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<?xml-stylesheet type="text/xsl" media="screen" href="/~d/styles/rss2full.xsl"?><?xml-stylesheet type="text/css" media="screen" href="http://feeds.feedburner.com/~d/styles/itemcontent.css"?><rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:openSearch="http://a9.com/-/spec/opensearch/1.1/" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:feedburner="http://rssnamespace.org/feedburner/ext/1.0" version="2.0"><channel><atom:id>tag:blogger.com,1999:blog-34531871</atom:id><lastBuildDate>Mon, 02 Nov 2009 08:58:45 +0000</lastBuildDate><title>हिन्‍दी पन्‍ना</title><description>भुवनेश शर्मा का हिन्‍दी ब्‍लॉग</description><link>http://hindipanna.blogspot.com/</link><managingEditor>bhuvnesh.ad@gmail.com (भुवनेश शर्मा)</managingEditor><generator>Blogger</generator><openSearch:totalResults>88</openSearch:totalResults><openSearch:startIndex>1</openSearch:startIndex><openSearch:itemsPerPage>25</openSearch:itemsPerPage><atom10:link xmlns:atom10="http://www.w3.org/2005/Atom" rel="self" href="http://feeds.feedburner.com/hindi-panna" type="application/rss+xml" /><feedburner:emailServiceId>hindi-panna</feedburner:emailServiceId><feedburner:feedburnerHostname>http://feedburner.google.com</feedburner:feedburnerHostname><atom10:link xmlns:atom10="http://www.w3.org/2005/Atom" rel="hub" href="http://pubsubhubbub.appspot.com" /><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-34531871.post-5188051674895099583</guid><pubDate>Wed, 29 Jul 2009 16:25:00 +0000</pubDate><atom:updated>2009-07-29T22:22:39.947+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">पाकिस्‍तान</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">terrorism</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">india</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">आतंकवाद</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">pakistan</category><title>आईये पाक में बढ़ते आतंक के लिए माफी मांगे</title><description>मुंबई हमलों के बाद जब दिल्‍ली में बैठे गीदड़ों में भभकी देने का कंपटीशन चला तब ऐसा लगा कि वाकई कुछ हो लेगा. अब तो अमेरिका भी साथ है और सबूत भी और उधर यूएन को भी समझाके पाक की कर देंगे ऐसी-तैसी. पर हाय रे किस्‍मत ! ...क्‍या कहें जैसी किस्‍मत हमारे पडौसियों ने पाई उसका जवाब नहीं. गीदड़ कुर्सी पे यहां बैठते हैं और पूंछ उनके निजाम के सामने हिलाते हैं. वाह जी वाह....इसे ही तो कहते हैं अंधे के हाथ बटेर नहीं बतख लगना....वरना कोई बेवकूफ थोड़े ही खामखा मिस्र के बियावान में जाकर अपनी नाक काटकर पेश करेगा, ऐसी बहादुरी तो कोई महान स्‍कॉलर ही कर सकता है जिसकी विद्वत्‍ता और मैनेजमेंट की चर्चा लोग-बाग ऐसे बयान करते हैं जैसे उसने गद्दी पर बैठकर इस मुल्‍क पर अहसान कर दिया हो....दाल बेशक नब्‍बे रुपये हो फर्क नहीं पड़ता, भई दाल महंगी है तो पनीर खाओ, रोटी महंगी है तो ब्रेड खाओ...खामखा यहां का अवाम चुपचाप ऐसे विद्वान से शासित होने के बजाय हल्‍ला मचाता है.&lt;br /&gt;मेरा अनुरोध उक्‍त विद्वान महोदय से सिर्फ इतना है कि यदि उन्‍हें हमारे पडौसियों के दुखदर्द की इतनी ही चिंता है तो क्‍यों नहीं उनके यहां आतंकवाद,दुखदर्द, गरीबी, भुखमरी मिटाने को एक पैकेज की घोषणा कर देते....भुखमरी दूर हो ना हो, कम से कम कुछ समय के लिए वे उससे असलहा वगैरह खरीदकर खुद की भारतीयों से रक्षा ही कर लेंगे आखिर हमने उनकी नाक में दम जो कर रखा है....मुझे पक्‍का विश्‍वास है कि आदरणीय उक्‍त मसले पर अगली कैबिनेट और पार्टी मीटिंग में जरूर विचार करेंगे और यदि उनके पास वाकई एक इंसान का दिल है तो एक सताये हुए राष्‍ट्र से क्षमा मांगने तक में वे पीछे नहीं हटेंगे.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;ऐसी महान आत्‍मा को मेरा कोटि-कोटि नमन !&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/34531871-5188051674895099583?l=hindipanna.blogspot.com'/&gt;&lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/hindi-panna/~4/G3s6Yjia9gM" height="1" width="1"/&gt;</description><link>http://feedproxy.google.com/~r/hindi-panna/~3/G3s6Yjia9gM/blog-post.html</link><author>bhuvnesh.ad@gmail.com (भुवनेश शर्मा)</author><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">1</thr:total><feedburner:origLink>http://hindipanna.blogspot.com/2009/07/blog-post.html</feedburner:origLink></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-34531871.post-1993386521555021675</guid><pubDate>Mon, 15 Jun 2009 14:50:00 +0000</pubDate><atom:updated>2009-06-15T20:20:00.403+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">birds</category><title>ये बेजुबान भी हमारे अपने हैं</title><description>कुछ समय पहले मेरे पास एक एसएमएस आया जिसे यहां प्रस्‍तुत कर रहा हूं-&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;HUMBLE REQUEST:&lt;br /&gt;Plz keep a bowl in ur balcony or window so that BIRDS can drink water as it too hot this summer for all lives...plz fwd it to all..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;बचपन में मैं हमेशा पक्षियों के लिए पानी का इंतजाम कर देता था...पर कुछ समय से थोड़ा आलसी हो गया हूं...पर मेरी एक रिश्‍ते की बहन ने एसएमएस करके फिर से मुझे इसके लिए उकसाया और अपना आलस त्‍यागकर छत पर गया तो दो पुराने मटके रखे हुए थे। उनके ऊपरी हिस्‍से को काटकर मैंने उनमें पानी भरा और अलग-अलग जगहों पर रख दिया।&lt;br /&gt;इस एसएमएस को यहां रखने का यही उद्देश्‍य सभी को इसके लिए उकसाना है कि अपने घरों की छतों, बालकनियों, छायादार स्‍थानों पर गर्मियों में मिट्टी के बर्तन या पुराने मटकों इत्‍यादि में पानी भरकर रखें जिससे बेचारे प्‍यासे पक्षी अपना कंठ तर कर सकें।&lt;br /&gt;वैसे भी हमारे भारत में प्‍यासे को पानी पिलाना सबसे बड़ा पुण्‍य माना गया है तो क्‍यों ना मुफ्त में पुण्‍य भी बटोर लें :-) ।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/34531871-1993386521555021675?l=hindipanna.blogspot.com'/&gt;&lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/hindi-panna/~4/lnjviT5XvvU" height="1" width="1"/&gt;</description><link>http://feedproxy.google.com/~r/hindi-panna/~3/lnjviT5XvvU/blog-post_15.html</link><author>bhuvnesh.ad@gmail.com (भुवनेश शर्मा)</author><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">7</thr:total><feedburner:origLink>http://hindipanna.blogspot.com/2009/06/blog-post_15.html</feedburner:origLink></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-34531871.post-1126987440388653864</guid><pubDate>Sun, 14 Jun 2009 13:11:00 +0000</pubDate><atom:updated>2009-06-14T20:13:58.958+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">global warming</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">market economy</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">environment</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">capitalism</category><title>जरूरतें कम करके भी आप पर्यावरण को बचा सकते हैं</title><description>&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://4.bp.blogspot.com/_lilFNFkYooc/SjUL_TvnYWI/AAAAAAAAAxU/TcRy5LrL55k/s1600-h/globe_in_hand1.jpg"&gt;&lt;img style="margin: 0pt 10px 10px 0pt; float: left; cursor: pointer; width: 200px; height: 200px;" src="http://4.bp.blogspot.com/_lilFNFkYooc/SjUL_TvnYWI/AAAAAAAAAxU/TcRy5LrL55k/s200/globe_in_hand1.jpg" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5347193314831982946" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;सबसे पहले तो अपन स्‍पष्‍ट कर दें कि अपन यहां पूंजीवाद, साम्‍यवाद, समाजवाद या और किसी वाद या विचारधारा पर बहस की शुरूआत नहीं कर रहे। फिलहाल जो दुनियाभर में हल्‍ला मचा हुआ है ग्‍लोबल वार्मिंग का और उसके लिए जो प्रयास हो रहे हैं वो कितने मायने रखते हैं जब तक हम एक व्‍यापक परिवर्तन या ठीक से कहें तो जीवनशैली में परिवर्तन को एक मुद्दा नहीं बनाते। मेरा मानना है कि आज के इंसान की जीवनशैली संबंधी जरूरतें इसी तरह बढ़ती रहें और साथ ही हम ग्‍लोबल वार्मिंग व पर्यावरण की ढपली भी बजाते रहें तो उससे कोई सुधार आ सकेगा ऐसा लगता तो नहीं।&lt;br /&gt;आज की मुक्‍त बाजार व्‍यवस्‍था और पूंजीवाद के घनघोर समर्थक चाहते हैं कि लोगों की जरूरतें बढ़ें, लोग ज्‍यादा से ज्‍यादा उपभोक्‍ता सामान खरीदें, उन्‍हें किसी भी तरह ललचाकर बाजार तक खींचा जाए और यही एक बढ़ती और तरक्‍की करती हुई अर्थव्‍यवस्‍था का मूलमंत्र है। इसी विषय पर मैंने काफी समय पहले एक पोस्‍ट लिखी थी (पढ़ने के लिए &lt;a href="http://hindipanna.blogspot.com/2009/02/blog-post.html"&gt;यहां क्लिक करें&lt;/a&gt;) जिसमें मैंने मुद्दा उठाया था कि किस प्रकार पूंजीवादी व्‍यवस्‍था लोगों की जरूरतें बढ़ाने और बेवजह के सामानों का निर्माण कर उन्‍हें बहुत ही आवश्‍यक वस्‍तु के रूप में प्रचारित कर बाजार में खपाने की है। पूंजीवाद के समर्थकों का कहना है कि इस व्‍यवस्‍था के अलावा फिलहाल कोई विकल्‍प नहीं है और ये व्‍यवस्‍था लोगों का जीवन-स्‍तर सुधारने और उपभोक्‍ता वस्‍‍तुओं तक उनकी पहुंच सुलभ बनाने के लिए कारगर साबित हुई है परंतु धरती पर दिनोंदिन बढ़ रहा कचरा, ई-कचरा, संसाधनों का अंधाधुंध शोषण, कटते जंगलों के लिए क्‍या यही व्‍यवस्‍था उत्‍तरदायी नहीं है। केवल और केवल यही कारण है कि मुझे इस व्‍यवस्‍था से चिढ़ है चूंकि पर्यावरण के लिए बढ़ती अर्थव्‍यवस्‍थाएं और बढ़ते बाजार एक अभिशाप बन चुके हैं और ध्‍यान देने वाली बात ये है कि इन बाजारों में आम इंसान की जरूरत की चीजों के अलावे जो अधिकांश चीजें खपाई जा रही हैं उनकी वास्‍तविकता में कोई जरूरत व औचित्‍य नहीं है पर बाजार बढ़ाना है, मुनाफा बढ़ाना है अर्थव्‍यवस्‍था बढ़ानी है और सबसे बड़ी बात ये है कि दूसरे देशों से आज के युग में प्रतिद्वंदिता भी करनी है और मुनाफे की इस रेस के लिए चाहे कितनी भी कुर्बानी देनी पड़े सब जायज है।&lt;br /&gt;लोगों को मेरी बात कष्‍ट पहुंचा सकती है...कुछ लोग ये भी कहेंगे कि पैसा जो मैं अपनी मेहनत से कमाता हूं उसे खर्च करने की मुझे पूरी आजादी है पर क्‍या एक इंसान होने के नाते आपकी जो जिम्‍मेदारी है उसके लिए क्‍या आपने सोचा है।&lt;br /&gt;हालांकि इसमें लोगों का दोष भी नहीं है....उन्‍हें जो सिखाया जाता है वे वैसा ही करते हैं। आजकल के बच्‍चे जो पैदा होते ही टीवी देखकर बड़े हो रहे हैं वे बड़े होकर इन सब बातों को कैसे समझ पायेंगे। आज की बाजार व्‍यवस्‍था एक ऐसा समाज तैयार कर रही है जिसमें उसे केवल उपभोक्‍ता ही नहीं बनाने हैं बल्कि उनकी सोच, उनकी आदतों का भी निर्माण करना है और ऐसे ही लोगों की जरूरत है इस सिस्‍टम को।&lt;br /&gt;महात्‍मा गांधी का वो प्रसिद्ध कथन तो सबने पढ़ा होगा कि ये धरती लोगों की जरूरतें पूरा करने में सक्षम है पर उसके लालच को नहीं। पर फिर भी बाजार व्‍यवस्‍था के समर्थक कुतर्क करने से बाज नहीं आने वाले जबकि बाजार व्‍यवस्‍था और बढ़ता हुआ लालच एक दूसरे के पर्यायवाची हैं और दुनिया को लगातार लालची बनाते जाने के दुष्‍परिणाम हम अभी से देख ही रहे हैं।&lt;br /&gt;ब्राजील में अमेजन के घने जंगल जिन्‍हें धरती के फेफड़े भी कहा जाता है उन फेंफड़ों में भी यही लालची बाजार व्‍यवस्‍था कैंसर की तरह प्रवेश कर चुकी है। पर फिर भी लगता है कि पर्यावरण सरकारों के लिए कोई मुद्दा ही नहीं रह गया है सभी मुद्दों का केंद्र है बढ़ती हुई अर्थव्‍यवस्‍था जिससे उद्योगपति भी खुश, उपभोक्‍ता भी खुश और टैक्‍स से अपनी जेबें भरने वाली सरकारें भी खुश।&lt;br /&gt;एक साधारण समझ की बात है एक तरफ तो हम अपनी जरूरतों को बढ़ाने में लगे हुए हैं दूसरी तरफ पर्यावरण की भी बात कर लेते हैं। ये दोनों ही बातें घोर विरोधाभाषी हैं....जैसे हम पानी बचाने की बात करते हैं पर पैसा होने पर घर में खुद का स्‍वीमिंग पूल बनवाने से भी नहीं कतराते। जबकि जितनी भी लग्‍जरी सुविधाएं हैं उन्‍हीं की कीमत हम चुका रहे हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;खैर इस तरह की उपदेशात्‍मक बातें करके भी हम क्‍या उखाड़ लेंगे। आईये आज हम मिलकर संकल्‍प लेते हैं कि बाजार से केवल उन्‍हीं सामानों को खरीदेंगे जिनकी हमें जरूरत है। केवल विज्ञापनों से प्रभावित होकर, पड़ौसियों व रिश्‍तेदारों से प्रभावित होकर हम बाजार का रुख नहीं करेंगे। यही एक मंत्र है जिसको हमें आत्‍मसात करना होगा यदि वाकई हम पर्यावरण के प्रति सचेत हैं।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/34531871-1126987440388653864?l=hindipanna.blogspot.com'/&gt;&lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/hindi-panna/~4/V2ExE0SHwbU" height="1" width="1"/&gt;</description><link>http://feedproxy.google.com/~r/hindi-panna/~3/V2ExE0SHwbU/blog-post_14.html</link><author>bhuvnesh.ad@gmail.com (भुवनेश शर्मा)</author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="http://4.bp.blogspot.com/_lilFNFkYooc/SjUL_TvnYWI/AAAAAAAAAxU/TcRy5LrL55k/s72-c/globe_in_hand1.jpg" height="72" width="72" /><thr:total 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right; cursor: pointer; width: 186px; height: 288px;" src="http://2.bp.blogspot.com/_lilFNFkYooc/Siu3BpV6grI/AAAAAAAAAxE/s8UhL1jFITE/s400/save_earth.jpg" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5344566621710746290" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;परसों विश्‍व पर्यावरण दिवस था, इस प्रकार के औप‍चारिक दिवस चूंकि दिखावा बन कर रह गये हैं सो लोगों ने इस ओर ध्‍यान देना ही बंद कर दिया है हालांकि पहले भी इनको कितनी तवज्‍जो दी जाती थी यह सभी जानते ही हैं...बस चंद बड़े अखबारों में सरकारी विज्ञापन और संपादकीय लिखने भर की रस्‍म-अदायगी करके दिवस मना लिया जाता है  पर फिलहाल अपन इस तरह की बातों का रोना-धोना मचाकर खुद को बुद्धिजीवी साबित नहीं करना चाहते सो कुछ ठोस बात करते हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;काफी दिनों से सोच रहा था कि ऐसे कौन से उपाय हैं जो हम अपने पर्यावरण को बचाने और इस धरती को लाखों-सालों तक जीवित बनाये रखने के लिए अपना सकते हैं। वैसे जहां बिगड़ते पर्यावरण के बावजूद लोगों को गैरजिम्‍मेदाना हरकतें करते देखता हूं तो खून खौल उठता है परंतु फिर भी हमारे आसपास अक्‍सर ऐसे सज्‍जन लोग मिल ही जाते हैं जो अपने पर्यावरण के लिए वाकई ईमानदारीपूर्ण प्रयास कर रहे हैं पर मुझे लगता है कि ऐसे एकल प्रयासों के साथ-साथ सामूहिक प्रयासों की भी आवश्‍यकता है और मेरा मानना है कि हमारा हिंदी ब्‍लॉगर्स का जो इतना बड़ा समुदाय है वह साथ मिलकर पर्यावरण संरक्षण के लिए कुछ संकल्‍प ले और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करे तो लाखों-करोंड़ों नहीं तो कुछ हजार लोगों का ये कदम बहुत छोटा ही सही कुछ तो परिवर्तन ला ही सकता है। वैसे  काबिले-गौर बात ये भी है कि ज्‍यादातर हिंदी ब्‍लॉगर इस बारे में काफी सजग हैं और अपने स्‍तर पर प्रयास करते भी रहते हैं। काफी समय पहले परिचर्चा नामक फोरम पर(जो कि आजकल बंद पड़ा हुआ है) बहुत से ब्‍लॉगर्स ने अपने प्रयासों और आइडियाज को शेयर किया था वे वाकई काबिले-तारीफ थे जैसे संजय बेंगाणीजी महानगर में रहते हुए भी अपने अधिकर कामों के लिए सायकल का प्रयोग करते हैं, बहुत से लोग पॉलीथीन की जगह कपड़े के थैले प्रयोग कर रहे हैं, पानी का भी बहुत किफायत से इस्‍तेमाल करने वाले लोग हैं।&lt;br /&gt;मेरा मानना है कि हम सभी लोग जो भी प्रयास कर रहे है उन्‍हें एक-दूसरे से साझा करें, कुछ तुम चलो कुछ हम चलें की तर्ज पर और जो भी इसके लिए नया किया जा सकता है करें, नये नये उपाय एक-दूसरे को सुझायें-अपनायें। साथ ही अपने परिवार और आसपास में भी यथासंभव जो किया जा सकता है उसकी शुरुआत करें ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;फिलहाल तो मेरी सभी ब्‍लॉगर बंधुओं से अपील है कि वे अपने-अपने चिट्ठे पर खुद के द्वारा पर्यावरण के लिए किये जा रहे प्रयासों से दूसरों को अवगत करायें हालांकि कुछ लोगों को ये खुद मियां मिट्ठू बनना लग सकता है फिर भी प्‍लीज ऐसा करें क्‍योंकि जब हम अपने आइडियाज दूसरों से शेयर करेंगे तो ही तो हम दूसरों को कुछ बता पायेंगे और उनसे कुछ नया सीख पायेंगे।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;फिलहाल तो मैं खुद के कुछ प्रयासों के बारे में यहां लिख रहा हूं आप सब से भी अपील है कि अपने-अपने चिट्ठे पर ऐसे ही प्रयासों के बारे में लिखें जिससे दूसरे भी पढ़कर उन्‍हें अपना सकें।-&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;1- सबसे पहले बात बिजली की, अपने घर में जिन बिजली के उपकरणों जैसे पंखा,  टीवी, ट्यूबलाइट आदि का प्रयोग नहीं हो रहा है उनको बंद करना&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;2- बल्‍ब की जगह सीएफएल प्रयोग करना&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;3- पॉलीथीन का प्रयोग यथासंभव कम करना और जहां उसके बिना काम चल सकता हो वहां उसका प्रयोग ना करना।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;4- जितना संभव हो पैदल चलना, सार्वजनिक परिवहन के साधनों का प्रयोग करना। पैदल चलना इसलिए भी मुफीद है कि मेरा शहर छोटा है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;5- एक तरफ से प्रिंट किये हुए फालतू कागजों, पैम्‍पलेट आदि को कचरे में नहीं फेंकना बल्कि उनकी दूसरी तरफ लिखने के लिए प्रयोग में लेना।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;6- पानी का जितना कम प्रयोग हो सके करना और फालतू  पानी को पौधों-गमलों में डालना।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;7- कॉस्‍मेटिक्‍स का प्रयोग बिलकुल नहीं करना क्‍योंक‍ि ऐसी अनुपयोगी चीजें केवल कचरे को बढ़ावा देती हैं जो बायोडिग्रेडेबल नहीं हैं साथ ही उनमें क्‍लोरो-फ्लोरो कार्बन होते हैं जो विशेष रूप से खतरनाक हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;हालांकि सूची बहुत छोटी है पर हौसले बुलंद हैं....इंशाल्‍लाह ये सूची आपके मार्गदर्शन से बढ़े और हमारे सामूहिक प्रयासों को नेट पर ही सही दुनिया देखे।&lt;br /&gt;फिलहाल तो अपन यहीं से शुरूआत करते हैं....बाकी धीरे-धीरे जब कारवां चल पड़ेगा तो और भी मुसाफिर आ जाएंगे काफिले में... साथ ही आप सबसे एक छोटी सी गुजारिश और है कि अपने आस-पास और कहीं भी पर्यावरण के लिए काम कर रहे लोगों के छोटे-छोटे प्रयासों को भी अपने चिट्ठे पर प्रकाशित कर दूसरों को भी उनके बारे में बताएं..वस्‍तुत: यही लोग जो छोटे-छोटे प्रयास कर रहे हैं हमारे हीरो हैं और हमें इनके प्रयासों से खुद भी प्रेरणा लेकर दूसरों को भी उनके बारे में बताना चाहिए क्‍योंकि आलोचनाएं और दूसरों पर दोषारोपण तो बहुत हो चुका अब समय है खुद कुछ कर दिखाने का और सकारात्‍मक सोचने का.....वो गायत्री परिवारवाले कहते हैं ना कि हम सुधरेंगे, युग सुधरेगा।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/34531871-6174004294825055439?l=hindipanna.blogspot.com'/&gt;&lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/hindi-panna/~4/gKj0mLqEtlM" height="1" width="1"/&gt;</description><link>http://feedproxy.google.com/~r/hindi-panna/~3/gKj0mLqEtlM/blog-post.html</link><author>bhuvnesh.ad@gmail.com (भुवनेश शर्मा)</author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="http://2.bp.blogspot.com/_lilFNFkYooc/Siu3BpV6grI/AAAAAAAAAxE/s8UhL1jFITE/s72-c/save_earth.jpg" height="72" width="72" /><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">15</thr:total><feedburner:origLink>http://hindipanna.blogspot.com/2009/06/blog-post.html</feedburner:origLink></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-34531871.post-3473956755919297329</guid><pubDate>Wed, 18 Mar 2009 15:40:00 +0000</pubDate><atom:updated>2009-03-18T22:17:39.171+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">secularism</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">bjp</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">communalism</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">varun gandhi</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">ndtv</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">narendra modi</category><title>भड़काऊ कौन है अब ये एनडीटीवी से पूछना पड़ेगा ?</title><description>वरुण गांधी आजकल खिसियाहट में अपने कहे से पल्‍ला झाड़ते नजर आ रहे हैं, बातों से ज्‍यादा खिसियाहट उनके चेहरे पर नजर आती है। उनके बारे में ज्‍यादा कहने की जरूरत नहीं है सिवाय इसके कि उनका ना तो भारतीय राजनीति और बीजेपी में ही कोई वजूद है और ना ही उन्‍हें बात करने तक की समझ है। बेचारे पहले चुनाव के समय जोश में आकर-उल्‍टा सीधा कह गये तो ना तो अब निगलते बन रहा है और ना उगलते, ऐसे नादान बालक अपनी लुटिया खुद ही डुबोते हैं...यदि वे जीत भी जाएं तो भी बीजेपी में उन्‍हें कोई घास डालने से रहा। सबसे बड़ी बात है उनके भीतर भरी कुंठा, यदि उनके पिता जीवित होते तो शायद वे भारतीय राजनीति के दैदीप्‍यमान नक्षत्र व युवराज जैसे संबोधनों से नवाजे जा रहे होते...पर हाय रे किस्‍मत! ऐसा कुंठित व्‍यक्ति यदि खुद के वजूद का अहसास कराने के लिए कुछ उल्‍टा-सीधा कर बैठता है तो इसमें बेचारे का क्‍या दोष। कुंठा से भरा हर व्‍यक्ति ऐसे ही ऊटपटांग हरकत करते पाया जाता है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;खैर आज रात एनडीटीवी के न्‍यूज पॉइंट पर मुख्‍य मुद्दा यही था....बेचारे की लंगोटी को पकड़े हुए थे चैनल वाले। वैसे भी हिंदूविरोध और खासकर बीजेपी विरोध का ठेका उन्‍होंने ले ही रखा है....बेचारे कम्‍युनिस्‍टों की मजबूरी भी है वे खाते ही इसका हैं....बाकी इसके लिए पैसा पाकिस्‍तान से आये या किसी खाड़ी देश से उन्‍हें सब मंजूर है।&lt;br /&gt;चैनल के एंकर ने वरुण गांधी के बहाने एक तरफ से लपेटना शुरू किया पहले वरुण के बहाने बीजेपी की छीछालेदर शुरू की फिर बाबरी मस्जिद जैसे महान स्‍मारक के शहीद होने पे टसुए बहाए गए, फिर कल्‍याण सिंह और बाल ठाकरे को जी भरकर कोसा गया। कुल मिलाकर चुनावी मौसम में एनडीटीवी वाले जी-जान से जुटे हैं कि बीजेपी को एक भड़काऊ, फासीवादी, गंगा-जमुनी संस्‍कृति विरोधी और अंतत: चूंकि हमारा चरित्र सेक्‍युलर है इसलिए राष्‍ट्रविरोधी होने तक का सर्टिफिकेट दे दिया जाए।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;ये चांडाल कंपनी बहुत सामाजिक सरोकारों और पत्रकारिता के ऊंचे आदर्शों की बात करती है पर अब चुनाव का मौसम है तो ये सब बातें छोड़कर केवल एक खास पार्टी के खिलाफ प्रोपेगैंडा चालू है। इसके लिए अलग से इन्‍हें चुनावी बजट भी मिला होगा।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कांग्रेस ने पिछले 5 साल में अपने कितने चेले-चपाटे राष्‍ट्रीय रोजगार गारंटी योजना के जरिए लखपति-करोड़पति बना दिए इसका इनके पास कोई हिसाब किताब नहीं। उल्‍टा इनके चहेते कारत तो इस योजना को बहुत सफल मानते हैं। पिछले बीजेपी के शासन के मुकाबले इस शासन में आधारभूत-संरचना व निर्माण कार्यों पर कितना काम हुआ। सेना के आधुनिकीकरण के जो दावे किये जाते रहे वो कहां गये। कांग्रेस का हाथ आम आदमी के साथ का दावा करने वाले राहुल बाबा को आम आदमी की समझ कितनी है.....राष्‍ट्रीय मुद्दों और राष्‍ट्रीय समस्‍याओं को वो कितना समझते हैं सिवाय अपने सुनियोजित स्‍टंटों के।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इन सब बातों के बजाय पूरा ध्‍यान इस बात पर दिया जा रहा है कि नरेंद्र मोदी कितना बड़ा शैतान है....और यदि गलती से कहीं बीजेपी सत्‍ता में आ गई तो ईराक में सद्दाम हुसैन के शासनकाल से भी भयंकर कत्‍लेआम शुरू हो जाएगा....कल्‍याण सिंह के पुराने वीडियो बार-बार दिखाये जा रहे हैं और उस बहाने बीजेपी को गरियाया जा रहा है......एक साध्‍वी जिसके खिलाफ अभी तक आरोप साबित नहीं हुए और मामला चल रहा है उसका बहाना लेकर हिंदुओं को आतंकवादी होने का सर्टिफिकेट ये पहले दे ही चुके हैं....बाकी सोहराबुद्दीन जैसों के लिए भारतीय न्‍याय-व्‍यवस्‍था तक को गरिया सकते हैं....हिंदू तालिबानों से किसी भी तरह कम नहीं ऐसा भी ये एक परम मूर्ख और घटिया आदमी प्रमोद मुथालिक का उदाहरण देकर साबित कर ही चुके हैं.....&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;बाकी सेक्‍युलर और कम्‍युनिस्‍टों के लिए सब जायज है.....चाहे यासीन मलिक जैसे आतंकवादी खुलेआम मीडिया पर तकरीर करते पाये जाते हैं अभिव्‍यक्ति की स्‍वतंत्रता के नाम पर.......पर बेचारे जम्‍मू के हिंदुओं के हितों के बारे में चर्चा करने की फुर्सत इन्‍हें आज तक नहीं मिली.....इनके चहेते कम्‍युनिस्‍ट रोजाना अनगिनत बांग्‍लादेशियों को सीमापार करवाकर उनके राशनकार्ड बनवाते हों....फिर भी रवीश कुमार जैसे महान पत्रकार टीवी पर इसी चिंता में घुले हुए नजर आते हैं कि पाकिस्‍तानी कलाकारों को हिंदुस्‍तान में क्‍यों कुछ लोग भला बुरा कहते हैं...और लगे हाथ इसके खिलाफ बीजेपी और संघ परिवार जैसे तालिबानी(?)  संगठनों की भूमिका भी बतला देते हैं.....ये महान सेक्‍युलरता के झंडाबरदार लालू के समय में हुए दंगों और पासवान के बांग्‍लादेशियों के प्रति प्रेम को भूल जाते हैं क्‍योंकि वे सेक्‍युलर हैं.....असम में बांग्‍लादेशियों का हरा झंडा फहराना तक इन्‍हें मंजूर है... पर मकबूल फिदा हुसैन की प्रदर्शनी में हुए छुटपुट बवाल के खिलाफ वृंदा करात जैसी महान नेत्रियां इनके कैमरे के सामने चिल्‍लाने लगती हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;भाईयों एक दिन किसी हिंदू के मंदिर जाने या तिलक लगाने और जन्‍माष्‍टमी मनाने को भी सांप्रदायिक करार दे दिया जाएगा। वैसे भी वंदे मातरम और भारत माता की जय बोलने को तो सांप्रदायिक करार दिया ही जा चुका है......किसी को भी खुद को भारतीय होने से पहले खुद को सेक्‍युलर साबित करना होगा तभी वह इस देश में रह सकेगा.....और सेक्‍युलरिज्‍म के सर्टिफिकेट के लिए आपको रवीश कुमार, बरखा दत्‍त एण्‍ड कंपनी की शरण में जाना होगा.....बाकी यदि आप जालीदार टोपी पहनते हैं, दाड़ी बढ़ाकर रखते हैं और हिंदू आतंकवाद की बात करते हैं तो आपका काम बिना सर्टिफिकेट के भी चल जाएगा :)&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;चलूं मैं भी सेक्‍युलर होने का सर्टिफिकेट ले लूं......खुदा हाफिज :)&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/34531871-3473956755919297329?l=hindipanna.blogspot.com'/&gt;&lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/hindi-panna/~4/LRMTeH23-SQ" height="1" width="1"/&gt;</description><link>http://feedproxy.google.com/~r/hindi-panna/~3/LRMTeH23-SQ/blog-post.html</link><author>bhuvnesh.ad@gmail.com (भुवनेश शर्मा)</author><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">11</thr:total><feedburner:origLink>http://hindipanna.blogspot.com/2009/03/blog-post.html</feedburner:origLink></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-34531871.post-1828765676194401582</guid><pubDate>Mon, 23 Feb 2009 10:44:00 +0000</pubDate><atom:updated>2009-02-23T17:15:02.131+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">slumdog millionaire</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">oscar</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">ocsar awards</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">academy awards</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">mumbai</category><title>गर्व है कि हम स्‍लमडॉग से बेहतर फिल्‍में बनाते हैं</title><description>&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://1.bp.blogspot.com/_lilFNFkYooc/SaKJ2Sen29I/AAAAAAAAAwc/hqr1tScXtJ0/s1600-h/15149_slum11.jpg"&gt;&lt;img style="margin: 0px auto 10px; display: block; text-align: center; cursor: pointer; width: 400px; height: 267px;" src="http://1.bp.blogspot.com/_lilFNFkYooc/SaKJ2Sen29I/AAAAAAAAAwc/hqr1tScXtJ0/s400/15149_slum11.jpg" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5305954876762086354" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;कल तकरीबन छ: महीने बाद कोई फिल्‍म सिनेमा में जाकर देखी वो भी इसलिए कि फिल्‍म के बारे में इतना सुन रखा था कि बिना देखे रह नहीं सका.....पर लौटते समय यही बात जेहन में थी कि हम भारतीय कब बाज आयेंगे गुलामी की आदत से। स्‍लमडॉग के रिलीज से पहले और रिलीज के वक्‍त हमारे यहां विवाद हो चुके हैं पर अब जब इसे आठ ऑस्‍कर मिल चुके हैं तो सभी खुश हैं। मीडिया जश्‍न मना रहा है, कहीं इसे भारत की सफलता बताया जा रहा है, कहीं भारत का सम्‍मान।&lt;br /&gt;पर मुझे अफसोस है कि क्‍यों मैंने इस घटिया फिल्‍म को देखने के लिए पैसे खर्च किये। यदि मनोरंजन की बात है तो साउथ की एक्‍शन फिल्‍में देखकर कहीं अधिक मनोरंजन हो सकता है और यदि वास्‍तविकता या सामाजिक मुद्दे पर फिल्‍म बनाने की बात है तो इसमें मुझे ऐसी कोई बात भी नजर ही नहीं आई। नजर आया तो केवल यह कि फिल्‍म का एक और केवल एक ही उद्देश्‍य था भारत की गंदगी, सड़ी हुई व्‍यवस्‍था और लोगों की दयनीय व्‍यवस्‍था को दिखाना और फिर वाहवाही लूटना। कुछ समय पहले अमिताभ बच्‍चन ने भी इसे लेकर नाराजगी जताई थी पर लोगों ने उनकी ही आलोचना करना शुरू कर दिया और फिर जब सब अच्‍छा ही अच्‍छा हो रहा हो- रहमान अवार्ड पर अवार्ड जीते जा रहा हो, भारतीय कलाकार उस फिल्‍म का हिस्‍सा हों और हमारी प्‍यारी आमची मुंबई पर फिल्‍म बनी हो तो बस हमें लग रहा है कि हमने दुनिया फतह कर ली।&lt;br /&gt;पश्चिम में ऐसा प्रचार किया गया कि स्‍लमडॉग पहली फिल्‍म है जिसने भारत की वास्‍तविकता को सिनेमा के पर्दे पर दिखाया है। मतलब अब तक हम केवल मिथुन और शाहरुख टाइप मसाला और फूहड़ फिल्‍में ही बनाना जानते हैं और हमें एक गोरे से सीखने की जरूरत है कि फिल्‍म क्‍या होती है और कैसे व क्‍यों बनाई जाती है।&lt;br /&gt;यदि हम मुंबई की ही बात करें तो विगत समय में हमारे यहां इतनी बेहतरीन फिल्‍में फिल्‍मकारों ने बनाई हैं कि स्‍लमडॉग वाला डैनी बॉयल उनके आगे पानी भरे। इस समय मुझे कुछ बेहतरीन फिल्‍में याद आ रही हैं- चांदनी बार, पेज3, ब्‍लैक फ्रायडे, अ वेडनेसडे और मुंबई मेरी जान। इन फिल्‍मों ने वाकई वास्‍तविकता के धरातल को छुआ है अपने सही अर्थों में। सच्‍चाई ये है और सच्‍चाई वो भी है जो स्‍लमडॉग में दिखाई देती है पर उसके पीछे छिपा नजरिया ही नहीं नजर आता।&lt;br /&gt;यदि वास्‍तविकता की भी बात करें तो उस स्‍तर पर भी ये एक बचकानी फिल्‍म है। केवल मुंबई के स्‍लम्‍स, कूड़े के ढेर, गंदगी से पटे नाले, भीख मांगते बच्‍चे यही सब दिखाकर रियैलिटी का हल्‍ला मचाया जा रहा है। फिल्‍म का हीरो कैसे कौन बनेगा करोड़पति के हर सवाल का जवाब जानता है इसकी कहानी भी बहुत बचकानी सी और नाटकीय है। फिक्‍शन भी तर्कयुक्‍त होना चाहिए ना कि शाहरुख खान की 'रब ने बना दी जोड़ी टाइप'।&lt;br /&gt;मेरे ख्‍याल में यदि स्‍लमडॉग जैसी घटिया फिल्‍म को ऑस्‍कर मिलता है तो कम से कम अब तो हमें जरूर खुश होना चाहिए। स्‍लमडॉग की सफलता पर नहीं बल्कि इस पर कि हम स्‍लमडॉग से बेहतर फिल्‍में बना चुके हैं और बना रहे हैं।&lt;br /&gt;और हां वह गाना जिसके लिए रहमान को दो ऑस्‍कर मिले वाकई मुझे तो कुछ खास नहीं लगा पर ऑस्‍कर वालों को खास इसलिए लगा कि वह एक गोरे की फिल्‍म में है, जो कि केवल अपना सम्‍मान करना जानते हैं। रहमान इससे कई गुना बेहतर संगीत पहले रच चुके हैं। लगान या रंग दे बसंती के गीत ही सुन लें। पर गोरे लोगों को वही चीज पसंद आती है जिसमें हम भारतीयों की भद्द पिटे उनकी नहीं वरना लगान को ऑस्‍कर ना देने के पीछे का कारण मेरी समझ में तो नहीं आता।&lt;br /&gt;हाल फिलहाल में सुना है एक भारतीय लेखक अरविंद अडिगा को भी बुकर मिला है। पश्चिम के हाथ एक और मसाला लगा है जिसके माध्‍यम से भारत की नीचता का प्रचार किया जा सके। पश्चिमी पुरस्‍कारों की मंशा मेरे ख्‍याल से पुरस्‍कार देकर हर उस चीज का प्रचार करने की है जिससे पूरब का अपमान होता हो। वरना वास्‍तविकता ही यदि दिखाना है तो बहुत कुछ है दिखाने को।&lt;br /&gt;पर हमेशा पश्चिमी ठप्‍पा लगवाने को आतुर हम भारतीय हमेशा ऑस्‍कर को ही परम सत्‍य मानते हैं। क्‍या कोई भारतीय कह सकता है कि स्‍लमडॉग लगान से एक बेहतर फिल्‍म थी ? क्‍यों हम उस समय लगान के ऑस्‍कर में नामांकित होने पर जश्‍न मना रहे थे और पुरस्‍कार ना जीत पाने पर मायूस थे।&lt;br /&gt;कुछ भी हो स्‍लमडॉग के ऑस्‍कर मिलने के बाद एक बात अच्‍छी हुई है कि हमें इस बात पर विचार-मंथन करने का मौका मिला है कि क्‍या वाकई ऑस्‍कर जैसे टुच्‍चे पुरस्‍कारों का कोई मतलब है और जो पुरस्‍कार ऐसी दोयम दर्जे की फिल्‍म को मिला है क्‍यों ना हम सब मिलकर उसका बॉयकॉट करें और फैसला लें कि अब कोई भारतीय फिल्‍म ऐसे छोटे और ओछे पुरस्‍कार के लिए ना भेजी जाए :) ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;छायाचित्र: बीबीसी के सौजन्‍य से।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/34531871-1828765676194401582?l=hindipanna.blogspot.com'/&gt;&lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/hindi-panna/~4/j35IAGtIW_U" height="1" width="1"/&gt;</description><link>http://feedproxy.google.com/~r/hindi-panna/~3/j35IAGtIW_U/blog-post_23.html</link><author>bhuvnesh.ad@gmail.com (भुवनेश शर्मा)</author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="http://1.bp.blogspot.com/_lilFNFkYooc/SaKJ2Sen29I/AAAAAAAAAwc/hqr1tScXtJ0/s72-c/15149_slum11.jpg" height="72" width="72" /><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">11</thr:total><feedburner:origLink>http://hindipanna.blogspot.com/2009/02/blog-post_23.html</feedburner:origLink></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-34531871.post-6580410040652704141</guid><pubDate>Thu, 19 Feb 2009 16:30:00 +0000</pubDate><atom:updated>2009-02-19T23:08:32.227+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">socialism</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">global recession</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">capitalism</category><title>पूंजीवाद से चिढ़ इसलिए है</title><description>वैसे वैश्विक मंदी के दौर में जहां एक ओर सुना जा रहा है कि साम्‍यवादी विचारधारा की ओर फिर से लोग आकर्षित हुए हैं और कार्ल मार्क्‍स की किताबों की बिक्री बढ़ गई है तब पूंजीवाद जैसी व्‍यवस्‍था को गरियाना बुद्धिजीवी टाइप लोगों के लिए एक शगल हो सकता है खासकर उनके लिए जिनकी रोजी-रोटी ही पूंजीवाद के विरोध पर टिकी है ये बात अलग है कि उनकी खुद की जीवनशैली से पूंजीवाद को निकाल दिया जाए तो वे घिघियाने लगेंगे।&lt;br /&gt;पर हर किसी के लिए पूंजीवाद के विरोध के अपने कारण हैं। ज्‍यादातर लोग किसी वाद या व्‍यवस्‍था के विरोधी इसीलिए होते हैं क्‍योंकि वे उसकी विरोधी व्‍यवस्‍था के पोषक होते हैं, ऐसे में उन्‍हें तो आंख मूंदकर उसका विरोध करना होता है। होता ये भी है कि यदि आप किसी एक विचारधारा या व्‍यवस्‍था का विरोध करते हैं तो आपको खुद-ब-खुद विरोधी खेमे का समझ लिया जाता है। जैसे यदि आप कांग्रेस का विरोध करते हैं तो यकीनन आपको लोग खाकी पैंट वाला ही समझेंगे चाहे आप उनसे भी कांग्रेस जितनी ही नफरत करते हों।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;बहरहाल बिना बेकार की भूमिका बांधे सीधे मुद्दे पर आ जाते हैं। मैं कभी किसी वाद या विचारधारा का समर्थक नहीं रहा। किसी भी विचारधारा को अपना लेने के कारण मेरे ख्‍याल से हर सिस्‍टम या विचारधारा की अच्‍छी-बुरी बातों को जानने-समझने से हम महरुम रह जाते हैं। ऐसी स्थिति में हम जब कुछ देखते हैं तो उसी विचारधारा के चश्‍मे से देखते हैं जैसे मनमोहन सिंह समाजवाद के नाम से और वामपंथी पूंजीवाद के नाम से बिदकते हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;पूंजीवाद के समर्थक मानते हैं क‍ि ये एक संपूर्ण व्‍यवस्‍था है और जनता के हितों के लिए जितने प्रयास इस व्‍यवस्‍था के माध्‍यम से किये जा सकते हैं उतने किसी और से नहीं। पर वास्‍तव में जनता-जनार्दन क्‍या है पूंजीवाद में ? अपना मुनाफा बढ़ाने का एक जरिया मात्र !&lt;br /&gt;आज दोपहर में मैं एक नये बने शॉपिंग मॉल में घूम रहा था। वहां दो-चार शोरूम में मैंने लकड़ी का बना हुआ फर्श देखा। फालतू और बेवजह के लग्‍जरी सामान से बेहद चिढ़ होने के कारण मुझे बहुत बुरा लगा कि कैसे अनगिनत बेहतरीन पेड़ों को जूतों के तले रौंदे जाने के लिए फर्श में इस्‍तेमाल कर लिया जाता है। पिछले साल बीबीसी के राजेश जोशी दक्षिण अमेरिका में अमेजन के जंगलों से रिपोर्टिंग करते हुए कह रहे थे कि बड़ी तेजी से ये जंगल काटे जा रहे हैं और इसकी लकड़ी यूरोप और अन्‍य देशों में लकड़ी का सामान बनाने के लिए हो रही है। लकड़ी के सामान की जरूरत हर घर में होती है पर फर्श तक लकड़ी का बनवाने को लोग शान समझने लगे हैं। इसके पीछे की कीमत को कोई नहीं जानना चाहता। मेरा तो मानना है कि ये तो एक अपराधिक स्‍तर का उपभोक्‍तावाद है जिसमें प्रकृति के अपराधी हम खुद हैं और जैसा कि सर्वविदित है हमें एक ना एक दिन इसकी सजा मिलनी है।&lt;br /&gt;पर आज के समय में जहां हर चीज मुनाफे को ध्‍यान में रखकर की जाती है और मुनाफा ही भगवान है वहां पर्यावरण जैसी चीजों के तो कोई मायने रह ही नहीं जाते।&lt;br /&gt;टीवी पर विज्ञापन आ रहा है कि फलां परफ्यूम या डियो लगाये लौंडे के पीछे लड़कियां भाग रही हैं। जिसके पास बढि़या गैजेट्स हैं वही हीरो है। जो जितना ज्‍यादा फिजूलखर्च है उसका उतना ही जलवा है। हर कंपनी चाहती है लोग ज्‍यादा से ज्‍यादा खरीदें और ज्‍यादा से ज्‍यादा मुनाफा दें। यहां तक कि एक पूंजीपति तो ये सोचता है कि लोग पुराने का मोह से जितनी जल्‍दी मुक्‍त हों उतना अच्‍छा और जितनी जल्‍दी पुराने माल को फेंककर नया माल खरीदने आयें उतनी ही चांदी। पर इस तरह की सोच हमें ले कहां जा रही है। क्‍या हमने कभी सोचा है कि हम जो अनाप-शनाप कॉस्‍मेटिक्‍स उपयोग करते हैं उनको बनाने और उनके उपयोग करने और उपयोग के बाद जो वेस्‍ट बचता है उसको मिलाकर पर्यावरण की कितनी वाट लगाये दे रहे हैं। हमें सिखाया जाता है कि हमें क्‍यों फलां चीज खरीदनी चाहिए और क्‍यों पुराना गैजेट बेकार है और तुरंत नया खरीद लेना चाहिए और एक उपभोक्‍ता के तौर पर हम वही सब किये जा रहे हैं जो पूंजीपति हमसे कराना चाहता है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;पूंजीवाद के समर्थक कहेंगे कि ये उपभोक्‍ताओं के लिए बेहतर है क्‍योंकि इसमें उपभोक्‍ता के हाथ में चॉइस रहती है, एक स्‍वस्‍थ प्रतियोगिता होती है जिससे उपभोक्‍ता वाजिब दामों पर अपनी मनपसंद चीजें खरीदता है। पर उपभोक्‍ता की अपनी पसंद या नापंसद क्‍या हो ये तो पूंजीवाद ही तय करता है। उपभोक्‍ता के ब्रेनवॉश के लिए जो तरीके अपनाये जाने चाहिए वे सब उसे पता हैं। उसे पता है कि कैसे किसी महाफालतू चीज की जरूरत पैदा की जाए और कैसे उसे एक जरूरी चीज में तब्‍दील करके उपभोक्‍ताओं से तगड़ा मुनाफा कमाया जाए। और एक बेचारा उपभोक्‍ता है जो दिन-ब-दिन पूंजीवाद के बहकावे और अपनी सुविधा के लालच में भयंकर रूप से लालची होता जा रहा है और उपभोक्‍ता का लालच जितना ज्‍यादा बढ़ेगा उतना ही बाजार की ताकतें उसे अपने जाल में उलझाकर मुनाफा ऐंठेंगी। लाखों-करोडों टन वेस्‍ट, ई-कचरा, धुंआ पैदा होता रहे उन्‍हें इससे क्‍या। उनका मकसद तो मुनाफा है चाहे इसके लिए धरती लाइलाज बीमारियों से ग्रसित होती रहे।&lt;br /&gt;आजकल बड़े पैमाने पर लग्‍जरी आयटम्‍स की खरीदी की जाती है। ऐसे सामान जो गैरजरूरी और फालतू हैं उनका बाजार खड़ा करके एक दिखावटी समाज तैयार किया जा रहा है जो केवल दिखावे को ही सब-कुछ मानता है चाहे उसकी कितनी भी कीमत चुकानी पड़े। पर पूंजीवाद और आम ग्राहक की सुविधा के नाम पर सब चल रहा है और चूंकि सभी खुश हैं इसलिए किसे फिक्र है-सादा जीवन उच्‍च विचार जैसी बातें सुनने की।  फैक्ट्रियां दिन-रात फालतू का सामान, जिसकी वास्‍तव में कोई जरूरत नहीं है, बनाने के लिए दिन-रात धुंआ उगल रही हैं। सरकारें भी खुश हैं कि टैक्‍स ज्‍यादा इकट्ठा हो रहा है। फिर ये सब करके क्‍योटो प्रोटोकाल जैसे सिस्‍टम बनाये जाते हैं मानो सौ चूहे खाकर बिल्‍ली हज करने जाए। भई समझौता तो इस बात का होना चाहिए कि मनुष्‍य अपनी जरूरतें कम करे और फालतू सामान की खरीद से बचे पर ये नहीं होगा और क्‍योटो प्रोटोकाल जैसी नौटंकियां चलती रहेगी। आगे और भी योजनाएं बनेंगी पर मनुष्‍य का लालच कहां जाएगा। संसाधनों की कमी का हल्‍ला हर जगह मचता है पर उनके किफायत से उपयोग की बात कभी नहीं होती।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;महात्‍मा गांधी ने कहा था कि ये धरती मनुष्‍य की आवश्‍यकताओं की पूर्ति तो कर सकती है पर उसके लालच की नहीं पर पूंजीवाद तो लालच पर ही टिका है जिस दिन मनुष्‍य ने साधारण तरीके से जीना सीख लिया उस दिन ये बेमौत मर जाएगा। पूंजीवाद एक विचारशून्‍य और भेड़चाल वाले समाज के निर्माण में जुटा है और काफी हद तक वो इसमें सफल भी हो चुका है। एक आदमी जब कुछ खरीदता है तो शायद ही सोच पाता है कि वह चीज वास्‍तव में कितनी जरूरी है उसके लिए। उसे तो बस यही सिखाया जाता है कि स्‍टेटस मेंटेन करना है या शान मारनी है तो फलां चीज तो खरीदनी ही होगी।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कुल मिलाकर पूंजीवाद लालच पर टिका एक ऐसा दैत्‍य है जो सब कुछ खतम करके ही दम लेगा। मनुष्‍य के बढ़ते लालच, उपभोग की चरमसीमा उसे कहां तक ले जाएगी ये बताने की जरूरत नहीं है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;पुरानी भारतीय जीवनशैली मेरे ख्‍याल में पूंजीवाद और पूंजीवाद से धरती के लिए पैदा घनघोर संकट का विकल्‍प हो सकती है। इस पर फिर कभी चर्चा करते हैं..... फिलहाल के लिए बस।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/34531871-6580410040652704141?l=hindipanna.blogspot.com'/&gt;&lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/hindi-panna/~4/TuoBqaFCPOo" height="1" width="1"/&gt;</description><link>http://feedproxy.google.com/~r/hindi-panna/~3/TuoBqaFCPOo/blog-post.html</link><author>bhuvnesh.ad@gmail.com (भुवनेश शर्मा)</author><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">7</thr:total><feedburner:origLink>http://hindipanna.blogspot.com/2009/02/blog-post.html</feedburner:origLink></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-34531871.post-5729665914179464497</guid><pubDate>Mon, 26 Jan 2009 12:13:00 +0000</pubDate><atom:updated>2009-01-26T22:01:52.267+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">indian democracy</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">lk advani</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">indira gandhi</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">republic day</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">nehru dynasty</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">indian constitution</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">monarchy</category><title>ये गणतंत्र का तमाशा बंद करो भाई</title><description>मशहूर कवि नीरज ने अपनी कविता के माध्‍यम से आज के भारत के हालात पर कुछ यूं व्‍यंग्‍य किया है -&lt;br /&gt;'ज्‍यौं लूट लें कहार ही दुल्‍हन की पालकी, हालत वही है आज के हिंदुस्‍तान की।'&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आज देश में 26 जनवरी की सालाना रस्‍म अदायगी फिर से की गई। राजपथ पर परेड देखते हुए बहुत ही अलंकारपूर्ण भाषा में जोशीली कमेंट्री सुनकर किसी भी भारतवासी का सीना गर्व से फूल जाता होगा। पर बहुत सालों के बाद आज जानबूझकर मैंने टीवी ऑन नहीं किया परेड देखने। राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र, जम्‍मू कश्‍मीर और पूर्वोत्‍तर में सुरक्षा सख्‍त थी ऐसा बताया गया। हर दिन खौफ के साये में जीने वाले आम नागरिक के नाम पर होने वाला ये सालाना तमाशा हर साल शांति से संपन्‍न होता रहे सरकार केवल यही चाहती है शायद। बाकी दिनों में क्‍या होता है क्‍या नहीं इससे कोई मतलब नहीं। आज दिनभर बिजली कटौती भी नहीं हुई वरना पूरा बिल भरकर भी दिन-दिनभर बिजली की कटौती झेलने को आम नागरिक अभिशप्‍त है इसलिए उस पर स्‍वाधीनता या गणतंत्र दिवसों पर एहसान कर सरकार अपने कर्तव्‍य की इतिश्री कर लेती है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;जब तक कलाम एक राष्‍ट्राध्‍यक्ष की हैसियत से गणतंत्र दिवस की सलामी लेते थे तब तक बहुत सुखद लगता था कि हां ये है हमारा राष्‍ट्रपति जो वहां राजपथ पर बैठा हुआ है पर बासठ साल के बाद भी राजतंत्र की पकड़ ढीली नहीं हुई है इस देश पर। वह लगातार धीरे-धीरे गणतंत्र के टेंटुए को दबा रहा है और हम बस तमाशा देख रहे हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;लगभग साठ साल पहले हमने खुद को गणतंत्र घोषित कर ब्रिटेन की महारानी से कह दिया था कि अब हमारे भाग्‍य विधाता हम खुद ही हैं पर ये वादा जनता से नहीं बल्कि केवल उसे भुलावे में रखने के लिए किया गया था। चूंकि आंखों देखी मक्‍खी निगली नहीं जाती इसलिए जनता की आंखों के सामने पर्दा डाल दिया गया और गणतंत्र अब दूसरे राजवंश की गुलामी में आ गया। आज उस राजवंश के वारिस को खुलेआम 'युवराज' जैसे संबोधनों से नवाजा जाता है और उसके चाकर देश के सर्वोच्‍च पदों पर आसीन हैं केवल जनता को भुलावे में रखने के लिए। आज उस राजवंश की हैसियत ये है कि वो एक कुत्‍ते को भी राष्‍ट्रपति पद पर बैठा दे तो जनता उसे भी अगले साल राजपथ पर सलामी लेते देखेगी। आज राष्‍ट्रपति से लेकर प्रधानमंत्री और उसकी पूरी कैबिनेट की केवल एकमात्र योग्‍यता ये है कि उसकी निष्‍ठा देश के प्रति ना होकर एक खास परिवार के प्रति है और इसीलिए वो अपने पद पर है वरना जिन लोगों के नाम तक देश की जनता नहीं जानती थी वे ही उस पर राज कर रहे हैं और उस परिवार का वारिस आजकल ये समझने की कोशिश कर रहा है कि ये 'जनता' क्‍या होती है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;बात यहां किसी पार्टीविशेष की पक्षधरता या किसी विरोधी पक्ष की झंडाबरदारी को लेकर नहीं है। बात ये है कि पहले तो ये तय हो कि एक नेता ही देश का नेतृत्‍व करे किसी पूर्व प्रधानमंत्री की रसोई संभालने वाली या किसी के चरणों में शीष नवाने वाले ऐरे-गैरे नहीं। ऐसे थोपे गये लोग तो उन लोक और गण के गाल पर करारा तमाचा हैं जिनका आप हर साल बड़े गर्व से जश्‍न मनाते हैं। पर घोर शर्म की बात है कि ये सब नहीं हो रहा है और इस सबका ठीकरा फोड़ा जा रहा है जनता के ऊपर। पर जनता ने तो वोट देते समय किसी को ये अधिकार नहीं दिया था कि आप हम पर जिसे चाहे थोप दें हम उसे सर आंखों पर बिठा लेंगे। अब पांच साल तक वो जो भी करें उसे मजबूरन जनता को झेलना ही है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;उधर एक 81 साल का बूढ़ा भी दूल्‍हा बनने चला है। इधर भारत में 47 वर्षीय ओबामा की जीत से लोग खुश हैं वहां कबर में पैर लटकाये ये व्‍यक्ति खुद को अगला प्रधानमंत्री बता रहा है। आखिर कौन सी अपील है इसमें ? केवल इसके कि इसकी पार्टी में सबसे वरिष्‍ठ ( केवल उम्र के आधार पर ) यही व्‍यक्ति है। अटल में एक अपील थी जनता उन्‍हें पसंद करती थी। पर ये बुड्ढा तो खुद ही अपने को जनता के ऊपर थोप रहा है। हां उसकी पार्टी वर्तमान व्‍यवस्‍था का एक विकल्‍प हो सकती है पर जरूरी तो नहीं कि उसका नेतृत्‍व वही करे। क्‍या केवल उमर ही इस देश में योग्‍यता का पैमाना हो गई है। ऐसा ही है तभी शायद एक बीमार बूढ़ा, चलने फिरने से लाचार पर शातिर देश के मानव संसाधन के विकास का ठेका लिए बैठा है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;जिन शहीदों को आज मरणोपरांत सम्‍मानित किया गया। उन पर इन्‍हीं नेताओं ने जमकर की‍चड़ भी उछाला और अब वे सम्‍मानित भी हो रहे हैं। मकसद ये था कि कम से कम जनता और शायद सुरक्षा बल तो कम से कम मुगालते में रहें कि लड़ते-लड़ते मरने पर कुछ मेडल-वेडल भी मिलता है वरना हमें ( नेताओं को ) इन कीड़ो मकौड़ों से क्‍या मतलब है पर ये खामखा जनता के बीच हीरो बनेंगे तो हमें भी इनपे कीचड़ तो उछालनी ही होगी।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;हमारे सैनिक शस्‍त्रों की जो झांकियां देखकर हमारा सीना गर्व से फूलता है क्‍या हमें पता है कि वे हमारी सुरक्षा करने में पर्याप्‍त हैं भी या नहीं। कुछ समय पहले ही कैग हमारी वायुसेना की क्षमता पर सवाल उठा चुका है। आधुनिकीकरण के लिए जो सामान-संसाधन चाहिए उनकी खरीदी की फाइलें सालों से अटकी पड़ी हैं। पुलिस आधुनिकीकरण की बात की जाती है पर अब भी उनके पास अंग्रेजों के जमाने की बंदूकें हैं और उधर तीन साल पहले ही ये खुलासा हो चुका है कि स्विस बैंक में सबसे ज्‍यादा काला धन जमा करने वाला देश भारत है जिसका लगभग 1500 अरब डालर इन बैंकों में जमा है फिर भी दुनिया के एक-तिहाई भूखे भारत में रहते हैं। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;द ग्रेट नेहरु डायनेस्‍टी की वारिसान इंदिरा गांधी ने अपने समय में गरीबी हटाओ का नारा दिया था और गरीबों के लिए इंदिरा आवास योजना जैसे कार्यक्रम बनाये पर आज राजधानी दिल्‍ली तक में गरीबों के लिए बनाये आशियाने चुपचाप दलालों-नेताओं द्वारा दबा लिये जाते हैं तो देश में एक आदमी के जिंदा रहने की जद्दोजहद कितनी कठिन होगी। इतने विरोधाभासों के बीच इन प्रतीकों को पकड़े रहना कम से कम मुझे तो बहुत हास्‍यास्‍पद प्रतीत होता है। हम कब तक ऐसे भुलावे और दिखावे‍ में जियेंगे। गणतंत्र दिवस और स्‍वाधीनता दिवस मनाना सभी चाहते हैं पर पहले हम अपने संविधान को तो खोलकर देखें कि उसमें जो कल्‍याणकारी राज्‍य का नारा दिया गया है उसके लक्ष्‍यों की दिशा में हम कितना आगे बढ़े इन साठ सालों में।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/34531871-5729665914179464497?l=hindipanna.blogspot.com'/&gt;&lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/hindi-panna/~4/2KUxysoBJJc" height="1" width="1"/&gt;</description><link>http://feedproxy.google.com/~r/hindi-panna/~3/2KUxysoBJJc/blog-post_26.html</link><author>bhuvnesh.ad@gmail.com (भुवनेश शर्मा)</author><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">6</thr:total><feedburner:origLink>http://hindipanna.blogspot.com/2009/01/blog-post_26.html</feedburner:origLink></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-34531871.post-3053317902351825049</guid><pubDate>Sun, 18 Jan 2009 14:53:00 +0000</pubDate><atom:updated>2009-01-18T23:05:30.269+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">pm</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">lk advani</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">gujrat</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">development</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">bjp</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">national leader</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">leadership</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">narendra modi as a prime minister</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">modi</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">narendra modi</category><title>आखिर मोदी इतने करिश्‍माई क्‍यों हैं</title><description>&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://2.bp.blogspot.com/_lilFNFkYooc/SXNoN6qFHiI/AAAAAAAAAsU/KXMaMlW_TyY/s1600-h/NarendraModi-HindustanTimes.jpg"&gt;&lt;img style="margin: 0pt 10px 10px 0pt; float: left; cursor: pointer; width: 224px; height: 320px;" src="http://2.bp.blogspot.com/_lilFNFkYooc/SXNoN6qFHiI/AAAAAAAAAsU/KXMaMlW_TyY/s320/NarendraModi-HindustanTimes.jpg" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5292688575383805474" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;केरल से माकपा सांसद एपी अब्‍दुल्‍ला कुट्टी को गुजरात के मुख्‍यमंत्री नरेंद्र मोदी के विकास के मॉडल की तारीफ करना महंगा पड़ गया, जब उन्‍हें अपने बयान के कारण &lt;a href="http://www.bbc.co.uk/hindi/regionalnews/story/2009/01/090117_kutty_modi_cpm_vv.shtml"&gt;पार्टी से निलंबित&lt;/a&gt; कर दिया गया। कट्टर भाजपा विरोधी और मोदी की मुखालफत करने में हमेशा मुखर रहने वाली माकपा को ये सहन नहीं हुआ कि उनका ही एक सांसद मोदी की तारीफ कर रहा है। उधर उद्योगपतियों अनिल अंबानी व सुनील भारती मित्‍तल द्वारा मोदी को प्रधानमंत्री पद के लिये प्रोजेक्‍ट करने संबंधी मामला भी गर्म है। मीडिया पिली हुई है भाजपा नेताओं से सफाई मांगने। कुल मिलाकर जो भी हो मोदी उत्‍तरोत्‍तर विवादों के केंद्र में रहकर और विवादों से ऊपर उठकर राष्‍ट्रीय राजनीति के क्षितिज पर चमकने की पूरी तैयारी में जुटे हैं। हालांकि उन्‍होंने भी कहा है कि &lt;a href="http://www.bbc.co.uk/hindi/regionalnews/story/2009/01/090118_modi_advani_ac.shtml"&gt;आडवाणी ही प्रधानमंत्री पद के उम्‍मीदवार&lt;/a&gt; हैं और इस बारे में कोई विवाद नहीं है।&lt;br /&gt;जहां तक प्रधानमंत्री पद का सवाल है वे काफी समय से इसकी चर्चा के केंद्र में रहे हैं और उनके विरोधी इसे नकारते रहे हैं पर हालिया प्रकरण से उनकी इस दावेदारी को और बल मिला है और उनकी स्‍वीकार्यता राष्‍ट्रीय स्‍तर के नेता के तौर पर बढ़ी है।&lt;br /&gt;मोदी के बारे में उनके विरोधियों द्वारा कहा जाता है कि गुजरात के बाहर उनका कोई कद नहीं है, वे कट्टर हिंदूवादी और अल्‍पसंख्‍यकविरोधी हैं पर इन सब विवादों के बावजूद पिछले काफी समय से उनकी स्‍वीकार्यता बढ़ती ही गई है और इसमें बहुत बड़ा हाथ उनके विकास के एजेंडे का है। एक मुख्‍यमंत्री के तौर पर उनकी छवि पाक-साफ है उन पर भ्रष्‍टाचार का कोई आरोप नहीं है। सबसे बड़ी बात है गुजरातियों का उनमें विश्‍वास। आज हिंदुस्‍तान का कौन सा प्रदेश है जहां का मुख्‍यमंत्री नरेंद्र मोदी की ही तरह अपने प्रदेश में लोकप्रिय है। मायावती प्रधानमंत्री बनने की बात करती हैं पर क्‍या उत्‍तर प्रदेश का एक आम नागरिक निर्विवाद रूप से उन्‍हें अपना नेता मानता है ? ऐस में देश का नेतृत्‍व कैसे होगा। सही बात तो ये है कि अटलजी के बाद अब तक देश में कोई राष्‍ट्रीय स्‍तर का नेता पैदा नहीं हो सका है जो हैं भी उनकी छवि और स्‍वीकार्यता राष्‍ट्रीय स्‍तर का नेता होने लायक नहीं भले ही वे आडवाणी क्‍यों ना हों।&lt;br /&gt;जहां तक धर्मनिरपेक्षता की बात है जनता की समझ में अब आने लगा है कि धर्मनिरपेक्षता की ढपली बजाते रहने वालों का ही दामन इस मामले में सबसे दागदार है। हालांकि प्रोपेगैंडा करने में उन्‍हें महारत हासिल है। वरना मोदी द्वारा गांधीनगर में मंदिरों को तोड़ा जाना उनको नजर नहीं आता जबकि हिंदुस्‍तान में कहीं भी किसी भी दूसरे धर्म के स्‍थलों पर एक ईंट भी उखाड़े जाने पर ये हंगामा बरपा देने के लिए तैयार बैठे हैं।&lt;br /&gt;मोदी साथ सबसे बड़ी बात है कि उनके समर्थक उनके कट्टर समर्थक हैं और विरोधी धुरविरोधी। धीरे-धीरे जनमानस के दिमाग में ये बात बैठ रही है कि एक विकसित प्रदेश का मुख्‍यमंत्री वास्‍तव में एक विकासशील देश को प्रगति के रास्‍ते पर ले जा सकता है। उनके ऊर्जावान भाषणों में जनमानस को प्रभावित करने की कला है। वे मुद्दों पर स्‍पष्‍ट राय रखते हैं और सरल व सहज संप्रेषण कला उनको दूसरों से बेहतर वक्‍ता बनाती है। अभी हाल ही में मध्‍यप्रदेश के चुनावों के समय शहर में हुई आमसभा में एक गुजराती के मुख से हिंदी में जोरदार भाषण सुनकर बहुत प्रभावित हुआ। उनका व्‍यक्तित्‍व वाकई एक नेता का सा है। वरना आजकल चारों ओर चोर, दलाल, दे शद्रोही नेता बने बैठे हैं। यहां तक कि देश का वर्तमान प्रधानमंत्री तक जब भाषण देता है तो लगता है अपनी ड्यूटी बजा रहा है कमोबेश यही स्थिति भाजपा के भावी प्रधानमंत्री की है और वे अपने दम पर भाजपा को जिता भी पायेंगे इसके कोई आसार नजर नहीं आ रहे।&lt;br /&gt;मोदी के विरोधियों को अन्‍य मतभेदों से परे हटकर इस बात को तो स्‍वीकार करना ही होगा कि अन्‍य प्रदेशों की बजाय गुजरात में संभावनाएं ज्‍यादा नजर आती हैं, उद्योगपति वहां निवेश कर रहे हैं और जनता में उनकी लोकप्रियता निर्विवाद है। वरना विकास को साथ लिये बिना कोई भी नेता इतने समय तक कुर्सी पर काबिज नहीं रह सकता और लो‍कप्रिय नहीं बना रह सकता। ये मोदी ही हैं जिन्‍होंने ये कहने की हिम्‍मत दिखाई कि उन्‍हें केंद्र से एक पैसा नहीं चाहिए बशर्ते उनके प्रदेश से केंद्र को जो टैक्‍स जाता है वो ना मांगा जाए जबकि दूसरे प्रदेशों के मुख्‍यमंत्री कर्जों में डूबे रहने और केंद्र से पैकेज की मांग करने के लिए जाने जाते हैं।&lt;br /&gt;आतंकवाद के मुद्दे और अन्‍य राष्‍ट्रीय मुद्दों पर अपनी बेबाक राय सामने रखना भी राष्‍ट्रीय स्‍तर के नेताओं का ही शगल है। जो भी हो नरेंद्र मोदी भले ही आगामी चुनावों में प्रधानमंत्री ना बन सकें पर राष्‍ट्र का नेतृत्‍व करने की ऊर्जा उनमें है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/34531871-3053317902351825049?l=hindipanna.blogspot.com'/&gt;&lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/hindi-panna/~4/c49h-cDa-xw" height="1" width="1"/&gt;</description><link>http://feedproxy.google.com/~r/hindi-panna/~3/c49h-cDa-xw/blog-post.html</link><author>bhuvnesh.ad@gmail.com (भुवनेश शर्मा)</author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="http://2.bp.blogspot.com/_lilFNFkYooc/SXNoN6qFHiI/AAAAAAAAAsU/KXMaMlW_TyY/s72-c/NarendraModi-HindustanTimes.jpg" height="72" width="72" /><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">6</thr:total><feedburner:origLink>http://hindipanna.blogspot.com/2009/01/blog-post.html</feedburner:origLink></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-34531871.post-4519782648263306372</guid><pubDate>Sun, 30 Nov 2008 16:27:00 +0000</pubDate><atom:updated>2008-11-30T22:54:01.427+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">terrorism</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">mahesh bhatt</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">india tv</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">satire</category><title>आतंकियों डरो मत महेश भट्ट और इंडिया टीवी हैं ना</title><description>भारत के महान मानवाधिकारवादी, अल्‍पसंख्‍यकों के मसीहा, पाकिस्‍तान-भारत मैत्री और सदभाव के स्‍वयंभू ठेकेदार, सेक्‍युलरिज्‍म नामक धर्म के पैगंबर,  हिंदी फिल्‍म इंडस्‍ट्री के इकलौते प्रवक्‍ता, सिनेमा के पर्दे पर अश्‍लीलता और नीचता की नई इबारतें रचने वाले महान फिल्‍मकार जिनके एहसानों तले भारत ही नहीं पाकिस्‍तान की जनता भी दबी हुई है इस बार फिर से मीडिया की सुर्खियां बनने की जुगत में कामयाब हो गए...वैसे इस काम में और शायद इसी काम में उनको महारथ हासिल है.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इस बार वे &lt;a href="http://www.bbc.co.uk/hindi/entertainment/story/2008/11/081130_bhat_militant_pp.shtml"&gt;बचाव में उतरे हैं&lt;/a&gt; देश के ही एक महान मीडिया चैनल इंडिया टीवी के..जिसके बारे में कुछ भी कहना स्‍वयं राम के सामने उनके चरित्र का गुणगान करना होगा......भारत के ही एक और महान सपूत श्री श्री 1008 सननानानंद रजत शर्माजी जो कि इंडिया टीवी चैनल चलाते हैं और उनका दावा है कि ये एक न्‍यूज चैनल है.....चलिए मान लिया. तो हमारे महेश भट्टजी जिन्‍होंने पूरी फिल्‍म इंडस्‍ट्री, सेक्‍युलरिस्‍ट जमात की तरफ से बाइट देने का ठेका लिया हुआ है इस बार इंडिया टीवी के बचाव में उतरे हैं.....वाकया कुछ यों है कि कुछ हमारे पाकिस्‍तानी भाई(महेश भट्ट साहब ऐसे ही बोलते हैं) ताज होटल में आए हुए थे ये बात अलग है कि उनकी नादानी से कुछ लोगों की जानें चली गईं....पर हमारा तो फर्ज बनता है न कि उनकी भी बात सुनी जाए उनका भी पक्ष देखा जाए...आखिर मानवता भी कोई चीज है....सो हमारे चपड़गंजू रजत शर्माजी का चैनल इसी स्पिरिट को दर्शाने के लिए उनकी बातचीत दिखाता रहा....भई क्रेडिट भी तो लेना था कि देशवासियों तुम भले इस चैनल की छीछालेदर करते रहो पर हमारे आतंकी भाई भी यही चैनल देखते हैं और इसी से बातें करते हैं ....तुम भले ही हमपर थू-थू करो....सो खूब बातचीत हुई आतंकियों से...सर्टिफिकेट मिल गया कि सबसे भरोसेमंद चैनल यही है भले देशवासियों के लिए न सही आतंकियों के लिए ही सही&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अब समस्‍या यह है कि सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने चैनल वालों को नोटिस पकड़ा दिया है कि आतंकियों से बातचीत क्‍यों की गई और उनकी जायज-नाजायज मांगें जो भी होतीं उनके लिए एक प्‍लेटफार्म क्‍यों उपलब्‍ध कराया गया..... इस पर हमारे महेश भट्ट साहब को कड़ा एतराज है. उनका कहना है कि चरमपंथियों को प्‍लेटफार्म देने में कोई बुराई नहीं है और ना ही ये गुनाह है...दावा तो उनका यहां तक है कि इंडिया टीवी ने जिम्‍मेदार पत्रकारिता की है....कैसी बात कर रहे हैं भट्ट साहब ? तो क्‍या अब तक इंडिया टीवी गैरजिम्‍मेदार पत्रकारिता कर रहा था ? पत्रकारिता का तो पट्टा ही इन्‍होंने लिखाया हुआ है साहब. ये जो भी करें वही प‍त्रकारिता है...रोज ही पत्रकारिता की नयी परिभाषायें गढ़ी जाती हैं यहां....आखिर आप जैसे मंजे हुए बतोलेबाजों के लिए भी तो एक यही प्‍लेटफार्म तो मुफीद है&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;खैर मुद्दे पर आते हैं भट्ट साहब आतंकियों को प्‍लेटफार्म देने उन्‍हें अपनी बात कहने की छूट देने की वकालत कर रहे हैं...मेरे ख्‍याल में भारत सरकार को इंडिया टीवी और महेश भट्ट की अगुवाई में एक समिति बना देनी चाहिए....जिन्‍हें आतंकियों की भावी योजनाओं और उनके बारे में जानकारी प्रसारित करने का ठेका मिलना चाहिए...आतंकियों से बात कब, कैसे और कहां करनी है इसका इंतजाम भट्ट साहब खुद कर लेंगे आखिर हर हफ्ते उनकी पाकिस्‍तान सैर जो होती है...एक तरह से वह उनका दूसरा घर ही है....जितना प्‍यार उन्‍हें पाकिस्‍तान से है उतना प्‍यार तो उन्‍हें अपनी फिल्‍मों की हीरोइनों पर भी नहीं आता होगा...वैसे भी आजकल ये डिपार्टमेंट उनका भांजा इमरान देखता है....तो ऐसा हो कि हर हफ्ते भट्ट साहब जब भी पाकिस्‍तान जाएं वहां से आतंकियों से उनके भावी कारनामों की जानकारी लेकर लौटें और साथ में उनकी बाइट भी.......फिर इंडिया टीवी वाले जोर शोर से दिखाएं कि हमारे पास है आतंकियों की योजना का एक्‍सक्‍लूसिव.....इधर जनता उसे सोप ओपेरा की तरह टीवी पर देखे उधर गृहमंत्रालय कहे कि हमारे पास ऐसी कोई जानकारी नहीं है....होगी भी कैसे इंडिया टीवी के पास सब कुछ एक्‍सक्‍लूसिव है....दो-चार दिन बाद जब सोनिया मैडम पीएम की चापलूसी से थक जाएं तो कहें जाओ जाकर देखो क्‍या हो रहा है और तब उन्‍हें खयाल आए कि 10 जनपथ के बाहर भी एक दुनिया है  और आनन-फानन में वे भावी घटनास्‍थल वाली जगह पर हाईअलर्ट कर दें और कहें कि हम आतंकियों के मंसूबों को सफल नहीं होने देंगे.....और इसके बाद आतंकी आराम से किसी दूसरे शहर में अपने कारनामों को अंजाम देकर निकल जाएं.....है ना एकदम फुलप्रूफ प्‍लान.....आतंकियों अब तो आप भट्ट साहब की शरण में चले ही जाईये&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/34531871-4519782648263306372?l=hindipanna.blogspot.com'/&gt;&lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/hindi-panna/~4/-ZcqSkPf3UM" height="1" width="1"/&gt;</description><link>http://feedproxy.google.com/~r/hindi-panna/~3/-ZcqSkPf3UM/blog-post.html</link><author>bhuvnesh.ad@gmail.com (भुवनेश शर्मा)</author><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">9</thr:total><feedburner:origLink>http://hindipanna.blogspot.com/2008/11/blog-post.html</feedburner:origLink></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-34531871.post-5850844183833275375</guid><pubDate>Wed, 17 Sep 2008 12:57:00 +0000</pubDate><atom:updated>2008-09-17T21:05:53.871+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">big brother</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">shilpa shetty</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">monica bedi</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">indian media</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">big boss</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">rahul mahajan</category><title>मोनिका बेदीजी हम आपको नमन करते हैं</title><description>आजकल छोटे पर्दे पर एक चैनल पर बिग बॉस का प्रसारण हो रहा है पर हल्‍ला हर चैनल पर मचा हुआ है। कुछेक चैनल जिनका काम बस &lt;span style="color: rgb(51, 0, 51); font-style: italic; font-weight: bold;"&gt;सेलेब्रिटी &lt;/span&gt;&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://2.bp.blogspot.com/_lilFNFkYooc/SNEjCBt2swI/AAAAAAAAAlM/wZvdse8MnAM/s1600-h/1.jpeg"&gt;&lt;img style="margin: 0pt 10px 10px 0pt; float: left; cursor: pointer;" src="http://2.bp.blogspot.com/_lilFNFkYooc/SNEjCBt2swI/AAAAAAAAAlM/wZvdse8MnAM/s320/1.jpeg" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5247013558590812930" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;span style="color: rgb(51, 0, 51); font-style: italic; font-weight: bold;"&gt;गॉसिप जैसे महत्‍वपूर्ण राष्‍ट्रीय विषयों&lt;/span&gt; को दिखाने का है उनके अलावा हमारे &lt;span style="font-style: italic; font-weight: bold;"&gt;लोकतंत्र के चौथे स्‍तंभ का &lt;/span&gt;&lt;span style="font-style: italic; font-weight: bold;"&gt;पट्टा भी जिन्‍होंने लिखाया हुआ है&lt;/span&gt;  वे सब मिलकर बिग बॉस के घर मे बंद लोगों की बातें, उनके झगड़े, उनके फैशन, उनके अफेयर जैसी बातों को चटखारा ले-लेकर दिन-रात दिखाने में लगे हैं। ऐसा दिखाया जा रहा है मानो इस समय देश में एक बहुत ही महान राष्‍ट्रीय उत्‍सव चल रहा है जिसके बारे में मीडिया वालों का दायित्‍व बनता है कि उसकी पल-पल की अपडेट जनता तक पहुंचाए।&lt;br /&gt;शिल्‍पा शेट्टी जिन्‍होंने विदेश में जाकर भारत की महानता का परचम लहराया जिससे कि स्‍वामी विवेकानंद तक की उपलब्धियां हमें छोटी लगने लगती हैं, इस शो को होस्‍ट कर रही हैं। आखिर बिग ब्रदर के घर में अपनी ऐसी-तैसी कराकर और कुछ टसुए बहाकर इस बिल्‍ली के भागों ऐसा छींका फूटा कि वो अब तक साथ निभा रहा है। पर धन्‍य है भारतीय परंपरा जो हर विदेशी चीज को ऐसे अपनाती है जिससे ब्रिटेनवासियों को अब तक गर्व होता होगा कि हम भले अब उनके शासक नहीं पर दिल से वे खुद को हमारा गुलाम ही मानते हैं तभी तो जेड गुडी जिसके बारे में ना जाने बिग ब्रदर के समय क्‍या-क्‍या लिखा गया था, जब भारत में आती है तो पूरा मीडिया उसके सामने ऐसे बिछ जाता है जैसे स्‍वयं महारानी एलिजाबेथ अपनी रियाया को दर्शन देकर धन्‍य करने निकली हों।&lt;br /&gt;रियेलिटी शोज में कितनी रियेलिटी होती है यह किसी से छिपा नहीं है। कुछ झगड़ालू और विवादास्‍पद छवि के लोगों को इकट्ठा कर एक घर में बंद कर दो और फिर चटखारे ले-लेकर उनकी गंदी हरकतों को दिखा-दिखाकर टीआरपी बटोरो। कहने की जरूरत नहीं कि ऐसे शोज में सभी कुछ पहले से फिक्‍स होता है।&lt;br /&gt;सो इस बार बिग ब्रदर के घर में ऐसे सेलेब्रिटी (मीडिया ऐसा मानता है जनता नहीं ) बुलाये गये &lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://1.bp.blogspot.com/_lilFNFkYooc/SNEjbypuioI/AAAAAAAAAlU/al0ezYwg_xQ/s1600-h/2.jpg"&gt;&lt;img style="margin: 0pt 0pt 10px 10px; float: right; cursor: pointer;" src="http://1.bp.blogspot.com/_lilFNFkYooc/SNEjbypuioI/AAAAAAAAAlU/al0ezYwg_xQ/s320/2.jpg" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5247014001223568002" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;जिनकी महानता का वर्णन सूरज को दिया दिखाने जैसा होगा। इनमें हैं राहुल महाजन, मोनिका बेदी जैसी राष्‍ट्रीय हस्तियां, ऐसी पुण्‍यात्‍माएं जिनके पुण्‍यकर्मों का लेखा-जोखा खोलने की यहां जरूरत नहीं वैसे भी कहा जाता है कि प्रतिभा किसी तारीफ की मोहताज नहीं होती सो इन जैसे प्रतिभाशाली और महान विभूतियों को बिग बॉस के अन्‍य प्रतिभागियों से ज्‍यादा महत्‍व देना निहायत जरूरी है।&lt;br /&gt;कुछ समय पहले शायद भारत-श्रीलंका क्रि‍केट सीरीज के ही दौरान बीच-बीच में बिग ब्रदर के विज्ञापन दिखाये जाते थे। जिनमें ये दोनों बड़ी मासूम सी सूरत बनाकर खुद को ही नैतिकता का सर्टिफिकेट देते दिखाई देते थे। मोनिका बेदीजी का कहना था कि उन्‍होंने इतने कष्‍ट सहे, इतनी मुश्किलें उनके सामने आईं फिर भी वे हिम्‍मत नहीं हारीं और डटकर खड़ी रहीं और जैसा कि किताबों में बच्‍चे पढ़ते हैं कि अंत में सच्‍चाई की जीत होती है कुछ वैसे ही उनको भी जीत मिली और जेल से बाहर अब वे आजाद हैं।&lt;br /&gt;राहुल महाजन कहां पीछे रहने वाले थे। एक समय भारत के सबसे बड़े दलाल रहे व्‍यक्ति का यह सपूत भी चिल्‍ला-चिल्‍लाकर कह रहा था कि उसने भी जीवन में कुछ कम कष्‍ट नहीं सहे, उसको भी बुरा समय देखना पड़ा, उसने भी मुंबई की बसों में धक्‍के खाए। लग रहा था कि जनता उसे उसके सुकर्मों का सर्टिफिकेट दे ना दे, वह खुद इसमें सक्षम है और खुद को सर्टिफिकेट देने के लिए उसे किसी दूसरे की जरूरत नहीं है। हाय भगवान हमें भी ऐसे बुरे दिन दिखाए और फिर हजारों करोड़ के कालेधन का एकमात्र वारिस बनने के लिए कुछेक कष्‍ट सहने में कोई बुराई नहीं है।&lt;br /&gt;कुल मिलाकर यह साबित करने की कोशिश की जा रही है कि उक्‍त दोनों ही लोग बेचारे इस गलत सिस्‍टम के मारे हैं। राहुल महाजन जैसे बेचारों को अदालतों के चक्‍कर काटने पड़ते हैं अरबपति होकर तो ये तो भाई सरासर जुलम है। हमारे पास इतना पैसा हो तो हम अदालत, पुलिस, सिस्‍टम सबको खरीद लें। पर बेचारे राहुल को कितना कष्‍ट भोगना पड़ा होगा इसकी तो बस कल्‍पना ही की जा सकती है। और मोनिका बेदीजी उनकी मासूमियत पर तो बस मर-मिटने को जी चाहता है। बेचारी कैसी रोनी सूरत बनाकर रोज कहती फिरती हैं कि वे अबू सलेम के बारे में कुछ नहीं जानतीं ना ही उससे उनका कोई संपर्क है। सही है जी एक आतंकवादी की रखैल होकर उन्‍हें इतनी फुर्सत ही कहां मिली होगी कि वे उसके बारे में कुछ जानें-समझें। फिर भी लोग अब तक शक करते हैं कि उनके अबू सलेम से संबंध हैं। कैसे इस देश के लोग एक बेचारी अबला के चरित्र पर कीचड़ उछालते हैं शर्म आनी चाहिए उन्‍हें और अब उन्‍हें जो फिल्‍मों के आफर मिल रहे हैं वे तो बस उनकी महान अभिनय प्रतिभा के कारण हैं।&lt;br /&gt;मोनिकाजी आप वाकई में अब प्रेरणा का स्रोत बन चुकी हैं ऐसे देश में जहां अब भी पैसे तथा पहुंच होने के बावजूद सिस्‍टम को ना खरीद सकने वाले लोगों के लिए जो बेचारे अदालत के चक्‍कर काट-काटकर परेशान हैं और इस कारण उन्‍हें जो कष्‍ट भोगने पड़ रहे हैं उसका अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता। मोनिकाजी आप ही उन्‍हें कुछ मार्ग दिखाएं। आज के युग में आप ही उनकी तारणहार हैं। ऐसे प्रेरणादायी व्‍यक्तित्‍व को हमारा नमन।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/34531871-5850844183833275375?l=hindipanna.blogspot.com'/&gt;&lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/hindi-panna/~4/RTITtHBLHR4" height="1" width="1"/&gt;</description><link>http://feedproxy.google.com/~r/hindi-panna/~3/RTITtHBLHR4/blog-post_9280.html</link><author>bhuvnesh.ad@gmail.com (भुवनेश शर्मा)</author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="http://2.bp.blogspot.com/_lilFNFkYooc/SNEjCBt2swI/AAAAAAAAAlM/wZvdse8MnAM/s72-c/1.jpeg" height="72" width="72" /><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">8</thr:total><feedburner:origLink>http://hindipanna.blogspot.com/2008/09/blog-post_9280.html</feedburner:origLink></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-34531871.post-7319776880966364286</guid><pubDate>Wed, 17 Sep 2008 11:46:00 +0000</pubDate><atom:updated>2008-09-17T17:31:51.787+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">amazing pics</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">photography</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">fun</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">funny photos</category><title>फोटोग्राफी या संयोग ?</title><description>&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://2.bp.blogspot.com/_lilFNFkYooc/SNDxO5UAGvI/AAAAAAAAAkU/v8eFXhZOV30/s1600-h/1.jpeg"&gt;&lt;img style="margin: 0px auto 10px; display: block; text-align: center; cursor: pointer;" src="http://2.bp.blogspot.com/_lilFNFkYooc/SNDxO5UAGvI/AAAAAAAAAkU/v8eFXhZOV30/s400/1.jpeg" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5246958804091804402" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://4.bp.blogspot.com/_lilFNFkYooc/SNDxPMthyrI/AAAAAAAAAkc/iuY_cM4JQSk/s1600-h/2.jpeg"&gt;&lt;img style="margin: 0px auto 10px; display: block; text-align: center; cursor: pointer;" src="http://4.bp.blogspot.com/_lilFNFkYooc/SNDxPMthyrI/AAAAAAAAAkc/iuY_cM4JQSk/s400/2.jpeg" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5246958809299143346" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://4.bp.blogspot.com/_lilFNFkYooc/SNDxPSbEKeI/AAAAAAAAAkk/F25v3tlbfUQ/s1600-h/3.jpeg"&gt;&lt;img style="margin: 0px auto 10px; display: block; text-align: center; cursor: pointer;" src="http://4.bp.blogspot.com/_lilFNFkYooc/SNDxPSbEKeI/AAAAAAAAAkk/F25v3tlbfUQ/s400/3.jpeg" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5246958810832316898" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://4.bp.blogspot.com/_lilFNFkYooc/SNDxPT7MyeI/AAAAAAAAAks/MnB6ACUcpWs/s1600-h/4.jpeg"&gt;&lt;img style="margin: 0px auto 10px; display: block; text-align: center; cursor: pointer;" src="http://4.bp.blogspot.com/_lilFNFkYooc/SNDxPT7MyeI/AAAAAAAAAks/MnB6ACUcpWs/s400/4.jpeg" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5246958811235535330" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://3.bp.blogspot.com/_lilFNFkYooc/SNDxPljKKrI/AAAAAAAAAk0/nMXcwkXqf4Y/s1600-h/5.jpeg"&gt;&lt;img style="margin: 0px auto 10px; display: block; text-align: center; cursor: pointer;" src="http://3.bp.blogspot.com/_lilFNFkYooc/SNDxPljKKrI/AAAAAAAAAk0/nMXcwkXqf4Y/s400/5.jpeg" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5246958815966538418" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://4.bp.blogspot.com/_lilFNFkYooc/SNDxD-hm_mI/AAAAAAAAAkM/ki038gtVykc/s1600-h/6.jpeg"&gt;&lt;img style="margin: 0px auto 10px; display: block; text-align: center; cursor: pointer;" src="http://4.bp.blogspot.com/_lilFNFkYooc/SNDxD-hm_mI/AAAAAAAAAkM/ki038gtVykc/s400/6.jpeg" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5246958616512495202" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/34531871-7319776880966364286?l=hindipanna.blogspot.com'/&gt;&lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/hindi-panna/~4/tny-IpuC6LI" height="1" width="1"/&gt;</description><link>http://feedproxy.google.com/~r/hindi-panna/~3/tny-IpuC6LI/blog-post_17.html</link><author>bhuvnesh.ad@gmail.com (भुवनेश शर्मा)</author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="http://2.bp.blogspot.com/_lilFNFkYooc/SNDxO5UAGvI/AAAAAAAAAkU/v8eFXhZOV30/s72-c/1.jpeg" height="72" width="72" /><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">9</thr:total><feedburner:origLink>http://hindipanna.blogspot.com/2008/09/blog-post_17.html</feedburner:origLink></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-34531871.post-4104158548403971342</guid><pubDate>Tue, 16 Sep 2008 12:55:00 +0000</pubDate><atom:updated>2008-09-16T22:55:29.710+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">communal harmony</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">terrorism</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">secularism</category><title>तो भाड़ में जाए ऐसा सांप्रदायिक सौहार्द</title><description>हद कर रखी है इस देश में सांप्रदायिक सद्भाव की माला जपने वालों ने। रोज-रोज एक ही बात सुनने को मिलती है कि आतंकवादी अपने मकसद में कभी कामयाब नहीं होंगे, आप सांप्रदायिक सदभाव बनाये रखें, शांति भंग ना करें। अरे बेशर्म नेताओं शांति तो तुम्‍हारे कारण भंग हो गई है इस देश की। भैया आतंकवादी तो रोज ही अपने मकसद में कामयाब हो रहे हैं पर आपको शायद इस बात का बहुत गम है कि ये हिंदू-मुस्लिम आपस में लड़ काहे नहीं रहे। इन सेक्‍युलर कहलाने वालों को इस बात से कोई मतलब नहीं है कि रोज कितने लोग मर रहे हैं इन्‍हें तो बस सांप्रदायिक सदभाव की पड़ी है। हद है भाई ! ऐसा कहकर, लिखकर हमारी सरकार, मीडिया, सेक्‍युलर जमात साबित क्‍या करना चाहती है। यही ना कि असल में हम सभी हिंदुस्‍तानी सांप्रदायिक हैं, हिंसक हैं, दूसरों के खून के प्‍यासे हैं और हम मार्ग ना दिखायें तो ये जंगली लोग आपस में मर-कटें।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;जबकि आंखें खोलकर देखने वाला व्‍यक्ति भी आसानी से समझ सकता है कि लंबे समय से हिंदू और मुसलमान इस देश में साथ रहते आए हैं और अब भी उनके इतने गहरे अंतर्संबंध हैं कि उन्‍हें एक-दूसरे से अलग नहीं किया जा सकता। हालांकि धर्म और सियासत ने हमेशा ही दोनों के बीच खाई को चौड़ा करने का प्रयास किया है और उनके बीच झगड़े भी होते रहे हैं पर हर बम धमाके के बाद एक ही माला जपना जबकि एक आम आदमी को जिंदगी की जद्दोजहद से कहां इतनी फुर्सत कि सांप्रदायिक सदभाव बिगाड़ने के पुनीत कार्य में लग जाए।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;जब भी कोई बड़ा आतंकवादी हमला होता है तो हर बार सांप्रदायिक सदभाव का भोंपू फुल आवाज में बजने लगता है। पर आज तक मेरी समझ में ये बात नहीं आई कि आतंकवादी घटनाओं का सांप्रदायिक सदभाव से क्‍या लेना-देना है। जबकि लंबे समय से घटित हो रही आतंकी वारदातों के बावजूद ये साबित हो चुका है कि सांप्रदायिक सदभाव तो नहीं बिगड़ता अव्‍वल इससे नेताओं को बड़ा कष्‍ट होता है कि कहीं कोई सांप्रदायिक सदभाव बिगड़े और हम वोट बैंक का नंगा नाच शुरू करें। इन नेताओं की बात सुनकर तो ऐसा लगता है कि हिंदुस्‍तानियों पर कोई और काम रह ही नहीं गया है बजाय सांप्रदायिक सदभाव बिगाड़ने के। अरे भाई हमको कोई काम-धाम है कि नहीं, हमारे घरों में बाल-बच्‍चे नहीं हैं, जिनके लिए हमें रोज सुबह काम के लिए निकलना पड़ता है, जो हम हिंदू और मुसलमान सांप्रदायिक सदभाव के पीछे पिल पड़ें और यदि हिंदू-मुसलमान के बीच का ये सांप्रदायिक सौहार्द एक बम धमाके के इंतजार में ही बिगड़ने को बैठा है तो इससे तो सांप्रदायिक वैमनस्‍य ज्‍यादा भला है। पर शुक्र की बात है कि ऐसा कुछ है नहीं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: rgb(51, 51, 255); font-weight: bold;"&gt;मेरी &lt;a href="http://hindipanna.blogspot.com/2008/09/blog-post.html"&gt;कल की पोस्‍ट&lt;/a&gt;  पर आयी कुछ टिप्‍पणियों का मैं जिक्र करना चाहूंगा &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आदरणीय &lt;a style="font-weight: bold;" href="http://www.blogger.com/profile/00350808140545937113"&gt;श्री दिनेशराय द्विवेदी&lt;/a&gt; जी जिन्‍हें मैं अपना गुरू मानता हूं ने लिखा है कि &lt;span style="font-style: italic; font-weight: bold;"&gt;"आप बेटी को तो अधिकार दे सकते हैं। उस बेटी के बेटे की बहू को क्यों नहीं? क्या इस लिए कि वह पराए घर से आई है?"&lt;/span&gt; उनसे मैं कहना चाहूंगा कि यहां बात अधिकार देने या ना देने की नहीं है। बात है तो अधिकारों के इस्‍तेमाल के जायज और नाजायज तरीके की। यहां मेरा या किसी और का किसी पराये या विदेशी से व्‍यक्तिगत वैमनस्‍य नहीं है। मनमोहन सिंह जिनके बारे में तो कुछ कहा ही नहीं जा सकता वे भी भारतीय हैं और उनके बारे में भी मैं पहले लिखता रहा हूं कि उनमें जरा भी गैरत होती तो वे यूं प्रधानमंत्री की कुर्सी पर ना बैठे होते। और जो भी सत्‍ता के उच्‍चतम स्‍तर पर बैठा है उसे आलोचनाओं का सामना करना होगा फिर वह यह कहकर तो नहीं बच सकता कि वह विदेशी है इसलिए उसके बारे में ऐसा कहा जा रहा है। ऐसे में तो उसको स्‍वयं और जिम्‍मेदार तरीके से व्‍यवहार करना चाहिए। और जहां तक बेटी (इंदिरा गांधी) की बात है तो उन्‍होंने भी गरीबी हटाओ का नारा देकर क्‍या देश की जनता के साथ मजाक नहीं किया था, जब भ्रष्‍टाचार चरम पर था और उन्‍होंने कांग्रेस पार्टी को भाटों और चारणों की पार्टी में तब्‍दील कर दिया था और ये उन्‍हीं के चिरंजीव थे जो गरीब को रोटी ना होने पर ब्रेड खाने की सलाह देते थे। अब उनकी जगह सोनिया है तो उसे भी आलोचना सहनी होगी भले ही वह देश की नागरिक हो और वर्षों तक इस देश में बिना नागरिकता के रहने के बाद अब उसकी नागरिक बनकर उसने हम पर कोई अहसान तो नहीं किया है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;और आदरणीय&lt;a href="http://www.blogger.com/profile/12658655094359638147"&gt; &lt;span style="font-weight: bold;"&gt;डॉ. अमर कुमार&lt;/span&gt;&lt;/a&gt; लिखते हैं कि &lt;i&gt;सोनिया से ऎसा द्वेष&lt;br /&gt;क्यों ? शासक को कोसने से पहले उनको पकड़ें, जो शासित&lt;br /&gt;होने को निहुरे पड़े हैं, मैं साहसपूर्वक कह सकता हूँ कि, आप&lt;br /&gt;सच्चे भारतीय हैं.. भारतीय तो आप यहाँ जन्म लेने मात्र से&lt;br /&gt;स्वतः हो गये, सच्चे यूँ कि किसी को भी गरिया कर और अपना&lt;br /&gt;कालर झरिया कर हम निश्चिन्त हो लेते हैं... आप भी तो ?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/i&gt;डॉक्‍टर साहब आपसे कहना चाहता हूं कि मेरा सोनिया गांधी से कोई व्‍यक्तिगत वैमनस्‍य नहीं है। जब साढ़े चार साल पहले वे सत्‍ता में आई थीं तब हमने भी उनसे कुछ उम्‍मीदें लगाई थीं कि बीजेपी के शाइनिंग इंडिया के नाटक के बाद अब कोई तो ऐसा मिले जो बस काम करे। पर वे तो अपनी सास इंदिरा गांधी के पावन  पदचिन्‍हों पर चल निकलीं। उन्‍होंने अपनी पार्टी में कार्यकर्ता नाम के जीव का अस्तित्‍व ही खत्‍म कर दिया अब वहां बस चाटुकार ही पाये जाते हैं और कितनी बेशर्मी से उनका एक चाटुकार शिवराज पाटिल इतनी बुरी तरह इज्‍जत उतरने के बाद भी कहता है कि आलाकमान का मुझमें पूरा विश्‍वास है। मतलब जनता का आपमें विश्‍वास हो ना हो सोनिया के दरबार में आप रोज जाकर दंडवत करें तो कोई आपका कुछ नहीं बिगाड़ सकता। वाह दुनिया में भारत शायद पहला देश होगा जहां ऐसी मिसाल मिलेगी।&lt;br /&gt;और जहां तक गरियाने की बात है तो मुझे, आपको और हम सभी को सत्‍ता तंत्र की आलोचना का पूरा अधिकार है।  यदि आलोचना ना की जाए तो कुछ लोग सवाल उठाते हैं कि जो तटस्‍थ्‍ा रहेगा समय उनके भी अपराध लिखेगा और आलोचना की जाए तो एक सच्‍चे भारतीय का तमगा आप दे ही दे रहे हैं कि भारतीयों को यही काम है बस गरियाने का। अब आप ही मार्ग सुझायें कि ऐसे समय में क्‍या किया जा सकता है। &lt;span style="font-style: italic;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;span&gt;मेरे मित्र &lt;a style="font-weight: bold;" href="http://www.blogger.com/profile/07295261803997216572"&gt;गौरव&lt;/a&gt; कहते हैं कि&lt;/span&gt;&lt;span style="font-style: italic;"&gt;  &lt;/span&gt;&lt;span style="font-style: italic;"&gt;मैं सोनिया जी का नाम यहां पर तर्कसंगत नहीं मानता... वो देश की बहु हैं और इस नाते से बराबर का सम्मान उनका हक है. किसी दूसरे देश मैं जन्म लेना किसी भी रूप से से उनके व्यक्तित्व को छोटा नहीं करता या नहीं कर सकता&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;गौरव भाई आपकी गलतफहमी पर क्‍या कहूं पर वे एक देश की बहू नहीं एक परिवार की बहू हैं जिसने यहां राज करने का पट्टा लिखाया हुआ है और आजकल उस पट्टे के दम पर वो राज कर रही हैं....और उनकी मंत्रिमंडल के लोगों के लिए भी उनके पास एक पट्टा है जो आमतौर पर एक जानवर विशेष के लिए होता है और उसी के दम पर प्रधानमंत्री और उनकी पूरी कैबिनेट उनके सामने दुम हिलाती है। मुद्दा यहां किसी से भेदभाव का नहीं है मुद्दा तो देश के आम आदमी की जिंदगी बनी हुई है ऐसे में हम उस महिला के सम्‍मान की ढपली कैसे बजायें।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/34531871-4104158548403971342?l=hindipanna.blogspot.com'/&gt;&lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/hindi-panna/~4/nvw3v3-Lrp4" height="1" width="1"/&gt;</description><link>http://feedproxy.google.com/~r/hindi-panna/~3/nvw3v3-Lrp4/blog-post_9991.html</link><author>bhuvnesh.ad@gmail.com (भुवनेश शर्मा)</author><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">11</thr:total><feedburner:origLink>http://hindipanna.blogspot.com/2008/09/blog-post_9991.html</feedburner:origLink></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-34531871.post-5854046086769791552</guid><pubDate>Tue, 16 Sep 2008 06:55:00 +0000</pubDate><atom:updated>2008-09-16T12:49:59.276+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">bbchindi</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">news</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">kandhmal</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">attack</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">orrisa</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">police station</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">बीबीसी हिन्‍दी</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">police</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">bbc</category><title>पुलिस थाने पर पुलिसकर्मियों का हमला</title><description>यदि वाकई में ऐसा हो जाए तो क्‍या हाल हो ? बीबीसी हिन्‍दी ने अपने होमपेज पर आज सुबह ये खबर लगाई  जो अभी भी दायीं तरफ की &lt;a style="color: rgb(51, 102, 255);" href="http://www.bbc.co.uk/hindi/regionalnews/story/2008/09/080916_police_attacked.shtml"&gt;इस लिंक&lt;/a&gt; पर जाकर पढ़ी जा सकती है जबकि वाकई में थाने पर भीड़ द्वारा हमला किया गया था जिसमें एक पुलिसकर्मी की मौत भी हो गई थी।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://2.bp.blogspot.com/_lilFNFkYooc/SM9Zm4plI1I/AAAAAAAAAkE/-s3LhQsRcx4/s1600-h/untitled.bmp"&gt;&lt;img style="margin: 0px auto 10px; display: block; text-align: center; cursor: pointer;" src="http://2.bp.blogspot.com/_lilFNFkYooc/SM9Zm4plI1I/AAAAAAAAAkE/-s3LhQsRcx4/s400/untitled.bmp" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5246510615486604114" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;इतने प्रतिष्ठित न्‍यूज वेबसाइट पर ऐसी गलतियां पहले देखने को रही हैं। इनसे अनुरोध है कृपया इसे सुधारें और पाठकों को भ्रम में ना डालें।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/34531871-5854046086769791552?l=hindipanna.blogspot.com'/&gt;&lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/hindi-panna/~4/1ElUNLo7Yvo" height="1" width="1"/&gt;</description><link>http://feedproxy.google.com/~r/hindi-panna/~3/1ElUNLo7Yvo/blog-post_16.html</link><author>bhuvnesh.ad@gmail.com (भुवनेश शर्मा)</author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="http://2.bp.blogspot.com/_lilFNFkYooc/SM9Zm4plI1I/AAAAAAAAAkE/-s3LhQsRcx4/s72-c/untitled.bmp" height="72" width="72" /><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">6</thr:total><feedburner:origLink>http://hindipanna.blogspot.com/2008/09/blog-post_16.html</feedburner:origLink></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-34531871.post-401943788952873273</guid><pubDate>Mon, 15 Sep 2008 11:21:00 +0000</pubDate><atom:updated>2008-09-15T22:39:17.511+05:30</atom:updated><title>मीडिया वालों शिवराज पाटिल को मत डराओ, हिम्‍मत है तो खुलकर सामने आओ</title><description>लंबे समय से इलेक्‍ट्रॉनिक मीडिया के रंग-ढंग देखकर टीवी देखना छोड़ ही दिया था। चाहे कितनी भी बड़ी, कैसी भी घटना हो सबकी जानकारी इंटरनेट पर मिल ही जाती है सो टीवी की कोई जरूरत ही नहीं है। परसों दिल्‍ली में धमाके हुए तब जरूर कुछेक मिनट को टीवी खोलकर देखा। उसके बाद कल एक मित्र ने बताया कि शिवराज पाटिल के बारे में टीवी पर न्‍यूज चल रही है तो उत्‍सुकतावश देखा। पता लगा कि महाशय शनिवार रात को बम-धमाकों के समय बार-बार अपने कपड़े बदल रहे थे मानो दिल्‍ली में कोई फैशन परेड हो रही हो और पाटिल साहिब को रैंप पर चलना हो।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;पर इस बार बच्‍चू मीडिया के शिकंजे में आ ही गए। बहुत सही समय पर मीडिया ने एक जिम्‍मेदार ओहदे पर बैठे और नीचता के सभी रिकार्ड तोड़&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://1.bp.blogspot.com/_lilFNFkYooc/SM6WcXQPdcI/AAAAAAAAAjw/NEacjdrU1cA/s1600-h/newdelhi-blast.jpg"&gt;&lt;img style="margin: 0pt 10px 10px 0pt; float: left; cursor: pointer;" src="http://1.bp.blogspot.com/_lilFNFkYooc/SM6WcXQPdcI/AAAAAAAAAjw/NEacjdrU1cA/s320/newdelhi-blast.jpg" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5246296029955847618" border="0" /&gt;&lt;/a&gt; चुके &lt;span style="color: rgb(51, 51, 255); font-weight: bold;"&gt;लोकतंत्र की आयातित महारानी&lt;/span&gt; के इस चरणसेवक की वो बखिया उधेड़नी शुरू की कि 10 जनपथ तक सकते में आ गया। मीडिया से इस प्रकार की जोरदार प्रतिक्रिया के साथ ही जनता की ये राय कि ऐसे मक्‍कार गृहमंत्री को लात मारकर बाहर कर देना चाहिए भी इटैलियन महारानी के कानों में जरूर गूंज रही होगी। आज 10 जनपथ पर हुई बैठक में पाटिल को ना बुलाने से लोग जरूर कुछ कयास लगा रहे होंगे पर बेकार में कोई उम्‍मीद ना पालें ऐसा मेरा सुझाव है क्‍योंकि कुछ भी बदलने वाला नहीं है। ऐसे समय में किसी भी बदलाव की उम्‍मीद करना खुद को धोखा देना है जब देश में सरकार नाम की कोई चीज ही नहीं है और सत्‍ता एक विदेशी महिला, जो हमेशा भारत देश के लिए अपने किये गये त्‍याग का ढोंग करती है, के पैर की जूती बनकर रह गई है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;देश के नागरिकों के लिए बहुत सहजता से समझ में आने वाली बात है कि एक विदेशी महिला जो कदम-कदम पर भारत की प्रतिष्‍ठा की धज्जियां उड़ाती है, जिसके सामने राष्‍ट्रपति और प्रधानमंत्री हाथ जोड़े खड़े रहते हैं, खुद एक राष्‍ट्राध्‍यक्ष की तरह व्‍यवहार करती है और दुनिया को यह संदेश देती है कि भारत भले सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश हो उसके &lt;span style="color: rgb(51, 51, 255); font-weight: bold;"&gt;प्रधानमंत्री और राष्‍ट्रपति की हैसियत मेरे पालतू से ज्‍यादा की नहीं है&lt;/span&gt;, की निष्‍ठा इस देश और इसके लोगों में कैसे हो सकती है। यदि यह ऐसी ही त्‍यागवान महिला है और इस महान त्‍याग की भावना के कारण इसने सभी पदों का त्‍याग कर दिया है तो क्‍या इसे मालूम नहीं है कि भारत के लोकतंत्र में एक प्रधानमंत्री की क्‍या गरिमा है, एक राष्‍ट्रपति का कितना सम्‍मान है। बम विस्‍फोटों के बाद प्रधानमंत्री आवास की बजाय 10 जनपथ पर आपात बैठक का होना क्‍या दुनिया वालों को ये दिखाने के लिए काफी नहीं है कि इस देश में आजकल प्रधानमंत्री नाम की कोई चीज है ही नहीं और है  भी तो केवल मैडम के सामने दुम हिलाने के लिए। खुदा ना खास्‍ता इटली का कोई पर्यटक ही इन विस्‍फोटों का शिकार बन जाता तो पूरी की पूरी कैबिनेट ऐसे गला फाड़-फाड़कर रोती जैसे इनका कोई सगा मर गया हो खासकर हमारे चाटुकार-श्रेष्‍ठ मन्‍नू भाई। अभी ज्‍यादा दिन नहीं हुए जब ये कंधमाल की घटनाओं पर ऐसे मातम मना रहे थे जैसे इनके घर में ही गमी हो गई हो क्‍योंकि मरने वाले ईसाई थे। उनका बस चलता तो सिक्‍ख होने के बावजूद ऐसे गम के मौके पर अपने बाल तक मुंडवा लेते पर मैडम ने कहा होगा कि ईसाई धर्म में इसकी कोई जरूरत नहीं है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;फिलहाल तो ऐसा लगता है कि इस देश में  केवल एक विदेशी महिला की जूतियों का ही सम्‍मान हो रहा है जिनकी राष्‍ट्रपति से लेकर प्रधानमंत्री और कैबिनेट तक वंदना करते हैं और इसके अलावा उनकी किसी में कोई निष्‍ठा नहीं है। भारत के संविधान में चाहे कुछ भी लिखा हो पर अब तो यहां &lt;span style="color: rgb(51, 0, 51);"&gt;कोई भी माई का लाल मैडम के प्रसाद-पर्यन्‍त ही अपने पद पर बना रह सकता है चाहे वह राष्‍ट्रपति ही क्‍यों ना हो&lt;/span&gt;।  ऐसी महिला जिसकी इस देश और यहां के संविधान में कोई आस्‍था नहीं है और उसके चरणवंदकों, जिनकी उसकी चरणवंदना के अलावा किसी और में कोई आस्‍था नहीं है, से इस देश के भोले-भाले लोग ये उम्‍मीद लगाकर बैठे हैं कि अब नहीं तो तब ये लोग कुछ करेंगे पर इन लोगों को अपनी महारानी के प्रशस्तिगान और उसकी सुविधाओं का ख्‍याल रखने से फुर्सत मिले तब तो वे कुछ सोचें&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;देश में कहीं भी बम धमाके हों, लोग मरे इनका घिसा-पिटा रिकॉर्ड बजता ही रहता है। सांप्रदायिक सौहार्द बनाये रखें, आतंकवादी कभी सफल नहीं होंगे, शांति बनाये रखें। &lt;span style="color: rgb(51, 51, 255); font-weight: bold;"&gt;ऐसा लगता है कि हिंदुस्‍तान की जनता हाथ धोकर सांप्रदायिक सौहार्द के पीछे पड़ी हुई है&lt;/span&gt; और देश में जो शांति है वो इन्‍हीं के कारण है। नहीं तो ये हिंदुस्‍तानी तो इतने जंगली लोग हैं कि रोज एक-दूसरे के खून के प्‍यासे हो उठें पर इनके रोज-रोज बजने वाले रिकॉर्ड को सुनकर ही रुके हुए है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;और वह &lt;span style="color: rgb(51, 51, 255); font-weight: bold;"&gt;शिवराज पाटिल वह तो बेचारा महारानी के इस दरबार का एक अदना सा नौकर&lt;/span&gt; है। अब आप यदि उसे गृहमंत्री समझने की भूल कर बैठे हैं तो इसमें उस बेचारे का क्‍या दोष ! वह तो बेचारा अपनी ड्यूटी बजाने के अलावा कुछ जानता ही नहीं। उस बेचारे को यदि कपड़े पहनने का शौक है तो पहनने दीजिए और इसके अलावा उसे कुछ आता हो तो कुछ करे ना। जब अहमदाबाद गया था तो वहां की बारिश में बेचारे के जूते में कीचड़ लगने के भय से कितना चिंतित हो गया था। हो भी क्‍यों ना, इतनी मेहनत करके बेचारे ने अपना वार्डरोब सजाया हुआ है। इतने भय के माहौल में उसे भी डर लगता होगा ना पर लोग उस बेचारे को और डरा रहे हैं। शास्‍त्रों तक में ऐसे निरीह प्राणियों पर दया करने की बात कही गई है फिर भी लोग ऐसे पापकर्म के भागी बन रहे हैं तो भगवान उनको सदबुद्धि दे।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मीडिया जो इस मामले में बड़े जोर-शोर से अपनी पीठ ठोंक रहा है अपने गिरेबान में झांके। एक अदने से व्‍यक्ति को बलि का बकरा बनाकर वाहवाही तो उसने लूट ली पर उसे भी पता है कि इससे कुछ होना-जाना नहीं है पर उसे इससे क्‍या मतलब। सत्‍ता के शीर्ष पदों पर बैठे व्‍यक्ति तक अब उस बेचारे के पीछे पड़े हैं, खुद कई कांग्रेसी नेता तक उनको बुरा-भला कह रहे हैं क्‍योंकि उन्‍हें भी अपनी गोटियां फिट करनी हैं। ऐसे में उस व्‍यक्ति को नंगा करने से म‍ीडिया को भला काहे कोई गुरेज हो पर ऐसा करके उसने कोई बड़ा वीरता का काम नहीं किया है। यदि मीडिया कुछ करना ही चाहता है तो खुलकर सामने आए और जो वास्‍तविक जिम्‍मेदार हैं उनकी ओर उंगली उठाए। पर उसे अपनी दुकान चलानी है और इसीलिए वह ऐसे विलेन खोजता है जो उसे कोई नुकसान तो नहीं पहुंचा सकते अव्‍वल वाहवाही जरूर दिला सकते हैं।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/34531871-401943788952873273?l=hindipanna.blogspot.com'/&gt;&lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/hindi-panna/~4/EJ_ajbAIrSw" height="1" width="1"/&gt;</description><link>http://feedproxy.google.com/~r/hindi-panna/~3/EJ_ajbAIrSw/blog-post.html</link><author>bhuvnesh.ad@gmail.com (भुवनेश शर्मा)</author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="http://1.bp.blogspot.com/_lilFNFkYooc/SM6WcXQPdcI/AAAAAAAAAjw/NEacjdrU1cA/s72-c/newdelhi-blast.jpg" height="72" width="72" /><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">11</thr:total><feedburner:origLink>http://hindipanna.blogspot.com/2008/09/blog-post.html</feedburner:origLink></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-34531871.post-2123721365871755060</guid><pubDate>Sat, 07 Jun 2008 16:34:00 +0000</pubDate><atom:updated>2008-06-07T23:34:02.566+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">left parties</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">ipl</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">corruption</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">petrol price hike</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">national rural employment gurantee sceam</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">inflation</category><title>दुम हिलाने का पॉंच-साला रिकॉर्ड</title><description>मुझे मनमोहन सिंहजी से पूरी उम्‍मीद है कि वे जल्‍द ही टीवी पर आकर राष्‍ट्र के नाम अपने संबोधन में कहेंगे कि हम मजबूर हैं, अंतर्राष्‍ट्रीय बाजार में आटे-दाल की कीमतें बढ़ रही हैं जिन पर हमारा नियंत्रण नहीं है इसलिए हम कुछ भी कर पाने में असमर्थ हैं। आप महंगे आटा-दाल को थोड़े धैर्य के साथ मिलाकर खाएं या थोड़ा कम खाना खाएं। फिर वे अपने मंत्रियों से कहेंगे कि अपने कुत्‍तों को एसी की हवा खिलाने की बजाय थोड़ा बाहर ठंडी हवा में घुमाएं और सरकारी खर्चे के बचत अभियान में सहयोग करें।&lt;br /&gt;पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ाने से मुद्रास्‍फीति अब वैसे भी राजधानी एक्‍सप्रेस की तरह दौड़ने वाली है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;पर मुझ जैसे नासमझ बालक कहेंगे कि  अंतर्राष्‍ट्रीय बाजार में आटे-दाल का भाव बढ़ने से हमें क्‍या।  हम भले पेट्रोल का उत्‍पादन नहीं करते पर अन्‍न का तो करते हैं। पर भैये हम उत्‍पादित अन्‍न ही खाते रहेंगे तो हमारी सरकार के उन चहेते ठेकेदारों, मंत्रियों का क्‍या होगा जो विदेशों से आयातित अन्‍न में घपले पर ही पल रहे हैं। उन बेचारों के तो फाके हो जाएंगे और बड़ी-बड़ी कंपनियॉं हमारा ही गेंहूं खरीदकर हमें पिज्‍जा-बर्गर एटसेट्रा एटसेट्रा खिलाकर अपनी जेबें कैसे भरेंगी। जब इतनी महंगाई में गेहूं का आयात ही करना पड़ रहा है तो भी किसानों को समर्थन मूल्‍य पिछले साल की तुलना में क्‍यों नहीं बढ़ा है और बाकी पैसा किसकी जेब में जा रहा है।&lt;br /&gt;कालाबाजारी रोकने और दूसरी हरित क्रांति की बातें ये ऐसे करते हैं जैसे मोंटेकजी लैपटाप पर बटन दबायेंगे और उधर सब हो जायेगा। हरित क्रांति तो नहीं इनके कृषि मंत्री ने देश में क्रिकेट क्रांति जरूर कर दी है। अब जब भी महंगाई बढ़ेगी और जनता चिल्‍लायेगी ये कहेंगे येल्‍लो देखो आपके लिए एक नया तमाशा- एक और आईपीएल।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मनमोहनजी अब जिस पैट्रोल का रोना रो रहे हैं उनके ये आंसू तब कहां थे जब छाती तान के कहे फिरते थे कि हम परमाणु करार करेंगे, हम ऊर्जा जरूरतों का हल निकालेंगे। पांच सालों मे इनकी यही उपलब्धि रही कि ना तो ये परमाणु करार ही कर पाए ना ही ईरान से गैस ही ला पाए। हां देश को ऊर्जा संकट की गहरी खाई में खूब जोर का धक्‍का मार के गिरा दिया और मजे से गद्दार वामपंथियों के साथ सत्‍ता-सुख लूट रहे हैं। कहां तो परमाणु करार ना होने पर कहते थे कि गिरा दो सरकार वहीं अब वामपंथियों की मुहब्‍बत में पागल होकर आंखें मूंदे बैठे हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;उपलब्धियां इनकी बड़ी काबिलेगौर रहीं। सच्‍चर-सच्‍चर, कोटा-कोटा अलापते हुए इनको लगा कि जनता को कुछ नहीं चाहिए। अल्‍पसंख्‍यक कार्ड और अलां-फलां कार्ड से ही उसका पेट भर जाना है। सो पांचों साल ये सच्‍चर-सच्‍चर, कोटा-कोटा जैसे राग अलापते रहे। जबकि प्राथमिक स्‍तर पर सर्व-शिक्षा अभियान कैसा तमाशा बना हुआ है ये इन्‍हें नजर नहीं आया। सबको बिना स्‍कूल भेजे ही उच्‍च शिक्षित बना देने की जादू की छड़ी जो इन्‍हें मिल गई है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कांग्रेस पार्टी की मालकिन(अध्‍यक्ष कहना भद्दा लगता है यहां) सोनिया मैडम, जो कि हिंदुस्‍तान के अब तक के इतिहास मे त्‍याग की एकमात्र प्रतिमूर्ति हैं, ने राष्‍ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के नाम पर अपने भक्‍तों को खूब रेवडि़यां बांटीं कि ले जाओ बेटा कमाओ और ऐश करो। जिन लोगों को इस बात पर शक है वे खुद इसकी पड़ताल करें और देखें कैसे मैडम के भक्‍त हर जिले, ब्‍लॉक मे इस योजना के प्रभारी बने हुए हैं जबकि ना ही वे जनप्रतिनिधि हैं और ना ही इसे क्रियान्वित करने के लिए सरकारी अमले की कोई कमी है। अहा क्‍या बल्‍ले-बल्‍ले हो रही है जी सोनिया मैडम के चेलों की। जिस पैसे को मनमोहनजी ग्रामीणों तक पहुंचाने का दम भरते हैं वही पैसा कांग्रेसी दलालों की दलाली के पैसे से खरीदी कारों से धुंए के रूप में उड़ता दिखाई देगा। पेट्रोल की कीमतें उनके लिए थोड़े ना बढ़ी हैं जी।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;और मनमोहनजी को बधाई जल्‍द ही वे मैडम के सामने &lt;a href="http://hindipanna.blogspot.com/2006/09/blog-post_22.html"&gt;दुम हिलाने&lt;/a&gt; का पांच-साला रिकॉर्ड बनाने जा रहे हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-style: italic;"&gt;(ये लेख बहुत जल्‍दी में लिखा गया है। वैसे भी मुझ जैसे बालकों को लाग-लपेटवाले अंदाज में बात करना पसंद नहीं है। मेरे ख्‍याल में इतनी स्‍पष्‍टवादिता पर शायद लोग नाक-भौं सिकोडें। यदि गलत हूं तो मार्गदर्शन करें। ब्‍‍लॉग जगत में लोग जहां व्‍यक्तिगत रूप से तो खूब कीचड़ उछालने का खेल खेलते हैं पर राष्‍ट्रीय मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखने में रुचि कम लेते हैं। मेरी गुजारिश है कि जब देश-दुनिया में इतना कुछ हो रहा है तो खुलकर विभिन्‍न मुद्दों पर अपनी राय रखना और उन पर बहस करना ब्‍लॉग जगत के लिए बेहतर है बजाय व्‍यक्तिगत आक्षेप लगाने या कीचड़ उछालने के)&lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/34531871-2123721365871755060?l=hindipanna.blogspot.com'/&gt;&lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/hindi-panna/~4/8HOjXfSSc-A" height="1" width="1"/&gt;</description><link>http://feedproxy.google.com/~r/hindi-panna/~3/8HOjXfSSc-A/blog-post_07.html</link><author>bhuvnesh.ad@gmail.com (भुवनेश शर्मा)</author><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">12</thr:total><feedburner:origLink>http://hindipanna.blogspot.com/2008/06/blog-post_07.html</feedburner:origLink></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-34531871.post-1803140922482201813</guid><pubDate>Sat, 07 Jun 2008 11:02:00 +0000</pubDate><atom:updated>2008-11-13T16:38:33.117+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">घरेलू हिंसा कानून</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">ipc</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">dowry laws</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">भारतीय दंड संहिता</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">section 498a</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">indian penal code</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">domestic voilence act</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">दहेज कानून</category><title>कोई तो सुने इन दहेज कानून पीडि़तों की</title><description>ये शिकायत है अहमदाबाद के योगेश कुमार जैन की,  जिनका 43 वर्षीय बड़ा भाई, जो कि पेशे से डॉक्‍टर है, विगत 16-17 वर्षों से मानसिक बीमारी से जूझ रहा है। उसकी पत्‍नी इन्‍हें ब्‍लैकमेल कर रही है कि अपनी मां के नाम पर जो मकान है, जिसकी कीमत तकरीबन 50 लाख रुपये है, उसे उसके नाम कर दिया जाए नहीं तो वह भारतीय दंड संहिता की धारा 498a के तहत उनकी शिकायत दर्ज कराएगी।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;ऐसी ही कई कहानियॉं आपको मिल जाएंगी जिनमे पत्‍नी-पीडि़त पति के पास सिवाय घुट-घुटकर जीने के कोई विकल्‍प ही नहीं बचता। क्‍योंकि हमारे भारतीय कानूनों के अनुसार पीडि़त केवल पत्‍नी ही हो सकती है पति(या उसके परिजन) नहीं। हालांकि ये कानून बनाये तो गये थे समाज मे स्त्रियों के शोषण को रोकने और शोषि‍तों को सजा दिलवाने के लिए और इनका उपयोग आरोपियों को सजा दिलाने में हो भी रहा है। पर उन निर्दोष पतियों और उनके परिजनों का क्‍या जो बिना मतलब घुन की तरह पिस रहे हैं क्‍योंकि कानून मे उनके लिए कोई उपचार है ही नहीं ?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;हालांकि ऐसे बेचारे  पत्‍नी-पीडि़तों के किस्‍से तो बहुत हैं । पर मुद्दे की बात पर आते हैं। कुछ दिन पहले &lt;a href="http://rajeshroshan.com/"&gt;राजेश रोशनजी&lt;/a&gt; के ब्‍लॉग पर एक चित्र छपा था-&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://2.bp.blogspot.com/_lilFNFkYooc/SEpwbxWi9cI/AAAAAAAAAK0/rAJE5sr74CY/s1600-h/section-498a.jpg"&gt;&lt;img style="margin: 0px auto 10px; display: block; text-align: center; cursor: pointer;" src="http://2.bp.blogspot.com/_lilFNFkYooc/SEpwbxWi9cI/AAAAAAAAAK0/rAJE5sr74CY/s400/section-498a.jpg" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5209099541414081986" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;इसे पढ़कर लगा कि क्‍या वाकई दहेज संबंधी कानूनों ने कुछ पतियों का जीना मुहाल कर रखा है ?&lt;br /&gt;हालां‍कि आस-पास के क्षेत्र में ऐसी एक-दो घटनाओं के बारे में सुना तो था पर नेट पर खोजा तो &lt;a href="http://498a.blogvis.com/"&gt;इस साइट&lt;/a&gt; पर काफी सारे मामले ऐसे देखने को मिले। भारतीय महिला से शादी करने से पहले सोचने की चेतावनी के साथ धारा 498a एवं घरेलू हिंसा अधिनियम के बारे में &lt;a href="http://www.associatedcontent.com/article/522885/indias_legal_tools_of_extortion.html"&gt;काफी सारी बातें&lt;/a&gt; कही गई हैं। और तो और कई शहरों में उपलब्‍ध &lt;a href="http://mynation.net/"&gt;टेलीफोन हेल्‍पलाइन&lt;/a&gt; के साथ-साथ यहां &lt;a href="http://mynation.net/advice/"&gt;ऑनलाइन सलाह&lt;/a&gt; भी दी जा रही है। पर बेचारे पति करें भी तो क्‍या ?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आप सभी की प्रतिक्रियाओं के इंतजार में-&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/34531871-1803140922482201813?l=hindipanna.blogspot.com'/&gt;&lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/hindi-panna/~4/jmib5kSlMw0" height="1" width="1"/&gt;</description><link>http://feedproxy.google.com/~r/hindi-panna/~3/jmib5kSlMw0/blog-post.html</link><author>bhuvnesh.ad@gmail.com (भुवनेश शर्मा)</author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="http://2.bp.blogspot.com/_lilFNFkYooc/SEpwbxWi9cI/AAAAAAAAAK0/rAJE5sr74CY/s72-c/section-498a.jpg" height="72" width="72" /><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">11</thr:total><feedburner:origLink>http://hindipanna.blogspot.com/2008/06/blog-post.html</feedburner:origLink></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-34531871.post-1735398728572469303</guid><pubDate>Sat, 05 Apr 2008 12:27:00 +0000</pubDate><atom:updated>2008-04-05T21:07:24.000+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">hindustan</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">हिन्‍दी</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">hindi</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">भारतीय</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">indian freedom movement</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">भारत</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">हिन्‍दुस्‍तान</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">इंडिया</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">हिन्‍दू</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">bharat</category><title>ग से ‘गाय’ नहीं सी फॉर ‘काऊ’</title><description>&lt;p class="MsoNormal"&gt;&lt;span  lang="HI" style="font-family:Mangal;"&gt;मेरे चिट्ठे पर प्रकाशित डा. निरंजन कुमार का &lt;a href="http://hindipanna.blogspot.com/2008/04/blog-post_05.html"&gt;आलेख&lt;/a&gt; पढ़कर हमें पता चला कि कैसे इस देश का नाम इंडिया पड़ा और अपने देश के लिए आजकल भारत या हिन्‍दुस्‍तान की बजाय लोग विदेशियों की तर्ज पर इंडिया शब्‍द का प्रयोग करना अपनी शान समझते हैं। &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class="MsoNormal"&gt;&lt;span  lang="HI" style="font-family:Mangal;"&gt;पर ये इंडियंस वास्‍तव में चाहते क्‍या हैं &lt;/span&gt;? &lt;span  lang="HI" style="font-family:Mangal;"&gt;इंडिया शब्‍द कहने से केवल इस बात का बोध नहीं होता कि फलां व्‍यक्ति अपने देश का नाम अंग्रेजी में ले रहा है बल्कि इसके बहुत गहरे निहितार्थ हैं और इसके पीछे की मंशा पर भी विचार किया जाना चाहिए।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;    &lt;p class="MsoNormal"&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;span  lang="HI" style="font-family:Mangal;"&gt;सीधे शब्‍दों में कहा जाए तो यह तीन अक्षर का शब्‍द &lt;/span&gt;‘&lt;span  lang="HI" style="font-family:Mangal;"&gt;इंडिया&lt;/span&gt;’&lt;span  lang="HI" style="font-family:Mangal;"&gt; हमारी हजारों वर्षों की पहचान को मिटाने की विदेशी साजिशों और हमारे देश में रहने वाले &lt;/span&gt;‘&lt;span  lang="HI" style="font-family:Mangal;"&gt;इंडियंस&lt;/span&gt;’&lt;span  lang="HI" style="font-family:Mangal;"&gt; की नासमझी और विकृत मानसिकता का प्रतीक है। &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;    &lt;p class="MsoNormal"&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;span  lang="HI" style="font-family:Mangal;"&gt;मेरे पड़ौस में रहने वाले शर्माजी अपने दो वर्षीय नाती को घुमाने ले जाते हैं तो रास्‍ते में मिलने वाले जानवरों से उसका परिचय कराते हैं। परिचय कराते समय वे इस बात का विशेष ध्‍यान रखते हैं कि जिन भी जानवरों का नाम वे अपने नाती को बतायें वे अंग्रेजी में हों। गाय के लिए काउ, कुत्‍ते के लिए डॉग, सुअर के लिए पिग और चिडि़या के लिए बर्ड जैसे शब्‍द वे अपने छोटे से नाती को सिखाते हैं। एक दिन वे सिखा रहे थे- काउ इज अवर मदर। मुझे लगा कि अगले दिन वे यह न सिखाने लगें कि एलिजाबेथ इज अवर मदर। &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;    &lt;p class="MsoNormal"&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;span  lang="HI" style="font-family:Mangal;"&gt;खैर ये तो एक उदाहरण है। पर आप कहीं भी नजर दौड़ाईये आप ये अवश्‍य पाएंगे कि जो &lt;/span&gt;‘&lt;span  lang="HI" style="font-family:Mangal;"&gt;इंडियंस&lt;/span&gt;’&lt;span  lang="HI" style="font-family:Mangal;"&gt; खुद अपनी पूरी उमर में अंग्रेजी नहीं सीख पाए वे बच्‍चे को अंग्रेजी में धुरंधर बनाने का अजीब सा हठ रखते हैं। हर कोई इस बात पर तुल गया है कि कैसे भी करके अपने बच्‍चे को अंग्रेजी ही सिखाई जाए और ऐसे में भले बच्‍चा अपनी भाषा हिंदी सीखने से वंचित रह जाए। हिंदी सीखने को एक गैरजरूरी और समय बर्बाद करने वाला काम समझा जाने लगा है। मेरे एक परिचित डॉक्‍टर के पास एक सज्‍जन अपने बेटे को दिखाने लाए। डॉक्‍टर ने कहा- बेटे जीभ दिखाओ। बच्‍चे ने नहीं दिखाई। फिर उसके पिता ने कहा- बेटे टंग दिखाओ और बेटे ने जीभ दिखा दी। &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;    &lt;p class="MsoNormal"&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;span  lang="HI" style="font-family:Mangal;"&gt;अपनी उमर भर गाय को गैया कहने वाले और पक्षियों को परेबा कहने वाले जब छोटे बच्‍चों के सामने बनावटी ढंग से अंग्रेजी में &lt;/span&gt;‘&lt;span  lang="HI" style="font-family:Mangal;"&gt;काउ&lt;/span&gt;’&lt;span  lang="HI" style="font-family:Mangal;"&gt; और &lt;/span&gt;‘&lt;span  lang="HI" style="font-family:Mangal;"&gt;बर्ड&lt;/span&gt;’&lt;span  lang="HI" style="font-family:Mangal;"&gt; हांकने लगते हैं तो दिल को बहुत कोफ्त होती है। अंग्रेजी को एक विषय के रूप में सिखाये जाने की बजाय हम बच्‍चों को पूरा ही अंग्रेज बनाने पर तुल गये हैं। इस तरह के ब्रेनवॉश से जो पीढ़ी सामने आयेगी वो बाद में अपने बुजुर्ग मां-बाप से यही पूछेगी कि- &lt;/span&gt;‘&lt;span  lang="HI" style="font-family:Mangal;"&gt;व्‍हाट इज दिस फ्रीडम फाइटर एंड व्‍हाई डिड दे फाईट फार इंडिया&lt;/span&gt;’&lt;span  lang="HI" style="font-family:Mangal;"&gt;। तो फिर वे क्‍या जवाब देंगे &lt;/span&gt;? &lt;span  lang="HI" style="font-family:Mangal;"&gt;&lt;span style=""&gt; &lt;/span&gt;क्‍या ऐसे लोग जो खुद अपनी पहचान मिटाने पर तुले हैं अपने बच्‍चों को समझायेंगें कि हमारे स्‍वतंत्रता-सेनानी अपनी पहचान, अपने भारत के लिए अंग्रेजों से लड़े। ये कैसे अपने बच्‍चों को ये समझा पाएंगे कि वे किस भारत देश के लिए लड़े जबकि ये लोग अब उसी भारत के खिलाफ, उसकी पहचान के खिलाफ हैं। भाषा केवल शब्‍दों के माध्‍यम से अपनी बात कहना भर नहीं है। उससे हमारी पहचान, हमारा इतिहास, हमारा सम्‍मान बहुत कुछ जुड़ा होता है। &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;    &lt;p class="MsoNormal"&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;span  lang="HI" style="font-family:Mangal;"&gt;अभिभावकों द्वारा ऐसी मानसिकता को अपना लिये जाने के भी कुछ कारण हैं। हर किसी के अंदर एक बहुत बड़ा डर बैठा हुआ है कि हमारा बच्‍चा किसी से कमतर न हो और इस कमतरी का मतलब हिंदी में बात करना, अंकल को चाचा कहना और टेंपल को मंदिर कहना समझ लिया गया है। लोगों को लगता है यदि बच्‍चे को जिंदगी की रेस में दौड़ाना है तो उन्‍हें &lt;/span&gt;‘&lt;span  lang="HI" style="font-family:Mangal;"&gt;घोड़े&lt;/span&gt;’&lt;span  lang="HI" style="font-family:Mangal;"&gt; को घोड़े की बजाय &lt;/span&gt;‘&lt;span  lang="HI" style="font-family:Mangal;"&gt;हॉर्स&lt;/span&gt;’&lt;span  lang="HI" style="font-family:Mangal;"&gt; कहना सिखाना होगा। हर कोई अपनी पहचान को मिटाने और अंग्रेज बन जाने की जद्दोजहद में लगा हुआ है। भारतीयता को मूर्खता, पिछड़ेपन और गँवारपन का पर्याय मान लिया गया है। लोग खुद के भारतीय होने पर शर्म महसूस करते हैं। हम खुद के भारतीय होने के खिलाफ लड़ रहे हैं। अपनी पहचान के खिलाफ लड़ रहे हैं। हम उस पहचान के‍ खिलाफ लड़ रहे हैं जिससे हमारा अस्तित्‍व है और अपने ही अस्तित्‍व के खिलाफ इस लड़ाई में हम खुद को ही हार जाने वाले हैं।&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/34531871-1735398728572469303?l=hindipanna.blogspot.com'/&gt;&lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/hindi-panna/~4/wM4Up1AIqEI" height="1" width="1"/&gt;</description><link>http://feedproxy.google.com/~r/hindi-panna/~3/wM4Up1AIqEI/blog-post_5510.html</link><author>bhuvnesh.ad@gmail.com (भुवनेश शर्मा)</author><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">13</thr:total><feedburner:origLink>http://hindipanna.blogspot.com/2008/04/blog-post_5510.html</feedburner:origLink></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-34531871.post-2406253414146033775</guid><pubDate>Sat, 05 Apr 2008 02:56:00 +0000</pubDate><atom:updated>2008-04-05T08:55:41.565+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">हिंदुस्‍तान</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">संविधान</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">kalidas</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">sindhu</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">iran</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">भारत</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">bharat</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">hindustan</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">hindu</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">ईरान</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">राजभाषा</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">indus</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">secular</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">सिंधु</category><title>एक देश दो नाम</title><description>&lt;span style="font-weight: bold; font-style: italic;"&gt;अमेरिका में प्रोफेसर डा. निरंजन कुमार का यह लेख 3 अप्रैल के दैनिक जागरण में छपा था। इस लेख में उन्‍होंने भारत के विविध नामों और उनकी उत्‍पत्ति पर प्रकाश डाला है। बेहद जानकारीपूर्ण यह लेख मैं दैनिक जागरण और डा. निरंजन कुमार के आभार सहित यहां प्रस्‍तुत कर रहा हूं-&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;span  lang="HI" style="font-family:Mangal;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;एक देश दो नाम&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;    &lt;p class="MsoNormal"&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;span  lang="HI" style="font-family:Mangal;"&gt;-डॉ. निरंजन कुमार&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class="MsoNormal"&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;विदेश में रहते हुए अपने देश को नए तरीके से देखने-समझने की दृष्टि मिलती&lt;/span&gt;&lt;span style="" lang="HI"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;है। इनमें से एक है कि अपने देश का नाम क्या हो&lt;/span&gt;&lt;span style=""&gt;? &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;वैसे अपने देश के कई नाम&lt;/span&gt;&lt;span style="" lang="HI"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;रहे हैं-जंबूद्वीप आर्यावर्त&lt;/span&gt;&lt;span style=""&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;आर्यदेश या आर्यनाडु&lt;/span&gt;&lt;span style=""&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;भारत&lt;/span&gt;&lt;span style=""&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;हिंद&lt;/span&gt;&lt;span style=""&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;हिंदुस्तान&lt;/span&gt;&lt;span style=""&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;इंडिया आदि। जंबूद्वीप नाम धार्मिक होने की वजह से एवं&lt;/span&gt;&lt;span style="" lang="HI"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;आर्यावर्त और आर्यदेश या आर्यनाडु जाति बोधक होने से खुद ही अप्रचलित हो&lt;/span&gt;&lt;span style="" lang="HI"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;गए। आज प्रमुख रूप से तीन नाम मिलते हैं- इंडिया&lt;/span&gt;&lt;span style=""&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;हिंदुस्तान&lt;/span&gt;&lt;span style=""&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;और भारत।&lt;/span&gt;&lt;span style="" lang="HI"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;सबसे पहले इंडिया को देखें। इंडिया काफी पुराना शब्द है और ग्रीक भाषा से&lt;/span&gt;&lt;span style="" lang="HI"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;आया है। ईसा पूर्व चौथी-पांचवीं सदी में ग्रीक लोगों ने सिंधु नदी के लिए&lt;/span&gt;&lt;span style="" lang="HI"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;इंडस शब्द का प्रयोग किया और इससे आगे की भूमि को इंडिया कहा&lt;/span&gt;&lt;span style=""&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;जो बाद में&lt;/span&gt;&lt;span style="" lang="HI"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;चलकर इंडिया बन गया। ग्रीक से यह दूसरी सदी में लैटिन में आया और फिर &lt;/span&gt;&lt;span style=""&gt;9&lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;वीं&lt;/span&gt;&lt;span style="" lang="HI"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;सदी में अंग्रेजी में&lt;/span&gt;&lt;span style=""&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;लेकिन अंग्रेजी में इसका बहुलता से प्रयोग &lt;/span&gt;&lt;span style=""&gt;16&lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;वीं-&lt;/span&gt;&lt;span style=""&gt; 17&lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;वीं सदी में हुआ। इंडिया शब्द पर विचार करें तो एक ओर तो यह&lt;/span&gt;&lt;span style="" lang="HI"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;पश्चिम/अंग्रेजी औपनिवेशिक-साम्राज्यवादी शासन की देन है और दूसरी तरफ यह&lt;/span&gt;&lt;span style="" lang="HI"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;शब्द उन देशवासियों को अपने में समाहित करता नहीं दिखाई पड़ता है&lt;/span&gt;&lt;span style=""&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;जो देश&lt;/span&gt;&lt;span style="" lang="HI"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;की मेहनतकश आम जनता है&lt;/span&gt;&lt;span style=""&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;जो गांवों और छोटे शहरों में रहती है या बड़े&lt;/span&gt;&lt;span style="" lang="HI"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;शहरों में हाशिए पर है। इंडिया और इंडियन से हमें ऐसे लोगों या वर्ग का&lt;/span&gt;&lt;span style="" lang="HI"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;बोध होता है जो शक्ल और सूरत में भले ही देश के अन्य लोगों की तरह हों&lt;/span&gt;&lt;span style=""&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;पर&lt;/span&gt;&lt;span style="" lang="HI"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;अपने व्यवहार&lt;/span&gt;&lt;span style=""&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;वेशभूषा&lt;/span&gt;&lt;span style=""&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;बोली और संस्कृति में मानो पश्चिम की फोटोकापी&lt;/span&gt;&lt;span style="" lang="HI"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;हों। इस तरह इंडिया शब्द में एक तरफ जहां साम्राज्यवादी गंध है तो दूसरी&lt;/span&gt;&lt;span style="" lang="HI"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;ओर यह पूरे देश का प्रतिनिधित्व करता दिखाई नहीं पड़ता। दूसरा शब्द है&lt;/span&gt;&lt;span style="" lang="HI"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;हिंदुस्तान। यह शब्द भी काफी पुराना है। इसका उद्गम भी उसी सिंधु नदी से&lt;/span&gt;&lt;span style="" lang="HI"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;हुआ है। ईरानी लोग स का उच्चारण नहीं कर पाते थे&lt;/span&gt;&lt;span style=""&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;इसे वे ह कहते थे। इसलिए&lt;/span&gt;&lt;span style="" lang="HI"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;प्राचीन ईरानी और अवेस्ता भाषाओं (ईपू&lt;/span&gt;&lt;span style=""&gt;10&lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;वीं सदी) में सिंधु के लिए हिंदू&lt;/span&gt;&lt;span style="" lang="HI"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;मिलता है। ईपू &lt;/span&gt;&lt;span style=""&gt;486 &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;की पुस्तक नक्श-ई-रुस्तम में उल्लेख मिलता है कि ईरान&lt;/span&gt;&lt;span style="" lang="HI"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;के एक शासक डारीयस ने इस प्रदेश को हिंदुश कहा। अवेस्ता भाषा में स्थान के&lt;/span&gt;&lt;span style="" lang="HI"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;लिए स्तान शब्द मिलता है। इस प्रकार यह प्रदेश हिंदुस्तान कहा जाने लगा और&lt;/span&gt;&lt;span style="" lang="HI"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;यहां के निवासी हिंदू। उस समय हिंदू शब्द धर्म का पर्याय नहीं था। अरबी&lt;/span&gt;&lt;span style="" lang="HI"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;में इसे अलहिंद कहा जाता था। &lt;/span&gt;&lt;span style=""&gt;11&lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;वीं सदी की इतिहास की पुस्तक है तारीख&lt;/span&gt;&lt;span style="" lang="HI"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;अल-हिंद। इसी से हिंद शब्द आया। इस प्रकार हिंदुस्तान शब्द शुद्ध रूप से&lt;/span&gt;&lt;span style="" lang="HI"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;एक सेकुलर शब्द था&lt;/span&gt;&lt;span style=""&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;लेकिन मुख्य रूप से यह उत्तर भारत के लिए इस्तेमाल&lt;/span&gt;&lt;span style="" lang="HI"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;होता था। अंग्रेजी शासन काल में फूट डालो और राज करो कि नीति के तहत&lt;/span&gt;&lt;span style="" lang="HI"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;हिंदुओं और मुसलमानों के बीच एक खाई पैदा होनी शुरू हुई। इसी समय&lt;/span&gt;&lt;span style="" lang="HI"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;दुर्भाग्यवश नारा आया हिंदी-हिंदू-हिंदुस्तान का&lt;/span&gt;&lt;span style=""&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;जो कि धार्मिक- राजनीतिक&lt;/span&gt;&lt;span style="" lang="HI"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;भावना से प्रेरित था। इस बढ़ती हुई दूरी का दुष्परिणाम सामने आया जिन्ना&lt;/span&gt;&lt;span style="" lang="HI"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;की टू नेशन थ्योरी के रूप में। इस द्वि-राष्ट्र के सिद्धांत के अनुसार&lt;/span&gt;&lt;span style=""&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;हिंदू और मुस्लिम&lt;/span&gt;&lt;span style=""&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;दो अलग-अलग राष्ट्र या राष्ट्रीयता हैं। हिंदुस्तान&lt;/span&gt;&lt;span style="" lang="HI"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;हिंदुओं के लिए है&lt;/span&gt;&lt;span style=""&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;इसलिए मुसलमानों के लिए एक अलग देश होना चाहिए। इसी से&lt;/span&gt;&lt;span style="" lang="HI"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;पाकिस्तान की मांग आई। इस तरह हिंदुस्तान शब्द&lt;/span&gt;&lt;span style=""&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;जो पूरी तरह से&lt;/span&gt;&lt;span style="" lang="HI"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;पंथनिरपेक्ष शब्द था&lt;/span&gt;&lt;span style=""&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;एक तरह से सेकुलर नही रह गया। अधिकांश बड़े&lt;/span&gt;&lt;span style="" lang="HI"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;नेता-गांधीजी&lt;/span&gt;&lt;span style=""&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;नेहरू&lt;/span&gt;&lt;span style=""&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;मौलाना आजाद आदि जिन्ना से सहमत नहीं थे&lt;/span&gt;&lt;span style=""&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;लेकिन&lt;/span&gt;&lt;span style="" lang="HI"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;विशिष्ट ऐतिहासिक&lt;/span&gt;&lt;span style=""&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;राजनीतिक परिस्थितियों में पाकिस्तान बन गया। हमारे&lt;/span&gt;&lt;span style="" lang="HI"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;नेताओं ने यह कभी नहीं माना की हिंदुस्तान सिर्फ हिंदुओं का देश है। यह&lt;/span&gt;&lt;span style="" lang="HI"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;अनायास नहीं था कि जब देश का संविधान बना तो इसके पहले ही अनुच्छेद में&lt;/span&gt;&lt;span style="" lang="HI"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;कहा गया है कि इंडिया अर्थात भारत राज्यों का एक संघ होगा। इस मिले-जुले&lt;/span&gt;&lt;span style="" lang="HI"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;धर्म&lt;/span&gt;&lt;span style=""&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;समाज और संस्कृति वाले देश को पूरी दुनिया आश्चर्य और सम्मान से&lt;/span&gt;&lt;span style="" lang="HI"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;देखती है। इंडिया शब्द को अपनाना दुर्भाग्यपूर्ण था&lt;/span&gt;&lt;span style=""&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;शायद इसके पीछे&lt;/span&gt;&lt;span style="" lang="HI"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;औपनिवेशिक शासन का मनोवैज्ञानिक दबाव रहा होगा। औपनिवेशिक-मनोवैज्ञानिक&lt;/span&gt;&lt;span style="" lang="HI"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;दबाव के कारण ही अनुच्छेद &lt;/span&gt;&lt;span style=""&gt;343 &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;के तहत दुर्भाग्यवश हिंदी के साथ-साथ&lt;/span&gt;&lt;span style="" lang="HI"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;अंग्रेजी को भी राजभाषा बना दिया गया। इसी मानसिकता के तहत कालिदास को&lt;/span&gt;&lt;span style="" lang="HI"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;भारत का मिल्टन&lt;/span&gt;&lt;span style=""&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;समुद्र गुप्त को नेपोलियन बोनापार्ट और कह दिया जाता है&lt;/span&gt;&lt;span style=""&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;जो कि बिल्कुल औपनिवेशिक व्याख्या है&lt;/span&gt;&lt;span style=""&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;लेकिन आज वह दबाव खत्म हो चुका है।&lt;/span&gt;&lt;span style="" lang="HI"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;भारत नाम सबसे सार्थक है। यह शब्द संस्कृत के भ्र धातु से आया है&lt;/span&gt;&lt;span style=""&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;जिसका&lt;/span&gt;&lt;span style="" lang="HI"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;अर्थ है उत्पन्न करना&lt;/span&gt;&lt;span style=""&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;वहन करना निर्वाह करना। इस तरह भारत का शाब्दिक&lt;/span&gt;&lt;span style="" lang="HI"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;अर्थ है-जो निर्वाह करता है या जो उत्पन्न करता है। भारत का एक अन्य अर्थ&lt;/span&gt;&lt;span style="" lang="HI"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;है ज्ञान की खोज में संलग्न। अपने अर्थ और मूल्य में यह शब्द सेकुलर भी&lt;/span&gt;&lt;span style="" lang="HI"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;है। यह नाम प्राचीन राजा भरत से जुड़ा हुआ है&lt;/span&gt;&lt;span style=""&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;लेकिन इसका कोई धार्मिक&lt;/span&gt;&lt;span style="" lang="HI"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;मतलब नहीं। संविधान की आठवीं अनुसूची में उल्लिखित &lt;/span&gt;&lt;span style=""&gt;23 &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;भाषाओं में से लगभग&lt;/span&gt;&lt;span style="" lang="HI"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;सभी में इसे भारत&lt;/span&gt;&lt;span style=""&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;भारोत&lt;/span&gt;&lt;span style=""&gt;, &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;भारता या भारतम कहा जाता है। क्या अच्छा हो कि&lt;/span&gt;&lt;span style="" lang="HI"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;हम इसे इंडिया की जगह भारत पुकारें।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p class="MsoNormal"&gt;साभार: दैनिक जागरण&lt;br /&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:12;"  lang="HI" &gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/34531871-2406253414146033775?l=hindipanna.blogspot.com'/&gt;&lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/hindi-panna/~4/XcAdpvY3wcg" height="1" width="1"/&gt;</description><link>http://feedproxy.google.com/~r/hindi-panna/~3/XcAdpvY3wcg/blog-post_05.html</link><author>bhuvnesh.ad@gmail.com (भुवनेश शर्मा)</author><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">6</thr:total><feedburner:origLink>http://hindipanna.blogspot.com/2008/04/blog-post_05.html</feedburner:origLink></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-34531871.post-3996017806786706102</guid><pubDate>Fri, 04 Apr 2008 00:30:00 +0000</pubDate><atom:updated>2008-04-04T07:23:56.942+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">left parties</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">dalai lama</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">tibbet</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">भारत चीन संबंध</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">तिब्‍बत</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">tibbett</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">cpm</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">international politics</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">china</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">cpi</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">वामदल</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">दलाईलामा</category><title>चीन के आगे गिड़गिड़ाने के मायने</title><description>&lt;p class="MsoNormal"&gt;&lt;span  lang="HI" style="font-family:Mangal;"&gt;अब तो रोजमर्रा की बात हो चली है कि हमारे माननीय विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी चीन को आश्‍वासन देते रहते हैं कि हमारी धरती से आपके खिलाफ हम कोई गतिविधि नहीं होने देंगे। उधर चीन कभी आंखें दिखाता है तो कभी पीठ थपथपाता है।&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;    &lt;p class="MsoNormal"&gt;&lt;span  lang="HI" style="font-family:Mangal;"&gt;फिर से प्रणब मुखर्जी ने चीन के आगे घुटने टेकने वाले रुख के साथ वही बात दोहराई कि भारत तिब्‍बत को चीन का हिस्‍सा मानता है और भारत में ओलंपिक मशाल को पूरी सुरक्षा प्रदान की जाएगी। साथ ही दलाईलामा को फिर से समझाया गया है कि वे भारत में बस मेहमान बनकर रहें और चीन के खिलाफ कोई हरकत न करें। हालांकि वैसे भी वे कुछ करने के मूड में नहीं लगते।&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;    &lt;p class="MsoNormal"&gt;&lt;span  lang="HI" style="font-family:Mangal;"&gt;विदेश नीति के हिसाब से देखा जाए तो भारत और चीन के रिश्‍तों में लंबे समय की कटुता के बाद अब संबंध सामान्‍य हो चले हैं। हालांकि जानकारों का कहना है कि द्विपक्षीय संबंधों के इस मधुर दौर में भारत को चीन के खिलाफ कुछ भी कहने से बचना चाहिए। पर मेरा मानना है कि भारत भले ऐसा सोचता हो चीन कभी भारत के साथ संबंध मधुर रखने का पक्षधर नहीं रहा है। वह केवल दबाव की विदेश नीति भारत जैसे देशों पर लागू करता रहा है और संभवत: आगे भी करता रहेगा। दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंध भी इस कारण सामान्‍य हैं कि भारत के साथ उसका कारोबार 60 अरब डॉलर के आंकड़े पर दस्‍तक दे रहा है और आर्थिक संबंधों को बनाये रखने तथा भारत में अपना माल खपाने के लिए वह अच्‍छे संबंधों की बात कर रहा है। यदि भारत-चीन कारोबार ऐसी ऊंचाईयां नहीं छू रहा होता तब भी क्‍या वह भारत के साथ ऐसे ही संबंधों का पक्षधर होता इसमें शक की कोई गुंजाइश नहीं है। संबंधों की इस कथित मधुरता के दौर में भी वह भारत के प्रधानमंत्री के अपने ही एक सीमांत प्रदेश में दौरे पर आ‍पत्ति उठाता है और प्रणब मुखर्जी जैसे लोगों को उसका बचाव करना पड़ता है।&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;    &lt;p class="MsoNormal"&gt;&lt;span  lang="HI" style="font-family:Mangal;"&gt;कूटनीतिक नजरिए से देखा जाए तो भारत ने तिब्‍बत मसले पर प्रारंभ में समझदारी का परिचय दिया और तिब्‍बत को चीन का घरेलू मामला मानकर उससे दूरी बनाये रखी। यहां तक कि पूरा विश्‍व समुदाय इस बात पर चीन को गरियाता रहा पर भारत यही दोहराता रहा कि तिब्‍बत चीन का अभिन्‍न अंग है और वह अपनी जमीन से चीन विरोधी कोई गतिविधि नहीं होने देगा। वैसे भी भारत को चीन से सुधरते संबंधों की कीमत पर तिब्‍बत मसले में कोई टांग नहीं अड़ानी चाहिए। खासकर तब जब तिब्‍बती धर्मगुरू और उनकी निर्वासित सरकार भारतीय क्षेत्र में रहती है। क्‍योंकि इससे सीधा-सीधा संदेश जाता कि भारत अपनी जमीन से चीन विरोधी त्‍त्‍वों को समर्थन दे रहा है। &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;    &lt;p class="MsoNormal"&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;span  lang="HI" style="font-family:Mangal;"&gt;पर शुरू से ही चीन को भारत के द्वारा अपना रुख स्‍पष्‍ट कर दिये जाने के बावजूद वह भारत पर दबाव बना रहा है या कहें कि भारत की कमजोर विदेश नीति का वह पूरा फायदा उठाना चाहता है। जब भारत की धरती पर आकर अमेरिका की नेता नैंसी पेलोसी चीन को खरी-खोटी सुनाती हैं तब भी भारत खुद को इससे दूर रखता है। फिर भी हमारे नेताओं को बार-बार सफाई देने की जरूरत क्‍यों पड़ती है। उल्‍टा भारत कम से कम इस मामले में चीन को यह तो कह ही स‍कता था कि उसे अंतर्राष्‍ट़ीय समुदाय की भावनाओं का ख्‍याल रखना चाहिए था या तिब्‍बत मसले का वह शांतिपूर्वक समाधान खोजे। पर हमारे नेताओं को चीन से अपनी पीठ थपथपाये जाने का चस्‍का लग गया है और शुरू से ही स्‍पष्‍ट रुख रखने के बावजूद चीन की मनमर्जी के हिसाब से बयान दे रहे हैं। इससे अप्रत्‍यक्ष रूप से अंतर्राष्‍ट्रीय समुदाय के चीन पर पड़ने वाले दबाव को कम करने की साजिश की बू आती है और संदेश जाता है कि भारत इस मामले में चीन के साथ है। &lt;span style=""&gt; &lt;/span&gt;कहने की जरूरत नहीं कि इसमें बहुत बड़ा हाथ भारत के देशद्रोही वामदलों का है जो हमेशा फिलिस्‍तीन, कश्‍मीर या ईरान मसले पर चिल्‍ला-चिल्‍लाकर आसमान एक कर देते हैं। पर तिब्‍बत मसले पर मुंह पर पट्टी बांध लेते हैं क्‍योंकि इससे उनका चहेते चीन के हित जुड़े हैं जिसे वो अपना माई-बाप मानते हैं। पर भारत सरकार को यह तो सोचना चाहिए कि वह गद्दारों के दबाव में अपनी विदेश नीति चलाए या भारतीय हितों के मद्देनजर। &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;    &lt;p class="MsoNormal"&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;span  lang="HI" style="font-family:Mangal;"&gt;कुल मिलाकर शुरूआत में सही नीति अपनाने के बावजूद हमारे नेता अब पूरी तरह से चीन के दबाव मे दिख रहे हैं और बेवजह भारत की छवि को खराब करने के लिए चीन की जी-हुजूरी करने में जुट गये हैं।&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/34531871-3996017806786706102?l=hindipanna.blogspot.com'/&gt;&lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/hindi-panna/~4/fx6WMaY3fBc" height="1" width="1"/&gt;</description><link>http://feedproxy.google.com/~r/hindi-panna/~3/fx6WMaY3fBc/blog-post_04.html</link><author>bhuvnesh.ad@gmail.com (भुवनेश शर्मा)</author><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">6</thr:total><feedburner:origLink>http://hindipanna.blogspot.com/2008/04/blog-post_04.html</feedburner:origLink></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-34531871.post-4361289179009026218</guid><pubDate>Thu, 03 Apr 2008 00:30:00 +0000</pubDate><atom:updated>2008-04-03T14:23:53.701+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">pratibha patil</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">panchayat</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">महिला आरक्षण</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">upa</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">पंचायती राज</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">women empowerment</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">bjp</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">women reservation</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">reservation</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">आरक्षण</category><title>ऐसे आरक्षण से किसका भला होगा ?</title><description>&lt;p class="MsoNormal"&gt;&lt;span  lang="HI" style="font-family:Mangal;"&gt;ज्‍यादा समय नहीं हुआ जब भाजपा ने चिल्‍ला-चिल्‍लाकर महिला आरक्षण के मामले में यूपीए सरकार को कठघरे में खडा़ किया कि वह महिला आरक्षण मामले में गंभीर नहीं दिखती और अपने संगठन में महिलाओं को आरक्षण देने की घोषणा भी की। वहीं कांग्रेस की नेता और महिला एवं बाल विकास मंत्री रेणुका चौधरी ने कहा कि सरकार इसी सत्र में महिला आरक्षण विधेयक लाना चाहती है। हालांकि मामला अभी तक लटका हुआ है और हो सकता है आगे भी लटका रहे। महिला अधिकारों की बात करने वालों से माफी मांगते हुए मेरा ये प्रश्‍न है कि क्‍या उन्‍होंने गंभीरता से कभी विचार किया है कि इस प्रकार के आरक्षण से महिलाओं की स्थिति में वाकई कुछ परिवर्तन हो सकता है &lt;/span&gt;?&lt;/p&gt;    &lt;p class="MsoNormal"&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;span  lang="HI" style="font-family:Mangal;"&gt;आईये कुछ उदाहरणों पर नजर डालते हैं-&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;      &lt;p class="MsoNormal"&gt;&lt;span  lang="HI" style="font-family:Mangal;"&gt;पहला- मेरे शहर में स्‍थानीय नगरपालिका में महिलाओं के लिए कुछ सीटें आरक्षित हैं और जिले में कुछ नगरपालिकाओं में कहीं-कहीं अध्‍यक्ष भी महिला ही हो सकती है। जिस प्रकार से चुनावों में साधारणतया ईमानदार, समाज के लिए कुछ करने का जज्‍बा रखने वाले कर्तव्‍यनिष्‍ठ भद्र पुरुष भाग लेने से कतराते हैं तो जाहिर है कि कोई पढ़ी-लिखी, जागरूक और अधिकारसंपन्‍न महिला से चुनाव लड़ने की उम्‍मीद तो नहीं की जा सकती क्‍योंकि उसके पास ना तो समर्थकों के रूप में गुंडों की फौज है और ना ही वोट-बैंक या फर्जी वोट डलवाने की कूबत।&lt;br /&gt;विभिन्‍न वार्डों के बाहुबलियों या प्रभावशाली लोग महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों को ऐसे ही तो नहीं छोड़ देने वाले। ऐसे में इन दबंगों, गुंडों और बाहुबलियों के द्वारा अपनी-अपनी पत्नियों को चुनाव लड़वाना आम बात है। चुनाव में प्रचार भी इनके खुद के नाम पर ही किया जाता है और कहा जाता है कि फलानेराम चुनाव लड़ रहे हैं। कई बार तो जनता को उम्‍मीदवार महिला का नाम तक नहीं पता होता। यहां तक कि जीतने के बाद भी ये महिलाएं स्‍थानीय स्‍तर पर जनता की नुमाइंदगी करने की बजाय घर का चूल्‍हा-चौका करते ही नजर आती हैं। इनमें से अधिकांश महिलाएं अनपढ़ होती हैं तो इन्‍हें अपने पद और कार्यक्षेत्र के बारे में कतई कोई जानकारी नहीं होती। ऐसे में इनके पति महोदय ही इनके नाम पर अपने क्षेत्र में अपनी राजनीति करते हैं और स्‍थानीय निकाय की बैठकों में भी भाग लेते देखे जाते हैं। &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class="MsoNormal"&gt;&lt;span  lang="HI" style="font-family:Mangal;"&gt;कल के स्‍थानीय अखबार ने नगरपालिका परिषद की बैठक की रिपोर्ट छापी जिसके अनुसार सभी महिला पार्षद इस बैठक में शामिल हुईं पर केवल श्रोता के रूप में जबकि बहस आदि कार्यवाही करने का काम इनके पतियों ने किया। ऐसे में इनकी महिलाओं की उस बैठक और यहां तक कि उस पद पर क्‍या अहमियत है।&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;    &lt;p class="MsoNormal"&gt;&lt;span  lang="HI" style="font-family:Mangal;"&gt;दूसरा- मेरे पड़ौस के विधानसभा क्षेत्र की विधायक एक महिला हैं। हालांकि विधायक होने के नाते वे क्षेत्र में लोगों से मिलती-जुलती हैं और उनकी समस्‍याएं सुनती हैं पर हर समय उनके पति महाशय उनके साथ मौजूद रहते हैं और साफ-साफ कहें तो लोगों से बात भी वही करते हैं और बाकी सारे काम भी जो उनकी विधायक पत्‍नी के जिम्‍मे हैं और विधायक महोदया हर जगह मूकदर्शक ही बनी रहती हैं। गनीमत है कि पति महोदय विधानसभा में उनकी कुर्सी पर नहीं बैठते।&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;    &lt;p class="MsoNormal"&gt;&lt;span  lang="HI" style="font-family:Mangal;"&gt;तीसरा- पास ही के जिले की एक नगरपालिका अध्‍यक्ष जो महिला हैं, को उनके पति महोदय के अवैध कार्यों और जमकर भ्रष्‍टाचार के आरोप में हटा दिया गया। जबकि अध्‍यक्ष महोदय जिनके ऊपर सारा कार्यभार होना चाहिए बस नाम के लिए ही थीं। अफसरों को धमकाने, उनसे मन-मुताबिक काम करवाने, नगरपालिका के फैसलों और पैसे खाने का पूरा जिम्‍मा उनके पति के ऊपर ही था। &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;    &lt;p class="MsoNormal"&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;span  lang="HI" style="font-family:Mangal;"&gt;चौथा- कुछ दिन पहले समाचार देख रहा था जिसमें एक महिला सरपंच से संवाददाता की बात हो रही थी। बातचीत में उसने महिला सरपंच से उनके कार्य करने तरीकों और योजनाओं की जानकारी मांगी तो उस सरपंच का कहना था कि उसे कुछ नहीं मालूम क्‍योंकि उसके वो ही(पति) सारा काम देखते हैं। &lt;span style=""&gt; &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;    &lt;p class="MsoNormal"&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;span  lang="HI" style="font-family:Mangal;"&gt;ये हैं महिलाओं की राजनीति में स्थिति और आरक्षण की प्रासंगि‍कता को टटोलते कुछ मामले जो मैंने अपने आस-पास देखे और कोई भी ऐसी स्थितियों को अपने आस-पास महसूस कर सकता है। &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;    &lt;p class="MsoNormal"&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;span  lang="HI" style="font-family:Mangal;"&gt;सवाल ये है कि क्‍या केवल महिला आरक्षण लागू कर देने से महिलाओं की स्थिति में कुछ सुधार होने वाला है &lt;/span&gt;? &lt;span  lang="HI" style="font-family:Mangal;"&gt;देश में एक महिला राष्‍ट्रपति के बनने पर खूब हल्‍ला मचता है कि महिला सशक्तिकरण की दिशा में ये मील का पत्‍थर है। पर क्‍या केवल उनके महिला होने से ही देश की महिलाओं के सशक्तिकरण की बात को बल मिलता है। मेरे ख्‍याल से ऐसे कहने वाले धोखे में हैं। जब-तब रटा-रटाया भाषण दे-देने वाली और सक्रियता के मामले में पुराने राष्‍ट्रपतियों के मुकाबले शून्‍य राष्‍ट्रपति भी देश की उन्‍हीं महिलाओं का प्रतीक हैं जिनके हाथ में सत्‍ता होने पर भी वे दूसरों का मुंह ताकती हैं। इसे तो मुझे महिला अशक्तिकरण कहना ज्‍यादा ठीक लगता है। &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;        &lt;p class="MsoNormal"&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;span  lang="HI" style="font-family:Mangal;"&gt;मध्‍यप्रदेश और बिहार के मुख्‍यमंत्री अपनी लोकलुभावन छवि के मद्देनजर स्‍थानीय निकायों में पचास प्रतिशत महिला आरक्षण की घोषणा करते हैं पर उनके प्रदेशों में महिलाओं का ये हाल है कि महिला संरपंचों को अपने अधिकारों के बारे में जानकारी तक नहीं है और उनके पतियों या परिवार के सदस्‍यों द्वारा पंचायतें बुलाई जाती हैं।&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p class="MsoNormal"&gt;&lt;span  lang="HI" style="font-family:Mangal;"&gt;महिला आरक्षण के समर्थकों का यह तर्क होगा कि पूरी तौर पर न सही कुछ तो परिवर्तन हुआ है। पर कब तक हम हर चीज में कुछ भी जैसी चीजों पर संतोष करते रहेंगे। जिस कछुआ चाल से परिवर्तन आ रहा है उससे तो शायद अभी और सौ साल लग सकते हैं स्थिति को सुधारने में। हम इस बात पर क्‍यों विचार नहीं करते कि और कौन से ऐसे उपाय हैं जिनसे अभी और कम से कम अगली पीढ़ी को वास्‍तविक अर्थों मे न्‍याय मिल सके। &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;    &lt;p class="MsoNormal"&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;span  lang="HI" style="font-family:Mangal;"&gt;मैं न तो यहां महिलाओं की स्थिति को सुधारने के लिए किये जाने वाले प्रयासों का विरोधी हूं और न ही आरक्षण का। पर कम से कम जब हम मौजूदा ढांचे के अनुसार अपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रहे तो सिवाय यह कहने के कि कुछ तो हो  रहा है, हमें इस पर विचार करना चाहिए कि ऐसे कौन से उपाय या संशोधन हैं जिनसे और बेहतर परिणाम लाये जा सकते हैं। &lt;span style=""&gt;             &lt;/span&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/34531871-4361289179009026218?l=hindipanna.blogspot.com'/&gt;&lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/hindi-panna/~4/hcprByCB7Jg" height="1" width="1"/&gt;</description><link>http://feedproxy.google.com/~r/hindi-panna/~3/hcprByCB7Jg/blog-post.html</link><author>bhuvnesh.ad@gmail.com (भुवनेश शर्मा)</author><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">3</thr:total><feedburner:origLink>http://hindipanna.blogspot.com/2008/04/blog-post.html</feedburner:origLink></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-34531871.post-1816815257854789477</guid><pubDate>Mon, 31 Mar 2008 06:54:00 +0000</pubDate><atom:updated>2008-11-13T16:38:33.893+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">hindi movie</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">katrina kaif</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">race hindi movie</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">latest bollywood movies</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">hindi film</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">कैटरीना कैफ</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">रेस</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">bollywood</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">बिपाशा बसु</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">race</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">bipasha basu</category><title>जिंदगी की नहीं फिल्‍मी रेस</title><description>&lt;span  lang="HI" style="font-family:Mangal;"&gt;अब्‍बास-मस्‍तान से जितनी उम्‍मीद की जाती है वे उससे ज्‍यादा कभी खरे नहीं उतरते। हालिया रिलीज रेस भी उनकी उसी थ्रिलर श्रेणी की फिल्‍म है जिसके लिए वे जाने जाते हैं। हालांकि थ्रिलर फिल्‍में वे लंबे समय से बनाते आ रहे हैं पर इस बार भी वे अपनी पुरानी लीक पर ही दिखाई देते हैं। भड़काऊ &lt;/span&gt;&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://2.bp.blogspot.com/_lilFNFkYooc/R_CMFL5Xy2I/AAAAAAAAAJI/mvyyRqKAuvw/s1600-h/Race.jpg"&gt;&lt;img style="margin: 0pt 10px 10px 0pt; float: left; cursor: pointer;" src="http://2.bp.blogspot.com/_lilFNFkYooc/R_CMFL5Xy2I/AAAAAAAAAJI/mvyyRqKAuvw/s400/Race.jpg" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5183797191824100194" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;span  lang="HI" style="font-family:Mangal;"&gt;संगीत, स्‍वार्थी किरदारों की आपसी लड़ाई और धुंआधार प्रचार इन सब चीजों का प्रयोग वे खुलकर अपनी फिल्‍मों में करते आए हैं। &lt;span style=""&gt; &lt;/span&gt;उनकी खासियत या कहें कौशल कि वे व्‍यावसायिक रूप से औसत दर्जे की फिल्‍म बनाकर सिनेमाघर में लोगों को खींच ही लाते हैं। &lt;/span&gt;    &lt;p class="MsoNormal"&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;span  lang="HI" style="font-family:Mangal;"&gt;इस बार रेस में उन्‍होंने अपनी इसी शैली और भीड़ खेंचू स्‍टारकास्‍ट के साथ अच्‍छा प्रयोग किया है। फिल्‍म दो भाईयों रणवीर(सैफ अली खान) और राजीव(अक्षय खन्‍ना) की आपसी लड़ाई पर केंद्रित है। दौलत के लिए ये दोनों एक-दूसरे की जान के दुश्‍मन बन जाते हैं। फिल्‍म में बिपाशा बसु, कैटरीना कैफ और समीरा रेड्डी जैसी अभिनेत्रियां महत्‍वपूर्ण किरदारों में हैं। अनिल कपूर भी इनवेस्‍टीगेशन ऑफीसर के कमाल के किरदार में हैं। अनिल कपूर आजकल किसी भी फिल्‍म में और कैसे भी किरदार में दिखाई दें प्रभावित करते हैं। फिल्‍म की शूटिंग दक्षिण अफ्रीका के शानदार लोकेशनों पर हुई है जो फिल्‍म की जान हैं। कैटरीना कैफ और बिपाशा हमेशा की तरह खूबसूरत और सेक्‍सी नजर आती हैं। सैफ अपने पूरे फॉर्म में हैं। &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class="MsoNormal"&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class="MsoNormal"&gt;&lt;span  lang="HI" style="font-family:Mangal;"&gt;फिल्‍म की कहानी बहुत दमदार तो नहीं पर अंत तक दर्शक को बांधे रखती है। कहानी के हिसाब से किरदारों का प्रयोग बढि़या तरीके से निर्देशकद्वय ने किया है। फिल्‍म के गाने टीवी के प्रोमो के हिसाब से तो बहुत अच्‍छे हैं पर फिल्‍म में ठूंसे हुए हैं। तेज गति से भागती फिल्‍म में गाने बोर ही करते हैं। फिल्‍म के अंत में तेज संगीत के साथ कारों की रेस दिखाई जाती है। इसे देखकर लगता है अब्‍बास-मस्‍तान ने अपनी थ्रिलर शैली और मसाला सिनेमा का कॉकटेल बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class="MsoNormal"&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class="MsoNormal"&gt;&lt;span  lang="HI" style="font-family:Mangal;"&gt;प्रीतम चक्रबर्ती जैसे संगीत के लिए जाने जाते हैं वैसा ही उन्‍होंने इस फिल्‍म में भी दिया है। गानों के &lt;span style=""&gt; &lt;/span&gt;वीडियोज प्रभावित करते हैं पर फिल्‍म में सिचुएशन के हिसाब से नहीं लगते। कुमार तौरानी की यह फिल्‍म भीड़ खींचने में कामयाब हो रही है। हालांकि इस हफ्ते रिलीज हुई &lt;/span&gt;‘&lt;span  lang="HI" style="font-family:Mangal;"&gt;वन टू थ्री&lt;/span&gt;’&lt;span  lang="HI" style="font-family:Mangal;"&gt; इसे कड़ी टक्‍कर देगी। जिंदगी की रेस दिखाकर फिल्‍म को पैसे कमाने की रेस में दौड़या गया है और काफी हद तक यह सफल भी है।&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/34531871-1816815257854789477?l=hindipanna.blogspot.com'/&gt;&lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/hindi-panna/~4/QrgzYxGQtts" height="1" width="1"/&gt;</description><link>http://feedproxy.google.com/~r/hindi-panna/~3/QrgzYxGQtts/blog-post_31.html</link><author>bhuvnesh.ad@gmail.com (भुवनेश शर्मा)</author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="http://2.bp.blogspot.com/_lilFNFkYooc/R_CMFL5Xy2I/AAAAAAAAAJI/mvyyRqKAuvw/s72-c/Race.jpg" height="72" width="72" /><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">4</thr:total><feedburner:origLink>http://hindipanna.blogspot.com/2008/03/blog-post_31.html</feedburner:origLink></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-34531871.post-134636603242518729</guid><pubDate>Thu, 20 Mar 2008 00:13:00 +0000</pubDate><atom:updated>2008-03-20T05:53:44.090+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">jayprakash narayan</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">woman empowerment</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">psc</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">infanticide</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">commodity market</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">female feticide</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">dowry</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">दहेज हत्‍या</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">शेयर</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">भ्रूण हत्‍या</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">feudalism</category><title>लड़कियों अभी तुम्‍हें मरना होगा, कमोडिटी मार्केट में तेजी है.......</title><description>&lt;p class="MsoNormal"&gt;&lt;span  lang="HI" style="font-family:Mangal;"&gt;मध्‍यप्रदेश में हाल ही में लोक सेवा आयोग और न्‍यायिक सेवा परीक्षाओं के नतीजे आने के बाद कमोडिटी मार्केट खूब उछालें मार रहा है। ऊंची जातियों में जहां तैयारी से पहले कमोडिटीज के औने-पौने दाम मिल रहे थे वहीं अब इनके रेट 25 से 50 लाख तक पहुंच रहे हैं। हालांकि बोली लगाने वालों की तो कोई कमी नहीं पर कम ही हैं पर उछलते मार्केट में हैसियत वाले ही भाव-ताव कर पा रहे हैं। &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;    &lt;p class="MsoNormal"&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;span  lang="HI" style="font-family:Mangal;"&gt;जी हां कमोडिटी मार्केट का मतलब आप समझ रहे होंगे। इस समय नौकरीशुदा और वह भी राज्‍यसेवा में चयनित लड़कों की रेट्स का आप अनुमान नहीं लगा सकते। फिर भी बोली लगाने वालों की यहां कोई कमी नहीं है। अपने विवाह के लिए लाखों की रिश्‍वत लेने वाले इन नए अफसरों से ईमानदारी की उम्‍मीद कतई मत करिएगा और बोली लगाने वाले जो लाखों की रकम लगा रहे हैं वो कहां से आ रही है&lt;/span&gt;?&lt;span  lang="HI" style="font-family:Mangal;"&gt; नहीं, वो सफेद कमाई तो बिलकुल नहीं है। हमारे समाज की यही विडंबना है कि यहां महिला सशक्तिकरण के बड़े-बड़े भाषण दिये जाते हैं, कानून बन जाते हैं, आरक्षण मिल जाता है पर महिलाओं की स्थिति वही है। वैसे भी सामंतवादी समाज में महिलाओं को क्‍या स्‍थान प्राप्‍त है ये सभी जानते हैं और &lt;span style="font-weight: bold;"&gt;जिस सामंतवाद के खात्‍मे की बात आजादी से अब तक होती रही है वो अपनी पूरी ताकत से साथ मौजूद है और फल-फूल रहा है&lt;/span&gt;। &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;    &lt;p class="MsoNormal"&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;span  lang="HI" style="font-family:Mangal;"&gt;कन्‍या भ्रूण हत्‍या के पीछे हमारे एनजीओ चिल्‍ल-पों मचाते हैं, सरकार रोज नयी-नयी योजनाएं बनाकर इसे खत्‍म करने की प्रतिबद्धता दोहराती रहती है पर इस समस्‍या की भयावहता में कोई कमी नहीं आती। क्‍या कारण है कि इतने प्रयासों के बावजूद हम इसे खतम तो क्‍या कम भी नहीं कर पाए है। इधर-उधर से लेकर गिनाने के लिए बहुत कारण हैं पर एक कारण है जिसकी बात हम कभी नहीं करते और करते भी हैं तो दूसरों के लिए। हमारे खुद के लिए ये बात हमें कतई नहीं सुहाती। दहेज&lt;/span&gt; ! &lt;span  lang="HI" style="font-family:Mangal;"&gt;जी हां यही वह कारण है जो आज कन्‍या-भ्रूण हत्‍या की एकमात्र और असली वजह है और दिनों-दिन झूठी शानो-शौकत के पीछे पागल हमारे समाज में इस महामारी को खत्‍म करने की बजाय प्रोत्‍साहन दिया जा रहा है। महानगरो में रहने वाले कुछ लोग इससे भले सहमत न हों पर छोटे शहरों और ग्रामीण भारत की यही हकीकत है। &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;    &lt;p class="MsoNormal"&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;span  lang="HI" style="font-family:Mangal;"&gt;ऊपर से हमारे मुख्‍यमंत्री सरीखे नेता ऐसे विवाह समारोहों में सम्मिलित होते हैं जहां लाखों-करोड़ों का दहेज खुलेआम दिया जाता है। अफसरी पाने वाले नौजवान या उनके परिवारजन कभी नहीं चाहते कि लड़की वालों से एकमुश्‍त मोटी रकम न वसूली जाए। &lt;span style="font-weight: bold;"&gt;सभ्‍य समाज लड़कियों को कितना ही पढ़ा-लिखा रहा है। पर उनके लिए ऊंची रकम पर दूल्‍हा खरीदना ही पड़ता है&lt;/span&gt;। और दूल्‍हों की खरीद-फरोख्‍त वाले इस सिस्‍टम से हम आशा नहीं कर सकते कि वहां लड़कियों को बराबरी का दर्जा अभी क्‍या पचास साल बाद भी मिल सकेगा। यह वही देश है जहां कभी लोकनायक ने संपूर्ण क्रांति की बात की थी। उन्‍होंने अपने जीते-जी इस प्रकार की खरीद-फरोख्‍त की सख्‍त मुखालफत की पर उनके बाद जितनी तेजी से उनकी क्रांति का पहिया उल्‍टी दिशा में घूमा उसको देखकर तो बस बस सिर ही फोड़ा जा सकता है।&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;    &lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;हमारे माननीय मुख्‍यमंत्री ने भी भ्रूण-हत्‍या जैसे मसले पर बड़ी संवेदनशीलता का परिचय दिया। उन्‍होंने &lt;/span&gt;&lt;span style=""&gt;‘&lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;लाड़ली बेटी योजना&lt;/span&gt;&lt;span style=""&gt;’&lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt; या शायद &lt;/span&gt;&lt;span style=""&gt;‘&lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;लाड़ली लक्ष्‍मी योजना&lt;/span&gt;&lt;span style=""&gt;’&lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt; शुरू की है जिसमें लड़कियों के जन्‍म के समय उनके नाम बैंक में सरकार कुछ रकम जमा करेगी और ये रकम उसके विवाह के समय काम आयेगी। उनकी शिक्षा के लिए लिए भी कुछ योजनाएं शुरू की गई हैं। पर बात यहीं पर आकर अटक जाती है कि जब शादी पर खर्च करना ही है तो बच्चियों की जरूरत ही क्‍या है। &lt;span style="font-weight: bold;"&gt;लड़कियों को पालना, उन्‍हें शिक्षा देना ऐसा शेयर हो गया है जिसमें निवेश करते रहने के बावजूद वापस कुछ नहीं मिलता&lt;/span&gt;। तो फिर हमारे सभ्‍य समाज के समझदार लोग उन्‍हें दुनियां में आने ही क्‍यों देंगे &lt;/span&gt;&lt;span style=""&gt;&lt;span style="font-size:100%;"&gt;?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-style: italic; font-weight: bold;font-size:100%;" &gt;अगली पोस्‍ट में  ऐसे भयावह  आंकड़े  जिन्‍हें देखकर  भारत की  महान संस्‍कृति  का डंका  पीटने  वालों को  जूते  मारने का  मन करता है ............  &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/34531871-134636603242518729?l=hindipanna.blogspot.com'/&gt;&lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/hindi-panna/~4/LXgZGcoJZUE" height="1" width="1"/&gt;</description><link>http://feedproxy.google.com/~r/hindi-panna/~3/LXgZGcoJZUE/blog-post_20.html</link><author>bhuvnesh.ad@gmail.com (भुवनेश शर्मा)</author><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">3</thr:total><feedburner:origLink>http://hindipanna.blogspot.com/2008/03/blog-post_20.html</feedburner:origLink></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-34531871.post-2140201062468246968</guid><pubDate>Tue, 18 Mar 2008 12:40:00 +0000</pubDate><atom:updated>2008-11-13T16:38:34.162+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">water conservation</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">apj abdul kalam</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">काली बेई</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">yamuna</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">बलवीर सिंह सींचेवाल</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">ganga</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">ngo</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">environment</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">guru nanak</category><title>जरूरत है बलवीर सिंह जैसे नायकों की</title><description>&lt;span  lang="HI" style="font-family:Mangal;"&gt;पर्यावरण के प्रति जागरूक लोगों के लिए बाबा बलवीर सिंह सींचेवाल कोई अनजाना नाम नहीं हैं। बलवीर सिंह सींचेवाल ने पंजाब की एक नदी जो गं&lt;/span&gt;&lt;span  lang="HI" style="font-family:Mangal;"&gt;दा नाला बन चुकी थी, को अपने प्रयासों से पुनर्&lt;/span&gt;&lt;span  lang="HI" style="font-family:Mangal;"&gt;जीवित करके दिखा दिया कि अनियंत्रित व अनियोजि&lt;/span&gt;&lt;span  lang="HI" style="font-family:Mangal;"&gt;त विकास के इस यु्ग में यदि समाज और सरकारें &lt;/span&gt;&lt;span  lang="HI" style="font-family:Mangal;"&gt;अपनी भूमिका का ठीक से निर्वहन करें तो सही अर्थों में विकास की निर्मल गंगा बहाई जा सकती है। पर विडंबना है कि वर्तमान में जारी विकास हर&lt;/span&gt;&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://2.bp.blogspot.com/_lilFNFkYooc/R9-4phvCWeI/AAAAAAAAAH0/1TONJloj9rU/s1600-h/ganga+garbage.JPG"&gt;&lt;img style="margin: 0px auto 10px; display: block; text-align: center; cursor: pointer;" src="http://2.bp.blogspot.com/_lilFNFkYooc/R9-4phvCWeI/AAAAAAAAAH0/1TONJloj9rU/s320/ganga+garbage.JPG" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5179061120069163490" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;span  lang="HI" style="font-family:Mangal;"&gt; तरह से पर्यावरण के लिए अभिशाप साबित हो रहा है और यदि हमने विकास की इस अनवरत प्रक्रिया में अपनी जिम्‍मेदारी को ईमानदारी से स्‍वीकार नहीं किया तो बहुत कुछ हमेशा के लिए पीछे छूट जाएगा।&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;    &lt;p class="MsoNormal"&gt;&lt;span  lang="HI" style="font-family:Mangal;"&gt;160 किलोमीटर लंबी काली बेई नदी पंजाब में सतलज की सहायक नदी है। एक समय &lt;span style=""&gt; &lt;/span&gt;था जब 32 शहरों की गंदगी और समाज की उपेक्षा की मार सहती इस नदी की हालत देश की अनगिनत नालों में तब्‍दील हो चुकी नदियों की तरह ही थी। यह वही नदी है जिसके किनारे सिखों के गुरू नानकदेवजी को दिव्‍यज्ञान प्राप्‍त हुआ था। पर समय के साथ देश की अन्‍य नदियों की तरह ही इस नदी के लिए भी अस्तित्‍व का संकट पैदा हो गया। तब इस नदी के पुनरुद्धार करने का बीड़ा उठाया बाबा बलवीर सिंह ने।&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;    &lt;p class="MsoNormal"&gt;&lt;span  lang="HI" style="font-family:Mangal;"&gt;पंजाब के एक छोटे से गांव सींचेवाल के इस संत ने अपने बलबूते इस नदी को साफ करने का बीड़ा उठाया। संत बलवीर सिंह ने अपने शिष्‍यों के साथ इस काम को अंजाम देने के साथ-साथ अपने गुरुद्वारे में आने वाले श्रद्धालुओं को इस नदी के उद्धार के लिए जुट जाने को प्रेरित किया। उन्‍होंने लोगों को समझाया कि वे गुरुनानक के चरण स्‍पर्श प्राप्‍त इस नदी की सफाई कर भगवान की सच्‍चे अर्थों में सेवा कर सकेंगे। सन 2000 में उनके द्वारा शुरू किये गये प्रयासों के कुछ वर्षों में ही इसका असर दिखा और आज इसकी निर्मल धारा को देखकर सहसा विश्‍वास नहीं होता कि बिना कुछ खर्च किये केवल मानवीय प्रयासों से कैसे एक खत्‍म हो चुकी नदी को पुनर्जीवन दिया जा सकता है। &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;    &lt;p class="MsoNormal"&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;span  lang="HI" style="font-family:Mangal;"&gt;संत सींचेवाल का कालीबेई के लिए किया गया यह योगदान आज नदी संरक्षण में लगे लोगों, सरकारों और एजेंसियों के लिए प्रेरणा बन गया है। तत्‍कालीन राष्‍ट्रपति ए.पी.जे. अब्‍दुल कलाम ने जब इस बारे में सुना तो वे खुद इस अनुपम प्रयोग को देखने पहुंचे। उनके भाषणों में अक्‍सर संत सींचेवाल और कालीबेई का जिक्र रहता है। फिलीपींस सरकार ने भी उनके इस प्रयोग के बारे में जानकर मनीला की एक नदी के पुनरुद्धार के लिए उनसे सहयोग मांगा है।&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;    &lt;p class="MsoNormal"&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;span  lang="HI" style="font-family:Mangal;"&gt;गंगा और यमुना की सफाई पर करोड़ों रुपए डकार जाने वाली सरकारों, एनजीओ और हम खुद जो गंगा को गंगामैया कहते हैं क्‍या अब भी उदासीन बने रहेंगे &lt;/span&gt;?&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/34531871-2140201062468246968?l=hindipanna.blogspot.com'/&gt;&lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/hindi-panna/~4/zbFcJ6flCMg" height="1" width="1"/&gt;</description><link>http://feedproxy.google.com/~r/hindi-panna/~3/zbFcJ6flCMg/blog-post_18.html</link><author>bhuvnesh.ad@gmail.com (भुवनेश शर्मा)</author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="http://2.bp.blogspot.com/_lilFNFkYooc/R9-4phvCWeI/AAAAAAAAAH0/1TONJloj9rU/s72-c/ganga+garbage.JPG" height="72" width="72" /><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">2</thr:total><feedburner:origLink>http://hindipanna.blogspot.com/2008/03/blog-post_18.html</feedburner:origLink></item><item><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-34531871.post-774720727185075030</guid><pubDate>Sat, 15 Mar 2008 16:04:00 +0000</pubDate><atom:updated>2008-11-13T16:38:34.371+05:30</atom:updated><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">अनिल कपूर</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">hindi movie</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">अनुराग सिन्‍हा</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">subhash ghai</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">terrorism</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">sufism</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">anurag sinha</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">taare jameen par</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">sukhwinder</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">black and white</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">anil  kapoor</category><category domain="http://www.blogger.com/atom/ns#">sufi</category><title>और भी रंग हैं जिंदगी के: ब्‍लैक एंड व्‍हाइट</title><description>&lt;span  lang="HI" style="font-family:Mangal;"&gt;सिनेमाघर में जाकर पता लगा कि ब्‍लैक एंड व्‍हाईट सुभाष घई की फिल्‍म है। ऐसा फिल्‍मकार जिसकी फिल्‍मों में बड़े स्‍टार, भव्‍य सेट्स, लार्जर दैन लाइफ कहानियां और मधुर संगीत होता है, इस बार लीक से हटकर कुछ प्रयोग कर रहा है यह जानकर अच्‍छा लगा। हालांकि शोमैन सुभाष&lt;span style=""&gt;  &lt;/span&gt;की फिल्‍में मुझे कभी अच्‍छी नहीं लगीं पर उनकी फिल्‍मों का संगीत जरूर लुभाता है। पर इस&lt;/span&gt;&lt;span  lang="HI" style="font-family:Mangal;"&gt; बार उन्‍होंने अपनी शोमैन की छवि को बदलने का प्रयास किया है। वैसे भी पिछले काफी समय से उनके सितारे गर्दिश में ही चल रहे हैं और उनकी बड़े बजट की फिल्‍में पिट भी चुकी हैं। शायद यही कारण है कि वे &lt;/span&gt;‘&lt;span  lang="HI" style="font-family:Mangal;"&gt;चक दे इंडिया&lt;/span&gt;’&lt;span  lang="HI" style="font-family:Mangal;"&gt; और &lt;/span&gt;‘&lt;span  lang="HI" style="font-family:Mangal;"&gt;तारे जमीं पर&lt;/span&gt;’&lt;span  lang="HI" style="font-family:Mangal;"&gt; के समय में सामाजिक सरोकारों वाली फिल्‍मों पर सोचने लगे हैं। &lt;/span&gt;    &lt;p class="MsoNormal"&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;span  lang="HI" style="font-family:Mangal;"&gt;फिल्‍म कहानी है एक मुस्लिम युवक नुमैर &lt;/span&gt;&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://2.bp.blogspot.com/_lilFNFkYooc/R9v0DhvCWdI/AAAAAAAAAHo/yg39pPb85PY/s1600-h/2black.jpg"&gt;&lt;img style="margin: 0pt 10px 10px 0pt; float: left; cursor: pointer;" src="http://2.bp.blogspot.com/_lilFNFkYooc/R9v0DhvCWdI/AAAAAAAAAHo/yg39pPb85PY/s320/2black.jpg" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5178000538024958418" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;span  lang="HI" style="font-family:Mangal;"&gt;काजी(अनुराग सिन्‍हा) की जो अफगानिस्‍तान के किसी आतंकवादी शिविर से प्रशिक्षण लेकर दिल्‍ली आता है। वह एक फियादीन हमलावर है जो 15 अगस्‍त के दिन दिल्‍ली के लाल किले पर विस्‍फोट करने के मकसद से दिल्‍ली आया है। दिल्‍ली में वह चांदनी चौक में एक रिश्‍तेदार के यहां ठहरा हुआ है। फिल्‍म में अनिल कपूर एक उर्दू प्रोफेसर राजन माथुर की प्रभावी भूमिका में हैं साथ ही उर्दू शायर की भूमिका में गफ्फार भाई(हबीब तनवीर) भी हैं। &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;    &lt;p class="MsoNormal"&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;span  lang="HI" style="font-family:Mangal;"&gt;फिल्‍म के माध्‍यम से घई मुस्लिम आतंकवादियों को पैगाम देते नजर आए हैं कि हिंसा की इजाजत कोई धर्म नहीं देता। उन्‍होंने फिल्‍म के चरित्रों के माध्‍यम से उस संस्‍कृति को दिखाया है जिसे हम साझा संस्‍कृति कहते हैं और जिसमें हिंदू और मुसलमान दोनों ही धर्मों के लोगों के लिए सम्‍मान है। मुहब्‍बत का संदेश देने वाली इस फिल्‍म के जरिए बहुत ही प्रासंगिक विषय को उठाया गया है। पर अच्‍छे विषय पर बनी फिल्‍म भी उतनी ही अच्‍छी होती तो एक बड़े दर्शक वर्ग तक इसका पैगाम पहुंचता। सुभाष घई ने लीक से हटकर सार्थक सिनेमा बनाने की कोशिश में निराश किया है। एक अच्‍छा विषय ही फिल्‍म के अच्‍छे होने की गारंटी नहीं है बल्कि उसे दमदार तरीके से प्रस्‍तुत करना महत्‍वपूर्ण है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class="MsoNormal"&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;फिल्‍म के नायक अनुराग सिन्‍हा ने अपनी पहली ही फिल्‍म में अभिनय से प्रभावित किया है। वैसे भी रंगमंच का अनुभव होने के कारण वे मंजे हुए कलाकार हैं। पर निर्देशक ने उनकी प्रतिभा का ठीक ढंग से इस्‍तेमाल नहीं किया है। अनिल कपूर हमेशा की तरह फॉर्म में हैं। हबीब तनवीर कम समय के लिए दिखे हैं। उनके जैसे कलाकार के लिए फिल्‍म में कोई स्‍कोप नहीं है। फिल्‍म का संगीत पक्ष भी कमजोर सा है। एक गीत &lt;/span&gt;&lt;span style=""&gt;‘&lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;मैं चला&lt;/span&gt;&lt;span style=""&gt;’&lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt; को छोड़कर बाकी कुछ खास नहीं हैं। सही कहा जाए तो फिल्‍म के सभी पक्षों पर भावुकता और नाटकीयता हावी है जबकि चित्रण पर ठीक से ध्‍यान नहीं दिया गया है। सुभाष घई को अपनी भूमिका ऐसे विषयों में निर्माता तक ही सीमित रखनी चाहिए। कम से कम ऐसी प्रयोगवादी फिल्‍मों में तो नहीं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/34531871-774720727185075030?l=hindipanna.blogspot.com'/&gt;&lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/hindi-panna/~4/bz9f8QnOjH4" height="1" 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