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	<title>Himalaya Gaurav</title>
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	<description>Himalaya Gaurav Uttarakhand</description>
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		<title>16 अप्रैल 2026 (गुरुवार) को वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि, शाम 07:44 पीएम से अमावस्या</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Himalaya Gaurav Uttarakhand]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 15 Apr 2026 16:19:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म और संस्कृति]]></category>
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					<description><![CDATA[16 अप्रैल 2026 (गुरुवार) को वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि है, जो शाम 6:53 (या 8:11 PM) तक रहेगी, जिसके बाद अमावस्या शुरू होगी। उत्तर भाद्रपद नक्षत्र, इंद्र&#8230; ]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>16 अप्रैल 2026 (गुरुवार) को <mark>वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि है, जो शाम 6:53 (या 8:11 PM) तक रहेगी, जिसके बाद अमावस्या शुरू होगी</mark>। उत्तर भाद्रपद नक्षत्र, इंद्र योग और विष्टि (भद्रा) करण का संयोग है। सूर्योदय 05:54 AM और सूर्यास्त 06:47 PM के बीच होगा। शुभ मुहूर्त में अभिजीत मुहूर्त 11:55 AM &#8211; 12:46 PM है।  वैशाख अमावस्या पर पितर पृथ्वी के निकट होते हैं। इस दिन किया गया तर्पण उन्हें जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति दिलाने में सहायक होता है।  ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जिनकी कुंडली में राहु-केतु के कारण दोष है, उनके लिए इस दिन पूजा करना अत्यंत फलदायी है।</p>



<p> 16 अप्रैल का दिन है और वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि &amp; धर्म और विवाह के कारक ग्रह &amp;   16 अप्रैल को वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी  &amp; <strong>वैशाख अमावस्या का आरंभ: </strong>आज शाम 07:44 पीएम से अमावस्या तिथि लग रही है। पितृ तर्पण और दान के लिए यह समय अत्यंत शुभ है। 16 अप्रैल 2026, गुरुवार का आज का पंचांग आपके दिन की सही शुरुआत और योजना बनाने में सहायक है। आज वैशाख मास की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि है, जो रात्रि 8:12 तक रहेगी, इसके बाद अमावस्या प्रारंभ होगी। उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्र के प्रभाव में यह दिन विशेष आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व रखता है।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="658" height="368" src="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/16-APRIL.jpg" alt="" class="wp-image-26355" srcset="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/16-APRIL.jpg 658w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/16-APRIL-300x168.jpg 300w" sizes="(max-width: 658px) 100vw, 658px" /></figure>



<p>6 अप्रैल  को वैशाख कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि और गुरुवार का दिन है। चतुर्दशी तिथि गुरुवार रात 8 बजकर 12 मिनट तक रहेगी। 16 अप्रैल को सुबह 10 बजकर 38 मिनट तक इंद्र योग रहेगा,  उसके बाद वैधृति योग लग जाएगा। साथ ही गुरुवार दोपहर 1 बजकर 59 मिनट तक उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र </p>



<p> रेवती नक्षत्र होने के कारण आज पूरा दिन गण्डमूल का प्रभाव रहेगा। इस नक्षत्र में जन्मे बच्चों की शांति पूजा भविष्य में आवश्यक होती है। गुरुवार का दिन लक्ष्मी प्राप्ति के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। गुरुवार होने के कारण श्री हरि विष्णु-लक्ष्मी का पूजन करें और संभव हो तो पीले वस्त्रों का दान करें। इससे घर में सुख-शांति बनी रहती है।</p>



<p>वर्ष 2026 में यह अमावस्या 17 अप्रैल, शुक्रवार को मनाई जाएगी। वैशाख अमावस्या को सतुआ अमावस्या या सातुवाई/ सातुवाई अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। शास्त्रों में इस दिन को पितरों की तृप्ति, कालसर्प दोष से मुक्ति और दान-पुण्य के लिए अक्षय फलदायी माना गया है।</p>



<p>पीपल में त्रिदेवों और पितरों का वास माना गया है। इस दिन सुबह पीपल के वृक्ष पर जल, कच्चा दूध और काले तिल अर्पित करें। शाम के समय पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं और अपने पितरों से क्षमा प्रार्थना करें।</p>



<p></p>



<h3 class="wp-block-heading">आने वाले समय की भविष्यवाणियां:</h3>



<p>1. आसमान से लाल वर्षा होगी और समुद्र का जलस्तर बढ़ने से कई तटीय शहर डूब जाएंगे।</p>



<p>2. धरती का तापमान बढ़ने से पहाड़ों से आग निकलेगी और आसमान में &#8216;दो सूरज&#8217; जैसा दृश्य दिखाई देगा।</p>



<p>3. दिन में तारे नजर आएंगे, जिससे कुछ क्षेत्रों की जनसंख्या पूरी तरह समाप्त हो जाएगी।</p>



<p>4. उत्तर दिशा में कार्तिक द्वादशी के दिन चार चेहरों वाला तारा कई दिनों तक दिखाई देगा।</p>



<p>5, छह धर्म मिलकर एक हो जाएंगे और वेंकटेश्वर स्वामी का खजाना चोरी हो जाएगा।</p>



<p>6. तिरुपति बालाजी मंदिर की महिमा वैश्विक होगी और हर धर्म के लोग वहां दर्शन के लिए आएंगे।</p>



<p>7. ग्रंथ में ऐसी बीमारी का उल्लेख है, जिसमें मनुष्य के सिर से रक्त निकलेगा और उसकी तत्काल मृत्यु हो जाएगी।</p>



<p>8. कलियुग के 5 हजार वर्ष बीतने के बाद, अधर्म के अंत से पहले दुनिया को लगभग 108 वर्षों के लंबे संघर्ष और उथल-पुथल से गुजरना होगा।</p>



<p>9. जब शनि मीन और मेष राशि में गोचर करेगा, तब एक भीषण और निर्णायक युद्ध होगा।</p>



<p>10. &#8216;विश्ववसु&#8217; नामक संवत्सर में भगवान कल्कि का अवतार होगा, जो दुष्टों का नाश करेंगे।</p>



<p><strong>ब्रह्मेंद्र स्वामी के अनुयायी इन घटनाओं का समय मुख्य रूप से 2026 से 2030 के बीच मान रहे हैं, हालांकि समय का सटीक अनुमान लगाना कठिन है। कुछ लोग मानते हैं कि संवत्सर के अगले चक्र में यह घटित होगा।</strong></p>
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		<title>14 अप्रैल को वैशाख कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि और मंगलवार &#038; 19 अप्रैल अक्षय तृतीया का पर्व बेहद खास</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Himalaya Gaurav Uttarakhand]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 13 Apr 2026 11:29:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म और संस्कृति]]></category>
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					<description><![CDATA[14 अप्रैल 2026 (मंगलवार) को वैशाख कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि (रात 12:13 बजे तक) और शतभिषा नक्षत्र है। आज मेष संक्रांति, बैसाखी और अंबेडकर जयंती है। सूर्य सुबह 9:31 बजे&#8230; ]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="has-luminous-vivid-orange-color has-text-color has-link-color wp-elements-fda2fc7b4f1b620a23a8f3fd53d8eafe">14 अप्रैल 2026 (<strong>मंगलवार) को <mark>वैशा</mark></strong><mark>ख कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि (रात 12:13 बजे तक) और शतभिषा नक्षत्र है</mark>। आज मेष संक्रांति, बैसाखी और अंबेडकर जयंती है। सूर्य सुबह 9:31 बजे मेष राशि में गोचर करेंगे, जिसे मेष संक्रांति कहा जाता है। मुख्य शुभ समय अभिजित मुहूर्त (12:14 PM &#8211; 01:04 PM) है और राहुकाल 03:34 PM &#8211; 05:10 PM तक रहेगा।  सूर्योदय-सुबह 5:56 AM  सूर्यास्त- शाम 6:45 PM BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI CHIEF EDITOR ; </p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="818" height="530" src="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/14-APRIL-26-1.jpg" alt="" class="wp-image-26350" srcset="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/14-APRIL-26-1.jpg 818w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/14-APRIL-26-1-300x194.jpg 300w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/14-APRIL-26-1-768x498.jpg 768w" sizes="(max-width: 818px) 100vw, 818px" /></figure>



<p><strong>14 अप्रैल 2026</strong>, मंगलवार विशेष रूप से धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण दिन है।   वैशाख संक्रांति, डॉ. अम्बेडकर जयंती और विभिन्न राज्यों में मनाए जाने वाले पर्व जैसे वैशाखी, विशु और मेष संक्रांति का शुभ संयोग बना है।  हिंदू पंचांग के अनुसार आज वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि है, जो 15 अप्रैल रात 12:12 बजे तक रहेगी , उसके बाद  त्रयोदशी तिथि लग जाएगी. साथ ही शाम 04:05 बजे तक शततार्क नक्षत्र, उसके बाद पूर्वाभाद्रपद लग जाएगा. इसके अलावा दोपहर 03:39 बजे तक शुक्ल योग रहेगा उसके बााद ब्रह्म योग लग जाएगा. </p>



<p class="has-luminous-vivid-amber-background-color has-background">अक्षय तृतीया का पर्व बेहद खास रहने वाला है, क्योंकि इस शुभ दिन चंद्रमा अपनी उच्च राशि वृषभ में गोचर करने जा रहे हैं। 19 अप्रैल को दोपहर 12 बजकर 32 मिनट पर होने वाला यह गोचर कई राशियों के लिए किस्मत बदलने वाला साबित हो सकता है। कांसे के बर्तन खरीदना आपके लिए शुभ रहेगा </p>



<ul class="wp-block-list">
<li>वैशाख कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि- 14 अप्रैल 2026 को रात 12 बजकर 13 मिनट तक</li>



<li>शुक्ल योग- 14 अप्रैल 2026 को दोपहर 3 बजकर 40 मिनट तक</li>



<li>शतभिषा नक्षत्र- 14 अप्रैल 2026 को शाम 4 बजकर 6 मिनट तक</li>



<li>सूर्य का में मेष राशि में गोचर-  14 अप्रैल 2026 को सुबह 9 बजकर 31 मिनट पर</li>



<li>वरुथिनी एकादशी पारण का समय- 14 अप्रैल को सुबह 6 बजकर 54 मिनट से सुबह 8 बजकर 53 मिनट तक </li>



<li>14 अप्रैल 2026 व्रत-त्यौहार- मेष संक्रांति, पना संक्रांति, बैसाखी, वरुथिनी एकादशी पारण</li>
</ul>



<p>14 अप्रैल को वैशाख कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि और मंगलवार &amp; 14 अप्रैल को वैशाख कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि और मंगलवार का दिन है। द्वादशी तिथि मंगलवार को रात 12 बजकर 13 मिनट तक रहेगी। 14 अप्रैल को दोपहर 3 बजकर 40 मिनट तक शुक्ल योग रहेगा। साथ ही मंगलवार को शाम 4 बजकर 6 मिनट तक शतभिषा नक्षत्र रहेगा। इसके अलावा आज पंचक है। साथ ही 14 अप्रैल को सुबह 9 बजकर 31 मिनट पर सूर्य मेष राशि में गोचर करेगें। 14 अप्रैल को मेष संक्रांति, बैसाखी, पना संक्रांति भी मनाई जाएगी</p>



<ul class="wp-block-list">
<li><strong>अभिजीत मुहूर्त:</strong> 12:14 PM से 01:04 PM।</li>



<li><strong>राहुकाल:</strong> 03:34 PM से 05:10 PM।</li>



<li><strong>विजय मुहूर्त:</strong> 02:44 PM से 03:35 PM।</li>



<li><strong>गोधूलि मुहूर्त:</strong> 06:54 PM से 07:17 PM।</li>



<li><strong>त्रिपुष्कर योग:</strong> शाम 04:06 बजे से रात 12:12 बजे तक (शुभ कार्यों के लिए उत्तम</li>
</ul>



<p><strong>व्रत / दिवस विशेष –</strong> वैशाख संक्रांति, पुण्यकाल 15- 56 तक, मीन मल मास समाप्त, डाँ. अम्बेडकर जयंती. श्री सैन जयंती, पंचक, वैशाखी</p>
]]></content:encoded>
					
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		<title>13 अप्रैल 2026 को वरुथिनी एकादशी पर दुर्लभ चतुर्ग्रही योग, कीर्तन करें, राजनीतिक बदलाव, सत्ता संगठन में परिवर्तन,</title>
		<link>https://himalayauk.org/perform-rare-chaturgrahi-yoga-kirtan-on-varuthini-ekadashi-on-13-april-2026-political-change-change-in-power-organization/?utm_source=rss&#038;utm_medium=rss&#038;utm_campaign=perform-rare-chaturgrahi-yoga-kirtan-on-varuthini-ekadashi-on-13-april-2026-political-change-change-in-power-organization</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Himalaya Gaurav Uttarakhand]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 12 Apr 2026 16:30:02 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[ट्रेंडिंग समाचार]]></category>
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					<description><![CDATA[13 अप्रैल का दिन है और वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि  &#38; सोमवार, 13 अप्रैल को वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि है। इस एकादशी&#8230; ]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>13 अप्रैल का दिन है और वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि  &amp; सोमवार, 13 अप्रैल को वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि है। इस एकादशी को वरुथिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। एकादशी पर धनिष्ठा और शुभा योग का संयोग बनेगा। इस दिन चंद्रमा का गोचर शनि के स्वामित्व वाली राशि कुंभ में रहेगा। इस तिथि पर धनिष्ठा नक्षत्र और दूसरे तरह के योगों का संयोग रहेगा।  भगवान विष्णु के नामों का जप और कीर्तन करें &amp; राजनीतिक उथल-पुथल एवं प्राकृतिक आपदाओं की आशंका &amp; राजनीतिक बदलाव होंगे। सत्ता संगठन में परिवर्तन होगा। 13 अप्रैल 2026 की वरुथिनी एकादशी बेहद खास &amp;  आने वाला समय आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद खास है। 13 अप्रैल 2026 को पड़ने वाली  वरुथिनी एकादशी सिर्फ एक व्रत नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने का सुनहरा अवसर &amp; ‘वरुथिनी’ शब्द का अर्थ होता है रक्षा कवच। यानी यह एकादशी हमें पापों, कष्टों और नकारात्मकता से बचाने वाली ढाल है।</p>



<p>CALL US; 9412932030</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="814" height="550" src="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/13-AP.jpg" alt="" class="wp-image-26341" srcset="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/13-AP.jpg 814w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/13-AP-300x203.jpg 300w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/13-AP-768x519.jpg 768w" sizes="(max-width: 814px) 100vw, 814px" /></figure>



<p class="has-luminous-vivid-amber-background-color has-background">By Chandra Shekhar Joshi Chief Editor &amp; Bagla Mukhi Peeth ; 9412932030</p>



<p>मीन राशि और एकादशी तिथि दोनों के स्&#x200d;वामी भगवान विष्&#x200d;णु हैं. लिहाजा 13 अप्रैल 2026 को एकादशी पर 5 राशियों को श्रीहरि और लक्ष्&#x200d;मी जी का धन-सफलता और सौभाग्&#x200d;य का विशेष आशीर्वाद</p>



<p class="has-light-green-cyan-background-color has-background"><strong>13 अप्रैल 2026 को वरुथिनी एकादशी है और इस दिन मीन राशि में 4 ताकतवर ग्रह सूर्य, बुध, मंगल और शनि मिलकर चतुर्ग्रही योग बना रहे हैं. ज्&#x200d;योतिष शास्&#x200d;त्र में चतुर्ग्रही योग को बहुत शुभ माना गया है. उस पर सुख, सौभाग्&#x200d;य, सफलता देने वाले गुरु ग्रह की राशि में इस योग का बनना अत्&#x200d;यंत लाभदायी है. यह योग भगवान विष्&#x200d;णु और मां लक्ष्&#x200d;मी की विशेष कृपा दिलाएगा. जानिए एकादशी पर बन रहे चतुर्ग्रही योग का लाभ किन 5 भाग्&#x200d;यशाली राशियों को मिलने वाला है</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="666" height="518" src="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/13-APIL-2026.jpg" alt="" class="wp-image-26342" srcset="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/13-APIL-2026.jpg 666w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/13-APIL-2026-300x233.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 666px) 100vw, 666px" /></figure>



<p class="has-pale-pink-background-color has-background">चतुर्ग्रही योग मीन राशि में ही बन रहा है और इसके जातकों को धन लाभ कराएगा. साथ ही समाज में मान-सम्&#x200d;मान बढ़ेगा. लोग आपके रचनात्&#x200d;मक कार्यों से प्रभावित होंगे.  13 अप्रैल 2026 को वरुथिनी एकादशी है और इस दिन मीन राशि में 4 ताकतवर ग्रह सूर्य, बुध, मंगल और शनि मिलकर चतुर्ग्रही योग बना रहे हैं. ज्&#x200d;योतिष शास्&#x200d;त्र में चतुर्ग्रही योग को बहुत शुभ माना गया है. उस पर सुख, सौभाग्&#x200d;य, सफलता देने वाले गुरु ग्रह की राशि में इस योग का बनना अत्&#x200d;यंत लाभदायी है. यह योग भगवान विष्&#x200d;णु और मां लक्ष्&#x200d;मी की विशेष कृपा दिलाएगा. जानिए एकादशी पर बन रहे चतुर्ग्रही योग का लाभ किन 5 भाग्&#x200d;यशाली राशियों को मिलने वाला है. </p>



<p>चतुर्ग्रही योग मीन राशि में ही बन रहा है और इसके जातकों को धन लाभ कराएगा. साथ ही समाज में मान-सम्&#x200d;मान बढ़ेगा. लोग आपके रचनात्&#x200d;मक कार्यों से प्रभावित होंगे. </p>



<p> एकादशी व्रत करने से साधक के सारे पाप नष्&#x200d;ट हो जाते हैं. इस साल 13 अप्रैल 2026, सोमवार को वरुथिनी एकादशी है. वरुथिनी एकादशी पर शुभ योग और धनिष्&#x200d;ठा नक्षत्र का संयोग बन रहा है. वहीं सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित है. सोमवार के दिन भगवान शिव का जलाभिषेक करें, बेलपत्र-धतूरा अर्पित करें. </p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="666" height="538" src="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/13-APRIL-2026.jpg" alt="" class="wp-image-26343" srcset="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/13-APRIL-2026.jpg 666w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/13-APRIL-2026-300x242.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 666px) 100vw, 666px" /></figure>



<p>दिवस विशेष – वरुथिनी एकादशी व्रत, श्री बल्लभाचार्य जयंती, पंचक, महापात रात्रि 12-12 से रात्रि 4-05 तक, वरुथिनी एकादशी की शुरुआत 12 अप्रैल रात 1:16 बजे से हो रही है और इसका प्रभाव 14 अप्रैल रात 1:08 बजे तक रहेगा।<br>व्रत 13 अप्रैल को रखा जाएगा और पारण (व्रत खोलना) 14 अप्रैल को सुबह सूर्योदय से 8:31 बजे तक करना शुभ माना गया है।</p>



<p>भगवान श्री कृष्ण ने स्वयं कहा है कि इस व्रत का फल 10,000 वर्षों की तपस्या और सूर्य ग्रहण के समय कुरुक्षेत्र में स्वर्ण दान के बराबर होता है।</p>



<p>13 अप्रैल 2026, सोमवार विशेष रूप से धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण दिन है। आज वरुथिनी एकादशी व्रत, शुभ योग और कई शुभ चौघड़िया बन रहे हैं, जो नए कार्यों की शुरुआत के लिए अनुकूल माने जाते हैं।  वरुथिनी एकादशी का पर्व भगवान विष्णु की आराधना के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है। वर्ष 2026 में यह एकादशी 13 अप्रैल को पड़ रही है और इस बार इसका महत्व और भी बढ़ जाता है, क्योंकि इस दिन कई दुर्लभ ग्रह योग बन रहे हैं।  </p>



<p>भगवान श्री विष्णु की उपासना करें। बंदर, पहाड़ी गाय या कपिला गाय को भोजन कराएं। रोज उगते सूर्य को अर्घ्य देना शुरू करें। रविवार के दिन उपवास रखे। रोज गुढ़ या मिश्री खाकर पानी पीकर ही घर से निकलें। जन्मदाता पिता का सम्मान करें, प्रतिदिन उनके चरण छुकर आशीर्वाद लें । भगवान सूर्य की स्तुति आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें ।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="716" height="536" src="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/13-APRIL.jpg" alt="" class="wp-image-26344" srcset="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/13-APRIL.jpg 716w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/13-APRIL-300x225.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 716px) 100vw, 716px" /></figure>



<p>14 अप्रैल को ग्रहों के राजा सूर्य मेष राशि में (Sun Transit 2026) गोचर करेंगे। सूर्य आत्मा का कारक माना जाता है। सूर्य के मजबूत रहने से करियर और कारोबार में मन मुताबिक सफलता मिलती है। व्यक्ति ऊंचा मुकाम हासिल करने में कामयाब होता है। इसके लिए ज्योतिष लोगों को सूर्य मजबूत करने की सलाह देते हैं।</p>



<p>सूर्य को मजबूत करने के लिए रोजाना सूर्य देव को जल का अर्घ्य दें। साथ ही सूर्य चालीसा का पाठ करें। इसके अलावा, पिताजी के साथ संबंध मधुर रखना चाहिए। पिता के आशीर्वाद से जातक अपने जीवन में खूब तरक्की और उन्नति करता है। </p>



<p>रुथिनी  का पर्व भगवान विष्णु की आराधना के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है। वर्ष 2026 में यह एकादशी 13 अप्रैल, सोमवार को पड़ रही है। इस बार यह दिन ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद खास और प्रभावशाली माना जा रहा है, क्योंकि ग्रहों की स्थिति एक दुर्लभ संयोग बना रही है। सूर्य, बुध, मंगल और शनि का मीन राशि में एक साथ आना जीवन में बड़े बदलाव के संकेत दे रहा है। चंद्रमा और गुरु की स्थिति भी नए अवसर और तरक्की के द्वार खोल सकती है। हालांकि राहु और राज पंचक के प्रभाव के कारण हर कदम सोच-समझकर उठाने की जरूरत होगी, इसलिए यह एकादशी जहां लाभ और प्रगति के योग बना रही है, वहीं संयम बरतने की भी सलाह दे रही है।</p>



<p> चंद्रमा कुंभ राशि में स्थित होंगे और मिथुन राशि में विराजमान गुरु की उन पर दृष्टि रहेगी। यह योग व्यक्ति के विचारों को स्पष्टता देता है और निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत बनाता है। ऐसे समय में मन अपेक्षाकृत शांत रहता है और व्यक्ति कठिन परिस्थितियों में भी समझदारी से काम ले पाता है। यह संयोग आध्यात्मिक झुकाव भी बढ़ाता है, जिससे व्यक्ति भक्ति और आत्मचिंतन की ओर आकर्षित होता है।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="716" height="536" src="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/13-APRIL-1.jpg" alt="" class="wp-image-26345" srcset="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/13-APRIL-1.jpg 716w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/13-APRIL-1-300x225.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 716px) 100vw, 716px" /></figure>



<p>वरुथिनी एकादशी के दिन सूर्य, बुध, मंगल और शनि जैसे प्रमुख ग्रह मीन राशि में एकत्र रहेंगे। मीन राशि को आध्यात्मिकता और आंतरिक शांति का प्रतीक माना जाता है। इतने ग्रहों का एक साथ होना व्यक्ति को भीतर की ओर देखने और खुद को समझने का अवसर देता है। हालांकि बुध की स्थिति थोड़ी कमजोर मानी जा रही है, फिर भी अन्य ग्रहों का सहयोग इस समय को आत्मविकास के लिए अनुकूल बनाता है।</p>



<p>जहां एक ओर शुभ योग बन रहे हैं, वहीं राहु और राज पंचक की उपस्थिति यह संकेत देती है कि हर निर्णय सोच-समझकर लेना जरूरी है। जल्दबाजी या भावनाओं में आकर लिया गया फैसला नुकसान दे सकता है। इसलिए इस समय धैर्य और विवेक सबसे बड़ी ताकत होंगे।</p>



<p>ग्रहों के राजा कहे जाने वाले सूर्य देव 14 अप्रैल को मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करेंगे। मेष राशि में सूर्य उच्च का फल देते हैं। ज्योतिष में सूर्य को एक महत्वपूर्ण ग्रह माना गया है। सूर्य को आत्मा और पिता का कारक भी कहा गया है। सूर्य शुभ होने पर व्यक्ति को उच्च पद की प्राप्ति होती है।</p>



<p>सूर्य 14 अप्रैल को मेष राशि में प्रवेश करेंगे। जहां पर ये इस राशि में 14 मई तक रहेंगे। मेष राशि सूर्यदेव की उच्च की राशि होते हैं और इस राशि के स्वामी ग्रह मंगल होते हैं। वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कोई भी ग्रह जब अपनी उच्च राशि में रहता है तब इसका शुभ फल जातकों के जीवन पर पड़ता है। सूर्य के उच्च की राशि में गोचर करने से कई राशि के लोगों को फायदा मिलने के संकेत हैं।</p>



<p>सूर्य देव के मीन राशि में गोचर से मीन मलमास प्रारंभ हो जाता है । जिसकी वजह एक माह तक यानी सूर्य के मीन राशि में रहते विवाह आदि मंगल कार्यों पर रोक लग जाती है। सूर्य के मीन से निकलकर मेष राशि में गोचर के साथ मीन मलमास समाप्त हो जायेगा और इसकी वजह से रुके हुए मांगलिक कार्यक्रम, विवाह आदि फिर से शुरू हो जाएंगे।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="768" height="1024" src="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/HGU-BANK-BAR-CODE-2-768x1024.jpg" alt="" class="wp-image-26346" srcset="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/HGU-BANK-BAR-CODE-2-768x1024.jpg 768w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/HGU-BANK-BAR-CODE-2-225x300.jpg 225w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/HGU-BANK-BAR-CODE-2-1152x1536.jpg 1152w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/HGU-BANK-BAR-CODE-2.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 768px) 100vw, 768px" /></figure>



<p>द्वादशी पर पराया अन्न खाने से व्रत का पूरा पुण्य नष्ट हो सकता है। &amp;  गजेंद्र मोक्ष हमें सिखाती है कि जब जीवन में कोई सहारा नहीं बचता, तब भगवान का स्मरण ही अंतिम शक्ति बनता है। गजेंद्र ने संकट में भगवान को पुकारा और उन्हें मुक्ति मिली। यही इस एकादशी का सार है: पूर्ण श्रद्धा और समर्पण।</p>
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		<title> 11 अप्रैल 2026 शनिवार शनि देव और हनुमान जी को समर्पित शनिवार &#038; 9 ग्रहों की स्थिति &#038;</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Himalaya Gaurav Uttarakhand]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 10 Apr 2026 16:48:10 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म और संस्कृति]]></category>
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					<description><![CDATA[ 11 अप्रैल 2026 के दिन का आरंभ वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि से हो रहा है, जो कि सुबह 12:37 मिनट पर समाप्त  इसके बाद दिनभर दशमी&#8230; ]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p> 11 अप्रैल 2026 के दिन का आरंभ वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि से हो रहा है, जो कि सुबह 12:37 मिनट पर समाप्त  इसके बाद दिनभर दशमी तिथि &amp;शनि देव और हनुमान जी को समर्पित शनिवार &amp; जिनकी कृपा से जीवन की तमाम परेशानियों से मुक्ति &amp; 11 अप्रैल 2026 के दिन का आरंभ नक्षत्र उत्तराषाढ़ा से होगा, जो कि दोपहर में 01:39 मिनट पर समाप्त होगा. इसके बाद दिनभर नक्षत्र श्रवण रहने वाला है. &amp; शनिवार के दिन का आरंभ सिद्ध योग में होगा, जो शाम में 06:38 मिनट पर समाप्त होगा. इसके बाद अगले दिन की सुबह तक साध्य योग रहने वाला है. सूर्योदय- सुबह 06 बजे सूर्यास्त- शाम 06 बजकर 44 मिनट पर &amp; <strong>शनि देव और हनुमान जी की उपासना </strong> BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI BAGLA MUKHI PEETH DEHRADUN Mob 9412932030</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="690" height="534" src="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/11-APRIL-26.jpg" alt="" class="wp-image-26335" srcset="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/11-APRIL-26.jpg 690w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/11-APRIL-26-300x232.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 690px) 100vw, 690px" /></figure>



<p>महात्मा ज्योतिबा फुले जयंती &amp; 11 अप्रैल 2026 में सिद्ध योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और बुध गोचर &amp;  11 अप्रैल 2026 : आज का दिन वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि और शनिवार के प्रभाव के साथ शुरू  &amp; सिद्ध योग, साध्य योग, <strong>सर्वार्थ सिद्धि योग</strong>, आडल योग और विडाल योग जैसे कई शुभ योग &amp; साथ ही बुध ग्रह का गोचर &amp;  हनुमान जी व शनि देव की पूजा</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="830" height="542" src="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/11-APRIL-2026-SAT.jpg" alt="" class="wp-image-26337" srcset="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/11-APRIL-2026-SAT.jpg 830w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/11-APRIL-2026-SAT-300x196.jpg 300w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/11-APRIL-2026-SAT-768x502.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 830px) 100vw, 830px" /></figure>



<p> पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाने से शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या के कष्टों में राहत &amp;  हनुमान जी को   लड्डू अर्पित करें। श्रवण नक्षत्र होने के कारण आज किए गए दान-पुण्य का अक्षय फल प्राप्त होता है। काले तिल और गुड़ का दान करें। शनिवार और श्रवण नक्षत्र का मेल तकनीकी कार्यों और नई मशीनरी खरीदने के लिए (राहुकाल को छोड़कर) मध्यम शुभ </p>



<p><strong>शनिवार, 11 अप्रैल 2026 का पंचांग</strong> विक्रम संवत 2083 (रौद्र संवत्सर) में प्रवेश  &amp; उत्तरायण और बसंत ऋतु में वैशाख कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि रात 12:38 तक रहेगी तिथि: नवमी &#8211; दोपहर 11:34 एएम तक, उसके बाद दशमी। नक्षत्र: श्रवण &#8211; दोपहर 03:37 पीएम तक, उसके बाद धनिष्ठा। अभिजीत मुहूर्त (सबसे शुभ)-11:46 एएम से 12:36 पीएम विजय मुहूर्त 02:16 पीएम से 03:06 पीएम  ब्रह्म मुहूर्त-04:21 एएम से 05:08 एएम   राहुकाल (अशुभ समय)-09:11 एएम से 10:46 एएम यमगण्ड- 01:55 पीएम से 03:30 पीएम  गुलिक काल-06:01 एएम से 07:36 एएम</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>9 ग्रहों की स्थिति</strong></h2>



<ul class="wp-block-list">
<li>शुक्र ग्रह: मेष राशि में 11 अप्रैल 2026 (शनिवार) को रहेंगे.</li>



<li>केतु ग्रह: सिंह राशि में 11 अप्रैल 2026 (शनिवार) को रहेंगे.</li>



<li>बुध ग्रह: मीन राशि में 11 अप्रैल 2026 (शनिवार) को गोचर करेंगे.</li>



<li>चंद्र ग्रह: मकर राशि में 11 अप्रैल 2026 (शनिवार) को रहेंगे.</li>



<li>राहु ग्रह: कुंभ राशि में 11 अप्रैल 2026 (शनिवार) को रहेंगे.</li>



<li>देवगुरु बृहस्पति (गुरु) ग्रह: मिथुन राशि में 11 अप्रैल 2026 (शनिवार) को रहेंगे.</li>



<li>शनि ग्रह, मंगल ग्रह और सूर्य ग्रह: मीन राशि में 11 अप्रैल 2026 (शनिवार) को रहेंगे.</li>
</ul>
]]></content:encoded>
					
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			</item>
		<item>
		<title>10 अप्रैल 2026, शुक्रवार का दिन ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष महत्व,  शीतलाष्टमी, कालाष्टमी जैसे महत्वपूर्ण व्रत-त्योहार, जल संसाधन दिवस, भारतीय रेल सप्ताह प्रारंभ, 24 अप्रैल: मां बगलामुखी जयंती, पीतांबरा प्रकटोत्सव, सत्य सांईं महा.दिवस</title>
		<link>https://himalayauk.org/10-april-2026-friday-has-special-significance-from-astrological-point-of-view-important-fast-festivals-like-shitalashtami-kalashtami-water-resources-day-bharti/?utm_source=rss&#038;utm_medium=rss&#038;utm_campaign=10-april-2026-friday-has-special-significance-from-astrological-point-of-view-important-fast-festivals-like-shitalashtami-kalashtami-water-resources-day-bharti</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Himalaya Gaurav Uttarakhand]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 09 Apr 2026 16:42:17 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तराखंड समाचार]]></category>
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					<description><![CDATA[10 अप्रैल 2026  शुक्रवार तिथि: अष्टमी &#8211; सुबह 11:17 एएम तक, उसके बाद नवमी। 10 अप्रैल 2026, शुक्रवार का दिन ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष महत्व &#38; वैशाख मास के कृष्ण पक्ष&#8230; ]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="has-light-green-cyan-background-color has-background"> 10 अप्रैल 2026  शुक्रवार तिथि: अष्टमी &#8211; सुबह 11:17 एएम तक, उसके बाद नवमी। 10 अप्रैल 2026, शुक्रवार का दिन ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष महत्व &amp; <strong>वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि</strong> है, जिसमें पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र और शिव योग का संयोग  &amp; माता शीतला की पूजा और बासोड़ा (शीतला अष्टमी) पर्व के लिए विशेष महत्व BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI 9412932030</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="666" height="512" src="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/10-APRIL.jpg" alt="" class="wp-image-26331" srcset="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/10-APRIL.jpg 666w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/10-APRIL-300x231.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 666px) 100vw, 666px" /></figure>



<p>^ अभिजीत मुहूर्त (शुभ)- 11:47 एएम से 12:37 पीएम  अमृत काल- 09:09 एएम से 10:47 एएम  ब्रह्म मुहूर्त-04:22 एएम से 05:09 एएम राहुकाल (अशुभ समय)-10:46 एएम से 12:21 पीएम यमगण्ड- 03:31 पीएम से 05:05 पीएम गुलिक काल-07:37 एएम से 09:12 एएम  </p>



<p>शुक्रवार होने के कारण आज धन की देवी लक्ष्मी जी की पूजा का भी शुभ संयोग है। शाम के समय घर के मुख्य द्वार पर घी का दीपक जलाने से समृद्धि आती है। वैशाख महीने के कृष्&#x200d;ण पक्ष की अष्&#x200d;टमी तिथि और शुक्रवार का दिन है. इस तिथि को कालाष्&#x200d;टमी कहते हैं. कालाष्&#x200d;टमी व्रत भगवान शिव के रुद्रावतार बाबा काल भैरव को समर्पित है. हर महीने के कृष्&#x200d;ण पक्ष की अष्&#x200d;टमी को कालाष्&#x200d;टमी व्रत रखते हैं इसलिए इसे मासिक कालाष्&#x200d;टमी कहते हैं. साथ ही आज शुक्रवार होने से मां लक्ष्&#x200d;मी की भी पूजा की जाएगी.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="812" height="550" src="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/10-APRIL-2026-1.jpg" alt="" class="wp-image-26332" srcset="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/10-APRIL-2026-1.jpg 812w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/10-APRIL-2026-1-300x203.jpg 300w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/10-APRIL-2026-1-768x520.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 812px) 100vw, 812px" /></figure>



<p><strong>सर्वार्थ सिद्धि योग: </strong>आज उत्तराषाढ़ा नक्षत्र और शुक्रवार के संयोग से शुभ कार्यों के लिए अच्छा समय बन रहा है (राहुकाल को छोड़कर)। <strong> </strong>10 अप्रैल 2026 की रात 11:15 बजे तक अष्&#x200d;टमी तिथि रहेगी और उसके बाद नवमी तिथि प्रारंभ होगी.  10 अप्रैल की शाम 06:30 बजे तक शिव योग रहेगा और इसके बाद सिद्ध योग प्रारंभ होगा.  ब्रह्म मुहूर्त &#8211; सुबह 04:37 बजे से 05:25 बजे तक अमृत काल &#8211; सुबह 06:07 बजे से 07:54 बजे अभिजीत मुहूर्त &#8211; दोपहर 12:03 बजे से 12:53 बजे तक</p>



<p><strong>आज का विशेष उपाय:</strong>&nbsp;शुक्रवार का दिन होने के कारण किसी कन्या को सफेद मिठाई खिलाना भी शुभ रहेगा</p>



<p><strong>12 अप्रैल:&nbsp;</strong>रात 12.15 से पंचक शुरू</p>



<p><strong>13 अप्रैल:</strong>&nbsp;वरूथिनी एकादशी, वल्लभाचार्य जयंती, जलियांवाला बाग दिवस</p>



<p><strong>14 अप्रैल:</strong>&nbsp;वैशाखी पर्व, विशु, सूर्य मेष संक्रांति, संत शिरोमणि सेन जयंती</p>



<p><strong>15 अप्रैल:</strong>&nbsp;खरमास स., सौर वैशाख मा.प्रा., शिव चतुर्दशी पर्व, प्रदोष व्रत</p>



<p><strong>17 अप्रैल:&nbsp;</strong>पंचक (दिन 11.46 तक), वैशाखी अमावस, सतुवाई अमावस्या</p>



<p><strong>18 अप्रैल:</strong>&nbsp;गुरु अनंग देव जयंती</p>



<p><strong>19 अप्रैल:&nbsp;</strong>भगवान परशुराम प्रकटो. (अन्य मत से) मुस्लिम मास जिल्काद प्रा.</p>



<p><strong>20 अप्रैल:</strong>&nbsp;भगवान परशुराम प्रकटोत्सव, अक्षय तृतीया पर्व, विनायकी चतुर्थी, रोहिणी व्रत</p>



<p><strong>21 अप्रैल:&nbsp;</strong>संत सूरदास जयंती, आद्य शंकराचार्य जयंती</p>



<p><strong>22 अप्रैल:</strong>&nbsp;रामानुजाचार्य जयंती</p>



<p><strong>23 अप्रैल:&nbsp;</strong>गंगा सप्तमी, पुष्य (रात्रि 01.16 से) श्री गंगोत्पत्ति, चित्रगुप्त प्रकटो.</p>



<p><strong>24 अप्रैल:</strong>&nbsp;मां बगलामुखी जयंती, पीतांबरा प्रकटोत्सव,&nbsp;सत्य सांईं महा.दिवस, पुष्य (रात्रि 12.10 तक)</p>



<p><strong>25 अप्रैल:</strong>&nbsp;जानकी नवमी श्री जानकी प्रकटोत्सव, संत भूराभगत जयंती</p>



<p><strong>26 अप्रैल:&nbsp;</strong>महावीर स्वामी कैवल्य ज्ञान दिवस</p>



<p><strong>27 अप्रैल:&nbsp;</strong>मोहिनी एकादशी पर्व</p>



<p><strong>29 अप्रैल:&nbsp;</strong>प्रदोष व्रत</p>



<p><strong>30 अप्रैल:</strong>&nbsp;नृसिंह प्रकटोत्सव, गुरु अमरदास जयंती श्री नृसिंह चतुर्दशी पर्व।</p>



<h3 class="wp-block-heading">अप्रैल 2026 के विशेष दिवस</h3>



<p>1 अप्रैल: वित्तीय वर्ष प्रा., अप्रैल फूल डे,&nbsp; मूर्ख दिवस</p>



<p>7 अप्रैल: विश्व स्वास्थ्य दिवस</p>



<p>8 अप्रैल: विश्व बंजारा दिवस</p>



<p>10 अप्रैल: डॉ. हेनीमेन जयंती</p>



<p>11 अप्रैल: ज्योतिबा फुले जयंती</p>



<p>13 अप्रैल: जलियांवाला बाग दिवस</p>



<p>14 अप्रैल: डॉ. अंबेडकर जयंती, अग्निशामक दिवस</p>



<p>18 अप्रैल: ताता टोपे दिवस</p>



<p>19 अप्रैल: तिथि से छत्रपति शिवाजी जयंती&nbsp;</p>



<p>22 अप्रैल: विश्व पृथ्वी दिवस</p>



<p>25 अप्रैल: विश्व मलेरिया जागरूकता दिवस</p>
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		<title>9 अप्रैल 2026 गुरुवार, कालाष्टमी, 9 अप्रैल की रात 9 बजकर 19 मिनट से &#038;  केले के पेड़ की जड़ में जल, घी का दीपक</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Himalaya Gaurav Uttarakhand]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 08 Apr 2026 16:13:07 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तराखंड समाचार]]></category>
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					<description><![CDATA[9 अप्रैल 2026 (गुरुवार) को वैशाख कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि (शाम 09:18 तक, फिर अष्टमी) है। इस दिन मूल नक्षत्र और परिघ योग है। मुख्य समय: सूर्योदय 06:05 AM, सूर्यास्त&#8230; ]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>9 अप्रैल 2026 (गुरुवार) को <mark>वैशाख कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि (शाम 09:18 तक, फिर अष्टमी) है। इस दिन मूल नक्षत्र और परिघ योग है। मुख्य समय: सूर्योदय 06:05 AM, सूर्यास्त 06:38 PM, और राहुकाल 01:56 PM &#8211; 03:30 PM तक रहेगा। यह कालाष्टमी का समय है</mark> &amp; <strong>सूर्योदय/सूर्यास्त:</strong> 06:05 AM / 06:38 PM &amp; 09 अप्रैल का दिन है और वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि &amp; <strong>9 अप्रैल 2026, गुरुवार का पंचांग</strong> ^  2026 में सीता नवमी 25 अप्रैल को है। ये पर्व हर साल वैशाख महीने की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को आता है। देवी सीता को लोग भूमि पुत्री यानी धरती की बेटी मानते हैं क्योंकि धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक उनका जन्म गर्भ से नहीं बल्कि धरती से हुआ था। कहते हैं कि जिस नक्षत्र में राम नवमी होती है, उसी में सीता नवमी भी आती है, इसलिए इसकी पूजा का महत्व और बढ़ जाता है। ^ तिथि: सप्तमी &#8211; दोपहर 11:42 एएम तक, उसके बाद अष्टमी।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="808" height="546" src="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/9-APRIL-2026-PUNCHANG.jpg" alt="" class="wp-image-26325" srcset="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/9-APRIL-2026-PUNCHANG.jpg 808w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/9-APRIL-2026-PUNCHANG-300x203.jpg 300w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/9-APRIL-2026-PUNCHANG-768x519.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 808px) 100vw, 808px" /></figure>



<p class="has-pale-pink-background-color has-background">by Chandra Shekhar Joshi Mob. 9412932030</p>



<p>आज के दिन भगवान विष्णु को पीले फूल, चने की दाल और गुड़ अर्पित करना चाहिए। &#8216;ॐ नमो भगवते वासुदेवाय&#8217; मंत्र का जाप करने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है।  केले के पेड़ की जड़ में जल अर्पित करें और घी का दीपक जलाएं। इससे गुरु दोष शांत होता है और विवाह या करियर में आ रही बाधाएं दूर होती हैं।</p>



<p class="has-pale-pink-background-color has-background">BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI Mob. 9412932030</p>



<p>9 अप्रैल 2026 को वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि है। यह सप्तमी तिथि शाम 09 बजकर 18 मिनट तक रहेगी फिर इसके बाद सप्तमी तिथि लग जाएगी। इस तिथि पर चंद्रमा धनु राशि और मूल नक्षत्र में रहेंगे। वहीं इस तिथि पर परीघा योग और दूसरे शुभ योगों का संयोग </p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="812" height="460" src="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/9-APRIL-2026.jpg" alt="" class="wp-image-26326" srcset="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/9-APRIL-2026.jpg 812w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/9-APRIL-2026-300x170.jpg 300w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/9-APRIL-2026-768x435.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 812px) 100vw, 812px" /></figure>



<p>खरमास 15 मार्च से शुरू हुआ था, जो करीब एक महीने तक रहता है। 14 अप्रैल को सूर्य के मेष राशि में प्रवेश करते ही इसका समापन &amp; वैशाख माह में आने वाली यह तिथि भगवान कालभैरव की उपासना के लिए विशेष &amp; कालभैरव, भगवान शिव के उग्र और रक्षक स्वरूप हैं, जिनकी पूजा करने से जीवन में आ रही बाधाएं दूर होती हैं और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। मान्यता है कि सच्चे मन से कालभैरव की आराधना करने पर व्यक्ति को भय, संकट और दुखों से राहत मिलती है।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="878" height="506" src="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/VISHNU.jpg" alt="" class="wp-image-26327" srcset="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/VISHNU.jpg 878w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/VISHNU-300x173.jpg 300w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/VISHNU-768x443.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 878px) 100vw, 878px" /></figure>



<p> वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत 9 अप्रैल की रात 9 बजकर 19 मिनट से होगी और इसका समापन 10 अप्रैल की रात 11 बजकर 15 मिनट पर होगा। उदया तिथि को मानते हुए कालाष्टमी का व्रत 10 अप्रैल को रखा जाएगा। हालांकि, कालभैरव की पूजा के लिए विशेष रूप से निशा काल का महत्व होता है, जो 9 अप्रैल की रात में पड़ रहा है। इसलिए जो श्रद्धालु निशा काल में पूजा करना चाहते हैं, वे 9 अप्रैल की रात को भी भैरव पूजा कर सकते हैं।</p>



<p>2026 में सीता नवमी 25 अप्रैल को है। ये पर्व हर साल वैशाख महीने की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को आता है। देवी सीता को लोग भूमि पुत्री यानी धरती की बेटी मानते हैं क्योंकि धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक उनका जन्म गर्भ से नहीं बल्कि धरती से हुआ था। कहते हैं कि जिस नक्षत्र में राम नवमी होती है, उसी में सीता नवमी भी आती है, इसलिए इसकी पूजा का महत्व और बढ़ जाता है।</p>



<ul class="wp-block-list">
<li> कुत्ते को भोजन कराना अत्यंत शुभ माना जाता है, क्योंकि कुत्ता कालभैरव का वाहन माना जाता है। </li>



<li>भगवान कालभैरव के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाएं और “ॐ कालभैरवाय नमः” मंत्र का जप करें। ऐसा करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।</li>
</ul>



<p> हल्दी वाले भोजन से परहेज करना। लेकिन आखिर ऐसा क्यों किया जाता है? हल्दी को हिंदू धर्म में बहुत शुभ और पवित्र माना जाता है। इसका उपयोग पूजा-पाठ, शादी-विवाह, मंगल कार्यों और धार्मिक अनुष्ठानों में किया जाता है। हल्दी को सौभाग्य, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। यही वजह है कि इसे “मंगलकारी” चीजों में गिना जाता है।</p>
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		<title>8 अप्रैल: वैशाख कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि और बुधवार, धार्मिक रूप से क्यों खास? छोटे पुण्य कर्म भी बड़ा फल देते हैं, भगवान गणेश को दूर्वा (21 गांठ) और मोदक, हरी मूंग की दाल का दान, गाय को हरा चारा खिलाना, इलायची या थोड़ी सी सौंफ खाकर निकलें</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Himalaya Gaurav Uttarakhand]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 07 Apr 2026 16:36:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[ट्रेंडिंग समाचार]]></category>
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					<description><![CDATA[8 अप्रैल 2026 एक खास दिन है, जिसमें बनने वाले शुभ योग और संयोग इसे सामान्य दिनों से अलग बनाते हैं। इस दिन के व्रत, त्योहार और शुभ समय आपके&#8230; ]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>8 अप्रैल 2026 एक खास दिन है, जिसमें बनने वाले शुभ योग और संयोग इसे सामान्य दिनों से अलग बनाते हैं। इस दिन के व्रत, त्योहार और शुभ समय आपके जीवन में सकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं।   भगवान विष्णु, शिव या अपने इष्ट देव का ध्यान करें और दिन की शुरुआत करें। वैशाख मास में जल दान, अन्न दान और गरीबों की सहायता करना विशेष पुण्यदायी माना जाता है।  मंदिर में दीप जलाकर पूजा-अर्चना करें। 8 अप्रैल को वैशाख कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि और बुधवार ^  षष्ठी तिथि बुधवार शाम 7 बजकर 02 मिनट तक  &amp; आज के दिन हरी मूंग की दाल का दान करना या गाय को हरा चारा खिलाना अत्यंत शुभ फलदायी &amp; इलायची या थोड़ी सी सौंफ खाकर निकलें</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="736" height="414" src="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/8-APRIL-PUNCHANG-1.jpg" alt="" class="wp-image-26321" srcset="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/8-APRIL-PUNCHANG-1.jpg 736w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/8-APRIL-PUNCHANG-1-300x169.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 736px) 100vw, 736px" /></figure>



<p class="has-light-green-cyan-background-color has-background">BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI Mob. 9412932030</p>



<p class="has-light-green-cyan-background-color has-background">भगवान गणेश को दूर्वा (21 गांठ) और मोदक &amp; आज दोपहर 02:51 पीएम तक मूल नक्षत्र रहेगा। यह गण्डमूल नक्षत्रों में से एक है, इसलिए इस समय में सावधानी बरतें। इसके बाद पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र शुरू होगा जो शुभ कार्यों के लिए बेहतर है।</p>



<p>8 अप्रैल 2026 को वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि है। यह षष्ठी तिथि शाम 07 बजकर 01 मिनट तक रहेगी फिर इसके बाद नवमी तिथि &amp; अभिजीत मुहूर्त-आज उपलब्ध नहीं है (बुधवार को यह मुहूर्त मान्य नहीं होता) विजय मुहूर्त 02:17 पीएम से 03:07 पीएम  अमृत काल- 08:35 एएम से 10:10 एएम  ब्रह्म मुहूर्त-04:24 एएम से 05:11 एएम  राहुकाल (अशुभ समय)-12:21 पीएम से 01:56 पीएम यमगण्ड- 07:39 एएम से 09:13 एएम  गुलिक काल-10:47 एएम से 12:21 पीएम</p>



<p> 8 अप्रैल को वैशाख कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि और बुधवार का दिन है। षष्ठी तिथि बुधवार को शाम 7 बजकर 02 मिनट तक रहेगी। 8 अप्रैल को शाम 5 बजकर 11 मिनट तक वरीयान योग रहेगा। साथ ही बुधवार को पूरा दिन पूरी रात पार करके गुरुवार सुबह 8 बजकर 49 मिनट तक मूल नक्षत्र रहेगा। इसके अलावा 8 अप्रैल को शाम 7 बजकर 2 मिनट से गुरुवार सुबह 8 बजकर 11 मिनट तक पाताल लोक की भद्रा </p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="806" height="550" src="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/7-APRIL-2026-1.jpg" alt="" class="wp-image-26319" srcset="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/7-APRIL-2026-1.jpg 806w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/7-APRIL-2026-1-300x205.jpg 300w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/7-APRIL-2026-1-768x524.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 806px) 100vw, 806px" /></figure>



<p>बुधवार, 8 अप्रैल 2026 का पंचांग &amp;  वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि है, जिसमें मूल नक्षत्र और वरियान योग का संयोग बन रहा है &amp; विक्रम संवत् &#8211; 2083<br>संवत्सर नाम – रौद्र<br>शक संवत् – 1948<br>हिजरी सन् – 1447<br>मु. मास – 19 सव्वाल<br>अयन – उत्तरायण<br>ऋतु – बसंत ऋतु<br>मास – वैशाख<br>पक्ष – कृष्ण</p>



<p> 8 अप्रैल 2026 को कौन-कौन से व्रत और पर्व हैं और यह दिन धार्मिक रूप से क्यों खास है? 8 अप्रैल 2026, बुधवार को वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि है (शाम 7:02 PM तक)। भले ही इस दिन कोई बड़ा त्योहार नहीं है, लेकिन वैशाख मास का हर दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। इस दिन स्नान, दान और भगवान की पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="736" height="414" src="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/8-APRIL-PUNCHANG.jpg" alt="" class="wp-image-26320" srcset="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/8-APRIL-PUNCHANG.jpg 736w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/8-APRIL-PUNCHANG-300x169.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 736px) 100vw, 736px" /></figure>



<p>इस दिन कोई प्रमुख व्रत या त्योहार नहीं है, लेकिन वैशाख मास में किए गए हर धार्मिक कार्य का विशेष महत्व होता है। इस महीने को धर्म, तप और पुण्य का महीना माना जाता है। ऐसे में इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, गंगा स्नान और दान-पुण्य करना अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है।</p>



<ul class="wp-block-list">
<li><strong>शुभ मुहूर्त:</strong> 11:36 AM से 12:26 PM</li>



<li><strong>राहुकाल:</strong> 12:01 PM से 1:35 PM</li>



<li><strong>गुलिक काल:</strong> 10:27 AM से 12:01 PM</li>



<li><strong>यमघण्ट काल:</strong> 7:18 AM से 8:52 AM</li>



<li><strong>सूर्योदय:</strong> 5:43 AM</li>



<li><strong>सूर्यास्त:</strong> 6:18 PM</li>
</ul>



<p>8 अप्रैल 2026 का दिन भले ही किसी बड़े त्योहार से जुड़ा न हो, लेकिन धार्मिक दृष्टि से यह दिन बेहद महत्वपूर्ण है। वैशाख मास के प्रभाव से इस दिन किए गए छोटे-छोटे पुण्य कर्म भी बड़ा फल देते हैं। श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजा, दान और अच्छे कर्म करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>वैशाख कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि- 8 अप्रैल 2026 को शाम 7 बजकर 02 मिनट तक</li>



<li>वरीयान योग- 8 अप्रैल को शाम 5 बजकर 11 मिनट तक</li>



<li>मूल नक्षत्र- 8 अप्रैल को पूरा दिन पूरी रात पार करके कल सुबह 8 बजकर 49 मिनट तक</li>



<li>पाताल लोक की भद्रा-  8 अप्रैल को शाम 7 बजकर 2 मिनट से गुरुवार सुबह 8 बजकर 11 मिनट तक</li>
</ul>



<p>ज्योतिष विज्ञान के अनुसार भद्रा अलग-अलग बारह चंद्र राशियों के अनुसार तीनों लोक- स्वर्ग, पृथ्वी और पाताल में घूमती रहती है। जिस दिन चन्द्रमा मेष, वृषभ, मिथुन और वृश्चिक राशि में होता है तब भद्रा का वास स्वर्ग लोक पर माना जाता है और जब चंद्रमा कर्क, सिंह, कुंभ और मीन राशि में होता है तब भद्रा का वास पृथ्वी लोक पर माना जाता है वही जब चंद्रमा कन्या, तुला, धनु और मकर राशि में होता है तब भद्रा का वास पाताल लोक में माना जाता। आज चन्द्रमा का वास धनु राशि में है तो इसलिए आज पाताल लोक की भद्रा रहेगी। पाताल लोक की भद्रा का वैसे तो कोई असर पृथ्वी पर नहीं पड़ता और अगर भद्रा सोमवार, गुरुवार और शुक्रवार के दिन पड़े, तो उसका कोई दोष नहीं लगता। लेकिन पाताल लोक की भद्रा के दौरान इस बात का ख्याल जरूर रखना चाहिए कि भद्रा के मुख काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए।</p>



<p>वैशाख मास की मासिक शिवरात्रि वर्ष 2026 में 15 अप्रैल को मनाई जाएगी। इस दिन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि रात 10 बजकर 31 मिनट पर प्रारंभ होगी और अगले दिन यानी 16 अप्रैल को शाम 8 बजकर 11 मिनट पर समाप्त होगी। इसलिए निशिता काल के अनुसार व्रत और पूजा 15 अप्रैल की रात को ही करना अधिक शुभ माना जाता है। </p>



<ul class="wp-block-list">
<li>एक तांबे के लोटे में जल लें, उसमें काले तिल मिलाएं और उससे शिवलिंग का अभिषेक करें। इस समय &#8220;ॐ नमः शिवाय&#8221; मंत्र का जाप करने से ग्रहों के दुष्प्रभाव कम होते हैं।</li>



<li>यदि आप अपने घर में पारद शिवलिंग स्थापित करते हैं और इस दिन पूरी श्रद्धा से उसकी पूजा करते हैं, तो आपकी आय में वृद्धि होगी।</li>



<li>आटे से 11 शिवलिंग बनाना और उनका जल से अभिषेक करना भी एक विशेष उपाय है। कहा जाता है कि इस दिन मंत्रों का जाप करने से आपको संतान प्राप्ति में सहायता मिलती है।\</li>



<li>यदि किसी के विवाह में बाधाएं आ रही हैं, तो शिवलिंग का केसर मिश्रित दूध से अभिषेक करना और देवी पार्वती की पूजा करना शुभ माना जाता है।</li>



<li>ऐसा माना जाता है कि शिवलिंग पर शुद्ध घी अर्पित करने के बाद उस पर जल चढ़ाने से संतान संबंधी समस्याएं दूर होती हैं।</li>



<li>मासिक शिवरात्रि की शाम को, भगवान शिव को जल अर्पित करना चाहिए और&#8221;ॐ नमः शिवाय&#8221; मंत्र का जाप करना चाहिए। </li>
</ul>
]]></content:encoded>
					
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			</item>
		<item>
		<title>हनुमान भक्तअमिताभ बच्चन ,  शनिवार और मंगलवार ;यज्ञ की पूर्णाहुति के दिन हवन करते समय ही पता चला कि&#8230;  ;07 अप्रैल, 026 का दिन</title>
		<link>https://himalayauk.org/hanuman-devotee-amitabh-bachchan-while-performing-havan-on-the-completion-day-of-yagya-on-saturday-and-tuesday/?utm_source=rss&#038;utm_medium=rss&#038;utm_campaign=hanuman-devotee-amitabh-bachchan-while-performing-havan-on-the-completion-day-of-yagya-on-saturday-and-tuesday</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Himalaya Gaurav Uttarakhand]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 06 Apr 2026 16:09:11 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य समाचार]]></category>
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					<description><![CDATA[07 अप्रैल का दिन है और वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि  &#38; शुभ तिथि पर चंद्रमा वृश्चिक राशि में रहेंगे। वृश्चिक राशि के स्वामी ग्रह मंगलदेव होते&#8230; ]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>07 अप्रैल का दिन है और वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि  &amp; शुभ तिथि पर चंद्रमा वृश्चिक राशि में रहेंगे। वृश्चिक राशि के स्वामी ग्रह मंगलदेव होते हैं।  7 अप्रैल 2026 को वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि है। पंचमी तिथि दोपहर 04 बजकर 35 मिनट तक रहेगी फिर इसके बाद षष्ठी तिथि लग जाएगी। इस तिथि पर चंद्रमा वृश्चिक राशि और ज्येष्ठा नक्षत्र में रहेंगे। इसके अलावा 07 अप्रैल को कई तरह के शुभ योग भी बनेगा जिसमें प्रमुख रूप से सर्वार्थि सिद्धि योग और व्यतिपाता योग बनेगा।  मीन राशि में शनि और मंगल की युति 2 अप्रैल से 11 मई 2026 तक बड़े बदलावों का संकेत &amp; युद्ध, राजनीतिक उथल-पुथल, महंगाई और प्राकृतिक आपदाओं की संभावना </strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="816" height="540" src="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/7-APRIL-26-1.jpg" alt="" class="wp-image-26313" srcset="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/7-APRIL-26-1.jpg 816w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/7-APRIL-26-1-300x199.jpg 300w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/7-APRIL-26-1-768x508.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 816px) 100vw, 816px" /></figure>



<p class="has-pale-pink-background-color has-background">BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI Mob. 9412932030 call us; </p>



<p><strong> </strong>मीन राशि में मंगल के साथ शनि की युति 2 अप्रैल से 11 मई तक रहेगी। <strong>शनि और मंगल</strong> को उग्र ग्रह माना गया है। अप्रैल के महीने में करीब 30 साल बाद एक साथ <strong>4 ग्रहों की युति मीन राशि</strong> में बनने जा रही है। 2 अप्रैल को मीन राशि में मंगल प्रवेश कर चुके हैं। इसके बाद 3 उग्र ग्रह <strong>सूर्य, मंगल और शनि एक साथ मीन राशि में गोचर</strong> करेंगे। इनके साथ बुध भी यहां मौजूद रहेंगे।</p>



<p><strong>नीतिका शर्मा </strong>ने बताया कि <strong>मंगल गोचर </strong>मीन राशि में 2 अप्रैल को प्रवेश कर चुके हैं। ज्योतिष गणना के अनुसार 18 महीने बाद गुरु की राशि मीन में मंगल प्रवेश कर चुके हैं। जहां सूर्य, शनि और शुक्र पहले से ही विराजमान हैं। ऐसे में मंगल के गोचर से <strong>शनि मंगल योग</strong> भी बनेगा। मंगल और शनि दोनों को पाप ग्रह माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र में दोनों क्रूर ग्रहों की युति को प्रतिकूल प्रभाव देना वाला माना जाता है। इन दोनों ग्रहों की युति से देश दुनिया में अप्रिय घटनाएं घटने की संभावना है। वर्तमान समय में कई देशों में चल रही युद्ध की स्थिति और तेज हो सकती है।</p>



<p>युद्ध के कारक ग्रह मंगल एक राशि में 45 दिनों तक गोचर करते हैं। 17 फरवरी को कुंभ राशि में पड़े सूर्य ग्रहण के बाद जब मंगल ने 23 फरवरी को इस राशि में प्रवेश किया उसके बाद से वैश्विक राजनीति तेज़ी से बदली। मंगल के ग्रहण की राशि कुंभ में राहु और सूर्य से युति के तुरंत बाद 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान पर बड़ा हमला किया और उसके सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई सहित 40 बड़े सैन्य अधिकारियों और नेताओं को मार डाला। अपने ऊपर थोपे गए इस युद्ध का जवाब ईरान ने भी बड़ी प्रतिबद्धता के साथ दिया और अमेरिका-इजराइल सहित उसके खाड़ी देशों के सहयोगियों को बड़ा नुकसान पहुंचाया। अभी हाल ही में 29 मार्च को अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की नीतियों और ईरान युद्ध के विरोध में कई शहरों में बड़े जनांदोलन हुए।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="806" height="550" src="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/7-APRIL-2026.jpg" alt="" class="wp-image-26314" srcset="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/7-APRIL-2026.jpg 806w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/7-APRIL-2026-300x205.jpg 300w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/7-APRIL-2026-768x524.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 806px) 100vw, 806px" /></figure>



<p>शनि का मंगल से संयोग होता है तो देश और दुनिया में जनविद्रोह, आंदोलन और युद्ध जैसे हालात बन जाते हैं। शनि और मंगल की इस युति को &#8216;द्वंद्व योग&#8217; कहा जाता है। शनि अनुशासन और न्याय के देवता हैं, जबकि मंगल अग्नि और साहस के। मीन राशि (जल तत्व) में इनका मिलन मानसिक अशांति और वैचारिक मतभेद पैदा कर सकता है। मीन राशि समुद्र और जल का प्रतिनिधित्व करती है, इसलिए इस समय के दौरान समुद्री तूफान या जल से संबंधित प्राकृतिक आपदाओं की संभावना बढ़ जाती है।</p>



<p>मंगल 2 अप्रैल से 2026 से 11 मई 2026 तक मीन राशि में रहेंगे। यानी कि 11 मई तक मंगल व शनि की युति सक्रिय रहेगी। वहीं सूर्य 14 अप्रैल तक मीन राशि में रहेंगे और उसके बाद मेष राशि में गोचर कर जाएंगे। लिहाजा मंगल-शनि की युति सूर्य के साथ 14 अप्रैल तक रहेगी। अग्नि तत्व वाले मंगल ग्रह युद्ध और हिंसा के कारक हैं। राजनीति, न्याय के कारक उग्र ग्रह शनि के साथ मीन राशि में युति कर रहे हैं। इतना ही नहीं वहां अग्नि तत्व वाले सूर्य ग्रह भी मौजूद हैं। ऐसे में मंगल-शनि और सूर्य का साथ भयावह साबित हो सकता है।</p>



<p>7 अप्रैल 2026, मंगलवार का पंचांग और शुभ मुहूर्त नीचे दिया गया है। आज वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि है। मंगलवार का दिन श्री हनुमान जी और मंगल देव की आराधना के लिए समर्पित है।</p>



<p><strong>हनुमान जी की पूजा: </strong>आज मंगलवार है, इसलिए हनुमान चालीसा, सुंदरकांड या बजरंग बाण का पाठ करना बहुत शुभ रहेगा। आज उन्हें बूंदी के लड्डू या पान का बीड़ा अर्पित करना लाभकारी होगा।</p>



<p> कर्ज से परेशान हैं या भूमि संबंधी विवाद चल रहे हैं, तो आज मंगल देव के मंत्र &#8220;ॐ अं अंगारकाय नमः&#8221; का जाप करें और हनुमान जी को चमेली के तेल में सिंदूर मिलाकर चोला चढ़ाएं।</p>



<p>बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन भी हनुमान भक्त हैं। प्रयाग के कोतवाल कहे जाने वाले तथा संगम तट पर लेटे श्रीराम भक्त हनुमान मंदिर में वे हर साल अरदास लगवाते हैं।&nbsp;</p>



<p>बताया जाता है कि यहां के हनुमानजी में बिग बी की गहरी आस्था है। हर साल उनका प्रतिनिधि मुंबई से आता है। वह पूजा-अर्चना करवाता है। इस तरह से बिग बी अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं।   इस घटना के बाद से ही अमिताभ का इस मंदिर और बजरंगी बली के प्रति आस्था बढ़ी और हर साल वे अपनी उपस्थिति की अर्जी यहां लगवाते हैं। अमिताभ के भाई अजिताभ ने भी यहां 51 किलो का पीतल का घंटा मंदिर में लगवाया है। </p>



<p>वैसे इस मंदिर से उनका बचपन का नाता है। पिता डॉ. हरिवंश राय बच्चन के साथ वे इस मंदिर में प्रत्येक शनिवार और मंगलवार आया करते थे। साथ में उनके छोटे भाई अजिताभ भी होते थे।</p>



<p>अभिजीत मुहूर्त- 11:52− 12:41  सूर्योदय का समय- <strong>06:05</strong> सूर्यास्त का समय- <strong>18:27</strong> &amp; विक्रम संवत् &#8211; 2083</p>



<p>संवत्सर नाम – रौद्र शक संवत् – 1948  हिजरी सन् – 1447  मु. मास – 18 सव्वाल  अयन – उत्तरायण</p>



<p>ऋतु – बसंत ऋतु  मास – वैशाख पक्ष – कृष्ण</p>
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		<title>6 अप्रैल, सोमवार,26, वैशाख कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि, माता अनुसुइया की जयंती &#038; संकष्टी चतुर्थी और सोमवार का संयोग, शिव परिवार की पूजा, गणेश जी को दूर्वा और शिव जी को बेलपत्र &#038; BAGLA MUKHI PEETH DUN हनुमान जी के पैरों से कंपन</title>
		<link>https://himalayauk.org/6-april-monday-26-vaishakh-chaturthi-date-of-krishna-paksha-birth-anniversary-of-mata-anusuiya-coincidence-of-sankashti-chaturthi-and-monday-worship-of-shiva-family-ganesh/?utm_source=rss&#038;utm_medium=rss&#038;utm_campaign=6-april-monday-26-vaishakh-chaturthi-date-of-krishna-paksha-birth-anniversary-of-mata-anusuiya-coincidence-of-sankashti-chaturthi-and-monday-worship-of-shiva-family-ganesh</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Himalaya Gaurav Uttarakhand]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 05 Apr 2026 16:17:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य समाचार]]></category>
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					<description><![CDATA[6 अप्रैल 2026, सोमवार का दिन विशेष ज्योतिषीय संयोग लेकर आया है। आज चतुर्थी तिथि, अनुराधा नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्धि योग का शुभ संयोग बन रहा है, जो कई कार्यों&#8230; ]]></description>
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<p><strong>6 अप्रैल 2026, सोमवार का दिन विशेष ज्योतिषीय संयोग लेकर आया है। आज चतुर्थी तिथि, अनुराधा नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्धि योग का शुभ संयोग बन रहा है, जो कई कार्यों के लिए अत्यंत लाभकारी &amp;  वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि है। सोमवार का दिन भगवान शिव की आराधना के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। चतुर्थी &#8211; सुबह 04:35 एएम तक (7 अप्रैल), उसके बाद पंचमी। संकष्टी चतुर्थी और सोमवार का संयोग होने के कारण आज शिव परिवार (शिव-पार्वती और गणेश जी) की संयुक्त पूजा करें। गणेश जी को दूर्वा और शिव जी को बेलपत्र अर्पित BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI Mob. 9412932030</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="462" height="600" src="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/SHIV-PARIWAR-1.jpg" alt="" class="wp-image-26303" srcset="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/SHIV-PARIWAR-1.jpg 462w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/SHIV-PARIWAR-1-231x300.jpg 231w" sizes="auto, (max-width: 462px) 100vw, 462px" /></figure>



<p><strong><a href="http://www.himalayauk.org">शिव परिवार पूजा</a> (शिव, पार्वती, गणेश, कार्तिकेय और नंदी) <mark>घर में सुख, शांति, एकता और समृद्धि लाने के लिए की जाती है</mark></strong></p>



<p>6 अप्रैल 2026, सोमवार को <mark>वैशाख कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि (दोपहर 02:11 तक, फिर पंचमी) है। इस दिन अनुराधा नक्षत्र, सिद्धि योग और माता अनुसुइया जयंती मनाई जाएगी</mark>। यह दिन मानसिक शांति और पूजा-पाठ के लिए विशेष है।  6 अप्रैल को वैशाख कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि और सोमवार का दिन है। चतुर्थी तिथि सोमवार दोपहर 2 बजकर 11 मिनट तक सूर्योदय-सुबह 6:03 AM सूर्यास्त- शाम 6:41 PM</p>



<p> ज्योतिष शास्त्र अनुसार सभी ग्रह कुछ-कुछ समय में सिर्फ राशि ही नहीं बदलते बल्कि अपना नक्षत्र भी बदलते हैं। इसी कड़ी में 6 अप्रैल को दो बड़े ग्रहों का नक्षत्र परिवर्तन होने जा रहा है। 6 अप्रैल को 01:04 AM पर शुक्र भरणी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे तो वहीं इसी रात 10:04 PM पर मंगल उत्तर भाद्रपद नक्षत्र में चले जाएंगे। ये गोचर 4 राशि वालों के सुखों में बढ़ोतरी करने वाला है।</p>



<p class="has-pale-pink-background-color has-background">हनुमान जी के पैरों से कंपन</p>



<p><strong>BAGLA MUKHI PEETH ; DEHRADUN; हनुमान जी के चरणों (पैरों) से वाइब्रेशन (कंपन) या दिव्य ऊर्जा का अनुभव होना उनके अत्यंत सक्रिय, जागृत और रक्षक रूप का प्रतीक माना जाता है। सनातन धर्म में हनुमान जी को &#8216;अष्ट सिद्धि और नवनिधि के दाता&#8217; के रूप में पूजा जाता है, और उनके चरणों में अटूट श्रद्धा रखने से विशेष फल मिलते हैं।<br>हनुमान जी के पैरों से कंपन या ऊर्जा के महात्म्य के प्रमुख कारण और संकेत निम्नलिखित हैं:<br>असीम ऊर्जा और जागृत शक्ति: हनुमान जी रुद्रावतार (शिवजी का रूप) हैं। उनके चरण ऊर्जा का केंद्र हैं। मान्यता है कि जहां हनुमान जी की प्राण-प्रतिष्ठित मूर्ति या सच्चे मन से पूजा होती है, वहां उनके चरणों में सूक्ष्म रूप से दिव्य ऊर्जा या वाइब्रेशन महसूस हो सकते हैं, जो उनकी जीवित उपस्थिति को दर्शाते हैं।<br>संकट मोचन और सुरक्षा: हनुमान जी के पैर &#8220;सुरक्षा कवच&#8221; के समान हैं। उनके चरणों का ध्यान करने या चरणों से निकलने वाली ऊर्जा का अनुभव करने से भय, बुरी आत्माओं और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। यह कंपन साधक को यह आश्वासन देता है कि हनुमान जी उनके संकट को दूर कर रहे हैं।<br>आत्मविश्वास और मनोबल में वृद्धि: यदि पूजा के दौरान हनुमान जी के चरणों में कंपन या शक्ति का अनुभव हो, तो यह उस व्यक्ति के आत्मविश्वास में वृद्धि, मानसिक मजबूती और निडरता का संकेत है। यह ऊर्जा शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने और जीवन की कठिनाइयों से लड़ने की शक्ति देती है।<br>भक्ति और समर्पण (सिंदूर का महत्व): हनुमान जी के बाएं पैर (उल्टे पैर) के सिंदूर को अत्यंत चमत्कारिक माना जाता है। यदि भक्त हनुमान जी के चरणों में सिंदूर लगाकर (उल्टे पैर का) उन्हें अर्पण करता है, तो उसे नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति मिलती है और उसका अटका हुआ काम जल्दी बन जाता है।<br>कष्टों का निवारण: हनुमान जी के चरणों में ध्यान लगाने से शारीरिक रोग और मानसिक कष्ट दूर होते हैं। चरणों से आने वाली तरंगे मन को शांत करती हैं और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती हैं।</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="818" height="568" src="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/6-APRIL.jpg" alt="" class="wp-image-26304" srcset="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/6-APRIL.jpg 818w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/6-APRIL-300x208.jpg 300w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/6-APRIL-768x533.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 818px) 100vw, 818px" /></figure>



<p>6 अप्रैल को वैशाख कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि और सोमवार का दिन है। चतुर्थी तिथि सोमवार दोपहर 2 बजकर 11 मिनट तक रहेगी। 6 अप्रैल को दोपहर बाद 3 बजकर 25 मिनट तक सिद्धि योग रहेगा। साथ ही  सोमवार देर रात 2 बजकर 57 मिनट तक अनुराधा नक्षत्र रहेगा। इसके अलावा 6 अप्रैल को माता अनुसुइया की जयंती</p>



<p>माता अनुसुइया, ऋषि अत्रि की पत्नी, कर्दम ऋषि व देवहूति की पुत्री और त्रिदेव यानि ब्रम्हा ,विष्णु ,महेश की माता थी जो अपनी भक्ति, सतीत्व, पतिव्रता और पवित्रता के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने अपने सतीत्व व तपस्या के बल और तेज से ब्रह्मा, विष्णु और महेश को शिशु रूप में परिवर्तित कर दिया था। माता अनुसुइया का विशेष मेला और जयंती कार्यक्रम उत्तराखंड के चमोली में सती अनुसुइया आश्रम में मनाया जाता है, जो अत्रि ऋषि की तपस्थली भी है।</p>



<p>माता अनुसुइया का जन्मदिवस पूरे हर्षो उल्लास के साथ खास तौर पर सती अनुसुइया आश्रम और चित्रकूट आदि के मंदिरों में मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं सती अनुसुइया और महर्षि अत्रि की पूजा करती हैं। वे अपने पति की दीर्घायु और परिवार में सुख-शांति के लिए व्रत रखती हैं। ऐसा माना जाता है कि इस दिन व्रत करने से घर में समृद्धि आती है और पति का स्वास्थ्य उत्तम बना रहता है, साथ ही आश्रमों में विशेष भजन, कीर्तन और मेलों का आयोजन होता है।</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>वैशाख कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि &#8211; 6 अप्रैल 2026 को दोपहर 2 बजकर 11 मिनट तक</li>



<li>सिद्धि योग- 6 अप्रैल को दोपहर 2 बजकर 11 मिनट तक</li>



<li>अनुराधा नक्षत्र- 6 अप्रैल को देर रात 2 बजकर 57 मिनट तक</li>



<li>6 अप्रैल 2026 व्रत-त्यौहार- माता अनुसुइया जयंती</li>
</ul>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="768" height="1024" src="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/HGU-BANK-BAR-CODE-1-768x1024.jpg" alt="" class="wp-image-26305" srcset="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/HGU-BANK-BAR-CODE-1-768x1024.jpg 768w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/HGU-BANK-BAR-CODE-1-225x300.jpg 225w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/HGU-BANK-BAR-CODE-1-1152x1536.jpg 1152w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/HGU-BANK-BAR-CODE-1.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 768px) 100vw, 768px" /></figure>



<p>वैशाख माह का आरंभ 3 अप्रैल से हो चुका है, जिसका समापन 1 मई को होगा। इस महीने में स्नान, दान-पुण्य और पूजा-पाठ करने से पुण्यकारी फलों की प्राप्ति होती है। वहीं वैशाख मास में कई ग्रहों का भी राशि परिवर्तन होने वाला है। इसके अलावा कई ग्रह शक्तिशाली राजयोग का निर्माण भी करेंगे। इन ग्रहों के राशि परिवर्तन से कई राशियों को धन का लाभ मिलेगा। 11 अप्रैल को बुध मीन राशि में गोचर करेंगे, जहां मंगल पहले से ही विराजमान हैं। सूर्य और शनि के प्रभाव के साथ मिलकर यह चतुर्ग्रही योग बनेगा। इसके अलावा सूर्य और बुध की युति से बुधादित्य राजयोग का निर्माण होगा। 14 अप्रैल को सूर्य मेष राशि में प्रवेश करेंगे। 19 अप्रैल को शुक्र वृष राशि में प्रवेश करेंगे, जिससे मालव्य राजयोग का निर्माण होगा। इसके बाद 30 अप्रैल को बुध मेष राशि में गोचर करेंगे। </p>



<p class="has-pale-pink-background-color has-background">हर दिन सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच, कुछ निश्चित समय अवधि होती है जब किसी भी शुभ कार्य को नहीं करना चाहिए या कोई नया काम शुरू नहीं करना चाहिए। इस समय को शुभ या बुरा मुहूर्त कहा जाता है। ज्योतिषियों के अनुसार, इस अवधि में, तारों और ग्रहों की स्थिति प्रतिकूल और अप्रभावी होती हैं। यह मूलभूत कार्यों को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है और बुरे प्रभाव या विफलता का कारण बनता है। कभी-कभी, इस अवधि में नए उद्यम शुरू करने से अपेक्षित परिणाम नहीं मिलते हैं या अप्रत्याशित समय के लिए रुक जाते हैं। हिंदू पंचांग में, राहु कालम् या व्रज्याम काल में किसी भी अच्छे काम को करने के लिए सबसे अनुचित समय माना जाता है।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="682" src="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/DELHI-AWARD-2-APRIL-26-1-1024x682.jpg" alt="" class="wp-image-26306" srcset="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/DELHI-AWARD-2-APRIL-26-1-1024x682.jpg 1024w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/DELHI-AWARD-2-APRIL-26-1-300x200.jpg 300w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/DELHI-AWARD-2-APRIL-26-1-768x512.jpg 768w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/DELHI-AWARD-2-APRIL-26-1.jpg 1280w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p class="has-pale-pink-color has-text-color has-link-color wp-elements-03362afd535974742dc3ead21c0cd13d"><strong>चंद्रमा के रोशनी वाले पखवाड़े वाले समय को शुक्ल पक्ष कहा जाता है। यह अमावस्या से पूर्णिमा तक का समय होता है जब चंद्रमा चमकता है। जबकि वह समय जब चंद्रमा अपने रूप को धूमिल करता है उसे कृष्ण पक्ष कहा जाता है। यह अवधि पूर्णिमा से शुरू होती है और नव चन्द्र दिवस पर समाप्त होती है। इनमें से प्रत्येक अवधि में 15 दिन होते हैं जिन्हें क्रमशः शुक्ल पक्ष तिथि और कृष्ण पक्ष तिथि के रूप में जाना जाता है। इसके अलावा, हिंदू पंचांग की पूर्णिमा तिथि और अमावस्या तिथि जैसी तिथियां हिंदू परंपराओं में सबसे महत्वपूर्ण तिथियां मानी जाती हैं।</strong></p>



<p>ज्योतिषीय रूप से, सूर्यास्त और सूर्योदय के बीच आठ खंड या मुहूर्त होते हैं जो एक दिन के शुभ और अशुभ समय का संकेत देते हैं। राहु काल इन आठ खंडों में से एक है जो हर दिन 90 मिनट तक रहता है। इस अवधि में, राहु, हानिकारक ग्रह, प्रमुख है। राहु काल में जो कुछ भी किया जाता है या शुरू किया जाता है उसका नकारात्मक परिणाम होता है। इस प्रकार, राहु काल के दौरान किसी भी शुभ कार्य को नहीं करने का सुझाव दिया गया है।</p>



<p>निक पंचांग की बेहतर समझ के लिए इससे अच्छी तरह से वाकिफ होना चाहिए। यह विभिन्न ज्योतिषीय घटनाओं के बारे में सटीक जानकारी प्रदान करता है और किसी भी तरह से आपको कुछ भी नया शुरू करने के लिए सबसे उपयुक्त समय खोजने में मदद करता है।</p>



<p><strong>सूर्योदय और सूर्यास्त</strong>&nbsp;&#8211; हिंदू कैलेंडर में सूर्योदय से अगले सूर्यादय तक की अवधि को एक दिन माना जाता है। अतः, सूर्योदय और सूर्यास्त का समय ज्योतिष में बहुत महत्व रखता है। सभी प्रमुख निर्णय सूर्य और चंद्रमा की स्थिति पर विचार करने के बाद ही लिए जाते हैं।</p>



<p><strong>चंद्रोदय और चन्द्रास्त</strong>&nbsp;&#8211; अनुकूल समय का निर्धारण करने के लिए चंद्रोदय और चन्द्रास्त का समय हिंदू कैलेंडर में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।</p>



<p><strong>शक संवत</strong>&nbsp;&#8211; शक संवत भारतीय आधिकारिक नागरिक कैलेंडर है, जिसे 78 ईस्वी में स्थापित किया गया था।</p>



<p><strong>अमांत माह</strong>&nbsp;&#8211; हिंदू कैलेंडर, में जो चंद्र महीना अमावस्या के दिन समाप्त होता है, उसे अमांत माह के रूप में जाना जाता है। आंध्र प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा कुछ ऐसे राज्य हैं जो इस हिंदू कैलेंडर का पालन करते हैं।</p>



<p><strong>पूर्णिमांत माह</strong>&nbsp;&#8211; हिंदू कैलेंडर में चंद्र महीना पूर्णिमा के दिन समाप्त होता है उसे पूर्णिमांत माह के रूप में जाना जाता है। हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, झारखंड, मध्य प्रदेश, उड़ीसा, पंजाब, राजस्थान, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश ऐसे राज्य हैं जो इस हिंदू कैलेंडर का पालन करते हैं।</p>



<p><strong>सूर्य राशि और चंद्र राशि</strong>&nbsp;&#8211; सूर्य चिह्न, राशि के आधार पर किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व को दर्शाता है और यह उसके जन्म के समय एक मूल राशि के राशि चक्र में सूर्य की स्थिति से निर्धारित होता है। चंद्र चिन्ह से किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व के भावनात्मक पहलू का पता चलता है, और यह उसके जन्म के समय मूल राशि के चार्ट में राशि चक्र की स्थिति से निर्धारित होता है।</p>



<p><strong>पक्ष</strong>&nbsp;&#8211; तिथि को दो हिस्सों में बांटा गया है। प्रत्येक ‘आधे’ भाग को एक पक्ष के रूप में जाना जाता है। इसके दो पक्ष हैं, जैसेः शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष।</p>



<h3 class="wp-block-heading">शुभ समय / अच्छा समय</h3>



<p><strong>अभिजीत नक्षत्र</strong>&nbsp;&#8211; जब भगवान ब्रह्मा मकर राशि में स्थित होते हैं, तो इसे अभिजीत नक्षत्र के रूप में जाना जाता है। नए कार्यों को करने और नई खरीदारी करने के लिए यह सबसे शुभ अवधियों में से एक माना जाता है।</p>



<p><strong>अमृत ​​कालम्</strong>&nbsp;&#8211; यह अन्नप्राशन संस्कार और अन्य हिंदू अनुष्ठानों को करने का समय है। यह बहुत ही शुभ समय माना जाता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">अशुभ समय</h3>



<p><strong>गुलिकई कालम्</strong>&nbsp;&#8211; गुलिका मंडा के बेटे उर्फ ​​शनि थे। इस समय को गुलिकई कालम् के नाम से जाना जाता है। इस अवधि के दौरान किसी भी कार्य की शुरुआत करना शुभ नहीं माना जाता है अतः इससे बचना चाहिए।</p>



<p><strong>यमगंडा</strong>&nbsp;&#8211; यह एक अशुभ अवधि है, और किसी भी सफल और समृद्ध उद्यम के कार्य के लिए यह समयावधि वर्जित है।</p>



<p><strong>दुर मुहूर्तम</strong>&nbsp;&#8211; यह दिन में एक बार सूर्यास्त से पहले एक बार आता है। किसी भी शुभ कार्य को करने से पहले इस समय से बचना चाहिए</p>



<p><strong>व्रज्याम कालम्</strong>&nbsp;&#8211; व्रज्याम या विशघटिका वह समय है जो वर्तमान दिन से शुरू होता है और आने वाले दिन से पहले समाप्त होता है। इसे सौम्य काल नहीं माना जाता है।</p>



<p><strong>राहु कालम्</strong>&nbsp;&#8211; राहु की अवधि किसी भी कार्य के लिए अच्छी नहीं मानी जाती है। किसी भी नई पहल के लिए राहु के प्रभाव से पूरी तरह बचा जाना चाहिए।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="818" height="568" src="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/6-APRIL-1.jpg" alt="" class="wp-image-26308" srcset="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/6-APRIL-1.jpg 818w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/6-APRIL-1-300x208.jpg 300w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/6-APRIL-1-768x533.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 818px) 100vw, 818px" /></figure>



<p class="has-vivid-green-cyan-background-color has-background">CALL US&#8217; 9412932030</p>



<p>ज्ञान चाहिए : काशी जाओ<br>मोक्ष चाहिए : केदार जाओ<br>भोग और शांति के लिए : सोमनाथ<br>पद चाहिए : नागेश्वर नाथ<br>पुत्र : घृष्णेश्वर<br>पूर्व जन्मों के कर्म के अच्छे फल प्राप्त करने के लिए : त्रयंबक<br>दुनिया से हार गए तो : भीमशंकर<br>सुघड़ दीर्घायु पत्नी : मल्लिकाजून<br>शत्रु विजय : रामेश्वरम<br>आयु, स्वास्थ्य, निरोग, भय से मुक्ति: महाकाल<br>और कुछ नहीं चाहिए , महादेव को पाने के लिए: ओंकारेश्वर<br>और<br>बगला मुखी पीठ, बंजारा वाला देहरादून में ज्योति स्वरूप में विराजमान दिव्य अलौकिक चमत्कारिक शिवलिंग के समक्ष 45 मिनट आंख बंद करके बैठने पर इन समस्त ज्योतिर्लिंग का पुण्य प्राप्त होगा: 46वे मिनट पर आप इस अद्भुत शिवलिंग से लिंक हो जायेगे और दिव्य ऊर्जा आपसे संपर्क साध लेगी : चन्द्रशेखर जोशी संस्थापक साधक बगलामुखी पीठ बंजारा वाला देहरादून</p>
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		<title>5 अप्रैल संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी, संकटों को हरने वाला</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Himalaya Gaurav Uttarakhand]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 04 Apr 2026 16:28:30 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म और संस्कृति]]></category>
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					<description><![CDATA[05 अप्रैल का दिन है और वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि &#38; 5 अप्रैल 2026 को वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि है। यह तृतीया तिथि&#8230; ]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="has-pale-pink-background-color has-background">05 अप्रैल का दिन है और वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि &amp; 5 अप्रैल 2026 को वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि है। यह तृतीया तिथि दोपहर 12 बजकर 01 मिनट तक रहेगी फिर इसके बाद चतुर्थी तिथि &amp; इस तिथि पर चंद्रमा तुला राशि और विशाखा नक्षत्र में रहेंगे। इस दिन कई तरह के शुभ योग का भी बनेगा जिसमें प्रमुख रूप से सर्वार्थि सिद्धि योग समेत व्रज योग  BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI Mob. 9412932030</p>



<p>संकष्टी” का अर्थ होता है- संकटों को हरने वाला. मान्यता है कि विकट संकष्टी चतुर्थी का व्रत करने से मानसिक शांति प्राप्त होती है और रुके हुए कार्य पूर्ण होते हैं. ज्योतिषीय दृष्टि से इस दिन पूजा करने पर कुंडली में बुध और केतु के दोषों का प्रभाव कम होता है तथा संतान सुख की प्राप्ति होती है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="608" height="412" src="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/5.jpg" alt="" class="wp-image-26296" srcset="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/5.jpg 608w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/5-300x203.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 608px) 100vw, 608px" /></figure>



<p>संकष्टी चतुर्थी के दिन सुबह उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें. इसके बाद भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक जलाएं. भगवान को दूर्वा, मोदक, लड्डू और लाल-पीले फूल अर्पित करें. इसके बाद “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप करें और आरती करें. फिर रात में चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करें.</p>



<p>विकट संकष्टी चतुर्थी वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाई जाती है. साल 2026 में यह पर्व 5 अप्रैल को मनाया जाएगा. यह पर्व भगवान गणेश को समर्पित है. हिंदू धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य देवता माना गया है. मान्यता है कि उनकी आराधना से सभी दुख, बाधाएं और संकट दूर होते हैं, इसी कारण उन्हें विघ्नहर्ता कहा जाता है.</p>



<p>मान्यता है कि भगवान गणेश को लाल रंग के फूल, विशेषकर गुड़हल और गेंदे के फूल अर्पित करना शुभ होता है.</p>



<p><strong> </strong>5 अप्रैल को वैशाख कृष्ण पक्ष की तृतीया और तिथि रविवार का दिन है। तृतीया तिथि रविवार दोपहर 12 बजे तक रहेगी, उसके बाद चतुर्थी तिथि लग जाएगी। 5 अप्रैल को दोपहर 2 बजकर 44 मिनट तक वज्र योग रहेगा। साथ ही रविवार रात 12 बजकर 8 मिनट तक विशाखा नक्षत्र रहेगा। इसके अलावा 5 अप्रैल को संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी व्रत किया जाएगा।</p>



<p>भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और प्रथम पूज्य देवता माना जाता है. हर माह कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाता है, जोकि भगवान गणेश को समर्पित विशेष व्रत है. इस दिन श्रद्धालु व्रत रखकर भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करते हैं. वहीं रात में चंद्रोदय को अर्घ्य देने के बाद व्रत पूरा होता है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="916" src="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/4-2-1024x916.jpg" alt="" class="wp-image-26298" srcset="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/4-2-1024x916.jpg 1024w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/4-2-300x268.jpg 300w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/4-2-768x687.jpg 768w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/4-2.jpg 1080w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>वैशाख महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को विकट संकष्टी चतुर्थी के नाम से जाता है. यह व्रत रखने से जीवन की बाधाएं और कष्ट दूर होते हैं. लेकिन तिथि को लेकर लोगों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है. दरअसल पंचांग में 5 और 6 अप्रैल दोनों ही दिन चतुर्थी तिथि पड़ रही है</p>



<p>पंचांग के अनुसार,  वैशाख महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि रविवार, 5 अप्रैल 2026 को शुरू होकर 6 अप्रैल 2026 तक रहेगी. 5 अप्रैल को सुबह 11:59 पर चतुर्थी लग जाएगी और सोमवार, 6 अप्रैल को दोपहर 02:10 पर समाप्त होगा. वैसे तो आमतौर पर कई व्रत त्योहार उदयातिथि के आधार पर रखें जाते हैं, लेकिन संकष्टी चतुर्थी का व्रत चंद्र दर्शन के बाद खोला जाता है और इस दिन चंद्र पूजन का विशेष महत्व है, इसलिए विकट संकष्टी चतुर्थी का व्रत 5 अप्रैल 2026 को रखा जाएगा और इसी दिन भगवान गणेश की पूजा की जाएगी. इस दिन विशाखा नक्षत्र रहेगा. साथ ही वज्र योग और सिद्धि योग भी बन रहा है.</p>



<p>विकट संकष्टी पर 5 अप्रैल 2026 को पूजा के लिए सुबह 07:41 बजे से दोपहर 12:49 बजे तक का मुहूर्त रहेगा. इसके बाद शाम में 06:20 से 8:06 का मुहूर्त भी शुभ है. विकट संकष्टी व्रत के दिन भद्रा भी लग रही है, लेकिन भद्रा का वास पाताल लोक में रहने से इसका प्रभाव पूजा-पाठ पर नहीं पड़ेगा. भद्रा सुबह 06 बजकर 07 मिनट से शुरू 11 बजकर 59 मिनट तक रहेगी.&nbsp;</p>



<p>वहीं 5 अप्रैल 2026 को चंद्रोदय का समय (Vikata Sankashti Chaturthi 2026 Moon Rise Time) रात 09:58 पर रहेगा. इस समय आप चंद्रमा की पूजा करें और अर्घ्य देकर अपना व्रत खोल सकते हैं. </p>



<p><strong>भगवान गणेश जी के मंत्र</strong></p>



<p>हीं श्रीं क्लीं नमो भगवते गजाननाय. ॐ वक्रतुण्डाय हुं॥</p>



<p>वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ. निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥</p>



<p>ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्ति प्रचोदयात्॥</p>



<p>ॐ लम्बोदराय नमः॥</p>



<p>ॐ गं गणपतये नमः॥</p>



<p>ॐ श्री गणेशाय नमः॥</p>



<p>ॐ नमो भगवते गजाननाय. ॐ वक्रतुण्डाय हुं॥</p>



<p>ॐ नमो सिद्धि विनायकाय सर्वकार्यकर्त्रे सर्वविघ्नप्रशमनाय सर्वराज्यवश्यकरणाय सर्वजन सर्वस्त्री पुरुष आकर्षणाय श्रीं ॐ स्वाहा॥</p>



<p>ॐ हीं श्रीं क्लीं गौं गः श्री महागणधिपतये नमः॥</p>



<p>हीं श्रीं क्लीं गौं वरमूर्तये नमः. ॐ गं गणपतये नमः॥</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>सूर्योदय-सुबह 6:06 AM</li>



<li>सूर्यास्त- शाम 6:40 PM</li>
</ul>



<ul class="wp-block-list">
<li>ब्रह्म मुहूर्त 04:56 ए एम से 05:43 ए एम</li>



<li>प्रातः सन्ध्या 05:20 ए एम से 06:29 ए एम</li>



<li>अभिजित मुहूर्त 12:16 पी एम से 01:06 पी एम</li>



<li>विजय मुहूर्त 02:45 पी एम से 03:35 पी एम</li>



<li>गोधूलि मुहूर्त 06:52 पी एम से 07:15 पी एम</li>
</ul>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="768" height="1024" src="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/HGU-BANK-BAR-CODE-768x1024.jpg" alt="" class="wp-image-26297" srcset="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/HGU-BANK-BAR-CODE-768x1024.jpg 768w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/HGU-BANK-BAR-CODE-225x300.jpg 225w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/HGU-BANK-BAR-CODE-1152x1536.jpg 1152w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/04/HGU-BANK-BAR-CODE.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 768px) 100vw, 768px" /></figure>



<ul class="wp-block-list">
<li>वैशाख कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि &#8211; 5 अप्रैल 2026 को दोपहर 12 बजे तक रहेगी, उसके बाद चतुर्थी तिथि लग जाएगी</li>



<li>वज्र योग- 5 अप्रैल को दोपहर 2 बजकर 44 मिनट तक</li>



<li>विशाखा नक्षत्र- 5 अप्रैल को रात 12 बजकर 8 मिनट तक </li>



<li>05 अप्रैल 2026 व्रत-त्यौहार-  संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी व्रत </li>
</ul>
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