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	<title>Lopak</title>
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	<description>देसी बात देसी अंदाज़</description>
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	<title>Lopak</title>
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		<title>श्री लंका के प्रधानमंत्री ने क़बूला, भारत ने आतंकी हमले की पहले ही दी थी चेतावनी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Rashmi Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 22 Apr 2019 10:01:57 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[defense]]></category>
		<category><![CDATA[Foreign Affairs]]></category>
		<category><![CDATA[Foreign Policy]]></category>
		<category><![CDATA[Bomb blasts]]></category>
		<category><![CDATA[Tanik Vikramsinghe]]></category>
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					<description><![CDATA[कोलम्बो में हुआ आतंकी हमला सभी की ज़ुबान पर है. रविवार को हुए आठ बम धमाकों से पड़ोसी देश दहल गया. धमाकों में हुई मौतों का आंकड़ा 215 पहुंच गया<div><a class="permalink" href="https://www.lopak.in/2019/04/ranil-vikramsinghe-srilanka-attacks/">Read More...</a></div>]]></description>
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<p>कोलम्बो में हुआ आतंकी हमला सभी की ज़ुबान पर है. रविवार को हुए आठ बम धमाकों से पड़ोसी देश दहल गया. धमाकों में हुई मौतों का आंकड़ा 215 पहुंच गया है, जबकि 500 से ज्यादा लोग घायल हो गये. मरने वालों में 35 विदेशी लोग भी शामिल हैं. </p>



<p>हमला ईस्टर के दिन चर्च में प्रार्थना कर रहे लोगों पे हुआ हमले में अभी तक किसी भारतीय के घायल होने या मरने के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है. अब तक किसी आतंकी संगठन या समूह ने इन हमलों की जिम्मेदारी नहीं ली है. लेकिन विदेशी मीडिया में नैशनल तोहिथ जमात (Thawheed Jamaat) का नाम लिया जा रहा है, जो कि एक इस्लामिक चरमपंथी संगठन है और इसका एक धड़ा तमिलनाडु में भी सक्रिय है. </p>



<figure class="wp-block-embed-twitter wp-block-embed is-type-rich is-provider-twitter"><div class="wp-block-embed__wrapper">
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true"><p lang="en" dir="ltr">Some intelligence officers were aware of this incidence. Therefore there was a delay in action. What my father heard was also from an intelligence officer. Serious action need to be taken as to why this warning was ignored. I was in Badulla last night <a href="https://t.co/ssJyItJF1x">pic.twitter.com/ssJyItJF1x</a></p>&mdash; Harin Fernando (@fernandoharin) <a href="https://twitter.com/fernandoharin/status/1119999431909228544?ref_src=twsrc%5Etfw">April 21, 2019</a></blockquote><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
</div></figure>



<p>श्री लंका के प्रधानमंत्री रनिल विक्रमसिंघे ने रविवार को मीडिया के सामने यह बात मानी कि उन्हें 10 दिन पहले से जानकारी थी पर वह हमले को रोकने के लिए उचित क़दम नहीं उठा पाए. उच्च ख़ूफ़िया एजेंसियों के हिसाब से ज़हरन हासिम -नेशनल तौवहीद जमात ने सरी लंका में आत्मघाती हमला करने की साज़िश रची थी. इसके तहत उन्होंने 8 जगहों का चयन किया था. जिसमें चर्च और होटल दोनो शामिल थे. ध्यान देने वाली बात होगी कि इन जगहों पर भारतीयों की तादाद सबसे ज़्यादा होती है. <a href="http://﻿https://www.news18.com/news/india/despite-indias-warning-sri-lanka-failed-to-take-precautions-pm-ranil-wickremesinghe-admits-colombo-had-intel-on-blasts-2111317.html">नई दिल्ली ने कोलम्बो के साथ यह जानकारी 4 अप्रैल को साझा की थी</a>.<br></p>



<p>इस पर कार्रवाही करते हुए श्री लंका के पुलिस प्रमुख ने 10 दिन पहले ही अलर्ट जारी किया था. प्रधानमंत्री विक्रमसिंघे ने यह भी कहा कि आतंकवादियों को बाहरी मदद मिली थी या नहीं इस बात का पता लगाने के लिए उन्हें दूसरे देशों की सहायता की ज़रूरत है. हालाँकि उन्हें जो जानकारी मिली है उसके हिसाब से आतंकी स्थानीय ही थे.</p>



<p>इस सिलसिले में 13 लोगों को गिरफ़्तार किया जा चुका है. एक ख़ास कमिटी बनाई गई है इस मामले की जाँच करने के लिए. कमिटी को दो हफ़्तों के अंदर अंदर रिपोर्ट देनी है.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>लाल सलाम की असहिष्णुता का उदाहरण है कन्हैया कुमार</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Prashant Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 22 Apr 2019 08:08:25 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Election]]></category>
		<category><![CDATA[Politics]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[Beat]]></category>
		<category><![CDATA[CPIM]]></category>
		<category><![CDATA[kanahiya kumar begusarai]]></category>
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					<description><![CDATA[बिहार के बेगूसराय में कन्हैया कुमार के समर्थकों ने अपने आलोचकों को ऐसा जवाब दिया जो शायद उनको हफ्तों तक याद रहे. कन्हैया के प्रशंसकों ने कुछ ऐसा कार्य कल<div><a class="permalink" href="https://www.lopak.in/2019/04/kanahiya-beat-up-people/">Read More...</a></div>]]></description>
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<p>बिहार के बेगूसराय में कन्हैया कुमार के समर्थकों ने अपने आलोचकों को ऐसा जवाब दिया जो शायद उनको हफ्तों तक याद रहे. कन्हैया के प्रशंसकों ने कुछ ऐसा कार्य कल बेगूसराय में कर दिया जिसको देखर वो दौर याद आ गया जब &#8216;जिसकी लाठी उसकी भैंस&#8217; ही लोकतंत्र में एक सच्चाई थी. बाहुबल का जोर. रसूख और पैसे का जोर. कालांतर में हुई उन घटनाओं को शायद अब कन्हैया कुमार चरितार्थ करना चाहते हैं. घटना है बेगूसराय के कुरैया गांव की.</p>



<p>इस गांव में चांद पेट्रोल पंप के पास से जब कन्हैया कुमार का काफिला निकल रहा था तब कुछ लोगों ने कन्हैया कुमार को <a rel="noreferrer noopener" aria-label="काले झंडे दिखाते हुए कन्हैया विरुद्ध नारे लगाए (opens in a new tab)" href="https://www.republicworld.com/election-news/bihar-lok-sabha-elections/watch-people-gherao-cpis-kanhaiya-kumar-cavalcade-raise-black-flags-in-protest-in-begusarai" target="_blank">काले झंडे दिखाते हुए कन्हैया विरुद्ध नारे लगाए</a>. छात्र नेता महोदय का यूनिवर्सिटी कैंपस होता तो एकबार निपट भी लेते और खबर JNU की दीवारों से बाहर भी न जाती. परंतु ये तो भाई राजनीति का दूसरा अखाड़ा है. </p>



<p>यहां तो नेता जी की धोती खुलने तक कि खबरें छप जाया करती है, और यहां तो पोल खुल चुकी थी. लगे हाथ कन्हैया के समर्थकों ने आव देखा न ताव, उन लोगों की सुताई कर दी. घर में घुस कर मारा. ये सिर्फ नरेंद्र मोदी का ही नारा नहीं बल्कि अब कन्हैया कुमार भी बोल सकते हैं कि &#8216;ससुर हमहुँ घर में घुस के मरले रहिनि&#8217;.</p>



<figure class="wp-block-embed-twitter wp-block-embed is-type-rich is-provider-twitter"><div class="wp-block-embed__wrapper">
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true"><p lang="en" dir="ltr">Kanhaiya Kumar&#39;s supporters carrying red flags beating up people by getting inside their houses in Begusarai<br><br>Hi Kanhaiya&#39;s star campaigner <a href="https://twitter.com/ReallySwara?ref_src=twsrc%5Etfw">@ReallySwara</a> One apology for the violence unleashed by your leader please? <a href="https://t.co/dcqxCWWDgI">pic.twitter.com/dcqxCWWDgI</a></p>&mdash; Monica (@TrulyMonica) <a href="https://twitter.com/TrulyMonica/status/1120010774859210754?ref_src=twsrc%5Etfw">April 21, 2019</a></blockquote><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
</div></figure>



<p>लोकतंत्र का एक चित्र ये भी है. ये वही कन्हैया है जो लोकतंत्र की दुहाई देते नहीं थकते. अपने ऊपर देशद्रोह का मामला चल रहा है लेकिन दुनिया को यह बताते चलते हैं कि कौन देशभक्त नहीं है. बस यही कुछ ऐसी बातें हैं जो नेता जी का पीछा उनके चुनावी नतीजों तक करेंगी. कहो तो अभी स्टेज सजा कर भाषणबाजी शुरू कर दें. 70 साल की कमियों को बताने लगे. समाज के बड़े जानकार की तरह शोषण के दौर को ताजा करवा देंवें. </p>



<blockquote style="text-align:left" class="wp-block-quote is-layout-flow wp-block-quote-is-layout-flow"><p>लेकिन राजनीति और भाषणबाजी दो अलग बातें होती हैं. कभी सच में चुनावी मैदान में उतरियेगा तो पता चलेगा कि देश में बातों की जलेबियाँ बनाने वाले कितने नेता है. कन्हैया के समर्थकों की इन हरकतों ने एकबार फिर से ये सिद्ध कर दिया कि कौआ चाहें कितना कोशिश कर ले लेकिन कभी हंस नहीं बन सकता. विक्टिम कार्ड खेलने वाले कन्हैया कुमार शायद इसको अपनी जाति पर ले सकते हैं तो पहले ही यह बात देंवें की हम यहाँ बस एक मुहावरा बोले हैं.</p></blockquote>



<p>आश्चर्य यह है कि इनके लिए स्वरा भास्कर कुछ दिन पहले वोट मांगने गयी थी. शायद अब ट्विटर पर वो इसके लिए भी माफी मांग लें. वो क्या है कि उनके हृदय में कुछ ज़्यादा ही ग्लानि उत्पन्न हो रही है. आजकल वो आत्मग्लानि में इतना ज्यादा हैं कि सार्वजनिक रूप से सबसे माफी मांग रही हैं. चलिए राजनीति का एक रंग आखिरकार कन्हैया ने भी चख लिया.</p>



<figure class="wp-block-pullquote alignleft"><blockquote class="has-text-color has-luminous-vivid-orange-color"><p>वैसे भी लाल सलाम वालों का राजनैतिक इतिहास कितनी लालिमा से भरा हुआ है यह देश जानता है. कन्हैया की इस &#8216;असहिष्णुता&#8217; को बेगूसराय याद रखेगा. बाकी उनके वैचारिक समर्थक अभी से डैमेज कंट्रोल में लग चुके होंगे.</p></blockquote></figure>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>नोट्रे डैम पर आंसू बहते पर अपने हज़ारो साल पुराने अतुल्य मंदिर के जलने का पता नहीं</title>
		<link>https://www.lopak.in/2019/04/cry-for-notre-dam-forget-meenakshi-temple/?utm_source=rss&#038;utm_medium=rss&#038;utm_campaign=cry-for-notre-dam-forget-meenakshi-temple</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[श्वेतांक भूषण सिंह]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 22 Apr 2019 07:46:24 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Culture]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म-संस्कृति]]></category>
		<category><![CDATA[Meenakshi temple]]></category>
		<category><![CDATA[Notre Dam]]></category>
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					<description><![CDATA[दो दिन पहले फ्रांस के सबसे प्रसिद्ध स्थलों में से एक पेरिस के 850 साल पुराने मध्ययुगीन नॉट्रे-डेम कैथेड्रल में आग लग गई और मुख्य संरचना को छोड़कर भवन की<div><a class="permalink" href="https://www.lopak.in/2019/04/cry-for-notre-dam-forget-meenakshi-temple/">Read More...</a></div>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div id='fb-root'></div>
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<p>दो दिन पहले फ्रांस
के सबसे प्रसिद्ध
स्थलों में से एक पेरिस
के 850 साल पुराने
मध्ययुगीन नॉट्रे-डेम
कैथेड्रल में आग
लग गई और मुख्य संरचना
को छोड़कर भवन
की शिखर और छत तक
ढह गये. जाहिर
है यह एक दुर्भाग्यपूर्ण खबर थी.</p>



<p>जल्द ही, देखते
ही देखते नॉर्टे-डेम के
जलने की तस्वीरें
और वीडियो हमारे
सभी फोन और टीवी पर
छा गए अगर सच
बोलूं तो मैं नोट्रे-डेम
कैथेड्रल के बारे
में नहीं जानता
था लेकिन फिर
भी आग देखकर
दुख महसूस किया.</p>



<p>तभी अचानक बहुतेरे
संदिग्धों के सोशल
मीडिया पर भयभीत
भावनाओं के उभार को देखकर
मुझे थोड़ा शक़
होने लगा. मैने
देखा इनमें से
तो अनेकों वही
भारतीय हैं, जिन्होंने
कभी अपनी कला
और वास्तुकला की
परवाह नहीं की,
वे नोट्रे-डेम
के बारे में
इतना भयभीत और
पीड़ित क्यूँ हैं?</p>



<p>फिर बहुत सारे ट्वीट्स और थ्रेड्स पढ़े. इससे पहले कि मैं कुछ समझ पाता, @Trueindology का ट्वीट देखा, जो की हाल ही में हज़ारों साल पुराने मीनाक्षी मंदिर को नष्ट करने वाली विनाशकारी आग के बारे में था. बहुत ताज़्ज़ूब हुआ की मुझे इस घटना के विषय में कोई जानकारी नहीं थी.</p>



<figure class="wp-block-embed-twitter wp-block-embed is-type-rich is-provider-twitter"><div class="wp-block-embed__wrapper">
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true"><p lang="en" dir="ltr">Just a few months ago, Madurai Meenakshi temple was damaged in conflagration. Mind you, this is a World Heritage site and older than Notredame. Can you show me a tweet of yours where you have expressed grief? I am asking you since you say your appreciation transcends boundaries.</p>&mdash; True Indology (@TrueIndology) <a href="https://twitter.com/TrueIndology/status/1117985756780224512?ref_src=twsrc%5Etfw">April 16, 2019</a></blockquote><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
</div></figure>



<p>फिर जाना की
मदुरैई का मीनाक्षी
मंदिर कुछ ही महीने पहले
भीषण आग लगने से बड़े
पैमाने पर क्षतिग्रस्त
हो गया था. ये नोट्रे-डेम से
काफी पुरानी है,
वर्ल्ड हेरिटेज साइट
भी है, अत्यंत
ही खूबसूरत है
और हमारी प्राचीन
शिल्पकाला की धारिणी
भी है. </p>



<p>लेकिन क्या आपको
इस घटना के बारे में
चौबीसों घंटे मीडिया
कवरेज हुआ हो, याद है?
क्या आपने किसी
को अपनी पीड़ा
व्यक्त करते देखा?
हमारे अपने भव्य
मीनाक्षी मंदिर में
लगी आग की झबर को
शायद कुछ अख़बार
के पन्नों में
जगह मिली हो लेकिन किसी
टीवी पर इसका कोई ज़िक्र
भी नहीं हुआ.
</p>



<p>मुझे तो अब भी शर्म आ रही है, और साथ में गुस्सा भी. शर्मिंदा इसलिए, क्योंकि एक 2000 साल पुराना प्रसिद्ध भारतीय मंदिर आग में नष्ट हो, और मुझे इसके बारे में पता भी नहीं. गुस्सा, क्योंकि हालात कल्पना से भी बदतर है.</p>



<figure class="wp-block-embed-twitter wp-block-embed is-type-rich is-provider-twitter"><div class="wp-block-embed__wrapper">
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true"><p lang="en" dir="ltr">Terribly sad to learn of the fire in Notre Dame cathedral. And ASHAMED that I didn&#39;t even know of the devastating fire that engulfed the thousand year-old Meenakshi Temple recently. There was no round-the-clock coverage, no SM lament. Thank you, <a href="https://twitter.com/TrueIndology?ref_src=twsrc%5Etfw">@TrueIndology</a> for letting us know. <a href="https://t.co/CxIFiENjzc">pic.twitter.com/CxIFiENjzc</a></p>&mdash; Anand Ranganathan (@ARanganathan72) <a href="https://twitter.com/ARanganathan72/status/1118013073095151616?ref_src=twsrc%5Etfw">April 16, 2019</a></blockquote><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
</div></figure>



<p>अब ज़रा कल्पना
करें की हज़ारों
नॉर्ट-डेम्स जला
दिए जाएँ, नष्ट
किए जाएँ&#8230; वो
भी किसी दुर्घटना
में नहीं, बल्कि
इंसानों द्वारा&#8230; सिर्फ़
इसलिए की उनकी विचारधारा, उनका विश्वास
आपसे अलग हो?</p>



<p>आपका कहना की
किसी कला और वास्तुकला की सराहना
को सीमाबद्ध नहीं
किया जा सकता,
सही है. मैं आपकी सराहना
की सराहना करता
हूं. लेकिन जब
पिछले दो दशकों
में कश्मीर में
सैकड़ों मंदिरों को
नष्ट किया गया
तो आपको आक्रोश
क्यूँ नहीं आया?
पीड़ा क्यूँ नहीं
हुई?</p>



<p>भारत में हजारों
प्राचीन मंदिर हैं,
जिनमें से कई अक्सर नष्ट
हो गये या किए गये
हैं. ख़ास कर उन लोगों
ने जिन्होने इस
बात पर कभी तूल नहीं
दिया, अगर अचानक
नॉर्ट-दमे की आग देखकर
वास्तुकला प्रेमी बन
जाएँ, तो यह बहुत ही
संदेहास्पद है.</p>



<blockquote class="wp-block-quote is-layout-flow wp-block-quote-is-layout-flow"><p>किसी ने ट्वीट किया &#8211; &#8220;Thou shalt not be forgiven for this huge loss to history, art, and architecture.&#8221; &nbsp;इस मूर्खता को समझना भी मुश्किल है.</p></blockquote>



<p>हे मूर्ख, नोट्रे-डेम एक धनी प्रथम विश्व देश में है और इसके लाखों-करोड़ों प्रेमी और अनुयायी हैं जो की इसकी अच्छी देखभाल करेंगे. और तुरंत ही खबर आई की इस कैथेड्रल के पुनर्निर्माण के लिए फ्रांसीसी अरबपति फ्रेंकोइस-हेनरी पिनाउल ने 100 मिलियन यूरो देने का वादा किया.</p>



<p>और भारत के अंदर ये ही लोग कहेंगे: &#8220;इसके बजाय एक अस्पताल का निर्माण करें? या अनाथालय? नहीं? एक विश्वविद्यालय? उनके धर्मोपदेश केवल भारत की अशिक्षित-गँवार जनता के लिए आरक्षित हैं. पश्चिमी देशों का नाम सुनते हीं इनका हृदय उनकी परंपराएँ, उनके धरोहर के लिए पिघल जाता है.</p>



<p>आगे और पढ़ने पर जानकारी हुई की शायद, वेदपुरेस्वरार मंदिर में स्थित शिवलिंग को उपनिवेश के दौरान फ्रांसीसी द्वारा नष्ट कर दिया गया था. नोट्रे-डेम के बारे में पढ़ने के बाद निश्चित रूप से उल्लेख करूंगा कि यह व्यापक रूप से माना जाता है कि इस कैथेड्रल ने एक पूर्व बुतपरस्त (Pagan) मंदिर की जगह पर कब्जा कर लिया था.</p>



<p>मेरा सिर्फ़ इतना कहना है की जब आप पेरिस में हुए इस नुकसान पर शोक व्यक्त कर रहे हैं तो कृपया यह भी याद रखें कि आपके अपने घर में क्या हुआ था.&nbsp;</p>



<p>तब नालंदा विश्वविद्यालय को भी याद करें जिसे बख्तियार खिलजी ने जब जलाया तब इस आग में करोड़ों पांडुलिपियाँ हफ्तों-महीनों तक तक जलती रहीं और इस प्राचीन ज्ञान के भंडार को विनाश के गर्त में डाल दिया गया. </p>



<p>क्या आपमें यह समझने की भूख है कि सोमनाथ के मंदिर को, मार्तण्ड के भव्य सूर्य मंदिर को, किस विचारधारा के किस राक्षस ने क्यूँ जला दिया था?&nbsp;जो लोग राम जन्म भूमि से हमारी सभ्यता के भावनात्मक संबंध का मखौल बनाते हैं, वे नोट्रे-डेम के लिए रो रहे हैं?&nbsp;</p>



<blockquote style="text-align:left" class="wp-block-quote is-layout-flow wp-block-quote-is-layout-flow"><p>क्या आपको ग्यात है जवाहरलाल नेहरू ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के विषय में के एम मुंशी से क्या कहा था?&nbsp;</p><p>“I do not like your trying to restore Somnath. It is Hindu revivalism.” (“मुझे सोमनाथ को बहाल करने की आपकी कोशिश पसंद नहीं है. यह हिंदू पुनरुत्थानवाद है.”) </p></blockquote>



<p>क्या आपलोगों ने इस बात के लिए कभी नेहरू को कटघरे में खड़ा किया? नहीं, आप हमेशा उनके बचाव में खड़े रहे.</p>



<p>मुझे भी कला और वास्तुकला से प्यार है, लेकिन मेरी अपनी प्राथमिकताएँ हैं. कला और वास्तुकला की सराहना सीमाओं को पार करती है, ठीक है, और किसी भी पश्चिमी नुकसान पर शोक करने को फैशानाबले मानना भी ठीक है. लेकिन नोट्रे-डेम के बारे में रोना और अपने स्वयं के बर्बाद मंदिरों के बारे में चुप्पी, सिर्फ़ और सिर्फ़ बेशर्मी है.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>क्या नरेंद्र मोदी ने रैली में सच में दी &#8220;बहन की गाली&#8221;?</title>
		<link>https://www.lopak.in/2019/04/modi-gaali-fake-news/?utm_source=rss&#038;utm_medium=rss&#038;utm_campaign=modi-gaali-fake-news</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Rashmi Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 22 Apr 2019 00:54:26 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Election]]></category>
		<category><![CDATA[News]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[BC]]></category>
		<category><![CDATA[fake news]]></category>
		<category><![CDATA[Gaali]]></category>
		<category><![CDATA[Modi]]></category>
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					<description><![CDATA[कांग्रेस की फ़ेक न्यूज़ फ़ैक्टरी ने आज काफ़ी ओछी हरकत की. हमेशा सादी सभ्य भाषा बोलने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गाली देने का इलज़ाम लगा दिया. हर परिस्थिति में<div><a class="permalink" href="https://www.lopak.in/2019/04/modi-gaali-fake-news/">Read More...</a></div>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div id='fb-root'></div>
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<p>कांग्रेस की फ़ेक न्यूज़ फ़ैक्टरी ने आज काफ़ी ओछी हरकत की. हमेशा सादी सभ्य भाषा बोलने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गाली देने का इलज़ाम लगा दिया. हर परिस्थिति में दिमाग शांत रख कर बातचीत करने वाले मोदी जी आप खोकर भी कभी गाली गलौच तो क्या असभ्य भाषा में भी बात न करें. </p>



<p>पर <a href="https://twitter.com/GauravPandhi/status/1119905666670288896">कांग्रेस के गौरव पंधि ने कल एक स्पीच का क्लिप शेयर किया जिसमे मोदी जी पानी बचाने को</a> लेकर बात कर रहे थे. पर इस वीडियो को इस तरह से चलाया गया कि सुनने में वह गाली जैसा लग रहा है. मोदी जी ने रैली को सम्बोधित करते हुए कहा &#8221;लोको कहे छे भविष्य मा पानी माते लड़ाई थवनि छे, एला भाई बधा कहो छो पानी नि लड़ाई ठवनि छे तो पानी पेला पाल केम न बांधिए&#8221;. </p>



<p>इस वाक्य में पानी लड़ाई &#8216;थवनी छे&#8217; को बार बार इस प्रकार चलाया गई कि वह बहन वाली गाली जैसे सुनाई दे रही है. </p>



<figure class="wp-block-embed-twitter wp-block-embed is-type-rich is-provider-twitter"><div class="wp-block-embed__wrapper">
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true"><p lang="en" dir="ltr">Congress IT cell is distorting PM&#39;s speech for their Propaganda&#8230; <br><br>He is saying Alya, badha kaho chho pani ni ladai thavani chhe toh paani pela paal kem naa bandhiye..<br><br>This is pathetic even for Congress.. <a href="https://t.co/hJaCnPTtqj">https://t.co/hJaCnPTtqj</a></p>&mdash; Chowkidar Ekita (@LostByWaves) <a href="https://twitter.com/LostByWaves/status/1119926324594745345?ref_src=twsrc%5Etfw">April 21, 2019</a></blockquote><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
</div></figure>



<p>मोदी जी का कहना था कि &#8216;सब बोल रहे हैं कि भविष्य में लड़ाइयां पानी के लिए लड़ी जाएंगी&#8230;. अगर सब बोल रहे हैं कि पानी के लिए लड़ाई होगी तो हम पानी के लिए पहले से पाल क्यों न बनाए. &#8216;पानी के पहले पाल (मेड़) बनाना गुजराती मुहावरा है.</p>



<p>अब आप सोचिये, कि कांग्रेस ने यह वीडियो सोशल मीडिया पर फैला दिया है. ज़्यादातर लोग जो गुजराती नहीं जानते वो इसे सच मान बैठेंगे और इसे आगे फॉरवर्ड कर देंगे. </p>



<p>जब तक यह सच बहार आएगा कि मोदी जी ने ऐसा कुछ नहीं कहा तब तक लोग इस बात से हटकर किसी दूसरी बात की तरफ आकर्षित हो जाएंगे और उसमे दिलचस्पी लेंगे. यही मोडस ऑपरेंडी है, झूठ फैलादो क्यूंकि पता है कि लोगों में धैर्य नहीं है कि वो सच की प्रतीक्षा करें.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>कांग्रेस के &#8216;न्याय&#8217; पर कोर्ट ने किया न्याय, कहा &#8221;72000 रुपए सालाना का वादा रिश्वत जैसा&#8221;</title>
		<link>https://www.lopak.in/2019/04/court-objects-on-congress-promise/?utm_source=rss&#038;utm_medium=rss&#038;utm_campaign=court-objects-on-congress-promise</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Rashmi Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 21 Apr 2019 12:08:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Congress]]></category>
		<category><![CDATA[Election]]></category>
		<category><![CDATA[Politics]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[congress promises]]></category>
		<category><![CDATA[Modi]]></category>
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					<description><![CDATA[लोकसभा चुनाव में बीजेपी को हराने के लिए पार्टियों हर तरह के पैंतरे आज़मा रही हैं. इसी क्रम में कांग्रेस पार्टी ने वादा किया है कि अगर वह सत्ता में<div><a class="permalink" href="https://www.lopak.in/2019/04/court-objects-on-congress-promise/">Read More...</a></div>]]></description>
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<p>लोकसभा चुनाव में बीजेपी को हराने के लिए पार्टियों हर तरह के पैंतरे आज़मा रही हैं. इसी क्रम में कांग्रेस पार्टी ने वादा किया है कि अगर वह सत्ता में आई तो देश के 25 फीसदी गरीब परिवारों को हर साल 72,000 देगी. इस वादे को जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के खिलाफ मानते हुए <a href="https://hindi.opindia.com/politics/lok-sabha-election-allahabad-high-court-issues-notice-to-congress-against-party-manifesto/" target="_blank" rel="noreferrer noopener" aria-label="इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कांग्रेस पार्टी से जवाब माँगा है (opens in a new tab)">इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कांग्रेस पार्टी से जवाब माँगा है</a>.</p>



<p>याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट में दलील दी है कि कांग्रेस के चुनावी मेनिफेस्टो में 72,000 रुपये न्यूनतम आय की गारंटी का वादा रिश्वत की तरह है और यह जन प्रतिनिधित्व कानून का उल्लंघन है. मतदाता को प्रलोभन देना निष्पक्ष मतदान के खिलाफ है. इससे मतदान की प्रक्रिया प्रभावित होती है. इस पर कोर्ट ने कांग्रेस से दो हफ़्ते के भीतर जवाब माँगा है.<br></p>



<blockquote style="text-align:left" class="wp-block-quote is-layout-flow wp-block-quote-is-layout-flow"><p>एक राजनीतिक दल इस तरह का वादा नहीं कर सकता क्योंकि यह कानून और आचार संहिता का उल्लंघन है. याचिका में कोर्ट से चुनाव आयोग को निर्देश जारी कर कांग्रेस के चुनावी घोषणा पत्र से न्यूनतम आय की गारंटी का वादा हटवाने का अनुरोध किया गया है. कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख 13 मई को होगी.</p></blockquote>



<p>यह आदेश चीफ जस्टिस गोविन्द माथुर और एसएम शमशेरी की डिवीजन बेंच ने अधिवक्ता मोहित कुमार और अमित पाण्डेय की जनहित याचिका पर दिया है. याचिका की सुनावाई जस्टिस सुधीर अग्रवाल और जस्टिस राजेंद्र कुमार कर रहे हैं. याचियों का कहना है कि इस घोषणा को घोषणापत्र से हटाया जाए. साथ ही याचियों के 3 अप्रैल 2019 को चुनाव आयोग को भेजे गये प्रत्यावेदन को निर्णीत किया जाए.</p>



<p>कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में 2030 तक गरीबी को खत्म करने का लक्ष्य रखा गया है जिसके तहत पांच करोड़ सबसे गरीब परिवारों को न्यूनतम आय योजना &#8216;न्याय&#8217; के तहत हर साल 72 हजार रुपये दिए जाने का वादा किया गया है.</p>



<p>इसके अलावा <a href="https://www.tv9bharatvarsh.com/uttar-pradesh/allahabad-high-court-issued-notice-to-congress-on-nyay-scheme-35878.html" target="_blank" rel="noreferrer noopener" aria-label="कॉन्ग्रेस की न्याय योजना को लेकर चुनाव आयोग ने राहुल गाँधी को आचार संहिता उल्लंघन का नोटिस जारी किया है (opens in a new tab)">कॉन्ग्रेस की न्याय योजना को लेकर चुनाव आयोग ने राहुल गाँधी को आचार संहिता उल्लंघन का नोटिस जारी किया है</a>. कांग्रेस ने अमेठी में न्याय योजना के दावे प्रचार सम्बंधी का एक बैनर बिना मकान मालिक की अनुमति लिए लगा दिया जिस पर आयोग ने उनसे जवाब माँगा है. इसको लेकर आयोग ने 24 घंटे के अंदर उनसे जवाब माँगा है.</p>



<p>कांग्रेस के न्याय के चक्कर में झूठे वादों के साथ अन्याय हो रहा है.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>असहिष्णुता ब्रिगेड की राष्ट्रवाद विरोधी खीझ</title>
		<link>https://www.lopak.in/2019/04/intoerance-of-intolerance-brigade/?utm_source=rss&#038;utm_medium=rss&#038;utm_campaign=intoerance-of-intolerance-brigade</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Prashant Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 21 Apr 2019 10:25:38 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[celebs]]></category>
		<category><![CDATA[Media]]></category>
		<category><![CDATA[ट्रॉल्स कार्नर]]></category>
		<category><![CDATA[GD Bakshi]]></category>
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					<description><![CDATA[देश में एक विचारधारा ऐसी भी चल रही है जो सब मर्यादाओं को भूल चुकी है. जिसने सबको यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि राजनैतिक क्षेत्र में क्या<div><a class="permalink" href="https://www.lopak.in/2019/04/intoerance-of-intolerance-brigade/">Read More...</a></div>]]></description>
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<p>देश में एक विचारधारा ऐसी भी चल रही है जो सब मर्यादाओं को भूल चुकी है. जिसने सबको यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि राजनैतिक क्षेत्र में क्या एक व्यक्ति का समर्थन करना दूसरे लोगों को अपनी सभी सीमाओं को तोड़ने पर मजबूर कर देता है? शायद आज ऐसा ही हो रहा है. </p>



<p>अपने मेजर जनरल जी.डी. बक्शी का नाम तो सुना ही होगा. वह टीवी चैनलों पर सेना की तरफ से अपनी राय रखने के लिए जाने जाते हैं. उनकी कुछ बातें देश के लिबरल लोगों को पसंद नहीं आती है. शायद इसलिए क्योंकि एक सीमा के बाद एक सैनिक होने के नाते उनका राष्ट्रवाद उबाल मारने लग जाता है. राष्ट्रवाद एक ऐसा शब्द है जिससे हमारे देश के लिबरल कुछ ज़्यादा इत्तेफाक नहीं रखते. शायद इसलिए भी क्योंकि वो गोली का जवाब गुलाब से देना चाहते हैं. प्रैक्टिकल दुनिया में तो ये पॉसिबल नहीं है. लेकिन वो ऐसा करना चाहते हैं. यही कारण है कि उनकी और एक रिटायर्ड फौजी की आपस में ज़्यादा बनती नहीं. लेकिन फिर भी वो जी. डी. बक्शी को किसी न किसी सिर पर नीचा दिखाने का प्रयास करते रहते हैं. अफसोस कि वो ऐसा कर नहीं पाए. </p>



<p>अब ट्विटर पर एक तथाकथित पत्रकार रोहिणी सिंह द्वारा एक ट्वीट किया गया. उन्होंने यह ट्वीट जनरल जी.डी. बक्शी के संदर्भ में किया. दरअसल एयर विस्तार जो एक एयरलाइन कंपनी है, उसने अपने जहाज़ में जी.डी. बक्शी की मौजूदगी को गौरवांवित करने वाला क्षण समझा. उसको उन्होंने ट्विटर पर साझा करते हुए बताया कि कैसे एयर विस्तार बक्शी को अपने जहाज़ में देख कर गर्व से फूला नहीं समा रहा है. बस यही बात रोहिणी सिंह को अखर गयी. रोहिणी ने एयर विस्तार को जानकारी देने के लिए धन्यवाद कहा. इनके साथ ही उन्होंने कहा कि अब आए वो इंडिगो की एयरलाइन्स में सफर करेंगी. यह एक व्यक्ति की दूसरे व्यक्ति के लिए घृणा की सीमा थी. </p>



<figure class="wp-block-embed-twitter wp-block-embed is-type-rich is-provider-twitter"><div class="wp-block-embed__wrapper">
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true"><p lang="en" dir="ltr">Dear <a href="https://twitter.com/airvistara?ref_src=twsrc%5Etfw">@airvistara</a>. Thank you for the warning. Will take <a href="https://twitter.com/IndiGo6E?ref_src=twsrc%5Etfw">@IndiGo6E</a> instead from now on. <a href="https://t.co/NtnyV74RyY">https://t.co/NtnyV74RyY</a></p>&mdash; Rohini Singh (@rohini_sgh) <a href="https://twitter.com/rohini_sgh/status/1119818113426628608?ref_src=twsrc%5Etfw">April 21, 2019</a></blockquote><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
</div></figure>



<p>रोहिणी सिंह किस एयरलाइन्स से सफर करें ये उनका अपना विषय है. वह चाहें तो अपनी प्राइवेट गाड़ी में भी सफर कर सकती हैं. पैसे की तो कोई कमी है नहीं उनको यह स्पष्ट है. लेकिन जिस संदर्भ में उन्होंने यह कहा, उससे हमें ऐतराज है. बहुत से लोगों को इससे ऐतराज है. </p>



<blockquote class="wp-block-quote is-layout-flow wp-block-quote-is-layout-flow"><p>विडंबना यह है कि रोहिणी सिंह असहिष्णुता ब्रिगेड की एक सिपाही हैं. उनका भी यही मत रहा है कि मोदी के कार्यकाल में देश में असहिष्णुता बढ़ गयी है.लेकिन उनका ऐसा व्यवहार उसी एक मूल उद्देश्य को मुंह चिढ़ाता है जिसके लिए वह खड़ी हुई थी. जब एक एक व्यक्ति द्वारा जो देश की सेना में सैनिक रह चुका है. अपनी सेवाएं दे चुका है. वैसे व्यक्ति के लिए ऐसी घृणा को प्रदर्शित करना उनकी खीझ को ही दर्शाता है.</p></blockquote>



<p>कभी जीवन में ऐसा मौका आये जब देश के लिए कुछ करना हो, और आपके सामने एक ऐसा व्यक्ति हो जिससे कुछ मतभेद हो, फिर भी देशहित के लिए उन मतभेदों को किनारे रख कार्य करना चाहिए. यहाँ खुद को एक न्यूट्रल जर्नलिस्ट बताने वालों को इतनी छोटी बातें भी समझ में नहीं आती, तो उनसे और क्या उम्मीद कर सकते हैं. बाकी रोहिणी जी के भविष्य के लिए शुभकामनाएं. आशा करते हैं कि वह खुद के अंदर इन बातों को सुधरेंगी. नहीं भी किया तब भी देश के पास जी. डी. बक्शी जैसे लाखों सैनिक हैं जो किसी न किसी एयरलाइन्स में उनके सफर को ऐसे ही बाधित करते रहेंगे.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>क्या कांग्रेस द्वारा करकरे का हिंदुओं के खिलाफ षडयंत्र रचने में हुआ इस्तेमाल</title>
		<link>https://www.lopak.in/2019/04/did-congress-use-karkare/?utm_source=rss&#038;utm_medium=rss&#038;utm_campaign=did-congress-use-karkare</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Rashmi Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 21 Apr 2019 04:33:06 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[BJP]]></category>
		<category><![CDATA[Election]]></category>
		<category><![CDATA[News]]></category>
		<category><![CDATA[Politics]]></category>
		<category><![CDATA[ग्राउंड रिपोर्ट 2019 चुनाव]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
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					<description><![CDATA[कल ट्विटर पर साध्वी प्रज्ञा के शहीद हेमंत करकरे के लिए लगाए गए इलज़ाम के बाद आलोचनाओं से भर गया.बीजेपी समर्थक भी इस बयान से खुश नहीं थे. पर एक<div><a class="permalink" href="https://www.lopak.in/2019/04/did-congress-use-karkare/">Read More...</a></div>]]></description>
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<p>  <script>(function(d, s, id) {
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  }(document, 'script', 'facebook-jssdk'));</script>कल ट्विटर पर साध्वी प्रज्ञा के शहीद हेमंत करकरे के लिए लगाए गए इलज़ाम के बाद आलोचनाओं से भर गया.बीजेपी समर्थक भी इस बयान से खुश नहीं थे.</p>
<p>पर <a href="https://threadreaderapp.com/thread/1119206415908782081.html">एक ट्विटर यूसर ने एक थ्रेड में यह लिखा कि हेमन्त करकरे का कांग्रेस द्वारा इस्तेमाल किया जा रहा था. उन्होंने साध्वी पर गलत इल्ज़ाम लगाए और उन्हें फँसाया.</a><br />
अमेरिकी इन्टेलीजेंस के अनुसार समझौता और मालेगांव ब्लास्ट लश्कर ए तैयबा के निर्देशों पे हुए थे. इसके बाद भी साध्वी प्रज्ञा पर इनका इल्ज़ाम लगाना केवल साज़िश ही है.<br />
लश्कर को बचाने या हिन्दू आतंक का तानाबाना बुनने के लिए हेमन्त क् इस्तेमाल किया गया जिसके चलते शायद यह डर रहा होगा कि वह सारी बातों पर से कभी बाद में पर्दा न उठा दें. जिसके चलते एक रणनीति के तहत उन्हें 26/11 के दिन जान से हाथ धोना पड़ा.</p>
<p>महत्वपूर्ण बातें<br />
● हेमंत का 26/11 से एक दिन पहले राणा अयूब ने साक्षात्कार लिया था (जैसा कि उन्होंने दावा किया था). शायद किसी को पता था ये समय निर्णायक है.<br />
● करकरे ATS चीफ होने के बाद भी खुद पुलिस की टोली लेकर आतंकियों के खिलाफ युद्ध में उतरे. जबकि एक ATS को शायद अपनी ही जगह पर रहकर ट्रूप को संभालना चाहिए था.<br />
● सबसे ज़्यादा महत्पूर्ण बात यह है कि <em>जिन गोलियों से हेमन्त की मृत्यू हुई वो आतंकवादियों की गोली से मेल नहीं खा रही थी.</em> हो सकता है कि मुठभेड़ में धुएं का फायदा उठाकर उन्हें अलग से मारा गया हो ताकि वो कभी भी हिन्दू आतंक की झूठी कहानी से पर्दा न उठा पाएं.<br />
●26/11 के दिन <a href="https://timesofindia.indiatimes.com/india/Digvijay-gives-proof-of-conversation-with-Hemant-Karkare/articleshow/7216046.cms"><strong>दिग्विजय सिंह और करकरे की बातचीत हुई थी.</strong> </a>इस बात के सबूत हैं, उन्होंने क्या बात की यह केवल वही जानते हैं.<br />
● आखरी बात की करकरे की पत्नी कविता की मृत्यू एक हत्या थी न कि प्राकृतिक मृत्यू. हेमंत की पत्नी होने के नाते वह उनकी सबसे करीबी रही होंगी, और जो सकता है कि हाईकमान को डर हो कि कहीं वो इस बात से पर्दा न उठा दे कि हेमन्त का इस्तेमाल किस प्रोपेगण्डा के लिए किया गया.<br />
रिपोर्ट के अनुसार कविता की मौत ब्रेन हैमरेज से हुई थी, क्योंकि उन्हें हाइपरटेंशन था. किसी को मारने के लिए उसे ब्रेन हैमरेज देना कोई मुश्किल कार्य नहीं. पहले भी ऐसी मृत्यू पर संशय ज़ाहिर किया गया है. CIA जैसे संगठनों पर ऐसा काम करने का इल्जाम लगाया जा चुका है.<br />
अब सबसे हैरानी की बात : यह बताया गया था कि कविता की आंखें और किडनी डोनेट की गई. पर अगर उनका हाइपरटेंशन इतना बुरा था कि उन्हें इसके चलते ब्रेन हैमरेज हो गया तो जाहिर है कि उनके अंग ट्रांसप्लांट के लिए स्वस्थ नहीं होंगे.</p>
<p><a href="https://www.indiatoday.in/magazine/cover-story/story/20120716-abu-jundal-arrest-kasab-mumbai-terror-attacks-conspiracy-theories-758992-2012-07-07">अगर कसाब ज़िंदा नहीं पकड़े जाते तो हाथ में बंधे कलावे का इस्तेमाल हिन्दू आतंक का झूठ फैलाने के लिए किया जाता.</a><br />
26/11 के दिन हेमन्त की दिग्विजय (26/11 RSS की साज़िश फेम) से बातचीत और एक दिन पहले राणा अयूब को साक्षात्कार शक पैदा करता ही है. शायद प्लानिंग यह थी कि करकरे को मारकर यह साबित किया जाएगा कि उन्होंने हिन्दू आतंकवाद का पर्दाफाश किया इसलिए उन्हें हिंदुओं ने मार गिराया.</p>
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true">
<p lang="en" dir="ltr"><a href="https://twitter.com/hashtag/ConspiracyTheory?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#ConspiracyTheory</a> <a href="https://twitter.com/hashtag/Thread?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#Thread</a> <br />Hemant Karkare was Congress’ handled officer. He actually did actively, on the instructions of his handlers, framed false charges against Sadhvi Pragya and others.</p>
<p>&mdash; Be’Havin! (@WrongDoc) <a href="https://twitter.com/WrongDoc/status/1119206415908782081?ref_src=twsrc%5Etfw">April 19, 2019</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<p><a href="https://www.facebook.com/HinduismDeMystified/videos/2615240075216687/">कर्नल पुरोहित की पत्नी ने भी करकरे पर उन्हें प्रताड़ित करने के इल्ज़ाम लगाए थे</a>. यह बात छुपी नहीं है की साध्वी प्रज्ञा को भी जेल में प्रताड़ित किया गया था. <a href="https://twitter.com/gary_agg/status/1119196929039261696">सुदर्शन टीवी द्वारा दिखाए गए एक वीडियो और उनके बहन के बयान के बाद यह बात साफ़ है.</a> ऊपर दिए गए थ्रेड में लिखी गई सभी बातें आन रिकार्ड हैं. बाक़ी बिन्दू तो हमें ख़ुद ही मिलाने होंगे.<br />
नोट : यह ट्विटर यूज़र द्वारा लिखें गाए ट्वीट्स का हिंदी में केवल अनुवाद है. इसकी सत्यता का आँकलन पाठक को ख़ुद करना होगा.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>तो क्या सच में राहुल गांधी और राहुल विंची एक ही व्यक्ति है?</title>
		<link>https://www.lopak.in/2019/04/are-raul-vinci-and-rahul-gandhi-one/?utm_source=rss&#038;utm_medium=rss&#038;utm_campaign=are-raul-vinci-and-rahul-gandhi-one</link>
					<comments>https://www.lopak.in/2019/04/are-raul-vinci-and-rahul-gandhi-one/#comments</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Prashant Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 20 Apr 2019 09:01:09 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Congress]]></category>
		<category><![CDATA[Politics]]></category>
		<category><![CDATA[Rahul Gandhi]]></category>
		<category><![CDATA[ग्राउंड रिपोर्ट 2019 चुनाव]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[BJP]]></category>
		<category><![CDATA[Smriti Irani]]></category>
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					<description><![CDATA[देश में एक बड़ी राजनीतिक पार्टी के अध्यक्ष के ऊपर एक संगीन आरोप लगा है है। कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष राहुल गांधी के ऊपर अपने चुनावी एफिडेविट में गलत जानकारी<div><a class="permalink" href="https://www.lopak.in/2019/04/are-raul-vinci-and-rahul-gandhi-one/">Read More...</a></div>]]></description>
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<p>देश में एक बड़ी राजनीतिक पार्टी के अध्यक्ष के ऊपर एक संगीन आरोप लगा है है। कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष राहुल गांधी के ऊपर अपने चुनावी एफिडेविट में गलत जानकारी देने का आरोप लगा है. स्थिति यह हो गई है कि अब चुनाव आयोग ने राहुल गांधी से इस बारे में जवाब मांगा है. दरअसल अमेठी के अंदर नामांकन करने वाले राहुल गांधी के एफिडेविट में स्टैंप पेपर अमेठी की जगह दिल्ली का लगा हुआ है. इसके साथ ही उनकी शैक्षणिक योग्यता को लेकर भी चुनाव आयोग ने जवाब मांगा भी चुनाव आयोग ने जवाब मांगा है. दूसरी तरफ राहुल गांधी के द्वारा दी हुई जानकारियों में भी काफी गलत तथ्य मिले हैं. चुनाव आयोग राहुल गांधी और राहुल विंची के नाम को ले कर संदेह में है. अब चुनाव आयोग पूछ रहा है कि क्या राहुल गांधी और राहुल विंची एक ही आदमी का नाम है? </p>



<figure class="wp-block-embed-twitter wp-block-embed is-type-rich is-provider-twitter"><div class="wp-block-embed__wrapper">
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true"><p lang="en" dir="ltr">Ravi Prakash, lawyer of independent MP candidate from Amethi, Dhruv Lal who has raised objections on Rahul Gandhi&#39;s nomination papers: On basis of certificate of incorporation of a company registered in UK, he declared himself a UK citizen. A non-citizen can&#39;t contest polls here. <a href="https://t.co/A8ifZgbGhC">pic.twitter.com/A8ifZgbGhC</a></p>&mdash; ANI UP (@ANINewsUP) <a href="https://twitter.com/ANINewsUP/status/1119513799214505984?ref_src=twsrc%5Etfw">April 20, 2019</a></blockquote><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
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<p>यह राजनैतिक भूचाल लाने के लिये काफी है. कोइलारा मुबारकपुर के रहने वाले अफजाल वारिस ने राहुल के नामांकन को ले कर आपत्ति की है. वह बहुजन मुक्ति पार्टी के प्रत्याशी है. राहुल के नामांकन को रद्द करने की मांग भी की गई है. इसमें राहुल गांधी की अपनी शैक्षणिक योग्यता में स्थान को ले कर भी सवाल उठ रहे हैं. यह सभी सवाल राहुल को हजम नहीं होंगे. चुनाव आयोग द्वारा इस बड़े राजनैतिक परिवार को ले कर की गई यह टिप्पणी बहुत से राजनीतिक विश्लेषकों का लिए आश्चर्य की बात है. इससे पहले कभी ऐसा देखने को शायद ही मिला हो.</p>



<p>इन सभी बातों को लेकर यह कहा जा रहा है कि आने वाले दिनों में राहुल के नामांकन पर खतरा मंडरा रहा है. वैसे राहुल गांधी के ऊपर सुब्रमण्यम स्वामी ने भी बहुत से सवाल उठाए थे. देश के एक क्षेत्र से आने वाला राजनैतिक उम्मीदवार एक ज़िम्मेदारी के साथ चुनाव में उतरता है. सही जानकारी जनता और आयोग के सामने रखने की ज़िम्मेदारी. जिस जनता का प्रतिनिधित्व करने के लिए वह जा रहा है, उसके लिए सर्वप्रथम उसे जनता के सामने खुद की असली सच्चाई रखनी होती है.</p>



<p>राहुल गांधी के लिए यह एक असहजता से भरा क्षण है. वैसे राहुल गांधी के सिपहसालार खड़े हो गए हैं इसका बचाव करने के लिए, लेकिन क्या खुद राहुल गांधी इसका जवाब देंगे. कम से कम अभी तो नहीं लगता है.  चुनाव आयोग ने अपनी टिप्पणी में &#8216;मिसलीडिंग&#8217; जैसे शब्दों का प्रयोग किया है. यह अवश्य आने वाले समय में राहुल गांधी की मुसीबतें बढ़ाएगा. दो नावों पर सवाल राहुल के लिए यह चुनावी वैतरणी पार करना आसान नहीं होने वाला.</p>
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		<title>आज भी बहुत सारे चोर हैं जो &#8216;सेनानी&#8217; बने एवं &#8216;पद्म&#8217; और &#8216;चक्र&#8217; लिए घूम रहे हैं.</title>
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		<dc:creator><![CDATA[K. S. Dwivedi]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 20 Apr 2019 06:48:45 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[OpEd]]></category>
		<category><![CDATA[विचार]]></category>
		<category><![CDATA[Fake Gallantry]]></category>
		<category><![CDATA[Fake Honor]]></category>
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					<description><![CDATA[उत्तराखंड (तत्कालीन उत्तर प्रदेश) के अल्मोड़ा जिले में एक बुजुर्ग थे जो अक्सर हमारे स्कूल के रास्ते में शराब के नशे में पाए जाते थे. वह स्वयं को स्वतंत्रता संग्राम<div><a class="permalink" href="https://www.lopak.in/2019/04/satire-chakra/">Read More...</a></div>]]></description>
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<p>उत्तराखंड (तत्कालीन उत्तर प्रदेश) के अल्मोड़ा जिले में एक बुजुर्ग थे जो अक्सर हमारे स्कूल के रास्ते में शराब के नशे में पाए जाते थे. वह स्वयं को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बताते थे, उनको इसके लिए ताम्र-पत्र भी मिला था.</p>



<p>ताम्र-पत्र हम लोगों को तब दिखा था जब वह किसी और के आंगन में खड़े पेड़ को काटने पहुँच गए थे और विरोध होने पर उन्होंने कहा था; &#8220;ये देखो! मेरे पास स्वतंत्रता सेनानी होने का ताम्र-पत्र है. मैं किसी के भी आँगन का पेड़ काट सकता हूँ.&#8221; उनका व्यक्तित्व स्कूल की किताबों में पढाये जाने वाले स्वतंत्रता सेनानियों से बिलकुल मेल नहीं खाता था.</p>



<p>लेकिन समय और समझ, दोनों के अभाव में हमने कभी इस बात पर ज्यादा विचार नहीं किया. हम सब उनको एक स्वतंत्रता सेनानी ही मानते थे और आम बुजुर्गों से थोड़ा ज्यादा सम्मान देते थे.</p>



<p>एक दिन स्कूल से लौटते समय देखा कि उनके हमउम्र 7-8  लोग जो स्वतंत्रता सेनानी नहीं थे, उनको पीट रहे थे. कोई चोरी का मामला था. जब तक हम लोग पहुंचे, पिटाई लगभग समाप्त हो चुकी थी और प्रश्नोत्तर और विवेचना का दौर चल रहा था. अचंभित होकर हम लोगों ने पूछा; &#8220;बुबू! ये तो सेनानी हैं, इनको तो सम्मान देना चाहिए, आप लोग मार रहे हो?&#8221;</p>



<p>एक कम उम्र के दादा जी ने बताया; &#8220;अरे! किस बात का सेनानी? लीसा-चोर था ये. अंग्रेज ठेका देते थे चीड़ के जंगलों में से लीसा (Resin) निकालने का और और ये रात को ठेकेदारों का लीसा चुराता था. एक बार पकड़ा गया और जेल चला गया. तभी सुराज आया (आजादी मिली) और क्लर्क को इसने ये बोला कि मैं भी क्रांतिकारी था और इसीलिए अंग्रेजों ने मुझे जेल भेज दिया. ये तो बचपन से ही चोर था, पहले ककड़ी चुराता था, फिर मुर्गियां चुराता था. जब लीसा चुराने लगा तब पकड़ा गया.&#8221;</p>



<blockquote style="text-align:left" class="wp-block-quote is-layout-flow wp-block-quote-is-layout-flow"><p>आज भी बहुत सारे चोर हैं जो &#8216;सेनानी&#8217; बने एवं &#8216;पद्म&#8217; और &#8216;चक्र लिए घूम रहे हैं.</p><p></p></blockquote>



<p></p>



<p><strong>दावा त्याग</strong> &#8211; लेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं. आप उनको फेसबुक अथवा ट्विटर पर सम्पर्क कर सकते हैं.</p>
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		<title>चुनाव घोषणा पत्र: लिखा हुआ करके दिखाओ तो मानें</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Rakesh Ranjan]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 20 Apr 2019 04:14:46 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Parody]]></category>
		<category><![CDATA[हास्य व्यंग्य]]></category>
		<category><![CDATA[Elections]]></category>
		<category><![CDATA[Manifesto]]></category>
		<category><![CDATA[politician]]></category>
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					<description><![CDATA[हमारे लोकतंत्र में कमियां ढ़ूँढ़ने वालों की कोई कमी नहीं क्योंकि आसमान की भले ही एक हद हो पर नैराश्य की कोई सीमा नहीं होती. चुनावी घोषणा पत्रों व चुनाव प्रचार<div><a class="permalink" href="https://www.lopak.in/2019/04/election-menifesto/">Read More...</a></div>]]></description>
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<p>हमारे लोकतंत्र में कमियां ढ़ूँढ़ने वालों की कोई कमी नहीं क्योंकि आसमान की भले ही एक हद हो पर नैराश्य की कोई सीमा नहीं होती. चुनावी घोषणा पत्रों व चुनाव प्रचार के जिन हथकंडों से कुछ लोग लोकतंत्र के दूषित होने का दुखड़ा रोते हैं, वे आधे भरे गिलास को आधा खाली गिलास मानने वाले हैं. उन्हे हमारे माननीयों की जनोन्मुखता नहीं दिखती. कुछ माननीय जनता के हित चिन्तन में झूठा होने की कीमत पर भी दुबले हुए जा रहे हैं, कुछ जनता के मनोरंजन के लिए अथक परिश्रम कर रहे हैं. कुछ देश का भड़ास सूचकांक बढ़ाने के लिए आठों पहर योगदान दे रहे हैं. </p>



<p><strong>चुनाव घोषणा पत्रों में असंभव से दिखने वाले वादों से बिदकना स्वयं में अलोकतांत्रिक है. गबरु प्रेमी अपनी अलहड़ प्रेमिका से भी तो असंभव वादे करता है; “मैं फूलों से, कलियों से, तारों से तेरी माँग भर दूँगा.”</strong> क्या कोई प्रेमिका ऐसे किसी मनुहार को लिटरली लेती है और सिर्फ इसी आधार पर प्रेमी का वरण कर लेती है? नेता जी के असंभव से वादे को भी मतदाता इसी स्पिरिट में लें और नेता जी का लोकतांत्रिक वरण सिर्फ वादे के आधार ही न करें तो बात बन सकती है.</p>



<blockquote style="text-align:left" class="wp-block-quote is-layout-flow wp-block-quote-is-layout-flow"><p>पार्टियां चुनाव घोषणा पत्रों में आजकल अपनी सरकार बनने पर मुफ्त बिजली और पानी ही नहीं बल्कि साड़ी-धोती, लैपटॉप, आभूषण आदि भी देने का वादा करती हैं. आगे वे फिल्मों के टिकट, नेटफ्लिक्स का सब्सक्रिप्शन, डिजानर कपड़े जैसे विलासिता उत्पाद देने का वादा भी करेंगी. </p></blockquote>



<p>आजकल बिना काम किए ही 72000/  प्रति वर्ष के निश्चित मासिक आय की भी चर्चा भी जोरों पर है. इन वादों के अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभावों पर चिन्तित न होइए. वादा करने से पहले पार्टी के अर्थशास्त्रियों ने गंभीर चिन्तन किया और वे इस निष्कर्ष पर पहुँचे कि यदि जनता स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, सुरक्षा और उर्जा आदि का प्रबंध स्वयं कर ले तो पार्टी की बनने वाली सरकार के पास किए गए वादों को पूरा करने के लिए पर्याप्त संसाधन होंगे. </p>



<p>एक पार्टी का घोषणा पत्र आया है जिसमे सेना में जातिवाद के घालमेल की बात कही गयी है और वृहदतर सामाजिक न्याय के लिए शोषक सवर्णों पर अतिरिक्त कर लगाने की धमकी भी दी गयी है. इस घोषणा पत्र पर सेना को राजनीति में घसीटे जाने और जातिवाद भड़कने का रोना मत रोने लगिए, क्योंकि इस पार्टी के नहाने का अवसर ही नहीं आएगा, तो ये निचोड़ेगी क्या खाक. सहिष्षुणता सबके प्रति एक जैसी होनी चाहिए. देश में एक विधान, समान नागरिक संहिता और अयोध्या आदि संबंधी चुनावी वादों पर कुछ लोगों की भृकुटि तन जाती है. उन्हे साम्प्रादायिक वैमनस्य का भूत दिखने लगता है, कश्मीरियत और जम्हूरियत खतरे में पड़ने लगती है और अमन के श्वेत कबूतर काले ज्वर की चपेट में आ जाते हैं. ऐसे लोगों को भी रिलैक्स करने की जरुरत है. ये बातें दशकों से लिखी जा रही हैं. अब इसे लिखे जाने की रस्म बन चुकी है, कोरम पूरा होने दीजिए.</p>



<p>चुनाव घोषणा पत्र लोकतंत्र की अनेकता में एकता का एक उदाहरण है. जैसे कमोबेश लगभग सभी दल चुनाव घोषणा पत्र बनाते हैं और इस लिहाज से कम से कम एक कॉमन मुद्दा तो है इनके बीच. तो क्या हुआ जो राष्ट्रहित के मुद्दों पर ये एक नहीं हो पाते. लगभग सारे दलों के चुनाव घोषणा पत्र एक सुर में गरीबी और भ्रष्टाचार से लड़ने की बात करते रहे हैं, तरीके भले ही अलग हों. तो क्या हुआ जो गरीबी और भ्रष्टाचार अंगद की तरह पैर जमाए हुए हैं. </p>



<p>यदि गरीबी और भ्रष्टाचार इतने जिद्दी हैं तो इसका ठीकरा दलों पर नहीं फोड़ा जा सकता. यह ठीकरा हम भी उनके सिर फोड़ना छोड़ देंगे यदि वे एक दूसरे को इसके लिए दोषी बताना बंद कर दें. साथ ही, सभी दल दूसरों के घोषणा पत्र को सब्जबाग और अपने घोषणा पत्र को फलदार बगिया बताने से पहरहेज करें तो घोषणा पत्रों से होने वाली ट्रस्ट डेफिसिट थोड़ी कम होगी.</p>



<p>अलबत्ता, चुनाव घोषणा पत्र पर कुछ बातें तो खलती ही हैं. चुनाव&nbsp;घोषणापत्र आज वैसा फिजूल दस्तावेज बन चुका है जिसे बनाने वाले तक यह सोचते हैं कि बना ही क्यों रहे हैं.&nbsp;पढ़ने वाले सिर्फ वही होते हैं जिन्हे इसका महिमामंडन करके किसी की हवा बनानी होती हैं या इसमें मीन मेख निकालकर किसी का हित साधना होता है. मतदाताओं से चुनाव घोषणा पत्र पढ़वाओ तो जानें, लिखा हुआ करके दिखाओ तो मानें.</p>
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