<?xml version='1.0' encoding='UTF-8'?><?xml-stylesheet href="http://www.blogger.com/styles/atom.css" type="text/css"?><feed xmlns='http://www.w3.org/2005/Atom' xmlns:openSearch='http://a9.com/-/spec/opensearchrss/1.0/' xmlns:blogger='http://schemas.google.com/blogger/2008' xmlns:georss='http://www.georss.org/georss' xmlns:gd="http://schemas.google.com/g/2005" xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'><id>tag:blogger.com,1999:blog-8049618298159816963</id><updated>2024-12-19T08:54:56.505+05:30</updated><category term="True Story"/><category term="Gangwar"/><category term="Mumbai Underworld"/><category term="Underworld"/><category term="Underworld and Dawood Ibrahim"/><category term="Underworld gangwar"/><category term="dawood and chota Rajan"/><title type='text'>Jurm ki duniya</title><subtitle type='html'>देश और दुनिया के जरायम से जुडे हैरत भरे किस्से</subtitle><link rel='http://schemas.google.com/g/2005#feed' type='application/atom+xml' href='http://jurmkiduniya.blogspot.com/feeds/posts/default'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8049618298159816963/posts/default?redirect=false'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://jurmkiduniya.blogspot.com/'/><link rel='hub' href='http://pubsubhubbub.appspot.com/'/><author><name>sunil verma</name><uri>http://www.blogger.com/profile/06462864962085848512</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='27' height='32' src='//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiM8mYTF1rSTG5OLwjuKe8ktdZwaNsHWlaRFf283uYibqX2zwZT1C0LITcRz_c-QhdhjEK686quBdQwPl6yirK3P5dvBOclUZ-nAWjIgkhf_dw38PrIOFgSWi-PC_Q-ilg/s113/sunil+pic2.jpg'/></author><generator version='7.00' uri='http://www.blogger.com'>Blogger</generator><openSearch:totalResults>10</openSearch:totalResults><openSearch:startIndex>1</openSearch:startIndex><openSearch:itemsPerPage>25</openSearch:itemsPerPage><blogger:adultContent>true</blogger:adultContent><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8049618298159816963.post-7625298072707070481</id><published>2019-07-17T19:41:00.001+05:30</published><updated>2019-07-17T19:41:07.901+05:30</updated><title type='text'>दूसरों की कुंडली बांचने वाला पढ़ ना सका अपनी कुंडली</title><content type='html'>&lt;div dir=&quot;ltr&quot; style=&quot;text-align: left;&quot; trbidi=&quot;on&quot;&gt;
&lt;h2 style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;
&lt;span data-mce-selected=&quot;inline-boundary&quot; style=&quot;background: rgb(232, 234, 235); border-radius: 2px; box-shadow: rgb(232, 234, 235) 0px 0px 0px 1px; box-sizing: inherit; color: #191e23; font-family: &amp;quot;Noto Serif&amp;quot;; font-size: 16px; font-weight: 600; margin: 0px -2px; padding: 0px 2px; white-space: pre-wrap;&quot;&gt;सुनील वर्मा ﻿&lt;/span&gt;&lt;/h2&gt;
&lt;div&gt;
&lt;span data-mce-selected=&quot;inline-boundary&quot; style=&quot;background: rgb(232, 234, 235); border-radius: 2px; box-shadow: rgb(232, 234, 235) 0px 0px 0px 1px; box-sizing: inherit; color: #191e23; font-family: &amp;quot;Noto Serif&amp;quot;; font-size: 16px; font-weight: 600; margin: 0px -2px; padding: 0px 2px; white-space: pre-wrap;&quot;&gt;&lt;h3 style=&quot;color: black; font-family: &amp;quot;Times New Roman&amp;quot;; white-space: normal;&quot;&gt;
&lt;span style=&quot;background-color: #8ed1fc; color: #2c2929; font-family: &amp;quot;Source Sans Pro&amp;quot;, sans-serif; font-size: 20px;&quot;&gt;एक आशिक मिजाज ज्‍योतिषाचार्य जो दुसरों का भविष्‍य बताने के दावे करता था लेकिन एक दिन अपनी किस्‍मत में लिखी राहु की दशा को ना पढ़ सका और फिर जो कुछ हुआ उसी पर आधारित सच्‍ची कहानी&lt;/span&gt;&lt;/h3&gt;
&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;
&lt;a href=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjwupwfYD9FFjj2YiX81shOG3GgfyMIiSuZRn3cPeoQSxgaoZBN9Pg5Sv7ZF4U99Q5oviFfRxGtzq4BVIbcaoX6zDwP8mD_haSyKeZ8JW7PkpJA0zAhGR-avEkZhidaurp5gKftbPK5tXJs/s1600/acharya+atul+ji+on+sadhna+tv.jpg&quot; imageanchor=&quot;1&quot; style=&quot;margin-left: 1em; margin-right: 1em;&quot;&gt;&lt;img border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;493&quot; data-original-width=&quot;727&quot; height=&quot;432&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjwupwfYD9FFjj2YiX81shOG3GgfyMIiSuZRn3cPeoQSxgaoZBN9Pg5Sv7ZF4U99Q5oviFfRxGtzq4BVIbcaoX6zDwP8mD_haSyKeZ8JW7PkpJA0zAhGR-avEkZhidaurp5gKftbPK5tXJs/s640/acharya+atul+ji+on+sadhna+tv.jpg&quot; width=&quot;640&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;
अभिषेक शर्मा (32) खुद को लोगों से अलग-अलग नामों से रूबरू कराता था। किसी को अपना परिचय अभिषेक वशिष्‍ठ, किसी को अभिनव शर्मा तो किसी को अभी शर्मा के नाम से देता था।&lt;/div&gt;
अभिषेक शरीर से थोडा भारी भरकम और चेहरे से साधारण, मगर आकर्षक व्यक्तित्व का स्वामी था। उसकी एक खूबी थी कि एक बार वह जिस व्यक्ति से मिल लेता था उस पर वह अपना प्रभाव छोड़ देता और मिलने वाला उसका मुरीद हो जाता था। &lt;br /&gt;
मेघा मलिक भी ऐसी ही युवती थी जो पहली ही मुलाकात में अभिषेक से इतनी प्रभावित हो गई कि मेघा ने अभिषेक को अपना जीवन साथी बनाने का फैसला कर लिया। अभिषेक के परिवार में तो कोई नहीं था लेकिन मेघा के परिवार ने हंसी खुशी दोनों को गठबंधन की गांठ में बांध दिया। अभिषेक और मेघा मलिक की शादी के बारे में जानने से पहले अभिषेक के बारे में जानना जरूरी है। अभिषेक शर्मा एक ऐसा महत्वाकांक्षी युवक है जिसकी परवरिश उसके नाना और परनाना ने की है। &lt;br /&gt;
अभिषेक की उम्र उस वक्त महज 3 साल की थी, जब उसके पिता नंदकिशोर शर्मा और मां सुनीता देवी का आपसी मतभेदों के बाद तलाक हो गया। दरअसल शादी के बाद से ही उसके माता पिता की कभी आपस में बनी नहीं। सुनीता ने तलाक लेने के बाद मुकेश नाम के दुसरे व्यक्ति से दूसरी शादी कर ली और पंजाब के जीरकपुर में जाकर रहने लगी। सुनीता ने दूसरी शादी कर ली तो उसके बाद नंदकिशोर ने भी अपना घर बसा लिया और हरिद्वार जाकर रहने लगा। हालांकि माता-पिता के तलाक के वक्त अभिषेक की उम्र मात्र 3 साल थी। लेकिन युवावस्था और जवानी की दहलीज पर पहुंचने के बाद भी उसने कभी अपने माता पिता से मिलने की कोशिश नहीं की। उसकी परवरिश नाना और परनाना के परिवार ने मिलकर की थी।&lt;br /&gt;
अभिषेक के नाना डॉ राजेंद्र शर्मा और नानी संतोष देवी, परनाना स्वर्गीय नीलकंठ जो एक नामचीन ज्योतिषी थे और परनानी हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले में पिहोवा तहसील के पुराना बाजार में रहते है। अभिषेक की मां सुनीता भी भी शादी के बाद अपने नाना के पास ही रही और उन्होंने वहीं पर अभिषेक को जन्म दिया था। जब उसके माता पिता ने एक दूसरे से संबंध खत्म कर अपनी नई जिंदगी बसा ली तो अभिषेक को नाना-नानी ने अपने पास ही रख लिया । अभिषेक को बचपन से माता पिता का प्यार तो नहीं मिला लेकिन ननिहाल में उसे जो परवरिश और प्यार मिला उसके कारण अभिषेक को कभी माता पिता की कमी महसूस नहीं हुई।&lt;br /&gt;
अभिषेक को ननिहाल में न तो कभी पैसे की कमी महसूस हुई और ना ही परिवार के प्यार की। उसका हम उम्र मामा उमाकांत उर्फ सोनू भी अभिषेक को अपना भांजा नही बल्कि छोटे भाई की तरह प्यार देता था।&lt;br /&gt;
माता पिता का फर्ज निभाने वाले नाना-नानी ने अभिषेक की पढ़ाई लिखाई और शिक्षा दीक्षा दिलाने में कभी कोई कमी नहीं छोड़ी। अभिषेक के परनाना ने 9 साल की उम्र से ही अभिषेक को ज्योतिष व पंडिताई के कर्मकांड की शिक्षा दीक्षा देनी शुरू कर दी थी, जिससे धर्म-कर्म और ज्योतिष में अभिषेक ने अच्छा ज्ञान हासिल कर लिया। यही कारण था कि लोगों की कुडंली उनके मस्‍तक की रेखा और हाथों की लकीरें देखकर वह लोगों को उनके भूत और भविष्‍य के बारे में जब बताता तो वे अभिषेक की ज्‍योतिष कला के मुरीद होकर रह जाते। लेकिन अभिषेक अपने इस ज्ञान के कारण गुमनामी की जिंदगी बसर नहीं करना चाहता था। वह चाहता था कि उसकी ज्‍योतिष कला दुनिया भर तक पहुंचे इसके जरिए वह बहुत पैसा भी कमाना चाहता था। उन दिनों टीवी चैनलों पर ज्‍योतिष व भविष्‍य फल बताने वाले कुछ कार्यक्रम शुरू हुए थे जिसमें बैठने वाले ज्‍योतिषाचार्यो को अचानक प्रसिद्धि मिलने लगी थी। अभिषेक ने एक बड़े ज्‍योतिषी के रूप में प्रचार पाने के लिए इससे एक कदम आगे बढने की ठान ली । उसने तय कर लिया कि वह पत्रकारिता की डिग्री लेकर अपनी ज्‍योतिष विद्या के सहारे एक दिन लोकप्रियता के शिखर पर भी पहुंचेगा और ढेर सारा पैसा भी कमायेगा।&amp;nbsp;&amp;nbsp; &lt;br /&gt;
बस उस पर पत्रकार बनने की धुन सवार हो गई। चूंकि अभिषेक की रुचि पत्रकार बनने की थी, इसलिए इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी करने के बाद नाना-नानी ने साल 2000 में उसे कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में पत्रकारिता की पढाई के लिए दाखिला दिलवा दिया। पांच साल की पढाई के बाद अभिषेक ने 2005 में उसने पत्रकारिता में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल कर ली। पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी करने के बाद अभिषेक ने दैनिक पंजाब केसरी, दैनिक भास्कर, अमर उजाला, जगत क्रांति, हरिभूमि जैसे अखबारों के साथ थोडे-थोड़े दिन बतौर ट्रेनी पत्रकार काम किया। टीवी पत्रकारिता सीखने के लिए अभिषेक ने  एनडीटीवी इंडिया, ईटीवी, इंडिया न्यूज़, स्टार न्यूज़ जैसे लीडिंग न्यूज़ चैनलों में भी स्ट्रिंगर के रूप में और न्यूज डेस्क पर काम किया। पत्रकारिता के गुर सीखने के बाद अभिषेक ने अपनी रुचि के मुताबिक धर्म-कर्म, अध्यात्म और ज्योतिषी में अपनी किस्‍मत अजमानी शुरू की । उसने ऑनलाइन टेलीशॉपिंग और जन्मकुंडली बनाने का काम शुरू कर दिया। &lt;br /&gt;
अभिषेक जब पत्रकारिता की पढाई कर रहा था उन्‍हीं दिनों साल 2002 में परिवार वालों ने हिमाचल प्रदेश की रहने वाली एक लडकी कविता से अभिषेक की शादी कर दी। कविता बेहद संवेदनशील और घरेलू लडकी थी। शुरूआत में अभिषेक और कविता के संबध दुसरे पति-पत्‍नियों की तरह एक दम सामान्‍य थे। शादी के कुछ समय बाद अभिषेक ओर कविता का एक बेटा भी हुआ जिसका नाम उन्होंने प्यार से मांसू रखा। इन दिनों उसकी उम्र अब 8 साल है। युवावस्था से ही अभिषेक थोड़ा रंगीन मिजाज का था। अभिषेक चूंकि अक्सर घर से बाहर रहता था, कभी नौकरी के सिलसिले में तो कभी किसी दूसरे काम की वजह से। वह जब कविता के पास भी होता तब भी वह अपने साथ काम करने वाली लडकियों और महिलाओं से टेलीफोन पर लंबी–लंबी बात करने में अपना वक्‍त बिताता था। इसलिए पत्नी कविता से अक्सर उसका झगड़ा होने लगा। बाद में दोनों के बीच विवाद इस कदर बढ़ गया कि अक्‍सर दोनों के बीच मारपीट होंने लगी और दोनों के परिवारों को बार-बार उनके बीच हस्‍तक्षेप करना पडता। परिणाम ये हुआ कि अब इसी कारण अभिषेक अक्‍सर घर से बाहर ही रहने लगा। पति के बिना कविता अपने ननिया सास ससुर के पास ही रहती थी। नाना नानी को भी अभिषेक का इस तरह परिवार और पत्‍नी का त्‍याग अच्‍छा नहीं लगा। लिहाजा जब उन्‍होंने उस पर कविता के साथ रहने का दबाव देना शुरू किया तो उसने कविता से अलग होने का फैसला कर लिया। 2010 में अभिषेक ने कविता को गांव में पंचायत करके तलाक दे दिया और तय हुआ कि उसका बेटा भी कविता के पास ही रहेगा। हालांकि कानूनी रूप से दोनों के बीच तलाक नहीं हुआ था इसलिए कविता अपने बेटे के साथ अभिषेक के नाना-नानी के पास ही रहने लगी। अभिषेक ने अपने माता पिता के हिस्‍से की प्रॉपर्टी अपने नाना-नानी को बेच दी और जो पैसा मिला उसमें से बडी रकम&amp;nbsp;हरजाने के रूप में अपनी पत्नी कविता को दे दी। बाकी रकम से उसने अपना खुद का बिजनेस शुरू कर दिया। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;figure class=&quot;wp-block-image&quot;&gt;&lt;img alt=&quot;&quot; class=&quot;wp-image-1743&quot; src=&quot;http://crimeindia.in/wp-content/uploads/2019/07/media-ke-naam-par-logo-ko-aise-prabhawit-karta-thaa-1-697x1024.jpg&quot; /&gt;&lt;figcaption&gt; अभिषेक सेटेलाइट चेनलाै की नकल के डिजीटल चैनल चलाकर करता था धाेखाधड़ी&lt;/figcaption&gt;&lt;/figure&gt;अभिषेक को पता था कि हमारे देश में लोग धर्म-कर्म और अंधविश्वास पर ज्यादा यकीन करते हैं इसलिए उसने पत्रकारिता में धर्म-कर्म, ज्‍योतिष और कुंडली का जो काम सीखा था, उसी को अपना माध्यम बनाया मीडिया कारोबार के जरिए इसे बढाने का फैंसला किया। उसने चंडीगढ़ में वेब टीवी पोर्टल और यू ट्यूब चैनल के जरिए कुंडली और धर्म-कर्म जैसे विषयों पर लिखने-पढने और वीडियों न्‍यूज बनाने का काम शुरू कर दिया। इस काम से वाकई उसे प्रसिद्धि मिलनी शुरू हो गई। अभिषेक वशिष्‍ठ ने 2012 में साधना चैनल पर खुद को ज्योतिषाचार्य आचार्य अतुल जी महाराज बताकर एक प्रोग्राम देना शुरू कर दिया। अद्भुत ज्‍योतिष समाधान के नाम से शुरू हुए इस कार्यक्रम में उसके नंबर भी प्रसारित किए जाते थे और वह प्रोग्राम के बीच में फोन करने वाले दर्शकों से उनकी जन्‍मतिथि व जन्‍मस्‍थान के बारे में पूछताछ कर उनके भविष्‍य के बारे में बताता था। कुछ दिन तक तो यह प्रोग्राम काफी अच्‍छा चला। लेकिन बाद में कुछ दर्शकों ने चैनल से यह शिकायत की कि आचार्य अतुल जी की बतायी गई ज्‍यादातर बाते झूठ निकलती है। इसके बाद टीवी चैनल का माथा ठनका और उन्‍होंने आचार्य अतुल जी के बारे में जानकारी जुटायी तो पता चला कि असल में वह अतुल जी महाराज नहीं बल्कि ज्‍योतिष की जानकारी रखने वाला अभिषेक वशिष्‍ठ नाम का पत्रकार है जो खुद को एक विख्‍यात ज्‍योतिष के रूप में स्‍थापित करने के लिए चैनल का सहारा ले रहा था। ये जानकारी मिलने के बाद टीवी चैनल ने उस प्रोग्राम को बंद कर अभिषेक से किनारा कर लिया। &lt;br /&gt;
हालांकि अभिषेक ने कुछ दूसरे टीवी चैनलों पर भी इसके बाद अलग-अलग नामों से ज्योतिष के रूप में अपने प्रोग्राम देने की कोशिश की मगर फिर वह सफल नहीं हो सका। लिहाजा उसने अपना सारा ध्‍यान अपने यू ट्यूब के प्रोग्राम और वेबसाइटों के जरिए इस काम को बढाने पर केन्द्रित कर दिया।&amp;nbsp; &lt;br /&gt;
2016 में अभिषेक ने अपना चंडीगढ़ वाला ऑफिस बंद कर दिया और देहरादून के रेसकोर्स रोड पर इंडियन मीडिया ग्रुप के नाम से एक नई कंपनी बनाकर फिर से मीडिया का वहीं कारोबार शुरू कर दिया। दरअसल, चंडीगढ से अपना दफ्तर बंद करके देहरादून में नया ठिकाना बनाने का कारण ये था कि वहां पर लोग अब अभिषेक की ज्‍योतिष विद्या के झांसे में आना बंद हो गए थे और उसका कारोबार वहां मंदा पडने लगा था। &lt;br /&gt;
देहरादून में रहते हुए ही उसने अब दुसरे तरीको से भी पैसा कमाने के तरीके ईजाद कर लिए थे। चंडीगढ के सेक्‍टर 34 ए में वह जीबीएम डेवलपर एंड प्रमोटर नाम की कंपनी चलाने वाले सुभाष बंसल से मिला। अभिषेक ने खुद को एक अपनी ही कंपनी इंडिया मीडिया कंपनी का कर्मचारी बताया और और अपना परिचय विशाल शर्मा के रूप में दिया। उसने सुभाष बंसल से कहा कि उसकी कंपनी अपने लिए एक जमीन तलाश कर रही है। वह उनकी कंपनी से अपनी कंपनी की सेल परचेज डील करवा देगा लेकिन इसके बदले वह दस फीसदी कमीशन लेगा। सुभाष बंसल को विशाल बने अभिषेक ने खुद की देहरादून वाली कंपनी के ऐसे सभी दस्‍तावेज भी दिखाए जिन्‍हें देखकर सुभाष बंसल को भरोसा हो गया कि वह उस कंपनी का अधिकृत कर्मचारी है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;figure class=&quot;wp-block-image&quot;&gt;&lt;img alt=&quot;&quot; class=&quot;wp-image-1744&quot; src=&quot;http://crimeindia.in/wp-content/uploads/2019/07/acharya-atul-ji.jpg&quot; height=&quot;446&quot; width=&quot;640&quot; /&gt;&lt;figcaption&gt;कुछ समय तक वाे एक नामचीन चैनल में ज्याेतिषी बनकर लाेगाें की कुंडली बताता रहा&lt;/figcaption&gt;&lt;/figure&gt;सुभाष बंसल से उसने चंडीगढ के सेक्‍टर 15 में अपनी कंपनी इंडिया मीडिया ग्रुप कंपनी के लिए 6 नवंबर 2016 को एक करोड दो लाख रूपए की डील फाइनल की और इसके बदले उसने कंपनी को सेल डील के बदले फर्जी चेक दे दिया और ब्रोकरेज के रूप में पांच लाख की रकम ऐंठ ली। मगर शक होंने पर सुभाष बंसल ने जांच पडताल करने पर उसे वहीं रोक लिया। चेक की जांच करायी तो वह फर्जी निकला और सुभाष बंसल ने सेक्‍टर 34 पुलिस को खबर कर दी। चंडीगढ पुलिस ने अभिषेक के खिलाफ अपराध संख्‍या 409 दर्ज करके अभिषेक को भादंस की धारा 419/420/467 में गिरफ्तार कर लिया इस मामलें में कुछ माह बाद अभिषेक की जमानत हो गई। चूंकि देहरादून में उसने केवल फ्राड करने की नीयत से दफ्तर खोला था जिसे उसने जमानत पर आने के बाद बंद कर दिया। चंडीगढ में असफलता हाथ लगने के बाद अभिषेक ने देहरादून से अपना बोरिया बिस्‍तर समेटा और गुरूग्राम आ गया। यहां उसने सोहना रोड पर चंडीगढ एवेन्‍यू सोसाइटी में एक बडा फ्लैट किराए पर लिया और यहां एडीएन स्‍टार न्‍यूज के नाम से डिजीटल चैनल और समाचार पत्र शुरू कर दिया। इस चैनल व अखबार का एक दफ्तर अभिषेक ने नोएडा सेक्‍टर 126 की तपस्‍या कारपोरेट हाइट में भी खोलाा लेकिन इस दफ्तर को खोलने का मकसद केवल अपने क्‍लाइंट के साथ मी‍टिंग करना था। उसका सारा काम गुरूग्राम के दफ्तर से ही होता था। यहां उसने तीन चार महिलाओं व तीन लडको को काम पर रखा। फरवरी 2018 में उसका एडीएन स्‍टार न्‍यूज पेपर भी शुरू हो गया। इसी नाम के डिजीटल चैनल का लोगों और डिजाइनिंग अभिषेक ने बिल्‍कुल स्‍टार न्‍यूज से मिलती जुलती हुई बनवायी जिसके देखकर लगता था कि स्‍टार न्‍यूज से एबीपी न्‍यूज के नाम में तब्‍दील हुआ स्‍टार न्‍यूज चैनल एडीएन स्‍टार न्‍यूज के नए नाम से शुरू हो रहा है। इस डिजीटल चैनल का अभिषेक ने फेसबुक और सोशल मीडिया पर खूब प्रचार किया जिस कारण भ्रम के कारण बहुत से लोगों इस डिजीटल चैनल के साथ जुडकर काम करने लगे। इसमें न्‍यूज तो नाम के लिए दिखाई जाती थी अधिकांश प्रोग्राम कुंडली और टेलीशॉपिंग से जुडे हुए होते थे। अभिषेक ने पैसा कमाने के लिए एक बार फिर छोटे मोटे दूसरे सेटेलाइट चैनलों पर भविष्‍य और कुंडली से जुडे प्रोग्राम देने शुरू कर दिए थे। &lt;br /&gt;
कुंडली और दूसरों का भविष्‍य बताते-बताते अभिषेक को एक बात का अनुभव हुआ कि लोगों की सबसे ज्‍यादा चिंता या तो अपने रोजगार से जुडी होती है या बेटियों की&amp;nbsp; शादी और उनके लिए योग्‍य वर को लेकर। क्‍योंकि उसके कुंडली प्रोग्राम में लोग अक्‍सर अपनी बेटियों के लिए अच्‍छा रिश्‍ता मिलने का लेकर सवाल पूछते थे। अभिषेक किशोरावस्‍था से ही रंगीन और आशिक मिजाज प्रवृत्ति का था। उसने सोचा क्‍यों न वह खुद भी शादी कर लें। अभिषेक जवान भी था और अच्‍छा खासा पैसा भी कमाता था। बातचीत करने में तो वह इतना पारंगत था कि एक बार जो भी उससे बात कर लेता प्रभावित हुए बिना नहीं रहता। बस उसने इसी का ध्‍यान में रखकर मेट्रीमोनियल की अलग-अलग वेबसाइट्स पर अलग-अलग नाम से फर्जी आईडी बनाकर अपना प्रोफाइल बनाया। सभी प्रोफाइल मे उसने खुद को अविवाहित और अनाथ बताते हुए, मीडिया हाउस कंपनी का मालिक और लाखों कमाने वाला बताया था। हा हर मेट्रोमोनियल साइट्स पर नाम अ‍लग रखा था। कहीं अभिषेक वशिष्‍ठ तो कहीं अभिषेक शर्मा, कहीं अभिनव शर्मा नाम लिखा था। दिलचस्‍प बात ये थी कि मीडिया के क्षेत्र में काम करते अभिषेक जालसाजी के सभी गुर सीख गया था। उसने अपने सभी नामों की न सिर्फ आईडी और आधार व पहचान पत्र बनवा रखे थे बल्कि अलग-अलग नाम से कई मोबाइल नंबर भी रखता था। मैट्रीमोनियल की हर साइट पर उसने अलग अलग नंबर दे रखे थे। &lt;br /&gt;
इसका परिणाम ये निकला कि उसकी प्रोफाइल से प्रभावित होकर कुछ लडकियों व उनके परिजनों ने अभिषेक से चैट के जरिए व काल के जरिए संपर्क करना शुरू कर दिया। वह जब भी किसी परिवार से मिलने जाता तो किराए की बीएमडब्‍लू गाडी लेकर जाता था और उसे अपनी बताता। नोएडा और गुरूग्राम में उसने जो किराए के फ्लैट ले रखे थे उन्‍हें भी वह लोगों को अपना बताता था। जब कोई उससे उसकी आमदनी पूछता तो वह 40 से 50 लाख सलाना की कमायी बताता।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;figure class=&quot;wp-block-image&quot;&gt;&lt;img alt=&quot;&quot; class=&quot;wp-image-1745&quot; src=&quot;http://crimeindia.in/wp-content/uploads/2019/07/photo-recover-in-abhishek-mobile-1024x832.jpg&quot; height=&quot;520&quot; width=&quot;640&quot; /&gt;&lt;figcaption&gt;पुलिस काे एक फाेटाे मिली जिसमें वाे किसी लडकी की मांग भर रहा है&lt;/figcaption&gt;&lt;/figure&gt;मैट्रीमोनियल साइट जीवनसाथी डॉट कॉम पर उसने अभिषेक वशिष्‍ठ पुत्र नंद किशोर के नाम से ऐसी ही प्रोफाइन बना रखी थी। जिसे देखकर जनवरी 2018 में नई दिल्‍ली के तानसेन मार्ग पर रहने वाले एयर कंडीशनर इंजीनियर नरेश मलिक ने अभिषेक से फोन पर संपर्क कर मिलने की इच्‍छा जताई और बताया कि वह अपनी इकलौती बेटी मेघा के लिए उससे शादी की बात करना चाहता है।&amp;nbsp;&amp;nbsp; &lt;br /&gt;
नरेश मलिक की इच्‍छा के मुताबिक अभिषेक अपनी किराए की बीएमडब्‍लू कार लेकर गोल मार्किट के बंगला स्‍वीटस में आकर नरेश मलिक से मिला। पहली ही नजर में नरेश मलिक अभिषेक से बेहद प्रभावित हुए। शरीर से अभिषेक थोडा भारी जरूर था लेकिन उसका व्‍यक्त्वि बेहद आकृर्षक  था। उसकी बातों में ऐसा प्रभाव था कि नरेश मलिक ने पहली ही मुलाकात के बाद फैंसला कर लिया कि वह अपनी बेटी की शादी अभिषेक के साथ ही करेंगे। यह जानकार तो उन्‍हें और भी प्रसन्‍नता हुई की अभिषेक एकदम अकेला था। उसने उन्‍हें बताया कि उसके माता पिता की कई साल पहले एक हादसे में मौत हो गई है। करीबी रिश्‍तेदारों में भी कोई नहीं है दूर के रिश्‍तेदारों से उसका कोई वास्‍ता नहीं है। उसके पास नोएडा व गुरूग्राम में अपना घर है और वह एक मीडिया कंपनी का मालिक है तथा 40 से 50 लाख रूपए हर साल कमाता है। अपली बीएमडब्‍लू गाडी है। &lt;br /&gt;
एक पिता को क्‍या चाहिए। बेटी के लिए सुंदर, सुशील और कमाने वाला पति और अगर परिवार के नाम पर वह एकदम अकेला हो तो सोने पे सुहागा ही होगा। बातचीत से नरेश मलिक ये भी जान गए कि अभिषेक एक दम धर्म भीरू स्‍वभाव का लडका था। उन्‍होंने अभिषेक से मुलाकात की बात अपने परिवार को बतायी तो उसकी खूबियां जानकार सभी बहुत खुश हुए। नरेश मलिक की पत्‍नी सुप्रीम कोर्ट के रजिस्‍ट्रार आफिस में नौकरी करती है। जबकि उनका बडा बेटा विवाहित है और उनके साथ ही रहता है। परिवार की सहमति से अभिषेक से परिवार के दूसरे सदस्‍यों का मिलने जुलने का सिलसिला शुरू हुआ। नरेश मलिक की बेटी मेघा भी उससे मिली। सभी को अभिषेक संस्‍कारी और अपने लायक लडका लगा। मेघा एक दिन अभिषेक के साथ उसके घर गुरूग्राम भी गई वहां बडे़ से फ्लैट में ही उसका डिजीटल टीवी और अखबार का चल रहा ऑफिस तथा वहां काम करने वाले कर्मचारियों को भी उसने देखा तो उसे संतुष्टि हो गई कि अभिषेक ने जो कुछ बताया है सब ठीक है। नरेश मलिक व उनकी बेटी मेघा ने इस दौरान मोका पाकर अभिषेक की बीउमडब्‍लू कार के ड्राइवर राजकुमार से भी अभिषेक के बारे में छानबीन की तो उसने भी बताया कि अभिषेक में न तो कोई बुरी लत है न ही आजकल के दूसरे नौजवानों की तरह उनमें कोई ऐब है। इतने बड़े कारोबार और प्रोपर्टी के बावजूद उनमें कोई घमंड नहीं है। &lt;br /&gt;
बस मलिक परिवार को अब लगा कि देर करना ठीक नहीं है कहीं ऐसा न हो कि हाथ से लडका निकल जाए लिहाजा उन्‍होंने 29 जनवरी 2018 को अभिषेक को अपने घर बुलाया और उसे शगुन में 11 हजार रूपए व नारियल देकर तिलक करके उसका अपनी बेटी के साथ रिश्‍ता पक्‍का कर दिया। जब बात पक्‍की हो गई तो बदले में अभिषेक ने भी मेघा को सोने की एक अंगूठी पहना दी। शादी पक्‍की होंने के बाद मेघा एक बार अभिषेक की जांच पडताल करने गुरूग्राम के उसके फ्लैट पर पहुंची लेकिन इस बार भी उसे कोई शक नहीं हुआ। आखिर 10 मार्च को 2018 को नरेश मलिक के परिवार ने अपने रिश्‍तेदारों और मित्रों को बुलाकर आईटीसी मौर्या होटल में अभिषेक व मेघा की रिंग सेरेमनी  कर दी। इस आयोजन में करीब 4 लाख खर्च हुआ। रिंग सेरेमनी के&amp;nbsp; दो दिन बाद ही मलिक परिवार ने गाजियाबाद के एक आर्य समाज मंदिर में दोनों की सादगी पूर्ण ढंग से शादी कर दी। शादी में मलिक परिवार ने अभिषेक को लाखों रूपए नगद व बेटी व दामाद को लाखों के जेवर दिए। &lt;br /&gt;
चूंकि अभिषेक के घर में शादी के बाद के घरेलू रीति रिवाज करने वाला काई नहीं था लिहाजा पहले तो एक-दो दिन अभिषेक नवविवाहित पत्‍नी मेघा को लेकर दो दिन तक गुरूग्राम के रेडीसन ब्‍लू होटल में रहा और उसके बाद 15 दिन के लिए हनीमून मनाने के लिए केरल चला गया। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;figure class=&quot;wp-block-image&quot;&gt;&lt;img alt=&quot;&quot; class=&quot;wp-image-1747&quot; src=&quot;http://crimeindia.in/wp-content/uploads/2019/07/acp-attar-singh-and-insp-amul-tyagi.gif&quot; height=&quot;320&quot; width=&quot;640&quot; /&gt;&lt;figcaption&gt;अभिषेक काे पकडने वाली स्पेशल सेल की टीम के एसीपी अतर सिंह व इंसपेक्टर अमूल त्यागी &lt;/figcaption&gt;&lt;/figure&gt;10 जुलाई 2018 को नरेश मलिक व उनकी पत्‍नी अपनी बेटी मेघा को लेकर नई दिल्‍ली के बाराखम्‍बा थाने में पहुंचे। उन्‍होंने थाना प्रभारी गिरीश कोशिक को बताया कि उनका दामाद अभिषेक वशिष्‍ठ&amp;nbsp; उनकी बेटी को छोउकर कहीं चला गया है। मलिक परिवार ने बताया कि अभिषेक जब उनकी बेटी को लेकर केरल में हनीमून बनाने गया था तो वहां उसने उसके साथ हिसंक ढंग से अपनी वासना पूर्ति की। इतना ही नहीं उसने उनकी बेटी की इच्‍छा के खिलाफ उसके साथ अमानुषिक ढंग से अप्राकृतिक ढंग से काम पिपासा शांत की । इतना ही नहीं लाखों का दान दहेज देने के बावजूद हनीमून से लौटते ही अभिषेक ने उनकी बेटी पर पिता से 10 लाख रूपए लाने का दबाव बनाना शुरू कर दिया। जब उसने मना किया तो वह मेघा से मारपीट करने लगा। दो तीन महीने तक अभिषेक व मेघा के बीच इसी तरह के छोटे मोटे झगडे होते रहे इस बात पर दोनों में झगडा होंने लगा । एक दिन जब मेघा ऐसी ही लडाई के बाद अपने मायके गई थी तो दो दिन तक उसकी अनुपस्थिति में अभिषेक ने अपना गुरूग्राम व नोएडा का आफिस व घर खाली कर दिया और अपने सभी सामान, गाडी और बेटी को दहेज में मिले गहनों के साथ फरार हो गया। चूंकि मामला दहेज का ही नहीं एक महिला के उत्‍पीडन का भी था । लिहाजा एसएचओ कोशिक ने अपराध संख्‍या 81 पर भारतीय दंड सहिता की धारा 323, 406, दहेज उत्‍पीडन की धारा 498ए, 420, 468 व 377 के तहत मुकदमा पंजीकृत करा दिया और इसकी जांच का काम तेजतर्रार महिला सब इंसपेक्‍टर अलका शर्मा के सुपुर्द कर दिया। आरोप अभिनव शर्मा को पकडने के लिए थाना प्रभारी ने अलका शर्मा के नेतृत्‍व में एक टीम भी गठित कर दी जिसमें सब इंसपेकटर मुकेश खाटा व एसआई विवेक को भी उनकी मदद करने के लिए शामिल कर दिया गया। &lt;br /&gt;
सब इंसपेक्‍टर अलका शर्मा ने मुकदमा दर्ज कर जांच हाथ में लेते ही सबसे पहले आरोपी अभिषेक के उन सभी मोबाइल नंबर को ट्रेस करने का काम शुरू किया जो उन्‍हें मलिक परिवार से मिले थे। लेकिन हैरानी की बात ये थी कि ये सभी नंबर लगातार बंद चल रहे थे। कई दिन की मशकक्‍त के बाद बाराखंबा थाने की पुलिस को अभिषेक शर्मा की बीएमडब्‍लू गाडी का नंबर से उस कार का रजिस्‍टर्ड पता मिल गया। पुलिस ये जानकार हैरान रह गई कि जिस लक्‍जरी कार को अभिषेक अपना बताता था वह ग्रेटर कैलाश में रहने वाले पंकज मल्‍होत्रा के नाम पर थी और उस कार का ड्राइवर राजकुमार दरअसल उन्‍हीं का ड्राइवर था और यह कार अभिषेक ने 80 हजार रूपए महीने के किराए पर ली थी। पिछले तीन पांच महीने से उसने ये कार किराए पर ली हुई थी। ड्राइवर राजकुमार को जब पकडकर पूछताछ की गई तो उसने बताया कि अभिषेक इस कार को तभी इस्‍तेमाल करता था जब उसे किसी पर अपना प्रभाव जमाना होता था। अभिषेक राजकुमार को इसी बात के 15 हजार रूपए महीना देता था कि जब भी कोई उसके बारे में राजकुमार से छानबीन करे तो वह उससे यहीं बताए कि वह अनाथ है और ये बीएमडब्‍लू गाडी भी अभिषेक की ही है। गुरूग्राम व नोएडा के जो मकान उसके पास है वे भी अभिषेक ने अपने ही बताने के लिए कहा। राजकुमार को भला इतना सा झूठ बोलने में कौन सी दिक्‍कत थी। उसने मलिक परिवार से भी पूछने पर ये झूठ बोल दिया था। राजकुमार इससे ज्‍यादा कोई जानकारी नहीं दे सका। &lt;br /&gt;
जांच अधिकारी अलका शर्मा ने अभिषेक शर्मा के सभी टेलीफोन नंबर की डिटेल निकलवाकर ऐसे कई लोगों से पूछताछ की जिनसे वह काफी बातचीत करता था। लेकिन लंबा वक्त बीत गया और अभिषेक वशिष्‍ठ का कोई सुराग नहीं मिला। नई दिल्‍ली जिले के तत्कालीन डीसीपी मधुर वर्मा ने जांच अधिकारी अलका शर्मा और बाराखंबा रोडा थाने की पुलिस की अनुसंशा पर आरोपी अभिषेक को भगौडा घोषित कर उसकी गिरफ्तारी या सूचना देने वाले का 50 हजार रूपए का ईनाम देने की घोषणा कर दी । &lt;br /&gt;
&lt;div class=&quot;wp-block-image&quot;&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;figure class=&quot;aligncenter&quot; style=&quot;clear: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;&quot;&gt;&lt;img alt=&quot;&quot; class=&quot;wp-image-1748&quot; src=&quot;http://crimeindia.in/wp-content/uploads/2019/07/si-and-io-alka-sharma.jpg&quot; /&gt;&lt;figcaption&gt;बाराखंबा थाने की जांच अधिकारी अलका शर्मा  &lt;/figcaption&gt;&lt;/figure&gt;&lt;/div&gt;
जब किसी मुकदमे के आरोपी के उपर ईनाम घोषित कर दिया जाता है तो उसे पकडने के लिए दिल्‍ली पुलिस की सभी विशेष यूनिट अधिकृत हो जाती है। जैसे ही दिल्‍ली पुलिस की विशेष शाखा के दक्षिणी परिक्षेत्र के एसीपी अतर सिंह को पता चला कि बाराखंबा रोड थाने से एक महिला के साथ शादी के नाम पर अभिषेक नाम का आरोपी धोखाधडी करके फरार हुआ है तो उन्‍होंने अपनी टीम के दो सबसे तेजतर्रार इंसपेक्‍टर अमूल त्‍यागी और चन्द्रिका प्रसाद  को बुलाकर अभिषेक के बारे में जानकारी जुटाने के लिए कहा। इंसपेक्‍टर त्‍यागी और प्रसाद ने उसी दिन बाराखंबा रोड थाने से अभिषेक के खिलाफ लिखी गई एफआईआर की कॉपी हासिल की और उसके खिलाफ जानकारी जुटानी शुरू कर दी। इतना ही नही पुलिस ने मलिक परिवार से मिलकर अभिषेक की फोटो भी हासिल कर ली।&lt;br /&gt;
स्‍पेशल सेल की जांच आमतौर सटीक इलैक्‍टॅानिक सर्विलांस और तकनीक पर आधारित होती है। जिस काम को जिले में थानों की पुलिस सामान्‍य बात समझ कर नजरअंदाज कर देती है। स्‍पेशल सेल उसी आधार पर सुराग हासिल कर लेती है। इस मामलें में भी ऐसा ही हुआ। इंसपेक्‍टर चन्द्रिका प्रसाद व अमूल त्‍यागी के साथ सब इंसपेक्‍टर अमित व राहुल तथा कांस्‍टेबल कपिल व अजीत भी जांच में जुट गए। स्‍पेशल सेल की टीम ने अभिषेक के सभी मोबाइल नंबरों की छह महीने की काल डिटेल के साथ उसके नंबरों की सीडीआर तथा फोन लोकेशन खंगालनी शुरू की। इस छानबीन के बाद पुलिस ने कई ऐसे लोगों का पता लगाया जो उससे लगातार बात करते रहते थे। इसके बाद पुलिस ने छह ऐसे लोगों का छांटा जिनसे करीब हर रोज अभिषेक की बात होती है। उन सभी दह लोगों के फोन नंबर की काल डिटेल निकाली गई तो ऐसी दो महिलाओं का पता चला जो हरिद्ववार में रहती थी। उन दोनों महिलाओं के नंबर पर अभिषेक लगभग हर रोज बात करता था। उसके मोबाइल की लोकेशन भी महीने में दो तीन बार कई कई दिन तक उन्‍हीे महिलाओं के मोबाइल की लोकेशन के पास होती थी। पुलिस को लगा कि हो न हो ऐसा तभी हा सकता है जब अभिषेक उनसे मिलने जाता हो। पुलिस को इन दोनों महिलाओं पर इसलिए भी शक गहरा गया कि जुलाई महीने में जब अभिषेक दिल्‍ली से भागा तो उसके एक मोबाइल की लोकेशन कुछ दिन तक हरिद्वार में ही दिखी थी लेकिन बाद में उसने इस फोन काे भी बंद कर दिया। दिलचस्‍प बात ये थी कि जिस मोबाइल में उसने ये नंबर डाला हुआ था उसी में उसने एक नया नंबर डालकर उसे अगस्‍त महीने से शुरू किया था।  दिलचस्‍प बात ये थी इस नंबर से अगस्‍त महीने से ही मीनाक्षी और पूनम नाम की इन दोनों महिलाओं के फोन पर लगातार उसी तरह लंबी लंबी बातचीत होती थी जैसे अभिषेक के पुराने नंबरों से लंबी कॉल होती थी। एसीपी अतर सिंह समझ गए कि दाल में कुछ काला है लिहाजा उन्‍होंने इसंपेक्‍टर प्रसाद व त्‍यागी को टीम के साथ तत्‍काल हरिद्वार की तरफ रवाना कर दिया।&lt;br /&gt;
&lt;div class=&quot;wp-block-image&quot;&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;figure class=&quot;aligncenter&quot;&gt;&lt;img alt=&quot;&quot; class=&quot;wp-image-1749&quot; src=&quot;http://crimeindia.in/wp-content/uploads/2019/07/si-mukesh-khanta-with-our-associate-1024x654.jpg&quot; height=&quot;408&quot; width=&quot;640&quot; /&gt;&lt;figcaption&gt;सब इंसपेक्टर मुकेश खांटा अपने सहयाेगी सब इंसपेक्टर के साथ&lt;/figcaption&gt;&lt;/figure&gt;&lt;/div&gt;
हरिद्वार पहुंचने के बाद पुलिस टीम ने सबसे पहले अपनी टीम की महिला कर्मचारियों की मदद से मीनाक्षी और पूनम से जाकर पूछताछ की और उस नंबर के बारे में पूछताछ की जिस नंबर से अगस्‍त 2018 से उनसे बात की जा रही थी। पहले तो दोनों महिलाएं थोडा घबराई लेकिन जब पुलिस ने उन्‍हें अपने तेवर दिखाए तो उन्‍होंने उगल दिया कि यह नंबर अभिषेक वशिष्‍ठ का है जो इन दिनों हरिद्वार में ही अपना डिजीटल चैनल व अखबार चला रहा था। स्‍पेशल सेल की टीम ने पूनम और मी‍नाक्षी से अभिषेक के ऑफिस का पता हासिल किया और 22 दिसंबर को ही उसे प्रेम आश्रम चौक स्थित उसके कार्यालय से धर दबोचा। उस वक्‍त वहां एक दो लोग भी काम कर रहे थे। उनसे पूछताछ के बाद स्‍पेशल सेल की टीम ने उन्‍हें तो छोड दिया लेकिन अभिषेक को हरिद्वार की अदालत में पेश कर उसका ट्रांजिट रिमांड लिया और उसे दिल्‍ली ले लाया गया। दिल्‍ली लाकर स्‍पेशल&amp;nbsp; सेल ने उसकी गिरफ्तारी अपने रोजनामचे में दर्ज कर ली और बाराखंबा रोड पुलिस को उसकी गिरफ्तारी की सूचना दे दी। बाराखंबा रोड थाने की सब इंसपेक्‍टर अलका शर्मा काे जैसे ही अभिषेक शर्मा की गिरफतारी की सूचना मिली तो वे तत्‍काल एसआई मुकेश खाटा के साथ स्‍पेशल सेल के दफ्तर पहुंच गई जहां तमाम कागजी कार्रवाई के बाद उन्‍होंने अभिषेक शर्मा को अपनी हिरासत में लेकर उसी दिन अदालत में पेश कर दिया और पूछताछ के लिए सात दिन की पुलिस रिमांड हासिल कर ली। &lt;br /&gt;
अभिषेक शर्मा से पूछताछ में पता चला कि उसे यौन संबधों के दौरान महिलाओं से अप्राकृतिक संबध बनाने का शौक है। इसलिए जब वह मेघा मलिक के साथ हनीमून मनाने केरल गया तो वहां उसने मेघा के साथ भी यही करने की कोशिश की। मगर मेघा ने ऐसा करने से मना कर दिया जिस पर अभिषेक ने उसे धमकी दी कि अगर वह उसकी शारीरिक जरूरत पूरी नहीं कर सकती तो उसके साथ लंबा जीवन बिताना उसके लिए संभव नहीं होगा। न चाहते हुए भी मेघा उसकी इच्‍छापूर्ति के लिए तैयार हो गई। दिल्‍ली आने के बाद अभिषेक ने मेघा पर एक जरूरी काम के लिए अपने पिता से 10 लाख रूपए लाने का दबाव बनाना शुरू कर दिया। लेकिन मेघा ने साफ इंकार कर दिया कि वह ऐसा नहीं कर सकती। ये बात भी आई गई हो गई। लेकिन असली दिक्‍कत तब शुरू हुई जब मेघा ने अभिषेक पर जब तब राधास्‍वामी सतसंग में चलने का दबाव बनाना शुरू किया। दरअसल पूरा मलिक परिवार राधा स्‍वामी का अनुयायी है। जबकि अभिषेक दुर्गा माता का पुजारी है। मेघा और अभिषेक दोनों की धार्मिक आस्‍थाएं एकदम अलग थी। इसलिए इस बात को लेकर दोनों के बीच अक्‍सर झगडा होंने लगा। इसी बात को लेकर एक दो बार दोनों में हाथ पायी भी हो गई। नाराजगी में जब मेघा अपने घर चली गई तो अभिषेक ने उसकी अनुपस्थिति में अपना गुरूग्राम व नोएडा वाले घर खाली कर दिए और रातों रात हरिद्वार चला गया। दरअसल हरिद्वार से उसका पुराना नाता था। मीनाक्षी व पूनम की जिन महिलाओं के माध्‍यम से पुलिस अभिषेक तक पहुंची थी दरअसल उन दोनों के साथ अभिषेक के लिव इन रिलेशन के रिश्‍ते है। दोनों ही गरीब परिवार की महिलाए है लेकिन उनके पति बेरोजगार व परिवार चलाने में असमर्थ है। दोनों के बच्‍चे भी है। मीनाक्षी करीब दस साल पहले मोहाली में अभिषेक के पास नौकरी करती थी। उसी वक्‍त मीनाक्षी से उसके संबध हो गए थे। बाद में जब उसने अपना दफ्तर बंद कर दिया तो मीनाक्षी अपने परिवार के साथ हरिद्वार आकर रहने लगी। लेकिन वहां आने के बाद भी अभिषेक से उसके लिव इन रिलेशन बरकरार रहे। &lt;br /&gt;
दरअसल, अभिषेक उसके पूरे परिवार का खर्च उसे हर महीने पहुंचाता था। और कभी कभी उससे मिलने के लिए आता रहता था। हरिद्वार की ही रहने वाली एक अन्‍य गरीब विवाहित महिला पूनम से भी अभिषेक के ऐसे ही रिश्‍ते थे। जब वह 2016 में देहरादून आया और वहां एक दफ्तर खोला तो पूनम उसके यहां नौकरी करने आयी थी। जिससे बाद में उसके संबध कायम हो गए। बाद में दफ्तर तो बंद हो गया मगर वह पूनम को भी हर माह घर खर्च के लिए पूरा पैसा देता था जब कभी मन करता तो पूनम से मिलने हरिद्वार चला आता। बाद में जब वह मेघा मलिक को छोडकर हरिद्वार चला गया ताे मीनाक्षी व पूनम की मदद से वहां एडीएन स्‍टार न्‍यूज डिजीटल चैनल का नया दफ्तर बनाया। &amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;br /&gt;
लेकिन अभिषेक यह बात भूल गया था कि अपने पाप के जो निशान वह दिल्‍ली में छोडकर आया है उसके निशान खोजते-खोजते पुलिस उसे हरिद्वार में भी आकर दबोच सकती है। &lt;br /&gt;
&lt;div class=&quot;wp-block-image&quot;&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;figure class=&quot;aligncenter&quot;&gt;&lt;img alt=&quot;&quot; class=&quot;wp-image-1750&quot; src=&quot;http://crimeindia.in/wp-content/uploads/2019/07/abhishek-vashisth.jpg&quot; /&gt;&lt;figcaption&gt; अभिषेक शर्मा &lt;/figcaption&gt;&lt;/figure&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;
&lt;!-- wp:paragraph --&gt;  &lt;!-- /wp:paragraph --&gt;  &lt;!-- wp:paragraph --&gt;  &lt;!-- /wp:paragraph --&gt;  &lt;!-- wp:paragraph --&gt;  &lt;!-- /wp:paragraph --&gt;  &lt;!-- wp:paragraph --&gt;  &lt;!-- /wp:paragraph --&gt;  &lt;!-- wp:paragraph --&gt;  &lt;!-- /wp:paragraph --&gt;  &lt;!-- wp:image {&quot;id&quot;:1743} --&gt;  &lt;!-- /wp:image --&gt;  &lt;!-- wp:paragraph --&gt;  &lt;!-- /wp:paragraph --&gt;  &lt;!-- wp:paragraph --&gt;  &lt;!-- /wp:paragraph --&gt;  &lt;!-- wp:paragraph --&gt;  &lt;!-- /wp:paragraph --&gt;  &lt;!-- wp:paragraph --&gt;  &lt;!-- /wp:paragraph --&gt;  &lt;!-- wp:image {&quot;id&quot;:1744} --&gt;  &lt;!-- /wp:image --&gt;  &lt;!-- wp:paragraph --&gt;  &lt;!-- /wp:paragraph --&gt;  &lt;!-- wp:paragraph --&gt;  &lt;!-- /wp:paragraph --&gt;  &lt;!-- wp:paragraph --&gt;  &lt;!-- /wp:paragraph --&gt;  &lt;!-- wp:image {&quot;id&quot;:1745} --&gt;  &lt;!-- /wp:image --&gt;  &lt;!-- wp:paragraph --&gt;  &lt;!-- /wp:paragraph --&gt;  &lt;!-- wp:paragraph --&gt;  &lt;!-- /wp:paragraph --&gt;  &lt;!-- wp:paragraph --&gt;  &lt;!-- /wp:paragraph --&gt;  &lt;!-- wp:paragraph --&gt;  &lt;!-- /wp:paragraph --&gt;  &lt;!-- wp:image {&quot;id&quot;:1747} --&gt;  &lt;!-- /wp:image --&gt;  &lt;!-- wp:paragraph --&gt;  &lt;!-- /wp:paragraph --&gt;  &lt;!-- wp:paragraph --&gt;  &lt;!-- /wp:paragraph --&gt;  &lt;!-- wp:paragraph --&gt;  &lt;!-- /wp:paragraph --&gt;  &lt;!-- wp:image {&quot;id&quot;:1748,&quot;align&quot;:&quot;center&quot;} --&gt;  &lt;!-- /wp:image --&gt;  &lt;!-- wp:paragraph --&gt;  &lt;!-- /wp:paragraph --&gt;  &lt;!-- wp:paragraph --&gt;  &lt;!-- /wp:paragraph --&gt;  &lt;!-- wp:image {&quot;id&quot;:1749,&quot;align&quot;:&quot;center&quot;} --&gt;  &lt;!-- /wp:image --&gt;  &lt;!-- wp:paragraph --&gt;  &lt;!-- /wp:paragraph --&gt;  &lt;!-- wp:paragraph --&gt;  &lt;!-- /wp:paragraph --&gt;  &lt;!-- wp:paragraph --&gt;  &lt;!-- /wp:paragraph --&gt;  &lt;!-- wp:paragraph --&gt;  &lt;!-- /wp:paragraph --&gt;  &lt;!-- wp:image {&quot;id&quot;:1750,&quot;align&quot;:&quot;center&quot;} --&gt;  &lt;!-- /wp:image --&gt;  &lt;!-- wp:paragraph --&gt;  &lt;!-- /wp:paragraph --&gt;&lt;/div&gt;
स्‍पेशल सेल ने जब अभिषेक को दिल्‍ली लाकर उससे पूछताछ की थी तो उसके पास से बरामद मोबाइल में एक तस्‍वीर मिली जिसमें वह दुल्‍हन बनी एक महिला की मांग में सिंदूर भर रहा है। पुलिस के प्‍यार व सख्‍ती से पूछताछ के बावजूद अभिषेक ने उस तस्‍वीर के बारे में खुलासा नहीं किया। हांलाकि शुरूआत में उसने मीनाक्षी और पूनम से भी अपने लिव इन रिलेशन की बात कबूल नहीं की थी। मगर बात में जब पुलिस ने मीनाक्षी और पूनम को हरिद्वार से दिल्‍ली बुलाकर अभिषेक से सामना कराया तो उसने कबूल कर लिया । हांलाकि पुलिस को शक है कि मैट्रीमोनियल साइट पर प्रोफाइल बनाकर अभिषेक ने मलिक परिवार की तरह दूसरे परिवार की लडकियों को भी अपनी धोखाधडी का शिकार बनाया है लेकिन अभी तक पुलिस के सामने कोई पीडित परिवार सामने नहीं आया है। चूंकि पुलिस की पूछताछ में ये सच सामने आ गया कि अभिषेक ने अपनी पहली शादी की बात छिपायी थी। अपने परिजनों की मौत की झूठी बात कही थी। शादी करने के लिए मलिक परिवार से झूठ कहा था कि वह लाखों रूपए सलाना कमाता है और उसके पास बीएमडब्‍लू कार व दो –दो मकान है। इसलिए पुलिस ने उसे धोखाधडी, जालसाजी और दहेज उत्‍पीडन का आरोपी मानते हुए सात दिन की रिमांड के बाद बदालत में पेश कर दिया जहां से उसे जेल भेज दिया गया। &amp;nbsp;कितनी हैरानी की बात है कि दूसरों की कुंडली बताने वाला अभिषेक शायद खुद की कुंडली पढने में विफल हो गया था इसलिए वह जेल की सलाखों के पीछे पहुंच गया था।&lt;/div&gt;
</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://jurmkiduniya.blogspot.com/feeds/7625298072707070481/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://jurmkiduniya.blogspot.com/2019/07/blog-post.html#comment-form' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8049618298159816963/posts/default/7625298072707070481'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8049618298159816963/posts/default/7625298072707070481'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://jurmkiduniya.blogspot.com/2019/07/blog-post.html' title='दूसरों की कुंडली बांचने वाला पढ़ ना सका अपनी कुंडली'/><author><name>sunil verma</name><uri>http://www.blogger.com/profile/06462864962085848512</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='27' height='32' src='//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiM8mYTF1rSTG5OLwjuKe8ktdZwaNsHWlaRFf283uYibqX2zwZT1C0LITcRz_c-QhdhjEK686quBdQwPl6yirK3P5dvBOclUZ-nAWjIgkhf_dw38PrIOFgSWi-PC_Q-ilg/s113/sunil+pic2.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjwupwfYD9FFjj2YiX81shOG3GgfyMIiSuZRn3cPeoQSxgaoZBN9Pg5Sv7ZF4U99Q5oviFfRxGtzq4BVIbcaoX6zDwP8mD_haSyKeZ8JW7PkpJA0zAhGR-avEkZhidaurp5gKftbPK5tXJs/s72-c/acharya+atul+ji+on+sadhna+tv.jpg" height="72" width="72"/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8049618298159816963.post-5629541138110164379</id><published>2019-05-26T10:31:00.001+05:30</published><updated>2019-05-29T16:10:50.086+05:30</updated><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="True Story"/><title type='text'>सूटकेश में मिली लडकी की लाश की गुत्थी सुलझाने में उलझ गई</title><content type='html'>&lt;div dir=&quot;ltr&quot; style=&quot;text-align: left;&quot; trbidi=&quot;on&quot;&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;span data-mce-selected=&quot;inline-boundary&quot; style=&quot;background: rgb(232 , 234 , 235); border-radius: 2px; box-shadow: rgb(232 , 234 , 235) 0px 0px 0px 1px; box-sizing: inherit; color: #191e23; font-family: &amp;quot;noto serif&amp;quot;; font-size: 16px; font-weight: 600; margin: 0px -2px; padding: 0px 2px; white-space: pre-wrap;&quot;&gt;सुनील वर्मा &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
एक जमाना था जब बिसरख दुनिया भर मशहूर होंने के बाद भी एक औसत दर्जे का गांव हुआ करता था। लेकिन जैसे जैसे नोएडा ने विकास की उडान भरी वैसे-वैसे बिसरख में भी समृद्धि और संपन्‍नता का वास होता चला गया। बिसरख गांव तथा इसके वाशिंदों की जमीन नोएडा अथारिटी में चली गइग्‍ और मुआवजों की रकम ने यहां के लोगों को रातों रात करोडपति बना दिया। इसी का परिणाम था कि बिसरख व आसपास के इलाके में जहां कभी कच्‍चे मकान और दूर दूर तक खेत खलिहान दिखायी पड़ते थे आज वहां गगन चुंबी अट्टालिकाएं खडी हो गई है। आस पास के इलाकों में लोगो ने अपने बड़े बडे मकानों को छोटा कर लिया और जमीनों के छोटे-छोटे टुकड़ो पर कई मंजिला मकान बनाकर उन्‍हें किराए पर दे दिया और आमदनी का नया जरिया तैयार कर लिया। &lt;br /&gt;
बिसरख इस इलाके का सबसे मशूहर गांव है इसलिए इस गांव में वर्षो पहले एक थाना भी खोला गया था। कुछ साल पहले तक बिसरख गाजियाबाद के न्‍यायिक परिक्षेत्र में आता था लेकिन बाद में इसे गौतमबुद्ध नगर में शामिल कर लिया गया।&lt;br /&gt;
&lt;table align=&quot;center&quot; cellpadding=&quot;0&quot; cellspacing=&quot;0&quot; class=&quot;tr-caption-container&quot; style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto; text-align: center;&quot;&gt;&lt;tbody&gt;
&lt;tr&gt;&lt;td style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgV8OcAvQJTpz5mNh5QlXxv05fQIJyr26Xku_IH89Vu7obtUXAaSnqg2JR6n7Q5mEXzBbLSmGXHHto5DcY5dfWJfbjKiMm1yN0JCkdeZhSaIw_8Giojkj8j1ywNsWzhQcf7fZkmiTZ2Nnyb/s1600/mala+6.jpg&quot; imageanchor=&quot;1&quot; style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto;&quot;&gt;&lt;img border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;912&quot; data-original-width=&quot;1600&quot; height=&quot;363&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgV8OcAvQJTpz5mNh5QlXxv05fQIJyr26Xku_IH89Vu7obtUXAaSnqg2JR6n7Q5mEXzBbLSmGXHHto5DcY5dfWJfbjKiMm1yN0JCkdeZhSaIw_8Giojkj8j1ywNsWzhQcf7fZkmiTZ2Nnyb/s640/mala+6.jpg&quot; width=&quot;640&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;
&lt;tr&gt;&lt;td class=&quot;tr-caption&quot; style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;माला&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;
&lt;/tbody&gt;&lt;/table&gt;
इसी बिसरख इलाके के एक गांव हैबतपुर में शिवम (26) भी अपनी पत्‍नी माला(24) के साथ किराए के मकान में रहता था। तीन मंजिला इस मकान के दूसरे फ्लोर के दो कमरे के मकान में शिवम पिछले कई महीने से रह रहा था। शिवम और माला दोंनो ही न&lt;br /&gt;
नई पीढी के पढ़े लिखे युवक युवती थे। माला ने जहां एमकॉम की पढाई की थी तो शिवम ने एमबीए किया था। वर्ष 2016 में शिवम और माला की जान पहचान फेसबुक पर एक दूसरे से बातचीत के जरिए हुई थी। बाद में दोनों की दोस्ती प्‍यार में बदल गई। दोनों एक ही बिरादरी के थे लिहाजा नवंबर 2017 में दोनों ने परिजनों की सहमति से विवाह कर लिया। शादी के कुछ समय बाद ही शिवम ने नोएडा के एक मॉल में सेल्स एक्‍जीक्‍यूटिव की नौकरी कर ली। हांलाकि शादी से पहले माला भी जॉब करती थी लेकिन बाद में जब उसके गर्भ में शिवम के प्‍यार का अंश पलने लगा तो उसने नौकरी छोड़ दी। इन दिनों वह पांच माह के गर्भ से थी। चूंकि माला एमकॉम तक पडी लिखी थी, गर्भवती होंने के कारण घर से बाहर जाकर नौकरी नहीं कर सकती थी। इसलिए वह पति का हाथ बंटाने के लिए घर में ही बच्चों को कोचिंग के साथ निकट के एक प्राइवेट स्कूल में टीचिंग की जॉब करने लगी थी। &lt;br /&gt;
माला की छोटी सी दुनिया थी उस पर जान छिडकने वाला पति और कोख में पल रहा उसका बच्‍चा। इसके अलावा अगर माला के पास समय बचता तो वह क्रिश्चियन बागू कालोनी की गली नंबर 10 के मकान नंबर 6 में रहने वाले अपने माता पिता के पास चली चली जाती। माला रामअवतार और मालती देवी की चार संतानों में सबसे छोटी है। उसकी दो बडी बहने और एक भाई है सबकी शादी हो चुकी है और सभी गाजियाबाद में आसपास ही रहते हैं। शिवम के परिवार में भी उसके माता पिता के अलावा तीन भाई व एक बहन है। वे भी गाजियाबाद में ही रहते हैं।&lt;br /&gt;
7 अप्रैल, 2018 को शिवम रोज की तरह सुबह साढ़े दस बजे हैबतपुर स्थित अपने किराए के घर से मोटरसाईकिल लेकर ड्यूटी के लिए निकला। वह रात को नौ बजे तक घर लौटता था। शिवम का नियम था कि वह दोपहर को दो बजे लंच टाइम में अपनी पत्‍नी माला को फोन करके उसकी खैरियत पूछता और उसके खान पान व दर्वाइया लेने की याद दिलाता। लेकिन उस दिन जब शिवम ने माला को फोन किया तो उसके दोनों ही मोबाइल का स्विच ऑफ मिला। &lt;br /&gt;
हो सकता है माला खाना खाकर आराम कर रही हो और नींद में खलल से बचने के लिए उसने मोबाइल स्विच ऑफ कर दिए हो। ये सोचकर वे बेफिक्र हो गया। उसने करीब पांच बजे ये सोचकर फिर फोन किया कि शायद वो अब तक सोकर उठ गइ होगी। लेकिन इस बार भी फोन करने पर स्विच ऑफ होंने का ही संदेश मिला तो शिवम को माला की चिंता होने लगी। लेकिन उसने फिर भी ये सोचकर धीरज धर लिया कि हो सकता है अभी माला सोकर ही न उठी हो। इसके बाद काम की ऐसी व्‍यस्‍तता हुई कि रात 8 बजे तक उसे माला को फोन करने की फुर्सत ही नहीं मिली। फुर्सत मिलते ही शिवम ने माला को फिर फोन‍ किया तो एक बार फिर उसे फोन बंद होने का जवाब मिला। इसके बाद तो शिवम की परेशानी चरमसीमा पर पर पहुंच गई। ये सारे फोन शिवम ने अपने मॉल के लैंड लाइन फोन से किए थे। दरअसल, उसके ऑफिस में काम के दौरान किसी को भी मोबाइल फोन रखने की इजाजत नहीं थी इसलिए शिवम अपना मोबाइल भी घर पर माला के पास ही छोडकर जाता था। हैरानी की बात ये थी कि माला के फोन के साथ उसका मोबाइल भी स्विच ऑफ बता रहा था। परेशान शिवम ने साढे आठ बजे जल्‍दी-जल्‍दी काम समेटा और आधा घंटे में घर के लिए निकला पड़ा। रोज की तरह वो उस दिन भी रात के नौ बजे ही घर पहुंचा तो देखा फ्लैट के मुख्‍यद्वार पर ताला लटका था।&amp;nbsp;&amp;nbsp; &lt;br /&gt;
सबसे पहले शिवम ने मकान के पहले और तीसरे तल पर रहने वाले किरायेदारों के परिवार से माला के बारे में पूछा। लेकिन उन्‍होंने बताया कि उन्‍होंने दोपहर से ही माला को कहीं नहीं देखा। घर की एक चाभी शिवम के पास भी रहती थी। उसने ताला खोला और घर के भीतर गया तो देखा कि उसके बैडरूम में कुछ असामान्‍य है। बैडरूम में पड़े बैड पर काफी सामान बिखरा हुआ था और कमरे में रखी लोहे की अल्‍मारी में भी सामान बेतरतीबी से इधर उधर रक्‍खा था।&amp;nbsp; &lt;br /&gt;
कहीं ऐसा तो नहीं कि माला कहीं चली गई हो। &lt;br /&gt;
‘हां हो सकता है अपने मम्मी-पापा के पास गई होगी।’ लेकिन उसने मोबाइल क्‍यों बंद किया हुआ है। सोचते हुए शिवम ने घर के मुख्‍यद्वार पर ताला लगाया और मोटर साईकिल में किक मारकर अपनी ससुराल में बागू कालोनी की तरफ चल दिया। बागू कालोनी, हैबतपुर गांव से ज्‍यादा दूर नहीं थी मुश्किल में बीस मिनट में शिवम वहां पहुंच गया। जब उसने सास ससुर से माला के बारे में पूछा तो वे चौंक पड़े क्‍योंकि उस दिन माला न तो उनके पास आयी थी न ही उस दिन फोन पर उनकी कोई बात हुई थी। परिवार के लोग भी परेशान हो उठे। इसके बाद शिवम और उसके ससुराल वालों ने दूसरे रिश्‍तेदारों व जान पहचान वालों को फोन करके पूछताछ शुरू कर दी कि माला उनके घर पर तो नहीं है। लेकिन कहीं से भी ये जवाब नहीं मिला कि उन्‍हें माला के बारे में कोई खबर है। रात अधिक हो चुकी थी लिहाजा शिवम और परिजनों ने तय किया कि अब उन्‍हें माला की तलाश करने के लिए पुलिस की मदद लेनी चाहिए। लिहाजा शिवम अपने ससुर व साले के साथ बिसरख थाने पहुंच गए। &lt;br /&gt;
&lt;table align=&quot;center&quot; cellpadding=&quot;0&quot; cellspacing=&quot;0&quot; class=&quot;tr-caption-container&quot; style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto; text-align: center;&quot;&gt;&lt;tbody&gt;
&lt;tr&gt;&lt;td style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjq6csUyW6Q5TGa2Y7ZNV2qELqEMh2C0Cld6v2DI3ceuA62uU-1Ge7-sdFXltIEXhijFRaR_G1kfilhhjlr5QCaDpOCPBgjZ1-DG03u79L-doqVFIANvsfaCzXqvIiJp8b75dHM_ydYb6Gw/s1600/accused+saurabh+and+ritu.jpg&quot; imageanchor=&quot;1&quot; style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto;&quot;&gt;&lt;img border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;806&quot; data-original-width=&quot;1224&quot; height=&quot;420&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjq6csUyW6Q5TGa2Y7ZNV2qELqEMh2C0Cld6v2DI3ceuA62uU-1Ge7-sdFXltIEXhijFRaR_G1kfilhhjlr5QCaDpOCPBgjZ1-DG03u79L-doqVFIANvsfaCzXqvIiJp8b75dHM_ydYb6Gw/s640/accused+saurabh+and+ritu.jpg&quot; width=&quot;640&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;
&lt;tr&gt;&lt;td class=&quot;tr-caption&quot; style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;माला की हत्या करने वाले पडाेसी दंपत्ति&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;
&lt;/tbody&gt;&lt;/table&gt;
&lt;br /&gt;
आमतौर पर रात के समय बिसरख थाने में सन्‍नाटा पसरा होता है। 8 अप्रैल 2018 के पहले पहर में रात का करीब एक बजे चुका था जब शिवम अपने ससुराल वालो के साथ थाने पहुंचा। &lt;br /&gt;
उस वक्‍त रात्रि ड्यूटी पर तैनात ड्यूटी अफसर ने सारी बात सुनने के बाद शिवम की शिकायत पर डीडी नंबर 45 पर माला की गुमशुदगी का मामला दर्ज कर लिया। ड्यूटी अफसर ने शिवम से माला की फोटो और उसके हुलिए के बारे में जानकारी लेकर उसी रात जिले के सभी थानों में माला की गुमशुदगी की सूचना प्रसारित कर दी। पुलिस माला को अपने ढंग से तलाश कर रही थी और शिवम तथा उसके ससुराल वाले अपने तरीके से ढूंढ रहे थे इसी तरह तीन दिन गुजर गए। &lt;br /&gt;
11 अप्रैल की दोपहर को इंदिरापुरम पुलिस को कुछ राहगीरों से सूचना मिली की कनावनी में नाले के किनारे एक संदिग्‍ध सूटकेस पड़ा है तो इस सूचना पर पुलिस वहां पहुंची। जांच पड़ताल के बाद पता चला कि ट्राली बैग में एक महिला की लाश है जिसके हाथ-पैर सूटकेस के अंदर ही बाधे थे और सूटकेस में एक तौलिया भी गर्दन से लिपटा हुआ था जिससे साफ लग रहा था कि उसकी हत्‍या करने के बाद शव को ट्राली बैग में भरकर वहां लाकर डाला गया था। इंदिरापुरम थाना प्रभारी सचिन मलिक और क्षेत्राधिकारी धर्मेन्‍द्र चौहान का साफ लग रहा था कि हत्‍या कहीं ओर की गई हे और शव को वहां लाकर इसलिए डाला गया है ताकि उसकी पहचान जल्‍द न हो सके। लिहाजा उन्‍होंने घटना स्‍थल व लाश की फोटो करवाकर समाचार पत्रों व टीवी चैनलों में उसकी खबरे प्रकाशित करने के लिए दे दी। पुलिस ने गाजियाबाद व आसपास के जिलों की पुलिस को भी लावारिश हालात में मिले महिला के शव की सूचना दे दी। ताकि जल्‍द से जल्‍द उसकर पहचान हो सके। इंदिरापुरम पुलिस ने महिला के शव का पंचनामा भरकर उसे पोस्‍टमार्टम गृह में सुरक्षित रखवा दिया।&lt;br /&gt;
इंदिरापुरम थाना क्षेत्र में मिले शव की जानकारी और लाश की फोटो अगले दिन तक पूरे गाजियाबाद और आसपास के जिलों के थानों में पहुंच चुकी थी। बिसरख थाने में भी इंदिरापुरम थाने में मिले महिला के शव की जानकारी पहुंची तो पुलिस ने अपने इलाके में गुमशुदा महिलाओं से उस शव का मिलान किया। लाश का चेहरा काफी फूला हुआ था इसलिए उससे तो पहचान पाना नामुमकिन सा था लेकिन उसकी कद काठी और उम्र का जो विवरण लिखा था उससे लग रहा था कि यह लाश माला की हो सकती है। लिहाजा बिसरख पुलिस ने उसी दिन माला के पिता राम अवतार तथा माला के पति शिवम को फोन करके इंदिरापुरम थाने में मिले शव के बारे में बताकर कहा कि वे इंदिरापुरम पुलिस के साथ जाकर मोर्चरी में रखे शव को एक बार जाकर देख ले हो सकता है कि वो शव माला का न हो।&lt;br /&gt;
माला के पिता रामअवतार अपने परिवार के साथ तुरंत ही इंदिरापुरम थाने पहुंचे और थाना प्रभारी सचिन मलिक से मिलकर पहले अपनी बेटी माला के लापता होंने की बात बतायी फिर उनसे कनावनी नाले के किनारे मिले अज्ञात महिला का शव को देखने की इच्‍छा व्‍यक्‍त की। इंदिरापुरम पुलिस के साथ जब परिजन मोर्चरी पहुंचे और शव को देखा तो राम अवतार व उनकी पत्‍नी शव को देखते ही फूट फूटकर रोने लगे। दरअसल वह शव माला का ही था। दरअसल महिला के पैर में जो काला धागा बंधा था और पैर की उंगुली में जो बिछुए थे वे माला के ही थे। इसके अलावा इंदिरापुरम पुलिस ने वह ट्राली बैग भी परिजनों को दिखाया जिसमें महिला का शव मिला था तो पूरी तरह साफ हो गया कि यह शव माला का ही है। क्‍योंकि माला के परिवार ने यह ट्राली बैग माला को उसकी शादी में दहेज के कपड़े व गहने रखकर दिया था। परिजनों ने इस बैग को खुद खरीदा था लिहाजा उससे पहचानने में किसी को कोई भ्रम नहीं हुआ। संयोग से जिस वक्‍त माला के परिजन शव की शिनाख्‍त कर रहे थे उसी वक्‍त बिसरख पुलिस से सूचना पाकर इंदिरापुरम पुलिस के जरिए शिवम भी माला का शव देखने के लिए मोर्चरी पहुंच गया शव को देखने के बाद उसने भी महिला के शव की शिनाख्‍त अपनी पत्‍नी माला के रूप में कर दी। जब माला के शव की शिनाख्‍त की औपचारिकता पूरी हो गई तो पुलिस ने भी शव को पोस्‍टमार्टम के लिए भिजवा दिया।&lt;br /&gt;
&lt;table align=&quot;center&quot; cellpadding=&quot;0&quot; cellspacing=&quot;0&quot; class=&quot;tr-caption-container&quot; style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto; text-align: center;&quot;&gt;&lt;tbody&gt;
&lt;tr&gt;&lt;td style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjLVv-psDICZbEQEIab1duw-VQFIg3QyrKzwI_xETWfIpXycDTug8xLdPhGgkzHlZ6BTrtYMjfXynJxIDFPxKrVfN_fEJWoMEhzPwYprsM9r_yStsTPKX_OZgPOv17gEUOCaWOb93-fVjoG/s1600/mala+murder+ssp+confrance.jpg&quot; imageanchor=&quot;1&quot; style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto;&quot;&gt;&lt;img border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;902&quot; data-original-width=&quot;1431&quot; height=&quot;402&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjLVv-psDICZbEQEIab1duw-VQFIg3QyrKzwI_xETWfIpXycDTug8xLdPhGgkzHlZ6BTrtYMjfXynJxIDFPxKrVfN_fEJWoMEhzPwYprsM9r_yStsTPKX_OZgPOv17gEUOCaWOb93-fVjoG/s640/mala+murder+ssp+confrance.jpg&quot; width=&quot;640&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;
&lt;tr&gt;&lt;td class=&quot;tr-caption&quot; style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;हत्याकांड का खुलासा करती नाेएडा पुलिस&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;
&lt;/tbody&gt;&lt;/table&gt;
&lt;br /&gt;
शव की पहचान के बाद शिवम और माला के पिता इंदिरापुरम थाने आकर थाना प्रभारी सचिन मलिक से मिलें और उनसे माला की हत्‍या के बारे में पूछताछ करने लगे तो सचिन मलिक ने शिवम और रामअवतार से अलग-अलग पूछा कि उन्‍हें माला की हत्‍या में किस पर शक है। शिवम तो हत्‍या करने वालों के बारे में कुछ नहीं बता सका लेकिन माला के पिता राम अवतार ने आरोप लगाते हुए कहा कि उन्‍हें माला के पति शिवम पर शक है कि उसी ने अपने परिवार के साथ मिलकर मनचाहा दहेज ने मिलने के कारण माला की हत्या की है। चूंकि मामला गंभीर था इसलिए थाना प्रभारी सचिन मलिक ने सीओ इंदिरापुरम धर्मेंद्र चौहान को फोन करके सारी बात बता दी। लिहाजा सीओ धर्मेन्‍द्र चौहान तत्‍काल इंदिरापुरम थाने पहुंच गए। परिजनों ने उन्‍हें भी यही बात बतायी। राम अवतार ने सीओ चौहान को बताया कि माला की शादी में उन्‍होंने हैसियत के अनुसार दहेज भी दिया गया था। लेकिन शादी के बाद से ही शिवम माला को दहेज के लिए परेशान करता था। प्रेम विवाह करने की वजह से यह बात माला अपने परिजनों को नहीं बताती थी। लेकिन वह अपनी बहानों से अक्‍सर शिवम की प्रताडना को जिक्र करती रहती थी। शिवम चाहता था कि ससुराल वाले उसे आई टेन कार व पांच लाख रूपए गिफ्ट में दे जिसके लिए शिवम अक्‍सर माला को ताने देता रहता था। रामअवतार ने आरोप लगाया कि उसके पति ने भाई, मां व पिता के साथ मिलकर हत्या की है।&lt;br /&gt;
आरोप चूंकि दहेज हत्‍या के थे लिहाजा माला के पिता रामअवतार की शिकायत पर सीओ चौहान ने उसी दिन इंदिरापुरम थाने में अपराध संख्‍या 243/18 पर भादंस की धारा 498 ए (क्रूरता), 304 बी (दहेज हत्‍या), 201 (सबूत नष्‍ट करने), 316 (जन्मजात बच्चे की मौत) के साथ दहेज निषेध अधिनियम, 1961 के धारा 3 और 4 के तहत मुकदमा पंजीकृत करवा दिया। चूंकि मृतका अपने पति के साथ नोएडा के हैबतपुर में रहती थी और वह क्षेत्र बिसरख थाना क्षेत्र के अर्न्‍तगत आता है संयोग से उसकी गुमशुदगी भी उसी थाने में पहले से दर्ज थी लिहाजा घटना का न्‍यायिक क्षेत्र बिसरख मानते हुए एएएसपी गाजियाबाद वैभव कृष्‍ण ने माला हत्‍याकांड की जांच बिसरख थाने में स्‍थानांतरित करवा दी। इधर, अगले दिन सुबह माला के शव का पोस्‍टमार्टम हो गया और शव उसके परिजनों को सौंप दिया गया जिसका उन्‍होंने अंतिम संस्‍कार कर दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुलासा हुआ कि मृतका माला पांच माह की गर्भवती थी यानि ये सिर्फ एक हत्‍या का नहीं बल्कि एक साथ दो हत्‍या का मामला था। पोस्‍टमार्टम रिपोर्ट से यह भी पता चल गया कि माला की हत्‍या गला दबाने के कारण हुई थी।&lt;br /&gt;
दहेज हत्‍या से जुडे मामलों की जांच चूंकि राजपत्रित अधिकारी से कराने का नियम है इसलिए बिसरख पुलिस ने इंदिरापुरम से स्‍थानांतरित होकर आए माला हत्‍याकांड का मामला अपने थाने के अभिलेखों में दर्ज कर लिया जिसकी जांच तत्‍कालीन बिसरख क्षेत्राधिकारी अनित कुमार सिंह ने शुरू कर दी। &lt;br /&gt;
शिवम, उसके माता पिता और भाई को बिसरख पुलिस ने तत्‍काल हिरासत में ले लिया। लेकिन उन्‍हें जेल भेजने से पहले पुलिस को ऐसे साक्ष्‍य जुटाने थे जिससे साबित होता कि वाकई शिवम व उसके परिजनों ने दहेज के लिए माला की हत्‍या करके उसके शव को ठिकाने लगाया था। चूंकि माला के पिता रामअवतार आरोपों के अलावा ऐसा कोई साक्ष्‍य पेश नहीं कर सके थे जिससे साबित होता कि शिवम माला को दहेज के लिए परेशान करता था। शिवम नोएडा के सेक्‍टर 18 के एक मॉल में सेल्समेन का काम करता था, लिहाजा पुलिस ने अपनी जांच वहीं से शुरू की। मॉल के मैनेजर विक्रम से पूछताछ से लेकर वहां की सीसीटीवी फुटेज और बायोमैट्रिक मशीन के रिकार्ड से पता चला कि घटना वाले दिन शिवम सुबह नौ बजे घर से चला गया था और रात को साढ़े आठ बजे वहां से निकला था। अगर वह अपनी डूयटी पर मौजूद था तो जाहिर था कि घटना में वह कहीं भी सक्रिय रूप से शामिल नहीं था। लिहाजा सीओ अनित कुमार सिंह ने तत्‍काल शिवम और उसके परिजनों की गिरफ्तारी का फैंसला टाल दिया। &lt;br /&gt;
लेकिन सीओ अनित कुमार सिंह ने शिवम के परिवार को पूरी तरह आरोपों से मुक्‍त नहीं किया था। लिहाजा उन्‍होंने शिवम के अलावा उसके माता पिता और भाई के मोबाइल कॉल की डिटेल व उसकी सीडीआर निकलवाई। सीडीआर में परिवार के किसी भी सदस्‍य की लोकेशन हैबतपुर गांव के आसपास नहीं मिली। न ही कॉल डिटेल से ऐसा कोई सुराग मिला कि शिवम के परिजनों को आरोपी माना जाता। सीओ अनित कुमार सिंह को जांच में पता चला है कि मृतका माला के परिजन दोनों की शादी के खिलाफ थे। उन्‍हें लगा कि कहीं इसी वजह से तो माला के परिजन दुराग्रह के कारण शिवम और उसके परिवार वालों के खिलाफ बिना सबूत के आरोप नहीं लगा रहे हैं। कई दिनों की जांच पडताल के कारण सीओ अनित कुमार सिंह को कहीं से भी इस बात के साक्ष्‍य नहीं मिले की माला की हत्‍या में शिवम या उसके परिजनों का हाथ है या माला को दहेज के लिए प्रताडित किया जाता था। &amp;nbsp;लिहाजा उच्चाधिकारियों के संज्ञान में जांच के सभ तथ्‍य लाने के बाद सीओ अनित कुमार सिंह ने माला हत्‍याकांड के मुकदमे से दहेज हत्‍या की धाराए हटाकर आगे की जांच बिसरख थाना प्रभारी अखिलेश त्रिपाठी के सुपुर्द कर दी। एसएचओ अखिलेश त्रिपाठी ने इस मुकदमे में अब भादंस की नई धाराए 302, 201, 316, 394, 411 जोड नए सिरे से पडताल शुरू कर दी। उन्‍होंने शिवम से माला के दोस्‍तों व उसके बारे में व्‍यक्तिगत जान पहचान वालों के बारे में जानकारी जुटानी शुरू की तो पता चला कि माला के पास दो मोबाइल फोन थे और संयोग से दोनों ही मोबइल फोन गायब थे। शिवम ने यह भी बताया कि 7 अप्रैल को जब माला कमरे में ताला लगाकर कहीं चली गई और वह घर लौटा था तो उसने घर में कुछ सामान इधर उधर फैला देखा था। जबकि माला घर को करीने से सजाकर रखने वाली लडकी थी। शिवम ने बताया कि उसने अपने ससुराल वालों को भी यह बात बतायी थी कि माला घर से जेवरात लेकर गायब गई है। &lt;br /&gt;
शिवम ने बताया कि जब तक माला की लाश नहीं मिली थी तब तक वह यही समझ रहा था कि शायद माला किसी बात से नाराज होकर खुद घर से चली गई है और घर से गहने भी ले गई है। लेकिन उसकी लाश मिलने के बाद ये साफ है कि किसी ने उसकी हत्‍या करने के बाद घर में लूटपाट की है। लेकिन अखिलेश त्रिपाठी की समझ में ये बात नहीं आ रही थी कि अगर किसी ने लूट की वारदात को अंजाम भी दिया है तो वह माला की हत्‍या करके उसकी लाश को इतनी दूर ले जाकर ठिकाने लगाने की मशक्‍कत क्‍यों करेगा। कहीं ऐसा तो नहीं माला का किसी से प्रेम संबध हे और उसके किसी आशिक ने ही इस वारदात को अंजाम दिया हो। ये सोचकर अखिलेश त्रिपाठी ने माला के दोनों मोबाइल की कॉल डिटेल निकलवाने के साथ उसके मोबाइल की सीडीआर भी निकलवाई। लेकिन कई दिन तक उसकी जांच के बाद भी कोई क्‍लू नहीं निकला। अखिलेश त्रिपाठी ने अपने मुखबिरों को भी माला के चरित्र के बारे में जानकारी जुटाने के काम पर लगाया। उन्‍होंने माला के उस स्‍कूल में भी लोगों से माला के बारे जानकारी हासिल की जहां वह टीचिंग करती थी लेकिन कहीं से भी कोई ऐसा सुराग हाथ नहीं लग रहा था जिससे हत्‍याकांड के खुलासे में कोई मदद मिलती।&lt;br /&gt;
&lt;table cellpadding=&quot;0&quot; cellspacing=&quot;0&quot; class=&quot;tr-caption-container&quot; style=&quot;float: left; margin-right: 1em; text-align: left;&quot;&gt;&lt;tbody&gt;
&lt;tr&gt;&lt;td style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiTRl6t3ps2dac9oBfU6W0ez4kDNxM8ZjQ8bjivrvePdjECGv_YHMULwh2GRD-d4rTcQQF5ff9XxsQPRgIZb_w557eQc5dQgBwYISRpGVKs8tZr3lqBzfRsiu-tVJZ6A6Ymgo0gsSiUTin-/s1600/mala+5.jpg&quot; imageanchor=&quot;1&quot; style=&quot;clear: left; margin-bottom: 1em; margin-left: auto; margin-right: auto;&quot;&gt;&lt;img border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;1600&quot; data-original-width=&quot;1343&quot; height=&quot;320&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiTRl6t3ps2dac9oBfU6W0ez4kDNxM8ZjQ8bjivrvePdjECGv_YHMULwh2GRD-d4rTcQQF5ff9XxsQPRgIZb_w557eQc5dQgBwYISRpGVKs8tZr3lqBzfRsiu-tVJZ6A6Ymgo0gsSiUTin-/s320/mala+5.jpg&quot; width=&quot;268&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;
&lt;tr&gt;&lt;td class=&quot;tr-caption&quot; style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;माला&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;
&lt;/tbody&gt;&lt;/table&gt;
&lt;br /&gt;
ये तो अब तय था कि हत्‍यारा कोई ऐसा शख्‍स था जिसने हत्‍या खुद की और इसमें शिवम को फंसाने की कोशिश की थी। एक ऐसी वजह थी जिससे त्रिपाठी को हत्‍याकांड का खुलासा होंने की उम्‍मीद दिख रही थी। माला का एक मोबाइल न मिलने के कारण पुलिस को जांच में &lt;br /&gt;
परेशानी जरूर आ रही थी लेकिन उसे उम्‍मीद थी कि अगर उस मोबाइल का&amp;nbsp;इस्तेमाल  किया &lt;br /&gt;
गया तो निश्‍चित ही कोई सुराग हाथ लगेगा। इसलिए पुलिस ने माला के उस मोबाइल नंबर को सर्विलांस पर लगवा दिया। पूछताछ में पता चला था कि माला इंटरनेट का काफी इस्तेमाल करती थी। व्‍हाटएप तथा फेसबुक मैसेंजर पर कॉलिंग भी करती थी। इसलिए पुलिस ने उसके वाट्सएप तथा फेसबुक प्रोफाइल को भी खंगाला लेकिन उसमें भी कोई सुराग नही मिला। पुलिस को&lt;br /&gt;
यह पता नहीं चला कि वह किससे बात करती थी। पुलिस को कॉल डिटेल की जांच से माला की     एक सहेली के बारे में पता चला जिससे वह जरूरत से ज्‍यादा बात करती थी। लिहाजा पुलिसने माला की उस सहेली से पूछताछ की। पता चला कि नोएडा में रहने वाली इस सहेली की भी लव मैरिज हुई थी। लेकिन पुलिस को लंबी पूछताछ के बाद भी उससे कोई खास खास जानकारी नहीं मिली।&lt;br /&gt;
8 अप्रैल को हुई माया की हत्‍या की जांच करते हुए बिसरख पुलिस को तीन महीने से ज्‍यादा का वक्‍त बीत गया था लेकिन हत्‍याकांड में प्रगति के नाम पर पुलिस एक कदम आगे बढाती तो दो कदम पीछे खडी दिखायी देती थी। घर से गायब कुछ गहनों, नकदी और दो मोबाइल फोन के कारण ये बात तो साफ दिख रही थी कि माला की हत्‍या लूट के उद्देश्‍य से की गई है कि लेकिन ये सब पुलिस को भ्रम में रखने के लिए किया गया है या सच में लूट हुई है पुलिस इसी पसोपेश में थी। इसी दौरान जून के आखिरी सप्‍ताह में गौतमबुद्ध नगर के एसएसपी डा0 अजयपाल &lt;br /&gt;
शर्मा ने क्राइम मीटिंग की समीक्षा के दौरान जब पाया कि बिसरख थाने की पुलिस माला &lt;br /&gt;
हत्‍याकांड खोलने में नाकाम है तो उन्‍होंने इस केस की जांच जिला अपराध शाखा को &lt;br /&gt;
हस्‍तातरित कर दी। जिसकी जांच का जिम्‍मा इंसपेक्‍टर कृष्‍णवीर सिंह को सोंपा गया।  &lt;br /&gt;
इंसपेक्‍टर कृष्‍णवीर सिंह ने एक बार फिर माला हत्‍याकांड की जांच नए सिरे से शुरू की। उन्‍होंने सबसे पहले माला के माता पिता के आरोपों को ध्‍यान मे रखकर शिवम के इर्द- गिर्द जांच का शिकंजा कसा। इसके बाद माला व शिवम के विवाहेत्‍तर संबधों को लेकर जांच पडताल की। तीसरे चरण में उन्‍होंने लूट के उद्देश्‍य से माला की हत्‍या के एंगल की जांच करते हुए आस पडोस में रहने वाले लोगों से पूछताछ शुरू की। इसी दौरान पुलिस को माला के घर के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों  और आस पडोस के लोगों से पूछताछ के दोरान पता चला कि गाजियाबाद के कैलाश नगर में रहने वाला माला की बुआ के लड़के मोहित और उसकी पत्‍नी रिंकी का माला के घर काफी आना जाना था। वारदात से एक दिन पहले भी दोनों माला के घर पर आए थे और तीन चार घंटे तक उसके घर पर रहे थे। इंसपेक्‍टर कृष्‍णवीर सिंह ने सौरभ को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी। मोहित ने बताया कि उसकी पत्‍नी रिंकी व माला की आपस में गहरी &lt;br /&gt;
छनती थी इसलिए वह अक्‍सर माला से मिलने और उसकी खैरियत लेने के लिए उसके घर &lt;br /&gt;
आता जाता रहता था। मोहित ने बताया कि आखिरी बार जब वह माला के घर उससे मिलने के लिए उसके घर गया था तो माला ने उस दिन उसे व रिंकी को अपने गहने और कपड़े दिखाए थे।      इसके बाद तो इंसपेक्‍टर कृष्‍णवीर सिंह को पूरा विश्‍वास हो गया कि माला के गहने देखकर &lt;br /&gt;
शायद मोहित के मन में लालच आ गया होगा। इसलिए उन्‍होंने मोहित के मोबाइल की कॉलडिटेल भी निकलवायी और उसकी सीडीआर भी चेक की तो पता चला कि मोहित की लोकेशन भी उस दिन माला के घर के आसपास नहीं थी।&amp;nbsp;इंसपेक्‍टर कृष्‍णवीर सिंह ने कई बार मोहित को पूछताछ के लिए बुलाया लेकिन उसके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं जुटा सके।  लिहाजा  &lt;br /&gt;
उन्‍होंने उसकी तरफ से ध्‍यान हटाकर दुसरे बिन्‍दुओं पर जांच शुरू कर दी। इधर बिसरख थाने का ज्‍यादातर स्‍टाफ और थाना प्रभारी सभी बदल चुके थे। नए थाना प्रभारी अनिल कुमार शाही ने थाने का चार्ज संभालने के बाद जब देखा कि माला हत्‍याकांड उनके थाने का एक ऐसा अनसुलझा केस है जिसकी जांच अपराध शाखा को सौंप दी गई है तो उन्‍होंने तय कर लिया कि वे अपने स्‍तर पर अलग से इस केस को सुलझाने का प्रयास करेंगे। बिसरख सर्किल के नए सीओ निशांक शर्मा ने भी एसएचओ अनिल कुमार शाही से हत्‍याकांड की गुत्‍थी को हर हाल में सुलझाने के लिए कहा। उन्‍होंने एसएचओ अनिल कुमार शाही के नेतृत्‍व में इंसपेक्‍टर इनवेस्‍टीगेशन&lt;br /&gt;
राम संजीवन, एसआई देवेन्‍द्र कुमार राठी को शामिल करके उन बिन्‍दुओं पर काम करने के लिए लगा दिया जिन पर पुलिस ने अब तक गौर नहीं किया था।      &lt;br /&gt;
इस दौरान पुलिस को हैबतपुर गांव में शिवम के घर के आसपास के लोगों से पूछताछ व सीसीटीवी की पडताल से पता चला कि जिस दिन माला अपने घर से लापता हुई थी। कुछ लोगों ने उसी मकान में तीसरे फ्लोर पर किराये के मकान में रहने वाले सौरभ व उसकी पत्नी रितु को एक बडे से बैग के साथ टैंपो से कहीं जाते देखा था। शाम को वे फिर वापस घर आ गए थे। ये एक चौकाने वाली जानकारी थी। शिवम से पूछताछ करने पर पता चला कि मई के महीने में सौरभ व रितु ने यह मकान खाली कर दिया था और अब वे गाजियाबाद के भीम नगर में किराए पर रहते है। इंसपेक्‍टर राम संजीवन ने माला के माता पिता को बुलाकर पूछताछ की तो उन्‍होंने     एक नई चौकाने वाली जानकारी दी। माला की मां कांति देवी ने बताया कि एक दिन वह विजय नगर में किसी काम से गई थी तो संयोग से उसे माला के मकान में तीसरे तल पर रहने वाली रितु मिल गई। रितु ने एक ऐसी बनारसी साडी पहनी हुई थी जो हूबहू ऐसी साढी से मिलती जुलती थी जो माला की मां ने उसके विवाह में उसे दहेज में दी थी। जब माला की मां ने उस साडी के बारे में रितु से पूछा तो वह सकपका गई थी उसने बाद में कहा कि माला ने कुछ दिन पहले उसे वह साडी उपहार स्‍वरूप देकर कहा था कि भाभी आपके उपर ये साडी अच्‍छी लगेगी आप पहन लिया करो क्‍योंकि मैं भारी भरकम साडी नहीं पहनती। रितु ने कांति देवी को सफाई तो दे दी लेकिन कांति देवी के हलक से उसका सच उतरा नहीं क्‍योंकि उन्‍हें पता था कि माला को अपने गहनों और कपड़ो से बेहद प्‍यार था जिसे वो किसी को नहीं देती थी। लेकिन सच जानने के लिए बेटी अब जिंदा नही थी इसलिए यह बात उनके दिमाग से निकल गई। लेकिन जब     इंसपेक्‍टर राम सजीवन ने उनसे रितु व उसके पति सौरभ के बारे में पूछा तो कांति देवी को अनायास ये बात याद आ गई। राम सजीवन ने ये बात एसएचओ अनिल कुमार शाही और सीओ निशांक शर्मा को बतायी तो उन्‍होंने रणनीति बनायी कि सौरभ को बिना भनक लगे&lt;br /&gt;
उसकी निगरानी की जाए। साथ ही उन्‍होंने माला व शिवम के लापता मोबाइल को फिर सेसर्विलांस पर लगवा दिया।&lt;br /&gt;
&lt;table cellpadding=&quot;0&quot; cellspacing=&quot;0&quot; class=&quot;tr-caption-container&quot; style=&quot;float: right; margin-left: 1em; text-align: right;&quot;&gt;&lt;tbody&gt;
&lt;tr&gt;&lt;td style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEirO-qgJwAp-dsEJIkZFv0flOhaHdqua6M17UStimNO9UicxT9uTk3-XF5YJYD3POHE6C_TwwLIOBk6yTqsvb0qHXtz9wtglhF_kS56n_M16U1BTLoFjNSahvXOaBzOnGZqcQLPiy1VC8rQ/s1600/ritu.jpg&quot; imageanchor=&quot;1&quot; style=&quot;clear: right; margin-bottom: 1em; margin-left: auto; margin-right: auto;&quot;&gt;&lt;img border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;1600&quot; data-original-width=&quot;1342&quot; height=&quot;320&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEirO-qgJwAp-dsEJIkZFv0flOhaHdqua6M17UStimNO9UicxT9uTk3-XF5YJYD3POHE6C_TwwLIOBk6yTqsvb0qHXtz9wtglhF_kS56n_M16U1BTLoFjNSahvXOaBzOnGZqcQLPiy1VC8rQ/s320/ritu.jpg&quot; width=&quot;268&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;
&lt;tr&gt;&lt;td class=&quot;tr-caption&quot; style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;रितु&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;
&lt;/tbody&gt;&lt;/table&gt;
एक हफ्ता बीता होगा कि अचानक मोबाइल कंपनी से सीओ निशांक शर्मा के पास फोन आया कि माला का मोबाइल फोन एक नए सिम कार्ड के साथ एक्टिव हुआ है। एसएचओ अनिल     शाही ने साइबर टीम के जरिए पता कराया तो जानकारी मिली कि यह फोन अलीगढ के थाना     पिसांवा अर्न्‍तगत गांव राऊपुर में रहने वाला शिवचरण दिवाकर इस्‍तेमाल कर रहा है। सीओ निशांक शर्मा के निर्देश पर इंसपेक्‍टर राम संजीवन और एसआई देवेन्‍द्र राठी की टीम ने उस गांव में जाकर शिवचरण को हिरासत में ले लिया। शिवचरण को थाने लाकर जब पूछा गया कि उसे वह फोन कहां से मिला तो उसने बताया कि कुछ दिन पहले उसके बेटे सौरभ दिवाकर ने &lt;br /&gt;
उसे दिया था। कुछ ही दिन पहले उसने एक सिम कार्ड खरीदकर दिया और उन्‍हें इस्‍तेमाल करने के लिए दे दिया था। सौरभ का नाम सामने आते ही सारी सीओ निशांक&amp;nbsp;शर्मा सारी कहानी &lt;br /&gt;
समझ गए। उन्‍होंने उसी वक्‍त सौरभ को हिरासत में लेने के लिए एक टीम उसके भीम नगर स्थित एक घर पर भेज  दी। सौरभ तो घर पर नहीं मिला लेकिन उसकी पत्‍नी रितु घर पर ही मिल गई। महिला पुलिस की मदद से उसे पुलिस टीम बिसरख थाने ले आयी। पुलिस के देखते ही रितु के हाथ पांव फूल गए। एसएचओ अनिल शाही के दिमाग में पहले से ही माला की साडी वाली बात थी लिहाजा उन्‍होंने थोडी सख्‍ती की और रितु टूट गई। उसने कबूल कर लिया कि     माला की हत्‍या उसने व उसके पति ने की थी और उसके घर से गहने, कपडे व नकदी तथा     दो मोबाइल चुराकर उसके शव को उसी के बैग में भरकर टेंपो से ले जाकर कनावनी नाले के पास फेंक दिया था। पुलिस टीम ने उसी समय माला को साथ लेकर उसके घर छापा मार तो &lt;br /&gt;
उसके घर से करीब तीन लाख&amp;nbsp; रूपए के वे तीन लाख रूपए के आभूषण, कीमती कपड़े, तथा एकअन्‍य मोबाइल और दूसरा कीमती सामान बरामद कर लिया जो उसने अपने पति के साथ माला के घर से चुराए थे। इसके बाद पुलिस सौरभ दिवाकर की तलाश में जुट गई। अगली सुबह पुलिस ने सौरभ को भी गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में पता चला कि सौरभ मूल रूप से &lt;br /&gt;
अलीगढ़ के पिसावा का रहने वाला है और माला की हत्‍या के समय उसी मकान में तीसरे फ्लोर पर किराए पर रहता था जिस मकान के दूसरे फ्लोर पर शिवम अपनी पत्नी के साथ रह रहा     था। सौरभ ने बताया कि छह अप्रैल को माला की बुआ का लड़का मोहित व उसकी पत्नी रिंकी     उससे मिलने घर गए थे। घर में माला ने रिंकी को अपनी शादी के कीमती कपड़े, साड़ियां और आभूषण दिखाए थे। इसी दौरान वहां पर रितु भी पहुंच गई थी। उसने आभूषण व कपड़े देख लिए थे। जिसके बाद रितु के मन में लालच आ गया और उसने यह बात अपने सौरभ को बता।      दोनों ने मिलकर आभूषण व महंगे कपड़े लूटने के लिए माला की हत्या की साजिश रची। सौरभ नशे का आदी था और उसका काम धंधा भी ठीक नहीं चल रहा था। आर्थिक तंगी के कारण सौरभ ने माला की हत्‍या करके उसके घर में चोरी की साजिश रच डाली।  &lt;br /&gt;
7 अप्रैल को शिवम के जाने के बाद सौरभ के कहने पर रितु ने माला को अपने घर बहाने से बुलाया पहले उन्‍होंने मिलकर चाय पी। ओर उसके बाद गमछे नुमा तौलिए से सौरभ ने माला का गला घोंटकर हत्या कर दी। माला की लाश को अपने घर में ही छोडकर उसके पास से घर की चाभी लेकर सौरभ व रितु  माला के घर पहुंचे। माला घर की अलमारी में रखी महंगी सात साड़ियां, लहंगा-चुन्नी, स्वेटर और शॉल रख तो अपने पास रख लिए। और घर से मिले करीब तीन लाख के जेवर बाजार में ले जाकर बेच दिए थे जबकि 35 हजार रूपए की नकदी अपने पास रख ली थी। &amp;nbsp;सौरभ ने माला के घर में रखा शिवम का और माला का मोबाइल भी चुराकर स्विच ऑफ कर दिया। सौरभ माला के घर से उसका ट्राली बैग भी चुरा लाया था इसी ट्राली बैग में&lt;br /&gt;
उसने हाथ पांव बांधकर उसने माला के शव का भर दिया। दोपहर बाद सौरभ एक टैंपा बुला     लाया और पत्‍नी के साथ लाश से भरे बैग को लेकर विजय नगर के कनावनी में पहुंचकर     टैंपो का छोड दिया। टैंपो वाले के जाने के बाद कुछ दूर तक पति पत्‍नी बैग को किसी तरह दूर ले गए इसके बाद मौका देखकर उन्‍होंने सडक से नीचे नाले के किनारे लुडका दिया और फिर वहां से वापस घर लौट आए। सौरभ ने माला के घर से चुराए गए दो मोबाइल में से एक तो अपने घर में ही छिपाकर रख लिया। लेकिन उसने सबसे बडी गलती ये कर दी कि उसने इनमें से एक     मोबाइल अलीगढ़ में रहने वाले अपने पिता को दे दिया। कुछ दिन पहले उसने इस मोबाइल में एक सिमकार्ड डालकर उन्‍हें चलाने के लिए भी दे दिया तो उसने बडी भूल कर दी। पांच महीने से माला हत्‍याकांड का राज खोलने के लिए जुटी बिसरख पुलिस को इस मोबाइल की घंटी बजते ही हत्‍याकांड का राज खोलने का रास्‍ता मिल गया। सौरभ दिवाकर व उसकी पत्‍नी से विस्‍तृत पूछताछ के बाद बिसरख पुलिस ने उनकी गिरफ्तारी दर्ज कर ली और दोनों को अदालत में पेश कर दिया जहां से उन्‍हें न्‍यायिक हिरासत में जेन भेज दिया गया।&lt;/div&gt;
</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://jurmkiduniya.blogspot.com/feeds/5629541138110164379/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://jurmkiduniya.blogspot.com/2019/05/blog-post_25.html#comment-form' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8049618298159816963/posts/default/5629541138110164379'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8049618298159816963/posts/default/5629541138110164379'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://jurmkiduniya.blogspot.com/2019/05/blog-post_25.html' title='सूटकेश में मिली लडकी की लाश की गुत्थी सुलझाने में उलझ गई'/><author><name>sunil verma</name><uri>http://www.blogger.com/profile/06462864962085848512</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='27' height='32' src='//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiM8mYTF1rSTG5OLwjuKe8ktdZwaNsHWlaRFf283uYibqX2zwZT1C0LITcRz_c-QhdhjEK686quBdQwPl6yirK3P5dvBOclUZ-nAWjIgkhf_dw38PrIOFgSWi-PC_Q-ilg/s113/sunil+pic2.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgV8OcAvQJTpz5mNh5QlXxv05fQIJyr26Xku_IH89Vu7obtUXAaSnqg2JR6n7Q5mEXzBbLSmGXHHto5DcY5dfWJfbjKiMm1yN0JCkdeZhSaIw_8Giojkj8j1ywNsWzhQcf7fZkmiTZ2Nnyb/s72-c/mala+6.jpg" height="72" width="72"/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8049618298159816963.post-204838981620354488</id><published>2018-07-09T20:03:00.001+05:30</published><updated>2023-03-18T22:00:46.261+05:30</updated><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="True Story"/><title type='text'>एक कातिल हसीना सेे जिदंगी हार गया इंटरनेशनल बॉक्सर</title><content type='html'>&lt;div dir=&quot;ltr&quot; style=&quot;text-align: left;&quot; trbidi=&quot;on&quot;&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;table align=&quot;center&quot; cellpadding=&quot;0&quot; cellspacing=&quot;0&quot; class=&quot;tr-caption-container&quot; style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto; text-align: center;&quot;&gt;&lt;tbody&gt;
&lt;tr&gt;&lt;td style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjaXGA_it_ERFZd3xAunaTMfu7t_ALSu8opTUPPtig9WunRAC-yU3rcL16Pv0vd_F0SrvM2z-errHuAoc4ZTriI982ljdyl1JcPsLD2UBfEm-IhvrUB6vIVMLabWU3bSmU7UEUJKm5FIuND/s1600/maan.jpg&quot; imageanchor=&quot;1&quot; style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto;&quot;&gt;&lt;img border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;960&quot; data-original-width=&quot;955&quot; height=&quot;320&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjaXGA_it_ERFZd3xAunaTMfu7t_ALSu8opTUPPtig9WunRAC-yU3rcL16Pv0vd_F0SrvM2z-errHuAoc4ZTriI982ljdyl1JcPsLD2UBfEm-IhvrUB6vIVMLabWU3bSmU7UEUJKm5FIuND/s320/maan.jpg&quot; width=&quot;318&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;
&lt;tr&gt;&lt;td class=&quot;tr-caption&quot; style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: red;&quot;&gt;जितेन्द्र मान&lt;/span&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;
&lt;/tbody&gt;&lt;/table&gt;
&lt;b&gt;सुनील वर्मा&lt;br /&gt;&lt;/b&gt;&lt;br /&gt;
‘उर्फ ये मान का बच्चा भी ना बहुत ही कमीना हो गया है आजकल। बंदा कल से फोन ही बंद करके बैठा है। अगर सो भी रहा है तो ऐसी भी क्या नींद कि कल से नींद ही पूरी नही हुई। उपर से चौधरी साब ने फोन करके और जान खा रक्खी है।’&lt;br /&gt;
कई बार कॉल करने के बाद भी जब प्रीतम का फोन मान के फोन से कनेक्ट नहीं हुआ तो प्रीतम&amp;nbsp; नही मन बड़बड़ाते हुए ये सोचने पर मजबूर जरूर हो गया कि कुछ अनहोनी तो नहीं हो गई है। मान थोड़ा आलसी और नींद का कच्चा जरूर है लेकिन इतना लापरवाह कभी नहीं था कि बंदा अपना काम धंधा छोड़कर फोन बंद करके ही आराम फरमाने लगे।&lt;br /&gt;
‘कहीं कोई गड़बड़ या कोई और बात तो नहीं।’&lt;br /&gt;
कई तरह के बुरे खयालों के बीच प्रीतम लगातार बड़बडा रहा था। चिंता के कारण उसके माथे की लकीरे मोटी होती जा रही थी। होना भी लाजिमी थी।&lt;br /&gt;
मान को लेकर प्रीतम की चिंता बिना वजह नहीं थी। 10&amp;nbsp; जनवरी की दोपहर बाद जितेन्द्र मान जिसे सब प्यार से मान कहते थे उससे प्रीतम की आखरी बार फोन पर बातचीत हुई थी। उस वक्त प्रीतम रोहतक में हो रही एक बॉक्सिंग चैंपियनशिप का रेफरी बनकर रोहतक आया हुआ था। जब बात हुई थी तो उसने बताया कि वह घर पर ही है और आराम कर रहा है। पूछने पर मान ने यहीं बताया था कि थोड़ी देर पहले ही वह जिम से वापस आया है। उसके बाद प्रीतम अपने काम में व्यस्त हो गया और उस दिन दोबारा बात नहीं हो सकी। 11&amp;nbsp; जनवरी को उसने दोपहर से लेकर शाम तक कई बार मान के मोबाइल पर फोन लगाकर बात करनी चाही लेकिन हर बार यही जवाब मिला कि उसका मोबाइल स्विच अॉफ है।&lt;br /&gt;
अगले दिन यानि 12&amp;nbsp; जनवरी को प्रीतम रोहतक से अपना काम निबटाकर दिल्ली में अपने घर मुनिरका लौट रहा था, तभी ग्रेटर के जिम में उसके पार्टनर नितिन चौधरी ने फोन करके उससे पूछा कि मान कल भी जिम नहीं आया था और आज भी जिम नहीं पहुंचा, जिम आने वाले मेंबर और मान के क्लांइट नाराज हो रहे हैं।&lt;br /&gt;
नितिन ने प्रीतम से सवाल किया कि ‘मान जिम क्यों नहीं आ रहा उसकी तबियत तो ठीक है ना, क्योंकि उसका मोबाइल भी स्विच अॉफ है।&lt;br /&gt;
चिंता होंने के साथ प्रीतम को मान पर गुस्सा भी आया। क्योंकि उसे तो खुद ही नहीं पता था कि जनाब फोन बंद करके क्यों बैठे हैं।&lt;br /&gt;
प्रीतम जल्द से जल्द अपने घर पहुंच जाना चाहता था। दोपहर करीब12&amp;nbsp; बजे वह अपने घर मुनिरका पहुंंच गया। इस दौरान नितिन का दोबारा फोन आया कि मान अभी भी जिम नहीं पहुंचा और उसका मोबाइल भी स्विच अॉफ&amp;nbsp;है।&lt;br /&gt;
कहीं ऐसा तो नहीं कि मान का फोन कहीं खो गया हो, खराब हो गया हो।&lt;br /&gt;
अगर ऐसा है तो अभी मालूम हो जायेगा।&lt;br /&gt;
प्रीतम ने अपने जिम के इंसट्रेक्टर गौरव को फोन लगाया जो ग्रेटर नोएडा में ही रहता है।&lt;br /&gt;
‘हां सर क्या&amp;nbsp; हुआ।’ फोन पर दूसरी ओर से गौरव ने पूछा&lt;br /&gt;
‘गौरव तुमने मान का फ्लैट देखा है ना‘ प्रीतम ने पूछा&lt;br /&gt;
‘जी हां सर कई बार जा चुका हूं वहां पर‘ गौरव ने उत्तर दिया।&lt;br /&gt;
‘तुम तुरंत उसके रूम पर जाकर देखो कि उसने अपना फोन क्यों बंद किया हुआ है और वहां पहुंचते ही उससे मेरी बात कराना।‘&lt;br /&gt;
गौरव का निर्देश देकर प्रीतम फिर से अपने काम में लग गया। उसे भी जल्द ही अपने नए मकान में भी शिफ्ट करना था। 4 दिसंबर को ही प्रीतम की शादी हुई थी। तब तक वह भी जिला गौतमबुद्धनगर के ग्रेटर नोएडा के सेक्टर जीटा एक की एवीजे हाईटस सोसाइटी के फ्लैट नंबर एच 606&amp;nbsp; में मान के साथ ही रहता था। लेकिन शादी के बाद अब प्रीतम को बडे मकान की जरूरत थी। लिहाजा प्रीतम ने ग्रेटर नोएडा के सेक्टर 150&amp;nbsp; में एटीएस सोसाइटी में एक बडा फ्लैट खरीद लिया जल्द ही वह अपनी पत्नी के साथ वहां शिफ्ट होंने वाला था। इसीलिए वह रोहतक से सीधा अपने पैतृक घर मुनिरका आ गया और गाडी में कुछ सामान भरकर पत्नी के साथ ग्रेटर नोएडा निकलने की तैयारी कर रहा था। प्रीतम को ग्रेटर नोएडा के सेक्टर अल्फा में कमेर्शियल बेल्ट के ब्लॉक-ए में कसाना टॉवर के तीसरे फ्लोर पर अल्टीमेट फिटनेस एकेडमी के नाम से एक जिम था जिसमें नितिन चौधरी उसका पार्टनर था। यूं तो जिम में कई इंसट्रक्टर थे लेकिन जिम का असली ट्रेनर उसकी बुआ का लड़का जितेन्द्र मान ही था। बचपन से दोनों साथ पढ़े लिखे और जवान हुए थे। दोनों ने एक साथ बॉक्सिंग शुरू की थी और इसे अपना करियर बनाया था। इसलिए दोनो की एक दूसरे से खूब पटती भी थी।&lt;br /&gt;
पत्नी के साथ प्रीतम मुनिरका से निकलने की तैयारी कर ही रहा था कि तब तक गौरव का फोन आ गया ‘भाई जी मान भाई का फ्लैट तो बाहर सेे लॉक है शायद वे कहीं बाहर गए हुए हैं।‘&lt;br /&gt;
‘लगता है कुंभकर्ण की नींद सो रहा है कमीना। खुद बाहर से लॉक करके खिड़की के रास्ते अंदर चला गया होगा, सब जानता हूं मैं इसकी हरकतों को पहले भी कई बार ऐसा कर चुका है। तुम वहीं रूकों मैं घंटे भर में वहां पहुंच रहा हूं फिर देखता हूं इसे।‘ कहते हुए उसने फोन डिस्कनेक्ट कर दिया। प्रीतम समझ गया कि मान फ्लैट के भीतर ही होगा और सो रहा होगा, क्योंकि जब वह उसके साथ ही रहता था तब भी वह कई बार पूरे दिन और पूरी रात सोता रहता था और&amp;nbsp; फ्लैट को बाहर से लॉक करके खिड़की के रास्ते भीतर चला जाता था। इस बात के लिए वह पहले भी उसे डांट चुका था। लेकिन आज उसकी इस हरकत ने प्रीतम का पारा कुछ ज्यादा ही चढ़ा दिया था। उसने गौरव से कहा कि वह मान की सोसाइटी में ही रूके कुछ देर में वह खुद वहां पहुंच रहा है। इसके बाद प्रीतम ने अपनी पत्नी को साथ लिया और तेजी से ड्राइव करते हुए घंटे भर में मुनिरका से ग्रेटर नोएडा में एवीजे हाईटस सोसाइटी पहुंचा गया। सोसाइटी के गेट पर ही गौरव खड़ा था। उसने गाडी से मान के फ्लैट की चाभी निकाली और अपनी पत्नी तथा गौरव को साथ लेकर छठे फ्लोर पर मान के फ्लैट पर पहुंचा और मुख्यद्वार खोलकर अंदर प्रवेश किया। लॉबी को पार करते ही वह कमरा था जिसे मान ने अपना बेडरूम बनाया हुआ था।&amp;nbsp; &lt;br /&gt;
बेडरूम को दरवाजा थोडा खुुला था जिससे साफ दिख रहा था कि जमीन पर गद्दे डालकर बनाए गए बेड पर कोई सिर तक कंबल ओढ़कर सोया था।&lt;br /&gt;
&lt;table align=&quot;center&quot; cellpadding=&quot;0&quot; cellspacing=&quot;0&quot; class=&quot;tr-caption-container&quot; style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto; text-align: center;&quot;&gt;&lt;tbody&gt;
&lt;tr&gt;&lt;td style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhkuBQLc_sZJstYoELG4ahHiPzeHnx4ie6XnM1sUT17iOPjpGernG7K7UeVPfmbfBrURqbOXj3UmLav4wMrbQQfYNeE-wiJxwRwLvO6RZg7K5e3B7GPax32eH3SwYAwAkiYKiiME8O7eTPD/s1600/SRISTI+GUPTA.jpg&quot; imageanchor=&quot;1&quot; style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto;&quot;&gt;&lt;img border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;960&quot; data-original-width=&quot;960&quot; height=&quot;320&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhkuBQLc_sZJstYoELG4ahHiPzeHnx4ie6XnM1sUT17iOPjpGernG7K7UeVPfmbfBrURqbOXj3UmLav4wMrbQQfYNeE-wiJxwRwLvO6RZg7K5e3B7GPax32eH3SwYAwAkiYKiiME8O7eTPD/s320/SRISTI+GUPTA.jpg&quot; width=&quot;320&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;
&lt;tr&gt;&lt;td class=&quot;tr-caption&quot; style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: red;&quot;&gt;सृष्टि गुप्ता&lt;/span&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;
&lt;/tbody&gt;&lt;/table&gt;
‘ये देखो कमीना कंबल तानकर कुंभकर्ण की नींद सोया हुआ है और हम यहां परेशान हो रहे है।‘ मान की घर में मौजूदगी से संतोष की सांस लेते हुए प्रीतम बडबडाया और दौडते हुए मान के उपर पडा कंबल खींच लिया।&lt;br /&gt;
जितेन्द्र मान के मुंह और नाक से खून निकल रहा था। साथ ही प्रीतम की नाक में बदबू का तेज&amp;nbsp; भभका लगा तो ‘ओह माई गॉड’ कहते हुए वह दो कदम पीछे हट गया उसके मुंह से चीख निकल गयी। तब तक गौरव तथा उसकी पत्नी भी समीप आ गए। कमरे में उठ रहे बदबू के झौंकें के कारण उन्होंने अपनी नाक पर रूमाल रख लिए। अब प्रीतम की समझ में आ गया कि क्यों मान का मोबाइल बंद था। नाक और मुंह से खून आने के कारण वो समझ गया कि उसके मन में उठ रहे अनहोनी के ख्याल सच हो गए है। उसने समझा शायद मान ने कोई जहरीली चीज खाई है जिससे उसके मुंह और नाक से खून निकल रहा है।&lt;br /&gt;
गौरव ने सोसाइटी के आरडब्लूहए तथा आस पड़ोस के फ्लैट में रहने वाले पड़ोसियों को एकत्रित कर लिया। इसी दौरान प्रीतम ने पुलिस कंट्राेल रूम को फोन करके सूचना दे दी कि एवीजे हाईट सोसाइटी के एच 606 में जितेन्द्र मान की मौत हो गई है। सूचना मिलते ही सूरजपुर कोतवाली के एसएचओ अखिलेश प्रधान अपने उप निरीक्षक सोहनवीर मलिक और हरीराज , कांस्टेबल कृष्ण कुमार, राजेश कुमार,राजेश बाबू को लेकर तत्काल घटनास्थल पर पहुंच गए। तब तक दोपहर के दो बज चुके थे।&lt;br /&gt;
घटनासथल पर पहुंचकर जब इसपेक्टर अखिलेश प्रधान ने उस कमरे का निरीक्षण किया जिसमें जमीन पर गद्दे पर मान की लाश पड़ी थी तो बदबू के कारण उन्हें यकीन हो गया कि मान की मौत को कम से कम 24 घंटे से ज्यादा का वक्त बीत चुका था इसलिए उसकी लाश सड़ने लगी थी और उसमें से बदबू आ रही रही थी।&lt;br /&gt;
एसआई हरीराज ने मान के शरीर पर ओढ़े हुए कंबल को पूरी तरह हटाया तो देखा कि नीचे पड़े गद्दो पर खून का सैलाब बना हुआ था। कांसटेबल राजेश कुमार की मदद से जब उन्होंने मान के शव को पलटा तो देखा कि उसकी कमर व गर्दन से खून बह रहा था।&lt;br /&gt;
‘सर मामला कुछ और है इसे तो शायद किसी ने गोली मारी है मुंह और नाक से खून कोई विषैला पदार्थ खाने की वजह से नहीं बल्कि शायद गोली लगने की वजह से निकल रहा है।‘ एसआई हरीराज ने कहा।&lt;br /&gt;
&lt;table align=&quot;center&quot; cellpadding=&quot;0&quot; cellspacing=&quot;0&quot; class=&quot;tr-caption-container&quot; style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto; text-align: center;&quot;&gt;&lt;tbody&gt;
&lt;tr&gt;&lt;td style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg1Z-FilHyb9HZJE4jS-C6wteQQ_6YufnyfKV_dfd1RUCkBYPmu37npRFuusc3q6oWPK117zWBvBkAvVVAKxUQKzqB6g03WPfCJWCwvGoHclIjv4cDmIVO_3J30r6vygnuZWGpSASXYE28r/s1600/akhilesh+pradhan.jpg&quot; imageanchor=&quot;1&quot; style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto;&quot;&gt;&lt;img border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;1600&quot; data-original-width=&quot;1369&quot; height=&quot;320&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg1Z-FilHyb9HZJE4jS-C6wteQQ_6YufnyfKV_dfd1RUCkBYPmu37npRFuusc3q6oWPK117zWBvBkAvVVAKxUQKzqB6g03WPfCJWCwvGoHclIjv4cDmIVO_3J30r6vygnuZWGpSASXYE28r/s320/akhilesh+pradhan.jpg&quot; width=&quot;273&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;
&lt;tr&gt;&lt;td class=&quot;tr-caption&quot; style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: red;&quot;&gt;इंंसपेक्टर अखिलेश प्रधान&lt;/span&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;
&lt;/tbody&gt;&lt;/table&gt;
इंसपेक्टर अखिलेश प्रधान समझ गए कि मामला उतना सीधा नहीं है जितना वे समझ रहे थे। इंसपेक्टर प्रधान ने तुरंत एसपी सुनीति शर्मा को फोन करके घटना की इत्तला दी जो एसएसपी लवकुमार के शहर से बाहर होने के कारण जिला पुलिस के सर्वोच्च पद की जिम्मेदारी भी संभाल रही थी। एसपी सुनीति शर्मा कुछ ही देर में ग्रेटर नोएडा वन इलाके के सीओ अमित किशाेर श्रीवास्तव तथा फोरेंसिक क्राइम टीम को साथ लेकर घटनास्थल पर पहुंच गई।&lt;br /&gt;
जब उन्हें ये पता चला कि मरने वाला जितेन्द्र मान इंटरनेशनल बॉक्सिंग चैंपियन है तो उन्होंने इंसपेक्टर प्रधान को घटनास्थल के निरीक्षण से लेकर हर जांच को बेहद बारीकी से करने के निर्देश दिए। जिस कमरे में मान का शव पड़ा था उस कमरे में शराब की बोतल, सोडा व दो गिलास भी पडे थे। साथ में खाने के झूठे बर्तन तथा पानी का खाली जब रक्खा था। जिसे देखने से साफ था कि मान के साथ पहले किसी ने शराब पी थी और बाद में गोली मारकर उसकी हत्या कर दी गई। हत्यारा जो भी था वह मान का परिचित ही रहा होगा क्योंकि साथ मिलकर शराब कोई अंजान व्यक्ति नहीं पी सकता।&lt;br /&gt;
इंसपेक्टर प्रधान को प्रीतम टोकस ने बता दिया कि किस तरह वह पिछले दो दिनों से मान को फोन कर रहा था लेकिन उसका फोन स्विच अॉफ था।&lt;br /&gt;
क्राइम टीम ने मौके से संभावित फिंगर प्रिंट और फोटो व वीडियोंग्राफी करने का खत्म कर लिया तो इंसपेक्टर प्रधान ने शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया। इस दौरान प्रीतम ने अपने परिवार के अन्य लोगों और रिश्तेदारों को फोन करके मान की हत्या की सूचना दे दी थी। सूचना पाकर परिजनों के घटनास्थल पर पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया और वहां उन्हानें रोनो बिलखना शुरू कर दिया।&lt;br /&gt;
एसपी सुनीति शर्मा ने प्रीतम से पूछा-&lt;br /&gt;
‘आपकों किसी पर शक है कि किसने मान को मारा होगा।‘&lt;br /&gt;
‘नहीं मैम इस बारे में मुझे कोई आईडिया नहीं, क्योंकि मान की न तो किसी से दुश्मनी थी और न हीं मुझे इस बारे में उसने कभी बताया था। उदास और रूंधे गले से&amp;nbsp; मान ने उत्तर दिया ‘मेरा भाई बहुत सीधा था और उसका ज्यादातर वक्त तो जिम में या मेरे साथ ही गुजरता था ऐसे में पता नहीं किसने उसके साथ ऐसी अनहोनी कर दी।‘&lt;br /&gt;
‘सर हमने घर का कोना -कोना छान लिया है मृतक का फोन और पर्स कहीं नही मिल रहा है लगता है मारने वाला फोन और पर्स भी अपने साथ ले गया है।‘ घर की जांच पडताल के काम में जुटे एसआई हरीराज ने एसपी सुनीति और इंसपेक्टर प्रधान को बताया तो वे सोचने पर मजबूर हो गए कि&amp;nbsp; हत्या करने वाला मान का फोन अपने साथ क्यों ले गया है।‘&lt;br /&gt;
‘प्रधान हमे तुरंत इलैक्ट्रॉनिक सर्विलांस पर काम करना होगा।‘ एसपी सुनीति ने कहा और उन्होंने प्रीतम टोकस से मान का मोबाइल नंबर नोट करके अपनी सर्विलांस टीम के कांस्टेबल संजीव कुमार और सुधीर अहलावत को देकर निर्देश दिया कि मान के मोबाइल फोन की पिछले एक महीने की कॉल डिटेल, उसकी लोकेशन तथा तमाम जानकारी जितनी जल्दी हो सके निकालकर इंसपेक्टर प्रधान को दो।&lt;br /&gt;
आदेश मिलते ही संजीव और सुधीर इस काम को करने के लिए वहां से रवाना हो गए।&lt;br /&gt;
&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;
&lt;/div&gt;
एसपी सुनीति और सीओ अमित किशाेर भी इसके बाद इंसपेक्टर प्रधान को आवश्यक दिशा निर्देश देकर घटनास्थल से रवाना हो गए।&lt;br /&gt;इस दौरान मीडिया में भी ये खबर जंगल की आग की तरह&amp;nbsp; फैल चुकी थी कि एवीजे हाईटस में 27 साल के जिस युवक का मर्डर हुआ है वो इंटरनेशनल जूनियर बॉक्सिंग चैपियनशिप जीतने वाला मान है। देर शाम तक मीडिया और पुलिस अपने -अपनेे काम में व्यस्त रहे।&lt;br /&gt;
उसी दिन यानि 12 जनवरी 2018 की शाम को इंसपेक्टर अखिलेश प्रधान ने प्रीतम टोकस की लिखित शिकायत पर सूरजपुर थाने में अपराध संख्या 40 पर भादसं की धारा 302 में हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया और जांच की कमान खुद अपने हाथ में ले ली।&lt;br /&gt;
उन्होंने प्रीतम टोकस से मृतक जितेन्द्र सिंह मान के बारे में सबकुछ बताने के लिए कहा तो प्रीतम ने जो कुछ बताया उसे जानकर इंसपेक्टर प्रधान को भी मान से हमदर्दी पैदा हो गई क्योंकि उसका प्रोफाइल ही कुछ गर्व करने वाला था।&lt;br /&gt;
जितेंन्द्र मान का जन्म 12 दिसंबर 1990 को दिल्ली के दिल्ली के अलीपुर गांव में हुआ था। जन्म के दो साल बाद ही जितेन्द्र की मां राजबाला को निधन हो गया था। जब वह दस साल का था तो उसके पिता सत्य प्रकाश&amp;nbsp; का भी बीमारी के कारण निधन हो गया। परिवार में जितेन्द्र के दो बड़े भाई योगेश व देवेन्द्र है जो विवाहित है वे अलीवुर में ही रहते है। जितेन्द्र की एक बहन भी है जो उससे छोटी है और उसकी शादी हो चुकी है। पिता की मौत के बाद जितेंन्द्र मान अपनी बुआ के पास मुनिरका में आकर रहने लगा। बुआ का लड़का प्रीतम टोकस उससे तीन साल बड़ा और लगभग हम उम्र ही था। इसके बाद दोनों ने एक साथ पढाई की ओर बाद में दिल्ली के दयाल सिंह कालेज से गे्रजुऐशन किया। प्रीतम और जितेन्द्र दोनों के ही परिवारों में ज्यादातर युवा उम्र के बच्चों में कुश्ती और बॉक्सिंग को लेकर न सिर्फ क्रेज था वरन ज्यादातर परिजनों ने इन खेलों को अपना प्रोफेशन और करियर भी बना लिया था। इसीलिए किशाेरावस्था से ही प्रीतम और जीत मान ने बॉक्सिंग खेलना शुरू कर दिया था और नेशनल कोच राजेश टोकस से कोचिंग लेनी शुरू कर दी थी।&amp;nbsp; 1988 में दोनों ने ही हरियाणा में स्टेट बॉक्सिंग में अपना रजिस्ट्रेशन कराया था। वह दिल्ली स्टेट की ओर से ही खेलते थे। मान ने कई चैंपियनशिप खेलते हुए कई गोल्ड मैडल और प्रतियोगिता जीती थीे। उज्बेकिस्तान, क्यूबा, फ्रांस और रूस में वह कई चैंपियनशिप में खेला और देश के लिए गोल्ड तथा सिल्वर मेडल जीते थे। इसी दौरान युवावस्था में मान की नियुक्ति खेल कोटे से आर्मी में हो गई। आर्मी की तरफ से भी उसने कई टूर्नामेंट खेले और बॉक्सिंग में मेडल हासिल किए। मान की जब नियुक्ति आर्मी में बतौर कांस्टेबल हुई थी तो उससे वायदा किया गया था कि उसे जल्द ही तरक्की देकर हवलदार बना दिया जाएगा। लेकिन कई साल पहले बीत जाने पर भी जब उसे तरक्की नहीं दी गई तो सेना से नाराजगी में उसने दो साल पहले नौकरी छोड दी। दो साल पहले 2015 में ही प्रीतम ने ग्रेटर नोएडा के अल्फा कमर्शल बेल्ट स्थित कसाना टावर में अल्टीमेट फिटनेस एकेडमी का नाम से जिम खोला था। सेना की नौकरी छोड़ने के कुछ महीने तो मान अलीपुर में अपने दोनों भाईयों के पास रहा । लेकिन खाली रहने के कारण जल्द ही उसका मन उब गया। तो प्रीतम के कहने पर एक साल पहले मान ने उसके जिम में बतौर ट्रेनर ज्वाइन कर लिया।&lt;br /&gt;
&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;
&lt;a href=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEh7Ih6No8pc-jb6-ntdP-_BWrjCRzO2ZO4stAtz0uE9p7J7X4VGawClJygEMVnd0ktYQ6AMeAgYkO-u-Nmtr9XZ0L8kpTmS_WI6vJtW5EYSf_RL05TlQ1YsHtcviBDTsXRq4hbjXvls8t1F/s1600/SP+SUNITI+SINGH+ADRESS+PRESS+CONFRANCE.jpg&quot; imageanchor=&quot;1&quot; style=&quot;margin-left: 1em; margin-right: 1em;&quot;&gt;&lt;img border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;1200&quot; data-original-width=&quot;1600&quot; height=&quot;240&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEh7Ih6No8pc-jb6-ntdP-_BWrjCRzO2ZO4stAtz0uE9p7J7X4VGawClJygEMVnd0ktYQ6AMeAgYkO-u-Nmtr9XZ0L8kpTmS_WI6vJtW5EYSf_RL05TlQ1YsHtcviBDTsXRq4hbjXvls8t1F/s320/SP+SUNITI+SINGH+ADRESS+PRESS+CONFRANCE.jpg&quot; width=&quot;320&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;
एक इंटरने’ानल ट्रेनर के जिम में आने से अल्टीमेट जिम की प्रतिष्ठा काफी बढ गई थी। प्रीतम टोकस कस परिवार चूंकि मुनिरका में रहता था इसलिए उसने एवीजे हाईटस में एक टू बेडरूम का फ्लैट किराए पर लिया हुआ था। जब मान ने उसका जिम ज्वाइन कर लिया तो वह भी प्रीतम के साथ उसी के साथ रहने लगा। दोनों के पास फ्लैट की एक-एक चाभी रहती थी। मान इस बीच कभी कभी अपने भाईयों योगेश और देवेन्द्र से मिलने अलीपुर भी जाता रहता था।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;
प्रीतम टोकस से हुई बातचीत में ये तो साफ हो गया था कि मान एक स्पोर्टस मैन था उसकी लाइफ में प्रीतम टोकस काफी करीब से जुड़ा था। प्रधान समझ गए कि अगर प्रीतम को नहीं मालूम कि मान की किसी से दुश्मनी है तो ये पता लगाना काफी टेढ़ी खीर होने वाला था। लेकिन उन्हें हर हाल में उसके हत्यारे तक पहुंचना था।&lt;br /&gt;
अगले दिन दोपहर होते-होते पोस्टमार्टम करने वाले डाक्टरों ने ये रिपोर्ट इंसपेक्टर प्रधान को दे दी कि मान की हत्या गोली मारकर की गई थी उसे चार गोली लगी थी। तीन गोली उसकी पीठ में लगी थी और एक गोली गर्दन में लगी थी। गोली एक दम पिस्तौल से सटाकर मारी गई थी। पोस्टमार्टम से ये भी खुलासा हुआ कि मान की हत्या करीब 48 घंटा पहले यानि 10 जनवरी की दोपहर से शाम के वक्त की गई थी। इसंपेक्टर प्रधान के सामने अब तस्वीर काफी हद तक साफ हो चुकी थी। इसलिए उन्होंनेे 10 जनवरी को घटना का दिन मानकर जांच को आगे बढाना शुरू कर दिया।&amp;nbsp; &lt;br /&gt;
‘हरी राज सोसाइटी के सीसीटीवी से पता करो कि उस दिन सुबह से रात तक मान से उसके कमरे पर मिलने कौन-कौन आया था।‘ इंसपेक्टर प्रधान ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट को एक तरफ रखते हुए कहा।&lt;br /&gt;
हरीराज ने कांस्टेबल राजेश कुमार को साथ लिया और एवीजे सोसाइटी पहुंच गए। वहां उन्होंने सोसाइटी के रजिस्टर चेक करने के अलावा उस दिन ड्यूटी पर मौजूद गार्डो से पूछताछ की तथा उसके बाद सोसाइटी के छठे तल पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज चेक की। लेकिन सीसीटीवी फुटेज की क्वालिटी इतनी खराब थी कि उससे कोई ज्यादा मदद तो नहीं मिल सकी। लेकिन ये जरूर पता चला कि खुद जितेन्द्र मान 10 जनवरी को करीब साढे ग्यारह बजे सीढियों से चढकर पहले अपने फ्लैट पर पहुंचा था। इसके बाद&amp;nbsp; 12 बजकर 40 मिनट पर कोई मान के कमरे में गया था और वहीं शख्स 4 बजकर 20 मिनट पर वापस निकला था। उसके बाद से मान के कमरे में किसी के जाने की फुटेज नहीं मिली थी। हरीराज ने उस फुटेज की कॉपी अपने कब्जे में ले ली।&lt;br /&gt;
इंसपेक्टर प्रधान को तब तक मान के फोन की सीडीआर भी मिल चुकी थी। उन्होंने एसआई सोहनवीर तथा कांस्टेबल राजेश बाबू को फोन कॉल की डिटेल चेक करने के काम पर लगा दिया। इस दौरान उन्होंने प्रीतम टोकस को बुलाकर मान के घर में प्रवेश करने वाले शख्स की पहचान कराने की कोशिश की मगर सीसीटीवी की फुटेज इतनी खराब थी कि बस उसमें आकृति बनी दिखाई पड रही थी उससे ये भी पता नहीं चल रहा था कि कमरे में जाने वाला शख्स स्त्री है या मर्द। प्रीतम टोकस ने इंसपेक्टर प्रधान को बताया कि 10 जनवरी की सुबह सवा ग्यारह बजे मान अल्टीमेट जिम से अपनी सुबह की शिफ्ट पूरी करके निकला था और 15 मिनट बाद ही वह अपने रूम पर पहुंच गया था। करीब पौने दो बजे जब उसने रोहतक से मान को फोन किया था तो वह कमरे पर ही था लेकिन उसने ये नहीं बताया था कि कमरे पर उसके साथ कोई आया हुआ है।&lt;br /&gt;
इंसपेक्टर प्रधान समझ गए कि दोपहर पौने दो बजे से चार बजे के बीच ही वो सुबकुछ हुआ जिसके दाैरान मान की हत्या हुई। घटना से ये बात तो साफ थी कि किसी लूटपाट के मकसद से हत्या को अंजाम नहीं दिया गया था। जिस निर्दयता से हत्या की गई वो साफ दरशाता था कि हत्यारा मान को खत्म करने के लिए ही उसके कमरे पर आया था इसीलिए उसने एक दो नहीं बल्कि चार गोलियां मारी। पूरा इत्मीनान होंने के बाद उसने शायद खुद ही मान को उपर से कंबल भी ओढाया होगा।&lt;br /&gt;
&lt;table align=&quot;center&quot; cellpadding=&quot;0&quot; cellspacing=&quot;0&quot; class=&quot;tr-caption-container&quot; style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto; text-align: center;&quot;&gt;&lt;tbody&gt;
&lt;tr&gt;&lt;td style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEikQ5q_ZcGgSYpQSY_issSMiMHn7S66bg79eO_wZ1-jk_l-idAgIx9qBocKNBIMiAf0nDYbU2hKTbcWvQU6vsr4RFA0FPvoFXfqlBt3EWTHjZG57k5qiNSXE49_GgVa-IAHlcrF3NN4YnNl/s1600/jitendra+murder+accused+2.jpg&quot; imageanchor=&quot;1&quot; style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto;&quot;&gt;&lt;img border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;631&quot; data-original-width=&quot;1258&quot; height=&quot;200&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEikQ5q_ZcGgSYpQSY_issSMiMHn7S66bg79eO_wZ1-jk_l-idAgIx9qBocKNBIMiAf0nDYbU2hKTbcWvQU6vsr4RFA0FPvoFXfqlBt3EWTHjZG57k5qiNSXE49_GgVa-IAHlcrF3NN4YnNl/s400/jitendra+murder+accused+2.jpg&quot; width=&quot;400&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;
&lt;tr&gt;&lt;td class=&quot;tr-caption&quot; style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: red;&quot;&gt;अाराेपी इमरान व नफीस&lt;/span&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;
&lt;/tbody&gt;&lt;/table&gt;
लेकिन एक बात हैरत में डालने वाली थी कि हत्यारे ने तीन गोलियां चलाई मगर उसकी आवाज किसी ने नहीं सुनी थी।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;
इन सवालों की जांच करने पर पता चला कि जिस फ्लोर पर मान का फ्लैट था उस पर मात्र चार फ्लैट ही भरे थे बाकी खाली थे। उन फ्लैट में रहने वाले भी दोपहर के उस वक्त या तो अपने काम पर गए थे अथवा सोसाइटी से बाहर थे। वैसे भी ऐसी सोसाइटी में रहने वाले लोग काफी संवेदनहीन होते है आस पड़ोस में क्या हो रहा है वे इससे ज्यादा सरोकार नहीं रखते। हत्यारे ने जब गोली चलायी होगी तो जाहिर है उस वक्त बाहर के मुख्यद्वार के अलावा बेडरूम का दरवाजा भी बंद होगा इसलिए गोली चलने की आवाज काफी धीमा हो गई होगी।&lt;br /&gt;
जांच की कड़ी में इंसपेक्टर प्रधान को मान के मोबाइल की सीडीआर की छानबीन से ये एक महत्वपूर्ण जानकारी मिली कि 17 ऐसे लोग थे जिन्होंने पिछले एक महीने के दौरान मान से तकरीबन हर रोज एक या इससे ज्यादा बार बात की थी। उनकी बातचीत भी काफी लंबी होती थी। ये जानकारी काफी महत्वपूर्ण थी। प्रधान ने इसी कड़ी को आगे बढाने का काम शुरू किया।&lt;br /&gt;
उन्होंने उन सभी 17 नंबरों की सीडीआर निकलवायी तो पता चला कि उनमें से एक नंबर प्रीतम टोकस का था और पांच दूसरे नंबर या तो जिम के किसी कर्मचारी के थे या मान के परिवार के किसी सदस्य के थे। इंसपेक्टर प्रधान ने हर शख्स को थाने बुलाकर संतुष्टि कर ली थी कि वो मान से कब और किसलिए बात करते थे। लेकिन 11 नंबर ऐसे थे जिनके कारण प्रधान को लगा कि हत्याकांड के पीछे कहीं न कहीं प्यार मोहब्बत का कोई चक्कर जरूर है। क्योंकि ये सभी 11 नंबर लडकियों के थे और इनमें से आठ उसी जिम की थी जहां जितेन्द्र मान ट्रेनर था। चूंकि जिम में ज्यादातर बड़े परिवार की लडकियों और महिलाए जाती है इसलिए एसपी सुनीति ने खुद उन सभी महिलाओं को अपने अॉफिस बुलाकर मान से फोन करने का कारणों की पूछताछ की।&lt;br /&gt;
मगर इन नंबरो में एक नंबर ऐसा था जिसने इंसेपक्टर प्रधान की छठी इंन्द्री को जागृत कर दिया। दरअसल ये नंबर सृष्टि गुप्ता नाम की किसी लडकी का था। फोन ग्रेटर नोएडा की होरिजन सोसाइटी के टी 5/1103 के पते पर रजिस्टर्ड। एसआई हरीराज पुलिस टीम को लेकर जब उस पते पर पहुंचे तो वहां ताला लटका मिला। सोसाइटी की सिक्यूरिटी से पता चला कि सृष्टि गुप्ता स्टूडेंट है और वहां अकेली रहती है। उसके यहां काम करने के लिए मेड भी आती थी। सृष्टि गुप्ता के बारे में इससे ज्यादा कोई सुराग नहीं मिल सका। हरीराज ने सिक्यूरिटी वालों को हिदायत दे दी कि जैसे ही सृष्टि गुप्ता वापस लौटे तो बिना उसे खबर किए पुलिस को सूचना दें।&lt;br /&gt;
इधर इंसपेक्टर प्रधान को न जाने क्यों लगने लगा था कि मान के मर्डर से कहीं न कहीं सृष्टि गुप्ता का कोई संबध है। लेकिन क्या संबध है ये तभी पता चल सकता था जब सृष्टि गुप्ता पुलिस के सामने आती और उससे पूछताछ होती। प्रधान ने सृष्टि का फोन सर्विलांस पर लगवा दिया। सृष्टि गुप्ता की तलाश के साथ प्रधान मान हत्याकांड की जांच कुछ दूसरे बिन्दुओं पर पड़ताल करके भी कर रहे थे। लेकिन कहीं से कोई लीड नहीं मिल रही थी।&lt;br /&gt;
इस दौरान उन्होंने होरिजन सोसाइटी के रिकार्ड से सृष्टि गुप्ता की फोटो हासिल कर ली थी। काफी खूबसरत और युवा लड़की थी सृष्टि, मरने वाला भी युवा ही था। प्रधान को लगने लगा कहीं न कहीं मामला प्यार मोहब्बत का हो सकता है। इसी बीच 15 जनवरी को होरिजन सोसाइटी के एक सिक्योरिटी गार्ड ने एसआई हरी राज को फोन करके बताया कि सृष्टि गुप्ता अपने फ्लैट पर मौजूद है तो उन्होंने ये बात तत्काल इंसपेक्टर प्रधान को बतायी। प्रधान ने हरीराज से तुरंत सृष्टि को थाने बुलाने के लिए कहा। हरीराज लेडी कांस्टेबल रिचा और मोनिका को साथ लेकर सृष्टि के फ्लैट पर पहुंच गए।&lt;br /&gt;
एसआई हरीराज ने मोनिका के फ्लैट पर जाकर उसे बताया कि एक खास मामलें में उसे सूरजपुर थाने चलना है और कुछ पूछताछ करनी है।&lt;br /&gt;
‘आपको जो पूछताछ करनी हैं यहीं कर लीजिए सर मैं थाने क्यों चलूं मैंने कौन सा गलत काम किया है।‘&lt;br /&gt;
‘मैडम जरूरी नहीं कि जो लोग गलत काम करते हैं वहीं थाने जाते है जरूरी होंने पर शरीफ लोग भी पुलिस की मदद के लिए थाने जाते हैं। अब आप बताईये कि आप खुद चलेगी कि हम अपने तरीके से आपकों थाने ले चले।‘&lt;br /&gt;
हरीराज ने पुलिस अंदाज में बात की तो सृष्टि समझ गई कि ऐसी कोई बात जरूर है जिस कारण पुलिस जबरन भी थाने लेकर ही जायगी।&lt;br /&gt;
थाने मेंं इंसपेक्टर प्रधान के सामने पहुंचते ही सृष्टि भड़क गई- ‘सर क्या मैं पूछ सकती हूं कि आपनेे किस जुर्म में मुझे इस बेहूदा तरीके से थाने बुलाया है।‘&lt;br /&gt;
‘जितेन्द्र मान को कैसे जानती हो।‘&lt;br /&gt;
इंसपेेकटर मान ने बिना किसी भूमिका बांधे सृष्टि गुप्ता से सवाल किया।&lt;br /&gt;
‘कौन जितेन्द्र मान।‘&lt;br /&gt;
‘वहीं जितेन्द्र मान जिससे आप हर रोज फोन पर लंबी-लंबी बात किया करती थी। अल्टीमेट फिटनेस एकेडमी का जिम ट्रेनर।&lt;br /&gt;
इंसपेक्टर प्रधान ने सृष्टि के चेहरे पर नजरें गडा दी वे देखना चाहते थे कि जवाब देते वक्त उसके चेहरे पर किस तरह के भाव पैदा होते है।&lt;br /&gt;
&lt;table align=&quot;center&quot; cellpadding=&quot;0&quot; cellspacing=&quot;0&quot; class=&quot;tr-caption-container&quot; style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto; text-align: center;&quot;&gt;&lt;tbody&gt;
&lt;tr&gt;&lt;td style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhOy8PM6Fhrc6navaWaeoJh7mS7Y6tEksXfb8h3dkGMa9RICOgfQTOnkI1gP313LNh3jUmwhf3l8TvcpjbBUHKh_LsoafYgJdaSdYbF3dgBuN7qLcRa-FD91rD0n7_m0xnjwLhG0QHCOBBz/s1600/srishti.jpg&quot; imageanchor=&quot;1&quot; style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto;&quot;&gt;&lt;img border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;400&quot; data-original-width=&quot;400&quot; height=&quot;320&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhOy8PM6Fhrc6navaWaeoJh7mS7Y6tEksXfb8h3dkGMa9RICOgfQTOnkI1gP313LNh3jUmwhf3l8TvcpjbBUHKh_LsoafYgJdaSdYbF3dgBuN7qLcRa-FD91rD0n7_m0xnjwLhG0QHCOBBz/s320/srishti.jpg&quot; width=&quot;320&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;
&lt;tr&gt;&lt;td class=&quot;tr-caption&quot; style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: red;&quot;&gt;&amp;nbsp;सृष्टि&lt;/span&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;
&lt;/tbody&gt;&lt;/table&gt;
‘जितेन्द्र मान.......ओह वो जितेन्द्र मान.....अच्छा आप मान सर की बात कर रहे हैं.... हां मैं जानती हूं उन्हें ट्रेनर&amp;nbsp;रहे हैं वो मेरे। लेिकन पिछले सितंबर से मैंने जिम में जाना ही बंद कर दिया था।‘ सृष्टि गुप्ता ने जवाब दिया।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;
प्रधान ने देखा कि जिस वक्त सृष्टि जवाब दे रही थी उनकी नजरों से नजरे हटाकर वो इधर-उधर देखकर जवाब दे रही थी। पुलिस की नौकरी करते हुए न जाने कितने मामलों की जांच के दौरान उन्होंने इस बात का अनुभव लिया था कि झूठ बोलने वाला इंसान कभी नजरें मिलाकर बात नहीं करता।&lt;br /&gt;
सृष्टि गुप्ता का झूठ भी उसकी नजरे चुराने से साफ दिखायी पड़ रहा था।&lt;br /&gt;
अब वे उन सवालों पर आ गए जिनका जवाब उन्हें मान के कातिल तक पहुंचा सकता था।&lt;br /&gt;
‘आप कब से कब तक अल्टीमेट जिम में फिटनेस के लिए गई थी बता सकती हैं।‘&lt;br /&gt;
‘मैं मार्च 2017 से सितंबर तक जिम गई थी इसके बाद मैंने जिम छोड़ दिया।‘ सृष्टि ने जवाब दिया।&lt;br /&gt;
‘छोड़ने की कोई खास वजह।‘ प्रधान ने अगला सवाल किया।&lt;br /&gt;
‘कोई खास वजह नहीं बस यूंही ही छोड दिया.......लेकिन सर मैं ये पूछना चाहती हूंं कि क्या जिम ज्वाइन करना कोई गुनाह है....क्या आपने यही सब पूछने के लिए मुझे थाने बुलाया है।‘&lt;br /&gt;
सृष्टि ने जवाब देने के बाद गुस्से में आवाज उंची करते हुए पूछा।&lt;br /&gt;
‘चिल्लाईये मत मिस सृष्टि और बनने की कोशिश मत कीजिए कि मैं आपसे ये सवाल क्यों कर रहा हूं।‘ इंसपेक्टर प्रधान का पारा भी अब हाई हो गया - ‘क्या आपकों पता नहीं कि मान का मर्डर हो चुका है। पहले आप ये बताईये कि जब आप सितंबर में जिम छोड चुकी थी तो किसलिए उससे हर रोज फोन पर देर-देर तक बात करती थी।’&lt;br /&gt;
प्रधान के आवाज उंची करते ही सृष्टि सकपका गई।&lt;br /&gt;
‘जी....जी...वो मेरे अच्छे दोस्त थे इसलिए वो मेरी खैर खबर लेते रहते थे। लेकिन मान सर का मर्डर कब हुआ और कैसे ?‘&lt;br /&gt;
सृष्टि गुप्ता जब लडखडाती जुबान से जवाब देते हुए चौंककर उनसे सवाल पूछ रही थी तब प्रधान उसके चेहरे के उडे हुए हर भाव को पढ रहे थे।&lt;br /&gt;
उनका विश्वास यकीन में बदलता जा रहा था कि कहीं न कहीं मान की हत्या के तार सृष्टि गुप्ता से जुड़े है।&lt;br /&gt;
‘मिस सृष्टि कोई भी इंंसान मामूली दोस्ती और हाल चाल पूछने के लिए हर रोज इतनी देर तक फोन पर बात नहीं करता। 10 जनवरी को जब मान की हत्या हुई उससे एक दिन पहले भी देर शाम को आपने मान को फोन किया था। जान सकता हूं आपकी क्या बात हुई थी।‘&lt;br /&gt;
प्रधान अब सृष्टि को सोचने का कोई मौका नहीं देना चाहते थे। उन्होंने सवालों की झडी लगा दी।&lt;br /&gt;
‘और आप बता सकती है कि 10 जनवरी को आप 12 बजे से ’ााम पंाच बजे तक कहां थी।‘&lt;br /&gt;
एक के बाद एक सवाल से सृष्टि को लगा मानों पुलिस ने उसे ही कातिल ठहराने की ठान ली है।&lt;br /&gt;
‘सर एक दिन पहले तो मैंने यूं ही रूटीन में बात की थी..... लेकिन आपकों लगता है कि गुनाहगार मैं हूं तो आप मेरी लोके’ान चेक करा लीजिए मैं उस दिन किसी काम से दुर्गापुरी चौक कुछ सामान खरीदने गई थी।‘&lt;br /&gt;
‘ऐसा क्या सामान था जो उसे खरीदने इतनी दूूर गई थी।‘ प्रधान ने पूछा।&lt;br /&gt;
‘मैंने अपना कैमरा ठीक होंने के लिए दिया था वहां एक परिचित दुकानदार को, उसी को लेने गई थी।‘ इसके बाद मैं नोएडा में जीआईपी मॉल गई और वहां से घर के कुछ जरूरी सामान खरीदकर रात को घर वापस आ गई थी।&lt;br /&gt;
सर आप तो पुलिस वाले हा मेरे फोन की लोकेशन से चेक करा लीजिए कि मैं कहा गई थी।&lt;br /&gt;
इंसपेक्टर प्रधान को सृष्टि के उपर शक जरूर था लेकिन उनके पास अभी तक ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं था जिससे वे सृष्टि के साथ सख्ती से पूछताछ नहीं कर सकते। इतने वि’वास से सृष्टि ने जब ये बात कहीं कि उसके मोबाइल की लोकेशन से पता कर लें तो प्रधान का वि’वास एक बार को डगमगाया जरूर कि कहीं सृष्टि पर शक करना उनकी गलती तो नहीं। लेकिन एकाएक उन्हें लगा कि जिस तरह से सारे हालात सृष्टि के खिलाफ है कहीं ने कही वो इस मामलें से जुड़ी जरूर है।&lt;br /&gt;
प्रधान ने जब उस दिन उन्होंने सृष्टि से उसके परिवार के बारे में पूछा कि उसके माता पिता कहा रहते हैं तो उसने बता दिया कि वह बुलंदशहर के खुर्जा नगर में वैशाली कालोनी की रहने वाली है जहां उसके माता पिता और पूरा परिवार रहता है। वह ग्रेटर नोएडा में रहकर मासकॉम की पढाई कर रही थी।&lt;br /&gt;
दरअसल, प्रधान को मान की हत्या में सृष्टि के शामिल होंने का शक अनायास नहीं हुआ था। उन्होंने उन सभी लडकियों के फोटों हासिल किए थे जिनसे मान फोन पर बात करता था। उन्होंने वे सभी फोटो एवीजे हाईट सोसायटी के गार्डो और अन्य लोगों को दिखाए तो कुछ लोगों ने सृष्टि को पहचानते हुए बताया कि था कि उन्होंने इस लड़को को मान के साथ सोसायटी में कई बार आते-जाते हुए देखा था। बस इसीलिए प्रधान ने सृष्टि को फोकस कर जांच &#39;शुरू की।&lt;br /&gt;
इंसपेक्टर प्रधान को घटनास्थल के निरीक्षण के बाद से ही ये शक हो गया था कि हत्याकांड में किसी लड़की का हाथ है। क्योंकि घटनास्थल से कुछ ऐसी चीजें भी मिली थी जिससे लग रहा था कि मौत से पहले मान ने सेक्स किया है। मान की दोस्ती कई लड़कियों और महिलाओं से थी लेकिन इनमें से कौन हत्याकांड मे शामिल है और किसका उसके रूम पर आना जाना है ये पता लगाना जरूरी था। इसलिए उन्होंने संदेह के दायरे में आयी सभी लडकियों के फोटो सोसाइटी वालों को दिखाए थे। जब सोसायटी वालों ने सृष्टि का फोटो पहचानकर वहां उसके आने जाने की पुष्टि कर दी तो उसके बाद उन्होंने सृष्टि पर फोकस किया था।&lt;br /&gt;
उस दिन कुछ और पूछताछ करने के बाद इंसपेक्टर प्रधान ने सृष्टि को हिदायत दी थी कि जब तक ये केस नही सुलझ जाता वह उन्हें बिना बताये शहर छोड़कर कहीं न जायें। अगर जरूरत पड़ी तो उसे पूछताछ के लिए दोबारा भी बुलाया जा सकता है।&lt;br /&gt;
सृष्टि के जाने के बाद प्रधान ने एसआई हरी राज और कांस्टेबल राजेश कुमार को चौबीस घंटे सृष्टि के उपर निगाह रखने और उसकी गतिविधियों पर नजर रखने के काम पर लगा दिया। वे खुद पुलिस की एक टीम को लेकर खुर्जा में सृष्टि के बताये उस पते पर पहुंचे जहां उसने अपने परिवार का निवास बताया था।&lt;br /&gt;
इंसपेक्टर प्रधान की मुलाकात सृष्टि के पिता सुधीर गुप्ता से हुई जो मोबाइल के सिम कार्ड व मोबाइल रिचार्ज करने का काम करते थे। परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी। माता पिता के अलावा सृष्टि के परविार में उसकी तीन छोटी बहने और एक भाई थे। सुधीर गुप्ता की माली हालत देखकर कहीं से भी नहीं लग रहा था कि वे अपनी बेटी को इतनी महंगी पढाई कराते हुए अलग से किराए का मकान लेकर दे सकते है।&lt;br /&gt;
इन सवालों के जवाब भी प्रधान को मिल गए। दरअसल, सुधीर गुप्ता से बहुत ज्यादा जानकारी तो नहीं मिल सकी । लेकिन इतना जरूर पता चला कि दो साल पहले जब सृष्टि मेरठ यूनिवर्सिटी से बीबीए की पढाई कर रही थी तभी से उनके संबध अपनी बेटी से नहीं हैं। काफी कुरेदने और दबाव डालने के बाद सुधीर गुप्ता ने बताया कि सृष्टि के एक मुस्लिम लड़के से नाजायज संबध बन गए थे। उस मुस्लिम लडके को वह अपना पति बताती थी और उसने ही सृष्टि को कोई मकान लेकर दिया हुआ था। बकौल सुधीर गुप्ता जब उन्होंने इस बात का विरोध किया तो सृष्टि ने उनसे बातचीत बंद कर दी। लिहाजा उन्होंने भी सृष्टि से अपने सारे संबध तोड़ लिए उसके घर आने-जाने पर प्रतिबंध लगा दिया। ये जानकारी काफी चौंकाने वाली थी क्योंकि सृष्टि ने पूछताछ में सिर्फ यही बताया था कि वह एक स्टूडेंट है और अकेली रहती है। इसका मतलब उसके ठाट बाट के पीछे उसका वो आ’िाक है जिसने उसे पत्नी बनाकर रक्खा हुआ है। बस इसके बाद थाने वापस आते ही सृष्टि पर अपनी निगाहें जमा दी।&amp;nbsp; &lt;br /&gt;
17 जनवरी की शाम का वक्त था।&lt;br /&gt;
एसआई हरीराज को कांस्टेबल राजेश कुमार ने फोन कर बताया कि एक इनोवा गाडी मे सृष्टि गुप्ता अपना सामान रखवा रही है। ऐसा लगता है कि कहीं जाने की तैयारी में है। जानकारी काफी अहम थी।&lt;br /&gt;
हरीराज फौरन इंसपेकटर प्रधान के पास पहुंचे।&lt;br /&gt;
‘सर लगता है आपका शक ठीक ही था...बॉक्सर मान को शिकार सृष्टि ने किया था। और अब ये शिकार हमारे हाथ से उडन छू होंने की तैयारी कर रहा है।‘&lt;br /&gt;
‘ओह अगर वो हाथ से निकल गई तो बड़ी मुश्किल हो जायेंगी....देर मत करो हरीराज भागने से पहले उसे पकड़ना जरूरी है।&#39; कहते हुए इंसपेक्टर प्रधान ने अपने सभी हमराहों को जल्दी से गाडी में बैठने के लिए कहा।&lt;br /&gt;
इंसपेकटर प्रधान की गाडी मुश्किल&amp;nbsp;से बीस मिनट में फर्राटें भरती हुई होरिजन सोसाइटी के मुख्यद्वार पर पहुंची तो गेट पर ही मोटरसाईकिल से बाहर निकल रहे राजेश को देखकर उन्होंने गाडी रूकवा ली।&lt;br /&gt;
‘सर अभी-अभी सोसाइटी से जो इनोवा गाडी बाहर निकली है सृष्टि उसी में सवार है लगता है पकडे जाने के डर से वो भाग रही है।&#39; राजेश ने हॉफतें हुुए कहा।&lt;br /&gt;
इंसपेक्टर प्रधान ने देर नहीं की, जिस तरफ कांस्टेबल राजेश कुमार ने इशारा किया था उसी तरफ उन्होंने गाडी को मुड़वा दिया। करीब दो किलोमीटर आगे जाने पर उन्हें वह इनोवा गाडी दिख गई। फर्राटा भर रही उनकी गाडी ने इनोवा कार को ओवरटेक करके रूकवा लिया। उसमें सृष्टि के साथ दो लोग और भी सवार थे। पूछने पर पता चला उनमें से एक इमरान कुरैशी था जिसे उसने अपना पति बताया। जबकि गाडी को ड्राइव कर रहे शख्स का नाम नफीस था। जिसे इमरान ने अपना ड्राइव बताया। इंसपेक्टर प्रधान तीनों को गाडी समेत थाना सूरजपुर लिवा लाये।&lt;br /&gt;
गाडी की तलाशी ली गई तो प्रधान की आंखे फटी रह गई। क्योंकि गाडी में सृष्टि का कुछ जरूरी सामान भरा था। जिसमें उसके खून से सने एक जोडी कपड़ो के अलावा जितेन्द्र मान का पर्स और भी था। जो हत्या के बाद पुलिस को उसके कमरे से गायब मिला था।&lt;br /&gt;
‘कहां भाग रही थी सृष्टि जी क्या अब भी आपकों अपनी सफाई में कुछ कहना है। क्या अब भी आप कहेंगी कि मान की हत्या से आपका कोई मतलब नहीं।‘ जरूरी सबूत हाथ में आते ही इंसपेक्टर प्रधान सृष्टि से मुखातिब होते हुए बोले।&lt;br /&gt;
सृष्टि ने अपराध बोध में सिर झुका लिया। इसके बाद ज्यादा वक्त नहीं लगा। उसने मान की हत्या का अपराध कबूल कर लिया और हत्याकांड की पूरी परत खुलती चली गई।&lt;br /&gt;
मान के हत्यारों की गिरफ्तारी की सूचना मिलने के बाद एसपी देहात सुनिति भी सूरजपुर थाने पहुंच गई। इमरान कुरैशी और सृष्टि ने हत्या की पूरी साजिश का खुलासा उन्हीं के सामने किया।&lt;br /&gt;
24 साल की सृष्टि ने बताया कि तीन साल पहले जब वह मेरठ यूनिवर्सिटी से बीबीए की पढाई कर&amp;nbsp; रही थी तो उसी दौरान वह नोएडा में अर्थ इन्फ्रास्ट्रक्रचर कंपनी के सेल्स डिपार्टमेंट में नौकरी करती थी। वह टेलीफोन पर कॉल करके लोगों को अपनी कंपनी के फ्लैट बेचने का काम करती थी।&lt;br /&gt;
एक दिन उसने इमरान कुरैशी नाम के व्यक्ति को फोन करके जब अपनी कंपनी के फ्लैट के अॉफर के बारे में बताया तो इमरान को उसकी दिलकश आवाज और बात करने के अंदाज ने काफी आकृषित किया।&lt;br /&gt;
‘मैडम फ्लैट तो हम खरीद लेंगे लेकिन पहले ये बताईयें की आप रहने वाली कहां की हैं।‘&lt;br /&gt;
इमरान ने पूछा।&lt;br /&gt;
‘आप कुछ ज्यादा ही पर्सनल हो रहे हैं सर.....पहले ये बताईये कि आपकों हमारे अॉफर कैसे लगे।‘सृष्टि ने टालने वाले अंदाज में कहा।&lt;br /&gt;
‘देखिए मैम हमे आपका हर अॉफर अच्छा लगा। लेकिन आप हमे ज्यादा अच्छी लगी। आपकी सेल करवा देंगे अगर आप हमसे दोस्ती कर लें तो।‘&lt;br /&gt;
सृष्टि को उम्मीद बंधी कि शायद क्लाइंट उसके जाल में फंस गया है। चंचल स्वभाग की वो थी। काम निकालने के लिए हंसकर मुस्कराकर और दिलकंश अंंदाज में बात करने की कला उसे खूब आती थी। लिहाजा उसने कहा- ‘अरे सर आपसे बात हो रही है तो मान लीजिए दोस्त तो हम हो ही गए आपके ....बाई दी वे मैं खुर्जा की रहने वाली हूं।‘&lt;br /&gt;
‘अरे ये तो गजब हो गया....मैं भी खुर्जा में ही रहता हूं....आप कहा रहती हैं खुर्जा में।‘ इमरान ने खुशी का इजहार करते हुए पूछा।&lt;br /&gt;
सृष्टि भी उत्सुकता में बात को आगे बढाने से रोक न सकी- ‘जी मैं वैशाली कालोनी में रहती हूं।‘&lt;br /&gt;
‘सृष्टि जी मजा आ गया आपसे दोस्ती करके मैं मौ० तरीनान की गली नंबर 7 की किला मस्जिद के पास रहता हूं।‘ इमरान ने कहा।&lt;br /&gt;
बात जब शुरू हुई तो काफी आगे बढ गई। इमरान ने सृष्टि का पर्सनल मोबाइल नंबर ले लिया और कहा कि वह पहले उससे पर्सनल मुलाकात करेगा उसके बाद वह उसकी कंपनी में इन्वेस्ट करने का प्लान करेगा।&lt;br /&gt;
सृष्टि को उन दिनो 20 हजार रूपए तनख्वाह मिलती थी जिसमें वह नोएडा में एक कमरा लेकर रहती थी और साथ ही नौकरी व बीबीए की प्राईवेट पढाई भी करती थी। उस दिन इमरान से हुई बातचीत वहीं खत्म नहीं हुई। इमरान अक्सर फोन पर उससे बातचीत करने लगा। और एक दिन उससे मिलने भी आ गया।&lt;br /&gt;
इमरान न तो बहुत सुंदर था न ज्यादा पढ़ा लिखा था। लेकिन उसके शरीर महंगा लिबास था। अंगुलियों में हीरे और सोने की महंगी कीमती अंगुठिया थी और गले में लटकी सोने की मोटी कीमती चैन पहने इमरान सकोडा गाडी में सवार था। देखकर ही लगता था कि वह कोई अमीर जादा है। पहली ही मुलाकात में इमरान ने सृष्टि से मुलाकात के बाद महंगे रेस्टरा में खाना खाया और उसके बाद हजारों रूपऐ की शॉपिंग कर कीमती उपहार दिलाए। पहली ही मुलाकात में इमरान के रईसाना अंदाज से सृष्टि इमरान से प्रभावित हुए बिना न रह सकी। इसके बाद वे अक्सर मिलने लगे। दोनों के बीच करीबी भी आ गई।&lt;br /&gt;
इमरान ने एक दिन मन की बात कह दी।&lt;br /&gt;
‘सृष्टि बहुत हो गई नौकरी अब तुम मेरी बनकर रहो और बस ऐश करो...मैं नहीं चाहता कि मेरी दिलरूबा कहीं दो टके की नौकरी करें किसी की गुलाम बनकर रहे।‘&amp;nbsp; &lt;br /&gt;
सृष्टि समझ चुकी थी कि एक तरफ सिसक कर जिंदगी जीने से अच्छा एक अमीर इंसान की प्रेमिका बनकर ऐश से जिंदगी गुजारना ज्यादा अच्छा है। इसलिए उसने इमरान का अॉफर स्वीकार कर लिया। इसके बाद ढाई साल पहले इमरान ने उसे हाेरिजन सोसाइटी में एक किराए का फ्लैट लेकर दे दिया। उसे 50 हजार रूपए खर्च के लिए देने लगा। बदले में वह अक्सर उसकी बाहों में वक्त गुजारने के लिए दूसरे तीसरे दिन आता रहता था। इमरान को पैसे की कमी नहीं थी। भरा पूरा परिवार था। सात भाई थे । सभी का मीट का कारोबार था। खुद भी शादीशुदा था चार बच्चे भी थे। लेकिन जिंदगी में पढी लिखी और हसीन माशूका नही थी। लेकिन सृष्टि ने वो कमी पूरी कर दी थी। इसके बाद जब भी वह सृष्टि को कहीं ले जाता तो उसका परिचय अपनी पत्नी के रूप में ही देता था। सृष्टि भी उसका परिचय अपने पति के रूप में ही कराती थी।&lt;br /&gt;
इमरान के सृष्टि की जिंदगी में आतेे ही उसके माता पिता को बेटी के बदले अंदाज और ठाट बाट भरी जिंदगी को देखकर लगने लगा कि हो न हो बेटी किसी गलत राह पर चल पडी है। लिहाजा उन्होंने जब पूछा तो सृष्टि ने बता दिया कि उसने इमरान नाम के एक व्यक्ति से शादी कर ली है और वह उसी के दिए गए मकान में गे्रटर नोएडा में रहती है। इसके बाद परिवार से सृष्टि&amp;nbsp; के संबध बिगड गए। क्योंकि सृष्टि के लिए पैसा और ऐश भरी जिंदगी ज्यादा मायने रखती थी न कि परिवार के साथ रहकर गुरबत और मुसीबत की जिंदगी गुजरना।&lt;br /&gt;
वक्त ऐसे ही गुजरता रहा। इमरान सृष्टि गुप्ता के उपर पैसा लुटाकर उसके साथ ऐश करता रहा और सृष्टि अपनी हर ख्वाहिश को अपने जिस्म को इमरान के हवाले कर पूरा करती रही। इसी बीच उसने बीबीए की पढाई भी पूरी कर ली थी। अब उसने ग्रेटर नोएडा में ही एक प्राईवेट कालेज में मॉसकाम की पढाई के लिए दाखिला ले लिया था। मार्च के महीने में ही उसने अल्टीमेट जिम ज्वॉइन किया था। जहां उसने फार्म में अभिभावक की जगह भी पति के तौर पर इमरान का ही नाम लिखवाया था।&lt;br /&gt;
जुलाई महीने मे जिम में ही उसकी मुलाकात कुछ समय पहले आये नए ट्रेनर जितेन्द्र मान से हुई जिसे सब मान सर कहकर बुलाते थे। मान खूबसूरत भी था और जवान भी। इमरान से उसकी जरूरते जरूरी पूरी होती थी। लेकिन हमेशा से मान जैसे किसी हैंडसम से दोस्ती की ख्वाहिश में सृष्टि जल्द ही मान के करीब हो गई। वैसे भी सृष्टि जिस खुले और बिंदास तरीके से जिंदगी जीती थी उसमें कोई जवान इंसान उसकी तरफ सहज ही आकृषित हुए बिना नहीं सह सकता था।&lt;br /&gt;
सृष्टि और मान जल्द ही एक दूसरे से खुल गए। इसके बाद दोनों के बीच जल्द ही जिम के बाहर भी मिलने-मिलाने का सिलसिला चल निकला। एक वक्त ऐसा भी आया जब मान सृष्टि से मिलने के लिए उसके फ्लैट पर जाने लगा। ये सिलसिला इतना लंबा चला कि एक दिन घर में काम करने वाली नौकरानी के जरिए और सृष्टि के फोन की कॉल डिटेल देखकर इमरान को ये शक हो गया कि उसके अपने जिम के ट्रेनर से अवैध संबध हो गए है। दरअसल ग्रेटर नोएडा में इमरान के कुछ ऐसे भी लोग थे जिन्हें वह कई बार खाने पीने के लिए सृष्टि के फ्लैट पर भी बुलाता रहता था। उन्हीं में से एक दोस्त ने सृष्टि को एक दो बार नोएडा के एक मल्टीप्लेक्स और रेस्तरा में मान के साथ हाथ में हाथ डालकर घूमते हुए देख लिया था। बस इतना सुनकर इमरान के तन मन में आग लग गई। क्योंकि उसे ये कतई बर्दा’त नहीं हुआ कि वह जिस लडकी को अपनी जान से ज्यादा चाहता है उसकी हर ख्वाहिश और जरूरत पूरी करता है वह किसी और से प्यार की पेंग बढाए।&lt;br /&gt;
इमरान ने जब सृष्टि से मान के साथ चल रही उसकी प्रेम कहानी को लेकर सवाल किया तो सृष्टि को लगा कि उसके सोने की चिडिया उसके हाथ से निकल जायेगी। इसलिए उसने इमरान को कहानी सुना दी कि सिंतबर महीने में एक दिन मान ने उसे फोन करके पूछा था कि वह कहा है।&lt;br /&gt;
&#39;तो मैने बोल दिया कि घर पर ही हूं।&#39;&lt;br /&gt;
मान सर ने कहा कि मैं भी तुम्हारी सोसाइटी के पास ही हूं अगर काफी पिलाओं तो तुम्हारे घर आउं।&lt;br /&gt;
मैं इंकार नहीं कर सकी और उन्हें घर आने के लिए इनवाइट कर दिया। लेकिन जब वे घर आऐ तो उन्होंने मेरी काफी में किसी बहाने मुझे वहां से भेजकर कुछ नशीली चीज मिला दी। इसके बाद काफी पीने पर मैं बेहोश हो गई और मान ने मेरे साथ रेप किया। उसने रेप की ये क्लिप वीडियों में रिकार्ड कर ली। मान ने इसके बाद से मुझे ये क्लिप दिखाकर ब्लैकमेल करके अपने साथ घूमने फिरने पर मजबूर कर दिया। वह सामान भी खरीदता तो उसका बिल भी मुझसे ही दिलवाता।&lt;br /&gt;
सृष्टि का त्रियाचरित्र दिखाना काम आ गया।&lt;br /&gt;
‘उस साले बॉक्सर को मैं जिंदा नहीं छोडूगां। उसे तुम्हारें साथ किए गए अपराध की सजा भुगतनी होगी।‘ इमरान का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंंच गया।&lt;br /&gt;
सृष्टि समझ गई इमरान को ये सब बताकर उसने गलती कर दी है। लेकिन अपने झूठ को छिपाने के लिए उसे अब इमरान के कहे मुताबिक ही करना था। इसके बाद इमरान ने एक दिन उससे कहा कि अगर वह मान से प्यार करती है तो वह उसे मार देगा अगर वाकई मान ने उसके साथ गलत किया है तो वह खुद उसे अपने हाथों से गोली मारेगी।&lt;br /&gt;
मान से प्यार करने की बात तो सृष्टि कबूल नहीं कर सकती थी। इसलिए उसने कहा कि वह मान को ही गोली मार देगी। उसने दिखावे के लिए एक दो बार इमरान के सामने मान को फोन भी किया और कहा कि वह अपने मोबाइल फोन से उसकी वीडियों डिलीट कर दें। लेकिन मान हमेशा इस वीडियों क्लिप को एक याद बताकर बात को टाल देता था।&lt;br /&gt;
इसके बाद से इमरान ने मान की हत्या की साजिश&amp;nbsp; रचनी शुरू कर दी।&lt;br /&gt;
इसके लिए इमरान फुलप्रूफ योजना तैयार करने गला ताकि वह और सृष्टि पकड में भी न आएं और मान का काम भी तमाम हो जाएं।&lt;br /&gt;
उसने छह राउंड का एक देशी पिस्तौल खरीदा और लाकर सृष्टि को दिया। उसने सृष्टि को बताया कि किस तरह पिस्तौल चलता है।&lt;br /&gt;
उसने योजना के मुताबिक व्हाटसएप&amp;nbsp; पर चैट करके 9 जनवरी को सृष्टि से कहा कि वह मान से फोन पर बात करे और उससे अगले दिन 10 जनवरी को मिलने का प्रोग्राम सैट करें। सृष्टि ने ऐसा ही किया। उसने मान से बात की और कहा कि अगर कल कोई कमरे पर नहीं है तो वो उससे मिलने उसके कमरे पर आना चाहती है।&lt;br /&gt;
मान ने भी कह दिया कि वह बारह बजे तक कमरे पर आ जायेगा। वह उसके बाद कभी भी कमरे पर आ जाये। इसके बाद साजिश को कैसे अंजाम देना था इसके लिए इमरान ने सृष्टि से व्हाटसएप पर पूरी बात की। तय की गई प्लानिंंग के मुताबिक अगले दिन सुबह इमरान अपने ड्राईवर नफीस को लेकर ग्रेटर नाेएडा पहुंचा। लेकिन वह अपना मोबाइल को खुर्जा में जानबूझकर अपने घर पर ही छोड आया। नफीस ने इमरान को डीएलएफ माल छोडा जहां उसने एक मल्टीप्लेक्स में फिल्म देखकर अपना समय गुजारा। उसे छोडने के बाद नफीस होरिजन सोसाइटी पहुंचा जहां सोसाइटी के बाहर पहले से ही सृष्टि उसका इंतजार कर रही थी।&lt;br /&gt;
इमरान की योजना के मुताबिक सृष्टि ने अपने दोनों फोन नफीस को दे दिए। जिन्हें लेकर नफीस दिल्ली के शाहदरा और दिलशाद गार्डन होता हुुआ दुर्गापुरी चौक पहुंचा। वहां एक दो फोन सृष्टि के फोन पर आए तो उसने उन कॉल को रिसीव जरूर किया लेकिन अपनी तरफ से कोई उत्तर नहीं दिया ताकि ये साबित हो जाये कि सृष्टि मान के कमरे में न होकर दिल्ली में मौजूद थी।&lt;br /&gt;
दूसरी ओर सृष्टि करीब 10 जनवरी को करीब पौने बारह बजे मान के कमरे पर पहुंची।&lt;br /&gt;
इमरान की पिस्टल लेकर सृष्टि 10 जनवरी को दोपहर करीब साढे बारह बजे आटो से जितेंद्र मान के फ्लैट पर पहुंची। दोनों ने वोडका शराब पी और साथ में खाना भी खाया। सृष्टि ने अपनी अश्लील विडियो क्लिप को फोन से डिलीट करने की मनुहार करते हुए मान को खुश करने के लिए उसके जिस्म की प्यास भी बुझाई। लेकिन इसके बावजूद मान ने सृष्टि की बात को अनसुना कर दिया। और दूसरी पीठ करके करके मुंह के बल बेड पर लेट गया। सृष्टि को लग गया कि मान ऐसे नहीं मानेगा अब उसकी मौत ही आखरी रास्ता है लिहाजा उसने बैग में रखी पिस्टल निकाली और बिस्तर पर खड़ी होकर ताबड़तोड़ चार गोली जितेंæ की पीठ की तरफ दाग दी। सृष्टि ने हत्या करने के बाद मान के शव के उपर कंबल डाल दिया ताकि पहली नजर देखने पर यहीं लगे कि वह सो रहा है।&lt;br /&gt;
सृष्टि अपने साथ बैग में एक जोड़ी कपड़े लेकर गई थी। पहने हुए कपड़े चूंकि खून में सन गए थे। इसलिए जब उसके कपड़ो पर खून के कुछ छीटें पड गए तो उसने बाथरूम में जाकर साथ लाये कपड़ो को बदला और खून से सने पहने हुए कपड़ो को निकालकर अपने बैग में रख लिया। सृष्टि ने इसके बाद मान का मोबाइल और पर्स उठाकर अपने बैग में रख लिया। मोबाइल का स्विच आफ करके अपने बैग में रखने से पहले सृष्टि ने मान के मोबाइल से उसकी तरफ से एक मैसेज जिम के मोबाइल पर किया जिसमें उसने मान की तरफ से लिखा कि जरूरी काम से बाहर जा रहा हूं शाम को जिम नहीं आ सकूंगा। इसके बाद सृष्टि जब मान के फ्लैट से बाहर निकली तो उससे पहले उसने अपने सिर व चेहरे को स्कार्फ से अच्छी तरह से ढक लिया ताकि आसानी से कोई उसे पहचान न सके। उसने फ्लैट की चाभी अंदर से उठा ली थी जिससे उसने मुख्यद्वार को बाहर से लॉक किया और चाभी बैग में रख ली। उस वक्त चार बजकर 40 मिनट का वक्त था जब सृष्टि लिफ्ट के रास्ते नीचे उतरी और सोसाइटी से बाहर आ गई। यह वक्त ऐसा होता है जब लोगों का आवागमन काफी होता है इसलिए सोसाइटी के किसी गार्ड का उसकी तरफ ध्यान नही गया। सोसाइटी के बाहर आकर कुछ दूर चलकर सृष्टि ने एक आटो लिया और डीएलएफ मॉल पहुंची। वहां पहले से तय प्रोग्राम के मुताबिक&amp;nbsp; इनोवा गाडी लेकर नफीस भी पहुंचा चुका था और उसका इंतजार कर रहा था। गाडी में इमरान कुरैशी भी मौजूद था।&lt;br /&gt;
‘सब काम ठीक से हो गया।‘ इमरान ने उत्साहित होकर पूछा&lt;br /&gt;
‘हां एकदम ठीक तरीके से ही हुआ है।‘ गाडी के भीतर बैठते हुए सृष्टि ने जवाब दिया।&lt;br /&gt;
‘किसी ने देखा तो नही।‘&lt;br /&gt;
‘नही सबकुछ प्लान के मुताबिक हुआ है।‘ सृष्टि ने जवाब दिया।&lt;br /&gt;
इमरान के ड्राईवर नफीस ने सृष्टि के दोनों फोन उसे वापस लौटा दिए।&lt;br /&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;
इसके बाद सृष्टि और इमरान गाडी से ही वहां से निकलकर दुर्गापुरी चौक पहुंचे और वहां एक कैमरा रिपेयर की दुकान से सृष्टि ने अपना कैमरा लिया। जो उसने ठीक करने के लिए दिया था। उसी इलाके से उसने कुछ लोगों को फोन किए ताकि उसके मोबाइल की लोकेशन तब तक उस इलाके की आ सके। बाद में दोनों ग्रेट इंडिया पैलेस मॉल पहुंचे। वहां इमरान तो गाडी में ही बैठा रहा लेकिन सृष्टि ने अंदर जाकर कुछ शॉपिंग की और बिल संभाल कर रख लिए। वहां भी उसने कुछ लोगों से फोन पर बात की। कुछ देर वहां समय बिताने के बाद वे तीनों दनकौर नहर की तरफ गए जहां सृष्टि ने मान का मोबाइल तोड़कर उसके फलैट कर चाभी के साथ नहर में डाल दिया। इसके बाद तीनों ग्रेटर नोएडा में होरिजन सोसाइटी पहुंचे और वहां सृष्टि को छोड़ने के बाद इमरान अपने ड्राईवर नफीस के साथ खुर्जा बुलंदशहर चला गया।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;
अगले दिन से सृष्टि व इमरान अखबाराें और टीवी चैनलों में चल रही मान हत्याकांड की खबरों के जरिए पुलिस की गतिविधियों पर नजर रखने लगे। 15 जनवरी को जब इंसपेक्टर प्रधान ने बुलाकर सृष्टि से पूछताछ की तो उसने ये सारी बात इमरान को बतायी और कहा कि शायद पुलिस को उस पर शक हो गया है। इसलिए अब वहां रहना ठीक नहीं है। तो इमरान ने योजना बनायी की वह पहले सृष्टि को वहां से हटा दगो इसके बाद वह उस मकान को खाली कर देगा। इसलिए इनोवा कार लेकर वह सृष्टि के फलैट पर पहुंचा उसके जरूरी सामान गाडी में रखकर वह ड्राईवर नफीस और सृष्टि के साथ उसकी सोसाइटी से निकला ही था कि पुलिस की गाडी ने उसे घेर लिया और उन तीनों को थाने ले आयी। पुलिस ने जब इनोवा की तलाशी ली तो गाडी से कब्जे से न सिर्फ वो पिस्टल बरामद हो गई जिससे मान को गोली मारी गई थी अपितु सृष्टि के खून से सने कपड़े और मान को वो पर्स भी बरामद हो गया जिसे सृष्टि घटनास्थल से उठा लायी थी। इसके बाद सृष्टि के पास अपने बचाव में कहने के लिए कुछ बचा नहीं था। लिहाजा थाने पहुंचते ही जब इंसपेक्टर प्रधान ने उससे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पूछताछ की तो उसने कबूल कर लिया कि उसी ने मान की गोली मारकर हत्या की थी। उसने बताया कि मान की हत्या उसने इसलिए की थी कि जब मान पहली बार उसके फलैट पर आया था तो उसने उसे काफी में मिलाकर कोई नशीली चीज खिला दी थी। जिसके कारण वह बेहोश हो गई। नशे की उसी अवस्था में मान ने उसके साथ सेक्स किया और अपने फोन से उसकी वीडियों क्लिप बना ली। सृष्टि ने पुलिस को बताया कि जब उसे होश आया तो उसका मान के साथ काफी झगड़ा हुआ। लेकिन मान ने उस वक्त उससे माफी मांग ली और कहा कि उसने उन दोनों की एक बहुत अच्छी फिल्म बनायी है। फिर उसने सृष्टि को वह वीडियों फिल्म भी दिखायी जो उसने बनायी थी। बकौल सृष्टि इसी के बाद से मान जब तब उसे ब्लैकमेल करते हुए अक्सर जबरन शारीरिक संबध बनाने के लिए मजबूर करता रहता था।&lt;br /&gt;
एसपी सुनीति और इंसपेक्टर प्रधान ने इमरान, सृष्टि और नफीस से पूछताछ उनको साथ ले जाकर दनकौर की उस नहर में खोजबीन करायी जहां उन्होंने मान के फोन व घर की चाभी को फेंकने की बात कहीं थी। लेकिन काफी प्रयास के बाद भी इन दोनों चीजों को बरामद करने में उन्हें कोई सफलता नहीं मिली। इंसपेक्टर प्रधान ने सृष्टि और इमरान के दो -दो मोबाइल फोन के साथ नफीस के फोन को कब्जे में लिया था। जिनमें उन तीनों के बीच हत्याकांड की साजि’ा और उसे अंजाम देने के लिए व्हाटस एप से की गई चैट का वो रिकार्ड मौजूद था। प्रधान ने फोरेंसिंक टीम से कहकर उस चैट की कॉपी सेव करवा ली तथा उनके मोबाइल फोरेंसिक टेस्ट के लिए भिजवा दिए। मान के खून से सने सृष्टि के कपड़े जो पुलिस ने मान के पर्स के साथ बरामद किए थे उन्हें भी जांच के लिए फोरेंसकि प्रयोगशाला भेज दिया गया। मान के शरीर से निकली गोलियों से मिलान के लिए बरामद किए गए पिस्तौल को ब्लैस्टिक एक्सपर्ट को भेज दिया गया। सृष्टि, इमरान और नफीस की गिरफ्तारी की औपचारिकता को पूरी करने के बाद उन्हें गौतमबुद्धनगर सीजेएम&amp;nbsp; की कोर्ट में पेश कर दिया गया जहां से तीनों को न्यायिक हिरासत में गौतमबुद्ध नगर जेल भेज दिया गया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;b&gt;&lt;br /&gt;&lt;/b&gt;
&lt;b&gt;बॉक्स&lt;/b&gt;&lt;br /&gt;
&lt;b&gt;&lt;br /&gt;&lt;/b&gt;
&lt;b&gt;गले नहीं उतरती अशलील वीडियों क्लिप की थ्योरी&lt;/b&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;
हालांकि सृष्टि ने पुलिस खुलासे में ये आरोप लगाया कि मान ने कुछ महीना पहले उसके घर पर उसके साथ रेप किया था और उसकी अश्लील वीडियों क्लिप बना ली थी। लेकिन पुलिस अधिकारियों के साथ जितेन्द्र मान के फुफेरे भाई प्रीतम टोकस तयेरे भाई राहुल के गले से ये आरोप नहीं उतर रहे है। वे कह रहे हैं कि इमरान की निगाहों में खुद को पाक साफ बताने के लिए खुद को चरित्रवान साबित करने के लिए उससे ये झूठ बोला। प्रीतम टोकस कहते हैं, सृष्टि चंचल स्वभाव की लड़की थी उन्हें शक है कि उसने खुद ही मान को अपने रूपजाल में फंसाकर उससे संबध बनाए होंगे। उनका तर्क है कि अगर मान भी लिया जाए कि मान ने सृष्टि की कोई अ’लील वीडियो बना ली थी। तो वह पुलिस से शिकायत कर सकती थी। इमरान को उसने ये बात बतायी तो उसका तथाकथित पति होंने के नाते वह भी पुलिस से मान की शिकायत करके मान को गिरफतार करवा सकता था।&lt;br /&gt;
लेकिन दोनों ने ही ऐसा नहीं किया। हत्या वाले दिन जब सृष्टि, मान से उससे मिलने के लिए कमरे पर गई थी तो मान के पीठ करके लेटते समय मौका देखकर उसका मोबाइल लेकर भाग जाती या उससे वीडियों क्लिप डिलीट कर देती। प्रीतम टोकस कहते है कि कुछ दिन पहले तक वह खुद मान के साथ रहता था। कभी कभी वह अपने फोन में नेटवर्क नहीं होंने के कारण मान का मोबाइल भी यूज कर लेता था जिसे वह सहज ही दे देता था। अगर उसके फोन में किसी की प्राइवेट क्लिप होती तो कभी भी वो अपना फोन यूज करने के लिए आसानी से नहीं देता। उनके मुताबिक जब तक वे मान के साथ रहे उन्हें नहीं लगता कि सृष्टि उससे मिलने उस मकान में कभी आयी होगी। वे सवाल उठाते है कि किसी लडकी के साथ कोई तभी घूम फिर या शारीरिक संबध रख सकता है जब इसमें लडकी की सहमति हो।&amp;nbsp;&lt;br /&gt;
प्रीतम टोकस आरोप लगाते हैं कि सच्चाई या तो उनका भाई जीतमान जानता था जो अपनी सफाई देने के लिए अब दुनिया में नहीं है। जबकि सृष्टि गुप्ता झूठ बोलकर सच्चाई को गलत तरीके से पेश कर रही है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;b&gt;कथा पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के नाटय रूपातरंण पर आधारित&amp;nbsp;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;
</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://jurmkiduniya.blogspot.com/feeds/204838981620354488/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://jurmkiduniya.blogspot.com/2018/07/blog-post.html#comment-form' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8049618298159816963/posts/default/204838981620354488'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8049618298159816963/posts/default/204838981620354488'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://jurmkiduniya.blogspot.com/2018/07/blog-post.html' title='एक कातिल हसीना सेे जिदंगी हार गया इंटरनेशनल बॉक्सर'/><author><name>sunil verma</name><uri>http://www.blogger.com/profile/06462864962085848512</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='27' height='32' src='//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiM8mYTF1rSTG5OLwjuKe8ktdZwaNsHWlaRFf283uYibqX2zwZT1C0LITcRz_c-QhdhjEK686quBdQwPl6yirK3P5dvBOclUZ-nAWjIgkhf_dw38PrIOFgSWi-PC_Q-ilg/s113/sunil+pic2.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjaXGA_it_ERFZd3xAunaTMfu7t_ALSu8opTUPPtig9WunRAC-yU3rcL16Pv0vd_F0SrvM2z-errHuAoc4ZTriI982ljdyl1JcPsLD2UBfEm-IhvrUB6vIVMLabWU3bSmU7UEUJKm5FIuND/s72-c/maan.jpg" height="72" width="72"/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8049618298159816963.post-6885816279499200694</id><published>2018-07-09T14:17:00.001+05:30</published><updated>2018-07-09T15:10:25.568+05:30</updated><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="Gangwar"/><title type='text'>दूसराें की सुपारी लेने वाला मुन्ना बजरंगी, खुद हाे गया सुपारी किलिंग का शिकार</title><content type='html'>&lt;div dir=&quot;ltr&quot; style=&quot;text-align: left;&quot; trbidi=&quot;on&quot;&gt;
&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;
&lt;a href=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjqPp7EXLoJ08B6paHcnWouSFOgFUIHx_gRcAjf-t2pd0DtlfbSSDLd_KinbXyK1Mim15nfuzF9B8wCL_-8a9nT1oLJbMtwmj2gU2xntXdg0MYrQyK91TD1KR7IEIAxl1aLSq0yNsqRYf09/s1600/bagpat-jail-1.gif&quot; imageanchor=&quot;1&quot; style=&quot;margin-left: 1em; margin-right: 1em;&quot;&gt;&lt;img border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;420&quot; data-original-width=&quot;680&quot; height=&quot;197&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjqPp7EXLoJ08B6paHcnWouSFOgFUIHx_gRcAjf-t2pd0DtlfbSSDLd_KinbXyK1Mim15nfuzF9B8wCL_-8a9nT1oLJbMtwmj2gU2xntXdg0MYrQyK91TD1KR7IEIAxl1aLSq0yNsqRYf09/s320/bagpat-jail-1.gif&quot; width=&quot;320&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div&gt;
&lt;div style=&quot;font-family: georgia, &amp;quot;times new roman&amp;quot;, &amp;quot;bitstream charter&amp;quot;, times, serif; font-size: 16px;&quot;&gt;
&lt;b&gt;सुनील वर्मा ।&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;
&lt;span style=&quot;font-family: georgia, times new roman, bitstream charter, times, serif;&quot;&gt;पूर्वांचल का कुख्यात डॉन प्रेम प्रकाश उर्फ मुन्ना बजरंगी की बागपत जेल में हत्या कर दी गई। आज पूर्व बसपा विधायक लोकेश दीक्षित से रंगदारी मांगने के आरोप में बागपत कोर्ट में मुन्ना बजरंगी की पेशी होनी थी। मुन्ना बजरंगी को रविवार झांसी जेल से बागपत लाया गया था। उसे तन्हाई बैरक में कुख्यात सुनील राठी ओर विक्की सुंहेड़ा के साथ रखा गया था। मुन्ना बजरंगी के वकील के मुताबिक मुन्ना बजरंगी को 10 गोलियां सिर में मारी गई है इसके बाद पिस्तौल को गटर में फेंक दिया गया।&amp;nbsp; हालांकि, जेल में कैदी के पास पिस्तौल कैसे आई, यह बड़ा सवाल है। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने&amp;nbsp; उदय प्रताप सिंह, डिप्टी जेलर शिवाजी यादव, हेड वार्डन अरजिंदर सिंह, और वार्डन माधव कुमार को सस्पेंड कर दिया गया है और न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। सीएम ने कहा, जेल परिसर के अंदर होने वाली ऐसी घटना एक गंभीर बात है। जिम्मेदार लोगों के खिलाफ जांच के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी।&amp;nbsp; मुन्ना बजरंगी पर 20 लोगों की हत्या का आरोप है। शक है कि गैंगवार के तहत कुख्यात सुनील राठी ने बजरंगी की हत्या की।&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;span style=&quot;font-family: georgia, times new roman, bitstream charter, times, serif;&quot;&gt;&lt;b&gt;पत्नी ने 10 दिन पहले जताई थी हत्या की आशंका&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;span style=&quot;font-family: georgia, times new roman, bitstream charter, times, serif;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;table align=&quot;center&quot; cellpadding=&quot;0&quot; cellspacing=&quot;0&quot; class=&quot;tr-caption-container&quot; style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto; text-align: center;&quot;&gt;&lt;tbody&gt;
&lt;tr&gt;&lt;td style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhnEsyzzl7ZkW2eX2R09dPU1HYUveVthe8VyYv6h4iAUEgDCRY-psrqp5NZBot_0GOZEPFCk8Pd7A33o_ikS-8I9m6L29lcOW1L0Qg_tm2tqgzon_9tii35Ltfruvwl0j2GShIaf5QQtoSz/s1600/munna-bajrangi-and-his-wife-seema-singh.gif&quot; imageanchor=&quot;1&quot; style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto;&quot;&gt;&lt;img border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;397&quot; data-original-width=&quot;680&quot; height=&quot;186&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhnEsyzzl7ZkW2eX2R09dPU1HYUveVthe8VyYv6h4iAUEgDCRY-psrqp5NZBot_0GOZEPFCk8Pd7A33o_ikS-8I9m6L29lcOW1L0Qg_tm2tqgzon_9tii35Ltfruvwl0j2GShIaf5QQtoSz/s320/munna-bajrangi-and-his-wife-seema-singh.gif&quot; width=&quot;320&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;
&lt;tr&gt;&lt;td class=&quot;tr-caption&quot; style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: red;&quot;&gt;पत्नी सीमा ने पति बजरंगी की हत्या का जताया था संदेह&lt;/span&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;
&lt;/tbody&gt;&lt;/table&gt;
&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: georgia, &amp;quot;times new roman&amp;quot;, &amp;quot;bitstream charter&amp;quot;, times, serif;&quot;&gt;जेल में ही गोली&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: georgia, times new roman, bitstream charter, times, serif;&quot;&gt;मारकर हत्या कर दी गई। जेल में माफिया डॉन की हत्या से अधिकारियों में हड़कंप मच गया है। पुलिस पूरे मामले की जांच में जुट गई है। घटना के सूचना के मिलते ही जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक जेल पहुंचे और घटना का जायजा लिया। इस बीच लखनऊ में राज्य के पुलिस उपमहानिरीक्षक (कानून एवं व्यवस्था) प्रवीन कुमार ने बताया कि शुरुआती जांच हत्या में कुख्यात अपराधी सुनील राठी का नाम सामने आ रहा है। सुनील राठी यूपी के साथ उत्तराखंड में सक्रिय है। सुनील की मां राजबाला छपरौली से बसपा से चुनाव लड़ चुकी है ।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: georgia, times new roman, bitstream charter, times, serif;&quot;&gt;मुन्ना बजरंगी की पत्नी सीमा सिंह ने 10 दिन पहले ही प्रेस वार्ता कर बजरंगी की हत्या की आशंका जताई थी। सीमा सिंह ने एसटीएमुन्ना बजरंगी की पत्नी सीमा सिंह ने 10 दिन पहले ही प्रेस वार्ता कर बजरंगी की हत्या की आशंका जताई थी। सीमा सिंह ने एसटीएफ के दो इंस्पेक्टर पर शक जताया था। सीमा सिंह ने&amp;nbsp; उनकी सुरक्षा बढ़ाने की मांग की थी।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: georgia, &amp;quot;times new roman&amp;quot;, &amp;quot;bitstream charter&amp;quot;, times, serif;&quot;&gt;पिछले दिनों लखनऊ में&amp;nbsp; हुए एक गैंगवार में माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी के साले पुष्पजीत सिंह की हत्या कर दी गई। गत शुक्रवार को मुन्ना पुलिस अभिरक्षा के बीच साले की तेरहवीं में भाग लेने के लिए विकासनगर कॉलोनी आया था।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;span style=&quot;font-family: georgia, times new roman, bitstream charter, times, serif;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;br /&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;
&lt;span style=&quot;font-family: georgia, times new roman, bitstream charter, times, serif;&quot;&gt;&lt;b&gt;कौन है मुन्ना बजरंगी?&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;span style=&quot;font-family: georgia, &amp;quot;times new roman&amp;quot;, &amp;quot;bitstream charter&amp;quot;, times, serif;&quot;&gt;मुन्ना बजरंगी का असली नाम प्रेम प्रकाश सिंह है। उसका जन्म 1967 में उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के पूरेदयाल गांव में हुआ था। उसके पिता पारसनाथ सिंह उसे पढ़ा लिखाकर बड़ा आदमी बनाने का सपना संजोए थे. मगर प्रेम प्रकाश उर्फ मुन्ना बजरंगी ने उनके अरमानों को कुचल दिया। उसने पांचवीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ दी। किशोर अवस्था तक आते आते उसे कई ऐसे शौक लग गए जो उसे जुर्म की दुनिया में ले जाने के लिए काफी थे।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;span style=&quot;font-family: georgia, times new roman, bitstream charter, times, serif;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;
&lt;span style=&quot;font-family: georgia, times new roman, bitstream charter, times, serif;&quot;&gt;&lt;b&gt;जुर्म की दुनिया में ऐसे रखा पहला कदम&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;span style=&quot;font-family: georgia, &amp;quot;times new roman&amp;quot;, &amp;quot;bitstream charter&amp;quot;, times, serif;&quot;&gt;मुन्ना बजरंगी को हथियार रखने का बड़ा शौक था, वह फिल्मों की तरह एक बड़ा गैंगेस्टर बनना चाहता था। यही वजह थी कि 17 साल की नाबालिग उम्र में ही उसके खिलाफ पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया। जौनपुर के सुरेही थाना में उसके खिलाफ मारपीट और अवैध असलहा रखने का मामला दर्ज किया गया था। इसके बाद मुन्ना ने कभी पलटकर नहीं देखा।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;span style=&quot;font-family: georgia, times new roman, bitstream charter, times, serif;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;
&lt;span style=&quot;font-family: georgia, times new roman, bitstream charter, times, serif;&quot;&gt;&lt;b&gt;अस्सी के दशक में की थी पहली हत्या&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;span style=&quot;font-family: georgia, &amp;quot;times new roman&amp;quot;, &amp;quot;bitstream charter&amp;quot;, times, serif;&quot;&gt;मुन्ना अपराध की दुनिया में अपनी पहचान बनाने की कोशिश में लगा था। इसी दौरान उसे जौनपुर के स्थानीय दबंग माफिया गजराज सिंह का संरक्षण हासिल हो गया। साल 1984 में मुन्ना ने लूट के लिए एक व्यापारी की हत्या कर दी। इसके बाद उसने गजराज के इशारे पर ही जौनपुर के भाजपा नेता रामचंद्र सिंह की हत्या करके पूर्वांचल में अपना दम दिखाया।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;span style=&quot;font-family: georgia, times new roman, bitstream charter, times, serif;&quot;&gt;पूर्वांचल में अपनी साख बढ़ाने के लिए मुन्ना बजरंगी 90 के दशक में पूर्वांचल के बाहुबली माफिया और राजनेता मुख्तार अंसारी के गैंग में शामिल हो गया। यह गैंग मऊ से संचालित हो रहा था, लेकिन इसका असर पूरे पूर्वांचल पर था। मुख्तार अंसारी ने अपराध की दुनिया से राजनीति में कदम रखा और 1996 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर मऊ से विधायक निर्वाचित हुए।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;span style=&quot;font-family: georgia, times new roman, bitstream charter, times, serif;&quot;&gt;इसके बाद इस गैंग की ताकत बहुत बढ़ गई। मुन्ना सीधे पर सरकारी ठेकों को प्रभावित करने लगा था। वह लगातार मुख्तार अंसारी के निर्देशन में काम कर रहा था। पूर्वांचल में सरकारी ठेकों और वसूली के कारोबार पर मुख्तार अंसारी का कब्जा था। लेकिन इसी दौरान तेजी से उभरते बीजेपी के विधायक कृष्णानंद राय उनके लिए चुनौती बनने लगे।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;span style=&quot;font-family: georgia, times new roman, bitstream charter, times, serif;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;
&lt;span style=&quot;font-family: georgia, times new roman, bitstream charter, times, serif;&quot;&gt;&lt;b&gt;गॉड फादर मुख्तार अंसारी ने दी&amp;nbsp; कृष्णानंद राय की सुपारी&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;table align=&quot;center&quot; cellpadding=&quot;0&quot; cellspacing=&quot;0&quot; class=&quot;tr-caption-container&quot; style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto; text-align: center;&quot;&gt;&lt;tbody&gt;
&lt;tr&gt;&lt;td style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhl60Tyw0Dq42sG2lWCPe8FD9hzaOze2KC4V3X0pigMr33bOMRTNWE2pvwQtJYUcuemchBGCFrmcSBd3F5EHNFC8kSvwL8RUrvkeg9K-nLnbPkwgusgA1g0EC-rxtKq5F_rXxUYkURB3I6_/s1600/rai-and-bajrangi.gif&quot; imageanchor=&quot;1&quot; style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto;&quot;&gt;&lt;img border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;397&quot; data-original-width=&quot;680&quot; height=&quot;186&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhl60Tyw0Dq42sG2lWCPe8FD9hzaOze2KC4V3X0pigMr33bOMRTNWE2pvwQtJYUcuemchBGCFrmcSBd3F5EHNFC8kSvwL8RUrvkeg9K-nLnbPkwgusgA1g0EC-rxtKq5F_rXxUYkURB3I6_/s320/rai-and-bajrangi.gif&quot; width=&quot;320&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;
&lt;tr&gt;&lt;td class=&quot;tr-caption&quot; style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: red;&quot;&gt;मुख्तार अंसारी के कहने पर बजरंगी ने की थी कृष्णानंद राय की हत्या&lt;/span&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;
&lt;/tbody&gt;&lt;/table&gt;
&lt;span style=&quot;font-family: georgia, &amp;quot;times new roman&amp;quot;, &amp;quot;bitstream charter&amp;quot;, times, serif;&quot;&gt;&lt;br /&gt;कृष्णानंद राय पर मुख्तार अंसारी के दुश्मन बृजेश सिंह का हाथ था। उसके संरक्षण में कृष्णानंद राय का गैंग फल फूल रहा था। इसी वजह से दोनों गैंग अपनी ताकत बढ़ा रहे थे। इनके संबंध अंडरवर्ल्ड के साथ भी जुड़े गए थे। कृष्णानंद राय का बढ़ता प्रभाव मुख्तार को रास नहीं आ रहा था। उन्होंने कृष्णानंद राय को खत्म करने की जिम्मेदारी मुन्ना बजरंगी को सौंप दी।&amp;nbsp; मुख्तार से फरमान मिल जाने के बाद मुन्ना बजरंगी ने भाजपा विधायक कृष्णानंद राय को खत्म करने की साजिश रची। 29 नवंबर 2005 को माफिया डॉन मुख्तार अंसारी के कहने पर मुन्ना बजरंगी ने कृष्णानंद राय को दिन दहाड़े मौत की नींद सुला दिया। उसने अपने साथियों के साथ लखनऊ हाइवे पर कृष्णानंद राय की दो गाड़ियों पर AK47 से 400 गोलियां बरसाई थी। इस हमले में गाजीपुर से विधायक कृष्णानंद राय के अलावा उनके साथ चल रहे 6 अन्य लोग भी मारे गए थे। पोस्टमार्टम के दौरान हर मृतक के शरीर से 60 से 100 तक गोलियां बरामद हुईं थी। इस हत्याकांड ने सूबे के सियासी हलकों में हलचल मचा दी। हर कोई मुन्ना बजरंगी के नाम से खौफ खाने लगा। इस हत्या को अंजाम देने के बाद वह मोस्ट वॉन्टेड बन गया था।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;span style=&quot;font-family: georgia, times new roman, bitstream charter, times, serif;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;br /&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;
&lt;span style=&quot;font-family: georgia, times new roman, bitstream charter, times, serif;&quot;&gt;&lt;b&gt;सात लाख का इनामी था मुन्ना बजरंगी&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;span style=&quot;font-family: georgia, &amp;quot;times new roman&amp;quot;, &amp;quot;bitstream charter&amp;quot;, times, serif;&quot;&gt;भाजपा विधायक की हत्या के अलावा कई मामलों में उत्तर प्रदेश पुलिस, एसटीएफ और सीबीआई को मुन्ना बजरंगी की तलाश थी। इसलिए उस पर सात लाख रुपये का इनाम भी घोषित किया गया। बजरंगी पर&amp;nbsp; हत्या, अपहरण और वसूली के कई मामलों में शामिल होने के आरोप थे। वो लगातार अपनी लोकेशन बदलता रहा, पुलिस का दबाव भी बढ़ता जा रहा था।&amp;nbsp; यूपी पुलिस और एसटीएफ लगातार मुन्ना बजरंगी को तलाश कर रही थी। उसका यूपी और बिहार में रह पाना मुश्किल हो गया था। दिल्ली भी उसके लिए सुरक्षित नहीं था। इसलिए मुन्ना भागकर मुंबई चला गया। उसने एक लंबा अरसा वहीं गुजारा। इस दौरान उसका कई बार विदेश जाना भी होता रहा। उसके अंडरवर्ल्ड के लोगों से रिश्ते भी मजबूत होते जा रहे थे।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;span style=&quot;font-family: georgia, times new roman, bitstream charter, times, serif;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;
&lt;span style=&quot;font-family: georgia, times new roman, bitstream charter, times, serif;&quot;&gt;&lt;b&gt;पुलिस ने मुन्ना को ऐसे किया गिरफ्तार&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;table align=&quot;center&quot; cellpadding=&quot;0&quot; cellspacing=&quot;0&quot; class=&quot;tr-caption-container&quot; style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto; text-align: center;&quot;&gt;&lt;tbody&gt;
&lt;tr&gt;&lt;td style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEh59qiYuft0RsQZomrpS9U16yAC6Z6S6gN_lGDai1bYaclNhDNzoK6sI-X6Nj493fkLTowl82WBSmYjn6W29haONyPCjbl5IHHgzJOO7pujwHb-Gdnd3RsJz7QdvuovlAe7WHYJvNxs8a41/s1600/baajrangi-in-costedy.gif&quot; imageanchor=&quot;1&quot; style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto;&quot;&gt;&lt;img border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;400&quot; data-original-width=&quot;680&quot; height=&quot;188&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEh59qiYuft0RsQZomrpS9U16yAC6Z6S6gN_lGDai1bYaclNhDNzoK6sI-X6Nj493fkLTowl82WBSmYjn6W29haONyPCjbl5IHHgzJOO7pujwHb-Gdnd3RsJz7QdvuovlAe7WHYJvNxs8a41/s320/baajrangi-in-costedy.gif&quot; width=&quot;320&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;
&lt;tr&gt;&lt;td class=&quot;tr-caption&quot; style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: red;&quot;&gt;2009 में दिल्ली पुलिस ने बजरंगी काे किया था गिरफ्तार&lt;/span&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;
&lt;/tbody&gt;&lt;/table&gt;
&lt;span style=&quot;font-family: georgia, &amp;quot;times new roman&amp;quot;, &amp;quot;bitstream charter&amp;quot;, times, serif;&quot;&gt;&lt;br /&gt;उत्तर प्रदेश समते कई राज्यों में मुन्ना बजरंगी के खिलाफ मुकदमे दर्ज थे। वह पुलिस के लिए परेशानी का सबब बन चुका था। उसके खिलाफ सबसे ज्यादा मामले उत्तर प्रदेश में दर्ज हैं। 29 अक्टूबर 2009 को दिल्ली पुलिस ने मुन्ना को मुंबई के मलाड इलाके में नाटकीय ढंग से गिरफ्तार कर लिया था। माना जाता है कि मुन्ना को अपने एनकाउंटर का डर सता रहा था। इसलिए उसने खुद एक योजना के तहत दिल्ली पुलिस से अपनी गिरफ्तारी कराई थी। मुन्ना की गिरफ्तारी के इस ऑपरेशन में मुंबई पुलिस को भी ऐन वक्त पर शामिल किया गया था। दिल्ली पुलिस ने कहा था कि दिल्ली के विवादास्पद एनकाउंटर स्पेशलिस्ट राजबीर सिंह की हत्या में मुन्ना बजरंगी का हाथ होने का शक है। इसलिए उसे गिरफ्तार किया गया।&amp;nbsp; इसके बाद इस शख्स ने अपनी राजनीतिक पारी शुरू की। 2012 के विधानसभा चुनाव में मुन्ना ने मडियाहू विधानसभा से किस्मत आजमाया। लेकिन वह हार गया। प्रेम प्रकाश उर्फ मुन्ना बजरंगी जौनपुर, सुल्तानपुर, तिहाड़, मिर्जापुर, झांसी और पीलीभीत जेल में भी बंद रह चुका है। हत्या की वजह रंजिश बतायी जा रही है।&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;span style=&quot;font-family: georgia, times new roman, bitstream charter, times, serif;&quot;&gt;&lt;b&gt;काैन है सुनील राठी&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;table align=&quot;center&quot; cellpadding=&quot;0&quot; cellspacing=&quot;0&quot; class=&quot;tr-caption-container&quot; style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto; text-align: center;&quot;&gt;&lt;tbody&gt;
&lt;tr&gt;&lt;td style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiLgRhn9wyTKKSTEQmaKAo8vhLmnxId9q_0D5RdYaSe3Sr3se03CrNmiYtg_q4RLtJpQ1FtXDu4i7ohOxYXUUZJs1zxhHkwLE3chBeCIHtRP1pnohCK1Og5JYyWfCedLKa1XEAIBPbrgrMk/s1600/sunil-rathi.gif&quot; imageanchor=&quot;1&quot; style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto;&quot;&gt;&lt;img border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;397&quot; data-original-width=&quot;680&quot; height=&quot;186&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiLgRhn9wyTKKSTEQmaKAo8vhLmnxId9q_0D5RdYaSe3Sr3se03CrNmiYtg_q4RLtJpQ1FtXDu4i7ohOxYXUUZJs1zxhHkwLE3chBeCIHtRP1pnohCK1Og5JYyWfCedLKa1XEAIBPbrgrMk/s320/sunil-rathi.gif&quot; width=&quot;320&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;
&lt;tr&gt;&lt;td class=&quot;tr-caption&quot; style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: red;&quot;&gt;सुनील राठी पुलिस की गिरफ्त में&lt;/span&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;
&lt;/tbody&gt;&lt;/table&gt;
&lt;span style=&quot;font-family: georgia, times new roman, bitstream charter, times, serif;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;br /&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;span style=&quot;font-family: georgia, times new roman, bitstream charter, times, serif;&quot;&gt;यूपी के माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी हत्याकांड में कुख्यात बदमाश सुनील राठी का नाम सामने आ रहा है। सूत्रों की माने तो सुनील के इशारे पर ही उसके गुर्गों ने मुन्ना को गोली मारी है। सुनील राठी को हाल ही में रुड़की जेल से बागपत शिफ्ट किया गया था। उसने रुड़की में अपनी जान का खतरा बताया था। सुनील ही नहीं उसका पूरा परिवार अपराध जगत में सक्रिय है। उत्तराखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अपराध जगत में सुनील राठी का नाम बड़ा है। अपने पिता की हत्या के बाद उसने जुर्म की दुनिया में कदम रखा था। इसके बाद एक-एक करके चार लोगों को मौत की नींद सुला दिया। लोग सुनील के नाम से भी डरने लगे. उसकी मां पिछले विधानसभा चुनाव में बीएसपी के टिकट पर छपरौली विधानसभा से चुनाव भी लड़ चुकी हैं। पिछले साल सुनील राठी का नाम तब सुर्खियों में आया था, जब उसने रुड़की शहर के एक प्रतिष्ठित डॉक्टर एनडी अरोड़ा से पचास लाख की रंगदारी मांगी थी। बागपत जेल में बंद रहते हुए उसे डॉक्टर से अपनी मां तक इन पैसों को पहुंचाने के लिए कहा था। इसके बाद रुड़की पुलिस सुनील राठी को रिमांड पर लेकर आई थी। कोर्ट के आदेश पर उसे रुड़की में रखा गया था। इस मामले में बागपत के टिकरी कस्बे से नगर पंचायत की पूर्व चेयरमैन और सुनील राठी की मां राजबाला को गिरफ्तार किया गया था। सुनील राठी जेल में बंद होने के बावजूद गैंग चलाता था। लेकिन अब इस बात की तहकीकात पुलिस कर रही है कि सुनील राठी ने किसके इशारे पर इस काम काे अंजाम दिया। एसटीएफ ने उससे जेल मे मिलने वाले लाेगाें के बारे में जानकारी एकत्र करनी शुरू कर दी है।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;span style=&quot;background-color: white; font-family: georgia, times new roman, bitstream charter, times, serif;&quot;&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;div style=&quot;font-family: georgia, &amp;quot;times new roman&amp;quot;, &amp;quot;bitstream charter&amp;quot;, times, serif; font-size: 16px;&quot;&gt;
&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;/div&gt;
&lt;/div&gt;
</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://jurmkiduniya.blogspot.com/feeds/6885816279499200694/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://jurmkiduniya.blogspot.com/2018/07/10-20-10-1967.html#comment-form' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8049618298159816963/posts/default/6885816279499200694'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8049618298159816963/posts/default/6885816279499200694'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://jurmkiduniya.blogspot.com/2018/07/10-20-10-1967.html' title='दूसराें की सुपारी लेने वाला मुन्ना बजरंगी, खुद हाे गया सुपारी किलिंग का शिकार'/><author><name>sunil verma</name><uri>http://www.blogger.com/profile/06462864962085848512</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='27' height='32' src='//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiM8mYTF1rSTG5OLwjuKe8ktdZwaNsHWlaRFf283uYibqX2zwZT1C0LITcRz_c-QhdhjEK686quBdQwPl6yirK3P5dvBOclUZ-nAWjIgkhf_dw38PrIOFgSWi-PC_Q-ilg/s113/sunil+pic2.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjqPp7EXLoJ08B6paHcnWouSFOgFUIHx_gRcAjf-t2pd0DtlfbSSDLd_KinbXyK1Mim15nfuzF9B8wCL_-8a9nT1oLJbMtwmj2gU2xntXdg0MYrQyK91TD1KR7IEIAxl1aLSq0yNsqRYf09/s72-c/bagpat-jail-1.gif" height="72" width="72"/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8049618298159816963.post-3122941471663969509</id><published>2018-06-28T16:12:00.000+05:30</published><updated>2018-07-09T16:11:49.833+05:30</updated><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="True Story"/><title type='text'>हरियाणा की एक डांसर जाे कभी गैंगस्टर रही, किसने करायी उसकी हत्या  </title><content type='html'>&lt;div dir=&quot;ltr&quot; style=&quot;text-align: left;&quot; trbidi=&quot;on&quot;&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: 0.0001pt; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;span lang=&quot;EN-US&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 16pt;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;mso-spacerun: yes;&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;EN-US&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 16pt;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: 0.0001pt; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;b style=&quot;text-indent: 36pt;&quot;&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;सुनील&amp;nbsp;वर्मा&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin: 0cm 0cm 0.0001pt 108pt; text-align: justify; text-indent: 36pt;&quot;&gt;
&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;EN-US&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt; &lt;!--[if !supportLineBreakNewLine]--&gt;&lt;br style=&quot;mso-special-character: line-break;&quot; /&gt; &lt;!--[endif]--&gt;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;EN-US&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: .0001pt; margin-bottom: 0cm; tab-stops: 93.95pt;&quot;&gt;
&lt;/div&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;table align=&quot;center&quot; cellpadding=&quot;0&quot; cellspacing=&quot;0&quot; class=&quot;tr-caption-container&quot; style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto; text-align: center;&quot;&gt;&lt;tbody&gt;
&lt;tr&gt;&lt;td style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiynEB_T5ZCYBalguSlLIDehmssaIK_UMNZj5pSOAAWiYRY7qePeAy2FKJ5hmrOrUBuL_kENOBMJzVpLQxIIGCrOdjwdc-QsDzwgvrOzGVTcffGL57FiMmtu-sOMb0-lsvH40SKirc-Af4e/s1600/harshita+2.jpg&quot; imageanchor=&quot;1&quot; style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: red;&quot;&gt;&lt;img border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;552&quot; data-original-width=&quot;700&quot; height=&quot;315&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiynEB_T5ZCYBalguSlLIDehmssaIK_UMNZj5pSOAAWiYRY7qePeAy2FKJ5hmrOrUBuL_kENOBMJzVpLQxIIGCrOdjwdc-QsDzwgvrOzGVTcffGL57FiMmtu-sOMb0-lsvH40SKirc-Af4e/s400/harshita+2.jpg&quot; width=&quot;400&quot; /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/a&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;
&lt;tr&gt;&lt;td class=&quot;tr-caption&quot; style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: red;&quot;&gt;लोकगायिका और डांसर हर्षिता दहिया&lt;/span&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;
&lt;/tbody&gt;&lt;/table&gt;
&lt;span lang=&quot;EN-US&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;17 &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;अक्‍टूबर की दोपहर &amp;nbsp;करीब सवा चार बजे बजे का वक्‍त था। हरियाणा की मशहूर लोकगायिका और डांसर हर्षिता दहिया पानीपत के गांव चमराड़ा में एक सांस्कृतिक व सामाजिक कार्यक्रम में भाग लेकर अपनी वैगन आर कार से सोनीपत जिले के गांव पुग्थला की ओर जा रही थीं। इसी दौरान चमराड़ा गांव से निकलने के बाद पांच किलोमीटर आगे चलते ही काले रंग फोर्ड फिगो कार ने हर्षिता की कार को ओवरटेक करके पुग्‍थला रोड पर मुर्गी फार्म के पास जबरन रुकवा लिया। कार में सवार दो युवक बाहर निकले। कार से उतरने वाले युवकों के हाथ में पिस्‍तौल से थी । उन्‍होने कार के अगले पिछले दरवाजे खोलकर उसमें बैठे सभी लोगों को पिस्‍तौल दिखाकर बाहर निकलने पर मजबूर कर दिया और वहां से भाग जाने को कहा और बोले उन्‍हें हर्षिता से से कुछ हिसाब चुकता करना है। साथ ही धमकी दी कि अगर उनके काम में रूकावट डाली तो वे उन्‍हें भी गोली मार देंगे।&lt;br /&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;कार में हर्षिता के अलावा उसके साथी निशा&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;EN-US&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;प्रदीप कुमार&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;EN-US&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;संदीप&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt; बैठे थे। &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;हथियार बंद युवकों की धमकी मिलते ही तीनों कार से उतर गए और सडक किनारे खेत की तरफ भाग निकले। इसके बाद हथियार बंद युवकों ने कार की पिछली सीट पर बैठी हर्षिता से चंद मिनट कुछ बात की और इसके बाद कई फायर किए। चंद सेंकेड में ही लहुलुहान होकर हर्षिता कार की पिछली सीट पर ढेर हो गई। ये सब कुछ इतनी तेजी से हुआ था कि किसी को पता ही नहीं चला कि ये सब क्‍या हो गया है। लेकिन ये तय था कि कार में सवार होकर जो युवक आए थे उनका मकसद सिर्फ हर्षिता की हत्‍या करने का था। क्‍योंकि जान बचाकर खेत में जा छिपे हर्षिता के साथियों ने साफ देखा कि ये इत्‍मीनान होंने पर कि हर्षिता मर चुकी है हत्‍यारें जिस कार में सवार होकर आए थे उसमें बैठकर भाग निकले। हर्षिता के साथियों ने कार में दो अन्‍य लोगों की परछाई भी देखी थी । हत्‍यारों के जाने के बाद निशा, प्रदीप और संदीप खेत से बाहर निकले और उन्‍होंने शोर मचाना शुरू कर दिया। ये ऐसा इलाका है जहां ट्रैफिक बहुत ज्‍यादा नहीं चलता। गाड़ी उस वक्‍त इसराना गांव से होकर गुजर रही थी। गोलिया की गूंज गांव के लोगों ने भी सुनी थी लिहाजा पांच मिनट में ही वहां गांव के लोगों और राहगीरों की भीड जुट गई। कुछ देर लोगों को सारा माजरा जानने और घटना को जानने समझने में लगी। जिस इलाके में ये घटना हुई थी वह पानीपत जिले के इसराना थाना क्षेत्र &amp;nbsp;में पडता है। गांव के कुछ लोगों के साथ प्रदीप चार किलोमीटर दूर थाने पर गया और इस पूरे मामले की सूचना इसराना पुलिस को दी। सूचना मिलते ही थाना प्रभारी कंवर सिंह तत्‍काल मय फोर्स घटना स्‍थल पर पहुंच गए। इस दौरान कंट्रोल रूम से इस घटना की सूचना जिले के उच्‍चाधिकारियों को भी मिल चुकी थी। इलाके के डीएसपी देशराज और पानीपत के एसपी राहुल शर्मा भी पुलिस फोर्स तथा एफएसएल की टीम लेकर घटना स्‍थल पर पहुंच गए।&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;इस दौरान पूछताछ करने पर थाना प्रभारी कंवर सिंह को पता चला कि हर्षिता दहिया पानीपत के गांव चमराडा में एक कार्यक्रम में शामिल होकर सोनीपत के रास्‍ते दिल्‍ली जा रही थीं। वह महज पांच किलोमीटर ही आगे बढ़ी थी कि उसका पीछा कर रही कार में सवार बदमाशों ने इस वारदात को अंजाम दे दिया।&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;
&lt;/span&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: 0.0001pt; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;हर्षिता को कई गोली लगीं थी जबकि तीन गोलियां कार की बॉडी पर लगी थी। पहली ही नजर में लग रहा था कि हमलावर हर्षिता को ही निशाना बनाने आए थे। तभी उन्होंने सिर्फ हर्षिता को ही निशाना बनाकर गोलियां चलाई।&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;EN-US&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: 0.0001pt; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;जिस गांव से हर्षिता कार्यक्रम में भाग लेकर लौट रही थी वहां भी उसकी हत्‍या की खबर पहुंच गई थी। इसलिए कुछ ही देर में घटनास्‍थल पर लोगों की भारी भीड जुट गई। वैसे भी हर्षिता दहिया काफी लोकप्रिय कलाकार थी। वह लोकगायिका व डांसर सपना चौधरी की तरह स्टेज शो में काफी पॉपुलर हो रही थी। दो दिन पहले ही रविवार को भी उसने एक स्‍टेज शो किया था। पूछताछ करने पर हर्षिता के तीनों साथी ये तो नहीं बता पाए कि हमलावर कौन थे क्‍योंकि उनमें से किसी को भी उन्‍होंने पहले कभी नहीं देखा था। &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;EN-US&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;table align=&quot;center&quot; cellpadding=&quot;0&quot; cellspacing=&quot;0&quot; class=&quot;tr-caption-container&quot; style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto; text-align: center;&quot;&gt;&lt;tbody&gt;
&lt;tr&gt;&lt;td style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhXwuyzadZ0tkKFU-i1g_VECz_hBf4lbI9bhYqllObMohwd_2V8QjQRMbNnkuVMnOzylFBUWjEgIx6_XPO-rJmS5MbM4ICbFeEGvC-vgBcHKmNv1ywFm3C9tv9C-j9AUD3dz3cWmMSYjkvN/s1600/harshita+car.jpg&quot; imageanchor=&quot;1&quot; style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto;&quot;&gt;&lt;img border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;521&quot; data-original-width=&quot;670&quot; height=&quot;310&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhXwuyzadZ0tkKFU-i1g_VECz_hBf4lbI9bhYqllObMohwd_2V8QjQRMbNnkuVMnOzylFBUWjEgIx6_XPO-rJmS5MbM4ICbFeEGvC-vgBcHKmNv1ywFm3C9tv9C-j9AUD3dz3cWmMSYjkvN/s400/harshita+car.jpg&quot; width=&quot;400&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;
&lt;tr&gt;&lt;td class=&quot;tr-caption&quot; style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: red;&quot;&gt;इसी कार में हुई&amp;nbsp;&amp;nbsp;हर्षिता की हत्या&lt;/span&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;
&lt;/tbody&gt;&lt;/table&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: 0.0001pt; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;लेकिन इतना तय था कि हत्‍या की इस वारदात को अंजाम किसी निजी दुश्‍मनी का बदला लेने के इरादे से ही किया गया था। फोरेंसिेक टीम ने घटनास्‍थल से फोटो और दुसरे साक्ष्‍य एकत्र करने का काम पूरा कर लिया तो थाना प्रभारी कंवर सिंह ने एस पी राहुल शर्मा के निर्देश पर हर्षिता के शव का पंचनामा भरवाकर उसे पोस्‍टमार्टम के लिए जिला सिविल अस्‍पताल भिजवा दिया। इसके बाद पुलिस हर्षिता के साथियों व कार को लेकर इसराना थाने पहुंच गई। जहां हर्षिता के साथी प्रदीप की शिकायत पर पुलिस ने अपराध संख्‍या 679 पर भा.द.स की धारा 302,506 व 120 बी में मुकदमा पंजीकृत कर लिया। एसपी राहुल शर्मा के निर्देश पर हत्‍या की विवेचना का काम थाना प्रभारी कंवर सिंह ने खुद अपने हाथ में ले लिया और डीएसपी देशराज को विशेष टीम बनाकर जल्‍द से जल्‍द हत्‍या की गुत्‍थी सुलझाने व हत्‍यारों की गिरफ्तारी के निर्देश दिए। &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;EN-US&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: 0.0001pt; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;इधर, थाना प्रभारी कंवर सिंह भी अपनी टीम के साथ जांच कार्य में लग चुके थे। उन्‍हें हर्षिता के साथियों से पूछताछ में पता चला था कि हर्षिता कुरुक्षेत्र के सांसद राजकुमार सैनी की प्रस्तावित रैली के विरोध में हुई एक बैठक से लौट रही थी। अपने साथियों के साथ वह कार से सोनीपत होकर दिल्‍ली जा रही थी। तभी पानीपत के पास इसराना के एक में एक कार ने उन्हें ओवरटेक करके इस वारदात को अंजाम दिया ।&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: 0.0001pt; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;जांच अधिकारी कंवर सिंह को अपने मुखबिरों और मीडिया की कुछ रिपोर्ट्स से ये भी पता चला कि हर्षिता दहिया म्‍यूजिक कंपनियों द्वारा गायकों के शोषण के खिलाफ बड़े स्तर पर एक मुहिम भी चला रही थी। इसे लेकर वो खुद कई बार कह चुकी थी कि उन्हें जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। इन म्‍यूजिक कंपनियों के खिलाफ हर्षिता दहिया और कुछ अन्य कलाकारों ने सोनीपत के देवीलाल पार्क में एक बड़े स्तर पर कार्यक्रम भी किया था और कंपनियों के संचालकों को खुले आम चुनौती भी दी थी।&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;EN-US&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: 0.0001pt; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;डीएसपी देशराज ने कई पुलिस कर्मियों को इस काम पर लगा दिया कि वे पता लगाए कि हर्षिता दहिया किन म्‍यूजिक कंपनियों के साथ एलबम में काम कर चुकी थी और किन कंपनियों को उसकी मुहिम से परेशानी महसूस हो रही थी। जिसके बाद पता चला कि &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;EN-US&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: 0.0001pt; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;सोनीपत के खरखौदा के दो कलाकारों तनु व मनु से हर्षिता का विवाद चल रहा था। वे दोनों म्यूजिक कंपनी भी चलाते हैं। विवाद होने पर दोनों ने हर्षिता को धमकी दी थी। इस पर &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;12&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt; अक्टूबर को हर्षिता ने खाप को एकत्रित होने के लिए कहा था। हर्षिता ने अपनी मौत से कुछ दिन पहले ही अपने फेसबुक पर एक वीडियो शेयर किया था जिसमें उसने अपनी जान को खतरा बताया था। इस वीडियो में हर्षिता ने बता था&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-size: 12.0pt;&quot;&gt;, ‘ ‘&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;कुछ दिन पहले तक बहन कहने वाले आज मुझे पीठ पीछे धमकी दे रहे हैं। हिम्मत हैं तो सामने आएं. वह कहते हैं कि &lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-size: 12.0pt;&quot;&gt;376&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt; और &lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-size: 12.0pt;&quot;&gt;302&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt; से नहीं डरते। मैं भी धारा &lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-size: 12.0pt;&quot;&gt;302&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt; से नहीं डरती। मुझे अनाथ बता रहे हैं. हां&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-size: 12.0pt;&quot;&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;मैं अनाथ हूं। इसका फायदा उठाऊंगी। मैं धारा &lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-size: 12.0pt;&quot;&gt;302&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt; लगवाकर जेल जाऊंगी&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-size: 12.0pt;&quot;&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;क्योंकि मेरे पीछे रोने वाली मां नहीं है।&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-size: 12.0pt;&quot;&gt;” &lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-size: 12.0pt; mso-bidi-language: HI;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: 0.0001pt; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;जांच अधिकारी कंवर सिंह ने आईटी विशेषज्ञों की एक टीम बुलाकर हर्षिता के फेसबुक पेज को खंगालने का काम शुरू कर दिया था जिससे उन्‍हें लग रहा था कि हो न हो हत्‍या का सूत्र इन्‍हीं धमकियों में से कहीं मिलेगा। उसके पेज में एक जगह फेसबुक लाइव के जरिए बताया था कि कोई उन्हें कोई पर लगातार धमकी दे रहा है। हर्षिता द्वारा सोशल मीडिया पर जारी कई गई एक तस्वीर में मशहूर डांसर सपना चौधरी के साथ तनु खरखौदा नाम के कलाकार और म्‍यूजिक कंपनी के संचालक पर उसने सीधे तौर धमकी देने का आरोप लगाया था। ये पोस्‍ट 8 अगस्‍त का था। &lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-size: 12.0pt; mso-bidi-font-family: Mangal; mso-bidi-language: HI;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: 0.0001pt; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;इतना ही नहीं उसी रात को कंवर सिंह ने हर्षिता के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल निकलवाने के लिए अपनी टीम को काम पर लगा दिया। ताकि पता चल सके कि उसे कौन लोग धमकी दे रहे हैं। जांच अधिकारी ने इस बात की पडताल भी शुरू कर दी कि हर्षिता फिलहाल किसके संपर्क में थी। &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;इस दौरान हर्षिता की साथी निशा ने पुलिस को पूछताछ में बताया कि हर्षिता काफी समय से नरेला में रह रही थी। हर्षिता ने उसे भी बताया था कि उसे फोन पर हत्या की धमकी मिल रही है। निशा ने बताया कि वह कार में हर्षिता के साथ ही पीछे वाली सीट पर बैठी थी। &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;EN-US&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;
&lt;a href=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgm0IbpvY7l2xwuhLEn2JobFfk1CPDMeDlJmU6rSp9u2-FSPInSVKOJNQeC48VZJV6RK6L7a7VsnQ5B12aEg698fy9chs3G2jAprf5VLn1OLTKSanix5GgdaLMyx2yonRjd0v7FS2_c1hpW/s1600/harshita_dahiya+dead+body.jpg&quot; imageanchor=&quot;1&quot; style=&quot;margin-left: 1em; margin-right: 1em;&quot;&gt;&lt;img border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;521&quot; data-original-width=&quot;670&quot; height=&quot;310&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgm0IbpvY7l2xwuhLEn2JobFfk1CPDMeDlJmU6rSp9u2-FSPInSVKOJNQeC48VZJV6RK6L7a7VsnQ5B12aEg698fy9chs3G2jAprf5VLn1OLTKSanix5GgdaLMyx2yonRjd0v7FS2_c1hpW/s400/harshita_dahiya+dead+body.jpg&quot; width=&quot;400&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: 0.0001pt; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;निशा ने बताया कि वह तीन दिन पहले ही फेसबुक के जरिये हर्षिता के संपर्क में आई थी। उसे हर्षिता के परिवार के बारे में इससे ज्‍यादा जानकारी नहीं है। इसके बाद गुमड़ गांव के रहने वाले संदीप ने पूछताछ में बताया कि चार दिन पहले ही उसकी भी फेसबुक के जरिये हर्षिता से बातचीत हुई थी। हर्षिता किसानों व 36 बिरादरी के बारे में बातें करती थी। हर्षिता ने उसे नहीं बताया था कि उसे जान का खतरा है। लेकिन वह उसका प्रशंसक था इसलिए चमराडा के कार्यक्रम में उसके साथ आ गया था। &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;EN-US&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: 0.0001pt; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;इसके बाद हर्षिता की हत्‍या की रिपोर्ट दर्ज कराने वाले सोनीपत के गांव राठधाना निवासी प्रदीप कुमार ने पुलिस को बताया कि वह पेशे से गायक&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;EN-US&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;लेखक व कलाकार है। पिछले 15 अक्टूबर को ही सोनीपत के देवीलाल पार्क में कई हरियाणवी कलाकर आए हुए थे। वहीं पर उसकी मुलाकात हर्षिता दहिया&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;EN-US&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;गुमड़ गांव के संदीप पहल उर्फ शैंडी और बल्लभगढ़ की संजय कालोनी की निशा से हुई थी। उसने बताया कि 17 अक्‍टूबर की सुबह आठ बजे संदीप ने उसे फोन करके बताया कि गाड़ी लेकर इसराना क्षेत्र के चमराड़ा गांव की चौपाल में जाना है। वहां पर सांसद राजकुमार सैनी की प्रस्‍तावित रैली के खिलाफ युवा किसान जागृति मिशन द्वारा 36 बिरादरी के भाईचारे के लिए कार्यक्रम है। इसके बाद वह अपनी कार से संदीप&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;EN-US&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;निशा और हर्षिता को लेकर गांव चमराडा गांव में पहुंचा। वहां एक घंटे के कार्यक्रम के बाद उन्होंने गांव की सरपंच सुमन देवी के घर खाना खाया।&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;EN-US&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: 0.0001pt; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;प्रदीप ने जांच अधिकारी को बताया कि इसके बाद दोपहर करीब चार बजे बजे वह चारों नरेला के लिए चल दिए। उसके साथ आगे की सीट पर संदीप और पीछे की सीट पर हर्षिता और निशा बैठी थी। अचानक पुगथला रोड पर मुर्गी फार्म के पास काले रंग की फोर्ड फिगो कार में सवार बदमाशों ने कार अड़ाकर उनकी गाड़ी रुकवा ली। कार से पहले एक बदमाश उतरा और उसने कहा कि उसे हर्षिता से हिसाब चुकता करना है&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;EN-US&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;इसलिए बाकी तीनों कार से उतरकर भाग जाएं&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;EN-US&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;नहीं तो उनकी भी जान जाएगी।&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;EN-US&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: 0.0001pt; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;इस पर वह&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;EN-US&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;संदीप व निशा खिड़की खोलकर खेतों की तरफ भाग गए। तब तक कार से दूसरा बदमाश भी उतर आया था और दोनों ने हर्षिता को गोलियों से भून डाला। पूछताछ में पता चला कि सोनीपत के गांव मोहम्‍मदपुर स्थित नाहरा गांव की मूल निवासी हर्षिता दहिया फिलहाल अपनी बहन लता के साथ दिल्ली के नरेला में रह रही थी।&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;EN-US&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: 0.0001pt; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;हर्षिता के साथियों से पूछताछ के बाद शुरूआती जांच में ही पुलिस को लगा कि हो सकता है हर्षिता की हत्या के मामले में कोई राजनीतिक वजह छिपी हो क्‍योंकि वह सांसद राजकुमार &lt;span style=&quot;mso-spacerun: yes;&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;सैनी की रैली को लेकर विरोध में सभाए कर रही थी। इसके अलावा पुलिस को दूसरा शक लगा कि किसी म्‍यूजिक कंपनी से विवाद के कारण भी हर्षिता की हत्‍या एक वजह हो सकती है। &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;EN-US&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: 0.0001pt; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;घटना वाले दिन हर्षिता दहिया सांसद राजकुमार सैनी की रैली का विरोध करने वाले संदीप भारती के कार्यक्रम में चमराड़ा गांव में पहुंची थीं। वहां उन्होंने कोई डांस का शो &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;भी&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt; नहीं&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt; किया बल्कि किसानों को साथ देने की बात कही थी। कहीं इस आयोजन में बुलाने के पीछे आयोजकों की हत्‍यारों से मिलीभगत तो नहीं। यहीं सोचकर डीएसपी देशराज ने इस कार्यक्रम के आयोजक &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;क्रांतिकारी स्टूडेंट आर्गेनाइजेशन के नेता संदीप भारती को भी रात में ही थाने बुलाकर पूछताछ की । संदीप भारती ने बताया कि किसानों की आवाज उठाने और हर वर्ग को एकजुट करने के लिए क्रांतिकारी स्टूडेंट ऑर्गेनाइजेशन के माध्यम से हमने जागृति अभियान चलाया हुआ है।&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt; 17 अक्‍टूबर को उन्‍होंने &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;पानीपत जिले के चमराड़ा गांव में सभा की थी। इसी कार्यक्रम में हमें समर्थन देने के लिए हर्षिता दहिया पहुंची थीं। इससे पहले वे वे कभी उनसे नहीं मिले थे। हर्षिता को इस सभा की जानकारी अपने किसी समर्थक से मिली थी जिसके बाद वे वहां पहुंची। जिसके लिए एक रात पहले हर्षिता ने कार्यक्रम में पहुंचने के लिए फेसबुक पर अपील करते हुए एक वीडियो भी शेयर किया था। कार्यक्रम में पहुंचने के बाद हर्षिता ने इस मिशन को अपना समर्थन देने की बात कही। इस दौरान उन्होंने कोई धमकी मिलने या किसी घटना के बारे में चर्चा नहीं की। हमारा अगला कार्यक्रम जाटल गांव में होना प्रस्तावित था लिहाजा वे अपने साथियों के साथ चमराडा गांव से जाटल की तरफ चले गए&lt;span style=&quot;mso-spacerun: yes;&quot;&gt;&amp;nbsp; &lt;/span&gt;जबकि हर्षिता संदीप ऊर्फ शैंडी, निशा और प्रदीप के साथ नरेला के लिए रवाना हो गई थी। हां इस पूछताछ में संदीप भारती व उनके साथ आयोजन में लगे कुछ लोगों से डीएसपी देशराज को एक काम की बात पता चली कि जिस काले रंग की फोर्ड फिगों कार में सवार होकर बदमाशों ने हर्षिता की हत्‍या की थी उसे चमराडा गांव में भी समारोह स्‍थल के पास देखा गया था। &lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-size: 12.0pt; mso-bidi-font-family: Mangal; mso-bidi-language: HI;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: .0001pt; margin-bottom: 0cm;&quot;&gt;
&lt;/div&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;इसका मतलब साथ था कि हत्‍यारों को पहले से पता था कि हर्षिता इस समारोह में पहुंचेगी ओर वे पहले से उसका पीछा कर रहे थे। यानि हत्‍या पूरी योजना के साथ की गई थी।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;इस बीच डीएसपी के निर्देश इसराना थाने की एक पुलिस टीम दिल्‍ली के नरेला स्थित स्‍वतंत्र नगर के मकान नंबर 352 में रहने वाली हर्षिता की बहन लता दहिया के पास पहुंच गई थी। जहां उन्‍होंने परिवार को इस बात की खबर दी कि हर्षिता की अज्ञात लोगों ने गोली मारकर हत्‍या कर दी गई है । इस सूचना के बाद घर में कोहराम बच गया। हर्षिता की बहन लता और खुद हर्षिता ने यह मकान मौसी के घर के पास ही बनाया था। जानकारी मिलने पर मौसी का परिवार भी वहीं आ पहुंचा। मौसेरे भाई रविन्‍द्र कादियान को साथ लेकर लता अगली सुबह ही पानीपत जिला अस्‍पताल पहुंच गई जहां हर्षिता का शव पोस्‍टमार्टम के लिए सुरक्षित रखा गया था। लता ने देखते ही अपनी बहन के शव का पहचान लिया। दोपहर होते होते पोस्‍टमार्टम के बाद हर्षिता का शव पुलिस ने उसके परिजनों को सोंप दिया। जिसका उसी शाम को अंतिम संस्‍कार भी कर दिया गया।&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: 0.0001pt; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;इस दौरान 18 अक्‍टूबर की देर शाम तक पुलिस को पता चला कि हर्षिता की हत्या 7 एमएम की पिस्टल से की गई थी। हर्षिता के शव का पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर राजीव मान ने जांच अधिकारी को बताया कि हर्षिता के शरीर पर 8 गोलियों के घाव थे। हांलाकि उसके शरीर से तीन ही गोलियां बरामद हुई हैं। इनमें से एक गोली हर्षिता की छाती के नीचे वाले हिस्से व दो पिछले हिस्से से मिली हैं। शेष गोलियां शरीर के पार हो गईं। गोलियों के अलावा शरीर के किसी हिस्से में चोट का कोई निशान नहीं मिला । &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;EN-US&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;table align=&quot;center&quot; cellpadding=&quot;0&quot; cellspacing=&quot;0&quot; class=&quot;tr-caption-container&quot; style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto; text-align: center;&quot;&gt;&lt;tbody&gt;
&lt;tr&gt;&lt;td style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiaqmWIC-lAZSY-7PG1lsZWGmehayqJnkMJ4Cft3Sxk3RuTsZm27_WUrmVRw8NTxuxnUhn4JTB223SgSUFv6EMdCLkUJeuP7NgUTZY9uRBftUS0Aj-HhbzBPjSVCNNYdiNvNVrndOfGYlyQ/s1600/Harshita+Dahiya%25E2%2580%2599s+cousin+Ravinder+Kadyan..jpg&quot; imageanchor=&quot;1&quot; style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto;&quot;&gt;&lt;img border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;1334&quot; data-original-width=&quot;1200&quot; height=&quot;400&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiaqmWIC-lAZSY-7PG1lsZWGmehayqJnkMJ4Cft3Sxk3RuTsZm27_WUrmVRw8NTxuxnUhn4JTB223SgSUFv6EMdCLkUJeuP7NgUTZY9uRBftUS0Aj-HhbzBPjSVCNNYdiNvNVrndOfGYlyQ/s400/Harshita+Dahiya%25E2%2580%2599s+cousin+Ravinder+Kadyan..jpg&quot; width=&quot;357&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;
&lt;tr&gt;&lt;td class=&quot;tr-caption&quot; style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: red;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 16px; text-align: justify;&quot;&gt;हर्षिता का&lt;/span&gt;&amp;nbsp;मौसेरा भाई रविन्‍द्र कादियान&lt;/span&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;
&lt;/tbody&gt;&lt;/table&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: 0.0001pt; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;शाम होने तक सभी कामकाज से फारिग होने पर डीएसपी देशराज ने लता को थाने बुलवाकर पूछताछ शुरू की । ताकि पता चल सके कि परिवार को हर्षिता की हत्‍या में किसी पर शक तो नहीं है। किसी से उसकी ऐसी दुश्‍मनी होगी तो इसका सुराग भी परिवार वालों से ही मिलेगा। लेकिन पूछताछ के बाद लता ने पुलिस को जो कुछ बताया उसने इस हत्‍याकांड की थ्‍योरी ही बदल दी। &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;EN-US&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: .0001pt; margin-bottom: 0cm;&quot;&gt;
&lt;/div&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;दरअसल हर्षिता की बड़ी बहन लता ने पुलिस को बताया कि उसकी बहन हर्षिता की हत्‍या उसके जीजा यानि लता के पति दिनेश कराला ने करवाई है। जो इस वक्‍त झज्‍जर जेल में बंद है।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;‘लेकिन दिनेश ऐसा क्‍यों करेगा वो भी जेल में रहते हुए।‘ डीएसपी देशराज ने हैरानी भरे स्‍वर में पूछा।&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: 0.0001pt; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;तब लता दहिया ने बताया&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;EN-US&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;, &#39;&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;मेरी बहन हर्षिता मेरी मां प्रेमो देवी की हत्या के मामले में चश्‍मदीद गवाह थी&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;EN-US&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;,&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt; और उनकी हत्‍या मेरे पति दिनेश ने की थी। दिनेश बार-बार जेल से धमकी दिलवा रहा था कि वह गवाही देने से मुकर जाए नहीं तो वह हर्षिता को भी मां के पास पहुंचा देगा।&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;EN-US&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;&#39; &lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: 0.0001pt; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;‘सर अब मेरी मां की हत्‍या के केस में मेरी बहन की अदालत में गवाही की तारीख एकदम करीब आ रही थी और दिनेश की धमकी देने का सिलसिला भी तेज हो गया था। मुझे पूरा यकीन है कि दिनेश ने ही उसकी हत्‍या करवाई है।’&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;EN-US&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: 0.0001pt; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;‘लेकिन दिनेश ने तुम्‍हारी मां की हत्‍या क्‍यों की’&lt;span style=&quot;mso-spacerun: yes;&quot;&gt;&amp;nbsp; &lt;/span&gt;डीएसपी देशराज ने उलझन भरे अंदाज में पूछा।&lt;span style=&quot;mso-spacerun: yes;&quot;&gt;&amp;nbsp; &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;EN-US&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: 0.0001pt; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;‘दरअसल मां की हत्‍या से पहले दिनेश ने मेरी बहन हर्षिता को स्‍कूल से उठा लिया था और उसके साथ जबरन मुंह काला किया था। इस मामलें की जब मेरी मां ने दिल्‍ली के कंझावला थाने में रिपोर्ट दर्ज करायी तो दिनेश फरार हो गया। वो तो पहले से ही क्रिमिनल था। पुलिस ने उस पर 25 हजार का ईनाम भी रख दिया। बाद में उसे गिरफ्तार कर लिया गया। लेकिन जेल जाने के बाद से ही वो मेरी मां को धमकी देने लगा कि हर्षिता के साथ हुए रेप की रिपोर्ट मेरी मां वापस ले ले और हर्षिता को भी धमकाने लगा कि वह कोर्ट में गवाही ने दे वरना वो मां-बेटी दोनों को मार डालेगा। बस जब हम लोग दबाव में नहीं आए तो उसने जेल से बाहर आते ही मेरी मां की दिसंबर 2014 में हत्‍या कर दी।’ &lt;span style=&quot;mso-spacerun: yes;&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;mso-spacerun: yes;&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;EN-US&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: 0.0001pt; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;डीएसपी देशराज अब हत्‍या के कारणों की जड तक पहुंच चुके थे। उन्‍होंने उसी रात जांच अधिकारी कंवर सिंह को निर्देश दिया कि वह जल्‍द से जल्‍द पता करें कि दिनेश कराला किस जेल में और उसे प्रोडक्‍शन वारंट पर लेकर रिमांड पर लें और पूछताछ करें। &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;EN-US&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: 0.0001pt; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;रात भर कई थानों और दिल्‍ली पुलिस से संपर्क करने पर जांच अधिकारी कंवर सिंह को पता चल गया कि &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;दिल्ली के कराला गांव का रहने वाला दिनेश मर्डर&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-size: 12.0pt;&quot;&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;रेप&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-size: 12.0pt;&quot;&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;लूट जैसे &lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-size: 12.0pt;&quot;&gt;12&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt; मामलों में आरोपी है। इन दिनों वह झज्जर जेल में बंद है। इसके आगे की राह काफी आसान थी।&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: 0.0001pt; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;सुबह होते ही जांच अधिकारी कंवर सिंह व डीएसपी देशराज ने पुलिस अधीक्षक राहुल शर्मा को विवेचना की प्रगति से अवगत कराते हुए अग्रिम आदेश लिए तो उन्‍होंने भी दिनेश कराला को रिमांड पर लेने का आदेश दिया। उसी दिन जांच अधिकारी कंवर सिंह ने पानी कार्ट में दिनेश कराला को प्रोडक्‍शन वारंट पर लेने की अर्जी दी। जिस पर अगले दिन की तारीख तय की गई। अगले दिन लता दहिया के बयान के आधार पर अदालत ने दिनेश कराला को पूछताछ के लिए चार दिन के पुलिस रिमांड सौंप दिया । इसराना थाने में लाने के बाद पहले तो दिनेश कराला कई घंटे तक पुलिस को बरगलाता रहा कि जेल में बंद वह भला किस तरह हर्षिता की हत्‍या करा सकता है लेकिन जब पुलिस ने अपने तरीके से दिनेश से पूछताछ शुरू की तो पह जल्‍द ही टूट गया और उसने बता दिया कि उसने ही जेल में रहकर हर्षिता की &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;हत्या की साजिश रची थी। पूछताछ के दौरान दिनेश ने बताया कि उसने अपने साथी जितेंद्र गोगी के साथ मिलकर जेल में हत्या की साजिश रची थी।&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;EN-US&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: 0.0001pt; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;पुलिस का कहना है कि जितेंद्र गोगी एक हिस्ट्रीशीटर अपराधी है और फिलहाल जेल से बाहर है। गोगी ने अपने साथी कुलदीप उर्फ फज्जा, इमरान व एक अन्‍य साथी के साथ मिलकर हर्षिता की हत्‍या को अंजाम दिया। उसके साथी अक्‍सर दिनेश से जेल में भी मिलने आते रहते थे और कोर्ट में पेशी के दौरान होने वाली तारीखों पर भी मिलते थे। उसी दौरान उसने उन्‍हें हर्षिता को ठिकाने लगाने का आदेश दिया। दिनेश कराला ने पुलिस को बताया कि उसने हर्षिता व लता को कई बार खबर भिजवाई थी कि वे गवाही देने से पीछे हट जाए लेकिन वे खबर देने वाले से उलटा जवाब भिजवाकर कह देती कि वे ठोक कर गवाही देंगी और उसे फांसी के फंदे तक पहुंचाऐंगी। समय धीरे-धीरे खत्‍म हो रहा था और गवाही देने की तारीख नजदीक आती जा रही थी। लिहाजा कोई दूसरा रास्‍ता न देखकर दिनेश ने हर्षिता को रास्‍ते से हटाने का फैंसला लिया और अपने शूटरों से उसकी हत्‍या करवा दी। &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;EN-US&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: 0.0001pt; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: 0.0001pt; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;कौन थी हर्षिता दहिया &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;b&gt;&lt;span style=&quot;font-size: 12.0pt;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: 0.0001pt; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;
&lt;a href=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg5gU0QMAdTcrmA8la12xUTVMQ5rNMDyZQFcWi8OhDLqABrYFQ1lkcCNC-aVaPb45S2ODVsDM_ypvNj-ntGWv6qig69hd1-xHA4jwRTnnrcfIQ5_QlQQ3-2ZFkXjUnRVsMQuLxXn4P7RWqI/s1600/harshita+dahiya.jpg&quot; imageanchor=&quot;1&quot; style=&quot;margin-left: 1em; margin-right: 1em;&quot;&gt;&lt;img border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;330&quot; data-original-width=&quot;629&quot; height=&quot;208&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg5gU0QMAdTcrmA8la12xUTVMQ5rNMDyZQFcWi8OhDLqABrYFQ1lkcCNC-aVaPb45S2ODVsDM_ypvNj-ntGWv6qig69hd1-xHA4jwRTnnrcfIQ5_QlQQ3-2ZFkXjUnRVsMQuLxXn4P7RWqI/s400/harshita+dahiya.jpg&quot; width=&quot;400&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;हरियाणा सोनीपत के मोहम्‍मदपुर नाहरा गांव की रहने वाली &lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-size: 12.0pt;&quot;&gt;2&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;1&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt; साल की हर्षिता दहिया अपनी मौसी के पास दिल्ली के नरेला स्थित स्‍वतंत्र नगर में रहती थी। हर्षिता दहिया अपने माता पिता की मौत के बाद से ही मौसी के पास ही मकान बनाकर रह रही थी। लता के अलावा हर्षिता दहिया की एक और सबसे बड़ी बहन मीनू है&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-size: 12.0pt;&quot;&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;जिसकी शादी दिल्‍ली के बिजवासन में हुई है।&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-size: 12.0pt; mso-bidi-font-family: Mangal; mso-bidi-language: HI;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: 0.0001pt; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;वैसे हर्षिता दहिया का असली नाम गीता था। स्कूल से लेकर हर प्रमाण पत्र में उसका नाम गीता ही है। परिवार के सभी सदस्य भी उसे गीता के नाम से ही जानते थे। उसने अपना नाम प्रोफेशनल डांसर बनने के समय बदला था। &lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-size: 12.0pt;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: 0.0001pt; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;हर्षिता को स्कूल के समय से ही गाने और नाचने का शौक था। उसके मामा के बेटे रविन्‍द्र कादियान ने बताया कि हर्षिता ने कभी सोचा नहीं था कि वो अपने शौक को अपना पेशा बना लेगी। हर्षिता केवल &lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-size: 12.0pt;&quot;&gt;12&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt; वीं कक्षा तक पढ़ी थी&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-size: 12.0pt;&quot;&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;जो उसने नरेला के एक स्कूल से की थी। &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-size: 12.0pt;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;mso-spacerun: yes;&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;इसके बाद उसने बीए में कॉलेज में एडमिशन तो लिया लेकिन पारिवारिक परेशानियों और अपने प्रोफेशन के कारण उसने पढ़ाई छोड़ दी थी।&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-size: 12.0pt;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: 0.0001pt; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;table align=&quot;center&quot; cellpadding=&quot;0&quot; cellspacing=&quot;0&quot; class=&quot;tr-caption-container&quot; style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto; text-align: center;&quot;&gt;&lt;tbody&gt;
&lt;tr&gt;&lt;td style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjnmnYNRcs2Q0XjFxf5j2ijxIxTUWg36Xkeq0VdEwhkTizN6bHuXj53FpN2ft46Z84-bh-YFTa1G4b57Mhp_sB5QvEQCG3RtTeZVkTphJeljkGXSvpz1YridHTdRKfuwqYGauHUUX9OPnhV/s1600/harshita+with+mother.jpg&quot; imageanchor=&quot;1&quot; style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto;&quot;&gt;&lt;img border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;521&quot; data-original-width=&quot;670&quot; height=&quot;310&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjnmnYNRcs2Q0XjFxf5j2ijxIxTUWg36Xkeq0VdEwhkTizN6bHuXj53FpN2ft46Z84-bh-YFTa1G4b57Mhp_sB5QvEQCG3RtTeZVkTphJeljkGXSvpz1YridHTdRKfuwqYGauHUUX9OPnhV/s400/harshita+with+mother.jpg&quot; width=&quot;400&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;
&lt;tr&gt;&lt;td class=&quot;tr-caption&quot; style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: red;&quot;&gt;हर्षिता अपनी मां के साथ&lt;/span&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;
&lt;/tbody&gt;&lt;/table&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;
&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;
&lt;/div&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;हर्षिता के पिता राजकुमार डीटीसी में ड्राइवर के पद पर कम करते थे। जब हर्षिता छोटी ही थी तो साल 2011 में उन्‍हें एक दिन ड्यूटी के दौरान ही हार्ट अटैक आया और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। उस वक्‍त तक उनका परिवार सोनीपत में ही रहता था। लेकिन इस हादसे के बाद हर्षिता का परिवार पूरी तरह बिखर गया। इसके बाद हर्षिता को अपनी मां प्रेमो देवी और मंझली बहन लता के साथ दिल्‍ली के नरेला में अपनी मौसी दया के पास आकर रहना पडा। यहीं से 2012 में प्रेमो देवी ने दिल्‍ली &lt;span style=&quot;mso-spacerun: yes;&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;के कराला गांव में रहने वाले दिनेश से लता की शादी कर दी। यहीं से हर्षिता ने भी अपनी आगे की पढाई शुरू की । इधर शादी के बाद लता को पता चला कि दिनेश कोई सीधा सादा इंसान नहीं वरन अपराधी किस्‍म का व्‍यक्ति था। वह शराब पीता था। लूट और डकैती जैसे कारनामों को अंजाम देता था उसके खिलाफ कई अपराधिक मामले भी चल रहे है। पुलिस को अक्‍सर उसके घर पर छापा पड़ता रहता है। शादी के कुछ दिन बाद ही इन बातों का विरोध करने पर लता से वह मारपीट भी करने लगा। इस दौरान बात कई बार इतनी बढती की लता की मां को भी समझाने के लिए उसके घर आना पडता। काफी दिन तक समझाने बुझाने की कोशिश की गई मगर दिनेश को न तो समझना था न ही वो समझा। इसके बाद अक्‍सर दिनेश अक्‍सर लता से मारपीट करता और वह अपनी मां के पास आ जाती। ये आए दिन की बात हो गई। इसी सिलसिले में अक्‍सर दिनेश का लता की मां के घर भी आना जाना होता। ये वो समय था जब नरेला के एक स्‍कूल में दसवीं कक्षा में पढ़ रही लता की सबसे छोटी बहन हर्षिता किशोरावस्‍था की दहलीज पर तेजी से कदम बढा रही थी। हर्षिता की खूबसूरती और सोना से दमकता बदन दिनेश की आंखों में कौंधने लगा था। हर्षिता की खबूसूरती दिनेश की नजरों में इस कदर चढ गई कि वह उसके घर आता तो किसी न किसी बहाने उसके साथ छेडछाड करने लगता था। लेकिन उसकी बहन व मां के कारण कभी वह उस पर हाथ नहीं डाल पाया। लेकिन अपराधिक प्रवृत्ति के दिनेश की अनबन जब लता से इस कदर बढ गई कि वह तंग आकर अपनी मां और बहन के पास ही नरेला के स्‍वतंत्र नगर में रहने लगी तो दिनेश के लिए हर्षिता के नजदीक आने का रास्‍ता ही पूरी तरह बंद हो गया था। तीनों मां बेटी की गुजर बसर का जरिया पिता की पेंशन ही था। &lt;table align=&quot;center&quot; cellpadding=&quot;0&quot; cellspacing=&quot;0&quot; class=&quot;tr-caption-container&quot; style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto; text-align: center;&quot;&gt;&lt;tbody&gt;
&lt;tr&gt;&lt;td style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjA3IZusQPX23vP_uR6Acs53JKBFE0hJURKF9CqxN9aAzYlsmMLE7ydi3nD6m-fwNcBBziAdGHTyq97tm4lrWvz_uX0E8jNtA9_dHttBJ3uOpGpedJboPHEtLIAKZaIOuASUDWuGJHH0hmB/s1600/dines+kumar+harshita+murdrer.jpg&quot; imageanchor=&quot;1&quot; style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto;&quot;&gt;&lt;img border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;294&quot; data-original-width=&quot;400&quot; height=&quot;293&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjA3IZusQPX23vP_uR6Acs53JKBFE0hJURKF9CqxN9aAzYlsmMLE7ydi3nD6m-fwNcBBziAdGHTyq97tm4lrWvz_uX0E8jNtA9_dHttBJ3uOpGpedJboPHEtLIAKZaIOuASUDWuGJHH0hmB/s400/dines+kumar+harshita+murdrer.jpg&quot; width=&quot;400&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;
&lt;tr&gt;&lt;td class=&quot;tr-caption&quot; style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: red;&quot;&gt;हर्षिता की जिंंदगी खराब करने वाला उसका अपराधी जीजा दिनेेश&lt;/span&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;
&lt;/tbody&gt;&lt;/table&gt;
&lt;br /&gt;लेकिन इस दौरान दिनेश के मन में क्‍या चल रहा है किसी को नहीं मालूम था। एक दिन हर्षिता को उसके जीजा दिनेश ने स्‍कूल के बाहर से अपहरण कर लिया। इसके बाद दिनेश ने उसके साथ रेप किया ओर धमकी दी की ये बात वो किसी को न बताए। दिनेश की&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt; &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;इस दरिंदगी के बात जब हर्षिता ने अपनी मां को आकर बतायी तो उसकी मां प्रेमो देवी ने मई 2014 में कंझावला थाने में लता के पति दिनेश पर दुष्कर्म का मामला दर्ज करा दिया था। दिनेश ने पहले उसकी मां पर दबाव बनाया कि वह मुकदमा वापस ले लें। जब वह दबाव में नहीं आयी तो जेल से जमानत पर रिहा होने के बाद दिनेश ने 17 दिसंबर 2014 में उसकी मां प्रेमों देवी की हर्षिता के सामने ही हत्‍या कर दी। नरेला थाना क्षेत्र में हुई इस हत्‍या के मामलें में हर्षिता चश्‍मदीद गवाह थी। लता की मानें तो दिनेश ने जेल से ही हर्षिता की हत्या की साजिश रची और फिर उसे अंजाम दिया। दिनश हर्षिता और लता की मां पर समझौते का दबाव बनाता था&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-size: 12.0pt;&quot;&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;लेकिन उन्होंने समझौते से साफ मना कर दिया था।&lt;/span&gt;&lt;b&gt;&lt;span style=&quot;font-size: 12.0pt; mso-bidi-language: HI;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: .0001pt; margin-bottom: 0cm;&quot;&gt;
&lt;/div&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;चूंकि हर्षिता का कोई भाई नहीं था इसलिए वह तीनों बहनें अपनी मां को राखी बांधती थी। यहीं कारण था कि तीनों ही बहने अपनी मां को बहुत प्‍यार करती थी। हर्षिता इसी कारण जान की धमकी मिलने के बावजूद गवाही देने से पीछे नहीं हट रही थी। अपनी मां की मौत के बाद रक्षाबंधन पर फेसबुक पर जिक्र करते हुए हर्षिता ने लिखा था कि आज मां की बहुत याद रही है। मां ने कभी भाई होने का अहसास नहीं होने दिया। वह हर रक्षाबंधन पर खुद राखी बंधवाती थी। मिस यू मां।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;!--[if !supportLineBreakNewLine]--&gt; &lt;!--[endif]--&gt;&lt;b style=&quot;font-size: 12pt;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/b&gt;&lt;br /&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: .0001pt; margin-bottom: 0cm;&quot;&gt;
&lt;/div&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;जीजा से बदला लेने के लिए बन गई थी गैंगस्टर&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;table align=&quot;center&quot; cellpadding=&quot;0&quot; cellspacing=&quot;0&quot; class=&quot;tr-caption-container&quot; style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto; text-align: center;&quot;&gt;&lt;tbody&gt;
&lt;tr&gt;&lt;td style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg2yCrgWDUCnyFEfZNM5ZIQj3G85qLGtDmc0SbVVDyLHT3Tlwr3aTX9Yx8JAUKpsrRCPmTXfwGnQM_2UnTIDLjoOVovNSzv77jEsTOc807ssH6bL6ZW5nz6RRRhnu7mhUyehI9bZtLjFgjX/s1600/harshota+arrest+in+shootout+case.jpg&quot; imageanchor=&quot;1&quot; style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: red;&quot;&gt;&lt;img border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;831&quot; data-original-width=&quot;1361&quot; height=&quot;244&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg2yCrgWDUCnyFEfZNM5ZIQj3G85qLGtDmc0SbVVDyLHT3Tlwr3aTX9Yx8JAUKpsrRCPmTXfwGnQM_2UnTIDLjoOVovNSzv77jEsTOc807ssH6bL6ZW5nz6RRRhnu7mhUyehI9bZtLjFgjX/s400/harshota+arrest+in+shootout+case.jpg&quot; width=&quot;400&quot; /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/a&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;
&lt;tr&gt;&lt;td class=&quot;tr-caption&quot; style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: red;&quot;&gt;रेपिस्ट जीजा से बदला लेने के लिए जब बनना पड़ा गैंगस्टर&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;
&lt;/tbody&gt;&lt;/table&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;जांच अधिकारी कंवर सिंह को दिनेश से चार दिन की पूछताछ व जांच में ये भी पता चला कि &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;हर्षिता ने अपनी मां की हत्या और खुद के साथ हुए रेप का बदला लेने के लिए कुख्यात गैंगस्टर रविंद्र पुगथला का गैंग भी ज्वाइन किया था। वह अपनी जान के खतरे को देखते हुए रवींद्र पुगथला के गुर्गे शक्ति के साथ रहने लगी थी और इस प्रयास में थी कि अपने हाथों से मां की हत्‍या और अपने अपमान का बदला ले सकें। इसीलिए फरवरी 2016 में हर्षिता ने रविन्‍द्र पुग्‍थला गैंग के लोगों के साथ दिल्‍ली के नरेला में दिनेश कराला पर खुद एक बार गोली चलाई थी। लेकिन वह किसी तरह गच गया था। हत्‍या के प्रयास का ये मुकदमा नरेला थाने में दर्ज हुआ था जिसमें हर्षिता जमानत पर रिहा हो गई थी।&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;जांच अधिकारी कंवर सिंह को सोनीपत के सीआइए स्टाफ के इंस्पेक्टर इन्‍द्रवीर से पता चला कि 2 मई &lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-size: 12pt;&quot;&gt;2016&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt; में रविंद्र पुगथला को सोनीपत के कामी रोड पर गिरफ्तार करने गई सोनीपत सीआईए टीम के साथ हर्षिता व उसके साथियों की मुठभेड़ हुई थी। रविन्‍द्र तो किसी तरह फरार हो गया लेकिन हर्षिता और उसके दो साथियों को पुलिस ने देसी पिस्तौलों के साथ गिरफ्तार कर लिया था। उस समय हर्षिता से अवैध हथियार बरामद हुए थे। इस मामलें का मुकदमा थाना सदर पानीपत में दर्ज हुआ था।&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;
&lt;/span&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: .0001pt; margin-bottom: 0cm;&quot;&gt;
&lt;/div&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;पुलिस पर फायरिंग करने के मामले में हर्षिता ने तब नाबालिग का सर्टिफिकेट पेश करके जमानत हासिल कर ली थी। इस मामले में अभी तक वह जमानत पर ही चल रही थी। जबकि उसका साथी शक्ति अब भी जेल में है। हालांकि सोनीपत सीआईए और एसआईटी की टीम ने रविंदर पुगथला को &lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-size: 12pt;&quot;&gt;10 &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;फरवरी &lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-size: 12pt;&quot;&gt;2017 &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;को एक एनकाउंटर में मार गिराया था। शक्ति के जेल में बंद होने और रविन्‍द्र के मारे जाने के बाद दिनेश के लिए हर्षिता को रास्‍ते से हटाना आसान हो गया और उसने पूरी साजिश जेल में बैठकर ही रच डाली।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;हालांकि दिनेश कराला से पूछताछ के बाद पुलिस हर्षिता की हत्‍या में शामिल उसके हत्‍यारों जितेन्‍द्र गोगी,&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt; कुलदीप उर्फ फज्जा, इमरान व चौथे अज्ञात बदमाश&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt; की गिरफ्तारी के लिए रात दिन छापेमारी कर रही है संभवत: वे जल्‍द ही गिरफ्तार भी हो जायेंगे। लेकिन पुलिस को अभी भी शक है कि जिस तरह हर्षिता ने अपने बेबाक अंदाज से अपने दुश्‍मनों और विरोधियों की जमात तैयार कर ली थी हो सकता है उसका फायदा&amp;nbsp; उठाकर उन लोगों ने भी दिनेश कराला को हर्षिता की हत्‍या की सुपारी दी हो। लिहाजा पुलिस आरोप पत्र दाखिल करने से पहले हत्‍या के इन तमाम पहलुओ पर भी जांच पड़ताल कर रही है।&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: .0001pt; margin-bottom: 0cm;&quot;&gt;
&lt;/div&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;बॉक्‍स&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;
&lt;b&gt;&lt;/b&gt;&lt;br /&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;b&gt;&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;हरीवुड की स्‍टार डांसर बनना चाहती थी हर्षिता&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: .0001pt; margin-bottom: 0cm;&quot;&gt;
&lt;/div&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;
&lt;a href=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjnOywdGpdF8SZdzl2WFNzUyVM4_z7q8S0ZewvzQs97O1i8gwEGeRj8a2NAVsvAttdHkzsBvl3HFjsdCKwC9vw3RqNHp3H6hskO4fpJuOMmWqc3iPzkvZVZQSSev_dloU2HmqEzGb7d8Htt/s1600/harshita+12.jpg&quot; imageanchor=&quot;1&quot; style=&quot;margin-left: 1em; margin-right: 1em;&quot;&gt;&lt;img border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;639&quot; data-original-width=&quot;960&quot; height=&quot;213&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjnOywdGpdF8SZdzl2WFNzUyVM4_z7q8S0ZewvzQs97O1i8gwEGeRj8a2NAVsvAttdHkzsBvl3HFjsdCKwC9vw3RqNHp3H6hskO4fpJuOMmWqc3iPzkvZVZQSSev_dloU2HmqEzGb7d8Htt/s320/harshita+12.jpg&quot; width=&quot;320&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;हर्षिता &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;दहिया हरियाणा में सपना चौधरी की तरह ही तेजी से लोकप्रिय हो रही थी। महज डेढ साल में वह फेमस लोकगायिका और डांसर बन गई थी। उसने हरियाणा की सबसे लोकप्रिय डांसर सपना चौधरी से भी ज्‍यादा फेमस होने का ख्‍वाब संजो रखा था। &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;उसके धमाकेदार डांस &lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-size: 12pt;&quot;&gt;&#39;&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;तेरी झोल पिया न सह पाऊंगी&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-size: 12pt;&quot;&gt;&#39; &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;को यूट्यूब पर अब तक &lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-size: 12pt;&quot;&gt;60 &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;हजार से ज्यादा लोग देख चुके हैं। हर्षिता दहिया का ये डांस वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था। वह अपने डांस के वीडियों को यूट्यूब पर अपलोड करके सोशल मीडिया पर शेयर करती थी। अपनी गजब की खूबसूरती&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-size: 12pt;&quot;&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;शानदार परफार्मेंस और बोल्‍ड अंदाज के कारण हर्षिता काफी तेजी से फेमस हुई थी।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;हरियाणा के हरीवुड में लक्की बॉय के नाम से जाने वाले मुकेश बैरागी जैसे कलाकार भी इस उभरती डांसिंग स्टार &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;हर्षिता के &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;फैन थे। मुकेश बैरागी के फेसबुक वॉल पर हर्षिता दहिया के साथ नजर आती उनकी कई फोटो इस बात की गवाह है। हर्षिता एक जानी मानी डांसर होंने के साथ अपनी खूबसूरती और अपने बिंदासपन के लिए भी जानी जाती थी। उसका बिंदासपन कुछ लोगों के लिए भारी भी पड़ जाता था। क्योंकि अक्सर हर्षिता दहिया अपने फेसबुक पर लाइव आकर हरीवुड के कुछ आर्टिस्ट के बारे में बेझिझक होकर बोलती थी जिससे उन आर्टिस्टों को कुछ परेशानी का सामना करना पड़ जाता था।&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: 0.0001pt; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;वैसे हर्षिता की फेसबुक पोस्‍टों का पढ़े तो वो इसमें कुछ गलत नहीं मानती थी क्‍योंकि वो सिर्फ कुछ ऐसे आर्टिस्ट की टांग खींचती जिन्होंने जनता के सामने शराफत का नकाब ओढ़ रखा होता है । अब हर्षिता अपने इस दावे में कहाँ तक सही थी ये तो वो खुद ही जानती होंगी लेकिन उनके लाइव आकर बोलने के स्टाईल और बिंदासपन को लोग पसंद करने लगे थे। यही वजह है की हर्षिता के फैन में भी अच्छा ख़ासा इजाफा हो रहा था। &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;EN-US&quot; style=&quot;font-size: 12.0pt; mso-ansi-language: EN-US;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: 0.0001pt; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;इसके अलावा हर्षिता ने तनु&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;EN-US&quot; style=&quot;font-size: 12.0pt; mso-ansi-language: EN-US;&quot;&gt;,&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt; मनु खरखौदा&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-size: 12.0pt; mso-ansi-language: EN-US;&quot;&gt; &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;के साथ भी एक सोंग में भी काम किया है। इन्‍हीं से बाद में उसका विवाद हो गया था और आरोप&lt;span style=&quot;mso-spacerun: yes;&quot;&gt;&amp;nbsp; &lt;/span&gt;है कि उनसे ही हर्षिता को धमकियां मिल रही थी इसका जिक्र हर्षिता ने फेसबुक पर पोस्‍ट किए गए अपने यू ट्यूब वीडियों में भी किया था। &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;EN-US&quot; style=&quot;font-size: 12.0pt; mso-ansi-language: EN-US;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: 0.0001pt; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;span lang=&quot;EN-US&quot; style=&quot;font-size: 12.0pt; mso-ansi-language: EN-US;&quot;&gt;‘&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;सुहागरात&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;EN-US&quot; style=&quot;font-size: 12.0pt; mso-ansi-language: EN-US;&quot;&gt;’ &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;गीत उनका सबसे पहला &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;फेमस लोकगीत था। इसी के बाद वे हरीवुड में सपना चौधरी की कंपटीटर बनी थी । &lt;span style=&quot;mso-spacerun: yes;&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;वैसे हर्षिता खुद की तुलना डांसर सपना चौधरी से ही करती थी। इतना ही नहीं हर्षिता ने रिएलिटी शो बिग बॉस के लिए भी खुद को सपना से बेहतर बताया था उन्‍होंने फेसबुक पर सपना के चयन को हरियाणा के लिए दुर्भाग्‍यपूर्ण बताया था।&lt;span style=&quot;mso-spacerun: yes;&quot;&gt;&amp;nbsp; &lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;mso-spacerun: yes;&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;EN-US&quot; style=&quot;font-size: 12.0pt; mso-ansi-language: EN-US; mso-bidi-font-family: Mangal; mso-bidi-language: HI;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: 0.0001pt; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;सपना चौधरी की ही तरह हर्षिता भी रागिनी गाती थी और इन पर डांस परफॉर्म भी करती थी। पूरे हरियाणा में कहा जाता है कि सपना चौधरी के साथ मिलकर हर्षिता रागिनी की प्रसिद्धि को बढ़ा रही थी। हर्षिता के स्टेज शो का वीडियो इंटरनेट पर भी काफी देखा जाता है। वह अब तक रागिनी के &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;EN-US&quot; style=&quot;font-size: 12.0pt; mso-ansi-language: EN-US;&quot;&gt;7&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt; एलबम लांच कर चुकी थी।&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;EN-US&quot; style=&quot;font-size: 12.0pt; mso-ansi-language: EN-US;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: 0.0001pt; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: .0001pt; margin-bottom: 0cm;&quot;&gt;
&lt;/div&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;!--[if !supportLineBreakNewLine]--&gt; &lt;!--[endif]--&gt;&lt;span lang=&quot;EN-US&quot; style=&quot;font-size: 12.0pt; mso-ansi-language: EN-US;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;/div&gt;
</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://jurmkiduniya.blogspot.com/feeds/3122941471663969509/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://jurmkiduniya.blogspot.com/2018/06/blog-post.html#comment-form' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8049618298159816963/posts/default/3122941471663969509'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8049618298159816963/posts/default/3122941471663969509'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://jurmkiduniya.blogspot.com/2018/06/blog-post.html' title='हरियाणा की एक डांसर जाे कभी गैंगस्टर रही, किसने करायी उसकी हत्या  '/><author><name>sunil verma</name><uri>http://www.blogger.com/profile/06462864962085848512</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='27' height='32' src='//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiM8mYTF1rSTG5OLwjuKe8ktdZwaNsHWlaRFf283uYibqX2zwZT1C0LITcRz_c-QhdhjEK686quBdQwPl6yirK3P5dvBOclUZ-nAWjIgkhf_dw38PrIOFgSWi-PC_Q-ilg/s113/sunil+pic2.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiynEB_T5ZCYBalguSlLIDehmssaIK_UMNZj5pSOAAWiYRY7qePeAy2FKJ5hmrOrUBuL_kENOBMJzVpLQxIIGCrOdjwdc-QsDzwgvrOzGVTcffGL57FiMmtu-sOMb0-lsvH40SKirc-Af4e/s72-c/harshita+2.jpg" height="72" width="72"/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8049618298159816963.post-6295774433399021564</id><published>2018-06-01T09:30:00.000+05:30</published><updated>2018-07-09T16:06:30.175+05:30</updated><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="Underworld gangwar"/><title type='text'>माया नगरी की सडक़ों पर बहने लगा खून</title><content type='html'>&lt;div dir=&quot;ltr&quot; style=&quot;text-align: left;&quot; trbidi=&quot;on&quot;&gt;
&lt;a href=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjO7bfWONvqx46QA6s83qsiBpIoADZB7n5OjByiWcqVNVU3eYR1Y4EWvz_fMUoYMmdyFG7NEuAbz46Cg94cMyC0i1RVCBlOOwEZBRhltomvmwE5krpW3YTDCIXyB6CLvWUmyLS0chfpEV63/s1600/ed_imgSNN1314AN_119807a.jpg&quot;&gt;&lt;img alt=&quot;&quot; border=&quot;0&quot; id=&quot;BLOGGER_PHOTO_ID_5481710269426094370&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjO7bfWONvqx46QA6s83qsiBpIoADZB7n5OjByiWcqVNVU3eYR1Y4EWvz_fMUoYMmdyFG7NEuAbz46Cg94cMyC0i1RVCBlOOwEZBRhltomvmwE5krpW3YTDCIXyB6CLvWUmyLS0chfpEV63/s200/ed_imgSNN1314AN_119807a.jpg&quot; style=&quot;cursor: hand; float: right; height: 140px; margin: 0px 0px 10px 10px; width: 200px;&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;
अपने भाई साबिर की हत्या करने वाले अमीरजादा को मौत के घाट उतारने के बावजूद दाउद के दिल में बदले की भावना कम नही हुई थी। अब दाऊद के बदले का दूसरा मोहरा था समद खान। दाउद इस बात का बखूबी समझता था कि अगर समदखान को जिंदा छोड़ा गया तो वह उसके लिए खतरनाक होगा। लिहाजा उसने अपने गिरोह में शामिल शूटर समदखान का खात्मा करने के लिए छोड़ दिए। &lt;br /&gt;
&lt;a name=&#39;more&#39;&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;
आखिरकार अक्टूबर-1984 की एक सुबह समद खान का गोलियों से छलनी रक्त रंजित शव गिरगाम में एक मकान के पास पड़ा मिला। समद खान करीम लाला को प्राणों से भी ज्यादा प्यारा था। करीम लाला उसकी मौत का बदला लेने के लिए कोई कदम उठाते कि समद की हत्या के ठीक एक महीने बाद नवंबर 84 में पुलिस ने करीम लाला को एक गोदाम में आग लगाने के जुर्म में गिरफ्तार कर लिया। जमानत पर छूटते ही उन्हें पुन: रासुका में गिरफ्तार कर लंबे अरसे के लिए सीखचों के भीतर बंद कर दिया गया। उन पर भिवंडी तथा दक्षिण मुंबई में हुए दगों को भडक़ाने का भी आरोप था। एक तरह से पुलिस और दाऊद इब्राहीम ने मिलकर करीम लाला के अपराधिक साम्राज्य को ध्वस्त सा कर दिया था।&lt;br /&gt;
दुसरी तरफ अमीरजादा का हत्यारा डेविड परदेसी आर्थर रोड जेल में बंद था। पुलिस की यातना और पिटाई से वह उन लोगों के नाम उगल सकता था, जिन्होंने उसे अमीरजादा को मारने के लिए वस्तुत: सूुपारी दी थी या उसके पीछे उनका प्रमुख हाथ था। उसकी निशानदेही पर राजन नायर को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी थी। एक दिन डेविड रहस्यमय ढंग से पुलिस हिरासत से गायब हो गया। इसी बीच आलमजेब का एक और साथी कालिया अंथोनी, जिसका बांद्रा से लेकर अंधेरी तक आतंक साम्राज्य छाया हुआ था, पुलिस मुठभेड़ में मारा गया।&lt;br /&gt;
कालिया की मौत और डेविड परदेसी की फरारी से बौखलाए आलमजेब ने अब्दुल कुंजू को अमीरजादा की हत्या के लिए जिम्मेदार राजन नायर को भरी अदालत में उसी तरह मारने के लिए एसाइन किया, जैसे अमीरजादा मारा गया था। अब्दुल कुंजू ने इसके लिए चंद्रशेखर सफालिगंा को तैनात किया। जिसने एस्टलेनेड कोर्ट के अहाते में पुलिस के कड़े पहरे में आ रहे राजन नायर की गोली मार कर हत्या कर दी। उस समय उसने नेवी की यूनीफार्म पहन रखी थी, उसकी अभिरक्षा में तैनात इंसपेक्टर गुरू ने छलांग लगाकर सफालिगां को पकड़ लिया। लेकिन 12 दिसंबर 85 को वह भी डेविड किसी तरह पुलिस गाड़ी में निकल भागा और तीन महीने बाद पुलिस मुठभेड़ में मारा गया।&lt;br /&gt;
आलमजेब को पूरा शक था कि डेविड परदेसी को पुलिस हिरासत से भगवाने तथा पुलिस को सूचना देकर कालिया अंथोनी, चंद्रशेखर सफालिगा, एवं महमूद कालिया को पुलिस मुठभेड़ में मरवाने के पीछे दाऊद का ही हाथ था। लिहाजा दाऊद गिरोह को तितर-बितर करने के उद्देश्य से आलमजेब ने इकबाल टैंपो के साथ मिलकर दाऊद के खास आदमी रशीद अरबी पर महालक्ष्मी पेट्रोल पंप के पास हमला किया, लेकिन वह बच गया फिर उसने दाऊद के एक दूसरे साथी बख्शी वधावन की हत्या कर दी।&lt;br /&gt;
साबिर के हत्यारों में अब सिर्फ आलमजेब बचा रह गया था, जो पूरी ताकत से दाऊद गिरोह को छिन्न भिन्न करने के लिए उसके साथियों पर हमला कर रहा था। दाऊद ने अभी तक अपने भाई साबिर के किसी भी हत्यारे को यमलोक पहुंचाने के लिए खुद हथियार नही उठाया था और इस बार भी उसे जरूरत नहीं पड़ी। वह मुंबई से अपना डेरा उठाकर 1985 में दुबई जा पहुंचा था। क्योंकि मुंबई में पुलिस के साथ दुश्मन भी उसके उपर निगाह गडाएं हुए थे। लेकिन उसके बदले की आग अभी ठंडी नहीं हुई थी। उसका निशाना आलमजेब ही था। &lt;br /&gt;
दाउद ने एक बार फिर फिर निशाना साधा और आलमजेब भी यमलोक पहुंच गया। 29 दिसंबर 85 को आलमजेब सूरत शहर के बाहरी इलाके में स्थित गुजरात हाउसिंग बोर्ड कालोनी के एक फ्लैट में उस समय मुठभेड़ में मारा गया, जब वह भारती नामक एक युवती के साथ जबरदस्ती पर उतारू था। उसकी चीख सुनकर पड़ोसियों ने सब इंसपेक्टर दलसुख भाई पारधी को इत्तला की तो उन्होनें पुलिस बल के साथ वहां छापा मारा और मुठभेड़ में आलमजेब को जान गंवानी पड़ी। भारती को उसके मनोरंजन के लिए आलमजेब के गिरोह की दो औरतें कैराग्राम से फुसला कर ले आयी थी। लेकिन किसी बात पर वह जोर जोर से चीखने लगी थीं। &lt;br /&gt;
आलमजेब की पुलिस मुठभेड़ में मौत के बाद अपराध जगत में इस तरह की चर्चा हुई की उसकी हत्या की योजना दाऊद गिरोह ने ही बनायी थी। दाऊद के किसी आदमी ने ही भारती नामक युवती को आलमजेब के पास भिजवाया था और दलसुख पारधी को सूचना भी उसी ने दी थी। इंसपेक्टर पारधी आलमजेब को मारने के लिए राष्ट्रपति का गोल्ड मैडल मिला था। इस तरह दाऊद के इंतकाम का आखिरी चरण भी पूरा हो गया था। लेकिन इसके लिए उसे भी कम कीमत नहीं चुकानी पड़ी थी।&lt;br /&gt;
अपने दुश्मनों को अंजाम तक पहुंचाने और सारी संपन्नता के बावजूद दाउद को निर्वासित होकर अपनी बीवी और बेटियों से काफी दूर दुबई में रहना पड़ रहा था। चोरों की तरह छिपकर वह मुंबई जाता और परिवार तथा साथियों से मिलकर वापस लौट जाता। हर क्षण दुश्मनो का खतरा नंगी तलवार की तरह उसके सिर पर लटकता रहता। महेश ढोलकिया की हत्या के बाद ढोलकिया गिरोह भी उसका जानी दुश्मन बन गया था। पुलिस हाथ धोकर उसके छोटे भाई अनीस के पाछे पड़ गयी थी। वह एक जुर्म में जब जमानत पर रिहा होता, तो उसे तुरंत दूसरे जुर्म के आरोप में गिरफ्तार कर लिया जाता। वहां से जमानत पर रिहा होता, तो पुलिस उसे रासुका के तहत गिरफ्तार कर लेती।&lt;br /&gt;
दाऊद अपनी पहुंच के बलपर हर वर्ष मुंबई चोरी छिपे आता है। अपने भाई इकबाल की शादी तथा पिता इब्राहीम कास्कर की शव यात्रा में भी वह मुंबई आया लेकिन सारी सतर्कताओं एवं तैयारियों के बावजूद पुलिस उसे गिरफ्तार नहीं कर सकी। वैसे पुलिस और अपराध जगत के लोग कहते है कि मुंबई पुलिस में उस समय तक दाउद ने ऐसी पैठ बना ली थी कि ढेर सारे पुलिस वाले एक तरह से उसके पेरोल पर काम करने लगे थे। दाउद उनकी पैसे से मदद करता जिसके बदले वे दाउद को पुलिस की सारी सूचनाएं देते । यही कारण रहा कि उसके मुंबई आने की भनक ऐसे पुलिस वालों को कभी नही मिली जो सचमुच दाउद को गिरफ्तार करना चाहते थे।&lt;br /&gt;
लेकिन अपने परिवार से दूर रहकरे बनवास झेल रहा दाउद वापस मुंबई आना चाहता था, सशर्त समर्पण भी करना चाहता था, लेकिन उसे मुंबई पुलिस और यहां की जेल पर भरोसा नहीं था क्योंकि उसके एक सहयोगी बाबू रेशीम पर पांच मार्च 87 को उसके नये प्रतिद्वंदी महेश ढोलकिया ने अपने सहयोगी शेट्टी गिरोह की मदद से हमला किया और मरवा डाला। इसके लिए ढोलकिया ने विजय उटकर तथा उसके साथियों को सुपारी दी थी। जिन्होंने जेकब सर्किल लॉेकअप में बमों से हमला कर बाबू रेशीम का खात्मा किया था। बाबू रेशीम के हत्यारों को सबक सिखाना जरूरी था। क्योंकि इसमें जरा भी देर की जाती तो दाउद का वह साम्राज्य छिन्न-भिन्न हो जाता जिसे उसने खून का दरिया पार करने के बाद खड़ा करने की कोशिश की थी। शेट्टी का खात्मा करने के लिए उसने रमा नाइक गिरोह को सुपारी दे डाली।&lt;br /&gt;
उस वक्त मुंबई में शेट्टी गिरोह और रमा नाईक गिरोह एक दूसरे के जानी दुश्मन थे, रमा नाईक दाऊद का साथी था। बाबू रेशीम की हत्या का बदला रमा नाईक ने एक महीने के भीतर, महेश ढोलकिया की उसके घर से कुछ कदम की दूरी पर दिनदहाड़े हत्या करके ले लिया । लेकिन रमा नाईक भी 21 जुलाई 88 को पुलिस मठभेड़ में मारा गया।&lt;br /&gt;
लगभग एक दशक तक बदले के लिए चली इस लगातार खूनी जंग से दाऊद की ही तरह करीम लाला और अरविंद ढोलकिया भी परेशान थे और उसे खत्म करना चाहते थे, दाऊद की बढ़ती ताकत को करीम लाला और अरविंद ढोलकिया ने भी दूसरे माफिया गिरोहों की तरह मान लिया था। इसी लिए करीम लाला ने मक्का तथा अरविंद ढोलकिया ने लंदन में दाऊद से मुलाकात कर समझौते की बात चलायी दाऊद भी इस लुकाछिपी को खत्म कर मुंबई वापस आना चाहता था। इसके लिए उसने तथा उसके मुंबई स्थित आदमियों ने हर तरीके से पृष्ठभूमि बनानी शुरू कर दी। कुछ पत्र-पत्रिकाओं में इस आशय की रिपोर्ट तथा लेख प्रकाशित कराये गये कि अगर सरकार उसे पांच छह वर्षों की सजा देकर संतोष कर ले, तो वह आत्म-समर्पण करने के लिए तैयार है।&lt;br /&gt;
मुंबई में दाऊद का काम देख रहे छोटे भाई नूरा उर्फ नूर मोहम्मद इब्राहिम ने कुछ प्रभावशाली माध्यमों तथा उच्च पुलिस अधिकारियों के जरिये महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री शरद पवंार से गुप्त मुलाकातें कर इस बात का आश्वासन दिया कि अगर दाऊद को कुछ शर्तों के साथ आत्मसमर्पण का मौका दिया जाए तो वह शिवसेना की बढ़ती ताकत को बे्रक लगा सकता है। फिर अगर हाजी मस्तान सहित 40 से भी ज्यादा तस्करों-माफिया सरदारों को आत्मसमर्पण करने का मौका देकर माफ किया जा सकता है, तो दाऊद को क्यों नहीं?&lt;br /&gt;
यह सब चल ही रहा था कि अचानक इस गैंगवार ने एक बार फिर पलटा खाया और आत्मसर्मपण कर सकून की जिदंगी बिताने के दाउद के मंसूबे धरे रह गए। इसक वजह थी सतीश राजे की हत्या।&lt;br /&gt;
यह 21 नवम्बर 88 की बात है जब हयम हाई स्कूल (भायखला) के चौराहे की लाल बत्ती पर अपनी वातानुकूलित इंपोटेंड कार होंडा अकार्ड के भीतर सतीश राजे बार-बार अपना पहलू बदल रहा था। उसकी नजरें बार-बार घड़ी पर टिक जाती थीं। उसे नागपाड़ा से नूरा से मिलकर दुबई से जरूरी संदेशों के बारे में बात भी करनी थी। वह विचारों में खोया हुआ था कि अचानक जोर की आवाज हुई। उसने चौंककर देखा, कुछ लोग हथौड़ो से उसकी कार की विडं स्क्रीन तथा पीछे का शीशा तोड़ रहे थे। जब तक वह संभल कर कार में सवार अपने साथियों को आदेश देता, एक हमलावर ने उसके कार ड्राइवर की कनपटी पर अपनी रिवाल्वर सटा दी और दूसरे ने उसके ऊपर गोलियों की बौछार शुरू कर दी। क्षणभर में ही उसका सारा शरीर खून से नहा उठा और वह शीट पर ही लुढक़ गया। हमलावरों को इतने से संतोष नहीं हुआ। तो उन्होंने उसी हथौड़े से जिससे वे कार की ङ्क्षवड स्क्रीन तोड़ रहे थे, उसके सिर को चकनाचूर कर दिया। तब तक बत्ती हरी हो गयी और कार के आगे खड़ा टैंकर जब आगे की ओर बढ़ा तो ड्राइवर ने झटके से कार स्टार्ट की और जेजे अस्पताल की तरफ भागा। कार से उतारकर वह उसे अस्पताल में ले गया, लेकिन डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। सतीश राजे नाम का यह शख्स दरअसल दाऊद का एरिया कमांडर यानि मुंबई चीफ था।&lt;br /&gt;
सतीश राजे की मौत के साथ ही डाक्टर तथा अस्पताल के कर्मचारी ही नही समूचा मुंबई शहर सकते में आ गया।। उसकी मौत की खबर सुनते ही चारों तरफ दहशत सी छा गयी। जरायम की दुनिया में जरा सी भी समझ रखने वाले जान गए कि अब जरूर कोई अनहोनी होगी। क्योंकि दाउद अपने एक आदमी की मौत पर खून का दरिया बहाने के लिए तब तक बदनाम हो चुका था। फिर सतीश राजे की हत्या तो उसकी रीढ़ पर वार करने जैसी थी। सतीश की हत्या के ठीक 12 दिन बाद 4 दिसंबर 1988 को मुंबई से रात के अंधेरे में एक मारूति कार सन्नाटे को चीरती हुई पूणे जा रही थी। मुबई तथा न्यू बांम्बे के बीच बने लंबे पुल को पार करके कांकरण भवन को पार करती हर्इु कार पनवेल के निकट पहुंची तभी एक दूसरी मारूति वैन ने उसका रास्ता रोक दिया। उस वैन से अंधेरे में तमाम चेहरे नमूदार हुए। उन्होंने मारूति कार पर अपनी आटोमैटिक रायफलों से अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। गालियां कार को छेदते हुए कार के भीतर सवारों को भी छलनी किये जा रही थीं। अचानक उस कार का ड्राइवर श्यामसुंदर नायर कार का दरवाजा खोलकर भागा। तब तक एक हमलावर की निगाह उस पर पड़ी और उसने अपनी स्टेनगन का रूख उसकी ओर कर दिया। कुछ क्षणों में ही गोलियों से छलनी उसका शरीर धराशायी हो गया, कार के भीतर होने वाली चीख चिल्लाहट तथा फायरिंग की आवाज उधर से गुजर रही हिंदुस्तान आर्गेनिक केमिकल फैक्ट्री की बस के ड्राइवर ने सुनी तो बस रोक दी। लेकिन हमलावरों ने जब उसकी बस पर फायरिंग शुरू कर दी, तो वह परली तरफ के दरवाजे से कूद कर भाग निकला और अंधरे में गुम हो गया। हमलावरों ने 180 से अधिक राउंड गोलियां चलायी थी, जिसमें 90 गालियां सिर्फ कार में लगी थी। इस हत्याकांड के मारे गये लोग थे अशोक जोशी (30) सतीश श्ंाकर सावंत (23) दिलीप लांडगे (22) करूपाकर हेगड़े (25) तथा श्याम सुंदर नायर मृतकों के नाम सुनते ही मुंबई में जैसे बिजली सी कौंध गई।&lt;br /&gt;
कौन थे सतीश रोजे, अशोक जोशी और उनके साथी जिनकी हत्याओं ने हंगामा करवा दिया था। दरअसल 21 नवबंर से 4 दिसंबर 88 के बीच 12 दिनों तक मुंबई के माफिया गिरोहों में खून की होली चलती रही जिसे खेलने वाले थे तीन अलग-अलग माफिया गिरोहों के कुख्यात सरगना। 21 नवंबर को जिस सतीश राजे की हत्या हुई थी, वह माफिया डॉन दाउन इब्राहीम का दांया हाथ था और दुबई में रह रहे दाऊद के सारे धंधों का मुंबई से संचालन करता था।&lt;br /&gt;
25 नंवबर को कुख्यात तस्कर एंव होटल मालिक अरविंद ढोलकिया और दो दिनों बाद उसके दूसरे माफिया साथी तथा होटल मालिक मनु करमचंदानी की हत्या हुई। इसके बाद 4 दिसंबर 88 को अशोक जोशी एवं उसके साथियों की हत्या हुई। अशोक जोशी रमाकांत नाईक गिरोह को सरगना था, जो 21 जुलाई 88 को चैबूर में पुलिस मुठभेड में नागापड़ा के पुलिस निरीक्षक राजन काटदरे के हाथों मारा गया था। रमाकांत की मौत का बदला उसके गिरोह ने सतीश राजे की हत्या करके तथा दाऊद गिरोह ने सतीश राजे की हत्या का बदला अशोक जोशी तथा उसके साथियों की हत्या करके लिया था।&lt;br /&gt;
सतीश राजे की हत्या में रमा नाईक के तीनों साथी (अरूण गवली, अशोक चौधरी उर्फ छोटा बाबू तथा आोक जोशी आदि) तथा अशोक जोशी ऐंड कंपनी की हत्या में दाऊद गिरोह के सरदारों ने सीधा भाग लिया था।&lt;br /&gt;
अपने तथा गिरोह से जुड़े सदस्यों पर हो रहे लगातार कातिलाना हमलों से आतंकित अरविन्द ढोलकिया ने कुछ संपर्क सूत्रों के माध्यम से दाऊद इब्राहिम से दुबई में मुलाकात कर संधि प्रस्ताव रखा। इस समूचे मामले में ढोलकिया परिवार की चुप्पी का भी पुलिस ने यही अर्थ निकाला कि वे दाऊद गिरोह से अपनी दुश्मनी को आगे बढ़ाना नहीं चाहते थे। नब्बे के दशक के पूरा होने तक ढोलकिया बंधु अपराध जगत की अहम धुरी रहे थें।&lt;br /&gt;
कौन थे ये ढोलकिया बंधु और दाऊद दब्राहिम से क्यों हो गई थी उसकी दुश्मनी? इसे जानने के लिए हमें एक बार फिर अतीत में जाना पड़ेगा? गुजराती एवं मारवाड़ी बहुल गिरगाम क्षेत्र की सिंधी गली में रहने वाली शांता बेन के चार बेटे थे, प्रवीण, ललित, अरविंद तथा महेश। महेश के जन्म के कुछ समय बाद ही उसके पिता की मौत होने से पूरा परिवार एक तरह से बेसहारा हो गया। शांताबेन सिलाई आदि के काम कर बच्चों को पालने लगी। दोनों बड़े बेटों, प्रवीण तथा ललित ढोलकिया ने छोटे मोटे रोजगार शुरू किये।&lt;br /&gt;
अरविन्द तथा महेश नौजवानी में कदम रखते ही तस्करी के आने वाले कपड़े साईकिल पर लादकर गली गली बेचने लगे थे। यह वह समय था, जब नौजवान शाबिर और दाऊद इब्राहिम ने मनीष मार्केंट में एक छोटी सी स्टॉल खोलकर तस्करी के सामान बेचने शुरू किये थे, अरविंद और महेश को तस्करी से लाये कपड़े बेचने में अच्छी आय होने लगी, तो उनके रहन-सहन में भी सुधार आया। सिंधी गली में टेलीविजन सबसे पहले उन्हीें के घर आया। चालनुमा मकान की हालत में रौनक आने लगी। लेकिन बड़े भाई प्रवीण एवं ललित को अरविंद तथा महेश का धंधा पसंद नहीं था। जोखिम होने के कारण पूरे परिवार में खटपट शुरू हुई, तो प्रवीण एवं ललित दूसरा मकान लेकर वहां सपरिवार रहने चले गये। बाद में अरविंद तथा महेश भी सिंधी गली वाले मकान को छोडक़र अन्यत्र रहने लगे। उसके बाद बेतहाशा कमाई होने पर वे पेंडर रोड जैसे पॉश इलाके में काफी बड़े फ्लैट में रहने लगे। वृद्धा मां शांताबेन चारों बेटों के पास एक एक कर रहने लगी। चारों भाइयों के अलग-अलग रहने के बावजूद उनके आपसी रिश्ते नहीं टूटे थे।&lt;br /&gt;
ढोलकिया बंधुओं ने शेट्टी या दूसरे गिरोहों की तरह ‘ठेके’ या ‘जॉब एसाइनमेंट’ का धंधा नहीं अपनाया। उनहोंने होटल तथा रेस्तरां खोलने शुरू किये, जहां वेश्याएं आकर ग्राहकों को मनोरंजन करती थीं। 1979 में मीसा में दूसरे अपराधियों की तरह अरविंद और महेश भी गिरफ्तार हुए। 1978 में रिहाई के बाद हाजी मस्तान, युसूफ पटेल आदि दूसरे तस्करों की तरह उन दोनों ने भी भवन निर्माण का काम शुरू किया। तब उनके विरूद्ध धोखाधड़ी के कई मामले प्रकाश में आये, जैसे एक ही फ्लैट को कइयों को बेच देना और कइयों से फ्लैट के पूरे पैसे लेने के बावजूद उन्हें फ्लैट का कब्जा न देना। लेकिन उनके भय से किसी ने पुलिस थानों में रिपोर्ट लिखाने की हिम्मत नहीं की।&lt;br /&gt;
1978 में अरविंद तथा महेश पर हिंसात्मक उपद्रव तथा हत्या के सात मामले दर्ज हुए थे। लेकिन सबूत के अभाव में उन्हें कोई सजा नहीं मिली। 1976 के बाद उन पर तस्करी के कोई आरोप दर्ज नहीं किये गये, जबकि पुलिस को सब कुछ पता था।&lt;br /&gt;
उन्होंने इसके साथ-साथ गिरगाम, वर्ली, खार आदि क्षेत्रों में कई होटल डिस्कोथिक आदि खोले, उनमें होटल सीजर्स पैलेस (खार) फिशरमैन हवार्थ (वर्ली) होटल अंजता एलोरा (गिरगाम), क्लियो डिस्कोथिक आदि प्रमुख थे। उन्होंने ये होटल तथा डिस्कोथिक उन आधुनिक युवक युवतियों के लिए खोले जिनके पास पैसा भी था और पश्चिम सुख भोगने की लालसा भी। इन स्थानों पर नशीले पदार्थों से लेकर कालगर्ल तक मिलती थी। इसीलिए ये होटल और डिस्कोथिक पुलिस छापे के हमेशा शिकार होते रहे।&lt;br /&gt;
ढोलकिया बंधुओं का ‘होटल व्यापार’ समृद्ध हुआ तो उनके बहुत से दुश्मन पैदा हो गये। इनमें कुछ लोग ऐसे होटल मालिक थे जिनके होटल व्यापार पर ढोलकिया बंधुओं के कारण काफी असर पड़ा था। होटल सीजर्स पैलेस तथा क्लियों डिस्कोथिक में वेश्यावृत्ति के कारण वहां असामाजिक तत्वों की सरगर्मी जब ज्यादा बढ़ गयी तथा देर रात तक हंगामे के कारण आस-पास रहने वालों की नींद हराम हो गयी, तो उन्होंने पुलिस में शिकायत की। बांद्रा पुलिस ने छापे मारकर वेश्याओं एवं कालगर्ल की गिरफ्तारियां की। ये छापे सीजर्स पैलेस के अलावा ढोलकिया के दूसरे होटलों पर भी पड़े। दर्जनों छापों तथा सैकड़ों कालगर्ल की गिरफ्तारी के बावजूद जब होटल की गतिविधियों पर कोई असर नहीं पड़ा और नियमानुसार होटल रात साढ़े ग्यारह बजे तथा डिस्कोथिक साढे बारह बजे बंद करने की बजाए देर रात खुले रहे, तो मुंबई के पुलिस आयुक्त ने मार्च 1987 में डिस्कोथिक के लाइसेंस के नवीनीकरण से इंकार कर दिया।&lt;br /&gt;
इसके बाद जैसे ढोलकिया बंधुओं के पतन का दौर शुरू हो गया। पहले महेश ढोलकिया की मौत और उसके बाद अरविन्द ढोलकिया कानून से भागता रहा और फिर 17 सितम्बर 1988 को उसकी भी हत्या कर दी गई और एक दशक तक मुंबई में तस्करी का साम्राज्य चलाने वाले ढोलकिया बंधुओं का अंत हो गया। बाकी बचे ढोलकिया बंधुओं ने इसके बाद साफ-सुथरी अमन-चैन की जिंदगी का दामन थाम लिया।&lt;br /&gt;
बहरहाल, ढोलकिया परिवार का अंत जो हुआ लेकिन वास्तविकता यह थी कि मुंबई के अपराध जगत पर आधिपत्य जमाने और अकेला ‘डॉन’ बनने की दाऊद की नीति ने परदे के पीछे से सारे घटनाक्रम को अंजाम दिलवाया था। दरअसल ढोलकिया बंधुओं के कारण दाऊद और उसके भाइयों के काम धंधे भी प्रभावित हो रहे थे इसलिए दाऊद ने ढोलकिया बंधुओं की तबाह करने का इंतजाम शुरू कर दिया था। &lt;br /&gt;
(अपराध की दुनिया में दाऊद का डॉन का रूतबा हासिल करने के लिए और कितना खून बहाना पड़ा पढि़ए अगले अंक में)&lt;/div&gt;
</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://jurmkiduniya.blogspot.com/feeds/6295774433399021564/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://jurmkiduniya.blogspot.com/2010/06/blog-post_11.html#comment-form' title='3 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8049618298159816963/posts/default/6295774433399021564'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8049618298159816963/posts/default/6295774433399021564'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://jurmkiduniya.blogspot.com/2010/06/blog-post_11.html' title='माया नगरी की सडक़ों पर बहने लगा खून'/><author><name>sunil verma</name><uri>http://www.blogger.com/profile/06462864962085848512</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='27' height='32' src='//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiM8mYTF1rSTG5OLwjuKe8ktdZwaNsHWlaRFf283uYibqX2zwZT1C0LITcRz_c-QhdhjEK686quBdQwPl6yirK3P5dvBOclUZ-nAWjIgkhf_dw38PrIOFgSWi-PC_Q-ilg/s113/sunil+pic2.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjO7bfWONvqx46QA6s83qsiBpIoADZB7n5OjByiWcqVNVU3eYR1Y4EWvz_fMUoYMmdyFG7NEuAbz46Cg94cMyC0i1RVCBlOOwEZBRhltomvmwE5krpW3YTDCIXyB6CLvWUmyLS0chfpEV63/s72-c/ed_imgSNN1314AN_119807a.jpg" height="72" width="72"/><thr:total>3</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8049618298159816963.post-1681280104677246578</id><published>2018-06-01T09:28:00.000+05:30</published><updated>2018-07-09T16:07:23.678+05:30</updated><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="Mumbai Underworld"/><title type='text'>बंबई से मुंबई तक</title><content type='html'>&lt;div dir=&quot;ltr&quot; style=&quot;text-align: left;&quot; trbidi=&quot;on&quot;&gt;
&lt;a href=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjyoM2boApiAYKM1PLch-fSapkf20SF6iveM65jyztKkgm7CXo5B-QsZNJapbMY_ms0UGKjX_K2aYNpQFazUx77LFMTXyITaNfx7olX_JQLCBVSitWP3xdf5mbeIQUinwN1dZs0cI2qrcn1/s1600/Haji-Mastan.jpg&quot; imageanchor=&quot;1&quot; style=&quot;clear: right; cssfloat: right; float: right; margin-bottom: 1em; margin-left: 1em;&quot;&gt;&lt;img border=&quot;0&quot; qu=&quot;true&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjyoM2boApiAYKM1PLch-fSapkf20SF6iveM65jyztKkgm7CXo5B-QsZNJapbMY_ms0UGKjX_K2aYNpQFazUx77LFMTXyITaNfx7olX_JQLCBVSitWP3xdf5mbeIQUinwN1dZs0cI2qrcn1/s320/Haji-Mastan.jpg&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;a href=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgG5So-kcS01_gQJbbjkKsSMhBqwOFTiZ9Llm_JSv7zlOaskHssq8l1eziuMzRSXfRK8Ax4mVVzSck2CcWwAvMOqpAFLh76_C6kXIlfV5jfTn65cDNq1oyTMrN1skYnclzcwKBe54klLWXE/s1600/vardarajan.jpg&quot; imageanchor=&quot;1&quot; style=&quot;clear: right; cssfloat: right; float: right; margin-bottom: 1em; margin-left: 1em;&quot;&gt;&lt;img border=&quot;0&quot; qu=&quot;true&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgG5So-kcS01_gQJbbjkKsSMhBqwOFTiZ9Llm_JSv7zlOaskHssq8l1eziuMzRSXfRK8Ax4mVVzSck2CcWwAvMOqpAFLh76_C6kXIlfV5jfTn65cDNq1oyTMrN1skYnclzcwKBe54klLWXE/s320/vardarajan.jpg&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;
बम्बई के मुम्बई बनने का सफर खून से सना है। देश के इस औद्योगिक शहर ने मायानगरी के अलावा माफिया अपराध को भी पनपते देखा है। मुंबई का अंडरवल्र्ड आज पूरे विश्व में अपनी जड़े जमा चुका है। लेकिन इस अंडरवल्र्ड की शुरूआत आखिर कब और कैसे हुई, इसी अन्र्तकथा को पेश करने के लिए मैंने एक अर्सा पहले मुंबई की सडक़ों की खाख छानी। पुलिस रिकार्ड में दर्ज दस्तावेजों का अध्ययन किया। कुछ पुराने पुलिस अफसरों की स्मृतियों को टटोला। ऐसे भी लोग थे जो कभी इस काली दुनिया का हिस्सा रहें,उनसे जानकारी हासिल की। इसी के बाद मैंने मुंबई अंडरवल्र्ड की अपराध गाथा लिखने का मन बनाया। इस अपराध गाथा की शुरुआत करीब 40 साल हुई थी। अपराध का यह सफर बन्दरगाह की गोदी से शुरू हुआ था और अब सात समुन्दर पार तक अपने पांव फैला चुका है। अडरवल्र्ड यानि जुर्म की दुनिया में वक्त के साथ कैसे बदलाव आए और बदलते वक्त के साथ जुर्म की दुनिया में किस सरगना की बादशाहत कायम हुई इसे आप लगातार पढ़ते रहेंगे। &lt;br /&gt;
&lt;a name=&#39;more&#39;&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;
यह सिलसिला है सत्तर के दशक का। उन दिनों मुंबई को बंबई के नाम से जाना जाता था। मराठा प्रदेश का यह फिल्मी शहर उन्ही दिनों भारत की सबसे बड़ी व्यवसायिक नगरी के रूप में तेजी से तब्दील हो रहा था। देश के कोने-कोने से हर जाति धर्म के लोग रोजगार की चाह में हर रोज बंबई पहुंचते हैं, उस समय भी ऐसा ही था। इसी कारण बंबई की आबादी तेजी से बढ़ रही थी। ऐसे में जमीन और मकानों के भाव भी तेजी से बढऩे लगे।&lt;br /&gt;
आंखों में हसीन सपने संजोय जो लोग इस ग्लैमर नगरी में पहुंचते उनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की होती जिनके सपने अधूरे रह जाते, टूट जाते थे। उनमें से कुछ गलत हाथों में पडक़र भटक जाते या फिर गलत रास्ते अपनाकर अपनी जीविका चलाते। अपराध की अंधेरी गलियों में भटकने वाले ये लोग कुछ तो गली मोहल्ले के मवाली बनकर रह जाते और कुछ बड़े इलाकों के दादा बन जाते, जिनके पास जितनी ताकत होती वह उतना ही बड़ा दादा बन जाता। दादा जिन्हे स्थानीय लोग बंबइया भाषा में भाई के नाम से सम्बोधित करते हैं।&lt;br /&gt;
करीब चौंतीस साल पहले सन 1974 के इसी माहौल में अपराध जगत के जो बड़े सरगना यानि भाई बंबई के अपराधिक क्षितिज पर अपना नाम लिख रहे थे। उनमें से एक कुख्यात नाम था-वरदराजन मुदालियार जो वरदा भाई के नाम से चर्चित हुए। यूं कहा जाये तो कुछ गलत न होगा कि वरदा भाई बंबई के अपराध जगत का गाïॅड फादर यानि सबसे पहला बड़ा संरक्षक था।&lt;br /&gt;
वरदा भाई सत्तर के दशक में अपने जन्म स्थान सलेम, तमिलनाडू से बंबई आये थे। बचपन से नेतृत्व करने की प्रवृत्ति के चलते वरदा भाई ने बोम्बे के विक्टोरिया टर्मिनल रेलवे स्टेशन के बाहर बूटपॉलिश करके जिन्दगी की शुरूआत की और फिर शीघ्र ही बुटपॉलिश करने वाले छोकरों को एकत्रित कर एक गिरोह बना लिया। वरदा भाई का सपना आसमान की बुलंदियों को छूने का था अपने इन्हीं सपनों को साकार रूप देने के लिए वरदा भाई ने अपना रूख बन्दरगाह की गोदी की तरफ किया। सागर किनारे बन्दरगाहों पर होने वाली कारगुजारियों का अपना एक अलग समीकरण होता है। समुद्री जहाजों से माल उतारने और गोदी तक पहुचाने के काम में होने वाली चोरी तथा हेर-फेर के अलावा कस्टम ड्यूटी से बचने के लिए तथा बीमा की रकम वसूलने के लिए माल गायब दिखाकर सीधे गोदामों तक कैसे पहुंचाया जाता है और तस्करी का माल कैसे उतरता है वरदा भाई ने इस कला को बाखूबी सीख लिया था। धीरे-धीरे वरदा भाई ने अपने छोकरों के साथ गोदी और डॉकयार्ड पर अपना साम्राज्य फैलाना शुरू कर दिया और चंद सालों में वरदा भाई गोदी का बेताज बादशाह बन गया। माल चाहे एक नम्बर का हो या फिर तस्करी का, बंबई के किसी भी डेकपोर्ट पर वरदा भाई की इजाजत के बिना माल नहीं उतर सकता था। इसका इतना असर हुआ कि तस्करी में पहले से जुड़े सरगना भी वरदा भाई की मदद लेने लगे। इन्ही मदद लेने वालों में एक नाम माफिया सरगना हाजी मस्तान का भी था।&lt;br /&gt;
हाजी मस्तान सोने की तस्करी करने वाला एक धार्मिक प्रवृत्ति का डॉन था। यह बात अलग है कि अपने समय में अपराध जगत से जुड़े सभी नये पुराने अपराधियों को जरायम पेशे के गुर हाजी मस्तान ने ही सिखाये थे। एक तरह से यह कहना गलत न होगा कि हाजी मस्तान नये पुराने अपराधियों का उस्ताद था। महाराष्ट्र के सितार जिले के रहने वाले हाजी मस्तान की जिंदगी का सफर मुंबई की एक गंदी सी चाल से शुरू हुआ था। किशोरावस्था में ही हाजी मस्तान ने पेट भरने के लिए आर्थर बंदरगाह पर कुली का काम शुरू कर दिया। यह सारा किस्सा 60 के दशक के दशक का है। जहां मजूदरी करने वाले मां और खुद का पेट भरने के लिए पहले उसने गलियों में सब्जी व फल बेची तो कुछ राते मजबूरी में किसी फुटपाथ पर पाइप में सोकर भी गुजारी। कुछ समय बाद जब मस्तान डॅाकपार्ट पर कुलीगिरी करने लगा तो चंद समय बाद ही मस्तान को डॉक पर होने वाली तस्करी के माल के हेर-फेर का पता चल गया । मस्तान अपने हाथ का कारनामा दिखाकर दो नंबर का माल कबाड़ मार्केट में ले जाकर बेचने लगा। धीरे-धीरे मस्तान के संबंध विदेश और विदेशी लोगों के साथ बन गये तो मस्तान ने उनके साथ भी हाथ मिलाकर पहले छोटे मोटे सामान और बाद में सोने की तस्करी का कारोबार शुरू कर दिया। यूं कहना गलत न होगा कि हाजी मस्तान बंबई का पहला तस्कर था जिसने तस्करी के अपराध को संगठित रूप दिया। हाजी मस्तान बंबई के अपराध जगत में उन दिनों तक अपना तस्करी का साम्राज्य स्थापित कर चुका था। उसे किसी ऐसे भाई की जरूरत थी जो तस्करी में उसके माल को सेफ्टी से उतार कर उसके गोदामों तक पहुंचा दे। वरदा भाई ने हाजी मस्तान से हाथ मिलाकर इस काम को बखूबी अंजाम देना शुरू कर दिया। कुछ ही सालों में बंबई महानगरी की रंगीन लोलुपता के साये में चल रहे अवैध धंधों में वरदा भाई और हाजी मस्तान ने अपने पांव पूरी तरह पसार लिए।&lt;br /&gt;
वैसे हमने आपको हाजी मस्तान के बारे में जो कुछ बताया है उसे पढक़र आपको अमिताभ बच्चन की मशहूर फिल्म दीवार की याद जरूर आ गई होगी। दरअसल दीवार फिल्म में अमिताभ बच्चन का काफी रोल हाजी मस्तान की जिंदगी से काफी मेल खाता है। कहा जाता है कि इस फिल्म की पटकथा हाजी के इशारे पर उसी के चरित्र को ध्यान में रखकर लिखी गई थी।&lt;br /&gt;
बहरहाल बात चल रही थी वरदा भाई की। जिसने हाजी मस्तान से हाथ मिलाकर अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए तस्करी, जिस्मफरोशी का जाल बिछाने, सायन-कोलीवाड़ा क्षेत्र में झुग्गी झोपड़ी बनवाने के लिए जमीनों पर अवैध कब्जे करने और ठेके पर हत्या करवाने तक के धंधे शुरू कर दिए थे। झुग्गी झोपडिय़ां बन गई और छोटे बड़े धंधेबाज चेले वहां आकर बस गए तो वरदा भाई के कुशल नेतृत्व में अवैध शराब का कारोबार भी सुनियोजित ठंग से चलने लगा। इसी के साथ वरदा भाई के प्रभाव क्षेत्र का विस्तार भी बढ़ चला। शक्ति संतुलन से लेकर आतंक और ऊंची पहुंच के खेल में भी वरदा भाई बड़ी रफ्तार से तरक्की करता गया। कहना चाहिए कि बंबइया अपराध जगत के एक बड़े हिस्से पर वरदा भाई का साम्राज्य स्थापित हो गया था। उनके सिपाहसालार निर्भय होकर जरायम की मुहिम फतेह करने लगे।&lt;br /&gt;
एक तरफ जहां हाजी तस्कर किंग बनकर जरायम की दनिया में किंग बन गया था ,वहीं दूसरी तरफ वरदा भाई मुंबई शहर में कत्लों गारत कराने वाला एक दसरा सिंडीकेट तैयार कर चुका था। हाजी जैसे लोगों की दुनिया वरदा जैसे भाइयों के बिना वैसे भी अधूरी मानी जाती है। हम फिरसे हाजी मस्तान की बात करते है। उन्ही दिनों तस्करी की दुनिया में यूसुफ पटेल, लल्लू जोगी और सुखनारायण बखिया जैसे तस्कर भी अपने पांव जमा चुके थे। हाजी मस्तान ने इन सभी तस्करों को एकत्रित कर एक सिंडीकेट की स्थापना की लेकिन कुछ अर्से बाद इस सिंडीकेट में शामिल यूसुफ पटेल और लल्लू जोगी ने सोने की तस्करी की दुबई में हुई एक बड़ी डील में बेईमानी कर ली जिस कारण हाजी मस्तान और यूसुफ पटेल में दुश्मनी हो गयी।&lt;br /&gt;
पटेल और हाजी मस्तान की दुश्मनी इस हद तक हो गई कि हाजी मस्तान ने 1971 में पेशेवर हत्यारों का गिरोह चलाने वाले करीम लाला के शूटरों द्वारा यूसुफ पटेल को भीड़ भरे भिंडी बाजार में सरेआम मरवा दिया। मुंबई के अपराध जगत में किसी अपराधी के गैंगवार के चलते हत्या की यह पहली वारदात थी। हाजी मस्तान की रोमांच भरी अपराधिक जिंदगी के ऐसे अनेक किस्से हैं। मैं अडंरवल्र्ड के इन सूरमाओं का महज जिक्र भर कर रहा हूं। अगर विस्तार से जानकारी दी जाएं तो हाजी मस्तान,वरदाभाई और करीम लाला पर अलग-अलग पूरी किताबें लिखी जा सकती है।&lt;br /&gt;
1974 का दौर हाजी मस्तान की जिंदगी में बदलाव का दौर था। उस समय आपात काल की शुरूआत होते ही तत्कालीन प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी ने हाजी मस्तान को मीसा लगाकर जेल में डलवा दिया। हाजी मस्तान के पास मौजूद अथाह दौलत का अंदाजा इसी बात से लग सकता है कि तब हाजी ने स्व. इंदिरा गांधी को लालच दिया था कि वह अपनी रिहाई के बदले उन्हे इतनी दौलत देगा कि उनके निवास से संसद भवन तक नोट सडक़ पर बिछा दिए जायेंगे। लेकिन अथाह दौलत भी हाजी मस्तान को रिहाई न दिला सकी। लेकिन आपात काल के बाद जब जनता पार्टी की सरकार बनी तो हाजी मस्तान समेत देश के चालीस बड़े तस्करों को माफी मिल गयी। हाजी मस्तान ने राजनीति की तरफ रूख किया और 1984 में महाराष्ट्र के दलित नेता जोगिन्दर कावड़े के साथ मिलकर दलित-मुस्लिम सुरक्षा महासंघ नाम से राजनीतिक दल की स्थापना की। बाद में 1990 में इसका नाम बदल कर भारतीय अल्पसंख्यक महासंघ कर दिया गया।&lt;br /&gt;
हाजी मस्तान के राजनीतिक दल ने बंबई, मद्रास और कलकत्ता के निकाय चुनाव में हिस्से लिए। जिनमें महासंघ को कोई सफलता तो नहीं मिली पर काले धन का इन चुनाव में जमकर प्रदर्शन हुआ। कहा जाता है कि चुनावों में काले धन के खुलेआम पानी की तरह बहाएं जाने का सिलसलिा भी उसी वक्त से शुरु हुआ था। 1991 में हाजी मस्तान की स्वाभाविक मौत हुई तो भले ही उनके अपराधिक साम्राज्य का अंत हो गया , मगर हाजी मस्तान नाम के अपराध रूपी पेड़ से जो शाखायें फूटी थी, उन्होने मुंबई के अपराध जगत में कुछ ऐसे गुल खिलाये कि आज यह अंडरवल्र्ड और इसके कारनामें मुंबई की आवाम के लिए नासूर बन चुके हैं। हाजी मस्तान का जिक्र खत्म करने से पहले मै आपकों उसकी कुछ ओर खूबियां बताना चाहता हूं। हाजी ही वह शख्स था जिसने सबसे पहले बॉलीवुड की दुनिया में दखल अंदाजी शुरू की थी। फिल्मों में अपराध के जरिए कमाए और काले धन को लगाने का सिलसिला भी उसी ने शुरू किया था। बड़े निर्माता निर्देशकों के इशारे पर अभिनेता-अभिनेत्रियों को डराने-धमकाने का चलन भी हाजी मस्तान ने ही शरू किया था। फिल्मी दुनिया में हाजी की दखलअंदाजी के कई दिलचस्प किस्से मशहूर है जिनसे उसके अपराधिक तंत्र की हैसियत का पता चलता है। एक ऐसा ही किस्सा कुछ इस तरह है। हुआ यूं कि अपने जमाने की एक मशहूर अदाकारा जो बाद में देश की जाने-माने गायक की पत्नी बनी, अपनी फिल्म का सेट छोडक़र अचानक गायब हो गई। वह जाना माना फिल्म निर्माता अभिनेत्री को शूंटिंग पर लौटने का दबाव डालने के लिए हाजी की शरण में पहुंचा। हाजी ने फिल्म निर्माता को जबान दे दी।&lt;br /&gt;
हाजी ने तत्काल अपने दुनियाभर में फैले अपराधिक तंत्र का सक्रिय किया तो हैरत अंग्रेज ढंग से वह अभिनेत्री अचानक तीसरे दिन शूटिंग के लिए मुंबई में फिल्म के सेट पर पहुंच गई। दरअसल हुआ यूं कि हाजी के गुर्गो ने उस अभिनेत्री को लंदन में तलाश कर लिया जहां वो अपने प्रेमी के साथ थी। हाजी के गुर्गो ने अभिनेत्री को चेहरे पर तेजाब फेंकने की धमकी दी जिसके परिणाम स्वरूप 80 के दशक की वह प्रसिद्ध अभिनेत्री काम पर लौट आयी। वाकई गजब था हाजी का अपराध की दुनिया में नेटवर्क। वैसे अपराध की दुनिया मे हाजी को आज भी रॉबिनहुड की तरह याद किया जाता है। यह कोई आश्चर्य की बात भी नही है। क्योंकि वह शराब को छूता भी नही था । उसने अनगिनत गरीब लड़कियों की शांदियां करवायी। न जाने कितने बेकार नौजवानों को काम पर लगवाया। हाजी मस्तान भले ही कितना भी धमभीरू और नेकदिल इंसान रहा हो लेकिन वो एक तस्कर, एक डॉन ,एक अपराधी था। इस सच से इंकार नही किया जा सकता।&lt;br /&gt;
एक फिल्मी डॉन की तरह हाजी मस्तान की भी कुछ कमियां थी। एक आम इंसान की तरह उसमें भी खूबसूरत लड़कियों पर फिदा होने की कमजारी थी। हाजी अक्सर फिल्मी पार्टियों में जाता था जहां वो एक सम्मानित अतिथि की तरह बुलाया जाता था। इन्हीं पार्टियों में आते-जाते हाजी मस्तान के दिलो दिमाग पर सोना नाम की एक महत्वाकांक्षी फिल्मी हसीना इतनी बुरी तरह छा गई कि पहले ही कई शादी रचा चुके हाजी ने न केवल उसे पत्नी जैसा दर्जा दिया बल्कि उसने सोना का हेरोइन बनने का अरमान पूरा करने के लिए एक फिल्म बदनाम फरिश्ते बना डाली।&lt;br /&gt;
यह फिल्म सोना का कोई भला न कर सकी तो हाजी ने सोहराब मोदी को वित्तीय सहायता देकर मीना कुमारी की अमर कहानी फिल्म बनवायी। इस फिल्म में सोना ने मधुबला की भूमिका निभायी। दरअसल बॉलीवुड में सोना को मधुबाला की डुप्लीकेट ही माना जाता रहा है । इतना ही नही हाजी ने कुछ फिल्मकारों को पैसा देकर एक और फिल्म बनवायी जिसमें सोना के साथ अभिनेता का रोल खुद हाजी ने किया था मगर हाजी के जीवन और चरित्र को लेकर बनी यह फिल्म बुरी तरह पिट गई। तमाम पैसा और ताकत लगाने के बावजूद हाजी अपनी रॉबिनहुड की छवि को भुना नही सका। अभिनेत्री को सेट पर बुलवाने की बात हो या फिर सोना को हेरोइन बनाने के लिए फिल्मों में पैसा लगाने और दखलअंदाजी करना ये उदाहरण देना इस लिए जरूरी था कि आप समझ जाए मुंबई के अपराध जगत में इसकी बुनियाद हाजी ने रखी थी। बहरहाल हमने जिक्र किया था करीम लाला और वरदा भाई का जो उसी दौर में मुंबई में अपराध के क्षितीज पर चमके जब वहां हाजी मस्तान का दौर था। वरदा भाई के बारे में हम बता ही चुके है ,अब रहा करीम लाला जिसका उदय भी ठीक उन्हीं दिनों में हुआ था यूं कहें कि करीम लाला का अपराध जगत में उदय एक तरफ से खूनी गैंगवार की शुरूआत थी । हालांकि करीम लाला उन्हीं दिनों शुरू हुई गैंगवार में कभी का खत्म हो चुका है मगर करीम लाला के खात्मे के बावजूद मुंबई में गैंगवार आज तक जारी है।&lt;br /&gt;
करीम लाला पेशेवर पठान हत्यारों के ऐसे गिरोह का सरगना था, जिनका काम सुपारी लेकर लोगों को मौत के घाट उतारना था। जलालाबाद, पखतूनिस्तान से बंबई आकर करीम लाला ने अपनी दिलेरी के बल पर पठानों का गिरोह तैयार किया था। इस गिरोह का काम मिल मालिकों के लिए मजदूर नेताओं की आवाज दबाना, बिल्डरों फायनेंसरों की डूबी रकम और जमीन पर कब्जे दिलवाने के अलावा तस्कर गिरोहों के लिए भी काम करना था। होजी मस्तान और वरदा भाई ने एक लम्बे समय बाद धर्म - कर्म और राजनीति के कारण अच्छी सामाजिक प्रतिष्ठा बना ली थी। करीम लाला ने भी अपना अपराधिक साम्राज्य स्थापित करने के बाद ऐसा ही करना चाहा जिसके लिए उसने हज किया और लौटने के बाद अपने जुंए, शराब व मादक पदार्थें के अड्डे अपने भतीजों और विशवस्त साथियों को सौंप दिये थे। लेकिन अपनी अलग खून खराबे की अपराध शैली के कारण वह हाजी और वरदा भाई जैसी प्रतिष्ठा न पा सका।&lt;br /&gt;
हाजी मस्तान की तरह करीम लाला भी राजनीतिक रूतबा हासिल करने की ख्वाहिश रखता था। वह करीब तीस सालों तक पख्तून जिरगा ए हिंद नामक पठानों की संस्था के मुखिया भी रहे। इसीलिए इंदिरा गांधी, खान अब्दुल गफ्फार खान जैसे राजनीतिज्ञ और सामाजिक लोगों तथा दिलीप कुमार जैसे अभिेनेताओं से उनका मिलना जुलना हो गया था। हाजी मस्तान, वरदाभाई और करीम लाला एक के बाद एक अपनी जिंदगी का सफर पूरा कर गए। लेकिन अपने पीछे छोड़ गए जुर्म की एक ऐसी विरासत जिस पर कब्जा जमाने के लिए बाद में मुंबई में खून का दरिया बहा। समूचा महाराष्ट्र अपराधियों के आंतक से दहल गया।&lt;br /&gt;
(आखिर कौन थे जुर्म की दुनिया में इन सरगनाओं के अगले वारिश और किसको मिली बादशाहत पढ़ते रहिए मैं आगे लिख रहा हूं)&lt;/div&gt;
</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://jurmkiduniya.blogspot.com/feeds/1681280104677246578/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://jurmkiduniya.blogspot.com/2010/06/blog-post_07.html#comment-form' title='3 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8049618298159816963/posts/default/1681280104677246578'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8049618298159816963/posts/default/1681280104677246578'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://jurmkiduniya.blogspot.com/2010/06/blog-post_07.html' title='बंबई से मुंबई तक'/><author><name>sunil verma</name><uri>http://www.blogger.com/profile/06462864962085848512</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='27' height='32' src='//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiM8mYTF1rSTG5OLwjuKe8ktdZwaNsHWlaRFf283uYibqX2zwZT1C0LITcRz_c-QhdhjEK686quBdQwPl6yirK3P5dvBOclUZ-nAWjIgkhf_dw38PrIOFgSWi-PC_Q-ilg/s113/sunil+pic2.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjyoM2boApiAYKM1PLch-fSapkf20SF6iveM65jyztKkgm7CXo5B-QsZNJapbMY_ms0UGKjX_K2aYNpQFazUx77LFMTXyITaNfx7olX_JQLCBVSitWP3xdf5mbeIQUinwN1dZs0cI2qrcn1/s72-c/Haji-Mastan.jpg" height="72" width="72"/><thr:total>3</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8049618298159816963.post-7913526199426191321</id><published>2018-06-01T09:26:00.000+05:30</published><updated>2018-07-09T16:08:06.487+05:30</updated><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="Underworld and Dawood Ibrahim"/><title type='text'>. . . .ओर पुलिस हवलदार का बेटा अपराध की अंधी गली में चला गया</title><content type='html'>&lt;div dir=&quot;ltr&quot; style=&quot;text-align: left;&quot; trbidi=&quot;on&quot;&gt;
&lt;img alt=&quot;&quot; border=&quot;0&quot; id=&quot;BLOGGER_PHOTO_ID_5480398886352447378&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj7je7jumQzgtXlGAeyRvs8U1vjgXJpVCBsyaB49tgZZ2wHDw9E5sjoxVDlToSk8ClOXoATrdDcvtl7mwIF9U4HpdtUOQzteDO2sYIgHwt5DRSeZVNT0rhwlMgichNp9xfXbpM9V3OnNuc_/s320/dawood-2.jpg&quot; style=&quot;cursor: hand; float: right; height: 320px; margin: 0px 0px 10px 10px; width: 308px;&quot; /&gt;सत्तर के दशक की शुरुआत से ही बंबई के अपराध जगत में अपराध चक्र तेजी से घूमने लगा था। महानगर में पैसे की चकाचौंध और सम्पन्नता को देखकर कई छोटे-छोटे अपराधी गिरोह सिर उठाने लगे थे। इन्ही में से एक था (हाजी मस्तान और वरदा भाई) का चेला दाऊद इब्राहिम। वही दाऊद जो आज अपराध की दुनिया का बेताज बादशाह है और उसके गिरोह को डी-कंपनी के नाम से जाता है। माफिया डॉन दाऊद इब्राहिम के बारे में जानने के लिए आपकों तीन दशक पहले के उस अतीत में ले चलते हैं जब मुंबई को बंबई के नाम से ही पुकारा जाता था और यहां सिर्फ हाजी मस्तान और वरदाभाई का सिक्का चलता था, मुंबई में कमाठीपुरा का इलाका तब छोटे -बड़े अपराधियों की शरणास्थली के रूप में चर्चित था और चारो ओर वेश्याओं का टिड्डी दल फैला हुआ था। उसी कमाठीपुरा के दूसरे छोर पर जे.जे. अस्पताल के निकट एक अंधेरी संकरी सडक़ की मामूली सी इमारत की मामूली सी चाल में सीआईडी पुलिस का हवलदार इब्राहिम कास्कर अपने छह बेटों, चार बेटियों और बीवी के साथ रहा करता था, उसके सपने तो बहुत ऊंचे थे, लेकिन पगार कम होने के कारण सपने कभी पूरे नही हो पाते थे। इन्ही सपनों को अपना बनाने के लिए वह गलत रास्तों पर चल निकला था।&lt;br /&gt;
&lt;a name=&#39;more&#39;&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;
इब्राहिम शेख कास्कर का पिता जिला रत्नागिरी के एक गांव मुमके का रहने वाला था, गरीबी से तंग आकर वह मुंबई चला आया, धीरे धीरे मुस्लिम बहुल इलाके भिंडी बाजार में, जो अपराधियों का एक बहुत बदनाम इलाका भी माना जाता है, वहां जूते की दुकान और हेयर कटिंग सैलून खोल लिए और दुकान में सहायता के लिए गांव से अपने बेटे इब्राहिम शेख कास्कर को बुलवा लिया। लेकिन इब्राहीम कास्कर का मन दुकान में नही लगा। तब वह मुंबई पुलिस में भर्ती हो गया। उस जमाने में पुलिस में नौकरी पाना ज्यादा मुश्किल नही था। इब्राहीम शेख की तैनाती, क्राइम ब्रांच में हुई। वहीं पर उसकी मुलाकात हाजी मस्तान से हो गई और वह उसके लिए काम करने लगा। उसने अपने दो बेटों का नाम पास के ही अहमद रोलर स्कूल में लिखवा दिया। उसके ये दोनों बेटे थे-अनीस इकबाल और अबदुल्ला। जबकि दो बेटों साबिर और दाऊद की दोस्ती पास की एक स्ट्रीट में रहने वाले आलमजेब, अमीरजादा और शाहजादा से हो गई। अमीरजादा और शाहजादा के पिता नवाबजादा खान की थेाड़ी बहुत दुआ सलाम इब्राहीम कास्कर से थी, दाऊद स्कूल में बास्केटबाल का अच्छा खिलाड़ी था और बड़ा होने पर बास्केटबाल चैम्पियन और पुलिस अफसर बनना चाहता था।&lt;br /&gt;
इब्राहिम कास्कर ने 1959 में क्राइम ब्रांच की नौकरी छोड़ दी। लेकिन इससे पहले मनीष मार्केट में एक छोटी सी गुमटी खरीद ली थी। बंबई व्ही.टी. से कुछ ही कदम के फासले पर बंबई पुलिस मुख्यालय के ठीक सामने स्थित क्रार्फड मार्केट के पिछवाड़े की मुख्य सडक़ पर मोस्ता मार्केट, मनीष मार्केट तथा मुसाफिर खाना के इर्द-गिर्द का स्थान तस्करी के सामानों की खुली बिक्री के लिए मशहूर है। यहां पर ताजातरीन इपोटेंड सामान खरीदने वालों का मेला सा लगा रहता है।&lt;br /&gt;
इब्राहिम के अन्डरवल्र्ड संपर्को के कारण साबिर व दाऊद की इंपोर्टेड सामानों से अटी दुकान न केवल चल निकली बल्कि हाजी मस्तान कनेक्शन के कारण उस इलाके में उनका रूतबा भी छाने लगा। दोनों ने हाजी मस्तान के लिए काम करना शुरू कर दिया। यह वह समय था, जब कमाठीपुरा, भिंडी बाजार, मोहम्मद अली रोड तथा डोकरी से लेकर मुसाफिरखाना तक करीम लाला और उनके कांट्रैक्ट किलर्स गिरोह का आतंक फैला हुआ था, पुलिस और अदालतों में विश्वास न रखने वाले लोग अपना काम करने के लिए करीम लाला गिरोह से संपर्क करते थे और भारी रकम काम के बदले में देते थे। बीहड़ समुद्र में अरब देशों से आने वाले सोने से भरी जैकटों को मछलीमार नौकाओं में लादकर समुद्र तट पर उतारने से लेकर गंतव्य तक पहुंचाने में जोखिम बहुत था। लेकिन आमदनी उस ढंग की नहीं थी, जैसी कि ठेके पर काम करने में। (मुंबई की अपराधिक दुनिया में ठेकों पर काम करने को सुपारी देना कहा जाता है जिसमें क्लाइंट गिरोह को काम सौपते समय तक रकम की आधी राशि अग्रिम में देते समय साथ में एक सुपारी भी देते हैं।)&lt;br /&gt;
सुपारी के काम ने दाऊद के बड़े भाई साबिर को इस हद तक रोमांचित किया कि उसने दाऊद, आलमजेब, अमीरजादा, शाहजादा तथा कुछ और साथियों का गिरोह बना कर सुपारी लेना शुरू कर दिया। शुरू में मिली सफलताओं ने उन्हें और भी दुस्साहसी बना दिया। दूसरी तरफ करीमलाला के उम्रदराज हो जाने से उनके भतीजे तथा वारिस समद खान ने उनका काम संभाल लिया। इस तरह से दो सुपारी गिरोहों का नेतृत्व दो दुस्साहसी युवकों के हाथों में आ गया। यहीं से इन दोनों गिरोहों के बीच आपसी टकराव और प्रतिद्वंद्विता का जो बीज पड़ा, वह आगे चलकर हिंसा का वटवृक्ष बन गया। लेकिन तब इसका आभास न तो उन दुस्साहसी युवकों को था और न उनके अभिभावकों को।&lt;br /&gt;
मुंबई में सुपारी देकर काम कराने वालों की कमी नहीं थी। जिस महानगर का सारा व्यवसाय उधारी पर चलता हो और गोदाम ,दुकान तथा फ्लैट बनवाकर किराये पर देकर आधी कमाई करने वालों की तादाद असंख्य हो, वहां उन लोगों की तादाद भी असंख्य होती है, जो पांव जमते ही अमानत में ख्यानत करने पर उतर आते हैं। अदालत में उनसे अपने धन या मकान-गोदाम दुकानों की वापसी के लिए याचिका दायर करने पर समय तो जाया होता ही है अदालती लड़ाई में वकीलों पर पानी की तरह पैसा बहाकर भी उन्हें अपना धन या सम्पत्ति मिलने की गारंटी नहीं होती, जबकि थोड़ी सी रकम और बढ़ाकर वे सुपारी देकर उन्हे वापस पा सकते हैं ऐसे में करीम लाला, समद खान तथा साबिर-दाऊद गिरोह को अपने पांव जमाने में कोई कठिनाई नहीं हुई।&lt;br /&gt;
इसी बीच एक काम में मिली रकम के बंटवारे को लेकर साबिर-दाऊद का अपने गिरोह के तीन सदस्यों आलमजेब, अमीरजादा और शाहजादा से झगड़ा हो गया। इन तीनों को विश्वास था कि साबिर-दाऊद ने बंटवारा इमानदारी से नहीं किया और भारी रकम दाब ली है। तीनो ने अपने कुछ साथियों के साथ दाऊद का गिरोह छोड़ दिया और करीम लाला, समद खान के साथ हो गये। इससे दाऊद गिरोह को झटका लगा, लेकिन दोनों भाइयों ने इसकी परवाह नहीं की और सुपारी और तस्करी के साथ-साथ अपहरण फिरौती का काम भी शुरू कर दिया। 1975 आते-आते उनके कदम कुछ हद तक जम गये थे, लेकिन करीम लाला-समद खान का गिरोह अब भी उनपर भारी पड़ता था। 1975 में गिरोह ने मुसाफिर खाना पर कब्जा कर लिया जहां हज जाने वाले यात्री जहाज से रवाना होने तक ठहरा करते थे उसके तत्कालीन मालिक ने मुसाफिर खाना को खाली करने का ठेका दाऊद को दे दिया दाऊद ने अपने दो साथियों महमूद कालिया और खालिद पहलवान की सहायता से मुसाफिर खाना पर कब्जा कर लिया। तो उसका प्रभाव और बढ़ गया। वोहरा मुसलमानों से भरे उस इलाके में पहले करीम लाला के एक पठान सहयोगी सईद बट्टा का काफी प्रभाव था। लेकिन मुसाफिर खाना विजय के बाद करीम लाला के प्रभाव को काफी धक्का लगा, तो समद खान ने दाऊद के ठेके के काम में टांग अड़ाकर खुद उस पर दांत मारना शुरू कर दिया। उसने एक पार्टी को पटाकर वह जाब खुद ले लिया, जिसमें बतौर कमीशन दाऊद को तीन लाख रूपये नकद मिलने वाले थे। इसी तरह की कई पार्टियां दाऊद के हाथ में आकर भी निकल गईं। इन्हीं में एक था तीन स्वर्ण तस्करों मियां, उमर बख्शी तथा शमशेर का एसाइनमेंट जॉब।&lt;br /&gt;
दुबई से समुद्र तट तक पहुंचे तीन तस्करों के सोने पर कस्टम अधिकारियों ने छापा मारकर उसे कस्टम के स्ट्रांग रूम में जमा करा दिया था। लेकिन तीनों तस्करों को विश्वास था कि 12 लाख रूपये के सोने के बिस्कटों से भरा एक जैकेट एक कस्टम अधिकारी ने चुपचाप खिसका दिया था। उस कस्टम अधिकारी से वह जैकेट बरामद कर उन्हें सौंपने का जॉब साबिर और दाऊद को सौंपा, बदले में 3 लाख रूपये बतौर पारिश्रमिक देने की बात मंजूर की। किसी कारणवश यह जॉब दाऊद गिरोह पूरा नहीं कर सका, तो उन्होंने समद खान से संपर्क किया। समद खान ने आलम जेब और अमीरजादा की सहायता से वह जैकेट लाकर उन तीनों तस्करों को सौंप दिया, तो साबिर और दाऊद बौखला गए।&lt;br /&gt;
12 फरवरी 1979 को साबिर अपने घर से केनेडी ब्रिज के लिए रवाना हुआ, जहां उसकी एक रखैल वैश्या रहती थी, जब वह उसके साथ कार में रवाना हुआ तो अमीरजादा, आलमजेब व जफर एक रेस्तरां में पाव भाजी खा रहे थे, साबिर को देखते ही उन्होनें आंखों में बात की, पाव भाजी छोडक़र वह तुरंत रेस्तरां से बाहर निकले और एक कार में सवार हो उसके पीछे लग लिये। प्रभादेवी पहुंचकर उन्होने एक कार किनारे रोकी और अपनी रिवाल्वर निकालकर प्रभादेवी पैट्रोल पम्प पर कार में पैट्रोल भरवा रहे साबिर पर निशाना साधा और रिवाल्वर के चैंबर खाली करने शुरू कर दिये। साबिर कटे पेड़ की तरह जमीन पर गिर पड़ा, वे कार लेकर मुसाफिर खाना पहुंचे। हां दाऊद के अपने दफ्तर में होने की उम्मीद थी वहां पहुंचते ही उन्होंने बाहर से अंधा धुंध फायरिंग शुरू कर दी। भीतर मौजूद खालिद पहलवान ने जवाबी फायरिंग शुरू की तो एक गोली आलमजेब की टांग में लगी और वह गिर पड़ा। तब फायरिंग रोककर वे सब भाग खड़े हुए। साबिर की हत्या की खबर मिलते ही दाऊद सचमुच पागल सा हो गया। उसने और उसके गिरोह ने समद खान ,अमीरजादा के सभी ठिकानों पर हमले किये, लेकिन पहले से ही सतर्क गिरोह के सभी लोग अंडरग्राउंड हो गये थे। आलमजेब-अमीरजादा से सलाम दुआ का रिश्ता रखनेवाले जो भी उनके सामने पड़े उनकी बुरी तरह से धुनाई की। आलमजेब और अमीरजादा जिस गली में रहते थे, वहां खड़ी टैक्सियों में आग लगा दी, उन्होने उन्हें मुफ्त पान खिलाने वाला पनवाड़ी को भी नहीं बख्शा, लेकिन असली मुजरिम तो साबिर की हत्या होते ही फुर्र हो गये थे।&lt;br /&gt;
दो गिरोहों की जानलेवा दुश्मनी, ऊपर से कस्टम तथा मुंबई पुलिस के बढ़ते दबाव के कारण दाऊद के तस्करी व्यापार पर बुरी तरह से असर पड़ा था और उसके लिए मुंबई सुरक्षित स्थान भी नहीं रह गया था, न व्यवसाय के लिहाज से और न ही सुरक्षा की दृष्टि से ऐसे में उसकी निगाह गुजरात के सुनसान सागर तटों पर गयी। जहां कभी तस्कर सम्राट सख नारायण बखिया का एकक्षत्र साम्राज्य था और कस्टम अधिकारी भी उस पर हाथ नही डाल पाते थे। उसने तुरंत बखिया के दायें हाथ लल्लू जोगी से दमण जाकर मुलाकात की। बखिया की गिरफ्तारी के बाद लल्लू जोगी भी अकेला पड़ गया था। दाऊद ने दुबई के शेख हाजी अशरफ के साथ लल्लू जोगी की मीटिंग कराकर एक गिरोह की स्थापना की, जिसके तहत विभिन्न देशों से सोने का जुगाड़ करने की जिम्मेदारी शेख हाजी असरफ की, द्रमण में सोना उतार कर निर्धारित जगहों पर पहुंचाने का काम लल्लू जोगी का तथा दुबई से गुजरात तक सोना तथा दूसरे सामान पहुचाने,सोने के बदले में भुगतान आदि की जिम्मेदारी तथा पूरा ऑपरेशन दाऊद को सौंपा गया। इस तरह तिलंगे तस्करों का व्यापार तब तक निर्विधन चलता रहा, जब तक दयाशंकर वहां कस्टम कलक्टर बनकर नहीं आ गए। उनकी घेरेबंदी से घबराकर दाऊद को दमण का सुरक्षित तट छोडक़र जामनगर के तट पर अपना कारोबार जमाना पड़ा। उसने वहां का काम संभालने की जिम्मेदारी जस्सू पटेल तथा जाखू काटा पर सौंपी। ताकि वह अपना ध्यान दुबई में स्थापित कारोबार संभालने में लगा सके। उसने वहां पर गारमेंट फैक्ट्री, ताजी खाद्य सामग्री और गोश्त के अलावा इलेक्ट्रॉनिक्स सामानों के आयात का काम भी शुरू कर दिया था। अभी तक ऊपर से शांत दिख रहा दाऊद आलमजेब को भूला नहीं था। दाऊद को मुंबई पुलिस पर विश्वास नहीं रह गया था। दाऊद की यह भी शिकायत थी कि साबिर के हत्यारों का नाम पता मालूम होने के बाद भी पुलिस ने किसी भी मुजरिम को गिरफ्तार नहीं किया था। किन्तु कुछ समय बाद जब अमीरजादा ने शक्ति फिल्म (दिलीप कुमार, अमिताभ बच्चन, राखी एवं स्मिता पाटिल) के निर्माता मुशीर रियाज का अपहरण फिरौती के लिए किया, तो वही पुलिस तत्काल हरकत में आ गयी और अमीरजादा को 29 फरवरी 82 को गिरफ्तार कर लिया।&lt;br /&gt;
6 सितम्बर 1983 को जब अमीरजादा को पुलिस की कड़ी निगरानी में सेशन जज एस.वाई.जोशी की अदालत में जफर अली के साथ पेश किया गया तो दर्शकों की दीर्घा में बैठा डेविड परदेसी उठा और रिवाल्वर निकालकर प्वाईंट रेंज से अमीरजादा पर फायर किया। फिर अदालत में भगदड़ का फायदा उठाकर भागा लेकिन अदालत में बैठे इंस्पेक्टर इसाक बागवान ने उसके पैरों का निशाना साधकर गोली चलायी। वह गिर पड़ा और पुलिस ने उसे दबोच लिया। भरी अदालत में अमीरजादा की हत्या होते ही आलमजेब भाग निकला और कच्छ (गुजरात) पहुंचकर एक अपराध में अपने को गिरफ्तार करवा दिया ताकि वहां पर सुरक्षित रह सके। हत्या के वक्त छोटा राजन के साथ अदालत में मौजूद दाऊद भी वहां से चुपचाप खिसक गया। पुलिस ने क्या तहकीकात की यह तो पता नहीं लेकिन समद खान गिरोह ने पता लगा लिया कि दाऊद ने वरदा भाई के कभी दायें हाथ रह चुके राजन नायर को अमीरजादा की हत्या के लिए सुपारी दी थी और डेविड परदेसी उसी का शूटर था। &lt;br /&gt;
(मुंबई के जरायम सिंडीेकेट के बीच मारकाट अब खूनी इंतकाम में बदल चुकी थी। आगे आपकों बताएंगें किस तरह दाउद ने अपने दुश्मनों का सफाया करके डॉन की पदवी हासिल की)&lt;/div&gt;
</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://jurmkiduniya.blogspot.com/feeds/7913526199426191321/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://jurmkiduniya.blogspot.com/2010/06/uu-aecua-auuiuu-oau-auus-e-se-ue-u.html#comment-form' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8049618298159816963/posts/default/7913526199426191321'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8049618298159816963/posts/default/7913526199426191321'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://jurmkiduniya.blogspot.com/2010/06/uu-aecua-auuiuu-oau-auus-e-se-ue-u.html' title='. . . .ओर पुलिस हवलदार का बेटा अपराध की अंधी गली में चला गया'/><author><name>sunil verma</name><uri>http://www.blogger.com/profile/06462864962085848512</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='27' height='32' src='//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiM8mYTF1rSTG5OLwjuKe8ktdZwaNsHWlaRFf283uYibqX2zwZT1C0LITcRz_c-QhdhjEK686quBdQwPl6yirK3P5dvBOclUZ-nAWjIgkhf_dw38PrIOFgSWi-PC_Q-ilg/s113/sunil+pic2.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj7je7jumQzgtXlGAeyRvs8U1vjgXJpVCBsyaB49tgZZ2wHDw9E5sjoxVDlToSk8ClOXoATrdDcvtl7mwIF9U4HpdtUOQzteDO2sYIgHwt5DRSeZVNT0rhwlMgichNp9xfXbpM9V3OnNuc_/s72-c/dawood-2.jpg" height="72" width="72"/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8049618298159816963.post-5868344266019554236</id><published>2018-06-01T09:25:00.000+05:30</published><updated>2018-06-07T19:18:28.351+05:30</updated><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="True Story"/><title type='text'>वीआईपी का शिकार करने वाली खूबसरत हसीना</title><content type='html'>&lt;div dir=&quot;ltr&quot; style=&quot;text-align: left;&quot; trbidi=&quot;on&quot;&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: .0001pt; margin-bottom: 0cm;&quot;&gt;
&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;सुनील वर्मा की&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt; line-height: 115%;&quot;&gt;रिपोर्ट&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: .0001pt; margin-bottom: 0cm;&quot;&gt;
&lt;span lang=&quot;EN-US&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;br /&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;table align=&quot;center&quot; cellpadding=&quot;0&quot; cellspacing=&quot;0&quot; class=&quot;tr-caption-container&quot; style=&quot;float: left; margin-right: 1em; text-align: left;&quot;&gt;&lt;tbody&gt;
&lt;tr&gt;&lt;td style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiHOk4sZCluUAFu6s2LEMmhZZRvoFbaxkmcHd1KfwvSTD3jxqoYl9-8_TviMi6UsgyRGaOG4DrBCJeKSabcfN5NgKA4S6pHLUAfgR_ECBwvCMdfRJPhv_2vyKAvF8p6tiUjbxMbPSgpJIZF/s1600/%25E0%25A4%25AE%25E0%25A5%258B%25E0%25A4%25A8%25E0%25A4%25BF%25E0%25A4%2595%25E0%25A4%25BE+%25E0%25A4%259A%25E0%25A5%258C%25E0%25A4%25A7%25E0%25A4%25B0%25E0%25A5%2580+1.jpg&quot; imageanchor=&quot;1&quot; style=&quot;margin-left: auto; margin-right: auto;&quot;&gt;&lt;img border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;1178&quot; data-original-width=&quot;1181&quot; height=&quot;318&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiHOk4sZCluUAFu6s2LEMmhZZRvoFbaxkmcHd1KfwvSTD3jxqoYl9-8_TviMi6UsgyRGaOG4DrBCJeKSabcfN5NgKA4S6pHLUAfgR_ECBwvCMdfRJPhv_2vyKAvF8p6tiUjbxMbPSgpJIZF/s320/%25E0%25A4%25AE%25E0%25A5%258B%25E0%25A4%25A8%25E0%25A4%25BF%25E0%25A4%2595%25E0%25A4%25BE+%25E0%25A4%259A%25E0%25A5%258C%25E0%25A4%25A7%25E0%25A4%25B0%25E0%25A5%2580+1.jpg&quot; width=&quot;320&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;
&lt;tr&gt;&lt;td class=&quot;tr-caption&quot; style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: red;&quot;&gt;मोनिका चौधरी&lt;/span&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;
&lt;/tbody&gt;&lt;/table&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: .0001pt; margin-bottom: 0cm;&quot;&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12pt; text-align: justify;&quot;&gt;गुजरात के वलसाड़ से भाजपा सांसद केसी पटेल ने &lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12pt; text-align: justify;&quot;&gt;28 &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12pt; text-align: justify;&quot;&gt;अप्रैल को दिल्‍ली के पुलिस आयुक्‍त अमूल्‍य पटनायक से मुलाकात की और उन्‍हें
बताया कि मोनिका नाम की एक महिला पिछले कुछ दिनों से उन्‍हें ब्‍लैकमेल कर पांच
करोड रूपये की मांग कर रही है। मामला केन्‍द्रीय सत्‍ता के एक सांसद से जुड़ा था
लिहाजा पुलिस आयुक्‍त ने तत्‍काल नई दिल्‍ली रेंज के विशेष आयुक्‍त मुकेश कुमार
मीणा को अपने पास ही बुला लिया। मुकेश मीणा को सांसद पटेल ने विस्‍तार से बताया कि
कुछ दिनों से उनके संपर्क में आयी मोनिका चौधरी नाम की महिला ने उनसे जान पहचान
बढ़ाने के बाद उन्‍हें इंदिरापुरम में अपने घर पर डिनर के लिए बुलाया और वहां उनके
खाने में नशा मिलाकर उन्‍हें बेहोश कर दिया । बाद में मोनिका ने बेहोशी की अवस्‍था
में उनकी आपत्तिजनक फोटो खींची और अश्‍लील वीडिया भी बना ली। इन्‍हीं वीडियों को
सार्वजनिक करने और इंटरनेट पर अपलोड करने की धमकी देकर वह उनसे पांच करोड़ रूपये
की मांग कर रही है। सांसद पटेल ने मुकेश मीणा से स्‍पष्‍ट बता दिया कि मोनिका से
उनकी मुलाकात पहले सु्प्रीम कोर्ट में हुई थी जहां वे अपने एक केस के सिलसिले में
गए थे। बाद में महिला ने उनका नंबर लेकर दो चार बात उनसे बातचीत की और फिर उनके
सरकारी आवास नर्मदा अपार्टमेंट पर आना जाना शुरू कर दिया। चूंकि मोनिका खुद को
वकील और वकालत के सम्‍मानित पेशे से जुड़ा बताती थी इसलिए वे भी उसे महत्‍व देते
थे। लेकिन उन्‍हें नहीं पता था कि वह एक ब्‍लैकमेलर है। सांसद पटेल ने बताया कि
मोनिका के साथ दो लोग व एक महिला भी जुड़े जो उसके साथ एक दो बार उनके यहां आये
थे।&lt;span style=&quot;mso-spacerun: yes;&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: .0001pt; margin-bottom: 0cm; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: .0001pt; margin-bottom: 0cm; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;विशेष आयुक्‍त मुकेश मीणा ने नॉर्थ एवेन्यू थाने में युवती
के खिलाफ मामला दर्ज कराया कि उसने अपने फ्लैट पर चाय में नशीला पदार्थ मिलाकर
उन्हें बेहोश किया और आपत्तिजनक वीडियो और फोटोग्राफ तैयार किए। बाद में युवती ने
इसके बदले सात करोड़ रुपये की डिमांड की। &lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: .0001pt; margin-bottom: 0cm; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;मुकेश मीणा ने तत्‍काल नई दिल्‍ली जिले के डीसीपी बी
के सिंह इलाके नार्थ एवेन्‍यू थाने के एसएचओ तथा एसीपी सुधीर गोस्‍वामी को अपने
कार्यालय में बुलाया तथा उन्‍हें सासंद के सी पटेल की शिकायत से अवगत कराने के बाद
तत्‍काल मामला दर्ज कर कार्यवाही करने के लिए कहा।&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: .0001pt; margin-bottom: 0cm; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;नई दिल्‍ली डीसीपी बी के सिंह ने सांसद पटेल की शिकायत
पर अपराध संख्‍या 93 पर जबरन वसूली और ब्‍लैकमेलिंग की एफआईआर दर्ज कर ली इसके बाद
एसीपी सुधीर गोस्‍वामी की निगरानी में एक विशेष जांच टीम का गठन किया साथ ही पुलिस
टीम को निर्देश दिया कि पूरी कार्रवाई को गोपनीय रखा जाए। पुलिस टीम ने सांसद पटेल
को किए गए फोन की कॉल डिटेल निकलवाने और उसमें आयी धमकी भरी कॉल की रिकाड्रिंग को
अपने कब्‍जे में लेकर शिकायत की पुष्टि कर ली तो पुलिस टीम ने उत्‍तर प्रदेश के
गाजियाबाद की इंदिरापुरम कालोनी के नीति खंड के एक अपार्टमेंट में तीन बैडरूम के
घर पर छापा मारा।&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;EN-US&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;table cellpadding=&quot;0&quot; cellspacing=&quot;0&quot; class=&quot;tr-caption-container&quot; style=&quot;float: left; margin-right: 1em; text-align: left;&quot;&gt;&lt;tbody&gt;
&lt;tr&gt;&lt;td style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhgJofhfrQ9Epxq63aCd1Qlx35NfCA7xswis6TAtU6W2-jDAzj6utI48jX8oh_6Ywv7dktJvgDJsIQZTGrg7QbQ2iUPMTw-5sd3GjM2bkaJHUAQYUv3fcVqzNvJrU_jcfHs6Ip21juMHk1E/s1600/monika+choudhry+2.jpg&quot; imageanchor=&quot;1&quot; style=&quot;clear: left; margin-bottom: 1em; margin-left: auto; margin-right: auto;&quot;&gt;&lt;img border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;1267&quot; data-original-width=&quot;1161&quot; height=&quot;320&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhgJofhfrQ9Epxq63aCd1Qlx35NfCA7xswis6TAtU6W2-jDAzj6utI48jX8oh_6Ywv7dktJvgDJsIQZTGrg7QbQ2iUPMTw-5sd3GjM2bkaJHUAQYUv3fcVqzNvJrU_jcfHs6Ip21juMHk1E/s320/monika+choudhry+2.jpg&quot; width=&quot;293&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;
&lt;tr&gt;&lt;td class=&quot;tr-caption&quot; style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: red;&quot;&gt;मोनिका चौधरी&lt;/span&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;
&lt;/tbody&gt;&lt;/table&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: .0001pt; margin-bottom: 0cm; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;मोनिका चौधरी पुत्री सुरेश पाल&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;मूल निवासी खांजापुर&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;थाना शहर कोतवाली
मुजफ्फरनगर है&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;,&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt; इंदिरापुरम स्थित अपने किराए के इसी घर में अकेली रहती थी।
महिला पुलिस ने मोनिका को अपनी गिरफ़त में ले लिया। और इसके बाद मकान की तलाशी ली।
तलाशी और छानबीन में पुलिस को कई अहम सबूत मिले हैं। वहां से &lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;500&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt; जीबी का एक डीबीआर
बरामद हुआ है। बरामद डीबीआर को फोरेंसिंक जांच के लिए भेज दिया गया है। पुलिस को
शक है कि इस डीवीआर में कई नेताओं हाईप्रोफाइल लोगों का स्टिंग हो सकता है&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;इसके अलावा घर के
अंदर ही सीसीटीवी कंट्रोल रूम बना हुआ था&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;जिसके जरिये सीसीटीवी कैमरों
को कंट्रोल और उनके जरिये वीडियो रिकॉर्डिंग होती थी।&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: .0001pt; margin-bottom: 0cm; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;इतना ही नही वहां से कई ऐसे दस्‍तावेज और सामान भी मिले जिसे देखकर पुलिस की
आखें खुली रह गई। महिला के &lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;6&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt; बैंक अकाउंट से संबधित
कागजात जैसे पास बुक और चेकबुक के अलावा जमा रशीदे और तीन लग्जरी कारों के पेपर
बरामद हुए। घर के बैडरूम की तलाशी में &lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;28&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt; कंडोम के पैकेट और वियाग्रा
की कुछ भरी व कुछ खाली शीशियां भी मिली हैं। इसके अलावा घर से कुछ डायरिया और
कागजात तथा ऐसे विजिटिंग कार्ड मिलें जिन्‍हें देख पुलिस चौंक गई। ज्‍यादातर
विजिंटिंग कार्ड पुलिसकर्मियों&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;नेताओं सांसदों, वकीलों और
कारपोरेट कंपनियों के थे। जो कार्ड मिलें उनमें से करीब 18 विजिटिंग कार्ड बीजेपी
सांसदों व नेताओं के थे। दिलचस्‍प बात ये थी कि महिला के घर की तलाशी में गृह
मंत्रालय के कई अधिकारियों के भी विजिंटिंग कार्ड मिले थे। मोनिका की &lt;span style=&quot;mso-spacerun: yes;&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;डायरी व मोबाइल में भी उनके नंबर व नंबर दर्ज
थे। मोनिका ने पुलिस को पूछताछ में बताया उसके पास से जिन नेताओं और आधिकारियों के
विजिंटिग कार्ड में मिले हैं वह काम के सिलसिले में उनसे मिलने आती जाती थी। मोनिका
ने बताया कि वकालत के पेशें में होंने के कारण उसका नेताओं और अधिकारियों सभी से
मिलना जुलना रहता है इसीलिए गृह मंत्रालय में भी उसका आना-जाना था। वहां के कुछ
अफसरों से भी उसकी जान पहचान है। &lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: .0001pt; margin-bottom: 0cm; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;कार्यशैली &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;b&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;
&lt;table cellpadding=&quot;0&quot; cellspacing=&quot;0&quot; class=&quot;tr-caption-container&quot; style=&quot;float: right; margin-left: 1em; text-align: right;&quot;&gt;&lt;tbody&gt;
&lt;tr&gt;&lt;td style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj4sQflNLSAObS0xhC8HQgVR4MR6C_5dH2WJyMtVzstMWLeOiUNTIeHocBdTO8c3dW_SXKZOLxfl5QW45oUJCFCwLhE-8itfQkk8bSqYIezkzKmaqgcBl8t6bHD-AzspZnqgKGvZAVZRuIt/s1600/%25E0%25A4%25AC%25E0%25A5%2580%25E0%25A4%259C%25E0%25A5%2587%25E0%25A4%25AA%25E0%25A5%2580+%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%2587+%25E0%25A4%25B2%25E0%25A4%25BF%25E0%25A4%258F+%25E0%25A4%2589%25E0%25A4%25B8%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%2580+%25E0%25A4%259F%25E0%25A5%258B%25E0%25A4%25AA%25E0%25A5%2580+%25E0%25A4%2594%25E0%25A4%25B0+%25E0%25A4%25AA%25E0%25A4%259F%25E0%25A4%2595%25E0%25A4%25BE+%25E0%25A4%25AA%25E0%25A4%25B9%25E0%25A4%25A8%25E0%25A4%2595%25E0%25A4%25B0+%25E0%25A4%25AA%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B0%25E0%25A4%259A%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25B0+%25E0%25A4%2595%25E0%25A4%25B0%25E0%25A4%25A4%25E0%25A5%2580+%25E0%25A4%25B9%25E0%25A5%2581%25E0%25A4%2588+%25E0%25A4%25AE%25E0%25A5%258B%25E0%25A4%25A8%25E0%25A4%25BF%25E0%25A4%2595%25E0%25A4%25BE+%25E0%25A4%259A%25E0%25A5%258C%25E0%25A4%25A7%25E0%25A4%25B0%25E0%25A5%2580.jpg&quot; imageanchor=&quot;1&quot; style=&quot;clear: right; margin-bottom: 1em; margin-left: auto; margin-right: auto;&quot;&gt;&lt;img border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;1600&quot; data-original-width=&quot;1359&quot; height=&quot;320&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj4sQflNLSAObS0xhC8HQgVR4MR6C_5dH2WJyMtVzstMWLeOiUNTIeHocBdTO8c3dW_SXKZOLxfl5QW45oUJCFCwLhE-8itfQkk8bSqYIezkzKmaqgcBl8t6bHD-AzspZnqgKGvZAVZRuIt/s320/%25E0%25A4%25AC%25E0%25A5%2580%25E0%25A4%259C%25E0%25A5%2587%25E0%25A4%25AA%25E0%25A5%2580+%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%2587+%25E0%25A4%25B2%25E0%25A4%25BF%25E0%25A4%258F+%25E0%25A4%2589%25E0%25A4%25B8%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%2580+%25E0%25A4%259F%25E0%25A5%258B%25E0%25A4%25AA%25E0%25A5%2580+%25E0%25A4%2594%25E0%25A4%25B0+%25E0%25A4%25AA%25E0%25A4%259F%25E0%25A4%2595%25E0%25A4%25BE+%25E0%25A4%25AA%25E0%25A4%25B9%25E0%25A4%25A8%25E0%25A4%2595%25E0%25A4%25B0+%25E0%25A4%25AA%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B0%25E0%25A4%259A%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25B0+%25E0%25A4%2595%25E0%25A4%25B0%25E0%25A4%25A4%25E0%25A5%2580+%25E0%25A4%25B9%25E0%25A5%2581%25E0%25A4%2588+%25E0%25A4%25AE%25E0%25A5%258B%25E0%25A4%25A8%25E0%25A4%25BF%25E0%25A4%2595%25E0%25A4%25BE+%25E0%25A4%259A%25E0%25A5%258C%25E0%25A4%25A7%25E0%25A4%25B0%25E0%25A5%2580.jpg&quot; width=&quot;271&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;
&lt;tr&gt;&lt;td class=&quot;tr-caption&quot; style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: red;&quot;&gt;मोनिका चौधरी&lt;/span&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;
&lt;/tbody&gt;&lt;/table&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: .0001pt; margin-bottom: 0cm; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;पुलिस नार्थ एवेन्‍यू थाने लाकर मोनिका के खिलाफ आवश्‍यक लिखा पढ़ी की
कार्रवाई की और अगली सुबह एक मई को उसे पटियाला हाउस कोर्ट में न्‍यायिक मजिस्‍टेट
की अदालत में पेश कर पांच दिन की पुलिस रिमांड पर ले लिया। इसके बाद जब मोनिका से पूछताछ
का सिलसिला शुरू हुआ तो एक के बाद एक चौकाने वाले खुलासे होते गए। मोनिका की
कार्यशैली के बारे में जानकर पुलिस हैरान रह गई। नेताओं से मोनिका की अच्छी खासी
जान पहचान थी और वह जान पहचान वाले नेता के यहां अक्‍सर जाती रहती थी। और वहां
उनसे मिलने आए दूसरे नेताओं तथा अधिकारियों से बातों-बातों में उनके मोबाइल नंबर तथा
विजिटिंग कार्ड ले लेती थी। इसके बाद फोन पर उनसे बातचीत का सिलसिला शुरू होता और
बाद में सिलसिला दोस्‍ती और मिलने मिलाने तक पहुंच जाता। मोनिका का कहना है कि दो
चार बार बातचीत के बाद ही उसे पता लगा जाता था कि उसके शिकार की महिलाओं से दोस्‍ती
में दिलचस्‍पी है या नहीं। वह ज्‍यादातर अधिक उम्र के लोगों को ही शिकार बनाने की
कोशिश करती। अगर शिकार मालदार या काम का होता था तो दोस्‍ती का सिलसिला आगे बढ़ाया
जाता अन्‍यथा संबधों को औपचारिक बातचीत तक सीमित कर दिया जाता । नेताओं तथा
अधिकारियों से दोस्‍ती और प्रगाढता सिर्फ उनसे दोस्‍ती गांठकर उन्‍हें ब्‍लैक मेल
करने के लिए ही नहीं की जाती थी बल्कि दलाली और लाइजनिंग करने के लिए भी उन संबधों
का इस्‍तेमाल किया जाता था। हां इसी दौरान जब प्रगाढ़ता बढ़ जाती थी और रिश्‍ते
शारीरिक मेल मिलाप तक पहुंच जाते थे। जब भी मोनिका किसी दोस्‍त या शिकार के साथ
घनिष्‍ठता के रिश्‍ते बनाती थी तो उसकी कोशिश होती ठिकाना उसका फ़लैट ही हो क्‍योंकि
वहां उसका खुफिया कैमरों को पूरा सैटअप लगा था और एकांत में बने रिश्‍ते की पूरी
रिकार्डिंग आसानी से हो जाती थी। पुलिस बताती है कि आमतौर पर मोनिका तथा उसके
गिरोह की दूसरी लड़की उस समय तक अपने शिकार को ब्‍लैकमेल नही करते थे जब‍ तक वे
उनके दलाली के काम आसानी से करने में मदद करते थे। लेकिन जब वे आनाकानी करते या
उन्‍हें लगता कि वे उनकी कोर्इ मदद नहीं कर सकते तो मोनिका और अजयपाल तय करते कि
शिकार से ब्‍लैकमेल कर कैसे और कितनी रकम ऐंठी जायें। वैसे ब्‍लैकमेल करने के लिए
गिरोह के लोग उन्हीं को चुनते थे समाज में जिनकी बड़ी प्रतिष्‍ठा होती थी या उन्‍हें
अपनी सीडी के सार्वजनिक होंने पर राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन खत्‍म होंने का डर
होता था। ऐसे शिकार आसानी से सौदेबाजी कर मनचाहा पैसा दे देते थे। मोनिका &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;सांसदों से
पहले नौकरी दिलाने या किसी दूसरी तरह की मदद मांगती और बातों के जरिए उन्हें अपने
जाल में फंसा लेती इसके बाद वह चाय या डिनर के बहाने अपने घर ले जाती और फिर खुद
ही ऐसे हालात पैदा कर देती कि उसके साथ आपत्तिजनक में हो बस वह ऐसी ही स्थिति की
तस्वीरें या वीडियोज बना लेती । इसके बाद उन्हें पैसा देने या बड़ी नौकरी की मांग करती।
अगर कोई ऐसा करने से मना करता है तो वह फर्जी रेप केस करने की धमकी देती है। जैसा
कि के सी पटेल के साथ हुआ। &lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;table cellpadding=&quot;0&quot; cellspacing=&quot;0&quot; class=&quot;tr-caption-container&quot; style=&quot;float: left; margin-right: 1em; text-align: left;&quot;&gt;&lt;tbody&gt;
&lt;tr&gt;&lt;td style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgXXrARIRCBg70xEUlDhJorvfMfF70WVniWogUC-V0VS3S6402ZkK8LTxzIjGWQs5oV1oTW2XoRX7fM9IThwcVVIwDCrTlCTjNqGsDa8knOlM_lVy0fJbxP-Ij286iDI7NVaibl5t56wtGo/s1600/%25E0%25A4%25AE%25E0%25A5%258B%25E0%25A4%25A8%25E0%25A4%25BF%25E0%25A4%2595%25E0%25A4%25BE+%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%2587+%25E0%25A4%25A0%25E0%25A4%25B9%25E0%25A4%25B0%25E0%25A4%25A8%25E0%25A5%2587+%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%2587+%25E0%25A4%25B2%25E0%25A4%25BF%25E0%25A4%258F+%25E0%25A4%25B8%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%2582%25E0%25A4%25B8%25E0%25A4%25A6+%25E0%25A4%25AA%25E0%25A4%259F%25E0%25A5%2587%25E0%25A4%25B2+%25E0%25A4%25A8%25E0%25A5%2587++%25E0%25A4%2585%25E0%25A4%25AA%25E0%25A4%25A8%25E0%25A5%2587+%25E0%25A4%25B2%25E0%25A5%2587%25E0%25A4%259F%25E0%25A4%25B0+%25E0%25A4%25B9%25E0%25A5%2588%25E0%25A4%25A1+%25E0%25A4%25AA%25E0%25A4%25B0+%25E0%25A4%25B2%25E0%25A4%25BF%25E0%25A4%2596%25E0%25A4%25BE+%25E0%25A4%25A5%25E0%25A4%25BE+%25E0%25A4%25AA%25E0%25A4%25A4%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B0.jpeg&quot; imageanchor=&quot;1&quot; style=&quot;clear: left; margin-bottom: 1em; margin-left: auto; margin-right: auto;&quot;&gt;&lt;img border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;421&quot; data-original-width=&quot;749&quot; height=&quot;179&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgXXrARIRCBg70xEUlDhJorvfMfF70WVniWogUC-V0VS3S6402ZkK8LTxzIjGWQs5oV1oTW2XoRX7fM9IThwcVVIwDCrTlCTjNqGsDa8knOlM_lVy0fJbxP-Ij286iDI7NVaibl5t56wtGo/s320/%25E0%25A4%25AE%25E0%25A5%258B%25E0%25A4%25A8%25E0%25A4%25BF%25E0%25A4%2595%25E0%25A4%25BE+%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%2587+%25E0%25A4%25A0%25E0%25A4%25B9%25E0%25A4%25B0%25E0%25A4%25A8%25E0%25A5%2587+%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%2587+%25E0%25A4%25B2%25E0%25A4%25BF%25E0%25A4%258F+%25E0%25A4%25B8%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%2582%25E0%25A4%25B8%25E0%25A4%25A6+%25E0%25A4%25AA%25E0%25A4%259F%25E0%25A5%2587%25E0%25A4%25B2+%25E0%25A4%25A8%25E0%25A5%2587++%25E0%25A4%2585%25E0%25A4%25AA%25E0%25A4%25A8%25E0%25A5%2587+%25E0%25A4%25B2%25E0%25A5%2587%25E0%25A4%259F%25E0%25A4%25B0+%25E0%25A4%25B9%25E0%25A5%2588%25E0%25A4%25A1+%25E0%25A4%25AA%25E0%25A4%25B0+%25E0%25A4%25B2%25E0%25A4%25BF%25E0%25A4%2596%25E0%25A4%25BE+%25E0%25A4%25A5%25E0%25A4%25BE+%25E0%25A4%25AA%25E0%25A4%25A4%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B0.jpeg&quot; width=&quot;320&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;
&lt;tr&gt;&lt;td class=&quot;tr-caption&quot; style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: red;&quot;&gt;सांसद के सी पटेल&lt;/span&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;
&lt;/tbody&gt;&lt;/table&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: .0001pt; margin-bottom: 0cm; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;वैसे पुलिस को जांच के बाद में यह भी पता चला है कि सांसद केसी पटेल ने अपने
सरकारी लेटर हेड पर वीपी हाउस में एक महिला के नाम पर दो रूम सेट बुक करने का
आवेदन किया था। यह लेटर &lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;10&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt; मार्च &lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;2017&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt; का है&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;जिसमें सांसद केसी
पटेल की ओर से महिला को अपना गेस्ट बताते हुए &lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;1&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt; महीने के लिए रूम बुक करने
की बात कही गई है।&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: .0001pt; margin-bottom: 0cm; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;&lt;br /&gt;मोनिका का बयान &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;b&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: .0001pt; margin-bottom: 0cm; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;हांलाकि मीडिया से बातचीत और पुलिस को दिए बयान में मोनिका चौधरी उर्फ मीनू ने
सांसद केसी पटेल के सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए बताया कि उन्होंने उसे
डरा-धमकाकर कई बार उसके साथ रेप किया था। मोनिका का कहना है कि वह पेशे से वकील है
और सुप्रीम कोर्ट में चल रहे एक मामले में उसकी मुलाकात सांसद केसी पटेल से हुई थी।
उसी केस के सिलसिले में सांसद ने उसे अपने &lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;604, &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;नर्मदा अपार्टमेंट पर
बुलाया था। वहां के सी पटेल ने उससे इधर उधर की बातचीत की और उसके साथ आत्‍मीयता
दर्शाने के बाद उसे अपने बैडरूम में ले जाकर उसके साथ रेप किया और उसे मुंह खोलने
पर जान से मारने की धमकी दी। मोनिका के बयान के मुताबिक सांसद ने उससे कहा&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;‘तुम हमें जानती
नहीं हो। हमारी केंद्र में सरकार है&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;गुजरात में है&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;उत्तर प्रदेश में भी
हमारी सरकार है। हम जैसा चाहेंगे वैसा करेंगे।’ &lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: .0001pt; margin-bottom: 0cm; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;मोनिका का कहना है कि वह सांसद के सी पटेल की धमकी से बहुत डर गई थी। जिसके
कारण सांसद ने इसके बाद भी कई बार अपने फ्लैट पर बुलाकर उसके साथ रेप किया था।
केसी पटेल डिनर करने के बहाने उसके गाजियाबाद स्थित घर पर भी आए थे। वहां भी
उन्होंने उसके साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाए। मोनिका का कहना है कि &lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;28&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt; मार्च को उसने अपने
बचाव में सांसद का सेक्स वीडियो बनाया था। उसके बाद मोनिका ने सांसद केसी पटेल से कहा
कि तुमने मेरा बहुत शोषण कर लिया&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;अब मैं पुलिस में तुम्हारी
शिकायत करूंगी।&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: .0001pt; margin-bottom: 0cm; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;मोनिका के मुताबिक इसके बाद सांसद केसी पटेल ने उसे देख लेने की धमकी दी और
कहा कि अगर तुमने ऐसा किया तो तुमकों जेल में सड़वा दूंगा। &lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;15&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt; अप्रैल को उसने
सांसद के खिलाफ पुलिस में नार्थ एवेंन्‍यू थाने में अपने साथ हुई पूरी घटना की
लिखित शिकायत देकर सांसद पटेल के खिलाफ रेप का मामला दर्ज कराने की कोशिश की लेकिन
पुलिस ने सांसद पटेल के खिलाफ मामला दर्ज नहीं किया गया। 20 मार्च को उसने फिर एक
बार ये प्रयास किया। लेकिन फिर भी सफलता नहीं मिली तो उसने सांसद को फोन किया कि
वह अब&lt;span style=&quot;mso-spacerun: yes;&quot;&gt;&amp;nbsp; &lt;/span&gt;उनके खिलाफ कोर्ट के जरिए उनके
खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाएगी। मोनिका के मुताबिक उसने पटियाला हाउस कोर्ट में अपर
मुख्‍य न्‍यायिक मजिस्‍ट्रेट की अदालत में सांसद के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की
अर्जी दाखिल भी कर दी थी। कोर्ट ने नई दिल्‍ली जिला पुलिस से इस बार में जवाब
मांगने के लिए नोटिस भी जारी कर दिया था। लेकिन पुलिस के आला अफसरों तथा सांसद
पटेल को इसकी भनक लग गई।&lt;span style=&quot;mso-spacerun: yes;&quot;&gt;&amp;nbsp; &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: .0001pt; margin-bottom: 0cm; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;इसके बाद उलटा उस पर केस दर्ज नहीं कराने के लिए दबाव बनाया जाने लगा। पुलिस
खुद उससे ऐसे पूछताछ करने लगी जैसे कि वह अपराधी हो और सांसद पीडित़। मोनिका के
मुताबिक जब सांसद तथा उनके दबाव मे काम कर रही पुलिस ने देखा कि उनका दबाव काम
नहीं करेगा तो सांसद पटेल ने उसके खिलाफ उल्‍टे ब्‍लैकमेल करके पांच करोड़ रूपए
मांगने की झूठी रिपोर्ट दर्ज करवा दी। मोनिका चौधरी का कहना है कि उसका न तो कोई
गैंग है और न ही उसने सांसद का पैसे के लिए कोई फोन किया। &lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: .0001pt; margin-bottom: 0cm; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;मोनिका का कहना कि वह भाजपा से जुड़ी हुई नहीं है लेकिन इसके बावजूद सांसद
पटेल ने उसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से मुलाकात
करवाने की बात कही थी।&amp;nbsp;मोनिका ने यह भी स्‍वीकार किया है कि 6-7 महीने पहले हरियाणा से कांग्रेस के राज्यसभा सांसद शादी लाल बत्रा ने भी उसे एडिश्नल एडवोकेट जनरल बनाने का वादा करते हुए उसका शोषण किया था उसने इसकी शिकायत तिलक मार्ग थाने में की थी लेकिन बाद में कुछ लोगों के बीच-बचाव के बाद उसने अपनी शिकायत वापल ले ली थी।&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot; lang=&quot;AR-SA&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;pre style=&quot;background: white; text-align: justify;&quot;&gt;&lt;/pre&gt;
&lt;pre style=&quot;background: white; text-align: justify;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;color: red; font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;पुलिस की कहानी&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;b&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/pre&gt;
&lt;table cellpadding=&quot;0&quot; cellspacing=&quot;0&quot; class=&quot;tr-caption-container&quot; style=&quot;float: left; margin-right: 1em; text-align: left;&quot;&gt;&lt;tbody&gt;
&lt;tr&gt;&lt;td style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj8zKIsCs2Ah_qgyn0aF02ppE1_e0vjX_IdE4vE3XL1k4__WxCms_E7O7tzvmM_7_m8j0vF97YiijzMG8vA79B23srf21WZpnW9iHstFbcstEGUMAJRAJnoHCXcFClQ2QotjBciE02vlrdx/s1600/Mukesh-Kumar-Meenaspecial+commisioner.jpg&quot; imageanchor=&quot;1&quot; style=&quot;clear: left; margin-bottom: 1em; margin-left: auto; margin-right: auto;&quot;&gt;&lt;img border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;500&quot; data-original-width=&quot;800&quot; height=&quot;200&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj8zKIsCs2Ah_qgyn0aF02ppE1_e0vjX_IdE4vE3XL1k4__WxCms_E7O7tzvmM_7_m8j0vF97YiijzMG8vA79B23srf21WZpnW9iHstFbcstEGUMAJRAJnoHCXcFClQ2QotjBciE02vlrdx/s320/Mukesh-Kumar-Meenaspecial+commisioner.jpg&quot; width=&quot;320&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;
&lt;tr&gt;&lt;td class=&quot;tr-caption&quot; style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: red;&quot;&gt;तत्कालीन&amp;nbsp; विशेष अायुक्त मुकेश मीणा&lt;/span&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;
&lt;/tbody&gt;&lt;/table&gt;
&lt;pre style=&quot;background: white; text-align: justify;&quot;&gt;&lt;/pre&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: .0001pt; margin-bottom: 0cm; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;मोनिका ने पुलिस को दिए अपने बयान में माना कि पेशे से वकील होने के चलते उसकी
भी महत्वाकांक्षा थी कि उसके पास कई बड़े केस आए। बड़े-बड़े लोग उसके क्लाइंट हो ।
इसी महत्वाकांक्षा की वजह से वह हाई-प्रोफाइल लोगों के झांसे में आकर ट्रैप हो गई।
मोनिका ने पुलिस को बरगलाने की कोशिश करते हुए बताया कि वह नहीं चाहती कि आगे कोई
भी लड़की इन लोगों के झांसे में फंसकर शिकार बने। इसलिए वह सांसद तथा उन जैसे
लोगों का वीडियों बनाकर उन्‍हें सबक सिखाती थी।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;background-color: white; font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 16px;&quot;&gt;मोनिका से पूछताछ के बाद पुलिस ने बताया कि मोनिका 2011 में यूपीएससी की सिविल सर्विस और राजस्‍थान पब्लिक सर्विस की तैयारी के लिए दिल्ली आयी थी लेकिन कामयाब नहीं हो सकी। इसके बाद उसने पार्लियामेंट की बेवसाइट से बुजुर्ग सांसदों के नंबर हासिल करके उनसे फोन पर अप्‍वाइंटमेंट लेकर काम दिलाने की फरियाद के बहाने मिलना जुलना शुरू किया। हांलाकि मोनिका ने पहले पुलिस को बताया कि उसने इसी दौरान उसने मेरठ यूनिवर्सिटी से डबल एम के बाद एलएलबी और एलएलएम की डिग्री लेकर वकालत शुरू कर दी थी। लेकिन पुलिस को अब तक की जांच में उसकी एलएलएम की कोई डिग्री नही मिली है।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;pre style=&quot;background: white;&quot;&gt;&lt;b style=&quot;background-color: transparent;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&amp;nbsp;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/pre&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: .0001pt; margin-bottom: 0cm; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;मोनिका का गिरोह&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;b&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: .0001pt; margin-bottom: 0cm; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;पुलिस की जांच और पूछताछ में खुलासा हुआ है कि मोनिका बाकायदा एक गिरोह बनाकर
ब्‍लैकमेलिंग का काम करती है। मोनिका की कॉल डिटेल में जिस नंबर पर सबसे ज्‍यादा
बात करने की डिटेल आयी पता चला कि वह अजयपाल तोमर का था। पुलिस के मुताबिक मोनिका
ने अजयपाल के साथ मलेशिया भी घूमने गई थी। दोनों वहां कई दिनों तक रहे थे। पूछने
पर मोनिका ने अजयपाल को अपना ब्वॉयफ्रेंड बताया है। उसने बताया कि अजय भी उसके शहर
का ही रहने वाला है। उसके संपर्क में रहने वाले गिरोह के एक दूसरे सदस्‍य के बारे
में उसने बताया कि उसका नाम मित्रपाल पुत्र विक्रम है और उसके उसके गांव के समीप
ही गांव पीनना का रहने वाला है। मित्रपाल अपने गांव का पूर्व प्रधान भी है। मोनिका
से ही पता चला कि मित्रपाल के खिलाफ यूपी में कई मामले दर्ज हैं। मोनिका ने बताया
कि इस गिरोह में उसके अलावा समेत दो अन्‍य &lt;span style=&quot;mso-spacerun: yes;&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;महिलाएं भी शामिल हैं। इनमें एक युवती झज्जर&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;हरियाणा की रहने
वाली है जबकि दूसरी हरियाणा के ही जींद की रहने वाली है।&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: .0001pt; margin-bottom: 0cm; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;वे दोनों मित्रपाल के निर्देश पर ही काम करती हैं। इन सब जानकारियों के बाद दिल्‍ली
पुलिस की एक टीम एसीपी सुधीर गोस्‍वामी नेतृत्व में मोनिका को पांच दिन के पुलिस
रिमांड पर लेकर मुजफ़फर नगर गई। &lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: .0001pt; margin-bottom: 0cm; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;दिल्ली पुलिस की टीम सबसे पहले मोनिका को लेकर एसएसपी मुजफ़फरनगर बबलू कुमार
के आफिस में पहुंची और काफी देर तक एसएसपी से इस सम्बन्ध में वार्ता की। एसएसपी के
निर्देश पर शहर कोतवाली पुलिस की एक टीम ने दिल्ली पुलिस के साथ खांजापुर पहुंचकर मोनिका
चौधरी के घर की तलाशी ली और जरूरी दस्तावेज कब्जे में लिये।&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: .0001pt; margin-bottom: 0cm; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;पुलिस ने उसके पिता सुरेश पाल तथा भाई राकेश से उनके ही आवास पर बंद कमरे में
घंटों तक पूछताछ की। एसीपी सुधीर गोस्‍वमी का कहना है कि तलाशी के दौरान पुलिस को मोनिका
की एलएलएम की डिग्री का कोई प्रमाण नहीं मिला जिसका अर्थ था कि मोनिका खुद के वकील
होंने का झेठा रोब गालिब करती थी। &lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;
&lt;a href=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEi4mCzq3YYaLraJn4m6NzeuZS3xSLtFxVeThrB32hXVSHzEzLVgeyBxWcx1GDRCuSSI93rVuKlgyfJlMHqopYTjWzKsb_eHdkIR01E4kY-v06HSwwQz1taKsnbQNX3uW3Qg1nkF9od1n7AE/s1600/%25E0%25A4%2586%25E0%25A4%25B0%25E0%25A5%258B%25E0%25A4%25AA%25E0%25A5%2580+%25E0%25A4%25B2%25E0%25A4%25A1%25E0%25A4%25BC%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%2580+%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%2587+%25E0%25A4%25AA%25E2%2580%258C%25E0%25A4%25BF%25E0%25A4%25A4%25E0%25A4%25BE+%25E0%25A4%2594%25E0%25A4%25B0+%25E0%25A4%25AE%25E0%25A5%2581%25E0%25A4%259C%25E0%25A4%25AB%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25AB%25E0%25A4%25B0%25E0%25A4%25A8%25E0%25A4%2597%25E0%25A4%25B0+%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%2587+%25E0%25A4%2585%25E0%25A4%25AA%25E0%25A4%25A8%25E0%25A5%2587+%25E0%25A4%2598%25E0%25A4%25B0+%25E0%25A4%25B8%25E0%25A5%2587+%25E0%25A4%25AA%25E0%25A5%2581%25E0%25A4%25B2%25E2%2580%258C%25E0%25A4%25BF%25E0%25A4%25B8+%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%2587+%25E0%25A4%25B8%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25A5+%25E0%25A4%25A8%25E2%2580%258C%25E0%25A4%25BF%25E0%25A4%2595%25E0%25A4%25B2%25E0%25A4%25A4%25E0%25A5%2580+%25E0%25A4%2586%25E0%25A4%25B0%25E0%25A5%258B%25E0%25A4%25AA%25E0%25A5%2580+%25E0%25A4%25AE%25E0%25A5%258B%25E0%25A4%25A8%25E2%2580%258C%25E0%25A4%25BF%25E0%25A4%2595%25E0%25A4%25BE.jpg&quot; imageanchor=&quot;1&quot; style=&quot;clear: right; float: right; margin-bottom: 1em; margin-left: 1em;&quot;&gt;&lt;img border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;748&quot; data-original-width=&quot;1600&quot; height=&quot;149&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEi4mCzq3YYaLraJn4m6NzeuZS3xSLtFxVeThrB32hXVSHzEzLVgeyBxWcx1GDRCuSSI93rVuKlgyfJlMHqopYTjWzKsb_eHdkIR01E4kY-v06HSwwQz1taKsnbQNX3uW3Qg1nkF9od1n7AE/s320/%25E0%25A4%2586%25E0%25A4%25B0%25E0%25A5%258B%25E0%25A4%25AA%25E0%25A5%2580+%25E0%25A4%25B2%25E0%25A4%25A1%25E0%25A4%25BC%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%2580+%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%2587+%25E0%25A4%25AA%25E2%2580%258C%25E0%25A4%25BF%25E0%25A4%25A4%25E0%25A4%25BE+%25E0%25A4%2594%25E0%25A4%25B0+%25E0%25A4%25AE%25E0%25A5%2581%25E0%25A4%259C%25E0%25A4%25AB%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25AB%25E0%25A4%25B0%25E0%25A4%25A8%25E0%25A4%2597%25E0%25A4%25B0+%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%2587+%25E0%25A4%2585%25E0%25A4%25AA%25E0%25A4%25A8%25E0%25A5%2587+%25E0%25A4%2598%25E0%25A4%25B0+%25E0%25A4%25B8%25E0%25A5%2587+%25E0%25A4%25AA%25E0%25A5%2581%25E0%25A4%25B2%25E2%2580%258C%25E0%25A4%25BF%25E0%25A4%25B8+%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%2587+%25E0%25A4%25B8%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25A5+%25E0%25A4%25A8%25E2%2580%258C%25E0%25A4%25BF%25E0%25A4%2595%25E0%25A4%25B2%25E0%25A4%25A4%25E0%25A5%2580+%25E0%25A4%2586%25E0%25A4%25B0%25E0%25A5%258B%25E0%25A4%25AA%25E0%25A5%2580+%25E0%25A4%25AE%25E0%25A5%258B%25E0%25A4%25A8%25E2%2580%258C%25E0%25A4%25BF%25E0%25A4%2595%25E0%25A4%25BE.jpg&quot; width=&quot;320&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: .0001pt; margin-bottom: 0cm; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;पुलिस ने मोनिका चौधरी के शैक्षिक प्रमाण पत्रों की भी छानबीन की&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;जिसमें पाया गया है
कि मोनिका चौधरी उर्फ मोनिका राठी मूल रूप से गांव बसेडा थाना छपार, मुजफ्फरनगर की
रहने वाली है और उसने बसेडा के जैन गल्र्स इंटर कालेज से दसवीं और बारहवीं की
परीक्षा पास की है। पुलिस ने दसवीं के शैक्षिक प्रमाण पत्र कब्जे में ले लिये&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;लेकिन इंटर का कोई
दस्तावेज पुलिस के हाथ नहीं लग सका है। इसके अलावा पुलिस को डीएवी कालेज
मुजफ्फरनगर से एलएलबी किया हुआ प्रमाण पत्र जरूर बरामद हुआ लेकिन एलएलएम की कोई
डिग्री नहीं मिल सकी&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;जबकि आरोपी युवती मोनिका चौधरी ने पूछताछ में खुद को एलएलएम
डिग्री धारक बताया था। पुलिस ने मोनिका चौधरी के सभी शैक्षिक प्रमाण पत्र&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;स्कूल की ग्रुप फोटो
व अन्य फोटो समेत अनेक महत्वपूर्ण दस्तावेज अपने कब्जे में लिये। पुलिस को मोनिका
चौधरी के पिता सुरेश पाल ने बताया कि उनका परिवार दस वर्ष पूर्व गांव बसेडा से आकर
खांजापुर में बसा था। पूछताछ में पुलिस को पता चला कि मोनिका चौधरी दो बार
खांजापुर गांव से प्रधानी का चुनाव भी लड चुकी है&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;एक बार उसे चालीस वोट मिले
थे और दूसरी बार सत्तर वोट मिले थे। मोनिका ने पुलिस को बताया कि उसके दोस्‍त
मित्रपाल ने ही उसे विधायक बनने का सपना दिखाना शुरू किया था। लेकिन उसने कहा था
कि राजनीति की पहली सीढी ग्राम प्रधान का चुनाव है। इसलिए मित्रपाल के कहने पर ही
उसने दो बार चुनाव लड़ा। बाद में जब इसमें बुरी तरह असफल रही तो उसने तय किया कि
अब वह पहले मोटी पैसा कमायेगी फिर सीधे पैसे के बल पर किसी राजनीतिक दल से पैसा
देकर एमएलसी की सीट खरीद लेगी।&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: .0001pt; margin-bottom: 0cm; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;दिल्ली पुलिस की एक टीम जिस समय मोनिका चौधरी के परिजनों से पूछताछ कर रही थी&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;उसी समय दूसरी टीम
हैड कांस्टेबिल विनोद कुमार के नेतृत्व में शहर कोतवाली पहुंची और मोनिका चौधरी का
आपराधिक रिकार्ड खंगाला&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;जिसमें उसके खिलाफ धारा &lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;498&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt; ए का मुकदमा दर्ज पाया
गया। पुलिस टीम ने मोनिका चौधरी के साथी मित्रपाल पुत्र विक्रम सिंह निवासी पीनना
का भी आपराधिक रिकार्ड खंगाला&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;जिसमें उसके खिलाफ दस
मुकदमे दर्ज पाये गये। इन मुकदमों में शहर कोतवाली में आठ&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;तितावी थाने में एक
व दिल्ली में एक मुकदमा दर्ज पाया गया है। मित्रपाल के घर भी पुलिस ने दबिश दी मगर
वह घर पर नहीं मिला। पुलिस उसके परिजनों से पूछताछ व सभी आवश्यक दस्तावेज जब्‍त कर
दिल्‍ली लौट आयी। इस दौरान पुलिस ने परिजनों से जो भी पूछताछ की उसकी बाकायदा रिकार्डिंग
भी की गई । पूछताछ और घर की तलाशी में जो दस्‍तावेज में मिले उससे पता चला कि क्योंकि
मीनू के पास जो कारें हैं&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;उनमें से एक उसके उसके भाई के नाम पर है। पूछताछ में भाई ने
बताया कि उसने मोनिका को ये कार किश्तों पर लेकर दी थी। पुलिस को पूछताछ के बावजूद
इस बात का पूरा शक है कि मोनिका ब्‍लैकमेलिंग का जो धंधा करती थी उसकी जानकारी
परिजनों को भी है। हांलाकि पुलिस जब मोनिका को लेकर उसके घर गई थी तो उसके परिजनों
ने जमकर हंगामा किया था और कहा कि पुलिस उसे उसे फंसा रही है।&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: .0001pt; margin-bottom: 0cm; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;पुलिस का कहना है कि मोनिका ने जल्द अमीर बनने की चाह में ब्‍लैकमेल करने का
यह शार्टकट धंधा अपनाया था। उसके सम्बन्ध बड़े-बड़े नेताओं से थे ही। बस उसने ऐसे
उम्रदराज और लोगों को अपना शिकार बनाना शुरू कर दिया जिनके पास मोटा पैसा था। मोनिका
लोगों को पहली ही मुलाकात में प्रभावित कर लेती थी। उसने अपनी फेसबुक पर जो
प्रोफाइल पिक्चर लगाया है&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;उसे देखकर ही अच्छे अच्छों के होश फाख्ता हो जाते। इस फोटो
में वह राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह के साथ है। प्रोफाइल में एक फोटो भाजपा
के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डा. लक्ष्मीकान्त वाजपेयी के साथ भी है। मोनिका का कहना
है कि डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी तो एक पारिवारिक कार्यक्रम में उसके मुज़फ्फरनगर में
खांजापुर स्थित मकान पर भी आ चुके हैं। &lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;table cellpadding=&quot;0&quot; cellspacing=&quot;0&quot; class=&quot;tr-caption-container&quot; style=&quot;float: left; margin-right: 1em; text-align: left;&quot;&gt;&lt;tbody&gt;
&lt;tr&gt;&lt;td style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgGconP6a2pcQ0GqBO4ols9IQhZcH1LsxR4sgnVhpQhit0ofXNYdvJzsfXkB8INscTOVgPNL9H52m9ThBOh3bPJBGX_TdiCmRpFQoa5gl6HQN8OdBiIJB-s2MSJEIX8-Fo3cp9XW0CkmB25/s1600/%25E0%25A4%25AE%25E0%25A5%258B%25E0%25A4%25A8%25E0%25A4%25BF%25E0%25A4%2595%25E0%25A4%25BE+%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%2587+%25E0%25A4%2598%25E0%25A4%25B0+%25E0%25A4%25B8%25E0%25A5%2587+%25E0%25A4%259C%25E0%25A5%258B+%25E0%25A4%25B8%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25AE%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25A8+%25E0%25A4%25AE%25E0%25A4%25BF%25E0%25A4%25B2%25E0%25A5%2587+%25E0%25A4%2589%25E0%25A4%25B8%25E0%25A4%25AE%25E0%25A5%2587+%25E0%25A4%25AF%25E0%25A5%2582%25E0%25A4%25AA%25E0%25A5%2580+%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%2587+%25E0%25A4%25AA%25E0%25A5%2582%25E0%25A4%25B0%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B5+%25E0%25A4%25B8%25E0%25A5%2580%25E0%25A4%258F%25E0%25A4%25AE+%25E0%25A4%2595%25E0%25A4%25B2%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25AF%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25A3+%25E0%25A4%25B8%25E0%25A4%25BF%25E0%25A4%2582%25E0%25A4%25B9+%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%2587+%25E0%25A4%25B8%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25A5+%25E0%25A4%2589%25E0%25A4%25B8%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%2580+%25E0%25A4%25AF%25E0%25A5%2587+%25E0%25A4%25AA%25E0%25A5%2581%25E0%25A4%25B0%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25A8%25E0%25A5%2580+%25E0%25A4%25A4%25E0%25A4%25B8%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B5%25E0%25A5%2580%25E0%25A4%25B0+%25E0%25A4%25AD%25E0%25A5%2580+%25E0%25A4%25AE%25E0%25A4%25BF%25E0%25A4%25B2%25E0%25A5%2580.jpg&quot; imageanchor=&quot;1&quot; style=&quot;clear: left; margin-bottom: 1em; margin-left: auto; margin-right: auto;&quot;&gt;&lt;img border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;1550&quot; data-original-width=&quot;1600&quot; height=&quot;309&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgGconP6a2pcQ0GqBO4ols9IQhZcH1LsxR4sgnVhpQhit0ofXNYdvJzsfXkB8INscTOVgPNL9H52m9ThBOh3bPJBGX_TdiCmRpFQoa5gl6HQN8OdBiIJB-s2MSJEIX8-Fo3cp9XW0CkmB25/s320/%25E0%25A4%25AE%25E0%25A5%258B%25E0%25A4%25A8%25E0%25A4%25BF%25E0%25A4%2595%25E0%25A4%25BE+%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%2587+%25E0%25A4%2598%25E0%25A4%25B0+%25E0%25A4%25B8%25E0%25A5%2587+%25E0%25A4%259C%25E0%25A5%258B+%25E0%25A4%25B8%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25AE%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25A8+%25E0%25A4%25AE%25E0%25A4%25BF%25E0%25A4%25B2%25E0%25A5%2587+%25E0%25A4%2589%25E0%25A4%25B8%25E0%25A4%25AE%25E0%25A5%2587+%25E0%25A4%25AF%25E0%25A5%2582%25E0%25A4%25AA%25E0%25A5%2580+%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%2587+%25E0%25A4%25AA%25E0%25A5%2582%25E0%25A4%25B0%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B5+%25E0%25A4%25B8%25E0%25A5%2580%25E0%25A4%258F%25E0%25A4%25AE+%25E0%25A4%2595%25E0%25A4%25B2%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25AF%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25A3+%25E0%25A4%25B8%25E0%25A4%25BF%25E0%25A4%2582%25E0%25A4%25B9+%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%2587+%25E0%25A4%25B8%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25A5+%25E0%25A4%2589%25E0%25A4%25B8%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%2580+%25E0%25A4%25AF%25E0%25A5%2587+%25E0%25A4%25AA%25E0%25A5%2581%25E0%25A4%25B0%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25A8%25E0%25A5%2580+%25E0%25A4%25A4%25E0%25A4%25B8%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B5%25E0%25A5%2580%25E0%25A4%25B0+%25E0%25A4%25AD%25E0%25A5%2580+%25E0%25A4%25AE%25E0%25A4%25BF%25E0%25A4%25B2%25E0%25A5%2580.jpg&quot; width=&quot;320&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;
&lt;tr&gt;&lt;td class=&quot;tr-caption&quot; style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: red;&quot;&gt;राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह के साथ&lt;/span&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;
&lt;/tbody&gt;&lt;/table&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: .0001pt; margin-bottom: 0cm; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;पुलिस रिमांड के दौरान हुई जांच में पुलिस को पता चला कि केसी
पटेल के अलावा &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;mso-spacerun: yes;&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;हरियाणा के सांसद
व कांग्रस नेता शादीलाल बत्रा, उत्तराखंड के मंत्री हरक सिंह रावत के खिलाफ भी
मोनिका ने ऐसी ही शिकायते दर्ज करायी हैं। इसके अलावा मोनिका ने शकरपुर थाने में
अपनी एक कार की चोरी की एफआरआई भी दर्ज कराई थी। मामला विवादास्पद होने के कारण यह
कार आखिर तक कोर्ट से रिलीज नहीं हुई थी। मीणा ने बताया कि महिला की आय का जरिया
एक्सटॉर्शन ही है। मोनिका के गिरोह में शामिल सभी साथियों की पहचान हो गई है। उन्‍हें
जल्‍द ही गिरफ़तार किया जाएगा।&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: .0001pt; margin-bottom: 0cm; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;इतना ही नहीं पुलिस ने मोनिका की बीए&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;एमए (अंग्रेजी)&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;एमए (राजनीतिक विज्ञान)&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;एलएलबी की डिग्री की जांच कराने का फैंसला लिया हे। क्‍योंकि &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;पुलिस को उस वक्‍त इन
डिग्रियों के फर्जी होंने का शक हुआ &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;उससे अंग्रेजी के कुछ शब्द लिखने को कहा गया&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;तो वह नहीं लिख पाई। ऐसे में पुलिस उसकी डिग्री को लेकर जांच करेगी। माना जा
रहा है कि डिग्री फर्जी हो सकती हैं।&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: .0001pt; margin-bottom: 0cm; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;मोनिका के परिवार में माता-पिता के अलावा एक भाई भी है।
पहले यह पुरकाजी ब्लाक के एक गांव में रहते थे। बाद में शहर कोतवाली के एक गांव
में घर बनाकर रहने लगे। उनकी माली हालत अच्छी नहीं है। उनके पास खेती की जमीन भी
नहीं है। मोनिका ने खुद को एलएलएम करने के बाद सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता बता रखा
है। वह बीच-बीच में सफारी गाड़ी से गांव आती थी। हालांकि पुलिस को अब तक छानबीन
में उसे अधिवक्ता होंने का कोई प्रमाण नही मिला है। वह लोगों पर सुप्रीम कोर्ट की
वकील होने का रौब गांठती थी। &lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: .0001pt; margin-bottom: 0cm; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;हनी ट्रैप मामले की पकड़ी गई मोनिका की कई अन्य भाजपा
नेताओं के साथ तस्वीरें भी उसके पकड़े जाने के बाद सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई
है। इन तस्वीरों से साफ है कि युवती का सत्ता के&lt;span style=&quot;mso-spacerun: yes;&quot;&gt;&amp;nbsp;
&lt;/span&gt;गलियारों और भाजपा के कार्यक्रमों में लगातार आना जाना रहा है। युवती के दो
फोटो राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह के साथ भी हैं। एक में वह कल्याण सिंह के
पास खड़े होकर फोटो खिंचवा रही है तो दूसरे में एक ग्रुप फोटो&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;जिसमें लगता है कि वह कुछ लोगों के साथ उनसे मिलने गई होगी। ऐसे ही एक फोटो
में भाजपा के पूर्व अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी के एक और युवती व दूसरी ओर
केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान बैठे हैं। इसके अलावा भी कई ऐसी फोटो हैं&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;जो बड़े नेताओं के साथ खिंचवाई गई है।&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: .0001pt; margin-bottom: 0cm; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: .0001pt; margin-bottom: 0cm; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;‘हनी ट्रैप’ शिकारों की कडि़या जोड़ने में जुटी
पुलिस&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt; &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;b&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: .0001pt; margin-bottom: 0cm; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;नई दिल्ली रेंज के विशेष पुलिस आयुक्त मुकेश मीणा ने बताया
कि दिल्ली पुलिस के सभी थानों इस बात की जांच की जा रही हैं कि किसी अन्‍य थाने
में तो महिला के खिलाफ ब्‍लै‍कमेलिंग या एक्सर्टोशन का मुकदमा तो दर्ज नहीं है। या
महिला ने ऐसा ही कोई झूठा रेप का मामला जो दर्जनही करवाया है। मीणा कहते है कि
मोनिका व उसके गिरोह ने कई नेताओं की अश्लील सीडी बनाकर उनसे मोटी रकम ऐंठी है।
महिला सांसद केसी पटेल की जो अश्लील सीडी बनाई है वह करीब पौने घंटे की है। पुलिस
के सामने जांच के दौरान इस बात का खुलासा हो चुका है कि अब तक मोनिका व उसके गिरोह
चार अन्‍य रसूखदार लोगों को अपना शिकार बना चुका हैं। जिनमें उत्‍तराखंड से बीजेपी
नेता हरक सिंह रावत, हरियाणा के राज्‍यसभा सांसद शादीलाल बत्रा, देवबंद के मौलाना
मसूद मदनी और यूपी पुलिस के एक कांस्‍टेबल सुभाष को हनीट्रैप में फंसाकर उनसे रकम
वसूलने&lt;b&gt; &lt;/b&gt;के मामलों की कलई खुल चुकी है। लेकिन बहुत से ऐसे भी लोग है जो हनीट्रैप
में फंसने के बाद ब्‍लैकमेलिंग का मोनिका गिरोह की ब्‍लैंकमेलिंग का शिकार हो चुके
है। बदनामी के डर से वे अब सामने नहीं आना चाहते । लेकिन फिर भी पुलिस ने ऐसे तमाम
लोगों की अपील की है कि वे उनकी पहचान को गुप्‍त रखकर उनकी शिकायत पर काम करेंगे। ये
जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने सारी कडि़यो को जोड़ना शुरू कर दिया।&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: .0001pt; margin-bottom: 0cm; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: .0001pt; margin-bottom: 0cm; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;हरक सिंह रावत ऐसे बने थे शिकार&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;b&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;
&lt;table cellpadding=&quot;0&quot; cellspacing=&quot;0&quot; class=&quot;tr-caption-container&quot; style=&quot;float: left; margin-right: 1em; text-align: left;&quot;&gt;&lt;tbody&gt;
&lt;tr&gt;&lt;td style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgMq49VqYsjA8nGQ13etJBZWCvMkX_FbslP1lLVZhbQBXxnBWpUVba6kB1X2nPothOxdW_8PzFaHKfndSY1ztSHqJOJ6Tv5P-3H9GSNgQ4sK8JCnt2dpXOYeR_x9zErOlfOXUKaJ0-3RXkA/s1600/harak-singh-rawat.jpeg&quot; imageanchor=&quot;1&quot; style=&quot;clear: left; margin-bottom: 1em; margin-left: auto; margin-right: auto;&quot;&gt;&lt;img border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;250&quot; data-original-width=&quot;375&quot; height=&quot;213&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgMq49VqYsjA8nGQ13etJBZWCvMkX_FbslP1lLVZhbQBXxnBWpUVba6kB1X2nPothOxdW_8PzFaHKfndSY1ztSHqJOJ6Tv5P-3H9GSNgQ4sK8JCnt2dpXOYeR_x9zErOlfOXUKaJ0-3RXkA/s320/harak-singh-rawat.jpeg&quot; width=&quot;320&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;
&lt;tr&gt;&lt;td class=&quot;tr-caption&quot; style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: red;&quot;&gt;हरक सिंह रावत&lt;/span&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;
&lt;/tbody&gt;&lt;/table&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: .0001pt; margin-bottom: 0cm; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;साउथ दिल्ली के सफदरजंग थाने में &lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;28&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt; जुलाई &lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;2016&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt; को उत्‍तराखंड के बीजेपी
नेता हरक सिंह रावत के खिलाफ खुद को असम निवासी बतानी वाली एक महिला ने रेप का केस
दर्ज करवाया था। 32 साल की इस महिला का आरोप था कि पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत ने दिल्ली
के सफदरजंग इन्क्लेव में ही उसके घर में रेप किया। &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;पुलिस ने मामला दर्ज कर महिला की मैडिकल जांच
करायी और पड़ताल शुरू की तो पता चला &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;कि यह महिला &lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;2014&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt; में भी रावत
के खिलाफ इसी थाने में छेड़छाड़ की शिकायत दर्ज करा चुकी है।&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: .0001pt; margin-bottom: 0cm; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;उस शिकायत में महिला ने कहा था कि हरक सिंह ने अपने दिल्ली
के ग्रीन पार्क स्थित घर पर सितंबर &lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;2013&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt; में उसके साथ
रेप किया था।&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: .0001pt; margin-bottom: 0cm; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;चूंकि हरक सिंह रावत मई महीने में कांग्रेस से बगावत करके 9
एमएलए के बीजेपी में गए थे और उन्होंने सीएम हरीश रावत पर करप्शन के आरोप लगाए थे।
इसलिए पुलिस को इस मामले में राजनीतिक साजिश्‍ की आशंका भी लग रही थी लिहाजा पुलिस
ने हरक सिंह रावत की गिरफ़तारी के लिए जल्‍दबाजी नहीं की। लेकिन अचानक तीन दिन बाद
मीनू नाम की इस महिला ने भाजपा नेता हरक सिंह रावत के खिलाफ दर्ज शिकायत वापस लेने
की अर्जी लगा दी और बयान दिया कि उसके साथ कोई दुष्‍कर्म नहीं हुआ। बाद में महिला
ने मीडिया से रूबरू होते हुए कहा कि उस पर सीएम हरीश रावत के लोगों ने मामला दर्ज
कराने के लिए उस पर दबाव डाला था। इसीलिए उसने दबाव में आकर मामला दर्ज कराया था।
इसके बाद कांग्रेस ने आरोप लगाया कि हरक सिंह रावत ने पैसे देकर ये पूरा मामला
ठंडा कर दिया। &lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: .0001pt; margin-bottom: 0cm; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;table cellpadding=&quot;0&quot; cellspacing=&quot;0&quot; class=&quot;tr-caption-container&quot; style=&quot;float: right; margin-left: 1em; text-align: right;&quot;&gt;&lt;tbody&gt;
&lt;tr&gt;&lt;td style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiZrF4wEBpLC5D7Ajd36LrsDcAvk-WMhm0YebNodnwU9n4_6UkiLR1VmbtL2oaKto_UJY_4vaTwV0ZO9WeS8oKBdGY1HmVx9xCx9f14o9hlgxmcEQnB9kGGwrMZi7z9xXk_yrZBWZbnOY-Z/s1600/maulana-rape.jpg&quot; imageanchor=&quot;1&quot; style=&quot;clear: right; margin-bottom: 1em; margin-left: auto; margin-right: auto;&quot;&gt;&lt;img border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;501&quot; data-original-width=&quot;650&quot; height=&quot;246&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiZrF4wEBpLC5D7Ajd36LrsDcAvk-WMhm0YebNodnwU9n4_6UkiLR1VmbtL2oaKto_UJY_4vaTwV0ZO9WeS8oKBdGY1HmVx9xCx9f14o9hlgxmcEQnB9kGGwrMZi7z9xXk_yrZBWZbnOY-Z/s320/maulana-rape.jpg&quot; width=&quot;320&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;
&lt;tr&gt;&lt;td class=&quot;tr-caption&quot; style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: red;&quot;&gt;देवबंद के मौलाना मसूद मदनी&lt;/span&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;
&lt;/tbody&gt;&lt;/table&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: .0001pt; margin-bottom: 0cm; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;देवबंद के धर्मगुरू भी बने मोनिका गिरोह के शिकार&lt;br /&gt;
&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; mso-ascii-font-family: Calibri; mso-ascii-theme-font: minor-latin; mso-bidi-font-family: Mangal; mso-bidi-language: HI; mso-bidi-theme-font: minor-bidi; mso-hansi-font-family: Calibri; mso-hansi-theme-font: minor-latin;&quot;&gt;दिल्‍ली पुलिस की जांच में सामने आया है कि
मोनिका के गिरोह में हरियाणा के जींद स्थित सफीदों की रहने वाली एक महिला देविका (
काल्‍पनिक नाम)&lt;span style=&quot;mso-spacerun: yes;&quot;&gt;&amp;nbsp; &lt;/span&gt;भी शामिल है। देविका नि&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;संतान महिलाओं
को बच्चे पैदा करने की दवा देने वाले देवबंद के मौलाना मसूद मदनी के खिलाफ इसी साल
15 मार्च को रेप का मुकदमा दर्ज करवा कर उन्‍हें जेल भिजवा दिया था। मसूद मदनी जमीयत
उलमा ए हिन्द के महासचिव मौलाना महमूद मदनी का सगा भाई व उत्तराखंड राज्य में
नारायण दत्त तिवारी सरकार में राज्य मंत्री रह चुका है। देविका ने उन पर आरोप लगाया
कि उन्‍होने संतान उत्‍पत्ति का झांसा देकर उसके साथ दुष्कर्म किया था। यह मामला देवबंद
कोतवाली में दर्ज हुआ था। मसूद मदनी जमीयत उलमा हिन्द का उत्तराखंड अध्यक्ष व
हरिद्वार बचाओ संघर्ष समिति का संयोजक भी रह चुका है।&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: .0001pt; margin-bottom: 0cm; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;देविका ने पुलिस को दिए अपने बयान में कहा था कि वह नौ
मार्च को मन्नत मांगने पिरान कलियर गई थी&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;वहां एक व्यक्ति की सलाह पर वह पति के साथ देवबंद पहुंचकर मसूद मदनी से मिली
और संतान होने के उपाय पूछे। उसने बताया कि मदनी ने&lt;span style=&quot;mso-spacerun: yes;&quot;&gt;&amp;nbsp; &lt;/span&gt;होली के बाद अकेले आने की सलाह दी तो वह 16
मार्च को देवबंद पहुंच गई। उसने बताया कि मदनी ने तंत्र क्रिया के नाम पर दो बार उसके
साथ दुष्कर्म किया और कहा कि जाओ&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;,
&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;अब तुम्हे संतान हो जाएगी। हांलाकि मसूद मदनी ने अपने उपर लगे आरोपों का
निराधार व देविका को ब्‍लैकमेलर बताया था लेकिन उस वक्‍त पुलिस ने उनकी एक नहीं
सुनी।&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: .0001pt; margin-bottom: 0cm; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;बता दे कि आरोपी मसूद मदनी दीनी और सियासी एतबार से देशभर
में खास रसूख रखने वाले परिवार से ताल्लुक रखते है। दिल्‍ली पुलिस को जांच के
दौरान इस देविका के मोनिका गैंग से संबध की जानकारी उस वक्‍त हुई जब सहारनपुर
पुलिस से संपर्क साधा गया। पुलिस को पता चला कि देविका ने जिस व्‍यक्ति को पति के
रूप में मौलाना से मिलवाया था वह कोई और नहीं बल्कि मोनिका का साथी मित्रपाल था।
यह स्‍थापित होते ही पुलिस समझ गई कि मोनिका के गिरोह में कुछ दूसरी लड़किया भी है
और ये पूरा गिरोह धनवान तथा प्रभावशाली लोगों को हनी टे्प में फंसाकर मोटी रकम
ऐंठने के लिए उन्‍हें ब्‍लैकमेल करता था। अब पुलिस हर उस संभावित ठिकानों पर
मोनिका गिरोह की इस दूसरी ब्‍लैकमेेलर लडकी की तलाश की रही है। &lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: .0001pt; margin-bottom: 0cm; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: .0001pt; margin-bottom: 0cm; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;कांग्रेस एमपी शादीलाल बत्रा भी फंसे थे जाल में
&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;b&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;
&lt;table cellpadding=&quot;0&quot; cellspacing=&quot;0&quot; class=&quot;tr-caption-container&quot; style=&quot;float: right; margin-left: 1em; text-align: right;&quot;&gt;&lt;tbody&gt;
&lt;tr&gt;&lt;td style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEivSCrm3ANqTlC2fwZB36j7aLip4wN379GZPBighVl1_2MhLoOC-AzLNnuEwMJq_S4cebxMekWUJoCs0e9Saotbc1YmraDcnNZMQ0czhZKJQeVrsy1ZAuTXQCRsTzT7KEjOm0NiYh7ohshR/s1600/shadi+lal+batra.jpg&quot; imageanchor=&quot;1&quot; style=&quot;clear: right; margin-bottom: 1em; margin-left: auto; margin-right: auto;&quot;&gt;&lt;img border=&quot;0&quot; data-original-height=&quot;540&quot; data-original-width=&quot;650&quot; height=&quot;265&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEivSCrm3ANqTlC2fwZB36j7aLip4wN379GZPBighVl1_2MhLoOC-AzLNnuEwMJq_S4cebxMekWUJoCs0e9Saotbc1YmraDcnNZMQ0czhZKJQeVrsy1ZAuTXQCRsTzT7KEjOm0NiYh7ohshR/s320/shadi+lal+batra.jpg&quot; width=&quot;320&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;
&lt;tr&gt;&lt;td class=&quot;tr-caption&quot; style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;font-size: medium; line-height: normal; margin-bottom: 0.0001pt; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;span style=&quot;color: red;&quot;&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , serif; font-size: 12pt;&quot;&gt;कांग्रेस के सांसद&amp;nbsp;&lt;/span&gt;शादीलाल बत्रा&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;
&lt;/tbody&gt;&lt;/table&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: .0001pt; margin-bottom: 0cm; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;ये मामला 27 सितम्बर 2016 का है जब दिल्ली के तिलक मार्ग
थाने &lt;span style=&quot;mso-spacerun: yes;&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;में कांग्रेस के सांसद&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
शादीलाल बत्रा
के खिलाफ रेप का केस दर्ज कराया गया था । रेप का आरोप लगाने वाली महिला कोई और
नहीं ने खुद को वकील बताने वाली मोनिका ही थी जिसने आरोप लगाते &lt;span style=&quot;mso-spacerun: yes;&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;हुए कहा कि हरियाणा से कांग्रेस के एमपी शादीलाल
बत्रा ने उनके साथ रेप किया है। मोनिका ने बताया था कि ये वारदात 24 सितम्बर की
है। साथ ही बताया कि कुछ महिने पहले एक दोस्त ने उसकी मुलाकात कांग्रेस नेता और
सांसद शादीलाल बत्रा से कराई थी।&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: .0001pt; margin-bottom: 0cm; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;सांसद ने अपने रसूख का दावा करते हुए उसे सुप्रीम कोर्ट में
हरियाणा की असिस्‍टेंट सोलिसिटर जनरल बनाने का झांसा दिया था। इसी का फायदा उठाते
हुए मोनिका से नजदीकियां बढाईं। उसके बाद 24 सितंबर को सांसद बत्रा मोनिका को अपने
फ्लैट में ले गए और उसके साथ बलात्कार किया। 76 साल के शादीलाल रोहतक से विधायक भी
रह चुके हैं और उनका पार्टी में अच्छी पहुंच मानी जाती है। पुलिस ने मामला दर्ज कर
लिया था और मामले की छानबीन के बाद ही गिरफ़्तारी की जाने की बात कही थी। लेकिन बताते
है की बाद में सांसद से संभवत मनचाही रकम मिलने के बाद मोनिका कोर्ट में अपने बयान
देने से मना कर दिया और केस वापस ले लिया। इस मामलें में शादी लाल बत्रा ने कहा था
कि आरोप लगाने वाली महिला उससे टिकट दिलाने की मांग कर रही थी जब वे उसे टिकट नहीं
दिला पाए तो उसने झूठा आरोप लगा दिया।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;
&lt;/div&gt;
&lt;b&gt; &lt;/b&gt;&lt;b&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;br /&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: .0001pt; margin-bottom: 0cm; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: .0001pt; margin-bottom: 0cm; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;एक सिपाही भी बना था मोनिका का पहला शिकार&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;b&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: .0001pt; margin-bottom: 0cm; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;बीजेपी&lt;span style=&quot;mso-spacerun: yes;&quot;&gt;&amp;nbsp; &lt;/span&gt;सांसद को
हनी ट्रैप का शिकार बनाने के बाद पुलिस के हत्थे चढ़ी मोनिका के खिलाफ जाँच जैसे
जैसे आगे बढ़ रही है उसके कारनामों पर रोज एक नया खुलासा हो रहा है। बेहद संजीदगी
से रात दिन तफ्तीश करने में जुटी दिल्ली पुलिस के विशेष आयुक्त मुकेश कुमार मीणा
ने बताया है कि जांच में पता चला है कि शातिर मोनिका चौधरी उत्तर प्रदेश पुलिस के
एक सिपाही को भी अपने ‘हनी ट्रैप’&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt; &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;के मायावी जाल में फंसा चुकी थी। ये घटना साल 1993 के अगस्त महीने की है। इसी
मोनिका ने मुजफ्फरनगर के एक थाने में सुभाष नाम के एक सिपाही के खिलाफ दुष्कर्म का
केस दर्ज कराया था। लेकिन&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;बाद में
मोनिका&lt;span style=&quot;mso-spacerun: yes;&quot;&gt;&amp;nbsp; &lt;/span&gt;उस सिपाही से 70 हजार रूपये ऐंठने
के बाद कोर्ट में अपने दिए बयान से साफ मुकर गई थी। &lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: .0001pt; margin-bottom: 0cm; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;&#39;&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;हनी ट्रैप&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;&#39; &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;केस की जांच कर रही पुलिस सिपाही सुभाष को भी
हनी ट्रैप केस की तफ्तीश में जोड़ने जा रही है ताकि उससे महिला की करतूतों का कुछ
और खुलासा हो सके। पुलिस इस बात की भी जांच करने में लगी है कि हनी ट्रैप में
सुभाष पहला शिकार बना था या फिर उससे पहले भी इसने किसी को अपना शिकार बनाया था।&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;line-height: normal; margin-bottom: .0001pt; margin-bottom: 0cm; text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;इस महिला के &lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;&#39;&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;हनी ट्रैप&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;&#39; &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;जाल से पर्दा
उठाती पुलिस की छानबीन में फिलहाल चार मामलों से पर्दा उठा है। पुलिस ने जांच आगे
बढने के बाद मोनिका के साथी अजय पाल को भी गिरफ्तार कर उन्‍हें न्‍यायि‍क हिरासत
में भेज दिया है। पुलिस की जांच में जो सबसे बड़ी बात पता लगी है वह यही कि लोग
समाज के लोकलाज के डर से पुलिस में शिकायत करने नहीं जाते थे। जिसके चलते लगातार &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;‘&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;हनी ट्रैप’&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt; &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;का यह खेल फलता
फूलता रहा। यही कारण था कि मोनिका हमेशा अमीर और राजनीति से जुड़े लोगों को ही अपने
हनीट्रेप में फंसाती थी क्‍योंकि ऐसे लोग बदनामी से ज्‍यादा डरते हैं। &lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: &amp;quot;mangal&amp;quot; , &amp;quot;serif&amp;quot;; font-size: 12.0pt;&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;a name=&#39;more&#39;&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;/div&gt;
&lt;/div&gt;
</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://jurmkiduniya.blogspot.com/feeds/5868344266019554236/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://jurmkiduniya.blogspot.com/2018/05/blog-post.html#comment-form' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8049618298159816963/posts/default/5868344266019554236'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8049618298159816963/posts/default/5868344266019554236'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://jurmkiduniya.blogspot.com/2018/05/blog-post.html' title='वीआईपी का शिकार करने वाली खूबसरत हसीना'/><author><name>sunil verma</name><uri>http://www.blogger.com/profile/06462864962085848512</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='27' height='32' src='//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiM8mYTF1rSTG5OLwjuKe8ktdZwaNsHWlaRFf283uYibqX2zwZT1C0LITcRz_c-QhdhjEK686quBdQwPl6yirK3P5dvBOclUZ-nAWjIgkhf_dw38PrIOFgSWi-PC_Q-ilg/s113/sunil+pic2.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiHOk4sZCluUAFu6s2LEMmhZZRvoFbaxkmcHd1KfwvSTD3jxqoYl9-8_TviMi6UsgyRGaOG4DrBCJeKSabcfN5NgKA4S6pHLUAfgR_ECBwvCMdfRJPhv_2vyKAvF8p6tiUjbxMbPSgpJIZF/s72-c/%25E0%25A4%25AE%25E0%25A5%258B%25E0%25A4%25A8%25E0%25A4%25BF%25E0%25A4%2595%25E0%25A4%25BE+%25E0%25A4%259A%25E0%25A5%258C%25E0%25A4%25A7%25E0%25A4%25B0%25E0%25A5%2580+1.jpg" height="72" width="72"/><thr:total>0</thr:total><georss:featurename>New Delhi, Delhi, India</georss:featurename><georss:point>28.6139391 77.209021200000052</georss:point><georss:box>28.3907261 76.886297700000057 28.8371521 77.531744700000047</georss:box></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8049618298159816963.post-856311279570973080</id><published>2010-07-13T10:41:00.000+05:30</published><updated>2018-07-09T16:09:01.765+05:30</updated><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="dawood and chota Rajan"/><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="Underworld"/><title type='text'>दाऊद-छोटा राजन: दोस्त कैसे बने दुश्मन ?</title><content type='html'>&lt;div dir=&quot;ltr&quot; style=&quot;text-align: left;&quot; trbidi=&quot;on&quot;&gt;
&lt;a href=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg12vyt0o2epW6Jzj9uPqje7L-Y3GD5aOq3FioaP8mYcjAhFhJmBCtFimOqmkNEHGjnn5TGNqXvAU0I40HKZckWi3cTa0s_ChTN18pTl3PkI1i53jjBenPJ4GnZ2KU4aqbykKU5C2MmiIQI/s1600/Rajan+merrige.jpg&quot; imageanchor=&quot;1&quot; style=&quot;clear: right; cssfloat: right; float: right; margin-bottom: 1em; margin-left: 1em;&quot;&gt;&lt;img border=&quot;0&quot; height=&quot;150&quot; rw=&quot;true&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg12vyt0o2epW6Jzj9uPqje7L-Y3GD5aOq3FioaP8mYcjAhFhJmBCtFimOqmkNEHGjnn5TGNqXvAU0I40HKZckWi3cTa0s_ChTN18pTl3PkI1i53jjBenPJ4GnZ2KU4aqbykKU5C2MmiIQI/s200/Rajan+merrige.jpg&quot; width=&quot;200&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&amp;nbsp;दाऊद इब्राहिम के अपराध की दुनिया में डॉन बनने के सफर में ऐसा बहुत कुछ हुआ जिसमें से बहुत कुछ लिखा जा चुका है पर इसके आगे बढऩे से पहले छोटा राजन पर चर्चा कर लेना जरूरी है। क्योंकि छोटा राजन अपराध की दुनिया में दाऊद का वो हमराज है जिसका जिक्र किए बिना दाऊद का अपराधिक इतिहास पूरा होना नामुमकिन है। &lt;br /&gt;
&lt;a name=&#39;more&#39;&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
छोटा राजन यानि राजेन्द्र सदाशिव निखलजे का जन्म 1956 में मुंबई के पूर्वी उपनगर चेंबूर में स्थित तिलक नगर हाउसिंग बोर्ड कालोनी में रहने वाले एक मध्यमवर्गीय दलित परिवार में हुआ । उसके पिता नगर निगम में एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी थे। बचपन से ही दादागिरी के शौक और बुरी संगत के शिकार राजेन्द्र ने पढऩे-लिखने में ज्यादा दिलचस्पी नहीं ली इसलिए वह बारहवीं जमात से आगे न पढ़ सका। राजेन्द्र ने मुंबई शहर में तेजी से बढ़ रहे दादागिरी के कारोबार और हाजी मस्तान, करीम लाला और वरदा भाई की बढ़ती ताकतों से प्रेरणा लेकर दादागिरी में कदम रख दिया।&lt;br /&gt;
चेंबूर और घाटकोपर उन दिनों वरदा भाई के सहायक और मिल मजदूर नेता रहे राजन नायर के प्रभाव वाले इलाके थे। गली कूंचों में मारपीट और दो नंबर के छोटे मोटे अपराध करते-करते राजेन्द्र &#39;बड़ा राजन यानि राजन नायर के गिरोह के लिये सिनेमा टिकट ब्लैक करने लगा।&lt;br /&gt;
राजेन्द्र की दिलेरी और बहादुरी बड़ा राजन के कानों तक पहुंची तो उन्होंने निखल्जे को अपने करीब लाते हुए वरदा भाई के स्वर्ण तस्करी के धंधे से जोड़ दिया निखल्जे को चेंबूर व घाटकोपर में गिरोह के सामान्य कार्यों की जिम्मेदारी भी सौंप दी गई।&lt;br /&gt;
बड़ा राजन के वरदहस्त के कारण निखल्जे को &#39;छोटा राजन कहा जाने लगा। 80 का दशक शुरू होते होते राजन सुपारी लेकर हत्या करने के धंधे में आ गया। यही वह समय था जब मुंबई पुलिस की कड़ी कार्यवाही के बाद वरदा भाई का सफाया हो यगा था। हाजी मस्तान और करीम लाला के सितारे भी गर्दिश में थे और हाजी मस्तान की सत्ता संभालने वाले दाऊद की करीम लाला के वारिसों से जबरदस्त गैंगवार छिड़ी हुई थी। ऐसे में अपनी अलग सत्ता चला रहे बड़ा राजन ने जब दाऊद का साथ लेकर पठानों के खिलाफ जेहाद छेड़ा तो बड़ा राजन को जान गंवानी पड़ी।&lt;br /&gt;
गरू की हत्या के बाद छोटा राजन को एक विश्वसनीय और ताकतवर सहारे की तलाश थी जो उसे दाऊद के रूप में मिल गया। दाऊद से गहरी दोस्ती के पीछे सिर्फ यहीं वजह नही थी कि वह अपराध की दुनिया में तेजी से उभर रहा था वरन एक वजह ये भी थी कि उसके साथ राजन का भावनात्मक लगाव हो गया था।&lt;br /&gt;
दरअसल छोटा राजन तिलक नगर की जिस बिल्डिंग में रहता था उसी की बगल वाली बिल्डिंग में रहती थी सुजाता। राजन की बचपन की इस प्रेयसी को 1988 में राजन के साथ शादी होने से पूर्व ही दाऊद ने अपनी मुंह बोली बहन बना लिया था। राजन की पत्नी सुजाता दाऊद को राखी बांधने&lt;br /&gt;
लगी। पत्नी और दोस्त के बीच बंधी पवित्र रिश्ते की इसी डोर ने राजन और दाऊद को इतना करीब ला दिया था कि 1988 में जब दाऊद को पुलिस के दबाव में दुबई भागना पड़ा तो उसने मुंबई में फैले अपने तमाम अपराधिक साम्राज्य का कमांडर बना दिया।&lt;br /&gt;
इस दौरान मुबई में एक और माफिया सरगना अरूण गवली सिर उठाने लगा था। उसके साथ अमर नाईक, दशरथ रोहणे और तान्या कोली के गिरोह थे। इन गिरोहों का काम हफ्ता वसूली, अपहरण और ठेके पर हत्याये करना था। दरअसल दाऊद के मुस्लिम होने के कारण अरूण गवली व साथी गिरोह दाऊद के साथ राजन की भी जान के दुश्मन बन गए थे। इसी के चलते दोनों गिरोह की खूनी गैंगवार में कई दर्जन छोटे बड़े अपराधी मारे गए।&lt;br /&gt;
1992 के आते-आते दाऊद और छोटा राजन में भी मतभेद गहराने लगे। इसके कई कारण थे। दरअसल दाऊद जुर्म की दुनिया का बेताज बादशाह जरूर बन गया था। मगर एक डर उसे हमेशा सताता रहता था वो था अपनो से मात खाने का डर। उसके आधिपत्य में पलने वाले गिरोह व उसके सरगना कहीं इतने ताकतवर न बन जांए कि भविष्य में उसके लिए चुनौती खड़ी कर दें। इसी के चलते दाऊद एक सोची समझी रणनीति के तहत अपने अधीन सभी गिरोंहो को आपस में भिड़वाकर रखता था। &lt;br /&gt;
अपनी इसी योजना के तहत दाऊद ने दुबई में बैठे मुंबई में शिवसेना पार्षद व गिरोह बाज खीम बहादुर थापा की हत्या करवा दी। थापा छोटा राजन का करीबी था। छोटा राजन को इसकी जानकारी मिली कि थापा की हत्या में दाऊद के नेपाल में बसे शूटर सुनील सांवत उर्फ सौत्या का हाथ है।&lt;br /&gt;
एक और ऐसी घटना हुई जिसने दाऊद और राजन के बीच खाई पैदा कर दी। हुआ यूं कि राजन के एक बेहद करीबी तैय्यब भाई को दाऊद के शूटरों ने मार डाला। छोटा राजन लगातार हो रही घटनाओं से बेहद चिंतित था, लिहाजा वह भाई से बात करने स्वयं दुबई पहुंचा और अठारह मंजिली पर्ल बिल्डिंग के ग्यारहवें तल पर बने डी. कंपनी के आलीशान ऑफिस में दाऊद भाई से मिला तो भाई ने बताया कि तैय्यब की लापरवाही और मुखबिरी के कारण उसके करोड़ों के सोने से लदे दो जहाज कस्टम वालों ने पकड़ लिये।&lt;br /&gt;
दाऊद ने सभी राजन के समक्ष प्रस्ताव रखा कि वह मुंबई छोड़कर उसके दुबई कारोबार को संभाल ले मगर राजन ने यह प्रसताव ठुकरा दिया और वापस मुंबई आ गया। दरअसल बाबरी मस्जिद ध्वस्त हो जाने के बाद दाऊद की पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आई.एस.आइ. से निकटता बढ़ गयी। और वह आई एस आई की साजिश का खिलौना बनकर इसके बदले में मुंबई बम विस्फोट की योजना बना रहा था।&lt;br /&gt;
ऐसे में जरूरी था कि मुंबई से दाऊद का एरिया कमांडर कोई कट्टर मुस्लिम हो, न कि छोटा राजन जैसा कोई हिन्दूवादी डॉन। यही कारण था कि राजन को किनारे कर अबू सलेम, मेमन बंधुओं को मुंबई में दाऊद भाई ने अतिरिक्त जिम्मेदारियां सौंपी थीं। छोटा राजन को स्पष्ट लगने लगा कि बहुत जल्द कोई बड़ा हादसा होने वाला है क्योकि खुद को किनारे किए जाने की दाऊद की रणनीति उसकी समझ में आने लगी थी। लेकिन मुंबई बम कांड से पहले ही एक ऐसी घटना हो गयी जिसने छोटा राजन और दाऊद के बीच दुश्मनी का बीज और गहरा बो दिया।&lt;br /&gt;
छोटा राजन लगातार अपने साथियों की हत्या से इस बदर बौखला गया कि उसने खबर मिलते ही दाऊद के विश्वासपात्र समझे जाने वाले पांच साथियों की मुंबई में एक ही दिन में हत्वा करवा दी। मुंबई समेत देश के कोने कोनें में फैले अपने साथियों अज्ञैर देश से बाहर के सूत्रों को तत्काल &#39;आपरेशन दाऊद पर काम बंद करके खुद के लिये काम करने के आदेश जारी कर दिये।&lt;br /&gt;
दाऊद और राजन दोनों की अटूट मित्रता रही थी । दोनों की एक दूसरे की कमजोरियों को बखूबी जानते थे। दाऊद जहां आदमियों के भरोसे काम चलाता है,वहीं राजन खुद एक शार्प शूटर तथा जिद्दी इंसान है। राजन ने मुंबई में अपना कमांडेट रोहित वर्मा को नियुक्त किया और खुद अपना ठिकाना मलेशिया के कुआलालमपुर में बनाकर वही से सैटेलाइट फोन के माध्यम से अपना कारोबार संचालित करना शुरू कर दिया।&lt;br /&gt;
इधर छोटा राजन ने दाऊद के शूटर सुनील सांवत से प्रतिशोध लेने के लिए सांवत की हत्या की सुपारी दे दी। सांवत दुबई में है,यह पता चलते ही राजन गिरोह ने सुनील सांवत को दिन दहाड़े हयात रिजेंसी होटल के सामने गोलियों से भून दिया। संयोग से उस समय दाऊद करांची में था जहां बेहद गोपनीय और सुरक्षित स्थान डिफेंस कालोनी में उसने अपना मुख्यालय बना लिया था। वहीं पर वह अपने परिजनों के साथ रह रहा था। उसे यंहा पर निजी अपराधियों के साथ आईएसआई का सुरक्षा कवच भी हासिल था। &lt;br /&gt;
इधर 1993का घटनाचक्र बहुत तेजी के साथ घटा। आईएसआई के इशारे पर दाऊद ने मेमन बंधुओ,अबू सलेम और अपने गुर्गो की मदद से मुंबई में कई जगह ब्लास्ट करवा दिए जिसमें सैकड़ो लोग मारे गए। ब्लास्ट के बाद सक्रिय हुई खुफिया एजेंसियों के कारण मुंबई में दाऊद समेत सभी गिरोहों की अपराधिक गतिविधियां करीब एक साल तक बंद रही। इस बीच मुंबई का समूचा अंडरवल्र्ड साम्प्रदायिक आधार पर बंट गया था। अरूण गवली,अमर नाइक और छोटा राजन हिन्दूवादी डॉन के रूप में उभरकर सामने आये तो दाऊद की छवि आईएसआई के इशारे पर चलने वाले पाक परस्त मुस्लिम डॉन के रूप में उभरी। छोटा राजन के बारे में तो यह बात भी फैलने लगी कि उसने मुंबई ब्लास्ट के लिए दाऊद को सबक सिखाने के लिए भारतीय खुफिया एजेंसियों रॉ और आईबी को मदद करनी शुरू कर दी। माना जाता है कि राजन ने दाऊद के बारे में अक्सर कई महत्वपूर्ण सूचनाएं खुफिया एजेंसियों को मुहैय्या करवाई। छाटा राजन दाऊद का किस हद तक दुश्मन बन चुका था इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसने मुंबई ब्लास्ट को अंजाम देने वाले दाऊद और उसके समूचे गिरोह का खात्मा करने की सौंगध खा ली। छोटा राजन ने अपनी इस सौंगध का निभाया भी। दो साल के भीतर राजन ने दाऊद गिरोह के सत्रह लोगों की हत्या करवा दी। इन सभी के मुंबई ब्लास्ट में शामिल होने का शक था।&lt;br /&gt;
बहरहाल मुंबई ब्लास्ट के बाद दाऊद ने फिर से मायानगरी में अपना अपराधिक साम्राज्य फैलाना शुरू किया और इस बार उसने मुंबई का लेफ्टिनेंट बनाया अपने दाएं हाथ छोटा शकील को। लेकिन छोटा राजन के साथी रोहित वर्मा और शूटर गुरू सॉटम दाऊद गिरोह पर भारी पड़ते रहे। 1997 में उन्होंने बंगलौर में दाऊद के एक साथी थकीउद्दीन वाहिद की हत्या कर दी। दरअसल थकीउद्दीन वाहिद दाउद की ईस्ट-वेस्ट एयरलांइस का डाइरेक्टर था। उसकी हत्या से दाऊद का बडा झटका लगा। दाऊद की कमर तोडऩे के लिए छोटा राजन ने यहीं पर बस नही किया। उसके शुटरों रोहित वर्मा और गुरू सॉटम ने नेपाल में बसे वहां के सांसद मिर्जा दिलशाद बेग की हत्या करवा दी। सांसद मिर्जा दिलशाद बेग ने सिर्फ नेपाल में दाऊद गिरोह को पनाह दिलवाता था वरन आईएसआई की आतंकवादी गतिविधियों और हथियार तस्करी का खास माध्यम भी बन गया था।&lt;br /&gt;
एक के बाद एक अहम लोगों की हत्या से दाऊद की कमर टूट गई थी। मुंबई बम कांड के एक और अभियुक्त पीलू खान की राजन गिरोह द्वारा हत्या के बाद छोटा शकील इस कदर बौखला गया कि पहले उसने पीलू खान के हत्यारे मंगेश पवार और फिर मुंबई में राजन के फाइनेंसर तथा भवन निर्माता ओम प्रकाश कुकरेजा की हत्या करवा दी। दरअसल राजन और दाऊद गिरोह में अब यह खूनी गैंगवार वर्चस्व की लड़़ाई को लेकर चल रही थी। मुंबई से हर वर्ष होने वाले 400 करोड़ के हफ्ता वसूली, शराब वेश्यावृत्ति जुएखाने और ठेके पर हत्याओं के कारोबार पर कब्जे के लिये दोनों गिरोह एक दूसरे को कमजोर करने में लगे हैं। तस्करी और जमीन पर कब्जे का धंधा ही दोनों गिरोह की रंजिश का मुख्य कारण है।&lt;br /&gt;
1993 में मुबई शहर में श्रृंखलावद्ध कम विस्फोट करवाकर सैकड़ों लोगों की जान लेने वाले और खुद को अपराध जगत का सबसे बड़ा डॉन कहलवाने वाले दाऊद इब्राहिम के अपराधिक साम्राज्य को छोटा राजन के सात सालों में छिन्न-भिन्न कर दिया और उसके विश्वास पात्र खतरनाक साथियों को चुन-चुन कर खत्म करने का अभियान छेड़ा। इसी छोटा राजन के डर से आई.एस.आई के हाथों का खिलौना बने डॉन दाऊद इब्राहिम ने अब अपना मुख्यालय दुबई से हटाकर करांची पाकिस्तान में बना लिया था। मौत यानि छोटा राजन नाम की सिर पर लटकती तलवार को हटाने के लिये दाऊद इब्राहिम के इशारे पर उसके सबसे करीबी साथी छोटा शकील ने 14 सितम्बर 2000 को बैंकाक में हमले की साजिश रची। शकील ने इस हमले को बहुत ही सुनियोजित ढंग से अंजाम दिया। पर असफलता ही हाथ लगी। वह इस हमले से एक साथ कई शिकार करना चाहता था पर किस्मत ने साथ नहीं दिया और छोटा राजन बाल-बाल बच गया। हुआ यूं की बैंकाक के संभ्रात इलाके के कूटनीतिक एंक्लेव में बने चरनकोर्ट अपाट्मेंट में रोहित वर्मा के घर पर 14 सितम्बर 2000 की रात साढ़े नौ बजे जब शकील के आदमियों ने हमला किया तब छोटा राजन घर में मौजूद था। मगर इस दाऊद का दुर्भाग्य ही कहा जायेगा के इस हमले में रोहित वर्मा व तीन अन्य लोग (पत्नी बेटी व नौकरानी) मारे गये जबकि छोटा राजन मात्र घायल हुआ और बच निकला। थाई पुलिस ने मात्र तीन दिनों के भीतर चार हमलावरों को गिरफ्तार कर लिया। इनमें से एक थाई हमलावर 51 वर्षीय चवालित उर्फ रफीक अरूकियत समेत तीन पाकिस्तानी शूटर थे जिनमें 33 वर्षीय मोहम्मद सलीम, 36 वर्षीय शेरखान और 45 वर्षीय मोहम्मद युसुफ ने पूछताछ के बाद न सिर्फ अपना अपराध कबूल किया वरन इस बात पर अफसोस जताया कि छोटा राजन जिंदा बच गया। इसी के बाद से दाऊद और छोटा राजन के बीच एक-दूसरे का खात्मा करने की जंग चल रही हैं। यह जंग उसी वक्त खत्म हो सकती है जब दोनों में से किसी एक सरगना का अंत हो जाएं।&lt;/div&gt;
</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://jurmkiduniya.blogspot.com/feeds/856311279570973080/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://jurmkiduniya.blogspot.com/2010/07/blog-post.html#comment-form' title='3 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8049618298159816963/posts/default/856311279570973080'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8049618298159816963/posts/default/856311279570973080'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://jurmkiduniya.blogspot.com/2010/07/blog-post.html' title='दाऊद-छोटा राजन: दोस्त कैसे बने दुश्मन ?'/><author><name>sunil verma</name><uri>http://www.blogger.com/profile/06462864962085848512</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='27' height='32' src='//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiM8mYTF1rSTG5OLwjuKe8ktdZwaNsHWlaRFf283uYibqX2zwZT1C0LITcRz_c-QhdhjEK686quBdQwPl6yirK3P5dvBOclUZ-nAWjIgkhf_dw38PrIOFgSWi-PC_Q-ilg/s113/sunil+pic2.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg12vyt0o2epW6Jzj9uPqje7L-Y3GD5aOq3FioaP8mYcjAhFhJmBCtFimOqmkNEHGjnn5TGNqXvAU0I40HKZckWi3cTa0s_ChTN18pTl3PkI1i53jjBenPJ4GnZ2KU4aqbykKU5C2MmiIQI/s72-c/Rajan+merrige.jpg" height="72" width="72"/><thr:total>3</thr:total></entry></feed>