<?xml version="1.0" encoding="UTF-8" standalone="no"?><rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:blogger="http://schemas.google.com/blogger/2008" xmlns:gd="http://schemas.google.com/g/2005" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:itunes="http://www.itunes.com/dtds/podcast-1.0.dtd" xmlns:openSearch="http://a9.com/-/spec/opensearchrss/1.0/" xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0" version="2.0"><channel><atom:id>tag:blogger.com,1999:blog-471899805446162401</atom:id><lastBuildDate>Thu, 19 Dec 2024 03:25:26 +0000</lastBuildDate><title>May I Help You</title><description>अगर आप हैं कंप्यूटर से परेशान तो मेरे पास है आपके परेशानी का समाधान.................................
I try to convey you regarding the IT related do and don'ts which will help you a lot.....</description><link>http://rradhikari.blogspot.com/</link><managingEditor>noreply@blogger.com (Unknown)</managingEditor><generator>Blogger</generator><openSearch:totalResults>76</openSearch:totalResults><openSearch:startIndex>1</openSearch:startIndex><openSearch:itemsPerPage>25</openSearch:itemsPerPage><language>en-us</language><itunes:explicit>clean</itunes:explicit><copyright>rradhikari@4U</copyright><itunes:image href="http://bp1.blogger.com/_W2UmOgNN7iI/R9eKpGr4gwI/AAAAAAAAABs/Lcl7ewl7w1w/S226/catch+me.jpg"/><itunes:keywords>कंप्यूटर</itunes:keywords><itunes:summary>अगर आप हैं कंप्यूटर से परेशान तो मेरे पास है आपके परेशानी का समाधान..........</itunes:summary><itunes:subtitle>May I Help You </itunes:subtitle><itunes:category text="Technology"><itunes:category text="Gadgets"/></itunes:category><itunes:author>Bapi</itunes:author><itunes:owner><itunes:email>rradhikari@gmail.com</itunes:email><itunes:name>Bapi</itunes:name></itunes:owner><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-471899805446162401.post-6480807466311823002</guid><pubDate>Fri, 19 Mar 2010 08:28:00 +0000</pubDate><atom:updated>2010-03-19T14:00:41.344+05:30</atom:updated><title>गूगल टीवी....</title><description>&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgaC4H-jGelE3sfdGCRBAofMafPAyzLQGAkbDUfeozYBhWsC0ERqfosU6u10G837G46DwchVxWumQkMpep4jO-heuDFOYIon3b647OscIDBN_LrEVD80TStZ-TdYphaYZbGyjvhYMU0rDM/s1600-h/Google+TV.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5450259450304976658" style="FLOAT: left; MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 200px; CURSOR: hand; HEIGHT: 134px" alt="" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgaC4H-jGelE3sfdGCRBAofMafPAyzLQGAkbDUfeozYBhWsC0ERqfosU6u10G837G46DwchVxWumQkMpep4jO-heuDFOYIon3b647OscIDBN_LrEVD80TStZ-TdYphaYZbGyjvhYMU0rDM/s200/Google+TV.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;p align="justify"&gt;गूगल ने टीवी के बाजार में भी उतरने की तैयारी कर ली है. इसके लिए गूगल ने कई बड़ी कंपनियों यथा- इंटेल, सोनी, लॉजीटेक आदि के साथ गलबहियां की है. ये सभी मिलकर प्रोजेक्ट गूगल टीवी के लिए काम करेंगे. गूगल का मकसद है वेब को टीवी और सेटटॉप बॉक्स के जरिए लोगों के बेडरूम तक पहुंचाना. इस गूगल टीवी प्रोजेक्ट पर कई महीनों से काम चल रहा है. यह प्रोजेक्ट एंड्रॉयड नामक एक सॉफ्टवेयर पर आधारित है जो कुछ स्मार्टफोन में उपलब्ध भी हैं. टीवी यूजर्स सोशल नेटवर्क और गूगल सर्च इंजन का इस्तेमाल कर पाएंगे. इसके अलावा गेम्स और सॉफ्टवेयर भी डाउनलोड किए जा सकेंगे.&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;Thanks...Bapi&lt;/div&gt;</description><link>http://rradhikari.blogspot.com/2010/03/blog-post_19.html</link><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgaC4H-jGelE3sfdGCRBAofMafPAyzLQGAkbDUfeozYBhWsC0ERqfosU6u10G837G46DwchVxWumQkMpep4jO-heuDFOYIon3b647OscIDBN_LrEVD80TStZ-TdYphaYZbGyjvhYMU0rDM/s72-c/Google+TV.jpg" width="72"/><thr:total>0</thr:total><author>rradhikari@gmail.com (Bapi)</author></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-471899805446162401.post-1061687804873559890</guid><pubDate>Thu, 18 Mar 2010 08:50:00 +0000</pubDate><atom:updated>2010-03-18T14:29:15.590+05:30</atom:updated><title>गूगल बज है क्‍या?</title><description>&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgYbLhkR5u7xHLZFd_AYyHZU8T7pICwhpsF1S1rN520ITuvSC34ykBntTP3n0kwnpLR1l6PoC2GSEx6xkKwojncJJ3AMjYGYFWFdGzo1tLCLD_2DK7Zq9f-2yR9y41eAZjooJi88VqrA5g/s1600-h/GoogleBuzzLogo.png"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5449895399851846018" style="FLOAT: left; MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 286px; CURSOR: hand; HEIGHT: 68px" alt="" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgYbLhkR5u7xHLZFd_AYyHZU8T7pICwhpsF1S1rN520ITuvSC34ykBntTP3n0kwnpLR1l6PoC2GSEx6xkKwojncJJ3AMjYGYFWFdGzo1tLCLD_2DK7Zq9f-2yR9y41eAZjooJi88VqrA5g/s320/GoogleBuzzLogo.png" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;p align="justify"&gt;गूगल बज इन दिनों खासा धूम मचा रहा है। आखिर यह गूगल बज है क्‍या? दरअसल यह गूगल के नए फीचर का नाम है। गूगल की ईमेल सर्वि‍स जीमेल का इनबि‍ल्‍ट फीचर है। इन शॉर्ट अगर कहें तो गूगल ने अपने यूजर्स को जीमेल में ही ऑरकुट और पि‍कासा की फेसि‍लि‍टी दी है। ताकि‍ यूजर को ऑरकुट और पि‍कासा के लि‍ए अलग से लॉगि‍न न करना पड़े। यानी एक साथ तीन काम।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#000099;"&gt;कैसे यूज करें गूगल बज?&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt; बज फीचर को यूज करने के लि‍ए अलग से कि‍सी सेटअप की जरूरत नहीं है। जीमेल में अब आप बज के जरि‍ए अपने फ्रेंड्स से फोटो, लिंक्‍स और वीडि‍यो भी शेयर कर सकते हैं। शेयर किए फोटो, ब्‍लॉग या चैटिंग पर जो कमेंट्स मि‍लते हैं उन्हें आप तुरंत इनबॉक्‍स में देख सकते हैं। और तो और यूजर हर पोस्‍ट के साथ थंबनेल में फोटो देख सकता है। डबल क्‍लि‍क करने पर यही थंबनेल फुल फोटो हो सकता हैं।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#000099;"&gt;और भी हैं कनेक्टिविटी :&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt; गूगल बज से आप ट्वि‍टर, पि‍कासा, फ्लि‍कर और गूगल रीडर से भी कनेक्‍ट हो सकते हैं। बज में आपसे फ्रीक्‍वेंटली चैट करने वाले या आपको मेल करने वाले लोग रेंडमली सि‍लेक्‍ट करके जोड़ दि‍ए जाते हैं। अपने सिक्रेट्स चाहें तो सबको बताएँ या सि‍र्फ चटपटी गॉसिप को अपने खास दोस्तों तक ही रखें।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#000099;"&gt;दिल की बात एक :&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt; साथ बज में आप ऐसे लोगों का ग्रुप बना सकते हैं जि‍नसे आप एक ही बात, एक साथ करना चाहते हैं। इन लोगों को आप डि‍फॉल्‍ट ग्रुप जैसे फ्रेंड्स, फैमि‍ली, कलिग या माय कॉन्‍टेक्‍ट में जोड़ सकते हैं। आप चाहें तो कोई नया ग्रुप भी बना सकते हैं। ऐसा ग्रुप बनाते समय ध्‍यान रखें कि‍ आप ग्रुप को वही बज भेजें जो आप सबसे शेयर करना चाहते हैं। सिंगल कॉन्‍टेक्‍ट को बज भेजने के लि‍ए आपको ग्रुप एडि‍ट करना होगा। यही बज का नेगेटि‍व पॉइंट है। क्‍योंकि‍ सपोज अगर बातों ही बातों में आपके की-बोर्ड से ऐसा कुछ टाइप हो गया जो आप सबको नहीं भेजना चाहते, वह सबको जा सकता है।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#000099;"&gt;इंस्‍टेंट है :&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt; बज बज को आप पब्‍लि‍क और प्राइवेट इन दो तरीको से भेज सकते हैं। पब्‍लि‍क में आपका बज वे सभी लोग देखेंगे जो जीमेल के इस फीचर से जुड़े हैं। सर्च बज में आप बज में यूनि‍वर्सली एडेड यूजर्स को सर्च भी कर सकते हैं। ये ऑरकुट के 'सर्च योर फ्रेंड्स' फीचर की तरह ही है। गूगल का दावा है कि‍ बज की सबसे बड़ी वि‍शेषता उसका इंस्‍टेंट होना है।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#000099;"&gt;बज की कमियाँ &lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;1 बज में फ्रीक्‍वेंटली चैट करने वाले दोस्त रेंडमली जोड़ दिए जाते हैं, जरूरी नहीं कि आपका बज उन सभी के लिए हो।&lt;br /&gt;2 सिंगल कॉन्‍टेक्‍ट को बज भेजने के लि‍ए हर बार ग्रुप एडि‍ट करना सुविधा के बजाय सिरदर्द हो सकता है।&lt;br /&gt;3 स्पेसिफिक इन्फॉरमेशन हर किसी से तो नहीं पूछी जा सकती, ऐसे में बार-बार सिंगल कॉन्‍टेक्‍ट के लिए ग्रुप एडि‍टिंग थोड़ा टाइम टेकिंग है।&lt;br /&gt;4 और एक कमी, जिसे आपने बज भेजा है, अगर उसकी किसी और से चैटिंग हो रही है तो उस अगले का रिप्लाय आपको अनावश्यक रूप से इन-बॉक्स में दिख सकता है। यानी उस बज का डायरेक्टली आपसे कोई लेना-देना नहीं। जिसे इतनी फुरसत हो कि दूसरों के बजिंग में इंट्रैस्ट रखता हो, वह मजे लेता रहे। हाँलाकि इतना पेशन्स किसी के पास होता नहीं है अत: यह एक परेशानी के सिवाय कुछ नहीं है। &lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;Thanks...Bapi&lt;/div&gt;</description><link>http://rradhikari.blogspot.com/2010/03/blog-post_6259.html</link><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgYbLhkR5u7xHLZFd_AYyHZU8T7pICwhpsF1S1rN520ITuvSC34ykBntTP3n0kwnpLR1l6PoC2GSEx6xkKwojncJJ3AMjYGYFWFdGzo1tLCLD_2DK7Zq9f-2yR9y41eAZjooJi88VqrA5g/s72-c/GoogleBuzzLogo.png" width="72"/><thr:total>0</thr:total><author>rradhikari@gmail.com (Bapi)</author></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-471899805446162401.post-450889317474119088</guid><pubDate>Thu, 18 Mar 2010 08:38:00 +0000</pubDate><atom:updated>2010-03-18T14:14:23.300+05:30</atom:updated><title>जानें अपने लैपटॉप को ...</title><description>&lt;p align="justify"&gt;आजकल की टेक्‍नोफ्रेंडली लाइफ के चलते हम मोबाइल फोन और कंप्‍यूटर के इतने आदि‍ हो चुके हैं कि‍ इनमें से जरा सी खराबी आने से हमारी जिंदगी में उथल पुथल मच जाती है। इनमें से एक भी चीज मि‍सिंग हो जाए तो हम अपने आपको बड़ा ही बेबस मेहसूस करने लगते हैं। आजकल की टेक्नि‍कल लतों में से 'लैपटॉप' भी एक है। आइए जानें कि‍ लैपटॉप में कि‍स तरह कि‍ खराबि‍याँ आ सकती हैं और उनसे कैसे बचा जाए- ‍&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#000099;"&gt;मदर बोर्ड :&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt; मदरबोर्ड में खराबी आमतौर पर उसकी आईसी (इंटीग्रेटेड सर्किट) में शार्ट सर्किट होने से आती है। मदरबोर्ड लैपटॉप का कीमती हिस्सा होता है। लिहाजा इसके खराब होने पर सबसे ज्यादा खर्च आता है। इसलिए इसका खास ख्याल रखना चाहिए। मदर बोर्ड में पानी व अन्य तरल पदार्थ न जाएँ इसका ध्यान रखने के साथ ही बायोस से छेड़छाड़ नहीं करना चाहिए। मदरबोर्ड खराब होने की सबसे बड़ी वजह बिजली का फ्लैक्चुएशन (बार-बार बिजली का आना-जाना) होता है। ऐसे समय पर लैपटॉप या पीसी को डायरेक्ट बिजली से चलाने के बजाए बैट्री करंट से चलाना चाहिए।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#000099;"&gt;हार्ड डिस्क :&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt; लैपटॉप व पीसी में हार्ड डिस्क सबसे अहम मानी जाती है। लैपटॉप की हार्ड डिस्क पीसी से कहीं ज्यादा मजबूत होने के साथ छोटी होती है, लेकिन बहुत कम ऊँचाई से भी गिरने से खराब हो सकती है। ऐसे में ध्यान रखना चाहिए कि यह न गिरे। साथ ही पीसी के मुकाबले लैपटॉप की हार्ड डिस्क से करंट लगने का खतरा ज्यादा होता है। ऐसे में इसका इस्तेमाल सावधानी से करना&lt;br /&gt;चाहिए&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#000099;"&gt;स्क्रीन :&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt; यह  लैपटॉप व पीसी का सबसे नाजुक हिस्सा होता है, जो बहुत आसानी से टूट जाता है। लिहाजा इसका इस्तेमाल बहुत सावधानी से करना चाहिए। दरअसल यह ग्लास (शीशे) और लिक्विड क्रिस्टल से बना होता है। एलसीडी में आमतौर पर उसकी हिफाजत के लिए आर्गेनिक कवर होता है, लेकिन यह नाकाफी है। ऐसे में एलसीडी को गिरने व धक्का लगने से बचाना चाहिए।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#000099;"&gt;टच पैड :&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;  लैपटॉप लेने के बाद ज्‍यादातर लोगों की शि‍कायत होती है कि‍ वह सही ढंग से काम नहीं कर रहा है। टचपैड पर स्‍पेशल कोटिंग होती है जो उंगलि‍यों की रगड़ से नि‍कल जाती है। जि‍ससे उसकी काम करने की क्षमता कम हो जाती है। दरअसल गर्मि‍यों के दि‍नों में हमारे हाथो से पसीना नि‍कलता है। ऐसे में नम उंगलि‍यों की रगड़ से टचपैड की स्‍पेशल कोटिंग खराब हो जाती है और वह सही ढंग से काम करना बंद कर देता है। इसलि‍ए टचपैड इस्‍तेमाल करने से पहले हाथों को साफ करें ताकि‍ उनमें नमी ना रहे।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#000099;"&gt;सीडी रोम :&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt; आम  तौर पर कोई भी सीडी रोम ज्‍यादा से ज्‍यादा एक साल तक चलती है। वहीं आमतौर पर लोग लैपटॉप व पीसी में लगी सीडी रोम का उपयोग मूवी या फि‍ल्‍म देखने में करते हैं जि‍ससे इसकी कार्य क्षमता आधी हो जाती है। लि‍हाजा इस बात का ध्‍यान रखें कि‍ सीडी रोम का इस्‍तेमाल सॉफ्टवेयर इंस्‍टॉल करने के लि‍ए ही करें। &lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;Thanks...Bapi&lt;/div&gt;</description><link>http://rradhikari.blogspot.com/2010/03/blog-post_18.html</link><thr:total>0</thr:total><author>rradhikari@gmail.com (Bapi)</author></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-471899805446162401.post-3242141049391089682</guid><pubDate>Thu, 18 Mar 2010 08:26:00 +0000</pubDate><atom:updated>2010-03-18T13:59:51.948+05:30</atom:updated><title>ई-कॉमर्स क्या है?</title><description>&lt;div align="justify"&gt;ई-कॉमर्स उत्पादों एवं सेवाओं की इंटरनेट पर सेल है। यह हमारी अर्थव्यवस्था का सर्वाधिक तेजी से विकासशील खंड है। यह नाममात्र के शुल्क पर न्यूनतम व्यवसाय को भी अपने उत्पाद या संदेश के साध वैश्विक ग्राहकों तक पहुंचने की सुविधा देता है। वर्तमान में, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर 250 मिलियन से ज्यादा लोग इंटरनेट का प्रयोग कर रहे हैं।&lt;br /&gt;ऑनलाइन जनसंख्या के 69 प्रतिशत ने पिछले 90 दिनों में कम से कम एक खरीददारी की है। विश्लेषक वर्ष 2004 तक 3.2 ट्रिलियन डॉलर की बिक्री दर्शाता हैं। इंटरनेट प्रयोगकर्त्ताओं की घरेलू औसत आमदनी 59000 डॉलर है, जो इसे लक्षित व्यवसाय के लिए बहुत आकर्षक जनसांख्यिकी बनाते हैं।&lt;br /&gt;क्या ई-कॉमर्स वेबसाइट आपके व्यवसाय के लिए सही है?&lt;br /&gt;संभवत: आपके व्यवसाय की प्रकृति पर बहुत कुछ निर्भर करता है। यदि आप एक लघु स्वतंत्र पुस्तक भंडार के स्वामी हैं, क्या इसकी अच्छी संभावना है कि आप अपनी पुस्तकें ऑनलाइन बेचकर अमीर बन संकते है। Amazon.com और Barnes एवं Noble ने इस बाजार पर अपनी पकड़ स्थापित की है और उन्होंने मात्र अपने आकार, नाम की पहचान और अपने ग्राहकों के साथ विश्वास के संबंध से इस बाजार पर अच्छी कीमत के साथ (पैमाने की किफायत) और उल्लेखनिय ग्राहक निष्ठा से हावी हो सके हैं।&lt;br /&gt;फिर भी, यदि आप एक स्थानीय पुस्तक भंडार के स्वामी हैं तो नए ग्राहकों तक पहुंचने, आपको बेहतर तरीके से जानने और उन्हें और व्यवसाय के लिए वापस बुलाते रहने के कई तरीके है। आप विशेष प्रमोशन या लेखकों द्वारा पुस्तकें पढ़े जाने की सूचनाएं दे सकते हैं। अपने ई- व्यवसाय के निर्माण करने में विश्वास एक आधारशिला बन सकती है जैसाकि वाटेन बफेट ने कहा है कि "यदि आप आभूषण के बारे में नहीं जानते हैं तो अपने जौहरी को जानें।"&lt;br /&gt;यह जरूरी नहीं है कि वेबसाइट सिर्फ आपके उत्पादों को ऑनलाइन बेचने के लिए ही हो। यह बहुत-सी भूमिकाएं निभा सकता है। वह आपके स्थापित हो चुके खुदरा भंडार की बिक्री का पूरक हो सकता है। यदि आप कोई अद्वितीय उत्पाद बेचते हैं जैसे वीट ग्रास या गूरमे चौकलेट तो आप पूरे देश में (या सच पूछे तो पूरे विश्व में) उन लोगों तक पहुंचने में सफल हो सकते हैं जिन्हें अपने ही शहर में इन उत्पादों को प्राप्त करने की सुविधा नहीं है।&lt;br /&gt;ई-कॉमर्स संचालित करने के लिए इंटरनेट का प्रयोग यह आवश्वासन नहीं देगा कि आप बड़े स्थापित प्रतिस्पर्धियों के साथ सफल ढंग से प्रतिस्पर्धा कर सकेंगे। उनके पास पहले से ही इनवेंटरी, डिलिवरी और मार्केटिंग व्यवस्था मौजूद है और वे परचून का सामान आप जैसी सस्ती दर पर (या उससे भी सस्ती दर पर) बेच सकते हैं। फिर भी इंटरनेट की खासियत यह है कि वह विश्वव्यापी संभावित ग्राहक उपलब्ध करा सकता है और यह कभी भी बंद नही होता।&lt;br /&gt;आपके ग्राहक दिन के 24 घंटे आपके व्यवसाय के बारे में जानकारी एक्सेस कर सकेंगे। आपने कितनी बार किसी स्टोर के बारे में जानकारी प्राप्त करनी चाही है, उनके लिए येलो पेजेस देखें है, किसी रविवार की सुबह उन्हें फोन किया है और पाया है की वे बंद है? निश्चित रूप से, अधिकांश कंपनियों के पास रिकॉर्ड किए संदेश होते हैं जो बताते हैं कि वे बंद हैं और वे अपने कार्य के घंटों की सूचना आपको देंगें।&lt;br /&gt;लेकिन यह ज्यादा बेहतर है कि सप्ताह के सातों दिनों एक दिन के चौबीस घंटें आपके संभावित ग्राहकों को आपके स्टोर के के बारे में सूचना उपलब्ध रहे। यही नहीं आपके संपूर्ण उत्पादों के बारे में भी। आप उसमें चित्र शामिल कर सकते हैं और संभवत: वीडियो भी । और आपके ग्राहक आपसे दिन के चौबीसों घंटे खरीदारी कर सकेंगे। इसलिए आपकी वेबसाइट का पता सभी जगह प्रमोट करना चाहिए जिसमें आपकी स्टेशनरी, बिक्री के फार्म और विज्ञापन शामिल हैं।&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;Thanks...Bapi&lt;/div&gt;</description><link>http://rradhikari.blogspot.com/2010/03/blog-post.html</link><thr:total>0</thr:total><author>rradhikari@gmail.com (Bapi)</author></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-471899805446162401.post-8825870154460327240</guid><pubDate>Sat, 29 Aug 2009 07:22:00 +0000</pubDate><atom:updated>2009-08-29T13:08:18.279+05:30</atom:updated><title>ई-मेल...  लेकिन जरा बच के......!</title><description>&lt;div align="justify"&gt;दुनिया भर में आई सूचना और संचार क्रांति से हमें अगर किसी चीज ने सबसे ज्यादा प्रभावित किया है तो वे हैं मोबाइल फोन और इंटरनेट। इंटरनेट ने आपसी संपर्क और सूचना के आदान प्रदान के क्षेत्र में आमूलचूल तब्दीली लाने में काफी अहम भूमिका निभायी है।इंटरनेट पर मौजूद ‘सर्च इंजन’ के अलावा ‘ई-मेल’ यानी इलेक्ट्रॉनिक मेल सेवा संचार क्रांति में खासी मददगार साबित हुई है। ‘ई-मेल’ की मदद से दुनिया के किसी भी कोने में बैठे शख्स से हम बात कर सकते हैं। शर्त बस इतनी है कि वह शख्स इंटरनेट की सेवा से महरूम न हो।‘ई-मेल’ एक डिजिटल सेवा है जिसके इस्तेमाल से एक दूसरे के संपर्क में रहने के अलावा किसी चीज का प्रचार-प्रसार भी किया जा &lt;span class=""&gt;सकता है &lt;/span&gt;ई-मेल के आविष्कार के पीछे मकसद दो या दो से अधिक लोगों के बीच सूचना का तेजी से आदान-प्रदान करना था लेकिन अब इसका गलत इस्तेमाल भी धड़ल्ले से हो रहा  है  ई-मेल के जरिये जहाँ किसी की मानहानि हो सकती है वहीं, ‘एनोनिमिटी’ यानी अपना असली नाम छुपाकर इसका दुरूपयोग भी किया जा सकता है। कोई भी शख्स किसी के ई-मेल आई-डी यानी किसी अन्य की पहचान और पासवर्ड जानकर दूसरों को धमकी भरा संदेश भेज सकता है और इस मामले की जाँच होने पर वह शख्स शक के दायरे में आएगा जिसके ई-मेल आई-डी से धमकी दी गई।  लोगों को अपना काम  खत्म होने के बाद सही तरीके से ‘साइन आउट’ करने, किसी को भूलकर भी अपना पासवर्ड नहीं बतानी चाहिए ई-मेल के गलत इस्तेमाल के मामले में सजा के प्रावधान भी है,  मानहानि के मामले में भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी कानून के तहत तीन साल की सजा और पाँच लाख रूपए का जुर्माना हो सकता है। इसी तरह ‘स्पैमिंग’, यानी किसी ऐसे व्यक्ति से आपको ई-मेल मिलना जिसे आपने आमंत्रित ही नहीं किया हो, को भारत सहित दुनिया के कई देशों में अपराध घोषित किया गया है।ई-मेल इस्तेमाल करने वालों के सामने आने वाली एक बहुत ही आम समस्या है उनके एकाउंट में वायरस का संचार। दूसरों के एकाउंट में वायरस भेजना भी एक दंडनीय अपराध है। इसमें भी आईटी कानून के तहत तीन साल की सजा हो सकती है। ई -मेल के इस्तेमाल की शुरुआत का इतिहास 1971 से मिलता है। सबसे पहले अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के तहत काम करने वाली कंपनी ‘बोल्ट बेरानेक एंड न्यूमैन’ (बीबीएन) के कंप्यूटर इंजीनियर रहे रे। टॉमलिनसन ने वर्ष 1971 में ई मेल का इस्तेमाल किया। यह पहला इस्तेमाल एक साथ रखे गये दो कम्प्यूटरों के बीच हुआ था।  &lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;Thanks...Bapi&lt;/div&gt;</description><link>http://rradhikari.blogspot.com/2009/08/blog-post.html</link><thr:total>0</thr:total><author>rradhikari@gmail.com (Bapi)</author></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-471899805446162401.post-8330590756143823781</guid><pubDate>Wed, 13 May 2009 06:24:00 +0000</pubDate><atom:updated>2009-05-13T11:56:22.417+05:30</atom:updated><title>माइक्रोसॉफ्ट इंटरनेट एक्सप्लोरर 8 की खूबियाँ</title><description>&lt;div align="justify"&gt;&lt;/div&gt;&lt;p align="justify"&gt;माइक्रोसॉफ्ट द्वारा हाल ही में इंटरनेट एक्सप्लोरर का नया वर्जन माइक्रोसॉफ्ट इंटरनेट एक्सप्लोरर 8 (बीटा वर्जन) बाजार में उतारा गया है। माइक्रोसॉफ्ट कंपनी का दावा है कि यह एक्सप्लोरर पहले से ज्यादा अपग्रेटेड और सुविधाजनक है। इस एक्सप्लोरर में वेबपेज अपेक्षाकृत तेजी से खुलेंगे और उन्हें लोड होने में भी कम समय लगेगा। एक ओर जहाँ इससे पहले के संस्करण ''इंटरनेट एक्सप्लोरर 7' (आईई 7) में सुरक्षा संबधी जरूरतों पर जोर दिया गया था वहीं इस नए संस्करण में स्थिरता और इस्तेमाल में होने वाली आसानी पर जोर दिया गया है। इसकी एक और खासियत है कि यह एक्सप्लोरर बेहद तेज है। आईई 8 में जावा के इस्तेमाल होने की प्रक्रिया को आसान बना दिया गया है और इसीलिए इस एक्सप्लोरर की क्रियाविधि पहले वाले वर्जन से बेहतर है। इसके कारण इंटरनेट एक्सप्लोरर 8 अपेक्षाकृत कम इंटरनेट स्पीड में भी वेबपेज को पूर्ण रूप से लोड करने की क्षमता रखता है। इसमें 'एक्टिविटी' नामक एक विशेष टूल है जिसके अनुसार उपयोगकर्ता जब एक पते का चयन करता है तो उसके माउस के ऊपर एक नया बटन बन जाता है। उस बटन को क्लिक करके उससे संबंधित सभी संभावित गतिविधियों को देखा जा सकता है। जब उपयोगकर्ता कोई पता टाइप करते हैं तो आईई 8 कम्प्यूटर की हिस्ट्री में मौजूद साइट के पॉप-अप पहले दिखाता है और बाद में फेवरेट में सेव साइट के सुझाव देता है। इसके अलावा यह फेवरेट के गैरजरूरी आरएसएस फीड को डीफॉल्ट सेट नहीं करता। आईई 8 में इंटरनेट उपयोगकर्ता एक नए टूल 'इनप्रायवेट' को 'पोर्न मोड' के नाम से भी चर्चित किया जा रहा है। इस टूल के उपयोग से अपनी पसंदीदा ऑनलाइन गतिविधियों को गुप्त रख सकते हैं। ताकि गूगल या कोई भी अन्य नेटवर्क इंटरनेट के माध्यम से उपयोगकर्ता की व्यक्तिगत जानकारी न ले सके।हालाँकि अन्य ब्राउज़रों जैसे कि फायरफॉक्स और ओपेरा मे भी कुछ इसी तरह की सुविधाएँ हैं, लेकिन 'इनप्रायवेट' टूल को अपेक्षाकृत सबसे उन्नत बताया जा रहा है। इस टूल की मदद से उपयोगकर्ता गोपनीयता (सीक्रेट मोड) में रहकर सर्फिंग कर सकता है, जिससे अन्य नेटवर्क उसकी जानकारी प्राप्त नहीं कर पाते हैं। इससे संभावित “साइबर धोखाधड़ी” से भी बचा जा सकता है। साथ ही इसकी मदद से अवांछित विज्ञापनों तथा स्पैम ईमेल से भी बचाव हो सकता है। &lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;Thanks...Bapi&lt;/div&gt;</description><link>http://rradhikari.blogspot.com/2009/05/8.html</link><thr:total>0</thr:total><author>rradhikari@gmail.com (Bapi)</author></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-471899805446162401.post-4243062304541747213</guid><pubDate>Thu, 19 Mar 2009 08:39:00 +0000</pubDate><atom:updated>2009-03-19T14:14:26.723+05:30</atom:updated><title>कहीं आप इंटरनेट एडिक्ट तो नहीं</title><description>आज के तकनीकी युग में हर ओर तकनीक का ही शोर है। छोटे बच्चे से लेकर बुजुर्ग व्यक्ति भी अब इंटरनेट पर सर्फिंग करने का शौक रखते हैं। एक जमाना हुआ करता था जब बच्चे मैदानों में अपने दोस्तों के साथ खेलने जाया करते थे या सारे दोस्त एक साथ बैठकर पढ़ाई किया करते थे लेकिन अब ये सारी बातें बहुत पुरानी हो चुकी हैं। अब सभी का एक ही विश्वसनीय साथी है इंटरनेट।आज से लगभग 10 साल पहले सिर्फ वही लोग इंटरनेट पर ज्यादा समय बिताया करते थे जो किसी तकनीकी संस्था में कार्यरत थे, क्योंकि वह उनके काम का एक हिस्सा था। लेकिन अब इंटरनेट पर सर्फिंग करना समय बिताने का एक जरिया बन चुका है।जितनी तेजी से इस आदत ने लोगों के जीवन में अपनी जगह बनाई है उसी तेजी से इस आदत के दुष्परिणाम भी नजर आने लगे हैं। इस तरह की आदतें बहुत सी दिमागी तकलीफों के उत्पन्न होने का कारण बनती जा रही हैं।कुछ लोगों को इंटरनेट सर्फिंग की इतनी बुरी लत लग जाती है कि वे लोग दिन में 12 घंटे से ज्यादा सर्फिंग में ही बिता देते हैं। इससे उनके पूरे परिवार पर तो असर पड़ता ही है साथ ही वे धीरे-धीरे नेट एडिक्ट भी बन जाते हैं। इंटरनेट का उपयोग न कर पाने की स्थिति में वे अपने आप को असहाय महसूस करने लगते हैं।इंटरनेट एडिक्शन भी एक तरह का नशा ही है। लोग इसके इतने आदी हो जाते हैं कि किसी भी तरह इस नशे को पा लेना ही उनके जीवन का असली मकसद बन जाता है। इंटरनेट एडिक्शन के बहुत से लक्षण साफ दिखाई देते हैं जैसे-&lt;br /&gt;* हमेशा सर्फिंग के बारे में सोचना।&lt;br /&gt;* किसी जरूरी काम के लिए भी सर्फिंग छोड़ने का मन न होना।&lt;br /&gt;* इंटरनेट का प्रयोग न कर पाने की स्थिति में मूड खराब हो जाना या किसी काम में मन न लगना।&lt;br /&gt;* तनाव के समय सिर्फ इंटरनेट के साथ से ही खुश होना।&lt;br /&gt;* परिवार वालों और दफ्तर में लोगों से झूठ बोलकर इंटरनेट सर्फ करने की आदत।&lt;br /&gt;* इंटरनेट पर किसी से बात करते समय यह किसी वेबसाइट को देखते हुए अपनी भावनाओं पर नियंत्रण न रख पाना।&lt;br /&gt;* इस आदत का व्यक्तिगत रिश्तों पर प्रभाव पड़ने से भी, आदत को न छोड़ना आदि।इस एडिक्शन से मुक्ति पाने का एक कारगर तरीका है काउंसलिंग। जिसके बाद इंटरनेट के प्रयोग को नियंत्रित किया जा सकता है। एक बार नियंत्रण में आने के बाद इस पर लगातार नजर बनाए रखना बहुत जरूरी है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;Thanks...Bapi&lt;/div&gt;</description><link>http://rradhikari.blogspot.com/2009/03/blog-post_19.html</link><thr:total>0</thr:total><author>rradhikari@gmail.com (Bapi)</author></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-471899805446162401.post-6733990615903346282</guid><pubDate>Thu, 19 Mar 2009 08:36:00 +0000</pubDate><atom:updated>2009-03-19T14:08:01.209+05:30</atom:updated><title>सावधान ..! ऑरकुट मैसेज में वायरस</title><description>&lt;p align="justify"&gt;गूगल की सोशल नेटवर्किंग साइट ऑरकुट के जरिए भी अब भेजे जा रहे ट्रॉजन वायरस युक्त मैसेज। ऑरकुट पर जब भी हमें कोई मैसेज दिखाई देता है तो हम उसे बिना सोचे समझे खोल कर पढ़ लेते हैं। कई बार फ्रेंड रिक्वेस्ट भी मैसेज के जरिए भेजी जाती हैं और हम तुरंत भेजने वाले व्यक्ति की प्रोफाइल देखने के लिए दी हुई लिंक पर क्लिक कर देते हैं।अगर आप भी कुछ ऐसा ही करते हैं तो अब जरा संभलकर मैसेज खोलें। ऑरकुट पर इन मैसेज के जरिए एक 'ट्रॉजन' नामक मैसेज भेजा जा रहा है, जो कि किसी विदेशी भाषा में भेजा जाता है। इस मैसेज के जरिए ऐसा दिखाया जाता है कि कोई सच्चे दोस्त की तलाश में आपको रिक्वेस्ट भेज रहा है। इस मैसेज में बहुत सी लिंक्स भी मौजूद होती हैं जिन पर क्लिक करते ही आप वेबसाइट के लॉगिन पेज पर पहुँच जाते हैं।कैसे आता है वायरस : जैसे ही इस लिंक पर आप क्लिक करते हैं आपके सिस्टम पर वायरस युक्त 'इमेजएम डॉट ईएक्सई' नामक फाइल डाउनलोड हो जाती है जिसकी वजह से होमपेज खुलता है। इसके साथ ही एक 'एमएसएन डॉट ईएक्सई' नामक फाइल डाउनलोड होती रहती है जिसका आपको पता ही नहीं चलता। यह वायरस असल में आपके अकाउंट का पासवर्ड कॉपी कर लेता है।अगली बार जब भी आप इस तरह का कोई मैसेज देखें, तो उसमें मौजूद लिंक पर सोच समझकर क्लिक करें। कहीं ऐसा न हो कि अनजाने में आप अपने सिस्टम पर ट्रॉजन को डाउनलोड कर लें। &lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;Thanks...Bapi&lt;/div&gt;</description><link>http://rradhikari.blogspot.com/2009/03/blog-post.html</link><thr:total>0</thr:total><author>rradhikari@gmail.com (Bapi)</author></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-471899805446162401.post-6601984262300564012</guid><pubDate>Sat, 24 Jan 2009 11:32:00 +0000</pubDate><atom:updated>2009-01-24T17:03:37.017+05:30</atom:updated><title>जीमेल के साथ अब इंस्टेंट मैसेजिंग</title><description>&lt;div align="justify"&gt;गूगल की बहुचर्चित ई-मेल सेवा के बारे में तो आप जानते ही हैं। यह सेवा आपको अनेक सुविधाजनक फीचर उपलब्ध कराती है। फीचर्स की इसी सूची में अब जीमेल एक और नाम शामिल करने जा रहा है, 'इंस्टेंट मैसेजिंग' या 'एसएमएस सेवा'।गूगल अब अपनी मेल सेवा यानी कि जीमेल के साथ अपने उपयोगकर्ताओं को अपने जीमेल कॉन्टेक्ट्‍स को इंस्टेंट मैसेज करने की सेवा भी शुरू करने जा रहा है। चैट विण्डो की सेटिंग्स टैब पर क्लिक करके उपयोगकर्ता अपने कॉन्टेक्ट्‍स को एसएमएस कर सकते हैं। इसके अलावा चैट कॉन्टेक्ट सर्च बॉक्स में अपने कॉन्टेक्ट का फोन नम्बर लिखकर भी इस सेवा का उपयोग किया जा सकता है।यह सेवा सिर्फ जीमेल के साथ ही उपलब्ध हो पाएगी। उपयोगकर्ता इस सेवा को गूगल के किसी अन्य इंस्टेंट मैसेजिंग सेवा के साथ उपयोग नहीं कर पाएँगे जैसे आईगूगल या फिर जीटॉक सॉफ्टवेयर। आपके द्वारा भेजे जाने वाले ये इंस्टेंट मैसेज, एक गूगल फोन नम्बर से भेजे जाएँगे, जिसको आपके कॉन्टेक्ट्स अपने फोन में स्टोर कर सकते हैं। इन स्टोर किए गए गूगल फोन नम्बर से आपके कॉन्टेक्ट्स आपको कम्प्यूटर-बेस्ड गूगल फोन नम्बर पर संपर्क कर सकते हैं।  &lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;Thanks...Bapi&lt;/div&gt;</description><link>http://rradhikari.blogspot.com/2009/01/blog-post.html</link><thr:total>0</thr:total><author>rradhikari@gmail.com (Bapi)</author></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-471899805446162401.post-1687565210433474859</guid><pubDate>Thu, 20 Nov 2008 08:11:00 +0000</pubDate><atom:updated>2008-11-20T13:44:26.941+05:30</atom:updated><title>अपराध का नया रूप:मोबाइल हैकिंग</title><description>&lt;p align="justify"&gt;आप ई-मेल हैकिंग और कम्प्यूटर हैकिंग से तो वाकिफ होंगे ही। आजकल हैकिंग और हैकर्स अपने अपराधों की वजह से लगातार चर्चा में बने हुए हैं। इनके बारे में अमूमन ही नए-नए समाचार हमें प्राप्त होते हैं। इन बातों से यह अंदाज़ा लगाया ही जा सकता है कि हैकिंग कितनी आसानी से हमारे बीच अपनी जगह बनाती जा रही है।इसी विकास का नतीजा है कि हैकिंग की यह तकनीक अब हमारे मोबाइल तक भी पहुँच गई है। अब हमारा सबसे विश्वसनीय साथी, हमारा मोबाइल भी इससे अछूता नहीं है।इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि सेलफोन में लगने वाली चिप किस तरह से बनाई जाती है, इसका पता ये हैकर्स आसानी से लगा लेते हैं, इसलिए उसे आसानी से हैक कर लेते हैं।हैक होने वाले मोबाइल ज़्यादातर जीएसएम तकनीक पर काम करने वाले मोबाइल होते हैं। इन्हें हैक करने के लिए सिर्फ कुछ हार्डवेयर चाहिए जो आसानी से फोन से जुड़ जाता है। बस थोड़ी सी इलेक्ट्रॉनिक्स कि जानकारी होने पर हैकर आपके फोन को हैक करके आपके फोन मेमोरी की सारी जानकारी ले सकता है, कई बार तो आपके फोन में स्टोर की हुई जानकारी बदली भी जा सकती है।इस तरह की हैकिंग के लिए यह ज़रूरी होता है कि हैकर आपके फोन को 3 से 4 मिनट के लिए उपयोग करे, बिना आपके फोन की ज़रूरी जानकारी के यह हैकिंग संभव नहीं। इसलिए अब अपना फोन किसी अजनबी को देने से पहले इस बारे में विचार ज़रूर कर लें।बढ़ते तकनीकी विकास की वजह से हैकर्स ने मोबाइल हैकिंग का एक तरीका और निकाल रखा है। इसके लिए वे उस फोन की तलाश में रहते हैं जिसमें ब्लूटूथ का उपयोग हो रहा हो। इसके लिए हैकर किसी भीड़ वाली जगह में अपने लैपटॉप पर हैकिंग सॉफ्टवेयर को एक्टिवेट करता है। यह सॉफ्टवेयर एक एंटीने के ज़रिए उपयोग में आ रहे नज़दीकी ब्लूटूथ के सिग्नल को पकड़ लेता है। फिर अपने लैपटॉप के ज़रिए वह आपके मोबाइल पर उपलब्ध सारी जानकारी हासिल कर उसका उपयोग कर सकता है। इससे बचने का सबसे अच्छा उपाय यह है कि अगर आप ब्लूटूथ का उपयोग कर रहे हैं तो थोड़ा संभल जाएँ। अपने ब्लूटूथ को या तो इन्विज़िबल मोड पर रखें या फिर बंद रखें तो बहुत ही अच्‍छा है।दूसरा तरीका यह है कि अपने फोन पर पासवर्ड का प्रयोग करें ताकि आपके फोन का उपयोग आप के अलावा कोई न कर पाए। इसके साथ ही आप अपने फोन को समय-समय पर अपडेट करते रहें तो यह फायदेमंद होगा।&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;Thanks...Bapi&lt;/div&gt;</description><link>http://rradhikari.blogspot.com/2008/11/blog-post_20.html</link><thr:total>0</thr:total><author>rradhikari@gmail.com (Bapi)</author></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-471899805446162401.post-2775455746383693761</guid><pubDate>Sat, 08 Nov 2008 07:11:00 +0000</pubDate><atom:updated>2008-11-08T15:44:42.021+05:30</atom:updated><title>कितना सुरक्षित है आपका नेट बैंकिंग</title><description>&lt;p align="justify"&gt;अगर आप अपने बैंक से संबंधित सारा काम इंटरनेट के माध्यम से करते हैं, तो यह जानना आपके लिए जरूरी है कि कहीं अनजाने में आप अपने अकाउंट से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी गलत लोगों तक तो नहीं पहुँचा रहे हैं? अगर आप अपने बैंक की वेबसाइट पर अपने अकाउंट के बारे में कोई भी जानकारी बिना सोचे-समझे दे देते हैं तो सावधान हो जाइए।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#000066;"&gt;क्या है खतरा -&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;ट्रॉजनहोर्स नामक प्रोग्राम अब बहुत से हैकर्स के पास मौजूद है, जिसकी मदद से ये लोग आसानी से अकाउंट की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। जब आप बैंक की वेबसाइट पर अपने अकाउंट के माध्यम से कुछ कार्य करते हैं, तो उस वेबसाइट पर आपको अपने अकाउंट के बारे में कुछ जानकारियाँ देनी पड़ती हैं। यह जानकारी आपसे कुछ फील्ड्स (सूचना क्षेत्रों) द्वारा ली जाती है। ट्रॉजनहोर्स प्रोग्राम की से इन फील्ड्स के साथ हैकर्स कुछ ऐसे फील्ड्स जोड देते हैं, जिनसे वे आपके अकाउंट की गुप्त जानकारी प्राप्त कर लेते हैं, जैसे आपके कार्ड का पिन नंबर।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#000066;"&gt;कैसे किया जाता है -&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;इसके लिए मालवेयर सॉफ्टवेयर का उपयोग किया जाता है, जो वेब ब्राउजर के साथ आसानी से जोड़ा जा सकता है। इस मालवेयर को एचटीएमएल इंजेक्शन के माध्यम से ब्राउजर से जोड़ा जाता है। यह मालवेयर ब्राउजर के साथ इतनी सक्षमता से जुड़ा रहता है कि यह किसी भी बैंक की वेबसाइट पर भी आसानी से कार्य कर सकता है। यहाँ तक कि उस वेबसाइट का लेआउट भी बदल सकता है।इसके, आपके ब्राउजर के साथ जुड़े होने का आपको एहसास भी नहीं होता है और यह अपना कार्य आसानी से करता रहता है। लेकिन अगर आप से कुछ ऐसी जानकारी बैंक की वेबसाइट पर माँगी जा रही है जो पहले कभी नहीं माँगी गई तो आपके ब्राउजर के साथ इस मालवेयर के होने की संभावना हो सकती है।यह लिम्बो नामक मालवेयर आपके कम्प्यूटर पर ज्यादातर दो तरीकों से स्टोर किया जाता है। पहला तो वह पॉप अप मैसेज जो आपको कुछ अतिरिक्त सॉफ्टवेयर डाउनलोड करने को कहे और दूसरे कुछ ऐसे तरीके जो उपयोगकर्ताओं को पता न चलें। यह मालवेयर सॉफ्टवेयर अब बड़ी मात्रा में उन लोगों के पास उपलब्ध हैं जो इंटरनेट का दुरुपयोग करने में माहिर हैं। इनकी उपलब्धता का एक कारण है इन मालवेयर सॉफ्टवेयर की कम कीमत। जो जानकारी ये हैकर्स लोगों द्वारा एकत्र करते हैं उसे ‘हार्वेस्ट’ कहा जाता है, यानी कि जानकारी जुटाना। इस जानकारी को जब धन पाने के लिए उपयोग किया जाता है तो इस प्रणाली को ‘कैशआउट’ कहा जाता है। इस तरह के धोखेबाजी के कारोबार में लिप्त लोग इन दोनों प्रणालियों में ही माहिर होते हैं। इन दोनों प्रणालियों का प्रयोग ज्यादातर दो तरह के हैकर्स करते हैं पहले वे जो हार्वेस्ट में निपुण होते हैं और दूसरे वे जिनका काम कैशआउट का होता है। दोनों क्षेत्रों में निपुण हैकर्स साथ मिलकर यह कार्य करते हैं।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#000066;"&gt;सुरक्षा -&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;इस तरह की परेशानियों से निपटने के लिए बहुत से बैंक अपने ग्राहकों के लेन-देन संबंधी व्यवहार पर नजर रखते हैं। यह काम ग्राहक के चलते आ रहे लेन-देन व्यवहार को ध्यान में रखकर किया जाता है। इसके लिए बैंक खास तैयार किए गए सॉफ्टवेयर की मदद भी ले रहे हैं। इन सॉफ्टवेयरों की मदद से इस तरह के हैकर्स को ग्राहकों को नुकसान पहुँचाने से रोका जा सकेगा। बैंकों द्वारा बढ़ाई गई सुरक्षा के साथ ही नेट बैंकिंग करने वाले लोगों को भी थोड़ी सावधानी बरतने की जरूरत है। बैंक अकाउंट के बारे में कोई भी गुप्त जानकारी गलत हाथों में न पहुँचे, इसका ध्यान रखना भी बहुत जरूरी है। &lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;Thanks...Bapi&lt;/div&gt;</description><link>http://rradhikari.blogspot.com/2008/11/blog-post.html</link><thr:total>0</thr:total><author>rradhikari@gmail.com (Bapi)</author></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-471899805446162401.post-2205135464502055724</guid><pubDate>Sat, 04 Oct 2008 12:51:00 +0000</pubDate><atom:updated>2008-10-04T18:25:05.753+05:30</atom:updated><title>गूगल का अपना वेब ब्राउजर : क्रोम</title><description>&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjTECrpzXzvorqjLW77HYWPDpcWfJV-_IRgO3niD-uV3jvWWuzCCgpMBr6mpUIhFlOJO0V0jsGJABI30t4T1BYfBQtAP8_gwYd5YkDkhS-CmlWMjShoQCJTK-mMdyGaRyo_xaR4MejUglI/s1600-h/googlebrowser.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5253281399700216866" style="FLOAT: left; MARGIN: 0px 10px 10px 0px; CURSOR: hand" alt="" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjTECrpzXzvorqjLW77HYWPDpcWfJV-_IRgO3niD-uV3jvWWuzCCgpMBr6mpUIhFlOJO0V0jsGJABI30t4T1BYfBQtAP8_gwYd5YkDkhS-CmlWMjShoQCJTK-mMdyGaRyo_xaR4MejUglI/s320/googlebrowser.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;p align="justify"&gt;&lt;a href="http://www.google.com/chrome/index.html?hl=en&amp;amp;brand=CHMI&amp;amp;utm_source=en-et&amp;amp;utm_medium=et&amp;amp;utm_campaign=en"&gt;&lt;strong&gt;क्रोम वेब ब्राउजर&lt;/strong&gt;&lt;/a&gt; ‘ओपन सोर्स कोड’ पर निर्भर ब्राउजर है। माइक्रोसॉफ्ट विण्डोज के लिए इसका बीटा वर्जन लांच हो चुका है लेकिन लाइनेक्स और मैक ओएसएक्स निर्माणाधीन है। इस ब्राउजर के निर्माण में जिन मुख्य बातों पर ध्यान दिया गया है वे हैं- सुरक्षा (सिक्यूरिटी), स्पीड और स्टेबिलिटी(स्थिरता)। सुरक्षा के लिए क्रोम में ऐसी तकनीक का प्रयोग किया गया है जो किसी भी हानिकारक या वायरस/मालवेअर युक्त साइट की लिंक पर क्लिक करते ही इसके हानिकारक होने की सूचना उपयोगकर्ता को मिल जाएगी। इसके साथ ही इस ब्राउजर का उपयोग न करने वाले लोगों तक यह सुविधा पहुँचाने के लिए एक ‘गूगल सेफ ब्राउजिंग एपीआई’ नामक सॉफ्टवेयर भी बनाया गया है। स्पीड ब्राउजिंग के लिए इस ब्राउजर में ‘जावा स्क्रिप्ट वर्चुअल मशीन’ का प्रयोग किया गया है। इसका निर्माण कार्य डेनमार्क में किया गया है। ‘जावा वर्चुअल मशीन के प्रयोग से ‘क्रोम’ पर ब्राउजिंग, बिना ज्यादा समय लिए की जा सकती है। इसके उपयोग से वी8 जावा स्क्रिप्ट नामक एक मशीन बनाई गई है जिसमें हिडन क्लास ट्रांजिशन, डायनमिक कोड जेनेरेशन और गार्बेज कलेक्शन जैसे फीचर दिए गए हैं। स्टेबिलिटी के लिए इस ब्राउजर को ‘मल्टी थ्रेडेड’ बनाया गया है। इस तकनीक के प्रयोग से ब्राउजर बिना किसी परेशानी के कई काम एक साथ कर सकता है। मल्टी थ्रेडेड होने की वजह से अगर यह बहुत से काम एक साथ करता है, तो कोई भी फंक्शन किसी दूसरे फंक्शन की वजह से रुकता नहीं है। इस ब्राउजर से पहले आए ब्राउजर ‘सिंगल थ्रेडेड’ तकनीक पर निर्भर हैं। इसके सुरक्षा पहलू पर काफी लोगों ने सवाल उठाए हैं। इस ब्राउजर में ऑटोमेटिक सॉफ्टवेयर डाउनलोड की सुविधा है, जिसकी वजह से उपयोगकर्ता के द्वारा किसी भी हानिकारक या वायरस वाली साइट खोलने की संभावना बढ़ जाती है। गूगल अपने इसी मल्टी मिलियन पाउंड डॉलर ब्राउजर की पॉलिसी की एक धारा की वजह से भी विवादों में पड़ गया था। इस ब्राउजर का एक और खास फीचर है, ‘इन्कोग्निटो’। इस फीचर की मदद से वेब ब्राउजर पर ब्राउजिंग हिस्ट्री और कुकीज स्टोर नहीं हो पाएगी।&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;Thanks...Bapi&lt;/div&gt;</description><link>http://rradhikari.blogspot.com/2008/10/blog-post.html</link><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjTECrpzXzvorqjLW77HYWPDpcWfJV-_IRgO3niD-uV3jvWWuzCCgpMBr6mpUIhFlOJO0V0jsGJABI30t4T1BYfBQtAP8_gwYd5YkDkhS-CmlWMjShoQCJTK-mMdyGaRyo_xaR4MejUglI/s72-c/googlebrowser.jpg" width="72"/><thr:total>0</thr:total><author>rradhikari@gmail.com (Bapi)</author></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-471899805446162401.post-1157305228230367241</guid><pubDate>Thu, 04 Sep 2008 05:04:00 +0000</pubDate><atom:updated>2008-09-04T10:41:31.964+05:30</atom:updated><title>कैसे निपटें विण्डोज़ विस्ता के क्रेश से</title><description>&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhcvFKCxMNuvzk374PKAd11xEj2VwaOsFIB9YirLFPBl_pRo-VT7Fx17SwHDT14wVWl6RT8MSXznARAwJPz3lD3hsxHiKn9U5-YIE8Jpsd0SPsf-fzNawJKjJLcc3CwWO9mU9ZbmUKKAuM/s1600-h/vindows+vista.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5242029314917677634" style="FLOAT: left; MARGIN: 0px 10px 10px 0px; CURSOR: hand" alt="" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhcvFKCxMNuvzk374PKAd11xEj2VwaOsFIB9YirLFPBl_pRo-VT7Fx17SwHDT14wVWl6RT8MSXznARAwJPz3lD3hsxHiKn9U5-YIE8Jpsd0SPsf-fzNawJKjJLcc3CwWO9mU9ZbmUKKAuM/s200/vindows+vista.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt; विण्डोज़ विस्ता के लाँच होते ही सभी कंप्यूटर प्रेमियों में इस ऑपरेटिंग सिस्टम को इंस्टॉल करने की होड़ सी लग गई थी। इसकी थीम लाँच होने के बाद से ही लोग इस सॉफ्टवेयर के इंतज़ार में नज़रे बिछाए बैठे थे।आपने भी बड़े शौक से अपने कंप्यूटर पर विण्डोज़ विस्ता को इंस्टॉल किया होगा। लेकिन ज़्यादातर लोग विण्डोज़ इंस्टॉल करने के बाद उसके क्रेश हो जाने से परेशान हो जाते हैं।उनकी कई ज़रूरी जानकारियाँ इस क्रेश में नष्ट हो जाती हैं। लेकिन विण्डोज़ विस्ता के पास आपकी इस परेशानी का हल है।विस्ता के साथ कंप्लीट-पीसी-बैकअप नामक टूल आता है जो आपको अपनी ज़रूरी फाइल, प्रोग्राम और किसी भी तरह का डाटा हार्ड डिस्क पर कॉपी करने में मदद करता है। इस टूल और विण्डोज़ की इंस्टॉलेशन सीडी की मदद से आप अपनी फाइलों के बैकअप के साथ ही विण्डोज़ को फिर से इंस्टॉल कर पाऐंगे। अगर आपके पास यह विण्डोज़ इंस्टॉलेशन सीडी उपलब्ध नहीं है तो आप F8 ‘की’ के माध्यम से उपलब्ध एडवांस्ड बूट ऑपरेशन्स की सहायता ले सकते हैं। आपके सिस्टम पर विण्डोज़ अगर सिस्टम बूट(चालू) होते समय क्रेश हुआ है तो इसका हल भी है विस्ता के पास। इस क्रेश से निपटने के लिए एक कमांड लाइन टूल उपलब्ध है।जिसको बूटट्रेक कहा जाता है। यह टूल डिस्क ऑपरेटिंग सिस्टम पर उपलब्ध कमांड का उपयोग करके इस क्रेश से सिस्टम को रिकवर कर सकता है।तो अब बिना क्रेश की चिन्ता किए,लेकिन सावधानीपूर्वक कार्य करते हुए विस्ता की विशेषताओं का आनन्द लिया जा सकता है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;Thanks...Bapi&lt;/div&gt;</description><link>http://rradhikari.blogspot.com/2008/09/blog-post.html</link><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhcvFKCxMNuvzk374PKAd11xEj2VwaOsFIB9YirLFPBl_pRo-VT7Fx17SwHDT14wVWl6RT8MSXznARAwJPz3lD3hsxHiKn9U5-YIE8Jpsd0SPsf-fzNawJKjJLcc3CwWO9mU9ZbmUKKAuM/s72-c/vindows+vista.jpg" width="72"/><thr:total>2</thr:total><author>rradhikari@gmail.com (Bapi)</author></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-471899805446162401.post-4169909881351871093</guid><pubDate>Sat, 23 Aug 2008 10:36:00 +0000</pubDate><atom:updated>2008-08-23T16:08:45.588+05:30</atom:updated><title>जानिए ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टम (GPS) को</title><description>&lt;div align="justify"&gt;क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि आप किसी नए शहर की सैर करने गए हों और वहाँ के रास्तों से अनजान आपने सही रास्ता चुनने में भूल कर दी और फिर बहुत सारी परेशानियों का सामना करना पड़ा हो आपको? अगर आप इस तरह की परेशानी का अनुभव कर चुके हैं तो यह जानकारी आपको बहुत पसंद आएगी।इस तरह की परेशानियों के समाधान के रूप में सामने आया है जीपीएस यानी ग्लोबल पोज़ीशनिंग सिस्टम। यह संयुक्त राज्य अमेरिका के स्पेस पर आधारित एक रेडियो नेविगेशन सिस्टम है। यह सिस्टम, आपको न केवल आपके वर्तमान स्थान के बारे में बताएगा, बल्कि आप जिस स्थान पर पहुँचना चाहते हैं उसका सही रास्ता भी बताएगा। यह सिस्टम आम लोगों को टाइमिंग सर्विस (सही वक्त बताने की सेवाएँ) भी प्रदान करता है। जीपीएस अपने बहुत सारे उपयोगकर्ताओं को सही समय और सही स्थान बताने की सेवाएँ प्रदान कर रहा है। जीपीएस तीन भागों से मिलकर बनता है। इनमें से पहला है जीपीएस का वह उपग्रह जो पृथ्वी के चारों ओर परिक्रमा लगाता है। दूसरा है, पृथ्वी पर स्थित नियंत्रण और प्रबोधन केन्द्र तथा तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण, उपयोगकर्ताओं के पास रखा जीपीएस रिसीवर।जीपीएस उपग्रह से प्रसारित होने वाले संकेत (सिग्नल) जीपीएस रिसीवर पहचाने जाने पर अधिगृहीत कर लिए जाते हैं। इसके पश्चात जीपीएस रिसीवर उपयोगकर्ताओं को स्थान की त्रिआयामी जानकारी प्रदान करता है, जिसमें उस स्थान की लंबाई, चौड़ाई और ऊँचाई शामिल होती हैं।जीपीएस रिसीवर बाज़ार में आसानी से प्राप्त हो सकते हैं। इसे लाने के बाद आप इसकी मदद से आसानी से यह पता लगा सकते हैं कि आप कहाँ हैं और जहाँ जाना चाहते हैं उस जगह का सही रास्ता क्या है। परिवहन सेवाओं के लिए यह कितना ज़रूरी है यह तो आप उन दिनों को याद करके पता लगा ही सकते हैं, जब आपको बसों और ट्रेनों का घंटों इंतज़ार करने के बाद भी यह पता नहीं चल पाता था कि आखिर उनके आने का सही समय क्या है? परंतु अब जीपीएस की मदद से यह संभव हो गया है।आपातकालीन सेवाएँ और आकस्मिक विपदाओं में सहायक संस्थाएँ दोनों ही जीपीएस पर निर्भर हैं, ताकि अपनी सेवाएँ समय पर पहुँचा सकें और लोगों की जान समय पर बचाई जा सके। प्रतिदिन जिन सेवाओं का हम उपयोग करते हैं, जैसे बैंक, मोबाइल सेवाएँ, विद्युत ग्रिड आदि सभी अपनी सेवाएँ ठीक तरीके से पहुँचाने में जीपीएस पर ही निर्भर रहती हैं। जीपीएस को 1994 में अमेरिकी सैन्य सेवाओं के लिए विकसित किया गया था। इस जीपीएस रिसीवर को सैनिक अपने साथ रखते थे। सभी गाड़ियों, हेलिकॉप्टरों और विमानों में इस रिसीवर को लगा दिया जाता था। इस रिसीवर को बहुत से विमानों में उपयोग किया जाता था जैसे एफ-16, के सी-135 एरियल टैंकर आदि।लेकिन अब इसका प्रयोग प्रतिदिन काम में आने वाली सेवाओं में भी होने लगा है। इनमें से सबसे लोकप्रिय सेवा को ‘वेहिकल ट्रैकिंग’ के नाम से जाना जाता है। ऑटोमोबाइल निर्माता अब गाड़ियों में मूविंग मैप डिस्प्ले लगा रहे हैं जो जीपीएस द्वारा संचालित होते हैं। जिन गाड़ियों में मूविंग मैप डिस्प्ले लगा होता है उसमें चालक को सही रास्ते की जानकारी मैप के ज़रिए मिल जाती है।एक खास तकनीक से तैयार किए गए गुब्बारे जीपीएस की मदद से ओज़ोन की परत में होने वाले नुकसान की जानकारी समय-समय पर प्रदान करते रहते हैं। जीपीएस से मिल रही इन सेवाओं से सुरक्षा सेवाओं के साथ-साथ आम लोगों के जीवन में कई बदलाव आ गए हैं। इस तकनीक का भविष्य शायद हमारी सोच से भी ऊपर है। और निरंतर इसका प्रयोग करके नए विकास होते ही रहेंगे।&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;Thanks...Bapi&lt;/div&gt;</description><link>http://rradhikari.blogspot.com/2008/08/gps.html</link><thr:total>0</thr:total><author>rradhikari@gmail.com (Bapi)</author></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-471899805446162401.post-8003316141740871046</guid><pubDate>Sat, 26 Jul 2008 10:08:00 +0000</pubDate><atom:updated>2008-07-26T15:42:12.460+05:30</atom:updated><title>माइक्रोसॉफ्ट का नया ऑपरेटिंग सिस्‍टम ‘मल्‍टी टच’</title><description>&lt;p align="justify"&gt;विश्व की अग्रणी साफ्टवेयर कंपनी माइक्रोसाफ्ट कार्पोरेशन ने अपने विंडो आपरेटिंग सिस्टम के अगले संस्करण को टच स्क्रीन बनाने की योजना बनाई है। विंडो के अगले संस्करण को मल्टी टच कहा जाएगा और यह विंडो-सेवन का हिस्सा होगा। उन्होंने बताया कि इस विंडो में टच स्क्रीन का भी विकल्प होगा और इसे अगले वर्ष के अंत तक जारी कर दिया जाएगा।&lt;br /&gt;इस विंडो में आपरेटिंग सिस्टम को अंगुली के छूने भर से नियंत्रण किया जा सकेगा और इसके अलावा इस पर काम करने के अन्य विकल्प भी उपलब्ध होंगे। टच स्क्रीन विंडो लाने का प्रयास इसका उदाहरण है कि माइक्रोसाफ्ट अपने उत्पादों को किस तरह से उन्नत बनाता है।&lt;br /&gt;माइक्रोसाफ्ट ने इस संबंध में एप्पल इंक से संपर्क किया है। एप्पल इंक ने इस प्रणाली का इस्तेमाल अपने आई फोन में सफलता पूर्वक किया है, जिसमें कंप्यूटर, फोन और इंटरनेट उपलब्ध कराया गया &lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;Thanks...Bapi&lt;/div&gt;</description><link>http://rradhikari.blogspot.com/2008/07/blog-post.html</link><thr:total>2</thr:total><author>rradhikari@gmail.com (Bapi)</author></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-471899805446162401.post-542159391189968920</guid><pubDate>Wed, 07 May 2008 12:30:00 +0000</pubDate><atom:updated>2008-05-07T18:08:33.619+05:30</atom:updated><title>जानें Windows की सामान्य परेशानियों को.....</title><description>&lt;div align="justify"&gt;आजकल विश्व के अधिकांश कम्प्यूटर्स में ऑपरेटिंग सिस्टम के रूप में विण्डोज़ का प्रयोग हो रहा है, किन्तु बहुत यूज़र फ्रेन्डली होने के साथ ही यह एक नाजुक सॉफ्टवेयर है तथा आदर्श परिस्थितियाँ न होने पर बहुत जल्द क्रैश हो जाता है। यदि आप भी अपने कम्प्यूटर में विण्डोज़ के बार-बार क्रैश होने से परेशान हैं तो नीचे दी गई टिप्स को आजमा कर देखें।&lt;br /&gt;1. यदि कोई प्रोग्राम या फॉन्ट आदि ठीक से काम नहीं कर रहा है तो रीबूट करें। अधिकांश एरर अस्थायी होते हैं व कई भिन्न प्रकार के प्रोग्राम्स के एक साथ रन होने से आ सकते हैं। रीबूट करने पर प्रोग्राम्स के दोबारा लोड होने से ये ठीक हो सकते हैं।&lt;br /&gt;2. यदि आपकी समस्या किसी विशेष सॉफ्टवेयर को इंस्टॉल करने के बाद आरंभ हुई है तो उसे अनइंस्टॉल करके देखें।&lt;br /&gt;3. विण्डोज़ की सभी सिस्टम फाइल्स मौजूद हैं या नहीं- जानने के लिए सिस्टम फाइल चेकर का प्रयोग करें। यह उन फाइल्स को पुनः अपने स्थान पर पहुँचा देगा जो मौजूद नहीं हैं या करप्ट हो गई हैं।&lt;br /&gt;4. यदि आपने अपना माउस बदला है, नया साउण्ड कार्ड या कोई अन्य हार्डवेयर इंस्टॉल किया है तो उसे हटाकर देखें। अपने विक्रेता या हार्डवेयर निर्माता की वेबसाइट से उसके लिए सबसे उपयुक्त सॉफ्टवेयर (ड्राइवर) प्राप्त करें। विक्रेता से मालूम करें कि क्या नया हार्डवेयर आपके पुराने हार्डवेयर के साथ कंपेटिबल है?&lt;br /&gt;5. खराब मैमोरी विण्डोज़ के क्रैश होने का सबसे प्रमुख कारण है। यदि आपको पेज फॉल्ट, इल्लीगल ऑपरेशन या फेटल एक्सेप्शन आदि संदेश मिल रहे हैं तो रैम को चैक कराएँ। नई मैमोरी मॉड्यूल लगाने के बाद ऐसे संदेश मिलने का अर्थ यह हो सकता है कि आपकी रैम मॉड्यूल खराब हो या कंपेटिबल न हो।&lt;br /&gt;6. कम्प्यूटर के चलते-चलते रुक जाने या ठीक काम नहीं करने पर स्कैन डिस्क, फिर डिस्क क्लीन-अप व फिर डीफ्रैग अवश्य करें।&lt;br /&gt;7. अपनी हार्ड डिस्क का काफी हिस्सा खाली रखें। याद रखें, विण्डोज़ को चलते समय स्वैप फाइल्स या टैम्परेरी फाइल्स बनाने के लिए काफी स्थान की आवश्यकता होती है। यदि आपकी हार्ड डिस्क में जगह कम है तो कई प्रकार के फॉल्ट पैदा हो सकते हैं, सिस्टम हैंग हो सकता है या विण्डोज़ क्रैश हो सकता है।&lt;br /&gt;8. अपनी हार्ड डिस्क को नियमित रूप से वायरस के लिए स्कैन करें। फाइल्स के संक्रमित होने पर एक वायरस रहित फ्लॉपी या विण्डोज़ की सीडी से बूट करें और पुनः विण्डोज़ इंस्टॉल करें।&lt;br /&gt;9. यदि आपके नए कम्प्यूटर में विण्डोज़ बार-बार क्रैश होता है तो विक्रेता को मदरबोर्ड व अन्य भागों की कंपेटिबिलिटी चैक करने को कहें। हो सकता है इनमें से कुछ विण्डोज़ या खासकर विण्डोज़ के आपके वर्जन के साथ काम करने योग्य नहीं हों।&lt;br /&gt;10. डिवाइस फेल होने संबंधी एरर आने पर 'स्टार्टिंग विण्डोज़...' आने पर एफ8 दबाकर विण्डोज़ को सेफ मोड में स्टार्ट करें। स्टार्ट। सेटिंग्स। कंट्रोल पैनल। सिस्टम में डिवाइस मैनेजर को सिलेक्ट कर उसमें यह देखें कि उस सूची में कोई डुप्लीकेट डिवाइस न हो। यदि ऐसा हो तो डिवाइस को हटाकर रीबूट करें। &lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;Thanks...Bapi&lt;/div&gt;</description><link>http://rradhikari.blogspot.com/2008/05/windows.html</link><thr:total>4</thr:total><author>rradhikari@gmail.com (Bapi)</author></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-471899805446162401.post-4821256426498091312</guid><pubDate>Wed, 30 Apr 2008 09:54:00 +0000</pubDate><atom:updated>2008-04-30T15:24:41.096+05:30</atom:updated><title>सैमसंग का डूएल मोड फोन</title><description>&lt;div align="justify"&gt;सैमसंग के उपभोक्ताओं के लिए बहुत बड़ी खुशखबरी है। सैमसंग टेली कम्युनिकेशन्स इंडिया ने हाल ही में सीडीएमए व जीएसएम सुविधा वाला डूएल हैंडसेट भारत में भी लांच किया है। सैमसंग '2 ऑन' में आप एक ही सेट में जीएसएम और सीडीएमए सुविधाओं का उपयोग कर सकते हैं। इसकी सीडीएमए सुविधा के अंतर्गत टाटा इंडिकॉम के साथ रिलायंस कम्युनिकेशन्स, दोनों ही सुविधाओं का उपयोग कर सकते हैं। इस फोन में 2.3 इंच टीएफटी टच स्क्रीन, 2 मेगापिक्सेल कैमरा, 1 जीबी से अधिक क्षमता वाले माइक्रो एसडी कार्ड और एमपी3/एएसी+ प्लेयर की सुविधा उपलब्ध है। इतना ही नहीं, इसके सेट को मॉडेम के रूप में भी 153 केबीपीएस कनेक्टिविटी के रूप में उपयोग में लाया जा सकता है। बाजार में इस फोन की अनुमानित कीमत 16,500 रुपए है। &lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;Thanks...Bapi&lt;/div&gt;</description><link>http://rradhikari.blogspot.com/2008/04/blog-post_30.html</link><thr:total>1</thr:total><author>rradhikari@gmail.com (Bapi)</author></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-471899805446162401.post-2551193633489224284</guid><pubDate>Mon, 28 Apr 2008 10:59:00 +0000</pubDate><atom:updated>2008-04-28T16:40:29.118+05:30</atom:updated><title>मोबाइल वैल्यू  एडेड सर्विसेज -  M वैस</title><description>&lt;p align="justify"&gt;वर्तमान में मोबाइल फोन न सिर्फ संचार का एक साधन है बल्कि इनका विस्तार हमारे व्यक्तित्व का एक हिस्सा बन चुका है। वर्तमान में हम मोबाइल को न सिर्फ एक-दूसरे का हाल जानने के लिए बल्कि एक-दूसरे की भावनाएँ, संवेदनाएँ और विचारों को व्यक्त करने का एक सशक्त माध्यम मानते हैं। दिनोंदिन मोबाइल उपभोक्ताओं की अपेक्षाएँ मोबाइल उद्योग से बढ़ती ही जा रही हैं। इतना ही नहीं, वर्तमान में मोबाइल सर्विसेज के चयन के पैमाने भी काफी बदल गए हैं। उपभोक्ता मोबाइल सेवाओं को उसकी वैल्यू एडेड सेवाओं के आधार पर चयन करने में अधिक रुचि दिखाने लगे हैं।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#000099;"&gt;क्या है वैस?&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;मोबाइल वैल्यू एडेड सर्विसेज (वैस) वे सेवाएँ हैं जो मूल रूप से वॉयस ऑफर का भाग न होकर उपभोक्ता को अलग से प्रदान की जाती है। इन अतिरिक्त सेवाओं के जरिए मोबाइल ऑपरेटरों के लिए आय का दूसरा विकल्प भी तैयार हो जाता है। इन सेवाओं का स्वाभाव समय के साथ-साथ बदलता रहता है।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#000099;"&gt;वैस की भूमिका&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;वर्तमान में मोबाइल सेवाओं के उद्योग में वैस की महत्वपूर्ण भूमिका है। वर्तमान में ऑपरेटरों के बीच कॉल रेट्स को कम करने की गलाकाट प्रतियोगिता है। ऐसे में वैल्यु एडेड सेवाएँ ऑपरेटरों की आय को बढ़ाने का बेहतर विकल्प हैं। वहीं भारत में वैस को मिल रहा प्रोत्साहन टेलीकॉम उद्योग को नई दिशा प्रदान कर रहा है। वैस द्वारा मोबाइल सेवाएँ उपभोक्ताओं को कम कॉल रेट्स के साथ-साथ विभिन्न लुभावनी सेवाओं को प्रदान करती हैं। इनमें मुख्य रूप से भारतीय ग्राहकों को जैसे - बॉलीवुड रिंगटोन्स, वॉलपेपर्स, कॉलर टोन्स आदि शामिल हैं। साथ ही वर्तमान में टीवी व रेडियो जैसे संचार साधनों के साथ मिलकर भी इन सुविधाओं को एक नया रूप मिल चुका है, जिसके अंतर्गत रिएलिटी शो व अन्य कार्यक्रमों में उपभोक्ता एसएमएस सुविधा के तहत भाग लेते हैं। इससे जहाँ टीवी कार्यक्रमों की लोकप्रियता बढ़ती है, वहीं मोबाइल ऑपरेटरों को भी बहुत लाभ होता है।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#000099;"&gt;वैस का स्वरूप&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;मोबाइल सेवाओं&lt;/span&gt; के बाजार में वैस विभिन्न रूपों में उपभोक्ताओं का आकर्षण बनी हुई है। जहाँ मनोरंजन की दृष्टि से कंपनियाँ चुटकुले, बॉलीवुड रिंगटोन्स और गेम्स जैसी सुविधाएँ प्रदान करती हैं, वहीं दूसरी ओर वैस के अंतर्गत विभिन्न प्रकार की जानकारियाँ (मूवी टिकट, क्रिकेट स्कोर, समाचार, बैंकिंग आदि) भी प्रदान की जाती है। इतना ही नहीं, वर्तमान में इसके बढ़ते प्रसार का आलम यह है कि आप घर बैठे अपने मोबाइल से रेलवे टिकट तक खरीद सकते हैं। इसके सभी स्वरूप वर्तमान पीढ़ी के बीच बेहद लोकप्रिय हैं। &lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;Thanks...Bapi&lt;/div&gt;</description><link>http://rradhikari.blogspot.com/2008/04/m.html</link><thr:total>0</thr:total><author>rradhikari@gmail.com (Bapi)</author></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-471899805446162401.post-1927115686385255972</guid><pubDate>Sat, 26 Apr 2008 05:26:00 +0000</pubDate><atom:updated>2008-04-26T11:01:21.644+05:30</atom:updated><title>शीघ्रतापूर्वक प्रोग्राम खोलना</title><description>&lt;p align="justify"&gt;हम सभी चाहते हैं कि एक के बाद एक कई क्लिक करके अपना समय व्यर्थ न गवाएँ और अपने वांछित प्रोग्राम को शीघ्रतापूर्वक खो लें। तो इसके लिये 'रन' (Run) बहुत बढ़िया साधन है। बस आपको कमांड्स याद होने चाहिये।&lt;br /&gt;यहाँ पर हम 'रन' (Run) बॉक्स में टाइप करने के लिये कुछ कमांड्स दे रहे हैं:&lt;br /&gt;रन बॉक्स खोलने के लिये एंटर+आर (Enter+R) कुंजियों को दबायें या स्टार्टरन (StartRun) का चयन करें।&lt;br /&gt;अब खुलने वाले बॉक्स में निम्न कमांड्स टाइप करें:&lt;br /&gt;केलकुलेटर (Calculator) खोलना़ टाइप करें - &lt;span style="color:#000099;"&gt;calc&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;कैरेक्टरमैप (Character Map) खोलना़ टाइप करें - &lt;span style="color:#000099;"&gt;charmap&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;कंट्रोल पैनल (Control Panel) खोलना़ टाइप करें - &lt;span style="color:#000099;"&gt;control&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;फॉन्ट फोल्डर (Fonts Folder) खोलना़ टाइप करें - &lt;span style="color:#000099;"&gt;fonts&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;कमाण्ड प्राम्प्ट (Command Prompt) खोलना़ टाइप करें - &lt;span style="color:#000099;"&gt;cmd&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;माइक्रोसॉफ्ट वर्ड (Microsoft Word) खोलना़ टाइप करें - &lt;span style="color:#000099;"&gt;winword&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;माइक्रोसॉफ्ट एक्सेल (Microsoft Excel) खोलना़ टाइप करें - &lt;span style="color:#000099;"&gt;excel&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;माइक्रोसॉफ्ट पॉवरपाइंट (Microsoft Powerpoint) खोलना़  टाइप करें - &lt;span style="color:#000099;"&gt;powerpnt&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;वर्डपैड (Wordpad) खोलना़ टाइप करें - &lt;span style="color:#000099;"&gt;write&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;माइक्रोसॉफ्ट पेंट (Microsoft Paint) खोलना़ टाइप करें - &lt;span style="color:#000099;"&gt;mspaint&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;फोटोशॉप (Photoshop) खोलना़ टाइप करें - &lt;span style="color:#000099;"&gt;photoshop&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;एक्रोबेट (Acrobat) खोलना़ टाइप करें - &lt;span style="color:#000099;"&gt;acrobat&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;डिव्हाइस मैनेजर (Device Manager) खोलना़ टाइप करें - &lt;span style="color:#000099;"&gt;devmgmt.msc&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;डिस्क डिफ्रैगमेंट (Disk Defragment) खोलना़ टाइप करें - &lt;span style="color:#000099;"&gt;dfrg.msc&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;डिस्क क्लीनअप (Disk Cleanup) खोलना़ टाइप करें - &lt;span style="color:#000099;"&gt;cleanmgr&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;चेक डिस्क (Check Disk) खोलना़ टाइप करें - &lt;span style="color:#000099;"&gt;chkdsk&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;डिस्प्ले प्रापर्टीज़ (Display Properties) खोलना़ टाइप करें - &lt;span style="color:#000099;"&gt;desk.cpl&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;आन स्क्रीन कीबोर्ड (On Screen Keyboard) खोलना़ टाइप करें - &lt;span style="color:#000099;"&gt;osk&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;एड रिमूव्ह प्रोग्राम (Add/Remove Programs) खोलना़ टाइप करें - &lt;span style="color:#000099;"&gt;appwiz.cpl&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;इंटरनेट एक्सप्लोरर (Internet Explorer) खोलना़ टाइप करें - &lt;span style="color:#000099;"&gt;iexplore&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;फ्रीसेल कॉर्ड गेम (Free Cell Card Game) खोलना़ टाइप करें - &lt;span style="color:#000099;"&gt;freecell&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;हार्ट्स कॉर्ड गेम (Hearts Card Game) खोलना़ टाइप करें - &lt;span style="color:#000099;"&gt;mshearts&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;माइनस्वीपर गेम (Minesweeper Game) खोलना़ टाइप करें - &lt;span style="color:#000099;"&gt;winmine&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;पिनबाल गेम (Pinball Game) खोलना़ टाइप करें - &lt;span style="color:#000099;"&gt;pinball &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;Thanks...Bapi&lt;/div&gt;</description><link>http://rradhikari.blogspot.com/2008/04/blog-post_26.html</link><thr:total>0</thr:total><author>rradhikari@gmail.com (Bapi)</author></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-471899805446162401.post-3773129515370045923</guid><pubDate>Sat, 19 Apr 2008 07:00:00 +0000</pubDate><atom:updated>2008-04-19T12:41:38.851+05:30</atom:updated><title>१० पैसे की मोबाइल कॉल - क्या सपना होगा पूरा ?</title><description>&lt;div align="justify"&gt;टेलीकॉम नियामक प्राधिकरण  ने हाल ही में एक वक्तव्य जारी कर दावा किया है कि वह दिन अब दूर नहीं  जब 10 पैसे में मोबाइल कॉल हो सकेगी. इसका कारण यह बताया गया कि एक ओर मोबाइल कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्द्धा तो बढ रही है, और साथ ही साथ ग्राहक आधार बढने पर प्रति कनेक्शन  लागत भी निरंतर घट रही है. मोबाइल कंपनियों के सूत्रों के अनुसार प्रति ग्राहक प्राप्ति पहले की तुलना में काफी कम होती जा रही है. वर्तमान में दो प्रकार की मोबाइल प्रोद्योगिकी देश में उपयोग की जा रही है. एक है सीडीएमए और दूसरा है जीएसएम. दोनों प्रौद्योगिकिया अलग-अलग है और इसलिए अभी तक दोनों प्रौद्योगिकियों की कंपनियां भी अलग-अलग  हैं. देश में सबसे पहले मोबाइल का प्रवेश जीएसएम प्रौद्योगिकी के आधार पर हुआ और उसकी अग्रणी कंपनी है, सुनील भारती की कंपनी एयरटेल. साथ ही साथ पहले एस्सार हच और बाद में वोडाफोन के नाम से दूसरी कंपनी है, जो जीएसएम प्रौद्योगिकी के आधार पर बाजार में दूसरा सस्थान बनाये हुए है. इनके अतिक्ति बाजार में आदित्य बिरला की आइडिया एवं अन्य कई कंपनियां जैसे बीपीएल, स्पाइस इत्यादि हैं, जो बाजार में हिस्सेदारी रखती हैं. सभी जानते हैं कि सर्वप्रथम जब मोबाइल फोन इस देश में आया तो प्रति मिनट कॉल शुल्क 32 रुपये और सुनने के लिए 16 रुपये रखा गया था. ग्राहक आधार बढता गया, नयी कंपनियां आती रहीं और कॉल शुल्क घटता गया. लेकिन जब तक सीडीएमए पर आधारित प्रौद्योगिकी का उपयोग करते हुए रिलायंस और टाटा नहीं आयीं थी, तब तक ग्राहकों को कंपनियों के एकाधिकार के चलते भरी कॉल शुल्क देना पडता था. लेकिन पहले रिलायंस और बाद में टाटा के आने प्रतिस्पर्द्धा का स्तर बढ गया और कॉल शुल्कों में भारी गिरावट देखी गयी. अभी तो कॉल शुल्क के बारे में निश्चित तौर पर कहना काफी हद तक नामुमकिन सा लगता है, क्यूंकि विभिन्न प्रकार की योजनाएं कंपनियां लेकर आती हैं. अपने ग्राहक आधार को बढाने के लिए कंपनियां अपने नेटवर्क पर की जानेवाली कॉल को थोडा सा शुल्क लेकर मुफ्त या 10 पैसे प्रति मिनट पर उपलब्ध करा देती हैं. अधिक घूमंतू लोगों के लिए कम लागत के रॉमिंग प्लान, युवाओं के लिए नाइट टॉक प्लान, लघु संदेशों (एसएमएस) के लिए अलग प्रकार के प्लान एसटीडी कॉल के लिए कुछ और अलग प्लान जैसे अलग-अलग प्रकार के तरीकों द्वारा मोबाइल कंपनियां अपने ग्राहकों को लुभाने का प्रयास करती हैं. लेकिन फिलहाल सीडीएमए प्रौद्योगिकी के मोबाइल के कॉल शुल्क जीएमएम प्रौद्योगिकी के कॉल शुल्कों से काफी कम है. कुछ भी कहे, लेकिन निरंतर बढती प्रतिसस्पर्द्धा के चलते देश में मोबाइल कॉल शुल्कों की दरें भी घटी और उपभाक्ताओं की चयन की स्वतंत्रता भी बढती गयी. आज उपभोक्ता को टेलीफोन कनेक्शन मिनटों में मिल जाता है, जबकि मोबाइल कंपनियों के आने से पूर्व लैंडलाइन कनेक्शन मिलने में 8 से 15 महीने तक का समय लगता था. आज सामान्य कामगार भी मोबाइल फोन रख सकते हैं और रखते भी हैं. चाहे ऑटो रिक्शा ड्राईवर हो, बढई हो, एलेक्ट्रिसियन हो अथवा पलंबर हो, शहरों में हर किसी के हाथ में मोबाइल स्वाभाविक बात है. जब देश आजाद हुआ तब 10000 लोगों के पीछे मात्र दो लोगों के पास ही टेलिफोन कनेक्शन होता था.  2007 दिसंबर तक के आकडों के अनुसार देश में 28 करोड 57  लाख टेलीफोन कनेक्शन थे, जबकि आज हर दस में से लगभग तीन लोगों के पास इस देश में टेलीफोन कनेःशन हैं. इसमें से मोबाइल कनेक्शन की संख्या 24 करोड 56 लाख है. जिस प्रकार से लैंडलाइन टेलीफोन तारों से जुडते हैं, मोबाइल कनेक्शन बिना तारों के होते हैं, लेकिन उनके संदेशों के जाने का माध्यम स्पेक्ट्रम  होता है. यह स्पेक्ट्रम  रक्षा मंत्रालय के पास ही उपलब्ध होता है. सैन्य कार्यों से यह स्पेक्ट्रम  खाली कर सरकार को दिया जाता है, जिसे सरकार टेलीकॉम कंपनियों को लाइसेंस फीस लेकर आवंटित करती है. देश में कुल स्पेक्ट्रम  सीमित हैं. प्रधानमंत्री ने भी यह माना है कि स्पेक्ट्रम  कीमती और सीमित संसाधन है, जिसका उपयुक्त प्रयोग होना चाहिए. वास्तव में किसी भी कंपनी को आवंटित स्पेक्ट्रम  उसके द्वारा दिये जाने वाले कनेक्शन की अधिकतम मात्रा को तय करेगा. यानी जिस कंपनी के पास अधिक स्पेक्ट्रम होगा, वही बाजार में बडी  कंपनी बनेगी.एक समय था कि जब भारतीय टेलीकॉम उद्योग सरकारी क्षेत्र में होने के कारण पूर्णतः नियंत्रित था. भारी नियंत्रण के चलते टेलीकॉम सेवाओं का अपेक्षित विस्तार नहीं हो पाया. तकनीकी विकास और नियंत्रणों के समाप्त होने एवं बडी संख्या में निजी क्षेत्र की कंपनियों के प्रवेश ने भारत में टेलीकॉम सेवाओं का अभूतपूर्व विकास करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी. हाल ही में स्पेक्ट्रम की बिक्री को लेकर एक बडा विवाद खडा हो गया है. अपनी सेवाओं को बढाने के लिए अधिक स्पेक्ट्रम की मांग को लेकर 46 कंपनियां स्पेक्ट्रम के लिए पंक्ति में थीं. यह पंक्ति लाइसेंस मिलने की तिथि के अनुसार क्रमबद्ध की गयी थी. भारत सरकार के संचार मंत्रालय द्वारा एक प्रेस नोट जारी कर रिलाइंस कम्यूनीकेशन को जीएसएम लाइसेंसी का दर्जा प्रदान कर दिया और उसे 1651 करोड रुपये में स्पेक्ट्रम उसी दिन बेच दिया.  रिलाइंस कम्यूनिकेंशन 1651 करोड रुपये के डिमांड डाफ्ट के साथ पहले से ही तैयार बैठी थी. इस प्रकार यह कंपनी ४६ कंपनियों जिन्होंने 575 आवेदन किये हुए थे की पंक्ति में सबसे आगे निकल गयी साथ ही साथ लाभांवित हुई एक अन्य सीडीएमए कंपनी टाटा  का मानना है कि इससे 6000 करोड रुपये के राजस्व का घाटा हुआ. सरकार पहले आओ और पहले पाओ के स्थान पर यदि स्पेक्ट्रम बिक्री के लिए नीलामी की प्रक्रिया अपनाती, तो उसे 6000 करोड रुपये अधिक मिलता. इसके साथ ही कानूनी युद्ध शुरू हुए और साथ ही शुरू हुआ टेलीकॉम नियामक प्राधिकरण और भारत सरकार के टेलीकॉम विभाग के बीच वाक्‌युद्ध. इस सब घटनाक्रम से यह स्पष्ट प्रतीत होता है कि मोबाइल कंपनियों की इस लडाई में सरकार द्वारा कुछ विशेष कंपनियों को अनुचित रूप से लाभ पहुंचाने का प्रयास किया गया है. जिसका नुकसान अन्य कंपनियों और विशेष तौर पर छोटी कंपनियों को उठाना पडेगा. लेकिन यह नुकसान कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा. पूर्व के अनुभव से यह स्पष्ट है कि टेलीकॉम उद्योग में प्रतिस्पर्धा के चलते कॉल शुल्क 32 रुपये प्रति मिनट से घटकर आमतौर पर 50 से एक रुपये तक पहुंच चुका है. लोगों को टेलीफोन सुविधा सस्ते से सस्ते दाम पर उपलब्ध कराने के लिए टेलीकॉम कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा बढाने में सरकार का एक विशेष दायित्व है. जिन परिस्थितियों में अचानक नीति परिवर्तन करते हुए स्पेक्ट्रम आवंटित करने का कार्य सरकार ने किया यह उसके इस दायित्व के प्रतिकूल है, लेकिन 10 पैसे प्रति मिनट कॉल के लक्ष्य को यदि प्राप्त करना है तो सरकार को लॉबीवाद के मार्ग से अलग हटकर आम आदमी के हित में सोचना होगा.&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;Thanks...Bapi&lt;/div&gt;</description><link>http://rradhikari.blogspot.com/2008/04/blog-post_19.html</link><thr:total>0</thr:total><author>rradhikari@gmail.com (Bapi)</author></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-471899805446162401.post-8404193138899794159</guid><pubDate>Thu, 17 Apr 2008 09:01:00 +0000</pubDate><atom:updated>2008-04-17T14:37:34.935+05:30</atom:updated><title>ऑनलाइन वायरस से कैसे निपटें?</title><description>&lt;p align="justify"&gt;वर्ष 2008 में पिछले कई वर्षों की तुलना में ऑनलाइन वायरस के हमले ज्यादा होंगे। इसका दायरा केवल कम्प्यूटर के कुछ सॉफ्टवेयर्स तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि खुलने वाली वेबसाइट्स और इंटरनेट तक्नालाजी से जुड़ने वाले उपकरण जैसे मोबाइल, प्रिंटर आदि के भी प्रभावित होने की संभावनाएँ बढ़ेंगी। एक एंटी वायरस कंपनी द्वारा हाल ही में वर्ष 2008 में इंटरनेट सिक्योरिटी को होने वाले दस शीर्ष खतरों की सूची जारी की गई है। इनमें वायरस के हमले और साइबर अपराध की संभावनाएँ शामिल हैं।&lt;br /&gt;क्या हैं वर्ष 2008 के : मैकएफी का अध्ययन यह कहता है कि अगले वर्ष ऐसी वेबसाइट्स की संख्या काफी बढ़ जाएगी, जो ई-बिजनेस के बहाने आपके क्रेडिट और डेबिट कार्ड या अकाउंट का पासवर्ड ले लेंगी और उसका दुरुपयोग करेंगी।&lt;br /&gt;* अमूमन टेक्स्ट स्पेम के रूप में आने वाले वायरसों की तुलना में नए वर्ष में इमेज स्पेम्स की संख्या बढ़ जाएगी। ये टेक्स्ट स्पेम की तुलना में तीन गुना बड़े होंगे। गत नवंबर में कुल स्पेम्स में से 40 प्रतिशत इमेज स्पेम थे। इन स्पेम्स के निशाने पर होंगी एमपीईजी फाइल्स, ई-मेलफाइल्स या अन्य मीडिया फाइल्स।&lt;br /&gt;* अध्ययन के मुताबिक वीडियो फाइल्स का ऑनलाइन आदान-प्रदान भी वायरस के खतरे से खाली नहीं रहेगा।&lt;br /&gt;* स्मार्टफोन टेक्नोलॉजी के बढ़ते उपयोग के कारण मोबाइल फोन खतरे के दायरे में रहेंगे। ब्लूटूथ, एसएमएस, इंस्टेंट मैसेजिंग, ई-मेल, वायफाय, यूएसबी, ऑडियो-वीडियो और वेब एक्सेस की सुविधा का उपयोग मोबाइल फोन उपभोक्ता काफी करने लगे हैं। इससे उपकरणों के वायरस के कारण खराब होने का खतरा बना रहेगा। मैकएफी ने हाल ही में ऐसे वायरस को खोजा है, जो मोबाइल फोन पर एसएमएस भेजकर उसे खराब कर देता है।&lt;br /&gt;* वर्ष 2008 में कमर्शियल पोटेंशियल अनवांटेड प्रोग्राम्स (पीयूपी) की संख्या ट्रोजन, की-लोगर्स, पासवर्ड स्टीलर्स, बोट्स और बैकडोर्स जैसे वायरसों के साथ बढ़ जाएगी।&lt;br /&gt;* यूएस फेडरल ट्रेड कमिशन के अनुसार प्रत्येक वर्ष 10 मिलियन अमेरिकी नागरिक ऑनलाइन फ्रॉड के शिकार हो रहे हैं। इसका मूल कारण बैकअप जानकारी या कम्प्यूटर चुराना है। वर्ष 2008 में हैकिंग, एटीएम और लैपटॉप से जानकारी चुराने जैसे अपराध बढ़ जाएँगे। जहाँ जानकारी का आदान-प्रदान किया जाता है वहाँ इस तरह के अपराध होने के खतरे ज्यादा होंगे। यूएसबी, प्रिंटर को दिए गए निर्देश, बौद्धिक संपदा, यूएसबी डिवाइस आदि इस खतरे से नहीं बच पाएँगे।&lt;br /&gt;* बॉट्स नाम का वायरस इंटरनेट रिले चैट (आईआरसी) के मामलों में ज्यादा खतरनाक होता है। इंस्टेंट मैसेजिंग जैसी सुविधाओं के लगातार बढ़ रहे उपयोग के कारण इस वायरस के निशाने पर अधिकांश कम्प्यूटर रहेंगे।&lt;br /&gt;* वर्ष  2008  में पैरासाइटिक वायरसों की संख्या भी बढ़ जाएगी। ये वायरस आपके कम्प्यूटर पर किसी फाइल में प्रवेश कर जाएँगे। जब आप उस फाइल को खोलेंगे तब वायरस जागृत हो जाएँगे और आपके कम्प्यूटर को खराब कर देंगे।&lt;br /&gt;* 32 बिट के प्लेटफॉर्म पर चलने वाले सॉफ्टवेयर्स पर भी वायरस के हमले बढ़ जाएँगे।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#000099;"&gt;फायरवॉल जरूरी :&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt; ई-कॉमर्स के लिए जब भी आप वेबसाइट पर सर्फ करते हैं तो निजी जानकारी के चोरी हो जाने का खतरा हमेशा बना रहता है। ऐसा ही खतरा हर इंटरनेट उपयोगकर्ता को भी रहता है। इसके लिए यह जरूरी है कि कम्प्यूटर पर फायरवॉल और एंटी वायरस लोड किए जाएँ। ट्रोजन या इमेज स्पेम से बचने के लिए आप किसी भी अपरिचित ई-मेल को न खोलें। कई स्पेम ऐसे होते हैं, जो आपकी रुचि के विषय से संबंधित जानकारी प्रेषित करते हैं। ऐसे ई-मेल खोलनेमें सावधानी बरतना चाहिए। ऑनलाइन खरीदी का उपयोग करने से पहले आप यह सुनिश्चित कर लें कि जिस वेबसाइट पर आप लेन-देन कर रहे हैं, उसका सिक्योरिटी लेवल कैसा है।&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#000099;"&gt;&lt;strong&gt;ब्लूटूथ को ओपन मोड़ में न रखें :&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt; अलग-अलग तरह के वायरसों से निपटने के लिए लोगों में जागरूकता लाना बहुत जरूरी है। आज दस इंटरनेट उपयोगकर्ताओं में से केवल एक या दो उपयोगकर्ता ही अपने कम्प्यूटर पर फायरवॉल का इस्तेमाल करते हैं, जबकि हर कम्प्यूटर पर फायरवॉल का होना आवश्यक है। वे बताते हैं कि संपर्क के माध्यमों में आज इंटरनेट का उपयोग सबसे ज्यादा बढ़ रहा है। जहाँ तक ई-बिजनेस का प्रश्न है, ऐसी वेबसाइट्स का ही उपयोग करें जिनका सिक्योरिटी लेवल अच्छा हो। स्मार्टफोन टेक्नोलॉजी पर होने वाले हमलों से बचने के लिए ब्लूटूथ या अन्य कोई तकनीक को हमेशा ओपन मोड में न रखें। उपयोग के तुरंत बाद उसे डिसएबल कर दें। &lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;Thanks...Bapi&lt;/div&gt;</description><link>http://rradhikari.blogspot.com/2008/04/blog-post_17.html</link><thr:total>1</thr:total><author>rradhikari@gmail.com (Bapi)</author></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-471899805446162401.post-1906375958911349607</guid><pubDate>Tue, 15 Apr 2008 06:37:00 +0000</pubDate><atom:updated>2008-04-15T12:08:27.868+05:30</atom:updated><title>पीसी के रख-रखाव के लिये ध्यान देने योग्य बातें!</title><description>&lt;div align="justify"&gt;अधिकतर लोग कम्प्यूटर खरीद तो लेते हैं किन्तु उसके रख-रखाव के लिये कभी भी ध्यान नहीं देते। यहाँ पर हम कुछ उन छोटी छोटी बातों का उल्लेख करेंगे जिससे आपका पीसी हमेशा टिप-टॉप बना रहे।&lt;br /&gt;वैसे तो कम्प्यूटर के लिये यूपीएस (UPS - Unrupted Power Supply) का इस्तेमाल करना ही चाहिये किन्तु यदि आपके क्षेत्र में अक्सर बिजली चली जाती है तो आप अपने कम्प्यूटर के लिये यूपीएस को अत्यावश्यक ही समझें।&lt;br /&gt;हम अपने कम्प्यूटर के कैबिनेट, मॉनीटर, कीबोर्ड, माउस की सफाई तो प्रायः करते हैं किन्तु पीसी को ठंडा रखने वाले पंखे (cooling fans) की सफाई की ओर हमारा ध्यान जाता ही नहीं है जबकि यह सबसे अधिक आवश्यक कार्य है। यदि धूल, गंदगी आदि के कारण से पंखा चलना बंद हो गया तो आपके कम्प्यूटर के पॉवर सप्लाय, ग्राफिक्स कॉर्ड, सीपीयू (CPU - Central Processing Unit) को भारी क्षति पहुँचने का अंदेशा रहता है। इसलिये यदि आप अपने पीसी के पंखे की सफाई यदि स्वयं करना नहीं जानते तो समय समय पर (कम से कम तीन माह में एक बार) अपने सर्विस प्रोव्हाइडर से पंखे की सफाई करवाते रहिये।&lt;br /&gt;अपने हार्डवेयर्स के लिये सही और नवीनतम ड्रायव्हर्स का ही प्रयोग करें। ड्रायव्हर्स के अपडेट हार्डवेयर बनाने वाली कंपनी के वेबसाइट में मुफ्त में उपलब्ध होता है।&lt;br /&gt;अपने कम्प्यूटर को हमेशा सही अर्थिंग दें, दो पिन वाले प्लग प्रयोग न करें बल्कि अर्थिंग वाले तीन पिन वाले प्लग का ही प्रयोग करें। आवश्यक हो तो अपने इलैक्ट्रिशियन से चेक करवा लें कि सही अर्थिंग मिल रहा है या नहीं। &lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;Thanks...Bapi&lt;/div&gt;</description><link>http://rradhikari.blogspot.com/2008/04/blog-post_15.html</link><thr:total>3</thr:total><author>rradhikari@gmail.com (Bapi)</author></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-471899805446162401.post-7097228690351131221</guid><pubDate>Sun, 13 Apr 2008 05:24:00 +0000</pubDate><atom:updated>2008-04-13T10:58:38.059+05:30</atom:updated><title>कम्प्यूटर को तेज करने वाला डिस्क डीफ्रेमेन्टर</title><description>&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjMWWXfzoJ3QAE-sJXLdE8vNT8faxokg_BhyphenhyphenlTTSAQ_Bt2T2GzyAuPl6w55KF7_OBaIxezYRFcEYmkQLvVzWMDXcRUtARnLM0qm0T9O-IkmifxAmhqhW1sAN4RI7JRXxglJlm2a5hkkouw/s1600-h/Disk-Defragmenter.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5188597296533418658" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; CURSOR: hand; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjMWWXfzoJ3QAE-sJXLdE8vNT8faxokg_BhyphenhyphenlTTSAQ_Bt2T2GzyAuPl6w55KF7_OBaIxezYRFcEYmkQLvVzWMDXcRUtARnLM0qm0T9O-IkmifxAmhqhW1sAN4RI7JRXxglJlm2a5hkkouw/s400/Disk-Defragmenter.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;डिस्क विखण्डन (disk fragmentation) कम्प्यूटर के धीमा हो जाने का एक बहुत बड़ा कारण है। जब फाइल्स विखण्डित होकर बिखर जाते हैं तो उन्हे खोलने के लिये कम्प्यूटर को उनके विखण्डित भागों को खोजने में बहुत अधिक समय बर्बाद करना पड़ता है और आपका कम्प्यूटर धीमा हो जाता है।विखण्डित फाइल्स और फोल्डर्स को ठीक करने के लिये विन्डोज़ (Windows) का डिस्क डीफ्रेगमेन्टर (Disk Defragmenter) एक बहुत उपयोगी टूल है। यह टूल आपके कम्प्यूटर के हॉर्ड डिस्क (Hard Disk) के विखण्डित फाइल्स व फोल्डर् को पुनः संघटित (consolidate) कर के उसके निश्चित स्थान पर ला देता है जिससे आपका कम्प्यूटर फिर से अपनी खोई हुई गति को प्राप्त कर लेता है&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#000099;"&gt;डिस्क डीफ्रेगमेन्टर (Disk Defragmenter) को कब चलाना &lt;span class=""&gt;चाहिए&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;1.वैसे तो डिस्क डीफ्रेगमेन्टर (Disk Defragmenter) को एक निश्चित अन्तराल में, कम से कम महीने में 2.एक बार, चला ही देना चाहिये किन्तु निम्न परिस्थितियों में भी इसे अवश्य चलाना चाहिये।&lt;br /&gt;3.जब आप अपने कम्प्यूटर में बड़ी संख्या में फाइल्स जोड़ते हैं।&lt;br /&gt;4.जब आपका डिस्क स्पेस 15 प्रतिशत या उससे भी कम हो जाये।&lt;br /&gt;5.जब कभी आप अपने कम्प्यूटर में कोई नया प्रोग्राम या विन्डोज का नया व्हर्सन इन्स्टाल करें।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#000099;"&gt;डिस्क डीफ्रेगमेन्टर (Disk Defragmenter) के प्रयोग की विधि&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;1.डिस्क डीफ्रेगमेन्टर (Disk Defragmenter) को खोलने के लिये स्टार्टआल प्रोग्राम्सएसेसरीजसिस्टम टूल्सडिस्क डीफ्रेगमेन्टर (StartAll ProgramsAccessoriesSystem ToolDisk Defragmenter) का प्रयोग करें।&lt;br /&gt;2.डिस्क डीफ्रेगमेन्टर (Disk Defragmenter) डॉयलाग बॉक्स में ड्राइव्ह्स का चयन करके एनालाइज (Analyze) बटन दबा दें। ड्राइव्ह्स के एनालाइज हो जाने पर एक नया डॉयलाग बॉक्स खुलता है जिसमें 3.एनालाइज्ड ड्राइव्ह्स के विषय में सूचना होती है&lt;br /&gt;4.अब प्रक्रिया आरम्भ करने के लिये आप डीफ्रेगमेन्ट (Defragment) बटन दबा दें।&lt;br /&gt;5.प्रक्रिया पूर्ण होने पर विस्तृत जानकारी के लिये व्हियु रिपोर्ट (View Report) बटन दबा दें।&lt;br /&gt;6.व्हियु रिपोर्ट (View Report) को बंद करने के लिये क्लोज (Close) बटन दबा दें।&lt;br /&gt;7.डिस्क डीफ्रेगमेन्टर (Disk Defragmenter) को बंद करने के लिये क्लोज (Close) बटन दबा दें।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;Thanks...Bapi&lt;/div&gt;</description><link>http://rradhikari.blogspot.com/2008/04/blog-post_13.html</link><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjMWWXfzoJ3QAE-sJXLdE8vNT8faxokg_BhyphenhyphenlTTSAQ_Bt2T2GzyAuPl6w55KF7_OBaIxezYRFcEYmkQLvVzWMDXcRUtARnLM0qm0T9O-IkmifxAmhqhW1sAN4RI7JRXxglJlm2a5hkkouw/s72-c/Disk-Defragmenter.jpg" width="72"/><thr:total>2</thr:total><author>rradhikari@gmail.com (Bapi)</author></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-471899805446162401.post-1049117974899517176</guid><pubDate>Sat, 12 Apr 2008 15:02:00 +0000</pubDate><atom:updated>2008-04-12T20:44:03.226+05:30</atom:updated><title>अपने कम्प्यूटर को गति प्रदान करें!</title><description>&lt;p align="justify"&gt;&lt;span style="color:#000000;"&gt;क्या आपके कम्प्यूटर (Computer) की गति धीमी हो गई है और वह किसी फाइल या वेबसाइट को खोलने में देर लगाता है? घबराने की कोई बात नहीं है, यहाँ दिये गये कुछ आसान मार्गदर्शन की सहायता से आप अपने कम्प्यूटर की गति बढ़ा सकते हैं।&lt;br /&gt;कम्प्यूटर की गति के धीमी होने के अनेक कारणों में से एक मुख्य कारण होता है डिस्क स्पेस (disk space) का कम होना। आप डिस्क क्लीनअप टूल (Disk Cleanup Tool) की सहायता से अपने हार्ड डिस्क (hard disk) के स्थान में इजाफा कर सकते हैं। डिस्क क्लीनअप टूल का प्रयोग आप निम्न कार्यों के लिये कर सकते हैं:&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;1.टेम्पररी&lt;/span&gt; इन्टरनेट फाइल्स (temperory internet files) को हटाने के लिये&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="color:#000000;"&gt;2.डाउनलोड प्रोग्राम फाइल्स (download program files) जैसे कि माइक्रोसॉफ्ट एक्टिव्हX&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="color:#000000;"&gt;3.कंट्रोल्स (Microsoft ActiveX) और जावा एप्लेट्स (Java applets) को हटाने के लिये&lt;br /&gt;4.रीसायकल बिन (Recycle Bin) को खाली करने के लिये&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;5.विन्डोज&lt;/span&gt; टेम्पररी फाइल्स (Windows temporary files) को हटाने के लिये&lt;br /&gt;6.जिन विन्डोज के वैकल्पिक घटकों (optional Windows components) का आप प्रयोग नहीं करते, उन्हें हटाने के लिये&lt;br /&gt;7.इंस्टाल किये गये उन प्रोग्राम्स को हटाने के लिये जो आपके प्रयोग के नहीं हैं&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#000099;"&gt;&lt;strong&gt;डिस्क क्लीनअप टूल (Disk Cleanup Tool)&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;1.डिस्क क्लीनअप टूल को खोलने के लिये स्टार्टआल प्रोग्राम्सएसेसरीजसिस्टम टूल्सडिस्क क्लीनअप (StartAll ProgramsAccessoriesSystem ToolDisk Cleanup) का प्रयोग करें।&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;2.ड्राइव्ह्स&lt;/span&gt; बॉक्स में यथोचित ड्राइव्ह का चयन करके OK बटन दबा दें।&lt;br /&gt;3.जिन फाइलों को हटाना हो उनसे सम्बंधित बॉक्सों को चेक कर के OK बटन दबा दें।&lt;br /&gt;4.जब कन्फर्म करने के लिये पूछा जाये तो Yes को क्लिक कर दें।&lt;br /&gt;कुछ ही मिनट के बाद आपके कम्प्यूटर को साफ करके तथा उसकी गति को बढ़ा कर डिस्क क्लीनअप टूल बन्द हो जायेगा।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;Thanks...Bapi&lt;/div&gt;</description><link>http://rradhikari.blogspot.com/2008/04/blog-post_12.html</link><thr:total>3</thr:total><author>rradhikari@gmail.com (Bapi)</author></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-471899805446162401.post-3441650222437321120</guid><pubDate>Fri, 11 Apr 2008 06:02:00 +0000</pubDate><atom:updated>2008-04-11T11:33:40.011+05:30</atom:updated><title>नोकिया कोड्स - टिप्स तथा ट्रिक्स</title><description>&lt;p align="justify"&gt;अपने मोबाइल सेट (Mobile Set) का इंटरनेशनल मोबाइल इक्विपमेंट आइडेंटिटी (IMEI - International Mobile Equipment Identity) चेक करना(टिप्पणी: इन कोड्स का प्रयोग अच्छी तरह से समझ कर अपनी स्वयं की जिम्मेदारी से करें।)यह तो आपको पता ही होगा कि प्रत्येक मोबाइल सेट (Mobile Set) की इंटरनेशनल मोबाइल इक्विपमेंट आइडेंटिटी (IMEI - International Mobile Equipment Identity) होता है जो कि सभी मोबाइल सेट्स के लिये अलग अलग होता है और यही मोबाइल सेट की पहचान होती है। यदि आप अपने मोबाइल सेट की इंटरनेशनल मोबाइल इक्विपमेंट आइडेंटिटी जानना चाहते हैं तोः&lt;br /&gt;अपने मोबाइल सेट में *#06# टाइप करें।&lt;br /&gt;आपको अपने मोबाइल सेट के स्क्रीन पर उसका इंटरनेशनल मोबाइल इक्विपमेंट आइडेंटिटी इस रूप में दिखाई देगा -XXXXXX XX XXXXXX XTAC FAC SNR SP&lt;br /&gt;उपरोक्त कोड्स का विवरण नीचे दिया जा रहा है।&lt;br /&gt;TAC = टाइप एप्रूव्हल कोड (Type approval code)&lt;br /&gt;FAC = फाइनल असेम्बली कोड़ (Final assembly code)&lt;br /&gt;SNR = सीरियल नम्बर (Serial number)&lt;br /&gt;SP = स्पेयर (Spare)&lt;br /&gt;यहाँ पर यह बता देना भी अनुचित नहीं होगा कि इंटरनेशनल मोबाइल इक्विपमेंट आइडेंटिटी का बहुत अधिक महत्व है क्योंकि आपका मोबाइल चोरी हो सकता है और उसका सिम, ऊपर का कव्हर आदि सभी कुछ भी बदला जा सकता है किन्तु इंटरनेशनल मोबाइल इक्विपमेंट आइडेंटिटी को कोई भी कभी नहीं बदल सकता।&lt;br /&gt;सर्विस मेनू टाइप की प्रविष्टि करना(टिप्पणी: यह टिप केवल नोकिया फोन के लिये है)&lt;br /&gt;अपने मोबाइल सेट में *#92702689# टाइप करें।&lt;br /&gt;अब आपको स्क्रीन पर नजर आयेगा:&lt;br /&gt;सीरियल नम्बर (Serial number - IMEI)&lt;br /&gt;उत्पादन दिनांक (Production date - MM/YY)&lt;br /&gt;खरीदने की तारीख (Purchase date - MM/YY) इसमें आप केवल एक बार प्रविष्टि कर सकते हैं।&lt;br /&gt;पिछले मरम्मत की तारीख (Date of last repair) 0000 का अर्थ है अब तक कभी मरम्मत नहीं हुआ है।&lt;br /&gt;इन्फ्रा-रेड के द्वारा यूजर डाटा का किसी दूसरे नोकिया फोन में अंतरण करना। (Transfer user data to another Nokia phone via Infra-Red)&lt;br /&gt;सॉफ्टवेयर रिव्हीजन टाइप चेक करना&lt;br /&gt;अपने मोबाइल सेट में *#0000# टाइप करें।&lt;br /&gt;अब आपको स्क्रीन पर नजर आयेगा:&lt;br /&gt;Nokia 6030 (मॉडल नम्बर - Model Number)&lt;br /&gt;V 5.11 (सॉफ्टवेयर रिव्हीजन - Software revision)&lt;br /&gt;30-05-2006 (सॉफ्टवेयर रिलीज दिनांक - date of the software release)&lt;br /&gt;RM-74 (फोन टाइप - Phone type) &lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;Thanks...Bapi&lt;/div&gt;</description><link>http://rradhikari.blogspot.com/2008/04/blog-post_11.html</link><thr:total>1</thr:total><author>rradhikari@gmail.com (Bapi)</author></item></channel></rss>