<?xml version="1.0" encoding="UTF-8" standalone="no"?><?xml-stylesheet href="http://www.blogger.com/styles/atom.css" type="text/css"?><rss xmlns:itunes="http://www.itunes.com/dtds/podcast-1.0.dtd" version="2.0"><channel><title>East News 24x7</title><description>UTTAR PRADESH NEWS, NATIONAL NEWS, STATE NEWS, SPORTS NEWS, EDUCATION NEWS, ADHYATM NEWS, DISTRICT NEWS, AUTHOR NEWS, FILM NEWS, SPECIAL NEWS, BUILDERS NEWS, BEAUTY TIPS, HEALTH NEWS, TECHNICAL NEWS, GAMES NEWS, BREAKING NEWS, WRITER NEWS, SCIENCE NEWS, RELIGIOUS NEWS, EARTH NEWS,  SPACE NEWS, HINDI NEWS, AJAB-GAJAB NEWS, LATEST UPDATE, MONDAL NEWS, VILLAGE NEWS, MADHYA PRADESH NEWS,  BIHAR NEWS, RAJASTHAN NEWS, UTTRAKHAND NEWS, LUCKNOW NEWS, BARABANKI NEWS, SITAPUR NEWS, GORAKHPUR NEWS, AYODHYA</description><managingEditor>noreply@blogger.com (East News 24x7)</managingEditor><pubDate>Tue, 31 Mar 2026 18:56:32 +0530</pubDate><generator>Blogger http://www.blogger.com</generator><openSearch:totalResults xmlns:openSearch="http://a9.com/-/spec/opensearchrss/1.0/">5170</openSearch:totalResults><openSearch:startIndex xmlns:openSearch="http://a9.com/-/spec/opensearchrss/1.0/">1</openSearch:startIndex><openSearch:itemsPerPage xmlns:openSearch="http://a9.com/-/spec/opensearchrss/1.0/">25</openSearch:itemsPerPage><link>https://eastnews24x7.blogspot.com/</link><language>en-us</language><itunes:explicit>no</itunes:explicit><itunes:summary>UTTAR PRADESH NEWS, NATIONAL NEWS, STATE NEWS, SPORTS NEWS, EDUCATION NEWS, ADHYATM NEWS, DISTRICT NEWS, AUTHOR NEWS, FILM NEWS, SPECIAL NEWS, BUILDERS NEWS, BEAUTY TIPS, HEALTH NEWS, TECHNICAL NEWS, GAMES NEWS, BREAKING NEWS, WRITER NEWS, SCIENCE NEWS, RELIGIOUS NEWS, EARTH NEWS, SPACE NEWS, HINDI NEWS, AJAB-GAJAB NEWS, LATEST UPDATE, MONDAL NEWS, VILLAGE NEWS, MADHYA PRADESH NEWS, BIHAR NEWS, RAJASTHAN NEWS, UTTRAKHAND NEWS, LUCKNOW NEWS, BARABANKI NEWS, SITAPUR NEWS, GORAKHPUR NEWS, AYODHYA</itunes:summary><itunes:subtitle>UTTAR PRADESH NEWS, NATIONAL NEWS, STATE NEWS, SPORTS NEWS, EDUCATION NEWS, ADHYATM NEWS, DISTRICT NEWS, AUTHOR NEWS, FILM NEWS, SPECIAL NEWS, BUILDERS NEWS, BEAUTY TIPS, HEALTH NEWS, TECHNICAL NEWS, GAMES NEWS, BREAKING NEWS, WRITER NEWS, SCIENCE NEWS, R</itunes:subtitle><itunes:category text="News &amp; Politics"/><itunes:owner><itunes:email>noreply@blogger.com</itunes:email></itunes:owner><item><title>भाईचारे का त्यौहार है ईद-उल-फितर</title><link>https://eastnews24x7.blogspot.com/2026/03/eid-ul-fitr-is-a-festival-of-brotherhood.html</link><category>Writer</category><author>noreply@blogger.com (East News 24x7)</author><pubDate>Sat, 21 Mar 2026 18:42:40 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-3505245523590782174.post-1121593311066191893</guid><description>&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjI8IO05t4McEXiA6ORmugWHQoYq2N1Cg-6NuxkSN6eYCbxoD2WoChiaXpLN2Q4EryqtjEkoUmQSK3-f_XJ2g-cQI4XZyr6QVIMaUw6WU9U3kuukFJeEBsT7bW0OVMr36Ct8qDBgfknMs-ut0yf0Uw4QZkoen3RirusWPGJBnYg7gcT0YMw49wz9vUjCao/s420/IMG-20260321-WA0001.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="420" data-original-width="399" height="640" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjI8IO05t4McEXiA6ORmugWHQoYq2N1Cg-6NuxkSN6eYCbxoD2WoChiaXpLN2Q4EryqtjEkoUmQSK3-f_XJ2g-cQI4XZyr6QVIMaUw6WU9U3kuukFJeEBsT7bW0OVMr36Ct8qDBgfknMs-ut0yf0Uw4QZkoen3RirusWPGJBnYg7gcT0YMw49wz9vUjCao/w608-h640/IMG-20260321-WA0001.jpg" width="608" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;p style="text-align: center;"&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;डॉ. नजमुस्साकिब अब्बासी नदवी&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;इस्लाम धर्म के दो त्यौहार ईद-उल-फितर और ईदुल अजहा (बकरीद) प्रेम, त्याग, करुणा और सौहार्द का प्रतीक है, जो सभी को गले मिलकर गिले-शिकवे भुलाने और भाईचारे को मजबूत करने का संदेश देते हैं। यह पवित्र त्यौहार दान, समानता और एकता को बढ़ावा देता है, जो समाज में शांति स्थापित करते हुए सभी को एक साथ मिलकर खुशियां बांटने के लिए प्रेरित करता है।ईद सिर्फ नमाज़ पढ़ने का नाम नहीं है बल्कि यह आपस में मिलकर प्रेम फैलाने का अवसर भी है। यह त्यौहार सामाजिक दूरियों को मिटाकर एकता का संदेश देता है और इस मौके पर लोग दुश्मनी और नफरत भूलकर एक-दूसरे के गले लगते हैं। ईद की नमाज से पहले गरीबों और जरूरतमंदों को 'फितरा देना अनिवार्य है, जो समाज में आर्थिक समानता और जरूरतमंदों के प्रति करुणा का भाव सिखाता है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;ईद की सेवइयां, नए कपड़े और उपहारों का आदान-प्रदान परिवार, दोस्तों और पड़ोसियों के बीच भाईचारे के बंधन को मजबूत करता है।ईद के दिन सामूहिक नमाज अमन, शांति और एकता का संदेश देती है तो वहीं दूसरी ओर यह बताती है कि हम सब एक हैं। ईद का मुख्य संदेश इंसानियत के प्रति प्रेम और एकता है, जो भाईचारे के माध्यम से समाज को एक सूत्र में पिरोता है।ईद उल फितर को खास बनाता है सदका ए फित्र। अपने आसपास गरीब लोगों को दी जाने वाली वह पूंजी, जिससे हर कोई इस त्योहार को मना सके। इस रकम से वह भी अपनी पसंद के पकवान और कपड़े ले सके। आप ईद को गौर से देखें तो फित्र की राशि को अनाज की तौल पर मापने को कहा गया है। जैसे जौ,गेहूं,खजूर या किशमिश वगैरह। हर एक को अपनी हैसियत के हिसाब से इसमें से कोई भी चीज चुनकर, उसकी एक नाप के मूल्यों के बराबर राशि दूसरे गरीब को देना अनिवार्य है। ईद उल फित्र का मतलब ही है, प्राकृतिक स्वभाव की ओर लौटना।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;यानि जहां बराबरी हो,सबके हिस्से का भोजन हो,सबके तन का कपड़ा हो,सबके सरों पर छतें हों। यह सब हासिल फितरे को पाबंदी से अदा करने से होगा। इसलिए हर परिवार के छोटे-बड़े प्रत्येक सदस्य का फितरा निकाला जाता है। सुबह ईद की नमाज से पहले ही प्रत्येक मुसलमान को फित्रा की रकम दूसरे कमजोर व्यक्ति को देनी होती है और इस तरह जकात और फित्रा की धनराशि से आर्थिक बराबरी का संदेश दिया गया है। ईदुल फितर पवित्र रमजान के खत्म होने के बाद का त्योहार है।ये एक महीने की कठिन इबादत और त्याग के साथ रब के सामने संपूर्ण समर्पण के बाद का त्योहार है। ईद को अगर रमजान की आध्यात्मिक दृष्टि से देखें, तो यह एक ऐसा उपहार है, जो आपको एक कठिन त्याग और समर्पण के बाद मिला है। जिस तरह रमजान का जीवन में एक उद्देश्य है, उसका एक दर्शन है, एक दृष्टि है, उसी प्रकार ईद का भी एक उद्देश्य है, एक दर्शन है और एक दृष्टि है। ईद एक ऐसा आध्यात्मिक संदेश देती है, जिसमें संपूर्ण मानवता की भलाई निहित है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&amp;nbsp;ईद के रोज हर एक से गले मिलकर सारे भेद भुलाने का संदेश दिया गया है। अगर गौर से देखें तो सामाजिक बराबरी के लिए आपस में गले मिलना सबसे बड़ा रास्ता है। जब आप ईद की खुशी में एक-दूसरे को बधाई देते हैं, तो उसमें गले मिलना उसका एक हिस्सा है। उस समय चाहे कोई राजा हो या प्रजा,चाहे कोई गुरु हो या शिष्य, चाहे पिता हो या पुत्र,चाहे अमीर हो या गरीब, शक्तिशाली हो या फिर कमजोर,आपस में बराबरी से गले मिलते हैं। बराबरी और भाईचारे का यह संदेश ईद का सबसे पवित्र संदेश है। यह मानवता के लिए मानव मात्र से प्रेम और उसके सम्मान व बराबरी को बनाए रखने का त्योहार है।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;ईद की सेंवई चाशनी के साथ घुलकर संदेश देती हैं कि जिस ईश्वर ने तुम्हारी कड़ी इबादत को देखा है, उसने तुम्हे ईद की सेवइयों की मिठास भी बख्शी है । यदि तुम जीवन भर अनुशासन का पालन करोगे,आध्यात्म की ओर मन लगाओगे, सांसारिक लोभ से खुद को दूर करोगे, मानव कल्याण को प्राथमिकता दोगे तो तुम्हारा सारा जीवन ईद की सेंवई की मिठास से भर जाएगा। ईद एक दूसरे को माफ़ करने का भी त्यौहार है। भाई भाई के गले शिकवे दूर करने का अवसर है, तमाम बुराई पीछे छोड़कर गले मिलकर चलने की सीख भी ईद देती है। अपनी की हुई ग़लती या जिस किसी का आपने दिल दुखाया हो,उससे माफ़ी मांगिये । उसके गले लगिये और प्रायश्चित कीजिये कि आप कभी दोबारा ऐसा नही करेंगे । कोई आपसे माफ़ी मांगे, तो आप उसे माफ़ कीजिये,आगे बढ़कर गले लगाइये और कहिए,ज़िन्दगी बड़ी छोटी है । हम इस सेंवई की मिठास के साथ इसे दोबारा खूबसूरत रास्तों पर लाते हैं । पैगम्बर हज़रत मुहम्मद सल्ल ने भी माफ़ करने को सबसे बेहतरीन रास्ता कहा है । ईद इसलिए और खास हो जाती है कि यह पूरे साल आंख चुराने वालों को भी एक मौका देती है कि गले मिलकर, आपस के गिले शिकवे दूर कर लो।&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;कहा जाता है कि ईद मानवीय आध्यात्मिक ऊंचाई का त्यौहार है।जो एक कठिन प्रशिक्षण अर्थात पूरे महीने के रोज़ा रखने के बाद आता है। दरअसल ईद अल्लाह की तरफ़ से एक त्यौहारी या ईदी है, जैसे हम अपने बच्चों को ईदी देते हैं वैसे ही अल्लाह भी हमें पूरे महीने रोज़ा रखने की खुशी में ईद के रूप में ईदी देता है। रमज़ान से ईद तक पूरा एक सफर है, जिसमे करुणा,त्याग,समर्पण,अनुशासन,भाईचारा,बराबरी,एकता और सहयोग गूंथे हुए हैं।इन्हें आत्मसात करना चाहिए,यही ईद की मुबारकबाद है।ईद का ये त्यौहार इस्लामी कैलेंडर के अनुसार शव्वाल माह की पहली तारीख को मनाया जाता है.इसलामी कैलंडर के सभी महीनों की तरह यह भी नए चांद के दिखने पर शुरू होता है. मुसलमानों का यह त्योहार पूरे विश्व में पूरे हर्षोल्लास से मनाया जाता है।ईद के दिन प्रत्येक मुसलमान अच्छे कपड़े पहन कर 2 रकात नमाज़ पढ़ने ईदगाह या किसी जुमा मस्जिद में जाता है,वहां इमाम ईद के संबंधित संबोधन देता है और लोगों को ईशभय की ओर बुलाता है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;इसी तरह जिन लोगों ने किसी कठिनाई के कारण रोजे नहीं रखे हैं वह ईद के बाद किसी भी महीने में क़ज़ा रोजे के रूप में उसे रख सकते हैं. हालांकि इन रोजों का महत्व उतना नहीं होता,इसके अलावा रोजा ना रख पाने की विशेष स्थिति में व्यक्ति अपनी एकदिन की पूरी खुराक किसी गरीब या जरूरतमंद को दे सकता है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p style="text-align: center;"&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&amp;nbsp;(लेखक नया सवेरा फाउंडेशन ग़ाज़ीपुर के संस्थापक और सौहार्द फेलोशिप के मेंटर हैं)&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;नमस्कार दोस्तों, ईस्ट न्यूज़ 24x7 में आपका स्वागत है...

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margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="692" data-original-width="638" height="640" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhW445ScG5lxdxeSyMI666nosoDcf3Z6AOiD9T8gSPq2nMVvoLp9pPmO7aOw-7bepx0GG2nn3jS9FiXt9q6PdplCrDRDdIGgnGDpgJF01qp7JKHagXjsx7yRg759OFqgGUuWuQV_6_zukq0oRDbd04mh-ACGDmwtW2h6K_esxbUdbRL1lmGxbRuqyKXHgQ/w590-h640/IMG_20260319_073859.jpg" width="590" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;p style="text-align: center;"&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;आचार्य संजय तिवारी&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;1960853127 वें नववर्ष की उत्साहमयी तरंगे हर भारतीय के मन को स्पर्श करें। इतने वर्ष बीत चुके हैं जिसका इतिहास हमारे पास उपलब्ध है। इस अवधि में युद्धों का भी इतिहास रहा है। स्वयं मां दुर्गा की दुर्गविनाशिनी, महिषासुर संहारिणी, रक्तबीज नाशिनी स्वरूप के इतिहास को हम आज से 9 दिन तक गायेंगे। आज जिस युद्ध को विश्व देख और झेल रहा है, ऐसे युद्ध इस सृष्टि में अनेक बार हुए हैं, आगे भी होंगे, किंतु सनातन वैदिक आर्य हिंदू संस्कृति के सान्निध्य में जीवन के शुद्ध संकेतांक भी सदैव उपलब्ध होंगे।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;blockquote&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;सृष्टि समय के साथ चली जिस गति से वह अनुभव है&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;सृजन - सृजन में स्पंदन की धार लिए वैभव है&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;पावन है , मनभावन है , नव मन है , आंगन आँगन ,&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;सेवा , सार , समर्पण लाया , यह नव संवत्सर है।।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;/blockquote&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;blockquote&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;प्राचेतस के श्लोक - श्लोक में , गीता के स्वर -स्वर&amp;nbsp; में&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;गायत्री के अक्षर अक्षर , ब्रह्म कृपा निर्झर में&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;गंगा की कल- कल धारा में ,&amp;nbsp; सागर गीत सुनाता&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;संकल्पो को पावन&amp;nbsp; करने आया संवत्सर है।।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;/blockquote&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;blockquote&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;नचिकेता के प्रश्नो का आधार रहा जो स्वर है&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;उपनिषदों की भाषा का आधार रहा जो स्वर है&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;अध्यायों , उप अध्यायों की हर वल्ली गाती है&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;काल चयन है , ऋतु पावन है , भारत संवत्सर है।।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;/blockquote&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;शुभ अवसर है। जगद्जननी माँ जगदंबा की आराधना से श्रीराम के जन्म तक। त्रेता में आसुरी सभ्यता को पराजित करने में 10 दिन लगे थे। द्वापर में अधर्म को 18 दिनों में पराजित किया जा सका। माता दुर्गा मो 9 दिन युद्ध करने के बाद विजय मिली थी। उनके सनातन संततियों ने कितनी शक्ति जुटायी है , इसका परीक्षण भी होगा।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;प्रथम दिन ही सृष्टि के उद्भव का है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, नवसंवत्सर। सनातन संस्कृति में वर्ष का प्रथम दिन। सबसे पहले इस दिन की बधाई और मातृ शक्ति को सादर वंदन।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;या देवि सर्वभूतेषु.....&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;आज से नौ दिन हर घर मे शक्ति साधना, आराधना, पूजा, वंदना, स्तुति और आरती अवश्य होगी। इस अवसर पर आइये न एक बार पूरा भारत सनातन संकल्प ले। अपने लगभग डेढ़ हजार वर्षों के संघर्ष के बाद विशुद्ध सनातन की स्थापना का संयोग बना है। कुछ तो आधुनिक विज्ञान की वजह से, कुछ पश्चिमी प्रगति के मानकों की वजह से, कुछ कबीलाई सभ्यताओं की वजह से और कुछ आधुनिक विज्ञान के प्रदूषण की वजह से। कोरोना की दो वर्षों की त्रासदी के बादआज परिस्थितियां प्रत्येक मनुष्य को पवित्रता धारण करने को विवश कर चुकी हैं। कुछ वर्ष पूर्व एक सूक्ष्म विषाणु के आक्रमण ने विश्व मे मानवता के सामने ऐसा संकट खड़ा कर दिया जिससे बचने का एकमात्र साधन सनातन जीवन संस्कृति ही निकल कर सामने आया। इसमें निर्धारित जीवन मूल्यों को अपनाए बिना करोना जैसी आसुरी शक्ति के आक्रमण से कोई नही बचेगा, ऐसा उस समय कहा गया । आज जब लगभग आधी दुनिया भयंकर युद्ध में फंसी है, इसके बीच जीवन का एक मात्र संकेतक सनातन संस्कृति में ही उपलब्ध हो सकता है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;या देवि सर्वभूतेषु, लज्जा रूपेण संस्थिता।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;लज्जा भी स्वयं देवी हैं । सनातन जीवन संस्कृति का आधार है शुद्धता और सत्य। वाणी, वस्त्र, शरीर, निवास, आवास, गोष्ठ, संबंध, कुटुंब, समाज, किया, कर्म, चिंतन, व्यवहार जैसे प्रत्येक विंदु पर केवल शुद्धता चाहिए।&amp;nbsp; गायत्री यानी मंत्र, गंगा यानी जल, गौ यानी पशुधन,तुलसी यानी वनस्पति एवं औषधियां, गौरी यानी स्त्री, गोविंद यानी ईश्वर में आस्था और गुरु यानी पथप्रदर्शक। ये सभी सनातन के आधार तत्व हैं। जिनके बिना सनातन संस्कृति सम्पूर्ण नही होती। अभी बहुत दिन नही हुए, भारत की स्वाधीनता के समय तक यह सब सुरक्षित अवस्था मे हमारे पास थे। आजादी के बाद जबसे हमने पश्चिमी प्रगति को आदर्श माना और दोहन के अंधे प्रवाह में बहने लगे , हमने अपना ही अस्तित्व समाप्त कर लिया।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;लगभग 2300 वर्ष पूर्व आचार्य चाणक्य ने कहा था, आस्था तुम्हारी है, वह डिग कैसे सकती है। अपनी आस्था पर भरोसा रखो, तुम्हे कभी कोई सभ्यता पराजित नही कर पायेगी। लेकिन हमने चाणक्य को न तो सुना और न ही उनका अनुकरण किया। कबीलों से उपजी अमानवीय सभ्यताओं में आदर्श तलाशने लगे। अपना विज्ञान , ज्ञान, संस्कार, जीवनमूल्य , अपनी आर्थिक नीति, अपनी व्यवस्थाएं हमे पिछड़ी लगने लगीं और कबीलाई व्यवस्थाओं को हमने अपनाना शुरू कर दिया। अपना भोजन नही रास आया। पश्चिमी अमानवीय पकवानों में आनंद मिलने लगा। गोपालन पिछड़ापन हो गया। श्वान बिस्तरों पर और बेटियों की गोद मे काबिज हो गए। पहले हम पाते घर के चौके में थे, जाते खेत मे थे। अब होटलों में पाने लगे, घरों में जाने लगे। रसोई कंगाल , बाथरूम मालामाल। अरे क्या रास्ता अपनाया हमने।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;यह जो चैत्र नवरात्र है इसे कई स्थानों पर गुड़ी पड़वा कहा जाता है। कभी सोचा है आपने कि यह गुड़ी पड़वा भला क्या है। लोक में इसी दिन के बाद नया अन्न ग्रहण करने का विधान है। नए वस्त्र धारण करने का पारंपरिक चलन भी है। इस गुड़ी पड़वा शब्द के बारे में कभी सोचा है किसी ने? कोई अंग्रेज जब गुरु पर्व बोलेगा तो उसका उच्चारण कैसा होगा। गुरु पर्व। गुड़ी पड़वा। हमने अपने गुरु पर्व को भुला दिया, गुड़ी पड़वा याद रह गया। गुरु की महत्ता तो कब की लुप्त कर दी हमने। गुरु से ज्ञान लेकर सृष्टि के संचालन की व्यवस्था में सभी की भूमिका निहित है, लेकिन हम कर क्या रहे है,? जो शिक्षा देने वाले है उन्हें ही गुरु भी मान लिया। हमे यही नही मालूम कि कौन शिक्षार्थी है, कौन विद्यार्थी है और कौन छात्र है। एक सुर में सभी को कह दिया छात्र। बहरहाल, यह एक अलग ही विषय है और इस पर कभी और चिंतन करेंगे।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;अभी यह सौभाग्य समाझिये। सनातन को अपनाइए। सृष्टि को बचाइए।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;नमस्कार दोस्तों, ईस्ट न्यूज़ 24x7 में आपका स्वागत है...

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&lt;/div&gt;</description><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhW445ScG5lxdxeSyMI666nosoDcf3Z6AOiD9T8gSPq2nMVvoLp9pPmO7aOw-7bepx0GG2nn3jS9FiXt9q6PdplCrDRDdIGgnGDpgJF01qp7JKHagXjsx7yRg759OFqgGUuWuQV_6_zukq0oRDbd04mh-ACGDmwtW2h6K_esxbUdbRL1lmGxbRuqyKXHgQ/s72-w590-h640-c/IMG_20260319_073859.jpg" width="72"/><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>इंडिया हैबिटेट सेंटर में  जीवंत दो प्रस्तुतियां</title><link>https://eastnews24x7.blogspot.com/2026/03/two-live-performances-at-India-habitat-centre.html</link><category>national</category><author>noreply@blogger.com (East News 24x7)</author><pubDate>Thu, 12 Mar 2026 08:35:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-3505245523590782174.post-5598665513058695389</guid><description>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgACwUBiSgff1e0vGGgogHIBVgdtNZMWJ_oaP8AM3EBDA4gWTWjg0XlsjQkoro_ssDL0ZezDtRHbeqYy1akVz8ZhzO2_xho9hrKPmGJBNt20jusF6CBClu0qxNXnJxAB3NqP6xmUfU_BSn4s7H8c4qruszZGzVsvrMsvZ6hTPOxRLCGBOzhKVaTbbnRWDE/s1274/IMG-20260311-WA0009.jpg" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="1274" data-original-width="1080" height="640" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgACwUBiSgff1e0vGGgogHIBVgdtNZMWJ_oaP8AM3EBDA4gWTWjg0XlsjQkoro_ssDL0ZezDtRHbeqYy1akVz8ZhzO2_xho9hrKPmGJBNt20jusF6CBClu0qxNXnJxAB3NqP6xmUfU_BSn4s7H8c4qruszZGzVsvrMsvZ6hTPOxRLCGBOzhKVaTbbnRWDE/w542-h640/IMG-20260311-WA0009.jpg" width="542" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;p style="text-align: left;"&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;blockquote&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;b&gt;“जीने भी दो यारो” और “फोन पे” ने सामाजिक मुद्दों को मंच पर किया साकार&amp;nbsp;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/blockquote&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;p style="text-align: center;"&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhbyWWMvIKxr73QyL2jl-DOPFNwiHXZ2kH2afSt6rgdldsD_mjhHv4wIvvIqXwsZlfQPabuhawSx6MfJoxBdsipTDWdzaKaf7jElKzq2IlaErD6sg_FZOt48vwQbmiLR-P44xyn3iiDp9frvBuXpMYDrJCkhG4yCCNnLh83lk-j8C-43N5OVXcgQgaUv8Q/s1599/IMG-20260311-WA0006.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="1599" data-original-width="923" height="200" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhbyWWMvIKxr73QyL2jl-DOPFNwiHXZ2kH2afSt6rgdldsD_mjhHv4wIvvIqXwsZlfQPabuhawSx6MfJoxBdsipTDWdzaKaf7jElKzq2IlaErD6sg_FZOt48vwQbmiLR-P44xyn3iiDp9frvBuXpMYDrJCkhG4yCCNnLh83lk-j8C-43N5OVXcgQgaUv8Q/w115-h200/IMG-20260311-WA0006.jpg" width="115" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;p style="text-align: center;"&gt;&lt;b&gt;माया कुलश्रेष्ठ&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;b&gt;नई दिल्ली। &lt;/b&gt;भारतीय रंगमंच केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह समाज का दर्पण भी है। मंच पर प्रस्तुत होने वाली कहानियाँ समाज की वास्तविकताओं, मानवीय संबंधों और जीवन के संघर्षों को सामने लाती हैं। ऐसे ही विचारोत्तेजक रंगमंच की परंपरा को आगे बढ़ाने वाले महत्वपूर्ण रंगकर्मियों में एक नाम है ओम कटारे का। उन्होंने अपने जीवन के कई दशक रंगमंच को समर्पित किए हैं और अपने नाटकों के माध्यम से समाज के सामने गंभीर प्रश्नों को सरल, रोचक और हास्यपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया है। उनकी रंगसंस्था यात्री थिएटर पिछले सैंतालीस वर्षों से लगातार सक्रिय है। इस संस्था ने न केवल अनेक सफल नाटकों का मंचन किया है, बल्कि अनेक युवा कलाकारों को भी तैयार किया है। यात्री थिएटर की विशेषता यह है कि यहाँ नाटक केवल मनोरंजन के लिए नहीं बल्कि समाज में विचार उत्पन्न करने के उद्देश्य से प्रस्तुत किए जाते हैं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;b&gt;रंगमंच की शुरुआत&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;ओम कटारे की रंगयात्रा की शुरुआत पृथ्वी थियेटर मुंबई से हुई। उस समय पृथ्वी थिएटर नया-नया स्थापित हुआ था और धीरे-धीरे भारतीय रंगमंच का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन रहा था। उस दौर में कई युवा कलाकार यहाँ अपनी प्रतिभा और रचनात्मकता के साथ प्रयोग कर रहे थे। ओम कटारे भी उन्हीं कलाकारों में थे जिन्होंने अपनी मेहनत और समर्पण से रंगमंच को नई ऊर्जा दी। पृथ्वी थिएटर में काम करते हुए उन्होंने यह अनुभव किया कि रंगमंच की असली शक्ति उसकी सादगी और सच्चाई में होती है। जब मंच पर दिखाई जाने वाली कहानी आम आदमी के जीवन से जुड़ी होती है तो दर्शक उससे तुरंत जुड़ जाते हैं। यही विचार उनके पूरे रंगमंचीय जीवन की आधारशिला बना।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiKG7fTFHKlHuTpli98ktgxWrvCTzSgY0im1FGQCDV_4kF7w-sI-OFOw3szAx3rVy3CzY9VPWzro_VhGgHI2nPtOGTZ0BhwOGhj0dddFaY48Jwm1-iVHQAVAYLuejnGxMs09zsN5K-oRg99t4MvwmCS9sSsXMg9X-1RsKeo_PuYhZO2q3mrG7CFhGD5tqA/s1276/IMG-20260311-WA0010.jpg" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="1276" data-original-width="1045" height="640" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiKG7fTFHKlHuTpli98ktgxWrvCTzSgY0im1FGQCDV_4kF7w-sI-OFOw3szAx3rVy3CzY9VPWzro_VhGgHI2nPtOGTZ0BhwOGhj0dddFaY48Jwm1-iVHQAVAYLuejnGxMs09zsN5K-oRg99t4MvwmCS9sSsXMg9X-1RsKeo_PuYhZO2q3mrG7CFhGD5tqA/w524-h640/IMG-20260311-WA0010.jpg" width="524" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;b&gt;यात्री थिएटर की स्थापना&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;इसी विचार को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने अपनी रंगसंस्था यात्री थिएटर की स्थापना की। “यात्री” शब्द का अर्थ है यात्रा करने वाला। यह नाम इस बात का प्रतीक है कि रंगमंच केवल एक प्रस्तुति नहीं बल्कि विचारों और अनुभवों की एक निरंतर यात्रा है। पिछले सैंतालीस वर्षों में यात्री थिएटर ने सैकड़ों मंचन किए हैं। इस संस्था की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ भव्य मंच सज्जा की अपेक्षा कहानी, अभिनय और संवाद की शक्ति पर अधिक ध्यान दिया जाता है। ओम कटारे का मानना है कि यदि कहानी सशक्त हो और कलाकार ईमानदारी से अभिनय करें तो साधारण मंच भी दर्शकों के मन पर गहरा प्रभाव छोड़ सकता है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;b&gt;आम आदमी के जीवन से जुड़ा रंगमंच&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;ओम कटारे के नाटकों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उनकी कहानियाँ आम आदमी के जीवन से जुड़ी होती हैं। उनके नाटकों के पात्र वही लोग होते हैं जिन्हें हम अपने आसपास देखते हैं—मध्यमवर्गीय परिवार, नौकरी करने वाले लोग, पड़ोसी और समाज के सामान्य नागरिक।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjN3S-HN1XGtYbmzaEj_-TLP5Gq4caFYeTrkCKy_eKcTDmSupfVLW0Cmtf9Vuof5lK3GSnXxdPbMe8nBwx0y_4lqD6coYy6Bf8JY0XEH5IXtBtqfUaXWwICBbEah8wSw4q87YvhepNEXtl3GtZN0ZyJWvfB_hqHpuDO1DvQvl7kO-OH8YUZ69e-9DbsqUQ/s1080/IMG-20260311-WA0008.jpg" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="963" data-original-width="1080" height="570" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjN3S-HN1XGtYbmzaEj_-TLP5Gq4caFYeTrkCKy_eKcTDmSupfVLW0Cmtf9Vuof5lK3GSnXxdPbMe8nBwx0y_4lqD6coYy6Bf8JY0XEH5IXtBtqfUaXWwICBbEah8wSw4q87YvhepNEXtl3GtZN0ZyJWvfB_hqHpuDO1DvQvl7kO-OH8YUZ69e-9DbsqUQ/w640-h570/IMG-20260311-WA0008.jpg" width="640" /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;b&gt;उनके नाटकों में अक्सर ऐसे विषय सामने आते हैं&amp;nbsp;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;ul style="text-align: left;"&gt;&lt;li&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;बदलते पारिवारिक संबंध&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;पीढ़ियों के बीच विचारों का अंतर&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;सामाजिक दिखावा और पाखंड&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;आधुनिक जीवन की भागदौड़&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;तकनीक का बढ़ता प्रभाव&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;इन विषयों को वे गंभीरता से उठाते हैं, लेकिन उनकी प्रस्तुति में हास्य और व्यंग्य का संतुलन होता है। इस कारण उनके नाटक दर्शकों को हँसाते भी हैं और सोचने के लिए प्रेरित भी करते हैं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;b&gt;उनके प्रमुख नाटक&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;ओम कटारे के नाटकों की सूची बहुत समृद्ध है और उनके कई नाटक वर्षों से मंचित होते रहे हैं। इनमें प्रमुख हैं&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;ul style="text-align: left;"&gt;&lt;li&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;रावणलीला&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;कालचक्र&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;चिंता छोड़ चिंतामणि&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;परफेक्ट फैमिली&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;हद कर दी आपने&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;चंदू की चाची&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;आया रे आया ए.आई. आया&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;इन नाटकों में पारिवारिक संबंधों, सामाजिक परिस्थितियों और आधुनिक जीवन की जटिलताओं को हास्य और व्यंग्य के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEi7XRnBk21ygn-8UDMy_8TdwNdjNi7DxwG50uXqIb8B7mzLjWgkA14EVuSJaMnxGRVaFiNN3MedENCQZwDBYpi-yHeCK1AJzi1EQfM3Il6Fvaz-UvSD5Cl8SFuFgK7EYobEG6AEbOXw7c_EjVd4ORxxRTbZHsE78OswculBbP-UJsocuQ7A10Zz-zH33MQ/s1265/IMG-20260311-WA0011.jpg" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="1265" data-original-width="1080" height="640" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEi7XRnBk21ygn-8UDMy_8TdwNdjNi7DxwG50uXqIb8B7mzLjWgkA14EVuSJaMnxGRVaFiNN3MedENCQZwDBYpi-yHeCK1AJzi1EQfM3Il6Fvaz-UvSD5Cl8SFuFgK7EYobEG6AEbOXw7c_EjVd4ORxxRTbZHsE78OswculBbP-UJsocuQ7A10Zz-zH33MQ/w546-h640/IMG-20260311-WA0011.jpg" width="546" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;b&gt;इंडिया हैबिटेट सेंटर में रंगमंच की विशेष शाम&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;पिछले छह और सात मार्च को दिल्ली के प्रतिष्ठित सांस्कृतिक केंद्र इंडिया हैबिटेट सेंटर में यात्री थिएटर द्वारा दो नाटकों का प्रभावशाली मंचन किया गया— “जीने भी दो यारो” और “फोन पे”। यह आयोजन रंगमंच प्रेमियों के लिए एक यादगार सांस्कृतिक संध्या बन गया।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;कार्यक्रम में प्रोफेसर केजी सुरेश जो इंडिया हैबिटेट सेंटर के निदेशक हैं, विशेष रूप से उपस्थित रहे। उनके साथ भारत सरकार के पूर्व केंद्रीय मंत्री विजय गोयल भी कार्यक्रम में शामिल हुए।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;इसके अतिरिक्त पुदुचेरी के आयुक्त रविदीप चाहर, वरिष्ठ पत्रकार विकास पोरवाल और मनीष कुलश्रेष्ठ भी इस अवसर पर उपस्थित रहे। इन सभी गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को और भी बढ़ा दिया।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;b&gt;“जीने भी दो यारो” : सामाजिक रिश्तों की कहानी&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;नाटक “जीने भी दो यारो” में पति-पत्नी के बीच होने वाले झगड़ों और पारिवारिक तनाव को अत्यंत रोचक और हास्यपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया गया। यह नाटक दिखाता है कि किस प्रकार समाज और रिश्तों की कमजोर कड़ियाँ भी कई बार टूटते संबंधों को जोड़ने का माध्यम बन जाती हैं।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;इस नाटक में कलाकारों ने अपने प्रभावशाली अभिनय से दर्शकों का मन जीत लिया।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEh7GP8kfcOgZckKSPZhhqXTCIJMhh2hbeMxYDlzgEcX6uerf_hbjilvDpyqFy_lQfBoVtvGX-46npS_DJ7Y_wRSp7hcWU7aC2UIx_iPvGXqW8-HeomEfPpzUHAXpGzeLJJFa7B-OlZuUHGMI6AkFyg86mRZJYxl82GkwKNTZlMJ5t1vYBPfhdNhpbaAxBM/s1080/IMG-20260311-WA0007.jpg" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="1031" data-original-width="1080" height="610" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEh7GP8kfcOgZckKSPZhhqXTCIJMhh2hbeMxYDlzgEcX6uerf_hbjilvDpyqFy_lQfBoVtvGX-46npS_DJ7Y_wRSp7hcWU7aC2UIx_iPvGXqW8-HeomEfPpzUHAXpGzeLJJFa7B-OlZuUHGMI6AkFyg86mRZJYxl82GkwKNTZlMJ5t1vYBPfhdNhpbaAxBM/w640-h610/IMG-20260311-WA0007.jpg" width="640" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;b&gt;कलाकार&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;ol style="text-align: left;"&gt;&lt;li&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;कनुप्रिया शर्मा — सावित्री&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;साहिल रवि — सत्यभान&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;हितेश भाटिया — न्यायाधीश&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;अनुप बालियान — बाबूलाल (क्लर्क)&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;देविका जना — अमृताबाई&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;नमन मुखर्जी — सूत्रधार&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;अभिराज बदने — अरदली&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ol&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;b&gt;“फोन पे” : बदलते समय की सच्चाई&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;दूसरा नाटक “फोन पे” आधुनिक जीवन की एक महत्वपूर्ण सच्चाई को सामने लाता है। आज के समय में जीवन की लगभग हर आवश्यकता—बातचीत, लेन-देन, कामकाज और कई बार रिश्ते भी—मोबाइल फोन तक सीमित होते जा रहे हैं। इस नाटक में दिखाया गया कि कैसे धीरे-धीरे इंसानी रिश्ते तकनीक के दायरे में सिमटते जा रहे हैं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhm8FZojjR5pfdBajDMz-FGxgTO87yqGWCv-ow3v6CJk7Pv5vYC7Y_SotCC4opTAU-C_FXSi6qGvv-Ygc0zWgO9Wm15iHGL2NNqtFPLNoU8R4Bdut-u7gqyrtuKWqCQyXdC394WbuqP2YwUA2zZ9DgYnifCnK8WIi99TmuRO3GgIpYUXjJth9vZmIq5T-o/s1080/IMG-20260311-WA0005.jpg" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="815" data-original-width="1080" height="482" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhm8FZojjR5pfdBajDMz-FGxgTO87yqGWCv-ow3v6CJk7Pv5vYC7Y_SotCC4opTAU-C_FXSi6qGvv-Ygc0zWgO9Wm15iHGL2NNqtFPLNoU8R4Bdut-u7gqyrtuKWqCQyXdC394WbuqP2YwUA2zZ9DgYnifCnK8WIi99TmuRO3GgIpYUXjJth9vZmIq5T-o/w640-h482/IMG-20260311-WA0005.jpg" width="640" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;b&gt;कलाकार&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;ol style="text-align: left;"&gt;&lt;li&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;ओम कटारे — बड़े भैया&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;प्रशांत उपाध्याय — आधिर&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;सायली गायकवाड़ — दिव्या&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;कनुप्रिया शर्मा — अनीता श्रीवास्तव&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;हितेश भाटिया — वेटर&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ol&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;b&gt;गुरु-शिष्य परंपरा&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;ओम कटारे आधुनिक विचारों के साथ-साथ भारतीय परंपरा की गुरु-शिष्य परंपरा में भी गहरा विश्वास रखते हैं। यात्री थिएटर में कलाकारों को केवल अभिनय ही नहीं सिखाया जाता, बल्कि मंच से जुड़ी हर छोटी-बड़ी चीज़—प्रकाश व्यवस्था, मंच सज्जा, प्रॉप्स और बैकस्टेज अनुशासन—भी सिखाई जाती है। उनके शिष्यों में सागर और नमन जैसे कलाकार इस परंपरा के अच्छे उदाहरण हैं, जो हर नाटक के साथ अपनी कला को और अधिक निखार रहे हैं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiOiSIGy8UDh7KTHEVCxYBj6niWh-fDEeCvC8TNAJee4lAuNBx5rHJKdUyq0TMxglF21REmCv-pdtTs9oIJDZHX-TrlxeA6psA8NDNiuiZzSTPtasUjEqbcW60iSVWd1tx7a8QqzK_5XzKk_M6pt4kqNdOD0UBMUXK0zxwrri8HuC4IvsXhrv6wyO7FEKQ/s1080/IMG-20260311-WA0004.jpg" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="801" data-original-width="1080" height="474" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiOiSIGy8UDh7KTHEVCxYBj6niWh-fDEeCvC8TNAJee4lAuNBx5rHJKdUyq0TMxglF21REmCv-pdtTs9oIJDZHX-TrlxeA6psA8NDNiuiZzSTPtasUjEqbcW60iSVWd1tx7a8QqzK_5XzKk_M6pt4kqNdOD0UBMUXK0zxwrri8HuC4IvsXhrv6wyO7FEKQ/w640-h474/IMG-20260311-WA0004.jpg" width="640" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;b&gt;एक यादगार सांस्कृतिक संध्या&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;दोनों नाटकों के मंचन के दौरान दर्शकों की तालियों से सभागार बार-बार गूंजता रहा। कलाकारों की जीवंत प्रस्तुति ने पूरे सभागार को ऊर्जा से भर दिया और वातावरण एक जीवंत सांस्कृतिक उत्सव में बदल गया। इस प्रकार इंडिया हैबिटेट सेंटर में आयोजित यह रंगमंचीय कार्यक्रम दिल्ली की सांस्कृतिक दुनिया में एक खुशनुमा और यादगार शाम के रूप में दर्ज हो गया।ओम कटारे और यात्री थिएटर की यह निरंतर यात्रा आने वाले समय में भी भारतीय रंगमंच को नई ऊर्जा, नई दिशा और नए विचार देती रहेगी।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;नमस्कार दोस्तों, ईस्ट न्यूज़ 24x7 में आपका स्वागत है...

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href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgI13_LFkJjuVpEl8Qpnk9pX5lrY4P_zquiKmZAGutdBSkkraQ7QijzM63NnCj6ICSC08KVyF0WDs-Jhqxkp-7E1MlUAD52sldeyMs5Xz2MweEjLG6OrVHmcaguF_iIiWVEoLYb-NMV0muYe5uFFmJuj4s1PDT0Z92eOEeIyiqbNFuaczfoMtI0UicuwZw/s1080/IMG-20260309-WA0002.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="999" data-original-width="1080" height="592" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgI13_LFkJjuVpEl8Qpnk9pX5lrY4P_zquiKmZAGutdBSkkraQ7QijzM63NnCj6ICSC08KVyF0WDs-Jhqxkp-7E1MlUAD52sldeyMs5Xz2MweEjLG6OrVHmcaguF_iIiWVEoLYb-NMV0muYe5uFFmJuj4s1PDT0Z92eOEeIyiqbNFuaczfoMtI0UicuwZw/w640-h592/IMG-20260309-WA0002.jpg" width="640" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;ul style="text-align: left;"&gt;&lt;li&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;मतदान से मतगणना तक की पुलिस की विशेष रणनीति प्रभावी रही&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;p style="text-align: center;"&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;कमल रायमाझी&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;b&gt;काठमांडू। &lt;/b&gt;साल 2023 में हुए प्रतिनिधि सभा और प्रांतीय सभा चुनावों की तुलना में 2026&amp;nbsp; को सम्पन्न प्रतिनिधि सभा सदस्य चुनाव अपेक्षाकृत अधिक शांतिपूर्ण और व्यवस्थित माहौल में सम्पन्न हुआ है। चुनाव अवधि के दौरान प्रभावी सुरक्षा रणनीति, सुरक्षाकर्मियों की सक्रिय तैनाती तथा सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय के कारण इस बार मतदान प्रक्रिया सुरक्षित, व्यवस्थित और भयमुक्त वातावरण में सम्पन्न होने की बात संबंधित पक्षों ने कही है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;चुनाव को शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न कराने के लिए नेपाल पुलिस ने बहुआयामी सुरक्षा योजना लागू की थी। मतदान स्थल और मतदान केंद्रों पर विशेष सुरक्षा व्यवस्था किए जाने के कारण मतदाताओं ने निर्भय होकर अपने मताधिकार का प्रयोग किया। सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि सीमित संसाधनों के बावजूद नेपाल पुलिस ने अधिकतम क्षमता का उपयोग करते हुए चुनाव को निष्पक्ष, सुरक्षित और शांतिपूर्ण वातावरण में सम्पन्न कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;पुलिस आई जी&amp;nbsp; दान बहादुर कार्की के अनुसार सुरक्षाकर्मियों को स्पष्ट जिम्मेदारियों के साथ परिचालित किया गया तथा देशभर के पुलिस इकाइयों को उच्च सतर्कता पर रखा गया था। पुलिस मुख्यालय के अनुसार चुनाव सुरक्षा के लिए मुख्यतः पाँच प्रमुख रणनीतियाँ अपनाई गई थीं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;पहली रणनीति के तहत सुरक्षा जोखिम का मूल्यांकन कर मजबूत सुरक्षा योजना तैयार की गई। दूसरी रणनीति के रूप में सीमित संसाधनों का प्रभावी उपयोग करते हुए सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाया गया। तीसरी रणनीति के तहत हाल के आंदोलनों के कारण कुछ कमजोर पड़े पुलिस मनोबल को मजबूत करने के लिए संगठन के भीतर विशेष पहल की गई। चौथी रणनीति के तहत सुरक्षा निकायों, राजनीतिक दलों, प्रशासन तथा अन्य सरोकार वाले पक्षों के साथ प्रभावी समन्वय कायम किया गया। पाँचवीं रणनीति के रूप में चुनाव अवधि के दौरान निरंतर निगरानी और नियंत्रण व्यवस्था को मजबूत किया गया।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;पुलिस मुख्यालय की सूचना शाखा के अनुसार पुलिस महानिरीक्षक कार्की ने स्वयं विभिन्न प्रांतों और जिलों के पुलिस इकाइयों का स्थलगत निरीक्षण, सुपरिवेक्षण तथा ब्रीफिंग कार्यक्रम किया। इससे सुरक्षाकर्मियों का मनोबल बढ़ाने और सुरक्षा प्रबंधन को प्रभावी बनाने में मदद मिली।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;इस बार के चुनाव में नेपाल पुलिस ने डिजिटल तकनीक के उपयोग को भी विशेष प्राथमिकता दी। सोशल मीडिया के माध्यम से फैलने वाली भ्रामक सूचनाओं और फेक न्यूज को नियंत्रित करने के लिए प्रत्येक जिले में सोशल मीडिया निगरानी टोली गठित की गई थी। इन टीमों ने ऑनलाइन माध्यमों पर प्रसारित भ्रामक सामग्री की निगरानी करते हुए आवश्यक कार्रवाई तथा सामग्री हटाने का कार्य भी किया।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;इसके अलावा संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी के लिए ड्रोन कैमरा, उच्च क्षमता वाले कैमरे तथा अनुसन्धान में डिजिटल तकनीक का प्रयोग किया गया। सुरक्षा स्थिति के अनुसार संगठनात्मक कमान संरचना को व्यवस्थित करते हुए प्रांत स्तर पर अतिरिक्त महानिरीक्षक के नेतृत्व में सुरक्षा कमांड स्थापित किया गया, जबकि जिला स्तर पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय को भी प्रभावी बनाया गया। नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस बल तथा राष्ट्रीय अनुसन्धान विभाग के साथ संयुक्त रूप से सुरक्षा निगरानी, जोखिम मूल्यांकन तथा संभावित विवाद समाधान के लिए सहयोग किया गया।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;उल्लेखनीय है कि 2023 के चुनाव के दौरान देश के विभिन्न जिलों में राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच कई स्थानों पर झड़पें हुई थीं। बाजुरा, रुकुम और कालीकोट में हुई हिंसक घटनाओं में आठ लोगों की मौत हुई थी, जबकि इलाम, सर्लाही, दोलखा, दाङ, नवलपरासी पश्चिम, हुम्ला, धादिङ, ललितपुर, तनहुँ, म्याग्दी, खोटाङ और भोजपुर सहित कई जिलों में दो दर्जन से अधिक लोग घायल हुए थे। कुछ स्थानों पर विस्फोटक पदार्थ रखने तथा मतदान में अवरोध डालने की घटनाएँ भी सामने आई थीं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;हालांकि 2026 के चुनाव में इस तरह की गंभीर घटनाएँ सामने नहीं आईं। सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार मतदान केंद्रों पर कड़ी और व्यवस्थित सुरक्षा व्यवस्था होने के कारण किसी बड़े हिंसक टकराव की स्थिति उत्पन्न नहीं हुई। कुछ स्थानों पर मामूली तनाव की स्थिति जरूर बनी, लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने तत्काल हस्तक्षेप कर हालात को सामान्य बना दिया।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;संविधानविद् और कानुन व्यवसायी सूर्य अधिकारी के अनुसार चुनाव का शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न होना प्रभावी सुरक्षा प्रबंधन का परिणाम है। वहीं सुरक्षा विश्लेषक तथा त्रिभुवन विश्वविद्यालय के सहप्राध्यापक उमेश चन्द्र रिजाल का कहना है कि पिछले अनुभवों के आधार पर सुरक्षा रणनीति में सुधार किए जाने से संभावित जोखिमों को कम करने में सफलता मिली।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;अधिकारकर्मी लक्ष्मी केसी ने भी कहा कि चुनाव अवधि के दौरान सुरक्षाकर्मियों ने उच्च जिम्मेदारी के साथ भूमिका निभाई, जिसके कारण कोई बड़ी हिंसक घटना नहीं हुई और इससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया को सकारात्मक संदेश मिला है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;नेपाल पुलिस के केंद्रीय प्रवक्ता पुलिस नायब महानिरीक्षक अवि नारायण काफ्ले के अनुसार चुनाव से पहले ही देशभर के मतदान केंद्रों को संवेदनशील, अति संवेदनशील और सामान्य श्रेणी में वर्गीकृत कर सुरक्षा योजना तैयार की गई थी। विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के संयुक्त परिचालन और समन्वय के कारण संभावित जोखिमों को समय रहते नियंत्रित किया जा सका।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;सुरक्षा निकायों का कहना है कि मानवीय क्षति के दृष्टिकोण से भी 2026 का चुनाव 2023 की तुलना में काफी शांतिपूर्ण रहा। पिछले चुनावों में देखने को मिली झड़प, विस्फोटक रखने के प्रयास और मतदान में अवरोध जैसी घटनाएँ इस बार नहीं दोहराई गईं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;विश्लेषकों के अनुसार चुनाव आयोग, सुरक्षा एजेंसियों, प्रशासन, राजनीतिक दलों और मतदाताओं के बीच सहयोग और जिम्मेदार भूमिका के कारण 2026 का प्रतिनिधि सभा चुनाव नेपाल की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में शांतिपूर्ण और व्यवस्थित चुनाव के रूप में स्थापित हुआ है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;सुरक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि अनुशासित परिचालन, प्रभावी सुरक्षा रणनीति और नेतृत्व की सक्रिय भूमिका के कारण नेपाल पुलिस ने चुनाव को सुरक्षित वातावरण में सम्पन्न कराने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। पूर्व पुलिस अधिकारियों के अनुसार पुलिस महानिरीक्षक कार्की के नेतृत्व संभालने के बाद संगठन की पेशेवर क्षमता, तकनीक के उपयोग और समन्वय प्रणाली में उल्लेखनीय सुधार देखा गया है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि इस बार चुनाव के दौरान पहली सुरक्षा घेरा बनकर कार्य कर रही पुलिस संगठन की सक्रियता और प्रभावी प्रबंधन को सुरक्षा क्षेत्र में नेतृत्व की सफलता के उदाहरण के रूप में भी देखा जा रहा है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;नमस्कार दोस्तों, ईस्ट न्यूज़ 24x7 में आपका स्वागत है...

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&lt;/div&gt;</description><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgI13_LFkJjuVpEl8Qpnk9pX5lrY4P_zquiKmZAGutdBSkkraQ7QijzM63NnCj6ICSC08KVyF0WDs-Jhqxkp-7E1MlUAD52sldeyMs5Xz2MweEjLG6OrVHmcaguF_iIiWVEoLYb-NMV0muYe5uFFmJuj4s1PDT0Z92eOEeIyiqbNFuaczfoMtI0UicuwZw/s72-w640-h592-c/IMG-20260309-WA0002.jpg" width="72"/><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>युवा रैपर और काठमांडू के मेयर बालेंद्र शाह के हाथ होगी नेपाल की कमान </title><link>https://eastnews24x7.blogspot.com/2026/03/nepal-will-be-led-by-young-rapper-and-kathmandu-mayor-balendra-shah.html</link><author>noreply@blogger.com (East News 24x7)</author><pubDate>Sat, 7 Mar 2026 16:12:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-3505245523590782174.post-3881703086949000719</guid><description>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEi388w1k5JelzIEGfGZ8ASseCfSLCjJcAGgOjkbQlsIHQ9cILNwUrP_Cd-Zv3_vcX1fThx4d5YDdohbx-dfu-BHEQfW4iU9m8bwIShMB1QeK2mhypNL1rfZFdqwB6b8fVXhe92Ytx08Lo94EMcgSZghMCmmm8QRwgrRpXXe3XqqXdBMwTcY71L6tJjJZKQ/s626/IMG-20260307-WA0004.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="626" data-original-width="492" height="640" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEi388w1k5JelzIEGfGZ8ASseCfSLCjJcAGgOjkbQlsIHQ9cILNwUrP_Cd-Zv3_vcX1fThx4d5YDdohbx-dfu-BHEQfW4iU9m8bwIShMB1QeK2mhypNL1rfZFdqwB6b8fVXhe92Ytx08Lo94EMcgSZghMCmmm8QRwgrRpXXe3XqqXdBMwTcY71L6tJjJZKQ/w504-h640/IMG-20260307-WA0004.jpg" width="504" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;p style="text-align: center;"&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;आचार्य संजय तिवारी&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;टाइम मैगज़ीन ने वालेन शाह को 2023 की 'भविष्य को आकार देने वाले 100 उभरते नेताओं' की सूची में शामिल किया था। टाइम मैगजीन की उस घोषणा के अभी दो वर्ष ही हुए हैं। नेपाल में पिछले वर्ष दो दिनों के अत्यंत हिंसक आंदोलन के बाद जब सभी राजनीतिक विकल्प झुलस चुके थे , प्रधानमंत्री ने कुर्सी छोड़ कर कहीं सुरक्षित शरण ले ली थी, पूर्व प्रधानमंत्री परिवार सहित घायल अस्पताल में थे , संसद से लेकर सुप्रीम कोर्ट और अनेक मंत्रियों के घर जल चुके थे , ऐसे में gen z के इस आंदोलन की उपज से बालेंद्र शाह का नाम नेपाल में नेतृत्व के लिए बहुत तेजी से उभर कर सामने आया था । नेपाल की पारंपरिक राजनीति में राष्ट्रीय फलक के लिए यह नया नाम था। यह अलग बात है कि उस आंदोलन के तत्काल बाद सत्ता संभालने की बजाय शाह ने चुनाव तक की प्रतीक्षा को बेहतर समझा। आज जब चुनाव हो चुके और परिणाम लगभग पूरे दिख रहे तो शाह की नई पार्टी का नेपाल की सत्ता पर काबिज होना अब सुनिश्चित हो गया है। नेपाल अब कांग्रेस और कम्युनिस्ट मुक्त सरकार देखने जा रहा है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;इस युवा रैपर और राजनेता को बलेन शाह या बलेन या बालेंद्र शाह भी कहा जाता है । शाह स्वयं एक नेपाली रैपर , संगीतकार, कवि, स्ट्रक्चरल इंजीनियर और राजनीतिज्ञ हैं। वह वर्तमान में नेपाल की राजधानी काठमांडू के 15वें महापौर के रूप में कार्यरत हैं । वह काठमांडू के महापौर चुने जाने वाले पहले स्वतंत्र उम्मीदवार भी हैं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;शाह 2010 के दशक की शुरुआत से नेपाली हिप-हॉप का भी हिस्सा रहे हैं । 2022 के स्थानीय चुनाव में , शाह ने नेपाली कांग्रेस की उम्मीदवार सिरजाना सिंह और सीपीएन (यूएमएल) के उम्मीदवार केशव स्थापित को हराया।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;बालेन्द्र शाह का जन्म 27 अप्रैल 1990 को काठमांडू के नरदेवी में एक मैथिल मूल के मधेसी परिवार में हुआ था । वे आयुर्वेदिक चिकित्सक राम नारायण शाह और उनकी पत्नी ध्रुवदेवी शाह के सबसे छोटे पुत्र हैं। उनके पिता की नरदेवी आयुर्वेदिक अस्पताल में तैनाती के बाद उनके माता-पिता मधेश प्रांत के महोत्तरी जिले से काठमांडू चले गए थे ।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;शाह ने अपनी 10+2 की पढ़ाई वीएस निकेतन हायर सेकेंडरी स्कूल से की। उन्होंने हिमालयन व्हाइटहाउस इंटरनेशनल कॉलेज से सिविल इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री ( बीई ) प्राप्त की। उन्होंने भारत के कर्नाटक स्थित विश्वेश्वरैया प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (वीटीयू) से स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री ( एमटेक ) भी प्राप्त की।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhYNJPQhLvxU9ivPjrD26raEAytpGdZQiS7YEamFyPEs3BzdCfEWvKW5ZQ1Fl41DFT_gtQ2eF4fR2jIMnSwhLndB6b5005TP4FF69s12-A8qf9Y_IUHStpLNomXhEgCqN3qCjegS5kncshlC28cOiDlypK67FzNXCH9CEU-Kec-wwgv4KMC2M9qzpcB0AQ/s979/IMG-20260307-WA0003.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="979" data-original-width="884" height="640" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhYNJPQhLvxU9ivPjrD26raEAytpGdZQiS7YEamFyPEs3BzdCfEWvKW5ZQ1Fl41DFT_gtQ2eF4fR2jIMnSwhLndB6b5005TP4FF69s12-A8qf9Y_IUHStpLNomXhEgCqN3qCjegS5kncshlC28cOiDlypK67FzNXCH9CEU-Kec-wwgv4KMC2M9qzpcB0AQ/w578-h640/IMG-20260307-WA0003.jpg" width="578" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;b&gt;संगीत व्यवसाय&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;कम उम्र से ही शाह को संगीत और कविता में रुचि थी। उन्होंने अपना पहला सिंगल, सड़क बालक रिलीज़ किया, जिसे उन्होंने नौवीं कक्षा में रहते हुए 2012 में लिखा था। यूट्यूब बैटल रैप सीरीज़ रॉ बार्ज़ में अपनी उपस्थिति के बाद 2013 में नेफ़ॉप प्रशंसकों के बीच उनकी प्रसिद्धि बढ़ी ।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;b&gt;काठमांडू के मेयर&lt;/b&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;यह पदभार ग्रहण करने के बाद सबसे पहले कदम के रूप में, शाह ने नगर परिषद की बैठकों का सीधा प्रसारण शुरू किया, जो शहर में पहली बार इस तरह की प्रथा को लागू करने का संकेत था। 6 जून 2022 को शहरी विकास मंत्रालय और नवनिर्वाचित प्रतिनिधियों के बीच 7 जून से कचरा निपटान शुरू करने के लिए एक समझौता हुआ और 18 अगस्त 2022 को स्थानीय लोगों और सरकारी अधिकारियों के बीच चार सूत्री समझौते के बाद, बालेन ने निजी कंपनियों को सभी असंग्रहित ठोस कचरे के निपटान का निर्देश दिया।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;b&gt;अवैध निर्माण का विध्वंस&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;शाह ने शहर के सौंदर्यीकरण और नदी संरक्षण के प्रयास के तहत, नदी के ऊपर बनी निजी संपत्तियों को ध्वस्त करके तुकुचा नदी को उजागर करने का निर्देश दिया । इस अभियान से प्रभावित व्यवसायों ने अदालत में एक रिट याचिका दायर की। इसके बाद, पाटन उच्च न्यायालय ने काठमांडू नगर सरकार को इस विध्वंस अभियान में शामिल होने से रोकने का अंतरिम आदेश जारी किया।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;उन्होंने नेपाल पुलिस से अनुरोध किया कि वह नगरपालिका से उचित प्राधिकरण के बिना फुटपाथों पर बनाए गए सभी पुलिस सब-स्टेशनों को हटाकर कानून और व्यवस्था का अनुपालन सुनिश्चित करे। मेयर के कार्यालय द्वारा त्रिभुवन अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के मैदान में तार की बाड़ सहित निर्माण सामग्री को हटाने के बाद , जो शहर से उचित अनुमोदन के बिना बनाए गए थे, उन्होंने नेपाल के नागरिक उड्डयन प्राधिकरण के साथ भी टकराव किया। सीएएएन ने मेयर बालेन को पत्र लिखकर प्रतिबंधित क्षेत्र में उनके जबरदस्ती प्रवेश के लिए स्पष्टीकरण मांगा और केएमसी मेयर से स्पष्टीकरण देने को कहा कि उन्हें सीएएएन अधिनियम की धारा 25(1) के अनुसार दंडित क्यों नहीं किया जाना चाहिए।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;केएमसी मेयर ने सीएएएन द्वारा दिए गए नोटिस को रद्द करने की मांग करते हुए उच्च न्यायालय का रुख किया। पाटन उच्च न्यायालय ने नोटिस पर अल्पकालिक स्थगन आदेश जारी किया। बालेन के कार्यालय ने नदी किनारे बसे भूमिहीन लोगों को खाली करने के लिए 7 दिन का सार्वजनिक नोटिस जारी किया, जिसके कारण झुग्गी बस्ती तोड़ने की कोशिश के दौरान निवासियों और नगरपालिका पुलिस के बीच संघर्ष हुआ। इस संघर्ष में कई लोग घायल हुए। बाद में बालेन ने घटना के दौरान गृह मंत्रालय की कथित सहायता की कमी पर चिंता व्यक्त की । इससे पहले, बालेन ने संघीय सरकार के प्रति असंतोष व्यक्त किया था जब काठमांडू का कचरा संग्रहण दो महीने तक बाधित रहा था। नदी किनारे बसे लोगों के साथ टकराव के बाद, संघीय सरकार और काठमांडू महानगर कार्यालय के बीच तनाव बढ़ गया, जिसके कारण अंततः बालेन को संघीय सरकार के मुख्यालय, सिंह दरबार से कचरा संग्रहण बंद करने का निर्देश देना पड़ा।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;मेयर बालेन के नेतृत्व में काठमांडू मेट्रो ने सामुदायिक स्कूलों में 'पाठ्यपुस्तक-मुक्त-शुक्रवार' कार्यक्रम शुरू किया, जिसका उद्देश्य छात्रों को तकनीकी कौशल सीखने और अन्य पाठ्येतर गतिविधियों में शामिल होने में मदद करना था।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;b&gt;व्यक्तिगत जीवन&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;शाह का विवाह सबीना काफले से हुआ है, जो एक सार्वजनिक स्वास्थ्य पेशेवर हैं। वह अपने परिवार के साथ गैरिगांव, तिनकुने में रहते हैं।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;b&gt;चुनावी इतिहास&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;b&gt;काठमांडू नगरपालिका चुनाव&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;बलेन शाह 2020 से ही उम्मीदवारी की अपनी योजनाओं पर विचार कर रहे थे और 17 दिसंबर 2021 को उन्होंने घोषणा की कि वह अपने फेसबुक पेज के माध्यम से एक स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में मेयर पद के लिए चुनाव लड़ेंगे। उनका अभियान कचरा प्रबंधन , सड़क यातायात नियंत्रण , सार्वजनिक सेवा वितरण, भ्रष्टाचार विरोधी और शहर की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर केंद्रित था। शाह 26 मई 2022 को 38.6% वोट हासिल करके निर्वाचित हुए। उन्होंने नेपाली कांग्रेस की उम्मीदवार सिरजाना श्रेष्ठ और पूर्व मेयर एवं सीपीएन (यूएमएल) उम्मीदवार केशव स्थापित को 23,000 से ज़्यादा वोटों के अंतर से हराया। शाह ने 30 मई 2022 को महापौर के रूप में शपथ ली और चुनावों में निर्वाचित नगरपालिका विधानसभा के अन्य सदस्यों को पद की शपथ दिलाई।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;नमस्कार दोस्तों, ईस्ट न्यूज़ 24x7 में आपका स्वागत है...

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margin-right: auto;"&gt;&lt;tbody&gt;&lt;tr&gt;&lt;td style="text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgTld0DcOr4xxsTGjGdZlAyugXzeRJLzgytdezcSqtYQB2KAOkY-tLwsuYr825z4pP0Mnhg-6xhUnlIZl88gYxxEqt87EL5QyEMtARZdrrjsvulg_yRQ-IIcRDZYVCBEuoBvimUI6Qasm1aIyzIJYOBHMr9gUoTUwR0FSzwYgPFUc-ztQR4ShHR574RNSM/s954/IMG_20260305_112832.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: auto; margin-right: auto;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="954" data-original-width="939" height="640" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgTld0DcOr4xxsTGjGdZlAyugXzeRJLzgytdezcSqtYQB2KAOkY-tLwsuYr825z4pP0Mnhg-6xhUnlIZl88gYxxEqt87EL5QyEMtARZdrrjsvulg_yRQ-IIcRDZYVCBEuoBvimUI6Qasm1aIyzIJYOBHMr9gUoTUwR0FSzwYgPFUc-ztQR4ShHR574RNSM/w630-h640/IMG_20260305_112832.jpg" width="630" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;&lt;tr&gt;&lt;td class="tr-caption" style="text-align: center;"&gt;आचार्य जानकी वल्लभ शास्त्री&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;&lt;/tbody&gt;&lt;/table&gt;&lt;p style="text-align: center;"&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;आचार्य संजय तिवारी&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;छायावाद के अंतिम स्तंभ, संस्कृत और हिंदी साहित्य के अप्रतिम विद्वान और 'निराला' जी के प्रिय आचार्य जानकी बल्लभ शास्त्री जी की पावन स्मृति को समर्पित एक विशेष पोस्ट के द्वारा आज हम नमन कर रहे हैं उस मनीषी को, जिनकी लेखनी में संस्कृत की शास्त्रीय गरिमा और हिंदी की सहज तरलता का अद्भुत संगम था। आचार्य जानकी बल्लभ शास्त्री केवल एक कवि और कथाकार नहीं थे, वे भारतीय मनीषा और परंपरा के जीवित एनसाइक्लोपीडिया थे। गया (बिहार) के मैगरा की मिट्टी में जन्मे और मुजफ्फरपुर को अपनी कर्मभूमि बनाने वाले आचार्य जी ने अपनी साधना से साहित्य जगत में एक ऊंचा मुकाम हासिल किया।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;प्रमुख गौरवपूर्ण योगदान:&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&amp;nbsp;संस्कृत-हिंदी का सेतु: उन्होंने 'काकली' जैसे संस्कृत काव्य संग्रह और 'राधा' जैसे हिंदी महाकाव्य की रचना कर दोनों भाषाओं को समृद्ध किया। उनकी रचनाओं में संगीत और शब्दों का अनूठा सामंजस्य मिलता है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&amp;nbsp;छायावाद की विरासत: उन्हें छायावाद के चार स्तंभों के बाद का सबसे महत्वपूर्ण कवि माना जाता है। महाप्राण निराला उन्हें अपना 'छोटा भाई' और साहित्य का उत्तराधिकारी मानते थे।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;'पद्म श्री' लौटाने का स्वाभिमान: 2010 में जब उन्हें 'पद्म श्री' से नवाजा गया, तो उन्होंने अपनी वरिष्ठता और गरिमा को ध्यान में रखते हुए उसे ससम्मान लौटा दिया था। यह उनके अटूट आत्मसम्मान और साहित्यिक शुचिता का प्रतीक था।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;मुजफ्फरपुर का 'निराला निवास':&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;मुजफ्फरपुर में उनका आवास 'निराला निवास' दशकों तक साहित्यकारों और जिज्ञासुओं के लिए तीर्थ स्थल बना रहा, जहाँ उन्होंने अपना पूरा जीवन ज्ञान की गंगा बहाने में समर्पित कर दिया। "शब्द ब्रह्म हैं, और इनकी सेवा ही सबसे बड़ी इबादत है।" — आचार्य जी का पूरा जीवन इसी सत्य का साक्षात्कार था।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;b&gt;जन्म: &lt;/b&gt;5 फरवरी 1916 (मैगरा, गया, बिहार)&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;b&gt;पहचान: &lt;/b&gt;कालजयी कवि, उपन्यासकार, आलोचक और संस्कृत के प्रकांड विद्वान&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&amp;nbsp;&lt;b&gt;प्रमुख कृतियाँ: &lt;/b&gt;राधा (महाकाव्य), काकली (संस्कृत काव्य), हंस बलाका, साहित्य दर्शन&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&amp;nbsp;&lt;b&gt;विशेष सम्मान: &lt;/b&gt;भारत भारती पुरस्कार, शिखर सम्मान और कई मानद उपाधियाँ&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&amp;nbsp;&lt;b&gt;निधन: &lt;/b&gt;7 अप्रैल 2011 (मुजफ्फरपुर)&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;नमस्कार दोस्तों, ईस्ट न्यूज़ 24x7 में आपका स्वागत है...

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margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="1242" data-original-width="1080" height="640" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgyGX4fBBVWUW6IRcjdy4TcriPSJht54jpKOAV97Ha8ra8r6heBAMXrK86AB_afk56XmN05F8AO7AvQIEGtyVf1ttue7fM1FjUPai3gFo4EiR_x9a3QyH4_rqdXSeNskOGvmeG1xw0cEGjcqgCXaeYgOy16-ONYs7hCJM0SDvjLj2lxhi_J568B9HXxqno/w556-h640/IMG-20260212-WA0004(1).jpg" width="556" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;blockquote&gt;&lt;p&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;यूपी की ब्राह्मण राजनीति: इतिहास और वर्तमान संदर्भ&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;/blockquote&gt;&lt;p style="text-align: center;"&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;शाश्वत तिवारी&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;उत्तर प्रदेश की राजनीति में ब्राह्मण नेतृत्व का लंबा इतिहास रहा है। कांग्रेस के दौर में अनेक ब्राह्मण मुख्यमंत्री हुए, जिनमें अंतिम प्रमुख नाम नारायण दत्त तिवारी का रहा। उनके कार्यकाल को प्रशासनिक दक्षता और विकास उन्मुख राजनीति के लिए याद किया जाता है। भाजपा के संदर्भ में भी यह देखा गया है कि जब प्रदेश संगठन या सत्ता में ब्राह्मण नेतृत्व को प्रमुखता मिली, तब पार्टी को व्यापक सामाजिक संतुलन साधने में लाभ हुआ। 2014 के लोकसभा चुनाव में प्रदेश अध्यक्ष के रूप में लक्ष्मीकांत बाजपेयी के नेतृत्व में भाजपा ने ऐतिहासिक सफलता अर्जित की।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;यूपी की राजनीति में ब्राह्मण नेतृत्व को लेकर एक नई बहस तेज होती दिख रही है। हाल के घटनाक्रमों, विशेषकर लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित प्रबुद्ध सम्मेलन के बाद यह चर्चा और मुखर हो गई है कि प्रदेश को एक ऊर्जावान, स्वीकार्य और संवादशील ब्राह्मण चेहरा चाहिए। इस पूरे परिदृश्य में बृजेश पाठक का नाम तेजी से उभरकर सामने आया है। वहीं दूसरी ओर डॉ. दिनेश शर्मा के प्रति असंतोष और तीखी नारेबाज़ी ने यह संकेत दिया कि राजनीतिक स्वीकार्यता केवल पद से नहीं, बल्कि जनसंवाद और सक्रिय उपस्थिति से तय होती है। कार्यक्रम में वरिष्ठ नेता कलराज मिश्र की मौजूदगी में हुआ विरोध यह दर्शाता है कि ब्राह्मण समाज के भीतर भी पीढ़ीगत परिवर्तन की मांग उठ रही है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;यह तथ्य इस बहस को बल देता है कि उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण नेतृत्व केवल जातीय समीकरण का विषय नहीं, बल्कि संगठनात्मक संतुलन और राजनीतिक संदेश का भी प्रश्न है। इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में हुए सम्मेलन में जो घटनाक्रम सामने आया, वह केवल व्यक्तिगत विरोध या समर्थन का मामला नहीं था। यह उस मनोविज्ञान का प्रतिबिंब था जिसमें समाज का एक बड़ा वर्ग अपने प्रतिनिधि से सक्रिय संवाद, उपलब्धता और संवेदनशीलता की अपेक्षा करता है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;डॉ. दिनेश शर्मा, जिन्हें ब्राह्मण कोटे से डिप्टी सीएम बनाया गया था और जो वर्तमान में राज्यसभा सदस्य हैं, उनके प्रति असंतोष ने यह संकेत दिया कि केवल संगठनात्मक पद या संसदीय उपस्थिति से समाज संतुष्ट नहीं होता। इसके विपरीत, बृजेश पाठक को जिस प्रकार समर्थन और सम्मान मिला, वह उनकी राजनीतिक शैली का परिणाम माना जा रहा है, सहजता, सुलभता और निरंतर संपर्क।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;इन अहम कारणों से उभर रहा है बृजेश पाठक का नाम। जन उपलब्धता:  राजनीतिक गलियारों में यह धारणा प्रबल है कि पाठक आम कार्यकर्ता और नागरिक के लिए सुलभ हैं। संवाद कौशल: छात्र जीवन से लेकर वर्तमान तक संगठनात्मक सक्रियता ने उन्हें जमीनी नेटवर्क दिया है। संतुलित छवि: वे केवल ब्राह्मण समाज तक सीमित न रहकर व्यापक सामाजिक आधार बनाने का प्रयास करते रहे हैं। प्रशासनिक भूमिका: डिप्टी सीएम के रूप में उनकी सक्रियता ने उन्हें सत्ता और संगठन के बीच सेतु का कार्य करने का अवसर दिया है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;उत्तर प्रदेश को अब एक नया ब्राह्मण चेहरा चाहिए, यह प्रश्न केवल जातीय पहचान तक सीमित नहीं है। उत्तर प्रदेश की राजनीति बहुस्तरीय सामाजिक समीकरणों पर आधारित है, ओबीसी, दलित, पिछड़ा, अति पिछड़ा, अल्पसंख्यक और सवर्ण सभी की भूमिका निर्णायक है। ब्राह्मण नेतृत्व की मांग इसलिए उठती है क्योंकि यह वर्ग ऐतिहासिक रूप से राजनीतिक विमर्श में वैचारिक दिशा देने वाला माना गया है। परंतु आज का मतदाता जातीय पहचान से अधिक कार्यक्षमता, पारदर्शिता और जनसंपर्क को महत्व देता है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;अध्ययन बताता है कि यदि कोई नेता, विश्वसनीयता, ऊर्जा और सक्रियता, समावेशी दृष्टिकोण इन तीनों कसौटियों पर खरा उतरता है, तो वह स्वाभाविक रूप से स्वीकार्यता प्राप्त करता है। इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में हुआ घटनाक्रम उत्तर प्रदेश की राजनीति में बदलते संकेतों का प्रतीक है। यह केवल एक कार्यक्रम का हंगामा नहीं, बल्कि सामाजिक अपेक्षाओं का प्रकटीकरण था। ब्राह्मण समाज के भीतर नेतृत्व परिवर्तन की चाह हो या व्यापक राजनीतिक संतुलन की आवश्यकता, दोनों ही स्थितियों में यह स्पष्ट है कि आज का समय ऐसे नेतृत्व की मांग करता है जो जातीय सीमाओं से ऊपर उठकर संवाद, सेवा और सक्रियता का उदाहरण प्रस्तुत करे। बृजेश पाठक का उभरता नाम इसी संदर्भ में देखा जा रहा है। किंतु अंतिम निर्णय जनता के हाथ में है। राजनीति में स्थायी वही होता है जो निरंतर जनविश्वास अर्जित करता रहे।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;नमस्कार दोस्तों, ईस्ट न्यूज़ 24x7 में आपका स्वागत है...

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margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="4096" data-original-width="4096" height="640" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEi4S6SPPtGb9rP0flMhPLfFbKhyJx_mxu5h9VnTL9ta6ZjrBU65pFvXF4UGKCUGr7UiB0R-fOJIOdbY_IPIK-YGUas-opP1LDfXWtM1tDf3qkYDBELrkarr024SeGGD66-aDGZ7CiZAtmlS-fTKcALSr1KyrQ1-Wj7QjqfWHvpNObSnPVt0k1XSisG1XV8/w640-h640/GridArt_20260227_191710734.jpg" width="640" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;p style="text-align: center;"&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;आचार्य संजय तिवारी&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;सनातन धर्मध्वजा के तेजोमय संगठनकर्ता, सनातन भारत के&amp;nbsp; खोए हुए आत्मगौरव को जागृत करने के लिए संत समाज, समितियों, सांस्कृतिक संगठनों को अपने तर्कशील व शास्त्रीय विचारों से निरंतर प्रोत्साहित करने वाले, हजारों- लाखों विद्वानों को उपाधियों व पदों के योग्य बनाने वाले, सामान्य सामाजिक कार्यकर्ता की भांति स्वभाव रखने वाले गंगा पुत्र परम पूज्य दंडी स्वामी जीतेंद्रानंद सरस्वती जी महाराज श्री (काशी) आज जन्मदिवस है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;वह सन्यासी हैं। संवेदनशील हैं। संघर्षशील हैं। सनातन क्रांतिवीर हैं। ऊर्जावान हैं। राष्ट्रवन्दना के अप्रतिम गायक हैं। भगवान आद्यशंकराचार्य की ज्योतिर्पीठ पर विराजमान शंकराचार्य भगवान स्वामी वासुदेवानंद जी सरस्वती के शिष्य हैं। अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री हैं। महामना की श्रीगंगामहासभा के राष्ट्रीय महामंत्री हैं। ओजस्वी एवं प्रखर राष्ट्रवादी वक्ता है। विद्वान हैं। सनातन संस्कृति के अध्येता हैं। भगवान भास्कर की स्वर्णिम रश्मियों सी तेजस्वी ज्योतिपुंज के साथ सनातन संत परपम्परा के प्रज्जवलित नक्षत्र हैं। वह वह आधुनिक भारत की संत परंपरा के नायक भी हैं और कुशल समन्वयक भी। ये ही स्वामी जीतेन्द्रानन्द जी सरस्वती हैं । सनातन संत परंपरा में तीन अनियों , 13 अखाड़ों और 127 संप्रदायों को एक साथ लाने और सनातन के उत्कर्ष के लिए समन्वित प्रयास स्वामी जी की बहुत बड़ी उपलब्धि है। आजकल भारत के पूरब से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण तक , उनके सनातन के एकीकरण के प्रयास को उनकी अनवरत यात्राओं में देखा जा सकता है। आज जब यह लिखने का अवसर था और स्वामी जी से कुछ शब्द लेने की आवश्यकता हुई, तब भी वह यात्रा में ही मिले। गोमांतक से सुदूर पूर्वोत्तर के क्षेत्र में उनकी उपस्थिति प्राप्त हुई।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;इससे पूर्व कि स्वामी जी की उपलब्धियों की चर्चा करें, पहले उनके प्रारंभिक जीवन पर थोड़ा प्रकाश डालना आवश्यक है। उत्तर प्रदेश के अति पिछड़े जिले कुशीनगर के अंतिम छोर पर स्थित खड्डा तहसील क्षेत्र के ग्राम रामपुर गोनहा में एक मध्यम वर्गीय परिवार में जन्मे जितेंद्र पाठक एक&amp;nbsp; ऐसे तत्व मर्मज्ञ है जो अपनी योग्यता एवं समाजसेवी स्वभाव के बल पर आज जीतेंद्रानंद सरस्वती के नाम से विख्यात है। जीतेन्द्रानंद सरस्वती की प्रारंभिक शिक्षा खड्डा के भारतीय शिशु मंदिर में हुई। स्नातक की शिक्षा उन्होंने उदित नारायण डिग्री कॉलेज पडरौना से ली। इसी के बाद वह आरएसएस के संपर्क में आये और&amp;nbsp; प्रचारक बन गए ।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;प्रचारक रूप में उन्होंने बनारस और सोनभद्र जिले का कार्य&amp;nbsp; संभाला। गांव-गांव गली-गली घर घर लोगों के अंदर हिंदुत्व की भावना जागृत की। इसी बीच महामना पंडित&amp;nbsp; मदन मोहन मालवीय&amp;nbsp; के पौत्र व सुप्रीम कोर्ट के जज गिरधर मालवीय के संपर्क में आने के बाद जितेंद्रानंद सरस्वती गंगा महासभा के राष्ट्रीय महामंत्री हो गए ।अविरल मोक्षदायिनी गंगा को स्वच्छ सुंदर बनाने के लिए उन्होंने गंगा स्वच्छता आंदोलन का बिगुल बजा दिया ।निरंतर एक के बाद एक कार्यक्रमों के माध्यम से&amp;nbsp; सोए हुए तंत्र को जागृत कर गंगा को स्वच्छ बनाने के लिए निरंतर प्रयास करते रहे।&amp;nbsp; संगम तट पर इलाहाबाद में एक कॉलोनी के निर्माण के दौरान गंगा को&amp;nbsp; प्रदूषित करने की संभावना पर उन्होंने इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर निर्माण कार्य रोके जाने की याचिका दायर की। जिसका अधिवक्ता संघ इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सहृदय स्वागत किया। न्यायालय ने आदेश जारी कर कॉलोनी के निर्माण पर रोक लगा दिया।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;इसी बीच दंडी स्वामी ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती के संपर्क में आकर ज्ञान अर्जित कर उनके शिष्य बन गए और दंडी स्वामी हो गए। अभी उनका सफर यहीं नहीं थमा। कुछ कर दिखाने की प्रतिभा मन में सजाएं जितेंद्रानंद सरस्वती ने अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री बनकर दुनिया का मार्गदर्शन&amp;nbsp; किया और संतों को सहेजने के साथ-साथ भारतीय संस्कृति को जीवंत करने के लिए अपने यात्रा को अनवरत जारी रखते हुए विलुप्त हो चली सभ्यता परंपरा को जीवंत करने के लिए दिन रात एक कर दिया। इनकी प्रतिभा और समर्पण के देखते हुए विश्व हिंदू परिषद के उच्च अधिकार समिति का&amp;nbsp; सदस्य बनाया गया।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;स्वामी जीतेंद्रनंद सरस्वती जी श्री राम मंदिर आंदोलन के अग्रिम कतार के समाजसेवियों में अपना नाम दर्ज कराते हुए दिसंबर 2018 में धर्म आदेश रैली के संयोजक बने जिसमें देश के सभी प्रमुख संतो को साथ लेकर इस कार्यक्रम का संचालन करते हुए कार्यक्रम को सफल बनाया। 1990 में शिला पूजन के दौरान राम जन्मभूमि आंदोलन के समय इन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। एक दिन देवरिया जेल में रहने के उपरांत इन्हें उनके साथियों के साथ 1 माह 14 दिन के लिए बस्ती जेल भेज दिया गया। एक क्रम में यदि स्वामी जी की अब तक की जीवन यात्रा को देखा जाय तो वह कुछ इस प्रकार दिखता है_&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;वह बाल्यकाल से ब्रह्मचारी हैं। 14 वर्षों तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक रहे हैं। इस दौरान संघ परिवार के विभिन्न संगठनों में कार्य किया। संस्कार भारती के संगठन मंत्री के रूप में काशी के गंगातट पर हिन्दू नववर्ष महोत्सव की नींव डाली। स्वामी जी जन्मजात आन्दोलनकारी हैं। आन्दोलनों में सफलता का स्वामी जी का रिकोर्ड शत-प्रतिशत है।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;1999 में सनातन संस्कृति पर प्रहार के लिए दीपा मेहता वॉटर फ़िल्म बनाना चाह रही थी। आडवाणी जी&amp;nbsp; का आशीर्वाद उसे प्राप्त था। फ़िल्म की शूटिंग के लिए टीम काशी आयी। स्वामी जी के नेतृत्व में ज़बर्दस्त आन्दोलन हुआ और फिर दीपा मेहता काशी ही क्या, भारत में कहीं भी इस फ़िल्म की शूटिंग नहीं कर सकी। 2003 में स्वामी जी ने बिहार के मुज्जफ़्फ़रपुर में प्रेम के द्वापरकालीन उत्सव ‘कौमुदी महोत्सव’ को पुनर्जीवित किया।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;2004 में गंगाजी के कार्य को हाथों में लेकर गंगा महासभा के महामन्त्री के रूप में देशव्यापी जनजागरण अभियान चलाया। जिसके फलस्वरूप गंगाजी को राष्ट्रीय नदी घोषित किया गया और अब संसद के शीतकालीन सत्र में गंगाजी पर विशेष क़ानून बनाने के लिए विधेयक लाया जा रहा है।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;2014 में ज्योतिष पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य जी महाराज ने दण्डी संन्यासी के रूप में दीक्षित किया। तब से लगातार स्वामी जी श्रीराम जन्मभूमि, काशी विश्वनाथ की मुक्ति, मठ-मन्दिरों पर से सरकारी नियंत्रण समाप्त हो, फ़र्ज़ी बाबाओं का सामाजिक बहिष्कार हो, जैसे धार्मिक विषयों पर मुखर रहे हैं और अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;2016 के उज्जैन कुम्भ में स्वामी जी को सनातन धर्म के सभी सम्प्रदायों के शीर्ष संगठन अखिल भारतीय सन्त समिति का महामन्त्री बनाया गया।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;2016 में ही स्वामी जी ने हिन्द-बलोच फ़ोरम की नींव डाली। तब से स्वामी जी पाकिस्तान के निशाने पर हैं। हिन्द-बलोच फ़ोरम बलोचिस्तान की आज़ादी के लिए संघर्ष कर रहे बलोच भाई-बहनों का समर्थन करता है।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;2018 के नवम्बर में दिल्ली में स्वामी जी के संयोजन में धर्मादेश कार्यक्रम में देश भर से हज़ारों सन्त का आगमन हुआ। श्रीराम मन्दिर के लिए क़ानून या अध्यादेश की माँग की गयी। श्रीराम जन्मभूमि का मुद्दा देश में फिर से उभर गया और सुप्रीम कोर्ट को जल्द सुनवाई के लिए बाध्य होना पड़ा।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;2019 के प्रयागराज कुम्भ में स्वामी जी ने हज़ारों सफ़ाई कर्मियों के साथ ऐतिहासिक गंगास्नान कर उन्हें सनातन के अंग होने का एहसास कराया। स्वामी जी&amp;nbsp; के प्रयासों से सन्तों ने किन्नरों को सनातन धर्म में अंगीकार कर कुम्भ में शाही स्नान की अनुमति प्रदान की।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;सम्प्रति स्वामी जी गंगा महासभा और अखिल भारतीय सन्त समिति दोनों संगठनों के महामंत्री हैं। साथ ही विश्व हिन्दू परिषद की उच्चाधिकार समिति के सदस्य हैं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;स्वामी जी इस समय बहुत उत्साहित हैं। उनकी सनातन की स्थापना की यात्रा को अब गति मिली है। वह कहते हैं, श्रीराम मंदिर का निर्माण और प्राणप्रतिष्ठा अभी हमारा सनातन संस्थापना के अंतहीन आंदोलन का प्रारंभ है। काशी में भगवान विश्वनाथ जी और मथुरा में योगेश्वर श्रीकृष्ण की भूमि को मुक्त करना प्राथमिकता में है। श्री काशी जी में श्रृंगार गौरी की अर्चना का कार्य होने लगा है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&amp;nbsp;प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को सनातन का महायोद्धा बताते हुए वह कहते हैं कि मोदी जी की दृढ़ इच्छाशक्ति और संकल्प के कारण ही भारत विश्वगुरु बन रहा है। आज दुनिया अयोध्या, काशी, मथुरा, महाकाल, सोमनाथ, बद्रीधाम सहित सनातन संस्कृति के सभी तीर्थों पर पर नजर लगाए है । प्रयागराज में करोड़ो श्रद्धालुओं की तीर्थ साधना यात्रा इसका सबसे बड़ा प्रमाण है। श्री अयोध्या जी में श्रीराम मंदिर की प्राणप्रतिष्ठा के बाद श्रीराम दरबार की स्थापना और सनातन ध्वज के लहराने से ही अब नए विश्व का निर्माण शुरू हो रहा है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;स्वामी जी का प्रिय मंत्र है&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;लोकाभिरामं रणरंगधीरं राजीवनेत्रं रघुवंशनाथम्।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;कारुण्यरूपं करुणाकरं तं श्रीरामचन्द्रं शरणं प्रपद्ये।।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;नमस्कार दोस्तों, ईस्ट न्यूज़ 24x7 में आपका स्वागत है...

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&lt;/div&gt;</description><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEi4S6SPPtGb9rP0flMhPLfFbKhyJx_mxu5h9VnTL9ta6ZjrBU65pFvXF4UGKCUGr7UiB0R-fOJIOdbY_IPIK-YGUas-opP1LDfXWtM1tDf3qkYDBELrkarr024SeGGD66-aDGZ7CiZAtmlS-fTKcALSr1KyrQ1-Wj7QjqfWHvpNObSnPVt0k1XSisG1XV8/s72-w640-h640-c/GridArt_20260227_191710734.jpg" width="72"/><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>युवा नारी शक्ति के हाथों नवाचार और स्वाद का अनोखा संगम</title><link>https://eastnews24x7.blogspot.com/2026/02/a-unique-confluence-of-innovation-and-taste-in-the-hands-of-young-women-power.html</link><category>Uttar Pradesh</category><author>noreply@blogger.com (East News 24x7)</author><pubDate>Wed, 25 Feb 2026 19:02:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-3505245523590782174.post-4003736750024930591</guid><description>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjJrpdfw-bBmPM8VqU4CUyyzUcPDy_nkNvzm12VEWgS90FBKb0H5RTd2mVpRF8mf7GZDWRV2qvLztLCUnrHg9aMZpuZS9eGaizj0LfWxS91uyivT0w2HFgVSU9qBjVK5q3ocif4pUAMvfvo5dUsD28KylT64BRT_4z5tFGLNYfIbEpCOS5dRCBeEMYwJlE/s4096/GridArt_20260225_185339393.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="4096" data-original-width="4096" height="640" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjJrpdfw-bBmPM8VqU4CUyyzUcPDy_nkNvzm12VEWgS90FBKb0H5RTd2mVpRF8mf7GZDWRV2qvLztLCUnrHg9aMZpuZS9eGaizj0LfWxS91uyivT0w2HFgVSU9qBjVK5q3ocif4pUAMvfvo5dUsD28KylT64BRT_4z5tFGLNYfIbEpCOS5dRCBeEMYwJlE/w640-h640/GridArt_20260225_185339393.jpg" width="640" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;/div&gt;&lt;blockquote&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;b&gt;मॉडर्न फ्यूजन थीम पर सी आर डी कॉलेज में सजा फूड फेयर&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;b&gt;शिक्षा के साथ उद्यमशीलता और टीमवर्क ही गढ़ता है भविष्य: डॉ अर्चना तिवारी&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;/blockquote&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;b&gt;विशेष संवाददाता&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;b&gt;गोरखपुर। &lt;/b&gt;शिक्षा के साथ उद्यमशीलता और टीम वर्क से ही युवाओं के भविष्य का निर्माण संभव है। नए भारत की नई शिक्षा नीति में यह ऐसा नियामक तत्व है जिससे पूर्ण विकसित भारत की आधारशिला रखी जा रही है। 2047 के विकसित भारत का यही सपना भी है। प्रख्यात शिक्षाविद और पूर्वांचल में गृहविज्ञान विषय की संस्थापक डॉ अर्चना तिवारी ने उक्त बातें कही। वह चन्द्रकान्ति रमावती देवी आर्य महिला पी.जी. कॉलेज में आयोजित विशाल फूड फेयर में मुख्य अतिथि के रूप में समारोह को संबोधित कर रही थीं। चंद्रकांति रमावती देवी आर्य महिला कॉलेज में&amp;nbsp; बुधवार को प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी गृह विज्ञान विभाग एवं आई.क्यू.ए.सी. के संयुक्त तत्वावधान में फूड फेयर प्रतियोगिता का भव्य आयोजन किया गया। इस वर्ष प्रतियोगिता की थीम माडर्न फ्यूजन डिशेज इन होली : विविध स्वरूप (MODERN FUSION DISHES IN&amp;nbsp; HOLI DELICACIES (Different Andaaz)” रही, जिसके अंतर्गत छात्राओं ने होली से जुड़े पारम्परिक व्यंजनों को आधुनिक फ्यूजन शैली में आकर्षक रूप से प्रस्तुत किया।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjpiok9NHT04OeYxBex7vCm76eW2ydszwSvIQDbwWD3RAmH32S9hronm_NbdBVmnz-_ajJvnTfCe2E9McjGczVZSVKei2OpwmVx07QzVCi-yGWwxW2aIPCDoYOYmzSng81mScJkH4rI05kfBFe07N6_ohecEayFoFsxFFZ-S-58FUjtca_vYwr1mUwNkZU/s1225/IMG-20260225-WA0008.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="1225" data-original-width="1076" height="640" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjpiok9NHT04OeYxBex7vCm76eW2ydszwSvIQDbwWD3RAmH32S9hronm_NbdBVmnz-_ajJvnTfCe2E9McjGczVZSVKei2OpwmVx07QzVCi-yGWwxW2aIPCDoYOYmzSng81mScJkH4rI05kfBFe07N6_ohecEayFoFsxFFZ-S-58FUjtca_vYwr1mUwNkZU/w562-h640/IMG-20260225-WA0008.jpg" width="562" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. अर्चना तिवारी, पूर्व विभागाध्यक्ष, गंगोत्री देवी महिला पी.जी. कॉलेज, गोरखपुर की गरिमामयी उपस्थिति के साथ विशिष्ट अतिथि के रूप में श्री पुष्पदंत जैन, चेयरपर्सन मैनेजमेंट कमिटी उपस्थित रहे। मुख्य अतिथि द्वारा रिबन काटकर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया गया तथा सभी स्टॉलों का अवलोकन कर छात्राओं की सृजनात्मकता एवं रचनात्मक व्यंजन प्रस्तुति की सराहना की तथा यह भी बताया कि कॉलेज में आयोजित होने वाले फूड फेयर छात्रों में उद्यमशीलता, कुकिंग स्किल और टीमवर्क को बढ़ावा देते हैं अतः सभी छात्राओं को इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना चाहिए।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhfukQwgSukrzDR92wH1F3zZ4nNW_MlR6fk5NwaObfC2RN1yzulOh5xaBKRopyVy6UMexxp5CuDN2NupLTIhLKeIWfUStyDe4_24V0CQYssEuSxDzQ19kkptHzT_qTTH6skNLgva59Ys0AbKCf1F-tJcLvtFv7F7r_XhvkmgcHQtY_CU_gseYUPuvF8BoY/s1414/IMG-20260225-WA0007.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="1414" data-original-width="1080" height="640" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhfukQwgSukrzDR92wH1F3zZ4nNW_MlR6fk5NwaObfC2RN1yzulOh5xaBKRopyVy6UMexxp5CuDN2NupLTIhLKeIWfUStyDe4_24V0CQYssEuSxDzQ19kkptHzT_qTTH6skNLgva59Ys0AbKCf1F-tJcLvtFv7F7r_XhvkmgcHQtY_CU_gseYUPuvF8BoY/w488-h640/IMG-20260225-WA0007.jpg" width="488" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;महाविद्यालय के विभिन्न विभागों की छात्राओं ने अपने-अपने आकर्षक एवं सुसज्जित स्टॉल लगाए, जिनमें होली विशेष व्यंजनों को नवीन एवं मनमोहक रूप में प्रस्तुत किया गया। जैसे गुजियों की बारात ,कोकोनट बाइट, बटाटा पुरी, पापड़ी चाट, रंगीला मोमोज, न्यूट्री इडली बाउल, गुलाबी रसमलाई, चटपटी पिचकारी पानी पुरी ,मिठाइयों की टोली ,दही बताशे, ढोकला ,गोल्डन बाईट कटलेट, दही बड़ा,फ्लेवर फायर भेलपुरी, प्रेमी लस्सी, अन्नपूर्णा बड़ा, आलू चाट कचालू आदि व्यंजनों को&amp;nbsp; अत्यंत सुंदर ढंग से प्रदर्शित किया गया। निर्णायक मंडल द्वारा स्वाद, स्वच्छता, सृजनात्मक प्रस्तुति, प्लेटिंग और गार्निशिंग एवं थीम आधारित व्यंजन के आधार पर मूल्यांकन किया गया।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;प्रतियोगिता में उत्कृष्ठ स्थान दही बड़ा,प्रथम स्थान&amp;nbsp; स्ट्रॉबेरी सैगो कस्टर्ड,द्वितीय स्थान&amp;nbsp; प्रेमी लस्सी, तृतीय स्थान&amp;nbsp; चटपटी पिचकारी पानी पूरी, गुजियों की बारात तथा सांत्वना पुरस्कार बादमे बहारा, न्यूट्री इडली बाउल को मिला। इसके अतिरिक्त अन्य उत्कृष्ट स्टॉलों को भी प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का सफल संचालन गृह विज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. सारिका जायसवाल एवं संस्कृति विभाग की विभाग अध्यक्ष डॉ दिव्या त्रिपाठी ने किया।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;इस अवसर पर महाविद्यालय की प्रबंधक डॉ. विजयलक्ष्मी मिश्रा, प्राचार्या डॉ. सुमन सिंह, उप-प्राचार्य डॉ. स्वप्निल पांडेय, आई.क्यू.ए.सी. समन्वयक डॉ. रेखा श्रीवास्तव, बी०एड० विभागाध्यक्ष डॉ. अपर्णा मिश्रा, डॉ. अनिता सिंह, श्रीमती पूजा गुप्ता, सुश्री हुमा हसन,&amp;nbsp; एवं अन्य प्रवक्तागण तथा समस्त छात्राएँ उपस्थित रहीं।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;नमस्कार दोस्तों, ईस्ट न्यूज़ 24x7 में आपका स्वागत है...

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उनसे मौन की अपेक्षा क्यों? ज्ञान स्त्रियों के लिए दंड क्यों बन जाता है? और जब एक स्त्री स्वयं को जान लेती है, तो सत्ता को खतरा क्यों महसूस होता है?&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;इस यात्रा में इतिहास, भूगोल, मिथक, साहित्य और कलाएँ साक्षी बनकर उपस्थित होती हैं। नाटक यह स्पष्ट करता है कि समय के पार स्त्रियों के जीवन में एक भयावह निरंतरता है—हिंसा, विलोपन और नैतिक अनुशासन की ऐसी पुनरावृत्ति जिसे समाज सामान्य बनाने की कोशिश करता है। ये स्मृतियाँ मिटाई नहीं जा सकतीं। हम चाहे जितना भी यह मान लें कि रात का अंधकार उजाले में बदल गया है, छायाएँ बनी रहती हैं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;नाटक में विभिन्न सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्त्री चरित्रों की स्मृति को आमंत्रित किया जाता है। Phoolan Devi के माध्यम से बाल विवाह और जातिगत हिंसा की चरम क्रूरता सामने आती है। Matsyagandhi की कथा यह दिखाती है कि स्त्री को “नया जीवन” देने के नाम पर उसका पुराना अस्तित्व कैसे मिटा दिया जाता है। Desdemona की हत्या यह उजागर करती है कि सत्ता की मात्र शंका ही स्त्री के लिए घातक हो सकती है। और Nora हमें याद दिलाती है कि नारीवाद केवल विचार नहीं हो सकता—उसे जीना पड़ता है, जोखिम उठाने पड़ते हैं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;इन सभी कथाओं को जो जोड़ता है, वह है—ज्ञान। यह नाटक जोर देकर कहता है कि स्मृति स्वयं में एक राजनीतिक क्रिया है। जानना प्रतिरोध है। याद रखना पुनः-अधिकार है। मंच पर चार स्त्रियाँ विभिन्न सामाजिक पृष्ठभूमियों से आती हैं, पर उनकी पीड़ा एक ही सच्चाई में मिलती है—स्त्रियों के शरीर और भावनाओं का निरंतर उपनिवेशीकरण। गाँव हो या तथाकथित प्रगतिशील शहरी परिवेश, शोषण के रूप बदलते हैं, स्वरूप नहीं। छेड़छाड़, मौन थोपा जाना, भावनात्मक शोषण और सामाजिक अधिकार—ये सब व्यक्तिगत घटनाएँ नहीं, बल्कि व्यवस्थागत संरचनाएँ हैं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;नाटक का सबसे असहज करने वाला पक्ष उसकी यह स्पष्टता है कि बौद्धिक और प्रगतिशील कहे जाने वाले समाज भी स्त्रियों से अपेक्षा करते हैं कि वे सहज रहें, अनुकूल रहें, भावनात्मक रूप से उपलब्ध रहें—परंतु कभी बाधक न बनें। यहाँ यह सुविधा भंग होती है। इस मंच पर जब स्त्री चुप्पी तोड़ती है, वह कमजोर नहीं होती—वह सशक्त होती है। और यही सशक्तता समाज को विचलित करती है। दृश्य संरचना में निसार का योगदान उल्लेखनीय है। न्यूनतम लेकिन अर्थपूर्ण मंच सज्जा भावनात्मक और प्रतीकात्मक स्थानों के बीच सहजता से यात्रा करती है। कुछ भी सजावटी नहीं; हर वस्तु, हर रिक्तता कथा की सेवा में है। मंच स्वयं स्मृतियों का संग्रहालय बन जाता है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;लगभग चालीस कलाकारों की टीम, जिनमें कई दुबई से आए थे, अद्भुत अनुशासन और सामूहिक चेतना के साथ मंच पर उपस्थित होती है। विशेष रूप से Kerala Kalamandalam से प्रशिक्षित दो शास्त्रीय नर्तकियों की उपस्थिति उल्लेखनीय रही। उनकी शारीरिक सजगता, स्थिरता और भावनात्मक सटीकता यह सिद्ध करती है कि शास्त्रीय प्रशिक्षण कितनी गहराई से राजनीतिक हो सकता है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;एक नर्तकी होने के नाते, मेरे लिए एक क्षण अत्यंत अर्थपूर्ण था—कुचिपुड़ी प्रशिक्षित कलाकार अश्विनी का मंच पर जीवंत गायन। शास्त्रीय परंपराओं में अधिकांश नर्तक गायन में प्रशिक्षित होते हैं, पर उन्हें सार्वजनिक रूप से उस स्वर का प्रयोग करने की अनुमति नहीं दी जाती। यहाँ वह आंतरिक सीमा टूटती है। देह और स्वर एक हो जाते हैं। फेमिनिस्ट मैनिफेस्टो क्रोध का नाटक नहीं है। यह अंतर्मुखी पुनः-अधिकार की बात करता है। यह स्त्रियों से कहता है—शांति, कौशल, अध्ययन और कला की साधना की ओर लौटो। उन लोगों को प्रसन्न करने से इंकार करो जो भावनाओं का उपभोग करते हैं, पर उत्तरदायित्व नहीं लेते।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;यह नाटक चिल्लाता नहीं। यह सुनता है। और उसी सुनने में यह समाज से एक असहज प्रश्न पूछता है: यदि एक स्त्री अपने इतिहास, अपनी देह, अपनी कला और अपने अंतःस्व को जान लेतो उस पर नियंत्रण कैसे संभव है?फेमिनिस्ट मैनिफेस्टो केवल एक नाटक नहीं है। यह एक दर्पण है और कई लोगों के लिए एक सामना।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;नमस्कार दोस्तों, ईस्ट न्यूज़ 24x7 में आपका स्वागत है...

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&lt;/div&gt;</description><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhuFWCXbFspf9JTCYvLZhntTtIRNGrQ4JJoKjM1vC9nbrl6iqWOBEWaC30DAX2EvEwPOl36pMJ7ZReLpyfeiAuB8YR2PR64Pw5Yqfbn4ZaKHatxwUSVDUix1I56V1zPqaCEwPsszm8Mw3D5-rBBSxQ_l3l_pA5SirPuTUcfVs7lh7A70WVuHJufv5eSGxw/s72-w640-h640-c/GridArt_20260221_170935234.jpg" width="72"/><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>सप्तशक्ति संगम गोरक्ष प्रांत का भव्य समापन समारोह</title><link>https://eastnews24x7.blogspot.com/2026/02/grand-closing-ceremony-of-sapta-shakti-sangam-gorakh-pradesh.html</link><category>Uttar Pradesh</category><author>noreply@blogger.com (East News 24x7)</author><pubDate>Thu, 19 Feb 2026 17:18:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-3505245523590782174.post-7372085050836524151</guid><description>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEikgy5l3VmNyhYoV-b4Y5FW0YKM_caG4AOZggLCFcdaOUPUusYemrhuyMX0LvCzprL6hz9v56cwTly7kgbDNPCIMRhyELfR7bcKzsai7ul48P-GhxYvbZwSStXYAj5JmrY5jzYydl38uepFIwKkaDoafCl-in05U_MUcdH5xVDXspz3mByo7rbgOEVlPW8/s952/IMG-20260219-WA0003.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="713" data-original-width="952" height="480" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEikgy5l3VmNyhYoV-b4Y5FW0YKM_caG4AOZggLCFcdaOUPUusYemrhuyMX0LvCzprL6hz9v56cwTly7kgbDNPCIMRhyELfR7bcKzsai7ul48P-GhxYvbZwSStXYAj5JmrY5jzYydl38uepFIwKkaDoafCl-in05U_MUcdH5xVDXspz3mByo7rbgOEVlPW8/w640-h480/IMG-20260219-WA0003.jpg" width="640" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;ul style="text-align: left;"&gt;&lt;li&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;मातृ शक्ति ने लिया सप्तसंकल्प&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;p style="text-align: center;"&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;विशेष संवाददाता&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;b&gt;गोरखपुर। &lt;/b&gt;सरस्वती बालिका विद्यालय सूर्यकुंड गोरखपुर में सप्तशक्ति संगम समापन समारोह का भव्य आयोजन हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में डॉक्टर पूजा श्रीवास्तव वरिष्ठ अधिवक्ता, सुप्रीम कोर्ट) विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉक्टर अर्चना तिवारी( गंगोत्री देवी महिला महाविद्यालय गोरखपुर) कार्यक्रम अध्यक्ष के रूप में श्रीमती निधि द्विवेदी( क्षेत्रीय संयोजिका सप्तशक्ति संगम) तथा मुख्य वक्ता के रूप में आदरणीय यशोधरा आर्य (प्रांत कार्यवाहिका अवध प्रांत), श्रीमती पूनम ओझा  तथा विद्यालय प्रबंधकीय समिति के पदाधिकारियों में प्रोफेसर शैल पांडे (अध्यक्ष) डॉक्टर नीना अस्थाना( मंत्री )तथा गोरक्ष प्रांत के विभिन्न महानगरों से आई हुई 1500 विद्वत मातृ शक्तियां उपस्थिति रहीं।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgsFwu92XQawO5PL3Zi4fkc1SEmBYd8TLrFmky5o_i1iNjqHa7BSxXrOwD0izTtqijUY6gIA6rLpGk-DLoagbSt8xeHL8Niw-ZMbW8RZ1KE8VihttDJrfaJqXIx0TDgMUcihAkMqkOuwn0nC5IojtXIdi-3jWfJMNlHAfBNIKzfnPzE3_k6L6SHFBhkIwM/s1304/IMG-20260219-WA0004.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="1304" data-original-width="1069" height="640" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgsFwu92XQawO5PL3Zi4fkc1SEmBYd8TLrFmky5o_i1iNjqHa7BSxXrOwD0izTtqijUY6gIA6rLpGk-DLoagbSt8xeHL8Niw-ZMbW8RZ1KE8VihttDJrfaJqXIx0TDgMUcihAkMqkOuwn0nC5IojtXIdi-3jWfJMNlHAfBNIKzfnPzE3_k6L6SHFBhkIwM/w524-h640/IMG-20260219-WA0004.jpg" width="524" /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;डॉ अर्चना तिवारी ने सप्त संकल्प की व्याख्या करते हुए सभी मातृ शक्तियों को संकल्प दिलाया। सप्त संकल्पों के प्रकटीकरण के लिए उन्होंने श्रीमद भगवद्गीता के उस श्लोक की भी व्याख्या की जिसमे सप्त शक्ति संकल्प का आधार दिया गया है। यह विद्या भारती द्वारा संचालित एक राष्ट्रव्यापी पहल है, जो मातृशक्ति को जागरूक, संगठित और सशक्त बनाने के लिए समर्पित है। यह 7 शक्तियों—कीर्ति, श्री, वाणी, स्मृति, मेधा, धृति और क्षमा—का संगम है, जिसका उद्देश्य नारी शक्ति के माध्यम से परिवार, संस्कृति और समाज में सकारात्मक परिवर्तन व राष्ट्र निर्माण करना है।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;सप्त शक्ति के 7 मुख्य आयाम (विद्या भारती के अनुसार) मातृशक्ति/कुटुम्ब शक्ति, संस्कार शक्ति (सरस्वती), शिक्षा,&amp;nbsp;धर्म शक्ति (दुर्गा/सीता/सावित्री), सेवा शक्ति (लक्ष्मी/शीतला), पर्यावरण शक्ति (पृथ्वी/गंगा),वीर शक्ति (वीरांगना),राष्ट्रीय शक्ति (भारत माता) हैं।विद्या भारती संघ शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में 'सप्तशक्ति संगम' कार्यक्रमों के माध्यम से महिलाओं को समाज में अपनी सक्रिय और नेतृत्वकारी भूमिका निभाने के लिए प्रेरित कर रही है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjkWGhsbwTBDYCVN53XlV8Cb-GG_6hFngDO7YgXT4e5_jOluWwwXGECvuV6UBMXsznTHFxDcaL8qvTj83mXsBfebsJORvaASPirxWLn3mHFnVhmTfOz8eolyGc6KqScslud8_sllkZh0fAN1xSlfk8trGASfN2lGZNoH5fytrS4Ul_IwxuAvLpQ5VTeCrk/s1080/IMG-20260219-WA0007.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="676" data-original-width="1080" height="400" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjkWGhsbwTBDYCVN53XlV8Cb-GG_6hFngDO7YgXT4e5_jOluWwwXGECvuV6UBMXsznTHFxDcaL8qvTj83mXsBfebsJORvaASPirxWLn3mHFnVhmTfOz8eolyGc6KqScslud8_sllkZh0fAN1xSlfk8trGASfN2lGZNoH5fytrS4Ul_IwxuAvLpQ5VTeCrk/w640-h400/IMG-20260219-WA0007.jpg" width="640" /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं मां सरस्वती की वंदना से हुआ। विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती रश्मि श्रीवास्तव नें समस्त अतिथियों का स्वागत -सम्मान तथा परिचय कराया । इसी क्रम में विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान द्वारा आयोजित गोरक्ष प्रांत शिशु शिक्षा समिति एवं जन शिक्षा समिति द्वारा विभिन्न विद्यालयों एवं संस्कार केंद्रों में आयोजित सप्तशक्ति संगम कार्यक्रमों का विस्तृत वृत प्रस्तुत किया।कार्यक्रम अध्यक्ष श्रीमती निधि द्विवेदी जी ने अपने उद्बोधन में समस्त मातृ&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&amp;nbsp;शक्तियों को संबोधित करते हुए पंच परिवर्तनों के बिंदुओं पर विस्तृत विवेचना प्रस्तुत की तथा कहा कि व्यष्टि से समष्टि के कल्याण के सूत्र भारतीय संस्कृति में निहित हैं। भारतीय संस्कृति विश्व को मार्ग दिखाने वाली है तधा मातृ शक्तियों को सप्त शक्तियों के जागरण के लिए आह्वान किया। इसी क्रम में विद्यालय की छात्रा बहनों ने आदिशक्ति गीत की मनोहर प्रस्तुति की।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhj_Pc7SiYEyDSb1q-lmTVewrbm1NYa9ZqPfibbDV3pft14Q2kjEjgoheRj5arbWamktlAIMajdeW0E4E0V1FIoJ1kkB8ievYJk0WohYf5QTfJx9B8yppksY_8hU6ewsqZKgGYazSHb_ky9BJBov7u5ZVSKtZOHOFLQ-D2Sm01TQw3pz1fQDREr93U3QcY/s1080/IMG-20260219-WA0005.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="708" data-original-width="1080" height="420" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhj_Pc7SiYEyDSb1q-lmTVewrbm1NYa9ZqPfibbDV3pft14Q2kjEjgoheRj5arbWamktlAIMajdeW0E4E0V1FIoJ1kkB8ievYJk0WohYf5QTfJx9B8yppksY_8hU6ewsqZKgGYazSHb_ky9BJBov7u5ZVSKtZOHOFLQ-D2Sm01TQw3pz1fQDREr93U3QcY/w640-h420/IMG-20260219-WA0005.jpg" width="640" /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;मातृ शक्तियों ने सप्त शक्तियों के जागरण का संकल्प लिया।&amp;nbsp;&amp;nbsp;प्रमुख वक्ता श्रीमती पूजा श्रीवास्तव ने  अपने प्रस्तावित विषय व्यक्ति से परमेष्टि की ओर पर विस्तृत व्याख्या की तथा सप्त शक्तियों के जागरण पर विशेष बल दिया।&amp;nbsp;यशोधरा जी ने मातृ शक्तियों से संवाद स्थापित करते हुए बालिका शिक्षा के विभिन्न बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा की।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEi3VrrepKH1ZbYDp-lNXmceqdHnDFhomXvnRqQ6Yc4dUzmYdgO6TOw3VhrJQh_pMmxbi2bNS9camMKWTP4-uLnuZHk2ndifS1kWPv1xknbchIPwcs6qMYIVkbvUzGNwEmkwauD9dedVOvX4Uf2QOIyFL3gaToXUKo4oBj2YRp8nTz705cERHoNBSso-pbw/s1077/IMG-20260219-WA0006.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="712" data-original-width="1077" height="424" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEi3VrrepKH1ZbYDp-lNXmceqdHnDFhomXvnRqQ6Yc4dUzmYdgO6TOw3VhrJQh_pMmxbi2bNS9camMKWTP4-uLnuZHk2ndifS1kWPv1xknbchIPwcs6qMYIVkbvUzGNwEmkwauD9dedVOvX4Uf2QOIyFL3gaToXUKo4oBj2YRp8nTz705cERHoNBSso-pbw/w640-h424/IMG-20260219-WA0006.jpg" width="640" /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;पूजा श्रीवास्तव जी ने अपने वक्तव्य में कहा कि नारी ही सृजनकर्ता है ।वह समाज को संस्कारित करने वाली है ।संपूर्ण नारी प्रकृति स्वरूपा  है। उन्होंने माता सीता के आदर्श चरित्र को अपने जीवन में अपनाने के लिए मातृ शक्तियों को प्रेरित किया।&amp;nbsp;छात्राओं द्वारा प्रस्तुत की गयी गणेश वंदना एवं होली नृत्य गीत की सुंदर सम्मोहक प्रस्तुति ने समस्त मातृ शक्तियों को एक सूत्र में बांधे रखा।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;सप्तशक्ति संगम की जिला संयोजिका डॉक्टर अर्चना शुक्ला ने समस्त आगत गणमान्य अतिथियों एवं मातृ शक्तियों  तथा विद्यालय परिवार के प्रति आभार ज्ञापित किया गया।&amp;nbsp;वंदे मातरम गीत के साथ कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;नमस्कार दोस्तों, ईस्ट न्यूज़ 24x7 में आपका स्वागत है...

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class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhqFm83kRsqiQI9wuB5nlILyNKIv545JkYAVDcWqN3RWo4Ak-qfcM4PbNkyMhM-R7kuaeCokxGCRye3tm9mrfH7jP1CCYg86KdM9F9VpAz8683dt7_hgrG1H96F4xnAstZMVIbjx-D2NMOV-Q73DaD1gcvCif4smradwgs7olTHr260qwGklMr6KwAh31g/s1076/IMG_20260213_055544.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="617" data-original-width="1076" height="366" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhqFm83kRsqiQI9wuB5nlILyNKIv545JkYAVDcWqN3RWo4Ak-qfcM4PbNkyMhM-R7kuaeCokxGCRye3tm9mrfH7jP1CCYg86KdM9F9VpAz8683dt7_hgrG1H96F4xnAstZMVIbjx-D2NMOV-Q73DaD1gcvCif4smradwgs7olTHr260qwGklMr6KwAh31g/w640-h366/IMG_20260213_055544.jpg" width="640" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhQfMcxZFZuzfFulWEOcVkDbayMlUbu9P-yvjLAWbzh6tCEM8xIqj_CDecp_9GFOfsFfnh3wjWi5SrGm7hUU9vaN8ZmPD315NN_KUnJvBjma3HAQKpFxAoIgZgXe3vLROO6ELPyut_d3kF-JnVQsAwpPnC0ccCtb0u1dimu2pFXEHvI82XROduoJut237U/s1242/IMG-20260212-WA0004.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="1242" data-original-width="1080" height="200" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhQfMcxZFZuzfFulWEOcVkDbayMlUbu9P-yvjLAWbzh6tCEM8xIqj_CDecp_9GFOfsFfnh3wjWi5SrGm7hUU9vaN8ZmPD315NN_KUnJvBjma3HAQKpFxAoIgZgXe3vLROO6ELPyut_d3kF-JnVQsAwpPnC0ccCtb0u1dimu2pFXEHvI82XROduoJut237U/w174-h200/IMG-20260212-WA0004.jpg" width="174" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;p style="text-align: center;"&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;शाश्वत तिवारी, स्वतंत्र पत्रकार&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;नेपाल दक्षिण एशिया का एक ऐसा राष्ट्र है, जिसने पिछले तीन दशकों में राजनीतिक परिवर्तन के अनेक उथल-पुथल भरे दौर देखे हैं। राजशाही से गणतंत्र तक की यात्रा, माओवादी जनयुद्ध से लेकर बहुदलीय लोकतंत्र की स्थापना तक का संघर्ष, और फिर संविधान निर्माण के बाद संघीय लोकतांत्रिक गणराज्य की स्थापना, इन सबके बीच नेपाल की राजनीति निरंतर पुनर्गठन की प्रक्रिया से गुजरती रही है। ऐसे में नेपाल के चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन का माध्यम नहीं होते, बल्कि वे राष्ट्र की वैचारिक दिशा, सामाजिक संतुलन और भू-राजनीतिक प्राथमिकताओं को भी निर्धारित करते हैं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;यह विश्लेषण नेपाल के हालिया चुनावी परिदृश्य, प्रमुख राजनीतिक शक्तियों, मतदाताओं के रुझान, सामाजिक-सांस्कृतिक आयामों, आर्थिक चुनौतियों और भारत-चीन जैसे पड़ोसी देशों के प्रभाव सहित व्यापक संदर्भों का गहन अध्ययन प्रस्तुत करता है। राजशाही से गणतंत्र तक नेपाल में 1990 का जनआंदोलन बहुदलीय लोकतंत्र की पुनर्स्थापना का आधार बना। किंतु राजनीतिक अस्थिरता, भ्रष्टाचार और सत्ता संघर्ष के कारण लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत नहीं हो सकी। 1996 में माओवादी जनयुद्ध आरंभ हुआ, जिसने दस वर्षों तक देश को हिंसा और अस्थिरता में झोंक दिया।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;2006 के जनआंदोलन (लोकतंत्र आंदोलन-2) के बाद राजशाही का अंत हुआ और नेपाल एक संघीय लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित हुआ। 2015 में नया संविधान लागू हुआ, जिसने संघीय ढांचा स्थापित किया-7 प्रांतों के साथ एक संघीय शासन प्रणाली। संविधान लागू होने के बाद हुए चुनावों ने नेपाल को नई राजनीतिक दिशा दी, लेकिन स्थायित्व अब भी चुनौती बना हुआ है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;नेपाल की संघीय संसद द्विसदनीय है, जिसमें दो सदन हैं, पहला, राष्ट्रीय सभा, यह ऊपरी सदन है जिसके 59 सदस्य होते हैं।दूसरा, प्रतिनिधि सभा, यह निचला सदन है, इसके 275 सदस्य होते है, और ये सरकार गठन में मुख्य भूमिका निभाता है, जिसमें से 165 सदस्यों का प्रत्यक्ष निर्वाचन होता है, इनके निर्वाचन के लिए देश को 165 निर्वाचन क्षेत्रों में बाँटा गया है। प्रत्येक क्षेत्र से एक प्रतिनिधि सीधे जनता द्वारा चुना जाता है। अन्य 110 सदस्यों को राजनीतिक दलों को मिले कुल मत प्रतिशत के आधार पर सीटें आवंटित की जाती हैं। इसमें महिलाओं, दलितों, जनजातियों, मधेसी, पिछड़े वर्ग और अन्य समूहों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाता है। प्रतिनिधि सभा का कार्यकाल सामान्यत 5 वर्ष का होता है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;यह मिश्रित चुनाव प्रणाली राजनीतिक विविधता को स्थान देती है, लेकिन गठबंधन राजनीति को भी अनिवार्य बना देती है। किसी एक दल के लिए स्पष्ट बहुमत पाना कठिन हो जाता है। नेपाली कांग्रेस उदार लोकतांत्रिक विचारधारा के साथ, ऐतिहासिक रूप से भारत समर्थक रुख लोकतंत्र और बहुलतावाद पर जोर देती है। नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी, वामपंथी राष्ट्रवाद के साथ के.पी. शर्मा ओली के नेतृत्व में चीन के साथ घनिष्ठ संबंधों की समर्थक हैं। माओवादी केंद्र पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ के नेतृत्व में जनयुद्ध से मुख्यधारा की राजनीति में प्रवेश के साथ सामाजिक न्याय और संघीयता पर जोर हैं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी अपेक्षाकृत नया दल है जो भ्रष्टाचार विरोधी एजेंडा के साथ, शहरी युवाओं में लोकप्रिय हैं। नेपाल के तराई क्षेत्र के अधिकारों की मांग है कि संघीय ढांचे में अधिक स्वायत्तता मिले। इन दलों के बीच गठबंधन और टूट-फूट नेपाल की राजनीति का स्थायी चरित्र बन चुकी है।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;हालिया संसदीय चुनावों में किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। नेपाली कांग्रेस और यूएमएल के बीच प्रतिस्पर्धा रही, जिसमें निर्णायक भूमिका छोटे दलों और गठबंधन सहयोगियों ने निभाई। मौजूदा हालात में मतदाताओं में पारंपरिक दलों के प्रति असंतोष, युवाओं का बढ़ता हस्तक्षेप, भ्रष्टाचार और महंगाई मुख्य मुद्दे हैं स्थिर सरकार की मांग, राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी जैसी नई शक्तियों का उभार इस असंतोष का परिणाम है। नेपाल की जनसंख्या में युवाओं की बड़ी हिस्सेदारी है। बड़ी संख्या में युवा विदेशों (खाड़ी देशों, मलेशिया, दक्षिण कोरिया) में काम करते हैं। इन युवाओं की प्राथमिकता है रोजगार के अवसर, पारदर्शी शासन, भ्रष्टाचार पर नियंत्रण, शिक्षा और स्वास्थ्य में सुधार। युवा मतदाता वैचारिक राजनीति से अधिक परिणाम-आधारित शासन चाहते हैं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;जानकारों की राय में, आज नेपाल की अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों से जूझ रही है, जैसे विदेशी रोजगार पर निर्भरता, रेमिटेंस आधारित अर्थव्यवस्था, व्यापार घाटा, पर्यटन में गिरावट चुनावों में आर्थिक स्थिरता बड़ा मुद्दा हैं। आज जनता चाहती है कि सरकार बुनियादी ढांचे, ऊर्जा, पर्यटन और कृषि क्षेत्र में सुधार करे।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;नेपाल में, 2015 के संविधान के बाद संघीय ढांचा लागू हुआ, लेकिन प्रांतों को पर्याप्त वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार नहीं मिल पाए। इससे स्थानीय स्तर पर असंतोष है। चुनावों में यह सवाल प्रमुख रहा कि क्या संघीय व्यवस्था वास्तव में जनता तक शासन की शक्ति पहुंचा पाई है या यह केवल सत्ता के नए केंद्र बना रही है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;वही दूसरी ओर, तराई क्षेत्र (मधेश) में लंबे समय से राजनीतिक उपेक्षा का भाव रहा है। मधेशी दलों ने अधिक प्रतिनिधित्व और समान अधिकारों की मांग की है। चुनावों में मधेशी राजनीति निर्णायक बनती है, क्योंकि वहां के वोट कई बार केंद्र की सत्ता समीकरण बदल देते हैं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;अगर इसे चुनाव को भारत-नेपाल संबंध के नजरिए से देखे तो नेपाल की राजनीति में भारत का प्रभाव ऐतिहासिक रहा है। खुली सीमा, सांस्कृतिक संबंध, व्यापार और ऊर्जा सहयोग, इन सबके कारण भारत-नेपाल संबंध अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। हालांकि, 2015 के संविधान के बाद सीमा नाकेबंदी के आरोपों ने नेपाल में भारत-विरोधी भावना को भी जन्म दिया। इसने वामपंथी दलों को राष्ट्रवादी एजेंडा उठाने का अवसर दिया।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;चुनावों में यह मुद्दा सीधे न सही, परंतु अप्रत्यक्ष रूप से मौजूद रहता है, विशेषकर विदेश नीति के संदर्भ में। नेपाल में चीन के बढ़ते प्रभाव के नजरिए से देखे तो, चीन ने नेपाल में बुनियादी ढांचे, सड़कों, ऊर्जा और डिजिटल परियोजनाओं में निवेश बढ़ाया है। बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के तहत सहयोग बढ़ रहा है। कुछ राजनीतिक दल चीन के साथ निकटता को विकास का विकल्प मानते हैं, जबकि अन्य इसे संतुलन की नीति से जोड़ते हैं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;नेपाल की विदेश नीति अब "संतुलन की कूटनीति" पर आधारित दिखती है, भारत और चीन दोनों के साथ संबंध बनाए रखना।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;नेपाल में गठबंधन सरकारें आम हो चुकी हैं। इसका सकारात्मक पहलू है, विविधता का प्रतिनिधित्व के साथ समावेशी शासन।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;दूसरी ओर इसका नकारात्मक पहलू यह है कि&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;बार-बार सरकार का गिरना, नीति स्थिरता का अभाव, वही दूसरी ओर प्रधानमंत्री बदलने की प्रवृत्ति ने अस्थिरता के साथ प्रशासनिक दक्षता को प्रभावित किया है। आज नेपाल में, मौजूदा जनता के बीच सबसे बड़ा असंतोष भ्रष्टाचार को लेकर है। कई घोटालों ने राजनीतिक नेतृत्व की विश्वसनीयता को प्रभावित किया हैं, यहां राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी जैसे दलों का उभार इस बात का संकेत है कि जनता पारदर्शी शासन चाहती है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;समानुपातिक प्रणाली के कारण संसद में महिलाओं और अल्पसंख्यकों की भागीदारी बढ़ी है। नेपाल दक्षिण एशिया में महिला प्रतिनिधित्व के मामले में अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में है।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;फिर भी, निर्णय-निर्माण स्तर पर प्रभाव सीमित है।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;नेपाल का लोकतंत्र अभी संक्रमण काल में है। यहां, चुनाव नियमित रूप से हो रहे हैं, यह सकारात्मक संकेत है। लेकिन राजनीतिक स्थिरता, आर्थिक सुधार और संस्थागत मजबूती आवश्यक है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;नेपाल के मौजूदा हालात का अध्ययन बताता है कि, आगामी वर्षों में नेपाल की राजनीति कई कारणों से प्रभावित होगी, जैसे युवा नेतृत्व का उभार, गठबंधन की स्थिरता, आर्थिक सुधार, भारत-चीन संतुलन और संघीय ढांचे का सुदृढ़ीकरण। यहां, राजनीतिक दल व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा से ऊपर उठकर राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता दें, तो नेपाल स्थिरता की दिशा में बढ़ सकता है। नेपाल के चुनाव केवल सरकार चुनने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक चेतना की परीक्षा हैं। जनता अब अधिक सजग है। वह वैचारिक नारों से अधिक ठोस परिणाम चाहती है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;खंडित जनादेश यह दर्शाता है कि मतदाता किसी एक दल को पूर्ण विश्वास नहीं दे रहे, बल्कि संतुलन और जवाबदेही चाहते हैं। यह लोकतंत्र की परिपक्वता का संकेत भी है और राजनीतिक दलों के लिए चेतावनी भी।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;अध्ययन बताता है कि, नेपाल आज परिवर्तन की दहलीज पर खड़ा है। यदि नेतृत्व दूरदर्शिता, पारदर्शिता और स्थिरता का परिचय देता है, तो हिमालय की यह धरती दक्षिण एशिया में लोकतांत्रिक स्थायित्व का उदाहरण बन सकती है। अन्यथा, अस्थिरता का चक्र जारी रहेगा।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;नेपाल के चुनाव हमें यह भी सिखाते हैं कि लोकतंत्र केवल संविधान से नहीं, बल्कि राजनीतिक संस्कृति से मजबूत होता है। और राजनीतिक संस्कृति तब विकसित होती है, जब सत्ता सेवा में बदलती है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p style="text-align: center;"&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;b&gt;&lt;u&gt;(शाश्वत तिवारी: लेखक यूपी के जाने - माने पत्रकार हैं और अपने विश्लेषण, निष्पक्ष स्वतंत्र टिप्पणी के लिए जाने जाते हैं)&lt;/u&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;नमस्कार दोस्तों, ईस्ट न्यूज़ 24x7 में आपका स्वागत है...

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margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="420" data-original-width="399" height="640" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgoDIakk09hle7NRCrWSunx7d4UeGAaqGnUBipnB8HRNeU8z__WRNjV3ny-Q9CRVto3fdzK2155TOFGvZR5Ad4PXHi3uWvRf-vxWXlRWp-A0HThCjPjB6mkarcVIvmGGmtUlRO8Bi2gp1TTKDMEvF3spYN8nO94X5jLOTfoZUFoEoOJsCRGKmpWkKV7Tfo/w608-h640/IMG-20260126-WA0003.jpg" width="608" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;p style="text-align: center;"&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;डॉ. नजमुस्साक़िब अब्बासी नदवी&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;भारत 26 जनवरी 2026 को अपना 77वाँ गणतंत्र दिवस मनाने जा रहा है। यह दिन 26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान के लागू होने की स्मृति में मनाया जाता है, जिसने भारत को एक संप्रभु, लोकतांत्रिक और गणराज्य राष्ट्र के रूप में स्थापित किया। भारत को भले ही 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता प्राप्त हुई हो, लेकिन उस समय देश के पास अपना संविधान नहीं था। तब शासन व्यवस्था मुख्यतः अंग्रेज़ों द्वारा बनाए गए भारत सरकार अधिनियम 1935 पर आधारित थी। स्वतंत्र भारत के लिए एक स्वदेशी संविधान के निर्माण हेतु 29 अगस्त 1947 को डॉ. भीमराव अंबेडकर की अध्यक्षता में संविधान मसौदा समिति का गठन किया गया।लगभग दो वर्ष ग्यारह महीने की लंबी प्रक्रिया के बाद भारतीय संविधान तैयार हुआ और 26 जनवरी 1950 को इसे देश में लागू किया गया। 26 जनवरी की तिथि का चयन इसलिए किया गया क्योंकि इसी दिन 1930 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज की घोषणा की थी।26 जनवरी 1950 को भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने 21 तोपों की सलामी के साथ राष्ट्रीय ध्वज फहराकर भारत को पूर्ण गणतंत्र घोषित किया। इसके बाद से यह दिन हर वर्ष राष्ट्रीय अवकाश के साथ पूरे देश में मनाया जाता है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;भारतीय संविधान नागरिकों को लोकतांत्रिक तरीके से अपनी सरकार चुनने का अधिकार देता है। संविधान लागू होने के बाद डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने पुराने संसद भवन के दरबार हॉल में राष्ट्रपति पद की शपथ ली थी। इसके पश्चात आयोजित भव्य परेड के बाद इरविन स्टेडियम में राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया। गणतंत्र दिवस केवल उत्सव का दिन नहीं, बल्कि उस ऐतिहासिक क्षण की याद है जब भारत ने अपने स्वयं के कानूनों और अधिकारों के साथ एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में पहचान बनाई। यह दिन हमें स्वतंत्रता सेनानियों और संविधान निर्माताओं के संघर्ष और बलिदान की याद दिलाता है। साथ ही यह लोकतंत्र, समानता, न्याय और स्वतंत्रता जैसे संवैधानिक मूल्यों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दोहराता है। लोकतंत्र शासन की वह प्रणाली है जिसमें जनता को अपने शासक चुनने का अधिकार होता है, जबकि गणतंत्र में सत्ता संविधान द्वारा नियंत्रित होती है। लोकतंत्र में बहुमत की इच्छा महत्वपूर्ण होती है, वहीं गणतंत्र में बहुमत भी संविधान की सीमाओं में बंधा होता है। यही कारण है कि गणतंत्र में सरकार पर संवैधानिक प्रतिबंध होते हैं और नागरिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाती है। संविधान लागू होने के बाद से ही समय-समय पर विपक्ष द्वारा यह आरोप लगाए जाते रहे हैं कि सत्ता पक्ष लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर कर रहा है। वर्तमान में भी चुनावी प्रक्रिया, कथित वोट चोरी, एसआईआर और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर राजनीतिक विवाद गहराए हुए हैं, जो लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय हैं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;भारत विश्व की सबसे बड़ी आबादी वाला देश है और स्वयं को जापान के साथ मिलकर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बताता है। इसके बावजूद देश के अनेक हिस्सों में आज भी गरीबी और सामाजिक असमानता बनी हुई है। आधुनिक भारत विविध धर्मों, भाषाओं और संस्कृतियों का संगम है। किंतु हाल के वर्षों में देश की धर्मनिरपेक्ष पहचान, बहुलवाद और सामाजिक सौहार्द पर प्रश्न उठ रहे हैं। कुछ नीतियों पर विशेष समुदायों को लक्षित करने के आरोप हैं, वहीं कुछ राज्यों की तथाकथित बुलडोज़र नीति को भेदभाव बढ़ाने वाला बताया जा रहा है। इसी प्रकार चुनाव आयोग की निष्पक्षता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मीडिया की भूमिका को लेकर भी विपक्ष सरकार की आलोचना करता रहा है। ये सभी मुद्दे लोकतंत्र की मजबूती के लिए गंभीर आत्ममंथन की माँग करते हैं।&amp;nbsp; यह भी एक विरोधाभास है कि एक महिला प्रधानमंत्री और दो महिला राष्ट्रपतियों का नेतृत्व पाने वाला देश आज भी लैंगिक असमानता और महिलाओं के खिलाफ हिंसा जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। हालांकि हाल के वर्षों में महिलाओं का मतदान प्रतिशत बढ़ना और स्थानीय निकायों में आरक्षण का प्रभाव लोकतंत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत है। गणतंत्र दिवस हमें यह याद दिलाता है कि भारतीय गणतंत्र केवल एक व्यवस्था नहीं, बल्कि एक सतत प्रक्रिया है, जिसे जीवंत बनाए रखने के लिए संविधान, संस्थाओं और नागरिकों—तीनों की सजगता आवश्यक है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;लेखक - सौहार्द फेलोशिप के मेंटर एवं नया सवेरा फाउंडेशन गाज़ीपुर के संस्थापक है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;नमस्कार दोस्तों, ईस्ट न्यूज़ 24x7 में आपका स्वागत है...

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&lt;/div&gt;</description><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgoDIakk09hle7NRCrWSunx7d4UeGAaqGnUBipnB8HRNeU8z__WRNjV3ny-Q9CRVto3fdzK2155TOFGvZR5Ad4PXHi3uWvRf-vxWXlRWp-A0HThCjPjB6mkarcVIvmGGmtUlRO8Bi2gp1TTKDMEvF3spYN8nO94X5jLOTfoZUFoEoOJsCRGKmpWkKV7Tfo/s72-w608-h640-c/IMG-20260126-WA0003.jpg" width="72"/><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>सुदामा ब्राह्मण की परिभाषा</title><link>https://eastnews24x7.blogspot.com/2026/01/definition-of-dudama-brahmin.html</link><category>Writer</category><author>noreply@blogger.com (East News 24x7)</author><pubDate>Fri, 9 Jan 2026 15:00:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-3505245523590782174.post-1869213079460854654</guid><description>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEh8g-iLh9ae-f9FJE52XPUOTze407V2yE4XEdiP_2m9c3zR3sSDXp90lQmwrWFU1TWDaftNW1ScMMEpwftQ46a16-56MyE5MJ8s1gHkKE1IkIDDAe-gFHHmu_cYDPJkGaY16TPoRp_1GBPGDUVqoGbR5FpF-oOq1Tqf93iav5mSmf5CjCubj-9EBE889I8/s842/IMG-20260109-WA0000.jpg" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="842" data-original-width="741" height="640" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEh8g-iLh9ae-f9FJE52XPUOTze407V2yE4XEdiP_2m9c3zR3sSDXp90lQmwrWFU1TWDaftNW1ScMMEpwftQ46a16-56MyE5MJ8s1gHkKE1IkIDDAe-gFHHmu_cYDPJkGaY16TPoRp_1GBPGDUVqoGbR5FpF-oOq1Tqf93iav5mSmf5CjCubj-9EBE889I8/w564-h640/IMG-20260109-WA0000.jpg" width="564" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;p style="text-align: center;"&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;आचार्य संजय तिवारी&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;आचार्य सुदामा। भगवान श्रीकृष्ण के मित्र। सहपाठी। कृष्ण को शॉप से सुरक्षित करने वाला बाल सखा जिसने सृष्टि के विधान की सुरक्षा के लिए चोर बन जाने में ही भलाई समझी। कृष्ण की सुरक्षा आवश्यक थी। सुदामा क्या वास्तव में एक दरिद्र और असहाय ब्राह्मण थे ?&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;b&gt;सुदामा वस्तुतः &lt;/b&gt;आचार्य सुदामा थे। सुदामा का पूरा प्रसंग केवल द्वारकाधीश के दरबार का ही पढ़ने को मिलता है। गुरु गृह में कृष्ण और सुदामा के अध्ययन के समय का भी केवल चने वाला प्रसंग ही मिलता है। ग्रंथों का अनुशीलन बहुत शोध मांगता है। अनेक संदर्भों की गहन व्याख्या में यह अनुभव होता है कि यदि सुदामा ने अपनी भूमिका को न निभाया होता तो श्रीकृष्ण स्वरूप का विधि प्रपंच ही बाधित हो जाता। विष्णु अवतार कृष्ण की वह क्षमता नष्ट हो जाती जो उन्हें जगद्गुरु योगेश्वर भगवान बना रही थी। विधाता ने कृष्ण की ऐसी सुरक्षा के लिए एक विधि की खोज शुरू की तो एक त्याग पुरुष की छवि पर रुके और सुदामा का सृजन करना पड़ा। सांदीपनी आश्रम में यदि सुदामा सहपाठी नहीं बनते तो कृष्ण का वस्तुनिष्ठ व्यापक निर्माण असंभव था। जैसे माता कैकेई ने श्रीराम को निर्मित किया, ब्राह्मण सुदामा ने उससे भी अधिक कंटक पथ अपनाया और कृष्ण के भगवत पथ को सुरक्षित किया।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;कृष्ण की समस्त भगवत लीलाओं के संपन्न होने के बाद सुदामा द्वारिका आए। यह कथा सभी को मालूम है। सुदामा को पता ही नही चला। सुदामा सो चुके थे किंतु कृष्ण अपनी ही सोंचों में मगन उनके पाँव दबाते हुए बचपन की बातें करते चले जा रहे थे, कि तभी रुक्मिणी ने उनके कंधे पर हाथ रखा। कृष्ण ने चौंक कर पहले उन्हे देखा और फिर सुदामा को, फिर उनका आशय समझ कर वहाँ से उठ कर अपने कक्ष में चले आये। कृष्ण की ऐसी मगन अवस्था देखकर रुक्मिणी ने पूछा, "स्वामी आज आपका व्यवहार बहुत ही विचित्र प्रतीत हो रहा है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;आप, जो इस संसार के बड़े से बड़े सम्राट के द्वारका आने पर उनसे तनिक भी प्रभावित नही होते हैं, वो अपने मित्र के आगमन की सूचना पर इतने भावविव्हल हो गए कि भोजन छोड़कर नंगे पाँव उन्हे लेने के लिए भागते चले गए। आप, जिनको कोई भी दुख, कष्ट या चुनौती कभी रुला नही पाई, यहाँ तक कि जो गोकुल छोड़ते समय मैया यशोदा के अश्रु देखकर भी नही रोये, वे अपने मित्र के जीर्ण शीर्ण, घावों से भरे पाँवों को देखकर इतने भावुक हो गए कि अपने अश्रुओं से ही उनके पाँवों को धो दिया।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;कूटनीति, राजनीति और ज्ञान के शिखर पुरुष आप, अपने मित्र को देखकर इतने मगन हो गए कि बिना कुछ भी विचार किये उन्हे समस्त त्रिलोक की संपदा एवं समृद्धि देने जा रहे थे।" कृष्ण ने अपनी उसी आमोदित अवस्था में कहा, "वह मेरे बालपन का मित्र है रुक्मिणी।" "परंतु उन्होंने तो बचपन में आपसे छुपाकर वो चने भी खाये थे जो गुरुमाता ने उन्हे आपसे बाँटकर खाने को कहे थे? अब ऐसे मित्र के लिए इतनी भावुकता क्यों?", सत्यभामा ने भी अपनी जिज्ञासा रखी।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;कृष्ण मुस्कुराये, " सुदामा ने तो वह कार्य किया है सत्यभामा, कि समस्त सृष्टि को उसका आभार मानना चाहिए। वो चने उसने इसलिए नही खाये थे कि उसे भूँख लगी थी बल्कि उसने इसलिए खाये थे क्योंकि वो नही चाहता था कि उसका मित्र कृष्ण दरिद्रता देखे। उसे ज्ञात था कि वे चने आश्रम में चोर छोड़कर गए थे, और उसे यह भी ज्ञात था कि उन चोरों ने वे चने एक ब्राह्मणी के गृह से चुराए थे। उसे यह भी ज्ञात था कि उस ब्राह्मणी ने यह श्राप दिया था कि जो भी उन चनों को खायेगा, वह जीवन पर्यंत दरिद्र ही रहेगा।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;सुदामा ने वे चने इसलिए मुझसे छुपा कर खाये ताकि मैं सुखी रहूँ। वो मुझसे ईश्वर का कोई अंश समझता था, तो उसने वे चने इसलिए खाये क्योंकि उसे लगा कि यदि ईश्वर ही दरिद्र हो जायेगा तो संपूर्ण सृष्टि ही दरिद्र हो जायेगी। सुदामा ने संपूर्ण सृष्टि के कल्याण के लिए स्वय का दरिद्र होना स्वीकार किया।" "इतना बड़ा त्याग!", रुक्मिणी के मुख से स्वतः ही निकला।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;" मेरा मित्र ब्राह्मण है रुक्मिणी, और ब्राह्मण ज्ञानी और त्यागी ही होते हैं। उनमें जनकल्याण की भावना कूट कूट कर भरी होती है। इक्का दुक्का अपवादों को यदि छोड़ दिया जाए तो ब्राह्मण ऐसे ही होते हैं। अब तुम ही बताओ ऐसे मित्र के लिए ह्रदय में प्रेम नही तो फिर क्या उत्पन्न होगा प्रिये? गोकुल छोड़ते हुए मैं इसलिए नही रोया था क्योंकि यदि मैं रोता तो मेरी मैया तो प्राण ही छोड़ देती। परंतु मेरे मित्र के ऐसे पाँव देखकर, उनमें ऐसे घावों&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;को देखकर मेरा ह्रदय भर आया रुक्मिणी। उसके पाँवों में ऐसे घाव और जीवन में उसकी ऐसी दशा मात्र इसलिए हुई क्योंकि वह अपने इस मित्र का भला चाहता था। पता है रुक्मिणी, परिवार को छोड़कर किसी और ने कभी इस कृष्ण का इतना भला नही चाहा। लोग बाग तो मुझसे उनका भला करने की अपेक्षा रखते हैं। बस सुदामा जैसे मित्र ही होते हैं जो अपने मित्र के सुख के लिए स्वेच्छा से दरिद्रता एवं कष्ट का आवरण ओढ़ लेते हैं। ऐसे मित्र दुर्लभ होते हैं और न जाने किन पुण्यों के फलस्वरूप मिलते हैं। अब ऐसे मित्र को यदि त्रिलोक की समस्त संपदा भी दे दी जाए तो भी कम होगा।", कृष्ण अपने भावुकता से भर्राये हुए स्वर में बोले।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;इधर कक्ष में समस्त रानियों के नेत्र सजल थे और उधर कक्ष के बाहर खड़े सुदामा के नेत्रों से गंगा यमुना बह रही थीं। सुदामा केवल एक दरिद्र ब्राह्मण नहीं हैं, वह साक्षात स्वरूप हैं, यही सृष्टि का ब्राह्मण है। ब्राह्मण अर्थात धर्मनिष्ठ, तपोनिष्ठ, ब्रह्मनिष्ठ, त्याग और तेज जिसमें सृष्टि स्वयं को सृजित करने की ऊर्जा पाती है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;नमस्कार दोस्तों, ईस्ट न्यूज़ 24x7 में आपका स्वागत है...

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margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="1032" data-original-width="1007" height="640" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg7YnxYFk-G3dX1qnNZIdctmYyY2tAK_EPcvsku835xouIUd1md4KuBHAlLl2MoodTF-d8nrnBhwHzF2hJX_qbnaZy5oOztmMkzC2zc4ztIWyN3s3CvBM4hPtPDKLSq3sl9ziMfg3Rwt2QOJExEDhcLUm_0X1OmPVlCG7X0v2kn2DgZAeNHViVG2IjDPeI/w624-h640/IMG-20260108-WA0000.jpg" width="624" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;p style="text-align: center;"&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;b&gt;आचार्य संजय तिवारी&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;हिंदी कथा साहित्य का एक सितारा अस्त हो गया। ज्ञानरंजन नहीं रहे। हिंदी की नामचीन पत्रिका पहल के संपादक व विख्यात कथाकार ज्ञानरंजन का 7 जनवरी को रात 10.30 बजे जबलपुर में निधन हो गया। वे 90 वर्ष के थे।&amp;nbsp; सुबह ही उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती किया गया था। सातवें दशक के यशस्वी कथाकार ज्ञानरंजन ने 'घंटा', 'बहिर्गमन', 'अमरूद' और 'पिता' जैसी कहानियों के माध्यम से हिंदी कहानी लेखन को एक नया गद्य दिया। मध्यवर्गीय पात्रों के जीवन के तमाम विरोधाभासों को अभिव्यक्त करने का भाषिक हुनर कथाकारों को दिया। उनकी&amp;nbsp; बहुचर्चित कहानियाँ समकालीन सामाजिक जीवन की अनेकानेक विरूपताओं का खुलासा करती हैं।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;ज्ञानरंजन का जन्म 21 नवंबर 1936 को महाराष्ट्र के अकोला में हुआ था। बचपन और किशोरावस्था का अधिकांश समय अजमेर, दिल्ली एवं बनारस में बीता तथा उच्च शिक्षा प्रयागराज में संपन्न हुई। लंबे समय से उनका स्थायी निवास मध्यप्रदेश के जबलपुर में है। उनका प्रिय शहर प्रयागराज ही रहा है। जबलपुर का स्थान उसके बाद ही आता है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;ज्ञानरंजन साठोत्तरी पीढ़ी के सर्वश्रेष्ठ कहानीकारों में से एक के रूप में मान्य हैं। साठोत्तरी पीढ़ी के 'चार यार' के रूप में प्रसिद्ध मंडली के चारों सदस्य -- ज्ञानरंजन, दूधनाथ सिंह, काशीनाथ सिंह एवं रवीन्द्र कालिया में से सबसे पहले सर्वाधिक प्रसिद्धि ज्ञानरंजन को ही प्राप्त हुई; हालांकि ये चारों अपने ढंग के श्रेष्ठ कहानीकार रहे हैं। प्रकाशित संग्रह के रूप में ज्ञानरंजन के छह कहानी संग्रह प्रकाशित हुए हैं, लेकिन यह बहुचर्चित तथ्य है कि इनकी कहानियों की कुल संख्या 25 है, जो कि सपना नहीं नामक संकलन में एकत्र प्रकाशित हैं। कम लिखने के संबंध में अनेक लोगों ने अनेक तरह की बातें कही हैं।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;किसी ने अनुभव के चूक जाने की बात की, तो किसी ने अगली पारी से पहले का विराम माना, तो किसी ने पहल जैसी पत्रिका की संपादकीय विवशता; परंतु स्वयं ज्ञानरंजन की नजर में कहानी-लेखन बंद करने का प्रमुख कारण उनके अपने दृष्टिकोण से सर्वश्रेष्ठता की कसौटी ही रही है। जो भी लिखें या तो सर्वोत्तम हो या फिर हो ही नहीं। यही कारण है कि पुस्तक रूप में प्रकाशित 25 कहानियों में से किसी एक कहानी को भी किसी मान्य समीक्षक ने कमजोर या उपेक्षा के योग्य के रूप में विवेचित नहीं किया। ज्ञानरंजन साठोत्तरी पीढ़ी के लेखक हैं और अकहानी में शामिल लेखकों के मित्र भी।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;इसके बावजूद 'अकहानी' को दुःखद परिणति तक पहुँचाने वाली न्यूनताओं से उनकी कहानियाँ प्रायः मुक्त रही हैं। उनकी एक सुप्रसिद्ध कहानी 'घंटा' की समीक्षा करते हुए हिंदी कहानी के शीर्षस्थ समीक्षक सुरेन्द्र चौधरी ने लिखा था कि कथानकहीनता के सादृश्य के बावजूद 'अकहानी' के संयोजन से 'घंटा' का संयोजन अनिवार्यतः भिन्न है। घंटा में मानव-संबंधों की विडंबना प्रत्यक्ष है। मानव-संबंधों की विडंबना की यह कहानी पूरे समय की विडंबना से गुजर जाती है। चौधरी जी के इस विवेचनात्मक कथन में अनायास ही कहानी-समीक्षा का एक प्राथमिक परंतु व्यापक प्रतिमान भी झलक उठा है। ज्ञानरंजन की अधिसंख्य कहानियों में स्पष्ट दिखने वाली वैयक्तिकता रचनात्मकता के ही रास्ते जिस सफलता से सामाजिक हो जाती है, वह उनकी निजी और खास विशेषता है। 'घंटा' के अतिरिक्त संबंध, पिता, बहिर्गमन, फेंस के इधर और उधर आदि कहानियों ने भी एक तरह से अपने नाम का प्रतिमान रच डाला है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;कहानियों के अतिरिक्त अन्य विधाओं में भी ज्ञानरंजन ने जमकर नहीं लिखा है। मन की तरंगों के अनुरूप एकाध रचनाएँ ही जब तब होती रही है। संस्मरण, व्याख्यान, संपादकीय, रचनात्मक निबंध, साक्षात्कार, अखबारी टिप्पणियाँ तथा एक उपन्यास-अंश आदि के साथ एक पत्र का संकलन भी उनकी पुस्तक कबाड़खाना में संकलित है। इसके अतिरिक्त मुख्यतः व्याख्यानों/वक्तव्यों एवं साक्षात्कारों के साथ कुछ अन्य विधाओं की रचनाओं की एक पुस्तक उपस्थिति का अर्थ नाम से प्रकाशित हुई है। तात्पर्य यह कि संख्यात्मक रूप में तो ज्ञानरंजन की कुल जमा-पूँजी तीन पुस्तकों में समा गयी है, लेकिन गुणात्मक रूप में वे लंबे समय से प्रायः सभी मान्य समीक्षकों के द्वारा हिंदी के सर्वश्रेष्ठ कहानीकारों में से एक के रूप में मान्य रहे हैं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;ज्ञानरंजन की कहानियाँ भारतीय भाषाओं के अतिरिक्त अनेक विदेशी भाषाओं में भी अनूदित हो चुकी हैं। भारतीय विश्वविद्यालयों के अतिरिक्त ओसाका, लंदन, सैनफ्रांसिस्को, लेनिनग्राद, और हाइडेलबर्ग आदि के अनेक अध्ययन केंद्रों के पाठ्यक्रमों में भी इनकी कहानियाँ शामिल हैं। लंदन पेंग्विन्स की भारतीय साहित्य की एन्थ्रूलॉजी में भी इनकी कहानी सम्मिलित है। अमेरिका में विलेज वॉयस द्वारा फिल्म का निर्माण किया गया है तथा दूरदर्शन द्वारा भी इनकी कहानियों पर आधारित दो फिल्मों का निर्माण हुआ है। हिन्दी की बहुचर्चित पत्रिका पाखी का सितंबर 2012 में ज्ञानरंजन पर केंद्रित उम्दा अंक प्रकाशित हुआ।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;ज्ञानरंजन ने हिंदी की सर्वोत्कृष्ट पत्रिकाओं में से निर्विवाद रूप से एक पहल का लंबे समय तक कुशल संपादन किया है। 'पहल' के 90 अंक निकालने के बाद सितंबर-अक्टूबर 2008 में लगातार शारीरिक, मानसिक एवं आर्थिक संघर्षों से ऊब कर उन्होंने 'पहल' का संपादन बंद कर दिया था। साहित्य-जगत में तब एक बड़ा खालीपन सा महसूस किया गया था। 3 वर्ष से अधिक के अंतराल के बाद पुनः जनवरी 2013 के अंक-91 के साथ 'पहल' की दूसरी पारी भिन्न आकार एवं कुछ भिन्न रूप में पुनः आरंभ हो गयी और अप्रैल 2021 (अंक-125) तक अविराम रूप से जारी रही। अंक-125 के संपादकीय में इस अंक को इस यात्रा का आख़िरी अंक होने की घोषणा कर दी गयी।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;b&gt;सम्मान:&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान का 'साहित्य भूषण सम्मान'&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;अनिल कुमार और सुभद्रा कुमारी चौहान पुरस्कार&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग का 'शिखर सम्मान'&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;सुदीर्घ कथा साधना, सृजनशीलता और बहुआयामी कार्यनिष्ठा के लिए वर्ष 2001-2002 के राष्ट्रीय 'मैथिलीशरण गुप्त सम्मान' से सम्मानित।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;नमस्कार दोस्तों, ईस्ट न्यूज़ 24x7 में आपका स्वागत है...

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text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEghrYQWkQK9BPYCKzru_Ltwp1sihli7UZZ1KJ_tYiN3bT5JbSSqlE5BTMr8cCzqZf6QbgFeKzg74qUYdnaeoBZXl6AyAxKm-bnxg1jRyTTRB8UIIpjSFjlGc6cj7RwZgyeNSqNSGc4iZ9bY82tk7kz-vmex7R8IgAQM0tYLvzfG9F7jn17IsEXMWNpDOqs/s1280/IMG-20260105-WA0038.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="576" data-original-width="1280" height="288" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEghrYQWkQK9BPYCKzru_Ltwp1sihli7UZZ1KJ_tYiN3bT5JbSSqlE5BTMr8cCzqZf6QbgFeKzg74qUYdnaeoBZXl6AyAxKm-bnxg1jRyTTRB8UIIpjSFjlGc6cj7RwZgyeNSqNSGc4iZ9bY82tk7kz-vmex7R8IgAQM0tYLvzfG9F7jn17IsEXMWNpDOqs/w640-h288/IMG-20260105-WA0038.jpg" width="640" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;p style="text-align: center;"&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;जयराम अनुरागी, विशेष संवाददाता&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;b&gt;ग़ाज़ीपुर। &lt;/b&gt;सौहार्द बन्धुत्व मंच गाजीपुर के तत्वाधान में कैथवलिया ग्राम सभा में माता सावित्रीबाई फुले का जन्म दिवस धूमधाम से मनाया गया&amp;nbsp; कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि जिला प्रोबेशन अधिकारी संजय कुमार सोनी द्वारा दीप प्रचलित कर किया गया तत्पश्चात ज्योतिबा फुले सावित्रीबाई फुले एवं डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के चित्र पर माला अर्पित कर लोगों ने श्रद्धांजलि अर्पित की तथा गरीबो में कंबल वितरण व सहभोज कार्यक्रम भी आयोजित किया गया तत्पश्चात एक गोष्ठी का आयोजन किया गया।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;इस अवसर पर जल विरादरी से ईश्वर चंद्र ने माता सावित्रीबाई फुले के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सावित्रीबाई फुले का समाज तथा महिलाओं के लिए योगदान अग्रणी है माता सावित्रीबाई फुले से प्रेरणा लेते हुए उनके विचारों को देश के जन-जन तक पहुंचाने की आवश्यकता है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला प्रोबेशन अधिकारी संजय कुमार सोनी ने बाल विवाह को रोकने के लिए एक शपथ दिलाते हुए कहा कि सावित्रीबाई फुले बाल विवाह विधवा विवाह जैसे समाज की कुरीतियों को समाज से मिटाने का काम किया पर आज भी अभी उनका सपना अधूरा है इसलिए हमें शपथ लेना चाहिए कि बाल विवाह को रोकने के लिए सरकार के साथ मिलकर जागरूकता फैलाये तथा इसका डटकर विरोध करने के लिए संकल्पित हो।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि राजीव गांधी पंचायती राज संगठन के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव डॉक्टर जनक कुशवाहा ने कहा कि माता सावित्रीबाई फुले देश की बालिकाओं के लिए देवी थी और समाज के लिए क्रांति ज्योति बनकर समाज को आईना दिखाने का काम किया उन्होंने जीवन में संघर्ष करते हुए महिलाओं को मुख्य धारा से जोड़ने का प्रयास किया और साथ ही साथ समाज में फैले विभिन्न कुरीतियों को जड़ से मिटाने का प्रयास किया।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhRO2PrPJQZlc_P6qmg3HWIvn2k8nYzoV8kFFQ-rGxq2CvmfJ5KZH_u58yjrcvliV_FmLMclF0hPJsPtAO_u7fyjcefX-D9I0gbhnqiuHFmlMSGWh7rTNfMrDYUvJl9p4yH5cHTQuzGhYDkkUGABtfKbRCXZxSrmggecz0Dq05R71IphLl7m0oGVA1ddFI/s4096/IMG-20260105-WA0041.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="1844" data-original-width="4096" height="288" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhRO2PrPJQZlc_P6qmg3HWIvn2k8nYzoV8kFFQ-rGxq2CvmfJ5KZH_u58yjrcvliV_FmLMclF0hPJsPtAO_u7fyjcefX-D9I0gbhnqiuHFmlMSGWh7rTNfMrDYUvJl9p4yH5cHTQuzGhYDkkUGABtfKbRCXZxSrmggecz0Dq05R71IphLl7m0oGVA1ddFI/w640-h288/IMG-20260105-WA0041.jpg" width="640" /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;सौहार्द कार्यक्रम के मेंटर क़ाज़ी फरीद आलम ने कहा कि आज हम सभी को माता सावित्री बाई के विचारों को जन-जन में फैलाकर समाज को नई दिशा देने के लिए आगे आने की आवश्यकता है अंतिम पंक्ति में खड़े समाज के लड़के और लड़कियों की शिक्षा से लेकर हर तरह की जागरूकता फैला कर देश में एक नई क्रांति पैदा करने की आवश्यकता है। सौहार्द बंधुत्व म़ंच की&amp;nbsp; साथी माया साहू ने सावित्रीबाई फूले जी को याद करते हुए कहीं की आज महिलाएं हर क्षेत्र में अपना लोहा मनवा रही है जिसका संपूर्ण श्रेय माता सावित्रीबाई फुले का है&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;कार्यक्रम में आए अतिथियों तथा माता और बहनों भाइयो का आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम के आयोजक और सौहार्द बंधुत्व मंच के संचालक अच्छे लाल कुशवाहा ने कहा कि कड़ाके की ठंडक में आने के लिए सभी को आभार व्यक्त करते हुए मुझे खुशी हो रही है परंतु हमें संकल्प लेना चाहिए की माता सावित्रीबाई फुले ज्योतिबा फुले और बाबा साहेब डॉ भीम राव अंबेडकर के विचारों को जनजन तक पहुंचाने का संकल्प लें यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। इसी अवसर पर मुख्य अतिथि श्री सोनी जी (DPO) द्वारा लावारिश लाशो की अंत्येष्टि करने वाले विरेन्द्र सिंह और 54 बार ब्लड डोनेटर शीर्ष दीप शर्मा को अंगवस्त्र से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विभा सिंह ने किया और संचालन सम्यक युवा मंच के संयोजक अखिलेश मौर्य ने किया।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;नमस्कार दोस्तों, ईस्ट न्यूज़ 24x7 में आपका स्वागत है...

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text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgqRfX6kn14SYZfrhpEBmqW9ZiyPSrrK6WRUwUscAOIUXIiBTha7AvwdwIus1suT-Sv7ZaxuimRbM4AHzshaDghj0axtMBbpexQlzWzQB8xAQURbXmvm10G7Xwxo7r5EHwJIcGRFdllRF053fdeBCHfFloMm7RmwDtctLcn2yb5O_o37CDDAwHZlybq3oU/s724/IMG_20251227_222638.png" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="608" data-original-width="724" height="538" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgqRfX6kn14SYZfrhpEBmqW9ZiyPSrrK6WRUwUscAOIUXIiBTha7AvwdwIus1suT-Sv7ZaxuimRbM4AHzshaDghj0axtMBbpexQlzWzQB8xAQURbXmvm10G7Xwxo7r5EHwJIcGRFdllRF053fdeBCHfFloMm7RmwDtctLcn2yb5O_o37CDDAwHZlybq3oU/w640-h538/IMG_20251227_222638.png" width="640" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;blockquote&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;पिंकी, पंकज, पंकज चौधरी से अध्यक्ष जी तक की दिलचस्प यात्रा&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/blockquote&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;p style="text-align: center;"&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;संजय तिवारी&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;भाजपा के नवनिर्वाचित अध्यक्ष पंकज चौधरी ने किसी अंजान तीर को पकड़ कर भाजपा की पीठ में ही घोंप दिया है। सामान्य ब्राह्मण जो कभी जाति की राजनीति नहीं करता, इस समय भाजपा का ही दुश्मन दिख रहा है। जातियों के सम्मेलन और विमर्श करने वाली पार्टी के इस नए अध्यक्ष को कुछ ब्राह्मण विधायकों की एक छोटी बैठक इतनी नागवार गुजरी कि तत्काल फतवा जैसा पत्रक जारी कर गंभीर चेतावनी दे डाली। परिणाम इतना भयावह है कि तीन दिन में यह मुद्दा सरकार में ब्राह्मणों की उपेक्षा से बहुत आगे निकल कर भाजपा के विरोध का स्वरूप लेने लगा है। नए अध्यक्ष जी के चयन में किसी सलाहकार ने पार्टी हाई कमान को गजब का गच्चा दिया है। संगठन का दूर दूर तक अनुभव नहीं रखने वाले कुर्मी जाति के नाम से बली बताए जाने वाले इस नेता पर लगाया गया दांव महंगा पड़ने वाला हो सकता है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;लखनऊ में 24 दिसंबर की रात विधायकों की जुटान की वजह चाहे जो रही हो, अध्यक्ष जी ने किसी अन्य के चलाए तीर को पकड़ कर सीधे पार्टी की पीठ में ही गाड़ दिया है। याद कीजिए , 2007 में विधानसभा चुनाव बीत जाने के बाद तक किसी को अंदाजा नहीं था कि मायावती जी सरकार बना सकती हैं। परिणाम अचानक पलट गए थे। इसके पीछे ब्राह्मण ही थे। सतीश चंद्र मिश्र के वे सम्मेलन याद कर सकते हैं। इसी तरह 2011 में अखिलेश यादव की ताजपोशी को भी याद कीजिए। उस बार भी ब्राह्मण ही थे।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;अब भाजपा के इस अध्यक्ष जी को पता नहीं कुछ याद भी है या नहीं। साल था 1989, गोरखपुर में नगर निगम का चुनाव। हैंड पंप चुनाव चिह्न पर पार्षद का चुनाव लड़ने आया एक नौजवान। दोस्तों में उसे सब पिंकी कहते थे। कुछ कहते थे पंकज। आज वह पंकज चौधरी हैं। केंद्र सरकार में मंत्री हैं। उत्तर प्रदेश भाजपा के शिखर पुरुष बनाए गए हैं। पिंकी से पंकज चौधरी तक के सफर की अनेक कथाएं हैं। सब कही नहीं जा सकती। इतना याद है कि 1989 के उस चुनाव में अपने क्षेत्र के घरों में हैंड पंप लगवाने में वह बहुत तेज थे। जीत कर निगम के सदन पहुंचे तो सौभाग्य और सुयोग से डिप्टी मेयर भी बने। उनका भाषण याद आता है जब उन्होंने कहा था कि चांदी के जूते बांट कर यहां तक आया हूँ।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;खैर, यह बहुत पुरानी बात हो गई। इनका संयोग देखिए कि केवल दो साल बाद ही पंकज चौधरी के रूप में महराजगंज लोकसभा सीट से इनको भाजपा से टिकट मिला और राम लहर में लोकसभा पहुंच गए। सिक्का जम गया। उस समय रमापति राम त्रिपाठी के नेतृत्व में गोरखपुर में भाजपा अपनी जड़ें जमा रही थी। कहा जाता है कि रमापति जी ने ही पंकज को भाजपा में दाखिला दिया और लगातार उन्हें निर्देशित करते रहे। 1991 के बाद से अब तक पंकज को केवल दो लोकसभा चुनावों में पराजय मिली है। इस बीच उनकी ताकत ऐसी हुई कि उनकी माता जी महाराज गंज से जिला पंचायत अध्यक्ष बनीं। उनके भाई प्रदीप चौधरी भी जिला पंचायत अध्यक्ष हुए। उनकी एक बहन सिद्धार्थ नगर से जिला पंचायत अध्यक्ष हुईं। उनके बहनोई विधायक बने। उनके एक बहनोई नेपाल में सांसद और मंत्री बने।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;पंकज चौधरी ने कभी किसी आंदोलन का नेतृत्व किया हो या भाग लिया हो, ऐसा कोई प्रमाण उपलब्ध नहीं है। भाजपा संगठन में उनकी किसी प्रकार की भूमिका भी कभी नहीं रही है। वे सीधा प्रदेश अध्यक्ष ही बने हैं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;नमस्कार दोस्तों, ईस्ट न्यूज़ 24x7 में आपका स्वागत है...

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&lt;/div&gt;</description><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgqRfX6kn14SYZfrhpEBmqW9ZiyPSrrK6WRUwUscAOIUXIiBTha7AvwdwIus1suT-Sv7ZaxuimRbM4AHzshaDghj0axtMBbpexQlzWzQB8xAQURbXmvm10G7Xwxo7r5EHwJIcGRFdllRF053fdeBCHfFloMm7RmwDtctLcn2yb5O_o37CDDAwHZlybq3oU/s72-w640-h538-c/IMG_20251227_222638.png" width="72"/><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>शाश्वत सनातन सृष्टि की कथा</title><link>https://eastnews24x7.blogspot.com/2025/12/story-of-eternal-creation.html</link><category>Writer</category><author>noreply@blogger.com (East News 24x7)</author><pubDate>Thu, 25 Dec 2025 16:11:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-3505245523590782174.post-3377294769314497181</guid><description>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjctyDgEOAxqzIA6v-lJ7u0-Plzlyu7S5w2udjwZk5WCulRYtU1164dB9lKeMOecnLRFoRBj_Ry2CzUyIA6t-e9M3FJNau40NWTfS5nhmhODLkR6plLK2XRMpoISaoaLEoqD2I_gvrhr1PBl_AJezL84p7Ds1pqyU3uT2a0koyhxbCsScpVkU5TJYuxVY0/s1599/IMG-20251216-WA0002.jpg" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="1599" data-original-width="923" height="640" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjctyDgEOAxqzIA6v-lJ7u0-Plzlyu7S5w2udjwZk5WCulRYtU1164dB9lKeMOecnLRFoRBj_Ry2CzUyIA6t-e9M3FJNau40NWTfS5nhmhODLkR6plLK2XRMpoISaoaLEoqD2I_gvrhr1PBl_AJezL84p7Ds1pqyU3uT2a0koyhxbCsScpVkU5TJYuxVY0/w370-h640/IMG-20251216-WA0002.jpg" width="370" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;p style="text-align: center;"&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;माया कुलश्रेष्ठ&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;शाश्वत सनातन सृष्टि की एक कथा है। इस कथा में गति है। लय है। ताल है। छंद हैं। ऊर्जा है। संवाद है। प्रवाह है। प्रकृति है। संयोग है। वियोग है। विरह है। प्रेम है। भक्ति है। भावना है। संवेदना है। क्रोध है। अंगार है। शक्ति है। विरलता भी है और अविरलता भी। सार्वभौम शिवत्व की समस्त और समग्र उपस्थिति है। इसे सदाशिव ने बहुत थोड़े रूप ने नटराज होकर हमारे लिए दिया है। हम इसे कितना जी सकते हैं और जान सकते हैं यह एक जन्म में संभव नहीं। इस अनंत यात्रा की कथा के एक स्वरूप भर कोई देख, जान और समझ पाता है। सनातन के सभी ग्रन्थ संवाद और कथाएं हैं। नृत्य की ऊर्जा में इन्हें केवल कथक में कहने की यात्रा भी अनंत है। यही तो है कथक।बिना थके कहने की अनंत यात्रा।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;लोक में इसकी परिभाषाएं और प्रस्तुतियों को बहुत सामान्य स्वरूप दिया जाता है। परिभाषाएं गढ़ने वालों ने अपनी अपनी समझ से इसे अपने ढंग से बताने की केवल चेष्टा भर की है। लोगों ने कहा, कथक शब्‍द की उत्‍पत्ति कथा शब्‍द से हुई है, जिसका अर्थ एक कहानी से है । कथाकार या कहानी सुनाने वाले वह लोग होते हैं, जो प्राय: दंतकथाओं, पौराणिक कथाओं और महाकव्‍यों की उपकथाओं के विस्‍तृत आधार पर कहानियों का वर्णन करते हैं । यह एक मौखिक परंपरा के रूप में शुरू हुआ । कथन को ज्‍यादा प्रभावशाली बनाने के लिए इसमें स्‍वांग और मुद्राएं बाद में जोड़ी गईं । इस प्रकार वर्णनात्‍मक नृत्‍य के एक सरल रूप का विकास हुआ और यह हमें आज कथक के रूप में दिखाई देने वाले इस नृत्‍य के विकास के कारणों को भी उपलब्‍ध कराता है ।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;वैष्‍णव संप्रदाय के माध्यम से इसे 15वीं सदी में उत्‍तरी भारत में प्रचलित बताया&amp;nbsp; गया था। सिद्धांतत: भक्ति आंदोलन ने लयात्‍मक और संगीतात्‍मक रूपों के एक सम्‍पूर्ण नव प्रसार के लिए सहयोग दिया । राधा-कृष्‍ण की विषय वस्‍तु मीराबार्इ, सूरदास, नंददास और कृष्‍णदास के कार्य के साथ बहुत प्रसिद्ध हुई । रास लीला की उत्‍पत्ति मुख्‍तय: बृज प्रदेश (पश्चिमी उत्‍तर प्रदेश में मथुरा) में एक महत्‍वपूर्ण विकास था । यह अपने आप में संगीत, नृत्‍य और व्‍याख्‍या का संयोजन है । रासलीला में नृत्‍य, जबकि मूल स्‍वांग का एक विस्‍तार था, जो वर्तमान परंपरागत नृत्‍य के साथ आसानी से मिश्रित है ।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;मुगलों के प्रभाव के साथ इस नृत्‍य को एक नया स्वरूप मिला । मुगल अपनी क़बीलाई व्यवस्था से इतर भारत में शासक बन कर यहां की इस पवित्र विद्या को अपने मनोरंजन के लिए उपयोग करने लगे। मंदिर के आंगन से लेकर महल के दरबार तक एक परिवर्तन ने अपना स्‍थान बनाया, जिसके कारण प्रस्‍तुतिकरण में अनिवार्य परिवर्तन आए । हिन्‍दू और मुस्लिम, दोनों दरबारों में कथक उच्‍च शैली में उभरा और मनोरंजन के एक मिश्रित रूप में विकसित हुआ । मुस्लिम आधिपत्य वर्ग के अंतर्गत यहां नृत्‍य पर विशेष जोर दिया गया। यह उनके लिए केवल मनोरंजन था लेकिन हमारे शास्त्रीय गुरुओं द्वारा प्रदत्त&amp;nbsp; भाव ने इस नृत्‍य को सौंदर्यपूर्ण, प्रभावकारी तथा भावनात्‍मक (इंद्रिय) आयाम प्रदान किए ।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;19वीं सदी में अवध के अंतिम नवाब वाजिद अली शाह के संरक्षण के तहत् कथक का एक अलग युग देखने को मिलता है । यह कहा जा सकता है कि उसने लखनऊ घराने को अभिव्‍यक्ति तथा भाव पर उसके प्रभावशाली स्‍वरांकन सहित स्‍थापित किया । जयपुर घराना अपनी लयकारी या लयात्‍मक प्रवीणता के लिए जाना जाता है और बनारस घराना कथक नृत्‍य का अन्‍य प्रसिद्ध पीठे हैं जहां शास्त्रीयता को बचा कर रखा गया ।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;कथक में गतिविधि (नृत्‍य) की विशिष्‍ट तकनीक है । शरीर का भार क्षितिजिय और लम्‍बवत् धुरी के बराबर समान रूप से विभाजित होता है । पांव के सम्‍पूर्ण सम्‍पर्क को प्रथम महत्‍व दिया जाता है, जहां सिर्फ पैर की ऐड़ी या अंगुलियों का उपयोग किया जाता है । यहां क्रिया सीमित होती है । यहां कोई झुकाव नहीं होते और शरीर के निचले हिस्‍से या ऊपरी हिस्‍से के वक्रों या मोड़ों का उपयोग नहीं किया जाता । धड़ गतिविधियां कंधों की रेखा के परिवर्तन से उत्‍पन्‍न होती है, बल्कि नीचे कमर की मांस-पेशियों और ऊपरी छाती या पीठ की रीढ़ की हड्डी के परिचालन से ज्‍यादा उत्‍पन्‍न होती है ।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;मौलिक मुद्रा में संचालन की एक जटिल पद्धति के उपयोग द्वारा तकनीकी का निर्माण होता है । शुद्ध नृत्‍य (नृत्‍त) सबसे ज्‍यादा महत्‍वपूर्ण है, जहां नर्तकी द्वारा पहनी गई पाजेब के घुंघरुओं की ध्‍वनि के नियंत्रण और समतल पांव के प्रयोग से पेचीदे लयात्‍मक नमूनों के रचना की जाती है । भरतनाट्यम्, उड़ीसी और मणिपुरी की तरह कथक में भी गतिविधि के एककों के संयोजन द्वारा इसके शुद्ध नृत्‍य क्रमों का निर्माण किया जाता है । तालों को विभिन्‍न प्रकार के नामों से पुकारा जाता है, जैसे टुकड़ा, तोड़ा और परन-लयात्‍मक नमूनों की प्रकृति के सभी सूचक प्रयोग में लाए जाते हैं और वाद्यों की ताल पर नृत्‍य के साथ संगत की जाती है । नर्तकी एक क्रम ‘थाट’ के साथ आरम्‍भ करती है, जहां गले, भवों और कलाईयों की धीरे-धीरे होने वाली गतिविधियों की शुरूआत की जाती है । इसका अनुसरण अमद (प्रवेश) और सलामी (अभिवादन) के रूप में परिचित एक परंपरागत औपचारिक प्रवेश द्वारा किया जाता है ।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;इसके बाद अनेक चक्‍कर नृत्‍य खण्‍डों में नृत्‍य शैली की एक बहुत विलक्षण विशेषता है । लयात्‍मक अक्षरों का वर्णन सामान्‍य है; नर्तकी अक्‍सर एक निर्दिष्‍ट छंदबद्ध गीत का वर्णन करती है और उसके बाद नृत्‍य गतिविधि के प्रस्‍तुतीकरण द्वारा उसका अनुसरण करती है । कथक के नृत्‍त भाग में नगमा को प्रयोग में लाया जाता है । ढोल बजाने वाले (यहां ढोल एक परवावज़, मृदंगम् का एक प्रकार या तबले की जोड़ी में से कोई एक हो सकता है) और नर्तकी-दोनों एक सुरीली पंक्ति की आवृत्ति पर निरंतर संयोजनों का निर्माण करते हैं । अर्थात पहले परवावज़ या तबले पर एक पंक्ति को बजाया जाता है, उसके बाद नर्तकी अपनी नृत्‍य गतिविधि या क्रिया में उसे दोहराती है । ढोल पर 16, 10, 14 आघात (ताल) का एक सुरीला क्रम एक आधार पर प्रदान करता है, जिस पर नृत्‍य का पूरा ढांचा निर्मित होता है ।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;अभिनय में ‘गत’ कहे जाने वाले साधारण समूहों में शब्‍द का प्रयोग नहीं किया जाता और यह द्रुत लय में कोमलता पूर्वक प्रस्‍तुत किया जाता है । यह लघु वर्णनात्‍मक खण्‍ड है, जो कृष्‍ण के जीवन से ली गई एक लघु उपकथा का प्रस्‍तुतीकरण है अन्‍य समूहों जैसे ठुमरी, भजन, दादरा- सभी संगीतात्‍मक रचनाओं में मुद्राओं के साथ एक काव्‍यात्‍मक पंक्ति की संगीत के साथ संयोजन करके व्‍याख्‍या की जाती है ।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;इन खण्‍डों में भरतनाट्यम् या उड़ीसी की तरह यहां शब्‍द से शब्‍द या पक्ति से पंक्ति की व्‍याख्‍या एक ही समय में की जाती है । यहां नृत्‍त (शुद्ध नृत्‍य) और अभिनय (स्‍वांग) दोनों में एक विषय वस्‍तु पर रूपांतरण प्रस्‍तुती करण के सुधार (प्रर्दशन) के लिए बहुत ज्‍यादा अवसर हैं । व्‍याख्‍यात्‍मक और भावनात्‍मक नृत्‍य की तकनीकियां आपस में अन्‍तर्ग्रथित हैं और एक तरफ काव्‍यात्‍मक पंक्ति तथा दूसरी तरफ सुरीली व छंद बद्ध पंक्ति के प्रदर्शन की विविधता के लिए नर्तकी की कुशलता उसकी क्षमता पर निर्भर करती है । अर्थात् यह नर्तकी की सामर्थ्‍य पर निर्भर करता है कि वह किस प्रकार एक ही पंक्ति को विविध रूप से प्रस्‍तुत कर सकती है ।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;आज कथक एक श्रेष्‍ठ नृत्‍य के रूप में स्थापित है । केवल कथक ही भारत का वह शास्‍त्रीय नृत्‍य है, जिसका सम्‍बंध मूल सनातन संस्‍कृति से रहा है। कथक ही शास्‍त्रीय नृत्‍य का वह रूप है, जो हिन्‍दुस्‍तानी या उत्‍तरी भारतीय संगीत से जुड़ा । इन दोनों का विकास एक समान है और दोनों एक दूसरे को सहारा व प्रोत्‍साहन देते हैं । मंदिरों के आंगन से निकल कर महलों और दरबारों से होते हुए विश्व संस्कृति के स्थापित मंचों पर कथक की अद्वितीय उपस्थिति अद्भुत है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;नमस्कार दोस्तों, ईस्ट न्यूज़ 24x7 में आपका स्वागत है...

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text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEghinwhP8Vlua_qIaXFwSE7VnA_BuRw03obGMWWs8Pc5e4mRSiXuW0kPOTpikAnCGBQzShALGgutzoKgbLLRMk9P40gLHcAo3ncy9k00BILQqHgyZzNslb2BFw6Vt2xwuTfPnngB3zg38MstvT2e2h-SIVLWBt8ha3irfbuOEmVvQpqbJwijJsDyN09ozY/s1078/IMG-20251225-WA0009.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="1078" data-original-width="1040" height="640" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEghinwhP8Vlua_qIaXFwSE7VnA_BuRw03obGMWWs8Pc5e4mRSiXuW0kPOTpikAnCGBQzShALGgutzoKgbLLRMk9P40gLHcAo3ncy9k00BILQqHgyZzNslb2BFw6Vt2xwuTfPnngB3zg38MstvT2e2h-SIVLWBt8ha3irfbuOEmVvQpqbJwijJsDyN09ozY/w618-h640/IMG-20251225-WA0009.jpg" width="618" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;blockquote&gt;&lt;p&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;सपने में राजर्षि यदु से मिला धाम की स्थापना का आदेश&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;कालीशंकर यादव ने लिया संकल्प, भूमि की व्यवस्था पूरी, प्रतिमा निर्माण शुरू&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;/blockquote&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;p style="text-align: center;"&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;आचार्य संजय तिवारी&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;एक सपना आजकल बहुत चर्चा में है। लगभग दो महीने पहले यह स्वप्न आया कालीशंकर यादव को। सपने में आए ऋषि स्वरूप महाराज यदु ने आदेश दिया, जातीय संकटों से अलग यदुकुल की महत्ता को स्थापित करो। कालीशंकर वस्तुतः यादव समाज की राजनीति के लिए कार्य कर रहे थे, इस स्वप्न ने उनके उद्देश्य को और विराट कर दिया। गोरखपुर जिले के चौरी चौरा क्षेत्र के ब्रह्मपुर में भूमि की व्यवस्था के बाद कालीशंकर अब यदु महाराज की प्रतिमा के निर्माण में जुट गए हैं। ब्रह्मपुर में यदुधाम की स्थापना का कार्य तेजी पर है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;यह जानना जरूरी है कि महाराज यदु हैं कौन? महाभारत में यदुकुल की चर्चा से लगभग सभी परिचित हैं। महाराज यदु सृष्टि के आदि पुरुष भगवान ब्रह्मा के वंश से आते हैं। इन्हीं यदु से कौरव और पांडव वंश का विकास हुआ। अब यह भी दिलचस्प है कि कुल के मूल ब्रह्मा जी के नाम की भूमि ब्रह्मपुर में ही यदु धाम स्थापित हो रहा है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;यदु वंश के यादव चंद्रवंशी क्षत्रिय हैं, जिसकी शुरुआत राजा यदु से हुई, जो पौराणिक राजा ययाति के पुत्र थे, और यह वंश आगे चलकर कई शाखाओं जैसे वृष्णि, अंधक, हैहय आदि में बँट गया। इसी में भगवान श्रीकृष्ण, बलराम, नंद और वासुदेव जैसे महत्वपूर्ण व्यक्तित्व शामिल हैं। ऐतिहासिक रूप से देवगिरि के यादव शासकों (सेउना) ने भी इस वंश से संबंध होने का दावा किया है।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjjnXyc0Ze_DmzbLh-cbg4UkM14ybjgVXCirJ01DYkdBtfQsIEkhHsglLFHIHMFzhWW8xaArz78xGXQcBNE2n4AyaP6HzF9qBL2K_RF8HAssD-CaU1r-hVsYYCxyZhoRZ3zT1d3N02RpkVCcPEETk2pd6mtHSio_ilm0t0Jrc3_zpaX7RY08VfLC3m9Vu8/s1322/IMG-20251225-WA0010.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="1322" data-original-width="891" height="640" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjjnXyc0Ze_DmzbLh-cbg4UkM14ybjgVXCirJ01DYkdBtfQsIEkhHsglLFHIHMFzhWW8xaArz78xGXQcBNE2n4AyaP6HzF9qBL2K_RF8HAssD-CaU1r-hVsYYCxyZhoRZ3zT1d3N02RpkVCcPEETk2pd6mtHSio_ilm0t0Jrc3_zpaX7RY08VfLC3m9Vu8/w432-h640/IMG-20251225-WA0010.jpg" width="432" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;यदु वंश की प्रारंभिक वंशावली में पता चलता है कि ब्रह्मा के एक पुत्र चंद्रमा हैं। इनसे बुध , इनसे पुरुरवा , इनसे आयु , इनसे नहुष और नहुष से ययाति का जन्म होता है। ययाति के दो विवाह हुए। एक देवयानी से यदु और तुर्वसु, और दूसरी शर्मिष्ठा से द्रुहु, पुरु, अनु का जन्म हुआ। यदु (ययाति के ज्येष्ठ पुत्र) ने अपने वंश को अलग कर यदुवंश की स्थापना की। यदु के चार या पाँच पुत्र थे, जिनसे आगे वंश चला। उनमें एक सहस्त्रजित या हैहय हुए। इनके वंशज हैहयवंशी कहलाए, जिनमें शक्तिशाली कार्तवीर्यार्जुन हुए।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;क्रोष्टु या क्रोष्टा के वंशज आगे चलकर सात्वत के वंशज कहलाए। सात्वत के कई पुत्र थे जिनमें भजमान, भजि, दिव्य, वृष्णि, देवावृक्ष, महाभोज, और अंधक हुए। वृष्णि के वंश में शूरसेन, वासुदेव (श्रीकृष्ण के पिता) और नन्द (श्रीकृष्ण के पालक पिता) हुए। अंधक वंश में श्रीकृष्ण की माता देवकी का जन्म हुआ। वृष्णि वंश में श्रीकृष्ण, बलराम, वसुदेव, नंद, सुभद्रा आदि हुए, जो द्वारका और मथुरा के प्रमुख केंद्र थे।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;हैहय वंश में कार्तवीर्यार्जुन (सहस्त्रभुजा वाला अर्जुन) इसी वंश में हुए, जिन्होंने कई राज्यों पर शासन किया। मध्यकाल में देवगिरि पर शासन करने वाले यादव शासक भी यदु वंश से माने जाते हैं।&amp;nbsp; यदु वंश एक विशाल और प्राचीन वंश है, जो कई शाखाओं में बँट गया, जिसमें श्रीकृष्ण का वृष्णि वंश और हैहय वंश प्रमुख हैं, और इन शाखाओं ने भारतीय इतिहास और संस्कृति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;अब गोरखपुर में ब्रह्मा की पावन धरती पर विश्व की पहली भव्य महाराज यदु की मूर्ति और दिव्य श्री यदुधाम की स्थापना होने जा रही है। यह ऐतिहासिक कार्य श्रीकृष्ण धर्म ट्रस्ट के तत्वाधान में होगा। आगामी 15 जनवरी को इस भव्य स्थापना की विधिवत आधिकारिक घोषणा श्रीकृष्ण धर्म ट्रस्ट के अध्यक्ष कालीशंकर यदुवंशी एवं ट्रस्ट कमेटी के द्वारा की जाएगी।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhIax0YAIs4E44qJvv_jsf_dPq9NIIHfTA0gwchpqLQ3z_4WvGoud4DZ2rxwEuKfkUjy25Yz6ww81o7Tf_oSdYsLSMdFDm3cUO2Fd8Q09M3z8XncolJluhWGACYTWRSDDiAmfoqnyduUzTfeTAxKqc6PZ4KOWiU9Z7OSQG4nP6yYdrjm7Rw_ZrS8Z7bWYE/s1374/IMG-20251225-WA0011.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="1374" data-original-width="999" height="640" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhIax0YAIs4E44qJvv_jsf_dPq9NIIHfTA0gwchpqLQ3z_4WvGoud4DZ2rxwEuKfkUjy25Yz6ww81o7Tf_oSdYsLSMdFDm3cUO2Fd8Q09M3z8XncolJluhWGACYTWRSDDiAmfoqnyduUzTfeTAxKqc6PZ4KOWiU9Z7OSQG4nP6yYdrjm7Rw_ZrS8Z7bWYE/w466-h640/IMG-20251225-WA0011.jpg" width="466" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;इस संकल्प के सिद्धकर्ता कालीशंकर का कहना है कि श्री यदुधाम आने वाली पीढ़ियों को अपने गौरवशाली महाराज यदु का वंशज होने की याद दिलाएगा, उन्हें स्वाभिमान और राष्ट्रसेवा की प्रेरणा देगा। श्री यदुधाम केवल एक मंदिर नहीं होगा, यह महाराज यदु के वंशजो के मन में जलती हुई उस लौ का प्रतीक होगा जो कहती है&amp;nbsp; “हम अपने इतिहास को भूलेंगे नहीं, हम अपने आदर्शों को झुकने नहीं देंगे।”&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;महाराज यदु की भव्य मूर्ति हर यदुवंशी को रोज़ याद दिलाएगी कि हम वीरता, त्याग और धर्म की उस परंपरा के वंशज हैं, जिसने स्वयं भगवान श्रीकृष्ण और भगवान सहस्रबाहु अर्जुन को जन्म देने वाला यदुकुल दुनिया को दिया।अब समय आ गया है कि हम सब मिलकर अपने इस गौरव को एक स्थायी रूप दें ताकि हमारे बच्चे, हमारे नौजवान जब श्री यदुधाम में कदम रखें, तो उनमें नई ऊर्जा, नया आत्मविश्वास और समाज के लिए कुछ करने की अटूट प्रेरणा जागे। यह महायज्ञ किसी एक व्यक्ति या संस्था का नहीं, हर उस यदुवंशी का है जो अपने कुलदेव और अपने वंश पर गर्व करता है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;श्रीकृष्ण धर्म ट्रस्ट सिर्फ माध्यम है असली शक्ति आप सबकी भावना, आपकी आस्था और आपका सहयोग है आगामी 15 जनवरी को श्री यदुधाम और महाराज यदु की इस भव्य स्थापना की विधिवत, आधिकारिक घोषणा की जाएगी। नए भारत में सनातन इतिहास की पुनर्स्थापना का यह नया अध्याय है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;नमस्कार दोस्तों, ईस्ट न्यूज़ 24x7 में आपका स्वागत है...

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text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEivDKOzsvLQOLaSM3GDvjKHQGjr9DB0mRPg_qYL4Up46PGtzxh5whAFCTK9Li9btbd0ceTgQhOUJltzBmInKPUtr9LT5hyiy7F3j6vm7_czL7lnT3m41Y3nE6esqV99QeYnfPWdqoM9wZZ9EQXfgBlri5tTU6gcDEdc4eksoknm13OErVubhNMH3YdqKT4/s1600/IMG-20251214-WA0025.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="1600" data-original-width="900" height="640" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEivDKOzsvLQOLaSM3GDvjKHQGjr9DB0mRPg_qYL4Up46PGtzxh5whAFCTK9Li9btbd0ceTgQhOUJltzBmInKPUtr9LT5hyiy7F3j6vm7_czL7lnT3m41Y3nE6esqV99QeYnfPWdqoM9wZZ9EQXfgBlri5tTU6gcDEdc4eksoknm13OErVubhNMH3YdqKT4/w360-h640/IMG-20251214-WA0025.jpg" width="360" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;ul style="text-align: left;"&gt;&lt;li&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;विश्व भोजपुरी सम्मेलन के प्रांतीय अधिवेशन में पास हुए तीन प्रस्ताव&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;संविधान की आठवीं अनुसूची में भोजपुरी को शामिल करे केंद्र सरकार&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;विशेष संवाददाता&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;b&gt;देवरिया। &lt;/b&gt;भोजपुरी संस्कृति पर्व 2025, विश्वभोजपुरी सम्मेलन की उत्तर प्रदेश इकाई के प्रांतीय अधिवेशन में केंद्र सरकार से मांग की गई कि भोजपुरी को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया जाय। कल से देवरिया में शुरू हुए अधिवेशन के विभिन्न सत्रों में किए गए व्यापक विमर्श के तीन बड़े प्रस्ताव पारित किए गए।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;अधिवेशन में सर्व सम्मति से यह प्रस्ताव पारित किया गया कि भारत गणराज्य के संविधान की आठवीं अनुसूची में भोजपुरी को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाना आवश्यक है। वर्तमान समय में भोजपुरी भाषा का व्याकरण, साहित्य, इसकी संस्कृति ,इस पर आधारित बाजार और इसकी भाषिक संप्रेषणीयता भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल अनेक भाषाओं से बहुत व्यापक है। भोजपुरी भाषी आबादी अब लगभग 20 करोड़ है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;अधिवेशन में विमर्श के निष्कर्ष स्वरूप यह प्रस्ताव पारित किया गया कि भारत की इतनी बड़ी भाषा को सुव्यवस्थित और संरक्षित करने के लिए उत्तर प्रदेश में भोजपुरी अकादमी की स्थापना अनिवार्य है। बिहार, मध्यप्रदेश और दिल्ली में राज्यों की भोजपुरी अकादमी पहले से ही स्थापित होकर कार्य कर रही हैं। इसके लिए भोजपुरी भाषी क्षेत्र का एक बड़ा क्षेत्र उत्तर प्रदेश में अकादमी की स्थापना होने से ही इस भाषा का विकास हो सकेगा।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;भोजपुरी साहित्य, संस्कृति और&amp;nbsp; इसके संप्रेषणीय स्वरूप की मधुरता और व्यापकता को देखते हुए इस के व्यावसायिक प्रयोग के लिए एक सशक्त नियामक आयोग अथवा सेंसर बोर्ड बनाया जाना चाहिए जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके इस भाषा में अश्लीलता और प्रदूषण के तत्व डाल कर केवल व्यवसाय करने के तंत्र को नियंत्रण में रखा जा सके। भोजपुरी संस्कृति और भाषा को अश्लील तत्व से सुरक्षा के लिए यह आवश्यक है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;विश्व भोजपुरी सम्मेलन के अधिवेशन की अध्यक्षता राष्ट्रीय अध्यक्ष अजीत दुबे ने की। देवरिया में इस अधिवेशन के संयोजक और उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष सिद्धार्थ मणि त्रिपाठी ने अधिवेशन में तीनों प्रस्ताव रखे जिन पर चर्चा के बाद इन्हें सर्वसम्मति से पारित किया गया।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg10Jm9asgeoEQF6pBtRPVwuaWg6PRCQtDI7hdumS4OOp2-C1FVgR9f2m-YoQBgmb3KL_3tGkvopHw1MLRmdTU9cc-qt4AHkWhg55ZBKXNQzpAirgIOfZbRI6gmGje51eO003WipKIqMAZCCgHwVGpyS7OTOA5v3aRGLXSVMeZSeEjvXMq9d0DFZBnmFpQ/s1065/IMG-20251214-WA0014.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="808" data-original-width="1065" height="486" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg10Jm9asgeoEQF6pBtRPVwuaWg6PRCQtDI7hdumS4OOp2-C1FVgR9f2m-YoQBgmb3KL_3tGkvopHw1MLRmdTU9cc-qt4AHkWhg55ZBKXNQzpAirgIOfZbRI6gmGje51eO003WipKIqMAZCCgHwVGpyS7OTOA5v3aRGLXSVMeZSeEjvXMq9d0DFZBnmFpQ/w640-h486/IMG-20251214-WA0014.jpg" width="640" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;इससे पूर्व इस अधिवेशन की औपचारिक शुरुआत प्रख्यात गायक, अभिनेता और दिल्ली के सांसद मनोज तिवारी के हाथों दीप प्रज्वलन से हुआ। इस भव्य समारोह को संबोधित करते हुए मनोज तिवारी ने भोजपुरी को संस्कृति का पर्याय बताया और जनता का आवाहन किया कि इस संस्कृति को विकृत करने वालों को जनता तिरस्कृत करे। भोजपुरी भाषा के हृदय स्थल देवरिया की धरती पर विश्व भोजपुरी सम्मेलन के संस्कृति पर्व 2025 का भव्य शुभारंभ हो गया।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;राजकीय इंटर कॉलेज देवरिया के विशाल प्रांगण में हजारों भोजपुरी प्रेमियों के बीच इस दो दिवसीय आयोजन की शुरुआत प्रख्यात भोजपुरी अभिनेता, गायक और दिल्ली के सांसद मनोज तिवारी मृदुल, विश्व भोजपुरी सम्मेलन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजीत दुबे, इसके संयोजक और प्रदेश अध्यक्ष सिद्धार्थ मणि त्रिपाठी और अनेक प्रख्यात मनीषियों द्वारा दीप प्रज्वलन से हुई। उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि दिल्ली के सांसद मनोज तिवारी ने अपने गंभीर, सारगर्भित और विविध आयामी उद्बोधन से सभी को मंत्र मुग्ध कर दिया।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;मनोज तिवारी ने अपने उदघाटन उद्बोधन में कहा कि भारत के यशस्वी प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी जी और गृह मंत्री अमित शाह जी को भोजपुरी भाषा और संस्कृति से बहुत गहरा लगाव है। इसलिए भोजपुरी को बहुत जल्दी संविधान की आठवीं अनुसूची में स्थान मिल सकता है। श्री तिवारी ने कहा कि प्रधान मंत्री जी स्वयं भोजपुरी के हृदय स्थल काशी के प्रतिनिधि हैं। वह अनेक बार भोजपुरी में ही जनता को संबोधित कर चुके हैं। केंद्र सरकार के शीर्ष नेतृत्व को यह लोक भाषा बहुत पसंद है। इसीलिए भाजपा भोजपुरी संस्कृति के प्रतिनिधियों को बहुत महत्व देती है।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiqmXHfCqQS9yE5HQNswOJ8uO6WhYACFZ_XHtA9jirkxV4Vct3WKBTsqyEIvqEr_6WW5kvVVNaQrQRDGiyTRIe7VwJqil4OvDLH6t6IQmlD6OXMtKwgVUqlZEJozmr8rrZI5Y49V3U7K2KVjsVUf8llKZoEDGbpy290H0ynxkwIFo38a8uK0RrVnCjfwkQ/s1280/IMG-20251214-WA0022.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="576" data-original-width="1280" height="288" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiqmXHfCqQS9yE5HQNswOJ8uO6WhYACFZ_XHtA9jirkxV4Vct3WKBTsqyEIvqEr_6WW5kvVVNaQrQRDGiyTRIe7VwJqil4OvDLH6t6IQmlD6OXMtKwgVUqlZEJozmr8rrZI5Y49V3U7K2KVjsVUf8llKZoEDGbpy290H0ynxkwIFo38a8uK0RrVnCjfwkQ/w640-h288/IMG-20251214-WA0022.jpg" width="640" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;अभी हाल ही संपन्न हुए बिहार के चुनाव इस बात के साक्षात प्रमाण हैं। भोजपुरी की महत्ता के कारण ही नेतृत्व ने मुझे भी अत्यधिक सम्मान और महत्व देकर भोजपुरी को ही आगे बढ़ाया है। आज सिद्धार्थ जी के संयोजन में देवरिया का यह भोजपुरी संस्कृति पर्व भारतीय लोक भाषाओं के उन्नयन के इतिहास में मील का पत्थर साबित होगा।श्री तिवारी ने अपने संबोधन में पंडित विद्यानिवास मिश्र और डॉ अरुणेश नीरन को कई बार याद किया।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;समारोह को संबोधित करते हुए विश्व भोजपुरी सम्मेलन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजीत दुबे ने कहा कि देवरिया में आज से तीस वर्ष पूर्व जो बीज पंडित विद्यानिवास मिश्र एवं डॉ अरुणेश नीरन जी ने सेतु की सन्निधि में रोपित किया था, आज वह विराट स्वरूप में दिख रहा है। इस विशाल अधिवेशन को यह स्वरूप देने वाले संयोजक सिद्धार्थ मणि त्रिपाठी कोटि कोटि बधाई के पात्र हैं। भोजपुरी को आठवीं अनुसूची में स्थापित करने के लिए चलाए जा रहे इस आंदोलन में मनोज तिवारी की आज प्रकट हुई भावना ने यह विश्वास दिलाया है कि 30 करोड़ लोगों द्वारा बोली जाने वाली इस लोक भाषा को अब उसका वास्तविक स्थान मिलेगा।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;संस्कृति पर्व के संस्थापक संपादक आचार्य संजय तिवारी ने कहा कि भोजपुरी केवल एक लोकभाषा ही नहीं है बल्कि भारतीय ज्ञान साहित्य की लोक संप्रेषण शक्ति है। इसकी लोक चेतना से भारत की स्वाधीनता का पूरा इतिहास भरा पड़ा है। भोजपुरी वस्तुतः वेद की लोकवाणी है। यहां हमें यह ध्यान देना चाहिए कि अपनी इस मातृभाषा का सम्मान स्वयं से करना शुरू करें। इसको सबसे सटीक रूप में मराठा संस्कृति से सीखा जा सकता है। प्रत्येक मराठी आपस में केवल मराठी में ही अपनी बात करते हैं, चाहे वे जहां भी हों। भोजपुरी के साथ ऐसा नहीं है। दो भोजपुरी भाषी लोग जहां भी मिलते हैं, वही के अनुसार भाषा का इस्तेमाल करते हैं। होना यह चाहिए कि यदि हम भोजपुरी भाषी चाहे जहां हों, केवल अपनी मातृभाषा में ही संवाद करें। अपने संबोधन में देवरिया के नगर विधायक शलभ मणि त्रिपाठी ने भोजपुरी की महत्ता पर प्रकाश डाला।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEisOZOoT3LMf1obYgya_Ta0ozKNsIkomIqTva0Os3pJcjOuj7wpZqwudVw67fkCndOlL0UXCrMMjUsqEGIJiBEplF0_jrZXC57D5F_HVIGzqQOBYbPNJEkI1ugv1CKVpc2My28VQqFmQ1njyoDeVwqFUFExceW6me-D2tet_PTGRuVN43_fWLfAj5V3B2o/s1280/IMG-20251214-WA0021.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="576" data-original-width="1280" height="288" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEisOZOoT3LMf1obYgya_Ta0ozKNsIkomIqTva0Os3pJcjOuj7wpZqwudVw67fkCndOlL0UXCrMMjUsqEGIJiBEplF0_jrZXC57D5F_HVIGzqQOBYbPNJEkI1ugv1CKVpc2My28VQqFmQ1njyoDeVwqFUFExceW6me-D2tet_PTGRuVN43_fWLfAj5V3B2o/w640-h288/IMG-20251214-WA0021.jpg" width="640" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;भोजपुरी संस्कृति पर्व, देवरिया के संयोजक सिद्धार्थ मणि त्रिपाठी ने अपने आधार एवं स्वागत वक्तव्य में कहा कि भारतीय सनातन संस्कृति की देवारण्य की पावन भूमि पर आप सभी की गरिमामय उपस्थिति से अभिभूत हूं। आज से 30 वर्ष पूर्व इसी भूमि पर इसी प्रांगण में विश्व भोजपुरी सम्मेलन की नींव रखी गई थी। संस्था के शिल्पकार अरुणेश नीरन को समर्पित इस अधिवेशन का आयोजन क़रीब तीस साल बाद देवरिया के राजकीय इंटर कॉलेज के मैदान पर किया जा रहा है । तीन दशक बीत गए। विश्व भोजपुरी सम्मेलन का यह भाषा आंदोलन अपनी गति के साथ चल रहा है और अब एक ऐसे मुकाम की ओर है जिसमें भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची की भाषाओं में इसे शामिल होने में कुछ दूरी शेष रह गई है। देवरिया में इस आयोजन का गंभीर अभिप्राय है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;आप सभी को यह विदित है कि विगत वर्षों में भोजपुरी भाषा के राजनीतिक भावनात्मक उपयोग की कोशिश अनेक राष्ट्रीय नेताओं से लेकर राष्ट्रीय राजनीति के पुरोधाओं ने की है। हमारे वर्तमान प्रधानमंत्री युगपुरुष नरेंद्र मोदी जी भोजपुरी के गढ़ से ही चुन कर आते हैं। काशी से लेकर बिहार तक माननीय प्रधानमंत्री जी के अनेक भाषण भोजपुरी से ही शुरू होते रहे हैं। इससे पहले भी कई राजपुरूषों ने यह प्रयोग किया। भोजपुरी भाषी भोली जनता का भावनात्मक जुड़ाव सभी को मिला लेकिन अभी तक इतनी मीठी भाषा को भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची में स्थान नहीं मिल सका। यह कहने में मुझे कोई संकोच नहीं है कि भारत के वर्तमान प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी जी और गृहमंत्री अमित शाह जी&amp;nbsp; को भोजपुरी बहुत प्रिय है। इसके बारे में आदरणीय मनोज तिवारी जी मुझे ज्यादा बेहतर अनुभव रखते हैं।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjwrfTjq8i2uGo-77EKKIhWJCtRXSF5FgJ_eFKCtZ5RvtSYrKFFz63GlCgMM-wBSNKvHjnX49qFr1Estfm7x1UNvDUztdnuKKn0bdSPcgbarI_EKE7-qYi54FBqCDmXprp3tGdp0UHNSu6AQfR2O4So7K4xg_SiUhzGRN4gXtDJxXCyL9ofkpTU56xdx9Q/s954/IMG-20251214-WA0018.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="954" data-original-width="928" height="640" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjwrfTjq8i2uGo-77EKKIhWJCtRXSF5FgJ_eFKCtZ5RvtSYrKFFz63GlCgMM-wBSNKvHjnX49qFr1Estfm7x1UNvDUztdnuKKn0bdSPcgbarI_EKE7-qYi54FBqCDmXprp3tGdp0UHNSu6AQfR2O4So7K4xg_SiUhzGRN4gXtDJxXCyL9ofkpTU56xdx9Q/w622-h640/IMG-20251214-WA0018.jpg" width="622" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;जब हम भोजपुरी की बात कर रहे हैं और आज विश्व भोजपुरी सम्मेलन की स्थापना की भूमि पर 30 वर्षों के बाद यह जुटान हुई है तो बहुत सी बातें कहने को जबान तक आती है। भोजपुरी कोई सामान्य बोली या संकेतांक भर नहीं है। देव भाषा संस्कृत की यह लोकभाषा है । राजकीय इंटर कॉलेज देवरिया के इस प्रांगण में इस आयोजन में देश और दुनिया में भोजपुरी साहित्य, संस्कृति और भाषा पर गंभीर कार्य कर रहे प्रख्यात विद्वान, संस्कृति कर्मी, लेखन, साहित्यकार, रंग कर्मी, गायक, कवि और संस्कृति के अध्येता एक साथ एक मंच पर सम्मिलित होकर भोजपुरी की बात किए। दो दिनों का यह एक ऐसा वैश्विक आयोजन रहा जो भोजपुरी को भाषा के रूप में उसका स्थान अवश्य सुनिश्चित कराएगा।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;उद्घाटन समारोह में विश्व भोजपुरी सम्मेलन के दिल्ली प्रांत के अध्यक्ष विनय मानी त्रिपाठी ने लोक भाषा के महत्व पर गंभीर चर्च की। उन्होंने इस आयोजन की महत्ता को रेखांकित किया। समारोह में प्रख्यात गायिका कल्पना पटवारी, भरत शर्मा व्यास, मदन राय, शिल्पी राज और आलोक कुमार एवं अनेक भोजपुरी साधक भी उपस्थित थे। प्रख्यात शिक्षाविद एवं संस्कृति पर्व की कार्यकारी संपादक डॉ अर्चना तिवारी भी उपस्थित थीं। इस अधिवेशन में विश्व भोजपुरी सम्मेलन के संस्थापक सदस्य जगदीश उपाध्याय, झारखंड से डॉ अजय ओझा, वाराणसी से अपूर्व नारायण तिवारी सहित बड़ी संख्या में सदस्य और पदाधिकारी भी उपस्थित थे।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;नमस्कार दोस्तों, ईस्ट न्यूज़ 24x7 में आपका स्वागत है...

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href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjw8Ry_v6JOyj4Aj0qDFjx7q8fr0tffzcLRTga-8_-xBz-tywvAIHRERk0jkPhBIzHTI_0lwBt2_72HgjtpYgmHgZiVO9KyqwqMMslYD0MfWwc10XTEu3GLWC_PgP96LKO7prpsOB0KRbyI1uc9gQrC5s93kFKeF0kxkL9b6mKr7mfvNzJG5YSlyPjlNxY/s1600/IMG-20251213-WA0018.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em; text-align: center;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="984" data-original-width="1600" height="394" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjw8Ry_v6JOyj4Aj0qDFjx7q8fr0tffzcLRTga-8_-xBz-tywvAIHRERk0jkPhBIzHTI_0lwBt2_72HgjtpYgmHgZiVO9KyqwqMMslYD0MfWwc10XTEu3GLWC_PgP96LKO7prpsOB0KRbyI1uc9gQrC5s93kFKeF0kxkL9b6mKr7mfvNzJG5YSlyPjlNxY/w640-h394/IMG-20251213-WA0018.jpg" width="640" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;ul style="text-align: left;"&gt;&lt;li&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;b&gt;भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपरा की संवाहक है भोजपुरी : मनोज तिवारी&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;b&gt;प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह बहुत अच्छी लगती है भोजपुरी&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;b&gt;भोजपुरी की प्राचीनता और वैश्विकता अद्भुत और प्रामाणिक : अजीत दुबे&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;b&gt;भोजपुरी के संरक्षण के लिए केंद्र और राज्य गंभीर हों : सिद्धार्थ मणि त्रिपाठी&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;b&gt;लोक की विरासत और संवेदना की संवाहक है भोजपुरी: आचार्य संजय&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;विशेष संवाददाता&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;b&gt;देवरिया। &lt;/b&gt;भोजपुरी भाषा के हृदय स्थल देवरिया की धरती पर विश्व भोजपुरी सम्मेलन के संस्कृति पर्व 2025 का भव्य शुभारंभ हो गया। राजकीय इंटर कॉलेज देवरिया के विशाल प्रांगण में हजारों भोजपुरी प्रेमियों के बीच इस दो दिवसीय आयोजन की शुरुआत प्रख्यात भोजपुरी अभिनेता, गायक और दिल्ली के सांसद मनोज तिवारी मृदुल, विश्व भोजपुरी सम्मेलन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजीत दुबे, इसके संयोजक और प्रदेश अध्यक्ष सिद्धार्थ मणि त्रिपाठी और अनेक प्रख्यात मनीषियों द्वारा दीप प्रज्वलन से हुई। उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि दिल्ली के सांसद मनोज तिवारी ने अपने गंभीर, सारगर्भित और विविध आयामी उद्बोधन से सभी को मंत्र मुग्ध कर दिया।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;मनोज तिवारी ने अपने उदघाटन उद्बोधन में कहा कि भारत के यशस्वी प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी जी और गृह मंत्री अमित शाह जी को भोजपुरी भाषा और संस्कृति से बहुत गहरा लगाव है। इसलिए भोजपुरी को बहुत जल्दी संविधान की आठवीं अनुसूची में स्थान मिल सकता है। श्री तिवारी ने कहा कि प्रधान मंत्री जी स्वयं भोजपुरी के हृदय स्थल काशी के प्रतिनिधि हैं। वह अनेक बार भोजपुरी में ही जनता को संबोधित कर चुके हैं। केंद्र सरकार के शीर्ष नेतृत्व को यह लोक भाषा बहुत पसंद है। इसीलिए भाजपा भोजपुरी संस्कृति के प्रतिनिधियों को बहुत महत्व देती है। अभी हाल ही संपन्न हुए बिहार के चुनाव इस बात के साक्षात प्रमाण हैं। भोजपुरी की महत्ता के कारण ही नेतृत्व ने मुझे भी अत्यधिक सम्मान और महत्व देकर भोजपुरी को ही आगे बढ़ाया है। आज सिद्धार्थ जी के संयोजन में देवरिया का यह भोजपुरी संस्कृति पर्व भारतीय लोक भाषाओं के उन्नयन के इतिहास में मील का पत्थर साबित होगा।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;श्री तिवारी ने अपने संबोधन में पंडित विद्यानिवास मिश्र और डॉ अरुणेश नीरन&amp;nbsp;को कई बार याद किया।&amp;nbsp;समारोह को संबोधित करते हुए विश्व भोजपुरी सम्मेलन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजीत दुबे ने कहा कि देवरिया में आज से तीस वर्ष पूर्व जो बीज पंडित विद्यानिवास मिश्र एवं डॉ अरुणेश नीरन जी ने सेतु की सन्निधि में रोपित किया था, आज वह विराट स्वरूप में दिख रहा है। इस विशाल अधिवेशन को यह स्वरूप देने वाले संयोजक सिद्धार्थ मणि त्रिपाठी कोटि कोटि बधाई के पात्र हैं। भोजपुरी को आठवीं अनुसूची में स्थापित करने के लिए चलाए जा रहे इस आंदोलन में मनोज तिवारी की आज प्रकट हुई भावना ने यह विश्वास दिलाया है कि 30 करोड़ लोगों द्वारा बोली जाने वाली इस लोक भाषा को अब उसका वास्तविक स्थान मिलेगा।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;संस्कृति पर्व के संस्थापक संपादक आचार्य संजय तिवारी ने कहा कि भोजपुरी केवल एक लोकभाषा ही नहीं है बल्कि भारतीय ज्ञान साहित्य की लोक संप्रेषण शक्ति है। इसकी लोक चेतना से भारत की स्वाधीनता का पूरा इतिहास भरा पड़ा है। भोजपुरी वस्तुतः वेद की लोकवाणी है। यहां हमें यह ध्यान देना चाहिए कि अपनी इस मातृभाषा का सम्मान स्वयं से करना शुरू करें। इसको सबसे सटीक रूप में मराठा संस्कृति से सीखा जा सकता है। प्रत्येक मराठी आपस में केवल मराठी में ही अपनी बात करते हैं, चाहे वे जहां भी हों। भोजपुरी के साथ ऐसा नहीं है। दो भोजपुरी भाषी लोग जहां भी मिलते हैं, वही के अनुसार भाषा का इस्तेमाल करते हैं। होना यह चाहिए कि यदि हम भोजपुरी भाषी चाहे जहां हों, केवल अपनी मातृभाषा में ही संवाद करें। अपने संबोधन में देवरिया के नगर विधायक शलभ मणि त्रिपाठी ने भोजपुरी की महत्ता पर प्रकाश डाला।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;भोजपुरी संस्कृति पर्व, देवरिया के संयोजक सिद्धार्थ मणि त्रिपाठी ने अपने आधार एवं स्वागत वक्तव्य में कहा कि भारतीय सनातन संस्कृति की देवारण्य की पावन भूमि पर आप सभी की गरिमामय उपस्थिति से अभिभूत हूं। आज से 30 वर्ष पूर्व इसी भूमि पर इसी प्रांगण में विश्व भोजपुरी सम्मेलन की नींव रखी गई थी। संस्था के शिल्पकार अरुणेश नीरन को समर्पित इस अधिवेशन का आयोजन क़रीब तीस साल बाद देवरिया के राजकीय इंटर कॉलेज के मैदान पर किया जा रहा है । तीन दशक बीत गए। विश्व भोजपुरी सम्मेलन का यह भाषा आंदोलन अपनी गति के साथ चल रहा है और अब एक ऐसे मुकाम की ओर है जिसमें भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची की भाषाओं में इसे शामिल होने में कुछ दूरी शेष रह गई है।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;देवरिया में इस आयोजन का गंभीर अभिप्राय है। आप सभी को यह विदित है कि विगत वर्षों में भोजपुरी भाषा के राजनीतिक भावनात्मक उपयोग की कोशिश अनेक राष्ट्रीय नेताओं से लेकर राष्ट्रीय राजनीति के पुरोधाओं ने की है। हमारे वर्तमान प्रधानमंत्री युगपुरुष नरेंद्र मोदी जी भोजपुरी के गढ़ से ही चुन कर आते हैं। काशी से लेकर बिहार तक माननीय प्रधानमंत्री जी के अनेक भाषण भोजपुरी से ही शुरू होते रहे हैं। इससे पहले भी कई राजपुरूषों ने यह प्रयोग किया। भोजपुरी भाषी भोली जनता का भावनात्मक जुड़ाव सभी को मिला लेकिन अभी तक इतनी मीठी भाषा को भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची में स्थान नहीं मिल सका। यह कहने में मुझे कोई संकोच नहीं है कि भारत के वर्तमान प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी जी और गृहमंत्री अमित शाह जी&amp;nbsp; को भोजपुरी बहुत प्रिय है। इसके बारे में आदरणीय मनोज तिवारी जी मुझे ज्यादा बेहतर अनुभव रखते हैं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;जब हम भोजपुरी की बात कर रहे हैं और आज विश्व भोजपुरी सम्मेलन की स्थापना की भूमि पर 30 वर्षों के बाद यह जुटान हुई है तो बहुत सी बातें कहने को जबान तक आती है। भोजपुरी कोई सामान्य बोली या संकेतांक भर नहीं है। देव भाषा संस्कृत की यह लोकभाषा है । वैश्विक परिदृश्य में संवेदना और लोक से जोड़ेगा आज का यह विश्व भोजपुरी सम्मेलन का अधिवेशन। विराट साहित्य पुरुष पंडित विद्यानिवास मिश्र के संरक्षण में स्थापित विश्व भोजपुरी सम्मेलन की स्थापना भूमि देवरिया में विश्व भोजपुरी सम्मेलन, उत्तर प्रदेश के तत्वावधान में संस्कृति पर्व के रूप में विश्व भोजपुरी सम्मेलन के अधिवेशन का यह उद्घाटन सत्र है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;राजकीय इंटर कॉलेज देवरिया के इस प्रांगण में इस आयोजन में देश और दुनिया में भोजपुरी साहित्य, संस्कृति और भाषा पर गंभीर कार्य कर रहे प्रख्यात विद्वान, संस्कृति कर्मी, लेखन, साहित्यकार, रंग कर्मी, गायक, कवि और संस्कृति के अध्येता एक साथ एक मंच पर सम्मिलित होकर भोजपुरी की बात करने जा रहे हैं। दो दिनों का यह एक ऐसा वैश्विक आयोजन है जो भोजपुरी को भाषा के रूप में उसका स्थान अवश्य सुनिश्चित कराएगा। देवरिया ही भोजपुरी भाषा की केंद्रीय भूमि है, इसलिए यह आयोजन बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;उद्घाटन समारोह में विश्व भोजपुरी सम्मेलन के दिल्ली प्रांत के अध्यक्ष विनय मानी त्रिपाठी ने लोक भाषा के महत्व पर गंभीर चर्च की। उन्होंने इस आयोजन की महत्ता को रेखांकित किया। समारोह में प्रख्यात गायिका कल्पना पटवारी, भरत शर्मा व्यास, मदन राय, शिल्पी राज और आलोक कुमार एवं अनेक भोजपुरी साधक भी उपस्थित थे। प्रख्यात शिक्षाविद एवं संस्कृति पर्व की कार्यकारी संपादक डॉ अर्चना तिवारी भी उपस्थित थीं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;नमस्कार दोस्तों, ईस्ट न्यूज़ 24x7 में आपका स्वागत है...

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&lt;/div&gt;</description><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjw8Ry_v6JOyj4Aj0qDFjx7q8fr0tffzcLRTga-8_-xBz-tywvAIHRERk0jkPhBIzHTI_0lwBt2_72HgjtpYgmHgZiVO9KyqwqMMslYD0MfWwc10XTEu3GLWC_PgP96LKO7prpsOB0KRbyI1uc9gQrC5s93kFKeF0kxkL9b6mKr7mfvNzJG5YSlyPjlNxY/s72-w640-h394-c/IMG-20251213-WA0018.jpg" width="72"/><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>देवरिया में संस्कृति पर्व : 26 की तैयारियाँ पूरी</title><link>https://eastnews24x7.blogspot.com/2025/12/Cultural-festival-in-Deoria-Preparations-for-26th-completed.html</link><category>Uttar Pradesh</category><author>noreply@blogger.com (East News 24x7)</author><pubDate>Fri, 12 Dec 2025 19:36:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-3505245523590782174.post-3022731713201497271</guid><description>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEi7Phj04NhryBjrJLk8aT7HGy12dPbYETlKAKLzOpjrynGhcjSjS_KWeScxCUHv6x1Sbil7DpNcgX-Z9tId0QfHSDpyyBdhRZczw_-8HnxYPw17uJ8o3k1UNT7D3E3d0GsKNZl__Fh4q_pMTE5wWyvIO7wXuplU_gLiXMzJxmJASInz28G94vOmUSHMZJU/s745/IMG-20251212-WA0006.jpg" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="517" data-original-width="745" height="444" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEi7Phj04NhryBjrJLk8aT7HGy12dPbYETlKAKLzOpjrynGhcjSjS_KWeScxCUHv6x1Sbil7DpNcgX-Z9tId0QfHSDpyyBdhRZczw_-8HnxYPw17uJ8o3k1UNT7D3E3d0GsKNZl__Fh4q_pMTE5wWyvIO7wXuplU_gLiXMzJxmJASInz28G94vOmUSHMZJU/w640-h444/IMG-20251212-WA0006.jpg" width="640" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;ul style="text-align: left;"&gt;&lt;li&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;आज से भोजपुरी के दिग्गजों का जमावड़ा&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;लोकप्रिय भोजपुरी गायक सांसद मनोज तिवारी मृदुल होंगे समारोह के मुख्य अतिथि&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;देश के कोने-कोने से जुट रहे साहित्यकार, रंगकर्मी और विविध क्षेत्रों के कलाकार&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;कल्पना पटवारी, भरत शर्मा व्यास, मदन राय, शिल्पी राज और आलोक कुमार देंगे प्रस्तुति&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;p&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="font-size: x-large;"&gt;विशेष संवाददाता&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;b&gt;देवरिया। &lt;/b&gt;विश्व भोजपुरी सम्मेलन की उत्तर प्रदेश इकाई के तत्वावधान में आयोजित हो रहे दो दिवसीय प्रांतीय अधिवेशन की तैयारियाँ पूरी हो चुकी हैं । राजकीय इंटर कॉलेज के मैदान पर इस समारोह का उद्घाटन दिल्ली के सांसद और प्रसिद्ध भोजपुरी गायक मनोज तिवारी मृदुल करेंगे। संस्था के शिल्पकार अरुणेश नीरन को समर्पित इस अधिवेशन का आयोजन क़रीब तीस साल बाद देवरिया के राजकीय इंटर कॉलेज के मैदान पर किया जा रहा है । विश्व भोजपुरी सम्मेलन का यह भव्य आयोजन हो रहा है । तयशुदा कार्यक्रम के क्रम में विभोस के प्रांतीय महामंत्री प्रो. शैलेंद्र कुमार राव तथा ज़िलाध्यक्ष गिरजेश मिश्र ने जानकारी देते हुए बताया कि दोपहर 12:00 बजे से सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत की जाएगी। जिसमें सुविख्यात गायक भरत शर्मा व्यास, मदन राय, आराधना सिंह सहित एक दर्जन से अधिक कलाकारों की प्रस्तुतियाँ होंगी। हास्य अभिनेता सुनील कुमार यादव मंच पर अपनी प्रस्तुति देंगे।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjgVVd9QKoH5dO_-gCB0Mvx6VGmhRDGKhPR2zoxdij0bJWqZB9B4bww2kN3ePzoYV_QrzJqoYe4q6cdGmhqhIMwOoc4iqC9Y4GYpVdl5xh6HAnz89N3QUXN_mNKDbyjJVEm0Ava4qNGH7BR8kMDiOInBAvR1E0EfDTpYFNFSDdAZ1N2iv6_TStO9PZ1X2o/s729/IMG-20251212-WA0007.jpg" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="500" data-original-width="729" height="438" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjgVVd9QKoH5dO_-gCB0Mvx6VGmhRDGKhPR2zoxdij0bJWqZB9B4bww2kN3ePzoYV_QrzJqoYe4q6cdGmhqhIMwOoc4iqC9Y4GYpVdl5xh6HAnz89N3QUXN_mNKDbyjJVEm0Ava4qNGH7BR8kMDiOInBAvR1E0EfDTpYFNFSDdAZ1N2iv6_TStO9PZ1X2o/w640-h438/IMG-20251212-WA0007.jpg" width="640" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्व भोजपुरी सम्मेलन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजित दुबे करेंगे। इस दौरान भोजपुरी भाषा, संस्कृति और साहित्य पर न सिर्फ़ विमर्श होगा बल्कि संगठनात्मक गतिविधियों पर चर्चा की जाएगी। पहले दिन देर शाम होने वाले लोकरंग कार्यक्रम में असम मूल की सुविख्यात भोजपुरी गायिका कल्पना पटवारी, शिल्पी राज, आलोक कुमार की प्रस्तुति होगी। मंच पर भिखारी ठाकुर, महेन्द्र मिसिर सम्मान, कबीर सम्मान, शिखर सम्मान विशिष्ट कलाकारों का किया जाएगा।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;अधिवेशन के दूसरे दिवस 14दिसंबर को 12 बजे दिन में बतकही 2:30 बजे दिन तक चलेगा सायं 4 बजे से कवि सम्मेलन मुशायरा शुरू होगा जिसमे जौहर कानपुरी, अजहर इक़बाल, शबीना अदीब डा. मजीद देवबंदी, ओम शर्मा ओम, अफजल इलाहाबादी, सीमा नयन, डा. जयति ओझा, अंजली अरोड़ा, राहुल राज मिश्र डा. शाद सिद्दीकी, आकृति विज्ञा, डा. कमलेश राय, भूषण त्यागी, सरोज पांडेय, बादशाह प्रेमी अपनी रचना की प्रस्तुति देंगे।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjlfuyEvAYMe7cJdUXasB-ujMRQxMVFBMHE79s3qaILap6eCc8GolPBqxn97sEIVgs9fm2VFGpXUSMfTUilt6i0qum6qTP7_kp50TWCyAbVcXfHeZ1-veWTiZCdwBoHWrOPw9EkiBP0DpVf_k9JInXslYv5tt7SmbkbHTwFnHbEsWq0teXcBV2a8T7V3ac/s757/IMG-20251212-WA0008.jpg" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="519" data-original-width="757" height="438" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjlfuyEvAYMe7cJdUXasB-ujMRQxMVFBMHE79s3qaILap6eCc8GolPBqxn97sEIVgs9fm2VFGpXUSMfTUilt6i0qum6qTP7_kp50TWCyAbVcXfHeZ1-veWTiZCdwBoHWrOPw9EkiBP0DpVf_k9JInXslYv5tt7SmbkbHTwFnHbEsWq0teXcBV2a8T7V3ac/w640-h438/IMG-20251212-WA0008.jpg" width="640" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;b&gt;इन साहित्यिक हस्तियों के नाम दिया जाएगा सम्मान&amp;nbsp;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;अधिवेशन के प्रथम दिन शनिवार को भरत शर्मा व्यास को महेंद्र मिश्र सम्मान, कल्पना पटवारी,आलोक कुमार, शिल्पी राज आराधना सिंह को भिखारी ठाकुर सम्मान से सम्मानित किया जायेगा। दूसरे दिन शनिवार को मोहन पाण्डेय भ्रमरको वरिष्ठ साहित्यकार ध्रुवदेव मिश्र "पाषाण " डा. रविंद्र तिवारी को अरुणेश नीरन ,मदन राय को मोती बी ए सम्मान से सम्मानित किया जायेगा।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;नमस्कार दोस्तों, ईस्ट न्यूज़ 24x7 में आपका स्वागत है...

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href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgVMkuq9JoFC7FVqe57SyYlEAIVwvzLm-h-_m93r2DjkQ1KWB3vKpL0lZ540B2W6bN9bKrBvXIQGtZCuQEK1kRZ3p-trc4sY6K2nlTNZ0yIsiHIyGbzw1iSlYhA63KwZENSX2RZuXbtgIk4qiJaLdNwabEoj3ZWEDtlSTKOOoDm9kc_f4Asbs-8IXtsF2A/s1490/IMG-20251210-WA0002.jpg" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="1490" data-original-width="1078" height="640" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgVMkuq9JoFC7FVqe57SyYlEAIVwvzLm-h-_m93r2DjkQ1KWB3vKpL0lZ540B2W6bN9bKrBvXIQGtZCuQEK1kRZ3p-trc4sY6K2nlTNZ0yIsiHIyGbzw1iSlYhA63KwZENSX2RZuXbtgIk4qiJaLdNwabEoj3ZWEDtlSTKOOoDm9kc_f4Asbs-8IXtsF2A/w464-h640/IMG-20251210-WA0002.jpg" width="464" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;p style="text-align: center;"&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;सिद्धार्थ मणि त्रिपाठी&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;p style="text-align: center;"&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;b&gt;अध्यक्ष, विश्व भोजपुरी सम्मेलन एवं आयोजक संस्कृति पर्व, देवरिया&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;ul style="text-align: left;"&gt;&lt;li&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;b&gt;भोजपुरी भाषा को वैश्विक परिदृश्य में लोक से जोड़ेगा विश्व भोजपुरी सम्मेलन&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;b&gt;संस्कृति की संरक्षक है भोजपुरी, संस्कृति पर्व देवरिया के आयोजन का उद्देश्य व्यापक&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;विशेष संवाददाता&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;b&gt;देवरिया।&lt;/b&gt; विश्व भोजपुरी सम्मेलन की स्थापना भूमि देवरिया में विश्व भोजपुरी सम्मेलन, उत्तर प्रदेश के तत्वावधान में दो दिवसीय अधिवेशन संस्कृति पर्व के रूप में 13 और 14 दिसंबर को देवरिया के राजकीय इंटर कॉलेज देवरिया के प्रांगण में आयोजित किया जा रहा है। इस आयोजन में देश और दुनिया में भोजपुरी साहित्य, संस्कृति और भाषा पर गंभीर कार्य कर रहे प्रख्यात विद्वान, संस्कृति कर्मी, लेखन, साहित्यकार, रंग कर्मी, गायक, कवि और संस्कृति के अध्येता एक साथ एक मंच पर सम्मिलित होकर भोजपुरी की बात करने जा रहे हैं।अधिवेशन के उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि दिल्ली से सांसद तथा लोकप्रिय गायक और अभिनेता श्री मनोज तिवारी मृदुल जी होंगे। जिसके दूसरे सत्र में लोकरंग कार्यक्रम के तहत सुविख्यात लोक गायिका कल्पना पटवारी, सुविख्यात गायक भरत शर्मा व्यास, शिल्पी राज, आलोक कुमार तथा मदन राय सहित क़रीब एक दर्जन कलाकारों द्वारा प्रस्तुतियाँ दी जाएंगी।&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;कार्यक्रम के दूसरे दिन समापन सत्र के तहत 14 दिसम्बर को दो सत्र आयोजित होंगे। इसमें पहला सत्र बतकही है। जिसमें बौद्धिक विमर्श होगा। जबकि दूसरे सत्र में कवि सम्मेलन और मुशायरे का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें भोजपुरी, हिन्दी और उर्दू  के रचनाकार शामिल होंगे। डा. कमलेश राय, भालचंद्र त्रिपाठी, बादशाह प्रेमी, सुभाष यादव तथा भूषण त्यागी रचना पाठ करेंगे। साथ ही प्रख्यात शायरा शबीना अदीब, शायर अज़हर इक़बाल, डा. मजीद देवबंदी, अफ़ज़ल इलाहाबादी, डा. जयति ओझा, सीमा नयन, आकृति विज्ञा अर्पण, सलीम, सरोज पांडेय, राहुल राज, शाद सिद्दीकी, ओम शर्मा ओम, डा. आशुतोष त्रिपाठी सहित अनेक नामचीन कवि मंच से प्रस्तुतियाँ देंगे।&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;साथ ही राज्यपाल हिमाचल प्रदेश महामहिम शिव प्रताप शुक्ल, आयरलैंड में भारत के राजदूत श्री अखिलेश मिश्र वर्चुअल रूप से इस अधिवेशन को संबोधित करेंगे। यह एक ऐसा वैश्विक आयोजन है जो भोजपुरी को भाषा के रूप में उसका स्थान अवश्य सुनिश्चित कराएगा। देवरिया ही भोजपुरी भाषा की केंद्रीय भूमि है, इसलिए यह आयोजन बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है। संस्कृति पर्व के नाम से आयोजित भोजपुरी के इस साहित्यिक सांस्कृतिक यज्ञ के संयोजक और विश्व भोजपुरी सम्मेलन , उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष सिद्धार्थ मणि त्रिपाठी ने देवरिया में आयोजित एक प्रेस वार्ता में इस आयोजन और भोजपुरी भाषा की अस्मिता और महत्ता पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए इस आयोजन के बारे में विस्तार से जानकारी दी।&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;उन्होंने बताया कि पंडित विद्यानिवास मिश्र जी भोजपुरी की मिट्टी की अति विशिष्ट सुगंध हैं। संस्कृत, हिंदी, अंग्रेजी और फारसी की विराट साहित्यिक विरासत के अग्रगण्य यात्री होकर भी पंडित जी को भोजपुरी को भाषा का अधिकार प्राप्त कराने की बड़ी धुन थी। जीवन भर अति उत्कृष्ट साहित्य रचते और विस्तारित करते पंडित विद्या निवास मिश्र जी ने वर्ष 1995 में भोजपुरी की केंद्रीय अंग सत्ता मानी जाने वाली देवरिया की धरती से एक आरंभ किया, नाम दिया विश्व भोजपुरी सम्मेलन।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;सेतु के सन्निधि में विश्व भोजपुरी सम्मेलन की स्थापना के बाद भोजपुरी को भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची में भाषा के रूप में स्थान दिलाने के लिए चल रहे पूर्व के संघर्षों को इस नई आंदोलन यात्रा से बहुत गति मिली। इसके हाल तक संरक्षक रहे श्री अरुणेश नीरन और वर्तमान अध्यक्ष अजीत दुबे के अलावा अनेक यात्रियों ने एक लंबी यात्रा की है। त्रिपाठी ने बताया कि भोजपुरी न केवल भारत वरन् विश्व के अनेक देशों में व्यवहृत होने वाली एक समृद्ध भाषा है जिसका विपुल साहित्य है। वर्तमान में इस भाषा को व्यवहृत करने वाले लोगों की संख्या लगभग 30 करोड़ है। इस दृष्टि से देखें तो यह भारत के साथ-साथ विश्व की सांस्कृतिक पहचान में योगदान देने वाली एक महत्वपूर्ण भाषिक संस्कृति भी है। भारत में बिहार और उत्तर प्रदेश में सरकारी स्तर पर किसी न किसी रूप में इसे सम्मान और मान्यता प्राप्त है।&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;भारत की लोक संस्कृति यदि सबसे अधिक किसी भाषा और साहित्य में अभिव्यक्त हुई है तो वह भोजपुरी है। भारत के स्वाधीनता संग्राम में भी भोजपुरी भाषियों का निर्णायक योगदान है। देवनागरी इसकी लिपि है। उन्होंने बताया कि हमारे संगठन "विश्व भोजपुरी सम्मेलन"  की उत्तर प्रदेश इकाई की ओर से यह दो दिवसीय(13 एवं 14 दिसंबर ) प्रांतीय अधिवेशन होने जा रहा है। हमारे संगठन के 11 प्रांतों से बड़ी संख्या में भोजपुरी के विद्वानों और प्रतिनिधियों के भाग लेने की भी संभावना है।लोककला, लोकसंस्कृति, लोकसाहित्य तथा लोक परंपराओं के संरक्षण और संवर्द्धन की दृष्टि से यह विशाल आयोजन पूर्वी उत्तर प्रदेश के देवरिया जनपद में होना सुनिश्चित है। इस अवसर के लिए आयोजन समिति ने एक स्मारिका प्रकाशित करने का निर्णय भी लिया है जिसमें भोजपुरी, हिन्दी, संस्कृत और अंग्रेजी में लिखी गईं रचनाएँ शामिल की जा रही हैं। यह स्मारिका स्वयं में भोजपुरी भाषा की आधिकारिक दस्तावेज बनेगी।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;त्रिपाठी ने कहा कि सृष्टि में भोजपुरी तब से है जब से इसका अस्तित्व है। मूलतः संस्कृत से लोकस्वर के रूप में उपज कर भोजपुरी ने सामान्य मानव सभ्यता में संवाद के माध्यम के रूप में खुद को स्थापित किया है। यह एक मात्र भाषा है जिसमे वैयाकरण की दृष्टि से संस्कृत से समानता की क्षमता है। भोजपुरी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमे किसी भी क्रिया या संज्ञा का कोई पर्यायवाची नहीं है , बल्कि हर क्रिया और  संज्ञा के लिए अलग शब्द हैं। यहाँ शब्दो की अद्भुत ढंग से प्रचुरता है। यही वजह है कि संवाद सम्प्रेषण की जो क्षमता भोजपुरी में है वह किसी अन्य भाषा में संभव ही नहीं हो सकता।&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;त्रिपाठी ने कहा कि भोजपुरी संस्कृत से ही निकली है। उनके कोश-ग्रन्थ ('व्युत्पत्ति मूलक भोजपुरी की धातु और क्रियाएं') में मात्र 761 धातुओं की खोज उन्होंने की है, जिनका विस्तार "ढ़" वर्ण तक हुआ है। इस प्रबन्ध के अध्ययन से ज्ञात होता है कि 761 पदों की मूल धातु की वैज्ञानिक निर्माण प्रक्रिया में पाणिनि सूत्र का अक्षरश: अनुपालन हुआ है। इस कोश-ग्रन्थ में वर्णित विषय पर एक नजर डालने से भोजपुरी तथा संस्कृत भाषा के मध्य समानता स्पष्ट परिलक्षित होती है। वस्तुत: भोजपुरी-भाषा संस्कृत-भाषा के अति निकट और संस्कृत की ही भांति वैज्ञानिक भाषा है। भोजपुरी-भाषा के धातुओं और क्रियाओं का वाक्य-प्रयोग विषय को और अधिक स्पष्ट कर देता है। प्रामाणिकता हेतु संस्कृत व्याकरण को भी साथ-साथ प्रस्तुत कर दिया गया है। इस ग्रन्थ की विशेषता यह है कि इसमें भोजपुरी-भाषा के धातुओं और क्रियाओं की व्युत्पत्ति को स्रोत संस्कृत-भाषा एवं उसके मानक व्याकरण से लिया गया है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;भाषा के अर्थ में ‘भोजपुरी’ शब्द का पहला लिखित प्रयोग रेमंड की पुस्तक ‘शेरमुताखरीन’ के अनुवाद (दूसरे संस्करण) की भूमिका में मिलता है। इसका प्रकाशन वर्ष 1789 है। इसके नामकरण के बारे में कई तरह के मत मिलते हैं। जिनमें से तीन मत काफी प्रचलित हैं। पहले मत के अनुसार राजा भोजदेव (सन् 1005-55 ई.) के नाम पर भोजपुर पड़ा। इस मत के समर्थक जार्ज अब्राहम ग्रियर्सन, उदयनारायण तिवारी आदि हैं। इस संबंध में उदयनारायण तिवारी ने लिखा है कि “भोजपुरी बोली का नामकरण शाहाबाद जिले के भोजपुर परगने के नाम पर हुआ है। शाहाबाद जिले में भ्रमण करते हुए डॉ. बुकनन सन् 1812 ई. में भोजपुर आए थे। उन्होंने मालवा के भोजवंशी ‘उज्जैन’ राजपूतों के चेरों जाति को पराजित करने के संबंध में उल्लेख किया है। आधुनिक इतिहासकारों ने मालवा के राजा भोजदेव या उनके वंशजों के भोजपुर विजय को संदिग्ध् माना हैं। इसपर विचार करते हुए दुर्गाशंकर सिंह नाथ ने लिखा है कि (मालवा के भोज का)” भोजपुर-भोजदेव पूर्वी प्रांत में कभी नहीं आए। दूसरे मत के अनुसार इसका नामकरण वेद से जोड़ा गया है। वेद में भोज शब्द का प्रयोग मिलता है। इस मत के समर्थकों में डा.ए.बनर्जी शास्त्री, रघुवंश नारायण सिंह, जितराम पाठक का नाम प्रमुख है। एक तीसरा मत भी है जिसके अनुसार भोजपुरी भाषा का नामकरण कन्नौज के राजामिहिर भोज के नाम पर भोजपुर बसा था। इस मत के पक्षधर पृथ्वी सिंह मेहता और परमानंद पांडेय हैं। परमानंद पांडेय के अनुसार “ गुर्जर प्रतिहारवंशी राजा मिहिरभोज का बसाया हुआ भोजपुर आज भी पुराना भोजपुर नाम से विद्यमान है। मिहिरभोज का शासनकाल सन् 836 ई. के आसपास माना जाता है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;भोजपुरी भाषा का इतिहास 7वीं सदी से शुरू होता है - 1000 से अधिक साल पुरानी! गुरु गोरख नाथ 1100 वर्ष में गोरख बानी लिखा था। संत कबीर दास (1297) का जन्मदिवस भोजपुरी दिवस के रूप में भारत में स्वीकार किया गया है और विश्व भोजपुरी दिवस के रूप में मनाया जाता है। भोजपुरी भाषा प्रधानतया पश्चिमी बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश तथा उत्तरी झारखण्ड के क्षेत्रों में बोली जाती है।भोजपुरी एक बड़े भूभाग की भाषा है। यह पूर्वी बिहार और पश्चिमी उत्तर - प्रदेश के साथ-साथ झारखंड के कुछ क्षेत्रों के लोगों की मातृभाषा है। इसके आलावा बिहार और उत्तर प्रदेश के भोजपुरी भाषी जिलों से सटे नेपाल के कुछ हिस्सों में यह बोली जाती है। यह बिहार के पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, सारण, सीवान, गोपालगंज, भोजपुर, बक्सर, सासाराम और भभूआ जिलों में तथा उत्तरप्रदेश के बलिया, देवरिया, कुशीनगर, वाराणसी, गोरखपुर महाराजगंज, गाजीपुर, मऊ, जौनपुर, मिर्जापुर के लोगों की मातृभाषा है। झारखंड में यह पलामू, गढ़वा और लातेहार जिलों के कुछ भागों में बोली जाती है।&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;एक अनुमान के मुताबिक भारत में कुछ भागों में बोलनेवालों की जनसंख्या 26 करोड़ के आस-पास है। नेपाल के रौतहट, बारा, पर्सा, बिरग, चितवन, नवलपरासी, रूपनदेही और कपिलवस्तु में भोजपुरी बोली जाती है। वहाँ के थारू लोग भोजपुरी बोलते हैं। नेपाल में भोजपुरी भाषी लोगों की आबादी ढ़ाई लाख से अधिक है। जो वहाँ की जनसंख्या के लगभग नौ प्रतिशत है। भोजपुरी सही मायने में विश्वभाषा है। भारत और नेपाल के अलावे यह मारीशस, फिजी, सूरीनाम, ट्रीनीडाड, नीदरलैंड जैसे कई देशों की बड़ी आबादी इसे बोलती-समझती है। रोजी – रोजगार की भाषा नहीं रहने के कारण नई पीढ़ी इससे कट रही है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;त्रिपाठी ने बताया कि भोजपुरी में पिछले कुछ समय से अनावश्यक, अश्लील साहित्य और गीतों की एक ऐसी परंपरा विकसित हुई है जिसने भोजपुरी के मर्म पर प्रहार किया है। संस्कृति पर्व के इस आयोजन में उस पर बहुत गंभीरता से विचार कर भोजपुरी की मूल मधुर, संस्कारयुक्त थाती को संरक्षित करने पर मंथन होगा और उसके उपाय भी तलाशे जाएंगे।&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;नमस्कार दोस्तों, ईस्ट न्यूज़ 24x7 में आपका स्वागत है...

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&lt;/div&gt;</description><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgVMkuq9JoFC7FVqe57SyYlEAIVwvzLm-h-_m93r2DjkQ1KWB3vKpL0lZ540B2W6bN9bKrBvXIQGtZCuQEK1kRZ3p-trc4sY6K2nlTNZ0yIsiHIyGbzw1iSlYhA63KwZENSX2RZuXbtgIk4qiJaLdNwabEoj3ZWEDtlSTKOOoDm9kc_f4Asbs-8IXtsF2A/s72-w464-h640-c/IMG-20251210-WA0002.jpg" width="72"/><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>भोजपुरी अस्मिता को लेकर आयोजित हो रहा संस्कृति पर्व</title><link>https://eastnews24x7.blogspot.com/2025/11/Cultural-festival-being-organised-for-Bhojpuri-identity.html</link><category>Uttar Pradesh</category><author>noreply@blogger.com (East News 24x7)</author><pubDate>Mon, 17 Nov 2025 03:32:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-3505245523590782174.post-484031318652445515</guid><description>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhmqUayLcksZNYDTK8tkaWhsJL1X8E1I4PifvlYATknGB_X1LlzxiFyF94iYBeVScuTi1Kw8ZJJvieNDy775URkEqRcfNktcP3Tkj33wY-P3yBaqBQypisTYjkYE-sG4P2OzK6iJ8E9pQ0msfsChxr2MHIWyqQ3TBe_-d-pA9qQQDxY4O0EO1qsJ5VZaiU/s1080/IMG-20251116-WA0005.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="549" data-original-width="1080" height="326" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhmqUayLcksZNYDTK8tkaWhsJL1X8E1I4PifvlYATknGB_X1LlzxiFyF94iYBeVScuTi1Kw8ZJJvieNDy775URkEqRcfNktcP3Tkj33wY-P3yBaqBQypisTYjkYE-sG4P2OzK6iJ8E9pQ0msfsChxr2MHIWyqQ3TBe_-d-pA9qQQDxY4O0EO1qsJ5VZaiU/w640-h326/IMG-20251116-WA0005.jpg" width="640" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;p style="text-align: center;"&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;विशेष संवाददाता&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-family: Hind; font-size: medium;"&gt;&lt;b&gt;देवरिया। &lt;/b&gt;विश्व भोजपुरी सम्मेलन की प्रादेशिक इकाई के तत्वावधान में देवरिया जनपद में 13 एवं 14 दिसंबर को प्रांतीय अधिवेशन संस्कृति पर्व के रूप आयोजित करेगी। इसकी तैयारी बैठक रविवार को जिलाध्यक्ष पं. गिरजेश मिश्र, मंटू की अध्यक्षता में शहर के ट्यूबवेल कॉलोनी तथा सिंधी मिल कालोनी में हुई ।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-family: Hind; font-size: medium;"&gt;बैठक को सम्बोधित करतें हुये प्रदेश अध्यक्ष सिद्धार्थ मणि त्रिपाठी नें कहा कि 30 साल बाद विश्व भोजपुरी सम्मेलन का दो दिवसीय प्रांतीय अधिवेशन, देवरिया में किया जा रहा है I जिसकी सफलता आप सभी सहित समस्त जनपद वासियों के ऊपर निर्भर है I&amp;nbsp; दो दिनों में पाँच सत्रों में यह सम्मेलन आयोजित होगा। जिसमें संगोष्ठि, सांस्कृतिक कार्यक्रम, कवि सम्मेलन तथा सम्मान समारोह शामिल है ।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEigXQ06sABdFAEg271XO2XhVukVX2umFAc4OjqXiZwmZxorkFkjTFEqjX-WxdhiD78DqodEdExC0yMUJUd3Tm2_7eLyk5gEEV2vQBFvZJyHf7XuzDl4_-tlTrN7knS481thkDJBMP8TjEGZS7ZW4MgIpqERS4KKFcrgA8eP_UtU23RFqwhkzEGDdTeOlZA/s1080/IMG-20251116-WA0004.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;span style="font-family: Hind; font-size: medium;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="673" data-original-width="1080" height="398" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEigXQ06sABdFAEg271XO2XhVukVX2umFAc4OjqXiZwmZxorkFkjTFEqjX-WxdhiD78DqodEdExC0yMUJUd3Tm2_7eLyk5gEEV2vQBFvZJyHf7XuzDl4_-tlTrN7knS481thkDJBMP8TjEGZS7ZW4MgIpqERS4KKFcrgA8eP_UtU23RFqwhkzEGDdTeOlZA/w640-h398/IMG-20251116-WA0004.jpg" width="640" /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-family: Hind; font-size: medium;"&gt;अनिल मिश्र नें कहा कि विश्वभोजपुरी का यह कदम भोजपुरी भाषा को विश्व में पहचान दिलाएगी, रविप्रकाश मिश्र छोटे नें कहा कि भोजपुरी भाषा ही नहीं संस्कृति है I बृजभूषण गोंड नें कहा कि इस आयोजन से भोजपुरी भाषा को देश विदेश में उत्कृष्ट स्थान मिलेगा प्रो. सुधीर कुमार शुक्ल नें अधिवेशन को सफल बनाने के लिए आह्वान किया I&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-family: Hind; font-size: medium;"&gt;इस अवसर पर विजय बहादुर गोड़, त्रिपुरेश मिश्र, भाजपा नेता संजय सिंह, प्रमुख प्रतिनिधि लार अमित सिंह बबलू, सपा नेता नित्यानंद त्रिपाठी, प्रदीप कुमार गोंड, राजीव शाह, विशाल गोंड, हरीश नरायण तिवारी, वीरेंद्र कुमार, सतीश पाण्डेय चंद्रप्रकाश दुबे, कौशल किशोर मिश्र, मारकंडे शाही आदि उपस्थित रहें I&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;नमस्कार दोस्तों, ईस्ट न्यूज़ 24x7 में आपका स्वागत है...

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