<?xml version="1.0" encoding="UTF-8" standalone="no"?><?xml-stylesheet href="http://www.blogger.com/styles/atom.css" type="text/css"?><rss xmlns:itunes="http://www.itunes.com/dtds/podcast-1.0.dtd" version="2.0"><channel><title>एक हि धुन जय जय भारत!</title><description></description><managingEditor>noreply@blogger.com (चंदन)</managingEditor><pubDate>Mon, 2 Sep 2024 11:23:13 +0530</pubDate><generator>Blogger http://www.blogger.com</generator><openSearch:totalResults xmlns:openSearch="http://a9.com/-/spec/opensearchrss/1.0/">8</openSearch:totalResults><openSearch:startIndex xmlns:openSearch="http://a9.com/-/spec/opensearchrss/1.0/">1</openSearch:startIndex><openSearch:itemsPerPage xmlns:openSearch="http://a9.com/-/spec/opensearchrss/1.0/">25</openSearch:itemsPerPage><link>http://ekhidhun.blogspot.com/</link><language>en-us</language><itunes:explicit>yes</itunes:explicit><copyright>सर्वाधिकार सुरक्षित </copyright><itunes:subtitle/><itunes:author>चंदन भारत </itunes:author><itunes:owner><itunes:email>noreply@blogger.com</itunes:email><itunes:name>चंदन भारत </itunes:name></itunes:owner><item><title>भारत बिचौलियों का स्वर्ग </title><link>http://ekhidhun.blogspot.com/2013/08/blog-post.html</link><pubDate>Fri, 23 Aug 2013 17:46:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-3641175540044176469.post-5884614871352214698</guid><description>&amp;nbsp;शीर्षक से शर्म होना लाजिमी है, पर वास्तविकता इससे अलग भी नहीं है| हम मिसाइलों के कई संस्करण बना चुके हैं, जिनके जद में अमेरिका भी आ सकता है| पर तोप, लडाकू जहाज़ों, बन्दूकों, गोलों, गोलियों तथा अन्य युद्धक साजो - सामान के लिए दुसरे देशों पर निर्भर हैं| तकनीक का रोना हम रोते रहते हैं, जिसका फायदा बिचौलिए उठाते हैं, आखिर क्या कारण है की हमारे सम्बन्ध उन सभी देशों से अच्छे हैं जो तकनीक में सबसे आगे हैं, जबकी चीन आदि के साथ ऐसा नही है फिर भी वो हम से आगे है, कारण हमारे पास या तो इच्छा शक्ति नही हैं या फिर सत्ता में मौजूद बिचौलियों के दलाल हमें तकनीक से परिपूर्ण होने में रोकते हैं|&amp;nbsp;&lt;div&gt;
&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div&gt;
&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; सत्ता को बचाए रखने के लिए बिचौलिए जैसी भूमिका निभाते रहने से देश कभी गर्वित महसूस नही कर सकता, दंगों के दौरान बन्दूको का सामना गुलेलों से, धारदार हथियारों का सामना सिर्फ डंडे से करने वाला दंगाई नहीं भारत की पुलिस होती है, जैसे पुलिस का काम दंगाइयों को रोकना नहीं, &amp;nbsp;दंगाइयों को अपने ऊपर अपना क्रोध व्यक्त करने देने का है|&amp;nbsp;&lt;/div&gt;
&lt;div&gt;
&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div&gt;
&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; देश में सस्ते भोजन की आवश्यकता उन्हें हैं जो अपने लिए भोजन जुटाने में सक्षम नहीं हैं परन्तु अनुदानित कैंटीन की सुविधा अधिकांशत: उन लोगों को मिली हुई है, जो अपने लिए भोजन जुटाने में सक्षम भी हैं, और साधन सम्पन्न भी| सरकारी गोदामों के बाहर और भीतर अनाज बर्बाद हुआ जा रहा है, और बाजार में दाम आसमान छू रहे हैं, प्याज के दाम आसमान छू रहे हैं जबकी इसी वर्ष पाकिस्तान को प्याज निर्यात किये गए| अमेरिका हमें सड़ा गेहूं निर्यात करा है और हम नयी फसल निर्यात करते हैं| चीनी का निर्यात भी ऐसा ही है|&lt;/div&gt;
&lt;div&gt;
&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div&gt;
&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; देशी कपड़ा उद्योग तमाम समस्याओं से घिरा है, फिर भी विदेशी ब्रांड लोकप्रिय बनाए जा रहे हैं|&amp;nbsp;&lt;/div&gt;
&lt;div&gt;
सरकारी दवा कम्पनियां बीमार हालत में हैं और विदेशी कम्पनियों को सुविधा और छुट जारी है| सरकारी कम्पनियों में विनिवेश भी जारी है और निजी और विदेशी कम्पनियों को प्रोत्साहन के रूप में सुविधा और कर में छुट भी जारी है|&amp;nbsp;&lt;/div&gt;
&lt;div&gt;
&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div&gt;
इन सभी कारणों का एक ही मुख्य कारण है| सत्ता के केन्द्रों में बिचौलियों का किसी न किसी रूप में शामिल होना| जो सरकारी प्रतिष्ठानों को रसातल में भेजने की शर्त पर विदेशी और निजी प्रतिष्ठानों को बढाने में लगे हैं| ऐसा नही हैं की सरकारी अस्पतालों, कम्पनियों की आधारभूत संरचना निजी और विदेशी कम्पनियों से कम है| कारण एकमात्र बिचौलिया और उनका संरक्षण ही है|&lt;/div&gt;
&lt;div&gt;
&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div&gt;
&lt;a href="http://www.facebook.com/chandankrpgcil" target="_blank"&gt;चन्दन &lt;/a&gt;&lt;/div&gt;
</description><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total><author>noreply@blogger.com (चंदन भारत )</author></item><item><title>चुनाव : असमाजिक कार्यों कि होड़</title><link>http://ekhidhun.blogspot.com/2012/03/blog-post.html</link><category>असामाजिक तत्व</category><category>आम जनता</category><category>चुनाव</category><pubDate>Sun, 11 Mar 2012 20:29:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-3641175540044176469.post-8027594917667865985</guid><description>&lt;div style="text-align: justify;"&gt;हमारे देश में हर वर्ष किसी ना किसी प्रकार का चुनाव चलता हि रहता है| कभी किसी राज्य में विधान सभा का चुनाव, कभी राज्य सभा का चुनाव, कहीं नगर निगम का चुनाव, कहीं पंचायत चुनाव, किसी विश्विद्यालय के छत्र संघ का चुनाव इत्यादि| इन चुनाओं में कई उम्मीदवार अपना भाग्य आजमा रहे होते हैं| कुछ अपने पूर्व में किया कार्यों के बल-बूते तो कुछ अपने अपराधिक और दबंग पृष्ठभूमि के बल-बूते तो कुछ अपने मतदाताओं को खुश कर मत अपने पक्ष में करने के लिए अपनाए जाने वाले तरीकों के बल-बूते|&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;जैसा कि चुनावों के दौरान सुनने को मिलता है और समाचार पत्रों में छपता है| लगभग प्रत्येक प्रत्याशी कुछ ना कुछ असामाजिक तरीका अपनाता हि हैं| जैसे शराब बांटना, मतदाताओं को लुभाने के लिए पैसे बांटना, मतदाताओं के मनोरंजन के लिए और भी अन्य तरह के मनोरंजक साधनों का प्रबंध करना शामिल है| कुल मिला कर कहें तो इन चुनावों के दौरान अनेकानेक प्रकार के ऐसे इंतजाम किये जाते हैं जिससे कि मतदाताओं को लुभाया जा सके|&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;इसके बावजूद कुछ मतदातों को जिन पर सम्बन्धित उम्मीदवार को भरोसा नही होता है उन्हें अपने पक्ष में करने के लिए असमाजिक तत्वों का सहारा लिया जाता है| जो कि उम्मीदवार को आश्वस्त करते हैं की उनके प्रभाव में आने वाले मतदाता उन्हें हि मतदान करेंगे| इन प्रयोजनों में बहुत सारे पैसे खर्च होते हैं, जो की किसी ना किसी तरह से जनता से ही लिए जाते हैं| अब सवाल ये उठता है की चुनाव के बाद उम्मीदवार जनता से इस पैसे को किस तरह से वसूलते हैं? चुनाव के बाद जो भी उम्मीदवार चुनाव जीतता है वो इस स्थिति में होता है की वो नियमों, नीतियों और जनकल्याण के कार्यों को लागू कर सके| उन्ही नियमों, नीतियों और जनकल्याण के कार्यों को लागू करने के दौरान वो अपने मातहतों के माध्यम से घपले और घोटाला करता है जिससे कि उसके चुनावी खर्चों कि भरपाई हो पाती है और अगले चुनाव के खर्चे भी निकल जाते हैं|&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;चूँकि, इन नियमों, नीतियों, और जनकल्याण के कार्यों में सरकारी धन का ही उपयोग होता है| जो की आम जनता द्वारा सुई से लेकर साबुन तक पर लगाए गए विभिन्न प्रकार के कर से वसूला जाता है| और आम जनता के द्वारा चुकाया जाता है| चूँकि, जीते हुए उम्मीदवार जनता को खुश करना भी चाहते हैं इसलिए जनकल्याण के कार्य अधिकाधिक किये जाते हैं, उन्हें जनता के साथ साथ उस क्षेत्र विशेष के उनके सहयोगी रहे असमाजिक तत्वों को भी खुश करना होता है इसलिए निविदाएँ भी उन्ही असमाजिक तत्वों को दी जाती हैं, और ये निविदाएँ इस तरह से दी जाती हैं ताकि बचत में इन उम्मीदवारों को भी कुछ मिल सके| इस तरह से निविदाओं में ज्यादा बचत के निविदा को ज्यादा राशि में दिया जाता है और इस खर्च कि भरपाई के लिए कर कि दर को बढाना&amp;nbsp;पडता है| और इससे वस्तु और सेवाएं मंहगी होती है जो की आम जनता के जेब से हि जाते हैं|&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;अब पराजित उम्मीदवार भी अपने खर्चे कि भरपाई के लिए असमाजिक कार्य अपनाते हैं, जिसमें उन्हें मतदान नही करने वाले लोगों को धमकाना, अपहरण, हफ्ता वसूली, ठेके, नीलामी में अपने प्रभाव का इस्तेमाल &amp;nbsp;इत्यादि शामिल है| चूँकि, चुनाव के दौरान उन्हें लोगों के मनोरंजन में और असामजिक तत्वों के पीछे बहुत पैसे खर्च करने पड़ते हैं इस लिए ये तत्व भी अपनी नुकासन कि भरपाई के लिए अपने कुछ बचे प्रभाव का इस्तेमाल करता है| और जनता इन दोनों प्रकार के उम्मीदवारों से जूझती रहती है|&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;कुल मिला जुला कर कहा जाय तो ये चुनाव आम जनता के जेब पर दो तरफा प्रहार करते हैं| और वो मूकदर्शक बन कर देखती और जूझती रहती है और आने वाला अगला चुनाव भी इसी तरह के तोहफे देता है|&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div&gt;कुल मिला जुला कर कहा जाय तो चुनाव के दौरान आम जनता बढती मंहगाई और बढते अपराध से त्रस्त तो रहते ही हैं| चुनाव के बाद भी विकास कि आड़ में होने वाले अपराध की चक्की में पिसती रहती है| और फिर अगले चुनाव में यही प्रक्रम क्रमश: चलता रहता है|&lt;/div&gt;</description><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">1</thr:total><author>noreply@blogger.com (चंदन भारत )</author></item><item><title>हिन्दुत्व की आलोचना सुनने वाले और करने वाले दोनों यहाँ पढे !!</title><link>http://ekhidhun.blogspot.com/2012/02/blog-post.html</link><category>उत्कर्ष</category><category>जाति व्यवस्था</category><category>हिंदुत्व</category><category>हिंदू</category><pubDate>Sat, 25 Feb 2012 20:23:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-3641175540044176469.post-3914889774065226183</guid><description>&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;कुछ दिन पहले एन डी टी वी पर पत्रकार बरखा दत्त एक कार्यक्रम मे हिंदुत्व का जम कर मजाक उड़ा रही थी ...&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;इस प्रोग्राम मे दो मुस्लिम मौलवी और दो पादरी और अग्निवेश भी थे &amp;nbsp;..&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;ये सब हिंदू धर्म मे जातिवाद को लेकर हिंदू धर्म का मजाक बना रहे थे ..&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;तथाकथित "जातिवाद" (इस्लामिक शासन के बाद आए ) पर चर्चा कर रहे थे&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;और दूर बैठे अपने आकाओ को खुश कर रहे थे ....&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;अक्सर हिन्दू द्रोही हिन्दुत्व का मखौल उड़ाते है की इसमे छुआछूत है जात पात है&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;अगर ऐसा होता तो महाभारत और रामायण हिन्दुओ के पवित्र ग्रंथ नहीं होते&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;यहाँ जाती व्यवस्था हमेशा कर्म आधारित थी ....&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;लेकिन जरा यहाँ नजर डालिए&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;अब आप जरा इनकी भी सच्चाई देखिये :=&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;क्या आप जानते हैं कि......&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;================ईसाई धर्म में=================&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;- - - - एक मसीह....एक बाइबल..... और एक ही धर्म है ... - - - -&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;========================================&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;लेकिन मजे कि बात ये कि...&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;...&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;ये रोमन कैथेलिक और प्रोटेस्टेंट मे बंटे हुए है ..&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;आयरलैंड और बेलफास्ट मे अब तक सिर्फ पचास साल मे ही बीस हज़ार ईसाई आपसी दंगो मे मरे ..&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;ये कहते है कि युशु इंसान मे कोई फर्क नहीं करता ..&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;लेकिन गोरे ईसाइयों ने काले ईसाइयों पर भयानक पैशाचिक जुल्म ढाए और आज भी अमेरिका का सबसे खतरनाक आतंकी संगठन कोई मुस्लिम संगठन नहीं बल्कि "द व्हाइट सुपर " है जो गोरो का ग्रुप है और कालो और नीग्रो का दुश्मन है ..&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;किसी गोरे लोगो के चर्च मे कोई काला ईसाई नहीं जा सकता .&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;लैटिन कैथोलिक, सीरियाई कैथोलिक चर्च में प्रवेश नहीं करेगा.&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;ये दोनों, मर्थोमा चर्च में प्रवेश नहीं करेगा.&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;ये तीनों, Pentecost के चर्च में प्रवेश नहीं करेगा.&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;और, ये चारों... साल्वेशन आर्मी चर्च में प्रवेश नहीं करेगा.&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;इतना ही नहीं, ये पांचों, सातवें दिन Adventist चर्च में प्रवेश नहीं करेगा.&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;ये छह के छह, रूढ़िवादी चर्च में प्रवेश नहीं करेगा.&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;अब ये सातों जैकोबाइट चर्च में प्रवेश नहीं करेगा.&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;और, इसी तरह से........ ईसाई धर्म की 146 जातियां सिर्फ केरल में ही मौजूद हैं,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;इतना शर्मनाक होने पर भी ये .... चिल्लाते रहेंगे कि.. एक मसीह, एक बाइबिल, एक धर्म(??)&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;=============== अब देखिए मुस्लिमों को===========&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;अल्लाह एक , एक कुरान, एक .... नबी ! और महान एकता......... बतलाते हैं ?&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;जबकि, मुसलमानों के बीच, शिया और सुन्नी सभी मुस्लिम देशों में एक दूसरे को मार रहे हैं .&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;और, अधिकांश मुस्लिम देशों में.... इन दो संप्रदायों के बीच हमेशा धार्मिक दंगा होता रहता है..!&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;इतना ही नहीं... शिया को.., सुन्नी मस्जिद में जाना मना है .&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;इन दोनों को.. अहमदिया मस्जिद में नहीं जाना है.&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;और, ये तीनों...... सूफी मस्जिद में कभी नहीं जाएँगे.&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;फिर, इन चारों का मुजाहिद्दीन मस्जिद में प्रवेश वर्जित है..!&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;किसी बोहरा मस्जिद मे कोई दूसरा मुस्लिम नहीं जा सकता .&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;कोई बोहरा का किसी दूसरे के मस्जिद मे जाना वर्जित है ..&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;आगा खानी या चेलिया मुस्लिम का अपना अलग मस्जिद होता है .&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;सबसे ज्यादा मुस्लिम किसी दूसरे देश मे नही बल्कि मुस्लिम देशो मे ही मारे गए है ..&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;आज भी सीरिया मे करीब हर रोज एक हज़ार मुस्लिम हर रोज मारे जा रहे है .&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;अपने आपको इस्लाम जगत का हीरों बताने वाला सद्दाम हुसैन ने करीब एक लाख कुर्द मुसलमानों को रासायनिक बम से मार डाला था ...&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;पाकिस्तान मे हर महीने शिया और सुन्नी के बीच दंगे भड़कते है .&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;और इसी प्रकार से मुस्लिमों में भी 13 तरह के मुस्लिम हैं., जो एक दुसरे के खून के प्यासे रहते हैं और आपस में बमबारी और मार-काट वगैरह... मचाते रहते हैं.&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;*****अब आइये ... जरा हम अपने हिन्दू/सनातन धर्म को भी देखते हैं.&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;हमारी 1280 धार्मिक पुस्तकें हैं, जिसकी 10,000 से भी ज्यादा टिप्पणियां और १,00.000 से भी अधिक उप-टिप्पणियों मौजूद हैं..! एक भगवान के अनगिनत प्रस्तुतियों की विविधता, अनेकों आचार्य तथा हजारों ऋषि-मुनि हैं जिन्होंने अनेक भाषाओँ में उपदेश दिया है..&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;फिर भी, हम सभी मंदिरों में जाते हैं, इतना ही नहीं.. हम इतने शांतिपूर्ण और सहिष्णु लोग हैं कि सब लोग एक साथ मिलकर सभी मंदिरों और सभी भगवानो की पूजा करते हैं .&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;और तो और.... पिछले दस हजार साल में धर्म के नाम पर हिंदुओं में "कभी झगड़ा नहीं" हुआ .&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;इसलिए इन लोगों की नौटंकी और बहकावे पर मत जाओ... और.... "गर्व से कहो हम हिन्दू हैं"&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;जरा यहाँ भी पढे :&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;भारत की जाती व्यवस्था के&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;बारे मे संक्षिप्त वर्णन और तथ्य है&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;http://alturl.com/ehem9&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;&lt;a href="http://www.facebook.com/photo.php?fbid=199140396854222&amp;amp;set=a.113987858702810.13031.100002747887085&amp;amp;type=1" target="_blank"&gt;यह फेसबुक पर दिए एक लेख से संदर्भित है क्लिक करें! &lt;/a&gt; &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;यह लेख किसी कि धार्मिक भावना को उकसाने के उद्देश्य से नही लिखा गया है, इसे हिंदू धर्म मानने वाले भाइयों के ज्ञान में वृद्धि के लिए लिखा गया है ताकि हिंदू धर्म का मजाक उड़ाने वालों को उनके खुद के बारे में भी बताया जा सके|&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;</description><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">4</thr:total><author>noreply@blogger.com (चंदन भारत )</author></item><item><title>धर्मनिरपेक्षता एक छलावा</title><link>http://ekhidhun.blogspot.com/2011/11/blog-post_11.html</link><category>टैग</category><category>धर्मनिरपेक्षता</category><category>पट्टा</category><category>प्राथमिकता</category><category>लोकतंत्र</category><pubDate>Wed, 16 Nov 2011 18:09:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-3641175540044176469.post-4812856457464277918</guid><description>&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;
&lt;div style="text-align: justify;"&gt;
&lt;b&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; धर्मनिरपेक्ष&lt;/b&gt; शब्द संविधान के १९७६ में हुए ४२वें संशोधन अधिनियम  द्वारा प्रस्तावना में जोड़ा गया. यह सभी धर्मों की समानता और धार्मिक  सहिष्णुता सुनिश्चीत करता है| भारत का कोई आधिकारिक धर्म नहीं है| यह ना तो किसी धर्म को बढावा देता है, ना  ही किसी से भेदभाव करता है| यह सभी धर्मों का सम्मान करता है व एक समान  व्यवहार करता है| हर व्यक्ति को अपने पसन्द के किसी भी धर्म का उपासना,  पालन और प्रचार का अधिकार है| सभी नागरिकों, चाहे उनकी धार्मिक मान्यता कुछ  भी हो कानून की नजर में बराबर होते हैं| सरकारी या सरकारी अनुदान प्राप्त  स्कूलों में कोई धार्मिक अनुदेश लागू नहीं होता|&lt;/div&gt;
&lt;div style="text-align: justify;"&gt;
&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div style="text-align: justify;"&gt;
&lt;span class="Apple-style-span" style="font-family: Georgia,'Times New Roman',serif;"&gt;&lt;i&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &lt;span class="Apple-style-span" style="background-color: blue; color: white;"&gt;"&lt;span class="Apple-style-span" style="line-height: 26px;"&gt;&amp;nbsp;उच्चतम  न्यायालय का फैसला भी यही कहता है. इस फैसले के अनुसार, धर्मनिरपेक्षता का  अर्थ है कि राज्य का कोई धर्म नहीं होगा, राज्य सभी धर्मों से दूरी बनाए  रखेगा, राज्य किसी धर्म को बढ़ावा नहीं देगा और न ही राज्य की कोई धार्मिक  पहचान होगी|"&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div style="text-align: justify;"&gt;
&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div style="text-align: justify;"&gt;
&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; उपरोक्त संदर्भ भारतीय संविधान एवं उच्च न्यायालय का है जिसे की संसद संशोधित कर लागू किया है|&amp;nbsp; वे सभी लोग जो सरकार और तन्त्र में शामिल है इसे मानने के लिए बाध्य हैं| जब की प्रायोगिक रूप में जब ये देखा जाता है की सरकार में शामिल लोग जिन्हें धर्मनिरपेक्ष होना चाहिए था, वो कभी चादर ढोते, कभी नमाज अदा करते, तो कभी खुद टोपी पहन कर जनता को टोपी पहनाते कभी चर्च में झूठी प्रार्थना करते| तो कभी क्रिसमस मनाते दिख जाते हैं| &amp;nbsp;जबकि धर्मनिरपेक्षता का जो अर्थ संविधान और उच्चतम न्यायालय ने तय किया है वो इससे इतर है| और इन सब कारणों के पीछे सम्प्रदायिक सौहार्द कि भावना कि बात करते हैं| मैं पूछना चाहता हूँ कि सिर्फ उनके ऐसा करने से भारत कि जनता पर कोई असर पडता है, या अब तक पड़ा ? जबाब होगा नही| क्यूंकि जनता तो इन नेता नाम के व्यक्ति से हि घृणा करती है, जनता को चाहिए भारतीय धर्म संस्कृति का रक्षक, ऐसे ढोंगी और कायर नही जो सद्भावना के लिए चोला बदलते फिरते हैं, जनता ऐसे हि कई ढोंगी, भ्रष्ट और दुष्ट बाबाओं, मौलानाओ, और पादरियों से तंग है| इस तरह के आचरण से ना तो कभी मुसलमान खुश होंगे और ना हि ईसाई| ये कृत्य तो इस्लाम और ईसाई के धर्मग्रन्थ कुरान और बाइबिल के भी खिलाफ है| ये कृत्य कुछ हल्के ईसाइयो और इस्लामिक विद्वानों को अच्छा लगता होगा| कि ये नेता कभी कभी तो उनका चोला बदलते हैं और उनके साथ शामिल होते हैं|पर मेरे मित्र आपको मैं ये बतलाना चाहूँगा कि किसी भी धर्म में इस तरह कि हरकत तर्कसंगत नही है| अगर इन्हें सही में कोई धर्म पसंद होता तो ये वो धर्म अपना नही लेते? ये सिर्फ अपना रूप बदल कर आपका मत हासिल करना चाहते हैं| इन्हें डर होता है कि अगर धर्म परिवर्तन किया तो मूल धर्म का मत तो जाएगा हि, उस धर्म में नया होने के कारण कोई पूछेगा हि नही| उदाहरण हरियाणा के चंद्रमोहन उर्फ चाँद मोहम्मद को देख लीजिए एक समय सुर्ख़ियों में रहने और फिर धर्म परिवर्तन के बाद उनकी राजनीती गुम हो जाना किससे छिपा है|&lt;/div&gt;
&lt;div style="text-align: justify;"&gt;
&lt;span class="Apple-style-span" style="font-family: Georgia,'Times New Roman',serif; text-align: justify;"&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="background-color: white; line-height: 26px;"&gt;&lt;i&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/i&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div style="text-align: justify;"&gt;
&lt;span class="Apple-style-span" style="text-align: justify;"&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="background-color: white;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;a href="http://socialjustice.nic.in/pdf/tab18.pdf" style="text-align: justify;"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; 2001 कि जनगणना के अनुसार&lt;/a&gt;&amp;nbsp;सभी  धर्म के मानने वालों कि प्रतिशतता इस प्रकार है.. हिंदू &amp;nbsp;मुस्लिम ईसाई,  सिक्ख, जैन, इत्यादि| इन के आंकड़े भी धीरे धीरे बदलते रहे हैं&amp;nbsp;&lt;a href="http://socialjustice.nic.in/pdf/tab18.pdf" style="text-align: justify;"&gt;१९६१ से लेकर २००१ तक कि जनसंख्या में&lt;/a&gt;&amp;nbsp;इनमें से कुछ कि प्रतिशतता बढती तो कुछ कि घटती रही है| और घटने वाली संख्या हिंदुओं कि है| आज जो कि सभी को पता होगा इजरायल, अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, आस्ट्रेलिया, जर्मनी, नार्वे, चीन,और भी ना जाने कई यहाँ तक कि बांग्लादेश भी धर्मनिरपेक्ष देश हि है| इनके कारनामे जैसे इजरायल के फलिस्तीनी मुसलमानो पर हमले, अमेरिका, ब्रिटेन, जापान,आस्ट्रेलिया, और नार्वे कि संयुक्त सेना का आतंकवाद के बहाने इस्लामिक देशों पर हमले किसी से भी छिपे नही हैं और इन देशों के धन भी ईसाइयत के प्रचार में जुटे मशीनरियों को मिलते हैं| ये सभी धर्मनिरपेक्षता कि आड़ में लोगों का धर्म परिवर्तन का काम कर रहे हैं|| ये देश तो इस्लामिक उपनामों वाले लोगों पर बहुत हि कड़ी नजर रखते हैं, और उनकी तलाशी भी बहुत बेहूदा तरीके से करते हैं| जो कि अपमान के बराबर हि है, फिर भी इसके इस्लामिक देशों, से बहुत हि अच्छे हैं और जिनसे अच्छे नही हैं उन पर या तो हमले होते हैं, या सरकार बदल दी जाती है, अफगानिस्तान, ईराक, लीबिया, ट्यूनीशिया, इत्यादि इसके उदाहरण हैं| बांग्लादेश धर्मनिरपेक्ष होने के बावजूद भी अपने यहाँ कि हिंदू आबादी के साथ जो कर रहा है वो आये दिन पढ़ने को मिलते हि रहते हैं| चीन भी आतंकियों कि आड़ में मुसलमानों को नष्ट कर रहा है| जापान तो इतना तक घृणा करता है कि जापान कि सरकार मुसलमानों को अपने यहाँ कि नागरिकता भी नही देती| और तो और आज तक किसी भी सम्पन्न इस्लामिक राष्ट्र के राष्ट्राध्यक्ष ने कभी जापान कि कोई यात्रा भी नही कि जब कि वो एशिया में हि स्थित है और सभी देशों से ज्यादा विकसित है| इन सभी उदाहरणों से ये साफ़ हो जाता है कि&amp;nbsp;&amp;nbsp;ये सभी देश धर्मनिरपेक्षता का आदर्श छेड़ कर अपने धर्म संस्कृति को प्रसारित कर रहे हैं, प्रचारित कर रहे हैं|&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
धर्म&amp;nbsp; निरपेक्षता लोकतंत्र में द्वितीयक पहलु है, लोकतंत्र की प्राथमिकता राष्ट्र की अखंडता, एकता, समाजिकता और लोगों का सर्वांगीण विकास है| धर्मनिरपेक्षता का टैग पट्टे की तरह लगाकर घूमने से लोकतंत्र की प्राथमिकता गौण हो जाती है, और लोकतंत्र मौन| आज इन्ही कारणों से देश समाज और जनता पीछे है| विकास की जगह इस धर्मनिरपेक्षता ने ले ली है और लोग लगे हैं विकास, सद्भावना और समाजिकता की जगह पर धर्मनिरपेक्षता दिखाने में| उथले और असमाजिक दृष्टिकोण अपनाने वाले दिखावा बहुत करते हैं और वास्तविकता के साथ कम चलते हैं| ऐसे ही उथले और अमजिक लोगों का जमावडा हो चुका है| भारतीय राजनीती में इनके भाषणों का प्रचार चैनल करते हैं अधिकांश जनता तक उनकी आवाज प्न्हुन्चती भी नही और ये लोकप्रियता का टैग इन उथले और अस्माजिकों के गले में लटकाए घूमते हैं| समय है अब से ही सचेत हो जाना चाहिए और इस धर्मनिरपेक्षता को गौण और बाकी लोकतंत्र की प्राथमिकताओं को प्राथमिक बनाया जाए|&lt;/div&gt;
&lt;div style="text-align: justify;"&gt;
&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div style="text-align: left;"&gt;
&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;/div&gt;</description><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">2</thr:total><author>noreply@blogger.com (चंदन भारत )</author></item><item><title>जनहित में जारी एक लोकोपकारी अपील</title><link>http://ekhidhun.blogspot.com/2011/11/blog-post_16.html</link><category>अपील</category><category>कांग्रेस</category><category>चालबाजी</category><category>विदेशी</category><pubDate>Wed, 16 Nov 2011 16:15:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-3641175540044176469.post-3986689528114242775</guid><description>&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span class="caption"&gt;सभी राजनितिक द&lt;span class="text_exposed_show"&gt;लों  के नेताओं, कार्यकर्ताओं, एवम आगामी विधानसभा के दौर से गुजरने की तैयारी  कर रहे पाँचों राज्यों की समादरणीय जनता जनार्दन को मैं सचेत करना चाहता  हूँ कि कृपया इन चुनावों में काँग्रेस की चालबाजियों से आप सभी सावधान हो  जाईये ! इनके कुछ प्रमुख हथियार हैं जो ये हमेशा से उपयोग करते रहे हैं आप  सभी उनको पहचानिए और अपने-अपने राज्य में निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करिए !  कुछ नए तरीके इन लोगों ने इस दशक में अपनाये हैं इनकी भी पहचान करिए ! अगर  आप पहचान करने में चूक गए तो काँग्रेस के भ्रष्टाचार की दलदल से निकलना  असंभव हो जायेगा आपके लिए ! अभी आपके पास सुनहरा अवसर है ! अपने मताधिकार  का उचित प्रकार से प्रयोग करें ! और मन में संकल्प करें:-&lt;br /&gt;
काँग्रेस  हराओ देश बचाओ ! &lt;br /&gt;
काँग्रेस भगाओ देश बचाओ !!&lt;br /&gt;
काँग्रेस मिटाओ देश बचाओ !!!&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अब आईये इनकी चालबाजियों की चर्चा करते हैं एक एक करके ! &lt;br /&gt;
१. चुनाव आयोग में इन्होने अपने चमचों-बेलचों को भर दिया है ! इसका प्रमाण  देता हूँ आपको ! एम् एस गिल कभी चुनाव आयुक्त हुआ करते थे ! वो आज क्या  हैं ? अब आप स्वयम ही समझ लो ! इनको मिला हुआ मंत्री पद इन्हें काँग्रेस को  चुनाव जिताने के इनाम स्वरुप मिला है ! अगर काँग्रेस फिर से चुनाव जीत गयी  तो आज के चुनाव आयुक्त भी कल किसी मलाईदार पद पर चले जायेंगे यह तय है ! &lt;br /&gt;
२. ई वी एम् में हेरफेर करवाने में ये लोग माहिर हो गए हैं ! वोटिंग मशीन  की खरीददारी करते समय ही यह सारा जुगाड़ कर लिया जाता है ! चुनाव आयुक्त तो  इनका अपना होता ही  है ! काम कितना आसानी से हो जाता है आप सोच लीजिए !  इसीलिए वोट देते समय बहुत सावधानी से वोटिंग मशीन को परखें और गड़बड़ी होने  पर पुलिस के साथ-साथ वहाँ उपस्थित सभी लोगों को भी तत्काल सूचित करें !  ताकि कोई कारगर कदम उठाया जा सके जनता के हितों की रक्षा के लिए !&lt;br /&gt;
३.  हरेक अपराधी की अपराध करने की एक निश्चित मनोवृति होती है ! इसीलिए अपराधी  हमेशा एक ही प्रकार के हथकंडों को थोडा फेर बदल करके अपराध करते समय काम  में लाता है ! अपराध करने की इसी प्रवृति के अध्ययन के आधार पर इन  अपराधियों की जासूसी की जाती है ! अपराध में उपयोग किये जाने वाले हथकंडों  के आधार पर आप समझ जायेंगे कि अमुक अपराध अल कायदा ने किया है या इंडियन  मुजाहिद्दीन ने किया है या फिर काँग्रेस का कारनामा है यह ! आईये अब आपको  मैं काँग्रेस की अपराध करने की मानसिकता का दिग्दर्शन कराऊँ ! &lt;br /&gt;
ए).  काँग्रेस जब भी कोई षड़यंत्र रचती है तो उस दिन सारे अख़बारों में एक ही  प्रकार के बड़े-बड़े सरकारी विज्ञापन छपते हैं ! यथार्थ में यह उन अख़बारों  को विज्ञापन के रूप में अपरोक्ष रूप से सरकारी खजाने से दिया गया रिश्वत  होता है ! &lt;br /&gt;
बी). षड़यंत्र के पहले इसी प्रकार सभी टीवी चैनलों पर  सरकारी मंत्रालयों एवम विभागों के विज्ञापन अचानक अप्रत्याशित रूप से अधिक  नजर आने लगते हैं ! जब भी ऐसी कोई बात घटित होने लगे तो समझ लेना कुछ  गड़बड़ होने वाला है ! इसके बाद काँग्रेस के माध्यम से आने वाला समाचार एक  बड़ा षड़यंत्र होगा !&lt;br /&gt;
सी). यह षड्यंत्रकारी समाचार सभी चैनलों पर एक ही  दिन एक ही समय में दिखाया जाता है ! गजब की परफेक्ट टाइमिंग के साथ  प्रसारण होता है इन षड्यंत्रकारी समाचारों का ! डी). ऐसे सभी समाचारों के  बाद एक कुत्ता भौंकता है पत्रकारों के सामने ! फिर दो-तीन कुत्ते उसके सुर  में सुर मिलाते हैं ! फिर कई सियार उन कुत्तों से जुगलबंदी करने की जद में  हुवां हुवां करने लग जाते हैं ! जब भी ऐसे लक्षण प्रकट हों तो समझ लेना कि  काँग्रेस की शातिर कल्लू कलीम शैतानी मंडली के पिटारे से निकला है यह जिन !&lt;br /&gt;
४. मतदान के बाद मतपेटियों की रक्षा करने वाले कर्मचारियों, पुलिस  अधिकारीयों एवम सम्बंधित अन्य लोगों पर मतगणना के दिन तक पूरी नजर रखें !  &lt;br /&gt;
५. हरेक प्रशासनिक अधिकारी को किसी ना किसी प्रकार से अपने प्रपंच में  फँसाने का पूरा हुनर आता है इन्हें ! इसीलिए वोटों की गिनती के समय तब तक  जश्न मनाने की सोचना भी मत जब तक आप निर्वाचन अधिकारी से निर्वाचित घोषित  किये जाने का पत्र हाथ में ना ले लें ! तब तक मत गणना में बैठा आपका एक भी  कार्यकर्त्ता मतगणना की मेज से हिले नहीं ! अन्यथा आपका विजयी निर्वाचन  पत्र नाम बदलकर किसी चिदंबरम या सिब्बल को दे दिया जायेगा ! और समाचार  माध्यमों में घोषणा करवाने का हुनर तो कोई इनसे सीखे ! &lt;br /&gt;
५. काँग्रेस के  लोग, दूसरे दलों के कार्यकर्ताओं को बहस में उलझाकर अपना उल्लू सीधा करने  में बड़े माहिर होते हैं ! इसीलिए बहस में ना पड़कर इनकी चालों का अध्ययन  करिए ! और बचाव के मार्ग सोचें एवम उचित कदम उठायें !&lt;br /&gt;
६. कॉंग्रेसी लोग  आपका वोट खरीदने के लिए हरेक चुनाव की तरह इस चुनाव में भी आपके पास दारू  की बोतल और पैसा लेकर आएंगे ! कृपया अपना कीमती वोट पैसे के लालच में बेचना  मत ! नहीं तो आने वाली पीढ़ियाँ भी इसी प्रकार गरीबी के बोझ तले दबी रह  जाएगी ! उल्टा दारु-पैसे का लालच देने वाले इन काँग्रेसियों को समाज में  बेनकाब करें ! इनके खिलाफ शोर मचाएं !&lt;br /&gt;
७. आपकी जाति, क्षेत्र और भाषा  का नाम लेकर आपकी भावनाओं को भड़काने का काम करेंगे ये लोग ! परन्तु आप  अपने राज्य और अपने देश को ह्रदय में बिठाकर रखना ! इनकी बातों में नहीं  आना ! हम सभी भारतवंशी एक हैं यह भाव मन में रखना !&lt;br /&gt;
८. गरीबी हटाने के  नारे लगायेंगे ये बड़े ही आकर्षक अंदाज में ! इनकी बातों में बिलकुल नहीं  आना ! जब ६४ साल में इनसे गरीबी दूर नहीं हुई तो अब क्या खाक गरीबी दूर  करेंगे ये लोग ! गलती से भी काँग्रेस चुनाव जीत गयी तो महंगाई और बढ़ेगी !  ग़रीबों के मुँह का निवाला छीनने का इतिहास रहा है काँग्रेस का ! यह याद  रखकर सबको सावधान करना !&lt;br /&gt;
९. आपकी धार्मिक भावनाओं को भड़का कर आपका वोट  आपसे झटकने की कोशिश करेंगे ये कॉंग्रेसी ! परन्तु ध्यान रखना ये आपको  धोखा ही देंगे ! इनका पूरा इतिहास धोखाधड़ी के कारनामों का एक पिटारा है !  सावधान ! सावधान !&lt;br /&gt;
सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं &lt;br /&gt;
हम सबको मिलकर ऐसा कुछ काम करना चाहिए !&lt;br /&gt;
इस इलेक्शन में नहीं तो अगले इलेक्शन में सही &lt;br /&gt;
इस धरती से काँग्रेस का नाम मिटाना चाहिए !!&lt;br /&gt;
!!वन्दे मातरम !!&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span class="caption"&gt;सभी राजनितिक द&lt;span class="text_exposed_show"&gt;लों  के नेताओं, कार्यकर्ताओं, एवम आगामी विधानसभा के दौर से गुजरने की तैयारी  कर रहे पाँचों राज्यों की समादरणीय जनता जनार्दन को मैं सचेत करना चाहता  हूँ कि कृपया इन चुनावों में काँग्रेस की चालबाजियों से आप सभी सावधान हो  जाईये ! इनके कुछ प्रमुख हथियार हैं जो ये हमेशा से उपयोग करते रहे हैं आप  सभी उनको पहचानिए और अपने-अपने राज्य में निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करिए !  कुछ नए तरीके इन लोगों ने इस दशक में अपनाये हैं इनकी भी पहचान करिए ! अगर  आप पहचान करने में चूक गए तो काँग्रेस के भ्रष्टाचार की दलदल से निकलना  असंभव हो जायेगा आपके लिए ! अभी आपके पास सुनहरा अवसर है ! अपने मताधिकार  का उचित प्रकार से प्रयोग करें ! और मन में संकल्प करें:-&lt;br /&gt;
काँग्रेस  हराओ देश बचाओ ! &lt;br /&gt;
काँग्रेस भगाओ देश बचाओ !!&lt;br /&gt;
काँग्रेस मिटाओ देश बचाओ !!!&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अब आईये इनकी चालबाजियों की चर्चा करते हैं एक एक करके ! &lt;br /&gt;
१. चुनाव आयोग में इन्होने अपने चमचों-बेलचों को भर दिया है ! इसका प्रमाण  देता हूँ आपको ! एम् एस गिल कभी चुनाव आयुक्त हुआ करते थे ! वो आज क्या  हैं ? अब आप स्वयम ही समझ लो ! इनको मिला हुआ मंत्री पद इन्हें काँग्रेस को  चुनाव जिताने के इनाम स्वरुप मिला है ! अगर काँग्रेस फिर से चुनाव जीत गयी  तो आज के चुनाव आयुक्त भी कल किसी मलाईदार पद पर चले जायेंगे यह तय है ! &lt;br /&gt;
२. ई वी एम् में हेरफेर करवाने में ये लोग माहिर हो गए हैं ! वोटिंग मशीन  की खरीददारी करते समय ही यह सारा जुगाड़ कर लिया जाता है ! चुनाव आयुक्त तो  इनका अपना होता ही  है ! काम कितना आसानी से हो जाता है आप सोच लीजिए !  इसीलिए वोट देते समय बहुत सावधानी से वोटिंग मशीन को परखें और गड़बड़ी होने  पर पुलिस के साथ-साथ वहाँ उपस्थित सभी लोगों को भी तत्काल सूचित करें !  ताकि कोई कारगर कदम उठाया जा सके जनता के हितों की रक्षा के लिए !&lt;br /&gt;
३.  हरेक अपराधी की अपराध करने की एक निश्चित मनोवृति होती है ! इसीलिए अपराधी  हमेशा एक ही प्रकार के हथकंडों को थोडा फेर बदल करके अपराध करते समय काम  में लाता है ! अपराध करने की इसी प्रवृति के अध्ययन के आधार पर इन  अपराधियों की जासूसी की जाती है ! अपराध में उपयोग किये जाने वाले हथकंडों  के आधार पर आप समझ जायेंगे कि अमुक अपराध अल कायदा ने किया है या इंडियन  मुजाहिद्दीन ने किया है या फिर काँग्रेस का कारनामा है यह ! आईये अब आपको  मैं काँग्रेस की अपराध करने की मानसिकता का दिग्दर्शन कराऊँ ! &lt;br /&gt;
ए).  काँग्रेस जब भी कोई षड़यंत्र रचती है तो उस दिन सारे अख़बारों में एक ही  प्रकार के बड़े-बड़े सरकारी विज्ञापन छपते हैं ! यथार्थ में यह उन अख़बारों  को विज्ञापन के रूप में अपरोक्ष रूप से सरकारी खजाने से दिया गया रिश्वत  होता है ! &lt;br /&gt;
बी). षड़यंत्र के पहले इसी प्रकार सभी टीवी चैनलों पर  सरकारी मंत्रालयों एवम विभागों के विज्ञापन अचानक अप्रत्याशित रूप से अधिक  नजर आने लगते हैं ! जब भी ऐसी कोई बात घटित होने लगे तो समझ लेना कुछ  गड़बड़ होने वाला है ! इसके बाद काँग्रेस के माध्यम से आने वाला समाचार एक  बड़ा षड़यंत्र होगा !&lt;br /&gt;
सी). यह षड्यंत्रकारी समाचार सभी चैनलों पर एक ही  दिन एक ही समय में दिखाया जाता है ! गजब की परफेक्ट टाइमिंग के साथ  प्रसारण होता है इन षड्यंत्रकारी समाचारों का ! डी). ऐसे सभी समाचारों के  बाद एक कुत्ता भौंकता है पत्रकारों के सामने ! फिर दो-तीन कुत्ते उसके सुर  में सुर मिलाते हैं ! फिर कई सियार उन कुत्तों से जुगलबंदी करने की जद में  हुवां हुवां करने लग जाते हैं ! जब भी ऐसे लक्षण प्रकट हों तो समझ लेना कि  काँग्रेस की शातिर कल्लू कलीम शैतानी मंडली के पिटारे से निकला है यह जिन !&lt;br /&gt;
४. मतदान के बाद मतपेटियों की रक्षा करने वाले कर्मचारियों, पुलिस  अधिकारीयों एवम सम्बंधित अन्य लोगों पर मतगणना के दिन तक पूरी नजर रखें !  &lt;br /&gt;
५. हरेक प्रशासनिक अधिकारी को किसी ना किसी प्रकार से अपने प्रपंच में  फँसाने का पूरा हुनर आता है इन्हें ! इसीलिए वोटों की गिनती के समय तब तक  जश्न मनाने की सोचना भी मत जब तक आप निर्वाचन अधिकारी से निर्वाचित घोषित  किये जाने का पत्र हाथ में ना ले लें ! तब तक मत गणना में बैठा आपका एक भी  कार्यकर्त्ता मतगणना की मेज से हिले नहीं ! अन्यथा आपका विजयी निर्वाचन  पत्र नाम बदलकर किसी चिदंबरम या सिब्बल को दे दिया जायेगा ! और समाचार  माध्यमों में घोषणा करवाने का हुनर तो कोई इनसे सीखे ! &lt;br /&gt;
५. काँग्रेस के  लोग, दूसरे दलों के कार्यकर्ताओं को बहस में उलझाकर अपना उल्लू सीधा करने  में बड़े माहिर होते हैं ! इसीलिए बहस में ना पड़कर इनकी चालों का अध्ययन  करिए ! और बचाव के मार्ग सोचें एवम उचित कदम उठायें !&lt;br /&gt;
६. कॉंग्रेसी लोग  आपका वोट खरीदने के लिए हरेक चुनाव की तरह इस चुनाव में भी आपके पास दारू  की बोतल और पैसा लेकर आएंगे ! कृपया अपना कीमती वोट पैसे के लालच में बेचना  मत ! नहीं तो आने वाली पीढ़ियाँ भी इसी प्रकार गरीबी के बोझ तले दबी रह  जाएगी ! उल्टा दारु-पैसे का लालच देने वाले इन काँग्रेसियों को समाज में  बेनकाब करें ! इनके खिलाफ शोर मचाएं !&lt;br /&gt;
७. आपकी जाति, क्षेत्र और भाषा  का नाम लेकर आपकी भावनाओं को भड़काने का काम करेंगे ये लोग ! परन्तु आप  अपने राज्य और अपने देश को ह्रदय में बिठाकर रखना ! इनकी बातों में नहीं  आना ! हम सभी भारतवंशी एक हैं यह भाव मन में रखना !&lt;br /&gt;
८. गरीबी हटाने के  नारे लगायेंगे ये बड़े ही आकर्षक अंदाज में ! इनकी बातों में बिलकुल नहीं  आना ! जब ६४ साल में इनसे गरीबी दूर नहीं हुई तो अब क्या खाक गरीबी दूर  करेंगे ये लोग ! गलती से भी काँग्रेस चुनाव जीत गयी तो महंगाई और बढ़ेगी !  ग़रीबों के मुँह का निवाला छीनने का इतिहास रहा है काँग्रेस का ! यह याद  रखकर सबको सावधान करना !&lt;br /&gt;
९. आपकी धार्मिक भावनाओं को भड़का कर आपका वोट  आपसे झटकने की कोशिश करेंगे ये कॉंग्रेसी ! परन्तु ध्यान रखना ये आपको  धोखा ही देंगे ! इनका पूरा इतिहास धोखाधड़ी के कारनामों का एक पिटारा है !  सावधान ! सावधान !&lt;br /&gt;
सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं &lt;br /&gt;
हम सबको मिलकर ऐसा कुछ काम करना चाहिए !&lt;br /&gt;
इस इलेक्शन में नहीं तो अगले इलेक्शन में सही &lt;br /&gt;
इस धरती से काँग्रेस का नाम मिटाना चाहिए !!&lt;br /&gt;
!!वन्दे मातरम !!&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span class="caption"&gt;सभी राजनितिक द&lt;span class="text_exposed_show"&gt;लों  के नेताओं, कार्यकर्ताओं, एवम आगामी विधानसभा के दौर से गुजरने की तैयारी  कर रहे पाँचों राज्यों की समादरणीय जनता जनार्दन को मैं सचेत करना चाहता  हूँ कि कृपया इन चुनावों में काँग्रेस की चालबाजियों से आप सभी सावधान हो  जाईये ! इनके कुछ प्रमुख हथियार हैं जो ये हमेशा से उपयोग करते रहे हैं आप  सभी उनको पहचानिए और अपने-अपने राज्य में निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करिए !  कुछ नए तरीके इन लोगों ने इस दशक में अपनाये हैं इनकी भी पहचान करिए ! अगर  आप पहचान करने में चूक गए तो काँग्रेस के भ्रष्टाचार की दलदल से निकलना  असंभव हो जायेगा आपके लिए ! अभी आपके पास सुनहरा अवसर है ! अपने मताधिकार  का उचित प्रकार से प्रयोग करें ! और मन में संकल्प करें:-&lt;br /&gt;
काँग्रेस  हराओ देश बचाओ ! &lt;br /&gt;
काँग्रेस भगाओ देश बचाओ !!&lt;br /&gt;
काँग्रेस मिटाओ देश बचाओ !!!&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अब आईये इनकी चालबाजियों की चर्चा करते हैं एक एक करके ! &lt;br /&gt;
१. चुनाव आयोग में इन्होने अपने चमचों-बेलचों को भर दिया है ! इसका प्रमाण  देता हूँ आपको ! एम् एस गिल कभी चुनाव आयुक्त हुआ करते थे ! वो आज क्या  हैं ? अब आप स्वयम ही समझ लो ! इनको मिला हुआ मंत्री पद इन्हें काँग्रेस को  चुनाव जिताने के इनाम स्वरुप मिला है ! अगर काँग्रेस फिर से चुनाव जीत गयी  तो आज के चुनाव आयुक्त भी कल किसी मलाईदार पद पर चले जायेंगे यह तय है ! &lt;br /&gt;
२. ई वी एम् में हेरफेर करवाने में ये लोग माहिर हो गए हैं ! वोटिंग मशीन  की खरीददारी करते समय ही यह सारा जुगाड़ कर लिया जाता है ! चुनाव आयुक्त तो  इनका अपना होता ही  है ! काम कितना आसानी से हो जाता है आप सोच लीजिए !  इसीलिए वोट देते समय बहुत सावधानी से वोटिंग मशीन को परखें और गड़बड़ी होने  पर पुलिस के साथ-साथ वहाँ उपस्थित सभी लोगों को भी तत्काल सूचित करें !  ताकि कोई कारगर कदम उठाया जा सके जनता के हितों की रक्षा के लिए !&lt;br /&gt;
३.  हरेक अपराधी की अपराध करने की एक निश्चित मनोवृति होती है ! इसीलिए अपराधी  हमेशा एक ही प्रकार के हथकंडों को थोडा फेर बदल करके अपराध करते समय काम  में लाता है ! अपराध करने की इसी प्रवृति के अध्ययन के आधार पर इन  अपराधियों की जासूसी की जाती है ! अपराध में उपयोग किये जाने वाले हथकंडों  के आधार पर आप समझ जायेंगे कि अमुक अपराध अल कायदा ने किया है या इंडियन  मुजाहिद्दीन ने किया है या फिर काँग्रेस का कारनामा है यह ! आईये अब आपको  मैं काँग्रेस की अपराध करने की मानसिकता का दिग्दर्शन कराऊँ ! &lt;br /&gt;
ए).  काँग्रेस जब भी कोई षड़यंत्र रचती है तो उस दिन सारे अख़बारों में एक ही  प्रकार के बड़े-बड़े सरकारी विज्ञापन छपते हैं ! यथार्थ में यह उन अख़बारों  को विज्ञापन के रूप में अपरोक्ष रूप से सरकारी खजाने से दिया गया रिश्वत  होता है ! &lt;br /&gt;
बी). षड़यंत्र के पहले इसी प्रकार सभी टीवी चैनलों पर  सरकारी मंत्रालयों एवम विभागों के विज्ञापन अचानक अप्रत्याशित रूप से अधिक  नजर आने लगते हैं ! जब भी ऐसी कोई बात घटित होने लगे तो समझ लेना कुछ  गड़बड़ होने वाला है ! इसके बाद काँग्रेस के माध्यम से आने वाला समाचार एक  बड़ा षड़यंत्र होगा !&lt;br /&gt;
सी). यह षड्यंत्रकारी समाचार सभी चैनलों पर एक ही  दिन एक ही समय में दिखाया जाता है ! गजब की परफेक्ट टाइमिंग के साथ  प्रसारण होता है इन षड्यंत्रकारी समाचारों का ! डी). ऐसे सभी समाचारों के  बाद एक कुत्ता भौंकता है पत्रकारों के सामने ! फिर दो-तीन कुत्ते उसके सुर  में सुर मिलाते हैं ! फिर कई सियार उन कुत्तों से जुगलबंदी करने की जद में  हुवां हुवां करने लग जाते हैं ! जब भी ऐसे लक्षण प्रकट हों तो समझ लेना कि  काँग्रेस की शातिर कल्लू कलीम शैतानी मंडली के पिटारे से निकला है यह जिन !&lt;br /&gt;
४. मतदान के बाद मतपेटियों की रक्षा करने वाले कर्मचारियों, पुलिस  अधिकारीयों एवम सम्बंधित अन्य लोगों पर मतगणना के दिन तक पूरी नजर रखें !  &lt;br /&gt;
५. हरेक प्रशासनिक अधिकारी को किसी ना किसी प्रकार से अपने प्रपंच में  फँसाने का पूरा हुनर आता है इन्हें ! इसीलिए वोटों की गिनती के समय तब तक  जश्न मनाने की सोचना भी मत जब तक आप निर्वाचन अधिकारी से निर्वाचित घोषित  किये जाने का पत्र हाथ में ना ले लें ! तब तक मत गणना में बैठा आपका एक भी  कार्यकर्त्ता मतगणना की मेज से हिले नहीं ! अन्यथा आपका विजयी निर्वाचन  पत्र नाम बदलकर किसी चिदंबरम या सिब्बल को दे दिया जायेगा ! और समाचार  माध्यमों में घोषणा करवाने का हुनर तो कोई इनसे सीखे ! &lt;br /&gt;
५. काँग्रेस के  लोग, दूसरे दलों के कार्यकर्ताओं को बहस में उलझाकर अपना उल्लू सीधा करने  में बड़े माहिर होते हैं ! इसीलिए बहस में ना पड़कर इनकी चालों का अध्ययन  करिए ! और बचाव के मार्ग सोचें एवम उचित कदम उठायें !&lt;br /&gt;
६. कॉंग्रेसी लोग  आपका वोट खरीदने के लिए हरेक चुनाव की तरह इस चुनाव में भी आपके पास दारू  की बोतल और पैसा लेकर आएंगे ! कृपया अपना कीमती वोट पैसे के लालच में बेचना  मत ! नहीं तो आने वाली पीढ़ियाँ भी इसी प्रकार गरीबी के बोझ तले दबी रह  जाएगी ! उल्टा दारु-पैसे का लालच देने वाले इन काँग्रेसियों को समाज में  बेनकाब करें ! इनके खिलाफ शोर मचाएं !&lt;br /&gt;
७. आपकी जाति, क्षेत्र और भाषा  का नाम लेकर आपकी भावनाओं को भड़काने का काम करेंगे ये लोग ! परन्तु आप  अपने राज्य और अपने देश को ह्रदय में बिठाकर रखना ! इनकी बातों में नहीं  आना ! हम सभी भारतवंशी एक हैं यह भाव मन में रखना !&lt;br /&gt;
८. गरीबी हटाने के  नारे लगायेंगे ये बड़े ही आकर्षक अंदाज में ! इनकी बातों में बिलकुल नहीं  आना ! जब ६४ साल में इनसे गरीबी दूर नहीं हुई तो अब क्या खाक गरीबी दूर  करेंगे ये लोग ! गलती से भी काँग्रेस चुनाव जीत गयी तो महंगाई और बढ़ेगी !  ग़रीबों के मुँह का निवाला छीनने का इतिहास रहा है काँग्रेस का ! यह याद  रखकर सबको सावधान करना !&lt;br /&gt;
९. आपकी धार्मिक भावनाओं को भड़का कर आपका वोट  आपसे झटकने की कोशिश करेंगे ये कॉंग्रेसी ! परन्तु ध्यान रखना ये आपको  धोखा ही देंगे ! इनका पूरा इतिहास धोखाधड़ी के कारनामों का एक पिटारा है !  सावधान ! सावधान !&lt;br /&gt;
सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं &lt;br /&gt;
हम सबको मिलकर ऐसा कुछ काम करना चाहिए !&lt;br /&gt;
इस इलेक्शन में नहीं तो अगले इलेक्शन में सही &lt;br /&gt;
इस धरती से काँग्रेस का नाम मिटाना चाहिए !!&lt;br /&gt;
!!वन्दे मातरम !!&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;
&lt;span class="caption"&gt;&lt;span class="text_exposed_show"&gt;&lt;a href="http://www.facebook.com/photo.php?fbid=284527668254650&amp;amp;set=a.284527654921318.72523.100000922571117&amp;amp;type=1&amp;amp;theater" target="_blank"&gt;मुरारी शरण शुक्ला जी के फेस्बुक  वाल से &lt;/a&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;</description><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total><author>noreply@blogger.com (चंदन भारत )</author></item><item><title>ये समय मूल्यांकन का है!</title><link>http://ekhidhun.blogspot.com/2011/11/blog-post.html</link><category>अपराध</category><category>झोल</category><category>प्रावधान</category><category>भारत</category><category>महान</category><category>मूल्यांकन</category><category>संविधान</category><category>सरकार</category><pubDate>Sat, 5 Nov 2011 09:19:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-3641175540044176469.post-2732374685084485706</guid><description>&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;
&lt;div style="text-align: justify;"&gt;
&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; भारत कि स्वतंत्रता के ६४ साल व्यतीत हो चुके हैं| हम आज भी वहीँ खड़े हैं, और विकास रफ्तार अंग्रेजों से कुछ भी ज्यादा नही है| सिर्फ हम पर शासन करने के लिए अंग्रेजी नामों कि जगह हिंदी उर्दू से शुरू होने वाले नामों ने ले लिया है| स्वतंत्रता के शुरुआत में हि ये तस्वीरें दिखने लगी थी कि आगे कि तस्वीर कैसी होगी, संविधान में इतने उलझे उलझे प्रावधान जो आज तक घोटालेबाजों, अलगाववादियों, धोखेबाजों, और गद्दारों को उचित दंड नही दे पाए, उलटे शिकायतकर्ता, और आम जनता इन प्रावधानों के बनाए जाल में यदा कदा फंसती रहती हो तो उसे हम क्या कहें? इस दोष को दोष नही मानना सच्चाई से मुंह छुपाना होगा|&lt;/div&gt;
&lt;div style="text-align: justify;"&gt;
&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div style="text-align: justify;"&gt;
&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;जैसा कि देश में देखने को स्वतंत्रता के समय से देखने को मिलता आया है ये नेहरु, पटेल के जमाने से चला आ रहा है, वो ये कि पहले अपराध होता है, चोरी और लुट कि घटना नही देश से, समाज से गद्दारी वाली घटना, फिर कोई देशभक्त इसकी शिकायत करता है, कुछ दिनों तक जब तक वो देशभक्त शिकायत करता नही है तब तक उसके जोश का ठिकाना नही रहता, कि उसने एक नेक काम किया है, गद्दार को पकड़ा| पर असल फजीहत बेचारे कि शिकायत करते वक्त और उसके बाद शुरू होती है, जैसा कि हम सभी आज के परिदृश्य में देख रहे हैं और स्वतंत्रता के समय में भी ऐसा हि था|&lt;/div&gt;
&lt;div style="text-align: justify;"&gt;
&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div style="text-align: justify;"&gt;
&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; इस बार कि हि घटना देखिए... पहले अनेकानेक घोटाले हुए, फिर देशभक्त लोगों ने आवाज उठाई, वो भी जनता ने सरकार के सामने सरकार ने उससे इनकार किया, फिर कुछ दिन टालते मटोलते रहे, जैसे ये उन्हें चोर साबित कर देता, या फिर इनका धर्म है जनता कि बातों पे नही ध्यान देना, या फिर इन्हें चोर कहा जा रहा हो, या फिर सरकारों का नैतिक दायित्व है इन तरह कि बातों को दबाना| खैर जैसे तैसे इधर आवाज उठती रही, घोटाले और भी तेज होने लगे, घोटालेबाज भी हार मानने को तैयार नही, अब तीन तरह के लोग हो गए... एक जो अपराध करके खुद को श्रेष्ठ सिद्ध कर रहा था| दुसरा शोर मचा रहा था इन चोरी कि घटना पे| और सरकार जो इन मुफ्त के चौकीदारों कि बात सुनना और उस पर ध्यान देना हि नही चाह रही थी| फिर भी उस शोर में इतने लोग शामिल हुए कि आखिर में सरकार को जांच करवानी पडी| फिर भी कभी कभी ये बात आती हि रही कि कैग कि रिपोर्ट हि गलत है, तो ये भ्रष्टाचार कर के हमने देश का भी गौरव बढाया है, तो कभी भ्रष्टाचार करके आम जनता के हाँथ में मोबाइल थमाया है| खैर बाद में इन्हें कैद कि सजा मिली पर इन घटनाओं के दौरान और आज कल जो न्यायालय में हो रहा है, और उनके बचाव पक्ष के वकील जो पैतरे इस्तेमाल कर रहे हैं, वो यह संकेत देते हैं कि इन सभी चीजों से निपटने में हमारा संविधान पूर्ण रूप से सक्षम नही है| और अगर सब धाराएं हैं भी तो उनके बचने के लिए झोल भी इसी संविधान में हैं| और इस तरह से इन अपराधियों को बचा कर हम आम जनता कि भावना से खिलवाड कर रहे हैं|&amp;nbsp;&lt;/div&gt;
&lt;div style="text-align: justify;"&gt;
&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div style="text-align: justify;"&gt;
&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; इन सम्वैधानिक झोलों के कारण अब न्याय और अन्याय कुछ रह हि नही गया है| सब इस पर निर्भर करने लगा है कि आप संविधान के किस झोल का इस्तेमाल किस तरह से करते हैं जिससे आप &amp;nbsp;सही होकर गलत और गलत होकर सही हो सकते हैं | आज स्वतंत्रता के ६४ साल व्यतीत हो जाने के बाद भी हमने पाने इस संविधान को फुलप्रूफ नही किया है| इसी संविधान के कायदे कानून के अनुसार गिरफ्तार आदमी, इसी सम्विधान के झोल का उपयोग कर निकल जाता है| ये सब सिर्फ छोटे मोटे कामों में किया जाता हो ऐसी बात नही है, अभी हाल में राजीव गाँधी के हत्यारों कि सजा पर रोक, और तमिलनाडु कि विधानसभा का प्रस्ताव, फिर अफजल गुरु के माफ़ी के लिए कैम्प्गेन और जम्मू कश्मीर विधानसभा का प्रस्ताव| कुछ लोगों कि मांग पर सेना के अधिकारों में कटौती, धार्मिक आधार पर बहुसंख्यक और अल्पसंख्यकों का नया दर्जा और इससे आम जनता में बढता वैमन्स्व, सरकार का मूल्यों पर नियंत्रण करने कि जगह बहाने बनाना, आरक्षण और अन्य दूसरे झोलों के सहारे जनता और धार्मिक संगठनों में विवाद करवाना| धर्मनिरपेक्ष देश रहते हुए भी धर्म को संरक्षण प्रदान करना या फिर धर्मान्तरण के खिलाफ कानून नही बनाना| राष्ट्रवादी आंदोलनकारियों से समझौते करना| ये सभी घटनाएं बतलाती है कि भारत में प्रजातंत्र कि स्थापना जिन उद्देश्यों के लिए कि गयी थी| उन उद्देश्यों और लक्ष्यों को प्राप्त करना तो दूर हम उन्हें पानी कि दिशा में भी आगे नही बढ़ पा रहे हैं, और हम ऐसे ऐसे चीजों में उलझ कर रह गए हैं, जो हमें ना तो आगे बढने दे रहा है और ना ऐसा करके हम किसी को भी आगे बढने का मौका दे पायेंगे|&lt;/div&gt;
&lt;div style="text-align: justify;"&gt;
&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div style="text-align: justify;"&gt;
&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;किसी भी व्यवस्था को जांचने देखने और परखने के लिए ६४ साल कम मायने नही रखते| हमारे संविधान के बारे में यह बतलाया जाता है कि इसे कई देशों के सम्विधान से लेकर बनाया गया है और इस तरह हमारे सम्विधान में सभी वो गुण हैं जो दुनिया के सर्वश्रेष्ठ संविधान में होने चाहिए| पर वास्तविकता सीधा इसके उलटी है जो कि हमे आये दिनों देखने को मिलता रहता है जैसे, मुकदमे इतने लम्बे खींचते चले गए हैं कि दादा परदादा का मुकदमा पोते लड़ने लगे हैं, हर कोई गलती करने वाला अपराध करने वाला गर्वित रहता है और भुक्तभोगी, शिकायतकर्ता या देश, समाज के शुभचिंतक को अपराधी को अपराधी सिद्ध करने के लिए नाकों चने चबाना पडता है, फिर भी आशंका बनी हि रहती है सम्विधान में मौजूद झोलों के कारण|&amp;nbsp;&lt;/div&gt;
&lt;div style="text-align: justify;"&gt;
&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div style="text-align: justify;"&gt;
&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;राष्ट्र कि अपनी एक पहचान होती है, अपनी गरिमा और गौरव होता है| ये दूर दूर तक कायम रहता है चाहे उसकी महानता से हो या उसकी शक्ति के कारण हो| मानव संसाधन के धनी और देशप्रेमियों कि अधिकता के कारण भारत कि सेना तो अच्छी स्थिति में है पर अरुंधती, गिलानी, मीरवाइज, अग्निवेश, प्रशांत भूषण, जैसे लोग भारत के टुकड़े करने कि बात कह देते हैं और बचाव के लिए भी सम्विधान के हि झोल का उपयोग कर लेते हैं, भारत के महान लोगों द्वारा संकलित निर्मित ये संविधान आज भारत कि महानता पर प्रश्नचिंह लगा रहा है|&lt;/div&gt;
&lt;div style="text-align: justify;"&gt;
&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div style="text-align: justify;"&gt;
&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; संविधान गलत या सही है, ये बात अलग है पर वो ६४ साल से इसी स्थति में जिससे कि भारत कि महानता खतरे में है| बहुत हि शर्म कि बात है| हमें इसका अविलम्ब मूल्यांकन करना चाहिए और इसमें उत्पन्न झोलों को दूर करना चाहिए|&amp;nbsp;&lt;/div&gt;
&lt;div style="text-align: justify;"&gt;
&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div style="text-align: justify;"&gt;
&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;/div&gt;</description><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">11</thr:total><author>noreply@blogger.com (चंदन भारत )</author></item><item><title>मुट्ठी भर लोगों के संरक्षण में लगे लोग</title><link>http://ekhidhun.blogspot.com/2011/10/blog-post_22.html</link><category>उद्योगपति</category><category>नियम</category><category>नीति</category><category>पेड न्यूज</category><category>बहुमत</category><category>मुट्ठीभर</category><category>विकास दर</category><category>संरक्षण</category><pubDate>Sat, 22 Oct 2011 15:36:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-3641175540044176469.post-7761613629924601421</guid><description>&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;भारत में जनतंत्र है, इसे लोकतंत्र भी कहते हैं| &amp;nbsp;लोकतंत्र में लोगों के मन से सरकार चुनी जाती है जो कि एक नियत समयावधि तक सरकार चलाती है| &amp;nbsp;और जनता के हित के लिए नियमों को बनाना, सुधारना, जोड़ना, तोडना इत्यादि काम उसके जिम्मे में आता है| &amp;nbsp;जनता इन नियमों के पक्ष और विपक्ष में हो सकती है, इन विवादों से बचने के लिए, बहुमत का सहारा लिया जाता है, जिससे कि लोगों का ज्यादा मत किधर है ये जाना जा सके और सही नियम कायदे बनाए जा सकें जिससे कि देश कि जनता, एकता और अखंडता कि रक्षा हो सके|&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;पर जब हम देश कि संसद द्वारा बने कुछ नियमों और कानूनों पर नजर डालते हैं जैसे कि &amp;nbsp;पेड न्यूज, समलैंगिकों के लिए बने कानून, लिव इन रिलेशन, और नया आने वाले &amp;nbsp;कानून कम्युनल एक्ट कि ओर देखते हैं तो ऐसा लगता है कि इन सबों में तो ना तो जनता का बहुमत रहा है, और ना हि हो सकता है, क्यूंकि भारत कि जनता, कभी भी पेड न्यूज के पक्ष में नही थी| और ना हि समलैंगिकों के लिए बने कानून में, और ना तो लिव इन रिलेशनशिप के पक्ष में| और आने वाले प्रस्तावित बिल के पक्ष में हि जनता है| &amp;nbsp;२००१ कि जनगणना के अनुसार भारत में ८० प्रतिशत जनसंख्या हिंदुओं( सनातन धर्मियों) कि है| और सनातन परम्पराओं और मान्यताओं से उपरोक्त सभी मेल नही खाते हैं| उपरोक्त कानूनों को पास करवाने के लिए जनता के किसी भी संगठन ने कभी धरना और कोई मार्च नही किया, जिससे कि ये सिद्ध हो सके कि जनता कि इच्छा से ये नियम बने हैं, और अगर हुए भी हों तो वो इतने नही जिन्हें कि बहुमत मान लिया जाय|&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;इन सभी के लिए कानून बनाने से एक बात तो साफ़ हो चुकी है कि मीडिया, समलैंगिक, स्वछन्द एय्याशी करने वाले लिव इन रिलेशनशिप में रहने वालों और अहिन्दू धर्मियों के लिए भारत एक संरक्षण स्थल या चिड़ियाघर बन गया है| जहां पे इनकी रक्षा कि जायेगी, और इन्हें होने वाले हर कष्ट के लिए हिंदुओं(सनातन धर्मियों) को दंडित किया जाएगा| जो कि प्रस्तावित कम्युनल बिल में स्पष्ट है|&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; भारत में भी यही प्रक्रिया है| विभिन्न धर्म सम्प्रदायों के लोगों के रहने के कारण भारत को धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र घोषित किया गया है| &amp;nbsp;धर्मनिरपेक्षता का अर्थ जो इस प्रकार है-&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;&amp;nbsp;&lt;i&gt;&amp;nbsp;"&lt;span class="Apple-style-span" style="background-color: white; line-height: 26px;"&gt;&amp;nbsp;उच्चतम न्यायालय का फैसला भी यही कहता है. इस फैसले के अनुसार, धर्मनिरपेक्षता का अर्थ है कि राज्य का कोई धर्म नहीं होगा, राज्य सभी धर्मों से दूरी बनाए रखेगा, राज्य किसी धर्म को बढ़ावा नहीं देगा और न ही राज्य की कोई धार्मिक पहचान होगी|"&lt;/span&gt;&lt;/i&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="background-color: white; line-height: 26px;"&gt;&lt;i&gt;&amp;nbsp;&lt;/i&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;a href="http://socialjustice.nic.in/pdf/tab18.pdf"&gt;2001 कि जनगणना के अनुसार&lt;/a&gt;&amp;nbsp;सभी धर्म के मानने वालों कि प्रतिशतता इस प्रकार है.. हिंदू &amp;nbsp;मुस्लिम ईसाई, सिक्ख, जैन, इत्यादि| इन के आंकड़े भी धीरे धीरे बदलते रहे हैं&amp;nbsp;&lt;a href="http://socialjustice.nic.in/pdf/tab18.pdf"&gt;१९६१ से लेकर २००१ तक कि जनसंख्या में&lt;/a&gt;&amp;nbsp;इनमें से कुछ कि प्रतिशतता बढती तो कुछ कि घटती रही है|&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;हालाँकि धर्मनिरपेक्ष सरकारों को इन संख्याओं, प्रतिशतों और सांख्यिकी से नियमों, कायदों को बनाने और सुधारने में कोई फर्क नही पडना चाहिए क्यूंकि, सरकार के केन्द्र में धर्म तो है हि नही| और अगर पडता है तो भी बहुमत के पक्ष में सरकारों को फैसला करना चाहिए जो कि अब तक भारत में होता नही देखा गया| भारत में कायदे सिर्फ और सिर्फ संरक्षण के लिए बनाए जाते हैं, जैसे कि हिंदुओं को छोड़ कर सभी धर्मवाले, मेमने कि प्रजाति के हैं और हिंदू सिंह|&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;हर देश कि अपनी परम्परा, इतिहास, मान्यताएं, और मौलिक सिद्धांत होते हैं| जिन पर चलकर और जिनकी रक्षा करते हुए राष्ट्र उन्नति करता है, और दूसरे राष्ट्रों के लिए आदर्श बनता है| भारत के भी अपने आदर्श, मौलिक सिद्धांत और मान्यताएं हैं| जिन पर चलकर ये भी दूसरे राष्ट्रों के लिए आदर्श बन सकता है|&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;पर इन दिनों, भारत अपने नैतिक मूल्यों, आदशों और सिद्धांतों के क्षरण के सिद्धांत पर अग्रसर है| ऐसा भी नही है कि भारत में विचारकों, विद्वानों, कि कमी है| आज भी भारत के लोग देश और विदेशों में अपनी योग्यता, विद्वता, निपुणता और वाक्पटुता का लोहा मनवा रहे हैं| देश आज उनके सहारे चल रहा है, जो कि उस योग्य हि नही हैं| आज से कुछ समय पहले तक जब आरोपी और अपराधियों के लिए कानून में आना नही मना था... तब देश हत्यारों के विचारों से चल रहा था| आज पुर्नरूपेण वैसा नही कहा जा सकता| परन्तु, आज भी कुछ ना कुछ उन्ही के इशारे पर देश को चलाया जाता है|&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; देश कि अधिकांश जनता के लिए कोई नीतियां नही, कुछ उद्योगपतियों के लिए नीतियां बनाई जाती है| विकास दर के आधार पर आर्थिक नीतियां बनती हैं| अधिकांश जनसंख्या के जीवन स्तर को सुधारने और उनके भूख प्यास का जिम्मा जहां सरकार को लेना चाहिए था| वहीँ वो जिम्मेवारी विकास दर को दे दिया गया है| और लोग इन विकास दरों के माध्यम से मुट्ठीभर उद्योगपतियों के सहारे हैं|&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; आज देश के नियम मीडिया को पेड न्यूज प्रदान करते हैं, समलैंगिकों और लिव इन रिलेशनशिप वालों का संरक्षण करते हैं| मानवाधिकार अफजल और कसाब कि रक्षा करते हैं, और कश्मीर के आतंकियों को पेंशन देते हैं| नीतियां विकास दर बढती हैं, विकास दर मंहगाई &amp;nbsp;बढाती हैं, और इन सबके लिए उद्योगपतियों के हित में आर्थिक नीति बनाना आवश्यक है| और जब उद्योगपतियों &amp;nbsp;के हित में नीतियां बनेंगी तो गरीबो कि कौन सुनेगा|&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; ये चंद मुट्ठीभर लोग देश के नीतियों और नियमों का फायदा उठा रहे हैं, बाकी हम सारी जनता इनके संरक्षण में लगे हैं|&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;</description><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">8</thr:total><author>noreply@blogger.com (चंदन भारत )</author></item><item><title>शक्ति-पूजा का विस्मरण – शंकर शरण</title><link>http://ekhidhun.blogspot.com/2011/10/blog-post.html</link><category>क्रांति</category><category>दुर्गा</category><category>बंदर</category><category>भवानी</category><category>राक्षस</category><category>शंकर शरण</category><category>शक्तिपूजा</category><category>सरस्वती</category><category>हिंदू</category><pubDate>Fri, 21 Oct 2011 18:40:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-3641175540044176469.post-8780794902042915333</guid><description>&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="background-color: white; font-family: Georgia, Georgia; font-size: 15px; line-height: 25px;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: red; font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; कश्मीर के विस्थापित डॉक्टर कवि कुन्दनलाल चौधरी ने अपने कविता संग्रह ‘ऑफ गॉड, मेन एंड मिलिटेंट्स’ की भूमिका में प्रश्न रखा थाः “क्या हमारे देवताओं ने हमें निराश किया या हम ने अपने देवताओं को?” इसे उन्होंने कश्मीरी पंडितों में चल रहे मंथन के रूप में रखा था। सच पूछें, तो यह प्रश्न संपूर्ण भारत के लिए है। इस का एक ही उत्तर है कि हम ने देवताओं को निराश किया। उन्होंने तो हरेक देवी-देवता को, यहाँ तक कि विद्या की देवी सरस्वती को भी शस्त्र-सज्जित रखा था। और हमने शक्ति की देवी को भी मिट्टी की मूरत में बदल कर रख दिया। चीख-चीख कर रतजगा करना शेराँ वाली देवी की पूजा नहीं। पूजा है किसी संकल्प के साथ शक्ति-आराधन करना। सम्मान से जीने के लिए मृत्यु का वरण करने के लिए भी तत्पर होना। किसी तरह तरह चमड़ी बचाकर नहीं, बल्कि दुष्टता की आँखों में आँखें डालकर जीने की रीति बनाना। यही वह शक्ति-पूजा है जिसे भारत के लोग लंबे समय से विस्मृत कर चुके हैं।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: red; font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: red; font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;श्रीअरविंद ने अपनी रचना भवानी मंदिर (1905) में क्लासिक स्पष्टता से यह कहा था। उनकी बात हमारे लिए नित्य-स्मरणीय हैः “हमने शक्ति को छोड़ दिया है और इसलिए शक्ति ने भी हमें छोड़ दिया है। … कितने प्रयास किए जा चुके हैं। कितने धार्मिक, सामाजिक और राजनैतिक आंदोलन शुरू किए जा चुके हैं। लेकिन सबका एक ही परिणाम रहा या होने को है। थोड़ी देर के लिए वे चमक उठते हैं, फिर प्रेरणा मंद पड़ जाती है, आग बुझ जाती है और अगर वे बचे भी रहें तो खाली सीपियों या छिलकों के रूप में रहते हैं, जिन में से ब्रह्म निकल गया है।”&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: red; font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: red; font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;शक्ति की कमी के कारण ही हमें विदेशियों की पराधीनता में रहना पड़ा था। अंग्रेजों ने सन् 1857 के अनुभव के बाद सचेत रूप से भारत को निरस्त्र किया। गहराई से अध्ययन करके वे इस निष्कर्ष पर पहुँचे थे, कि इसके बिना उनका शासन असुरक्षित रहेगा। तब भारतीयों को निःशस्त्र करने वाला ‘आर्म्स एक्ट’ (1878) बनाया। गाँधीजी ने अपनी पुस्तक ‘हिन्द स्वराज’ में गलत बात लिखी कि अंग्रेजों ने हमें हथियार बल से गुलाम नहीं बना रखा है। वास्तविकता अंग्रेज जानते थे। कांग्रेस भी जानती थी। इसीलिए वह सालाना अपने अधिवेशनों में उस एक्ट को हटाने की माँग रखती थी। कांग्रेस ने सन् 1930 के ऐतिहासिक लाहौर अधिवेशन में भी प्रस्ताव पास करके कहा था कि अंग्रेजों ने “हमें निःशस्त्र करके हमें नपुंसक बनाया है।”&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: red; font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: red; font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;मगर इसी कांग्रेस ने सत्ता पाने के बाद देश को उसी नपुंसकता में रहने दिया! यदि स्वतंत्र होते ही अंग्रेजों का थोपा हुआ आर्म्स एक्ट खत्म कर दिया गया होता, तो भारत का इतिहास कुछ और होता। हर सभ्यता में आत्मरक्षा के लिए अस्त्र-शस्त्र रखना प्रत्येक व्यक्ति का जन्मसिद्ध अधिकार रहा है। इसे यहाँ अंग्रेजों ने अपना राज बचाने को प्रतिबंधित किया, और कांग्रेस के शब्दों में हमें ‘नपुंसक’ बनाया! हम सामूहिक रूप में निर्बल, आत्मसम्मान विहीन हो गए। पीढ़ियों से ऐसे रहते अब यह हमारी नियति बन गयी है।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: red; font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: red; font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;आज हर हिन्दू को घर और स्कूल, सब जगह यही सीख मिलती है। कि पढ़ो-लिखो, लड़ाई-झगड़े न करो। यदि कोई झगड़ा हो रहा हो, तो आँखें फेर लो। किसी दुर्बल बच्चे को कोई उद्दंड सताता हो, तो बीच में न पड़ो। तुम्हें भी कोई अपमानित करे, तो चुप रहो। क्योंकि तुम अच्छे बच्चे हो, जिसे पढ़-लिख कर डॉक्टर, इंजीनियर या व्यवसायी बनना है। इसलिए बदमाश लड़कों से मत उलझना। समय नष्ट होगा। इस प्रकार, किताबी जानकारी और सामाजिक कायरता का पाठ बचपन से ही सिखाया जाता है। बच्चे दुर्गा-पूजा करके भी नहीं करते! उन्हें कभी नहीं बताया जाता कि दैवी अवतारों तक को अस्त्र-शस्त्र की शिक्षा लेनी पड़ती थी। क्योंकि दुष्टों से रक्षा के लिए शक्ति-संधान अनिवार्य मानवीय स्थिति है। अपरिहार्य कर्तव्य है।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: red; font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: red; font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;वर्तमान भारत में हिन्दू बच्चों को वास्तविक शक्ति-पूजा से प्लेग की तरह बचा कर रखा जाता है! फिर क्या होता है, यह पंजाब, बंगाल और कश्मीर के हश्र से देख सकते हैं। सत्तर साल पहले इन प्रदेशों में विद्वता, वकालत, अफसरी, बैंकिंग, पत्रकारिता, डॉक्टरी, इंजीनियरी, आदि तमाम सम्मानित पदों पर प्रायः हिन्दू ही आसीन थे। फिर एक दिन आया जब कुछ बदमाश बच्चों ने इन्हें सामूहिक रूप से मार, लताड़ और कान पकड़ कर बाहर भगा दिया। अन्य अत्याचारों की कथा इतनी लज्जाजनक है कि हिन्दुओं से भरा हुआ मीडिया उसे प्रकाशित करने में भी अच्छे बच्चों सा व्यवहार करता है। या गाँधीजी का बंदर बन जाता है।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: red; font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: red; font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;तब अपने ही देश में अपमानित, बलात्कृत, विस्थापित, एकाकी हिन्दू को समझ नहीं आता कि कहाँ गड़बड़ी हुई? उस ने तो किसी का बुरा नहीं चाहा। उसने तो गाँधी की सीख मानकर दुष्टों, पापियों के प्रति भी प्रेम दिखाया। कुछ विशेष प्रकार के दगाबाजों, हत्यारों को भी ‘भाई’ समझा, जैसे गाँधीजी करते थे। तब क्या हुआ, कि उसे न दुनिया के मंच पर न्याय मिलता है, न अपने देश में? उलटे, दुष्ट दंबग बच्चे ही अदबो-इज्जत पाते हैं। प्रश्न मन में उठता है, किन्तु अच्छे बच्चे की तरह वह इस प्रश्न को भी खुल कर सामने नहीं रखता। उसे आभास है कि इससे बिगड़ैल बच्चे नाराज हो सकते हैं। कि ऐसा सवाल ही क्यों रखा? तब वह मन ही मन प्रार्थना करता हुआ किसी अवतार की प्रतीक्षा करने लगता है।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: red; font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: red; font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;हिन्दू मन की यह पूरी प्रक्रिया बिगड़ैल बच्चे जानते हैं। यशपाल की एक कहानी हैः फूलो का कुर्ता। फूलो पाँच वर्ष की एक अबोध बालिका है। उसके शरीर पर एक मात्र वस्त्र उसकी फ्रॉक है। किसी प्रसंग में लज्जा बचाने के लिए वह वही फ्रॉक उठाकर अपनी आँख ढँक लेती है। कहना चाहिए कि दुनिया के सामने भारत अपनी लज्जा उसी बालिका समान ढँकता है, जब वह खूँखार आतंकवादियों को पकड़ के भी सजा नहीं दे पाता। बल्कि उन्हें आदर पूर्वक घर पहुँचा आता है! जब वह पड़ोसी बिगड़ैल देशों के हाथों निरंतर अपमानित होता है, और उन्हीं के नेताओं के सामने भारतीय कर्णधार हँसते फोटो खिंचाते हैं। इस तरह ‘ऑल इज वेल’ की भंगिमा अपना कर लज्जा छिपाते हैं। स्वयं देश के अंदर पूरी हिन्दू जनता वही क्रम दुहराती है, जब कश्मीरी मुसलमान ठसक से हिंन्दुओं को मार भगाते हैं, और उलटे नई दिल्ली पर शिकायत पर शिकायत ठोकते हैं। फिर भारत से ही से अरबों रूपए सालाना फीस वसूल कर दुनिया को यह बताते हैं कि वे भारत से अलग और ऊँची चीज हैं। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर ‘आजाद कश्मीर’ है, यह बयान श्रीनगर की गद्दी पर बैठे कश्मीरी मुसलमान देते है!&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: red; font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: red; font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;दूसरे प्रदेशों में भी कई मुस्लिम नेता खुले आम संविधान को अँगूठा दिखाते हैं, उग्रवादियों, दंगाइयों की सामाजिक, कानूनी मदद करते हैं। जिस किसी को मार डालने के आह्वान करते हैं। जब चाहे विदेशी मुद्दों पर उपद्रव करते हैं, पड़ोसी हिन्दुओं को सताते-मारते हैं। फिर भी हर दल के हिन्दू नेता उनकी चौकठ पर नाक रगड़ते नजर आते हैं। वे हर हिन्दू नेता को इस्लामी टोपी पहनने को विवश करते हैं, मगर क्या मजाल कभी खुद भी रामनामी ओढ़ लें! उनके रोजे इफ्तार में हर हिन्दू नेता की हाजिरी जरूरी है, मगर वही मुस्लिम रहनुमा कभी होली, दीवाली मनाते नहीं देखे जा सकते। यह एकतरफा सदभावना और एकतरफा सेक्यूलरिज्म भी बालिका फूलो की तरह हिन्दू भारत की लज्जा छिपाती है।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: red; font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: red; font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;यह पूरी स्थिति देश के अंदर और बाहर वाले बिगड़ैल बखूबी जानते हैं। जबकि अच्छा बच्चा समझता है कि उसने चुप रहकर, या मीठी बातें दुहराकर, एवं उद्योग, व्यापार, कम्प्यूटर और सिनेमा में पदक हासिल कर दुनिया के सामने अपनी लज्जा बचा ली है। उसे लगता है किसी ने नहीं देखा कि वह अपने ही परिवार, अपने ही स्वधर्मी देशवासी को गुंडों, उग्रवादियों के हाथों अपमानित, उत्पीड़ित होने से नहीं बचा पाता। सामूहिक और व्यक्तिगत दोनों रूपों में। अपनी मातृभूमि का अतिक्रमण नहीं रोक पाता। उसकी सारी कार्यकुशलता और अच्छा बच्चापन इस दुःसह वेदना का उपाय नहीं जानता। यह लज्जा छिपती नहीं, बल्कि और उजागर होती है, जब सेक्यूलर बच्चे मौन रखकर हर बात आयी-गयी करने की दयनीय कोशिश करते हैं। डॉ. भीमराव अंबेदकर की ऐतिहासिक पुस्तक ‘पाकिस्तान या भारत का विभाजन’ (1940) में अच्छे और बिगड़ैल बच्चे, दोनों की संपूर्ण मनःस्थिति और परस्पर नीति अच्छी तरह प्रकाशित है।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: red; font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;मगर अच्छे बच्चे ऐसी पुस्तकों से भी बचते हैं। वे केवल गाँधी की मनोहर पोथी ‘हिन्द स्वराज’ पढ़ते हैं, जिसमें लिखा है कि आत्मबल तोपबल से भी बड़ी चीज है। इसलिए वे हर कट्टे और तमंचे के सामने कोई मंत्र पढ़ते हुए आत्मबल दिखाने लगते हैं। फिर कोई सुफल न पाकर कलियुग को रोते हैं। स्वयं को कभी दोष नहीं देते, कि अच्छे बच्चे की उन की समझ ही गलत है। कि उन्होंने अच्छे बच्चे को दब्बू बच्चे का पर्याय बना दिया, जिस से बिगड़ैल और शह पाते हैं। कि यह प्रकिया सवा सौ साल से अहर्निश चल रही है। शक्ति-पूजा भुलाई जा चुकी है। यही अनेक समस्याओं की जड़ है।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: red; font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: red; font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;आज नहीं कल, यह शिक्षा लेनी पड़ेगी कि अच्छे बच्चे को बलवान और चरित्रवान भी होना चाहिए। कि आत्मरक्षा के लिए परमुखापेक्षी होना गलत है। मामूली धौंस-पट्टी या बदमाशों तक से निपटने हेतु सदैव पुलिस प्रशासन के भरोसे रहना न व्यवहारिक, न सम्मानजनक, न शास्त्रीय परंपरा है। अपमानित जीना मरने से बदतर है। दुष्टता सहना या आँखें चुराना दुष्टता को खुला प्रोत्साहन है। रामायण और महाभारत ही नहीं, यूरोपीय चिंतन में भी यही सीख है। हाल तक यूरोप में द्वंद्व-युद्ध की परंपरा थी। इसमें किसी से अपमानित होने पर हर व्यक्ति से आशा की जाती थी कि वह उसे द्वंद्व की चुनौती देगा। चाहे उसमें उसकी मृत्यु ही क्यों न हो जाए।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: red; font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: red; font-family: Georgia, 'Times New Roman', serif;"&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;इसलिए, कहने को प्रत्येक शरद ऋतु में करोड़ों हिन्दू दुर्गा-पूजा मनाते है। इसे शक्ति-पूजन भी कहते हैं। किन्तु यह वह शक्ति-पूजा नहीं, जो स्वयं भगवान राम को राक्षसों पर विजय पाने के लिए आवश्यक प्रतीत हुई थी। जिसे कवि निराला ने अपनी अदभुत रचना ‘राम की शक्तिपूजा’ में पूर्णतः जीवन्त कर दिया है। आइए, उसे एक बार ध्यान से हृदयंगम करें!&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;लेखक परिचय:-&lt;br /&gt;
&lt;span class="Apple-style-span" style="background-color: #f0f0f0; color: blue; font-family: Arial, Arial; font-size: 12px; line-height: 18px;"&gt;मूलत: जमालपुर, बिहार के रहनेवाले। डॉक्टरेट तक की शिक्षा। राष्‍ट्रीय समाचार पत्रों में समसामयिक मुद्दों पर अग्रलेख प्रकाशित होते रहते हैं। 'मार्क्सवाद और भारतीय इतिहास लेखन' जैसी गंभीर पुस्‍तक लिखकर बौद्धिक जगत में हलचल मचाने वाले शंकर जी की लगभग दर्जन भर पुस्‍तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।&lt;/span&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="background-color: white; font-family: Georgia, Georgia; font-size: 15px; line-height: 25px;"&gt;&lt;a href="http://www.pravakta.com/archives/31475"&gt;प्रवक्ता.कॉम से साभार &lt;/a&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;</description><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total><author>noreply@blogger.com (चंदन भारत )</author></item></channel></rss>