रेलवे में फोर्थ क्लास में ही हैं... दोनों बेटों की शादी हो चुकी है... बुजर्ग बाप को कोई रखना नहीं चाहता... उधर फोन से आवज आयी जाने दो एंकर विजुअल चल जायेगा प्रोफाइल लो है... लेकिन मैं जब अपने घर से पत्रकारिता के लिये निकला था.. तो मुझे समाज का हर वो मुद्दा खबर लगता था, जिसका इन्सान से सरोकार हो लेकिन दुःख इस बात का है कि अब शायद पत्रकारिता का स्वरुप बदल गया है, जिसे बस ग्लेमर चाहिए!&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/bhadasblog/~4/9E9Nm_9jJqc" height="1" width="1"/&gt;</description>
			<author>bhadas4media@gmail.com (महेंद्र प्रजापति )</author>
			<category>Featured</category>
			<category>बिजनेस-उद्योग-श्रम-तकनीक-वेब-मोबाइल-मीडिया</category>
			<pubDate>Wed, 30 May 2012 13:10:00 +0000</pubDate>
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			<title>उदन्‍त मार्तण्‍ड ने परिचित कराया आधुनिक पत्रकारिता से </title>
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			<description>&lt;p&gt;: &lt;strong&gt;पत्रकारिता दिवस पर&lt;/strong&gt; : स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय के सुभारती पत्रकारिता एवं जनसंचार संकाय में हिन्दी पत्रकारिता दिवस (30 मई) के अवसर पर हिन्दी पत्रकारिता के उद्भव एवं विकास पर चर्चा की गई। वक्ताओं का कहना था कि 30 मई, 1826 को पं. जुगल किशोर शुक्ल ने ‘उदन्त मार्तण्ड’ निकालकर भारतीयों को आधुनिकता से परिचित कराने तथा उनमें राष्ट्रीयता की भावना को जागृत किया। सुभारती मास कॉम के प्राचार्य एवं डीन प्रो. आर.पी. सिंह ने हिन्दी पत्राकारिता के लंबे सफर और आज व्यापक विस्तार को उल्लेखित करते हुए कहा कि उदन्त मार्तण्ड का पत्रकारिता के इतिहास में एक विशिष्ट स्थान है। कानपुर निवासी शुक्ल जी ने कलकत्ता से साप्ताहिक समाचार पत्रा का प्रकाशन कर एक तरह से हिन्दी संस्कृति को पत्रकारिता के द्वारा समृद्ध किया। प्रिंट, इलेक्ट्रानिक और वेब हिन्दी मीडिया को भी उदन्त मार्तण्ड से प्रेरणा ग्रहण करना चाहिए क्योंकि शुरुआत सबसे अहम और कठिन होता है।&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/bhadasblog/~4/SUbI70XLvX8" height="1" width="1"/&gt;</description>
			<author>bhadas4media@gmail.com (ताहिर खान )</author>
			<category>Featured</category>
			<category>बिजनेस-उद्योग-श्रम-तकनीक-वेब-मोबाइल-मीडिया</category>
			<pubDate>Wed, 30 May 2012 11:37:28 +0000</pubDate>
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			<title> सारे बलिदान पत्रकार दें और आप उन्हें जीने न दें! वाह साहब</title>
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			<description>&lt;p&gt;पत्रकारिता दिवस पर बधाई। बधाई भी इसलिए की अगर हम पत्रकार हैं तो हम सब गर्व से बोले कि हम पत्रकार हैं। पत्रकारिता आज हिन्दुस्तान में जिस मुकाम पर है वह अपने आप में सम्पूर्ण है। हमारा इतिहास अतीत भी गौरवशाली रहा है। वर्तमान भी सम्पूर्ण है। भविष्य वर्तमान की नींव पर टिका हुआ है। हम 70 प्रतिशत कृषि आधारित कार्यों में जीवन व्यतीत करने वाले, जंगल, जमीन से जुड़े गंवई गांव में जीवन व्यतीत करने वाले देश के पत्रकार समूचे विश्व में जाने और माने जाते हैं। यह बड़ी उपलब्धि है। प्रायः पत्रकारिता को कटघरे में खड़ा किया जाता है। उसे नैतिक, सामाजिक, मानवीय मूल्यों की रक्षा का उपदेश पिलाया जाता है। उससे अव्यवस्था के खिलाफ लड़कर शहीद होने की उम्मीदें की जाती है। पत्रकारिता में गिरावट आ गई है। आ रही है। कह कर सिर नीचा करके चलने की साजिशें रची जाती है। यह निरन्तर जारी है।&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/bhadasblog/~4/Iq7uZX72fF0" height="1" width="1"/&gt;</description>
			<author>bhadas4media@gmail.com (पीयूष त्रिपाठी)</author>
			<category>Featured</category>
			<category>बिजनेस-उद्योग-श्रम-तकनीक-वेब-मोबाइल-मीडिया</category>
			<pubDate>Wed, 30 May 2012 11:27:35 +0000</pubDate>
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		<item>
			<title>मजहबी आरक्षण के खतरे तथा कांग्रेस को आईना </title>
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			<description>&lt;p&gt;आंध्र के उच्च न्यायालय ने कमाल कर दिया। करेले को नीम पर चढ़ने से रोक दिया। जाति के आधार पर दिए जा रहे आरक्षण से यह देश पहले से ही खोखला हो रहा है, अब मज़हब के आधार पर भी आरक्षण दिया जाने लगा था। पांच राज्यों में पिछले दिनों चुनाव जीतने की बड़ी चुनौती कांग्रेस के सामने थी। उसे नई तिकड़म सूझी। उसने सोचा कि यदि उसे मुसलमानों के थोकबंद वोट हथियाने हैं तो वह उनके सामने आरक्षण की गाजर लटका दे। उ.प्र. में इस हथकंडे के सफल होने की आशा सबसे ज्यादा थी। दिसंबर 2011 में केंद्र सरकार ने घोषणा कर दी कि शिक्षा और सरकारी नौकरियों में मुसलमानों को भी 4.5 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा। लेकिन मुसलमान ज़रा भी नहीं फिसले। उन्होंने चुनावों में कांग्रेस को सबक सिखा दिया। अब आंध्र के उच्च न्यायालय ने दोहरी मार लगा दी। कांग्रेस के सांप्रदायिक आरक्षण को राजनीति और कानून दोनों ने रद्द कर दिया।&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/bhadasblog/~4/AcvpmWMRwpE" height="1" width="1"/&gt;</description>
			<author>bhadas4media@gmail.com (डा. वेद प्रताप वैदिक)</author>
			<category>Featured</category>
			<category>सियासत-ताकत-राजकाज-देश-प्रदेश-दुनिया-समाज-सरोकार</category>
			<pubDate>Wed, 30 May 2012 07:51:31 +0000</pubDate>
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			<title>ज़फ़र ने पहाड़ों को काटकर शायरी के लिए रास्ता बनाया : सलमा सिद्दीक़ी</title>
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			<description>&lt;p&gt;: &lt;strong&gt;ज़फ़र गोरखपुरी की किताब 'मिट्टी को हँसाना है' का लोकार्पण &lt;/strong&gt;: ज़फ़र गोरखपुरी के दोहे मिट्टी के कुल्लहड़ में पेश की गई चाय की तरह हैं। इस चाय में मिट्टी की जो सोंधी गंध घुली होती है वही गंध ज़फ़र साहब के दोहों में भी है। ऐसे दोहे वही लिख सकता है जिसने किसान बनकर हल की नोंक से धरती को गुदगुदाया हो, मिट्टी को हँसाया हो।'' इन ख़यालों का इज़हार जाने-माने रंगकर्मी एवं फ़िल्म लेखक जावेद सिद्दीक़ी ने किया। शायर ज़फ़र गोरखपुरी के गीतों और दोहों की किताब 'मिट्टी को हँसाना है' के रिलीज़ के मौक़े पर अपनी राय ज़ाहिर करते हुए उन्हों ने आगे कहा- ज़फ़र साहब के दोहे हमारी सोच में ऐसे दाख़िल होते हैं जैसे साँसो में लोबान के धुँए की ख़ुशबू-&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/bhadasblog/~4/1JQ_-zFki1M" height="1" width="1"/&gt;</description>
			<author>bhadas4media@gmail.com (NewsDesk)</author>
			<category>Featured</category>
			<category>खेल-सिनेमा-संगीत-साहित्य-रंगमंच-कला-लोक</category>
			<pubDate>Wed, 30 May 2012 07:01:00 +0000</pubDate>
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			<title>‘जि‍जीवि‍षा और अन्‍य कहानि‍याँ’ कथा संग्रह का लोकार्पण</title>
			<link>http://feedproxy.google.com/~r/bhadasblog/~3/l8x_bYeqiXk/1473-2012-05-30-06-54-28</link>
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			<description>&lt;p&gt;उदयपुर : राजस्‍थान साहि‍त्‍य अकादमी और राजस्‍थान साहि‍त्‍यकार परि‍षद, कांकरोली के संयुक्‍त तत्‍वावधान में 11 मई 2012 को साहि‍त्‍य अकादमी सभागार में आयोजि‍त समारोह में सुप्रसि‍द्ध कवि‍, कथाकार और साहि‍त्‍यि‍क पत्रि‍का ‘सम्‍बोधन’ के सम्‍पादक क़मर मेवाड़ी के सद्य प्रकाशि‍त कथा संग्रह ‘जि‍जीवि‍षा और अन्‍य कहानि‍याँ’ का लोकार्पण राजस्‍थान साहि‍त्‍य अकादमी के अध्‍यक्ष वेद व्‍यास ने कि‍या। वेद व्‍यास ने कहा कि‍ कमर मेवाड़ी ने पि‍छले 55 वर्षों से नि‍रन्‍तर लेखन से साहि‍त्‍य के क्षेत्र में अप्रति‍म योगदान दि‍या है जि‍से वि‍स्‍मृत नहीं कि‍या जा सकता। उन्‍होंने वरि‍ष्‍ठ रचनाकारों के समग्र लेखन पर वि‍मर्श पर भी जोर दि‍या।&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/bhadasblog/~4/l8x_bYeqiXk" height="1" width="1"/&gt;</description>
			<author>bhadas4media@gmail.com (NewsDesk)</author>
			<category>Featured</category>
			<category>खेल-सिनेमा-संगीत-साहित्य-रंगमंच-कला-लोक</category>
			<pubDate>Wed, 30 May 2012 06:54:28 +0000</pubDate>
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			<title>“The Misunderstood Tawayafs”</title>
			<link>http://feedproxy.google.com/~r/bhadasblog/~3/RGAcM5oR344/1472-the-misunderstood-tawayafs</link>
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			<description>&lt;p&gt;Lucknow, the city of culture, art and poetry, the glory is not just confined; the city had Tawayafs as well. Tawayaf and glory? It’s contradicting, right? Something that has always been criticized and considered as social stigma can never be glorified. That’s our attitude toward this beautiful but miss-represented Tawayaf culture. Generally, when we talk about something we read about that first, but this is one thing we have never read about all we discuss is something we have heard, or watched in distorting movies and this Social Chinese whisper has made it taboo and suspicious. And so, the beautiful and glorified chapter of the culture remained untouched, unbelieved, unread.&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/bhadasblog/~4/RGAcM5oR344" height="1" width="1"/&gt;</description>
			<author>bhadas4media@gmail.com (Jamshed Soddiqui )</author>
			<category>Featured</category>
			<category>सियासत-ताकत-राजकाज-देश-प्रदेश-दुनिया-समाज-सरोकार</category>
			<pubDate>Wed, 30 May 2012 06:52:55 +0000</pubDate>
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			<title>आत्ममुग्धता में स्वयं का नुकसान कर रही है टीम अन्ना</title>
			<link>http://feedproxy.google.com/~r/bhadasblog/~3/iqgDd8gcB7w/1471-2012-05-30-06-49-33</link>
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			<description>&lt;p&gt;अन्ना हजारे के लोकपाल के गठन एवं भ्रष्टाचार के विरुद्ध किए जा रहे आंदोलन को एक वर्ष से अधिक का समय हो चुका है किन्तु अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि आखिर अन्ना और उनकी टीम में सामंजस्य क्यों नहीं बैठ पा रहा? अरविन्द केजरीवाल, किरण बेदी, प्रशांत भूषण, संतोष हेगड़े, मनीष सिसौदिया; सभी अपनी ढपली-अपना राग अलापने में लगे हैं। अन्ना हजारे की छवि और ईमानदारी पर खड़ा हुआ आंदोलन आज अन्ना टीम के कुछ लोगों की बपौती बन गया है। फिर अन्ना-रामदेव गठजोड़ से भी अन्ना टीम के बाकी सदस्य बिदके हुए हैं। उन्हें यह आभास हो चला है कि यदि अन्ना-रामदेव साथ मिलकर भ्रष्टाचार के विरुद्ध मैदान में उतरे तो टीम के बाकी सदस्यों का नामलेवा भी कोई नहीं बचेगा। क्या स्वयं को प्रासंगिक रखने एवं चर्चाओं में बनाए रखने के लिए ही टीम अन्ना के सदस्य ऊल-जलूल बयानबाजी कर रहे हैं। उनकी इस बयानबाजी से अव्वल तो अन्ना के आंदोलन को जाने-अनजाने पलीता लग रहा है दूसरे जनता की नज़रों में टीम अन्ना की विश्वसनीयता पर संशय बढ़ रहा है। अपनी निजी महत्वकांक्षाओं की पूर्ति हेतु अन्ना टीम के सदस्य अपना ही नुकसान कर रहे हैं जिसका परिणाम भी उन्हें भुगतना पड़ेगा। जो अन्ना जनलोकपाल आंदोलन चलाकर भ्रष्ट हो चुकी व्यवस्था में शुद्धि लाना चाहते थे, अपनी टीम के सदस्यों की कारगुजारियों की वजह से एक वर्ष बाद भी वे खामोश खड़े नज़र आते हैं।&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/bhadasblog/~4/iqgDd8gcB7w" height="1" width="1"/&gt;</description>
			<author>bhadas4media@gmail.com (सिद्धार्थ शंकर गौतम)</author>
			<category>Featured</category>
			<category>सियासत-ताकत-राजकाज-देश-प्रदेश-दुनिया-समाज-सरोकार</category>
			<pubDate>Wed, 30 May 2012 06:49:33 +0000</pubDate>
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			<title>पीलीभीत में लुटेरे बने व्यापारी, बेबस किसान मजबूर</title>
			<link>http://feedproxy.google.com/~r/bhadasblog/~3/LftgJGk_YDs/1470-2012-05-29-14-16-24</link>
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			<description>&lt;p&gt;मण्डी प्रशासन व जिला प्रशासन की सांठ-गांठ से किसानों का शोषण : पीलीभीत। उत्तर प्रदेश के किसानों को विकास का सपना दिखा कर सत्ता हासिल करने वाली सपा सरकार में भी किसानों का उत्पीड़न बदस्तूर जारी है। खाद्य एवं रसद विभाग के कर्मचारियों व अधिकारियों की शह पर दलालों ने गेंहूँ की सरकारी लेवियों पर कब्ज़ा जमाना शुरू कर दिया है। ऐसे में सूबे के पीलीभीत जिले के जिलाधिकारी इनपर अंकुश लगाने में नाकामयाब साबित हो रहे है। वही प्रदेश सरकार की नई नीति जिसमें किसानों को उनका पूरा हक़ दिलाने के ‘‘पंजाब पैटर्न’’ पर जिस गेहूं खरीद की बात कर पैटर्न तो लागू कर दिया परन्तु उसमें भी कमीशन एजेन्ट की ‘‘चांदी ही चांदी’’ है। क्या प्रदेश सरकार ने व्यापारियों को फायदा पहुंचाने के लिये ही इस नयी नीति को लागू किया। जहॉ पहले सरकारी गेहूं क्रय केन्द्रों पर कमीशन खोरी चल रही थी तो वहीं अब खाद्यान व्यापारी जमकर किसानों को लूट रहे है। वाह-रे प्रदेश सरकार की नीति।&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/bhadasblog/~4/LftgJGk_YDs" height="1" width="1"/&gt;</description>
			<author>bhadas4media@gmail.com (NewsDesk)</author>
			<category>Featured</category>
			<category>सियासत-ताकत-राजकाज-देश-प्रदेश-दुनिया-समाज-सरोकार</category>
			<pubDate>Tue, 29 May 2012 14:16:24 +0000</pubDate>
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			<title>पेट्रोल वृद्धि के खिलाफ मेरठ में सड़क पर उतरेंगे सपाई </title>
			<link>http://feedproxy.google.com/~r/bhadasblog/~3/VjZ73_KnyHo/1468-2012-05-29-12-15-30</link>
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			<description>&lt;p&gt;आसमान छूती मंहगाई व पेट्रोल-डीजल के मूल्यों में अप्रत्याशित वृद्धि के विरोध में समाजवादी पार्टी के 31 मई, 2012 के प्रदेश बन्द को सफल बनाने के लिए समाजवादी व्यापार सभा ने कमर कस ली है। व्यापार सभा के प्रदेश अध्यक्ष गोपाल अग्रवाल ने प्रेस को बताया कि प्रत्येक जनपद में यह संदेश भेज दिया गया है कि व्यापार सभा के कार्यकर्ता समाजवादी पार्टी के नेताओं के साथ बाजारों में सम्पर्क कर बन्द के कारणों को बतायेंगे तथा उनसे प्रतिष्ठान बन्द करने की अपील करेंगे। हलवाई व चाय की दुकानों आदि पर जहां अगले दिन की तैयारी के लिए कच्चा माल तैयार किया जाता है जैसे मैदा दाल आदि पानी में भिगोना, दही जमाना वहां पर बन्द की पूर्व संध्या पर व्यापाक प्रचार होगा कि 31 तारीख को बाजार बन्द रहेंगे तथा व्यापारी इसमें सहयोग करें। बन्द के दिन व्यापार सभा कार्यकर्ता प्रात: 6 बजे से ही सड़कों पर इस बात की निगरानी रखेंगे कि भट्टी आदि न जलाई जाय।&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/bhadasblog/~4/VjZ73_KnyHo" height="1" width="1"/&gt;</description>
			<author>bhadas4media@gmail.com (NewsDesk)</author>
			<category>Featured</category>
			<category>सियासत-ताकत-राजकाज-देश-प्रदेश-दुनिया-समाज-सरोकार</category>
			<pubDate>Tue, 29 May 2012 12:15:30 +0000</pubDate>
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			<title>कालजयी रचना लेखक और पाठक की साझेदारी से जन्म लेती है : दूधनाथ सिंह</title>
			<link>http://feedproxy.google.com/~r/bhadasblog/~3/vg-Jw0ctKJg/1467-2012-05-29-12-12-06</link>
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			<description>&lt;p&gt;कथाकार को कभी-कभी अपनी कुर्सी छोड़कर पाठक की कुर्सी पर भी बैठना चाहिए। लेखक को पाठक से साझेदारी करनी चाहिए। जो धीरे-धीरे विकसित होती है। हालांकि पाठक की तरफ से यह देर से पैदा होती है। सन 1959 में ‘सपाट चेहरे वाला आदमी’ कहानी लिखकर जो ‘लहर’ पत्रिका में छपी, अपने कथा लेखन की शुरुआत करने वाले वरिष्ठ कथाकार श्री दूधनाथ सिंह ने इलाहाबाद शहर के रचनाकारों के बीच कहा कि मैं बराबर यह देखता हूँ कि किन-किन कहानियों में असफल हुआ। और यह तय पाया कि जिन कहानियों में फैंटेसी में कहने की कोशिश की, वही असफल हुआ। उन्होंने कहा कि कहानी को वृतांत और व्यौरों से बाहर नहीं जाना चाहिए। कहानी फैटेंसी और प्रतीकों में नहीं व्योरों में होती है और विवरण कहे नहीं जाने चाहिए, बखाने जाने चाहिए। कहने और बखनाने में अंतर है।&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/bhadasblog/~4/vg-Jw0ctKJg" height="1" width="1"/&gt;</description>
			<author>bhadas4media@gmail.com (NewsDesk)</author>
			<category>Featured</category>
			<category>सियासत-ताकत-राजकाज-देश-प्रदेश-दुनिया-समाज-सरोकार</category>
			<pubDate>Tue, 29 May 2012 12:12:06 +0000</pubDate>
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		<item>
			<title>क्‍यों बढ़ रही है महानरों में तलाक की संख्‍या?</title>
			<link>http://feedproxy.google.com/~r/bhadasblog/~3/WTp1RYO_doA/1466-2012-05-29-09-50-45</link>
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			<description>&lt;p&gt;भारत के प्रमुख महानगरों जैसे दिल्ली, मुम्बई, बैगलूरू, कोलकाता, लखनऊ में आये दिन तलाकों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। अभी तक यह गलत धारणा थी कि तलाक की समस्या छोटे शहरों और बिना पढ़े-लिखे समाज में ज्यादा है, परन्तु आंकड़े कुछ और ही इशारा करते हैं।  एक सर्वे के अनुसार 1960 में जहां तलाक के वर्ष भर में एक या दो केस ही होते थे वही 1990 तक आते-आते तलाकों की संख्या प्रतिवर्ष हजारों की गिनती को पार कर गयी। फैमली कोर्ट में 2005 में तो यह संख्या लगभग 7000 से भी अधिक हो गयी। आश्चर्य की बात यह तलाक लेने वालो में सबसे बड़ी संख्या 25-35 वर्ष के नव-दम्पत्तियों की है। ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक इस समय दिल्ली में हर साल तलाक़ के आठ-नौ हज़ार मामले दर्ज हो रहे हैं। मुंबई में तलाक़ के मामलों की सालाना संख्या करीब पांच हज़ार है।&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/bhadasblog/~4/WTp1RYO_doA" height="1" width="1"/&gt;</description>
			<author>bhadas4media@gmail.com (राजीव गुप्‍ता)</author>
			<category>Featured</category>
			<category>सियासत-ताकत-राजकाज-देश-प्रदेश-दुनिया-समाज-सरोकार</category>
			<pubDate>Tue, 29 May 2012 09:50:45 +0000</pubDate>
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			<title>कांग्रेस की मजहबी राजनीति को करारा तमाचा है मजहबी आरक्षण पर रोक</title>
			<link>http://feedproxy.google.com/~r/bhadasblog/~3/A7wC95SbjN4/1465-2012-05-29-09-10-07</link>
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			<description>&lt;p&gt;कांग्रेस की धर्म आधारित राजनीति पर लगता है ग्रहण लगने लगा है। आंध्रप्रदेश उच्च न्यायालय ने कांग्रेसनीत संप्रग सरकार को ज़बर्दस्त झटका देते हुए मजहब आधारित आरक्षण देने पर रोक लगा दी है। गौरतलब है कि हाल ही में संपन्न हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र केंद्र ने ओबीसी के २७ फ़ीसदी कोटे से साढ़े चार फ़ीसदी आरक्षण अल्पसंख्यक समुदाय को देने की घोषणा की थी। चुनावों के दौरान इस घोषणा को मुस्लिम वोट बैंक को लुभाने का आसान जरिया माना गया था, लिहाजा चुनाव आयोग ने भी विधानसभा चुनावों तक इसके अमल में रोक लगा दी थी। किन्तु केंद्र सरकार ने विधानसभा चुनावों के नतीजे आते ही अपने फैसले को अमलीजामा पहना दिया।&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/bhadasblog/~4/A7wC95SbjN4" height="1" width="1"/&gt;</description>
			<author>bhadas4media@gmail.com (सिद्धार्थ शंकर गौतम)</author>
			<category>Featured</category>
			<category>सियासत-ताकत-राजकाज-देश-प्रदेश-दुनिया-समाज-सरोकार</category>
			<pubDate>Tue, 29 May 2012 09:10:07 +0000</pubDate>
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		<item>
			<title>लोगों के लिए जान देने वाले निर्मल के सपने अब भी अधूरे हैं </title>
			<link>http://feedproxy.google.com/~r/bhadasblog/~3/CjuP9wuxJa0/1464-2012-05-29-08-59-12</link>
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			<description>&lt;p&gt;: &lt;strong&gt;ई अभागी शराब बंद होणी चैंदी &lt;/strong&gt;: 16 मई 1998, उत्तराखंड के इतिहास की एक ऐसी तारीख, जब राज्य के एक होनहार युवा ने नशामुक्त उत्तराखंड की परिकल्पना लिए स्वयं को शहीद कर दिया। उम्मीदों व संभावनाओं से भरा यह युवा नेतृत्वकारी था निर्मल कुमार जोशी उर्फ निर्मल पंडित। एक ऐसा उभरता हुआ युवा क्रांतिकारी, जिससे लोगों को बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन निर्मल के साथ ही नशामुक्त उत्तराखंड के सवाल भी नेपथ्य में चले गए हैं। जिस प्रदेश में संसाधनों का अभाव हो और जिसके चलते शराब व्यवसाय ही राजस्व प्राप्ति का सबसे बड़ा स्रोत हो, वहां शराब मुक्ति के लिए राज्य सरकार से कोई उम्मीद करना बेमानी ही होगा। वह भी तब, जब सबसे अधिक मोटा मुनाफा शराब के जरिए ही आता हो।&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/bhadasblog/~4/CjuP9wuxJa0" height="1" width="1"/&gt;</description>
			<author>bhadas4media@gmail.com (मनु मनस्वी)</author>
			<category>Featured</category>
			<category>सियासत-ताकत-राजकाज-देश-प्रदेश-दुनिया-समाज-सरोकार</category>
			<pubDate>Tue, 29 May 2012 08:59:12 +0000</pubDate>
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		<item>
			<title> संसद की स्‍थाई समिति ने रेलवे को खान-पान व्‍यवस्‍था दुरुस्‍त करने का हुक्‍म दिया </title>
			<link>http://feedproxy.google.com/~r/bhadasblog/~3/o-i09Y4S7eI/1463-2012-05-29-07-44-49</link>
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			<description>&lt;p&gt;नई दिल्ली : जुलाई २०१० में रेलवे बोर्ड ने नई कैटरिंग पालिसी की घोषणा की थी और २००५ की नीति को पलट दिया था. २००५ की नीति में ट्रेनों में खान पान की व्यवस्था का सारा ज़िम्मा सरकारी कंपनी आईआरटीसी के हवाले कर दिया था. लेकिन रेल विभाग ने २०१० में दावा किया कि आईआरटीसी ने ट्रेनों में खाने पीने की सही व्यवस्था नहीं की और हालात बहुत बिगड़ गए. नई कैटरिंग पालिसी में रेलवे बोर्ड के तत्कालीन अध्यक्ष ने दावा किया था कि अब यह इंतज़ाम रेल विभाग खुद करेगा और सब ठीक हो जाएगा. लेकिन रेलवे का काम काज देखने के लिए बनायी गयी संसद की स्टैंडिंग कमेटी की ताज़ा रिपोर्ट से पता चलता है कि करीब दो साल पहले बहुत ही ताम झाम के साथ नई नीति की घोषणा करने के बाद भी रेलवे बोर्ड ने अपना काम सही तरीके से नहीं किया है और ट्रेनों में खान पान का इंतज़ाम उसी गैर ज़िम्मेदार आईआरटीसी और उसके ठेकेदारों के रहमो करम पर चल रहा है.&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/bhadasblog/~4/o-i09Y4S7eI" height="1" width="1"/&gt;</description>
			<author>bhadas4media@gmail.com (शेष नारायण सिंह )</author>
			<category>Featured</category>
			<category>सियासत-ताकत-राजकाज-देश-प्रदेश-दुनिया-समाज-सरोकार</category>
			<pubDate>Tue, 29 May 2012 07:44:49 +0000</pubDate>
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		<item>
			<title>उपचार के नाम पर भ्रष्‍टाचार का खतरनाक खेल </title>
			<link>http://feedproxy.google.com/~r/bhadasblog/~3/MrhEf435Hjs/1462-2012-05-28-14-04-20</link>
			<guid isPermaLink="false">http://news.bhadas4media.com/index.php/yeduniya/1462-2012-05-28-14-04-20</guid>
			<description>&lt;p&gt;जब किसी चिकित्सक को डिग्री दी जाती है उस वक्त्त एक शपथ दिलाया जाता है। उस शपथ को हिप्पोक्रेट ओथ कहते हैं, जिसमें मानव सेवा को सबसे अहम कहा जाता है। सबसे दिलचस्प बात तो यह है कि आम तौर पर शपथ एक बार ली जाती है लेकिन चिकित्सा के क्षेत्र में ऐसा नहीं है। चिकित्सक अपने हर नुस्खा लिखने से पहले Rx लिख कर उस शपथ को याद करता है और फिर मरीज़ के लिए उचित दवा और अन्य जरुरी चीज का नुस्खा लिख कर देता है, वह भी फ्री में नहीं नुस्खा बनाने का फीस लेकर। अब जरा गौर कीजिए एक दिन में कितनी बार एक भ्रष्ट चिकित्सक अपने ज़मीर को मारता होगा। ऐसे चिकित्सक से आप क्या उम्मीद करते हैं जो हर रोज अपने ज़मीर को मारता हो। जो चन्द पैसों कि खातिर जिंदगी को दांव पर लगाने से नहीं हिचकते ऐसे भ्रष्ट चिकित्सक से समाजसेवा करने की उम्मीद तो व्यर्थ ही है, क्योंकि मोटी फीस लेने वाले चिकित्सक कम से कम दो सौ रुपए तो लेते ही हैं। ऐसे में वे यदि दिन भर में पच्चीस मरीजों को भी देखता है तो रोज की आमदनी 5 हजार रुपए होगा यानी महीने का 1.5 लाख रुपए और साल का 18 लाख। जब इतनी बड़ी रकम ईमानदारी से कमाई जा सकती हो तो चंद रुपयों के लिए ईमान बेचना और अपने ज़मीर को हर रोज मारकर पैसा कमाना एक स्वस्थ मानसिकता की पहचान यकीनन नहीं।&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/bhadasblog/~4/MrhEf435Hjs" height="1" width="1"/&gt;</description>
			<author>bhadas4media@gmail.com (अब्‍दुल रशीद)</author>
			<category>Featured</category>
			<category>सियासत-ताकत-राजकाज-देश-प्रदेश-दुनिया-समाज-सरोकार</category>
			<pubDate>Mon, 28 May 2012 14:04:20 +0000</pubDate>
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		<item>
			<title>पोर्न स्टार सनी लियोन को नागरिकता और जन्मजात भारतीयों को देश निकाला!</title>
			<link>http://feedproxy.google.com/~r/bhadasblog/~3/3fsyoPK2Xpg/1461-2012-05-28-13-55-55</link>
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			<description>&lt;p&gt;छोटे परदे के रिएलिटी शो ‘बिग बॉस’ में आई एडल्ट फिल्मों की हिरोइन पोर्न स्टार जिस्म 2 की अभिनेत्री सनी लियोन को नागरिकता और जन्मजात भारतीयों को देश निकाला! जिस्म -२ जैसी विवादस्पद फिल्म की सूटिंग करते हुए सनी को भारतीय नागरिकता मिल गयी। सनी लियोन को नागरिकता का मसला सेलिब्रेटी महज रूटीन पेज थ्री खबर नहीं है, इससे पता चलता है कि भारत में सत्ता कैसे खुले बाजार की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए आइकनों के लिए नियम कानून ताक पर रख देती है और बहिष्कृत अछूत बहुजनों को नागरिकता, नागरिक और मानव अधिकारों से वंचित करके उनके जल, जंगल, जमीन और आजीविका पर कारपोरेट राज कायम किया जाता है। सनी ने सोशल नेटवर्किंग साइट पर ट्वीट करके इस उपलब्ध को सेलिब्रेट किया है। इससे पहले उनके पास कनाडा की नागरिकता थी। पोर्न स्टार सनी का असल नाम करण मल्होत्रा है जो कनाडा में पली और बढ़ी।&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/bhadasblog/~4/3fsyoPK2Xpg" height="1" width="1"/&gt;</description>
			<author>bhadas4media@gmail.com (एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास)</author>
			<category>Featured</category>
			<category>सियासत-ताकत-राजकाज-देश-प्रदेश-दुनिया-समाज-सरोकार</category>
			<pubDate>Mon, 28 May 2012 13:55:55 +0000</pubDate>
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		<item>
			<title>जगन की अदावत कहीं भारी न पड़ जाए कांग्रेस को </title>
			<link>http://feedproxy.google.com/~r/bhadasblog/~3/6sxbHKHsW-Q/1460-2012-05-28-12-44-12</link>
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			<description>&lt;p&gt;कभी कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी के ख़ास क्षत्रप वाईएस राजशेखर रेड्डी के पुत्र जगनमोहन रेड्डी से कांग्रेस की बीते २ वर्षों से चली आ रही अदावत ने अब गंभीर रूप ले लिया है, जहां से दोनों के राजनीतिक नफा-नुकसान का आकलन करना कठिन हो गया है। आँध्रप्रदेश की राजनीति में आने वाले दिनों में ज़बर्दस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिलेंगे। देखा जाए तो अधिक नुकसान कांग्रेस को होना तय है। जगन तो वैसे भी एकला चलो रे की तर्ज़ पर अपना सब कुछ दांव पर लगा चुके हैं। आंध्र कांग्रेस के लिए कितना महत्वपूर्ण है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसके ३३ सांसद इसी प्रदेश से हैं, जो संख्याबल में किसी भी राज्य के कांग्रेस सांसदों से सर्वाधिक हैं। फिर आंध्र में जगन ने ही कांग्रेस की पेशानी पर बल डाला हो ऐसा नहीं है। तेलंगाना मामला भी कांग्रेस के लिए गलफांस बन गया है।&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/bhadasblog/~4/6sxbHKHsW-Q" height="1" width="1"/&gt;</description>
			<author>bhadas4media@gmail.com (सिद्धार्थ शंकर गौतम)</author>
			<category>Featured</category>
			<category>सियासत-ताकत-राजकाज-देश-प्रदेश-दुनिया-समाज-सरोकार</category>
			<pubDate>Mon, 28 May 2012 12:44:12 +0000</pubDate>
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		<item>
			<title>शिमला नगर निगम में कांग्रेस का राज खतम, भाजपा अधर में, माकपा ने रचा इतिहास  </title>
			<link>http://feedproxy.google.com/~r/bhadasblog/~3/oNjV1GC4i3A/1459-2012-05-28-12-35-35</link>
			<guid isPermaLink="false">http://news.bhadas4media.com/index.php/yeduniya/1459-2012-05-28-12-35-35</guid>
			<description>&lt;p&gt;शिमला : आज संपन्न हुई मतगणना में कांग्रेस और भाजपा के लिए नाक का सवाल बन चुके हिमाचल की राजधानी शिमला के नगर निगम के सभी २५ वार्डों के चुनावों के नतीजों की घोषणा कर दी गई है. २५ पार्षदों वाले राजधानी के इस प्रतिष्ठित नगर निगम पर विगत २५ वर्षों से कांग्रेस का कब्ज़ा हटाते हुए इस बार भाजपा सेंध लगाने में कामयाब रही. २५ सीटों वाले इस नगर निगम के २७ मई को हुए चुनावों की आज हुई मतगणना में जहाँ भाजपा ने कांग्रेस को पीछे धकेलते हुए पहली बार १२ सीटों पर अपना कब्ज़ा जमाया है. वहीँ कांग्रेस इस दौड़ में भाजपा से पिछड़ते हुए १० सीटें लेकर दूसरे स्थान पर और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ३ सीटें लेकर तीसरे स्थान पर रही. शिमला नगर निगम के चुनावों में इस बार महापौर और उपमहापौर के पद के चुनाव सीधे तौर से जनता द्वारा ही किया गया. यानि कि इस बार मेयर और उप मेयर का चुनाव निर्वाचित पार्षदों द्वारा नहीं बल्कि मतदाताओं द्वारा सीधे किया गया.&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/bhadasblog/~4/oNjV1GC4i3A" height="1" width="1"/&gt;</description>
			<author>bhadas4media@gmail.com (विनायक शर्मा )</author>
			<category>Featured</category>
			<category>सियासत-ताकत-राजकाज-देश-प्रदेश-दुनिया-समाज-सरोकार</category>
			<pubDate>Mon, 28 May 2012 12:35:35 +0000</pubDate>
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		<item>
			<title>30 मई पत्रकारिता दिवस पर विशेष : भवानी भाई, पत्रकारिता और बाजार</title>
			<link>http://feedproxy.google.com/~r/bhadasblog/~3/p-vKWXgqFog/1458-30-----------</link>
			<guid isPermaLink="false">http://news.bhadas4media.com/index.php/creation/1458-30-----------</guid>
			<description>&lt;p&gt;भवानी भाई, पत्रकारिता और बाजार शीर्षक शायद आपको अटपटा लगे लेकिन तीनों के बीच का अन्तर्सम्‍बंध आगे चलकर हम समझने की कोशिश करेंगे। मैं गीत बेचता हूं किसम किसम के गीत बेचता हूं..दशकों पहले भवानी प्रसाद मिश्र ने जब यह गीत लिखा होगा तो उन्हें इस बात का अहसास रहा होगा कि आने वाले दिनों में पत्रकारिता भी किसम किसम के खबरें बेचेगी। जिसे जो पसंद होगा और जिसके जेब में दाम देने की गुरबत होगी, वह अपनी पसंद की खबर बनवायेगा और छपवायेगा। आज की पत्रकारिता का यही सच है।&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/bhadasblog/~4/p-vKWXgqFog" height="1" width="1"/&gt;</description>
			<author>bhadas4media@gmail.com (मनोज कुमार  )</author>
			<category>Featured</category>
			<category>बिजनेस-उद्योग-श्रम-तकनीक-वेब-मोबाइल-मीडिया</category>
			<pubDate>Mon, 28 May 2012 10:51:22 +0000</pubDate>
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		<item>
			<title>इंटरनेट पर नियंत्रण नहीं नियमन हो </title>
			<link>http://feedproxy.google.com/~r/bhadasblog/~3/b7IxCDxe7Js/1457-2012-05-27-14-00-57</link>
			<guid isPermaLink="false">http://news.bhadas4media.com/index.php/creation/1457-2012-05-27-14-00-57</guid>
			<description>&lt;p&gt;इंटरनेट एक माध्यम है जो पूरे विश्व को एक ऐसा मंच उपलब्ध कराता है जहां अभिव्‍यक्ति की पूरी आजादी है। लेकिन पिछले कुछ सालों में इंटरनेट का जिस तरह दुरुपयोग कह लें या फिर  स्वच्छंदता से इस्तेमाल हुआ है उसकी वजह से पूरे विश्व समुदाय में यह बात उठनी स्वाभाविक है अब समय आ गया है कि इंटरनेट पर नकेल कसी जाए। वैसे इंटरनेट पर लगाम लगाने के लिए जेनेवा में वर्ल्ड समिट ऑन इंफॉरमेशन सोसाइटी की जो बैठक हुई है, वह अपने आप में कोई नई पहल नहीं है और न ही आखिरी, क्योंकि इस क्रम में संयुक्त राष्ट्र कमेटी ऑन इंटरनेट रिलेटेड पॉलिसी की सिफारिशों की भी वकालत की गई है, जिसके माध्यम से ही इंटरनेट सम्बंधित नीतियों का नियमन होगा और उन 50 देशों के लिए बाध्यकारी होगा, जो संयुक्त राष्ट्र सीआइआरपी के सदस्य हैं।&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/bhadasblog/~4/b7IxCDxe7Js" height="1" width="1"/&gt;</description>
			<author>bhadas4media@gmail.com (अजय पाण्डेय)</author>
			<category>Featured</category>
			<category>बिजनेस-उद्योग-श्रम-तकनीक-वेब-मोबाइल-मीडिया</category>
			<pubDate>Sun, 27 May 2012 14:00:57 +0000</pubDate>
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		<item>
			<title>पंजाब केसरी दिल्‍ली व जालंधर समूह में कानूनी लड़ाई </title>
			<link>http://feedproxy.google.com/~r/bhadasblog/~3/DMb0faa2in0/1456-2012-05-27-13-53-37</link>
			<guid isPermaLink="false">http://news.bhadas4media.com/index.php/creation/1456-2012-05-27-13-53-37</guid>
			<description>&lt;p&gt;पंजाब केसरी व जालंधर समूह में इस समय कानूनी लड़ाई का दांव-पेंच फंस गया हैं. इस बात का खुलासा तब हुआ हैं, जब आगरा की एक पार्टी आगरा से ही जो कि समाजवादी पार्टी के काफी नजदीक मानी जाती हैं, आगरा की पंजाब केसरी फ्रेंचायजी के बाबत दिल्ली गयी. बताया गया है कि जब आगरा से प्रकाशित करने के सम्बन्ध में पंजाब केसरी, दिल्ली के संपादक से बात करने की कोशिश की गयी, तब जाकर इस मामले का खुलासा हुआ. गौरतलब है कि पंजाब केसरी अखबार का टाइटल विजय कुमार के नाम है. ऐसे में इस समय पंजाब केसरी पर जालंधर समूह का कब्जा है, क्योंकि वह वर्तमान में जगवानी, (पंजाबी), हिंद समाचार (उर्दू) व पंजाब केसरी टीवी का संचालन करता हैं. ऐसे में अगर फैसला पंजाब केसरी, दिल्ली के विरोध में गया तो अपने समाचार पत्र में बड़ा-बड़ा लेख लिखने वाले पंजाब केसरी के संपादक अश्वनी कुमार केवल दिल्‍ली तक सीमित रह सकते हैं.&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/bhadasblog/~4/DMb0faa2in0" height="1" width="1"/&gt;</description>
			<author>bhadas4media@gmail.com (NewsDesk)</author>
			<category>Featured</category>
			<category>बिजनेस-उद्योग-श्रम-तकनीक-वेब-मोबाइल-मीडिया</category>
			<pubDate>Sun, 27 May 2012 13:53:37 +0000</pubDate>
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		<item>
			<title>CDRO FACT FINDING : SARANDA, PORAIYAHAT</title>
			<link>http://feedproxy.google.com/~r/bhadasblog/~3/BvfYDMORI_0/1455-cdro-fact-finding--saranda-poraiyahat</link>
			<guid isPermaLink="false">http://news.bhadas4media.com/index.php/yeduniya/1455-cdro-fact-finding--saranda-poraiyahat</guid>
			<description>&lt;p&gt;Jharkhand is fast becoming a military state. Similar to operation green hunt which was started three years ago in mineral rich forest areas resided by adivasis, brutal operations are being carried out continuously in Jharkhand as well. ‘Operation Anaconda’ was launched as a special operation in August 2011 in Saranda forest area of West Singhbhum district of Jharkhand. Reasons for speeding up of such military operations by the state can be viewed in a twofold context. One the one hand mining activity in Saranda has been on the rise. Saranda is Asia’s largest mineral reserve and holds immense economic importance. On the other hand, contrary to the government claim that the area has been cleared of Maoist activity, infact it is far from being crushed.&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/bhadasblog/~4/BvfYDMORI_0" height="1" width="1"/&gt;</description>
			<author>bhadas4media@gmail.com (NewsDesk)</author>
			<category>Featured</category>
			<category>सियासत-ताकत-राजकाज-देश-प्रदेश-दुनिया-समाज-सरोकार</category>
			<pubDate>Sun, 27 May 2012 13:48:05 +0000</pubDate>
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			<title>ऐसा लगता है जैसे दो दशक पुरानी यह चिंता आज की ही बात हो</title>
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			<description>&lt;p&gt;: &lt;strong&gt;स्व. चन्द्रजीत यादव की पुण्य तिथि के अवसर पर&lt;/strong&gt; : 19 अप्रैल 1982 को संसद में बहस के दौरान स्व. चन्द्रजीत यादव ने देश के किसानों के दर्द को इस तरह पेश किया - कृषि हमारे देश की अर्थ-व्यवस्था की आज भी रीढ़ है और यदि हिन्दुस्तान में और खेती करने वालों की हालत नहीं सुधरेगी तो यह देश गरीब रहेगा और इस देश में गरीबी बेरोजगारी और आर्थिक विषमता खत्म नही हो सकती। आज दुर्भाग्य की बात है कि 35 वर्ष की आजादी के बाद भी हमारे देश के किसानों की आर्थिक हालत सबसे ज्यादा खराब है। आज अगर हम बिल्कुल निष्पक्ष रूप से देखें तो किसान की हालत में ज्यादा सुधार नहीं हुआ है। भाटिया जी ने हरियाणा और पंजाब के किसानों की चर्चा की। पर उनको भी मालूम है कि पंजाब और हरियाणा का किसान दूसरे प्रदेशों के किसानों की अपेक्षा ज्यादा उन्नत, ज्यादा अमीर और ज्यादा आधुनिक खेती करने वाला होने के बावजूद देश के विभिन्न भागों में 90 प्रतिशत किसान कर्जे से दबा हुआ है। खासतौर से ऐसे किसान जिनके पास दो-तीन एकड़ से कम जमीन है, उनकी हालत बिल्कुल एक खेतिहर मजदूर की श्रेणी के बराबर है। छोटे किसान और खेतिहर मजदूर दोनों की हालत बहुत खराब है।&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/bhadasblog/~4/bzVwb6Yvze0" height="1" width="1"/&gt;</description>
			<author>bhadas4media@gmail.com (बनवारी जालान )</author>
			<category>Featured</category>
			<category>सियासत-ताकत-राजकाज-देश-प्रदेश-दुनिया-समाज-सरोकार</category>
			<pubDate>Sun, 27 May 2012 13:42:20 +0000</pubDate>
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			<title>“गौरव सोलंकी की पीठ ठोकिये, क्योंकि डकैत सिर्फ पार्लयामेंट में नहीं होते” </title>
			<link>http://feedproxy.google.com/~r/bhadasblog/~3/4mTxFW4nLnQ/1453-2012-05-27-13-31-27</link>
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			<description>&lt;p&gt;मजबूरी और महत्वाकांक्षा ज़्यादातर लेखको की जुबां पर अपने शब्द रख देती है। क़लम घिसने वालो के लिए ये बेहद ज़रूरी है कि वो अपने अन्दर का लेखक कभी मरने न दें। विशेषरूप से, जब बाज़ारवाद में डूबी संस्थाए लेखकों को पुरस्कार उनके सम्मान को बढ़ाने के लिए नही, उनके सम्मान को खरीदने के लिए या अहसान तले दबाने के लिए देती हैं। मुझे आज तक समझ नहीं आया कि कैसे कोई संगठन या संस्था इतनी ताक़तवर हो सकती है कि किसी रचना का समाज तक पहुंचना या न पहुंचना, संस्था के विवेक पर निर्भर करे। क्या ये उस समाज की अपनी सोच को कमतरी से आंकना नहीं हुआ? या क्या ये खुद के बारे में 'अहम् ब्रह्मास्मि' जैसी कोई राय बनाने वाली बात नहीं है?&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/bhadasblog/~4/4mTxFW4nLnQ" height="1" width="1"/&gt;</description>
			<author>bhadas4media@gmail.com (जमशेद कमर सिद्दीकी )</author>
			<category>Featured</category>
			<category>खेल-सिनेमा-संगीत-साहित्य-रंगमंच-कला-लोक</category>
			<pubDate>Sun, 27 May 2012 13:31:27 +0000</pubDate>
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		<item>
			<title>मधुप पाण्डेय और दीपक गुप्ता को अट्टहास सम्मान</title>
			<link>http://feedproxy.google.com/~r/bhadasblog/~3/KhPqldrJf4E/1452-2012-05-27-13-22-56</link>
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			<description>&lt;p&gt;लखनऊ - देश का बहुप्रतीक्षित अट्टहास समारोह शनिवार, 2012 को रवीन्द्रालय सभागार, लखनऊ में  सायं 6:00 बजे हुआ, जिसमें लोग हसें, खिलखिलाये और जमकर ठहाके लगाये। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मा. मुलायम सिंह यादव इस बार अट्टहास सम्मान 2011 में नागपुर के प्रसिद्ध कवि श्री मधुप पाण्डेय को अट्टहास शिखर सम्मान और दिल्ली के युवा हास्य कवि दीपक गुप्ता को अट्टहास युवा सम्मान प्रदान किया।&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/bhadasblog/~4/KhPqldrJf4E" height="1" width="1"/&gt;</description>
			<author>bhadas4media@gmail.com (NewsDesk)</author>
			<category>Featured</category>
			<category>खेल-सिनेमा-संगीत-साहित्य-रंगमंच-कला-लोक</category>
			<pubDate>Sun, 27 May 2012 13:22:56 +0000</pubDate>
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		<item>
			<title>भक्ति का लिबास और आस्‍था का व्‍यापार  </title>
			<link>http://feedproxy.google.com/~r/bhadasblog/~3/mzIlU5LAsPQ/1451-2012-05-27-13-19-06</link>
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			<description>&lt;p&gt;कलयुग के ढोंगी बाबा अपनी कारगुजारी से सुर्खियां बटोरने में लगे हैं। इस संबंध में किसी एक का नाम लेना उचित नहीं होगा। क्योंकि यह संख्या उंगलियों पर गिनी जाने लायक नहीं है। बस, फर्क इतना है कि कुछ ढोंगी बाबा लाइम लाइट में आकर बदनाम हो गए हैं तो अनेक बाबाओं का लोगों को अंधविश्वास के जाल में फांस कर ठगने का खेल बिना सुर्खियों में आये जारी है। गांवों से लेकर शहर तक शायद ही देश का कोई ऐसा कोना होगा जहां पाखंडी बाबाओं और तंत्र-मंत्र करने वाले ढोंगियो ने भोली भाली जनता को भय दिखा कर ठगा न हो। यह बाबा किसी भी दशा में डाकुओं से कम नहीं हैं। इनके कारनामों को देख कर बचपन में कहानी के रूप में पढ़ा एक पाठ याद आ जाता है।&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/bhadasblog/~4/mzIlU5LAsPQ" height="1" width="1"/&gt;</description>
			<author>bhadas4media@gmail.com (अजय कुमार )</author>
			<category>Featured</category>
			<category>सियासत-ताकत-राजकाज-देश-प्रदेश-दुनिया-समाज-सरोकार</category>
			<pubDate>Sun, 27 May 2012 13:19:06 +0000</pubDate>
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		<item>
			<title>क्‍या सचमुच सोनिया पूर्वोत्‍तर क्षेत्र के विकास के प्रति गंभीर हैं?</title>
			<link>http://feedproxy.google.com/~r/bhadasblog/~3/2rcRWhA9YbQ/1450-2012-05-27-06-54-23</link>
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			<description>&lt;p&gt;कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने अपने असम के दौरे के दौरान दावा किया है कि केंद्र की यूपीए और असम की कांग्रेसी सरकार की कोशिश से उस इलाके में आतंकवाद कमज़ोर पड़ा है. बातचीत के ज़रिये समस्या को हल करने की नीति की उन्होंने तारीफ़ की और कहा कि यूपीए और कांग्रेस की इसी नीति के कारण कई आतंकवादी सगठनों ने आतंकवाद को तिलांजलि देने का फैसला किया है. उन्होंने भरोसा जताया कि आतंकवादी संगठनों के लोगों को विश्वास हो जाएगा कि आतंक का रास्ता सही नहीं है. वे आगे आयेंगे और शान्ति की प्रक्रिया में शामिल हो जायेंगे. सोनिया गाँधी असम की कांग्रेसी सरकार के एक साल पूरा होने की खुशी में आयोजित एक सभा में भाषण कर रही थीं. दिल्ली में भी कांग्रेसी मीडिया विभाग अपनी अध्यक्ष की सफल असम यात्रा की तारीफ़ करते नहीं अघा रहा है. उनके साहस को ख़ास तौर से बताया जा रहा है कि बम विस्फोट के बाद भी उन्होंने अपने कार्यक्रम में कोई परिवर्तन नहीं किया.&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/bhadasblog/~4/2rcRWhA9YbQ" height="1" width="1"/&gt;</description>
			<author>bhadas4media@gmail.com (शेष नारायण  सिंह )</author>
			<category>Featured</category>
			<category>सियासत-ताकत-राजकाज-देश-प्रदेश-दुनिया-समाज-सरोकार</category>
			<pubDate>Sun, 27 May 2012 06:54:23 +0000</pubDate>
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		<item>
			<title>पेट्रोल बम से झुलसे देश को राहत का छलावा </title>
			<link>http://feedproxy.google.com/~r/bhadasblog/~3/GJTffuqRkxg/1449-2012-05-26-07-23-17</link>
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			<description>&lt;p&gt;पेट्रोल बम से झुलसे देश को राहत का छलावा दे रही है यूपीए सरकार। राज्यों से कहा जा रहा है वैट और दूसरे टैक्स घटाकर मरहम का इंतजाम कर दिया जाये। पर कांग्रेस शासित राज्य महाराष्ट्र के लिए भी ऐसा करना नामुमकिन है। पहले से आर्थिक तंगी से जूझ रहे राज्यों के लिए तेल पर चैक्स राहत देकर अपने राजस्व में कटौती करना राजनीतिक दबाव के बावजूद मुश्किल है। पेट्रोल में एक ही झटके में 7.54 रुपये प्रति लीटर की भारी वृद्धि के बाद देशभर में बढ़ते विरोध को देखते हुए सरकार ने शुक्रवार को कहा कि मूल्यवृद्धि की वापसी पर निर्णय लेने से पहले कुछ दिन तक वह स्थिति की समीक्षा करेगी। मजा देखिये, पेट्रोल के दाम में अब तक की सबसे ऊंची वृद्धि करने के एक दिन बाद तेल कंपनियों ने गुरुवार को संकेत दिया है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम में गिरावट के रुझान को देखते हुए अगले महीने पेट्रोल के दाम 1.50 से 1.80 रुपये लीटर तक कम हो सकते हैं।&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/bhadasblog/~4/GJTffuqRkxg" height="1" width="1"/&gt;</description>
			<author>bhadas4media@gmail.com (एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास)</author>
			<category>Featured</category>
			<category>सियासत-ताकत-राजकाज-देश-प्रदेश-दुनिया-समाज-सरोकार</category>
			<pubDate>Sat, 26 May 2012 07:23:17 +0000</pubDate>
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		<item>
			<title>संसद में भोजपुरी की अलख </title>
			<link>http://feedproxy.google.com/~r/bhadasblog/~3/VEyyeh1Tc8s/1448-2012-05-25-14-37-46</link>
			<guid isPermaLink="false">http://news.bhadas4media.com/index.php/yeduniya/1448-2012-05-25-14-37-46</guid>
			<description>&lt;p&gt;गृहमंत्री पी चिदंबरम को हिंदी बोलते हुए भी कम ही देखा-सुना गया है। खालिस अंग्रेजी में सांसदों के सवालों का जवाब देने वाले पी चिदंबरम अगर भोजपुरी में यह कहने को मजबूर हो जाएं कि हम रउवा सभके भावना समझतानी तो यह न मानने का कारण नहीं रह जाता कि भोजपुरी को लेकर नजरिया बदलने लगा है। यहां गौर करने की बात यह है कि चिदंबरम उस तमिलनाडु से आते हैं, जहां 1967 में हिंदी विरोधी आंदोलन तेज हो गया था। 17 मई 2012 को लोकसभा में भोजपुरी को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने को लेकर उठे विशेष ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर चर्चा के जवाब में चिदंबरम को यह आश्वासन देना पड़ा कि संसद के मानसून सत्र में इसे लेकर ठोस कदम उठाए जाएंगे।&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/bhadasblog/~4/VEyyeh1Tc8s" height="1" width="1"/&gt;</description>
			<author>bhadas4media@gmail.com (उमेश चतुर्वेदी)</author>
			<category>Featured</category>
			<category>सियासत-ताकत-राजकाज-देश-प्रदेश-दुनिया-समाज-सरोकार</category>
			<pubDate>Fri, 25 May 2012 14:37:46 +0000</pubDate>
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		<item>
			<title>पौराणिक संविधान औरतों की गुलामी का संविधान है : मैत्रेयी पुष्पा</title>
			<link>http://feedproxy.google.com/~r/bhadasblog/~3/TtFiYjkPWcI/1447-2012-05-25-14-19-34</link>
			<guid isPermaLink="false">http://news.bhadas4media.com/index.php/dekhsunpadh/1447-2012-05-25-14-19-34</guid>
			<description>&lt;p&gt;कलावती चाची और सारंग जैसे महिला चरित्रों ने मैत्रेयी पुष्पा को एक समय चर्चा के शिखर पर बिठा दिया था। आज भी उस की गूंज गई नहीं है। मैत्रेयी की बात चलती है तो कलावती और सारंग साथ हो लेती हैं। अनायास। मैत्रेयी पुष्पा के उपन्यास ‘चाक’ में एक स्त्री, एक पुरुष के भीतर पुंसत्व जगाने के लिए देह समर्पण करती है और दूसरे संदर्भ में एक स्त्री अपने संघर्ष के सहचर मित्र के घायल होने पर अचानक इस हद तक आसक्ति अनुभव करती है कि उस के प्रति समर्पित हो जाती है। यानी दोनों प्रसंग यौन शुचिता की बनी बनाई धारणा को तोड़ते हैं। यह दोनों स्त्रियां क्रमश: ‘चाक’ की कलावती चाची और सारंग हैं। ‘चाक’ में एक संवाद है कि ‘हम जाट स्त्री बिछुआ अपने जेब में रखती हैं। जब चाहती हैं पहन लेती हैं जब चाहती हैं उतार देती हैं।’ इस संवाद के बहाने मैत्रेयी स्त्री में बगावत के बीज बोना चाहती हैं।&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/bhadasblog/~4/TtFiYjkPWcI" height="1" width="1"/&gt;</description>
			<author>bhadas4media@gmail.com (दयानंद पांडेय)</author>
			<category>Featured</category>
			<category>खेल-सिनेमा-संगीत-साहित्य-रंगमंच-कला-लोक</category>
			<pubDate>Fri, 25 May 2012 14:19:34 +0000</pubDate>
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		<item>
			<title>तीन साल की सरकार और जनता पर तेल की मार  </title>
			<link>http://feedproxy.google.com/~r/bhadasblog/~3/XY7uKaWtQ54/1446-2012-05-25-12-05-58</link>
			<guid isPermaLink="false">http://news.bhadas4media.com/index.php/yeduniya/1446-2012-05-25-12-05-58</guid>
			<description>&lt;p&gt;महंगाई की मार से जूझ रही जनता पर इस बार यूं.पी.ए.- 2 की अब तक की सबसे बड़ी मार पड़ी है। इस मंगलवार को यू.पी.ए. - 2 ने सरकार संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के सत्ता में तीन साल पूरे होने के उपलक्ष्य में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की ओर से शाम को एक डिनर पार्टी का आयोजन किया गया, जिसमें सरकार की तीन वर्षों की उपलब्धियों को गिनाया गया। अभी उपलब्धियों का यह जश्न पूरे शबाब पर ही था कि अचानक तेल कंपनियों ने बुधवार की शाम को पेट्रोल की कीमत में 7.50 रुपये प्रति लीटर बढ़ोतरी की घोषणा कर दी। गौरतलब है कि पेट्रोल के दाम में कभी भी इतनी ज्यादा बढ़ोतरी नहीं की गई। इससे पहले पिछले साल 2 बार 5-5 रुपये की बढ़ोतरी की जरूर गई थी, जो सबसे ज्यादा थी। तमाम राजनीतिक दबावों को दरकिनार कर तेल कंपनियों ने पेट्रोल की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी की है। डीजल और एलपीजी दाम नहीं बढ़ाए गए हैं। गौरतलब है कि  डीजल और एलपीजी की कीमतों में बढ़ोतरी के लिए शुक्रवार को मंत्रियों के समूह की बैठक होने वाली है और इसी बैठक में इनके दामों में बढ़ोतरी का निर्णय लिया जाएगा।&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/bhadasblog/~4/XY7uKaWtQ54" height="1" width="1"/&gt;</description>
			<author>bhadas4media@gmail.com (राजीव गुप्‍ता )</author>
			<category>Featured</category>
			<category>सियासत-ताकत-राजकाज-देश-प्रदेश-दुनिया-समाज-सरोकार</category>
			<pubDate>Fri, 25 May 2012 12:05:58 +0000</pubDate>
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		<item>
			<title>पेट्रोल के सरकारी आग से जल रहा है स्ट्रिंगर </title>
			<link>http://feedproxy.google.com/~r/bhadasblog/~3/rESqxnN3Lsg/1445-2012-05-25-10-43-49</link>
			<guid isPermaLink="false">http://news.bhadas4media.com/index.php/creation/1445-2012-05-25-10-43-49</guid>
			<description>&lt;p&gt;यशवंतजी नमस्कार, देश में बार-बार यूपीए सरकार ने पट्रोल में जो आग लगाई है उसकी मार मार देश के प्रत्येक व्यक्ति पर पड़ी है। इससे मीडिया भी अछूता भी नहीं है। मीडिया में भी एक दलित वर्ग है, जिसे हम मीडिया की भाषा में स्ट्रिंगर कहते हैं। इस पर भी यूपीए सरकार की मार सीधे-सीधे पड़ी है। मतलब यह है पिछले कई सालों में स्ट्रिंगर को स्टोरी के बदले मिलने वाले भुगतान में जरा भी बढ़ोतरी नहीं हुई है, बल्कि चैनलों ने स्ट्रिंगरों को अपनी सुविधानुसार भुगतान देना शुरू कर दिया है। कुछ चैनल १००० रुपये या ५०० रुपये स्टोरी देते हैं तो कुछ इससे भी कम। इसमें पेट्रोल से लेकर सभी तरह के भत्ते शामिल होते हैं।&lt;/p&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/bhadasblog/~4/rESqxnN3Lsg" height="1" width="1"/&gt;</description>
			<author>bhadas4media@gmail.com (भीम मनोहर)</author>
			<category>Featured</category>
			<category>बिजनेस-उद्योग-श्रम-तकनीक-वेब-मोबाइल-मीडिया</category>
			<pubDate>Fri, 25 May 2012 10:43:49 +0000</pubDate>
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		<item>
			<title>क़त्ल के सबूत मिटाने वालों पर कार्रवाई क्यों नहीं?</title>
			<link>http://feedproxy.google.com/~r/bhadasblog/~3/B7sNxS4J6j8/1444-2012-05-25-10-37-09</link>
			<guid isPermaLink="false">http://news.bhadas4media.com/index.php/yeduniya/1444-2012-05-25-10-37-09</guid>
			<description>&lt;p&gt;प्रिय यशवंत भाई, आरुषि मर्डर केस को मीडिया, ख़ासतौर से हर क़ीमत पर ख़बरें दिखाने वाले तेज़ तर्रार न्यूज़ चैनलों पर पिछले कई साल से सिर्फ देश की सबसे बड़ी मर्डर मिस्ट्री के तौर पर परोसा गया। अपनी नौकरी के दौरान कई बार इस ख़बर को बड़ी ही मेहनत से कवर किया लेकिन जब-जब फाइल करने की बारी आई तो शायद हमारी डेस्क या चैनल की पॉलिसी हमारी स्टोरी लाइन से मैच ना कर पाई। एक बार बड़ी ही मुश्किल से नोएडा के सरकारी अस्पताल में हुए पोस्टमार्टम की सच्चाई को बेनक़ाब करने के लिए स्टोरी फाइल की, मगर स्टोरी एयर ना हो सकी। यशवंत भाई इसी तरह की घुटन नौकरी के दौरान अक्सर रही, जिसका इलाज सिर्फ यही नज़र आया कि एक मंच अपना भी हो भले ही छोटा क्यों ना हो। यही सोच कर हिंदी साप्ताहिक दि मैन इन अपोज़िशन लांच किया था। आज जब ग़ाज़ियाबाद की सीबीआई अदालत ने तलवार दम्पति को लेकर फैसला सुनाया तो अनायास अपना अंक याद आ गया। भाई आपको इस अंक के पेज के साथ अपनी बात शेयर कर रहा हूं।&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/bhadasblog/~4/B7sNxS4J6j8" height="1" width="1"/&gt;</description>
			<author>bhadas4media@gmail.com (आज़ाद ख़ालिद)</author>
			<category>Featured</category>
			<category>सियासत-ताकत-राजकाज-देश-प्रदेश-दुनिया-समाज-सरोकार</category>
			<pubDate>Fri, 25 May 2012 10:37:09 +0000</pubDate>
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		<item>
			<title>मोदी गुट ने गडकरी को शह देकर संजय जोशी को मात दे दी </title>
			<link>http://feedproxy.google.com/~r/bhadasblog/~3/IMYuqoVtI0o/1443-2012-05-25-07-50-42</link>
			<guid isPermaLink="false">http://news.bhadas4media.com/index.php/yeduniya/1443-2012-05-25-07-50-42</guid>
			<description>&lt;p&gt;: &lt;strong&gt;नरेंद्र मोदी तैयार थे भाजपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी छोड़ने के लिए&lt;/strong&gt; : 'जब अटल बिहारी वाजपेयी के लिए गोविंदाचार्य को बीजेपी से बाहर बैठाया जा सकता है, तो नरेंद्र मोदी के लिए संजय जोशी को बीजेपी से बाहर का रास्ता क्यों नहीं दिखाया जा सकता.' संजय जोशी के इस्तीफे से ठीक पहले नरेंद्र मोदी का यही आखरी वाक्य रामवाण की तरह आरएसएस को भी लगा और नीतिन गडकरी को भी. जिसके बाद नीतिन गडकरी ने संजय जोशी को राष्ट्रीय कार्यकरिणी से इस्तीफा देने को कह दिया. लेकिन मोदी ने इस रामबाण से पहले जो बिसात संजय जोशी को लेकर बिछायी, उसने बुधवार रात को बीजेपी अध्यक्ष नीतिन गडकरी के भी होश फाख्ता कर दिये.&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/bhadasblog/~4/IMYuqoVtI0o" height="1" width="1"/&gt;</description>
			<author>bhadas4media@gmail.com (पुण्‍य प्रसून बाजपेयी)</author>
			<category>Featured</category>
			<category>सियासत-ताकत-राजकाज-देश-प्रदेश-दुनिया-समाज-सरोकार</category>
			<pubDate>Fri, 25 May 2012 07:50:42 +0000</pubDate>
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		<item>
			<title>''धारा 370 की बहाली के बिना कश्‍मीर समस्‍या का हल नामुमकिन है''</title>
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			<description>&lt;p&gt;नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने जम्‍मू-कश्‍मीर में सभी वर्गों के लोगों के साथ बातचीत के लिये 13 अक्तूबर 2010 को वार्ताकारों का समूह नियुक्‍त किया था। इस समूह में राधा कुमार, एमएम अंसारी और दिलीप पाडगांवकर को सदस्य बनाया गया था. इस समूह ने राज्‍य तथा राष्‍ट्रीय स्‍तर पर जम्‍मू-कश्मीर की सरकार, राजनीतिक दलों तथा संबंधित नागरिक वर्ग के साथ व्‍यापक विचार विमर्श किया. उनकी रिपोर्ट 12 अक्तूबर 2011 को सौंप दी गयी थी. सरकार ने अभी रिपोर्ट पर कोई निर्णय नहीं लिया है. आज यह रिपोर्ट जारी कर दी गयी. गृह मंत्रालय ने दावा किया है कि अब इस रिपोर्ट पर पूरे देश में बहस होगी और उसके बाद ही कोई फैसला लिया जाएगा. हालांकि यह अजीब बात है पिछले कई महीनों से यह रिपोर्ट सरकार के पास थी लेकिन इसे संसद के सत्र के दौरान जारी नहीं किया गया. अगर सरकार ने ऐसा किया होता तो इसपर बेहतर बहस हो सकती थी.&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/bhadasblog/~4/oAnkOxz0P74" height="1" width="1"/&gt;</description>
			<author>bhadas4media@gmail.com (शेष नारायण सिंह)</author>
			<category>Featured</category>
			<category>सियासत-ताकत-राजकाज-देश-प्रदेश-दुनिया-समाज-सरोकार</category>
			<pubDate>Fri, 25 May 2012 07:48:42 +0000</pubDate>
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		<item>
			<title>इंटरनेट मीडिया ने टीवी को पीछे छोड़ा </title>
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			<description>&lt;p&gt;रूसी मीडिया बाज़ार में पहली बार ऐसा हुआ है कि इंटरनेट संचार साधन टीवी चैनलों को पीछे छोड़कर आगे निकल गए हैं। उदाहरण के लिए अप्रैल माह में लोगों ने "याँडेक्स" (Yandex) पोर्टल को किसी भी टीवी चैनल की तुलना में सबसे अधिक संख्या में देखा और पढ़ा। इस वेबसाइट का एक दिन में 1 करोड़ 90 लाख यूज़रों ने उपयोग किया जबकि रूस के सबसे लोकप्रिय टीवी चैनल- "पहले चैनल" को देखनेवाले दर्शकों की संख्या इससे दस लाख कम रही।  ये आँकड़े टी.एन.एस. एजेंसी के विश्लेषकों द्वारा तैयार की गई एक रिपोर्ट में दर्ज हैं। "याँडेक्स" के अलावा Mail.ru वेबसाइट ने भी इस टीवी चैनल की लोकप्रियता को चुनौती दी है। अगर पूरे एक महीने में टीवी के दर्शकों और इंटरनेट यूज़रों की संख्या की तुलना की जाए तो टीवी दर्शकों की संख्या इंटरनेट यूज़रों की संख्या से लगभग 80 लाख अधिक बनती है। साभार : रेडिया रूस&lt;/p&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/bhadasblog/~4/jplttEsagy0" height="1" width="1"/&gt;</description>
			<author>bhadas4media@gmail.com (NewsDesk)</author>
			<category>Featured</category>
			<category>बिजनेस-उद्योग-श्रम-तकनीक-वेब-मोबाइल-मीडिया</category>
			<pubDate>Fri, 25 May 2012 05:54:02 +0000</pubDate>
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			<title>पत्रकार दबावों के आगे झुकने की बजाय आदर्श कायम रखें : खन्‍ना </title>
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			<description>&lt;p&gt;होशियारपुर। पत्रकार समाज को आईना दिखाते हैं लेकिन आज खुद अपनी भूमिका को लेकर पत्रकारों को भी आईना देखना होगा। आज जरूरत है कि पत्रकार खुद दबावों के आगे घुटने न टेकते हुए पत्रकारिता के आदर्शों और समाज की अपेक्षाओं को साथ लेकर चलें। वरिष्ठ पत्रकार इरविन खन्ना ने यहां समूह पत्रकार संघ की ओर से आयोजित विश्व प्रेस दिवस समारोह के अपने अध्यक्षीय भाषण में उक्त बात कही। उन्होंने कहा कि दुनिया में चाहे पत्र-पत्रिकाएं पहले कहीं भी छपी हों लेकिन भारतीय इतिहास में तीन पत्रकारों का वर्णन है जो पौराणिक काल के हैं। उन्होंने कहा कि देवर्षि नारद पहले पत्रकार हैं जो सदैव जनकल्याण की ही बात करते थे और उनके समाचार देने का मकसद भी वही होता था। उसके बाद राजनीतिक पत्रकार थी मंथरा जिसने सत्ता में ऐसा परिवर्तन किया, जिसकी दूसरी मिसाल नहीं मिलती और तीसरे थे महाभारत के संजय जिन्होंने दूरदर्शन की तरह उस महायुद्ध की जीवंत प्रसारण किया।&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/bhadasblog/~4/oSmmwWOUbqk" height="1" width="1"/&gt;</description>
			<author>bhadas4media@gmail.com (NewsDesk)</author>
			<category>Featured</category>
			<category>बिजनेस-उद्योग-श्रम-तकनीक-वेब-मोबाइल-मीडिया</category>
			<pubDate>Thu, 24 May 2012 14:22:32 +0000</pubDate>
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		<item>
			<title>एनयूजे का 17वां अधिवेशन कुरुक्षेत्र में आयोजित होगा </title>
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			<description>&lt;p&gt;नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) का 17वां द्विवार्षिक अधिवेशन कुरुक्षेत्र में आयोजित किया जायेगा। उक्त निर्णय 19-20 मई को ऋषिकेश में आयोजित राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में सर्वसम्‍मति से लिया गया। इसके अलावा पंजाब में यूनियन के चुनाव करवाने के लिए नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स के राष्ट्रीय सचिव संजय राठी को निर्वाचन अधिकारी नियुक्त किया गया। यह जानकारी देते हुए एचयूजे के प्रदेश प्रवक्ता रवि मलिक ने बताया कि हरियाणा राष्ट्रीय अधिवेशन की लगातार दूसरी बार मेजबानी कर रहा है। गत वर्ष नवम्‍बर 2011 में 16वां राष्ट्रीय अधिवेशन मानेसर, गुडगांव में आयोजित किया गया था।&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/bhadasblog/~4/dmAQfHpq6tA" height="1" width="1"/&gt;</description>
			<author>bhadas4media@gmail.com (NewsDesk)</author>
			<category>Featured</category>
			<category>बिजनेस-उद्योग-श्रम-तकनीक-वेब-मोबाइल-मीडिया</category>
			<pubDate>Thu, 24 May 2012 14:09:14 +0000</pubDate>
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		<item>
			<title>टीवी मीडिया की खबरें हो रही हैं अब बेअसर </title>
			<link>http://feedproxy.google.com/~r/bhadasblog/~3/lJnrXIw3eAc/1438-2012-05-24-14-02-35</link>
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			<description>&lt;p&gt;टीवी मीडिया जिस दौर से गुजर रहा है, उसका असर समाज पर और प्रशासन तंत्र पर भी दिख रहा है। बुलेट से तेज़, दुनिया का सबसे तेज़ बुलेटिन, न्यूज़ शतक, ट्वेंटी-ट्वेंटी ..खबरों का कोई असर समाज पर प्रशासन पर नहीं दिख रहा। पहले नेशनल चैनल पर कोई खबर आ जाये तो प्रशासन भागा भागा फिरता था। दिल्ली हाईकमान हिल जाता था। सरकार की छवि पर नज़र रखने वाला तंत्र राज्य सरकार को, मुख्यमंत्री को सोते हुए जगा देता था पर अब कोई असर नहीं। उत्तराखंड में एमपी से आये तीर्थ यात्रियों की बस गिर गयी, २६ मर गए, सरकार पर कोई असर नहीं, केदारनाथ में अब तक १५ मर गए सरकार के कानों पर जू तक नहीं रेंगी.. अख़बार मोहल्ला संस्करण हो गए, वो पहले से ही बेजुबान हो गए थे, रीजनल चैनल ने खबर दिखा दी तो एक घंटे बाद वो भी बेअसर..।&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/bhadasblog/~4/lJnrXIw3eAc" height="1" width="1"/&gt;</description>
			<author>bhadas4media@gmail.com (दिनेश मानसेरा)</author>
			<category>Featured</category>
			<category>बिजनेस-उद्योग-श्रम-तकनीक-वेब-मोबाइल-मीडिया</category>
			<pubDate>Thu, 24 May 2012 14:02:35 +0000</pubDate>
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		<item>
			<title>यूपीए दो के पास बताने के लिए घोटाले सबसे बड़े उपलब्धि </title>
			<link>http://feedproxy.google.com/~r/bhadasblog/~3/AZ0SOSd4cNk/1436-2012-05-24-13-16-30</link>
			<guid isPermaLink="false">http://news.bhadas4media.com/index.php/yeduniya/1436-2012-05-24-13-16-30</guid>
			<description>&lt;p&gt;यह पहली बार है जब एक ही सरकार के पिछले कार्यकाल की तुलना की जा रही है। दरअसल यह तुलना संप्रग-2 के तीन साल पूरे होने पर की जा रही है, जिसमें सरकार को अपनी ही पूर्ववर्ती सरकार में किए गए कामों से चुनौती मिल रही है। वैसे जब संप्रग-1 गठित की गई थी तब कुछ ऐसी परिस्थितियां थी जिसने उसे नैतिक आधर पर मजबूती दी थी। इसमें सोनिया गाँधी का प्रधानमंत्री पद ठुकरा देना, मनमोहन सिंह द्वारा प्रधानमंत्री पद के लिए किसी भी प्रकार जद्दोजहद न करना या फिर बिना किसी स्वार्थ के वाम दलों द्वारा सरकार को समर्थन देना आदि ये वो तथ्य थे, जिन्होंने सरकार के प्रति आम जनमानस में विश्वास और आत्मीयता का संचार कर दिया। लेकिन उन्हीं लोगों ने जब थोड़ी बहुत सुधार कर दोबारा सरकार बनाई तो लोगों ने उसे शुरुआती दौर से ही नकारना शुरू कर दिया था। हालांकि इसके लिए कोई सुनी सुनाई बातें नहीं थी जिसकी वजह से लोगों में सरकार विरोधी सोच का संचार हुआ बल्कि इसके लिए सरकार की वो नीतियां जिम्मेदार हैं, जिन्होंने सरकार को आम आदमी से दूर कर दिया।&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/bhadasblog/~4/AZ0SOSd4cNk" height="1" width="1"/&gt;</description>
			<author>bhadas4media@gmail.com (अजय पाण्डेय)</author>
			<category>Featured</category>
			<category>सियासत-ताकत-राजकाज-देश-प्रदेश-दुनिया-समाज-सरोकार</category>
			<pubDate>Thu, 24 May 2012 13:16:30 +0000</pubDate>
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		<item>
			<title>पत्रकारों ने प्रशासन एवं ठेकेदार के खिलाफ जताया रोष </title>
			<link>http://feedproxy.google.com/~r/bhadasblog/~3/2zjifjLKhmI/1435-2012-05-24-10-56-28</link>
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			<description>&lt;p&gt;रतलाम। पॉवर हाउस रोड स्थित पुलिया का निर्माण कार्य ठेकेदार द्वारा रोकने और प्रशासन के ढीले रवैये की प्रेस क्लब के सदस्यों ने एकमत से कड़ी निन्दा की है। प्रेस क्लब की मंगलवार को आहूत आपात बैठक में सदस्यों ने एक मत से प्रेस क्लब भवन को क्षति पंहुचाने के लिए ठेकेदार की कडे़ शब्दों में निन्दा करते हुए निर्माण कार्य शीघ्र शुरू करने की मांग की है। प्रेस क्लब को भवन को गंभीर क्षति पहुंचाए जाने के बाद प्रेस क्लब द्वारा इस मामले की रिपोर्ट पुलिस को की गई थी। पुलिया निर्माण के ठेकेदार के विरुद्ध पुलिस प्रकरण दर्ज होने के बाद से ठेकेदार ने निर्माण कार्य बन्द कर दिया। इस वजह से पॉवर हाउस रोड का यातायात जहां अव्यवस्थित हो गया है वहीं पुलिया भी बेहद कमजोर हो चुकी है, जो कि कभी भी ढह सकती है। इतनी समस्याएं उत्पन्न होने के बावजूद लोकनिर्माण विभाग और प्रशासन द्वारा इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। इन्हीं मुद्दों पर चर्चा के लिए प्रेस क्लब सदस्यों की एक आपात बैठक क्लब अध्यक्ष उमेश मिश्र की अध्यक्षता में मंगलवार को सर्किट हाउस पर आयोजित की गई।&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/bhadasblog/~4/2zjifjLKhmI" height="1" width="1"/&gt;</description>
			<author>bhadas4media@gmail.com (NewsDesk)</author>
			<category>Featured</category>
			<category>बिजनेस-उद्योग-श्रम-तकनीक-वेब-मोबाइल-मीडिया</category>
			<pubDate>Thu, 24 May 2012 10:56:28 +0000</pubDate>
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		<item>
			<title>पेट्रोल बम फटने से जूनियर जर्नलिस्टों पर यह पड़ेगा असर..</title>
			<link>http://feedproxy.google.com/~r/bhadasblog/~3/yYmOelSn2xs/1434-2012-05-24-10-02-45</link>
			<guid isPermaLink="false">http://news.bhadas4media.com/index.php/creation/1434-2012-05-24-10-02-45</guid>
			<description>&lt;p&gt;पेट्रोल लगभग अस्सी रुपये लीटर हो गया. सब चैनलों ने खबरें चलाई. खूब चलाई. देर रात तक पत्रकार पी2सी मारता हुआ कमोवेश हर चैनल पर नज़र आ रहा था. लेकिन क्या किसी मालिकान ने सोचा कि इस पेट्रोल का सबसे ज्यादा असर मीडिया पर ही पड़ेगा. क्योंकि आज की तिथि में जो पत्रकार लगभग 5000 रुपये के वेतन पर कार्यरत हैं सबसे ज्यादा दिक्कत उसको ही आती है. क्योंकि वो जैसे-तैसे 70 रुपये के भाव में गाड़ी चला रहा था, लेकिन एकदम अस्सी के पास तेल पहुँच जाने से सबसे ज्यादा चोट पत्रकार को ही लगी है. मार्केट में खबर है कि कांग्रेस जाने को है इसलिए अपनी औकात दिखा रही है. अब चर्चा यह है कि सरकार एलपीजी पर भी देने वाली सब्सिडी ख़त्‍म करने जा रही है, जिसके चलते सिलेंडर भी अब लगभग 800 में ही मिलेगा.&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/bhadasblog/~4/yYmOelSn2xs" height="1" width="1"/&gt;</description>
			<author>bhadas4media@gmail.com (NewsDesk)</author>
			<category>Featured</category>
			<category>बिजनेस-उद्योग-श्रम-तकनीक-वेब-मोबाइल-मीडिया</category>
			<pubDate>Thu, 24 May 2012 10:02:45 +0000</pubDate>
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		<item>
			<title>धनवालों का धाम है अक्षरधाम</title>
			<link>http://feedproxy.google.com/~r/bhadasblog/~3/QL6CdbRbMKk/1432-2012-05-23-09-12-27</link>
			<guid isPermaLink="false">http://news.bhadas4media.com/index.php/imotion/1432-2012-05-23-09-12-27</guid>
			<description>&lt;p&gt;पिछले दिनों दिल्ली प्रवास पर थी। बीच में समय मिला तो बहुचर्चित अक्षरधाम मंदिर दर्शन का मन बनाया। भव्य इमारत और मंदिर का शिल्प मनभावन था। जैसे-जैसे आगे बढ़ते गए वैसे-वैसे मंदिर की भव्यता में डूबते गए। सुरक्षा चौकस थी। हर ओर सफाई और अनुशासन की छाप थी। मंदिरॉ में जैसे आमतौर पर प्रसाद और कुचले फूलों के ढेर पड़े दिख जाते हैं उनका यहाँ नितांत अभाव था। चलते हुए मुख्य प्रवेश द्वार तक आ गए। वहाँ एक फॉर्म भरकर अपना सामान जमा कराना था। अंदर मोबाइल, कैमरा, खाने-पीने की वस्तुए ले जाना मना था। यह भी ठीक ही लगा। मंदिर में खाना-पीना सही नहीं है, शुचिता से ही जाना चाहिए। सुरक्षा व्यवस्था से गुजरना एक लंबी प्रक्रिया थी। सब औपचारिकतायेँ पूरी करके हम मंदिर के अंदर पहुँचे। सामने ही किताबों की एक स्टाल दिखी। मंदिर और संस्थापक पर अनेक पुस्तकें वहाँ उपलब्ध थी।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/bhadasblog/~4/QL6CdbRbMKk" height="1" width="1"/&gt;</description>
			<author>yashwant@bhadas4media.com (चिदर्पिता गौतम)</author>
			<category>Featured</category>
			<category>पर्यटन-स्वास्थ्य-धर्म-अध्यात्म-संवेदना-सोच-विचार</category>
			<pubDate>Wed, 23 May 2012 09:12:27 +0000</pubDate>
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		<item>
			<title>पाकिस्तान के कई हिस्सो में ट्विटर बंद</title>
			<link>http://feedproxy.google.com/~r/bhadasblog/~3/u6C0TreuyZM/1431-2012-05-23-09-05-37</link>
			<guid isPermaLink="false">http://news.bhadas4media.com/index.php/creation/1431-2012-05-23-09-05-37</guid>
			<description>&lt;p&gt;इस्लामाबाद। पाकिस्तान के गृहमंत्री रहमान मलिक भले ही ट्विटर पर किसी तरह की पाबंदी की बात से इंकार किया है, लेकिन देश के कई हिस्सो में इस माइक्रो-ब्लॉगिंग वेबसाइट को बंद कर दिया गया है। इस पर अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। इस्लामाबाद और निकटवर्ती शहर रावलपिंडी सहित स्थानों के लोग ट्विटर का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं। मलिक ने रविवार सुबह खुद ट्वीट किया था कि पाकिस्तानी सरकार की ट्विटर और फेसबुक पर प्रतिबंध लगाने की उनकी कोई योजना नहीं है।&lt;/p&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/bhadasblog/~4/u6C0TreuyZM" height="1" width="1"/&gt;</description>
			<author>yashwant@bhadas4media.com (News Desk)</author>
			<category>Featured</category>
			<category>बिजनेस-उद्योग-श्रम-तकनीक-वेब-मोबाइल-मीडिया</category>
			<pubDate>Wed, 23 May 2012 09:05:37 +0000</pubDate>
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		<item>
			<title>‘नक्सल समर्थक’ स्वीडन के लेखक की यात्रा पर प्रतिबंध की योजना</title>
			<link>http://feedproxy.google.com/~r/bhadasblog/~3/rFaRfGonQ80/1430-2012-05-23-09-04-39</link>
			<guid isPermaLink="false">http://news.bhadas4media.com/index.php/yeduniya/1430-2012-05-23-09-04-39</guid>
			<description>&lt;p&gt;नई दिल्ली। सरकार नोबेल पुरस्कार विजेता दम्पति गुनार एवं अल्वा मिरदल के लेखक पुत्र जान मिरदल की भारत यात्रा पर प्रतिबंध लगाने की योजना बना रही है क्योंकि उसका मानना है कि वह माओवादी समर्थक है। भारत सरकार 85 वर्षीय जान मिरदल की ओर से कथित रूप से माओवादी समर्थक विचारधारा के लिए उनके भविष्य की यात्राओं पर प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रही है जिसके माता पिता प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु एवं इंदिरा गांधी के नजदीकी मित्र थे।&lt;/p&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/bhadasblog/~4/rFaRfGonQ80" height="1" width="1"/&gt;</description>
			<author>yashwant@bhadas4media.com (News Desk)</author>
			<category>Featured</category>
			<category>सियासत-ताकत-राजकाज-देश-प्रदेश-दुनिया-समाज-सरोकार</category>
			<pubDate>Wed, 23 May 2012 09:04:39 +0000</pubDate>
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		<item>
			<title>अपना तो मिले कोई : समकालीन ग़ज़ल का एक नया आसमान</title>
			<link>http://feedproxy.google.com/~r/bhadasblog/~3/NWU1fXUDrEg/1429-2012-05-23-08-45-40</link>
			<guid isPermaLink="false">http://news.bhadas4media.com/index.php/dekhsunpadh/1429-2012-05-23-08-45-40</guid>
			<description>&lt;p&gt;: &lt;strong&gt;समीक्षा - यश मालवीय : ग़ज़ल संग्रह- अपना तो मिले कोई : शायर- देवमणि पाण्डेय&lt;/strong&gt; : ग़ज़ल के पैरहन में रचनात्मकता की रूह की साँसें सँजोता ग़ज़ल संग्रह 'अपना तो मिले कोई' मेरे सामने है। हिन्दुस्तानी लबोलहजे में गुफ़्तगू करते अशआर, शायराना अंदाज़, ज़िंदगी की तक़लीफ़ों से वाबस्ता फ़कीराना ठाठ, अलमस्त तबीयत, सादगी का हुस्न, अपने वक्त के संजीदा तक़ाज़े, आज की कविता का मुहावरा, कबीराना रंग, रूमान के दिलकश गोशे, संवाद का सलीक़ा, बारीक बुनावट, एकदम अलहदा सी कहन, सजा हुआ सा शिल्प, कथ्य का बाँकपन, चोट करती भंगिमा… इन सारी रंग -रेखाओं से मिलकर संग्रह के कवि का एक आत्मीय सा स्केच तैयार होता है और वह स्केच है सुकवि देवमणि पांडेय का। जिन्होंने उन्हें मंचों से बोलते- बतियाते, संचालन करते, काव्य पाठ करते देखा-सुना और महसूस किया है, उन्हें वह संग्रह में भी बाक़ायदा बातचीत करते नज़र आएंगे।&lt;/p&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/bhadasblog/~4/NWU1fXUDrEg" height="1" width="1"/&gt;</description>
			<author>yashwant@bhadas4media.com (यश मालवीय)</author>
			<category>Featured</category>
			<category>खेल-सिनेमा-संगीत-साहित्य-रंगमंच-कला-लोक</category>
			<pubDate>Wed, 23 May 2012 08:45:40 +0000</pubDate>
		<feedburner:origLink>http://news.bhadas4media.com/index.php/dekhsunpadh/1429-2012-05-23-08-45-40</feedburner:origLink></item>
		<item>
			<title>प्रसार माध्यम में है भारत-पाक सौहार्द निमार्ण की क्षमता : छगन भुजबल</title>
			<link>http://feedproxy.google.com/~r/bhadasblog/~3/6zixfRHH3D4/1428-2012-05-23-08-40-57</link>
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			<description>&lt;p&gt;: कराची प्रेस क्लब के 14 पत्रकारों का प्रतिनिधिमंडल मुंबई दौरे पर : मुंबई : भारत और पाकिस्तान दोनों पड़ोसी देशों के बीच आपसी सौहार्द एवं मित्रता निर्माण करने की क्षमता दोनों दोशों के प्रसार माध्यमों में है। यदि दोनों देश की मीडिया इसे वास्तविक रूप से चित्रित करें तो दोनों की कटुता समाप्त हो सकती है और आपसी भाईचारा बहाल हो सकता है। यह बातें राज्य के सार्वजनिक निर्माण व पर्यटन मंत्री छगन भुजबल ने कही। श्री भुजबल मुंबई के दौरे पर आए पाकिस्तान के पत्रकारों के साथ  विशेष बातचीत के दौरान बोल रहे थे। प्रेस क्लब, मुंबई के निमंत्रण पर 21 मई, 2012 को पाकिस्तान की ओर से कराची प्रेस क्लब के 14 पत्रकारों का एक प्रतिनिधिमंडल भारत के दौरे पर आया है। प्रेस क्लब की ओर से 22 मई को स्नेहभोज का आयोजन किया गया था।&lt;/p&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/bhadasblog/~4/6zixfRHH3D4" height="1" width="1"/&gt;</description>
			<author>yashwant@bhadas4media.com (आफताब आलम)</author>
			<category>Featured</category>
			<category>सियासत-ताकत-राजकाज-देश-प्रदेश-दुनिया-समाज-सरोकार</category>
			<pubDate>Wed, 23 May 2012 08:40:57 +0000</pubDate>
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		<item>
			<title>पाकिस्तानी पत्रकारों का मत- बंद हो दुश्मनों जैसा व्यवहार, आसानी से मिले वीजा</title>
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			<description>&lt;p&gt;मुंबई : भारत-पाकिस्तान के पत्रकारों को अब नफरत के खेल में शामिल नहीं होना चाहिए. दोनों देशों के रिश्ते सुधारने में मीडिया बडी भूमिका अदा कर सकता है. हमने यह भूमिका निभानी शुरु भी कर दी है. यह कहना है कराची प्रेस क्लब के अध्यक्ष ताहिर हसन खान का. मुंबई दौरे पर आए पाकिस्तानी पत्रकारों के दल का नेतृत्व कर रहे खान ने मंगलवार को मुंबई प्रेस क्लब में आयोजित परिचर्चा में यह बात कही.&lt;/p&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/bhadasblog/~4/UsJAIXDISvc" height="1" width="1"/&gt;</description>
			<author>yashwant@bhadas4media.com (विजय सिंह 'कौशिक')</author>
			<category>Featured</category>
			<category>बिजनेस-उद्योग-श्रम-तकनीक-वेब-मोबाइल-मीडिया</category>
			<pubDate>Wed, 23 May 2012 07:45:21 +0000</pubDate>
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		<item>
			<title>Call to end ‘Traditional Rivals’ term in Indo-Pak reporting</title>
			<link>http://feedproxy.google.com/~r/bhadasblog/~3/6pH_-2-ITC0/1426-indo-pak-reporting</link>
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			<description>&lt;p&gt;MUMBAI : With a clarion call to end the use of hate language like “traditional rivals” while reporting events related India and Pakistan, a media conclave today called for creating ambience for improving relations between the two neighbours. The Press Club Mumbai, celebrating Karachi Week on the occasion of the visit of a Pakistan Media Delegation to Mumbai, hosted the conclave on the “Role of Media in Indo-Pak Relations”.&lt;/p&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/bhadasblog/~4/6pH_-2-ITC0" height="1" width="1"/&gt;</description>
			<author>yashwant@bhadas4media.com (News Desk)</author>
			<category>Featured</category>
			<category>बिजनेस-उद्योग-श्रम-तकनीक-वेब-मोबाइल-मीडिया</category>
			<pubDate>Wed, 23 May 2012 07:40:39 +0000</pubDate>
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		<item>
			<title>इलेक्ट्रानिक मीडिया ग्रपु, रुद्रपुर का चुनाव संपन्न, विजय आहूजा अध्यक्ष बने</title>
			<link>http://feedproxy.google.com/~r/bhadasblog/~3/JrxZQpy0Usc/1425-2012-05-22-06-53-33</link>
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			<description>&lt;p&gt;इलेक्ट्रानिक मीडिया ग्रुप रुद्रपुर की एक आवश्यक बैठक काशीपुर बाईपास स्थित एक होटल में संपन्न हुई. पुराणी कार्यकारिणी भंग किये जाने के साथ नयी कार्यकारिणी का गठन किया गया जिसमें अध्यक्ष पद पर विजय आहूजा निर्वाचित हुए. चुनाव अधिकारी एसटीएन न्यूज़ के राजेश चावला काली और जी न्यूज़ के धीरेन्द्र मोहन गौड़ की देख रेख में चुनाव संपन्न हुए. अध्यक्ष पद पर डीके द्विवेदी और आहूजा के बीच सीधा मुकाबला था. वोटिंग में दोनों ही पत्रकारों को नौ नौ मत प्राप्त हुए, जिसके बाद सर्वसम्मति से पर्ची सिस्टम अपनाया गया और इसमें आईबीएन7 के विजय आहूजा विजयी रहे.&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/bhadasblog/~4/JrxZQpy0Usc" height="1" width="1"/&gt;</description>
			<author>yashwant@bhadas4media.com (News Desk)</author>
			<category>Featured</category>
			<category>बिजनेस-उद्योग-श्रम-तकनीक-वेब-मोबाइल-मीडिया</category>
			<pubDate>Tue, 22 May 2012 06:53:33 +0000</pubDate>
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		<item>
			<title>कवनो ठगवा नगरिया लूटल हो</title>
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			<description>&lt;p&gt;लूट का अपना सुख है। यह बड़ा व्यापक शब्द है। अपने भीतर कई-कई अर्थ समाये हुए। लूटने का अपना मजा है, लुटने का भी। शायरों की बात मानें तो इश्क में लुटकर भी लोग खुश महसूस करते हैं। बचपन में हम भी मेले में कई बार लुटे तो कई बार लूटने का आनंद भी लिया। सबसे पहले चश्मा, घड़ी, पिपिहरी और फुलौना खरीदते थे। पैसे तो गये। अब जलेबी कैसे खायें। पहले लुटे, अब लूटने की बारी। बड़ा जोखिम होता था मगर क्या करें। जलेबियाँ छनती देख मुंह में लार भर आती। किसी दुकान पर खड़े-खड़े हिम्मत बटोरते, दुकानदार का मूड इधर-उधर हुआ नहीं कि कुछ टुकड़े लेकर नौ-दो ग्यारह। जो खाया सो खाया। जितना पेट में गया, उतना ही अपना हुआ। बाकी चीजें कितनी देर तक टिकतीं हैं। घर तक आते-आते चश्मा टूट जाता था, घड़ी हाथ से निकल कर गिर जाती थी, फुलौना पटाखे की तरह फटकर हवा में उड़ जाता था। पिंपियाते हुए घर पहुंचते पर लूटी हुई जलेबी का स्वाद देर तक बना रहता, पहले जीभ पर फिर स्मृति में।&lt;/p&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/bhadasblog/~4/erUQ8yMI15M" height="1" width="1"/&gt;</description>
			<author>yashwant@bhadas4media.com (सुभाष राय)</author>
			<category>Featured</category>
			<category>पर्यटन-स्वास्थ्य-धर्म-अध्यात्म-संवेदना-सोच-विचार</category>
			<pubDate>Tue, 22 May 2012 06:50:17 +0000</pubDate>
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		<item>
			<title>पत्रकार संगठनों पर मठाधीश हावी</title>
			<link>http://feedproxy.google.com/~r/bhadasblog/~3/tyzaTlberDQ/1423-2012-05-22-06-48-35</link>
			<guid isPermaLink="false">http://news.bhadas4media.com/index.php/creation/1423-2012-05-22-06-48-35</guid>
			<description>&lt;p&gt;शाहजहाँपुर। उत्तर प्रदेश जर्नलिस्ट एसोसिएशन में एक बार फिर मठाधीश हावी होने के लिए रणनीति बना रहे हैं। पत्रकारों के बीच चुनाव से परहेज करने वाले यह मठाधीश चुपचाप अपने ही बीच के लोगों को अध्यक्ष व महामंत्री घोषित कर देते हैं। इस बात से पत्रकारों में रोष है। पत्रकारों ने उत्तर प्रदेश जर्नलिस्ट एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष से विधिवत प्रक्रिया से चुनाव कराने की मांग की है। इसके साथ प्रेस क्लब का भी चुनाव करने की मांग की गई है।&lt;/p&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/bhadasblog/~4/tyzaTlberDQ" height="1" width="1"/&gt;</description>
			<author>yashwant@bhadas4media.com (सौरभ दीक्षित)</author>
			<category>Featured</category>
			<category>बिजनेस-उद्योग-श्रम-तकनीक-वेब-मोबाइल-मीडिया</category>
			<pubDate>Tue, 22 May 2012 06:48:35 +0000</pubDate>
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		<item>
			<title>क्या हम बच्चों की बात सुनने के लायक हैं?</title>
			<link>http://feedproxy.google.com/~r/bhadasblog/~3/GB8qqDyL81U/1422-2012-05-22-06-45-03</link>
			<guid isPermaLink="false">http://news.bhadas4media.com/index.php/weyoume/1422-2012-05-22-06-45-03</guid>
			<description>&lt;p&gt;बच्चों के यौन शोषण की घटनाओं पर शोध के दौरान मुझे एक बड़ी सीख तब मिली जब मैंने अपनी विशेषज्ञ डॉ. अनुजा गुप्ता से पूछा कि यौन शोषण का शिकार होने के बाद भी बच्चे अपने मां-बाप से उसके बारे में बताने में कठिनाई महसूस क्यों करते हैं? उनका जवाब था, क्या हम बच्चों की सुनते हैं? क्या हम उनकी बात सुनने के लायक हैं? और यह वास्तव में एक बड़ा सवाल है। मेरा अपने बच्चों के साथ क्या संबंध है? क्या मैं अपने बच्चों से उनकी परेशानियां पूछता हूं? क्या वास्तव में बच्चों की बात सुनता हूं? क्या मैं जानता हूं कि मेरे बच्चे के दिमाग में क्या चल रहा है? क्या मैं उसके भय, सपनों, उम्मीदों के बारे में जानता हूं? क्या वास्तव में मैं यह सब जानना भी चाहता हूं। क्या मैं अपने बच्चों का दोस्त हूं? यद्यपि पहली पीढ़ी की तुलना में हमारी पीढ़ी बच्चों के साथ अधिक बातचीत करती है। या कम से कम हम ऐसा मानना पसंद करते हैं..फिर भी हममें से कितने हैं जो अपने बच्चों के साथ मजबूती से जुड़े हैं? हममें से कितनों के पास एक स्वस्थ संबंध के लिए जरूरी समय और सोच है?&lt;/p&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/bhadasblog/~4/GB8qqDyL81U" height="1" width="1"/&gt;</description>
			<author>yashwant@bhadas4media.com (News Desk)</author>
			<category>Featured</category>
			<category>विश्लेषण-आलेख-ब्लाग-टिप्पणी-चर्चा-चौपाल</category>
			<pubDate>Tue, 22 May 2012 06:45:03 +0000</pubDate>
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		<item>
			<title>बाड़मेर का एक गाँव जहां गर्भ में मारे जाते हैं लड़के, लड़की होने पर बजती है थाली</title>
			<link>http://feedproxy.google.com/~r/bhadasblog/~3/NO_evFWQY9g/1421-2012-05-21-18-27-23</link>
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			<description>&lt;p&gt;यहां लड़की पैदा होने पर बजती है थाली. गर्भ में मारे जाते हैं लड़के.  राजस्थान के पश्चिमी सीमावर्ती क्षेत्र में बाड़मेर के समदड़ी क्षेत्र के  सांवरड़ा, करमावास, सुइली, मजलव लाखेटा इत्यादि गावों में ऐसा ही होता है.  कारण है यहां की महिलाएं वेश्यावृति के धंधे को संचालित करती हैं. समदड़ी  क्षेत्र के आधा दर्जन गांवों में जिस्मफरोशी रोजमर्रा की हकीकत है. यहां पर  जो होता चला आ रहा है वह निश्चित रूप से अशिक्षा, गरीबी का परिणाम है.  क्षेत्र में देह व्यापार से जुड़ी महिलाएं लड़कों को लिंग परीक्षण के  पश्चात गर्भ में ही खत्म कर देती हैं और लड़की का जन्म इनके लिए खुशियां  लेकर आता है. आमतौर पर लड़कों के जन्म पर राजस्थान में बजने वाली थाली यहां  लड़की के जन्म पर बजाई जाती है. 400 घरों वाली आबादी वाले करमावास,  सावरंड़ा क्षेत्र में मात्र 30 फीसदी ही पुरुष है बाकी सभी महिलाएं हैं.&lt;/p&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/bhadasblog/~4/NO_evFWQY9g" height="1" width="1"/&gt;</description>
			<author>yashwant@bhadas4media.com (दुर्ग सिंह पुरोहित)</author>
			<category>Featured</category>
			<category>लव-सेक्स-धोखा-साजिश-आश्चर्य-अजूबा</category>
			<pubDate>Mon, 21 May 2012 18:27:23 +0000</pubDate>
		<feedburner:origLink>http://news.bhadas4media.com/index.php/zindgani/1421-2012-05-21-18-27-23</feedburner:origLink></item>
		<item>
			<title>हाशिमपुरा कत्लेआम - सेकुलर दाग अच्छे हैं?</title>
			<link>http://feedproxy.google.com/~r/bhadasblog/~3/JQG0wOL799k/1420-2012-05-20-10-48-44</link>
			<guid isPermaLink="false">http://news.bhadas4media.com/index.php/yeduniya/1420-2012-05-20-10-48-44</guid>
			<description>&lt;p&gt;कुछ ऐसे हादसे होते हैं जिनके जख्मों के निशान इतने गहरे होते हैं कि वक्त्त भी उसे भरने से परहेज करता है और इंसानियत भी मरहम लगाने से। और ज़रा सा कुरेदने पर असहनीय दर्द की पीड़ा आंखों से छलक जाती है। ऐसे हादसे इंसानियत के मुंह पर ऐसा तमाचा है जिसका निशान जब तक इंसाफ नहीं हो जाए नहीं मिटने वाला। जब सरकार अवाम के दर्द को अनसुना कर दे और कानून से इंसाफ पाने कि मियाद इतनी लम्बी हो जाए के हकीक़त के पन्नों पर झुठ का धूल जमने लगे तो ऐसे में इंसाफ का दम घुटना लाजमी सा लगने लगता है। लेकिन इंसानी फितरत है के उम्मीद का दामन जब तक सांस रहती है नहीं छुटती या यूँ कहें उम्मीद के सिवा कोई मददगार भी तो नहीं। और शायद यही उम्मीद हाशिमपुरा के लोगों को आज भी यकीन दिलाता है की उनको इंसाफ जरुर मिलेगा।&lt;/p&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/bhadasblog/~4/JQG0wOL799k" height="1" width="1"/&gt;</description>
			<author>yashwant@bhadas4media.com (अब्दुल रशीद)</author>
			<category>Featured</category>
			<category>सियासत-ताकत-राजकाज-देश-प्रदेश-दुनिया-समाज-सरोकार</category>
			<pubDate>Sun, 20 May 2012 10:48:44 +0000</pubDate>
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		<item>
			<title>सावधान!  पत्रकारिता गिरवी रख दी गयी है</title>
			<link>http://feedproxy.google.com/~r/bhadasblog/~3/ZXdxQ-Ii5Qc/1419-2012-05-20-10-46-54</link>
			<guid isPermaLink="false">http://news.bhadas4media.com/index.php/creation/1419-2012-05-20-10-46-54</guid>
			<description>&lt;p&gt;कुछ दिनों पहले खबर आयी कि एबी बिरला ग्रुप और टी.वी.टुडे के बीच एक डील हुई. डील के तहत अब टी.वी.टुडे में ए.बी.बिरला ग्रुप का हिस्सा तकरीबन 27% फीसदी का होगा.  मद्देनज़र, एक मोटी रकम टी.वी.टुडे के हिस्से में आयी है. टी.वी.टुडे देश के प्रभावशाली मीडिया संस्थानों में से एक है. पत्रकारिता में भी इसने सराहनीय योगदान दिया. पर पिछले कुछ दिनों से इसकी गिरती साख (न्यूज़ के नाम पर, आज तक और इंडिया टुडे में परोसी जाने वाली सामग्री) और पैसों के लिए कंटेंट में गिरावट पर इसने ज़्यादा जोर लगाया. बात समझने वाली थी. पत्रकारिता पर पैसा भारी पड़ने लगा था.&lt;/p&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/bhadasblog/~4/ZXdxQ-Ii5Qc" height="1" width="1"/&gt;</description>
			<author>yashwant@bhadas4media.com (नीरज)</author>
			<category>Featured</category>
			<category>बिजनेस-उद्योग-श्रम-तकनीक-वेब-मोबाइल-मीडिया</category>
			<pubDate>Sun, 20 May 2012 10:46:54 +0000</pubDate>
		<feedburner:origLink>http://news.bhadas4media.com/index.php/creation/1419-2012-05-20-10-46-54</feedburner:origLink></item>
		<item>
			<title>'The sting operation was managed to damage the police image'</title>
			<link>http://feedproxy.google.com/~r/bhadasblog/~3/YYW2HF4wBF4/1418-the-sting-operation-was-managed-to-damage-the-police-image</link>
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			<description>&lt;p&gt;JAMMU: A property dealer, who allegedly manipulated a CD to defame senior IPS officers, has been taken into custody after he surrendered in the court of Electricity Judge in Jammu on Friday Ravinder Gupta alias Gola Shah, booked under Public Safety Act in 2006, has been arrested under FIR 42/12 under sections 341/342/352/427/452/506/464/479/471/120-B and 3/30 Arms Act and 66 (A) IT Act for concocted story videographed as a sting operation to trap few police officers, who were investigating his land grabbing FIRs a police spokesman said.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/bhadasblog/~4/YYW2HF4wBF4" height="1" width="1"/&gt;</description>
			<author>yashwant@bhadas4media.com (News Desk)</author>
			<category>Featured</category>
			<category>लव-सेक्स-धोखा-साजिश-आश्चर्य-अजूबा</category>
			<pubDate>Sun, 20 May 2012 10:31:16 +0000</pubDate>
		<feedburner:origLink>http://news.bhadas4media.com/index.php/zindgani/1418-the-sting-operation-was-managed-to-damage-the-police-image</feedburner:origLink></item>
		<item>
			<title>Pyar Ka Park - Central Park</title>
			<link>http://feedproxy.google.com/~r/bhadasblog/~3/DWCIj2RjoaA/1417-pyar-ka-park-central-park</link>
			<guid isPermaLink="false">http://news.bhadas4media.com/index.php/weyoume/1417-pyar-ka-park-central-park</guid>
			<description>&lt;p&gt;Yashwant Ji, Namaskar !!!! Agar aap ne ye mera lekh cchapa to ye mera pahla lekh hoga aur vo bhi kucch khas nahi. Shayad ise padhkar kucch log bole ki kya bakvas hai ye, Ya kuch log bole ki ye to normal hai. Kal yani ki 17th May12, ko subah maine paper me padha ki kal ka tempreture 43 Degree tha tabhi mere munh se nikla ki tabhi to kal itni fadu dhoop aur garmi thi. Kucch kam ke silsile me main CP gaya tha to maine socha ki chalo Central Park me baith kar lunch karte hai, Thodi dhandak to milege. Park ke main gate pe kadi checking ke baad maine park me entry ki, Vaah Kya najara tha !!! Aankho ko kafi sukoon mila.&lt;/p&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/bhadasblog/~4/DWCIj2RjoaA" height="1" width="1"/&gt;</description>
			<author>yashwant@bhadas4media.com (Abhishek Mishra)</author>
			<category>Featured</category>
			<category>विश्लेषण-आलेख-ब्लाग-टिप्पणी-चर्चा-चौपाल</category>
			<pubDate>Sun, 20 May 2012 10:28:46 +0000</pubDate>
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		<item>
			<title>भोपाल के दर्द को १९८९ में बेच लिया था दिल्ली दरबार के कारिंदों ने </title>
			<link>http://feedproxy.google.com/~r/bhadasblog/~3/BeH5-Zi2HdQ/1416-2012-05-19-08-57-48</link>
			<guid isPermaLink="false">http://news.bhadas4media.com/index.php/yeduniya/1416-2012-05-19-08-57-48</guid>
			<description>&lt;p&gt;भारत के इतिहास में अस्सी के दशक को एक ऐसे कालखंड के रूप में याद किया जाएगा, जिसमें आजादी की लड़ाई के मुख्य मूल्यों और मान्यताओं को तिलांजलि देने का काम शुरू हो गया था. धर्मनिरपेक्ष राजनीति और सामाजिक बराबरी का लक्ष्य हासिल करना स्वतंत्रता संग्राम का स्थायी भाव था. १९२० से १९४७ तक चली आज़ादी की लड़ाई में हर मोड़ पर इस बुनियादी समझदारी को देखा सकता था. इस दौर में देश के आम आदमी को विदेशी सत्ता के खिलाफ उठ खड़े होने की प्रेरणा महात्मा गाँधी ने दी थी. भारत का आम आदमी महात्मा गांधी के साथ था. इस आन्दोलन की राजनीति के वाहक के रूप में कांग्रेस पार्टी ने इस देश की जनता को नेतृत्व दिया था. आज़ादी के बाद महात्मा गाँधी तो चले गए थे, लेकिन जवाहर लाल नेहरू ने पूंजी के सामाजिक नियंत्रण और सोशलिस्टिक पैटर्न आफ सोसाइटी की राजनीति के ज़रिये धर्म निरपेक्षता और सामाजिक समरसता के सिद्धांत को जारी रखने का काम किया था.&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/bhadasblog/~4/BeH5-Zi2HdQ" height="1" width="1"/&gt;</description>
			<author>bhadas4media@gmail.com (शेष नारायण सिंह )</author>
			<category>Featured</category>
			<category>सियासत-ताकत-राजकाज-देश-प्रदेश-दुनिया-समाज-सरोकार</category>
			<pubDate>Sat, 19 May 2012 08:57:48 +0000</pubDate>
		<feedburner:origLink>http://news.bhadas4media.com/index.php/yeduniya/1416-2012-05-19-08-57-48</feedburner:origLink></item>
		<item>
			<title>सरकारी मशीनरी सूचना अधिकार अधिनियम को बेजान करने पर दृढ़! </title>
			<link>http://feedproxy.google.com/~r/bhadasblog/~3/WXl9LiF7zXg/1415-2012-05-19-08-40-42</link>
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			<description>&lt;p&gt;शासन प्रशासन के क्रिया कलापों में पारदर्शिता लाने और उसे नागरिकों के प्रति जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से सोनिया गांधी की अध्यक्षता में गठित राष्ट्रीय सलाहकार परिषद की पहल पर आम आदमी को सूचना पाने का प्रभावी अस्त्र 2005 के अधिनियम द्वारा दिया गया था, जनहित की दिशा में एक सराहनीय और अप्रत्याशित कदम रहा। लेकिन नीचे से उपर तक भ्रष्टाचार में आकण्ठ में डूबी सरकार की वह मशीनरी जिसका काम ही है जनता को सताना, किसी काम के लिए उसे दौड़ा-दौड़ा कर पस्त कर देना और दलालों के माध्यम से मनमाना पैसा वसूलने के बाद उसे राहत देना या नहीं भी देना। उसे यह कहां हजम होने वाला और वह धीरे-धीरे अपने चिर परिचित हरकतों से अधिनियम की भावना को दफन करने पर आमादा दिख रही है। इस अधिनियम के सक्रिय होने में उसे घाटा ही घाटा है। और तो और सरकारी मशीनरी के विरुद्ध अपील करने के लिए बनी संस्था प्रदेश के सूचना आयोग की भी वही दशा होती जा रही है, जैसे दूसरे सरकारी आयोगों की। वहां अपीलों का अम्बार लगा हुआ है। जो सुनवाई अपील के एक माह में अपेक्षित रही उसका नम्बर अब छह-छह माह में नहीं आ रहा है।&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/bhadasblog/~4/WXl9LiF7zXg" height="1" width="1"/&gt;</description>
			<author>bhadas4media@gmail.com (बनवारी जालाना )</author>
			<category>Featured</category>
			<category>सियासत-ताकत-राजकाज-देश-प्रदेश-दुनिया-समाज-सरोकार</category>
			<pubDate>Sat, 19 May 2012 08:40:42 +0000</pubDate>
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			<title>झारखंड में लोकतंत्र की उलटबांसी</title>
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			<description>&lt;p&gt;नयी आर्थिक नीतियों के लागू होते जाने के साथ कल्याणकारी राज्य की अवधारणा का अर्थ किस तरह बदलता गया, झारखंड इसका मिसाल बन गया है। एक स्थानीय आदिवासी नेता के शब्दों में कहें तो सरकार अब टाटा और मित्तल को सबसे गरीब और भूमिहीन मान कर मुफ्त में जमीन देने लगी है, जबकि आदिवासी अब सरकार की नजर में जमींदार हो गये हैं, जिनसे हर कीमत पर उनकी जमीन का मालिकाना हक छीन कर इन नवभूमिहीनों में बांटना उसकी लोकतांत्रिक जिम्मेदारी हो गयी है। समझा जा सकता है कि उदारीकरण के साथ राज्य की भूमिका खत्म नहीं हुयी है जैसा कि अक्सर कहा जाता है। बल्कि सिर्फ उसके पोजीशन में शिफ्टिंग हुयी है। यानी राज्य अब भी कल्याणकारी भूमिका में है, अमीरों के पक्ष में हिंसक होने की हद तक।    &lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/bhadasblog/~4/3YD5tlpjb9M" height="1" width="1"/&gt;</description>
			<author>bhadas4media@gmail.com (राजीव यादव )</author>
			<category>Featured</category>
			<category>सियासत-ताकत-राजकाज-देश-प्रदेश-दुनिया-समाज-सरोकार</category>
			<pubDate>Sat, 19 May 2012 08:12:12 +0000</pubDate>
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			<title>बरसों बाद एक मंच पर दिखे बरेली के दिग्‍गज पत्रकार </title>
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			<description>&lt;p&gt;बरेली। बरेली के पत्रकारों ने शुक्रवार को नायाब मिशाल कायम की। एक बैनर के नीचे वह तमाम पत्रकार दिखें जो प्रायः पत्रकारों द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में नजर नहीं आते थे। पत्रकारों को जोड़ने का काम किया बरेली प्रेस क्लब बरेली ने। कार्यक्रम था, बरेली प्रेस क्लब बरेली द्वारा आयोजित प्रेस से मिलिए का। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री भगवत सरन गंगवार। बरेली प्रेस क्लब बरेली लगभग 20 वर्ष पुराना संगठन है। इसमें बरेली के जाने माने वरिष्ठ पत्रकार इस संगठन के सदस्य हैं। प्रायः यह संगठन शुसुप्त अवस्था में रहता है। लेकिन गाह-बगाहे धमाके करता रहा है। ऐसा ही धमाका बरेली की प्रेस राजनीति में आज हुआ। स्थानीय पत्रकारों की राजनीति के चलते उपजा और श्रमजीवी पत्रकार संगठन मृत पडे़ हैं।&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/bhadasblog/~4/k89CSuw1O-I" height="1" width="1"/&gt;</description>
			<author>bhadas4media@gmail.com (अनुरुद्ध तिवारी )</author>
			<category>Featured</category>
			<category>बिजनेस-उद्योग-श्रम-तकनीक-वेब-मोबाइल-मीडिया</category>
			<pubDate>Sat, 19 May 2012 07:48:47 +0000</pubDate>
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