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अड्डे राष्ट्रीयकृत बैंक</category><category>भ्रष्टाचार पर कांग्रेस-भाजपा की थू-थू मैं-मैं</category><category>भ्रष्टाचार प्रगति पर है</category><category>मंडल और कमंडल का क्षीण होता प्रभाव</category><category>मंत्री जी को शर्म आती है</category><category>मंदिर नहीं बनाएंगे</category><category>मंदिर निर्माण से राष्ट्र निर्माण की ओर प्रयाण</category><category>मजदूरों के साथ सरकारी अन्याय</category><category>मजीठिया वेतन आयोग को लागू करवाए सरकार</category><category>मटुकनाथ प्रेम विद्यालय बनेगा देश का गौरव</category><category>मणिपुर के बाद मेवात से भाग मिल्खा भाग</category><category>मधुबनी में मोदी ने दी BIHAR की नई परिभाषा</category><category>मन रे (सुर में) न गा यानी मनरेगा</category><category>मनमोहन</category><category>मनमोहन जी नामुमकिन नहीं है भारत में मिस्र जैसी क्रांति</category><category>मनमोहन तुम कब जाओगे?</category><category>मनमोहन सिंह का राष्ट्रवाद</category><category>मनमोहन सिंह का सर्जिकल स्ट्राइक</category><category>मनमोहन सिंह को श्रद्धांजलि</category><category>मनीष 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हूँ</category><category>मैं सन्नी लियोन बनना चाहती हूँ.</category><category>मैला आँचल का दुलारचंद कापरा और राहुल-सोनिया</category><category>मोदी और वर्तमान भारत</category><category>मोदी और विपक्ष</category><category>मोदी की कथनी और करनी</category><category>मोदी के एक साल बनाम सौ दिन के केजरीवाल</category><category>मोदी गांधी हैं या सावरकर</category><category>मोदी जी</category><category>मोदी जी कब चलेगा भ्रष्ट पुलिस पर सुधार का डंडा</category><category>मोदी जी कृपया जमीन पर आ जाईए</category><category>मोदी जी को गुमशुदा आंकड़ों की तलाश</category><category>मोदी नहीं कोरोना और चीन से लड़े कांग्रेस</category><category>मोदी मोदी योगी योगी</category><category>मोदी राज में पैसा बचाना मना है</category><category>मोदी राजा भोज मनमोहन गंगू तेली</category><category>मोदी लहर चालू आहे</category><category>मोदी विरोध के बहाने देश को नुकसान पहुँचा रहे हैं लालू-नीतीश-कांग्रेस</category><category>मोदी सरकार</category><category>मोदी सरकार का मूर्ख बनाओ कार्यक्रम</category><category>मोदी सरकार की टच एंड रन की 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मूर्खिस्तान है</category><category>याचना नहीं अब रण होगा</category><category>यातना शिविर से यातना शिविर तक</category><category>यातनाओं भरा सफ़र</category><category>याद रहोगे मनमोहन</category><category>यूपी की जीत के सबक</category><category>यूपी को संभालिए मोदी जी!</category><category>यूपी में कब राष्ट्रपति शासन लगाएगी मोदी सरकार?</category><category>यूपी में राष्ट्रपति शासन लगाए वरना इस्तीफा दे मोदी सरकार</category><category>यूपी में सुशासन और हिंदुत्व की जीत</category><category>ये कहाँ आ गए हम ?</category><category>ये तो होना ही था</category><category>योगी तेरी खैर नहीं ...</category><category>योगी बनें 2019 में प्रधानमंत्री</category><category>योग्यता को देखो</category><category>रंगदारी का लाइसेंस बाँट रही बिहार सरकार</category><category>रंजीत</category><category>रक्तरंजित बिहार हो</category><category>रक्तहीन क्रांति</category><category>रघुवंश प्रसाद सिंह को श्रद्धांजलि</category><category>राईटर्स मीट में उपलब्धि-वर्णन कम मजबूरियों का रोना ज्यादा</category><category>राक्षस धर्म और 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दुविधा के बीच झूलता भारतीय जनमानस</category><category>सुशासन की सड़ांध मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड</category><category>सुशासन के नाम पर</category><category>सुशासन बाबू गए मांझी भी चले जाएंगे मगर क्या कुबतपुर में बिजली आएगी?</category><category>सुशासन मतलब अंधा</category><category>सुशासन में आकाशकुसुम हुआ न्याय</category><category>सुशासन-पीड़ित वृद्ध विधवा का मुख्यमंत्री के नाम पत्र</category><category>सुशासन-मिथक या यथार्थ</category><category>सूचना के अधिकार को बेअसर करने की बिहार सरकार की साजिश</category><category>सूर्य नमस्कार बुरा?</category><category>सेक्स शिक्षा अच्छी</category><category>सेक्सी</category><category>सेक्सी तुझे लोग बोलें</category><category>सोनपुर मेले का बदलता स्वरुप</category><category>सोनिया ने हमें दोयम दर्जे का नागरिक बना दिया</category><category>सोनियाजी सोनियाजी क्या हुआ आपको?</category><category>सोनू और नीतीश</category><category>स्टिंग ऑपरेशन और लोकमंगल</category><category>सड़क पर डिग्री क्यों नहीं बाँट देते सुशासन बाबू</category><category>हत्या सिर्फ ललित बाबू 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मित्रों, भारत की संघ में विराजित मोदी सरकार के बारह वर्ष पूरे हो रहे हैं. भारतीय संस्कृति में १२ साल का एक युग माना जाता है. कहने का तात्पर्य यह कि १२ साल का समय काफी ज्यादा होता है और कोई भी सरकार यह नहीं कह सकती कि उसे देश को बदले के लिए जनता ने पर्याप्त समय नहीं दिया. हमें यह भी याद रखना होगा कि मोदी सरकार अच्छे दिनों के वादों के साथ सत्ता में आई थी. लगा था जैसे मोदी सरकार के सत्ता में आते ही दैहिक, दैविक, भौतिक तापा, राम राज काहू नहिं व्यापा जैसी स्थिति आ जाएगी, जनता और राष्ट्र की सारी समस्याएँ एकबारगी समाप्त हो जाएगी. आज बारह साल बाद सवाल उठता है कि क्या ऐसा हुआ? और अगर नहीं हुआ तो क्यों नहीं हुआ?
मित्रों, हम बारी-बारी से प्रत्येक महत्वपूर्व मुद्दे पर मोदी सरकार के प्रदर्शन पर पूरी तरह से निष्पक्ष होकर विचार करेंगे. सबसे पहले हम भ्रष्टाचार के मुद्दे को लेते हैं क्योंकि जब २०१४ का चुनाव प्रचार चल रहा था तब तत्कालीन मनमोहन सरकार का ऐसा कोई विभाग था ही नहीं जिस पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप न लगे हों. दुर्भाग्यवश आज भी देश में भ्रष्टाचार की कमोबेश वही स्थिति है जैसी २०१४ में थी. आज भी जब हम किसी भी सरकारी कार्यालय में जाते हैं तो बिना सुविधा शुल्क दिए हमारा कोई काम नहीं होता. भ्रष्टाचार के कारण विदेशी निवेशक भारत में निवेश नहीं करना चाहते. विशेष रूप से शिक्षा, राजस्व और पुलिस विभाग पहले से कहीं ज्यादा भ्रष्ट हैं. मोदी ने २०१४ में विदेशी बैंकों से काला धन वापस लाने के वादे यह कहकर किया था कि प्रत्येक भारतीय के खातों में १५-१५ लाख रूपए विदेशी बैंकों से वापस लाकर डाले जाएँगे लेकिन विदेश से एक पैसा काला धन वापस नहीं लाया गया. लगातार गुजरात से बिहार तक पुल गिर रहे हैं, पानी की टंकियां धराशायी हो रही हैं।
                 उधर, अमेरिकी न्याय विभाग (DoJ) ने गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी के खिलाफ ₹2,500 करोड़ (265 मिलियन डॉलर) के रिश्वतखोरी और धोखाधड़ी के आपराधिक आरोपों को स्थायी रूप से हटा दिया है। मई 2026 की ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी अदालतों ने इन मामलों को 'विद प्रिजुडिस' (with prejudice) खारिज कर दिया है, जिसका अर्थ है कि इन्हें भविष्य में दोबारा नहीं खोला जा सकता। इस मामले में अडानी पर सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए भारतीय अधिकारियों को कथित तौर पर रिश्वत देने और अमेरिकी निवेशकों को गुमराह करने का आरोप था। अडानी ने अमेरिकी प्रतिभूति और विनिमय आयोग (SEC) के सिविल आरोपों को सुलझाने के लिए 60 लाख डॉलर (लगभग ₹50 करोड़) का भुगतान करने पर सहमति जताई।केस बंद होने का कारण: अमेरिकी अभियोजकों को मामले को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत और अमेरिका के साथ कोई स्पष्ट सीधा संबंध नहीं मिला।अमेरिकी निवेश का प्रस्ताव: रिपोर्ट्स के अनुसार, अडानी समूह ने अमेरिका में 10 बिलियन डॉलर (लगभग ₹96,000 करोड़) के निवेश और 15,000 नौकरियां पैदा करने का प्रस्ताव दिया है, जिसे कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में इस कानूनी राहत से जोड़कर देखा जा रहा है।
ईधर नॉर्वे के गवर्नमेंट पेंशन फंड ग्लोबल (जो लगभग 2.2 ट्रिलियन डॉलर से अधिक की संपत्ति प्रबंधित करता है) ने अपनी नैतिकता परिषद के सुझावों के आधार पर अडानी समूह पर महत्वपूर्ण प्रतिबंध लगाए:मई 2024: अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन को संघर्ष क्षेत्रों में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों के कारण बाहर कर दिया गया。फरवरी 2026: अडानी ग्रीन एनर्जी को भी वित्तीय अनियमितताओं और धोखाधड़ी की चिंताओं के कारण निवेश के लिए अयोग्य कंपनियों की सूची (ब्लैकलिस्ट) में शामिल कर दिया गया।
यात्रा पर राजनीतिक विवाद विपक्ष का दावा: विपक्षी नेता राहुल गांधी का आरोप है कि पीएम मोदी की नॉर्वे यात्रा भारत के कूटनीतिक और आर्थिक हितों के बजाय अडानी समूह की साख बचाने और उनके अटके हुए निवेश को बहाल करने के लिए की गई थी। इसी प्रकार अमेरिका के समक्ष मोदी सरकार के आत्मसमर्पण को भी अडानी पर अमेरिका में चल रहे भ्रष्टाचार के मुकदमे से जोड़ कर देखा जा रहा है।
मित्रों, रोजगार के मुद्दे पर भी मोदी सरकार पूरी तरह से विफल रही है. कहाँ तो हर साल दो करोड़ रोजगार देने के वादे किए गए थे लेकिन आज भारत में जितनी बेरोजगारी है पहले कभी थी ही नहीं. देश में बेरोजगारी कम करके दिखाने के लिए बातूनी मोदी सरकार ने नई चाल चली है। मतलब नाच न जाने आंगन टेडा. सरकार ने कहा- अगर आप सप्ताह में सिर्फ एक घंटे भी काम करते हैं, तो आपको बेरोजगार नहीं माना जाएगा। लेकिन... बेरोजगारी कम दिखाने के इस पैंतरे के बाद भी देश में 48% लोग बेरोजगार पाए गए हैं- ये जानकारी खुद मोदी सरकार के सांख्यिकी मंत्रालय ने दी है। यह आंकड़ा देश में भयावह बेरोजगारी की कहानी बता रहा है, जहां युवा एक नौकरी के लिए दर-दर भटक रहे हैं और नरेंद्र मोदी महंगा मशरूम खाकर मौज मार रहे हैं। रही बात श्रमिकों को न्यूनतम मजदूरी देने की तो आपको नोएडा-गाज़ियाबाद में एमबीए डिग्री धारक युवा भी बारह-चौदह हज़ार मासिक पर काम करते हुए मिल जाएंगे. कहने का मतलब यह कि आज ईट ढोने वाले उच्च शिक्षा प्राप्त युवकों के कहीं ज्यादा कमा रहे हैं और देश में पढोगे-लिखोगे बनोगे ख़राब वाली स्थिति पैदा हो गई है. मोदी सरकार मानती है कि भजिया तलना अच्छा वैकल्पिक रोजगार है लेकिन यह नहीं बताती कि वर्तमान समय एआई का है और इसमें हम बुरी तरह से पिछड़ चुके हैं. एआई एक तरफ हमारी सॉफ्टवेयर उद्योग को खाता जा रहा है वहीँ इस क्षेत्र में हम ताईवान जैसे छोटे देशों से भी पिछड़ गए हैं चीन और अमेरिका से प्रतियोगिता करना तो दूर की बात है. पहले नोटबंदी,फिर लॉक डाउन और अब रसोई गैस संकट ने देश में बेरोजगारी की स्थिति को विस्फोटक बना दिया है. पिछले दिनों लाखों अप्रवासी श्रमिकों को रसोई गैस न मिलने के चलते घर लौटना पड़ा है. 
मित्रों,देश में शिक्षा की क्या स्थिति है इसे आप नीट परीक्षा में लगातार लीक हो रहे प्रश्न पत्रों से आसानी से समझ सकते हैं। आप बिहार के किसी भी सरकारी स्कूल में चले जाईए कहीं पढ़ाई नहीं होती। मास्टर आते हैं और बैठकर चले जाते हैं। स्कूल भोजनालय मात्र बन चुके हैं। बिहार के अधिकतर शिक्षक खुद महा अज्ञानी हैं फिर पढ़ाएंगे क्या? कालेजों में चाहे वो सरकारी हों या निजी उनमें भी पढ़ाई गायब है। दुनिया के शीर्ष सौ विश्वविद्यालयों में इस समय भारत का कोई विश्वविद्यालय या शिक्षा संस्थान शामिल नहीं है। अभी सीबीएसई की बारहवीं की कापी जांच में जो धांधली हुई है पूरी दुनिया उसे देख रही है। एक ऐसी एजेंसी को कापी जांच का काम दे दिया गया जो पहले से ही बहुत बदनाम थी। क्या ऐसा बिना मोटी रिश्वत लिए किया गया होगा? हमारे शिक्षक जिनको प्रश्न पत्र सेट करने का काम दिया जाता है खुद पैसे लेकर प्रश्न पत्र आऊट कर दे रहे हैं। बाद में शिक्षा मंत्री के साथ उनकी तस्वीर सामने आती है। हर जगह शिक्षा के क्षेत्र में संघियों को बिठा दिया गया है और उनको दोनों हाथों पैसे बनाने की खुली छूट दे दी गई है। इतना ही नहीं ज्यादातर निजी शैक्षिक संस्थान खुद नेताओं ने खोल रखे हैं। सरकारी विद्यालयों में पढ़ाई नहीं होने से निजी विद्यालयों को लूट की खुली छूट मिल गई है।
मित्रों, स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी मोदी सरकार पूरी तरह से असफल सिद्ध हुई है। देश के सरकारी अस्पतालों में लोग मरने और निजी अस्पतालों में सबकुछ लुटाने जाते हैं। ऊपर से सरकार निजी अस्पतालों को मुफ्त में सैंकड़ों एकड़ जमीन देती है जिसका कोई लाभ जनता को नहीं होता। कई अस्पताल तो खुद नेताओं के हैं‌।
मित्रों,2014 में मोदी ने जनता से एक और वादा किया था और वो वादा था त्वरित न्याय देने का। दुर्भाग्यवश इस मोर्चे पर भी मोदी सरकार पूरी तरह और बुरी तरह विफल साबित हुई है क्योंकि आज भी एक मुकदमे के निबटारे में औसतन 10 साल का लंबा वक्त लगता है। आज भी कालेजियम सिस्टम परिचालन में है। न्याय सिर्फ अमीर और प्रभावशाली लोगों के लिए है और गरीबों को मिलती है सिर्फ तारीख। बाबा राम रहीम सिंह दोषी साबित होने के बाद भी बार-बार जेल से बाहर आता है लेकिन विष्णु तिवारी निर्दोष होने के बावजूद बीस सालों तक जेल में रहता है और अपनी मां और भाइयों के दाह-संस्कार के लिए भी बाहर नहीं आ पाता‌।
मित्रों, वैश्विक कूटनीति में आज भारत की जितनी बुरी स्थिति है कदाचित भूतकाल में कभी नहीं थी। प्रधानमंत्री बनने से पहले जो मोदी कहा करते थे कि न आंख झुकाऊंगा और न आंख दिखाऊंगा आज अमेरिका के आगे दंडवत हैं। अमेरिका भारत पर पचास प्रतिशत टैरिफ लगाता है मगर भारत बदले में कोई कार्रवाई नहीं करता बस हाथ जोड़कर खड़ा रहता है। यहां तक कि भारत किस देश से तेल खरीदेगा इसका निर्णय भी इन दिनों अमेरिका ले रहा है। लगता है जैसे भारत पर अमेरिका का कब्जा हो गया है और भारत अमेरिका का 51वां राज्य है। उधर चीन अमेरिका को भाव नहीं देता बल्कि ईरान में हारने के बाद ट्रंप थक-हार कर चीन जाता है लेकिन खाली हाथ वापस आता है। एक अडानी को बचाने के लिए मोदी अमेरिका और नार्वे दो-दो देशों के आगे नतमस्तक हो जाते हैं।
मित्रों, अर्थव्यवस्था का तो कहना ही क्या! भारतीय अर्थव्यवस्था इन दिनों चौथे स्थान से फिसलकर छठे स्थान पर आ गई है। रुपया शतक लगाने वाला है। शेयर बाजार के मामले में हम ताईवान जैसे छोटे देश से भी नीचे चले गये हैं। तो ऐसा है मोदी सरकार के समय निवेशकों का भारत पर विश्वास. एआई हमारी साफ्टवेयर इंडस्ट्री को निगलने लगा है और हम एआई के क्षेत्र में कहीं हैं ही नहीं। आखिर बदहाल शिक्षा व्यवस्था से भजिया तलनेवाले ही तैयार हो सकते हैं एआई विशेषज्ञ नहीं। हमारा निर्यात भी चीन से होनेवाले आयात पर निर्भर है‌‌। अमेरिकी टैरिफ के कारण हमारे हाथों से हमारी वस्तुओं का सबसे बड़ा आयातक भी छिन गया है। ईधर ईरान-अमेरिका युद्ध के चलते अरब देशों को होने वाला निर्यात भी बंद है। कोढ़ में खाज यह कि कभी चीन हमारे चावल वापस कर दे रहा है तो कभी जापान हमसे आम खरीदने से मना कर दे रहा है‌। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के प्रावधान बता रहे हैं भारत सरकार ने भारत के किसानों के हित भी अमेरिका के हाथों बंधक रख दिया है। महंगाई चरम पर है, आम आदमी की आमदनी लगातार घट रही है। लोगों की बचत कम हो रही है कर्ज बढ़ रहा है.  देश का व्यापार घाटा आसमान छू रहा है और चीख-चीख कर कह रहा है मेक ईन इंडिया सिर्फ जुमला था‌‌। सेवा क्षेत्र धराशायी है, कृषकों को खाद नहीं मिल रहा और विनिर्माण क्षेत्र नोटबंदी के समय से ही गोते खा रहा है। कुल मिलाकर भारत आज आयात प्रधान अर्थव्यवस्था बनकर रह गया है जैसे अंग्रेजों के समय था। मोदी सरकार को बस अपने चंद उद्योगपति मित्रों से मतलब है बांकी जनता वस्त्र-भोजन और शिक्षा-स्वास्थ्य विहीन हो जाए कोई बात नहीं। कब किस उद्योगपति को ईडी के माध्यम से कंगाल कर दिया जाए और नीलामी में हेराफेरी कर उसकी कंपनी को अडानी के हवाले कर दिया जाए कोई नहीं जानता। मानो विविध भारती पर मोदी गा रहे हैं अब अडानी के हवाले वतन साथियों।
मित्रों, घुसपैठ के खिलाफ भी मोदी सरकार शोर तो खूब मचा रही है लेकिन काम कुछ खास नहीं हुआ है। मुस्लिम तुष्टिकरण अब एससी तुष्टिकरण में बदल चुका है और एससी-एसटी एक्ट में झूठे मुकदमों से परेशान सवर्ण समाज को यूजीसी नोटिफिकेशन लाकर शिक्षा से भी वंचित करने की गंदी साजिश रची जा रही है। बारह साल में एक बार भी प्रेस कांफ्रेंस नहीं करनेवाले मोदी इन दिनों खुद आनेवाले समय को कठिन बताकर जनता को तैयार रहने के लिए कहते फिर रहे हैं। अच्छे दिन तो आए नहीं बुरे दिन जरूर आ गये हैं और न जाने इस चायवाले, अनपढ़, अभिनय सम्राट के कार्यकाल में देश की जनता को क्या-क्या दुख झेलना पड़ेगा‌। हां,भाजपा इस समय जरूर हजारों करोड़ के पार्टी फंड का सुख जमकर भोग रही है। मोदी के साथ-साथ उसके मंत्री भी नितांत अयोग्य हैं और अपनी आनेवाली सात पीढ़ियों के लिए धनार्जन में पूरे मनोयोग से जुटे पड़े हैं। वंशवाद आज जितना एनडीए में है उतना इंडी एलायंस में भी नहीं है। नीतीश कुमार का पागल बेटा भी मंत्री बना दिया गया है। मोदी सरकार ने धारा 370 को हटाया जरूर है लेकिन कश्मीरी पंडित वापस अपने घर नहीं जा सके हैं. इसी तरह राम मंदिर भी बन चुका है लेकिन मोदी के अनुसार भारत अब राम का नहीं बुद्ध का देश है. 
मोदी सरकार का सबसे बड़ा दोगलापन तो तब सामने आता है जब चुनावों के समय हिंदुओं को बंटोगे तो कटोगे का संदेश देनेवाली मोदी सरकार सुप्रीम कोर्ट द्वारा असंवैधानिक घोषित कर देने के बाद एससी-एसटी एक्ट को दोबारा लागू कर और यूजीसी नोटिफिकेशन लाकर अपने सबसे कट्टर समर्थक सवर्णों की पीठ में छुरा घोंपने का घृणित कृत्य करती है। अंत में मैं मोदी समर्थक अर्थशास्त्री सुरजीत भल्ला द्वारा इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित आलेख में उल्लिखित पंक्तियों की तरफ देश का ध्यान आकर्षित करना चाहूंगा जो उन्होंने बंगाल और असम में भाजपा की शानदार जीत को लेकर लिखी है मोदीजी आप जीत रहे हैं लेकिन देश हार रहा है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;मैं एक छोटा सा पत्रकार हूँ, स्वभाव से विद्रोही. मैं विश्वामित्र की तरह एक सामानांतर दुनिया तो बनाना नहीं चाहता हूँ फिर भी इस दुनिया में कुछ बदलाव जरूर चाहता हूँ जो सिर्फ बातें बनाने से नहीं होनेवाला, इसके लिए कुछ कदम उठाने पड़ेंगे.&lt;/div&gt;</description><link>http://brajkiduniya.blogspot.com/2026/05/blog-post_29.html</link><author>noreply@blogger.com (ब्रजकिशोर सिंह)</author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgRGcDs0LLH3vrg-X9foAVBNsj2Jd9DhyT8kuqPqLT-9gRjnkNzCmC58MmjsoeEeFSfDQmcKYaccUsKDNRlOk9-6u4X8xyHb2-PYik3IJuQXb9WaRj6I07zdNnAhSTRmugfkjPvXXx8VBNhDO7Uu7KQEk3MDHBj058HYLqxeT6qYAEl2QILlE9j8FFgrZ8/s72-c/%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4%20%E0%A4%9A%E0%A5%80%E0%A4%A81.jpg" width="72"/><thr:total>0</thr:total></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-4719772605751864996.post-266916447047179431</guid><pubDate>Wed, 06 May 2026 04:00:57 +0000</pubDate><atom:updated>2026-05-06T10:37:38.498+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">जय भीम</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">जय भीम राव कांबले</category><title>जय भीम, जय भीम राव कांबले </title><description>&lt;div class="separator" style="clear: both;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhQbtqlo2qpkuU_yiLEVMkWJ6kL_2Jz3DfIdo5mKRY3ylZFXPrvCmvpn4J3L6OnY_cbL4i5VHIOwF7E5N8HYidUb94QesNdLtnseDsUrI3A-VSi5GExSDZhuz8GfmgplZ1UlzyI5ZjRrdI42IZQJrrnaxl8UspMGC1uuzGTbIF3zX7Utt6FEzlZXZEsOXs/s627/1000178015.png" style="display: block; padding: 1em 0; text-align: center; "&gt;&lt;img alt="" border="0" width="320" data-original-height="437" data-original-width="627" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhQbtqlo2qpkuU_yiLEVMkWJ6kL_2Jz3DfIdo5mKRY3ylZFXPrvCmvpn4J3L6OnY_cbL4i5VHIOwF7E5N8HYidUb94QesNdLtnseDsUrI3A-VSi5GExSDZhuz8GfmgplZ1UlzyI5ZjRrdI42IZQJrrnaxl8UspMGC1uuzGTbIF3zX7Utt6FEzlZXZEsOXs/s320/1000178015.png"/&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;
मित्रों, इन दिनों पुणे में 4  साल की अबोध बच्ची के साथ घटी एक रेप और बेरहमी से की गई हत्या की घटना ने  पूरे भारत के मन-मस्तिष्क को झकझोर कर रख दिया है. यहाँ अपराधी का नाम भीमराव कांबले है. मतलब नाम भी बाबा साहेब वाला और जाति भी बाबा साहेब वाली। उम्र जानकर तो आप और भी आश्चर्य में पड़ जाएंगे। 65 साल. 

मित्रों, इतना ही नहीं मृतक बच्ची कथित रूप से ब्राह्मण जाति की थी. मतलब बलात्कारी महार और पीड़िता ब्राह्मणी। इतना ही नहीं पता चला है कि पुणे की मासूम बच्ची के साथ हैवानियत के आरोप में गिरफ्तार भीमराव कांबले एक आदतन  अपराधी है, जिसका पूरा इतिहास क्राइम से भरा हुआ है. साल 2015 में बड़े अपराध में जेल के अंदर गया कांबले छूट गया था. हमारे हाथ लगे दस्तावेजों और कोर्ट आदेशों से साफ हो गया है कि यह पहली बार नहीं, बल्कि उसके हाथ काले कारनामों से रंगे पड़े हैं. साल 2015 में बड़े अपराध में जेल के अंदर गया कांबले छूट गया था. 

मित्रों, साल 1998 में भीमराव कांबले की क्राइम की दुनिया में पर्दापण हुआ, जब साल 1998 में उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 354 (महिला की लज्जा भंग करना) और धारा 452 (हमले की तैयारी के साथ घर में अनधिकृत प्रवेश) के तहत मामला दर्ज किया गया था. इस मामले ने तभी संकेत दे दिए थे कि उसकी गतिविधियां समाज और महिलाओं की सुरक्षा के लिए खतरा हैं. साल 2015 में यौन उत्पीड़न केस में सबूतों के अभाव भीमराव कांबेल छोड़ दिया गया था. इस मामले से संबंधित कोर्ट ऑर्डर की कॉपी भी सामने आई है. मामला अत्यंत गंभीर था, लेकिन कानूनी प्रक्रिया के दौरान अभियोजन पक्ष आरोपों को सिद्ध करने में नाकाम रहा. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसके खिलाफ कोर्ट में पर्याप्त व पुख्ता सबूत पेश नहीं किए जा सके. गौरतलब है तब प्रत्यक्षदर्शियों या तकनीकी साक्ष्यों की कमी के चलते, न्यायालय ने भीमराव कांबले को 'बेनिफिट ऑफ डाउट' देते हुए सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था. उसकी यह आपराधिक कुंडली बताती है कि वह पहले भी गंभीर कानूनी पचड़ों में फंस चुका है. भले ही वह अदालत से एक बार तकनीकी आधार पर बच निकला हो, लेकिन उसके खिलाफ दर्ज पुराने मुकदमे उसकी हिंसक और आपराधिक प्रवृत्ति की गवाही देते हैं. अब नए सिरे से उठ रहे सवालों ने प्रशासन को फिर से उसके पुराने रिकॉर्ड को खंगालने पर मजबूर कर दिया है. 

मित्रों, पुणे में पिछले सप्ताह उसी हजारों सालों से दबे-कुचले व्यक्ति द्वारा चार वर्षीय जिस पुजारी की लड़की की दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गई थी, उसकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने दम घुटने से उसकी मौत होने का संकेत दिया है। पुलिस ने बताया है कि 65 वर्षीय आरोपित भीमराव ने पीड़िता के मुंह में मोजा ठूंस दिया था। इससे दम घुटने से उसकी मौत हो गई। पुलिस के अनुसार, आरोपित बच्ची को खाने का लालच देकर बहला-फुसलाकर मवेशी बाड़े में ले गया, जहां उसने उसका यौन उत्पीड़न किया और बाद में उसकी बेरहमी से हत्या कर दी। मृतक मासूम के शरीर पर चोट के भी गहरे निशान पाए गए हैं. 

मित्रों, अब हम आते हैं अपने मूल विषय पर. सामाजिक न्याय के नए पुरोधा आदरणीय नरेंद्र मोदी जी का एक भाषण हमने देखा है जिसमें वो कहते हैं कि जिनके साल हजारों सालों तक अत्याचार हुए उनको बदला लेने का अवसर मिलना चाहिए। जाहिर है कि वर्ष २०१८ में जब सुप्रीम कोर्ट ने एससी-एसटी एक्ट के अन्यायपूर्ण प्रावधानों को अवैध घोषित करते हुए कहा था कि इस एक्ट में पहले जांच होनी चाहिए फिर गिरफ़्तारी तब महान मोदी जी कथित रूप से हजारों सालों से अत्याचार झेल रही जातियों को बदला लेने का भरपूर अवसर प्रदान करते हुए न सिर्फ पहले गिरफ़्तारी फिर जाँच को फिर से लागू कर दिया बल्कि धाराओं को भी बढाकर २२ से 47 कर दिया। इतना ही नहीं लाखों रूपये के मुआवजे भी दिए जाने लगे. भले ही अदालत में आरोप झूठे साबित हो जाएं और निर्दोष आरोपी का जीवन,कैरियर, घर, परिवार सबकुछ बर्बाद हो जाए लेकिन न तो झूठे आरोप लगानेवालों पर कोई कानूनी कार्रवाई होगी और न ही मुआवजा वापस लिया जाएगा। 

मित्रों, नतीजा यह है कि एससी-एसटी के लिए यह एक्ट एक तीर से दो शिकार करने का सुअवसर प्रदान कर रहा है. सवर्ण को जेल भेजकर उसके पूर्वजों द्वारा किये गए कथित अत्याचारों का बदला भी ले लिया और जेब में लाखों रूपये भी आ गए. हालाँकि मोदी जी भी जानते हैं कि एक हजार साल तक देश के समस्त हिन्दू क्रमशः मुसलमानों और ईसाइयों के गुलाम थे इसलिए जातीय अत्याचार की कहानियां झूठी हैं. 

मित्रों, मैं इस आलेख के अंत में प्रधानमंत्री बन जाने के बाद भी पिछड़े से अति पिछड़े हो गए मोदी जी से मांग करता हूँ कि एससी-एसटी एक्ट में एक और बदलाव करके यह प्रावधान कर दें कि जो भी एससी-एसटी वर्ग का व्यक्ति सवर्ण महिलाओं के साथ रेप और फिर उनकी हत्या करेगा उसको अपराध में की गई क्रूरता के अनुसार सजा नहीं बल्कि ईनाम दिया जाएगा।  ऐसा प्रावधान करने से ही सामाजिक न्याय पूर्णता को प्राप्त करेगा। साथ ही मैं चंद्रशेखर रावण के उन दावों का भी तहे दिल से समर्थन करता हूँ कि एससी-एसटी आजीवन दबा-कुचला रहेगा भले ही वो वास्तविक रावण की तरह आतताई हो और सोने की लंका में रहता हो. यहाँ तक कि उनको मंदिरों का पुजारी बनाना भी उनके साथ अत्याचार है और ऐसा करनेवालों पर एससी-एसटी एक्ट के तहत कठोर-से-कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए.
&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;मैं एक छोटा सा पत्रकार हूँ, स्वभाव से विद्रोही. मैं विश्वामित्र की तरह एक सामानांतर दुनिया तो बनाना नहीं चाहता हूँ फिर भी इस दुनिया में कुछ बदलाव जरूर चाहता हूँ जो सिर्फ बातें बनाने से नहीं होनेवाला, इसके लिए कुछ कदम उठाने पड़ेंगे.&lt;/div&gt;</description><link>http://brajkiduniya.blogspot.com/2026/05/blog-post.html</link><author>noreply@blogger.com (ब्रजकिशोर सिंह)</author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhQbtqlo2qpkuU_yiLEVMkWJ6kL_2Jz3DfIdo5mKRY3ylZFXPrvCmvpn4J3L6OnY_cbL4i5VHIOwF7E5N8HYidUb94QesNdLtnseDsUrI3A-VSi5GExSDZhuz8GfmgplZ1UlzyI5ZjRrdI42IZQJrrnaxl8UspMGC1uuzGTbIF3zX7Utt6FEzlZXZEsOXs/s72-c/1000178015.png" width="72"/><thr:total>0</thr:total></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-4719772605751864996.post-702848340010155067</guid><pubDate>Wed, 21 Jan 2026 04:16:00 +0000</pubDate><atom:updated>2026-01-28T09:47:25.408+05:30</atom:updated><title>सवर्ण विरोधी भाजपा </title><description>&lt;div class="separator" style="clear: both;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEicM8S5ROYBFvWOJoeKqzVFJttxzu9TaCDd7XAxsCJHflfQPRKcaxS0l_-7V_s4i1vXWQCZ8u5_WwM6G7hoBYRFCA0F6EX2G0YSrIi1Lo7hyphenhyphenRl4RtMxHJOhBlLwr6TGXuG0AfmpRGClfjj-NV2pILXHQnsr0mZyxKZaQkg2iulbDIxbvu8Dn8oruEFCZf0/s300/%E0%A4%AF%E0%A5%82%E0%A4%9C%E0%A5%80%E0%A4%B8%E0%A5%80.jpg" style="display: block; padding: 1em 0; text-align: center; "&gt;&lt;img alt="" border="0" width="320" data-original-height="168" data-original-width="300" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEicM8S5ROYBFvWOJoeKqzVFJttxzu9TaCDd7XAxsCJHflfQPRKcaxS0l_-7V_s4i1vXWQCZ8u5_WwM6G7hoBYRFCA0F6EX2G0YSrIi1Lo7hyphenhyphenRl4RtMxHJOhBlLwr6TGXuG0AfmpRGClfjj-NV2pILXHQnsr0mZyxKZaQkg2iulbDIxbvu8Dn8oruEFCZf0/s320/%E0%A4%AF%E0%A5%82%E0%A4%9C%E0%A5%80%E0%A4%B8%E0%A5%80.jpg"/&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;
मित्रों, यूजीसी ने उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने के लिए प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस, 2026 लागू कर दिया है. इसे लेकर विवाद पैदा हो रहा है. जैसे-जैसे लोगों को इसके बारे में मालूम हो रहा है, त्यों-त्यों भारत के सवर्णों में नाराजगी दिखने लगी है. इस नियम में ओबीसी को SC/ST के साथ जातिगत भेदभाव की परिभाषा में शामिल किया गया है, जिससे सामान्य वर्ग के छात्रों में नाराजगी पैदा हो गई है. वो इस गाइडलाइंस को एकतरफा बता रहे हैं, ये आशंका जता रहे हैं कि इसका जमकर दुरुपयोग किया जाएगा. ये गाइडलाइंस 15 जनवरी 2026 से देशभर के सभी कॉलेज, युनिवर्सिटियों और उच्च शिक्षा संस्थानों में लागू भी हो गए हैं. दरअसल इसके प्रावधान इतने कड़े हैं कि लोगों को लग रहा है कि ऐसे कानून का सही इस्तेमाल तो कम होगा लेकिन इससे बदला लेने की कार्रवाई ज्यादा होगी यानि दुरुपयोग खूब हो सकता है.
मित्रों, संसद की शिक्षा, महिला, बाल और युवा संबंधी मामलों की संसदीय समिति ने यूजीसी के ड्राफ्ट रेगुलेशंस की समीक्षा करने के बाद इसे 8 दिसंबर 2025 को सरकार को सौंपा. कांग्रेस के राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह इस समिति के चेयरमैन हैं. इस समिति यूजीसी को सिफारिशें दीं, जिसके आधार पर भेदभाव वाले नियम में ओबीसी को भी जाति आधारित डिसक्रिमिनेशन में शामिल किया जाए. ओबीसी को यूजीसी के ड्राफ्ट में नहीं रखा गया था. साथ ही ये सिफारिश भी दी कि Equity Committee में SC/ST/OBC से आधे से ज्यादा प्रतिनिधित्व हो. डिसेबिलिटी को भी डिस्क्रिमिनेशन के आधार में शामिल किया जाए. अन्य बदलावों में discriminatory practices की लिस्ट और पब्लिक डिस्क्लोजर की सिफारिश की. इन सिफारिशों के बाद UGC ने फाइनल रेगुलेशंस में कई बदलाव करते हुए इसे जनवरी 2026 में नोटिफाई कर दिया- जैसे OBC को शामिल करना और फॉल्स कंप्लेंट पर जुर्माने का प्रावधान हटाना. कई रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया में कहा जा रहा है कि दिग्विजय सिंह की अगुवाई वाली संसदीय समिति ने OBC को शामिल करने की सिफारिश की, जिससे फाइनल गाइडलाइंस प्रभावित हुईं.
मित्रों,जब यूजीसी के ड्राफ्ट में OBC को बाहर रखा गया तो उसकी आलोचना हुई; अब शामिल करने से सामान्य वर्ग के छात्र इसे “दूसरा SC/ST एक्ट” बता रहे हैं. सोशल मीडिया पर सामान्य वर्ग के छात्रों का विरोध काफी तेज है, जो इसे असंतुलित बता रहे हैं. झूठी शिकायतों पर जुर्माने का प्रावधान हटाने से भी चिंता बढ़ी है. सवर्णों का मानना है कि ये नियम उन्हें पहले से दबाने वाला मानकर पहले से दोषी ठहराते हैं, जबकि SC/ST/OBC को पहले से ही  “ओप्रेस्ड” यानि पीड़ित मा्न लिया गया है. अगर कोई जनरल कैटेगरी का व्यक्ति जाति-आधारित भेदभाव का शिकार होता है, तो उसके लिए कोई सुरक्षा नहीं है. झूठी शिकायतों से करियर बर्बाद होने का खतरा है. कुछ इसे आरक्षण की तरह एकतरफा पॉलिसी बता रहे हैं.
मित्रों, इस नियम के अनुसार हर उच्च शिक्षा संस्थान में इक्विटी कमेटी गठन करना जरूरी होगा, जिसमें OBC, SC, ST, महिलाओं और दिव्यांगों के प्रतिनिधि शामिल होंगे. शिकायत पर 24 घंटे में प्राइमरी कार्रवाई करनी होगी और 15 दिनों में रिपोर्ट देनी होगी. यूजीसी के प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस, 2026 में भेदभाव स्पष्ट रूप से SC/ST/OBC के सदस्यों के विरुद्ध केवल जाति या जनजाति के आधार पर किया गया भेदभाव है. सामान्य भेदभाव की व्यापक परिभाषा में धर्म, नस्ल, जाति, लिंग, जन्म स्थान या विकलांगता पर अनुचित व्यवहार भी शामिल है. यानि अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के सदस्यों के खिलाफ जाति या जनजाति के आधार पर कोई भी स्पष्ट या निहित अनुचित, भेदभावपूर्ण या पक्षपाती व्यवहार इसमें शामिल होगा. नियमों का उल्लंघन करने पर संस्थान को डिग्री देने से रोकना या अनुदान बंद करना संभव है. यानि यूजीसी उसकी मान्यता ही खत्म कर सकता है. संस्थानों को इक्विटी कमेटी बनानी होगी, जिसमें SC, ST, OBC, PwD और महिलाओं के प्रतिनिधि शामिल होंगे. जाति-आधारित भेदभाव को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है, जो SC, ST और OBC के सदस्यों के खिलाफ होता है. शिकायतों के लिए 24×7 हेल्पलाइन और सख्त समय-सीमा होगी. शिकायत मिलने के 24 घंटे में कार्रवाई शुरू हो जाएगी. 60 दिनों में जांच पूरी करनी होगी. उल्लंघन पर संस्थान की मान्यता रद्द हो सकती है, या UGC फंडिंग रोक सकती है. ड्राफ्ट गाइडलाइंस फरवरी 2025 में जारी हुईं. फाइनल नियम 13 जनवरी 2026 को नोटिफाई हुए. कुल प्रोसेस में लगभग 11 महीने (करीब 330 दिन) लगे, जिसमें पब्लिक फीडबैक, विरोध और संसदीय समिति की रिव्यू शामिल थे. UGC के नए नियमों के तहत जातिगत भेदभाव की शिकायत मिलने पर इक्विटी कमेटी जांच करेगी. संस्थान प्रमुख को रिपोर्ट सौंपेगी. आरोपी छात्र पर संस्थागत अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी, जैसे चेतावनी, जुर्माना, निलंबन या निष्कासन. शिकायत ऑनलाइन, लिखित, ईमेल या 24×7 इक्विटी हेल्पलाइन से दर्ज हो सकती है. कमेटी शिकायत मिलते ही जल्द बैठक करेगी; गंभीर मामलों में पुलिस को सूचित किया जाएगा. निर्णय से असंतुष्ट पक्ष 30 दिनों में ऑम्बड्सपर्सन को अपील कर सकता है. हल्के मामलों में परामर्श या चेतावनी मिलेगी. गंभीर मामलों में छात्रावास/होस्टल से हटाना, परीक्षा से वंचित करना या संस्थान से निकालना जैसी कार्रवाई हो सकती है. संस्थान सभी शिकायतों का रिकॉर्ड रखेंगे.विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों ने देश में घमासान मचा दिया है. एक तरफ संविधान का अनुच्छेद 14 समानता की बात करता है तो दूसरी तरफ यूजीसी की नई गाइडलाइन किसी भी तरह से समानता का अधिकार का पालन करती नहीं दिख रही है. 

मित्रों,यूजीसी गाइडलाइन तो सवर्णों के लिए खतरनाक है ही, बिहार के 38 में 33 जिलों को एट्रोसिटी संभावित क्षेत्र घोषित करने की खबर भी वायरल हो रही है. बताया जा रहा है कि एट्रोसिटी संभावित क्षेत्रों में सामान्य वर्ग के किसी भी व्यक्ति को हथियारों का लाइसेंस नहीं दिया जा सकता. इसके उलट अनुसूचित जाति और जनजाति को बिना जांच पड़ताल के हथियार लाइसेंस दिए जाने का प्रावधान है. सरकार की यह कवायद यह जाहिर करना चाहती है कि सवर्णों से अनुसूचित जाति और जनजाति को खतरा है, लेकिन अनुसूचित जाति और जनजाति से सवर्णों को कोई खतरा नहीं है.


मित्रों, इससे पहले मोदी सरकार द्वारा (अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) संशोधन अधिनियम, 2018) मूल 1989 के कानून को मजबूत करने के लिए लाया गया था, जिसने 2018 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले (जिसमें गिरफ्तारी के लिए अग्रिम जांच और अनुमोदन की आवश्यकता थी) को पलट दिया, और इसमें पीड़ित/गवाह सुरक्षा के लिए नए प्रावधान जोड़े गए, जिससे तत्काल गिरफ्तारी और मामलों के त्वरित निपटारे के प्रावधान बहाल हुए। 2018 में सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीश ए.के. गोयल की बेंच) ने एक फैसले में SC/ST एक्ट के तहत गिरफ्तारी के लिए अग्रिम जांच और अनुमोदन की आवश्यकता बताई थी. वास्तव में २०१८ में संशोधित एससीएसटी एक्ट १९१८ के रौलेट एक्ट से भी ज्यादा सख्त और काला कानून है. फिर इसका दुरुपयोग भी जमकर हो रहा है. न सिर्फ इसके द्वारा सवर्णों पर झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं बल्कि इसके द्वारा जमकर पैसा भी कमाया जा रहा है मुआवजे के रूप में. विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार एससी एसटी एक्ट के आजकल 90% केस फर्जी होते हैं। इसमें पुलिस और न्यायिक व्यवस्था की मिलीभगत होती है और सिर्फ धन उगाही के काम में आती है। न जाने देश में ऐसे कितने विष्णु तिवारी हैं जिनका जीवन झूठे एससी-एसटी मुकदमों के कारण बेवजह जेल में बीत गया।
मित्रों, अभी २० जनवरी, २०२६ को दिए अपने एक निर्णय के जरिए सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि अनुसूचित जाति या जनजाति से संबंध रखने वाले को केवल अपमानजनक शब्द बोलने या गाली-गलौज करना स्वत: ही अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम, 1989 के तहत अपराध नहीं बन सकता. सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस जे बी पारदीवाला और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने कहा कि शिकायतकर्ता को जाति के आधार पर अपमानित करने की स्पष्ट मंशा होनी चाहिए। पटना हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में एफआईआर और आरोप पत्र में जाति-आधारित अपमान के अभाव को रेखांकित किया। कोर्ट ने एससी एसटी एक्ट की धारा 3(1) के प्रावधानों को दोहराते हुए कहा कि केवल अपशब्दों का प्रयोग करने पर एससी एसटी एक्ट के प्रावधान लागू नहीं होंगे. 
मित्रों, दिल्ली में 30 अप्रैल 2025 को मोदी कैबिनेट की बैठक में कई फैसले लिए गए, जिसमें जाति जनगणना को अहम माना जा रहा है. केंद्र सरकार ने फैसला किया कि आगामी जनगणना में जातिगत गणना को पारदर्शी तरीके से शामिल किया जाएगा. लेकिन उसके बाद जातिगत जनगणना की रिपोर्टों का होगा क्या? क्या इसको ढाल बनाकर राष्ट्रीय और प्रादेशिक स्तरों पर आरक्षण की सीमा को बढाकर ८०-९० प्रतिशत नहीं कर दिया जाएगा?
मित्रों, हाल ही में भारत सरकार द्वारा जाती एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में सबसे अधिक बेरोजगार इस समय सवर्ण जाति के लोग हैं. बावजूद इसके न तो सवर्णों के हित के लिए एक पॉलिसी सरकार बनाएगी और न ही सवर्ण जाति के छात्रों के लिए फ्री कोचिंग की सुविधा करेगी. सरकार की हालिया वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, बेरोज़गारी की दर विभिन्न जातियों में इस प्रकार है: अनुसूचित जाति (SC): 3.3%; अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC): 3.1%; अनुसूचित जनजाति (ST): 1.9%; सवर्ण वर्ग (General Category): 3.8%। यह आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि सवर्ण वर्ग में बेरोज़गारी की दर अन्य वर्गों की तुलना में अधिक है। हालांकि, इस पर समाज में व्यापक चर्चा नहीं हो रही है। ऐसा लगता है कि मीडिया और राजनीतिक दल सवर्णों को लगातार नजरअंदाज कर रहे हैं, जबकि यह इस वर्ग के लिए एक गंभीर चिंता का विषय है। सरकार न सिर्फ कोचिंग और स्कॉलरशिप में भेदभाव करती है बल्कि बिजनेस करने के लिए लोन देने में भी भेदभाव करती है. यकीन मानिए अगले दस सालों में सवर्णों में यह बेरोजगारी दर 10% को छू जाएगी.
मित्रों, अंत में मैं इन काव्य पंक्तियों के द्वारा एक सामान्य सवर्ण के दर्द को आपलोगों के सामने रखना चाहता हूँ
राष्ट्रवाद का झोला टंगे मैं सवर्ण बेचारा आवारा हूँ, 
मुसलमानों से यदि बच जाऊं तो दलितों का चारा हूँ, 
कांग्रेस ने दर्द दिए तब हमने कमल को चुना, 
किन्तु जेल में डाल रहे हमें कोई पड़ताल बिना, 
इतने दिन तक भक्ति की फिर भी मोदी का मारा हूँ, 
वोट बैंक की राजनीति में मैं सवर्ण बेचारा हूँ. 
&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;मैं एक छोटा सा पत्रकार हूँ, स्वभाव से विद्रोही. मैं विश्वामित्र की तरह एक सामानांतर दुनिया तो बनाना नहीं चाहता हूँ फिर भी इस दुनिया में कुछ बदलाव जरूर चाहता हूँ जो सिर्फ बातें बनाने से नहीं होनेवाला, इसके लिए कुछ कदम उठाने पड़ेंगे.&lt;/div&gt;</description><link>http://brajkiduniya.blogspot.com/2026/01/blog-post_21.html</link><author>noreply@blogger.com (ब्रजकिशोर सिंह)</author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEicM8S5ROYBFvWOJoeKqzVFJttxzu9TaCDd7XAxsCJHflfQPRKcaxS0l_-7V_s4i1vXWQCZ8u5_WwM6G7hoBYRFCA0F6EX2G0YSrIi1Lo7hyphenhyphenRl4RtMxHJOhBlLwr6TGXuG0AfmpRGClfjj-NV2pILXHQnsr0mZyxKZaQkg2iulbDIxbvu8Dn8oruEFCZf0/s72-c/%E0%A4%AF%E0%A5%82%E0%A4%9C%E0%A5%80%E0%A4%B8%E0%A5%80.jpg" width="72"/><thr:total>0</thr:total></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-4719772605751864996.post-8748518880891473715</guid><pubDate>Sun, 18 Jan 2026 04:04:00 +0000</pubDate><atom:updated>2026-01-20T09:45:04.230+05:30</atom:updated><title>झुनझुना बन चुका है नमो ऐप </title><description>&lt;div class="separator" style="clear: both;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEh6hG3ofHjka6lLwzNms4JApMcSytZtKAqvBEMhSyo_YBYSCP0XJXYcNHWIjg_c-VdnnNPZvSINHmFsxOddEDuKTy4ChCaZlGaLp1fQWWi8Y0FoD0MvF0kybMo0lom_WxcAZK8cVRy9e13Xpkbadx8FhM2TFpZdtBwckmaUUInWpb0iFys76N0QNVtu_b8/s1349/Screenshot%202026-01-18%20at%2009-33-35%20PMO.png" style="display: block; padding: 1em 0; text-align: center; "&gt;&lt;img alt="" border="0" width="320" data-original-height="766" data-original-width="1349" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEh6hG3ofHjka6lLwzNms4JApMcSytZtKAqvBEMhSyo_YBYSCP0XJXYcNHWIjg_c-VdnnNPZvSINHmFsxOddEDuKTy4ChCaZlGaLp1fQWWi8Y0FoD0MvF0kybMo0lom_WxcAZK8cVRy9e13Xpkbadx8FhM2TFpZdtBwckmaUUInWpb0iFys76N0QNVtu_b8/s320/Screenshot%202026-01-18%20at%2009-33-35%20PMO.png"/&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;


मित्रों, जब देश में सोनिया-मनमोहन की सरकार थी तब देश की हालत क्या थी याद है आपको? पूरे भारत में निराशा का माहौल था. पूरी दुनिया भारत को असफल राष्ट्र मानने लगी थी. भारत में लोकतंत्र फेल हो चुका था. सरकार क्या थी घोटालों की सरकार थी. जनता की कहीं कोई सुननेवाला नहीं था. मजबूरन देश की जनता ने सरकार बदलने का निर्णय किया और एक ऐसे व्यक्ति को प्रधानमंत्री बनाया जो देश को बदल देने के वादे और दावे कर रहा था. उसका दावा था कि अब चलता है को देश में चलने नहीं देगा. काला धन देश में वापस लाएगा. लेकिन हुआ क्या?
मित्रों, ऐसे ही उम्मीद भरे माहौल में १८ जून, २०१५ को नमो ऐप लांच किया गया. शहर-शहर कार्यक्रमों का आयोजन करके इस ऐप का प्रचार भी किया गया. सच पूछिए तो मुझे इसके बारे में जानकर अपार ख़ुशी हुई. मैंने कई बार इस मंच पर अपनी समस्याएँ रखीं और हर बार त्वरित समाधान हो गया. यहाँ तक कि मेरे हाजीपुर शहर में कचरे के उठान से सम्बंधित समस्या का भी समाधान किया गया. इस बीच मैं मुज़फ्फरनगर के श्रीराम कॉलेज में अध्यापक बन गया. एक बार जब मैंने मुज़फ्फरनगर के लिए दिल्ली से बस पकड़ी तब पता चला कि बस पहले हापुड़ जाएगी, फिर मेरठ जाएगी और उसके बाद मुजफ्फरनगर. उस समय गर्मी का मौसम था और बस भी ठसाठस भरी हुई थी. मुझे खड़े होकर यात्रा करनी पड़ी और वह भी सिर्फ इसलिए क्योंकि उस दिन भारत के तत्कालीन गृह मंत्री श्री राजनाथ सिंह सड़क मार्ग से दिल्ली से मेरठ जा रहे थे और इसलिए बसों का रूट बदल दिया गया था. मैंने मुज़फ्फरनगर पहुँचते ही नमो ऐप पर इसकी शिकायत की. कुछ दिनों के बाद मुझे फोन आया तब मैंने कहा कि मेरी समस्या का समाधान तो तब होगा जब आगे से किसी मंत्री या अन्य वीआईपी के चलते यातायात का रूट नहीं बदला जाएगा.
मित्रों, कुछ समय बाद मेरे कॉलेज का सफाईकर्मी हमारे पत्रकारिता विभाग में आया और बताया कि उसके गाँव की दबंग जाति के लोगों ने उसके वाल्मीकि समुदाय के लोगों के मोहल्ले का रास्ता रोक दिया है. पंचायत चुनाव में उन लोगों ने एक मुसलमान को प्रधान पद के लिए वोट दिया था जो जीतने के बावजूद मामले में हाथ डालने से भाग रहा है. मैंने तत्काल नमो ऐप पर शिकायत दर्ज करवा दी. कुछ दिनों के बाद मुज़फ्फरनगर के जिलाधिकारी का मुझे फोन आया और समस्या का समाधान कर दिया गया.
मित्रों, इसके बाद ऐप में कई बदलाव कर दिए गए. अब शिकायत करने पर जिस विभाग या राज्य सरकार से शिकायत सम्बंधित है उसके बारे में भी बताना पड़ता था. इतना ही नहीं शिकायत करने के बाद अब मामले को प्रदेश लोक शिकायत विभाग में भेज दिया जाता था और मैसेज भेज दिया जाता था कि आपकी समस्या का समाधान कर दिया गया है और तबसे जनसमस्याओं के समाधान का यह मंच झुनझुना बनकर रह गया है. उसके बाद आपके पास बार-बार फोन करके पूछा जाता है कि क्या आप समाधान से संतुष्ट हैं लेकिन उसके बाद होता कुछ भी नहीं है. मतलब फोन करके पूछना भी सिर्फ औपचारिकता होती है. तबसे मैंने कई बार कई तरह की समस्याओं के बारे में शिकायत की जिनमें से अधिकतर बिहार के राजस्व व पुलिस विभाग से सम्बंधित थी. हर बार मैसेज आता रहा कि आपकी समस्या का समाधान कर दिया गया है हालाँकि अधिकतर समस्याओं का कोई समाधान नहीं हुआ. मामले को जनशिकायत में भेजकर औपचारिकता पूरी कर ली गई. एक मामले में तो मुझे वैशाली जिला जनशिकायत विभाग द्वारा कई महीने तक तारीख-पे-तारीख देकर मामले की मेरी अनुपस्थिति में सुनवाई कर ली गई और फैसला मेरे खिलाफ सुना दिया गया. मामला महनार के अंचलाधिकारी द्वारा घूस नहीं देने पर दस्तावेज के अपठनीय होने का बहाना बनाकर दाखिल-ख़ारिज के आवेदन को रद्द कर देने से सम्बंधित था.
मित्रों, कुल मिलाकर जो मंच जनता को प्रधानमंत्री जी द्वारा उपलब्ध करवाया गया था वो अब बेकार हो साबित चुका है. यद्यपि नमो ऐप अभी भी मोदी जी के भोंपू के रूप में जरूर बखूभी अपने काम को अंजाम दे रहा है और दिन-रात जनता को मोदी जी के मन की बात सुना-बता रहा है. लेकिन जनता अपने मन की बात अब कैसे सरकार को सुनाए और क्यों सुनाए जब उसकी बातों को सुना ही नहीं जा रहा? ऐसे में सवाल उठता है कि अब लोग अपनी शिकायतों को लेकर जाएँ तो कहाँ जाएँ. बिहार में तो प्रदेश स्तर पर जन शिकायतों के लिए ऐसा कोई मंच है भी नहीं. मुझे लगा था कि नेता लोग भले भी मोटी चमड़ी वाले होते हैं लेकिन मोदी जी ऐसे नहीं हैं लेकिन इस नमो ऐप की दुर्गति देखकर तो ऐसा लगता है कि मोदी जी भी बांकी नेताओं की तरह ही मोटी चमड़ी वाले हैं.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;मैं एक छोटा सा पत्रकार हूँ, स्वभाव से विद्रोही. मैं विश्वामित्र की तरह एक सामानांतर दुनिया तो बनाना नहीं चाहता हूँ फिर भी इस दुनिया में कुछ बदलाव जरूर चाहता हूँ जो सिर्फ बातें बनाने से नहीं होनेवाला, इसके लिए कुछ कदम उठाने पड़ेंगे.&lt;/div&gt;</description><link>http://brajkiduniya.blogspot.com/2026/01/blog-post.html</link><author>noreply@blogger.com (ब्रजकिशोर सिंह)</author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEh6hG3ofHjka6lLwzNms4JApMcSytZtKAqvBEMhSyo_YBYSCP0XJXYcNHWIjg_c-VdnnNPZvSINHmFsxOddEDuKTy4ChCaZlGaLp1fQWWi8Y0FoD0MvF0kybMo0lom_WxcAZK8cVRy9e13Xpkbadx8FhM2TFpZdtBwckmaUUInWpb0iFys76N0QNVtu_b8/s72-c/Screenshot%202026-01-18%20at%2009-33-35%20PMO.png" width="72"/><thr:total>0</thr:total></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-4719772605751864996.post-3898956169083444042</guid><pubDate>Sun, 12 Oct 2025 03:12:00 +0000</pubDate><atom:updated>2025-10-12T09:12:34.798+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">क्या बिहार में ७० हजार करोड़ का घोटाला हुआ है?</category><title>क्या बिहार में ७० हजार करोड़ का घोटाला हुआ है?</title><description>मित्रों, कई दशक पहले मेरी नानी श्रीमती धन्ना कुंवर की मृत्यु हो गई, सबकी एक-न-एक दिन होती है. मेरी माँ दो बहन थी. मेरी माँ ने अकेले नानी का श्राद्ध किया. मौसी ग्यारह साल पहले ही मर चुकी थी और मौसा ने नानी से सम्बन्ध तोड़ रखा था. पिताजी डॉ. विष्णुपद सिंह जो आरपीएस कॉलेज महनार में प्रोफेसर थे बड़े हिसाबी-किताबी थे. उनके पास लिखित में एक-एक पैसे का हिसाब रहता था. यह अलग बात थी कि उनसे किसी ने नानी के श्राद्ध का हिसाब नहीं माँगा अगर मांगता तो आसानी से एक-एक पैसे का हिसाब दे देते. 
मित्रों, कल्पना करिए कि पिताजी बिहार के प्रशासनिक कुनबे की तरह लापरवाह होते और लिखित हिसाब नहीं रखते तब क्या होता? तब पिताजी मुंहजुबानी कहते कि उन्होंने श्राद्ध में इतना पैसा खर्च किया है जो सच भी होता तो उनके ऊपर झूठे आरोप लग सकते थे कि उन्होंने या तो बिल्कुल भी खर्च नहीं किया है या फिर कम किया है और ज्यादा बता रहे हैं. यद्यपि पिताजी की ईमानदारी से पूरा महनार अनुमंडल परिचित था क्योंकि उन्होंने दो-दो बार कॉलेज का प्रधानाचार्य रहने के दौरान कभी एक पैसा घूस नहीं खाया या फिर विद्यार्थियों को भी फ्री में नोट्स और गेस देते रहे फिर भी वे निश्चित रूप से संदेह के घेरे में आ जाते. 
मित्रों, ठीक वही बात इन दिनों बिहार में भी हो रहा है. बिहार सरकार के विभिन्न विभागों ने पैसे खर्च किए लेकिन हिसाब नहीं दे रहे हैं या दे नहीं पा रहे हैं यद्यपि व्यय तो हुआ है और ठीक उसी तरह हुआ है जैसे पिताजी ने नानी के श्राद्ध में किया था. कहने का तात्पर्य यह है कि मामला घोटाले का नहीं है बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का है जिसको राजनीति के ठेकेदार प्रशांत किशोर घोटाला साबित करने पर तुले हैं.  
मित्रों, सवाल यह भी है कि जब प्रशांत किशोर कहते हैं कि अशोक चौधरी भ्रष्ट हैं तो लोग उनपर तुरंत भरोसा कर लेते हैं। लेकिन जब वे कहेंगे कि आरसीपी सिंह भ्रष्ट नहीं हैं तो उनपर कौन भरोसा करेगा? कहना न होगा कि यह वही आरसीपी सिंह हैं जिन्हें एक दौर में नीतीश सरकार के समस्त भ्रष्टाचार का सरगना माना जाता रहा और कथित आरसीपी टैक्स के लिए वे कुख्यात भी रहे। खुद जेडीयू ने उन्हें भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर पार्टी से निकाला। इसके बाद भाजपा ने उन्हें अपनी वॉशिंग मशीन में धोने का प्रयास किया, लेकिन वे धुल नहीं पाए, जिसके फलस्वरूप पार्टी में शामिल करके भी उन्हें लॉन्च नहीं किया। सोचिए दाग कितने गहरे लगे होंगे भाजपा को कि उन्हें अहसास हुआ कि मेरी वॉशिंग मशीन में भी ये धुल नहीं पाए। उस वॉशिंग मशीन में, जिसमें देश के बड़े-बड़े भ्रष्टाचारी धुलकर पवित्र हो गए।
मित्रों, जिस आरसीपी को भाजपा भी अपनी वॉशिंग मशीन में नहीं धो पाई, उन्हें प्रशांत किशोर ने अपनी पीके वॉशिंग मशीन में धो दिया है। अब आरसीपी टैक्स वाले आरसीपी सिंह पवित्र हैं और जनसुराज ने उनकी बेटी को विधानसभा चुनाव का टिकट भी दे दिया है। मजे की बात यह कि बेटी के टिकट का ऐलान भी बाप ने ही किया। अब प्रशांत किशोर कहते घूम रहे हैं कि आरसीपी की बेटी को टिकट उनकी योग्यता पर दिया। मतलब आप एक कथित भ्रष्ट नेता की बेटी को टिकट दे दें तो वह न तो परिवारवाद है, न टिकट बेचना है। केवल अशोक चौधरी द्वारा अपनी बेटी के लिए टिकट मैनेज कर लेना ही परिवारवाद और टिकट खरीदना है? मतलब तुम करो तो भ्रष्टाचार और हम करें तो शिष्टाचार? इसी राजनीतिक संस्कृति का अनुसरण करके प्रशांत किशोर दूसरों से बेहतर कैसे हुए?
मित्रों, सवाल है कि आज आपने आरसीपी की बेटी को टिकट दिया। कर्पूरी ठाकुर की पोती को टिकट दिया। कल आप अन्य नेताओं और अपने बेटे बेटियों को भी टिकट देंगे? आज आपने कथित आरसीपी टैक्स वाले आरसीपी सिंह को अपनी वॉशिंग मशीन में धोया, कल अन्य भ्रष्टाचारियों को भी धोएंगे? और यह तो बस शुरुआत है। आप कह सकते हैं कि मेरे दाग देख रहे हो, विपक्षियों के दाग नहीं देखते. लेकिन यदि प्रशांत किशोर पांडे जो अब तक भाड़े के रणनीतिकार थे और सिर्फ पैसों के लिए काम करते थे,ये भी नहीं देखते थे कि किसके जीतने के देश को लाभ होगा और किसके जीतने से नुकसान, उम्मीद जगाकर उम्मीद को कुचलने का काम करेंगे, दूसरों के लिए बनाए सिद्धांत को खुद पर ही लागू नहीं करेंगे, तो फिर लोग आपको भी क्यों न कहें - केजरीवाल पार्ट टू? &lt;div class="blogger-post-footer"&gt;मैं एक छोटा सा पत्रकार हूँ, स्वभाव से विद्रोही. मैं विश्वामित्र की तरह एक सामानांतर दुनिया तो बनाना नहीं चाहता हूँ फिर भी इस दुनिया में कुछ बदलाव जरूर चाहता हूँ जो सिर्फ बातें बनाने से नहीं होनेवाला, इसके लिए कुछ कदम उठाने पड़ेंगे.&lt;/div&gt;</description><link>http://brajkiduniya.blogspot.com/2025/10/blog-post.html</link><author>noreply@blogger.com (ब्रजकिशोर सिंह)</author><thr:total>0</thr:total></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-4719772605751864996.post-1514044142344061802</guid><pubDate>Sat, 02 Aug 2025 01:51:00 +0000</pubDate><atom:updated>2025-08-02T07:27:50.012+05:30</atom:updated><title>क्या मजाक है?</title><description>मित्रों, पिछले दिनों चुनाव आयोग द्वारा बिहार में कराए जा रहे एसआईआर को लेकर नाटक क्या खूब महानाटक हुआ। विपक्ष ने सड़क से लेकर संसद तक आसमान को सर पे उठा लिया। चुनाव आयोग ने भी कहा कि चूंकि बिहार के सीमांचल में जनसंख्या से ज्यादा आधार कार्ड बन गया है इसलिए उसे घुसपैठियों के वोटर लिस्ट में शामिल होने की आशंका है। फिर लड़ाई सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंच गयी। विपक्ष को लगा कि घुसपैठिए मतदाता सूची से बाहर हो जाएंगे तो उनकी मुश्किलें और बढ़ जाएंगी और फिर से उनकी हार पक्की हो जाएगी। 
मित्रों, अब जबकि वोटर लिस्ट का प्रारूप सामने आया है तो पता चला है कि किशनगंज से ज्यादा वोटर तो वैशाली, मुजफ्फरपुर आदि कई जिलों में कम हो गये। कहने का मतलब यह कि कई महीने तक पूरे बिहार की पूरी सरकारी मशीनरी को लगाए रखने के बाद चुनाव आयोग वोटर लिस्ट से सिर्फ मरे हुए और एकसाथ कई स्थानों पर मतदाता बने लोगों को ही हटा पाया घुसपैठिए तो फिर से वोटर लिस्ट में बने रह गये। हम तो इस सारी कवायद पर बस यही कह सकते हैं कि भाई, क्या मजाक है? ऐसा होना भारत के  लोकतंत्र के साथ मजाक है या भारत में पिछले 78 सालों से लोकतंत्र के नाम पर मजाक ही चल रहा है और चलता चला जा रहा है?
मित्रों, मजाक तो पिछले दिनों भारत के उपराष्ट्रपति के पद के साथ भी हुआ है। साथ ही अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इन दिनों विश्व व्यापार संगठन और सारे वैश्विक व्यापारिक नियमों का मजाक बना रखा है। उनका कहना है कि वो कोई अंतराष्ट्रीय व्यापारिक कानून न ही जानते हैं और न ही मानते हैं। बल्कि वो जो कहते और करते हैं वही नियम है, वही कानून है, दैट्स औल। उनके मजाक की हद तो तब हो गई जब उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था मृत  अर्थव्यवस्था है। क्या मजाक है भाई? जो सबसे ज्यादा जीवंत है उसी को आप मृत बता रहे हो? इतने सुंदर विरोधाभासी अलंकार का प्रयोग भगवान झूठ न बोलवाए मैंने आजतक नहीं देखा हालांकि तेजस्वी यादव भी इस अलंकार का बखूबी इस्तेमाल कर लेते हैं। चार लाईन हिंदी न बोल सकनेवाले तेजस्वी भी जब नारा लगाते हैं कि बिहार को चाहिए तेजस्वी सरकार और जब महान लालू के पुत्र होने के बावजूद तेजस्वी कहते हैं कि वो बिहार से भ्रष्टाचार मिटाएंगे तब भी गूंगे तक बोल उठते हैं कि क्या मजाक है? वैसे मजाक करने में अपने राहुल बाबा भी कम नहीं हैं जो खुद भी एक मजाक हैं।
मित्रों, इससे पहले कि मेरा यह कथित आलेख भी ज्यादा लंबा होकर पाठकों को लंबा न कर जाए और मजाक न बन जाए मुझे अपनी सहचरी लेखनी को विराम देना होगा। तो हम बहुत जल्द फिर से उपस्थित होते हैं नये मजाक के साथ तब तक आप भी मजाक करते रहिए, क्योंकि भैया ये ज़िन्दगी भी मजाक है, एक भद्दा-सा मजाक।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;मैं एक छोटा सा पत्रकार हूँ, स्वभाव से विद्रोही. मैं विश्वामित्र की तरह एक सामानांतर दुनिया तो बनाना नहीं चाहता हूँ फिर भी इस दुनिया में कुछ बदलाव जरूर चाहता हूँ जो सिर्फ बातें बनाने से नहीं होनेवाला, इसके लिए कुछ कदम उठाने पड़ेंगे.&lt;/div&gt;</description><link>http://brajkiduniya.blogspot.com/2025/08/blog-post.html</link><author>noreply@blogger.com (ब्रजकिशोर सिंह)</author><thr:total>0</thr:total></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-4719772605751864996.post-8968928991480041726</guid><pubDate>Wed, 23 Jul 2025 05:14:00 +0000</pubDate><atom:updated>2025-07-24T12:28:12.893+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">मार्गदर्शक मंडल में जगदीप धनखड़</category><title>मार्गदर्शक मंडल में जगदीप धनखड़ </title><description>मित्रों, पिछले कुछ दिनों से अंतर्राष्ट्रीय जगत में बहुत-कुछ अप्रत्याशित हो रहा था. ट्रम्प की गुलाटियों ने सारे कूटनीतिज्ञों और राजनैतिक विशेषज्ञों को पागल करके रखा हुआ था. ऐसे माहौल में अचानक भारतीय राट्रीय राजनैतिक परिदृश्य को लेकर अजब-गजब कयास लगाए जाने लगे. महान से लेकर महानतम की गिनती में आनेवाले राजनैतिक भविष्यवक्ता एक ऐसे व्यक्ति के भविष्य को लेकर चिंतित होने लगे जिसका राहू, केतु, शनि समेत सारे ग्रह मिलकर भी कुछ नहीं बिगाड सकते. आगे नाथ न पीछे पगहा. लोग कयास लगाने लगे कि योगी आदित्यनाथ आखिर बार-बार दिल्ली क्यों जा रहे हैं? मानो दिल्ली नोएडा हो गया जहाँ जो मुख्यमंत्री एक बार गया तो अपने पद से गया. लेकिन बिल्लियों के भाग्य से छींका तो कहीं और टूटनेवाला था.

मित्रों, मैं बात कर रहा हूँ भारतीय गणराज्य के महामहिम उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ जी द्वारा परसों दिए गए त्यागपत्र की. मैं चैलेंज करता हूँ कि किसी भी राजनैतिक विश्लेषक के पास इस घटना की कोई पूर्व सूचना नहीं थी. दिनभर राज्यसभा में सब कुछ सामान्य रूप से चल रहा था फिर शाम ढलते-ढलते ऐसा क्या हो गया कि जाट बलवान ने इतनी प्रतिष्ठित कुर्सी को लात मार दी. जाहिर है कि मामला पद की और साथ ही व्यक्तिगत प्रतिष्ठा से जुड़ा हुआ कुछ तो ऐसा रहा होगा जो उनको नागवार गुजरा। वैसे भी धनखड़ साब ठहरे जाट. जब जो जी में आया बोल दिया बिना लाग-लपेट के. उन्होंने उपराष्ट्रपति के रबर स्टाम्प पद को काफी सक्रिय बना दिया था जिसकी शीर्ष नेतृत्व को कतई उम्मीद नहीं थी.

मित्रों, धनखड़ साब कभी किसी को तो कभी किसी को कुछ-न-कुछ सुना जाते. कट्टर देशभक्त थे इसलिए विपक्ष का भारतविरोधी रवैया उनको बिलकुल भी नहीं सुहाता था. उनका ऐसा ही रवैया न्यायपालिका के साथ भी था. भ्रष्ट और निरंकुश न्यायपालिका के साथ उनका पूरा ३६ का आंकड़ा था. कई बार तो खुले मंच से योगी आदित्यनाथ की भी मुक्त कंठ से प्रशंसा कर डाली जिनको देश का बहुत बड़ा वर्ग पीएम मैटेरियल मानता है लेकिन मोदी-शाह की जोड़ी शायद ऐसा नहीं मानती. तभी तो पिछले लोकसभा चुनाव में यूपी में उनको शीर्ष नेतृत्व द्वारा ही कमजोर करने के प्रयास किए गए. इतना ही नहीं जगदीप धनखड़ जी कुछ सठियाने भी लगे थे। उनकी जिद थी कि उनको राष्ट्रपति के समान सुविधाएं दी जाएं और हर मंत्रालय में उनकी भी तस्वीर लगे। साथ ही उन्होंने सरकार से बिना पूछे जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग को भी स्वीकार कर लिया था‌। साथ ही उनके हृदय का भी हाल ही में आपरेशन भी हुआ था।

मित्रों, ऐसे हालात में उपराष्ट्रपति जी की तबियत तो खराब होनी ही थी सो हुई. वैसे भी बेचारे ७५ साल के होनेवाले थे और वर्तमान भाजपा नेतृत्व के अनुसार आप ७५ साल के होने के बाद राजनीति में सक्रिय नहीं रह सकते इसलिए भी उनके ऊपर मार्गदर्शक मंडल में शामिल होने का दबाव पड़ रहा होगा, शायद. सो बेचारे दस महीने पहले ही अभूतपूर्व से भूतपूर्व उपराष्ट्रपति हो लिए. आगे देखना है कि १७ सितम्बर के बाद मोदी जी क्या करते हैं? वैसे हमारे बिहार में तो कहावत है कि रास्ता दिखाओ तो आगे चलो. वैसे भी अब मोदी सरकार जड़ता की शिकार होती हुई दिख रही है जिस तरह की जड़ता की शिकार वह नोटबंदी से पहले नजर आ रही थी।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;मैं एक छोटा सा पत्रकार हूँ, स्वभाव से विद्रोही. मैं विश्वामित्र की तरह एक सामानांतर दुनिया तो बनाना नहीं चाहता हूँ फिर भी इस दुनिया में कुछ बदलाव जरूर चाहता हूँ जो सिर्फ बातें बनाने से नहीं होनेवाला, इसके लिए कुछ कदम उठाने पड़ेंगे.&lt;/div&gt;</description><link>http://brajkiduniya.blogspot.com/2025/07/blog-post.html</link><author>noreply@blogger.com (ब्रजकिशोर सिंह)</author><thr:total>0</thr:total></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-4719772605751864996.post-7538372785517613393</guid><pubDate>Wed, 28 May 2025 02:59:00 +0000</pubDate><atom:updated>2025-05-28T08:46:02.233+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">लालू के लाल</category><title>लालू के लाल</title><description>
मित्रों, बिहार की राजनीति में इन दिनों तूफान आया हुआ है। कारण यह है कि बिहार का सबसे बड़ा राजपरिवार नैतिक दिखने की कोशिश कर रहा है। ये वही राजपरिवार है जिसने सत्ता के नशे में कभी नैतिकता के परवाह तक नहीं की। जो मन में आया किया, बिहार में सामाजिक न्याय के नाम पर जंगल राज चलाया, किसी भी डाक्टर, जज, प्रोफेसर, व्यापारी का अपहरण करवा दिया, आईएएस की पत्नी तक का सालों साल बलात्कार करवाया, चंदा बाबू के बेटे को जिंदा तेजाब के टैंकर में डलवा दिया, अनपढ़ पत्नी को आठ साल के लिए बिहार जैसे पिछड़े राज्य का मुख्यमंत्री बना दिया, सीताराम केसरी के बुज़ुर्ग भाई को नग्न करके नचवा दिया, डीएम से तंबाकू लगवाया, कुल मिलाकर एक खुशहाल राज्य को पूरी तरह से बर्बाद करके रख दिया । 
मित्रों, उस समय ऐसा लगता था कि बिहार में या तो बंदर शासन कर रहा है या फिर कोई पागल या शैतान। बिहार में लालू और बालू के सिवाय कुछ नहीं बचा था। फिर सत्ता बदली और बिहार में अपेक्षाकृत अच्छा शासन आया. आश्चर्य है कि आज बिहार का हिरन्यकश्यप, बिहार का रावण नैतिकता की दुहाई दे रहा है. दरअसल उनके बड़े बेटे तेजप्रताप यादव ने कांड कर दिया है. शादीशुदा तेजप्रताप ने घोषणा कर दी है कि उनका अनुष्का यादव नाम की युवती के साथ १२ सालों से प्रेम चल रहा है. सवाल उठता है कि अगर ऐसा था तो लालू परिवार को अनुष्का के साथ ही तेजप्रताप की शादी करनी चाहिए थी. फिर अतिप्रतिष्ठित पूर्व मुख्यमंत्री दारोगा राय की पोती के साथ तेजप्रताप की शादी क्यों की? क्यों उस लड़की की जिंदगी बर्बाद की?
मित्रों, लालू जी अगर सत्ता में होते तो शायद अब तक ऐश्वर्या जीवित भी नहीं होती क्योंकि तब उनके पास एक-से-एक हत्यारे और गुंडे उपलब्ध थे, बस एक ईशारा काफी होता. परंतु हाय रे दुर्भाग्य! एक तो बेचारे विपक्ष में हैं और उस पर प्रदेश में चुनाव सिर पर है। अगर राजपरिवार सत्ता में होता तो शायद लालू जी ताल ठोंक कर कह देते उनके बेटे ने जो किया ठीक किया, वही नैतिकता है, वही अनुकरणीय है‌। छोटे बेटे ने एक ईसाई लड़की से विवाह किया, गोपालक के घर में गोमांसभक्षक आई तब तो लालूजी ने कुछ नहीं कहा फिर तेज प्रताप के मामले में कार्रवाई का दिखावा क्यों? छोटका ने किया तो रासलीला और बड़का ने किया तो कैरेक्टर ढीला? वैसे लालूजी के पास कौन-सा कैरेक्टर था? लालूजी भी तो नेता के नाम पर काला धब्बा हैं, घोटाला किंग. दोषसिद्ध, सजायाफ्ता. ऐसे में उनकी कार्रवाई को लेकर यही कहा जा सकता है कि छलनी दूसे शूप के जिसमें खुद हजारों छेद है. वैसे ईश्वरभक्त तेजप्रताप का कालनेमि निकलना भी बिहारी जनमानस के लिए कम दुखद नहीं है. अंत में हम लालू परिवार को पुत्र जन्म की बधाई देते हैं और आशा करते हैं कि ये बच्चा बड़ा होकर लालू यादव नहीं बनेगा.  &lt;div class="blogger-post-footer"&gt;मैं एक छोटा सा पत्रकार हूँ, स्वभाव से विद्रोही. मैं विश्वामित्र की तरह एक सामानांतर दुनिया तो बनाना नहीं चाहता हूँ फिर भी इस दुनिया में कुछ बदलाव जरूर चाहता हूँ जो सिर्फ बातें बनाने से नहीं होनेवाला, इसके लिए कुछ कदम उठाने पड़ेंगे.&lt;/div&gt;</description><link>http://brajkiduniya.blogspot.com/2025/05/blog-post_28.html</link><author>noreply@blogger.com (ब्रजकिशोर सिंह)</author><thr:total>0</thr:total></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-4719772605751864996.post-8043701857422633542</guid><pubDate>Wed, 21 May 2025 02:16:00 +0000</pubDate><atom:updated>2026-04-05T16:50:22.354+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">उड़ता बिहार</category><title>सूखे नशे की गिरफ्त में उड़ता बिहार </title><description>&lt;div class="separator" style="clear: both;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhLbLQy7WEZg7mARp8475m06tdIFR73h4OGez96yhr2Q3pGWUJIVq8isF_2QIug0lswxs5dXo-SXO5gCOGLpT37rUSGpeqMubWhZlMkF6Am0STdRzd39jLu7bv2pP7wp5kU6i0vM0r3rwqk9-nW_cCPBYzoIY6u4eCfRpdmwZj8hmwlqoQaR0Fc36yNAqw/s1020/maxresdefault.jpg" style="display: block; padding: 1em 0; text-align: center; "&gt;&lt;img alt="" border="0" width="320" data-original-height="709" data-original-width="1020" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhLbLQy7WEZg7mARp8475m06tdIFR73h4OGez96yhr2Q3pGWUJIVq8isF_2QIug0lswxs5dXo-SXO5gCOGLpT37rUSGpeqMubWhZlMkF6Am0STdRzd39jLu7bv2pP7wp5kU6i0vM0r3rwqk9-nW_cCPBYzoIY6u4eCfRpdmwZj8hmwlqoQaR0Fc36yNAqw/s320/maxresdefault.jpg"/&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;
मित्रों, एक पेड़ पर एक कौआ सपरिवार रहता था। उसी पेड़ के एक कोटर में एक सांप कहीं से आकर रहने लगा। वो सांप कौए के सारे अण्डों-बच्चों को खा जाता था. कौआ काफी परेशान रहने लगा. उसी पेड़ के समीप नेवले का बिल था. कौए ने एक युक्ति लगाई और नेवले के बिल से सांप के कोटर तक के पूरे रास्ते में मछली के टुकड़े डाल दिए. युक्ति ने काम भी किया. मछली के टुकड़े खाते हुए नेवला सांप के कोटर तक पहुँच गया और सांप को मार डाला. लेकिन इस दौरान उसने कौए के घोंसले को भी देख लिया और अब से जब भी मादा कौआ अंडे देती नेवला उसे खा जाता. अब कौए के सामने पहले से भी विकराल समस्या मुंह बाए खडी थी जिसका कोई समाधान उसे सूझ नहीं रहा था. 
मित्रों, इन दिनों बिहार की भी कुछ ऐसी ही स्थिति है. पहले बिहार सरकार ने गली-गली में शराब की दुकानें खुलवाई. पूरे बिहार की जवानी नशे में लड़खड़ाने लगी. फिर अचानक शराबबंदी कर दी. शराब तो बंद हो गई यद्यपि तस्करी होकर तो अब भी आ रही है और मिल भी रही है फिर भी शराब पीनेवाले कम जरूर हो गए लेकिन धीरे-धीरे बिहार में स्मैक, हिरोइन, हशीश, गांजा, चरस जैसे अन्य सूखे नशीले पदार्थों ने उसका स्थान ले लिया और स्थिति पहले से भी भयावह हो गई. जो जवानी पहले लड़खड़ा रही थी अब उड़ने लगी है। पूरी-की-पूरी पीढ़ी खराब हो रही है। देह-दुनिया से बेसुध युवक आज के बिहार में महानगर से लेकर गांवों तक में विक्षिप्तों की तरह भटकते दिखाई दे जाते हैं. मैं बहुत-से प्रतिष्ठित परिवारों के ऐसे युवाओं और किशोरों को जानता हूँ जो माँ-बाप की डांट-फटकार से तंग आकर आत्महत्या तक कर चुके हैं. उनमें से कई तो अपने घरों के इकलौते चिराग थे. कई परिवारों की खुशियों को यह नए प्रकार का नशा खा चुका है और कई परिवारों की खुशियों को अभी खाता जा रहा है. 
मित्रों, सवाल उठता है कि जबकि बिहार में शराब बंदी नहीं थी और शराब पीना वैध था तब तो बिहार सरकार ने उसे रोक दिया लेकिन सूखा नशा तो पहले से ही अवैध है अब वो इसे कैसे रोकेगी? जो नशा बिहार के युवाओं के नसों में धीरे-धीरे उतर रही और उनको अपना गुलाम बना रही है उससे अब कैसे निबटेगी? उपाय तो निकालना पड़ेगा. बिहार की कृषि जलवायु-परिवर्तन और नीलगायों के चलते पहले से ही नष्ट हो चुकी है अगर बिहार की जवानी भी किसी काम की नहीं रही तो बिहार तो पूरी तरह से बर्बाद ही हो जाएगा. हमने कई साल पहले बनी एक फिल्म उड़ता पंजाब में पंजाब को उड़ते हुए देखा था. वास्तव में मैं कभी पंजाब नहीं गया. और अब अपनी आँखों से बिहार को उड़ते हुए देख रहा हूँ और सत्ता के नशे में डूबी बिहार सरकार का इस तरफ थोडा-सा भी ध्यान नहीं है. पुडिया यानि सूखा नशा शराब से भी कहीं बड़ी समस्या बन चुकी है मगर बिहार के सर्वज्ञानी शाहे बेखबर को कोई खबर ही नहीं है. 
&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;मैं एक छोटा सा पत्रकार हूँ, स्वभाव से विद्रोही. मैं विश्वामित्र की तरह एक सामानांतर दुनिया तो बनाना नहीं चाहता हूँ फिर भी इस दुनिया में कुछ बदलाव जरूर चाहता हूँ जो सिर्फ बातें बनाने से नहीं होनेवाला, इसके लिए कुछ कदम उठाने पड़ेंगे.&lt;/div&gt;</description><link>http://brajkiduniya.blogspot.com/2025/05/blog-post_21.html</link><author>noreply@blogger.com (ब्रजकिशोर सिंह)</author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhLbLQy7WEZg7mARp8475m06tdIFR73h4OGez96yhr2Q3pGWUJIVq8isF_2QIug0lswxs5dXo-SXO5gCOGLpT37rUSGpeqMubWhZlMkF6Am0STdRzd39jLu7bv2pP7wp5kU6i0vM0r3rwqk9-nW_cCPBYzoIY6u4eCfRpdmwZj8hmwlqoQaR0Fc36yNAqw/s72-c/maxresdefault.jpg" width="72"/><thr:total>0</thr:total></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-4719772605751864996.post-5435567458454282769</guid><pubDate>Fri, 16 May 2025 01:19:00 +0000</pubDate><atom:updated>2025-05-16T08:38:04.402+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">विष के दांत</category><title>विष के दांत</title><description>मित्रों, भारत और पाकिस्तान के बीच अल्पकालिक युद्ध रूक चुका है। वैसे इसे मुठभेड़ भी कहा जा सकता है और युद्ध भी लेकिन इसने पाकिस्तान को जो चोट पहुंचाई है निश्चित रूप से बतौर प्रधानमंत्री मोदी वहां की पीढ़ियां याद रखेंगी। दुनिया के इतिहास में ऐसा बहुत कम बार देखा गया है कि कोई अघोषित युद्ध जो वास्तव में युद्ध ही था मात्र तीन दिनों में ही समाप्त हो जाए. इस युद्ध में पाकिस्तान जमकर बेनकाब हुआ और उसे भारतीय सेना ने तो बेनकाब किया ही खुद वहां की जनता ने भी भारत द्वारा किए गए हमलों के बाद की स्थिति के वीडियोज अपलोड कर कम शर्मिंदा नहीं किया. टाम कूपर जैसे दिग्गज रक्षा विशेषज्ञों ने तो यहां तक कहा है कि यह विश्व इतिहास का सबसे एकतरफा युद्ध था।
मित्रों, इस तीन दिवसीय मुठभेड़ ने कंगाल पाकिस्तान की कमजोर सामरिक स्थिति को पूरी तरह से बेपर्दा करके रख दिया. पाकिस्तान की न तो कोई मिसाइल और न ही कोई ड्रोन भारत की सतह को छू पाया. सबको भारत की वायु रक्षा प्रणाली ने आसमान में ही नष्ट कर दिया. दूसरी तरफ भारत ने पाकिस्तान की रक्षा प्रणाली को तो पूरी तरह से तहस-नहस तो किया ही साथ ही मुज़फ्फराबाद, लाहौर, नूर खान, रावलपिंडी, पेशावर, करांची, बहावलपुर आदि सारे स्थानों पर मनवांछित हमले कर पाकिस्तान को पूरी तरह से घुटनों पर ला दिया. यहाँ तक कि पाकिस्तान के लिए भारत की अभेद्य वायु सुरक्षा प्रणाली के कारण लड़ाकू विमानों को उसकी अपनी सीमा में उड़ा पाना भी दूभर हो गया. एक तरफ जहाँ पूर्वी सीमा पर पाकिस्तान को भारत पीट रहा था वहीं पश्चिमी सीमा पर बलूचों और तालिबान के समक्ष पाकिस्तानी सेना कहीं भी नहीं टिक पा रही थी. ईधर भारत ने नदियों के पानी का भी रणनीतिक उपयोग शुरू कर रख था। विदित हो कि कुछ दिन पहले ही भारत ने सिन्धु जल संधि को सिन्धु नदी में डूबो दिया था यह कहकर कि खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते. 
मित्रों,जब ऐसा माना जा रहा था कि युद्ध निर्णायक मोड़ पर पहुँचने वाला है तभी अमेरिका के बडबोले राष्ट्रपति डोनाल्ड टर्र टर्र ट्रम्प ने सोशल मीडिया के माध्यम से बताया कि भारत और पाकिस्तान संघर्ष विराम करनेवाले हैं. साथ ही उन्होंने इसको करवाने का श्रेय भी ले लिया. लेकिन जब भारत के प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि हमें मध्यस्थ की जरुरत नहीं और वो भारत के साथ न्यूक्लियर ब्लैकमेल नहीं होने देंगे तब श्रीमान टर्र टर्र ट्रम्प ने पलटी मार दी और कहा है उन्होंने संघर्ष विराम नहीं करवाया, हमने तो झूठ बोला था. वैसे हमले को रोकने को लेकर पाकिस्तान के नूर खान से कई सारी कहानियां हवाओं में तैर रही हैं. कुछ-न-कुछ हुआ हो जरूर है जिसे दुनिया से छिपाया जा रहा है.
मित्रों, अब रही बात उनकी जिनके बचे-खुचे जीवन का एकमात्र उद्देश्य मोदी जी और मोदी जी की सरकार की आलोचना करना है तो इस सन्दर्भ मुझे एक कहानी याद आ रही है. उस समय भारत की धरती पर बैगन का नया-नया आगमन हुआ था. अकबर भोजन करने बैठा तो देखा कि थाली में बैगन का भुर्ता है. उसने बीरबल से कहा कि बीरबल बैगन बहुत अच्छी चीज है. बीरबल ने छूटते ही कहा कि जी हुजुर आप बजा फरमा रहे हैं. कुछेक पल के बाद अकबर ने अपनी बात से पलटते हुए कहा कि बीरबल बैगन बहुत ख़राब चीज है. बीरबल ने फिर से कहा कि बादशाह सलामत सही कह रहे हैं. तब अकबर ने कहा कि बैगन अच्छा है या ख़राब तुम किस तरफ हो? बीरबल ने मुस्कुराते हुए कहा कि हुजुर हम तो आपकी तरफ हैं, बैगन हमारा रिश्तेदार थोड़े न है उससे हमारा क्या लेना-देना. 
मित्रों, ठीक यही बात मोदी विरोधियों पर लागू होती है. मोदी ने पाकिस्तान पर हमला नहीं किया तो कष्ट, कर दिया तो कष्ट, हमला लम्बा खिंचा तो कष्ट और हमला रोक दिया तो कष्ट. इनका कष्ट तो जाता ही नहीं है. कई सारे कांग्रेस नेताओं और डफली मण्डली के बयानों को देखकर तो शक भी होने लगा कि वो भारतीय हैं या पाकिस्तानी. इस बीच बहुत सारी ऐसी पाकिस्तानी महिलाएं भी सामने आई जो दशकों से भारत में अवैध रूप से रहकर थोक में बच्चे पैदा कर रही थीं. 
मित्रों, अंत में मैं कहना चाहूँगा कि विष के दांत टूट गये हैं लेकिन सांप अभी भी जिंदा है। देखना है कि यह सांप फिर से विषदंत उगाता है या फिर केंचुआ बनकर अंतत: मृत्यु को प्राप्त होता है। अगर कांग्रेस फिर से जीतती है तो इसके विषदंत का फिर से उगना निश्चित है और अगर भाजपा की सरकार कुछ दशकों तक बनी रहती है तो या तो यह नापाक देश दुनिया के नक्शे से ही गायब हो जाएगा या फिर खंडित होकर मरियल केंचुए में परिवर्तित हो जाएगा यह भी निश्चित है. &lt;div class="blogger-post-footer"&gt;मैं एक छोटा सा पत्रकार हूँ, स्वभाव से विद्रोही. मैं विश्वामित्र की तरह एक सामानांतर दुनिया तो बनाना नहीं चाहता हूँ फिर भी इस दुनिया में कुछ बदलाव जरूर चाहता हूँ जो सिर्फ बातें बनाने से नहीं होनेवाला, इसके लिए कुछ कदम उठाने पड़ेंगे.&lt;/div&gt;</description><link>http://brajkiduniya.blogspot.com/2025/05/blog-post.html</link><author>noreply@blogger.com (ब्रजकिशोर सिंह)</author><thr:total>0</thr:total></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-4719772605751864996.post-7718089414615746630</guid><pubDate>Thu, 24 Apr 2025 03:32:00 +0000</pubDate><atom:updated>2025-04-24T09:08:37.100+05:30</atom:updated><title>हिंदुस्तान में खतरे में हिंदू</title><description>मित्रों, अगर हम यह कहें कि इन दिनों हिन्दूबहुल भारत में बहुसंख्यक हिन्दू खतरे में हैं तो अतिशयोक्ति नहीं होगी. पहले पश्चिम बंगाल और अब कश्मीर में जिस तरह मुसलमानों ने पिछले दिनों हिन्दुओं का नरसंहार किया है उससे पता चलता है कि स्थिति कितनी चिंताजनक हो चुकी है. बंगाल के मुर्शिदाबाद में बिना किसी उकसावे के न सिर्फ हिन्दुओ की बेरहमी से हत्या की गई बल्कि जमकर लूटपाट और इस तरह से आगजनी की गई कि हिन्दुओं के पास सिवाय पलायन करने के और कोई उपाय ही नहीं बच गया. 
मित्रों, अभी बंगाल की आग ठंडी भी नहीं पड़ी थी कि कश्मीर में घूमने गए २७ निर्दोष हिन्दू पर्यटकों को मुसलमानों ने सिर्फ इसलिए मार दिया क्योंकि वे हिन्दू थे. पहले तो उनको कलमा पढ़ने के लिए बोला गया फिर उनके कपडे उतार कर, नंगा करके इस बात की तस्दीक की गई कि उनका खतना नहीं हुआ है और वो हिन्दू हैं. इतना ही नहीं उन हिन्दू पर्यटकों की न सिर्फ बेरहमी से हत्या की गई बल्कि पत्नी और बच्चों की आँखों के सामने, उनके परिजनों के मन में इस्लाम का खौफ पैदा करने के लिए हत्या की गई. सबसे हृदयविदारक दृश्य तो वो था जिसने दो-तीन साल का बच्चा अपने मृतक पिता के शव के पास बैठा हुआ है और उसे जगा रहा है उसे यह भी नहीं पता कि इस्लाम ने उसके पिता को मार डाला है. मारे भी क्यों नहीं जबकि उसकी आसमानी किताब खुद उसे ऐसे करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है जैसा कि जाकिर नाईक सहित कई सारे इस्लामिक विद्वान् भी मान चुके हैं. 
मित्रों, सवाल उठता है कि हिंदुस्तान में हिंदुत्व की रक्षा कैसे की जाए? ईश्वर अल्लाह तेरो नाम गाने से तो नहीं होगी और न ही पुलिस और सेना के भरोसे बैठे रहने से होगी बल्कि हिन्दुओं को कम-से-कम इतनी ताकत जुटानी पड़ेगी कि उनकी रक्षा हो सके. वीर विनायक दामोदर सावरकर इस खतरे को १९५० के दशक में ही समझ गए थे. उन्होंने तभी कहा था कि इस्लाम एक घर्म नहीं सेना है जिसका उद्देश्य  पूरी दुनिया से अन्य धर्मों का उन्मूलन कर इस्लाम की स्थापना करना है. हम कितना भी भाईचारा और शांति के मंत्र जपें हमें मार दिया जाएगा क्योंकि उनकी आसमानी पुस्तक के अनुसार अगर आपके माता-पिता भी इस्लाम को नहीं मानते तो वो भी आपके शत्रु हैं. इसलिए अम्बेदकर ने कहा था कि इस्लाम एक बंद निकाय है और उसके लिए राष्ट्र और राष्ट्रभक्ति का कोई मतलब नहीं है बल्कि उसके लिए सिर्फ उसका मजहब ही मायने रखता है. मैं हिन्दुओं को अवैध हथियार घरों में रखने को नहीं कहता लेकिन वो पारम्परिक हथियार तो रख ही सकते हैं और जितनी चाहे उतनी रख सकते हैं. हिन्दुओं के लिए भागना समाधान नहीं है. हिंदुस्तान उनका एकमात्र और आखिरी ठिकाना है इसलिए भागना नहीं है बल्कि ईट का जवाब पत्थर से देना है, लोहे से देना है. घरों में महाराणा और छत्रपति की तस्वीरें लगाने से काम नहीं चलने वाला बल्कि प्रत्येक हिन्दू को स्वयं महाराणा सांगा और छत्रपति संभाजी बनना होगा तभी हिंदू भी बचेगा और हिंदुत्व भी।
मित्रों, रही बात सरकार और विपक्ष की तो सरकार को जो भी करना चाहिए कर रही है लेकिन विपक्ष को देखकर तो लग ही नहीं रहा कि वो भारत के राजनैतिक दल हैं या पाकिस्तान के। अगर वे भारत के राजनैतिक दल हैं तो वो क्यों पाकिस्तान की भाषा बोल रहे हैं? ईधर हिंदुस्तान के मुसलमान हिंदुओं को मार-काट रहे हैं कभी बंगाल तो कभी महाराष्ट्र कभी कश्मीर और कभी राजधानी दिल्ली में और उधर सोनिया गांधी का दामाद कह रहा है कि हिंदुस्तान में मुसलमान डरे हुए हुए हैं‌‌। फिर तो हलाकू, तैमूर, चंगेजखान, गजनवी, हिटलर, नादिरशाह, औरंगजेब और जनरल डायर भी बहुत डरे हुए थे, बेचारे थे, पीड़ित थे। इतना ही नहीं दिल्ली में अनन्या के बलात्कारी भी बहुत लाचार, असहाय और डरे हुए थे। 
मित्रों, ऐसा क्यों होता है कि जब भी हिंदू मरता है और मारनेवाले मुसलमान होते हैं तब विपक्ष के मुंह में दही जम जाता है। अभी बंगाल और कश्मीर में मुसलमानों ने किसी भी हिंदू से उसकी जाति नहीं पूछी उनको मारने और लूटने के लिए सिर्फ इस बात की तसल्ली की कि वो हिंदू हैं, काफिर हैं इसलिए उनको जीने का अधिकार नहीं है। 
मित्रों, अनंतनाग के जवाब में भारत सरकार ने कल पाकिस्तान के साथ सिंधु जलसंधि को रद्द कर दिया है। यह समझ में नहीं आता कि आखिर यह संधि की क्यों गई थी जबकि पाकिस्तान हमारी हजारों वर्ग किलोमीटर जमीन पर १९४७ से ही कब्जा जमाकर बैठा हुआ है। समझ में तो यह भी नहीं आता कि जबकि पाकिस्तान से ज्यादा मुसलमानों को हिंदुस्तान में ही रखना था तो हिंदुस्तान का बंटवारा हुआ क्यों! समझ में यह भी नहीं आता कि १९७१ में पाकिस्तान से कश्मीर का आधा व बचा हुआ हिस्सा लिया क्यों नहीं गया जबकि पाकिस्तान ने आत्मसमर्पण कर दिया था? समझ में तो बस इतना आता है कि पाकिस्तान ही कांग्रेस थी और कांग्रेस ही पाकिस्तान है अन्यथा सोनिया का दामाद पाकिस्तान की भाषा नहीं बोलता।
मित्रों, रही बात बंगाल और कश्मीर के स्थानीय लोगों की तो बंगाल में तो राष्ट्रपति शासन में चुनाव करवाना होगा और कश्मीर में स्थानीय आतंकवादियों को कड़ा सबक सिखाना होगा। पाकिस्तान के खिलाफ भी यथासंभव कठोरतम कदम उठाने पड़ेंगे ठीक वैसे ही जैसे इजरायल ने हमास के खिलाफ उठाए हैं भले सबसे बड़ा विपक्ष सुप्रीम कोर्ट कितने भी रोड़ा क्यों न अंटकाए।
&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;मैं एक छोटा सा पत्रकार हूँ, स्वभाव से विद्रोही. मैं विश्वामित्र की तरह एक सामानांतर दुनिया तो बनाना नहीं चाहता हूँ फिर भी इस दुनिया में कुछ बदलाव जरूर चाहता हूँ जो सिर्फ बातें बनाने से नहीं होनेवाला, इसके लिए कुछ कदम उठाने पड़ेंगे.&lt;/div&gt;</description><link>http://brajkiduniya.blogspot.com/2025/04/blog-post_24.html</link><author>noreply@blogger.com (ब्रजकिशोर सिंह)</author><thr:total>0</thr:total></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-4719772605751864996.post-3289468194107934774</guid><pubDate>Thu, 10 Apr 2025 04:29:00 +0000</pubDate><atom:updated>2025-04-10T11:20:36.313+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">ट्रंप की गुगली में फंसा चीन</category><title>ट्रंप की गुगली में फंसा चीन </title><description>मित्रों, जबसे डोनाल्ड ट्रंप वैश्विक महाशक्ति संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति बने हैं तभी से पूरे विश्व में हडकंप मचा हुआ है. दरअसल ट्रंप ने अमेरिका के लगातार बढ़ते व्यापार घाटे को कम करने के लिए पूरी दुनिया के देशों के खिलाफ नौ अप्रैल से पारस्परिक कर लगाने का फैसला किया. देखते-देखते पूरी दुनिया में शेयर बाजार में कत्लेआम होने लगा. सबसे ज्यादा नुकसान खुद अमेरिका के निवेशकों को हुआ. जहाँ ट्रंप ने भारत 10 प्रतिशत बेस टैक्स के अतिरिक्त 26 प्रतिशत टैक्स लगाया वहीँ भारत पर 26% का अतिरिक्त टैरिफ होगा. चीन पर 34%, वियतनाम पर 46% और बांग्लादेश पर 37% अतिरिक्त टैरिफ लगाया. इसके अलावा इंडोनेशिया पर 32%, यूरोपीय संघ पर 20% और जापान पर 25% टैरिफ लगाया. इससे टैरिफ के बावजूद भारत का निर्यात ज्यादातर देशों के मुकाबले अमेरिका में सस्ता रहेगा, क्योंकि एक तो मुकाबले वाले देशों से भारत के सामानों पर कम टैक्स लगेगा और दूसरा जिन देशों के सामानों पर भारत से कम टैरिफ लिया जा रहा है उनकी तुलना में भारत के सामान सस्ते होते है.
मित्रों, जहाँ भारत ने इस पर वार्ता का रास्ता अपनाया वहीँ चीन ने ताव खाकर बदले में अमेरिकी सामानों पर 84 प्रतिशत का टैक्स लगा दिया. इस बीच चीन से अमेरिका को होनेवाला निर्यात लगभग शून्य हो गया. साउथ चाइना पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन में लिस्टेड एक एक्सपोर्ट कंपनी के कर्मचारी ने कहा कि ट्रंप सरकार के नए टैरिफ के बाद उनकी अमेरिका को होने वाली डेली शिपमेंट 40-50 कंटेनर से गिरकर सिर्फ 3-6 कंटेनर रह गई है. 
मित्रों, इस बीच अचानक यू टर्न लेते हुए ट्रंप ने कल भारत सहित 75 देशों पर लगाए अपने अतिरिक्त टैरिफ को 90 दिन के लिए रोक दिया है. वहीं दूसरी तरफ टैरिफ का जवाब टैरिफ से देने वाले चीन पर पलटवार करते हुए 125 प्रतिशत का भारी टैरिफ लगा दिया. 
मित्रों, शांत दिमाग से काम करो और खुश रहो. लगता है भारत के लिए बड़े-बुजुर्गों की कही यह बात काम आ गई है. अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते के लिए बातचीत शुरू करने की रणनीति और साथ ही अमेरिकी टैरिफ के खिलाफ जवाबी कार्रवाई न करने के अपने संयम, दोनों का फायदा भारत मिलता दिख रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार, 9 अप्रैल को भारत सहित 75 देशों पर लगाए अपने अतिरिक्त टैरिफ को 90 दिन के लिए रोक दिया. उन्हें जुलाई तक केवल 10 प्रतिशत का बेसिक टैरिफ देना होगा. वहीं दूसरी तरफ अमेरिका के टैरिफ का जवाब टैरिफ से देने वाले चीन पर पलटवार करते हुए उसपर 125 प्रतिशत का भारी टैरिफ लगा दिया. सवाल है कि डोनाल्ड ट्रंप ने भारत समेत 75 देशों पर यूटर्न क्यों लिया? ट्रंप का माइंडगेम क्या है? यह पूछे जाने पर कि उन्होंने 75 देशों को टैरिफ से राहत देने का आदेश क्यों दिया है, अमेरिकी राष्ट्रपति ने रिपोर्टरों से कहा: "लोग लाइन से थोड़ा बाहर जा रहे थे. वे चिड़चिड़े हो रहे थे."
मित्रों, दरअसल टैरिफ पर यह रोक सिर्फ दूसरे देशों की जरूरत नहीं थी बल्कि खुद अमेरिका इसके प्रेशर में दबा जा रहा है. जिस तरह से अमेरिका का स्टॉक मार्केट 90 दिन की रोक की घोषणा के बाद 10 प्रतिशत तक उछला है, यह बता रहा कि अमेरिका का मार्केट ट्रंप के टैरिफ नीति का दवाब साफ महसूस कर रहा है. यहां यह भी बात गौर करने वाली है कि ट्रंप ने इन 75 देशों पर अपने टैरिफ को खत्म नहीं किया है बल्कि उसपर केवल रोक लगाई है. यानी उनके पास अगले 90 दिन का वक्त है कि वह इन 75 देशों के साथ कैसे व्यापार करना है, उसपर कोई डील कर सकें. तो दूसरी तरफ ट्रंप और चीन दोनों अब ऐसे चिकन गेम में उलझ गए हैं कि दोनों ही पीछे नहीं हटना चाहते. यह दोनों में से जो पहले पीछे हटेगा, वह हारा हुआ दिखेगा, हारा हुआ माना जाएगा. चीन के पक्ष में सबसे बड़ा फैक्टर यह है कि चीन अमेरिका पर जितना निर्भर है, उससे कहीं अधिक अमेरिका चीनी आयात पर निर्भर है. ऐसे में देखना होगा कि अमेरिका और चीन के बीच का टैरिफ युद्ध कितने दिनों तक चलता है और उसमें जीत किसकी होती है फ़िलहाल तो चीन को ज्यादा नुकसान होता हुआ साफ़ देखा जा सकता है. 
&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;मैं एक छोटा सा पत्रकार हूँ, स्वभाव से विद्रोही. मैं विश्वामित्र की तरह एक सामानांतर दुनिया तो बनाना नहीं चाहता हूँ फिर भी इस दुनिया में कुछ बदलाव जरूर चाहता हूँ जो सिर्फ बातें बनाने से नहीं होनेवाला, इसके लिए कुछ कदम उठाने पड़ेंगे.&lt;/div&gt;</description><link>http://brajkiduniya.blogspot.com/2025/04/blog-post_10.html</link><author>noreply@blogger.com (ब्रजकिशोर सिंह)</author><thr:total>0</thr:total></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-4719772605751864996.post-2701806138953350775</guid><pubDate>Sat, 05 Apr 2025 02:27:00 +0000</pubDate><atom:updated>2025-04-05T10:21:58.674+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">वक्फ बोर्ड में संशोधन का अभिनन्दन</category><title>वक्फ बोर्ड में संशोधन का अभिनन्दन </title><description>मित्रों, बहुप्रतीक्षित वक्फ बोर्ड संशोधन अधिनियम लोकसभा और राज्यसभा दोनों से पारित हो चुका है. अब जैसे-ही भारत की माननीय राष्ट्रपति इस विधेयक पर हस्ताक्षर करेंगी विधेयक कानून बन जाएगा. कितने आश्चर्य की बात है कि पीवी नरसिंह राव और मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्रित्व काल में इतने सारे हिंदुविरोधी क़ानून बनाए गए और हिन्दुओं को पता तक नहीं चला जबकि अभी जब वक्फ बोर्ड कानून में बदलाव किया जा रहा है तब किस तरह मुसलमानों ने आसमान को सर पर उठा रखा है.
मित्रों, मुसलमान कितने जागरूक हैं और हम कितने लापरवाह इस बात का इससे बड़ा उदाहरण हो ही नहीं सकता. क्या कोई संस्था या कानून देश की न्यायपालिका और संविधान से ऊपर हो सकता है? लेकिन वक्फ बोर्ड को भारत की न्यायपालिका और संविधान से ऊपर बना दिया गया. एक बाबरी ढांचा नामक खंडहर के बदले कांग्रेस ने मुसलमानों को पूरा भारत दे दिया. मानों जमीन न हुई बस और ट्रेन की सीट हो गई. जिस पर भी वक्फ बोर्ड ने हाथ डाल दिया वही उसकी हो गई. उसके बाद आप कोर्ट भी नहीं जा सकते बल्कि आपको वक्फ बोर्ड के न्यायाधिकरण में ही जाना होगा. न सिर्फ मुसलमानों की जमीनें बल्कि हिन्दुओं, ईसाईयों सहित अन्य धर्मावलम्बियों के उपासना स्थलों और गांवों को हड़प लिया गया. यहाँ तक कि मात्र एक सूचना देकर सरकारी जमीनों पर भी दावा ठोंक दिया गया और सरकारी अधिकारी मजबूरन मुंह देखते रहे क्योंकि संसद द्वारा कानून बनाकर ऐसे प्रावधान ही कर दिए गए थे.
मित्रों, उससे भी ज्यादा दुर्भाग्यपूर्ण तो यह रहा कि यथास्थिति बनाए रखने को 20 मुस्लिम सांसदों से भी ज्यादा बेचैन 210 कथित धर्मनिरपेक्ष हिन्दू सांसद देखे गए. क्या इन हिन्दू सांसदों को पता नहीं है कि धार्मिक आधार पर 1947 में हिंसा के बल पर बनवाए गए पाकिस्तान और बांग्लादेश में हिन्दुओं के साथ क्या-क्या हो रहा है और कैसे इन देशों में हिन्दुओं को विलुप्ति के कगार पर पहुंचा दिया गया? सबकुछ जानते हुए ये लोग कैसे भारत में जिहादी ताकतों को मजबूत करने में लगे हैं? हद तो यह है वही लोग हिन्दू धर्म और राष्ट्र की रक्षा में अपने रक्त की एक-एक बूँद न्योछावर कर देनेवाले अनमोल वीरों को उल्टे गद्दार साबित करने में लगे हैं. कोई भय नहीं कि हिन्दू नाराज हो जाएँगे! भय हो भी कैसे जबकि हिन्दू खुद बंटे हुए हैं, जाति में, पांति में. यहाँ तक कि हिन्दू परिवारों तक में एकता नहीं है. पति-पत्नी, भाई-भाई में विवाद बढ़ते ही जा रहे हैं फिर कोई उनसे क्यों डरे? 
मित्रों, इतना ही नहीं हिन्दू धर्म का संगठन भी काफी असंगठित है. चारों शंकराचार्यों तक में मतैक्य नहीं है. वक्फ बोर्ड में संशोधन से तो सिर्फ लैंड जिहाद रूकेगा अन्य जिहादों में सबसे खतरनाक जनसँख्या जिहाद कैसे रूकेगा? जो धर्माचार्य सोने के सिंहासनों पर बैठकर हिन्दुओं से ज्यादा बच्चे पैदा करने का आह्वान करते रहते हैं क्या वो उन बच्चों का खर्च उठाएंगे?&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;मैं एक छोटा सा पत्रकार हूँ, स्वभाव से विद्रोही. मैं विश्वामित्र की तरह एक सामानांतर दुनिया तो बनाना नहीं चाहता हूँ फिर भी इस दुनिया में कुछ बदलाव जरूर चाहता हूँ जो सिर्फ बातें बनाने से नहीं होनेवाला, इसके लिए कुछ कदम उठाने पड़ेंगे.&lt;/div&gt;</description><link>http://brajkiduniya.blogspot.com/2025/04/blog-post.html</link><author>noreply@blogger.com (ब्रजकिशोर सिंह)</author><thr:total>0</thr:total></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-4719772605751864996.post-5814968433327376699</guid><pubDate>Fri, 28 Mar 2025 07:14:00 +0000</pubDate><atom:updated>2025-03-28T12:44:38.617+05:30</atom:updated><title>ईश्वर जजों का सर्वनाश करे</title><description>अब नहीं डरेंगे.. लिखेंगे ✊✊

मेरी कलम चलेगी.. ✍️

चला दो मुझपर अवमानना का केस, भगतसिंह डरे होते फांसी के फंदे से तो क्या आजादी मिल पाती.?? 

कलंकित होने के बाद भी....

न्यायपालिका के जज नहीं सुधर सकते -

ईश्वर सभी जजों का सर्वनाश करें - जजों की वजह से बलात्कार हो रहे हैं और वो जज ही दंगों के लिए दोषी हैं..!! 

जस्टिस यशवंत वर्मा के घपले ने न्यायपालिका और उसमे बैठे जजों के मुख पर कालिख पोत दी,

न्यायपालिका को ऐसा हमाम साबित कर दिया जिसमें सब नंगे हैं....

पूरा लेख कमेंट में है, जरुर पढ़िए..
अब किसी पर विश्वास नहीं किया जा सकता..

-कलंकित होने के बाद भी जज अपने में कुछ सुधार लाने को तैयार नहीं लग रहे और इसलिए मैं तो ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि ऐसे सभी जजों का सर्वनाश करें। 

वर्तमान न्यायपालिका का पुनर्निर्माण करने की जरूरत है और वह तब ही हो सकता है जब इस व्यवस्था को ख़त्म कर दिया जाए...

यानी नई सृष्टि का निर्माण करने के लिए

वर्तमान सृष्टि को मिटाना जरूरी है।
इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस राम मनोहर मिश्रा ने 19 मार्च, 2025 के फैसले में कहा था कि-

“स्तनों को दबाना और लड़की के कपड़े उतारने की कोशिश करने से रेप की कोशिश साबित नहीं होती - ऐसा करना रेप की तैयारी करना है, रेप करना नहीं है।”

मैंने अपने 20 मार्च के लेख में लिखा था “यानी जज साहब चाहते हैं कि रेप होना ही चाहिए था”

परसों जस्टिस मिश्रा के फैसले के खिलाफ किसी वकील ने सुप्रीम कोर्ट में PIL दायर की थी जिस पर सुनवाई जस्टिस बेला त्रिवेदी और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की...
वकील ने अपनी दलील शुरू करते हुए “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” का जब जिक्र किया तो जस्टिस बेला त्रिवेदी ने कहा कि वकील की तरफ से कोर्ट में कोई “lecture baji” नहीं होनी चाहिए और यह कह कर याचिका को खारिज कर दिया। 

ये वही बेला त्रिवेदी हैं जिन्होंने मध्यप्रदेश की एक 4 साल की बच्ची के बलात्कारी और हत्यारे की फांसी की सजा उम्रकैद में बदलते हुए कहा था कि Every Sinner Has A Future...

इसका मतलब था उन्हें बच्ची के जीवन से कोई मतलब नहीं था और परसों याचिका को खारिज करने का भी मतलब यही निकलता है कि वह भी जस्टिस मिश्रा की तरह बच्चियों के रेप को सही मानती हैं।
और यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि न्यायपालिका में बैठे “कथित न्यायाधीश” ही बलात्कार के लिए जिम्मेदार हैं।

ऐसे बेशर्मों को ऊपर वाले से कुछ तो डरना चाहिए और इसलिए मैं कहता हूं ऐसे जजों का ईश्वर सर्वनाश करें... 

परसों ही बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच के जस्टिस नितिन साम्ब्रे और जस्टिस वृषाली जोशी की पीठ ने नागपुर हिंसा के मुख्य आरोपी फहीम खान के घर पर बुलडोज़र चला कर गिराने को स्टे कर दिया...

लेकिन यह आदेश होने तक उसका घर गिर चुका था, फिर भी बेंच ने दूसरे अन्य मुख्य आरोपी युसूफ शेख के घर के अवैध हिस्से को गिराने के काम पर रोक लगा दी।
ये बेशर्म जज, मतलब दंगाइयों के साथ खड़े हो गए? उनके घर की रक्षा कर रहे हो कानूनी दावपेच से तो उन्होंने जो लोगों के घरों को और सरकार एवं निजी संपत्तियों को आग लगाई वह किस अधिकार से लगाई? 

पहले भी दंगाइयों को कई हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट बचाते रहे हैं.. और इसलिए यह कहना गलत नहीं होगा कि न्यायपालिका में बैठे जज ही दंगों के लिए जिम्मेदार हैं। 

मतलब ये जज ही बलात्कार को बढ़ावा दे रहे हैं और दंगे भी करा रहे हैं। नागपुर बेंच के जजों को चाहिए कि जितने भी दंगाई पुलिस ने पकड़े हैं, उन सभी को छोड़ दें।
पूरी न्यायपालिका का मुंह काला हुआ है लेकिन लगता है इन लोगों को काला मुंह बहुत पसंद है...

दंगाइयों और बलात्कारियों को संरक्षण देने से पहले ऐसे जजों को जवाब देना चाहिए कि बलात्कारी और दंगाई किस मौलिक अधिकार से ऐसा कुकर्म करते हैं?

आपने जाकर “दंगो” को स्टे क्यों नहीं किया?? 

“आदमी को चाहिए वक्त से डर कर रहे, कौन जाने किस घड़ी वक्त का बदले मिज़ाज” जब राम की लाठी पड़ती है तो आवाज़ नहीं होती, यह याद रहे..!!-साभार पंडित नेतन्याहू मिश्रा के एक्स ट्विट से&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;मैं एक छोटा सा पत्रकार हूँ, स्वभाव से विद्रोही. मैं विश्वामित्र की तरह एक सामानांतर दुनिया तो बनाना नहीं चाहता हूँ फिर भी इस दुनिया में कुछ बदलाव जरूर चाहता हूँ जो सिर्फ बातें बनाने से नहीं होनेवाला, इसके लिए कुछ कदम उठाने पड़ेंगे.&lt;/div&gt;</description><link>http://brajkiduniya.blogspot.com/2025/03/blog-post_28.html</link><author>noreply@blogger.com (ब्रजकिशोर सिंह)</author><thr:total>0</thr:total></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-4719772605751864996.post-5037324042598420559</guid><pubDate>Wed, 19 Mar 2025 13:16:00 +0000</pubDate><atom:updated>2025-03-19T18:46:44.018+05:30</atom:updated><title>भारत बना क्रिकेट जगत का चैम्पियन </title><description>भारत बना चैंपियंस चैंपियन
9 मार्च, 2025 की देर शाम जैसे ही विश्व के सर्वश्रेष्ठ आलराउंडर रवीन्द्र जडेजा ने दुबई अंतर्राष्ट्रीय स्टेडियम में प्रतिष्ठित चैम्पियंस ट्राफी के फाइनल में विजयी चौका लगाया पूरा भारत ख़ुशी से झूम उठा और होली से पहले दिवाली मानाने लगा. ये जीत इसलिए तो विशेष थी ही कि भारत ने इसे 12 साल बाद जीता बल्कि इसलिए भी विशेष थी क्योंकि इस पूरे टूर्नामेंट में एकमात्र भारत ही ऐसी टीम थी जो अपराजेय रही. उससे भी बड़ी बात तो यह रही कि भारत ने किसी भी आईसीसी टूर्नामेंट के फाइनल में पहली बार न्यूजीलैंड को हराया. अपनी पूरी विजयी यात्रा में भारत ने २० फरवरी को बांग्लादेश को 21 गेंद शेष रहते 6 विकेट से, पाकिस्तान को 23 फरवरी को 45 गेंद शेष रहते 6 विकेट से और 2 मार्च को न्यूजीलैंड को मात्र 45.3 ओवरों में आल आउट कर ४४ रनों से हराया. 
भारत की इस बेमिशाल जीत में कप्तान रोहित शर्मा का योगदान तो अप्रतिम रहा ही साथ ही प्रत्येक मैच में कोई न कोई खिलाडी भारत के लिए संकटमोचक बनकर आता रहा और मंझधार में फंसी पारी को पार लगाता रहा. जहाँ भारत के टॉस हारने के बाद बांग्लादेश के खिलाफ मोहम्मद शमी ने घातक गेंदबाजी करते हुए 10 ओवरों में 53 रन देकर 5 विकेट और हर्षित राणा ने 7.4 ओवरों में 31 रन देकर 3 बहुमूल्य विकेट प्राप्त किए वहीँ 229 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए शुभमन गिल ने 101, कप्तान रोहित शर्मा ने 41 और केएल राहुल ने 41 रन बनाकर जीत को आसान कर दिया. पाकिस्तान के खिलाफ महा मुकाबले में एक बार फिर भारत टॉस हारा लेकिन इसका टीम के मनोबल और प्रदर्शन पर कोई असर नहीं पड़ा. कुलदीप यादव के 3, हार्दिक पांड्या के 2 और हर्षित राणा के 1 विकेट की मदद से भारत ने पाकिस्तान को 49.4 ओवरों में 241 रनों पर समेट दिया. बाद में 242 रनों के लक्ष्य को भारत ने विराट कोहली के 100, श्रेयस अय्यर के 56 और शुभमन गिल के 46 रनों की शानदार पारी की बदौलत मात्र 42.3 ओवरों में प्राप्त कर लिया. 2 मार्च को हुए मुकाबले में न्यूजीलैंड ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया. भारत ने श्रेयस अय्यर के 79, हार्दिक पांड्या के 45  और अक्षर पटेल के बहुमूल्य 42 रनों की सहायता से 9 विकेट पर 249 रन बनाए. जवाब में न्यूजीलैंड की पारी मात्र 45.3 ओवरों में 205 रनों पर सिमट गई. भारत की तरफ से वरुण चक्रवर्ती ने घातक गेंदबाजी करते हुए 5, कुलदीप यादव ने 2 और हार्दिक पांड्या ने 1 विकेट लिए. 

इस तरह अपराजेय और अपने ग्रुप में टॉप पर रहते हुए भारत ने शानदार तरीके से उच्च मनोबल के साथ सेमीफाइनल तक का रास्ता तय किया. 2 मार्च वाले मैच में भारत अगर न्यूजीलैंड से हार जाता तो उसकी सेमीफाइनल में अपेक्षाकृत कमजोर टीम मानी जानेवाली द. अफ्रीका से टक्कर होती लेकिन भारत ने जानबूझकर हारने के बजाए मैच को जीतना तय किया और इस प्रकार सेमीफाइनल में उसकी टक्कर ऑस्ट्रेलिया से हुई. रोहित शर्मा एक बार फिर टॉस हार गए और ऑस्ट्रेलिया ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 49.3 ओवरों में 264 रनों का चुनौतीपूर्ण स्कोर बनाया. भारत की तरफ से मोहम्मद शमी ने 3, रविन्द्र जडेजा ने 2 और वरुण चक्रवर्ती ने 2 विकेट लेकर मजबूत मानी जानेवाली ऑस्ट्रेलिया को आल आउट करके भारत को मनोवैज्ञानिक बढ़त दिलाई. जवाब में भारत ने जीत के लक्ष्य को मात्र 48.1 ओवर में 6 विकेट गंवाकर आसानी से प्राप्त कर लिया. भारत की तरफ से विराट कोहली 84, श्रेयस अय्यर 45 और केएल राहुल 42 टॉप स्कोरर रहे. 

इस प्रकार भारत की 9 मार्च को फाइनल में टक्कर होनी तय हुई न्यूजीलैंड से जो दूसरे सेमीफाइनल में द. अफ्रीका को हराकर फाइनल में पहुंचा था. फाइनल में भी एक बार फिर से भारत के कप्तान रोहित शर्मा टॉस हार गए लेकिन जियाले कब भाग्य के भरोसे रहा करते हैं उनको तो भरोसा होता है अपने प्रदर्शन और हौसले पर. ग्रुप मैच की हार से भयभीत न्यूजीलैंड ने इस बार बल्लेबाजी करने का फैसला किया और 50 ओवरों में 7 विकेट खोकर 251 रन बनाए जिसको क्रिकेट विशेषज्ञ चुनौतीपूर्ण बता रहे थे. भारत की तरफ से एक बार फिर से स्पिनरों का दबदबा रहा. कुलदीप यादव ने 2, रविन्द्र जडेजा ने 1 और वरुण चक्रवर्ती ने 1 विकेट लेकर न्यूजीलैंड की बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी. जवाब में भारत ने तेज शुरुआत की. रोहित शर्मा ने कई आकर्षक शॉट लगाकर शमा बाँध दिया. रोहित शर्मा ने 76, श्रेयस अय्यर ने 48 और केएल राहुल ने नाबाद रहते हुए महत्वपूर्ण 34 रन बनाए और भारत ने एक ओवर शेष रहते हुए चैम्पियंस ट्राफी अपने नाम कर लिया. मैच और ट्राफी भले भारत ने जीता हो लेकिन अपने जवाब से न्यूजीलैंड के कप्तान मिचेल सेंटनर ने यह कहकर कि वे एक बेहतर टीम से हारे हैं दुनिया भर में फैले क्रिकेट प्रशंसकों का दिल जीत लिया। कुछ लोगों ने यह कहकर कि दुबई की पिच स्पिनरों के अनुकूल थी भारत की अश्वमेधी जीत को कम करके आंकने की नापाक कोशिश भी की लेकिन सवाल उठता है कि पिच तो सबके लिए एक ही थी। साथ ही ऐसा कब हुआ कि कोई टीम एक बार भी टास न जीत पाए फिर भी पूरे टूर्नामेंट में अपराजेय रहे?
 
जहाँ भारत के लिए चैम्पियंस ट्राफी खुशियों का पैगाम लेकर आया वहीँ पाकिस्तान के लिए यह शर्म का विषय बन गया और पाकिस्तान पहले 5 दिनों में ही बगैर कोई मैच जीते टूर्नामेंट से बाहर हो हुआ ही साथ ही अंतिम क्षणों में उससे फाइनल की मेजबानी भी छिन गई. कहते हैं कि इस टूर्नामेंट की मेजबानी के चक्कर में कंगाल पाकिस्तान को 870 करोड़ रूपये का घाटा हुआ. चौथी बार चैम्पियंस ट्राफी अपने नाम कर भारत इसे सबसे ज्यादा चार बार जीतनेवाला देश बन गया है साथ ही रोहित शर्मा ने तीन आईसीसी टूर्नामेंट जीतकर महेंद्र सिंह धोनी की बराबरी कर ली है. आशा है भारत की टीम आगे भी न सिर्फ सीमित ओवर के खेल में बल्कि टेस्ट मैचों में भी अविस्मरणीय प्रदर्शन करके भारतीय प्रशंसकों को होली से पहले होली और दिवाली से पहले दिवाली मनाने के अवसर देती रहेगी. 

&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;मैं एक छोटा सा पत्रकार हूँ, स्वभाव से विद्रोही. मैं विश्वामित्र की तरह एक सामानांतर दुनिया तो बनाना नहीं चाहता हूँ फिर भी इस दुनिया में कुछ बदलाव जरूर चाहता हूँ जो सिर्फ बातें बनाने से नहीं होनेवाला, इसके लिए कुछ कदम उठाने पड़ेंगे.&lt;/div&gt;</description><link>http://brajkiduniya.blogspot.com/2025/03/blog-post.html</link><author>noreply@blogger.com (ब्रजकिशोर सिंह)</author><thr:total>0</thr:total></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-4719772605751864996.post-7376080883701218801</guid><pubDate>Mon, 10 Feb 2025 07:19:00 +0000</pubDate><atom:updated>2025-02-10T12:49:23.639+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">कौन बनेगा दिल्ली का सुल्तान?</category><title>कौन बनेगा दिल्ली का सुल्तान?</title><description>मित्रों, दिल्ली यानि भारत का दिल, भारत की राजधानी.दिल्ली वही दिल्ली जो कई बार बसी और उजड़ी. वही दिल्ली जिसको कई बार तैमूर, गोरी, अब्दाली, बाबर, नादिरशाह और इंदिरा गांधी ने ईन्सानों और इंसानियत के खून से नहलाया.  वही दिल्ली जिसने दारा शिकोह को हाथी पर उल्टा बैठा, पराजित और अपमानित देखा. दिल्ली जिसने कई राजाओं का राज्याभिषेक भी देखा और कई राजाओं को तख़्त से उतरते भी देखा. वही दिल्ली जिसके बारे में कवि रामावतार त्यागी ने कहा है कि

मैं दिल्ली हूँ मैंने कितनी, रंगीन बहारें देखी हैं।

अपने आँगन में सपनों की, हर ओर कितारें देखीं हैं॥

मैंने बलशाली राजाओं के, ताज उतरते देखे हैं।

मैंने जीवन की गलियों से तूफ़ान गुज़रते देखे हैं॥

देखा है; कितनी बार जनम के, हाथों मरघट हार गया।

देखा है; कितनी बार पसीना, मानव का बेकार गया॥

मैंने उठते-गिरते देखीं, सोने-चाँदी की मीनारें।

मैंने हँसते-रोते देखीं, महलों की ऊँची दीवारें॥

वही दिल्ली जिसके ऊपर व्यंग्य करते हुए महाकवि नागार्जुन ने आपातकाल के समय कहा था कि

लूटपाट के काले धन की करती है रखवाली, 
पता नहीं दिल्ली की देवी गोरी है या काली।

उसी दिल्ली में इन दिनों विधानसभा चुनावों की जबरदस्त सरगर्मी है और इतनी ज्यादा सरगर्मी है कि लगता ही नहीं चुनाव सिर्फ कुछ सौ वर्ग किलोमीटर में सिमटे दिल्ली के लिए मुखिया चुनने के लिए हो रहा है बल्कि लगता है जैसे चुनाव पूरे भारत के लिए प्रधान चुनने के लिए होने जा रहा है. बिगुल फूंका जा चुका है और राजनैतिक महारथियों की ओर से तीरों पर तीर चलने लगे हैं.
पिछले चार चुनावों की तरह इस बार भी यहाँ मुख्यतया तीन पार्टियाँ चुनाव मैदान में हैं. इस बार भी पिछले १२ सालों से दिल्ली पर राज कर रही अरविन्द केजरीवाल की आम आदमी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच सीधा मुकाबला है वहीँ इसे त्रिकोणात्मक बनाने की कोशिश कांग्रेस पार्टी कर रही है जिसका पिछले दो विधानसभा चुनावों में खाता तक नहीं खुला. 

मित्रों, अगर हम बात करें आम आदमी पार्टी की तो वह इस बार भी इस चुनाव को प्रदेश के बजाए देश का चुनाव बना डालने की जी-तोड़ कोशिश कर रही है. उसके मुखिया अरविन्द केजरीवाल दावा कर रहे हैं कि वो दिल्ली में अपनी पार्टी बचाने की नहीं देश बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं. 

दूसरी तरफ उनके खिलाफ चुनाव लड़ रहे कांग्रस उम्मीदवार संदीप दीक्षित उनके इस दावे पर सवाल उठाते हुए तल्खी से कहते हैं "जब केजरीवाल अन्ना के साथ लोकपाल के नाम पर देश को बेवकूफ बना रहे थे, तो देश बचा रहे थे? जब 34 करोड़ के अय्याश महल में गुलछर्रे उड़ा रहे थे, तो देश बचा रहे थे? जब 7 लाख के स्कूल कमरे 24 लाख में बनवा रहे थे, तो देश बचा रहे थे? जब विज्ञापनों पर हजारों करोड़ उड़ा रहे थे, तो देश बचा रहे थे? जब शराब की दलाली करके 2000 करोड़ डकार रहे थे, तो देश बचा रहे थे? जब कोविड के दौरान लोग ऑक्सीजन और बेड के लिए तड़प रहे थे, तो देश बचा रहे थे? जब पराली जलाने का ठीकरा किसानों पर फोड़ रहे थे, तो देश बचा रहे थे? जब यमुना को साफ करने का झूठा वादा कर रहे थे, तो देश बचा रहे थे? जब कांग्रेस और शीला दीक्षित के किए गए हर काम को बिना शर्म अपने नाम पर बता रहे थे, तो देश बचा रहे थे? जब झूठे एफिडेविट से जनता के साथ धोखाधड़ी कर रहे थे, तो देश बचा रहे थे? जब हर राज्य चुनाव में कांग्रेस के वोट काटकर बीजेपी को जिता रहे थे, तो देश बचा रहे थे? जब शीला जी के बारे में बेशर्मी से 1000 झूठ फैला रहे थे, तो देश बचा रहे थे? जब सोनिया गांधी को जेल भेजने की धमकी दे रहे थे, तो देश बचा रहे थे? इतनी बड़ी लिस्ट है कि लोग थक जाएं पढ़ते-पढ़ते।" उन्होंने कहा कि केजरीवाल देश नहीं बचा रहे बल्कि देश को केजरीवाल से बचाने की जरुरत है।

मित्रों, इस चुनाव में जो बात सबसे ज्यादा केजरीवाल के खिलाफ जा रही है वो है सरकार की विफलताएं और उनसे उत्पन्न जनता की नाराजगी.  दिल्ली की जनता उनसे इसलिए नाराज है क्योंकि जब 1761 के बाद पहली बार दिल्ली में हिंदुओं का नरसंहार हुआ तब नरसंहार करनेवालों के सरगना ताहिर हुसैन केजरीवाल के स्नेहिल थे. दिल्ली की जनता उनसे इसलिए नाराज है क्योंकि अरविन्द केजरीवाल को १२ सालों में सिर्फ मौलाना याद थे अब जाकर पंडित और ग्रंथी याद आ रहे हैं. मोहल्ला क्लिनिक गायब-से हो गए हैं, १५ लाख सीसीटीवी लापता है.  हर चुनाव में केजरीवाल ने एक ही वादे किए कि यमुना साफ करेंगे, सड़कें चकाचक करेंगे, नालियां बनवाएंगे, दिल्ली को झीलों का शहर बनाएंगे लेकिन किया यही कि किया कुछ भी नहीं. पहले केजरीवाल एमसीडी पर काम नहीं करने देने के आरोप लगाते थे लेकिन अब एमसीडी पर भी उनका ही कब्ज़ा है और दिल्ली के हालात इतने ख़राब हैं कि न तो नलों से साफ़ पानी आ रहा है, न तो सड़कें दुरुस्त हैं और हवा तो इतनी प्रदूषित है कि आप खुले में साँस तक नहीं ले सकते. केजरीवाल का दावा है कि अगर दिल्ली पुलिस उनके हाथों में होती तो दिल्ली चैन से सोती लेकिन पंजाब में जहां उनकी सरकार है और उनकी पुलिस है वहां पुलिस चौकियां तक सुरक्षित नहीं हैं। केजरीवाल पहले भ्रष्टाचार मिटाने की बात करते थे अब तिहाड़ जेल से सरकार चलाकर शर्मनाक उदहारण पेश कर चुके हैं। उस पर उनकी सहयोगी दिल्ली की सिंघम स्वाति मालीवाल ने अलग उनके खिलाफ मोर्चा खोल रखा है।

मित्रों, दिल्ली चुनावों में केजरीवाल के सामने सबसे मजबूती से जो दल इस बार भी खड़ा है पूरे भारत में विजय पताका फहरा चुकी भारतीय जनता पार्टी जिसकी आँखों में दिल्ली उसी तरह चुभ रही है जैसे कभी सम्राट अशोक की आँखों में कलिंग चुभता था. पार्टी ने इस बार दिल्ली में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. प्रधानमंत्री मोदी कई जनसभाएं कर चुके हैं और आप सरकार को आपदा का नाम दे चुके हैं. भाजपा का उत्साह हरियाणा और महाराष्ट्र की जीत के बात सातवें आसमान पर है. भाजपा की तरफ से मोदीजी के अलावा  परवेश वर्मा, रमेश विधूड़ी, अमित शाह, राजनाथ सिंह, वीरेंद्र सचदेवा‌, विजेंद्र गुप्ता, मनोज तिवारी, जेपी नड्डा,   कपिल मिश्रा जैसे दिग्गज दिन-रात दिन-रात एक किए हुए हैं. साथ ही उत्तर प्रदेश के फायर ब्रांड मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी अपने बटेंगे तो कटेंगे के नारे के साथ प्रचार में जुटे हूए हैं। केजरीवाल ने उत्तर प्रदेश और बिहार मूल के मतदाताओं के खिलाफ बयान देकर येन चुनावों के समय भारतीय जनता पार्टी को बैठे-बिठाए बहुत बड़ा भावनात्मक मुद्दा दे दिया है. भाजपा जानती है कि यह चुनाव केजरीवाल के लिए जीवन और मरण का चुनाव है और अगर भाजपा ने दिल्ली जीत लिया तो कमजोर विपक्ष और भी कमजोर हो जाएगा जो इनदिनों एक बार फिर से विभाजित दिखाई दे रही है. 

मित्रों, रही बात कांग्रेस की तो कदाचित राजनीति को उत्सव माननेवाले राहुल गाँधी अब जाकर चुनाव में उतरे हैं. परवेश वर्मा के अनुसार "जब बीजेपी और आम आदमी पार्टी आधा पेपर लिख चुकी तब राहुल गांधी एग्जामिनेशन हॉल में घुसे हैं."

जाहिर है कांग्रेस चुनाव लड़ नहीं रही है सिर्फ लडती हुई दिखाई दे रही है वो भी इसलिए क्योंकि इंडी गठबंधन में कांग्रेस पर अच्छा प्रदर्शन करने के लिए दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है और कहीं-न-कहीं एक बार फिर से तीसरा मोर्चा आकार लेने लगा है जो भविष्य में भाजपा के लिए फायदेमंद और कांग्रेस के लिए प्राणघातक साबित होगा. ईधर मैदान में कांग्रेस देर से तो आई ही है साथ ही राहुल गांधी ने इंडियन स्टेट से लड़ने की बात करके एक नये विवाद को जन्म दे दिया है जिसकी गूंज भविष्य में दूर तक जानेवाली है।

मित्रों, ऐसे में दिल्ली की जनता इस बार किस पार्टी के गले में जयमाला डालेगी इसका पता ८ फरवरी को चलेगा. उसी दिन पता चलेगा कि केजरीवाल की काठ की हांडी चौथी बार भी आग पर चढ़ती है या भी जलकर राख हो जाती है. उसी दिन पता चलेगा कि इस बार भी कांग्रेस का खाता खुलता है या नहीं और उसी दिन पता चलेगा कि दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी का विगत २७ सालों से चल रहा वनवास समाप्त होता है या नहीं.  
नोट-इस आलेख को मैंने १६ जनवरी को ही लिखा था लेकिन कुछ अपरिहार्य कारणों से इसे अब प्रकाशित करने जा रहा हूँ. कैसा लिखा था आपकी राय का इंतजार रहेगा.
&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;मैं एक छोटा सा पत्रकार हूँ, स्वभाव से विद्रोही. मैं विश्वामित्र की तरह एक सामानांतर दुनिया तो बनाना नहीं चाहता हूँ फिर भी इस दुनिया में कुछ बदलाव जरूर चाहता हूँ जो सिर्फ बातें बनाने से नहीं होनेवाला, इसके लिए कुछ कदम उठाने पड़ेंगे.&lt;/div&gt;</description><link>http://brajkiduniya.blogspot.com/2025/02/blog-post.html</link><author>noreply@blogger.com (ब्रजकिशोर सिंह)</author><thr:total>0</thr:total></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-4719772605751864996.post-5367294306488859394</guid><pubDate>Fri, 27 Dec 2024 12:52:00 +0000</pubDate><atom:updated>2024-12-27T20:54:10.118+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">मनमोहन सिंह को श्रद्धांजलि</category><title>मनमोहन सिंह को श्रद्धांजलि </title><description>&lt;div class="separator" style="clear: both;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhOmembMf6l2PYxMkQK6L9NiL8FC60hgyuVHRRY__ZXOTMrRCTrOY4FtCV42Yak85fJrWZ7LZuUUP1BbPG5QsXO6sDDgwlk2j6OFvpe4CdyfZkU7iCVvpzB4lDWjozXWztjFeqsL60Qw4jUhDWXky-mVc5DegxaXFy0GigbaJU8lwas4BJYvBwVCgOdJVA/s540/%E0%A4%AE%E0%A4%A8%E0%A4%AE%E0%A5%8B%E0%A4%B9%E0%A4%A8%20%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9.webp" style="display: block; padding: 1em 0; text-align: center; "&gt;&lt;img alt="" border="0" width="320" data-original-height="394" data-original-width="540" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhOmembMf6l2PYxMkQK6L9NiL8FC60hgyuVHRRY__ZXOTMrRCTrOY4FtCV42Yak85fJrWZ7LZuUUP1BbPG5QsXO6sDDgwlk2j6OFvpe4CdyfZkU7iCVvpzB4lDWjozXWztjFeqsL60Qw4jUhDWXky-mVc5DegxaXFy0GigbaJU8lwas4BJYvBwVCgOdJVA/s320/%E0%A4%AE%E0%A4%A8%E0%A4%AE%E0%A5%8B%E0%A4%B9%E0%A4%A8%20%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9.webp"/&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;
मित्रों, श्रद्धांजलि शब्द दो शब्दों के मिलने से बना है-श्रद्धा और अंजलि. तात्पर्य यह कि श्रद्धांजलि देने के लिए मन में श्रद्धा का होना जरूरी है. जहाँ तक कथित पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का सवाल है तो मेरे मन में उनके प्रति कोई श्रद्धा नहीं है. कुछ लोग कह सकते हैं कि मरे हुए लोगों की आलोचना नहीं करनी चाहिए. तो क्या हम तैमुर, खिलजी, बाबर, हिटलर और औरंगजेब की भी प्रशंसा करें? कम-से-कम हमसे तो ऐसा होने से रहा. हम तो हजारों साल पहले मरे रावण को भी नहीं बख्शते और आज भी हर साल उसका पुतला जलाते हैं. 
मित्रों, हमें बताया-पढ़ाया गया कि वे भारत के प्रधानमंत्री थे. मगर ऐसा था क्या? पहली बात तो यह कि मनमोहन दुर्घटनावश प्रधानमंत्री बने नहीं थे बनाये गये थे. दूसरी बात यह कि मनमोहन की जिम्मेदारी और वफ़ादारी देश के प्रति नहीं थी बल्कि सोनिया परिवार के प्रति थी. इसलिए मनमोहन भारत के नहीं सोनिया परिवार के प्रधानमंत्री थे. मनमोहन नाममात्र के प्रधानमंत्री थे वास्तविक सत्ता सोनिया गांधी एंड फेमिली के हाथों में थी. मनमोहन वास्तव में रिमोट संचालित प्रधानमंत्री थे जिसका रिमोट सोनिया परिवार के हाथों में था. 
मित्रों, मनमोहन देशप्रेमी के बजाए कुर्सी प्रेमी भी थे. चंद्रशेखर जब प्रधानमंत्री पद से हट रहे थे तब मनमोहन ने पैरवी करके यूजीसी के चेयरमैन के पद पर उनके हाथों खुद को नियुक्त करवाया था क्योंकि वो नहीं चाहते थे कि उनसे सरकारी सुविधाएँ छिन जाए. इतना ही नहीं मनमोहन स्टॉकहोम सिंड्रोम से ग्रस्त भी थे. जिन मुसलमानों के कारण भारतमाता के टुकड़े हुए और लाखों हिन्दुओं-सिखों की तरह मनमोहन को भी अपने ही देश में शरणार्थी बनना पड़ा उनको उन्हीं मुसलमानों से आश्चर्यजनक प्रेम था. उन्होंने लाल किले की प्राचीर से कहा था कि भारत के संसाधनों पर पहला अधिकार मुसलमानों का है. क्यों, जबकि मुसलमान पहले ही जबरन अलग मुल्क ले चुके थे?
मित्रों, मनमोहन के कार्यकाल में भ्रष्टाचार ने नये कीर्तिमान प्राप्त किये, नयी ऊंचाइयों को छुआ. खुद भ्रष्टाचार किया भी नहीं मगर भ्रष्टाचार को रोका भी नहीं. उनके कई मंत्रियों के लिए जेल घर बन गए थे. मनमोहन के कार्यकाल में एकतरफ जहाँ आतंकी घटनाएँ रोजाना की बात हो गई थीं वहीँ दूसरी तरफ प्रधानमंत्री मनमोहन आतंकवादियों को अपने आतिथ्य में बुलाकर चाय-नाश्ता करवाते थे.  इतना ही नहीं मनमोहन के कार्यकाल में कई निर्दोष हिन्दुओं को झूठे मुकदमों में फंसाकर फर्जी भगवा आतंकवाद का भूत खड़ा करने की कोशिशें भी की गयी. 
मित्रों, मनमोहन एक ऐसे सरदार थे जो बिल्कुल भी असरदार नहीं थे. जननेता भी नहीं थे हमेशा संसद में पिछले दरवाजे यानि राज्यसभा के माध्यम से आते रहे और लोकसभा चुनाव लड़ने की हिम्मत नहीं जुटा पाये या यूं कहें कि उनकी मालकिन ने कभी उनको इसकी ईजाजत नहीं दी. भारत को दुनिया की फैक्ट्री बनाने के बदले उन्होंने चीनम शरणम गच्छामि का मार्ग चुना और भारत की अर्थव्यवस्था को चीन के हवाले कर दिया. उनके समय भारत-चीन के मध्य तेजी से व्यापार घाटा बढ़ा और भारत एक तरह से चीन का आर्थिक उपनिवेश बन गया. हां, उनका वित्त मंत्री के रूप में कार्यकाल जरूर प्रशंसनीय था. कल उनका पार्थिव शरीर कांग्रेस पार्टी के मुख्यालय में रखा जाएगा जहाँ से उनकी अंतिम यात्रा निकलेगी. लेकिन यह सवाल भी उठता है कि जब कांग्रेस पार्टी के ही नेता रहे पूर्व प्रधानमंत्री पी वी नरसिंह राव की मृत्यु हुई थी तो क्यों उनके पार्थिव शरीर को कांग्रेस पार्टी मुख्यालय में ले जाने से रोक दिया गया था और क्यों उनका अंतिम संस्कार दिल्ली में नहीं होने दिया गया जबकि यह नरसिंह राव ही थे जिन्होंने मनमोहन को मनमोहन बनाया था. हमें यह भी नहीं भूलना चाहिए कि जब नरसिंह राव के मृत शरीर के साथ यह अपमानजनक घटना हुई थी तब मनमोहन ही प्रधानमंत्री थे. रेनकोट पहनकर नहाने वाले गैरराजनैतिक राजनेता मनमोहन सिंह को उनके निधन पर नमन.
&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;मैं एक छोटा सा पत्रकार हूँ, स्वभाव से विद्रोही. मैं विश्वामित्र की तरह एक सामानांतर दुनिया तो बनाना नहीं चाहता हूँ फिर भी इस दुनिया में कुछ बदलाव जरूर चाहता हूँ जो सिर्फ बातें बनाने से नहीं होनेवाला, इसके लिए कुछ कदम उठाने पड़ेंगे.&lt;/div&gt;</description><link>http://brajkiduniya.blogspot.com/2024/12/blog-post_27.html</link><author>noreply@blogger.com (ब्रजकिशोर सिंह)</author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhOmembMf6l2PYxMkQK6L9NiL8FC60hgyuVHRRY__ZXOTMrRCTrOY4FtCV42Yak85fJrWZ7LZuUUP1BbPG5QsXO6sDDgwlk2j6OFvpe4CdyfZkU7iCVvpzB4lDWjozXWztjFeqsL60Qw4jUhDWXky-mVc5DegxaXFy0GigbaJU8lwas4BJYvBwVCgOdJVA/s72-c/%E0%A4%AE%E0%A4%A8%E0%A4%AE%E0%A5%8B%E0%A4%B9%E0%A4%A8%20%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9.webp" width="72"/><thr:total>0</thr:total></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-4719772605751864996.post-8492625431971602617</guid><pubDate>Wed, 11 Dec 2024 02:58:00 +0000</pubDate><atom:updated>2024-12-11T08:42:59.543+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">बांग्लादेश हिन्दुओं के लिए सबक</category><title>बांग्लादेश से हिन्दुओं को लेना होगा सबक </title><description>&lt;div class="separator" style="clear: both;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjwIODMFOaVdgTptt3hzvoSernV-RIZGSggJeb_j7MKyKsp_qX7C5w-nm1HLVkohHK93QWbd60ExUiDpeF5tyaJzeS9NY5aewcem1oBYvtfulH4w6Xhnw0aY5tPXZO6F3ASt3CVzFzB55AVq7FL0E7lblKbTZmzLFlcBMGNK2blsjLFJy7PMlIUg1oabsQ/s909/Screenshot%202024-12-11%20at%2008-27-09%20%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6%20%E0%A4%95%E0%A5%87%20%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%81%E0%A4%93%E0%A4%82%20%E0%A4%95%E0%A5%80%20%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B2%20%E0%A4%95%E0%A5%80%20%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%BE%20%E0%A4%95%E0%A5%87%20%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%8F%20%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%201971%20%E0%A4%9C%E0%A5%88%E0%A4%B8%E0%A4%BE%20%E0%A4%95%E0%A4%A6%E0%A4%AE%20%E0%A4%89%E0%A4%A0%E0%A4%BE%20%E0%A4%B8%E0%A4%95%E0%A4%A4%E0%A4%BE%20%E0%A4%B9%E0%A5%88%20%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4%20-%20can%20India%20take%20steps%20like%201971%20to%20protect%20the%20life%20and%20property%20of%20Hindus%20of%20Bangladesh%20opns2%20-%20AajTak.png" style="display: block; padding: 1em 0; text-align: center; "&gt;&lt;img alt="" border="0" width="320" data-original-height="507" data-original-width="909" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjwIODMFOaVdgTptt3hzvoSernV-RIZGSggJeb_j7MKyKsp_qX7C5w-nm1HLVkohHK93QWbd60ExUiDpeF5tyaJzeS9NY5aewcem1oBYvtfulH4w6Xhnw0aY5tPXZO6F3ASt3CVzFzB55AVq7FL0E7lblKbTZmzLFlcBMGNK2blsjLFJy7PMlIUg1oabsQ/s320/Screenshot%202024-12-11%20at%2008-27-09%20%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6%20%E0%A4%95%E0%A5%87%20%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%81%E0%A4%93%E0%A4%82%20%E0%A4%95%E0%A5%80%20%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B2%20%E0%A4%95%E0%A5%80%20%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%BE%20%E0%A4%95%E0%A5%87%20%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%8F%20%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%201971%20%E0%A4%9C%E0%A5%88%E0%A4%B8%E0%A4%BE%20%E0%A4%95%E0%A4%A6%E0%A4%AE%20%E0%A4%89%E0%A4%A0%E0%A4%BE%20%E0%A4%B8%E0%A4%95%E0%A4%A4%E0%A4%BE%20%E0%A4%B9%E0%A5%88%20%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4%20-%20can%20India%20take%20steps%20like%201971%20to%20protect%20the%20life%20and%20property%20of%20Hindus%20of%20Bangladesh%20opns2%20-%20AajTak.png"/&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;
मित्रों, कई साल पहले एनडीटीवी में एक पत्तलकार हुआ करते थे नाम था रवीश कुमार. श्रीमान भरमाते थे कि अगर भारत में मुसलमान बहुसंख्यक हो भी गए तो क्या होगा? तब भी हमने उनको जवाब देते हुए कहा था कि अगर ऐसा हुआ तो भारत में शरियत का शासन हो जाएगा और पंडित जी आपके साथ-साथ सारे हिन्दुओं को तलवार के बल पर मुसलमान बना दिया जाएगा. हमने यह भी कहा था कि आप तो खुद ही बुद्धिमंद हो देख लो कि पाकिस्तान में हिन्दुओं के साथ क्या हो रहा है और कश्मीर में क्या हो चुका है. 
मित्रों, भारत के बंटवारे से भी कई साल पहले बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर जी ने कांग्रेस और भारत के हिन्दुओं को सावधान करते हुए कहा था कि मुसलमान राष्ट्र और राष्ट्रवाद में विश्वास नहीं करते बल्कि उनके लिए उनका मजहब और मुस्लिम भ्रातृत्व सर्वोपरि है इसलिए अगर धर्म के आधार पर उनको अलग देश दिया जाता है तो भारत और पाकिस्तान के बीच जनसँख्या का सम्पूर्ण हस्तांतरण होना चाहिए अर्थात भारत में एक भी मुसलमान नहीं होना चाहिए. लेकिन कांग्रेस के मूर्ख और हिंदुविरोधी छद्मधर्मनिरपेक्षतावादी नेताओं ने उनकी एक न सुनी जिसका परिणाम यह है कि भारत आज गृहयुद्ध के मुहाने पर आकर खड़ा हो गया है. 
मित्रों, आज जो बांग्लादेश में हो रहा है क्या वह कल के भारत की बानगी नहीं है? कितना आश्चर्यजनक है कि बतौर बांग्ला लेखिका तसलीमा नसरीन "जिस भारत के 17,000 सैनिकों ने बांग्लादेश को उसके दुश्मन पाकिस्तान से बचाने के लिए अपनी जान गंवाई, वह अब दुश्मन माना जाता है. जिस भारत ने एक करोड़ शरणार्थियों को भोजन और कपड़े , रहने के लिए घर दिए, वह अब दुश्मन माना जाता है. जिस भारत ने देश को पाकिस्तानी सेना से बचाने के लिए हथियार और स्वतंत्रता सेनानियों को ट्रेनिंग दी, वह अब दुश्मन माना जाता है." और "जिस पाकिस्तान ने 30 लाख बांग्लादेशियों की हत्या की और 2 लाख महिलाओं का रेप किया, वह अब कथित तौर पर दोस्त है. आतंकवादियों को पैदा करने में नंबर एक पर रहने वाला पाकिस्तान अब कथित तौर पर बांग्लादेश का निकटतम मित्र है. जिस पाकिस्तान ने 1971 के अत्याचारों के लिए बांग्लादेशियों से अभी तक माफी तक नहीं मांगी है, वह अब कथित तौर पर एक मित्र राष्ट्र है." 
मित्रों, कहने का तात्पर्य यह कि दुनियाभर के मुसलमानों के लिए मजहब ही सबकुछ है मित्रता, त्याग, सहायता और अहसान कुछ भी नहीं. जिस देश का जन्म भारत के कारण हुआ उस देश के मुसलमान भी भारत के अहसान को भूल गए और अत्याचारी पाकिस्तान से सिर्फ इसलिए गले मिल रहे हैं क्योंकि वह एक मुस्लिम देश है. बांग्लादेश के मुसलमान तो इस कदर नमकहराम निकले कि वे उस इस्कॉन को समाप्त करने पर तुले हुए हैं जिसने कुछ महीने पहले की बरसात में भयंकर बाढ़ के समय उनके प्राणों की रक्षा की थी. भारत के मुसलमानों का रूख भी कोई अलग नहीं है. अब हिन्दू मुसलमानबहुल ईलाकों में न तो धार्मिक जुलूस निकाल सकता है, न तो मंदिर बनाकर पूजा कर सकता है और न ही शवयात्रा निकाल सकता है. रोजाना कोई-न-कोई मुसलमान हमारे प्रधानमंत्री को भी जान से मारने की धमकी दे रहा है. मुस्लिम ईलाकों में पुलिस और अन्य अधिकारी भी जाने से डरने लगे हैं न जाने कब पत्थरबाजी होने लगे. भारत की राजधानी दिल्ली तक में हिंदूविरोधी दंगे हो चुके हैं  . अभी २० प्रतिशत होने पर ही मुसलमान भारत के कानून और संविधान को नहीं मान रहे.  
मित्रों, तात्पर्य यह कि भारत के मुसलमान आजादी से पहले भी खुद को अलग राष्ट्र मानते थे और आज भी मानते हैं. ऊपर से कांग्रेस पार्टी ने उनको मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड, अनुच्छेद ३१ ए और अल्पसंख्यक आयोग देकर उनके अलगाववाद को भड़काया है. उस पर उनके वक्फ बोर्ड को किसी भी भारतीय संपत्ति पर अधिकार कर लेने के कानूनी अधिकार कांग्रेस पार्टी ने दे रखी है. आज मुसलमानों में जनसँख्या विस्फोट की स्थिति है जबकि हम दो हमारे दो के झांसे में आए हिन्दुओं की जनसँख्यावृद्धि दर शून्य होने की तरफ अग्रसर है. भारत के बंटवारे के समय भारत में मात्र ५ प्रतिशत मुसलमान थे जो आज २० प्रतिशत हो चुके है. जिस दिन उनकी संख्या हिन्दुओं के बराबर हो जाएगी हिन्दुओं को देश छोड़कर जाना होगा लेकिन वे जाएँगे कहाँ? 
मित्रों, तात्पर्य यह कि अब हिन्दुओं के लिए जागने का समय हो चुका है. हिन्दुओं को अपनी  जनसँख्या बढानी होगी और इसके लिए भारत के हिन्दू अरबपतियों और हिन्दू संगठनों को सहायता देने के लिए आगे आना होगा क्योंकि सबका साथ, सबका विकास की मारी सरकार तो जो भी करेगी उसका फायदा मुसलमानों को ही ज्यादा होगा. मुसलमानों के मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड, वक्फ बोर्ड को समाप्त करना होगा और मुसलमानों को सारी विशेष सुविधाओं को समाप्त करते हुए समान नागरिक संहिता लागू करना होगा. &lt;div class="blogger-post-footer"&gt;मैं एक छोटा सा पत्रकार हूँ, स्वभाव से विद्रोही. मैं विश्वामित्र की तरह एक सामानांतर दुनिया तो बनाना नहीं चाहता हूँ फिर भी इस दुनिया में कुछ बदलाव जरूर चाहता हूँ जो सिर्फ बातें बनाने से नहीं होनेवाला, इसके लिए कुछ कदम उठाने पड़ेंगे.&lt;/div&gt;</description><link>http://brajkiduniya.blogspot.com/2024/12/blog-post.html</link><author>noreply@blogger.com (ब्रजकिशोर सिंह)</author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjwIODMFOaVdgTptt3hzvoSernV-RIZGSggJeb_j7MKyKsp_qX7C5w-nm1HLVkohHK93QWbd60ExUiDpeF5tyaJzeS9NY5aewcem1oBYvtfulH4w6Xhnw0aY5tPXZO6F3ASt3CVzFzB55AVq7FL0E7lblKbTZmzLFlcBMGNK2blsjLFJy7PMlIUg1oabsQ/s72-c/Screenshot%202024-12-11%20at%2008-27-09%20%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6%20%E0%A4%95%E0%A5%87%20%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%81%E0%A4%93%E0%A4%82%20%E0%A4%95%E0%A5%80%20%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B2%20%E0%A4%95%E0%A5%80%20%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%BE%20%E0%A4%95%E0%A5%87%20%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%8F%20%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%201971%20%E0%A4%9C%E0%A5%88%E0%A4%B8%E0%A4%BE%20%E0%A4%95%E0%A4%A6%E0%A4%AE%20%E0%A4%89%E0%A4%A0%E0%A4%BE%20%E0%A4%B8%E0%A4%95%E0%A4%A4%E0%A4%BE%20%E0%A4%B9%E0%A5%88%20%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4%20-%20can%20India%20take%20steps%20like%201971%20to%20protect%20the%20life%20and%20property%20of%20Hindus%20of%20Bangladesh%20opns2%20-%20AajTak.png" width="72"/><thr:total>0</thr:total></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-4719772605751864996.post-189382553094695999</guid><pubDate>Thu, 14 Nov 2024 09:38:00 +0000</pubDate><atom:updated>2024-11-14T19:50:30.110+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">नीतीश बाबू का सुशासन मॉडल अद्भुत-मोदी!</category><title>नीतीश बाबू का सुशासन मॉडल अद्भुत-मोदी!</title><description>मित्रों, आज हमने ज्यों ही दैनिक हिंदुस्तान अख़बार का प्रथम पृष्ठ देखा चौंक गया. कल दरभंगा की धरती से भारत के प्रधानमंत्री ने बिहार की नीतीश सरकार के प्रशस्ति गान में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी और यहाँ तक बोल गए कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी का सुशासन मॉडल अद्भुत है. पता नहीं एक समय नीतीश जी के डीएनए पर सवाल उठानेवाले प्रधानमंत्री जी ने ऐसा राजनैतिक मजबूरी में कहा या फिर उनको बिहार की वस्तु-स्थिति के बारे में कुछ पता ही नहीं है. वैसे कारण चाहे पहला हो या दूसरा दोनों ही स्थिति खतरनाक है. 


मित्रों, इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि नीतीश जी के बिहार के मुख्यमंत्री बनने से पहले बिहार में जंगलराज था लेकिन बिहार में जंगलराज तो आज भी है बस उसका स्वरुप बदल गया है. पहले जहाँ रंगबाज जनता को बन्दूक दिखाकर लूट रहे थे नीतीश राज में अधिकारी कलम दिखाकर जनता को लूट रहे हैं. आज की तारीख में ऐसा कोई सरकारी काम नहीं जो बिहार में बिना रिश्वत दिए हो जाता हो. सबसे ख़राब स्थिति पुलिस और राजस्व विभाग की है. पुलिस बिना रिश्वत लिए एफ़आईआर तक दर्ज नहीं करती तो वहीँ राजस्व विभाग बिना पैसे लिए दाखिल ख़ारिज तक नहीं करता. खुद मैंने ४ मौजों में जमीन का दाखिल ख़ारिज करवा कर भ्रष्टाचार को जाना और भोगा है जबकि सम्बंधित अंचलाधिकारी अच्छी तरह से जानते थे कि मैं एक पत्रकार हूँ. फिर भी उन्होंने एक ही तरह के कागजात के आधार पर तीन मौजे की जमीन का दाखिल ख़ारिज तो कर दिया लेकिन एक मौजे का आवेदन इस बेतुके आधार पर रिजेक्ट कर दिया कि कागजात अपठनीय है जबकि कागजात हुबहू वही थे. आखिर तीन मौजे के मामले में वही कागजात पठनीय और एक मौजे के मामले में अपठनीय कैसे हो गए? नहीं समझे तो समझाता हूँ दरअसल बांकी तीन के लिए मैंने पैसे दिए थे जबकि एक के लिए नहीं दिए. 



मित्रों, अब आप कहेंगे कि दोषी मैं भी हूँ रिश्वत देने का. हाँ, मैं दोषी हूँ लेकिन अगर पैसे नहीं देता तो निश्चित रूप से अंचलाधिकारी महोदय बांकी तीन मौजों के आवेदन भी रद्द कर देते. मुझे इस सन्दर्भ में इतिहास से एक उदाहरण याद आ रहा है. कहते हैं कि फिरोजशाह तुगलक (१३५१-८८) के समय में भ्रष्टाचार चरम पर था. सुल्तान का एक नजदीकी जब इसकी शिकायत लेकर सुल्तान के पास पहुंचा तब सुल्तान ने कहा कि कभी-कभी तो उसे खुद रिश्वत देनी पड़ती है. फिर सुल्तान ने उस व्यक्ति को पैसे देते हुए कहा कि जाओ उस अधिकारी को ये पैसे देकर अपना काम करवा लो. 



मित्रों, अभी शुक्रवार 8 नवंबर को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने  कहा कि भ्रष्ट लोगों के खिलाफ तुरंत कानूनी कार्रवाई बहुत ही जरूरी है, क्योंकि देरी से या कमजोर कार्रवाई से ऐसे लोगों को बढ़ावा मिलता है। राष्ट्रपति ने केन्द्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) के सतर्कता जागरूकता सप्ताह समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि विश्वास सामाजिक जीवन का आधार है और भ्रष्टाचार लोकतंत्र में जनता के विश्वास को कमजोर करता है. लेकिन सवाल उठता है कि जब अधिकारी एक पत्रकार को भी अंगूठा दिखा देते हैं तो आम आदमी की क्या बिसात? सवाल यह भी उठता है कि बिहार के अधिकारियों में ऐसा करने की हिम्मत आती कहाँ से है? मैंने फिर नमो ऐप पर शिकायत की वो भी पूरे प्रमाण के साथ. वहां से मेरी शिकायत वैशाली जिला लोक शिकायत में भेज दी गयी और फिर शुरू हुआ तारीखों का खेल. लोक शिकायत पदाधिकारी ने कई महीनों तक कार्यालय में कदम ही नहीं रखे. फिर एक दिन मुझे बताए बिना उस सीओ को बुलाकर स्पष्टीकरण लिखवा लिया गया जिसमें वही सफाई दी गई थी कि कागजात अपठनीय थे. उनसे यह पूछा तक नहीं गया कि जबकि तीन मौजों के लिए कागजात पठनीय थे तो एक मौजा के लिए अपठनीय कैसे हो गए? और फिर मेरे केस को रिजेक्ट कर दिया गया. उसके बाद से जब भी मैंने नमो ऐप पर बिहार सरकार से सम्बंधित कोई भी शिकायत की है तो उसे लोकशिकायतों की कब्रगाह जिला लोक शिकायत में भेज दिया गया है और कर्तव्यों की इतिश्री कर ली गई है. जबकि मामले को सीधे सम्बंधित विभाग में भेजा जाना चाहिए था. अब भारत की माननीया राष्ट्रपति जी बताएंगी कि बिहार की भ्रष्ट्राचारपीड़ित जनता जाए तो कहाँ जाए जबकि प्रधानमंत्री के स्तर तक तो कुछ होता नहीं. अब क्या हम अंतर्राष्ट्रीय न्यायलय, हेग का रूख करें? 



मित्रों, इतना ही नहीं बिहार में अदालत के फैसलों का भी कोई मतलब नहीं है. मान लिया आपने कोई जमीन का मुकदमा जीता और कोर्ट ने आपको दखल कब्ज़ा भी करवा दिया तो इसका मतलब यह नहीं कि आपका उस जमीन कर कब्ज़ा हो ही जाएगा. उधर कोर्ट के अधिकारी कब्ज़ा दिलवाकर वापस गए नहीं कि दबंग फिर से जमीन पर चढ़ जाएंगे और फिर से वही सारे चक्कर. बिहार में नीतीश राज में भी मुगलकालीन कहावत लागू होती है-जमीन जोरू जोर का नहीं तो किसी और का. कहने का तात्पर्य यह कि मोदीजी बुरा मानें या भला बिहार में कोई सुशासन नहीं है बल्कि आज भी बिहार में जंगलराज है. बिहार में पहले अपराधी जनता को लूटते थे अब सिस्टम लूट रहा है मगर पूरी खामोशी से. बिहार में आज भी सरकारी अधिकारी और कर्मचारी काम नहीं करने के ऐवज में सरकार से वेतन लेते हैं और काम करने के बदले जनता से रिश्वत. लालू-राबड़ी राज से अंतर बस इतना है कि आज पटना उच्च न्यायालय नहीं कह रहा कि बिहार में जंगलराज है. मैं मोदी जी और नीतीश कुमार जी से हाथ जोड़कर विनती करना चाहूँगा कि सिर्फ दिखावा नहीं करिए वास्तव में धरातल पर काम होना चाहिए। और वास्तिवकता यह है जब आप बिहार के थाने में अपने मोबाइल के चोरी हो जाने की एफ़आइआर करने जाएंगे तो आपसे लिखवाया जाएगा कि मोबाइल चोरी नहीं हुआ खो गया है. इतना ही नहीं जब आपके किसी परिजन की हत्या हो जाती है और आप लाश लेने पोस्टमार्टम कक्ष में जाते हैं तो क्या मजाल कि बिना हजारों रूपये की रिश्वत लिए आपको अपने प्रियजन का शव दे दिया जाए. फिर न्याय मिलना तो दूर की कौड़ी रही. गुर्दाचोरी की शिकार सुनीता के साथ जो कुछ हुआ किसी से छिपा हुआ नहीं है. गजब तो यह कि कल जब प्रधानमंत्री बिहार में सुशासन होने के अद्भुत दावे कर रहे थे उसी दिन बिहार की राजधानी पटना के एक आश्रय गृह में जहरीला भोजन खाने से छः और १२ वर्ष की दो बच्चियों सहित तीन महिलाओं की मौत हो गई, वहीं 12 महिलाएं गंभीर रूप से बीमार पड़ गईं।



मित्रों, आज से डेढ़ सौ साल पहले भारतेंदु हरिश्चंद्र ने जो तत्कालीन शासन के बारे में कहा था वही बात दुर्भाग्यवश आज के राजनेताओं पर भी अक्षरशः लागू होती है फिर चाहे वो किसी भी पार्टी का कोई भी नेता हो-

भीतर भीतर सब रस चूसै।

हँसि हँसि कै तन मन धन मूसै।

जाहिर बातन मैं अति तेज।

क्यों सखि साजन नहिं अँगरेज।




&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;मैं एक छोटा सा पत्रकार हूँ, स्वभाव से विद्रोही. मैं विश्वामित्र की तरह एक सामानांतर दुनिया तो बनाना नहीं चाहता हूँ फिर भी इस दुनिया में कुछ बदलाव जरूर चाहता हूँ जो सिर्फ बातें बनाने से नहीं होनेवाला, इसके लिए कुछ कदम उठाने पड़ेंगे.&lt;/div&gt;</description><link>http://brajkiduniya.blogspot.com/2024/11/blog-post_14.html</link><author>noreply@blogger.com (ब्रजकिशोर सिंह)</author><thr:total>0</thr:total></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-4719772605751864996.post-1296942252117558930</guid><pubDate>Thu, 07 Nov 2024 08:00:00 +0000</pubDate><atom:updated>2024-11-07T13:45:32.922+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">ट्रम्प की जीत और भारत</category><title>ट्रम्प की जीत और भारत </title><description>&lt;div class="separator" style="clear: both;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgR4G5yLftB7yUuUdeJj-e8x8yBsehhGvUSMccr5tceL3D9Ea2YWd_Od89lsr4EYI5nv9Fgu8im5IoJzDoUPBZMRWw9JoiWa8zg1kNEonSdsG1bxV6FME4X7C17qqPbFX6xV6z_UPK4X2CtBW4aRzw1KnMWCOyRbuYYpx-UgMqL8rdL_00NN0w7WoZfkNk/s548/Screenshot%202024-11-07%20at%2013-44-58%20us%20presidential%20election%20result%202024%20what%20is%20written%20over%20donald%20trump%20red%20cap%2045-47...%20%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%82%E0%A4%AA%20%E0%A4%95%E0%A5%80%20%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%B2%20%E0%A4%9F%E0%A5%8B%E0%A4%AA%E0%A5%80%20%E0%A4%AA%E0%A4%B0%20%E0%A4%86%E0%A4%96%E0%A4%BF%E0%A4%B0%20%E0%A4%90%E0%A4%B8%E0%A4%BE%20%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%20%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%96%E0%A4%BE%20%E0%A4%A5%E0%A4%BE%20%E0%A4%9C%E0%A5%8B%20%E0%A4%B9%E0%A5%8B%20%E0%A4%97%E0%A4%AF%E0%A4%BE%20%E0%A4%B8%E0%A4%9A%20%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%AC%E0%A4%BF%E0%A4%A4.png" style="display: block; padding: 1em 0; text-align: center; "&gt;&lt;img alt="" border="0" width="320" data-original-height="307" data-original-width="548" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgR4G5yLftB7yUuUdeJj-e8x8yBsehhGvUSMccr5tceL3D9Ea2YWd_Od89lsr4EYI5nv9Fgu8im5IoJzDoUPBZMRWw9JoiWa8zg1kNEonSdsG1bxV6FME4X7C17qqPbFX6xV6z_UPK4X2CtBW4aRzw1KnMWCOyRbuYYpx-UgMqL8rdL_00NN0w7WoZfkNk/s320/Screenshot%202024-11-07%20at%2013-44-58%20us%20presidential%20election%20result%202024%20what%20is%20written%20over%20donald%20trump%20red%20cap%2045-47...%20%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%82%E0%A4%AA%20%E0%A4%95%E0%A5%80%20%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%B2%20%E0%A4%9F%E0%A5%8B%E0%A4%AA%E0%A5%80%20%E0%A4%AA%E0%A4%B0%20%E0%A4%86%E0%A4%96%E0%A4%BF%E0%A4%B0%20%E0%A4%90%E0%A4%B8%E0%A4%BE%20%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%20%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%96%E0%A4%BE%20%E0%A4%A5%E0%A4%BE%20%E0%A4%9C%E0%A5%8B%20%E0%A4%B9%E0%A5%8B%20%E0%A4%97%E0%A4%AF%E0%A4%BE%20%E0%A4%B8%E0%A4%9A%20%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%AC%E0%A4%BF%E0%A4%A4.png"/&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;
मित्रों, सारे पूर्वानुमानों को असत्य साबित करते हुए डोनाल्ड ट्रम्प एक बार फिर से अमेरिका के राष्ट्रपति चुने गए हैं और वो भी भारी बहुमत से. पूरी दुनिया के देश इस समय उनकी जीत के दुनिया और अपने-अपने देशों पर पड़नेवाले प्रभावों का विश्लेषण करने में लगे हैं. ऐसा इसलिए भी है क्योंकि ट्रम्प एक बेहद महत्वाकांक्षी, शक्तिशाली और एक ऐसे व्यक्ति हैं जिनके बारे में कोई भी पूर्वानुमान लगाना संभव नहीं है कि आगे किसी मुद्दे पर वो क्या करनेवाले हैं. 

मित्रों, फिर भी दुनियाभर के विशेषज्ञों का अनुमान है कि ट्रम्प के दोबारा अमेरिका के राष्ट्रपति बनने के क्या परिणाम देखने को मिल सकते हैं. उदाहरण के लिए ट्रम्प यूक्रेन की मदद रोक सकते हैं, ईजराइल को और ताकत दे सकते हैं और चीन के प्रति काफी कठोर रवैया अपना सकते हैं. इसके साथ ही कदाचित पाकिस्तान के साथ-साथ बांग्लादेश की वर्तमान अवैध सरकार के प्रति भी ट्रम्प काफी कठोरता से पेश आएंगे ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है. हो सकता है कि फिर से बांग्लादेश में लोकतंत्र की बहाली हो जाए और फिर से शेख हसीना वाजेद की प्रधानमंत्री के रूप में वापसी भी हो जाए क्योंकि ट्रंप पहले से ही मोहम्मद यूनुस के डेमोक्रेटिक पार्टी को अंधसमर्थन से नाराज़ हैं।  अगर ऐसा होता है तो भारत के साथ-साथ बांग्लादेश का भी भला होगा जिसकी अर्थव्यवस्था इन दिनों वहां छाई अराजकता के चलते रसातल में जाती हुई दिखाई दे रही है. 

मित्रों, पिछली बार जब ट्रंप जीते थे तब भी हमने एक आलेख के माध्यम से कहा था कि ट्रंप सबसे पहले अपने देश का भला देखेंगे बाद में किसी और का और वह बात इस बार भी लागू होती है। फिर भी इतना तो तय है कि भारत-अमेरिकी संबंधों में सुधार होगा जो जो वाईडन के कार्यकाल में अधोगति की तरफ जाने लगा था। वैसे भी भारत का वर्तमान नेतृत्व इतना कमजोर नहीं है कि उसे अमेरिका की जरुरत पड़े और इस सच्चाई से न तो चीन, न ही रूस, न ही यूरोप, न ही मणिशंकर अय्यर और न ही अमेरिका नावाकिफ है। वैसे एक समाचार यह भी है जो काफी महत्वपूर्ण है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को अमेरिका के नव-निर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बातचीत की और उन्हें राष्ट्रपति चुनाव में जीत पर फिर से बधाई दी। सूत्रों के अनुसार, दोनों नेताओं ने वैश्विक शांति के लिए साथ मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई। बातचीत के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी की प्रशंसा करते हुए कहा कि पूरी दुनिया उन्हें प्यार करती है। उन्होंने भारत को एक महान देश और पीएम मोदी को एक महान नेता बताया।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;मैं एक छोटा सा पत्रकार हूँ, स्वभाव से विद्रोही. मैं विश्वामित्र की तरह एक सामानांतर दुनिया तो बनाना नहीं चाहता हूँ फिर भी इस दुनिया में कुछ बदलाव जरूर चाहता हूँ जो सिर्फ बातें बनाने से नहीं होनेवाला, इसके लिए कुछ कदम उठाने पड़ेंगे.&lt;/div&gt;</description><link>http://brajkiduniya.blogspot.com/2024/11/blog-post_7.html</link><author>noreply@blogger.com (ब्रजकिशोर सिंह)</author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgR4G5yLftB7yUuUdeJj-e8x8yBsehhGvUSMccr5tceL3D9Ea2YWd_Od89lsr4EYI5nv9Fgu8im5IoJzDoUPBZMRWw9JoiWa8zg1kNEonSdsG1bxV6FME4X7C17qqPbFX6xV6z_UPK4X2CtBW4aRzw1KnMWCOyRbuYYpx-UgMqL8rdL_00NN0w7WoZfkNk/s72-c/Screenshot%202024-11-07%20at%2013-44-58%20us%20presidential%20election%20result%202024%20what%20is%20written%20over%20donald%20trump%20red%20cap%2045-47...%20%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%82%E0%A4%AA%20%E0%A4%95%E0%A5%80%20%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%B2%20%E0%A4%9F%E0%A5%8B%E0%A4%AA%E0%A5%80%20%E0%A4%AA%E0%A4%B0%20%E0%A4%86%E0%A4%96%E0%A4%BF%E0%A4%B0%20%E0%A4%90%E0%A4%B8%E0%A4%BE%20%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%20%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%96%E0%A4%BE%20%E0%A4%A5%E0%A4%BE%20%E0%A4%9C%E0%A5%8B%20%E0%A4%B9%E0%A5%8B%20%E0%A4%97%E0%A4%AF%E0%A4%BE%20%E0%A4%B8%E0%A4%9A%20%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%AC%E0%A4%BF%E0%A4%A4.png" width="72"/><thr:total>0</thr:total></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-4719772605751864996.post-6388378397834138774</guid><pubDate>Wed, 06 Nov 2024 10:37:00 +0000</pubDate><atom:updated>2024-11-07T12:02:10.270+05:30</atom:updated><title>बिहार कोकिला शारदा दी को श्रद्धांजलि</title><description>&lt;div class="separator" style="clear: both;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEi9dgKTuSQnmG9H-uzXF71Hv_8ubUu_Iah2WpIa-jDNrHBKMyt8xdhn7s5LynMH965Ak4Mi3Zho3-94DTCdzp4uhtyCCCGWo_zy27mxAFEHt1zk-0LWJJHC1Ms3cc04ut3zcPyeaQAiMoGLAIFGTL5hfJcn5vkxoTXyK4NQsJWdgWrYwDgA2gV2NSlHKiI/s1200/sharda-sinha-1569899485.jpg" style="display: block; padding: 1em 0; text-align: center; "&gt;&lt;img alt="" border="0" width="320" data-original-height="675" data-original-width="1200" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEi9dgKTuSQnmG9H-uzXF71Hv_8ubUu_Iah2WpIa-jDNrHBKMyt8xdhn7s5LynMH965Ak4Mi3Zho3-94DTCdzp4uhtyCCCGWo_zy27mxAFEHt1zk-0LWJJHC1Ms3cc04ut3zcPyeaQAiMoGLAIFGTL5hfJcn5vkxoTXyK4NQsJWdgWrYwDgA2gV2NSlHKiI/s320/sharda-sinha-1569899485.jpg"/&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;
मित्रों, बिहार कोकिला शारदा सिन्हा इतनी जल्दी हमसे दूर चली जाएंगी और वो भी छठ पर्व के दौरान शायद ही किसी ने सोंचा था। वो शारदा सिन्हा ही थीं जिनके गाए हुए छठ गीतों को सुनकर हम सभी बड़े हुए हैं। अकस्मात कुछ दिन पहले समाचारों में आया कि वो गंभीर रूप से बीमार हैं। साथ ही यह भी पता चला कि उनके पति ब्रजकिशोर सिन्हा जी के सितम्बर में गुजर जाने का उनको गहरा सदमा लगा है जो शारदा दी जैसी कोमल और मधुर स्वभाव वाली महिला के लिए स्वाभाविक भी था। 
मित्रों, हमारा तो उनसे कभी आमना-सामना नहीं हुआ लेकिन सोशल मीडिया के माध्यम से उनके साथ यदा-कदा विचारों का आदान-प्रदान हो जाता था। जहां तक मुझे याद आ रहा है जब हम नौ-दस साल के थे तब पहली बार उनके गाए छठ गीत सुनने का सौभाग्य मिला था। हमारे जिले की भाषा बज्जिका में गाया उनका गीत केरबा जे फरेला धऊड़ से ओई पर सुगा मडराए, मारबऊ से सुगबा धनुष से सुगा गिरे मुरझाए गीत तो इतना लोकप्रिय हुआ कि बाद में महाराष्ट्रवासी अनुराधा पोडवाल ने भी उसे गाया। साथ ही पनिया के जहाज से पल्टनिया बनी अईह गीत भी फिजाओं में गूंजने लगा था। अब जाकर पता चला कि यह गीत गिरमिटिया प्रथा के विरूद्ध गाया गया था। 
मित्रों, इतना ही नहीं उनके गाए विवाह-गीतों के बिना शायद ही बिहार में कोई विवाह संपन्न होता था। फिर चाहे वो बबुआ देत काहे गारी बता द बबुआ गीत हो या अवध नगरिया से अईले दोनों भईया हाय रे जियरा या फिर कहवां से सिया दुल्हनिया पड़ेला झिरझिर बुनिया गीत हो। 
मित्रों, पहले पहल हम शारदा दी को भोजपुरी गायिका समझते थे लेकिन बाद में पता चला कि उन्होंने तो बिहार की समस्त भाषाओं में गीत गाए हैं फिर चाहे भोजपुरी हो या मैथिली,अंगिका,मगही या बज्जिका. मैंने प्यार किया फिल्म में उनके द्वारा गाए गीत कहे तोसे सजना तोहरे सजनिया को भला कोई भूल सकता है क्या? क्या गरिमा, क्या सुर पर पकड़ थी शारदा दी की, अद्भुत! उन्होंने कभी भोजपुरी, मैथिली या अन्य किसी भी आंचलिक भाषा कोई अश्लील गीत नहीं गाया। बल्कि भगवान ने जितना दिया उतने में ही संतुष्ट रहीं। जब-जब बिहार सरकार ने विश्वविद्यालय शिक्षकों के प्रति अन्याय किया शारदा दी ने मिथिला विश्वविद्यालय के एक विश्वविद्यालय शिक्षक के रूप में उसका तीव्रतम विरोध किया। 
मित्रों, कुछ दिनों पहले ही शारदा दी ने एक गजल सोशल मीडिया पर डाला था जिसमें उनको अपने बेटे-बेटियां के साथ मिलकर आज जाने की जिद न करो, मेरे पहलू में बैठे रहो गाते हुए देखा जा सकता था लेकिन तब हमें क्या पता था कि वो खुद इतनी जल्दी जाने की जिद कर देंगी। आज बिहार का उपवन सूना हो गया। वैसे जबतक धरती रहेगी बिहार-कोकिला के गाए गीत बिहार के हर घर में और हर आंगन में गूंजते रहेंगे‌‌। शारदा दी को हमारी ओर से विनम्र श्रद्धांजलि। अलविदा दीदी!


&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;मैं एक छोटा सा पत्रकार हूँ, स्वभाव से विद्रोही. मैं विश्वामित्र की तरह एक सामानांतर दुनिया तो बनाना नहीं चाहता हूँ फिर भी इस दुनिया में कुछ बदलाव जरूर चाहता हूँ जो सिर्फ बातें बनाने से नहीं होनेवाला, इसके लिए कुछ कदम उठाने पड़ेंगे.&lt;/div&gt;</description><link>http://brajkiduniya.blogspot.com/2024/11/blog-post.html</link><author>noreply@blogger.com (ब्रजकिशोर सिंह)</author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEi9dgKTuSQnmG9H-uzXF71Hv_8ubUu_Iah2WpIa-jDNrHBKMyt8xdhn7s5LynMH965Ak4Mi3Zho3-94DTCdzp4uhtyCCCGWo_zy27mxAFEHt1zk-0LWJJHC1Ms3cc04ut3zcPyeaQAiMoGLAIFGTL5hfJcn5vkxoTXyK4NQsJWdgWrYwDgA2gV2NSlHKiI/s72-c/sharda-sinha-1569899485.jpg" width="72"/><thr:total>0</thr:total></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-4719772605751864996.post-5993005232713103676</guid><pubDate>Tue, 22 Oct 2024 02:58:00 +0000</pubDate><atom:updated>2024-10-22T08:32:21.870+05:30</atom:updated><title>चीन हारा सुनीता भी हारी</title><description>&lt;div class="separator" style="clear: both;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiyFDmkeHQKaOKYWKBiRKRbwoP-ClG3JQycfHxBMRwEwIVxbNancVv8SgVbyHatG3KSGP7tUfDRo3o6ohHuXdtMj40WNpHiZmsRSnG7mFkyaQZTpkdZMxUxLoBk_5ao837FQAxraE5KKIcfUzOJDPkFQFVVZx4EDtdj5GPPVTWmJZEnfC6xvPYvBEQeJlU/s974/Screenshot%202024-10-22%20at%2008-22-18%20India%20China%20LAC%20News%20%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%AA%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%97-%E0%A4%A1%E0%A5%87%E0%A4%AE%E0%A4%9A%E0%A5%8B%E0%A4%95%20%E0%A4%B8%E0%A5%87%20%E0%A4%AA%E0%A5%80%E0%A4%9B%E0%A5%87%20%E0%A4%B9%E0%A4%9F%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%80%20%E0%A4%B8%E0%A5%87%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%8F%E0%A4%82%20%E0%A4%AB%E0%A4%BF%E0%A4%B0%20%E0%A4%B6%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A5%82%20%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%97%E0%A5%80%20%E0%A4%AA%E0%A5%87%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%97%E2%80%A6%20%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4-%E0%A4%9A%E0%A5%80%E0%A4%A8%20%E0%A4%95%E0%A5%87%20%E0%A4%AC%E0%A5%80%E0%A4%9A%20%E0%A4%AC%E0%A4%A8%E0%A5%80%20%E0%A4%B8%E0%A4%B9%E0%A4%AE%E0%A4%A4%E0%A4%BF%20-%20New%20agreement%20between%20India%20and%20China%20regarding%20patrolling%20on%20LAC%20MEA%20issued%20st%5B...%5D.png" style="display: block; padding: 1em 0; text-align: center; clear: left; float: left;"&gt;&lt;img alt="" border="0" width="320" data-original-height="487" data-original-width="974" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiyFDmkeHQKaOKYWKBiRKRbwoP-ClG3JQycfHxBMRwEwIVxbNancVv8SgVbyHatG3KSGP7tUfDRo3o6ohHuXdtMj40WNpHiZmsRSnG7mFkyaQZTpkdZMxUxLoBk_5ao837FQAxraE5KKIcfUzOJDPkFQFVVZx4EDtdj5GPPVTWmJZEnfC6xvPYvBEQeJlU/s320/Screenshot%202024-10-22%20at%2008-22-18%20India%20China%20LAC%20News%20%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%AA%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%97-%E0%A4%A1%E0%A5%87%E0%A4%AE%E0%A4%9A%E0%A5%8B%E0%A4%95%20%E0%A4%B8%E0%A5%87%20%E0%A4%AA%E0%A5%80%E0%A4%9B%E0%A5%87%20%E0%A4%B9%E0%A4%9F%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%80%20%E0%A4%B8%E0%A5%87%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%8F%E0%A4%82%20%E0%A4%AB%E0%A4%BF%E0%A4%B0%20%E0%A4%B6%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A5%82%20%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%97%E0%A5%80%20%E0%A4%AA%E0%A5%87%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%97%E2%80%A6%20%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4-%E0%A4%9A%E0%A5%80%E0%A4%A8%20%E0%A4%95%E0%A5%87%20%E0%A4%AC%E0%A5%80%E0%A4%9A%20%E0%A4%AC%E0%A4%A8%E0%A5%80%20%E0%A4%B8%E0%A4%B9%E0%A4%AE%E0%A4%A4%E0%A4%BF%20-%20New%20agreement%20between%20India%20and%20China%20regarding%20patrolling%20on%20LAC%20MEA%20issued%20st%5B...%5D.png"/&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;

&lt;div class="separator" style="clear: both;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhnrjnbZKvo-SR8lm291qNfVF5vqg8Mg6peabdELeWvqZgjc5mAnLEPvg4TOxUlswCqioYQHj37xlHWntxiQgLdM9yXmhYDiLvrK0BOTt3DdmHZJd3drFp6h0hNteiRKV6Dhqr9YQE2_w5k1O98T16ROWkQgaPbdkVnHVPt2w_moAIYlBj17flm7Vinmt0/s941/Screenshot%202024-10-22%20at%2008-22-56%20%E0%A4%A6%E0%A4%B0-%E0%A4%A6%E0%A4%B0%20%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B0%20%E0%A4%B2%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%80%20%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A5%80%20%E0%A4%AA%E0%A4%B0...%20%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%A1%E0%A4%A8%E0%A5%80%20%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A1%20%E0%A4%95%E0%A5%80%20%E0%A4%AA%E0%A5%80%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A4%BF%E0%A4%A4%20%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%A8%E0%A5%80%E0%A4%A4%E0%A4%BE%20%E0%A4%A8%E0%A5%87%20%E0%A4%86%E0%A4%96%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%20%E0%A4%A6%E0%A4%AE%20%E0%A4%A4%E0%A5%8B%E0%A4%A1%E0%A4%BC%20%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE%20%E0%A4%8F%E0%A4%B8%E0%A4%95%E0%A5%87%E0%A4%8F%E0%A4%AE%E0%A4%B8%E0%A5%80%E0%A4%8F%E0%A4%9A%20%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82%20%E0%A4%B2%E0%A5%80%20%E0%A4%85%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%AE%20%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%B8%20-%20News18%20%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%80.png" style="display: block; padding: 1em 0; text-align: center; clear: right; float: right;"&gt;&lt;img alt="" border="0" width="320" data-original-height="511" data-original-width="941" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhnrjnbZKvo-SR8lm291qNfVF5vqg8Mg6peabdELeWvqZgjc5mAnLEPvg4TOxUlswCqioYQHj37xlHWntxiQgLdM9yXmhYDiLvrK0BOTt3DdmHZJd3drFp6h0hNteiRKV6Dhqr9YQE2_w5k1O98T16ROWkQgaPbdkVnHVPt2w_moAIYlBj17flm7Vinmt0/s320/Screenshot%202024-10-22%20at%2008-22-56%20%E0%A4%A6%E0%A4%B0-%E0%A4%A6%E0%A4%B0%20%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B0%20%E0%A4%B2%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%80%20%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A5%80%20%E0%A4%AA%E0%A4%B0...%20%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%A1%E0%A4%A8%E0%A5%80%20%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A1%20%E0%A4%95%E0%A5%80%20%E0%A4%AA%E0%A5%80%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A4%BF%E0%A4%A4%20%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%A8%E0%A5%80%E0%A4%A4%E0%A4%BE%20%E0%A4%A8%E0%A5%87%20%E0%A4%86%E0%A4%96%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%20%E0%A4%A6%E0%A4%AE%20%E0%A4%A4%E0%A5%8B%E0%A4%A1%E0%A4%BC%20%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE%20%E0%A4%8F%E0%A4%B8%E0%A4%95%E0%A5%87%E0%A4%8F%E0%A4%AE%E0%A4%B8%E0%A5%80%E0%A4%8F%E0%A4%9A%20%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82%20%E0%A4%B2%E0%A5%80%20%E0%A4%85%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%AE%20%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%B8%20-%20News18%20%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%80.png"/&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;
मित्रों, काफी दिन पहले मैंने एक फिल्म देखी थी जिसमें विलेन के पास उसका आदमी खबरें लेकर आता है और पूछता है कि उसके पास दो खबरें हैं एक अच्छी और एक बुरी, आप पहले किसे सुनना चाहेंगे? और जाहिर तौर पर विलेन पहले अच्छी खबर सुनाने को बोलता है। 
मित्रों, ठीक उसी तरह आज मेरे पास एक अच्छी और बुरी खबर है। वैसे बचपन में जब हमारे पास खाने के लिए अच्छी और ज्यादा अच्छी चीज़ होती थी तब हम तो पहले अच्छी और बाद में ज्यादा अच्छी चीज खाते थे। खैर हम भी आपको पहले अच्छी खबर सुनाते हैं। 
मित्रों, हुआ यह है कि हमारा पुराना दुश्मन चीन लद्दाख में भारत-तिब्बत सीमा पर साल 2020 वाली पुरानी स्थिति बहाल करने के लिए राजी हो गया है। ऐसा पहली बार हुआ है कि चीन आगे बढ़कर पीछे हट जाए। ऐसा भारत सरकार और भारतीय सेना की दृढ़ता और बेजोड़ कूटनीति के चलते संभव हो सका है। हम बिहारियों के लिए यह उपलब्धि और भी ज्यादा गर्व करने लायक है क्योंकि गलवान में शहीद होनेवाले अधिकतर जवान बिहार रेजिमेंट के थे। 
मित्रों, दरअसल चीन पुराने और नये भारत के अंतर को समझ नहीं पाया। अमेरिका, इंग्लैंड और कनाडा भी समझ नहीं पा रहे हैं। नया भारत न केवल आंखों में आंखें डालकर बात करना जानता है बल्कि उसे शत्रुओं की आंखें निकालकर गोटी खेलना भी न केवल आता है भाता भी है। न केवल भारत ने सीमा पर चीन को ईंट का जवाब पत्थर से दिया बल्कि वैश्विक कूटनीति में भी ऐसा धोबिया पछाड़ लगाया कि चीन को दिन में ही तारे नजर आने लगे। जहां मनमोहन सरकार के लिए सोनिया परिवार ही सबकुछ था मोदी सरकार के लिए देश ही सबकुछ है। बस इतनी-सी बात चीन की समझ में नहीं आई और उसने इसलिए मुंह की खाई।
मित्रों, जो लोग गरीबों को कीड़े-मकोड़े से ज्यादा नहीं समझते उनके लिए दूसरी खबर कोई मायने नहीं रखती लेकिन मेरे लिए इसकी अहमियत पहली खबर से कम नहीं है. हुआ यह है कि सुनीता जिन्दगी के लिए लड़ते-लड़ते हार गई है और उसका देहांत हो गया है. आप कहेंगे कौन-सी सुनीता, देश में तो रोजाना लाखो सुनीता मरती है. लीजिए आपकी याददाश्त भी भारतीय जनता की तरह कमजोर निकली. बता दें कि वर्ष 2022 में 11 जुलाई को मुजफ्फरपुर जिले की सकरा थाना क्षेत्र के बाजी राउत गांव की 35 वर्षीय सुनीता देवी जो चमार जाति से आती है के पेट में दर्द हुआ तो इलाज के लिए उसे डॉक्टर पवन कुमार के क्लिनिक लाया गया. डॉक्टर ने उसे गर्भाशय निकालने के लिए ऑपरेशन की सलाह दी. बरियारपुर स्थित शुभकांत क्लिनिक में 3 सितंबर 2022 को सुनीता के गर्भाशय का ऑपरेशन किया गया था, जो झोलाछाप डॉक्टर पवन कुमार ने किया था. उसने इस ऑपरेशन के लिए 30 हजार रुपए लिए थे. इसके बाद भी जब सुनीता की दिक्कत दूर नहीं हुई और पेट में दर्द होता रहा तो 5 सितंबर को सुनीता की तबीयत खराब होने पर उसे श्रीकृष्ण चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल लाया गया. यहां 7 सितंबर 2022 को जांच के बाद पता चला कि उसकी दोनों किडनी निकाल ली गई है. बता दें कि वर्ष 2022 में गलत ऑपरेशन का शिकार हुई सुनीता जो दो साल से डायलिसिस पर थी बीते साल सीएम नीतीश कुमार से भी मिली थी. इसके बाद सीएम नीतीश ने 5 लाख का चेक भी सरकार की ओर से दिया था. वहीं, बीते महीने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से भी की किडनी लगवाने की मांग की थी, लेकिन उनकी यह मांग अधूरी ही रह गई और अब उसने दम तोड़ दिया.
मित्रों, मैं पूछता हूँ कि बिहार और भारत सरकार का अरबों रूपयों का बजट किस काम का जब वो किसी गरीब सुनीता की जान न बचा सके? सुनीता और उसके परिवार को जो भोगना पड़ा और भविष्य में जो भोगना पड़ेगा उसके लिए दोषी कौन है? हमारा लचर कानून और उससे भी ज्यादा लचर और भ्रष्ट व्यवस्था? मैं चीन के खिलाफ भारत की बढ़त का स्वागत करता हूँ और तहे दिल से स्वागत करता हूँ लेकिन मैं सुनीता की हत्या की भारी मन से निंदा भी करता हूँ. क्योंकि हमारा तंत्र इतना ज्यादा भ्रष्ट हो चुका है कि कोई नहीं जानता कि कब किसे सुनीता बना दिया जाए. फिर किडनी तो गरीबों के कथित मसीहा लालू यादव की भी ख़राब हुई थी लेकिन उनके पास आज अरबों रूपये हैं इसलिए वो स्वस्थ हो गए लेकिन गरीब सुनीता को तो देर-सबेर मरना ही था ना, सो वो मर गयी और आगे भी मरती रहेगी यही तो लोकतंत्र है. 
&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;मैं एक छोटा सा पत्रकार हूँ, स्वभाव से विद्रोही. मैं विश्वामित्र की तरह एक सामानांतर दुनिया तो बनाना नहीं चाहता हूँ फिर भी इस दुनिया में कुछ बदलाव जरूर चाहता हूँ जो सिर्फ बातें बनाने से नहीं होनेवाला, इसके लिए कुछ कदम उठाने पड़ेंगे.&lt;/div&gt;</description><link>http://brajkiduniya.blogspot.com/2024/10/blog-post.html</link><author>noreply@blogger.com (ब्रजकिशोर सिंह)</author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiyFDmkeHQKaOKYWKBiRKRbwoP-ClG3JQycfHxBMRwEwIVxbNancVv8SgVbyHatG3KSGP7tUfDRo3o6ohHuXdtMj40WNpHiZmsRSnG7mFkyaQZTpkdZMxUxLoBk_5ao837FQAxraE5KKIcfUzOJDPkFQFVVZx4EDtdj5GPPVTWmJZEnfC6xvPYvBEQeJlU/s72-c/Screenshot%202024-10-22%20at%2008-22-18%20India%20China%20LAC%20News%20%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%AA%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%97-%E0%A4%A1%E0%A5%87%E0%A4%AE%E0%A4%9A%E0%A5%8B%E0%A4%95%20%E0%A4%B8%E0%A5%87%20%E0%A4%AA%E0%A5%80%E0%A4%9B%E0%A5%87%20%E0%A4%B9%E0%A4%9F%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%80%20%E0%A4%B8%E0%A5%87%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%8F%E0%A4%82%20%E0%A4%AB%E0%A4%BF%E0%A4%B0%20%E0%A4%B6%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A5%82%20%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%97%E0%A5%80%20%E0%A4%AA%E0%A5%87%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%97%E2%80%A6%20%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4-%E0%A4%9A%E0%A5%80%E0%A4%A8%20%E0%A4%95%E0%A5%87%20%E0%A4%AC%E0%A5%80%E0%A4%9A%20%E0%A4%AC%E0%A4%A8%E0%A5%80%20%E0%A4%B8%E0%A4%B9%E0%A4%AE%E0%A4%A4%E0%A4%BF%20-%20New%20agreement%20between%20India%20and%20China%20regarding%20patrolling%20on%20LAC%20MEA%20issued%20st%5B...%5D.png" width="72"/><thr:total>0</thr:total></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-4719772605751864996.post-7182964649990813871</guid><pubDate>Mon, 30 Sep 2024 07:23:00 +0000</pubDate><atom:updated>2024-09-30T19:12:09.321+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">बिहार में पीके फिरकी तो नहीं ले रहा?</category><title>बिहार में पीके फिरकी तो नहीं ले रहा?</title><description>&lt;div class="separator" style="clear: both;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEi4TaKEF35QeHlxg4hsEjFjwXJFtf9ee4mv5suPMKbF1KICsQLoljIu3KaA0Fok6v03lKD-ZJJPyf87g7vtIT19JJ81SjCtECBLqD34PC-da68s6PNhiIdboj2-riuoFvoAYuLm0D7CT19CN8jHyrCm2o1EYR7CLY1LvGgNUmFfikaDqGBArcDqyNaDq90/s300/%E0%A4%9C%E0%A4%A8%20%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C.jpg" style="display: block; padding: 1em 0; text-align: center; "&gt;&lt;img alt="" border="0" width="320" data-original-height="168" data-original-width="300" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEi4TaKEF35QeHlxg4hsEjFjwXJFtf9ee4mv5suPMKbF1KICsQLoljIu3KaA0Fok6v03lKD-ZJJPyf87g7vtIT19JJ81SjCtECBLqD34PC-da68s6PNhiIdboj2-riuoFvoAYuLm0D7CT19CN8jHyrCm2o1EYR7CLY1LvGgNUmFfikaDqGBArcDqyNaDq90/s320/%E0%A4%9C%E0%A4%A8%20%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C.jpg"/&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;
मित्रों, दस साल हो गए एक फिल्म आई थी और सुपर डुपर हिट भी रही थी. नाम था पीके. उस फिल्म में भगवान, खुदा और गॉड के नाम दुनिया में व्याप्त झूठ और पाखण्ड पर व्यंग्य किया गया था. अगर आपने वो फिल्म देखी है तो देखा होगा कि उस फिल्म का नायक पीके जो सुदूर दूसरे ग्रह से आया है धर्माधिकारियों को लेकर एक बात बार-बार कहता है कि ये फिरकी ले रहा है मतलब धोखा दे रहा है. 
मित्रों, इन दिनों बिहार में भी एक पीके यानि प्रशांत किशोर आए हुए हैं और वे कतई दूसरे ग्रह से नहीं आए हैं. श्रीमान इन दिनों गाँधी की तस्वीर लिए पूरे बिहार में घूम रहे हैं. उनका कहना है कि वे बिहार का कायाकल्प कर देंगे और बिहार सबसे निचले पायदान से सबसे ऊपर के पायदान पर पहुँच जाएगा. लोअर बर्थ से अपर बर्थ पर. उनका पूरा तौर-तरीका वही है जो २०१३-१४ में केजरीवाल का था. जहाँ केजरीवाल ने कथित जीवित गाँधी अन्ना हजारे को यूज किया वहीँ ये पीके गाँधी और गाँधीवाद के बल पर बिहार को जीतना चाहता है. 
मित्रों, कहना न होगा कि भारत की आजादी के बाद से ही भारत को जितना गाँधीवादियों ने लूटा है किसी और ने नहीं लूटा. इतिहास साक्षी है कि पूरी मानवता के इतिहास में गाँधी से बड़ा कोई ढोंगी और पाखंडी हुआ ही नहीं. वह महान व्यक्ति दिन में महात्मा बना फिरता था और रातों में खुलेआम नंगी औरतों के साथ नंगा सोकर अपनी अतृप्त वासना को तृप्त करता था. इतना ही नहीं गाँधी ने भाईचारा की जिद में जितना हिन्दुओं और हिंदुस्तान को मुस्लिम तुष्टिकरण के माध्यम से नुकसान पहुँचाया आज किसी से छिपा हुआ नहीं है. 
मित्रों, इन दिनों पीके भी उसी गाँधी की तरह खुलकर मुस्लिम तुष्टिकरण की बातें कर रहा है. इसने तो घोषणा भी कर दी है कि वो टिकट वितरण में मुसलमानों को उनकी जनसंख्या के अनुपात से कई गुना अधिक टिकट देगा. एक गाँधी ने भारत का बंटाधार कर दिया और अब पीके दूसरा गाँधी बनने का दावा करता फिर रहा है. सवाल उठता है कि क्या बिहार और भारत को एक और गाँधी की आवश्यकता है?
मित्रों, एक कहावत है कि सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली. सवाल उठता है कि २०१५ में क्यों पीके को बिहार का हित-अहित नजर नहीं आया जब वे बिहार में महागठबंधन को जिता रहे थे? तब उनको इस बात की चिंता क्यों नहीं थी कि महागठबंधन की जीत के बाद तेजस्वी यादव उपमुख्यमंत्री बनेंगे? क्या तब तेजस्वी यादव नौवीं फेल नहीं थे? इसी तरह आज के पश्चिम बंगाल में जो अराजकता और अत्याचार का माहौल है और जिस प्रकार बिहार के लालू राज की तरह आईएएस की पत्नी तक सुरक्षित नहीं है क्या उसके लिए प्रशांत किशोर की जिम्मेदारी नहीं बनती है जो पिछले विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी के लिए रणनीति बना रहे थे?
मित्रों, आज वही प्रशांत किशोर जो पैसों के लिए किसी भी चोर-डाकू को चुनाव जितवा सकता था दांत में तिनका दबाकर खुद को पाक-साफ़ बताता फिर रहा है. कोई क्यों यकीन करे उस पर? कभी मुक्तिबोध में कहा था कि 
जो है मुझे उससे बेहतर चाहिए,
पूरी दुनिया साफ करने के लिए एक मेहतर चाहिए.
प्रश्न उठता है कि क्या प्रशांत किशोर नीतीश कुमार से बेहतर विकल्प हैं? हम पहले ही केजरीवाल को चुनकर दिल्ली में धोखा खा चुके हैं जो २०१३-१४ में पीके की तरह ही मीठी-मीठी बातें करते थे और अब १५६ दिनों तक जेल से शासन चलाकर अनचाहा और शर्मनाक विश्व रिकॉर्ड बना चुके हैं. तो क्या प्रशांत किशोर भी केजरीवाल साबित होने वाले हैं? उन्होंने सत्ताग्रहण के पंद्रह मिनट के भीतर बिहार में शराबबंदी समाप्त करने की घोषणा करके इस बात के संकेत भी दे दिए हैं। सवाल तो यह भी उठता है कि गांधी तो मद्यपान के विरोधी थे फिर ये प्रशांत किशोर किस प्रकार का गांधीवादी है?
मित्रों, एक समय बिहार के लोगों ने जगन्नाथ मिश्र की सरकार को हटाकर लालू यादव को मुख्यमंत्री बनाया था पर मिला क्या? जंगलराज? इसी तरह क्या केजरीवाल शीला दीक्षित से बेहतर साबित हो रहे हैं? इसमें कोई संदेह नहीं कि नीतीश कुमार के शासन में बिहार का विकास हुआ है और तमाम कमियों के बावजूद स्थिति में सुधार हुआ है और निरंतर हो रहा है. 
मित्रों, एक बात और इसमें कोई संदेह नहीं कि इस बार का लोकसभा चुनाव परिणाम बिहार के लिए अनंत संभावनाएं लेकर आया है. विपक्ष तो आरोप भी लगा रहा है कि इस साल का आम बजट भारत का कम बिहार का बजट ज्यादा है. फिर क्यों न बिहार में डबल ईंजन की सरकार बनी रहने दी जाए? क्यों वर्तमान व्यवस्था के साथ छेड़-छाड़ की जाए और वो भी एक अविश्वसनीय पीके के कहने पर? आखिर क्यों बेवजह का जोखिम लिया जाए? बल्कि क्यों न वर्तमान सरकार को ही प्रभावी सुधार करने के लिए बाध्य किया जाए?&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;मैं एक छोटा सा पत्रकार हूँ, स्वभाव से विद्रोही. मैं विश्वामित्र की तरह एक सामानांतर दुनिया तो बनाना नहीं चाहता हूँ फिर भी इस दुनिया में कुछ बदलाव जरूर चाहता हूँ जो सिर्फ बातें बनाने से नहीं होनेवाला, इसके लिए कुछ कदम उठाने पड़ेंगे.&lt;/div&gt;</description><link>http://brajkiduniya.blogspot.com/2024/09/blog-post_30.html</link><author>noreply@blogger.com (ब्रजकिशोर सिंह)</author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEi4TaKEF35QeHlxg4hsEjFjwXJFtf9ee4mv5suPMKbF1KICsQLoljIu3KaA0Fok6v03lKD-ZJJPyf87g7vtIT19JJ81SjCtECBLqD34PC-da68s6PNhiIdboj2-riuoFvoAYuLm0D7CT19CN8jHyrCm2o1EYR7CLY1LvGgNUmFfikaDqGBArcDqyNaDq90/s72-c/%E0%A4%9C%E0%A4%A8%20%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C.jpg" width="72"/><thr:total>0</thr:total></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-4719772605751864996.post-9044590194615930677</guid><pubDate>Wed, 18 Sep 2024 02:15:00 +0000</pubDate><atom:updated>2024-09-18T08:19:52.904+05:30</atom:updated><title>आतिशी राबड़ी हैं या मनमोहन </title><description>मित्रों, आम आदमी पार्टी (आप) की बैठक में दिल्ली की नई मुख्यमंत्री चुनी गईं आतिशी का कहना है कि वो इस जिम्मेदारी से खुश तो हैं, लेकिन उन्हें इसका भारी गम भी है कि अरविंद केजरीवाल सीएम नहीं रहेंगे। सोचिए, जो दिल्ली जैसे अहम प्रदेश जहां से पूरे भारतका शासन चलता है की मुख्यमंत्री बनने जा रही हैं, वो खुलकर यह भी नहीं कह सकतीं कि हां, अरविंद केजरीवाल दिल्ली के मुख्यमंत्री हैं, लेकिन अब वो यह कमान संभालने जा रही हैं। बल्कि वो यह कह रही हैं कि दिल्ली का एक ही मुख्यमंत्री है और उसका नाम है- अरविंद केजरीवाल।
मित्रों, आतिशी ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा, 'मैं आज ये जरूर कहना चाहती हूं आम आदमी पार्टी के सभी विधायकों की तरफ से, दिल्ली की दो करोड़ जनता की तरफ से कि दिल्ली का एक ही मुख्यमंत्री है, और उस मुख्यमंत्री का नाम अरविंद केजरीवाल है।' आतिशी के इस बयान के बाद क्या विरोधियों का यह आरोप साबित नहीं होता है कि दिल्ली के असली मुख्यमंत्री तो इस्तीफे के बाद भी अरविंद केजरीवाल ही रहेंगे, आतिशी तो बस रबर स्टांप रहेंगी? ध्यान रहे कि यही छवि देश के लगातार दो बार प्रधानमंत्री रहे काफी पढ़े-लिखे मनमोहन सिंह की रही। तथ्यों, तर्कों और सबूतों के आधार पर एक बड़ा वर्ग मानता है कि 2004 से 2014 तक भारत की असली प्रधानमंत्री तो सोनिया गांधी थीं, मनमोहन सिंह तो बस यस मैन की भूमिका में फाइलों पर दस्तखत करने तक सीमित थे।
मित्रों, 2004 के लोकसभा चुनावों में 145 सीटों के साथ कांग्रेस पार्टी सबसे बड़े दल के रूप में उभरी। बीजेपी 138 सीटों के साथ दूसरे नंबर पर खिसक गई। कांग्रेस पार्टी ने संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) के साथी दलों के साथ केंद्र में सरकार बना ली। सोनिया गांधी प्रधानमंत्री की स्वाभाविक दावेदार थीं, लेकिन विदेशी मूल का मुद्दा उछला और सोनिया को कदम वापस खींचने पड़े। बीजेपी की धाकड़ नेता सुषमा स्वराज ने तब खुला ऐलान किया था कि यदि सोनिया गांधी प्रधानमंत्री बनती हैं, तो वह राजनीतिक संन्यास ले लेंगी और अपना सिर मुंडवाकर जमीन पर सोएंगी।
मित्रों, विपक्ष के कड़े विरोध के आगे सत्ता की भूखी सोनिया को झुकना पड़ा। वो झुकीं, लेकिन हार मानने के बजाय बाजी अपने हाथों में रखी। सोनिया ने मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री चुना। मनमोहन सिंह हमेशा से ब्यूरोक्रैट रहे, राजनेता नहीं। उनका ट्रैक रिकॉर्ड गारंटी दे रहा था कि वो कभी सोनिया की खिंची लक्ष्मण रेखा पार नहीं करेंगे। सोनिया को और क्या चाहिए था? दायरा क्रॉस करने की आशंका जिनसे थी, उन प्रणब मुखर्जी को सोनिया ने दरकिनार कर दिया था। बाद में प्रणब दा को राष्ट्रपति भवन भेज दिया गया।
मित्रों, हमारे यहां तेरहवीं को श्राद्ध होता है लेकिन मनमोहन सरकार के गठन के 13वें दिन ही राष्ट्रीय सलाहकार परिषद (एनएसी) का गठन हो गया। सोनिया गांधी इसकी चेयरपर्सन बन गईं। एनएसी के गठन के पीछे दलील यह दी गई कि यूपीए के कई साथी दल हैं, जिनके साझा घोषणापत्र को लागू करने के लिए एक ऐसी संस्था की दरकार है जो सरकार को वक्त-वक्त पर सही सुझाव दे सके। लेकिन यह तो कहने की बात थी। सोनिया गांधी की अध्यक्षता में एनएसी के फैसले और सरकार में उसकी दखल के सबूत सामने आने लगे तो पता चल गया कि दरअसल असली पीएम सोनिया ही हैं, मनमोहन सिंह तो बस मुखौटा हैं।
मित्रों, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के अधीन सरकार का संचालन भले ही संवैधानिक रूप से स्वतंत्र था, लेकिन एनएसी के जरिए सोनिया गांधी की सीधी या परोक्ष भागीदारी ने इसे 'समानांतर सत्ता केंद्र' की शक्ति दे दी। बीजेपी और अन्य विपक्षी दलों ने एनएसी को 'सुपर कैबिनेट' कहकर इसकी आलोचना की और कहा कि मनमोहन सिंह की सरकार पर सोनिया गांधी की छाया बनी हुई है। कई राजनीतिक विश्लेषकों ने इसे 'दो सत्ता केंद्रों' वाली सरकार कहा, जिसमें मनमोहन सिंह एक निर्वाचित और संवैधानिक प्रधानमंत्री थे, लेकिन निर्णय लेने में उनका योगदान लगभग शून्य था।
इन दोनों कार्यकाल में सोनिया गांधी ने मनमोहन सिंह सरकार को कभी फ्री हैंड नहीं छोड़ा और उस पर साया बनकर मंडराती रहीं। 2014 में बीजेपी सत्ता में आई और नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने तो सरकार ने एनएसी से जुड़ी सैकड़ों फाइलें सार्वजनिक कर दीं। वो फाइलें बताती हैं कि किस तरह देश को सूचना का अधिकार (आरटीआई) देने वाली एनएसी ने अपने ही कामकाज को गुप्त रखने का पक्का इतंजाम किया था। एनएसी ने 2005 में तय किया था कि उसके रिकॉर्ड सिर्फ एनएसी के सदस्य ही देख सकते हैं, वो भी तब जब सदस्य इसकी मांग करें। एनएसी की बैठकों में मंत्रियों और नौकरशाहों को बुलाया जाता था। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) की फाइलें सोनिया गांधी के पास जाती थीं और वहां से पास होकर पीएमओ आती थीं। कई बार उलटा होता था। सोनिया गांधी की तरफ से ही फाइलें तैयार होकर पीएमओ आती थीं जिन्हें लागू करवाना मनमोहन सिंह सरकार के लिए अनिवार्य होता था। नो इफ, नो बट, सोनिया गांधी का निर्देश सर माथे पर। यही थी बतौर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सबसे बड़ी जिम्मेदारी। मोदी सरकार की तरफ से सार्वजनिक की गई कई एनएसी फाइलें चीख-चीखकर यह सत्य बताती हैं। इन फाइलों से साफ झलकता है कि कैसे सोनिया गांधी के निर्देशों को मनमोहन सिंह को मानना ही पड़ता था।
मित्रों, केंद्र से अब रुख करते हैं बिहार का। बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव पशुपालन घोटाले में फंसे तो पटना के स्पेशल कोर्ट ने 25 जुलाई, 1997 को उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया। इस कारण लालू ने उसी दिन मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया और कमान अपनी पत्नी राबड़ी देवी के हाथों सौंप दी। लालू ने सुप्रीम कोर्ट में पटना स्पेशल कोर्ट को चुनौती दी लेकिन 29 जुलाई को याचिका खारिज हो गई और अगले ही दिन 30 जुलाई, 1997 को लालू ने स्पेशल कोर्ट के सामने सरेंडर कर दिया। लालू प्रसाद यादव को कोर्ट से जेल भेज दिया गया। अब सवाल उठता है कि क्या आतिशी के रूप में दिल्ली को राबड़ी देवी मिल गई हैं या मनमोहन मिल गये हैं। इशारा साफ है- मुख्यमंत्री की कुर्सी भले ही आतिशी के पास हो, लेकिन असली ताकत तो केजरीवाल के पास ही रहेगी, निर्णय तो वही लेंगे इसे आतिशी भी मान ही चुकी हैं। राबड़ी देवी अशिक्षित थीं और आतिशी मनमोहन की तरह उच्च शिक्षित मगर दशा एक जैसी। राजनीति में खड़ाऊं पूजन की व्यवस्था से पद पाए लोगों की महत्वाकांक्षा भी जग सकती है। आतिशी को 'शीशमहल' अपने मोहपाश में बांधा पाता है कि नहीं, ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा। यहां हम आपको यह भी बता दें कि कभी आतिशी के पिता विजय सिंह ने एक समय संसद पर हमले में शामिल आतंकी अफजल गुरु को फांसी से बचाने के लिए खून-पसीना एक कर दिया था। इतना ही नहीं नक्सल आतंकवाद के कट्टर समर्थक आतिशी मरलेना के कट्टर कम्युनिस्ट माता-पिता ने इनके उपनाम मरलेना में मर मार्क्स से जबकि लेना लेलिन से लिया है।

&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;मैं एक छोटा सा पत्रकार हूँ, स्वभाव से विद्रोही. मैं विश्वामित्र की तरह एक सामानांतर दुनिया तो बनाना नहीं चाहता हूँ फिर भी इस दुनिया में कुछ बदलाव जरूर चाहता हूँ जो सिर्फ बातें बनाने से नहीं होनेवाला, इसके लिए कुछ कदम उठाने पड़ेंगे.&lt;/div&gt;</description><link>http://brajkiduniya.blogspot.com/2024/09/blog-post_18.html</link><author>noreply@blogger.com (ब्रजकिशोर सिंह)</author><thr:total>0</thr:total></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-4719772605751864996.post-727670534817954158</guid><pubDate>Wed, 11 Sep 2024 12:23:00 +0000</pubDate><atom:updated>2024-09-11T18:45:08.099+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">आखिर किसके विपक्ष में हैं विपक्ष के नेता राहुल</category><title>आखिर किसके विपक्ष में हैं विपक्ष के नेता राहुल</title><description>&lt;div class="separator" style="clear: both;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgI56O0u7L-UjCr31-cN68caX059pgZBlSEiqzvnRuSo2KCHH5IxekJfANRzpvFtFTG4tAtEXXvR3k5h3Uwdzz9MVyYzT_wikTdBfdTPywr7aDpP2gMqVAQjbxi5H9u506gvn1AdjVVRylvNjWMRbJQvB49BR02ICRY2VYbllljctkhyzJ7jm2EDIDsb5M/s1047/Screenshot%202024-09-11%20at%2017-52-05%20%27%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%AC%E0%A4%BF%E0%A4%A4%20%E0%A4%B9%E0%A5%81%E0%A4%86%20%E0%A4%B9%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%80%20%E0%A4%96%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%A8%20%E0%A4%95%E0%A5%80%20%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%97%20%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%9C...%27%20%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%96%E0%A5%8B%E0%A4%82%20%E0%A4%AA%E0%A4%B0%20%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B9%E0%A5%81%E0%A4%B2%20%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A7%E0%A5%80%20%E0%A4%95%E0%A5%87%20%E0%A4%AC%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A8%20%E0%A4%B8%E0%A5%87%20%E0%A4%97%E0%A4%A6%E0%A4%97%E0%A4%A6%20%E0%A4%B9%E0%A5%81%E0%A4%86%20%E0%A4%86%E0%A4%A4%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A5%80%20%E0%A4%AA%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A5%82%20-%20gurpatwant%20singh%20pannun%20said%20Our%20demand%20for%20Khalistan%20has%20been%20proven%20justified%20after%20Rahul%20%5B...%5D.png" style="display: block; padding: 1em 0; text-align: center; "&gt;&lt;img alt="" border="0" height="320" data-original-height="1047" data-original-width="950" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgI56O0u7L-UjCr31-cN68caX059pgZBlSEiqzvnRuSo2KCHH5IxekJfANRzpvFtFTG4tAtEXXvR3k5h3Uwdzz9MVyYzT_wikTdBfdTPywr7aDpP2gMqVAQjbxi5H9u506gvn1AdjVVRylvNjWMRbJQvB49BR02ICRY2VYbllljctkhyzJ7jm2EDIDsb5M/s320/Screenshot%202024-09-11%20at%2017-52-05%20%27%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%AC%E0%A4%BF%E0%A4%A4%20%E0%A4%B9%E0%A5%81%E0%A4%86%20%E0%A4%B9%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%80%20%E0%A4%96%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%A8%20%E0%A4%95%E0%A5%80%20%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%97%20%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%9C...%27%20%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%96%E0%A5%8B%E0%A4%82%20%E0%A4%AA%E0%A4%B0%20%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B9%E0%A5%81%E0%A4%B2%20%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A7%E0%A5%80%20%E0%A4%95%E0%A5%87%20%E0%A4%AC%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A8%20%E0%A4%B8%E0%A5%87%20%E0%A4%97%E0%A4%A6%E0%A4%97%E0%A4%A6%20%E0%A4%B9%E0%A5%81%E0%A4%86%20%E0%A4%86%E0%A4%A4%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A5%80%20%E0%A4%AA%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A5%82%20-%20gurpatwant%20singh%20pannun%20said%20Our%20demand%20for%20Khalistan%20has%20been%20proven%20justified%20after%20Rahul%20%5B...%5D.png"/&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;
मित्रों, इन दिनों भारत की जनता एक सवाल से परेशान है और उसका उत्तर ढूंढ रही है कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गाँधी आखिर किसके विपक्ष में हैं मोदी के या भारत के? दरअसल पिछले कई सालों से राहुल गाँधी जब भी विदेश जाते हैं तो भूल जाते हैं कि वो मोदी के खिलाफ बोलने के बजाए भारत के खिलाफ बोल रहे हैं. 
राहुल भूल जाते हैं कि मोदी और भारत अलग-अलग चीज हैं दोनों एक नहीं हैं. माना कि राहुल गाँधी भारत को भारतमाता नहीं मानते लेकिन हैं तो भारत के ही. पहले जब वो सामान्य नागरिक या सांसद के रूप में विदेश की धरती से अपने देश के खिलाफ बोलते थे तब बात दूसरी थी लेकिन अब वो विपक्ष के नेता हैं, एक जिम्मेदार पद पर हैं. और विदेश में जाकर भारत के खिलाफ बोलना और दुश्मन देश चीन की स्तुति करना कहीं से लोकसभा में विपक्ष के नेता को शोभा नहीं देता. 
मित्रों, विपक्ष के नेता अटलजी भी थे, आडवाणी जी थे. उन्होंने हमेशा सिर्फ सत्तारूढ़ दल की खिलाफत की कभी देश की खिलाफत नहीं की. फिर राहुल इस तरह विचित्र व्यवहार क्यों कर रहे हैं?
जब सिखों को विमान तक में कृपाण ले जाने की अनुमति है तो फिर राहुल ने सिखों को लेकर अमेरिका में झूठ क्यों बोला? क्या राहुल अलग खालिस्तान चाहते हैं और अमेरिका भारत तोड़ो यात्रा पर गये थे? जिस तरह गांधी नेहरू ने भारत के तीन टुकड़े किये क्या राहुल भी चाहते हैं कि भारत के अनेक टुकड़े हो जायें? क्या राहुल को भी खालिस्तानियों ने केजरीवाल की तरह अरबों रूपये दिये हैं चीन के साथ तो उनका अग्रीमेंट ही है? 
मित्रों, अंत में मैं उन सभी नेताओं से जो भारत को अपनी पुण्यभूमि नहीं मानते; यह कहना चाहता हूँ कि अगर आपको चीन या पाकिस्तान ज्यादा प्यारा लगता है और भारत से नफरत है तो आप भारत में क्या कर रहे हैं चीन-पाकिस्तान चले क्यों नहीं जाते?&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;मैं एक छोटा सा पत्रकार हूँ, स्वभाव से विद्रोही. मैं विश्वामित्र की तरह एक सामानांतर दुनिया तो बनाना नहीं चाहता हूँ फिर भी इस दुनिया में कुछ बदलाव जरूर चाहता हूँ जो सिर्फ बातें बनाने से नहीं होनेवाला, इसके लिए कुछ कदम उठाने पड़ेंगे.&lt;/div&gt;</description><link>http://brajkiduniya.blogspot.com/2024/09/blog-post.html</link><author>noreply@blogger.com (ब्रजकिशोर सिंह)</author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgI56O0u7L-UjCr31-cN68caX059pgZBlSEiqzvnRuSo2KCHH5IxekJfANRzpvFtFTG4tAtEXXvR3k5h3Uwdzz9MVyYzT_wikTdBfdTPywr7aDpP2gMqVAQjbxi5H9u506gvn1AdjVVRylvNjWMRbJQvB49BR02ICRY2VYbllljctkhyzJ7jm2EDIDsb5M/s72-c/Screenshot%202024-09-11%20at%2017-52-05%20%27%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%AC%E0%A4%BF%E0%A4%A4%20%E0%A4%B9%E0%A5%81%E0%A4%86%20%E0%A4%B9%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%80%20%E0%A4%96%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%A8%20%E0%A4%95%E0%A5%80%20%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%97%20%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%9C...%27%20%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%96%E0%A5%8B%E0%A4%82%20%E0%A4%AA%E0%A4%B0%20%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B9%E0%A5%81%E0%A4%B2%20%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A7%E0%A5%80%20%E0%A4%95%E0%A5%87%20%E0%A4%AC%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A8%20%E0%A4%B8%E0%A5%87%20%E0%A4%97%E0%A4%A6%E0%A4%97%E0%A4%A6%20%E0%A4%B9%E0%A5%81%E0%A4%86%20%E0%A4%86%E0%A4%A4%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A5%80%20%E0%A4%AA%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A5%82%20-%20gurpatwant%20singh%20pannun%20said%20Our%20demand%20for%20Khalistan%20has%20been%20proven%20justified%20after%20Rahul%20%5B...%5D.png" width="72"/><thr:total>0</thr:total></item></channel></rss>