<?xml version='1.0' encoding='UTF-8'?><?xml-stylesheet href="http://www.blogger.com/styles/atom.css" type="text/css"?><feed xmlns='http://www.w3.org/2005/Atom' xmlns:openSearch='http://a9.com/-/spec/opensearchrss/1.0/' xmlns:georss='http://www.georss.org/georss'><id>tag:blogger.com,1999:blog-5371403670818517101</id><updated>2009-10-28T14:41:40.948+05:30</updated><title type='text'>HINDI SEX STORIES</title><subtitle type='html'>हिंदी सेक्स-साइट हिंदी सेक्स कहानियाँ में आपका स्वागत है। हमारी कोशिश है कि इस साइट के माध्यम से आप इन कहानियों का भरपूर मज़ा ले पायेंगे। वैधानिक चेतावनी: यह साइट पूर्ण रूप से व्यस्कों को लिये है। यदि आपकी आयु 18 वर्ष या उससे कम है तो कृपया इस साइट को बंद करके बाहर निकल जायें।
Hindi Sex Stories , Hindi Sexy Aunty , Hindi Lesbian Storeys , Main Or Meri didi, didi Ko Choda , mata ko choda</subtitle><link rel='http://schemas.google.com/g/2005#feed' type='application/atom+xml' href='http://mastjanghu.blogspot.com/feeds/posts/default'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5371403670818517101/posts/default'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://mastjanghu.blogspot.com/'/><link rel='hub' href='http://pubsubhubbub.appspot.com/'/><link rel='next' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5371403670818517101/posts/default?start-index=26&amp;max-results=25'/><author><name>JAI SINGH</name><uri>http://www.blogger.com/profile/01785593676712838482</uri><email>noreply@blogger.com</email></author><generator version='7.00' uri='http://www.blogger.com'>Blogger</generator><openSearch:totalResults>239</openSearch:totalResults><openSearch:startIndex>1</openSearch:startIndex><openSearch:itemsPerPage>25</openSearch:itemsPerPage><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5371403670818517101.post-2611139173593758963</id><published>2009-10-28T14:26:00.005+05:30</published><updated>2009-10-28T14:39:05.946+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='sexy story hindi mein'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='hindi adult stories'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='antarvasna stories'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='Adult stories'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='hindi sex stories'/><title type='text'>दीदी, जीजाजी और पारो-1</title><content type='html'>प्रेषिका - पिंकी सेक्सी  &lt;br /&gt;मेरे परिवार में मैं, पिताजी, माताजी और मुझ से तीन साल बड़ी दीदी हैं, जिनका नाम है शालिनी। मैं और दीदी एक-दूसरे से बहुत प्यार करते हैं। भाई-बहन से अधिक हम दोस्त हैं। हम एक-दूसरे की निजी बातें जानते हैं और मुश्किल में राय भी लेते-देते हैं। सेक्स के बारे में हम काफ़ी खुले विचार के हैं। हालाँकि हमने आपस में चुदाई नहीं की है। जब मैं छोटा था तो वह अक्सर मुझे नहलाती थी। उस वक़्त मात्र कौतूहल से दीदी मेरे लौड़े के साथ खेला करती थी। मुझे गुदगुदी होती थी और लौड़ा कड़ा हो जाता था। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती गई तैसे-तैसे हमारी छेड़-छाड़ बढ़ती चली गई। तब मैं अट्ठारह साल का था और वो इक्कीस साल की। तब तक मैंने उसकी चूचियाँ देख लीं थीं, भोस देख ली थी और उसने मेरा लंड हाथ में लेकर मूठ मार दिया था। चुदाई क्या है, कैसे की जाती है, क्यूँ की जाती है, यह सब मुझे उसी ने सिखाया था।&lt;br /&gt;कहानी शुरु होती है शालिनी की शादी से। पिताजी ने बड़ी धूम-धाम से उसकी शादी की। बारात दो दिनों की मेहमान रही। खाना-पीना, गाना-बजाना सब दो दिनों तक चला। जीजाजी शैलेश कुमार उस वक्त तेईस साल के थे और बहुत ख़ूबसूरत थे। दीदी भी कुछ कम नहीं थी। लोग कहते थे कि बड़ी सुन्दर जोड़ी है।&lt;br /&gt;बारात में एक लड़की थी- पारुल, जीजू की छोटी बहन यानि दीदी की ननद। भाई-बहन भी एक-दूसरे से बहुत प्यार करते थे। पारो पाँच फुट लम्बी, गोरी और पतली थी। गोल चेहरे पर काली-काली बड़ी आँखें थीं। बाल काल और लम्बे थे। कमर पतली थी और नितम्ब भारी थे। कबूतर की जोड़ी जैसे छोटे-छोटे स्तन सीने पर लगे हुए थे। मेरी तरह वो भी बचपन से निकल कर जवानी में क़दम रख रही थी।&lt;br /&gt;क्या हुआ, कुछ पता नहीं, लेकिन पहले दिन से ही पारो मुझसे नाराज़ थी। जब भी मुझसे मिलती तब डोरे निकालती और हुँह -- कहकर मुँह बिचका कर चली जाती थी। एक बार मुझे अकेले में मिली और बोली: तू रोहित है ना? पता है? मेरे भैया तेरी बहन की फाड़ कर रख देंगे।&lt;br /&gt;ऐसी बेहूदी बात सुनकर मुझे गुस्सा आ गया। भला कौन दूल्हा अपनी दुल्हन की झिल्ली तोड़े बिना रहता है? अपने आप पर नियंत्रण रख कर मैंने कहा: तू भी एक लड़की है ना, एक ना एक दिन तेरी भी कोई फाड़ देगा।&lt;br /&gt;वह मुँह लटकाए वहाँ से चली गई।&lt;br /&gt;दीदी ससुराल से तीन दिन बाद आई। मैंने माँ को उसे कहते सुना: डरने की कोई बात नहीं है। कभी-कभी आदमी देर लगाता है। पर सब ठीक हो जाएगा।&lt;br /&gt;अकेली पाकर मैंने उससे पूछा: क्यूँ री? साजन से चुदवा कर आई हो ना? कैसा है जीजू का लंड? बहुत दर्द हुआ था पहली बार?&lt;br /&gt;दीदी: कुछ नहीं हुआ है रोहित। वो पारुल अपने भैया से छूटती नहीं, रोज़ हमारे साथ सोती है। तेरे जीजू ने एक बार अलग कमरे में सोने को कहा तो रोने लगी और हंगामा मचा दिया।&lt;br /&gt;मैं समझ गया। दीदी चुदवाए बिना आई थी। पाँच-सात दिनों के बाद वह पुनः ससुराल चली गई और एक महीने के बाद आई। अबकी बार उसे देख कर मेरा दिल डूब गया। उसके चेहरे पर से नूर उड़ गया था। कम से कम पाँच किलो वज़न घट गया था। आँखों के आसपास काले धब्बे पड़ गए ते। उसका हाल देखकर माँ रो पड़ी। दीदी ने मुझे बताया कि वो अब भी कुँवारी थी। जीजू ने एक बार भी नहीं चोदा था।&lt;br /&gt;मैंने पूछा: जीजू का लंड तो ठीक है ना? खड़ा होता है या नहीं?&lt;br /&gt;दीदी: वो तो ठीक है, नहाते वक्त देखा है मैंने। रात को मौक़ा नहीं मिलता।&lt;br /&gt;मैं: हनीमून पर चले जाओ ना?&lt;br /&gt;दीदी: तेरे जीजू ने यह भी कोशिश की, पर वो भी साथ चलने पर अड़ गई।&lt;br /&gt;मैं: सच कहूँ? तेरी उस ननद को चाहिए एक मोटा-तगड़ा लंड। एक बार चुदवाएगी तो शांत हो जाएगी।&lt;br /&gt;दीदी: तेरे जीजू भी यही चाहते हैं। लेकिन कौन चोदेगा उसे?&lt;br /&gt;मैंने शरारत से कहा: मैं चोद लूँ?&lt;br /&gt;दीदी हँस पड़ी: तू क्या चोदेगा? तेरी तो नुन्नी है, चोदने के लिए लंड चाहिए।&lt;br /&gt;मैंने पाजामा खोल कर मेरा लौड़ा दिखाया और कहा: ये देख, नुन्नी लगती है तुझे? कहे तो अभी खड़ा कर दूँ। देखना है?&lt;br /&gt;दीदी: ना बाबा ना। सलामत रहे तेरा लंड।&lt;br /&gt;मैं: मान लो कि मैंने पारुल को चोद भी लिया, जीजू को पता चले कि मैंने उसे चोदा है तो तुम पर गुस्सा नहीं होंगे?&lt;br /&gt;दीदी: ना, वो भी उससे थक गए हैं। कहते थे कि कोई अच्छा आदमी मिल जाए तो उसे कोई हर्ज़ नहीं है पारुल की चुदाई में।&lt;br /&gt;मैं: तो दीदी, मुझे तेरे घर आने दे। कोशिश करेंगे, क़ामयाब रहे तो सही, वर्ना कुछ नहीं।&lt;br /&gt;दीवाली के दिन आ रहे थे। स्कूल में डेढ़ महीने की छुट्टियाँ पड़ीं। दीदी ने जीजू से बात की होगी क्योंकि उनकी चिट्ठी आई थी पिताजी के नाम जिसमें मुझे दीवाली मनाने अपने शहर में बुलाया था। मैं दीदी के ससुराल चला आया। मुझे मिलकर दीदी और जीजू बहुत ख़ुश हुए। हर वक्त की तरह इस बार भी पारो हुँह कर के चली गई।&lt;br /&gt;जीजू सिविल कोर्ट में नौकरी करते थे और अपने पुरखों के मकान में रहते थे। मकान पुराना था लेकिन तीन मंजिलों वाला बड़ा था। आस-पास दूसरे मकान जो थे वे भी काफी पुराने थे, लेकिन खाली पड़े थे। शहर के बीच होने पर भी जीजू ने काफी एकान्त पाया था।&lt;br /&gt;यहाँ आने के पहले दिन मुझे पता चला कि जीजू के परिवार में वो और पारो दोनों ही थे। कई साल पहले जब उनके माता-पिता का देहान्त हुआ तब पारो छोटी बच्ची थी। उस दिन से जीजू ने पारो को अपनी बेटी की तरह से पाला-पोसा था। उस दिन से ही पारो अपने भैया के साथ सोती थी और इतनी लगी हुई थी कि दीदी के आने पर छूटना नहीं चाहती थी। दीदी की समस्या हल करने का कोई प्लान मैंने बनाया नहीं था। मैं सोचता था कि क्या किया जाए। इतने में जीजू हम सब को एक छोटी सी ट्रिप पर ले गए और मेरा काम बन गया।&lt;br /&gt;शहर से करीब तीस मील दूर गलटेश्वर नाम की एक जगह है, वहीं सागर किनारे एक सदियों पुराना शिव-मन्दिर है, आसपास काफी प्राकृतिक सुन्दरता है। बहुत सारे लोग पिकनिक के लिए वहाँ जाते हैं। आने-जाने में लेकिन सारा दिन लग जाता है।&lt;br /&gt;मैंने एक अच्छा सा कैमरा ख़रीदा था जो मैं हमेशा अपने पास रखता था। इस पिकनिक पर वो ख़ूब काम आया। मैंने जीजू और दीदी की कई तस्वीरें लीं। मैं जानबूझ कर पारो की उपेक्षा करता रहा, उसके जानते हुए भी उसकी एक भी तस्वीर नहीं ली। हाँलाकि मैंने उसकी चार तस्वीरें लीं थी जिसका उसको पता नहीं चला था।&lt;br /&gt;अचानक मेरी नज़र मन्दिर की बाहरी दीवारों पर जो शिल्प था उस पर पड़ी। मैं देखता ही रह गया। वो शिल्प था चुदाई करते हुए युगल का। अलग-अलग पोज़ीशन में चुदाई करती हुई पुतलियाँ इतनी सजीव थीं कि ऐसा लगे कि अभी बोल उठेगीं। जीजू से छुपा-छुपी मैं फटाफट उन शिल्प को तस्वीर खींचने लगा। इतने में दीदी आ गई। चुदाई करते प्रेमी के शिल्प देख वो उदास हो गई।&lt;br /&gt;पारो मुझसे कतराती रही। सारा दिन इधर-उधर घूमे-फिर और शाम को घर आए।&lt;br /&gt;दूसरे दिन मैंने मेरे दोस्त के स्टूडियो में फिल्म्स दे दी। डेवलप और प्रिंट निकालने के लिए तीसरे दिन दीदी और जीजू को कुछ काम के वास्ते बाहर जाना पड़ा, सुबह से गए रात को आने वाले थे। ट्यूशन-क्लास की वज़ह से पारो साथ न जा सकी। दोपहर के दो बजे वो क्लास से आई। फोटो स्टूडियो रास्ते में आता था। इसलिए वो तस्वीरें लेते आई। आते ही उसने पैकेट मेरी ओर फेंका और रसोईघर में चली गई चाय बनाने। मैं इसके पीछे-पीछे गया। अकड़ी हुई मेरी ओर पीठ करके वह खड़ी थी।&lt;br /&gt;मैंने कहा: मेरे लिए भी चाय बनाना।&lt;br /&gt;गुस्से में वो बोली: ख़ुद बना लेना। नौकर नहीं हूँ तुम्हारी।&lt;br /&gt;मैंने पास जाकर उसके कंधे पर हाथ रखा। उसने तुरन्त झिड़क दिया और बोली: दूर रहो मुझसे। छुओ मत। मुझे ऐसी हरक़तें पसन्द नहीं।&lt;br /&gt;मैंने धीरे से कहा: अच्छा बाबा, माफ़ करना। लेकिन ये तो बताओ कि तुम मुझसे इतनी नाराज़ क्यों हो? क्या किया है मैंने?&lt;br /&gt;पारो: अपने आप से पूछिए, क्या नहीं किया है आपने।&lt;br /&gt;मैं: अच्छा बाबा, क्या नहीं किया है मैंने?&lt;br /&gt;अब तक वो मुझ से मुँह फेरे खड़ी थी। पलट कर बोली: बड़े भोले बनते हो। सारी दुनिया की तस्वीरें निकाल लेते हो। यहाँ तक कि वो मंदिर के पत्थरों भी बाक़ी ना रहे। एक में हूँ जिसको तुम टालते रहे हो। मेरी एक भी तस्वीर नहीं खींची तुमने। आपका क़ीमती कैमरा ख़राब हो जाएगा, इतनी बदसूरत हूँ ना मैं?&lt;br /&gt;मैं: कौन कहता है कि मैंने तु्म्हारी तस्वीर नहीं खींची? भला इतनी सुन्दर लड़की पास हो और तस्वीर ना निकाले, ऐसा कौन मूर्ख होगा!&lt;br /&gt;पारो: मुझे उल्लू मत बनाईए। दिखाइए मेरी फोटो।&lt;br /&gt;मैं: पहले चाय पिलाओ।&lt;br /&gt;उसने दोनों के लिए चाय बनाई। चाय पी कर हम मेरे कमरे में गए और तस्वीर देखने बैठे। मैं पलंग पर बैठा था। वो मेरे बगल में आ बैठी। थोड़ी सी दूर। उसने पतले कपड़े की फ्रॉक पहना था जिसके आर-पार अन्दर की ब्रा साफ़ दिखाई दे रही थी। उसके बदन से मस्त खुशबू आ रही थी। सूँघ कर मेरा लौड़ा जागने लगा।&lt;br /&gt;पहले हमने दीदी और जीजू की तस्वीरें देखीं। बाद में पारो की चार तस्वीरें निकलीं। अपनी तस्वीर देखने के लिए वो नज़दीक सरकी। मेरे कंधे पर हाथ रख वो ऐसे बैठी की हमारी जाँघें एक-दूसरे से सट गईं, मैं मेरी पीठ पर उसके स्तन का दबाव महसूस करने लगा। बेचारा मेरा लंड, क्या करे वो? खड़ा होकर सलामी दे रहा था और लार टपका रहा था। बड़ी मुश्किल से मैंने उसे छुपाए रखा।&lt;br /&gt;पारो की चार तस्वीरों में से तीन सीधी-सादी थी जिसमें वो हँसती हुई पकड़ी गई थी। बड़ी प्यारी लगता थी। चौथी तस्वीर में वह नीचे झुकी हुई थी और हवा से दुपट्टा सीने से हट गया था। उसकी चूचियाँ साफ़ दिख रहीं थीं। तस्वीर देखकर वह शरमा गई और बोली: तुम बड़े शैतान हो।&lt;br /&gt;मैं: तो ओर तस्वीर खींचने दोगी?&lt;br /&gt;पारो: हाँ-हाँ लेकिन ये बाक़ी की तस्वीर किसकी है?&lt;br /&gt;मैं: रहने दे। ये तस्वीरें तेरे देखने लायक नहीं है।&lt;br /&gt;पारो: क्या मतलब? नंगी है क्या? देखूँ तो मैं।&lt;br /&gt;इतना कहकर अचानक वो तस्वीर लेने के लिए झपटी। मैंने हाथ हटा लिया। इस छीना-झपटी में वो गिर पड़ी मेरी बाँहों में। वो सँभल जाए इससे पहले मैंने उसे सीने से लगा लिया। झटपट वो सँभल गई। शर्म से उसका चेहरा लाल हो गया, और उसने सिर झुका लिया। मेरे पहलू से लेकिन वो हटी नहीं। मैंने मेरा हाथ उसकी कमर में डाल दिया। ऊँगलियाँ मलते-मलते दबी आवाज़ में वो बोली: क्यों सताते हो? दिखाओ ना।&lt;br /&gt;मेरे पास कोई चारा नहीं था। चुदाई करते हुए शिल्प की तस्वीरें मैं दिखाने लगा। मुस्कुराती हुई दाँतों में ऊँगली चबाती हुई वो देखती रही।&lt;br /&gt;अन्त में बोली: बस? यही था? ये तो कुछ नहीं है, भैया के पास एक किताब है, जिसमें सच्चे आदमी और औरतों की तस्वीरें हैं।&lt;br /&gt;मैं: तुम्हें कैसे मालूम?&lt;br /&gt;पारो: मैंने किताब देखी है, देखनी है तुझे?&lt;br /&gt;मैं: हाँ, हाँ... ज़रूर।&lt;br /&gt;खड़ी होकर वो बोली: चलो मेरे साथ।&lt;br /&gt;अब समस्या यह थी कि मेरा लंड पूरा तन गया था। निकर के बावज़ूद उसने मेरे पाजामे का तम्बू बना रखा था। इस हालत में मैं कैसे चल सकूँ?&lt;br /&gt;मैंने कहा: मैं बैठा हूँ, तू किताब ले आ।&lt;br /&gt;वो किताब ले आई और बोली: एक दिन जब मैं भैया के कमरे की सफाई कर रही थी तब मैंने पलंग के नीचे ये पाई। मेरे ख्याल से भाभी ने भी देखी है।&lt;br /&gt;मैं: दीदी देखे या ना देखे, क्या फ़र्क पड़ेगा? तू जो उनके बीच आ रही है।&lt;br /&gt;पारो: मैं उनके बीच नहीं आ रही हूँ। देख रोहित, भैया मेरे सर्वस्व हैं, और कोई मुझसे उन्हें छीन ले, यह मैं बर्दाश्त नहीं करूँगी। चाहे वह भाभी हो या कोई और।&lt;br /&gt;मैं: अरी पगली, दीदी कहाँ जाएगी तेरे भैया को छीन लेकर? भैया के साथ वो भी तेरी हो जाएगी। कब तक तू कबाब में हड्डी बनी रहेगी?&lt;br /&gt;पारो: मैं जानती हूँ।&lt;br /&gt;मैं: क्या जानती हो?&lt;br /&gt;पारो: कि मेरी वज़ह से भैया वो नहीं कर पाए हैं।&lt;br /&gt;मैं: वो मायने क्या? मैं समझा नहीं।&lt;br /&gt;पारो: ख़ूब समझते हो और भोले बन रहे हो!&lt;br /&gt;वो शरमा रही थी फिर भी बोली: मज़ाक छोड़ो। देखो, मैंने भैया से सिर्फ एक चीज़ माँगी है।&lt;br /&gt;मैं: वो क्या?&lt;br /&gt;उसने नज़रें फेर लीं और बोली: मैंने कहा, एक बार, सिर्फ़ एक बार मुझे देखने दे।&lt;br /&gt;मैं: क्या देखने दे?&lt;br /&gt;पारो: शैतान, जानते हुए भी पूछते हो?&lt;br /&gt;मैं: नहीं जानता मैं साफ़-साफ़ बताओ ना।&lt;br /&gt;पारो: वो, वो जो हर दूल्हा-दुल्हन करते हैं सुहागरात को।&lt;br /&gt;मैं: मुझे ये भी नहीं पता। क्या करते हैं?&lt;br /&gt;पारो: हाय राम, चु... चु... मुझसे नहीं बोला जाता।&lt;br /&gt;मैं: ओह.. .ओ... चुदाई की कह रही हो?&lt;br /&gt;अपना चेहरा छुपा कर सिर हिला कर उसने हाँ कही।&lt;br /&gt;मैं: तुझे दीदी और जीजू की चुदाई देखनी है एक बार, इतना ही!&lt;br /&gt;उसने मुँह फेर लिया और हाँ बोली।&lt;br /&gt;मैं: जीजू ने क्या कहा?&lt;br /&gt;पारो: भाभी ना बोलती है।&lt;br /&gt;मैं: मैं उनको समझाऊँगा। लेकिन एक ही बार, ज्यादा नहीं। और एक बात पूछूँ? उनको चोदते देखकर तुम अगर उत्तेजित हो जाओगी तो क्या करोगी?&lt;br /&gt;पारो: नहीं बताऊँगी तुझे।&lt;br /&gt;मैंने आगे बात ना चलाई। पलंग पर बैठ मैंने उसे पास बुला लिया। वो मेरी बगल में आ बैठी। मैंने किताब उसके हाथ में रख दी। मेरा हाथ उसकी कमर में डाला। उसने किताब खोली।&lt;br /&gt;किताब के पहले पन्ने पर नर्म व खड़े लौड़ों के चित्र थे। देखकर पारो बोली: ऐसा ही होता है। क्या बोलें इसको? शिश्न? मैंने देखा है।&lt;br /&gt;मेरा लंड ठुमके ले रहा था। मैंने कहा: इसको लौड़ा कहते हैं और इसको लंड। कहाँ देखा है तुमने?&lt;br /&gt;वो फिर शरमाई और बोली: किसी को ना कहने का वचन दे।&lt;br /&gt;मैं: वचन दिया।&lt;br /&gt;पारो: मैंने भैया का देखा है, कैसे वो बाद में बताऊँगी।&lt;br /&gt;मेरा हाथ उसकी पीठ सहलाने लगा। वो मेरे और निकट आई। हम दोनों उत्तेजित हो चले थे, लेकिन उस वक्त हमें इसका भान नहीं था।&lt;br /&gt;दूसरे पन्ने पर बन्द और चौड़ी की हुई चूत की तस्वीरें थीं।&lt;br /&gt;जानबूझ कर मैंने पूछा: ये भी ऐसी ही होती है क्या? क्या कहते हैं उसे?&lt;br /&gt;सिर झुका कर वो बोली: भोस। ऐसी ही होती है भाभी की भी ऐसी ही होगी।&lt;br /&gt;मैं: तेरी कैसी है? देखने देगी मुझे?&lt;br /&gt;पारो: तुम जो तुम्हारा दिखाओ तो मैं मेरी दिखाऊँगी।&lt;br /&gt;मैं खड़ा हो गया। नाड़ा खोल पाजामा उतारा और लंड को आज़ाद किया।&lt;br /&gt;थोड़ी देर वो ताज्ज़ुब होकर देखती रही, फिर बोली: मैं छू सकती हूँ?&lt;br /&gt;मैं: क्यों नहीं?&lt;br /&gt;ऊँगलियों के नोक से उसने लंड छुआ। कोमल उँगलियों का हल्का स्पर्श पाकर लंड और कड़ा हो गया और ठुमके लेने लगा।&lt;br /&gt;पारो: ये तो हिलता है।&lt;br /&gt;मैं: क्यूँ नहीं? तुझे सलाम कर रहा है।&lt;br /&gt;पारो: धत्त।&lt;br /&gt;मैं: मुट्ठी में ले तो ज़रा।&lt;br /&gt;उसने मुट्ठी से लंड पकड़ा तो ठुमक-ठुमक करके वो अधिक कड़ा हो गया।&lt;br /&gt;उसकी मदहोशी बढ़ने लगी, साँसें तेज़ चलने लगी, चेहरा लाल हो गया।&lt;br /&gt;वो बोली: हाय रे, इतना कड़ा क्यों हुआ है? दर्द नहीं होता ऐसे तन जाने से?&lt;br /&gt;मैं: ऐसे कड़ा ना हो तो चूत में कैसे खुस सके और कैसे चोद सके?&lt;br /&gt;पारो: ये तो लार भी निकालता है।&lt;br /&gt;वाकई मेरा लंड अपनी लार से गीला हो चला था।&lt;br /&gt;मैं: ये लार नहीं है, अपनी प्यारी चूत के लिए वो आँसू बहा रहा है।&lt;br /&gt;मुट्ठी से लंड दबोच कर वो बोली: रोहित, बड़ा शैतान है तू।&lt;br /&gt;मैंने उसे बाँहों में भर लिया और कहा: ऐसे-ऐसे मुठ मार।&lt;br /&gt;वो डरते-डरते मुठ मारने लगी। उसके गोरे-गोरे गाल पर मैंने हल्के से चूमा और कहा: मज़ा आता है ना?&lt;br /&gt;जवाब में उसने मेरे गालों पर भी चूम लिया।&lt;br /&gt;मैं: अब सोच, जब ये चूत में घुसकर ऐसा करे तब कितना आनन्द आता होगा।&lt;br /&gt;वो बोली: नहीं, और उसने मुट्ठी से लंड मसल डाला।&lt;br /&gt;मैंने लंड छुड़ा कर कहा: अब तेरी बारी।&lt;br /&gt;शरमाती हुई वो खड़ी हो गई। फ्रॉक के नीचे हाथ डाल कर कच्छी निकालने लगी। मैंने कहा: ऐसे नहीं, पलंग पर लेट जा।&lt;br /&gt;वो चित्त लेट गई। शरम से नज़रें चुराकर उसने फ्रॉक ऊपर उठाया।&lt;br /&gt;उसकी गोरी-गोरी चिकनी जाँघें खुली हुई देखकर मेरे लंड फनफनाने लगा। उसने सफ़ेद पैन्टी पहनी थी। भोस के पानी से पैन्टी गीली होकर चिपक गई थी। कुल्हे उठाकर उसने पैन्टी उतारी। तुरन्त उसने हाथ भोस से ढँक दी।&lt;br /&gt;मैंने कहा: ऐसे छुपाओगी तो कैसे देख पाऊँगा?&lt;br /&gt;उसकी कलाई पकड़ कर मैंने उसके हाथ हटा दिए, उसकी छोटी सी भोस मेरे सामने आई।&lt;br /&gt;काले घुँघराले झाँट से ढँकी उसकी भोस छोटी थी। मोन्स उँची थी। बड़े मोटे होंठ थे और एक दूजे से लगे हुए थे। तीन इंच लम्बी दरार चिकने पानी से गीली हुई थी। मैंने हल्के से छुआ। तुरन्त उसने मेरा हाथ हटा दिया। मैंने कहा: तूने मेरा लंड पकड़ा था, अब मुझे तेरी छूने दे।&lt;br /&gt;मैंने फिर भोस पर हाथ रखा। उसने मेरी कलाई पकड़ ली लेकिन विरोध किया नहीं। ऊँगलियों से बड़े होते चौड़े कर मैंने भोस का भीतरी हिस्सा देखा। किताब में दिखाई थी, वैसी ही पारो की भोस थी। जवान कुँवारी लड़की की भोस मैं पहली बार देखा था। छोटे होंठ नाज़ुक और पतले और साँवली रंग के थे। दरार के अगले कोने में एक इंच लम्बी कड़ा सा भग्न था। भग्न का छोटा मत्था चेरी जैसा दिखाई दे रहा था। दरार के पिछले हिस्से में था, चूत का मुँह जो गीला-गीला हुआ था। मैंने ऊँगली के हल्के स्पर्श से दरार को टटोला। जैसे मैंने भग्न को छुआ वो झटके से कूद पड़ी। मैंने चूत का मुँह छुआ और एक ऊँगली अन्दर डाली। ऊँगली योनि-पटल तक जा पहुँची।&lt;br /&gt;हम दोनों काफी उत्तेजित हो गए थे। उसने आँखें बन्द कर ली थीं। मुझे यहाँ तक याद है कि अपनी बाँहें लम्बी कर उसने मुझे अपने बदन पर खींच लिया था। इसके बाद क्या हुआ और कैसे हुआ वो मुझे याद नहीं। वो जब चीख पड़ी, तब मुझे होश आया कि मैं उसके ऊपर लेटा था और मेरा लंड झिल्ली तोड़कर आधा चूत में घुस गया था। वो मुझे धकेल कर कहने लगी: उतर जाओ, उतर जाओ, बहुत दर्द होता है।&lt;br /&gt;मैंने उसके होंठ चूमे और कहा: ज़रा धीरज धर, अभी दर्द कम हो जाएगा।&lt;br /&gt;वो बोली: तू क्या कर रहा है? मुझे चोद रहा है?&lt;br /&gt;मैं: ना, हम एक-दूज़े को चोद रहे हैं।&lt;br /&gt;पारो: मुझे गर्भ लग जाएगा तो?&lt;br /&gt;मैं: कब आई थी तेरी माहवारी?&lt;br /&gt;पारो: आज-कल में आनी चाहिए।&lt;br /&gt;मैं: तब तो डरने की कोई बात नहीं है। कैसा है अब दर्द?&lt;br /&gt;पारो: कम हो गया है।&lt;br /&gt;मैं: बाक़ी रहा लंड डाल दूँ अब?&lt;br /&gt;वो घबड़ा कर बोली: अभी बाकी है? फिर से दुखेगा!&lt;br /&gt;मैं: नहीं दुखेगा। तू सिर उठा कर देख, मैं हौले-हौले डालूँगा।&lt;br /&gt;मैं हाथों के बल थोड़ा उठा। वो हमारे पेटों के बीच से देखने लगी। हल्के दबाव से मैंने पूरा लंड उसकी चूत में उतार दिया।&lt;br /&gt;अब हुआ ये कि मेरी उत्तेजना बहुत बढ़ गई थी। दीदी के घर आ कर मूठ मारने का मौक़ा मिला नहीं था। बड़ी मुश्किल से मैं अपने-आप को झड़ने से रोक पा रहा था। ऐसे में पारो ने चूत सिकोड़ी। मेरा लंड दब गया। फिर क्या कहना? दन-दना-दन धक्के शुरु हो गए, मैं रोक नहीं पाया। पारो की परवाह किए बिना मैं चोदने लगा और आठ-दस धक्कों में झड़ पड़ा।&lt;br /&gt;उसने पाँव लम्बे किए और मैं उतरा। उसने भोंस पर पैन्टी दबा दी। चूत से खून के साथ मिला हुआ ढेर सारा वीर्य निकल पड़ा। बाथरूम में जाकर हमने सफाई कर ली।&lt;br /&gt;वो रोने लगी, मैंने उसे बाँहों में भर लिया, मुँह चूमा और गाल पर हाथ फिराया। वो मुझसे लिपट कर रोती रही।&lt;br /&gt;मैं: क्यूँ रोती हो? अफ़सोस है मुझ से चुदाई की, इस बात का?&lt;br /&gt;मेरे चेहरे पर हाथ फिरा कर बोली: ना, ऐसा नहीं है।&lt;br /&gt;मैं: बहुत दर्द हुआ? अभी भी है?&lt;br /&gt;पारो: अभी नहीं है, उस वक्त बहुत दर्द हुआ। मुझे लगा कि मेरी... मेरी... चूत फटी जा रही है। लेकिन तू इतनी जल्दी में क्यूँ था? तेरा बदन अकड़ गया था और तूने मुझे भींच डाला था। और तेरे ये.... ये... लंड कितना मोटा हो गया था? क्या हुआ था तुझे?&lt;br /&gt;मैं: इसे स्खलन कहते हैं। उस वक्त आदमी सबकुछ भूल जाता है और अद्भुत आनन्द महसूस करता है।&lt;br /&gt;पारो: लड़कियों के साथ ऐसा नहीं होता?&lt;br /&gt;मैं: क्यूँ नहीं। तुझे मज़ा नहीं आया?&lt;br /&gt;पारो: तू चोदने लगा तो भोस में मीठी सी गुदगुदी होने लगी थी, लेकिन तू रुक गया।&lt;br /&gt;मैं: अगली बार चोदेंगे तब मैं तुम्हें भी स्खलित करवाऊँगा।&lt;br /&gt;पारो: अभी करो ना। देखो तेरा ये फिर से खड़ा होने लगा है।&lt;br /&gt;मैं: हाँ, लेकिन तेरी चूत का घाव अभी हरा है, मिटने तक राह देखेंगे, वर्ना फिर से दर्द होगा और ख़ून निकलेगा।&lt;br /&gt;शेष अगले भाग में …&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5371403670818517101-2611139173593758963?l=mastjanghu.blogspot.com'/&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://mastjanghu.blogspot.com/feeds/2611139173593758963/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='https://www.blogger.com/comment.g?blogID=5371403670818517101&amp;postID=2611139173593758963&amp;isPopup=true' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5371403670818517101/posts/default/2611139173593758963'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5371403670818517101/posts/default/2611139173593758963'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://mastjanghu.blogspot.com/2009/10/1_28.html' title='दीदी, जीजाजी और पारो-1'/><author><name>JAI SINGH</name><uri>http://www.blogger.com/profile/01785593676712838482</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:extendedProperty xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' name='OpenSocialUserId' value='15234607527984438017'/></author><thr:total xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5371403670818517101.post-7611172599864500529</id><published>2009-10-28T14:26:00.004+05:30</published><updated>2009-10-28T14:38:35.157+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='sexy story hindi mein'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='hindi adult stories'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='antarvasna stories'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='Adult stories'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='hindi sex stories'/><title type='text'>दीदी, जीजाजी और पारो-2</title><content type='html'>प्रेषिका - पिंकी सेक्सी &lt;br /&gt;प्रथम भाग से आगे …&lt;br /&gt;पारो: अभी करो ना। देखो तेरा ये फिर से खड़ा होने लगा है।&lt;br /&gt;मैं: हाँ, लेकिन तेरी चूत का घाव अभी हरा है, मिटने तक राह देखेंगे, वर्ना फिर से दर्द होगा और ख़ून निकलेगा।&lt;br /&gt;मेरा लंड फिर से तन गया था। पारो ने उसे मुट्ठी में थाम लिया और बोली: होने दो जो होवे सो। मुझे ये चाहिए।&lt;br /&gt;मैं ना कैसे कहूँ भला? मुझे भी चोदना था। मैंने किताब निकाली। इनमें एक तस्वीर ऐसी थी जिसमें आदमी नीचे लेटा था और औरत उसकी जाँघों पर बैठी थी। मैंने ये तस्वीर दिखाकर कहा: तू ऐसा बैठ सकोगी?&lt;br /&gt;पारो: हाँ, लेकिन इसमें आदमी का वो कहाँ है?&lt;br /&gt;मैं: वो औरत की चूत में पूरा घुसा है, इसलिए दिखाई नहीं देता। आ जा।&lt;br /&gt;मैं चित्त लेट गया। अपने पाँव चौड़े कर वो मेरी जाँघों पर बैठ गई, मैंने लंड सीधा पकड़ रखा था। उसने चूत लंड पर टिकाई। आगे सिखाने की ज़रूरत नहीं थी. कूल्हे गिरा उसने लंड चूत में ले लिया। लंड और चूत दोनों गीले थे इसलिए कोई दिक्कत ना हुई। पूरा लंड घुस जाने पर वो रुकी। लंड ने ठुमका लगाया। उसने चूत सिकोड़ी। नितम्ब उठा गिरा कर वो चोदने लगी।&lt;br /&gt;चौड़े किए गए भोस के होंठ और बीच में तने भग्नों को मैं देख सकता था। मैंने अँगूठा लगाकर उसके भग्न सहलाए। आठ-दस धक्के में वो थक गई और मुझ पर ढल पड़ी।&lt;br /&gt;लंड को चूत में दबाए रख मैंने उसे बाँहों में भर लिया और पलट कर ऊपर आ गया। तुरन्त उसने जाँघें पसारीं और ऊपर उठा लीं। दो-तीन धक्के मार कर मैंने पूछा: दर्द होता है?&lt;br /&gt;पारो ने ना कही। मैं धीरे-गहरे धक्के से चोदने लगा। पूरा लंड निकालता था और घकच्च से डाल देता था। पारो अपने नितम्ब हिलाने लगी और मुँह से सी... सी... सी... करने लगी। योनि में फटाके होने लगे। मैंने धक्के की रफ्तार बढ़ाई।&lt;br /&gt;वो बोली: उसस्सससस्सस... उस्सस्सससस मुझे कुछ हो रहा है रोहित, ज़ोर से चोदो मुझे।&lt;br /&gt;मैं घचा छच्च्चच, घचा घच्चचचच धक्के से उसे चोदने लगा।&lt;br /&gt;अचानक वह झड़ पड़ी। पर मैं रुका नहीं, धक्के देता चला। वो बेहोश सी हो गई। झड़ना शान्त होने पर उसकी चूत की पकड़ कम हुई। मैंने अब धीरे से पाँच-सात गहरे धक्के लगाए और अन्त मे लंड को चूत की गहराई में पेल कर ज़ोर से झड़ा।&lt;br /&gt;एक-दूसरे से लिपट कर हम दोनों थोड़ी देर तक पड़े रहे। इतने में दीदी और जीजू आ गए। फटाफट हमने ताश की बाज़ी टेबल पर लगा दी। जब जीजू ने पूछा कि हमने क्या किया तो पारो ने फिर मुँह बिचकाया- हुँह... कहते हुए।&lt;br /&gt;मैंने कहा: हम ताश खेल रहे थे, पारो एक बार भी नहीं जीती।&lt;br /&gt;रात का खाना खाकर सब सो गए। आज पहली बार पारुल अपने भैया से अलग कमरे में सोई। मैं बिस्तर पर पड़ा, लेकिन नींद नहीं आई। सोचने लगा, क्या मैंने पारो को चोदा था, या कोई सपना था? उसकी चूत याद आते ही नर्म लौड़ा उठने लगता था और उसमें हल्का सा मीठा दर्द होता था। दर्द से फिर लौड़ा नर्म पड़ जाता था। इससे तसल्ली हुई कि वाक़ई मैंने पारो को चोदा ही था।&lt;br /&gt;और दीदी और जीजू सारा दिन कहाँ गए थे? वापस आने पर दीदी इतनी खुश क्यूँ दिखाई दे रही थी। उसके चेहरे पर निखार क्यूँ आ गया था? जीजू भी कुछ गुनगुना रहे थे। और आज की रात जब पारो बीच में नहीं है तो जीजू दीदी को चोदे बिना छोड़ेंगे नहीं। मुझे पारो की भोस याद आ गई। दीदी की ऐसी ही थी ना? जीजू का लंड कैसा होगा? पारो को चोदने का मौक़ा कब मिलेगा? विचारों की धारा के साथ मेरा हाथ भी लंड पर चलता रहा। दीदी की और पारो की चुदाई सोचते-सोचते मैं झड़ पड़ा। नींद कब आई उसका पता न चला।&lt;br /&gt;दूसरे दिन जीजू को तीन दिन वास्ते बाहर गाँव जाना हुआ। मैंने दीदी से पूछा कि वो लोग कहाँ गए थे। मुस्कुराती हुई वो बोली: रोहित, ये सब तेरी वज़ह से हो सका। तू था तो पारो ने हमें अकेले जाने दिया। हम गए थे अहमदाबाद। एक अच्छी सी होटल में। सारा दिन खाया-पिया, इधर-उधर घूमे और...&lt;br /&gt;मैं: ... और जो भी किया, चुदाई की या नहीं?&lt;br /&gt;जवाब में उसने चोली नीची करके आधे स्तन दिखाए। चोट लगी हो, वैसे धब्बे पड़े हुए थे। जीजू ने बेरहमी से स्तन मसल डाले थे।&lt;br /&gt;मैं: कितनी बार चोदा जीजू ने?&lt;br /&gt;दीदी मुझ से बड़ी थी फिर भी शरमाई और बोली: तुझे क्या? तूने क्या किया सारा दिन?&lt;br /&gt;मैंने सारी बात बता दी। पारो को मैंने चोदा, यह जानकर वह इतनी खुश हुई कि मुझसे लिपट गई और गालों पर चूमने लगी।&lt;br /&gt;मैंने पूछा- क्यूँ। वो पारो को अपनी चुदाई देखने ना कहती थी।&lt;br /&gt;वो बोली: तेरे जीजू अपनी बहन से शरमाते हैं। कहते हैं कि वो देखेगी तो उनका वो खड़ा नहीं हो पाएगा।&lt;br /&gt;मुझे इस उलझन का रास्ता निकालना था। सबसे पहले मैंने जाकर दीदी का बेडरूम देखा। कमरा बड़ा था। एक ओर पलंग था, दूसरी ओर चौड़ी सीट थी। पलंग के सामने वाली दीवार में एक बन्द दरवाड़ा था। दरवाड़े पर एक बड़ा आईना लगा हुआ था। आईने की वज़ह साफ थी। सीट के सामने बड़ी स्क्रीन वाली टीवी थी, वीडियो-प्लेयर और सीडी-प्लेयर के साथ। एक कोने में बाथरूम का दरवाज़ा था।&lt;br /&gt;मैंने मकान की टूर लगाई बेडरूम की बगल में एक छोटी सी कोठरी पाई। कोठरी में फालतू सामान भरा था। एक दूसरा दरवाज़ा बन्द था जो मेरे ख़्याल से बेडरूम में खुलता था। मैंने चाकू निकाला और बन्द दरवाज़े की पैनल में एक सुराख़ बना दिया। दरवाज़ा पुराना होने से सुराख़ बनाने में देर ना लगी। मैंने झाँका तो दीदी का बेडरूम साफ़ दिखाई दिया। मेरा काम हो गया।&lt;br /&gt;मैं अब जीजू के लौट कर आने की राह देखने लगा। इसी बीच मैंने वो किताब ठीक से पढ़ ली। काफ़ी जानकारी मिली। कच्ची कुँवारी को चोदने के लिए कैसे गरम किया जाय, वहाँ से लेकर तीन बच्चों की शादीशुदा माँ कैसे झड़वाया जाए, वो सब तस्वीरों के साथ उसमें लिखा था। रोज़ किताब पढ़कर मैं हस्तमैथुन करता रहा, क्यूँकि पारो मुझसे दूर रहती थी।&lt;br /&gt;एक दिन पारो को एकांत पा कर किस करके मैंने कहा: चल कुछ दिखाऊँ। हाथ पकड़ कर मैं उसे कोठरी में ले गया और सुराख़ दिखाई। उसने आँख लगाकर देखा तो दंग रह गई।&lt;br /&gt;मैंने कहा: जीजू आएँगे, उसी दिन दीदी को चोदेंगे। तू रात को यहाँ आ जाना, चुदाई देखने मिलेगी। &lt;br /&gt;मैं दीदी से कहूँगा कि वो रोशनी बन्द ना करे।&lt;br /&gt;मेरे गाल पर चिकोटी काट कर वो बोली: बड़ा शैतान है तू।&lt;br /&gt;मैं उसे चूमने गया, तब ठेंगा दिखा कर वह भाग गई।&lt;br /&gt;जीजू शुक्रवार को आए। दूसरे दिन शनिवार था। जीजू सिनेमा के अन्तिम शो की टिकटें ले आए। दीदी ने मुझे पारो के साथ बिठाने का प्रयत्न लेकिन वो नहीं मानी। मुझे जीजू के साथ बैठना पड़ा।&lt;br /&gt;फिल्म बहुत सेक्सी थी। जीजू एक हाथ से दीदी की जाँघ सहलाते रहे। दीदी का हाथ जीजू का लंड टटोल रहा था। शो छूटने के बाद जब घर वापस आए, तब रात के बारह बजे थे।&lt;br /&gt;सिनेमा देखने से मैं काफ़ी उत्तेजित हो गया था। मुझे ये भी पता था कि आज की रात जीजू दीदी को चोदे बिना नहीं छोड़ने वाले थे। मैं सोचने लगा कि वो कैसे चोदेंगे, और मुझसे रहा नहीं गया। मैंने किताब निकाली और एक अच्छी सी तस्वीर देखते हुए मैंने मुठ मार ली।&lt;br /&gt;बाद में मैं दबे पाँव कोठरी में पहुँचा। सुराख़ में से देखा तो बेडरूम में रोशनी जल रही थी। जीजू नंगे बदन पलंग पर बैठे थे और लौड़ा सहला रहे थे। इतने में बाथरूम से दीदी निकली। उसने ब्रा और पैन्टी पहनी हुई थी। आकर वो सीधी जीजू की गोद में बैठ गी, उनकी ओर पीठ करके। जीजू ने आईने के ओर ईशारा करके कान में कुछ कहा। दीदी ने शरमा कर अपनी आँखों पर हाथ रख दिए जैसे ही दीदी के हाथ ऊपर उठे, जीजू ने ब्रा में क़ैद उसके स्तनों को थाम लिया। दीद उनके ऊपर ढल पड़ी और ऊँगलियों के बीच से आईने में अपना प्रतिबिम्ब देखने लगी।&lt;br /&gt;जीजू ने हुक खोल कर ब्रा निकाल दी और दीदी के नंगे स्तनों को सहलाने लगे। दीदी के स्तन इतने बड़े होंगे ये मैंने सोचा ना था। जीजू की हथेलियों में समाते ना थे। स्तन के मध्य में बादामी रंग का गहरा घेरा और उसके बीचों-बीच घुण्डी थी। आईने में देखते हुए जीजू घुण्डियों को मसल रहे थे। दीदी ने सिर घुमा कर जीजू के मुँह से मूँह चिपका दिया। जीजू का एक हाथ दीदी के पेट पर उतर आया। दीदी ने ख़ुद की जाँघें उठाईं और चौड़ी कर दीं।&lt;br /&gt;इतने में पारो आ गई। मैंने इशारे से कहा कि सुराख़ में देख। वो आगे आ गई और आँख लगाकर देखने लगी। मैं उसके पीछ सटकर खड़ा हो गया। मैंने मेरा सिर उसके कंधे पर रख दिया। धीरे से मैंने - दीदी की भोस दिख रही है? तेरे जैसी है ना? आकार में ज़रा बड़ी होगी। मेरे हाथ पारो की कमर पर थे। हौले-हौले मेरा हाथ पेट पर पहुँचा और वहाँ से स्तन पर।&lt;br /&gt;पारो ने नाईटी पहनी थी। अन्दर ब्रा नहीं थी। बड़ी मौसम्बी के आकार के स्तन मेरी हथेलियों में समा गए। दबाने से दबे नहीं, ऐसे कड़े स्तन थे। नाईटी के आर-पार कड़ी घुण्डियाँ मेरी हथेलियों में चुभ रहीं थीं। वो दीदी की चुदाई देखती रही और मैं स्तन से खेलता रहा। थोड़ी देर बाद मैंने उसे हटाया और नज़र लगाई।&lt;br /&gt;दीदी अब पलंग पर चित पड़ी थी। ऊपर उठाई हुई और चौड़ी की हुई उसकी जाँघों के बीच जीजू धक्का दे रहे थे। कुल्हे उछाल कर दीदी जवाब दे रही थी। आईने में देखने के लिए जीजू ने मुद्रा बदली। अब दीदी का सिर आईने की ओर हुआ। जीजू फिर से जाँघों के बीच गए और दीदी को चोदने लगे। इस बार चूत में आता-जाता उनका लंड साफ़ दिखाई दे रहा था। मैंने फिर पारो को देखने दिया।&lt;br /&gt;मेरा लंड कब का तन गया था और पारो के कुल्हों के बीच दबा जा रहा था। पेट पर से मेरा हाथ उसके पाजामे के अन्दर घुसा। पारो नें मेरी कलाई पकड़ कर कहा: यहाँ नहीं, तेरे कमरे में जाकर करेंगे। मैंने हाथ निकाल लिया लेकिन पाजामे के ऊपर से भोस सहलाने लगा। पारो खेल देखती हुई नितम्ब हिलाने लगी। थोड़ी देर बाद सुराख़ से हटकर बोली: खेल खत्म, ओह रोहित, मुझे कुछ हो रहा है। मुझे से खड़ा नहीं जा रहा।&lt;br /&gt;मैं पारो को वहीं की वहीं चोद सकता था। लेकिन मैंने ऐसा नहीं किया। मुझे अबकी बार पारो को आराम से चोदना था। थोड़ी देर पहले ही मैंने मूठ मार ली थी इसलिए मैं अपने आप पर नियंत्रण रख सका।&lt;br /&gt;मैंने उसकी कमर पकड़ कर सहारा दिया। वो मुझ पर ढल पड़ी। मैंने उसे बाँहों में उठा लिया और मेरे कमरे में ले गया। पलंग पर बैठ मैंने उसे गोद में ले लिया।&lt;br /&gt;मैंने कहा: देखी भैया-भाभी की चुदाई?&lt;br /&gt;उसकी आँखें बन्द थीं। अपनी बाँहें मेरे गले में डालकर वो बोली: भैया का वो कितना बड़ा है! फिर भी पूरा भाभी की चूत में घुस जाता था ना?&lt;br /&gt;मैंने कहा: तेरी चूत में भी ऐसे ही गया था मेरा लंड, याद है?&lt;br /&gt;पारो: क्यों नहीं? इतना दर्द जो हुआ था।&lt;br /&gt;मैं: अबकी बार दर्द नहीं होगा। चोदने देगी ना मुझे?&lt;br /&gt;अपना चेहरा मेरी ओर घुमा कर वो बोली: शैतान, ये भी कोई पूछने की बात है?&lt;br /&gt;पारो का कोमल चेहरा पकड़ कर मैंने होंठ से होंठ छू लिए, इसने चूमने दिया। मैंने अब होंठ से होंठ दबा दिए। उसके कोमल पतले होंठ बहुत मीठे लगते थे। थोड़ी देर कुछ किए बिना होंठ चिपकाए रखे। बाद में जीभ निकाल कर उसके होंठ चाटे और चूसे। मैंने कहा: ज़रा मुँह खोल।&lt;br /&gt;डरते-डरते उसने मुँह खोला। मैंने उसके होंठ चाटे और जीभ उसके मुँह में डाली। तुरन्त उसने चूमना छोड़ दिया और बोली: छिः छिः ऐसा गन्द क्यूँ कर रहे हो?&lt;br /&gt;मैं: इसे फ्रेंच किस कहते हैं। इसमें कुछ गन्द नहीं है। ज़रा सब्र कर और देख, मज़ा आएगा। खोल तो मुँह।&lt;br /&gt;अबकी बार उसने मुँह खोला, तब मैंने जीभ लंड की तरह कड़ी कर ली और उसके मुँह में डाली। अपने होंठों से उसने पकड़ ली। अन्दर-बाहर करके जीभ से मैंने उसका मुँह चोदा। मुँह में जाकर मेरी जीभ चारों ओर घूम गई। तब मैंने मेरी जीभ वापस ली। फिर उसने ठीक इसी तरह अपनी जीभ से मेरा मुँह चोदा। मेरा लंड फिर तन गया, उसकी साँसें तेज़ चलने लगी।&lt;br /&gt;चूमते हुए मेरे हाथ स्तन पर उतर आए। पाजामा तो हमने उतार दिया था। कमीज़ बाकी थी। देर किए बिना मैंने फटाफट हुकों को खोलकर कमीज़ उतार फेंकी। उसने मेरी कमीज़ के बटन खोल डाले। मैंने मेरी कमीज़ उतार दी। अब हम दोनों नंगे हो गए। शरम से उसने एक हाथ से चेहरा ढँक लिया, दूसरा चूत पर रख लिया। स्तन खुले हुए थे। मेरे हाथों ने नंगे स्तन थाम लिए।&lt;br /&gt;क्या स्तन पाए थे उसने। बड़े आकार की मौसम्बी जैसे गोल-गोल। पारो के कुँवारे स्तन कड़े थे। मुलायम चिकनी त्वचा के नीचे खून की नीली नसें दिखाई दे रहीं थीं। बिल्कुल मध्य में एक इंच का गहरा घेरा था जिसके बीच छोटी सी कोमल घुण्डी थी। घेरा और घुण्डी बादामी रंग के थे और ज़रा सा उभर आए थे। उसका स्तन मेरी हथेली में ऐसे बैठ गया जैसे कि मेरे लिए ही बनाया हो।&lt;br /&gt;स्तन को छूते ही दबोच लेने का दिल हुआ। लेकिन वो किताब की पढ़ाई याद आई। ऊँगलियों की नोक से पहले स्तनों को सहलाया। बाहरी भाग से शुरु करके स्तन के मध्य में लगी हुई घुण्डियों की ओर ऊँगलियाँ चलाईं। उसके बदन पर रोएँ खड़े हो गए। हौले से मैंने स्तन हथेली में भर लिया और दबाया। रुई के गोले जैसा नर्म होने पर भी उसके स्तन दबाए नहीं जा रहे थे, उत्तेजना से बहुत ही कड़े हो गए थे। छोटी सी घुण्डी सिर उठाए खड़ी थी। च्यूँटी में लेकर मैंने दोनों घुण्डियों को मसल दिया। पारों के मुँह से लम्बी आह निकल पड़ी।&lt;br /&gt;मैंने उसे लिटा दिया। मैं बगल में लेट गया। वो मुझसे लिपट गई। मैंने मेरे होंठ घुण्डी से चिपका दिए। उसकी उँगलियाँ मेरे बालों में घूमने लगीं। एक-एक कर मैंने दोनों घुण्डियाँ काफी देर तक चूसीं। पारे ने मेरी घुण्डियाँ तलाश निकाली। जब मैंने उसकी घुण्डियाँ छोड़ दीं, तब उसने मेरी घुण्डियों को होंठों के बीच लेकर चूसीं। घुण्डियों से निकला करंट लंड तक पहुँच गया। लंड अधिक अकड़ कर लार बहाने लगा।&lt;br /&gt;मैंने उसे चित्त लिटा दिया। हमारे मुँह फिर फ्रेंच किस में जुट गए। स्तन छोड़ करक मेरा हाथ उसके सपाट पेट पर उतर आया और भोस की ओर चला। जब मैंने नाभि को छुआ, उसे गुदगुदी हुई, वो छटपटाई और उस के पाँव ऊपर उठ गए।&lt;br /&gt;मैंने उस किताब में पढ़ा था कि नई-नवेली दुल्हन किशोरी को लंड से दूर रखना चाहिए, ताकि उत्तेजित होने से पहले वह लंड देखकर घबरा न जाए। पारो तीन बार मेरा लंड पकड़ चुकी थी और अब उत्तेजित भी हो गई थी। इसलिए मैं रुका नहीं। उसका दाहिना हाथ पकड़ कर मैंने लंड पर रख दिया।&lt;br /&gt;वो डरी नहीं, लंड पकड़ लिया। लेकिन आगे क्या करना, उसे पता नहीं था। वो लंड को पकड़े रही, कुछ भी किए बिना। फिर भी उसकी कोमल ऊँगलियों का स्पर्श मुझे बहुत मीठा लगता था। लंड अधिक कड़ा हो गया, ठुमके लगाने लगा और भरपूर लार बहाने लगा। मैंने उसकी कलाई पकड़ कर दिखाया कि मूठ कैसे मारी जाती है। धीरे-धीरे वो मूठ मारने लगी।&lt;br /&gt;मुट्ठी से लंड दबोच कर वो बोली: कितना बड़ा और मोटा है तेरा ये? लोहे जैसा कठोर भी है, तुझे दर्द नहीं होता?&lt;br /&gt;मैं: कड़ा ना हो, तो चूत में कैसे घुस पाएगा? मोटा और बड़ा है तेरी चूत के लिए।&lt;br /&gt;पारो: मुझे तो पकड़ने से ही झुरझुरी हो जाती है।&lt;br /&gt;उधर मेरा हाथ भोस पर पहुँच गया था। मेरी ऊँगलियाँ भोस की दरार में उतर पड़ीं। भोस ने भी भरपूर रस बहाया था और चारों ओर गीली-गीली हो गई थी। हल्के स्पर्श से मैंने भोस सहलाई। पारो ने पाँव उठा रखे थे, अब उसने जाँघें सिकोड़ दीं। फिर भी मेरी एक ऊँगली उसकी चूत के भग्न तक जा पाने में सफल रही। जैसे ही मैंने उसके भग्न को छुआ, पारो ने मेरा हाथ पकड़ कर हटा दिया।&lt;br /&gt;अब चूमना छोड़ कर मैं बैठ गया और बोला: पारु, देखने दे तेरी भोस।&lt;br /&gt;अपने हाथ से भोस ढँकने का प्रयत्न करते हुए वह बोली: ना, रहने दो, मुझे शर्म आती है।&lt;br /&gt;मैं: मेरा लंड लेने में शर्म ना आई? अब शर्म कैसी? शरम आए तो मेरा लंड पकड़ लेना। चल, पाँव खुले कर।&lt;br /&gt;वो ना-नुकर करती रही और मैं उसे पलंग के किनारे पर ले आया। मैं ज़मीन पर बैठ गया। जाँघें उठाकर चौड़ी की। शरमाते हुए भी उसने अपने पाँव चौड़े कर लिए। किताब में जैसी दिखाई थी वैसी ही उसकी भोस मेरे सामने आई।&lt;br /&gt;मैंने पारो को दो बार चोदा था लेकिन उसकी भोस ठीक से देखी नहीं थी। इस वक़्त पहली बार ग़ौर से देखने का मौक़ा मिला था मुझे। उसकी भोस काफी ऊँची थी। बड़े होंठ मोटे थे और एक दूजे से सटे हुए थे। भोंस पर और बड़े होंठ के बाहरी हिस्से पर काले घुँघराले झाँटें थीं। बड़े होंठ के बीच तीन इंच लम्बी दरार रथी। मैंने हौले से बड़े होंठ चौड़े किए। अन्दर का कोमल हिस्सा दिखाई दिया। साँवली गुलाबी रंग के छोटे होंठ सूज गए मालूम होते थे। छोटे होंठ आगे जहाँ मिलते थे वहाँ उसकी भग्न थी। इस वक्त वही कड़ी हो गई थी, वह एक इंच लम्बी थी। उसका छोटा मत्था चेरी जैसा दिखता था। दरार के पिछले भाग में था योनि का मुख, जो अभी बन्द था। सारी भोस काम-रस से गीली-गीली हो चुकी थी।&lt;br /&gt;मुझे फिर से किताब की शिक्षा याद आई, कैसे भोस चाटी जाती है। पहले मैंने बड़े होंठ के बाहरी भाग पर जीभ चलाई। आगे से पीछे और पीछे से आगे, दोनों ओर चाटी। पारो के नितम्ब हिलने लगे। होंठ चौड़े कर के मैंने जीभ की नोक से अन्दरी हिस्सा चाटा और भग्न टटोली। भग्न को मैंने मेरे होंठों के बीच लिया और चूसा।&lt;br /&gt;पारो से सहा नहीं गया। मेरा सिर पकड़कर उसने हटा दिया और मुझे खींच कर अपने ऊपर ले लिया। उसने अपनी जाँघें मेरी कमर में डाल दीं तो भोस मेरे लंड के साथ जुट गईं। वह धीरे से बोली: चल ना, कितनी देर लगाता है?&lt;br /&gt;राह देखने की क्या ज़रूरत थी? हाथ में पकड़ कर लंड का मत्था मैंने भोस की दरार में रगड़ा, ख़ास तौर पर भग्न पर। इस वक़्त मुझे पता था कि चूत कहाँ है। इसलिए लंड को ठीक निशाने पर लगाने में दिक्क़त नहीं हुई। लंड का मत्था चूत के मुँह में फँसा कर मैं पारो पर लेट गया।&lt;br /&gt;मैंने कहा: पारो, दर्द हो तो बता देना।&lt;br /&gt;हल्के दबाव से मैंने लंड चूत में डाला। सर्रर्रर्रर्रर्ररररररररर करता हुआ लंड जब आधा अन्दर गया तब मैं रुका। मैंने पारो से पूछा: दर्द हो रहा है क्या?&lt;br /&gt;जवाब में उसने अपनी बाँहें गले में डालीं और सिर हिला कर ना कहा। अब मैं आगें बढ़ा और हौले-हौले पूरा लंड चूत में पेल दिया। उसकी सिकुड़ी चूत की दीवारें लंड से चिपक गईं।&lt;br /&gt;ऊपरवाले ने भी क्या जोड़ी बनाई लंड-चूत की? अभी तो चूत में डाला ही था, चोदना शुरु किया नहीं था। फिर भी सारे लंड में से आनन्द का रस झड़ने लगा था। लंड से निकली हुी झुरझुरी सारे बदन में फैल जाती थी। थोड़ी देर लंड को चूत की गहराई में दबा रख मैं रुका और चूत का मज़ा लिया। मैंने उससे पूछा: पारो, मज़ा आ रहा है ना?&lt;br /&gt;इतना कहकर मैंने लंड खींचा। तुरन्त उसने मेरे कूल्हे पर पाँव से दबाव डाला और चूत सिकोड़ कर लंड निचोड़ा। मैंने फिर कहा: अब तू मुँह से कहेगी, तभी चोदूँगा, वर्ना उतर जाऊँगा... क्या करना है?&lt;br /&gt;वो बोली: क्यूँ सताते हो? मैं बोल नहीं सकती।&lt;br /&gt;मैं: पाँव पसारे लंड ले सकती हो, और बोल नहीं सकती? एक बार बोल, मुझे चोदो।&lt;br /&gt;हिचकिचाती हुई वो बोली: म...मुझे च... चो... दो।&lt;br /&gt;फिर क्या कहना था? आधा लंड बाहर निकाल कर मैंने फिर से घुसा दिया। धीरे और लम्बे धक्के से मैं पारो को चोदने लगा। सर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रररररररर बाहर, सर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रररर अन्दर। वो भी नितम्ब हिला-हिला कर इस तरह चुदवाती थी कि लंड का मत्था अलग-अलग से घिस पाए। किताब में मैंने भग्न के बारे में पढ़ा था। मैं भी इस तरह धक्के देता था जिससे भग्न में रगड़ पड़ सके।&lt;br /&gt;तीन दिन के बाद ये पहली चुदाई थी पारो के लिए। हम दोनों जल्दी उत्तेजित हो गए। लंड चूत में आते-जाते ठुमक-ठुमक करने लगा। योनि में स्पंदन होने लगी। पारो ज़ोरों से मुझसे लिपट गई। मेरे धक्के तेज़ और अनियमित हो गए। मैं घचा-घच्च, घचा-घच्च चोदने लगा। एकाएक पारो का बदन अकड़ गया और वो चिल्ला उठी। मेरी पीठ पर उसने नाख़ून गाड़ दिए। ज़ोर-ज़ोर से चारों ओर नितम्ब घुमा कर झटके देने लगी। चूत में फटाके होने लगी। अपने स्तन मेरे सीने से रगड़ दिए। स्खलन तीस सेकेण्ड तक चला।&lt;br /&gt;स्खलन के बाद भी वह मुझे हाथ-पाँव से जकड़ी रही। मैं झड़ने के क़रीब था इसलिए रुका नहीं। धना-धन, धना-धन धक्के लगाता रहा। लंड कठोर था और चूत गीली थी इसलिए ऐसी घमासान चुदाई हो सकी। ज़ोरों के पाँच-सात धक्के मार मैंने पिचकारी छोड़ दी। मेरे वीर्य से उसकी योनि छलक उठी।&lt;br /&gt;कुछ देर तक हम होश खो बैठे। जब होश आया तो पता चला कि पारो चिल्लाई थी और हो सकता था कि दीदी और जीजू ने चीख सुन भी ली हो। घबरा कर मैं झटपट उतरा और बोला: पारो, जल्दी कर। चली जा यहाँ से। दीदी-जीजू आएँगे तो मुसीबत खड़ी हो जाएगी।&lt;br /&gt;पारो का उत्तर सुनकर मैं हैरान रह गया, वो बोली: आने भी दे, तू डर मत। मैं ख़ुद भैया से कहूँगी कि तेरा कसूर नहीं है, मैं ही अपने-आप चु... चु... वो करवाने चली आई हूँ। अब लेट जा मेरे साथ।&lt;br /&gt;हम दोनों एक-दूसरे से लिपट कर सो गए। दीदी या जीजू कोई भी नहीं आए।&lt;br /&gt;सुबह पाँच बजे वो जागी और अपने कमरे में जाने को तैयार हुई। मुँह पर चूमकर मुझे जगाया और बोली: मैं चलती हूँ, सुबह के पाँच बजे हैं। तुम सोते रहो, और आराम करो। रात फिर मिलेंगे।&lt;br /&gt;लेकिन मैं उसके कहाँ जाने देने वाला था! खींच कर आगोश में ले लिया। वो ना-ना करती रही। मैं जगह-जगह पर चूमता रहा। आख़िर उसने पाजामा उतारा और जाँघें फैलाईं। मेरा लंड तैयार ही था। एक झटके में चूत की गहराई नापने लगा। इस वक्त सावधानी की कोई ज़रूरत नहीं थी। धना-धन तेज़ी से चुदाई हो गई तीन मिनट तक। दोनों साथ-साथ झरे।&lt;br /&gt;दूसरे दिन मैंन दीदी से पूछा: आईने में देखते हुए चुदाई का मज़ा कैसा होता है?&lt;br /&gt;वो बोली: शैतान, तुझे कैसे पता चला कि हम... कि हम...?&lt;br /&gt;मैं उसे कोठरी में ले गया और सुराख़ दिखाई। वो समझ गई।&lt;br /&gt;शालिनी: तो तूने आख़िर हमारी चुदाई देख ही ली।&lt;br /&gt;मैं: मैंने नहीं, हमने कहो।&lt;br /&gt;शालिनी: ओह, तो पारो भी साथ थी?&lt;br /&gt;मैं: हाँ थी।&lt;br /&gt;शालिनी: तब तो तूने उसे... उसे...?&lt;br /&gt;मैं: हाँ, मैंने उसे चोदा जी भर के।&lt;br /&gt;शालिनी: चूत भर के कहो। कैसी लगी उसकी कुँवारी चूत?&lt;br /&gt;मैं: बहुत प्यारी। मेरा लंड भी कुँवारा ही था ना!&lt;br /&gt;शालिनी: अब क्या? शादी करेगा उससे?&lt;br /&gt;दोस्तों, आ गए हम हमारी समस्या पर। मैं दीदी के घर अधिक दिनों तक नहीं रुका, लेकिन जितने दिन भी रहा, इतने दिन रोज़ाना रात को पारो को चोदा। किताब में दिखाए गए आसनों में से कोई-कोई आज़मा कर भी देखे। किताब के मुताबिक़ उसे लंड चूसना भी सिखाया। अकेले मुँह को भग्न से लगाकर उसे झड़वाया। छुट्टियाँ खत्म होने से पहले मैं घर लौट आया।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5371403670818517101-7611172599864500529?l=mastjanghu.blogspot.com'/&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://mastjanghu.blogspot.com/feeds/7611172599864500529/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='https://www.blogger.com/comment.g?blogID=5371403670818517101&amp;postID=7611172599864500529&amp;isPopup=true' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5371403670818517101/posts/default/7611172599864500529'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5371403670818517101/posts/default/7611172599864500529'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://mastjanghu.blogspot.com/2009/10/2_594.html' title='दीदी, जीजाजी और पारो-2'/><author><name>JAI SINGH</name><uri>http://www.blogger.com/profile/01785593676712838482</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:extendedProperty xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' name='OpenSocialUserId' value='15234607527984438017'/></author><thr:total xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5371403670818517101.post-4608138564051909372</id><published>2009-10-28T14:25:00.002+05:30</published><updated>2009-10-28T14:38:25.885+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='sexy story hindi mein'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='hindi adult stories'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='antarvasna stories'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='Adult stories'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='hindi sex stories'/><title type='text'>चढ़ती जवानी की मस्ती</title><content type='html'>लेखिका : शमीम बानो कुरेशी  &lt;br /&gt;शादी के बाद से नज़मा भाभी की चुदाई बहुत ही कम हुई थी। जवान तन लण्ड का प्यासा था। मुझे रोज चुदते देख कर उसका मन भी मचल उठा। वो रोज छुप छुप कर अब्दुल से मेरी चुदाई देखा करती थी। जब वो गाण्ड मारता था तो भाभी का दिल हलक में अटक जाता था। भैया को बस धंधे से मतलब था। रात को दारू पीता और थकान के मारे जल्दी सो जाता था। सात दिन पहले वो मुम्बई चला गया था।&lt;br /&gt;नज़मा भाभी आज तो ठान रखी थी कि मुझसे बात करके कुछ काम तो फ़िट कर ही लेगी।&lt;br /&gt;भाभी ने मेरा हाथ पकड़ा और कहा,"बानो छत पर चल, एक जरूरी काम है !"&lt;br /&gt;"यहीं बोल दे ना ...  !"&lt;br /&gt;"अब तू भी गाण्ड फ़ुला कर नखरे दिखा !  ...  कहा ना जरूरी काम है !"&lt;br /&gt;"चूतिया टाईप बातें मत कर ...  गाण्ड जैसा अपना मुँह खोल ...  बोल क्या बात है !"&lt;br /&gt;"साली हारामजादी ...  मां चुदा ! ...  नहीं बताती ... !"&lt;br /&gt;"हाय मेरी भाभी जान ...  चल फिर ... लगता है जरूर कोई बात है !"&lt;br /&gt;भाभी ने मेरा हाथ पकड़ा और लगभग खींचती हुई छत की ओर छलांगें मारती हुई सीढ़ियाँ चढ़ने लगी। छ्त पर पहुंचते ही वो हांफ़ने लगी। उसकी छातियाँ ऊपर नीचे होने लगी। &lt;br /&gt;"सुन ...  एक बात कहूँ ...  बुरा तो नहीं मानेगी ना ... " उसने बड़ी मुश्किल से उखड़ती आवाज में कहा।&lt;br /&gt;"बोल ना ...  दिल में इतनी बेचैनी  ...  क्या बात है ...  किसी ने चोद मारा है क्या ... ?"&lt;br /&gt;"बात ही कुछ ऐसी है ...  देख नाराज मत होना ... !"&lt;br /&gt;मैंने उसे हैरानी से देखा ...  "बोल ना ... ऐसा क्या है?"&lt;br /&gt;"बहुत दिन हो गये, तेरे भाई जान तो यहाँ है नहीं ... !" वो अटकते हुए बोली।&lt;br /&gt;"हाँ तो ...  आ जायेंगे ना ...! "&lt;br /&gt;"वो तेरा दोस्त है ना, अब्दुल ...  उससे मेरी दोस्ती करवा दे !" भाभी ने जमीन की ओर देखते हुये कहा।&lt;br /&gt;"ओह हो ...  मेरी भाभी की चूत चुदासी हो गई है ...  चुदना है क्या?"&lt;br /&gt;"बानो ! ...  प्लीज़ देख मजाक मत कर ... मेरी हालत बहुत खराब हो रही है ... देख, चूत में से पानी टपक रहा है !"&lt;br /&gt;"अच्छा ...  पहले देखूँ तो कितनी बैचेन है भाभी की चूत ... " मैंने उसकी चूत दबा दी।&lt;br /&gt;सच में रसीली हो चुकी थी।&lt;br /&gt;तो भोसड़ी की ! रान्ड को चुदवाना है ? मैंने कहा।&lt;br /&gt;"सच रे ...  ये तो बहुत ही चुदासी है ...  साली पहले क्युँ नहीं चुदवा लिया ... कब चुदवाओगी  ...  ...  कब बुलाऊँ उसे ...??? "&lt;br /&gt;"आज रात को ही चुदवा दे ना मुझे ... "भाभी ने कातर नजरो से मुझे देखा। मुझे उस पर दया आ गई ... &lt;br /&gt;अब्दुल तो शाम को सात बजे ही घर पर आ गया था। शाम का धुंधलका बढ़ गया था। हम दोनों छत पर आ गये।  दूसरी छतों पर लोग थे।&lt;br /&gt;"बानो, भाभी आये उसके पहले कुछ हो जाये ... ?" अब्दुल बोला।&lt;br /&gt;मुझे डर सा लगा, पर तुरन्त आईडिया आ गया। दीवार की आड़ में मस्ती कर लेते हैं।&lt;br /&gt;"अच्छा तो नीचे बैठ जा और मेरी चूत खोल ले ...  ऊपर तो कुछ दिखेगा नहीं"&lt;br /&gt;मैं दीवार पर खड़ी हो गई ताकि कमर तक दीवार आ जाये ... वो नीचे बैठ गया और मेरी सफ़ेद पेन्टी नीचे उतार दी। मेरी चूत उसके सामने थी। उसने नीचे कुर्सी की गद्दी लगा ली और वो दीवार से टिक कर आराम से बैठ गया, और मेरी चूत से खेलने लगा। कभी मेरी चूत को सहलाता, तो कभी मेरे दाने को छू लेता ...&lt;br /&gt;फिर दोनों हाथों से मेरे चूतड़ों को पकड़ कर दबा देता और मेरे गाण्ड के छेद में अंगुली डाल देता। बड़ा मजा आ रहा था। उसका लण्ड खड़ा हो गया था। सो जिप खोल कर उसने लौड़ा बाहर निकाल लिया और मुठ मारने लगा। उसके हाथ कभी कभी मेरे टॉप के अन्दर भी घुस जाते थे। मुझे डर लगता कि कोई मादरचोद मुझे देख ना ले, सो उसका हाथ पकड़ कर वापस नीचे ले जाती।&lt;br /&gt;"चूतिये ...  ऊपर मत कर ...  कोई देख लेगा तो ...  मेरी तो माँ चुद जायेगी !" &lt;br /&gt;"बानो धीरे से नीचे बैठ जा ... तब तो कोई नहीं देखेगा ना !" मैं उसकी तरकीब समझ नहीं पाई। मैने नीचे देखा और धीरे से बैठ गई और उसका लण्ड सीधा मेरी चूत में घुस गया। लण्ड चूत में घुसते ही मुझे उसकी बात पल्ले पड़ गई और हंस दी।&lt;br /&gt;"भोसड़ी के ...  मुझे चोदेगा क्या ... ? भाभी को आने दे ना ... !" मैंने उसका लौड़ा बाहर निकाल दिया।&lt;br /&gt;तभी छत के कमरे में से मुझे खिड़की से झांकती हुई भाभी नजर आ गई। वो वहाँ खड़ी खड़ी अपनी चूंचियाँ मसल रही थी। जाने वो कब से खड़ी हो कर हमें देख रही थी। उसने मेरे देखते ही इशारा किया। मैंने अब्दुल को दूर हटा दिया।&lt;br /&gt;"सुन रे गाण्डू, कपड़े पहन ले ... भाभी आने वाली है !" मैंने अब्दुल को लताड़ा।&lt;br /&gt;अब्दुल ने कपड़े पहन लिये और खड़ा हो गया। मैंने भी अपने कपड़े सही कर लिए। सब कुछ सही देख कर भाभी कमरे में से बाहर छत पर आ गई।&lt;br /&gt;भाभी जान के आते ही अब्दुल जैसे तैयार हो गया। मैने भाभी को इशारा किया कि क्या शुरु करें कार्यक्रम?&lt;br /&gt;वो तो जैसे पहले ही गरम हो चुकी थी। उसका हाथ तो चूत पर ही था और उसे दबा रखा था ...  मानो पेटीकोट दबा रखा हो।&lt;br /&gt;"अब्दुल, यह है नजमा भाभी ...  तुम्हें याद कर रही थी !"&lt;br /&gt;"सलाम, भाभी जान ...  आप तो बड़ी खूबसूरत हैं !"&lt;br /&gt;प्रत्युत्तर में भाभी मुस्कराई और बोली,"मुझे तो बानो ने बताया कि आप तो कमाल के हैं !"&lt;br /&gt;"यह भोसड़ी का तो बस  ...  चुदाई में कमाल दिखाता है ... " मैंने उन दोनों को खोलने की कोशिश की।&lt;br /&gt;"चल हट री भेन की लौड़ी ...  वो तो सभी मर्द होते हैं !" भाभी ने खुलना ही मुनासिब समझा।&lt;br /&gt;"भाभी जान ...  आपकी बात तो अलग लग रही है ...  आपके पोन्द तो कैसे मस्त हैं !" अब्दुल ने पास आते हुए कहा। &lt;br /&gt;"हाय अल्लाह ...  आप तो पोंद पर ही आ गए ...  मैंने तो आपके बारे में अभी कुछ नहीं कहा ?"&lt;br /&gt;अब्दुल ने सीधा आक्रमण कर दिया। भाभी के उभरे हुए मस्त पोंद दबा दिये।&lt;br /&gt;"भाभी इसे यानि पोंद मरवा कर देखो ... " गाण्ड में अब्दुल ने अंगुली करते हुये कहा।&lt;br /&gt;"आईईई ...  बानो ...  मेरी पोंद दबा दी इसने ... !"&lt;br /&gt;"अब्दुल चूंचे भी दबा दे  ...  जल्दी कर ... " मैंने अब्दुल को इशारा किया।&lt;br /&gt;अब्दुल ने उसके पीछे आ कर दोनों चूंचिया दबा दी। भाभी के मुँह से सिसकारी निकल पड़ी।&lt;br /&gt;"अरे हट छोड़ मुझे, किसी ने देख लिया तो रट्टा हो जायेगा !" भाभी ने यहां वहां देखा और घबरा कर कहा ... "चल वहीं बैठ जा, जहां तू बानो की चूस रहा था।"&lt;br /&gt;अब्दुल तुरन्त वहीं जा कर बैठ गया और भाभी जान अब्दुल के पास गई और अपना पेटीकोट उठाया और उस पर डाल दिया।&lt;br /&gt;"बानो, शुक्रिया मेरी जान ... अब तो अब्दुल से मैं चुदा लूंगी ... चल रे अब्दुल ... शुरू हो जा ... " भाभी ने मुस्करा कर मुझे देखा और आंख मार दी और भाभी के मुख से आह निकल पड़ी। मैं समझ गई कि अब्दुल ने कुछ अन्दर किया है।&lt;br /&gt;"हाय अब्बा ...  डाल दे अंगुली ...  पूरी घुसेड़ दे रे ... "&lt;br /&gt;भाभी ने मुझे पकड़ लिया। मैं भाभी की चूंचियाँ दबाने लगी। उसने मुझे वासना भरी नजर से देखा और सिसकारी भरने लगी। " बानो, यह तो मस्त लड़का है रे ... चूत का पानी ही निकाल देगा !"&lt;br /&gt;"भाभी जान ...  मस्त हो जा ...  अब तेरे पेटीकोट में क्या हो रहा है मैं क्या जानू रे ... "&lt;br /&gt;"हाँ बानो ...  ये अन्दर की बात है ...  साला गजब चूत चूसता है ...  हाय मुझे मूत आ रहा है !" नजमा भाभी मचलती हुई बोली।&lt;br /&gt;"मूत दे भाभी ...  मैं चूत खोलता हूँ ... "अब्दुल पेटीकोट के अन्दर से बोला।&lt;br /&gt;"हाय मेरी अम्मा ... " भाभी ने जरा सा जोर लगाया और मूतना चालू कर दिया। अब्दुल अन्दर ही अन्दर उसके पेशाब का आनन्द लेने लगा। अपना मुँह गीला कर लिया और अपना मुँह खोल कर पेशाब भर लिया।&lt;br /&gt;"और निकाल मूत ...  भाभी ...  क्या स्वाद है ... " उसने चूत में अपना मुँह घुसा कर चाटने लगा।&lt;br /&gt;"बैठ जा भाभी जान ... आजा ... " भाभी धीरे से उकडू बैठ गई और मुख से एक आनन्द भरी सीत्कार निकल गई ... "हाय रे ... लण्ड घुस गया चूत में ... " अब्दुल ने लण्ड घुसते ही पेटीकोट अपने ऊपर से हटा लिया और भाभी को जकड़ लिया। अब्दुल का लण्ड चूत में पूरा घुस गया था। मैंने तुरन्त वहा फ़ैला हुआ पेशाब साफ़ किया और दौड़ कर दरी ले आई और भाभी के पीछे लगा दी। अब्दुल ने भाभी को कसे हुए दरी पर लेटा दिया और लण्ड को चूत में फिर से घुसेड़ दिया। &lt;br /&gt;"हाय अब्दुल ...  तेरा लौड़ा कितना प्यारा है ...  पूरा ही अन्दर तक उतर गया ... अह्ह्ह्ह"&lt;br /&gt;अब्दुल अब ठीक से सेट हो कर उस पर लेट गया और चोदने का आनन्द लेने लगा। मैंने भी भाभी की गाण्ड में अपनी अंगुली डाल दी।&lt;br /&gt;"बानो ...  मजा आ गया ...  एक अंगुली और डाल दे  ...! "&lt;br /&gt;मैंने भाभी की गाण्ड में दो अंगुलियां डाल दी और घुमाने लगी। मुझे एक शरारत और सूझी, अब्दुल की गाण्ड में भी दूसरे हाथ की अंगुली डाल दी।&lt;br /&gt;"बानो, तू साली चुपचाप नहीं बैठ सकती है ना ...  साला युसुफ़ गाण्ड चोद जाता है वो कम है क्या ?"&lt;br /&gt;"क्या, युसुफ़ भी तुम्हारा दोस्त है ... ?"&lt;br /&gt;"हां भाभी, और फ़िरोज भी है ... " मैने फ़िरोज का नाम और जोड़ दिया&lt;br /&gt;"हाय रे, बानो ...  मुझे भी अपनी टोली में मिला लो ना ... " भाभी चुदते हुये बोली।&lt;br /&gt;"भाभी चलो, अब हम भी तीन और ये भी तीन ...  नसीम को भी बताना चाहिये !"&lt;br /&gt;"नसीम भी ... ।" भाभी तो इतने सारे चुदाई के साथी मिल जायेंगे यकीन भी नहीं हो रहा था। भाभी चुदवा कर मदमस्त हो रही थी। उसे लण्ड क्या मिला मानो दुनिया मिल गई हो। वो बहुत ही उत्तेजित हो कर आनन्द ले रही थी। मैंने गाण्ड में अंगुली पेलना चालू रखा, दोनों ही डबल मार से बहुत उत्तेजित हो गये थे ... अब्दुल सटासट लण्ड चला रहा था। अब्दुल का लौड़ा कड़कने लगा था, उसका डण्डा लोहे जैसा हो गया था। दोनों की कमर एक तालमेल के साथ तेजी से चल रही थी। चूत गीली होने से फ़च फ़च की आवाजें भी सुनाई पड़ रही थी। उत्तेजित भाभी के जिस्म में ऐंठन होने लगी थी।&lt;br /&gt;मैंने भाभी और अब्दुल की गाण्ड में से अंगुली निकाल दी और भाभी की चूंचियां और निपल मसलने लगी, भाभी के मुँह से एक गहरी आह निकली और उसकी चूत ने रस छोड़ दिया। इधर अब्दुल भी लण्ड का जोर लगा कर वीर्य छोड़ने की कोशिश कर रहा था। मैं भाभी को छोड़ कर अब्दुल के चूतड़ों को दबा कर मसलने लगी। ... बस अब्दुल ने अपना लौड़ा बाहर निकाला और पिचकारी छोड़ दी। मैंने तुरन्त उसका लौड़ा मुठ में भर लिया और उसे निचोड़ने लगी और मुठ मार मार कर बाकी का वीर्य बाहर निकालने लगी। भाभी नीचे पडी हांफ़ रही थी और अब अब्दुल भी ठण्डा पड़ रहा था।&lt;br /&gt;"भोसड़ी के ...  अब ऊपर से तो हट जा भाभी के ... " मैने अब्दुल को पीछे खींचा।&lt;br /&gt;अब्दुल खड़ा हो गया। भाभी भी उठ बैठी। भाभी ने पेटीकोट नीचे किया और मुझसे लिपट पड़ी।&lt;br /&gt;"बानो, शुक्रिया इस शानदार चुदाई का ...  एक बात कहूँ ? प्लीज मना मत करना ... !"&lt;br /&gt;"हां बोलो ...  नज्जो भाभी ...! "&lt;br /&gt;"मुझे भी, अपने दोस्तों में शामिल कर लो ... फ़िरोज, हाय कितना चिकना है ... युसुफ़ का लौड़ा तो सोलिड है और अब्दुल तो कितना प्यारा है !"&lt;br /&gt;"भाभी ...  फिर तो आप रोज चुदोगी, होशियार ...  भैया को भूल जाओगी ...! " मैंने भाभी को मजाक में कहा।&lt;br /&gt;"हाय बानो ...  ये लो मैंने तो पेटीकोट अभी से ऊपर उठा दिया ...  चोदो ...  मुझे जी भर कर चोदो !"&lt;br /&gt;हम तीनों ही हंस पड़े ...  और फिर सभी दोस्त बन गये । चुदाई सिलसिला शुरू हो गया ...  भला चढ़ती जवानी के जोश को कोई रोक सका है ...  ।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5371403670818517101-4608138564051909372?l=mastjanghu.blogspot.com'/&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://mastjanghu.blogspot.com/feeds/4608138564051909372/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='https://www.blogger.com/comment.g?blogID=5371403670818517101&amp;postID=4608138564051909372&amp;isPopup=true' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5371403670818517101/posts/default/4608138564051909372'/><link rel='self' type='application/atom+xml' 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scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='Adult stories'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='hindi sex stories'/><title type='text'>मज़ा आने वाला है</title><content type='html'>प्रेषक - शाम  &lt;br /&gt;नमस्ते दोस्तों&lt;br /&gt;मेरा नाम शाम है। अब मैं आपको अपनी सच्ची कहानी बताने जा रहा हूँ। मैं गुजरात के एक शहर में रहता हूँ।&lt;br /&gt;मेरा घर एक सरकारी कॉलोनी के पास है। मैं क़रीब २२ साल का था। तब मैंने कॉलेज की पढ़ाई पूरी की और अभी कोई नौकरी पर नहीं लगा था। तब मैं और मेरे दोस्तों ने मिलकर एक धंधा शुरु किया। जिसमें हम पास की सरकारी कॉलोनी, जहाँ पर सभी लोग बाहर से रहने आते थे, उनको यह पता नहीं होता था कि इस शहर में कौन सी चीज़ कहाँ मिलती थी, उन्हें हम उनके काम का सामान घर तक पहुँचवाने का काम करते थे, और इससे अच्छी कमाई होती थी।&lt;br /&gt;अब मैं कहानी पर आता हूँ।&lt;br /&gt;वैसे तो मैं और मेरे दोस्त बड़े ही रोमांटिक थे और वहाँ की औरतें भी काफ़ी सेक्सी होतीं थीं। मीना जो कि एक क्लास टू ऑफिसर की बीवी थी, उनकी शादी को अभी कुछ ही महीने हुए थे। वह देखने में बहुत ही सेक्सी थी। उसकी फिगर ३४-२८-३८ होगी। ऊँचाई क़रीब ५.८ होगी। मेरी नज़र पहले दिन से ही उस पर थी। ख़ास कर उसके चूतड़ों को देखकर मैं पागल ही हो जाता था। दिन में एक बार तो किसी न किसी बहाने से उसके घर चला ही जाता था। बहाना न हो तो भी मैं 'कुछ चाहिए', यह पूछने के बहाने चला जाता था। अक्सर उसका पति जो कि ऊँची पोस्ट के कारण सुबह ९:३० को चला जाता था और शाम को देर से आता था। तब से मैं यह ख़्वाब देखता था कब जा कर मैं इस को चोदूँ और हर रोज़ उस के ख्याल से मैं मुठ मारता था।&lt;br /&gt;एक दिन की बात थी जब मैं कुछ सामान देने के बहाने उनके घर शाम को गया तब घर का दरवाज़ा खुला था। और मैं बिना थोक किए बिना ही घुस गया। मैंने देखा तो मीना सिर्फ ब्रा और पैन्टी में ही थी और आईने के सामने बैठकर तैयार हो रही थी। मुझे देख उसने कोई हरक़त नहीं की, ना ही अपने आप को ढँकने की, न ही घबराई। और मैंने जैसे शर्म आ रही है, ऐसा नाटक करते हुए सॉरी कह कर घर से बाहर जाने का उपक्रम किया। &lt;br /&gt;उसने कहा- अरे तुम कहाँ जा रहे हो? तुम तो बड़े शर्मीले हो। क्या इससे पहले तुम ने कभी किसी औरत को इस तरह नहीं देखा है?&lt;br /&gt;मैंने कहा- नहीं !&lt;br /&gt;क्या तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है?&lt;br /&gt;मैंने कहा- है ! लेकिन मैंने अभी तक उसके साथ कुछ भी नहीं किया।&lt;br /&gt;तो उसने पूछा- क्यों नहीं किया।&lt;br /&gt;अब धीरे-धीरे वह मेरे बहुत ही क़रीब आ गई। मैं समझ गया इसके इरादे कुछ ठीक नहीं लगते। फिर मैंने भी मौक़े की नज़ाकत को जान के अपने एक हाथ को उसकी जाँघ पर और दूसरे को उसके कंधे पर रख दिया। वो तो जैसे इसी के लिए तैयार थी।&lt;br /&gt;मैंने हिम्मत करके धीरे-धीरे उसकी चूचियों पर ब्रा के ऊपर से ही सहलाने लगा। मैंने पूछा कि आईने के सामने बैठी थी, कहीं बाहर जाने वाली हो क्या?&lt;br /&gt;तो वह बोली- मुझे पता था कि तुम इसी समय आते हो तो मैं तुम्हार ही इन्तज़ार कर रही थी।&lt;br /&gt;तो मैंने पूछा- तुमको कैसे यह पता चला कि मेरी नज़र तुम पर है?&lt;br /&gt;तो इस पर वह हँस कर बोली- एक दिन तुम्हें मेरे बदन घूर कर देखते हुए देख लिया था ! तुम्हारे साहब रात को क़ाफी देर से आते हैं, हफ्ते में चार दिन वह शराब पी कर आते हैं और बाकी उनको नौकरी की टेंशन रहती है तो हमारे बीच में महीने में एक-दो बार ही सम्बन्ध बन पाते हैं। मैं कॉलेज के समय से ही खूब चुदक्कड़ रही हूँ, मेरी चूत प्यासी रहे यह तो मुझसे सहन नहीं होता। पहले दो महीने सामने वाले पटेल साहब का लड़का उसके साथ सेटिंग हुई, लेकिन फिर वह विदेश पढ़ने चला गया। इतने में तुम आए और मेरी नज़र तुम पर पड़ी, तब मैंने तुमसे चुदवाने का मन बना लिया था। लेकिन तुम मुझे कुछ इशारा ही नहीं देते थे, इसीलिए आज मैंने तुम्हें खुला इशारा देने का मन बना लिया था।&lt;br /&gt;यह कह कर वह मुझसे लिपट गई। मैं भी जैसे तैयार था। पहले मैंने उसकी ब्रा को खोला और मेरे सामने थीं दो हरी-भरीं नारंगी। उसकी चूचियों की घुण्डियों का रंग हल्का गुलाबी था और मैं बस उसपर टूट पड़ा। फिर उसने मेरे कपड़े उतारना शुरु किया। अब हम दोनों पैन्टी-अन्डरवीयर में थे। हम दरवाज़ा बन्द करना भूल गए थे।&lt;br /&gt;उसने कहा- तुम अन्दर बेडरूम में जाओ, मैं दरवाज़ा बन्द कर आती हूँ।&lt;br /&gt;मैं अन्दर रूम में पहुँचा, तब मैंने देखा कि रूम अच्छी तरह से सजाया था और कोने की टेबल पर सेक्सी तस्वीरों वाली पत्रिकाएँ थीं।&lt;br /&gt;मैंने कहा- ये तुम पढ़ती हो?&lt;br /&gt;"मैं अपनी दोस्त से पढ़ने के लिए लेती हूँ।"&lt;br /&gt;"कौन सी दोस्त? वो मिसेज़ पटेल?"&lt;br /&gt;तो उसने कहा "हाँ।"&lt;br /&gt;"वह भी तुम्हारी तरह मस्त और सेक्सी है।"&lt;br /&gt;"पहले मेरी प्यास बुझाओ फिर मैं उसके साथ तुम्हारी सेटिंग करवा दूँगी।"&lt;br /&gt;अब उसने कमरे का ए.सी. चालू किया। फिर वह मेरे क़रीब आई और मेरे लंड को जो कब से उसे देखकर बाहर आने को बेक़रार था को अन्डरवीयर के ऊपर से ही सहलाना शुरु कर दिया। इसके बाद उसने उसे उतार दिया।&lt;br /&gt;मेरा लंड जो कि ८" लम्बा और ३" मोटा था, उसे देखकर बोली "आज तक मैंने इतना तगड़ा और लम्बा नहीं देखा है। आज तो बहुत मज़ा आने वाला है। आज मैं तुम्हें वह सुख दूँगी जो तुम्हें सपनों में ही मिलता होगा।"&lt;br /&gt;यह कह कर वो मेरा लंड अपने हाथ में लेकर उससे खेलने लगी, फिर उसे अपने मुँह में लेकर लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी, साथ ही मेरे अंडकोष भी चाटने लगी।&lt;br /&gt;मैंने कहा,"अब मुझसे रहा नहीं जाता, क्योंकि यह मेरा पहली बार है।"&lt;br /&gt;"डार्लिंग यह तो शुरुआत है, आगे-आगे देखो होता है क्या!"&lt;br /&gt;और वह घोड़ी बन गई और बोली,"बहुत दिन हो गए, मेरी किसी ने गाँड नहीं मारी। तुम मेरी यह तमन्ना आज पूरी करो।"&lt;br /&gt;और सच में उसको जो पीछे से करने में जो मज़ा था वह अलग ही था। क़रीब १५ मिनट तक मैंने उसको पीछे से ही शॉट्स मारे। फिर वह सीधी हुई और मेरा मुँह अपनी चूत के पास ले गई, और मैं उसे चाटने लगा। मेरा एक हाथ उसकी दाईं चूची को दबा रहा था। अब हम 69 की मुद्रा में आ गए। वह काफी उत्तेजित हो चुकी थी और मुझे ज़ोर-ज़ोर से चूम रही थी। मैं भी बहुत जोश में आ गया था।&lt;br /&gt;अब उसने कहा कि अब मुझसे रहा नहीं जाता, चोदो मुझे।&lt;br /&gt;फिर मैंने अपना लंड जो कि बहुत ही तड़प रहा था, उसकी चूत पर रख दिया और धक्का दिया। मेरा ४" उसकी चूत में जा चुका था और वह सिसकियाँ लेने लगी। फिर मैंने दूसरे धक्के में पूरा लण्ड उसकी चूत में डाल दिया। मुझे उसकी चूत की गरमी का अहसास पागल बना रहा था।&lt;br /&gt;अब मैंने थोड़ी रफ्तार बढ़ाई, तो उसने भी कहा- और ज़ोर से, और तेज़। बस मुझे चोद दो।&lt;br /&gt;और मैं साथ-साथ उसके पूरे गोरे बदन का मज़ा ले रहा था। कभी उसके होंठ, तो कभी-कभी उसकी चूची चूस कर। बस फिर क्या था, वह झड़ गई और मैंने भी कहा - मैं भी झड़ने वाला हूँ !&lt;br /&gt;उसने कहा- तुम अन्दर मत झड़ना, मैं तुम्हारा रस पीना चाहती हूँ। तब मैंने अपना लंड उसकी चूत से बाहर निकाल लिया और उसके मुँह पर पिचकारी मारी, उसने सारा पानी पी लिया।&lt;br /&gt;ऐसा बहुत दिनों तक हुआ। मिसेज़ पटेल को कैसे चोदा, वो अगली कहानी में बताऊँगा।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5371403670818517101-4642510796835418620?l=mastjanghu.blogspot.com'/&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://mastjanghu.blogspot.com/feeds/4642510796835418620/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='https://www.blogger.com/comment.g?blogID=5371403670818517101&amp;postID=4642510796835418620&amp;isPopup=true' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5371403670818517101/posts/default/4642510796835418620'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5371403670818517101/posts/default/4642510796835418620'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://mastjanghu.blogspot.com/2009/10/blog-post_4104.html' title='मज़ा आने वाला है'/><author><name>JAI SINGH</name><uri>http://www.blogger.com/profile/01785593676712838482</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:extendedProperty xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' name='OpenSocialUserId' value='15234607527984438017'/></author><thr:total xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5371403670818517101.post-9116567661942225127</id><published>2009-10-28T14:24:00.004+05:30</published><updated>2009-10-28T14:38:30.390+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='sexy story hindi mein'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='hindi adult stories'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='antarvasna stories'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='Adult stories'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='hindi sex stories'/><title type='text'>नेहा की चूत खोली-1</title><content type='html'>प्रेषक - राज़ पाल सिंह     &lt;br /&gt;किरण आँटी की चुदाई से मैं ऊब चुका था। उनकी बेटी नेहा जवान हो रही थी। बड़ी-बड़ी चूचियाँ, उभरी हुई गाँड, क़यामत लगती थी। ख़ैर किरण आँटी मुझे उसके पास फटकने भी नहीं देती थी।&lt;br /&gt;एक दिन मैं उसके यहाँ किसी काम से गया तो नेहा ने दरवाज़ा खोला। उसने स्कर्ट पहन रखी थी. मेरी नज़र उसके चिकने-गोरे पैरों पर पड़ी। मेरा लंड खड़ा होने लगा तो मैंने अपनी साँसों रोककर किसी तरह स्वयं पर नियंत्रण किया। उसने मुझे ड्राईंगरूम में बिठाया। ख़ुद मेरे सामने बैठ गई। मैंने पूछा - "आँटी कहाँ हैं?" तो मालूम हुआ कि बाहर निकली हुईं हैं। हमारे बीच काफी बातें हुईं। उस दौरान उसने इस बात का ख़ास ख़्याल रखा कि कहीं से उसकी स्कर्ट न उठे और उसके जाँघें मुझे न दिखाई दे।&lt;br /&gt;फिर वह पानी लाने के लिए उठी और जाने लगी। उस दौरान मैं उसकी गाँड निहारता रहा। मेरा लंड फिर से खड़ा होने लगा। तभी वह पानी लेकर आ गई। इस बार बैठते समय मुझे उसकी काली पैन्टी दिख गई। ख़ैर बातों-बातों में मुझे मालूम हुआ कि उसके कम्प्यूटर पर कुछ प्रोजेक्ट बनाने हैं, तो मैंने तुरन्त उसे प्रस्ताव दिया कि मेरे यहां बना लो।&lt;br /&gt;उसने कहा - ठीक है, माँ से पूछकर आऊँगी।&lt;br /&gt;फिर मैं वहाँ से चला आया।&lt;br /&gt;एक दिन मैं अपने कमरे में सोया था कि नेहा किरण आँटी के साथ आई। मैं नीचे गया तो मालूम हुआ कि नेहा को मुझसे कुछ काम है। जब मैंने पूछा तो मालूम हुआ कि वह कम्प्यूटर पर प्रोजेक्ट बनाना चाहती है। शायद उसने अपनी माँ से हमारी पिछली मुलाक़ात का विस्तृत ब्यौरा नहीं दिया था।&lt;br /&gt;मैंने कहा- ठीक है चलो। तो वह मेरे पीछ आने लगी। किरण आँटी भी उठी और आने लगी, तो मेरी माँ ने कहा- आप बच्चों के पीछे कहाँ जा रहीं हैं?&lt;br /&gt;इसपर आँटी ने कहा- कहीं नहीं भाभीजी, मैं भी देखूँ यह कम्प्यूटर क्या बला है।&lt;br /&gt;माँ- ठीक है, तबतक मैं चाय बनाती हूँ।&lt;br /&gt;मैं दोनों को अपने कमरे में लाया और कम्प्यूटर को चालू किया। नेहा काम करने लगी तो आँटी ने कहा, चलो तुम्हारे छत से अपना मक़ान देखते हैं।&lt;br /&gt;मैं उन्हें ऊपर ले जाने लगा। ऊपर पहुँचकर मैं बाहर का दरवाज़ा खोलने लगा तो किरण आँटी ने मेरा हाथ पकड़ लिया और मुझे रोक लिया।&lt;br /&gt;मैंने कहा,"क्या हुआ आँटी?"&lt;br /&gt;तो वे मेरे कान के पास आकर बुदबुदाई,"ऊपर आना तो एक बहाना था, असल में तुमसे चुदवाना था।" यह कहकर वो मुझसे लिपट गई और चुम्मा-चाटी करने लगी। उसने मेरा लोअर सरका दिया और सीढ़ियों पर बैठ गई, फिर मेरा लंड मुँह में लेकर चूसने लगी।&lt;br /&gt;मैं भी जोश में था। मैंने उनकी चोटी पकड़ी और उनके मुँह में ही धक्के लगाने लगा। उनका गला घुट गया और आँखों में आँसू आ गए पर मैं नहीं रुका। हाँलाँकि उन्होंने छूटने की कोशिश की पर चूँकि वह सीढ़ियों के बीच बैठीं थीं और मैं ठीक सामने खड़ा था इसलिए उनके छूटने की सम्भावना नहीं थी।&lt;br /&gt;तभी नीचे से चाय के लिए आवाज आई। चूँकि हम सीढ़ी पर ही थे इसलिए मुझे रुकना पड़ा क्योंकि हमारी चुदाई की आवाज़ें नीचे तक जा सकतीं थीं। इसका फ़ायदा उठाकर उन्होंने मेरा लंड अपने मुँह से निकाला और फिर उसने अपना एक पैर उठाकर सीढ़ियों की रेलिंग पर रख दी और अपनी साड़ी कमर तक उठा दी।&lt;br /&gt;फिर उसने अपने दोनों हाथों से अपनी चूत फैलाकर मुझे निमंत्रण दिया। मैं घुटनों पर बैठ गया और अपने दोनों हाथों से उनकी जाँघ पकड़कर उन्हें अपनी ओर खींचकर उनकी चूत चाटने लगा। फिर अपना लंड उसकी चूत में लगाया और पेल दिया। चूत गीली होने के कारण बिना रुके सीधे जड़ तक पहुँच गया। फिर मैंने धक्के लगाने शुरु किए। मैं ज़ोर-ज़ोर से धक्के लगा रहा था। कुछ ही देर बाद उनकी चूत कुछ टाईट हुई और वे झड़ गईं। मैं भी तेज़ी से झड़ा। फिर उन्होंने अपने कपड़े ठीक किए, मुझे एक चुम्मा दिया और नीचे चली गई।&lt;br /&gt;मैं अपने कपड़े ठीक कर नीचे अपने कमरे में आया। वहाँ नेहा कम्प्यूटर पर अभी भी काम कर रही थी। मैं पीछे से उसके अंगों को देख रहा था। कुछ देर बाद उसने कहा कि उसका काम खत्म हो गया। वह उठी और जाने लगी। ज्यों ही वह खड़ी हुई, मेरा ध्यान उसकी स्कर्ट पर गया। उसकी स्कर्ट ठीक उसकी गाँड के नीचे गीली हो गई थी।&lt;br /&gt;मैंने उसे रोका और कहा- ज़रा यहाँ तो आना।&lt;br /&gt;नेहा- क्या है? कहते हुए मेरे पास आई।&lt;br /&gt;मैं- तुम्हारी स्कर्ट पीछे से गीली हो गई है।&lt;br /&gt;नेहा- बैठे-बैठे पसीना हो रहा था ना, इसलिए हो गई होगी।&lt;br /&gt;मैं- सिर्फ एक गोल सा धब्बा है, अजीब सा लग रहा है।&lt;br /&gt;उसने स्कर्ट घुमाकर पीछे का हिस्सा आगे किया और यह देखकर असमंजस में पड़ गई। फिर उसने कहा- मैं नीचे कैसे जाऊँगी? माँ और आँटी क्या सोचेंगी।&lt;br /&gt;मैंने कहा- कुछ देर खड़ी रहो, सूख जाएगा।&lt;br /&gt;मैं कम्प्यूटर पर बैठ गया और वह मेरे पीछे खड़ी हो गई। मैंने उससे कहा- तुमने अभी तक जो भी काम किया, वह इसमें ही होगा।&lt;br /&gt;उसने कहा- प्लीज़ उसे खोलिएगा मत।&lt;br /&gt;मैंने पूछा- क्यों?&lt;br /&gt;उसने कहा- बस ऐसे ही।&lt;br /&gt;मैंने कहा- मैं खोलता हूँ, और बताता हूँ कि उसे कैसे ग़ायब करते हैं।&lt;br /&gt;मैंने खोला तो देखा कि उसने मेरी गुप्त फाईलों को खोला था और नंगी चुदाई वाली तस्वीरें देखीं थीं।&lt;br /&gt;मैंने उसे यह साफ करना सिखाया। फिर उसने कहा कि अच्छा हुआ आपने बता दिया वरना मैं किसी दिन पकड़ी जाती।&lt;br /&gt;मैंने कहा- पकड़ी तो तुम फिर भी जाओगी।&lt;br /&gt;उसने पूछा- वह कैसे?&lt;br /&gt;मैं- इसी तरह, यदि तुम नैपकिन का प्रयोग नहीं करोंगी और स्कर्ट गीली करोगी तो कोई भी पकड़ लेगा।&lt;br /&gt;वह शरमा गई, उसका चेहरा लाल हो गया।&lt;br /&gt;मैंने कहा- फिल्म देखोगी?&lt;br /&gt;उसने कहा- नहीं मैं सबसे नई फिल्म देख चुकी हूँ।&lt;br /&gt;मैं- बेवक़ूफ, वो वाली।&lt;br /&gt;नेहा- है?&lt;br /&gt;मैं- हाँ।&lt;br /&gt;नेहा- तो दिखाईए।&lt;br /&gt;मैंने एक डीवीडी निकाली और उसे चालू किया। फिल्म शुरु हुई, 69 की मुद्रा दिखा रहे थे। मेरा खड़ा हो गया और लोअर उठ गया। ख़ैर उसका ध्यान फिल्म पर था। उसकी साँसें तेज़ हो गईं, वह गर्म हो गई। वह मेरी बगल वाली कुर्सी पर बैठने लगी तो मैंने उसे अपना रुमाल दिया और कहा- उसे अपनी चड्डी में डाल लो। उसने उसको मोड़कर अपनी चड्डी में डाल ली।&lt;br /&gt;फिल्म में लड़का लड़की को तरह-तरह की मुद्राओं में चोद रहा था। तभी नीचे से उसकी माँ की आवाज़ दी कि जाना नहीं है क्या?&lt;br /&gt;उसने कहा - बस दो मिनट माँ।&lt;br /&gt;फिर वह उठी और जाने लगी।&lt;br /&gt;मैंने कहा - मेरा रुमाल?&lt;br /&gt;उसने कहा - बाद में नया दे दूँगी।&lt;br /&gt;मैंने कहा - मुझे वही चाहिए।&lt;br /&gt;नेहा - अच्छा, साफ़ करके दे दूँगी।&lt;br /&gt;मैं- मैं कर लूँगा।&lt;br /&gt;तब उसने चड्डी में हाथ डाला और रुमाल निकालकर टेबल पर रख दिया। मैं उठा और रुमाल लेकर सूँघने लगा।&lt;br /&gt;उसने पूछा- यह क्या कर रहे हो?&lt;br /&gt;मैं- देख रहा हूँ, कैसी ख़ुशबू है!&lt;br /&gt;उसने पूछा- कैसी है?&lt;br /&gt;मैं- बिल्कुल मदहोश कर देने वाली।&lt;br /&gt;फिर वह चली गई। शाम को वह और उसकी माँ छत पर टहल रहे थे। मैं भी अपने छत पर आया। उनसे दो-चार बातें हुईं। फिर मैंने अपना रुमाल निकाला और पसीना पोंछने लगा। तभी उनकी काम वाली बाई आ गई और किरण आँटी नीचे लगी गईं। फिर मैं रुमाल सूँघकर नेहा को चिढ़ाने लगा। बीच-बीच में उसे रुमाल चाटकर भी दिखाता। मानों वह रुमाल उसकी बुर है। वह शरमा जाती।&lt;br /&gt;एक दिन वह फिर अपनी माँ के साथ कम्प्यूटर पर काम के बहाने आई। मैं समझ गया कि माल गर्म है।&lt;br /&gt;उसने कहा- आज बाकी की मूवी देखनी है।&lt;br /&gt;मैंने फिर वही डीवीडी लगा दी। चुदाई का सीन चलने लगा, वह गर्म हो रही थी।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5371403670818517101-9116567661942225127?l=mastjanghu.blogspot.com'/&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://mastjanghu.blogspot.com/feeds/9116567661942225127/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='https://www.blogger.com/comment.g?blogID=5371403670818517101&amp;postID=9116567661942225127&amp;isPopup=true' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5371403670818517101/posts/default/9116567661942225127'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5371403670818517101/posts/default/9116567661942225127'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://mastjanghu.blogspot.com/2009/10/1.html' title='नेहा की चूत खोली-1'/><author><name>JAI SINGH</name><uri>http://www.blogger.com/profile/01785593676712838482</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:extendedProperty xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' name='OpenSocialUserId' value='15234607527984438017'/></author><thr:total xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5371403670818517101.post-2585788858470904787</id><published>2009-10-28T14:23:00.011+05:30</published><updated>2009-10-28T14:39:18.090+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='sexy story hindi mein'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='hindi adult stories'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='antarvasna stories'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='Adult stories'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='hindi sex stories'/><title type='text'>मस्तानी लौन्डिया</title><content type='html'>प्रेषक : संजीव चौधरी &lt;br /&gt;मेरा नाम संजीव है। मैं २६ साल का हूँ और एक प्राईवेट फ़र्म में सेल्स मैनेजर हूँ। मेरी शादी नहीं हुई है, अकेला दिल्ली में रह रहा था।&lt;br /&gt;दो महीने पहले मेरी ममेरी बहन १२वीं की परीक्षा के बाद मेरे साथ रहने आ गई। उसको अभी स्पोकन ईंग्लिश का एक कोर्स करना था फ़िर दिल्ली युनिवर्सिटी से बी.ए.। उसके मम्मी-पापा उसे मेरे घर छोड़ कर चले गए और मुझे उसका गार्जियन बना गए। बी.ए. में एड्मिशन के बाद उसे होस्टल मिलने पर उसे होस्टल जाना था। उसका नाम निशु था, १८ साल की निशु की जवानी एक दम से खिली हुई थी। ५'५" की निशु का रंग थोड़ा सांवला था, पर इकहरे बदन की निशु की फ़िगर में गजब का नशा था, ३४-२२-३४ की निशु को जब भी मैं देखता मेरे लंड में हल्का हल्का कड़ापन आना शुरु हो जाता। हालाँकि मैं दिखावा करता कि मुझे उसके बदन में कोई दिलचस्पी नहीं है, पर मुझे पता था कि निशु को भी मेरी नज़र का अहसास है। करीब एक सप्ताह में हम लोग काफ़ी घुल-मिल गए।&lt;br /&gt;मेरे दोनों करीबी दोस्तों सुमित और अनवर से भी निशु खूब फ़्रेंड्ली हो गई थी। वो दोनों लगभग रोज़ मेरे घर आते थे।&lt;br /&gt;मई के दूसरे शनिवार के एक दोपहर की बात है। निशु कोचिंग क्लास गई थी और हम तीनों दोस्त बैठ कर बीयर पी रहे थे। बात का विषय तब निशु ही थी। मेरे दोनों दोस्त उसकी फ़िगर और बॉडी की बात कर रहे थे, पर मैं चुप था।&lt;br /&gt;अनवर ने मुझे छेड़ा कि मैं एकदम बेवकूफ़ हूँ कि अब तक उसकी जवानी भी नहीं देखी है। मेरे यह कहने पर कि वो मुझे भैया बोलती है, दोनों हंसने लगे और कहा कि ठीक है, हम लोग उपाय करके उसको थोड़ा ढीठ बनाएंगे, पर उन दोनों ने शर्त रखी कि मैं भी मौका मिलते ही उसे चोद लूंगा और फिर उन दोनों से अपना अनुभव कहूँगा।&lt;br /&gt;फिर अनवर बोला- यार उसकी एक पैंटी ला दो, तो मैं अभी मुठ मार लूँ।&lt;br /&gt;तभी दरवाजे की घण्टी बजी और निशु घर आ गई। सफ़ेद सलवार और पीले चिकन के कुर्ते में वह गजब की सेक्सी दिख रही थी। हम सब को बीयर के मजे लेते देख वो मुस्कुराई, सुमित ने उसको भी बीयर में साथ देने को निमन्त्रण दिया। मेरे उम्मीद के विपरीत वो हम लोगों के साथ बैठ गई।&lt;br /&gt;हम लोग इधर-उधर की बात करते हुए बीयर का मजा ले रहे थे। निशु भी खूब मजे ले रही थी।&lt;br /&gt;एक-एक बोतल पीने के बाद सुमित बोला- क्यों न हम लोग ताश खेलें, समय अच्छा कटेगा।&lt;br /&gt;सब के हाँ कहने पर मैं ताश ले आया और तब सुमित बोला- चलो अब आज के दिन को फ़न-डे बनाया जाए।&lt;br /&gt;निशु ने हाँ मे हाँ मिलाई।&lt;br /&gt;सुमित अब बोला- हम सब स्ट्रीप-पोकर खेलते हैं, अगर निशु हाँ कहे तो ! वैसे भी अब आज फ़न-डे है।&lt;br /&gt;निशु का जवाब था- अगर भैया को परेशानी नहीं है तो मुझे भी कोई परेशानी नहीं है।&lt;br /&gt;अब अनवर बोला- निशु, हम लोगों के बदन पर चार कपड़े हैं, तुम अपना दुपट्टा हटाओ नहीं तो तुम्हारे पाँच कपड़े होंगे।&lt;br /&gt;निशु मजे के मूड में थी, बोली- नहीं, अकेली लड़की खेलूंगी, तीन लड़कों के साथ मुझे इतनी छूट मिलना चाहिए।&lt;br /&gt;सुमित फ़ैसला करते हुए बोला- ठीक है, पर हम लड़कों के कपड़े तुमको उतारना होगा, और तुम्हारा कपड़ा वो लड़का उतारेगा जिसके सबसे ज्यादा अंक होंगे।&lt;br /&gt;मैं सब सुन रहा था, और मन ही मन में खुश हो रहा था। अब मुझे लग रहा था कि मैं सच में बेवकूफ़ हूँ, निशु तो पहले से मस्त लौंडिया थी।&lt;br /&gt;मेरे सामने अनवर था, निशु मेरे दाहिने और सुमित मेरे बाँए था। पहला गेम अनवर हारा और नियम के मुताबिक निशु ने अनवर कि कमीज उतार दी।&lt;br /&gt;दूसरे गेम में मैं हार गया, और निशु मुस्कुराते हुए मेरे करीब आई और मेरा टी-शर्ट उतार दी। पहली बार निशु का ऐसा स्पर्श मुझे अच्छा लगा।&lt;br /&gt;तीसरे गेम में निशु हार गई और सुमित को उसका एक कपड़ा उतारना था। सुमित ने अपने दाहिने हाथ से उसका दुपट्टा हटा दिया और अपने बाँए हाथ से उसकी एक चुची के हल्के से छू दिया। मेरा लंड अब सुरसुराने लगा था।&lt;br /&gt;अगले दो गेम सुमित हारा और उसके बदन से टी-शर्ट और बनियान दोनों निकल गये।&lt;br /&gt;इसके बाद वाली गेम मैं हारा और मेरे बदन से भी बनियान हट गया और फिर जब सुमित हारा तो अब पहली बार किसी का कमर के नीचे से कपड़ा उतरा। निशु ने खूब खुश होते हुए सुमित की जींस खोल दी। मैक्रोमैन ब्रिफ़ में सुमित का लंड हार्ड हो रहा है, साफ़ दिख रहा था।&lt;br /&gt;एक नई बीयर की बोतल तभी खुली। उसके मजे लेते हुए पत्ते बंटे, और इस गेम में निशु हार गई, और अनवर को उसके बदन से कपड़ा हटाना था। निशु अब मेरे सामने अनवर की तरफ़ पीठ करके खड़ी हो गई, जिससे अनवर को उसके कुर्ते की ज़िप खोलने में सुविधा हो।&lt;br /&gt;अनवर ने पहले अपने दोनों हाथ को पीछे से उसकी चुची पे ला कर दो-तीन बार चुची मसला, और फिर उसके कुर्ते की ज़िप खोल करके कुर्ते को उसके बदन से अलग कर दिया। एक बार हमारी नज़र मिली, वह मुझे देख कर मुस्कुराई। गुलाबी रंग की ब्रा में कसे उसकी शानदार छाती किसी को भी मस्त कर सकती थी। उसका एकदम सपाट पेट और गहरी नाभि देख हम तीनों लड़कों के मुँह से एक ईईईससस निकलते-निकलते रह गया।&lt;br /&gt;वो एकदम सामान्य दिख रही थी। उसकी नाभि के ठीक नीचे एक काला तिल देख सुमित बोल उठा- ब्यूटी स्पॉट भी शानदार जगह पर है निशु। इतनी जानदार फ़िगर है तुम्हारी, थोड़ा अपने बदन का ख्याल रखो।&lt;br /&gt;निशु बोली- कितना डायटिंग करती हूँ संजीव भैया से पूछिए।&lt;br /&gt;सुमित अब बोला- मैं तुम्हारे अंडर-आर्म के बालों के बारे में कह रहा हूँ।&lt;br /&gt;सच निशु के काँख में खूब सारे बाल थे, काफ़ी बड़े भी। ऐसा लगता था कि निशु काफ़ी दिनों से उसको साफ़ नहीं किया है। पहली बार मैं एक जवान लड़की की काँख में इतना बाल देख रहा था और अपने दोस्तों को दिल में थैंक्स बोल रहा था कि उनकी वजह से मुझे निशु के बदन को देखने क मौका मिल रहा था।&lt;br /&gt;निशु पर बीयर का मीठा नशा हो गया था और वो अब खूब मजे ले रही थी हम लड़कों के साथ। वैसे नशा तो हम सब पर था बीयर और निशु की जवानी का।&lt;br /&gt;निशु मुस्कुराई और बोली- चलिए अब पत्ते बाँटिए भैया। पत्ते बाँटने की मेरी बारी थी।&lt;br /&gt;ब्रा में कसे हुए निशु की जानदार चुचियों को एक नज़र देख कर मैने पत्ते बाँट दिए। यह गेम मैं हार गया। मुझे थोड़ी झिझक थी।&lt;br /&gt;पर जब निशु खुद मेरे पास आकर बोली- भैया खड़ा हो ताकि मैं तुम्हारी पैंट उतारूँ !&lt;br /&gt;तब मैं भी मस्त हो गया।&lt;br /&gt;मैंने कहा- ओके, जब गेम का यही नियम है तब फ़िर ठीक है, खोल दो मेरा पैंट, और मैं खड़ा हो गया।&lt;br /&gt;निशु ने अपने हाथ से मेरे बरमुडा को नीचे खींच दिया और जब झुक कर उसको मेरे पैरों से बाहर कर रही थी तब मेरी नज़र उसके ब्रा में कसी हुई चुचियों पर थी, जो उसके झुके होने से थोड़ा ज्यादा ही दिख रही थी।&lt;br /&gt;अनवर ने अपना हाथ आगे किया और उसके चूतड़ पर एक हल्का सा चपत लगाया। वो चौंक गई, और हम सब हंसने लगे।&lt;br /&gt;मेरा लंड फ़्रेंची में एकदम कड़ा हो गया था और निशु को भी यह पता चल रहा था।&lt;br /&gt;अगली बाजी अनवर हारा, और उसकी भी बनियान उतर गई। पर जब तक निशु उसका बनियान खोल रही थी, वो तब तक उसके पेट और नाभि को सहलाता रहा था।&lt;br /&gt;अगली बाजी मैं जीता और निशु हार गई। पहली बार मुझे निशु के बदन से कपड़ा उतारने का मौका मिला। निशु मेरे सामने आकर खड़ी हो गई। मेरे दिल में जोश था पर थोड़ी झिझक भी थी। मुझे निशु की सलवार खोलनी थी।&lt;br /&gt;मैंने अभी सलवार की डोरी पकड़ी ही थी कि अनवर बोला- थोड़ा सम्भल के ! जवान लड़कियों की सलवार के भीतर बम रहता है, ध्यान रखना संजीव।&lt;br /&gt;मैं झेंप गया, निशु भी थोड़ा झेंपी, पर फ़िर सम्भल गई और बोली- मैं आत्मघाती दल की सदस्या नहीं हूँ, सीधी-साधी लड़की हूँ भाई, ऐसा क्यों बोलते हैं अनवर भैया।&lt;br /&gt;मैं तब तक उसके सलवार को नीचे कर चुका था, और वो अपने पैरे उठा के उसको पूरी तरह से निकालने में सहयोग कर रही थी। वो अपने दोनों हाथ से मेरे कन्धे को पकड़ कर अपने पैर ऊपर कर रही थी, ताकि मैं सलवार पूरी तरह से उतार सकूँ।&lt;br /&gt;अब जब मैंने निशु को देखा तो मेरा लंड एक बार पूरी तरह से ठनक गया। गुलाबी ब्रा और मैरून पैंटी में निशु एक मस्तानी लौंडिया लग रही थी। उसका सांवला-सलोना बदन मेरे दोस्तों के भी लंड का बुरा हाल बना रहा था।&lt;br /&gt;इसके बाद की बाजी अनवर फ़िर हारा और निशु ने उसका पैंट खोल दिया। इस बार निशु के चूतड़ पे सुमित ने तबला बजाया, पर अब निशु नहीं चौंकी, वह शायद समझ गई थी कि अकेली लड़की होने की वजह से उसको इतना लिफ़्ट हम लड़कों को देना होगा।&lt;br /&gt;अब जबकि हम सब अपने अंडरगार्मेंट में थे, सुमित बोला- क्या अब हम लोग गेम रोक दें, इसके बाद नंगा होना पड़ेगा।&lt;br /&gt;उसने अपनी बात खत्म भी नहीं की थी कि अनवर बोला- कोई बात नहीं, नंगा होने के लिए ही तो स्ट्रीप-पोकर खेला जाता है।&lt;br /&gt;मैं दिल से चाह रहा था कि खेल ना रुके और मैं एक बार निशु को नंगा देखूँ।&lt;br /&gt;सुमित ने निशु से पूछा- बोलो निशु, तुम अकेली लड़की हो, आगे खेलोगी?&lt;br /&gt;उस पर तो मजे का नशा था। वो चुपचाप मुझे देखने लगी, तो अनवर बोला- अरे निशु तुम अपने इस भैया की चिंता छोड़ो। अगर तुम मेरी बहन होती, तो जितने दिन से तुम इसके साथ हो, उतने दिन में ये साला तुमको सौ बार से कम नहीं चोदता। देखती नहीं हो, इसका लंड अभी भी एकदम कड़ा है, सुराख में घुसने के लिए।&lt;br /&gt;और उसने अपना हाथ बढ़ाया और अंडरवीयर के उपर से मेरे लंड पे फ़ेर दिया। मैं इस बात की उम्मीद नहीं कर रहा था, चौंक गया। और सब लोग हँसने लगे, निशु भी मेरी हालत पे खुल कर हँसी। बीयर का हल्का नशा अब हम सब पर था।&lt;br /&gt;अगली बाजी अनवर हार गया और निशु मुस्कुराते हुए उसको देखी। अनवर अपनी ही मस्ती में था बोला- आओ, करो नंगा मुझे। तुम्हारे जैसी सेक्सी लौन्डिया के हाथों तो सौ बार मैं नंगा होने को तैयार हूँ।&lt;br /&gt;और जब निशु ने उसका अंडरवीयर खोला तो उसका ७" का फ़नफ़नाया हुआ लंड खुले में आ कर अपना प्रदर्शन करने लगा। अनवर भी निशु को अपने बाँहों में कस कर उसके होठ चूमने लगा और उसका लंड निशु की पेट पे चोट कर रहा था। तीन-चार चुम्बन के बाद उसने निशु को छोड़ा तब वो अपनी सीट पे बैठी।&lt;br /&gt;अनवर साइड में बैठ कर अपने लंड से खेलने लगा। वह साथ में अपना बीयर का ग्लास भी ले गया।&lt;br /&gt;अगले गेम में निशु हार गई और मुझे उसकी ब्रा खोलनी थी। वो आराम से मेरे सामने आ कर मेरी तरफ़ पीठ करके खड़ी हो गई, और पीठ से अपने बाल समेट कर सामने कर लिए, ताकि मैं अराम से उसके ब्रा की हुक खोल सकूँ।&lt;br /&gt;मैंने प्यार से ब्रा का हुक खोला, और वो अब सीधी हो गई, ताकि मैं उसकी चुचियों पर से ब्रा निकाल सकूँ।&lt;br /&gt;अनवर पे सच थोड़ा नशा हो गया था, बोला- अबे साले संजीव, अब तो छू ले उसको। तेरी बहन है, बार बार चूची नंगी करके नहीं देगी तेरे को।&lt;br /&gt;उसकी बात सुन मुझे खूब मजा आया, पर निशु को पता नहीं क्या लगा, बोली- मन है तो छू लीजिए संजीव भैया।&lt;br /&gt;मैं समझ गया कि अब वह भी हल्के नशे में थी। मैंने दो-चार बार उसकी चूची पे हाथ फ़ेरा। &lt;br /&gt;अगली बाजी मैं हार गया। निशु खुब खुश हुई और जोर से बोली- हाँ अब करुँगी आपको नंगा संजीव भैया।&lt;br /&gt;मैं खड़ा हो गया और उसने मेरे फ़्रेन्ची को नीचे कर दिया।&lt;br /&gt;मेरा फ़नफ़नाया हुआ लन्ड आजाद हो कर खुश हो गया। मेरा आधा सुपाड़ा मेरे फ़ोरस्कीन से बाहर झांक रहा था।&lt;br /&gt;अनवर कैसे चुप रहता, बोल पड़ा- निशु खेल लो उस लन्ड से, तुम्हारे भैया का है, हमेशा नहीं मिलेगा देखने के लिए।&lt;br /&gt;सुमित भी बोला- क्यों, मियाँ-बीवी राजी तो क्या करेगा काजी।&lt;br /&gt;और दोनों हँसने लगे।&lt;br /&gt;निशु मेरे लन्ड को ले कर सहलाने लगी कि सुमित बोला- हाथ से लन्ड के साथ तो लड़के खेलते हैं निशु ! लड़की तो लन्ड का लॉलिपॉप बना कर चूसती है।&lt;br /&gt;निशु से मैं यह उम्मीद नहीं कर रहा था। &lt;br /&gt;पर वो मेरे लन्ड को अपने मुँह में ले कर चूसने लगी। दो-चार बार के बाद उसने बुरा सा मुँह बनाया, शायद उसको अच्छा नहीं लगा तो वो मेरा लन्ड छोड़ कर सुमित के सामने बैठ गई।&lt;br /&gt;सुमित बोला- अब की बाजी में खेल खत्म हो जायेगा। इसलिए जो दूसरे को नंगा करेगा वो एक मिनट तक उसके प्राइवेट पार्ट को चूसेगा। मंजूर है तो बोलो वरना यहीं पे खेल समाप्त करते हैं।&lt;br /&gt;निशु की आंखे लाल हो गई थी। वो अब नशे में थी। उसने पत्ते उठा लिए और आखिरी बाजी बंट गई। मैं दिल से दुआ कर रहा था कि निशु हार जाए ताकि उसकी चूत का भी आज दर्शन हो जाए।&lt;br /&gt;और मेरी दुआ कुबूल हो गई। सुमित जीत गया और निशु हार गई। सुमित ने अब निशु हो अपनी बांहो में उठा करके उसको सेन्टर टेबल पे लिटा दिया और उसके दोनों पैरों के बीच आ गया। खूब प्यार से उसके मखमली जांघों को सहलाया और फिर मुझे और अनवर को पास आने का न्योता दिया- आ जाओ भाई लोगो, अब निशु की चूत का दीदार करो।&lt;br /&gt;मैं तो कब से बेचैन था इस पल के लिए।&lt;br /&gt;हम तीनों दोस्त मेज को घेर कर खड़े हो गये। निशु अब तक मुस्कुरा रही थी। सुमित ने निशु की पैंटी के ऊपर की इलास्टिक से फ़ोल्ड करना शुरु कर दिया। दूसरे फ़ोल्ड के बाद निशु की झांट की झलक मिलने लगी। धीरे-धीरे उसकी चूत की झलक भी मिलने लगी।&lt;br /&gt;सुमित ने उसके पैरों को ऊपर की तरफ़ करके पैंटी नीचे से पैरों से निकाल दी और फ़िर धीरे-धीरे उसके टांगों को थोड़ा साइड की तरफ़ खोल दिया और अब निशु की चूत की फ़ाँक एकदम सामने दिख रही थी। निशु की चूत पे २-२" के बाल थे और इन बड़ी-बड़ी झांटों की वजह से उसके चूत की घुंडी साफ़ नहीं दिख रही थी।&lt;br /&gt;सुमित ने उसकी चूत पे हाथ फ़ेरा और फ़िर उसके झांटों को साइड करके हम दोनों को उसकी पूरी चूत के दर्शन कराए।&lt;br /&gt;जब निशु की नज़र मेरे से मिली तब उसने अपने हाथों से अपना चेहरा ढ़क लिया। पर अब मुझे उसकी शर्म की परवाह नहीं थी। हम में से किसी को नहीं थी।&lt;br /&gt;निशु बोली- अब छोड़ दीजिए।&lt;br /&gt;पर सुमित ने उसको याद कराया कि अभी ३५ सेकेंड वो उसकी चूत चूसेगा।&lt;br /&gt;इसके बाद वो निशु की चूत चूसने में लग गया, अनवर मूठ मारने लगा और मैं सब चीज़ समेटने लगा। निशु के मुँह से सिसकारी निकलने लगी थी। &lt;br /&gt;नई-नई जवानी चढ़ी थी बेचारी पे, इसलिए वो इतना मजा पा कर के शायद झड़ गई और बोली- अब बस, अब मुझे पेशाब आ रही है।&lt;br /&gt;पर सुमित रुकने का नाम नहीं ले रहा था। निशु ने दो-तीन बार अपने बदन को सुमित की पकड़ से छुड़ाना चाहा, फ़िर उसी मेज पर ही सुमित के चेहरे पे सु-सु करने लगी। सुमित ने अब अपना चेहरा हटा लिया।&lt;br /&gt;निशु ने अपना बदन एकदम ढीला छोड़ दिया और खूब मूती, फ़िर शांत हो गई।&lt;br /&gt;दो मिनट ऐसे ही रहने के बाद उसे कुछ होश आया और तब वह उठी और फ़िर अपने कपड़े उठा कर अपने बेडरूम में चली गई।&lt;br /&gt;हम लोगों ने भी अपने कपड़े पहन लिए।&lt;br /&gt;सुमित बोला- अब थोड़ी देर उसको अकेला छोड़ वरना वो रोने लगेगी, जब उसको लगेगा कि क्या-क्या हुआ है।&lt;br /&gt;हम लोग अब पास की मार्केट की तरफ़ निकल गये, निशु तब बाथरूम में थी।&lt;br /&gt;आप सब को यह कहानी कैसी लगी? बताना !&lt;br /&gt;साथ ही यह भी बताना कि मुझे निशु के साथ किये गये मजे के बारे में भी लिखना चाहिए या नहीं।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5371403670818517101-2585788858470904787?l=mastjanghu.blogspot.com'/&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://mastjanghu.blogspot.com/feeds/2585788858470904787/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='https://www.blogger.com/comment.g?blogID=5371403670818517101&amp;postID=2585788858470904787&amp;isPopup=true' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5371403670818517101/posts/default/2585788858470904787'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5371403670818517101/posts/default/2585788858470904787'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://mastjanghu.blogspot.com/2009/10/blog-post_5417.html' title='मस्तानी लौन्डिया'/><author><name>JAI 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/&gt;प्रथम भाग से आगे :&lt;br /&gt;एक दिन वह फिर अपनी माँ के साथ कम्प्यूटर पर काम के बहाने आई। मैं समझ गया कि माल गर्म है।&lt;br /&gt;उसने कहा - आज बाकी की मूवी देखनी है।&lt;br /&gt;मैंने फिर वही डीवीडी लगा दी। चुदाई का सीन चलने लगा, वह गर्म हो रही थी।&lt;br /&gt;अचानक उसने मुझसे पूछा- क्या मैं आपकी गोद में बैठ सकती हूँ?&lt;br /&gt;मेरा लंड तो पहले से ही खड़ा था और उसकी बात सुनकर सलामी देने लगा। ख़ैर मैंने हाँ कर दी। वह बैठ गई। ज़्यों ही मेरे लंड का सम्पर्क उसकी गाँड से हुआ, मेरा लंड उसकी गाँड में घुसने के लिए बेताब होने लगा। ख़ैर मैं कुछ देर तक वैसे ही बैठा रहा, फिर मैंने अपना हाथ उसकी चूचियों पर रख दिया और सहलाने लगा। उसकी साँसें तेज़ हो गईं। यह देख मैं उसकी चूचियों को दबाने लगा। वह पूरी तरह गर्म हो चुकी थी। &lt;br /&gt;मैंने उसे उठने के लिए कहा, तो उसने कहा- रहने दीजिए ! मज़ा आ रहा है।&lt;br /&gt;मैंने कहा- उठो ! और मज़ा दूँगा।&lt;br /&gt;वह उठी तो मैंने अपनी कुर्सी पीछे की। फिर मैंने उसे टेबल पर झुका दिया और उसकी स्कर्ट उठा दी। उसकी पैन्टी गीली हो चुकी थी। यानि उसकी बुर पानी छोड़ रही थी।&lt;br /&gt;मैंने उसकी पैन्टी नीचे सरकाई और उसकी टाँगें फैलाईं। एकदम अपनी माँ पर गई थी। मैंने उसके दोनों नितम्बों को दबाना और चूसना शुरु किया। उसकी गोरी गाँड लाल हो गई। उसकी बुर लगातार पानी छोड़ रही थी।&lt;br /&gt;मैंने उसकी टाँगो और अधिक फैलाईं, नीचे बैठकर उसकी बुर को चाटने लगा। मैं अपनी जीभ उसकी बुर में डालने लगा। वह बेक़ाबू हो गई। थोड़ी ही देर में वह तेज़ी से झड़ी। यह उसकी ज़िन्दगी का पहला स्खलन था। फिर वह थोड़ी शांत हुआ अब मैंने अपना लोअर सरका कर कुर्सी पर बैठ गया और उसे बैठने के लिए कहा, वह मान गई। फिर मैंने अपने लंड के सुपाड़े को उसकी गाँड की छेद पर लगाया और उसे बैठाने लगा। मेरा लंड धीरे-धीरे उसकी गाँड में जाने लगा।&lt;br /&gt;थोड़ा दर्द हुआ पर शीघ्र ही पूरा लंड अन्दर चला गया। फिर मैं उसकी चूचियाँ दबाने लगा और उससे पूछा, बहुत आसानी से चला गया, पहले भी किया है क्या?&lt;br /&gt;उसने कहा - हाँ, अभी कुछ दिनों पहले ही स्कूल के दो सीनियरों ने मेरी जम कर गाँड मारी थी।&lt;br /&gt;मैं- वह कैसे?&lt;br /&gt;नेहा- हुआ यूँ कि मैं सुबह की प्रार्थनासभा में जाने की बजाय क्लास में मस्तराम पढ़ रही थी कि अचानक वे आ गए। मैंने मस्तराम डेस्क के अन्दर डाल दी। वे मेरे पास आए और पूछा कि तुम प्रार्थना में क्यों नहीं गई। मैंने उन्हें बताया कि तबीयत ठीक नहीं है। वे जाने लगे कि तभी अचानक मस्तराम डेस्क से नीचे गिर गई। उन्होंने देख लिया और कहा अच्छा तो यह बिमारी है। उसका पता तो सबको चलना चाहिए, नहीं तो फैलेगी।&lt;br /&gt;नेहा ने आगे बताया- मैं बुरी तरह से डर गई और उनके आगे गिड़गि़ड़ाने लगी कि प्लीज़ किसी को मत बताइएगा। पक्के हरामी थे दोनों। एक कहता है कि नहीं बताएँगे तो फैलेगी, कल किसी और को लग जाएगी, परसों किसी और को, फिर सारा स्कूल इसकी चपेट में आ जाएगा. मैने उनके पैर पकड़ लिए तो उन्होंने कहा कि एक शर्त पर छोड़ेंगे। मैंने कहा कि हर शर्त मंज़ूर है।&lt;br /&gt;उन्होंने कहा - पहले शर्त तो सुन लो।&lt;br /&gt;मैंने पूछा - क्या?&lt;br /&gt;उन्होंने कहा- गाँड मरवानी होगी।&lt;br /&gt;मैं फिर गिड़गिड़ाने लगी कि प्लीज़, मेरे साथ ऐसा मत कीजिए। पर हाथ में आया माल भला कोई छोड़ेगा! ख़ैर उन्होंने मेरी एक न सुनी और एक ने दरवाज़ा बन्द कर दिया। फिर दूसरे ने अपनी पैंट की ज़िप खोली और लंड निकालकर सहलाने लगा। उसका लंड खड़ा हुआ तो देखकर ही मेरी आँखों से आँसू आ गए। क़रीब ८ इंच लम्बा और ३ इंच गोलाई वाला था। फिर उसने कहा चिन्ता मत करो, पहले वह चोदेगा, उसका मुझसे पतला है।&lt;br /&gt;शायद वे समलैंगिक थे इसलिए उन्हें सिर्फ मेरी गाँड चाहिए थी। उन्होंने मुझे डेस्क पर कुतिया बनाया और एक मेरे आगे और दूसरा मेरे पीछे पहुँच गया। फिर आगे वाले ने पीछे वाले से पूछा कि यार पैकेट तो है ना? पीछे वाले ने कहा कि एक ही है, पर कोई बात नहीं बारी-बारी से इस्तेमाल कर लेंगे।&lt;br /&gt;फिर क्या था। सामने वाले ने अपना लंड मेरे मुँह में डाल दिया और बोला- ले चूस।&lt;br /&gt;मरती क्या ना करती ! मैं चूसने लगी।&lt;br /&gt;दूसरा मेरी गाँड में डालने लगा। गाँड सँकरी पड़ रही थी। उसने दूसरे से पूछा- यह तो बहुत टाईट है यार !&lt;br /&gt;तो दूसरे ने कहा- थूक लगा ले।&lt;br /&gt;उसने वैसा ही किया फिर डालने लगा। उसका थोड़ा सा ही अन्दर गया था कि मैं दर्द से छटपटाने लगी। चूँकि दूसरे ने मुँह में डाल रखा था इसलिए मेरी आवाज़ तक बाहर नहीं निकल पाई। उसने निकाला और फिर से थूक लगाया और दोबारा डालना शुरु किया और धीरे-धीरे करके पूरा डाल दिया।&lt;br /&gt;फिर उसने पेलना आरम्भ किया। धीरे-धीरे मेरा दर्द खत्म हो गया और आनन्द आने लगा। एक मुँह में तथा दूसरा गाँड में पेल रहा था।&lt;br /&gt;तभी पीछे वाले ने कहा- वह झड़ने वाला है।&lt;br /&gt;दूसरे ने कहा- एक ही है, उसे ख़राब मत कर यार, इसके मुँह में झड़।&lt;br /&gt;उसने अपना लंड निकाल लिया और आगे आया। यहाँ उसने अपने लंड से कॉण्डोम उतारा और दूसरे को दे दिया और उसने उसे चढ़ा लिया। फिर दोनों ने अपने स्थान बदल लिए। ज्योहीं दूसरे ने अपना ८ गुणा ३ इंच का लण्ड मेरी गाँड में डाला मेरी खुशी दर्द में बदल गई। मैं छटपटाने लगी, पर उसने रहम नहीं दिखाया और पूरा पेल दिया। फिर वह रुका और थोड़ा समायोजन करने की कोशिश करने लगा। कुछ देर में मैं सामान्य हुई तो उसने धीरे-धीरे पेलना शुरु किया।&lt;br /&gt;इधर सामने वाला मेरे मुँह में तेज़ी से झड़ा और ठंडा पड़ गया। ख़ैर उसका साथी चालू रहा। फिर अचानक वह वहशी हो गया और मेरी कमड़ पकड़कर ज़ोरों से धक्के लगाने लगा। फिर वह भी तेज़ी से झड़ा और मेरे ऊपर निढाल हो गया।&lt;br /&gt;जब उसने अपना लंड निकाला तो मेरी गाँड बन्द नहीं हो पा रही थी। उन्होंने अपने कपड़े ठीक किए। फिर एक ने एक गद्देदार रुमाल मेरी पैन्टी में डाला और मेरी पैन्टी चढ़ा दी, फिर चलते-चलते कहा- गर्म पानी से गाँड की सिंकाई कर लेना, ठीक हो जाएगी।&lt;br /&gt;उनके चले जाने के बाद मैंने बैठने की कोशिश की पर ठीक से बैठ नहीं पा रही थी। ख़ैर जैसे-तैसे किया। काफी अच्छे से चुदाई की थी सालों ने।&lt;br /&gt;शाम को जब मैंने सिंकाई की तो थोड़ा आराम मिला।&lt;br /&gt;इधर मैंने अब उसे उठाकर कम्प्यूटर टेबल पर झुका दिया और उसकी कमर पकड़ कर धक्के लगाने लगा। मैं तेज़ी से उसकी गाँड मार रहा था। थोड़ी ही देर में मैं चरम पर था। फिर मैं तेज़ी से झड़ा और उसे लेकर कुर्सी पर बैठ गया। उसकी बुर पानी छोड़ रही थी। मैंने अपनी एक ऊँगली उसकी बुर में डालकर अन्दर-बाहर करने लगा।&lt;br /&gt;तभी किरण आँटी आ गईं। आते ही बोली- आख़िर साले ने चोद ही दिया।&lt;br /&gt;उसने नेहा का हाथ पकड़ा और उसे मेर ऊपर से हटाने लगी।&lt;br /&gt;नेहा ने कहा- बस थोड़ा सा ! झड़ने वाली हूँ।&lt;br /&gt;आँटी- अच्छा ! मैं यहाँ खड़ी होकर तेरा झड़ना देखूँ? चल हट, मेरी बारी !&lt;br /&gt;कहते हुए उसने नेहा को उठा दिया और ख़ुद मेरी गोद में बैठ गई। उसने मेरा लंड सहलाया और उसे अपनी चूत में घुसा लिया और कहा चल चोद.. !&lt;br /&gt;मुझे दिक्कत हो रही थी तो मैं उसे अपने बिस्तर पर ले आया और उसे घोड़ी बनाकर चोदने लगा। इधर नेहा चुदने को बक़रार थी और अपनी माँ बगल में घोड़ी बन गई। मैं बारी-बारी उन्हें चोदने लगा।&lt;br /&gt;कुछ ही देर में किरण आँटी तेज़ी से झड़ी और ठण्डी पड़ गई। फिर उनका ख्याल मेरी ओर गया कि मैं नेहा कि गाँड मार रहा था।&lt;br /&gt;इस पर उन्होंने मुझसे कहा- अभी इसकी चूत नहीं खोली है क्या?&lt;br /&gt;मैंने कहा- नहीं।&lt;br /&gt;फिर उसने नेहा की ओर देखा और कहा- असली मज़ा तो चूत में है। चल मैं तेरी मदद करती हूँ।&lt;br /&gt;उसने नेहा को सीधा किया और उसका सिर अपनी गोद में ले लिया और उसकी दोनों टाँगें छितराकर मुझसे कहा- आ चल, मेरी बेटी की चूत का उदघाटन कर।&lt;br /&gt;मैंने उसकी चूत को चाटकर गीला किया और अपना लंड उसकी चूत की छेद पर टिकाया और फिर किरण आँटी ने उसका मुँह बन्द किया और मैंने एक ज़ोरदार धक्का दिया। मेरा लंड उसकी चूत को चीरता हुआ अन्दर चला गया। वह बुरी तरह से तड़प उठी और उसने अपनी माँ की जाँघ में नाखून गड़ा डाला।&lt;br /&gt;उसकी बुर लहूलुहान हो चुकी थी। जब वह थोड़ा शांत हुई तो मैंने पेलना शुरु किया। धीरे-धीरे उसे आनन्द आने लगा, तो किरण आँटी ने उसका मुँह छोड़ दिया और वह गाँड उठा-उठाकर चुदवाने लगी।&lt;br /&gt;फिर किरण आँटी ने कहा- देखा असली मज़ा इसमें है।&lt;br /&gt;नेहा- मुझे क्या मालूम, मैं तो जब भी रात में देखती, आप पापा से गाँड ही मरवाया करतीं थीं।&lt;br /&gt;इस पर किरण आँटी मुस्कुराई- अच्छा तो यह बात है?&lt;br /&gt;नेहा- क्या करूँ? पापा आपकी इतनी ज़ोर-ज़ोर से लेते थे कि मेरी नींद अक्सर खुल ही जाती थी।&lt;br /&gt;किरण आँटी- अच्छा, मैं कहा करती थी कि धीरे करो, नहीं तो बेटी जाग जाएगी, तो कहते कि जागने दो, अपनी माँ से कुछ सबक लेगी तो अपने पति को तीनों छेदों का सुख देगी।&lt;br /&gt;फिर किरण आँटी उठी और अपने कपड़ी ठीक किए और मुझसे वीर्य उसकी चूत में न डालने के लिए कहा और नीचे चली गई।&lt;br /&gt;मैंने अपनी गति बढ़ा दी। उसने मेरे हाथों को ज़ोर से पकड़ लिया। उसकी चूत टाईट हो गई और वह तेज़ी से झड़ी। मैं भी झड़नेवाला था, तो मैंने अपना लंड निकालना चाहा।&lt;br /&gt;उसने रोक लिया और कहा इसी में।&lt;br /&gt;फिर क्या था मैंने गति और बढ़ा दी और उसकी चूत अपने गर्म लावे से भर दी।&lt;br /&gt;हम कुछ देर अगल-बगल ऐसे ही लेटे रहे। इस दौरान मैं उसकी चूचियों से खेलता रहा। फिर वह उठी, अपनी चूत से बाहर बहता हुआ मेरा लावा साफ किया, कपड़े ठीक किए और मुझे एक तगड़ा अधर-चुम्बन दिया और जाने लगी। जाते वक्त वह ठीक से चल नहीं पा रही थी पर उसने अपनी स्कर्ट उठा रखी थी ताकि मैं उसकी गाँड की चाल देख सकूँ और मैं उसे जाते हुए देखता रहा।&lt;br /&gt;इसके बाद नेहा की एक दोस्त ने भी मुझसे चुदवाया और किरण आँटी ने भी मुझे हमारी एक और पड़ोसी को चोदने के लिए मज़बूर किया।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5371403670818517101-4826116819394304360?l=mastjanghu.blogspot.com'/&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://mastjanghu.blogspot.com/feeds/4826116819394304360/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='https://www.blogger.com/comment.g?blogID=5371403670818517101&amp;postID=4826116819394304360&amp;isPopup=true' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5371403670818517101/posts/default/4826116819394304360'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5371403670818517101/posts/default/4826116819394304360'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://mastjanghu.blogspot.com/2009/10/2_28.html' title='नेहा की चूत खोली-2'/><author><name>JAI SINGH</name><uri>http://www.blogger.com/profile/01785593676712838482</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:extendedProperty xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' name='OpenSocialUserId' value='15234607527984438017'/></author><thr:total xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5371403670818517101.post-557786784086231214</id><published>2009-10-28T14:23:00.009+05:30</published><updated>2009-10-28T14:39:02.980+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='sexy story hindi mein'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='hindi adult stories'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='antarvasna stories'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='Adult stories'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='hindi sex stories'/><title type='text'>मेरा प्यार दीप्ति</title><content type='html'>प्रेषक - विक्रम  &lt;br /&gt;अन्तर्वासना के सभी पाठकों को विक्रम का प्यार भरा नमस्कार। बड़ी कोशिशों के बाद मैं अपनी पहली कहानी आपके सामने लाया हूँ। दोस्तों मेरा नाम विक्रम है और मैं भरतपुर राजस्थान का रहने वाला हूँ।&lt;br /&gt;मेरी उम्र इक्कीस साल है, कद ५'११" है। बात पिछले वर्ष की है जब मैं बी. टेक प्रथम वर्ष में था। दीप्ति मेरे पड़ोस में रहती है, दिखने में वो बहुत ही सुन्दर है, हमेशा हँसता हुआ चेहरा, गोरा रंग, बड़ी-बड़ी आँखें, और ५ फुट ७ इंच कद है। उसकी फ़िगर ३१-२५-३४ है और उम्र में मुझसे २ साल छोटी है।&lt;br /&gt;मेरी माँ उसे बहुत पसन्द करती है, इसलिए वो अक्सर हमारे घर आती रहती थी। हम छत पर भी मिलते थे। दिन गुज़रते रहे और कब हमारी दोस्ती प्यार में बदल गई, वो मुझे मना नहीं कर पाई, क्योंकि वो पहले से ही चाहती थी। हम मज़बूरी में ज़्यादातर फोन पर बातें करते थे। साल का आख़िरी दिन आया। हम फोन पर बातें कर रहे थे, वो और उसके घरवाले कुछ देर पहले ही बाहर से आए थे, इसलिए जल्दी सो गए। मेरे घरवाले भी सो चुके थे।&lt;br /&gt;बातों-बातों में मैंने पूछा "क्या, मुझे नए साल का उपहार मिलेगा?&lt;br /&gt;पहले तो उसने मना कर दिया, फिर मान गई। रात को ठीक १२ बजते ही मैं उसके घर पहुँच गया, उसने दरवाज़ा खोल। वो मुझसे नज़रें नहीं मिला पा रही थी, शायद शरमा रही थी... उस रात उसके चेहरे पर एक नई खुशी थी।&lt;br /&gt;उसने दरवाज़ा लगाया और मेरे सीने से चिपक गई और बोली "हैप्पी न्यू ईयर मेरी जान..." पहले तो मैं थोड़ा डर गया, फिर उसने बिस्तर पर बिठा दिया। हम फोन पर कई बार सेक्स कर चुके थे, पर हकीक़त में कभी मौक़ा नहीं मिला था, सिर्फ चूमना छोड़कर।&lt;br /&gt;अब भी हिम्मत नहीं हो रही थी कुछ करने की। बस दोनों बातें कर रहे थे प्यार भरी! एक-दूसरे को निहार रहे थे, एक-दूसरे के आगोश में, बिना कुछ किए ही दोनों तड़प रहे थे। मैं उसके पैरों पर सिर रख कर लेटा हुआ था, वो मेरे बालों और होंठों पर हाथ फेर रही थी।&lt;br /&gt;आख़िरकार मेरे सब्र का बाँध टूट गया, और मैं उस पर टूट पड़ा। उसे चूमने लगा, वो भी यही चाहती थी, इसलिए मेरा साथ देने लगी। हम दोनों की हालत ख़राब हो रही थी... उस वक़्त दिमाग ने काम करना बन्द कर दिया...।&lt;br /&gt;सच में क्या होंठ थे...! एकदम गुलाबी और रसीले... मज़ा आ गया, फिर मैं उसे गर्दन पर चूमने लगा। वो मस्त होने लगी और सिसकारियाँ लेने लगी... आह... उउउउह्हह्हहहह... शह्हहह... उसकी सिसकारियाँ मुझमें जोश भर रहीं थीं।&lt;br /&gt;बोलने लगी "विक्रम प्लीज़ हट जाओ..." वरना मैं पागल हो जाऊँगी, पर मैं कहाँ मानने वाला था।&lt;br /&gt;थोड़ी ही देर में हम नंगे हो गए...। कसम से, क्या चूत थी... एकदम गुसाबी। मेरा एक हाथ उसकी चूचियों पर चल रहा था और दूसरा उसकी चूत पर। चूत भट्ठी हो रही थी और पूरी गीली हो चुकी थी... उसकी साँसें तेज़ और गरम थीं जो मुझे महसूस हो रही थीं। सपनों में तो उसे कितनी बार चोद चुका था, पर आज सपना सच लग रहा था।&lt;br /&gt;हम पागलों की तरह एक-दूसरे को चूम रहे थे, जीभ से जीभ मिला कर एक-दूसरे का रस पी रहे थे और एक-दूसरे के अंगों को चूम रहे थे।&lt;br /&gt;उसने अपने पैरों से मेरे लण्ड को सहलाना शुरु किया, और अपने चूतड़ों को ऊपर उठा रही थी। मैं समझ गया कि अब वो चुदने के लिए तैयार है। मैंने लण्ड उसकी चूत पर रख कर ज़ोर का धक्का लगाया। उसकी चीख निकल गई... "आह्ह्हह्हह विक्रम लग गई" मैं बुरी तरह डर गया। मुझे लगा कि कोई जाग गया है। मैंने जल्दी से लाईट बन्द कर दी।&lt;br /&gt;फिर हम दोनों चुप हो गए। दीप्ति रो रही थी। मैंने पूछा क्या हुआ तो बोली "...प्लीज़ मैं अब नहीं कर सकती.... मेरे बहुत दर्द हो रहा है।"&lt;br /&gt;फिर थोड़ी देर बाद जब बत्ती जलाई तो देखा, पूरी बेडशीट खून से सनी थी। वो बहुत रोई, बोली "सुबह अगर माँ ने देख लिया तो मुझे मार ही डालेगी! जान प्लीज़ अपने घर जाओ।" वो कराह रही थी।&lt;br /&gt;मुझे उसकी हालत पर तरस आ रहा था, मैं बोला, "सेक्स नहीं कर सकती तो मेरा लण्ड तो चूस सकती हो...।" वो मान गई और मुझे फर्श पर लिटा दिया और हाथ में लेकर हिलाने लगी। कुछ देर देखती रही और चूसने लग गई... कसम से दोस्तों, मैं तो जन्नत में था, मेरा शरीर अकड़ने लगा।&lt;br /&gt;वो बुरी तरह से काँप रही थी, थोड़ी देर में मैंने अपना वीर्य उसके मुँह में निकाल दिया... हम दोनों निढाल से पड़ गए।&lt;br /&gt;फिर उसे भी जोश आने लगा, बोली "विक्रम मेरी भी चूसो ना...। मैंने उसके पैर चौड़े किए और उसे जीभ से चोदने लग गया...। उसने अपने पैरों से मुझे जकड़ लिया। उसकी सिसकारियाँ तेज़ होने लगीं। तरह-तरह की आवाज़ें निकलना लगीं... आह…………आह……उह्ह्ह्…उह्ह्ह्…उह्ह्ह्…उह्ह्ह्…शह्ह्ह्ह्ह्ह्हशह्ह्ह्ह्ह्ह्हशह्ह्ह्ह्ह्ह्ह….आहह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह………हाय्…… मै तो गई यार! और वो झड़ गई।&lt;br /&gt;थोड़ी देर में हम दोनों फिर शुरु हो गए। वह बोली "थोड़ा धीरे करना... दर्द होता है... इस बार मैंने जल्दबाज़ी नहीं की और उसे चोदने लगा। वो भी सारा दर्द भूल कर मेरा साथ देने लगी... उसने मुझे कस कर पकड़ लिया... बोली "और ज़ोर से... जल्दी-जल्दी करो……आहह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह………उह्ह्ह् ष्ह्ह्ह्ह्ह उह्ह्ह् पूरा अन्दर तक डाल दो।&lt;br /&gt;पागलों की तरह चूमने लगी और वो फिर से झड़ गई। उसकी आँखों से खुशी झलक रही थी... साथ ही आँसूँ भी निकल पड़े। बोलने लगी "मैं तुम्हारे लिए कुछ भी कर सकती हूँ।"&lt;br /&gt;मैं उसकी चूत में ही झड़ गया। उस रात मैंने उसे चार बार चोदा।&lt;br /&gt;हमें जब भी अवसर मिलता है हम सम्भोग करते हैं। हमने छत, बाथरुम, गार्डन में ना जाने कितनी बार सम्भोग किया है... पर एक दिन वो यहाँ से चली गई।&lt;br /&gt;मेरे पास उसकी यादों के सिवा कुछ नहीं बचा।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5371403670818517101-557786784086231214?l=mastjanghu.blogspot.com'/&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://mastjanghu.blogspot.com/feeds/557786784086231214/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='https://www.blogger.com/comment.g?blogID=5371403670818517101&amp;postID=557786784086231214&amp;isPopup=true' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5371403670818517101/posts/default/557786784086231214'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5371403670818517101/posts/default/557786784086231214'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://mastjanghu.blogspot.com/2009/10/blog-post_7495.html' title='मेरा प्यार दीप्ति'/><author><name>JAI SINGH</name><uri>http://www.blogger.com/profile/01785593676712838482</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:extendedProperty xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' name='OpenSocialUserId' value='15234607527984438017'/></author><thr:total xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5371403670818517101.post-2790043477510872443</id><published>2009-10-28T14:23:00.008+05:30</published><updated>2009-10-28T14:38:53.048+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='sexy story hindi mein'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='hindi adult stories'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='antarvasna stories'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='Adult stories'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='hindi sex stories'/><title type='text'>तेरे घर आ रही हूँ</title><content type='html'>प्रेषिका - लीना के  &lt;br /&gt;नमस्कार प्रिय पाठक&lt;br /&gt;मैं निशु&lt;br /&gt;मैं आपको अपनी एक कहानी बताता हूँ। मैं मुम्बई का रहने वाला हूँ। मेरी कहानी १९ मई २००९ को घटी सच्ची कहानी है। मेरे घर के सारे सदस्य गाँव गए थे तो मुझे ही घर का पूरा काम करना पड़ता था। पूरे घर का काम करने में पूरा दिन चला जाता तो मैं अपने दोस्त को रोज़ नहीं मिल पाता। मेरे दोस्तों के समूह में हम ७ दोस्त थे। ३ लड़कियाँ और ४ लडके। उसमें से सिर्फ़ ३ लोग ही मुम्बई में थे। लीना (परिवर्तित नाम), राज और मैं।&lt;br /&gt;१७ मई को राज अपने दादी के घर चला गया तो फिर लीना और भी बोर होने लगी। क्योंकि लीना तो बहुत ही अमीर परिवार से थे और रोज़ हमें घुमाने या पार्टी के लिए ले जाती थी। लीना वैसे दिखने में एकदम हॉट, सेक्सी है। कोई भी उसे देखे तो उसका खड़ा होकर अण्डरवीयर में सलाम करता होगा। उसकी फिगर तो शायद ३२-२८-३२ होगी। उसकी एक-एक अदा हर किसी को फ़िदा होने पर मज़बूर करती थी। उसके होंठ तो एकदम लाल टमाटर जैसे थे, उसे देखकर मुझे तो रोज़ किस्स करने की इच्छा होती, पर कभी मौक़ा नहीं मिला था।&lt;br /&gt;१९ तारीख को मेरा नसीब खुल गया और लीना ने मुझे कॉल किया और पूछा कि क्या आज तुम खाली हो क्या। मुझे लगा कि आज वह फिर से मुझे कहीं घुमाने ले जाना चाहती है। मैंने कहा - हाँ फ्री हूँ।&lt;br /&gt;तो उसने कहा - मैं तेरे घर आ रही हूँ।&lt;br /&gt;मैंने कहा - ठीक है।&lt;br /&gt;फोन रखने के लगभग २० मिनट बाद वह मेरे घर आ गई। मैं अपने घर में हमेशा की तरह कम्प्यूटर पर गाने सुन रहा था। मैंने उससे पूछा कि चाय या सॉफ्ट-ड्रिंक लोगी, तो उसने कहा कुछ भी चलेगा। मैं उसके पसन्द की ७अप की २ गिलास लेकर बाहर आया तो देखा कि लीना मेरे कम्प्यूटर के सामने बैठी है। मैंने उसे १ गिलास दिया और मैं उसके पास वाले बिस्तर पर बैठ गया। उसे सेवन अप की घूँट मारी और कम्प्यूटर में मेरी तस्वीरें देखने लगी।&lt;br /&gt;अचानक उसने मेरी एक हॉट तस्वीर देखी और फिर मुझे घूर कर देखने लगी। मैं उसे देखकर डर गया। उसी समय उसका मोबाईल बजा और उसके हाथ से गिलास उसकी चूचियों पर गिर गई और उसकी टीशर्ट भीग गई। टीशर्ट भीगने के कारण उसकी सफ़ेद टी-शर्ट से उसकी ब्रा साफ-साफ दिखने लगी। मैं तुरन्त उठकर उसके पास चला गया और गिरा हुआ गिलास उठाया और पूछा, कहीं लगी तो नहीं। वो शर्म के मारे मुझसे नज़रें नहीं मिला पा रही थी। उसे ऐसी हालत में देखते ही मेरा लंड खड़ा हो गया। मैंने उससे कहा कि बाथरूम में जाकर धो लेना, पर वह नहीं मानी। और उसी हालत में वह घर से बाहर भी नहीं जा सकती था। तो वह मान गई और बाथरूम चली गई। १० मिनट वो बाहर नहीं आई, मैं सोचने लगा कि क्या कर रही होगी।&lt;br /&gt;जब वह वापस आई तो मैं उसे बस देखता ही रह गया। वह काले रंग की ब्रा और पैन्टी पहने हुए मेरे सामने थी। थोड़ी देर के लिए मैं बिल्कुल सुन्न हो गया था। फिर मैं होश में आया और सीधे जाकर उसे ज़ोरों से गले लगा लिया और उसके होंठों पर होंठ रखकर चूमने लगा। उसे ख़ुद को सँभालने का मौक़ा भी नहीं मिला।&lt;br /&gt;चूमते-चूमते मैंने अपना एक हाथ उसकी पैन्टी के अन्दर डाल कर उसके गोरे-गोरे और मुलायम चूतड़ों को सहलाने लग गया। फिर मैंने उसकी ब्रा भी उतार दी। ब्रा उतारते ही उसकी गुलाब़ी घुण्डियों वाली चूचियाँ मेरे सामने थीं। मैंने उन्हें दबोच लिया और एक हाथ से उसकी घुंडी को मसलने लगा, तो उसकी सिसकियाँ निकल पड़ीं। फिर मैंने एक झटके से उसकी पैन्टी को उतार कर उसे बिस्तर पर लिटा दिया, उसने भी मेरे कपड़े उतार दिए।&lt;br /&gt;उसके गाँड की छेद भी गुलाबी रंग की थी। मैं बीच-बीच में उसमें भी उँगली डाल देता, जिससे वह अचानक चिहुँक पड़ती। थोड़ी देर ऐसा करने के बाद मैंने उसे नीचे लिटा दिया, उसकी टाँगों को अपने कंधों पर रखकर मैंने अपना लंड उसके गाँड की छेद पर रखा और हल्का सा धक्का लगाया तो मेरे लंड का सुपाड़ा उसके अन्दर चला गया, जिसके कारण वो चिल्ला पड़ी। मैं रुक गया और उसकी चूचियाँ दबाने लगा, उसका दर्द थोड़ा कम हुआ तो मैंने फिर उसकी जाँघों को पकड़ कर धक्का मारा और पूरा लंड अन्दर घुसा दिया। वह एकदम से चिल्ला उठी।&lt;br /&gt;मैंने उसके होंठों को चूमना शुरु कर दिया, फिर थोड़ा सामान्य होने पर मैं उसकी गाँड में अपना लंड अन्दर-बाहर करने लगा। अब उसे भी मज़ा आने लगा। मैंने साथ में उसकी चूत में ऊँगली करना भी जारी रखा, जिससे उसे और भी मज़ा आ रहा था। वह सिसकारियाँ लेने लगी और बोली, निशु थोड़ा और तेज़ करो। मैंने चुदाई की गति में और बढ़ावा किया। थोड़ी देर बाद उसकी चूत से पानी आने लगा।, और वह अपनी गाँड को दबोचने लगी। उसने कहा, "निशु... मैं गई... मैं गई...!" कहते हुए फिर वो आहहह्हहहह.... आह्ह्हहह्हहहह करने लगी।"&lt;br /&gt;पर मैं रुका नहीं। जल्द ही मेरा भी निकलने वाला था। मैंने पूछा - "लीना कहाँ छोड़ूँ?"&lt;br /&gt;उसने कहा, "अन्दर ही।"&lt;br /&gt;थोड़ी देर धक्के मारने के बाद मैंने अपना सारा वीर्य उसकी गाँड में ही छोड़ दिया। यह पहला अवसर था कि मैं किसी की गाँड में स्खलित हुआ था।&lt;br /&gt;फिर मैं उसके ऊपर लेट गया, थोड़ी देर लेटे रहने के बाद हमने एक-दूसरे को साफ़ किया और वापस आकर दुबारा बिस्तर पर लेट गए और बातें करने लगे। थोड़ी देर बाद मैं फिर से तैयार हो गया। पिर मैंने उसकी चूत की जमकर चुदाई की।&lt;br /&gt;उस दिन मैंने उसकी २ बार चुदाई की।&lt;br /&gt;फिर हम २२ को वाटर किंगडम चले गए और वहाँ भी मज़े लिए। यह मैं अगली कहानी में लिखूँगा।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5371403670818517101-2790043477510872443?l=mastjanghu.blogspot.com'/&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://mastjanghu.blogspot.com/feeds/2790043477510872443/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='https://www.blogger.com/comment.g?blogID=5371403670818517101&amp;postID=2790043477510872443&amp;isPopup=true' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5371403670818517101/posts/default/2790043477510872443'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5371403670818517101/posts/default/2790043477510872443'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://mastjanghu.blogspot.com/2009/10/blog-post_4539.html' title='तेरे घर आ रही हूँ'/><author><name>JAI SINGH</name><uri>http://www.blogger.com/profile/01785593676712838482</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:extendedProperty xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' name='OpenSocialUserId' value='15234607527984438017'/></author><thr:total xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5371403670818517101.post-8074993304150708150</id><published>2009-10-28T14:22:00.002+05:30</published><updated>2009-10-28T14:39:25.477+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='sexy story hindi mein'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='hindi adult stories'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='antarvasna stories'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='Adult stories'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='hindi sex stories'/><title type='text'>मिनी मेरी बन गई</title><content type='html'>प्रेषक : राज पाल सिंह  &lt;br /&gt;एक बार मैं फिर आपके सामने अपनी नई कहानी के साथ हाजिर हूँ। मैं अपना परिचय अपनी पिछली कहानी "तनु- मेरा पहला प्यार" और "मेरा प्यारा प्यार" में दे ही चुका हूँ।&lt;br /&gt;मेरी यह कहानी एकदम सच्ची है जो आप लोगो को एकदम अपने करीब लगेगी। मेरा अगला सैक्सपिरियन्स चाँद के साथ था। फिर नीना, फिर शैलजा, फिर कल्पना और फिर मिनी के साथ मेरा सैक्सपिरियन्स हुआ। पर आज ना जाने क्यों मुझे मिनी बहुत याद आ रही है। इसलिये मैं चाँद, नीना, शैलजा और कल्पना को साईड करते हुए पहले मिनी के साथ हुए सैक्सपिरियन्स को आप लोगो के साथ शेयर करता हूँ। उस वक़्त मैं 20 साल का और मिनी 19 साल की थी।&lt;br /&gt;मेरे माता-पिता दोनों टीचर थे। मेरी एक बडी बहन है। जो मेरे से लगभग दो साल बड़ी है। मेरी बहन की शादी बनारस में हुई। मेरे जीजाजी एक मल्टी-नैशनल कम्पनी में परचेज़ मैनेजर हैं। बी.एस सी के बाद मैंने बनारस हिन्दू युनिवर्सिटी में बी.फ़ार्मेसी में प्रवेश लिया। मैं होस्टल में रहने लगा। फिर दीदी ने अकेले होने की वजह से मुझे अपने साथ ही रहने को कहा। मैं होस्टल छोड़ कर दीदी-जीजाजी के साथ में रहने लगा। &lt;br /&gt;दीदी के पड़ोस में एक दुमंज़िला मकान था। जहाँ दो बहनें रहा करती थी। ऊपर बड़ी बहन जो कि मकान मालकिन भी थी और नीचे यानी ग्राउंड-फलौर पर छोटी बहन। बड़ी बहन लगभग 55 साल की थी और छोटी बहन लगभग 50 साल की थी। हम उन्हें ऊपर वाली आन्टी और नीचे वाली आन्टी कहते थे। ऊपर वाली आन्टी के तीन बच्चे थे। दो लड़के और एक लड़की। लड़की सबसे बड़ी थी। तीनों बच्चों की शादी हो चुकी थी और सभी बाहर रहते थे। इसलिये उपर वाली आन्टी-अकल ने अपनी सबसे बड़ी लड़की की लड़की को अपने साथ रखा हुआ था। उसका नाम लीनू था। लीनू लगभग 16 साल की थी और बनारस महिला कॉलेज़ में बी.ए. प्रथम वर्ष में पढ़ती थी। लीनू बहुत ही ख़ूबसूरत थी। खैर वो बाद में……&lt;br /&gt;नीचे वाली आन्टी के भी तीन ही बच्चे थे। दो लड़के और एक लड़की। लड़की सबसे बड़ी थी। तीनों बच्चे पढ़ रहे थे। लड़की का नाम मीनाक्षी था। घर में सब उसे मिनी कहते थे। मिनी लगभग 19 साल की थी और बनारस महिला कॉलेज़ में ही बी. एस सी. (बायो) अन्तिम वर्ष में पढ़ती थी। &lt;br /&gt;मिनी भी बहुत ही ख़ूबसूरत थी मगर लीनू से कुछ कम। मेरी बहन ने भी बी.एस सी. (बायो) की थी। इसलिये मिनी मेरी बहन से कभी-कभी पढ़ने आती थी। जब मैं दीदी-जीजाजी के साथ में रहने लगा तो दीदी मिनी को मेरे से पढ़ने के लिये कह देती। मिनी को मेरा समझाना अच्छा लगता था, इसलिये वो अकसर मेरे से पढ़ने आने लगी।&lt;br /&gt;धीरे-धीरे मैं और मिनी एक दूसरे को बहुत पसन्द करने लगे। मिनी से मेरी मुलाक़ातें बढ़ने लगी। ये मुलाक़ातें धीरे-धीरे प्यार में बदल गई। फिर एक दूसरे को बाँहो में भरना, किस करना, फिर एक दूसरे के अंगों को छूना भी शुरु हो गया। मैं मिनी के स्तनों को दबाने और सलवार के उपर से उसकी चूत को दबाने और फिर सलवार के अन्दर हाथ डाल कर चूत पर हाथ फिराने तक पहुँच गया। मिनी भी मेरी पैंट की ज़िप खोल कर मेरा लण्ड निकालने और दबाने तक पहुँच गई।&lt;br /&gt;एक दिन मिनी घर आई। उसे मुझ से केमिस्ट्री में कुछ पढ़ना था। हम दोनों ड्राइंगरूम में पढ़ने लगे। हमें पढ़ते देख कर मेरी बहन बोली कि तुम लोग पढ़ाई करो और मैं मार्केट हो कर आती हूँ। दो-तीन घंटे तक आ जाउँगी। कह कर वो चली गई। बहन के जाते ही मैं मिनी को छेड़ने लगा। &lt;br /&gt;मिनी ने कहा- क्या कर रहे हो। &lt;br /&gt;मैं बोला- मौके का फायदा उठा रहा हूँ।&lt;br /&gt;मैंने मिनी को खींच कर अपनी गोद में लिटा लिया।&lt;br /&gt;मैं मिनी के बालों में हाथ फिराने लगा। फिर मैं उसके गालों पर हाथ फिराने लगा। मैं उसके कुरते के ऊपर से उसके स्तन दबाने लगा। मिनी ने अपनी आंखें बंद कर रखी थी। फिर मैं उसके कुरते के गले के अन्दर से हाथ डाल कर उसके सख्त हो चुके स्तनों को दबाने लगा। फिर मैं उसके कुरते को उतारने लगा। &lt;br /&gt;मिनी बोली- क्या करते हो ! दीदी आने वाली होंगी।&lt;br /&gt;मैंने कहा- वो दो-तीन घंटे तक नही आँएंगी। कह कर मैं फिर उसके कुरते को उतारने लगा। &lt;br /&gt;मिनी बोली- प्लीज़ ! कोई आ जाएगा। &lt;br /&gt;मैने उठ कर दरवाज़ा बंद कर दिया। फिर मैं मिनी का हाथ पकड़ कर उसे बेडरूम में ले आया। मैंने मिनी को अपनी बाँहो में भर लिया, अपने जलते हुए होंठ मिनी के होंठों पर रख दिए। फिर मैं उसके नरम-नरम होंठों को अपने होंठों में भर कर चूसने लगा। &lt;br /&gt;मिनी ने मुझे अपनी बाँहो में कस लिया। मेरे हाथ मिनी के जिस्म पर फिर रहे थे। कुछ देर बाद मैंने मिनी को बैड पर लिटा दिया। फिर मिनी का कुरता उपर करके उसके चिकने पेट पर अपने जलते हुए होंठ रख दिए। फिर मैं उसके नरम-नरम गोरे-गोरे पेट को अपने होंठों में भर कर चूसने लगा। मिनी के मुँह से आह निकलने लगी।&lt;br /&gt;फिर मैं उसके कुरते को उतारने लगा। मिनी ने कोई विरोध नही किया। मैंने उसका कुरता उतार कर फ़ेंक दिया। मिनी के गोरे-गोरे स्तन गुलाबी ब्रा में फँसे थे। फिर मैं उसकी ब्रा के ऊपर से उसके स्तनों को दबाने लगा। मिनी ने अपनी आंखें बंद कर रखी थी। &lt;br /&gt;कुछ देर बाद मैंने उसकी ब्रा भी उसके तन से जुदा कर दी। फिर मैं उसके गोरे-गोरे सख्त स्तन दबाने लगा। साथ-साथ उसके गुलाबी निप्पल को हल्के-हल्के मसलने लगा। फिर मैं उसके नरम-नरम गोरे-गोरे स्तनों को अपने होंठों में भर कर चूसने लगा। मिनी के मुँह से सिसकियाँ निकलने लगी।&lt;br /&gt;फिर मैं उसके पेट पर हाथ फिराते हुए उसकी सलवार के अन्दर ले गया। मैं उसकी सलवार का नाड़ा खोलने लगा तो मिनी ने कोई विरोध नही किया। मैंने उसकी सलवार उतार कर फेंक दिया। मिनी ने गुलाबी पैन्टी पहनी हुई थी। फिर मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिये और सिर्फ जॉकी में मिनी से लिपट गया। फिर मैं उसकी पैन्टी के ऊपर से पाव रोटी की तरह उभरी हुई उसकी चूत को दबाने लगा। मिनी ने अपनी आंखें बंद कर रखी थी। फिर मैं उसकी पैन्टी के अन्दर से हाथ डाल कर उसकी चूत के बालों पर हाथ फिराने लगा। कुछ देर बाद मैंने उसकी पैन्टी भी उसके तन से जुदा कर दी।&lt;br /&gt;मेरा लण्ड तन कर खड़ा हो गया था और जॉकी को फाड़ कर बाहर आने को हो रहा था। मैंने जॉकी उतार कर फेंक दी। मैं मिनी की चिकनी टांगों पर हाथ फिराने लगा। फिर मैं मिनी की चूत के बालों में हाथ फिराने लगा। फिर हाथ फिराते-फिराते मैनें अपनी उँगलियॉ मिनी की चूत के अन्दर डाल दी। &lt;br /&gt;फिर उंगलियों से मिनी की चूत के फाँको को खोलने और बन्द करने लगा। फिर मैं मिनी की चूत के जी-पॉन्यट को रगड़ने लगा। मिनी के मुँह से सिसकियाँ निकलने लगी। मिनी ने मस्त होकर अपनी आंखें बंद कर ली। मेरा लण्ड मिनी की जांघों से रगड़ खा रहा था। मिनी ने मेरा लण्ड अपने हाथ में थाम लिया। वो मेरे लण्ड को अपने हाथ में दबाने लगी। मेरा लण्ड तन कर सख्त हो गया था। मिनी मेरे लण्ड को मुठ्ठी में भर कर उपर-नीचे और आगे-पीछे करने लगी। मैं मिनी की चूत मारने को बेताब हो रहा था।&lt;br /&gt;मैंने मिनी को कहा- मिनी ! बहुत मन हो रहा है। कर लें क्या ! &lt;br /&gt;मिनी कुछ नही बोली। मैंने इसे मिनी की हाँ समझ लिया। मैं मिनी के उपर लेट गया। मिनी का नंगा जिस्म मेरे नीचे दबा हुआ था। मैं अपने लण्ड को मुठ्ठी में भर कर मिनी की चूत के जी-पॉन्यट के उपर-नीचे करके रगड़ने लगा। फिर मैं अपने लण्ड को पकड़ कर मिनी की चूत के अन्दर डालने की कोशिश करने लगा। &lt;br /&gt;मिनी ने मेरा हाथ पकड़ लिया और बोली- हमें डर लगता है। प्लीज़ ! कंडोम के बिना कुछ नहीं करेंगे। प्लीज़ ! कंडोम हो तो लगा लीजिए। &lt;br /&gt;मैने एक बार दीदी के साथ साफ-सफाई में हाथ बँटाते हुए बैड की दराज में कंडोम देखे थे। मैंने फौरन उठ कर बैड की दराज में से कंडोम निकाल कर अपने लण्ड पर लगा लिया। मिनी ध्यान से मुझे कंडोम लगाते देख रही थी। कंडोम लगा कर मैं फिर से मिनी के ऊपर लेट गया। मिनी का नंगा जिस्म मेरे नीचे दब गया।&lt;br /&gt;फिर मिनी मेरे लण्ड को मुठ्ठी में भर अपनी चूत के ऊपर रगड़ने लगी और बोली- प्लीज़ ! ऐसे करते रहिए। अपने आप चला जाएगा। &lt;br /&gt;मिनी की चूत से कुछ चिकना-चिकना सा निकलने लगा था। शायद उसको यह करना अच्छा लग रहा था। वो मेरे लण्ड को अपनी चूत से रगड़े जा रही थी। मुझे बहुत ज्यादा उत्तेजना हो रही थी। इसी उत्तेजना में मैंने मिनी का हाथ पकड़ लिया। इससे पहले मैं कुछ समझ पाता मैं मिनी की चूत के ऊपर झड़ गया। &lt;br /&gt;कंडोम लगे लण्ड को चूत से रगड़ने की वजह से कंडोम फट गया था और मेरा वीर्य मिनी की चूत के बालों में भर गया था। मैं मिनी के बगल में लेट गया। मिनी उठ कर बाथरुम चली गई। कुछ देर बाद वो बाथरुम से अपनी चूत साफ करके आकर मेरी बगल में लेट गई। कुछ देर हम चुपचाप लेटे रहे। थोड़ी देर बाद मिनी ने मेरी तरफ करवट ले कर अपनी टांगों को मेरी टांगों पर रख लिया। मैंने भी करवट ले कर मिनी को अपनी बाँहो में भर लिया।&lt;br /&gt;मैंने अपने जलते हुए होंठ मिनी के होंठों पर रख दिए। फिर मैं उसके नरम-नरम होंठों को अपने होंठों में भर कर चूसने लगा। उसने मुझे अपनी बाँहो में कस लिया। मेरे हाथ मिनी के गोरे-गोरे और चिकने-चिकने जिस्म पर फिर रहे थे। मिनी भी अपने हाथों को मेरी पीठ पर फिर रही थी। कुछ देर मैं मिनी के होठों को चूसता रहा। फिर मैं मिनी के ऊपर लेट गया।&lt;br /&gt;फिर मैं साथ-साथ उसके गुलाबी निप्पल को हल्के-हल्के मसलने लगा। मेरा लण्ड फिर से तन कर खड़ा हो गया था और मिनी की चूत के बालों से रगड़ खा रहा था। मैं मिनी की चिकनी टांगों पर हाथ फिराने लगा।&lt;br /&gt;मेरा लण्ड मिनी की जांघों के बीच फंसा हुआ था। मिनी ने मेरा लण्ड अपने हाथ में थाम लिया। मैं मिनी को चोदने को बेताब हो रहा था। मिनी की चूत से फिर से कुछ चिकना-चिकना सा निकलने लगा था। फिर कुछ देर बाद मैं अपने लण्ड को पकड़ कर मिनी की चूत के अन्दर डालने की कोशिश करने लगा।&lt;br /&gt;मिनी ने फिर से मेरा हाथ पकड़ लिया और बोली- प्लीज़ कंडोम लगा लीजिए। &lt;br /&gt;मैंने फौरन फिर से बैड की दराज में से कंडोम निकाल कर अपने लण्ड पर लगा लिया। कंडोम लगा कर मैं फिर से मिनी के उपर लेट गया। मैने अपने को मिनी की टांगों के बीच में सैट कर अपने लण्ड को पकड कर मिनी की चूत के अन्दर डालने की कोशिश करने लगा। मिनी ने मेरा लण्ड अपने हाथ में थाम लिया और अपनी चूत के सुराख पर लगा दिया और बोली- अब धीरे से डालिए।&lt;br /&gt;मैंने हल्का सा ज़ोर लगाया। मेरे लण्ड का सुपाड़ा मिनी की चूत में घुस गया। मिनी के मुँह से आह निकली। &lt;br /&gt;उसने मुझे अपनी बाँहो में कस लिया और अपनी आँखें कस कर बन्द कर ली। मैंने थोड़ा ओर जोर लगाया। मेरा लगभग आधा लण्ड मिनी की चूत में घुस गया। मिनी के मुँह से सिसकियाँ निकलने लगी। फिर मैंने तीसरा और आखिरी धक्का दिया तो मेरा पूरा लण्ड मिनी के कौमार्य को चीरता हुआ चूत में समा गया। मिनी के मुँह से जोर से आह निकली। उसने मुझे अपनी बाँहो में पूरी ताकत से कस लिया।&lt;br /&gt;मैने भी मिनी को अपनी बाँहो में भर लिया और मैं उसके नरम-नरम होंठों को अपने होंठों में भर कर चूसने लगा ताकि वो अपना दर्द भूल जाए। मेरा पूरा लण्ड मिनी की चूत के अन्दर समाया हुआ था। हम दोनों ने एक दूसरे को इस कदर अपनी बाँह में जकड़ा हुआ था कि हवा भी हम दोनों के बीच से पास नहीं हो सकती थी। मिनी का नंगा जिस्म मेरे नंगे जिस्म के नीचे दबा हुआ था। मेरी टांगें मिनी की टांगों के बीच में फंसी हुई थी। मैं मिनी के माथे पर, फिर आँखों पर तथा गालों को किस करने लगा। मिनी भी मेरे गालों को किस करने लगी। &lt;br /&gt;कुछ देर हम दोनों इसी तरह से एक-दूसरे को चूमते रहे। फिर मैंने अपने लण्ड को धीरे से मिनी की चूत से थोड़ा सा बाहर निकाला और फिर अपने लण्ड को धीरे से मिनी की चूत में अन्दर घुसा दिया। फिर मैं अपने लण्ड को धीरे-धीरे से मिनी की चूत के अन्दर-बाहर करने लगा। कुछ देर बाद मिनी ने अपनी टांगें ऊपर की तरफ मोड़ ली और मेरी कमर के दोनों तरफ लपेट ली। मैं अपने लण्ड को धीरे-धीरे मिनी की चूत के अन्दर-बाहर कर रहा था। धीरे-धीरे मेरी रफ़्तार बढ़ने लगी। अब मेरा लण्ड मिनी की चूत में तेजी से अन्दर-बाहर हो रहा था। मैं मिनी की चूत में अपने लण्ड के तेज-तेज धक्के मार रहा था। हम दोनों सेक्स के नशे में चूर हो रहे थे। मिनी को भी मजा आने लगा था। वो मेरे हर धक्के का स्वागत कर रही थी।&lt;br /&gt;उसने मेरे हिप्स को अपने हाथों में थाम लिया। अब वो भी नीचे से मेरे धक्कों के साथ-साथ अपने हिप्स ऊपर-नीचे कर रही थी। जब मैं लण्ड उसकी चूत में से बाहर खींचता तो वो अपने हिप्स ऊपर उठा देती। जब मैं लण्ड उसकी चूत के अन्दर घुसाता तो वो अपने हिप्स पीछे खींच लेती। मैं तेज-तेज धक्के मार कर मिनी को चोदने लगा। मैं बैड पर हाथ रख कर मिनी के उपर झुक कर तेजी से उसकी चूत मारने लगा। अब मेरा लण्ड मिनी की चिकनी चूत में तेजी से आ-जा रहा था।&lt;br /&gt;मिनी भी अब आँखें खोल कर चुदाई का भरपूर मजा ले रही थी। मैं मिनी को पागलों की तरह से चोद रहा था। अब मैं पूरी तेजी से मिनी के उपर कूद-कूद कर उसे चोद रहा था। मिनी इस चुदाई के नशे से मदहोश हो रही थी। &lt;br /&gt;मैंने रुक कर मिनी से कहा- मिनी अच्छा लग रहा है क्या? &lt;br /&gt;मिनी बोली "हा बहुत अच्छा लग रहा है। करो ना। तेज-तेज करते रहो।" &lt;br /&gt;मिनी के मुहँ से ये सुन कर मैंने अपनी रफ्तार और बढ़ा दी। मैंने मिनी के हिप्स को हाथों से जकड़ लिया और छोटे-छोटे मगर तेज-तेज शॉट मार कर मिनी को चोदने लगा। &lt;br /&gt;मिनी के मुँह से मस्ती में "ओह्ह्ह्हहोहोह सस्स्स्स्स्स्सह्ह्ह हाहाह्ह्हआआ हा-हा करो-करो ऽअआह हाहअआ प्लीज़ राज, तेज-तेज करो ना।"&lt;br /&gt;मैं मिनी के उपर लेट गया और मैंने मिनी को अपनी बाँहो में भर लिया। फिर मैंने अपने होंठ मिनी के होंठों पर रख दिए और मैं उसके नरम-नरम होंठों को अपने होंठों में भर कर चूसते हुए उसे ओर तेजी से चोदने लगा। मेरा लण्ड सटासट मिनी की चूत में तेजी से अन्दर-बाहर हो रहा था।&lt;br /&gt;अब मैं मिनी की चूत में अपने लण्ड के तेज-तेज धक्के मार रहा था। हम दोनों सेक्स के नशे में चूर हो रहे थे। मिनी भी अपने होठों से मेरे होठों को चूसती हुई मजे से चुदाई का मजा ले रही थी। मैं मिनी को काफ़ी देर तक ऐसे ही चूमते हुए कस कर चोदता रहा। लगभग 5 मिनट तक हम दोनों एक दूसरे के होठों को चूसते हुए चुदाई का मजा लेते रहे। फिर अचानक मिनी ने मुझे कस कर अपनी बाँहो में भर लिया।&lt;br /&gt;उसने अपने होंठ मेरे होठों से अलग करके कहा- ओह राज, मैं तो होने वाली हूँ। प्लीज़ तुम भी हो जाओ। दोनों साथ-साथ होंगे। जब तुम होने लगो प्लीज़ तो इसे मेरे अन्दर से बाहर निकाल लेना। कंडोम का भी कोई भरोसा नही होता है। प्लीज़ बाहर ही होना।&lt;br /&gt;मैने कहा- ठीक है मिनी।&lt;br /&gt;और यह कह कर मैं तेज-तेज धक्के मार कर मिनी को चोदने लगा। &lt;br /&gt;लगभग 2 मिनट बाद अचानक मिनी ने एक जोर से आह भरी और अपने हिप्स और अपनी चूत को थोड़ा ऊपर की तरफ उठाया और फिर बैड पर अपने पैर पसार दिये। मैं समझ गया कि मिनी डिस्चार्ज हो चुकी है।&lt;br /&gt;मैं भी डिस्चार्ज होने वाला था, इसलिये मैं बैड पर हाथ रख कर मिनी के उपर झुक कर तेजी से उसकी चूत मारने लगा। अब मेरा लण्ड मिनी की चिकनी चूत में तेजी से आ-जा रहा था। मिनी आँखें बंद करके बैड पर सपाट लेट कर मेरे डिस्चार्ज होने का इंतजार कर रही थी। लगभग 2 मिनट तक मिनी को तेज-तेज चोदने के बाद जब मैं डिस्चार्ज होने लगा तो मैने मिनी के कहने के मुताब़िक, अपना लण्ड मिनी की चूत में से बाहर खींच लिया और मिनी की चूत के बाहर कंडोम में ही डिस्चार्ज हो गया।&lt;br /&gt;फिर मैं मिनी के उपर लेट गया। मिनी का नंगा जिस्म मेरे नीचे दब गया। मेरा लण्ड कंडोम में सिकुड़ा हुआ मिनी की झाटों के ऊपर पडा था। कुछ देर तक मैं मिनी के ऊपर लेटा रहा और अपनी तेज-तेज चल रही सांसों को काबू में आने का इंतजार करता रहा। मिनी भी मेरे नीचे दबी हुई अपनी आँखें बंद करके लेटी हुई थी।&lt;br /&gt;कुछ देर बाद मैंने उठ कर अपने लण्ड पर से कंडोम उतार कर एक अखबार के कागज़ में लपेट कर डस्टबिन में फेंक दिया। फिर अपने अन्डरवियर से अपना लण्ड साफ करके मिनी की बगल में लेट गया। मिनी आँखें बंद करके लेटी हुई थी। कमरे की हल्की रोशनी में उसका गोरा और नंगा बदन चमक रहा था। कुछ देर बाद मैने मिनी की तरफ करवट ली और अपनी टांग मिनी की टांगों पर रख दी। फिर उसके स्तनों पर हाथ फेरने लगा। &lt;br /&gt;मिनी बोली- हो गई तुम्हारे मन की !&lt;br /&gt;मैने कहा- हाँ मिनी, बहुत अच्छा लगा। मजा आ गया।&lt;br /&gt;कह कर मैंने करवट ले कर मिनी को अपनी बाँहो में भर लिया। &lt;br /&gt;कुछ देर तक हम ऐसे ही लिपटे हुए बातचीत करते रहे। फिर मिनी बोली- चलो अब उठो। दीदी आने वाली होंगी। &lt;br /&gt;मैंने कोई खास नखरा नहीं किया और मिनी के कहते ही मैंने उठ कर अपने अन्डरवियर से अपना लण्ड फिर से साफ किया और अपने कपड़े पहन लिये। मिनी ने भी उठ कर अपने कपड़े पहन लिये। फिर हम दोनों ड्राइंगरूम में बैठ कर बातें करने लगे। हमने कुछ देर बातचीत की। &lt;br /&gt;फिर मिनी बोली- मैं चलती हूँ। दीदी के आने से पहले मेरा चले जाना ही ठीक रहेगा। वरना दीदी को खामख्वाह शक होगा।&lt;br /&gt;कह कर मिनी घर जाने लगी। मैंने उसका हाथ पकड़ लिया। &lt;br /&gt;फिर मैंने उससे कहा- प्लीज़ कुछ देर ओर रुको ना।&lt;br /&gt;वो अपना हाथ छुड़ाने लगी और बोली- क्या करते हो। दीदी आने वाली होंगी। मैं जा रही हूं।&lt;br /&gt;वो जाने लगी। मैंने उसे खींच कर अपनी गोद में लिटा लिया। &lt;br /&gt;मिनी बोली "क्या करते हो। दीदी आने वाली होंगी। प्लीज़ छोड़ो मुझे।&lt;br /&gt;मैंने उसे छोड़ने की बजाय अपने सीने से चिपका लिया। फिर मैं अपने हाथ को नीचे ले जाकर उसके कुरते के ऊपर से उसके स्तन दबाने लगा। &lt;br /&gt;मैं मिनी से बोला- मिनी, एक बार फिर करने का मूड़ हो रहा है। एक बार फिर करें क्या? &lt;br /&gt;यह सुनते ही वो एकदम छिटक कर अलग हो गई और बोली- पागल तो नहीं हो गये हो। दीदी आने वाली होंगी। मैं जा रही हूं। ओ.के बाय!&lt;br /&gt;उसने हाथ हिला कर बाय किया। फिर वो दरवाजा खोल कर तेजी से अपने घर जाने लगी। मैं उसे जाते हुए देखता रहा। &lt;br /&gt;तो यह था मेरा मिनी के साथ ये मेरा पहला सैक्सपिरियंस। इसके बाद मौका मिलने पर लगभग एक साल में हमने 18 बार खुलकर सेक्स किया। हर बार सेक्स करने का अन्दाज और मजा अलग ही था। अगर समय मिला तो मिनी के साथ बाकी के 18 में से कुछ खास-खास सैक्सपिरियंस के बारे में भी जरुर बताऊँगा। &lt;br /&gt;मिनी के साथ इसके बाद लगभग एक साल तक ही सेक्स हो पाया। क्योंकि मिनी की मम्मी और मौसी की आपस में अनबन हो गई और उन्होंने मकान बदल लिया। फिर जीजाजी ने भी बनारस वाली कम्पनी छोड़ कर फरीदाबाद में एक दूसरी कम्पनी ज्वाईन कर ली। मैं फिर से होस्टल में शिफ्ट हो गया। मकान बदलने के बाद, दीदी-जीजाजी के जाने के बाद मैं मिनी से मिलने उसके घर तो कई बार गया तथा मिनी से मिलना भी हुआ। मगर सेक्स ना हो सका।&lt;br /&gt;फिर मेरे बी.फ़ार्मा अन्तिम वर्ष के पेपर शुरु हो गये। पेपर दे कर मैं मिनी से मिलने उसके घर गया और मिनी से जल्द मिलने का वादा करके गुड़गाँव वापस आ गया। लगभग 3 महीने बाद मैं अपना रिजल्ट लेने फिर बनारस गया। चूंकि मैं होस्टल छोड़ चुका था, इसलिये मैं होटल में ठहरा था। रिजल्ट लेकर मैं मिनी से मिलने उसके घर पास होने की खुशी में मिठाई ले कर गया। मिनी और उसके घरवालों ने मेरा जोर-शोर से स्वागत किया। मैं काफी देर वहां रुका। वहीं लन्च किया। फिर लन्च के बाद जब मैं चलने लगा तो मिनी मुझे मेन-गेट पर छोड़ने के बहाने आ गई।&lt;br /&gt;मैंने गेट पर मिनी को कहा- मिनी, परसों मैं वापस गुड़गाँव जा रहा हूँ। अब ना जाने कब मुलाकात होगी। मैं सम्राट होटल में रूम न:11 में ठहरा हूँ। क्या तुम कल मुझसे मिलने वहां आ सकती हो? प्लीज़ मिनी, प्लीज़ जरुर आ जाना। मैं पूरा दिन तुम्हारा इन्तज़ार करुंगा। ओके ! बाय !&lt;br /&gt;यह कह कर मैं मिनी की हां या ना सुने बगैर चल दिया। मैं जानता था कि मिनी जरुर आएगी और ऐसा हुआ भी। &lt;br /&gt;अगले दिन मिनी लगभग 12 बजे होटल आई। मैं होटल लॉबी में उसका इन्तज़ार कर रहा था। फिर मिनी को साथ लेकर मैं होटल के कमरे में आ गया। उस दिन हमने होटल के कमरे में और फिर बाथटब में कुल 3 बार सेक्स किया। बड़ा मजा आया। अगले दिन मैं गुड़गाँव वापस आ गया फिर चाहते हुए भी हम दोबारा नही मिल सके और हमारे प्यार की कहानी यहीं खत्म हो गई।&lt;br /&gt;एक बार मिनी का भाई मेरे पास गुड़गाँव में मेरे घर पर आया। उसने बताया कि मिनी की शादी हो गई है और वो गुड़गाँव में ही किसी काल-सेन्टर में जॉब कर रही है। उसके दो बेटे है। उसका पति दिल्ली में किसी न्यूज़ चैनल में जॉब कर रहा है। मैंने मिनी के भाई को अपना मोबाईल नम्बर दिया और कहा कि मिनी को कहना कि मेरे से बात करे। मगर आज इस बात को लगभग तीन साल हो गये है। मगर मिनी का आज तक फोन नहीं आया। या तो उसके भाई ने उसे मेरा नम्बर दिया ही नहीं। या फिर वो चूंकि अब शादीशुदा है, इसलिये वो शायद मुझसे बात ना करना चाहती हो। खैर जो भी हो।&lt;br /&gt;सो मिनी आज तुम कहाँ हो। अगर तुम यह कहानी पढ़ोगी, तो जरुर मुझे पहचान लोगी।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5371403670818517101-8074993304150708150?l=mastjanghu.blogspot.com'/&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://mastjanghu.blogspot.com/feeds/8074993304150708150/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='https://www.blogger.com/comment.g?blogID=5371403670818517101&amp;postID=8074993304150708150&amp;isPopup=true' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5371403670818517101/posts/default/8074993304150708150'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5371403670818517101/posts/default/8074993304150708150'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://mastjanghu.blogspot.com/2009/10/blog-post_2646.html' title='मिनी मेरी बन गई'/><author><name>JAI SINGH</name><uri>http://www.blogger.com/profile/01785593676712838482</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:extendedProperty xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' name='OpenSocialUserId' value='15234607527984438017'/></author><thr:total 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सन्देश उनको देना चाहती हूँ जो पहली बार सेक्स करते हैं।&lt;br /&gt;कृपया सेक्स में जल्दी न मचायें और पहले जी भर के प्यार करें एक दूसरे को और अच्छे से यौन-पूर्व-क्रीड़ा करें फिर आगे बढ़ें !&lt;br /&gt;मैं एक बात और लड़कियों को बताना चाहती हूँ कि आप लोग अगर सेक्स का मौका यह सोच कर छोड़ देती हैं कि आपके पति को शायद पता चल जायेगा !&lt;br /&gt;तो बेफिक्र होकर सेक्स करिए क्योंकि किसी भी हालत में उन्हें नहीं पता चलने वाला !&lt;br /&gt;तो शुरु करते हैं - &lt;br /&gt;उन्हीं दिनों मेरी एक सहेली थी रीता नाम की। हम दोनों लगभग सारी बातें एक दूसरे को बता देते थे। वो भी मेरी ही उम्र की थी और मेरी जैसी ही सुन्दर और उसका फिगर भी लगभग मेरे जैसा ही था।&lt;br /&gt;एक दिन मैं घर पर अकेली थी और रीता रात के लगभग १० बजे मेरे घर पर आई। वो मेरे घर के बाजू वाले घर में ही रहती थी इसलिए रात को कभी कभी आ जाती थी। फिर हम दोनों साथ में टीवी देखती थी।&lt;br /&gt;उसके आने के थोड़ी देर पहले ही मैंने रोहित की दी हुई एक व्यस्क मूवी देखी थी इसलिए थोड़ा उत्तेजित हो रही थी। मुझे रोहित की कमी महसूस हो रही थी। रीता ने नाईट-सूट पहना था और मैंने ट्रांसपरेंट सी नाईटी पहनी थी जिसमें से मेरी ब्रा और पैंटी भी दिख रही थी।&lt;br /&gt;रीता- सावी आज तो तुम क़यामत लग रही हो। &lt;br /&gt;सावी- क्यों ऐसी क्या बात है मेरी जान?&lt;br /&gt;रीता- तुमने तो गजब की नाईटी पहन रखी है !&lt;br /&gt;फिर मैंने रीता को अपनी बाँहों में भर लिया और चूम लिया।&lt;br /&gt;रीता- यह क्या कर रही हो? मैं तुम्हारी बॉय-फ्रेंड नहीं हूँ !&lt;br /&gt;तो क्या हुआ मेरी जान तुम रोहित से कम भी तो नहीं हो !&lt;br /&gt;और फिर मैंने रीता के स्तनों को हल्के से दबाया, रीता ने थोड़ी प्रतिक्रिया की पर फिर मना नहीं किया। शायद वो भी मूड में थी। मैं उसको लेकर बिस्तर पर पहुँच गई और हम दोनों बिस्तर पर एक दूसरे की बाँहों में आ गए। हम दोनों एक दूसरे के होंठों को कस के चूसने लगे। मैं रीता के स्तन भी हल्के हल्के दबा रही थी।&lt;br /&gt;फिर मैंने रीता के नाईट-सूट के टॉप के बटनों को खोला और उसे ऊपर करके उतार दिया। रीता ने पीले रंग की ब्रा पहनी थी और उसके स्तन उसमें से बाहर आने को बेचैन थे।&lt;br /&gt;रीता ने भी मेरी नाईटी की गांठ खोल दी और मैंने अपनी नाईटी उतार दी।&lt;br /&gt;फिर मैंने रीता की लोअर धीरे धीरे उतार दी। अब हम दोनों ही सिर्फ ब्रा और पैंटी में थी। मैंने गुलाबी रंग की ब्रा और पैंटी पहनी थी। हम दोनों एक दूसरे को बाँहों में कस के जकड़ कर प्यार करने लगे और दोनों एक दूसरे से स्तन मसलने लगे।&lt;br /&gt;फिर मैं रीता के ऊपर आ गई और उसकी ब्रा को ऊपर कर दिया, उसके दोनों बड़े बड़े चुचे उछल कर बाहर आ गए और मैंने दोनों को कस के बारी बारी से चूसा।&lt;br /&gt;आआआआअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह सवीईईईईईईईईऽऽ ! क्या कर्रऽऽ रही हूऊऊऊऊऊऊऊऊऊओ !&lt;br /&gt;कुछ नहीं मेरी जान कब से तुम प्यार करना चाहती थी, आज तो मैं जी भर के तुम्हें प्यार करुंगी।&lt;br /&gt;फिर मैं उसके दोनों स्तन मसलने लगी और चूसने लगी। उसने भी मेरी ब्रा नीचे कर दी तो मेरे दोनों चुचे बाहर आ गए। मैं थोड़ा ऊपर गई और अपने चुचे उसके मुँह के ऊपर ले गई।&lt;br /&gt;उसने भी उछल कर मेरी चुचियों को मुँह में दबाया और कस के चूसने लगी।&lt;br /&gt;फिर थोड़ी देर बाद मैं उसके पेट को चूमते हुए नीचे आई और उसके पैंटी के ऊपर से किस किया। उसकी भी पैंटी गीली हो गई थी। फिर मैं उसकी पैंटी नीचे करने लगी तो उसने मेरा हाथ पकड़ लिया।&lt;br /&gt;रीता- बस सावी इससे ज्यादा ठीक नहीं है !&lt;br /&gt;सावी- पगली, मैं ही तो कर रही हूँ, मैं तुम्हें गर्भवती थोड़ा न कर दूंगी ! तुम तो बस मजे लेती जाओ !&lt;br /&gt;फिर मैंने उसकी पैंटी उतार दी, उसने अपने हाथों से अपनी चूत को ढक लिया। मैंने उसके हाथ हटाये और फिर उसकी जांघों के आस पास किस करते हुए जैसे ही उसकी गीली चूत को किस किया-&lt;br /&gt;आऽऽऽह आऽऽ साआआआआआआअवीईईईईईइ !&lt;br /&gt;वो पागल हो उठी, शायद उसको इतना मजा कभी नहीं आया था !&lt;br /&gt;फिर मैं उसकी चूत को कस के चूसने लगी&lt;br /&gt;ऊऊऊऊऊऊओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह म्म्म्माआऽऽह !&lt;br /&gt;रीता कस के बिस्तर पकड़ कर चिल्ला रही थी।&lt;br /&gt;फिर करीब १५ मिनट तक मैं उसकी चूत को चूसती रही, फिर ऊपर गई और उसके मुँह के पास बैठ गई।&lt;br /&gt;रीता मेरा इशारा समझ गई, उसने मेरी पैंटी को किनारे किया और मेरी चूत में अपनी जीभ घुसेड़ दी।&lt;br /&gt;अब मैं मजे ले रही थी- मैं अपने हाथों से अपनी चुचियों को हल्के हल्के मसल रही थी।&lt;br /&gt;फिर थोड़ी देर बाद मैंने भी अपनी पैंटी रीता के सामने बगैर शरमाते हुए उतार दी। हम दोनों एक दूसरे के सामने पूरी नंगी थी। फिर हम दोनों ने एक दूसरे को बाँहों में भर लिया और होठों को चूसने लगे और एक दूसरे की चुचियों को मसलने लगी।&lt;br /&gt;रीता- यार मेरी हालत तो तुमने ख़राब कर दी है, अब पूरा सेक्स कैसे होगा?&lt;br /&gt;अब कोई हो तो बुलाओ !&lt;br /&gt;शायद रीता की आवाज रोहित ने सुन ली, मैं दरवाजा अन्दर से बंद करना भूल गई थी और यह भी कि मैंने रोहित को घर १० बजे बुलाया था।&lt;br /&gt;पर वो १०.३० बजे आया, दरवाजा खुला पा कर वो ड्राइंग रूम से होते हुए सीधे मेरे बेडरूम में आ गया, जहाँ हम दोनों गुथमगुथा थी।&lt;br /&gt;उसकी तो बाछें खिल गई !&lt;br /&gt;हम दोनों ही मना करने लायक हालत में नहीं थी और बिस्तर में एक दूसरे की बाँहों में सिमटे हुई थी।&lt;br /&gt;पहले तो रीता ने ही रोहित को देखा और वो ऊपर से नीचे तक कांप गई।&lt;br /&gt;मैं तो उसकी चुचियों को नीचे जाकर चूस रही थी और उसकी चूत में अपनी ऊँगली डाल के उसकी चूत को फैला रही थी। &lt;br /&gt;उसने मुझे झझकोरा, मैंने रोहित के तरफ देखा और कहा- अरे रोहित तुम कब आये?&lt;br /&gt;अब सब अकबका रहे थे।&lt;br /&gt;फिर रोहित ने अन्दर से दरवाजा बंद कर लिया और हमारे सामने ही अपनी टी शर्ट उतारी और फिर जीन्स भी उतार दी।&lt;br /&gt;उसका लंड एक साथ दो दो नंगी लड़कियों को देख कर पागल हुआ जा रहा था। उसके अंडरवियर से ही उसका लंड फनफना रहा था। फिर उसको अपना अंडरवियर भी उतारना पड़ा क्योंकि उसका लंड उसमें से बाहर आने को मचल रहा था।&lt;br /&gt;मैंने रोहित को पहले रीता की जवानी तारने के लिए इशारा किया क्योंकि वो मुझसे ज्यादा तड़प रही थी।&lt;br /&gt;फिर मैं रीता से अलग हो गई और रोहित ने रीता को अपनी बाँहों में भर लिया, रीता भी रोहित से चिपक गई और रोहित रीता के स्तन दबाते हुए उसको रसीले होठों को चूसने लगा।&lt;br /&gt;मैं रोहित को देख रही थी और मेरी हालत और ख़राब होती जा रही थी। रोहित जी भर के नया स्वाद चख रहा था।&lt;br /&gt;फिर रोहित नीचे आ कर रीता की चुचियों को मुँह में ले कर चूसने लगा और कस के मसलने लगा।&lt;br /&gt;रीता ये सब पहले ही करवा चुकी थी इसलिए उससे बर्दाश्त करना मुश्किल हो रहा था, वो बहुत जोर से तड़प रही थी। &lt;br /&gt;फिर रोहित ने रीता की चुचियों को अच्छे से चूसा और दबाया, फिर उसका पेट और नाभि चूमते हुए वो नीचे आने लगा। रीता की चूत तो जबरदस्त गीली थी क्योंकि मैं भी उसे कस के चूस चुकी थी।&lt;br /&gt;फिर रोहित ने रीता की चूत को फैला कर अपनी जीभ अन्दर डाल दी और उसकी दोनों चुचियों को दबाते हुए उसकी चूत को चूसने लगा।&lt;br /&gt;१५ मिनट तक रोहित ने रीता की चूत को कस के चूसा और फिर वो ऊपर आया और अपना लंड रीता के मुँह के ऊपर रख दिया, रीता की आँख बंद थी इसलिए जैसे ही उसने आँख खोली रोहित का लंड अपने मुँह के ऊपर देख कर वो एकदम से घबरा गई।&lt;br /&gt;उसने मेरी तरफ देखा तो मैंने उसको रोहित का लंड मुँह में लेने का इशारा किया।&lt;br /&gt;फिर वो रोहित का मोटा और लम्बा लंड मुँह में ले कर चूसने लगी। &lt;br /&gt;रोहित आहें भर रहे था।&lt;br /&gt;मैं रोहित के पास आ कर बैठ गई तो रोहित मेरी चुचियों को मसलने लगा। रीता रोहित का लंड इतने जोर जोर से चूस रही थी कि रोहित रीता के मुँह में ही स्खलित हो गया। रीता ने भी उसका वीर्य पूरा पी लिया और तब तक लंड मुँह में ले कर रखा जब तक वो दोबारा खड़ा नहीं हो गया।&lt;br /&gt;फिर रोहित ने अपना लंड रीता के मुँह से निकाला और फिर उसके ऊपर लेट गया। &lt;br /&gt;रोहित ने अपना लंड रीता के चूत में रखा और कस के धक्का मारा।&lt;br /&gt;आऽऽऽह आऽऽ म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्मर गईइऽऽऽ !&lt;br /&gt;रीता गला फाड़ कर चिल्लाई। &lt;br /&gt;मैंने एकदम से रीता के मुँह में अपना हाथ रख दिया और अपनी चूत को रीता के मुँह में लाकर उसके ऊपर बैठ गई।&lt;br /&gt;रीता ने अपनी जीभ मेरी चूत में डाल दी और उधर रोहित पूरी ताकत से रीता के चूत में अपना लंड घुसाने लगा।&lt;br /&gt;मैंने रोहित को बोला- आराम से डालना जानू ! नहीं तो कुंवारी लड़की मर जायेगी।&lt;br /&gt;पर रोहित कहाँ रुकने वाला था, उसने तो बस पूरी ताकत से अपना लंड रीता की चूत को फाड़ता हुआ अन्दर घुसेड़ दिया।&lt;br /&gt;रीता इतना जोर का धक्का बर्दाश्त नहीं कर पाई और बेहोश हो गई।&lt;br /&gt;रोहित ने पास पड़ा तौलिया उठाया और रीता की चूत से निकल रहे खून के आस पास तौलिया लगा दिया।&lt;br /&gt;मैं उठी और फिर पानी लाकर रीता के चहेरे में एक दो बूँद पानी के छींटे मारे।&lt;br /&gt;रीता होश में आई तो रोने लगी। फिर मैंने उसे समझाया कि पहली बार तो ऐसा होता ही है क्योंकि मेरे साथ भी हुआ था। &lt;br /&gt;अब तक रीता भी कुछ सामान्य हो गई तो रोहित उसे धीरे धीरे चोदने लगा। &lt;br /&gt;शुरु शुरु में कुछ धक्कों तक तो रीता चिल्लाती रही फिर धीरे धीरे उसकी चीखें उसकी आहों में बदल गई&lt;br /&gt;आआआआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह साआआआआवीईईईईईईईईईईइ&lt;br /&gt;रीता ने कहा- ये तुम्हारा प्रेमी तो बिलकुल एक्सपर्ट है चुदाई का!&lt;br /&gt;यह सुनकर रोहित फुला नहीं समाया और फिर वो रीता को जोर जोर से चोदने लगा, पूरा कमरा रीता के आहों से गूंजने लगा- आहऽऽअ ऊऊऊओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् !&lt;br /&gt;रोहित रीता को थोड़ी देर तक जोर जोर से चोदता रहा फिर पता नहीं उसको मेरे पर भी तरस आ गया। उसने अपना लंड रीता की चूत से निकाला और पूरा रीता की चूत का रस लगा गीला लंड मेरे मुँह में दे दिया।&lt;br /&gt;मैंने उसका लंड अपने मुँह में पूरा अन्दर ले लिया और उसके मोटे और लम्बे लंड को जोर जोर से चूसने लगी।&lt;br /&gt;रीता की चूत का रस मुझे बहुत भा रहा था।&lt;br /&gt;रीता अपनी चूत में ऊँगली डाल के ऊँगली अपने मुँह में डाल रही थी।&lt;br /&gt;फिर रोहित ने अपना लंड मेरे मुँह से निकाला और मुझे अपने गोद में बिठा लिया और अपना लंड मेरी चूत में डाल दिया।&lt;br /&gt;फिर मेरी गांड को ऊपर उठा के मुझे चोदने लगा और मेरी चुचियों को अपने मुँह में भर के चूसने और दबाने लगा।&lt;br /&gt;क्या रात थी वो !&lt;br /&gt;और रोहित की तो जैसे किस्मत खुल गई थी !&lt;br /&gt;दो दो लड़कियों के मजे ले रहा था वो !&lt;br /&gt;थोड़ी देर बाद उसने मुझे कुतिया स्टाइल में किया और पीछे से चोदने लगा।&lt;br /&gt;मैंने रीता की चूत को अपने मुँह के पास किया और उसकी चूत को चाटने और चूसने लगी।&lt;br /&gt;फिर करीब २ घंटे तक वो हम दोनों को बारी बारी से चोदता रहा और हम दोनों लड़कियों की रात उसके पहलू में गुजरी।&lt;br /&gt;मैं बता और लिख नहीं सकती की क्या क़यामत की रात थी वो !&lt;br /&gt;सवेरे जब मैं जागी तो रोहित जा चुका था, रीता मेरी बाँहों में कस के जकड़ के सो रही थी।&lt;br /&gt;मैंने रीता को अलग करने की कोशिश करी तो वो उंघते हुए उठी।&lt;br /&gt;मैंने रीता की तरफ देखा तो रीता थोड़ा शरमा सी रही थी। मैंने पूछा- क्या हुआ मेरी जान?&lt;br /&gt;तो रीता ने कहा- मैंने बहुत अच्छा सपना देखा कि मैं तुम और तुम्हारा प्रेमी रोहित एक साथ हैं और वो सब मेरे साथ भी हो गया जो कुछ दिन पहले तुम्हारे साथ हुआ था।&lt;br /&gt;मैंने रीता के तरफ मुस्कुरा के देखा। &lt;br /&gt;रीता ने फिर अपने आप को देखा और उसकी नज़र जैसे ही चूत पर पड़ी वो समझ गई कि कल रात को उसने सपना नहीं देखा बल्कि वो सब कुछ सचमुच हो गया।&lt;br /&gt;उसने बिस्तर पर लगा हुआ उसकी चूत से निकला हुआ खून भी देखा। उसकी चूत मेरे से भी ज्यादा बुरी हालत में थी और बहुत फटी हुई थी।&lt;br /&gt;फिर वो मुझसे लिपट गई और बोली- क्या ये सब ठीक हुआ?&lt;br /&gt;मैंने उसको ढांढस बंधाया कि सब भूल जाये और इसे एक खुशनुमा सपना समझ कर कभी कभी याद कर ले।&lt;br /&gt;फिर हम दोनों साथ साथ नहाई और वो अपने घर चली गई।&lt;br /&gt;तो दोस्तों कैसी लगी यह नई कहानी !&lt;br /&gt;मैं जल्द ही अगली कहानी लेकर फिर से हाज़िर होऊँगी।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5371403670818517101-8224361709141688190?l=mastjanghu.blogspot.com'/&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://mastjanghu.blogspot.com/feeds/8224361709141688190/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='https://www.blogger.com/comment.g?blogID=5371403670818517101&amp;postID=8224361709141688190&amp;isPopup=true' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5371403670818517101/posts/default/8224361709141688190'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5371403670818517101/posts/default/8224361709141688190'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://mastjanghu.blogspot.com/2009/10/blog-post_5822.html' title='एक खुशनुमा सपना'/><author><name>JAI SINGH</name><uri>http://www.blogger.com/profile/01785593676712838482</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:extendedProperty xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' name='OpenSocialUserId' value='15234607527984438017'/></author><thr:total xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5371403670818517101.post-7583855331702193934</id><published>2009-10-28T14:21:00.004+05:30</published><updated>2009-10-28T14:39:19.104+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='sexy story hindi mein'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='hindi adult stories'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='antarvasna stories'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='Adult stories'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='hindi sex stories'/><title type='text'>सच्चे प्यार का अंत</title><content type='html'>प्रेषक : प्रतीक &lt;br /&gt;अपने अजीज़ पाठकों और अन्तर्वासना के कद्रदानों को सादर नमन !&lt;br /&gt;दोस्तो, मेरी ३ कहानियाँ अन्तर्वासना पर प्रकाशित हो चुकी हैं और अब तो गुरूजी और इस वेब साईट से ऐसा रिश्ता हो गया है कि अपनी दैनिक डायरी छोड़ अन्तर्वासना वेबसाइट पर ही अपनी बात लिखना पसंद करने लगा हूँ।&lt;br /&gt;आज फिर एक यादगार घटना आपसे बांटने जा रहा हूँ ... जिसने मेरी जिंदगी के मायनों को बदल के रख दिया।&lt;br /&gt;यह कहानी मेरी और मेरे पहले प्यार बुलबुल की है। उसके साथ बीता हुआ हर लम्हा एक धोखा ही था क्योंकि मेरे लिए तो वो सारी दुनिया थी पर उसके लिए शायद मैं एक बिस्तर पर खेलने वाला खिलौना था।&lt;br /&gt;जब मैं १२वीं क्लास में था, मेरी टयूशन पर एक लड़की आती थी जिससे मैं प्यार कर बैठा। हम छुप छुप कर मिलने लगे और मैं उसे अपना सच्चा प्यार समझ कर जीवन-साथी मानने लगा।&lt;br /&gt;वो हमेशा मुझसे अकेले में मिलने का कहती रहती और एक दिन किस्मत (मेरी बदकिस्मती) ने जोर मारा और हम उसके घर पर अकेले में मिले क्योंकि उसके घर के सभी सदस्य बाहर गए थे और २ दिन वो अकेली थी।&lt;br /&gt;सुबह ९ बजे मैं उसके घर पहुँच गया। वो नहाई नहीं थी। मेरे जाने के बाद उसने चाय बनाई और मेरी बाहों में बाहें डालकर अपने हाथ से मुझे चाय पिला कर नहाने चली गई। कुछ ही देर में उसने मुझे अन्दर से आवाज लगाकर अन्दर बुलाया। वो पूरी नग्न थी। उसे देख कर मुझे कुछ होता चला गया और मैंने अपने जीवन का पहला सेक्स उसके साथ किया।&lt;br /&gt;शाम ५ बजे में अपने घर गया, जाते हुए उसने मुझे कहा कि रात को आ जाना, साथ रहेंगे !&lt;br /&gt;पर मेरे घर पर कुछ महमान आने के कारण मैंने उसे कह दिया कि मैं नहीं आ पाउँगा।&lt;br /&gt;उसने पहले मुझे जोर दिया पर जब मैं नहीं माना तो उसने कहा- कुछ नहीं ! मत आना !&lt;br /&gt;उसकी इन बातों का पता नहीं मुझ पर क्या असर हुआ और लगभग ३० मिनट बाद ही मैं उसके घर चला गया। मेन-गेट खुला था, तो मैं उसके दरवाजे के पास आया और दरवाज़ा खटकाने को ही था कि अचानक मुझे कुछ सिसकने की और सेक्सी आवाज आई। जब मैंने पास की खिड़की में से देखा तो मेरी आँखे खुली की खुली रह गई।&lt;br /&gt;बुलबुल जिसे मैं अपना सब कुछ समझता था, वो मेरे ही दोस्त, जिसे वो अपना भाई मानती थी, के साथ सेक्स कर रही थी।&lt;br /&gt;मैंने दरवाजा खटकाया तो विजय भाग गया और बुलबुल पसीने में लटपट दरवाजा खोलने आई। मुझे देख कर उसे लग गया कि मुझे पता चल गया है तो उसने मुझे कहा- प्रतीक ! यह जिंदगी और चूत जब तक अच्छी है मजे लो !&lt;br /&gt;उसकी इस बात ने मेरी जिंदगी में प्यार के मायने बदल दिए और उस दिन से आज तक मैंने कई लड़कियों का साथ शारीरिक सम्बन्ध बनाये पर सच्चे प्यार के लिए मैं आज भी तड़फता हूँ।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5371403670818517101-7583855331702193934?l=mastjanghu.blogspot.com'/&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://mastjanghu.blogspot.com/feeds/7583855331702193934/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='https://www.blogger.com/comment.g?blogID=5371403670818517101&amp;postID=7583855331702193934&amp;isPopup=true' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5371403670818517101/posts/default/7583855331702193934'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5371403670818517101/posts/default/7583855331702193934'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://mastjanghu.blogspot.com/2009/10/blog-post_6299.html' title='सच्चे प्यार का अंत'/><author><name>JAI SINGH</name><uri>http://www.blogger.com/profile/01785593676712838482</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:extendedProperty xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' name='OpenSocialUserId' value='15234607527984438017'/></author><thr:total xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5371403670818517101.post-9043582127121007961</id><published>2009-10-28T14:19:00.005+05:30</published><updated>2009-10-28T14:39:45.133+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='sexy story hindi mein'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='hindi adult stories'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='antarvasna stories'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='Adult stories'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='hindi sex stories'/><title type='text'>चंडीगढ़ की बारिश</title><content type='html'>प्रेषक : विकी &lt;br /&gt;हेल्लो दोस्तो,&lt;br /&gt;विक्की का आप सभी को प्यार भरा नमस्कार.....&lt;br /&gt;मैं २७ साल का जवान लड़का हूँ और चंडीगढ़ में प्राइवेट जॉब करता हूँ। आज से दो साल पहले फरवरी २००७ को मैंने सेक्टर ३४ में एक नया घर एक पेइंग गेस्ट के तौर पर लिया। मकान मालिक घर के ग्राउंड फ्लोर पर रहते थे और मैं ऊपर की मंजिल पर अकेला रहता था। मकान मालिक के परिवार में एक ६० साल की बुजुर्ग औरत, उसका ३० साल का जवान बेटा(रितेश) और २७ साल की जवान बहू(रूचि) रहते थे। मकान मालिक की एक १८ साल की नौकरानी(कम्मो), हर रोज मेरी सुबह की चाय, ब्रेकफास्ट और डिनर ऊपर मेरे कमरे में दे जाती थी।&lt;br /&gt;मैं तब तक बहुत ही शरीफ लड़का था और अपने काम में बहुत व्यस्त रहता था। लेकिन एक दिन जब मैं सुबह नहा कर बाहर निकला तो देखा कि कम्मो दरवाजे के छेद से मुझे देख रही थी। जब मैंने दरवाजा खोला तो वो घबराकर वापिस जाने लगी, मैंने उससे पूछा- क्या कर रही थी?&lt;br /&gt;तो बोली- आप की चाय लेकर आई थी और शरमा के कमरे से बाहर भाग गई।&lt;br /&gt;उस दिन से मेरा उसको देखने का नजरिया बदल गया। अगले दिन वो जब चाय लेकर आई तो मैंने उसके शरीर को ऊपर से नीचे तक ध्यान से देखा। वो जवानी की दहलीज पे कदम रख चुकी थी, उसके स्तन छोटे छोटे अमरूदों की तरह थे और उसका कमसिन गदराया बदन किसी की भी नियत बिगाड़ सकता था, वो मुझे इस तरह नजरें गड़ा कर देखते हुए देख कर शरमा गई और हंसती हुई कमरे से बाहर निकल गई। मैं समझ गया कि लोहा गरम है और खुद को कोसने लगा कि एक महीने से मैंने उसकी तरफ ध्यान कैसे नहीं दिया। उस रात मैं उसे चोदने के प्लान ही बनाता रहा।&lt;br /&gt;अगले दिन वो जब आई तो मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और उसे अपनी तरफ खींचने लगा, वो अपना हाथ छुड़ा कर भाग गई। दोस्तों मैं बता नहीं सकता कि मेरा कैसा हाल था, मैंने सोच लिया कि आज तो इसे चोद कर ही रहूँगा और रात के डिनर का इंतजार करने लगा। रात को वो जब डिनर लेकर आई तो मैंने उसे पकड़ लिया और अपनी तरफ खींच लिया, वो छुड़ाने की कोशिश करने लगी पर मैंने उसे बिलकुल अपने से सटा लिया और अपना एक हाथ उसे गले में डाल लिया और दूसरे हाथ से उसके दायें चूतड़ को कस के पकड़ लिया, और इससे पहले कि वो कुछ बोले, मैंने अपने होंठ उसके गुलाबी होठों पर रख दिए और उसे चूमने लगा।&lt;br /&gt;उसने भी अपने हथियार डाल दिए और मेरा साथ देने लगी। मैं १० मिनट तक उसके होंठ चूमता रहा। मुझे लग रहा था कि मैं जन्नत की सैर कर रहा हूँ और सारी कायनात आज यहीं पर रुक जाये। फिर मैंने उसके स्तनों पर हाथ रखा, मैं अभी उसके स्तन का साइज़ ही माप रहा था की नीचे से रूचि ने कम्मो को आवाज लगा दी, कम्मो मुझ से छुट कर जाने लगी तो मैंने उसे कस कर पकड़ लिया और बोला- आज नहीं छोडूंगा, आज तो तेरी जवानी का रस पीकर ही रहूँगा !&lt;br /&gt;तो वो बोली- मुझे अभी जाने दो, मैं फिर आपके पास आ जाउंगी, फिर जी भर कर चोद लेना।&lt;br /&gt;उस रात मैं अपने लंड की प्यास नहीं बुझा सका, मैं रात भर मुठ मारता रहा और ७ बार मुठ मरने के बाद जब लंड खड़ा होने बंद हो गया तो मैं सो गया।&lt;br /&gt;अगले दिन मैं काम के सिलसिले मैं एक हफ्ते के टूर पर मुंबई निकल गया। अपना प्रोजेक्ट ख़त्म कर मैं वापिस चंडीगढ़ आ गया।&lt;br /&gt;मकान मालिक के घर पर कुछ मेहमान आए हुए थे, इसलिए मुझे ४-५ दिन कम्मो को चोदने का मोका नहीं मिला, आखिर एक हफ्ते बाद सब लोग चले गए तो एक दिन मैंने मौका देख कर कम्मो को पकड़ लिया और उसे बेड पर लिटा लिया, आज वो भी पूरे मूड में थी। उसने खुद ही मेरे होंठ चूसने शुरू कर दिए और बोली- आज तो मुझे चोद डालो, बहुत दिनों से प्यासी हूँ, उस दिन भी बीच में ही रह गए उस सड़ी सी रूचि के कारण।&lt;br /&gt;मैंने उसके स्तन पकड़ लिए और कपड़ों के ऊपर से ही उन्हें मसलने लगा। उसके स्तन टाइट होने लगे और वो पूरी तरह से गरम हो गई। मैंने प्यार से उसका सूट उतार दिया और उसकी ब्रा की हुक खोल दी, उसके छोटे छोटे अमरुद आजाद हो गए, अब वो सिर्फ सलवार में थी। मैंने अपने दायें हाथ से उसके दायें स्तन के निप्पल को जोर से रगड़ दिया, उसके मुंह से हलकी सी सिसकी निकली और उसने अपना एक हाथ मेरी पैन्ट में डाल दिया, मैंने उसकी अमरुद सी चूची को चूसना शुरू कर दिया और लगभग १५ मिनट तक उसकी चूचियां चूसता रहा, वो भी पैन्ट में मेरा लौड़ा हिलाती रही।&lt;br /&gt;मैंने उसकी सलवार का नाड़ा धीरे से खोल दिया और एक ही झटके में उसकी सलवार उसके शरीर से अलग हो गई, अब वो सिर्फ पैन्टी मैं थी। मैंने पैन्टी के ऊपर से ही अपना हाथ उसकी चूत के ऊपर फिरा दिया, उसकी पैन्टी गीली हो चुकी थी, वो एक बार स्खलित हो चुकी थी। फिर मैंने अपनी पैन्ट उतार दी और अंडरवियर से अपने लंड को आजाद कर दिया, मेरा ८" लम्बा और ३" मोटा लंड एकदम सीधा खड़ा था। मैंने उसे नीचे बिठाया और अपना लंड उसके मुंह में डाल दिया, वो मेरे लंड को लोलीपोप की तरह चूसने लगी। &lt;br /&gt;दोस्तो, मैं यहाँ बता दूं कि मेरा स्टेमिना बहुत ज्यादा है, मेरे नीचे आई हुई लड़की कभी मुझे छोड़ती नहीं है। कम्मो मेरा लंड लगभग आधे घंटे तक चूसती रही, अब मैं उसे चोदने के लिए तैयार था, मैंने जैसे ही उसकी पैन्टी उतरने के लिए अपना हाथ बढ़ाया, रूचि ने कम्मो को आवाज लगा दी।&lt;br /&gt;कम्मो ने जल्दी जल्दी अपने कपड़े पहने और नीचे भाग गई।&lt;br /&gt;उस रात मैंने अपनी चूतिया किस्मत को बहुत गाली दी कि चूत इतनी पास आकर भी मेरा लंड प्यासा रह गया।&lt;br /&gt;अगले दिन जब मैं शाम को काम से वापिस आया तो मेरा डिनर लेकर रूचि ऊपर आई, आज मैंने पहली बार रूचि को इतने पास से और इतने ध्यान से देखा। या खुदा...। संगमरमर सा तराशा हुआ बदन, मैंने शायद ही इतनी सुंदर औरत अपनी जिन्दगी में देखी होगी। उसका साइज़ ३६-२४-३६ ही था। मैं तो उसे देखता ही रह गया, उसने टाइट नाईट सूट पहन रखा था, वो ऐसी बिजली गिरा रही थी कि मेरा लंड पैन्ट फाड़ कर बाहर आने को मचलने लगा। मैं एकटक उसे देख रहा था। रूचि ने मेरा खाना टेबल पर रखा और बोली कि कुछ और चाहिए क्या।&lt;br /&gt;मेरे मुँह से निकल गया - आप..।&lt;br /&gt;फिर थोड़ा रुक कर बोला-  आप. चिंता मत करें, अगर मुझे कुछ चाहिए होगा तो मैं कम्मो से मांग लूँगा।&lt;br /&gt;तो रूचि बोली- मैंने कम्मो को नौकरी से निकाल दिया है, जब तक कोई नया नौकर नहीं मिल जाता, मैं ही आप का खाना लाया करूंगी। यह कहकर रूचि नीचे चली गई।&lt;br /&gt;उस रात मेरी कम्मो को चोदने की ख्वाहिश सदा के लिए अधूरी रह गई। पर मुझे इस बात का ज्यादा दुःख नहीं हुआ, क्यूंकि मैं रूचि को चोदने के सपने देखने लगा था, और रात भर प्लान बनाने लगा कि कैसे रूचि को चोदा जाये, एक प्लान सोचकर मैं सो गया।&lt;br /&gt;सुबह मैं नहा कर तौलिये में ही बाहर निकल आया और रूचि चाय लेकर ऊपर आ गई, मेरा तौलिये में से खड़ा लंड उसे साफ़ दिख रहा था, उसने जल्दी से चाय रखी और जाने लगी, इस बीच उसने तीन चार बार मेरे तौलिये में से खड़े लंड को चोर निगाह से देखा। जब वो चली गई तो मैं अपने प्लान की कामयाबी पर बहुत खुश हुआ और डर भी रहा था कि कहीं ये मुझे भी घर से न निकाल दे। पर इतनी सुंदर माल की लेने के लिए ये एक बहुत छोटा रिस्क था।&lt;br /&gt;रूचि का पति रितेश एक शराबी था और एक रात शराब के नशे में किसी से लड़ाई कर ली और पुलिस केस बन गया। पुलिस उसे पकड़ कर जेल ले गई। जब यह खबर मुझे पता चली तो मैं रूचि को साथ लेकर जेल में उसके पति से मिलने गया, फिर मैंने पुलिस से बात की तो पुलिस ने बताया कि इसने जिसे मारा है वो एक करोड़पति बाप का बेटा है और आज रात को हम इसकी बहुत बुरी तरह पिटाई करेंगे, ये सुन कर रूचि रोने लगी, तो मैंने उसके कंधे पर हाथ रख कर उसे दिलासा दी को वो चिंता न करे, फिर मैंने अपने एक दोस्त के पापा को फ़ोन लगाया, जो की पंजाब पुलिस में ऊँची पोस्ट पर है, मैंने उनकी बात उस पुलिस वाले से करवाई। बाद में पुलिस वाले ने मुझे सर कहकर बुलाना शुरू कर दिया और कहा- आप चिंता न करें, हम इन्हें कुछ नहीं करेंगे, पर केस बन गया है, हम इन्हें ऐसे ही नहीं छोड़ सकते, आप सुबह इनकी जमानत करवा लीजियेगा।&lt;br /&gt;जब मैं थाने से बाहर निकला तो बहुत तेज बारिश शुरू हो गई और आप को बता दूं की चंडीगढ़ की बारिश में मौसम बहुत सुहाना हो जाता है और जिसे उस रात कोई लड़की चोदने को नहीं मिलती वो अपनी किस्मत पर बहुत रोता है। आज मेरे साथ बला की खूबसूरत लड़की तो थी पर समय सही नहीं था। मैं रूचि को लेकर घर आ गया, उसका हाल बहुत बुरा था, वो पूरा रास्ता रोती रही, यहाँ तक की कार से भी मैंने ही उसे उतारा।&lt;br /&gt;हम दोनों बारिश में पूरी तरह भीग गए थे, उसकी साड़ी उसके शरीर से चिपकी हुई थी। एक सुंदर औरत........ बरसात की रात....... बारिश में भीगा हुआ साड़ी में लिपटा बदन........। अब आप ही बताये क्या कोई खुद पर कण्ट्रोल कर सकता है। मैं तो मन ही मन उसे चोदने का प्लान बना रहा था और डर रहा था कि कहीं किस्मत आज भी चूतिया न निकले।&lt;br /&gt;मैं उसे कार से उतार कर घर की तरफ लेकर चलने लगा, की अचानक वो मुझ से लिपट गई और बोली- थैंक्यू, आज आपकी वजह से मेरे पति बच गए नहीं तो पुलिस जाने आज क्या करती उनके साथ !&lt;br /&gt;और वो तेज तेज रोने लगी, मैंने भी मौका देख उसके सर और पीठ पर हाथ फिराना शुरू कर दिया, और उसे थोड़ा और अपनी बाँहों में कस लिया। बारिश की बूंदें उसके होठों पर पड़ रही थी, मेरा खुद को रोक पाना मुश्किल हो गया और मैंने अपने होंठ उसके होठों पर रख दिए। आज तो जैसे मेरी लॉटरी ही खुल गई, उसने कोई इनकार नहीं किया, या तो बारिश ने उसका मूड बना दिया होगा, या शायद वो मेरी एहसानमंद होगी। मैंने उसे ५ मिनट तक चूसा और फिर गोद में उठा कर उसे ऊपर अपने कमरे में ले गया।&lt;br /&gt;मैंने उसे बिस्तर पर लिटा दिया और अपने होठ उसके होठों से जोड़ दिए, बाहर से आती बारिश की आवाज संगीत का काम कर रही थी। हम दोनों १५-२० मिनट तक एक दूसरे के होंठ चूसते रहे, फिर मैंने धीरे धीरे उसके गले को चूमना शुरू किया, फिर साड़ी के ऊपर से ही उसकी चुचियों को चूमा, फिर उसकी नाभि को, और फिर उसकी चूत के ऊपर एक छोटी सी किस की।&lt;br /&gt;आज तो मैं जन्नत में था, अगर खुदा भी आकर कहता कि चल तुझे स्वर्ग ले चलता हूँ तो आज मैं उसे भी इनकार कर देता।&lt;br /&gt;मैंने उसके होठों को चूमते हुए बड़े प्यार से उसकी साड़ी उसके शरीर से अलग कर दी, फिर उसके ब्लाउज को उतार दिया और चूमते चूमते उसकी ब्रा भी उतार दी। वाह ! क्या चूचियां थी उसकी, एक दिन तो इन्हीं से खेलने के लिए चाहिए, पर मैंने उन्हें ३० मिनट तक चूसा, वो भी पूरी तरह गरम हो गई थी और मेरा साथ देने लगी। उसने मेरे सारे कपड़े उतार दिए और मेरा ८" लम्बा और ३" मोटा लंड देख कर हैरान रह गई। जब मैंने कारण पूछा तो उसने बताया कि उसके पति का लंड बहुत छोटा है।&lt;br /&gt;फिर वो मुझसे बातें करने लगी और काफी खुल गई, आखिर में उसने बताया कि उसने मुझे और कम्मो को देख लिया था इसलिए उसने कम्मो को काम से निकल दिया, क्योंकि रूचि मेरा लंड अपनी चूत में लेना चाहती थी, उसके पति शराबी है वो कभी रूचि को संतुष्ट नहीं कर पाता और उसका लंड भी बहुत छोटा है, अभी तक उसकी झिल्ली भी अच्छी तरह से नहीं टूटी है। वो एक जवान मर्द की तलाश में थी और मुझसे चुदने का कब से प्लान बना रही थी।&lt;br /&gt;मैंने उसके मुँह पर ऊँगली रख कर कहा- आज कुछ मत बोलो, आज हम दोनों का सपना पूरा हो जायेगा, पर क्या तुम मेरा लंड सह लोगी क्यूंकि मैं बहुत देर तक चोदता हूँ।&lt;br /&gt;तो वो बोली- ऐसा चुदने के लिए तो मैं मर भी सकती हूँ मेरे राजा !&lt;br /&gt;मैंने उसके शेष कपड़े भी उतार दिए और वो मेरे सामने पूरी नंगी खड़ी थी, उसकी चूत को देख कर लग रहा था कि जैसे उसे किसी ने आज तक छुआ भी नहीं हो। मेरा हाथ उसकी मखमल सी चूत पर चला गया, वो बहुत गरम थी। हम दोनों ६९ की पोजीशन में आ गए और वो मजे लेकर मेरा लंड चूसने लगी, मैंने अपनी एक ऊँगली उसकी चूत के ऊपरी हिस्से पर रगड़नी शुरू कर दी, इतने में ही उसने पानी छोड़ दिया, फिर मैंने अपनी एक ऊँगली उसकी चूत में प्यार से धीरे धीरे डाल दी, उसके मुँह से हल्की हल्की सिसकी निकलने लगी और उसका सारा शरीर काम्पने लगा।&lt;br /&gt;मैंने अपने एक ऊँगली उसकी चूत में घुमानी शुरू कर दी, थोड़ी देर में वो दोबारा स्खलित हो गई, और मेरा लंड अपने मुँह से निकाल कर बोली- अब रहा नहीं जाता जानू ! अब तो मेरी चूत की प्यास बुझा दो और मुझे चोद दो !&lt;br /&gt;मैंने उसे बेड पर लिटा दिया और उसके ऊपर आ गया, मैंने अपना लंड उसकी चूत के ऊपर सटा दिया और उसकी चूत पर ही अपना लंड रगड़ने लगा और होठों से उसकी चूचियां जोर जोर से काटने लगा।&lt;br /&gt;वो पूरी तरह उत्तेजित हो गई और बोली- राजा अब अन्दर डाल दो नहीं तो मैं मर जाउंगी।&lt;br /&gt;मैंने कहा- अन्दर डाल दिया तो भी तुम मर जाओगी, क्यूंकि तुम्हारी चूत बहुत टाइट है।&lt;br /&gt;उसने कहा- मुझे कुछ नहीं होगा बस तुम मुझे आज जम कर चोद दो। मैंने हरी झंडी पा कर अपने लंड का जोर उसकी चूत पर दबा दिया, चूत से दो बार पानी निकल जाने के बावजूद भी मेरा लंड उसकी चूत में नहीं जा रहा था, वो अपने होठ दांतों में दबाए होने वाले दर्द के लिए खुद को तैयार कर रही थी।&lt;br /&gt;मैंने उसे कहा- ऐसे प्यार से ये नहीं जायेगा, मुझे थोड़ा जोर लगाना पड़ेगा, तुम्हें थोड़ा ज्यादा दर्द होगा। उसने सर हिला कर हामी भर दी। मैंने अपने हाथ उसके चूतड़ों से सटा लिए और एक जोरदार धक्का मारा। मेरा लंड २" उसकी चूत के अन्दर चला गया, उसके मुँह से बहुत तेज चीख निकली- आआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् उईएम्म्म्ममाआआआआ.....। &lt;br /&gt;मैं ऐसे ही बिना हिले डुले उसके ऊपर लेट गया और १० मिनट तक ऐसे ही लेटा रहा, उसका सारा शरीर दर्द से कांप रहा था। १० मिनट बाद उसने हिलना शुरू किया और नीचे से चूतड़ उठा उठा कर धक्के लगाने लगी, मैं समझ गया कि वो अब फिर से तैयार है, मैंने और जोर लगाना शुरू किया और अपना लंड ४" तक उसकी चूत में डाल दिया। वो दर्द के मारे चीखने लगी और उसकी चूत से खून निकलने लगा&lt;br /&gt;मैंने उससे कहा- आज तुम सचमुच की सुहागन बन गई हो !&lt;br /&gt;पर उससे दर्द कण्ट्रोल नहीं हो रहा था और बोली- अपना लंड निकाल लो नहीं तो मैं मर जाउंगी।&lt;br /&gt;मैं भी डर गया और अपना लंड उसकी चूत में से निकाल लिया। मुझे लगा कि शायद आज मैं इसकी अब और नहीं मार पाऊंगा और आज भी मेरा लौड़ा प्यासा रह जाएगा। मैंने उसके होठों को चूसना शुरू कर दिया और अपने दोनों हाथों से उसकी चूचियां जोर जोर से रगड़ने लगा।&lt;br /&gt;१५ मिनट में वो गरम हो गई और बोली- मैं क्या करुँ मुझ से दर्द बर्दाश्त नहीं होता।&lt;br /&gt;मैंने थोड़ी देर सोच कर उससे कहा- मुझ पर भरोसा है?&lt;br /&gt;तो वो बोली- जान से भी ज्यादा !&lt;br /&gt;तो मैं घुटनों के बल बैठ गया और उसे अपने ऊपर आने को कहा। वो धीरे धीरे मेरे ऊपर आने लगी, जब उसकी चूत मेरे लंड के पास आई तो मैंने उसे कहा- पूरे जोर से मेरे लंड पर बैठ जाओ !&lt;br /&gt;वो बोली- दर्द होगा !&lt;br /&gt;मैंने कहा- मुझ पर भरोसा करो।&lt;br /&gt;उसने अपनी आँखें बंद कर ली और पूरा जोर लगा कर मेरे लंड पर बैठ गई, नीचे से मैंने भी अपना लंड ऊपर उठा लिया, एक ही झटके ही पूरा लंड उसकी चूत में। उसके मुँह से तेज तेज चीखें निकलने लगी हाय मर गई.........। आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्छ.....। ऊऊऊओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह, माँ मार डाला .................।&lt;br /&gt;उसका सारा शरीर पसीने से तर हो गया, उसका अंग अंग कांप रहा था। वो मुझसे छुटने की कोशिश करने लगी, पर मैंने उसे कस कर पकड़ रखा था, वो करीब २० मिनट तक ऐसे ही बैठी रही, फिर उसने चूतड़ हिलाना शुरू कर दिया। मैंने ७" लंड चूत से बाहर निकाला और एक ही झटके में पूरा अन्दर डाल दिया, मुझे लगा कि मेरा लंड उसकी बच्चेदानी से टकरा गया, उसके मुंह से हलकी हलकी सिसकारियां निकलने लगी।&lt;br /&gt;मैंने १५ मिनट तक उसे इसी पोज में चोदा, फिर उसे डौगी स्टाइल में किया और पीछे से उसे २० मिनट तक चोदा। इस बीच वो २ बार स्खलित हुई, फिर मैंने उसे नीचे लिटा कर पूरी तेज रफ्तार से चोदना शुरू कर दिया, पूरा कमरा फच फच की आवाज से भर गया, करीब ३० मिनट बाद वो फिर से स्खलित हो गई, मैंने अपनी स्पीड और बढ़ा दी और ५ मिनट बाद ही उसकी चूत में गरम वीर्य की धार छोड़ दी और मैं उसके ऊपर निढाल होकर गिर गया।&lt;br /&gt;१० मिनट बाद जब मैं उठा तो उसके चेहरे पर सम्पूर्णता के भाव साफ़ साफ़ दिख रहे थे, वो मुझे चूमने लगी और बोली- मुझे कभी छोड़ कर मत जाना और मुझ से लिपट गई।&lt;br /&gt;उसके बाद उसने मुझे ३ और असंतुष्ट पत्नियों से मिलवाया, जिनके पति उन्हें संतुष्ट नहीं कर सकते थे, मैंने उन्हें ६ महीने तक संतुष्ट किया।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5371403670818517101-9043582127121007961?l=mastjanghu.blogspot.com'/&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://mastjanghu.blogspot.com/feeds/9043582127121007961/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='https://www.blogger.com/comment.g?blogID=5371403670818517101&amp;postID=9043582127121007961&amp;isPopup=true' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5371403670818517101/posts/default/9043582127121007961'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5371403670818517101/posts/default/9043582127121007961'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://mastjanghu.blogspot.com/2009/10/blog-post_1740.html' title='चंडीगढ़ की बारिश'/><author><name>JAI SINGH</name><uri>http://www.blogger.com/profile/01785593676712838482</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:extendedProperty xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' name='OpenSocialUserId' value='15234607527984438017'/></author><thr:total xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5371403670818517101.post-181190685947693443</id><published>2009-10-28T14:19:00.004+05:30</published><updated>2009-10-28T14:39:42.769+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='sexy story hindi mein'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='hindi adult stories'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='antarvasna stories'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='Adult stories'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='hindi sex stories'/><title type='text'>तोड़ा तृप्ति की सील को</title><content type='html'>प्रेषक : डी के डॉन  &lt;br /&gt;तृप्ति रविवार को मेरे ऑफिस में आई तो मैंने उससे अपने दिल की बात कही। मैंने कहा- जब से तुमने ज्वाइन किया है, मैं तब से तुम पर फ़िदा हो गया था और मैं नहीं चाहता था कि कोई और मेरे और तुम्हारे बीच में आये, इसी लिए मैंने तुमको पाने के लिए अपनी जी जान लगा दी।&lt;br /&gt;मुझे पता चल चुका था कि तृप्ति सिर्फ पैसे वालों को लाइन देते थी और मेरे पास पैसे की कोई कमी नहीं थी, लिहाजा मैंने उसको पूरी तरह से इम्प्रेस कर लिया था। मैं शादी-शुदा था ये बात भी उसको पता थी पर फिर भी वो मुझको मन ही मन पसंद करने लगी थी और मुझे क्या टाइम पास चाहिए था।&lt;br /&gt;बस वो मेरे जाल में फंसती चली गई और मैंने भी सोचा एक दिन, इससे पहले कि वो ऑफिस छोड़ के जाए मुझे इसके काम लगाना है। बस इसीलिए मैं उसे काम के बहाने रविवार को भी ऑफिस बुलाता था।&lt;br /&gt;उस दिन मैंने तृप्ति की चूची दबाने का मन बना लिया था तो मैंने कुछ काम के बहाने उसे अपने पास बिठा लिया और अपने पीसी पर काम करने को कहा। वो मान गई। वो मेरे ऊपर झुक कर मेरे पीसी पर काम करने लगी और मैंने धीरे से अपने नजर तृप्ति की चूची की तरफ घुमाई तो मुझे तृप्ति की पूरी चूची उसकी कुरते के अंदर नजर आ गई। उसने काले रंग की ब्रा पहनी थी। उसकी बड़ी बड़ी चूची देख कर मेरा लण्ड आउट ऑफ़ कण्ट्रोल होने लगा।&lt;br /&gt;मैंने उससे और पास आने को कहा वो मेरे बिलकुल करीब आ गई अब मैं उसकी चूची की खुशबू को सूंघ सकता था। मैंने धीरे धीरे उसकी चूची की तरफ अपना हाथ बढाया और उसकी एक चूची को पकड़ लिया। वो तुंरत पीछे हट गई और कहने लगी- सर, ये क्या कर रहे हैं? मैंने उसे समझाया- इसमें कुछ भी गलत नहीं है और मुझ पर शक न कर ! मैं तो शादी-शुदा हूँ, कुछ भी गलत नहीं करूंगा।&lt;br /&gt;काफी न नुकुर के बाद तृप्ति मान गई- केवल चूची दबा लीजिये और कुछ नहीं करवाउंगी।&lt;br /&gt;मेरा क्या ! आज वो अपनी चूची दबवाने को मान गई है एक दिन वो मुझसे चुदवाने को भी मान जायेगी ! नहीं तो जबरदस्ती चोद दूंगा साली को !&lt;br /&gt;उस दिन से मैंने रोज़ तृप्ति की चूची को दबाता और बाथरूम जाकर हाथ से मारता। कुछ दिन बाद उसको शक हो गया कि मैं जब भी उसकी चूची दबाता हूँ तो उसके तुंरत बाद बाथरूम क्यूँ जाता हूँ।&lt;br /&gt;उसने मुझे पूछा कि ऐसा क्यूँ ?&lt;br /&gt;मैंने बता दिया कि मैंने तुमसे वादा किया है मैं सिर्फ तुम्हारी चूची दबाऊंगा, तुमको चोदूंगा नहीं, इसीलिए अपने लण्ड को शांत करने के लिए बाथरूम जाकर हाथ से मारता हूँ।&lt;br /&gt;इस पर उसने कहा- आप जब चूची दबाते हैं तो मेरा मन भी चुदवाने को होता है, पर क्या करूँ, यहाँ नहीं हो सकता है !&lt;br /&gt;इस पर मैंने उससे कहा- ऐसे बात है तो पहले क्यूँ नहीं बताया? मैं तुमको किसी बढ़िया होटल ले के चलता !&lt;br /&gt;यह बात सुन कर तो उसकी बांछें खिल गई। वो अगले रविवार को होटल चलने के लिए तैयार हो गई।&lt;br /&gt;मैं उसे अपनी कार में ले जाने की बात कही तो उसने न नहीं किया। मुझे पता था कि उसको अमीर लोग पसंद आते हैं इसीलिए मुझे न नहीं करेगी।&lt;br /&gt;मैंने रविवार के लिए एक फाइव स्टार होटल बुक कराया, तृप्ति को अपनी पत्नी बना के ले गया। मैंने उससे कहा था- तुम पहले ऑफिस आना, फिर यहाँ से चलेंगे !&lt;br /&gt;मैं अपने साथ अपनी बीवी की एक साड़ी लाया था। मैंने तृप्ति से कहा- यह साड़ी पहन लो ताकि किसी को शक न हो !&lt;br /&gt;उसने वैसा ही किया। होटल पहुँच कर रूम लिया, अंदर गए और रूम अंदर से लॉक कर लिया।&lt;br /&gt;बस फिर क्या था हम दोनों की मुराद आज पूरी होने जा रही थी। मैंने तृप्ति को बिस्त्तर पर लिटा दिया तुंरत, और उसके ऊपर चढ़ के बैठ गया। उसकी दोनों चूची को कस के पकड़ के मसलने लगा। तृप्ति को समझ नहीं आ रहा था मुझे अचानक क्या हो गया।&lt;br /&gt;मैंने कहा- मेरे जान अभी कुछ न कहो, बाद में कहना ! महीनों बाद तुम मिली हो ! मुझे अपने लण्ड की प्यास बुझाने दो ! फिर बात करेंगे !&lt;br /&gt;मैंने उसका ब्लाऊज़ उतारा, उसने सफ़ेद रंग की ब्रा पहनी थी, तुंरत ही उसकी ब्रा भी उतार दी और तृप्ति की चूची को दबाने लगा। तृप्ति भी गर्म-गर्म साँसें लेने लगी। तृप्ति की चूची को अब मैं अपने मुँह में लेकर चूसने लगा। मैं तृप्ति की चूची को दबा दबा के मुँह में चूसे जा रहा था। तृप्ति भी बिस्तर में मचलने लगी थी। मैंने तुंरत तृप्ति की साड़ी और चड्ढी को उतारा, अपने लण्ड तुंरत तृप्ति की चूत में डाल दिया। तृप्ति की तो जैसे गांड फट गई- साली बिस्तर पर तड़पने लगी और मैं तो कई दिनों से तड़प रहा था उसको चोदने के लिए !&lt;br /&gt;इतना मोटा लण्ड तृप्ति की चूत में जायेगा तो क्या हाल होगा तृप्ति का ! आप सोच सकते हो ! साली की मैया चुद गई ! जब मैंने पूरा लण्ड तृप्ति की चूत में डाल दिया तो उसकी चूत से खून बहने लगा क्यूँकि यह तृप्ति की पहले चुदाई थी न ! अभी तक तृप्ति की चूत की सील नहीं टूटी थी सो आज वो भी टूट गई। मैंने तोड़ा तृप्ति की सील को और मैंने ही तृप्ति की चूत को भी चोदा ! यह मेरी किस्मत है तृप्ति ने मुझसे चुदवाना पसंद किया।&lt;br /&gt;खैर मैंने साली को जम के चोदा, मादरचोद को !&lt;br /&gt;तृप्ति की दोनों चूचियों को पकड़ के लण्ड तृप्ति की चूत में अंदर-बाहर करने लगा और तृप्ति भी जोर जोर से सांसे लेने लगी। मैं जैसे बिस्तर पर पटक देता वैसे ही साली पड़ी रहती मादरचोद ! मैंने गधे की तरह चोदा मादरचोद को ! बहुत चोदा ! मैंने तृप्ति को पूरी ताकत से चोदा, तृप्ति झड़ गई, फिर मैं भी झड़ गया।&lt;br /&gt;तृप्ति ने पूछा- आपने ऐसा क्यूँ किया?&lt;br /&gt;मैंने कहा- मैं तुमको चोदने के लिए इतना परेशान था कि बस मौका मिलते मैं तुमको चोदना चाहता था इसीलिए तुंरत तुम को चोद डाला ! अब हमारे पास मौका भी है और टाइम भी है ! अभी फिर थोड़ी देर में तुम को चोदूंगा ! तुम नहा धो लो ! तब तक मैं नाश्ते का आर्डर देता हूँ, फिर उसके बाद चोदूंगा !&lt;br /&gt;एक घंटे के बाद मैंने तृप्ति से कहा- तुम तैयार हो चुदवाने को?&lt;br /&gt;उसने कहा- मैं तो कब से रेडी हूँ !&lt;br /&gt;मैंने तुंरत तृप्ति को बिस्तर पर लिटाया और चढ़ गया साली मादरचोद पे ! और लगा चूसने तृप्ति की चूची को !&lt;br /&gt;इस बार बहुत टाइम था तो अब तृप्ति को आराम से चोदना था !&lt;br /&gt;मैंने तृप्ति की दोनों टांगों को उठा के ऊपर किया और उसकी चूत को चाटने लगा। तृप्ति की चूत को चाटने में बहुत मज़ा आ रहा था कि आपको क्या बताऊँ ! दोस्तो, काश आप भी होते वहां पे !&lt;br /&gt;खैर अगली बार तुम सब भी चलना मेरे साथ तृप्ति को चोदने ! लेकिन तृप्ति को पहले मैं ही चोदूंगा, फिर तुम सब ! &lt;br /&gt;क्यूँकि तृप्ति मेरा माल है ना !&lt;br /&gt;खैर तृप्ति आधे घंटे तक तृप्ति की चूत चाटने के बाद मैंने तृप्ति से अपने लण्ड को चूसने को कहा तो मादरचोद ने मना कर दिया।&lt;br /&gt;मैंने कहा- चाट के देख मेरी जान, बहुत मज़ा आएगा ! तुझे जो चाहिए, मैं दूंगा ! पहले इस दिन को तो जी लो मेरी जान ! मैं तेरा प्रमोशन कर दूंगा !&lt;br /&gt;इस पर तृप्ति तैयार हो गई और मेरा लण्ड चूसने लगी। वो साली मेरा पूरा लण्ड मुँह में लेकर चूस रही थी। मुझे भी बड़ा मज़ा आ रहा था !&lt;br /&gt;१५ मिनट तक तृप्ति ने मेरा लण्ड चूसा, फिर मैं तृप्ति की चूची चूसने लगा, उसके निप्प्ल को खूब मसलने लगा। मैंने अपना मुंह तृप्ति की चूत में लगा रक्खा था कि जब इसकी चूत झड़ेगी तो मैं उसकी चूत चाटूंगा।&lt;br /&gt;मैंने तृप्ति की चूची को खूब रगड़ा और तृप्ति की चूत को भी !&lt;br /&gt;कहते है न कि चूत और खैनी जितना रगड़ोगे, उतनी नशीली हो जाएँगी ! थोड़ी देर में तृप्ति झड़ गई पर मैं तो अभी भी वैसा ही था। अब तृप्ति की चूत नशीली हो गई थी इसीलिए चाटने में बहुत मज़ा आने लगा। तृप्ति की चूत से जो भी माल निकला, मैंने उसे चाट लिया और तृप्ति की चूची को इतना दबाया कि उसमें से दूध सा निकलने लगा। फिर मैंने तृप्ति का दूध पिया। तृप्ति की चूत और तृप्ति का दूध पीने के बाद तृप्ति झड़ चुकी थी। उसकी गाण्ड में ज्यादा दम नहीं बचा था। तब तक मैंने अपने लण्ड को कण्ट्रोल में रक्खा, फ़िर मेरी बारी आई। मैंने तृप्ति को बिस्तर पर पटक के चोदा।&lt;br /&gt;कैसे?&lt;br /&gt;बताता हूँ !&lt;br /&gt;तृप्ति अब मेरे सामने पूरी नंगी लेटी थी, मैंने उसके पूरे बदन को चाट चाट कर चूसा। मैं तृप्ति को दोनों पैरों से ऊपर उठा कर बिस्तर के किनारे ले आया और तृप्ति की चूत में अपना १० इंच मोटा लण्ड घुसा दिया। फिर उसको तृप्ति तो पहले झड़ चुकी थी उसके ज्यादा दम नहीं था। उसकी चूची को, उसकी चूत को चोद-चोद के भोंसड़ा बना दिया उस दिन मैंने ! अब मैं झड़ने लगा तो मैंने तृप्ति को नहीं बताया कि मेरा निकलने वाला है। मैंने अपनी गति को बढ़ा दिया, चोदने की पूरी ताकत से तृप्ति की चूत की मैं चुदाई कर रहा था कि तभी मेरे लण्ड से माल निकलने लगा और मैंने भी सारा माल तृप्ति की चूत के अंदर गिरा दिया।&lt;br /&gt;तृप्ति को पता चला कि मैंने अपना सारा माल उसकी चूत में गिरा दिया तो वो थोड़ा नाराज हुई।&lt;br /&gt;मैंने उसे समझा दिया कि कुछ नहीं होगा, मैंने ऑपरेशन कराया है, बच्चा नहीं होगा तुमको !&lt;br /&gt;तो वो मान गई साली ! गधी है न !&lt;br /&gt;जबकि ऐसा कुछ भी नहीं था !&lt;br /&gt;मुझे तो उसकी चूत को टेस्ट करना था, वो कर लिया ! उस दिन दो बार तृप्ति को चोदने के बाद जो मज़ा आया वो आज तक नहीं आया ! अभी भी हमारे पास टाइम था, तृप्ति को घर जाना था उसमें भी टाइम था।&lt;br /&gt;मैंने सोचा था- आज पूरी तरह तृप्ति को बर्बाद कर दूंगा ! मादरचोद किसी को मुंह नहीं दिखा पायेगी साली !&lt;br /&gt;मैंने उससे कहा- अभी कपड़े नहीं पहनना ! अभी एक बार और करूँगा ! टाइम है, फिर घर चलूँगा !&lt;br /&gt;तृप्ति ने कहा- चाहे जितना करिये ! मेरी चूत तो अब आपकी हो गई है !&lt;br /&gt;मैं खुश हो गया बहुत ! मैं तृप्ति से चिपट कर लेट गया। थोड़ी देर में हम दोनों फ़िर तैयार !&lt;br /&gt;तृप्ति को मैंने नहीं बताया पर इस बार मैंने तृप्ति की गांड मारने की सोची थी।&lt;br /&gt;मैं तृप्ति की चूची मसलने लगा और मुंह में ले के चूसने लगा, तृप्ति का दूध पीने लगा।&lt;br /&gt;तृप्ति से मैंने अपना लण्ड चूसने को कहा तो तृप्ति ने मेरा लण्ड चूस कर खड़ा कर दिया। जब मेरा लण्ड खड़ा हो गया तो मैंने तृप्ति को कुतिया की तरह बिस्तर पे खड़ किया और तृप्ति की चूत में लण्ड डाल के तृप्ति को दुबारा चोदने लगा। जब मेरा लण्ड पूरा खड़ा हो गया और तन गया तो मैंने अपना लण्ड तृप्ति की चूत से निकाल कर तृप्ति की गांड में डाल दिया। तृप्ति की तो मैया चुद गई, लेकिन मेरा मन तृप्ति की गांड मारने को था तो वही किया।&lt;br /&gt;१५ मिनट तक तृप्ति की मैं गांड मारता रहा और फ़िर जो मेरे लण्ड से माल निकला वो मैंने दुबारा तृप्ति की चूत में अपना लण्ड डाल के तृप्ति की चूत में गिरा दिया। &lt;br /&gt;इतना होने के बाद मैंने तृप्ति से कहा- मेरा पूरा जिस्म चाटो और लण्ड भी !&lt;br /&gt;तृप्ति ने वही किया और तब मेरा लण्ड खडा नहीं हुआ तो मैं समझ गया कि अब आज के लिए हो गया।&lt;br /&gt;अगले इतवार फिर आऊंगा यहाँ पे तुम को लेके !&lt;br /&gt;तृप्ति ने कहा- अब हम हर रविवार ऑफिस के बहाने यहाँ आयेंगे और मज़े करेंगे !&lt;br /&gt;अब मैं तृप्ति को हर रविवार ऑफिस के बहाने बुलाता और तृप्ति को साड़ी पहना कर अपनी कार में होटल ले के जाता, वहाँ पूरा दिन में तृप्ति को चोदता रहता।&lt;br /&gt;यह सिलसिला तृप्ति के साथ आज भी चल रहा है क्यूँकि अभी तृप्ति की शादी नहीं हुई है और मैं इतनी आसानी से तृप्ति की शादी होने भी नहीं दूंगा !&lt;br /&gt;नहीं तो मेरा क्या होगा ! &lt;br /&gt;तृप्ति ने दो बार बच्चा गिराया है, अब तृप्ति मुझे कुछ नहीं कहती क्यूँकि मैंने सारा इन्तज़ाम करवा दिया है, मेरे जब मर्ज़ी होती है मैं तृप्ति को चोद देता हूँ और वो चुदवा भी लेती है। मैं उसको पूरी रण्डी बना दूंगा।&lt;br /&gt;अब अगली कहानी में आप को बताऊंगा कि कैसे मेरे दोस्तों ने तृप्ति को मेरे सामने चोदा !&lt;br /&gt;यह एक सच्ची घटना है जो मेरे साथ हाल के कुछ दिनों में हुई थी। ..............&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5371403670818517101-181190685947693443?l=mastjanghu.blogspot.com'/&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://mastjanghu.blogspot.com/feeds/181190685947693443/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='https://www.blogger.com/comment.g?blogID=5371403670818517101&amp;postID=181190685947693443&amp;isPopup=true' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5371403670818517101/posts/default/181190685947693443'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5371403670818517101/posts/default/181190685947693443'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://mastjanghu.blogspot.com/2009/10/blog-post_7674.html' title='तोड़ा तृप्ति की सील को'/><author><name>JAI SINGH</name><uri>http://www.blogger.com/profile/01785593676712838482</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:extendedProperty xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' name='OpenSocialUserId' value='15234607527984438017'/></author><thr:total xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5371403670818517101.post-5313436588806388420</id><published>2009-10-28T14:18:00.005+05:30</published><updated>2009-10-28T14:39:45.627+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='sexy story hindi mein'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='hindi adult stories'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='antarvasna stories'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='Adult stories'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='hindi sex stories'/><title type='text'>मकान मालकिन और उसकी बेटियाँ</title><content type='html'>प्रेषक/प्रेषिका : रानी साहिबा  &lt;br /&gt;मेरा नाम दीपक है, उम्र ५१ साल, कद ५ फीट ९ इंच, रंग गोरा और बदन कसरती है। मेरी पत्नी का नाम रेखा है, उम्र ४८ साल, रंग गोरा और बदन दुबला पतला है। हमारे दो बेटे हैं, दोनों पुणे में इंजीनयरिंग पढ़ रहे हैं। मैं भी पेशे से इंजीनीयर हूँ।&lt;br /&gt;बात लगभग दो साल पहले की है, जब मेरा ट्रान्सफर आगरा हुआ।&lt;br /&gt;आगरा में जो मकान हमने किराये पर लिया, वह एक होमेओपथिक डॉक्टर का था। डॉक्टर साहब दक्षिण भारतीय हैं। उनका नाम के रामचंद्रन है, उम्र लगभग ५८ साल, कद ५ फीट ६ इंच, रंग सांवला और बदन दुबला पतला है। पहली नज़र में ही लगता है कि शरीफ आदमी हैं। उनके परिवार में उनकी पत्नी रागिनी है। उम्र लगभग ५२ साल, कद ५ फीट ४ इंच, रंग सांवला और बदन भरा पूरा है। नैन-नक्श तीखे होने के कारण इस उम्र में भी अच्छी खासी सेक्सी दिखती हैं। इन दोनों के अलावा इनके परिवार में इनकी तीन बेटियाँ हैं, जिनके नाम नंदिनी, कमलिनी और कुमुदिनी हैं। इनकी उम्र क्रमशः २४, २२ और २० साल है। तीनों का कद लगभग ५ फीट ४ इंच, रंग सांवला और नैन नक्श अपनी माँ की तरह तीखे हैं। सबसे बड़ी नंदिनी अपनी माँ की तरह भरे बदन की तथा कमलिनी और कुमुदिनी अपने पापा की तरह दुबली पतली हैं। तीनों एक ही कॉलेज में पढ़ती हैं।&lt;br /&gt;मुझे इस मकान में रहते हुए तीन महीने हो चुके थे और डॉक्टर साहब व हमारे परिवार के सम्बन्ध घरेलू जैसे हो चुके थे। एक दिन रात को खाना खाने के बाद मैं कंप्यूटर पर अपना काम कर रहा था और मेरी पत्नी अपने कमरे में सोने जा चुकी थी, मुझे ऐसा लगा जैसे मेरे मुख्य द्वार के पास कोई खड़ा है और किसी से बात कर रहा है। मैंने घड़ी पर नज़र डाली तो देखा साढ़े बारह बज रहे थे।&lt;br /&gt;मैं चुपके से उठा, दरवाजे के पास जाकर ध्यान दिया तो पता चला कि डॉक्टर साहेब की मंझली लड़की कमलिनी मोबाइल पर किसी से धीरे धीरे बात कर रही थी। मैंने बातचीत पर ध्यान दिया तो अंदाजा हो गया कि अपने बॉयफ्रेंड विक्की से बात कर रही थी। उसकी बात सुनकर मेरे पैरों के नीचे से ज़मीन निकल गई। वह विक्की से कह रही थी कि तीन दिन ऊपर हो गए हैं और मुझे महीना नहीं हुआ है, बहुत डर लग रहा है।&lt;br /&gt;उसकी बातें सुनकर बहुत अजीब सा लगा कि मैं जिसे सीधी-सादी समझता था, खूब छुपी रुस्तम निकली। एक बात और यह हुई कि उसकी बातें सुनकर मेरा लंड खड़ा हो गया। पिछले तीन साल से मैंने अपनी पत्नी को नहीं चोदा था, क्यूंकि वह ठंडी हो चुकी थी और चुदाई के समय साथ नहीं देती थी। उसको चोदने की अपेक्षा मैं कंप्यूटर पर ब्लू फ़िल्म देखते हुए मुठ मारना ज्यादा पसंद करता था।&lt;br /&gt;खैर, कमलिनी और विक्की की मोबाइल पर बातचीत जारी थी और मेरा लंड भी जोर मारने लगा था।&lt;br /&gt;मैंने कुछ सोचा और धीरे से दरवाजा खोला। मुझे देखते ही कमलिनी सकपका गई और फ़ोन काट दिया। मैंने अपने होठों पर ऊँगली रखकर उसे चुप रहने का इशारा किया और उसका हाथ पकड़ कर अन्दर कमरे में खींच लिया। वह रोने की हालत में थी। मैंने उसके सिर पर हाथ फेरा, उसे अपने सीने से लगाकर सांत्वना दी तो वो कुछ सामान्य हुई।&lt;br /&gt;मेरे पूछने पर उसने बताया कि विक्की उसकी क्लास में पढ़ता है, दोनों अच्छे दोस्त हैं। १५ दिन पहले जब मैं विक्की के घर गई तो वह अकेला था और प्यार करते करते सब हो गया। &lt;br /&gt;मैंने उसे कहा- कोई बात नहीं, गलती किससे नहीं होती ? और कौन सी ऐसी समस्या है जिसका समाधान नहीं है ? अगर मुझ पर विश्वास करो तो तुम्हारा महीना १२ घंटे में हो जाएगा। लगभग रोते रोते उसने पूछा- बताइए अंकल क्या करुँ ?&lt;br /&gt;मैंने कहा- पहली बात ! मैं तुम्हारा दोस्त हूँ, मुझे अंकल नहीं, दीपक कहो। दूसरी बात, तुम्हें कुछ नहीं करना है, जो करना है, मैं करूंगा, तुम शान्ति से देखती जाओ।&lt;br /&gt;मैं उसे दीवान पर लाया और उसका हाथ अपने लंड पर रखकर कहा- तुम्हारा इलाज ये ही करेगा।&lt;br /&gt;उसे अपने सीने से लगाकर उसके होठों पर अपने होंठ रखकर मैंने उसका गाउन धीरे धीरे ऊपर उठाया और चिकनी टांगों पर हाथ फेरते फेरते उसकी पैंटी पर पहुँच गया। धीरे से उसकी पैंटी उतारी, अपना लोअर नीचे खिसकाया, उसे दीवान पर लिटा दिया और उसकी टांगों के बीच आ गया। उसकी चूत पर बाल थे, शायद उसने कभी अपनी झांटें साफ़ नहीं की थीं। झांटें हटाकर उसकी चूत फैलाई तो मेरे पूरे शरीर में करंट दौड़ गया। एक तो मैं तीन साल बाद चूत देख रहा था, दूसरे उसकी चूत क्या गज़ब की थी। &lt;br /&gt;उसकी चूत के गुलाबी होठों पर मैंने जब अपनी जीभ फेरी तो उसे भी करंट लगा। अब मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रखा और दो तीन बार में पूरा लंड उसकी चूत के अन्दर कर दिया और उसका गाउन ऊपर खिसका कर, ब्रा हटाकर उसके मम्मे अपने हाथ में लेकर चूसने लगा। लगभग आधा घंटा चोदने के बाद जब मेरा लंड पानी छोड़ने को हुआ तो मैंने &lt;br /&gt;अपना लंड उसकी चूत से बाहर निकाला और ६९ की पोजीशन में आकर उसके मुंह में डाल दिया और उसकी चूत चाटने लगा। वह मेरा लंड चूस रही थी। जब लंड ने पानी छोड़ा तो &lt;br /&gt;वह घबरा गई और लंड अपने मुंह से बाहर निकाल दिया जिससे सारा वीर्य उसके गाउन पर गिर गया।&lt;br /&gt;हम दोनों ने अपने कपड़े ठीक किए। ढाई बज चुके थे, मैंने उसे अपने सीने से लगाकर किस किया और डोंट वरी ! कह कर विदा कर दिया और वहीं दीवान पर सो गया।&lt;br /&gt;करीब ३ बजे मेरे मोबाइल पर घंटी बजी, देखा तो कमलिनी का नम्बर था। मैंने धीरे से बोला- हेल्लो !&lt;br /&gt;तो उधर से काफ़ी खुश लहजे में बोली- थैंक्यू ! अभी अभी मेरा महीना हो गया।&lt;br /&gt;मैंने उससे कहा- विक्की जैसे छोकरों से सावधान रहना ! अब सो जाओ। शुभ रात्रि !&lt;br /&gt;बाकी कहानी अगली बार लिखूंगा, इंतज़ार करिए..।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5371403670818517101-5313436588806388420?l=mastjanghu.blogspot.com'/&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://mastjanghu.blogspot.com/feeds/5313436588806388420/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='https://www.blogger.com/comment.g?blogID=5371403670818517101&amp;postID=5313436588806388420&amp;isPopup=true' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5371403670818517101/posts/default/5313436588806388420'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5371403670818517101/posts/default/5313436588806388420'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://mastjanghu.blogspot.com/2009/10/blog-post_28.html' title='मकान मालकिन और उसकी बेटियाँ'/><author><name>JAI SINGH</name><uri>http://www.blogger.com/profile/01785593676712838482</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:extendedProperty xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' name='OpenSocialUserId' value='15234607527984438017'/></author><thr:total xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5371403670818517101.post-1944451044393018773</id><published>2009-10-28T14:18:00.004+05:30</published><updated>2009-10-28T14:39:42.029+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='sexy story hindi mein'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='hindi adult stories'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='antarvasna stories'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='Adult stories'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='hindi sex stories'/><title type='text'>चांदनी की चूत</title><content type='html'>प्रेषक : सेक्सी बॉय &lt;br /&gt;मेरा नाम सैक्सी बॉय है। मैं २५ साल का हूं। मेरी गर्लफ़्रेंड का नाम चांदनी है वो २२ साल की है और उसकी फ़ीगर तो ऐसी कि पूछो मत। वो बहुत ही सुंदर है, एकदम गोरी चिट्टी लम्बे लम्बे काले बाल, हाइट करीब ५'५" और फ़ीगर ३६-२५-३८ है।&lt;br /&gt;हम दोनों घर से बाहर दिल्ली में एक ही कमरे में रह कर पढ़ते थे। मैंने कमरे में पढ़ने के लिये कुछ गंदी किताबें रखी हुई थी जो एक दिन चांदनी के हाथ लग गई। इसलिये मैं अपने लंड और वो अपनी चूत की प्यास नहीं रोक सकी।&lt;br /&gt;वो बोली- मैं ही तुम्हारी वाइफ़ बन जाती हूं और मुझे अपनी ही समझो और मेरे साथ सेक्स करो।&lt;br /&gt;वो जींस शर्ट में आई और बोली- चलो शुरू हो जाओ।&lt;br /&gt;उसने मुझे किस करना शुरु कर दिया, मेरे लिप्स को वो बुरी तरह से किस करने लगी। मैं भी जोश में आ गया और उसको किस करने लगा। और उसको अपनी बाहों में दबाने लगा। उसको मैंने खींच कर बेड पर लिटा दिया और मैं उसके ऊपर आ गया और उसको चूमना शुरु कर दिया। १० मिनट तक मैं उसको चूमता रहा।&lt;br /&gt;फिर मैंने उसका शर्ट खोल दिया। उसके बाद मैंने उसकी ब्रा भी खोल दी। जैसे ही मैंने ब्रा खोली तो उसके दूध उछल कर बाहर आ गये, मैं उसे देखकर उसको दबाने लगा। कितने दिनों के बाद इसके पूरे के पूरे स्तन देखने को और दबाने को मिले।&lt;br /&gt;फिर मैंने उसकी निप्पल को मुंह में रख दिया और चूसने लगा। वो आआआह्हह्हाआआआह्हह्हह्हहाह्हह कर रही थी। मैं उसे चूसता ही रहा। थोड़ी देर बाद मैंने उसकी जींस खोल कर उसको पैंटी पे ला दिया उसकी चूत बहुत गरम हो गई थी, उसकी पैंटी गीली हो चुकी थी। मैं पैंटी को निकाल के उसकी चूत को फैला के चाटने लगा। वो सिसकारी भर रही थी। अहाआआ अस्स्सशहस आआआअह्हहह्हस्सस्स स्सशाआ आआहस्सह्हस्स अह्हह्हह ह्ह्हह हस्साआ आअह्ह ह्हहा ह्हह्हाआ ह्हह्हाहह…&lt;br /&gt;वो मेरे लंड को हाथ में लेकर खींच रही थी और कस कर दबा रही थी। फिर चांदनी ने कमर को ऊपर उठा लिया और मेरे तने हुए लंड को अपनी जांघों के बीच लेकर रगड़ने लगी। वो मेरी तरफ़ करवट लेकर लेट गई ताकि मेरे लंड को ठीक तरह से पकड़ सके। उसकी चूची मेरे मुंह के बिल्कुल पास थी और मैं उन्हें कस कस कर दबा रहा था।&lt;br /&gt;अचानक उसने अपनी एक चूची मेरे मुंह मे ठेलते हुए कहा- चूसो इनको मुंह में लेकर।&lt;br /&gt;मैंने उसकी बाईं चूची को मुँह में भर लिया और जोर जोर से चूसने लगा। थोड़ी देर के लिये मैंने उसकी चूची को मुंह से निकाला और बोला- मैं हमेशा तुम्हारी कसी चूची को सोचता था और हैरान होता था। इनको छूने की बहुत इच्छा होती थी और दिल करता था कि इन्हे मुंह में लेकर चूसूं और इनका रस पीऊं। पर डरता था पता नहीं तुम क्या सोचो और कहीं मुझसे नाराज़ न हो जाओ। तुम नहीं जानती चांदनी कि तुमने मुझे और मेरे लंड को कितना परेशान किया है?&lt;br /&gt;अच्छा तो आज अपनी तमन्ना पूरी कर लो, जी भर कर दबाओ, चूसो और मज़े लो, मैं तो आज पूरी की पूरी तुम्हारी हूं जैसा चाहे वैसा ही करो- चांदनी ने कहा।&lt;br /&gt;फिर क्या था, चांदनी की हरी झंडी पाकर मैं जुट पड़ा चांदनी की चूची पर।&lt;br /&gt;मेरी जीभ उसके कड़े निप्पल को महसूस कर रही थी। मैंने अपनी जीभ चांदनी के उठे हुए कड़े निप्पल पर घुमाई। मैं दोनों अनारों को कस के पकड़े हुए था और बारी बारी से उन्हें चूस रहा था। मैं ऐसे कस कर चूचियों को दबा रहा था जैसे कि उनका पूरा का पूरा रस निचोड़ लूंगा। चांदनी भी पूरा साथ दे रही थी। उसके मुंह से ओह! ओह! अह! सी, सी! की आवाज निकल रही थी। मुझसे पूरी तरह से सटे हुए वो मेरे लंड को बुरी तरह से मसल रही थी और मरोड़ रही थी।&lt;br /&gt;अपनी बाईं टांग को मेरे कंधे के ऊपर चढ़ा दिया और मेरे लंड को अपनी जांघों के बीच रख लिया। मुझे उसकी जांघो के बीच एक मुलायम रेशमी एहसास हुआ। ये उसकी चूत थी। चांदनी ने पैंटी नहीं पहन रखी थी और मेरे लंड का सुपाड़ा उसकी झांटों में घूम रहा था। मेरा सब्र का बांध टूट रहा था। मैं चांदनी से बोला, 'चांदनी मुझे कुछ हो रहा और मैं अपने आपे में नहीं हूं, प्लीज मुझे बताओ मैं क्या करूं?&lt;br /&gt;चांदनी बोली- करो क्या, मुझे चोदो, फाड़ डालो मेरी चूत को।&lt;br /&gt;मैं चुपचाप उसके चेहरे को देखते हुए चूची मसलता रहा। उसने अपना मुंह मेरे मुंह से बिल्कुल सटा दिया और फुसफुसा कर बोली- अपनी चांदनी को चोदो !&lt;br /&gt;चांदनी हाथ से लंड को निशाने पर लगा कर रास्ता दिखा रही थी और रास्ता मिलते ही मेरा लंड एक ही धक्के में सुपाड़ा अंदर चला गया। इससे पहले कि चांदनी सम्भले या आसन बदले, मैंने दूसरा धक्का लगाया और पूरा का पूरा लंड मक्खन जैसी चूत की जन्नत में दाखिल हो गया।&lt;br /&gt;चांदनी चिल्लाई- उईई ईईईइ ईईइ माआआ हुहुह्हह्हह ओह सेक्सी बॉय, ऐसे ही कुछ देर हिलना डुलना नहीं, हाय! बड़ा जालिम है तुम्हारा लंड। मार ही डाला मुझे तुमने मेरे राजा। चांदनी को काफ़ी दर्द हो रहा था। पहली बार जो इतना मोटा और लम्बा लंड उनके बुर में घुसा था। मैं अपना लंड उसकी चूत में घुसा कर चुपचाप पड़ा था। चांदनी की चूत फड़क रही थी और अंदर ही अंदर मेरे लौड़े को मसल रही थी। उसकी उठी उठी चूचियां काफ़ी तेज़ी से ऊपर नीचे हो रही थी। मैंने हाथ बढ़ा कर दोनों चूची को पकड़ लिया और मुंह में लेकर चूसने लगा। चांदनी को कुछ राहत मिली और उसने कमर हिलानी शुरु कर दी।&lt;br /&gt;फिर चांदनी बोली, अब लंड को बाहर निकालो, लेकिन मैं मेरा लंड धीरे धीरे चांदनी की चूत में अंदर-बाहर करने लगा। फिर चांदनी ने स्पीड बढ़ाने को कहा। मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी और तेज़ी से लंड अंदर-बाहर करने लगा। चांदनी को पूरी मस्ती आ रही थी और वो नीचे से कमर उठा उठा कर हर शॉट का जवाब देने लगी। रसीली चूची मेरी छाती पर रगड़ते हुए उसने गुलाबी होंठ मेरे होंठ पर रख दिये और मेरे मुंह में जीभ ठेल दिया।&lt;br /&gt;चूत में मेरा लंड समाये हुए तेज़ी से ऊपर नीचे हो रहा था। मुझे लग रहा था कि मैं जन्नत पहुंच गया हूं। जैसे जैसे वो झड़ने के करीब आ रही थी उसकी रफ़्तार बढ़ती जा रही थी। कमरे में फच फच की आवाज गूंज रही थी मैं चांदनी के ऊपर लेट कर दनादन शॉट लगाने लगा। चांदनी ने अपनी टांग को मेरी कमर पर रख कर मुझे जकड़ लिया और जोर जोर से चूतड़ उठा उठा कर चुदाई में साथ देने लगी।&lt;br /&gt;मैं भी अब चांदनी की चूची को मसलते हुए ठका-ठक शॉट लगा रहा था। कमरा हमारी चुदाई की आवाज से भरा पड़ा था। चांदनी अपनी कमर हिला कर चूतड़ उठा उठा कर चुदा रही थी और बोले जा रही थी- अह्हह आअह्हह्हह उनह्हह्ह ऊओह्हह्ह ऊऊह्हह् हाआआन हाआऐ मीईरे रज्जज्जजा, माआआअर गयययययये रीईए, लल्लल्लल्ला चूऊओद रे चूऊओद।&lt;br /&gt;उईईईई मीईईरीईइ माआअ, फाआआअत गाआआईई रीईई शुरु करो, चोदो मुझे। लेलो मज़ा जवानी का मेरे राज्जज्जा।&lt;br /&gt;और अपनी गांड हिलाने लगी। मैंने लगातर 30 मिनट तक उसे चोदा।&lt;br /&gt;मैं भी बोल रहा था- लीईए मेरीईइ रानीई, लीई लीईए मेरा लौड़ा अपनीईइ ओखलीईए मीईए। बड़ाआअ तड़पयययययया है तूनीई मुझीई। लीईए लीई, लीई मेरीईइ चांदनी ये लंड अब्बब्बब तेराआ हीई है। अह्हह्हह्ह! उह्हह्हह्हह्ह क्या जन्नत का मज़ाआअ सिखयाआअ तुनीईए। मैं तो तेरीईईइ गुलाम हूऊऊ गईईए।&lt;br /&gt;चांदनी गांड उछाल उछाल कर मेरा लंड चूत में ले रही थी और मैं भी पूरे जोश के साथ उसकी चूचियों को मसल मसल कर अपनी चांदनी को चोदे जा रहा था। &lt;br /&gt;चांदनी मुझको ललकार कर कहती- लगाओ शॉट मेरे राज !&lt;br /&gt;और मैं जवाब देता- ये ले मेरी रानी, ले ले अपनी चूत में।&lt;br /&gt;जरा और जोर से सरकाओ अपना लंड मेरी चूत में मेरे राज ! ये ले मेरी रानी, ये लंड तो तेरे लिये ही है।&lt;br /&gt;देखो राज्जज्जा मेरी चूत तो तेरे लंड की दिवानी हो गई, और जोर से और जोर से आआईईईईए मेरे राज्जज्जज्जजा। मैं गईईईईईए रीई- कहते हुए मेरी चांदनी ने मुझको कस कर अपनी बाहों में जकड़ लिया और उसकी चूत ने ज्वालामुखी का लावा छोड़ दिया। अब तक मेरा भी लंड पानी छोड़ने वाला था और मैं बोला, "मैं भी अयाआआ मेरी जाआअन," और मैंने भी अपने लंड का पानी छोड़ दिया और मैं हांफ़ते हुए उसकी चूची पर सिर रख कर कस के चिपक कर लेट गया।&lt;br /&gt;तो दोस्तो यह थी मेरी चांदनी की चुदाई की जबरदस्त कहानी।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5371403670818517101-1944451044393018773?l=mastjanghu.blogspot.com'/&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://mastjanghu.blogspot.com/feeds/1944451044393018773/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='https://www.blogger.com/comment.g?blogID=5371403670818517101&amp;postID=1944451044393018773&amp;isPopup=true' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5371403670818517101/posts/default/1944451044393018773'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5371403670818517101/posts/default/1944451044393018773'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://mastjanghu.blogspot.com/2009/10/blog-post_7710.html' title='चांदनी की चूत'/><author><name>JAI SINGH</name><uri>http://www.blogger.com/profile/01785593676712838482</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:extendedProperty xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' name='OpenSocialUserId' value='15234607527984438017'/></author><thr:total xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5371403670818517101.post-5762906355744971877</id><published>2009-10-08T11:56:00.000+05:30</published><updated>2009-10-08T11:56:07.118+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='sexy picture'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='sexy images'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='GIRL'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='NUDE'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='Adult Photo'/><title type='text'>Bold girls 2</title><content type='html'>&lt;div class="post-body entry-content"&gt;&lt;img height="1024" src="http://hosted.met-art.com/met-art_mw_49_680//full/met-art_mw_49_3.jpg" width="680" /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;img height="1024" src="http://hosted.met-art.com/met-art_mw_49_680//full/met-art_mw_49_4.jpg" width="680" /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;img height="1024" src="http://hosted.met-art.com/met-art_mw_49_680//full/met-art_mw_49_8.jpg" width="680" /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;img height="1024" src="http://hosted.met-art.com/met-art_mw_49_680//full/met-art_mw_49_7.jpg" width="680" /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;img height="1024" src="http://hosted.met-art.com/met-art_mw_49_680//full/met-art_mw_49_10.jpg" width="680" /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;img height="1024" src="http://hosted.met-art.com/met-art_mw_49_680//full/met-art_mw_49_11.jpg" width="673" /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;img height="1024" src="http://hosted.met-art.com/met-art_mw_49_680//full/met-art_mw_49_13.jpg" width="680" /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;img height="1024" src="http://hosted.met-art.com/met-art_mw_49_680//full/met-art_mw_49_14.jpg" width="680" /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;img height="1024" src="http://hosted.met-art.com/met-art_mw_49_680//full/met-art_mw_49_15.jpg" width="680" /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;img src="http://hosted.met-art.com/met-art_mw_49_680//full/met-art_mw_49_17.jpg" style="height: 411px; width: 523px;" /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5371403670818517101-5762906355744971877?l=mastjanghu.blogspot.com'/&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://mastjanghu.blogspot.com/feeds/5762906355744971877/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='https://www.blogger.com/comment.g?blogID=5371403670818517101&amp;postID=5762906355744971877&amp;isPopup=true' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5371403670818517101/posts/default/5762906355744971877'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5371403670818517101/posts/default/5762906355744971877'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://mastjanghu.blogspot.com/2009/10/bold-girls-2.html' title='Bold girls 2'/><author><name>JAI SINGH</name><uri>http://www.blogger.com/profile/01785593676712838482</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:extendedProperty xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' name='OpenSocialUserId' value='15234607527984438017'/></author><thr:total xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5371403670818517101.post-613952574847931860</id><published>2009-10-08T11:38:00.001+05:30</published><updated>2009-10-28T14:38:01.941+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='sexy story hindi mein'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='hindi adult stories'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='antarvasna stories'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='Adult stories'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='hindi sex stories'/><title type='text'>मेरी सेक्सी पड़ोसन राखी-2</title><content type='html'>प्रेषक : हॉट प्रिन्स&lt;br /&gt;पहले भाग से आगे&lt;br /&gt;फ़िर कुछ देर बाद उसने कहा," मेरी जान ! मेरी चूत तो अभी भी प्यासी है, इसकी प्यास भी तो बुझाओ, बहुत ही तंग करती है, मुझे ! बहुत ही खुजली मचती है इसमें ! बस अब मेरी चूत में अपना लन्ड डाल कर कस कर चोद डालो !"&lt;br /&gt;और ऐसा कहकर वो लेट गई और मेरे लन्ड को अपनी चूत के योनि-द्वार पर रगड़ने लगी और जैसे ही उसकी कोमल चूत का स्पर्श मेरे लन्ड पर हुआ, फ़िर से 8" का लम्बा हो कर सलामी मारने लगा। मेरा लन्ड भी उसकी चूत के लिये बहुत ही व्याकुल था, क्युँकि बहुत तड़पा था राखी की चूत के लिये।&lt;br /&gt;मैंने कहा," देखा जान ! कैसा फ़ुदक रहा है तुम्हारी चूत के लिये !"&lt;br /&gt;फ़िर मैंने राखी को बेड पर सीधा लिटाया और मैं उसके उपर आ गया। अपने लन्ड को उसकी चूत के गुलाबी छेद पर रखा और अन्दर डालना शुरु कर दिया, उसकी चूत बहुत ही टाईट थी इस लिये मेरा लन्ड उसकी चूत में मुश्किल से जा रहा था, लेकिन कुछ जोर लगाने से सारा अन्दर घुस गया मुझे लगा कि उसकी चूत की सील पहले ही किसी ने तोड़ी हुई है। &lt;br /&gt;मैने उससे पूछा,"क्या आज से पहले कभी सेक्स किया है?"&lt;br /&gt;तो उसने कहा," हाँ ! एक बार मेरे मामा का लड़का हमारे घर में आया था और रात को वो हमारे कमरे में सोया था तो रात को मेरे करीब आया, उसने मुझे नंगा कर दिया और अपने लन्ड को मेरी गीली चूत के पास लाया और मेरी चूत पर मसलने लगा। मुझे बहुत ही मजा आने लगा था इसलिये मैं उसके लन्ड को अपनी चूत में घुसाने लगी, जैसे ही उसका लन्ड मेरी कुंआरी चूत में गया मुझे बहुत दर्द हुआ था और मेरी चुत में से खून निकलने लगा। फ़िर वो मेरी चूत में कुछ देर तक हिला और जल्दी ही झड़ गया। और वो जाकर सो गया, मेरा मजा अधूरा ही रह गया और उस रात को मैंने अपनी चूत को अपनी उन्ग्लियों से शान्त किया !"&lt;br /&gt;"लेकिन आज आप मेरी चूत को ऐसे चोदना कि इस साली को चैन पड़ जाये !"&lt;br /&gt;मेरे लन्ड ने उसकी चूत में अपने लिये जगह बनाई और पूरा का पूरा 8" का अन्दर समा गया। मैंने धीरे-धीरे उसकी चूत की चुदाई शुरु कर दी। अब वो जन्नत में थी, चिल्लाई," और अन्दर तक डाल दो !"&lt;br /&gt;मैं समझ गया कि उसकी चूत बहुत ही चुदासी हो उठी है।&lt;br /&gt;उसने अपने कूल्हे ऊपर उठाये और मेरे लन्ड को अपनी चूत में और गहराई तक समा लिया। मेरा लन्ड काफ़ी मोटा और तगड़ा था जिससे मेरे लन्ड पर उसकी चूत कसी हुई थी। जैसे ही मैं अपना लन्ड बाहर निकालता उसकी चूत के अन्दर का छल्ला बाहर तक खिंच कर आता और लन्ड के साथ अन्दर चला जाता।&lt;br /&gt;मेरा लन्ड उसकी चूत को अन्दर तक पेल रहा था। कुछ देर तक ऐसे चोदने के बाद मैंने एक तकिया उसकी गाँड के नीचे लगा दिया जिससे उसकी चूत ऊपर उठ गई और चूत का छेद थोड़ा सा खुल गया और अपना लन्ड उसके योनि-द्वार पर रखा और कमर को एक झटका दिया, मेरा पूरा लन्ड उसकी चूत को चीरता हुआ अन्दर के आखिरी हिस्से पर जा टकराया। राखी उत्तेजना में भर गई, मेरे सीने से चिपक गई और उसके मुँह से निकल पड़ा," ओह्ह्ह्………हाय्…………अब……मजा मिला है ! आपका लन्ड मेरी चूत के आखिरी हिस्से को रगड़ रहा है, बस ऐसे ही मुझे चोद डालो !"&lt;br /&gt;मैंने उसकी दोनों टाँगों को ऊपर उठाया और उसकी चूत में लन्ड तेज रफ़्तार से आगे पीछे करके लगा। मेरा लन्ड उसकी चूत में रफ़्तार पकड़ चुका था। मैं उसके ऊपर छाया हुआ था और मेरे होंठ उसके रसीले होंठों को चूस रहे थे। राखी की कामोत्तेजना इतनी तीव्र थी कि उसका सारा शरीर तप रहा था, उसने उन्माद में अपनी दोनों आँखें बन्द कर रखी थी और उसका शरीर मछली की तरह तड़प रहा था।&lt;br /&gt;जैसे ही मेरा लन्ड उसकी चूत में जाता, वो अपनी कमर उठा कर लन्ड को अन्दर तक समा लेती, मेरे लन्ड के हर प्रहार का जबाव वो अपने चूतड़ उठा उठा कर दे रही थी। मेरे बेडरूम का वातावरण राखी की चुदाई से गरम हो रहा था, कमरे में उसके मुँह से उत्तेजना भरी आवाजें गूंज रही थीं," आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ! उईईईईई………उम्म्म्म्म्म्म्……… ।आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्……… ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्…… चोद ! मुझे ! कस कर ! हाँ ………और तेज ! जोर जोर से चोद मुझे ! अन्दर तक पेल दे अपने लन्ड को ! फ़ाड डाल मेरी चूत को ! बहुत मजा आ रहा है। और चोद , कस कर चोद, सारा लन्ड डाल कर पेल ! मेरी चूत बहुत ही तंग करती है मुझे ! आज इसको शान्त कर दो अपने लन्ड से ! बहुत दिन बाद चूत की खुजली मिट रही है ! हाँ और तेज ! और तेज ! उईईईईईईइ………आआआअहाआअ………उह्ह्ह्ह्ह्ह्… ह्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्……………ओफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्……………हाँ…………"&lt;br /&gt;और राखी का पूरा जिस्म अकड़ गया और उसने मुझे नीचे कर दिया और खुद मेरे ऊपर आ गई और मेरे लन्ड को अन्दर लिये हुए चूत को रगड़ने लगी और उसने जिस्म को अकड़ाया और रुक गई। उसकी चूत इतनी गरम हो उठी कि मेरा लन्ड पिघलने लगा, और वो चुदाई के आखिरी पड़ाव पर आ गई और झड़ गई। मेरा लन्ड उसकी चूत के तरल द्रव्य से सराबोर हो गया। वो पहली बार इतना स्खलित हुई कि उसकी चूत से गरम गरम रस रिसने लगा और मेरी जांघों पर टपकने लगा।&lt;br /&gt;उसके चेहरे पर सन्तुष्टि का भाव साफ़ नजर आ रहा था, लेकिन मैं अभी जल्दी झड़ने वाला नहीं था और मैं उसको लगातार ऐसे ही चोदे जा रहा था। अब उसकी चूत उसके स्खलित होने से लिसलिसा उठी थी और मेरा लन्ड उसकी चूत को घपाक से चोद रहा था, घच-घच की आवाज उसकी चुदाई से कमरे में गूंज रही थी।&lt;br /&gt;मैंने राखी को घोड़ी की तरह पोजिशन में लिया और पीछे से लन्ड उसकी चूत में पेल दिया। इस बार मेरा पूरा लन्ड उसकी चूत में आसानी से चला गया और मैं उसको उसी पोजिशन में चोदने लगा।&lt;br /&gt;कुछ देर बाद राखी फिर से झड़ गई। मैं लगातार उसको चोद रहा था, वो भी कमर आगे पीछे करके चुदाई का मजा लेने लगी। उसकी गाँड का भूरा छेद मेरे सामने था, मैं एक उन्गली से उसकी गाँड को भी मसल रहा था। मैंने अपने दोनों हाथों से उसकी चूची पकड़ ली और उनको दबाने लगा। मैं मानो राखी को चोदते हुए स्वर्ग में आ गया था और मैं कस कर रफ़्तार से तेज तेज चोदने लगा। उसके नितम्ब मेरी जांघों से टकरा रहे थे। 10 मिनट के बाद मुझे अहसास हुआ कि मैं भी स्खलित होने वाला हूँ।&lt;br /&gt;मैंने राखी से पूछा तो उसने कहा,"मेरी चूत में ही भर दो तभी इसकी आग शान्त होगी !"&lt;br /&gt;मेरे मुँह से कराह निकली और मेरे लन्ड ने गरम गरम वीर्य से उसकी चूत को भर दिया। मैंने चुदाई तब तक चालू रखी जब तक मेरे लन्ड में से वीर्य की आखिरी बूँद उसकी चूत में न निकल गई और उसी समय राखी भी फ़िर से झड़ ग़ई।&lt;br /&gt;मैंने अपना लन्ड बाहर निकाल लिया। हम दोनों निढाल होकर बेड पर पड़ गये, उसकी चूत में से मेरा और उसका रस मिश्रित हो कर रिस कर उसकी जांघों पर आ गया।&lt;br /&gt;कुछ देर बाद मेरा लन्ड फिर से खड़ा हो गया और उस रात को मैंने राखी को दो बार और चोदा।&lt;br /&gt;चुदाई के बाद राखी ने कहा,"आज आपने मेरी चूत की वर्षों की आग को शान्त किया है, ऐसा मजा जिन्दगी में पहली बार मिला है !"&lt;br /&gt;फ़िर उसने मुझे गुड नाइट किस किया और हम दोनों थक कर सो गये। सुबह होते ही वो अपने घर चली गई।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5371403670818517101-613952574847931860?l=mastjanghu.blogspot.com'/&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://mastjanghu.blogspot.com/feeds/613952574847931860/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='https://www.blogger.com/comment.g?blogID=5371403670818517101&amp;postID=613952574847931860&amp;isPopup=true' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5371403670818517101/posts/default/613952574847931860'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5371403670818517101/posts/default/613952574847931860'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://mastjanghu.blogspot.com/2009/10/2.html' title='मेरी सेक्सी पड़ोसन राखी-2'/><author><name>JAI SINGH</name><uri>http://www.blogger.com/profile/01785593676712838482</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:extendedProperty xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' name='OpenSocialUserId' value='15234607527984438017'/></author><thr:total xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5371403670818517101.post-985070504934822002</id><published>2009-10-08T11:36:00.001+05:30</published><updated>2009-10-08T11:36:01.359+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='ENGLISH SEX STORIES'/><title type='text'>Woman's Story: First Time's the Charm</title><content type='html'>&lt;div align="left"&gt;&lt;span style="font-family: Arial;"&gt;It was my first time doing anything with a guy.&amp;nbsp; I was so nervous.&amp;nbsp; The guy I was with was also a lot more experienced than I.&amp;nbsp;&amp;nbsp; &lt;/span&gt;    &lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="left"&gt;&lt;span style="font-family: Arial;"&gt;I snuck out of my house at about 1:00 am. From there we met at his car a little ways down the street and drove off to his house. When we got to his house he put on some music and we relaxed. Soon things starting heating up and I started sucking on his fingers. He seemed to enjoy it, so because I was in a risk-taking mood I asked if he would like me to suck somewhere else.&amp;nbsp;&amp;nbsp; &lt;/span&gt;    &lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="left"&gt;&lt;span style="font-family: Arial;"&gt;He un-zipped his pants and his cock popped out.&amp;nbsp; Slowly I started licking and sucking getting harder and faster and repeating everything he said he liked. I continued this for about 5 minutes until he pulled me away and took of my shorts and panties and started fingering me.&amp;nbsp; It was amazing...and before we knew it we were sixty-nining and enjoying the hell out of it.&amp;nbsp; He was so incredibly good I didn't want to stop.&amp;nbsp; I must have come about twice when finally we decided to stop. We laid on his bed talking for a bit then he took me home.&amp;nbsp; I cannot wait till we do this again. thinking about this makes me so horny.&amp;nbsp; This definitely was not bad for a first time.&amp;nbsp; &lt;/span&gt;    &lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5371403670818517101-985070504934822002?l=mastjanghu.blogspot.com'/&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://mastjanghu.blogspot.com/feeds/985070504934822002/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='https://www.blogger.com/comment.g?blogID=5371403670818517101&amp;postID=985070504934822002&amp;isPopup=true' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5371403670818517101/posts/default/985070504934822002'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5371403670818517101/posts/default/985070504934822002'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://mastjanghu.blogspot.com/2009/10/womans-story-first-times-charm.html' title='Woman&apos;s Story: First Time&apos;s the Charm'/><author><name>JAI SINGH</name><uri>http://www.blogger.com/profile/01785593676712838482</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:extendedProperty xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' name='OpenSocialUserId' value='15234607527984438017'/></author><thr:total xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5371403670818517101.post-4617119807828086418</id><published>2009-10-08T11:35:00.003+05:30</published><updated>2009-10-08T11:35:36.715+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='ENGLISH SEX STORIES'/><title type='text'>Woman's Story: First Time Blow Job</title><content type='html'>&lt;div align="left"&gt;&lt;span style="font-family: Arial;"&gt;Joey was a few years older than me. He was so cute and        strong, and I admired him and thought he was really exciting. &lt;/span&gt;        &lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;span style="font-family: Arial;"&gt;When he invited me over to his house one day, I enthusiastically walked        to the bus and got there as soon as I could. His mother was home and he        introduced us. &lt;/span&gt;        &lt;br /&gt;&lt;span style="font-family: Arial;"&gt;"Let's go to my room," he said, and his mother looked at me        approvingly. &lt;/span&gt;        &lt;br /&gt;&lt;span style="font-family: Arial;"&gt;We sat on his bed for a few minutes, talking about school. Then he        asked me if he could teach me something that I hadn't learned in class --        how to get a boy off. I giggled and agreed, hoping his mother wouldn't        know. I heard her doing the dishes while Joey unbuttoned his Levi's (I        remember those so clearly -- and he wasn't wearing underwear). He took off        his pants and held his cock in his hand, which looked massive to me.       &lt;/span&gt;        &lt;br /&gt;&lt;span style="font-family: Arial;"&gt;He told me to grab it. Then he told me to suck on it, so I bent down,        my face cautiously moving toward him. &lt;/span&gt;        &lt;br /&gt;&lt;span style="font-family: Arial;"&gt;He smelled clean and the skin of his cock was smooth. I was warm and        comfortable and pleased with myself&amp;nbsp; that I was learning this great        lesson about sex. I wrapped my mouth around and ventured to suck, like he        had asked. &lt;/span&gt;        &lt;br /&gt;&lt;span style="font-family: Arial;"&gt;"Just slide your mouth up and down," he suggested, and I did. He pushed        my head down, encouraging me. Then his hand covered my hand (which was        wrapped around the base of his cock still) and he made motion for me to        stroke him. It was difficult to coordinate with the sucking, but it didn't        take long before he started shaking and making soft moaning noises. He        pulled away&amp;nbsp; from me quickly, and I watched his cock spray cum on his        bed in front of me.&amp;nbsp; &lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5371403670818517101-4617119807828086418?l=mastjanghu.blogspot.com'/&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://mastjanghu.blogspot.com/feeds/4617119807828086418/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='https://www.blogger.com/comment.g?blogID=5371403670818517101&amp;postID=4617119807828086418&amp;isPopup=true' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5371403670818517101/posts/default/4617119807828086418'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5371403670818517101/posts/default/4617119807828086418'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://mastjanghu.blogspot.com/2009/10/womans-story-first-time-blow-job.html' title='Woman&apos;s Story: First Time Blow Job'/><author><name>JAI SINGH</name><uri>http://www.blogger.com/profile/01785593676712838482</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:extendedProperty xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' name='OpenSocialUserId' value='15234607527984438017'/></author><thr:total xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5371403670818517101.post-4299192702227897800</id><published>2009-10-08T11:35:00.001+05:30</published><updated>2009-10-08T11:35:06.764+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='ENGLISH SEX STORIES'/><title type='text'>Woman's Story: Summer Break</title><content type='html'>&lt;span style="font-family: Arial;"&gt;The summer before I came to college, I went on  a two- week trip to Mexico. My high school group met up with ones from Indiana  and Florida. I was hot for a guy from Indiana named Rick. I'm not sure why, he  wasn't my type at all. He was cute in that Superman/Clark Kent way, and he never  said much. Well, the last night of the trip I got drunk at a disco in Puerto  Vallarta. My friend Nikki, who had a thing for a different Indiana guy, was with  me and we motivated each other to go try to hook up with them. I did the  sluttiest thing ever and walked up to Rick with my room key and said, "If you  come with me now, you're going to get laid." He accepted the offer. The minute  we got back to the room we started taking our clothes off. I started by sucking  him off. He had the biggest dick I've ever seen, long and fat. I got a little  scared. He started to finger me and I was dripping pussy juice all over his  hand. I laid down on the bed and spread my legs. I figured we would just go  straight to fucking, but instead he licked me softly and nibbled my clit. I was  grabbing handfuls of his hair and groaning. I wanted him to fuck me so bad. He  was getting off on it to. I was basically begging for him to give it to me.  Finally he stopped eating me and slipped his dick in. I felt something rip but I  wasn't about to stop him. We fucked like animals all over the bed, we did  positions I had never done before (hey, I was just out of high school). when it  was over we lay there sweating and panting. I realized that huge cock had torn  me open and I was starting to get sore. Since it was the last night of the trip,  the next morning we said goodbye and went to our separate groups. I had trouble  walking for days. &lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5371403670818517101-4299192702227897800?l=mastjanghu.blogspot.com'/&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://mastjanghu.blogspot.com/feeds/4299192702227897800/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='https://www.blogger.com/comment.g?blogID=5371403670818517101&amp;postID=4299192702227897800&amp;isPopup=true' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5371403670818517101/posts/default/4299192702227897800'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5371403670818517101/posts/default/4299192702227897800'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://mastjanghu.blogspot.com/2009/10/womans-story-summer-break.html' title='Woman&apos;s Story: Summer Break'/><author><name>JAI SINGH</name><uri>http://www.blogger.com/profile/01785593676712838482</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:extendedProperty xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' name='OpenSocialUserId' value='15234607527984438017'/></author><thr:total xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5371403670818517101.post-5026393327180629169</id><published>2009-10-08T11:34:00.001+05:30</published><updated>2009-10-08T11:34:45.269+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='ENGLISH SEX STORIES'/><title type='text'>Woman's Story: One-on-One</title><content type='html'>&lt;span style="font-family: Arial;"&gt;It was a Thursday afternoon, which meant game day at our high school. I was on the girls basketball team so I helped set up for the boys game. I went into the gym to find my ex-boyfriend shooting around. He looked at me and I looked at him and we both just smiled. I looked over to see the economics teacher Mr. Tanke deeply reading his news paper. I paid him no mind and went on to talk to Leron. As we went on talking, somehow the subject of sex came up (mind you that all of the time we were together we never fucked) and he suggested that we go into the locker room. Being the stubborn person that I am I asked why. He shook his head in anguish as if he were mad at me, and I hate that, so  I said sure. He looked pretty surprised but wasn't completely shocked. He took my hand and led me into the locker room to find it completely empty. He took me to the back portion which was called the cage. He threw me against the wall and we began to kiss deeply and passionately. Before I knew it I felt his hard dick in his warm up suit and I couldn't help but to drop to my knees and suck his sweet long cock. It felt and tasted so good in my mouth that I wanted to swallow it all, and before I knew it he exploded in my mouth. It tasted so great he was surprised to see that a 18-year-old could suck so well. He then feel to his knees and pushed me onto the floor and ate my sweet little pussy vigorously. I had no choice but to cum in his mouth. I was still wet and he was hard again.&amp;nbsp; We fucked hard for about fifteen minutes or so before we both came. I guess all the noise we were making attracted attention cause before we knew it one of his team mates walked in. We looked up from the floor and laughed. He laughed too and said it's game time. Leron said, OK, just give me a minute. We quickly dressed and left out of different exits of the locker room. It was the best one-on-one ever. No winner, no loser, just both opponents satisfied.&lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5371403670818517101-5026393327180629169?l=mastjanghu.blogspot.com'/&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://mastjanghu.blogspot.com/feeds/5026393327180629169/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='https://www.blogger.com/comment.g?blogID=5371403670818517101&amp;postID=5026393327180629169&amp;isPopup=true' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5371403670818517101/posts/default/5026393327180629169'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5371403670818517101/posts/default/5026393327180629169'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://mastjanghu.blogspot.com/2009/10/womans-story-one-on-one.html' title='Woman&apos;s Story: One-on-One'/><author><name>JAI SINGH</name><uri>http://www.blogger.com/profile/01785593676712838482</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:extendedProperty xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' name='OpenSocialUserId' value='15234607527984438017'/></author><thr:total xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5371403670818517101.post-3205370484977058648</id><published>2009-10-08T11:33:00.002+05:30</published><updated>2009-10-08T11:33:54.759+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='ENGLISH SEX STORIES'/><title type='text'>Woman's Story: I Was Sore the Next Day</title><content type='html'>&lt;span style="font-family: Arial;"&gt;The first time I ever had sex I was 17. My boyfriend, who I'd been with for 7 months at that time, was 18. He and I had talked about having sex, but he never pushed me. One night, he came to my window. I was surprised, and I let him in my room and laid in my bed with him. It was probably 12:30 at night. He'd said he'd been thinking about me all day, and I the same for him. &lt;/span&gt;      &lt;div align="left"&gt;&lt;span style="font-family: Arial;"&gt; He started to kiss me, and I pushed my body close to his. He started to play with the elastic on my pajama shorts, and asked me if it was okay. I said, yes, of course. He slowly slid my shorts off...and started to finger me. I moaned and sighed with pleasure, trying not to wake up my sister across the hall. &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="left"&gt;&lt;span style="font-family: Arial;"&gt; He asked me if he could taste me. He slowly went down to my wet pussy, licking and flicking my clit with his tongue. This was the first time I'd ever been eaten out. I put a pillow over my face and moaned when I'd reached an orgasm. &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="left"&gt;&lt;span style="font-family: Arial;"&gt;  He came back up to me, taking my shirt off and sucking my nipples. He put his hand in between  my legs, and I spread them. His cock was throbbing. He teased my clit with it,  and then finally stuck it in me. I rocked my body with his, as he pinched my  nipples and kissed me. &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="left"&gt;&lt;span style="font-family: Arial;"&gt;  He pulled out of me and came on my stomach. He cleaned it off like a gentlemen,  and I sucked him hard again. After this, he turned me on my side and started to  finger me again. He was ready for round two. I stayed laying sideways as he  fucked me slowly at first and then faster and faster. The next day I was sore  and bleeding, but it was well worth it.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5371403670818517101-3205370484977058648?l=mastjanghu.blogspot.com'/&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://mastjanghu.blogspot.com/feeds/3205370484977058648/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='https://www.blogger.com/comment.g?blogID=5371403670818517101&amp;postID=3205370484977058648&amp;isPopup=true' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5371403670818517101/posts/default/3205370484977058648'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5371403670818517101/posts/default/3205370484977058648'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://mastjanghu.blogspot.com/2009/10/womans-story-i-was-sore-next-day.html' title='Woman&apos;s Story: I Was Sore the Next Day'/><author><name>JAI SINGH</name><uri>http://www.blogger.com/profile/01785593676712838482</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:extendedProperty xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' name='OpenSocialUserId' value='15234607527984438017'/></author><thr:total xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5371403670818517101.post-7736470205467399490</id><published>2009-10-07T18:32:00.002+05:30</published><updated>2009-10-07T18:32:36.600+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='HINDI JOKES'/><title type='text'>पहली बार अकेली सोयी है !</title><content type='html'>﻿मल्लिका शेरावत को एयरपोर्ट कस्टम काउंटर पर चेक करते हुए पुछा :&lt;br /&gt;"माचिस की इस डिब्बी में क्या है ?"&lt;br /&gt;मल्लिका शेरावत ने जवाब दिया :&lt;br /&gt;"परेशान मत करों. इसमे मेरे कपड़े है और क्या !"&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;रिपोर्टर ने मल्लिका से पुछा :&lt;br /&gt;"सुबह उठकर सबसे पहले आप क्या करती है ?"&lt;br /&gt;मल्लिका ने जवाब दिया :&lt;br /&gt;"सुबह उठकर सबसे पहले अपने घर चली जाती हुं"&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मल्लिका शेरावत का देशभक्ति गीत :&lt;br /&gt;"अब तुम्हारे हवाले बदन साथियों"&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;लड़्को के लिये जन्मदिन का बधाई संदेश :&lt;br /&gt;ईश्वर करें हर दिन आपकी खुशियाँ पेट्रोल के भाव की तरह बढ़े&lt;br /&gt;और आपके ग़म मल्लिका शेरावत के कपड़ों की तरह घटे"&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मल्लिका शेरावत के मरने के बाद उसकी कब्र पर क्या लिखा होगा ?&lt;br /&gt;"पहली बार अकेली सोयी है !"&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5371403670818517101-7736470205467399490?l=mastjanghu.blogspot.com'/&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://mastjanghu.blogspot.com/feeds/7736470205467399490/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='https://www.blogger.com/comment.g?blogID=5371403670818517101&amp;postID=7736470205467399490&amp;isPopup=true' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5371403670818517101/posts/default/7736470205467399490'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5371403670818517101/posts/default/7736470205467399490'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://mastjanghu.blogspot.com/2009/10/blog-post_4730.html' title='पहली बार अकेली सोयी है !'/><author><name>JAI SINGH</name><uri>http://www.blogger.com/profile/01785593676712838482</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:extendedProperty xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' name='OpenSocialUserId' value='15234607527984438017'/></author><thr:total xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5371403670818517101.post-1561718362497068258</id><published>2009-10-07T18:30:00.001+05:30</published><updated>2009-10-07T18:30:42.804+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='HINDI JOKES'/><title type='text'>﻿ट्रक का नंबर भी लिखा है</title><content type='html'>एक ट्रक दुसरे ट्रक को खीच रहा था.&lt;br /&gt;देख कर सरदारजी हँसकर लोटपोट होके गिर पड़े और बोले: &lt;br /&gt;एक रस्सी का टुकड़ा उठाने के लिये २-२ ट्रक&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सन्ता और बन्ता मिस्र के म्युज़ीयम में ममी को देख रहे थे&lt;br /&gt;सन्ता: बेचारा! पट्टीयाँ ही पट्टीयाँ लगी हैं...&lt;br /&gt;कितनी चोटें लगी हैं इसको..&lt;br /&gt;जरूर ट्रक एक्सीडेंट में मरा होगा...&lt;br /&gt;बन्ता: हाँ, ट्रक का नंबर भी लिखा है . :- A.D.1460&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सन्ता मे बन्ता से पुछा : तुम पोस्टपैड के बजाय प्रीपैड को महत्व क्यों देते हो?&lt;br /&gt;बन्ता: प्रीपैड में बहुत फ़ायदा है, इसमे कॉल के बाद बिल बढने के बजाय कम होता है...&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5371403670818517101-1561718362497068258?l=mastjanghu.blogspot.com'/&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://mastjanghu.blogspot.com/feeds/1561718362497068258/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='https://www.blogger.com/comment.g?blogID=5371403670818517101&amp;postID=1561718362497068258&amp;isPopup=true' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5371403670818517101/posts/default/1561718362497068258'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5371403670818517101/posts/default/1561718362497068258'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://mastjanghu.blogspot.com/2009/10/blog-post_7087.html' title='﻿ट्रक का नंबर भी लिखा है'/><author><name>JAI SINGH</name><uri>http://www.blogger.com/profile/01785593676712838482</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:extendedProperty xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' name='OpenSocialUserId' value='15234607527984438017'/></author><thr:total xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'>0</thr:total></entry></feed>