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<?xml-stylesheet type="text/xsl" media="screen" href="/~d/styles/atom10full.xsl"?><?xml-stylesheet type="text/css" media="screen" href="http://feeds.feedburner.com/~d/styles/itemcontent.css"?><feed xmlns="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:openSearch="http://a9.com/-/spec/opensearch/1.1/" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:gd="http://schemas.google.com/g/2005" xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0" xmlns:feedburner="http://rssnamespace.org/feedburner/ext/1.0" gd:etag="W/&quot;CE4GQXgyeCp7ImA9WhRVFkg.&quot;"><id>tag:blogger.com,1999:blog-4037994172839597177</id><updated>2012-01-16T00:12:00.690+05:30</updated><title>आलोक तोमर</title><subtitle type="html">आलोक तोमर को लोग जानते भी हैं और नहीं भी जानते. उनके वारे में वहुत सारे किस्से कहे जाते हैं, ज्यादातर  सच और मामूली और कुछ कल्पित और खतरनाक. दो बार तिहाड़ जेल और कई बार विदेश हो आए आलोक तोमर ने भारत में काश्मीर से ले कर कालाहांडी के सच बता कर लोगों को स्तब्ध भी किया है तो दिल्ली के एक पुलिस अफसर से पंजा भिडा कर जेल भी गए हैं. वे दाऊद इब्राहीम से भी मिले हैं और रजनीश से भी. वे टी वी, अखबार, और इंटरनेट की पत्रकारिता करते हैं.</subtitle><link rel="http://schemas.google.com/g/2005#feed" type="application/atom+xml" href="http://aaloktomar.blogspot.com/feeds/posts/default" /><link rel="alternate" type="text/html" href="http://aaloktomar.blogspot.com/" /><link rel="next" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/4037994172839597177/posts/default?start-index=26&amp;max-results=25&amp;redirect=false&amp;v=2" /><author><name>गूगल मित्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17719251231605581199</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel="http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail" width="16" height="16" src="http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif" /></author><generator version="7.00" uri="http://www.blogger.com">Blogger</generator><openSearch:totalResults>65</openSearch:totalResults><openSearch:startIndex>1</openSearch:startIndex><openSearch:itemsPerPage>25</openSearch:itemsPerPage><atom10:link xmlns:atom10="http://www.w3.org/2005/Atom" rel="self" type="application/atom+xml" href="http://feeds.feedburner.com/datelineindia" /><feedburner:info uri="datelineindia" /><atom10:link xmlns:atom10="http://www.w3.org/2005/Atom" rel="hub" href="http://pubsubhubbub.appspot.com/" /><entry gd:etag="W/&quot;DkUDRHw9fSp7ImA9WxNaFEo.&quot;"><id>tag:blogger.com,1999:blog-4037994172839597177.post-6381233126904912862</id><published>2009-11-29T11:26:00.000+05:30</published><updated>2009-11-29T11:27:55.265+05:30</updated><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2009-11-29T11:27:55.265+05:30</app:edited><title>SUPRIYA ROY ABROAD</title><content type="html">&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_ddA-DxW--2w/SxINXTop3bI/AAAAAAAAAy8/8NB3n3eQYGg/s1600/DSCN0004.JPG"&gt;&lt;img alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/_ddA-DxW--2w/SxINXTop3bI/AAAAAAAAAy8/8NB3n3eQYGg/s400/DSCN0004.JPG" border="0" /&gt;&lt;/a&gt; &lt;br /&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_ddA-DxW--2w/SxINXye2rGI/AAAAAAAAAzE/yGUxeyes160/s1600/FSCN0145.JPG"&gt;&lt;img alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/_ddA-DxW--2w/SxINXye2rGI/AAAAAAAAAzE/yGUxeyes160/s400/FSCN0145.JPG" border="0" /&gt;&lt;/a&gt; &lt;br /&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_ddA-DxW--2w/SxINYKJiARI/AAAAAAAAAzM/b5nlkdHFuRI/s1600/DSCN0005.JPG"&gt;&lt;img alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/_ddA-DxW--2w/SxINYKJiARI/AAAAAAAAAzM/b5nlkdHFuRI/s400/DSCN0005.JPG" border="0" /&gt;&lt;/a&gt; &lt;br /&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_ddA-DxW--2w/SxINYmygusI/AAAAAAAAAzY/9KeauO2DGFQ/s1600/DSCN0006.JPG"&gt;&lt;img alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/_ddA-DxW--2w/SxINYmygusI/AAAAAAAAAzY/9KeauO2DGFQ/s400/DSCN0006.JPG" border="0" /&gt;&lt;/a&gt; &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;script src="http://js.nicedit.com/nicEdit.js" type="text/javascript"&gt;&lt;/script&gt;&lt;br /&gt;&lt;script type="text/javascript"&gt;&lt;br /&gt;bkLib.onDomLoaded(nicEditors.allTextAreas);&lt;br /&gt;&lt;/script&gt;&lt;div style='clear:both; text-align:NONE'&gt;&lt;a href='http://picasa.google.com/blogger/' target='ext'&gt;&lt;img src='http://photos1.blogger.com/pbp.gif' alt='Posted by Picasa' style='border: 0px none ; padding: 0px; background: transparent none repeat scroll 0% 50%; -moz-background-clip: initial; -moz-background-origin: initial; -moz-background-inline-policy: initial;' align='middle' border='0' /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;FRIENDS IF YOU LIKED OR EVEN HATE YOU SAW, PLEASE GIVE ME A BUZZ ON aloktomar@hotmail.com
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ALOK&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4037994172839597177-6381233126904912862?l=aaloktomar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/datelineindia/~4/dqYiBay7Hwc" height="1" width="1"/&gt;</content><link rel="replies" type="application/atom+xml" href="http://aaloktomar.blogspot.com/feeds/6381233126904912862/comments/default" title="Post Comments" /><link rel="replies" type="text/html" href="http://www.blogger.com/comment.g?blogID=4037994172839597177&amp;postID=6381233126904912862&amp;isPopup=true" title="1 Comments" /><link rel="edit" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/4037994172839597177/posts/default/6381233126904912862?v=2" /><link rel="self" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/4037994172839597177/posts/default/6381233126904912862?v=2" /><link rel="alternate" type="text/html" href="http://feedproxy.google.com/~r/datelineindia/~3/dqYiBay7Hwc/supriya-roy-abroad.html" title="SUPRIYA ROY ABROAD" /><author><name>गूगल मित्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17719251231605581199</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel="http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail" width="16" height="16" src="http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif" /></author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="http://3.bp.blogspot.com/_ddA-DxW--2w/SxINXTop3bI/AAAAAAAAAy8/8NB3n3eQYGg/s72-c/DSCN0004.JPG" height="72" width="72" /><thr:total>1</thr:total><feedburner:origLink>http://aaloktomar.blogspot.com/2009/11/supriya-roy-abroad.html</feedburner:origLink></entry><entry gd:etag="W/&quot;Dk4FQH4yfSp7ImA9WxdXF0g.&quot;"><id>tag:blogger.com,1999:blog-4037994172839597177.post-2196127717882955567</id><published>2008-06-29T21:23:00.001+05:30</published><updated>2008-06-29T21:25:11.095+05:30</updated><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2008-06-29T21:25:11.095+05:30</app:edited><title>एक लटकती हुई चार्जशीट</title><content type="html">&lt;strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आलोक तोमर&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;दो साल, चार महीने और पाँच दिन। इतना वक्त लगा दिल्ली पुलिस को एक चार्जशीट दाखिल करने में। वो भी ऐसे मामले मैं जिसमें वह अभियुक्त की जमानत रद्द करवाने के लिए हाई कोर्ट में एक साल से अर्जी लगाये हुए है और वहां पुलिस का तर्क है कि अभियुक्त अगर आजाद रहा तो देश और न्याय के लिए भारी खतरा है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;ये मामला है 2006 के फरवरी महीने का जब एक संपादक पर इल्जाम लगाया गया था कि उसने वे डेनिश कार्टून भारत में छाप कर भारत में सांप्रदायिक अशांति फैलाने की कोशिश की है जिन्हें ले कर पूरी दुनिया के कई हिस्सों में फतवे जारी किए जा रहे है और खास तौर पर डेनमार्क में तो कार्टून छापने वाले संपादक को भूमिगत होना पड़ा है। तब पुलिस को इतनी फ़िक्र और इतनी जल्दी थी कि इस 'अभियुक्त संपादक' को बिना उचित अदालत में ले जाए, सीधे तिहाड़ जेल भेज दिया गया-इस आदेश के साथ कि इसे उस उच्च सुरक्षा बैरक में बंद करो जहाँ कश्मीरी आतंकवादी आदि बंद होते हैं। बारह दिन जेल में रहने के बाद जमानत हुई और इस बात का इंतजार भी कि कब अभियोग लगेंगे और कब मुक़दमा शुरू होगा। इस बीच संसार के लगभग हर देश के पत्रकार संगठनो ने भारत के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को  इंटरनेट पर और सीधे भी अपीलें भेजी। सर्वोदयी प्रभाष जोशी से ले कर वामपंथी कमलेश्वर तक अदालत में हाजिर हुए और उन्होने संपादक की बेगुनाही और धर्मनिरपेक्षता की कसमें खाई और संबंधित मजिस्ट्रेट ने जमानत के आदेश में ही पुलिस के आरोप की धज्जियां उड़ा दी। लेकिन दिल्ली की पुलिस कसम खाए बैठी थी कि संसार के इस सबसे बड़े लोकतंत्र की राजधानी में अभिव्यक्ति की आजादी का जो संवैधानिक मूल अधिकार है, उसे अपने बूटो ंके नीचे रौंद दिया जाय। दिल्ली  में अटल बिहारी वाजपेयी गृह मंत्री शिवराज पाटिल से इस गिरफ्तारी ंके खिलाफ अपील कर रहे थे तो झारखंड ंके उन्ही की पार्टी ंके एक नेता संपादक का सिर कलम करने वाले को करोड़ो रुपए का इनाम देने का ऐलान कर रहा था। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इस मामले में सवा दो साल में 17 जांच अधिकारी बदले गए, तीन थानेदार और तीन डीसीपी बदल गए लेकिन चार्ज शीट को न पेश होना था न वो हुई। हार कर कर अभियुक्त पत्रकार ने दिल्ली हाईकोर्ट से ही कहा कि मी लार्ड, अगर इल्जाम है तो मुक़दमा चलवाइए या फिर एफ़ आई आर को ही खारिज कीजिए। अदालत ने पुलिस से पूछा औए एक थकी हारी एफ़ आई आर 5 जून को पेश कर दी गयी। अब मुक़दमा चलेगा, तारीखें पड़ेंगी और पत्रकार लिखने की वजाय अदालत में  मुजरिम बना रहेगा।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;गिरफ्तारी के वक्त वहुत खबरें बनी थी, टीवी चेनलों के ओ वी वैन लगे थे। बहुत सारे संपादक टीवी पर प्रेस की आजादी का राग गा रहे थे तो एक तो ऐसे थे जो संपादक को ही नालायक करार दे रहे थे। इसके बाद वे इंडिया इंटरनेशनल सेंटर गए होंगे और अपने होम थियेटर पर कोई फिरंगी फिल्म देखी होगी। अपनी अपनी बुध्दि, अपने अपने सरोकार। कोई ये नहीं देख पा रहा था कि तत्कालीन पुलिस आयुक्त की ख़ुद इस मामले में क्या दिलचस्पी थी, यह भी नहीं कि इस आयुक्त के के पॉल की धर्मं पत्नी ज़िंदगी भर कांग्रेस के एक ठिगने महाबली मंत्री के साथ-तू जहाँ जहाँ रहेगा, मेरा साया साथ होगा-की अदा में काम करती रहीं थी, आज भी कर रही हैं। शिखंडी  की तरह आचरण कर रहे गृह मंत्री को आगे रख कर चलाया गया था ये हथियार।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;के के पॉल का गुस्सा कितना निजी था ये इसी से ज़ाहिर है कि एक और मामले में, इसी पत्रकार को गिरफ्तार करने के लिए, कुछ ही महीने बाद पुलिस टीम हवाई अड्डे पर जहाज़ के नीचे खड़ी कर दी और पत्रकार को उठवा लिया। इस बार गिरफ्तारी दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने की थी। ये सेल आतंकवादियों और माफिया से निपटने के लिए वनाया गया है। फिर तिहाड़ जेल। इस बार संगत सांसद पप्पू यादव से ले कर नवी वार रूम लीक केस के अभियुक्तों की मिली। फिर जमानत हुई और ये लो, मामला अदालत की पहली पेशी में,दस- पन्द्रह मिनट में खारिज। कार्टून वाले मामले में चार्ज शीट तब तक भी नहीं आयी थी।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इस बीच के के पॉल  को संघ लोक सेवा आयोग का सदस्य बना दिया गया। एक लापता इन्स्पेटर से जान का खतरा बहाना बना और पहले उन्हें ज़ेड श्रेणी की सुरक्षा मिली और फिर जेड प्लस श्रेणी की। अपने देश में भूतपूर्व पुलिस आयुक्त होना कितने खतरे की बात है? लापता इंस्पेक्टर वापस भी आ गया, उसे धमकी के आरोप में गिरफ्तार भी नहीं किया गया। मगर के के पौल की सुरक्षा अब भी कायम है। बेटा वकालत कर रहा है और पत्नी एनजीओ भी चलाती हैं और देश ंके विदेश मंत्री की सलाहकार भी हैं। यह जोड़ा इतना करामाती है कि एनजीओ के लिए हरियाणा सरकार से करोड़ो की जमीन मिल गई और पत्नी ंके नाम से गुड़गांव ंके महंगे बीएलएफ ईलाके में एक करोड़ रुपए की लागत से और यह सिर्फ मकान बनाने की लागत है उनकी एक तीन मंजीला कोठी भी तैयार हो गयी। इस कोठी की जानकारी बिल्डर एमएल आहुजा की बेबसाईट-www.mlahujaassociates.com से मिल सकती है। लेकिन लोग तरक्की करे और बीबी के नाम से उसके जीते जी ताजमहल बनवाए, खुद को शाहजहां साबित करें, अपना क्या जाता है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;ये में अपनी कहानी लिख रहा हूँ। गुणों की खान नहीं हूँ इस लिए न्यायोचित रूप से निरासक्त नहीं रह पाया तो न्याय और आप क्षमा करें। न मर्यादा पुरुषोत्तम हूँ और न महात्मा गांधी, फिर भी चार अक्षर बेच कर रोजी   चलाता हूँ। मेंरा एक सवाल है आप सब से और अपने आप से। जिस देश में एक अफसर की सनक अभिवक्ति की आजादी पर भी भरी पड़ जाए, जिस मामले में रपट लिखवाने वाले से ले कर सारे गवाह पुलिस वाले हों, जिसकी पड़ताल, 17 जांच अधिकारी करें और फिर भी चार्ज शीट आने में सालों लग जायें, जिसमें एक भी नया सबूत नहीं हो-सिवा एक छपी हुई पत्रिका के-ऐसे मामले में आज में कटघरे में हूँ, कल आप भी हो सकते हैं। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मित्रो, ग़लत फहमी मत पालिए। में न मुकदमा लड़ने ंके लिए चंदा मांग रहा हूँ और न जुलूस  निकालने के लिए भीड़। न्याय या दंड भी मुझे अदालत से मिलेगा। मेरा सवाल सिर्फ़ यह है कि जब एक साथी पूरी व्यवस्था से निरस्त्र या ज्यादा से ज्यादा काठ की तलवारों के साथ लड़ता है तो आप सिर्फ़ तमाशा क्यों देखते हैं? समर शेष है, नही पाप का भागी केवल व्याध / जो तटस्थ है, समय लिखेगा, उनका भी अपराध।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अब चाहें तो वो लेख (मूल हिन्दी के इंग्लिश अनुवाद का हिन्दी अनुवाद ) पढ़ लें जिस पर सारा बवाल कटा है---&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;'पिछले दिनों इस्लाम धर्म की स्थापना करने वाले पवित्र हजरत मोहम्मद के एक कार्टून पर, जो डेनमार्क में छपा है, काफ़ी प्रदर्शन हुए, और अब भी चल रहे हैं। हजरत मोहम्मद के कार्टून छापने वाली पत्रिका वाही है जिसने च्रिस्ट के कार्टून छपने से इनकार कर दिया था। अब जॉर्ज बुश भी कहते हैं कि मुस्लिमों में परिहास बोध नहीं होता और इसी से उनके धर्म के मूल आधार का पता चलता है। अमेरिका की इन मूर्खता भरी टिप्पणियों से आतिशबाजी उठनी स्वाभाविक हैं। आप किसी भी धर्म की मूल आधार को चुनौती  दे कर बच नहीं सकते।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;माना कि किसी भी धर्मं की महानता का पैमाना उसकी सहिष्णुता है और यह तथ्य भी कि वह अपने पर की गयी टिप्पणियों को कितना सहन कर सकता है। किंतु अगर कोई धर्म अगर अपने पर मजाक का बुरा मानता हो तो उसे अपने पथ का संधान करने के लिए ख़ुद छोड़ देना चाहिए।'&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कुछ ग़लत लिखा था?&lt;/strong&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;FRIENDS IF YOU LIKED OR EVEN HATE YOU SAW, PLEASE GIVE ME A BUZZ ON aloktomar@hotmail.com
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ALOK&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4037994172839597177-2196127717882955567?l=aaloktomar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/datelineindia/~4/5g_smoQIRhs" height="1" width="1"/&gt;</content><link rel="replies" type="application/atom+xml" href="http://aaloktomar.blogspot.com/feeds/2196127717882955567/comments/default" title="Post Comments" /><link rel="replies" type="text/html" href="http://www.blogger.com/comment.g?blogID=4037994172839597177&amp;postID=2196127717882955567&amp;isPopup=true" title="2 Comments" /><link rel="edit" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/4037994172839597177/posts/default/2196127717882955567?v=2" /><link rel="self" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/4037994172839597177/posts/default/2196127717882955567?v=2" /><link rel="alternate" type="text/html" href="http://feedproxy.google.com/~r/datelineindia/~3/5g_smoQIRhs/blog-post_29.html" title="&lt;strong&gt;एक लटकती हुई चार्जशीट&lt;/strong&gt;" /><author><name>गूगल मित्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17719251231605581199</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel="http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail" width="16" height="16" src="http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif" /></author><thr:total>2</thr:total><feedburner:origLink>http://aaloktomar.blogspot.com/2008/06/blog-post_29.html</feedburner:origLink></entry><entry gd:etag="W/&quot;Ak8MRX89eSp7ImA9WxdQGUo.&quot;"><id>tag:blogger.com,1999:blog-4037994172839597177.post-786510798966822948</id><published>2008-06-20T21:49:00.001+05:30</published><updated>2008-06-20T21:51:24.161+05:30</updated><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2008-06-20T21:51:24.161+05:30</app:edited><title>रोटी चाहिए या यूरेनियम?</title><content type="html">&lt;strong&gt;&lt;br /&gt;आलोक तोमर&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;रात को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह एटमी करार की भव बाधाओं से जूझ और एक हद तक निपट कर सोए थे लेकिन जागे तो एक जोरदार झटका उनका इंतजार कर रहा था। मुद्रास्फीति का इंडेक्स आ चुका था और यह कोई अच्छी खबर नही थी कि बाजार में एक सप्ताह में महंगाई की दर साढ़े ग्यारह फीसदी तक पहुंच गई है और सरल भाषा में कहें तो आलू-प्याज से गाजर-मूली और साबुन तेल तक के दाम बढ़ गए हैं और बाजार आम आदमी और सरकार दोनों की पकड़ से बाहर हो गया है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;यह कोई शुभ सूचना नही है। सब लोग और खासतौर पर विपक्षी यह याद दिलाने में कतई नही चुक रहे कि यह महंगाई तेरह साल का एक रिकॉर्ड है और पिछली बार भी यह रिकॉर्ड तभी बना था जब मनमोहन सिंह नरसिंह राव सरकार में वित्ता मंत्री हुआ करते थे। मनमोहन सिंह वित्ता मंत्री रहने के पहले रिजर्व बैंक के गर्वनर भी रह चुके हैं और उन्हें अच्छी तरह पता है कि मुद्रास्फीति क्यों होती है और इसके क्या-क्या उपाय हो सकते हैं। अब तो खैर बहुत देर हो गई है मगर चिदम्बरम को वित्तामंत्री बना कर मनमोहन सिंह ने कोई बहुत शानदार फैसला नही किया था। जब उनको मोंटेक सिंह अहलुवालिया को भारत सरकार में लाना ही था तो उन्हें ही वित्ता मंत्री बना देते। या प्रधानमंत्री रहते हुए भी वित्ता मंत्रालय वे खुद अपने पास रख सकते थे। पहले भी कई बार ऐसा हुआ है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अब जब महंगाई पर हाहाकार मचा हुआ है और कोई निदान बताने की बजाय सभी धिक्कार मंत्र जपने में लगे हुए हैं तो एक बात पर हैरत होती है। जिस दिन पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़े थे उसी दिन वित्ता मंत्री चिदम्बरम ने घोषित कर दिया था कि इसका असर बाजार पर पड़ना लाजमी है। जब ये भाव बढ़ाए गए थे तो दुनिया के तेल बाजार में पेट्रोलियम की कीमत 135 डॉलर प्रति बैरल थी। आज की ताजा खबर यह है कि यह कीमत इसी साल 200 डॉलर तक पहुंच सकती है। सरकार को अगर दीवालिया नही होना है तो उसे फिर से पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाने पडेेंग़े और जाहिर है कि मनमोहन सिंह सरकार को और जूते पड़ेंगे। एक बैरल में 119 लीटर से कुछ ज्यादा का आंकड़ा होता है और इस हिसाब से कच्चे तेल का दाम ही लगभग 38 रुपए प्रति लीटर बैठता है। इसके बाद रिफाइनरी का खर्चा और पेट्रोल पंपो से ले जाने और पंप मालिकों के कमीशन आदि को मिला कर अगर 200 डॉलर का भाव हो गया तो हमें तमाम रियायतों के बावजूद एक लीटर पेट्रोल लगभग 75 रुपए में पड़ेगा। उस हालत में चुनाव में कांग्रेस का क्या हाल होगा यह समझा जा सकता है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कृषि मंत्री शरद पवार आज बहुत हैरत में बता रहे थे कि हमारे पास इतना अनाज और आलू प्याज हुआ है कि किसानों के पास उसे रखने के लिए जगह नहीं है। भारतीय खाद्य निगम के गोदाम भी पूरी तरह भरे हुए हैं। श्री पवार का कहना यह है कि किसानों को सरकार उचित दाम नही दे पा रही और यह भी बाजार में आए संकट की एक जड़ है। अब श्री पवार को यह कौन याद दिलाए कि दो साल पहले जब अनाज के भंडार खाली थे तो विदेशों से खराब श्रेणी का गेंहू आयात करने के लिए भारत सरकार ने शायद उन्हीं की सहमति से जो दाम दिया था वही भारतीय किसानों को क्यों नही दिया जा सकता। अगर आप किसान की जेब और पेट भरा रखेंगे तो उनका कर्जा माफ करने की नौबत ही नही आएगी। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;वामपंथी सबके सब लगता है कि अपने किचन गार्डन में सब्जियां और अनाज उगाते हैं। पूरा देश जब महंगाई को ले कर हैरान और परेशान था तो माक्र्सवादी पोलित ब्यूरो के महासचिव प्रकाश करात ने लगभग खीझ कर पत्रकारों से कहा कि महंगाई क्यों बढ़ी यह आप मुझसे क्यों पूछते हैं। उनसे पूछिए जिन्होंने पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाए हैं और उन्हें एटमी करार की चिंता ज्यादा है। इस संदर्भ में कुत्तो की दुम वाला मुहावरा अपने आप याद आ जाता है। देश में सुनामी हो या चक्रवात अपने कामरेड भाई इंकलाब जिंदाबाद ही करते रहेंगे। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;भारत में सिर्फ खाना ही महंगा नही हो रहा। थोक भाव इंडेक्स के आधार पर ही महंगाई का हिसाब किया जाता है और यह शुक्रवार की रात तक ग्यारह से काफी आगे निकल गया था। रिजर्व बैंक की सुरक्षित सीलिंग सीमा इस मामले में साढ़े पांच प्रतिशत की है। इसका सीधा असर बैंकों पर पड़ा है और घर से ले कर गाड़ी खरीदने तक के कर्जे फटाफट महंगे हो गए हैं। फरवरी में जब मुद्रास्फीति साढ़े पांच प्रतिशत के आस पास थी तो बैंकों को छुट दी गई थी कि वे अपनी आधार पूंजी यानी नकद कर्ज अनुपात यानी केश क्रेडिट रेशियो का प्रतिशत छह तक ले जा सकते हैं। आज की तारीख में यह प्रतिशत नौ करने की जरूरत आ गई है और इतना पैसा खुद रिजर्व बैंक के खजाने में भी नही है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;बहुत साल पहले जब चंद्रशेखर प्रधानमंत्री थे तब यह नौबत आई थी कि रिजर्व बैंक का सोना भी विदेशी बैंकों के पास गिरवी रखना पड़ा था ताकि रुपए का दाम डॉलर के अनुपात में बहुत ज्यादा नही घट जाए। फिलहाल उलटी धारा चल रही है। रुपया डॉलर की तुलना में मजबूत होता जा रहा है और इस बात से चिदम्बरम भले ही खुश हों लेकिन कमल नाथ नाराज हैं क्योंकि निर्यात करने के लिए उन्होंने जो लक्ष्य अपने सामने रखा था वह अब डॉलर की कीमत से निर्धारित होता है और यह कीमत बदलने से निर्यात का इंडेक्स नीचे चला जाता है। निर्यात नही होगा तो देश में विदेशी मुद्रा नही आएगी और विदेशी मुद्रा का अभाव कम से कम कमल नाथ की राय में भारत को दुनिया के व्यापार जगत में बहुत पीछे ले जाएगा। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इस तर्क को अगर उलट कर देखें तो अगर निर्यात नही भी हो और रुपए का भाव बढ़ता रहे तो डॉलर का अनुपातिक दाम गिरेगा और भारत को मिलने वाला कच्चा तेल भी उन्ही बढ़े हुए डॉलर वाले दामों पर प्राप्त होगा। जाहिर है कि इसका असर महंगाई पर भी पड़ेगा और फिलहाल महंगाई के आंकड़ो को न सरकार अनदेखा कर सकती है और न किसी भी पार्टी के नेता। भाजपा के जो नेता उछल उछल कर बोल रहे हैं कि मनमोहन सिंह की सरकार महंगाई के मामले में फेल हो गई वे भी अगर किसी संयोग से सत्ताा में आए तो यही महंगाई उन्हें भी विरासत में मिलने वाली है और इससे सुलझने के लिए वे कोई ऐसे मौलिक प्रयास नही कर पाएंगे जिन्हें करने से वे अपने आप को महंगाई के इस प्रपंच से निकाल सकें। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;वैसे सही बात यह है कि भारत सरकार को कम से कम आने वाले कुछ महीनों तक सारी और चिंताएं भूल कर महंगाई से सुलझने में ध्यान लगाना पड़ेगा क्योंकि एटमी करार इंतजार कर सकता है लेकिन अगर देश की जनता भूखी मरी और लोगों की जिंदगी दुभर हुई तो सरकार को कोई नही बचा पाएगा और यह सरकार ऐसे कारणों से गिरेगी जो दरअसल कुछ दिनों बाद उसके नियंत्रण से बाहर चले जाएगें। सोनिया गांधी के इस तर्क में कुछ नही धरा है कि राज्य सरकारें असल में इस महंगाई के लिए जिम्मेदार हैं। फिलहाल दामों पर राजनीति की बजाय राजनीति के मूल्य ठीक से तय किए जाने चाहिए और मूल्यों पर राजनीति नही की जानी चाहिए।&lt;/strong&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;FRIENDS IF YOU LIKED OR EVEN HATE YOU SAW, PLEASE GIVE ME A BUZZ ON aloktomar@hotmail.com
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ALOK&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4037994172839597177-786510798966822948?l=aaloktomar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/datelineindia/~4/PWF0GJwGJrk" height="1" width="1"/&gt;</content><link rel="replies" type="application/atom+xml" href="http://aaloktomar.blogspot.com/feeds/786510798966822948/comments/default" title="Post Comments" /><link rel="replies" type="text/html" href="http://www.blogger.com/comment.g?blogID=4037994172839597177&amp;postID=786510798966822948&amp;isPopup=true" title="0 Comments" /><link rel="edit" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/4037994172839597177/posts/default/786510798966822948?v=2" /><link rel="self" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/4037994172839597177/posts/default/786510798966822948?v=2" /><link rel="alternate" type="text/html" href="http://feedproxy.google.com/~r/datelineindia/~3/PWF0GJwGJrk/blog-post_20.html" title="रोटी चाहिए या यूरेनियम?" /><author><name>गूगल मित्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17719251231605581199</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel="http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail" width="16" height="16" src="http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif" /></author><thr:total>0</thr:total><feedburner:origLink>http://aaloktomar.blogspot.com/2008/06/blog-post_20.html</feedburner:origLink></entry><entry gd:etag="W/&quot;D0YARH84eyp7ImA9WxRbGEk.&quot;"><id>tag:blogger.com,1999:blog-4037994172839597177.post-8753314338069342797</id><published>2008-06-19T21:38:00.001+05:30</published><updated>2008-12-09T23:22:25.133+05:30</updated><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2008-12-09T23:22:25.133+05:30</app:edited><title>दुर्भाग्य में वासना खोजते लोग</title><content type="html">&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_ddA-DxW--2w/SFqEym7x1rI/AAAAAAAAAO8/KHnFT76X4Z8/s1600-h/arrushi.jpg"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;" src="http://4.bp.blogspot.com/_ddA-DxW--2w/SFqEym7x1rI/AAAAAAAAAO8/KHnFT76X4Z8/s400/arrushi.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5213625523614373554" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;सुप्रिया रॉय&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;जब तक आप नाम रहते है और संज्ञा होने की सीमा से बाहर नही जाते, तब तक यह आभास कर पाना भी असंभव है कि आपके अस्तित्व का अर्थ आपके आस पास के समाज के लिए क्या है। चौदह साल की नादान और सपनो की दुनिया मे रहने वाली आरूषि तलवार को अपनी यह कीमत जान का दाम देकर चुकानी पड़ी। जिन लाल बत्तिायो पर वह अपनी स्कूल बस मे बैठ कर साथियो से हॅसी मजाक करते हुए निकल जाती थी, वहा पर लगें मजमो मे भी उसकी बात हो रही है और जिन अखबारो का उसने कभी नाम तक नही सुना था, उनमे भी उसकी मौत को ले कर किस्से और कहानियां रचे जा रहे है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इस देश मे बल्कि हमारी दुनिया मे अक्सर यह होता है कि एक जीता जागता शख्स अचानक शीर्षको और फाइल नंबरो मे तब्दील हो जाता है और फिर उसके बारे मे वे लोग भी कहानियां कहने लगते है जिनसे उसका कभी वास्ता नही रहा होता। तलवार परिवार जिसे आम तौर पर गुमनाम और एक हसमुख परिवार कहा जाता था, जिसकी पूरी दुनिया अपनी बेटी के लाड प्यार के आस पास घूमती थी, अचानक दंत कथाओ की चीज बन गई है और इस घर का चप्पा-चप्पा इस तरह सार्वजनिक हो गया है जितना शायद ताजमहल या कोई दूसरी मशहूर इमारत भी नही रही होगी। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;लोग और उससे भी ज्यादा सीबीआई इन दंत कथाओ की नियमित रचनाकार बन गई है। निष्पाप लोग अचानक गुनाहगार साबित कर दिये जाते है, सीबीआई डॉ. तलवार के यहा कंपाउडर कृष्णा को गैर कानूनी हिरासत मे ले कर उसके तमाम तरह के कानूनी परीक्षण करवा लेता है और बाद मे उसको हत्या के आरोप मे गिरफ्तार कर लिया जाता है। मोहल्ले, पड़ोस और दोस्तो का घेराव होता है और कभी आरूषि को चरित्रहीन बताया जाता है तो कभी उसके पिता की चरित्रहीनता को इस कांड की वजह बताया जाता है। एक त्रासदी मे भी स्वाद खोजने वाले इतने तल्लीन है कि आईपीएल का फाइनल भी टीआरपी मे इस खबर के सामने पिट जाता है। रामदेव से ले कर राजू श्रीवास्तव तक सब फेल हो जाते हैं और हमारी विकृत कल्पनाओं में एक विभत्स हत्या कांड मनोरंजन का पर्याय बन कर जीवित रहता है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;चलिए, पहले पुलिस और अब सीबीआई की बुरी से बुरी कल्पना को एक बार सच मान लें और यह मंजूर कर लें कि जेल में बंद राजेश तलवार ने ही अपनी फुल सी बेटी का पहले सिर फोड़ा और गला काट दिया। लेकिन इस पूरी कथा में आनंद लेने वालों को यह समझ में नही आता कि कानून की अदालत में जाने के पहले समाज की अदालत में अचानक फैसले क्यों होने लगे? एक पिता जिसे अपनी इकलौती बेटी खोने का संताप सता रहा है, उसे सहानुभूति मिलने की बजाय जेल में बंद कर दिया गया और इसके बावजूद बंद रखा गया जब सीबीआई के जासूस सरेआम कह चुके थे कि उन्हें कृष्णा के तौर पर असली कातिल मिल गया है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;विकृत आनंद लेने वालों में सिर्फ हमारे आपके जैसे टीवी देखने वाले या अखबार पढ़ने वाले लोग नही हैं बल्कि उस समय उत्तार प्रदेश पुलिस के आई जी गुरबख्श सिंह का वह चेहरा भुलाए नही भुलता जब वे मीडिया को यह बताने में लगे थे कि कैसे डॉक्टर साहब घर में घुसे और उन्होंने नौकर हेमराज और अपनी बेटी को आपत्तिाजनक स्थिति में देखा और आपे में दोनों की हत्या कर दी। सरदार गुरबख्श सिंह की वर्दीधारी वासना को सिर्फ यह कह कर चैन नही पड़ा, उन्होंने फिर से कहा कि आपत्तिाजनक स्थिति थी लेकिन वे लोग यानी वह नन्ही बच्ची और बूढ़ा हो रहा नौकर भोगविलास में नही डूबे थे। इस मूर्ख ने यह खुलासा करते हुए अपने परम मूर्ख अधिकारियों द्वारा तैयार केस डायरी भी ठीक से नही देखी थी जिसमें पिता अपनी बेटी के कमरे में बैठ कर उसके कम्पयूटर से किस किस को मेल कर रहा है और कौन कौन सी वेबसाइट देख रहा है, इसका पूरा ब्यौरा दर्ज है। अब तो सीबीआई भी कहती है कि नोएड़ा पुलिस ने जांच का कबाड़ा कर दिया।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;जैसे सीबीआई ने जांच का बहुत कल्याण किया हो। पन्द्रह दिन से साले जांच करते घूम रहे थे और अखिल भारतीय आर्युविज्ञान संस्थान के विशेषज्ञ साथ में थे लेकिन सोलहवें दिन अचानक राज खुलता है कि पोस्टमॉर्टम में आरूषि के साथ बलात्कार के संकेतों की ठीक से जांच नही की गई। इतने दिन तक इतने वैज्ञानिक परीक्षण करने और आकाश पाताल एक कर देने वाले इन अनपढ़ो को सबसे मूल प्रमाण और कारण की याद इतनी देर में आई। जाहिर है कि उनके लिए भी आरूषि तलवार अब फाइल नंबर से ज्यादा कुछ नही रह गई है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आखिर यह समझ में आता है कि जिस देश में अपराध पत्रिकाएं और धार्मिक पत्रिकाएं दोनों ही सबसे ज्यादा बिकती हैं, वहां अपराध को और उसके दर्शन को धर्म करार दे देने वाले लोग भी कम नही होंगे। सीबीआई अब मीडिया पर तोहमत मढ़ने में लगी है कि उसे ठीक से और शांति से जांच नही करने दी गई। आज तक सीबीआई, पिछले पन्द्रह वर्षो में अपने द्वारा जांच किए गए मामलों में पन्द्रह फीसदी लोगों को भी सजा नही दिलवा पाई। उस पर वह बात करती है कि उसे सबूत मिलते जा रहे हैं और वह मामला सुलझाने के कगार पर ही है। सीबीआई भी न्याय पालिका की तरह आचरण कर रही है और बयान सबूत होने के पहले ही चाहे जिस को मुजरिम करार देने में जूट जाती है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आरूषि की मौत के तीसवें दिन मुंबई में भी लगभग मिलती जूलती घटना घटी। इंजीनियरिंग कॉलेज की एक छात्रा अचानक लापता हो गई और उसके खास दोस्तों को ला कर झूठ पकड़ने वाली मशीन पर बिठा दिया गया। इस मशीन से करंट वगैरा तो नही लगता लेकिन उन पर सामाजिक लांछन तो लगा ही। आखिरकार इस लड़की की लाश उसके घर के पलंग के भीतर बने बॉक्स से बरामद हुई और अब उसके माता पिता को झूठ पकड़ने वाली मशीन पर बिठा दिया गया है। जांच में गोपनीयता बनाए रखने के नाम पर हमारी पुलिस और जांच एजेंसियां जितने झूठ बोलती हैं उस हिसाब तो इन सबका दैनिक लाई डिटेक्टर टेस्ट करवाना चाहिए। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;यहां आरूषि या मुंबई की वह अभागी लड़की मुल विषय नही है। मूल विषय है हमारे अंत:करण में छिपी बैठी वह वासना और हर घटना के पीछे अपनी दमित कल्पनाओं को आकार देने वाली वह भावना जिसकी वजह से आरूषि तलवार एक दुर्भाग्यवश मरे पात्र का नाम नही बल्कि एक धारावाहिक कथा बन जाती है और जिसे टीवी सीरियल में शामिल होने से रोकने के लिए चैनल को एक सरकारी पत्र लिखना पड़ता है। टीआरपी और सर्कुलेशन धंधें के हिसाब से अच्छे शब्द हैं लेकिन हर शब्द की और हर कर्म की अपनी सीमा होती है और इस सीमा को तोड़ने वालों का अपराध भी तो किसी को तय करना चाहिए। वैसे आप चाहें तो यह भी कह सकते हैं कि इस विषय पर इतना लिख कर मैंने भी लोकप्रियतावाद की इस दौड़ में शामिल होने की कोशिश की है। आजाद देश है और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है।&lt;/strong&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;FRIENDS IF YOU LIKED OR EVEN HATE YOU SAW, PLEASE GIVE ME A BUZZ ON aloktomar@hotmail.com
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भाइयो और बहनो, आपको हमारे माक्र्सवादी मित्रो और देश की आत्म निर्भरता मे से एक का चुनाव करना है। एटमी करार को एक चुनावी मुद्दा बना देना न आकस्मिक है और न अनायास। अ्रगर यूपीए की सरकार दोबारा बनी तो बहुत आराम से यह कहा जा सकता है कि अब तो इस समझौते को जनादेश भी मिल गया है। अगर कांग्रेस और उसके साथी सरकार बनाने लायक बहुमत नही जुटा सके और भाजपा सहित किसी तीसरे चौथे या पांचवे मोर्चे की सरकार आई तो इस करार पर फैसला लेने की जिम्मेदारी होगी। भाजपा तो वैसे भी इस करार का विरोध बहुत मुखर हो कर नही कर रही है। उसका कहना सिर्फ यह है कि भारत के हितो को सर्वोपरि रखना चाहिए। इस मामले मे मनमोहन सिह पहले ही भारतीय हितो की रक्षा करने वाले दस्तावेज तैयार कर चुके है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अब यह मनमोहन सिह का कसूर नही है कि माक्र्सवादियो को यह दस्तावेज और उसकी भाषा पसंद नही आ रही है। लेकिन यह कांग्रेस की चिंता का विषय जरूर है। वामपंथी सरकार के अस्तित्व के लिए पच्चीस जून तक की समय सीमा दे चुके है। इसके बाद अगर एटमी करार पर उनकी बात नही मानी गई तो वे समर्थन वापस लेगें और पक्की बात है कि अविश्वास प्रस्ताव ले कर आएगें। भाजपा उनका समर्थन करेगी और अभी तक जो गणित है उसके अनुसार सरकार यह विश्वास मत जीत भी सकती है मगर इसके लिए उसे मुलायम सिंह यादव आदि को बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी और यह कीमत सिर्फ राजनैतिक नहीं होगी। इसीलिए कांग्रेस अव्वल तो वामपंथियो को सरकार गिराने का सुख नही लेने देगी और बाइज्जत विश्वास मत जीत कर लोक सभा भंग करने की सिफारिश करेगी और फिर शान से चुनाव के मैदान में जाएगी। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;जैसे कांग्रेस यह मान कर चल रही है कि अगले आम चुनाव में माक्र्सवादियों के सांसदों की गिनती बीस तक घटेगी तो यही हाल लालू यादव का भी होने वाला है। वे दस जनपथ के वफादार सही लेकिन यूपीए के लिए गणित में मददगार नही होगें। लालू यादव का नुकसान नीतिश कुमार का लाभ होगा और कांग्रेस का मानना है कि वह धर्मनिरपेक्षता के टोटके के सहारे नीतिश कुमार और उड़ीसा के  नवीन पटनायक को भी अपने साथ जोड़ने में कामयाब हो सकेगी। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;समीकरणों पर और गणित पर ही जब पूरी राजनीति चलनी है तो एटमी करार से बढ़िया मुद्दा कांग्रेस को नही मिल सकता। जहां बिजली नही है, और वह देश के ज्यादातर हिस्सों में नही है, मतदाता को आसानी से समझाया जा सकता है कि अगर लेफ्ट वालों ने यह करार होने दिया होता तो आपके घर इस समय दीवाली मन रही होती। सौ बातों की एक बात यह है कि कांग्रेस अब आम चुनाव की मुद्रा में आ चुकी है और जाहिरा तौर पर वामपंथियों को ब्लैकमेलर साबित करने पर तुल गई है। शुरूआत बहुत पहले ही खुद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कर दी थी जब हरियाणा की एक सभा में कई महीने पहले उन्होंने गरज कर कहा था कि वामपंथी सरकार कल गिरा रहे हों तो आज गिरा दें लेकिन यूपीए उनकी धमकियों के बीच नही चलेगा और हमें कुर्सी से कोई खास मोह नही है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;उधर कांग्रेस भी जानती है कि भाजपा को भले ही साथियों की कमी खल रही हो, उसे हल्का प्रतिपक्ष मान कर नही चला जा सकता। आखिरकार विधानसभा चुनावों में कांग्रेस लगातार हारती जा रही है और भाजपा उसका सफाया करती जा रही है। जब यूपीए सरकार बनी थी तो उसके पास चौदह राज्य सरकारे थीं जो अब घट कर चार रह गई हैं। इसी साल होने वाले विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को कोई बहुत चमकदार नतीजों की उम्मीद नही करनी चाहिए। जिस राजस्थान में भाजपा घिसटती हुई दिख रही थी वहां भी गुर्जरों और उनके साथ दूसरी जातियों के गरीबों को आरक्षण दे कर वसुंधरा राजे ने तुरप चाल चल दी है। सोनिया गांधी को इन राज्यों में लोकल नेता की तरह मेहनत करनी पड़ेगी क्योंकि मध्य प्रदेश, छत्ताीसगढ़ और राजस्थान में जो लोकल नेता उन्होंने भावी शासक बना कर भेजे हैं उनमें से ज्यादातर का कोई जनाधार ही नही है। इसके अलावा कांग्रेस को यह अच्छी तरह याद है कि तीन विधानसभा चुनाव के नतीजे लोकसभा चुनाव की पृष्ठभूमि तैयार करेंगे। इसीलिए आश्चर्य नही होना चाहिए कि सरकार विश्वास मत जीते और अगले दिन लोकसभा चुनाव की घोषणा कर दे। &lt;/strong&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;FRIENDS IF YOU LIKED OR EVEN HATE YOU SAW, PLEASE GIVE ME A BUZZ ON aloktomar@hotmail.com
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ALOK&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4037994172839597177-6168487138018138260?l=aaloktomar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/datelineindia/~4/snHHP-9rY9w" height="1" width="1"/&gt;</content><link rel="replies" type="application/atom+xml" href="http://aaloktomar.blogspot.com/feeds/6168487138018138260/comments/default" title="Post Comments" /><link rel="replies" type="text/html" href="http://www.blogger.com/comment.g?blogID=4037994172839597177&amp;postID=6168487138018138260&amp;isPopup=true" title="1 Comments" /><link rel="edit" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/4037994172839597177/posts/default/6168487138018138260?v=2" /><link rel="self" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/4037994172839597177/posts/default/6168487138018138260?v=2" /><link rel="alternate" type="text/html" href="http://feedproxy.google.com/~r/datelineindia/~3/snHHP-9rY9w/blog-post_19.html" title="कांग्रेस अब चुनाव की मुद्रा में" /><author><name>गूगल मित्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17719251231605581199</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel="http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail" width="16" height="16" src="http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif" /></author><thr:total>1</thr:total><feedburner:origLink>http://aaloktomar.blogspot.com/2008/06/blog-post_19.html</feedburner:origLink></entry><entry gd:etag="W/&quot;D0YARH0ycSp7ImA9WxRbGEk.&quot;"><id>tag:blogger.com,1999:blog-4037994172839597177.post-459717016079028396</id><published>2008-06-10T16:23:00.001+05:30</published><updated>2008-12-09T23:22:25.399+05:30</updated><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2008-12-09T23:22:25.399+05:30</app:edited><title>चंदन मित्र का नया पता </title><content type="html">&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_ddA-DxW--2w/SE5eJiHuiLI/AAAAAAAAAO0/ppU54a9CxmQ/s1600-h/chandan.jpg"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;" src="http://1.bp.blogspot.com/_ddA-DxW--2w/SE5eJiHuiLI/AAAAAAAAAO0/ppU54a9CxmQ/s400/chandan.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5210205336785291442" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;राजेन्द्र जोशी &lt;br /&gt;डेटलाइन इंडिया  &lt;br /&gt;देहरादून, 8 जून-उत्तराखंड में भाजपा की सरकार आने का सबसे बडा लाभ तो खैर मुख्यमंत्री की कुर्सी पाने वाले भुवन चंद्र खंडूडी को हुआ है लेकिन वामपंथी से भाजपा के सांसद बने पत्रकार और फिल्माें तथा वास्तविक जीवन की हीरोइनों के प्रेमी चंदन मित्र भी कम फायदे मे नहीं रहे।  &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इन्हीं पन्नो पर आप पढ़ चुके है कि चंदन मित्र को भाजपा ने उत्तराखंड के मामले में रिपोर्ट तैयार करने और वहां के कामकाज की जानकारी हाई कमान को देने के लिए अधिकृत किया था। इस सिलसिले में देहरादून गए चंदन मित्र अपने अखबार के लिए भी मोटे विज्ञापन वसूल लाए। यह कहानी का सिर्फ एक पहलू है। नई कहानी यह है कि नैनीताल जिले के खूबसूरत हिल स्टेशन रामगढ के पास चंदन मित्र अचानक पचास लाख रुपये की जमीन के मालिक हो गए है और अब वहां एक करोड़ रुपये की अनुमानीत लागत से उनका बागान और रमणीय रिसॉर्ट बन रहा है।  चंदन मित्र को जिस अखबार पायनियर का मालिक बनवाने और अखबार चलाने में लालकृष्ण आड़वाणी ने एक बडी बैंक से एनडीए सरकार के दौरान दिल खोल कर मदद दिलवाई थी, उसका दिल्ली संस्करण अब भी घाटे में चल रहा बताया जाता है और कर्मचारियों को समय पर वेतन भी नहीं मिलता। और तो और, अंग्रेजो द्वारा स्थापित इस अखबार में विश्व प्रसिध्द जंगल बुक के लेखक रूडयार्ड किपलिंग के काम करने का प्रचार बहुत जोर शोर से पायनियर के विज्ञापनों में किया जाता है, उनका इलाहाबाद स्थित मकान जर्जर हालत में है और कभी भी गिर सकता है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;एक तरफ अखबार के संपादक करोडों का आसियाना बनवा रहे है तो दूसरी ओर इस अखबार से जूडे रहे एक बडे नाम की विरासत को सहेजने के लिए भी यह अखबार पैसा नहीं खर्च करना चाहता।  भाजपा की जैसे जैसे राज्य सरकारो में स्थापना होती जा रही है, जाहिर है कि चंदन मित्र का अखबार और निजी तौर पर खुद श्री मित्र भी अच्छी-खासी तरक्की करेंगे। दिल्ली में भी चंदन मित्र की अच्छी खासी कोठी है और उसका दाम चार करोड़ रुपये से कम नहीं आंका जा सकता। इसके पहले वे इंडियन एयरलाइंस की सहयोगी संस्था अलायंस एयर के यात्रियों के लिए एक पत्रिका दर्पण निकाला करते थे और इस पत्रिका मेंं भी भाजपा शासित राज्यों के , खासतौर पर पर्यटन विभागों के विज्ञापन बहुत धडल्ले से छपा करते थे। इन विज्ञापनों की आमदनी की साझेदारी को लेकर इंडियन एयरलाइंस से उनका विवाद हुआ और एयरलाइंस ने ये पत्रिका चंदन मित्र से छीन ली। वियाग्रह के चलते फिरते विज्ञापन चंदन मित्रा से बहुत लोगों को इर्श्या हो सकती ह।ै लेकिन सब भगवा झंडा ओढ़ने के लिए वामपंथी दोस्तो को दगा नहीं दे पाते।   &lt;/strong&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;FRIENDS IF YOU LIKED OR EVEN HATE YOU SAW, PLEASE GIVE ME A BUZZ ON aloktomar@hotmail.com
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ALOK&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4037994172839597177-459717016079028396?l=aaloktomar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/datelineindia/~4/9sXzCXf-wmg" height="1" width="1"/&gt;</content><link rel="replies" type="application/atom+xml" href="http://aaloktomar.blogspot.com/feeds/459717016079028396/comments/default" title="Post Comments" /><link rel="replies" type="text/html" href="http://www.blogger.com/comment.g?blogID=4037994172839597177&amp;postID=459717016079028396&amp;isPopup=true" title="0 Comments" /><link rel="edit" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/4037994172839597177/posts/default/459717016079028396?v=2" /><link rel="self" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/4037994172839597177/posts/default/459717016079028396?v=2" /><link rel="alternate" type="text/html" href="http://feedproxy.google.com/~r/datelineindia/~3/9sXzCXf-wmg/blog-post_10.html" title="&lt;strong&gt;चंदन मित्र का नया पता &lt;/strong&gt;" /><author><name>गूगल मित्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17719251231605581199</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel="http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail" width="16" height="16" src="http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif" /></author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="http://1.bp.blogspot.com/_ddA-DxW--2w/SE5eJiHuiLI/AAAAAAAAAO0/ppU54a9CxmQ/s72-c/chandan.jpg" height="72" width="72" /><thr:total>0</thr:total><feedburner:origLink>http://aaloktomar.blogspot.com/2008/06/blog-post_10.html</feedburner:origLink></entry><entry gd:etag="W/&quot;D0YAR3g7eyp7ImA9WxRbGEk.&quot;"><id>tag:blogger.com,1999:blog-4037994172839597177.post-8495948071156190758</id><published>2008-06-03T22:21:00.002+05:30</published><updated>2008-12-09T23:22:26.603+05:30</updated><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2008-12-09T23:22:26.603+05:30</app:edited><title>हत्या, मंत्री, पत्रकार और रिश्वत</title><content type="html">&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_ddA-DxW--2w/SEV3TaQB4iI/AAAAAAAAAOM/qX2RDs0P5w8/s1600-h/RAJBIR.jpg"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;" src="http://2.bp.blogspot.com/_ddA-DxW--2w/SEV3TaQB4iI/AAAAAAAAAOM/qX2RDs0P5w8/s400/RAJBIR.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5207699719471620642" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_ddA-DxW--2w/SEV3FHMBlYI/AAAAAAAAAOE/eA_p5gTBwCc/s1600-h/RUPAN.jpg"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;" src="http://1.bp.blogspot.com/_ddA-DxW--2w/SEV3FHMBlYI/AAAAAAAAAOE/eA_p5gTBwCc/s400/RUPAN.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5207699473836381570" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;br /&gt; &lt;br /&gt;डेटलाइन इंडिया&lt;br /&gt;नई दिल्ली, 3 जून -  असम के शिक्षा मंत्री रिपुन बोरा आज जब दिल्ली में सीबीआई के एक अधिकारी को रिश्वत देते पकड़े गए तो पत्रकारों और दिल्ली के व्यापारियों के बीच एक बहुत विवादास्पद गठजोड़ का भी खुलासा हो गया। रिपुन बोरा असम में हत्या के आरोप में गिरफ्तार हो चुके हैं और कुख्यात सांसद मणिकुमार सुब्बा के सहयोगी माने जाने वाले रिपुन बोरा को मंत्रिमंडल से फिर भी नही हटाया गया था। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;रिपुन बोरा पर छात्र नेता डेनियल टोपो की हत्या का आरोप है। टोपो चाय बगान मजदूरों के छात्र बेटों का संगठन चलाते थे और 1996 विधानसभा चुनाव में रिपुन बोरा चुनाव हार गए थे। और इसके लिए वे टोपो को जिम्मेदार मानते थे। 2001 में हुए विधानसभा चुनाव में उसी गोहपुर सीट से रिपुन बोरा लड़े और जीते लेकिन इसके पहले 27 सितंबर 2000 को डेनियल टोपो की हत्या कर दी गई थी।  रिपुन बोरा मंत्री थे इसलिए असम पुलिस ने जांच खत्म कर दी और कहा कि हत्याकांड का पता नही चल रहा है। इसके बाद जांच सीबीआई ने अपने हाथ में ली और रिपुन बोरा के खिलाफ लगातार सबूत मिलते चले गए।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;रिपुन बोरा आतंकित थे और उन्होंने दिल्ली में असम के एक अखबार के संवाददाता मुकुल पाठक के जरिए सीबीआई के जांच अधिकारी से संपर्क किया। बगैर मांगे इस अधिकारी को दस लाख रुपए की रिश्वत का प्रस्ताव दिया गया ताकि वह मामला खत्म कर सके। सीबीआई ने जाल बिछा लिया था और रिपुन बोरा ने असम में कारोबार करने वाले दिल्ली के एक व्यापारी रमेश महेश्वरी को दस लाख रुपए का इंतजाम करने के लिए कहा। यह खुलेआम रिश्वत का मामला था। पैसे का इंतजाम हुआ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;असम भवन की कार में बिठा कर अधिकारी को मथुरा रोड़ पर एक मकान में लाया गया और रिपुन बोरा ने खुद एक हजार के नोटों की शक्ल में दस लाख रुपए अधिकारी को सौंपे। वे नही जानते थे कि जाल बिछा हुआ है और वे बुरी तरह फंसने वाले हैं। बोरा ने जैसे ही पैसे दिए, अधिकारी ने मोबाइल पर पहले से निर्धारित और तैयार एसएमएस भेज दिया। सीबीआई की पूरी टीम अंदर घुसी और मामला बिगड़ता देख कर मंत्री जी ने पिछले दरवाजे से भागने की कोशिश की। लेकिन उन्हें वहां भी सीबीआई के अधिकारी इंतजार करते मिले। पत्रकार पाठक भागा हुआ है लेकिन दस लाख देने वाले व्यापारी रमेश महेश्वरी को कैद कर लिया गया। बोरा को यह खबर मिलते ही मंत्रिमंडल से निकाल दिया गया है और उन्हें सीबीआई मुख्यालय में ले जा कर पूछताछ जारी है।   &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;सीबीआई की जांच के पहले दिन खुले रहस्य  &lt;br /&gt;हरियाणा के बड़े नामों पर नजर&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;डेटलाइन इंडिया&lt;br /&gt;नई दिल्ली, 3 जून- सीबीआई ने दिल्ली पुलिस के सहायक आयुक्त राजबीर सिंह की हत्या का मामला आज औपचारिक रूप से अपने हाथ में लिया और फिलहाल गुड़गांव पुलिस की एफआईआर के अनुसार हत्यारे विजय भारध्दाज के खिलाफ ही जांच शुरू नही की। अब सीबीआई राजबीर सिंह के पूरे परिवार और उसके परिचित लोगों और उनके निवेशों के बारे में पड़ताल कर रही है और सिर्फ आज की तारीख में एजेंसी ने आठ बैंको में बीस खाते जांच के दायरे में ले लिए हैं।  &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;चौबीस मार्च को दिल्ली पुलिस के एनकांउटर स्पेशलिस्ट राजबीर सिंह को गुड़गांव में गोली से उड़ा दिया गया था और प्रोपट्री डीलर विजय भारध्दाज ने ही खुद स्वीकार किया था कि उसने राजबीर सिंह को पैसे अदा ना कर पाने के कारण मारा था। सीबीआई ने बहुत हिम्मत कर के एक पत्र केबिनेट सचिवालय को भी भेज दिया है जिसके अनुसार जेड प्लस सुरक्षा वाले राजबीर सिंह के सुरक्षा कर्मियों की लापरवाही के बारे में हुई जांच की रिपोर्ट मांगी गई है। इसके अलावा हरियाणा की राजनीति और कारोबार के कई बड़े नाम सीबीआई की सूची में हैं जिनसे एक एक कर के पूछताछ की जाएगी।  &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;गुड़गांव पुलिस दिल्ली पुलिस की मदद ले कर भी अब तक राजबीर सिंह की लेन देन वाली डायरी बरामद नही कर सकी है और सीबीआई अधिकारियों के अनुसार राजबीर सिंह के हत्या के उद्देश्य को ले कर उसकी पहली प्राथमिकता इस डायरी की बरामदगी है। इसीलिए राजबीर सिंह के परिवार और खासतौर पर उसकी बहन और पत्नी से पूछताछ की जाएगी। सीबीआई निदेशक विजय शंकर ने अपनी एजेंसी को इस मामले में चार्ज शीट दाखिल करने के लिए तीन महीने का समय दिया है। यह बात अलग है कि अगले ही महीने विजय शंकर रिटायर हो रहे हैं।  राजबीर सिंह अपनी हिम्मत और मुठभेड़ो में सफलताओं के कारण सब इंस्पेक्टर से एसीपी के पद पर पहुंचे थे लेकिन संपत्तिा विवादों को ले कर उन पर कई बार गंभीर आरोप भी लग चुके थे।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सीबीआई की जांच के दायरे में दिल्ली पुलिस के कई वर्तमान और भूतपूर्व अधिकारी भी हैं और सीबीआई अधिकारियों के अनुसार राजबीर सिंह के अंडर वर्ल्ड से भी संबंध थे। अधिकारियों ने स्वीकार किया कि पहली नजर में विजय भारध्दाज कातिल तो है लेकिन इस पूरे मामले में वह अकेला नही है। जिस पिस्तौल से राजबीर की हत्या की गई वह सरकारी थी और हरियाणा पुलिस के अधिकारी अशोक शरण को आबंटित की गई थी। अशोक शरण का कहना है कि एक छापे के दौरान हिसार जिले के दादरी इलाके में 21 जुलाई 2007 को यह पिस्तौल खो गई थी। सीबीआई इस गुत्थी को सुलझाने के लिए अशोक शरण से भी नए सिरे से पूछताछ करेगी।      &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सीबीआई को बहुत लोगों पर शक&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;डेटलाइन इंडिया&lt;br /&gt;नई दिल्ली, 3 जून - आरूषि-हेमराज हत्याकांड में सीबीआई चौबीस घंटे की रिमांड में भी आरूषि के पिता डॉक्टर राजेश तलवार से कुछ निकलवा नही पाई।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;वैसे भी सीबीआई अब एक एक कर के इस जांच से जुड़े नोएडा पुलिस के अधिकारियों को बुलाने वाली है और उन्हें बताने वाली है कि इस जांच में उन्होंने कितनी बड़ी मूर्खताएं की हैं।  सीबीआई अधिकारियों को राजेश तलवार को दो दिन की रिमांड और मिल गई है और नॉर्को टेस्ट के बारे में अभी उसे अनुमति नही मिली है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;खुद सीबीआई अधिकारी मानते हैं कि इस मामलें में राजेश तलवार एक तो मुख्य अभियुक्त नही हैं क्योंकि खुद एफआईआर उन्होंने लिखवाई थी और इसमें हेमराज को कातिल बताया गया था। तब तक हेमराज की लाश नही मिली थी। इसके अलावा आज अदालत में सीबीआई के वकील ने यह भी कहा कि राजेश तलवार से नोएडा पुलिस द्वारा की गई पूछताछ समय की बर्बादी थी और अगर घर सील कर के जांच की जाती तो पहले ही दिन मामला सुलझ जाता। नतीजा साफ था।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;नोएडा के एसएसपी और तलवार को कातिल घोषित करने वाले आई जी गुरदर्शन सिंह से भी सीबीआई अब पूछताछ कर सकती है। पहले दिन की जांच में सीबीआई ने इतना पता लगा लिया है कि आरूषि से बलात्कार की कोशिश या बलात्कार नही हुआ था, उस रात घर में कम से कम तीन बाहरी लोग आए थे, हेमराज की हत्या अचानक नही बल्कि काफी गुत्थमगुत्था होने के बाद हुई थी, हेमराज नेपाली होने के बावजूद खुखरी नही रखता था इसलिए उसे हत्या का हथियार नही माना जा सकता, और आखिर में यह भी जब तक हत्या का हथियार बरामद नही हो जाता तब तक राजेश तलवार की इस कांड में भूमिका के बारे में निश्चित तौर पर कुछ नही कहा जा सकता। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सीबीआई की छह सदस्यों वाली टीम हरिद्वार भी हो आई है और वहां आरूषि के अस्थि विसर्जन करने वाले पंडो को पूरे छह घंटे तक एक स्थानीय होटल में पूछताछ के लिए बंदं रखा। मुख्य पंडे के मोबाइल रिकॉर्ड उसके बयानों को झूठ साबित करते हैं। यह झूठ इस पंडे ने खुद बोला या इसकी कीमत वसूल  की, सीबीआई को यह भी पता लगाना है। पंडे ने तलवार परिवार का आने और जाने का जो समय बताया है वह गलत पाया गया है और यह भी पाया गया है कि जो समय वह अस्थि विसर्जन का बता रहा है उस समय वह अपना बिजली का बिल भरने गया हुआ था।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इस दौरान तलवार से उसकी तीन बार बात हुई और तलवार परिवार उस समय घाट पर ही मौजूद था। राजेश तलवार धीरे धीरे हत्या के आरोप के दायरे से तो दूर होता जा रहा है लेकिन उसके अटपटे बयान सीबीआई की समझ में नही आ रहे। सच जानने का तरीका सिर्फ नॉर्को टेस्ट बचता है।  &lt;/strong&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;FRIENDS IF YOU LIKED OR EVEN HATE YOU SAW, PLEASE GIVE ME A BUZZ ON aloktomar@hotmail.com
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href="http://feedproxy.google.com/~r/datelineindia/~3/nD7R_3yalUo/blog-post_03.html" title="&lt;strong&gt;हत्या, मंत्री, पत्रकार और रिश्वत&lt;/strong&gt;" /><author><name>गूगल मित्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17719251231605581199</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel="http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail" width="16" height="16" src="http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif" /></author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="http://2.bp.blogspot.com/_ddA-DxW--2w/SEV3TaQB4iI/AAAAAAAAAOM/qX2RDs0P5w8/s72-c/RAJBIR.jpg" height="72" width="72" /><thr:total>0</thr:total><feedburner:origLink>http://aaloktomar.blogspot.com/2008/06/blog-post_03.html</feedburner:origLink></entry><entry gd:etag="W/&quot;CUUCQX06eip7ImA9WxdRE0w.&quot;"><id>tag:blogger.com,1999:blog-4037994172839597177.post-1754393988444952654</id><published>2008-06-01T15:09:00.000+05:30</published><updated>2008-06-01T15:11:00.312+05:30</updated><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2008-06-01T15:11:00.312+05:30</app:edited><title>अतीत और भविष्य में जाने की तैयारी</title><content type="html">अतीत और भविष्य में जाने की तैयारी&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;डेटलाइन इंडिया&lt;br /&gt;कैप कार्निवाल, अमेरिका, 1 जून- अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के पास एक पूरा कार्यक्रम भी है और इसके लिए पर्याप्त पैसा भी, लेकिन एक प्रयोग को ले कर खुद अमेरिका की सरकार से उसकी ठनी हुई है। यह प्रयोग सापेक्षता के नियम को इस्तेमाल करते हुए अतीत और भविष्य में यात्रा का है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;नोबेल पुरस्कार विजेता अल्बर्ट आइंस्टीन के इस सिध्दांत कें उनसार प्रकाश की गति से चलने पर पृथ्वी के समय से बहुत आगे और बहुत पीछे जाया जा सकता है। अब तक की अंतरिक्ष उड़ानों में इस बात की पुष्टि भी हो चुकी है कि अंतरिक्ष यात्री यात्रा में छह महीने रहते हैं तो पृथ्वी पर छह साल का औसतन समय बीत जाता है। मंगल पर गए फीनिक्स को पृथ्वी के समय के हिसाब से वहां पहुंचने में छह महीने और दो दिन लगे जब कि फीनिक्स की घड़ियां बताती हैं कि यह यात्रा तिरेपन घंटे में पूरी हो गई।  नासा के वैज्ञानिक भी मानते हैं कि सिध्दांत के तौर पर धरती के समय की सीमा को पार करते हुए अतीत और  भविष्य दोनों में जाया जा सकता है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;1981 से लगातार नासा के प्रशासक अमेरिका सरकार से यह प्रयोग करने की अनुमति चाह रहे हैं लेकिन अमेरिकी सीनेट ने इस प्रयोग की नैतिकता और परिणामों पर लंबा विचार करके रपट अपने पास रख ली है। समिति की आपत्तिायां काफी व्यवहारिक और सनसनीखेज हैं। पहली आपत्तिा तो यह है कि मनुष्य अगर भविष्य में पहुंच गया तो वह अपनी अगली कई पीढ़ियों से एड़वांस में मिल लेगा और उससे सामाजिक रचना और व्यक्ति का जीवन भी प्रभावित होगा। वह अपनी मौत भी देख लेगा और खुद को दफनाए जाते हुए भी देख लेगा। ऐसा होने पर व्यक्ति का मानसिक संतुलन बिगड़ने की पूरी संभावना है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अमेरिकी सीनेट की कमेटी ने अतीत में जाने के बारे मे बहुत मनोरंजक उदाहरण दिया है। इसके अनुसार कोई व्यक्ति तीन पीढ़ी पीछे अतीत में पहुंचा और उसने वहां अपने दादा-दादी को जवानी की हालत में पाया। उसने किसी तरह उनकी हनीमून रोक दी, तो जाहिर है कि न उसके पिता पैदा होगें और न उसके इस संसार में आने का कोई कारण बचेगा। धारणा काल्पनिक ही है लेकिन अतीत में एक बार पहुंच कर वर्तमान हो जाने के बाद ऐसी किसी घटना से इंकार नही किया जा सकता। इसी तरह सीनेट ने यह भी एक तर्क दिया है कि आज की तारीख में अतीत में पहुंचने वाले किसी व्यक्ति का जमीन जायदाद का झगड़ा किसी से चल रहा है तो वह अतीत में जा कर उसके पूर्वजों को ही निपटा देगा और इस आधार पर आने वाली पीढ़ियां ही मिट जाएगीं।  &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;नासा का यह सबसे महत्वाकांक्षी कार्यक्रम प्रयोग के तौर पर भी इसीलिए खटाई में पड़ा है। चूहों और खरगोशों पर इस तरह के प्रयोग किए जा चुके हैं और वे सफल भी हुए हैं। एक खरगोशों के जोड़े को अंतरिक्ष में भेजा गया और तीन महीने बाद जब यह जोड़ा लौटा तो उसकी पीढ़ी के खरगोश बूढ़े हो कर मर भी चुके थे और उनकी तीसरी पीढ़ी चल रही थी। यह बहुत कुछ ऐसा ही है कि आप आज अंतरिक्ष में जाए, दो साल बाद लौटें तो अपने सारे दोस्तों की तस्वीरों पर माला चढ़ी देखें और शाम को जब टहलने निकले तो उन दोस्तों के बेटे या पोते पार्क में छड़ी ले कर टहलते हुए नजर आएं। सीनेट ने ईसाई धर्म का हवाला देते हुए इसे प्रकृति और ईश्वर के सिध्दांत के साथ अन्याय बताया है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;FRIENDS IF YOU LIKED OR EVEN HATE YOU SAW, PLEASE GIVE ME A BUZZ ON aloktomar@hotmail.com
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ALOK&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4037994172839597177-1754393988444952654?l=aaloktomar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/datelineindia/~4/5zBIe37TprA" height="1" width="1"/&gt;</content><link rel="replies" type="application/atom+xml" href="http://aaloktomar.blogspot.com/feeds/1754393988444952654/comments/default" title="Post Comments" /><link rel="replies" type="text/html" href="http://www.blogger.com/comment.g?blogID=4037994172839597177&amp;postID=1754393988444952654&amp;isPopup=true" title="0 Comments" /><link rel="edit" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/4037994172839597177/posts/default/1754393988444952654?v=2" /><link rel="self" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/4037994172839597177/posts/default/1754393988444952654?v=2" /><link rel="alternate" type="text/html" href="http://feedproxy.google.com/~r/datelineindia/~3/5zBIe37TprA/blog-post_8681.html" title="अतीत और भविष्य में जाने की तैयारी" /><author><name>गूगल मित्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17719251231605581199</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel="http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail" width="16" height="16" src="http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif" /></author><thr:total>0</thr:total><feedburner:origLink>http://aaloktomar.blogspot.com/2008/06/blog-post_8681.html</feedburner:origLink></entry><entry gd:etag="W/&quot;CUYMQXwzeSp7ImA9WxdRE0w.&quot;"><id>tag:blogger.com,1999:blog-4037994172839597177.post-4230981404919770217</id><published>2008-06-01T15:07:00.001+05:30</published><updated>2008-06-01T15:09:40.281+05:30</updated><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2008-06-01T15:09:40.281+05:30</app:edited><title>अभिषेक वर्मा ब्लैकमेल पर उतरा</title><content type="html">&lt;strong&gt;&lt;br /&gt;डेटलाइन इंडिया&lt;br /&gt;नई दिल्ली, 1 जून- नेवी वॉर रूम मामले में जमानत पर छूटे अभिषेक वर्मा ने कल पूरी रात अपने खास दोस्तों के साथ दक्षिण दिल्ली के एक पांच सितारा होटल में पार्टी की। भुगतान उन्होंने अपने क्रेडिट कार्ड से किया। लगभग दो लाख रुपए का यह भुगतान होटल को तो मिल गया मगर सवाल अब भी बाकी बचा है कि लगभग चार साल तिहाड़ जेल में रहने के बाद भी उनका कार्ड चालू कैसे था और इसका इस्तेमाल और भुगतान कौन कर रहा था। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अभिषेक के अपने सारे ज्ञात बैंक खाते तो सील हैं। इसी पार्टी में अभिषेक ने जो बड़े बड़े बयान दिए वे बहुत गंभीर हैं। इन बयानों से जाहिर है कि वे कांग्रेस के बड़े नेताओं और यहां तक कि कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी तक को ब्लैकमेल करना चाहते हैं। ब्लैकमेल का उपकरण र्स्कोपियन पनडुब्बी सौदे में दलाली का मामला है और अभिषेक वर्मा इतना भी बोल पा रहा है तो इसकी वजह यह है कि केन्द्रीय जांच ब्यूरो - सीबीआई ने आपस में जुड़े नेवी वॉर रूम लीक और इस सौदे की दलाली के मामले में अदालत के बार बार कहने और समय सीमा तय करने बावजूद अब तक अपनी अंतिम रपट नही दी है। सीबीआई के अधिकारी इस संबंध में यह भी नही बता पाए हैं कि नेवी वॉर रूम लीक और पनडुब्बी सौदे में आपस में सीधे क्या संबंध है।  सीबीआई ने इस मामलें में अब तक कई जांच अधिकारी बदले हैं, अदालत में सरकारी वकील बार बार बदले गए हैं और जो सीबीआई अभी दो महीने पहले तक यह कह रही थी कि अभिषेक वर्मा को जिंदगी भर जेल में रखने के लिए उसके पास पर्याप्त प्रमाण हैं, उसी ने अब अदालत को कहा है कि उसके पास सूचनाएं तो हैं लेकिन इनके बारे में प्रमाण मिलना बाकी है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अभिषेक वर्मा की हिम्मत की दाद देनी पड़ेगी कि उसने सीधे श्रीमती सोनिया गांधी से मिलने के लिए भी समय मांगा है। यह समय उसे मिलेगा या नही इस बारे में कांग्रेस नेता एकदम खामोश हैं और अभिषेक वर्मा की माँ रीता वर्मा असली धर्म संकट में हैं क्योंकि वे अब भी कांग्रेस की सदस्य हैं और भूतपूर्व सांसद होने के नाते अब भी संगठन की कई समितियों में हैं। अभिषेक वर्मा ने आज असली मुसीबत में कांग्रेस के कोषाध्यक्ष मोती लाल वोरा को डाला। अभिषेक उनके बंगले पर पहुंचे और अंकल कह कर बाकायदा उनके पांव छुए। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;श्री वोरा को और कुछ नही सूझा तो उन्होंने एक फोन करने के बहाने बंगले के भीतर जाने में ही खैरियत समझी। हालांकि उनका सचिव मोबाइल और कॉर्डलैस फोन ले कर साथ में ही खड़ा हुआ था। अभिषेक भाजपा के नेताओं से भी मिलना चाहते हैं और उन्होंने एक साझा मित्र के जरिए भाजपा नेता लाल कृष्ण आडवाणी से भी समय मांगा है। जाहिर है कि जेल से निकले अभिषेक वर्मा अपनी इस आजादी को अपनी अदालती मुक्ति के लिए इस्तेमाल करना चाहते हैं। लेकिन श्रीमती सोनिया गांधी और दूसरे कांग्रेसी नेताओं को ब्लैकमेल कर के वे कुछ कर पाएंगे इसकी संभावना बहुत कम दिखती है। उन्होंने तीस लाख रुपए जमानत के तौर पर कहां से जमा करवाए इसकी भी जांच की जा रही है। &lt;/strong&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;FRIENDS IF YOU LIKED OR EVEN HATE YOU SAW, PLEASE GIVE ME A BUZZ ON aloktomar@hotmail.com
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ALOK&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4037994172839597177-4230981404919770217?l=aaloktomar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/datelineindia/~4/OQYRFnMOgm4" height="1" width="1"/&gt;</content><link rel="replies" type="application/atom+xml" href="http://aaloktomar.blogspot.com/feeds/4230981404919770217/comments/default" title="Post Comments" /><link rel="replies" type="text/html" href="http://www.blogger.com/comment.g?blogID=4037994172839597177&amp;postID=4230981404919770217&amp;isPopup=true" title="2 Comments" /><link rel="edit" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/4037994172839597177/posts/default/4230981404919770217?v=2" /><link rel="self" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/4037994172839597177/posts/default/4230981404919770217?v=2" /><link rel="alternate" type="text/html" href="http://feedproxy.google.com/~r/datelineindia/~3/OQYRFnMOgm4/blog-post_01.html" title="अभिषेक वर्मा ब्लैकमेल पर उतरा" /><author><name>गूगल मित्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17719251231605581199</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel="http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail" width="16" height="16" src="http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif" /></author><thr:total>2</thr:total><feedburner:origLink>http://aaloktomar.blogspot.com/2008/06/blog-post_01.html</feedburner:origLink></entry><entry gd:etag="W/&quot;D0YAR3Y4eSp7ImA9WxRbGEk.&quot;"><id>tag:blogger.com,1999:blog-4037994172839597177.post-2438683348330792165</id><published>2008-06-01T15:05:00.001+05:30</published><updated>2008-12-09T23:22:26.831+05:30</updated><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2008-12-09T23:22:26.831+05:30</app:edited><title>अमरिंदर और उनकी आरूसा</title><content type="html">&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_ddA-DxW--2w/SEJtsRlaeuI/AAAAAAAAAN8/cgJwmIeu6jw/s1600-h/asoora.jpg"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;" src="http://4.bp.blogspot.com/_ddA-DxW--2w/SEJtsRlaeuI/AAAAAAAAAN8/cgJwmIeu6jw/s400/asoora.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5206844726595713762" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अमरिंदर और उनकी आरूसा&lt;br /&gt;डेटलाइन इंडिया&lt;br /&gt;नई दिल्ली, 1 जून - प्रकाश सिंह बादल की सीआईडी ने पिछले मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की हसीन प्रेमिका या मित्र अरूसा आलम के बारे में पड़ताल करके पूरी जानकारी गृह मंत्रालय को भेज दी है और मांग की है कि गुप्तचर ब्यूरो से भी पड़ताल करवा के अमरिंदर सिंह के खिलाफ देशद्रोह और आफीशियल सीक्रेट एक्ट के तहत मुकदमा कायम किया जाए। इन दोनों अपराधों में फांसी से ले कर उम्र कैद तक की सजा है।  &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अभी तक जमा की गई जानकारी के अनुसार पहले पाकिस्तान के सैनिक शासक याह्या खान और फिर कुछ समय जुलफिकार अली भूट्टो की अंतरंग मित्र रही और अपने प्रभाव के कारण रानी जनरल के नाम से कुख्यात माँ की बेटी अरूसा आलम के आईएसआई से सीधे संपर्को के सबूत मिले हैं और भारत के एक निर्वाचित राजनेता का उसके साथ अंतरंगता बढ़ाना संदेह का विषय है। सीआईडी रिपोर्ट में विदेश सचिव श्री शिव शंकर मेनन का भी नाम है जिनकी अरूसा से दोस्ती तब हुई थी जब मेनन पाकिस्तान में भारत के उच्चायुक्त थे और उन्हीं के कहने पर अरूसा आलम को भारत में असीमित प्रवेश वाला वीजा मिला था। यह विशेषाधिकार भारत सरकार ने आज तक किसी दूसरे पाकिस्तान पत्रकार को नही दिया है। हाल ही में सरबजीत सिंह को छुड़ाने में लगे पाकिस्तान के भूतपूर्व मंत्री अजीज बर्नी को दिल्ली हवाई अव्े से ही वापस लौटा दिया गया था। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार बावन साल की हो चुकी अरूसा अब भी काफी हसीन दिखती हैं और रसिया पटियाला नरेश हाल ही में हिमाचल की वादियों में उनके साथ हनीमून की मुद्रा में घूम कर आए हैं। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अरूसा आलम पेशे से पत्रकार हैं और उन्हें राजनयिक और जासूसी मामलों का विशेषज्ञ माना जाता है। परवेज मुशर्रफ के सबसे करीबी लोगों में उनकी गिनती है और मुशर्रफ जब भी किसी विदेश यात्रा पर गए तो यह देवी जी जरूर साथ गई। जब श्री मुशर्रफ पिछली भारत यात्रा पर आए थे तब भी अरूसा उनके साथ आए पत्रकारों के दल में थी और यह संयोग नही हो सकता कि बाकी पत्रकारों से अलग, ताज होटल के पास पंजाब सरकार के महल कपूरथला हाउस जिसे अब अतिथि गृह बना दिया गया है, में ठहरीं और इस दौरान राजा अमरिंदर सिंह भी दिल्ली में ही रहे। अमरिंदर सिंह की पत्नी रानी परणीत कौर लोक सभा की सदस्य हैं और वे अपने पति के इस बुढ़ापे के प्रेम की शिकायत कई बड़े कांग्रेसी नेताओं से कर चुकी हैं जिनमें अब कांग्रेस से बाहर कर दिए गए अमरिंदर सिंह के बहनोई और भूतपूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह भी हैं।  अरूसा ने कॉलेज से निकतते ही इस्लामाबाद के पहले अंग्रेजी अखबार डेली मुस्लिम में रक्षा संवाददाता के तौर पर काम करना शुरू कर दिया था। उन्हें सीधे रक्षा और राजनयिक संवाददाता बना दिया गया। इस दौरान आईएसआई के कई बड़े अधिकारियों के संपर्क में आईं और उस समय उन्हें भारत विराधी कामों के लिए जाना जाता था। इसके अलावा उन्होंने एक मीडिया एनजीओ भी बनाया जिसे सीधे सीधे आईएसआई से मदद मिलने की खबर आम हैं। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;फिलहाल रावलपिंडी-इस्लामाबाद प्रैस क्लब की उपाध्यक्ष अरूसा पाकिस्तान ऑबजर्वर में काम करती हैं जिसके मालिक जाहिद मलिक पाकिस्तान के एटम बम के संस्थापक और फिलहाल एटमी रहस्यों की तस्करी के आरोप में घर में नजरबंद है। अरूसा ने एक ब्रिटिश राजनयिक गार्डन हाईलेंडर के पाकिस्तानी औरताें के साथ संबंध उजागर किए थे और यह करने के लिए वे उनके बेडरूम में भी चली गईं थीं। वह भी तब जब वे अपनी हनीमून से लौटीं ही थीं। दो बच्चों की माँ अरूसा मशहूर गायक अदनान सामी की मौसेरी बहन हैं और उन्होंने अपने बेटे को भी एक पॉप बैंड बनाने में अदनान सामी की मदद की है।  पाकिस्तान अखबारों के अनुसार वहां के राजनेता भी अमरिंदर और अरूसा के रिश्तों को ले कर चिंतित हैं और हाल ही में अरूसा ने रावलपिंडी में एक कोठी खरीदी है जिसका दाम पाकिस्तानी मुद्रा में सात करोड़ रुपए बताया जाता है। सीआईडी का आरोप है कि यह रकम श्री अमरिंदर सिंह ने अपनी खूबसुरत मित्र को भेंट की थी। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अमरिंदर सिंह पर आरोप सिर्फ सीआईडी ही नही लगा रही बल्कि अकाली दल के ही एक संगठन के नेता और भूतपूर्व आईपीएस अधिकारी सिमरनजीत सिंह मान ने भी यही आरोप अमरिंदर सिंह पर लगाए हैं। उन्होंने तो यहां तक कहा है कि आरूसा को कश्मीर में भी घूमने का खास इंतजाम अमरिंदर सिंह ने ही करवाया और गुलाम नबी आजाद ने उनकी इस काम में पूरी मदद की। जहां तक आरूसा का सवाल है तो वे इन दिनों पेरिस में एक फैशन शो में हिस्सा लेने गई हैं।&lt;/strong&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;FRIENDS IF YOU LIKED OR EVEN HATE YOU SAW, PLEASE GIVE ME A BUZZ ON aloktomar@hotmail.com
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ALOK&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4037994172839597177-2438683348330792165?l=aaloktomar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/datelineindia/~4/B2TBUWUnZAY" height="1" width="1"/&gt;</content><link rel="replies" type="application/atom+xml" href="http://aaloktomar.blogspot.com/feeds/2438683348330792165/comments/default" title="Post Comments" /><link rel="replies" type="text/html" href="http://www.blogger.com/comment.g?blogID=4037994172839597177&amp;postID=2438683348330792165&amp;isPopup=true" title="1 Comments" /><link rel="edit" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/4037994172839597177/posts/default/2438683348330792165?v=2" /><link rel="self" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/4037994172839597177/posts/default/2438683348330792165?v=2" /><link rel="alternate" type="text/html" href="http://feedproxy.google.com/~r/datelineindia/~3/B2TBUWUnZAY/blog-post.html" title="&lt;strong&gt;अमरिंदर और उनकी आरूसा&lt;/strong&gt;" /><author><name>गूगल मित्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17719251231605581199</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel="http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail" width="16" height="16" src="http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif" /></author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="http://4.bp.blogspot.com/_ddA-DxW--2w/SEJtsRlaeuI/AAAAAAAAAN8/cgJwmIeu6jw/s72-c/asoora.jpg" height="72" width="72" /><thr:total>1</thr:total><feedburner:origLink>http://aaloktomar.blogspot.com/2008/06/blog-post.html</feedburner:origLink></entry><entry gd:etag="W/&quot;D0YARn46fSp7ImA9WxRbGEk.&quot;"><id>tag:blogger.com,1999:blog-4037994172839597177.post-7332307949592806914</id><published>2008-05-31T20:11:00.003+05:30</published><updated>2008-12-09T23:22:27.015+05:30</updated><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2008-12-09T23:22:27.015+05:30</app:edited><title>एक कलंकित कांग्रेसी अभिषेक</title><content type="html">&lt;strong&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_ddA-DxW--2w/SEFj-BlaetI/AAAAAAAAAN0/Qt7ItdLW0WU/s1600-h/VERMA.jpg"&gt;&lt;img style="display:block; margin:0px auto 10px; text-align:center;cursor:pointer; cursor:hand;" src="http://2.bp.blogspot.com/_ddA-DxW--2w/SEFj-BlaetI/AAAAAAAAAN0/Qt7ItdLW0WU/s400/VERMA.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5206552561445403346" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;आलोक तोमर &lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;पैंतीस साल की उम्र में अरबपति बन कर लंदन में घर खरीदने और पिकनिक के लिए पानी का जहाज, दिल्ली और लंदन में रहने के लिए कोठियां रखने वाले छत्ताीसगढ़ के बिलासपुर के एक परिवार के लड़के अभिषेक वर्मा को आज तिहाड़ जेल से मुक्ति मिल गई।  सांसद पिता श्रीकांत वर्मा और सांसद मांँ रीता वर्मा के बेटे अभिषेक पर पनडुब्बी घोटाले में दलाली करने और नौ सेना के रहस्य खरीद कर बेचने वाले नेवी वार रूम लीक मामले में मुख्य अभियुक्त होने का आरोप है और उसके जमानत पर रिहा होने का मतलब कांग्रेस के कई बड़े नेताओं की आफत आ जाना है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इन नेताओं में सबसे पहली कतार में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे और छत्ताीसगढ़ के कांग्रेसी नेता और कांग्रेस के कोषाध्यक्ष मोती लाल वोरा के अलावा श्रीमती सोनिया गांधी के सचिव विन्सेंट जॉर्ज के भी नाम हैं। इस तथाकथित घोटाले की जांच सीबीआई कर रही है और इसके सिलसिले में नौ सेना के एडमिरल से ले कर सेना के कर्नल तक स्तर के अधिकारी अब भी बगैर सुनवाई के तिहाड़ जेल में बंद हैं। यह मामला फ्रांँस की एक कंपनी का है जिसमें भारत की नौ सेना को स्कोर्पियन नाम की पनडुब्बियां बेचने का सौदा किया था और इस सौदे के खिलाफ नौ सेना अधिकारी, रक्षा मुख्यालय और खुद प्रणब मुखर्जी बताए जाते थे लेकिन इस सौदे में लगभग सात सौ करोड़ रुपए की सिर्फ दलाली शामिल है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;जाहिर है कि आकार और रकम के मामले में यह सौदा बोफोर्स का भी बाप है। अभिषेक वर्मा जवान होने के पहले ही करामाती हो गए थे और सबसे पहले उनका नाम तब उछला था जब उन्होंने करोल बाग दिल्ली के एक ज्वेलर सुभाष चंद्र बड़जात्या को इनकम टैक्स अधिकारी अशोक अग्रवाल के साथ मिल कर करोड़ों रुपए का चुना लगाया था। इस मामले में लाभ पाने वालों में विन्सेंट जॉर्ज का नाम आने के बाद मामला दब गया था और सिर्फ अशोक अग्रवाल को नौकरी से हाथ धोना पड़ा और जेल की सलाखों के पीछे रहना पड़ा।  &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;यह सीबीआई ने सच पाया है कि दलाली ली गई थी और इस भुगतान की कहानी बड़ी मनोरंजक है। अक्टूबर 2005 में तत्कालीन रक्षा मंत्री प्रणब मुखर्जी ने फ्राँस की थेल्स कंपनी से पनडुब्बियों का करार किया और अगले ही दिन थेल्स चेरिटेबल ट्रस्ट 2, डेशवुड लांग रोड, हडलिस्टन, सरे, इंग्लैंड में पांच करोड़ डॉलर दो किस्तों में स्विटजरलैंड की यूबीएस बैंक ज्यूरिक के खाता नंबर 0026324 से एलजीटी बैंक बडूज, लिंकेस्टिन में जमा करवा दिए। सीबीआई के पास इस बात का रिकॉर्ड है कि इसके तुंरत बाद अभिषेक वर्मा लिंकेस्टिन गया और वहां से इस एकाउंट से सारे पैसे निकाल कर वापस अपने स्विस बैंक एकाउंट में रख दिए। सौदा पूरा हुआ। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कांग्रेस को असली चिंता हो सकती है तो अभिषेक वर्मा की रिकॉर्ड की हुई बातचीत और उसके ई मेल रिकॉर्ड से हो सकती है। आखिर जब स्कोर्पियन बनाने वाली थेल्स कंपनी के प्रेसिडेंट भारत में थे तो अभिषेक वर्मा ने इस सौदे से संबंधित कई लोगों को ई मेल लिखी और एक ई मेल में साफ लिखा है कि थेल्य के प्रेसिडेंट सीधे सोनिया गांधी से मिलना चाहते हैं लेकिन जो भी सौदा होगा वह कांग्रेस की ओर से मैं करूगां और मैं ही संबंधित महिला यानी श्रीमती सोनिया गांधी को पैसा पहुंचाऊगां। इसी दौरान अभिषेक ने अपने पिता के दोस्त और कांग्रेस के कोषाध्यक्ष मोती लाल वोरा से 28 मई 2005 को फोन पर दिन के एक बज कर तैंतीस मिनट से एक बज कर चालीस मिनट तक यानी पूरे सात मिनट बात की और यह बातचीत सीबीआई के रिकॉर्ड में है। कांग्रेस का खजांची अगर हथियारों के किसी दलाल से सात मिनट तक बात करता है तो वह कम से कम हनुमान चालीसा तो नही पढ़ रहा होगा।  इस घोटाले में नौ सेना अध्यक्ष अरुण प्रकाश के भतीजे रवि शंकरन भी शामिल हैं और सीबीआई ने उसके खिलाफ इंटरपोल से वांरट निकलवा लिया है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;यह न समझ में आने वाली बात है कि शंकरन का लंदन का पता सीबीआई और इंटरपोल के पास है और उसे दो बार पूछताछ के लिए लंदन में बुलाया जा चुका है लेकिन अब तक भारत नही लाया जा सका। अभिषेक की ई मेल में उसकी तत्कालीन रक्षा मंत्री प्रणब मुखर्जी से कई बहुत 'संतोषजनक और फलदायी' बातचीत का भी वर्णन है। यह फल किसके लिए है और किसको मिला यह तो पता नही मगर जेल अभिषेक वर्मा ही गए।  श्रीमती सोनिया गांधी की दिक्कत वही है जो उनके पति राजीव गांधी की थी। दोनों बहुत भले लोग कहे जा सकते हैं लेकिन अपने को बचाने और उनकी मदद करने के चक्कर में वे अक्सर मुसीबत में फंसत रहे हैं। बोफोर्स और एचडीडल्यू पनडुब्बी कांड की विस्तार से जांच करने वाले महेश दत्ता शर्मा और इसे अदालत में ले जाने वाले अरुण जेटली से भी पूछिए तो वे भी कहते हैं कि बेचारे राजीव गांधी को तो पता ही नही था कि बोफोर्स में हो क्या रहा है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;वित्त मंत्री के नाते विश्वनाथ प्रताप सिंह ने इस सौदे पर आपत्तिा की थी और बाद में जब रक्षा मंत्री बने तो खुद ही इस सौदे को मंजूरी दी थी। उनके पहले रक्षा मंत्री रहे कृष्ण चंद पंत आज भाजपा में हैं लेकिन जब वे कांग्रेस में थे तब भी इस बात पर स्तब्ध रहते थे कि वी पी सिंह उन्हें उत्तार प्रदेश वापस भेजने पर क्यों तुले हुए थे।  प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह पर भी इस मामले की आंच आनी स्वाभाविक है और यह तब है जब कोई भी जांच के नतीजे आने के पहले ही कसम खा कर कह सकता है कि मनमोहन सिंह ने इस पूरे कर्मकंाड में एक धेला भी नही खाया। लेकिन जो मनमोहन सिंह खुद इस सौदे के खिलाफ थे वे अचानक इसे मंजूरी क्यों दे बैठे, इस सवाल का जवाब तो उन्हें ही देना पड़ेगा। उनके मंत्रिमंडल से वोलकर रपट के बाद बाहर हो चुके विदेश मंत्री नटवर सिंह भी कहते हैं कि मनमोहन सिंह या सोनिया गांधी ने उनके काम में कभी हस्तक्षेप नही किया।  अभिषेक वर्मा का पासपोर्ट जब्त कर लिया गया है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;हर महीने दूसरे और चौथे सोमवार को उसे अदालत में हाजिर हो कर भारत में ही होने का प्रमाण भी देना पड़ेगा। किसी भी बहाने और किसी भी तरह कोई विदेश यात्रा वह नही कर सकेगा। तीस लाख रुपए का जूर्माना उस पर लगाया गया है और उसके सारे बैकों के सारे ज्ञात खाते सील कर दिए गए हैं। इस मामले में वर्तमान रक्षा मंत्री ए के एंटनी की भी जवाबदेही बनती है और इस जवाबदेही के साथ उन्हें प्रणब मुखर्जी के जमाने की फाइलों पर भी शोध करनी पड़ेगी। रही बात सीबाआई की तो वह मोती लाल वोरा और प्रणब मुखर्जी को बुला कर पूछे तो कि फोन पर क्या बात हुई थी और संतोषजनक और फलदायी चर्चाए क्या क्या हुई थीं।&lt;/strong&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;FRIENDS IF YOU LIKED OR EVEN HATE YOU SAW, PLEASE GIVE ME A BUZZ ON aloktomar@hotmail.com
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ALOK&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4037994172839597177-7332307949592806914?l=aaloktomar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/datelineindia/~4/e_gSjhnhXFE" height="1" width="1"/&gt;</content><link rel="replies" type="application/atom+xml" href="http://aaloktomar.blogspot.com/feeds/7332307949592806914/comments/default" title="Post Comments" /><link rel="replies" type="text/html" href="http://www.blogger.com/comment.g?blogID=4037994172839597177&amp;postID=7332307949592806914&amp;isPopup=true" title="4 Comments" /><link rel="edit" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/4037994172839597177/posts/default/7332307949592806914?v=2" /><link rel="self" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/4037994172839597177/posts/default/7332307949592806914?v=2" /><link rel="alternate" type="text/html" href="http://feedproxy.google.com/~r/datelineindia/~3/e_gSjhnhXFE/blog-post_31.html" title="एक कलंकित कांग्रेसी अभिषेक" /><author><name>गूगल मित्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17719251231605581199</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel="http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail" width="16" height="16" src="http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif" /></author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="http://2.bp.blogspot.com/_ddA-DxW--2w/SEFj-BlaetI/AAAAAAAAAN0/Qt7ItdLW0WU/s72-c/VERMA.jpg" height="72" width="72" /><thr:total>4</thr:total><feedburner:origLink>http://aaloktomar.blogspot.com/2008/05/blog-post_31.html</feedburner:origLink></entry><entry gd:etag="W/&quot;D0YARnw_eSp7ImA9WxRbGEk.&quot;"><id>tag:blogger.com,1999:blog-4037994172839597177.post-7325069909052787276</id><published>2008-05-19T21:13:00.002+05:30</published><updated>2008-12-09T23:22:27.241+05:30</updated><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2008-12-09T23:22:27.241+05:30</app:edited><title>इंटरनेट पर चली पतित राजनीति</title><content type="html">&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_ddA-DxW--2w/SDGgXklHZlI/AAAAAAAAANs/7iiSEXy5jXI/s1600-h/Sukanya.JPG"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;" src="http://1.bp.blogspot.com/_ddA-DxW--2w/SDGgXklHZlI/AAAAAAAAANs/7iiSEXy5jXI/s320/Sukanya.JPG" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5202115371406419538" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;br /&gt;राहुल गांधी पर घिनौने आरोप&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आलोक तोमर&lt;br /&gt;डेटलाइन इंडिया&lt;br /&gt;नई दिल्ली, 19 मई-अमेरिका की एक अरबपति इंटरनेट कंपनी ने पूरी दुनिया में यह कुप्रचार फैलाया हुआ है कि कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और उनके दोस्तों ने अमेठी में लगभग ढाई साल पहले एक युवती से सामूहिक बलात्कार किया था। पता नहीं किन कारणों से इस इंटरनेट कंपनी की वेबसाइट को न भारत में प्रतिबंधित किया गया और न इसके खिलाफ कोई सख्त कानूनी कार्रवाई की गई।  यू टयूब नाम की यह कंपनी अमेरिका में रजिस्टर्ड है और कुछ ही समय पहले गूगल्स ने बहुत मोटी रकम दे कर इसे खरीदा है। निशुल्क वीडियो दिखाने और किसी के भी वीडियो अपनी साईट पर होस्ट करने वाली इस कंपनी के संस्थापकों में जावेद मीर नाम का एक बांग्लादेशी भी है जो 1992 में अपने देश से भाग कर अमेरिका चला गया था। यू टयूब पर मौजूद वीडियो में छह वीडियो मौजूद हैं जिनमें आरोप लगाया गया है कि भारत बलात्कारियों का देश है और राहुल गांधी ने 3 दिसंबर 2006 को संयुक्ता नाम की एक युवती के साथ अपने कुछ विदेशी दोस्तों के साथ मिल कर शराब पिला कर बलात्कार किया और चुप रहने के लिए 50 हजार रुपए देने की पेशकश भी की। संयुक्ता के पिता का नाम बलराम सिंह और मां का नाम सुमित्रा देवी बताया गया है और वेबसाइट पर भारतीय कानून के खिलाफ बलात्कार की कथित शिकार महिला की तस्वीर भी प्रकाशित की गई। विचित्र बात यह है कि वेबसाइट में चश्मदीद गवाहों के तौर पर कुछ लोगों के बयान भी दिखाए गए हैं लेकिन उनके चेहरे नहीं दिखाए गए। इरादों का खतरनाक होना इसी बात से जाहिर है कि वेबसाइट ने किसी भी तथाकथित प्रत्यक्षदर्शी का नाम तक नहीं जाहिर किया। यह झूठी सूचनाएं वेबसाइट पर प्रकाशित करते वक्त बहुत जोर शोर से राहुल गांधी को देश का भावी प्रधानमंत्री भी घोषित किया गया है जिससे अपने आप जाहिर हो जाता है कि यह षडयंत्र उनके राजनैतिक दुश्मनों का है।  कांग्रेस ने अपनी ओर से एक और वेबसाइट जिस पर यह सामग्री उपलब्ध थी, को कानूनी नोटिस भेज कर काम चला लिया है। यह दूसरी वेबसाइट थी अमेरिका में रजिस्टर्ड है और नोटिस भेजने वाले प्रसिध्द वकील और कांग्रेस के प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघ्वी के नीति मार्ग स्थित कार्यालय से सिर्फ यह जवाब मिला कि श्री सिंघ्वी लंदन में हैं और उनके जिस सहयोगी जॉय बोस ने नोटिस भेजा था वे उपलब्ध नहीं है।  कमाल की बात यह है कि एक विदेशी वेबसाइट भारत के एक होनहार सांसद के चरित्र पर कीचड उछालती है और उसके खिलाफ भारत में एफआईआर भी दर्ज नहीं की जाती। यू टयूब से वीडियो उठा कर प्रकाशित करने वाली वेबसाइट को नोटिस भेजा जाता है और मूल वेबसाइट भारत में धडल्ले से चलती रहती है। यू टयूब अपनी इन हरकतों की वजह से कई देशों में प्रतिबंधित कर दी गई है और इस पर भारतीय फिल्मों तथा अश्लील दृश्यों की भरमार है।  अभिषेक मनु सिंघ्वी भारत के अतिरिक्त महाधिवक्ता रह चुके हैं और संयोग से शासन करने वाली पार्टी के प्रवक्ता है लेकिन अपनी ही पार्टी के नेता राहुल गांधी के अपमान के खिलाफ उन्होंने कोई ठोस कानूनी कार्रवाई नहीं की। वेबसाइट के अनुसार यह लडकी इसका परिवार और वीडियो रिकॉर्ड करने वाले पत्रकार सभी लापता हैं और शायद उनकी हत्या कर दी गई है। यह अलग बात है कि देश के किसी भी थाने में इस बारे में कोई रपट दर्ज नहीं है। मानवाधिकार आयोग, महिला आयोग दोनों में भी शिकायत की गई बताई गई है लेकिन इस शिकायत का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।  &lt;/strong&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;FRIENDS IF YOU LIKED OR EVEN HATE YOU SAW, PLEASE GIVE ME A BUZZ ON aloktomar@hotmail.com
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href="http://feedproxy.google.com/~r/datelineindia/~3/VVYCR5KEGjs/blog-post_18.html" title="&lt;strong&gt;उत्तराखंड में भी है एक कारगिल&lt;/strong&gt;" /><author><name>गूगल मित्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17719251231605581199</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel="http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail" width="16" height="16" src="http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif" /></author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="http://3.bp.blogspot.com/_ddA-DxW--2w/SDA0DUlHZkI/AAAAAAAAANk/_21-hhcLhng/s72-c/c.jpg" height="72" width="72" /><thr:total>1</thr:total><feedburner:origLink>http://aaloktomar.blogspot.com/2008/05/blog-post_18.html</feedburner:origLink></entry><entry gd:etag="W/&quot;AkICQXg6eSp7ImA9WxdTE0w.&quot;"><id>tag:blogger.com,1999:blog-4037994172839597177.post-5282560488980238850</id><published>2008-05-09T13:05:00.000+05:30</published><updated>2008-05-09T13:06:00.611+05:30</updated><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2008-05-09T13:06:00.611+05:30</app:edited><title>बच्चन जी का सच्चा स्मारक</title><content type="html">&lt;strong&gt;&lt;script src="http://js.nicedit.com/nicEdit.js" type="text/javascript"&gt;&lt;/script&gt;&lt;br /&gt;&lt;script type="text/javascript"&gt;&lt;br /&gt;bkLib.onDomLoaded(nicEditors.allTextAreas);&lt;br /&gt;&lt;/script&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;आलोक तोमर&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अमिताभ बच्चन ने अपने बाबू जी, हरिवंश राय बच्चन का स्मारक बनाने की घोषणा की है। कायदे से यह घोषणा देश में हिंदी के विकास के लिए काम कर रही दर्जनों संस्थाओं में से किसी को करनी चाहिए थी। उनके पास करोड़ो का बजट है जो ज्यादातर फूहड़ अनुवादों और बैठकों के यात्रा भत्ताों में खर्च होता है। आखिर कवि बच्चन का बेटा होने का सौभाग्य तो अमिताभ को ही मिला है लेकिन अगर आधुनिक हिंदी कविता की बात की जाए तो बच्चन रिश्ते में पूरी समकालीन हिंदी कविता के बाप लगते हैं। एक पूरी पीढ़ी है जिसने गोदान और मधुशाला पढ़ने के लिए बाकायदा हिंदी सीखी। आज कवि सम्मेलन बहुत बड़ा बाजार बन गए हैं लेकिन कवि बच्चन ने ही कवि सम्मेलनों में पारिश्रमिक लेने की परम्परा शुरू की थी। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मेरी विनम्र राय में कवि बच्चन का सबसे बड़ा स्मारक देश भर में बिखरा हुआ है और उसे संजोने की जरूरत है। यह स्मारक है बच्चन जी ध्दारा लिखे गए हजारों पत्र जो पूरे देश के शहरों और कस्बों में लोगों की फाइलों में लगे हुए हैं। बच्चन जी उन्हें लिखे गए हर पत्र का जवाब देते थे। गरीबी में थे तो पोस्ट कार्ड पर देते थे और जब चार पैसे जुड़ गए तो लैटर पैड पर बहुत कलात्मक लिखावट में संक्षिप्त ही सही, जवाब आते जरूर थे। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;बात तब की है जब मैं चम्बल घाटी के एक छोटे से कस्बे भिंड में रहता था। बच्चन जी की आत्मकथा का पहला हिस्सा- क्या भूलूं, क्या याद करूं, प्रकाशित हो चुका था और अपने मन में भी कवि बनने की इच्छा जाग गई थी। तुकबंदियां करने लगा था और हिम्मत देखिए कि सीधे बच्चन जी को उनके प्रतीक्षा वाले पते पर भेजने लगा था। जवाब हर बार आता था और हमेशा शाबाशी का नही होता था फिर भी एक ध्वनि जरूर होती थी कि चलो कोई तो कविता लिख रहा है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इस बीच लगा कि इलाहाबाद, जो साहित्य राजधानी थी, गए बगैर अपन साहित्यकार नही बन पाएंगें। सोलह साल की उम्र में वहां रहने वाली अपनी मौसी के घर जा कर बस गया। साईकिल चलाना सीखा, बच्चन जी ने जिन जगहों का वर्णन किया था जैसे कटघर, मुट्ठीगंज, सिविल लाइंस, एलफ्रेड पार्क की लाईब्रेरी- सब घुम डाली। नवाब यूसूफ रोड पर इलाचंद्र जोशी से मिला, लुकरगंज में महादेवी वर्मा के दर्शन किए, खुसरोबाग की सड़क पर नरेश मेहता के घर गया और उनके साहित्य पर तो निहाल था ही, उनकी बेटी पर भी मुग्ध हो गया। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इसी सड़क पर आगे उपेन्द्र नाथ अश्क एक बड़े सरकारी बंगले पर कब्जा किए बैठे थे। उनका उपन्यास निमिषा उन दिनों साप्ताहिक हिन्दुस्तान में धारावाहिक छप रहा था और मेरे जैसे किशोर को वे टॉलस्टाय नजर आने लगे थे। उन्होनें दर्शन दिए, नीबू पानी पिलाया और मेरे जैसे बच्चे से रहस्योद्धाटन करने के अंदाज में कहा कि अमिताभ बच्चन असम में इलाहाबाद विश्वविघालय के कुलपति रह चुके झा साहब के बेटे हैं। सबूत के तौर पर उन्होनें कहा कि बच्चन जी कितने छोटे कद के हैं और अमिताभ का कद कितना लंबा है। यही इस बात का सबूत है। इतने बड़े आदमी से इतनी छोटी बात सुन कर दिल को चोट लगी लेकिन वे जैसे भी थे अपने लिए उस समय गुनाहों के देवता थे इसलिए थके कदमों से साईकिल उठाई और वापस आ गया। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;भिंड लौट कर बच्चन जी को एक पत्र में, जो शायद चार पेज का होगा, अश्क जी की बेहयाई के बारे में विस्तार से लिखा। आज्ञा भी मांगी कि अगर बच्चन जी कहें तो अपनी चंबल घाटी की शैली में अश्क जी को उनके खुसरो बाग में ठोक कर चला आऊं। तब तक इलाके की परम्परा के अनुसार देसी पिस्तौल चलाना सीख लिया था। पत्र का जवाब पंद्रह दिन बाद आया और वह भी पांच लाईन का। पहले आर्शीवाद अंत में शुभकामनाएं और बीच में सिर्फ यह कि मैनें लोगों का और उनके काम का आदर सीखा है और मुझे नही लगता कि मुझे अपनी आत्मा के अलावा और किसी को जवाब देना है। अश्क जी का तो उन्होनें कहीं नाम ही नही लिया। इसके बाद भी मैं कविताएं भेजता रहा, जवाब आते रहे। मधुशाला का सम्मोहन इतना था कि साथ पढ़ने वाली माधवी नाम की एक लड़की से एक तरफा प्रेम हो गया तो उसकी शान में, मधुशाला के छंद में ही, चौंसठ पन्ने की कॉपी में मधुबाला नाम की कृति लिख कर भेज दी। इस बार दो लाईन का जवाब आया। पहली लाईन थी कि तुम्हारी भाषा और छंद की समझ बढ़ती जा रही है और दूसरी लाईन में लिखा था कि हमेशा मौलिकता की ओर बढ़ो, नकल और अनुसरण की कोई मंजिल नही होती। फिर पत्रकार बना तो शीर्षकों ने कविता को पीछे धकेल दिया मगर मन का कवि मरने को तैयार नही था। उस जमाने की बम्बई में जनसत्ताा में नौकरी करने गया तो पहली कोशिश बच्चन जी से मिलने की थी जो अन्नू कपूर ने जया जी से कह कर पूरी करवाई। अब सारी कहानी कहने चला हूं तो यह भी बता दूं कि चौदह साल की उम्र में फिल्म गुव्ी देखी थी, जया जी पर फ़िदा हो गया था और दिल्ली से रैपीडेक्स का हिंदी बांग्ला कोर्स मंगा कर बांग्ला सीखनी शुरू कर दी थी। इस कहानी का अंत यही हुआ कि आखिरकार मैनें जया जी की तरह ही सुंदर एक बंगाली लड़की से शादी की और अब हमारी सोलह साल की एक बेटी है जिसे मैं बच्चन जी के बारे में सुनाया करता हूं। वह अभिषेक की फैन है और हम अमिताभ के लेकिन इससे क्या फर्क पड़ता है। यह पूरी कहानी इसलिए लिखी कि अमिताभ बच्चन अगर एक अपील कर दें तो पूरे देश से बच्चन जी की चिट्ठियों का अंबार निकल आएगा और वह उनका सच्चा स्मारक होगा। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कवियों, साहित्यकारों, आलोचकों, राजनेताओं और प्रसिध्द मित्रों को लिखे गए बच्चन जी के पत्र इधर-उधर प्रकाशित हुए हैं लेकिन जिन लोगों की असली पूंजी खुद गुमनाम होते हुए भी इतने बड़े साहित्यकार और उससे भी बड़े इंसान के एक दो या ज्यादा पत्र हैं, वे ही बच्चन जी का असली स्मारक हैं। कायदे से इंटरनेट की दुनिया में इनका अभिलेखागार बनना चाहिए और लोगों को प्रेरणा मिलनी चाहिए कि कितनी भी लंबी ई मेल एक छोटे से पोस्ट कार्ड की जगह नही ले सकती। &lt;/strong&gt;       &lt;/strong&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;FRIENDS IF YOU LIKED OR EVEN HATE YOU SAW, PLEASE GIVE ME A BUZZ ON aloktomar@hotmail.com
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href="http://feedproxy.google.com/~r/datelineindia/~3/SvCurNu0PGw/blog-post_8849.html" title="&lt;strong&gt;बच्चन जी का सच्चा स्मारक&lt;/strong&gt;" /><author><name>गूगल मित्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17719251231605581199</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel="http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail" width="16" height="16" src="http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif" /></author><thr:total>1</thr:total><feedburner:origLink>http://aaloktomar.blogspot.com/2008/05/blog-post_8849.html</feedburner:origLink></entry><entry gd:etag="W/&quot;D0YARnc-eyp7ImA9WxRbGEk.&quot;"><id>tag:blogger.com,1999:blog-4037994172839597177.post-5615588295648918541</id><published>2008-05-09T12:57:00.002+05:30</published><updated>2008-12-09T23:22:27.953+05:30</updated><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2008-12-09T23:22:27.953+05:30</app:edited><title>बच्चन जी का सच्चा स्मारक</title><content type="html">&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_ddA-DxW--2w/SCP9qUuq6XI/AAAAAAAAANc/0sMAfq3tJTU/s1600-h/agnipath.JPG"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;" src="http://1.bp.blogspot.com/_ddA-DxW--2w/SCP9qUuq6XI/AAAAAAAAANc/0sMAfq3tJTU/s320/agnipath.JPG" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5198277298476476786" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;script src="http://js.nicedit.com/nicEdit.js" type="text/javascript"&gt;&lt;/script&gt;&lt;br /&gt;&lt;script type="text/javascript"&gt;&lt;br /&gt;bkLib.onDomLoaded(nicEditors.allTextArea  &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;आलोक तोमर&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अमिताभ बच्चन ने अपने बाबू जी, हरिवंश राय बच्चन का स्मारक बनाने की घोषणा की है। कायदे से यह घोषणा देश में हिंदी के विकास के लिए काम कर रही दर्जनों संस्थाओं में से किसी को करनी चाहिए थी। उनके पास करोड़ो का बजट है जो ज्यादातर फूहड़ अनुवादों और बैठकों के यात्रा भत्ताों में खर्च होता है। आखिर कवि बच्चन का बेटा होने का सौभाग्य तो अमिताभ को ही मिला है लेकिन अगर आधुनिक हिंदी कविता की बात की जाए तो बच्चन रिश्ते में पूरी समकालीन हिंदी कविता के बाप लगते हैं। एक पूरी पीढ़ी है जिसने गोदान और मधुशाला पढ़ने के लिए बाकायदा हिंदी सीखी। आज कवि सम्मेलन बहुत बड़ा बाजार बन गए हैं लेकिन कवि बच्चन ने ही कवि सम्मेलनों में पारिश्रमिक लेने की परम्परा शुरू की थी। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मेरी विनम्र राय में कवि बच्चन का सबसे बड़ा स्मारक देश भर में बिखरा हुआ है और उसे संजोने की जरूरत है। यह स्मारक है बच्चन जी ध्दारा लिखे गए हजारों पत्र जो पूरे देश के शहरों और कस्बों में लोगों की फाइलों में लगे हुए हैं। बच्चन जी उन्हें लिखे गए हर पत्र का जवाब देते थे। गरीबी में थे तो पोस्ट कार्ड पर देते थे और जब चार पैसे जुड़ गए तो लैटर पैड पर बहुत कलात्मक लिखावट में संक्षिप्त ही सही, जवाब आते जरूर थे। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;बात तब की है जब मैं चम्बल घाटी के एक छोटे से कस्बे भिंड में रहता था। बच्चन जी की आत्मकथा का पहला हिस्सा- क्या भूलूं, क्या याद करूं, प्रकाशित हो चुका था और अपने मन में भी कवि बनने की इच्छा जाग गई थी। तुकबंदियां करने लगा था और हिम्मत देखिए कि सीधे बच्चन जी को उनके प्रतीक्षा वाले पते पर भेजने लगा था। जवाब हर बार आता था और हमेशा शाबाशी का नही होता था फिर भी एक ध्वनि जरूर होती थी कि चलो कोई तो कविता लिख रहा है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इस बीच लगा कि इलाहाबाद, जो साहित्य राजधानी थी, गए बगैर अपन साहित्यकार नही बन पाएंगें। सोलह साल की उम्र में वहां रहने वाली अपनी मौसी के घर जा कर बस गया। साईकिल चलाना सीखा, बच्चन जी ने जिन जगहों का वर्णन किया था जैसे कटघर, मुट्ठीगंज, सिविल लाइंस, एलफ्रेड पार्क की लाईब्रेरी- सब घुम डाली। नवाब यूसूफ रोड पर इलाचंद्र जोशी से मिला, लुकरगंज में महादेवी वर्मा के दर्शन किए, खुसरोबाग की सड़क पर नरेश मेहता के घर गया और उनके साहित्य पर तो निहाल था ही, उनकी बेटी पर भी मुग्ध हो गया। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इसी सड़क पर आगे उपेन्द्र नाथ अश्क एक बड़े सरकारी बंगले पर कब्जा किए बैठे थे। उनका उपन्यास निमिषा उन दिनों साप्ताहिक हिन्दुस्तान में धारावाहिक छप रहा था और मेरे जैसे किशोर को वे टॉलस्टाय नजर आने लगे थे। उन्होनें दर्शन दिए, नीबू पानी पिलाया और मेरे जैसे बच्चे से रहस्योद्धाटन करने के अंदाज में कहा कि अमिताभ बच्चन असम में इलाहाबाद विश्वविघालय के कुलपति रह चुके झा साहब के बेटे हैं। सबूत के तौर पर उन्होनें कहा कि बच्चन जी कितने छोटे कद के हैं और अमिताभ का कद कितना लंबा है। यही इस बात का सबूत है। इतने बड़े आदमी से इतनी छोटी बात सुन कर दिल को चोट लगी लेकिन वे जैसे भी थे अपने लिए उस समय गुनाहों के देवता थे इसलिए थके कदमों से साईकिल उठाई और वापस आ गया। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;भिंड लौट कर बच्चन जी को एक पत्र में, जो शायद चार पेज का होगा, अश्क जी की बेहयाई के बारे में विस्तार से लिखा। आज्ञा भी मांगी कि अगर बच्चन जी कहें तो अपनी चंबल घाटी की शैली में अश्क जी को उनके खुसरो बाग में ठोक कर चला आऊं। तब तक इलाके की परम्परा के अनुसार देसी पिस्तौल चलाना सीख लिया था। पत्र का जवाब पंद्रह दिन बाद आया और वह भी पांच लाईन का। पहले आर्शीवाद अंत में शुभकामनाएं और बीच में सिर्फ यह कि मैनें लोगों का और उनके काम का आदर सीखा है और मुझे नही लगता कि मुझे अपनी आत्मा के अलावा और किसी को जवाब देना है। अश्क जी का तो उन्होनें कहीं नाम ही नही लिया। इसके बाद भी मैं कविताएं भेजता रहा, जवाब आते रहे। मधुशाला का सम्मोहन इतना था कि साथ पढ़ने वाली माधवी नाम की एक लड़की से एक तरफा प्रेम हो गया तो उसकी शान में, मधुशाला के छंद में ही, चौंसठ पन्ने की कॉपी में मधुबाला नाम की कृति लिख कर भेज दी। इस बार दो लाईन का जवाब आया। पहली लाईन थी कि तुम्हारी भाषा और छंद की समझ बढ़ती जा रही है और दूसरी लाईन में लिखा था कि हमेशा मौलिकता की ओर बढ़ो, नकल और अनुसरण की कोई मंजिल नही होती। फिर पत्रकार बना तो शीर्षकों ने कविता को पीछे धकेल दिया मगर मन का कवि मरने को तैयार नही था। उस जमाने की बम्बई में जनसत्ताा में नौकरी करने गया तो पहली कोशिश बच्चन जी से मिलने की थी जो अन्नू कपूर ने जया जी से कह कर पूरी करवाई। अब सारी कहानी कहने चला हूं तो यह भी बता दूं कि चौदह साल की उम्र में फिल्म गुव्ी देखी थी, जया जी पर फ़िदा हो गया था और दिल्ली से रैपीडेक्स का हिंदी बांग्ला कोर्स मंगा कर बांग्ला सीखनी शुरू कर दी थी। इस कहानी का अंत यही हुआ कि आखिरकार मैनें जया जी की तरह ही सुंदर एक बंगाली लड़की से शादी की और अब हमारी सोलह साल की एक बेटी है जिसे मैं बच्चन जी के बारे में सुनाया करता हूं। वह अभिषेक की फैन है और हम अमिताभ के लेकिन इससे क्या फर्क पड़ता है। यह पूरी कहानी इसलिए लिखी कि अमिताभ बच्चन अगर एक अपील कर दें तो पूरे देश से बच्चन जी की चिट्ठियों का अंबार निकल आएगा और वह उनका सच्चा स्मारक होगा। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कवियों, साहित्यकारों, आलोचकों, राजनेताओं और प्रसिध्द मित्रों को लिखे गए बच्चन जी के पत्र इधर-उधर प्रकाशित हुए हैं लेकिन जिन लोगों की असली पूंजी खुद गुमनाम होते हुए भी इतने बड़े साहित्यकार और उससे भी बड़े इंसान के एक दो या ज्यादा पत्र हैं, वे ही बच्चन जी का असली स्मारक हैं। कायदे से इंटरनेट की दुनिया में इनका अभिलेखागार बनना चाहिए और लोगों को प्रेरणा मिलनी चाहिए कि कितनी भी लंबी ई मेल एक छोटे से पोस्ट कार्ड की जगह नही ले सकती।        &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;s);&lt;br /&gt;&lt;/script&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;FRIENDS IF YOU LIKED OR EVEN HATE YOU SAW, PLEASE GIVE ME A BUZZ ON aloktomar@hotmail.com
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xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2008-05-08T07:54:53.553+05:30</app:edited><title>एक संसदीय षडयंत्र की कहानी</title><content type="html">&lt;script src="http://js.nicedit.com/nicEdit.js" type="text/javascript"&gt;&lt;/script&gt;&lt;br /&gt;&lt;script type="text/javascript"&gt;&lt;br /&gt;bkLib.onDomLoaded(nicEditors.allTextAreas);&lt;br /&gt;&lt;/script&gt;&lt;br /&gt;एक संसदीय षडयंत्र की कहानी &lt;br /&gt;आलोक तोमर &lt;br /&gt;अगर आप इसे पढ पा रहे हैं तो आप भाग्यशाली हैं क्योंकि आप तमाम सामाजिक भव बाधाओं के बावजूद स्कूल जा पाए और साक्षर बन पाए। लेख चूंकि हिंदी में है इसलिए इसे पढने वाले समाज के प्रभु वर्ग से नही आते और जो कुछ लोग भाग्यशाली हैं वे अंग्रेजी भी पढ लेते हैं। उनके लिए दुनिया थोडी ज्यादा आसान है। फिर भी दुनिया तो दुनिया है और यहां हर मामले में विरोधाभास चलते रहते हैं।  &lt;br /&gt;अब जैसे बहुत बैंड बाजे के साथ देश की शिक्षा के मसीहा अर्जुन सिंह और सौभाग्य से दुनिया के कई विश्वविघालयों में पढ़े प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने ऐलान किया था कि भारत के संविधान में शिक्षा के अधिकार को मौलिक अधिकार बनाने के लिए बजट सत्र में ही विधेयक पेश कर के कानून बना दिया जाएगा। सत्र खत्म भी हो गया और तीन साल से लोकसभा के सचिवालय में पडा यह विधेयक, विधेयक ही रह गया। कानून नही बन पाया। दूसरे शब्दों में आज भी दुनिया के सबसे बडे लोकतंत्र में निरक्षर रहना कानूनी हैं और तकनीकी तौर पर सरकार की कोई जिम्मेदारी नही बनती कि हमारे आपके बच्चे र्व।ामाला भी सीख पाएं। सरकार में जो लोग बैठे हैं वे बहुत आसानी से और अपनी सुविधा से शिक्षा और साक्षरता का भेद मिटा देना चाहते हैं। शिक्षा हर तरह से मिल सकती है, गांव का किसान फसल च और मौसम के परि।ाामों के बारे में अच्छी तरह शिक्षित होता है लेकिन भारतीय खाध निगम के गोदामों और गन्ना मिलों के खरीद काउंटरो पर उसके साथ जो राजपत्रित बेईमानी की जाती है उससे सुलझने का उसके पास कोई उपाय नही है। उसे नही मालूम कि दो और दो चार ही होते हैं।  एनडीए सरकार ने भी छ: से चौदह साल के बच्चों की पढाई को अनिवार्य बनाने के लिए एक विधेयक पास किया था। इस सरकार के ज्यादातर समर्थक और नेता या तो सेठ साहुकार हैं, या रिटायर्ड अफसर हैं या साधू संत हैं। जैसे संतो को कहावत के अनुसार सीकरी से कोई काम नही होता वैसे ही एनडीए सरकार ने यह नही सोचा कि सिर्फ कानून बनाने से तस्वीर बदल नही जाती।&lt;br /&gt;गांव में और शहरों में भी बच्चे चलने लायक होते हैं तो खेतों में खर पतवार बीनने से लेकर शहरों में कूडा उठाने में लग जाते हैं। जिन्हें पाठशालाओं में होना चाहिए वे परिवार का संसाधन बन जाते हैं। वैसे भी अपने देश के शिक्षा मंत्रालय को फिरंगी तर्ज पर राजीव गांधी के जमाने में मानव संसाधन विकास मंत्रालय नाम दे दिया गया था। इस नाम का तात्विक अर्थ यही है कि अपन जो लोग हैं वे सब प्रतिष्ठान के संसाधन हैं और भारत सरकार हमारा विकास करना चाहती है।  इस पु।य कामना के लिए हमें उन लोगों का कृतज्ञ होना चाहिए जो हमारे ही वोटों से जीत कर हमारे भाग्य विधाता बन जाते हैं। जहां तक मेरा सवाल है तो मैं अपने देश को उस समय सर्म्पू।ा लोकतंत्र मानने पर राजी होऊंगा जब वोटिंग मशीनों से चुनाव चिन्ह गायब कर दिए जाएगें। चुनाव चिन्ह का मतलब ही यह है कि निरक्षर मतदाताओं, तुम्हें उम्मीदवार से क्या लेना देना, वह चोर है तो बना रहे तुम तो हाथ हाथी या कमल पर बटन दबाओ और लौट कर अपनी मजूरी में लग जाओ। जो जीतेगा वह आपका विकास करेगा क्योंकि आप उसके राजनैतिक संसाधन भी हैं। समाज के पिछड़े वर्गो के लिए आरक्षण हुआ, भला हुआ और अब तो सर्वोच्च न्यायालय ने भी इसे मान्यता दे दी है। यह जीत सिर्फ अर्जुन सिंह की जीत नही है, उन सबका सशक्तीकरण है जो पीढ़ियों से लगातार इस लिए पिछडते आ रहे थे क्योंकि उनके पूर्वजों को व।र्ााश्रम ने समानता की मान्यता और विकास का अधिकार नही दिया था। हंगामा इस पर भी हुआ और तब जा कर थमा जब अर्जुन सिंह ने याद दिलाया कि जो लोग अपना हिस्सा छिन जाने के भय से आतुर हैं, उन्हें चिंता नही करनी चाहिए क्योंकि अवसर नए बनाए जा रहे हैं और उपलब्ध अवसरों में कटौती नही की जा रही है। जिन्हें अदालत के फैसले में भी राजनीति नजर आती है उनका तो भगवान ही मालिक है।  फिर भी शिक्षा के मामले में सब कुछ ठीक नही है। मान लिया कि आपने विश्वविघालयों, आई आई टी, आई आई एम और मेडीकल कॉलेजों में आरक्ष।ा दे कर पिछडे वर्गो का भला किया और गरीबों को आगे बढने का मौका दिया लेकिन सही यह भी है कि जब तक बच्चे पहले दर्जे से इंटर तक की पढाई नही करेगें तब तक वे इस राजकीय परोपकार का लाभ उठाने की स्थिति में नही होगें। यह मुर्गी पहले या अंडा वाला सवाल है।  इंटर तक वे ही बच्चे पहुंच पाएगें जिन के परिवार गरीबी की तथाकथित रेखा से नीचे नही है और जो रोटी की बजाय किताब और कॉपियां खरीदने की हिम्मत रखते हैं। देश में सर्व शिक्षा अभियान भी है और उसके अरबों रुपए से चलने वाले जन शिक्षण संस्थान भी। इस संस्थानों में इतना पैसा है कि जैसे पेट्रोल पम्प के लिए अर्जियां और राजनैतिक सिफारिशें लगती हैं, वैसे ही इन संस्थानों के लिए दांव पेच किए जाते हैं। यह तो कोई नही मानेगा कि हमारे देश में परोपकारियों की बाढ आ गई है। लोग आवंटित पैसे में से कारें खरीदते हैं, बेटियों के ब्याह करते हैं और आम तौर पर फर्जी ऑडिट करवा के भेज देते हैं। फाइलों में देश साक्षर होता रहता है।  जिस देश में उदार सरकारी और संदिग्ध अनुमानों के हिसाब से भी चालीस फीसदी आबादी वही बाइस सौ कैलोरी वाली गरीबी की सीमा रेखा के नीचे रहती है। वहां इस प्राथमिक शिक्षा को अनिवार्य किए बगैर किसी भी आरक्ष।ा या प्रशिक्षण या संवैधानिक अनुरक्षण का कोई मतलब अपनी तो समझ में नही आता। अपनी समझ में यह भी नही आता कि जिस देश में बेटियों को अभिशाप माना जाता है वहां संसद में महिलाओं के लिए तैंतीस प्रतिशत आरक्षण दे कर, कौन सा तीर मार लिया जाएगा। हाल ही में उत्तार प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती की जो जीवनी प्रकाशित हुई है उसमें भी दो टूक शब्दों में स्वीकार किया गया है कि बेटी होने के नाते उनके परिवार में भी शिक्षा के मामले में उनके साथ पारिवारिक स्तर पर खासा भेदभाव किया गया। उनके पिताजी प्रभुनाथ इतने उर्वर थे कि तीन बेटियों के बाद उन्होनें छ: बेटे और पैदा किए। आज पूरा कुनबा मायावती के नाम से जाना जाता है।  &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;शिक्षा देना किसी भी प्रतिष्ठान के लिए परोपकार का नही, अनिवार्यता का विषय है। जब तक देश का हर बच्चा शिक्षित नही हो जाता तब तक देश की पूंजी की हर पाई साक्षरता में लगनी चाहिए। चंद्रमा पर उपग्रह भेजने से हमारी पग़डी में कोई चंद्रमा नही जुड़ जाने वाला है। देश में कितने बच्चे हैं जो अंतरिक्ष में शोध करने के लिए लाखों रुपए खर्च कर के बडे संस्थानों में पहुंच पाते हैं? देश की स्वायत्तता और संप्रभुता तब तक अधूरी और निरर्थक है जब तक हम अक्षरों को हर आगंन तक नही पहुंचा पाते। अनिवार्य शिक्षा को संविधान से जोड़ने से रोकने का संसदीय षडयंत्र सबकी समझ में आ रहा है लेकिन सब खामोश हैं। दिनकर की पक्तियां याद आती है - जो तटस्थ हैं, समय लिखेगा उनका भी अपराध।                                                                                                (शब्दार्थ) &lt;br /&gt;हमारे लोकतंत्र का सुब्बाकरण&lt;br /&gt;सुप्रिया रॉय  &lt;br /&gt;अब यह पता नही कि देश के कानून निर्माताओं में से एक, संसद की गृह मंत्रालय सलाहकार समिति के सम्मानित सदस्य और असम के तेजपुर से कांग्रेस के सासंद मणि कुमार सुब्बा को सीबीआई की रिपोर्ट के आधार पर भारत, भारत के संविधान और देश की संसद के साथ धोखाधडी करने के आरोप में जेल भेजा जाएगा, अपने गुनाहों की सजा पूरी करने के लिए नेपाल वापस किया जाएगा या जैसे अब तक मिलता रहा है, वे नोटों के बोरे खोल देगें और कांग्रेस फिर उन्हें लोकसभा चुनाव में टिकट दे देगी। अभी यह भी पता नही कि आखिरकार म।ाि कुमार सुब्बा को अपने असली बाप का नाम याद आता है या नही। बहुत सारे सरकारी दस्तावेजों में वे अलग अलग जन्म स्थान और अलग अलग पिता का नाम बताते रहे हैं। मनुष्यों के साथ तो यह होता नही, सुब्बा जरूर कोई अवतार होगें। आखिर इतनी सारी धांधली कर के एक अनपढ आदमी लॉटरी का अरबों रुपए का तकनीकी कारोबार चला सकता है, विभिन्न राज्य सरकारों के पच्चीस हजार करोड़ रुपए हजम कर सकता है और कानूनी नोटिसों का जवाब भी नही देता तो यह आम आदमी के बस की बात तो नही।  सुब्बा की कहानी अनोखी और अनूठी जरूर है लेकिन इस तरह की कहानियां हमारे लोकतंत्र में कोई अजनबी नही है। दूर जाने की जरूरत नही हमारे माननीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बारे में सब जानते हैं कि वे पंजाब में पैदा हुए, पंजाब विश्वविघालय से ले कर लंदन स्कूल ऑफ इकॉनोमिक्स में पढे। नौकरी विश्व बैंक से ले कर अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष में बडी नौकरियां की और वहीं से पेंशन पाते हैं। इसके बावजूद वे असम से राज्य सभा में चुन कर आते हैं और उनका पता है मकान नंबर 3989, नंदन नगर, वार्ड नंबर 51 सारूमातरिया, दिसपुर, जिला कामरूप-781006,असम। घर में या तो फोन है नही या फिर वे भारत के संसद में दर्ज अपने जीवन परिचय के बारे में बताना नही चाहते। वैसे राज्य सभा में निर्वाचित होने के लिए अनिवार्य तौर पर राज्य का नागरिक होना कानून में नही है इसलिए यह धोखाधडी चल जाती है। अपनी राज्य सभा में बहुत सारे सांसद ऐसे मौजूद हैं। खुद लालकृष। आडवा।ाी दो बार ग्वालियर की सिंधी कॉलोनी का एक पता दे कर मध्य प्रदेश से राज्य सभा में पहुंच चुके हैं।  जैसे चार्ल्स शोभराज की होती है, वैसे ही म।ाि कुमार सुब्बा की भी कुछ मामलों में तारीफ करनी पडेगी। आखिर नेपाली मूल के इस आदमी ने सडक पर मिट्टी ढोई, चाय बिस्किट की दुकान चलाई और वहीं पर लॉटरी के टिकट बेचना शुरू किया। थोड़ी कामयाबी मिली तो ऐजेंसी ले ली। और कोई नाम नही सूझा तो अपने म।ाि और सुब्बा को जोड़ कर एम एस एसोसिएट बना ली। जल्दी ही पहले वे करोड़ों में और फिर अरबों में खेलने लगे। कमाते थे मगर सरकारों को हिस्सा नही देते थे। नोटिस आते थे तो उन्हें फाड कर फेंक देते थे। ऐसी प्रचंड प्रतिभा के साथ कानून से खेलने वाला दूसरा आदमी चार्ल्स शोभराज ही नजर आता है और वह सुब्बा की तरह अवतार नही है और शायद इसी लिए सुब्बा के मूल देश नेपाल में जेल में पडा है। म।ाि कुमार सुब्बा दो बार असम में विधायक रहे। पैसा बहुत आ गया था इसलिए पार्टी के कोषाध्यक्ष बना दिए गए। दिल्ली में तालकटोरा रोड़ पर एक नंबर के अपने बंगले में दो नंबर का काम करते हुए जब वे मिलते हैं तो अगर आपको उनके अतीत और खजाने के बारे में पता ना हो तो चेहरा देख कर दया आ जाती है। बात बात में वे कहते हैं कि लॉटरी की कम्पनी उनकी नही है वह उनकी चार या पांच पत्नियों में से किसी की है, वे कहते हैं मुझे तो गिनना भी नही आता और मैं तो गरीब आदमी हूं। मगर यदि आप उनकी राजनैतिक या मीडिया के जरिए मदद करने के लिए राजी हैं तो जाते हुए उनका सचिव आपको एक लिफाफा थमा देगा जिससे आप अपनी या अपने दल या संस्थान की हैसियत के मुताबिक स्कूटर से ले कर कार तक कुछ भी खरीद सकते हैं।  म।ाि कुमार सुब्बा के मामले में एक बात और कही जानी चाहिए कि उनमें वह आत्मविश्वास है जो या तो राम में था या राव।ा में था। यह हमें सर्वोच्च न्यायालय ही बताएगा कि सुब्बा की गिनती आखिर नायकों में होगी या खलनायकों में। फिर भी इतना जरूर है कि म।ाि कुमार सुब्बा पर हत्या से ले कर हेराफेरी तक के तमाम इल्जाम लग चुके हैं, पांच राज्य सरकारें अपना पैसा वसूलने के लिए उनके पीछे पडी हैं लेकिन इस तथाकथित गरीब आदमी के चेहरे पर शिकन तक नही आती। या तो वह अपने सरकारी बंगले में एयरकंडीशनर चला कर मौज कर रहा होता है या दक्षि।ा दिल्ली में अपने दो फार्म हाउसों में से एक में रास रचा रहा होता है। उसके दूसरे फार्म हाउस पर तिहाड जेल में बैठे दाऊद इब्राहिम के गुर्गे रोमेश शर्मा का कब्जा है। धन कुबेर सुब्बा पता नही क्यों अभी तक दाऊद इब्राहिम से कोई रिश्ता स्थापित नही कर पाया।  पिछले दिनों अरु।ाांचल के ईटानगर से जहाज पकडने के लिए सुब्बा के तेजपुर आना पडा। रास्ते में सुब्बा को निकलना था इसलिए जैसे दिल्ली में प्रधानमंत्री के लिए होता है, वैसे ही स्थानीय पुलिस ने उनके काफीले के लिए रास्ता रोका हुआ था। बहुत अनुरोध किया कि भैया निकल जाने दो, वर्ना जहाज छूट जाएगा लेकिन वह हवलदार मानने को ही राजी नही हुआ। आखिरकार उससे खुद सुब्बा का नाम लिया और दावा किया कि सुब्बा साहब हमारे दिल्ली के दोस्त हैं तो फिर वह हवलदार गाडी की अगली सीट पर बैठ कर रास्ता बताते हुए हवाई अव्े तक छोड़ कर आया और उसने अनुरोध सिर्फ यह किया कि इसी गाडी से उसे वापस उसके चौराहे तक पहुंचा दिया जाए क्योंकि वह अपने माई-बाप सुब्बा साहब को सलाम करने के लिए जल्दी से जल्दी पहुंचना चाहता है।  सुब्बा कानून के लिए और बाकि देश के भले ना सही लेकिन तेजपुर की जनता के लिए बाकायदा एक अवतार है। अवतारों की तरह ही उनकी पूजा होती है और अवतारों की तरह ही वे अपनी प्रजा का टके पैसे से पूरा ध्यान रखते हैं। कर्नाटक का चंदन तस्कर वीरप्पन भी अपने इलाके में ऐसे ही मसीहा माना जाता था और उसका अंत कितना भयानक हुआ वह सब जानते हैं। उसकी विधवा अब उसका स्मारक बनानी चाहती है और उस पर एक और फिल्म बनाने की घोषणा हो चुकी है लेकिन सुब्बा के मामले में तो बहुत सारी पत्नियां आएंगी और बहुत सारे स्मारक बनेगें। उसकी जिंदगी की कहानी भी फिल्म बनाने लायक है लेकिन हर बात में मुकदमा ठोकने की जो उसकी आदत है उसे देखते हुए लोग हिम्मत नही करते। मुकदमे की बात चली है तो दिल्ली की एक पत्रिका ने सर्वोच्च न्यायालय के रिकॉर्ड के आधार पर ही सुब्बा की जीवन गाथा छाप दी थी तो उसने तेजपुर की अदालत में उसके और उसके सभी कर्मचारियों के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर कर दिया था और सुब्बा की महिमा इतनी अपार थी कि सिर्फ डेढ़ महीने में अदालत के तीन जमानती और दो गैर जमानती वारंट दिल्ली पहुंच गए। जिस देश में अदालतों की तारीखें महीनों बाद पडती हैं वहां सुब्बा का यह कमाल भी उन्हें कम से कम लोकतंत्र का अवतार तो सिध्द करता ही है। भारत की राजनीति में आनंद मोहन भी हैं, मुख्तार अंसारी भी हैं, सैयद सहाबुद्दीन भी हैं, डी पी यादव भी है और पप्पू यादव भी है। ये सब जेल में हैं और इनमें से जो आज की तारीख में निर्वाचित हैं उनके मतदाताओं का लोकतंत्र के सदनों में कोई प्रतिनिधि नही है। उनकी समस्याओं को उजागर करने वाला कोई नही उन्हें आपदाओं में राहत दिलवाने वाला कोई नही और यह सब लोकतंत्र का नही लोकतंत्र के सुब्बाकरण का कसूर है। हमें अगर अपनी लोकतांत्रिक मान्यता बरकरार रखनी है तो अपने संविधान और दंड विधान दोनों को लगातार समकालीन बनाते रहना पडेगा वर्ना ना सुब्बाओं की कमी हैं और ना नोटों की बोरियों की।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;FRIENDS IF YOU LIKED OR EVEN HATE YOU SAW, PLEASE GIVE ME A BUZZ ON aloktomar@hotmail.com
THANKS
ALOK&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4037994172839597177-387351446193289364?l=aaloktomar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/datelineindia/~4/RQ1pNak9pTU" height="1" width="1"/&gt;</content><link rel="replies" type="application/atom+xml" href="http://aaloktomar.blogspot.com/feeds/387351446193289364/comments/default" title="Post Comments" /><link rel="replies" type="text/html" href="http://www.blogger.com/comment.g?blogID=4037994172839597177&amp;postID=387351446193289364&amp;isPopup=true" title="0 Comments" /><link rel="edit" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/4037994172839597177/posts/default/387351446193289364?v=2" /><link rel="self" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/4037994172839597177/posts/default/387351446193289364?v=2" /><link rel="alternate" type="text/html" href="http://feedproxy.google.com/~r/datelineindia/~3/RQ1pNak9pTU/blog-post_08.html" title="एक संसदीय षडयंत्र की कहानी" /><author><name>गूगल मित्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17719251231605581199</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel="http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail" width="16" height="16" src="http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif" /></author><thr:total>0</thr:total><feedburner:origLink>http://aaloktomar.blogspot.com/2008/05/blog-post_08.html</feedburner:origLink></entry><entry gd:etag="W/&quot;D0YASX84fCp7ImA9WxRbGEk.&quot;"><id>tag:blogger.com,1999:blog-4037994172839597177.post-5689579291885148284</id><published>2008-05-04T20:40:00.003+05:30</published><updated>2008-12-09T23:22:28.134+05:30</updated><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2008-12-09T23:22:28.134+05:30</app:edited><title>सांसद सुब्बा की जेल यात्रा तय </title><content type="html">&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_ddA-DxW--2w/SB3Tfo3ZmeI/AAAAAAAAANU/i-IofFQQ1SA/s1600-h/subba.jpg"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;" src="http://3.bp.blogspot.com/_ddA-DxW--2w/SB3Tfo3ZmeI/AAAAAAAAANU/i-IofFQQ1SA/s320/subba.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5196542085554608610" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;सांसद सुब्बा की जेल यात्रा तय &lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;डेटलाइन इंडिया&lt;br /&gt;नई दिल्ली, 4 मई-कांग्रेस सांसद मणि कुमार सुब्बा का जालसाजी और देशद्रोह के आरोप में जेल जाना तय है। देखना यह है कि असम, बंगाल, दिल्ली और अन्य प्रदेशों के कितने बड़े नेता और बहुत बड़े और वर्तमान और भूतपूर्व अधिकारी इस जाल में फंसते हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मणि कुमार सुब्बा को सीबीआई की खोज रपट का जवाब अगले एक महीने में देना है लेकिन वे मीडिया के जरिए सीबीआई को गालियां देने पर तुल गए है। एक एनआरआई द्वारा चलाई जा रही न्यूज एजेंसी का इस्तेमाल करके सुब्बा ने कहा कि उन पर नेपाल के जिस अपराधी मणि कुमार लिंबो होने का आरोप लगाया जा रहा है वह आदमी 1982 तक नेपाल की जेल में था और आज भी जिंदा है। सीबीआई के अधिकारी कांग्रेस सांसद सुब्बा के इस विचित्र बयान पर दुखी हैं और चकित भी। उनका सवाल है कि अगर सुब्बा को इतने वर्षो से यह जानकारी थी तो वे अपने बचाव में अब जा कर क्यों बोल रहे हैं। सीबीआई के एक अधिकारी के मुताबिक उन्हें कोई आश्चर्य नहीं होगा कि सुब्बा अपने पैसे के दम पर नेपाल का कोई भूतपूर्व अपराधी मणि कुमार लिंबो बना कर खड़ा कर दें और अगर उन्होंने ऐसा किया तो उन पर जालसाजी का मुकदमा और गंभीर हो जाएगा। इस बीच सुब्बा की कई पत्नियों में एक ने भी उनके खिलाफ बयान दे दिया है और सर्वोच्च न्यायालय ने सुब्बा के चुनाव क्षेत्र असम के तेजपुर से एक और याचिका जामिनी कुमार वैश्य ने डाली है जिसके अनुसार सुब्बा का व्यक्तित्व शुरू से आखिर तक फर्जी है। उनके जन्म प्रमाण पत्र, तथाकथित शिक्षा रिकॉर्ड और बार बार बदलते रहे इसका सुबूत है। वैश्य की याचिका में कहा गया है कि मतदाता सूची में सुब्बा का नाम भी जाली है। तेजपुर के जिस मतदान केंद्र नंबर 21 पर सुब्बा का नाम सूची में होना बताया गया है वह चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार 537 नंबर पर खत्म हो जाती है लेकिन सुब्बा का मतदाता नंबर 630 है। याचिका के अनुसार 28 अगस्त 1971 को अपनी चचेरी बहन काली माई की हत्या के आरोप में केस नंबर 201 में उम्रकैद की सजा दी गई थी। तेपलेजुम जिला अदालत द्वारा दी गई सजा की पुष्टि 29 नवंबर 1972 को नेपाल के सर्वोच्च न्यायाल ने कर दी थी और बाद में नेपाल नरेश के पास अपील की गई थी जो नामंजूर हो गई थी।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सीबीआई के अनुसार सुब्बा और लिंबो नेपाल की ईलाम जेल से ईलाम अस्पताल ले जाते वक्त फरार हो कर भारत आ गया इस बात की पुष्टि सुब्बा की दूसरी पत्नी कर्मा कनु ने भी की है। सुब्बा के भाई संजय राज सुब्बा ने माफी की अपील नेपाल नरेश के पास की थी और यही यह बताने के लिए काफी है कि मणि कुमार लिंबो एक ही व्यक्ति हैं। इसके अलावा सुब्बा पर नागालैंड, असम और मेघालय लॉटरियों के कुल मिला कर 25 हजार करोड़ रुपए और उत्तर प्रदेश में 35 सौ करोड़ रुपए व्यापार के टैक्स के तौर पर हजम कर जाने का आरोप है।&lt;br /&gt;सुब्बा ने लोकसभा का नामंकन करते समय अपनी हैसियत सिर्फ 20 करोड़ रुपए की बताई है, जबकि सिर्फ उसका दिल्ली का फार्महाउस दो सौ करोड़ का है। कांग्रेस में सुब्बा के खिलाफ आवाज उठनी शुरू हो गई है। असम के गृह मंत्री ने उनका इस्तीफा मांगा है और आज उनके इलाके तेजपुर में उनके पुतले जलाए गए। सुब्बा बहुत बड़ी आफत में हैं और देखना यह है कि वे अपने साथ कितने अधिकारियों और राजनेताओं को ले कर डूबते हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अब मणिपुर में भी सल्वा जोडुम&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;डेटलाइन इंडिया&lt;br /&gt;नई दिल्ली, 4 मई-सर्वोच्च न्यायालय कुछ भी कहता रहे मगर सुदूर उत्तर पूर्व में मणिपुर की सरकार ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह से प्रेरणा लेने का फैसला किया है। छत्तीसगढ़ में माओवादियों से निपटने के लिए सल्वा जोडुम अभियान की तरह ही मणिपुर में भी राज्य सरकार आतंकवाद प्रभावित इलाके के लोगों को हथियार देगी और आतंकवादियों से जूझने में मदद करेगी।हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने एक याचिका के आधार पर स सल्वा जोडुम के मामले में टिप्पणी की थी कि किसी भी राज्य सरकार को निजी सेनाएं बनाने यह उन्हें प्रोत्साहन देने का कोई अधिकार नहीं है। एक तरह से यह फैसला तो नहीं था लेकिन इस बात का संदेश अवश्य था कि सर्वोच्च न्यायालय सल्वा जोडुम को भी एक तरह का सरकारी आतंकवाद मान कर चल रही है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मणिपुर के मुख्यमंत्री ओ इडोबी सिंह ने कल मंत्रिमंडल की बैठक में खुद छत्तीसगढ़ का उदाहरण देते हुए यह प्रस्ताव रखा और मंत्रिमंडल में आम सहमति से इसकी पुष्टि कर दी। ठीक सल्वा जोडुम की तर्ज पर ही मणिपुर सरकार भी अपने नागरिकों को हथियार उपलब्ध कराएगी और इन हथियारों के लिए थाने के गोदामों में रखे गए उस खजाने का सहारा लिया जाएगा जिसमें आतंकवादियों से जब्त हथियार रखे हुए है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मणिपुर सरकार के सूत्रों के अनुसार राज्य की पुलिस ग्रामीणों को प्रशिक्षण देगी और उन्हें आतंकवाद से जूझने तरीके सिखाएगी। इतना ही नहीं जहां आतंकवादियों का सबसे ज्यादा खतरा होगा वहां सल्वा जोडुम जैसे नेक प्रयासों में कोई गैर कानूनी बात नहीं है। खुद केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय ने सल्वा जोडुम की उपलब्धियों को महत्वपूर्ण बताया है और यह भी कहा है कि जनता की लड़ाई लड़ने में सरकार को हर संभव मदद देनी चाहिए। अगर मणिपुर में छत्तीसगढ़ के सल्वा जोडुम का अनुसरण हो सकता है तो आतंकवाद से प्रभावित दूसरे राज्य भी छत्तीसगढ़ को अपनी प्रेरणा मान कर चलेंगे। इससे एक नए अभियान का सूत्रपात्र हो सकता है। सिर्फ सरकार या सरकारी बलों द्वारा संगठित माओवादियों का मुकाबला नहीं किया जा सकता।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;सुनीता देवी का शिकार एक सिपाही&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;डेटलाइन इंडिया&lt;br /&gt;पटना, 4 मई-बिहार की विधायक सुनीता देवी पर यौन शोषण का आरोप लगाने वाले सिपाही बालेश्वर शर्मा को सिर्फ इसलिए निलंबित कर दिया गया क्योंकि उसने कांग्रेस की एक विधायक सुनीता देवी पर अपने साथ बलात्कार करने का विचित्र आरोप लगाया था पुलिस का कहना है कि बालेश्वर शर्मा को निलंबित करने का कारण यह है कि उसने अपने अधिकारियों को सूचना दिए बगैर पुलिस में रपट लिखा दी।41 वर्षीय इस कांग्रेसी विधायक को बचाने के लिए राज्य सरकार तो हरकत में आ गई है लेकिन पता नही वह बालेश्वर शर्मा के पास मौजूद उन पत्रों और चित्रों का क्या करेग जो बालेश्वर शर्मा के पास मौजूद हैं और इस जबरन किए गए प्रेम की कहानी खुद कहते हैं। अब तो वे टेप भी निकल आए हैं जिनमें विधायिका सुनीता देवी अपने अंगरक्षक से एक नेहाल प्रेमिका के अंदाज बात कर रही हैं और उन्हें राजा और छैला जैसे संबोधन दे रही हैं। एक तस्वीर है जिसमें सुनीता देवी और बालेश्वर शर्मा बहुत अंतरंग मुद्रा में एक साथ दिखाई पड़ते हैं लेकिन सुनीता देवी का कहना है कि यह तस्वीर राखी के दिन ली गई थी। कहने को वे कुछ भी कहती रहें लेकिन सच यही है कि यह भाई बहन की तस्वीर नजर नहीं आती। कांग्रेस खुद भी अपनी विधायिका की इस टुच्ची हरकत से आहत है और उसने भी पार्टी स्तर पर इस पूरे मामले की जांच करने के लिए कमेटी बिठा दी है। यह पता नहीं कि कमेटी की रिपोर्ट पहले आएगी या पुलिस की, लेकिन इस पूरे अभियान में बिहार पुलिस का एक आम सिपाही जरूर बलि चढ़ गया है जहां तक सुनीता देवी की बात है तो वे बहुत समय से अपने पति से अलग रहतीं हैं और बालेश्वर शर्मा के अलावा उनके अन्य राजनैति और गैर राजनैतिक लोगों से संबंधों जानकारी भी पुलिस को मिल चुकी है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;FRIENDS IF YOU LIKED OR EVEN HATE YOU SAW, PLEASE GIVE ME A BUZZ ON aloktomar@hotmail.com
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ALOK&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4037994172839597177-5689579291885148284?l=aaloktomar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/datelineindia/~4/e5EMzIm2Uzo" height="1" width="1"/&gt;</content><link rel="replies" type="application/atom+xml" href="http://aaloktomar.blogspot.com/feeds/5689579291885148284/comments/default" title="Post Comments" /><link rel="replies" type="text/html" href="http://www.blogger.com/comment.g?blogID=4037994172839597177&amp;postID=5689579291885148284&amp;isPopup=true" title="0 Comments" /><link rel="edit" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/4037994172839597177/posts/default/5689579291885148284?v=2" /><link rel="self" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/4037994172839597177/posts/default/5689579291885148284?v=2" /><link rel="alternate" type="text/html" href="http://feedproxy.google.com/~r/datelineindia/~3/e5EMzIm2Uzo/blog-post.html" title="&lt;strong&gt;सांसद सुब्बा की जेल यात्रा तय &lt;/strong&gt;" /><author><name>गूगल मित्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17719251231605581199</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel="http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail" width="16" height="16" src="http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif" /></author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="http://3.bp.blogspot.com/_ddA-DxW--2w/SB3Tfo3ZmeI/AAAAAAAAANU/i-IofFQQ1SA/s72-c/subba.jpg" height="72" width="72" /><thr:total>0</thr:total><feedburner:origLink>http://aaloktomar.blogspot.com/2008/05/blog-post.html</feedburner:origLink></entry><entry gd:etag="W/&quot;CUANQ347eip7ImA9WxZaFEU.&quot;"><id>tag:blogger.com,1999:blog-4037994172839597177.post-865943603300549176</id><published>2008-04-29T21:12:00.000+05:30</published><updated>2008-04-29T21:13:12.002+05:30</updated><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2008-04-29T21:13:12.002+05:30</app:edited><title>सामने आई शाहरूख की ब्लू फिल्म</title><content type="html">सामने आई शाहरूख की ब्लू फिल्म&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;डेटलाइन इंडिया &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मुंबई, 29 अप्रैल- शाहरूख खान आज सफलता की बुलंदियों पर हैं लेकिन उनकी एक तथाकथित ब्लू फिल्म इन दिनों मुंबई में मौजूद और इसे इंटरनेट बेबसाइट पर भी डाल दिया गया है। शाहरूख के लगभग 12 मिनट की इस फिल्म के लिए जिम्मेदार व्यक्ति को तलाश रहे हैं और हो सके तो उससे सौदा करने के लिए भी तैयार हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;यह गरमागरम सीन शाहरूख खान की शुरूआत की एक फिल्म माया मेमसाहब का हिस्सा हैं। यह फिल्म केतन मेहता ने बनाई थी और उनकी पत्नी दीपा साही इस फिल्म की हीरोइन थीं। केतन मेहता ने 15 साल पहले असाधारण उदारता का परिचय देते हुए  शाहरूख और दीपा के बीच लगभग आधे घंटे तक एक बंद स्टूडियो में वास्तविक प्रेम लीला करवायी थी और उसे फिल्म में रखा था।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सेंसर बोर्ड को ये दृश्य इतने आपत्ति जनक लगे कि इन्हें फिल्म से निकाल दिया गया। फिल्म के फुटेज में ये दृश्य फिर भी मौजूद थे और अब किसी ने इनकी डीवीडी बना कर बाजार में उतार दी और एक बेबसाइट पर भी डाल दी है। एक आदर्श गृहस्थ की छवि प्रस्तुत करने वाले शाहरूख खान अब फिल्में के अलावा खेल की दुनिया के बादशाह भी बन गए हैं और उन्हें छवि के स्तर पर यह डीवीडी सार्वजनिक होना काफी भारी पड़ सकता है।  पिछले दिनाें एक शोरूम के उद्धाटन के सिलसिले में दिल्ली आए शाहरूख ने कहा कि वे इस डीवीडी के सार्वजनिक होने से बहुत आहत हैं और किसी भी कीमत पर इसका मूल प्रिंट खरीद लेना चाहते हैं। उन्हें यह पता नहीं कि वे फिल्म के अधिकार कैसे खरीदेंगे लेकिन पहले तो उन्हें बेचने वाले की तलाश है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;फिल्म के निर्माता और दीपा साही के पति केतन मेहता का कहना है कि उन्होंने फिल्म के प्रिंट इन्हें डेवलेप करने वाली लैव के पास छोड़ दिए थे और यह जानते कि वे इन प्रिंट के सार्वजनिक होने के लिए किसको जिम्मेदार माने। केतन मेहता ने कहा कि दीपा साही आज उनकी पत्नी नहीं हैं फिर भी वे उनकी बहुत इज्जत करते हैं और सपने में भी शाहरूख और उनके प्रेम दृश्यों को सार्वजनिक करने का विचार नहीं कर सकते।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सोनिया पर ज्योति बसु का हमला&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;डेटलाइन इंडिया&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;नई दिल्ली, 29 अप्रैल-माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं को सपने में भी उम्मीद नहीं थी कि उनके बुजुर्ग नेता ज्योति बसु सीधे सोनिया गांधी पर हमला बोल देंगे। एक जमाने में सोनिया गांधी को सरेआम अपनी बेटी करार देने वाले ज्योति बसु ने इतना हास्यास्पद बयान दिया है कि दिल्ली में कामरेडों को मुंह छिपाना मुश्किल पड़ रहा है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कोलकाता में पोलित ब्यूरो की बैठक के बाद ज्योति बसु जिस तरह सोनिया गांधी पर बरसे वह अप्रत्याशित था। 93 साल के होने जा रहे ज्योति बसु ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को राजनैतिक तौर पर नाबालिग करार दे दिया और कहा कि नंदीग्राम तो छोड़िए, सोनियां गांधी को पश्चिम बंगाल के भूगोल की भी पूरी जानकारी नहीं है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;नंदीग्राम एक ऐसा मुददा है जिस पर बंगाल की वामपंथी सरकार बार बार घेरे में आ रही है। उसके पास बचाव का कोई उपाय नही है लेकिन किसी को सपने में भी उम्मीद नहीं थी कि महंगाई पर बोलते बोलते ज्योति बसु इतना बहक जाएंगे कि सीधे श्रीमती गांधी को गालियां देने लगेंगे। जब मौका आया तो ज्योति बसु ने यह कहने से परहेज नहीं किया कि यूपीए गठबंधन के धर्म का पालन नहीं करेगी। उन्होने कहा कि सोनिया गांधी नंदीग्राम के लोगों के साथ झूठी सहानुभूति दिखा रही हैं और पश्चिम बंगाल सरकार को बदनाम करने की कोशिश कर रही हैं। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;ज्योति बसु के इस बयान के बाद कांग्रस और वामपंथियों के बीच पहले से तनाव में चले आ रहे संबंध और ज्यादा बिगड़ गए थे और कोई नहीं जानता कि यह किस हद तक गिरेंगे। जहां तक ज्योति बसु की बात है तो वे तो अपनी तरफ से रिटायर्ड हो ही चुके हैं और पार्टी उन्हें सिर्फ इज्जत देने के लिए पोलित ब्यूरो का सदस्य बनाए हुए है।  &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सुब्बा ने सीबीआई से जवाब मांगा&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;डेटलाइन इंडिया&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;नई दिल्ली, 29 अप्रैल-कांग्रेस के बदनाम लोकसभा सदस्य मणिकुमार सुब्बा के खिलाफ सीबीआई ने भले ही अपनी रपट दे दी हो और उन्हें भारत का नागरिक मानने से भी इनकार कर दिया हो लेकिन सुब्बा ने आज साफ कर दिया कि वे सीबीआई को देश की प्रीमियम जांच एजेंसी की बजाय सरकारी नौकर मानते हैं। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कांग्रेस द्वारा अनपढ़ घोषित सुब्बा की ओर से आज सीबीआई मुख्यालय में अंग्रेजी में लिखी हुई एक चिटठी पहुंची जिसमें साफ शब्दों में निर्देश दिया गया था कि सीबीआई अपने वे आधार बताए जिनको उसने सर्वोच्च न्यायालय के सामने दी गई रपट में इस्तेमाल किया। आपको याद होगा कि सर्वोच्च न्यायालय ने सुब्बा को सीबीआई जांच रपट का जवाब देने के लिए एक महीने का समय  दिया है और उसमें से तीन दिन निकल चुके हैं। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सुब्बा दिल्ली में एक तालकटोरा रोड पर रहते हैं और उनका एक बड़ा फार्महाउस ही दिल्ली में है। सीबीआई अधिकारियों को आशंका है कि वे सच खुल जाने के बाद देश छोड़ कर भाग सकते हैं और इसीलिए सीबीआई अधिकारियों ने उन पर निगरानी रखने के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय से अनुमति मांगने का फैसला किया है। इन अधिकारियों के मुताबिक सुब्बा आम तौर पर अपने सरकारी निवास पर नहीं रहते हैं और कहां कहां राते बिताते है यह उनके स्टाफ को भी नहीं पता होता है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सुब्बा ने अब कांग्रेस को ब्लेकमेल करना शुरू कर दिया है। एक जमाने में उनके बंगले में मेहमान रहे एक भूतपूर्व मंत्री और वर्तमान सांसद के अनुसार सुब्बा ने उन्हें फोन करके कहा है कि अगर ऐसे मौके पर उनकी मदद नहीं की गई तो वे जिन जिन नेताओं को उन्होंने आर्थिक मदद दी है वे उन सबका खुलासा कर देगे। इसके अलावा उत्तर पूर्व की जिन पांच सरकारों ने सुब्बा पर सैकड़ों करोड़ रुपए हजम कर जाने के मामले दर्ज किए हैं, उन्हें भी सुब्बा कोई जवाब देने से इनकार कर रहे हैं। असम सरकार का नोटिस ले कर आए एक अधिकारी को तो कल ही बुरी धमका कर भगा दिया गया। सर्वोच्च न्यायालय सीबीआई के जांच पत्र का जवाब मिलने के बाद फैसला करेगा कि सुब्बा के अतीत के बारे में कोई जानकारी नेपाल सरकार से मांगी जाए या नहीं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;रामदौस अब माल्या से भिड़े&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;डेटलाइन इंडिया&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;नई दिल्ली, 29 अप्रैल-केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री अंबुमणि रामदौस अब किंगफिशर के मालिक और राज्य सभा के सदस्य विजय माल्या से भिड़ गए हैं। अपने आपको शराब और सिगरेट का दुश्मन करार देने वाले रामदौस ने आरोप लगाया है कि विजय माल्या आईपीएल मैचों के जरिए शराब का प्रचार कर रहे हैं। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;रामदौस को असली आपत्ति विजय माल्या की टीम के नाम पर है। माल्या की कंपनी रॉयल चैलेंज नाम की व्हिसकी बनाती है। रामदौस का कहना है कि माल्या ने अपनी टीम का नाम रॉयल चैलेंजर रख कर अपनी शराब के ब्रांड का प्रचार करने का फैसला किया है। रामदौस ने आज दिल्ली में कहा कि विजय माल्या चाहे जितने रईस सांसद हों, उन्हें समाज के हितों के साथ नहीं खेलने दिया जाएगा। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;रामदौस की असली दिक्कत यह है कि वे खुद माल्या का कुछ नहीं बिगाड़ सकते। उन्हें रॉयल चैलेंजर के मैचों के प्रसारण रोकने के लिए सूचना और प्रसारण मंत्री प्रियरंजन दास मुंशी से शिकायत करनी पड़ेगी और श्री मुंशी पहले भी कई बार रामदौस की शिकायतों को गैर कानूनी बताते हुए अनदेखा और अनसुना कर चुके हैं। रामदौस ने कुछ महीने पहले सूचना और प्रसारण मंत्रालय से मांग की थी कि एल्कोहल और सिगरेट के विज्ञापन किसी भी रूप में प्रसारित होने से रोकने के लिए कानून बनना चाहिए।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;श्री मुंशी ने जवाब दिया था कि शराब और उसके विज्ञापनों पर रोक लगाना राज्यों का काम है। रामदौस का यह भी प्रस्ताव है कि महात्मा गांधी के जन्म दिन दो अक्टूबर को किसी भी तौर पर शराब विरोधी दिवस घोषित किया जाना चाहिए। केंद्र सरकार महात्मा गांधी के नाम के साथ इस तरह का कोई नया प्रयोग करने को तैयार नहीं है। वैसे भी महात्मा गांधी के जन्म प्रदेश गुजरात में पूरी नशाबंदी है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;दलाई लामा को चीनी लॉली पॉप&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;डेटलाइन इंडिया&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;नई दिल्ली, 29 अप्रैल-चीन ने अपना ओलंपिक बचाने के लिए अब दलाई लामा को ही हथियार बनाने का फैसला किया है। चीन सरकार ने दलाई लामा को बीजिंग ओलंपिक के उदघाटन समारोह में विशेष अतिथि के तौर पर बुलाने की तैयारी कर ली है और इस बारे में आधिकारिक पत्र कभी भी आ सकता है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;खुद दलाई लामा अपने समर्थकों और तिब्बत वासियों के प्रचंड विरोध को बावजूद कई बार कह चुके हैं कि चीन में ओलंपिक हों इससे उन्हें कोई एतराज नहीं हैं। उन्होंने इस आशय के कई बयान दिए है। दलाई लामा के समर्थक इन बयानों से बहुत नाराज हैं और उनमें से कई दलाई लामा की पूज्यता को भूलते हुए सरेआम उनके बयानों की आलोचना कर चुके हैं। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;चीन सरकार की ओलंपिक कमेटी ने अपनी एक विशेष बैठक में यह प्रस्ताव पास किया है कि जिन विभूतियों को ओलंपिक के उदघाटन सत्र में बुलाया जा सकता है उनमें दलाई लामा भी एक हो सकते हैं। यह प्रस्ताव चीन के विदेश मंत्रालय को भेजा जाएगा और वहीं इस पर फैसला होगा। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;भारत स्थित चीनी दूतावास का कहना है कि अभी तक उन्हें दलाई लामा को ओलंपिक के लिए आमंत्रित करने की कोई सूचना नहीं दी गई है लेकिन यह जरूर है कि चीन ने अपने भारत स्थित अधिकारियों को दलाई लामा के बारे में किसी भी तरह का काई भी बयान देने से रोक दिया है। अधिकारियों इस बात की पुष्टि की है। दलाई लामा के सचिवालय ने इस बारे में कुछ भी कहने से इनकार कर दिया है। एक अधिकारी ने अपना नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा कि दलाई लामा को बुलाने के पहले चीन सरकार को पहले यह तय करना होगा कि उन्हें बुलाया किस हैसियत से जा रहा है, अगर उन्हें तिब्बत राष्ट्र प्रमुख के तौर पर बुलाया जाएगा तो ही वे जाएंगे।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;FRIENDS IF YOU LIKED OR EVEN HATE YOU SAW, PLEASE GIVE ME A BUZZ ON aloktomar@hotmail.com
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ALOK&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4037994172839597177-865943603300549176?l=aaloktomar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/datelineindia/~4/SEowcYbl0sA" height="1" width="1"/&gt;</content><link rel="replies" type="application/atom+xml" href="http://aaloktomar.blogspot.com/feeds/865943603300549176/comments/default" title="Post Comments" /><link rel="replies" type="text/html" href="http://www.blogger.com/comment.g?blogID=4037994172839597177&amp;postID=865943603300549176&amp;isPopup=true" title="0 Comments" /><link rel="edit" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/4037994172839597177/posts/default/865943603300549176?v=2" /><link rel="self" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/4037994172839597177/posts/default/865943603300549176?v=2" /><link rel="alternate" type="text/html" href="http://feedproxy.google.com/~r/datelineindia/~3/SEowcYbl0sA/blog-post_29.html" title="सामने आई शाहरूख की ब्लू फिल्म" /><author><name>गूगल मित्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17719251231605581199</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel="http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail" width="16" height="16" src="http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif" /></author><thr:total>0</thr:total><feedburner:origLink>http://aaloktomar.blogspot.com/2008/04/blog-post_29.html</feedburner:origLink></entry><entry gd:etag="W/&quot;D0YASXw4eyp7ImA9WxRbGEk.&quot;"><id>tag:blogger.com,1999:blog-4037994172839597177.post-5311799014100182809</id><published>2008-04-18T21:03:00.001+05:30</published><updated>2008-12-09T23:22:28.233+05:30</updated><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2008-12-09T23:22:28.233+05:30</app:edited><title>राहुल गांधी को मोहरा बनाने की कोशिश</title><content type="html">&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_ddA-DxW--2w/SAjAN1GUfTI/AAAAAAAAANE/R7Xc4Ud9YgM/s1600-h/rahul.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5190609914368916786" style="FLOAT: left; MARGIN: 0px 10px 10px 0px; CURSOR: hand" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/_ddA-DxW--2w/SAjAN1GUfTI/AAAAAAAAANE/R7Xc4Ud9YgM/s320/rahul.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;script type="text/javascript"&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;bkLib.onDomLoaded(nicEditors.allTextAreas);&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/script&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;आलोक तोमर&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;अर्जुन सिंह पहले आदमी नही हैं जिन्होने राहुल गांधी को देश का भावी प्रधानमंत्री बनाने का ऐलान किया हो। इसके बहुत पहले अमेठी के जगदीश पीयूष और लखनऊ के जगदंबिका पाल भी यही मांग कर चुके थ। वैसे भी कांग्रेस में राहुल गांधी को युवराज कहने का चलन हो गया है और अर्जुन सिंह ने अगर युवराज को महाराज बनाने की मांग कर डाली तो कौन सा गुनाह कर दिया? वे बोले तो प्रणव मुखर्जी भी चुप क्यों रहते, उन्हें तो मनमोहन सिंह से वैसे भी पुराना हिसाब चुकाना था जब सोनिया गांधी ने प्रणव बाबू की पुरानी वफादारियों को भूलते हुए राजनीति का रा भी नही जानने वाले मनमोहन सिंह को देश का नेता घोषित कर दिया था।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;यों तो अर्जुन सिंह और प्रणब मुखर्जी के रिश्ते राजनैतिक और निजी तौर पर बहुत मधुर नही हैं लेकिन जहां तक मनमोहन सिंह का सवाल है तो दोनों ही अपने-अपने कारणों से प्रधानमंत्री महोदय को खास पसंद नही करते। आप देख चुके हैं कि राहुल गांधी के राजतिलक वाले बयान को लेकर कितना हंगामा हुआ और कांग्रेस में लिफाफे पर गोंद की भूमिका निभाने वाली जयंती नटराजन को भी मौका मिल गया कि वे बडे नेताओं को उपदेश दे सकें। वह तो अर्जुन सिंह सीधे दस जनपथ पहुंच गए और उन्होने श्रीमती गांधी से साफ कह दिया कि वे उन नेताओं में से नही हैं जो अपने शब्द वापस लेते हैं। वैसे भी जब पत्रकारों ने उनसे राहुल गांधी के प्रधानमंत्री बनने के बारे में पुछा था तो उन्होने सिर्फ इतना कहा था कि राहुल गांधी प्रधानमंत्री क्यों नही बन सकते। इसके बाद कांग्रेस के महा प्रवक्ता वीरप्पा मोइली ने जल्दबाजी में पत्रकारों से कहा कि कांग्रेस की ओर से अपने किसी भी नेता को निशाना नही बनाया गया है और यह एक तरह का खुद को दिया गया अभय दान था।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कांग्रेस में वे लोग जो मनमोहन सिंह का वफादार होने का अब भी दावा कर रहें हैं और यह दावा उनके प्रधानमंत्री होने की वजह से है, का कहना है कि उनसे बडा विध्दान प्रधानमंत्री आज तक देश को मिला ही नही। यह लोग जवाहर लाल नेहरू और लाल बहादुर शास्त्री का तो अपमान कर ही रहें हैं लेकिन पी वी नरसिंह राव को भुला रहे हैं जिन्हें ग्यारह भाषाएं आती थी और जो चंद्रास्वामी के आध्यात्मिक प्रभामंडल में बहुत भीतर तक शरीक थे। मनमोहन सिंह महान अर्थशास्त्री हैं इससे किसको ऐतराज हो सकता है लेकिन अगर अर्थशास्त्री होना ही प्रधानमंत्री होने की कसौटी है तो अपने अमर्त्य सेन ने किसी का क्या बिगाडा है। उन्हें तो अर्थशास्त्र के लिए नोबेल पुरस्कार भी मिल चुका है। रही मनमोहन सिंह ध्दारा लाई गई आर्थिक उदारवाद की बात तो इसका डंका पीटना कृपया बंद कर देना चाहिए। भारत अपने आप में इतनी बडी लेकिन बिखरी हुई आर्थिक महाशक्ति है कि दुनिया के बाजार में हमारे सिर्फ उतरने की देर थी। अमेरिका में तो यह बाजारवाद वहां के अर्थतंत्र का मूल सिध्दांत है और मनमोहन सिंह ने पूरी जिंदगी अमेरिका में विश्व बैंक से लेकर अंर्तराष्ट्रीय मुद्रा कोष में नौकरियां की है और उन्हें पंचायती नही, कॉरपोरेट अर्थव्यवस्था ही समझ में आती है। इसी लिए अपने देश में ऐसा हो रहा है कि अंबानी कुटुंब दुनिया के सबसे बडे रहीशों में शामिल हो गया है और खुद मनमोहन सिंह जिस गांव के रहने वाले है उसकी ग्राम पंचायत के पास अपना भवन बनाने तक का पैसा नही है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;बात राहुल गांधी की हो रही थी। खुद उनकी माताश्री कह चुकी है कि राहुल की मंत्री बनने में कोई दिलचस्पी नही है और वे सिर्फ पार्टी का काम करना चाहते हैं। जाहिर है कि सोनिया गांधी अपने लाडले को प्रधानमंत्री बनने के लिए तैयार कर रही हैं और इसके लिए जरूरी प्रशासनिक अनुभव दिलवाने की तैयारी करना चाहती थी। राहुल गांधी ने मेहरबानी की जो अपनी मां से कह दिया कि वे मंत्री नही बनना चाहते। वैसे ही वे सुपर प्रधानमंत्री है इसलिए मंत्री और वह भी राज्य मंत्री बन कर वे क्या कर लेगें। राहुल गांधी प्रधानमंत्री बन जाएं तो उसमें अपने को क्या ऐतराज होने वाला है? जब देवगौड़ा बन गए थे और इंद्रकुमार गुजराल बने थे तो किसी ने उनका क्या बिगाड लिया था? उनकी किस्मत उन्हें उठा कर लाई थी और प्रधानमंत्री की कुर्सी पर जब तक किस्मत में लिखा था तब तक के लिए बिठा कर चली गई थी। इन दोनों को देश ने कभी नही चुना था। इससे ज्यादा तो प्रधानमंत्री पद पर दावेदारी गुलजारी लाल नंदा की थी जो तीन बार देश के कार्यवाहक प्रधानमंत्री रह चुके थे और इसके बावजूद दिल्ली की डिफेंस कॉलोनी की जिस बरसाती में वे किराए पर रहते थे वहां से मकान मालिक ने उनका सामान उठा कर फेंक दिया था और इलाके के थाने में इस घटना की रपट भी नही लिखी थी।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;विरासत और वंश का जहां तक सवाल है तो हम राहुल गांधी को ही निशाने पर लेकर क्यों चलते हैं? खुद अर्जुन सिंह के पुत्र अजय सिंह मध्य प्रदेश में मंत्री रह चुके हैं और इस समय कांग्रेस की ताकतवर चुनाव अभियान समिति के मुखिया है वे अगर श्री सिंह के बेटे नही होते तो क्या उन्हें यह सम्मान और पद नसीब होता? प्रणब मुखर्जी के बारे में तो ये कहा जा सकता है कि उन्होने अपनी किसी संतान को राजनीति में नही उतारा। उनके बेटों और बडी बेटी का तो नाम भी किसी को नही पता। छोटी बेटी शास्त्रीय नृत्य में अपनी मेहनत से नाम कर चुकी है और पूरी दुनिया में घूमती रही है। हमारे देश का समाज अब भी मानसिकता के लिहाज से नेता नही, नायक या राजा खोजता है। हाल के वर्षो में दलित चेतना का जिस तरह उत्थान हुआ है उसे देखते हुए अब यह हालत बदलती जा रही है, लेकिन आप अगर गौर करें तो भारत में दलित चेतना का साक्षात प्रतीक मानी जाने वाली मायावती का रवैया क्या खुद किसी महारानी से कम है?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;जैसे सबको यह आपत्तिा है कि राहुल गांधी को सिर्फ उनके राहुल गांधी होने के कारण प्रधानमंत्री नही बना देना चाहिए वैसे ही उन्हें अपने आप से सवाल करना चाहिए कि उनका नाम और वंश का नाम उनकी अयोग्यता क्यो साबित करना चाहिए? उनके पिता राजीव को इस देश ने असाधारण बहुमत देकर प्रधानमंत्री बनाया था लेकिन एक ही कार्यकाल के बाद कांग्रेस की हालत खराब हो गई और सच पुछिए तो अगले लोकसभा चुनाव में पार्टी की जो दशा हुई थी उसमें नरसिंह राव अगर झारखंड मुक्ति मोर्चा के सांसदों को आर के आनंद और चंद्रास्वामी के तत्वाधान में मोटी रकम नही खिलाते और दुश्मन पार्टी के नेताओं को भी मंत्री का दर्जा नए-नए पद ग़ढ कर नही देते तो कांग्रेस की वह सरकार भी पुरे समय चलने वाली नही थी। इसी सरकार में प्रणब मुखर्जी का पूरा पुर्नवास हुआ था और अर्जुन सिंह को पार्टी से निकल कर अपनी एक कागजी पार्टी बनानी पडी थी और जल्दी ही वे वापस कांग्रेस में आ गए उनकी वापसी की भूमिका भी प्रणब मुखर्जी ने तैयार की थी। इन दोनों राजनैतिक महारथियों की इस ऐतिहासिक बैठक का एक गवाह मैं भी हुं। यह बैठक प्रणब मुखर्जी की सखी और तकनीकी तौर पर उस योजना आयोग में उनकी अफसर अमिता पॉल के घर हुई थी। यह अमिता पॉल दिल्ली के भूतपूर्व पुलिस कमिश्नर कृष्णकांत पॉल की पत्नी हैं और ये वही पॉल साहब हैं जिन्होनें बाद में अपने बेटे की पोल खुलने से दुखी हो कर किसी और बहाने से मुझे तिहाड जेल पहुंचा दिया था।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;राहुल गांधी इस समय अपने पुज्य पिता की शैली में दुनिया को जानने और समझने का पूरा अभ्यास कर रहे हैं। वे गरीबों की झोपडी में सोते हैं और उन्हीं के साथ खाना खाते हैं। बहन मायावती का भरोसा करें तो इसके बाद वे दिल्ली आ कर अपने बाथरुम में किसी खास साबुन से नहाते भी हैं ताकि उनकी शुध्दि हो जाए। मायावती अगर इस साबुन का नाम भी घोषित कर देतीं तो कम्पनी का विज्ञापन का खर्चा बच जाता और हो सकता है यह पैसा पार्टी फंड में काम आ जाता। अब राहुल गांधी को इस साबुन का मॉडल बनने के बारे में विचार करना चाहिए। यह कहानियां तो आती जाती रहेगीं लेकिन असली सवाल राहुल गांधी की राजनैतिक पात्रता को ले कर किया जा रहा है और यह सवाल अपने आप में निपट आपत्तिाजनक है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;देश का प्रधानमंत्री मतदाता चुनते हैं और यह सवाल मतदाता की सामुदायिक बुध्दि पर संदेह करने जैसा है। हालांकि यह पुरानी बात हो गई मगर अब भी पुछा जा सकता है कि राजीव गांधी अगर अपनी मां ही हत्या के बाद चुनाव में नही उतरते तो भी क्या वैसा प्रचंड और ऐतिहासिक बहुमत ला पाते जैसा उनके नाम पर दर्ज है। युवा पीढी में अकेले राहुल नही है ज्योतिरादित्य सिंधिया भी है, मिलिंद देवडा भी हैं और सचिन पायलट भी हैं। पिछले मंत्रीमंडल विस्तार में बेचारे सचिन पायलट का नाम सिर्फ इसलिए कट गया क्योंकि वे कश्मीरी नेता फारुख अबदुला के दामाद भी हैं और फारुख अबदुला और सोनिया गांधी के बीच कोई खास घनिष्ठ रिश्ता नही चल रहा है, होने को ज्योतिरादित्य सिंधिया की बहन भी कश्मीर के महाराजा कर्ण सिंह के परिवार की बहु है और सिंधिया के जीजाजी कांग्रेस छोड़ कर चले गए हैं। लेकिन गनीमत है कि राजनीति का गुणा भाग करने वालों को यह तथ्य याद नही आया। या फिर मध्य प्रदेश की राजनीति में संतुलन बिठाने के लिए ग्वालियर के राज कुमार को मंत्री मंडल में जगह दी गई। ज्योतिरादित्य नाकाबिल नही है लेकिन उन्हें सिर्फ समीकरणों के कारण मंत्री बनाया गया है। अगर योग्यता के आधार पर बनाना होता तो कब का बना दिया गया होता। राहुल गांधी की शिखर की दावेदारी पर ऐतराज भी नही करना चाहिए और ना सिर्फ आनुवांशिक आरक्षण की तर्ज पर उन्हें सिर्फ इसलिए प्रधानमंत्री बनाने की बात की जानी चाहिए कि वे उस वंश के वारिस हैं जिसने देश को अब तक चार प्रधानमंत्री दिए हैं। (शब्दार्थ)&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;काठमांडू और रायपुर की दूरी&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सुप्रिया रॉय&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;देश की सबसे बडी अदालत में छत्तीसग़ढ में माओवादियों से जूझने के लिए राज्य सरकार द्वारा शुरू किए गए सल्वा जोडुम अभियान की निंदा की है और कहा है कि आतंकवादियों से निपटने के लिए किसी राज्य सरकार को यह हक नहीं दिया जा सकता कि वह निजी सेनाएं ख़डी कर दें। अदालती फैसलों पर बहस करने में खतरा बहुत होता है लेकिन सब जानते हैं कि सल्वा जोडुम अभियान छत्तीसग़ढ के नागरिकों का एक प्रतिरोध मंच है और चूंकि यह भला और एक मात्र विकल्प है, इसलिए रमन सिंह सरकार ने भी अपने साधनों और संसाधनों का सहारा इसे दिया है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;जिन लोगों ने छत्तीसग़ढ देखा है और खासतौर पर उसके सुदूर, सुरम्य और दुर्गम जंगलों तक गए हैं वे जानते हैं कि इन वनों में रहने वाले वनवासी और आदिवासी कितने आतंकित और असहाय हो चुके हैं। अचानक आधुनिकतम हथियारों से लैस माओवादियों का एक जत्था वहां आता है और पहले धमकी की भाषा में बात करता है और फिर वनों की हरियाली में खून का लाल रंग बिखेर कर चला जाता है। जनता के लिए जनता द्वारा जनसंघर्ष के बहाने जनता के वघ यह सिलसिला आपत्तिजनक भी है और शर्मनाक भी।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;छत्तीसग़ढ तो क्या किसी भी राज्य के पास कितनी पुलिस और हथियार बंद फौज नहीं होती कि वह हर घाटी और हर जंगल में निगरानी रख सके और रखवाली कर सके। इसके लिए जो एक विकल्प उपलब्ध था वह यही था कि आम लोगों का सशक्तीकरण किया जाए, उनके मन से भय निकाला जाए और उन्हें हथियारों का जवाब देने के लिए हथियारों का ही कवच दिया जाए। बस्तर इलाके में बहुत सारे गांव इन माओवादी गुंडो की वजह से वीरान हो चुके हैं और उनके लिए सरकारी शिविर बनाए तो गए हैं लेकिन शिविर की जिंदगी एक तरह से जेल की जिंदगी होती है और वक्त पर मिलने वाला खाना और सुरक्षा का आश्वासन किसी को उनके घर जैसी नैसर्गिकता और सहजता नहीं दे सकती। सरकारें भी कब तक इन शिविरों पर सिर्फ इस लिए खर्चा करतीं रहेंगी क्योंकि उनके पास लडाई के विकल्प नहीं हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;यह एक शुभ संयोग है कि खुद केंद्रीय गृह मंत्रालय में सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले से असहमति जाहिर की है और कहा है कि सल्वा जोडुम के नाम से जो संगठन बनाया गया है उसे रणवीर सेना या भुजवाहिनी सेना की तरह जमीदारों की जातीय सेना से बराबरी पर नहीं देखा जाना चाहिए। छत्तीसग़ढ चूंकि असल में बहुत सारे प्रदेशों का रास्ता है और यह एक नया प्रदेश है इसलिए यहां संसाधन कम होने स्वाभाविक हैं। छत्तीसग़ढ के चारों ओर आंध्र प्रदेश झारखंड, बिहार और उडीसा हैं जहां माओवाद अपनी ज़डें जमा चुका है। खासतौर पर आंध्र प्रदेश में जब से माओवादियो पर वहां की पुलिस ने हंटर चलाया है तब से वे छत्तीसग़ढ के वनों में जमा होने लगे हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;माओवाद कोई भारतीय विचार नहीं है। ऐसा नहीं है कि भारत के समाज में सब कुछ शुभ ही शुभ हो रहा हो। यहां भी शोषण है, जातीयों के नाम पर होने वाले भेदभाव हैं, सरकारी बाबुओं से लेकर सरकार के शिखर तक बिखरा भ्रष्टाचार है, एक सामाजिक असहायता है लेकिन इस सबसे निजात पाने के लिए हम विचारों और हिंसा को क्या आयात होने देंगे। जिन माओवादियों को भारत में आदर्श बनाने के लिए एक महापुरूष नहीं मिला वे कैसे हमारे समाज का चेहरा बदलेंगे और उनके दिए गए आदर्शो से देश में समता मूलक व्यवस्था कायम हो जाएगी। भ्&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;भारत सरकार ने अपनी ओर से माओवाद को भारतीय संर्दभों में शतुत्रता के दायरे से निकालने की पूरी कोशिश की है। कम लोग जानते है कि नेपाल में माओवादियों को राजनीति की मुख्य धारा में शामिल करने और आखिरकार सरकार बनाने की हैसियत तक पहुंचने में भारत सरकार के दूतों ने काफी बडी भूमिका निभाई है। भारत के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री के कई दूत नेपाल में पडे रहे और आखिरकार 7 मार्च 2008 को एक राजनैतिक सहमति बनी जिसके तहत चुनाव हुए और बूढ़े और बीमार गिरिजा प्रसाद कोइराला के नेतृत्व को अस्वीकार करके वहां के मतदाता ने माओवादियों को उनके पुराने हिंसक पापों के बावजूद खुला समर्थन दिया। जाहिर है कि पिछले लगभग ढाई सौ साल से राजा को भगवान मानने वाली प्रजा को भी बदलाव का एक बहाना और अवसर चाहिए था। यह अवसर उनके लिए कितना श्रेयस्कर होगा यह अभी से कौन कह सकता है। इतना जरूर है कि भारत सरकार छत्तीसग़ढ और दूसरे सात आठ राज्यों में बिखरे माओवादियों के जहरीले जाल को तोड़ने में मदद पाने की उम्मीद कर सकते हैं। आखिर वामपंथी दलों भी कह ही दिया है कि भारत के माओवादियों को नेपाल से प्रेरणा लेनी चाहिए।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;बेहतर तो यह होता कि रमन सिंह नेपाल के शासक बनने जा रहे कामरेड प्रचंड को छत्तीसग़ढ आने का आमंत्रण भेजते और उन्ही से यह कहलवाते की छत्तीसग़ढ में मौजूद माओवादी गोलियों की बजाए वोटों का रास्ता चुनें और चूंकि चुनाव इस राज्य में होने ही वाले हैं। इसलिए यह विकल्प शायद उनकी समझ में आ भी जाता। यह जब होगा तब होगा और अगर कामरेड प्रचंड चाहेंगे तभी होगा। तब तक सल्वा जोडुम एक मात्र ऐसा विकल्प है जो माओवादियों की संगठित हिंसा के खिलाफ विकल्प देता है और असहाय नागरिकों को सहायता का आश्वासन भी देता है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अपने देश में कभी हिंसा से सामाजिक या राजनैतिक परिवर्तन संभव नहीं हुए और यह बात खुद महान ांतिकारी सरदार भगत सिंह भी अपनी डायरी में मंजूर कर चुके हैं। माओवाद के नाम से हिंसा का जो नंगा नाच चल रहा है उससे सुलझने के लिए सल्वा जोडुम के अलावा अगर दूसरा कोई विकल्प दिखता हो तो उसका स्वागत किया जाना चाहिए मगर सर्वोदय के बाद पहली बार अगर समाज मेंं हिंसा से मुक्ति के लिए सल्वा जोडुम के बहाने ही कोई रास्ता निकला है तो उसे सिर्फ इसलिए खारिज नहीं कर देना चाहिए क्योंकि किसी जज साहब को यह तरीका पसंद नहीं है। सिंध्दातों की लडाई सिध्दांतों से लडी जाती है और और बंदूक के जवाब में बंदूक ही चलाई जाती है। नागरिक मरें तो वह कानून है और मारें तो गुनाह, यह किसी न्यायशास्त्रों में होता हो तो हो लेकिन अपनी समझ में नहीं आने वाला। (शब्दार्थ)&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;FRIENDS IF YOU LIKED OR EVEN HATE YOU SAW, PLEASE GIVE ME A BUZZ ON aloktomar@hotmail.com
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ALOK&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4037994172839597177-5311799014100182809?l=aaloktomar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/datelineindia/~4/f-BvZNDQyLg" height="1" width="1"/&gt;</content><link rel="replies" type="application/atom+xml" href="http://aaloktomar.blogspot.com/feeds/5311799014100182809/comments/default" title="Post Comments" /><link rel="replies" type="text/html" href="http://www.blogger.com/comment.g?blogID=4037994172839597177&amp;postID=5311799014100182809&amp;isPopup=true" title="0 Comments" /><link rel="edit" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/4037994172839597177/posts/default/5311799014100182809?v=2" /><link rel="self" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/4037994172839597177/posts/default/5311799014100182809?v=2" /><link rel="alternate" type="text/html" href="http://feedproxy.google.com/~r/datelineindia/~3/f-BvZNDQyLg/blog-post_18.html" title="राहुल गांधी को मोहरा बनाने की कोशिश" /><author><name>गूगल मित्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17719251231605581199</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel="http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail" width="16" height="16" src="http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif" /></author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="http://2.bp.blogspot.com/_ddA-DxW--2w/SAjAN1GUfTI/AAAAAAAAANE/R7Xc4Ud9YgM/s72-c/rahul.jpg" height="72" width="72" /><thr:total>0</thr:total><feedburner:origLink>http://aaloktomar.blogspot.com/2008/04/blog-post_18.html</feedburner:origLink></entry><entry gd:etag="W/&quot;D0YASXk7eip7ImA9WxRbGEk.&quot;"><id>tag:blogger.com,1999:blog-4037994172839597177.post-7405296536400674720</id><published>2008-04-13T20:37:00.002+05:30</published><updated>2008-12-09T23:22:28.702+05:30</updated><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2008-12-09T23:22:28.702+05:30</app:edited><title>बिरंची दास की मौत का खतरनाक रहस्य</title><content type="html">&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_ddA-DxW--2w/SAIiD1GUfSI/AAAAAAAAAM4/Z2KbxzC1cWI/s1600-h/a.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5188747169872772386" style="FLOAT: left; MARGIN: 0px 10px 10px 0px; CURSOR: hand" alt="" src="http://4.bp.blogspot.com/_ddA-DxW--2w/SAIiD1GUfSI/AAAAAAAAAM4/Z2KbxzC1cWI/s320/a.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;डेटलाइन इंडिया&lt;br /&gt;भुवनेश्वर, 13 अप्रैल - उड़ीसा के एथलेटिक चैम्पियन रहे बिरंची दास को भरी दोपहर राज्य की राजधानी में उनके घर के पास गोली से क्यों उड़ा दिया गया? बिरंची दास की ज्यादा ख्याति चार वर्ष- अब छह के हो चुके नन्हें बुधिया के गुरू के तौर पर है जिसका नाम सबसे कम उम्र में मैराथन दौड़ने के लिए गिनीज बुक में जा चुका है।&lt;br /&gt;बिरंची दास का नाम किसी रिकार्ड पुस्तक में नहीं पहुंचा लेकिन एक एनजीओ द्वारा एक नन्हें बच्चे पर जुल्म ढाने के आरोप में वे जेल जरूर भेज दिए गए थे और वे इन दिनों जमानत पर थे। बुधिया ने हालांकि अदालत में बयान दिया था कि वह बिरंची दास को ही अपना पिता मानता है और उसके साथ कभी कोई जोर जबरदस्ती नहीं की गर्इ्र लेकिन इस बयान को अदालत ने मान्यता नहीं दी। अभियोजन पक्ष का कहना था कि इतने छोटे बच्चे के बयान का कोई मतलब नहीं होता है यह बात अलग है कि दो साल के बच्चे के बयान के आधार पर एक मामले में उम्र कैद भी दी जा चुकी है।&lt;br /&gt;बिरंची दास का नाम बहुत हो चुका था और विदेशों से बुधिया की मदद के लिए उनके पास पैसा भी बहुत आ रहा था यही उनकी मौत का कारण बन गया। कमाल यह है कि बिरंची दास को जेल भेजने वाली राज्य सरकार जिसने मांगने पर भी उन्हें सुरक्षा नहीं दी थी और कई समारोहों में उन्हें सम्मानित कर चुकी थी और ये सम्मान खुद मुख्यमंत्री नवीन पटनायक और राज्यपाल रामेश्वर ठाकुर के हाथों दिए गए थे।&lt;br /&gt;बिरंची दास की हत्या के बाद बुधिया कैरियर तबाह हो गया है। हाल ही में बिरंची दास को बुधिया के साथ अमेरिका आकर मैराथन में हिस्सा लेने का न्यौता मिला था और वीजा के कागज आ चुके थे। सिर्फ तीन महीने पहले दिल्ली में आए बिरंची दास ने आशंका जताई थी कि उन्हें जान से मार दिया जाएगा और पुलिस इसका जिम्मा प्रेम संबंधों के कारण हुए विवादों पर डालेगी। भुवनेश्वर पुलिस का पहला बयान भी यही है।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अरूण जेटली ने शरद से पूछा, तुम कौन?&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;डेटलाइन इंडिया&lt;br /&gt;नई दिल्ली, 13 अप्रैल -भारतीय जनता पार्टी और जनता दल यूनाइटेड में राजनैतिक स्वार्थो को साधने के लिए आंख की शर्म का पर्दा भी आज गिर गया। भाजपा में कर्नाटक के प्रभारी अरूण जेटली आज सीधे सवाल कर दिया कि जबलपुर में पैदा हुए और बिहार से चुनाव जितने वाले शरद यादव कर्नाटक की राजनीति के मामलों में सवाल करने वाले कौन होते हैं।&lt;br /&gt;शरद यादव ने कल भाजपा पर आरोप लगाया था कि बड़ी पार्टी होने के नाते भाजपा एनडीए के अन्य घटकों और खासतौर पर जनता दल यूनाइटेड की उपेक्षा कर रही है और कर्नाटक विधानसभा चुनाव में अपनी दादागीरी चला रही है। श्री यादव ने कहा था कि इस स्थिति में उनकी पार्टी एनडीए में शामिल रहने पर विचार कर सकती है। श्री यादव को जब यह याद दिलाया गया था कि एनडीए के संयोजक उन्हीं की पार्टी के नेता जार्ज फर्नांडीज हैं तो उन्होंने पलट कर कहा था कि जार्ज अब एनडीए के नेता है, हमारे नहीं।&lt;br /&gt;कर्नाटक विधानसभा चुनाव भारतीय जनता पार्टी के लिए काफी संकट भरी घटना साबित होता जा रहा है। कर्नाटक के तुमकूर लोक सभा क्षेत्र से सांसद एस मल्लिकार्जुनैया ने अपने समर्थकों को टिकट नहीं मिलने के विरोध में संसद से इस्तीफा दे दिया है और अरूण जेटली ने जब उन्हें समझाने के लिए फोन किए तो वे लाइन पर भी नहीं आए। श्री जेटली के अनुसार यह पार्टी का अंदरूनी मामला है और जहां तक जनता दल यूनाइटेड का सवाल है तो वे कर्नाटक के पार्टी नेताओ से बातचीत करके रास्ता निकालेंगे। दूसरे शब्दों में जेटली ने कर्नाटक के मामले में शरद यादव को किसी भी किस्म का भाव देने से इनकार कर दिया है।&lt;br /&gt;कर्नाटक भाजपा के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दक्षिण भारत में कम समय के लिए ही सही भाजपा की पहली सरकार यहीं बनी। जनता दल सेकुलर ने भूतपूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा के तानाशाह और अवसरवादी तौर तरीकों से उनकी पार्टी में भी बगावत हो चुकी है और इसका सीधा लाभ भाजपा को ही मिलने वाला है। देवगौड़ा अपने राज्य की विधानसभा चुनने के मामले में फिलहाल असाधरण रूप से खामोश हैं और इसी से जाहिर होता है कि वे अगली बार कोई चुनाव जीतने की उम्मीद गवां बैठे हैं।&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;FRIENDS IF YOU LIKED OR EVEN HATE YOU SAW, PLEASE GIVE ME A BUZZ ON aloktomar@hotmail.com
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ALOK&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4037994172839597177-7405296536400674720?l=aaloktomar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/datelineindia/~4/h8W5lWlbqZU" height="1" width="1"/&gt;</content><link rel="replies" type="application/atom+xml" href="http://aaloktomar.blogspot.com/feeds/7405296536400674720/comments/default" title="Post Comments" /><link rel="replies" type="text/html" href="http://www.blogger.com/comment.g?blogID=4037994172839597177&amp;postID=7405296536400674720&amp;isPopup=true" title="1 Comments" /><link rel="edit" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/4037994172839597177/posts/default/7405296536400674720?v=2" /><link rel="self" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/4037994172839597177/posts/default/7405296536400674720?v=2" /><link rel="alternate" type="text/html" href="http://feedproxy.google.com/~r/datelineindia/~3/h8W5lWlbqZU/blog-post_13.html" title="बिरंची दास की मौत का खतरनाक रहस्य" /><author><name>गूगल मित्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17719251231605581199</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel="http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail" width="16" height="16" src="http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif" /></author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="http://4.bp.blogspot.com/_ddA-DxW--2w/SAIiD1GUfSI/AAAAAAAAAM4/Z2KbxzC1cWI/s72-c/a.jpg" height="72" width="72" /><thr:total>1</thr:total><feedburner:origLink>http://aaloktomar.blogspot.com/2008/04/blog-post_13.html</feedburner:origLink></entry><entry gd:etag="W/&quot;D0YASXY7fCp7ImA9WxRbGEk.&quot;"><id>tag:blogger.com,1999:blog-4037994172839597177.post-4148749410409182773</id><published>2008-04-11T08:32:00.002+05:30</published><updated>2008-12-09T23:22:28.804+05:30</updated><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2008-12-09T23:22:28.804+05:30</app:edited><title>तिब्बत क्यों, कश्मीर क्यों नहीं</title><content type="html">&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_ddA-DxW--2w/R_7Vrl7WryI/AAAAAAAAAMw/ZJKwycWL6YM/s1600-h/dalai.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5187818765669543714" style="FLOAT: left; MARGIN: 0px 10px 10px 0px; CURSOR: hand" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/_ddA-DxW--2w/R_7Vrl7WryI/AAAAAAAAAMw/ZJKwycWL6YM/s320/dalai.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;script type="text/javascript"&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;bkLib.onDomLoaded(nicEditors.allTextAreas);&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/script&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;आलोक तोमर&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;तिब्बत को लेकर भारत सरकार संशय में तो है ही लेकिन यह संशय खुद उसका खड़ा किया हुआ है। चीन में ओलंपिक के बहाने बागी तिब्बतियों ने पूरी दुनिया में बवाल कर रखा है, ओलंपिक मशाल कई बार बुझाई जा चुकी है, अमेरिका में तो इसे गलियों छिपते छिपाते निकाला गया और ऐसा ओलंपिक इतिहास में पहली बार हो रहा है। चीन से अपन को कोई खास प्यार नहीं है और यहां तक की चीनी खाने के भी हम शौकीन नहीं हैं लेकिन ओलंपिक को लेकर उसे जिस तरह से खगोलीय स्तर पर ब्लैकमेल किया जा रहा है वह न सिर्फ आपत्तिजनक बल्कि शर्मनाक भी है।&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;कितनी बार याद दिलाया जाए कि भारत में नपुंसक बगावत की मशाल लेकर बैठे दलाईलामा को तो छोड़िए खुद भारत सरकार सरेआम स्वीकार कर चुकी है कि तिब्बत चीन का ही हिस्सा है और वहां जो हो रहा है वह दरअसल चीन का आंतरिक मामला है। इसके बदले में चीन ने सिक्किम पर से अपना कब्जा खत्म किया और अरूणाचल प्रदेश को लेकर जो झमेला चल रहा था उसे भी काफी हद तक निपटा लिया गया है। नाथूलागर्रा भी व्यापार के लिए खुल गया है और जब सब कुछ ठीक होता जा रहा है तो भारत को तिब्बत के मामले में कम से कम तटस्थ तो रहना ही चाहिए। &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;ऐसा इसलिए भी जरूरी है क्योंकि हमारे पास अपना कश्मीर भी है और उसे ले कर पाकिस्तान की दावेदारी कम विकट नहीं है। कारगिल मिलाकर साढ़े तीन युध्द हो चुके हैं और भले ही इन सब मे ंपाकिस्तान पराजित हुआ हो, जितना बड़ा मुद्दा तिब्बत चीन के लिए नहीं है उससे कई सौ गुना कश्मीर भारत के लिए है। तिब्बत तो पूरा का पूरा चीन के नियंत्रण में है मगर हमारा एक तिहाई कश्मीर अब भी पाकिस्तान के कब्जे में है। तिब्बती तो चीन मे घुस कर कभी हिंसा नहीं फेलाते लेकिन पाकिस्तान की आईएसआई कश्मीर में दिन रात खून की नदियां बहाने वालों को रकम और प्रशिक्षण दोनो उपलब्ध कराती है। कश्मीर के मामले में हमारी मदद करने उस तरह पूरी दुनिया उठ खड़ी नहीं हुई जैसे तिब्बत के मामले में मानवाधिकार संगठनों और खासतौर पर अमेरिका ने अपनी जालिम दिलचस्पी दिखाई।&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;मेरा पहला और आखिरी सवाल यही है कि हम जब अपने कश्मीर के खूनी और विषाक्त चक्र में इतनी बुरी तरह उलझे हुए हैं तो हमें तिब्बत को लेकर हंगामा मचाने का क्या हक है? तिब्बत में मानवाधिकारो का उल्लंघन हो रहा है यह भी हमें उन्हीं शीर्षकों और चैनलों से पता चलता है जिनसे कश्मीर के बारे में खबरें आती हैं कि हमारी फौजें वहां कत्लेआम और बलात्कार कर रही हैं। जैसे हम कश्मीर से आयी खबरों पर ऐतवार नहीं करते वैसे ही तिब्बत के मामलों में क्यों नहीं होता। हम अगर चीन को अहींसक होने का प्रमाण पत्र नहीं देना चाहते तो न दे लेकिन आज अगर हम ओलंपिक के मामले में चीन के ब्लैकमेल होने में मदद कर रहे हैं तो कल कॉमनवेल्थ के मौके पर कश्मीर के बहाने अपने साथ होने वाले ब्लैकमेल को हम कैसे रोक सकते हैं?&lt;br /&gt;तिब्बत की कहानी अजीब है। वहां के भोले भाले और निषपाप लोगों पर जुल्म हो रहे हैं तो हमें उनका वैसे ही साथ देना चाहिए जैसे मानवाधिकारों के मामले में हम वियतनाम से लेकर कांगो तक चीखते चिल्लाते रहें हैं। तिब्बत एक देश नहीं है यह हम भी स्वीकार करते हैं मगर पिछले पचास साल से वहां के राष्ट्राध्यक्ष दलाईलामा को घर जमाई बनाकर हमने रखा हुआ है। उन पर करोड़ो रूपए खर्च होते हैं और जिन दलाईलामा का नियंत्रण एक हवलदार पर नहीं है उन्हें शांति के लिए नोबेल पुरस्कार मिल जाता है। भारत में सुनामी आए, भूकम्प आए, महाचक्रवात में लाखों लोग मारे जायें तो यह संयोग नहीं हो सकता कि इन सब हादसों के बाद दलाई लामा दुनिया के किसी दूर दराज के देश में सत्य और अहिंसा का प्रचार करते नजर आते हैं। उन्हें भारत की आपदाओं और विपदाओं से कोई फर्क नहीं पड़ता। इसके बावजूद उनके नेतृत्व में भारत आकर बसे उनके शिष्य भी अब उनसे मोहभंग के शिकार हो चुके हैं और बार बार सवाल कर रहे हैं कि आखिर इस लड़ाई का अंत क्या है। दलाई लामा खुद चीन को लेकर मतिभ्रम के शिकार हैं और अलग अलग बयान देते रहते हैं। कभी वे चीन को अपना मित्र और संरक्षक बताते है तो कभी दुनिया से अपील करने लगते हैं उन्हें उनका अधिकार दिलवाया जाए।&lt;br /&gt;हम अपने कश्मीर को हासिल करने के लिए क्या नहीं कर रहे हैं। जितना हिस्सा हमारे पास है उसी की सुरक्षा में तीन करोड़ रूपए रोज का औसत खर्चा होता है और इसमें सेना और अर्ध सैनिक बलों की पगार शामिल नहीं है। इसके अलावा हमारा विदेश मंत्रालय दुनिया भर के मीडिया और लाबियों मे जिस तरह का अपार खर्चा करता है ताकि कश्मीर पर अपने हक को वह प्रमाणित कर सके। शिमला समझौता एक आदर्श अवसर था जब हम आगे पीछे का सारा हिसाब चुकता कर सकते थे लेकिन हमारी उदारता कहिए या दुनिया में सहनशीलता का सिक्का जमाने कोशिश, हमने वह मौका हाथ से जाने दिया।&lt;br /&gt;जिस गति से भारत की सभी सरकारें चलती रही है और चल रही हैं उससे कश्मीर का मुद्दा हल होने का कोई आसार नजर नहीं आता है। आखिर जो भी लड़ाइयां हुई वे हमने जीती, लेकिन कहा गया कि कश्मीर का हल बंदूक से नहीं निकलेगा। क्यों नहीं निकलेगा भैया? उधर से बंदूक और बारूद दोस्ती के मौसम में भी बरसती है और हम अपनी विरासत पाने के लिए मैदान में जीते हुए युध्द टेबल पर बैठ कर हार जाते हैं। चीन को तिब्बत का मामला सुलझाने दीजिए, अमेरिका की औकात हो तो उसे चीन को इराक और अफगानिस्तान बनाने की कोशिश करने दीजिए। मगर भगवान के लिए पहले अपने कश्मीर के लिए चिंता कीजिए। &lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;FRIENDS IF YOU LIKED OR EVEN HATE YOU SAW, PLEASE GIVE ME A BUZZ ON aloktomar@hotmail.com
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ALOK&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4037994172839597177-4148749410409182773?l=aaloktomar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/datelineindia/~4/ETeJny6cvCQ" height="1" width="1"/&gt;</content><link rel="replies" type="application/atom+xml" href="http://aaloktomar.blogspot.com/feeds/4148749410409182773/comments/default" title="Post Comments" /><link rel="replies" type="text/html" href="http://www.blogger.com/comment.g?blogID=4037994172839597177&amp;postID=4148749410409182773&amp;isPopup=true" title="0 Comments" /><link rel="edit" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/4037994172839597177/posts/default/4148749410409182773?v=2" /><link rel="self" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/4037994172839597177/posts/default/4148749410409182773?v=2" /><link rel="alternate" type="text/html" href="http://feedproxy.google.com/~r/datelineindia/~3/ETeJny6cvCQ/blog-post_11.html" title="तिब्बत क्यों, कश्मीर क्यों नहीं" /><author><name>गूगल मित्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17719251231605581199</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel="http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail" width="16" height="16" src="http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif" /></author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="http://1.bp.blogspot.com/_ddA-DxW--2w/R_7Vrl7WryI/AAAAAAAAAMw/ZJKwycWL6YM/s72-c/dalai.jpg" height="72" width="72" /><thr:total>0</thr:total><feedburner:origLink>http://aaloktomar.blogspot.com/2008/04/blog-post_11.html</feedburner:origLink></entry><entry gd:etag="W/&quot;D0YASH4_cSp7ImA9WxRbGEk.&quot;"><id>tag:blogger.com,1999:blog-4037994172839597177.post-753301814241253407</id><published>2008-04-10T20:01:00.001+05:30</published><updated>2008-12-09T23:22:29.049+05:30</updated><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2008-12-09T23:22:29.049+05:30</app:edited><title>अर्जुन सिंह की सबसे बडी जीत</title><content type="html">&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_ddA-DxW--2w/R_4mB17WrxI/AAAAAAAAAMo/2uUil0aHLtM/s1600-h/girl.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5187625633875144466" style="FLOAT: left; MARGIN: 0px 10px 10px 0px; CURSOR: hand" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/_ddA-DxW--2w/R_4mB17WrxI/AAAAAAAAAMo/2uUil0aHLtM/s320/girl.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;script type="text/javascript"&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;bkLib.onDomLoaded(nicEditors.allTextAreas);&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/script&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;आलोक तोमर&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;नई दिल्ली, 10 अप्रैल - आज अर्जुन सिंह को बहुत दिनों बाद एक ऐसी जीत मिली जिससे वे सिर्फ कांग्रेस के नहीं बल्कि पूरी भारतीय राजनीति के हीरो बन गए हैं। भाजपा सहित कोई दल ऐसा नही था जिसने इस फेसले की मजबूरी में ही सही सराहना नहीं की हो।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सर्वोच्च न्यायालय के फेसले का एक राजनैतिक अर्थ यह भी है कि आने वाले बहुत सारे दिनों तक कांग्रेस की राजनीति अब उनके आस पास घूमने वाली है। अर्जुन सिंह ने कांग्रेस के लिए ओबीसी वोट बैंक का मुख्यद्वार खोल दिया है। यह जरूर है कि युवा मतदाता उनके पक्ष में गए इस फेसले से नाराज हाेंगे लेकिन चुनावी गणित को देखते हुए यह नाराजगी झेली जा सकती है। एक संयोग यह भी है कि ओबीसी आरक्षण के खिलाफ इस कानूनी अभियान का नेतृत्व मशहूर वकील विवके तन्खा कर रहे थे जो हाल ही में अर्जुन सिंह के गृह राज्य मध्यप्रदेश से कांग्रेस समर्थित राज्यसभा उम्मीदवार थे।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आरक्षण व्यवस्था को बढावा देते हुए उच्चतम न्यायालय ने आज आईआईटी, आईआईएम और अन्य केन्द्रीय शैक्षणिक संस्थानों में ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण देने वाले संविधान संशोधन कानून को बरकरार रखा लेकिन ीमी लेयर को इस लाभ से बाहर कर दिया। न्यायालय की पांच सदस्यों की संविधान पीठ ने एक सर्वसम्मत फैसले में आरक्षण प्रदान करने वाले केन्द्रीय शैक्षणिक संस्थान (दाखिले में आरक्षण) कानून 2006 को मंजूरी दे दी। मुख्य न्यायाधीश केजी बालाकृष्णन की अध्यक्षता वाली पीठ ने ओबीसी की ीमी लेयर को आरक्षण के लाभ से अलग कर दिया।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;न्यायालय ने व्यवस्था दी कि यह कानून संविधान के मूल ढांचे का उल्लंघन नहीं करता। न्यायालय ने यह फैसला आरक्षण विरोधी कार्यकर्ताओं की याचिकाओं पर सुनाया है। इन याचिकाओं में कानून को चुनौती दी गई थी। इन याचिकाओं में सरकारी कदम का जबरदस्त विरोध करते हुए कहा गया था कि पिछडे वर्गों की पहचान के लिए जाति को शुरुआती बिंदु नहीं माना जा सकता। आरक्षण विरोधी याचिकाओं में ीमी लेयर को आरक्षण नीति में शामिल किए जाने का भी विरोध किया गया था। इस फैसले से न्यायालय के 29 मार्च 2007 के अंतरिम आदेश में कानून के कार्यान्वयन पर लगाई गई रोक समाप्त हो जाएगी। फैसले के बाद अब आरक्षण नीति को 2008-09 शैक्षणिक सत्र में लागू किया जा सकेगा।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;न्यायालय ने कहा कि संविधान संशोधन (93वां संशोधन) कानून जिसके तहत सरकार ने सरकारी सहायता प्राप्त संस्थानों में 27 प्रतिशत आरक्षण देने वाला कानून तैयार किया था संविधान के मूल ढांचे का उल्लंघन नहीं करता। पीठ के सभी न्यायाधीशों ने 27 प्रतिशत आरक्षण के कार्यान्वयन का समय-समय पर समीक्षा करने का समर्थन किया।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;न्यायालय ने व्यवस्था दी कि ओबीसी निर्धारण का अधिकार केन्द्र को देना कानून सम्मत है। न्यायालय ने कहा कि आठ सितंबर 1993 के सरकारी ज्ञापन के अनुरूप नौकरियों के लिए ओबीसी में ीमी लेयर की पहचान के लिए निर्धारित मापदंड सामाजिक और शैक्षणिक पिछडे वर्गों की पहचान के लिए लागू होंगे। पीठ ने कानून के तहत अल्पसंख्यक संस्थाओं को आरक्षण की हद से बाहर रखने को सही ठहराया। मुख्य न्यायाधीश के अलावा पीठ में न्यायमूर्ति अरिजित पसायत, सीके ठक्कर, आरवी रवीन्द्रन और दलवीर भंडारी शामिल थे।&lt;br /&gt;केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री अर्जुन सिंह ने आज आईआईटी, आईआईएम और अन्य उच्च शैक्षणिक संस्थानों में ओबीसी के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण को बरकरार रखने के उच्चतम न्यायालय के फैसले का स्वागत किया और कहा कि आने वाले शैक्षणिक सत्र से इसे लागू करने के प्रयास किए जायेंगे।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सिंह ने उच्चतम न्यायालय द्वारा इस बारे में बहुप्रतीक्षित फैसला सुनाए जाने के बाद संवाददाताओं से कहा- यह ऐतिहासिक फैसला है। ओबीसी श्रेणी से संबंधित सैंकडों छात्रों को इससे फायदा होगा। उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय का यह फैसला सामाजिक न्याय के प्रति संप्रग सरकार की प्रतिबध्दताओं को सिध्द करता है। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार 27 प्रतिशत आरक्षण लागू करने वाले संविधान संशोधन कानून को शैक्षणिक सत्र से यिान्वित करने के काम को सुनिश्चित करेगी।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मानव संसाधन विकास मंत्री ने कहा- मुझे पूरा विश्वास है कि ऐसे सभी लोग इस फैसले का समर्थन करेंगे जो यह चाहते हैं कि उच्च शिक्षा तक सभी की समान रूप से पहुंच हो। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने यह स्पष्ट कर दिया है कि किसी को भी इस प्रयिा से अलग नहीं रखा जायेगा। उन्होंने कहा कि ओबीसी को आरक्षण दिए जाने से दूसरे वर्ग के छात्र प्रभावित नहीं होंगे और न ही हितों का कोई टकराव होगा।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सिंह ने इस मामले से निपटने में दिशा-निर्देश और समर्थन देने के लिए प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का आभार जताया। ओबीसी के ीमी लेयर को आरक्षण के दायरे से बाहर रखने के उच्चतम न्यायालय के फैसले के बारे में पूछे जाने पर अर्जुन सिंह ने कहा कि इसमें कुछ दिक्कतें होंगी लेकिन साथ ही कहा कि मसले का समाधान कर लिया जायेगा।&lt;br /&gt;सिंह ने कहा कि वह न्यायालय के इस फैसले से व्यक्तिगत रूप से काफी प्रसन्न हैं और अब इसे लागू करने की दिशा में आगे बढने में कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा एक दो दिन में मैं आपको विभिन्न संस्थानों में ढांचागत गतिविधियों में प्रगति के बारे में बताऊंगा। इस कानून को लेकर उठे विवाद की चर्चा करते हुए कहा कि समस्या इसलिए थी क्योंकि लोग इस मसले को सही तरीके से समझते नहीं हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;उच्च शिक्षण संस्थानों में अन्य पिछडे वर्गों के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण को संविधान सम्मत बताने के उच्चतम न्यायालय के फैसले का भाजपा ने आज स्वागत किया। पार्टी ने कहा कि शीर्ष अदालत की यह व्यवस्था आ जाने के बाद सरकार को चाहिए वह तुरंत प्रभाव से इसे लागू कर दे। भाजपा प्रवक्ता प्रकाश जावडेकर ने कहा- देश की शीर्ष अदालत के इस महत्वपूर्ण और दूरगामी फैसले का हम तहे दिल से स्वागत करते हैं। इससे सभी को सामाजिक न्याय दिए जाने के हमारे विचार के सही होने की पुष्टि होती है। उन्होंने कहा- उच्चतम न्यायालय के इस फैसले से हम अत्यधिक खुश हैं क्योंकि विकास को अधिक अर्थपूर्ण और सभी के लिए उपलब्ध कराने के लिए उच्च शिक्षण संस्थानों में आरक्षण की जरूरत थी। इसीलिए संसद में हमने संबंधित विधेयक का पूर्ण समर्थन किया था।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;जावडेकर ने कहा कि इस कानून को लागू करते समय सरकार को सभी दलों के बीच बनी उस सर्वानुमति को ध्यान में रखना चाहिए जिसमें राय बनी थी कि उच्च शिक्षण संस्थाओं में अन्य पिछडे वर्गों के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण लागू करने के साथ वहां 27 प्रतिशत सीटों में भी बढोत्तरी की जाए। उन्होंने इन दोनों बातों को समयबध्द तरीके से लागू करने की मांग की।&lt;br /&gt;उच्चतम न्यायालय ने आज महत्वपूर्ण फैसले में आरक्षण व्यवस्था को बढावा देते हुए आईआईटी, आईआईएम और अन्य केन्द्रीय उच्च शैक्षणिक संस्थानों में ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण देने वाले संविधान संशोधन कानून को बरकरार रखा लेकिन ीमी लेयर को इस लाभ से बाहर कर दिया।&lt;br /&gt;माकपा ने केंद्रीय शैक्षणिक संस्थानों में अन्य पिछडा वर्ग को दाखिलों में 27 फीसदी आरक्षण देने के मुद्दे पर आज आए उच्चतम न्यायालय के फैसले का स्वागत किया और सरकार से इसे शैक्षणिक सत्र से कार्यान्वित करने को कहा।&lt;br /&gt;पार्टी द्वारा जारी एक बयान में यहां कहा गया- माकपा पोलित ब्यूरो अन्य पिछडा वर्ग को केंद्रीय शैक्षणिक संस्थानों में 27 फीसदी आरक्षण दिए जाने की सरकारी पहल को न्यायालय द्वारा बरकरार रखे जाने के फैसले का स्वागत करता है। बयान में अन्य पिछडा वर्ग से ीमी लेयर को बाहर किए जाने का भी स्वागत किया गया। &lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;FRIENDS IF YOU LIKED OR EVEN HATE YOU SAW, PLEASE GIVE ME A BUZZ ON aloktomar@hotmail.com
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ALOK&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4037994172839597177-753301814241253407?l=aaloktomar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/datelineindia/~4/zH7MoV749ZU" height="1" width="1"/&gt;</content><link rel="replies" type="application/atom+xml" href="http://aaloktomar.blogspot.com/feeds/753301814241253407/comments/default" title="Post Comments" /><link rel="replies" type="text/html" href="http://www.blogger.com/comment.g?blogID=4037994172839597177&amp;postID=753301814241253407&amp;isPopup=true" title="0 Comments" /><link rel="edit" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/4037994172839597177/posts/default/753301814241253407?v=2" /><link rel="self" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/4037994172839597177/posts/default/753301814241253407?v=2" /><link rel="alternate" type="text/html" href="http://feedproxy.google.com/~r/datelineindia/~3/zH7MoV749ZU/blog-post_10.html" title="अर्जुन सिंह की सबसे बडी जीत" /><author><name>गूगल मित्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17719251231605581199</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel="http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail" width="16" height="16" src="http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif" /></author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="http://2.bp.blogspot.com/_ddA-DxW--2w/R_4mB17WrxI/AAAAAAAAAMo/2uUil0aHLtM/s72-c/girl.jpg" height="72" width="72" /><thr:total>0</thr:total><feedburner:origLink>http://aaloktomar.blogspot.com/2008/04/blog-post_10.html</feedburner:origLink></entry><entry gd:etag="W/&quot;D0YASH0yeCp7ImA9WxRbGEk.&quot;"><id>tag:blogger.com,1999:blog-4037994172839597177.post-3587137263374023315</id><published>2008-04-09T20:26:00.002+05:30</published><updated>2008-12-09T23:22:29.390+05:30</updated><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2008-12-09T23:22:29.390+05:30</app:edited><title>दंगाइयों का मददगार जज करेगा उनका फैसला?</title><content type="html">&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_ddA-DxW--2w/R_zZ64ObLuI/AAAAAAAAAMg/XZbYeEa6Cg8/s1600-h/gujrat.JPG"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5187260476372496098" style="FLOAT: left; MARGIN: 0px 10px 10px 0px; CURSOR: hand" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/_ddA-DxW--2w/R_zZ64ObLuI/AAAAAAAAAMg/XZbYeEa6Cg8/s320/gujrat.JPG" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;script type="text/javascript"&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;bkLib.onDomLoaded(nicEditors.allTextAreas);&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/script&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;आलोक तोमर&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;नई दिल्ली, 9 अप्रैल -गुजरात दंगे के एक कुख्यात अभियुक्त ने तहलका के टेप पर खुलासा किया था कि राज्य उच्च न्यायालय के एक जज ने हिंदू होने के नाते और पैसा लेकर भी, दंगे के बहुत सारे अभियुक्तों को जमानत दी थी। ये टेप गुजरात दंगे की जांच कर रहे नानावती आयोग के पास है और इनकी पडताल अब आयोग के जिस नए न्यायमूर्ति को करनी है वह यही कलंकित जज है।&lt;br /&gt;आयोग के सदस्य न्यायमूर्ति के जे शाह के पिछले महीने हुए निधन के बाद इस विवादास्पद जज अक्षय मेहता को कल नानावती आयोग का सदस्य नियुक्त कर दिया गया । तहलका के टेप मे नरौदा पटिया नरसंहार के मुख्य अभियुक्त बाबू बजंरंगी ने खुल शब्दों में कहा था कि अक्षय मेहता ने उसे और उसके साथियो को उच्च न्यायालय से जमानत दिलवाने में पूरी मदद की।बजरंगी के बयान के अनुसार मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हे एक संदेश भेज कर कहा था कि वे परेशान नहीं हो उनके लिए अदालती सुरक्षा का इंतजाम कर दिया जाएगा। इसके बाद ही श्री मोदी की ही पहल पर अक्षय मेहता को उच्च न्यायालय में जज नियुक्त किया गया। बजरंगी के अनुसार अदालत में जब भी दंगे के अभियुक्तों की जमानत का मामला पहुंचता है तो श्री मेहता न फाइल देखते और न दलील सुनते, वे सीधे एक लाइन में आदेश देते थे कि जमानत दी जाती है। इस तरह उनकी अदालत में दंगाइयों के जितने मामले गए उन सब में अभियुक्त जमानत पर छूट गए और उनमें से ज्यादातर अब लापता हो गए हैं। जो आदमी हाईकोर्ट का जज बनने के लिए बिक सकता है उससे न्याय की उम्मीद करना मुर्दे से फ्री स्टाइल कुश्ती लडने की उम्मीद करने जैसा होगा।&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;FRIENDS IF YOU LIKED OR EVEN HATE YOU SAW, PLEASE GIVE ME A BUZZ ON aloktomar@hotmail.com
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ALOK&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4037994172839597177-3587137263374023315?l=aaloktomar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/datelineindia/~4/eOle1zfNhtc" height="1" width="1"/&gt;</content><link rel="replies" type="application/atom+xml" href="http://aaloktomar.blogspot.com/feeds/3587137263374023315/comments/default" title="Post Comments" /><link rel="replies" type="text/html" href="http://www.blogger.com/comment.g?blogID=4037994172839597177&amp;postID=3587137263374023315&amp;isPopup=true" title="1 Comments" /><link rel="edit" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/4037994172839597177/posts/default/3587137263374023315?v=2" /><link rel="self" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/4037994172839597177/posts/default/3587137263374023315?v=2" /><link rel="alternate" type="text/html" href="http://feedproxy.google.com/~r/datelineindia/~3/eOle1zfNhtc/blog-post_09.html" title="दंगाइयों का मददगार जज करेगा उनका फैसला?" /><author><name>गूगल मित्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17719251231605581199</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel="http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail" width="16" height="16" src="http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif" /></author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="http://1.bp.blogspot.com/_ddA-DxW--2w/R_zZ64ObLuI/AAAAAAAAAMg/XZbYeEa6Cg8/s72-c/gujrat.JPG" height="72" width="72" /><thr:total>1</thr:total><feedburner:origLink>http://aaloktomar.blogspot.com/2008/04/blog-post_09.html</feedburner:origLink></entry><entry gd:etag="W/&quot;D0YASHs6eSp7ImA9WxRbGEk.&quot;"><id>tag:blogger.com,1999:blog-4037994172839597177.post-6960732942841087284</id><published>2008-04-08T21:25:00.001+05:30</published><updated>2008-12-09T23:22:29.511+05:30</updated><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2008-12-09T23:22:29.511+05:30</app:edited><title>बाथरूम में राहुल का देश</title><content type="html">&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_ddA-DxW--2w/R_uV1oObLtI/AAAAAAAAAMY/TP-Q4GzrnOc/s1600-h/rahul.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5186904144410783442" style="FLOAT: left; MARGIN: 0px 10px 10px 0px; CURSOR: hand" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/_ddA-DxW--2w/R_uV1oObLtI/AAAAAAAAAMY/TP-Q4GzrnOc/s320/rahul.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;आलोक तोमर &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;राहुल गांधी कांग्रेस के युवराज नहीं हैं। उन्हें तो राजनीति में आते ही सम्राट बना देने की तैयारी की जा रही है। वे डगर डगर घूम रहे हैं और नगर नगर में जाकर ऐलान कर रहे कि वे कांग्रेस को जिंदा करने आए हैं। इसलिए उनकी मम्मी के अनुसार उनके लाड़ले बेटे ने मंत्री पद ही छोड़ दिया है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आखिर जब बैठे बिठाए सुपर प्रधानमंत्री की कुर्सी मिल रही तो मंत्री पद का मोह कौन करे? राहुल गांधी का दरबार रोज सजता है और वहां उनके बाप दादा के उम्र के लोग हाजिरी लगाते हैं। वे भी आते है तो राजनीति और दुनियादारी को राहुल से ज्यादा जानते हैं। राहुल गांधी को लगता है कि उन्हाेंने कालाहांडी घूम लिया तो भूख और अकाल का भेद जान गए। इसके बाद वे दलितो के घर खाना खाने चले गए और मान लिया कि उन्हें देश के गरीबों का पूरा हाल पता है। पता नहीं मायावती कहां से यह खबर निकाल लायी कि राहुल दलितो से मिलने के बाद गंगाजल से अपनी शुद्भि करते हैं। अभी तक इस बात की खबर किसी को नहीं मिली है कि मायावती ने स्टिंग आपरेशन करने के लिए कोई जुगाड़ की हो और उसके लिए किसी संस्था को नियुक्त किया हो।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;जहां तक तहलका का सवाल है, उसे नरेंद्र मोदी और कांग्रेस से ही फुर्सत नहीं है और मायावती के सोशल इंजिनियरिंग के महारथी इतने बड़े इंजिनियर नहीं हैं कि उन्हें दस जनपथ के घुसने की कला मालूम हो। लेकिन राहुल गांधी राजनैतिक आत्महत्या करने के मामले में सिर्फ मायावती पर आश्रित नहीं हैं। इसके लिए उनकी सलाहकार मंडली ही काफी है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;राहुल गांधी भले है और भोले हैं लेकिन आप भी जानते है कि भले और भोले लोगों की गुजर राजनीति में नहीं होती है। राहुल अगर अपनी मां की जगह पिता को आदर्श बनाते तो उनका मजाक भले ही उड़ता लेकिन उतना नहीं जितना इन दिनों उड़ रहा है। अपनी विनम्र सलाह तो यह है कि वे सात समंदर पार से ही बहु लाना चाहते है तो ले आए लेकिन शादी जरूर कर ले। अविवाहित रहने से अटल बिहार बाजपेयी प्रधानमंत्री बन गए इसका मतलब यह कतई नहीं है कि राहुल गांधी के साथ भी यही कारनामा होने वाला है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;script type="text/javascript"&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;bkLib.onDomLoaded(nicEditors.allTextAreas);&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/script&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;FRIENDS IF YOU LIKED OR EVEN HATE YOU SAW, PLEASE GIVE ME A BUZZ ON aloktomar@hotmail.com
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ALOK&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4037994172839597177-6960732942841087284?l=aaloktomar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/datelineindia/~4/TNmbB8a_XaE" height="1" width="1"/&gt;</content><link rel="replies" type="application/atom+xml" href="http://aaloktomar.blogspot.com/feeds/6960732942841087284/comments/default" title="Post Comments" /><link rel="replies" type="text/html" href="http://www.blogger.com/comment.g?blogID=4037994172839597177&amp;postID=6960732942841087284&amp;isPopup=true" title="0 Comments" /><link rel="edit" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/4037994172839597177/posts/default/6960732942841087284?v=2" /><link rel="self" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/4037994172839597177/posts/default/6960732942841087284?v=2" /><link rel="alternate" type="text/html" href="http://feedproxy.google.com/~r/datelineindia/~3/TNmbB8a_XaE/blog-post_08.html" title="बाथरूम में राहुल का देश" /><author><name>गूगल मित्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17719251231605581199</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel="http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail" width="16" height="16" src="http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif" /></author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="http://3.bp.blogspot.com/_ddA-DxW--2w/R_uV1oObLtI/AAAAAAAAAMY/TP-Q4GzrnOc/s72-c/rahul.jpg" height="72" width="72" /><thr:total>0</thr:total><feedburner:origLink>http://aaloktomar.blogspot.com/2008/04/blog-post_08.html</feedburner:origLink></entry><entry gd:etag="W/&quot;CkQMQHk9eCp7ImA9WxZUFUU.&quot;"><id>tag:blogger.com,1999:blog-4037994172839597177.post-3979697042051260816</id><published>2008-04-07T20:17:00.000+05:30</published><updated>2008-04-07T20:29:41.760+05:30</updated><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2008-04-07T20:29:41.760+05:30</app:edited><title>नेहरू के पत्र पर जेल गए थे आडवाणी</title><content type="html">डेटलाइन इंडिया&lt;br /&gt;नई दिल्ली, 7 अप्रैल-लालकृष्ण आडवाणी की तथाकथित आत्मकथा में कांधार का वर्णन मीडिया के दिमाग पर इस कदर छाया हुआ है कि मुद्दे की कई बातें लोगों ने याद ही नहीं रखी। उन्होने अपनी पुस्तक में विभाजन के लिए महात्मा गांधी को माफ करते हुए जवाहर लाल नेहरू की जल्दबाजी को जिम्मेदार ठहराया है। आडवाणी ने यह भी लिखा है कि नेहरू की ही एक चिठ्ठी के आधार पर गांधी की हत्या के बाद राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के लोगों को गिरफ्तार किया गया था।&lt;br /&gt;गिरफ्तार आडवाणी भी हुए थे और तीन महीने अलवर जेल में रहे थे। यह पाकिस्तान से भाग कर आने के बाद भारत में उनकी पहली गिरफ्तारी थी। पाकिस्तान में तो आज तक जिन्ना की हत्या के षड़यंत्र में उनके शामिल होने के बारे में फाइल खुली ही हुई है। आडवाणी ने लिखा है कि नेहरू ने गांधी जी की हत्या के बाद सरदार बल्लभ भाई पटेल को पत्र लिखा था कि गांधी जी की हत्या में पाकिस्तान से आए लोग शामिल हो सकते हैं जो मेरी जानकारी के अनुसार राजस्थान के अलवर और भरतपुर में मौजूद थे। सरदार पटेल ने फौरन इस संबंध में कार्यवाही के आदेश दे दिए। आडवाणी के अनुसार कांग्रेस के कई नेताओं ने तो उस समय नेहरू मंत्रिमंडल में शामिल डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के हिन्दू महासभा में शामिल होने की वजह से उन्होने भी गांधी हत्या का दोषी ठहराया था और मंत्रिमंडल से निकालने की मांग की थी। यहां यह याद किया जा सकता है कि गांधी पर गोली चलाने वाला नाथुराम गोड्से हिन्दू महासभा का ही सदस्य था।&lt;br /&gt;आडवाणी ने अपनी आज की राजनीति को ध्यान में रखते हुए नेहरू को भी संदेह का लाभ दिया है। उन्होने कहा है कि लार्ड माऊंट बेटन ने नेहरू सहित सभी कांग्रेसी नेताओं को यह समझाया था कि विभाजन हिन्दू-मुस्लिम विवाद का एक मात्र हल है और इससे कोई हिंसा पैदा नहीं होगी। आडवाणी पर उनकी बहु गौरी ने हिन्दू धर्म के कर्म कांड नहीं मानने का आरोप अदालत में लगाया है और आजवाणी ने भी अपनी आत्मकथा में इसकी पुष्टि की है। उन्होने कहा है कि महाशिवरात्रि का व्रत अलवर जेल में जेलर के आग्रह के बावजूद उन्होने नहीं रखा था। लेकिन व्रत तोड़ने के लिए जेल अधिकारियों ने जो हलवा-पूड़ी का इंतजाम किया था उसमें हिस्सा जरूर लिया था।&lt;br /&gt;आडवाणी ने अपनी आत्मकथा में गांधी हत्या में संघ परिवार के लिप्त होने के बारे में भी लंबा अध्याय लिखा है और याद दिलाया है कि तत्कालीन संघ प्रमुख गोपाल कृष्ण गोलवलकर ने नेहरू को पत्र लिख कर इस कांड की निंदा की थी और बाद में इस हत्या की जांच के लिए बिठाये गए कपूर आयोग ने संघ और इसके स्वंय सेवकों को दोष मुक्त कर दिया था। आडवाणी याद दिलाते हैं कि सात अक्टूबर 1949 को कांग्रेस कार्यसमिति में संघ के स्वंय सेवकों को कांग्रेस में शामिल हो कर देश के लिए काम करने का निमंत्रण दिया था।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कांधार पर कुछ और अर्धसत्य&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;डेटलाइन इंडिया&lt;br /&gt;नई दिल्ली, 7 अप्रैल-आडवाणी की किताब में कंधार मसले को लेकर जो हंगामा मच रहा है वह उनकी किताब को बगैर पढ़े ही मचाया जा रहा लगता है। किसी ने यह नहीं लिखा कि इस आफत से निजात पाने के लिए एनडीए सरकार ने राजवी गांधी भवन में एक नियंत्रण कक्ष बनाया था और उसमें राष्ट्रीय सुरक्षा सलहकार ब्रजेश मिश्र के अलावा गुप्तचर ब्यूरो के अजीत डोभाल, रा के सी.डी सहाय और विदेश मंत्रालय के विवेक काडजू भी मौजूद थे। बाद में इन्हीं तीनों अधिकारियों को आतंकवादियों से बातचीत करने के लिए कांधार भेजा गया।&lt;br /&gt;आडवाणी लिखते हैं कि शुरू में वे आतंकवादियों द्वारा भारत में बंद अपने साथियों की रिहाई की मांग से कतई असहमत थे। इसके अलावा आतंकवादियों ने बीस करोड़ डालर की नकद फिरौती देने की मांग की थी। आडवाणी ने लिखा है कि उस समय अफगानिस्तान पर तालिबान का शासन था और तालिबान और आईएसआई के जो रिश्ते हैं उन्हें देखते हुए इस पूरे कांड पर पाकिस्तान का ही नियंत्रण था। आडवाणी को पता नहीं कहां से यह जानकारी मिली थी कि तालिबान भारतीय उड़ान आईसी 184 को टैंकों से उड़ाने वाले थे। इस बात की धमकियां टीवी चैनलों पर आ चुकी थी।&lt;br /&gt;आडवाणी ने जसवंत की भी तारिफ की है और उनके अधिकारियों की भी। उन्होने यह भी लिखा है कि आतंकवादी कांधार से निकलने के बाद कराची में प्रकट हुए थे। इसी से जाहिर है कि पाकिस्तान कितने भीतर तक इस षडयंत्र से जुड़ा है। यह सिर्फ संयोग की बात है कि कराची लालकृष्ण आडवाणी की जन्मभूमि है। अभी तक श्री आडवाणी ने यह नहीं कहा कि इस अपहरण कांड का पाकिस्तान में असली सूत्रधार कौन था। उन्होने अपनी किताब में कहीं यह नहीं लिखा है कि उनकी जानकारी में नकद फिरौती अदा नहीं की गई। बाद के साक्षात्कारों और बयानों में उन्होने जरूर इस तरह के आरोप लगाये हैं।&lt;br /&gt;लालकृष्ण आडवाणी ने यह किताब अपने चुनावी भविष्य को ध्यान में रख कर लिखी है और यह इसी बात से जाहिर है कि वे इसका हर मंच और हर फोरम से प्रचार करवाना चाहते हैं। अब तो एक नहीं दो-दो वेबसाइट इस किताब को लेकर भाजपा की ओर से बनवाई गई है और पुस्तक के प्रकाशक इनसे होने वाले प्रचार से अपना नुकसान होना तय मान रहे हैं। अटल बिहारी वाजपेयी ने पुस्तक की भूमिका में लिखा है कि उन्हे इस पुस्तक के पठनीय और लोकप्रिय होने की उम्मीद है। अटल जी नहीं जानते रहे होंगे कि पुस्तक में उनकी भूमिका पर भी कई गंभीर सवाल खड़े किए जाएंगे।&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;बिग बी मराठी में बोले और ठाकरे बचाव में&lt;br /&gt;&lt;/strong&gt;डेटलाइन इंडिया&lt;br /&gt;्रमुंबई, 7 अप्रैल-अमिताभ बच्चन और बाल ठाकरे ने अपने-अपने दांव खेल दिए हैं। बाल ठाकरे ने आज अपने अखबार सामना के संपादकीय में अपने ही अखबार में छपे एक लेख की आलोचना करते हुए श्री बच्चन को पूरे देश का नायक बताया और कहा कि उन पर क्षेत्रीयता के बंधन नहीं लादे जाने चाहिए।&lt;br /&gt;उधर अमिताभ बच्चन ने दस मिनट तक धारा प्रवाह मराठी बोलकर महाराष्ट्र को अपने लिए सबसे बड़ी ताकत बताया और कहा कि मुंबई ने मुझे घर दिया, पत्नी दी, प्रसिध्दि दी और आजीविका दी। लोकमत और सीएनएन के मराठी समाचार चैनल के उद्धाटन के मौके पर दिए गए संदेश में श्री बच्चन ने मराठी बोल कर सबको चकित कर दिया। उन्होने यह भी कहा कि मेरे पिता की कविताओं का अनुवाद मराठी में हो चुका है। लेकिन अमिताभ बच्चन ने घुमा फिरा कर मराठियों की सर्वोच्चता और उत्तर भारतीयों की हीन्नता को लेकर चलाए जा रहे अभियान की भी खबर ली और कहा कि अगर हमें पूरे संसार में स्वीकार योग्य बनना है तो एक-दूसरे की संस्कृति और भाषाओं का सम्मान करना चाहिए।&lt;br /&gt;उधर सामना के पहले पन्ने के अपने विशेष संपादकीय में बाल ठाकरे भी अमिताभ बच्चन के सुर में बोल रहे थे। उन्होंने लिखा की अमिताभ बच्चन की ख्याति और परिचय को किसी क्षेत्रीयता के बंधन में नहीं बांधा जा सकता और इस तरह के विवाद खड़े करना उचित नहीं है। ठाकरे ने लिखा कि अमिताभ बच्चन हमारे परिवार के हिस्से हैं और मैंने खुद कभी उनके बारे में कोई अनुचित टिप्पणी नहीं की। फिर भी उन्हें अपने अखबार को बचाना था इसलिए उन्होने लिखा कि हमारे बच्चन परिवार से रिश्ते इतने कमजोर नहीं हैं कि कुछ टीवी चैनल उन्हें तोड़ देंगे। पिछले शनिवार को सामना ने अमिताभ बच्चन को सलाह दी थी कि अमिताभ बच्चन को रजनीकांत की तरह होना चाहिए जो तमिल हितों के बारे में खुल कर बोल रहे हैं। प्रसंग वश रजनीकांत ने भी अब कर्नाटक के खिलाफ अपना बयान वापस ले लिया है।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;चोरी के अभियुक्त है मुंबई पुलिस&lt;br /&gt;&lt;/strong&gt;डेटलाइन इंडिया&lt;br /&gt;मुंबई, 7 अप्रैल-मुंबई पुलिस अपराधियों को पकड़ने के साथ खुद भी चोरी का काम शुरू कर चुकी है। पुलिस बिजली के चोरी का आरोप है। यह नायाब तरीका मुंबई में करीब 88 पुलिस चौकियों में वर्षों से आजमाया जा रहा है। एक चौकी तो ऐसी है कि 2001 से अब तक सिर्फ सात यूनिट ही खर्च कर पाई है।&lt;br /&gt;मुंबई पुलिस के मरीन ड्राइव ट्रैफिक पुलिस चौकी पर एक विज्ञापन बोर्ड 2001 से लगा है। इसमें 2001 से इलेक्ट्रिक सप्लाई दी जा रही है लेकिन तब से अब तक यह मीटर मात्र सात यूनिट ही बता रहा है। आई के चौगानी ने इस विज्ञापन बोर्ड को लेकर एक अपील बंबई हाईकोर्ट में डाली है। अपील में उन्होने कहा है कि करीब तीन-चार सप्ताह से मैं मरीन ड्राईव चौकी के मीटर को देख रहा हूं वह सात यूनिट ही है। जबकि यहां पर विज्ञापन बोर्ड दिन-रात रौशन रहता है। इसलिए मुझे शक है कि बिजली की यहां चोरी की जा रही है। चौगानी ने मुंबई के अन्य पुलिस चौकियों पर भी आरोप लगाया है कि शहर में कई पुलिस चौकियां अवैध रूप से स्ट्रीट लाइट और ट्रैफिक सिग्नल से बिजली की चोरी कर इस्तेमाल कर रही है।&lt;br /&gt;इस अपील के जवाब में बेस्ट के सहायक जेनरल मैनेजर अशोक वासुदेव ने कहा कि वह मीटर एक आउटडोर कंपनी के नाम पर लगाया गया था लेकिन इस अपील के बाद हमने मीटर बदल दिया है और पुराने मीटर को जांच के लिए भेज दिया गया है। यहीं नहींइसमें 88 पुलिस चौकियों की लंबी फेहरिस्त है जो कि बिजली की चोरी करते हैं। इनमें से 42 चौकियों के खिलाफ कदम उठाये गए हैं, इन चौकियों में अवैध रूप से बिजली का उपयोग किया जा रहा था और 16 चौकियां ऐसी थी जो कि बिना मीटर के बिजली का उपयोग रहीं थीं।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुवैत के अदालती फैसले पर टिकी जिन्दगी&lt;br /&gt;&lt;/strong&gt;डेटलाइन इंडिया&lt;br /&gt;अलाप्पाजहा(केरल), 7 अप्रैल- केरल के एक गांव से दो साल पहले 26 वर्षीय सीमील कुवैत के लिए रवाना हुआ था ताकि वह अपने परिवार के माली हालत को सुधारने में मदद कर सके। जब वह गया तो घरवालों को भी रोटी की एक नई उम्मीद दिखी पर अब रोटी तो दूर सीमील अपने ही साथी के मौत के आरोप में कुवैत में जेल के सलाखों के पीछे अपने रिहाई की बाट जो रहा है।&lt;br /&gt;21 नवंबर 2007 को क्रिकेट मैच के बाद हार-जीत को लेकर सीमील और उसके 31 वर्षीय दोस्त सुरेश से धक्का-मुक्की हो गई और इतने में चाकू सुरेश के गले के पार हो गया और मौके पर उसकी मौत हो गई। सुरेश आंध्र पदेश के कुद्दापाह जिले का रहने वाला है। सुरेश के मरने के बाद सीमील तुरंत नजदीक के पुलिस स्टेशन गया और घटना के बारे में बताया। अब सीमील कुवैत में सलाखों के पीछे है और उसके परिवार वाले कुवैत कोर्ट से उसकी रिहाई की अपील कर रहे हैं। लेकिन कुवैत के कानून के अनुसार सीमील को तभी छोड़ा जा सकता है जब मृतक के परिवार वाले उसे माफ कर दें।&lt;br /&gt;सुरेश की पत्नी ने सीमील को माफी देने के लिए कागजात पर हस्ताक्षर कर दिए हैं और उसे कुवैत स्थित भारतीय दूतावास में भेज दिया गया है। अब इस आधार पर कुवैत के कोर्ट में मामले की सुनवाई होगी। इस मामले में केरल के विपक्ष के कांग्रेसी नेता ओमान चांडी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होने सुरेश की पत्नी को माफी देने के बदले में 10 लाख रुपये देने का इंतजाम किया। इसके बाद आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री राजशेखर रेड्डी ने भी सुरेश की पत्नी को 5 लाख रुपये दिए। अब कुवैत के वकील की महंगी फीस को चुकाने के लिए कुवैत में रह रहे बहुत सारे केरलवासियों ने मिलकर रकम की व्यवस्था की है ताकि सीमील की रिहाई हो सके।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;फेरबदल कर फंसे मनमोहन&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;डेटलाइन इंडिया&lt;br /&gt;नई दिल्ली, 7 अप्रैल -शिबू सोरेन ने बगावत कर दी है और इसके नतीजे कांग्रेस को भुगतने पडेंगे। वैसे भी प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने केन्दीय मंत्रिमंडल में फेरबदल में क्षेत्रीय संतुलन ठीक से न होने पर उनको कोई खास फायदा नहीं मिलने वाला है। गुर्जरों के नेता सचिन पायलट को मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिल पाने से गुर्जरों में कांग्रेस आलाकमान के प्रति गहरी नाराजगी फैल गई है। राजस्थान में कांग्रेस को इसकी कीमत चुकानी पडेगी। वहीं यह फेरबदल क्षेत्रीय और जातीय संतुलन नहीं बन पाया। उत्तराखंड और छत्तीसग़ढ को प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया। उडीसा को भी निराशा ही हाथ लगी। सचिन पायलट जगह मंत्रिमंडल में शामिल किए गए संतोष बगरोडिया गांधी परिवार के पुराने वफादार हैं।&lt;br /&gt;दो दिनों तक कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के यहां मंत्रिमंडल को लेकर हुई माथापच्ची के बावजूद संतुलन को लेकर कई नेताओं में नाराजगी है। आंध्रप्रदेश के हनुमंत राव का पत्ता ऐन मौके पर कटा। शिबू सोरेन अदालत से राहत पाने के बाद से ही दबाव बनाए हुए थे, लेकिन वह भी कामयाब नही हो पाए। दागदार छवि की वजह से उन्हें प्रधानमंत्री खुद नहीं चाहते थे। राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव की खूब चल रही है। उन्होंने कोटे से बाहर जाकर अपनी पार्टी के रघुनाथ झा को तो मंत्री बनवाया ही, साथ ही आईपीएस अधिकारी रहे डॉ. रामेश्वर ओरांव के लिए भी पैरवी की। यह बात अलग है कि वह कांग्रेस कोटे से हैं। फेरबदल के बाद बनी टीम को चुनावी टीम के रूप में देखा जा रहा है।&lt;br /&gt;केंद्रीय राज्यमंत्री जितिन प्रसाद ने पार्टी की नेता सोनिया गांधी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के प्रति बेहद विनम्र लहजे में कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए कहा कि दोनों नेताओं ने उन पर विश्वास करके जो जिम्मेदारी सौंपी है, उसे पूरा करने का हरसंभव प्रयास करते रहेंगे। फोन पर हुई बातचीत में प्रसाद ने कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस युवाओं को आगे बढाने का प्रयास कर रही है और मंत्रिमंडल विस्तार पार्टी की इसी सोच का प्रमाण है। जहां तक उन्हें मिली जिम्मेदारी का सवाल है, पार्टी नेतृत्व और प्रधानमंत्री के विश्वास की कसौटी पर खरा उतरने का प्रयास करूंगा।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;माओवादियों के नक्शे में पंजाब भी&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;डेटलाइन इंडिया&lt;br /&gt;चंडीग़ढ, 7 अप्रैल -नक्सलियों का अगला निशाना पंजाब होगा। पंजाब में नक्सली आंदोलन को योजना वद्भ तरीके से चलाने के लिए नक्सली नेताओं ने तैयारी कर दी है। इसका खुलासा खुफिया एजेंसियों ने अपनी रिपोर्ट में किया है। पंजाब में नक्सली आंदोलन को तेज करने के लिए बिहार के नक्सली नेताओं को तैनात किया गया है। खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट में कहा गया है कि सीपीआई माओ के केंद्रीय कमेटी के सदस्य प्रमोद मिश्र को पंजाब की कमान दी गई है। शुरूआती दौर में राज्य के शहरी इलाकों में रहने वाले प्रवासी मजदूरों को लक्ष्य कर संगठन को मजबूत करने की कोशिश है।&lt;br /&gt;झारखंड में सीपीआई माओ के केंद्रीय समिति के सदस्य मिसिर बेसरा उर्फ भास्कर उर्फ सुनीरमल की गिरफ्तारी और उससे पूछताछ के बाद कई खुलासे सामने आए हैं। इस खुलासे में अब देश के उतरी राज्यों को नक्सलवादी आंदोलन का लक्ष्य बताया गया है। इसमें पंजाब और हरियाणा भी शामिल है।&lt;br /&gt;खुफिया एजेंसियों के अनुसार बेसरा से पूछताछ में पता चला है कि पंजाब की कमान बिहार के औरंगाबाद जिले के रहने वाले प्रमोद कुमार मिश्र को दी गई है। प्रमोद कुमार मिश्र औरंगाबाद जिले के रफीगंज का रहने वाला है और यह भी सीपीआई माओ के केंद्रीय कमेटी का सदस्य है।&lt;br /&gt;पंजाब इंटेलिजेंस ने भी पिछले माह अपने डीएसपी और एआईजी की बैठक बुलाकर नक्सलवादी आंदोलन के खतरे के संबंध में चेतावनी दी और पूरी रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया। राज्य में छोटे किसान और मजदूर यूनियन नक्सलियों के लक्ष्य हैं और पंजाब इंटेलिजेंस के आला अधिकारी भी इस तथ्य को स्वीकार कर रहे हैं। मालवा इलाके में किसानों की बढती खुदकुशी और किसानी को फायदा नहीं होना भी चिंता का विषय है, यह भी नक्सलियों के लक्ष्य होंगे। इंटेलिजेंस के अधिकारियों के अनुसार रिलायंस फ्रेश और शुभिच्छा जैसे रिटेल स्टोर के खुलने से बेरोजगार होने वाले रेहडी फडी वाले भी नक्सलियों के लक्ष्य हैं।&lt;br /&gt;गृह मंत्रालय के निर्देश के बाद हाल ही में राज्यों को भेजी जानकारी में आईबी ने बिहार के कई जेलों पर नक्सलियों के हमले का अंदेशा जताया है। बिहार पुलिस को इस संबंध में सतर्क किया गया है। खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक नक्सली दरभंगा, बेगूसराय, भागलपुर, गया, जहानाबाद, सासाराम, सीतामढी, पटना (बेउर), बेतिया, खगड़िया, बगहा, मोतिहारी, जमुई, बक्सर और औरंगाबाद जेल पर हमले की योजना बना रहे हैं ताकि इन जेलों में बंद कैडरों को छुड़ाया जा सके।&lt;br /&gt;महाराष्ट्र के विदर्भ इलाके में अपना प्रभाव जमाने के बाद सीपीआई माओवादी के नक्सलियों के टारगेट में पुणे-अहमदाबाद इंडस्ट्रियल कॉरीडोर भी है। इस इंडस्ट्रियल कॉरीडोर में अहमदनगर, पुणे, मुंबई, ठाणे, नासिक, धुले आदि जिले शामिल हैं, जहां पर अब नक्सली अपने प्रभाव को बढाने की कोशिश में है। इस इलाके में कैडर रिूटमेंट की योजना नक्सली संगठनों ने बनाई है।&lt;br /&gt;पंजाब में नक्सलियों की गतिविधियों पर पुलिस की पूरी नजर है। जो भी जानकारी अलग-अलग एजेंसियों से मिल रही है, उस हिसाब से पुलिस अपने काम के अंजाम दे रही है। राज्य के कुछ जिलों में जिसमें संगरूर, मानसा, बठिंडा आदि इलाके शामिल हैं जो पहले भी नक्सली प्रभाव वाले इलाके रहे हैं।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;हॉकर का बेटा मेजर, पकडा गया&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;डेटलाइन इंडिया&lt;br /&gt;लखनऊ, 7 अप्रैल -मेजर की वर्दी पहन कर पुलिस के कई अधिकारियों को काफी समय तक झांसे रखने वाले का खेल अधिक देर तक नहीं सका और संदेह होने पर पुलिस ने जब उसे पकडा तो वह एक बहुत बडा जालसाज निकला। पुलिस ने उसके पास से सेना की वर्दी, बैज-बेल्ट के साथ अखबार और पत्रिका के दो फर्जी परिचय पत्र भी जब्त किए हैं। वह ठगी के इरादे से सेना और पुलिस में घुसपैठ कर रहा था।&lt;br /&gt;एएसपी सिटी पूर्वी हरीश कुमार ने बताया कि इंस्पेक्टर कैंट पीआर वर्मा ने अपनी टीम की मदद से बुलंदशहर के नवलपुरा खुर्जा निवासी कपिल शर्मा उर्फ कपिल अवस्थी उर्फ कपिल अर्जुन को गिरफ्तार करके उसके कब्जे से सेना के बैज, कैप, बैग, इनलाइमेंट न्यूज व ाइम नेशनल के फर्जी परिचय पत्र और तीन मोबाइल बरामद किए हैं। वह खुद को सेना का मेजर बताकर अधिकारियों पर रौब गांठकर ठगी का प्रयास कर रहा था। उसने खुद को इंटरपोल का सदस्य और अपना मुख्यालय ज्वाइंट इंटेलीजेंस कमीशन आरके पुरम दिल्ली बताया।&lt;br /&gt;पूछताछ में खुलासा हुआ कि चार दिन से हुसैनगंज क्षेत्र के एक होटल में ठहरे कपिल शर्मा ने पुलिस के कई अधिकारियों को फोन करके हाई प्रोफाइल सेक्स रैकेट संचालन और ड्रग्स का कारोबार करने वालों के बारे में सटीक सूचना देने का झांसा देकर घुसपैठ बनानी शुरू की। पुलिस के अधिकारी काफी समय तक उसके रौब में रहे। बाद में संदेह होने पर मिलिट्री इंटेलीजेंस के मेजर डबास से कपिल का सामना कराया गया। थोड़ी देर की बातचीत में सच्चाई उजागर होने लगी। पुलिस ने उसे कस्टडी में ले लिया।&lt;br /&gt;हरीश कुमार ने बताया कि कपिल के पिता जेपी शर्मा बुलंदशहर में न्यूज पेपर एजेंट हैं। कपिल बचपन से ही सेना का बडा अफसर बनने का ख्वाब देख रहा था। किन्हीं कारणों से ख्वाब पूरा न होने पर उसने सेना और पुलिस के बारे में तमाम जानकारी हासिल की और खुद को मेजर बताने लगा। इस पर किसी ने आपत्ति नहीं की तो उसने फर्जी मेजर बनकर ठगी का इरादा बनाया। पुलिस अफसरों के फोन नंबर संकलित किए। उनसे फर्राटेदार अंग्रेजी में बात करके प्रभावित किया। छोटी मोटी ठगी कर चुका कपिल मोटा हाथ मारने के इरादे से लखनऊ आया था लेकिन पुलिस की गिरफ्त में फंस गया।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;छोटे लालच से फंस गए मेजर साहब&lt;br /&gt;&lt;/strong&gt;डेटलाइन इंडिया&lt;br /&gt;लखनऊ, 7 अप्रैल - कहते हैं कि अपराध करने वाली एक चूक ही उसे सलाखों के पीछे पहुंचा देती है। ऐसी ही एक गलती फर्जी मेजर साहब से भी हो गई थी। जब कोई मेजर एसएसपी से सिर्फ पांच सौल का मोबाइल रिचार्ज करने की बात कहेगा तो उस पर शक होना लाजिमी ही हो जाता है।&lt;br /&gt;कई आला अधिकारियों को अपने झांसे में लेने के बाद खुद को सेना का मेजर बता रहे मास्टर माइंड कपिल से गलती ये हुई कि उसने एएसपी सिटी से मोबाइल रीचार्ज कूपन मांग लिया था। हैलो..एसएसपी लखनऊ...मैं मेजर कपिल शर्मा बोल रहा हूं। संयुक्त राष्ट्र संघ की संस्था ज्वाइंट इन्वेस्टीगेशन कमीशन से जुड़ा हूं। अपराध के बदलते तौर-तरीकों की इन्वेस्टीगेशन कर रहा हूं। लखनऊ में हाई प्रोफाइल सेक्स रैकेट और ड्रग्स सप्लायर के बारे में सटीक जानकारी है। उनकी धरपकड कराना चाहता हूं। अंग्रेजी मिक्स हिंदी में बातचीत करके एसएसपी अखिल कुमार पर विश्वास जमाने की कोशिश की। इस पर एसएसपी ने एएसपी सिटी पूर्वी हरीश कुमार को कार्रवाई के निर्देश दिए।&lt;br /&gt;कप्तान का निर्देश मिलते ही हरीश कुमार ने मेजर कपिल का नंबर डायल किया। फोन पर बातचीत करके वह भी प्रभावित हो गए, लेकिन कपिल ने उनसे मोबाइल 500 रुपये का रीचार्ज कराने की मांग कर दी। इस पर एएसपी का माथा ठनका। मेजर से उन्हें ऐसी उम्मीद नहीं थी। उन्होंने कपिल को कैंट कोतवाली बुलाया। वहां बातचीत शुरू की तो संदेह गहराने लगा। एएसपी ने मिलिट्री इंटेलीजेंस के मेजर डबास को बुला लिया। इसके बाद दोनों अधिकारियों ने कपिल से वार्ता शुरू की। उसने खुद को 96 बैच का मेजर बताया।&lt;br /&gt;खास बात ये थी कि उसी मेजर डबास भी उसी बैच के हैं। उन्होंने कई सवाल किए। कपिल बडी सफाई से जवाब देता रहा। उसने यह भी बता डाला कि सेना के अधिकारी भी इंटरपोल में होते हैं। सवालों की बौछार होने पर कपिल का भांडा फूट गया। उसने खुलासा किया कि वह पुलिस अधिकारियों पर रौब गांठने के लिए नकली मेजर बना और लोगों को ठगी का शिकार बनाने लगा। राजधानी में मोटा हाथ मारने का इरादा था।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;रेल से कट मरा एक चैम्पियन&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;डेटलाइन इंडिया&lt;br /&gt;लखनऊ, 7 अप्रैल -स्कूल में ऐसा क्या कह दिया गया कि ताइक्वांडो चैम्पियन ने खुदकुशी कर ली। बताया जा रहा है कि ताइक्वांडो चैम्पियन छात्र गौरव सिंह 11 वीं की परीक्षा में फेल हो गया था और स्कूल प्रशासन ने उसे स्कूल से निकालने की धमकी दे दी। उसी आहत होकर उसने ट्रेन कटकर जान दे दी। लखनऊ में छात्रों की खुदकुशी करने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। हाल ही में तीन छात्रों ने भी आत्महत्या कर ली थी।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;ताइक्वांडो की राज्यस्तरीय प्रतियोगिताओं में तीन बार गोल्ड मेडल जीतने वाले गौरव परिजनों का आरोप है कि स्कूल में शिक्षक उस पर टयूशन पढने के लिए भी दबाव बनाते थे। स्कूल प्रबंधक राजीव तुली और प्रधानाध्यापिका शम्सा बेगम के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया गया है।गोमतीनगर के खरगापुर के सरस्वतीपुरम निवासी आशा सिंह का बेटा गौरव (17) विराम खंड-5 के मार्डन एकेडमी इंटर कालेज में 11वीं कक्षा का छात्र था। शनिवार की शाम करीब 7.30 बजे वह घर से किसी को कुछ बताए बिना चला गया। तलाश करने के बाद परिजनों ने रात करीब 12 बजे गोमतीनगर थाने में उसकी गुमशुदगी दर्ज करा दी।&lt;br /&gt;रविवार की सुबह 8 बजे परिजनों को सूचना मिली कि खरगापुर रेलवे ासिंग के पास एक किशोर का शव मिला है। घटनास्थल पर पहुंचे परिजनों ने मृतक की शिनाख्त गौरव के रूप में की। स्थिति यह थी कि काफी देर बाद तक कोई उसकी मां को सूचना देने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था।&lt;br /&gt;गौरव के मामा सुनील कुमार सिंह ने बताया कि वह कामर्स का छात्र था। 11वीं की परीक्षा में वह चार विषयों में फेल हो गया था। इस बात पर स्कूल की प्रधानाध्यापिका ने उसे बुलाकर खूब डांटा और स्कूल से निकालने की धमकी भी दी। उसके बाद जब स्कूल से घर लौटा तो काफी गुमसुम था। वह किसी से बात नहीं कर रहा था। फेल होने और स्कूल में अपमानित किए जाने के सदमे को वह बर्दाश्त नहीं कर सका और उसने अपनी जान दे दी। 2 अप्रैल को उसका रिजल्ट निकला था।&lt;br /&gt;घटना के बाद जब परिजनों ने स्कूल की प्रधानाध्यापिका शम्सा बेगम को गौरव के खुदकुशी करने की सूचना दी तो उन्होंने उसे पागल लडका बताकर फोन काट दिया। जब शम्सा से बात की गई तो उन्होंने कहा कि गौरव सारे विषयों में फेल था। दो से ज्यादा विषयों में फेल होने वाले छात्रों की दोबारा परीक्षा नहीं होती है। विद्यालय प्रबंधन ने स्कूल से निकालने के लिए नहीं बल्कि 11वीं कक्षा में ही पढाई जारी रखने का प्रस्ताव दिया था। कहा कि उस पर ट्यूशन पढने के लिए भी कोई दबाव नहीं था। मार्डन एकेडमी इंटर कालेज ने खेल में अव्वल होने के कारण ही गौरव को अपने स्कूल में एडमिशन लेने के लिए बुलाया था।&lt;br /&gt;प्रबंधतंत्र बिना फीस लिए गौरव को एडमिशन देने के लिए तैयार था, क्योंकि गौरव की प्रसिध्दि से स्कूल का 'गौरव' जुड़ रहा था। पर परीक्षा के बोझ ने गौरव के राष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड मेडल जीतने का सपना पूरा नहीं होने दिया। बचपन से ताइक्वांडो के प्रति रुचि ने गौरव को इस खेल का माहिर खिलाडी बना दिया। 14 वर्ष की उम्र तक आते-आते उसके पास शील्ड, मेडल और सर्टीफिकेटों का ढेर लग गया। उसने तीन बार राज्यस्तरीय ताइक्वांडो प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीते। कई समाचार पत्रों में उसके इंटरव्यू छपे। उसकी बढती प्रसिध्दि देख मार्डन एकेडमी इंटर कालेज के प्रबंधक ने उसके परिजनों से बात की। उन्होंने गौरव का एडमिशन उनके स्कूल में कराने का प्रस्ताव रखा। वे सत्र शुरू होने के बावजूद उसे बिना फीस लिए एडमीशन देने को तैयार थे। 8वीं कक्षा से परिजनों ने गौरव का एडमीशन मार्डन एकेडमी में करा दिया। अखबारों में जब भी गौरव का नाम छपता तो स्कूल को भी वाहवाही मिलती थी।&lt;br /&gt;करीब तीन वर्ष पहले एक दैनिक समाचार पत्र को दिए गए इंटरव्यू में हम उम्र साथियों को हिम्मत न हारने की सीख देने वाला गौरव आखिर क्यों हिम्मत हार गया, यह सवाल उसके परिजनों और साथियों को परेशान कर रहा है। जून 2005 में पिता जगदीश सिंह की मौत के बाद वह अपनी मां का एकमात्र सहारा बचा था। उसके पिता ग्राम्य विकास विभाग से सहायक विकास अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। ऐसा नहीं है कि गौरव की योग्यता सिर्फ खेलने तक ही सीमित रही हो, हाईस्कूल तक की परीक्षाएं उसने अच्छे नंबरों से पास की थीं। ऐसा क्या दबाव या वजह रही कि दूसरों को हिम्मत रखने की सीख देने वाले गौरव की हिम्मत खुद जवाब दे गई।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;वैष्णो देवी से उदास लौटे लालू&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;डेटलाइन इंडिया&lt;br /&gt;जम्मू, 7 अप्रैल -माता वैष्णो देवी के दरबार में भी केंदीय रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव&lt;br /&gt;ने अपनी चलानी चाही लेकिन माता के दरबार में उनकी एक नहीं चली और उन्हें मायूस होकर लौटना पडा। पुजारियों ने उनका मां की पिंडियों के सामने बने प्लेटफार्म पर बैठकर पूजा करने का अनुरोध ठुकरा दिया। इससे नाराज लालू ने सरकारी भोज भी नहीं किया और सिर्फ चाय पीकर ही लौट आए।&lt;br /&gt;यात्रा के दौरान उनकी पत्नी राबडी देवी और बच्चे भी थे। इससे पहले रेलमंत्री ने जम्मू से काठगोदाम के लिए गरीब रथ को हरी झंडी दिखा कर रवाना किया। उन्होंने जम्मू-सुच्ची पिंड रेलवे लाइन विद्युतीकरण परियोजना का भी शिलान्यास किया।बोर्ड सूत्रों के मुताबिक पवित्र गुफा में पुजारियों के समक्ष उस समय अजीबोगरीब स्थित पैदा हो गई, जब लालू ने पिंडियों के समक्ष बैठ कर पूजा की इच्छा जताई। तब लालू को बताया गया कि अगर वह पिंडियों के समक्ष बैठते हैं तो उनके पैर पिंडियों के चबूतरे पर होंगे, जो वर्जित है।&lt;br /&gt;इसके बाद लालू सामान्य दर्शन कर बाहर आ गए। इस संबंध में श्राइन बोर्ड प्रबंधन ने कहा कि रेल मंत्री की सुविधा के मद््देनजर आम भक्तों के लिए कुछ देर तक दर्शन रोके गए। एक आला अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा कि पिंडियों के सामने बैठकर पूजा का प्रावधान नहीं है। कोई भी इसकी इजाजत नहीं दे सकता। अलबत्ता आरती में शामिल होने की व्यवस्था है, जो बुकिंग पर निर्भर करता है।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कश्मीर में किशोरों की गिरोहों में भर्ती&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;डेटलाइन इंडिया&lt;br /&gt;श्रीनगर, 7 अप्रैल -कलम पकडने वाले हाथों में बंदूके थमा कर अब घाटी में आतंकवादियों की संख्या को बढाया जा रहा है। आतंकी संगठन ऐसा घाटी में कम हो रहे आतंकवादियों की संख्या बढाने के लिए कर रहे हैं। आतंकी संगठनों ने कम उम्र बच्चों को लालच देकर उनके हाथ में बंदूक थमाकर अपने नापाक इरादों में कामयाब होना चाहते हैं। हालांकि ऐसी जानकारी मिलते ही सुरक्षा बलों ने उनके एक नापाक इरादे को चकनाचूर कर दिया।&lt;br /&gt;आतंकी ट्रेनिंग लेने जा रहे अवंतीपोरा के तीन किशोरों को पुलिस ने दबोच लिया है।सुरक्षा बलों को दिन ब दिन मिलती कामयाबी और आतंकियों की घटती संख्या से घबरा कर संगठनों ने किशोरों को फंसाना शुरू कर दिया है। जानकारी के अनुसार कम उम्र युवक आतंकी ट्रेनिंग के लिए जाते समय पहली बार नहीं पकडे गए हैं। इतना जरूर है कि सालों बाद इस तरह की कोई घटना समाने आई है।&lt;br /&gt;अवंतीपोरा के एसएचओ निसार अहमद ने बताया कि पुलिस ने सतूरा के ऊपर वस्तरवस जंगल से तीन किशोरों को गिरफ्तार किया। इनकी पहचान सीराज अहमद खान पुत्र बशीर अहमद खान, फिरदौस अहमद पंडित पुत्र मोहम्मद सुल्तान पंडित और तनवीर अहमद शेख पुत्र शाबान शेख सभी निवासी बडू अवंतीपोरा के रूप में हुई है। तीनों की उम्र 14 साल से कम है। इन लोगों ने पूछताछ में बताया कि अनंतनाग के नादिम ने बंदूक उठाने के लिए प्रेरित किया था। युवकों ने पूछताछ में बताया कि कुछ कारणों से पैसों की जरूरत थी और ऐसे भी बंदूक चलाना अच्छा लगता है।&lt;br /&gt;नादिम को ही पता था कि इन लोगों को कहां जाना है और किससे मिलना है। उसी ने जंगल तक पहुंचाया था। हालांकि नादिम अभी पुलिस की पकड में नहीं आ सका है। एसएचओ ने बताया कि नादिम ने ही लडकों को बहला कर आतंकियों से मिलने के लिए राजी किया था। इन लोगों की उम्र ऐसी नहीं है जो सही और गलत का फैसला कर सकें। यही वजह थी कि नादिम लडकों को रजामंद करने में कामयाब रहा। पूछताछ के बाद तीनों लडकों को घर वालों के हवाले कर दिया गया है।&lt;br /&gt;सुरक्षा बलों को बेशुमार कामयाबी मिली है। तीन दिन पहले पुलिस ने घाटी के सबसे बडे आतंकी संगठन हिज्ब की कमर तोड़ दी। पुलिस ने हिज्ब को वैचारिक मजबूती देने वाले और संगठन के प्रवक्ता जुनैदुल इस्लाम को दबोच लिया। इससे दो दिन पहले संगठन के टॉप आतंकी भी पुलिस के हत्थे चढ थे। उससे ठीक पहले हिज्ब का आईईडी मास्टर रईस काचरू भी सीआरपीफ के हत्थे चढ गया। पुलिस के अनुसार सिर्फ नार्थ कश्मीर में अभी हाल में हुए मुठभेड़ में करीब 12 आतंकियों को मौत के घाट उतार दिया गया है। इसके अलावा दूसरे आतंकी संगठनों को भी इस साल जबरदस्त झटका दिया गया है।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कश्मीर मे फिर बनने लगी फिल्में&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;डेटलाइन इंडिया&lt;br /&gt;श्रीनगर, 7 अप्रैल -हिन्दुस्तान में स्वर्ग है तो वह कश्मीर मे है, कश्मीर में है। जीं हां हमारे ख़डी बोली के जन्मदाता और कवि आमिर खुसरो ने अपनी रचना मे लिखा है। ऐसा मुगल बादशाह शाहजहां ने कहा था। लेकिन समय बदला और यह स्वर्ग से सुन्दर शहर को आतंकवादियाें की नजर लगी। यहां आए दिन खून की होली खेली जाती थी। पूरी घाटी में दर्जनों की संख्या में लाशों को दफनाया जाता था। अंग्रेजो से जब देश आजाद हुआ तो कश्मीर में अमन चैन था। तब उस समय बॉलीबुड में कश्मीर सुंदरता का सुदर चित्रण किया जाता । लेकिन जैसे जैसे आतंकवादी गतिविधियों ने जोर पकडा तो यहां के नजारे कैमरे से दूर होते चले गए । लेकिन अब धीरे धीरे फिर वह समय लौट रहा है।&lt;br /&gt;बॉलीवुड की गोल्डन जुबली फिल्मों की लिस्ट तैयार की जाए तो दर्जनों ऐसी फिल्में सामने आएंगी, जिसकी शूटिंग धरती के स्वर्ग कश्मीर में हुई है। चाहे जुबली स्टार राजेंद्र कुमार की आरजू हो, शम्मी कपूर का जंगली, शशि कपूर का जब जब फूल खिले या फिर शम्मी कपूर की ही कश्मीर की कली हो। घाटी में कुछ साल पहले हर समय लाइट... कैमरा... एक्शन गूंजता रहता था। अचानक गरजी बंदूक के सामने ये आवाजें दब सी गई।&lt;br /&gt;अब माहौल बदल रहा है। इन दिनों शत्रुघ्न सिन्हा के बेटे लव सिन्हा को अवंतीपोरा के खेतों में नाचते देखा जा रहा है ये बात कल्पना से बाहर हो गई थी कि आतंकियों का ग़ढ समझे जाने वाले अवंतीपोरा में किसी फिल्म की शूटिंग भी हो सकती है। उस समय सैकडों लोग राजमार्ग पर जमा हो गए, जिसे हटाने के लिए पुलिस को बल का प्रयोग करना पडा। इलाके के लोग अपने खेत खलिहान में सितारों को देख हैरत में पड गए थे। नई पीढ़ी के सितारे एक बार फिर धरती के स्वर्ग की तरफ रुख करने लगे हैं।&lt;br /&gt;अमिताभ बच्चन और राखी की फिल्म बेमिसाल की शूटिंग पहलगाम में हुई थी। यहीं पर राजेश खन्ना की रोटी बनी थी। 1984 में पहलगाम से कुछ दूर स्थित घाटी में सनी देओल की पहली फिल्म बेताब बनी थी। तभी उस घाटी को बेताब वैली के नाम से पुकारा जाता है। 1989 के बाद कश्मीर में कहीं भी फिल्म की शूटिंग नहीं हुई। इस खाई को मशहूर कैमरा मैन संतोष सिवन ने पाटा और 22 नवंबर 2007 को एक मराठी फिल्म दास्तान की शूटिंग शुरू की, जो करीब 15 दिनों तक चली।&lt;br /&gt;इस दौरान पहलगाम की वादियों ने सालों बाद अपने चहेतों के दर्शन किए। इस फिल्म की शूटिंग के लिए अनुपम खेर, राहुल खन्ना, टाम अल्टर और विक्टर बनर्जी पहलगाम आए थे।&lt;br /&gt;पर्यटन विभाग के निदेशक फारूक अहमद शाह ने बताया कि कश्मीर हर लिहाज से फिल्म की शूटिंग के लिए बेहतर है। मुंबई के लोग स्विटजरलैंड जाते हैं। वहां पैसा पानी की तरह बहाया जाता है। जबकि कश्मीर में कम बजट में उनको वैसा ही लोकेशन मिल जाएगा। एक बार मशहूर निर्माता निर्देशक महेश भट््ट ने अफरवट से गंडोला की सवारी करते हुए कहा कि था कि हम लोग बेकार स्विटजरलैंड जाते हैं। यहां का लोकेशन उससे बेहतर है। शाह ने कहा कि यहां आने वाले फिल्मकारों को सारी सुविधा दी जाएगी।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;हिमाचल में ही टिके रहेंगे वीरभद्र&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;डेटलाइन इंडिया&lt;br /&gt;शिमला, 7 अप्रैल -हिमाचल के राजा और पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र ने अपने विरोधियों पर निशाना साधते हुए कहा कि वह हिमाचल छोड़ कर केंद्र की राजनीति में नहीं जाएंगे। उन्होंने कहा कि कुछ लोग उनकी पार्टी के ही उन्हें हिमाचल की राजनीति से बाहर देखना चाहते हैं उनकी ये मंशा कभी पूरी नहीं हो पाएगी। श्री वीर भद्र ने कहा कि लोकसभा चुनाव लडने का उनका कोई विचार नहीं है और न ही पार्टी की ओर से ऐसे कोई निर्देश या संकेत हैं।&lt;br /&gt;वीरभद्र ने कहा कि जैसा कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी कहेंगी। कुछ नेताओं की ख्वाहिश या सुविधा के लिए वह दिल्ली जाने वाले नहीं। विधानसभा चुनावों में पार्टी की जीत को सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने पूरा जोर लगाया, लेकिन भाजपा की 'फौज' के सामने वह अकेले पड गए। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकसभा चुनाव लडने का उनका कोई इरादा नहीं है।&lt;br /&gt;उन्होंने कहा कि उन्हें प्रदेश की राजनीति से बाहर करने को प्रयासरत कांग्रेस के ही कुछ नेता इस तरह की चर्चा कर रहे हैं। कभी मेरे लोकसभा चुनाव लडने का शगूफा छोड़ा जाता है, तो कभी राज्यपाल बनाने का। उन्होंने कहा कि चंद स्थानीय नेताओें की ख्वाहिश और सुविधा के लिए वह प्रदेश छोड़ने वाले नहीं। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि पार्टी आलाकमान की ओर से उन्हें लोकसभा चुनाव को लेकर कोई निर्देश नहीं मिले हैं। पार्टी के कुछ लोगों की ख्वाहिश हो सकती है कि वह प्रदेश की राजनीति में न रहें। महज ऐसे लोगों को खुश करने के लिए वह दिल्ली नहीं जा सकते। उनके अनुसार वह पार्टी हित और सोनिया गांधी के कहने पर ही कोई कदम उठाएंगे।&lt;br /&gt;पूर्व मुख्यमंत्री का कहना है कि प्रदेश के कुछ नेता पहले भी पार्टी आलाकमान के समक्ष प्रदेश की गलत स्थिति पेश करते रहे हैं। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत को सुनिश्चित करने का उन्होंने पूरा प्रयास किया, लेकिन वह भाजपा की फौज के सामने अकेले पड गए। विरोधियों की अपेक्षा केंद्र से उनकी पार्टी के कम नेता प्रचार के लिए हिमाचल आए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कांग्रेस पार्टी एकजुट है।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;नाचते हुए डॉक्टरों में खून खराबा&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;डेटलाइन इंडिया&lt;br /&gt;चंडीग़ढ, 7 अप्रैल -रेजीडेंट डॉक्टरों ने पीकर जो ड्रामा किया उससे पूरा पीजीआई खासा चर्चा में बना हुआ है। जिस पीजीआई में पूरे देश के काफी गंभीर हालत में मरीज भर्ती होते है। वहीं के डॉक्टरों और स्टॉफ ने मरीजों को अपने हाल पर छोड़कर 'लेट नाइट डीजे पार्टी का आयोजन किया गया जिसमें जमकर हंगामा हुआ। पार्टी में डॉक्टर और टेक्नीशियन आपस में भिड गए। मामला हाथापाई और गाली-गलौज तक पहुंच गया। बाद में पीजीआई प्रशासन को हस्तक्षेप करना पडा तब जाकर हंगामा शांत हुआ और पार्टी दोबारा शुरू हुई।&lt;br /&gt;पीजीआई के स्प्रिंग फेस्ट में हंगामे की एक ही दिन में यह दूसरी घटना थी।स्प्रिंग फेस्ट में रात को कैंपस में ही बने अपर कैफेटेरिया में लेट नाइट डीजे पार्टी का आयोजन होता है। पार्टी में रेजीडेंट डॉक्टर समेत संस्थान के सभी विभागों के विद्यार्थी हिस्सा लेते हैं। शनिवार देर रात करीब सवा एक बजे जब पार्टी चरम पर थी तब रेडियोथेरेपी विभाग के टेक्नीशियन कंचन तथा कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के लैब टेक्नीशियन गोस्वामी यहां पहुंचे। कंचन ने बताया कि जब वे और उनका दोस्त गोस्वामी डीजे फ्लोर पर चढने लगे तो वहां मौजूद डेंटल विभाग के सीनियर रेजीडेंट डॉक्टर ने उन लोगों को चढने नहीं दिया।&lt;br /&gt;इतना ही नहीं डॉक्टर ने दोनों को कालर पकडकर धक्का दे दिया। मामला बढता देख आयोजकों ने बीच बचाव करना शुरू कर दिया। बात बनती न देख पीजीआई प्रशासन को रात में ही सूचना दी गई। पीजीआई के सुरक्षाकर्मियों समेत तमाम लोग मौके पर पहुंचे। इस बारे में पीजीआई के कल्चरल कमेटी एवं पल्मोनरी विभाग के प्रमुख डॉ. एसके जिंदल ने बताया कि घटना शनिवार देर रात को हुई थी। दोनों पक्षों ने आपस में समझौता कर लिया है। उधर, सीनियर रेजीडेंट डॉक्टर से जब इस संबंध में बात करने की कोशिश की गई तो उनसे संपर्क नहीं हो पाया।&lt;br /&gt;नर्सिंग इंस्टीटयूट की छात्राएं एवं फिजियोथेरेपी विभाग के छात्र भी आपस में भिड गए थे। दोनों पक्षों में जमकर हंगामा हुआ। इस हंगामे की वजह फिजियोथेरेपी विभाग के छात्रों के चरित्र पर कमेंट किया जाना था। छात्राओं ने टि््विस्टेड मूवी के एक दृश्य में दर्शाया कि फिजियोथरेपी विभाग के छात्र पढाई के दौरान प्यार किसी और से करते हैं और शादी किसी और से करते हैं। बस इसी को लेकर बवाल मचा था। मंजू वाडवलकर, प्रवक्ता, पीजीआई ने बताया कि पीजीआई प्रशासन से देर रात होने वाली पार्टी की इजाजत ली जाती है। दो तारीख से शुरू हुए स्प्रिंग फेस्ट में रोज ही कोई न कोई इवेंट होता है। इसमें सुरक्षा व्यवस्था भी पुख्ता होती है।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;सुरों के शाहशाह की समाधि अभी नहीं&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;डेटलाइन इंडिया&lt;br /&gt;वाराणसी, 7 अप्रैल -&lt;br /&gt;फातमान स्थित दरगाह में भारत रत्न बिस्मिल्लाह खां को दफनाए गए स्थान पर मकबरा बनाने का मामला फिर अधर मे अटक गया है। इस बार मकबरा बनाने वाली कंपनी ने ही मकबरा बनाने से मना कर दिया है उसने रकम वापसी के लिए भी मेयर को पत्र लिखा है। आपकों बता दे कि फातमान स्थित दरगाह में भारत रत्न बिस्मिल्लाह खां की मजार बनाने के लिए अभी शिया-सुन्नी वक्फ बोर्ड का आपसी विवाद सुलझा ही नही हैं।&lt;br /&gt;मकबरा अवस्थापना निधि से बनना है। इस निधि में पर्याप्त धन है फिर भी काम शुरू नहीं हो रहा है।आर्टिस्टिक विजन के अरुण सिंह का कहना है कि काम शुरू करने के लिए धरोहर राशि जमा किए छह महीने से अधिक हो गए थे फिर भी काम शुरू नहीं हुआ तो हाथ खींचने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। योजना के मुताबिक 21 फुट ऊंची मजार पर के प्रवेश द्वार पर धातु की शहनाई बनाई जाएगी।&lt;br /&gt;उधर, नगर निगम के मुख्य अभियंता रामकेवल प्रसाद का कहना है कि धरोहर राशि वापस करने का आवेदन मिला है। मुख्य अभियंता का कहना है कि दोनों पक्षों के विवाद को देखते हुए इस संबंध में फाइल महापौर को भेजी गई है। सुन्नी वक्फ बोर्ड के प्रदेश अध्यक्ष ने हाल ही में बनारस दौरे के समय कहा था कि आसपास के चीजों को कोई नुकसान न हो तो उन्हें कोई दिक्कत नहीं है। इस संबंध में नगर निगम को बोर्ड से अनुरोध करना था, जो अब तक नहीं किया गया। सुन्नी वक्फ बोर्ड के जिलाध्यक्ष शकील अहमद बबलू भी कहते हैं कि नगर निगम की ओर से पहल न करने के कारण ही मामला लटका हुआ है।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;शादी की जिद में अश्लीलता का नाटक&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;डेटलाइन इंडिया&lt;br /&gt;आगरा, 7 अप्रैल -पहले दोस्त बनाया और फिर पेय पदार्थ में नशीला पदार्थ मिलाकर उसकी अश्लील बीडियो बनाकर युवती और उसके परिवार को करने लगा ब्लैकमेल। पीड़िता पुलिस में शिकायत भी की लेकिन पुलिस ने कोई मामला दर्ज नहीं । लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी और कोर्ट में गई, जिसके आदेश के बाद पुलिस ने युवक के खिलाफ आईटी एक्ट में मामला दर्ज कर लिया है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;शातिर चाहता है कि युवती से उसका विवाह हो जाए। इसीलिए जहां भी युवती के परिजन रिश्ता तय करते शातिर उसे अश्लील क्लिपिंग दिखा कर तुड़वा देता। इस बार भी उसने ऐसा ही किया, युवती का शादी तय हो गई थी और माह के अंतिम सप्ताह में बारात आनी थी। इसे शातिर ने तुड़वा दिया।न्यू आगरा थाना क्षेत्र निवासी युवती के पिता ने एक माह पहले इस संबंध में थाना छत्ता में शिकायत की थी। पुलिस ने मुकदमा दर्ज करने से पहले मामले की जांच करना उचित समझा। करीब एक माह बाद भी जब छत्ता पुलिस ने मुकदमा दर्ज नहीं किया तो पीड़िता के पिता ने कोर्ट की शरण ली। कोर्ट के आदेश पर शनिवार को थाना छत्ता ने मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस की मानें तो आरोपी युवक शातिर है। उसने युवती की अश्लील क्लिपिंग खींची है। छत्ता पुलिस ने युवती के पिता की तहरीर पर आरोपी प्रेम कुमार उर्फ छोटू पुत्र कैलाशी निवासी नाला भैरों चंदा पान वाली गली थाना छत्ता के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।&lt;br /&gt;युवती के पिता ने तहरीर में लिखा कि उसके पुत्र बल्केश्वर स्थित कालेज में 11 वीं की छात्रा थी। उसके साथ पढने वाली दो सहेलियों ने आरोपी का परिचय उनकी पुत्री से कराया था। उसी दौरान छोटू ने पुत्री का मोबाइल नंबर ले लिया। इसके बाद उसने पुत्री से मोबाइल पर वार्ता करना शुरू कर दिया। शातिर ने दोस्ती करके उनकी बेटी को सेंट जोंस कालेज के समीप अपने दोस्त एस कुमार के घर बुलाया। जहां उसे कोल्ड ड्रिंक में धोखे से नशीला पदार्थ पिलाकर उसकी अश्लील सीडी बनाई गई।&lt;br /&gt;उन्होंने लिखा कि इसके बाद वह दबाव में उसे कलेक्ट्रेट ले गया, जहां वकील से तैयार कराए कागजों पर उनकी बेटी के हस्ताक्षर भी कराए। इतना ही नहीं पुत्री की सहेलियों के घर भी मोबाइल से अश्लील क्लिपिंग बनाई गई। युवती के पिता ने लिखा कि इसका उनको पता ही नहीं चला। जब उन्होंने बेटी का रिश्ता तय करना शुरू किया तो शातिर आरोपी ने अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया। उसने बनाई सीडी को अपने दोस्तों में बांट दिया और रिश्तेदारों को उसे दिखाना शुरू कर दिया।&lt;br /&gt;आरोपी का कहना था कि युवती से उसकी शादी कराई जाए। उन्होंने लिखा कि हाल ही में उन्होंने अपनी बेटी का रिश्ता मथुरा से तय किया था। गोद भराई वाले दिन शातिर ने मंगेतर के भाई से उसका मोबाइल नंबर ले लिया। इसके बाद उसके फोन पर पहले तो धमकी दी, फिर अश्लील सीडी की जानकारी दे दी। इस पर भी जब बात नहीं बनी तो शातिर मथुरा में युवती के मंगेतर के घर चला गया, जहां उसने युवती की अश्लील क्लिपिंग को दिखाकर रिश्ता तुड़वा दिया। युवती के पिता ने लिखा कि उनकी पुत्री की शादी अप्रैल माह के अंतिम सप्ताह में होनी तय हुई थी। युवती के पिता का कहना है कि अब शातिर पूरी तरह ब्लैकमेलिंग पर उतर आया है। पुलिस ने आरोपी की तलाश शुरू कर दी है।&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;नशे की तस्करी के लिए मशहूर हिमाचल&lt;br /&gt;&lt;/strong&gt;डेटलाइन इंडिया&lt;br /&gt;कुल्लू, 7 अप्रैल -&lt;br /&gt;कुल्लत प्रदेश में 'काला सोना' का सालाना अरबाें रुपये का कारोबार होता है। इंटरनेशनल मार्केट में उत्तम किस्म की चरस की कीमत 20 लाख रुपये प्रति किलो है। गोरखधंधों के मास्टर माइंड बाहरी राज्यों से धंधों का संचालन कर रहे हैं।&lt;br /&gt;उन्होंने स्थानीय लोगों को रिटेलर बना रखा है। ऊंची पहुंच वाले और विदेशी पर्यटक भी सैर-सपाटे के बहाने यहां ड्रग्स का जाल बिछा रहे हैं। खुफिया सूत्रों की मानें तो चरस तस्करी के केवल दस प्रतिशत मामले ही पुलिस के हत्थे चढते हैं। राज्य से बाहर उजागर हुए चरस के मामले स्पष्ट करते हैं कि ड्रग्स का कारोबार देश के विभिन्न राज्यों के अलावा विदेशों तक चल रहा है। हर साल पुलिस करीब क्विंटल चरस बरामद करती है, जिसकी कीमत करोड़ों रुपये में है। पुलिस से बच निकलने वाले लोगों की संख्या इससे कहीं अधिक है। गोवा, दिल्ली जैसे शहरों में चरस की अच्छी कीमत है।&lt;br /&gt;कुल्लू पुलिस ने पिछले सत्रह वर्षों में करीब 17 क्विंटल चरस पकडी है। काले सोने के अलावा स्मैक, अफीम, गांजा, ब्राउन शूगर और एलएसडी के सौदागर भी पांव पसारने लगे हैं। खुफिया सूत्रों के मुताबिक चरस के अलावा अन्य ड्रग्स का कारोबार अरबों रुपये में पहुंच रहा है। चरस को स्टिल की शक्ल देकर तो कभी मूर्तियों में डालकर तस्करी के तरीके अपनाए जा रहे हैं। अखरोट और नारियल को काटकर उसके भीतर चरस तस्करी के मामले पुलिस ने उजागर किए हैं। स्मैक और एलएसडी जैसे महंगे और घातक ड्रग्स भी देवभूमि में फैलाए जा रहे हैं। चरस तस्करों में विदेशी, नेपाली और बाहरी राज्यों के लोग शामिल हैं। अब तक सीआईडी और जिला पुलिस ने दो सौ से अधिक विदेशी सैलानियों को ड्रग्स के साथ दबोचा है।&lt;br /&gt;पुलिस अधीक्षक जगत राम के अनुसार चरस तस्करी में विदेशियों और दूसरे राज्यों के लोग ही मास्टर माइंड हैं। उन्होंने कहा कि एक किलो चरस की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में 20 लाख रुपये तक है। इस धंधे से जुड़े कुछ प्रतिशत लोग ही पुलिस के हत्थे चढते हैं। पुलिस तस्करों पर कडी नजर रखे हुए है। चरस तस्करी को रोकने में पुलिस की पकड कमजोर पडती नजर आ रही है। पिछले तीन सालों में पुलिस द्वारा बरामद चरस की मात्रा घटती जा रही है। 2004 में 160.790, 2005 में 123. 680, 2006 में 105.652, 2007 में 66. 489 किलोग्राम चरस बरामद हुई। एसपी जगत राम कहते हैं कि 'भांग उखाडो' अभियान की कामयाबी से तस्करी कम होती प्रतीत हो रही है। इस साल ड्रग्स का कारोबार शुरुआती दौर में फलने फूलने लगा है। एक जनवरी 2008 से 30 मार्च तक जिला पुलिस ने 32 किलोग्राम चरस बरामद की है। चरस के 23 मामलों में 26 लोग दबोचे गए। इनमें से 14 हरियाणा के हैं। एक विदेशी को भी दबोचा गया है। आनी क्षेत्र में तीन तस्करों से हाल ही में 17 किलोग्राम चरस बरामद हुई है।&lt;br /&gt;पुलिस ने पिछले 17 सालों में करीब 17 क्विंटल चरस पकडी है तथा दो सौ विदेशियों समेत करीब छह सौ लोगों को गिरफ्तार किया गया। 1990 में 17.160, 1991 में 12.900, 1992 में 14.622, 1993 में 7.045, 1994 में 15.655, 1995 में 108, 1996 में 67.330, 1997 में 22. 125, 1998 में 39.105, 1999 में 28.185, 2000 में 193.870, 2001 में 106.435, 2002 में 385.200, 2003 में 146.346, 2004 में 160.790, 2005 में 123. 680, 2006 में 105.652, जबकि 2007 में 66.489 किलोग्राम चरस बरामद हुई।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कश्मीर पुलिस का सिपाही क्या डॉन है?&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;डेटलाइन इंडिया&lt;br /&gt;जम्मू, 7 अप्रैल -शिमला पुलिस ने एक हत्याकांड की गुत्थियां सुलझायी चाही तो पता चला कि कश्मीर पुलिस का एक सिपाही दरअसल अंडरवर्ल्ड का छोटा मोटा डॉन है । इस सिपाही को लेकर हिमाचल और कश्मीर पुलिस के बीच तन गई है।&lt;br /&gt;शिमला हत्याकांड का तीसरा आरोपी अभी तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। उसे पकडने के लिए शिमला पुलिस अब दूसरे आरोपी को जम्मू लेकर आई है। उसकी निशानदेही पर शिमला पुलिस जम्मू में छापामारी करेगी।तीन हत्याओं के बाद परेशानी में पडी शिमला पुलिस इस केस को हल करने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है। शिमला पुलिस के पास इस समय सिर्फ बंटी है, जिसे लेकर वह जम्मू पहुंच गई है और उसकी निशानदेही पर वह छापामारी करेगी।&lt;br /&gt;बताया जाता है कि तीन हत्याओं के बाद शिमला पुलिस के रोंगटे ख़डे हो गए हैं, क्योंकि हत्याओं को देखते हुए लगता है कि गैंगवार शुरू हो चुका है। शिमला में ऐसी पहली घटना सामने आई है जिसमें गैंगवार के चलते तीन शव बरामद हुए हैं जिनमें से दो युवक जम्मू के हैं और एक युवती जिसके बारे में अभी तक पुलिस असमंजस में है कि वह मोनिका है या कोई और। इस समय शिमला पुलिस के दो सब इंस्पेक्टर, दो एएसआई, दो हवलदार तथा तीन सिपाही बंटी को लेकर जम्मू में डेरा डाले हुए हैं जो इस सारे मामले में जम्मू पुलिस के साथ शालू की गिरफ्तारी के लिए सुराग जुटाने की कोशिश करेंगे।&lt;br /&gt;बताया जाता है कि बंटी के साथ शिमला पुलिस गांधी नगर थाने में है और वहीं पूछताछ की जा रही है। सूत्रों का कहना है कि छानबीन में सामने आया है कि हत्याकांड में इस्तेमाल हुई एक गाडी जम्मू से बाहर भेज दिया गया है। इस समय हत्याकांड में इस्तेमाल हुई दो गाड़ियों में से एक ही जम्मू पुलिस के पास है और उसमें गोलियों के दो निशान तथा खून से लथपथ सीट कभर मिले हैं। सूत्रों का कहना है कि शिमला पुलिस जम्मू पुलिस से कह रही है कि उन्हें गाडी दी जाए ताकि वह उसमें मिले खून की जांच करवाए और पता लगा सके कि खून किसका है क्योंकि शिमला पुलिस को शक है कि वह खून मोनिका का हो सकता है जिसका शव कांग़डा से मिला था। हालांकि मोनिका के परिजनों को जब पुलिस थाने में लाकर शव का फोटो दिखाया गया था तो उन्होंने उसे मोनिका मानने से इंकार कर दिया था।&lt;br /&gt;सूत्रों का कहना है कि शिमला पुलिस मिंटा को साथ लेने के लिए जम्मू में डेरा डाले हुए है लेकिन जम्मू पुलिस मिंटा पर जम्मू में चल रहे मामलों को सुलझाने में लगी हुई है जिनमें वह पुलिस से फरार बताया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि पुलिस शहर में कई स्थानों पर छापे मार सकती है जिनमें दोनों के पुराने साथी भी शामिल हैं। जानकारी के अनुसार इन घटनाओं के होने से शिमला पुलिस सकते में है और शिमला पुलिस पर दबाव है कि वह इन मामलों को जल्द से जल्द सुलझाए। सूत्रों का कहना है कि इस प्रकरण से जुड़े साक्ष्यों को एकत्रित करने के लिए आरोपी को जम्मू लाया गया है। जम्मू के अतिरिक्त कठुआ में भी जांच की जाएगी। आरोपी के जम्मू स्थित घर की भी तलाशी जांच टीम करेगी। बंटी 10 अप्रैल तक पुलिस रिमांड पर है।&lt;br /&gt;शिमला हत्याकांड में शामिल जितेंद्र सिंह उर्फ शालू पुलिस वाला है या गैंगस्टर इसके बारे में उधेड़बुन बनी हुई है क्योंकि उसके खिलाफ कई पुलिस थानों में आपराधिक मामले भी दर्ज हैं। हाल ही में उसने मार्च महीने में विजयपुर थाना अंतर्गत क्षेत्र में एक युवक पर कुछ साथियों के साथ तेजधार हथियारों से जानलेवा हमला किया था। हमले में युवक गम्भीर रूप से घायल हो गया था और पुलिस ने उसके खिलाफ मामला दर्ज किया था। लेकिन बावजूद इसके वह आज भी पुलिस में कर्मचारी है। पहला मामला सिटी थाना जम्मू में एफआईआर नंबर 1698 के तहत 324.34 आरपीसी के तहत। दूसरा मामला पीएस सिटी जम्मू में एफआईआर नंबर 6601 में 353 आरपीसी के तहत। तीसरा मामला पीएस पक्का डंगा में एफआईआर नंबर 13206 के तहत। हत्या के प्रयास का चौथा मामला विजयपुर थाना में दर्ज। पांचवां मामला एफआईआर नंबर 12305 के तहत धारा 452, 427, 425 में विजयपुर में दर्ज। छठा मामला एफआईआर नंबर के तहत 6306 में विजयपुर में दर्ज। जानकारी के अनुसार उस पर कोई भी मामला हत्या का प्रयास करने से कम नहीं है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;बहुत दुर्गति होने वाली है मुशर्रफ की&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;अक्षय कुमार&lt;br /&gt;आने वाले दिनों में पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ नाम के राष्ट्रपति रह जाएंगे, क्योंकि सत्तारूढ गठबंधन मुशर्रफ की शक्तियों में कटौती करने की योजना बना रहा है। जल्द ही इसके लिए संविधान संशोधन किए जाएंगे। पाकिस्तानी संसद में इन संशोधनों के लिए प्रस्ताव लाया जाएगा। अगर सत्तारूढ गठबंधन ऐसा करने में सफल रहा तो मुशर्रफ से संसद को बर्खास्त करने और देश में इमरजेंसी लगाने जैसी महत्वपूर्ण शक्तियां छिन जाएंगी। इसके अलावा इन संशोधनों के जरिए जजों को नियुक्त करने की प्रयिा में बदलाव किया जाएगा और यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि प्रांतों की स्वायत्तता का दुरुपयोग कोई न कर सके।&lt;br /&gt;डॉन अखबार की रिपोर्ट के अनुसार सत्तारूढ गठबंधन संविधान के अनुच्छेद 58 (2 बी) के तहत मुशर्रफ की शक्तियां छीनेगा। यह शक्तियां संसद में समाहित कर दी जाएंगी। असेंबली अनुच्छेद 58 (2 बी) के तहत प्रांत में गवर्नर और सेना प्रमुख को नियुक्त कर सकेगी। सूत्रों के अनुसार प्रस्तावित संशोधन संविधान में 18वां परिवर्तन होगा, जिसके माध्यम से राष्ट्रपति पद में निहित शक्तियां छीनकर इस पद को बिना शक्तियों का (प्रतीक) बना दिया जाएगा। सत्तारूढ गठबंधन में शामिल पाकिस्तान मुसलिम लीग - नवाज के एक वरिष्ठ नेता ने कहा है कि अगर मुशर्रफ की शक्तियां छिन जाएंगी तो उनके खिलाफ महाभियोग चलाने की कोई जरूरत नहीं रह जाएगी।&lt;br /&gt;उन्होंने कहा कि वह मुशर्रफ के साथ काम कर सकते हैं, यदि वह संसद के मामले में हस्तक्षेप न करें। पीएमएल-एन सरकार में शामिल एक प्रमुख गठबंधन है और सरकार पर बर्खास्त जजों की बहाली और मुशर्रफ को हटाने के लिए लगातार दबाव बनाता रहा है। सूत्रों के अनुसार बर्खास्त जजों को संसद में प्रस्ताव लाकर फिर से बहाल किया जा सकता है और अगर जरूरी होगा तो प्रधानमंत्री भी इस मामले में शासकीय आदेश जारी कर सकते हैं। यह सारे संशोधन 2006 में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी और पाकिस्तान मुसलिम लीग - एन द्वारा हस्ताक्षर किए गए एक चार्टर में उल्लिखित शर्तों के ही तहत किए जाएंगे। बहरहाल सत्तारूढ दलों के गठबंधन द्वारा चलाई गई इस नई मुहिम से आने वाले दिनों में राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ की मुश्किलें काफी बढ सकती हैं।&lt;br /&gt;पाकिस्तान की गठबंधन सरकार के मंत्री राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ से मिलने से कतरा रहा हैं। इसीके चलते मुशर्रफ और उनके सहयोगियों के पास काफी कम काम रह रहा है। राष्ट्रपति के रूप में कई प्रमुख शक्तियां अपने पास रखने वाले मुशर्रफ इससे पहले की सरकारों के साथ अक्सर काफी मिलजुल कर काम करते रहे हैं। लेकिन गिलानी सरकार के मंत्री मुशर्रफ को भाव नहीं दे कहे हैं। इन मंत्रियों ने शपथ समारोह में भी मुशर्रफ के विरोध में बांह पर काली पट््टी बांध रखी थी, हालांकि उन्हें शपथ राष्ट्रपति मुशर्रफ ने ही दिलाई थी।&lt;br /&gt;प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी ने प्रधानमंत्री का पद संभालते ही कहा था कि वह राष्ट्रपति मुशर्रफ के साथ मिलकर काम करने को तैयार हैं, फिर भी उनके मंत्री राष्ट्रपति से कतरा रहे हैं। दि न्यूज अखबार ने पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के हवाले से लिखा है कि पार्टी के नेताओं और मंत्रियों ने मुशर्रफ से मिलने पर अघोषित प्रतिबंध लगा रखा है। खाली वही मंत्री मुशर्रफ से मिल रहे हैं प्रोटोकॉल के अनुसार जिनकी उपस्थिति जरूरी होती है।&lt;br /&gt;प्रधानमंत्री गिलानी ने भी शपथ लेने के बाद केवल एक बार राष्ट्रपति मुशर्रफ के साथ बैठक की है। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के सह अध्यक्ष आसिफ अली जरदारी अभी तक मुशर्रफ से नहीं मिले हैं और न ही उनकी निकट भविष्य में उनसे मिलने की कोई योजना है। सत्तारूढ गठबंधन में शामिल दूसरे महत्वपूर्ण दल पीएमएल-एन के अध्यक्ष नवाज शरीफ मुलाकात तो दूर हाल ही में मुशर्रफ से कह चुके हैं कि वह जल्द ही राष्ट्रपति पद भी छोड़ दें। शरीफ मुशर्रफ के धुर विरोधी माने जाते हैं, उनकी सरकार का 1999 में तख्तापलट करके ही मुशर्रफ ने सत्ता पर कब्जा जमाया था।&lt;br /&gt;पाकिस्तान नेशनल असेंबली की पहली महिला स्पीकर फहमिदा मिर्जा ने पद संभालने के बाद पहली बार चुप्पी तोड़ते हुए कहा है कि यदि सांसद चाहे तो मौजूदा राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ को हटाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इसके लिए सभी सांसदों को एकजुट होने की जरूरत नहीं है, सदन के दो तिहाई सांसद ही महाभियोग चलाकर मुशर्रफ को हटा सकते हैं। फहमिदा ने पाक के प्रमुख दैनिक 'डेली टाइम्स' को दिए एक इंटरव्यू में ये बातें कहीं।&lt;br /&gt;उन्होंने कहा कि मैं सभी पहलुओं को संविधान के दायरे में रख कर देखती हूं क्योंकि अब मैं किसी राजनीतिक पार्टी का प्रतिनिधित्व नहीं कर रही हूं बल्कि संवैधानिक निकाय नेशनल असेंबली का हिस्सा हूं।' देश की संसद सर्वोच्च है या राष्ट्रपति, के जवाब में उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति को अनुच्छेद 58 (2 बी) के तहत संसद को भंग करने का अधिकार है। लेकिन उन्होंने संकेत दिया कि इस अनुच्छेद के जरिए पाकिस्तान के लोकतंत्र के साथ बार-बार खिलवाड हुआ है और यह अनुच्छेद विवाद का विषय बना हुआ है।उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में संसद का स्थान सर्वोपरि होना चाहिए। संसद को मजबूत स्थिति में कैसे लाया जाए , इस सवाल का जवाब देते हुए मिर्जा ने कहा कि सभी राष्ट्रीय मुद््दों पर संसद में विचार विमर्श होना चाहिए। इसके लिए किसी दूसरी संस्थाओं की मदद न ली जाए। इस प्रयिा के जरिए संसद की स्थिति में सुधार लाया जा सकता है। उन्होंने बताया अब समय आ चुका है कि संसद को मजबूत बनाया जाए।&lt;br /&gt;उन्होंने नई संसद के सांसदों से उम्मीद जताते हुए कहा कि उन्हें पार्टी से ऊपर उठकर संसद की गरिमा और सर्वोच्चता का ख्याल रखते हुए काम करना चाहिए। गौरतलब है कि आम चुनाव में मुशर्रफ समर्थित पार्टी की हार के बाद उन पर महाभियोग चलाए जाने का दबाव बढता जा रहा है। उन्हें राष्ट्रपति पद से हटाए जाने को लेकर नई गठबंधन सरकार में शामिल देश की दूसरी सबसे बडी पार्टी 'पाकिस्तान मुसलिम लीग-एन' ने मुहिम चला रखी है। पार्टी के गुस्से का आलम यह है कि कुछ सदस्यों ने कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ लेते वक्त मुशर्रफ के विरोध में बांह में काली पट््टी बांध रखी थी।&lt;br /&gt;पाकिस्तान में नई सरकार के गठन के बाद राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ की मुश्किलें थमने का नाम ही नहीं ले रहीं हैं क्योंकि नई सरकार ने कहा है कि पिछले साल मुशर्रफ द््वारा लगाई गई इमेरजेंसी के दौरान उन्होंने संविधान के खिलाफ जो कडे कदम उठाए थे उन्हें कहीं से भी संवैधानिक नहीं ठहराया जा सकता है और अब वक्त आ गया है जब उन फैसलों की समीक्षा की जाए।&lt;br /&gt;नए कानून मंत्री फारूक नाइक ने कहा कि किसी भी अकेले इंसान को यह अधिकार नहीं है कि वह संविधान और संसद के किसी भी संशोधन पर अकेले निर्णय ले सके क्योंकि इसके लिए उसके पास दो तिहाई बहुमत होना चाहिए। नाइक ने कहा कि नई सरकार मुशर्रफ द््वारा अपदस्थ जजों को जिनमें पूर्व चीफ जस्टिस इख्तियार मोहम्मद चौधरी शामिल हैं, को 30 दिनों के भीतर उनका पदभार देते हुए उनकी जिम्मेदारी उन्हें सौंप देगा। नाइक ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अपदस्थ जजों की तीस दिनों की यह गिनती 31 मार्च से शुरू हो चुकी है। हो सकता है कि नए जजों की बहाली के संदर्भ में सरकार जल्द ही कोई खुशखबरी सुनाएं।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;नया नहीं है तिब्बतियों पर जुल्म&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;विजय आर्य&lt;br /&gt;मार्च के महीने में तिब्बती, सारी दुनिया में जहां कहीं भी शरणार्थी की जिंदगी बिता रहे हैं, अपने देश पर चीनी आधिपत्य से मुक्ति और आजादी के लिए धरना-प्रदर्शन करते हैं। हाल के दिनों में तिब्बत की राजधानी ल्हासा में तिब्बतियों ने सडकों पर जोरदार प्रदर्शन और प्रतिरोध किए। जो जानकारियां अभी तक मिली हैं, चीनी सेना ने बेरहमी के साथ एक बार फिर इस संघर्ष को दबाने की कोशिश की है। प्रदर्शनकारियों पर गोलियां भी चलाई गईं और काफी संख्या में लोगों के मरने की खबरें भी हैं। चीनी सेना ने कई मुहल्लों में कर्फ्यू लगा दिया है और बिजली-पानी तक काट दिया है। इस संघर्ष और दमन की पूरी जानकारी मिलने में तो समय लगेगा, फिर भी इतना साबित हो गया है कि तिब्बत में स्वतंत्रता की वह आग बुझी नहीं है, जिसका चीनी सरकार दावा करती रही है। बीस साल पहले भी ल्हासा की सडकों पर ऐसा संघर्ष हुआ था।&lt;br /&gt;तब भी चीनी सेना ने दमन का च काफी लंबे समय तक चलाया था। इस बार जो दमन हुआ है, उसकी खबरें और चित्र बहुत समय से मीडिया से प्राप्त हो रहे हैं और उस पर अंतरराष्ट्रीय प्रतियिाएं भी आने लगी हैं। तिब्बतियों के धर्मगुरु और भारत में निर्वासित तिब्बती सरकार के प्रमुख दलाई लामा ने चीनी दमन की तीखी निंदा की है। उनके साथ ही यूरोप के कई देशों समेत हमारे देश में जॉर्ज फर्नाडिंस सरीखे कुछ साहसी नेताओं ने भी चीन के इस कदम की आलोचना की है। लेकिन कुछ समय पूर्व जब धर्मशाला से तिब्बतियों ने संप्रभु तिब्बत के लिए जुलूस निकाला, तो उन्हें रोका गया और पुलिस ने उनके साथ निर्ममतापूर्वक व्यवहार किया&lt;br /&gt;तिब्बतियों के साथ हमारी पुलिस का यह व्यवहार भारतीय जनता को भी अच्छा नहीं लगता। ऐसे व्यवहार केबावजूद तिब्बती भारत के विरुध्द कुछ भी नहीं बोलते। ऐसा वे शायद अपनी मजबूरी के कारण ही करते हैं।&lt;br /&gt;इधर हमारे यहां चिंता की बात यह हुई है कि तिब्बतियों के मुक्ति संग्राम को जनता और संसद का जो समर्थन मिलता था, वह अब लगभग समाप्त हो गया है। पहले तिब्बतियों के प्रदर्शनों में भारतीय भी शामिल होते थे, लेकिन अब ऐसा देखने को नहीं मिलता। भारतीय संसद भी तिब्बत की मुक्ति और तिब्बतियों के मुक्ति संग्राम के समर्थन के सवाल पर मौन हो गई है। फिर भी कुछ लोग भारत-तिब्बत मैत्री संघ या एशिया समर्थक तिब्बती मंच चला रहे हैं।&lt;br /&gt;हाल के वर्र्षों में तिब्बतियों की आजादी और मुक्ति के लिए अंतरराष्ट्रीय अभियान के केंद्रबिंदु दलाई लामा स्वयं रहे हैं। अभी कुछ माह पूर्व ही उन्होंने कनाडा और ऑस्ट्रेलिया की यात्रा कर वहां के प्रधानमंत्रियों से मुलाकात की थी। हालांकि बीजिंग ने इसे गंभीरता से लिया। दलाई लामा अमेरिका में पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन और राष्ट्रपति जॉर्ज बुश से कई बार मिल चुके हैं। उन्हें मिल रही अंतरराष्ट्रीय मान्यता और उनके बढ रहे विदेश दौरों से चीन को परेशानी होती है। दलाई लामा यूरोप के राष्ट्राध्यक्षों से भी मिल चुके हैं। यूरोपीय संघ तथा यूरोप के कई देशों की संसद ने प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से तिब्बत की आजादी का समर्थन किया है। सूचना है कि अगले कुछ महीनों में दलाई लामा एक बार फिर कई देशों के दौरे पर जा रहे हैं। स्वाभाविक है कि इससे चीन की परेशानी बढेगी।&lt;br /&gt;ल्हासा की हाल की घटनाओं को बीजिंग ओलंपिक खेलों से जोड़कर भी देखा जा रहा है, लेकिन यह ठीक नहीं है। जो मुक्ति संघर्ष विगत पचास वर्षों से निरंतर चल रहा है और जिसके चलते रहने की संभावना है, उससे जुड़े लोग यदि किसी अंतरराष्ट्रीय आयोजन पर सवाल उठाते भी हैं, तो इसमें एतराज की बात नहीं हो सकती। तिब्बत की मुक्ति के साथ तिब्बतियों के मानवाधिकारों के हनन का मामला भी अकसर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उछलता रहता है और अब तो मानवाधिकारों का इस कदर अंतरराष्ट्रीयकरण हो चुका है कि दुनिया के किसी भी हिस्से में इसके मसले पर धरने-प्रदर्शन आयोजित किए जाते हैं। तिब्बत की मुक्ति का सवाल और तिब्बतियों के मानवाधिकारों के हनन के मामले फिलहाल अंतरराष्ट्रीय मंच पर तेजी से उछल रहे हैं। बीजिंग ओलंपिक पर भी इसकी छाप दिखाई पडती है, तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए। वर्ष 1987 में मॉस्को ओलंपिक खेलों का दुनिया के देशों ने तो इसीलिए बहिष्कार किया था कि तत्कालीन सोवियत संघ की सेना ने अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया था।&lt;br /&gt;भारत ने विगत पचास वर्षों में तिब्बत के मसले पर कई बडी गलतियां की हैं, इसे आम भारतीय जनता भी मानती है। 1948 में कम्युनिस्ट ांति होने के बाद चीन ने अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र में जो पहला काम किया, वह तिब्बत में सशस्त्र घुसपैठ का था। तब निहत्थे तिब्बतियों ने कडा प्रतिरोध किया था। उसी वर्ष तिब्बत में चीनी सेना की घुसपैठ का मामला सुरक्षा परिषद में उठा था। भारत ने इस मामले में चीन के साथ बातचीत की बात कही थी।&lt;br /&gt;तब कम्युनिस्ट चीन को संयुक्त राष्ट्र की सदस्यता नहीं मिली थी और भारत चीन का बडा समर्थक था। यह मामला भारत पर छोड़ दिया गया और भारत ने चीन के साथ समझौता कर 1950 में तिब्बत को चीन का स्वशासी हिस्सा मान लिया। लेकिन चीन ने तिब्बतियों को कभी स्वशासन का अधिकार नहीं दिया। बीजिंग के आधिपत्य अभियान के दबाव के चलते दलाई लामा गुप्त रूप से भारत चले आए। भारत ने सुरक्षा परिषद से तिब्बत का मामला वापस लेकर तथा चीन से समझौता कर भारी कूटनीतिक भूल की थी। बाद में हमारी सरकार को एहसास हुआ कि यह भारी राजनीतिक भूल भी थी। इस भूल के चलते ही भारत पर चीनी हमला हुआ और इसी कारण भारतीय सीमाओं पर चीनी सेना का दबाव बना हुआ है। और चीन इस दबाव का कूटनीतिक लाभ भी उठा रहा है।&lt;br /&gt;वर्ष 1950 में जब भारत सरकार ने चीन के साथ तिब्बत से वह समझौता किया, तो सरदार वल्लभ भाई पटेल व डॉ. राजेंद्र प्रसाद जैसे कांग्रेसी इसके विरोध में थे। डॉ. राम मनोहर लोहिया जैसे समाजवादी जिंदगी भर तिब्बत की आजादी के सवाल को जिंदा रखे हुए थे। बीती सदी के पचास और साठ के दशक में संसद में तिब्बत का सवाल गूंजता रहा।&lt;br /&gt;लेकिन संप्रग सरकार शायद 1950 के समझौते और सीमा पर चीनी सेना के दबाव में है, किंतु जनता पर कोई मजबूरी नहीं है। भारत की उत्तरी सीमाओं पर चीनी सेना का दबाव, भारतीय भूमि पर चीन का अवैध कब्जा और तिब्बत की मुक्ति एक-दूसरे से जुड़े सवाल हैं। इन सवालों को हल करने के लिए तिब्बत की आजादी और तिब्बत के मुक्ति संग्राम को भारतीय जनता का खुला समर्थन जरूरी है। जो गलती या चूक हमसे हो गई है, उसे ठीक भी हमें ही करना है। हमारी जनता को देश में और भारत के बाहर तिब्बतियों द्वारा छेड़े गए मुक्ति संग्राम में बडे पैमाने पर भाग लेना चाहिए। यह भारतीयों की जिम्मेदारी है और कर्तव्य भी।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;FRIENDS IF YOU LIKED OR EVEN HATE YOU SAW, PLEASE GIVE ME A BUZZ ON aloktomar@hotmail.com
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ALOK&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4037994172839597177-3979697042051260816?l=aaloktomar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/datelineindia/~4/WeCxP8qisHc" height="1" width="1"/&gt;</content><link rel="replies" type="application/atom+xml" href="http://aaloktomar.blogspot.com/feeds/3979697042051260816/comments/default" title="Post Comments" /><link rel="replies" type="text/html" href="http://www.blogger.com/comment.g?blogID=4037994172839597177&amp;postID=3979697042051260816&amp;isPopup=true" title="1 Comments" /><link rel="edit" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/4037994172839597177/posts/default/3979697042051260816?v=2" /><link rel="self" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/4037994172839597177/posts/default/3979697042051260816?v=2" /><link rel="alternate" type="text/html" href="http://feedproxy.google.com/~r/datelineindia/~3/WeCxP8qisHc/blog-post_07.html" title="नेहरू के पत्र पर जेल गए थे आडवाणी" /><author><name>गूगल मित्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17719251231605581199</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel="http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail" width="16" height="16" src="http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif" /></author><thr:total>1</thr:total><feedburner:origLink>http://aaloktomar.blogspot.com/2008/04/blog-post_07.html</feedburner:origLink></entry></feed>

