<?xml version='1.0' encoding='UTF-8'?><?xml-stylesheet href="http://www.blogger.com/styles/atom.css" type="text/css"?><feed xmlns='http://www.w3.org/2005/Atom' xmlns:openSearch='http://a9.com/-/spec/opensearchrss/1.0/' xmlns:blogger='http://schemas.google.com/blogger/2008' xmlns:georss='http://www.georss.org/georss' xmlns:gd="http://schemas.google.com/g/2005" xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'><id>tag:blogger.com,1999:blog-7024567440226660873</id><updated>2026-02-09T03:04:03.213+05:30</updated><category term="कम्युनिज्म"/><category term="मार्क्‍सवाद"/><category term="भाजपा"/><category term="नंदीग्राम नरसंहार"/><category term="अन्य लेख"/><category term="आतंकवाद विरोध"/><category term="यूपीए की असफलताएं"/><category term="सांस्कृतिक राष्ट्रवाद"/><category term="कर्नाटक में भाजपा की जीत"/><category term="इस्‍लाम"/><category term="संजीव कुमार सिन्हा"/><category term="नक्सली आतंकवाद"/><category term="श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड"/><category term="राम सेतु"/><category term="अर्थशास्‍त्र"/><category term="कुलदीप चंद अग्निहोत्री"/><category term="माकपा"/><category term="सीपीएम"/><category term="अखण्ड भारत"/><category term="कांग्रेस"/><category term="तरूण विजय"/><category term="मीडिया"/><category term="अम्बा चरण वशिष्ठ"/><category term="अरुण जेटली"/><category term="राष्ट्रभाषा हिन्दी"/><category term="विडियो"/><category term="श्री लाल कृष्ण आडवाणी"/><category term="जम्मू-कश्मीर"/><category term="जेएनयू का पर्चा"/><category term="तिब्बत की आजादी"/><category term="बलबीर पुन्ज"/><category term="संसद में बहस"/><category term="अल्‍पसंख्‍यक तुष्टिकरण"/><category term="खबर पर नजर"/><category term="बंगलादेशी घुसपैठ"/><category term="भारत-अमेरिका नाभिकीय समझौता"/><category term="श्री नरेंद्र मोदी"/><category term="आज के प्रश्न"/><category term="आर्थिक"/><category term="ईसाई"/><category term="एनडीए"/><category term="दीनानाथ मिश्र"/><category term="धर्मनिरपेक्षता"/><category term="धर्मान्‍तरण"/><category term="धारा 370"/><category term="पं बंगाल"/><category term="बर्मा में लोकतंत्र की मांग"/><category term="राष्ट्र"/><category term="राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ"/><category term="श्री अटल बिहारी वाजपेयी"/><category term="श्रीराम जन्‍मभूमि आंदोलन"/><category term="समाज"/><category term="साहित्‍य"/><category term="हिन्दू राष्ट्र"/><category term="हिन्‍दुत्‍व"/><title type='text'>हितचिन्तक- लोकतंत्र एवं राष्ट्रवाद की रक्षा में।</title><subtitle type='html'>लोकतंत्र एवं राष्ट्रवाद की रक्षा में।</subtitle><link rel='http://schemas.google.com/g/2005#feed' type='application/atom+xml' href='http://hitchintak.blogspot.com/feeds/posts/default'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7024567440226660873/posts/default?alt=atom'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://hitchintak.blogspot.com/'/><link rel='hub' href='http://pubsubhubbub.appspot.com/'/><link rel='next' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7024567440226660873/posts/default?alt=atom&amp;start-index=26&amp;max-results=25'/><author><name>संजीव कुमार सिन्‍हा</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11879095124650917997</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg-VUG_8k4GcxEdCmjpiY_6UDali2WkziCy8QL3pvL6x98CxCQkSWCPT0QSOxfne88NMZUAxuRH02FkYn1eMUbfqb1lDlWyIjQte5L7cGqhL9x2KHht1Wlw7WNx98YJCQ/s220/Mintoo.jpg'/></author><generator version='7.00' uri='http://www.blogger.com'>Blogger</generator><openSearch:totalResults>343</openSearch:totalResults><openSearch:startIndex>1</openSearch:startIndex><openSearch:itemsPerPage>25</openSearch:itemsPerPage><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7024567440226660873.post-5150729967803163394</id><published>2022-02-18T18:20:00.001+05:30</published><updated>2022-03-04T18:24:06.256+05:30</updated><title type='text'>मोदी सरकार में विभिन्न योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को सशक्त किया गया : डॉ. भारतीबेन शियाल</title><content type='html'>&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;div class=&quot;initial-letter&quot;&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (8 मार्च) पर विशेष साक्षात्कार&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और लोकसभा सांसद डॉ.
 भारतीबेन शियाल से नई दिल्ली स्थित उनके निवास पर कमल संदेश के सह संपादक&lt;/strong&gt;&lt;span style=&quot;color: #ff6600;&quot;&gt; संजीव कुमार सिन्हा &lt;/span&gt;&lt;strong&gt;और कमल संदेश डिजिटल टीम के सदस्य&lt;/strong&gt; &lt;span style=&quot;color: #ff6600;&quot;&gt;विपुल शर्मा &lt;/span&gt;&lt;strong&gt;ने
 राजनीति में महिलाओं की भागीदारी, महिला कार्यकर्ता को लेकर भाजपा का 
संगठनात्मक दृष्टिकोण एवं महिला सशक्तिकरण हेतु मोदी सरकार के असाधारण 
प्रयासों को लेकर चर्चा की। प्रस्तुत है इस बातचीत के प्रमुख अंश :&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;सबसे पहले हमें यह बताइए कि आप भाजपा से कब और कैसे जुड़ीं? अपनी राजनीतिक यात्रा के बारे में बताएं।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;देखा जाए तो मेरी राजनीतिक यात्रा वर्ष 2000 में शुरू हुई। मैं जिला 
पंचायत का चुनाव लड़ी और अच्छे वोटों से जीती। यह वह दौर था, जब जिला 
पंचायत पर कांग्रेस पार्टी का कब्जा था। लेकिन कांग्रेस की अंदरूनी कलह के 
चलते भाजपा को जिला पंचायत पर शासन करने का अवसर मिला और मैं जिला पंचायत 
की अध्यक्ष बनी। इसके बाद भाजपा संगठन के साथ जुड़कर भी विभिन्न दायित्वों 
का निर्वहन किया। जिला स्तर पर मुझे तीन बार उपाध्यक्ष पद पर कार्य करने का
 मौका मिला। इसके अलावा मंडलों और बहुत सारे प्रकोष्ठों की प्रभारी रही। 
इसके उपरांत प्रदेश स्तर पर ओबीसी मोर्चा की कार्यकारिणी में रहने का अवसर 
मिला। ऐसे ही प्रदेश कार्यकारिणी में भी रहने का अवसर मिला। इसके बाद वर्ष 
2012 में तलाजा विधानसभा से चुनाव लड़ी और अच्छे अंतर से जीत हासिल की। 
वर्ष 2014 में मुझे लोकसभा चुनाव लड़ने का अवसर मिला और यह पहली बार था जब 
किसी महिला को भावनगर लोकसभा संसदीय क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया गया था। जब
 चुनाव परिणाम आए तो पूरे सौराष्ट्र क्षेत्र में मेरी जीत का अंतर सबसे 
अधिक था। ऐसे ही 2019 के लोकसभा चुनाव में मुझे एक बार फिर भावनगर से चुनाव
 लड़ने का अवसर मिला और इस बार मेरी जीत का अंतर पिछली बार की तुलना में और
 बेहतर हो गया। संगठन स्तर पर भी मेरा निरंतर योगदान रहा। इसके बाद मुझे 
भाजपा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष का दायित्व दिया गया।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;भाजपा संगठन में महिला भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए किस तरह के प्रयास किए जाते हैं?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;स्थापना काल से ही भाजपा में महिलाओं को उचित स्थान मिलता आया है। 
संगठनात्मक स्तर पर कम से कम 33 प्रतिशत महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित की 
जाती है। मेरे अनुभव में पार्टी के भीतर बूथ स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर 
तक महिलाओं की सशक्त भागीदारी सुनिश्चित होती है। वर्तमान में राष्ट्रीय 
स्तर पर पांच उपाध्यक्ष, एक महामंत्री एवं चार मंत्री महिला कार्यकर्ता 
हैं। इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर पर महिला मोर्चा है, जिनके 
माध्यम से महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;संगठन में महिला कार्यकताओं के राजनीतिक प्रशिक्षण के लिए किस तरह के कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;हमारी पार्टी में मंडल स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक प्रशिक्षण 
कार्यक्रम चल रहे हैं। देखा जाए तो जब किसी महिला को संगठन में कोई दायित्व
 मिलता है या वह जनप्रतिनिधि बनती है, तो उन सभी को पार्टी प्रशिक्षण विभाग
 द्वारा प्रशिक्षित किया जाता है। जब मैं विधानसभा में चुनकर पहुंची थी, तो
 उस दौरान भी हमारे लिए तीन दिवसीय प्रशिक्षण वर्ग का आयोजन किया गया था। 
जिसमें हमें बताया गया कि कैसे विधानसभा में कार्य करना है और कैसे आम जनता
 के लिए कार्य करना है। इसके अतिरिक्त किस प्रकार से अधिकारियों के साथ काम
 करना है और किस प्रकार सरकार के साथ समन्वय स्थापित करना है, यह भी बताया 
गया।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;मोदी सरकार ने महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए कौन-कौन से कदम उठाए हैं?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;मैं लंबे समय से श्री नरेन्द्र मोदी के साथ काम कर रही हूं। वह जब 
गुजरात में मुख्यमंत्री थे, तो मैं विधायक थी। गुजरात और केंद्र की मोदी 
सरकार में महिलाओं के लिए सबसे ज्यादा चिंता की गई है। सालों से देखा गया 
है कि भारत ही नहीं वैश्विक स्तर पर पुरुषों की तुलना में महिलाओं को समान 
अधिकार प्राप्त नहीं थे। ऐसे में यदि इस मामले को लेकर सबसे ज्यादा चिंता 
किसी ने की है तो वह मोदी सरकार ने की है। देश में जबसे मोदी सरकार आई है 
तबसे महिलाओं के जीवन में कई महत्वपूर्ण बदलाव आए हैं। मोदी सरकार ने देश 
भर में महिलाओं के लिए शौचालयों का निर्माण करवाया और उनको उचित सम्मान 
दिया। महिलाओं के लिए उज्ज्वला योजना लेकर आए। ऐसे ही सुकन्या समृद्धि 
योजना है, मुद्रा योजना है, जिसके तहत कर्ज लेनेवाले में से 76 प्रतिशत 
महिलाएं हैं। मोदी सरकार की ‘मातृत्व योजना’ के तहत बच्चे के जन्म के समय 
महिलाओं के खाते में 6000 रुपए जमा किए जाते हैं, जिससे महिला अपनी और अपने
 बच्चे की देखभाल कर सकती है। इसके अतिरिक्त मातृत्व अवकाश को 12 सप्ताह से
 बढ़ाकर 26 सप्ताह कर दिया गया है।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;देश की ग्रामीण महिलाओं को ध्यान में रखते हुए स्वयं सहायता समूहों को 
मजबूती दी जा रही है। इसके अलावा तीन तलाक की कुप्रथा को मोदी सरकार ने 
समाप्त किया है। वहीं महिलाओं से संबंधित विभिन्न कानूनों में सुधार कर 
उनको सख्त बनाया गया है। यह मोदी सरकार के प्रयास ही हैं जिनके कारण 
हरियाणा से आरंभ हुए ‘बेटी बचाओ—बेटी पढ़ाओ अभियान’ का असर अब पूरे देश में
 दिखने लगा है।&lt;/p&gt;
&lt;blockquote&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;blockquote&gt;&lt;strong&gt;देश में जबसे मोदी सरकार आई है &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;तबसे महिलाओं के जीवन में कई &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;महत्वपूर्ण बदलाव आए हैं&lt;/strong&gt;&lt;/blockquote&gt;&lt;strong&gt;&lt;/strong&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;/blockquote&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए क्या किया जाना चाहिए?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;देखिए, दुनिया की आधी आबादी महिलाओं की है। परिणामस्वरूप, राजनीति में 
महिलाओं की समान भागीदारी अपेक्षित है, जैसा अन्य किसी भी क्षेत्र में होता
 है। हाल के दिनों में भारत में इस स्थिति में कुछ सुधार हुआ है और भारतीय 
जनता पार्टी इस संबंध में उत्कृष्ट कार्य कर रही है। संगठन में महिलाओं की 
भागीदारी सुनिश्चित करने के साथ-साथ भाजपा ने सरकार में महिलाओं का 
प्रतिनिधित्व भी सुनिश्चित किया है। मोदी सरकार में वर्तमान में 11 महिला 
मंत्री हैं। इसी तरह, पिछली सरकार में लोकसभा की अध्यक्ष श्रीमती सुमित्रा 
महाजन और विदेश मंत्री के पद पर लोकप्रिय नेता स्वर्गीय सुषमा स्वराज थीं।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;भारतीय संस्कृति में महिलाओं का क्या स्थान है?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;भारतीय संस्कृति में वेद, उपनिषद और शास्त्रों में महिलाओं को हमेशा 
देवी का दर्जा दिया गया है और उनको पूजनीया माना गया है- ‘यत्र नार्यस्तु 
पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता:’ या ‘नारी तू नारायणी’। हां, मैं यह मानती 
हूं कि बीच में एक कालखंड ऐसा आया जब इस धारणा में कुछ बदलाव हुआ और 
महिलाओं का शोषण आरंभ हुआ, महिलाओं को पुरुषों के समान भागीदारी देने से 
इंकार किया गया।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;लेकिन जबसे मोदी सरकार आई है, तबसे महिलाओं को लेकर धारणा में बदलाव आया
 है। उनकी सुरक्षा, स्वरोजगार और आत्मसम्मान को सुनिश्चित किया जा रहा है। 
उदाहरण के तौर पर, मेरे संसदीय क्षेत्र भावनगर में एक ऐसा रेलवे स्टेशन है,
 जहां सिर्फ महिला कुली कार्यरत हैं। ऐसे ही देखें तो आज रिक्शा ड्राइवर से
 लेकर फाइटर प्लेन भी महिलाएं चला रही हैं। खेलकूद में महिलाओं ने देश का 
नाम ऊंचा किया है। राजनीति में भी महिलाएं आगे आ रही हैं और कहा जा सकता है
 कि स्थिति में बहुत सुधार हो रहा है।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;गुजरात में जब श्री नरेन्द्र मोदी मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने 
महिला सशक्तिकरण को लेकर अनेक योजनाएं प्रारंभ की थी। देश भर में इसकी बहुत
 प्रशंसा हुई थी। कृपया इस संबंध में हमें बताएं।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;मोदीजी जब गुजरात में मुख्यमंत्री थे, तो उन्होंने सबसे अधिक महिलाओं की
 चिंता की। मुख्यमंत्री रहते हुए श्री मोदी जब भी विदेश दौरे पर जाते थे, 
तो उन्हें विभिन्न उपहार मिला करते थे, जिनको परंपरागत तौर पर तोशाखाना में
 जमा करवा दिया जाता था, लेकिन माननीय मोदीजी इस संदर्भ में एक प्रस्ताव 
लेकर आए और उनके कहने पर इन उपहारों की नीलामी प्रक्रिया को आरंभ किया गया 
और इस प्राप्त राशि से महिलाओं के लिए ‘कन्या केलवणी निधि’ बनाया गया। इसके
 माध्यम से बेटियों के लिए विभिन्न कार्यक्रम बनाए गए। गुजरात में जिन 
स्थानों पर बेटियों में अशिक्षा और ड्रॉपआउट दर अधिक थी, वहां ‘कन्या 
केलवणी रथ’ के माध्यम से जागरूकता लाने का प्रयास किया गया। इसके अतिरिक्त 
गुजरात में बेटियों के लिए फ्री एसटी पास, मुफ्त साइकिल, यूनिफॉर्म, 
पुस्तकें और विभिन्न स्कॉलरशिप कार्यक्रमों को चलाया गया। गुजरात सरकार 
विद्यालक्ष्मी बॉन्ड भी लेकर आई। गुजरात के ग्रामीण इलाकों में बहुत सारी 
महिलाएं पशुपालन उद्योग से जुड़ी हुई हैं और हर गांव में एक दूध उत्पादक 
मंडली है। इनमें से जिन दूध उत्पादक मंडली में केवल महिला सदस्य है, उनके 
लिए विशेष प्रावधान किए गए। ऐसे ही प्रॉपर्टी लेनेवाली महिलाओं को स्टांप 
ड्यूटी से छूट दी गई थी। सरकारी भर्ती में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत 
आरक्षण है। स्थानिक स्वराज की संस्थाओं— ग्राम पंचायत, तहसील पंचायत, जिला 
पंचायत, नगरपालिका और महानगरपालिका में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया 
गया। गुजरात में नारी अदालत की शुरुआत मोदीजी ने की, महिला सुरक्षा के लिए 
गुजरात में 181 नंबर हेल्पलाइन है। गुजरात में महिला पुलिस स्टेशनों की 
संख्या में बढ़ोतरी की गई है। वहीं, प्रदेश में ‘सुरक्षा सेतु’ योजना के 
अंतर्गत महिलाओं को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। गुजरात सरकार 
‘व्हालीदिकरी’ योजना भी चला रही है, जिस घर में बेटी होती है, गांव के 
सरपंच, जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी बैंड-बाजे लेकर उनके घर जाते हैं और उनके 
खाते में एक हजार रुपए जमा कर दिया जाता है। ऐसे ही विभिन्न योजनाओं के 
माध्यम से महिलाओं को सशक्त किया गया।&lt;/p&gt;
&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://hitchintak.blogspot.com/feeds/5150729967803163394/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment/fullpage/post/7024567440226660873/5150729967803163394' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7024567440226660873/posts/default/5150729967803163394'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7024567440226660873/posts/default/5150729967803163394'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://hitchintak.blogspot.com/2022/02/blog-post.html' title='मोदी सरकार में विभिन्न योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को सशक्त किया गया : डॉ. भारतीबेन शियाल'/><author><name>संजीव कुमार सिन्‍हा</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11879095124650917997</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg-VUG_8k4GcxEdCmjpiY_6UDali2WkziCy8QL3pvL6x98CxCQkSWCPT0QSOxfne88NMZUAxuRH02FkYn1eMUbfqb1lDlWyIjQte5L7cGqhL9x2KHht1Wlw7WNx98YJCQ/s220/Mintoo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7024567440226660873.post-6331999569735174886</id><published>2022-01-21T18:24:00.001+05:30</published><updated>2022-03-04T18:28:52.914+05:30</updated><title type='text'>उत्तराखंड में भाजपा सरकार में सभी मोर्चों पर विकास हुआ है : दुष्यंत गौतम</title><content type='html'>&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;div class=&quot;initial-letter&quot;&gt;&lt;p&gt;उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव-प्रचार जोरों
 पर है। यहां 70 विधानसभा सीटों पर 14 फरवरी को मतदान संपन्न होना है। इसी 
संबंध में भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री एवं उत्तराखंड प्रदेश भाजपा 
प्रभारी &lt;span style=&quot;color: #ff6600;&quot;&gt;श्री &lt;strong&gt;दुष्यंत गौतम&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt; से कमल संदेश के सह संपादक &lt;strong&gt;&lt;span style=&quot;color: #ff6600;&quot;&gt;संजीव कुमार सिन्हा&lt;/span&gt; &lt;/strong&gt;एवं डिजिटल मीडिया सदस्य &lt;strong&gt;&lt;span style=&quot;color: #ff6600;&quot;&gt;विपुल शर्मा&lt;/span&gt; &lt;/strong&gt;ने
 बातचीत की। श्री गौतम का कहना है कि उत्तराखंड में भाजपा सरकार में सभी 
मोर्चों पर विकास हुआ है। उन्होंने अपने वक्तव्य में राज्य सरकार द्वारा 
शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, पर्यटन, कृषि समेत विभिन्न क्षेत्रों में किए 
गए विकास कार्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भाजपा केवल 
चुनाव के समय में नहीं, अपितु निरंतर कार्य करनेवाला राजनीतिक संगठन है, 
जबकि कांग्रेस केवल चुनाव के समय दिखती है। उत्तराखंड के अंदर भाजपा भारी 
बहुमत से विजयी होगी और ‘अबकी बार-साठ पार, फिर भाजपा सरकार’ का हमारा 
संकल्प साकार होगा। प्रस्तुत हैं बातचीत के मुख्यांश :&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा की क्या तैयारी है?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;भारतीय जनता पार्टी एक ऐसा राजनीतिक दल है जो चुनावों के लिए विशेष रूप 
से कभी भी तैयारी नहीं करता है। वो निरंतर सेवाभाव से काम करता है। जनसंघ 
के समय से लेकर अभी भाजपा तक, देशसेवा और समाजसेवा के लक्ष्य को लेकर हम 
काम कर रहे हैं। जब भी कोई आपदा आती है, उससे बचाना हमारा संकल्प है। 
वर्तमान में कोरोना काल में हम ‘सेवा ही संगठन’, ‘सेवा ही समर्पण’ जैसे 
अभियान के माध्यम से सक्रिय हैं। इसलिए राजनीति में होते हुए भी हमें चुनाव
 के लिए कोई विशेष तैयारी नहीं करनी होती है। हम उतनी ही तैयारी करते हैं, 
जैसे परीक्षा के समय बच्चे को ज्यादा काम करना पड़ता है। यह सौभाग्य है कि 
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जैसा नेतृत्व हमारे पास है, जो अपने 
अनुभवों, संकल्पों और समर्पण से हमें एक दिशा देते रहते हैं और हमें जागृत 
करते रहते हैं।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;उत्तराखंड में भाजपा सरकार है। इस सरकार की प्रमुख उपलब्धियां क्या हैं?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;उत्तराखंड में भाजपा सरकार में सभी मोर्चों पर विकास हुआ है। महिला 
सशक्तिकरण के लिए अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। बहनों और महिलाओं को 
बराबर का अधिकार मिले, इसलिए उनको संपत्ति में हक हो, यह बहुत बड़ा कार्य 
किया गया है। घास काटने के लिए हमारी माताएं-बहनें बाहर जाया करती थीं, 
जिसके कारण जानवरों का भी शिकार हो जाया करती थीं। आज हम उन्हें ढाई किलो 
रुपए के अंदर घास दे रहे हैं। हमने गैस के कनेक्शन देकर उन्हें धुएं से 
बचाने का काम किया है। शौचालय देकर उनका मान बढ़ाया है।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;पूरे देश के अंदर गरीबी रेखा के नीचे आयुष्मान कार्ड बांटा जाता है, 
लेकिन उत्तराखंड के अंदर सौ प्रतिशत लोगों को आयुष्मान कार्ड देने की बात 
की गई है। राज्य में सौ प्रतिशत टीकाकरण हुआ है। मुफ्त टीकाकरण के साथ-साथ 
बजट में हमने इस बार वृद्धि की है। ऑक्सीजन प्लांट हमने हर जगह शत-प्रतिशत 
स्थापित कर दी है। इसका स्तर बढ़ा है। ऋषिकेश को हम मेडिकल हब की तरह डेवलप
 कर रहे हैं। राज्य में कोई जिला ऐसा नहीं है जहां अस्प‍ताल न हो। 
चिकित्सकों की संख्या में हमने वृद्धि की है। मेडिकल इंटर्न सहायता की राशि
 जो साढ़े सात हजार रुपए हुआ करती थी, उसको बढ़ाकर साढ़े सत्रह हजार रुपए 
किया है।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;उत्तराखंड देवभूमि है। चार धाम ऑल वेदर रोड की व्यवस्था हुई है। 
उत्तराखंड के लगभग हर परिवार से लोग सेना के अंदर जाते हैं। प्रधानमंत्री 
श्री नरेन्द्र मोदी की दूरदर्शिता से आज वहां पर एक और धाम जुड़ गया है। 
सैन्यधाम पांचवें धाम के रूप में माना जाएगा। सैनिकों के विश्राम गृहों का 
हमने निर्माण किया है। एक सैनिक का बेटा आज राज्य का मुख्यमंत्री है।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;हमने नई पर्यटन नीति बनाई है। पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिया है। 
चंडीदेवी, सुरकंडादेवी मंदिर को भव्यता प्रदान की है। मसूरी रोपवे का 
निर्माण किया है। फिल्मों के अनुकूल उसको बनाने का काम किया है।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;हमने एक रुपया में नल और नल में स्वच्छ जल की व्यवस्था की है। जिनके पास
 छत नहीं है उनके लिए मकान की व्यवस्था हुई है। कृषि बजट की बात करें तो 
सबसे ज्या‍दा बजट वहां किसानों के लिए रखा गया है। जंगली जानवरों से 
सुरक्षा की है। प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना देने की बात हमने कही है।&lt;br /&gt;
युवाओं के लिए हमने नई सरकारी नौकरियां खोली हैं। हाल ही में विभिन्न 
विभागों में 24 हजार नौकरियां निकाली हैं। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के 
माध्यम से हम बिना गारंटी के ऋण दे रहे हैं। स्वरोजगार के लिए वीर चंद्र 
गढ़वाली योजना प्रारंभ किया है। नई स्टार्ट अप नीति बनाई है। डबल इंजन की 
सरकार का क्या फायदा होता है यह इससे पता चलता है कि हम पहाड़ों के अंदर 
रेल का निर्माण कर रहे हैं। जो पांच-पांच घंटे के रास्ते थे उनको एक-एक 
घंटे में तब्दील करने का काम कर रहे हैं।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए हमने नए कॉलेज खोले हैं। स्कूलों में 
इंटरनेट की सुविधा दी है। उदयमान छात्र योजना बनाई है। अटल उत्कर्ष 
विद्यालय खोले हैं। विश्वविद्यालयों में हम फ्री वाई-फाई की सुविधा हम दे 
रहे हैं। मिड डे मील योजना को गुणवत्तापूर्ण ढंग से लागू किया है।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;इसके साथ ही, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, नमामि गंगे योजना, उड़ान 
योजना, उत्तराखंड राज्य ग्रामीण आजीविका, वाटर शेड विकास कार्यक्रम, 
प्रधानमंत्री आवास योजना, दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल विकास योजना, 
स्वामित्व योजना, पशु नस्ल सुधार, श्रम उद्योग, मत्स्य पालन, गोपालन, 
पशुपालन, बकरी पालन जैसी अनेक योजनाओं को मूर्त रूप देकर भाजपा सरकार ने 
उत्तराखंड का चहुंमुखी विकास किया है। इसलिए हम आज दावे से कह सकते हैं कि 
हमने लोगों के दिलों में जगह बनाई है।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पूर्व की कांग्रेस सरकार और वर्तमान भाजपा सरकार में क्या अंतर है?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;सबसे बड़ा अंतर है कि उत्तराखंड राज्य का सपना श्रद्धेय श्री अटल बिहारी 
वाजपेयी जी ने साकार किया। प्रदेश की भाजपा सरकार ने सबके मन में अपनी जगह 
बनाई है। आज की तारीख में आप कहीं भी राज्य में जाएंगे तो आपको भाजपा सरकार
 के विरुद्ध कुछ दिखाई नहीं देगा। वहां पर सारा पॉजिटिव ही दिखाई देता है। 
कांग्रेस ने स्वीकार किया है कि उसके शासन के अंदर वे जब 100 रुपए भेजते थे
 तो 15 रुपए ही जाते थे यानी 85 प्रतिशत खा जाया करते थे। जबकि हमने जन-जन 
के खाते खुलवाए हैं। उनके खाते में सरकार की धनराशि सीधे भेज दी जाती है। 
हम सरकार के पैसे का पारदर्शिता के साथ उपयोग करते हैं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;पहले जो भी सरकारें हुआ करती थीं उसमें ये होता था कि इस जाति को ये दे 
दो, इस धर्म के लोगों को ये दे दो। लेकिन हमने इस दृष्टि से काम किया है कि
 प्रत्येक व्यक्ति को सरकार की योजनाओं का लाभ मिले। हम ‘सबका साथ, सबका 
विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास’ इस ध्येय से काम कर रहे हैं।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि भाजपा सरकार ने प्रदेश की जनता को विकास के नाम पर छला है।&lt;br /&gt;
&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;
कांग्रेस विपक्ष में है। ये सामान्य बातें हैं, जो विपक्ष को कहनी ही कहनी 
है। यहां भी कहेंगे वो अन्य राज्य में भी यही भाषा बोलेंगे। उनके पास कोई 
मुद्दा ही नहीं है बोलने के लिए। हम पूछते हैं कि क्योंं विपक्ष साढ़े चार 
साल के अंदर हमारे विरोध में कभी भी कोई आंदोलन नहीं कर पाया। चुनाव के समय
 दो-तीन महीने से वो बाहर निकलकर आ रहे हैं, लेकिन जनता ने उनको स्वीकार 
नहीं किया है। हम ‘एक साल बेमिसाल’, हर साल अपना जो कार्य है उसको जनता के 
बीच में ले जाते हैं। उनसे मापदंड पूछते हैं। फिर हम लगातार सुधार करते 
रहते हैं। विपक्ष राज्य में बिखरा-बिखरा दिखाई देता है। उत्तराखंड के अंदर 
भारतीय जनता पार्टी भारी बहुमत से विजयी हो रही है। अबकी बार-साठ पार, फिर 
भाजपा सरकार।&lt;/p&gt;
&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://hitchintak.blogspot.com/feeds/6331999569735174886/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment/fullpage/post/7024567440226660873/6331999569735174886' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7024567440226660873/posts/default/6331999569735174886'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7024567440226660873/posts/default/6331999569735174886'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://hitchintak.blogspot.com/2022/01/blog-post.html' title='उत्तराखंड में भाजपा सरकार में सभी मोर्चों पर विकास हुआ है : दुष्यंत गौतम'/><author><name>संजीव कुमार सिन्‍हा</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11879095124650917997</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg-VUG_8k4GcxEdCmjpiY_6UDali2WkziCy8QL3pvL6x98CxCQkSWCPT0QSOxfne88NMZUAxuRH02FkYn1eMUbfqb1lDlWyIjQte5L7cGqhL9x2KHht1Wlw7WNx98YJCQ/s220/Mintoo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7024567440226660873.post-3136760208031852533</id><published>2022-01-20T18:47:00.001+05:30</published><updated>2022-03-04T18:48:19.401+05:30</updated><title type='text'>यह छात्रवृत्ति अनुसूचित जाति के पोस्ट मैट्रिक छात्रों के लिए सुरक्षा कवच है</title><content type='html'>&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;strong&gt;भारतीय जनता पार्टी, अनुसूचित जाति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष
 श्री लाल सिंह आर्य से ‘अनुसूचित जाति के पोस्ट मैट्रिक छात्रों के लिए 
छात्रवृत्ति’ मुद्दे पर कमल संदेश के सह संपादक संजीव सिन्हा ने बातचीत की,
 जिसके प्रमुख अंश यहां प्रस्तुत हैं :&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;देश&lt;/strong&gt; में 1944 से अनुसूचित जाति के पोस्ट मैट्रिक 
बच्चों के लिए छात्रवृत्ति योजना चालू थी। आजादी के बाद से अभी तक आवश्यक 
रुपए की व्यवस्था नहीं थी। इस छात्रवृत्ति में कुछ अनियमितताएं भी थीं। कम 
राशि होने के कारण छात्रों को यदि कुछ नए इंस्ट्रूमेंट लेना है, कुछ 
टेक्नाॅलोजी से जुड़ना है तो नहीं जुड़ पाते थे। राज्य सरकार समय पर पैसा 
नहीं भेजती थी इन छात्रों को, तो उनको जो भी साधन पढ़ने के लिए खरीदने थे तो
 वो उससे वंचित रहते थे। इस कारण से बच्चे कहीं न कहीं विद्यालय छोड़ते थे। 
ऐसी संख्या करोड़ों में है।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;पहली बार प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय 
सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्री श्री थावरचंद गहलोत एवं उनकी टीम ने एक 
अध्ययन किया कि आखिर अनुसूचित जाति के पोस्ट मैट्रिक बच्चे जो विद्यालय छोड़
 रहे हैं, वो विद्यालय कैसे आएं, उनको पढ़ाई के साधन कैसे मिले, पारदर्शी 
व्यवस्था कैसे हो, इस संबंध में कैबिनेट की बैठक में निर्णय हुआ कि आनेवाले
 पांच वर्षों की योजना बनाई जाए और उन योजनाओं के तहत इस राशि को कई गुना 
बढ़ाकर 59 हजार करोड़ रुपए पांच साल में केंद्र सरकार खर्च करेगी। छात्रों का
 रजिस्ट्रेशन होगा, राज्य में उनके बैंक में खाते खुलेंगे और एक क्लिक से 
उन छात्रों के खाते में केंद्र सरकार पैसे डालेगी, तो एक पारदर्शी व्यवस्था
 हो गई।&lt;br /&gt;
इस छात्रवृत्ति में छात्रों को लैपटाॅप लेना है, रहने की, खाने की ये सारी 
व्यवस्थाएं कहीं न कहीं हैं। एक बड़ी चीज इसमें और की गई है कि पहले 60 लाख 
बच्चे ही लाभान्वित हो रहे थे, अब इससे प्रतिवर्ष चार करोड़ बच्चे लाभान्वित
 होंगे। एक करोड़ 36 लाख ऐसे बच्चे जो विद्यालय छोड़ गए हैं, उनके लिए सरकार 
घर-घर चलने का अभियान चलाएगी। उन बच्चों के परिवार और उनके बीच में जाना और
 उनसे आग्रह करना कि चलिए, आप दोबारा नामांकन करा लीजिए। तो सरकार का ऐसा 
अनुमान है कि कुल 36 लाख बच्चे पांच साल में पुनः विद्यालय में लौटेंगे। यह
 कहा जा सकता है कि बाबा साहेब अंबेडकर और दीनदयाल उपाध्याय जी के सपनों को
 अगर ईमानदारी से कोई पूरा कर रहा है तो नरेन्द्र मोदी जी की सरकार कर रही 
है।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;कांग्रेस 57 वर्ष हिंदुस्तान में सत्ता में रही, उसके कई प्रधानमंत्री 
रहे, राज्यों में अनेक वर्षों तक उसके कई मुख्यमंत्री रहे, जो नरेन्द्र 
मोदी जी ने सोचा है, वो कांग्रेस ने क्यों नहीं सोचा? अगर कांग्रेस ने 
ईमानदारी से पोस्ट मैट्रिक छात्रों के लिए सोच लिया होता तो ड्राॅपआउट होता
 ही नहीं, बच्चे विद्यालय छोड़ते ही नहीं, नए बच्चे और आते। नरेन्द्र मोदी 
जी का जो ये निर्णय है, वह बहुत ऐतिहासिक है, बहुत पारदर्शी है और अनुसूचित
 जाति के पाेस्ट मैट्रिक छात्रों के लिए सुरक्षा कवच है।&lt;/p&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://hitchintak.blogspot.com/feeds/3136760208031852533/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment/fullpage/post/7024567440226660873/3136760208031852533' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7024567440226660873/posts/default/3136760208031852533'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7024567440226660873/posts/default/3136760208031852533'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://hitchintak.blogspot.com/2022/01/blog-post_20.html' title='यह छात्रवृत्ति अनुसूचित जाति के पोस्ट मैट्रिक छात्रों के लिए सुरक्षा कवच है'/><author><name>संजीव कुमार सिन्‍हा</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11879095124650917997</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg-VUG_8k4GcxEdCmjpiY_6UDali2WkziCy8QL3pvL6x98CxCQkSWCPT0QSOxfne88NMZUAxuRH02FkYn1eMUbfqb1lDlWyIjQte5L7cGqhL9x2KHht1Wlw7WNx98YJCQ/s220/Mintoo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7024567440226660873.post-2654535485428249700</id><published>2021-12-04T18:31:00.001+05:30</published><updated>2022-03-04T18:33:02.660+05:30</updated><title type='text'>प्रधानमंत्री मोदीजी अनुसूचित जनजाति समाज के उत्थान को लेकर अंतर्मन से काम कर रहे हैं : समीर उरांव</title><content type='html'>&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;div class=&quot;initial-letter&quot;&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;भा&lt;/strong&gt;रतीय जनता पार्टी, 
अनुसूचित जनजाति (एसटी) मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं झारखंड से 
राज्यसभा सांसद श्री समीर उरांव का कहना है कि मोर्चा जनजाति समाज में 
पार्टी की विचारधारा का प्रसार कर रहा है; इसके साथ ही इस समाज की प्रमुख 
समस्याओं— पलायन और बेरोजगारी को दूर करने के लिए संसदीय संकुल विकास योजना
 बनाने को लेकर कार्य कर रहा है।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;पिछले दिनों नई दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में &lt;strong&gt;श्री समीर उरांव&lt;/strong&gt; से ‘कमल संदेश’ के सह संपादक &lt;strong&gt;संजीव कुमार सिन्हा&lt;/strong&gt; एवं कमल संदेश डिजिटल टीम सदस्य &lt;strong&gt;विपुल शर्मा&lt;/strong&gt;
 ने मोदी सरकार द्वारा जनजाति समुदाय के हितार्थ किए जा रहे कार्यों, भाजपा
 एसटी मोर्चा की गतिविधियों एवं आगामी योजनाओं पर बातचीत की। प्रस्तुत हैं 
मुख्यांश—&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;span style=&quot;color: #ff6600;&quot;&gt;&lt;strong&gt;जनजातीय गौरव दिवस के रूप में 
भगवान बिरसा मुंडा की जयंती मनाने का निर्णय लिया गया है। गत 15 नवंबर को 
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पहला जनजातीय गौरव दिवस 
मनाया गया। इससे देश भर में क्या संदेश गया?&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;पिछले 10 नवंबर को देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 
अपने कैबिनेट में विभिन्न विषयों के साथ अनुसूचित जनजातियों के सम्मान के 
लिए जनजाति वीर महापुरुष, जिन्होंने देश के स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई 
में महती भूमिका निभाई थी, ऐसे ‘धरती आबा’ भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को 
जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया। भगवान बिरसा मुंडा की 
जयंती को इसलिए चुना गया कि वे देश की आजादी की लड़ाई के साथ-साथ समाज 
‘आत्मनिर्भर’ हो, इसकी भी चिंता करते थे। वे गांव-गांव में जाकर जन-जागरण 
करते थे। जहां कहीं भी किसी प्रकार की समस्या, विपत्ति या बीमारी की बात 
हो, लोग बिरसा मुंडाजी को याद करते थे, उनके पास जाते थे। उनके आत्मीय भाव 
से लोग संकट से मुक्त हो जाते थे और इस तरह बिरसा मुंडाजी भगवान के रूप में
 सुविख्यात हो गए।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;भगवान बिरसा मुंडाजी राष्ट्र, राष्ट्रीयता, राष्ट्रभक्ति के भाव के साथ 
आगे बढ़े। इससे अंग्रेजों को काफी परेशानी होने लगी और वे इनको ढूढ़ने लगे।
 भगवान बिरसा मुंडा ने डोंबारी बुरू से उलगुलान शुरू कर दिया कि अब अंग्रेज
 को यहां से भगा देना है। डोंबारी बुरू को लेकर इतिहास के पन्नों में ठीक 
से बातें अंकित नहीं है। जालियावाला बाग कांड से पूर्व 1896 के आसपास 
डोंबारी बुरू में उलगुलान के बाद जब इन लोगों की बैठक हो रही थी, उस समय 
अंग्रेज सिपाहियों ने अंधाधुंध गोलियां चलाईं। इसमें भगवान बिरसा मुंडाजी 
के सैकड़ों अनुयायी हताहत हो गए। भगवान बिरसा मुंडाजी ने देश-समाज के लिए 
अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। जेल के अंदर रहस्यमय ढंग से उनकी मृत्यु हो
 गई।&lt;br /&gt;
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 2016 में देश के ऐतिहासिक लालकिले की 
प्राचीर से अपने भाषण में स्वतंत्रता संग्राम में भगवान बिरसा मुंडाजी की 
महती भूमिका को रेखांकित किया था। उन्होंने कहा था कि जनजातीय महापुरुषों 
की स्मृति में संग्रहालय हो, जिससे छात्र प्रेरणा लेकर राष्ट्रभक्ति के भाव
 के साथ आगे बढ़ें।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;और 15 नवंबर, 2021 को यह अवसर आया जब उनकी जयंती जनजातीय गौरव दिवस के 
रूप में मनाई गई। जिस जेल में उनकी रहस्यमय ढंग से मृत्यु हुई, वहां पर 
भगवान बिरसा मुंडा संग्रहालय का भी उद्घाटन हुआ। आज देश का जनजाति समाज 
गर्व के साथ प्रफुल्लित है और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के प्रति 
हार्दिक आभार व्यक्त कर रहा है।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;span style=&quot;color: #ff6600;&quot;&gt;&lt;strong&gt;अनुसूचित जनजाति समाज के हित में मोदी सरकार ने कौन-कौन से कदम उठाए हैं ?&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;सबसे बड़ी बात है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी अनुसूचित जनजाति 
के हित में सोचते हैं और उसे साकार करते हैं। जनजाति समाज आगे बढ़े, इस 
दृष्टि से मोदीजी को लगा कि सबसे पहले इनकी शिक्षा ठीक ढंग से हो, इसलिए 
नवोदय विद्यालय की तर्ज पर एकलव्य मॉडल रेसिडेंसियल स्कूल योजना बनाई और आज
 साढ़े सात सौ के आसपास ये विद्यालय बनने प्रारंभ हो गए हैं।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रद्धेय श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 
जनजातियों के हित में सोचा। इसलिए, अलग से जनजातीय मंत्रालय का गठन किया। 
उस काम को प्रधानमंत्री मोदीजी तेजी से आगे ले गए।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;जनजाति का जीवन जल, जंगल, जमीन से जुड़ा हुआ है। अंग्रेज सरकार आई, उस 
समय 1927 में फॉरेस्ट एक्ट बना दिया, उसके बाद 1960 में एक्ट बना। 1980 में
 वन का राष्ट्रीयकरण किया गया। 2006 में कांग्रेस सरकार ने फॉरेस्ट राइट 
एक्ट, कम्युनिटी फॉरेस्ट राइट बनाया। रिजर्व फॉरेस्ट, प्रोटेक्टेड एरिया 
फॉरेस्ट; विलेज फॉरेस्ट ऐसा वर्गीकरण कर दिया। इन सबके चलते जनजाति अपने 
अधिकार से वंचित होते गए। हमारे देश के प्रधानमंत्रीजी ने इन सारी चीजों को
 देखा और सूक्ष्मता के साथ अध्ययन किया कि उनका अधिकार कैसे प्राप्त हो। 
उन्होंने फॉरेस्ट डिपार्टमेंट और ट्राइबल अफेयर्स मिनिस्ट्री को कहा कि 
इसका सरलीकरण किया जाए।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;लोग अपने गांव की सीमा के अंदर अपनी वनभूमि पर उत्पादन कर सके और 
सामुदायिक वन का संरक्षण-संवर्धन कर सके, इसके साथ-साथ वहां से प्राप्त 
चीजों का विपणन भी कर सके, इस बात को ध्यान में रखते हुए ज्वाइंट 
रिज्यॉल्यूशन करने का काम पिछले 6 जुलाई को हुआ है। इसके आधार पर देश भर के
 फॉरेस्ट विलेज और इसके निकट रहनेवाले लोग सामुदायिक वनाधिकार का लाभ लेने 
की योजना में आगे बढ़ रहे हैं। गांव-गांव में लोग समूह बनाकर वनधन केंद्र 
के माध्यम से वनोत्पाद को आगे बढ़ा रहे हैं। ट्राइफेड के माध्यम से उसके 
विपणन के काम को आगे बढ़ाया जा रहा है। जनजातियों के सशक्तिकरण के लिए 
ट्राइबल फाइनेंस कॉरपोरेशन के माध्यम से योजना बनाई गई है। मत्स्य विभाग, 
पशुपालन विभाग आदि विभागों में पचास प्रतिशत सब्सिडी के आधार पर उनके 
रोजगार की व्यवस्था की गई है। स्टार्टअप योजना में इनके लिए बहुत से 
प्रावधान किए गए हैं।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;span style=&quot;color: #ff6600;&quot;&gt;&lt;strong&gt;कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि भाजपा आदिवासियों को गुमराह कर रही है। इस पर आपका क्या कहना है ?&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;कांग्रेस खुद दोषी है। संविधान निर्माण के समय से ही वह जनजातियों को 
धोखा देने का काम कर रही है। वह संविधान के अंदर जनजातियों की स्पष्ट 
परिभाषा तक नहीं बना पायी। अनुसूचित जाति को लेकर संविधान निर्माण के समय 
स्पष्ट रूप से कहा गया कि अनुसूचित जाति के जो लोग अपनी आस्था, विश्वास और 
पारम्परिक उपासना को अगर त्याग देते हैं, वह अनुसूचित जाति की सूची से बाहर
 हो जाएंगे। लेकिन अनुसूचित जनजाति के लोग जिन्होंने आस्था, विश्वास और 
परंपरा; इन सारी चीजों को वर्षों-वर्षों से त्याग दिया है वे आज भी 
अनुसूचित जनजाति के रूप में बने हुए हैं। वर्तमान में 729 अनुसूचित 
जनजातियों की सूची है।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;अनुसूचित जनजाति के लोग कहते हैं कि हम प्रकृति पूजक हैं। यानी सीधे 
सनातनी भाव के साथ जुड़े हुए हैं, इसलिए वह सनातन हैं। लेकिन कांग्रेस और 
कम्युनिस्ट पार्टी के लोगों ने उनके बारे में देश भर में भ्रम फैलाया कि वे
 सनातनी नहीं हैं।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;आजादी के बाद से चाहे केंद्र में हो या बाकी राज्यों में, अधिकांश समय 
कांग्रेस की सरकारें रही हैं लेकिन उन्हें अनुसूचित जनजाति हित में सोचने 
तक की फुर्सत नहीं रही। योजना बनाने का विषय तो बाद की है।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;हमारे देश के यशस्वी प्रधानमंत्री मोदीजी जनजातियों को आगे बढ़ाने के 
लिए पूरे अंतर्मन से काम कर रहे हैं, यह कांग्रेस के लोगों को पच नहीं रहा 
है।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;span style=&quot;color: #ff6600;&quot;&gt;&lt;strong&gt;भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा की गतिविधियों के बारे में बताएं ?&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा अध्यक्ष का दायित्व संभालने के बाद हमने 
संगठन की अंतिम इकाई ‘बूथ’ के कार्यकर्ताओं तक पहुंच बनाई है। मोर्चा 
जनजाति समाज में पार्टी की विचारधारा का प्रसार कर रहा है। अभी लगभग 30 
संगठनात्मक प्रदेशों में हम काम कर रहे हैं। उसमें से 20 प्रदेशों में मेरे
 स्वयं का प्रवास हो चुका है। हमारे पदाधिकारीगण भी प्रवास कर रहे हैं। 
इससे हमारी संगठनात्मक संरचना नीचे स्तर तक ठीक ढंग से बन रही है। गत 22, 
23 और 24 अक्टूबर को एसटी मोर्चा की राष्ट्रीय कार्यकारणी बैठक रांची में 
संपन्न हुई। उसमें सभी प्रदेशों से जो अपेक्षित थे उतने लोग आए। इस महामारी
 के समय में भी एसटी मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने ‘सेवा ही संगठन’, ‘सेवा 
समर्पण अभियान’ जैसे रचनात्मक अभियानों में पूर्ण मनोयोग के साथ महती 
भूमिका निभाई है।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;भाजपा के प्रति जनजाति समाज का समर्थन निरंतर बढ़ रहा है। वर्तमान में 
आरक्षित और अनारक्षित सीटों को मिलाकर पार्टी के 40 लोकसभा सांसद हैं और 
राज्यसभा में 7 सांसद। प्रधानमंत्री मोदीजी भी पूरे विश्वास के साथ 
जनजातियों के हित में काम कर रहे हैं। इसीलिए नारा है– सबका साथ, सबका 
विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास। उनकी यात्रा में जनजाति समाज और 
मोर्चा के कार्यकर्ता भी सहयोग करते आगे बढ़ रहे हैं।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;span style=&quot;color: #ff6600;&quot;&gt;&lt;strong&gt;भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा की आगामी योजनाएं क्या हैं ?&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;अनुसूचित जनजाति समाज की प्रमुख समस्याएं हैं— पलायन और बेरोजगारी। इसे 
दूर करने के लिए हम पहल कर रहे हैं। संसदीय संकुल विकास योजना बनाने को 
लेकर कार्य चल रहा है। अभी तक हम लोग ऐसे 40 संसदीय क्षेत्रों को एक कलस्टर
 के रूप में चयनित कर चुके हैं। कलस्टर के अंदर गांव भी चयनित हो गए हैं। 
इस संबंध में हमारी दो तीन स्तर की बैठकें और कार्यशाला भी हो गई हैं। वहां
 क्या-क्या संभावनाएं हैं, इन सारी चीजों का सर्वेक्षण कर सूचीबद्ध कर लिया
 गया है। अब हम वहां कैसे एक साल के भीतर उसी परिसर के अंदर उन लोगों को 
रोजगार दे सकते हैं, कैसे पलायन को रोक सकते हैं, वहां की उत्पादित चीजों 
का प्रसंस्करण करते हुए किस प्रकार से बाजार तक पहुंचा सकते हैं, उनकी 
आमदनी कैसे सीधे उनकी जेब में आ सकती है, इस प्रकार से योजना करके हम लोग 
आगे बढ़ रहे हैं। ताकि ‘आत्मनिर्भर भारत’ की जो परिकल्पना हमारे 
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने की है, वह साकार हो सके।&lt;/p&gt;
&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://hitchintak.blogspot.com/feeds/2654535485428249700/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment/fullpage/post/7024567440226660873/2654535485428249700' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7024567440226660873/posts/default/2654535485428249700'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7024567440226660873/posts/default/2654535485428249700'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://hitchintak.blogspot.com/2021/12/blog-post.html' title='प्रधानमंत्री मोदीजी अनुसूचित जनजाति समाज के उत्थान को लेकर अंतर्मन से काम कर रहे हैं : समीर उरांव'/><author><name>संजीव कुमार सिन्‍हा</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11879095124650917997</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg-VUG_8k4GcxEdCmjpiY_6UDali2WkziCy8QL3pvL6x98CxCQkSWCPT0QSOxfne88NMZUAxuRH02FkYn1eMUbfqb1lDlWyIjQte5L7cGqhL9x2KHht1Wlw7WNx98YJCQ/s220/Mintoo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7024567440226660873.post-1257048454270015643</id><published>2021-11-18T18:48:00.001+05:30</published><updated>2022-03-04T18:49:25.051+05:30</updated><title type='text'>ईमानदार व पारदर्शी भाजपा सरकार के चलते हरियाणा में हमें पुन: जनसमर्थन मिला : अनिल जैन</title><content type='html'>&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;strong&gt;हा&lt;/strong&gt;ल ही में संपन्न 
हरियाणा विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने जीत दर्ज की। राज्य में 
भाजपा सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी और बहुमत से थोड़ी ही दूर रही। 
ध्यातव्य हो कि हरियाणा विधानसभा की कुल 90 सीटों में से भाजपा ने 40 सीटों
 पर विजय हासिल की थी।&lt;br /&gt;
हरियाणा विधानसभा चुनाव एवं राज्य सरकार की उपलब्धियों को लेकर भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री एवं हरियाणा प्रदेश भाजपा प्रभारी &lt;strong&gt;&lt;span style=&quot;color: #ff6600;&quot;&gt;डॉ. अनिल जैन&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt; से उनके नई दिल्ली स्थित निवास पर कमल संदेश के सहायक संपादक &lt;span style=&quot;color: #ff6600;&quot;&gt;&lt;strong&gt;संजीव सिन्हा&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;
 ने बातचीत की। डॉ. जैन का कहना है कि हरियाणा में भाजपा की ईमानदार और 
पारदर्शी सरकार के चलते पार्टी को दुबारा जनसमर्थन मिला। वहीं उनका मानना 
है कि मोदी शासन में विश्व पटल पर भारत की साख बढ़ रही है। राष्ट्रीय 
सुरक्षा के मोर्चे पर हम सशक्त हो रहे हैं और गरीब अपने दम पर खड़ा हो सके,
 इसके लिए अनेक प्रयास किए जा रहे हैं।&lt;br /&gt;
हम यहां बातचीत के मुख्यांश प्रस्तुत कर रहे हैं :&lt;/p&gt;&lt;div class=&quot;initial-letter&quot;&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style=&quot;color: #ff6600;&quot;&gt;हाल ही में संपन्न विधानसभा 
चुनाव में भाजपा ने सर्वाधिक सीटें जीती। पांच साल शासन में रहने के बाद 
लगातार दूसरी बार जीत दर्ज करना कठिन होता है। पार्टी बहुमत के करीब रही। 
इस उपलब्धि के पीछे क्या कारण रहे ?&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;देखिए, हरियाणा विधानसभा में पहले हम 4 से 47 हुए। इस चुनाव में हमें 40
 सीटें मिलीं। यह उपलब्धि हम इसलिए प्राप्त कर पाए कि केंद्र में 
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में मजबूत सरकार है। मोदीजी की
 अपार लोकप्रियता है। इसके साथ, भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह और 
प्रदेश भाजपा ने अच्छी रणनीति बनाई। हमने इसे नीचे तक क्रियान्वित किया। 
इसका हमें लाभ मिला। सांगठनिक स्तर पर विजय संकल्प रैली, पन्ना प्रमुख 
महासम्मेलन, चुनावी जनसभा, सघन प्रवास और संवाद आदि के माध्यम से संगठन को 
सशक्त करते हुए यह उपलब्धि प्राप्त की।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;राज्य सरकार के सुशासन से लोगों में बहुत उत्साह था। इसी के कारण हमने 
पांच वर्षों में जो भी चुनाव हुए, चाहे स्थानीय निकायों के हों, पंचायतों 
के हों, मेयर के हों या फिर उपचुनाव, सभी चुनावों में हमने लगातार विजय 
हासिल की। सभी 10 लोकसभा सीटें हमने जीती। तो ये मोदीजी की लोकप्रियता, 
अच्छी रणनीति और हमारी राज्य सरकार जो पांच साल ईमानदारी से चली, उसके कारण
 से संभव हुआ।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;span style=&quot;color: #ff6600;&quot;&gt; &lt;strong&gt;हरियाणा सरकार की ऐसी कौन सी प्रमुख उपलब्धियां हैं जिनके चलते पार्टी को पुन: जनसमर्थन प्राप्त हुआ ?&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;अब हरियाणा भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद का प्रदेश नहीं रहा। तो सबसे बड़ी
 उपलब्धि तो ये है कि यह सरकार ईमानदार सरकार है। पारदर्शी सरकार है। इसने 
नौकरियों में पारदर्शिता रखी। पर्ची और खर्ची के बगैर नौकरियां दीं। सबसे 
बड़ा काम हमारी सरकार का यही था। बहुत काम हुए। गिनाएंगे तो बहुत लंबा समय 
लगेगा लेकिन प्रमुख रूप से देखें तो सरकार की ईमानदार छवि, हरियाणा एक – 
हरियाणवी एक, भेदभाव के बिना विकास, पारदर्शी तरीके से नौकरियां उपलब्ध 
कराने का काम, सही ट्रांसफर पॉलिसी; ये ऐसे काम हैं जिनके कारण से सरकार की
 एक छवि निखरकर आई।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;span style=&quot;color: #ff6600;&quot;&gt;&lt;strong&gt;हरियाणा किसान प्रधान राज्य है। किसानों के हित में सरकार ने किस तरह के कदम उठाए हैं ?&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;हरियाणा ने सबसे पहले जितना मुआवजा कहा, उतना दिया। केंद्र सरकार ने 
मुआवजा डेढ़ गुना बढ़ाया, हरियाणा ने दो गुना बढ़ा दिया। पहले 50 प्रतिशत 
फसल के नुकसान पर मुआवजा मिलता था, अब 33 प्रतिशत पर मिलने लगा। हरियाणा ने
 शुरू-शुरू में 2100 करोड़ का मुआवजा दिया। जबसे हरियाणा बना तबसे 2014 तक 
कुल मिलाकर 1200 करोड़ का मुआवजा दिया गया है और हमारी सरकार द्वारा 2014 
से लेकर अब तक 3600 करोड़ का करीब-करीब मुआवजा दिया गया है। पर्याप्त 
मुआवजा देना अर्थात् सरकार किसानों के साथ खड़ी है। फिर किसानों को 
भावांतरण योजना से लाभान्वित करना, ये सरकार और किसान के लिए बहुत बड़ी 
उपलब्धि है। तीसरी बात, एक-एक दाना खरीदना। दूसरे प्रदेश के किसान भी लेकर आ
 जाते हैं क्योंकि हरियाणा के किसानों का दाना-दाना खरीदा जाता है, तो ये 
खरीद पूरी करना बड़ी बात है। खरीद में केवल धान ही नहीं, केवल गेहूं ही 
नहीं, तो सूरजमुखी, बाजरा, सब प्रकार की फसलें हैं, इनकी खरीद की योजना 
बनाई जाती है। 92 प्रतिशत तक एमएसपी बढ़ाकर खरीदा है। दक्षिण हरियाणा का 
सूखेग्रस्त किसान भी बाजरे की खेती कर लाभप्रद रह सकें, इसकी योजना को 
क्रियान्वित किया। केंद्र में मोदीजी ने लागू की थी, उसको सही स्तर पर 
हरियाणा ने अपने यहां लागू किया है।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;span style=&quot;color: #ff6600;&quot;&gt;&lt;strong&gt;युवाओं के समक्ष एक प्रमुख 
मुद्दा रहता है कि उन्हें रोजगार मिले। इस दिशा में राज्य सरकार की ओर से 
किस तरह के प्रयास किए जा रहे है ?&lt;br /&gt;
&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
हरियाणा में युवाओं के हित में सरकार अनेक योजनाएं चला रही है और गंभीरता 
से प्रयास कर रही है। आज सबसे ज्यादा खुश युवा है क्योंकि खेलों में सबसे 
ज्यादा उन्नति, प्रगति, खिलाड़ियों को नौकरी, खिलाड़ियों को पुरस्कार राशि,
 पूरे देश में हरियाणा में सबसे ज्यादा दिए जाते हैं। दूसरा, युवाओं के लिए
 नौकरी, ईमानदारी और पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराए जा रहे हैं। युवा सबसे 
ज्यादा इस बात से खुश है। अभी 62 हजार नौकरियां दी थी और नौकरियां निकलने 
वाली हैं। हमें यह समझना होगा कि केवल नौकरी से युवा को रोजगार नहीं दिया 
जा सकता, हमें रोजगार के साधन उपलब्ध कराकर अधिक रोजगार सृजन करना होगा। 
इसको ध्यान में रखते हुए हरियाणा ने करीब-करीब 16 लाख लोगों को मुद्रा लोन 
दिए हैं। उल्लेखनीय है कि एक आदमी अकेला अपना काम नहीं करता तो 2-3 लोगों 
को रोजगार देगा तो 30-40 लाख लोगों को रोजगार वही दे देगा, तो इस प्रकार से
 ये हम कोशिश कर रहे हैं। जितनी प्राइवेट नौकरियां हैं, उनमें 75 प्रतिशत 
हरियाणा के लोगों को नौकरी मिलें, कम से कम क्लास 3 और क्लास 4 नौकरियों 
में, इसकी चिंता सरकार करेगी।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;span style=&quot;color: #ff6600;&quot;&gt;&lt;strong&gt;मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल ने कहा था कि राज्य में हम एनआरसी लागू करेंगे तो इसकी क्या जरूरत है यहां ?&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;एनआरसी तो पूरे देश में लागू करने की जरूरत है। हरियाणा में भी 
बंगलादेशी घुसपैठिए आकर रहते हैं। फरीदाबाद, पानीपत, यमुनानगर, गुड़गांव 
जैसे अनेक जगहों पर हैं, घुसपैठिए यहां क्यों रहे? यह देश से जुड़ा विषय है
 इसलिए मुख्यमंत्री होने के नाते उन्होंने कहा कि ये सारे प्रदेश में लागू 
होने चाहिए, यह ठीक है। हरियाणा देश का हिस्सा है।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;span style=&quot;color: #ff6600;&quot;&gt;&lt;strong&gt;केंद्र में भी भाजपा सरकार है। आपकी दृष्टि में इस सरकार की क्या प्रमुख उपलब्धियां हैं ?&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;केंद्र सरकार ने जिस प्रकार से देश के मान, सम्मान और स्वा‍भिमान को 
विश्व पटल पर सबसे ऊंचा रखा है, आजादी के बाद यह बहुत बड़ी उपलब्धि‍ है। मैं
 व्यक्तिगत रूप से इस बात को कहूंगा क्योंकि मेरे साथ किस्से जुड़े हैं। 
मैं लखनऊ में मेडिकल कॉलेज में पढ़ा। मेरे साथ के सौ लोग बाहर होंगे। ये 
लोग पहले क्या कहते थे और आज कितने गर्व से रहते हैं, इससे पता लगता है कि 
भारत ने कितनी बड़ी प्रगति की है। सारी दुनिया में प्रधानमंत्री कहीं जाते 
हैं, तो लोग मोदी-मोदी के नारे से उनका स्वागत करते हैं, सारी दुनिया देखकर
 दंग रहती है। देश के प्रधानमंत्री का इतना मान-सम्मान होता है, बड़े से बड़ा
 राष्ट्राध्यक्ष पलक-पावड़े बिछाकर मोदी का स्वागत करते हैं, ये बहुत बड़ी 
बात है। खाने-पीने से बड़ी चीज सम्मान है। देश के सम्मान की बात आती है तो 
व्यक्तिगत सम्मान भी पीछे रह जाता है। मोदीजी ने सबसे बड़ा काम मेरी दृष्टि 
में अगर कोई किया है तो देश का सम्मान दुनिया की नजर में बहुत ऊंचा किया 
है।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;देश की सुरक्षा के प्रति देश में जिस प्रकार की गंभीरता मोदीजी ने 
दिखाई, वह उल्लेखनीय है। चाहे वो पुलवामा के बाद बालाकोट की घटना हो या 
चाहे उरी के बाद सर्जिकल स्ट्राइक की घटना हो, दुनिया में अमेरिका और 
इजराइल के बाद भारत तीसरा ऐसा देश है, जो दूसरे के देश में जाकर अपने 
सैनिकों की शहादत का बदला ले सकता है। हमने ऐसा करके दिखाया। एक बार नहीं, 
दो-दो बार करके दिखाया। दुनिया भी भारत की शक्ति को मानने लगी है। 
प्रधानमंत्री मोदीजी की दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति को समझने लगी है।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;तीसरी बात, मैं जनकल्याण की कहूंगा। गरीब अपने दम पर खड़ा हो सके, इसके 
लिए अनेक प्रयास किए जा रहे हैं। अंत्योदय लागू करना हमारी वैचारिक 
प्रतिबद्धता है। अंत्योदय मतलब गरीब कल्याण, हम इसे साकार कर रहे हैं। 2022
 तक सबके सिर पर छत हो, 2 करोड़ से ज्यादा घर मोदी जी ने बनाकर दिए है। 12 
करोड़ की जनसंख्या इससे प्रभावित हुई। 8-9 करोड़ शौचालय बनवाकर दिए। कितने 
परिवारों को इसने प्रभावित किया। गरीब के जीवन में परिवर्तन आए, गैस दी। 
फिर तमाम तरह की उनको सहूलियतें दीं। आयुष्मान भारत की योजना, पूरी दुनिया 
की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना है। 50 करोड़ प्रभावित हुए इससे। 5 लाख तक का 
बीमा। अभी तक करीब-करीब देश में 30-35 लाख लोगों ने इसका लाभ ले लिया है। 
तो ऐसी योजनाएं, जिससे देश का गरीब स्वाभिमान के साथ खड़ा होकर देश की 
प्रगति में साथ दे सके, चलाई जा रही हैं। यह संवेदनशीलता दिखाता है कि 
नेतृत्व की दिशा क्या है। इसमें 100 फीसदी खरे उतरे हैं मोदीजी। उनके 
नेतृत्व‍ में देश सही मायने में आगे बढ़ रहा है। अभी तो अपार संभावनाएं 
हैं, आगे ऐसे प्रयास होते रहेंगे।&lt;/p&gt;
&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://hitchintak.blogspot.com/feeds/1257048454270015643/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment/fullpage/post/7024567440226660873/1257048454270015643' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7024567440226660873/posts/default/1257048454270015643'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7024567440226660873/posts/default/1257048454270015643'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://hitchintak.blogspot.com/2021/11/blog-post.html' title='ईमानदार व पारदर्शी भाजपा सरकार के चलते हरियाणा में हमें पुन: जनसमर्थन मिला : अनिल जैन'/><author><name>संजीव कुमार सिन्‍हा</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11879095124650917997</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg-VUG_8k4GcxEdCmjpiY_6UDali2WkziCy8QL3pvL6x98CxCQkSWCPT0QSOxfne88NMZUAxuRH02FkYn1eMUbfqb1lDlWyIjQte5L7cGqhL9x2KHht1Wlw7WNx98YJCQ/s220/Mintoo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7024567440226660873.post-3421763443321280167</id><published>2021-10-14T18:33:00.001+05:30</published><updated>2022-03-04T18:39:11.017+05:30</updated><title type='text'>‘सेवा और समर्पण’ हर भाजपा कार्यकर्ता के लिए मूल मंत्र है : अरुण सिंह</title><content type='html'>&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;div class=&quot;initial-letter&quot;&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;भा&lt;/strong&gt;जपा के राष्ट्रीय महामंत्री &lt;strong&gt;श्री अरुण सिंह&lt;/strong&gt; ने &lt;strong&gt;‘कमल संदेश’&lt;/strong&gt; के सह संपादक &lt;span style=&quot;color: #ff6600;&quot;&gt;&lt;strong&gt;संजीव कुमार सिन्हा&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt; और &lt;span style=&quot;color: #ff6600;&quot;&gt;&lt;strong&gt;राम प्रसाद त्रिपाठी&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;
 के साथ एक विशेष साक्षात्कार में ‘सेवा और समर्पण अभियान’ के पीछे के 
विचार और इसकी उल्लेखनीय सफलता के बारे में चर्चा की। श्री सिंह ने कहा कि 
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एक कर्मयोगी हैं और उन्होंने अपने साहसिक 
निर्णयों और दूरदर्शी नेतृत्व से ‘न्यू इंडिया’ के सपने को साकार करने का 
विश्वास जनता में पैदा किया है। इसलिए, 17 सितंबर से 07 अक्टूबर तक यानी 
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन से लेकर 20 दिनों के लिए 
पार्टी ने पूरे देश में ‘सेवा और समर्पण अभियान’ चलाने का निर्णय लिया। 
हमारे लिए यह खुशी का पल है क्योंकि इस अभियान का समापन शासन के प्रमुख के 
रूप में श्री मोदी के शानदार 20 साल पूरे होने पर हो रहा है। प्रस्तुत है 
बातचीत के प्रमुख अंश–&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;• &lt;strong&gt;भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा 17 सितंबर को प्रधानमंत्री 
श्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन से शुरू किया गया ‘सेवा और समर्पण अभियान’ 7
 अक्टूबर को एक बड़ी सफलता के साथ संपन्न हुआ। कृपया इस अभियान के बारे में
 हमें बताइए।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;जैसा कि आप जानते हैं, 07 अक्टूबर, 2021 को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र 
मोदी ने सांविधानिक सेवा में अपने 20 वर्ष पूरे किए है, जिसमें गुजरात के 
मुख्यमंत्री के रूप में 13 वर्ष से अधिक और शेष भारत के प्रधानमंत्री के 
रूप में है। ठीक 20 साल पहले 07 अक्टूबर 2001 को श्री नरेन्द्र मोदी गुजरात
 के मुख्यमंत्री बने थे। उन्होंने 2001 और 2014 के बीच मुख्यमंत्री के तौर 
पर कार्य किया और 26 मई, 2014 को देश के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। 
श्री मोदी ने 2014 से 2019 तक प्रधानमंत्री के रूप में सेवा करने के बाद 
मई, 2019 में अपने दूसरे कार्यकाल के लिए शपथ ली। वह अकेले ऐसे राजनेता हैं
 जो पिछले दो दशकों से उल्लेखनीय उपलब्धियों के साथ राष्ट्र की सेवा कर रहे
 हैं। इसलिए 17 सितंबर से 07 अक्टूबर तक प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 
के जन्मदिन से लेकर 07 अक्टूबर तक 20 दिनों के लिए पार्टी ने पूरे देश में 
‘सेवा और समर्पण अभियान’ के रूप में श्री मोदी के शानदार 20 साल पूरे होने 
का उत्सव मनाया।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;•&lt;strong&gt; ‘सेवा और समर्पण’ अभियान और इसकी भव्य सफलता के पीछे मुख्य विचार और प्रेरणा क्या है?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी देश के करोड़ों लोगों के लिए सुशासन के
 प्रतीक हैं। उन्हें उनके दूरदर्शी नेतृत्व और प्रधानमंत्री के रूप में 
असाधारण सफलताओं के लिए जाना जाता है। अनुच्छेद 370 को निरस्त करने का 
मामला हो, तीन तलाक के खिलाफ कानून, अयोध्या में राम मंदिर, सीएए, ओबीसी 
आयोग को संवैधानिक दर्जा, जीएसटी और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के लिए 
आरक्षण, प्रधानमंत्री श्री मोदी ने समाज की बेहतरी के लिए ऐतिहासिक निर्णय 
लिए हैं, जो देश की आजादी के बाद से लंबित थे। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र 
मोदी एक कर्मयोगी हैं और उन्होंने अपने साहसिक निर्णयों और दूरदर्शी 
नेतृत्व से ‘न्यू इंडिया’ के सपने साकार करने का विश्वास जनता में पैदा 
किया है। उनके निर्णयों के कार्यान्वयन ने एक आत्मनिर्भर और मजबूत भारत की 
नींव रखी, उनके नेतृत्व में देश एक वैश्विक शक्ति के रूप में उभरा है।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;श्री मोदी ने गरीबी को बहुत करीब से देखा है और इसी ने उन्हें जन-धन, 
उजाला, उज्ज्वला, किसान सम्मान निधि, सौभाग्य, पीएम आवास, स्वच्छ भारत 
अभियान, वोकल फॉर लोकल, गरीब कल्याण और कई अन्य योजनाओं को लागू करने के 
लिए प्रेरित किया है। उनकी प्रत्यक्ष लाभ योजना ने भ्रष्टाचार पर रोक लगा 
दी है और बिचौलियों को खत्म कर दिया है। इन सभी कारणों से विशेष रूप से 
पार्टी के करोड़ों कार्यकर्ता और आम लोग मोदीजी को एक प्रेरणा और 
मार्गदर्शक के रूप में देखते हैं। मैं तो कहूंगा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी
 के लिए कार्यकर्ताओं का प्यार और स्नेह, उनका आकर्षक व्यक्तित्व, 
कल्याणकारी योजनाएं और ऐतिहासिक उपलब्धियां इस अभियान की भव्य सफलता के 
पीछे की मुख्य प्रेरणा हैं।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जगत प्रकाश नड्डा ने एक समिित का गठन 
िकया, जिसमें भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्रियों श्री कैलाश विजयवर्गीय, 
श्रीमती डी. पुरंदेश्वरी, राष्ट्रीय मंत्री श्री विनोद सोनकर और भाजपा 
किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री राजकुमार चाहर शामिल थे। इस टीम ने
 भाजपा प्रदेश नेतृत्व और हमारे लाखों कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर इस 
कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष के गतिशील नेतृत्व 
में काम किया।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;• इस अभियान के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा कौन से सेवा कार्य किए गए?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;20 दिनों के इस अभियान में कई कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। हमारे 
कार्यकर्ताओं ने 2,000 से अधिक रक्तदान शिविरों का आयोजन किया। देश भर में 
45,000 स्थानों पर हानिकारक सिंगल यूज प्लास्टिक का पृथक्करण कार्य संपन्न 
हुआ। इसी तरह देश के सभी जिलों में हजारों स्थानों पर नि:शुल्क स्वास्थ्य 
जांच शिविर, नदी और तालाब की सफाई, वृद्धों के घरों, अस्पतालों, मलिन 
बस्तियों आदि में भोजन, वस्तुओं और फल का वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में भारतीय वैज्ञानिकों ने दो ‘मेड 
इन इंडिया’ कोविड टीके तैयार किए और केंद्र सरकार रिकॉर्ड समय में लगभग 100
 करोड़ लोगों को मुफ्त में टीके दे रही है। इसलिए, अपने नेता के लिए स्नेह 
के प्रतीक के रूप में लाखों कार्यकर्ताओं ने इसमें भाग लिया और इस अभियान 
के दौरान टीकाकरण के लिए जरूरतमंदों की मदद की। श्री मोदीजी के जन्मदिन पर 
2.5 करोड़ टीकाकरण के साथ एक विश्व रिकॉर्ड भी बनाया गया और हमारे 
कार्यकर्ताओं ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।&lt;br /&gt;
भाजपा कार्यकर्ताओं ने भी दिव्यांग जनों के लिए अत्यधिक सराहनीय कार्य किया
 और उन्हें हजारों कृत्रिम अंग और अन्य सहायक उपकरण दान किए।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;जीवन के हर चरण में प्रधानमंत्री श्री मोदी ने राष्ट्र को मजबूत करने 
में बहुत योगदान दिया है। इसलिए, देश के विभिन्न जिलों में और नई दिल्ली 
स्थित भाजपा केंद्रीय कार्यालय में भी प्रदर्शनियों का आयोजन किया गया, 
जिसमें हमारे प्रधानमंत्री के जीवन के विभिन्न चरणों और उपलब्धियों को 
दर्शाया गया है। लाखों लोगों ने इन प्रदर्शनियों को देखा और इससे प्रेरणा 
प्राप्त की।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;‘सेवा’ और ‘समर्पण’ हर भाजपा कार्यकर्ता का मूल मंत्र है। इसलिए, इन 
सेवा कार्यों के साथ हमारे कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री के लिए शुभकामनाएं
 दीं और उनके अच्छे स्वास्थ्य और लंबे जीवन के लिए प्रार्थना की।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;• आजकल राजनीति का अर्थ विरोध, प्रदर्शन, जिंदाबाद और मुर्दाबाद
 तक सीमित रह गया है। जबकि, भाजपा का ध्यान समाज सेवा पर अधिक है। इसके 
पीछे क्या विचार है?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;किसी भी कार्यकर्ता के लिए राजनीति में तीन उद्देश्य होते हैं। सबसे 
पहले संगठनात्मक— पार्टी की विचारधारा के आधार पर पार्टी का विस्तार करना 
हमारे लिए मुख्य संगठनात्मक उद्देश्य है। दूसरा, लोगों के हित के लिए काम 
करना, जनहित से जुड़े मुद्दों को उठाना और उनके समाधान के लिए संघर्ष करना।
 तीसरा, समाज के लिए रचनात्मक कार्य करना। योजनाओं के सर्वोत्तम उपयोग के 
लिए सरकार की उपलब्धियों का प्रसार और लोगों में जन-जागरूकता पैदा करना इस 
उद्देश्य का हिस्सा है। लेकिन दुर्भाग्य से हमारे विपक्षी दल जनता की 
समस्याओं के समाधान के लिए नहीं बल्कि अपनी समस्याओं के समाधान के लिए 
कार्य कर रहे हैं।&lt;/p&gt;&lt;strong&gt;• श्री मोदी के जन्मदिन पर 2.5 करोड़ टीकाकरण के साथ एक विश्व 
रिकॉर्ड भी बनाया गया और हमारे कार्यकर्ताओं ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका 
निभाई&lt;/strong&gt;
&lt;p&gt;भाजपा के लिए ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ भारत
 के सर्वांगीण विकास को बढ़ावा देने का मंत्र है और इसमें हमारे 
कार्यकर्ताओं को पूर्ण विश्वास है। जब कोविड महामारी के दौरान विपक्ष कहीं 
नजर नहीं आ रहा था, तब हमारे कार्यकर्ता जरूरतमंदों की मदद के लिए सड़कों 
पर थे। उन्होंने समस्याओं का सामना किया, लेकिन महामारी के दौरान लोगों की 
सेवा से पीछे नहीं हटे क्योंकि यह भाजपा की संस्कृति है। लेकिन विपक्षी 
दलों, जैसे– कांग्रेस, सपा, बसपा और अन्य को समाजसेवा में कोई विश्वास नहीं
 है। अतः विपक्षी दलों के लिए विरोध, प्रदर्शन, जिंदाबाद और मुर्दाबाद अब 
मूल मंत्र बन गया हैं और सेवा कार्य जैसे वृक्षारोपण, नदी/तालाब की सफाई, 
रक्तदान शिविर, स्वास्थ्य शिविर, संकट के समय गरीबों और जरूरतमंदों की मदद 
करना, स्वच्छता अभियान, वोकल फॉर लोकल, खादी को बढ़ावा देना हमारे 
दिन-प्रतिदिन के कार्यक्रम का हिस्सा बन गया है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी
 ने अपने जीवनकाल में रचनात्मक कार्य पर जोर िदया। अगर कोई गांधीजी के 
सपनों को पूरा कर रहा है और इन सेवा कार्यों को जन आंदोलन के रूप में 
बढ़ावा दे रहा है, तो वह प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी हैं।&lt;/p&gt;
&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://hitchintak.blogspot.com/feeds/3421763443321280167/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment/fullpage/post/7024567440226660873/3421763443321280167' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7024567440226660873/posts/default/3421763443321280167'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7024567440226660873/posts/default/3421763443321280167'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://hitchintak.blogspot.com/2021/10/blog-post.html' title='‘सेवा और समर्पण’ हर भाजपा कार्यकर्ता के लिए मूल मंत्र है : अरुण सिंह'/><author><name>संजीव कुमार सिन्‍हा</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11879095124650917997</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg-VUG_8k4GcxEdCmjpiY_6UDali2WkziCy8QL3pvL6x98CxCQkSWCPT0QSOxfne88NMZUAxuRH02FkYn1eMUbfqb1lDlWyIjQte5L7cGqhL9x2KHht1Wlw7WNx98YJCQ/s220/Mintoo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7024567440226660873.post-1196892483092689740</id><published>2021-09-21T18:39:00.001+05:30</published><updated>2022-03-04T18:40:38.167+05:30</updated><title type='text'>संवैधानिक प्रावधानों का लाभ समाज के सभी वर्गों को सुनिश्चित किया जा रहा है : भूपेन्द्र यादव</title><content type='html'>&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;div class=&quot;initial-letter&quot;&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;कें&lt;/strong&gt;द्रीय पर्यावरण, वन 
एवं जलवायु परिवर्तन तथा श्रम एवं रोजगार मंत्री श्री भूपेन्द्र यादव का 
कहना है कि भारतीय जनता पार्टी की ‘सबके साथ’ की जो कल्पना है उसमें समाज 
के वर्ग आपस में संघर्षात्मक नहीं, बल्कि सहयोगात्मक रूप से कार्य करते 
हैं। श्री यादव का कहना है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जलवायु 
परिवर्तन की चुनौती से निपटने के लिए वैश्विक पहल कर रहे हैं।&lt;br /&gt;
पिछले दिनों नई दिल्ली स्थित पर्यावरण भवन में &lt;strong&gt;श्री भूपेन्द्र यादव&lt;/strong&gt; से &lt;span style=&quot;color: red;&quot;&gt;&lt;strong&gt;‘कमल संदेश’&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt; के सह संपादक &lt;span style=&quot;color: #ff6600;&quot;&gt;संजीव कुमार सिन्हा&lt;/span&gt; एवं &lt;span style=&quot;color: #ff6600;&quot;&gt;राम प्रसाद त्रिपाठी&lt;/span&gt; ने बातचीत की। प्रस्तुत है इस बातचीत के प्रमुख अंश–&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;मोदी सरकार ने पिछड़ा वर्ग समुदाय के हित में अनेक निर्णय लिये 
हैं। पूर्व में पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा दिया गया। वहीं, हाल 
ही में चिकित्सा पाठ्यक्रमों में अन्य पिछड़ा वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर 
वर्ग को आरक्षण प्रदान करने के फैसले किए। इन निर्णयों के क्या दूरगामी 
परिणाम होंगे?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;भारतीय जनता पार्टी की सरकार ‘सबका साथ–सबका विकास’ में विश्वास रखती 
है। हमारी ‘सबके साथ’ की जो कल्पना है उसमें आपस में संघर्षात्मक नहीं, 
बल्कि समाज का एक वर्ग दूसरे वर्ग से पूरक मिलकर विकास का कार्य करता है। 
भारत में लंबे समय से पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देने की मांग 
चली आ रही थी, जिसको पूरा करने का कार्य प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 
द्वारा हुआ। सामाजिक स्तर पर सहभागिता बढ़ाने के लिए केंद्रीय विद्यालयों 
में विद्यार्थियों के लिए आरक्षण, नीट की परीक्षा में आरक्षण, 
विश्वविद्यालयों में प्राध्यापक और सिंगल पदों के लिए भी आरक्षण की 
व्यवस्था को लागू किया गया। इसके साथ ही आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के लिए 
भी 10 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था की गई है।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;हमारी पार्टी की स्पष्ट मान्यता है कि संविधान के अंतर्गत दिए गए 
प्रावधानों का लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुंचे और भारत के संविधान की 
प्रस्तावना में जो सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय की बात कही गई है, वह
 भी पूरा हो।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;• पिछले महीने ब्रिक्स-2021 की पर्यावरण मंत्री स्तर की 7वीं 
बैठक संपन्न हुई। ब्रिक्स देशों के पर्यावरण मंत्रियों ने पर्यावरण पर ‘नई 
दिल्ली वक्तव्य’ को अपनाया। इस संबंध में बताइए।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;दुनिया भर में पर्यावरण को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। विभिन्न देशों के बीच
 ‘पेरिस समझौता’ भी हुआ। जलवायु परिवर्तन पर आईपीसीसी की एक महत्त्वपूर्ण 
रिपोर्ट है, जिसके अंतर्गत यह कहा गया है कि दुनिया में जलवायु परिवर्तन हो
 रहा है, पृथ्वी का तापमान बढ़ रहा है, अनेक प्रकार के सूखे, वायु 
परिवर्तन, समुद्र के स्तर में वृद्धि, ग्लेशियर का पिघलना, जैसी चुनौतियां 
उत्पन्न हो रही हैं। इन सब विषयों को ब्रिक्स की बैठक में उठाया गया था। 
इसके बाद विभिन्न द्विपक्षीय और बहुपक्षीय विषयों पर भारत सरकार की वार्ता 
चल रही है। जहां तक भारत का सवाल है प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के 
नेतृत्व में भारत में एनडीसी के लक्ष्यों को पूरा किया गया है, इसके साथ ही
 दुनिया में वैकल्पिक ऊर्जा के लिए भारत ने उल्लेखनीय प्रयास किए हैं। भारत
 की वर्तमान ऊर्जा की प्राथमिक क्षमता का 36 प्रतिशत अब वैकल्पिक नवीकरणीय 
ऊर्जा के माध्यम से उपलब्ध हो रहा है। भारत में 450 गीगावाट ऊर्जा का 
लक्ष्य 2030 तक का रखा है, जिसमें 165 गीगावाट प्राप्त भी किया गया है। 
भारत का लक्ष्य महत्त्वाकांक्षी अवश्य है लेकिन जलवायु परिवर्तन को लेकर 
जिस तरह की बात चलती है, उस पर भारत में सक्रियता से प्रयास किया गया है। 
यही कारण है कि ब्रिक्स सम्मेलन में भी भारत का इस विषय पर पूरी तरह से 
ध्यान गया। भारत का यह मानना है कि पेरिस समझौते के अतिरिक्त दो विषय 
हैं–विकासशील देशों को आर्थिक सहायता प्रदान करने के लिए विकसित देश आगे 
आएं और दूसरा स्वच्छ टेक्नॉलॉजी का ट्रांसफर हो, इन दोनों विषयों को भी 
भारत ने वैश्विक मंच पर समय-समय पर उठाया।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;• भारत सरकार ने लॉकडाउन के दौरान वन और वन्यजीव संरक्षण को 
‘आवश्यक सेवाओं’ के रूप में वर्गीकृत करने के लिए एक सक्रिय कदम उठाया। बाघ
 संरक्षण की दिशा में किए जा रहे प्रयास के बारे में बताएं।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;हमारी सरकार पूरी तरह से वन और वन्य जीवों के संरक्षण को लेकर समर्पित 
है। भारत में इस समय लगभग 25 प्रतिशत वनावरण क्षेत्र है। हमारा यह मानना है
 कि वन प्रतिशत बढ़ना चाहिए। वन और वृक्ष आच्छादन भी बढ़ना चाहिए। इन सारे 
विषयों को देखते हुए सरकार द्वारा विशेष प्रयास भी किए जा रहे हैं। देश में
 इस समय 52 बाघ अभयारण्य हैं और इसमें से 14 बाघ अभयारण्यों को वैश्विक 
मान्यता भी प्राप्त हुई है। बाघ अभयारण्यों का ज्यादा संरक्षण हो, इसको 
लेकर सरकार पूरी तरह से कार्य कर रही है। इसके साथ जितनी भी लुप्तप्राय 
प्रजातियां और समुद्री क्षेत्र हैं, उसको लेकर सरकार पूरी तरह से संवेदनशील
 है। पिछले सात वर्षों में मोदीजी के नेतृत्व में देश में वनक्षेत्र बढ़ा 
है। दो सौ नगर-वन विकसित िकए जा रहे हैं, ताकि सब लोगों को स्वस्थ रहने में
 सहूलियत हो।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;• भारत की चार और वेटलैंड्स (आर्द्रभूमि) को रामसर सचिवालय से 
रामसर स्थलों के रूप में मान्यता मिल गई है। यह वैश्विक जैविक विविधता को 
संरक्षित करने की दृष्टि से कितना महत्त्वपूर्ण है?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;निश्चित रूप से भारत के पास वेटलैंड्स की प्राथमिक क्षमता है। जैविक 
विविधता की दृष्टि से भी भारत अनुपम है। हमारे चार और वेटलैंड्स को मान्यता
 मिली है। वेटलैंड्स के लिए हमने विशेष रूप से एक वेबसाइट बनाई है। हमारा 
यह मानना है कि वेटलैंड हमारे प्रवासी पक्षी के लिए भी एक आश्रय स्थल बनते 
हैं। तापमान एवं अन्य विषयों पर भी ध्यान दिया जा रहा है। भारत के पास जो 
प्राकृतिक संपदा है यह पूरी तरीके से सुरक्षित रहे, इसके लिए सरकार पूरी 
प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;• जलवायु परिवर्तन वैश्विक चिंता का कारण बना हुआ है। इससे 
निपटने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत द्वारा
 वैश्विक पहल की गई। पेरिस समझौते के लक्ष्य को पूरा करने में भारत किस 
दिशा में आगे बढ़ रहा है?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;पेरिस समझौते के लक्ष्य को पूरा करने के लिए भारत दुनिया का वह देश है 
जिसने अपने एनडीसी के लक्ष्यों को प्राप्त किया है। मैंने पूर्व में भी कहा
 है कि सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भारत ने दुनिया को प्रेरित करनेवाला 
अन्तरराष्ट्रीय सौर गठबन्धन बनाया। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की पहल
 पर दुनिया के लगभग 91 से ज्यादा देश इसके सदस्य बन गए हैं। भारत सरकार ने 
आठ से ज्यादा मंत्रालयों को इकट्ठा करके भूमि को मरुस्थली करने के विशेष 
कार्य को हाथ में लिया है। इसलिए वैकल्पिक ऊर्जा को आगे बढ़ाना और साथ ही 
भारत की वन्य संपदा को बढ़ाने के लिए सरकार पूरी तरीके से प्रतिबद्ध है। 
जलवायु परिवर्तन से निपटने को लेकर प्रधानमंत्रीजी द्वारा समय-समय पर जो 
दिशानिर्देश दिए जाते हैं, उसका पूरी तरीके से पालन किया जाता है।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;• पिछले दिनों केंद्र सरकार द्वारा ई-श्रम पोर्टल का शुभारंभ किया गया। इससे देश में असंगठित कामगारों को किस प्रकार की मदद मिलेगी?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;देश के विभिन्न श्रमिक कानूनों को एक करके हम चार श्रमिक कोड लेकर आए 
हैं। उन चार श्रमिक कोडों में सामाजिक सुरक्षा कोड, आॅक्यूपेशनल सेफ्टी 
कोड, इंडस्ट्रियल रिलेशन कोड और वेजेज कोड हैं। सामाजिक सुरक्षा कोड में इस
 बात का प्रावधान किया गया है कि असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों का एक डाटा 
बनना चाहिए। इसके साथ ही सेक्शन 142 में सामाजिक सुरक्षा कोड भी बनाने की 
बात की गई है।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;इन सारे विषयों को देखते हुए देश में अलग-अलग सेक्टर का एक डाटा बनना 
चाहिए, इस पर सक्रियता से कार्य प्रारंभ हुआ है। हमारे लिए संतोष का विषय 
है कि शुरू के ही 20 दिनों में इसकी संख्या 1 करोड़ पहुंच गई है। निश्चित 
रूप से सामाजिक सुरक्षा के विषय को आगे ले जाने में यह पोर्टल महत्त्वपूर्ण
 भूमिका निभा रहा है।&lt;/p&gt;
&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://hitchintak.blogspot.com/feeds/1196892483092689740/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment/fullpage/post/7024567440226660873/1196892483092689740' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7024567440226660873/posts/default/1196892483092689740'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7024567440226660873/posts/default/1196892483092689740'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://hitchintak.blogspot.com/2021/09/blog-post.html' title='संवैधानिक प्रावधानों का लाभ समाज के सभी वर्गों को सुनिश्चित किया जा रहा है : भूपेन्द्र यादव'/><author><name>संजीव कुमार सिन्‍हा</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11879095124650917997</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg-VUG_8k4GcxEdCmjpiY_6UDali2WkziCy8QL3pvL6x98CxCQkSWCPT0QSOxfne88NMZUAxuRH02FkYn1eMUbfqb1lDlWyIjQte5L7cGqhL9x2KHht1Wlw7WNx98YJCQ/s220/Mintoo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7024567440226660873.post-8491392515428487510</id><published>2021-09-02T18:41:00.001+05:30</published><updated>2022-03-04T18:42:31.135+05:30</updated><title type='text'>देश के राजनीतिक इतिहास में अपनी तरह की पहली ‘जन आशीर्वाद यात्रा’ : तरुण चुघ</title><content type='html'>&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;div class=&quot;initial-letter&quot;&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय 
महामंत्री श्री तरुण चुघ अपने संगठनात्मक कौशल के लिए जाने जाते हैं। वे 
पूर्व में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् में विभिन्न दायित्वों और 
तत्पश्चात् भाजपा राष्ट्रीय मंत्री के रूप में अपनी जिम्मेदारियों का 
निर्वहन कर चुके हैं।&lt;br /&gt;
&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;
&lt;strong&gt;‘कमल संदेश’ के सह संपादक &lt;span style=&quot;color: #ff6600;&quot;&gt;संजीव कुमार सिन्हा&lt;/span&gt; और &lt;span style=&quot;color: #ff6600;&quot;&gt;राम प्रसाद त्रिपाठी&lt;/span&gt;
 के साथ एक विशेष साक्षात्कार में श्री चुघ ने ‘जन आशीर्वाद यात्रा’ की 
भव्य योजना के पीछे के विचार और इसकी उल्लेखनीय सफलता के बारे में चर्चा 
की। ‘जन आशीर्वाद यात्रा’ के राष्ट्रीय प्रभारी श्री चुघ का कहना है कि 
अन्य दलों के शासन के दौरान लोगों को सरकार के पास जाना पड़ता था, लेकिन अब
 मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री जनता के दरवाजे तक पहुंच रहे हैं। भाजपा 
सरकार एवं अन्य सरकारों के बीच यही अंतर है। प्रस्तुत है इस बातचीत के 
प्रमुख अंश : &lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;• सबसे पहले हम आपको देश के विभिन्न राज्यों में भाजपा द्वारा 
आयोजित ‘जन आशीर्वाद यात्रा’ की अपार सफलता के लिए बधाई देते हैं। यात्रा 
के राष्ट्रीय प्रभारी के रूप में इस भव्य कार्यक्रम और इसके पीछे के विचार 
के बारे में हमें बताइए।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;केंद्र सरकार में नए मंत्रियों के शामिल होने के बाद माननीय 
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने स्थापित और मान्य लोकतांत्रिक परंपरा 
के अनुसार संसद के दोनों सदनों में अपने नए सदस्यों का परिचय देना चाहा। 
लेकिन विपक्ष ने प्रधानमंत्री को ऐसा करने में अवरोध उत्पन्न किया।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;सुविदित है कि मोदी सरकार का वर्तमान मंत्रिपरिषद् स्वतंत्र भारत के 
इतिहास में सबसे समावेशी है, जहां विभिन्न जातियों, पंथ, भाषा, धर्म, वर्ग,
 लिंग, आयु समूह और सामाजिक समूह के लोगों का प्रतिनिधित्व है। विपक्ष ने 
इस परंपरा को तोड़कर पिछड़े वर्गों, महिलाओं और अन्य हाशिए के वर्गों के 
प्रतिनिधियों के प्रति उपेक्षा दिखाई। यह इस देश की जनता और संसदीय 
लोकतांत्रिक व्यवस्था का अपमान है।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;तब प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने नए मंत्रियों को नए तरीके से 
लोगों से परिचित कराने का निर्णय लिया। नए शामिल किए गए मंत्रियों के लिए 
लोगों तक पहुंचने और सरकार के प्रतिनिधियों के रूप में उनसे मिलने का इससे 
बेहतर तरीका और क्या हो सकता है?&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;मोदी सरकार की हर योजना के केंद्र में हमारे गांव, गरीब, दलित, वंचित, 
पिछड़ा वर्ग, युवा और महिलाएं हैं। मोदी सरकार की प्रतिबद्धता और मंत्र है-
 ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’। हमारा विश्वास भारत
 के सर्वांगीण विकास को बढ़ावा देना है। इसलिए हमारे मंत्रीगण पिछले सात 
वर्षों में मोदी सरकार द्वारा किए गए विकास कार्यों का संदेश फैलाने के लिए
 देश के कोने-कोने का दौरा कर रहे हैं और यही इस भव्य कार्यक्रम का मुख्य 
उद्देश्य है।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;• कृपया ‘जन आशीर्वाद यात्रा’ के बारे में हमें विस्तार से बताएं।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 
के निर्णय के अनुसार, ‘जन आशीर्वाद यात्रा’ 16 अगस्त, 2021 से शुरू हुई और 
14 दिनों के बाद समाप्त हुई।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;यात्रा के दौरान नए शामिल 39 केंद्रीय मंत्री अपने-अपने राज्यों में गए, सीधे नागरिकों से जुड़े और उनका आशीर्वाद लिया।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;‘जन आशीर्वाद यात्रा’ ने 22 राज्यों की 212 लोकसभा सीटों के लगभग 24,173
 किलोमीटर और 265 जिलों को कवर किया। 14 दिनों के दौरान 5,035 से अधिक 
कार्यक्रमों का आयोजन किया गया और लगभग 25 लाख लोगों ने सीधे यात्रा में 
भाग लिया।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;आमतौर पर यात्राएं चुनाव-अभियान के उद्देश्य से या किसी राजनीतिक 
कार्यक्रम के लिए या किसी मुद्दे के विरोध में आयोजित की जाती हैं। लेकिन, 
यहां इस यात्रा का उद्देश्य बिल्कुल अलग था। यह किसी राजनीतिक मुद्दे या 
चुनावों पर केंद्रित नहीं थी।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;क्या आपने कभी भारत के राजनीतिक इतिहास में सुना है कि सरकार में शामिल 
होने वाले मंत्री नागरिकों की समस्याओं को जानने और समझने के लिए सीधे 
लोगों से जुड़ रहे हैं? हम जानते हैं कि एक बार चुने गए नेता अपने निर्वाचन
 क्षेत्रों में या लोगों के साथ बहुत कम दिखाई देते हैं। हालांकि, नए शामिल
 किए गए मंत्रियों को जनता से सीधे जुड़ने और उनकी समस्याओं को समझना इस 
कार्यक्रम के पीछे का प्रमुख उद्देश्य था। यात्रा, योजना के अनुसार चली और 
केंद्रीय मंत्रियों को देश के लाखों नागरिकों का आशीर्वाद मिला।&lt;/p&gt;
&lt;blockquote&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;blockquote&gt;&lt;strong&gt;‘जन आशीर्वाद यात्रा’ 16 अगस्त, 2021 से शुरू हुई और 14 दिनों के बाद समाप्त हुई&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;
&lt;strong&gt;• यात्रा के दौरान नए शामिल 39 केंद्रीय मंत्री अपने-अपने राज्यों में गए, सीधे नागरिकों से जुड़े और उनका आशीर्वाद लिया&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;
&lt;strong&gt;• ‘जन आशीर्वाद यात्रा’ ने 22 राज्यों की 212 लोकसभा सीटों के लगभग 24,173 किलोमीटर और 265 जिलों को कवर किया&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;
&lt;strong&gt;• 14 दिनों के दौरान 5,035 से अधिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया और लगभग 25 लाख लोगों ने सीधे यात्रा में भाग लिया&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;
&lt;strong&gt;• ‘जन आशीर्वाद यात्रा’ की सफलता का पूरा श्रेय भारत की जनता 
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की उपलब्धियों, देश के सर्वांगीण विकास की
 उनकी प्रतिबद्धता और इस यात्रा के लिए संगठन-शिल्पी श्री जगत प्रकाश नड्डा
 की बेहतर योजना को जाता है&lt;/strong&gt;&lt;/blockquote&gt;&lt;strong&gt;&lt;/strong&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;/blockquote&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;• जन आशीर्वाद यात्रा को लेकर जनता का कैसा प्रतिसाद रहा?&lt;br /&gt;
&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;
‘जन आशीर्वाद यात्रा’ बेहद सफल रही। जनसंपर्क का यह रूप भारत के इतिहास में
 पहली बार देखा गया है। राज्यों में भारत के लोगों ने नए मंत्रियों का 
गर्मजोशी से स्वागत किया और देश के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध रहने 
के लिए प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्ववाली भारतीय जनता पार्टी सरकार की
 सराहना की।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;जैसा कि मैंने उल्लेख किया है, लगभग 5000 कार्यक्रम आयोजित किए गए थे और
 ये सभी कार्यक्रम सभी क्षेत्रों के लोगों की भागीदारी के साथ अत्यधिक सफल 
रहे।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जगत प्रकाश नड्डा के मार्गदर्शन में एक
 टीम का गठन किया गया, जिसमें भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री एम.चुबा 
एओ, राष्ट्रीय सचिव सर्वश्री विनोद सोनकर, सत्य कुमार, सुनील देवधर, अरविंद
 मेनन एवं श्रीमती पंकजा मुंडे शामिल थे। इस टीम ने यात्रा को सफल बनाने के
 लिए बहुत मेहनत की, लेकिन ‘जन आशीर्वाद यात्रा’ की सफलता का पूरा श्रेय 
भारत की जनता प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की उपलब्धियों, देश के 
सर्वांगीण विकास की उनकी प्रतिबद्धता और इस यात्रा के लिए संगठन-शिल्पी 
श्री जगत प्रकाश नड्डा की बेहतर योजना को जाता है।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;• देश के हर हिस्से में भाजपा संगठन विस्तार के लिए ‘जन आशीर्वाद यात्रा’ कितनी महत्वपूर्ण रही?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;‘जन धन योजना’, ‘स्वच्छ भारत’, ‘उज्ज्वला’, ‘आवास योजना’ और सैकड़ों 
अन्य सामाजिक कल्याण योजनाओं के माध्यम से प्रधानमंत्री हमारे समाज के 
प्रत्येक वर्ग को लाभ प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, विशेष रूप से उन 
लोगों को लाभ पहुंचाया जा रहा है जो विकास की दौड़ में पीछे छूट गए है या 
देश के सबसे वंचित वर्ग से आते हैं।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;दूसरी बात भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जगत प्रकाश नड्डा के कुशल 
नेतृत्व में पार्टी हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सपने को पूरा
 करने के लिए पूरे संगठन को इसमें शामिल करने के लिए पूरी तरह से तैयार है।
 इसके लिए भाजपा विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से लगातार इन कल्याणकारी 
योजनाओं का लाभ लेने के लिए जनता में जागरूकता पैदा कर रही है।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;अंत में, अन्य दलों के शासन के दौरान लोगों को सरकार के पास जाना पड़ता 
था, लेकिन अब मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री जनता के दरवाजे तक पहुंच रहे 
हैं। भाजपा सरकार एवं अन्य सरकारों के बीच यही अंतर है। यही कारण है कि 
सरकार एवं पार्टी दोनों को सभी वर्गों के लोगों का पूरे दिल से आशीर्वाद 
मिल रहा है और ‘जन आशीर्वाद यात्रा’ ने इस तथ्य को प्रमाणित किया है।&lt;/p&gt;
&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://hitchintak.blogspot.com/feeds/8491392515428487510/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment/fullpage/post/7024567440226660873/8491392515428487510' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7024567440226660873/posts/default/8491392515428487510'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7024567440226660873/posts/default/8491392515428487510'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://hitchintak.blogspot.com/2021/09/blog-post_2.html' title='देश के राजनीतिक इतिहास में अपनी तरह की पहली ‘जन आशीर्वाद यात्रा’ : तरुण चुघ'/><author><name>संजीव कुमार सिन्‍हा</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11879095124650917997</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg-VUG_8k4GcxEdCmjpiY_6UDali2WkziCy8QL3pvL6x98CxCQkSWCPT0QSOxfne88NMZUAxuRH02FkYn1eMUbfqb1lDlWyIjQte5L7cGqhL9x2KHht1Wlw7WNx98YJCQ/s220/Mintoo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7024567440226660873.post-1770237652036568745</id><published>2021-08-31T18:42:00.001+05:30</published><updated>2022-03-04T18:43:52.823+05:30</updated><title type='text'>मोदी सरकार समाज के पिछड़े और कमजोर वर्गों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है : के. लक्ष्मण</title><content type='html'>&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;div class=&quot;initial-letter&quot;&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;भाजपा अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) 
मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. के. लक्ष्मण का कहना है कि मोदी सरकार की 
योजनाओं से बड़े पैमाने पर पिछड़ा वर्ग समुदाय लाभान्वित हुआ है, जबकि 
कांग्रेस ने हमेशा ओबीसी को मतदाता के रूप में देखा है और उन्हें कभी महत्व
 नहीं दिया। पिछले दिनों डॉ. लक्ष्मण से कमल संदेश के सह संपादक &lt;span style=&quot;color: #ff6600;&quot;&gt;संजीव कुमार सिन्हा&lt;/span&gt; एवं &lt;span style=&quot;color: #ff6600;&quot;&gt;रामप्रसाद त्रिपाठी&lt;/span&gt; ने बातचीत की। प्रस्तुत है प्रमुख अंश-&lt;br /&gt;
&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;
&lt;span style=&quot;color: #ff6600;&quot;&gt;&lt;strong&gt;मोदी सरकार ने हाल ही में मेडिकल 
शिक्षा में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग 
(ईडब्ल्यूएस) के लिए आरक्षण का ऐतिहासिक फैसला लिया। कृपया इस संबंध में 
हमें बताएं ?&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने मेडिकल शिक्षा में ओबीसी को 27 
प्रतिशत तथा ईडब्ल्यूएस के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण का फैसला लिया। इसे 
वर्तमान शैक्षणिक वर्ष 2021-22 से ही लागू किए जाने का निर्णय लिया गया है।
 इसके अंतर्गत एमबीबीएस, एमएस, बीडीएस, एमडीएस और डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में
 5,550 छात्र लाभान्वित होंगे।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;span style=&quot;color: #ff6600;&quot;&gt;&lt;strong&gt;इस निर्णय के क्या दूरगामी परिणाम होंगे?&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;प्रधानमंत्री श्री मोदी हमारे प्रेरणास्रोत पं. दीनदयाल उपाध्याय द्वारा
 प्रस्तुत अंत्योदय सिद्धांत के आधार पर सरकार चला रहे हैं। मोदी सरकार 
समाज के पिछड़े और कमजोर वर्गों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। आज 
अनुसूचित जाति समाज से देश के राष्ट्रपति बने हैं तो पिछड़ा वर्ग से देश के
 प्रधानमंत्री। पूरे देश में ओबीसी आबादी 50 प्रतिशत है। मेडिकल शिक्षा में
 ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण के निर्णय से निस्संदेह पिछड़ा वर्ग सशक्त 
होगा। मोदीजी द्वारा प्रस्तुत ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, और अब 
सबका प्रयास’ इस ध्येय से संपूर्ण देशवासियों का हित संवर्धन होगा।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;span style=&quot;color: #ff6600;&quot;&gt;&lt;strong&gt;कांग्रेस ने इस निर्णय को चुनावी एजेंडा करार दिया है। क्या कहेंगे आप इस पर ?&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;सिर्फ राजनीति के लिए हम निर्णय नहीं लेते हैं, सामाजिक न्याय भी होना 
चाहिए। हम जो बोलते हैं वो करते हैं और जो करते हैं वो बोलते हैं। धारा 370
 हटाने, राममंदिर का निर्माण, तीन तलाक खत्म करने, ऐसे अनेक निर्णय हुए 
हैं। जो वंचित हैं, पार्टी और सरकार सभी जगह, हम उनको लेकर आगे बढ़ते हैं। 
मैं सवाल करना चाहता हूं कि कांग्रेस क्यों पिछड़ा वर्ग को केवल मतदाता के 
नाते देखती रही है, इंसानियत के नाते क्यों नहीं देखा? पिछड़ा वर्ग हित में
 विभिन्न आयोगों ने सिफारिशें कीं, लेकिन उसने इसे ठुकरा दिया। कांग्रेस को
 तो हक ही नहीं है सवाल पूछने का।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;span style=&quot;color: #ff6600;&quot;&gt;&lt;strong&gt;हाल ही में मंत्रिपरिषद् विस्तार
 में समाज के सभी वर्गों से मंत्रियों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हुआ है। 
इसे आप किस रूप में देखते हैं ?&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;वर्तमान में मोदी सरकार में 27 मंत्री अन्य पिछड़ा वर्ग से हैं जबकि 12 
अनुसूचित जाति एवं 8 अनुसूचित जाति समुदाय से हैं। 11 महिला मंत्री भी 
सरकार में शामिल हैं। भौगोलिक और सामाजिक दृष्टिकोण से विचार करते हुए 
मंत्रिपरिषद् में उन्हें शामिल कर सम्मान दिया गया है। मोदी सरकार सही 
मायने में सामाजिक न्याय पर अमल कर रही है। हम देश भर में इन मंत्रियों के 
जन-समर्थन को लेकर ‘जन आशीर्वाद यात्रा’ कर रहे हैं।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;span style=&quot;color: #ff6600;&quot;&gt;&lt;strong&gt;मोदी सरकार ने ओबीसी समाज के हित में और कौन से कदम उठाए हैं ?&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;मोदी सरकार ने गत सात वर्षों में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिये हैं। 
राष्ट्रीय स्तर पर पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा दिया गया। यह 
ऐतिहासिक कदम था। पहली बार केंद्रीय विद्यालयों, नवोदय विद्यालयों और विधि 
विश्वविद्यालयों, सैनिक स्कूलों में भी आरक्षण लागू किया जा रहा है, जिससे 
इस साल पिछड़ा वर्ग के लगभग 70 हजार छात्रों को लाभ होनेवाला है। मछुआरों 
के लिए अलग मंत्रालय का गठन किया गया। क्रीमी लेयर का स्तर 6 लाख रुपये से 
बढ़ाकर 8 लाख रुपये किया गया। पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग के कर्मचारियों के 
बच्चों के लिए पहली बार आरक्षण पर अमल किया जा रहा है। 1993 में मंडल आयोग 
की सिफारिश के बाद किसी सरकार ने पिछड़ा वर्ग पर इतना ध्यान नहीं दिया, 
जितना कि मोदी सरकार दे रही है।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;आजादी के बाद 75 वर्षों में तो लगभग 60 वर्ष कांग्रेस सरकार में थी। 
इसमें भी लगभग 35 साल एक ही परिवार ने राज किया। पचास के दशक में नेहरूजी 
जब प्रधानमंत्री थे, तब काका कालेलकर आयोग ने जो सिफारिशें की, उस पर संसद 
में चर्चा नहीं की और उसकी अनदेखी की। इंदिरा गांधीजी 17 साल प्रधानमंत्री 
रहीं, इन्होंने काका कालेलकर आयोग को कोई महत्व नहीं दिया और न ही कोई अन्य
 आयोग बिठाया। कांग्रेस ने पिछड़ा वर्ग को धोखा दिया। जब कभी आरक्षण का 
मुद्दा आया, उसने समर्थन नहीं किया।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;जनता पार्टी शासन में मोरारजीभाई प्रधानमंत्री थे, अटल बिहारी 
वाजपेयीजी, लालकृष्ण आडवाणीजी उस सरकार में मंत्री थे, तभी मंडल आयोग का 
गठन हुआ। इसकी सिफारिशें भी तब हुईं जब केंद्र में वीपी सिंह सरकार आई। 
वीपी सिंह सरकार ने लोकसभा में प्रस्ताव पारित किया। राजीव गांधीजी ने दो 
बार लगातार विपक्ष के नेता के नाते इसके खिलाफ बोला। इतना ही नहीं, 2004 से
 लेकर 2014 तक केंद्र में यूपीए सरकार थी। क्षेत्रीय दल– समाजवादी, राजद, 
बसपा आदि जो अपने को पिछड़ा वर्ग के हितैषी के रूप में प्रस्तुत करते नहीं 
थकते हैं, उन्होंने क्यों नहीं पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देने 
के बारे में सोचा?&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;जब मोदी सरकार द्वारा 2017 में पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा 
दिया गया तब लोकसभा में कांग्रेस ने विरोध किया, वामपंथी दलों ने विरोध 
किया। लोकसभा में प्रस्ताव पारित हुआ। राज्यसभा में यह बिल आने पर कांग्रेस
 ने फिर इसका विरोध किया। श्री भूपेन्द्र यादव के नेतृत्व में समिति बनी। 
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी, श्री अमित शाहजी एवं श्री जगत प्रकाश 
नड्डा की पहल से राज्यसभा में दोबारा इसे पारित किया गया। भाजपा शासित अनेक
 राज्यों में ओबीसी समुदाय के मुख्यमंत्री बने हैं।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;सिर्फ आरक्षण की ही बात नहीं, मोदी सरकार द्वारा जो भी योजनाएं बनाई गई 
हैं, उससे पिछड़े और गरीबों को बहुत लाभ हो रहा है। प्रधानमंत्री सुरक्षा 
बीमा योजना, जीवन ज्योति बीमा योजना, मुद्रा योजना, किसान सम्मान निधि 
योजना, आयुष्मान भारत योजना, सुकन्या समृद्धि योजना आदि से सबसे बड़े 
पैमाने पर लाभान्वित पिछड़ा वर्ग समाज ही हुआ है। इसलिए यह गरीबों-किसानों 
की सरकार है। शोषित, पीड़ित, वंचित, दलित; इन वर्गों की सरकार है। इन 
वर्गों के हित में काम करनेवाली सरकार है, युवाओं, महिलाओं की भी इसमें 
भागीदारी है।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;span style=&quot;color: #ff6600;&quot;&gt;&lt;strong&gt;भाजपा ओबीसी मोर्चा के राष्ट्रीय
 अध्यक्ष के रूप में आपके कार्यकाल का एक वर्ष पूरा हो रहा है। इस दौरान 
मोर्चा की क्या सक्रियता रही ?&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जगत प्रकाश नड्डा के नेतृत्व में पार्टी 
के अंदर पिछड़ा वर्ग समुदाय को काफी महत्व दिया जा रहा है। इस समुदाय से 
अनेक प्रदेश अध्यक्ष बने हैं। भाजपा ओबीसी मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का 
दायित्व मेरे द्वारा संभालने के बाद अनेक कार्यक्रम हुए हैं। राष्ट्रीय 
कार्यकारिणी का गठन हुआ है। चार बार राष्ट्रीय परिषद् की बैठकें हुई हैं। 
पहली बार मोर्चा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक दिल्ली में हुई। संसद 
में कांग्रेस ने प्रधानमंत्री मोदीजी द्वारा नए मंत्रियों का परिचय कराने 
के समय विरोध किया और ऐसा नहीं करने दिया। भाजपा ने तय किया कि आम आदमी के 
बीच नए मंत्रियों का अभिनंदन समारोह करेंगे। मोर्चा द्वारा मोदी सरकार में 
ओबीसी समुदाय के 27 मंत्रियों का अभिनंदन कार्यक्रम किया गया। पूर्व के 
दोनों कार्यक्रमों में भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जगत प्रकाश नड्डा की 
उपस्थिति उल्लेखनीय रही। आज देश भर में हम संगठन मजबूत करने के िलए प्रवास 
कर रहे हैं। 28 प्रदेशों में कार्यसमिति गठित हुई है। लगभग 801 जिलों में 
ओबीसी मोर्चा का गठन हुआ है। लगभग 9507 मंडलों में पहली बार ओबीसी मोर्चा 
समिति गठित हुई है।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;span style=&quot;color: #ff6600;&quot;&gt;&lt;strong&gt;भाजपा ओबीसी मोर्चा की आगामी क्या योजनाएं हैं ?&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;हम हर प्रदेश में सामाजिक कल्याण सम्मेलन करेंगे। जहां-जहां पिछड़ा वर्ग
 आयोग नहीं बिठाया गया, उसको संवैधानिक दर्जा देने की मांग भी हमारी है, 
इसके लिए हम आंदोलन करेंगे और लोगों को इकट्ठा करेंगे। ओबीसी समुदाय में 
भाजपा की विचारधारा का प्रचार करेंगे और उन्हें मोर्चा से जोड़ेंगे। अन्य 
दलों द्वारा ओबीसी समुदाय को किस तरह धोखा दिया गया है, इसका पर्दाफाश 
करेंगे। ओबीसी मोर्चा मंडल से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक घर-घर दस्तक देगा, 
गांव-गांव पहुंचेगा और जन-जन को जागृत करेगा। पिछड़ा वर्ग का समर्थन लेने 
में भाजपा ओबीसी मोर्चा सक्रिय रूप से काम करेगा।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;***************************************************************************&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;•&lt;strong&gt;मेडिकल शिक्षा में ओबीसी तथा ईडब्ल्यूएस आरक्षण से एमबीबीएस, 
एमएस, बीडीएस, एमडीएस और डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में 5,550 छात्र लाभान्वित 
होंगे&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;• मोदी सरकार सही मायने में सामाजिक न्याय पर अमल कर रही है&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;• राष्ट्रीय स्तर पर पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा दिया गया। यह ऐतिहासिक कदम था&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;• मोदी सरकार द्वारा जो भी योजनाएं बनाई गई हैं, उससे पिछड़े और गरीबों को बहुत लाभ हो रहा है&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;• ओबीसी मोर्चा मंडल से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक घर-घर दस्तक देगा और जन-जन को जागृत करेगा&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;*******************************************************************************&lt;/p&gt;
&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://hitchintak.blogspot.com/feeds/1770237652036568745/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment/fullpage/post/7024567440226660873/1770237652036568745' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7024567440226660873/posts/default/1770237652036568745'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7024567440226660873/posts/default/1770237652036568745'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://hitchintak.blogspot.com/2021/08/blog-post.html' title='मोदी सरकार समाज के पिछड़े और कमजोर वर्गों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है : के. लक्ष्मण'/><author><name>संजीव कुमार सिन्‍हा</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11879095124650917997</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg-VUG_8k4GcxEdCmjpiY_6UDali2WkziCy8QL3pvL6x98CxCQkSWCPT0QSOxfne88NMZUAxuRH02FkYn1eMUbfqb1lDlWyIjQte5L7cGqhL9x2KHht1Wlw7WNx98YJCQ/s220/Mintoo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7024567440226660873.post-1290702576130178547</id><published>2021-08-06T18:44:00.001+05:30</published><updated>2022-03-04T18:45:21.040+05:30</updated><title type='text'>वर्तमान में हम भारत के इतिहास में महिला सशक्तिकरण का स्वर्ण युग देख रहे हैं : वानथी श्रीनिवासन</title><content type='html'>&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;div class=&quot;initial-letter&quot;&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;भा&lt;/strong&gt;रतीय जनता पार्टी, 
महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष और कोयंबटूर दक्षिण से तमिलनाडु 
विधानसभा की सदस्य श्रीमती वानथी श्रीनिवासन पार्टी की ऊर्जावान महिला 
नेतृत्व का प्रतिनिधित्व करती हैं। एक बहुत ही विनम्र कृषि परिवार से 
आनेवाली श्रीमती श्रीनिवासन ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् में अनेक 
दायित्वों का कुशलतापूर्वक निर्वहन किया। उन्होंने महिला मोर्चा की 
राष्ट्रीय अध्यक्ष का कार्यभार संभालने से पहले भाजपा, तमिलनाडु प्रदेश 
मंत्री, महामंत्री और उपाध्यक्ष के रूप में कई जिम्मेदारियां निभाईं। अपने 
संगठनात्मक कौशल के लिए जानी जानेवाली श्रीमती श्रीनिवासन ने तमिलनाडु में 
हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज की और इस चुनाव में उन्होंने 
एक नामी फिल्म अभिनेता को हराया था।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;श्रीमती वानथी श्रीनिवासन से उनके नई दिल्ली स्थित निवास पर कमल संदेश के सह संपादक &lt;strong&gt;&lt;span style=&quot;color: #ff6600;&quot;&gt;संजीव कुमार सिन्हा&lt;/span&gt; &lt;/strong&gt;और&lt;strong&gt; &lt;span style=&quot;color: #ff6600;&quot;&gt;राम प्रसाद त्रिपाठी&lt;/span&gt; &lt;/strong&gt;ने
 महिला मोर्चा की सक्रियता एवं मोदी सरकार द्वारा महिला सशक्तिकरण के लिए 
किए जा रहे कार्यों को लेकर बातचीत की। प्रस्तुत है प्रमुख अंश :&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;span style=&quot;color: #ff6600;&quot;&gt;&lt;strong&gt;सबसे पहले हम आपको कोयंबटूर दक्षिण विधानसभा चुनाव में जीत के लिए बधाई देते हैं।&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;आपके अभिवादन के लिए धन्यवाद।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style=&quot;color: #ff6600;&quot;&gt;‘बेटी बचाओ—बेटी पढ़ाओ’ से लेकर 
अधिकतम महिला मंत्रियों को मंत्रिपरिषद् में शामिल करने तक, प्रधानमंत्री 
श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्ववाली केंद्र सरकार ने लैंगिक न्याय और महिला 
सशक्तिकरण के लिए अनेक कदम उठाए हैं। एक महिला के तौर पर आप इसे कैसे देखती
 हैं ?&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;जहां तक स्त्रीशक्ति के हित के लिए विभिन्न कदमों का सवाल है, मुझे लगता
 है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र की भाजपा 
सरकार देश की बेटियों के दर्द और चुनौतियों को समझती है और उनका समयबद्ध 
तरीके से समाधान करने के लिए कटिबद्ध है। यह सरकार महिलाओं को उनके अधिकार 
देकर उन्हें सशक्त बनाने के लिए भी प्रतिबद्ध है।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;इसके अलावा, भाजपा देश की एकमात्र राष्ट्रीय पार्टी है जो पार्टी में 
महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान कर रही है। पार्टी न केवल महिलाओं को 
चुनाव लड़ने का मौका दे रही है, बल्कि पंचायत से लेकर संसद तक केंद्रीय 
मंत्रिपरिषद् सहित सरकार के हर स्तर पर उनका प्रतिनिधित्व सुनिश्चित कर रही
 है, जिससे सरकार के सर्वोच्च निर्णय लेनेवाले निकाय में महिलाओं का 
प्रतिनिधित्व हो सके।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;मैं आपसे सहमत हूं कि ‘बेटी बचाओ—बेटी पढ़ाओ’ से लेकर ‘सुकन्या समृद्धि 
योजना’ तक, मातृत्व अवकाश देने से लेकर केंद्रीय मंत्रिमंडल में अधिकतम 
महिलाओं को शामिल करने तक, भाजपा नेतृत्ववाली सरकार ने बड़े पैमाने पर 
महिलाओं के हित में अनेक योजनाएं प्रारंभ की है। किसी अन्य सरकार ने 
महिलाओं को शासन में इतना सम्मान और प्रतिनिधित्व नहीं दिया, जितना मोदी 
सरकार ने दिया है। एक महिला के रूप में मुझे संगठन का हिस्सा होने पर गर्व 
महसूस होता है और मुझे यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि प्रधानमंत्री श्री
 मोदी के नेतृत्व में वर्तमान में हम भारत के इतिहास में महिला सशक्तिकरण 
का स्वर्ण युग देख रहे हैं।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;span style=&quot;color: #ff6600;&quot;&gt;&lt;strong&gt;किसी देश को सशक्त बनाने के लिए 
महिलाओं का सशक्तिकरण बेहद जरूरी है। इस संदर्भ में देखा जाए तो हाल ही में
 अधिकतम महिलाओं को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल करना कितना महत्वपूर्ण 
है ?&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;प्रधानमंत्री श्री मोदी शुरू से ही इस बात पर जोर देते रहे हैं कि किसी 
देश को सशक्त बनाने के लिए महिला सशक्तिकरण बेहद जरूरी है। इसलिए, पिछले 
सात वर्षों में प्रधानमंत्रीजी ने यह सुनिश्चित किया है कि महिलाओं को 
पर्याप्त सम्मान एवं भरपूर अवसर मिले।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;स्वतंत्रता के बाद के भारत में संभवत: यह पहली बार है जब केंद्रीय 
मंत्रिपरिषद् में इतनी बड़ी संख्या में महिला मंत्री शामिल हैं। 
प्रधानमंत्रीजी ने सात और महिला मंत्रियों को शामिल किया है, जिसके बाद अब 
महिला मंत्रियों की कुल संख्या 11 हो गयी है। प्रधानमंत्रीजी का यह कदम 
दर्शाता है कि भारत ‘महिलाओं के विकास’ से आगे बढ़कर ‘महिला नेतृत्ववाले 
विकास’ की ओर जा रहा है। ये मंत्री देश भर से हैं और समाज के सभी वर्गों और
 तबकों का प्रतिनिधित्व करते हैं। और इन महिला मंत्रियों के नेतृत्व में 
महिला केंद्रित मुद्दों और नीतियों को प्राथमिकता मिलनी तय है जैसा पहले 
कभी नहीं हुआ।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;span style=&quot;color: #ff6600;&quot;&gt;&lt;strong&gt;मोदी सरकार ने हमारे देश की 
महिला आबादी की बेहतरी के लिए कई कल्याणकारी योजनाओं को लागू किया है। 
भाजपा महिला मोर्चा इस संदेश को जमीनी स्तर पर ले जाने और कल्याणकारी 
योजनाओं के शीघ्र कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने को लेकर क्या योजना बना 
रहा है ?&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;‘जन-धन योजना’ का उदाहरण हमारे सामने हैं, महिलाएं इस योजना की प्रमुख 
लाभार्थी हैं और मोदीजी जानते हैं कि यदि एक महिला अपना एक नया पैसा भी 
खर्च करती है, तो वह उसके परिवार के कल्याण के लिए होता है। इसलिए 
प्रधानमंत्रीजी ने महिलाओं के खाते में पैसा जमा कराया। ‘स्वच्छ भारत’ में 
भी सबसे ज्यादा फायदा महिलाओं को ही मिला है।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;इसी तरह ‘उज्ज्वला’ है, जिसमें भी महिलाएं ही प्रमुख लाभार्थी हैं, और 
यह उन्हें पारंपरिक तरीके से ईंधन के प्रयोग से मुक्ति प्रदान करता है जो 
कई बीमारियों का कारण बनता था। ‘आवास योजना’ में भी महिलाएं प्रमुख 
लाभार्थी हैं और उनके नाम संपत्ति कर महिलाओं को सशक्त बनाया जा रहा है। 
जिस तरह से हमारे प्रधानमंत्रीजी ने बेटियों को हर क्षेत्र में अपनी सही 
जगह हासिल करने के लिए प्रोत्साहित किया है वह वास्तव में अभूतपूर्व और 
सराहनीय है। भाजपा महिला मोर्चा इन कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए 
महिलाओं में जागरूकता पैदा कर रही है और आनेवाले दिनों में हम प्रत्येक 
लाभार्थी के घर तक जाने का प्रयास करेंगे।&lt;/p&gt;
&lt;blockquote&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;blockquote&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;• माेदी सरकार महिलाओं को उनके अधिकार देकर उन्हें सशक्त बनाने के लिए भी प्रतिबद्ध है&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;• भारतीय जनता पार्टी न केवल महिलाओं को चुनाव लड़ने का मौका दे
 रही है, बल्कि पंचायत से लेकर संसद तक केंद्रीय मंत्रिपरिषद् सहित सरकार 
के हर स्तर पर उनका प्रतिनिधित्व सुनिश्चित कर रही है&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;• भारत के 75वें स्वतंत्रता दिवस पर आयोजित अमृत महोत्सव के 
निमित्त हम 75 महिला स्वतंत्रता सेनानियों के जन्मस्थान एवं स्मारकों पर एक
 कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बना रहे हैं&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;/blockquote&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;/blockquote&gt;
&lt;p&gt;&lt;span style=&quot;color: #ff6600;&quot;&gt;&lt;strong&gt;महिलाओं के लिए जम्मू और कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश की नई अधिवास (डोमिसाइल) नीति कितनी महत्वपूर्ण है ?&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;पुराना स्थायी निवासी नियम जम्मू और कश्मीर की महिलाओं के साथ भेदभाव 
करता था क्योंकि यह नियम उनको किसी गैर-स्थायी निवासी के साथ शादी करने के 
बाद राज्य से प्राप्त अधिकार से वंचित कर देता था। लेकिन नई डोमिसाइल नीति 
ने राज्य की महिलाओं को विवाह की स्वतंत्रता देकर और उनके डोमिसाइल को बनाए
 रखने के साथ-साथ समाज में समान भागीदारी का अधिकार प्रदान कर न्याय प्रदान
 किया है। अब उनके जीवन-साथी भी डोमिसाइल नीति के तहत लाभ पाने के हकदार 
हैं।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;जब एक लड़की केवल राज्य की सीमाओं के बाहर जीवन-साथी चुनने के लिए अपनी 
नागरिकता और संपत्ति खो देती है, तो ऐसी भेदभावपूर्ण प्रथा को रोकने के लिए
 भाजपा के अलावा किसी अन्य राजनीतिक दल ने इसके खिलाफ अपनी आवाज उठाने की 
हिम्मत नहीं दिखाई। भाजपा महिला मोर्चा ने इस ऐतिहासिक निर्णय के लिए 
प्रधानमंत्री को धन्यवाद दिया है। जम्मू-कश्मीर की कई महिलाओं को डोमिसाइल 
अधिकारों से लाभ होगा, जिनसे वे दशकों से वंचित थीं।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;span style=&quot;color: #ff6600;&quot;&gt;&lt;strong&gt;भाजपा ने कोविड-19 महामारी के दौरान ‘सेवा ही संगठन’ की शुरुआत की। महिला मोर्चा ने इस अभियान में कैसे अपना योगदान दिया ?&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;कोरोना महामारी की दूसरी लहर के दौरान भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री 
जगत प्रकाश नड्डा द्वारा शुरू किए गए ‘सेवा ही संगठन’ अभियान के तहत पार्टी
 की लाखों महिला कार्यकर्ता अपने घरों से जरूरतमंदों की सेवा के लिए भोजन, 
आवश्यक सामग्री और रक्तदान के लिए निकलीं। 22 राज्यों से उपलब्ध रिपोर्ट के
 अनुसार 55,58,294 मास्क, 46,86,686 भोजन के पैकेट, 47,88,522 राशन के 
पैकेट, 3,76,498 सेनेटरी पैड / सैनिटाइज़र वितरित किए गए और 11,645 महिला 
मोर्चा कार्यकर्ताओं ने जरूरतमंदों को रक्तदान किया।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;span style=&quot;color: #ff6600;&quot;&gt;&lt;strong&gt;आपके कार्यभार संभालने के बाद, भाजपा महिला मोर्चा की प्रमुख उपलब्धियों के बारे में कुछ बताएं ?&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;महिला मोर्चा ने अधिकांश राज्यों में प्रदेश कार्यकारिणी की बैठकें पूरी
 कर ली हैं। अब हमारा ध्यान मंडलस्तरीय समितियां, बूथ समितियां और पन्ना 
प्रमुखों में महिलाओं की संख्या बढ़ाने पर है। हम बूथ समितियों में एक 
तिहाई महिलाओं को शामिल करने के लिए काम कर रहे हैं।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;दूसरे, हम महिला केंद्रित मुद्दों के सुचारू समाधान और विभिन्न 
कल्याणकारी योजनाओं के कार्यान्वयन के लिए पंचायत से संसद तक एक संगठनात्मक
 नेटवर्क का निर्माण कर रहे हैं।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;तीसरा, हम सर्वस्पर्शी कार्य करते हुए प्रत्येक महिला तक पहुंचने का 
प्रयास कर रहे हैं। हम हर राज्य में महिला प्रतिनिधियों का सम्मान और 
अभिनंदन करेंगे। हम उनसे जुड़ना चाहते हैं क्योंकि ये महिलाएं प्रधानमंत्री
 की योजनाओं के प्रचार और प्रसार में महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकती हैं।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;भारत के 75वें स्वतंत्रता दिवस पर आयोजित अमृत महोत्सव के निमित्त हम 75
 महिला स्वतंत्रतासेनानियों के जन्मस्थान/स्मारकों पर एक कार्यक्रम आयोजित 
करने की योजना बना रहे हैं। इस अवसर पर हम भारत के स्वतंत्रता संग्राम में 
भाग लेनेवाली इन गुमनाम महिला नेताओं पर एक पुस्तक भी प्रकाशित करने की 
योजना बना रहे हैं।&lt;/p&gt;
&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://hitchintak.blogspot.com/feeds/1290702576130178547/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment/fullpage/post/7024567440226660873/1290702576130178547' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7024567440226660873/posts/default/1290702576130178547'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7024567440226660873/posts/default/1290702576130178547'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://hitchintak.blogspot.com/2021/08/blog-post_6.html' title='वर्तमान में हम भारत के इतिहास में महिला सशक्तिकरण का स्वर्ण युग देख रहे हैं : वानथी श्रीनिवासन'/><author><name>संजीव कुमार सिन्‍हा</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11879095124650917997</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg-VUG_8k4GcxEdCmjpiY_6UDali2WkziCy8QL3pvL6x98CxCQkSWCPT0QSOxfne88NMZUAxuRH02FkYn1eMUbfqb1lDlWyIjQte5L7cGqhL9x2KHht1Wlw7WNx98YJCQ/s220/Mintoo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7024567440226660873.post-6178685095377085867</id><published>2021-06-04T18:57:00.001+05:30</published><updated>2022-03-04T18:59:13.786+05:30</updated><title type='text'>इस चुनाव में हमने ‘विकास राष्ट्रवाद’ को आकार दिया है : डॉ. विनय सहस्रबुद्धे</title><content type='html'>&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;strong&gt;भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, 
राज्यसभा सदस्य एवं मध्यप्रदेश प्रभारी डॉ. विनय सहस्रबुद्धे से नई दिल्ली 
स्थित उनके आवास पर लोकसभा चुनाव एवं वैचारिक विषयों पर कमल संदेश के सहायक
 संपादक&lt;/strong&gt; &lt;span style=&quot;color: #ff6600;&quot;&gt;संजीव कुमार सिन्हा&lt;/span&gt; &lt;strong&gt;ने बातचीत की। प्रस्तुत हैं मुख्य अंश :&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class=&quot;initial-letter&quot;&gt;
&lt;p&gt;&lt;span style=&quot;color: #ff6600;&quot;&gt;भाजपा ने इस बार 2014 के लोकसभा चुनाव से भी बड़ी जीत हासिल की। इस जीत के क्या कारण रहे?&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;मुझे लगता है कि देश की राजनीति ने एक दृष्टि से करवट बदली है। चुनावी 
राजनीति का जो पारंपरिक व्याकरण था उसमें भी एक आमूलचूल परिवर्तन आने की 
दिशा में ये चुनाव परिणाम संकेत करते हैं। आमतौर पर चुनाव लड़े जाते थे 
लोकलुभावन वादों के आधार पर। किसी भावनात्मक विषय को एकदम से ऊपर उठाते हुए
 या फिर अस्मिता से जुड़े, पहचान या परिचय से जुड़े विषयों को आगे लाते हुए
 भारत में चुनाव सामान्य तौर पर लड़े जाते हैं।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;इस समय जो देख रहा हूं या जो समझ में आ रहा है वो मैं वर्णन करूंगा कि 
एक तरीके से जैसे डेवलपमेंट इकॉनोमिक्स होता है, डेवलपमेंट एडमिनिस्ट्रेशन 
नाम की एक नई ज्ञान-शाखा चली आई है। वैसे इस चुनाव की देन है कि इसने 
डेवलपमेंट नेशनलिज्म को आकार दिया है। तो यह एक ‘विकास राष्ट्रवाद’ है। 
इसको कोई ‘राष्ट्र विकासवाद’ भी कह सकता है, जिसमें राष्ट्रीय अस्मिता के, 
राष्ट्रीय स्वाभिमान के, राष्ट्र की विश्व में जो पहचान है, पहचान के और 
देश के विकास के; और विकास में सामाजिक न्याय भी है, अंत्योदय भी है, गरीबी
 उन्मूलन भी है, सारी चीजें हैं। इन सारे विषयों का एक मिला–जुला रसायन बना
 है। जिस रसायन ने एक बहुत बड़ा परिवर्तन इस चुनाव में सिद्ध किया है। तो 
उस दृष्टि से मैं पहले मुद्दे पर आता हूं कि यह चुनाव एक दृष्टि से राजनीति
 की बदलती हुई करवट का परिचायक है और बदले हुए व्याकरण का एक चिह्न है, 
उसको चिन्हित करने वाला, उसको निर्देशित करने वाला ये चुनाव है।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;span style=&quot;color: #ff6600;&quot;&gt;आपके पास मध्य प्रदेश भाजपा के प्रभारी 
का भी दायित्व है। इस प्रदेश में लोकसभा चुनाव में भाजपा ने बड़ी जीत दर्ज 
की। हालांकि कुछ महीने पूर्व हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा को अपेक्षित 
सफलता नहीं मिली। लोकसभा चुनाव में इतनी जल्दी भाजपा ने शानदार जीत कैसे 
हासिल की?&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;–देखिए, मध्य प्रदेश के बारे में मैं यह कहूंगा कि वहां पर तीन कारण 
सबसे महत्वपूर्ण रहे। पहली बात ये रही कि वहां के मतदाताओं को शिवराज सिंह 
सरकार के अपदस्थ होने का एक पछतावा था, उनको छोटी–मोटी नाराजगी पन्द्रह साल
 रही सरकार के बारे में होना स्वाभाविक है, मगर नाराजगी इतनी भी नहीं थी कि
 वो सरकार को हटते हुए देखे, मगर सरकार मात्र 4 सीटों के लिए सत्तासीन नहीं
 हो पाई तो उसके कारण पश्चाताप से दग्ध, ऐसा मध्य प्रदेश का जनमानस था। वो 
भूल सुधारने की कोशिश उन्होंने बड़े जबरदस्त तरीके से इस चुनाव में की हुई 
दिखाई दे रही है, ये एक बात है।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;दूसरी बात है कि कमलनाथ सरकार के सत्तासीन होने के बाद जो वहां के 
गर्वनेंस का स्वरूप रहा है, वो भी बहुत निराशाजनक है और किसी भी आश्वासन की
 प्रतिपूर्ति में कोई कारगर कदम नहीं उठाए गए। कानून व्यवस्था चरमरा गई है।
 भ्रष्टाचार के नए–नए किस्से लोग एक–दूसरे को बता रहे हैं। अपने अनुभव के 
आधार पर, स्वयं उनके निजी सचिव के दफ्तर में करोड़ों की संपदा पाई गई है और
 इनके जो तीन शीर्षस्थ नेता हैं, इसके आपस दिक्कतों के चलते भी वहां की 
राजनीति में एक अस्थिरता आई है, तो ऐसी स्थिति में लोगों को उस सरकार के 
पक्ष में वोट देने का एक भी कारण कमलनाथ सरकार ने दिया नहीं है, तो लोग 
क्यों वोट देंगे। और तीसरी बात, जो पूरे देश के लिए मायने रखती है कि 
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी को पुन: सत्ता में प्रतिस्थापित करने के 
प्रति लोगों में जबरदस्त उत्साह और अनुकूलता की भावना थी, तो इन तीन कारणों
 से हम मध्यप्रदेश का चुनाव जीत पाए हैं।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;span style=&quot;color: #ff6600;&quot;&gt;अब कुछ वैचारिक प्रश्न। भाजपा और कांग्रेस में क्या अंतर है?&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;कांग्रेस–भाजपा में अंतर तो काफी है। हमारी भारतीय जनता पार्टी की अपनी 
जो विशिष्ट पहचान है, वो संगठन के कारण है, विचारधारा के कारण है, और मैं 
मानता हूं कि विचारधारा इसमें अहम है। इस विचारधारा का प्रतिबिंब हमारे 
संगठन शैली में भी है, और हमारे गवर्नेंस में भी है, मगर मूल अंतर विचारों 
का है।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;सबसे पहली बात है कि कांग्रेस समेत बहुत सारे राजनीतिक दलों ने जो 
विचारों का मार्ग स्वीकार किया है, वो मुख्यत: भारत के बाहर जन्मी हुई 
विचारधाराओं का है, भारतीय विचारधारा जिसको हम कहेंगे स्वदेशी विचारधारा, 
इस देश की मिट्टी का सुगंध रखनेवाली विचारधारा, उसके आधार पर काम करने वाला
 विचारधारा कोई है, जो पूर्णरूपेण विचारधारा अधिष्ठित दल है तो वो भाजपा 
है। दूसरा है कि कम्युनिस्टों का अपवाद छोड़िए तो बहुत सारे दल ऐसे हैं जो 
एक घराने पर केंद्रित हैं और भारतीय जनता पार्टी देश के सभी क्षेत्रों में 
उपस्थित होने के बावजूद भी यहां पर न राष्ट्रीय स्तर पर, न राज्य स्तर पर 
किसी एक घराने की चलती है। हमारे यहां प्रदेश का, जिले का या देश का 
राष्ट्रीय अध्यक्ष पार्टी का कौन बनेगा, इसके बारे में कोई बता नहीं सकता, 
जबकि अन्यान्य दलों में लोग बता पाते हैं कि इनका बेटा होगा, इनका पोता 
होगा, या नाती होगा या ये होगा। तो भारतीय जनता पार्टी संगठन के संदर्भ में
 पूर्ण लोकतांत्रिक तरीके से चलने वाली पार्टी है और वो भी विचारधारा का 
अंग है। तीसरी बात है कि बाकी बहुत सारे दल वोट–बैंक की राजनीति के कारण 
समाज में विभेद उत्पन्न करने पर तुले हुए होते हैं। समाज जितना ज्यादा 
विभाजित उतनी उनकी जीत की संभावना अधिक, ये गणित रहता है, जबकि यहां हम 
सामाजिक एकता के कारण पर चुनाव लड़ते हैं। हम पार्टी को किसी एक वर्ग विशेष
 तक सीमित रखने के विरोध में हैं जबकि देश में कई राजनीतिक दल हैं, जिनका 
एक समाज विशेष के साथ इतना गहरा रिश्ता बन गया है कि उसके अतिरिक्त लोग 
उनके बारे में सोच ही नहीं सकते हैं। एक समीकरण सा बन गया है कि एक्स 
पार्टी यानी ये समाज, वाई पार्टी यानी ये समाज, ऐसा भाजपा के बारे में कोई 
नहीं कह पाएगा। चौथा महत्वपूर्ण बिन्दु है जो विचारधारा को ही परिलक्षित 
करता है। हम कहते हैं कि राष्ट्र प्रथम, दल उसके पश्चात् और व्यक्ति उसके 
बाद तो इसी विचार की परछाई हमारी गवर्नेंस में भी दिखती है।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;प्रधानमंत्री मोदीजी हों या हमारे विभिन्न मुख्यमंत्री हों, इन्होंने 
गवर्नेंस यानी शासकता में एक उद्देश्यपूर्णता लाई है, जो लगभग निष्कासित हो
 चुकी थी और इसलिए सरकार में काम करना यानी केवल लालबत्ती की कार में 
बैठना, सरकार में काम करना यानी लेटरहेड या विजिटिंग कार्ड छपवाना, सरकार 
में काम करना यानी अफसरशाही पर नकेल कसना, इतना मात्र नहीं होता है, या रौब
 जमाना है या गार्ड ऑफ ऑनर लेना है, इतना मात्र नहीं होता, सरकार में बैठना
 यानी एक दायित्व निभाना है और दायित्व के पीछे उद्देश्यपूर्णता के आधार पर
 उस दायित्व को निभाना ये होता है और इसका परिचय मुझे लगता है कि भारतीय 
जनता पार्टी अपने सरकारों के माध्यम से देती रही है।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;span style=&quot;color: #ff6600;&quot;&gt;आपने कहा कि कांग्रेस का संबंध विदेशी विचारधारा से है। इसका आधार क्या है?&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;कांग्रेस की विचारधारा विदेशी मतलब क्या, मूलत: कांग्रेस की जो 
विचारधारा थी वो स्वाधीनता आंदोलन तक तो भारत को स्वाधीन करना, इतनी ही थी।
 मगर स्वाधीनता आंदोलन के बाद देश के प्रथम प्रधानमंत्री नेहरूजी के ऊपर 
साम्यवाद का एक आकर्षण था और इसीलिए सोवियत रूस का मॉडल उन्हें बेहद पसंद 
था, जिसके कारण हमारे यहां प्लैंड इकॉनोमी, योजना आयोग, ये सारा विषय आया 
और 1956–57 में मद्रास के निकट आवडी में जब कांग्रेस का अधिवेशन हुआ था, 
उसमें उन्होंने समाजवादी धारा को अपना लिया।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;हम कहते हैं कि पहले तो हमारा जनतंत्र आध्यात्मिक जनतंत्र है, बाद में 
वो राजनीतिक है और अब बाबासाहेब अंबेडकर के सपनों के अनुसार हमें सामाजिक 
और आर्थिक जनतंत्र की ओर बढ़ना है। मगर इन्हें सेकुलरिज्म का मोह इतना हो 
गया, जो एक विशिष्ट परिस्थिति के कारण ब्रिटेन में पनपी हुई विचारधारा थी, 
हमारे यहां कभी भी पंथ के आधार पर सत्ता नहीं थी, तो ये सारी चीजें इसी को 
परिलक्षित करती हैं कि कांग्रेस की विचारधारा भी धीरे–धीरे विदेश के संदर्भ
 में जानी जाने लगी।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;span style=&quot;color: #ff6600;&quot;&gt;भाजपा नया भारत बनाने की बात कहती है। पार्टी के पास नए भारत के लिए क्या विजन है?&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;देखिए, भाजपा का विजन हमारे सनातन संस्कृति के सूत्र वाक्य से ही है। और
 वो है– सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे सन्तु निरामया:। सभी सुखी हों, सभी को 
निरामय जीवन का लाभ हो और इसलिए अंत्योदय का जो दर्शन है, वो हमारा एक 
दृष्टि से प्राणतत्व है। हम प्रेरणा राष्ट्रवाद या राष्ट्रभक्ति से लेते 
हैं, अंत्योदय हमारा लक्ष्य है। उसको पाने के लिए हमारे जो साधन हैं, उसका 
नाम है– सुशासन और विकास।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;सुशासन और विकास ये कोई केवल फ्लाईओवर्स के माध्यम से या बुलेट ट्रेन के
 माध्यम से नहीं होता है, बुलेट ट्रेन, फ्लाईओवर्स, अच्छी परिवहन 
व्यवस्थाएं, ये तो बहुत महत्वपूर्ण इसलिए हो जाता है, क्योंकि उसके आधार पर
 हमारी अर्थव्यवस्था को गति मिलती है, अर्थव्यवस्था को गति मिलती है तो 
समाज के निचले तबके तक विकास का रिसाव होता है। संसाधन वहां भी पहुंचते हैं
 और लोग सपने देखने लगते हैं, जब लोग आकांक्षावान हो जाते हैं, तब वो और 
तरक्की करते हैं, तो यही हमारी धारणा है। ये कोई किसी को एनटाइटलमेंट के 
आधार पर कि कोई उसके नाम से जमीन करो, उसको फलाना पैसे दे दो, इसके माध्यम 
से नहीं होता, हमने अगर जनकल्याण के कार्यक्रम किए हैं, तो वो भी सशक्तिकरण
 के लिए किए हैं, ताकि वो अपने पैरों पर खड़ा हो पाए।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;अंबेडकरजी ने जो कहा था उस समय कि नौकरी मांगने वाले मत रहो, देने वाले 
बनो, इसको अमल में लाने के लिए मोदीजी को सत्ता हाथ में लानी पड़ी। उसके 
पहले क्या अंबेडकरजी का नाम किसी ने नहीं लिया था, लिया तो था मगर केवल नाम
 लिया था, काम तो भूल गए थे तो हमने वो किया है।&lt;/p&gt;
&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://hitchintak.blogspot.com/feeds/6178685095377085867/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment/fullpage/post/7024567440226660873/6178685095377085867' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7024567440226660873/posts/default/6178685095377085867'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7024567440226660873/posts/default/6178685095377085867'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://hitchintak.blogspot.com/2021/06/blog-post.html' title='इस चुनाव में हमने ‘विकास राष्ट्रवाद’ को आकार दिया है : डॉ. विनय सहस्रबुद्धे'/><author><name>संजीव कुमार सिन्‍हा</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11879095124650917997</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg-VUG_8k4GcxEdCmjpiY_6UDali2WkziCy8QL3pvL6x98CxCQkSWCPT0QSOxfne88NMZUAxuRH02FkYn1eMUbfqb1lDlWyIjQte5L7cGqhL9x2KHht1Wlw7WNx98YJCQ/s220/Mintoo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7024567440226660873.post-2907744213453410789</id><published>2019-11-07T18:49:00.001+05:30</published><updated>2022-03-04T18:55:40.825+05:30</updated><title type='text'>दक्षिण कोरिया से हम कई विषयों पर सीख सकते हैं : मुरलीधर राव</title><content type='html'>&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;strong&gt;भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव श्री 
मुरलीधर राव के नेतृत्व में पार्टी के छह सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने दक्षिण 
कोरिया का प्रवास किया। यह यात्रा 14 अक्टूबर से 20 अक्टूबर के बीच संपन्न 
हुई। इस प्रतिनिधिमंडल में भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. विजय सोनकर 
शास्त्री, सांसद श्री उमेश जी. जाधव, भाजपा विदेश मामले विभाग के राष्ट्रीय
 संयोजक डॉ. विजय चौथाइवाले, डॉ. श्यामा प्रसाद मुकर्जी शोध अधिष्ठान के 
निदेशक डॉ. अनिर्बान गांगुली एवं भाजपा विदेश मामले विभाग से जुड़े डॉ. 
आश्विन जोहर भी शामिल थे।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class=&quot;initial-letter&quot;&gt;&lt;strong&gt;
&lt;/strong&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;गत 22 अक्टूबर को भाजपा राष्ट्रीय महासचिव श्री मुरलीधर राव से कमल संदेश के सहायक संपादक &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style=&quot;color: #ff6600;&quot;&gt;संजीव कुमार सिन्हा&lt;/span&gt; ने उनके नई दिल्ली स्थित निवास पर दक्षिण कोरिया प्रवास को लेकर बातचीत की। प्रस्तुत है बातचीत के प्रमुख अंश-&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;span style=&quot;color: #ff6600;&quot;&gt;आपके नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल दक्षिण कोरिया के प्रवास पर रहा। इस यात्रा का उद्देश्य क्या था?&lt;br /&gt;
&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
इस यात्रा का उद्देश्य भारत और दक्षिण कोरिया के बीच पार्टी के स्तर पर बेहतर संबंधों को बढ़ावा देना था।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;देखिए, पूर्वी एशिया में गत पांच दशकों में औद्योगिक विस्तार कर एक 
महत्त्वपूर्ण सफल अर्थव्यवस्था का संचालन करते हुए जो तीन-चार देश गतिशील 
हैं उसमें दक्षिण कोरिया आता है। दक्षिण कोरिया गत कुछ वर्षों से एक ट्रेड 
सरप्लस कंट्री के नाते स्थापित हुआ है। निर्यात करते हुए, अर्थव्यवस्था को 
मजबूत करते हुए, लगातार ग्रोथ रेट बढ़ाते हुए, वहां की गरीबी को समाप्त 
किया, शिक्षा के स्तर को बहुत ऊंचा किया और अपने प्रति व्यक्ति आय भी 30-35
 हजार डॉलर तक बढ़ाया तो इस प्रकार के एक सफल-विकसित देश के नाते दक्षिण 
कोरिया स्थापित हुआ है।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;गत कुछ वर्षों में वहां शुरुआत के दिनों में कुछ दिक्कतें आईं, 
लोकतांत्रिक व्यवस्था पूरी तरह स्थापित नहीं हो पाई, लेकिन गत दो दशकों में
 एक सफल लोकतांत्रिक व्यवस्था के नाते भी उसने अपनी राजनीतिक व्यवस्था को 
स्थिर किया। हमारी जैसी आबादी नहीं है लेकिन एक महत्वपूर्ण देश है, तो इस 
दृष्टि से भारत और चीन के साथ-साथ जब दो सौ वर्षों के बाद एशिया जो महाखंड 
है ये एक बार फिर से विश्व के अंदर महत्त्वपूर्ण क्षेत्र के नाते उभर रहा 
है, फिर से आर्थिक मजबूती को स्थापित कर रहा है। दो सौ&amp;nbsp;साल उपनिवेशवाद के 
कारण बहुत कुछ खोया था तो ऐसे में भारत से आने वाले दिनों में रिश्ते, 
राजनीतिक दृष्टि और आर्थिक दृष्टि से बढ़ना चाहिए, ऐसा वहां की पार्टी और 
सरकार भी सोच रही है। हमारी लुकईस्ट पॉलिसी जिसे हमारी सरकार ने भी मोदीजी 
के नेतृत्व में इसको और सक्रिय किया तो ऐसे में उस देश को समझना, संवाद को 
बढ़ाना, रिश्तों के लिए भविष्य की संभावनाओं को तलाशना और रिश्तों के लिए 
एक प्रकार से नींव डालने का काम, इस दृष्टि से हमारे सात दिन की छह सदस्यीय
 प्रतिनिधिमंडल की यात्रा हुई और यह सचमुच बहुत सफल यात्रा संपन्न हुई।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;span style=&quot;color: #ff6600;&quot;&gt;इस प्रतिनिधिमंडल ने दक्षिण कोरिया में सात दिनों तक किस तरह से प्रवास किए। किस प्रकार के कार्यक्रम रहे?&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;वहां की जो कोरिया फाउंडेशन है उन्होंने हमारे सारे कार्यक्रमों की रचना
 की। वहां की सरकार चलाने वाली लिबरल पार्टी, विपक्ष की कंजरवेटिव पार्टी 
और उसके महत्त्वपूर्ण नेता, ऐसे सब लोगों से व्यक्तिगत और सामूहिक हमारी 
बातचीत हुई। उनके साथ देश की राजनैतिक, द्विपक्षीय और अलग-अलग देशों के साथ
 संबंध, उसमें जो जटिलताएं हैं, इन सब पर चर्चा हुई। यहां के एमपी के समान 
जो वहां की नेशनल असेंबली के मेंबर्स हैं, ऐसे कई लोगों से हमारा मिलना 
हुआ। वहां नेशनल असेंबली में भी जाकर सब देखा और वहां के अधिकारियों से बात
 की। उसके अलावा वहां के जो पॉलिसीज इशूज पर सोचनेवाले महत्वपूर्ण थिंक 
टैंक्स हैं उन सबसे हम मिले। उनकी टोली के साथ हमारी गहन चर्चा हुई।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;वहां बुद्धिज्म के लगभग चौदह सौ साल पुराने मोनास्ट्री है, तुंगडो 
मोनास्ट्री, वहां 20-22 प्रतिशत से ज्यादा आबादी बुद्धिज्म के लोग हैं, ऐसे
 रिलीजियस नेताओं के साथ हम उनसे भी मिले, उनके साथ हमारा भोजन का 
कार्यक्रम भी था, वहां संवाद का कार्यक्रम भी हुआ और इसके अलावा हमारे वहां
 पर जितने इंडस्ट्रीज हैं जो भारत के लिए भी और वहां भी महत्त्वपूर्ण हैं, 
ऐसे हुंडई, सैमसंग, पास्को और डंकू और इस प्रकार के जो महत्त्वपूर्ण कंपनीज
 हैं, उनसे मिले। उद्योगपतियों और अर्थशास्त्रियों से भी हम मिले। मीडिया 
के हाउसेस में भी हम गए तो संपूर्ण समाज के अलग-अलग महत्वपूर्ण लोग हैं, 
पक्ष हैं, उनसे विभिन्न विषयों पर योजनाबद्ध ढंग से चर्चा हुई।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;span style=&quot;color: #ff6600;&quot;&gt;इसी वर्ष दक्षिण कोरिया ने भारत को अपना 
‘विशेष रणनीतिक साझेदार’ घोषित किया। दोनों देशों के बीच व्यापार और आर्थिक
 संबंध किस तरह से विकसित हो रहे हैं?&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;देखिए, 1991 के उदारीकरण के बाद उस समय की सरकार ने लुकईस्ट पॉलिसी की 
घोषणा की थी। हमारे संबंध बढ़ाने का कार्य शुरू किया था। अटलजी की सरकार के
 समय भी इसकी गति तेज करने का काम किया। अब विशेषकर मोदीजी की सरकार आने के
 बाद दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति और यहां के प्रधानमंत्री दोनों के बीच 
गर्मजोशी के रिश्ते हैं। आपसी विश्वास भी है, आपसी केमिस्ट्री बहुत अच्छा 
है। ऐसी मान्यता वहां के लोगों में है। यहां पर सरकार में स्पेशल डेस्क भी 
हुआ है, निवेश के बारे में और इससे संबंधित मुद्दों के बारे में समयबद्ध 
ढंग से इसके फॉलोअप करने की व्यवस्था यहां की सरकार ने किया, जिसका बहुत 
अच्छा रिस्पांस वहां से है।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;वो ट्रेड सरप्लस कंट्री होने के कारण उनके पास निवेश करने के लिए बहुत 
अच्छी पूंजी हैं, उसका उपयोग करने की मंशा हमारे मन में है और आर्थिक 
दृष्टि से यहां कई जगह पर वो निवेश कर रहे हैं, निवेश बढ़ा है। हम दोनों के
 बीच में जो ट्रेड है वो 21 बिलियन डॉलर का अभी हो रहा है। हमारे ट्रेड 
डेफिसीट ज्यादा हैं। आने वाले दिनों में ये ट्रेड डेफिसीट कम करने के लिए 
उनके देश में कृषि क्षेत्र, स्पेस रिसर्च, सुरक्षा, कृषि, ऑरगेनिक फूड्स और
 कल्चर, ऐसे क्षेत्र में भारत आगे बढ़ सकता है, इसकी संभावनाएं हमें चर्चा 
में मिली। हम केंद्र सरकार को भी रिपोर्ट देंगे, पार्टी के राष्ट्रीय 
अध्यक्ष को भी देंगे, तो जो भविष्य की संभावनाएं हैं उन संभावनाओं को और 
मजबूत करने के लिए हम आगे बढ़ेंगे।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;span style=&quot;color: #ff6600;&quot;&gt;हाल ही में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा था कि दक्षिण कोरिया भारत के लिए रोल मॉडल है, ऐसा क्यों?&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;ऐसा इसलिए कहा कि हम लगभग एक ही समय में गुलामी से मुक्त हुए। हम हुए 
1947 में और वे 1945 में। उनका पार्टिशन हुआ। हमारा भी पार्टिशन हुआ। 
दक्षिणी कोरिया-उत्तरी कोरिया करके पार्टिशन हुआ। हमारा भारत और पाकिस्तान 
के नाते। इतने नीचे से गरीबी से, पिछड़ेपन से, निरक्षरता से, सारी समस्याओं
 से जूझनेवाला दक्षिणी कोरिया इन सब चुनौतियों को स्वीकार करते हुए आज एक 
औद्योगिक और प्रौद्योगिक संपन्न देश बन गया है। विपुल मात्रा में पूंजी 
अर्जित कर प्रति व्यक्ति आय बढ़ाते हुए आधारभूत ढांचे को पूरे देश में 
गांव-गांव में फैलाया। पांच दशकों के अंदर वह दुनिया के अग्रिम देशों की 
पंक्ति में आ गया। प्रवास के दौरान अध्ययन पश्चात् हमें लगा कि&amp;nbsp;&amp;nbsp;दक्षिण 
कोरिया से कई विषयों पर हम सीख सकते हैं, इसलिए भारत के भविष्य के लिए 
दक्षिण कोरिया रोल मॉडल की तरह है।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;span style=&quot;color: #ff6600;&quot;&gt;वहां के राजनेताओं, बुद्धिजीवियों और आम आदमी में भारत के प्रति किस प्रकार की सोच है?&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;देखिए, बुद्धिस्ट लोग वहां आबादी में 20-25 प्रतिशत है। किंतु मूलत: 
सांस्कृतिक दृष्टि से वो बुद्धिस्ट देश है। इसका प्रभाव आज भी उनके ऊपर है।
 आज मजहब के नाते कुछ लोग बदले होंगे और कुछ लोग नास्तिक होंगे, उसके बाद 
भी नास्तिकता के नाते एथिइज्म डिक्लेयर्ड उसके नाते सबसे ज्यादा 50 प्रतिशत
 वो लोग होंगे, फिर भी वहां बुद्धिज्म की संस्कृति का प्रभाव दिखता है। 
इसके रहते हुए वहां के आमलोगों में बुद्धिज्म के लिए भारत के प्रति, 
हालांकि बुद्धिज्म चीन के माध्यम से गया, आदर का भाव है। भारत उनके लिए 
मातृभूमि है, बुद्ध की जन्मभूमि है, कर्मभूमि है, तपोभूमि है, इसलिए हमारी 
सांस्कृतिक महत्ता को वो समझते हैं, इसलिए भारत के प्रति उनके मन में खूब 
सम्मान है।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;इसके अलावा भी हमने देखा कि वहां ऐतिहासिक कुछ और चीजें हैं। वहां सरनेम
 किम रखने वालों की आबादी भी 8 से 10 प्रतिशत है। मान्यता है कि ये किम 
सरनेम रखनेवाली जो आबादी है, उसका संबंध अयोध्या से है। यहां की राजकुमारी 
शताब्दियों पहले वहां गईं और वहां के कारक डायनेस्टी स्थापित करने वाले 
महाराज के साथ उनकी शादी हुई और सुरीरत्ना नाम से वह इतिहास में अंकित है। 
आज उसको वहां हियो के नाम से जानते हैं। उनके वंशजों का ही सरनेम किम है। 
तो इसके आज भी भावनात्मक और सांस्कृतिक रिश्ते हैं। इसलिए भारत के प्रति 
आदर है। यही नहीं, जब दक्षिणी कोरिया के ऊपर जापान का राज चलाता था तो उसे 
लेकर रवींद्रनाथ टैगोरजी ने कविता लिखी कि पूरे विश्व में दक्षिणी कोरिया 
फिर से लैंप ऑफ द ईस्ट के रूप में पुनर्जाग्रत होगा और विश्व के अंदर एक 
अच्छी भूमिका निभाएगा। यह लोगों के मन में है। वे लोग इसे भूल नहीं पा रहे 
हैं और इतना ही नहीं, हमारी भारतीय सेना की भी यशस्वी भूमिका है।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;उत्तर और दक्षिण कोरिया के बीच में जब युद्ध हुआ, सिविल वार हुआ, 1950 
से 53 के दौरान, तो इस दौरान मेडिकल मिशन के रूप में आर्मी के लोगों ने जो 
सेवा की, उसके कारण लोगों में आज भी बड़ी श्रद्धा है। इसलिए हमारे लोगों के 
प्रति, हमारी संस्कृति के प्रति और हमारे देश के प्रति वहां के 
बुद्धिजीवियों, राजनेताओं सबके मन में सम्मान और विश्वास, ये दोनों चीजें 
मुझे देखने को मिली। भारत में मोदीजी की सरकार इतने बड़े लोकतांत्रिक देश 
में दुबारा जीतकर इतनी बड़ी संख्या में वोट प्राप्त सत्ता में आई, इससे वो 
अचंभित हैं और इसे सम्मान से देखते हैं। इसलिए मोदीजी के प्रति वहां 
पढ़े-लिखे लोगों में और सामान्य लोगों में एक आदर का भाव है।&lt;/p&gt;
&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://hitchintak.blogspot.com/feeds/2907744213453410789/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment/fullpage/post/7024567440226660873/2907744213453410789' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7024567440226660873/posts/default/2907744213453410789'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7024567440226660873/posts/default/2907744213453410789'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://hitchintak.blogspot.com/2019/11/blog-post.html' title='दक्षिण कोरिया से हम कई विषयों पर सीख सकते हैं : मुरलीधर राव'/><author><name>संजीव कुमार सिन्‍हा</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11879095124650917997</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg-VUG_8k4GcxEdCmjpiY_6UDali2WkziCy8QL3pvL6x98CxCQkSWCPT0QSOxfne88NMZUAxuRH02FkYn1eMUbfqb1lDlWyIjQte5L7cGqhL9x2KHht1Wlw7WNx98YJCQ/s220/Mintoo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7024567440226660873.post-3878076456728696764</id><published>2019-06-04T18:56:00.001+05:30</published><updated>2022-03-04T18:56:54.967+05:30</updated><title type='text'>संगठन की सक्रियता और भाजपा सरकार की उपलब्धियों के चलते हमारी शानदार जीत हुई : श्याम जाजू</title><content type='html'>&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;strong&gt;देश के अनेक राज्यों की तरह 
उत्तराखंड और दिल्ली में भी भाजपा ने सभी लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज की। 
पार्टी ने उत्तराखंड की सभी पांच और दिल्ली की सात सीटों पर कमल खिलाया। 
भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री श्याम जाजू के पास दिल्ली एवं उत्तराखंड
 के प्रदेश प्रभारी का दायित्व है। कमल संदेश के सहायक संपादक &lt;/strong&gt;&lt;span style=&quot;color: #ff6600;&quot;&gt;संजीव कुमार सिन्हा&lt;/span&gt;&lt;strong&gt;
 ने नई दिल्ली स्थित उनके कार्यालय में उनसे लोकसभा चुनाव के संदर्भ में इन
 दोनों राज्यों में भाजपा के प्रदर्शन को लेकर बातचीत की। अपने संगठनात्मक 
कौशलता के लिए ख्यात श्री जाजू का कहना है कि संगठन की सक्रियता और भाजपा 
सरकार की उपलब्धियों के चलते पार्टी ने शानदार सफलता प्राप्त की। प्रस्तुत 
हैं मुख्यांश : &lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class=&quot;initial-letter&quot;&gt;
&lt;p&gt;&lt;span style=&quot;color: #ff6600;&quot;&gt;आप भाजपा, दिल्ली प्रदेश और उत्तराखंड के
 प्रदेश प्रभारी हैं। इन दोनों राज्यों में पार्टी ने शत–प्रतिशत सीटें 
जीती हैं। इस जीत के क्या कारण रहे?&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;उत्तराखंड भारतीय जनता पार्टी का गढ़ रहा है। 2014 के लोकसभा चुनाव में 
भी हमने सभी पांचों सीटें जीती थी, उसके बाद विधानसभा का चुनाव हुआ तो 70 
में से 57 सीटें हम जीते, थराली का उपचुनाव हुआ वो भी हम जीते, नगर निकाय 
के चुनाव हुए उसमें भी बढ़त हासिल की और इस बार भी पांचों की पांच सीट हमने
 जीती। कांग्रेस नेता व पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत हारे, इस सबके पीछे 
प्रमुख कारण यह रहा कि उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन 
करने का काम प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में हुआ है। 
केंद्र से ऑलवेदर रोड के लिए जो पैसे गए, रेल के लिए जो पैसे गए, इससे वहां
 की अर्थव्यवस्था में परिवर्तन आया है, पर्यटकों की संख्या में वृद्धि हुई 
है और इन सबके चलते प्रदेश का भरपूर विकास हुआ। अब उत्तराखंड एक ऐसा प्रदेश
 है जहां मुख्यमंत्री ने शत–प्रतिशत स्वास्थ्य बीमा दिया है, अटल आयुष्मान 
योजना वहां पर लागू किया है। इसके साथ ही केंद्र सरकार की उपलब्धियों का भी
 हमें फायदा हुआ, इस सबके चलते उत्तराखंड में हम पांचों सीटें जीते।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;जहां तक दिल्ली का सवाल है, दिल्ली में भी पिछली बार हम सभी सातों सीटें
 जीते थे। दिल्ली में भी केंद्र सरकार के माध्यम से इस पांच साल के 
कार्यकाल में जो इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट हुआ है, इसका हमें लाभ मिला। 
दिल्ली में कांग्रेस ने बड़े दिग्गज नेता मैदान में उतारे थे। पूर्व 
मुख्यमंत्री और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, उन सबको लोगों ने नकारा। आम आदमी 
पार्टी से लोगों को हताशा थी और उन्होंने एकमात्र सशक्त और समर्थ विकल्प के
 रूप में भारतीय जनता पार्टी को चुना।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;span style=&quot;color: #ff6600;&quot;&gt;दोनों राज्यों में भाजपा ने लोकसभा चुनाव
 को लेकर किस प्रकार की रणनीति बनाई थी, चुनाव अभियान किस प्रकार चला, इसके
 बारे में हमें बताएं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;भाजपा का संगठनात्मक ढांचा मजबूत है। भाजपा के कार्यकर्ताओं ने बहुत 
अच्छा काम किया। दोनों ही राज्यों में भारतीय जनता पार्टी का पन्ना प्रमुख,
 बूथ प्रमुख, शक्ति केंद्र प्रमुख, मंडल अध्यक्ष, जिला अध्यक्ष, ये जो 
नेटवर्क था, इस नेटवर्क ने प्रत्याशियों की मेहनत के समानांतर सघन अभियान 
चलाया, इसका यह परिणाम हुआ कि शानदार जीत हम हासिल कर पाए। उत्तराखंड में 
विषेशकर हमारे लोगों ने सभी जगह पर अनुसूचित जाति के सम्मेलन किए, 70 के 70
 विधानसभाओं में हमारे सम्मेलन हुए, युवा शक्ति को जोड़ने के लिए बाइक 
रैलियां हुईं।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;दिल्ली में हर विधानसभा क्षेत्र में महिला मोर्चा का सम्मेलन हुआ। यहां 
भी अनुसूचित जाति मोर्चा ने बहुत अच्छा काम किया, रामलीला मैदान में विशाल 
कार्यक्रम आयोजित किया था। झुग्गी–झोपड़ी का वोट–बैंक जो कांग्रेस और आम 
आदमी पार्टी में शिफ्ट हो गया था, वो भी इस बार हमारे साथ रहा। कई पैमाने 
पर मुस्लिम वोट भी हमें मिले हैं। इन सबका मिला–जुला असर ये रहा कि हम इन 
दोनों राज्यों में सभी सीटें जीत पाए।&lt;/p&gt;
&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://hitchintak.blogspot.com/feeds/3878076456728696764/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment/fullpage/post/7024567440226660873/3878076456728696764' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7024567440226660873/posts/default/3878076456728696764'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7024567440226660873/posts/default/3878076456728696764'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://hitchintak.blogspot.com/2019/06/blog-post.html' title='संगठन की सक्रियता और भाजपा सरकार की उपलब्धियों के चलते हमारी शानदार जीत हुई : श्याम जाजू'/><author><name>संजीव कुमार सिन्‍हा</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11879095124650917997</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg-VUG_8k4GcxEdCmjpiY_6UDali2WkziCy8QL3pvL6x98CxCQkSWCPT0QSOxfne88NMZUAxuRH02FkYn1eMUbfqb1lDlWyIjQte5L7cGqhL9x2KHht1Wlw7WNx98YJCQ/s220/Mintoo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7024567440226660873.post-656930354694021035</id><published>2019-05-17T18:59:00.001+05:30</published><updated>2022-03-04T19:00:32.913+05:30</updated><title type='text'>भाजपा कर्नाटक में जीत की नई इबारत लिखेगी और तमिलनाडु में अधिक सीटें हासिल करेगी: मुरलीधर राव</title><content type='html'>&lt;p&gt;भाजपा राष्ट्रीय महासचिव श्री मुरलीधर राव लोकसभा चुनाव 2019 के लिए 
पार्टी के कर्नाटक और तमिलनाडु प्रदेश प्रभारी हैं। उन्होंने पिछले कई 
महीने इन राज्यों में पार्टी के उम्मीदवारों के लिए व्यापक प्रचार किया और 
भाजपानीत राजग को जीत दिलाने के लिए अथक प्रयास किया। कर्नाटक और तमिलनाडु 
में मतदान संपन्न हो गया है। कमल संदेश के सहायक&lt;span style=&quot;color: black;&quot;&gt; संपादक&lt;/span&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style=&quot;color: #ff6600;&quot;&gt; संजीव कुमार सिन्हा&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;
 ने श्री राव के साथ इन राज्यों में भाजपा के चुनावी अभियान, रणनीति और 
भाजपानीत राजग के प्रदर्शन के बारे में विस्तृत रूप से चर्चा की। श्री 
मुरलीधर राव ने बताया कि इस बार भाजपा कैसे जीत की नई इबारत लिखेगी और 
तमिलनाडु में अधिक सीटें प्राप्त करेंगी। प्रस्तुत है मुख्य अंशः&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;span style=&quot;color: #ff6600;&quot;&gt;&lt;strong&gt;कर्नाटक और तमिलनाडु में लोकसभा 
चुनाव संपन्न हो चुके हैं जहां के आप प्रदेश प्रभारी हैं। इन राज्यों में 
पार्टी का प्रचार अभियान किस तरह चला और प्रमुख मुद्दे क्या थे ?&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;कर्नाटक में भाजपा को हमेशा एक मजबूत शक्ति के रूप में देखा जाता है 
लेकिन पिछले विधानसभा चुनावों में हम सत्ता में नहीं आए क्योंकि हम कुछ 
सीटों से पीछे रह गए। हालांकि, भाजपा 104 सीटों के साथ नंबर एक राजनीतिक दल
 के रूप में उभरी।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;पिछले विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद कांग्रेस और जद(एस) दोनों को अपनी
 शक्ति का एहसास हुआ और अपने अस्तित्व के लिए उन्हें गठबंधन सरकार बनाने के
 लिए एक साथ आना पड़ा। कांग्रेस इतनी डरी हुई थी कि उसने खुद को गठबंधन 
सरकार में एक अधीनस्थ दल के रूप में प्रस्तुत किया तथा केवल 38 सीटों के 
साथ जद (एस) ने मुख्यमंत्री पद ग्रहण किया और सरकार में मुख्य भूमिका 
निभाई। इस गठजोड़ ने वास्तव में गठबंधन की मजबूरियों और कमजोरियों का 
प्रदर्शन किया है और दिखाया है कि कैसे ब्लैकमेल और आंतरिक झगड़ा आए दिन का
 क्रम बन गया है। कर्नाटक के लोग इस स्थिति से अच्छी तरह वाकिफ हैं और इससे
 भाजपा को एक तरह का फायदा हुआ है, इसीलिए भाजपा सरकार या मोदी सरकार की 
जरूरत है।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;इस एक आख्यान (नैरेटिव) के साथ-साथ राष्ट्रीय आख्यान – राष्ट्रीय 
सुरक्षा, विकास, सुशासन, पारदर्शी शासन और भ्रष्टाचारमुक्त शासन, गरीबों के
 कल्याण आदि मुद्दे ने भाजपा की बहुत मदद की है।&lt;br /&gt;
कर्नाटक में भाजपा का चुनाव अभियान हमारे विचारों के अनुरूप आगे बढ़ा। यह 
मोदीजी बनाम अन्य का रहा। इसलिए यह अभियान मोदीजी और उनकी उपलब्धियों के 
आसपास केंद्रित था।&lt;br /&gt;
इसलिए, इस बार मुझे उम्मीद है कि विभिन्न क्षेत्रों के फीडबैक के अनुसार हम
 कर्नाटक में भाजपा की जीत में कुछ और सीटें जोड़ेंगे और राज्य में एक नई 
इबारत लिखेंगे। निश्चित रूप से पार्टी ने 2014 में जो प्रदर्शन किया था, 
उससे हम आगे जाएंगे।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;span style=&quot;color: #ff6600;&quot;&gt;&lt;strong&gt;तमिलनाडु में भाजपा को किस तरह का समर्थन मिल रहा है ?&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;तमिलनाडु 39+1 (पांडिचेरी), 40 सीटों वाला एक बहुत बड़ा राज्य है। 2014 
के चुनावों में मोदीजी के पक्ष की लहर ने हमारी बहुत मदद की, उस समय अनेक 
छोटे दलों के साथ हमारा गठबंधन था। हमें 19.5 प्रतिशत का महत्वपूर्ण वोट 
शेयर मिला, लेकिन इसके मुताबिक यह सीट में परिणत नहीं हो सका था। इसलिए हम 
केवल दो सीटें पाने में कामयाब हुए थे।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;अब, इस चुनाव में डीएमके और कांग्रेस के गठजोड़ के खिलाफ हम एआइडीएमके, 
पीएमके, डीएमडीके और अन्य कुछ दलों के साथ एक अच्छा जीवंत गठबंधन बनाने में
 कामयाब रहे। तमिलनाडु में इस गठबंधन के कारण लड़ाई बहुत तीव्र हो गई और 
मेरे विचार से मोदीजी के नेतृत्व एवं उनके अभियान के चलते हम एक नई रचना 
बनाने में सक्षम हुए, जिसे हम गठबंधन सहयोगियों और लोगों के बीच बनाना 
चाहते थे। इसलिए, निश्चित रूप से हम वहां एक सफल राजग की पटकथा लिखने के 
लिए सोच रहे हैं। मोदीजी के नेतृत्व में एनडीए को इस बार तमिलनाडु में 
अच्छी संख्या प्राप्त होगी।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;span style=&quot;color: #ff6600;&quot;&gt;&lt;strong&gt;विपक्षी दलों के महागठबंधन से भाजपा और राजग को किस तरह की चुनौती मिल रही है ?&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;पूरे देश में महागठबंधन नहीं है। पूरे देश में विपक्षी एकता नहीं है। वे
 भाजपा बनाम अन्य के बीच की लड़ाई देखना चाहते थे। जैसा आप जानते हैं अन्य 
का प्रतिनिधित्व एक प्रत्याशी करता है जो भाजपा के खिलाफ है। विपक्ष की 
रणनीति यह है कि भाजपा विरोधी मत को विभाजित होने से रोका जाए।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;हालांकि, कई महत्वपूर्ण राज्यों में वे ऐसा नहीं कर पाए। अगर आप उत्तर 
प्रदेश का उदाहरण लें तो कोई एकजुट लड़ाई नहीं है, बंगाल में कोई एकजुट 
लड़ाई नहीं है, ओडिशा में कोई एकजुट लड़ाई नहीं है, केरल में एकजुट लड़ाई 
नहीं है और आंध्र प्रदेश में ऐसा कुछ नहीं है।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;इसलिए, महागठबंधन अब केवल एक नारा है और यह एक प्रकार का स्वप्नलोक है 
और जमीन पर ऐसा कोई महागठबंधन नहीं है और यह महागठबंधन संभव नहीं हो पाया 
है क्योंकि वे एक नेता पर सहमत नहीं हैं, वे इस बात पर सहमत नहीं हैं कि 
कौन शासन करेगा और एजेंडा क्या होगा, कार्यक्रम क्या होगा ?&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;किसी ने राहुल गांधी का नाम प्रस्तावित किया है और अन्य दल इसे स्वीकार 
नहीं कर रहे हैं। अन्य दलों ने कुछ अन्य नामों का प्रस्ताव किया है और 
कांग्रेस ने उन्हें स्वीकार नहीं किया है। यहां तक कि ऐसी पांच पार्टियां 
जो महज पांच सीटें जीतने को सोच रही हैं, वे भी प्रधानमंत्री बनने का 
महास्वप्न देख रही हैं। यही कारण था कि महागठबंधन स्थापित नहीं हो सका।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;लोग इसे जानते भी थे। उन्हें एक स्थिर सरकार, निर्णायक सरकार और ऐसी 
सरकार की जरूरत है जो फैसले ले सके, ऐसा केवल मोदीजी कर सकते हैं।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style=&quot;color: #ff6600;&quot;&gt;राष्ट्रीय स्तर पर भाजपानीत राजग का प्रदर्शन कैसा रहेगा ?&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;केंद्र में मोदी सरकार के बारे में आम जनता ने जो आख्यान तैयार किया है,
 वह यह है कि मोदीजी के हाथों में राष्ट्र सुरक्षित है, मोदीजी के नेतृत्व 
में इस देश को स्थिर सरकार मिली है, मोदीजी का नेतृत्व निर्णायक है तथा 
मजबूत एवं असमझौतावादी नेतृत्व के चलते वैश्विक एजेंसियों, बहुपक्षीय 
एजेंसियों एवं सभी महत्त्वपूर्ण देशों से बातचीत करने में सक्षम है एवं 
हमारे देश के हितों को केवल मोदी सरकार द्वारा संरक्षित किया जा सकता है। 
इसलिए, लोग इन मुद्दों पर भी चर्चा कर रहे हैं और इस आधार पर भाजपानीत राजग
 का समर्थन कर रहे हैं।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;वे राष्ट्रीय सुरक्षा, राष्ट्रीय विकास, गरीबों के कल्याण, सुशासन और 
भ्रष्टाचारमुक्त शासन जैसे मुद्दों के महत्व को महसूस कर रहे हैं, इसलिए 
मुझे लगता है कि इन सकारात्मक पहलों के लिए भाजपानीत राजग को 2014 में जो 
प्राप्त हुआ था उसे अधिक सीटें मिलेंगी।&lt;/p&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://hitchintak.blogspot.com/feeds/656930354694021035/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment/fullpage/post/7024567440226660873/656930354694021035' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7024567440226660873/posts/default/656930354694021035'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7024567440226660873/posts/default/656930354694021035'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://hitchintak.blogspot.com/2019/05/blog-post.html' title='भाजपा कर्नाटक में जीत की नई इबारत लिखेगी और तमिलनाडु में अधिक सीटें हासिल करेगी: मुरलीधर राव'/><author><name>संजीव कुमार सिन्‍हा</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11879095124650917997</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg-VUG_8k4GcxEdCmjpiY_6UDali2WkziCy8QL3pvL6x98CxCQkSWCPT0QSOxfne88NMZUAxuRH02FkYn1eMUbfqb1lDlWyIjQte5L7cGqhL9x2KHht1Wlw7WNx98YJCQ/s220/Mintoo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7024567440226660873.post-1722146692421702881</id><published>2018-09-19T19:01:00.001+05:30</published><updated>2022-03-04T19:02:37.301+05:30</updated><title type='text'>केरल आपदा के बीच कायम हुई एकता की मिसाल : के. जे. अल्फोंस</title><content type='html'>&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;strong&gt;केंद्रीय पर्यटन राज्य मंत्री 
(स्वतंत्र प्रभार) श्री के. जे. अल्फोंस कुशल प्रशासक के तौर पर सुविख्यात 
हैं। केरल कैडर से 1979 बैच के आईएएस अधिकारी रहे श्री अल्फोंस दिल्ली 
विकास प्राधिकरण के आयुक्त रह चुके हैं। वह राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2017 की 
समिति के सदस्य हैं। ‘मेिकंग ए डिफरेंस’ उनकी चर्चित पुस्तक है। हाल ही में
 केरल में जब विनाशकारी बाढ़ आई तो प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के साथ
 श्री अल्फोंस की सक्रियता उल्लेखनीय रही।&lt;br /&gt;
&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;
&lt;strong&gt; पिछले दिनों नई दिल्ली स्थित यातायात भवन में श्री अल्फोंस के 
कार्यालय में उनसे केरल प्राकृतिक आपदा, भाजपा संगठन, पर्यटन क्षेत्र में 
सरकार की उपलब्धियों एवं योजनाओं आदि विषयों पर कमल संदेश के सहायक संपादक &lt;span style=&quot;color: red;&quot;&gt;संजीव कुमार सिन्हा&lt;/span&gt; ने बातचीत की। प्रस्तुत है मुख्यांश&lt;/strong&gt; :&lt;/p&gt;&lt;div class=&quot;initial-letter&quot;&gt;
&lt;p&gt;&lt;span style=&quot;color: red;&quot;&gt;&lt;strong&gt;हाल ही में केरल में बारिश और 
बाढ़ ने भयंकर तबाही मचाई। राज्य में सदी की सबसे बड़ी प्राकृतिक आपदा में 
सैकड़ों लोगों की मौत हो गई और लाखों लोग बेघर हो गए। राज्य पर आए इस संकट 
से उबरने के लिए केंद्र सरकार किस तरह से केरलवासियों की सहायता कर रही है?&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;पहले दिन से हमारे माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व 
में केन्द्र सरकार केरलवासियों को हर प्रकार से सहायता देने के लिए तत्पर 
है। इस आपदा को लेकर प्रधानमंत्रीजी ने केरल के मुख्यमंत्री से कई बार 
बातचीत की है और निर्देश भी जारी किए हैं। इसके साथ ही कैबिनेट सचिव के 
नेतृत्व में एक समिति की स्थापना की गई है। आवश्यक सहायता प्रदान करने के 
लिए सभी मंत्रालयों की प्रतिदिन बैठक बुलाई जाती है।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;पहले चरण में जब बाढ़ का प्रकोप बढ़ा तो केंद्रीय गृहमंत्री श्री राजनाथ
 सिंह ने यहां बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और केन्द्रीय सहायता 
के रूप में तत्काल 100 करोड़ रुपये की सहायता की घोषणा की। उससे पहले 160 
करोड़ रुपए की सहायता दी गई थी। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 
यहां आए, स्थिति की समीक्षा की और 500 करोड़ रुपए की सहायता की घोषणा की। 
ये जो राशियां दी गईं हैं यह तत्काल सहायता है। अभी अनुमान लगाया जा रहा है
 कि कितनी क्षति हुई है, फिर केंद्र सरकार तद्नुसार सहायता राशि और 
व्यवस्थाएं उपलब्ध कराएगी। वहीं, सेना, नौसेना, अर्द्धसैनिक बल, नेशनल 
डिजास्टर रेस्पांस फोर्स केरल के लोगों की सहायता कर रहे हैं। दूसरे राज्य 
भी जो कुछ सहायता कर सकते हैं, वे भी सहयोग कर रहे हैं। भारत सरकार 
पर्याप्त संख्या में विमान, हैलीकॉप्टर, बचाव जहाज आदि की मदद दे रही है और
 निस्संदेह राज्य सरकार केन्द्र सरकार के साथ पूर्ण सहयोग कर रही है और हर 
प्रकार की संभव सहायता प्रदान की जा रही है। अत: राहत कार्य पूरी सक्रियता 
के साथ हो रहा है।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;यह बहुत अच्छा माड्यूल रहा है जिसमें केन्द्र और राज्य सरकार के बीच 
गहरा सहयोग मिला है। भाजपानीत केंद्र सरकार का सदा से विचार रहा है, 
प्रत्येक राज्य को हर प्रकार का सहयोग प्रदान किया जाए। केरल के 
मुख्यमंत्री ने स्वयं ही कहा है कि भारत सरकार और प्रधानमंत्री से पूरा 
सहयोग मिला है।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;span style=&quot;color: red;&quot;&gt;&lt;strong&gt;भारतीय जनता पार्टी एक संगठन के रूप में किस प्रकार से इस संकट की घड़ी में केरल के लोगों का सहयोग कर रही है?&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;केरल में भाजपा कार्यकर्ता राहत कार्य में जुटे हुए हैं। विशेष रूप से 
सेवा भारती, जो रा.स्व.सं. की समविचारी संस्था है, आवश्यकता से अधिक काम कर
 रही है। वे दिन–रात राहत सामग्री संग्रह के काम में जुटे हैं। घर–घर जाकर 
सामग्री इकट्ठी कर रहे हैं। जल स्तर कम हो जाने पर वे घर–घर जाकर घरों की 
सफाई करेंगे। वे लोगों को अपने घर जाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। सेवा 
भारती ने शानदार काम किया है और आगे भी करती रहेगी। केरल बाढ़ के बारे में 
एक बात और उल्लेखनीय है कि केरल के लोगों ने एकता का गहरा परिचय दिया है। 
अन्यथा केरल राजनीतिक रूप में बहुत विभाजित रहा है। राजनीतिक विचारों के 
आधार पर विभिन्न क्षेत्र भी विभाजित रहे हैं। उनके अपनी–अपनी यूनियनें हैं,
 परन्तु इस बार सभी ने मिलकर काम किया। यह पूरे देश के लिए शानदार उदाहरण 
है। स्कूलों और कॉलेज के विद्यार्थी वितरण केन्द्र और संकलन केन्द्र में 
काम कर रहे हैं। दूसरे, केरल की ब्यूरोक्रेसी- आईएएस, आईपीएस आदि सभी मेहनत
 से काम कर रहे हैं। नि:संदेह, कई राज्यों ने सामग्री भेजी है। 
परिणामस्वरूप, केरल में भारी मात्रा में सहयोग राशि प्राप्त हो रही है। 
पूरा देश सक्रिय है। हमने सचमुच दिखा दिया है कि भारत एक है। भारत की यह एक
 महान भावना है जिस पर हर नागरिक को गर्व होना चाहिए।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;span style=&quot;color: red;&quot;&gt;&lt;strong&gt;केरल उन कुछ राज्यों में से है 
जहां भाजपा सरकार नहीं रही है, परन्तु हम देखते हैं कि यहां पिछले कुछ 
चुनावों से भाजपा का मत प्रतिशत बढ़ता जा रहा है। आप केरल में भाजपा का 
कैसा भविष्य देखते हैं?&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;देखिए, 2011 में िवधानसभा चुनाव में भाजपा का मत 6 प्रतिशत से बढ़कर 
14.65 प्रतिशत तक पहुंच गया। संसदीय चुनावों में 6 प्रतिशत से 10 प्रतिशत 
तक पहुंचा। पिछले विधानसभा चुनाव में लगभग 15 प्रतिशत मिला था। इस प्रकार 
वोट शेयर धीरे–धीरे बढ़ता चला जा रहा है। केरल विधान सभा में हमारा एक 
विधायक है। यह बहुत अच्छी बात है। मेरे विचार से लोगों को भाजपा को वोट 
देना चाहिए।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;मोदी सरकार ने पिछले चार वर्षों में लोगोें के लिए बहुत कुछ किया है। 
लगभग बजट का 70 प्रतिशत गरीबों पर खर्च किया जा रहा है। इस प्रकार मोदी 
सरकार का ध्यान साधारण लोगों, पिछड़ों, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति 
लोगों पर कहीं अधिक है। उपलब्धियां असाधारण हैं। हमने साढ़े आठ करोड़ 
शौचालय बनाए, जो 72 वर्षों में बनाए गए शौचालयों की कुल संख्या से कहीं 
ज्यादा है। हमने 33 करोड़ गरीब लोगों के खाते खोले और इन खातों में पिछले 2
 वर्षों में 3 लाख करोड़ रुपए स्थानांतरित हुए। हमने साढ़े चार करोड़ 
एलपीजी गैस कनेक्शन बांटे, जिनसे महिलाओं को जीने का अधिकार मिला, अन्यथा 
महिलाएं इससे होने वाले कैंसर से मर रही थीं। आज हर गांव में बिजली पहुंच 
गई है, हम देश के गरीब परिवारों को बिजली कनेक्शन दे रहे हैं। उसे हम 2019 
तक पूरा कर लेंगे। अब प्रत्येक घर के लिए वायदा करते हैं। इस वर्ष हम एक 
करोड़ से अधिक घरों को कनेक्शन सौंप देंगे। ये बड़ी बातें हैं जो हम करने 
जा रहे हैं। अब नवीनतम बड़ी बात सभी के लिए स्वास्थ्य की है। भारत उन 
चुनींदा देशों में से है, जिसकी स्वास्थ्य बीमा सभी गरीब लोगों के लिए पूरी
 तरह नि:शुल्क है। 5 लाख में लोग किसी भी निजी अस्पताल में इलाज करा सकते 
हैं। मैंने बिजली का प्रभाव जाना है। बिना बिजली वाले घरों और गांवों का 
अध्ययन किया है। हमने जो कुछ गरीब लोगों के लिए किया, वह केवल जीडीपी के 
रूप में नहीं है। इसका प्रभाव लम्बे समय तक चलता है। समुचित स्वच्छता के 
कारण हम लोगों के स्वास्थ्य, लोगों की जीवनशैली, लोगों को दीर्घकालीन 
जीवनशैली की कल्पना कर सकते हैं। अच्छे शौचालय होने से 3 लाख बच्चे डायरिया
 से मृत होने से बच जाएंगे। कल्पना कीजिए कि किस प्रकार बिजली होने के कारण
 विद्यार्थी बेहतर अध्ययन कर सकेंगे, लोगों का जीवन कहीं बेहतर हो सकेगा।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;हम लोगों के जीवन में बड़ा परिवर्तन ला रहे हैं। भारत विश्व में सबसे 
भ्रष्ट देशों में से एक था और, नि:संदेह मोदी सरकार ने पूरी तरह भ्रष्टाचार
 समाप्त कर दिया है। यह क्रांतिकारी परिवर्तन आगे भी चलता रहेगा। इससे जीवन
 में बदलाव आएंगे।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;span style=&quot;color: red;&quot;&gt;&lt;strong&gt;पर्यटन क्षेत्र में केंद्र सरकार की क्या उपलब्धियां हैं?&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;हम विश्व में तेजी से बढ़ती पर्यटन अर्थव्यवस्था हैं। 2017 में पर्यटन 
की वैश्विक वृद्धि दर लगभग 5 प्रतिशत है। पिछले वर्ष भारत में पर्यटन 
वृद्धि दर 14 प्रतिशत रही। विदेशी पर्यटकों का भारत आगमन 19.2 प्रतिशत तक 
जा पहुंचा। अत: भारत में लोगों का आगमन सबसे तेज रहा। हमने बहुत बेहतर काम 
किया। विदेशी पर्यटक 10 मिलियन पार कर गए और घरेलू पर्यटकों की संख्या भी 
अच्छी रही। इससे क्या मुझे खुशी है? नहीं, मैं खुश नहीं हूं, क्योंकि हमारी
 पांच हजार साल पुरानी सभ्यता है। हमारे पास देने को बहुत कुछ है। मेरा 
उद्देश्य बहुत स्पष्ट है कि मैं 2020 तक तीन वर्षों में 20 मिलियन पर्यटक 
चाहता हूं। अब हमें विदेशी पर्यटकों से 27 मिलियन डॉलर प्राप्त हो रहे हैं,
 जो एक लाख सत्तर करोड़ रुपए के बराबर हैं। तीन वर्षों में यह राशि दुगुनी 
करनी है। पांच वर्षों में हम 100 बिलियन डालर तक पहुंचना चाहते हैं। यह 
मेरा उद्देश्य है। आप आश्चर्यचकित होंगे यह जानकर कि चार वर्षों के मोदी 
शासन में भारत में पर्यटन क्षेत्र में 14.62 मिलियन रोजगार पैदा हुए। अत: 
देश में हम सबसे बड़े रोजगार निर्माता हैं। कांग्रेस बेरोजगारों की व्यर्थ 
की बातें करती हैं।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;span style=&quot;color: red;&quot;&gt;&lt;strong&gt;पर्यटन क्षेत्र के विकास के लिए आगामी योजनाएं क्या हैं?&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;हम पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए विदेशों में रोड शो कर रहे हैं 
क्योंकि हमेें लोगों के पास पहुंचना है, उनसे बात करनी है। हम यूरोप, 
अमेरिका, लैटिन अमेरिकी देशों में रोड शो कर रहे हैं। पिछले हफ्ते हम चीन 
में थे। हमारा विशेष ध्यान चीन पर है क्योंकि पिछले वर्ष 144 मिलियन चीनी 
लोग विदेश गए थे। चीन विश्व में सबसे बड़ा आउटडोर मार्केट है। 144 मिलियन 
चीनी लोगों में से केवल 2.4 मिलियन चीनी भारत में आए हैं। यह तो एक प्रतिशत
 भी नहीं बनता है। हमारा उद्देश्य अगले दो वर्षों में कम से कम एक प्रतिशत 
कुल 144 मिलियन चीनी पर्यटकों को आकर्षित करना है। अन्तत: 5 वर्षों में हम 
10 प्रतिशत चीनी पर्यटकों को भारत में लाना चाहते हैं जो साढ़े चौदह मिलियन
 बनता है। यह संभव है, हम रोड शो कर रहे हैं और अनेक तरह से प्रयासरत हैं।&lt;/p&gt;
&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://hitchintak.blogspot.com/feeds/1722146692421702881/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment/fullpage/post/7024567440226660873/1722146692421702881' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7024567440226660873/posts/default/1722146692421702881'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7024567440226660873/posts/default/1722146692421702881'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://hitchintak.blogspot.com/2018/09/blog-post.html' title='केरल आपदा के बीच कायम हुई एकता की मिसाल : के. जे. अल्फोंस'/><author><name>संजीव कुमार सिन्‍हा</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11879095124650917997</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg-VUG_8k4GcxEdCmjpiY_6UDali2WkziCy8QL3pvL6x98CxCQkSWCPT0QSOxfne88NMZUAxuRH02FkYn1eMUbfqb1lDlWyIjQte5L7cGqhL9x2KHht1Wlw7WNx98YJCQ/s220/Mintoo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7024567440226660873.post-7728910888134736143</id><published>2013-09-30T13:00:00.000+05:30</published><updated>2013-09-30T13:00:05.444+05:30</updated><title type='text'>नमो-नमो.....आंखों ने जो देखा !</title><content type='html'>&lt;div dir=&quot;ltr&quot; style=&quot;text-align: left;&quot; trbidi=&quot;on&quot;&gt;
&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: left;&quot;&gt;
&lt;span style=&quot;background-color: white; color: #37404e; font-family: &#39;lucida grande&#39;, tahoma, verdana, arial, sans-serif; font-size: 13px; line-height: 18px;&quot;&gt;अपन गांधी, लोहिया और दीनदयाल उपाध्याय को आदर्श राजनेता मानकर राजनीति में सक्रिय हैं। सादगी, शुचिता, विनम्रता, अध्ययनशीलता...ये सब गुण ऐसे हैं, जो ज्यादा आकर्षित करते हैं। ज्यादा तड़क-भड़क मुझे नहीं भाते। अटलजी-&lt;/span&gt;&lt;span class=&quot;text_exposed_show&quot; style=&quot;background-color: white; color: #37404e; display: inline; font-family: &#39;lucida grande&#39;, tahoma, verdana, arial, sans-serif; font-size: 13px; line-height: 18px;&quot;&gt;आडवाणीजी के भी इसलिए प्रशंसक हैं कि ये दोनों नेता छह दशकों से नैतिकता, शुचिता और प्रामाणिकता के पर्याय बने हुए हैं।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;
&lt;span class=&quot;text_exposed_show&quot; style=&quot;background-color: white; display: inline; text-align: left;&quot;&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;
&lt;span style=&quot;color: #37404e; font-family: &#39;lucida grande&#39;, tahoma, verdana, arial, sans-serif; font-size: 13px; line-height: 18px;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;span style=&quot;color: #37404e; font-family: &#39;lucida grande&#39;, tahoma, verdana, arial, sans-serif; font-size: 13px; line-height: 18px;&quot;&gt;&lt;div style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;
मैं स्वेच्छा से स्वीकारी हुई गरीबी का जीवन जीता हूं और इसमें आनंदित रहता हूं, और जिनका जीवन इस तरह का है, उनसे प्रेरित होता हूं। यानी &#39;सादा जीवन – उच्च विचार&#39; अपना पाथेय है। गत एक दशक से भारतीय राजनीति में नरेंद्र मोदी जिस तरीके से लगातार आगे बढ़ रहे हैं वह आश्चर्यजनक है। गुजरात को उन्होंने समृद्धि की उस ऊंचाई पर पहुंचा दिया, जहां तक किसी भी मुख्यमंत्री के लिए अपने राज्य को पहुंचाना सपना जैसा है। तो मेरे मन में स्वेच्छा से स्वीकारी हुई गरीबी और चरम समृद्धि में द्वंद्व जैसा चला। बहुत ज्यादा मैं मोदी जी का प्रशंसक नहीं हो पाया। इसे लेकर लगातार मित्रों से बहस होती रही।&lt;/div&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;
&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;
&lt;a href=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEggTAcWFPoMJxi26lEHCHDKp7ObCqrT59Ys7uTplPfDmW4iXA1dvoiTioYw9Efm6R8QZZXmtcTt5ziS7aHTwWwshWX0-TNpUpDsEWy6QCLngFn5hyphenhyphenBdTx4YpcCWuEJPi-KFgad0cz76dvc/s1600/c+DSC_0332.JPG&quot; imageanchor=&quot;1&quot; style=&quot;font-family: &#39;Times New Roman&#39;; font-size: medium; line-height: normal; margin-left: 1em; margin-right: 1em; text-align: center;&quot;&gt;&lt;img border=&quot;0&quot; height=&quot;212&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEggTAcWFPoMJxi26lEHCHDKp7ObCqrT59Ys7uTplPfDmW4iXA1dvoiTioYw9Efm6R8QZZXmtcTt5ziS7aHTwWwshWX0-TNpUpDsEWy6QCLngFn5hyphenhyphenBdTx4YpcCWuEJPi-KFgad0cz76dvc/s320/c+DSC_0332.JPG&quot; width=&quot;320&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;
&lt;/div&gt;
&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;
&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;span style=&quot;background-color: white; color: #37404e; font-family: &#39;lucida grande&#39;, tahoma, verdana, arial, sans-serif; font-size: 13px; line-height: 18px;&quot;&gt;परसों मित्रवर नितिन शर्मा जी का कॉल आया कि कल यानी 29 सितम्बर को दिल्ली में आयोजित नरेंद्र मोदी जी की रैली में चलो। रैली के दिन सुबह-सुबह 9 बजे वो मित्र नीरज आर्य और विजय शर्मा के संग अपनी कार से मेरे निवास पहुंचे। हम भी उनके साथ हो लिए। होर्डिंग, बैनर, पार्टी के झंडे से पूरा रास्ता पटा पड़ा था। अधिकांश कारों, बसों और मिनी बसों में पार्टी के झंडे लगे थे और &#39;नरेंद्र मोदी जिन्दाबाद&#39; के नारे से यात्रा-मार्ग गुंजायमान हो रहा था। 10 बजे के करीब हम रिठाला मेट्रो स्टेशन के आसपास पहुंचे। मित्र विजय शर्मा आइजीएल के अधिकारी थे तो उन्होंने जुगाड़ लगाई और हमने गाड़ी वहीं आईजील स्टेशन पर खड़ी कर दी। और वहीं से पैदल चल पड़े। चार-पांच किलोमीटर पैदल चलना पड़ा। रास्ते भर में लोगों का रेला जारी था। ऐसा लग रहा था कि हम धार्मिक परिक्रमा कर रहे हों। नारे तो गूंज ही रहे थे, लोगों के वर्ग भी विविधता लिए हुए थे। युवाओं की फौज, 80 साल के वृद्ध, गांव के गरीब और किसान, कॉरपोरेट क्षेत्र की महिलाएं और पुरूष, सब पसीने से तर-बतर लेकिन उत्साह और उम्मीद के सहारे पैदल ही रैली स्थल की ओर चले जा रहे, स्वयं की प्रेरणा से जा रहे....अपने 36 साल के जीवन में किसी राजनीतिक रैली में ऐसा उत्साह अपनी आंखों से मैं पहली बार देख रहा था। साढ़े 10 बजे हम रैली स्थल यानी रोहिणी स्थित जैपनीज पार्क पहुंचे। पूरा पंडाल खचाखच भरा हुआ। लोगों का उत्साह देखते ही बन रहा था। जब हम रैली से करीब सवा एक बजे विदा हुए तो भी रास्ते में लोगों का काफिला आता ही रहा। भारी भीड़। जितनी संख्या पंडाल में उतनी ही उसके बाहर, वह भी सतत्।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;
&lt;a href=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhbRBdKooybOUZO6gtk1AEnYcaA6Qqw1Pwe0F3AS3BtRqQZWWvMqZ3_xc-56Xm4XkUthBx3y5z2xvWVZDz9Aqj1QHRBPxb66cmOAs4MHLFd0h0HT3F-zDl8WJdb00MdBvxB-ZWwt9idz4c/s1600/1381680_576363142412325_1744446856_n.jpg&quot; imageanchor=&quot;1&quot; style=&quot;margin-left: 1em; margin-right: 1em;&quot;&gt;&lt;img border=&quot;0&quot; height=&quot;240&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhbRBdKooybOUZO6gtk1AEnYcaA6Qqw1Pwe0F3AS3BtRqQZWWvMqZ3_xc-56Xm4XkUthBx3y5z2xvWVZDz9Aqj1QHRBPxb66cmOAs4MHLFd0h0HT3F-zDl8WJdb00MdBvxB-ZWwt9idz4c/s320/1381680_576363142412325_1744446856_n.jpg&quot; width=&quot;320&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;
&lt;span style=&quot;background-color: white; color: #37404e; font-family: &#39;lucida grande&#39;, tahoma, verdana, arial, sans-serif; font-size: 13px; line-height: 18px;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;
&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;
&lt;a href=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiKmzbeEj-NQ73qNa46TIIdWd4cUbduV90PJj1N6lLZMNO50u7fbF7PMsNxf_59-vG9V8kQey_wSnwXBKIQbycNzlISZN_CWV1IuF8wFeuKDfpXjXOyij7GUYqCXGhN8syehYSkQz5bBxk/s1600/1377381_576361632412476_1348195713_n.jpg&quot; imageanchor=&quot;1&quot; style=&quot;margin-left: 1em; margin-right: 1em; text-align: center;&quot;&gt;&lt;img border=&quot;0&quot; height=&quot;240&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiKmzbeEj-NQ73qNa46TIIdWd4cUbduV90PJj1N6lLZMNO50u7fbF7PMsNxf_59-vG9V8kQey_wSnwXBKIQbycNzlISZN_CWV1IuF8wFeuKDfpXjXOyij7GUYqCXGhN8syehYSkQz5bBxk/s320/1377381_576361632412476_1348195713_n.jpg&quot; width=&quot;320&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;span style=&quot;background-color: white; color: #37404e; font-family: &#39;lucida grande&#39;, tahoma, verdana, arial, sans-serif; font-size: 13px; line-height: 18px;&quot;&gt;एक कमरे में बंद होकर, एसी रूम में, लैपटॉप-डेस्कटॉप के सहारे मैं जो अपने मित्रों से बहस करता था, वह हकीकत से कोसों दूर था। आखिर जब राजनीति में विश्वसनीयता का संकट चरम पर हो, राजनीतिक रैलियों में दिहाड़ी पर भीड़ जुटाए जाते हों, आम आदमी सहज कहते पाएं जाते हों कि सब नेता चोर हैं.....ऐसे में नरेंद्र मोदी को लेकर जन-विश्वास का देशभर में जगह-जगह ऐसा व्यापक प्रकटीकरण होना, इसमें जरूर कुछ न कुछ विशेष बात है। नरेंद्र मोदी की चुस्त प्रशासनिक क्षमता, ईमानदार राजनेता और उनकी प्रखर राष्ट्ररवादी विचारधारा समकालीन भारतीय राजनीति में उन्हें विशिष्ट बनाता है, इसमें कोई दोमत नहीं है।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;br style=&quot;color: #37404e; font-family: &#39;lucida grande&#39;, tahoma, verdana, arial, sans-serif; font-size: 13px; line-height: 18px;&quot; /&gt;&lt;span style=&quot;background-color: white; color: #37404e; font-family: &#39;lucida grande&#39;, tahoma, verdana, arial, sans-serif; font-size: 13px; line-height: 18px;&quot;&gt;जब भारत को भ्रष्टाचार का महारोग जर्जर किए जा रहा हो, जब देश के प्रधानमंत्री अपने पिलपिले व्यवहार से करोड़ों भारतीयों के साथ छल कर रहे हों, जब तुष्टिकरण की राजनीति देश में अलगाव पैदा कर रही हो तो ऐसे में नरेंद्र मोदी के पक्ष में खड़ा होना राष्‍ट्रीय कर्तव्य है और तटस्थ रहना राष्ट्रीय अपराध।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span class=&quot;text_exposed_show&quot; style=&quot;background-color: white; color: #37404e; display: inline; font-family: &#39;lucida grande&#39;, tahoma, verdana, arial, sans-serif; font-size: 13px; line-height: 18px;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;(फोटो : विजय शर्मा)&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://hitchintak.blogspot.com/feeds/7728910888134736143/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment/fullpage/post/7024567440226660873/7728910888134736143' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7024567440226660873/posts/default/7728910888134736143'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7024567440226660873/posts/default/7728910888134736143'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://hitchintak.blogspot.com/2013/09/blog-post_30.html' title='नमो-नमो.....आंखों ने जो देखा !'/><author><name>संजीव कुमार सिन्‍हा</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11879095124650917997</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg-VUG_8k4GcxEdCmjpiY_6UDali2WkziCy8QL3pvL6x98CxCQkSWCPT0QSOxfne88NMZUAxuRH02FkYn1eMUbfqb1lDlWyIjQte5L7cGqhL9x2KHht1Wlw7WNx98YJCQ/s220/Mintoo.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEggTAcWFPoMJxi26lEHCHDKp7ObCqrT59Ys7uTplPfDmW4iXA1dvoiTioYw9Efm6R8QZZXmtcTt5ziS7aHTwWwshWX0-TNpUpDsEWy6QCLngFn5hyphenhyphenBdTx4YpcCWuEJPi-KFgad0cz76dvc/s72-c/c+DSC_0332.JPG" height="72" width="72"/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7024567440226660873.post-3677186559825971831</id><published>2013-09-26T19:17:00.002+05:30</published><updated>2013-09-26T19:17:34.952+05:30</updated><title type='text'> हिंदी चिट्ठाकारिता को मिला नवजीवन</title><content type='html'>&lt;div dir=&quot;ltr&quot; style=&quot;text-align: left;&quot; trbidi=&quot;on&quot;&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;
&lt;span style=&quot;color: blue;&quot;&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style=&quot;font-size: 14px;&quot;&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-size: 14px;&quot;&gt;म.गां.अं.हिं.वि.वि., वर्धा में 20 एवं 21 सितम्‍बर 2013 को &#39;हिंदी ब्लॉगिंग एवं सोशल मीडिया&#39; संगोष्ठी संपन्न&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;
&lt;span style=&quot;font-size: 14px;&quot;&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style=&quot;color: blue;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: #993300;&quot;&gt;संजीव कुमार सिन्‍हा &lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;color: black;&quot;&gt;की रपट&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;
&lt;span style=&quot;font-size: 14px;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: blue;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: black;&quot;&gt;पिछले महीने जब इंटरनेट पर विचर रहा था तो अचानक &#39;हिंदी ब्लॉगिंग और सोशल मीडिया&#39; विषयक संगोष्ठी का संदर्भ आया। मैं रूक गया। दिलचस्पी जगी। &lt;a href=&quot;http://satyarthmitra.blogspot.in/2013/07/blog-post_30.html&quot; target=&quot;_blank&quot;&gt;पूरी पोस्ट पढ़ गया।&lt;/a&gt; फिर दूसरी पोस्ट भी संदर्भित थी।&lt;a href=&quot;http://satyarthmitra.blogspot.in/2013/08/blog-post.html&quot; target=&quot;_blank&quot;&gt; तो उसे भी पढ़ गया।&lt;/a&gt; यह ब्लॉग सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी का था। मेरा उनसे परिचय नहीं था। &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;a href=&quot;http://www.pravakta.com/wp-content/uploads/2013/09/20130920_114829.jpg&quot;&gt;&lt;img alt=&quot;20130920_114829&quot; class=&quot; wp-image-70998 alignright&quot; height=&quot;300&quot; src=&quot;http://www.pravakta.com/wp-content/uploads/2013/09/20130920_114829.jpg&quot; width=&quot;400&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;span style=&quot;font-size: 14px;&quot;&gt;संगोष्ठी‍ में भाग लेने की इच्छा प्रबल हो उठी।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;span style=&quot;font-size: 14px;&quot;&gt;मैंने सिद्धार्थ जी को मेल किया, &#39;&#39;मैं सन् 2006 से हिंदी ब्लॉ़गिंग की दुनिया में सक्रिय हूं। 2006 से 2008 तक &lt;a href=&quot;http://hitchintak.blogspot.in/&quot; target=&quot;_blank&quot;&gt;हितचिन्तक ब्लॉग &lt;/a&gt;को लेकर सक्रिय था। 2008 से प्रवक्ता डॉट कॉम का संपादन कर रहा हूं।&#39;&#39;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;span style=&quot;font-size: 14px;&quot;&gt;&#39;&#39;रुचि लेने के लिए धन्यवाद। सेमिनार में प्रतिभाग के लिए सबको अवसर है, बशर्ते वह इसमें गंभीर रुचि प्रदर्शित करे। आपको करना यह भर हैं कि इस सेमिनार में आप जो बातें रखना चाहते हैं उनको संक्षेप में आलेखबद्ध करके तत्काल उपलब्ध करा दें ताकि वि.वि. द्वारा आपके आमंत्रण की औपचारिक स्वीकृति प्राप्त कर सकूँ।&#39;&#39; – सिद्धार्थजी ने जवाबी मेल में कहा।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;span style=&quot;font-size: 14px;&quot;&gt;कुछ दिनों बाद फिर सिद्धार्थजी का मेल आया, &#39;&#39;लंबी प्रतीक्षा के बाद भी आपका आलेख नहीं आया।&#39;&#39;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;span style=&quot;font-size: 14px;&quot;&gt;दरअसल, इसी बीच मैं एक किताब के संपादन में व्यस्त हो गया था।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;span style=&quot;font-size: 14px;&quot;&gt;समय निकालकर मैंने उन्हें &#39;&#39;2007 में हिंदी ब्लॉगिंग के परिदृश्‍य&#39;&#39; पर एक संक्षिप्त आलेख मेल किया।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;a href=&quot;http://www.pravakta.com/wp-content/uploads/2013/09/20130920_124534.jpg&quot;&gt;&lt;img alt=&quot;20130920_124534&quot; class=&quot; wp-image-70999 alignright&quot; height=&quot;300&quot; src=&quot;http://www.pravakta.com/wp-content/uploads/2013/09/20130920_124534.jpg&quot; width=&quot;400&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;span style=&quot;font-size: 14px;&quot;&gt;और इस तरह से मुझे कार्यक्रम में सहभागिता के लिए औपचारिक निमंत्रण मिला।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;span style=&quot;font-size: 14px;&quot;&gt;कार्यक्रम में सहभागिता हेतु मैं इसलिए उत्सुक था कि एक तो ब्लॉगिंग की दुनिया से खास लगाव रहा है। और दूसरा, इस संगोष्ठी में अनूप शुक्ल, अनिल रघुराज, आलोक कुमार, विपुल जैन जैसे वरिष्ठ ब्लॉगर आने वाले थे।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;span style=&quot;font-size: 14px;&quot;&gt;इसी बीच पता चला कि माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल के प्रकाशन अधिकारी व ब्लॉगर मित्रवर डॉ. सौरभ मालवीय भी संगोष्ठी में पधारने वाले हैं। उनसे बातचीत हुई। और उन्होंने अपने साथ मेरा भी वर्धा आने-जाने का टिकट आरक्षित करा लिया। हालांकि, बाद में अपरिहार्य कारणवश वे नहीं जा सके।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;span style=&quot;font-size: 14px;&quot;&gt;19 सितम्बर को प्रात: 11.30 बजे नई दिल्ली से केरला एक्सप्रेस से मैं सेवाग्राम के लिए रवाना हुआ। रात्रि 9.30 पर ट्रेन भोपाल पहुंची और सौरभ जी आगे की यात्रा और वापसी का टिकट मुझे देने आए।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;a href=&quot;http://www.pravakta.com/wp-content/uploads/2013/09/524612_10202078108864321_1011884289_n.jpg&quot;&gt;&lt;img alt=&quot;524612_10202078108864321_1011884289_n&quot; class=&quot; wp-image-71000 alignright&quot; height=&quot;300&quot; src=&quot;http://www.pravakta.com/wp-content/uploads/2013/09/524612_10202078108864321_1011884289_n.jpg&quot; width=&quot;400&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;span style=&quot;font-size: 14px;&quot;&gt;प्रात: साढ़े छह बजे के करीब केरला&lt;/span&gt; &lt;span style=&quot;font-size: 14px;&quot;&gt;एक्सप्रेस सेवाग्राम स्टेशन पर पहुंची। मैं जैसे ही ट्रेन से उतरा। अविनाश वाचस्पति दिख गए। उनके साथ दो सज्जन और भी थे। मैंने पहचान लिया था। अविनाशजी ने परिचय कराया, ये हैं अनूप शुक्ल और ये संतोष त्रिवेदी। बाद में प्लेटफॉर्म नम्बर-1 पर कार्तिकेय मिश्र मिले। स्टेशन के मुख्य द्वार पर आते ही आयोजक की ओर से हमें लेने के लिए बंधु मिले। हम उनके साथ कार से महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्विविद्यालय, वर्धा परिसर स्थित &#39;नागार्जुन सराय&#39; पहुंचे।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;span style=&quot;font-size: 14px;&quot;&gt;सुबह साढ़े सात बजे नागार्जुन सराय पहुंचा। आयोजक की ओर से बताया गया कि आपको कक्ष संख्यान 213 अलॉट किया गया है। मैंने गेट खटखटाया। सामने मित्रवर पंकज झा मिले। फेसबुक के चर्चित यूजर और दीपकमल, रायपुर के संपादक। हम जानते थे कि झा साहब देर रात तक जागते हैं क्योंकि वे फेसबुक पर खूब समय बिताते हैं। और इसके चलते सुबह देर तक सोते हैं। सो, दो मिनट राम-राम हुआ और वे झट से सो गए। मैं भी दूसरे बेड पर पसर गया। साढ़े आठ बजे जग गया। नित्य क्रिया से निवृत्त हुआ। इसके बाद झा जी भी फ्रेश हुए।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;span style=&quot;font-size: 14px;&quot;&gt;जलपान के लिए बुलावा आया। हम दोनों साथ गए। जलपान-कक्ष में नामी-गिरामी ब्लॉगरों को देखकर मन गद्गद हो गया।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;span style=&quot;font-size: 14px;&quot;&gt;प्रात 10 बजे. उद्घाटन कार्यक्रम। हबीब तनवीर सभागृह। कार्यक्रम की शुरूआत विवि के कुलगीत से हुआ। बताया गया कि यह नरेश सक्सेना जी द्वारा रचित है। संगोष्ठी के संयोजक सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी ने कार्यक्रम की भूमिका रखी। संचार एवं मीडिया अध्येयन केंद्र के निदेशक प्रो. अनिल कुमार राय ने स्वागत भाषण दिया। इसके बाद ब्लॉगिंग की महत्ता पर युनूस खान की मधुर आवाज में रवि रतलामी की ऑडियो-विजुअल प्रस्तुति प्रस्तुत की गई। कार्तिकेय मिश्र ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की और प्रवीण पांडेय ने अपने वक्तव्य में हिंदी ब्लॉगिंग के लिए सांस्थानिक समर्थन पर बल दिया। म.गां.अं.हिं.वि.वि. के प्रतिकुलपति अरविंदाक्षन ने भी संबोधित किया।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;a href=&quot;http://www.pravakta.com/wp-content/uploads/2013/09/1235945_10202095798626554_399061554_n.jpg&quot;&gt;&lt;img alt=&quot;1235945_10202095798626554_399061554_n&quot; class=&quot; wp-image-71001 alignright&quot; height=&quot;300&quot; src=&quot;http://www.pravakta.com/wp-content/uploads/2013/09/1235945_10202095798626554_399061554_n.jpg&quot; width=&quot;400&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;span style=&quot;font-size: 14px;&quot;&gt;कुलपति श्री विभूति नारायण राय ने कहा कि विश्वविद्यालय नवाचारी पाठ्यक्रमों के पक्ष में रहा है, यह संगोष्ठी उसी का परिणाम है। उन्होंने आगे कहा कि हिंदी ब्लॉगिंग के लिए एग्रीगेटर की व्यवस्था होनी चाहिए और इसमें हम भूमिका निभाएंगे।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;span style=&quot;font-size: 14px;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: blue;&quot;&gt;&lt;strong&gt;प्रथम सत्र। &#39;&#39;ब्लॉग, फेसबुक और ट्विटर की तिकड़ी : एक दूसरे के विकल्प या पूरक।&#39;&#39;&lt;/strong&gt; &lt;/span&gt;वक्ता थे – बलिराम धाप्से, अनूप शुक्ल , प्रवीण पांडे, अरविंद मिश्र, संतोष त्रिवेदी, सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी, अविनाश वाचस्पति।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;span style=&quot;font-size: 14px;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: blue;&quot;&gt;&lt;strong&gt;द्वितीय सत्र। तकनीकी सत्र।&lt;/strong&gt; &lt;/span&gt;आलोक कुमार, विपुल जैन और अनूप शुक्ल ने विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को ब्लॉग खाता बनाने की संक्षिप्त प्रक्रिया बताई।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;a href=&quot;http://www.pravakta.com/wp-content/uploads/2013/09/20130920_220231.jpg&quot;&gt;&lt;img alt=&quot;20130920_220231&quot; class=&quot; wp-image-71002 alignright&quot; height=&quot;300&quot; src=&quot;http://www.pravakta.com/wp-content/uploads/2013/09/20130920_220231.jpg&quot; width=&quot;400&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;span style=&quot;font-size: 14px;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: blue;&quot;&gt;&lt;strong&gt;तृतीय सत्र। &#39;&#39;सोशल मीडिया और राजनीति।&#39;&#39;&lt;/strong&gt; &lt;/span&gt;संचालक- हर्षवर्धन त्रिपाठी। वक्तागण-संजीव सिन्हा, पंकज झा, संजीव तिवारी, अनूप शुक्लत, अनिल रघुराज, शंकुतला शर्मा, कार्तिकेय मिश्र।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;span style=&quot;font-size: 14px;&quot;&gt;पहले दिन रात्रिभोजन के उपरांत &lt;span style=&quot;color: blue;&quot;&gt;&lt;strong&gt;सांस्‍कृतिक कार्यक्रम&lt;/strong&gt; &lt;/span&gt;का भी आयोजन किया गया। इसका कुशल संचालन अरविंद मिश्र ने किया। कुलपति श्री विभूति नारायण राय की उपस्थिति उल्‍लेखनीय रही। अरविंद मिश्र, प्रवीण पांडेय, शकुंतला शर्मा, सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी, हर्षवर्धन त्रिपाठी ने अपनी कविता सुनाकर सबको मंत्रमुग्‍ध कर दिया। &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;span style=&quot;font-size: 14px;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: blue;&quot;&gt;&lt;strong&gt;दूसरा एवं अंतिम दिन। चौथा सत्र। &#39;हिंदी ब्लॉगिंग और साहित्य।&#39;&lt;/strong&gt; &lt;/span&gt;संचालक- इष्टदेव सांकृत्यायन। वक्‍तागण - अविनाश वाचस्‍पति, अरविंद मिश्र, ललित शर्मा, शंकुतला शर्मा, डॉ. प्रवेश चोपड़ा, वंदना अवस्थी दूबे। इस सत्र में इस बात पर चर्चा हुई कि साहित्य के कितने आयामों को छू रहा है ब्लॉग? अविनाश वाचस्पति ने सटीक बात कही कि ब्लॉग घर का खाना है और सोशल मीडिया फास्‍ट फूड।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;span style=&quot;font-size: 14px;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: blue;&quot;&gt;&lt;strong&gt;तकनीकी चर्चा।&lt;/strong&gt; &lt;/span&gt;आलोक कुमार एवं विपुल जैन ने विकीपीडिया के बारे में विस्तार से बताया कि कैसे यहां अपना खाता बनाकर या बिना खाता बनाए आप अपना योगदान देते हुए हिंदी को समृद्ध कर सकते हैं। शैलेष भारतवासी तकनीकी जिज्ञासाओं की पूर्ति के लिए मंचासीन हुए।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;a href=&quot;http://www.pravakta.com/wp-content/uploads/2013/09/20130920_120948.jpg&quot;&gt;&lt;img alt=&quot;20130920_120948&quot; class=&quot; wp-image-71022  alignright&quot; height=&quot;300&quot; src=&quot;http://www.pravakta.com/wp-content/uploads/2013/09/20130920_120948.jpg&quot; width=&quot;400&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;span style=&quot;font-size: 14px;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: blue;&quot;&gt;&lt;strong&gt;खुली चर्चा और समापन सत्र।&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt; अतिथि थे - कुलपति श्री विभूति नारायण राय, संचार एवं मीडिया अध्ययन केंद्र के निदेशक प्रो. अनिल कुमार राय, मनीषा पांडेय, संचालन किया सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी ने। मनीषा पांडेय ने जेंडर मुद्दे पर विचार रखे। कुलपति जी ने अपने समापन वक्‍तव्‍य में ब्लॉगरों से लेखन में विविधता लाने का मुद्दा उठाते हुए कानून, स्वास्‍थ्‍य और विज्ञान से जुड़े मसले पर लेखन की आवश्‍यकता जताई। संचार एवं मीडिया अध्ययन केंद्र के निदेशक प्रो. अनिल कुमार राय ने कहा कि 15 अक्टूरबर तक हम एग्रीगेटर का काम पूरा कर लेंगे।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;
&lt;span style=&quot;color: #993300; font-size: 16px;&quot;&gt;&lt;strong&gt;विचार-बिंदु&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;span style=&quot;font-size: 14px;&quot;&gt;&#39;हिंदी ब्लॉंगिंग एवं सोशल मीडिया&#39; विषयक संगोष्ठी में प्रमुख रूप से निम्न विषय उठे :&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;span style=&quot;font-size: 14px;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: blue;&quot;&gt;&lt;strong&gt;1. ब्लॉग बनाम सोशल मीडिया – &lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;वक्ताओं ने कहा कि ब्लॉग बनाम सोशल मीडिया का बहस उछालना ठीक नहीं है। यह एक-दूसरे का पूरक है। यह अवश्य है कि अपने विचारों को समग्रता में प्रस्तुत करने के लिए ब्लॉगिंग अधिक रचनात्मक और गंभीर है। लेकिन फेसबुक तकनीकी रूप से सबसे अधिक सक्षम है।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;span style=&quot;font-size: 14px;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: blue;&quot;&gt;&lt;strong&gt;2. ब्लॉग सोशल मीडिया में आएगा या नहीं ? –&lt;/strong&gt; &lt;/span&gt;इस पर भी खूब चर्चा हुई और अंत में यह उभरकर आया कि ब्लॉग रचनात्मक लेखन के लिए है जबकि सोशल मीडिया लोगों के बीच सामाजिक नेटवर्क और सामाजिक संबंध बनाने के लिए।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;span style=&quot;font-size: 14px;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: blue;&quot;&gt;&lt;strong&gt;3. ब्लॉग विधा है या माध्‍यम ? –&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt; इस पर जमकर विवाद हुए। अंत में यह माना गया कि ब्लॉग निश्चित रूप से माध्यम है। जैसे प्रिंट एक माध्यम है और उसमें कविता, कहानी, लेख प्रस्तुत होते हैं।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;span style=&quot;font-size: 14px;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: blue;&quot;&gt;&lt;strong&gt;4. आत्मानुशासन एवं स्वनियंत्रण का मसला –&lt;/strong&gt; &lt;/span&gt;उद्घाटन सत्र में कुलपति श्री विभूति नारायण राय ने यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि सोशल मीडिया में जिस तरीके से गाली-गलौज और सामाजिक वैमनस्यता फैलाने की बात हो रही है उसे देखते हुए आत्मनियंत्रण-आत्मानुशासन की जरूरत है। और यह पहल न्यूमीडिया से जुड़े लोगों को स्‍वयं करना चाहिए। अन्यथा यह काम सरकार कर देगी।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;span style=&quot;color: #993300; font-size: 14px;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: blue;&quot;&gt;&lt;strong&gt;5. &#39;चिट्ठासमय&#39; एग्रीगेटर -&lt;/strong&gt;&lt;span style=&quot;color: black;&quot;&gt; यह सर्वविदित तथ्‍य है कि नारद, चिट्ठाजगत और ब्‍लॉगवाणी के बंद हो जाने का हिंदी चिट्ठाकारिता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। सो, लम्‍बे समय से एक एग्रीगेटर की आवश्‍यकता रेखांकित हो रही थी।&lt;strong&gt; &lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;color: black;&quot;&gt;वर्धा संगोष्ठी की सबसे बड़ी उपलब्धि रही कि म.गां.अं.हिं.वि.वि. की ओर से कहा गया कि 15 अक्टू़बर 2013 तक &#39;चिट्ठाजगत&#39; एग्रीगेटर का काम संपन्न हो जाएगा। &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;
&lt;span style=&quot;color: blue; font-size: 16px;&quot;&gt;&lt;strong&gt;सेवाग्राम आश्रम भ्रमण&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;
&lt;a href=&quot;http://www.pravakta.com/wp-content/uploads/2013/09/1017041_10202095796666505_1093203264_n.jpg&quot;&gt;&lt;img alt=&quot;1017041_10202095796666505_1093203264_n&quot; class=&quot;aligncenter size-full wp-image-71005&quot; height=&quot;375&quot; src=&quot;http://www.pravakta.com/wp-content/uploads/2013/09/1017041_10202095796666505_1093203264_n.jpg&quot; width=&quot;500&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;span style=&quot;font-size: 14px;&quot;&gt;संगोष्ठी के दूसरे दिन प्रात: सवा सात बजे हम लोग बस में सवार होकर सेवाग्राम, वर्धा के लिए रवाना हुए। महात्मा गांधी मेरे आदर्श हैं। पंकज झा साथ में थे, सो इतिहास बताते जा रहे थे कि यहीं 1942 में कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में भारत छोड़ो प्रस्ताव स्वीकृत हुआ। गांधीजी का आश्रम वास्तव में प्रेरणास्पद लगा। रचनात्मक कार्य करने की प्रेरणा जगी। मित्रवर राकेश कुमार सिंह उम्दा फोटोग्राफर हैं, सो उन्होंने हम सबकी ढ़ेरों तस्वींरें खींच डालीं।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;
&lt;a href=&quot;http://www.pravakta.com/wp-content/uploads/2013/09/20130921_081647.jpg&quot;&gt;&lt;img alt=&quot;20130921_081647&quot; class=&quot;aligncenter  wp-image-71006&quot; height=&quot;300&quot; src=&quot;http://www.pravakta.com/wp-content/uploads/2013/09/20130921_081647.jpg&quot; width=&quot;400&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;
&lt;strong&gt;&lt;span style=&quot;color: blue; font-size: 16px;&quot;&gt;संघ कार्यालय, नागपुर दर्शन&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;
&lt;a href=&quot;http://www.pravakta.com/wp-content/uploads/2013/09/20130922_081331.jpg&quot;&gt;&lt;img alt=&quot;20130922_081331&quot; class=&quot;aligncenter  wp-image-71007&quot; height=&quot;300&quot; src=&quot;http://www.pravakta.com/wp-content/uploads/2013/09/20130922_081331.jpg&quot; width=&quot;400&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;span style=&quot;font-size: 14px;&quot;&gt;वापसी का टिकट वर्धा/सेवाग्राम से न कराकर नागपुर से करा लिया था। अपन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक हैं। नागपुर हर स्वयंसेवक के लिए प्रेरक नगर है। यहां संघ का मुख्यालय है और परमपूज्य सरसंघचालक का केंद्र। &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;
&lt;a href=&quot;http://www.pravakta.com/wp-content/uploads/2013/09/20130921_195416.jpg&quot;&gt;&lt;img alt=&quot;20130921_195416&quot; class=&quot;aligncenter  wp-image-71008&quot; height=&quot;300&quot; src=&quot;http://www.pravakta.com/wp-content/uploads/2013/09/20130921_195416.jpg&quot; width=&quot;400&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;
यहीं संघ के संस्थापक परमपूज्य डॉ. केशवराव हेडगेवार और द्वितीय सरसंघचालक श्रीगुरुजी की स्‍मृति मंदिर भी है। राष्ट्रवाद के प्रखर केंद्र का दर्शन कर मन में त्यापग, तपस्या और बलिदान की भावना प्रबल हुई।&lt;/div&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;
&lt;a href=&quot;http://www.pravakta.com/wp-content/uploads/2013/09/20130922_081901.jpg&quot;&gt;&lt;img alt=&quot;20130922_081901&quot; class=&quot;aligncenter  wp-image-71024&quot; height=&quot;534&quot; src=&quot;http://www.pravakta.com/wp-content/uploads/2013/09/20130922_081901.jpg&quot; width=&quot;400&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;
&lt;span style=&quot;color: blue;&quot;&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style=&quot;font-size: 16px;&quot;&gt;महिला सशक्तिकरण&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;
&lt;a href=&quot;http://www.pravakta.com/wp-content/uploads/2013/09/20130921_210151.jpg&quot;&gt;&lt;img alt=&quot;20130921_210151&quot; class=&quot;aligncenter  wp-image-71009&quot; height=&quot;300&quot; src=&quot;http://www.pravakta.com/wp-content/uploads/2013/09/20130921_210151.jpg&quot; width=&quot;400&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;span style=&quot;font-size: 14px;&quot;&gt;नागपुर में भोजन के लिए श्री गोगा कृपा भोजनालय जाना हुआ। यह देखकर मैं दंग रह गया कि भोजनालय में सारी व्‍यवस्‍थाएं महिलाओं ने संभाली हुई है। मैं सोचने लगा कि हमारे बिहार में कब ऐसी स्थिति निर्मित होगी जब महिलाएं आत्‍मनिर्भर बन सकेंगी। &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;a href=&quot;http://www.pravakta.com/wp-content/uploads/2013/09/20130922_195137.jpg&quot;&gt;&lt;img alt=&quot;20130922_195137&quot; class=&quot;aligncenter size-full wp-image-71038&quot; height=&quot;375&quot; src=&quot;http://www.pravakta.com/wp-content/uploads/2013/09/20130922_195137.jpg&quot; width=&quot;500&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;span style=&quot;font-size: 14px;&quot;&gt;नागुपर से 22 सितम्बर को दोपहर एक बजे गोंडवाना एक्सप्रेस से नई दिल्ली के लिए रवाना हुआ। जब ट्रेन भोपाल पहुंची तो सौरभजी का स्नेह मुझे फिर मिला, रात्रि-भोजन का पैकेट लिए वे स्टेशन पर खड़े थे।&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-size: 14px;&quot;&gt; &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;
&lt;span style=&quot;color: blue;&quot;&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style=&quot;font-size: 16px;&quot;&gt;झलकियां&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;
&lt;a href=&quot;http://www.pravakta.com/wp-content/uploads/2013/09/20130921_172403.jpg&quot;&gt;&lt;img alt=&quot;20130921_172403&quot; class=&quot;aligncenter  wp-image-71015&quot; height=&quot;300&quot; src=&quot;http://www.pravakta.com/wp-content/uploads/2013/09/20130921_172403.jpg&quot; width=&quot;400&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;
&lt;span style=&quot;font-size: 14px;&quot;&gt;• म.गां.अं.हिं.वि.वि., वर्धा परिसर की रचना अद्भुत है। आधुनिक वास्तुशिल्प अनूठा है। यह पहाड़ पर स्थित है। इतने पेड़-पौधे हैं कि शीतल एवं स्‍वच्‍छ हवा चलती रहती है। यह आपको ताजगी से भर देता है। सुंदर घास, विविध फूलों की क्यारियां मनोहारी दृश्य निर्मित करते हैं।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;
&lt;a href=&quot;http://www.pravakta.com/wp-content/uploads/2013/09/20130920_160658.jpg&quot;&gt;&lt;img alt=&quot;20130920_160658&quot; class=&quot;aligncenter  wp-image-71010&quot; height=&quot;300&quot; src=&quot;http://www.pravakta.com/wp-content/uploads/2013/09/20130920_160658.jpg&quot; width=&quot;400&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;
&lt;span style=&quot;font-size: 14px;&quot;&gt;• दोनों दिनों का मौसम बारिश की रिमझिम फुहारों के बीच सम्पन्न हुआ यानी प्राकृतिक छटाएं देखते ही बनती थी।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;
&lt;span style=&quot;font-size: 14px;&quot;&gt;• जहां हम ठहरे थे &#39;नागार्जुन सराय&#39;, उसके कमरे अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस थे। एसी, गिजर, आलमारी, टीवी...से युक्‍त।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;
&lt;a href=&quot;http://www.pravakta.com/wp-content/uploads/2013/09/20130920_093421.jpg&quot;&gt;&lt;img alt=&quot;20130920_093421&quot; class=&quot;aligncenter  wp-image-71011&quot; height=&quot;534&quot; src=&quot;http://www.pravakta.com/wp-content/uploads/2013/09/20130920_093421.jpg&quot; width=&quot;400&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;
&lt;span style=&quot;font-size: 14px;&quot;&gt;• पूरे देश में जहां राजनेताओं की स्मृति में नामकरण की प्रथा रूढ़ हो चुकी है ऐसे में साहित्यकारों के नाम पर हॉस्टल, मार्ग, प्रतिमा, भवन...यह सब देखकर किसका न मन प्रफुल्लित होगा!&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;span style=&quot;font-size: 14px;&quot;&gt;• &#39;सोशल मीडिया एवं राजनीति&#39; वाले सत्र के विषय में ही राजनीति शब्द है तो राजनीति की बात होनी ही थी। तृतीय सत्र में जब संजीव तिवारी बोलने के लिए आए तो वे फेसबुक पर पंकज झा की सक्रियता की तारीफ के क्रम में यह बोल गए, &#39;भाजपा मेरे दिल में है।&#39;&#39; इस बात पर श्रोताओं ने आपत्तियां दर्ज कीं। इसके पूर्व पंकज झा ने भी अपने वक्तव्य में कह दिया था कि छुपी हुई प्रतिबद्धताएं खतरनाक होती हैं और हम भाजपा से हैं, यह कहने में गर्व है। जब मेरी बारी आई तो संचालक महोदय ने मेरे परिचय में जोड़ दिया कि आप कमल संदेश के सहायक संपादक हैं। तो ऐसा संदेश चला गया कि भाजपा की बातें हो रही हैं। जबकि ऐसा था नहीं। यह सब अनायास ही हुआ।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;
&lt;a href=&quot;http://www.pravakta.com/wp-content/uploads/2013/09/993716_10201471678767407_1553821782_n1.jpg&quot;&gt;&lt;img alt=&quot;993716_10201471678767407_1553821782_n1&quot; class=&quot;aligncenter  wp-image-71012&quot; height=&quot;225&quot; src=&quot;http://www.pravakta.com/wp-content/uploads/2013/09/993716_10201471678767407_1553821782_n1.jpg&quot; width=&quot;400&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;
&lt;span style=&quot;font-size: 14px;&quot;&gt;• आलोक कुमार से मिलना मेरे लिए रोमांचकारी रहा। हिंदी के आदि चिट्ठाकार। उनके साथ फोटों भी खिंचवाई।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;
&lt;a href=&quot;http://www.pravakta.com/wp-content/uploads/2013/09/News1.jpg&quot;&gt;&lt;img alt=&quot;News&quot; class=&quot;aligncenter  wp-image-71029&quot; height=&quot;484&quot; src=&quot;http://www.pravakta.com/wp-content/uploads/2013/09/News1.jpg&quot; width=&quot;400&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;span style=&quot;font-size: 14px;&quot;&gt;• विश्वविद्यालय में एम.फिल. की पढ़ाई कर रहे एक मित्र ने जानकारी दी कि कार्यक्रम के दोनों दिन अखबार में आप सबका नाम छपा है, यह देखकर मन फूला न समाया।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;
&lt;a href=&quot;http://www.pravakta.com/wp-content/uploads/2013/09/20130921_133206.jpg&quot;&gt;&lt;img alt=&quot;20130921_133206&quot; class=&quot;aligncenter  wp-image-71013&quot; height=&quot;300&quot; src=&quot;http://www.pravakta.com/wp-content/uploads/2013/09/20130921_133206.jpg&quot; width=&quot;400&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;
&lt;span style=&quot;font-size: 14px;&quot;&gt;• सब जगह नमो-नमो। जब आलोक जी विकीपीडिया के बारे में बता रहे थे तो उस समय उदाहरणार्थ उन्होंने श्री नरेंद्र मोदी का ही पृष्ठ खोला।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;
&lt;a href=&quot;http://www.pravakta.com/wp-content/uploads/2013/09/20130921_150017.jpg&quot;&gt;&lt;img alt=&quot;20130921_150017&quot; class=&quot;aligncenter  wp-image-71014&quot; height=&quot;300&quot; src=&quot;http://www.pravakta.com/wp-content/uploads/2013/09/20130921_150017.jpg&quot; width=&quot;400&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;
&lt;span style=&quot;font-size: 14px;&quot;&gt;• मित्रवर पंकज झा सत्र समाप्ति पर विवि के मुख्यद्वार के निकट एक दुकान पर साथ ले जाते थे। वहां के दुकानदार दुनिया की सबसे मधुर भाषा में बात कर रहे थे। समझ गए होंगे आप, मैथिली भाषा में। बिहार की अखिल भारतीय उपस्थिति वर्धा में भी सिद्ध हुई।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;span style=&quot;font-size: 14px;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: blue;&quot;&gt;&lt;strong&gt;• और अंत में धर्म भ्रष्ट होने का वाकया...&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt; &#39;&#39;मुझ पारम्परिक ब्राह्मण के साथ वर्धा में बहुत अन्याय हुआ। पैंतालीस साल के जीवन में हमेशा शाकाहारी बना रहा, अंडा व केक से भी दूर रहा पर वहाँ गलती से चिकन चख लिया। हम जिस कान्यकुब्ज परिवार से हैं, यह कृत्य घोर राक्षसी माना जाता है। हमारे मन में यह धारणा बचपन से ही पुष्ट है कि ऐसा करना घोर अधर्मी काम है। हालाँकि मैं अब समझता हूँ कि खाने-पीने से नहीं कर्मों से व्यक्ति धर्मी-अधर्मी होता है। पर क्या करें, दिल मानता नहीं। श्रीमतीजी भी बहुत दुखी हैं। यह सब बापू और विनोबा की धरती पर हुआ। यह सोचकर संतोष कर लेता हूँ कि निराला भी माँसाहारी थे, इस नाते गाँधी और निराला की जमात में शामिल हो गया हूँ:-( &lt;span style=&quot;color: blue;&quot;&gt;- संतोष त्रिवेदी के फेसबुक वाल से।&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;color: blue; font-size: 14px;&quot;&gt; &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;span style=&quot;font-size: 14px;&quot;&gt;अंत में, यह लिखना आवश्यक है। इतने सुंदर और विचारशील संगोष्‍ठी के लिए इसके आयोजक कुलपति श्री विभूति नारायण राय एवं संयोजक श्री सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी को हार्दिक धन्यवाद।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;blockquote&gt;
&lt;strong&gt;&lt;span style=&quot;font-size: 14px;&quot;&gt;हिंदी चिट्ठाकारिता संक्रमण काल से गुजर रहा है। इससे मुक्ति के लिए बस एक मुकम्मल एग्रीगेटर की जरूरत है। &#39;चिट्ठासमय&#39; के आगमन से रौनक पुन: वापस लौटेगी और हिंदी में विचारों की दुनिया समृद्ध होगी। तब वर्धा संगोष्ठी-2013 निश्चित रूप से हिंदी चिट्ठाकारिता के लिए &#39;मील का पत्थर&#39; माना जाएगा।&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/blockquote&gt;
&lt;/div&gt;
</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://hitchintak.blogspot.com/feeds/3677186559825971831/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment/fullpage/post/7024567440226660873/3677186559825971831' title='2 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7024567440226660873/posts/default/3677186559825971831'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7024567440226660873/posts/default/3677186559825971831'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://hitchintak.blogspot.com/2013/09/blog-post_26.html' title=' हिंदी चिट्ठाकारिता को मिला नवजीवन'/><author><name>संजीव कुमार सिन्‍हा</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11879095124650917997</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg-VUG_8k4GcxEdCmjpiY_6UDali2WkziCy8QL3pvL6x98CxCQkSWCPT0QSOxfne88NMZUAxuRH02FkYn1eMUbfqb1lDlWyIjQte5L7cGqhL9x2KHht1Wlw7WNx98YJCQ/s220/Mintoo.jpg'/></author><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7024567440226660873.post-5757189334201929617</id><published>2013-09-26T18:03:00.002+05:30</published><updated>2013-09-26T19:16:20.218+05:30</updated><title type='text'>राष्ट्रीय मीडिया चौपाल–2013 : एक अवलोकन</title><content type='html'>&lt;div dir=&quot;ltr&quot; style=&quot;text-align: left;&quot; trbidi=&quot;on&quot;&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;
&lt;span style=&quot;font-size: 14px;&quot;&gt;&lt;strong&gt;मीडिया&lt;/strong&gt; के सभी माध्यमों में &#39;वेब मीडिया&#39; सबसे तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऐसा इसलिए हो रहा है कि इसने पत्रकारिता का लोकतांत्रिकरण किया है। मुख्यधारा के मीडिया से लोग हताश और निराश हैं। सो, बड़े पैमाने पर लोग सोशल साइट्स, ब्लॉग और वेबसाइट के जरिए अपने विचार अभिव्यक्त कर रहे हैं। यहां वे स्वयं ही लेखक, संपादक और मालिक हैं। यह कम खर्चीला मीडिया माध्यम है। इसके लिए कागज की जरूरत नहीं, सो पर्यावरण के अनुकूल भी है। समय सीमा और भौगोलिक सीमा से मुक्त है। कोई समाचार अपलोड करते ही एक सेकेण्ड में पूरी दुनिया में फैल जाता है। कभी भी इसका अर्काइव देखा जा सकता है। &lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-size: 14px;&quot;&gt;अब लोग खबर के लिए समाचार-पत्र, रेडियो और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर निर्भर नहीं हैं। फेसबुक और वेबसाइट से लोग आसानी से समाचार पा रहे हैं। अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों में अन्य सभी मीडिया माध्यमों को वेबमाध्यम से कड़ी टक्कर मिल रही है। वहां के कई प्रमुख समाचार-पत्र बंद हो चुके हैं।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;
&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;
&lt;span style=&quot;font-size: 14px;&quot;&gt;वेबमीडिया दिनोंदिन सशक्त हो रहा है और यह परिवर्तनकामी भूमिका भी निभा रहा है। समाजसेवी अन्ना हजारे की अगुआई में चले भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन में सोशल मीडिया ने प्रभावी भूमिका निभाई, यह हम सब जानते ही हैं। अब सभी राजनीतिक दल सोशल मीडिया पर विशेष प्रकोष्ठ भी बना रहे हैं।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;
&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;
&lt;span style=&quot;font-size: 14px;&quot;&gt;उपरोक्त विशेषताएं होने के बाद भी वेबमीडिया की राह में कई चुनौतियां हैं। आर्थिक प्रारूप का अभाव। विज्ञापन के मामले में गूगल द्वारा भारतीय भाषाओं के साथ भेदभाव। असंसदीय भाषा का धड़ल्‍ले से प्रयोग। वेब मीडिया के लिए किसी आचारसंहिता का न होना। बिजली की दिक्कत, सो बहुसंख्यक आबादी तक इंटरनेट का ना पहुंच पाना।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;
&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;
&lt;span style=&quot;font-size: 14px;&quot;&gt;यह सही है वेबमीडिया लगातार अपनी पहुंच व्यापक करता जा रहा है लेकिन उस पर विश्वसनीयता और प्रामाणिकता के प्रश्‍नचिन्ह लग रहे हैं। इसके साथ ही यह सवाल भी उठ रहे हैं कि मीडिया और राजनीति के अलावे क्या समाज-जीवन के अन्य क्षेत्रों की चर्चा वेबमीडिया पर हो रही है? वेबमीडिया में साहित्य, कला, संस्कृ्ति, विज्ञान आदि का क्या परिदृश्य है?&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;
&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;
&lt;span style=&quot;font-size: 14px;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;http://www.pravakta.com/wp-content/uploads/2013/09/Rashtriya-Media-Chaupal-2013.jpg&quot;&gt;&lt;img alt=&quot;Rashtriya Media Chaupal 2013&quot; class=&quot;alignright  wp-image-70875&quot; height=&quot;473&quot; src=&quot;http://www.pravakta.com/wp-content/uploads/2013/09/Rashtriya-Media-Chaupal-2013.jpg&quot; width=&quot;630&quot; /&gt;&lt;/a&gt;लोगों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित हो और नया मीडिया में विज्ञान को जगह मिले.. इसको लेकर &quot;जन-जन के लिए विज्ञान, जन-जन के लिए मीडिया&quot; थीम पर केंद्रित गत 14 एवं 15 सितम्बर को भोपाल में राष्ट्रीय मीडिया चौपाल-2013 का आयोजन सम्पन्न हुआ। &lt;span style=&quot;text-decoration: underline;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;http://www.pravakta.com/new-media-is-now-mainstream-media&quot; target=&quot;_blank&quot;&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style=&quot;color: blue; text-decoration: underline;&quot;&gt;पिछले साल भी यह चौपाल लगा था।&lt;/span&gt; &lt;/strong&gt;&lt;/a&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;color: #993300;&quot;&gt;&lt;strong&gt;अनिल सौमित्र जी,&lt;/strong&gt; &lt;/span&gt;जो स्पंदन संस्था चलाते हैं और ब्लॉगर हैं, की पहल पर मप्र विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद् तथा स्पंदन के संयुक्त तत्वावधान में यह चौपाल आयोजित हुआ। इस चौपाल में 6 तकनीकी सत्रों में गहन चर्चा हुई। देश के प्रमुख वैज्ञानिकों, तकनीकी विशेषज्ञों एवं वेब लेखकों की उपस्थिति उल्लेखनीय रही। देश भर से कुल 145 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिसमें सर्वाधिक 35 प्रतिनिधि दिल्ली से रहे।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;
&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;
&lt;span style=&quot;font-size: 14px;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: blue;&quot;&gt;&lt;strong&gt;उद्घाटन सत्र।&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt; अतिथियों - भारत सरकार के वरिष्ठ वैज्ञानिक मनोज पटेरिया, विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान के निदेशक प्रो. प्रमोद वर्मा, वरिष्ठ पत्रकार रमेश शर्मा, वेबदुनिया के संपादक जयदीप कर्णिक, वरिष्ठ पत्रकार गिरीश उपाध्याय द्वारा दीप-प्रज्वलन से शुभारंभ। अपने वक्‍तव्‍य में प्रो. प्रमोद वर्मा ने इस तरह के कार्यक्रम को जन-जन तक पहुंचाने की जरूरत पर बल दिया। कार्यक्रम के आयोजक व स्पंदन संस्था से जुड़े अनिल सौमित्र ने संचालन करते हुए मीडिया चौपाल की भूमिका रखी और कहा कि यह सब प्रयास इसलिए हो रहा है ताकि वेब मीडिया के संचारकों की क्षमता में वृद्धि हो।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;
&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;
&lt;span style=&quot;font-size: 14px;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: blue;&quot;&gt;&lt;strong&gt;पहला सत्र।&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style=&quot;color: #993300;&quot;&gt; &#39;नया मीडिया, नई चुनौतियां।&#39;&lt;/span&gt; &lt;/strong&gt;मुख्य वक्ता वेबदुनिया के संपादक जयदीप कर्णिक ने कहा कि हम तथ्य की जांच किये बिना उसे जल्दबाजी में फेसबुक, ट्विटर और ब्लॉग पर अपलोड कर देते हैं, यह ठीक नहीं है। इसलिए सोशल मीडिया की प्रामाणिकता और विश्वसनीयता बनाये रखने पर जोर देना होगा। इस सत्र के दौरान वरिष्ठ पत्रकार गिरीश उपध्याय, पत्रकार अनुराग अन्वेषी, मुक्ता पाठक, पंकज कुमार झा, यशवंत सिंह, वर्तिका तोमर, संजीव कुमार सिन्हा, उमेश चतुर्वेदी आदि ने भी अपने विचार रखें। इस सत्र की अध्यक्षता मध्यप्रदेश एकता समिति के उपाध्यक्ष व वरिष्ठ पत्रकार रमेश शर्मा ने की एवं संचालन टीवी पत्रकार हर्षवर्धन त्रिपाठी ने किया।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;
&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;
&lt;span style=&quot;font-size: 14px;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: #993300;&quot;&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style=&quot;color: blue;&quot;&gt;दूसरा सत्र।&lt;/span&gt; &#39;विकास कार्य क्षेत्र और मीडिया अभिसरण (कन्वर्जेंस) की रूपरेखा।&#39;&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt; इस सत्र में वरिष्ठ वैज्ञानिक और मध्यप्रदेश शासन के वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. प्रमोद के वर्मा ने प्रजेंटेशन के माध्यम से बताया कि किस तरह सोशल मीडिया समाज में वैज्ञानिक चेतना और जागरूकता लाने में मदद कर सकता है। मध्यप्रदेश एकता समिति के उपाध्यक्ष श्री रमेश शर्मा ने कहा कि भारत में विज्ञान की महान परम्परा रही है। भारत सरकार के वरिष्ठ वैज्ञानिक श्री मनोज पटेरिया भी उपस्थित थे। वरिष्ठ् पत्रकार श्रीमती स्मिता मिश्रा ने भी अपने विचार रखे।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;
&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;
&lt;span style=&quot;font-size: 14px;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: blue;&quot;&gt;&lt;strong&gt;तीसरा सत्र।&lt;span style=&quot;color: #993300;&quot;&gt; &#39;आमजन में वैज्ञानिक दृष्टि का विकास और जन माध्यम।&#39;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt; मुख्य वक्ता वरिष्ठ वैज्ञानिक मनोज पटेरिया ने कहा कि वर्तमान में मीडिया में विज्ञान की खबरों को लेकर पर्याप्त कवरेज नहीं मिल पा रहा है। अगर हमें लोगों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास करना है तो विज्ञान की खबरों को भी महत्व देना होगा। अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बीके कुठियाला ने कहा कि भारत में हमेशा से विज्ञान प्रतिष्ठित रहा है। उन्होंने चेताते हुए कहा कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण के नाम पर पाश्चात्य देशों का अंधानुकरण न हो क्योंकि वहां तो और अंधविश्वास व्याप्त है।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;
&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;
&lt;span style=&quot;color: #ff6600; font-size: 18px;&quot;&gt;&lt;strong&gt;चौपाल का दूसरा और अंतिम दिन।&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;
&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;
&lt;span style=&quot;font-size: 14px;&quot;&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style=&quot;color: blue;&quot;&gt;चौथा सत्र।&lt;/span&gt; &lt;span style=&quot;color: #993300;&quot;&gt;&#39;आपदा प्रबंधन और नया मीडिया।&#39;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt; मुख्य वक्ता विज्ञान प्रसार नई दिल्ली के पूर्व निदेशक डॉ. सुबोध मोहंती ने कहा कि मुख्य धारा के मीडिया के सहयोगी के तौर पर नया मीडिया को देखना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि स्थायी विकास (सस्टेनेबल डेवलपमेंट) को आपदा के साथ जोड़ना होगा। सामान्य तौर पर हम आपदा की अनदेखी करते हैं। &#39;देखा जाएगा&#39; यह प्रवृत्ति त्यागनी होगी। उन्होंने 33 तरह के आपदाओं पर प्रकाश डाला। इस सत्र में उत्तराखंड में आई विभीषिका के दौरान न्यू मीडिया के द्वारा किए गए कार्यों पर चर्चा की गई। इस सत्र का संचालन श्री पंकज झा (दीपकमल, रायपुर) ने किया। &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;
&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;
&lt;span style=&quot;font-size: 14px;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: #993300;&quot;&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style=&quot;color: blue;&quot;&gt;पांचवां सत्र।&lt;/span&gt; &#39;&#39;जनमाध्यमों का अंतर्संबंध और नया मीडिया।&#39;&#39;&lt;/strong&gt; &lt;/span&gt;मुख्या वक्ता भारतीय जनसंचार संस्थान के पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष प्रो. हेमंत जोशी ने न्यू मीडिया के परिप्रेक्ष्य में &#39;जन माध्यमों का अंतर्संबंध&#39; विषय पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने &#39;सोशल मीडिया&#39; नामकरण पर यह कहकर आपत्ति उठाई कि &#39;एंटी सोशल मीडिया&#39; भी होता है क्या? उन्होंने आगे कहा कि ठीक है कि एक आंदोलन फेसबुक और ट्विटर से सफल हुआ और यदि वह विफल हुआ तो क्या इसका जिम्मा फेसबुक व ट्विटर को नहीं जाना चाहिए?&lt;strong&gt;&lt;span style=&quot;color: blue;&quot;&gt; लेखिका एवं शोधार्थी कायनात काजी&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt; ने &#39;समय की मांग-साहित्य में विज्ञान का समावेश&#39; विषय पर प्रेजेंटेशन दिया। इस सत्र की अध्यक्षता वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. सुबोध माहंती ने की।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;
&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;
&lt;span style=&quot;font-size: 14px;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: blue;&quot;&gt;&lt;strong&gt;समापन सत्र।&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt; &lt;span style=&quot;color: #993300;&quot;&gt;&lt;strong&gt;मुक्‍त चिंतन।&lt;/strong&gt; &lt;/span&gt;मप्र शासन के वैज्ञानिक सलाहकार एवं परिषद के महानिदेशक प्रो. प्रमोद के वर्मा ने प्रतिभागियों को संबोधित किया। इस सत्र में &#39;नया मीडिया की विश्वसनीयता और प्रामाणिकता पर उठ रहे प्रश्‍नचिन्ह को देखते हुए क्या इस मीडिया में &#39;स्‍वनियमन&#39; की आवश्यकता है&#39;, इस मुद्दे पर जमकर चर्चा हुई। इस सत्र का संचालन श्री अनिल पांडेय (द संडे इंडियन) ने किया एवं अध्‍यक्षता श्री उमेश चतुर्वेदी (टीवी पत्रकार एवं ब्‍लॉगर) ने की। &lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-size: 14px;&quot;&gt;विभिन्न सत्रों की कार्यवाहियों को मैपकोस्ट के वरिष्ठ वैज्ञानिक डीके पाण्डेय ने प्रस्तुत किया।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;
&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;
&lt;span style=&quot;font-size: 14px;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: #ff6600; font-size: 18px;&quot;&gt;&lt;strong&gt;ये रहे उपस्थित :&lt;/strong&gt; &lt;/span&gt;&quot;मीडिया चौपाल-2013&quot; में श्री हर्षवर्धन त्रिपाठी (टीवी पत्रकार और ब्लॉगर), श्री अनिल पाण्डेय (द संडे इंडियन), श्री यशवंत सिंह (भड़ासफॉरमीडिया डॉट कॉम), श्री संजीव सिन्हा (प्रवक्ता डॉट कॉम), श्री आशीष कुमार &#39;अंशु&#39;, श्री अनुराग अन्वेषी, श्री सिद्धार्थ झा, श्री पंकज साव, श्री उमेश चतुर्वेदी, श्री पंकज झा (दीपकमल, रायपुर), श्री शिराज केसर, सुश्री मीनाक्षी अरोड़ा (इंडिया वाटर पोर्टल), श्री चंद्रकांत जोशी (हिन्दी इन डॉट कॉम, मुम्बई), श्री लोकेन्द्र सिंह (ग्वालियर), श्री विकास दवे (कार्यकारी संपादक, देवपुत्र, इंदौर), श्री राजीव गुप्ता, सुश्री वर्तिका तोमर, ठाकुर गौतम कात्यायन (पटना), श्री अभिषेक रंजन, श्री अंकुर विजयवर्गीय (नई दिल्ली), श्री प्रवीण शुक्ला, श्री शिवानंद द्विवेदी &#39;सहर&#39;, श्री अवनीश सिंह (हिंदुस्थान समाचार), श्री आशुतोष झा, श्री विभय कुमार झा, श्री नीरज पाठक, श्री रामचंद्र झा, श्री प्रेम कुमार, श्री श्रवण कुमार शुक्ला, श्री राजेश रंजन...की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;
&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;
&lt;span style=&quot;font-size: 14px;&quot;&gt;भोपाल से मीडिया चौपाल में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के प्राध्यापक पुष्पेन्द्र पाल, संजय द्वेदी, डॉ. सौरभ मालवीय, मोनिका वर्मा, लाल बहादुर ओझा, सुरेन्द्र पाल, वरिष्ठ पत्रकार गिरीश उपाध्याय, द बिजनेस स्टैंडर्ड के मध्यप्रदेश प्रभारी शशिकांत त्रिवेदी, द वीक के दीपक तिवारी, श्री अमरजीत कुमार, वेब पत्रकार हर्ष सुहालका, जय शर्मा केतकी, स्तंभ लेखक गोपाल कृष्ण छिब्बर, मुक्ता पाठक, शैफाली पाण्डेय, वरिष्ठ पत्रकार सुचान्दना गुप्ता, हरिअग्र हरी, सरमन नगले उपस्थित रहे।&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-size: 14px;&quot;&gt; &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;
&lt;blockquote&gt;
&lt;span style=&quot;color: blue; font-size: 18px;&quot;&gt;&lt;strong&gt;मीडिया चौपाल-2013 के समापन सत्र में उठी प्रमुख बातें –&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/blockquote&gt;
&lt;/div&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;
&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;
&lt;span style=&quot;font-size: 14px;&quot;&gt;• न्यू मीडिया के लेखकों को एकजुट रहने के लिए किसी सक्रिय मंच की सख्त आवश्‍यकता। एक टीम बननी चाहिए। पत्रकारों के दमन के खिलाफ आवाज उठनी चाहिए। - &lt;span style=&quot;color: #993300;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यशवंत सिंह,&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt; सीइओ, भड़ासफॉरमीडिया डॉट कॉम।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;
&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;
&lt;span style=&quot;font-size: 14px;&quot;&gt;• वेबपत्रकारों को मान्यता मिले। -&lt;span style=&quot;color: #993300;&quot;&gt;&lt;strong&gt; हर्षवर्धन त्रिपाठी,&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt; टीवी पत्रकार एवं ब्लॉगर।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;
&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;
&lt;span style=&quot;font-size: 14px;&quot;&gt;• न्यू मीडिया के लिए जो भी संगठन बने उनका अन्य मीडिया संगठनों से समन्वय हो। - &lt;span style=&quot;color: #993300;&quot;&gt;&lt;strong&gt;स्मिता मिश्र&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;, स्तंभ लेखिका।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;
&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;
&lt;span style=&quot;font-size: 14px;&quot;&gt;• संगठन को सशक्त करने के लिए सदस्यता राशि - 1000 रुपए रखी जाय- &lt;span style=&quot;color: #993300;&quot;&gt;&lt;strong&gt;संदीप&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;
&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;
&lt;span style=&quot;font-size: 14px;&quot;&gt;• मीडिया चौपाल के लिए एक वेबसाइट की जरूरत। कानूनी जागरूकता की आवश्यकता। - &lt;span style=&quot;color: #993300;&quot;&gt;&lt;strong&gt;दामोदर&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;
&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;
&lt;span style=&quot;font-size: 14px;&quot;&gt;• मीडिया चौपाल का सांस्थानिक स्वूरूप ठीक नहीं। जब भी संगठन बनने की बात होने लगती है तो मुझे डर लगने लगता है। - &lt;span style=&quot;color: #993300;&quot;&gt;&lt;strong&gt;आशीष कुमार &#39;अंशु&#39;&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;, ब्लॉंगर।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;
&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;
&lt;span style=&quot;font-size: 14px;&quot;&gt;• सांस्थानिक स्वरूप समय की मांग है। - &lt;span style=&quot;color: #993300;&quot;&gt;&lt;strong&gt;अनुराग अन्वेषी, &lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;वरिष्‍ठ पत्रकार।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;
&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;
&lt;span style=&quot;font-size: 14px;&quot;&gt;• खूब चर्चा करें, फिर इसे अगली बार साकार करें। - &lt;span style=&quot;color: #993300;&quot;&gt;&lt;strong&gt;हेमंत जोशी,&lt;/strong&gt; &lt;/span&gt;प्रोफेसर, आईआईएमसी।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;
&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;
&lt;span style=&quot;font-size: 14px;&quot;&gt;• मीडिया चौपाल को संस्थागत स्वरूप दें लेकिन उसकी प्रवृत्ति चौपाल की ही हो।–&lt;span style=&quot;color: #993300;&quot;&gt;&lt;strong&gt;प्रो. बीके कुठियाला&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;, कुलपति, माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;
&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;
&lt;span style=&quot;font-size: 14px;&quot;&gt;• आर्थिक प्रारूप कैसे विकसित हो, इस पर जोर दें। सहज विज्ञापन मिले, इस हेतु सरकार तक जाकर अपनी बात रखनी चाहिए। छत्तीसगढ़ से शुरूआत करें, मैं पहल के तैयार हूं। - &lt;span style=&quot;color: #993300;&quot;&gt;&lt;strong&gt;पंकज झा&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;, स्तंभ लेखक&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;
&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;
&lt;span style=&quot;font-size: 14px;&quot;&gt;• भारतीय भाषाओं के साथ गूगल का भेदभाव, पीआईबी में वेबपत्रकारों के लिए मान्यता, डीएवीपी में विज्ञापन के लिए जो शर्तें हैं, उस पर पुनर्विचार, वेबपत्रकारों को सरकारी मान्यता, इस सब विषयों पर हमारा कोई प्रतिनिधिमंडल संबंधित संस्था के पास जाकर अपनी बात रखें। - &lt;span style=&quot;color: #993300;&quot;&gt;&lt;strong&gt;संजीव कुमार सिन्हा&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;, संपादक, प्रवक्ता डॉट कॉम&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;
&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;
&lt;span style=&quot;font-size: 14px;&quot;&gt;• वेबमीडिया के लिए स्वनियमन की बात ठीक नहीं है। - &lt;span style=&quot;color: #993300;&quot;&gt;&lt;strong&gt;उमेश चतुर्वेदी, &lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;टीवी पत्रकार एवं ब्‍लॉगर&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;/div&gt;
&lt;/div&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: left;&quot;&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: right;&quot;&gt;
&lt;span style=&quot;color: blue;&quot;&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style=&quot;font-size: 14px;&quot;&gt;(प्रस्‍तुति : संजीव कुमार सिन्‍हा)&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-size: 14px;&quot;&gt; &lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;/div&gt;
</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://hitchintak.blogspot.com/feeds/5757189334201929617/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment/fullpage/post/7024567440226660873/5757189334201929617' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7024567440226660873/posts/default/5757189334201929617'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7024567440226660873/posts/default/5757189334201929617'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://hitchintak.blogspot.com/2013/09/blog-post.html' title='राष्ट्रीय मीडिया चौपाल–2013 : एक अवलोकन'/><author><name>संजीव कुमार सिन्‍हा</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11879095124650917997</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg-VUG_8k4GcxEdCmjpiY_6UDali2WkziCy8QL3pvL6x98CxCQkSWCPT0QSOxfne88NMZUAxuRH02FkYn1eMUbfqb1lDlWyIjQte5L7cGqhL9x2KHht1Wlw7WNx98YJCQ/s220/Mintoo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7024567440226660873.post-7526367090691043132</id><published>2012-10-22T20:28:00.002+05:30</published><updated>2012-10-22T20:53:34.398+05:30</updated><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="मीडिया"/><title type='text'>संवाद करें और साथ चलें</title><content type='html'>&lt;div dir=&quot;ltr&quot; style=&quot;text-align: left;&quot; trbidi=&quot;on&quot;&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;div style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;
&lt;span style=&quot;color: blue;&quot;&gt;&lt;strong&gt;संजीव कुमार सिन्हा&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;table cellpadding=&quot;0&quot; cellspacing=&quot;0&quot; class=&quot;tr-caption-container&quot; style=&quot;float: right; margin-left: 1em; text-align: right;&quot;&gt;&lt;tbody&gt;
&lt;tr&gt;&lt;td style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjwf_QRnL77uhVjW3eAo5a3ermrBvr1CWJLoK4Z3s4R07zxh0usHiJLVdZs39F_F_Ns3qoWOXmGf-srHKAlYY1evtTUQLfzNYOMM4WJxtZFC_MEnr4UNB7XGODv5OUgxkC6rYaxCNvOIuI/s1600/23.jpg&quot; imageanchor=&quot;1&quot; style=&quot;clear: right; margin-bottom: 1em; margin-left: auto; margin-right: auto;&quot;&gt;&lt;img border=&quot;0&quot; height=&quot;183&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjwf_QRnL77uhVjW3eAo5a3ermrBvr1CWJLoK4Z3s4R07zxh0usHiJLVdZs39F_F_Ns3qoWOXmGf-srHKAlYY1evtTUQLfzNYOMM4WJxtZFC_MEnr4UNB7XGODv5OUgxkC6rYaxCNvOIuI/s320/23.jpg&quot; width=&quot;320&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;
&lt;tr&gt;&lt;td class=&quot;tr-caption&quot; style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;बाएं से दाएं – भारत भूषण, संजीव सिन्‍हा (प्रवक्‍ता डॉट कॉम), आशीष झा (इसमाद डॉट कॉम), अमलेंदु उपाध्‍याय (हस्‍तक्षेप डॉट कॉम), यशवंत सिंह (भड़ास4मीडिया डॉट कॉम), जयराम विप्‍लव (जनोक्ति डॉट कॉम), संजय तिवारी (विस्‍फोट डॉट कॉम)&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;
&lt;/tbody&gt;&lt;/table&gt;
&lt;strong&gt;सन् 2006 में&lt;/strong&gt; मैं कंप्यूटर, कहते हैं आग और पहिया के बाद इसी ने मानव सभ्यता को बदलने में सबसे उल्लेखनीय भूमिका निभाई है, की संगति में आया। हिंदी में सर्च के दौरान मशहूर ब्लॉगर रवि रतलामी के ब्लॉग पर पहुंच गया और खेल-खेल में अपना ब्लॉग भी बना लिया। (अभी थोड़ी देर पहले ब्लॉगर डॉट कॉम पर अपने प्रोफाइल की पड़ताल की तो पता चला नवम्बर 2006 में हितचिन्तक डॉट ब्लॉगस्पॉट डॉट कॉम बना लिया था। यानी, नेट पर सक्रिय रूप से काम करते हुए मुझे 6 वर्ष हो गए) हालांकि हितचिन्तक पर सक्रियता में तेजी आई मई 2007 से। तब से लेकर मई 2009 तक जमकर ब्लॉगिंग किया। ब्लॉगजगत की अनेक खट्टी-मीठी यादें मन में ताजा हैं। इसी बीच मित्रवर भारत भूषण के सौजन्य से 16 अक्टूबर 2008 को प्रवक्ता डॉट कॉम की स्थापना हो चुकी थी। और हम बड़े फलक पर अपने काम में जुट गए। काम में जुटने के पीछे जो उद्देश्य थे वह यह कि हम चाहते थे कि 80 करोड़ लोगों की भाषा हिंदी नेट पर समृद्ध हो और इस भाषा में विचार-विमर्श हो। साथ ही लोगों में राष्ट्रीय चेतना का प्रवाह हो।&lt;br /&gt;
&lt;strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;/strong&gt;
&lt;strong&gt;गौरतलब है कि&lt;/strong&gt; भारत में इंटरनेट की शुरुआत 1995 में वीएसएनएल के द्वारा हुई। इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ के आंकड़ों के मुताबिक इस वक्त देश में तकरीबन 14 करोड़ लोग इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहे हैं और यह संख्या बड़ी तेजी से बढ़ रही है। 22 सितम्बर 1999 को हिंदी की पहली वेबसाइट ‘वेबदुनिया डॉट कॉम’ की शुरुआत हुई। यानी हिंदी वेबमीडिया की सक्रियता के 13 साल हो गए हैं। तबसे लेकर हजारों वेबसाइटें बन चुकी हैं। हमें इसका अंदाजा नहीं था कि इतनी जल्दी वेबमीडिया का विस्तार इस हद तक हो जाएगा। जब हिंदी की दुनिया में पाठकों की कमी का स्‍यापा चारों तरफ चल रहा हो ऐसे में ’प्रवक्ता’ को ही देखें तो आज इसे प्रतिदिन 44 हजार 382 हिट्स मिल रही है। लोकप्रियता के मामले में भड़ास4मीडिया डॉट कॉम ने तो खैर इतिहास ही रच डाला। इसी तरह विस्फोट डॉट कॉम, मोहल्लालाइव डॉट कॉम, जनोक्ति डॉट कॉम, हस्तक्षेप डॉट कॉम, नेटवर्क6 डॉट इन, इसमाद डॉट कॉम आदि विषयवस्तु और गुणवत्ता की दृष्टि से बेहतरीन कार्य कर रहे हैं। वर्तमान समय में आज सभी प्रमुख समाचार-पत्रों की वेबसाइटें हैं। लोकतांत्रिक प्रकृति, प्रिंट, रेडियो और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की खासियत को अपने में समेटे, समय सीमा और भौगोलिक सीमा से मुक्त, कभी भी अर्काइव देख लेने की सुविधा, कम लागत, पर्यावरण के अनुकूल आदि सुविधाओं के चलते वेबमीडिया का भविष्य उज्ज्वल है और यही मुख्यधारा का मीडिया बनता जा रहा है। ब्रिटेन और अमेरिका में प्रिंट और इलेक्‍ट्रॉनिक मीडिया को वेबमीडिया कड़ी टक्‍कर दे रहा है और कई प्रतिष्ठित अखबारों का मुद्रण भी बंद हो चुका है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;strong&gt;वेबमीडिया के व्यापक&lt;/strong&gt; विस्तार के पश्चात् यह जरूरी हो गया है कि अब&amp;nbsp;इस पर कायदे से बात होनी चाहिए। क्योंकि प्रिंट मीडिया की समस्याओं को लेकर ‘प्रेस काऊंसिल ऑफ इंडिया’ गंभीर दिखता है। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के लिए बीइए संस्था है। लेकिन वेबमीडिया की चिंता करनेवाली कोई संस्था नहीं हैं। प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के लिए आचारसंहिता पर विस्तार से चर्चा हुई है लेकिन वेबमीडिया को लेकर इस तरह की कोई पहल नहीं हुई है। चाहे वेबमीडिया की भाषा और विषयवस्तु का सवाल हो या फिर आर्थिक मॉडल की, इस पर ढंग से विचार नहीं किया गया। सरकारों द्वारा वेबपत्रकारों को अधिमान्यता नहीं मिल रही है तो वेबपत्रकारों पर हमले बढ़ रहे हैं। वेबमीडिया पर गाहे-बगाहे सवाल उठते रहते हैं कि यह गंभीर नहीं है और सरकार भी इस पर अपनी नजरें टिकाए हुई है। इसलिए वेबपत्रकारों को चाहिए कि वह स्वनियमन की पहल करें। कहने का अर्थ यह है कि वेबमीडिया बहुत ‘बड़ा’ हो गया है, लेकिन इसे ‘अच्छा’ बनने की दिशा में निरंतर प्रयासरत होना चाहिए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;
&lt;a href=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj1BOm6sEydijA0dCIX7TgK0u2MMm8ThHjI1Vz48QPwMpRTiHUax_zeQdBQbWnFMKk8-BwtmO7-Qdk8RBSa-7xi4PaCQHpHJgV5uKh-ymRWIcPAuqNseKzHUmcyqc4ndlybPv-p5h73Hy4/s1600/31.jpg&quot; imageanchor=&quot;1&quot; style=&quot;clear: right; float: right; margin-bottom: 1em; margin-left: 1em;&quot;&gt;&lt;img border=&quot;0&quot; height=&quot;240&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj1BOm6sEydijA0dCIX7TgK0u2MMm8ThHjI1Vz48QPwMpRTiHUax_zeQdBQbWnFMKk8-BwtmO7-Qdk8RBSa-7xi4PaCQHpHJgV5uKh-ymRWIcPAuqNseKzHUmcyqc4ndlybPv-p5h73Hy4/s320/31.jpg&quot; width=&quot;320&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;
&lt;strong&gt;कुछ महीने पहले&lt;/strong&gt; एक दिन संजय तिवारी जी का फोन आया। उन्होंने कहा कि सभी वेबसाइटों को एक साथ आना चाहिए और एक मंच बनना चाहिए। और पहल करते हुए उन्होंने विस्फोट पर हस्तक्षेप, प्रवक्ता समेत कुछ साइटों का लिंक भी प्रस्तुत किया। परन्तु कुछ दिनों बाद साइट के सज्जाकरण के पश्चात् वह लिंक दिखना बंद हो गया। लेकिन मुझे लगा कि यह पहल आगे बढ़नी चाहिए। और इसी बीच&amp;nbsp;एक अवसर भी आ गया प्रवक्ता डॉट कॉम की चौथी सालगिरह का। हमने सोचा इस अवसर का लाभ उठाते हुए प्रमुख साइट प्रमुखों को बुलाकर इस पर बात करनी चाहिए। सबसे पहले हमने प्रवक्ता के प्रबंधक भारत जी को फोन किया। हमेशा की तरह उन्होंने हामी भर दी। जगह के लिए हमने सोचा कि कोई मध्य दिल्ली का स्थान हो। और कांस्टिट्यूशन क्लब से अच्छा क्या हो सकता है? पता किया तो हमें यह स्थान मिल गया। इसके बाद हमने सूची बनाई और कुल 11 लोगों के नाम सामने आए। अविनाश जी (मोहल्लालाइव डॉट कॉम) को फोन लगाया और निवेदन किया कि 16 अक्टूबर को प्रवक्ता के चार साल पूरे हो रहे हैं और इस अवसर पर चाय-कॉफी के साथ वेबमीडिया की दशा और दिशा पर बात करना चाहते हैं। सो आप आइए। उन्होंने हमारा उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि संजीवजी, चाय-कॉफी ही नहीं आपको समोसे की भी व्यवस्था करनी होगी। उन्होंने कहा कि वो जरूर आएंगे। लेकिन उस दौरान बुखार से पीडि़त हो जाने के कारण वह बैठक में उपस्थित नहीं हो सके। फिर हमने संजय जी (विस्फोट डॉट कॉम) को याद किया। उन्होंने भी कहा कि आएंगे। इसके बाद यशवंत जी (भड़ास4मीडिया डॉट कॉम) को कॉल किया तो उन्होंने कहा कि संजीव, यह जरूरी काम है। मैं रहूंगा बैठक में। फिर अमलेंदु जी (हस्तक्षेप डॉट कॉम) को सूचना दी। उन्होंने भी हामी भर दी। आवेश तिवारी जी (नेटवर्क6 डॉट इन) से बात की। उन्होंने भी उपस्थित रहने को आश्वस्त किया, लेकिन वो नहीं आ पाए। फिर हमने आशीष जी (इसमाद डॉट कॉम) को फोन किया। उन्होंने भी कहा, आएंगे। इसके पश्‍चात् हमने पुष्कर जी (मीडियाखबर डॉट कॉम) को कॉल किया। उन्होंने कहा कि इस वक्त वो अपने गांव (बिहार) में हैं, सो बैठक में उपस्थित नहीं रह पाने का उन्हें अफसोस रहेगा। इसके बाद जयराम जी (जनोक्ति डॉट कॉम) को फोन लगाया। कहा, आएंगे। फिर हमने ब्रजेश जी को फोन किया। उन्होंने भी कहा, आएंगे लेकिन ऐन समय पर जरूरी बैठक के कारण वो नहीं आ सके। फिर हमने अफरोज साहिल (बियोंडहेडलाइन्स डॉट इन) को फोन किया। उन्होंने भी उपस्थित रहने की बात कही लेकिन अस्वस्थ हो जाने के कारण मौजूद नहीं हो सके।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;
&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;
&lt;a href=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEieZKFeUjguaysHWzAtkEArkuE_XR5ii7rsV7D9OpjH85LDAxfidRWF9rvIZqv4VJvET1NH9lrXNT9S_a4-OJ-YkNe1c1dKgayostZKc94xqSRknOzdn-ETHe__saYUDqumgxxkqQ8Q8Jo/s1600/7.jpg&quot; imageanchor=&quot;1&quot; style=&quot;clear: right; float: right; margin-bottom: 1em; margin-left: 1em;&quot;&gt;&lt;img border=&quot;0&quot; height=&quot;240&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEieZKFeUjguaysHWzAtkEArkuE_XR5ii7rsV7D9OpjH85LDAxfidRWF9rvIZqv4VJvET1NH9lrXNT9S_a4-OJ-YkNe1c1dKgayostZKc94xqSRknOzdn-ETHe__saYUDqumgxxkqQ8Q8Jo/s320/7.jpg&quot; width=&quot;320&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;
&lt;strong&gt;बैठक वाले दिन&lt;/strong&gt; 16 अक्टूबर को मैं ठीक 3 बजे कांस्टिट्यूशन क्लब पहुंच गया। और प्रथम तल पर स्थित बैठक स्थल पर जाकर आसन जमा लिया। इसी बीच साढ़े तीन बजे भारत जी पहुंचे। और चार बजने में कुछ मिनट बाकी थे तो आशीष जी पहुंचे। ठीक चार बजे यशवंत जी और अमलेंदु जी, राकेश जी (वेब तकनीकी जानकार) के साथ पहुंचे। भारतजी यशवंत जी के साथ तकनीकी ज्ञान बघार रहे थे तो संजय जी और जयराम जी का आगमन हुआ। इसी बीच भारत जी के सौजन्य से अल्पाहार का अवसर आया। सैंडविच, पेस्ट्री और चाय का स्वाद लेते हुए तकनीकी चर्चाएं होती रहीं। अल्पाहार के बाद परिचय का दौर चला। वैसे तो सब एक दूसरे को जानते ही थे लेकिन परिचय का क्रम काफी देर तक चला। सबने अपने बारे में विस्तार से बताया। यशवंत जी ने बताया कि वे पढ़ाई के दौरान वामपंथी छात्र संगठन ‘आइसा’ से जुड़े रहे और पत्रकारिता की पढ़ाई के बाद दैनिक जागरण और अमर उजाला में काम किया। जयराम जी ने कहा कि उन्होंने जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया और उसके बाद मुख्यधारा की पत्रकारिता में जाने की बजाए वैकल्पिक मीडिया पथ पर चलना स्वीकारा और जनोक्ति की शुरुआत की। हमने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् में सक्रियता से काम करने के बाद इन दिनों कमल संदेश से जुड़ा हूं और गत चार वर्षों से प्रवक्ता का संपादन कर रहा हूं। अमलेंदु जी ने अपना परिचय देते हुए कहा कि वो उत्तर प्रदेश में एआईएसएफ के सचिव रहे हैं और लम्बे समय से पत्रकारिता से जुड़े हैं। उन्होंने बताया कि वह राष्ट्रीय सहारा के ‘हस्तक्षेप’ परिशिष्ट के लिए दो साल तक काम कर चुके हैं। आशीष जी ने अपने बारे में बताते हुए कहा कि उन्हें मीडिया के तमाम विधाओं का अनुभव प्राप्त है। वह फोटोग्राफर रहे। प्रभात खबर, दैनिक जागरण और आज समाज में काम किया और वर्तमान में सौभाग्य मिथिला चैनल के न्यूज हेड का दायित्व संभाल रहे हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;
&lt;a href=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjTcWvOMCDb0vxDk7KnAZf1YGgI16SzgxkPtR4gEaF8lQAREUuqH-KmHenfDW9nnkrdEQe6fJ3iKD0jd6_JcP36KTJO9DfXBSwneyTa5sLRS1GQzjZUwNmP6TdBlnF0IElscDKyaIT334s/s1600/5.jpg&quot; imageanchor=&quot;1&quot; style=&quot;clear: right; float: right; margin-bottom: 1em; margin-left: 1em;&quot;&gt;&lt;img border=&quot;0&quot; height=&quot;240&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjTcWvOMCDb0vxDk7KnAZf1YGgI16SzgxkPtR4gEaF8lQAREUuqH-KmHenfDW9nnkrdEQe6fJ3iKD0jd6_JcP36KTJO9DfXBSwneyTa5sLRS1GQzjZUwNmP6TdBlnF0IElscDKyaIT334s/s320/5.jpg&quot; width=&quot;320&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;
&lt;strong&gt;परिचय के उपरांत&lt;/strong&gt; वेबसाइट के आर्थिक पहलू पर बात हुई। यह विषय प्रमुखता से उभरा कि गूगल विज्ञापन के मामले में भारतीय भाषाओं के साथ भेदभाव करता है। इस बात पर चिंता प्रकट की गई कि वेबमीडिया को अस्तित्व में आए कई वर्ष हो गए लेकिन इसका कोई आर्थिक मॉडल विकसित नहीं हो पाया है। सबने माना कि वेबसाइट के संचालन के लिए आर्थिक ढांचे पर ध्यान देना जरूरी है और जिस तरह स्मॉल न्यूजपेपर एसोसिएशन सरकार पर विज्ञापन के लिए दबाव बनाते हैं हमें भी इस ओर सामूहिक पहल करनी होगी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;strong&gt;इसके पश्चात् बैठक&lt;/strong&gt; में हमने यह विषय रखा कि संजय जी ने एक बार न्यूमीडिया के लिए एक मंच बनाने का विचार रखा था लेकिन वह आगे बढ़ नहीं सका। तो क्या इसे आगे बढ़ाया जा सकता है? सबसे पहले यशवंत जी अपने विचार रखते हुए कहा कि यह स्वागतयोग्य पहल है और एक ग्रूप बनना चाहिए। जयराम जी ने बताया कि हम सबको एक साथ आना ही चाहिए और इस पर वह काफी समय से सोच भी रहे हैं। अमलेंदु जी ने भी इसे समयोचित माना। संजय जी ने भी कहा कि स्वार्थ छोड़कर समूह बनाना चाहिए। आशीष जी ने कहा कि यह मंच तो बनना ही चाहिए साथ ही एडिटर्स गिल्ड जैसे संगठन के बारे में भी सोचना चाहिए। इसके पश्चात् बैठक में संगठन के लिए चार-पांच नाम आए और सर्वसम्मति से ‘भारतीय वेब पत्रकार संघ’ नामक संगठन के गठन पर सहमति बनी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;strong&gt;बैठक में यह&lt;/strong&gt; भी तय हुआ कि इस संस्था को रजिस्टर्ड कराया जाए। फेसबुक, ब्लॉग और वेबसाइट बनाकर इससे सैकड़ों वेबपत्रकारों को जोड़ा जाए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;strong&gt;ठीक सवा 6 बजे&lt;/strong&gt; बैठक समाप्त हो गई यानी पूरे दो घंटे तक बैठक चली। इस बैठक की यह खासियत रही कि बड़े ही आत्मीय माहौल में और सहज तरीके से चर्चा हुई। कांस्टिट्यूशन क्लब से बाहर निकलते समय गेट पर ग्रूप फोटो लिए गए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
एक-दूसरे के अभिवादन के साथ सब विदा हुए।&lt;/div&gt;
</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://hitchintak.blogspot.com/feeds/7526367090691043132/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment/fullpage/post/7024567440226660873/7526367090691043132' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7024567440226660873/posts/default/7526367090691043132'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7024567440226660873/posts/default/7526367090691043132'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://hitchintak.blogspot.com/2012/10/blog-post.html' title='संवाद करें और साथ चलें'/><author><name>संजीव कुमार सिन्‍हा</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11879095124650917997</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg-VUG_8k4GcxEdCmjpiY_6UDali2WkziCy8QL3pvL6x98CxCQkSWCPT0QSOxfne88NMZUAxuRH02FkYn1eMUbfqb1lDlWyIjQte5L7cGqhL9x2KHht1Wlw7WNx98YJCQ/s220/Mintoo.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjwf_QRnL77uhVjW3eAo5a3ermrBvr1CWJLoK4Z3s4R07zxh0usHiJLVdZs39F_F_Ns3qoWOXmGf-srHKAlYY1evtTUQLfzNYOMM4WJxtZFC_MEnr4UNB7XGODv5OUgxkC6rYaxCNvOIuI/s72-c/23.jpg" height="72" width="72"/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7024567440226660873.post-3905061154140853438</id><published>2012-07-11T14:36:00.001+05:30</published><updated>2012-07-11T14:54:16.988+05:30</updated><title type='text'>दिल्‍ली में सिनेमा दर्शन</title><content type='html'>&lt;div dir=&quot;ltr&quot; style=&quot;text-align: left;&quot; trbidi=&quot;on&quot;&gt;
&lt;span style=&quot;font-family: Arial, Helvetica, sans-serif; line-height: 28px; text-align: -webkit-auto;&quot;&gt;काफी दिनों से श्रीमती जी की इच्‍छा थी कि दिल्‍ली में सिनेमा साथ नहीं देखा, हमें चलना चाहिए। और यह इच्‍छा गत 8 जुलाई को पूरी हुई। हिंदी के दस राष्‍ट्रीय समाचार-पत्र अपन प्रतिदिन देखते हैं लेकिन पढ़ते जनसत्ता हैं। इस अखबार में &#39;नगर में आज&#39; नाम से एक स्‍तंभ &amp;nbsp;है जिसमें उस दिन होने वाले कार्यक्रमों की सूचना होती है। इसी से हमें दिल्‍ली में आयोजित सेमिनार, संगोष्‍ठी और प्रदर्शनों की जानकारियां मिलती हैं। और हम समय निकाल कर अकसर जाते हैं। इसी स्‍तंभ से पता चला कि&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: Arial, Helvetica, sans-serif; line-height: 1.8; text-align: -webkit-auto;&quot;&gt;राजघाट स्थित राष्‍ट्रीय गांधी संग्रहालय&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: Arial, Helvetica, sans-serif; line-height: 1.8; text-align: -webkit-auto;&quot;&gt;&amp;nbsp;में सायं 4 बजे से शनिवार को अंग्रेजी और रविवार को हिंदी फिल्‍म दिखाई जाती है। 8 जुलाई को रविवार था। हमने श्रीमती जी को कहा कि चलो तैयार हो जाओ। ठीक साढ़े तीन बजे निकलना है। उनको सहसा विश्‍वास नहीं हुआ। लेकिन मेरी गंभीरता देख वह तैयार हो गई। तो अपने डेढ़ वर्षीय पुत्र के साथ हम राजघाट पहुंचे। जब हम पहुंचे तो फिल्‍म चल रही थी। हॉल में लगभग 50 लोगों के बैठने की व्‍यवस्‍था है लेकिन वहां बमुश्किल 15 लोग थे। फिल्‍म का नाम था- &#39;बापू ने कहा था..&#39;। 1962 में श्‍वेत और श्‍याम के कैनवास पर बनी इस फिल्‍म के निर्देशक थे विजय भट्ट, इन्‍होंने ही मशहूर फिल्‍म बैजू बावरा निर्देशित की थी। अपन गांधीजी के भक्‍त हैं इसलिए फिल्‍म का नाम जानकर मन प्रफुल्लित हो गया। पांच मिनट फिल्‍म चली होगी कि &#39;सार्थक&#39; ने अपना करतब दिखाना शुरू कर किया। वह बगल में पड़ी खाली कुर्सियों पर उधम-कूद मचाने लगा। श्रीमती जी गुस्‍सायीं। हमने कहा, ऐसा करो कि बगल में ही राजघाट है। यहीं बापू की समाधि है तब तक उसे देख आओ। वह &#39;सार्थक&#39; को गोद में लेकर बाहर निकल गई। फिल्‍म में मैं गांधीजी के अवतरित होने का इंतजार कर रहा था लेकिन वे प्रारंभ के दस मिनट तक दिखाई नहीं दिए। मैं भी बाहर निकला। वहां के विक्रय केंद्र में खड़ी एक महिला से पूछा, &#39;बापू ने कहा था..&#39; फिल्‍म कहां लगी ? महिला ने उसी हॉल की ओर इशारा किया। मैं फिर जाकर वहीं बैठ गया। देखता हूं कि सिनेमा में मोरारजीभाई एक जनसभा में बच्‍चों को उपदेश दे रहे हैं। वे बता रहे थे, &#39;बच्‍चों, गांधी जी सच बोलते थे और कहते थे हमेशा सच बोलना। चोरी नहीं करना। किसी को कष्‍ट नहीं पहुंचाना।&#39; दरअसल यह फिल्‍म गांधीवादी आदर्शों की पृष्‍ठभूमि में बनी है। इस फिल्‍म में चार-पांच नटखट बच्‍चे हैं। एक बार वे लोग पटाखे चलाते हैं और इसकी लुत्ती एक व्‍यक्ति की झोपड़ी पर पड़ती है। झोपड़ी धू-धूकर जल जाती है। इसे लेकर पंचायत बैठती है तो उसमें ये बच्‍चे शरारती हरकत करते हुए किसी और व्‍यक्ति का नाम लगा देते हैं। जिसका घर जला है उसके साथ एक सेठ छल रचता है। सेठ उससे कहता है कि हम तुम्‍हें घर बनवाने के लिए 300 रुपए देते हैं, इसके बदले यहां (स्‍टाम्‍प लगे सादे कागज पर) अंगूठा लगा दो, हम ये रुपए उस व्‍यक्ति से, जिसने तुम्‍हारा घर जलाया है उससे बात हो गई, ले लेंगे। और इस तरीके से सेठ उससे अंगूठे का निशान लगवाकर उसकी सारी जमीनें अपने नाम कर लेता है।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: Arial, Helvetica, sans-serif; line-height: 28px; text-align: -webkit-auto;&quot;&gt;चार-पांच जो नटखट बच्‍चे हैं उसमें से एक सेठ का भी बेटा है और यह बालक अपने पिता की कारस्‍तानी को अपनी आंखों से देखता है। उसे रात में नींद नहीं आती है। वो सोचता है। मोरारजी भाई द्वारा गांधीजी के कहे एक-एक शब्‍द उसके दिमाग में घूमने लगते हैं। वो तय करता है कि अपने पिता के इस कृत्‍य का विरोध करेगा। जब सेठ अपने दल-बल सहित, जिसका घर जला है, उसके जमीन पर हल चलाने पहुंचता है तो सेठ का बेटा सामने आकर खड़ा हो जाता है। वह जिद्द करता है कि पिताजी आपने गलत किया। हमने आपके छल-प्रपंच को अपनी आंखों से देखा है। उसके पिता नाराज होते हैं और घर लौट जाते हैं। बालक वहीं खेत में ही सत्‍याग्रह पर बैठ जाता है। उसके सभी नटखट दोस्‍तों को भी अपनी गलती का आभास होता है और वे भी उसके साथ हो जाते हैं। धीरे-धीरे गांव के और भी लोग बालक का साथ देने आ जाते हैं। सेठ पिता जमीन छोड़ने पर मजबूर होता है और इस तरह सच की जीत होती है। सत्‍यमेव जयते। ध्‍यान में आया कि यही तो भारत की परंपरा है। नचिकेता ने भी श्रेष्‍ठ आचरण परंपरा की अक्षुण्‍णता के लिए पिता से जिद किया था। परमात्‍मा से यही प्रार्थना है कि हमें नचिकेता और गांधीजी के प्रेरक पाथेय पर चलने की शक्ति दी।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;div style=&quot;font-family: Arial, Helvetica, sans-serif; line-height: 28px; text-align: -webkit-auto;&quot;&gt;
&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div style=&quot;font-family: Arial, Helvetica, sans-serif; line-height: 28px; text-align: -webkit-auto;&quot;&gt;
फिल्‍म समाप्‍त होने से दो मिनट पहले श्रीमती जी हॉल में आ गईं। उन्‍हें साफ-सुथरा बापू की समाधि ने प्रेरित किया। फिर हमने अपने सैमसंग मोबाइल से केन्‍द्र के परिसर में लगी बापू की मूर्तियों के सान्निध्‍य में तस्‍वीरें खिंचवायीं। घर आने के बाद श्रीमती जी ने कहा, &#39;बापू की समाधि, वहां का शांतिमय प्रेरक वातावरण, उनके चित्र, उनकी मूर्तियों को देखकर अच्‍छा लगा। थैंक यू।&#39;&lt;/div&gt;
&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;
&lt;a href=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgt2Dx9iyBS-qssdKOFZUvgtmuKYTe_zifuMBgZf6Pz2DgQgLGXiucL3tTLa8kSQBlvkzrwV88eOezad8Mu5bdVpaFgB0BitYYvY-RJ3I9sTmUH4kzHqpUgwzVeGOHrFoqdCPsL1HOXX1M/s1600/2012-07-08+17.07.48.jpg&quot; imageanchor=&quot;1&quot; style=&quot;margin-left: 1em; margin-right: 1em;&quot;&gt;&lt;img border=&quot;0&quot; height=&quot;240&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgt2Dx9iyBS-qssdKOFZUvgtmuKYTe_zifuMBgZf6Pz2DgQgLGXiucL3tTLa8kSQBlvkzrwV88eOezad8Mu5bdVpaFgB0BitYYvY-RJ3I9sTmUH4kzHqpUgwzVeGOHrFoqdCPsL1HOXX1M/s320/2012-07-08+17.07.48.jpg&quot; width=&quot;320&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;
&lt;a href=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEidUbUpC0bGr45jGcLpO4OH8xWokQogbYJ9kbPcNFKjCsB2QDcOu5l32jmIwlANR6Z_oeBdf6bw35B2essa6ulUHPd526gCzVzL3ay5ZwXIfO8PlpOFvFTrf8Fj7X1DAS_wDS0fyqEpO3w/s1600/2012-07-08+17.12.50.jpg&quot; imageanchor=&quot;1&quot; style=&quot;margin-left: 1em; margin-right: 1em;&quot;&gt;&lt;img border=&quot;0&quot; height=&quot;320&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEidUbUpC0bGr45jGcLpO4OH8xWokQogbYJ9kbPcNFKjCsB2QDcOu5l32jmIwlANR6Z_oeBdf6bw35B2essa6ulUHPd526gCzVzL3ay5ZwXIfO8PlpOFvFTrf8Fj7X1DAS_wDS0fyqEpO3w/s320/2012-07-08+17.12.50.jpg&quot; width=&quot;240&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;
&lt;a href=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjNhPRuFZtTNhode9eRTrvUlBwyj54rZ9OAR1MQNJ8OTK2wkzQG0SuqUwIJpTqklkuX8qEpp0O9y4jamtayi5KngNw20g6msCCPO2eJ6UoAc99Pt1L7ZnYnZTN-R7-DOb4wWXbpy9cc7pw/s1600/2012-07-08+17.13.13.jpg&quot; imageanchor=&quot;1&quot; style=&quot;margin-left: 1em; margin-right: 1em;&quot;&gt;&lt;img border=&quot;0&quot; height=&quot;240&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjNhPRuFZtTNhode9eRTrvUlBwyj54rZ9OAR1MQNJ8OTK2wkzQG0SuqUwIJpTqklkuX8qEpp0O9y4jamtayi5KngNw20g6msCCPO2eJ6UoAc99Pt1L7ZnYnZTN-R7-DOb4wWXbpy9cc7pw/s320/2012-07-08+17.13.13.jpg&quot; width=&quot;320&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;
&lt;a href=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgRkH3J-tkCndCE0NLl5Qu5yEdJK61xBKQ2fS28dt7PM2WffXuruMA8yywyy5WFtK4LmFSDsXsZcm204aeXTRMjSynFBis783qT8jojePoKJtpnR37jUmhoUUaY-lB9DdRf8XbvQlj-_O8/s1600/2012-07-08+17.14.13.jpg&quot; imageanchor=&quot;1&quot; style=&quot;margin-left: 1em; margin-right: 1em;&quot;&gt;&lt;img border=&quot;0&quot; height=&quot;240&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgRkH3J-tkCndCE0NLl5Qu5yEdJK61xBKQ2fS28dt7PM2WffXuruMA8yywyy5WFtK4LmFSDsXsZcm204aeXTRMjSynFBis783qT8jojePoKJtpnR37jUmhoUUaY-lB9DdRf8XbvQlj-_O8/s320/2012-07-08+17.14.13.jpg&quot; width=&quot;320&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;
&lt;a href=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjg5v2YPfpSRJx7OUWOQLfJPmBrcSDhGraRkR5IXoBFBlHaw8Hz8_kJjUw_YOndG5tI1_3idmmpfjWnLW-w3JnME-K4wI2XWBjdFWZOCtPiargc0aGN8YM1QmZUHtggxnDdMsi5rl07x3Y/s1600/2012-07-08+17.14.42.jpg&quot; imageanchor=&quot;1&quot; style=&quot;margin-left: 1em; margin-right: 1em;&quot;&gt;&lt;img border=&quot;0&quot; height=&quot;320&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjg5v2YPfpSRJx7OUWOQLfJPmBrcSDhGraRkR5IXoBFBlHaw8Hz8_kJjUw_YOndG5tI1_3idmmpfjWnLW-w3JnME-K4wI2XWBjdFWZOCtPiargc0aGN8YM1QmZUHtggxnDdMsi5rl07x3Y/s320/2012-07-08+17.14.42.jpg&quot; width=&quot;240&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;
&lt;a href=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEitDH1EQqwUPoiAcSyigNDep7SpSbhf-kmf_qgUlLtvP6iXY8Gyk0QkKtRN1Hk3Vrsb0mLE0gm8M0CQhm5bC3EUnOJhYrlG6alPBwNJs47FD-fv-SbQjXwpurNSeCttbFj34fPGY7U85kA/s1600/2012-07-08+17.15.36.jpg&quot; imageanchor=&quot;1&quot; style=&quot;margin-left: 1em; margin-right: 1em;&quot;&gt;&lt;img border=&quot;0&quot; height=&quot;240&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEitDH1EQqwUPoiAcSyigNDep7SpSbhf-kmf_qgUlLtvP6iXY8Gyk0QkKtRN1Hk3Vrsb0mLE0gm8M0CQhm5bC3EUnOJhYrlG6alPBwNJs47FD-fv-SbQjXwpurNSeCttbFj34fPGY7U85kA/s320/2012-07-08+17.15.36.jpg&quot; width=&quot;320&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;
&lt;a href=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhvmsy69BWnyGEJZDQUKOjhUQeiVyayGb7oGOJV3bWtFlpXNexz478u2D7DTiZy6nkHjCBY7TUit-Z26u8txk-P3nV_oE1JWx4eBYqRODNi9cWtXcswUeh31ciD8Et0-s56eMp5z4azuh4/s1600/2012-07-08+17.16.23.jpg&quot; imageanchor=&quot;1&quot; style=&quot;margin-left: 1em; margin-right: 1em;&quot;&gt;&lt;img border=&quot;0&quot; height=&quot;240&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhvmsy69BWnyGEJZDQUKOjhUQeiVyayGb7oGOJV3bWtFlpXNexz478u2D7DTiZy6nkHjCBY7TUit-Z26u8txk-P3nV_oE1JWx4eBYqRODNi9cWtXcswUeh31ciD8Et0-s56eMp5z4azuh4/s320/2012-07-08+17.16.23.jpg&quot; width=&quot;320&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;
&lt;a href=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiLDp53ZNnUadIKt35BI57IJ35lXFAzwfkcOUKeIEGfPNNNhP428Yam_f5eqqbd_LZhpgQI34Pa7i9zakBtrs6MxIGSOX2uDlu40bWs6HEZnB9xwJwDEk4bl3Xxt13g-DRgKca2DJhHICQ/s1600/2012-07-08+17.29.33.jpg&quot; imageanchor=&quot;1&quot; style=&quot;margin-left: 1em; margin-right: 1em;&quot;&gt;&lt;img border=&quot;0&quot; height=&quot;240&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiLDp53ZNnUadIKt35BI57IJ35lXFAzwfkcOUKeIEGfPNNNhP428Yam_f5eqqbd_LZhpgQI34Pa7i9zakBtrs6MxIGSOX2uDlu40bWs6HEZnB9xwJwDEk4bl3Xxt13g-DRgKca2DJhHICQ/s320/2012-07-08+17.29.33.jpg&quot; width=&quot;320&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;
&lt;a href=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEi6pcR-o4VSeAvO53rBdQ6zJsfbNFR3UGxecZxFVa4L_hNkARVNmiFsRgXPjWgo-CAkCC5y7FeyphS6y1VrBhJeagg9m42U7fE1aC9JHYpzm3KSCrBAvJTZEUQWS3DbAsK5FyJRNos506I/s1600/2012-07-08+17.30.53.jpg&quot; imageanchor=&quot;1&quot; style=&quot;margin-left: 1em; margin-right: 1em;&quot;&gt;&lt;img border=&quot;0&quot; height=&quot;240&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEi6pcR-o4VSeAvO53rBdQ6zJsfbNFR3UGxecZxFVa4L_hNkARVNmiFsRgXPjWgo-CAkCC5y7FeyphS6y1VrBhJeagg9m42U7fE1aC9JHYpzm3KSCrBAvJTZEUQWS3DbAsK5FyJRNos506I/s320/2012-07-08+17.30.53.jpg&quot; width=&quot;320&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;
&lt;a href=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEivnTykOdK9fjzCd9nO2MjF5x7D2GG0qWDRELvFhAfIBVhILf7TDjftizkSVm1Sbkzyl1w8dVSwUL2eTA1bHCcdtlXPe8RFWEG2I9RYCDOO57ojdp0qg5Mvz-P6V3uJN0_uAOc8GQuVW5U/s1600/2012-07-08+17.47.31.jpg&quot; imageanchor=&quot;1&quot; style=&quot;margin-left: 1em; margin-right: 1em;&quot;&gt;&lt;img border=&quot;0&quot; height=&quot;320&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEivnTykOdK9fjzCd9nO2MjF5x7D2GG0qWDRELvFhAfIBVhILf7TDjftizkSVm1Sbkzyl1w8dVSwUL2eTA1bHCcdtlXPe8RFWEG2I9RYCDOO57ojdp0qg5Mvz-P6V3uJN0_uAOc8GQuVW5U/s320/2012-07-08+17.47.31.jpg&quot; width=&quot;240&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;
&lt;a href=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiy8D7GdSXWHcVn75cgeRT55VtVZ-e9e616099yw6DXsCVXa5tCcomXN4Qw1mbKr9fQXF9VEMygYGr8pS_745b4zXpG4Y28k8XhhyCacMQWD74Q4gNH59QzPtpxizZsE_9l6LDahKy8t3Y/s1600/2012-07-08+17.47.56.jpg&quot; imageanchor=&quot;1&quot; style=&quot;margin-left: 1em; margin-right: 1em;&quot;&gt;&lt;img border=&quot;0&quot; height=&quot;240&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiy8D7GdSXWHcVn75cgeRT55VtVZ-e9e616099yw6DXsCVXa5tCcomXN4Qw1mbKr9fQXF9VEMygYGr8pS_745b4zXpG4Y28k8XhhyCacMQWD74Q4gNH59QzPtpxizZsE_9l6LDahKy8t3Y/s320/2012-07-08+17.47.56.jpg&quot; width=&quot;320&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;div class=&quot;separator&quot; style=&quot;clear: both; text-align: center;&quot;&gt;
&lt;a href=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEih7wIdaGGfQGoYAwTb33136kYudFB-CQvzY3gBDdZzy7ucpqoopnN-kIq_R-vFQ9BQen7wsekWhksN0SbRYNeMwkYcvPmwrISH427DFtq_bIe6B7Sm0f9_62VjTs2t-gSRHK8ait-M2Sw/s1600/2012-07-08+18.16.04.jpg&quot; imageanchor=&quot;1&quot; style=&quot;margin-left: 1em; margin-right: 1em;&quot;&gt;&lt;img border=&quot;0&quot; height=&quot;320&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEih7wIdaGGfQGoYAwTb33136kYudFB-CQvzY3gBDdZzy7ucpqoopnN-kIq_R-vFQ9BQen7wsekWhksN0SbRYNeMwkYcvPmwrISH427DFtq_bIe6B7Sm0f9_62VjTs2t-gSRHK8ait-M2Sw/s320/2012-07-08+18.16.04.jpg&quot; width=&quot;240&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;
&lt;div style=&quot;font-family: Arial, Helvetica, sans-serif; line-height: 28px; text-align: center;&quot;&gt;
&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://hitchintak.blogspot.com/feeds/3905061154140853438/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment/fullpage/post/7024567440226660873/3905061154140853438' title='5 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7024567440226660873/posts/default/3905061154140853438'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7024567440226660873/posts/default/3905061154140853438'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://hitchintak.blogspot.com/2012/07/blog-post.html' title='दिल्‍ली में सिनेमा दर्शन'/><author><name>संजीव कुमार सिन्‍हा</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11879095124650917997</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg-VUG_8k4GcxEdCmjpiY_6UDali2WkziCy8QL3pvL6x98CxCQkSWCPT0QSOxfne88NMZUAxuRH02FkYn1eMUbfqb1lDlWyIjQte5L7cGqhL9x2KHht1Wlw7WNx98YJCQ/s220/Mintoo.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgt2Dx9iyBS-qssdKOFZUvgtmuKYTe_zifuMBgZf6Pz2DgQgLGXiucL3tTLa8kSQBlvkzrwV88eOezad8Mu5bdVpaFgB0BitYYvY-RJ3I9sTmUH4kzHqpUgwzVeGOHrFoqdCPsL1HOXX1M/s72-c/2012-07-08+17.07.48.jpg" height="72" width="72"/><thr:total>5</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7024567440226660873.post-7441748031874656899</id><published>2011-06-28T09:17:00.008+05:30</published><updated>2011-06-28T20:03:27.989+05:30</updated><title type='text'>एक वामपंथी और एक राष्‍ट्रवादी के बीच फेसबुक पर शब्‍द-युद्ध</title><content type='html'>&lt;div style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: Mangal&quot;&gt;मित्र पंकज झा &#39;फेसबुक&#39; पर अपने विचारों से रौशनी बिखेरते रहते हैं&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot;&gt; &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;और यदा-कदा अपने सवालों से जन-चेतना को झकझोरते रहते हैं। गत शुक्रवार को उन्‍होंने वहां &lt;a href=&quot;http://www.facebook.com/jay7feb/posts/2197398377789&quot;&gt;एक सवाल&lt;/a&gt; रखा।&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: Mangal&quot;&gt;इस सवाल को लेकर कई टिप्‍पणियां आईं। लेकिन यहां समर &#39;अनार्य&#39; और मेरे बीच लंबी बहस हुई। पहले परिचय जान लें :&lt;/span&gt; &lt;/p&gt;  &lt;a href=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgMssRWJgQsKIHbybwxn_5TUwIHaCS2Hwk9Dl3YiM84M1YbnjaiYAlx3wfkNQ78plOr4e4sEwuzwpGLz-MYbT6XB5CvQqhSBc3QUVNAWkEw3G-GnG7uSxS6pspX101cqXWGJsM9UxFZaU8/s1600/pankaj.jpg&quot; onblur=&quot;try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}&quot;&gt;&lt;img style=&quot;float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 75px; height: 75px;&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgMssRWJgQsKIHbybwxn_5TUwIHaCS2Hwk9Dl3YiM84M1YbnjaiYAlx3wfkNQ78plOr4e4sEwuzwpGLz-MYbT6XB5CvQqhSBc3QUVNAWkEw3G-GnG7uSxS6pspX101cqXWGJsM9UxFZaU8/s200/pankaj.jpg&quot; border=&quot;0&quot; alt=&quot;&quot; id=&quot;BLOGGER_PHOTO_ID_5623121612795844018&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot; &gt;&lt;b&gt;पंकज झा। &lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot; style=&quot;font-family: Mangal; &quot;&gt;&lt;b&gt;माखनलाल पत्रकारिता विश्‍वविद्यालय से एमए। &lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot; style=&quot;font-family: Mangal; &quot;&gt;&lt;b&gt;राजनीतिक टिप्‍पणीकार।&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;a href=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiJ8yqmsqz3iVKhOafwkK_nU_ftz5xEgV7x5aNeES-zvQ8KKtbEDGQGOMn7qJ1sy1c85BpYeTIdxPagxPTXrd5YX2dQ1hSzjRAZrXb-PM5lakHvURLZktclFpwsIeRopE4rYTIoOFMITpA/s1600/sam3.jpg&quot; onblur=&quot;try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}&quot;&gt;&lt;img style=&quot;float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 75px; height: 75px;&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiJ8yqmsqz3iVKhOafwkK_nU_ftz5xEgV7x5aNeES-zvQ8KKtbEDGQGOMn7qJ1sy1c85BpYeTIdxPagxPTXrd5YX2dQ1hSzjRAZrXb-PM5lakHvURLZktclFpwsIeRopE4rYTIoOFMITpA/s200/sam3.jpg&quot; border=&quot;0&quot; alt=&quot;&quot; id=&quot;BLOGGER_PHOTO_ID_5623121061170443026&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: Mangal&quot;&gt;समर &#39;अनार्य&#39;। नक्‍सलवादी-मार्क्‍सवादी कार्यकर्ता। जवाहरलाल नेहरू विश्‍वविद्यालय में रिसर्च स्‍कॉलर।&lt;/span&gt; &lt;/b&gt;&lt;/p&gt;  &lt;a href=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjWhzc0cuYiv7xTgY76IwNWkj8nx7i80GcD23Wd0KE02nqGiRlcLKFLLtGSdrousyPnGNJaPhcDamDEp7PbYIqmo4b8clrBi-d-hkNg8Fc1giGagg-KFpXiRQEvIXyI9J9WCnAga0zHX-I/s1600/sanjeev.jpg&quot; onblur=&quot;try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}&quot;&gt;&lt;img style=&quot;float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 75px; height: 75px;&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjWhzc0cuYiv7xTgY76IwNWkj8nx7i80GcD23Wd0KE02nqGiRlcLKFLLtGSdrousyPnGNJaPhcDamDEp7PbYIqmo4b8clrBi-d-hkNg8Fc1giGagg-KFpXiRQEvIXyI9J9WCnAga0zHX-I/s200/sanjeev.jpg&quot; border=&quot;0&quot; alt=&quot;&quot; id=&quot;BLOGGER_PHOTO_ID_5623121165756599010&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: Mangal&quot;&gt;&lt;b&gt;संजीव सिन्‍हा। रा.स्‍व.संघ का स्‍वयंसेवक। गुरू जंभेश्‍वर विश्‍वविद्यालय से पत्रकारिता में एमए। &lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: Mangal&quot;&gt;&lt;b&gt;आपसे निवेदन है कि इस बहस को पढ़ें :&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: Mangal&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;blockquote&gt;&lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: Mangal&quot;&gt;&lt;b&gt;पंकज झा का सवाल ये रहा :&lt;/b&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;Pankaj Jha ....&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;गोरी&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;गजनबी&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;बाबर&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;तैमूर&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;नादिरशाह&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;चंगेज खां&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;फिरंगी&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: Mangal&quot;&gt;डच&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;पुर्तगाली&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;फ्रांसीसी और कांग्रेसी इन सबमें सबसे बड़ा लुटेरा कौन &lt;/span&gt;???&lt;/p&gt;&lt;/blockquote&gt;&lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Samar Anarya &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;पंकज जी-- बाबर को इस सूची में (आपकी राजनीतिक विवशता समझता हूँ फिर भी सच कहने की बुरी आदत है सो है) न ही शामिल किया जाय. बाबर हिन्दुस्तान में &lt;/span&gt;&#39;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;बसने&lt;/span&gt;&#39; &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;आया था&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;उसकी पीढियां यही रहीं&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;यहीं की मिट्टी में दफ़न हुईं. उनका बनाया खजाना भी यहीं रहा न कि किसी स्विस बैंक के किसी छिपे हुए अकाउंट में. उनकी&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;और उनकी पीढ़ियों के&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;बनाये रिश्ते&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: Mangal&quot;&gt;महल&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;किले&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;सब कुछ यहीं है. अब उनकी तुलना इन लोगों से&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;जरा ठीक नहीं &lt;/span&gt;lagtee..&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;&lt;b&gt;Samar Anarya &lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;आगे&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;इस सूची में कारगिल शहीदों के ताबूत घोटाले वाली&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;होटल सेंटूर वाली&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;पेट्रोल पम्प घोटाले वाली&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;बंगारू लक्ष्मण वाली&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;येदुरप्पा वाली&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;सीमेंट घोटाले वाली भाजपा को भी शामिल कर लें&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;यह आग्रह रहेगा.. बेशक कोंग्रेस शायद फिर भी बड़ी साबित हो&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;पर वह तो हर मामले में भाजपा से आगे ही रही है&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;साम्प्रदायिक नरसंहारों तक.. २००२ गुजरात १९८४ दिल्ली से बहुत पीछे थोड़े ही &lt;/span&gt;hoga..&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Sanjeev Kumar Sinha &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;लगता है समर नाम के प्राणी के आंखों पर लाल चश्‍मा लगा है। इसलिए भ्रष्‍ट हो रहे लाल खून का रंग पहचाने में उन्‍हें दिक्‍कत हो रही है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;mso-bidi-font-family: &amp;quot;Times New Roman&amp;quot;&quot;&gt;‎&lt;/span&gt;(&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;1) ज्योति बसु के बेटे चंदन बसु की अकूत संपत्ति का राज क्‍या है। आज कोलकाता में कितनी ही बेशकीमती इमारतें खड़ी हैं जिनको बसु परिवार के स्वामित्व वाला माना जाता है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;mso-bidi-font-family: &amp;quot;Times New Roman&amp;quot;&quot;&gt;‎&lt;/span&gt;(&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;2) सरकारी उपक्रम बंगाल लैम्प से बल्ब लेकर विभिन्‍न सरकारी विभागों में आपूर्ति का ठेका चंदन बसु को मिला। उन्होंने न तो बंगाल लैम्प की २५-३० करोड़ की उधारी चुकाई&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;न ही सरकारी विभागों को आपूर्ति ही की। बाद में उन्होंने बिस्किट फैक्टरी डाली।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;mso-bidi-font-family: &amp;quot;Times New Roman&amp;quot;&quot;&gt;‎&lt;/span&gt;(&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;3) केरल माकपा सचिव विजयन ने वर्ष 1997 में उन्होंने एक कनाडियाई कंपनी को ठेका देने के एवज में पैसे लिए थे।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;mso-bidi-font-family: &amp;quot;Times New Roman&amp;quot;&quot;&gt;‎&lt;/span&gt;(&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;4) माकपा मुखपत्र देशाभिमानी पर एक फरार लाटरी माफिया सांतियागो मार्टिन से करोड़ों रुपए लेने का खुलासा हुआ था।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;mso-bidi-font-family: &amp;quot;Times New Roman&amp;quot;&quot;&gt;‎&lt;/span&gt;(&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;5) केरल के कम्युनिस्ट नेताओं ने शराब माफिया से धन लिया। कुछ दिनों पहले कोलम और तिरुअनंतपुरम् में शराब से हुई मौतों के बारे में जांच कर रहे न्यायमूर्ति वी.पी. मोहनकुमार आयोग ने तीन प्रमुख कम्युनिस्ट नेताओं को इस कांड में आरोपी पाया। जांच आयोग की रपट के अनुसार इन तीनों ने शराब व्यापारी मणिकन से भारी मात्रा में धन लेकर उसे लाभ पहुंचाया।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;mso-bidi-font-family: &amp;quot;Times New Roman&amp;quot;&quot;&gt;‎&lt;/span&gt;(&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;6) माकपा सांसद नीलोत्‍पल बसु के एनजीओ &lt;/span&gt;&#39;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;ग्रामीण संचार सोसाइटी (ग्रासो)&lt;/span&gt;&#39; &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;ने करोडों रूपए के घोटाले को अंजाम दिए हैं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;mso-bidi-font-family: &amp;quot;Times New Roman&amp;quot;&quot;&gt;‎&lt;/span&gt;(&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;7) साल्टलेक का जमीन आबंटन के घोटाले को कौन भूल सकता है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;mso-bidi-font-family: &amp;quot;Times New Roman&amp;quot;&quot;&gt;‎&lt;/span&gt;(&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;8) पश्चिम बंगाल में अनाज घोटाले ने कॉमरेडों की पोल खोल दी।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: Mangal&quot;&gt;9) वक्फ घोटाला ने कॉमरेडों के अल्पसंख्‍यक हितैषी होने के झूठ को उजागर कर दिया&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;जिसमें लगभग १६०० करोड़ रुपए की संपत्ति का हेरफेर था।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;mso-bidi-font-family: &amp;quot;Times New Roman&amp;quot;&quot;&gt;‎&lt;/span&gt;(&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;10) पीएल एकाउंट घोटाला लगभग आठ सौ करोड़ का माना जाता है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;mso-bidi-font-family: &amp;quot;Times New Roman&amp;quot;&quot;&gt;‎&lt;/span&gt;(&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;11) हाल का नरेगा मस्टर रोल घोटाला के बारे में आप क्‍या कहेंगे।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: Mangal&quot;&gt;(11) केजीबी से कम्‍युनिस्‍टों ने पैसे खाए।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;mso-bidi-font-family: &amp;quot;Times New Roman&amp;quot;&quot;&gt;‎&lt;/span&gt;(&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;12) पश्चिम बंगाल में तीन दशक से सत्ता पर काबिज वामदलों का कैडर तो भ्रष्टाचार का जैसे पर्याय बन चुका था। वहां माकपा और भाकपा कैडर को राशनकार्ड से लेकर ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए घूस खिलाने के आरोप लगे हैं। वामदलों के कैडर ने भ्रष्टाचार को संस्थागत रूप दे रखा था। यही कारण है कि आम लोगों ने वामदलों के आतंक से तंग आकर जमीनी स्तर पर किसानों और गरीबों की लड़ाई लड़ने वाली तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी को वोट दिया।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Samar Anarya &lt;span lang=&quot;HI&quot;&gt;‎&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;Pankaj &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;भाई.. देखिये&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: Mangal&quot;&gt;मेरी कही बात फिर से सही साबित हो रही है.. आप जैसे भले संघी&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;जिनसे बातचीत की संभावना एक सार्थक काम लगता हो कितने कम हैं.. संजीव कुमार सिन्हा जैसे ही लोग ज्यादा मिलते हैं..&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Sanjeev Kumar Sinha &lt;span lang=&quot;HI&quot;&gt;‎&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;मेरी आशंका सही साबित हुई। समर &lt;/span&gt;&#39;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;लालू&lt;/span&gt;&#39; &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;ही निकला। पंकज ये बताओ जरा कि ये पढा लिखा भी है कि नहीं। इसके इतिहासबोध पर तरस ही खाया जा सकता है। &lt;/span&gt;&#39;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;बाबर भारत में बसने नहीं आया था कॉमरेड&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;वह भारत को लूटने आया था।&lt;/span&gt;&#39;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Samar Anarya &lt;span lang=&quot;HI&quot;&gt;‎&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;@&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;संजीव कुमार सिन्हा साहब.. बिलकुल ठीक पहचाना आपने.. समर नाम के इस प्राणी की आँखों पर खांटी लाल चश्मा चढ़ा है.. (और जानते ही होंगे की लाल रंग हमेशा भगवा से गाढ़ा होता है).. बाकी मैं कोई भी प्राणी सही आपको इंसान मानता हूँ..(सबको ही मानता हूँ).. आपसे अलग हूँ ना अभी यह चेतना गयी नहीं&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Sanjeev Kumar Sinha &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;सही बात है कि लाल रंग हमेशा भगवा से गाढ़ा होता है। लेकिन ये भूल गए कि काला रंग लाल से भी गाढ़ा होता है। लाल की बजाए काली पट्टी आंखों पर बांध लो तो अच्‍छा रहेगा।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Samar Anarya &lt;span lang=&quot;HI&quot;&gt;‎&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;@&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;आगे&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;संजीव जी.. आपके बताये ये सारे घोटाले सही भी हों तो कारगिल के शहीदों के ताबूत बेच कर पैसा खा जाने से कम ही गलीज हरकत हैं के नहीं&lt;/span&gt;? &lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: Mangal&quot;&gt;और उसके बाद आप के बताये इन सारे घोटालों की रकम जोड़ कर भी केवल और केवल पेट्रोल पम्प घोटाले (राम नाईक का नाम याद है&lt;/span&gt;?) &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;से कम ही होगी..&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Sanjeev Kumar Sinha &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;दूसरी बात कि जॉर्ज फर्नांडिस देश के ईमानदार नेता है। उस पर थूकना चांद पर थूकने के बराबर है। हश्र मालूम होगा कि इससे क्‍या फायदा होगा। यहां भी सामान्‍य ज्ञान के बारे में तुम्‍हारी हालत पतली है। सीबीआई ने कथित ताबूत घोटाले मामले में जॉर्ज को क्‍लीन चिट दे दी थी।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Samar Anarya &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;mso-bidi-font-family:&amp;quot;Times New Roman&amp;quot;&quot;&gt;‎&lt;/span&gt;Pankaj&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt; भाई.. बाबासाहेब की एक प्रसिद्द उक्ति याद आ गयी-- मैं पैदा हिन्दू जरूर हुआ था पर मरूँगा नहीं.. &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: Mangal&quot;&gt;अब मैं ठहरा घनघोर नास्तिक&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: Mangal&quot;&gt;जो हिन्दू ही नहीं है तो संघी क्या होगा&lt;/span&gt;? &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;आगे&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;बचपन में एक छोटे से कसबे में खेलने की और जगहों की अनुपस्तिथि में &lt;/span&gt;&#39;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;शाखा&lt;/span&gt;&#39; &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: Mangal&quot;&gt;जाने की मजबूरी को समझदारी की पहली सीढ़ी पर कदम रखते ही दुरुस्त कर लिया था.. अब तो संघ की कुत्सित मानसिकता को (संघियों को नहीं&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;वह तो अपने ही भटके हुए लोग हैं) ख़त्म करना ही ध्येय भी है लक्ष्य भी&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Sanjeev Kumar Sinha &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;ये तुमने कौन से हिंदू धर्मग्रंथों में पढ़ लिया कि नास्तिक हो जाने पर हिंदू नहीं हो सकता। यहां भी तुम्‍हारी जानकारी पर तरस आता है। हिंदू धर्म के अधिकांश दर्शन नास्तिक दर्शन ही है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Sanjeev Kumar Sinha &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;बाबा साहब ने कहा कि &lt;/span&gt;&#39;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;मैं पैदा हिन्दू जरूर हुआ था पर मरूँगा नहीं..&lt;/span&gt;&#39; &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;ठीक बात है। परन्‍तु सब जानते हैं कि उनका निधन हिंदू के नाते ही हुआ। बुद्ध भी हिंदू धर्म में भगवान माने जाते हैं और बौद्ध भी हिंदू धर्म का अभिन्‍न हिस्‍सा है। लेकिन यह भी बात याद रखो कि तुम्‍हारे बड़े बड़े कॉमरेड उन्‍हें &lt;/span&gt;&#39;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;लालू&lt;/span&gt;&#39; &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;न बना सके। मौलवी उन्‍हें मुसलमान न बना सके और कथित म‍शिनरी उन्‍हें ईसाई न बना सके। प्रखर राष्‍ट्रवादी बाबा साहब की जय।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Samar Anarya &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;संजीव कुमार सिन्हा-- अच्छा हुआ जो अपने असली वाले स्तर पर उतर आये भाई.. हम लालू सही तुम तो &lt;/span&gt;&#39;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;रामू काका&lt;/span&gt;&#39; &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: Mangal&quot;&gt;भी नहीं मालूम हो पाए ठीक से.. काफी अनपढ़ और जाहिल किस्म के मालूम पड़ते हो भाई.. थोडा पढ़ लिख लेते&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;पर छोडो यार&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;तुम जैसों को किताबों से क्या काम&lt;/span&gt;?&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Sanjeev Kumar Sinha &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;लालू कहने पर भौं भौं क्‍यों कर रहो हो। तुम्‍हीं ने तो कहा था तुम्‍हारे आंखों पर लाल चश्‍मा चढ़ा है। वैसे सच में मेरा किताबों से क्‍या काम। मैं तो लाल खटमल मारने की दवा बेचता हूं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Samar Anarya &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;दूसरी बात&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: Mangal&quot;&gt;की जार्ज फर्नान्डीज़ ईमानदार हैं की नहीं तुम्ही तय करोगे&lt;/span&gt;? &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;ईमानदारी का सर्टिफिकेट बांटने वाले क्लर्क हो क्या रामू काका&lt;/span&gt;? &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;और उसको भी घूस ले के बनाते हो क्या&lt;/span&gt;?&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Sanjeev Kumar Sinha&lt;/span&gt;&lt;/b&gt; &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;भारतीय राजनीति में जॉर्ज फर्नांडिस एक उम्‍मीद का नाम है&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;जिसने आपातकाल के दिनों में कांग्रेस और वामपंथियों के गठजोड़&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;जिसने जनता पर जमकर अत्‍याचार किया&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;को ध्‍वस्‍त कर दिया। इसलिए जॉर्ज का नाम सुनते ही कॉमरेड सांड की तरह भड़कते हैं&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: Mangal&quot;&gt;हमें मालूम है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Samar Anarya &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;और घूस ले कर ईमानदारी का सर्टिफिकेट बनाते ही हो तो लगे हाथ एक येदुरप्पा के लिए भी बना देते&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: Mangal&quot;&gt;क्या पता एकाध सर्वेंट क्वार्टर ही मिल जाता &lt;/span&gt;tumhe..&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Samar Anarya&lt;/span&gt;&lt;/b&gt; &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;नास्तिक होने पर हिन्दू नहीं हो सकता अपनी यह मैंने तो कहीं पढ़ा हो पर जरा ग्रंथों में जरा भी गति हो तो नास्तिक दर्शनों का नाम भी बता देते. सांख्य&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;वैशेषिक आदि अदि.. और फिर यह की वेदान्त के अलावा और कौन कौन से दर्शन हिंदूओ में प्रचलित हैं&lt;/span&gt;? &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;पर फिर वही&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;तुम जैसे अनपढ़ जाहिलों को तर्कों से क्या काम&lt;/span&gt;?&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Sanjeev Kumar Sinha &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;सच में तुम्‍हें मालूम नहीं था कि हिंदू धर्म में नास्तिकों भी जगह है। सच सच बोलो&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: Mangal&quot;&gt;मैंने ज्ञान दिया तो गूगल से जानकारी लेकर यहां टीप दिए हो न। अन्‍यथा तुम यह नहीं कहते कि &lt;/span&gt;&#39;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;अब मैं ठहरा घनघोर नास्तिक&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;जो हिन्दू ही नहीं है&lt;/span&gt;&#39;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Samar Anarya&lt;/span&gt;&lt;/b&gt; &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;जरा बाबा साहब को पढ़ लेते यार&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;दीक्षाभूमि में बाबा साहब ने &lt;/span&gt;&#39;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;धर्म परिवर्तन&lt;/span&gt;&#39; &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;किया था.. फिर विश्व में तो छोडो भारत में धर्मों की सूची देख लेते.. बौद्ध धर्म हिन्दू धर्म का हिस्सा नहीं है.. इतनी सी बात जान पाते.. बाकी यह तो तुम हिन्दुओं की आदत ही रही है जिसने चुनौती दी और &lt;/span&gt;&#39;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;डंडा&lt;/span&gt;&#39; &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: Mangal&quot;&gt;कर दिया उसको तुमने भगवान् घोषित कर दिया.. विष्णु का अवतार बना दिया.. एक सलाह है&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;हिन्दुस्तान के बाहर (कभी गलती से) जा पाओ तो यह कह भी मत देना नहीं तो बौद्ध बहुत मारेंगे.. और फिर दूतावास ही बचाएगा.. वह भी डिपोर्ट &lt;/span&gt;karke..&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Sanjeev Kumar Sinha&lt;/span&gt; &lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;बाबा साहब ने भारत की माटी से उपजे दर्शन को ही स्‍वीकार किया था न कि पश्चिम से आयातित विचारधारा और धर्म को। और यह तो जानते ही हो कि हिंदू धर्म ने बुद्ध को भगवान का अवतार बताया है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Samar Anarya &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;आखिर में&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: Mangal&quot;&gt;मेरी आँख में लाल पत्ती ही ठीक है&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;तुम भाई भगवे से खुश रहो.. हाँ अगर चाहो तो काले रंग की एक लंगोट सिला लो&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;नजर नहीं लगेगी..&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Sanjeev Kumar Sinha&lt;/span&gt;&lt;/b&gt; &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;और अंत में समर&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;लंगोट काले रंग का हो चलेगा लेकिन आंखों पर काली पट्टी हो तो धड़ाम से गिर पड़ोगे।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Samar Anarya &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;बहुत हुआं हुआं कर लेते हो यार संजीव..लेकिन याद है न उस हुआं हुआं करने वाले प्राणी (बोले तो तुम) की कहानी जिसने एक बार दहाड़ने की कोशिश की थी&lt;/span&gt;? &lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: Mangal&quot;&gt;झूठे हुआं हुआं मत करो यार.. सबसे पहले तुम्ही बन्दर की तरह लंका में कूदे थे &lt;/span&gt;Pankaj &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;भाई को बताते हुए की इस प्राणी की आँखों पर लाल चश्मा चढ़ा हुआ है..वैसे संभव है की भूल गए हो&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;तुम जैसे लोग २४ घंटे से ज्यादा कुछ याद रखें भी कैसे.. रटने की भी सीमाँ होती है..&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Sanjeev Kumar Sinha &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;हम तो हनुमान जी के सेवक हैं तो बन्‍दर की तरह लंका में कूदेंगे ही। और अन्‍याय&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;अनीति और अनाचार के प्रतीक कमीनिस्‍टों को जला देंगे&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;मिटा देंगे।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Samar Anarya&lt;/span&gt;&lt;/b&gt; &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;रही बात तुम जैसे बेवकूफों से ज्ञान लेने की तो इस पर तो हंस भी नहीं सकता.. खैर&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;हे गूगल के दुलारे&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;विकिपीडिया के मारे बेचारे&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;यह लिंक देख लेना आर इस पर हुई बहस भी..३ मार्च २०११(दिन गिन पाओ तो आज से कम से कम ३ महीने पहले की नास्तिकता पर बहस है मेरी यह) &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;http://mohallalive.com/&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;2011/03/03/&lt;/span&gt;census-and-social-bias/comment-page-&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;2/&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Sanjeev Kumar Sinha&lt;/span&gt;&lt;/b&gt; &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;mso-bidi-font-family:&amp;quot;Times New Roman&amp;quot;&quot;&gt;‎&lt;/span&gt;&#39;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;प्रत्यक्षं किम् प्रमाणम।&lt;/span&gt;&#39; &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;कहीं और खंगालने क्‍यों जाऊं। यहां तुम रंगे हाथों पकड़े गए हो और अब उससे मुकर नहीं सकते कि &lt;/span&gt;&#39;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;अब मैं ठहरा घनघोर नास्तिक&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;जो हिन्दू ही नहीं है&lt;/span&gt;&#39;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Samar Anarya &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;आँखे खुली कुछ की अभी भी गूगल पर छुछुआ रहे हो&lt;/span&gt;?&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;&lt;b&gt;Sanjeev Kumar Sinha &lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;हम काहे छुछुआएं जी&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;तुम्‍हीं छिछिआओ।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Samar Anarya&lt;/span&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt; &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;और रही बात जार्ज फर्नान्दिज़ की&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;तो तुम्हारे ऊपर ठीक से तरस भी नहीं खा सकता.. लगाये रहो उनसे उम्मीद..दो चुनाव से तो पा ही रहे हो.. तीसरा भी आ ही रहा है..&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Sanjeev Kumar Sinha &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;ठीक है हम दो चुनाव से पानी पी रहे हैं लेकिन जनता ने अभी भी हमें 9 राज्‍यों में शासन करने का दायित्‍व सौंपा हुआ है। और भाई कॉमरेड&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;तुम्‍हारा हाल क्‍या है। तीन राज्‍य में ही सिमटे रहे हो और इस बार तो दो से भी निपटा दिए गए। कॉमरेड होते तो इस तरह के तर्क नहीं गढ़ते। वास्‍तव में तुम मार्क्‍सवाद का लबादा ओढ़े छुपे कांग्रेसी हो।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Samar Anarya &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;और यार झूठ बोलते हुए शर्म नहीं आती&lt;/span&gt;? &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;बाबा साहब ने &lt;/span&gt;&#39;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;धर्म परिवर्तन&lt;/span&gt;&#39; &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;किया था या नहीं&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;यह पूछा था मैंने.. अब भारत की माटी और विदेश की माटी पर काहे उतर आ रहे हो&lt;/span&gt;? &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;फिर से&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;अगर कभी भारत के बाहर जाने का मौका मिले (मुश्किल लगता है तुम्हारे लिए नेपाल और भूटान छोड़कर पर फिर भी)..गलती से बौद्ध धर्म को हिन्दू धर्म का हिस्सा मत बोल देना.. बहुत &lt;/span&gt;pitoge&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Sanjeev Kumar Sinha &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;पहले संविधान का अध्‍ययन करो मित्र। संविधान की धारा २५ में स्पष्ट कहा गया है कि जैन और बौद्ध धर्म हिंदू धर्म का अंग हैं। संविधान विरोधी बातें कहने से बाज आओ वरना जानते ही हो भारतीय पुलिस थर्ड डिग्री का प्रयोग में माहिर है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Samar Anarya &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;और बड़े अनपढ़ मालूम पड़ते हो यार&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;तुम जैसों की आँखे वहीं होती हैं जहाँ लंगोट बंधता है.. संभल कर चलना.. नहीं ऑंखें और वह दोनों बंद हो गया तो गूगल से देख देख ज्ञान कहाँ से &lt;/span&gt;doge?&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Sanjeev Kumar Sinha &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;काले लंगोट बांधने से स्‍वस्‍थ रहोगे और आंखों पर पट्टी बांध ली तो विकलांग हो जाओगे। समझे डियर।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Samar Anarya &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;अमे संजीव कुमार सिन्हा.. तुम केवल हनुमान जी के सेवक ही नहीं बुद्धि से भी बन्दर ही हो में.. और चाहे जिस के प्रातीक कम्युनिस्टों को जला देने&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;मिटा देने की तुम्हारी ख्वाहिश भी उतनी ही पुराणी है जितनी हनुमान की पूंछ में लगी आग.. तो फरफरा लो में// होगा कुछ नहीं &lt;/span&gt;usse&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Sanjeev Kumar Sinha &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;कम्‍युनिस्‍टों को हम आज भी मिटा रहे हैं मित्र&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;मध्‍यप्रदेश&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;छत्तीसगढ़&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;कर्नाटक&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: Mangal&quot;&gt;उत्तराखंड&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;हिमाचल प्रदेश&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;गुजरात आदि प्रदेशों में कोई है कम्‍युनिज्‍म का नामलेवा। राष्‍ट्रवादी ताकतों की अगुवाई में जनता ने कमीनिस्‍टों को दफन कर दिया है। हम तो दनदना रहे हैं&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;फरफरा तुम रहे हो&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;अंतिम लौ की तरह&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;बस अब बुझने ही वाले हो।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Samar Anarya &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;बुरबके हो का में संजीव कुमार सिन्हा.. खैर समझ आ रहा है.. तुम्हारा नहीं तुम्हारी .. का कसूर है.. जिन्दगी भर मुंशीगिरी किये.. मौलिक कुछ सोचे नहीं..तो अब ही तुमसे क्या &lt;/span&gt;UMMED..&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Samar Anarya &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;और में बेवकूफ शिरोमणि.सिन्हा जरा संविधान की धारा 25 काअध्ययन भी कर लेते.. कोई संघी बौद्धिक में बताया और तुम कूद पड़े बानरोचित गुण के प्रदर्शन में.. (खैर गलती तुम्हारी अही तुम्हारी .... की है.. आज तक तय ही नहीं कर पाए हो की हो कहाँ.. तो..&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Samar Anarya&lt;/span&gt;&lt;/b&gt; &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;ई लो.. पढ़ लो धारा२५-- 25. &lt;/span&gt;Freedom of conscience and free profession, practice and propagation of religion&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: Mangal&quot;&gt;(1) &lt;/span&gt;Subject to public order, morality and health and to the other provisions of this Part, all persons are equally entitled to freedom of conscience and the right freely to profess, practise and propagate religion&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: Mangal&quot;&gt;(2) &lt;/span&gt;Nothing in this article shall affect the operation of any existing law or prevent the State from making any law&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: Mangal&quot;&gt;(&lt;/span&gt;a) regulating or restricting any economic, financial, political or other secular activity which may be associated with religious practice;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: Mangal&quot;&gt;(&lt;/span&gt;b) providing for social welfare and reform or the throwing open of Hindu religious institutions of a public character to all classes and sections of Hindus Explanation I The wearing and carrying of kirpans shall be deemed to be included in the profession of the Sikh religion Explanation II In sub clause (b) of clause reference to Hindus shall be construed as including a reference to persons professing the Sikh, Jaina or Buddhist religion, and the reference to Hindu religious institutions shall be construed accordingly&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;&lt;b&gt;Sanjeev Kumar Sinha &lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;कॉपी पेस्‍ट करने की बजाय जरा संविधान की धारा का हिंदी भावार्थ ठीक से समझ लेते तो तुम्‍हें गलतफहमी नहीं होती।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Samar Anarya &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;अब बताओ में झूठे की कालज बी के तहत समाहित होने और तुम्हारे मुताबिक़ एक होने में फर्क है की नहीं.. बाकी मैं समझ सकता हूँ की गलती तुम्हारी नहीं तुम्हारी .... की है.. समझदारी की ही कमी है तुम्ही.. लिखना सीखे पढना नहीं.. मुंशी ही ठहरे ना बाभनों के दलाल तुम..&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;&lt;b&gt;Sanjeev Kumar Sinha&lt;/b&gt; &lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;मित्र&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;हमारी विचारधारा राष्‍ट्रवादी विचारधारा है। जो क्षेत्रवाद&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;पंथवाद&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;जातिवाद के संकीर्ण दायरों से मुक्‍त होकर रगों-रगों में राष्‍ट्रीयता का संचार करती है। बहस में तुम्‍हारी हार हो रही है तो तुम नीचता पर उतर आए हो। सही बोले कि &lt;/span&gt;&#39;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: Mangal&quot;&gt;मुंशी ही ठहरे ना बाभनों के दलाल तुम..&lt;/span&gt;&#39;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;। मैं मुंशी किसी बाभन पंकज झा की दलाली नहीं कर रहा बस सच को सच बता रहा हूं तो तुम्‍हारी फट रही है। जातिगत आक्षेप यह साबित करता है कि मार्क्‍सवाद की सड़ांध ने तुम्‍हारे दिमाग को प्रदूषित कर दिया है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Samar Anarya&lt;/span&gt;&lt;/b&gt; &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;नास्तिकता पे बात ही न करो में.. औकात समझ आ गयी तुम्हे अपनी तो भाग रहे हो.. छिछिआओ में..&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Samar Anarya &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;और बाकी सिन्हा जी.. कितना समझाया की लंगोट वहाँ नहीं आपनी आँखों में बाँध लो.. भगवा हो या काला.. मदद करेगा.. ना नजर लगेगी ना बेवकूफी की उल्टी करोगे भाई.. डाक्टर तुम्हारी मदद करें.. या फिर कुछ आयुर्वेदिक ही कर लो..&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Samar Anarya &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;वहम की दावा का ईलाज तो हकीम लुकमान के पास भी नहीं था संजीव बाबू.. आप ही कैसे ठीक हो पायेंगे&lt;/span&gt;?&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Sanjeev Kumar Sinha &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;और अंत में&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;तुम्‍हारी बीमारी को मैंने पहचान लिया है। तुमको पिछवाड़े में नहीं&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;मुंह में बवासीर हो गया है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Samar Anarya &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;आगे&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;कम्युनिस्टों को मिटाने की ख्वाहिश लिए आपके पुरखन की कई पीढियां निपट गयीं.. और उनके राहुल महाजन जैसे सपूतों ने उनके अस्थि-कलश के साथ कोकीन सेवन किया.. दर्द तो होगा ही..&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Sanjeev Kumar Sinha &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;बार-बार कह रहा हूं कि इतिहास की जानकारी रखो। 1920 में कम्‍युनिस्‍ट पार्टी का काम भारत में शुरू हुआ और 1925 में राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ की स्‍थापना हुई। कम्‍युनिस्‍ट पार्टी उस समय वैश्विक स्‍तर पर चमक रही थी और संघ की शुरूआत नागपुर की गलियों से हो रही थी। इतिहास गवाह है कि सामाजिक और राजनैतिक स्‍तर पर भारत में वामपंथ कहां है और राष्‍ट्रवाद कहां। संघ का एक स्‍वयंसेवक लालकिला की प्राचीर से राष्‍ट्रध्‍वज को लहरा चुका है और तुम केवल नारों में ही गाते रहो हो लालकिला पर कब्‍जा करेंगे। वामपंथ लगातार मिटता जा रहा है तो संघ तमाम अवरोधों को चिरता हुआ लगातार बढ़ता जा रहा है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Samar Anarya &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;आगे&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;गलत भावार्थ समझने-समझानी की पुराणी बीमारी है तुम संघियों को&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;समझता हूँ&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: Mangal&quot;&gt;बदलने तक की कोशिश कर डाली&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: Mangal&quot;&gt;हुआ नहीं तो बिलबिला भी रहे हो पिलपिला भी.. बिल्बिलाओ.. मेरी भरपूर सहानुभूति है..&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Samar Anarya &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;हाँ यह जान लो की संविधान मूलतः अंगरेजी में लिखा गया है&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;और किसी विवाद की दिशा में अंगरेजी वेर्जन ही प्रधान होता है.. ( आह तुम्हारा हिन्दी-हिन्दू राष्ट्रवाद!) और मियाँ&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;संविधानिक प्राविधानों को समझने के लिए उनका &lt;/span&gt;&#39;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;अर्थ&lt;/span&gt;&#39; &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;देखा जाता है.. भावार्थ नहीं.. खैर यह समझना समझाना तुम्हारे लिए इतना भी आसान &lt;/span&gt;kahan?&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Sanjeev Kumar Sinha &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;हिंदी-हिंदू-राष्‍ट्रवाद हमारे लिए नारा नहीं है। जीने-मरने का मंत्र है। दुनिया जानती है कि कम्‍युनिस्‍टों ने राष्‍ट्रभाषा हिंदी का सदा विरोध किया है। इसलिए तुम्‍हारे हिंदी विरोध पर मुझे आश्‍चर्य नहीं हो रहा है। अपने आका की बात को ही तो दोहराओगे।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Samar Anarya &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;हाँ&lt;/span&gt;, &#39;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;मित्र&lt;/span&gt;&#39; &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;शब्द के प्रयोग पर आप कुछ जरा जल्दी ही उतर आये सिन्हा साहब.. मुझे कोई ऐतराज नहीं की मैं कडवी और घटिया भाषा का इस्तेमाल कर रहा हूँ&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;लगातार (बावजूद इसके की मेरी आदत कभी नहीं रही यह).. पर जरा देख भी लें की शुरू किसने की थी&lt;/span&gt;??&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;&lt;b&gt;Sanjeev Kumar Sinha &lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;मैं तुम्‍हें ऊपर पहले ही &lt;/span&gt;&#39;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;डियर&lt;/span&gt;&#39; &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: Mangal&quot;&gt;शब्‍द से संबोधित कर चुका हूं। इसलिए तुमको मैं अपना दुश्‍मन नहीं मानता।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Samar Anarya &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;यह था आपका पहला कमेन्ट मेर एबारे में जब आप मुझे जानते ही नहीं &lt;/span&gt;the.. &quot;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;लगता है समर नाम के प्राणी के आंखों पर लाल चश्‍मा लगा है। इसलिए भ्रष्‍ट हो रहे लाल खून का रंग पहचाने में उन्‍हें दिक्‍कत हो रही है।&quot;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Sanjeev Kumar Sinha &#39;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;लगता है समर नाम के प्राणी के आंखों पर लाल चश्‍मा लगा है। इसलिए भ्रष्‍ट हो रहे लाल खून का रंग पहचाने में उन्‍हें दिक्‍कत हो रही है।&lt;/span&gt;&#39; &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;इसमें कौन सी आपत्तिजनक बात है&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;जरा बताना। क्‍या शानदार लाइन है मित्र।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;&lt;b&gt;Samar Anarya &lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;और यह था मेरा जवाब.. &lt;/span&gt;@&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;संजीव कुमार सिन्हा साहब.. बिलकुल ठीक पहचाना आपने.. समर नाम के इस प्राणी की आँखों पर खांटी लाल चश्मा चढ़ा है.. (और जानते ही होंगे की लाल रंग हमेशा भगवा से गाढ़ा होता है).. बाकी मैं कोई भी प्राणी सही आपको इंसान मानता हूँ..(सबको ही मानता हूँ).. आपसे अलग हूँ ना अभी यह चेतना गयी नहीं&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: Mangal&quot;&gt;ध्यान दें की अभी भी मैं &lt;/span&gt;&#39;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;साहब&lt;/span&gt;&#39; &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;के साथ आपको &lt;/span&gt;&#39;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;आप&lt;/span&gt;&#39; &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;भी कह रहा हूँ... &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Samar Anarya &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;और उस पर आपका &lt;/span&gt;&#39;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;सिन्हा ज्सहब&lt;/span&gt;&#39; &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: Mangal&quot;&gt;जवाब यह रहा.. &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: Mangal&quot;&gt;&quot;&lt;/span&gt;@ &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;मेरी आशंका सही साबित हुई। समर &lt;/span&gt;&#39;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;लालू&lt;/span&gt;&#39; &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;ही निकला। पंकज ये बताओ जरा कि ये पढा लिखा भी है कि नहीं। इसके इतिहासबोध पर तरस ही खाया जा सकता है। &lt;/span&gt;&#39;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;बाबर भारत में बसने नहीं आया था कॉमरेड&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;वह भारत को लूटने आया था।&lt;/span&gt;&#39;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Sanjeev Kumar Sinha &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;तुम्‍हारी बातचीत से तो यही लगता है कि तुम्‍हें इतिहास का ज्ञान नहीं है अन्‍यथा यह नहीं कहते कि बाबर ने भारत को नहीं लूटा।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Samar Anarya&lt;/span&gt;&lt;/b&gt; &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;इसके बाद आप मुझसे उम्मीद क्या कर रहे थे&lt;/span&gt;?? &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;की आप मेरे मित्र &lt;/span&gt;Pankaj &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;झा की दीवाल पर उल्टी-दस्त करते रहें और मैं &lt;/span&gt;&#39;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;सभ्यता&lt;/span&gt;&#39; &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;की सीमाओं में &lt;/span&gt;bana rahun??&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Samar Anarya &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;एक जर्मन कहावत है.. सवाल जिस भाषा में पूछे जाएँ जवाब उसी में देना चाहिए&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;नहीं तो सामने वाले को कुछ समझ नहीं आता.. तो यह भाषा आपके लिए इस्तेमाल करनी पडी.. और अभी तब तक करता रहूँगा जब तक आप सुधर &lt;/span&gt;naa &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: Mangal&quot;&gt;जाएँ..&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Samar Anarya &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;और सिन्हा साहब.. बवासीर मुझे मुंह में हुई है ठीक&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;आपका क्या करूँ की मुंह में और वहां दोनों जगह हो गयी.. जातिवादी आक्षेप आप हिन्दूवादियों को कब से बुरे लगने लगे मनुपुत्रों&lt;/span&gt;?? &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;और अगर यह गाली लग ही रहे एही तो जिम्मेदार आपके &lt;/span&gt;&#39;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;मनु बाबा&lt;/span&gt;&#39; &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;हैं हम नहीं.. &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: Mangal&quot;&gt;मैं तो सिर्फ वर्णाश्रम की बात कर रहा था आपकी कहाँ कहाँ फट पडी.. सिल गयी.. (रफू करा लें)..&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Sanjeev Kumar Sinha &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;मित्र&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;मुझे मत समझाओ। मैं सार्व‍जनिक जीवन में हूं। शब्‍द प्रयोग का बहुत ख्‍याल रखता हूं। और &lt;/span&gt;&#39;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: Mangal&quot;&gt;तुम&lt;/span&gt;&#39; &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;शब्‍द मित्र के लिए आत्‍मीय संबोधन है। जबकि तुम शुरू से ही गाली गलौज की भाषा पर उतरे हो&lt;/span&gt;, &#39;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;काफी अनपढ़ और जाहिल किस्म के मालूम पड़ते हो भाई&lt;/span&gt;&#39; &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;यही कहा था तुमने। फिर बाद में जाति को लेकर भी मुझे गाली दी&lt;/span&gt;, &#39;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: Mangal&quot;&gt;मुंशी ही ठहरे ना बाभनों के दलाल तुम&lt;/span&gt;&#39;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;। जाकर चुल्‍ली भर पानी में डूब मरो।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Samar Anarya&lt;/span&gt;&lt;/b&gt; &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;संघ बढ़ रहा है&lt;/span&gt;?? &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;शताब्दी का सबसे बड़ा चुटकुला सुना रहे हैं क्या भाई साहब&lt;/span&gt;? &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;इस पर तो ठीक से हंस भी नहीं सकता..&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Sanjeev Kumar Sinha &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;संघ बढ़ रहा है&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;यह चुटकुला नहीं है मित्र&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;अकाट्य सत्‍य है। अटक से कटक तक और कश्‍मीर से कन्‍याकुमारी तक&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;संघ का पताका लहरा रहा है। और वामपंथ....&lt;/span&gt;? &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;यह दिनोंदिन गर्त में समा रहा है। और ठीक से हंसोगे कैसे &lt;/span&gt;? &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: Mangal&quot;&gt;मैंने कहा न कि तुम्‍हें मुंह का बवासीर हो गया है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Samar Anarya &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;हाँ&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;अब समझा.. बात ठीक है.. संघ बढ़ रहा है... उत्तर प्रदेश से खत्म होने के बाद अरब सागर की और बढ़ रहा है.. डूब मरने के लिए..&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Sanjeev Kumar Sinha &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;कौन उत्तर प्रदेश से खत्‍म हो गया है&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;मित्र। जरा लिखने से पहले सो‍च लिया करो। उत्तर प्रदेश के हर शहर में संघ की शाखाएं लग रही है। उत्तर प्रदेश विधानसभा में भाजपा की सीटें अर्द्धशतक से अधिक है। और वामपंथ की हाल क्‍या है&lt;/span&gt;? &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;एकाध विधायक है। जनता ने जनविरोधी वामपंथ के जड़ में मट्ठा डाल दिया है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Samar Anarya &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;संजीव बाबू.. शब्दों से खेलना पुराणी आदत है संघियों की पर खैर.. यह &lt;/span&gt;&#39;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;प्राणी&lt;/span&gt;&#39; &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;क्या होता है&lt;/span&gt;? &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;वह भी लाल चश्मे वाला&lt;/span&gt;? &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;और उसके बाद भी मेरे &lt;/span&gt;&#39;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;संजीव साहब&lt;/span&gt;&#39; &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: Mangal&quot;&gt;वाले जवाब पर क्या कहा था आपने&lt;/span&gt;? &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: Mangal&quot;&gt;की मैं &lt;/span&gt;&#39;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;लालू&lt;/span&gt;&#39; &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;हूँ और आप &lt;/span&gt;&#39;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;लाल खटमल&lt;/span&gt;&#39; &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: Mangal&quot;&gt;मारने वाले&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;यही न&lt;/span&gt;? &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;काफी संसदीय भाषा थी..&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Sanjeev Kumar Sinha &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;सही कहा आपने&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;हम स्‍वयंसेवकों की पुरानी आदत है शब्‍दों से खेलना। इसमें भी हम पारंगत हैं। प्राणी क्‍या होता है&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;यह तुमको नहीं मालूम&lt;/span&gt;? &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;किस विद्यालय में पढ़े हो मित्र&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;किताबों में यह नहीं पढ़ा था कि &lt;/span&gt;&#39;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है&lt;/span&gt;&#39;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Samar Anarya &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;और उसी कमेन्ट में आपने पंकज जी से पूछा था की मैं जरा भी पढ़ा लिखा हूँ या नहीं-- इसी बात को अनपढ़ और जाहिल कहते हैं संजीव मियाँ.. जो मैंने इस पोस्ट के बाद इसके जवाब में लिखी..&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;&lt;b&gt;Sanjeev Kumar Sinha&lt;/b&gt;&lt;/span&gt; &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;क्‍या तर्क दिया है&lt;/span&gt;? &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;जो अनपढ़ हैं वह जाहिल है। हां&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;तभी तो करोड़ों अनपढ़ भारतीय जनता को तुम जाहिल समझते रहे और उन्‍होंने तुमसे &lt;/span&gt;&#39;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;जाहिल&lt;/span&gt;&#39; &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;होने का ठीक से बदला ले लिया। देश भर में वामपंथ की कब्रें खोद दी।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Samar Anarya &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;और हाँ&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: Mangal&quot;&gt;हिन्दी से भी हाथ तंग लगता है तुम्हारा भाई तो&lt;/span&gt;, &#39;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;तुम&lt;/span&gt;&#39; &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;मित्र के लिए आत्मीय संबोधन होता है&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;अपरिचितों के लिए नहीं! ख़ास तौर पर ऐसे अपरिचित के लिए जो आपको लगातार &lt;/span&gt;&#39;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;आप&lt;/span&gt;&#39; &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: Mangal&quot;&gt;या साहब कह रहा हो.. आपके &lt;/span&gt;&#39;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;लालू&lt;/span&gt;&#39; &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;और खटमल मार्का विशेषणों के बाद भी.. और तब भी आप न सुधरे तो याद है न&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;आप ही की भाषा में-- &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: Mangal&quot;&gt;और जब&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Samar Anarya &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;विनय न मानत जलधि जड़ गए तीन दिन बीत&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: Mangal&quot;&gt;बोले राम सकोप तब भय बिन होय न &lt;/span&gt;preet!&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Samar Anarya &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;या संस्कृत में -शठे साठ्यम समाचरेत! तो तुम्हारी शाब्दिक दुष्टता रुकते न देख मैं और करता भी क्या&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;उतर आया उसी भाषा में जो तुम्हे समझ में आती सी दिख रही थी..&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Samar Anarya &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;और हाँ&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: Mangal&quot;&gt;हिन्दूवादियों को जाती का जिक्र गाली नहीं लग्न चाहिए &lt;/span&gt;&#39;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;सिन्हा&lt;/span&gt;&#39; &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;साहब.. वर्णाश्रम आपके पुरखे &lt;/span&gt;&#39;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;मनु&lt;/span&gt;&#39; &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;ने बनाया था हमने नहीं.. वही वर्णाश्रम जो आज भी जिन्दा है और अभी पुरी में दलित लड़कियों के मंदिर प्रवेश पर पूरे गाँव को सजा देता है&lt;/span&gt;,.. &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;अब बताओ भाई..इन मनुवादियों की मुंशीगीरी करने वाले &lt;/span&gt;&#39;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;बाभनों के दलाल&lt;/span&gt;&#39; &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;हुए या नहीं&lt;/span&gt;? &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: Mangal&quot;&gt;सत्य इतना कड़वा क्यों लगता है&lt;/span&gt;?&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Samar Anarya&lt;/span&gt;&lt;/b&gt; &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;वामपंथ के खिलाफ घटिया भाषा का प्रयोग करते हुए आप के मुखारविंद से दो शब्द न झाडे इस विषय पर.. दलाली ही है यह मियाँ.. तो भाई डूब तो तुम मरो.. चुल्लू भर पानी में न सही&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: Mangal&quot;&gt;गंगा में ही.. शायद कुछ पाप ही धुल जाएँ तुम्हारे!&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Sanjeev Kumar Sinha &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;रक्‍तपिपासु स्‍टालिन और माओ का उद्धरण देते तो चलता लेकिन तुम वामपंथियों को बाबा तुलसीदास और संस्‍कृत के श्‍लोक को उद्धृत करने का अधिकार नहीं है जो तुलसीदास को प्रतिगामी और पुरातनपंथी करार देते हैं और जिन्‍होंने जेएनयू में अरबी और उर्दू के पाठ्यक्रम को तो लागू किया लेकिन दशकों तक संस्‍कृत की पढ़ाई जेएनयू में नहीं होने दी। वो तो भला हो स्‍वयंसेवक डॉ. मुरली मनोहर जोशी का जिन्‍होंने देवभाषा की पढ़ाई जेएनयू में सुनिश्वित करवाई।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Samar Anarya &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;सिन्हा साहब.. रात के अंधे को तो कोई मदद भी कर दे.. तुम्हारे जैसे दिन के अंधों का क्या करे.. बढाओ अपना संघ.. संघ का पताका कहाँ लहरा है बस हमें भी बता देना.. तुम्हारे ख्यालों को छोड़ कर..&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Sanjeev Kumar Sinha &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;तुमको रतौंधी हो गया है तो मैं कुछ नहीं कर सकता। सीधे डॉक्‍टर के पास जाओ और अपना ईलाज कराओ। किसी भी राजनीतिक विश्‍लेषक से जरा पूछ लो कि संघ के समानांतर देश में किसी संगठन का वजूद है क्‍या। औंधे मुंह गिरोगे।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Samar Anarya&lt;/span&gt;&lt;/b&gt; &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;प्राणी तो बता दिए.. पर साम्क्जिक प्राणी में और फलाने नाम के प्राणी में फरक बताना भूल गए मुंशी जी.. क्यों &lt;/span&gt;bhaai?&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Sanjeev Kumar Sinha&lt;/span&gt;&lt;/b&gt; &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;मैंने तो बस तुमको प्राणी ही कहा था। अब यह तुम्‍हारे ऊपर है कि अपने को सामाजिक प्राणी मानते हो या फिर असामाजिक प्राणी।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Samar Anarya &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;मैंने तर्क नहीं दिया था अनपढ़ों के जाहिल होने का मियां&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;तुमने पूछा था मेरे बारे में पंकज भाई से की मैं &lt;/span&gt;&#39;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;अनपढ़&lt;/span&gt;&#39; &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;हूँ या नहीं.. मैंने तो बस तुम्हारे शब्द अलंकारों के साथ तुम को लौटा दिया था बस..खैर तुम जैसे झूठों का तो कोई करे भी क्या.. प्राणी याद रहा.. लालू भूओल गए.. लाल खटमल मार दावा भूल गए.. अभी तक किसी सही कम्युनिस्ट से पाला पड़ा नहीं था लग रहा है..&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Sanjeev Kumar Sinha &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;तुमने कहा था&lt;/span&gt;, &#39;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;तुम जैसों को किताबों से क्या काम&lt;/span&gt;?&#39; &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;तो मैंने साफ शब्‍दों में कहा कि हां भई&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;मैं तो लाल खटमल मारने की दवा बेचता हूं। यह सुनकर इतना बौखला क्‍यों रहे हो &lt;/span&gt;?&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Sanjeev Kumar Sinha&lt;/span&gt;&lt;/b&gt; &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;mso-bidi-font-family:&amp;quot;Times New Roman&amp;quot;&quot;&gt;‎&lt;/span&gt;&#39;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;लालू&lt;/span&gt;&#39; &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;कह दिया तो इतना काहे नाक-भौं सिकोड़ रहे हो। लाल सलाम का नारा तुम लगाते हो। लाल पैजामा तुम पहनते हो और लाल झोला लेकर तुम चलते हो। और फिर तुमने स्‍वीकार भी किया था&lt;/span&gt;, &#39;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;समर नाम के इस प्राणी की आँखों पर खांटी लाल चश्मा चढ़ा है&lt;/span&gt;&#39;..&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: Mangal&quot;&gt;तो भई&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;लालू हुए कि नहीं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Samar Anarya&lt;/span&gt;&lt;/b&gt; &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;जरा सी भी ईमानदारी हो तो इस बातचीत में अपनी पहली कमेन्ट&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;मेरा जवाब&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;उसका अपना जवाब और अपनी भाषा देख लो.. या किसी निष्पक्ष आदमी की राय ले लो.. सब साफ़ हो जायेगा.. हाँ अगर सहने की हिम्मत न हो तो दूसरों के खिलाफ ऐसी भाषा का प्रयोग ही न करो भाई.. एक बात और&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;गलती मानने से आदमी बड़ा होता है&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;छोटा नहीं.. मान लोगे की अभद्र और असंसदीय भाषा का प्रयोग तुमने शुरू किया था तो कद बढेगा ही तुम्हारा.. और फिर अपनी तो आदत है जो जिस भाषा में पूछे उसी में जवाब देने की..&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Sanjeev Kumar Sinha &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;अभद्र भाषा मैं बोल रहा हूं। हा हा हा..। यह किसकी उक्ति है मित्र&lt;/span&gt;, &#39; &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;तुम जैसे अनपढ़ जाहिलों को तर्कों से क्या काम&lt;/span&gt;?&#39; &#39;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;हिन्दुस्तान के बाहर (कभी गलती से) जा पाओ तो यह कह भी मत देना नहीं तो बौद्ध बहुत मारेंगे.. और फिर दूतावास ही बचाएगा.. वह भी डिपोर्ट &lt;/span&gt;karke..&#39; &#39; &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;मुंशी ही ठहरे ना बाभनों के दलाल तुम..&lt;/span&gt;&#39; &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;वाह क्‍या बात है&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;चलनी दूसे सूप के जवना में बहत्तर छेद।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Samar Anarya &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;और हम क्या उद्धृत करेंगे क्या नहीं तुम्ही तय करोगे सिन्हा साहब&lt;/span&gt;? &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;आभी भी &lt;/span&gt;&#39;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;राम राज्य में जी रहे हो क्या की शम्बूकों को कुछ नहीं बोलने दोगे&lt;/span&gt;? &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;गलतफहमी से बाहर आओ भाई.. हमारा तो जो मन होगा उद्धृत करेंगे..&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Sanjeev Kumar Sinha &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;तुम्‍हारा जो मन होगा वह तुम कैसे उद्धृत कर दोगे। बाबा तुलसी को तुम पुरातनपंथी और प्रतिगामी बताओगे और उनके दोहे का अपने पक्ष में बौद्धिक प्रयोग भी करोगे&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;यह नहीं चलेगा&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;मित्र। यह तो बौद्धिक बेईमानी है। मैंने ऊपर कहा न कि तुम रक्‍तपिपासु स्‍टालिन और माओ का ही उद्धरण दिया करो।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Samar Anarya &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;अरे भाई भग्गू प्रसाद (भगवा से व्यतिपुत्त शब्द) तुम्हारे &lt;/span&gt;&#39;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;लालू&lt;/span&gt;&#39; &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;शब्द प्रयोग से मुझे कोई दिक्कत नहीं हुई थी&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;न है.. मैं तो बार बार तुम्हे बस यही बता रहा था की तुम्हारे इस शब्द के बाद मैं भी तुम्हारी भाषा में बात करने लगा..तो अब रुदाली काहे गा रहे हो&lt;/span&gt;? &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;इसका भी पैसा मिलता है क्या तुम्हे&lt;/span&gt;?&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Sanjeev Kumar Sinha &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;हां मित्र&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;राष्‍ट्रवादी विचारधारा के प्रसार के लिए मुझे पैसे मिलते हैं&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;स्‍वदेशी पैसे लेकिन तुम कामरेड तो विदेशी जूठन पर पलने वाले लोग हो। सही कहा न मैंने।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Samar Anarya &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;और संघ की बदहाली राजनीतिक विश्लेषकों से पूछने की जरूरत नहीं है भाई. अभी अभी ५ राज्यों के चुनावों में १००० से ज्यादा सीटों में भाजपा को मिलीं बस ५ से पता ही चल जाता है.. साफ़ साफ़.. हाँ तुम जैसे आँख के अंधे नाम नयन्सुखों को कहाँ समझ &lt;/span&gt;aayega?&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Sanjeev Kumar Sinha &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;मुगालते में जीते रहो। जैसे कम्‍युनिस्‍ट पार्टी ने तो पूरे देश को लाल कर दिया। शर्म नहीं आती है भाजपा के बारे में कहते हुए। ऊपर मैंने कह ही दिया है&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;मध्‍यप्रदेश&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;छत्तीसगढ़&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;कर्नाटक&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: Mangal&quot;&gt;उत्तराखंड&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;हिमाचल प्रदेश&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;गुजरात आदि प्रदेशों में कोई है कम्‍युनिज्‍म का नामलेवा। इन राज्‍यों में राष्‍ट्रवादी पताका लहरा रहा है वहीं लाल झंडा...........चर्रर्रर्रर्रर्र।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Samar Anarya &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;अभद्रता की शुरुआत करने वाले सबसे ज्यादा रूदाली गाते हैं&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;सो मुझे कोई आश्चर्य नहीं हो रहा मित्र.. तुमने बात ही &lt;/span&gt;&#39;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;प्राणी&lt;/span&gt;&#39; &#39;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;लालू&lt;/span&gt;&#39;, &#39;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;पढ़ा लिखा है की नहीं&lt;/span&gt;&#39; &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;से शुरू की थी&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;और मैंने उसी भाषा में जवाब दिया तो अब बिलबिला रहे हो&lt;/span&gt;? &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;आदमी हो की ऊदबिलाव मित्र&lt;/span&gt;?&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Sanjeev Kumar Sinha &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span style=&quot;mso-tab-count:1&quot;&gt;  &lt;/span&gt;&#39;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;प्राणी&lt;/span&gt;&#39; &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;और &lt;/span&gt;&#39;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;लालू&lt;/span&gt;&#39; &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;कह देने पर काहे खंभा नोच रहे हो&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;खिसियानी बिल्‍ली की तरह। प्राणी क्‍या होता है&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: Mangal&quot;&gt;यह तुमको नहीं मालूम&lt;/span&gt;? &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;किस विद्यालय में पढ़े हो मित्र&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;किताबों में यह नहीं पढ़ा था कि &lt;/span&gt;&#39;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है&lt;/span&gt;&#39;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;। और &lt;/span&gt;&#39;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;लाल सलाम&lt;/span&gt;&#39; &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;का नारा तुम लगाते हो। &lt;/span&gt;&#39;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;लाल पैजामा&lt;/span&gt;&#39; &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: Mangal&quot;&gt;तुम पहनते हो और &lt;/span&gt;&#39;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;लाल झोला&lt;/span&gt;&#39; &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;लेकर तुम चलते हो। और फिर तुमने स्‍वीकार भी किया था&lt;/span&gt;, &#39;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;समर नाम के इस प्राणी की आँखों पर खांटी लाल चश्मा चढ़ा है&lt;/span&gt;&#39;..&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;तो भई&lt;/span&gt;, &#39;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: Mangal&quot;&gt;लालू&lt;/span&gt;&#39; &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;हुए कि नहीं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Samar Anarya &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;और उद्धृत तो में जो मन में आएगा वही करेंगे.. तुलसी याद आए तो वह&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;और मनुस्मृति को गरियाना हुआ तो उसे.. पेटेंट करवा लो अगर रोकना चाहते हो..(वैसे पिछली कोशिश तो सर के बल उलट गयी थी तुम जैसों की पर एक बार और कोशिश करने से क्या जाता है मित्र.. फिर समझ में आ जायेगा की संघ बढ़ते बढ़ते अरब सागर में डूब गया है की नहीं) समझे ब्रह्मा और सरस्वती के &lt;/span&gt;putr?&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Sanjeev Kumar Sinha &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;मनुस्‍मृति को गरिया रहे हो तो बात समझ में आती है। जैसे कामरेड रामायण और गीता को गरियाते हैं लेकिन तुम तो बाबा तुलसी के विचार का अपने पक्ष में प्रयोग कर रहे हो&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: Mangal&quot;&gt;ये दोमुंहापन कैसे चलेगा &lt;/span&gt;?&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Sanjeev Kumar Sinha &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;और हां&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;हमें गर्व है कि हम ब्रह्मा और सरस्‍वती के पुत्र हैं। क्‍या तुम्‍हें भी रक्‍तपिपासु माओ और स्‍टालिन का बेटा होने पर गर्व है &lt;/span&gt;?&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Samar Anarya &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;मुंशी जी -- मनुस्मृति हमारे चाचा नहीं बनाए थे.. आपके पुरखे बनाए थे.. ब्रह्मा और सरस्वती के मानस पुत्र मनु महाराज.. और अभी भी नहीं बताये की तुलसी पर पेटेंट करवा लिए हो क्या&lt;/span&gt;? &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;हमारा तो जो मन आएगा उद्धृत करेंगे.. &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: Mangal&quot;&gt;राम राज में जी रहे हो का मुंशी जी की शम्बूक को वेद पाठ नहीं करने दोगे&lt;/span&gt;? (&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;वैसे मनुस्मृति के मुताबिक़ खुद कहाँ खड़े हो मुंशी जी यह भी बता ही देते-- और फिर से हमने नहीं लिखी वह&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;जिनके दलाल बने फिरते हो उन्होंने ही लिखी &lt;/span&gt;hai)&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Sanjeev Kumar Sinha&lt;/span&gt;&lt;/b&gt; &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;फिर तुमने बचकानी बात कर दी। इतना पूअर साबित होगे सामान्‍य ज्ञान में इसका मुझे अंदाजा नहीं था। मनु महाराज ब्राह्मण नहीं&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;क्षत्रिय थे&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;समझे डियर। अभी जाके कुछ पढ़ो लिखो।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Samar Anarya&lt;/span&gt;&lt;/b&gt; &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;और हाँ&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: Mangal&quot;&gt;राष्ट्रवादी विचार के लिए तुम्हे पैसे मिलते होंगे.. अभी विचार बेचो-- तुम्हारे नेताओं ने तो राष्ट्र ही बेचा हुआ है.. अमेरिका के तलवे चाट के.. आडवानी का पैजामा उतरवा लिया था अमेरिकी हवाई अड्डे पर याद है न&lt;/span&gt;??&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Sanjeev Kumar Sinha &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;हमारे नेताओं ने राष्‍ट्र बेच दिया&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;वाह क्‍या बात कही है। पहले ये बताओ कि तुम कॉमरेड भारत को एक राष्‍ट्र मानते भी हो। इतनी बड़ी सैद्धांतिक भूल। करात तो डांट पिलाएगा तुमको&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;समझे।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Samar Anarya &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;और तुम्हे ब्रह्मा और सरस्वती का पुत्र होने पर गर्व है&lt;/span&gt;? &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;बहुत बढ़िया भाई.. पर फिर यह भी बता देते की ब्रह्मा का कोई मंदिर क्यों नहीं है&lt;/span&gt;? &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;उनकी पूजा क्यों नहीं &lt;/span&gt;hotee?&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Sanjeev Kumar Sinha &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;ओह&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: Mangal&quot;&gt;फिर गलती। इस लड़के को कोई जानकारी नहीं है। मैंने ठीक ही पंकज से पूछा था कि ऐसी बात करता है कि लगता नहीं है यह पढ़ा लिखा है। नहीं तो यह थोड़े कहता कि &lt;/span&gt;&#39;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;ब्रह्मा का कोई मंदिर क्यों नहीं है&lt;/span&gt;?&#39; &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;ऐसा करो&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;एक दिन के लिए नास्तिक से आस्तिक बन जाओ और एक बार पुष्‍कर स्थित ब्रह्मा मंदिर जाकर अन्‍य हिंदुओं की तरह धूप अगरबती दिखा आओ। समझे।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Samar Anarya &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;और खिसियानी बिल्ली के साथ साथ अंगूर खट्टे हैं मार्का लोमड़ी सिन्हा-- वाम तो सदैव प्रतिपक्ष रहा है.. अब भी है.. तुम तो देश को भगवा बनाने निकले थे.. ६ साल शीर्ष पर भी रह आये.. उसके बाद क्या हुआ&lt;/span&gt;? &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;हवा निकल गयी&lt;/span&gt;? &lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: Mangal&quot;&gt;खाकी निक्कर खाकी निक्कर खाकी निक्कर चरर्र टाइप-&lt;/span&gt;?&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;&lt;b&gt;Sanjeev Kumar Sinha &lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;फिर गलती। हर बात गलत। तुम सदैव प्रतिपक्ष में रहे। झूठ बोलते हो। केरल&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;बंगाल&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;त्रिपुरा में तुम्‍हारे आकाओं ने सत्ता की मलाई नहीं चाटी&lt;/span&gt;? &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;केन्‍द्र की बात करते हो तो वह तो तुम्‍हारे लिए सपना ही रहेगा जबकि स्‍वयंसेवक प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी लालकिला के प्राचीर से राष्‍ट्रध्‍वज फहरा चुके हैं और एक बात पता है उस दिन कई कॉमरेडों ने खुदकुशी कर ली थी।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Samar Anarya&lt;/span&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt; &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;गजबे चम्पक हो मुंशी जी..मैंने मनु महाराज की जाती का कब जिक्र किया.. तुम्हारे पुरखे हैं&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: Mangal&quot;&gt;ब्रह्मा और सरस्वती(रिश्ते में गड़बड़ हो जायेगी मुंशी जी) के मानस पुत्र.. जहाँ फंसते हो वहां दुम दबा के कहीं नई जगह खुजलाना क्यों शुरू कर देते हो भाई&lt;/span&gt;? &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;कोई बीमारी है क्या&lt;/span&gt;? &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;ईलाज क्यों नहीं कराते&lt;/span&gt;? &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;बाबा रामदेव से ही करा लो चाहे(पश्चिमी विज्ञान पर भरोसा होगा नहीं तुम्हारा)&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Sanjeev Kumar Sinha &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;पहले तुमने कहा&lt;/span&gt;, &#39;..&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;मुंशी ही ठहरे ना बाभनों के दलाल तुम..&lt;/span&gt;&#39; &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;फिर उसके बाद कहा&lt;/span&gt;, &#39;..&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;हमने नहीं लिखी वह(मनु‍स्‍मृति)&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;जिनके दलाल बने फिरते हो उन्होंने ही लिखी &lt;/span&gt;hai)&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;।&lt;/span&gt;&#39; &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: Mangal&quot;&gt;इसका साफ-साफ मतलब हुआ कि मनु&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: Mangal&quot;&gt;जो बाभन है&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;उन्‍होंने मनुस्‍मृति लिखी। पतली गली से तुमको निकलने नहीं देंगे&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;बस मनुवादी...मनुवादी...चिल्‍लाते रहते हो। पता तो है नहीं कि कौन क्‍या है&lt;/span&gt;? &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;दिमाग में गोबर ठूस रखे हो तो तुम्‍हें पता कैसे चलेगा&lt;/span&gt;?&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Samar Anarya &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;और मुंशी जी तुम्हारे नेताओं ने देश ही नहीं बेचा&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;खुद को भी बेच दिया था.. टालबोट की किताब भूल गए&lt;/span&gt;? &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;किसकी किसकी पैंट/पैजामे उतारे हैं अमेरिकियों ने अपने हवाई अड्डों पर. तुम्हारे महँ नेता जसवंत सिंह&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;आडवानी और जार्ज फर्नान्दिज़ तक के..&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Samar Anarya &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;और फिर कारगिल के शहीदों का ताबूत तक तो बेच डाला तुमने/तुम्हारे नेताओं ने मुंशी जी उर्फ़ भग्गू प्रसाद.. (भगवा से निकला है) और फिर उसके बाद उनके परिजनों को मिलने वाले पेट्रोल पम्प तक..&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Sanjeev Kumar Sinha&lt;/span&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt; &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;दुनिया जानती है कि भाजपा के नेतृत्‍व वाली एनडीए शासन पाक साफ थी जबकि वामपंथ समर्थित यूपीए सरकार ने किस तरह घोटालों के सारे रिकॉर्ड ध्‍वस्‍त कर डाले।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Sanjeev Kumar Sinha&lt;/span&gt;&lt;/b&gt; &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;ताबूत घोटाले में जॉर्ज फर्नांडिस को सीबीआई ने क्लिनचिट दे दी थी और पेट्रोल पंप मामले में अनियमितता की शिकायत पर तत्‍कालीन प्रधानमंत्री श्री अटलबिहारी वाजपेयी ने सारे अलॉटमेंट रद्द कर दिए थे&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;ऊपर कई बार बता चुके&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;लेकिन तुम हो थेथ्‍थर तो समझोगे कैसे&lt;/span&gt;? &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;पर तुम्‍हारे आकाओं ने तो करोड़ों रूपए के वक्‍फ घोटाले को अंजाम दिया&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;जिसमें लगभग १६०० करोड़ रुपए की संपत्ति का हेरफेर था। और पीएल एकाउंट घोटाला कर लगभग आठ सौ करोड़ रूपए खा गए।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;&lt;b&gt;Samar Anarya &lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;और पुष्कर&lt;/span&gt;? &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: Mangal&quot;&gt;बस एक मंदिर&lt;/span&gt;? &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;बाकी कहीं ब्रह्मा की मूर्ति नहीं है मंदिर नहीं है इसके पीछे क्या कहानी है मुंशी जी&lt;/span&gt;? &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;गजबे चम्पक हो यार.. बता भी दो&lt;/span&gt;? &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;की अपनी वंश परंपरा पर शर्म आ रही है&lt;/span&gt;?&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;&lt;b&gt;Sanjeev Kumar Sinha &lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;पहले तो तुमने कहा कि &lt;/span&gt;&#39;.. &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;यह भी बता देते की ब्रह्मा का कोई मंदिर क्यों नहीं है&lt;/span&gt;?&#39; &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;और जब सरेआम तुम्‍हारी अज्ञानता पकड़ी गई तो घिघियाने लगे&lt;/span&gt;, &#39;....&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: Mangal&quot;&gt;और पुष्कर&lt;/span&gt;? &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;बस एक मंदिर&lt;/span&gt;? &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;बाकी कहीं ब्रह्मा की मूर्ति नहीं है मंदिर नहीं है इसके पीछे क्या कहानी है मुंशी जी&lt;/span&gt;?&#39;&#39; &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;गलती पर गलती पर शर्म तुमको नहीं आती।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Samar Anarya &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;और एक आध राज्य में जो कम्युनिस्ट थे भी/हैं भी (कितने कम्युनिस्ट हैं वह यह छोडो--- अब भौंकना मत शुरू कर देना-- उनसे हमारा उतना ही अच्छा/खराब रिश्ता है जितना तुम्हारा शिवसेना से!) उससे प्रतिपक्ष ही बनता है सत्ता पक्ष नहीं.. और वो जहाँ हारे भीं हैं वहाँ तो तुम्हारा खाता तक नहीं खुला है.. कांग्रेस जीती है वहां.. (कहीं तुम भाजपा के अन्दर कांग्रेस के दलाल तो नहीं&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;सच सच बता दो&lt;/span&gt;? &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;तुम्हारी बातों से तो ऐसा ही लग रहा है)&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Sanjeev Kumar Sinha &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;दो राज्‍यों की दुहाई कब तक देते रहोगे। भारत दो राज्‍यों से नहीं है मित्र। अपने दम पर भाजपा सात राज्‍यों में और दो राज्‍यों में उसकी गठबंधन की सरकारें हैं। यह देखकर तुम्‍हारे छाती पर सांप लोट रहा होगा। वामपंथ है कहां&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;जनता ने बंगाल की खाड़ी में वामपंथ को दहा दिया है। भारत की माटी में वामपंथ दफन हो रहा है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Samar Anarya &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;अच्छा मुंशी जी एक बात बताओ&lt;/span&gt;? &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;तुम्हारी मनुस्मृति के मुताबिक़ तुम्हे शाश्त्रों को पढने का भी अधिकार है की नहीं(उन्हें उद्धृत करना तो छोडो ही).. और अगर नहीं तो काहे मनुवादियों के इतने घटिया वकील बनने की कोशिश कर रहे हो&lt;/span&gt;? &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;नया मुल्ला प्याज ज्यादा खता है जैसा तो कुछ नहीं है &lt;/span&gt;na?&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Samar Anarya&lt;/span&gt;&lt;/b&gt; &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;बाबा.. गजबे चम्पू हो तुम भग्गू प्रसाद.. राम के गुण गाती फिरती है तुम्हारी पार्टी.. उन्ही के मंदिर के नाम पर सत्ता में आई थी एक बार गलती से (दो कर दो चाहो तो).. अब राम भी तो बाभन नहीं थे..&lt;/span&gt;??&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Sanjeev Kumar Sinha &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;श्रीराम राष्‍ट्रीय नायक हैं। राष्‍ट्रवादियों के आराध्‍य हैं। इसलिए राम के गुण गाते फिरना हमारा धर्म है। मुझे मालूम है तुमलोग रावण के गुण गाते हो। बार बार बाभन&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: Mangal&quot;&gt;क्षत्रिय का उल्‍लेख करके तुमने साबित कर दिया है कि तुम घोर जातिवादी हो&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;जाति के नाम पर आग लगाकर लोगों को झुलसाना कब बंद करोगे।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Samar Anarya &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;और&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;ब्रह्मा का एक मंदिर है यह बहस मोहल्ला पे सदियों पहले कर चुके हम तुम्हारे जारज भाई कालेश्वर प्रसाद से.. बाकी उनकी पूजा काहे नहीं होती&lt;/span&gt;? &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;एक ही मंदिर क्यों है इस पर भी प्रकाश डालोगे मुंशी जी&lt;/span&gt;? &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;और इस पर भी की अपने पुरखे मनु के मुताबिक़ तुम धर्म ग्रंथों को उद्धृत करने के अधिकारी भी हो के नहीं जो हमें तुलसी को उद्धृत करने से मन कर रहे हो&lt;/span&gt;??&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Sanjeev Kumar Sinha &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;प्रत्‍यक्षं किं प्रमाणम्। तुमने खुलेआम कहा है &lt;/span&gt;&#39;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;ब्रह्मा का कोई मंदिर क्यों नहीं है&lt;/span&gt;?&#39; &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;इधर उधर की बात मत करो। सबके सामने तुम्‍हारी पोल खुल गई। अब तो मुंह छिपाने लायक भी नहीं रहे। और हां&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;पुष्‍कर जाकर ब्रह्मा जी के दर्शन अवश्‍य कर आना।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Samar Anarya &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;और में चम्पक.. बोफोर्स में सीबीआई ने राजीव गांधी परिवार को भी क्लीन चित दे दी थी तो&lt;/span&gt;? &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: Mangal&quot;&gt;सीबीआई और करती क्या है&lt;/span&gt;? &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;बाकी आवंटन रद्द किये या नहीं तुम्हारे जारज नेता बाजपेयी की सरकार में कारगिल के शहीदों का अपमान करके पेट्रोल पम्प बेचे गए या नहीं में&lt;/span&gt;???&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Sanjeev Kumar Sinha &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;कॉमरेडों की बात करो&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;कांग्रेस के बारे में तुमसे तब बात करेंगे जब तुम भेडि़ए की खाल से बाहर आकर कहोगे कि तुम कांग्रेसी हो। अभी तक तो तुम लाल चश्‍माधारी ही हो।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Samar Anarya &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;तुम लोग क्या समझोगे पर&lt;/span&gt;? &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;उसी पार्टी के हो न जिसके नेता प्रमोद महाजन की हत्या उसके भाई ने की&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;और क्यों&lt;/span&gt;? &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;और जिसकी अस्थियाँ लेकर उसका बेटा कोकीन पीकर मरते मरते बचा&lt;/span&gt;??&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Sanjeev Kumar Sinha&lt;/span&gt;&lt;/b&gt; &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;प्रमोद महाजन को तो उनके भाई ने गोली मारकर हत्‍या कर दी। लेकिन तुम्‍हारे कॉमरेडों ने तापसी मलिक की कैसे हत्‍या की&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;यह बताते हुए भी मुझे घृणा होती है। जानते हो सिंगूर की जमीन जबरन अधिग्रहीत करने के विरोध में उस इलाके में जो लोग आंदोलनरत थे&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;उनमें एक प्रमुख नाम तापसी मालिक का भी था। उसने अनशन भी किया था। दिन भर भूखे रहने के बाद रात को खाना खाया और सो गई&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;किन्तु सूर्योदय नहीं देख पाई। तापसी जब तड़के नित्य कर्म करने मैदान गई&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;तो उसके साथ कॉमरेडों ने सामूहिक बलात्कार किया। उसकी योनी में रॉड घुसाकर उसे क्षत विक्षत कर दिया। और उसके बाद उसके शरीर पर कैरोसिन तेल छिड़ककर उसे जला कर मार डाला।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: Mangal&quot;&gt;कहना न होना कि ये कम्युनिस्ट फासिस्ट हो गए हैं। जब कम्युनिस्ट फासिस्ट होते है&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;तो उनका फासिज्म देखकर पुराने जमाने के फासिस्ट भी लजा जाते हैं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Samar Anarya &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;हाँ मुंशी जी.. बता नहीं रहे हो अब तक&lt;/span&gt;? &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;मनुस्मृति के मुताबिक़ तुम्हे धर्मग्रन्थ पढने का भी हक़ है की नहीं&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;उद्धृत करना तो छोड़ ही दो तुम भग्गू प्रसाद&lt;/span&gt;? &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family: Mangal&quot;&gt;की ऐसे ही मुझे तुलसी को उद्धृत करने से मना कर रहे थे&lt;/span&gt;??&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class=&quot;MsoNormal&quot; style=&quot;text-align:justify&quot;&gt;&lt;b&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot;&gt;Sanjeev Kumar Sinha&lt;/span&gt;&lt;/b&gt; &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;हम तो मनुस्‍मृति भी पढ़ते हैं&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;रामायण और गीता भी। जो बातें अच्‍छी लगती है उससे सीख लेते हैं। तुम्‍हारी तरह नकारात्‍मक चीजों को लेकर ढोल नहीं बजाते। जाहिर सी बात है जब दिमाग में ही कचड़ा भरा पड़ा हो&lt;/span&gt;, &lt;span lang=&quot;HI&quot; style=&quot;font-family:Mangal&quot;&gt;तो वो गलत बातों पर ही तुम्‍हारी दृष्टि जाएगी।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://hitchintak.blogspot.com/feeds/7441748031874656899/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment/fullpage/post/7024567440226660873/7441748031874656899' title='20 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7024567440226660873/posts/default/7441748031874656899'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7024567440226660873/posts/default/7441748031874656899'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://hitchintak.blogspot.com/2011/06/blog-post.html' title='एक वामपंथी और एक राष्‍ट्रवादी के बीच फेसबुक पर शब्‍द-युद्ध'/><author><name>संजीव कुमार सिन्‍हा</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11879095124650917997</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg-VUG_8k4GcxEdCmjpiY_6UDali2WkziCy8QL3pvL6x98CxCQkSWCPT0QSOxfne88NMZUAxuRH02FkYn1eMUbfqb1lDlWyIjQte5L7cGqhL9x2KHht1Wlw7WNx98YJCQ/s220/Mintoo.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgMssRWJgQsKIHbybwxn_5TUwIHaCS2Hwk9Dl3YiM84M1YbnjaiYAlx3wfkNQ78plOr4e4sEwuzwpGLz-MYbT6XB5CvQqhSBc3QUVNAWkEw3G-GnG7uSxS6pspX101cqXWGJsM9UxFZaU8/s72-c/pankaj.jpg" height="72" width="72"/><thr:total>20</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7024567440226660873.post-1116528338077901837</id><published>2009-05-12T12:09:00.000+05:30</published><updated>2009-05-12T12:12:31.462+05:30</updated><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="कम्युनिज्म"/><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="कांग्रेस"/><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="धर्मनिरपेक्षता"/><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="माकपा"/><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="मार्क्‍सवाद"/><title type='text'>जरूरी है छद्म-सेक्युलरवादियों से बच कर रहना</title><content type='html'>&lt;p&gt;चुनाव का मौसम आता है और हमारे वामपंथी बुध्दिजीवी, कांग्रेसी पाखण्डी और पंच सितारा होटलों में रहने वाले लोग तथाकथित समाजसेवी सेक्युलरिज्म पर अपना ज्ञान बघारने में लग जाते है और इस मुद्दे पर हंगामा खड़ा करना शुरू कर देते हैं। उन्हें तो इतना भी मालूम नहीं है कि &#39;सेक्युलरिज्म&#39; शब्द की अवधारणा भारत में कोई नई नहीं है, परन्तु भले ही इसके आंतरिक शब्दों का अर्थ अलग हो। भारत में सेक्युलरिज्म का उपदेश देना मूर्खता है क्योंकि इसकी अवधारणा तो भारत की मिट्टी में चिरन्तन काल से चली आ रही है। सच तो यह है कि हमारे तथाकथित सेक्युलर ब्रिगेड के लोग जिस प्रकार का प्रचार कर रहे हैं, वह तो एक काल्पनिक बहुसंख्यक- अल्पसंख्यकों के बीच दीवार खड़ी कर छद्म-सेक्युलरिज्म का प्रचार कर रहे हैं जिससे कभी भी इस देश के लोगों में राष्ट्र के प्रति देशप्रेम की भावना का निर्माण नहीं हो सकता है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;यह दिखलाने के लिए कि वे ही सच्चे सेक्युलर सिध्दांतवादी है और अपनी सेक्युलर-विश्वसनीयता सिध्द करने के लिए लिए उन्हें बहुसंख्यकों की भर्त्सना करने में भी संकोच नहीं होता है। इस प्रकार की विचारधारा रखने से लोगों को एकजुट करने की बजाए होता यह है कि समस्या निरंतर बढ़ती चली जाती है। राष्ट्रीय एकता पनप तो नहीं पाती बल्कि अन्दरूनी रूप से लोगों में मजहबी उन्माद पैदा हो जाता है। समस्या निरंतर बनी रहती है जिससे राष्ट्रीय एकता की कीमत पर अल्पसंख्यक एकता को महत्व दिया जाता है, ताकि वोटबैंक की राजनीति चलती रहे। &lt;/p&gt;&lt;p&gt;काश, इस प्रकार का सेक्युलरिज्म ही राष्ट्रीय एकता निर्माण का ही सामंजस्यपूर्ण शक्ति बन पाता तो फिर कम्युनिस्ट शासित रूस और यूगोस्लोवाकिया क्यों विखण्डित होते। इस प्रकार का सेक्युलरिज्म सच्चे राष्ट्रवाद और देशभक्ति के विरूध्द रहता है, जिसमें प्रत्येक व्यक्ति के लिए केवल एक ही पहचान की बजाए अनेक पहचान की बात की जाती है चाहे वह साम्प्रदायिक पहचान के रूप में किसी भी समुदाय की क्यों न हो? अब आप ही बताइए, कौन सी विचारधारा विभाजनकारी है? जब एक ही पहचान का सवाल सामने आता है तो भारत विश्व के सभी देशों में एक ही बात के लिए विख्यात है और वह है भारत की प्राचीन सभ्यता की पहचान, जिसमें उसका उज्ज्वल इतिहास और संस्कृति भी शामिल रहती है। भला कौन भगवान राम के अस्तित्व पर प्रश्न खड़ा करने की बात सोच भी सकता है और फिर क्या कोई कह सकता है कि ऐसा सवाल खड़ा कर वह सेक्युलरिज्म को आगे बढ़ा रहा है? क्या कोई व्यक्ति विभिन्न धर्मों के लिए अलग-अलग सिविल संहिताओं की बात कहे और फिर भी कहे कि वे ही सेक्युलरिज्म के हितों के चैम्पियन हैं?&lt;/p&gt;&lt;p&gt;पहले की तरह ही इस बार 2009 की चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही, साम्प्रदायिकता और सेक्युलरिज्म के बीच बहस फिर से सामने आ गई है। इस बार जिन व्यक्तियों ने इस बहस की शुरूआत की है, वह और कोई नहीं, वे हैं &#39;ग्रेट कामरेड&#39; श्री प्रकाश करात और उनके साथीगण तथा कुछ पुराने कांग्रेस के बोगस-सेक्युलर मित्र। बार-बार उनकी एक ही रट लगी रहती है कि साम्प्रदायिक ताकतों को सत्ता में आने से रोकने के लिए केन्द्र में सेक्युलर पार्टियां मिलकर सेक्युलर सरकार बनाएंगी। परन्तु आम आदमी के लिए यह समझ पाना मुश्किल है कि कामरेडों का साम्प्रदायिकवाद और सेक्युलरवाद का मतलब क्या है? बल्कि यह बात और भी रोचक लगने लगती है कि भारत में वामपंथी प्रमाणपत्र देने वाली एजेंसी बन गई है कि कौन सेक्युलर है और कौन साम्प्रदायिक! उनके अनुसार- &lt;/p&gt;&lt;p&gt;-  अफजल गुरू, कसाब और मदानी जैसे आतंकवादियों के प्रति उदासीनता बरती जाए तब तो ऐसे लोग भी सेक्युलरवादी होते है परन्तु एमसी शर्मा के बलिदान का समर्थन किया जाए तो वे लोग साम्प्रदायिक बन जाते है।&lt;br /&gt;-  एम.एफ. हुसैन सेक्युलर है परन्तु तस्लीमा नसरीन साम्प्रदायिक है, तभी तो उसे पश्चिम बंगाल के सेक्युलर राज्य से बाहर निकाल दिया गया।&lt;br /&gt;-  इस्लाम का अपमान करने वाला डेनिश कार्टूनिस्ट तो साम्प्रदायिक है परन्तु हिन्दुत्व का अपमान करने वाले करूणानिधि को सेक्युलर माना जाता है।&lt;br /&gt;-  मेजर संदीप उन्नीकृष्णन के बलिदान का उपहास उड़ाना सेक्युलरवादी होता है, हेमन्त करकरे के बलिदान पर प्रश्नचिह्न लगाने वाला सेक्युलवादी होता है, दिल्ली पुलिस की मंशा पर सवाल खड़ा करना सेक्युलरवादी होता है, परन्तु एटीएस के स्टाइल पर सवाल खड़ा करना साम्प्रदायिकता के घेरे में आता है।&lt;br /&gt;-  राष्ट्र-विरोधी &#39;सिमी&#39; सेक्युलर है तो राष्ट्रवादी रा.स्व.सं साम्प्रदायिक है।&lt;br /&gt;- एमआईएम, पीडीपी, एयूडीएफ और आईयूएमएल जैसी विशुध्द मजहब-आधारित पार्टियां सेक्युलर है, परन्तु भाजपा साम्प्रदायिक है।&lt;br /&gt;-  बांग्लादेशी आप्रवासियों, विशेष रूप से मुस्लिमों का और एयूडीएफ का समर्थन करना सेक्युलर है, परन्तु कश्मीरी पंडितों का समर्थन करना साम्प्रदायिक है।&lt;br /&gt;-  नंदीग्राम में 2000 एकड़ क्षेत्र में किसानों पर गोलियों की बरसात करना सेक्युलरिज्म है परन्तु अमरनाथ में 100 एकड़ की भूमि की मांग करना साम्प्रदायिक है।&lt;br /&gt;-  मजहबी धर्मांतरण सेक्युलर है तो उनका पुन: धर्मांतरण करना साम्प्रदायिक होता है।&lt;br /&gt;-  कुछ चुनिंदा समुदायों को स्कालरशिप और आरक्षण सेक्युलरिज्म है परन्तु सभी योग्य-सुपात्र भारतीयों के बारे में इस प्रकार की चर्चा करना भी साम्प्रदायिक होता है।&lt;br /&gt;-  मजहबी आधार पर आर्मी, न्यायपालिका, पुलिस में जनगणना कराना कांग्रेस और वामपंथियों की नजरों में सेक्युलरिज्म है परन्तु एक-भारत की बात करना भी साम्प्रदायिक है।&lt;br /&gt;-  हिन्दू समुदाय के कल्याण की बात करना साम्प्रदायिक है तो उधर मुस्लिम तुष्टिकरण सेक्युलर है।&lt;br /&gt;- कामरेडों का नमाज में भाग लेना, हज जाना और चर्च जाना तो सेक्युलरिज्म है परन्तु हिन्दूओं का मंदिरों में जाना या पूजा में भाग लेना साम्प्रदायिक है।&lt;br /&gt;-  पाठय-पुस्तकों में छत्रपति शिवाजी और गुरू गोविन्द सिंह जैसी धार्मिक नेताओं के प्रति अपशब्दावली का इस्तेमाल &#39;डिटोक्सीफिकेशन&#39; या सेक्युलरिज्म माना जाता है और भारत सभ्यता का महिमामंडन साम्प्रदायिक कहा जाता है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;हमारे प्रिय छद्म-सेक्युलर कामरेडों, आखिर आप आम आदमी को क्या समझते हैं? क्या वे एकदम मूर्ख है? नहीं, बिल्कुल नहीं! वे आपकी मंशा और विदेशों के प्रति आपके नर्म रूख को वे भली भांति जानते हैं, वे आपकी गली-सड़ी विचारधारा को समझते हैं, जिसे पूरी दुनिया ने कूड़े में फेंक दिया है। आपने एक बार नहीं, दो बार नहीं, बल्कि कई बार अपने को राष्ट्र-विरोधी और समाज-विरोधी प्रमाणित कर दिया है।&lt;br /&gt;आप तो उस विचारधारा के प्रवर्तक रहे हैं जिसने 1942 में &#39;भारत छोड़ो&#39; आंदोलन का जबरदस्त विरोध किया, 1962 में आपने चीन-भारत युध्द में भारत का विरोध किया, पाकिस्तान के साथ 1965 और 1971 के युध्दों मे ंभारत का विरोध किया, करगिल युध्द में आक्रमणकारियों के समर्थन में आकर भारत की कार्रवाई पर सवालिया निशान लगाया, जब 1975 में राष्ट्रीय इमर्जेंसी लगी तो आपने लोकतंत्र का गला घोंटने का समर्थन किया, आपने अवैध बांग्लादेशी आप्रवासियों के देश-निष्कासन का विरोध किया, &#39;भारत के परमाणु शक्ति बन जाने&#39; तक का विरोध किया, बल्कि आपने इस पर उस समय चीन का समर्थन किया जब वह परमाणु शस्त्रों का परीक्षण कर रहा था। अर्थव्यवस्था के उदारीकरण का विरोध किया। भारत में विकास और औद्योगीकरण का विरोध किया और आपकी पार्टी की शासित राज्य सरकार ने &#39;सेज&#39; निर्माण के लिए निर्दोष किसानों पर गोलियों की बौछार की। आप तो वह लोग हैं जिन्होंने &#39;सोनार बागला&#39; (पश्चिम बंगाल) को तबाह करके रख दिया। आपने अपने 30 वर्ष के शासन में राज्य को भारतीय राज्यों में सबसे निचले स्तर पर लाकर खड़ा कर किया है, पश्चिम बंगाल और केरल में सभी विकास-कार्य ठप्प हो गए हैं, आपने अपने स्वार्थ के लिए पूरी अर्थव्यवस्था और समाज को तबाह करके रख दिया है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;आप तो उसी वामपंथी मोर्चे के लोग हैं जिन्होंने अपने स्वार्थी राजनैतिक हितों के लिए यूपीए के बैनर तले साढ़े चार वर्षों तक कांग्रेस का खूब दोहन किया। और जब आपने देख लिया कि अब तो दूध मिलने वाला नहीं तो अपने उसे बाहर का दरवाजा दिखा दिया। कांग्रेसनीत यूपीए की तरह आप भी भारत और उसकी अर्थव्यवस्था को बिगाड़ने के लिए उतने ही जिम्मेदार हैं। आप भी उसी गठबंधन का हिस्सा थे जिसने देश को समृध्द बनाने की बजाए गरीब बना कर रख दिया, किसानों के कल्याण की बजाए उन्हें आत्महत्या करने पर मजबूर किया, कीमतें स्थिर न रह कर आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को आसमान तक पहुंचा दिया, भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की बजाए तबाह कर दिया, आम आदमी की रोजी-रोटी को छीना, बेरोजगारी बढ़ी और उसकी सुरक्षा खतरे में पड़ गई। &lt;/p&gt;&lt;p&gt;हमारे प्रिय कामरेडों, यह सच है कि किसी भी व्यक्ति के लिए आपकी सही प्रकृति भांपना बेहद मुश्किल काम है परन्तु सीधो सादे शब्दों में यह तो कहा ही जा सकता है कि आप &#39;अवसरवादी&#39; होने के अलावा कुछ भी नहीं रह गए हैं और आप सत्ताा हथियाने के लिए किसी से भी हाथ मिला सकते हैं और हमारे इस महान देश को सीढ़ी दर सीढ़ी तबाह करने में जुटे हैं। वरना, उड़ीसा में जो बीजेडी दो महीने पहले साम्प्रदायिक थी, वह आपसे मिलने के बाद कैसे एक ही रात में सेक्युलर बन गई। यदि आप मानते हैं कि चन्द्रबाबू नायडू, जयललिता और देवगौड़ा साम्प्रदायिक थे, जब वे एनडीए के पार्टनर थे, तो अचानक वे आज कैसे सेक्युलर हो गए।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;यह नितांत अवसरवादिता है और आप फिर से सेक्युलरिज्म के नाम पर सत्ताा हथियाने की फिराक में लगे हैं। क्योंकि आम आदमी आपकी वास्तविक मंशा को समझने लगा है, इसलिए आप अपनी पार्टी के 80 वर्ष के इतिहास में अपने खेमे में 80 एमपी भी ला नहीं पाए। यदि राष्ट्र-विरोधी तत्वों के खिलाफ आवाज उठाना साम्प्रदायिक है, यदि अपने उज्ज्वल अतीत और संस्कृति पर अभिमान करना साम्प्रदायिक है तो इस महान देश का आम आदमी छद्म-सेक्युलर होने के बजाए स्वयं को साम्प्रदायिक कहलाना ही अधिाक पसंद करेगा। हमें उम्मीद है कि देश का परिपक्व मतदाता इन चुनावों में छद्म-सेक्युलवादी ताकतों से बुरी तरह आहत होकर अपने को सेक्युलरवादी होने का दावा करने वालों के मिथक को तोड़ डालेगा और उन्हें सेक्युलरिज्म का सही अर्थ समझा देगा।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style=&quot;color:#3333ff;&quot;&gt;- राम प्रसाद त्रिपाठी&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;em&gt;(लेखक दिल्ली विश्वविद्यालय में शोध-छात्र हैं)&lt;/em&gt;&lt;/strong&gt; &lt;/p&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://hitchintak.blogspot.com/feeds/1116528338077901837/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment/fullpage/post/7024567440226660873/1116528338077901837' title='9 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7024567440226660873/posts/default/1116528338077901837'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7024567440226660873/posts/default/1116528338077901837'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://hitchintak.blogspot.com/2009/05/blog-post_12.html' title='जरूरी है छद्म-सेक्युलरवादियों से बच कर रहना'/><author><name>संजीव कुमार सिन्‍हा</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11879095124650917997</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg-VUG_8k4GcxEdCmjpiY_6UDali2WkziCy8QL3pvL6x98CxCQkSWCPT0QSOxfne88NMZUAxuRH02FkYn1eMUbfqb1lDlWyIjQte5L7cGqhL9x2KHht1Wlw7WNx98YJCQ/s220/Mintoo.jpg'/></author><thr:total>9</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7024567440226660873.post-1539031229961426676</id><published>2009-05-10T18:49:00.002+05:30</published><updated>2009-05-10T18:52:42.571+05:30</updated><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="एनडीए"/><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="भाजपा"/><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="श्री नरेंद्र मोदी"/><title type='text'>एक फोटो, जिसने &#39;सेकुलरिस्‍टों&#39; की नींदें उड़ा दीं</title><content type='html'>&lt;div align=&quot;center&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhlNO5BKatFxEK9LkKH-Z8iinOh_SAM6sMoXFZPqCF1RPovKT0UDiXBZuAGQsiBVgsa5Xj41kxAtTLojQIdlR0mYhP9_yYTFjN2m33FNRu6YrU79f1Z5QXOwjdLIymW9NIVbUaUvqSQi58/s1600-h/modiji_nitishji.jpg&quot;&gt;&lt;img id=&quot;BLOGGER_PHOTO_ID_5334184839984057218&quot; style=&quot;DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 337px; CURSOR: hand; HEIGHT: 223px; TEXT-ALIGN: center&quot; alt=&quot;&quot; src=&quot;https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhlNO5BKatFxEK9LkKH-Z8iinOh_SAM6sMoXFZPqCF1RPovKT0UDiXBZuAGQsiBVgsa5Xj41kxAtTLojQIdlR0mYhP9_yYTFjN2m33FNRu6YrU79f1Z5QXOwjdLIymW9NIVbUaUvqSQi58/s400/modiji_nitishji.jpg&quot; border=&quot;0&quot; /&gt;&lt;/a&gt; हिन्‍दुस्‍तान टाइम्‍स से साभार&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://hitchintak.blogspot.com/feeds/1539031229961426676/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment/fullpage/post/7024567440226660873/1539031229961426676' title='9 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7024567440226660873/posts/default/1539031229961426676'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7024567440226660873/posts/default/1539031229961426676'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://hitchintak.blogspot.com/2009/05/blog-post.html' title='एक फोटो, जिसने &#39;सेकुलरिस्‍टों&#39; की नींदें उड़ा दीं'/><author><name>संजीव कुमार सिन्‍हा</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11879095124650917997</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg-VUG_8k4GcxEdCmjpiY_6UDali2WkziCy8QL3pvL6x98CxCQkSWCPT0QSOxfne88NMZUAxuRH02FkYn1eMUbfqb1lDlWyIjQte5L7cGqhL9x2KHht1Wlw7WNx98YJCQ/s220/Mintoo.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhlNO5BKatFxEK9LkKH-Z8iinOh_SAM6sMoXFZPqCF1RPovKT0UDiXBZuAGQsiBVgsa5Xj41kxAtTLojQIdlR0mYhP9_yYTFjN2m33FNRu6YrU79f1Z5QXOwjdLIymW9NIVbUaUvqSQi58/s72-c/modiji_nitishji.jpg" height="72" width="72"/><thr:total>9</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7024567440226660873.post-7293559399093417191</id><published>2009-04-29T11:04:00.003+05:30</published><updated>2009-04-29T11:22:57.280+05:30</updated><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="यूपीए की असफलताएं"/><title type='text'>संप्रग सरकार यानी घोटालों की सरकार</title><content type='html'>&lt;blockquote&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style=&quot;color:#3333ff;&quot;&gt;कांग्रेस-नीत संप्रग सरकार के चरित्र में भ्रष्‍टाचार समाहित रहा और उसने&lt;br /&gt;संकीर्ण स्‍वार्थों की खातिर पूरे तंत्र को ध्‍वस्‍त कर दिया। कांग्रेसनीत केन्‍द्र&lt;br /&gt;सरकार के शासन में गेहूं आयात घोटाला, स्‍पेक्‍ट्रम घोटाला, स्‍कॉर्पियन पनडुब्‍बी&lt;br /&gt;घोटाला, वोल्‍कर घोटाला, सेज घोटाला, बालू प्रकरण, डीडीए घोटाला.....जैसे घोटालों&lt;br /&gt;का अंतहीन सिलसिला जारी रहा।&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;/blockquote&gt;&lt;p&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;घोटालों की सरकार यानी संप्रग सरकार के कारनामों पर एक नजर-&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style=&quot;color:#3333ff;&quot;&gt;&lt;strong&gt;बालू का मुद्दा&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;डीएमके मंत्री द्वारा अपने बेटों को फायदा पहुंचाने के लिए पेट्रोलियम तथा प्राकृतिक गैस मंत्रालय से अनुरोध करने तथा प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा मंत्रालय को पत्र लिखना दुर्भाग्यपूर्ण रहा।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मंत्री महोदय ने घोटाले में न केवल अपनी भूमिका को स्वीकार किया, जिसमें उन्होंने कहा कि मैने अपने बेटों की स्वामित्व वाली कम्पनियों के लिए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय से फायदा पहुंचाने की बात का अनुरोध किया है, बल्कि वह बड़ी दिठाई से &#39;तो क्या हुआ&#39; जैसा रवैया अपनाकर चलते रहे।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;इस घोटाले का रहस्य खुलने से एक और भी बड़ी बात जुड़ गई कि प्रधानमंत्री कार्यालय ने डीएमके मंत्री के इस मामले की सिफारिश करते हुए आठ-आठ पत्र पेट्रोलियम तथा प्राकृतिक गैस मंत्रालय को लिखे।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;यूपीए चेयरपर्सन की चुप्पी भी इस मामले में एक दम साफ रही क्योंकि यह बात हर व्यक्ति जानता है कि सरकार की पूरी राजनीतिक सत्ता ही उनके हाथों में है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;प्रधानमंत्री और यूपीए चेयरपर्सन दोनों ही की चुप्पी से पता चलता है कि कांग्रेस पार्टी और उसके नेतृत्व की सरकारों में शुचिता और जवाबदेही किस हद तक गिर गई है जो कभी पहले स्वतंत्रता के दशकों में हुआ करती थी।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style=&quot;color:#3333ff;&quot;&gt;क्वात्रोच्चि पर रहम&lt;span class=&quot;&quot;&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style=&quot;color:#3333ff;&quot;&gt;&lt;span class=&quot;&quot;&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;हाल ही में केन्द्रीय जांच ब्यूरो ने बहुचर्चित बोफोर्स तोप सौदा दलाली कांड के मुख्य अभियुक्त इतालवी नागरिक ओतावियो क्वात्रोच्चि का नाम आरोपी सूची से हटा दिया। ऐसा लगता है सोनिया गांधी के दवाब में प्रधानमंत्रीजी झुक गए हैं। &lt;/p&gt;&lt;p&gt;पिछले वर्ष यूपीए के कानून मंत्री श्री एच.आर. भारद्वाज की कृपा से बोफोर्स मामले में दलाल ओत्तावियो क्वात्रोच्चि के व्यक्तिगत खातों को डिफ्रीज कर दिया गया। सीबीआई सूत्रों के अनुसार इसका मतलब क्वात्रोच्चि के खिलाफ केस को कमजोर किया जाना है। एक ऐसी पार्टी, जिसमें वहां की सुप्रीम लीडर की इजाजत के बिना एक पत्‍ता भी हिल नहीं सकता है, जिससे निष्कर्ष निकालना जरा भी कठिन नहीं है। कानून मंत्री श्री एच.आर. भारद्वाज ने जो कुछ भी किया, उसे वह अपनी सुप्रीम लीडर की स्वीकृति के बिना करने की हिम्मत कर ही नहीं सकते थे।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;वह तब तक यह सब कुछ नहीं कर सकते थे, जब तक उन्हें यह विश्वास न हो जाए कि ऐसा करने से ही उनकी सुप्रीम लीडर खुश होगी। यह बात कि वे खुश थी, इस बात से सिद्ध हो गई जब श्री भारद्वाज की गलती के लिए उन्हें हटाने की बजाए उनको बचाया गया तथा उन्हें लगातार छठी बार राज्यसभा के लिए नामित कर उन्हें पुरस्कृत किया गया।&#39;&#39;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;यह याद रखना जरूरी होगा कि श्रीमती सोनिया गांधी के साथ क्वात्रोच्चि के व्यक्तिगत सम्बंध सबको मालूम है और कुछ सूत्रों का तो यह भी कहना है कि ये सम्बंध बहुत पहले के हैं। क्वोत्रोच्चि ने गांधी परिवार के सम्बंध में अपनी निकटता की बात अपने विभिन्न साक्षात्कारों में स्वीकार भी की है जिसका किसी ने खण्डन भी नहीं किया है। यूपीए सरकार क्वात्रोच्चि पर बड़ी मेहरबान रही है, हालांकि उनके खिलाफ आज भी रेड कार्नर नोटिस निकला हुआ है। वह अभी तक पुलिस और कोर्ट की निगाह में भगौड़ा है जिसे यूपीए सरकार बचा रही है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style=&quot;color:#3333ff;&quot;&gt;&lt;strong&gt;क्वात्रोच्चि गिरफ्तार&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;20 फरवरी 2007 को क्वात्रोच्चि अर्जेंटीना में गिरफ्तार कर लिया गया। अर्जेंटीना के कानून के मुताबिक भारत सरकार को उसके प्रत्यर्पण के लिए तीस दिनों के अंदर केस फाइल करनी थी, लेकिन संप्रग सरकार ने इस अति महत्त्वपूर्ण सूचना को लोगों से 20 दिनों तक छिपाए रखा। दुर्भाग्य है कि यह सूचना लोगों को चैनेलों के माध्‍यम से मिली। ऐसा लगता है कि सरकार इसे पूरे 30 दिनों तक छिपाए रखना चाहती थी, ताकि क्वात्रोच्चि फरार हो जाए। संप्रग सरकार यह कह कर अपना बचाव कर रही थी, कि भारत की अर्जेंटीना से कोई प्रत्यर्पण संधि नहीं है, हालांकि स्रोतों का कहना है कि दोनों देशों के बीच ब्रिटिश काल से ही प्रत्यर्पण संधि है, जिसे दोनों देशों में से किसी ने भी भंग नहीं किया है। &lt;br /&gt;सच तो यह है कि संप्रग सरकार का निर्णय गलत था। गौरतलब है कि अबू सलेम को बिना प्रत्यर्पण संधि के ही पुर्तगाल से भारत लाया गया था।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सीबीआई की लगातार विफलता से न केवल क्वात्रोची को रिहा होने में मदद मिली, बल्कि वह अपने देश लौटने में सफल रहा। सीबीआई अर्जेंटिना के कानूनों के मुताबिक दस्तावेजों को पेश करने में असफल रही। वह 25 मई 1997 के कोर्ट आदेश को भी प्रस्तुत करने में असफल रही, जिसके आधार पर भगोड़े का प्रत्यर्पण प्रयास जारी था। सीबीआई प्रत्यर्पण सुनिश्चित कराने के लिए अर्जेंटिना कोर्ट में दस्तावेज पेश करने में विफल रही। यह प्रत्यर्पण आदेश के लिए आवश्यक वैधानिक आधारों को भी नहीं पेश कर सकी। सीबीआई का सर्वाधिक हास्यास्पद बहाना यह कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पांच महीने बाद भी वह अर्जेंटिना कोर्ट के आदेश की आधिकारिक अनुवादिक कॉपी प्राप्त नहीं कर सकी। यह सभी गतिविधियां हमारे इस दावे की भलीभांति पुष्टि करते हैं कि &#39;क्वात्रोची बचाओ अभियान&#39; में सीबीआई के जरिए सरकार शामिल है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style=&quot;color:#3333ff;&quot;&gt;स्कोर्पियन पनडुब्बी घोटाला&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;गत मार्च 2006 में यूपीए सरकार का भ्रष्टाचार का एक बड़ा घोटाला सामने आया। मामला था र्स्कोपियन पनडुब्बी खरीद मामले में लगभग 750 करोड़ की दलाली लेने का। जिस &#39;थेल्स&#39; नाम कंपनी से भारत सरकार ने यह पनडुब्बी खरीदी उस कंपनी का नाम विश्व बैंक की काली सूची में दर्ज है। एनडीए सरकार के कार्यकाल में इस कंपनी की अविश्वसनीयता को धयान में रखते हुए थेल्स कंपनी के प्रस्तावों को रद्द कर दिया गया था। पर वहीं वर्तमान यूपीए सरकार ने उसी कंपनी से 18798 करोड़ रूपये के स्कोर्पियन पनडुब्बी का सौदा किया तथा लगभग 750 करोड़ रूपये की दलाली इस पूरे सौदे में कुछ बिचौलियों के बीच बांट ली गयी।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style=&quot;color:#3333ff;&quot;&gt;मित्रोखिन आर्काइव्ज में खुले भेद&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&#39;मित्रोखिन आर्काइव्ज&#39; के प्रकाशन से कांग्रेस और कम्युनिस्टों की शर्मनाक गाथा सामने आई जिससे पता चलता है कि धान के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा को भी खतरे में डाला जा सकता है। इस बात का आरोप लगा है कि इमर्जेंसी के उन बदनाम दिनों में केजीबी ने श्रीमती गांधी के समर्थन देने तथा उनके राजनैतिक विरोधियों के खिलाफ गतिविधियां चलाने के लिए 10.6 मिलियन रूबल (उस समय के विनिमय दर के हिसाब से लगभग 10 मिलियन पौंड से अधिाक) की राशि खर्च की थी।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;केजीबी के पेपरों से यह भी पता चलता है कि 1977 के चुनावों में केजीबी ने 21 गैर कम्युनिस्ट राजनीतिज्ञों को, जिन में चार केन्द्रीय मंत्री भी शामिल थे, को मदद दी थी। मास्को ने केजीबी के माध्‍यम से सीबीआई को बडी तादाद में धान दिया था। अकेले 1975 के पहले छह महीनों में ही 25 लाख रूपए भेजे गए थे।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style=&quot;color:#3333ff;&quot;&gt;वोल्कर&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;पॉल वोल्कर के नेतृत्व में संयुक्त राष्ट्र समिति में जो रहस्योद्धाटन हुए हैं उससे कांग्रेस की विफलताओं की सूची और बढ़ गई। इसमें कांग्रेस और तत्कालीन विदेश मंत्री श्री नटवर सिंह को 2001 में ईराकी तेल बिक्री में गैर अनुबंधीय लाभार्थी के रूप में दिखाया गया है। शुरू में प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह ने श्री नटवर सिंह से मुलाकात करने के बाद अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि अनाज के बदले तेल कार्यक्रम के बारे में संयुक्त राष्ट्र जांच में जो कुछ तथ्य सामने आए हैं वे किसी विपरीत निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए अपर्याप्त हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;बाद में कांग्रेस और प्रधानमंत्री को मुंह की खानी पड़ी जब श्री नटवर सिंह ने त्यागपत्र देने का फैसला किया ताकि कांग्रेस अधयक्ष श्रीमती सोनिया गांधी की खाल बचाई जा सके क्योंकि वे भी इस घोटाले में उतनी ही शामिल थी और यह बात उनकी सहमति और जानकारी के बिना नहीं हो सकती थी।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अब जांच श्री नटवर सिंह तक सीमित है और आश्चर्य की बात है कि यूपीए सरकार इस घोटाले पर अजीब सी चुप्पी साधो है जिसमें कांग्रेस भी शामिल है। सरकार ने वोल्कर घोटाले की जांच के लिए जस्टिस आर.एस. पाठक अथोरिटी गठित की है। यह अथोरिटी बड़ी धीमी गति से कार्य कर रही है। इसका 6 महीने का कार्यकाल पूरा हो चुका है। और इसका कार्यकाल आगे बढ़ा दिया गया है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style=&quot;color:#3333ff;&quot;&gt;पाठक अथॉरिटी की रिपोर्ट&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;जस्टिस आर.एस. पाठक अथॉरिटी की रिपोर्ट से कांग्रेस सुप्रीमो सोनिया गांधी और पूर्व विदेश मंत्री के. नटवर सिंह के लिए गहरा धक्‍का लगने वाली बात होनी चाहिए क्योंकि ये दोनों उसी दिन से ही अपने को निर्दोष होने का दावा करते आ रहे हैं जबसे संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा नियुक्त वोल्कर कमिटी ने &#39;अनाज के बदले तेल&#39; के कार्यक्रम के अंतर्गत अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा जारी किए गए तेल वाउचरों में इन दोनों का नाम गैर-अनुबंधीय लाभार्थी के रूप में लिया था। जस्टिस पाठक ने नटवर सिंह, उनके बेटे जगत सिंह दोनों को ही ठेका प्राप्त करने में अपने पदों का दुरूपयोग करने का दोषी पाया है। एक ऐसी पार्टी जहां श्रीमती सोनिया गांधी की स्वीकृति के बिना पता तक भी नहीं हिल सकता तो कैसे यह माना जा सकता है कि जो कुछ हुआ उसके बारे में श्रीमती गांधी को पता ही नहीं था।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;जस्टिस पाठक अथॉरिटी रिपोर्ट से प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह द्वारा क्लीन चिट पर भी प्रश्न खड़े हो जाते हैं जिसमें प्रधानमंत्री ने यह दावा किया था कि रिपोर्ट में &#39;अपर्याप्त साक्ष्य&#39; है जिनसे श्री नटवर सिंह के खिलाफ किसी विपरीत निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सकता। यदि ऐसी बात है तो जस्टिस पाठक श्री नटवर सिंह को कैसे दोषी ठहरा सकते हैं। यदि ऐसा है तो डा. मनमोहन सिंह ने क्यों नटवर सिंह से विदेश पोर्टफोलियो छीना और कुछ दिनों बाद क्यों उन्हें अपने मंत्रिमंडल से हटा दिया?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style=&quot;color:#3333ff;&quot;&gt;&lt;strong&gt;बोइंग सौदे में जांच की आवश्यकता&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;यूपीए सरकार ने एयर इंडिया के लिए विमान प्राप्त करने के लिए जो ढंग अपनाया है उससे भारत और विदेशों में गहरी नाराजगी है। जो प्रक्रिया अपनाई गई हैं उसमें कहीं पारदर्शिता नहीं हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style=&quot;color:#3333ff;&quot;&gt;नौसेना वार रूम से सूचनाएं लीक&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/strong&gt;पिछले दिनों भारतीय सेना के एक प्रमुख अंग नौसेना के वार रूम से कुछ गुप्त सूचनाएं लीक किये जाने व उन्हें विदेशियों को बेचे जाने का मामला सामने आया। इस बात की पुष्टि इससे भी होती है कि इस मामले में नौसेना के 3 अफसरों को बिना किसी कोर्ट मार्शल या जांच के बर्खास्त कर दिया गया। पर जिन लोगों ने यह सूचना लीक की और विदेषियों को बेचा उनके खिलाफ केंद्र सरकार ने कोई कार्यवाही अभी तक नहीं की है। यदि इस मामले में नौसेना के वरिश्ठ अधिकारियों को बर्खास्त किया गया तो इन बिचौलियों को सरकार क्यों बचा रही है? वह भी तो देशद्रोह का मामला है। रक्षा मंत्री प्रणव मुखर्जी का इस पूरे मामले में बयान आश्‍चर्य में डालने वाला है । उनका कहना है कि लीक हुई सूचनाएं वाणिज्य महत्व की थी।&lt;/p&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://hitchintak.blogspot.com/feeds/7293559399093417191/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment/fullpage/post/7024567440226660873/7293559399093417191' title='3 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7024567440226660873/posts/default/7293559399093417191'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7024567440226660873/posts/default/7293559399093417191'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://hitchintak.blogspot.com/2009/04/blog-post_29.html' title='संप्रग सरकार यानी घोटालों की सरकार'/><author><name>संजीव कुमार सिन्‍हा</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11879095124650917997</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg-VUG_8k4GcxEdCmjpiY_6UDali2WkziCy8QL3pvL6x98CxCQkSWCPT0QSOxfne88NMZUAxuRH02FkYn1eMUbfqb1lDlWyIjQte5L7cGqhL9x2KHht1Wlw7WNx98YJCQ/s220/Mintoo.jpg'/></author><thr:total>3</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7024567440226660873.post-3165843325032205889</id><published>2009-04-04T12:36:00.001+05:30</published><updated>2009-04-04T12:38:12.620+05:30</updated><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="कम्युनिज्म"/><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="माकपा"/><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="मार्क्‍सवाद"/><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="सीपीएम"/><title type='text'>&#39;मुंह में मार्क्‍स, बगल में मदनी&#39;</title><content type='html'>&lt;strong&gt;&#39;मुंह में मार्क्‍स, बगल में मदनी।&#39;&lt;/strong&gt; देश के सभी दलों को धर्मनिरपेक्षता का पाठ पढ़ाने वाली माकपा का यह नया दर्शन है। चुनावी मौसम में मुसिलम वोटों के लिए माकपा की बेताबी देखने लायक है और इसके लिए उसे सांप्रदायिक और आतंकवादी मुसिलम संगठनों से हाथ मिलाने से भी कोई परहेज नहीं रहा। केरल में अपने वाम सहयोगियों के विरोध के बावजूद वह कोयंबतूर बम कांड के आरोपी और आतंकवादियों से रिश्ते रखने वाले अब्दुल नासेर मदनी की पार्टी पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) से गठबंधन कर रही है तो पश्चिम बंगाल में नंदीग्राम और रिजवानुर हत्याकांड के बाद मुस्लिमों में बढ़ते असंतोष से पार पाने के लिए जमाते-इस्लामी-ए-हिंद और जमीअत-उलेमा-ए हिंद के साथ सहयोग की संभावनाएं तलाश रही है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;माकपा हमेशा से अल्पसंख्यकों की खास हितैषी होने का दावा करती रही है। पार्टी के मुताबिक वह अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और विकास पर विशेष ध्यान देती है। सच्चर कमेटी की सिफारिशों को अमली जामा पहनाने के लिए उसने यूपीए सरकार पर लगातार दबाव बनाए रखा। माकपा शासित राज्यों केरल और पश्चिम बंगाल में उसकी सरकारों ने अल्पसंख्यकों के विकास के लिए हर संभव कदम उठाए। लेकिन मुस्लिम इन दावों से प्रभावित हुए बगैर उससे छिटकते जा रहे हैं। चुनाव से ठीक पहले उसे अपने दो मुस्लिम सांसदों केरल के अब्दुल्ला कुट्टी और पश्चिम बंगाल के अबू आयेश मंडल को पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण निष्कासित करना पड़ा। यह कहीं न कहीं मुसिलमों में पार्टी के प्रति बढ़ते असंतोष का परिचायक है। केरल में तो माकपा को मुसिलम वोट कम ही मिलते हैं लेकिन पश्चिम बंगाल में अभी तक मुसिलम वोट माकपा के साथ थे। अब यहां भी नंदीग्राम और रिवानुर हत्याकांड के बाद मुसिलम वोटों के उससे छिटक कर तृणमूल के साथ जाने के आसार नजर आ रहे हैं। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;भाजपा की केसरिया सांप्रदायिकता को लेकर नाक-भौं सिकोड़ने वाली माकपा को शायद इस्लामी सांप्रदायिकता और उग्रवाद से कोई परहेज नहीं है। केंद्रीय नेतृत्व के संकोच, बाकी वाम दलों के विरोध और पार्टी के मुख्यमंत्री धड़े के एतराज के बावजूद केरल माकपा पर हावी पिनराई विजयन गुट मदनी की पीडीपी से गठबंधन कर रहा है। मदनी राज्य की उग्रवादी मुसिलम राजनीति के सितारे हैं और संगीन आरोपों से घिरे रहे हैं। वे कोयंबतूर बमकांड के अभियुक्त रहे लेकिन सबूतों के अभाव में बरी हो गए। लेकिन हाल ही में पकड़े आतंकवादियों से पता चला कि मदनी और उनकी पत्नी सूफिया के आतंकवादियों से रिश्ते लगातार बने रहे हैं और वे उन्हें पनाह भी देते रहे हैं। इसके अलावा उन पर सांप्रदायिकता भड़काने सहित कई मामलों में बीस मुकदमें चल रहे हैं। एक समय मदनी ने इस्लामी सेवक संघ बनाया था लेकिन अब उसका नाम बदल की पीडीपी कर दिया है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;केरल की सबसे ताकतवर मुसिलम पार्टी मुसलिम लीग कांग्रेस की अगुआई वाले मोर्चे के साथ हैं। इसलिए माकपा पिछले कुछ अर्से से उसके गढ़ में सेंध लगाने के लिए मदनी की पीडीपी का इस्तेमाल कर रही है। लेकिन माकपा और मदनी का यह सहयोग पर्दे की ओट में चलता था। माकपा कहती थी पीडीपी उसका समर्थन कर रही है तो वह कैसे इंकार करे। लेकिन इस चुनाव में माकपा की कलई खुल गई है क्योंकि उसने पोन्नई की सीट भाकपा के घोर विरोध के बावजूद मदनी की पार्टी के उम्मीदवार को दी। इसके बाद माकपा ने वाम मोर्चे के कार्यकर्ता सम्ममेलनों में मदनी और उनकी पार्टी के नेताओं को बुलाना शुरू किया। इसका वाम मोर्चे के प्रमुख घटक भाकपा और आरएसपी ने विरोध किया। इन दोनों दलों की दलील है कि पीडीपी एक सांप्रदायिक पार्टी है। लेकिन माकपा उनके विरोध की जरा भी परवाह नहीं कर रही। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मदनी को लेकर वाम मोर्चे में ही नहीं तो माकपा के अंदर भी मतभेद है। खुद मुख्यमंत्री अच्युतानंदन ही पीडीपी के साथ गठबंधन के खिलाफ हैं। उन्होंने हाल ही में यह बयान देकर अपनी नाराजगी साफ कर दी कि मदनी को क्लीन चिट नहीं दी जाएगी। यह भी बताया जाता है कि मुख्यमंत्री ने पार्टी की पोलित ब्यूरो से माकपा-पीडीपी गठबंधन के खिलाफ शिकायत की है। लेकिन राज्य माकपा सचिव विजयन पीडीपी को &#39;धर्मनिरपेक्ष&#39; होने का प्रमाण पत्र बांटते फिर रहे हैं। पार्टी के सामने पशोपेश की स्थिति तब पैदा हो गई जब जमाते-इस्लामी-ए-हिंद और जमीअत-उलेमा-ए-हिंद ने भी पीडीपी को सांप्रदायिक संगठन करार दे दिया। मजेदार बात यह है कि माकपा का केंद्रीय नेतृत्व पार्टी के लिए इन दोनों संगठनों का समर्थन जुटाने में लगा हुआ है। इन संगठनों की जल्दी ही पश्चिम बंगाल वाम मोर्चे के अध्यक्ष विमान बोस के साथ बैठक होने वाली है। यह बात अलग है कि इन दोनों मुसिलम संगठनों का केंद्रीय नेतृत्व माकपा के साथ सहयोग के पक्ष में है लेकिन उनकी स्थानीय इकाइयां इसके खिलाफ है। पश्चिम बंगाल की इकाई नंदीग्राम के बाद माकपा के साथ किसी भी तरह के तालमेल के खिलाफ है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि माकपा के अभेद्य गढ़ों केरल और पश्चिम बंगाल में पार्टी के पैरों तले जमीन खिसकती जा रही है। इससे हताश माकपा मुसलिम सांप्रदायिक और उग्रवादी संठनों के साथ प्रेम की पींगें बढ़ाने के लिए मजबूर हो रही है। दरअसल माकपा मुसिलमों को रिझाने के लिए हर तह के तरीके इस्तेमाल करती रही है। उसने मुसलिमों के इराक और फिलिस्तीन जैसे वैश्विक इस्लामी मुद्दे बहुत जोर-शोर से उठाए। करेल में उसकी सभाओं में अक्सर सद्दाम हुसैन और यासिर अराफत की तस्वीरें तक लगाई जाती रहीं। मुसलिम समुदाय में व्याप्त पिछड़ेपन को दूर करने के लिए उसने सच्चर कमेटी की सिफारिशों को लागू कराने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा दिया। हाल ही में उसने अपने घोषणा पत्र में पार्टी ने मुसलिमों के लिए विशेष उपयोजना बनाने के अलावा उनके लिए समान अवसर आयोग गठित करने और बैंक कर्जों में से 15 फीसद कर्ज मुसलिमों को देने के लुभावने वायदे किए। गुरूवार की प्रेस कांफ्रेंस में करात ने माकपा शासित राज्यों में मुसिलमों के लिए किए गए विकास कार्यों के आंकड़ों का अंबार लगा दिया। लेकिन पार्टी के कुछ नेताओं का कहना है कि मुसलिम मतदाताओं पर न तो इन विकास कार्यों का असर हो रहा है और न चुनावी वायदों का। बड़ी तादाद में मुसलिमों को टिकट देना भी बहुत काम नहीं आता इसलिए चुनाव में ऐसे मुसलिम संगठनों का साथ लेना जरूरी हो गया है जिनका मुसलिमों पर अच्छा खास असर हो। मुसलिम वोटों की मृग मरीचिका उसे मुसलिम सांप्रदायिक ओर उग्रवादी मुसलिम संगठनों के साथ हाथ मिलाने के लिए मजबूर कर रही है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;-सतीश पेडणेकर&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;जनसत्ता(28 मार्च, 2009) से साभार</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://hitchintak.blogspot.com/feeds/3165843325032205889/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment/fullpage/post/7024567440226660873/3165843325032205889' title='4 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7024567440226660873/posts/default/3165843325032205889'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7024567440226660873/posts/default/3165843325032205889'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://hitchintak.blogspot.com/2009/04/blog-post.html' title='&#39;मुंह में मार्क्‍स, बगल में मदनी&#39;'/><author><name>संजीव कुमार सिन्‍हा</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11879095124650917997</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg-VUG_8k4GcxEdCmjpiY_6UDali2WkziCy8QL3pvL6x98CxCQkSWCPT0QSOxfne88NMZUAxuRH02FkYn1eMUbfqb1lDlWyIjQte5L7cGqhL9x2KHht1Wlw7WNx98YJCQ/s220/Mintoo.jpg'/></author><thr:total>4</thr:total></entry></feed>