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	<title>Himalaya Gaurav</title>
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	<description>Himalaya Gaurav Uttarakhand</description>
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		<title>12 जून 2026&#8230;&#8230;विभिन्न ग्रहों की स्थिति&#8230;&#8230;&#038;भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए प्रदोष व्रत सायंकाल, गोधूलि बेला में करने का विधान</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Himalaya Gaurav Uttarakhand]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 11 Jun 2026 17:29:35 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[स्वास्थ्य समाचार]]></category>
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					<description><![CDATA[प्रदोष भगवान शिव को प्रसन्न कर जीवन में सुख-समृद्धि, लक्ष्मी प्राप्त करने का स्वर्णिम अवसर है। भारतीय संस्कृति में अधिकांश व्रत-पूजन प्रातःकाल में ही किए जाते हैं, किन्तु भगवान शिव&#8230; ]]></description>
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<p>प्रदोष भगवान शिव को प्रसन्न कर जीवन में सुख-समृद्धि, लक्ष्मी प्राप्त करने का स्वर्णिम अवसर है। भारतीय संस्कृति में अधिकांश व्रत-पूजन प्रातःकाल में ही किए जाते हैं, किन्तु भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए प्रदोष व्रत सायंकाल, गोधूलि बेला में करने का विधान है। व्रतोपवास की दृष्टि से भगवान शिव की आराधना में वारों में सोमवार और तिथियों में त्रयोदशी (प्रदोष) का विशेष महत्व माना जाता है।</p>



<p class="has-luminous-vivid-amber-background-color has-background">by Chandra Shekhar Joshi Chief Editor; Himalayauk.org (Leading Newsportal &amp; Daily Newspaper  &amp; youtube Chennel) MOB 9412932030</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="802" height="456" src="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/MAHA-DEV-1.jpg" alt="" class="wp-image-26644" srcset="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/MAHA-DEV-1.jpg 802w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/MAHA-DEV-1-300x171.jpg 300w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/MAHA-DEV-1-768x437.jpg 768w" sizes="(max-width: 802px) 100vw, 802px" /></figure>



<p>“प्रदोष” का भगवान शिव के साथ अन्योन्याश्रित संबंध है। ’प्रदोषो रजनीमुखम‘ रात्रि के प्रारंभ की बेला प्रदोष नाम से संबोधित की जाती है, रात्रि शिव को विशेष प्रिय है। मुख्यतर प्रदोष का अर्थ है, रात्रि का प्रारंभ। प्रदोष काल में शिव तांडव स्तोत्र का पाठ अत्यन्त लाभदायक है। जो व्यक्ति प्रदोष काल में शिव जी की पूजा के समय रावण द्वारा रचित शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करता है, उनको भगवान शंकर जी अचल सम्पति प्रदान करते हैं। शिव तांडव स्तोत्र का अंतिम सत्रहवां श्लोक इस बात की पुष्टि करता है,</p>



<p class="has-luminous-vivid-amber-background-color has-background"><strong>12 जून 2026 को <mark>ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि है。 यह दिन शुक्रवार है और इस दौरान अश्विनी नक्षत्र और अतिगण्ड योग का संयोग  &amp;  12 जून  शुक्रवार जो देवी लक्ष्मी को समर्पित है। और यह अधिक मास की अंतिम द्वादशी तिथि भी होगी। जिसमें शुक्र के साथ गुरु का गोचर कर्क राशि में होगा जिससे गजलक्ष्मी योग का शुभ संयोग बनेगा। और तो और कल यानी 12 जून के दिन चंद्र मंगल युति भी मेष राशि में रहेगी जो एक उत्तम संयोग है। इस पर कल बुध का गोचर मिथुन राशि मे होने से भद्र राजयोग भी प्रभावी रहेगा</mark> &amp;  12 जून  चंद्रमा का गोचर अश्विनी उपरांत भरणी नक्षत्र से मेष राशि में होगा। चंद्रमा का यह गोचर बहुत ही शुभ फलदायी रहने वाला है क्योंक चंद्रमा से द्वितीय भाव में सूर्य स्थित हैं और चंद्रमा के साथ मंगल युति कर रहे हैं जिससे चंद्र मंगल योग भी बन रहा है। इस पर कल दिन के स्वामी ग्रह शुक्र का गोचर कर्क राशि मे गुरु के साथ हो रहा है जिससे उत्तम राजयोग बना है। और बुध मिथुन राशि में संचार करके हुए भद्र योग बना रहे हैं। ऐसे में 12 जून का दिन मेष, मिथुन, कर्क, मकर समेत कई राशियों के लिए बहुत ही शुभ फलदायी और भाग्यशाली </strong></p>



<p>सायंकाल शिव पूजन का विशेष महत्व है। प्रदोषकाल में शिव पूजन अत्यन्त लाभदायक होता है। लंकापति रावण शिव जी का परम भक्त था, रावण के पास जितनी भी धन-सम्पदा थी, वह सब शिव कृपा का ही प्रताप था। रावण प्रदोष काल में शिव को प्रसन्न कर, सिद्धियाँ प्राप्त करता था।</p>



<p>प्रदोष भगवान शिव को प्रसन्न कर जीवन में सुख-समृद्धि, लक्ष्मी प्राप्त करने का स्वर्णिम अवसर है। भारतीय संस्कृति में अधिकांश व्रत-पूजन प्रातःकाल में ही किए जाते हैं, किन्तु भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए प्रदोष व्रत सायंकाल, गोधूलि बेला में करने का विधान है। व्रतोपवास की दृष्टि से भगवान शिव की आराधना में वारों में सोमवार और तिथियों में त्रयोदशी (प्रदोष) का विशेष महत्व माना जाता है।</p>



<p class="has-luminous-vivid-orange-background-color has-background">“प्रदोष” का भगवान शिव के साथ अन्योन्याश्रित संबंध है। ’प्रदोषो रजनीमुखम‘ रात्रि के प्रारंभ की बेला प्रदोष नाम से संबोधित की जाती है, रात्रि शिव को विशेष प्रिय है। मुख्यतर प्रदोष का अर्थ है, रात्रि का प्रारंभ। प्रदोष काल में शिव तांडव स्तोत्र का पाठ अत्यन्त लाभदायक है। जो व्यक्ति प्रदोष काल में शिव जी की पूजा के समय रावण द्वारा रचित शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करता है, उनको भगवान शंकर जी अचल सम्पति प्रदान करते हैं। शिव तांडव स्तोत्र का अंतिम सत्रहवां श्लोक इस बात की पुष्टि करता है,</p>



<p>प्रदोष भगवान शिव को प्रसन्न कर जीवन में सुख-समृद्धि, लक्ष्मी प्राप्त करने का स्वर्णिम अवसर है। भारतीय संस्कृति में अधिकांश व्रत-पूजन प्रातःकाल में ही किए जाते हैं, किन्तु भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए प्रदोष व्रत सायंकाल, गोधूलि बेला में करने का विधान है। व्रतोपवास की दृष्टि से भगवान शिव की आराधना में वारों में सोमवार और तिथियों में त्रयोदशी (प्रदोष) का विशेष महत्व माना जाता है।</p>



<p>“प्रदोष” का भगवान शिव के साथ अन्योन्याश्रित संबंध है। ’प्रदोषो रजनीमुखम‘ रात्रि के प्रारंभ की बेला प्रदोष नाम से संबोधित की जाती है, रात्रि शिव को विशेष प्रिय है। मुख्यतर प्रदोष का अर्थ है, रात्रि का प्रारंभ। प्रदोष काल में शिव तांडव स्तोत्र का पाठ अत्यन्त लाभदायक है। जो व्यक्ति प्रदोष काल में शिव जी की पूजा के समय रावण द्वारा रचित शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करता है, उनको भगवान शंकर जी अचल सम्पति प्रदान करते हैं। शिव तांडव स्तोत्र का अंतिम सत्रहवां श्लोक इस बात की पुष्टि करता है,</p>



<p><strong>पूजावसानसमये दशवक्त्रगीतं<br>यः शम्भुपूजनमिदं पठति प्रदोषे।<br>तस्य स्थिरां रथगजेन्द्रतुरङ्गयुक्तां<br>लक्ष्मीं सदैव सुमुखीं प्रददाति शम्भुः।।</strong></p>



<p><strong>&nbsp;</strong>धर्मशास्त्रानुसार प्रदोष अथवा त्रयोदशी का व्रत मनुष्य को संतोषी एवं सुखी बनाता है। इस व्रत के पुण्य प्रभाव से सुहागन स्त्रियों का सुहाग अटल रहता है। जो स्त्री-पुरुष जिस कामना को लेकर इस व्रत को करते हैं, उनकी सभी कामनाऐं कैलाशपति शंकर पूरी करते हैं। सूत जी के कथानुसार त्रयोदशी का व्रत करने वाले को सौ गाय-दान करने का फल प्राप्त होता है। इस व्रत को जो विधि-विधान और तन-मन-धन से करता है, उसके सभी दुःख दूर हो जाते हैं।</p>



<p><strong>प्रदोषकाल में पूजा करके रावण कृत शिव ताण्डव स्तोत्र,<br>जो पढ़ता है भाव भक्ति से, वह होता विजयी सर्वत्र।।<br>शिव शंकर शुभ लक्ष्मी देते सुख सम्पत्ति, धन अपरम्पार।<br>महिमा शिव की बड़ी निराली, नहीं किसी ने पाया पार।।</strong></p>
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		<title>11 जून 2026 का दिन धार्मिक दृष्टि से क्यों इतना विशेष </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Himalaya Gaurav Uttarakhand]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 10 Jun 2026 16:19:26 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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					<description><![CDATA[11 जून 2026 (गुरुवार) को ज्येष्ठ (अधिकमास) कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि (परम एकादशी) ^ 11 जून को ज्येष्ठ माह (अधिकमास) के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि है। इस एकादशी&#8230; ]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>11 जून 2026 (गुरुवार) को <mark>ज्येष्ठ (अधिकमास) कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि (परम एकादशी)</mark>  ^ 11 जून को ज्येष्ठ माह (अधिकमास) के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि है। इस एकादशी को परमा एकादशी के नाम से जाना जाता है। शुभ तिथि पर चंद्रमा मीन राशि में रहेंगे। इस राशि के स्वामी ग्रह बृहस्पति होते हैं।  ^ 11 जून ग्रह-नक्षत्रों की चाल,.  ^ 11 जून 2026 का दिन धार्मिक दृष्टि से क्यों इतना विशेष माना जा रहा है? 11 जून 2026, गुरुवार के दिन ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि है (रात 10:37 PM तक)। इस दिन परम एकादशी का पावन व्रत रखा जाएगा, जिसे भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने और पापों से मुक्ति पाने के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। साथ ही शोभन योग और रेवती नक्षत्र का संयोग इस दिन को पूजा-पाठ, व्रत और आध्यात्मिक साधना के लिए और भी मंगलकारी बना रहा है।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="904" height="1016" src="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/3.jpg" alt="" class="wp-image-26641" srcset="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/3.jpg 904w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/3-267x300.jpg 267w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/3-768x863.jpg 768w" sizes="(max-width: 904px) 100vw, 904px" /></figure>



<p class="has-luminous-vivid-amber-background-color has-background">हर दिन की तरह 11 जून 2026 का पंचांग भी तिथि, नक्षत्र और ग्रहों की स्थिति के आधार पर विशेष जानकारी देता है। इस दिन कौन-से संयोग बन रहे हैं और इसका क्या महत्व बताया गया है</p>



<p>11 जून, गुरुवार को ज्येष्ठ माह (अधिकमास) के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि है। इस एकादशी को परमा एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस तिथि पर रेवती नक्षत्र और शोभना का संयोग रहेगा। इस तिथि पर चंद्रमा का गोचर मीन राशि में होगा, मीन राशि के स्वामी ग्रह बृहस्पति होते हैं। </p>



<p>1 जून 2026, गुरुवार के दिन ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि है (रात 10:37 PM तक)। इस दिन परम एकादशी का पावन व्रत रखा जाएगा, जिसे भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने और पापों से मुक्ति पाने के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। साथ ही शोभन योग और रेवती नक्षत्र का संयोग इस दिन को पूजा-पाठ, व्रत और आध्यात्मिक साधना के लिए और भी मंगलकारी बना रहा है।</p>



<p><strong>ब्रह्म मुहूर्त</strong> &#8211; इस मुहूर्त में जागना एवं प्रथम पूजन करना महत्त्वपूर्ण होता है। सभी मनुष्यों को धार्मिक एवं शैक्षणिक गतिविधियाँ आरम्भ करने के लिये इस शुभ मुहूर्त में उठने का सुझाव दिया जाता है।</p>



<ol class="wp-block-list">
<li><strong>प्रातः सन्ध्या</strong> &#8211; यह हिन्दु धर्म के अनुयायियों के लिये एक अति महत्त्वपूर्ण अनुष्ठान एवं दैनिक रूप से की जाने वाली तीन सन्ध्याओं में से एक है।</li>



<li><strong>मध्याह्न सन्ध्या</strong> &#8211; यह तीन दैनिक सन्ध्याओं में से एक है जो मध्याह्न काल में की जाती है। मध्याह्न सन्ध्या, अभिजित मुहूर्त के समय की जाती है, जो एक शुभ मुहूर्त है।</li>



<li><strong>सायाह्न सन्ध्या</strong> &#8211; यह हिन्दुओं के लिये एक आवश्यक अनुष्ठान है, जो दैनिक रूप से की जाने वाली तीन सन्ध्याओं में से एक है।</li>



<li><strong>राहु काल</strong> &#8211; यह एक अशुभ समयावधि है। राहु काल में किसी भी प्रकार का शुभ कार्य आरम्भ नहीं करना चाहिये। राहु काल भारत के दक्षिणी राज्यों में अधिक प्रचलित है।</li>



<li><strong>अभिजित मुहूर्त</strong> &#8211; यह दिन के मध्य में एक शुभ समयावधि है। यदि कोई शुभ मुहूर्त उपलब्ध नहीं है तो उस स्थिति में <a href="http://WWW.HIMALAYAUK.ORG">अभिजित मुहूर्त</a> में सभी प्रकार के शुभ कार्य किये जा सकते हैं।</li>



<li><strong>विजय मुहूर्त</strong> &#8211; यह एक शुभ मुहूर्त है। विजय मुहूर्त यात्रा आरम्भ करने हेतु शुभ माना जाता है। इस मुहूर्त में यात्रा आरम्भ करने से यात्रा सफल होती है तथा यात्रा का उद्देश्य पूर्ण होता है।</li>



<li><strong>सङ्कल्प</strong> &#8211; यह पूजन अनुष्ठान का एक अभिन्न अङ्ग है। सङ्कल्प के द्वारा कालचक्र के एक निश्चित क्षण में पूर्ण इच्छाशक्ति द्वारा देश, काल, समय आदि के उच्चारण सहित अनुष्ठान सम्बन्धित प्रतिज्ञा को दृढ़ एवं पुष्ट किया जाता है। सङ्कल्प हेतु पञ्चाङ्ग के सभी पाँच तत्वों की आवश्यकता होती है। इन पाँच तत्वों के अतिरिक्त सङ्कल्प में राशिमण्डल के नव ग्रहों, मुख्यतः <a href="https://www.drikpanchang.com/hindu-gods/navagraha/chandra/lord-chandra.html">WWW.HIMALAYAUK.ORG</a>, <a href="https://www.drikpanchang.com/hindu-gods/navagraha/surya/lord-surya.html">सूर्य</a> एवं <a href="https://www.drikpanchang.com/hindu-gods/navagraha/guru/lord-guru.html">बृहस्पति</a> की स्थिति भी सम्मिलित होती है।</li>



<li><strong>सूर्योदय</strong> &#8211; <a href="http://HIMALAYAUK.ORG">सूर्य नमस्कार</a> करने एवं <strong>उदीयमान सूर्य को अर्घ्य</strong> अर्पण करने हेतु सूर्योदय का उचित समय ज्ञात होना आवश्यक है। अतः पञ्चाङ्ग की आवश्यकता प्रतिदिन होती है, क्योंकि सूर्योदय का समय वर्ष पर्यन्त परिवर्तित होता रहता है।</li>



<li><strong>चन्द्रोदय</strong> &#8211; चन्द्र देव से सम्बन्धित भी अनेक अनुष्ठान होते हैं। <a href="https://www.drikpanchang.com/vrats/sankashti-chaturthi-dates.html">WWW.HIMALAYAUK.ORG</a> तथा <a href="http://WWW.HIMALAYAUK.ORG">कृष्ण जन्माष्टमी</a> के अवसर पर भी उदीयमान चन्द्र की पूजा-अर्चना की जाती है।</li>
</ol>



<p class="has-luminous-vivid-amber-background-color has-background">11 जून 2026 का दिन धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। परम एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है और इसे सभी एकादशियों में विशेष फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत, पूजा और विष्णु मंत्र जाप करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। रेवती नक्षत्र और शोभन योग का संयोग इस दिन को दान-पुण्य, ध्यान और आध्यात्मिक कार्यों के लिए शुभ बनाता है।</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ एवं पीले वस्त्र धारण करें।</li>



<li>भगवान विष्णु का ध्यान कर व्रत का संकल्प लें।</li>



<li>भगवान विष्णु को तुलसी दल, पीले पुष्प और पंचामृत अर्पित करें।</li>



<li>“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें।</li>



<li>विष्णु सहस्रनाम या श्री हरि स्तोत्र का पाठ करें।</li>



<li>जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र और फल का दान करें।</li>



<li>शाम के समय घी का दीपक जलाकर भगवान विष्णु की आरती करें।</li>
</ul>
]]></content:encoded>
					
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			</item>
		<item>
		<title>9 जून 2026 धार्मिक और ज्योतिषीय बदलाव लेकर आएगा &#038; ज्येष्ठ माह का छठा बड़ा मंगल: बुढ़वा मंगल,11 जून 2026, गुरुवार- परम एकादशी</title>
		<link>https://himalayauk.org/9-june-2026-the-sixth-big-mars-of-jyeshtha-month-will-bring-religious-and-astrological-changes-old-man-tuesday/?utm_source=rss&#038;utm_medium=rss&#038;utm_campaign=9-june-2026-the-sixth-big-mars-of-jyeshtha-month-will-bring-religious-and-astrological-changes-old-man-tuesday</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Himalaya Gaurav Uttarakhand]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 08 Jun 2026 11:33:54 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[ट्रेंडिंग समाचार]]></category>
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					<description><![CDATA[पंचांग 9 जून 2026 के अनुसार आज का दिन मंगलवार, कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि है। आज राहुकाल शाम 03:49 से 05:34 बजे तक रहेगा &#38; 9 जून को अधिक&#8230; ]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>पंचांग 9 जून 2026</strong> के अनुसार <mark>आज का दिन मंगलवार, कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि है। आज राहुकाल शाम 03:49 से 05:34 बजे तक रहेगा</mark>  &amp; 9 जून को अधिक ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि मंगलवार का दिन है। नवमी तिथि मंगलवार को देर रात 2 बजकर 35 मिनट तक रहेगी। 9 जून को सुबह 8 बजकर 19 मिनट तक प्रीति योग रहेगा, उसके बाद आयुष्मान योग लग जायेगा। साथ ही मंगलवार को सुबह 9 बजकर 40 मिनट तक पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र रहेगा, उसके बाद उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र लग जायेगा। इसके अलावा 9 जून को पंचक है। 9 जून को ज्येष्ठ माह का छठा बड़ा मंगल (बुढ़वा मंगल) है। </p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="628" height="548" src="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/SURYA.jpg" alt="" class="wp-image-26638" srcset="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/SURYA.jpg 628w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/SURYA-300x262.jpg 300w" sizes="(max-width: 628px) 100vw, 628px" /></figure>



<ul class="wp-block-list">
<li>अधिक ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की नवमी- 9 जून 2026 को देर रात 2 बजकर 35 मिनट तक</li>



<li>प्रीति योग- 9 जून 2026 को सुबह 8 बजकर 19 मिनट तक प्रीति योग रहेगा, उसके बाद आयुष्मान योग लग जायेगा</li>



<li>पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र- 9 जून 2026 को सुबह 9 बजकर 40 मिनट तक पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र रहेगा, उसके बाद उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र लग जायेगा</li>



<li>9 जून 2026 विशेष-  ज्येष्ठ माह का छठा बड़ा मंगल (बुढ़वा मंगल)</li>



<li>ब्रह्म मुहूर्त- 04:34 ए एम से 05:17 ए एम</li>



<li>अभिजित मुहूर्त- 12:11 पी एम से 01:04 पी एम</li>



<li>विजय मुहूर्त &#8211; 02:50 पी एम से 03:43 पी एम</li>



<li>गोधूलि मुहूर्त- 07:14 पी एम से 07:36 पी एम </li>
</ul>



<ul class="wp-block-list">
<li>सूर्योदय- सुबह 5:21 बजे   सूर्यास्त- शाम 7: 17 बजे</li>
</ul>



<p class="has-pale-pink-background-color has-background"><strong> बुध ग्रह 11 जून को आर्द्रा नक्षत्र से निकलकर पुनर्वसु नक्षत्र में प्रवेस कर जाएंगे। बुध का यह नक्षत्र परिवर्तन 11 बजकर 30 मिनट पर होगा। 8 जून तक बुध पुनर्वसु नक्षत्र में ही गोचर करते रहेंगे और उसके बाद पुष्य नक्षत्र में प्रवेश कर जाएंगे। 11 जून से 8 जुलाई तक का समय कुछ राशियां के लिए बेहद शुभ</strong> </p>



<p> 9 से 23 जून के बीच  _ कालसर्प योग को ज्योतिष शास्त्र के घातक योगों में से एक माना जाता है। इस योग के साथ पैदा हुए लोगों के जीवन में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं। यह योग तब बनता है जब कुंडली के 7 मुख्य ग्रह राहु-केतु के बीच फंस जाते हैं। ऐसी ही स्थिति 9 से 23 जून के बीच भी बनेगी। चंद्रमा जब मीन से निकलकर कुंभ में जाएंगे तो सिंह में बैठे केतु और कुंभ में बैठे राहु के बीज सभी ग्रह आ जाएंगे। ऐसे में कालसर्प योग के प्रभाव से कुछ राशियों को जीवन में उतार-चढ़ावों का सामना करना पड़ सकता है। </p>



<p>पंचाग के अनुसार, 9 जून 2026 धार्मिक और ज्योतिषीय बदलाव लेकर आएगा। कृष्ण पक्ष नवमी से शुरू होकर रात के बाद दशमी में बदल जाएगा। चंद्रमा मीन राशि में पूरे दिन रहेगा, यह समय शांत रहने, सोच-समझकर काम करने और जल्दबाजी से बचने का संकेत है। 9 जून को कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि सुबह से प्रारंभ होकर रात 2:35 बजे तक प्रभावी रहेगी। इसके बाद दशमी तिथि शुरू हो जाएगी। नवमी तिथि को शक्ति और साधना से जुड़ा माना जाता है, जबकि दशमी नए कार्यों के शुभारंभ और आगे बढ़ने का संकेत देती है। नक्षत्र की बात करें तो सुबह 9:39 बजे तक पूर्वाभाद्रपदा नक्षत्र रहेगा। इसके बाद उत्तराभाद्रपदा नक्षत्र प्रारंभ होगा। यह नक्षत्र शांत स्वभाव और गहन चिंतन से जुड़ा माना जाता है। इसलिए यह दिन सोच-समझकर निर्णय लेने के लिए अनुकूल माना जाता है। इस दिन सुबह 8:18 बजे तक प्रीति योग रहेगा, जिसके बाद आयुष्मान योग शुरू होगा। आयुष्मान योग को शुभ तथा स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है। वहीं करणों में पहले तैतिल, फिर गर और उसके बाद वणिज करण रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार ये करण कार्यों की गति और उनके परिणामों को प्रभावित करते हैं।</p>



<p>11 जून 2026, गुरुवार को पड़ने वाली &#8216;परमा एकादशी&#8217; (पुरुषोत्तम या अधिकमास एकादशी) हर तीन साल में एक बार आती है। <mark>यह भगवान विष्णु को समर्पित अत्यंत पुण्यदायी व्रत है, जिसके पालन से सभी पापों का नाश होता है और मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है</mark>।  वैदिक पंचांग के अनुसार अधिकमास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 10 जून 2026 को देर रात 12 बजकर 57 मिनट पर शुरू होगी और 11 जून को रात 10 बजकर 36 मिनट पर समाप्त होगी. ऐसे में उदयातिथि के अनुसार परमा एकादशी का व्रत 11 जून 2026 को रखा जाएगा. इस दिन ब्रह्म मुहूर्त का समय सुबह 4 बजकर 2 मिनट से लेकर 4 बजकर 42 मिनट तक रहेगा. वहीं सुबह 11 बजकर 53 मिनट से दोपहर 12 बजकर 49 मिनट तक अभिजित मुहूर्त रहेगा. इसके बाद दोपहर 2 बजकर 40 मिनट से दोपहर 3 बजकर 36 मिनट तक विजय मुहूर्त बन रहा है. 11 जून 2026 को परमा एकादशी के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का निर्माण हो रहा है जो कि पूरे दिन रहेगा.</p>



<p>एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि के दिन किया जाता है. 11 जून को परमा एकादशी व्रत रखा जाएगा और 12 जून को व्रत का पारण किया जाएगा. पंचांग के अनुसार व्रत का समय सुबह 5 बजकर 23 मिनट से लेकर सुबह 8 बजकर 10 मिनट तक रहेगा.</p>



<p>परमा एकादशी अधिकमास में आती है और अधिकमास यानि मलमास तीन साल में एक बार आता है. इसलिए परमा एकादशी व्रत तीन साल में एक बार पड़ता है और ऐसे में इस व्रत का पुण्य अन्य एकादशी की तुलना में तीन गुना बढ़ जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार परमा एकादशी का व्रत रखने वाले जातक का 100 यज्ञों के समान फल प्राप्त होता है. परमा का अर्थ है सबसे उत्तम, यानि परमा एकादशी सभी व्रतों में सबसे श्रेष्ठ व उत्तम है. इस दिन व्रत रखने से भगवान विष्णु की कृपा प्रा​प्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है. यह व्रत मनुष्य को सभी पापों से मुक्ति दिलाता है.</p>
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		<title>8 JUNE 2026 बृहस्पति का गोचर भाग्य बदल देगा &#038;  गुरु की 2032 तक अतिचारी चाल  &#038; जब गुरु अतिचारी हुए, तो..महाभारत युद्ध के समय भी गुरु 7 वर्षों तक अतिचारी रहे, वैसी ही स्थिति फिर से</title>
		<link>https://himalayauk.org/8-june-2026-jupiters-transit-will-change-the-fate-of-jupiters-trespasser-movement-till-2032-when-jupiter-became-trespasser-even-during-the-mahabharata-war/?utm_source=rss&#038;utm_medium=rss&#038;utm_campaign=8-june-2026-jupiters-transit-will-change-the-fate-of-jupiters-trespasser-movement-till-2032-when-jupiter-became-trespasser-even-during-the-mahabharata-war</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Himalaya Gaurav Uttarakhand]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 07 Jun 2026 16:22:02 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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					<description><![CDATA[8 जून 2026 (सोमवार) ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि और शतभिषा नक्षत्र रहेगा。धार्मिक दृष्टि से यह दिन विशेष है, क्योंकि इस दिन कालाष्टमी मनाई जाएगी &#38; 8&#8230; ]]></description>
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<p><strong>8 जून 2026 (सोमवार)  <mark>ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि और शतभिषा नक्षत्र रहेगा</mark>。धार्मिक दृष्टि से यह दिन विशेष है, क्योंकि इस दिन कालाष्टमी मनाई जाएगी  &amp; 8 जून, सोमवार को ज्येष्ठ माह (अधिकमास) के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि है। इस तिथि पर शतभिषा नक्षत्र और विष्कुम्भ योग का संयोग रहेगा। अभिजीत मुहूर्त- 11:56-12:44  &amp; सूर्योदय का समय- 05:24 सूर्यास्त का समय-  19:16  BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI CHIEF EDITOR HIMALAYAUK &amp; BAGLA MUKHI PEETH SADHK DEHRADUN Mob. 9412932030</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="442" height="508" src="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/NAV-GRAH-2-1.jpg" alt="" class="wp-image-26632" srcset="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/NAV-GRAH-2-1.jpg 442w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/NAV-GRAH-2-1-261x300.jpg 261w" sizes="auto, (max-width: 442px) 100vw, 442px" /></figure>



<p class="has-light-green-cyan-background-color has-background">लगभग 5000 साल पहले महाभारत युद्ध के समय भी गुरु 7 वर्षों तक अतिचारी रहे थे। यही स्थिति प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भी देखी गई थी। हाल ही में 2018 से 2022 के बीच जब गुरु अतिचारी हुए, तो पूरी दुनिया ने &#8216;कोरोना&#8217; जैसी वैश्विक विभीषिका और आर्थिक मंदी का सामना किया। अब वैसी ही स्थिति फिर से दस्तक दे रही है।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="808" height="460" src="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/NAV-GRAH-3.jpg" alt="" class="wp-image-26633" srcset="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/NAV-GRAH-3.jpg 808w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/NAV-GRAH-3-300x171.jpg 300w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/NAV-GRAH-3-768x437.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 808px) 100vw, 808px" /></figure>



<p><strong>8 जून को अधिक ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि सोमवार का दिन है। अष्टमी तिथि सोमवार देर रात 3 बजकर 24 मिनट तक रहेगी। इसके अलावा 8 जून को श्री शीतलाष्टमी व्रत है। 8 जून को सुबह 9 बजकर 28 मिनट तक विष्कुंभ योग रहेगा, उसके बाद प्रीति योग लग जायेगा। साथ ही सोमवार को सुबह 9 बजकर 10 मिनट तक शतभिषा नक्षत्र रहेगा, उसके बाद पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र लग जायेगा। इसके अलावा 8 जून को शाम 5 बजकर 42 मिनट पर शुक्र कर्क राशि में गोचर करेगा। </strong></p>



<p> 8 जून सितारों की चाल और ग्रहों की स्थिति को देखें तो आज का दिन रणनीति और काम के बीच सही तालमेल बिठाने का एक बड़ा अवसर लेकर आया है। </p>



<p>पौराणिक ग्रंथों के अनुसार देवगुरु बृहस्पति की उत्पत्ति महर्षि अंगिरा और उनकी पत्नी स्मृति (या सुरूपा) के यहां पुत्र के रूप में हुई थी। वे परमपिता ब्रह्मा के मानस पुत्र महर्षि अंगिरा के वंशज और देवताओं के सर्वोच्च ज्ञान के प्रतीक माने जाते हैं।  महर्षि अंगिरा को जब काफी समय तक कोई संतान नहीं हुई, तब उन्होंने और उनकी पत्नी ने मिलकर ब्रह्मा जी की कठोर तपस्या की। ब्रह्मा जी ने प्रसन्न होकर उन्हें &#8216;पुंसवन&#8217; व्रत करने का आशीर्वाद दिया, जिसके फलस्वरूप उन्हें तीन तेजस्वी पुत्र प्राप्त हुए &#8211; संवर्त, उतथ्य और जीव (जिन्हें आगे चलकर देवगुरु बृहस्पति कहा गया)  बचपन से ही मेधावी और शांत स्वभाव वाले &#8216;जीव&#8217; ने अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद भगवान शिव की घोर तपस्या की। उनकी इस कठिन परीक्षा और भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें ज्ञान, बुद्धि और देवताओं के सर्वोच्च गुरु (देवगुरु) का पद प्रदान किया। सामान्य गोचर ज्योतिष सिद्धांत के अनुसार बृहस्पति एक राशि में लगभग 12 महीने यानी लगभग एक वर्ष रहते हैं, परंतु अतिचारी गति के कारण कर्क राशि में 2 जून के प्रवेश के बाद बृहस्पति 31 अक्तूबर 2026 को कर्क राशि को छोड़कर सिंह राशि में प्रवेश करेंगे। </p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="816" height="458" src="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/NAV-GRAH-4.jpg" alt="" class="wp-image-26634" srcset="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/NAV-GRAH-4.jpg 816w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/NAV-GRAH-4-300x168.jpg 300w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/NAV-GRAH-4-768x431.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 816px) 100vw, 816px" /></figure>



<p>2026 में बृहस्पति का मिथुन, कर्क और सिंह, तीन राशियों में गोचर बहुत लोगों का भाग्य बदल देगा, 12 राशियों पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा। गोचर में बृहस्पति देवता जब किसी की जन्म राशि से चतुर्थ, अष्टम एवं द्वादश भाव में गोचर करते हैं, तो वह समय उसे व्यक्ति के लिए कष्टप्रद होता है। वैदिक ज्योतिष में अतिचारी चाल का अर्थ है कि बहुत तेज चलना और गुरु आने वाले 8 वर्षों का यानी 2032 तक अतिचारी चाल चलने वाले हैं।</p>



<p class="has-luminous-vivid-amber-background-color has-background"> गुरु एक साल में तीन बार राशि बदलने वाले हैं। ज्योतिष शास्त्र में बृहस्पति को ज्ञान, धर्म, और अर्थव्यवस्था का कारक माना जाता है। जब बृहस्पति अतिचारी (सामान्य से तेज गति) होते हैं, तो वे अपनी शुभता खोकर देश-दुनिया में तेजी से बड़े, अप्रत्याशित और उथल-पुथल भरे बदलाव लाते हैं, जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था, मौसम और शासन-व्यवस्था पर पड़ता है। विश्व स्तर पर सत्तातंत्र (राजाओं और राजनेताओं) पर दबाव बढ़ता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शक्ति का संतुलन बदलता है और  आंतरिक कलह या जन-विद्रोह की स्थिति बन सकती है। चिकित्सा क्षेत्र में कुछ अजीबोगरीब बीमारियों का प्रकोप देखने को मिल सकता है, हालांकि इसके समाधान और नई दवाओं के आविष्कार भी तेज़ी से होंगे। गुरु चूंकि जीवन और शीतलता के कारक हैं, उनकी बिगड़ी चाल बड़े पैमाने पर जलवायु परिवर्तन लाएगी। कर्क राशि (जल तत्व) में उनकी स्थिति विनाशकारी बाढ़, समुद्री तूफान और जल संकट का कारण बन सकती है।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="810" height="462" src="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/NAV-GRAH-8-JUNE.jpg" alt="" class="wp-image-26635" srcset="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/NAV-GRAH-8-JUNE.jpg 810w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/NAV-GRAH-8-JUNE-300x171.jpg 300w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/NAV-GRAH-8-JUNE-768x438.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 810px) 100vw, 810px" /></figure>



<p>हर विनाश अपने साथ सृजन भी लाता है। जैसे महाभारत के बीच &#8216;गीता&#8217; का जन्म हुआ, वैसे ही इस कठिन समय में आध्यात्मिक जागृति और विज्ञान के क्षेत्र में क्रांतिकारी खोजें भी होंगी।</p>



<p>जून महीने का दूसरा सोमवार है और पूरे दिन द्वितीय ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि रहेगी. कल सुबह 09:10 तक शतभिषा नक्षत्र रहेगा और इसके बाद&nbsp;<strong>पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र</strong>&nbsp;की शुरुआत हो जाएगी. चंद्रमा कल पूरे दिन&nbsp;<strong>कुंभ राशि</strong>&nbsp;में संचार करेंगे, जहां राहु के साथ उनकी युति होने से&nbsp;<strong>चंद्रमा-राहु का ग्रहण दोष</strong>&nbsp;भी लगा रहेगा. इसके अलावा, कल शाम 05:43 पर सुख और ऐश्वर्य के दाता&nbsp;<strong>शुक्र देव कर्क राशि में गोचर</strong>&nbsp;करने जा रहे हैं, जिसका बड़ा असर सभी राशियों पर पड़ेगा.</p>



<p>ज्योतिषीय गणना के अनुसार, कल आकाश मंडल में वाशि योग, आनन्दादि योग, सुनफा योग और शंख योग के साथ&nbsp;<strong>विष्कुम्भ योग</strong>&nbsp;का प्रभाव रहेगा. वहीं, यदि आपकी राशि मेष, कर्क, तुला या मकर है, तो आपको&nbsp;<strong>रूचक व हंस योग</strong>&nbsp;का सपोर्ट मिलेगा, जबकि मिथुन, कन्या, धनु और मीन राशि के जातकों के लिए&nbsp;<strong>भद्र राजयोग</strong>&nbsp;का सीधा असर दिखाई देगा.</p>
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		<title>8 जून को भगवान सूर्य मंगल के मृगशिरा नक्षत्र में प्रवेश करते ही स्थितियां और ज्यादा गंभीर होगी; चन्द्रशेखर जोशी संस्थापक साधक बगलामुखी पीठ</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Himalaya Gaurav Uttarakhand]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 07 Jun 2026 07:41:25 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य समाचार]]></category>
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					<description><![CDATA[8 जून को भगवान सूर्य मंगल के मृगशिरा नक्षत्र में प्रवेश करते ही स्थितियां और ज्यादा गंभीर होगी; चन्द्रशेखर जोशी संस्थापक साधक बगलामुखी पीठ Mob. 9412932030 आखिर प्रकृति का यह&#8230; ]]></description>
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<p><strong>8 जून को भगवान सूर्य मंगल के मृगशिरा नक्षत्र में प्रवेश करते ही स्थितियां और ज्यादा गंभीर होगी; चन्द्रशेखर जोशी संस्थापक साधक बगलामुखी पीठ Mob. 9412932030</strong></p>



<p class="has-pale-pink-background-color has-background">आखिर प्रकृति का यह रौद्र रुप कब तक आम जनमानस को प्रभावित करता रहेगा ? ग्रह नक्षत्र की चाल ऐसी कौन सी दिशा में जा रही है जिससे प्रति वर्ष ऐसी स्थिति बन रही है। राजसत्ता नौकरशाह इसकी उपेक्षा करती है:</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="720" height="960" src="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/CS-J.jpg" alt="" class="wp-image-26625" srcset="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/CS-J.jpg 720w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/CS-J-225x300.jpg 225w" sizes="auto, (max-width: 720px) 100vw, 720px" /></figure>



<p>चन्द्रशेखर जोशी संस्थापक साधक बगलामुखी पीठ बंजारा</p>



<p>देवगुरु बृहस्पति नैसर्गिक शुभ ग्रह हैं और उनका काम शुभ फल देना है, किन्तु बृहस्पति की अतिचारी गति देश दुनिया के लिए अच्छी नहीं कही जा सकती है। अभी 8 जून को भगवान सूर्य मंगल के मृगशिरा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे इससे स्थितियां और ज्यादा गंभीर हो सकती हैं और यह स्थिति 22 जून तक बनी रहेगी।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="839" src="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/KEERTAN-MANDLI-1024x839.jpg" alt="" class="wp-image-26626" srcset="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/KEERTAN-MANDLI-1024x839.jpg 1024w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/KEERTAN-MANDLI-300x246.jpg 300w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/KEERTAN-MANDLI-768x629.jpg 768w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/KEERTAN-MANDLI-1536x1259.jpg 1536w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/KEERTAN-MANDLI.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>ज्योतिषीय संकेतों के अनुसार दुनिया के कई हिस्सों में अत्यधिक वर्षा, बाढ़, समुद्री तूफान और चक्रवात जैसी स्थितियां देखने को मिल सकती हैं।</p>



<p>असमय बारिश, भीषण गर्मी, लंबे समय तक सूखा और तापमान में अचानक बदलाव जैसी परिस्थितियां बन सकती हैं। मृगशिरा के स्वामी मंगल हैं, और सूर्य अग्नि तत्व के कारक हैं। इस युति से लोगों में ऊर्जा, शौर्य और जिज्ञासा बढ़ेगी, लेकिन साथ ही वायुमंडल में गर्मी और दबाव के कारण प्राकृतिक असंतुलन या मौसम में अप्रत्याशित बदलाव (जैसे आंधी-तूफान या अचानक बारिश, अग्नि कांड) देखने को मिल सकते हैं।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="916" src="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/4-1024x916.jpg" alt="" class="wp-image-26627" srcset="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/4-1024x916.jpg 1024w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/4-300x268.jpg 300w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/4-768x687.jpg 768w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/4.jpg 1080w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p class="has-light-green-cyan-background-color has-background">बृहस्पति का राशि परिवर्तन केवल व्यक्तिगत जीवन तक सीमित नहीं माना जाता, बल्कि मेदिनी ज्योतिष में इसका प्रभाव देश-दुनिया, अर्थव्यवस्था, राजनीति, मौसम और प्राकृतिक घटनाओं पर भी देखा जाता है।</p>



<p>2 जून 2026 को देवगुरु बृहस्पति अपनी उच्च राशि कर्क में प्रवेश कर चुके हैं। कर्क राशि जल तत्व की राशि मानी जाती है और इसमें गुरु की स्थिति सामान्यतः शुभ फलदायी मानी जाती है।</p>



<p>इस बार बृहस्पति की अतिचारी यानी सामान्य से अधिक तेज चाल ने ज्योतिषियों का ध्यान आकर्षित किया है।</p>



<p>उच्च राशि में गुरु का यह गोचर और उनकी तेज चाल राजनीति में बड़े उलटफेर, मौसम के मिजाज में तीखे बदलाव का पूर्वानुमान है</p>



<p>बृहस्पति अतिचारी (सामान्य से तेज गति) होते हैं, तो वे अपनी शुभता खोकर देश-दुनिया में तेजी से बड़े, अप्रत्याशित और उथल-पुथल भरे बदलाव लाते हैं, जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था, मौसम और शासन-व्यवस्था पर पड़ता है।</p>



<p class="has-pale-pink-background-color has-background">2 जून 2026 को गुरु का कर्क राशि में प्रवेश।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="577" src="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/KALI-DAS-JI-MAHARAJ-1024x577.jpg" alt="" class="wp-image-26628" srcset="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/KALI-DAS-JI-MAHARAJ-1024x577.jpg 1024w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/KALI-DAS-JI-MAHARAJ-300x169.jpg 300w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/KALI-DAS-JI-MAHARAJ-768x432.jpg 768w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/KALI-DAS-JI-MAHARAJ-1536x865.jpg 1536w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/KALI-DAS-JI-MAHARAJ.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>अतिचारी चाल के कारण मौसम में अस्थिरता के संकेत।</p>



<p>बृहस्पति का राशि परिवर्तन केवल व्यक्तिगत जीवन तक सीमित नहीं माना जाता, बल्कि मेदिनी ज्योतिष में इसका प्रभाव देश-दुनिया, अर्थव्यवस्था, राजनीति, मौसम और प्राकृतिक घटनाओं पर भी देखा जाता है। यही कारण है कि गुरु के प्रत्येक गोचर को विशेष महत्व दिया जाता है। 2 जून 2026 को देवगुरु बृहस्पति अपनी उच्च राशि कर्क में प्रवेश कर चुके हैं। कर्क राशि जल तत्व की राशि मानी जाती है और इसमें गुरु की स्थिति सामान्यतः शुभ फलदायी मानी जाती है। हालांकि इस बार बृहस्पति की अतिचारी यानी सामान्य से अधिक तेज चाल ने ज्योतिषियों का ध्यान आकर्षित किया है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार गुरु आने वाले वर्षों में असामान्य गति से राशि परिवर्तन करेंगे, जिसके कारण वैश्विक स्तर पर कई बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। मेदिनी ज्योतिष के अनुसार ग्रहों की ऐसी चाल मौसम के चक्र, प्राकृतिक संतुलन, जलवायु परिवर्तन और जनजीवन पर व्यापक प्रभाव डालती है।</p>
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		<title> 7 जून 2026 को भानु सप्तमी का पावन पर्व, 7 जून 2026   ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष ग्रह-नक्षत्र स्थितियों से युक्त&#8230;.. ग्रहों की चाल से बदल सकता है आपका दिन</title>
		<link>https://himalayauk.org/7-%e0%a4%9c%e0%a5%82%e0%a4%a8-2026-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%81-%e0%a4%b8%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%ae%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%b5/?utm_source=rss&#038;utm_medium=rss&#038;utm_campaign=7-%25e0%25a4%259c%25e0%25a5%2582%25e0%25a4%25a8-2026-%25e0%25a4%2595%25e0%25a5%258b-%25e0%25a4%25ad%25e0%25a4%25be%25e0%25a4%25a8%25e0%25a5%2581-%25e0%25a4%25b8%25e0%25a4%25aa%25e0%25a5%258d%25e0%25a4%25a4%25e0%25a4%25ae%25e0%25a5%2580-%25e0%25a4%2595%25e0%25a4%25be-%25e0%25a4%25aa%25e0%25a4%25be%25e0%25a4%25b5</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Himalaya Gaurav Uttarakhand]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 06 Jun 2026 16:42:35 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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					<description><![CDATA[ 7 जून 2026 को भानु सप्तमी का पावन पर्व &#38; धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भानु सप्तमी के दिन भगवान सूर्य की उपासना अत्यंत शुभ फलदायी % 7 जून, रविवार को ज्येष्ठ&#8230; ]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="has-vivid-red-color has-text-color has-link-color wp-elements-7b29926f8e4056b8cac16e5f67d84eb6">  <strong>  7 जून 2026 को भानु सप्तमी का पावन पर्व &amp; धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भानु सप्तमी के दिन भगवान सूर्य की उपासना अत्यंत शुभ फलदायी % 7 जून, रविवार को ज्येष्ठ माह (अधिकमास) के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि है। इस तिथि पर धनिष्ठा नक्षत्र और वैधृति योग का संयोग  BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI CHIEF EDITOR Mob. 9412932030</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="682" height="444" src="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/7-JUNE-2026-1.jpg" alt="" class="wp-image-26621" srcset="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/7-JUNE-2026-1.jpg 682w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/7-JUNE-2026-1-300x195.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 682px) 100vw, 682px" /></figure>



<p class="has-light-green-cyan-background-color has-background">हिंदू धर्म में सप्तमी तिथि को अत्यंत शुभ माना जाता है, और जब यह रविवार के दिन आती है तो इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। इसी कारण इसे रवि सप्तमी या विवस्वत सप्तमी भी कहा जाता है। इस दिन विशेष रूप से सूर्यदेव की पूजा करने का विधान है, खासकर दोपहर के समय। मान्यता है कि सूर्यदेव की आराधना करने से व्यक्ति को उत्तम स्वास्थ्य, लंबी आयु और धन-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। इस शुभ अवसर पर किए गए कुछ सरल उपाय जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।</p>



<p>स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की कामना रखते हैं, तो इस दिन भूमि पर बैठकर सूर्यदेव की पूजा करें। चंदन या सुगंधित वस्तुओं से उनका पूजन करें और सच्चे मन से लंबी उम्र की प्रार्थना करें। अगर आप बीमार चल रहे हैं, तो इस दिन अधिक से अधिक समय सूर्य की रोशनी में बिताएं। साथ ही घर में ताजी हवा और धूप आने दें। भानु सप्तमी पर स्वच्छ वस्त्र पहनकर  “ॐ घृणिः सूर्याय नमः” मंत्र का जप करें। यह उपाय बुद्धि और एकाग्रता बढ़ाने में सहायक माना जाता है। लाल फूल लेकर सूर्यदेव को अर्पित कर “ॐ ह्रीं घृणिः सूर्य आदित्याय श्रीं नमः” मंत्र का जप करें।  एक सफेद कपड़े में थोड़े चावल बांधकर पोटली बना लें &amp; मीठे चावल  मंदिर या किसी जरूरतमंद को दान करें।  जल में रोली और कुश मिलाकर सूर्यदेव को अर्घ्य दें। “ॐ ह्रीं घृणिः सूर्य आदित्याय श्रीं” मंत्र का  जप करें। पुष्प, गंध और गुड़ रखकर सूर्यदेव को अर्पित करें। फिर उनसे अपनी मनोकामना पूरी करने की प्रार्थना करें </p>



<p>6 जून 2026 का दिन ज्योतिष और पंचांग के अनुसार विशेष महत्व रखता है। इस दिन ग्रहों की स्थिति, तिथि, नक्षत्र और योग मिलकर पूरे दिन की ऊर्जा और प्रभाव को निर्धारित करते हैं। सूर्य, चंद्र और अन्य ग्रहों की चाल से यह समझा जाता है कि दिनकिस प्रकार के कार्यों के लिए अनुकूल रहेगा। यह पंचांग आपको दिन की शुभ-अशुभ स्थितियों, ग्रहों की चाल और महत्वपूर्ण समय की जानकारी देता है, ताकि आप अपने कार्यों की बेहतर योजना बना सकें और सही समय पर सही निर्णय ले सकें।. </p>
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		<title>  कॉकरोच भारत की राजनीतिक बहस में शामिल </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Himalaya Gaurav Uttarakhand]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 06 Jun 2026 08:27:09 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
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					<description><![CDATA[6 JUNE 2026 (HIMALAYAUK NEWS)  छात्रों ने नारे लगाते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की &#38; कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भी इस प्रदर्शन का समर्थन किया&#8230; ]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="has-light-green-cyan-background-color has-background">6 JUNE 2026 (HIMALAYAUK NEWS)  छात्रों ने नारे लगाते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की &amp; कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भी इस प्रदर्शन का समर्थन किया है. उन्होंने कहा कि अगर दीपके को गिरफ्तार किया गया तो वह छह सप्ताह का अनशन करेंगे.   कॉकरोच जनता पार्टी की ओर से कहा गया है कि हमारा एकमात्र एजेंडा है &#8211; भारत की शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद करने के लिए धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना होगा.किसी भी भ्रामक रणनीति के झांसे में न आएं! by Chandra Shekhar Joshi Mob 9412932030</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="656" height="336" src="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/6-june-2026-cok-roch-1.jpg" alt="" class="wp-image-26611" srcset="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/6-june-2026-cok-roch-1.jpg 656w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/6-june-2026-cok-roch-1-300x154.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 656px) 100vw, 656px" /></figure>



<p>दीपके ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में जंतर-मंतर पर समर्थकों से मुलाकात को लेकर उत्सुकता व्यक्त की और उन्हें एक किताब और राष्ट्रीय ध्वज लाने के लिए प्रोत्साहित किया. उन्होंने प्रदर्शन में हिस्सा लेने आने वाले लोगों से पुलिसकर्मियों को करुणा और कृतज्ञता के प्रतीक के रूप में फूल भेंट करने का भी आग्रह किया तथा इस बात पर जोर दिया कि आंदोलन प्रेम और शांति के साथ किया जाना चाहिए.</p>



<p>उन्होंने लिखा, &#8216;पहुंच गया. जंतर-मंतर पर आप सभी से मिलने के लिए उत्सुक हूं. एक किताब और हमारा तिरंगा लाना न भूलें! पुलिसकर्मियों को करुणा और कृतज्ञता के प्रतीक के रूप में फूल भेंट करें. हमें यह आंदोलन प्रेम और शांति के साथ करना है!&#8217;</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="406" height="320" src="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/6-june-2026-cok.jpg" alt="" class="wp-image-26612" srcset="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/6-june-2026-cok.jpg 406w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/6-june-2026-cok-300x236.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 406px) 100vw, 406px" /></figure>



<p>यह प्रदर्शन सीजेपी द्वारा आयोजित किया जा रहा है जो युवाओं के नेतृत्व वाली एक ऑनलाइन मुहिम है. इस प्रदर्शन के माध्यम से सीजेपी राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट), केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई), सामान्य विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा (सीयूईटी) और कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) सहित विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के लिए जवाबदेही की मांग कर रहा है. प्रदर्शन के मद्देनजर कानून व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए राष्ट्रीय राजधानी में सुरक्षा बढ़ा दी गई है.</p>



<p>कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दिपके ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह परीक्षाओं और भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के आरोप में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे सहित उनकी मांगों पर ध्यान देने के बजाय संगठन की सोशल मीडिया पर ज्यादा ध्यान दे रही है.<br>&nbsp;<br>उन्होंने कहा, &#8216;मेरे दोस्तों, यह एक लंबा संघर्ष है. सोशल मीडिया पर प्रधान के इस्तीफे की मांग शुरू किए हुए एक महीना हो गया है, लेकिन ये लोग इतने बेशर्म हैं कि कार्रवाई करने के बजाय, वे अन्य कामों में लगे हुए हैं, जैसे हमारे अकाउंट हैक करना और हमारी पोस्ट को डिलीट करवाना. आप हमारी पोस्ट डिलीट कर सकते हैं, लेकिन आप हमें इस मंच से मिटा नहीं सकते.&#8217;</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="666" height="432" src="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/6-JUNE-COK.jpg" alt="" class="wp-image-26613" srcset="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/6-JUNE-COK.jpg 666w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/6-JUNE-COK-300x195.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 666px) 100vw, 666px" /></figure>



<p>उन्होंने यह भी कहा कि कार्यकर्ता सोनम वांगचुक जल्द ही प्रदर्शन में शामिल होंगे और उनके समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया. <strong>कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके शनिवार सुबह ही अमेरिका से दिल्ली पहुँचे हैं.</strong> अभिजीत दीपके ने जंतर मंतर पहुंचकर कहा, &#8220;पिछले 5, 10 दिन से लोग मुझसे सवाल कर रहे थे कि सोशल मीडिया पर पेज चलाकर क्या होगा. उन लोगों को कैमरा घुमाकर ये दिखा दीजिए कि जंतर मंतर पर कितने कॉकरोच घर से बाहर निकल कर आएं हैं.&#8221;</p>



<p>उन्होंने दावा किया, &#8220;महज़ एक-दो दिन में हमारे साथ लाख़ों स्टूडेंट्स होंगे. ये कॉकरोच जनता पार्टी कोई प्लान की हुई पार्टी नहीं है. ये हर एक स्टूडेंट की आवाज़ है, जो सरकार से नाराज़ है.&#8221;</p>



<p>इस माहौल में एक व्यंगात्मक सोशल मीडिया कैंपेन &#8216;कॉकरोच जनता पार्टी&#8217; यानी सीजेपी, वर्चुअल दुनिया से वास्तविक दुनिया यानी कि सड़क पर उतर रही है.</p>



<p>इससे पहले सीजेपी ने एक्स हैंडल &#8216;कॉकरोच इज़ बैक&#8217; पर लिखा, &#8220;..हम धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा लेकर रहेंगे. अब समय आ गया है कि इस छोटे से मज़ाक को एक आंदोलन में बदल दिया जाए.&#8221; </p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="694" height="332" src="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/6-june-cokroch-3.jpg" alt="" class="wp-image-26614" srcset="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/6-june-cokroch-3.jpg 694w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/6-june-cokroch-3-300x144.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 694px) 100vw, 694px" /></figure>



<p>कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एअरपोर्ट पर उतरते ही शिक्षा मंत्री <a href="http://HIMALAYAUK.ORG">धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग </a>की.</p>



<p>अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर बताया है कि उन्हें दिल्ली पुलिस से जंतर मंतर पर प्रदर्शन करने की मंज़ूरी मिल गई है.</p>



<p>शिवसेना नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा है कि कॉकरोच जनता पार्टी को प्रदर्शन की इजाज़त देकर दिल्ली पुलिस ने ठीक काम किया है.</p>



<p><a href="http://www.himalayauk.org">सुप्रीम कोर्ट के जाने-माने वकील प्रशांत भूषण</a> ने कहा है कि सीजेपी के आंदोलन को समझदारी भरे समर्थन और मार्गदर्शन की ज़रूरत है.</p>



<p>उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा, &#8220;देश में परीक्षा पेपर लीक, भर्ती में भ्रष्टाचार, बेरोज़गारी और रोज़ाना घोटाले हो रहे हैं&#8230;&#8221;</p>



<p>&#8220;विदेश नीति पूरी तरह ढह गई है और अमेरिका पर निर्भरता बढ़ गई है. चुनाव आयोग, न्यायपालिका, मीडिया और अन्य संस्थाएं भी कमज़ोर हो गई हैं.&#8221;</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="686" height="414" src="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/6-JUNE-COKROCH.jpg" alt="" class="wp-image-26615" srcset="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/6-JUNE-COKROCH.jpg 686w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/6-JUNE-COKROCH-300x181.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 686px) 100vw, 686px" /></figure>



<p>उन्होंने लिखा, &#8220;हम एक बड़े तूफ़ान में घिरे हैं. कॉकरोच जनता पार्टी इस तूफ़ान का स्वाभाविक नतीजा है. इनके बड़े वादे हैं. इस जेन-ज़ी आंदोलन को समझदारी भरे समर्थन और मार्गदर्शन की ज़रूरत है.&#8221;</p>



<p><strong>भारत में राजनीतिक पार्टियों का जन्म सामान्य तौर पर आंदोलनों से होता है. लेकिन कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का जन्म 16 मई को सोशल मीडिया पर अचानक से हुआ था.</strong></p>



<p>इसका जन्म कटाक्ष करने वाले ऑनलाइन प्रोजेक्ट के रूप में हुआ था.</p>



<p>दरअसल, 15 मई को भारत के सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत ने एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा था, &#8220;समाज में पहले से ही ऐसे परजीवी मौजूद हैं जो व्यवस्था पर हमला करते हैं. क्या आप भी उनके साथ जुड़ना चाहते हैं? कुछ युवा ऐसे हैं, जो रोज़गार नहीं मिलने और पेशे में जगह न बना पाने के कारण कॉकरोच की तरह हर जगह फैल जाते हैं.&#8221;</p>



<p>जस्टिस सूर्यकांत की इस टिप्पणी की बहुत आलोचना हुई. हालांकि इस आलोचना के बाद जस्टिस सूर्यकांत ने स्पष्टीकरण दिया और कहा कि उनकी टिप्पणी को ग़लत तरीक़े से पेश किया गया है. उन्होंने कहा, &#8220;मुझे यह देखकर दुख हुआ कि मीडिया के एक वर्ग ने कल (15 मई को) एक निरर्थक मामले की सुनवाई के दौरान की गई मेरी मौखिक टिप्पणियों को गलत तरीके से पेश किया. मैंने विशेष रूप से उन लोगों की आलोचना की थी, जिन्होंने फर्ज़ी और नकली डिग्रियों की मदद से बार (कानूनी पेशे) जैसे क्षेत्रों में प्रवेश किया है. ऐसे ही लोग मीडिया, सोशल मीडिया और अन्य सम्मानित पेशों में भी घुस आए हैं, इसलिए वे परजीवियों की तरह हैं.&#8221; लेकिन तब तक कॉकरोच भारत की राजनीतिक बहस में शामिल हो चुका था. 16 मई को 30 साल के अभिजीत दीपके ने एक्स पर एक गूगल फॉर्म पोस्ट किया, जिसमें लोगों को कॉकरोच जनता पार्टी में रजिस्ट्रेशन के लिए आमंत्रित किया.</p>



<p class="has-pale-pink-background-color has-background">उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील करते हुए कहा, &#8220;प्रधानमंत्री जी, आपके शिक्षा मंत्री नाकाबिल हैं. उनके कारण हमारी शिक्षा व्यवस्था बर्बाद हो चुकी है. इतने पेपर लीक हुए हैं. करोड़ों बच्चे परेशान हैं. कई ने सुसाइड कर लिया है. मोदी जी, प्लीज़ धर्मेंद्र प्रधान को बर्खास्त कीजिए और लोकतंत्र में हमारा विश्वास कायम कीजिए.&#8221;</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="654" height="324" src="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/6-JUNE-COK-ROCH-JANTA-PARTY-FOUNDER.jpg" alt="" class="wp-image-26616" srcset="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/6-JUNE-COK-ROCH-JANTA-PARTY-FOUNDER.jpg 654w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/6-JUNE-COK-ROCH-JANTA-PARTY-FOUNDER-300x149.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 654px) 100vw, 654px" /></figure>



<p>पोस्ट   &#8221; 6 जून, सुबह 9 बजे- मिलते हैं कल, साथी कॉकरोचों. हम धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा लेकर रहेंगे.&#8221;</p>



<p>&#8220;अब समय आ गया है कि इस छोटे-से मज़ाक को एक आंदोलन में बदल दिया जाए. दिल्ली की सड़कों पर शांतिपूर्ण और प्रेमपूर्ण असहमति के साथ बड़ी संख्या में जुटने के लिए तैयार हो जाइए.</p>



<p>&#8220;लेकिन याद रखिए कि क्या करना है और क्या नहीं करना है. सबकी नज़रें हम पर हैं!&#8221;</p>



<p>इससे पहले अभिजीत दीपकेने कहा कि वो शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना देंगे. हालांकि ये साफ़ नहीं है कि वो दिल्ली पुलिस की अनुमति के बिना ये धरना प्रदर्शन कैसे होगा.</p>
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		<title>6 जून 2026   शनिवार का दिन न्याय के देवता शनि देव और संकटमोचन हनुमान जी की कृपा पाने के लिए परम फलदायी, 6 जून को ग्रहों की ऐसी स्थिति बनी है ..</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Himalaya Gaurav Uttarakhand]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 05 Jun 2026 16:36:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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					<description><![CDATA[6 जून 2026 (शनिवार) मास एवं पक्ष: ज्येष्ठ मास, कृष्ण पक्ष तिथि: षष्ठी (रात 02:40 तक, फिर सप्तमी) नक्षत्र: श्रवण (सुबह 06:03 तक, फिर धनिष्ठा) अभिजीत मुहूर्त: 11:52 AM से&#8230; ]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>6 जून 2026 (<mark>शनिवार</mark>) <strong>मास एवं पक्ष:</strong> ज्येष्ठ मास, कृष्ण पक्ष  <strong>तिथि:</strong> षष्ठी (रात 02:40 तक, फिर सप्तमी)  <strong>नक्षत्र:</strong> श्रवण (सुबह 06:03 तक, फिर धनिष्ठा)  <strong>अभिजीत मुहूर्त:</strong> 11:52 AM से 12:48 PM तक  <strong>राहुकाल:</strong> 08:51 AM से 10:36 AM तक &amp; <strong>सूर्योदय:</strong> 05:23 AM  <strong>सूर्यास्त:</strong> 07:17 PM &amp; 6 जून को ज्येष्ठ माह (अधिकमास) के कृष्ण पक्ष की षष्टी तिथि BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI CHIEF EDITOR &amp; BAGLA MUKHI PEETH DEHRADUN </p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="692" height="484" src="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/PUNCHAG-1.jpg" alt="" class="wp-image-26606" srcset="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/PUNCHAG-1.jpg 692w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/PUNCHAG-1-300x210.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 692px) 100vw, 692px" /></figure>



<p>6 जून 2026 (<mark>शनिवार</mark>)   शनिवार का दिन न्याय के देवता शनि देव और संकटमोचन हनुमान जी की कृपा पाने के लिए परम फलदायी माना जाता है।  महीना: ज्येष्ठ अधिकमास (मलमास / पुरुषोत्तम मास) तिथि: षष्ठी तिथि- सुबह 05:43 तक (इसके बाद सप्तमी तिथि प्रारंभ, जो अगले दिन सूर्योदय से पहले समाप्त होगी)</p>



<p class="has-pale-pink-background-color has-background"><strong>यह ज्येष्ठ अधिकमास का शनिवार है, इसलिए आज शाम के समय पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का चौमुखा दीपक जलाएं और पीपल की सात परिक्रमा करें। इसके साथ ही हनुमान जी के मंदिर जाकर हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ करें। इस उपाय से शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या और कुंडली के सभी कष्ट दूर होते हैं।</strong></p>



<p>क्यों बढ़ रही हैं आग की घटनाएं ? वर्तमान में विक्रम संवत 2083 जारी है और यह &#8216;रौद्र संवत्सर&#8217; है। &#8216;रौद्र&#8217; शब्द भगवान शिव के उग्र रुद्र स्वरूप का प्रतीक माना गया है। ज्योतिषियों के अनुसार, इस संवत्सर में अग्नि तत्व और उग्र ऊर्जा का प्रभाव अधिक सक्रिय रहता है। आग लगने, शॉर्ट सर्किट, विस्फोट और भीषण गर्मी जैसी घटनाओं की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। इन घटनाओं के पीछे व्यक्ति की भूल से लेकर कई बड़ी तकनीकी खामियां शामिल हैं। लेकिन यह समय ग्रह-नक्षत्रों के दृष्टिकोण से भी बेहद प्रभावशाली है और इससे कुछ संकेत मिल रहे हैं। आपको बता दें, वर्तमान में विक्रम संवत 2083 जारी है और यह &#8216;रौद्र संवत्सर&#8217; है। ज्योतिष शास्त्र में &#8216;रौद्र&#8217; शब्द भगवान शिव के उग्र रुद्र स्वरूप का प्रतीक माना गया है। माना जाता है कि, इस संवत्सर में अग्नि तत्व और उग्र ऊर्जा का प्रभाव अधिक सक्रिय रहता है। ऐसे में बार-बार अग्निकांड, गर्मी, विस्फोट जैसी कई घटनाओं का एक कारण यह भी हो सकता है। </p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="802" height="456" src="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/MAHA-DEV.jpg" alt="" class="wp-image-26607" srcset="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/MAHA-DEV.jpg 802w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/MAHA-DEV-300x171.jpg 300w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/MAHA-DEV-768x437.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 802px) 100vw, 802px" /></figure>



<p class="has-pale-pink-background-color has-background">ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 12 जून को रात 7 बजकर 36 मिनट से प्रारंभ होगी और 13 जून को शाम 4 बजकर 7 मिनट पर समाप्त होगी। चूंकि प्रदोष व्रत का पालन त्रयोदशी  तिथि में प्रदोष काल में किया जाता है, इसलिए 12 जून को ही यह व्रत रखा जाएगा। भगवान शिव की पूजा का सबसे उपयुक्त समय प्रदोष काल में माना जाता है। पंचांग के अनुसार, शाम 7:36 बजे से लेकर 9:20 बजे तक का समय पूजा-अर्चना के लिए अत्यंत शुभ रहेगा। इस अवधि में श्रद्धा और विधि से की गई पूजा विशेष फल प्रदान करती है। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का शुभ संयोग भी बन रहा है, जो इसे और अधिक प्रभावशाली बना देता है। इस अवसर पर श्रद्धालु प्रदोष काल में भगवान शिव का जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करते हैं। साथ ही अपने जीवन में सुख-समृद्धि, वैवाहिक सुख और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अधिक मास में आने वाला शुक्र प्रदोष व्रत साधक के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाने वाला होता है। इस व्रत को करने से भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा प्राप्त होती है, जिससे दांपत्य जीवन में प्रेम और सामंजस्य बना रहता है। साथ ही आर्थिक स्थिति मजबूत होती है और मानसिक तनाव में कमी आती है।</p>



<p>जून की शुरुआत कुछ राशियों के लिए खास संदेश लेकर आई है। 4 जून की सुबह चंद्रमा मकर राशि में प्रवेश कर चुके हैं। इसी के साथ गुरू और चंद्रमा के बीच समसप्तक योग का निर्माण हो गया है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब दो ग्रह एक-दूसरे से ठीक सातवें भाव में स्थित होते हैं, तब यह विशेष योग बनता है। इस समय गुरु कर्क राशि में विराजमान हैं और मकर में स्थित चंद्रमा से सातवें स्थान पर हैं। यानी दोनों ग्रह एक-दूसरे के आमने-सामने होकर प्रभाव डाल रहे हैं। दो शुभ ग्रहों के इस संतुलित संबंध का असर कुछ राशियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है, खासतौर पर आर्थिक मामलों में। 4 जून से 7 जून तक का समय इन राशियों के लिए अवसरों से भरा रह सकता है।</p>



<p class="has-light-green-cyan-background-color has-background">6 जून को ग्रहों की ऐसी स्थिति बनी है जिससे शुभाशुभ योग दोनों ही प्रभावी होंगे। शनिवार के दिन कल शनि की राशि मकर से चंद्रमा का गोचर कुंभ राशि में होगा। इस गोचर में चंद्रमा श्रवण नक्षत्र से धनिष्ठा नक्षत्र पर संचार करेंगे। और साथ ही राहु के साथ चंद्रमा की युति होने से ग्रहण योग बनेगा। जबकि इस ग्रहण योग के प्रतिकूल प्रभाव को कम करेंगे तीन राजयोग जो मंगल, बुध और गुरु बना रहे हैं। कल मेष राशि में मंगल संचार करते हुए रूचक राजयोग बनाएंगे तो मिथुन राशि में बुध भद्र राजयोग बनाएंगे। और सबसे बड़ी बात है कर्क राशि में गुरु का होना जिसकी वजह से कल कर्क राशि में हंस राजयोग भी प्रभावी होगा।</p>



<p><strong>उपाय : आपको उपाय के तौर पर खिचड़ी खाना चाहिए, घर पर काम करने वालों को भी खिचड़ी खिलाना शुभ रहेगा।</strong>  % <strong>उपाय : तेल और काले वस्त्र घर न लाएं, हनुमान चालीसा का पाठ करें।</strong> &amp; <strong>उपाय : पीपल के वृक्ष में जल देना शुभ रहेगा। 7 बार परिक्रमा भी करें।</strong>  &amp; <strong>उपाय : बुजुर्ग व्यक्ति से आशीर्वाद लें और चंदन का इत्र प्रयोग करें।</strong>  <strong>उपाय : कांच की गोली अपने पास रखें और सुरमा लगाएं।</strong> &amp; <strong>कन्या राशि</strong>  <strong> राहु के मंत्र ओम रां राहवे नमः का जप करें, शिवजी का अभिषेक करना शुभ रहेगा।</strong> &amp; <strong>उपाय : आपको शनि स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। तामसिक भोजन के प्रयोग से बचें।</strong> &amp; वृश्चिक राशि  <strong>उपाय : पीपल को जल देना और हनुमान चालीसा का पाठ करना आपके लिए शुभ होगा।</strong>  धनु राशि,  <strong>शनि स्तोत्र का पाठ आपको ढैय्या के प्रतिकूल प्रभाव से बचाएगा।</strong>  मकर राशि  <strong>पीपल को तिल मिले जल से अर्घ्य दें।</strong> &amp; कुंभ राशि   <strong>काले तिल में घी मिलाकर भगवान विष्णु को ओम नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र के साथ अर्पित करें।</strong> </p>



<p>मीन राशि <strong> : आपको उपाय के तौर पर जरूरतमंद लोगों को अन्न दान देना चाहिए।</strong></p>
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		<title>5 जून 2026 ज्येष्ठ अधिकमास शुक्रवार, क्या कहती है ग्रहों की स्थिति?&#8230;&#8230;चार दिशाओं के &#8216;रक्षक&#8217; वृक्ष, दो बरगद (बड़) के पेड़  कई जन्मों के पाप नष्ट</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Himalaya Gaurav Uttarakhand]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 04 Jun 2026 16:36:25 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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					<description><![CDATA[5 जून 2026 (शुक्रवार) श्रवण नक्षत्र और ब्रह्म योग का संयोग, सूर्योदय: सुबह 05:22 बजे सूर्यास्त: शाम 07:11 बजे अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:59 से दोपहर 12:52 तक राहुकाल: सुबह 10:45&#8230; ]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="has-cyan-bluish-gray-background-color has-background"> 5 जून 2026 (शुक्रवार)  श्रवण नक्षत्र और ब्रह्म योग का संयोग, <strong>सूर्योदय:</strong> सुबह 05:22 बजे  <strong>सूर्यास्त:</strong> शाम 07:11 बजे  <strong>अभिजीत मुहूर्त:</strong> सुबह 11:59 से दोपहर 12:52 तक <strong>राहुकाल:</strong> सुबह 10:45 से दोपहर 12:26 तक  &amp; 5 जून 2026, शुक्रवार का दिन ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि के साथ प्रारंभ हो रहा है। इस दिन श्रवण नक्षत्र और ब्रह्म योग का विशेष संयोग बन रहा है, जो धार्मिक एवं आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।  नक्षत्र: श्रवण नक्षत्र- दोपहर 01:43 तक (इसके बाद धनिष्ठा नक्षत्र) गोधूलि मुहूर्त: शाम 07:15 से शाम 07:36 तक।  By Chandra Shekhar Joshi Mob.95412932030</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="750" height="438" src="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/5.jpg" alt="" class="wp-image-26599" srcset="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/5.jpg 750w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/5-300x175.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 750px) 100vw, 750px" /></figure>



<p>ज्येष्ठ अधिकमास का शुक्रवार है, इसलिए आज शाम के समय माता लक्ष्मी के सम्मुख कपूर और घी का दीपक जलाएं। उन्हें मिश्री और मखाने की खीर का भोग लगाएं और &#8216;ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः&#8217; मंत्र का यथासंभव जाप करें।</p>



<p>वृक्षों को सिर्फ प्रकृति का हिस्सा नहीं, बल्कि देवताओं का रूप माना गया है। शास्त्रों में लिखा है कि जो पुण्य बड़े-बड़े यज्ञ करवाने, आलीशान मंदिर बनवाने या देव-आराधना से भी नहीं मिलता, वह पुण्य महज एक पौधा लगाने और उसकी देखभाल करने से आसानी से मिल जाता है। एक पौधा न जाने कितने जीवों को जीवनदान देता है। नया पौधा लगाने के लिए उत्तरा, स्वाति, हस्त, रोहिणी और मूल नक्षत्र को सबसे भाग्यशाली माना जाता है। इन नक्षत्रों में रोपे गए पौधे कभी सूखते नहीं हैं और बहुत तेजी से फलते-फूलते हैं। </p>



<p>घर की उत्तर दिशा में आंवला, अमलतास, हरसिंगार या तुलसी का पौधा लगा दें, वास्तु दोष तुरंत बैलेंस हो जाएगा। ड़ की जड़ में कुलथी, उड़द, मूंग, तिल और जौ मिला हुआ पानी डालना शुरू करें। पेड़  फलों से लद जाएगा। घर की बाउंड्री में पलाश, कंचन, अर्जुन, करंज और लसोड़ा/बहुवार के पेड़ हमेशा कलह और असंतोष पैदा करते हैं। वहीं बेर का पेड़ घर में नए दुश्मन खड़े करता है, निर्गुंडी का पौधा होता है, वहां कभी लड़ाई-झगड़े नहीं होते और हमेशा शांति रहती है। इसके अलावा घर की सीमा में अंगूर, कटहल (पनस), पाकड़ और महुआ के पौधे लगाना बेहद शुभ माना जाता है।</p>



<p>आंवले का पौधा लगाएं। इस पौधे को आप कहीं भी लगाएं, इसे लगाने वाले की जमीन संबंधी सारी परेशानियां धीरे-धीरे खत्म हो जाती हैं कुंडली में चंद्रमा कमजोर है, मानसिक तनाव रहता है या माता का स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता, तो आपको गूलर का पौधा लगाना चाहिए। यह चंद्रमा की हर पीड़ा को हर लेता है। </p>



<p>वास्तु के अनुसार, घर के चारों तरफ पेड़ों का सही कॉम्बिनेशन इस प्रकार होना चाहिए: घर के आंगन या परिसर में बिल्वपत्र (बेल) का एक भी पेड़ लगा होता है, उस घर पर भगवान शिव के साथ-साथ साक्षात माता लक्ष्मी की कृपा बरसती है। वहां कभी धन की कमी नहीं होती। </p>



<p><strong>शुभ:</strong>&nbsp;पूर्व में बरगद, पश्चिम में पीपल, उत्तर में पाकड़ और दक्षिण में गूलर का पेड़ होना भाग्य चमकाता है।</p>



<p><strong>अशुभ (भूलकर भी न करें):</strong>&nbsp;इसके बिल्कुल विपरीत, यानी पूर्व में पीपल, दक्षिण में पाकड़, पश्चिम में बरगद और उत्तर में गूलर का पेड़ होना भयंकर वास्तु दोष और कंगाली लाता है। कटीले पौधे, जैसे कैक्टस न लगाएं। ये पौधे घर में निगेटिव एनर्जी फैलाते हैं, जिससे शत्रु बाधा, मानसिक अशांति और धन की हानि होती है।</p>



<p><strong>&nbsp;</strong>उत्तम, आज्ञाकारी और सुख देने वाली संतान की कामना के लिए पलाश का वृक्ष लगाएं, लेकिन ध्यान रहे कि यह पेड़ घर की सीमा से बाहर होना चाहिए।</p>



<h1 class="wp-block-heading">5 जून 2026, शुक्रवार का दैनिक राशिफल</h1>



<p><strong>मेष (Aries) :</strong>&nbsp;आपका आज का दिन मित्रों और सामाजिक कार्यों के पीछे भागदौड़ में बीतेगा। धन का खर्च भी करना पडेगा। फिर भी नए मित्रों के साथ पहचान होने की भी संभावना अधिक है, जो कि भविष्य में आपके लिए लाभदायी रहेंगे। सरकारी कार्यों में सफलता प्राप्त होगी। बड़ों का सहयोग भी प्राप्त होगा और उन्हें मिलने से आनंद में वृद्धि होगी। दूर या विदेश स्थित संतान के संबंध में शुभ समाचार प्राप्त होंगे या उन्हें मिलने का अवसर प्राप्त होगा। आकस्मिक धनलाभ हो सकता है। प्रवास और पर्यटन होगा।</p>



<p>शुभ रंग = उजला</p>



<p>शुभ अंक : 4</p>



<p><strong>वृषभ (Taurus) :</strong>&nbsp;आज का दिन शुभ फलदायी है। विशेषकर व्यवसाय करने वालों के लिए आज का दिन बहुत लाभदायी रहेगा। व्यवसाय में पदोन्नति का भी योग है। कार्यालय में उच्च अधिकारी का सहकार प्राप्त होगा। पारिवारिक जीवन में भी सुख और संतोष प्राप्त होगा। मित्रों से मुलाकात आनंद प्रदान करेगी।</p>



<p>शुभ रंग = क्रीम</p>



<p>शुभ अंक : 2</p>



<p><strong>मिथुन (Gemini) :&nbsp;</strong>आज का दिन प्रतिकूलता लेकर आएग। मानसिक रूप से व्यग्रता और शारीरिक रुप से शिथिलता का अनुभव होगा। कार्य करने का उत्साह नहीं रहेगा। व्यावसायिक स्थल पर भी उच्चाधिकारी और सहकर्मचारी का व्यवहार नकारात्मक रहेगा। धन खर्च हो सकता है। संतानों के साथ मतभेद अथवा उनकी चिंता से मन व्यग्र रहेगा। प्रतिस्पर्द्धियों से सावधानी बरतें।</p>



<p>शुभ रंग = केशरी</p>



<p>शुभ अंक : 6</p>



<p><strong>कर्क (Cancer) :&nbsp;</strong>वैचारिक रूप से नकारात्मकता छाई रहने से आज दिनभर शारीरिक और मानसिक रूप से अस्वस्थता बनी रहेगी। इसलिए नकारात्मकता से दूर रहने की चेतावनी देते हैं। क्रोध पर भी आज संयम रखना पड़ेगा, खर्च अधिक रहेगा। परिजनों के बीच में घर्षण न हो इसका ध्यान रखें। नए कार्यों का प्रारंभ आज न करें। नए परिचय भी कुछ खास लाभदायी सिद्ध नहीं हो पाएंगे। सरकार-विरोधी प्रवृत्तियों से दूर रहना ही लाभदायी होगा।</p>



<p>शुभ रंग = पीला</p>



<p>शुभ अंक : 9</p>



<p><strong>सिंह (Leo) :&nbsp;</strong>आज पति-पत्नी के बीच में अनबन हो जाने से दांपत्य जीवन में क्लेश हो सकता है। आप दोनों में से किसी का स्वास्थ्य न बिगड़े, इसका भी ध्यान रखें। सांसारिक तथा अन्य प्रश्नों के कारण भी आपका मन आज उदासीन रहेगा। सामाजिक क्षेत्र में अपयश प्राप्त न हो इसका ध्यान रखिएगा। भागीदारों के साथ भी व्यवहार में मतभेद का निर्माण हो सकता है। कोर्ट-कचहरी से दूर रहें।</p>



<p>शुभ रंग = गुलाबी</p>



<p>शुभ अंक : 8</p>



<p><strong>कन्या (Virgo) :&nbsp;</strong>व्यावसायिक क्षेत्र में आज यश प्राप्त होने की संभावनाएं अधिक हैं। सहकर्मचारियों का साथ प्राप्त होगा। पारिवारिक वातावरण में सुख का अनुभव होगा। शारीरिक और मानसिक रूप से भी आप स्वस्थ रहेंगे, आर्थिक लाभ होगा। रोगी व्यक्ति के स्वास्थ्य में सुधार होगा। प्रतिस्पर्द्धियों पर विजय प्राप्त होगी।</p>



<p>शुभ रंग = हरा</p>



<p>शुभ अंक : 3</p>



<p><strong>तुला (Libra) :&nbsp;</strong>वैचारिक रूप से विशालता और वाणी की मधुरता अन्य लोगों को प्रभावित करेगी और इससे अन्य व्यक्तियों के साथ संबंधों में मेल बना रहेगा। चर्चा-विचारणा में भी आप प्रभाव जमा सकेंगे। परिश्रम की तुलना में परिणाम संतोषजनक नहीं प्राप्त होगा। कार्य में संभलकर आगे बढ़ना होगा। अजीर्ण की पीड़ा होने से खान-पान में ध्यान रखें। साहित्य लेखन की प्रवृत्ति में अभिरुचि बढ़ेगी।</p>



<p>शुभ रंग = क्रीम</p>



<p>शुभ अंक : 2</p>



<p><strong>वृश्चिक (Scorpio) :&nbsp;</strong>स्नेहीजनों के साथ संबंधों में सावधानी बरतनी होगी। शारीरिक और मानसिक रूप से अस्वस्थता के कारण व्यग्रता बनी रहेगी। माता का स्वास्थ्य बिगड़ सकता है। धन और कीर्ति की हानि होगी। पारिवारिक वातावरण क्लेशपूर्ण रहेगा। मन में प्रसन्नता का अभाव रहने से अनिद्रा भी आपको आज सताएगी।</p>



<p>शुभ रंग = लाल</p>



<p>शुभ अंक : 5</p>



<p><strong>धनु (Sagittarius) :&nbsp;</strong>प्रतिस्पर्द्धी आज परास्त होंगे। शारीरिक और मानसिक रूप से स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा। नए कार्य का शुभारंभ करने के लिए समय अनुकूल है। स्नेहीजनों के साथ समय आनंदपूर्वक बिताएंगे। आध्यात्मिकता का भी आनंद आपके जीवन में बना रहेगा। मित्रों और स्नेहीजनों के साथ भेंट होने से हर्ष होगा।</p>



<p>शुभ रंग = पीला</p>



<p>शुभ अंक : 9</p>



<p><strong>मकर (Capricorn) :&nbsp;</strong>आज का दिन मिश्र फलदायी है। परिजनों के साथ गलतफहमी या मनमुटाव के प्रसंग बनने से मन में ग्लानि छाई रहेगी, निरर्थक खर्च होगा। आरोग्य के विषय में ध्यान रखें। विद्यर्थियों को आज अभ्यास में रुचि नहीं होगी। शेयरों में पूंजी-निवेश करने का आयोजन आप कर सकेंगे। गृहणियों को आज असंतोष रहेगा। आध्यात्मिकता आज शांतिदायी सिद्ध होगी।</p>



<p>शुभ रंग = आसमानी</p>



<p>शुभ अंक : 7</p>



<p><strong>कुंभ (Aquarius) :&nbsp;</strong>आर्थिक दृष्टिकोण से आज का दिन लाभदायी है। परिवार का वातावरण आनंद से भरा रहेगा। मित्रों और परिजनों के साथ आनंदपूर्वक समय बीतेगा। प्रवास और पर्यटन का आनंद भी आज आप उठा सकेंगे। आध्यात्मिकता का आश्रय लेकर वैचारिक नकारात्मकता को दूर करने की सलाह देते हैं।</p>



<p>शुभ रंग = क्रीम</p>



<p>शुभ अंक : 2</p>



<p><strong>मीन (Pisces) :&nbsp;</strong>कोर्ट-कचहरी अथवा स्थावर संपत्ति की झंझट में आज न पड़ने की सलाह है। आज सभी कार्यों में मन की एकाग्रता से फायदा होगा, स्वास्थ्य संभालिएगा। स्वजनों के वियोग का प्रसंग उपस्थित होगा। परिवारजनों के साथ मतभेद रहेगा। मिल रहे लाभ पाने में हानि न हो जाए इसका ध्यान भी रखिएगा। लेन-देन में सोच-विचार कर निर्णय लीजिएगा। अकस्मात और गलतफहमी से दूर रहें।</p>



<p>शुभ रंग = उजला</p>



<p>शुभ अंक : 4</p>



<h4 class="wp-block-heading">ज्योतिषाचापं. प्रेम सागर पाण्डेय 9122608219 8877323328</h4>
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		<item>
		<title>4 जून 2026 ज्येष्ठ अधिक मास का गुरुवार, उत्तरायण, सकारात्मक प्रभाव वाला समय;  भगवान विष्णु के सम्मुख देशी घी का दीपक जलाएं &#038; ग्रहों के नक्षत्र परिवर्तन;बंद किस्मत के ताले खुल जाएंगे &#038; रोज  सुबह या शाम के समय हनुमान चालीसा का पाठ </title>
		<link>https://himalayauk.org/june-4-2026-thursday-of-jyeshtha-adhik-month-uttarayan-time-of-positive-influence-light-a-lamp-of-desi-ghee-in-front-of-lord-vishnu-planetary-stars/?utm_source=rss&#038;utm_medium=rss&#038;utm_campaign=june-4-2026-thursday-of-jyeshtha-adhik-month-uttarayan-time-of-positive-influence-light-a-lamp-of-desi-ghee-in-front-of-lord-vishnu-planetary-stars</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Himalaya Gaurav Uttarakhand]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 03 Jun 2026 15:51:58 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<category><![CDATA[अन्य समाचार]]></category>
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					<description><![CDATA[ 6 जून को जैसे ही चंद्रमा कुंभ राशि में गोचर करेंगे वैसे ही वे राहु के साथ मिलकर ग्रहण योग बनाएंगे। ये योग 8 जून तक बना रहेगा। ज्योतिष शास्त्र&#8230; ]]></description>
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<p class="has-light-green-cyan-background-color has-background"> 6 जून को जैसे ही चंद्रमा कुंभ राशि में गोचर करेंगे वैसे ही वे राहु के साथ मिलकर ग्रहण योग बनाएंगे। ये योग 8 जून तक बना रहेगा।  ज्योतिष शास्त्र में कई शुभ-अशुभ योगों का वर्णन किया गया है। जिनमें से ग्रहण योग बेहद अशुभ योग माना जाता है। कहते हैं जिसकी कुंडली में इस योग का निर्माण होता है ऐसे व्यक्ति का जीवन संघर्षों में बीतता है। इस योग के कारण सफलता पाने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ती है और हमेशा मानसिक तनाव बना रहता है।  ब मन के कारक चंद्र देव मायावी और पापी ग्रह राहु के साथ युति करते हैं, तो इसका कुछ राशियों पर बेहद नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।  BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI Mob. 9412932030</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="746" height="450" src="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/4-JUNE-1.jpg" alt="" class="wp-image-26594" srcset="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/4-JUNE-1.jpg 746w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/4-JUNE-1-300x181.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 746px) 100vw, 746px" /></figure>



<p>गुरुवार, 4 जून 2026  &amp;  गुरुवार का दिन देवताओं के गुरु बृहस्पति देव और जगत के पालनहार भगवान श्रीहरि विष्णु की आराधना के लिए अत्यंत पवित्र &amp; सूर्योदय: सुबह 05:23 एएम  सूर्यास्त: शाम 07:16 पीएम &amp; ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:02 से सुबह 04:42 तक। &amp; गोधूलि मुहूर्त: शाम 07:15 से शाम 07:36 तक।  &amp; राहुकाल: दोपहर 02:03 से शाम 03:47 तक (इस समय विशेष रूप से शुभ कार्यों से बचें)। आज अमांत और पूर्णिमांत दोनों गणनाओं के अनुसार ज्येष्ठ मास चल रहा है। यह मास धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है और इस दौरान कई पूजा-पाठ एवं व्रत रखे जाते हैं।</p>



<p> ज्येष्ठ अधिकमास का गुरुवार है, इसलिए आज भगवान विष्णु के सम्मुख देशी घी का दीपक जलाएं, उन्हें पीले फूल अर्पित करें और &#8216;विष्णु सहस्रनाम&#8217; का पाठ करें। इस दिन पीले वस्त्र पहनना और किसी मंदिर में चने की दाल या केले का दान करना कुंडली में गुरु ग्रह को मजबूत करता है और धन-धान्य की वृद्धि &amp; 4 जून, गुरुवार को ज्येष्ठ माह (अधिकमास) के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि है। इस तिथि पर उत्तराषाढा नक्षत्र और शुक्ल योग का संयोग रहेगा। इस तिथि पर चंद्रमा का गोचर मकर राशि में होगा, मकर राशि के स्वामी ग्रह शनि होते हैं,</p>



<p>4 जून 2026 का दिन पंचांग के अनुसार कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि के साथ आरंभ हो रहा है। गुरुवार का यह दिन धार्मिक कार्यों, पूजा-पाठ और पारिवारिक गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।  आज की तिथि कृष्ण पक्ष चतुर्थी है, जो रात 11:31 PM तक रहेगी। इसके बाद अगली तिथि प्रारंभ हो जाएगी। चतुर्थी तिथि को विशेष रूप से भगवान गणेश की पूजा और बाधाओं को दूर करने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। आज गुरुवार है, जो भगवान विष्णु और गुरु ग्रह से संबंधित माना जाता है। यह दिन ज्ञान, धार्मिक कार्यों और शुभ योजनाओं के लिए अनुकूल माना जाता है।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="692" height="484" src="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/PUNCHAG.jpg" alt="" class="wp-image-26595" srcset="https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/PUNCHAG.jpg 692w, https://himalayauk.org/wp-content/uploads/2026/06/PUNCHAG-300x210.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 692px) 100vw, 692px" /></figure>



<p>संवत्सर के अनुसार आज विक्रम संवत 2083 (सिद्धार्थ) और शक संवत 1948 (प्रभाउ) है, जो भारतीय पंचांग और पारंपरिक कालगणना के प्रमुख आधार माने जाते हैं। वर्तमान समय में ग्रीष्म ऋतु चल रही है, जो ऊर्जा, गर्मी और सक्रियता का प्रतीक मानी जाती है। अयन के अनुसार अभी उत्तरायण काल है, जिसे शुभ और सकारात्मक प्रभाव वाला समय माना जाता है।</p>



<p>आज सूर्योदय सुबह 5:08 AM बजे होगा और सूर्यास्त शाम 6:46 PM बजे। यह समय दैनिक कार्यों और शुभ गतिविधियों की योजना बनाने में सहायक होता है। चंद्रमा का उदय रात 10:09 PM बजे और चंद्रास्त सुबह 8:07 AM बजे होगा। आज चंद्रमा धनु राशि में स्थित है और इसका निवास पूर्व दिशा में माना गया है। आज उत्तराषाढ़ा नक्षत्र रात 3:42 AM तक रहेगा, जिसके बाद अगला नक्षत्र प्रारंभ होगा। उत्तराषाढ़ा नक्षत्र को स्थिरता, आत्मविश्वास और सफलता से जोड़कर देखा जाता है।</p>



<p>योग के रूप में शुक्ल योग है, जो सुबह 9:03 AM तक रहेगा। यह योग शुभ कार्यों और सकारात्मक योजनाओं के लिए अनुकूल माना जाता है। करण बव है, जो सुबह 10:26 AM तक रहेगा। करण का प्रभाव कार्यों की गति और उनके परिणामों पर माना जाता है। आज का अभिजीत मुहूर्त 11:30 AM से 12:24 PM तक रहेगा, जिसे दिन का सबसे शुभ समय माना जाता है।</p>



<p> 4 जून को अधिक ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि गुरुवार का दिन है। चतुर्थी तिथि गुरुवार को रात 11 बजकर 31 मिनट तक रहेगी। 4 जून को सुबह 9 बजकर 3 मिनट तक शुक्ल योग रहेगा, उसके बाद ब्रह्म योग लग जायेगा। अगर आपको कोई शांतिपूर्वक कार्य करना हो तो ब्रह्म योग में करने से आपको शुभ फलों की प्राप्ति होगी। साथ ही अगर आपका किसी से झगड़ा हुआ हो तो उसे सुलझाने के लिए भी ब्रह्म योग बहुत ही अच्छा है। साथ ही गुरुवार देर रात 3 बजकर 42 मिनट तक उत्तराषाढ़ा नक्षत्र रहेगा। </p>



<p class="has-pale-pink-background-color has-background">शुक्र ग्रह 11 जून 2026 की दोपहर 02:11 पर पुष्य नक्षत्र में प्रवेश कर जायेगा। इस नक्षत्र में शुक्र के आते ही 4 राशि वालों की जिंदगी पूरी तरह से बदल जाएगी।  ज्योतिष शास्त्र में जिस तरह से ग्रहों का राशि परिवर्तन महत्वपूर्ण माना जाता है। वैसे ही ग्रहों के नक्षत्र परिवर्तन का भी खास महत्व होता है। इस समय शुक्र पुनर्वसु नक्षत्र में गोचर कर रहे हैं, लेकिन 11 जून से ये पुष्य नक्षत्र में गोचर शुरू कर देंगे और 23 जून तक यहां विराजमान रहेंगे। शुक्र का पुष्य नक्षत्र में गोचर 4 राशि वालों के लिए किसी चमत्कार से कम साबित नहीं होगा। इन राशियों की बंद किस्मत के ताले खुल जाएंगे। </p>





<h3 class="wp-block-heading"><strong>वृषभ राशि</strong></h3>



<p>वृषभ राशि वालों के लिए शुक्र का पुष्य नक्षत्र में गोचर लाभकारी साबित होगा। आपके सभी कार्य पूरे होंगे। किसी काम में बड़ी सफलता मिलेगी। नया मकान या वाहन खरीदने का सपना पूरा हो सकता है। इनकम में जबरदस्त उछाल आएगा। अचानक से धन प्राप्ति के योग बनेंगे।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>कर्क राशि</strong></h3>



<p>कर्क राशि वालों को शुक्र का नक्षत्र गोचर विशेष लाभ दिलाएगा। आपकी पद-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। धन लाभ के रास्ते खुलेंगे। नई नौकरी मिलने के योग बन रहे हैं। अचानक से धन की प्राप्ति के आसार दिखाई दे रहे हैं। किसी काम में बड़ी सफलता हाथ लग सकती है। कार्यस्थल पर आपके काम की खूब प्रशंसा होगी। अविवाहित जातकों के लिए विवाह प्रस्ताव आ सकते हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>कन्या राशि</strong></h3>



<p>कन्या राशि वालों के लिए ये नक्षत्र गोचर किसी वरदान से कम साबित नहीं होगा। आमदनी में वृद्धि होगी। करियर में सुनहरी सफलता मिलेगी। अटके काम पूरे होंगे। बिजनेस में बंपर लाभ कमाने में सफल रहेंगे। साझेदारी के काम में खूब पैसा कमाएंगे। यात्रा सफल साबित होगी। धार्मिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>मीन राशि</strong></h3>



<p>इस राशि वालों के लिए भी शुक्र का नक्षत्र गोचर वरदान साबित होगा। आय में वृद्धि के संकेत मिल रहे हैं। ऑफिस में आपकी साख बढ़ेगी। नौकरी में मनचाही जगह ट्रांसफर मिल सकता है। विदेश से जुड़े कार्यों में सफलता मिलेगी। निवेश के लिए भी समय शानदार है। किसी पुराने कर्ज से मुक्ति मिल सकती है।</p>



<p>जब मन के कारक चंद्र देव मायावी और पापी ग्रह राहु के साथ युति करते हैं, तो इसका कुछ राशियों पर बेहद नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। चलिए जानते हैं इस युति से किन 3 राशियों के लोगों को फूंक-फूंक कर कदम रखने की जरूरत है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>मेष राशि (Aries)</strong></h3>



<p>6 से 8 जून तक का समय आपके लिए थोड़ा मुश्किल साबित हो सकता है। इस अवधि में किसी पर भी आंख बंद करके भरोसा न करें क्योंकि धोखा मिल सकता है। आर्थिक परेशानियां आ सकती हैं। बिजनेस में काफी नुकसान होने के भी आसार रहेंगे। इस दौरान कोई भी बड़ा निर्णय लेने से बचना होगा।&nbsp;कार्यस्थल पर झगड़ा करने से बचें। ऑफिस की&nbsp;राजनीति का शिकार हो सकते हैं। अचानक से खर्चों में बढ़ोतरी हो सकती है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>सिंह राशि (Leo)</strong></h3>



<p>सिंह राशि वालों के मानसिक तनाव काफी बढ़ सकते हैं। नौकरी में भी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। आपको कार्यस्थल पर बेहद सतर्क रहने की जरूरत होगी।&nbsp;वर्तमान नौकरी में काम का दबाव बढ़ सकता है। 6 से 8 जून के बीच नौकरी या बिजनेस में कोई भी बड़ा फैसला लेने से बचें नहीं तो नुकसान हो सकता है। इसके अलावा इस दौरान पैसों के लेनदेन को लेकर भी पारदर्शिता बनाए रखें।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>वृश्चिक राशि (Scorpio)</strong></h3>



<p>वृश्चिक राशि वालों के लिए भी ग्रहण योग परेशानियां बढ़ाने वाला साबित हो सकता है। बिजनेस में अचानक से&nbsp;मंदी आ सकती है। 6 से 8 जून के बीच&nbsp;कोई भी बड़ी डील करने से बचें। काम को लेकर जरा सभी लापरवाही बड़ा नुकसान करा सकती है। पैसों के लेनदेन में विशेष सावधानी बरतनी की सलाह है और&nbsp;जितना हो सके विवादों से दूर रहें।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>ग्रहण योग&nbsp;के बुरे प्रभावों से कैसे बचें?</strong></h3>



<p>यदि आपकी राशि भी ऊपर दी गई राशियों में शामिल है तो नीचे दिए गए उपाय जरूर करें जिससे ग्रहण योग का बुरा प्रभाव न पड़ सके&#8230;</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>नियमित रूप से शिवलिंग पर जलाभिषेक करें। कहते हैं इससे राहु दोष शांत होता है।</li>



<li>सोमवार के दिन दूध, चावल या चीनी का दान करें।</li>



<li>रोज सुबह या शाम के समय हनुमान चालीसा का पाठ करें।</li>
</ul>
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