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	<description>Himalaya Gaurav Uttarakhand</description>
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		<title>6 सितंबर 2026, रविवार &#038; 7.30pm एकादशी तिथि,   सिद्धि योग और आर्द्रा नक्षत्र का खास संयोग;कुछ विशेष उपाय ;समाज या राजनीति के क्षेत्र में रुतबा चाहते हैं, तो</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Himalaya Gaurav Uttarakhand]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 05 Sep 2026 16:20:21 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तराखंड समाचार]]></category>
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					<description><![CDATA[6 सितंबर 2026, रविवार भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि ^ 6 सितंबर को सिद्धि योग और आर्द्रा नक्षत्र का खास संयोग  &#38; वार: रविवार (Sunday) मास /&#8230; ]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="has-pale-pink-background-color has-background">6 सितंबर 2026, रविवार  <mark>भाद्रपद मास के <a href="http://www.himalayauk.org" target="_blank" rel="noreferrer noopener">कृष्ण पक्ष</a> की दशमी तिथि</mark> ^ 6 सितंबर को सिद्धि योग और आर्द्रा नक्षत्र का खास संयोग   &amp; <strong>वार:</strong> रविवार (Sunday)  <strong>मास / पक्ष:</strong> भाद्रपद, कृष्ण पक्ष  <strong>तिथि:</strong> दशमी तिथि शाम 07:29 बजे तक, उसके बाद एकादशी तिथि  <strong>नक्षत्र:</strong> आर्द्रा नक्षत्र रात्रि 07:52 बजे तक, उसके बाद पुनर्वसु नक्षत्र &amp; <strong>अभिजीत मुहूर्त:</strong> दोपहर 11:50 से 12:40 बजे तक <strong>ब्रह्म मुहूर्त:</strong> प्रातः 04:26 से 05:11 बजे तक <strong>विजय मुहूर्त:</strong> दोपहर 02:41 से 03:30 बजे तक   <strong><strong>राहुकाल (Rahu Kaal)</strong>:</strong> शाम 05:03 से 06:37 बजे तक</p>



<p><strong>By Chandra Shekhar Joshi Chief Editor &amp; President : Bagla Mukhi Peeth Dehradun 9412932030</strong></p>



<p class="has-luminous-vivid-orange-background-color has-background">हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 6 सितंबर रात्रि 7 बजकर 31 मिनट से शुरू हो जाएगी। वहीं एकादशी तिथि की समाप्ति 7 सितंबर को 5 बजकर 6 मिनट पर होगी। उदयातिथि में एकादशी 7 सितंबर को है इसलिए अजा एकादशी का व्रत भी 7 सितंबर को रखा जाना ही सही माना जाएगा। वहीं व्रत का पारण 8 सितंबर को सुबह 6 बजे के बाद होगा। </p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="910" height="512" src="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/09/6-SEP-1.jpg" alt="" class="wp-image-27098" srcset="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/09/6-SEP-1.jpg 910w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/09/6-SEP-1-300x169.jpg 300w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/09/6-SEP-1-768x432.jpg 768w" sizes="(max-width: 910px) 100vw, 910px" /></figure>



<p class="has-luminous-vivid-amber-background-color has-background">समाज या राजनीति के क्षेत्र में अपना रुतबा कायम करना चाहते हैं, तो</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="732" height="489" src="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/09/PUNCHANG-ALL.jpg" alt="" class="wp-image-27099" srcset="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/09/PUNCHANG-ALL.jpg 732w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/09/PUNCHANG-ALL-300x200.jpg 300w" sizes="(max-width: 732px) 100vw, 732px" /></figure>



<p>शनिवार 6 सितंबर के दिन भाद्रपद कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि है। इस दिन सिद्धि योग और आर्द्रा नक्षत्र &amp; रविवार 6 सितंबर के दिन भाद्रपद कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि रहेगी। शाम 7 बजकर 30 मिनट के बाद एकादशी तिथि की शुरुआत हो जाएगी। आज शाम 7 बजकर 53 मिनट तक आर्द्रा नक्षत्र रहेगा जिसका स्वामी ग्रह राहु है। इसके साथ ही सिद्धि योग भी आज विराजमान रहेगा। </p>



<p>रविवार के दिन सिद्धि योग में ये उपाय किए जाएं तो मनचाहे परिणाम आपको जीवन में प्राप्त हो सकते हैं।  कुछ विशेष उपाय : ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, सिद्धि योग और आर्द्रा नक्षत्र में कुछ खास उपाय करने से जीवन की अलग-अलग परेशानियों को दूर करने और मनोकामनाओं की पूर्ति में मदद </p>



<p>आर्द्रा नक्षत्र में रात को सोते समय अपने सिरहाने पर 2 मूली रखकर सोएं और सुबह उठकर मंदिर में दान कर दें। यह प्रक्रिया आर्द्रा नक्षत्र से शुरू करके लगातार 7 दिनों करें। वहीं, मंदिर में गुड़ या गुड़ से बनी कोई चीज दान करनी चाहिए।  &amp; आर्द्रा नक्षत्र के दौरान हाथ में कच्चा कोयला लेकर बहते जल में प्रवाहित कर दें। चांदी की एक ठोस गोली अपने ऑफिस या दुकान की तिजोरी में रख दें। &amp; सफलता नहीं मिल पा रही है तो  देवी सरस्वती के मंदिर जाएं।  देवी मां की विधिवत पूजा करें और सरसों के तेल का दीपक जलाएं। &amp; आर्द्रा नक्षत्र में रात को सोते समय अपने सिरहाने पर चन्दन का छोटा सा टुकड़ा रख कर सोएं और सुबह उस चन्दन को राहु के मंत्र का जाप करते हुए जल में प्रवाहित कर दें। मंत्र है: ऊँ भ्रां भ्रीं भ्रौं स राहवे नम </p>



<p>आर्द्रा नक्षत्र में संभव हो तो चांदी के बने हाथी को अन्यथा मिट्टी के हाथी को अपने घर में स्थापित करें। साथ ही पक्षियों को बाजरा डालें।</p>



<p class="has-pale-pink-background-color has-background">समाज या राजनीति के क्षेत्र में अपना रुतबा कायम करना चाहते हैं, तो मंदिर में तिल या गेहूं से बनी किसी चीज का दान करें।   तिल या फिर गेहूं का दान करें।</p>



<p>हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 6 सितंबर रात्रि 7 बजकर 31 मिनट से शुरू हो जाएगी। वहीं एकादशी तिथि की समाप्ति 7 सितंबर को 5 बजकर 6 मिनट पर होगी। उदयातिथि में एकादशी 7 सितंबर को है इसलिए अजा एकादशी का व्रत भी 7 सितंबर को रखा जाना ही सही माना जाएगा। वहीं व्रत का पारण 8 सितंबर को सुबह 6 बजे के बाद होगा।  ब्रह्म मुहूर्त: 04:52 AM से 05:38 AM तक  प्रातः सन्ध्या: 05:15 AM से 06:25 AM तक  अभिजित मुहूर्त: 12:12 PM से 01:01 PM तक  गोधूलि मुहूर्त: 06:48 PM से 07:11 PM तक</p>



<p>अजा एकादशी के दिन कई शुभ योग भी बनने जा रहे हैं। इस दिन सुबह के समय पुनर्वसु नक्षत्र रहेगा और रात्रि के समय पुष्य नक्षत्र। इसके साथ ही चंद्र-गुरु की युति से इस दिन गजकेसरी योग का निर्माण होगा। इस दिन <a href="http://www.himalayauk.org" target="_blank" rel="noreferrer noopener">पंचमहापुरुष योग</a> में से एक मालव्य योग का निर्माण शुक्र के स्वराशि में होने बनेगा। इसके साथ ही बुध ग्रह अपनी उच्च राशि में होकर भद्र योग का निर्माण इस दिन करेंगे। ऐसे में अजा एकादशी का व्रत रखने से और इस दिन तुलसी से जुड़े धार्मिक उपाय करने से भक्तों को बेहद शुभ फलों की प्राप्ति हो सकती है। जो लोग व्रत या उपाय न कर पाएं उन्हें भगवान विष्णु के मंत्रों का जप करने से भी सुखद परिणाम मिल सकते हैं। </p>



<p class="has-light-green-cyan-background-color has-background">क्या है पंच महापुरुष योग?</p>



<p>ज्योतिष के अनुसार कुंडली में बनने वाले योग हमारे जीवन पर भी प्रभाव डालते हैं। ज्योतिष में कई अच्छे और बुरे योगों की जानकारी मिलती है, लेकिन सभी योगों में पंच महापुरुष योग को बेहद खास और शुभ माना जाता है। यह योग कैसे बनता है और कैसे परिणाम इससे मिलते हैं, </p>



<p>कुंडली में मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि पंच महापुरुष योग का निर्माण करते हैं। मंगल से बनने वाले योग को रूचक योग, बुध से बनने वाले योग को भद्र योग, गुरु से बनने वाले योग को हंस योग, शुक्र से बनने वाले योग को मालव्य योग, और शनि से बनने वाले योग को शश योग कहा जाता है। कुंडली के पांच अलग-अलग ग्रहों से बनने वाले इन योगों को ही पंच महापुरुष योग का नाम दिया गया है। इन पांच योगों में से एक भी अगर आपकी कुंडली में बनता है तो आपको बेहद अच्छे फल प्राप्त होते हैं। आइए अब जानते हैं कि ये योग बनते कैसे हैं।&nbsp;</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>मंगल का रुचक योग</strong></h3>



<p>कुंडली के केंद्र भाव (1, 4, 7, 10) में जब मंगल अपनी स्वराशि यानि मेष या वृश्चिक में या फिर अपनी उच्च राशि मकर में हों तो रुचक योग बनता है। ऐसे लोगों को साहसी और पराक्रमी माना जाता है। मंगल के प्रभाव से नेतृत्व करने की भी इनमं अच्छी क्षमता होती है। सेना, पुलिस, चिकित्सा आदि क्षेत्रों में ये सफल होते हैं।&nbsp;</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>बुध का भद्र योग</strong></h3>



<p>जब बुध ग्रह कुंडली के केंद्र भावों में अपनी राशियों मिथुन या कन्या में हों तो भद्र योग बनता है। इस योग के बनने से व्यक्ति को अच्छी बौद्धिक क्षमता मिलती है। ऐसे लोग जबरदस्त कारोबारी हो सकते हैं। टेक्निकल क्षेत्रों में ये ऊंचाइयों को छू सकते हैं।&nbsp;</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>गुरु का हंस योग</strong></h3>



<p>शुभ ग्रह गुरु जब कुंडली के केंद्र भावों में अपनी राशि या फिर अपनी उच्च राशि में होते हैं तो हंस योग बनता है। गुरु की राशियां धनु और मीन हैं जबकि उच्च राशि कर्क। इस योग के बनने से जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है, धन वैभव की कोई कमी नहीं होती और मान-सम्मान भी व्यक्ति को खूब मिलता है।&nbsp;</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>शुक्र का मालव्य योग&nbsp;</strong></h3>



<p>शुक्र जब केंद्र भावों में अपनी राशियों वृषभ या तुला में हो या फिर अपनी उच्च राशि मीन में हो तो व्यक्ति को भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है। ऐसे लोग कलात्मक क्षेत्रों में खूब नाम कमाते हैं और दृढ़निश्चयी होते हैं।&nbsp;</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>शनि का शश योग&nbsp;</strong></h3>



<figure class="wp-block-image size-large"><img decoding="async" width="1024" height="577" src="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/09/CS-JOSHI-1-1024x577.jpg" alt="" class="wp-image-27100" srcset="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/09/CS-JOSHI-1-1024x577.jpg 1024w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/09/CS-JOSHI-1-300x169.jpg 300w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/09/CS-JOSHI-1-768x432.jpg 768w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/09/CS-JOSHI-1-1536x865.jpg 1536w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/09/CS-JOSHI-1.jpg 2048w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>शनि जब कुंडली के केंद्र भावों में मकर या कुंभ राशि में हों या फिर अपनी उच्च राशि तुला में हों तो शश योग बनता है। इस योग के प्रभाव से व्यक्ति न्यायप्रिय होता है। सरकारी क्षेत्रों में ऐसे लोगों को सफलता प्राप्त होती है। ऐसे लोग अच्छे जज या वकील हो सकते हैं।&nbsp;</p>
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		<title>4 सितंबर 2026, शुक्रवार &#038;  भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि जन्माष्टमी ^ मध्यरात्रि में कान्हा जन्म &#038; कालाष्टमी भी &#038; आधी रात को कृष्ण जन्म &#038; जन्माष्टमी पर इन   का होगा भाग्योदय ^ बाल गोपाल को पीले रंग के वस्त्र धारण करायें</title>
		<link>https://himalayauk.org/4-september-2026-friday-ashtami-tithi-of-bhadrapada-krishna-paksha/?utm_source=rss&#038;utm_medium=rss&#038;utm_campaign=4-september-2026-friday-ashtami-tithi-of-bhadrapada-krishna-paksha</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Himalaya Gaurav Uttarakhand]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 03 Sep 2026 17:03:38 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तराखंड समाचार]]></category>
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					<description><![CDATA[4 सितंबर 2026, शुक्रवार &#38;  4 सितंबर 2026 को भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि है। इस दिन जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जाता है। रात 11:57 से 12:43 के आसपास (लगभग मध्यरात्रि&#8230; ]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="has-pale-pink-background-color has-background">4 सितंबर 2026, <mark>शुक्रवार</mark> &amp; <strong> </strong>4 सितंबर 2026 को भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि है। इस दिन <strong><a href="http://www.himalayauk.org" target="_blank" rel="noreferrer noopener">जन्माष्टमी का त्योहार</a></strong> मनाया जाता है। रात 11:57 से 12:43 के आसपास (लगभग मध्यरात्रि में कान्हा के जन्म &amp; अष्टमी तिथि देर रात 12 बजकर 14 मिनट तक रहेगी। वहीं हर्षण योग दोपहर बाद 3 बजकर 44 मिनट तक रहेगा। साथ ही रोहिणी नक्षत्र रात 11 बजकर 5 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा इस दिन कालाष्टमी भी मनाई जाएगी। &amp; जन्माष्टमी के दिन  व्रत &amp; आधी रात को 12 बजे बाल गोपाल की पूजा ^  <a href="http://www.himalayauk.org"><strong>भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि</strong></a> ^  BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI CHIEF EDITOR &amp; PRESIDENT BAGLA MUKHI PEETH MOB. 9412932030</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="876" height="508" src="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/09/4-SEP-2026.jpg" alt="" class="wp-image-27093" srcset="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/09/4-SEP-2026.jpg 876w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/09/4-SEP-2026-300x174.jpg 300w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/09/4-SEP-2026-768x445.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 876px) 100vw, 876px" /></figure>



<p>धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी तिथि की आधी रात को मथुरा के कारागार में देवकी और वसुदेव के पुत्र के रूप में भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म लिया था।  04 सितंबर को भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि है। इस दिन देशभर में कृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जाएगा।  इस तिथि पर रोहिणी नक्षत्र और हरषाना योग का विशेष संयोग बन रहा है। इस तिथि पर चंद्रमा का गोचर वृषभ राशि में है, जिसके स्वामी मंगलदेव</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>जन्माष्टमी पूजा का समय &#8211; 11:57 PM से 12:43 AM, 5 सितंबर</li>



<li>मध्यरात्रि का क्षण &#8211; 12:20 AM, सितम्बर 05</li>
</ul>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>4 सितंबर 2026 जन्माष्टमी चंद्रोदय समय</strong></h3>



<p>जन्माष्टमी के दिन चंद्रमा रात 11 बजकर 29 मिनट पर निकलने की संभावना है।  अष्टमी तिथि 4 सितंबर को तड़के 2:25 बजे से शुरू होकर 5 सितंबर रात 12:13 बजे तक रहेगी। रोहिणी नक्षत्र रात्रि 11:03 बजे तक रहेगा।</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>ब्रह्म मुहूर्त &#8211; 04:30 AM से 05:15 AM</li>



<li>प्रातः सन्ध्या &#8211; 04:52 AM से 06:00 AM</li>



<li>अभिजित मुहूर्त &#8211; 11:55 AM से 12:45 PM</li>



<li>विजय मुहूर्त &#8211; 02:26 PM से 03:17 PM</li>



<li>गोधूलि मुहूर्त &#8211; 06:39 PM से 07:02 PM</li>



<li>सायाह्न सन्ध्या &#8211; 06:39 PM से 07:48 PM</li>



<li>अमृत काल &#8211; 08:03 PM से 09:33 PM</li>



<li>निशिता मुहूर्त &#8211; 11:57 PM से 12:43 AM, सितम्बर  </li>
</ul>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="882" height="502" src="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/09/4-SEP-1-1.jpg" alt="" class="wp-image-27094" srcset="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/09/4-SEP-1-1.jpg 882w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/09/4-SEP-1-1-300x171.jpg 300w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/09/4-SEP-1-1-768x437.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 882px) 100vw, 882px" /></figure>



<p>द्वापर युग में मथुरा पर राजा उग्रसेन का शासन था। उनका पुत्र कंस बेहद अत्याचारी था। कंस ने अपने पिता को गद्दी से हटाकर मथुरा पर अधिकार कर लिया और प्रजा पर अत्याचार करने लगा। हालांकि, अपनी बहन देवकी से वह बहुत प्रेम करता था, लेकिन उसी प्रिय बहन को कंस ने बहुत कष्ट भी दिए। देवकी का विवाह यदुवंशी सरदार वसुदेव से हुआ था।</p>



<p>बड़े अरमानों से कंस ने देवकी का विवाह कराया। जब विवाह के कंस स्वयं देवकी और वसुदेव को उनके घर पहुंचाने के लिए रथ लेकर निकला। तभी आकाशवाणी हुई कि जिस बहन को वह इतने प्रेम से विदा कर रहा है, उसी की आठवीं संतान कंस के वध का कारण बनेगी। यह सुनकर कंस क्रोधित हो गया और वसुदेव को मारने के लिए आगे बढ़ा।</p>



<p>तब देवकी ने कंस से वसुदेव का जीवन बख्शने की विनती की और वचन दिया कि उनकी जो भी संतान होगी, उसे वह कंस को सौंप देंगी। कंस ने अपनी बहन की बात मान तो ली, लेकिन देवकी और वसुदेव दोनों को कारागार में बंद कर दिया। देवकी और वसुदेव की 7&nbsp;संतानें हुईं और एक-एक करके उनके मामा कंस ने जन्म लेते ही उन सभी नवजातों की हत्या कर दी। आठवीं संतान के जन्म का समय आया तो कारागार की सुरक्षा और भी कड़ी कर दी गई। इसी दौरान गोकुल में नंद की पत्नी यशोदा भी संतान को जन्म देने वाली थीं।</p>



<p>भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी की आधी रात को देवकी ने <a href="http://WWW.HIMALAYAUK.ORG"><strong>भगवान विष्णु के आठवें अवतार श्रीकृष्ण को जन्म दिया</strong></a>। धार्मिक मान्यता के अनुसार उस समय भगवान विष्णु चतुर्भुज स्वरूप में देवकी और वसुदेव के सामने प्रकट हुए। उन्होंने बताया कि वे मानव रूप में अवतार लेकर कंस के अत्याचार का अंत करने आए हैं और वसुदेव से उन्हें गोकुल में नंद-यशोदा के पास छोड़ आने को कहा।</p>



<p>इसके बाद भगवान ने नवजात शिशु का रूप धारण कर लिया। उसी समय कारागार के पहरेदार मूर्छित हो गए और उसके द्वार अपने आप खुल गए। वसुदेव बालक कृष्ण को सूप में रखकर गोकुल की ओर चल पड़े। भारी बारिश के चलते उस समय यमुना नदी उफान पर थी। वसुदेव जब बालक कृष्ण को लेकर यमुना में उतरे, तब भगवान के चरणों का स्पर्श होते ही यमुना का जल शांत हो गया और उनके लिए रास्ता बन गया। वसुदेव गोकुल पहुंचे और नंद के घर जाकर बालक कृष्ण को यशोदा के पास सुला दिया। इसके बदले वे वहां जन्मी कन्या को लेकर मथुरा के कारागार में लौट आए।</p>



<p>प्रात: काल में जब कंस को देवकी के आठवें बच्चे के जन्म की सूचना मिली, तो वह अत्यंध क्रोध में धधकता हुआ उस शिशु की हत्या करने कारागार पहुंच गया। निर्मम कंस ने कन्या को देवकी की गोद से छीनकर उसे पत्थर पर पटकने का प्रयास किया, लेकिन वह कन्या उसके हाथ से निकलकर आकाश की ओर चली गई। उसने कंस को चेतावनी दी कि उसका वध करने वाला जन्म ले चुका है और गोकुल में नंद के घर पहुंच चुका है।</p>



<p><strong>कृष्ण ने किया अत्याचारी कंस&nbsp;का अंत</strong></p>



<p>आकाशवाणी सुनकर कंस और अधिक क्रोधित हो गया। उसने कृष्ण को मारने के लिए कई राक्षसों को भेजा, लेकिन सभी के प्रयास विफल रहे। आगे चलकर युवा अवस्था में श्रीकृष्ण ने कंस का वध किया और मथुरा के लोगों को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाई। भगवान कृष्ण ने अपने जीवन में अनेक लीलाएं कीं और महाभारत में अर्जुन को गीता का उपदेश देकर संसार को धर्म और कर्म का मार्ग दिखाया।</p>



<p><strong>न-धान्य के लिए:</strong> जन्माष्टमी की रात को लड्डू गोपाल का केसर मिले दूध से अभिषेक करें। इससे आर्थिक तंगी दूर होती है।<br><strong>बांसुरी का उपाय:</strong> भगवान कृष्ण को बांसुरी बेहद प्रिय है। इस दिन राधा-कृष्ण मंदिर में चांदी या बांस की एक सुंदर बांसुरी अर्पित करें। करियर और कारोबार में लाभ होगा।<br><strong>पीले वस्त्र व भोग:</strong> कान्हा को पीले वस्त्र पहनाएं और उन्हें पीले रंग की मिठाई या पंजीरी के साथ तुलसी दल का भोग लगाएं। इससे भगवान शीघ्र प्रसन्न होते हैं।<br><strong>मंत्र जाप:</strong> पूजा के दौरान &#8220;क्लीं कृष्णाय नमः&#8221; या &#8220;ह्रीं क्लीं कृष्णाय नमः&#8221; मंत्र की कम से कम एक माला (108 बार) जाप करें।</p>



<p><strong>जन्माष्टमी पर इन अभिलेखों का होगा भाग्योदय</strong> </p>



<p><strong>वृषभ राशि</strong></p>



<p>जन्माष्टमी के दिन वृषभ राशि पर श्रीकृष्ण की विशेष कृपा बरसाने वाली है। इस दिन चंद्रमा आपकी राशि में उच्च रहेगा। श्रीकृष्ण की भक्ति, प्रेम, सौंदर्य, आकर्षण और संगीत के प्रतीकों से संबंधित मंदिर, जो शुक्र ग्रह से संबंधित है। जन्माष्टमी पर आपको विशेष लाभ मिल सकता है। शुक्र चंद्रमा और अटके हुए कार्य को पूरा करने में सहायक साबित होंगे। रिश्तों से लाभ हो सकता है और परिवार में कोई मांगलिक कार्य हो सकता है।</p>



<p><strong>उपाय-</strong>&nbsp;जन्माष्टमी पर श्रीकृष्ण को बांसुरी बांधें और चांदी के रंग का वस्त्र पहनाएं।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>2. कर्क राशि</strong></h3>



<p>पौराणिक कथाओं में श्रीकृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में बताया गया है। कर्क राशि के स्वामी चंद्रमा हैं, इसलिए जन्माष्टमी पर कर्क राशि के जातकों की मानसिक शांति और संतुलन में वृद्धि होगी। कला क्षेत्र से जुड़े लोगों को हो सकता है लाभ।</p>



<p><strong>उपाय-</strong>&nbsp;जन्माष्टमी पर माखन-मिश्री का भोग लगाएं और कान्हा को सफेद वस्त्र पहनाएं।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>3. तुला राशि</strong></h3>



<p>जन्माष्टमी पर शुक्र अपनी स्वराशि तुला में रहेंगे और मंगल के साथ नवपंचम योग बनेगा। इन शुभ योग से तुला राशि वालों के भौतिक सुख-सुविधा में वृद्धि होगी। आर्थिक स्थिति में पहले से सुधार होगा और बिजनेस में नई-नई डील मिल सकती है।</p>



<p><strong>उपाय-</strong>&nbsp;जन्माष्टमी पर कच्चा दूध और गंगाजल से लोध गोपाल का अभिषेक करें।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>4. राशि</strong></h3>



<p>जन्माष्टमी पर ग्रह-नक्षत्रों से बनने वाला योग धनु राशि वालों के लिए भी सिद्ध होगा। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और व्यापार में लाभ होगा। वैवाहिक जीवन में प्यार और संत सुख की प्राप्ति के योग बन सकते हैं। नौकरीपेशा लोगों को रेस्टॉरेंट मिल में मिल सकता है।<br><br></p>



<p></p>
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		<title> 5 ऐसी चीजें हैं जिनसें श्रीकृष्ण शीघ्र ही प्रसन्न : 3 सितंबर 2026, गुरुवार विशेष पर्व: शीतला सप्तमी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Himalaya Gaurav Uttarakhand]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 02 Sep 2026 16:24:57 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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					<description><![CDATA[3 सितंबर 2026, गुरुवार विशेष पर्व: शीतला सप्तमी ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:30 से 05:15 तकअभिजित मुहूर्त: सुबह 11:55 से दोपहर 12:46 तक राहुकाल: दोपहर 01:55 से 03:30 तक सूर्योदय- सुबह&#8230; ]]></description>
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<p><strong>3 सितंबर 2026, <mark>गुरुवार</mark>  विशेष पर्व: शीतला सप्तमी ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:30 से 05:15 तक<br>अभिजित मुहूर्त: सुबह 11:55 से दोपहर 12:46 तक राहुकाल: दोपहर 01:55 से 03:30 तक  सूर्योदय- सुबह 06:00 बजे सूर्यास्त- शाम 06:41 बजे चंद्रमा 3 सितंबर की सुबह राशि परिवर्तन  &amp; शीतला सप्तमी का पूजन किया जाता है। आज भगवान विष्णु और बृहस्पति देव का दिन होने के कारण विशेष शुभ माना जाता है।</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="916" src="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/09/4-1024x916.jpg" alt="" class="wp-image-27089" srcset="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/09/4-1024x916.jpg 1024w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/09/4-300x268.jpg 300w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/09/4-768x687.jpg 768w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/09/4.jpg 1080w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p class="has-pale-pink-background-color has-background"> भगवान विष्णु के चरणों का ध्यान कर &#8216;ॐ नमो भगवते वासुदेवाय&#8217; मंत्र बोलते हुए यात्रा आरंभ करें।<strong> भगवान भोलेनाथ की कृपा से आपका जीवन सुख, समृद्धि और अच्छी सेहत से परिपूर्ण हो! कल्याण हो!</strong></p>



<p class="has-light-green-cyan-background-color has-background">3 सितंबर को भाद्रपद कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि देर रात 2 बजकर 26 मिनट तक रहेगी। इसके बाद अष्टमी तिथि शुरू हो जाएगी। इसी दिन शीतला सप्तमी का पर्व मनाया जाएगा। इस अवसर पर श्रद्धालु शीतला माता की पूजा करते हैं और परिवार की सुख-शांति, आरोग्य और समृद्धि की. </p>



<p>भाद्रपद कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि और गुरुवार का दिन है। सप्तमी तिथि 03 सितंबर को देर रात 2 बजकर 26 मिनट तक रहेगी। इसके अलावा कल रात 12 बजकर 29 मिनट तक रवि योग रहेगा। वहीं, कल रात 12 बजकर 30 मिनट तक कृतिका नक्षत्र रहेगा। इसके साथ कल 03 सितंबर को शीतला सप्तमी है</p>



<p>चंद्रमा 3 सितंबर 2026 की सुबह मेष राशि से निकलकर अपनी उच्च राशि वृषभ में गोचर कर जाएंगे। चंद्रमा का यह गोचर सुबह 7 बजकर 26 मिनट पर होगा। मन, माता, अर्थ आदि के कारक ग्रह चंद्रमा जब अपनी उच्च राशि में जाएंगे तो इनकी शक्ति कई गुना बढ़ जाएगी।</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>ब्रह्म मुहूर्त- 04:30 ए एम से 05:15 ए एम</li>



<li>प्रातः सन्ध्या- 04:52 ए एम से 06:00 ए एम</li>



<li>अभिजित मुहूर्त- 11:55 ए एम से 12:46 पी एम</li>



<li>विजय मुहूर्त- 02:27 पी एम से 03:18 पी एम</li>



<li>गोधूलि मुहूर्त- 06:41 पी एम से 07:03 पी एम</li>



<li>सायाह्न सन्ध्या- 10:12 पी एम से 11:43 पी एम</li>



<li>अमृत काल- 03:07 पी एम से 04:54 पी एम</li>
</ul>



<p>रवि योग और कृतिका नक्षत्र का प्रभाव रहेगा। मान्यता है कि रवि योग में किया गया कार्य सफल होता है। सूर्य के प्रभाव वाला यह योग बहुत ही प्रभावशाली माना जाता है। सूर्य की ऊर्जा से भरपूर इस योग में किए गए कार्य को कोई बिगाड़ नहीं सकता। इस योग में सभी अनिष्ट शक्तियों को नष्ट करने की अद्भुत शक्ति मानी जाती है। अतः इस योग में जो भी कार्य किए जाएं, उनके सफल होने की मान्यता है। इसलिए रवि योग में किसी भी प्रकार के शुभ कार्य संपन्न किए जा सकते हैं।</p>



<p>वहीं, कृतिका नक्षत्र कुल 27 नक्षत्रों में कृतिका तीसरा नक्षत्र है। इसका पहला चरण मेष राशि में, जबकि बाकी तीन चरण वृष राशि में आते हैं। लिहाजा मेष और वृष, दोनों राशियों पर कृतिका नक्षत्र का प्रभाव रहता है। कृतिका नक्षत्र के दौरान सूर्यदेव की उपासना करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>मेष राशि</strong></h3>



<p>चंद्रमा का गोचर आपके धन के <a href="http://www.himalayauk.org" target="_blank" rel="noreferrer noopener">द्वितीय भाव में </a>होगा। इस गोचर के चलते आपको धन-धान्य की प्राप्ति हो सकती है। पारिवारिक जीवन में अच्छा समय बिताने का भी आपको मौका मिल सकता है। जो लोग राजनीति के क्षेत्र में हैं उनके प्रशंसकों की संख्या बढ़ सकती है क्योंकि अपनी वाणी से आप लोगों को प्रभावित कर पाएंगे। जो लोग लेखन, गायन, वादन आदि के क्षेत्र में हैं उनकी कोई रचना प्रसिद्धि पा सकती है। </p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>वृषभ राशि</strong></h3>



<p>चंद्रमा का गोचर आपकी ही राशि में होगा ऐसे में आपके आत्मविश्वास में वृद्धि देखने को मिल सकती है। मानसिक रूप से आप प्रबल होंगे और सही समय पर सही फैसले ले पाएंगे। पारिवारिक जीवन में खुशियां आपको प्राप्त हो सकती हैं, कुटुंब के किसी सदस्य के जरिए शुभ समाचार भी मिल सकता है। कारोबारियों की योजनाएं सफल हो सकती हैं वहीं नौकरी पेशा लोगों को भी सुखद बदलाव कार्यक्षेत्र में देखने को मिल सकते हैं। दांपत्य जीवन में भी सकारात्मक बदलाव आ सकते हैं।&nbsp;</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>कर्क राशि</strong></h3>



<p>चंद्रमा आपकी ही राशि के स्वामी हैं और वृषभ राशि में गोचर के दौरान आपके एकादश भाव में विराजमान रहेंगे। एकादश भाव लाभ का कारक माना जाता है, ऐसे में आपको भी जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में लाभ की प्राप्ति हो सकती है। निवेश किए गए धन से अच्छा रिटर्न मिल सकता है। जो लोग विदेशों से जुड़ा कारोबार करते हैं उनको अच्छी डील मिल सकती है। इसके साथ ही पारिवारिक और सामाजिक जीवन में भी सकारात्मक बदलाव आपको देखने को मिल सकते हैं।&nbsp;</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>कन्या राशि&nbsp;</strong></h3>



<p>चंद्रमा के गोचर के चलते आपका नवम भाव सक्रिय होगा जिसे भाग्य का भाव भी कहा जाता है। इस गोचर के प्रभाव से आपके अधूरे काम पूरे हो सकते हैं और किस्मत का भी आपको भरपूर सहयोग प्राप्त होगा। कुछ नौकरी पेशा लोगों की अचानक से पदोन्नति हो सकती है। कन्या राशि के विद्यार्थियों के जीवन में भी सुखद बदलाव आ सकते हैं, एकाग्रता में वृद्धि देखने को मिलेगी।&nbsp;</p>



<p>4 सितंबर 2026 : श्रद्धालु शुभ मुहूर्त में बाल गोपाल की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं और मिलकर भगवान कृष्ण के जन्म का उत्सव मनाते हैं। कहते हैं जो भी श्रद्धालु जन्माष्टमी पर भगवान कृष्ण की सच्चे मन से आराधना करता है उसके जीवन के सारे दुख-दर्द दूर हो जाते हैं। </p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>चांदी की बांसुरी</strong></h3>



<p>जन्माष्टमी पर भगवान कृष्ण को बांसुरी जरूर अर्पित करें। अगर संभव हो तो इस शुभ अवसर पर कान्हा को चांदी की छोटी सी बांसुरी जरूर चढ़ाएं। बांसुरी अर्पित करते समय कान्हा से अपनी मनोकामना मांगें। इसके बाद यह बांसुरी घर के मंदिर में ही या अपनी तिजोरी में रख दें। मान्यता है कि ऐसा करने से घर की सारी नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है और माता लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>2. पीले वस्त्र&nbsp;&nbsp;</strong></h3>



<p>भगवान श्रीकृष्ण को पीतांबर धारी कहा जाता है। कहते हैं पीला रंग उन्हें अति प्रिय है, इसलिए जन्माष्टमी के शुभ अवसर पर कान्हा को पीले रंग की पोशाक जरूर पहनाएं। इससे बाल गोपाल की विशेष कृपा प्राप्त होगी।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>3. वैजयंती माला</strong></h3>



<p>जन्माष्टमी पर या इससे पहले भगवान कृष्ण के लिए वैजयंती माला जरूर खरीदें। फिर जन्माष्टमी की पूजा के दिन यह माला उन्हें पहनाएं। ऐसा माना जाता है कि श्रीकृष्ण को वैजयंती माला अर्पित करने से कुंडली में ग्रहों की स्थिति मजबूत होती है और अटके हुए काम बनने शुरू हो जाते हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>4. मोर पंख</strong></h3>



<p>मोर पंख भगवान कृष्ण का बेहद प्रिय माना जाता है। इसी कारण से जन्माष्टमी के दिन इसे भगवान को अर्पित करने का विशेष महत्व माना जाता है। ऐसे में जन्माष्टमी पर कान्हा के मुकुट पर मोर पंख जरूर सजाएं।&nbsp;</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>5. शंख&nbsp;</strong></h3>



<p>जन्माष्टमी के दिन घर में एक नया दक्षिणावर्ती शंख लाना बहुत शुभ माना जाता है। कहते हैं इस शुभ दिन पर इस शंख में गंगाजल भरकर भगवान कृष्ण का अभिषेक करने से सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है।&nbsp;</p>
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		<title>संयुक्त राष्ट्र ने चेताया ;हिमालय में ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे, हिमालयी ग्लेशियर बाढ़ कुछ घंटों में तबाही ला सकती है, खतरा शुरू हो चुका है</title>
		<link>https://himalayauk.org/united-nations-warned-that-glaciers-in-the-himalayas-are-melting-rapidly-himalayan-glacier-floods-can-cause-devastation-in-a-few-hours-the-danger-has-already-started/?utm_source=rss&#038;utm_medium=rss&#038;utm_campaign=united-nations-warned-that-glaciers-in-the-himalayas-are-melting-rapidly-himalayan-glacier-floods-can-cause-devastation-in-a-few-hours-the-danger-has-already-started</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Himalaya Gaurav Uttarakhand]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 02 Sep 2026 16:00:59 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य समाचार]]></category>
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					<description><![CDATA[संयुक्त राष्ट्र ने चेताया है कि मुंबई और कोलकाता समेत दक्षिण एशिया में 1.4 करोड़ से अधिक लोग स्थायी जलभराव के चलते घर खोने के तत्काल जोखिम में हैं. जलवायु&#8230; ]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>संयुक्त राष्ट्र ने चेताया है कि मुंबई और कोलकाता समेत दक्षिण एशिया में 1.4 करोड़ से अधिक लोग स्थायी जलभराव के चलते घर खोने के तत्काल जोखिम में हैं. जलवायु संकट अब सीधे घर, पानी, बिजली, खेती और जिंदगी पर दस्तक दे रहा है. मुंबई भारत के सबसे बड़े तटीय महानगरों में से एक है और समुद्र के बेहद करीब बसा हुआ है. वहीं कोलकाता गंगा-ब्रह्मपुत्र-मेघना डेल्टा क्षेत्र के संवेदनशील हिस्से में आता है. संयुक्त राष्ट्र समुद्र के बढ़ते स्तर को पर्यावरण का मुद्दा ही नहीं, बल्कि मानवाधिकार, अर्थव्यवस्था और विकास का संकट मान रहा है. हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट और बिजली नेटवर्क को भी भविष्य की बाढ़ को ध्यान में रखकर ज्यादा मजबूत बनाना होगा. हिमालयी क्षेत्रों को तय करना होगा कि खतरनाक ग्लेशियर झीलों की निगरानी कैसे होगी, चेतावनी कितनी जल्दी लोगों तक पहुंचेगी और नदी किनारे बसे लोगों को सुरक्षित कैसे किया जाएगा.</strong></p>



<p class="has-luminous-vivid-orange-color has-text-color has-link-color wp-elements-b7a30265ec16ed03e5b5586eb39bf74f"><strong>By Chandra Shekhar Joshi Chief Editor &amp; President Bagula Mukhi Peeth Dehradun Mob. 9412932030</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="943" height="549" src="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/09/HIMALAYA.jpg" alt="" class="wp-image-27083" srcset="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/09/HIMALAYA.jpg 943w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/09/HIMALAYA-300x175.jpg 300w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/09/HIMALAYA-768x447.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 943px) 100vw, 943px" /></figure>



<p class="has-pale-pink-background-color has-background"><strong>हिमालय में खतरा कई बार कुछ घंटों में पूरी घाटी की तस्वीर बदल सकता है. हिमालय में ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं. इससे ग्लेशियरों से जुड़ी झीलों में पानी जमा हो सकता है और प्राकृतिक बर्फ या मलबे से बांध पर दबाव बढ़ सकता है.</strong> यह खतरा इसलिए भी बड़ा है क्योंकि हिमालय से निकलने वाली नदियों पर पीने के पानी के साथ ही खेती, बिजली और रोजगार से जुड़े करोड़ों लोगों आश्रित हैं. समुद्र का बढ़ता स्तर धीरे-धीरे सामने आता है. हिमालयी ग्लेशियर बाढ़ कुछ घंटों में तबाही ला सकती है. हिमालय से मुंबई, कोलकाता और पूरे दक्षिण एशिया में संदेश स्पष्ट है कि खतरा आने वाला नहीं है, खतरा शुरू हो चुका है</p>



<p>समुद्र का स्तर बढ़ने पर इन इलाकों में तटीय बाढ़ का खतरा बढ़ता है. साथ ही कई तटीय इलाकों में जमीन भी धीरे-धीरे नीचे बैठ रही है. यानी इन इलाकों में जमीन धंस रही है. एक तरफ समुद्र का स्तर बढ़ रहा है, तो दूसरी तरफ जमीन धंस रही है. ऐसे में बाढ़ का खतरा और बड़ा हो रहा है.</p>



<p>संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि भारत के समुद्र तटीय महानगरों मुंबई और कोलकाता के साथ ढाका और दक्षिण एशिया के निचले डेल्टा क्षेत्रों में 1.4 करोड़ से ज्यादा लोग स्थायी जलभराव के कारण अपने घर खोने के तत्काल जोखिम में हैं. संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में स्पष्ट तौर पर यह जिक्र किया गया है कि इसका असर आज दिखाई देने लगा है और आने वाले दशकों में यह जलभराव तेजी से बढ़ सकता है. सबसे बड़ी चिंता दक्षिण एशिया के उन शहरों और इलाकों को लेकर जताई गई है जहां बड़ी आबादी समुद्र के बेहद करीब और निचले इलाकों में रहती है.</p>



<p class="has-light-green-cyan-background-color has-background">दरअसल, एक तरफ दुनिया के महासागर गर्म हो रहे हैं और समुद्र का स्तर लगातार ऊपर जा रहा है. दूसरी तरफ हिमालय में ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं, ग्लेशियर झीलों पर दबाव बढ़ रहा है और अचानक आने वाली बाढ़ का खतरा गंभीर होता जा रहा है. समुद्र का खारा पानी जब जमीन के अंदर मौजूद मीठे पानी के स्रोतों तक पहुंचेगा तब भूजल में नमक की मात्रा बढ़ जाएगी. इसे सैनिलाइजेशन या लवणीकरण या आसान शब्दों में खारेपन का बढ़ना कहा जाता है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="960" height="720" src="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/09/CS-JOSHI-HIMALAYA.jpg" alt="" class="wp-image-27084" srcset="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/09/CS-JOSHI-HIMALAYA.jpg 960w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/09/CS-JOSHI-HIMALAYA-300x225.jpg 300w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/09/CS-JOSHI-HIMALAYA-768x576.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 960px) 100vw, 960px" /></figure>



<p>इसका सीधा असर पीने के पानी पर पड़ेगा. तो अगर तटीय इलाकों के कुओं और जमीन के अंदर मौजूद पानी में समुद्री पानी घुसता है तो लोगों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना मुश्किल हो सकता है. इसका असर खेती पर भी पड़ेगा. मिट्टी में नमक बढ़ने से कृषि उत्पादकता घट सकती है. सिंचाई प्रभावित हो सकती है और भूजल पर निर्भर पारिस्थितिकी तंत्र को भी नुकसान पहुंच सकता है. यानी समुद्र का बढ़ता स्तर एक साथ पानी, खेती और भोजन की सुरक्षा सभी को प्रभावित कर सकता है.</p>



<p>संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक समुद्र का बढ़ता स्तर सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर चुनौती पैदा कर सकता है. तटीय स्वास्थ्य और सैनिटेशन इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचने से जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है. बाढ़ के कारण चोट और मौत का जोखिम बढ़ सकता है. सीवेज सिस्टम प्रभावित होने से स्वच्छता की समस्या पैदा हो सकती है. इसके अलावा बार-बार घर, जमीन और रोजगार खोने का डर लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर डाल सकता है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="615" height="1024" src="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/09/BANK-BAR-CODE-HGU-615x1024.jpg" alt="" class="wp-image-27085" srcset="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/09/BANK-BAR-CODE-HGU-615x1024.jpg 615w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/09/BANK-BAR-CODE-HGU-180x300.jpg 180w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/09/BANK-BAR-CODE-HGU-768x1280.jpg 768w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/09/BANK-BAR-CODE-HGU-922x1536.jpg 922w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/09/BANK-BAR-CODE-HGU.jpg 1229w" sizes="auto, (max-width: 615px) 100vw, 615px" /></figure>



<p>For Yr Contribution:  9412932030</p>
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			</item>
		<item>
		<title>02 सितंबर 2026 (बुधवार)  भाद्रपद कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि; हलषष्ठी; बलरामजी जन्मोत्सव; भद्राज मंदिर: उत्तराखंड में भगवान बलराम का एकमात्र धाम। </title>
		<link>https://himalayauk.org/02-september-2026-wednesday-shashthi-tithi-of-bhadrapada-krishna-paksha-halashashthi-balramji-birth-anniversary-bhadraj-temple-is-the-only-shrine-of-lord-balram-in-uttarakhand/?utm_source=rss&#038;utm_medium=rss&#038;utm_campaign=02-september-2026-wednesday-shashthi-tithi-of-bhadrapada-krishna-paksha-halashashthi-balramji-birth-anniversary-bhadraj-temple-is-the-only-shrine-of-lord-balram-in-uttarakhand</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Himalaya Gaurav Uttarakhand]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 01 Sep 2026 17:01:44 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म और संस्कृति]]></category>
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					<description><![CDATA[02 सितंबर 2026 का पंचांग: बुधवार के दिन भाद्रपद कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि  दिन: बुधवार मास: भाद्रपद पक्ष: कृष्ण पक्ष तिथि: षष्ठी तिथि (भोर 04:27 AM, 03 सितंबर तक)&#8230; ]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="has-luminous-vivid-orange-color has-text-color has-link-color wp-elements-cbe8f1a7f4ee7999af9a93d62cc20ab1"><strong>02 सितंबर 2026 का पंचांग: बुधवार के दिन भाद्रपद कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि  दिन: बुधवार मास: भाद्रपद  पक्ष: कृष्ण पक्ष  तिथि: षष्ठी तिथि (भोर 04:27 AM, 03 सितंबर तक) विशेष व्रत: हलषष्ठी (हरछठ / ललही छठ) व्रत   &amp; सूर्योदय: सुबह 05:59 AM सूर्यास्त: शाम 06:42 PM &amp; अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:55 AM से दोपहर 12:46 PM (लगभग)  ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:00 AM से 04:48 AM BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI CHIEF EDITOR &amp; FOUNDER PRESIDENT BAGLA MUKHI PEETH </strong></p>



<figure class="wp-block-embed is-type-video is-provider-youtube wp-block-embed-youtube wp-embed-aspect-16-9 wp-has-aspect-ratio"><div class="wp-block-embed__wrapper">
<iframe loading="lazy" title="महामाई से अरदास लगाई, बन गई अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी " width="1110" height="624" src="https://www.youtube.com/embed/WrjaLjvw76s?feature=oembed" frameborder="0" allow="accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture; web-share" referrerpolicy="strict-origin-when-cross-origin" allowfullscreen></iframe>
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<p>भाद्रपद कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि और बुधवार का दिन है। षष्ठी तिथि 02 सितंबर को पूरा दिन पूरी रात पार कर के भोर 4 बजकर 27 मिनट तक रहेगी। इसके अलावा <a href="http://www.himalayauk.org"><strong> हलषष्ठी का व्रत किया जायेगा</strong></a>। वहीं, कल रात 9 बजकर 12 मिनट तक ध्रुव योग रहेगा। इसके साथ ही कल 02 सितंबर को देर रात 1 बजकर 43 मिनट तक भरणी नक्षत्र रहेगा। इसके अलावा कल दोपहर 1 बजकर 46 मिनट पर शुक्र तुला राशि में गोचर </p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="742" height="665" src="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/09/BAL-BHADRA-TEMPLE-1.jpg" alt="" class="wp-image-27079" srcset="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/09/BAL-BHADRA-TEMPLE-1.jpg 742w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/09/BAL-BHADRA-TEMPLE-1-300x269.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 742px) 100vw, 742px" /></figure>



<p> 2 सितंबर को हलषष्ठी व्रत है। यह पर्व श्री बलरामजी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। चूंकि बलराम जी का प्रधान शस्त्र हल और मूसल है। इस दिन को हलषष्ठी, हरछठ या ललही छठ के रूप में मनाया जाता है। बलराम को हलधर के नाम से जाना जाता है। इस दिन गाय के दूध और दही का सेवन करना भी वर्जित है। इस दिन व्रत करने से संतानहीन दंपति को श्रेष्ठ संतान की प्राप्ति होती है और जिनकी पहले से संतान है, उनकी संतान की आयु, आरोग्य और ऐश्वर्य में वृद्धि होती है। </p>



<p> बलरामजी के जन्मोत्सव </p>



<p class="has-vivid-green-cyan-background-color has-background">भद्राज मंदिर: उत्तराखंड में भगवान बलराम का एकमात्र धाम। ,,,,,,,, पहाड़ी की चोटी पर स्थित भद्राज मंदिर में भगवान बलभद्र की पूजा की जाती है। ,,,,,,<br>चन्द्रशेखर जोशी संस्थापक साधक बगलामुखी पीठ बंजारा वाला देहरादून 9412932030</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="710" height="1024" src="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/09/BAL-BHADRA-710x1024.jpg" alt="" class="wp-image-27080" srcset="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/09/BAL-BHADRA-710x1024.jpg 710w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/09/BAL-BHADRA-208x300.jpg 208w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/09/BAL-BHADRA-768x1108.jpg 768w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/09/BAL-BHADRA.jpg 964w" sizes="auto, (max-width: 710px) 100vw, 710px" /></figure>



<p>भगवान बलभद्र एक जाग्रत देवता है ,,,,, इस मंदिर की स्थापना द्वापर युग में महाभारत युद्ध के ठीक बाद, पांडवों के समय की मानी जाती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान बलराम ने इस पहाड़ी पर आकर तपस्या की थी। स्थानीय मान्यताओं में बलभद्र जी को &#8216;भद्रराज देवता&#8217; कहा जाता है , विशेष रूप से &#8216;रोट कढ़ाई&#8217; (आटे और घी का हलवा) प्रसाद के रूप में चढ़ाते हैं। दूध घी मक्खन का भोग लगता है ,,,, भगवान बलभद्र के विषय में समाज के अधिकांश लोगों को विशेष जानकारी नहीं है,,,,,, पहाड़ों की रानी मसूरी से 15 किमी की दूरी भगवान भद्रराज का मंदिर स्थित है. भद्रराज मंदिर भगवान कृष्&#x200d;ण के छोटे भाई बलभद्र को समर्पित है. मान्यता है कि भगवान बलराम ने यहां पर राक्षस का वध किया. साथ ही चरवाहों के साथ पशुओं को भी चराया था.<br>देहरादून के पास मसूरी की भद्राज पहाड़ी पर स्थित यह मंदिर लगभग 7500 फीट की ऊंचाई पर है। भगवान बलराम को समर्पित यह स्थल आस्था और एडवेंचर ट्रेकिंग, दोनों का अद्भुत संगम है। लोक मान्यता है कि बलराम जी ने यहां पशुपालकों की रक्षा की थी और आज भी भद्राज देवता के रूप में उनकी आस्था के केंद्र बने हुए हैं<br></p>
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		<title> 1 सितंबर को रक्षा पंचमी 2026</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Himalaya Gaurav Uttarakhand]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 31 Aug 2026 15:53:49 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म और संस्कृति]]></category>
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					<description><![CDATA[1 सितंबर को भाद्रपद कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि और मंगलवार का दिन है। चतुर्थी तिथि मंगलवार को सुबह 7 बजकर 42 मिनट तक रहेगी , उसके बाद पंचमी तिथि&#8230; ]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>1 सितंबर को भाद्रपद कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि और मंगलवार का दिन है। चतुर्थी तिथि मंगलवार को सुबह 7 बजकर 42 मिनट तक रहेगी , उसके बाद पंचमी तिथि लग जाएगी। 1 सितंबर को रात 11 बजकर 39 मिनट तक वृद्धि योग रहेगा। साथ ही मंगलवार देर रात 2 बजकर 43 मिनट तक अश्विनी नक्षत्र रहेगा। इसके अलावा 1 सितंबर को रक्षा पंचमी मनाई जाएगी।  </p>



<ul class="wp-block-list">
<li>भाद्रपद कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि- 1 सितंबर 2026 को  सुबह 7 बजकर 42 मिनट तक रहेगी , उसके बाद पंचमी तिथि लग जाएगी</li>



<li>अश्विनी नक्षत्र-  1 सितंबर 2026 को देर रात 2 बजकर 43 मिनट तक</li>



<li>वृद्धि योग-1 सितंबर 2026 को रात 11 बजकर 39 मिनट तक </li>



<li>01 सितंबर 2026 विशेष- रक्षा पंचमी</li>
</ul>



<p>मंगलवार को रक्षा पंचमी है। इसे रेखा पंचमी या शांति पंचमी के नाम से भी जाना जाता है। प्रत्येक वर्ष रक्षा पंचमी का यह त्योहार<a href="http://www.himalayauk.org" target="_blank" rel="noreferrer noopener">www.himalayauk.org</a> के बाद ठीक पांचवें दिन मनाया जाता है। बता दें कि चतुर्थी तिथि मंगलवार को सुबह 7 बजकर 42 मिनट पर समाप्त हो जाएगी उसके बाद पंचमी तिथि शुरू हो जाएगी। रक्षा पंचमी पंचमी तिथि को मनाई जाती है। धार्मिक मान्यता है कि जो लोग किसी कारणवश रक्षाबंधन के दिन अपनी कलाई पर रक्षासूत्र बंधवाने में असमर्थ रहे हों या अपनी बहन से राखी नहीं बंधवा पाए हों, वे लोग आज रक्षा पंचमी के दिन रक्षासूत्र या राखी बंधवा सकते हैं।</p>



<p>31 अगस्त 2026 को भाद्रपद कृष्ण तृतीया तिथि प्रातः 08:50 बजे तक रहेगी, जिसके बाद चतुर्थी तिथि शुरू होगी। सूर्य दक्षिणायन, उत्तर गोल और वर्षा ऋतु में रहेंगे। चंद्रमा अगले दिन तड़के 03:23 बजे (1 सितंबर) तक मीन राशि में रहेंगे और फिर मेष राशि में प्रवेश करेंगे। पूजा और शुभ कार्यों के लिए ब्रह्म मुहूर्त सुबह 03:55 से 04:41 बजे तक और अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11:56 से 12:47 बजे तक रहेगा, जबकि राहुकाल सुबह 07:30 से 09:00 बजे तक रहेगा।</p>



<p>शक संवत 1948, भाद्रपद, कृष्ण, तृतीया, सोमवार, विक्रम संवत् 2083। तदनुसार अंग्रेजी तारीख 31 अगस्त सन् 2026 ई॰। सूर्य दक्षिणायन, उत्तर गोल, वर्षा ऋतु। राहुकाल सुबह 07 बजकर 30 मिनट से 09 बजकर 00 मिनट तक। तृतीया तिथि प्रातः 08 बजकर 50 मिनट तक उपरांत चतुर्थी तिथि का आरंभ।</p>



<p><strong>31 अगस्त 2026 को <mark>भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया-चतुर्थी तिथि और सोमवार</mark> &amp; तिथि: भाद्रपद कृष्ण तृतीया (सुबह 08:52 AM तक, उसके बाद चतुर्थी तिथि आरंभ) नक्षत्र: रेवती (देर रात 03:24 AM तक) सूर्योदय: सुबह 05:58 AM सूर्यास्त: शाम 06:43 PM राहुकाल: सुबह 07:34 AM से 09:10 AM तक &amp; सोमवार के दिन भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि है। इस दिन सुबह 8 बजकर 52 मिनट तक तृतीया रहेगी और उसके बाद चतुर्थी तिथि लग जाएगी। सोमवार के दिन कजरी तीज के व्रत के साथ ही संकष्टी श्रीगणेश चतुर्थी का व्रत भी रखा जाएगा।  &amp; बगला मुखी पीठ बंजारा वाला देहरादून में जन्माष्टमी 4 सितंबर को मनाई जाएगी. BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI CHIEF EDITOR &amp; BAGLA MUKHI PEETH</strong></p>



<p>मवार के दिन भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि है। इस दिन सुबह 8 बजकर 52 मिनट तक तृतीया रहेगी और उसके बाद चतुर्थी तिथि लग जाएगी। आज संकष्टी श्रीगणेश चतुर्थी&nbsp; &amp; ब्रह्म मुहूर्त- 04:51 ए एम से 05:37 ए एम प्रातः सन्ध्या- 05:14 ए एम से 06:23 ए एम अभिजित मुहूर्त- 12:14 पी एम से 01:04 पी एम विजय मुहूर्त- 02:44 पी एम से 03:34 पी एम</p>



<p>गोधूलि मुहूर्त- 06:54 पी एम से 07:17 पी एम सायाह्न सन्ध्या- 06:54 पी एम से 08:03 पी एम</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>भाद्रपद कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि- 31 अगस्त 2026 को सुबह 8 बजकर 52 मिनट तक रहेगी, उसके बाद चतुर्थी तिथि लग जाएगी</li>



<li>पूर्वा रेवती नक्षत्र-  31 अगस्त 2026 को देर रात 3 बजकर 24 मिनट तक</li>



<li>29 अगस्त 2026 विशेष- आज पंचक है। इसके साथ ही संकष्टी श्रीगणेश चतुर्थी और कजरी तीज का व्रत भी आज रखा जाएगा।</li>
</ul>



<p>संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी का व्रत हर माह कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को रखा जाता है। इसीलिए सोमवार को यह व्रत रखा जाएगा। माना जाता है कि इस दिन व्रत रखने से और गणेश जी की पूजा करने से सभी संकट दूर हो जाते हैं। तृतीया तिथि सोमवार को सुबह 8 बजकर 52 मिनट तक ही रहेगी, उसके बाद चतुर्थी तिथि शुरू हो जायेगी, जो कि मंगलवार सुबह 7 बजकर 42 मिनट तक रहेगी। यानि कि- चतुर्थी तिथि में चन्द्रोदय सोमवार को ही होगा इस व्रत का पारण चन्द्रमा को अर्घ्य देने के बाद किया जाता है, लिहाजा संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी व्रत सोमवार को&nbsp;ही किया जायेगा। चन्द्रोदय सोमवार की&nbsp;रात 8 बजकर 25 मिनट पर होगा।</p>



<p>आध्यात्मिक ऊर्जा – बहुत जरूरी : Spiritual Energy हमारे अंदर ही होती है लेकिन जब तक इसे रिचार्ज ना करो यह एक्टिवेट नहीं होती। कुछ ऐसे तरीके हैं जिनसे आप इस आध्यात्मिक ऊर्जा को जाग्रत कर सकते हैं। By Chandra Shekhar Joshi Chief Editor &amp; संस्थापक अध्यक्ष बगला मुखी पीठ: आध्यात्मिक ऊर्जा आपके शरीर से निकलती है और आपके औरा यानि आभामंडल को मजबूत बनाती है। आपने कई बार अपने अंदर या किसी दूसरे के अंदर इस आभामंडल को देखा होगा। कई बार आपने सोचा ..</p>



<p>&nbsp;पितृपक्ष की शुरुआत 26 सितंबर से : पूर्वजों का श्राद्ध जिस भी तिथि को हुआ है उसी तिथि को उनका श्राद्ध किया जाना चाहिए। यानि प्रतिपदा को मृत्यु हुई है तो प्रतिपदा के दिन, द्वितीया को हुई है तो द्वितीया के दिन और इसी तरह तिथि के अनुसार ही श्राद्ध किया जाना सही माना जाता है।&nbsp;वहीं मातृ पितरों को प्रसन्न करने के लिए नवमी का श्राद्ध करना शुभ माना जाता है। इसलिए नवमी तिथि को मातृ नवमी के नाम से भी जाना जााता है।&nbsp;&nbsp;जिन लोगों की मृत्यु की तारीख ज्ञात न हो उनका श्राद्ध सर्वपितृ अमावस्या के दिन किया जाता है।&nbsp;माना जाता है कि सर्वपितृ अमावस्या का श्राद्ध करने से आपके सभी पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। इसके अलावा आपको बता दें कि साल 2026 में चतुर्थी और पंचमी तिथि का श्राद्ध एक ही दिन 30 सितंबर को है। इसलिए जिन लोगों के पितृ की मृत्यु चतुर्थी या पंचमी तिथि को हुई है उन्हें 30 सितंबर को ही श्राद्ध करना चाहिए।&nbsp;</p>



<p>रेवती नक्षत्र अगले दिन तड़के 03 बजकर 23 मिनट (1 सितंबर) तक उपरांत अश्विनी नक्षत्र का आरंभ। गण्ड योग अगले दिन तड़के 01 बजकर 51 मिनट (1 सितंबर) तक उपरांत वृद्धि योग का आरंभ। विष्टि करण प्रातः 08 बजकर 50 मिनट तक उपरांत बव करण का आरंभ। चन्द्रमा अगले दिन तड़के 03 बजकर 23 मिनट (1 सितंबर) तक मीन राशि पर उपरांत मेष राशि पर संचार करेगा।  सोमवार को शुरु हुए पंचक का नाम राज पंचक होता है। </p>
]]></content:encoded>
					
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		<title> 31 अगस्त 2026 : कजरी तीज,संकष्टी श्रीगणेश चतुर्थी &#038;  &#038;  पितृपक्ष  26 सितंबर से &#038; सितंबर 2 तारीख को शनि-शुक्र का षडाष्टक योग &#038; जन्माष्टमी 4 सितंबर &#038; नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ सुरक्षित बचने के बाद एक अनोखा दावा</title>
		<link>https://himalayauk.org/31-%e0%a4%85%e0%a4%97%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4-2026-%e0%a4%95%e0%a4%9c%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%a4%e0%a5%80%e0%a4%9c%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%95%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%80-%e0%a4%b6/?utm_source=rss&#038;utm_medium=rss&#038;utm_campaign=31-%25e0%25a4%2585%25e0%25a4%2597%25e0%25a4%25b8%25e0%25a5%258d%25e0%25a4%25a4-2026-%25e0%25a4%2595%25e0%25a4%259c%25e0%25a4%25b0%25e0%25a5%2580-%25e0%25a4%25a4%25e0%25a5%2580%25e0%25a4%259c%25e0%25a4%25b8%25e0%25a4%2582%25e0%25a4%2595%25e0%25a4%25b7%25e0%25a5%258d%25e0%25a4%259f%25e0%25a5%2580-%25e0%25a4%25b6</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Himalaya Gaurav Uttarakhand]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 30 Aug 2026 16:33:07 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[ट्रेंडिंग समाचार]]></category>
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					<description><![CDATA[31 अगस्त 2026 को भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया-चतुर्थी तिथि और सोमवार &#38; तिथि: भाद्रपद कृष्ण तृतीया (सुबह 08:52 AM तक, उसके बाद चतुर्थी तिथि आरंभ) नक्षत्र: रेवती&#8230; ]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>31 अगस्त 2026 को <mark>भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया-चतुर्थी तिथि और सोमवार</mark> &amp; तिथि: भाद्रपद कृष्ण तृतीया (सुबह 08:52 AM तक, उसके बाद चतुर्थी तिथि आरंभ) नक्षत्र: रेवती (देर रात 03:24 AM तक) सूर्योदय: सुबह 05:58 AM सूर्यास्त: शाम 06:43 PM राहुकाल: सुबह 07:34 AM से 09:10 AM तक  &amp; सोमवार के दिन भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि है। इस दिन सुबह 8 बजकर 52 मिनट तक तृतीया रहेगी और उसके बाद चतुर्थी तिथि लग जाएगी। सोमवार के दिन कजरी तीज के व्रत के साथ ही संकष्टी श्रीगणेश चतुर्थी का व्रत भी रखा जाएगा।   &amp; बगला मुखी पीठ बंजारा वाला देहरादून में जन्माष्टमी 4 सितंबर को मनाई जाएगी. BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI CHIEF EDITOR &amp; BAGLA MUKHI PEETH </strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="466" height="284" src="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/08/31-AUGU.jpg" alt="" class="wp-image-27069" srcset="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/08/31-AUGU.jpg 466w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/08/31-AUGU-300x183.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 466px) 100vw, 466px" /></figure>



<p class="has-vivid-green-cyan-background-color has-background"><strong>नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बीच फंसे कैलाश तीर्थयात्रियों ने सुरक्षित बचने के बाद एक अनोखा दावा किया है। पानी के भयानक बहाव और जानलेवा खतरे से सुरक्षित निकलने के बाद, इन यात्रियों ने पास की एक पहाड़ी पर एक खास आकृति देखी। यात्रियों के अनुसार, यह आकृति बिल्कुल भगवान शिव के चेहरे जैसी लग रही थी। उनका मानना है कि इस भयानक प्राकृतिक आपदा के बीच स्वयं भगवान शिव ने आकर उनकी जान बचाई है। मौत के मुंह से वापस लौटे इन श्रद्धालुओं के लिए यह दृश्य केवल एक संयोग नहीं, बल्कि संकट की इस भयानक घड़ी में उनके गहरे विश्वास और अटूट आस्था का प्रतीक बन गया है।</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="652" height="1024" src="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/08/31-AUG-652x1024.jpg" alt="" class="wp-image-27070" srcset="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/08/31-AUG-652x1024.jpg 652w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/08/31-AUG-191x300.jpg 191w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/08/31-AUG-768x1205.jpg 768w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/08/31-AUG-979x1536.jpg 979w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/08/31-AUG.jpg 1048w" sizes="auto, (max-width: 652px) 100vw, 652px" /></figure>



<p class="has-pale-pink-background-color has-background"> <a href="http://www.himalayauk.org" target="_blank" rel="noreferrer noopener">गणेश जी के मंत्रों का जप</a> करके भी शुभ फल प्राप्त कर सकते हैं।  आध्यात्मिक ऊर्जा को रिचार्ज ; आध्यात्मिक ऊर्जा &#8211; Spiritual Energy हमारे अंदर ही होती है लेकिन जब तक इसे रिचार्ज ना करो यह एक्टिवेट नहीं होती। कुछ ऐसे तरीके हैं जिनसे आप इस आध्यात्मिक ऊर्जा को जाग्रत कर सकते हैं। बगला मुखी पीठ बंजारा वाला देहरादून में इसको अनुभव कर सकते हैं,, प्रस्तुत वीडियो इसका साक्षात उदाहरण है,, जहाँ शिवलिंग जाग्रत है: चन्द्रशेखर जोशी</p>



<p>सोमवार के दिन भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि है। इस दिन सुबह 8 बजकर 52 मिनट तक तृतीया रहेगी और उसके बाद चतुर्थी तिथि लग जाएगी। आज संकष्टी श्रीगणेश चतुर्थी  &amp; ब्रह्म मुहूर्त- 04:51 ए एम से 05:37 ए एम  प्रातः सन्ध्या- 05:14 ए एम से 06:23 ए एम    अभिजित मुहूर्त- 12:14 पी एम से 01:04 पी एम  विजय मुहूर्त- 02:44 पी एम से 03:34 पी एम</p>



<p>गोधूलि मुहूर्त- 06:54 पी एम से 07:17 पी एम  सायाह्न सन्ध्या- 06:54 पी एम से 08:03 पी एम</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>भाद्रपद कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि- 31 अगस्त 2026 को सुबह 8 बजकर 52 मिनट तक रहेगी, उसके बाद चतुर्थी तिथि लग जाएगी</li>



<li>पूर्वा रेवती नक्षत्र-  31 अगस्त 2026 को देर रात 3 बजकर 24 मिनट तक</li>



<li>29 अगस्त 2026 विशेष- आज पंचक है। इसके साथ ही संकष्टी श्रीगणेश चतुर्थी और कजरी तीज का व्रत भी आज रखा जाएगा।</li>
</ul>



<p>संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी का व्रत हर माह कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को रखा जाता है। इसीलिए सोमवार को यह व्रत रखा जाएगा। माना जाता है कि इस दिन व्रत रखने से और गणेश जी की पूजा करने से सभी संकट दूर हो जाते हैं।  तृतीया तिथि सोमवार को सुबह 8 बजकर 52 मिनट तक ही रहेगी, उसके बाद चतुर्थी तिथि शुरू हो जायेगी, जो कि मंगलवार सुबह 7 बजकर 42 मिनट तक रहेगी। यानि कि- चतुर्थी तिथि में चन्द्रोदय सोमवार को ही होगा इस व्रत का पारण चन्द्रमा को अर्घ्य देने के बाद किया जाता है, लिहाजा संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी व्रत सोमवार को ही किया जायेगा।  चन्द्रोदय सोमवार की रात 8 बजकर 25 मिनट पर होगा।</p>



<p class="has-pale-pink-background-color has-background">आध्यात्मिक ऊर्जा &#8211; बहुत जरूरी : Spiritual Energy हमारे अंदर ही होती है लेकिन जब तक इसे रिचार्ज ना करो यह एक्टिवेट नहीं होती। कुछ ऐसे तरीके हैं जिनसे आप इस आध्यात्मिक ऊर्जा को जाग्रत कर सकते हैं। By Chandra Shekhar Joshi Chief Editor &amp; संस्थापक अध्यक्ष बगला मुखी पीठ: आध्यात्मिक ऊर्जा आपके शरीर से निकलती है और आपके औरा यानि आभामंडल को मजबूत बनाती है। आपने कई बार अपने अंदर या किसी दूसरे के अंदर इस आभामंडल को देखा होगा। कई बार आपने सोचा ..</p>



<p> पितृपक्ष की शुरुआत 26 सितंबर से : पूर्वजों का श्राद्ध जिस भी तिथि को हुआ है उसी तिथि को उनका श्राद्ध किया जाना चाहिए। यानि प्रतिपदा को मृत्यु हुई है तो प्रतिपदा के दिन, द्वितीया को हुई है तो द्वितीया के दिन और इसी तरह तिथि के अनुसार ही श्राद्ध किया जाना सही माना जाता है। वहीं मातृ पितरों को प्रसन्न करने के लिए नवमी का श्राद्ध करना शुभ माना जाता है। इसलिए नवमी तिथि को मातृ नवमी के नाम से भी जाना जााता है।  जिन लोगों की मृत्यु की तारीख ज्ञात न हो उनका श्राद्ध सर्वपितृ अमावस्या के दिन किया जाता है। माना जाता है कि सर्वपितृ अमावस्या का श्राद्ध करने से आपके सभी पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। इसके अलावा आपको बता दें कि साल 2026 में चतुर्थी और पंचमी तिथि का श्राद्ध एक ही दिन 30 सितंबर को है। इसलिए जिन लोगों के पितृ की मृत्यु चतुर्थी या पंचमी तिथि को हुई है उन्हें 30 सितंबर को ही श्राद्ध करना चाहिए। </p>



<p class="has-luminous-vivid-orange-color has-text-color has-link-color wp-elements-a0b3d7692029138cbaf22467f5329ce7"><strong>सितंबर 2 तारीख  को शनि-शुक्र का षडाष्टक योग बनेगा। इस योग के चलते कुछ राशियों को करियर और सेहत से जुड़े मामलों में सतर्कता</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="882" height="514" src="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/08/STAR.jpg" alt="" class="wp-image-27068" srcset="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/08/STAR.jpg 882w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/08/STAR-300x175.jpg 300w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/08/STAR-768x448.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 882px) 100vw, 882px" /></figure>



<p class="has-pale-pink-background-color has-background">शुक्र ग्रह 2 सितंबर को कन्या राशि से निकलकर तुला राशि में गोचर करेंगे। ऐसे में मीन राशि में बैठे शनि के साथ शुक्र षडाष्टक योग बनाएंगे जिसे ज्योतिष में शुभ योग नहीं माना जाता। षडाष्टक योग के चलते मेष और वृश्चिक सहित 3 राशियों को जीवन में उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है। सेहत को लेकर भी इन राशियों को सतर्कता बरतने की आवश्यकता होगी। आपको बता दें कि षडाष्टक योग में शनि ग्रह की स्थिति शुक्र के छठे भाव में होगी जबकि शुक्र ग्रर शनि से अष्टम भाव में रहेंगे। </p>
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		<item>
		<title>30 अगस्त 26 रविवार; धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से खास &#038; भद्रा अलग-अलग बारह चंद्र राशियों के अनुसार तीनों लोक- स्वर्ग, पृथ्वी और पाताल में घूमती है</title>
		<link>https://himalayauk.org/30th-august-26th-sunday-bhadra-is-special-from-religious-and-astrological-point-of-view-according-to-different-twelve-moon-signs/?utm_source=rss&#038;utm_medium=rss&#038;utm_campaign=30th-august-26th-sunday-bhadra-is-special-from-religious-and-astrological-point-of-view-according-to-different-twelve-moon-signs</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Himalaya Gaurav Uttarakhand]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 29 Aug 2026 15:57:31 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म और संस्कृति]]></category>
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					<description><![CDATA[30 अगस्त 2026, रविवार का पंचांग भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि और उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र &#38; सुबह 04:51 से 05:37 तक अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:14 से 01:04&#8230; ]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p> 30 अगस्त 2026, रविवार का पंचांग <mark>भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि और उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र</mark> &amp;  सुबह 04:51 से 05:37 तक  <strong>अभिजित मुहूर्त:</strong> दोपहर 12:14 से 01:04 तक  <strong>विजय मुहूर्त:</strong> दोपहर 02:44 से 03:34 तक<br><strong>गोधूलि मुहूर्त:</strong> शाम 06:55 से 07:18 तक  <strong>सर्वार्थ सिद्धि योग:</strong> सुबह 06:23 से अगले दिन सुबह 03:44 तक &amp; <strong>राहुकाल:</strong> शाम 05:09 से 06:45 तक &amp; सूर्योदय- सुबह 05:57 बजे  सूर्यास्त- शाम 06:44 बजे &amp; रविवार होने से आज सूर्यदेव की उपासना की जाती है। तांबे के लोटे में जल से भगवान सूर्य को अर्घ्य दें।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="750" height="398" src="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/08/BHADRA-RAJ-TEMPLE-1.jpg" alt="" class="wp-image-27064" srcset="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/08/BHADRA-RAJ-TEMPLE-1.jpg 750w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/08/BHADRA-RAJ-TEMPLE-1-300x159.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 750px) 100vw, 750px" /></figure>



<p>30 अगस्त को भाद्रपद कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि और रविवार का दिन है। द्वितीया तिथि रविवार सुबह 9 बजकर 38 मिनट तक रहेगी। 30 अगस्त को देर रात 3 बजकर 45 मिनट तक उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र रहेगा। इसके अलावा रविवार को <strong><a href="http://www.himalayauk.org" target="_blank" rel="noreferrer noopener">पंचक </a></strong>और प्रथ्वी लोक की भद्रा है। 30 अगस्त को रात 9 बजकर 15 मिनट से कल सुबह 8 बजकर 52 मिनट तक प्रथ्वी लोक की भद्रा रहेगी। </p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="628" height="548" src="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/08/SURYA.jpg" alt="" class="wp-image-27065" srcset="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/08/SURYA.jpg 628w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/08/SURYA-300x262.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 628px) 100vw, 628px" /></figure>



<ul class="wp-block-list">
<li>भाद्रपद कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि- 30 अगस्त 2026 को सुबह 9 बजकर 38 मिनट तक</li>



<li>उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र- 30 अगस्त 2026 को देर रात 3 बजकर 45 मिनट तक</li>



<li>प्रथ्वी लोक की भद्रा- 30 अगस्त 2026 को रात 9 बजकर 15 मिनट से कल सुबह 8 बजकर 52 मिनट तक</li>



<li>30 अगस्त 2026  विशेष- पंचक</li>
</ul>



<ul class="wp-block-list">
<li>ब्रह्म मुहूर्त- 04:51 ए एम से 05:37 ए एम</li>



<li>प्रातः सन्ध्या- 05:14 ए एम से 06:23 ए एम</li>



<li>अभिजित मुहूर्त- 12:14 पी एम से 01:04 पी एम</li>



<li>विजय मुहूर्त- 02:44 पी एम से 03:34 पी एम</li>



<li>गोधूलि मुहूर्त- 06:55 पी एम से 07:18 पी एम</li>



<li>सायाह्न सन्ध्या- 06:55 पी एम से 08:04 पी एम</li>



<li>अमृत काल-10:56 पी एम से 12:32 ए एम, अगस्त 31</li>



<li>सर्वार्थ सिद्धि योग- 06:23 ए एम से 03:44 ए एम, अगस्त 31</li>
</ul>



<p>ज्योतिष विज्ञान के अनुसार भद्रा अलग-अलग बारह चंद्र राशियों के अनुसार तीनों लोक- स्वर्ग, पृथ्वी और पाताल में घूमती रहती है। जब चंद्रमा कर्क, सिंह, कुंभ और मीन राशि में होता है तब भद्रा का वास पृथ्वी लोक पर माना जाता है। रविवार को चंद्रमा का वास मीन राशि में है तो इसलिए पृथ्वी लोक की भद्रा है। पृथ्वी लोक की भद्रा में कोई भी शुभ कार्य करना वर्जित माना जाता है।</p>



<p class="has-pale-pink-background-color has-background">भगवान भोलेनाथ की कृपा से आपका जीवन सुख, समृद्धि और अच्छी सेहत से परिपूर्ण हो! कल्याण हो!; By Chandra Shekhar Joshi Chief Editor &amp; Bagla Mukhi Peeth Dehradun Mob. 9412932030</p>
]]></content:encoded>
					
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			</item>
		<item>
		<title>29 अगस्त 2026 शनिवार: अशून्य शयन द्वितीया व्रत  ;अशून्य शयन द्वितिया का अर्थ है- बिस्तर में अकेले न सोना पड़े; जीवनसाथी की लंबी उम्र के लिये </title>
		<link>https://himalayauk.org/29-august-2026-saturday-ashunya-shayan-dwitiya-vrat-ashunya-shayan-dwitiya-means-not-to-sleep-alone-in-the-bed-for-the-long-life-of-the-spouse/?utm_source=rss&#038;utm_medium=rss&#038;utm_campaign=29-august-2026-saturday-ashunya-shayan-dwitiya-vrat-ashunya-shayan-dwitiya-means-not-to-sleep-alone-in-the-bed-for-the-long-life-of-the-spouse</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Himalaya Gaurav Uttarakhand]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 28 Aug 2026 17:07:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तराखंड समाचार]]></category>
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					<description><![CDATA[29 अगस्त 2026 शनिवार का पंचांग भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि &#38; शनिवारमाह/पक्ष: भाद्रपद मास, कृष्ण पक्ष तिथि: प्रतिपदा (सुबह 09:57 AM तक, इसके बाद द्वितीया)नक्षत्र: पूर्वाभाद्रपद&#8230; ]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>29 अगस्त 2026 शनिवार का पंचांग <mark>भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि</mark> &amp;  शनिवार<br><strong>माह/पक्ष:</strong> भाद्रपद मास, कृष्ण पक्ष  <strong>तिथि:</strong> प्रतिपदा (सुबह 09:57 AM तक, इसके बाद द्वितीया)<br><strong>नक्षत्र:</strong> पूर्वाभाद्रपद (देर रात 03:43 AM, 30 अगस्त तक) <strong>योग:</strong> धृति योग (अगली सुबह 05:22 AM तक)  <strong>सूर्योदय:</strong> सुबह 05:57 AM <strong>सूर्यास्त:</strong> शाम 06:47 PM * <strong>अभिजीत मुहूर्त:</strong> दोपहर 12:14 PM से 01:04 PM तक<br><strong>ब्रह्म मुहूर्त:</strong> सुबह 04:51 AM से 05:37 AM तक  <strong>अमृत काल:</strong> शाम 07:32 PM से 09:10 PM तक  </p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="720" height="960" src="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/08/CS-J-2.jpg" alt="" class="wp-image-27060" srcset="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/08/CS-J-2.jpg 720w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/08/CS-J-2-225x300.jpg 225w" sizes="auto, (max-width: 720px) 100vw, 720px" /></figure>



<p class="has-cyan-bluish-gray-background-color has-background"><strong>आज शनिवार है। प्रतिपदा तिथि 09:57 बजे तक, फिर द्वितीया 09:37 (कल) बजे तक रहेगी। पूर्व भाद्रपदा नक्षत्र 03:41 (कल) बजे तक, उसके बाद उत्तर भाद्रपदा 03:44 (कल) बजे तक रहेगा। आज का योग सुकर्मा 06:34 बजे तक, फिर धृति योग 05:20 (कल) बजे तक। कौलव करण 09:57 बजे तक, उसके बाद तैतिल 21:50 बजे तक, फिर गर 09:37 (कल) बजे तक। महत्त्वपूर्ण नए कार्य राहु काल (09:09 से 10:45) के दौरान टालें। चन्द्रमा कुम्भ राशि में है और सूर्य सिंह राशि में।</strong></p>



<p class="has-light-green-cyan-background-color has-background">by Chandra Shekhar Joshi Chief Editor &amp; President Bagla Mukhi Peeth Dehradun Mob. 9412932030</p>



<p>29 अगस्त को भाद्र माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि &amp; 29 अगस्त को भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि है। इस तिथि पर&nbsp;पूर्वभाद्रपदा नक्षत्र और&nbsp;सुकर्माण&nbsp;योग का विशेष संयोग बन रहा है। इस तिथि पर चंद्रमा का गोचर कुंभ राशि में है, जिसके स्वामी शनिदेव होते हैं।&nbsp;</p>



<p>1 सितंबर 2026 को दोनों ग्रहों के बीच विशेष कोणीय स्थिति&nbsp; &amp; ज्योतिष शास्त्र में शनि और गुरु को बेहद प्रभावशाली ग्रह माना जाता है। इन दोनों की स्थिति में बदलाव का असर व्यक्ति के करियर, आर्थिक स्थिति और भाग्य पर पड़ सकता है। इस समय शनि मीन राशि में वक्री अवस्था में विराजमान हैं, जबकि गुरु अपनी उच्च राशि में स्थित हैं। 1 सितंबर 2026 को दोनों ग्रहों के बीच विशेष कोणीय स्थिति बनने जा रही है, जिससे नवपंचम राजयोग का निर्माण होगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इसका शुभ प्रभाव कुछ राशियों के लिए बेहद खास&nbsp; </p>



<p>शनिवार के दिन भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि है। इसके साथ ही शनिवार के दिन अशून्य शयन व्रत &amp; शनिवार के दिन भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि है। इसके साथ ही शनिवार के दिन अशून्य शयन व्रत भी किया जाएगा। माना जाता है कि अगर पति यह व्रत रखे तो वैवाहिक जीवन में सुख-शांति आती है। इसके साथ ही शनिवार को पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र और धृति योग भी रहेगा।</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>द्रपद कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि- 29&nbsp;अगस्त 2026 को सुबह 9 बजकर 57 मिनट तक</li>



<li>धृति योग- 29&nbsp;अगस्त 2026 को&nbsp;पूरा दिन पूरी रात पार कर के कल सुबह 5 बजकर 22 मिनट तक</li>



<li>पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र-&nbsp; 29&nbsp;अगस्त 2026 को देर रात 3 बजकर 43 मिनट तक</li>



<li>29&nbsp;अगस्त 2027 विशेष- अशून्य शयन व्रत</li>
</ul>



<ul class="wp-block-list">
<li>ब्रह्म मुहूर्त- 04:51 ए एम से 05:37 ए एम</li>



<li>प्रातः सन्ध्या- 05:14 ए एम से 06:23 ए एम</li>



<li>अभिजित मुहूर्त- 12:14 पी एम से 01:04 पी एम</li>



<li>विजय मुहूर्त- 02:45 पी एम से 03:35 पी एम</li>



<li>गोधूलि मुहूर्त- 06:56 पी एम से 07:19 पी एम</li>



<li>सायाह्न सन्ध्या- 06:56 पी एम से 08:05 पी एम</li>



<li>अमृत काल- 07:32 पी एम से 09:10 पी एम</li>
</ul>



<p>अशून्य शयन द्वितीया व्रत किया जायेगा। चातुर्मास के चार महीनों के दौरान प्रत्येक महीने के कृष्ण पक्ष की द्वितिया तिथि को यह व्रत किया जाता है। यहां एक बात यह समझ लेते है कि- द्वितीया तिथि में रात को चंद्रोदय के समय चंद्रमा को अर्घ्य देकर अशून्य शयन व्रत का पारण किया जाता है और द्वितीया तिथि आज सुबह 9 बजकर 58 मिनट पर लग जायेगी और कल सुबह 9 बजकर 38 मिनट तक रहेगी। यानि द्वितीया तिथि में चंद्रोदय आज ही होगा। लिहाजा अशून्य शयन व्रत आज ही किया जायेगा। अशून्य शयन द्वितिया का अर्थ है- बिस्तर में अकेले न सोना पड़े। जिस प्रकार स्त्रियां अपने जीवनसाथी की लंबी उम्र के लिये करवाचौथ का व्रत करती हैं, ठीक उसी तरह पुरुषों को अपने जीवनसाथी की लंबी उम्र के लिये यह व्रत करना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार अशून्य शयन द्वितिया का यह व्रत पति-पत्नी के रिश्तों को बेहतर बनाने के लिये बेहद अहम है। इस व्रत में श्री हरि विष्णु जी तथा लक्ष्मी जी की&nbsp;पूजा करने का विधान है,&nbsp;<a href="http://www.himalayauk.org" target="_blank" rel="noreferrer noopener">विष्णु जी की आरती का पाठ</a>&nbsp;इस दिन अवश्य करना चाहिए। दरअसल शास्त्रों के अनुसार चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु का शयनकाल होता है और इस अशून्य शयन व्रत के माध्यम से शयन उत्सव मनाया जाता है। गृहस्थ पति को यह व्रत अवश्य करना चाहिए।&nbsp;</p>



<p>सितंबर का महीना ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है। इस महीने में 4 बड़े ग्रह राशि परिवर्तन करेंगे। माह की शुरुआत में&nbsp;<a href="http://www.himalayauk.org" target="_blank" rel="noreferrer noopener">शुक्र ग्रह का गोचर</a>&nbsp;वृषभ राशि में होगा। वहीं बुध इस महीने 2 बार राशि बदलें। बुध का गोचर 7 सितंबर को कन्या राशि में होगा और 26 सितंबर को तुला राशि में। सूर्य ग्रह इस महीने के मध्य में 17 तारीख को कन्या राशि में गोचर करेंगे। वहीं मंगल का गोचर नीच राशि कर्क में होगा। सितंबर के महीने में ग्रहों की बदली गति का कुछ राशियों को फायदा मिल सकता है वहीं कुछ राशियों को सतर्कता भी इस माह में बरतनी होगी।&nbsp;</p>



<p>सितंबर के महीने में राशिचक्र की 8 राशियों को अच्छे परिणाम मिल सकते हैं। ये राशियां हैं वृषभ, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, मकर, कुंभ और मीन। इन राशियों को परिश्रम का अच्छा फल मिल सकता है। शुक्र की स्थिति के चलते पारिवारिक और प्रेम संबंधों में सुखद बदलाव देखने को मिलेंगे वहीं सूर्य-मंगल की स्थिति के चलते इन राशियों के लोग करियर-कारोबार में अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं। वृषभ, कुंभ वालों की मनोकामनाएं पूरी होने की संभावना है। वहीं कर्क-सिंह और तुला वालों को परिश्रम का अच्छा फल मिलने के योग हैं। इन राशियों के अटके हुए काम भी सितंबर के महीने में पूरे हो सकते हैं।&nbsp;</p>



<p></p>
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		<title>28 अगस्त 2026 शुक्रवार &#038; राखी: चंद्र ग्रहण और पंचक ,राखी बांधने का मुहूर्त : 12.4pm to 12,53 pm &#038; 12 राशियों के शुभ रंग &#038; मीन राशि पीला और हल्का नारंगी रंग शुभ; For C.S. JOSHI</title>
		<link>https://himalayauk.org/28-august-2026-friday-rakhi-lunar-eclipse-and-panchak-rakhi-tying-time-12-4pm-to-1253-pm-auspicious-colors-of-12-zodiac-signs-pisces-yellow-and-light-orange-colors-auspicious-for-c-s-joshi/?utm_source=rss&#038;utm_medium=rss&#038;utm_campaign=28-august-2026-friday-rakhi-lunar-eclipse-and-panchak-rakhi-tying-time-12-4pm-to-1253-pm-auspicious-colors-of-12-zodiac-signs-pisces-yellow-and-light-orange-colors-auspicious-for-c-s-joshi</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Himalaya Gaurav Uttarakhand]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 27 Aug 2026 16:34:29 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य समाचार]]></category>
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					<description><![CDATA[28 अगस्त 2026 (शुक्रवार) का पंचांग श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि &#38; तिथि: पूर्णिमा सुबह 09:48 ए एम तक, इसके बाद प्रतिपदा। नक्षत्र: शतभिषा नक्षत्र अगले दिन&#8230; ]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="has-luminous-vivid-amber-color has-text-color has-link-color wp-elements-bd7bbdcda6bf4db5bf4fc3c31c94a4ab">28 अगस्त 2026 (शुक्रवार) का पंचांग <mark>श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि</mark> &amp; तिथि: पूर्णिमा सुबह 09:48 ए एम तक, इसके बाद प्रतिपदा। नक्षत्र: शतभिषा नक्षत्र अगले दिन सुबह 03:13 ए एम तक। अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:14 पी एम से 01:05 पी एम तक। ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:51 ए एम से 05:37 ए एम तक। विजय मुहूर्त: दोपहर 02:45 पी एम से 03:36 पी एम तक। रक्षाबंधन राखी मुहूर्त:   ,,,,,राहुकाल: पूर्वाह्न 11:05 ए एम से दोपहर 12:40 पी एम तक।  &amp; चंद्र ग्रहण का स्पर्श काल भारतीय समय अनुसार आज सुबह 8 बजकर 4 मिनट पर शुरू होगा और दोपहर पहले 11 बजकर 22 मिनट पर समाप्त हो जायेगा। इस चंद्र ग्रहण का कुल पर्वकाल 3 घंटे 26 मिनट का होगा। आपको बता दें कि यह ग्रहण भारत में नजर नहीं आएगा इसलिए सूतक काल भी मान्य नहीं होगा। चंद्रग्रहण का सूतक काल ग्रहण प्रारंभ होने के 9 घंटे पहले लग जाता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, इस तरह की राखियां खरीदने से बचना चाहिए अन्यथा इसका जीवन में नकारात्मक असर पड़ सकता है।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="890" height="518" src="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/08/Untitled-4-copy.jpg" alt="" class="wp-image-27052" srcset="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/08/Untitled-4-copy.jpg 890w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/08/Untitled-4-copy-300x175.jpg 300w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/08/Untitled-4-copy-768x447.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 890px) 100vw, 890px" /></figure>



<p class="has-pale-pink-background-color has-background"> राखी राखी बांधने के लिए पहला मुहूर्त सुबह&nbsp; 5 बजकर 58 मिनट तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 4 मिनट&nbsp; से दोपहर 12 बजकर 53 मिनट तक रहेगा। ये दोनों मुहूर्त राखी बांधने के लिए उत्तम रहेगा।&nbsp;</p>



<p>सावन माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि का आरंभ 27 अगस्त को सुबह 9 बजकर 8 मिनट पर होगा। पूर्णिमा तिथि का समापन 28 अगस्त को सुबह 9 बजकर 48 मिनट पर होगा।&nbsp; रक्षाबंधन का त्यौहार 28 अगस्त 2026 को मनाया जाएगा।&nbsp;<strong><a href="http://WWW.HIMALAYAUK.ORG" target="_blank" rel="noreferrer noopener">रक्षाबंधन</a></strong>&nbsp;अनुष्ठान का समय सुबह 6 बजकर 23 मिनट से सुबह 9 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। राखी बांधने के लिए पहला मुहूर्त सुबह&nbsp; 5 बजकर 58 मिनट तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 4 मिनट&nbsp; से दोपहर 12 बजकर 53 मिनट तक रहेगा। ये दोनों मुहूर्त राखी बांधने के लिए उत्तम रहेगा।&nbsp;</p>



<p class="has-vivid-green-cyan-background-color has-background"><strong>मीन राशि</strong> <strong>पीला और हल्का नारंगी रंग शुभ</strong>;<strong> C.S. JOSHI Editor &amp; President : Bagla Mukhi Peeth Dehradun Mob. 9412932030</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="826" height="502" src="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/08/RAKHI-5.jpg" alt="" class="wp-image-27054" srcset="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/08/RAKHI-5.jpg 826w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/08/RAKHI-5-300x182.jpg 300w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/08/RAKHI-5-768x467.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 826px) 100vw, 826px" /></figure>



<p>28 अगस्त को हिंदू धर्म का प्रमुख त्यौहार रक्षाबंधन मनाया जाएगा। साथ ही इस दिन चंद्र ग्रहण और पंचक भी रहेगा &amp; 28 अगस्त को श्रावण शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि और शुक्रवार का दिन है। पूर्णिमा तिथि शुक्रवार सुबह 9 बजकर 49 मिनट तक रहेगी। 28 अगस्त को स्नान-दान की पूर्णिमा है। शुक्रवार को पूरा दिन पूरी रात पार कर के शनिवार सुबह 6 बजकर 36 मिनट तक सुकर्मा योग रहेगा। 28 अगस्त को देर रात 3 बजकर 14 मिनट तक शतभिषा नक्षत्र रहेगा। इसके अलावा 28 अगस्त को पंचक और&nbsp;<strong><a href="http://www.himalayauk.org" target="_blank" rel="noreferrer noopener">चंद्र ग्रहण</a></strong>&nbsp;भी रहेगा।&nbsp; राखी बांधने का सबसे उत्तम मुहूर्त : राखी बांधने का सबसे उत्तम मुहूर्त- 28 अगस्त 2026 को सुबह 6 बजकर 23 मिनट से सुबह 9 बजकर 48 मिनट तक</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>श्रावण शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि- 28 अगस्त 2026 को सुबह 9 बजकर 49 मिनट तक</li>



<li>सुकर्मा योग- 28 अगस्त 2026 को पूरा दिन पूरी रात पार कर के कल सुबह 6 बजकर 36 मिनट तक</li>



<li>शतभिषा नक्षत्र-&nbsp; 28 अगस्त 2026 को देर रात 3 बजकर 14 मिनट तक</li>



<li>28 अगस्त 2027 विशेष- रक्षाबंधन,&nbsp; चंद्र ग्रहण, पंचक</li>



<li>राखी बांधने का सबसे उत्तम मुहूर्त- 28 अगस्त 2026 को सुबह 6 बजकर 23 मिनट से सुबह 9 बजकर 48 मिनट तक ; </li>
</ul>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="612" height="592" src="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/08/MAHA-DEV-4.jpg" alt="" class="wp-image-27055" srcset="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/08/MAHA-DEV-4.jpg 612w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/08/MAHA-DEV-4-300x290.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 612px) 100vw, 612px" /></figure>



<ul class="wp-block-list">
<li>ब्रह्म मुहूर्त- 04:51 ए एम से 05:37 ए एम</li>



<li>प्रातः सन्ध्या- 05:14 ए एम से 06:23 ए एम</li>



<li>अभिजित मुहूर्त- 12:14 पी एम से 01:05 पी एम</li>



<li>विजय मुहूर्त- 02:45 पी एम से 03:36 पी एम</li>



<li>गोधूलि मुहूर्त- 06:57 पी एम से 07:19 पी एम</li>



<li>सायाह्न सन्ध्या- 06:57 पी एम से 08:05 पी एम</li>



<li>अमृत काल- 07:44 पी एम से 09:23 पी एम</li>
</ul>



<p>राहुकाल- 11:05 ए एम से 12:40 पी एम  &amp; सूर्योदय- सुबह 05:56 बजे&nbsp; सूर्यास्त- शाम 06:47 बजे  &amp; 12 राशियों के शुभ रंग &amp; बहनें अपने भाई की राशि के अनुसार राखी के रंग का चुनाव करती हैं तो उनके भाईयों का जीवन सुख-सौभाग्य और समृद्धि से भर जाता है। तो यहां जानिए रक्षाबंधन के दिन बहनों को अपने भाई को कौनसे रंग की राखी बांधनी चाहिए। </p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>मेष राशि</strong></h3>



<p>अगर आपके भाई की राशि मेष है तो उसके लिए लाल या केसरिया रंग की राखी का चुनाव करें। मेष राशि के स्वामी मंगल ग्रह है।&nbsp; मंगल ग्रह की राशि होने के कारण लाल रंग ऊर्जा, साहस और सफलता का प्रतीक माना जाता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>वृषभ राशि</strong></h3>



<p>वृषभ राशि वालों के लिए शुभ रंग सफेद और हल्का गुलाबी है। तो आपके भाई की राशि वृषभ है तो उनके लिए इसी रंग की राखी खरीदें। वृषभ राशि वालों का स्वामी शुक्र ग्रह है। शुक्र ग्रह से संबंधित यह राशि प्रेम, सुख और समृद्धि का प्रतीक है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>मिथुन राशि&nbsp;</strong></h3>



<p>अगर आपके भाई की राशि मिथुन है तो उनके लिए हरे रंग की राखी लें। हरा रंग बुद्धि, संवाद क्षमता और सकारात्मक सोच को दर्शाता है।&nbsp;</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>कर्क राशि</strong></h3>



<p>कर्क राशि वालों के लिए शुभ रंग सफेद और सिल्वर है। कर्क राशि का स्वामी चंद्रमा है। सफेद रंग की राखी बांधने से आपके भाई पर चंद्रमा की कृपा बनी रहेगी और उनकी कुंडली में चंद्र मजबूत रहेगा।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>सिंह राशि</strong></h3>



<p>सिंह राशि वालों के लिए सुनहरा या नारंगी रंग की राखी का चुनाव करें। ये सूर्य की ऊर्जा और आत्मविश्वास को बढ़ाने वाला रंग माना जाता है। सिंह राशि के स्वामी सूर्य देव है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>कन्या राशि</strong></h3>



<p>कन्या राशि के लिए शुभ रंग हरा और हल्का भूरा रहेगा। बुध ग्रह की शुभता प्राप्त करने के लिए हरे रंग की राखी उत्तम मानी जाती है। बता दें कि कन्या राशि के स्वामी बुध ग्रह है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>तुला राशि</strong></h3>



<p>तुला राशि के स्वामी भी शुक्र ग्रह है। इनके लिए गुलाबी और सफेद रंग की राखी उत्तम रहेगी। इस रंग की राखी बांधने से शुक्र ग्रह मजबूत होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>वृश्चिक राशि</strong></h3>



<p>अगर आपके भाई की राशि वृश्चिक है तो उनके लिए लाल या मैरुन रंग की राखी चुनें। इस राशि के स्वामी मंगल है। लाल रंग की राखी बांधने से आपके भाई की शक्ति बढ़ती है और आत्मबल मजबूत होता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>धनु राशि</strong></h3>



<p>धनु राशि वालों के लिए पीला रंग शुभ रहेगा।&nbsp; धनु राशि के स्वामी बृहस्पति (गुरु) हैं जिनका प्रिय रंग पीला माना जाता है। इस रंग की राखी बांधने से ज्ञान और भाग्य में वृद्धि होगी।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>मकर राशि</strong></h3>



<p>मकर राशि के स्वामी शनि देव है। तो अगर आपके भाई की राशि मकर है तो उन्हें नीला या गहरा नीला रंग की राखी बांधें। शनि ग्रह की सकारात्मक ऊर्जा के लिए यह रंग उपयुक्त होता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>कुंभ राशि&nbsp;</strong></h3>



<p>कुंभ राशि वालों के लिए शुभ रंग आसमानी और नीला रहेगा। तो रक्षाबंधन के दिन अपने भाई को इन्हीं रंग की राखी बांधें। ऐसा करने से आपके भाई को मानसिक शांति मिलेगी और सुख-समृद्धि में भी वृद्धि होगी। कुंभ राशि के स्वामी भी शनि देव हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>मीन राशि</strong>  : </h3>



<p class="has-luminous-vivid-amber-background-color has-background"><strong>मीन राशि के स्वामी भी गुरु है। ऐसे में इस राशि के जातकों के लिए पीला और हल्का नारंगी रंग शुभ रहेगा। बृहस्पति देव की कृपा प्राप्त होगी और आध्यात्मिक उन्नति भी मिलेगी।</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="768" height="1024" src="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/08/26-MAY-CS-JOSHI-PRAKAMYA-1-768x1024.jpg" alt="" class="wp-image-27056" srcset="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/08/26-MAY-CS-JOSHI-PRAKAMYA-1-768x1024.jpg 768w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/08/26-MAY-CS-JOSHI-PRAKAMYA-1-225x300.jpg 225w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/08/26-MAY-CS-JOSHI-PRAKAMYA-1-1152x1536.jpg 1152w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/08/26-MAY-CS-JOSHI-PRAKAMYA-1.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 768px) 100vw, 768px" /></figure>



<ul class="wp-block-list">
<li><strong>प्लास्टिक वाली राखी-&nbsp;</strong>ज्योतिषों के अनुसार, प्लास्टिक वाली राखियां भी कभी नहीं खरीदनी चाहिए। इसकी जगह रेशम के धागे वाली राखी खरीदें।&nbsp;</li>



<li><strong>भगवान की तस्वीर वाली राखी-&nbsp;</strong>भगवान की तस्वीर वाली राखी भी खरीदने से बचना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हाथ में भगवान वाली राखी बांधना उचित नहीं माना जाता है।</li>



<li><strong>काले रंग की राखी-&nbsp;</strong>रक्षाबंधन पर अपने भाई के लिए काले रंग की राखी नहीं खरीदना चाहिए। हमेशा लाल, केसरिया या पीले शुभ रंगों वाली राखी खरीदें।</li>



<li><strong>एविल आई वाली राखी-</strong>&nbsp;एविल आई वाली राखी भी खरीदने से बचना चाहिए। कुछ मान्यताओं के अनुसार, ऐसी राखी नकारात्मक ऊर्जा से जुड़ी मानी जाती है।</li>



<li><strong>खंडित या टूटी हुई राखी-</strong>&nbsp;यदि राखी का कोई मोती टूटा हो, धागा उधड़ा हुआ हो या कोई हिस्सा निकला हो तो ऐसी राखी भूलकर भी न खरीदें।</li>



<li><strong>अशुभ चिह्नों वाली राखी-&nbsp;</strong>बाजार में नकारात्मक प्रतीक वाली राखियां मिलती हैं। ऐसे में इस तरह की राखी बिल्कुल भी न लें। धार्मिक दृष्टि से भाई की कलाई पर केवल शुभ प्रतीकों वाली राखी ही बांधनी चाहिए।</li>
</ul>



<p>&nbsp;श्रावण माह की पूर्णिमा तिथि को पावन पर्व रक्षाबंधन मनाया जा रहा है।&nbsp; रक्षाबंधन भाई-बहन के अटूट स्नेह, विश्वास और रक्षा सूत्र के संकल्प का पर्व है। प्रातःकाल भद्रा रहित शुभ मुहूर्त में राखी बांधना शास्त्रसम्मत और शुभ रहेगा। शास्&#x200d;त्रानुसार देवी लक्ष्मी ने राजा बलि को अपना भाई बनाकर रक्षासूत्र बांधा था। भगवान श्रीकृष्ण ने भी चीरहरण के समय द्रौपदी की रक्षा कर वचन निभाया था।&nbsp; यह पर्व हर वर्ष श्रावण माह की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है।</p>



<p></p>



<p><strong>सावन में भगवान भोलेनाथ की कृपा से आपका जीवन सुख, समृद्धि और अच्छी सेहत से परिपूर्ण हो! कल्याण हो! by CHANDRA SHEKHAR JOSHI CHIEF EDITOR &amp; BAGLA MUKHI PEETH UTTRAKHAND. DEHRADUN </strong></p>



<p></p>
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