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<title><![CDATA[hastakshep | हस्तक्षेप]]></title>
<description><![CDATA[हस्तक्षेप एक स्वतंत्र हिंदी न्यूज़ पोर्टल है जो समसामयिक, राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय, सामाजिक, राजनैतिक, आर्थिक मुद्दों पर समाचार और विश्लेषण प्रस्तुत करता है। यहाँ दलित, वंचित, आदिवासी, महिला व छात्र अधिकारों को विशेष महत्व दिया जाता है।]]></description>
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<title>hastakshep | हस्तक्षेप</title>
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<pubDate>Wed, 27 May 2026 17:04:44 GMT</pubDate>
<lastBuildDate>Wed, 27 May 2026 17:04:44 GMT</lastBuildDate>
<copyright><![CDATA[Hastakshep]]></copyright>
<language><![CDATA[hi]]></language>
<managingEditor><![CDATA[anushka@blinkcms.ai (Hastakshep)]]></managingEditor>
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<title><![CDATA[‘क्लिक कल्चर’ के दौर में नेहरू की प्रासंगिकता : वैज्ञानिक चेतना, लोकतंत्र और विवेक की विरासत पर हमला]]></title>
<description><![CDATA[पंडित जवाहरलाल नेहरू की पुण्यतिथि पर विशेष लेख। जानिए कैसे ‘क्लिक कल्चर’ और इमेज राजनीति के दौर में नेहरू की वैज्ञानिक चेतना, लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और आधुनिक भारत की अवधारणा आज भी प्रासंगिक है]]></description>
<tags>धर्मनिरपेक्षता,सोशल मीडिया,पंडित जवाहरलाल नेहरू,कश्मीर</tags>
<link>https://hastakshep.com/column/pandit-nehru-digital-click-culture-analysis-301999</link>
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<category><![CDATA[आपकी नज़र,स्तंभ,हस्तक्षेप]]></category>
<dc:creator><![CDATA[Hastakshep]]></dc:creator>
<pubDate>Wed, 27 May 2026 17:04:43 GMT</pubDate>
<imagecaption><![CDATA[पं. जवाहर लाल नेहरू Pt. Jawaharlal Nehru]]></imagecaption>
<image><![CDATA[https://hastakshep.com/wp-content/uploads/2025/02/zf31wxOCTJXpJcsSeYh8.jpg]]></image>
<content:encoded><![CDATA[<img src='https://hastakshep.com/wp-content/uploads/2025/02/zf31wxOCTJXpJcsSeYh8.jpg' /><h2 style="text-align: justify; "><b>नेहरू बनाम ‘क्लिक कल्चर’ : विचारों से इमेज राजनीति तक का सफर
</b></h2><p style="text-align: justify; "><b>जब लोकतंत्र से बड़ा बना ‘क्लिक’: नेहरू की चेतावनी आज क्यों जरूरी है
</b></p><p style="text-align: justify; "><b>पंडित नेहरू और डिजिटल युग का संकट : विवेक, विज्ञान और लोकतंत्र की लड़ाई
</b></p><p style="text-align: justify; "><b>‘क्विक कल्चर’ के समय में नेहरू को समझना क्यों कठिन हो गया है
</b></p><h3 style="text-align: justify; "><b>नेहरू की विरासत और आज का ‘क्लिक संस्कार’
</b></h3><p style="text-align: justify; "><b>सोशल मीडिया और ‘क्लिक कल्चर’ के दौर में क्या विचार और विवेक हाशिये पर चले गए हैं? पंडित जवाहरलाल नेहरू की पुण्यतिथि पर पढ़िए उनका वैज्ञानिक मानववाद, लोकतांत्रिक दृष्टि और आधुनिक भारत के सपने पर गहन विश्लेषण
</b></p><p style="text-align: justify; "><b>''क्लिक कल्चर'' और पंडित नेहरू
</b></p><p style="text-align: justify; "><b>आज पंडित जवाहरलाल नेहरू की पुण्यतिथि है-
</b></p><p style="text-align: justify; ">नया डिजिटल कल्चर 'क्लिक कल्चर' है। 'क्विक' कल्चर है। इसने 'पुश बटन' और इमेज को महान और लोकतांत्रिक मूल्यों और विचारों को खोखला और निरर्थक बनाया है। सम्प्रति टीवी से लेकर फेसबुक तक अनेक संगठन और नेता इसके शैतान खिलाड़ी के रूप में खेल रहे हैं और भारत की मासूम युवा पीढ़ी को इमेजों के जरिए दिग्भ्रमित करने में लगे हैं। 'क्लिक कल्चर' ने युवाओं के विवेक पर सीधे हमला बोला हुआ है। 
</p><p style="text-align: justify; ">कहा जा रहा है 'क्लिक ' इमेज ही सत्य है, विचार तो बकबास होते हैं, बोर करते हैं, कमाना मूल्यवान काम है, सोचना फालतू चीज है, व्यवहारवादी बनो, जनवादी मत बनो, धर्मनिरपेक्षता फालतू चीज़ है, लोकतंत्र में रहो लेकिन लोकतांत्रिक मूल्यों के बिना। लोकतांत्रिक मूल्य तो बोझा हैं, वोट दो, लेकिन विवेकवाद के आधार पर सोचो मत, सार्थक है सिर्फ चुनाव जीतना। 
</p><p style="text-align: justify; ">इस 'क्लिक कल्चर' के नायक इन दिनों पंडित नेहरू का भी 'क्लिक संस्कार' करने में मशगूल हैं।
</p><p style="text-align: justify; "><b>सामान्य राजनेता नहीं थे पंडित जवाहरलाल नेहरू
</b></p><p style="text-align: justify; ">उल्लेखनीय है पंडित जवाहरलाल नेहरू देश के सामान्य प्रधानमंत्री नहीं थे, वे सामान्य राजनेता भी नहीं थे। आमतौर पर लोकतंत्र में नेता आते हैं और जाते हैं। औसत नेता ही लोकतंत्र की संपदा के रूप में नजर आते हैं, भारत में अनेक औसत नेता प्रधानमंत्री बने, लेकिन आधुनिक विचारवान विरल प्रधानमंत्री तो एकमात्र पंडितजी ही थे। वे ऐसे प्रधानमंत्री थे जिनके पास आधुनिक भारत का विज़न था, आधुनिक विचार थे, आधुनिक जीवनशैली थी और इन सबसे बढ़कर अपने विचारों के लिए जोखिम उठाने का साहस था।
</p><p style="text-align: justify; "><b>मुश्किल है नेहरू की विरासत को समझना
</b></p><p style="text-align: justify; ">नेहरू को पूजना आसान है, उनकी विरासत को समझना और उनके विचारों की दिशा में जोखिम उठाकर चलना बहुत मुश्किल काम है। खासकर वे लोग जो आधुनिक विचारों, वैज्ञानिक सचेतनता, धर्मनिरपेक्षता और लोकतंत्र के मर्म से अनभिज्ञ हैं या जो लोग आए दिन इनकी जड़ों में मट्ठा डालने का काम करते हैं, उनके लिए नेहरू को पाना बेहद मुश्किल है। 
</p><p style="text-align: justify; "><b>संस्कृति की देन थे पं. नेहरू
</b></p><p style="text-align: justify; ">नेहरू 'क्लिक कल्चर' की देन नहीं थे, वे तो संस्कृति की देन थे। नेहरू को पाने के लिए भारत की संस्कृति के पास जाना होगा। संस्कृति का मार्ग बेहद जटिल और जोखिम भरा है, वह फेसबुक की वॉल पर लिखी 'क्विक' इबारत नहीं है, नेहरू कोई किताब नहीं है, कोई कुर्सी नहीं है या मूर्ति नहीं है जिसके साथ खड़े होकर फोटो क्लिक करो और नेहरू की पंक्ति में शामिल हो जाओ! 
</p><p style="text-align: justify; ">भारत के प्रधानमंत्री बनने के बावजूद नेहरू की पंक्ति में खड़े होना संभव नहीं है, क्योंकि नेहरू कुर्सी नहीं बल्कि देश का आधुनिक विज़न हैं। नेहरू के आधुनिक विज़न को सचेत रूप से अर्जित करना होगा तब ही सही मायने में नेहरू की रुह को स्पर्श किया जा सकता है। महसूस किया जा सकता है।
</p><p style="text-align: justify; "><b>नेहरू को महान किस चीज ने बनाया
</b></p><p style="text-align: justify; ">नेहरू को महान जिस चीज ने बनाया वह था जीवन के प्रति उनका विवेकवादी नजरिया। नेहरू के लिए साधन और साध्य एक थे। उन्होंने लिखा है ''शुरु में जिंदगी के मसलों की तरफ़ मेरा रुख़ कमोबेश वैज्ञानिक था, और उसमें उन्नीसवीं सदी और बीसवीं सदी के शुरु के विज्ञान के आशावाद की चाशनी भी थी। एक सुरक्षित और आराम के रहन-सहन ने और उस शक्ति और आत्म-विश्वास ने, जो उस समय मुझमें था, आशावाद के इस भाव को और बढ़ा दिया था।'' 
</p><p style="text-align: justify; ">हमारे नेताओं और राजनीतिक कार्यकर्ताओं में एक बड़ा अंश है जो अंधविश्वासी और धर्म का अंधपूजक है। वे धर्म को आलोचनात्मक विवेक की आंखों से देखते ही नहीं हैं। ऐसे अंधपूजक हमारे देश के प्रधानसेवक भी हैं। जबकि नेहरू में ये चीजें एकदम नहीं थीं। नेहरू ने लिखा है, '' मजहब में – जिस रूप में मैं विचारशील लोगों को भी उसे बरतते और मानते हुए देखता था, चाहे वह हिन्दू-धर्म, चाहे इस्लाम या बौद्ध-मत या ईसाई-मत-मेरे लिए कोई कशिश न थी। अंध-विश्वास और हठवाद से उनका गहरा ताल्लुक था और जिन्दगी के मसलों पर ग़ौर करने का उनका तरीक़ा यक़ीनी तौर पर विज्ञान का तरीक़ा न था। उनमें एक अंश जादू-टोने का था और बिना समझे-बूझे यकीन कर लेने और चमत्कारों पर भरोसा करने की प्रवृत्ति थी।''
</p><p style="text-align: justify; "> '' फिर भी यह एक जाहिर-सी बात है कि मज़हब ने आदमी की प्रकृति की कुछ गहराई के साथ महसूस की हुई जरुरतों को पूरा किया है और सारी दुनिया में, बहुत ज्यादा कसरत में, लोग बिना मज़हबी अकीदे के रह नहीं सकते। इसने बहुत ऊँचे किस्म के मर्दों और औरतों को पैदा किया है, और साथ ही तंग नज़र और ज़ालिम लोगों को भी। इसने इन्सानी ज़िन्दगी को कुछ निश्चित आंकें दी हैं और अगरचे इन आंकों में से कुछ आज के ज़माने पर लागू नहीं हैं, बल्कि उसके लिए नुकसानदेह भी हैं, दूसरी ऐसी भी हैं, जो अख़लाक़ और अच्छे व्यवहार लिए बुनियादी हैं।"
</p><p style="text-align: justify; ">नेहरू ने लिखा है, ''असल में मेरी दिलचस्पी इस दुनिया में और इस जिंदगी में है, किसी दूसरी दुनिया या आने वाली जिंदगी में नहीं।'' पंडितजी पुनर्जन्म की धारणा में यकीन नहीं करते थे, अंधविश्वासों के विरोधी थे। दिमागी अटकलबाजी में यकीन नहीं करते थे। वे चीजों, घटनाओं, व्यक्तियों, समुदाय और वस्तुओं को वैज्ञानिक नजरिए से देखने में विश्वास करते थे। उन्होंने माना, '' मार्क्स और लेनिन की रचनाओं के अध्ययन का मुझ पर गहरा असर पड़ा और इसने इतिहास और मौजूदा जमाने के मामलों को एक नई रोशनी में देखने में बड़ी मदद पहुँचाई। इतिहास और समाज के विकास के लंबे सिलसिले में एक मतलब और आपस का रिश्ता जान पड़ा और भविष्य का धुंधलापन कुछ कम हो गया।''
</p><p style="text-align: justify; "><b>नेहरू के दोष
</b></p><p style="text-align: justify; ">1964 में 27 मई को मौत के बाद जवाहरलाल नेहरू का यश इतिहास की थाती है। उनका अनोखापन बेमिसाल है। नेहरू में दोष भी ढूंढे जा सकते हैं। हुकूमत की मौजूदा विचारधारा उनके सिर पापों की गठरी बांध उन्हें गुमनामी में धकेल देना चाहती है।                 नेहरू विस्मृति के अंधेरे में भी जुगनू की तरह दमकते ही रहते हैं वे अकेले हैं जो दक्षिणपंथ के हमले का शिकार हैं। आज़ादी की जद्दोजहद में तिलक, गांधी, नेहरू और सुभाष उत्तरोत्तर पड़ाव हैं। 
</p><p style="text-align: justify; ">1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के बाद नेहरू ने गांधी का सम्मान करते भी उनकी आदर्शवादिता को अव्यावहारिकता कहकर ठुकरा दिया। उन्हें कठोर पत्र भी लिखे। उन्होंने गांधी की मुखालिफत करते भगत सिंह के पक्ष में करीब आधी कांग्रेस को खड़ा भी किया। सुभाष बोस के साथ भगत सिंह के मुकदमे की पैरवी की।
</p><p style="text-align: justify; ">उन पर सरदार पटेल के साथ भारत विभाजन का दोष भी थोपा गया। उन्होंने योजना आयोग, भाखरा नांगल, आणविक शक्ति आयोग, भाषावाद प्रांत, सार्वजनिक उपक्रम, संसदीय तमीज और संविधान की इबारतें नायकत्व की भूमिका के साथ रचीं। 
</p><p style="text-align: justify; "><b>कश्मीर समस्या</b> को लेकर उनमें उलझाव बताया गया। पंचशील के मुखिया होने के बावजूद चीन ने दोस्ती और विश्वास में बहुत बड़ा धोखा दिया। कीमत देश की धरती को चुकानी पड़ी। 
</p><p style="text-align: justify; ">लोकतंत्र के रहनुमा नेहरू ने अपना व्यक्तित्व कई बार थोपने की कोशिश की, लेकिन बहुमत के आगे मासूमियत से हारते भी रहे।
</p><p style="text-align: justify; ">कांग्रेस अध्यक्ष बेटी इंदिरा ने केरल की सरकार की बर्खास्तगी को लेकर उसे खारिज कर दिया। नेहरू राजेन्द्र प्रसाद को दुबारा राष्ट्रपति बनाने के बदले उपराष्ट्रपति डॉक्टर राधाकृष्णन को प्रोन्नत करना चाहते थे। कांग्रेस ने बात नहीं मानी। नेहरू अदब से झुक गए। 
</p><p style="text-align: justify; ">दिल्ली की जनसभा में संचालक ने यूगोस्लाविया के राष्ट्रपति टीटो को पहला पुष्पगुच्छ देने नेहरू को आमंत्रित किया। जवाहरलाल ने चेहरा लाल पीला करते कहा। दिल्ली के नागरिकों की ओर से पहला पुष्पगुच्छ सौंपने का अधिकार महापौर अरुणा आसफ अली को है। यह संस्कारशीलता आज महापौरों को उपलब्ध नहीं है। उन्हें मंत्री, सचिव और आयुक्तों के सामने ऊंची नाक रखने से मना किया जाता है। 
</p><p style="text-align: justify; ">तपेदिकग्रस्त पत्नी को स्विट्ज़रलैंड के अस्पताल में छोड़ जेलों में जवानी सड़ा दी। दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान खंदकों में बैठकर हेरल्ड लास्की के फेबियन समाजवाद के पाठ पढ़े। अपनी बेटी को पिता के पत्र के नाम से चिट्ठियों की शृंखला लिखी। वह इतिहास बन गईं। बेटी देश की सबसे ताकतवर प्रधानमंत्री बनी और शहीदों की मौत पाई। नेहरू खानदान पर परिवारवाद का आरोप लगाने वाले यह नहीं कहते।              जवाहरलाल ने अपना उत्तराधिकारी जयप्रकाश में ढूंढा था, इंदिरा गांधी में नहीं। वे अटल बिहारी वाजपेयी को कांग्रेस में लाने को थे। नहीं चाहने पर भी मुख्यमंत्री रविशंकर शुक्ल के दबाव के कारण छत्तीसगढ़ में भिलाई इस्पात संयंत्र को लाकर प्रदेश को नया औद्योगिक तीर्थ दिया। उनकी किताबों विश्व इतिहास की झलक, भारत की खोज और आत्मकथा की रॉयल्टी से परिवार का खर्चा चलता रहा।
</p><p style="text-align: justify; ">नेहरू में कवि और दार्शनिक था। उनकी इतिहास दृष्टि में नदियां, हवाएं और तरंगें बहती हैं। नेहरू की गंगा सुदूर अतीत से भविष्य के महासागर तक संस्कारों का सैलाब लिए अनंतकाल तक बहती रहेगी। उनकी गंगा वसीयत से बेहतर वसीयत संसार में कहीं नहीं है। असाधारण बौद्धिक सांसद हीरेन मुखर्जी ने कहा था। मैं ऐसी वसीयत लिखने वाले की हर गलती माफ कर सकता हूं। यहां तक कि खराब सरकार को भी।
</p><p style="text-align: justify; ">नेहरू ने प्रधानमंत्री नहीं साहित्य अकादमी के अध्यक्ष की हैसियत से सर्वोच्च सोवियत नेता ख्रुश्चेव को लिखा था। 
</p><p style="text-align: justify; ">डॉक्टर जिवागो उपन्यास के लेखक बोरिस पास्तरनाक को रूसी समाज की कथित बुराइयों को उजागर करने के आरोप में अनावश्यक सजा़ नहीं दें। आल्डस हक्सले ने लिखा। जवाहरलाल का व्यक्तित्व गुलाब की पंखुड़ियों से बना है। शुरू में लगता था चट्टानी राजनीति में गुलाब की पंखुड़ियां कुम्हला जाएंगी। लेकिन गुलाब की पंखुड़ियों ने तो पैर जमाने षुरू कर दिए हैं। नेहरू का स्पर्श पाकर राजनीति सभ्य हो गई है। 
</p><p style="text-align: justify; ">टैगोर ने उन्हें भारत का ऋतुराज कहा था। विनोबा के लिए अस्थिर दौर में सबसे बड़े स्थितप्रज्ञ थे।
</p><p style="text-align: justify; ">उनके निंदक आज भी फल-फूल रहे हैं। शेख अब्दुल्ला को नेहरू का अवैध भाई बताते हैं। उनके पूर्वजों में मुसलमानों का रक्त अफवाहों के इंजेक्शन के जरिए डालते हैं। एडविना माउंटबेटन से उनके संबंधों में मांसलता का वीभत्स देखते हैं। उन्हें कॉमनवेल्थ को कायम रखते हुए कई समझौतों के लिए दोषी करार दिया जाता है। यह सफेद झूठ कहने वाले सर्वोच्च पद पर हैं। नेहरू सरदार पटेल की अंत्येष्टि में नहीं गए थे। निखालिस हिन्दू लगते गांधी, मालवीय, पुरुषोत्तमदास टंडन, सरदार पटेल, लालबहादुर शास्त्री, राजगोपालाचारी वगैरह कांग्रेसियों की तस्वीरों का संघ परिवार मुरीद है।
</p><p style="text-align: justify; ">नेहरू के सियासी और खानदानी वंशज गाफिल हैं। जवाहरलाल से बेरुख भी हैं। कांग्रेस इस असाधारण बौद्धिक से घबरा या उकताकर मिडिल-फेल जीहुजूरियों के संकुल को अपना बौद्धिक विश्वविद्यालय बनाए हुए है। काश! वे महान क्रांतिकारी भगत सिंह को पढ़ लेते। उसने कहा था मैं देश के भविष्य के लिए गांधी, लाला लाजपत राय और सुभाष बोस वगैरह सब को खारिज करता हूं। केवल जवाहरलाल वैज्ञानिक मानववाद होने के कारण देश का सही नेतृत्व कर सकते हैं। नौजवानों को चाहिए नेहरू के पीछे चलकर देश की तकदीर गढ़ें। 
</p><p style="text-align: justify; ">नेहरू चले गए। भगतसिंह भी। उस वक्त के नौजवान भी। वर्तमान के ऐसे करम हैं कि नेहरू अब भी उदास हैं।
</p><p style="text-align: justify; ">पंडित नेहरू ने लिखा है-
</p><p style="text-align: justify; ">"आज भी, जबकि क़ौमियत का ख़याल बहुत बदल गया और तरक्की कर गया है, विदेशों में हिन्दुस्तानियों का गिरोह एक अलग गिरोह समझा जाता है और अपने और अपने भीतरी भेदों के बाबजूद उन्हें एक गिना जाता है। हिन्दुस्तानी ईसाई चाहे जहां जाय, हिंदुस्तानी ही समझा जाता है, और हिंदुस्तानी मुसलमान चाहे तुर्की में हो, चाहे ईरान और अरब में, सभी मुसलमानी मुल्कों में वह हिंदुस्तानी ही समझा जाता है।"
</p><p style="text-align: justify; "><b><span style="font-size: 36px;">प्रोफेसर जगदीश्वर चतुर्वेदी</span></b></p><p style="text-align: justify; "><b><span style="font-size: 36px;"></span></b></p><div draggable="true" class="hocal-draggable"><iframe frameborder="0" src="//www.youtube.com/embed/whKhCk_8oEI" max-width="100%" class="video-element note-video-clip" height="360"></iframe></div><p style="text-align: justify; "><b><span style="font-size: 36px;"></span>
</b></p>]]></content:encoded>
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<title><![CDATA[देश दुनिया की लाइव खबरें 26 मई 2026 | Aaj Tak Live]]></title>
<tags>आज की बड़ी खबरें,सुबह की बड़ी खबरें,देश दुनिया की लाइव खबरें,news-headlines-in-hindi-for-school-assembly,News headlines in Hindi for school assembly,news headlines for school assembly in hindi,top-10-news,morning-news,todays-top-10-news,big-news-of-the-day,top-10-news-of-this-morning,latest news headlines for today,Daily School Assembly News Headlines in Hindi,headlines,top-headlines</tags>
<link>https://hastakshep.com/breaking-news/aaj-tak-breaking-news-26may-2026-301685</link>
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<category><![CDATA[Breaking News,खेल,दुनिया,देश,राजनीति,समाचार]]></category>
<dc:creator><![CDATA[Hastakshep]]></dc:creator>
<pubDate>Tue, 26 May 2026 03:36:06 GMT</pubDate>
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<image><![CDATA[https://hastakshep.com/h-upload/videothumb/yt_full_Nq2wYlWFucg.jpg]]></image>
<content:encoded><![CDATA[<img src='https://hastakshep.com/h-upload/videothumb/yt_full_Nq2wYlWFucg.jpg' /><h2 style="text-align: justify; "><b>Live news of the country and the world 26 May 2026 | Aaj Tak Live
</b></h2><p style="text-align: justify; "><b>Aaj Tak Breaking News 26 May 2026 दिन भर की खबरें 26 मई 2026 की देश दुनिया की आज तक लाइव खबरें यहां पढ़ें। यहां भारत की राजनीति, अर्थव्यवस्था, खेल, विज्ञान-तकनीक, मौसम अपडेट और अंतरराष्ट्रीय घटनाओं से जुड़ी हर ताज़ा व बड़ी खबर तुरंत पाएँ। 
</b></p><p style="text-align: justify; "><b>इस पेज पर दिन भर की खबरें अपडेट होंगीं..
</b></p><h3 style="text-align: justify; "><b>आज की ताज़ा खबरें और बड़ी खबरें 
</b></h3><p style="text-align: justify; "><b>26 मई को क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक की मेज़बानी करेंगे जयशंकर
</b></p><p style="text-align: justify; ">अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चीन यात्रा के कुछ दिनों बाद, भारत आज क्वाड के विदेश मंत्रियों की बैठक की अध्यक्षता करेगा, जिसमें "मुक्त और खुले इंडो-पैसिफिक" पर बातचीत मुख्य एजेंडा होगी। 
</p><p style="text-align: justify; ">प्राप्त जानकारी के अनुसार विदेश मंत्री एस. जयशंकर 26 मई को अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान के अपने समकक्षों की मेज़बानी करेंगे; यह बैठक अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो की भारत की द्विपक्षीय यात्रा के समापन पर होगी।
</p><h4 style="text-align: justify; "><b>राष्ट्रपति आज से शुरू हो रही तीन दिवसीय सिक्किम यात्रा के दौरान नाथू ला दर्रे का दौरा करेंगी
</b></h4><p style="text-align: justify; ">राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज से शुरू हो रही अपनी तीन दिवसीय सिक्किम यात्रा के दौरान भारत-चीन सीमा पर स्थित नाथू ला दर्रे का दौरा करेंगी। 
</p><p style="text-align: justify; ">राष्ट्रपति कार्यालय ने सोमवार को एक बयान में बताया कि मुर्मू मंगलवार को गंगटोक स्थित नामग्याल इंस्टीट्यूट ऑफ तिब्बतोलॉजी का दौरा करेंगी। 
</p><p style="text-align: justify; ">बयान में आगे कहा गया है कि मुर्मू 28 मई को गंगटोक में सिक्किम पुलिस को 'प्रेसिडेंट ऑफ इंडियाज़ पुलिस कलर' प्रदान करेंगी।
</p><p style="text-align: justify; "><b>हाई कोर्ट पहुंचा दिल्ली जिमखाना क्लब
</b></p><p style="text-align: justify; ">दिल्ली जिमखाना क्लब के सदस्यों ने सोमवार को दिल्ली हाई कोर्ट में केंद्र के उस आदेश के खिलाफ याचिका दायर की, जिसमें क्लब से 5 जून तक अपना परिसर सरकार को सौंपने के लिए कहा गया था। 
</p><p style="text-align: justify; ">सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील अभिषेक सिंघवी ने तत्काल सुनवाई के लिए जस्टिस अवनीश झिंगन के सामने इस मामले का ज़िक्र किया। 
</p><p style="text-align: justify; ">कोर्ट ने इस मुकदमे को आज सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।
</p><p style="text-align: justify; "><b>सिद्धारमैया आज दिल्ली आएंगे
</b></p><p style="text-align: justify; ">कर्नाटक सरकार के हाल ही में तीन साल पूरे करने के बाद, नेतृत्व में बदलाव या कैबिनेट में फेरबदल को लेकर चल रही ज़ोरदार अटकलों के बीच, कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया आज सुबह कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व से मुलाकात करेंगे। इस मुलाकात में वे राज्यसभा और विधान परिषद के आगामी चुनावों पर चर्चा करेंगे।
</p><p style="text-align: justify; "><b>पंजाब में स्थानीय निकाय चुनावों के लिए इंतज़ाम पूरे
</b></p><p style="text-align: justify; ">अधिकारियों के मुताबितॉक पंजाब में आज को 103 स्थानीय निकायों (जिनमें आठ नगर निगम शामिल हैं) के चुनावों के लिए ज़रूरी इंतज़ाम पूरे कर लिए गए हैं। उन्होंने बताया कि वोटों की गिनती 29 मई को होगी। 
</p><p style="text-align: justify; ">इन स्थानीय निकायों के 1,896 वार्डों में बैलेट पेपर के ज़रिए मतदान होगा। मतदान सुबह 8 बजे शुरू होगा और शाम 5 बजे तक चलेगा।
</p><p style="text-align: justify; "><b>ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी के ज़रिए केंद्र लोगों को 'लूट' रहा है: सपकाल
</b></p><p style="text-align: justify; ">महाराष्ट्र कांग्रेस ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार पर पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में बार-बार बढ़ोतरी करके आम लोगों को 'लूटने' का आरोप लगाते हुए कीमतों में तत्काल कटौती की मांग की है। 
</p><p style="text-align: justify; ">एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने घोषणा की कि कांग्रेस मंगलवार (आज) से महाराष्ट्र के हर ज़िले में अपने विभिन्न विभागों, प्रकोष्ठों और संबद्ध संगठनों के ज़रिए विरोध प्रदर्शन करेगी। इन प्रदर्शनों के ज़रिए ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी को वापस लेने और नागरिकों की इस 'लूट' को खत्म करने की मांग की जाएगी। लक्ष्य और सिंधु सिंगापुर ओपन में भारत की चुनौती की अगुवाई करेंगे
</p><p style="text-align: justify; "><b>26 मई को तेलंगाना के 16 ज़िलों के लिए लू की चेतावनी
</b></p><p style="text-align: justify; ">भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आज मंगलवार के लिए तेलंगाना के 16 ज़िलों में लू की चेतावनी जारी की है। 
</p><p style="text-align: justify; ">भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के ताज़ा बुलेटिन के अनुसार, जयशंकर भूपालपल्ली, मुलुगु, भद्राद्री कोठागुडेम, खम्मम, कुमारम भीम आसिफाबाद, मंचेरियल, करीमनगर, पेद्दापल्ली, नलगोंडा, सूर्यपेट, महबूबाबाद, वारंगल, हनुमकोंडा, जगतियाल, राजन्ना सिरसिला और जनगांव ज़िलों के कुछ हिस्सों में लू चलने की प्रबल संभावना है।</p><div draggable="true" class="hocal-draggable"><iframe frameborder="0" src="//www.youtube.com/embed/a5SI5DvpYa4" max-width="100%" class="video-element note-video-clip" height="360"></iframe></div>]]></content:encoded>
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