<?xml version="1.0" encoding="UTF-8" standalone="no"?><?xml-stylesheet href="http://www.blogger.com/styles/atom.css" type="text/css"?><rss xmlns:itunes="http://www.itunes.com/dtds/podcast-1.0.dtd" version="2.0"><channel><title>khabar kee talash</title><description></description><managingEditor>noreply@blogger.com (Social Reformer)</managingEditor><pubDate>Thu, 19 Dec 2024 08:53:03 +0530</pubDate><generator>Blogger http://www.blogger.com</generator><openSearch:totalResults xmlns:openSearch="http://a9.com/-/spec/opensearchrss/1.0/">18</openSearch:totalResults><openSearch:startIndex xmlns:openSearch="http://a9.com/-/spec/opensearchrss/1.0/">1</openSearch:startIndex><openSearch:itemsPerPage xmlns:openSearch="http://a9.com/-/spec/opensearchrss/1.0/">25</openSearch:itemsPerPage><link>https://khabarkeetalash.blogspot.com/</link><language>en-us</language><itunes:explicit>no</itunes:explicit><itunes:subtitle/><itunes:owner><itunes:email>noreply@blogger.com</itunes:email></itunes:owner><item><title>डिवाइन हर्ट फाउंडेशन की 27वीं वर्षगांठ पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दिया आशीर्वाद</title><link>https://khabarkeetalash.blogspot.com/2023/12/President-Draupadi-Murmu-blesses-Divine-Heart-Foundation-on-its-27th-anniversary.html</link><category>Uttar Pradesh</category><author>noreply@blogger.com (Social Reformer)</author><pubDate>Tue, 12 Dec 2023 13:08:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-8273185744249164225.post-1674772869147239243</guid><description>&lt;p&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgYVs-C8Cxze8DdfYzV4JHtA2Izg5CcJmoDcE6Hj0aLRPMcE8UTel4zzZEPSia4KgajQnBLbOOMAUNAIKFtuz7s8GwudJPJfXm9ndV5QO1D5x8miL8xkSmuJBweV9WTIYxScJAqgk6uNXxuT-ieHKPizPPSd7xBH2eXuxznXyvSPdgvKgPySDrnDxo7Jstb/s1024/IMG-20231211-WA0002.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em; text-align: center;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="693" data-original-width="1024" height="434" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgYVs-C8Cxze8DdfYzV4JHtA2Izg5CcJmoDcE6Hj0aLRPMcE8UTel4zzZEPSia4KgajQnBLbOOMAUNAIKFtuz7s8GwudJPJfXm9ndV5QO1D5x8miL8xkSmuJBweV9WTIYxScJAqgk6uNXxuT-ieHKPizPPSd7xBH2eXuxznXyvSPdgvKgPySDrnDxo7Jstb/w640-h434/IMG-20231211-WA0002.jpg" width="640" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;blockquote&gt;&lt;p&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;नर सेवा, नारायण सेवा की भावना ही हमारी शक्ति: राष्ट्रपति&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;सभी डॉक्टर जन जागरूकता के लिए कार्य करें: राष्ट्रपति&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;लखनऊ मेरा घर है और डिवाइन समूह लखनऊ का गौरव है: राजनाथ सिंह&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;विकसित राष्ट्र के निर्माण के लिए लोगों का स्वस्थ रहना जरूरी: राज्यपाल&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;डिवाइन में राष्ट्रपति जी का स्वागत : केशव मौर्य&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;सेवा और समाज हित में डिवाइन का योगदान : ब्रजेश पाठक&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;/blockquote&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;b&gt;लखनऊ। &lt;/b&gt;भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने कहा है कि नर सेवा नारायण सेवा की भावना ही भारत की शक्ति है। डिवाइन हर्ट समूह और इसके संस्थापक&amp;nbsp; को इसके लिए साधुवाद। यह अस्पताल आज इसी भावना के साथ कार्य कर रहा है यह खुशी की बात है। देश के सभी डॉक्टर जन जागरूकता के लिए कार्य करें। डिवाइन हर्ट फाउंडेशन के 27&amp;nbsp; वर्ष पूरे हो गए। इस अवसर पर आज भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने अपना आशीर्वाद दिया। उन्होंने सुबह की अपनी बनारस की उपस्थिति और शाम को लखनऊ में होने की खुशी को भी जाहिर किया।&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;डिवाइन अस्पताल परिसर में आयोजित एक भव्य समारोह में राष्ट्रपति के साथ उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदी बेन पटेल, भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, उपमुख्य मंत्री ब्रजेश पाठक सहित अनेक महत्वपूर्ण लोग उपस्थित थे। कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन से हुआ। श्रीमती आभा श्रीवास्तव ने स्वागत गीत और सरस्वती वंदना प्रस्तुत किया। डिवाइन समूह के संस्थापक डॉक्टर ए के श्रीवास्तव ने स्वागत भाषण प्रस्तुत कर डिवाइन के आधार से सभी को अवगत कराया। डॉक्टर अभिषेक श्रीवास्तव और डॉक्टर श्रेया श्रीवास्तव ने डिवाइन की 27 वर्षों की यात्रा को प्रस्तुत किया। प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदी बेन पटेल ने अपने आशीर्वचन दिए और डिवाइन को और उन्नति की कामना की। कार्यक्रम लखनऊ के अनेक गण्यमान्य लोग उपस्थित थे।&lt;/p&gt;</description><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgYVs-C8Cxze8DdfYzV4JHtA2Izg5CcJmoDcE6Hj0aLRPMcE8UTel4zzZEPSia4KgajQnBLbOOMAUNAIKFtuz7s8GwudJPJfXm9ndV5QO1D5x8miL8xkSmuJBweV9WTIYxScJAqgk6uNXxuT-ieHKPizPPSd7xBH2eXuxznXyvSPdgvKgPySDrnDxo7Jstb/s72-w640-h434-c/IMG-20231211-WA0002.jpg" width="72"/><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title> नवरात्रा में नींबू पानी के सही व्रत से घुटने का दर्द, ब्लड प्रेशर, शुगर जैसी बहुत सी बीमारियां होती है ख़त्म</title><link>https://khabarkeetalash.blogspot.com/2022/09/Many-diseases-like-knee-pain-blood-pressure-sugar-end-due-to-the-proper-fasting-of-lemonade-in-Navratra.html</link><category>Adhyatm</category><author>noreply@blogger.com (Social Reformer)</author><pubDate>Thu, 29 Sep 2022 08:26:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-8273185744249164225.post-2550278647023341626</guid><description>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhVEiEgw1NH7lKK9R_CoB7S4IXJBBtTC8I8jR03XTy2H0IFD1ffJcaDYFZh0D6-iQojjwf3NhvRqkml5yHd5DIsx62BLBUsoJKt7trA3Wk7hTNF2hhBtRlvvDxi_7qRzZTevZzmcFKjT1cilfbvf1ftv9bE337KOYHKT9tab4p_XM9E4L4BUUBHjk9WEg/s480/WhatsApp%20Image%202022-09-28%20at%204.53.13%20PM.jpeg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="480" data-original-width="467" height="640" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhVEiEgw1NH7lKK9R_CoB7S4IXJBBtTC8I8jR03XTy2H0IFD1ffJcaDYFZh0D6-iQojjwf3NhvRqkml5yHd5DIsx62BLBUsoJKt7trA3Wk7hTNF2hhBtRlvvDxi_7qRzZTevZzmcFKjT1cilfbvf1ftv9bE337KOYHKT9tab4p_XM9E4L4BUUBHjk9WEg/w622-h640/WhatsApp%20Image%202022-09-28%20at%204.53.13%20PM.jpeg" width="622" /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;ul style="text-align: left;"&gt;&lt;li&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;सन्त उमाकान्त जी ने बताये नवरात्रा का नियम और गुंजाईश&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;व्रत से कमजोर हुआ मन साधना में सुरत का साथ देता और ये शब्द को पकड़कर ऊपरी लोकों में जाने लगती है&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;b&gt;गाजियाबाद (उ.प्र.)। &lt;/b&gt;बाबा जयगुरुदेव जी के आध्यात्मिक उत्तराधिकारी, इस समय के युगपुरुष पूरे समरथ सन्त सतगुरु उज्जैन वाले बाबा उमाकान्त जी महाराज ने 26 सितंबर 2022&amp;nbsp; प्रातः गाज़ियाबाद में दिए व अधिकृत यूट्यूब चैनल जयगुरुदेवयूकेएम पर लाइव प्रसारित संदेश में नवरात्रा का नियम बताया। महात्माओ ने क्या नियम बनाया? अगर तबीयत खराब रहती हो तो नींबू पानी लगातार लो। जब दवा न थी तब रोग तकलीफ न आवे इसके लिए लोग साल में दो बार आने वाली नवरात्रा करते, नींबू पानी पीते थे, जिससे बदन बिल्कुल हल्का हो जाता था। नियम पालन से बहुतों का घुटने का दर्द, ब्लड प्रेशर शुगर आदि सही हो गया।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;यदि आपका शरीर बहुत कमजोर है, बहुत बुड्ढे हो, चल फिर नहीं सकते हो, दवा खानी पड़ती है, अंग्रेजी दवा खाते हो, (व्रत) हो नहीं सकता हो उनकी बात तो अलग है लेकिन जिनके शरीर में बल है, चल फिर लेते हो, हल्की-फुल्की तकलीफ जैसे पेट खराब, जुखाम आदि आ जाती है, उसको दूर करने के लिए उपवास करना ही चाहिए। आँतड़ियों में मल जमा हो जाता है। टेढ़ी-मेढ़ी है। कुछ भी खाओ और दवा भी खाओ तो वो सीधे मल को निकालता ही रहता है लेकिन उनको (जमी चिकनाई) नहीं निकाल पाता इसलिए पेट को खाली होना चाहिए। नींबू खारा होता है। उसकी सफाई तो ठीक तरह से तभी होगी जब पेट खाली रहेगा।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;यदि पूरा व्रत सही से न हो पाए तो गुंजाइश&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;जिसका नहीं चलता है तो दोनों टाइम जो भोजन खाते हो, खाने के लिए जीते हो उसको कम कर दो। एक चीज, उबला हुआ थोड़ा- आलू लौकी तरोई जो जल्दी हजम होने वाली चीज को खालो, पेट को थोड़ा खाली रखो। अब भी मन नहीं मानता है तो हल्की खिचड़ी दलिया एक टाइम खालो। इससे हो जाएगी सफाई। जब पेट हल्का होता है तो चाहे जो भी काम हो उसमें मन लगता है चाहे मजदूरी नौकरी व्यापार खेती भजन में मन लगता है। गुरु महाराज कहते थे कि रात को भजन में नींद आलस्य न आवे, एक रोटी का भूख रखकर के खाओ। गुरु महाराज जी ने तो बहुत छूट दिया। पहले के महात्माओं ने कहा एक टाइम खाओ। एक आहारी सदा व्रतधारी, एक नारी सदा ब्रह्मचारी।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;व्रत से मन कमजोर हो जाता है&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;नवरात्रि नौ दिनों की क्यों होती है? यह जो परमात्मा की अंश जीवात्मा सुरत के दुश्मन रजोगुण तमोगुण सतोगुण है उनको नष्ट करने के लिए क्योंकि तीनों की डोरी ऊपर बंधी है और देवता नहीं चाहते कि जीव ऊपर निकल जाए (तो पाप पुण्य के बंधन में बांधे रखते हैं)। तीन दिन में जब हल्का शरीर रहता है, ताकत में कमी आ जाती है तो मन नहीं कहता कुछ करो, सुस्त कमजोर पड़ जाता है क्योंकि यही मन सब कुछ करता है। आंख के पास बैठकर देखने, जीभ पर बैठकर स्वाद लेने, नभ्या का स्वाद, कान से सुनने का काम मन ही सब कुछ करता है तो व्रत से मन कमजोर हो जाता है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;नवरात्रि में उपवास करने वालों का मन भजन में ज्यादा लगता है&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;तीन दिन में तमोगुण फिर तीन दिन बाद रजो गुण खत्म होता है। फिर एकदम से कमजोर शरीर हो जाता है, चाहे रोग से ही हो फिर भगवान को याद करता है। कहा है-&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;दीन गरीबी मांग तेरे भले की कहूं&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;कहा है सतगुरु से दीनता गरीबी मांगना चाहिए जिससे दुनिया की इच्छाएं खत्म हो जाए। तो सतोगुण भी खत्म होता है। जो सतसंगी नवरात्रा में उपवास करते हैं उनका मन भजन में ज्यादा लगता है। दुनियादार यदि इसी को अपना लेंगे तो वे जिनको भगवान मान लेंगे उसको याद करेंगे। तो नौ दिन में तीनों चीजें खत्म और शरीर की बाहरी इंद्रियों पर बैठ के रस लेने वाला मन हो जाता है कमजोर। सुरत को जब शब्द के साथ जोड़ते हैं तब मन उसका साथ दे देता है और इस पिंड (शरीर) से निकल करके सुरत अंड ब्रह्मांड लोक में शब्द को पकड़ करके जाने लगती है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;</description><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" 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both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjUjBQJGdFBvbCYIMpmK5bHqFLAADQJYZWMB0Q95BlrDasG-9bfoQAS_FTMt2IjlQWJmj77vd907SbNPehlbrk4l6JaG-DoDtYCPw-PbSTBfYW_w-nENULqlNiqpDCbl_Cvi2cELvS78PEptAD_V6NfkzuIO2yWXXqcEoJ1O_QLXFLZlEjbMB1Xi4lLtw/s1536/WhatsApp%20Image%202022-09-27%20at%204.10.33%20PM.jpeg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="863" data-original-width="1536" height="360" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjUjBQJGdFBvbCYIMpmK5bHqFLAADQJYZWMB0Q95BlrDasG-9bfoQAS_FTMt2IjlQWJmj77vd907SbNPehlbrk4l6JaG-DoDtYCPw-PbSTBfYW_w-nENULqlNiqpDCbl_Cvi2cELvS78PEptAD_V6NfkzuIO2yWXXqcEoJ1O_QLXFLZlEjbMB1Xi4lLtw/w640-h360/WhatsApp%20Image%202022-09-27%20at%204.10.33%20PM.jpeg" width="640" /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;b&gt;नई दिल्ली। &lt;/b&gt;महिला एवं बाल विकास मंत्रालय भारत सरकार द्वारा उतर&amp;nbsp; प्रदेश में पोषण माह के अन्तर्गत स्वस्थ बालक स्पर्धा के विभिन्न कार्यक्रमों का&amp;nbsp; आयोजन हुआ।&amp;nbsp; स्वस्थ बालक स्पर्धा का आयोजन प्रदेश के 1.8 लाख से अधिक आँगनबाड़ी केन्द्रों पर किया गया। स्वस्थ बालक स्पर्धा कार्यक्रम के माध्यम से जनमानस को यह संदेश देना है कि बच्चे के सही शारीरिक और मानसिक विकास के लिए संतुलित और पौष्टिक आहार के साथ स्वच्छता और बच्चे की वृद्धि निगरानी भी बहुत जरूरी है। शारीरिक रूप से कमजोर बच्चे की प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण वह बार बार बीमारी पड़ेगा और अपने साथ के बच्चों से पीछे रह जाएगा। इस स्पर्धा के माध्यम से ऐसे बच्चों के माता-पिता को बच्चों की विशेष देख-भाल के लिए प्रेरित करना भी रहा है, जिनके बच्चें अपेक्षाकृत कमजोर है। इस स्पर्धा में विभाग के अधिकारियों / कर्मचारियों के साथ-साथ स्वास्थ्य विभाग, पंचायतीराज, ग्राम विकास स्वास्थ्य बालक बालिका स्पर्धा के आयोजन में स्थानीय संस्थाओं स्वयं सहायता समूहों, शैक्षणिक संस्थाएँ, यूथ क्लब, लायन्स क्लब, रोटरी क्लब, आशा, ए०एन०एम० आई०एम०ए० आदि का सक्रिय सहयोग लिया गया।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;इस स्पर्धा को सभी ऑगनबाड़ी केन्द्रों / बाल विकास परियोजना कार्यालयों पर त्योहार / उत्सव के रूप में मनाया गया तथा समुदाय में स्वास्थ्य एवं पोषण के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धात्मक जागरूकता लायी गयी। स्वास्थ्य बालक बालिका स्पर्धा के आयोजन में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की सहभागिता भी प्राप्त हुआ। स्वस्थ बालक बालिका प्रतियोगिता के आयोजन पश्चात् ग्राम पंचायत स्तर पर दिनॉक 2 अक्टूबर 2022 को पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन किया जायेगा। सभी आँगनबाड़ी केन्द्रों पर बच्चों की रैकिंग प्रथम, द्वितीय, तृतीय के रूप में की गयी है तथा बच्चों की माता-पिता (विशेष कर माताओं को) प्रमाण-पत्र भी उपलब्ध कराया जायेगा। प्रतियोगिता में स्वस्थ पाये गये बच्चों को उनकी रैकिंग के अनुसार ऑगनबाड़ी केन्द्र / स्थानीय स्तर पर निर्मित खिलौने आदि पुरस्कार के रूप में दिये जायेगें।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;आंगनवाड़ी केंद्रों पर संसाधनों के अतिरिक्त आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका को प्रमुख सेविका तथा अधिकारियों के नियमत सहयोगात्‍मक पर्यवेक्षन को तकनीक आधार बनाने के लिए विभाग द्वारा विकसित ‘सहयोग&amp;nbsp; ऐप’ का विमोचन किया गया। इस कार्यक्रम में 03-06 वर्ष के बच्चों के लिए ईसीसीआई आधार 'बाल पिटारा' मोबाइल ऐप का लॉन्च भी किया गया। आकांक्षात्मक जनपदों में 06 वर्ष की आयु तक के बच्चों के लिए दूरभाष पर गतिविधियों आधारित सीखने-सिखाने की प्रणाली -“दुलार” कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। “दुलार” कार्यक्रम में 08 आकांक्षात्मक जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया गया।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;</description><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" 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href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjE5oZVmZmCZDvi492Xev_Dqqk87KgPxI1MPL57FprXT9h6YOa0o1Nj7EIdDeq9TAX3S2j999mZbQbji2KKvFrUU8IHjAPYizYbcFpHOIqnGUjiybASh_l9f4-UIA4TWAgJA4qAYYEEtj6VlzaqVbiNem_N59eyKykpQT2ovYqwfzNzq8Zr-F0_ObiW1A/s1080/WhatsApp%20Image%202022-09-23%20at%203.31.21%20PM.jpeg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;span style="font-family: verdana; font-size: medium;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="608" data-original-width="1080" height="360" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjE5oZVmZmCZDvi492Xev_Dqqk87KgPxI1MPL57FprXT9h6YOa0o1Nj7EIdDeq9TAX3S2j999mZbQbji2KKvFrUU8IHjAPYizYbcFpHOIqnGUjiybASh_l9f4-UIA4TWAgJA4qAYYEEtj6VlzaqVbiNem_N59eyKykpQT2ovYqwfzNzq8Zr-F0_ObiW1A/w640-h360/WhatsApp%20Image%202022-09-23%20at%203.31.21%20PM.jpeg" width="640" /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;ul style="text-align: left;"&gt;&lt;li&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="font-family: verdana; font-size: large;"&gt;जीव को अनमोल दौलत नामदान देने वाले समरथ गुरु के एहसान को कोई चुका ही नहीं सकता&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="font-family: verdana; font-size: large;"&gt;मां के एहसान को नहीं भूलना चाहिए&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-family: verdana; font-size: medium;"&gt;&lt;b&gt;रेवाड़ी (हरियाणा)। &lt;/b&gt;अगले-पिछले जन्मों में मिले और मिलने वाले कर्म फल को दुःखों तकलीफों को अपनी दिव्य दृष्टि से देखते हुए जीवों पर तरस खा कर, उन्हें प्रेम से समझा बता कर विश्वास दिला कर हर तरह से मदद करके अपने असला घर सतलोक ले जाने के लिए कुछ समय के लिए मनुष्य शरीर में आये हुए इस समय के पूरे समरथ सन्त सतगुरु त्रिकालदर्शी उज्जैन वाले बाबा उमाकान्त जी महाराज ने 16 सितम्बर 2022 सायं बावल आश्रम, रेवाड़ी (हरियाणा) में दिए व अधिकृत यूट्यूब चैनल जयगुरुदेवयूकेएम पर लाइव प्रसारित संदेश में बताया कि उस प्रभु के भेजे सभी महापुरुषों का एक उद्देश्य रहा कि कलयुग में भटकते दु:ख झेलते जीवों को समझा कर निज घर पहुंचा दिया जाय।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-family: verdana; font-size: large;"&gt;&lt;b&gt;अपने पिछले जन्मों की दुःख तकलीफ मनुष्य देख ले तो परेशान हो जाएगा&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-family: verdana; font-size: medium;"&gt;बहुत दिन हो गए जब से अपने असला घर सतलोक से अलग हुए, छोड़े तब से बराबर दु:ख झेल रहे हैं। वह दु:ख अगर याद आ जाये, कोई याद करा दे तो आदमी बहुत परेशान हो जाएगा। जैसे गलती का एहसास होने पर व्यक्ति बराबर उसी को याद करता सोचता परेशान रहता है, इसी तरह से जीव परेशान हो जाएगा। क्योंकि यह भूल भ्रम काल माया का देश है। उसने सतपुरुष से वरदान में मांग लिया कि जीव को पिछले जन्म की बातें याद न रहे इसीलिए आदमी उन तकलीफों को देख नहीं पा रहा है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-family: verdana; font-size: large;"&gt;&lt;b&gt;छल कपट इतना बढ़ गया कि मददगार से भी लोग छल कपट कर देते हैं&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-family: verdana; font-size: medium;"&gt;जब किसी को तकलीफ होती है तब प्रभु को याद करता है, कहता है अब हम ऐसी गलती नहीं करेंगे कि हमको फिर यह तकलीफ हो। तकलीफ का कारण भी मालूम हो जाता है। सतसंग बराबर सुनने वालों को अच्छा-बुरा का ज्ञान रहता है। लेकिन चाहे जान में बने या अनजान में बने, बुरे का फल तो बुरा ही होता है। कहता तो है लेकिन ठीक होने पर भूल जाता है। स्वार्थपरता छल कपट इतना लोगों में बढ़ गया कि मदद करने वाले से भी लोग छल कपट कर जाते हैं, एहसान नहीं मानते।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-family: verdana; font-size: large;"&gt;&lt;b&gt;मां, गुरु और काल भगवान जिन्होंने मनुष्य शरीर दिया, उनका एहसान नहीं भूलना चाहिए&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-family: verdana; font-size: medium;"&gt;गुरु का, मां का, ये शरीर देने वाले का कितना एहसान है लेकिन उसको, उसका स्थान भूल जाते हैं। कब? जब धन प्रतिष्ठा, हर तरह की संपन्नता आ जाती है, उसके अहंकार में आदमी मां के एहसान को जो 9 महीना पेट में रखा पैदा किया पाला दूध पिलाया टट्टी पेशाब धोया बड़ा किया, ये बहुत बड़ा अहसान है लेकिन मां को गाली देते घर से बाहर निकाल देते हैं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-family: verdana; font-size: large;"&gt;&lt;b&gt;एहसान को कभी भूलना नहीं, चुकाना चाहिए&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-family: verdana; font-size: medium;"&gt;समरथ गुरु का एहसान तो कोई चुका ही नहीं सकता है जो उपकार उन्होंने किया, जीवों को धोया साफ किया, गंदगी में पड़े हुए थे, इस शरीर की, जीवात्मा की कीमत नहीं मालूम पड़ रही थी, उन्होंने बोध ज्ञान कराया और अनमोल चीज (नामदान) दिया। लेकिन उन चीजों से, उनके बताए रास्ते से अलग हो रहे हैं। सुख शांति का एक रास्ता भजन सुमिरन ध्यान करने का, न मन लगे तो सेवा करने का जो दिया इसी को छोड़ दे रहे हैं, गुरु के वचनों और गुरु को ही भूल रहे हैं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-family: verdana; font-size: large;"&gt;&lt;b&gt;काल भगवान के बगीचे को उखाड़ोगे, नियम तोड़ोगे तो तकलीफ तो आएगी ही आएगी&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-family: verdana; font-size: medium;"&gt;काल के एहसान को भूल रहे हैं। काल के ही बगीचे को उखाडने में, उसके नियम को तोड़ने में लगे हुए हैं तो तकलीफ तो आएगी ही आएगी। जैसे मां छोटे बच्चे की रक्षा देखभाल करती, कीड़े मकोड़ों जानवरों से बचाती है। बच्चा बड़ा हो गया तो भी वह प्रभु से प्रार्थना करती रहती है मेरे बच्चे का ध्यान रखना, दया करना। ऐसे गुरु भी बराबर ध्यान रखे रहते हैं, जीवों की संभाल के लिए लगे रहते हैं। जो यह देवी-देवता त्रिदेव ब्रह्मा विष्णु महेश हैं इनसे भी वह अपने जीवों के लिए कहते हैं, बचाने की कोशिश करते हैं कि हमारे जीव पर दया करना रक्षा करना, जो तुम्हारे हाथ में हैं वो हमारे जीवों के लिए, उनके शरीर के लिए करना। वह भी अपने बच्चे की तरह से (ध्यान रखते हैं) लेकिन जीव एहसान को भूल रहा है। अहसान को कभी नहीं भूलना चाहिए, एहसान को चुकाना चाहिए।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;</description><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjE5oZVmZmCZDvi492Xev_Dqqk87KgPxI1MPL57FprXT9h6YOa0o1Nj7EIdDeq9TAX3S2j999mZbQbji2KKvFrUU8IHjAPYizYbcFpHOIqnGUjiybASh_l9f4-UIA4TWAgJA4qAYYEEtj6VlzaqVbiNem_N59eyKykpQT2ovYqwfzNzq8Zr-F0_ObiW1A/s72-w640-h360-c/WhatsApp%20Image%202022-09-23%20at%203.31.21%20PM.jpeg" width="72"/><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title> गीता पढ़ने वालों को चौथे स्कन्ध के 34वें श्लोक के बारे में सोचना चाहिए</title><link>https://khabarkeetalash.blogspot.com/2022/09/Those-who-read-the-Gita-should-think-about-the-34th-verse-of-the-fourth-skandha.html</link><category>Adhyatm</category><author>noreply@blogger.com (Social Reformer)</author><pubDate>Wed, 14 Sep 2022 17:16:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-8273185744249164225.post-7252975693256648140</guid><description>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiHM1fwQUAWhEBOccmsD3MTsT9zULq0E4JDi-87YpwJg61v6hh2Aavvl6u5KqC8cPv3QXJBi_UY7FniDa569gaSPzX7RJE-QVAVIJZxflgAwdVgBmdMaGMtbcGR_6ugHDShyxf8mVi6y9lvy6hf5IcBuD5AkbljHKgZZIADWSn5Pvv1TrgadbWqs02Qxg/s1280/WhatsApp%20Image%202022-09-14%20at%204.49.14%20PM.jpeg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;span style="font-family: Hind; font-size: medium;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="962" data-original-width="1280" height="482" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiHM1fwQUAWhEBOccmsD3MTsT9zULq0E4JDi-87YpwJg61v6hh2Aavvl6u5KqC8cPv3QXJBi_UY7FniDa569gaSPzX7RJE-QVAVIJZxflgAwdVgBmdMaGMtbcGR_6ugHDShyxf8mVi6y9lvy6hf5IcBuD5AkbljHKgZZIADWSn5Pvv1TrgadbWqs02Qxg/w640-h482/WhatsApp%20Image%202022-09-14%20at%204.49.14%20PM.jpeg" width="640" /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;ul style="text-align: left;"&gt;&lt;li&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="font-family: Hind; font-size: large;"&gt;जयगुरुदेव नाम में पावर कब तक रहेगी&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="font-family: Hind; font-size: large;"&gt;प्रार्थना करने से क्या होता है&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-family: Hind; font-size: medium;"&gt;&lt;b&gt;उज्जैन (म.प्र.) । &lt;/b&gt;अपने दिव्य सतसंग के माध्यम से सभी वर्गों के लोगों की सभी तरह की समस्या तकलीफों के कारण और उपाय बता समझा देने वाले, घर परिवार में सुख शांति लाने वाले, आत्म कल्याण के लिए अनमोल दौलत नामदान देने वाले, जीवों की भलाई में परमार्थ के काम में गुरु के मिशन को पूरा करने में अनवरत लगे इस समय के पूरे समरथ सन्त सतगुरु त्रिकालदर्शी उज्जैन वाले बाबा उमाकान्त जी महाराज ने 1 सितंबर 2022 दोपहर वलसाड़ (गुजरात) में दिए व अधिकृत यूट्यूब चैनल जयगुरुदेवयूकेएम पर लाइव प्रसारित संदेश में बताया कि गुरु महाराज ने जयगुरुदेव नाम जगाया।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-family: Hind; font-size: large;"&gt;&lt;b&gt;जयगुरुदेव नाम कब तक चलेगा&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-family: Hind; font-size: medium;"&gt;जयगुरुदेव नाम को जब लोग बदनाम करने लग जाएंगे, इससे स्वार्थ सिद्ध करने लग जाएंगे, ऐसा समय आएगा कि लोग इसको पंथ बना लेंगे, जिससे लोग कमाने खाने लग जाएंगे तब इसका भी असर कम हो जाएगा। धीरे-धीरे कम होगा फिर खत्म हो जाएगा। फिर जो आएगा वो कोई दूसरा नाम जगाएगा। अभी तो यह आपके-हमारे रहते नाम रहेगा, एक आध पुश्त तक और भी रह सकता है, यह तो उस मालिक की मर्जी के ऊपर है। तो समझो यह जयगुरुदेव नाम भगवान का, प्रभु का नाम है। और इनमें (आये हुए भक्तगण) से काफी लोग ऐसे बैठे हैं जिनको बताया गया जयगुरुदेव नाम की ध्वनि सुबह शाम बोलो और बोलने लगे तो उनके घर का झगड़ा-झंझट खत्म हो गया।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-family: Hind; font-size: large;"&gt;&lt;b&gt;गीता पढ़ने वालों को सोचना चाहिए&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-family: Hind; font-size: medium;"&gt;कृष्ण केवल महापुरुष ही थे। वो पार नहीं कर सकते थे जीवों को, साफ-साफ उन्होंने कहा था। किससे? पांडवों से। जब पांडवों ने कहा आप अपने साथ हमको लेते चलिए तब बोले हम तुमको नहीं ले जा सकते। समरथ गुरु की तलाश करनी पड़ेगी, उनसे रास्ता लेना पड़ेगा, भजन करना पड़ेगा, योग साधना करनी पड़ेगी तब तुम धाम जा सकते हो। ये चीज गीता पढ़ने वालों को सोचना चाहिए। गीता के चौथे स्कंध के 34वें श्लोक में लिखा हुआ है की आत्मा के उद्धार के लिए समर्थ गुरु की खोज करनी पड़ेगी। कृष्ण उनको अपने साथ नहीं ले गए थे।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-family: Hind; font-size: large;"&gt;&lt;b&gt;प्रार्थना करने से क्या होता है&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-family: Hind; font-size: medium;"&gt;महाराज जी ने 2 सितंबर 2022 सांय सूरत (गुजरात) में दिये गये संदेश में बताया कि प्रार्थना सब लोगों को याद होना चाहिए। प्रार्थना करने से क्या होता है? वह (प्रभु) ऊपर से देखते हैं और दया करते हैं। मेहर की नजर करो मेरी ओर, दया की नजर करो मेरी ओर - ये प्रार्थना की जाती है जब, पापी ह्रदय पिघल कर आंखों से निकल आया, इन आंसुओं की माला लो भेंट है तुम्हारी। जब आंखों से आंसू गिरते हैं तो वह देखते हैं कि दुखी है, अब इसकी मदद कर देनी चाहिए। बच्चा जब रोता है आंख से आंसू निकलता है तब मां कितना भी जरूरी काम कर रही हो लेकिन उठ करके जाती है आंसू पोंछती है चुप कराती है उसकी इच्छा जो दूध पीने की या कुछ खाने पीने की होती है वो खिलाती पिलाती है। लेकिन जब तक रोओगे नहीं तब तक वो कैसे रीझेगा? हंसि हंसि कंत न पाइए, जिन पाया तिनि रोइ। यह उदाहरण इसलिए दे रहा हूं कि किसी तरह आपको समझ में आए।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-family: Hind; font-size: large;"&gt;&lt;b&gt;सतलोक का भोजन अमृत है&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-family: Hind; font-size: medium;"&gt;महाराज जी ने 18 अप्रैल 2020 सांय उज्जैन आश्रम में दिये गये संदेश में बताया कि ये शरीर का भोजन धान गेहूं मेवा मिष्ठान आदि है। जब यह पांच तत्वों का शरीर छूटता है जब 17 तत्वों के लिंग शरीर जिसमें देवी-देवता रहते हैं उसमें उनका भोजन सुगंधी है। और अंदर में एक शरीर है, एक लोक है- सूक्ष्म लोक। उसमें जो रहते हैं उनका भोजन रोशनी है नूर है प्रकाश है। और कारण लोक भी है। कारण लोक में शब्द का आहार है और जब यह सतलोक पहुंचती है तो अमृत का आहार मिलता है इसको, अमृत पीती है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;</description><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiHM1fwQUAWhEBOccmsD3MTsT9zULq0E4JDi-87YpwJg61v6hh2Aavvl6u5KqC8cPv3QXJBi_UY7FniDa569gaSPzX7RJE-QVAVIJZxflgAwdVgBmdMaGMtbcGR_6ugHDShyxf8mVi6y9lvy6hf5IcBuD5AkbljHKgZZIADWSn5Pvv1TrgadbWqs02Qxg/s72-w640-h482-c/WhatsApp%20Image%202022-09-14%20at%204.49.14%20PM.jpeg" width="72"/><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title> सनातन संस्कृति के आचार्यस्तम्भ का मोक्षलोकगमन</title><link>https://khabarkeetalash.blogspot.com/2022/09/Salvation-of-Acharyastambh-of-Sanatan-Culture.html</link><category>death news</category><author>noreply@blogger.com (Social Reformer)</author><pubDate>Mon, 12 Sep 2022 00:34:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-8273185744249164225.post-9131984094158666813</guid><description>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhB2FiHhwrPiIZ2o4BfKHEGUaJn0loWlntfIoEr7FguvLqc2F6FgwhHarMeWLGgsHpaLF3IRYCx12ySEHL2C3e-KGCXTZ9v9e64g1GzbZnSDBAL-YuUgHyNKVQN_AHilBppLw1F9q92pDFO0Fy9jhLUmZqLTDXJf2DsjyDQNED1hO0R5L2Ox92o86baOQ/s948/shankaracharya.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;span style="font-family: Hind; font-size: medium;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="533" data-original-width="948" height="360" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhB2FiHhwrPiIZ2o4BfKHEGUaJn0loWlntfIoEr7FguvLqc2F6FgwhHarMeWLGgsHpaLF3IRYCx12ySEHL2C3e-KGCXTZ9v9e64g1GzbZnSDBAL-YuUgHyNKVQN_AHilBppLw1F9q92pDFO0Fy9jhLUmZqLTDXJf2DsjyDQNED1hO0R5L2Ox92o86baOQ/w640-h360/shankaracharya.jpg" width="640" /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;ul style="text-align: left;"&gt;&lt;li&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="font-family: Hind; font-size: medium;"&gt;पोथीराम उपाध्याय से स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती तक की यात्रा&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;div style="text-align: center;"&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="font-family: Hind; font-size: medium;"&gt;(2 सितम्बर 1924 - 11 सितंबर 2022)&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;p style="text-align: left;"&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="font-family: Hind; font-size: medium;"&gt;संजय तिवारी&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-family: Hind; font-size: medium;"&gt;सनातन संस्कृति के पूज्यचरण सनातन के आचार्य हैं। आचार्य परंपरा में आदि गुरु हरिहर से पदक्रम होकर भगवान आदिशंकराचार्य तक की यात्रा अविराम रही है। भगवान आदि शंकराचार्य से आगे का क्रम अविरल, अविराम गतिमान है जिसकी छत्र छाया में सनातन की यात्रा चल रही है। इस यात्रा का एक पड़ाव आज पितृपक्ष की प्रतिपदा को शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद जी के परलोकगमन के रुप मे उपस्थित हुआ है। एक बालक पोथीराम उपाध्याय से स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती बनने तक की यात्रा को एक आलेख में समेटना संभव नहीं। एक संत, एक स्वाधीनता सेनानी, एक आचार्य और सनातन के धर्माचार्य तक के उनके व्यक्तित्व के अनेक पक्ष हैं। उनके किसी पक्ष से कुछ असहमति या कुछ अलग पक्ष भी संभव है लेकिन यह सर्वविदित है कि सनातन के एक स्तंभ आचार्य के रूप में स्वामी स्वरूपानंद जी महाराज का जीवन पथ सनातन संस्कृति के लिए पाथेय दिग्दर्शक के रूप में सदैव उपस्थित रहेगा।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-family: Hind; font-size: medium;"&gt;सनातन संस्कृति की रक्षा और इसको संगठित करने की भावना से आदिगुरु भगवान शंकराचार्य ने भारत के चारों दिशाओं में चार धार्मिक राजधानियां (गोवर्धन मठ, श्रृंगेरी मठ, द्वारका मठ एवं ज्योतिर्मठ) बनाई। इन चार में से द्वारकामठ के शंकराचार्य हैं स्वामी स्वरूपानंद जी सरस्वती। स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का जन्म 2 सितम्बर 1924 को मध्य प्रदेश राज्य के सिवनी जिले में जबलपुर के पास दिघोरी गांव में ब्राह्मण परिवार में पिता श्री धनपति उपाध्याय और मां श्रीमती गिरिजा देवी के यहां हुआ। माता-पिता ने इनका नाम पोथीराम उपाध्याय रखा। नौ वर्ष की उम्र में उन्होंने घर छोड़ कर धर्म यात्रायें प्रारम्भ कर दी थीं।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-family: Hind; font-size: medium;"&gt;इस दौरान वह काशी पहुंचे और यहां उन्होंने ब्रह्मलीन श्री स्वामी करपात्री महाराज वेद-वेदांग, शास्त्रों की शिक्षा ली। यह वह समय था जब भारत को अंग्रेजों से मुक्त करवाने की लड़ाई चल रही थी। जब 1942 में अंग्रेजों भारत छोड़ो का नारा लगा तो वह भी स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़े और 19 साल की उम्र में वह 'क्रांतिकारी साधु' के रूप में प्रसिद्ध हुए। इसी दौरान उन्होंने वाराणसी की जेल में नौ और मध्यप्रदेश की जेल में छह महीने की सजा भी काटी। वह करपात्री महाराज की राजनीतिक दल राम राज्य परिषद के अध्यक्ष भी थे। 1950 में वे दंडी संन्यासी बनाये गए और 1981 में शंकराचार्य की उपाधि मिली। उन्होंने शारदा पीठ शंकराचार्य स्वामी ब्रह्मानन्द सरस्वती से दण्ड-सन्यास की दीक्षा ली और स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती नाम से जाने जाने लगे।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-family: Hind; font-size: medium;"&gt;जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी दो मठों (द्वारका एवं ज्योतिर्मठ) के शंकराचार्य रहे हैं। ज्योतिर्मठ की आचार्यपीठ का विवाद न्यायालय तक गया। ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद जी सरस्वती हैं। यह विदित होना चाहिए कि शंकराचार्य का पद बहुत महत्वपूर्ण है। सनातन संस्कृति के हिंदुओं का मार्गदर्शन एवं भगवत् प्राप्ति के साधन आदि विषयों में हिंदुओं को आदेश देने के विशेष अधिकार शंकराचार्यों को प्राप्त होते हैं। सभी हिंदूओं को शंकराचार्यों के आदेशों का पालन करना चाहिये । वर्तमान युग में अंग्रेजों की कूटनीति के कारण धर्म का क्षय, जो कि हमारी शिक्षा पद्धति के दूषित होने एवं गुरुकुल परंपरा के नष्ट होने से हुआ है । हिंदूओं को संगठित कर पुनः धर्मोत्थान के लिये चारों मठों के शंकराचार्य एवं सभी वैष्णवाचार्य महाभाग सक्रिय हैं ।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-family: Hind; font-size: medium;"&gt;स्वामी स्वरुपानंद सरस्वती जी, सांई बाबा की पूजा करने के विरोध में रहे क्योंकि कुछ हिंदू दिशाहीन हो कर अज्ञानवश असत् की पूजा करने में लगे हुए हैं जिससे हिंदुत्व में विकृति पैदा हो रही है । स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी के अनुसार इस्कॉन भारत में आकर कृष्ण भक्ति की आड़ में धर्म परिवर्तन कर रहा है, ये अंग्रेजों की कूटनीति है कि हिंदुओं का ज्ञान ले कर हिंदुओं को ही दीक्षा दे कर अपना शिष्य बना रहे हैं | श्री स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी का 95 वां जन्मदिवस वृंदावन में बर्ष 2018 में मनाया गया एवं यहीं उनका 72वां चातुर्मास समपन्न हुआ था।&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p style="text-align: center;"&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="font-family: Hind; font-size: medium;"&gt;ॐ शांतिः।।&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;</description><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhB2FiHhwrPiIZ2o4BfKHEGUaJn0loWlntfIoEr7FguvLqc2F6FgwhHarMeWLGgsHpaLF3IRYCx12ySEHL2C3e-KGCXTZ9v9e64g1GzbZnSDBAL-YuUgHyNKVQN_AHilBppLw1F9q92pDFO0Fy9jhLUmZqLTDXJf2DsjyDQNED1hO0R5L2Ox92o86baOQ/s72-w640-h360-c/shankaracharya.jpg" width="72"/><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title> वक्त के पूरे समर्थ सन्त ही शरीर से जीवात्मा को निकालकर प्रभु सतपुरुष तक हैं पहुँचाते</title><link>https://khabarkeetalash.blogspot.com/2022/06/only-the-capable-saints-of-time-take-out-the-soul-from-the-body-and-reach-the-lord-satpurush.html</link><category>Adhyatm</category><author>noreply@blogger.com (Social Reformer)</author><pubDate>Wed, 22 Jun 2022 08:44:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-8273185744249164225.post-4891544181454118261</guid><description>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgaiuXYM_dJZ_PE2Wu6LolzxjFyFTrUDABsOO_H2wDdkd_iZcEqOWMrNVdMPpgq1-NOGC1cMcjvuFCvX9RHg4uPpaiI4mWvzMcMgLajseODwiVBFjQ_WWqGa5Gqxfxej9EAPGabog3ynyn1TItEq2XIW0vb_p1EJS-aYAkjJFnX9OiABBmAR6mupGwgcw/s420/baba%20umanand.jpeg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="336" data-original-width="420" height="512" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgaiuXYM_dJZ_PE2Wu6LolzxjFyFTrUDABsOO_H2wDdkd_iZcEqOWMrNVdMPpgq1-NOGC1cMcjvuFCvX9RHg4uPpaiI4mWvzMcMgLajseODwiVBFjQ_WWqGa5Gqxfxej9EAPGabog3ynyn1TItEq2XIW0vb_p1EJS-aYAkjJFnX9OiABBmAR6mupGwgcw/w640-h512/baba%20umanand.jpeg" width="640" /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;ul style="text-align: left;"&gt;&lt;li&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;जीवों को नर्क चौरासी, जन्म-मरण की असहनीय पीड़ा से बचाने के लिए सतपुरुष सन्तों को धरती पर भेजा करते हैं&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;धरती पर चलते-फिरते जीते-जागते मनुष्य शरीर में मौजूद वक़्त के सन्त सतगुरु से ज्यादा आस्था जड़ फोटो, पत्थर, मंदिर, जमीन में रखने वाले, टेकी, लकीर के फ़क़ीर, तोते की तरह केवल शब्दों को रटने-दोहराने वाले और 'वक़्त के सतगुरु' का अर्थ जानबूझ कर नजर अंदाज कर गुरु की बात काटने वाले मनमुखी भक्तों को भी अपनाने वाले, समझाते-समझाते न थकने वाले, वक़्त के समर्थ सन्त सतगुरु दुःखहर्ता त्रिकालदर्शी उज्जैन वाले बाबा उमाकान्त जी महाराज ने 7 जून 2022 को सूरत (गुजरात) में दिए व यूट्यूब चैनल जयगुरुदेवयूकेएम पर लाइव प्रसारित संदेश में बताया कि इस भारत भूमि पर हमेशा महापुरुष रहे हैं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;b&gt;धर्म की बेल पूरे विश्व में धर्म परायण भारत देश से है फैली&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;यह धर्म परायण देश है। धर्म की बेल यहीं से बढ़ी है। पूरे विश्व में धर्म यहीं से फैला है। कुछ देशों में तो भारत से भी खराब हालत है। वहां तो आदमी को जहां मिल गया खा लिया, सो लिया, भोग कर लिया। यहां तो भारतीय संस्कृति है। मैं घूमा हूं, देखा हूं विदेशों में। अगर भारतीय संस्कृति लाने वाले लोग न पहुंचते तो एकदम जानवरों जैसी जिंदगी लोग जीते।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;भारत की धर्म धरती पर अवतारी शक्तियों और सन्तों का हुआ अवतरण&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;भारत में सन्त महात्मा महापुरुषों का अवतरण हुआ है। जब-जब जरूरत पड़ी तब-तब उसने उसी तरह की शक्ति दे करके भेजा। राम-कृष्ण, महावीर, परशुराम, बुद्ध आदि तरह-तरह के लोग आये। सन्त कबीर पलटू नानक जगजीवन दास राधास्वामी शिव दयाल महाराज जी आए। गुरु महाराज, उनके गुरु महाराज दादा गुरु महाराज जैसे सन्त इस धरती पर पैदा हुए। जब ये पैदा होते, आते हैं तो कोई जमीन फाड़कर, आसमान चीरकर नहीं पैदा होते। यह भी मां के पेट से ही पैदा होते हैं लेकिन इनके संस्कार अच्छे होते हैं ।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;संस्कार किसको कहते हैं ?&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;जैसे आप सतसंगी हो, शाकाहारी हो। आप अपने बच्चों को सिखाते हो कि शाकाहारी रहो, प्रार्थना करो, नाम ध्वनि बोलो, ध्यान, भजन करो, सब सिखाते हो। उससे संस्कार बनता है। ऐसे ही ऊपर से भी जीवों का संस्कार बनता है। ऊपर से भेजे जीव उस समय के गुरु सन्त के पास पहुँच जाते हैं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;पाप कम होने पर बैठ कर व बढ़ने पर घूम-घूम कर प्रचार, संभाल करते हैं&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;सन्त हमेशा इस धरती पर रहते हैं। जब अत्याचार पापाचार बहुत बढ़ जाता है तब घूम-घूम कर प्रचार करते, लोगों को बताते, समझाते, खानपान चाल-चलन विचार भावना को सही रखने का उपदेश करते हैं। जब शांति रहती है समय पर जाड़ा गर्मी बरसात होती है, मां बेटे का कर्तव्य, पति-पत्नी का कर्तव्य एक-दूसरे का समझते हैं, माता-पिता का फर्ज अदा करते हैं, अपने-अपने तौर तरीके से ही सही भगवान के भजन के लिए लोग थोड़ा समय निकालते हैं, परमात्मा को याद करते हैं ऐसे समय में&amp;nbsp; एक जगह पर रुक करके संभाल करते रहते हैं। वक्त के मौजूदा गुरु को यह काम करना रहता है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;वक्त के पूरे समर्थ सन्त ही शरीर से जीवात्मा को निकालकर प्रभु सतपुरुष तक हैं पहुँचाते&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;दोनों आंखों के बीच में जीवात्मा बैठी है। वही इस शरीर को चलाती है। सन्त इसे शरीर से निकाल कर के ऊपर उस प्रभु के पास ले जाते हैं। जब वहां पहुंच जाती है तो अपनी पावर, ताकत में आ जाती है। फिर वह आदेश करते हैं, जाओ तुम अब जीवों का काम करो, उन्हें जगाओ। जीवों को रास्ता बता कर के हमारे पास पहुंचाओ। इस काम के लिए सतपुरुष सन्तों को भेजा करते हैं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;</description><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgaiuXYM_dJZ_PE2Wu6LolzxjFyFTrUDABsOO_H2wDdkd_iZcEqOWMrNVdMPpgq1-NOGC1cMcjvuFCvX9RHg4uPpaiI4mWvzMcMgLajseODwiVBFjQ_WWqGa5Gqxfxej9EAPGabog3ynyn1TItEq2XIW0vb_p1EJS-aYAkjJFnX9OiABBmAR6mupGwgcw/s72-w640-h512-c/baba%20umanand.jpeg" width="72"/><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>कोरोना के डर से बहुत से लोगों ने मांस खाना बंद कर दिया था अब जुबान के स्वाद के खातिर फिर से शुरू कर दिया </title><link>https://khabarkeetalash.blogspot.com/2022/06/many-people-had-stopped-eating-meat-due-to-fear-of-corona-now-started-again-for-the-taste-of-the-tongue.html</link><category>Adhyatm</category><author>noreply@blogger.com (Social Reformer)</author><pubDate>Mon, 20 Jun 2022 20:22:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-8273185744249164225.post-3282213092959581413</guid><description>&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEieWhqKOyqdhy5SQMqaofmAYTgQSF79FtzyaKxYWZ1sSDlxj4fUMoLZ6ZiveK-QfboTCMwsADFxbvndXzJNILkaPVStP1e-AKPg611m9uJK3YdKyAvv_0RMVXcdtr2esuCm_2Zla5z7kvdM66qhDK1Aq_KtRmEc5YiixOJyo9WIPLrCGpptAV932VSRQg/s539/baba%20umanand%20ji%20maharaj.jpeg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="472" data-original-width="539" height="350" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEieWhqKOyqdhy5SQMqaofmAYTgQSF79FtzyaKxYWZ1sSDlxj4fUMoLZ6ZiveK-QfboTCMwsADFxbvndXzJNILkaPVStP1e-AKPg611m9uJK3YdKyAvv_0RMVXcdtr2esuCm_2Zla5z7kvdM66qhDK1Aq_KtRmEc5YiixOJyo9WIPLrCGpptAV932VSRQg/w400-h350/baba%20umanand%20ji%20maharaj.jpeg" width="400" /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;ul&gt;&lt;li&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;b&gt;तकलीफ अगर याद रहे तो काहे को आवे&amp;nbsp;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;b&gt;सच्ची पूजा इबादत भजन का रास्ता अगर मालूम हो जाए तो जीवन सार्थक, नहीं तो कौड़ी बदले जाए&amp;nbsp;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;इस अनमोल मनुष्य जीवन की सार्थकता को बताने समझाने वाले, दुःख के बार-बार आने के कारण और उसके स्थाई समाधान के उपाय बताने वाले, शाकाहार सदाचार नशामुक्ति पर जोर देने वाले, अज्ञानता में लोगों की बेकार जाती मेहनत को बचाने वाले, इस समय के पूरे समर्थ सन्त सतगुरु दुःखहर्ता त्रिकालदर्शी तत्वदर्शी धरती के सरताज उज्जैन वाले बाबा उमाकान्त जी ने 6 जून 2022 को वलसाड़ (गुजरात) में दिए व अधिकृत यूट्यूब चैनल जयगुरुदेवयूकेएम पर लाइव प्रसारित संदेश में बताया कि देखो धन-दौलत कितना भी इकट्ठा करले, पूजा-पाठ कितना भी करले, आदमी को शांति नहीं मिल पा रही है। कारण क्या है? जिस मनुष्य शरीर रूपी मंदिर से आप पूजा-पाठ करते हो वही गंदा है। जैसे मंदिर में कोई गंदी चीज डाल दे तो कोई वहां पूजा नहीं करता, ऐसे ही ये मानव मंदिर है। इसमें जब लोग मुर्दा मांस डाल देते हैं तो कितना भी पूजा-पाठ करो वह कबूल नहीं करता।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;मांस, मछली, अंडा, शराब का सेवन करते, मंदिरों में जाते है तो कैसे कह सकते हैं कि हम धार्मिक हैं&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;जो लोग मांस-अंडा खाते, शराब का नशा करते, होश में नहीं रहते, वो कहते हैं हम धार्मिक हैं, हम पूजा करते हैं, मंदिरों में जाते हैं, हवन, अनुष्ठान, यज्ञ सब करते है। लेकिन कैसे कहां से करते हैं? इसी मानव मंदिर के अंग से, हाथ से करते हैं। इसी से फूल पत्ती प्रसाद चढ़ाते, इसी मुहं से श्लोक पढ़ते, स्तुति प्रार्थना करते हैं। तो जब यही गंदा है तो वो मालिक कहां से कबूल करेगा? नहीं करेगा।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;हिंसा-हत्या कीया, पशु-पक्षियों का मांस निकाल के उसके जीव को सताया इसलिए वो पूजा-उपासना कबूल नहीं कर रहा और नाराज होकर के सजा देता है&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;बच्चा गंदा हो करके आता है तो आप गले नहीं लगाते। पहले सफाई करते हो तब गले लगाते हो। गंदगी कोई पसन्द नहीं करता तो मालिक कैसे गन्दगी पसंद करेगा? जिसमें सड़न गलन बदबू हो, दिल दु:खा कर, हिंसा-हत्या कर, मांस निकाल कर खाया गया हो, उसके ही जीव को सताया हो तो (आपकी पूजा) कबूल नहीं करेगा और नाराज हो जाता है फिर सजा देता है। यहां भी सजा मिलती है, तकलीफ आती है।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;आदमी तकलीफ को भूल जाता है, अगर याद रहे तो काहे को तकलीफ दुबारा आवे&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;कोरोना काल में लोगों ने बढ़िया से बढ़िया दवा खिलाया लेकिन फायदा नहीं हुआ। बहुत से मांसाहारी चले गए। वैज्ञानिकों ने भी कहना शुरू कर दिया चमगादड़, मेंढक, बिल्ली, तोता खाने से मर्ज फैला है। वो भी कहने लगे मांस खाने वाले के ऊपर दवा का असर नहीं हो रहा है, मांस को छोड़ो। बहुत से लोगों ने डर के मारे मांस खाना छोड़ दिया था। लेकिन अब जुबान के स्वाद के खातिर फिर चालू कर दिया। देखा जाएगा जो होगा। तकलीफ आती है, आदमी भूल जाता है। तकलीफ अगर याद रहे तो काहे को तकलीफ आवे?&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;सच्ची पूजा इबादत भजन का रास्ता अगर मालूम हो जाए तो जीवन सार्थक, नहीं तो कौड़ी बदले जाए&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;मंदिर को अगर साफ-सुथरा रखेंगे, पूजा इबादत भजन का रास्ता अगर मालूम हो जाए तब तो यह जीवन सार्थक होगा नहीं तो ये कौड़ी बदले जाएगा।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;बाबा उमाकान्त जी के अनमोल वचन&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;ul style="text-align: left;"&gt;&lt;li&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;ऐसा कोई काम मत करो जिससे देश, किसी व्यक्ति, धर्म, धार्मिक ग्रंथ का नुकसान हो।&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;आध्यात्मिक ज्ञान के बिना यह विज्ञान विनाशकारी है।&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;देशभक्ति और मानव प्रेम का जज्बा पैदा करने का कार्य करो, लोगों को आध्यात्मिक बनाओ।&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, उन्मादों से बचो और लोगों को भी बचाओ।&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;हराम का पैसा जहां भी लगेगा, वहीं विनाश करेगा।&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;</description><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEieWhqKOyqdhy5SQMqaofmAYTgQSF79FtzyaKxYWZ1sSDlxj4fUMoLZ6ZiveK-QfboTCMwsADFxbvndXzJNILkaPVStP1e-AKPg611m9uJK3YdKyAvv_0RMVXcdtr2esuCm_2Zla5z7kvdM66qhDK1Aq_KtRmEc5YiixOJyo9WIPLrCGpptAV932VSRQg/s72-w400-h350-c/baba%20umanand%20ji%20maharaj.jpeg" width="72"/><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>गुरु महाराज से लेकर अब तक के चमत्कारों के संकलन की किताब इतनी मोटी बनेगी कि गाड़ी पर रखकर ले जाना पड़ेगा </title><link>https://khabarkeetalash.blogspot.com/2022/06/compilation-of-miracles-from-guru-maharaj-till-now.html</link><category>Adhyatm</category><author>noreply@blogger.com (Social Reformer)</author><pubDate>Thu, 16 Jun 2022 23:22:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-8273185744249164225.post-2424441203303454441</guid><description>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiVbKc1o9iGiwfI7J6vvR-EWjJ_dPQeS_onxJGua8cXrWuva603O_z9PkYOWTLxdqY88AtmHmebHvnWgM0Qd_wX5Ts2IDPjXxY_e0IiZnksUs7yVlxAYyO-gH3ln2i_KUzx2AfT6-5NHdw3rul8pgDNYyyHYFHl-e9YjfsWIauBYI5IAY84lKlOGEc98g/s448/baba%20umanand%20ji%20maharaj%20(3).jpeg" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="246" data-original-width="448" height="352" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiVbKc1o9iGiwfI7J6vvR-EWjJ_dPQeS_onxJGua8cXrWuva603O_z9PkYOWTLxdqY88AtmHmebHvnWgM0Qd_wX5Ts2IDPjXxY_e0IiZnksUs7yVlxAYyO-gH3ln2i_KUzx2AfT6-5NHdw3rul8pgDNYyyHYFHl-e9YjfsWIauBYI5IAY84lKlOGEc98g/w640-h352/baba%20umanand%20ji%20maharaj%20(3).jpeg" width="640" /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;ul style="text-align: left;"&gt;&lt;li&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;b&gt;यदि बच्चों पर संस्कार नहीं डाले तो आपकी सब मेहनत बेकार, कमाई उड़ा देंगे और नाम बदनाम कर देंगे&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;b&gt;जयगुरुदेव नाम ध्वनि बोलने से लोगों की जा रही बीमारी, तकलीफें, परीक्षा लेकर देख लो&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;जीवों के दुःख से दुखी होकर इस कलयुग में जीवों के कष्टों को हरने का संजीवनी बूटी, महामंत्र के समान जीवनदायी उपाय बताने वाले, बार-बार परीक्षा लेकर देख लो कहकर कष्टों में वास्तविक प्रैक्टिकल लाभ दिलाने वाले उज्जैन के बाबा उमाकान्त जी महाराज ने 6 जून 2022 को वलसाड़ (गुजरात) में दिए व अधिकृत यूट्यूब चैनल जयगुरुदेव यूकेएम पर लाइव प्रसारित संदेश में बताया कि अपने-अपने घरों में रोज सुमिरन ध्यान भजन करो। अपने-अपने घरों में गुरु महाराज का फोटो लगा लो, मंदिर बना लो। वहां साफ-सफाई जैसे मंदिरों की करते हो, साफ करो।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&amp;nbsp;मंदिर बनाते क्यों है?&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;पूजा पाठ के लिए। जब घर में मंदिर बना रहे, फोटो लगा रहे हैं तो हमको यहां ध्यान-भजन करना चाहिए। बच्चों पर उसका संस्कार बनेगा, असर पड़ेगा। आप अगर टीवी, मोबाइल में लगे रहोगे तो बच्चों को उससे कैसे बचा पाओगे? आपकी तो उम्र हो गयी, सब देख, समझ चुके हो लेकिन ये नादान बच्चे कैसे समझेंगे कि हमको इन चीजों से बचना चाहिए। वो और बुरे हो जाएंगे। बच्चों पर संस्कार माता-पिता, परिवारवालों का पड़ता है, उससे वो आगे बढ़ते हैं। यदि आपने बच्चों पर संस्कार नहीं डाले तो आपकी सब मेहनत बेकार, कमाई उड़ा देंगे और नाम बदनाम कर देंगे।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;b&gt;नियम बनाओ, नाम ध्वनि बोलो और तकलीफों में आराम पा लो&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;बराबर सब लोग नियम बनाओ, जयगुरुदेव नाम की ध्वनि बोलो। इससे तकलीफें जाएंगी। बहुत से लोगों की गईं। आप लोग जब बैठो तो प्रपंच की बातें मत करो, समझने की कोशिश करो। एक दूसरे से पूछने की कोशिश करो। महिलाएं महिलाओं से, पुरुष पुरुषों से पूछो। आप कैसे जुड़े हैं? बहुत से चमत्कार हुए। गुरु महाराज से लेकर अब तक जितने चमत्कार हुए, अगर लिखा जाए तो इतनी मोटी किताब तैयार होगी कि गाड़ी पर रखकर ले जाना पड़ेगा, इतने लोगों को लाभ मिला है।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;b&gt;लगातार एक घन्टा सुबह और शाम नाम ध्वनि बोलने वालों के घरों से बीमारी तकलीफें दूर, बिगड़े बच्चे भी सुधर गए&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;जब सब उसी के जीव हो, आप गुरु के बंदे हो तो आप से क्या सौतेला व्यवहार करेंगे? आप से भी प्रेम करेंगे, दया देंगे। सबको दया दे रहे हैं। सुबह और शाम नाम ध्वनि चालू करा दो। जिन्होंने विश्वास के साथ चालू करा दिया उनको बहुत फायदा हुआ। उनके बच्चे बिगड़ रहे थे, वह भी सुधरे। घर में से बीमारियां निकली, लड़ाई-झगड़ा कम, खत्म हो गया। विश्वास तो करो। एक कान से सुनोगे, दूसरे कान से निकाल दोगे तो कहां से प्रैक्टिकल हो पाएगा?&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;b&gt;जिन लोगों को नामदान मिल गया, करोगे तो होगा प्रभु का दर्शन&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;अब करते नहीं हो, करते हो तो छोड़ देते हो। क्योंकि मन आपको धोखा देता है। मन इस शरीर का हो गया राजा। मन किधर जाता है? खाने, सोने, मौज मस्ती, घूमने, धन कमाने, मान प्रतिष्ठा, इज्जत दिलाने आदि की तरफ। इन कामों में अगर लगोगे तो कर्म इकट्ठा होते जाएंगे। अच्छे कर्म कम और बुरे कर्म ज्यादा बन जाएंगे। इसलिए उन कर्मों को भी काटना जरूरी होता है क्योंकि बिजनेस व्यापार, नौकरी करते हो, बुरे कर्म करने वालों के बीच में रहते हो तो वह तो कर्म आना ही आना है। उसके लिए सेवा का विधान, नाम की कमाई,&amp;nbsp; सुमिरन, ध्यान, भजन का नियम बनाया गया। बराबर झाड़ू लगाते रहो। सुमिरन, ध्यान, भजन एक तरह से कर्मों को साफ करने का झाड़ू है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;b&gt;पाप शरीर के अंगों से बनता है, इसलिये इन्ही से सेवा करवा कर पाप कटवा दिया जाता है&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;देखो पाप किससे बनता है ? हाथ, आंख, मुंह, बोलने, शरीर से कर्म करने से बनता है। तो शरीर से पाप होता है। जब शरीर सेवा में लगता है तो हर अंगों का इस्तेमाल हो जाता है तो इससे कर्म कटते हैं। इसलिए सेवा भाव रखना चाहिए। सेवा जैसी भी हो, करना चाहिए। छोटे बन करके करना चाहिए। बड़ा बन करके सेवा कोई नहीं कर सकता। पहले से झुके रहो बजाय दबाव में झुकने के। कहते हैं-&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p style="text-align: center;"&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;b&gt;दु:ख में सुमिरन सब करै, सुख में करै न कोय। जो सुख में सुमरिन करै, तो दु:ख काहे को होय।।&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;इस चीज को याद रखो। गुरु महाराज पूरे सन्त थे, आज भी नए, पुराने सबके लिए मददगार हैं। जब गुरु से बराबर प्रेम बनाए रखोगे, याद करते रहोगे तो ऊपर से देखते हैं तो दया करते हैं। गुरु महाराज जब (शरीर से) मौजूद थे तो कोई कहीं भी बोलता था, मदद होती थी। आज भी होगी, विश्वास करो।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;मरने वाले के कान में प्रेमी ने जयगुरुदेव बोला तो बताया&amp;nbsp; बाबा जयगुरुदेव जी आ गए, यमराज के दूत जो मार रहे थे हट गए&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;मरने वाले&amp;nbsp; के कान में मौत के समय जब जयगुरुदेव बोला तो मौत के समय पीड़ा कम हुई। अगर (गुरु महाराज को पहले) देखा था तो बोला बाबा जी आ गए। नहीं देखा तो बोला सफेद दाढ़ी, सफेद कपड़ा पहने हुए महात्मा फ़क़ीर आ गए। यमराज के दूत मार रहे थे, कूट रहे थे, हट गए बाबा आ गए।&amp;nbsp; यह विद्या है दुनिया की विद्या से अलग है। दुनिया की सारी विद्या जहां से खत्म होती है वहां से अध्यात्म विद्या की शुरुआत होती है। इसको जब आप समझ जाओगे तो सब समझ में आ जाएगा।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;</description><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiVbKc1o9iGiwfI7J6vvR-EWjJ_dPQeS_onxJGua8cXrWuva603O_z9PkYOWTLxdqY88AtmHmebHvnWgM0Qd_wX5Ts2IDPjXxY_e0IiZnksUs7yVlxAYyO-gH3ln2i_KUzx2AfT6-5NHdw3rul8pgDNYyyHYFHl-e9YjfsWIauBYI5IAY84lKlOGEc98g/s72-w640-h352-c/baba%20umanand%20ji%20maharaj%20(3).jpeg" width="72"/><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title> भारत व नेपाल कृषि सहयोग के लिए नए एमओयू को शीघ्र अंतिम रूप देने पर सहमत</title><link>https://khabarkeetalash.blogspot.com/2022/06/india-and-nepal-agree-to-early-finalize-new-mou-for-agricultural-cooperation.html</link><category>National</category><author>noreply@blogger.com (Social Reformer)</author><pubDate>Thu, 9 Jun 2022 14:23:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-8273185744249164225.post-6619567879760373680</guid><description>&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj5eV9IvQUhGdz-BjCRD7lj5OjyEagj9FKRJZbW4dVbQLwv3Hi4lcQUbPv93v0vFN0qxD7iTVHkQEBZnRkcwZUZYc71nWNFK7l_V6HJ3bnI25g--TCTLjII6Wev0sD0XHDgZYtsJ8XW6BSXqJWAApRwZLglvJp30vJ900TfkmwwGxvlCDUIv4dQ4jxegw/s448/nepal_meeting.JPG" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="199" data-original-width="448" height="284" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj5eV9IvQUhGdz-BjCRD7lj5OjyEagj9FKRJZbW4dVbQLwv3Hi4lcQUbPv93v0vFN0qxD7iTVHkQEBZnRkcwZUZYc71nWNFK7l_V6HJ3bnI25g--TCTLjII6Wev0sD0XHDgZYtsJ8XW6BSXqJWAApRwZLglvJp30vJ900TfkmwwGxvlCDUIv4dQ4jxegw/w640-h284/nepal_meeting.JPG" width="640" /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;b&gt;नई दिल्ली/पीआईवी। &lt;/b&gt;केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर एवं नेपाल के कृषि और पशुधन विकास मंत्री महेंद्र राय यादव के बीच नई दिल्ली में बैठक हुई। इस दौरान तोमर ने भारत की ओर से नेपाल को हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। साथ ही, दोनों देश कृषि सहयोग के लिए नए समझौता ज्ञापन (एमओयू)&amp;nbsp; को शीघ्र अंतिम रूप देने पर सहमत हुए ताकि विभिन्न द्विपक्षीय कृषि मुद्दों पर तेजी से प्रगति की जा सके।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;span&gt;द्विपक्षीय बैठक में केंद्रीय मंत्री तोमर ने नेपाल के प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए कहा कि भारत और नेपाल के बीच घनिष्ठ और मैत्रीपूर्ण संबंध हैं, जो सदियों पुराने ऐतिहासिक तथा सांस्कृतिक संबंधों, खुली सीमा एवं गहन लोक संपर्क से स्पष्ट रूप से प्रकट होते हैं। तोमर ने कृषि सहित सभी क्षेत्रों में नेपाल के साथ सहयोग मजबूत करने की बात कही और बताया कि भारत ने कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में अनुसंधान तथा विकास के क्षेत्र में काफी प्रगति हासिल की है।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span&gt;उन्होंने कहा कि भारतीय कृषि प्रणाली से, जब भी आवश्यकता हो, नेपाल सीख सकता है।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;span&gt;नेपाल के मंत्री यादव ने तोमर को धन्यवाद देते हुए दोनों देशों के बीच सौहार्दपूर्ण और मैत्रीपूर्ण संबंधों को दोहराया।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span&gt;उन्होंने, कृषि मंत्री तोमर से कृषि प्रौद्योगिकी क्षेत्र, मुर्रा भैंस की किस्म, बार्डर पॉइंट्स संगरोध मुद्दों को हल करने और पशु वैक्सीन की आपूर्ति आदि में सहयोग प्रदान करने का अनुरोध किया। तोमर ने नेपाल के प्रतिनिधिमंडल को उनके द्वारा उठाए गए मुद्दों के शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया। तोमर ने भारत आने के लिए नेपाल के मंत्री व अन्य प्रतिनिधियों को धन्यवाद दिया और आई.एफ.ए.डी. प्रेसीडेंसी के लिए भारत की उम्मीदवारी के लिए नेपाल के समर्थन का अनुरोध किया।&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;</description><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj5eV9IvQUhGdz-BjCRD7lj5OjyEagj9FKRJZbW4dVbQLwv3Hi4lcQUbPv93v0vFN0qxD7iTVHkQEBZnRkcwZUZYc71nWNFK7l_V6HJ3bnI25g--TCTLjII6Wev0sD0XHDgZYtsJ8XW6BSXqJWAApRwZLglvJp30vJ900TfkmwwGxvlCDUIv4dQ4jxegw/s72-w640-h284-c/nepal_meeting.JPG" width="72"/><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह वियतनाम के तीन दिवसीय दौरे पर जाएंगे </title><link>https://khabarkeetalash.blogspot.com/2022/06/defense-minister-rajnath-singh-will-go-on-a-three-day-visit-to-vietnam.html</link><category>National</category><author>noreply@blogger.com (Social Reformer)</author><pubDate>Mon, 6 Jun 2022 22:18:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-8273185744249164225.post-4575340530549353309</guid><description>&lt;div style="text-align: left;"&gt;&lt;div&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgeCuZ_R2DAjIZPtqzHBZNznERLh6m4Efj6DG-VAhSuA8qZv6MuPSfyqMEXYd7dTsQmZphFnkNsYGqQSgKS7ZwmpjC4o2h7QlWkJYU7e0lBF_8dZIGed3FdDrHaaBcWO-ZgXwt0xQiOi6o14J0fEAHGgwUDTIFc4vMyZ4sOlcd9HeA21LfXB5IuzJRrxA/s448/defence-minister-rajnath-singh.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="301" data-original-width="448" height="430" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgeCuZ_R2DAjIZPtqzHBZNznERLh6m4Efj6DG-VAhSuA8qZv6MuPSfyqMEXYd7dTsQmZphFnkNsYGqQSgKS7ZwmpjC4o2h7QlWkJYU7e0lBF_8dZIGed3FdDrHaaBcWO-ZgXwt0xQiOi6o14J0fEAHGgwUDTIFc4vMyZ4sOlcd9HeA21LfXB5IuzJRrxA/w640-h430/defence-minister-rajnath-singh.jpg" width="640" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #333333;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="color: #333333;"&gt;नई दिल्ली/पीआईवी।&lt;/span&gt;&lt;span style="color: #333333;"&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;span style="color: #333333;"&gt;रक्षामंत्री राजनाथ सिंह वियतनाम के राष्ट्रीय रक्षामंत्री जनरल फान वान गियांग के निमंत्रण पर 08 से 10 जून, 2022 तक वियतनाम की आधिकारिक यात्रा करेंगे। रक्षामंत्री हनोई में दिवंगत राष्ट्रपति हो ची मिन्ह को उनके समाधि स्थल पर श्रद्धांजलि अर्पित कर अपनी यात्रा आरंभ करेंगे।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span style="color: #333333;"&gt;रक्षामंत्री&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span style="color: #333333;"&gt;जनरल फान वान गियांग के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे, जिसके दौरान दोनों मंत्री दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग की समीक्षा करेंगे और रक्षा संबंधों को और सुदृढ़ बनाने के लिए नई पहलों की खोज करेंगे। दोनों मंत्री साझा हित के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान करेंगे। रक्षामंत्री का वियतनाम के राष्ट्रपति गुयेन जुआन फुक और प्रधानमंत्री फाम मिन्ह चिन से भी मुलाकात करने का कार्यक्रम है।&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="color: #333333; font-size: medium;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="color: #333333; font-size: medium;"&gt;हाई फोंग के हांग हा शिपयार्ड में, रक्षा मंत्री वियतनाम को भारत सरकार की 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर की रक्षा क्रेडिट लाइन के तहत निर्मित 12 हाई स्पीड गार्ड नौकाओं को सुपुर्द करने के समारोह की अध्यक्षता करेंगे। यह परियोजना वियतनाम के साथ बढ़ते रक्षा उद्योग सहयोग के संदर्भ में महत्वपूर्ण है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 'आत्मनिर्भर भारत' और 'मेक इन इंडिया, 'मेक फॉर द वर्ल्ड' के विजन का उदाहरण है।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="color: #333333; font-size: medium;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;span style="color: #333333;"&gt;यात्रा के दौरान, राजनाथ सिंह दूरसंचार विश्वविद्यालय जहां भारत सरकार द्वारा 50 लाख अमेरिकी डॉलर के अनुदान के साथ एक आर्मी सॉफ्टवेयर पार्क स्थापित किया जा रहा है, सहित न्हा ट्रांग में वियतनाम के प्रशिक्षण संस्थानों का भी दौरा करेंगे। वह हनोई स्थित भारतीय दूतावास द्वारा आयोजित एक सामुदायिक कार्यक्रम में भी शामिल होंगे और वियतनाम में प्रवासी भारतीय के साथ बातचीत करेंगे।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span style="color: #333333;"&gt;भारत और वियतनाम 2016 से एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी साझा करते हैं और रक्षा सहयोग इस साझेदारी का एक प्रमुख स्तंभ है। वियतनाम भारत की एक्ट ईस्ट नीति और भारत-प्रशांत विजन में एक महत्वपूर्ण भागीदार है।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="color: #333333;"&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;span style="color: #333333;"&gt;दोनों देशों के बीच रक्षा नीति संवाद, द्विपक्षीय सैन्य विनिमय, उच्च-स्तरीय यात्राओं, क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण कार्यक्रमों, संयुक्त राष्ट्र शांति वाहिनी में सहयोग, जहाजों का दौरा और द्विपक्षीय अभ्यास सहित दोनों देशों के बीच व्यापक संपर्कों को शामिल करने के लिए पिछले कुछ समय के दौरान द्विपक्षीय रक्षा सहयोगों का विस्तार हुआ है।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span style="color: #333333;"&gt;भारत-वियतनाम राजनयिक संबंधों की स्थापना के 50 साल और भारत की आजादी के 75 साल के ऐतिहासिक अवसर पर रक्षा मंत्री की यात्रा द्विपक्षीय रक्षा सहयोग और व्यापक सामरिक साझेदारी को और समेकित करेगी।&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;</description><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgeCuZ_R2DAjIZPtqzHBZNznERLh6m4Efj6DG-VAhSuA8qZv6MuPSfyqMEXYd7dTsQmZphFnkNsYGqQSgKS7ZwmpjC4o2h7QlWkJYU7e0lBF_8dZIGed3FdDrHaaBcWO-ZgXwt0xQiOi6o14J0fEAHGgwUDTIFc4vMyZ4sOlcd9HeA21LfXB5IuzJRrxA/s72-w640-h430-c/defence-minister-rajnath-singh.jpg" width="72"/><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title> यूआईडीएआई ने 'आधार के उपयोग को सरल बनाने के लिए हालिया पहल' पर कार्यशाला का आयोजन किया</title><link>https://khabarkeetalash.blogspot.com/2022/06/uidai-organizes-workshop-on-recent-nitiatives-to-implify-aadhaar-access.html</link><category>National</category><author>noreply@blogger.com (Social Reformer)</author><pubDate>Fri, 3 Jun 2022 09:51:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-8273185744249164225.post-3973012276605726972</guid><description>&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiF7zCETc8XRkPszMh7kOghsypDfzGVtGCKWks9p4TxVn0dQCAj4sHUNqux2_X39NctrW0p0G7pbY-BBzfrzBB35Oq1vnrljNqu-0G5x2wzZB2CkFHifGpfyQRW7yliuSdzMVvY492a9pgoPj2NdLIk9yajI0G2nG5jtgVJiS6a7dqYMH2yNGNEp0mn/s448/aadhar-card-photo-change.jpg" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="256" data-original-width="448" height="366" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiF7zCETc8XRkPszMh7kOghsypDfzGVtGCKWks9p4TxVn0dQCAj4sHUNqux2_X39NctrW0p0G7pbY-BBzfrzBB35Oq1vnrljNqu-0G5x2wzZB2CkFHifGpfyQRW7yliuSdzMVvY492a9pgoPj2NdLIk9yajI0G2nG5jtgVJiS6a7dqYMH2yNGNEp0mn/w640-h366/aadhar-card-photo-change.jpg" width="640" /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;p&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;b&gt;नई दिल्ली/पीआईवी।&amp;nbsp;&lt;/b&gt;भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने 1 जून, 2022 को नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में 'आधार उपयोग को सरल बनाने के लिए हालिया पहल' पर एक कार्यशाला का आयोजन किया। यह कार्यक्रम राज्य/केंद्रशासित प्रदेश की सरकारों के विभिन्न विभागों की ओर से अपनाए गए आधार उपयोग में प्रमुख विकास और सर्वश्रेष्ठ अभ्यासों को साझा करने पर केंद्रित था। इस कार्यशाला में कई प्रतिष्ठित व्यक्तियों ने हिस्सा लिया। इनमें नीति आयोग के सीईओ श्री अमिताभ कांत, इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव अल्केश कुमार शर्मा, वित्त सचिव टीवी सोमनाथन, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग में वरिष्ठ सलाहकार डॉ. अखिलेश गुप्ता, यूआईडीएआई के सीईओ डॉ. सौरभ गर्ग और राज्य/केंद्रशासित प्रदेश की सरकारों के गणमान्य व्यक्ति शामिल थे।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;आधार आधारित प्रमाणीकरण और सत्यापन अवसंरचना का निर्माण करके आधार ने देश के डिजिटल परिदृश्य को हमेशा के लिए बदल दिया है। आधार मंच का उपयोग करते हुए राज्य/केंद्रशासित प्रदेश सरकार की योजनाओं के तहत संचालित कई आधार नवाचार हैं, जिन्होंने जमीनी स्तर पर वित्तीय और सामाजिक समावेशन प्राप्त करने में एक गेम चेंजर (बदलाव लाने वाला) होने की क्षमता दिखाई है। वर्तमान समय में डिजिटल पहचान आधारित प्रणालियां किसी भी समाज के सामाजिक और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। आधार भारत के सबसे महत्वपूर्ण नवाचारों में से एक साबित हुआ है। आधार ने बड़ी संख्या में ऐसे लोगों को पहचान दी है, जिनके पास पहले कोई पहचान नहीं थी। इसने ई-केवाईसी सेवाओं को सक्षम करके दरवाजे पर और मोबाइल फोन के जरिए बैंकिंग सेवा प्रदान करके डिजिटल खाई को समाप्त कर दिया है। इसके अलावा सरकार की कई कल्याणकारी पहलों के जरूरतमंद और योग्य प्राप्तकर्ताओं के बैंक खातों में प्रत्यक्ष नकद हस्तांतरण (डीबीटी) की सुविधा प्रदान की गई है।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;इस अवसर पर नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने कहा कि आधार ने लाभार्थियों को सशक्त बनाने वाले डिजिटल खाई को समाप्त करने, पारदर्शिता लाने और राज्य/केंद्रशासित प्रदेशों की सरकारों के समर्थन से बड़ी मात्रा में सार्वजनिक धनराशि की बचत करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने आगे कहा कि आधार न केवल विभिन्न सरकारी योजनाओं व 350 से अधिक केंद्रीय और 500 राज्य/केंद्रशासित प्रदेशों की योजनाओं के लिए सेवा प्रदान करने का आधार है, बल्कि इसने सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के डिजिटलीकरण पर महत्वपूर्ण अनुकरणीय प्रभाव डाला है, जिसके कारण अधिक समावेशी विकास हुआ है। इसके अलावा श्री कांत ने यह भी कहा कि इस विशाल डिजिटल अवसंरचना के साथ यूपीआई पारदर्शिता बढ़ाने और शासन में सुधार के लिए इस भविष्य की तकनीक का लाभ उठाने के लिए एक "अद्वितीय अवसर" उत्पन्न करता है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;इस अवसर पर वित्त सचिव टी.वी. सोमनाथन ने कहा कि विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार में भारत की समृद्ध विरासत है। हमारा मानना है कि भारत विश्व स्तरीय वैज्ञानिक समाधानों को प्राप्त करके ही आगे बढ़ेगा। पीडीएस योजनाओं में आधार की भूमिका विख्यात उदाहरणों में से एक है। इसके अलावा उन्होंने इस बात की भी सराहना की कि हमें एक भारतीय के रूप में इस तथ्य पर गर्व होना चाहिए कि आधार का निर्माण हमने किया था, न कि पश्चिमी विश्व से नकल किया गया और यह विश्व में सबसे सफल बायोमेट्रिक कार्यक्रमों में से एक होने का प्रमाण है।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;मंत्रालय के सचिव अल्केश कुमार शर्मा ने यूआईडीएआई के प्रयासों की सराहना की और आगे का रोडमैप प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि आज एक देश के रूप में हम एक और बदलाव के मुहाने पर खड़े हैं। सचिव ने आगे कहा, “अप्रैल 2022 तक 133 करोड़ से अधिक आधार जारी किए जा चुके हैं, जिसमें देश में 99.9 फीसदी से अधिक वयस्क जनसंख्या आधार में नामांकित हैं। किसानों से लेकर छात्रों तक, भारत का लगभग हर नागरिक सरकारी और गैर-सरकारी, दोनों तरह की सेवाएं प्राप्त करने वाले आधार से लाभान्वित हो रहे हैं। आइए, अगले पांच वर्षों में भारत को 1 ट्रिलियन डिजिटल अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य को प्राप्त करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए एक साथ हाथ मिलाएं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;यूआईडीएआई के सीईओ डॉ. सौरभ गर्ग ने पिछले एक दशक में आधार की सफलता और डीबीटी, शिक्षा, छात्रवृत्ति, फिनटेक व स्वास्थ्य सेवा आदि जैसे क्षेत्रों में आधार को एक आधारभूत पहचान के रूप में उपयोग करने के कई अवसरों के बारे में बताया। इसके अलावा उन्होंने डिजिटल पहचान का उपयोग करके विभिन्न अप्रयुक्त क्षेत्रों का उपयोग करने और खाइयों को दूर करने पर भी चर्चा की, जिससे सुदूर क्षेत्र के उपयोगकर्ताओं तक पहुंचकर सामाजिक व वित्तीय सार्वभौमिक समावेशन को प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने आगे बताया कि आने वाले दिनों में यूआईडीएआई का ध्यान पांच प्रमुख क्षेत्रों पर होगा-&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;ul&gt;&lt;li&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;निवासी केंद्रितता और पहुंच में सुगमता&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;आधार का उपयोग बढ़ाना&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;आधार की विश्वसनीयता को मजबूत करना&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;आधार प्रौद्योगिकी स्टैक का उन्नयन&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;आधार संरचना की अंतरराष्ट्रीय पहुंच&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&amp;nbsp;इस कार्यक्रम में आधार इकोसिस्टम के कामकाज और अच्छे अभ्यासों का प्रदर्शन किया गया। इसके बाद विभिन्न योजनाओं जैसे कि ईपीओसीआरए, एआरपीएएनए, केएएलआईए, एफडीएस व डीबीटी योजनाओं आदि के लिए आधार मंच का उपयोग करने वाले राज्य/केंद्रशासित प्रदेश की सरकार के विभागों ने अपनी प्रस्तुतियां दीं। इस अवसर पर विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. अखिलेश गुप्ता ने डिजिटल इंडिया की विशिष्ट उपलब्धियों को रेखांकित किया। उन्होंने आगे जोर देकर कहा, “प्रौद्योगिकी आज शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल, वित्त व कृषि क्षेत्रों के लिए बेहतर सेवाओं तक पहुंच को सक्षम बनाती है।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;इसके अलावा यह पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने में भी सहायता करती है और आधार यहां एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।” उन्होंने दोहराया कि एआई/एमएल प्रौद्योगिकियों में प्रगति, विशेष रूप से छवि विश्लेषण और पैटर्न मिलान के लिए गहन शिक्षा ने बायोमेट्रिक मिलान के विभिन्न तरीकों में सफलता को सक्षम किया है और इसके चलते विशेष रूप से सटीकता और गति में काफी बढ़ोतरी हुई है। इन प्रमुख क्षेत्रों का उपयोग यूआईडीएआई द्वारा राज्य/केंद्रशासित प्रदेश की सरकारों के साथ समन्वय स्थापित कर अधिक प्रभावशाली कवरेज और बड़े पैमाने पर बेहतर पहुंच के लिए किया जाना चाहिए।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;डॉ. सौरभ गर्ग ने अपने समापन भाषण में हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर और एप्लिकेशन स्टैक के मामले में उपलब्ध विशिष्ट तकनीक को अपग्रेड व अपनाकर आधार सेवाओं को प्रदान करने में सुधार के लिए शोधकर्ताओं, शैक्षणिक संस्थानों, उद्योग व स्टार्ट-अप्स के साथ मिलकर काम करने के लिए यूआईडीएआई की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने आधार आधारित मंच के भविष्य पर वक्ताओं व आमंत्रितों की ओर से प्रस्तावित विभिन्न सुझावों और पहलों का स्वागत किया, जो आने वाले समय में राज्यों के लिए मूल्यवान होंगे।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;इस कार्यशाला का समापन अध्यक्ष, वक्ताओं और उपस्थित लोगों के साथ-साथ आधार के उपयोग के जरिए आसान पहुंच प्रदान करने और निवासियों के जीवन को सरल बनाने के समग्र उद्देश्य के साथ राज्य/केंद्रशासित प्रदेश आधारित योजनाओं में विकास के कई रास्ते प्रदान करने के लिए राज्य/केंद्रशासित प्रदेश के सरकारी विभागों के साथ सहयोग करने की प्रतिबद्धता की सराहना की।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;</description><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiF7zCETc8XRkPszMh7kOghsypDfzGVtGCKWks9p4TxVn0dQCAj4sHUNqux2_X39NctrW0p0G7pbY-BBzfrzBB35Oq1vnrljNqu-0G5x2wzZB2CkFHifGpfyQRW7yliuSdzMVvY492a9pgoPj2NdLIk9yajI0G2nG5jtgVJiS6a7dqYMH2yNGNEp0mn/s72-w640-h366-c/aadhar-card-photo-change.jpg" width="72"/><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title> महापुरुषों के अच्छे काम में कुदरत, देवी-देवता भी देते हैं साथ</title><link>https://khabarkeetalash.blogspot.com/2022/06/in-the-good-work-of-great-men-nature-gods-and-goddesses-also-give-along.html</link><category>Adhyatm</category><author>noreply@blogger.com (Social Reformer)</author><pubDate>Thu, 2 Jun 2022 14:48:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-8273185744249164225.post-6287572424974898174</guid><description>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiE19PleOpwXyAQpPAk9nbYpTl8EOwhk99jy6yciCgkVq2AqsoSSQZgClQBiqsCdjSP6ABvsHh8-IZg2oapCio6NuISs9f7bBJ0hkGJPzqGUJIZZPsaXJ3ty5e6RZOZgJSq-4h4kLBGZfYZbMSc70BJa5mNR8Kkb0KxPToM4O7KGxnCm1X3ekEorVNcFA/s420/baba%20umanand.jpeg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;span style="font-family: verdana; font-size: medium;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="336" data-original-width="420" height="512" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiE19PleOpwXyAQpPAk9nbYpTl8EOwhk99jy6yciCgkVq2AqsoSSQZgClQBiqsCdjSP6ABvsHh8-IZg2oapCio6NuISs9f7bBJ0hkGJPzqGUJIZZPsaXJ3ty5e6RZOZgJSq-4h4kLBGZfYZbMSc70BJa5mNR8Kkb0KxPToM4O7KGxnCm1X3ekEorVNcFA/w640-h512/baba%20umanand.jpeg" width="640" /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;ul style="text-align: left;"&gt;&lt;li&gt;&lt;span style="font-family: verdana; font-size: medium;"&gt;तपस्वी भंडारे में जेठ महीने में जैसे कुदरत ने वातावरण को AC एयर कंडीशन बना दिया था&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-family: verdana; font-size: medium;"&gt;हम आये वही देश से, जहां तुम्हारो धाम, तुमको घर पहुँचावना, एक हमारो काम। इस मृत्युलोक में फसें जीवों को प्रेम से समझाकर, अमोलक नामदान दे कर काल, माया के बंधनों से छुड़वा कर जीते जी मुक्ति-मोक्ष दिलाकर अपने निज धाम सतलोक ले चलने वाले वक़्त के जीते जागते पूरे समर्थ सन्त सतगुरु उज्जैन वाले बाबा उमाकान्त जी महाराज ने तपस्वी भंडारा कार्यक्रम के तीसरे व अंतिम दिन 28 मई 2022 को सायंकालीन बेला में उज्जैन आश्रम पर दिए व यूट्यूब चैनल जयगुरुदेवयूकेएम पर लाइव प्रसारित संदेश में बताया कि तपस्वी भंडारा का नाम सुनकर बहुत से लोग घबरा गए की तपस्या करना पड़ेगा।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-family: verdana; font-size: medium;"&gt;वे लोग ज्यादा घबराए जो गुरु महाराज के पास खूब आते थे, पसीना बहाते, सेवा करते। सेवा का फल गुरु महाराज ने उनको दिया। वो जो चाहते थे कि हमारे पास धन, मान प्रतिष्ठा, घर हो जाए बढ़िया, वह चीजें उनको मिल गई। उनको ज्यादा फिक्र हुई कि एसी छोड़कर जाएंगे तो कैसे रहेंगे? बराबर कुछ लोगों के फोन आते, पूछते कितनी गर्मी है, कैसी लू चल रही है। कुछ लोग मोबाइल में भी देखे कि उज्जैन का क्या तापमान चल रहा है। वो आये ही नहीं। लेकिन जो चल पड़े, कहा न-&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p style="text-align: center;"&gt;&lt;span style="font-family: verdana; font-size: medium;"&gt;&lt;b&gt;चाहे अग्नि में भी मुझे चलना हो, चाहे कांटों पर मुझे चलना हो।&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p style="text-align: center;"&gt;&lt;span style="font-family: verdana; font-size: medium;"&gt;&lt;b&gt;चाहे छोड़कर देश निकलना हो, रहे ध्यान तुम्हारे चरणों में।।&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-family: verdana; font-size: medium;"&gt;गुरु को याद करके जो चल पड़े, उनको कुछ महसूस हुआ? कुछ नहीं। लगा कि जैसे कुदरत ने एसी एयर कंडीशन वातावरण बना दिया है। कुछ दिन पहले तो बहुत तेज धूप रहती थी, लोग सोचते भी थे कि शाम पांच बजे से सतसंग है तो बड़ी गर्मी रहेगी, धूप लगेगी। लेकिन कहीं महसूस हुआ? देखो, तमाम प्रेमी सब धूप में आराम से बैठे हुए हैं। पहले हवा गर्म थी लेकिन गर्मी भी इसकी कम हो गयी। आराम से सब हो गया।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEi5YvYIkfzfF1pg0gql-LLIEBGakUJQBq6z7H8M-s8Ha4NgMjICfqIROrusWyus2ezOrkVBNPPOh9SwBHeOdmJO6bbEQJOO5fifyv1yVXyF7z3mwyLtBiXDneVb6dkDPEXLRFyqv3RqdFQRpml5PE-MjYQ9ZnAHGsatEslxwO0Ni4FA85SkvU7XPKso3Q/s1080/sabha.jpeg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="499" data-original-width="1080" height="296" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEi5YvYIkfzfF1pg0gql-LLIEBGakUJQBq6z7H8M-s8Ha4NgMjICfqIROrusWyus2ezOrkVBNPPOh9SwBHeOdmJO6bbEQJOO5fifyv1yVXyF7z3mwyLtBiXDneVb6dkDPEXLRFyqv3RqdFQRpml5PE-MjYQ9ZnAHGsatEslxwO0Ni4FA85SkvU7XPKso3Q/w640-h296/sabha.jpeg" width="640" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;span style="font-family: verdana; font-size: medium;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-family: verdana; font-size: medium;"&gt;&lt;b&gt;गुरु रामदास द्वारा भक्तों की परीक्षा लेने का दृष्टांत&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-family: verdana; font-size: medium;"&gt;वह थे न गुरु रामदास। भक्तों की परीक्षा लेनी थी उन्हें। बोले, हमको फोड़ा हो गया है। भक्तों ने बोला गुरु महाराज बताओ, दवा इलाज कराते हैं। बोले ईलाज से नहीं जाएगा, बहुत तकलीफ दे रहा है। इस फोड़े में मवाद भर गया है। कोई मुंह से अगर मवाद को खींच ले तो ठीक हो सकता है। सब चले गए। एक जो गुरु का भक्त था, मुंह लगाया। जब उसमें खींचा तो कहा गुरु जी यह मवाद है? यह तो आम का रस है। आम बांध रखा था गुरु जी ने। अपने बेटे को कौन मवाद पिलाएगा?&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-family: verdana; font-size: medium;"&gt;&lt;b&gt;महापुरुष जो सोच लेते वह हो जाता है&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-family: verdana; font-size: medium;"&gt;गुरु के जब बंदे हो, उनके नाम पर जब चल पड़े हो, मरने मिटने के लिए एक तरह से, जब कुर्बानी आपके अंदर आ गई, जो भी होगा, देखा जाएगा तो उनको तो इंतजाम करना ही करना था। महापुरुष जो सोचते हैं, हो जाता है। महापुरुषों को कहना, करना नहीं पड़ता है। गुरु महाराज सोच लेते थे, वैसा हो जाता था।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-family: verdana; font-size: medium;"&gt;&lt;b&gt;देश में अन्न की कमी से मौतों को रोकने के लिए गुरु महाराज ने यज्ञ कर शिव को प्रसन्न किया&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-family: verdana; font-size: medium;"&gt;देखो गुरु महाराज ने यज्ञ किया था। पहले हरिद्वार में महामानव यज्ञ, फिर अयोध्या में किया ताकि अन्न की कमी दूर हो जाए। तब अक्सर रेडियो, अखबार में खबर आती रहती थी कि इतने आदमी भूखमरी से मर गए। अन्न नहीं था, हालत बहुत खराब थे। तब गुरु महाराज ने कहा, खुश करना पड़ेगा। जो तकलीफ देने वाले देवता हैं उनको। संहार का काम कौन करता है? शिव। अगर खुश हो जाए तो मदद भी करते हैं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-family: verdana; font-size: medium;"&gt;&lt;b&gt;सृष्टि की जिम्मेदारी है शिव के पास है&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-family: verdana; font-size: medium;"&gt;सृष्टि की जितनी भी जिम्मेदारी है, शिव के पास है। उन्हीं से ही होकर के ये जीवात्माएं मृत्युलोक में फैली हुई है। जब उनको समेटना होता है, जीवात्माओं को निकाल लेते हैं। किसके द्वारा? उनके माताहत जिनको देवता कहा गया है, जो यमराज हैं, यमराज के दूत सिपाही जिनको कह लो, उनके द्वारा वह निकला लेते हैं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-family: verdana; font-size: medium;"&gt;&lt;b&gt;गुरु महाराज की दया से एक ही दिन में तीन मौसम देखने को मिले&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-family: verdana; font-size: medium;"&gt;गुरु महाराज ने शिव जी से कहा कि आपके तकलीफ देने के बहुत तरीके हैं। लंबा हाथ है आपका। इनको भूखे मत मारो। तब उन्होंने कहा हम को कोई खिलाया नहीं बहुत दिनों से। में भूखा हूं, आप मेरा पेट भर दीजिए। फिर जो आप इच्छा करेंगे, वह हो जाएगा। फिर अयोध्या में यज्ञ किया। गुरु महाराज की दया से एक ही दिन में तीन मौसम देखने को मिला। बड़ी तेज गर्मी और गर्म हवा चल रही थी। बादल और बारिश के बाद इतना ठंडा मौसम हो गया कि जो दरी बिछाए थे वही ओढ़कर करके पुलाव जलाना पड़ा। एक ही दिन में तीन मौसम दिखा दिया। मैं आपको बता रहा था, जो यह इच्छा करते हैं, वह हो जाता है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;</description><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiE19PleOpwXyAQpPAk9nbYpTl8EOwhk99jy6yciCgkVq2AqsoSSQZgClQBiqsCdjSP6ABvsHh8-IZg2oapCio6NuISs9f7bBJ0hkGJPzqGUJIZZPsaXJ3ty5e6RZOZgJSq-4h4kLBGZfYZbMSc70BJa5mNR8Kkb0KxPToM4O7KGxnCm1X3ekEorVNcFA/s72-w640-h512-c/baba%20umanand.jpeg" width="72"/><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>भगवान शनि के लंगड़े होने की कथा </title><link>https://khabarkeetalash.blogspot.com/2022/05/the-story-of-lord-shani-becoming-lame.html</link><category>Adhyatm</category><author>noreply@blogger.com (Social Reformer)</author><pubDate>Mon, 30 May 2022 03:58:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-8273185744249164225.post-2376956678540050117</guid><description>&lt;p&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgnhPZKQtWfVg5BqV9WEp7DuTqERDWDpe567jCE_WICcWJZByJMhgG4HEVeblgHOIF2JQDx8zHTZr6bMNgiC9hjryJhsZs22V_NmpZPBHo58VLnChzcZrF1X35uiP6NWUOV5GCRlnkGEum5eYeBBMUNzAu8WnHrAqkvTMISaYkf9oAErOJotOohwFaD_A/s299/shani%20bhagwan.jpg" style="font-weight: bold; margin-left: 1em; margin-right: 1em; text-align: center;"&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="168" data-original-width="299" height="360" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgnhPZKQtWfVg5BqV9WEp7DuTqERDWDpe567jCE_WICcWJZByJMhgG4HEVeblgHOIF2JQDx8zHTZr6bMNgiC9hjryJhsZs22V_NmpZPBHo58VLnChzcZrF1X35uiP6NWUOV5GCRlnkGEum5eYeBBMUNzAu8WnHrAqkvTMISaYkf9oAErOJotOohwFaD_A/w640-h360/shani%20bhagwan.jpg" width="640" /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;blockquote&gt;&lt;b style="font-size: large;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;मुख्य जानकारी :&lt;/span&gt; पिप्पलाद ,&amp;nbsp;महर्षि दधीचि जी के पुत्र थे।&amp;nbsp;पिप्पलाद' का शाब्दिक अर्थ होता है-&amp;nbsp;'पीपल के पेड़ के पत्ते खाकर जीवित रहने वाला।&amp;nbsp;&amp;nbsp;संस्कृत वाङ्मय कोश के प्रणेता डॉक्टर श्रीधर भास्कर वर्णेकर के अनुसार अनुसार - पिप्पलाद उच्च कोटि के एक ऋषि थे।&amp;nbsp;इनकी माता का नाम 'गभस्तिनी' था। पिप्पलाद के पिता दधीचि ऋषि ने&amp;nbsp;जिस स्थान पर देह त्याग किया था, वहाँ पर कामधेनु ने अपनी दुग्ध धारा छोड़ी थी। इस वजह से&amp;nbsp;उस स्थान को ‘दुग्धेश्वर’ कहा जाने लगा।&amp;nbsp;पिप्पलाद उसी स्थान पर तपस्या&amp;nbsp;किया करते थे।&amp;nbsp;इसलिए उसे 'पिप्पलाद तीर्थ' भी कहते हैं।&amp;nbsp;पिप्पलाद की माता के तीन नाम प्राप्त होते हैं 'गभस्तिनी', 'सुवर्चा' और 'सुभद्रा'। दधीचि के देहावसान के समय गभस्तिनी गर्भवती थी तथा अन्यत्र रहती थी। पति के निधन का समाचार विदित होते ही। उन्होंने अपना पेट चीरकर गर्भ को बाहर निकाला तथा उसे पीपल वृक्ष के नीचे रखा। इसके पश्चात् वे सती हो गईं। गभस्तिनी के इस गर्भ का वृक्षों ने संरक्षण किया। आगे चलकर इस गर्भ से जो शिशु बाहर निकला&amp;nbsp;वही पिप्पलाद कहलाया। और जब इस बात का पता चला कि&amp;nbsp;मातृपितृवियोग के लिए शनि कारणीभूत है।&amp;nbsp;&lt;/b&gt;&lt;/blockquote&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;कहा जाता है कि पिप्पलाद मुनि की बाल्यावस्था में उनके पिता का देहावसान हो गया था। यमुना के तट पर तपस्वी जीवन व्यतीत करने वाले उनके पिता को शनि ने अत्यधिक कष्ट दिया था। विपन्नता और ब्याधि के निरंतर आक्रमण से पिप्पलाद मुनि के पिता के प्राण चले गए थे। उनकी माता अपने पति की मृत्यु का एकमात्र कारण शनि को ही मानती थी। जब पिप्पलाद बड़े हुए तो उन्होंने अपने मां से समस्त बातें जानीं। शनि के प्रति उनका क्रोध प्रचंड हो गया। उन्होंने शनि को ढूंढना प्रारंभ किया। अचानक एक दिन पीपल के वृक्ष पर शनि देव के दर्शन पीपलाद को हुए। पिप्पलाद शनि पर ब्रह्मदण्ड का संधान किये। शनिवार भागने में असमर्थ थे तो भी भागने लगे। ब्रह्मदंड ने तीनों लोगों में उन्हें दौड़ाया। अंततः ब्रह्मदण्ड ने शनि को लंगड़ा कर दिया। विकलांग शनि भगवान शिव से करुण प्रार्थना करने लगे।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;img alt="" class="size-full wp-image-1068 aligncenter" height="410" src="https://newsinfomaxindia.com/wp-content/uploads/2022/05/shiv_bhagan.jpg" width="730" /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;भगवान शिव ने प्रकट होकर पिप्पलाद मुनि को बोध कराया कि शनि तो सिर्फ सृष्टि के नियमों का पालन करते हैं और वे मेरे सहायक हैं। तुम्हारे पिता की मृत्यु का कारण शनि नहीं हैं। वस्तु स्थिति जानकर पिप्पलाद ने शनि को क्षमा कर दिया। इसी प्रकार शनि की अधोदृष्टि के पीछे भी एक कथा है- शनि की अधोदृष्टि और क्रूरता का रहस्य उनकी पत्नी द्वारा दिए गए शाप में है। एक बार ऋतुस्राव से निवृत्त होकर शनि की पत्नी पुत्र अभिलाषा से उनकी सेवा में उपस्थित हुई। शनि समाधि में लीन थे। पत्नी का ऋतुकाल व्यर्थ चला गया। आहत होकर पत्नी ने शाप दिया कि जिस पर उनकी दृष्टि पड़ जाएगी, वह नष्ट हो जाएगा।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;शनि की दृष्टि के कारण ही पार्वती पुत्र भगवान गणेश का शिरच्छेद न हुआ, भगवान राम को वनवास हुआ, लंकापति रावण का संहार हुआ और पांडवों को वनवास हुआ। शनि के कोप के कारण विक्रमादित्य राजा को कई कष्टों का सामना करना पड़ा तथा त्रेता युग में राजा हरिश्चंद्र को दर-दर की ठोकरें खानी पड़ी। राजा नल और उनकी रानी दमयंती को जीवन में कई प्रकार के कष्टों का सामना शनि की कुदृष्टि के कारण हुआ। ज्येष्ठ अमावस्या को शनि का जन्म होने के कारण इस दिन शनि जयंती मनाई जाती है। इस दिन शनि के निमित्त जो भी पूजा पाठ किए जाते हैं उससे शनि देवता प्रसन्न होते हैं। उनके दुःख और कष्टों में कमी करते हुए उन्हें श्रेष्ठ जीवन यापन की प्रेरणा प्रदान करते हैं। इस वर्ष 30 मई को शनि जयंती है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;ul style="text-align: left;"&gt;&lt;li&gt;&lt;span data-offset-key="cuvg3-0-0" style="background-color: white; color: #0f1419; white-space: pre-wrap;"&gt;&lt;span data-text="true"&gt;&lt;a href="https://khabarkeetalash.blogspot.com/2022/05/vat-savitri-fasting-story.html " target="_blank"&gt;&lt;span style="font-family: verdana; font-size: medium;"&gt;वट सावित्री व्रत कथा &lt;/span&gt;&lt;/a&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;</description><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgnhPZKQtWfVg5BqV9WEp7DuTqERDWDpe567jCE_WICcWJZByJMhgG4HEVeblgHOIF2JQDx8zHTZr6bMNgiC9hjryJhsZs22V_NmpZPBHo58VLnChzcZrF1X35uiP6NWUOV5GCRlnkGEum5eYeBBMUNzAu8WnHrAqkvTMISaYkf9oAErOJotOohwFaD_A/s72-w640-h360-c/shani%20bhagwan.jpg" width="72"/><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>वट सावित्री व्रत कथा</title><link>https://khabarkeetalash.blogspot.com/2022/05/vat-savitri-fasting-story.html</link><category>Adhyatm</category><author>noreply@blogger.com (Social Reformer)</author><pubDate>Mon, 30 May 2022 02:56:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-8273185744249164225.post-2765000230160759902</guid><description>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhNmux4QCLqx3zCncp2S9bb5fSKhqS-6CIxIPWJGSJzpAqhOfw5jJMYoLYQ_KcF_eGSzWoibWDAidIvLo46ayIeMARqY1wVvMKtlIWaxMNGsY3rAvvJrJlm5Gj277D-nuhDrzXEbqchESN_1d6Ue7d5B7sMV8r09kE--PCAjYmlyaw5KIvgVzxfbTrR9w/s730/vat-savitri-puja.jpg" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;span style="font-family: verdana; font-size: medium;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="548" data-original-width="730" height="480" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhNmux4QCLqx3zCncp2S9bb5fSKhqS-6CIxIPWJGSJzpAqhOfw5jJMYoLYQ_KcF_eGSzWoibWDAidIvLo46ayIeMARqY1wVvMKtlIWaxMNGsY3rAvvJrJlm5Gj277D-nuhDrzXEbqchESN_1d6Ue7d5B7sMV8r09kE--PCAjYmlyaw5KIvgVzxfbTrR9w/w640-h480/vat-savitri-puja.jpg" title="वट सावित्री व्रत कथा" width="640" /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;span style="font-family: verdana; font-size: medium;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-family: verdana; font-size: medium;"&gt;मद्र देश में एक समय अश्वपति नामक राजा का शासन था। राजा बड़ा दयालु एवं धार्मिक था। किन्तु उसके कोई संतान न थी। ज्योतिषियों के परामर्श से संतान प्राप्ति के लिए उसने यज्ञ किया। उस यज्ञ के बाद उन्हें एक कन्या की प्राप्ति हुई। उसका नाम सावित्री रखा। विवाह योग्य आयु में सावित्री सत्यवान को अपने पति के रूप में चुना लीं। नारद जी को जब यह बात पता चला तो उन्होंने सावित्री के पिता से कहे- कि सत्यवान अल्पायु हैं। अतः सावित्री को कोई दूसरा वर चुनना चाहिए।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-family: verdana; font-size: medium;"&gt;पिता ने सावित्री को समझाने का प्रयत्न किया, किंतु सावित्री अपने जिद पर अड़ी रही और बोली, हिंदू स्त्रियां दुनिया भर में केवल एक ही बार किसी पुरुष को चुनती हैं, बार-बार नहीं। सावित्री की जिद पर आश्वपति ने उसका विवाह सत्यवान के साथ कर दिया। सत्यवान अपने अंधे माता पिता के साथ में रहते थे। उनके पिता का नाम द्युमत्सेन सेन था‌ उनका राज्य छिन चुका था। सावित्री भी उनके साथ रहने लगी और अपने सास-ससुर की सेवा करने लगी।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-family: verdana; font-size: medium;"&gt;नारद जी द्वारा बताया गया सत्यवान के मरण का समय जब आने लगा तो सावित्री उपवास करना आरंभ कर दी। जिस दिन उसके पति के मरण का समय आया, उस दिन सावित्री ने व्रत रखा। सत्यवान जब लकड़ी काटने के लिए जाने लगे तो सावित्री साथ ही गई। जंगल में सत्यवान के सिर में पीड़ा होने लगी तो सावित्री की गोद में सिर रख कर लेट गए। थोड़ी देर बाद सावित्री ने देखा कि अनेक यमदूतों ‌के साथ यमराज आ पहुंचे और सत्यवान के जीवात्मा को लेकर दक्षिण दिशा की ओर चल दिए।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-family: verdana; font-size: medium;"&gt;सावित्री भी यमराज के पीछे पीछे चल दी। उसको आता देख यमराज ने कहा कि हे पतिव्रता नारी ! पृथ्वी पर ही पत्नी पति का साथ देती है। वहां तक तुमने साथ दिया है। आप वापस लौट जाओ।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-family: verdana; font-size: medium;"&gt;इस पर सावित्री ने कहा कि जहां मेरे पति रहेंगे, मुझे उनके साथ ही रहना है। यही मेरा पति धर्म है। यमराज सावित्री के इस उत्तर से प्रसन्न हो गए और उसने सावित्री से वर मांगने को कहा। सावित्री ने अपने सास-ससुर के लिए नेत्र ज्योति मांगी।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-family: verdana; font-size: medium;"&gt;यमराज ने सावित्री के सास-ससुर को नेत्र ज्योति प्रदान कर दी और कहा सावित्री तुम्हें लौटना चाहिए। लेकिन सावित्री नहीं मानी और पीछे-पीछे चलती रही। सावित्री को आता देखकर यमराज ने उसे दूसरा वर मांगने के लिए कहा, सावित्री ने ससुर का खोया हुआ राज्य मांगा। यमराज ने सावित्री के ससुर को खोया हुआ राज्य दे दिया, और सावित्री को पुनः लौटने के लिए कहा।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-family: verdana; font-size: medium;"&gt;लेकिन, सावित्री अपने पतिधर्म को निभाने के लिए यमराज के पीछे-पीछे चलने लगी। सावित्री की पति भक्ति को देखकर यमराज ने एक बार और वर मांगने के लिए कहा‌ तब सावित्री ने कहा कि मैं सत्यवान के सौ पुत्रों की मां बनना चाहती हूं। इतना सुनते ही यमराज ने सावित्री को उसके पति सत्यवान को वापस लौटा दिया।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-family: verdana; font-size: medium;"&gt;सावित्री अब उसी वटवृक्ष के पास वापस लौट जहां पर सत्यवान को लेकर बैठी थी। इस प्रकार सावित्री ने अपने ससुर को नेत्र ज्योति, उनका राज्य और अपने पति को प्राप्त कर ली। आपको बता दें कि वट सावित्री व्रत कथा श्रवण करने से सौभाग्यवती महिलाओं का सौभाग्य सुरक्षित रहता है, तथा उनकी मनोकामना पूर्ण होती है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;</description><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhNmux4QCLqx3zCncp2S9bb5fSKhqS-6CIxIPWJGSJzpAqhOfw5jJMYoLYQ_KcF_eGSzWoibWDAidIvLo46ayIeMARqY1wVvMKtlIWaxMNGsY3rAvvJrJlm5Gj277D-nuhDrzXEbqchESN_1d6Ue7d5B7sMV8r09kE--PCAjYmlyaw5KIvgVzxfbTrR9w/s72-w640-h480-c/vat-savitri-puja.jpg" width="72"/><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>उच्च शक्ति की मैग्नेट्रॉन प्रौद्योगिकी के स्वदेशी विकास का समर्थन कर रही है सरकार : डॉ. जितेंद्र सिंह</title><link>https://khabarkeetalash.blogspot.com/2022/05/government-is-supporting-indigenous-development-of-high-powered-magnetron-technology-Dr-jitendra-singh.html</link><category>National</category><author>noreply@blogger.com (Social Reformer)</author><pubDate>Sun, 29 May 2022 15:42:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-8273185744249164225.post-2000502185984521391</guid><description>&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiYgp4I5yZSHeElzMMOrYE8dea8Ci4iL4OliV2M1ocASY9IfkwF1u4xokmwgShbGXzAjlZEglwllzKsUr39tUCb39i2G1ZlAd3dB0hJtVnRx1uwfUFkx0-oNEqnrVzEQBL5SST65d5UwaB8TWvS9PJJhTK1gKGRN-YA1VBveVLG_ijQ3VPq06SNCpbBGw/s275/JITENDRA%20SINGH.jpg" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;span style="font-family: verdana; font-size: medium;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="183" data-original-width="275" height="426" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiYgp4I5yZSHeElzMMOrYE8dea8Ci4iL4OliV2M1ocASY9IfkwF1u4xokmwgShbGXzAjlZEglwllzKsUr39tUCb39i2G1ZlAd3dB0hJtVnRx1uwfUFkx0-oNEqnrVzEQBL5SST65d5UwaB8TWvS9PJJhTK1gKGRN-YA1VBveVLG_ijQ3VPq06SNCpbBGw/w640-h426/JITENDRA%20SINGH.jpg" title="उच्च शक्ति की मैग्नेट्रॉन प्रौद्योगिकी के स्वदेशी विकास का समर्थन कर रही है सरकार : डॉ. जितेंद्र सिंह" width="640" /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-family: verdana; font-size: medium;"&gt;&lt;b&gt;&lt;br /&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-family: verdana; font-size: medium;"&gt;&lt;b&gt;नई दिल्ली/पीआईवी। &lt;/b&gt;केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री एवं पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार),&amp;nbsp; प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री, डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज कहा है कि सरकार मुख्य रूप से कैंसर विकिरण चिकित्सा के लिए उपयोग की जाने वाली उच्च शक्ति की मैग्नेट्रॉन तकनीक के स्वदेशी विकास का समर्थन कर रही है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (टीडीबी) और मेसर्स पैनासिया मेडिकल टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड लिमिटेड, बैंगलोर के बीच "एस बैंड ट्यूनेबल मैग्नेट्रॉन फॉर पार्टिकल एक्सीलिरेटर्स" के विकास और व्यावसायीकरण के लिए वित्तीय सहायता हेतु समझौता ज्ञापन पर हुए हस्ताक्षर पर आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता की। टीडीबी ने कंपनी को 9.73 करोड़ की कुल परियोजना लागत में से 4.87 करोड़ की ऋण सहायता प्रदान करने पर सहमति व्यक्त की है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-family: verdana; font-size: medium;"&gt;डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सीएसआईआर-सीरी (सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट), पिलानी द्वारा व्यावसायिक उपयोग के लिए विकसित उच्च शक्ति वाले मैग्नेट्रॉन कैंसर चिकित्सकों (ऑन्कोलॉजिस्टों) के लिए 2 मिमी व्यास के ब्रेन ट्यूमर को भी बहुत कम दुष्प्रभावों के साथ सटीक विकिरण के साथ उपचार करने में एक पथप्रदर्शक तकनीक होगी।&amp;nbsp; उन्होंने कहा कि इससे न केवल प्रभावकारिता बढ़ेगी, बल्कि यह सूक्ष्म और प्रमुख ट्यूमर के उपचार में भी किफायती सिद्ध होगी। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि&amp;nbsp; टीडीबी के साथ, पैनेशिया ने भारत का पहला सबसे उन्नत और अभिनव एसबीआरटी सक्षम रैखिक त्वरकों (लीनियर एक्सीलिरेटर्स - एलआईएनएसीएस), सिद्धार्थ II विकसित किया है, जो 3 डीसीआरटी, वीएमएटी, आईएमआरटी, एसबीआरटी और एसआरएस जैसे उपचार के तौर-तरीकों से उपचार करने में सक्षम है।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-family: verdana; font-size: medium;"&gt;उन्होंने कहा कि&amp;nbsp; यूएस एफडीए, 510 (के) मंजूरी वाली यह मशीन 11 मई 2022 को मनाए जाने वाले प्रौद्योगिकी दिवस पर लॉन्च की गई है और यह दुनिया का तीसरा ब्रांड है जो दो वैश्विक दिग्गजों&amp;nbsp; इंग्लैंड और जापान के अलावा बाजार के लिए तैयार है। डॉ. जितेन्‍द्र सिंह ने कहा कि मोदी सरकार के "मेक इन इंडिया" और "मेक फॉर द वर्ल्ड" के मंत्र के अनुरूप इस मशीन को दुनिया के कई देशों में निर्यात किया जा सकता है क्योंकि इस कंपनी को यूएस एफडीए की मंजूरी पहले ही मिल चुकी है। वर्तमान में, हमारी अर्थव्यवस्था चिकित्सा अनुप्रयोगों के अलावा एनडीटी, रडार और अन्य औद्योगिक अनुप्रयोगों से संबंधित विभिन्न अनुप्रयोगों में आयातित मैग्नेट्रोन के उपयोग पर निर्भर करती है। अब दुनिया भर में मेडिकल लाइनैक निर्माताओं को आरएफ स्रोत की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने वाले अन्य अनुप्रयोगों के लिए इस तकनीक को आगे बढ़ाया जा सकता है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-family: verdana; font-size: medium;"&gt;डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पार्टिकल एक्सीलिरेटर्स&amp;nbsp; के लिए एस बैंड ट्यूनेबल मैग्नेट्रॉन के विकास और व्यावसायीकरण" हेतु पैनेशिया मेडिकल टेक्नोलॉजीज का समर्थन करने वाला प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड अब आम आदमी के लिए कैंसर के इलाज को और अधिक किफायती बनाने के लिए सिद्धार्थ II की लागत को और कम करने हेतु पैनसिया को एक कदम आगे बढ़ने में सक्षम बनाएगा। साथ ही यह बड़े पैमाने पर समाज को लाभ पहुंचाने के लिए बाजार संचालित अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देने वाले सर्वश्रेष्ठ उद्योग अकादमिक जुड़ाव का भी उदाहरण है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि 'मेक इन इंडिया' कार्यक्रम के तहत नरेन्‍द्र मोदी सरकार द्वारा चिकित्सा उपकरणों को प्राथमिकता वाले क्षेत्र के रूप में पहचाना गया है और देश के स्वदेशी विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-family: verdana; font-size: medium;"&gt;उन्होंने कहा कि&amp;nbsp; वर्तमान समय में भारत, जापान, चीन और दक्षिण कोरिया के बाद एशिया में चौथा सबसे बड़ा चिकित्सा उपकरणों का बाजार है और वैश्विक बाजार में 20वें स्थान पर है। डॉ. जितेन्‍द्र सिंह ने कहा कि भारत चिकित्सा उपकरणों की अपनी आवश्यकता का लगभग 86 प्रतिशत और उच्च गुणवत्ता वाले चिकित्सा उपकरणों का लगभग 100 प्रतिशत आयात करता है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि वैश्विक बाजारों के अध्ययन के अनुसार, मैग्नेट्रोन की विश्व स्तर पर भारी मांग है, क्योंकि यह सभी प्रकार के रैखिक त्वरक (लीनियर एक्सीलिरेटर्स), औद्योगिक ताप उपकरण (इन्डस्ट्रियल हीटिंग इक्विपमेंट्स), रडार प्रणालियों, चिकित्सा अनुप्रयोगों, एनडीटी और अन्य उद्योगों के लिए बहुत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भारत यह उपलब्धि हासिल करने वाला तीसरा देश होगा। अभी इंग्लैंड और जापान के पास वैश्विक बाजार का मेंट्स लगभग 80% - 90% हिस्सा है।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-family: verdana; font-size: medium;"&gt;उन्‍होंने कहा कि भारतीय स्वास्थ्य देखभाल पारिस्थितिकी तंत्र को एक मजबूत क्षेत्र बनाने के उद्देश्य से टीडीबी चिकित्सा उपकरणों के लिए वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनने के भारत की संकल्पना को गति प्रदान कर रहा&amp;nbsp; है। मैग्नेट्रॉन एक प्रकार की वैक्यूम ट्यूब डिवाइस है। यह अन्य समान माइक्रोवेव ट्यूबों की तुलना में माइक्रोवेव शक्ति का कॉम्पैक्ट और कम लागत वाला स्रोत है। यह उस क्रॉस-फील्ड डिवाइस के सिद्धांत पर काम करता है जो माइक्रोवेव विकिरण उत्पन्न करने के लिए लंबवत (पर्पेंडीकुलर) विद्युत और चुंबकीय क्षेत्रों में इलेक्ट्रॉनों की गति का उपयोग करता है, ताकि&amp;nbsp; चिकित्सा, एनडीटी और अन्य संबद्ध अनुप्रयोगों के लिए रैखिक त्वरक (लीनियर एक्सीलिरेटर्स) में आरएफ पावर स्रोत को निर्मित किया जा सके। इस तकनीक को वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद - कें‍द्रीय इलेक्ट्रोनिकी अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान&amp;nbsp; (सीएसआईआर- सीईईआरआई), पिलानी द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित किया गया है और कैंसर के इलाज के लिए विकिरण चिकित्सा मशीन में बड़े पैमाने पर उत्पादन तथा उपयोग के लिए पैनसिया में स्थानांतरित कर दिया गया है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-family: verdana; font-size: medium;"&gt;टीडीबी के सचिव, आईपी एंड टीएएफएस, श्री राजेश कुमार पाठक ने कहा कि अपनी स्थापना के बाद से ही टीडीबी बड़े पैमाने पर सभी के लाभ के लिए ऐसी नवीन/स्वदेशी प्रौद्योगिकियों का समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध है। टीडीबी 'पार्टिकल एक्सेलेरेटर्स हेतु एस बैंड ट्यूनेबल मैग्नेट्रॉन' के विकास और व्यावसायीकरण के लिए पैनेशिया मेडिकल टेक्नोलॉजीज का समर्थन कर रहा है और यह आम आदमी के लिए कैंसर के इलाज को और अधिक किफायती बनाने में आगे का एक कदम होगा। इसके अलावा हम आशा करते हैं कि कई मेडटेक कंपनियां इस तरह की और नवीन तकनीकों के साथ आगे आएंगी और भारत में अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ-साथ दुनिया के लिए उपलब्ध कराने के लिए सस्ती कीमत पर इनका निर्माण करेंगी। इस प्रकार यह भारत को दुनिया के लिए अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरणों के प्रमुख विनिर्माण केंद्र के रूप में बदल देंगी।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-family: verdana; font-size: medium;"&gt;पैनासिया के प्रबंध निदेशक जी.वी.सुब्रमण्यम ने कहा कि कंपनी ने लाइनैक को और अधिक स्वदेशी बनाने के साथ ही इसकी लागत को और कम करने के लिए चुनौती स्‍वीकार की तथा इसके लिए वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद - कें‍द्रीय इलेक‍ट्रोनिकी अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्‍‍थान&amp;nbsp; (सीएसआईआर- सीईईआरआई), पिलानी से संपर्क किया। इसने कैंसर के उपचार के लिए विकिरण चिकित्सा मशीन में बड़े पैमाने पर उत्पादन और उपयोग के लिए 2.6 मेगावाट एस-बैंड फ्रीक्वेंसी ट्यूनेबल पल्स मैग्नेट्रॉन हेतु सीईईआरआई द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित 2998 मेगाहर्ट्ज मैग्नेट्रॉन तकनीक का भी अधिग्रहण किया है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;</description><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiYgp4I5yZSHeElzMMOrYE8dea8Ci4iL4OliV2M1ocASY9IfkwF1u4xokmwgShbGXzAjlZEglwllzKsUr39tUCb39i2G1ZlAd3dB0hJtVnRx1uwfUFkx0-oNEqnrVzEQBL5SST65d5UwaB8TWvS9PJJhTK1gKGRN-YA1VBveVLG_ijQ3VPq06SNCpbBGw/s72-w640-h426-c/JITENDRA%20SINGH.jpg" width="72"/><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>बायोमास और हरित हाइड्रोजन का उपयोग ऊर्जा संरक्षण की कुंजी है : आर के सिंह</title><link>https://khabarkeetalash.blogspot.com/2022/05/use-of-biomass-and-green-hydrogen-is-the-key-to-energy-conservation-rk-singh.html</link><category>National</category><author>noreply@blogger.com (Social Reformer)</author><pubDate>Sun, 29 May 2022 08:19:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-8273185744249164225.post-1434415720460246389</guid><description>&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjf4uCMn9ykIZptBhKZC2Ck1TUc9fJG0kdPeXtFd1zpCvxrpR2SHseZvFGGebB8US9IlrNgzu2EKzugsAvYZzUgLg29YrTsaFuBhTbyFMDoL3_EPdjc5gL4H80kEKJ5SXgUP4JsMUT6BZJkvvCIefXZpZxNR1W1znsnFPxwmVafAddwKLRunTMjXXd-gA/s600/R.K.%20Singh.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="400" data-original-width="600" height="426" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjf4uCMn9ykIZptBhKZC2Ck1TUc9fJG0kdPeXtFd1zpCvxrpR2SHseZvFGGebB8US9IlrNgzu2EKzugsAvYZzUgLg29YrTsaFuBhTbyFMDoL3_EPdjc5gL4H80kEKJ5SXgUP4JsMUT6BZJkvvCIefXZpZxNR1W1znsnFPxwmVafAddwKLRunTMjXXd-gA/w640-h426/R.K.%20Singh.jpg" width="640" /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;b&gt;&lt;p&gt;&lt;b&gt;&lt;br /&gt;&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;नई दिल्ली/पीआईवी। &lt;/b&gt;केंद्रीय विद्युत और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री आरके सिंह ने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों और केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपालों से ऊर्जा संरक्षण के लिए राज्य स्तरीय संचालन समितियों का गठन करने को कहा है। ये संचालन समितियां संबंधित राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों की अध्यक्षता में कार्य करेंगी। विद्युत और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग, परिवहन, उद्योग, आवास एवं शहरी कार्य, कृषि, ग्रामीण विकास एवं लोक निर्माण विभाग आदि के प्रधान सचिव इन समितियों के सदस्य के रूप में कार्य करेंगे। समिति के आदेश के अंतर्गत राज्य और केंद्र शासित प्रदेश ऊर्जा संरक्षण की वार्षिक रणनीति पर काम करेंगे। उन्होंने कहा कि सबसे अधिक ऊर्जा दक्ष रूप से सतत विकास पर राज्य-विशिष्ट लक्ष्यों को पूरा करने में राज्यों/ केंद्रशासित प्रदेशों की महत्वपूर्ण भूमिका है।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;उन्होंने कहा कि कार्बन उत्सर्जन को कम करने और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर की गई अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने का एकमात्र साधन ऊर्जा संरक्षण है। उन्होंने बताया कि आंध्र प्रदेश, केरल, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड जैसे कुछ राज्यों ने पहले ही ऐसी समितियों का गठन कर लिया है। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि ऊर्जा संरक्षण के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एक साथ कई ट्रैक पर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि देश में बिजली की लगातार बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए पहला ट्रैक बिजली उत्पादन मिश्रण में अक्षय (नवीकरणीय ऊर्जा) को शामिल करना है। उन्होंने कहा कि दूसरा ट्रैक ऊर्जा दक्षता को बढ़ावा देने वाला होगा जबकि तीसरा ट्रैक बायोमास और हरित हाइड्रोजन का अधिक उपयोग करने का होगा।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;उन्होंने कहा कि अगर हम सभी इन बिंदुओं पर सामूहिक रूप से काम करें, तो हम न केवल अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर सकेंगे, बल्कि इससे नए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे, विकास में तेजी आएगी और अंततः देश के प्रत्येक नागरिक को लाभ होगा। उन्होंने कहा कि राज्यों से कृषि क्षेत्र में डीजल के उपयोग को सीमित करके वर्ष 2024 तक कृषि में शून्य डीजल उपयोग के प्रयास करने का आग्रह किया। इस संबंध में पीएम-कुसुम योजना के अंतर्गत अलग-अलग कृषि फीडरों के लिए सौर ऊर्जा अपनाने के लिए आरडीएसएस (पुनर्निर्मित वितरण क्षेत्र योजना) के माध्यम से वित्तीय सहायता प्राप्त की जा सकती है। सिंह ने बल देकर कहा कि वर्ष 2005 के स्तर की तुलना में वर्ष 2030 तक कार्बन उत्सर्जन की तीव्रता में 45 प्रतिशत की कमी के सफल कार्यान्वयन में राज्य सरकारों की भूमिका महत्वपूर्ण है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;ul style="text-align: left;"&gt;&lt;li&gt;&lt;span data-offset-key="6ps4f-0-0" style="background-color: white; color: #0f1419; font-family: TwitterChirp, -apple-system, BlinkMacSystemFont, &amp;quot;Segoe UI&amp;quot;, Roboto, Helvetica, Arial, sans-serif; white-space: pre-wrap;"&gt;&lt;span data-text="true"&gt;&lt;a href="https://khabarkeetalash.blogspot.com/2022/05/mahakumbh-of-dharma-karma-and-spirituality-at-baba-jaigurudev-ashram.html " target="_blank"&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;बाबा जयगुरुदेव आश्रम में धर्म, कर्म और आध्यात्म का महाकुंभ &lt;/span&gt;&lt;/a&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;</description><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjf4uCMn9ykIZptBhKZC2Ck1TUc9fJG0kdPeXtFd1zpCvxrpR2SHseZvFGGebB8US9IlrNgzu2EKzugsAvYZzUgLg29YrTsaFuBhTbyFMDoL3_EPdjc5gL4H80kEKJ5SXgUP4JsMUT6BZJkvvCIefXZpZxNR1W1znsnFPxwmVafAddwKLRunTMjXXd-gA/s72-w640-h426-c/R.K.%20Singh.jpg" width="72"/><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>बाबा जयगुरुदेव आश्रम में धर्म, कर्म और आध्यात्म का महाकुंभ</title><link>https://khabarkeetalash.blogspot.com/2022/05/mahakumbh-of-dharma-karma-and-spirituality-at-baba-jaigurudev-ashram.html</link><category>Adhyatm</category><author>noreply@blogger.com (Social Reformer)</author><pubDate>Sun, 29 May 2022 01:04:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-8273185744249164225.post-8578103739850855403</guid><description>&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEh55l4IqNrOWFsyEP-vHBqlc6jmYUzo-cMxGFyyzaQCfXW3qteBoeqAQa0BmV0PHOYJm424J1bU9mGzFTJubF0fgacxXUbbVo3JIeeMeEQ-v5fnWWGTwPWeOcZM7VVdfnKQnmGgo-VnACkYmwUSnu_iHp6CmQ-lmGtnDoBZxJpfv8C4PGGH18s8tvs8Kw/s1280/baba%20umakant.jpg" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="720" data-original-width="1280" height="360" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEh55l4IqNrOWFsyEP-vHBqlc6jmYUzo-cMxGFyyzaQCfXW3qteBoeqAQa0BmV0PHOYJm424J1bU9mGzFTJubF0fgacxXUbbVo3JIeeMeEQ-v5fnWWGTwPWeOcZM7VVdfnKQnmGgo-VnACkYmwUSnu_iHp6CmQ-lmGtnDoBZxJpfv8C4PGGH18s8tvs8Kw/w640-h360/baba%20umakant.jpg" width="640" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;span style="font-family: georgia; font-size: large;"&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;ul style="text-align: left;"&gt;&lt;li&gt;सन्तों का सम्बंध शरीर से नहीं जीवात्मा से होता है-सन्त उमाकान्त जी महाराज&amp;nbsp;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;/span&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-family: georgia; font-size: medium;"&gt;देश-दुनियां में शाकाहार,सदाचार,नशा मुक्ति,शराब बंदी के साथ-साथ कलयुग में सतयुग के आगमन का आह्वान करने वाले उज्जैन के पूज्य संत बाबा उमाकान्त जी महाराज द्वारा बाबा जयगुरुदेव जी के दशम वार्षिक भंडारे का अवसर पर मौजूद भक्तों के विशाल जनसमूह को सतसंग सुनाते हुए बताया कि जिस मृत्यु लोक में आप लोग रहते है ये काल भगवान का देश है। काल भगवान किसे कहते है जो पल भर में सृष्टि बनादे और मिटा दे।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-family: georgia; font-size: medium;"&gt;इन्होंने सतपुरुष की तपस्या कर उन्हें प्रसन्न करके उनके जैसा राज मांगा। तो ये जितने भी देवी-देवता है सब उन्ही के माताहत है और जीवात्मा यहाँ आकर भूल गई। जब कर्म ख़राब होने से जीव नार्को में तकलीफ, सज़ा पाकर प्रभु को याद करने तलगे तब सतपुरुष ने सन्तों को मनुष्य शरीर मे मृत्यु लोक भेजा। काल परमार्थ के काम मे बहुत रुकावट डालता है लेकिन जब दयाल, गुरु के काम लिए निकलते है तब यह बाधक नहीं बनता, बल्कि गुरु आदेश में चलने वालों के लिए दयाल के समान मददगार हो जाता है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-family: georgia; font-size: medium;"&gt;&lt;b&gt;आप भाग्यशाली हो जिन्हें ये नरतन मिला&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-family: georgia; font-size: medium;"&gt;महाराज जी ने अपने सन्देश में कहा कि माया और भक्ति कभी एक साथ नहीं रह सकते,दुनियां की चीजें परमार्थ में बाधक बनती है इसीलिए प्रेमियों ने प्रभु से मांगा की "साध संग मोहे देव नित परम् गुरु दातार"&amp;nbsp; तो दयाल जब अपनी शक्ति भेजते है तो जीव खिंचता हुआ चला आता है। तो आप भाग्यशाली हो जिसे यह नरतन मिला। देवता भी तरसते है इस मनुष्य शरीर को पाने के लिए।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-family: georgia; font-size: medium;"&gt;&lt;b&gt;हम किसी को साधु नहीं बनाते&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-family: georgia; font-size: medium;"&gt;नामदान की महिमा समझाते हुए महाराज जी ने बताया ये ईश्वर प्राप्ति का सबसे सरल सहज योग है। हम किसी को साधु नहीं बनाते ना ही किसी का घर छुड़वाते है। कोई किसी भी धर्म का हो,मज़हब&amp;nbsp; का हो,जाती का, हम तो केवल आपकी जीवात्मा को देखते है। महात्मा का सबंध आत्मा से होता है,शरीर से नहीं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-family: georgia; font-size: medium;"&gt;&lt;b&gt;मुसीबत में मददगार जयगुरुदेव नाम&amp;nbsp;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-family: georgia; font-size: medium;"&gt;जयगुरुदेव नाम की महिमा को सुनाते हुए महारजजी ने बताया कि जयगुरुदेव नाम किसी भी शाकाहारी, सदाचारी व्यक्ति के लिए तकलीफ, मुसीबत में मददगार है। उसी तरह ये जयगुरुदेव नाम आप किसी को बताकर फायदा बता सकते है फायदा दिला सकते हो।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-family: georgia; font-size: medium;"&gt;&lt;b&gt;दुबई के शेख़, मॉरीशस के कैबिनेट मंत्री समेत 13 देशों से आये भक्त लेने नामदान&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-family: georgia; font-size: medium;"&gt;इस तीन दिवसीय तपस्वी भंडारे में ना केवल भारत के कोने-कोने से भक्तगण शामिल हुए है बल्कि अमेरिका, अज़रबैजान, साउथ अफ्रीका, ब्रिटेन, श्रीलंका समेत 13 देशों से लोग पधारे है। जिनमे विशेष रूप से दुबई से पधारे हर्फ शेख साहब, मॉरीशस से केबिनेट मंत्री एवम नेपाल से सांसद भी पधारी है। महाराज जी के दर्शन के लिए प्रदेश के शिक्षा मंत्री मोहन भी सतसंग में पधारे।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-family: georgia; font-size: medium;"&gt;&lt;b&gt;गुरु पूजन आरंभ&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-family: georgia; font-size: medium;"&gt;महाराज जी द्वारा सतसंग, नामदान एवं दर्शनों के पश्चात रात्रि में गुरु पूजन किया गया जिसके उपरांत भक्तों ने कतारबद्ध होकर मंदिर पर पूजन करना शुरू कर दिया। 28 मई की शाम को महाराज जी के सतसंग के पश्चात इस तपस्वी भंडारे का विधिवत समापन होगा।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;</description><media:thumbnail 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