<?xml version="1.0" encoding="UTF-8" standalone="no"?><?xml-stylesheet href="http://www.blogger.com/styles/atom.css" type="text/css"?><rss xmlns:itunes="http://www.itunes.com/dtds/podcast-1.0.dtd" version="2.0"><channel><title>Pawitra kahaniya</title><description></description><managingEditor>noreply@blogger.com (Pawitra kahaniya)</managingEditor><pubDate>Wed, 25 Sep 2024 08:05:09 +0530</pubDate><generator>Blogger http://www.blogger.com</generator><openSearch:totalResults xmlns:openSearch="http://a9.com/-/spec/opensearchrss/1.0/">9</openSearch:totalResults><openSearch:startIndex xmlns:openSearch="http://a9.com/-/spec/opensearchrss/1.0/">1</openSearch:startIndex><openSearch:itemsPerPage xmlns:openSearch="http://a9.com/-/spec/opensearchrss/1.0/">25</openSearch:itemsPerPage><link>https://pawitrakhahaniya9.blogspot.com/</link><language>en-us</language><itunes:explicit>no</itunes:explicit><itunes:subtitle/><itunes:owner><itunes:email>noreply@blogger.com</itunes:email></itunes:owner><item><title>जीवन का चक्र </title><link>https://pawitrakhahaniya9.blogspot.com/2022/05/blog-post.html</link><category>जीवन चक्र की कहानी</category><category>पूर्वजो की कहानी</category><category>भवनात्मक कहानी</category><category>समाजिक कहानी</category><author>noreply@blogger.com (Pawitra kahaniya)</author><pubDate>Sun, 1 May 2022 15:24:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-6294846026234936559.post-6343956691749226346</guid><description>सुना था, जीवन की शुरुआत जन्म से होती है, पर किस जन्म से जो पहले बीत गया, या जो आनेवाला है...&lt;div&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;
  &lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjqLiutZQceLr2DbDhZ0SFsUzIkYszvW14OmqNlRKA8zvDASWsXbDLlQdwANeRp2ovAcfsGgltKOmHvtyc0jxNJ_Uex_kckZ-M_KIkm8V0X5DkLU1Wdbm2fOdK5NIhO2iUH00Bxc_00e2k/s1600/1651398892483058-0.png" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;
    &lt;img border="0" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjqLiutZQceLr2DbDhZ0SFsUzIkYszvW14OmqNlRKA8zvDASWsXbDLlQdwANeRp2ovAcfsGgltKOmHvtyc0jxNJ_Uex_kckZ-M_KIkm8V0X5DkLU1Wdbm2fOdK5NIhO2iUH00Bxc_00e2k/s1600/1651398892483058-0.png" width="400" /&gt;
  &lt;/a&gt;
&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;इसी कश्मकश मे जी रही सीमा,,,,, इस दुनिया मे खुद क़ो अकेला मानती है, लोग तो भरे थे उसके इर्द गिर्द बस हर कोई हर किसी क़ो समझ पाए सायद ये मुमकिन नहीँ.....&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;सीमा सामान्य जीवन जीने वाली साधारण सि लड़की&lt;/div&gt;&lt;div&gt;कई साल पहले अपने पिता के जाने के बाद वैसा प्यार दुलार संरक्षण दोबारा उसे महसूस नहीँ हुआ,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;एक बार वह एक ऐसे इंसान से मिली जिसने उसके कई सवालों के जवाब ढूंढने मे उसकी मदद की....&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;वह थे उसके क्लास टीचर मिस्टर राजेश कुमार.....वैसे साधारण बोली भाषा वाले उसके क्लास टीचर कई सारे विषयो मे अच्छी रूचि रखते थे, तर्क वितर्क मे उन्हें हरा पाना आसान काम नहीँ था.....&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;सीमा उनसे 10 वर्ष पहले अपने विद्यालय मे मिली थी.... कई बार उन्हें ऐसे प्रश्नों का जवाब देता देख सीमा नें अपने अंदर उठरहे प्रश्नों क़ो उनकी सामने रखा,,,,,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;दरअसल सीमा और राजेश सर एक हीं सफर के यात्री थे......उन्हें भी पानी पिने से पहले थोड़ा जल ज़मीन पर गिराने की आदत थी,,,,, वो तब ऐसा क्यों करते थे सीमा तब नहीँ समझ सकी प्रपने पिता के जाने के बाद काफी सारी बातें उसे समझ आने लगी थी,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;इसी बात पर सीमा नें उनसे अचानक पूछा लिया....सर आप पानी पिने से पहले फर्स या मिट्टी क़ो क्यों जल गिला करते है,कोई रीती रीवाज है क्या ये.......&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;इस पर राजेश सर का जवाब था.....मै पढ़ाने मे मशगूल था....कब मुझे पानी दिया किसी नें मैंने देखा हीं नहीँ,,,,,,इतनी देर तक वह पानी वहां रखा था पानी के अंदर कुछ धूल चली गयी हो,,,इसी कारन मै उसके ऊपरी प्रत क़ो पहले साफ कर लेता हु,बाद मे वह पानी पिता हु,,,,,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;मैंने फिर पूछा.....पक्का ना सर,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;उन्होंने कहा.....हाँ बाबा&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;इसके बाद छुट्टी की बेल बज गयी,और सभी घर क़ो चल दिए, मै भी जा हीं रही थी के अचानक राजेश सर आ गये और पूछने लगे.....तुम कुछ जानना चाहती थी मुझसे शायद !!!!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;पूछो क्या पुछना है.......&lt;/div&gt;&lt;div&gt;मैंने कहा.....नहीँ तो बस वही तो तब पूछा था,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;उन्होंने कहा....की,,,,,मै भरे क्लास मे था,और असल बात कहता तो सब स्टूडेंट्स मुझ पर हस्ते कहते आजकल कौन मानता है ऐसी दकियानुसी बातें, और मै नहीँ चाहता था कोई अपने शिक्षक पर हसे.....&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;तो मैंने कहा....फिर सही बात क्या थी सर,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;देखो मै पानी इसलिए जमीन पर गिराता हु क्युकि मेरे माता पिता का स्वर्गवास हो चूका है,,,,और जैसा की सब कहते है की मरने के बाद आत्मा क़ो 84 लाख योनियों मे जन्म लेना पड़ता है,तब जाकर उसे मनुष्य जीवन प्राप्त होता है, मुझे नहीँ पता मेरे माता पिता फिलहाल किस जन्म मे है और कैसे है, पर मै उनके लिए हमेशा प्राथर्ना करता हु....की वे जंहा भी हो कुशल हो, ये जल मै उन्ही दोनों क़ो अर्पित करता हु,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;मैंने ऐसा सुना था की हमारी दुनिया के जैसी हीं एक दुनिया और है....जंहा हम जो भी उन्हें अर्पित करते है,,,वह उन्हें प्राप्त हो जाता है,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;तुम यकीन नहीँ करोगी....पर फ़िरभी मै एक कहानी तुम्हे सुनाता हु........यह करीब 10 साल पहले की घटना है, एक भले पुरे परिवार का एक नौजवान युवक सन्यासी बन गया,,,,,,दर दर भटकता,भिक्षा मांगकर खाता,कुटिया मे निवास करता,सारे सुःख और वैभव होते हुए भी वह एक बैरागी का जीवन जी रहा था.....&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;उसके पिता ज़ब मिलते तब उसे साथ चलने क़ो कहते पर वह तो अपनी भक्ति मे लीन हो गया था, कभी कबार तो ऐसा होता की कई कई दिन तक उसे एक निवाला नसीब नहीँ होता....&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;फिर भी वह वापस नहीँ आया......उसके माता पिता की चार और संताने थी.....सभी उनका अच्छा ख्याल रखते मगर उनका मन उसी बेटे पर लगा रहता,,,,एक दिन खबर आई की उनका सन्यासी बेटा किसी बाढ़ मे डूब गया,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;सभी शोकाकुल हो गये,,,,भगवान क़ो कौशने लगे की आपकी सेवा मे लगा मेरा संतान भला ऐसी गति कैसे पा सकता है........उसके नाम से कई जगह यज्ञ हवन कराएं गये,,,,,, उसके लिया दान किए गये.....&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;एक दिन उसके माता पिता जंगल के बिचो बीच से होकर गुजर रहे थे.......तभी एक बंदर नें अचानक रास्ता रोक दिया,,,,,,, रोड के ठीक बीचो बिच वह बंदर दो घंटे तक बैठा रहा,लोग कितने भी कोशिश करते मगर वह वहां से नहीँ हिला......जबकि उस बस से पीछे दो छोटी गाड़िया थी वह आगे बाढ़ गयी, ज़ब वह बस निकला तो रास्ते मे एक बड़ा पेड़ इस प्रकार गिरा पड़ा मिला की उन दोनों गाड़ियों क़ो अपने निचे दबा गया,,,,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;बस वाले समझ चुके थे की ये हादसा बस के साथ होना था,पर उस बंदर नें हमारी जान बचाई थी,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;इसके 5-6 साल बाद उस घर के सबसे बड़े लडके क़ो गंभीर समस्या हो गयी, उसे अस्पताल ले जाया गया,जंहा तत्काल उसका ओप्रेशन करना था, मगर जिस डॉक्टर् से उनकी बात हुई थी,वह अपनी पत्नी और बच्चे के साथ अर्जेंटली कही दूसरी जगह निकल रहे थे,मगर रास्ते मे न जाने कहा से एक कौवे के कारण उनकी गाड़ी का एक्सीडेंट होते होते रह गया मगर उनके बच्चे को चोट आई जिसके कारण उन्हें वापस अस्पताल आना पड़ा,और अस्पताल आने के बाद उन्हें अपना ऑपरेशन तत्काल करना पड़ा,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;यह सारे घटनाएं महज एक इत्तेफाक थे, मगर ऐसी छोटी बड़ी घटना है उनके परिवार के साथ हर दिन हुआ करते थे, जैसे कोई अदृश्य शक्ति हमेशा उनके परिवार की रक्षा कर रही है, उनके जीवन को हर बाधा उसे हर विपत्ति से बचा रही है,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;तुम खुद समझ सकती हो जब वह एक प्राणी जो जिंदा था,,,,,तब उसने अपने परिवार के लिए कुछ भी करना जरूरी नहीं समझा और वह सन्यासी बन गया, मगर जब वह शरीर त्याग कर जा चुका था तो वह अपने कर्तव्य को किसी ना किसी प्रकार से पूरा करता रहा,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;धीरे-धीरे उसके परिवार वालों को भी समझ आ चुकी थी कि कि हम पर हमारे संतान का आशीर्वाद है,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;यह तो मैंने तुम्हें बस एक कहानी बताई ऐसे कहानियां ढूंढने निकलो तो तुम्हें 50 हो कहानियां मिल जाएंगे, लोग समझते हैं कि कोई मर गया तो वह हमेशा के लिए चला गया मगर ऐसा नहीं होता वह जहां भी है रहता है अपनों से जुड़ा रहता है,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;हर चीज़ का हिसाब रखता हर किसी की बात का हिसाब रखता है, हर वक्त आने पर उसे वह लोटाता भी है, भले इसमें कई सदियों का समय क्यों न लग जाए,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;इसीलिए कभी भी किसी भी आत्मा के बारे में बुरे शब्द नहीं बोलना चाहिए, पर लोगों का क्या है लोग जिंदा इंसानों को नहीं छोड़ते मुर्दों का क्या करेंगे?&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;खैर तुम रहने दो इन सब बातों को बस तुम्हारी जानकारी के लिए आज मैंने एक लंबा चौड़ा भाषण दे दिया, इसे दिल से मत लेना ,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;बस खुश रहो और अपना ध्यान रखो,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;इतना कहकर मेरे राजेश सर चले गए, हमारी वार्तालाप करीब 2 घंटे तक हुई थी, इन 2 घंटों में मैंने बहुत कुछ सीखा समझा,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;सबसे बड़ी सीख मुझे यह मिली हमारी हिंदू ग्रंथों के अनुसार जितनी भी बातें लिखी है वह सब सही है, इंसान का शरीर बढ़ता है पर आत्मा सदैव जिंदा रहता है, अच्छा बुरा देखने की समझ उसे हमेशा होती है,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;ठीक वैसे ही जैसे हम मैले कपड़े बदल कर नये और साफ कपड़े धारण करते हैं वैसे ही बुढ़ापे में शरीर को आत्महत्या कर नया शरीर धारण करती है और यह शरीर उसके कर्मों के हिसाब से उसे प्राप्त होती है,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;हमारे पूर्वज हमारे लिए हमेशा अच्छा सोचते हैं हमें भी उनके बारे में हमेशा अच्छा ही सोचना चाहिए,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;</description><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjqLiutZQceLr2DbDhZ0SFsUzIkYszvW14OmqNlRKA8zvDASWsXbDLlQdwANeRp2ovAcfsGgltKOmHvtyc0jxNJ_Uex_kckZ-M_KIkm8V0X5DkLU1Wdbm2fOdK5NIhO2iUH00Bxc_00e2k/s72-c/1651398892483058-0.png" width="72"/><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>Ishwar-ki-adalat : ईश्वर की अदालत </title><link>https://pawitrakhahaniya9.blogspot.com/2022/02/ishwar-ki-adalat.html</link><category>bhagwan ki kahani</category><category>dharmik kahani</category><category>sachchi kahani</category><author>noreply@blogger.com (Pawitra kahaniya)</author><pubDate>Fri, 4 Feb 2022 17:57:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-6294846026234936559.post-5776730208317968941</guid><description>&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;ईश्वर औऱ भक्त का रिश्ता कुछ ऐसा है मानो एक उदास हो तों दूसरा भी अन्न ग्रहण नहीँ कर पाता,&lt;div&gt;भक्ति की शक्ति ईश्वर क़ो उस चौखट तक भी ले आते है, जंहा भक्त रहता है,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;ये कहानी इसी पर आधारित है,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;b&gt;कहानी&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;b&gt;&lt;br&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;ये कहानी परमानंद नामक ब्राह्मण का था,,,,जो बचपन से अपने पिता क़ो पूजा पाठ औऱ हवन इत्यादि करते देखता था,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;
  &lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhZ2refrDKA7CsG8XwQ_ACcmVSCElBAtpslEQQnGdxbRm_ztGCYKRKr8JwnOCSKKnOIkEwLeBVI1KJz1g8GHEVS_Y8lhJLMlPL1BeJfVgnAdgJ5BvT9BOzeQ9WxS4BMCHBE-goF_Nj4aT0/s1600/1643977620366771-0.png" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;
    &lt;img border="0"   src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhZ2refrDKA7CsG8XwQ_ACcmVSCElBAtpslEQQnGdxbRm_ztGCYKRKr8JwnOCSKKnOIkEwLeBVI1KJz1g8GHEVS_Y8lhJLMlPL1BeJfVgnAdgJ5BvT9BOzeQ9WxS4BMCHBE-goF_Nj4aT0/s1600/1643977620366771-0.png" width="400"&gt;
  &lt;/a&gt;
&lt;/div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;हलाकि उस उम्र मे उसे इन सब चीजों मे परमानंद को कोई रुचि नहीं थी, क्योंकि उसकी उम्र तो बस अभी खेलने कूदने की थी,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;पर हां वह इतना जरूर समझता था कि धर्म-कर्म इंसान के लिए बहुत जरूरी होते हैं, परमानंद को बचपन से जीव जंतु तथा मॉक प्राणियों से बहुत लगाव था,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;वह नन्हें पालतू जानवरों को हमेशा आश्रय देता था, एक बार उसने एक कुत्ते के बच्चे को अपने घर में आश्रय दिया था,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;वह पिल्ला देखते ही देखते अपने दो और साथियों को घर में ले आया,,, परमानंद ने उसके बचपने को नजरअंदाज करते हुए सभी को आश्रय दिया, परमानंद उन सभी से खेलता और खिलाता था, उस घर में परमानंद के पिता माता और दो छोटे भाई रहते थे,,, हालांकि परमानंद के दोनों भाई भी बहुत समझदार और दयालु थे,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;इसलिए परमानंद की गैरमौजूदगी में उन तीनों पालतू जानवरों के संरक्षण वे दोनों ही करते थे, एक बार परमानंद किसी काम से बाहर गया हुआ था, इसी बीच उन तीनों पालतू जानवरों की तबीयत एक साथ बिगड़ गई,,,,, तीनों पालतू जानवरों की तबीयत एक साथ बिगड़ने का कारण समझ में किसी को नहीं आया,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;परमानंद के वे दोनों छोटे भाई उन दोनों पालतू जानवरों की सेवा में लगे हुए थे, थोड़ी देर बाद परमानंद के आने के बाद तीनों पालतू जानवर भी धीरे-धीरे स्वस्थ हो गए, शायद यह एक भावनात्मक बीमारी थी जो परमानंद की गैरमौजूदगी में उन तीनों बच्चों के साथ हुई थी,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;जिस कारन परमानंद के आते ही वे तीनों स्वस्थ हो गये,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;कभी कबार परमानंद उन तीनों पर भड़क भी जाता था, उनकी हरकतें ही कुछ ऐसी थी परमानंद के खिलौने जहां-तहां छुपा कर उन्हें कुतरते रहते थे, इसलिए परमानंद कभी-कभी उन पर गुस्सा भी करता था,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;इन्हीं सब चक्कर में उन तीनों मे से दो पिल्लो ने प्लास्टिक के खिलौने कुतर कर खा गए, जिस कारण उनकी तबीयत बहुत खराब हो गई......... कई तरह की दवाइयां खिलाई गई,लेकिन कोई सुधार नहीं था,,,,, परमानंद और उसके दोनों छोटे भाई सारी रात जग कर दोनों की रखवाली कर रहे थे,,,,,,, इसी तरह कई रात और दिन उन्होंने उन दोनों की देखभाल में गुजार दी, एक रात जब परमानंद उनके पास बैठा ऊंघ रहा था, तब उसके छोटे भाई ने कहा भैया तुम जाओ मैं यहीं पर रुकता हूं,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;परमानंद जाकर अपने बिस्तर पर लेट गया,बस कुछ ही पल हुए थे, परमानंद के वहां से हटते ही उन दोनों में से एक पिल्लै ने अपनी आखिरी सांस ली,इसके बाद तुरंत परमानंद को जगाया गया,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;परमानंद को जानकर बड़ा अफसोस हुआ कि मैं जब तक वहां था तब तक सब कुछ ठीक था, मेरे हटे यह कैसे हो गया, काश मैं वहां से नहीं हटता!!!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;परमानंद को यह मात्र एक आकाशमात घटना लगी थी, इस घटना को याद करते हुए परमानंद ने दूसरे पिल्ले की रखवाली अच्छे से की और औरवह स्वस्थ्य हो उठा,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;परमानंद को उस रात की घटना पर अफसोस था, इस घटना के कई साल बीत गया, परमानंद बिल्कुल बड़ा हो चुका था, और उसके दोनों भाई भी युवा हो चले,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;परमानंद पेशे से एक ब्राह्मण था, वह घर-घर जाकर याजको के यहां पूजा करवाता था और अपना जीवन यापन करता था, इसी दौरान भगवान की कृपा हुई उसका,,,,, और उसके घर एक नन्हे बालक आया,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;उस बालक के आने से परमानंद के भाग्य खुल गए, अचानक से उसकी संपत्ति में काफी इजाफा हुआ,,,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;परंतु नकारात्मक शक्तियां भी साथ आयी,,, जिस कारण लोगों के मन में यह बात घर कर गई अचानक इस ब्राह्मण के पास इतना धन कैसे आ गया, जरूर या कोई काली विद्या जानता है, वरना रातों-रात खजाना कहां से हाथ लग गया इस तुच्छ से ब्राह्मण को,,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;ब्राह्मण के आसपास रहने वाले कई लोग आपस में या बात करने लग गए कि या ब्राह्मण कोई विधा करता है इसलिए इसके पास धन आ गया,&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;यह बात गांव में तेजी से फैलने लगी, और ब्राह्मण के प्रति सब का नजरिया बदल कर क्रोध में परिवर्तन हो गया, अब सब उसकी अवहेलना करने लगे, ब्राह्मण जहां कहीं से भी गुजरता आसपास लोग चुगली करते नजर आते, कुछ लोग मुंह पर ताने मारते हैं,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;समय जैसे-जैसे बीता जा रहा था, लोगों के मन में आशंका है उतनी ही बढ़ती जा रही थी, हालात ऐसे हो गए थे कि किसी के घर में दूध भी उबल कर गिर जाता तो वह ब्राह्मण का दोष लगाते,,,,, कहते कल यही से गुजरा था जरूर से उसी ने कुछ किया होगा,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;जबकि ब्राह्मण अपने घर और अपने संसार की चिंता में व्यस्त था...अपने पिता के जाने के बाद उसे अपने भाइयों की दया की चिंता सता रही थी,,,, मन ही मन एक ही बात थी कि इन दोनों का ब्याह कर दूं तो अपने पिता द्वारा दी गई दायित्व से मुक्ति पाऊं,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;परंतु कोई अच्छा रिश्ता उसके घर से रिश्ता नहीं करना चाह रहा था,,, क्योंकि ब्राह्मण के बारे में लोग न जाने कैसी कैसी अफवाह बाहर उड़ा चुके थे,,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;जब यह बात ब्राह्मण के कानों में पड़ी, तो बस एक ही बात दिमाग में आई........ इतनी पूजा-पाठ इतनी श्रद्धा रखने के बाद अगर मेरे साथ यह हो रहा है, तो मैं सब छोड़ दूंगा.......... उसने भगवान के पास जाकर हाथ जोड़े औऱ अपनी आंसुओ से सारी ब्यथा बताई.......&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;आप ले चुका था कि जब तक लोग कहना नहीं छोड़ेंगे वह भगवान के मंदिर में दिया नहीं जलायेगा, ना ही किसी यजमान के घर पूजा करने जाएगा...&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;भगवान के सामने उसने 100% अपने निर्दोष होने की बात कही, वह जानता था उसके सारे कर्म से भगवान को समर्पित रहे है...&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;हां मन ही मन बहुत दुखी था.... लोगों से उसकी आशाएं भी कम हो चुकी थी, सब भगवान से आशा थी....... और उसे विश्वास था कि भगवान उसकी आत्मा को कभी नहीं तोडेंगे, नहीं टूटने देंगे&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;एक रात जब वह सोया हुआ था,,,,, उसे प्यास लगी और वह जाग उठा&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;वजह से ही पानी पीने के लिए मटके के पास गया.... उसे एहसास हुआ कोई उसके पीछे खड़ा है,पीछे मुड़ते ही उसे किसी की परछाई में महसूस हुई,,,, उसे ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे कोई उसके साथ लुका छुपी खेल रहा हो,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;परंतु हुआ अपनी चिंताओं में डूबा था इसलिए वापस जाकर अपने बिस्तर पर सो गया..... और आंखों को बंद करते ही अगले पल उसके सामने उसके इष्ट देव आ खडे हुए.........&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;वह नजारा देखने लायक था......सुनहरे रंग से रंगे,मानो पुरे शरीर से सोने की चमक आ रही हो,,,,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;परमानन्द क़ो यह दृश्य उसके दिल दिमाग़ के अंदर तक असर कर गया,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;जिसकारण वह आंखे खोल बैठा.....औऱ होश मेरे आकर उसे कहीं अधिक दुख हुआ........परन्तु ईश्वर तों उसके पास ही थे,,इसलिए उन्होंने दोबारा उसे दर्शन दिए...इसबार परमानन्द ने अपने ईष्टके माथे से लगे पांचमुख वाले नाग क़ो देखा...&amp;nbsp; जो जीवित होते हुवे भी सोने की भाती प्रकाश कर रहे थे,,,,,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;आँखों मे यही दृश्य लिए सुबह उठकर परमानंद ने ईश्वर क़ो नमस्कार किया............. उसे ऐसा आभाष हो रहा था,जैसे आज बस कुछ अच्छा होने क़ो है,,,,,,,,,,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;उसने थोड़ी देर बाद ही अपने कानो मेरे हरे कृष्णा....हरे रामा की धुँन सुनी....वह तुरंत खिड़की की औऱ झाँकने निकला.......&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;उसने देखा पीली पोशाक मेरे एक वैष्णव ब्राह्मण कीर्तन करते हुए जा रहा था....... माथे पर चंदन टिका..........&amp;nbsp; औऱ जैसा पीला नागो का मुकुट परमानन्द ने ईष्ट के माथे पर देखा था...ठीक वैसा ही सुंदर पीली पगड़ी धारण किये,वह ब्राह्मण कीर्तन करते जा रहा था,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;लोगो के लिए वह एक सामान्य सा ब्राह्मण था...पर परमानंद क़ो रात्रि मेरे दिए अधूरे आभाष ने एहसास करवा दिया था की वे प्रभु के रूप मेरे प्रमानन्द क़ो अस्वासन देने आये थे, की मै हमेशा तुम्हारे आस पास ही हु,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;परमानंद का यकीन तब पक्का हो गया....ज़ब उस ब्राह्मण ने बेवजह अपने पैर धोये.......औऱ आगे चल निकले,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;क्युकि परमानंद हर दिन अपने ईष्ट के चरणा अमृत क़ो माथे से लगाता था,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;इस तरह परमानन्द क़ो आश्वाशन देने ईश्वर खुद आ गये,,,,,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;जिसके बाद भले लोगो से परमानंद का विश्वास टूट चला हो,मगर अपने ईष्ट पर उसने हमेशा अपना विश्वास क़ायम रखा,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;शिक्षा :- निष्ठां सच्ची हो तों स्वम् भगवान भी भेष धर कर आ जाते है, भगवान के दर से बड़ी कोई अदालत नहीँ,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;</description><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhZ2refrDKA7CsG8XwQ_ACcmVSCElBAtpslEQQnGdxbRm_ztGCYKRKr8JwnOCSKKnOIkEwLeBVI1KJz1g8GHEVS_Y8lhJLMlPL1BeJfVgnAdgJ5BvT9BOzeQ9WxS4BMCHBE-goF_Nj4aT0/s72-c/1643977620366771-0.png" width="72"/><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>भगवान शिव का मन्दिर </title><link>https://pawitrakhahaniya9.blogspot.com/2022/01/blog-post.html</link><author>noreply@blogger.com (Pawitra kahaniya)</author><pubDate>Sat, 29 Jan 2022 17:35:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-6294846026234936559.post-4540501871413646473</guid><description>बड़ा नाम सुना था उस मन्दिर का, लोग कहते है सच में वहां भगवान शिव विराजमान है, पर मुझे कभी यकीन नहीँ हुआ, भला भगवान शंकर साक्षात् किसी भी मन्दिर में कैसे रह सकते है,&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;फिर भी मै वसुंधरा अपने परिवार जनो के संग उस मन्दिर के दर्शन को निकल गयी, मन्दिर काफी दूर था,,,,, और हमारे गाँव से ईरिक्शा के जरिये मन्दिर तक पहुंचने में पांच घंटे लगे,,,,,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;
  &lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiFZv-NQEWmaGbGgPpgpwPyGqXoLm87W7Uu-ncEcacntzfaSgumlRT7Gw8DwgLvOxHV6hD87_eeGS_l2o5eTtNwTISP9rk6ZscqLEMh_-Gtuv66OHGnOKm05-5-uRIgpG8Q9Htz89IXxkY/s1600/1643457927160488-0.png" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;
    &lt;img border="0"   src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiFZv-NQEWmaGbGgPpgpwPyGqXoLm87W7Uu-ncEcacntzfaSgumlRT7Gw8DwgLvOxHV6hD87_eeGS_l2o5eTtNwTISP9rk6ZscqLEMh_-Gtuv66OHGnOKm05-5-uRIgpG8Q9Htz89IXxkY/s1600/1643457927160488-0.png" width="400"&gt;
  &lt;/a&gt;
&lt;/div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;इतना समयानुसार लगने वाला था इसलिए हम सुबह 5 बजे ही घर से निकले थे, और 10 बजते बजते हम मन्दिर के सामने खडे थे,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;देखने से तों यह मन्दिर बिल्कुल आम मन्दिर की तरह साधारण ही लग रही थी, मामूली सा ढाँचा....&lt;/div&gt;&lt;div&gt;मन्दिर से निकलते ही सामने एक बरगद का पेड और पेड से ठीक निचे बड़ी सी नदी........&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;धूप भी पुरी मन्दिर तक नहीँ पहुंच पा रही थी.... भला इस मन्दिर में असि क्या खाश बात हो सकती है जो भगवान शिव यहां ठहरे हुए है......&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;चलो मन्दिर जाकर देखते है...... मन्दिर के भीतर प्रवेश करते ही इतनी शीतलता महसूस हुई जैसे किसी ने Ac ऑन क़र रखी हो,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;मन्दिर के बीचोबीच एक सफ़ेद शिवलिंग विराजमान था, और शिव लिंग के थी बाहर नंदी महराज भगवान शंकर के पहरेदार बने हुए थे, सामने बर्गर बरगद के पेड़ से सटे चबूतरे पर बैठकर देखने से वहां का नजारा अपने आप में अद्भुत था,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;थोड़ी दूर जाने के बाद एक बड़ी ऐसी गली मिलती जिसके दोनों तरफ छोटी-छोटी दुकानें थी जिसमें हर तरह के सामान मिल गए थे जो भगवान को अर्पित करने और चढ़ावे में काम आते हैं,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;वहां के लोगों से पूछने से पता चला तेजा मंदिर एकांत में रहता है तुम मंदिर से किसी के नृत्य करने और हुंकार भरने की आवाजें आती है, भला मंदिर में कौन आ सकता है या भगवान शिव का मंदिर था इसीलिए सभी ने मान लिया कि हे भगवान शिव स्वयं विराजमान है, हालांकि या मंदिर ज्यादा पुराना नहीं है परंतु ऐसा कहा जाता है कि यहां के बड़े जमींदारों ने इस मंदिर को बनाया था,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;एक विचित्र घटना के अनुसार एक छोटे से बालक ने मंदिर में स्वयं भगवान शिव को देखा था, उसका कहना था कि भगवान शिव ने उसे हाथ में एक प्रसाद दिया और उस बालक के सिर पर हाथ फेर कर आशीर्वाद भी दिया, बालक मात्र 6 वर्ष का था इसलिए उसे ठीक से कुछ भी याद नहीं परंतु वह जितना भी बोल सका उसे बताया कि वह भगवान शंकर ही थी जिन्होंने उसे हाथों में प्रसाद दिया था,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;वह बालक तब से बहुत ही विख्यात है और हर कोई उस बालक के पास जाकर आशीर्वाद लेता है वह बालक भगवान शंकर का भक्त कहलाता है उसका उसका नाम भी सबने सेवा ही रखा है,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;एक बार शिवा के पिता जो कि एक ट्रक ड्राइवर है उनकी गाड़ी एक सुनसान रास्ते पर बंद पड़ गई थी, कई घंटे धूप में प्रयास करने के बाद भी वह गाड़ी ठीक ना होगी उस समय वह बिल्कुल अकेले थे उनकी मदद के लिए कोई कोई सामने नहीं आया, शिवा के पिता कद काठी से लंबे चौड़े थे,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;अचानक रोड पर खड़े शिवा के पिता को किसी गाड़ी ने अवतल में टक्कर मार दी और वह एक तरफ बेहोश होकर गिर पड़े, जब उन्हें होश आया तो उन्होंने देखा कि वह गाड़ी में लेटे थे, फिर में किसी तरह गाड़ी चला कर अपने घर तक आए पता नहीं उनके घर गाड़ी अचानक कैसे ठीक हो गई,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;उन्होंने जब यह बात अपने घर आकर बताएं तो सब का भगवान शंकर पर अटूट विश्वास हो गया कि उनका मदद उनकी मदद करने वाला और कोई नहीं भगवान शंकर यह थे उन्होंने ही निंद्रा की अवस्था में शिवा के पिता को उठाकर गाड़ी में और गाड़ी को भी ठीक कर दिया,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;शिवा को स्वप्न में भगवान शंकर के दर्शन होते हैं ऐसा गांव वाले और कुछ सेवा कहता है भगवान शंकर उस उस पर अपनी कृपा हमेशा बनाए रखते हैं और उसे अपने सपनों में हमेशा दर्शन देते हैं, शिवा बताता है कि भगवान शंकर सर्प लपेटे, बाघ की छाल पहने होते हैं तथा उनके सिर पर मोटी जटाये होती है,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;गांव के लोगों से जब सुना तो उन्होंने बताया कि शिवा के साथ हर दम भोले शंकर उपस्थित रहते हैं कई बार गांव वासियों ने भगवान शंकर की छाया शिवा के साथ देखी थी मगर इस बात पर विश्वास करना सही है या गलत हमें नहीं पता,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;इस गांव तथा मंदिर का पता कहानी में उल्लेख किया नहीं रह सकता मगर अपनी राय से हमें बताएं कि क्या आप सच में भगवान शंकर को मानते हैं कि वह जिसके साथ ही बन जाते हैं उसकी हर पल साथ निभाते है,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;इस पर अपनी राय हमें कमेंट के माध्यम से जरूर बताएं&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;</description><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiFZv-NQEWmaGbGgPpgpwPyGqXoLm87W7Uu-ncEcacntzfaSgumlRT7Gw8DwgLvOxHV6hD87_eeGS_l2o5eTtNwTISP9rk6ZscqLEMh_-Gtuv66OHGnOKm05-5-uRIgpG8Q9Htz89IXxkY/s72-c/1643457927160488-0.png" width="72"/><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>Bhagwan-Shiv-dwara-kiye-Gaye-Chamatkar-ki-kahani : भगवान शिव के तले पावन गाँव </title><link>https://pawitrakhahaniya9.blogspot.com/2022/01/bhagwan-shiv-dwara-kiye-gaye-chamatkar.html</link><category>Bhagwan Shiv Ke sacche Bhakt ki kahani</category><category>Bhagwan Shiv Ki Kahani</category><category>dharmik kahani</category><author>noreply@blogger.com (Pawitra kahaniya)</author><pubDate>Sat, 29 Jan 2022 17:34:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-6294846026234936559.post-186322252048968174</guid><description>मेरी मां मुझे अक्सर अच्छी..... अच्छी कहानियां सुनाया करते थी,&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;जब छोटी थी मुझे साधुओं की कहानियां सुनाइ, प्रेतों की कहानियां सुनाएं&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;छोटे बदमाश बालकों की कहानियां सुनाती , और एक दूत की कहानि सुनाई थी, बाकी सब तो मुझे इतने अच्छे नहीं लगे मगर दूत की कहानी मुझे बहुत अच्छी लगी, और वही कहानी मैं आपको सुनाने जा रही हूं उम्मीद है आपको अच्छी लगेगी............&lt;div&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;
  &lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgahO9UpXRmfmFi6WBhx0r2nwpcn2nqJTDGOCTlJ_WQKnEoLVQt4g0iFkRLxlL_efRsVhW08LAq_xdJxGbE-pa4nILcYUwjH_FFwD7CRevq9Y4LJfgvxYriGQ6jmc1B8qabfFLYUMrmJQo/s1600/1643457905786243-0.png" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;
    &lt;img border="0"   src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgahO9UpXRmfmFi6WBhx0r2nwpcn2nqJTDGOCTlJ_WQKnEoLVQt4g0iFkRLxlL_efRsVhW08LAq_xdJxGbE-pa4nILcYUwjH_FFwD7CRevq9Y4LJfgvxYriGQ6jmc1B8qabfFLYUMrmJQo/s1600/1643457905786243-0.png" width="400"&gt;
  &lt;/a&gt;
&lt;/div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;दक्षिण भारत का रहने वाला रामनिवास भगवान शिव का भक्त था, पर उसकी वेशभूषा से कभी ऐसा प्रतीत नहीं होता कि वह भगवान शंकर का भक्त है सभी उसे वैष्णव समझते, सिर पर सिखाएं, रखने वाला भला वैष्णो ना होगा तो और क्या होगा......&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;परंतु आस्था का तो कोई रूप रंग नहीं होता भगवान शंकर का वह भक्त था और भगवान शंकर भी क्या बात स्वीकार कर चुके थे, रामनिवास के अधीन कई मंदिरों की सफाई का कार्य रहता और वह प्रात काल उठते सभी मंदिरों को साफ करता, यही उनकी दिनचर्या बन गई,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;पुराने लोगों के कहने अनुसार भगवान शंकर एक ऐसे देव हैं जो अपनी पूजा से ज्यादा, अपने स्थान की सफाई से प्रसन्न होते हैं&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;जो लोग भगवान शंकर की बिना दीप प्रज्वलित किए बिना प्रसाद अर्पित किए एक लोटा जल भी अर्पण क़र दे उस पर भगवान शिव की कृपा हो जाती है और रामनिवास तो हर दिन उनके पूरे मंदिर को जल से&amp;nbsp; नहलाता था इसलिए भगवान शंकर का उसे खाश आशीर्वाद प्राप्त था,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;सभी जानते है वह उन भक्तों की&amp;nbsp; सुनते हैं जो उनकी मंदिर की सफाई अर्थात जल से धोता है,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;रामनिवास चल का अच्छा इंसान था, हे मंदिर को भली-भांति&amp;nbsp; स्वच्छ करता, उसके काम से प्रसन्न एक दिन एक बड़ी जमीदार ने उसे अपने मंदिर को प्रतिदिन स्वच्छ करने के लिए कहा इसके बदले उसे दोनों वक्त भोजन बनाने के लिए राशन पानी देने का वचन दिया,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;रामनिवास अब तक बारी मंदिरों को ही स्वच्छ करता था पर वह अब बड़े जमींदार के पुश्तैनी शिव मंदिर को स्वच्छ करने वाला था, मम्मी थोड़ी आशंका भी थी अगर कहीं कोई भूल हो गई तो जमींदार से कोई दंड ना दे दे,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;इसलिए प्रातः काल समय से पहले वह जमींदार के मंदिर उपस्थित हो गया और आज्ञा लेकर मंदिर को स्वच्छ करने चला गया, 1 घंटे के बाद वहां महिलाएं पूजा करने जाने वाली थी,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;रामनिवास ने देखा क्या मंदिर तो बहुत ही महिला है यार लगता है कई सालों से ऐसी वीरान पड़ा था, आसपास जाले लगे हुए थे भगवान शंकर का शिवलिंग भी धूल से भरी हुई थी, उसने मन लगाकर पूरे मंदिर को स्वच्छ कर दिया,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;1 घंटे के भीतर ही उसने पूरे मंदिर को जल से धो डाला, और सभी जाली भी हटा दिए, जब बारी भगवान शिव की शिवलिंग की धोने की आई तो वह लगातार उस पर जल डालता रहा ढलता है ढलता रहा इस तरह उसने एक बाल्टी जल भगवान शंकर पर डाल दिए, तब जाकर भगवान शंकर पूर्णता स्वच्छ हो गये,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;परंतु अभी भी दुविधा में था कि कहीं मैंने कोई जोक तो नहीं करती है जिस कारण हो सके जमीदार मुझसे नाराज हो गये तों, इसलिए मंदिर में एक कोने में खड़ा होकर पुरे मंदिर को ध्यान से देखने लगा,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;वह मन ही मन सोच रहा था इस मंदिर को बनाने वाले ने कितने ध्यान से इस मंदिर को बनाया होगा कितनी अच्छी और सुंदर नाकाशी है इस मन्दिर में,,,,,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;वह मंदिर रामनिवास का मन मोह रहा था, और उधर भगवान शंकर चले आ रहे थे......&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;होठों पर मंद मंद मुस्कान दिए भगवान शंकर उसकी भावना से प्रसन्न हो गए और उसने मंदिर को इस तरह साफ किया कि भगवान शंकर भी रह ना सके और उससे मिलने, तथा दर्शन देने स्वयं आ गये,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;हालांकि रामनिवास यह नहीं देखा कि भगवान शंकर शिवलिंग के उपस्थित हुए हैं, माता मंदिर की दीवारों को देखने में लगा पड़ा था, अचानक एक अजनबी को सामने देखकर वह भयभीत हो गया,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;भगवान शंकर ने उसके कंधे पर हाथ रखे और बोले तो तुम बहुत अच्छे इंसान हो रामनिवास तुमने बहुत अच्छा कार्य किया है,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;यह सुनकर रामनिवास को ठंडक पहुंची उसे लगा कोई जमींदार उसके पास आया है, वह भगवान शंकर को जमीदार ही समझ रहा था,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;भगवान शंकर उसके कंधे पर हाथ रखे हुए थे और वह भगवान शंकर के सामने हाथ जोड़े खड़ा था, बिना यह जाने कि जो सामने व्यक्ति खड़ा है वह भगवान शंकर स्वयं है,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;यहां से रामनिवास की किस्मत बदलने वाली थी क्योंकि वह अब भगवान शंकर के खाश लोगो में सुमार होने वाला था..................................&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;दिनभर कार्य करने के चक्कर में उसे सुबह की घटना याद ही नहीं रही, परंतु जब रात को सोने गया तों निद्रा की अवस्था में भगवान शंकर का वही मुस्कुराता चेहरा उसके सामने आ गया, उसे मन ही मन थोड़ा अजीब लग रहा था, क्योंकि वह भी समझ नहीं पाया था कि आखिर सच क्या था,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;उसके घर में अब पहले की तरह अन्न की कमी नहीं रही, वह हर सुबह सबसे पहले वह जमींदार वाला मंदिर जाता उसके बाद बाकी सारे मंदिरों में जाता,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;और सिर्फ सोमवार को भगवान शंकर उसे किसी न् किसी तरह से दर्शन देते, मन ही मन रामनिवास असीम शांति का अनुभव कर रहा था, उसके जीवन में पहले की तरह अब क्लेश नहीं रहे,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;एक रात्रि जब वह सोया हुआ था, तब उसे आभास हुआ कि कोई उसे आवाज दे रहा है..... रामनिवास रामनिवास...... रामनिवास............... रामनिवास&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;वह भी रात्रि में बस आवाज के माध्यम से वह मंदिर चला आया जहाँ भगवान शिव अपने पूर्ण अवतार में बैठे थे, पीछे से एक विशाल नाग भगवान शिव को छाया दे रहा था,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;यह मंजर जितना अद्भुत था उतना ही आश्चर्यजनक..... रामनिवास आते ही भगवान शिव के चरणों में गिर क़र रोने लगा.......&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;हे प्रभु मुझसे भूल हो गयी मैंने आपको नहीँ पहचाना................ मै कैसे आपको नहीँ पहचान सका.... मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गयी,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;भगवान शिव ने कहा........ रामनिवास मैंने तुम्हे एक बड़े कार्य के लिए बुलाया है................. उठो और अपने कार्य में लीन हो जाओ,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;रामनिवास कौन सा कार्य प्रभु...........&lt;/div&gt;&lt;div&gt;तुम्हे पता भी है तुम्हारे गाँव में बड़ी तबाही होने वाली है..............................................&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;कैसे प्रभु, और मै क्या क़र सकता हु? इसे रोकने के लिए...&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;रामनिवास मेरे साथ चलो.....&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;वह भगवान शिव के साथ अनजाने से जगह में चल दिया....&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;भगवान शंकर ने उसे "एक छोटे से तालाब में डुबकी लगाने को कहा".....&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;रामनिवास ने डुबकी लगाई..और भगवान ने उसे कहा जाओ तुम भीगे बदन पुरे गाँव का एक चक्क्र लगाकर वापस यहां एक बार डुबकी लगावो,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;रामनिवास ने ऐसा ही किया..... और ज़ब वह वापस डुबकी लगाकर तालाब से निकला तों देखा वह तालाब का पानी पुरी तरह से काला पड़ चूका है,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;इस तरह उसने गाँव में फैले विषैले जहर से होने वाले तबाही को रोक दिया,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;इसके बाद भगवान शंकर की कई संदेशो को रामानिवास सुनता........ और किसी भी प्रकार की घटना से पूर्व पूर्ण करता,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;अब रामनिवास की बेटी की शादी होने को बात थी....&lt;/div&gt;&lt;div&gt;उसकी बेटी काली और कुरूप थी, इस कारन उसे वर मिलने में काफी दिक्क़त हो रही थी, रामनिवास को दूर दूर लडके देखने को जाने पड़ रहे थे....&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;रास्ते में बैलगाडी का एक पहिया खुलकर दूसरी और जा गिरा, बैलगाडी पर और भी लोग सवार थे.... रामनिवास बस भगवान का नाम जपते जा रहा था, उसे बस एक ही इक्छा थी की उसकी बेटी के हाथ पिले हो जाये.........&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;पहिया लाने गया, बैलगाडी चालक पहिया तों ना ला सका, मगर ज़ब वह आया तों उसके हाथ में खून लगा हुआ था, उसपर किसी जंगली जानवर ने हमला क़र दिया था, वे लोग जल्दी जल्दी बैलगाडी को वही छोड़कर भाग खडे हुए,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;एकाएक ढेर सारे जंगली जानवरो का उस स्थान के निवासियों पर हमला होने लगा, हमला ज्यादातर रात को होता था, इसलिए ज्यादातर पुरुषो को ही जंगली जानवर अपना शिकार बनाया करते थे, उस गाँव में अब धीरे धीरे पुरुषो की कमी होने लगी, और किसी को इतनी हिम्मत भी नहीँ हो रही थी की वे सब उन जंगली जानवरो को काबू क़र पाए,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;इधर रामनिवास अपनी बेटी के रिश्ते के लिए के सिलसिले में कई दिनों से बाहर था, इसलिए उसे गाँव की इस कदर ख़राब हो चुकी परिस्थिति से अंजान था,.&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;ज़ब उसने गाँव में कदम रखा तों सबने उन जंगली जानवरो की बात कहीं.... रामनिवास सीधा भगवान के मन्दिर पहुंचा, वहां जाकर भगवान शंकर को ढूंढने लगा,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;पर भगवान कहीं नजर नहीं आए, रामनिवास ने सोचा शायद आज सोमवार नहीं है इसलिए वह नहीं नजर आ रहा है,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;मैं कल फिर आऊंगा&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;सुबह होते ही रामनिवास अपनी दिनचर्या के अनुसार मंदिर में जा पहुंचा और साफ सफाई करने के बाद एक Ekta Bhagwan Shankar Ke Shivling एकता भगवान शंकर के शिवलिंग को निहारता बैठा रहा, भगवान शंकर उन्हें पीछे से हाथ देते हुए बोली और कहो रामनिवास क्यों परेशान हो रामनिवास ने उसने अपने गांव में आई विपदा के बारे में बताएं,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;भगवान शंकर मुस्कुराए और बोले तुम्हें हां मुझे पता है तुम किस बात से चिंतित हो मगर तुम उनका सामना अकेले नहीं कर सकते इसके लिए तुम्हें और भी लोगों की जरूरत पड़ेगी जबकि गांव में तो ज्यादातर लोग घायल पड़े हैं,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;रामनिवास बोला मुझे आपके होते हुए किसी और की क्या आवश्यकता पड़ेगी,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;भगवान शंकर भोले जिन्हें तुम मामूली जंगली जानवर समझ रहे हो वह असल में राक्षस है और वह इस गांव को पूरी तरह ध्वस्त करके मेरे मंदिर को अपने कब्जे में करना चाहते हैं, क्या तुम चाहते हो की वे ऐसा करे,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;रामनिवास ने कहा " नहीँ "&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;तों मै तुम्हे जैसा केहता हु वही करो, तुम्हे तों पता हैँ की गाँव में जन की कमी हो रही हैँ, और उनकी भय से कोई बाहर भी आना नहीँ चाह रहा हैँ, तुम्हे उनलोगो को बुलाना होगा,,,,,,,,,, जो अब संसार में नहीँ हैँ,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;रामनिवास बोला " मै भला ऐसा कैसे क़र सकता हु "&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;भगवान शंकर बोले "&amp;nbsp; तुम क़र सकते हो बस अपने अंतरात्मा से उन्हें आवाज़ लगावो जो अब इस संसार में नहीँ हैँ, तुम्हे जिनके अक्श दीखते हैँ, वे सब आएंगे, पर वो तों मात्र 5-10 ही लोग होंगे क्या उनकी मदद से मै ऐसा क़र सकूंगा?&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;प्रभु बोले " नहीँ "&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;रामनिवास "फिर "&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;प्रभु " तुम बुलावो तों सही "&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;रामनिवास " ठीक हैँ प्रभु आपकी जैसी इच्छा "&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;रामनिवास अपनी पुरी श्रद्धा से उन लोगो को याद करने लगा जो अब नहु हैं, और उन्हें मदद के लिए पुकार रहा था,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;पर उसने किसी की भी कोई आवाज नहीँ सुनी, लगातार कई दिन बीत गये, पर किसी और से मदद अति नहीँ दिखी,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;उसने मन ही मन सोचा ऐसा कभी हो सकता हैँ क्या,,, मरे हुए लोग कब का दूसरे योनियों में जा चुके होंगे,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;वो क्या आएंगे मदद करने, हमें तों अपनी मदद खुद ही करनी पड़ेगी,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;उसी शाम अचानक मौसम में बदलाव दिखने लगा, कोई बता रहा था तूफान आने को हैँ कोई कोई कह रहा था सैलाब आने को है, साझेदारी साल में थे, कई दिनों तक लगातार बारिश होने की संभावना है जता रहे थे,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;पर किसी को पता नहीं था कि रामनिवास के बुलावे पर ऊपर से मेहमान आने वाले थे, और जो लोग एक बार इस संसार से जा चुके होते हैं उनका दोबारा धरती पर लौटना कोई सामान्य बात नहीं थी इस, वर्षा, तूफान और समुद्र में उठ रही लहरें इसका एक जीता जागता प्रमाण था,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;लगता 2 दिनों की झमाझम बारिश तूफान के बाद रामनिवास के बुलावे पर आसमान से मेहमान आ चुके थे,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;रामनिवास किसी काम से अपने सामने वाले घर मिल गया, वहां उसे वे लोग भी देख रहे थे जिनका निधन उनके सामने हुआ था, अरे उसके लिए ताज्जुब की बात थी,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;उसने महसूस किया कि साथ भगवान शंकर के अनुसार आसमान से मदद आई है, इस तरह वह बारी-बारी से सभी घरों में देखने चला गया कि कौन कौन आया कौन कौन नहीं आया, उसने पाया कि ज्यादातर लोग आ चुके थे,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;मुझे आत्माओं की&amp;nbsp; अपनी एक शक्ति और ऊर्जा होती है, जिसे वह हर हालत में अपने परिवार को देना चाहता है और देता है,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;और उन्हें&amp;nbsp; बस यही कार्य करना था, अपने परिवार वालों की हर हाल में रक्षा करनी थी, एक अच्छी बात यह थी कि परिवार वालों में वे सभी लौट आए थे जो किसी न किसी तरह गांव में एक अच्छी भूमिका निभा रहे थे, जैसे गांव के हुए सभी मुखिया जो पूर्व काल में मुखिया, सरपंच, एवं छोटे-मोटे समाज सुधारक&amp;nbsp; रह चुके थे,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;इस तरह गांव में अनदेखा एक एक शक्ति अपने कार्य पर था पर किसी को इस बात की भनक नहीं थी, गांव के ज्यादातर मर्द आराम कर थे लेकिन फिर भी गांव की रक्षा अच्छी तरह से से हो रहा था,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;इसी बिच एक बार रामनिवास अपने पुश्तैनी गांव में किसी कारण से गया, हालांकि वह घर कई सालों से बंद पड़ा था,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;जब उसने घर के दरवाजे खुले और अंदर प्रवेश किया, उसका घर धूल मिट्टी से भरा पड़ा था, अंधेरा ही अंधेरा नजर आने के बाद भी उसे उसके बैठकर खाने में दर्जनों लोग बैठे दिखे,,,,,,,,, वह बैठकर खाना अजनबीयो से भरा पड़ा था, परन्तु रामनिवास के लिए यह ताज्जुब वाली बात नहीँ थी, उनलोगो को वह सही से पहचान ना सका, कई लोग अँधेरे में होने के कारन दिखे भी नहीँ,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;अजीब बात थी एक बुलावे पर इस तरह सभी आ पहुँचे रामनिवास अपने आप को भग्यशाली समझ रहा था, परन्तु बला अभी भी टली नहीँ थी......&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;वे जंगली जानवर अब धीरे धीरे कम हो रहे थे जिसका सामना करना आसान हो रहा था, और वे रहस्य्मयी जानवर कुछ ही हप्ते में गायब हो गये,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;गाँव वाले अब चैन की सांस ले रहे थे, उन सबको ये जानने में कोई दिलचस्पी नहीँ थी की सब ठीक हुआ तों हुआ कैसे, और जीवन सामान्य तरिके से चलने लगी,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;अब रामनिवास सुधार की इच्छा लिए वह हर आदेश मानने को तैयार था, इधर के सारे कार्य निपटाने के बाद उसने पास के ही गाँव में अपनी बेटी के लिए मनचाहा वर पाकर प्रसन्न हुआ,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;और बड़ी धूमधाम से उसकी शादी की, ramn&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;</description><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgahO9UpXRmfmFi6WBhx0r2nwpcn2nqJTDGOCTlJ_WQKnEoLVQt4g0iFkRLxlL_efRsVhW08LAq_xdJxGbE-pa4nILcYUwjH_FFwD7CRevq9Y4LJfgvxYriGQ6jmc1B8qabfFLYUMrmJQo/s72-c/1643457905786243-0.png" width="72"/><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>purwabhas : ईश्वर द्वारा दिया जाने वाला ूपुर्वांभास : सच्ची घटनापर आधारित </title><link>https://pawitrakhahaniya9.blogspot.com/2022/01/purwabhas.html</link><category>पवित्र कहानी</category><category>भक्त औऱ भगवान की कहानी</category><category>श्री विष्णु की कहानी</category><author>noreply@blogger.com (Pawitra kahaniya)</author><pubDate>Sat, 29 Jan 2022 17:33:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-6294846026234936559.post-6450628434436201257</guid><description>रहस्यों के बिच फ़सी एक जिंदगी.....की कहानी&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;भौतिक जीवन के अलावा दूसरी दुनिया के अनुभवों को महसूस करना हर किसी के बस की बात कहा है,,,, ऐसे लोग संसार मे बहुत कम होते है,,,,औऱ उन कम लोगो मे एक नाम प्रियंका का भी था....ज़ब भी वह कोई गलती करती उसके आस पास ऐसे लोग आने सुरु हो जाते जिन्हे ना तों वो ठीक से देख पाती,औऱ ना ही पहचान पाती,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;
  &lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiIQOESTNHTOob_oCj76k0Gei7FIrCIdKPSu5UV4ev5vYlbbVXHiPA9eeJ57ClJZgIu4_xBas-oXIlIUbXRg3aEdkKdmOfXD53C_zZkdPXG9nnTNfNmtZzw72urFCppRf3DFRUtUXHxM7I/s1600/1643457798788854-0.png" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;
    &lt;img border="0"   src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiIQOESTNHTOob_oCj76k0Gei7FIrCIdKPSu5UV4ev5vYlbbVXHiPA9eeJ57ClJZgIu4_xBas-oXIlIUbXRg3aEdkKdmOfXD53C_zZkdPXG9nnTNfNmtZzw72urFCppRf3DFRUtUXHxM7I/s1600/1643457798788854-0.png" width="400"&gt;
  &lt;/a&gt;
&lt;/div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;जाने किस उद्देश्य से जन्मी थी प्रियंका......... प्रकीर्ति से सीखने की ललक थी इसलिए प्रकृति से जुड़ी हर चीजों को गौर से नहीं आती थी उसके अंदर विशाल प्रश्नों का अंबार था जैसे आसमान कितना बड़ा है नदी का पानी बैठे-बैठे जाता कहां है, रात में पक्षियों सोती कहां है और ना जाने ऐसे कितने सवाल उसके मन में हर दिन आते थे, भरे पूरे माहौल में पली-बढ़ी प्रियंका अपने लोगों में अलग पहचान रखती थी,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;ईश्वर के प्रति उसकी गहरी आस्था थी, शायद इसलिए उसके मार्ग में आगे बढ़ने के लिए बेबी उसकी मदद करते थे,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;पक्षियों से उसकी बचपन से अच्छी बनती थी, जब 18 वर्ष की हुई उसके पिता ने एक नया घर खरीदा, घर के आस-पास पक्षि बड़ी तादाद में रहते थे, एक दिन जब वो छत पर खड़ी थी, एक बड़ा गिद्ध आया, और उसके सर पर पैर आगे बढ़ गया,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;प्रियंका बहुत बुरी तरह से डर गई थी, भला से कौन ना डरे, उनकी मोटी मोटी आंखें और नुकीले पीले चोंच देख कर भयावह लगता है, इस वजह से कई महीनों तक वह डरती रही और छत पर नहीं गई,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;कुछ महीनों बाद उसके पिता कल स्वास्थ्य बिगड़ने लगा, जिस कारण प्रियंका काफी चिंतित रहने लगी, एक सुबह जब वह अपनी रसोई में काम कर रही थी, सर को उठाते ही सामने एक बड़ा सा प्रियंका को निहारता बैठा था,उस मोहल्ले में गिद्ध का रहना मामली बात था, इसलिए प्रियंका नहीं एक सौ बिल्कुल भी गौर नहीं किया, लगातार अपने काम में लगी रही,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;कृपया करके मन में एक बात खत्म करें कि इससे पहले उसने कभी भी गिद्ध को मांस का टुकड़ा खाते नहीं देखा, और वह भी लगातार प्रियंका को ही घूरता जा रहा था, प्रियंका ने अपना ध्यान वहां से बार-बार हटाने की कोशिश की, मगर उसकी सुनहरे पंख पीली चोंच देख कर उसे कुछ अजीब तरह की अनुभूति हो रही थी, क्योंकि वह गीत बिल्कुल साफ सुथरा और बाकियों से ज्यादा पीला दिख रहा था, औऱ आँखों मे गजब का तेज था&amp;nbsp; जो प्रियंका को चुंबक की तरह अपनी औऱ आकर्षित कर रहा था,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;वह करीब देढ घंटो तक वही बैठा अपना शिकार खाता रहा, प्रियंका का यह अनुभव उसके माथे पर पसीने ले आ रहा था, मन मे बस एक ही प्रश्न दौड़ रहे थे,,,,,आखिर क्यूँ?&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;प्रियंका को अचानक उसके पिता की ज्यादा तबियत खराब होने की खबर मिली.......वह मिलने पहुंची तों उसके पिता बिल्कुल स्वस्थ्य लग रहे थे,,,, अच्छे से बात भी हुई, औऱ अहले सप्ताह होने वाले परिवारिक समारोह की बातें भी कर रहे थे, फिर अचानक उनके ना रहने की बात सुनने को मिली,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;प्रियंका को यह एक झटके जैसा लगा.......इस घटना के बाद कई महीने तक वह उस गिद्ध वाली बात को भूल नहीँ पायी, जाने वह क्या बताना चाहता था, या फिर एक अशुभ संकेत देकर भविष्य के प्रति आगाह करने आया था वह गिद्ध,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;प्रियंका ने हमेशा प्रकृति से अपनापन दिखाया था,लेकिन उस गिद्ध के ब्यवहार ने उसे विमुख होने पर मजबूर कर दिया,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;वह मकान मे कही भी रहती पर अपने छत पर जाए की उसकी हिम्मत नहीँ होती कही फिर से उन पर नजर ना&amp;nbsp; पड़ जाये,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;समय बिता कई वर्ष हो चले थे....अब वह उस घटना को भूला चुकी थी....&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;घर के एक कोने मे पड़े पड़े प्रियंका का शरीर अब काफी फ़ैल सा गया था, औऱ उसने अपने वजन को कम करने की सोची,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;जिसके लिए उसे परिवार के लोगो ने छत औऱ पार्क मे टहलने की सलाह दि, पार्क तों ठीक है पर छत !!!!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;फ़िरभी किसी तरह हिम्मत कर वह छत पर जाना आना चालू कर चुकी थी, उसके दिमाग़ मे एक तरकीब आई क्यूँ ना अपने डर को अंदर से खत्म कर दू, अब वह हर पल आस पास बैठे गिद्ध को निहारने लगी,,, उन्हें समझने की कोशिश करती,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;इस बिच अचानक उसकी एक दूर के परिजन का स्वास्थ्य खराब हो चूका था,,सभी उसके लिए सलामती की दुवा करने मे लगे थे, औऱ फिर उसी तरह वह गिद्ध पैरो मे मांस का टुकड़ा दबाये प्रियंका को उसके रसोई घर के सामने की खिड़की पर निहारता दिखा,,,,,,,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;प्रियंका को दोबारा वह मंजर देखकर उसके हाथ पैर सुन्न होने लगे,,,, वह डरर से कांप रही थी,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;की अब उस बीमार परिजन को कोई नहीँ बचा सकता,,, औऱ उसके जाने मे सिर्फ एक सप्ताह का समय शेष बचा है,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;इतना कुछ पता होने के बाद भी प्रियंका ने उस गिद्ध के सामने काफी हाथ पैर जोड़े,,,, काफी बिनती की, पर उसका कोई असर नहीँ हुआ औऱ वही हुआ जिसका प्रियंका को डरर था,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;इस घटना के बाद वह समझ चुकी थी की यह एक इशारा है उस गिद्ध का जो ईश्वर की तरह आकर प्रियंका को पहले ही आने वाली घटना को बता जाता है,,,,ताकि वह किसी तरह इसे रोक ले, यह फिर कुछ उपाय कर सके,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;औऱ यह सिर्फ दो बार की बात नहीँ थी ......हर बड़ी घटना से पहले यह होना तय था...औऱ तीसरी बार भी ठीक उसी तरह वह गिद्ध उसी तरह प्रियंका के रसोई घर वाले खिड़की पर बैठा मिला....&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;लेकिन इस बार प्रियंका ने एक साधु से इस घटना का जिक्र किया था.....औऱ उस साधु महराज ने रातभर जाग कर महामिर्त्युनंजय मंत्र का जाप करते हुए हवन किया, जिसके बाद बड़ी बाधा तों टल चुकी थी मगर अंश मात्र की अब भी बाकी थी,,,,,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;कुछ चीजे ऐसी होती है जिसे थोड़े समय के लिए टाला तो जा सकता है, लेकिन रोक पाना असंभव होता है, आने वाला समय इसी का उदाहरण है |&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;दोष चाहे जिस पर भी लगे मगर समय अपना काम कर के जा चूका होता है, जैसे प्रियंका के पिता के जाने के दौरान हुआ था,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;प्रियंका ने अपने ईश्वर भक्त होने की ना जाने कितनी दुहाई दी थी,,,क्युकि वह किसी से भी इस घटना का जिक्र करेगी तों वे सब उसे ही डायन समझेंगे,,,की इसी ने सबकुछ किया है,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;मन औऱ आत्मा से हार मानते हुए गिद्ध देव की प्रियंका ने पूजा करनी सुरु कर दी, सायद किसी दिन उन्हें प्रियंका पर दया आ जाये औऱ भविष्य मे होने वाली इस तरह की घटनाओ को प्रियंका को पूर्वभास देना सायद वे बंद कर दे,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;या फिर प्रियंका इन घटनाओ को रोक पाने मे सक्षम बन सके, इस दौरान उन गिद्ध से उसकी दोस्ती हो गयी, जिस तरह प्रियंका उन्हें निहारती रहती वे भी प्रियंका के आते ही ऊपर नजर आने लगते,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;इस दौरान प्रियंका ने सोचा की सायद अब सब ठीक हो जायेगा..... औऱ वह उन्हें गरुड़ का दूसरा रूप मानकर कई सारी इच्छाएं भी जाहिर की, औऱ वे इच्छाएं अनचाहे तरिके से पुरी होती गयी,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;अब प्रियंका के अंदर एक भावना घर करने लगी,,,,,,, के इतने सारे महान औऱ अद्भुत शक्तियों से भरे ये गरुड़ देव अगर यहा रहते है तों इसकी भी कोई विशेष वजह होंगी.....&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;सायद भगवान विष्णु का निवास आस पास ही कहीं हो,,,,,,,,,, एक दिन अपने मन मे ये ख़ास सवाल लिए एक गिद्ध से पूछा ही लिया.....&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;की आपके अधिपती कहा निवास करते है?&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;औऱ वे हमेशा की तरह मुँह फेर कर आकाश की औऱ गमन कर गये......&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;उनकी स्वाभाविक मे रुखापन जोटा है,वे किसी को भी इतनी जल्दी स्वीकार नहीँ करते,,,,, पर मैंने अपना प्रश्न जारी रखा....... मुझे भी जानना था की ज़ब वे सब असीमशक्तियों को लिए यहां रहते है, तों उन्हें अपना वाहन बनाने वाले देव का भी कहीं पास मे ही आश्रय होगा !!!!!!!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;मैंने उनका पीछा नहीँ छोड़ा....औऱ हर दिन एक ही सवाल कियां?&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;मेरी इच्छा शक्ति से वे भी अब हार मान चुके थे,,,,,,,,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;इस दौरान मेरी एक इच्छा थी की कार्तिक माह मे श्री विष्णु को घर मे स्थापित करू......&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;पर कोई राह ही नजर नहीँ आ रहा था,,,,,घरवालो से इस बारे मे बात करने से बेवजह भड़क रहे थे, औऱ कार्तिक माह के बस कुछ ही दिन शेष बचे थे,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;मेरी भगवान श्री विष्णु के प्रति जन्मी आस्था बार बार एक ही बात पर आकर अटकी थी, बस उन्हें किसी तरह घर ले आऊ,,,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;पहले तों मेरी बात सुनने के लिए भी कोई तैयारी नहीँ था, इसलिए अंदर ही अंदर भावुक होने लगी,,, की यदी इस वर्ष नहीँ कर पायी तों घरवालों की चाह के अनुसार अगले वर्ष का लम्बा इंतजार करना होगा,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;पर मुझसे नहीँ हो सकेगा औऱ एक साल का इंतजार..... इसलिए अपनी बात को सबके सामने दोहराती ही जा रही थी, जिसपर सभी बुरी तरह से क्रोध मे आ चुके थे, एक सुबह सबने अपनी आखिरी राय बता ही दी की हम चाहते है की अगले वर्ष ही श्री विष्णु की स्थापना घर मे करे,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;ये बात सुनकर प्रियंका खुद को रोक नहीँ पायी,,,,औऱ फुट फुट कर रोने लगी..... वह एक दिन तक लगातार रोती रही,अगली सुबह अचानक उसे गिद्ध की आवाज खिड़की से आनी सुरु हो गयी, प्रियंका ने झाका तों सामने गिद्ध महराज प्रियंका को एकटक निहारते मिले,,,,,,,,उनकी पास कोई मांस का टुकड़ा नहीँ था,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;इसलिए प्रियंका को भय नहीँ ख़ुशी महसूस हुई,,,, गिद्ध के रूप मे वे स्वम् गरुड़ देव ही थे जिन्होंने प्रियंका के अंदर चल रही द्वन्द को समझा, प्रियंका के मन मे उस दौरान बस एक ही बात चल रही थी मेरी मनोकामना पुरी हो जाये तों मै उनकी हर रोज़ चरण धोकर पियूँगी....&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;आजकल के इंसानो से आप सारी बात खुलकर भी बता दे तों भी वे आप पर विस्वास करने से पहले 100 बार सोचते है, पर उन्होंने बिना मेरी कोई बात सुने जाने मेरे पास आकर मेरी मनोकामना पुरी कर दी,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;औऱ ना जाने कैसे कैसे मेरे घरवाले स्थापना के लिए तैयारी हो गये, औऱ शुभ मुहूर्त के अंदर ही उनकी स्थापना भी हो गयी, यह मेरे लिए कोई चमत्कार से कम नही था,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;एक भक्त के मन की बात सिर्फ भगवान ही जान सकते है,इंसान मे इतनी शक्ति कहा?&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;इस दौरान कार्तिक माह के पूर्णिमा के दिन भगवान श्री विष्णु ने स्वम् स्वप्न मे आकर प्रियंका को दर्शन दिये ,,,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;वह स्वप्न कुछ इस प्रकार था प्रियंका बताती है की ज़ब वह छत पर किसी काम से गयी...तों करीब 20 फुट ऊँचा कोई मनुष्य छत के किनारो पर चलता कोई मनुष्य दिखा, प्रियंका ज़ब नजदीक गई तों वह सामने आ खडे हुए,,,,,,,,,,,औऱ कहने लगे बड़ा मेरा पता पूछा करती थी देखो मै तों यही हु,,, कोई एक झलक देखकर ही बता दे की वे स्वम् श्री विष्णु जी थे.....औऱ मै तों उनकी भक्त हु तों उन्हें पहचानती कैसे नहीँ,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;पर मुझे सिर्फ एक बात का दुख रहा मैंने उनसे कुछ कहा नहीँ,पुरा समय सिर्फ उन्हें निहारती रह गयी.....तन पर सिर्फ सोंने के वजनदार गहने,,,,,निचे हल्की पीली धोतीनुमा वस्त्र पहने हुए थे,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;उनकी तं के जेवर हाथ पर बंधे सोने के बाजुबंध से उनका उनका शरीर दिब्य दिख रहा था, जिससे नजरें हटाना किसी के लिए नामुमकिन होता |&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;हमारी ये कहानी आपको कैसी ललगी कमैंट्स मे जरुर बताये, औऱ इसे शेयर करे,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;</description><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiIQOESTNHTOob_oCj76k0Gei7FIrCIdKPSu5UV4ev5vYlbbVXHiPA9eeJ57ClJZgIu4_xBas-oXIlIUbXRg3aEdkKdmOfXD53C_zZkdPXG9nnTNfNmtZzw72urFCppRf3DFRUtUXHxM7I/s72-c/1643457798788854-0.png" width="72"/><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>Aghori-ne-bataya-Kund-Ka-Rahasya : कुंड का रहस्य : परब्रह्म दिलाने वाला दिब्य कुंड </title><link>https://pawitrakhahaniya9.blogspot.com/2022/01/aghori-ne-bataya-kund-ka-rahasya.html</link><category>astha ki kahani</category><category>Daiwiy kahani</category><category>dharmik kahani</category><category>pawitr kahani</category><author>noreply@blogger.com (Pawitra kahaniya)</author><pubDate>Sat, 29 Jan 2022 17:32:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-6294846026234936559.post-7723083580594306556</guid><description>शहर के बीचोबीच एक गांव में स्थित कुंड के पीछे कई सारे रहस्य छुपे हुए थे, जिससे जानने के लिए कई लोगों के मन में स्कूल के करीब जाने के सवाल भी आते तो पीछे हट जाते हैं क्योंकि वह कोई मामूली कुंड नहीं था कहते हैं वहां एक ऐसा पत्थर है जो के पद में चिन्ह की शक्ल लिए है,&lt;div&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;
  &lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgXCo3LtvNw9KJmAYIdVBFSi-UKKXES8LiCDDYXrYlvFnM5uvNyFdGtg_jIFI5rurA9IobM-MgcRujnSKIDyXWMoAThfmIld-JOSeixWmQ9_RY6vwzzyA3wLIOkG7uU2R70HlFZEEHyoX4/s1600/1643457773951687-0.png" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;
    &lt;img border="0" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgXCo3LtvNw9KJmAYIdVBFSi-UKKXES8LiCDDYXrYlvFnM5uvNyFdGtg_jIFI5rurA9IobM-MgcRujnSKIDyXWMoAThfmIld-JOSeixWmQ9_RY6vwzzyA3wLIOkG7uU2R70HlFZEEHyoX4/s1600/1643457773951687-0.png" width="400"&gt;
  &lt;/a&gt;
&lt;/div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;और जो कोई भी उस पद में चीन को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करता, वहां जाने कहां से एक पीला नाग उपस्थित हो जाता,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;यह कुंड कई सदियों से जस का तस पड़ा है, हालांकि इसके आसपास का भवन पूरी तरह से जर्जर होने को है फिर भी इसका जीर्णोद्धार करने की वाला ऐसा कोई मनुष्य नहीं है, क्योंकि वह सभी उस कुंड के आसपास जाने से डरते हैं, जाने कौन अपराध हो जाए जिसे भगवान नाराज होकर हमें श्राप दे दे,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;इसके अतिरिक्त वहां कई साधुओं की मंडली देखी जाती है, कई सारे ऐसे मां सोते हैं जिसने अघोरी साधु वहां बैठकर तप करते हैं, और कुछ दिनों बाद वहां से अंतर्ध्यान हो जाते हैं, वह कहां जाते हैं इसका भी किसी को कुछ भी ज्ञात नहीं,ल&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;कहते हैं उस कुंड में अद्भुत शक्तियां छुपी हुई है, कुछ लोग यहां खजाने दबे होने की बात नहीं बताते हैं, पर सच क्या है यह कोई नहीं जानता,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;उसी शहर का रहने वाला एक युवक जिसका नाम मनीष है वह लगातार उस कुंड के आसपास कुछ ना कुछ करता दिखता है, उसके मन के इरादे वही जाने,,,पर लोगों ने उसे कई बार वहां से दूर रहने को कहा पर फिर भी वह वही मंडराता मिलता है,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;आखिर ऐसी क्या बात है जिसे जानने के लिए मनीष वहां पर बिना चक्कर लगाया करता था?&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;लोगों को तो मनीष बिल्कुल पागल सा दिखता था क्योंकि बार-बार मना करने के बावजूद वह वही कार्य कर्ता ,गाने शहर शहर शहर&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;एक बार की बात है गांव के ज्यादातर घर बंद थे पंचायत के अनुसार उन्हें दूसरे गांव में खाली पड़ी जमीन, खेती के लिए मुफ्त में बांटे जा रहे थे परंतु जो जो जमीन का सही उम्मीदवार होगा उन्हीं को वह जमीन मिलती लेकिन मुफ्त में&amp;nbsp; जमीन के लालच में ज्यादातर घर बंद करके सभी लोग दूसरे गांव पहुंचे हुए थे,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;और इधर मनीष ने मौका पाकर उस कुंड में प्रवेश कर लिया उस कुंड का पानी पूरी तरह से हरा हो चुका था, कुंड के पानी में शैवाल भरे पड़े थे,,,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;इधर गांव में 2 दिनों से मनीष को ना देखे जाने पर मनीष के घरवाले उसके दोस्त आसपास के लोग, सभी परेशान हो गए, सभी का अंदेशा था कि वह मौका पाकर उस कुंड मैं छलांग लगा चुका है, और इस अपमान के बदले भगवान ने उसके प्राण ले लिए हैं,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;वह कुंड गांव के ठीक बीचोबीच था इसलिए लोग वहां आसपास कई दिनों से डेरा जमाए बैठे रहे, बात गांव की रहस्यमई कुंड की थी और एक भले मानुष के प्राण की,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;4 दिन बीत चुके थे परंतु अभी भी मनीष का कोई अता पता नहीं था, कुछ लोग बाहर तो कुछ लोग कुंड के द्वार पर बैठे मनीष के वापस लौटने का इंतजार कर रहे थे,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;और जैसा कि ग्रामीण लोगों के मन में था ठीक वैसा ही हुआ, करीब रात के 2:00 बजे मनीष व कुंड से वापस लौटा, वह बुरी तरह से जख्मी था, और उसके आते ही सभी गांव वालों ने उसे घेर लिया, लेकिन मनीष किसी को एक शब्द बिना बोले वह अपने घर लौट आया,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;घर आकर वह अपनी किताब पूरी करने में लग गया, दरअसल मनीष पेशे से एक लेखक था, और अपने गांव के रहस्यमई कुंड के बारे में वह लिख रहा था, जिसके कारण हुआ हर छोटी बड़ी जानकारी लेने के लिए वह कुंड के आसपास मंडराता फिरता,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;परंतु मनीष के आस पास वाले यह बात से अनजान थे, वे तो यही समझते कि मनीष किसी मानसिक रोग का शिकार हो गया है,,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;करीब 2 महीने बाद मनीष के लिखे हुए किताब का प्रकाशन हुआ, इस किताब में मनीष में वे सारे अनुभव व सारी जानकारी लिखे थे जो उसने 4 रातो तक उस कुंड में रहकर प्राप्त किए थे,,,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;मनीष के मित्र ने जब या पुस्तक खरीद कर पढ़ना शुरू किया,,,, इस प्रकार था&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;मैंने जब उस कुंड में छलांग लगाया मुझे लगा था वह मात्र एक कुंवे जैसा होगा ,,,, लेकिन मेरे मन में संकाय अनेक थी जिसे दूर करने के लिए मैं किसी भी हद तक जा सकता था,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;वह कुंड कागि गहरा था.....एक सामान्य कुवें से कही अधिक, फिर वह पानी बिल्कुल सड चूका था जिसकारण दुर्गन्ध के मारे मेरे प्रणाम निकलने ही वाले थे की कुंवे के एक भाग से से रौशनी आती दिखी,,,,मै पुरी तैयारी के साथ गया था,,,इसलिए पानी के अंदर ज्यादा दिक्क़त नहीँ हुई,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;कुंवे के एक भाग से रौशनी आता देख मै उस तरफ बाढ़ गया जंहा पाया की वह भाग आगे जाकर खुला हुआ था,मतलब ये की उस कुंवे मे एक गुप्त रास्ता था जो अंदर किसी कोष का द्वार रहा हो,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;पुराने ज़माने मे किले के निचे छुपने के स्थान बनाये जाते थे,ठीक यह स्थान वैसा ही था......पर उस स्थान पर मै अकेला नहीँ था, कई सारे अघोरी तांत्रिक उसके अंदर बैठे मिले,,,बात बड़ी अजीब थी, पर वह स्थान कुछ ऐसा था की खत्म होने का नां ही नहीँ ले रहा था,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;मै लगातार आगे बढ़ता गया.....कभी बड़ी टोकभी सकरे रास्ते मैंने देखे.....जो किसी दूसरे स्थान को इस स्थान से सीधा जोड़ रहे थे,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;वहां कुछ ऐसे रास्ते भी थे जो बस लोगो को चकमा देने के लिए बने थे,जहाँ मै भी कई बार फ़स गया, डरर लग कहीं मै यही ना मर्जी जाऊ पर मुझे इस जगह के बारे मे बताना था,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;औऱ निडरता के साथ आगे बढ़ता रहा, उस जवह को देख मन मे यही आ रहा था की बगैर किसी आधुनिक वैज्ञानिक के हमारे पूर्वजो ने इतने गूढ तरिके से इस स्थान को बनाया होगा,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;कई दिनों से भूखा प्यासा मै रात को उस जगह से आगे बढ़ने की हिम्मत नहीँ कर पाया,,, जंहा कई प्राणियों के अवशेष पढ़े थे, ये नऱ कंकाल जाने किस खोज मे इधर आए होंगे पर जो भी है रहस्य बड़ा था, उस स्थान से आगे बढ़ने पर सामने काले पानी से भरा एक तालाब मिला, जिसे पार करना खतरनाक हो सकता था, क्युकि जहरीले साँप औऱ बिच्छूवे तों वहां भरे पड़े थे, मै आगे जाकर औऱ भी रहस्यों को उजागर करना चाह रहा था, मगर मेरी हिम्मत अब जवाब दे रही थी,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;वहां जाकर मुझे ऐसा प्रतीत हुआ जैसे कई रहस्य इस कुंड मे दबे पड़े है,,, जो काफी बड़ा हो सकता है, किसी खजाने की तरह,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;वापस लौटते वक्त उन साधुओ ने मुझे बुरा इंसान समझ कर बुरी तरह से पिट डाला, जाने अपने शब्दों मे वे क्या केह रहे थे, थोड़ी देर बाद ज़ब उन्हें यकीन हुआ की मै कोई बुरा इंसान नहीँ हु तों उन्मे से एक अघोरी ने मुजगे एक संतरा खाने को दिया,मैंने पूछा आपको ये संतरा यहां कहा मिला...तों वह अघोरी मुझे एक छोटे से पथरीले रास्तो से मुझे वहां से बाहर की औऱ ले गया, वह बाहर का स्थान एक पहाड़ी क्षेत्र था,, जिसका रास्ता बिल्कुल ऊपर की तरफ खुल रहा था,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;तीन दिनों के बाद मैंने हवा औऱ सूर्य की रौशनी देखी....जो एक सुखद एहसास था, उसी समय मैंने उस अघोरी से पूछा लिया आप लोग यहां क्या कर रहे हो? खजाने की तलाश मे आये हो क्या?&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;उन्होंने अपने कान पर हैयह रखते हुए भगवान शंकर का नां उच्चारण करने लगे........शंभू शंभू!!!&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;मैंने पूछा.....फिर, तों उस अघोरी ने बताया की यह स्थान इस लोक का ब्रह्मास्थान है,,,,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;" ब्राम्हस्थान मतलब " मैंने पूछा&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;तों अघोरी ने बताया की जैसे हमारे शरीर मे हमारी नाभि ब्रह्मास्थान या केंद्र होता है, ठीक वैसे ही इस स्थान से हम अपने शरीर के कई बीमारियों को दूर कर सकते है,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;उसी तरह इस लोक के ब्रह्मास्थान पर सीधा अंतरिक्ष से किरणे आती है जिसे ग्रहण करने वाला मनुष्य असाधारण मनुष्यों मे शुमार हो जाता है, हम उन्ही किरणों को अवशोषित करते है, यह तप करने से ज्यादा सरल है,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;"इसे ग्रहण करने से क्या होता है " मैंने पूछा&lt;/div&gt;&lt;div&gt;तब अघोरी ने बताया की " अघोरी बनने के बाद हमारे जीवन का मुख्य उद्देश्य रहता है पारब्रह्म मे लीन हो जाना, अर्थात जीतेजी मोक्ष को प्राप्त हो जाना,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;औऱ ज़ब यह होता है तों हमें हमारे शरीर की जरूरत नहीँ होती,,,,हम दिब्य किरणों मे रूपांतरीत हो जाते है,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;मैंने पूछा " वहां कुछ नरकंकाल वहां पड़े है वे किनके है,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;उसने बताया हमसे पहले आने वाले हमारे गुरुजनो के जिन्होंने पारब्रह्म को पाया था,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;इनसब बातो से मै बुरी तरह डरर गया,,,लेकिन उसने मुझे समझाया की यह बात डरने वाली नहीँ है बल्कि खुश होने वाली है,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;मैंने पूछा " कैसे?"&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;अघोरी ने बताया की अगर कोई दुख मे होता है औऱ ईश्वर को पुकारता है तों क्या सच मे ईश्वर उसके समक्ष उपस्थित हो जाते है क्या?&lt;/div&gt;&lt;div&gt;नहीँ ना.......लेकिन उस ब्यक्ति के कार्य पुरे अथवा सफल हो जाता है क्युकि आकाश मे मौजूद वे किरणे जो परब्रह्म प्राप्त कर चुके होते है, वे ईश्वर की शक्ल मे कार्य करते है,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;औऱ जिसका श्रेय ईश्वर को जाता है, एक तरह से हम अपने आप को ईश्वर को समर्पित करते है, जैसे कोई सैनिक देश के लिए समर्पित होता है ठीक वैसे ही,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;अब मुझे उनकी बात समझ आ चुकी थी, औऱ साधु जीवन का उद्देश्य भी, मुझे ख़ुशी हुई की मै उनसे मिलकर ये सब जान सका,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;औऱ जिस कुंड को हमारे गाँव वाले भूतिया औऱ ना जाने क्या क्या समझ रहे थे, उसका रहस्य भी मै समझ गया, मैंने उनसे बिदा लेकर वापस लौटते समय अपने आप मे एक दिब्य अनुभूति महसूस की,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;जिसके बाद मै अपने जीवन मे कभी नहीँ रुका, औऱ निरंतर मुलाक़ात उदेस्यो पर कार्य करता रहा,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;धन्यवाद,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;इस कहानी को पढ़ने के बाद मनीष के दोस्त ने मित्र की पुस्तक पुरे गाँव वालो को दिखाया,जिससे उस कुंड के बारे मे लोग जागरूक हुए, औऱ वहां आना जाना आरम्भ कर चुके थे,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;उम्मींद करती हु मेरी आज की कहानी आपको अच्छी लगी होंगी, कृपया इसे शेयर करे, कमेंट के माध्यम से इस पर अपनी राय भी अवश्य दे,&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;</description><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgXCo3LtvNw9KJmAYIdVBFSi-UKKXES8LiCDDYXrYlvFnM5uvNyFdGtg_jIFI5rurA9IobM-MgcRujnSKIDyXWMoAThfmIld-JOSeixWmQ9_RY6vwzzyA3wLIOkG7uU2R70HlFZEEHyoX4/s72-c/1643457773951687-0.png" width="72"/><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>kalyug-ka-Teesra-Roop : कलयुग का तीसरा औऱ खतरनाक रूप </title><link>https://pawitrakhahaniya9.blogspot.com/2022/01/kalyug-ka-teesra-roop.html</link><category>horror kahani</category><category>prernadayak kahani</category><category>rhsymayi kahani</category><author>noreply@blogger.com (Pawitra kahaniya)</author><pubDate>Sat, 29 Jan 2022 17:31:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-6294846026234936559.post-5305162835961706632</guid><description>आँखों के सामने आये अचानक एक दृश्य से बाबा बैजनाथ कुछ परेशान से दिख रहे थे, शिष्यों ने उनसे पूछने की कोशिश भी की पर उन्होंने कुछ बताना जरुरी नहीँ समझा,,,,,,&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;भला ये नाजुक से शिष्य उस डरावने मंजर को देख क्या समझ पाएंगे....&amp;nbsp; &amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;
  &lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhTbag5nlcW-2rhlS5AwpjKmXFsIL9DUtnteUtEnG_zQ3EHV7tmCP8IvGTBCNhqbZxijWsf2Y7EVHyKJcug6h99EvgNsqVosVfX_KEy7CEBWtYjbwmROq8pSVsqQbljbx2YJFRggkwfG2A/s1600/1643457706036502-0.png" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;
    &lt;img border="0"   src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhTbag5nlcW-2rhlS5AwpjKmXFsIL9DUtnteUtEnG_zQ3EHV7tmCP8IvGTBCNhqbZxijWsf2Y7EVHyKJcug6h99EvgNsqVosVfX_KEy7CEBWtYjbwmROq8pSVsqQbljbx2YJFRggkwfG2A/s1600/1643457706036502-0.png" width="400"&gt;
  &lt;/a&gt;
&lt;/div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;बात बेचैन करने वाली तों थी....आखिर बात थी ही कुछ ऐसी......जिस तरह संसार मे अच्छी शक्तिया परस्पर एक दूसरे को जोड़कर बड़ी शक्तिया बनकर सामने अति है,वैसे ही बुरी शक्तिया भी अपने जैसो को ढूंढ़ कर विकरालरूप धारण करने की कोशिश मे लगी रहती है, ताकि वह राज कर सके उस प्राणी जगत पर जंहा सब कुछ दृष्टि की मदद से साक्षात्&lt;/div&gt;&lt;div&gt;प्राप्त हो जाता है,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;बाबाजी बैजनाथ ने भी हजारों सालो से कैद उस बुरी शक्ति के पुनः जागृत होने औऱ कहीं भूल से प्राणी जगत पऱ हावी होने को लेकर चिंता&amp;nbsp; ब्यक्त की है,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;जिसप्रकार अच्छाई का वास है, उसी प्रकार अँधेरे मे बुराई भी निवास करती है, परन्तु हमारे अंदर की ऊर्जा इतनी शक्ति शाली नहीँ होती की हम उन अच्छी या बुरी शक्तियों को खुली आँखों से देख पाए,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;पर कोई ऐसा जरुरत होता है जिसे अच्छी बुरी चीजों का आभास हो जाता है, जैसे बाबाजी बैजनाथ को हुआ था...... विकराल भयँकर पथरो की बेड़िया डाले,,,,,,,,मुंडमाल पहने वह राक्षस इसी लोक के गर्भ मे वास कर रहा है,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;किसी भी तरह की लापरवाही जो उस तक होकर जाती है.......अगर वह हो गयी तों अनजाने मे वह रिहा हो जायेगा, फिर वह लोगो की नियति से खिलवाड़ करेगा,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;यही भय से बाबाजी कभी नहीँ चाहते की वह दैत्य वहां से कभी छूटे,,,,,,,,,,&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;पृथ्वी पर धर्म की स्थापना को लेकर सजग रहने वाले बाबाजी बैजनाथ अकाशिये ऊर्जा का रूपनांतरण करना आरम्भ कर चुके है,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;इस ऊर्जा की मदद से आने वाली पीढ़ियों मे त्रेतायुग वाले गुण देखने को मिल सकते है, परन्तु उसके लिए वह ऐसे किसी भी चीज को बढ़ावा देने से परहेज कर रहे है, जो नकारत्मक शक्तियों से जुडा हो,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;औऱ यही उनकी भय का मुख्य कारन बना हुआ है की अगर वह अधर्मी स्वतंत्रता प्राप्त कर लेता है तों.......... वह पुनः अंधकारमय भविष्य लाने की कोशिश मे लग जायेगा.....जो की कलयुग का तीसरा रूप कहला सकता है ,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;कलयुग का पहला रूप,,,लूट,पाट,चोरी,डकैती,रेप, औऱ बाकी सारी चीजे तों संसार मे चल ही रही थी, पर फिर भी लोगो मे इंसानियत देखने को मिक्ति थी&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;दूसरा तों हम देख ही रहे है, किस तरह बीमारियों के आधीन होकर लोगो को तड़पता छोड़ अपनी अपनी जान बचाने मे लगे पड़े है, कलयुग का तीसरा रूप विन्ध्यवन्सक होगा, यह रूप एकदूसरे को खत्म करने के लिए काम करेगा......जो की मानवता के लिए हथियार प्रहार समान होगा,,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;इससे पहले की यह तीसरा रूप एक दूसरे को विरोधी बनाकर मरने मारने को तूल जाये, उस वजह को ही नष्ट कर दिया जाना चाहिए जो इसकी असल फसाद है..........&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;औऱ यह तभी मुमकिन है ज़ब हम अपने अंदर ऐसे गुणों को बिकसित ना करके अच्छे गुणों को बिकसित करे,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;बाबाजी बैजनाथ आने वाले उस काल से डर रहे है जो लोगो को एक दूसरे के जान का दुश्मन बना देगा,,,,,,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;एक समय बाद हर चीज के लिए छिना छपटी करने को आतुर रहेंगे लोग...किसी ने अपने मुँह से एक अपशब्द निकाल दिए तों उसे हमेशा के लिए खत्म करने की साहस लेकर घूमते नजर आएंगे ये लोग........&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;समय जैसे जैसे बीतेगा....राक्षसी प्रविर्ति जागृत होने लगेगी........चीजों के अभाव मे,लोगो की कड़वाहट शिखर पर होंगी,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;इसे नष्ट ना किया गया तों एक दूसरे को मारते काटते दिखेंगे सभी,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;औऱ तब मानवता की सबसे बड़ी हार होंगी,,इसलिए बाबाजी इस दैत्य रूपी कलयुग के तीसरे रूप को हमेशा के लिए खत्म कर देना चाहते है,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;</description><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhTbag5nlcW-2rhlS5AwpjKmXFsIL9DUtnteUtEnG_zQ3EHV7tmCP8IvGTBCNhqbZxijWsf2Y7EVHyKJcug6h99EvgNsqVosVfX_KEy7CEBWtYjbwmROq8pSVsqQbljbx2YJFRggkwfG2A/s72-c/1643457706036502-0.png" width="72"/><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>राजा का सम्राज्य और नीले जल की जलपरी </title><link>https://pawitrakhahaniya9.blogspot.com/2022/01/Nile-Jal-Ki-Jalpari-aur-Raja-ka-samrajy.html</link><category>जलपरी की कहानी</category><category>जादुई कहानी</category><category>समाजिक कहानी</category><author>noreply@blogger.com (Pawitra kahaniya)</author><pubDate>Sun, 9 Jan 2022 07:50:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-6294846026234936559.post-5580798789256852320</guid><description>&lt;span style="font-size: large;"&gt;पुरानी मान्यताओं को जिन्दा रखने वाले अभी भी कई गाँव ऐसे है जो भले दुनिया के किसी कोने में क्यूँ ना हो वहां के ब्यक्ति कहीं भी बसने के बाद भी अपनी मुलाक़ात संस्कृति नहीँ छोड़ते......&lt;/span&gt;&lt;div&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;
  &lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiUzp98zQVbLh5rQ7hB2tiKMoQ29Z6VLM7pXIlBssXKxuNuKZXlWzGMje8oVcdDjBOuYAk-Ovjv-I0PRaC_yS_KxoUl-RjwrqE_CbQmVA5KNjopTBU_1MBuzGQkqFX9M36QxUyu_BODToI/s1600/1641694822118146-0.png" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;
    &lt;img alt="नीले जल की जलपरी और राजा का सम्राज्य," border="0" height="249" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiUzp98zQVbLh5rQ7hB2tiKMoQ29Z6VLM7pXIlBssXKxuNuKZXlWzGMje8oVcdDjBOuYAk-Ovjv-I0PRaC_yS_KxoUl-RjwrqE_CbQmVA5KNjopTBU_1MBuzGQkqFX9M36QxUyu_BODToI/w400-h249/1641694822118146-0.png" title="नीले जल की जलपरी और राजा का सम्राज्य" width="400"&gt;
  &lt;/a&gt;
&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;येlकहानी दीपू की है जो एक टापू नुमा जगह पर रहता था, सायद भुत काल में वह आदिवासी ही रहा होगा, मगर अब वहां के लोग आम जिंदगी जी रहे है क्युकि उस टापू को मेन शहर से जोड़कर वहां के रहने वालो को लिए शहर की सारी सुविधाएं खोल दि गयी है,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;और समय बीतता रहा, पहनावे से वहां के लोग भी शहरी द्खखने लगे, शहर जाकर बच्चे पढ़ने लिखने लगे, और कइयों को तों अच्छी नौकरिया भी मिल चुकी है, जिससे धीरे धीरे ही सही पर टापू का नक्शा बदल रहा है, उस टापूपर स्थित गाँव का नाम शीतला था,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;यहां के लोग बोली चली से बिल्कुल सीधे साधे है, और पुरानी मान्यताओ के अनुसार यहां समुन्द्र में रहने वाली एक जलपरी की सालाना पूजा करने की जाती है,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;यह जलपरी इनलोगो पर अपना आशीर्वाद रखती है, कहते है की किसी ने उस जलपरी को कभी देखा तों नहीँ पर वह देवी की तरह सबके सपनो में आकर उसके मन के सारे तकलीफो को दूर क़र देती है, इस जलपरी का नाम नीले जल की जलपरी बताया था लोगो ने,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;उन्ही में से एक दीपू भी गाँव का रहनेवाला है, परर अब वह पुरी तरह से शहरी बन चूका है, शहर में जाकर पढ़ाई और नौकरी पाने के बाद उसके बाहरी और अंदर के हुलिए में काफी बदलाव आया है,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;दीपू बचपन से ही उस जलपरी को अपने सपनो में देखता था,,, सायद उस जलपरी का दीपू पर खाश आशीर्वाद प्राप्त था, तभी उसकी मार्ग के हर बाधा को जलपरी ने देवी बनकर दूर किये थे,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;दीपू को फोटोग्राफी का शौख था, वह ज़ब भी अपने गाँव आता, आस पास&amp;nbsp; के फोटो लेकर शहर में अपने दोस्तों को दिखाता, वे भी उस टापू की सुंदरता को देख मन्त्रमुग्ध हो जाते,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;दीपू फिलहाल 10 दिनों के लिए गाँव आया हुआ था, उसे घर के किसी अपने कक शादी अटेंड करनी थी, इसलिए उसके साथ दो दोस्त भी आये थे,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;इस समारोह के बिच ज़ब दोस्तों को समय मिलता वे आसपास के प्राकृतिक नजारो को देखने में मस्त हो जाते, इस बिच शादी भी हो गयी और अगली सुबह वे शहर की और निकलने वाले थे,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;आज उन्होंने निश्चय किया सबसे सुंदर जगह जाकर तस्वीरे लेंगे, इसके लिए उन्होंने पास के ही एक छोटे से आईलैंड जो की बस नाम का आईलैंड था, वहां एक बड़ी चट्टन और थोड़े भुत घास और झाड़ियों के शिवा कुछ भी नहीँ था, वहां जाकर समुन्द्र के सुंदर नजारे और फोटो लेनी थी उन्हें........ वहां पहुंचकर उन्होंने थोड़ी मछलिया पकड़ी और अगर पर सेक क़र खाने लगे,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;इसी बिच दीपू ने उन्हें उस ख़ास जलपरी देवी की कहानी सुनाई.. और बताया की उसके सपने मुझे हमेशा आते है, मै उन्हें देखकर अपनी सारी परेशानी भूल जाता हु, वे खामोश बड़ी उत्सुकता से दीपू की बात सुन रहे थे,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;थोड़ी देर बाद सभी इधर उधर की तस्वीरें लेने में जुट गया,,,,,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;अचानक उनकी कैमरे में उन्हें कुछ विचित्र दिखा..... ये क्या था उन्हें भी समझ नहीँ आया, पर दोनों दोस्तों को आशंका थी की उसने जलपरी को देखा था, ज़ब ये बात दीपू से कहीं तों वह चौक गया...... और कहने लगा काश मै भी देख पता,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;थोड़ी देर बाद सुनहरे पोशाक पहनी एक लड़की उनकी सामने आई, वह बिल्कुल आम लग रही थी, उसने अपना नाम सीयल बताया, सभी उस लड़की को देखकर खुश हो रहे थे,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;उनके ग्रुप में जान आ गयी थी, अब बोरियत बिल्कुल महसूस नहीँ हो रही थी, बातो ही बातो में लड़की ने कइ सारे ऐसे बातो का जिक्र किया जो उनकी निजी जिंदगी की मुसकील बनी हुई थी,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;उसे सुलझाने का उसने रास्ता भी दिखाया,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;उस जलपरी ने बताया की यहां के लोगो में से किसीने ने उसकी जान बचाई थी, जिसके कारन वह जलपरी उस टापू के लोगो की सहायक बन गयी, और हमेशा उनकी रक्षा करती है,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;जलपरी के साथ उनका साथी भी साथ रहता है, मगर लोगो में ज्यादा चर्चाये सिर्फ जलप्रफियों को लेकर होती है,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;ज़ब सभी ने पूछा की वो दिखती क्यूँ नहीँ है, और दिख भी गयी तों हम इंसानों से भागते क्यूँ है, वो लड़की ने कहा " इंसानों को जलिए जीव का स्वाद लेने की बुरी बीमारी है, वो उन्हें भी ना खाले इसलिए वे उनसे बचकर रहते है,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;लड़की नई थी साथ ही अंजान पर दीपू और बाकियो को लगा की सायद वह टापू की ही सदस्य है, तभी उसे इतना ज्ञात है,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;अंत में दीपू ने अपने सपनो के बारे में बताया तों लड़की ने कहा " वो तुम्हे किसी खाश बात बताना चाहती होंगी तभी वो तुमसे जुडी है " अब अंधेरा होने को था और अचानक शाम होते ही शीयला कहीं गुम हो गयी,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;फिर वे भी अपने टापू को लौट आये, और अगली सुबह शहर को चल दिए,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;सभी खुश लग रहे थे शिवाय दीपू के,,,,,,,,, उसके दिमाग़ में शियला की बातें घूम रही थी..... आखिर वह कौन सी बात है जो जलपरी देवी पुरे गाँव में सिर्फ मुझे बताना चाह रही थी,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;इसके अगले कई सालो तक वह लगातार शहर में काम में लगा रहा... लेकिन उसके सपने आने बंद ना हुए, सपने में उसे सुनहरी जलपरी पानी के अंदर तैरती..... लहरती दिखती,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;और वह प्रश्न दिमाग़ में फिर ताज़ा हो जाते....&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;क़ल दीपू को किसी खाश काम से अपने गाँव जाना है..... उसने ये भी सोच रखा है की इस बार मै पवित्र नदी जहाँ जलपरी रहती है, वहां जरुर जाऊंगा.....&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;और वह गाँव पहुंचकर अपने काम को निपटाने के बाद उस नदी के निकट पहुंचा, नदी में पानी की धार तेज थी.... और झरझर की आवाज के साथ वह बहती जा रही थी.....&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;दीपू याद करने लगा क्या मुझे सपने में यही नदी दिखती थी...... दिमाग़ से जवाब आया " हाँ "&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;दीपू समझ चूका था इसके पीछे कोई ना कोई रहस्य जरुर है, उसने रुक क़र जलपरी को याद किया....... और मन ही मन पुकारने लगा...&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;पर वहां उसे कोई जलपरी नहीँ दिखाई दि.....&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;वह निराश लौट आया... और अगली सुबह फिर उस नदी की और निकल पड़ा, ऐसा कई दिन किये जाए के बाद कोई परिणाम नहीँ निकला, अब उसने शहर जाने की सोची...&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;जाने से पहले उसे उसके घर के समान भी लेकर जाने थे क्युकि वहां के सभी लोग अब शहर में शिफ्ट हो चुके थे, इसलिए उसे चार पांच खाश चीजे साथ ले जानी थी, उसमे एक जंग लगी तलवार भी थी........&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;ये तलवार देखने से काफी पुरानी लग रही थी, उसके पकड़ने के स्थान पर दो साँप की तरह आकृति बनी हुई थी, दिपु एक पल देखकर चौक गया, भला ये तलवार हमारे घर में क्या क़र रहा है, यह तों किसी योद्धा का तलवार दिख रहा है,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;उसने फोन क़र अपने बूढ़े दादाजी से तलवार के बिषय में बात की, और उसकी कहनी पूछी.... उसे दादाजी ने बताया की यह तलवार उनकी मीत्र का था,,,,,,, जिसने जलपरी की जान बचाई थी और उसका मीत्र उस युद्ध में मारा जा चूका था, लेकिन अपनी तलवार की हिफाजत के लिए उसने मुझे चुना, इस तलवार के जरिये वह मेरे साथ ही रहा हमेशा,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;और इस तलवार पर अभी भी उसके रक्त लगे है, ज़ब आखिरी समय में वह घायल युद्ध में जलपरी के लिये लड़ा था,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;दीपू यह कहानी सुनकर भावुक हो गया, उसे लगा तलवार घर में होने के कारण जलपरी मुझे दिखती है,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;फिरभी एक आखिरी कोशिश के लिए वह जलपरी नदी के किनारो पर उस तलवार के साथ गया...... और अचानक उसके हाथ से तलवार छुट क़र नदी में जा गिरी,,,,,,,,,,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;तलवार में लगा रक्त नदी में घुल गया....... इससे पहले की दीपू कुछ समझ पाता........ चमकीली तेज रौशनी की चकाचोँद्ध से उसकी आंखे खुद बंद हो गयी.........&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;और कुछ क्षण बाद ज़ब उसने अपनी आंखे खोली तों उसके सामने सुनहरी जलपरी अपने आँखों में आंसू भरे ख़डी थी.............&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;दीपू की आंख उसकी रेशमी किरणो से बंद हो रही थी....... फ़िरभी वह जलपरी को देखने की ललक लिए आंखे खोले खड़ा था, दीपू ने पाया की यह वही जलपरी है जो हर पल मेरे सपने में अति थी, और उसकी पूँछ के तरफ़ का रंग हल्का नीला था....&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;जलपरी के हाथो में तलवार देख दीपू बोल पड़ा....... ये तलवार पानी में गिर गयी थी, आपके पास कैसे?&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;जलपरी धीमे स्वर में बोली " तुम्हे याद नहीँ ये तुम्हारी ही तलवार है,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;दीपू "नहीँ ये तों मेरे दादाजी के मीत्र की तलवार थी जो युद्ध में मारे गये "&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;जलपरी " हाँ पर तुम वही हो राजा द्धीर "&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;क्या? दीपू&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;फिर दीपू ने बताया की मुझे सपने में आप बचपन से दिखती थी,,,,,, इसके पीछे क्या रहस्य है?&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;जलपरी " रहस्य है, तुम्हारा साम्राज्य, तुम्हारा अपार खजाना जो अभी भी इस नदी के भीतर सुरक्षित है, मैने 59 सालो से इसकी रक्षा की है, पर अब तुम्हे इसे संभालना होगा "&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;दीपू " ये सब सुन ऐसा महसूस क़र रहा था जैसे ये सारी बातें उसके दिमाग़ के ऊपर से जा रही हो, क्युकि उसे कुछ भी याद नहीँ था सिवाय उसके सपनो के,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;मन ही मन वो ये सोच रहा था की सच में उन सपनो से मेरा ऐसा गहरा नाता इनसब की वजह से था........&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;दीपू ने जलपरी से कहा " देवी आप जो केह रही है वो स्त्य ही होगा, मगर मुझे कुछ भी याद नहीँ, कौन सा साम्राज्य और कौन सा खजाना.......&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;जलपरी ने दीपू के हाथो में अपने हाथ रखे..... और एक शब्द कहते ही दीपू की पुरानी सारी बीती बातें उसके डोमग में घूमने लगे.......... दीपू के अंदर वे सारी जानकारी और शक्ति आ चुकी थी जो उसके पूर्व जन्म में उसके साथ था,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;
  &lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiDf1H4VZnuNPGwA6iIEeyjDPOdctiwcTaAxQewTfbDYZgfgGMURloTB_cx5C4eqxRFIuBBitOocHgevj-3l2EDgCDdraHbswSRbcpEhO8T5znxJpQ_iHl1qdFb__Q9rrnlTdo7NjyYQWA/s1600/1641694816308453-1.png" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;
    &lt;img border="0" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiDf1H4VZnuNPGwA6iIEeyjDPOdctiwcTaAxQewTfbDYZgfgGMURloTB_cx5C4eqxRFIuBBitOocHgevj-3l2EDgCDdraHbswSRbcpEhO8T5znxJpQ_iHl1qdFb__Q9rrnlTdo7NjyYQWA/s1600/1641694816308453-1.png" width="400"&gt;
  &lt;/a&gt;
&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;अब आंखे खोलने पर वह जलपरी उसे अंजान नहीँ लगी.......... उसे सब याद आ चूका था की यह जलपरी उसके सम्राज्य की अनमोल धरोहर थी... जो की नीले पानी वाले नदी में रहती थी, पर ज़ब जलपरी की शक्तियों का पता अन्य दुश्मन लोगो को चला तों उसे पाने के लिए राजा धीर के किले पर हमला क़र दिया, और घायल पड़े राजा ने जलपरी और अपने बेशकीमती खजाने को को इस स्थान पर लाकर अलविदा केह गये,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;मरने से पूर्व उन्होंने अपने मित्र को तलवार सौप क़र ये कहा था की मै जल्द ही लौटूंगा........&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;और वे दीपू के रूप में आ गये, अब उन्हें अपना खजाना निकालना होगा, और उसकी मदद से अपना साम्राज्य वापस लेना होगा,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&amp;nbsp;जलपरी की बातों पर अब उसे पूरी तरह से विश्वास हो चुका था क्योंकि उसे पूर्व जन्म की सारी किस से याद आ चुके थे, दीपू अफजल अपना सब कुछ पाना चाहता था इसलिए वाह&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;दीपू अब अपने किले के निकट पहुंचा, यह किला राजघराने का सबसे आलीशान खेला था, ओरिया किला कई सौ एकड़ जमीन में&amp;nbsp; बनाया गया था,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&amp;nbsp;जब दीपू जिले के निकट पहुंचा तो उसने देखा, सामने एक खुला मैदान है और उस के बीचो बीच लंबी मीनारों से भरी खूबसूरती और नकाशी का बेहतरीन कारीगरी से संपन्न यह किला आज बेरंग खड़ा था,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&amp;nbsp;दीपू भूतपूर्व का यह दृश्य देखकर उसे समझ आ चुका था पहले और अब में इस किले में क्या अंतर था, ना तो इसकी शान और शौकत पहले जैसी रहे नहीं यहां लोगों का हुजूम दिखा,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&amp;nbsp;आसपास के लोगों से पूछने पर पता चला या किला किसी तंत्र मंत्र करने वाले शक्तिशाली इंसान के कब्जे में है, इस किले के अंदर वह सारे गलत कार्य हो किए जाते हैं जोकि अमानवीय है,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&amp;nbsp;राजा धीर की सत्ता हड़पने के बाद औरतों का शोषण, जनता पर अन्याय, जंगली पशुवो की हत्या, और काले जादू के लिए उनका किला विख्यात है, इसलिए उस किले से अब लोग को से दूर रहते हैं,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&amp;nbsp;दीपू को सम्राज्य के साथ उसके लिए उसका मान भी वापस लौटाना था, जिसके लिए सबसे पहले वह जलपरी के साथ नदी के उस छोड़ पर गया जंहा उसका खजाना दबा हुआ था,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;खजाने को निकालने पर दिलु को अनुभव हुआ की ये खजाने का मात्र आधा हिस्सा था, आधा हिस्सा उसने अपनी पत्नी के मायके वाले स्थान पर गाड़ा था, सायद वह अब उसे नहीँ मिल सकेंगे किन्तु ये धन भी उसके बहोत सारे काम में उसकी मदद क़र सकते है,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;सबसे पहले दीपू ने अपनी एक सेना तैयार की और उसे गुप्तचर की तरह उस किले में दाखिल करवा दिया, उसे सभी गुप्तचर छोटी बड़ी जानकारी देते रहते, और कई घिनौने कृत्य का प्रदाफाश भी हुआ,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;दीपू ने एक खाश प्लान बनाकर जलपरी की अदृश्य शक्तियों के मदद से किले के अंदर के घुसपैठियों का खतमा क़र किले पर अपना अधिकार क़र इसे पुनः पा लिया..... और धहीरे धीरे उस राज्य की खुशियाँ भी लौट आई....&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;जलपरी को पुनः नीले जल में स्थान दिया गया, और इस तरह से कहानी समाप्त हो गयी&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;/div&gt;&lt;h3 style="text-align: left;"&gt;&lt;span style="font-size: x-large;"&gt;शिक्षा:-&lt;/span&gt;&lt;/h3&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: x-large;"&gt;हम चाहे जितना अपनी भूतकाल और भविष्य काल से भाग ले पर हमें हमारी वास्तविक पहचान अंततः इन्ही में छुपा होता है&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;</description><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiUzp98zQVbLh5rQ7hB2tiKMoQ29Z6VLM7pXIlBssXKxuNuKZXlWzGMje8oVcdDjBOuYAk-Ovjv-I0PRaC_yS_KxoUl-RjwrqE_CbQmVA5KNjopTBU_1MBuzGQkqFX9M36QxUyu_BODToI/s72-w400-h249-c/1641694822118146-0.png" width="72"/><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>देवत्व का आगमन </title><link>https://pawitrakhahaniya9.blogspot.com/2021/12/Dewatw-ka-aagman.html</link><category>धर्म कर्म की कहानी</category><category>धार्मिक कहानी</category><category>मन्और भगवान की कहानी</category><author>noreply@blogger.com (Pawitra kahaniya)</author><pubDate>Thu, 23 Dec 2021 17:21:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-6294846026234936559.post-4034180099284566693</guid><description>&lt;span style="font-size: large;"&gt;बड़ी उत्सुकता रहती थी मुझे धर्म कर्म में, लेकिन  देखा सबके घर में मन्दिर है पर मेरे घर में किसी ने मन्दिर बनवाना जरुरी ही नहीँ समझा, बड़ी निराशा होती थी, जाने सब कैसे रह लेते है बगैर पूजा पाठ किये,&lt;/span&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;div&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;
  &lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEig2TUuMU1DpHm_DnVOK1KsWfgQKWpE54ZFxalAGShfSL-LX8KpIk9QDIOkkyBOSOweO9XUgw-AXIHJ61n2rN2zX3gECRNpAoAzGypxHb62bfBEQeuHeQyAXPQww8xSxBh1ObBoFTkNdQk/s1600/1640260277836763-0.png" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;
    &lt;img alt="देवत्व का आगमन" border="0" height="400" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEig2TUuMU1DpHm_DnVOK1KsWfgQKWpE54ZFxalAGShfSL-LX8KpIk9QDIOkkyBOSOweO9XUgw-AXIHJ61n2rN2zX3gECRNpAoAzGypxHb62bfBEQeuHeQyAXPQww8xSxBh1ObBoFTkNdQk/w329-h400/1640260277836763-0.png" title="देवता का आगमन" width="329"&gt;
  &lt;/a&gt;
&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;बडो से सुना था जहाँ धर्म की बातें नहीँ होती वहां नाकारत्मक ऊर्जा वास करने लगती थी, नकारात्मक ऊर्जा मतलब दैत्य दानव, फिर क्या आशन्ति ही आशन्ति " ये सब मीना बहु अपनी छोटी बहन से केह रही थी,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;मीणा अपने परिवार के साथ गुजरात के पोरबंदर में रहती थी, और मीणा का परिवार एक साधारण सा परिवार था,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;अन्य कहानिया पढ़े :-&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;a href="https://adhurikahaniya2020.blogspot.com/2021/12/Lawarish-beti.html?m=1"&gt;लावारिश बेटी&lt;/a&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;font size="4"&gt;&lt;a href="https://adhurikahaniya2020.blogspot.com/2021/12/Bhuli-bisri-duniya.html?m=1"&gt;भूली बिसरी दुनिया&lt;/a&gt;&lt;/font&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;font size="4"&gt;&lt;a href="https://adhurikahaniya2020.blogspot.com/2021/12/Mera-kachcha-rang.html?m=1"&gt;मेरा कच्चा रंग&amp;nbsp;&lt;/a&gt;&lt;/font&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;मीणा स्वाभाविक तौर से ईस्वर की अनन्य भक्त थी, परन्तु वह ससुराल के माहौल से अक्सर परेशान रहती, क्युकि वहां भईयौ में अक्सर तु तु मै मै होती रहती, जो की मीणा को बिल्कुल पसंद नहीँ था,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;घर की ऐसी अवस्था से वह खुद परेशान रहने लगी, मन ही मन उसने सोच लिया, चाहे जो हो पर मै अपने घर में एक प्यारा सा मन्दिर बनवा कर ही रहूंगी....&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;वह धीरे धीरे समयानुसार अपने सास ससुर और पति, के कानो में डालती रही की एक मन्दिर तों इस घर के लिए जरुरी ही है, चाहे जो कहो,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;समय समय पर किसी ना किसी तरिके से एक ही बात पहुंचने से यह बात सीधा दिल दिमाग़ पर असर करता है, और जो भी हो एक ना एक दिन कोई भी राजी हो जाता है, इसी तरह मीना बहु के ससुराल वाले के अंदर मन्दिर के लिए ना से हाँ में बदल गयी,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;फिर भी मंजिल अभी दूर थी ... अभी तों बस पहला पड़ाव ही पार हुआ था, घर में मन्दिर बनवाना बड़ी बात तों नहीँ थी, लेकिन जिसके घर में पहले कोई पूजा स्थल ना हो उसके घर में मन्दिर का निर्माण बड़ी बात थी...&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;मन्दिर मन्दिर के नाम से पूरा वातावरण शुद्ध होने लगा, और मीना की सासुमा के दिमाग़ में कई तरह की योजनाए जन्म लेने लगी,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;कहीं ना कहीं वह भी मन्दिर बनवाने में आस्था रखती थी, घर में कहीं कहीं मरम्मत करवानी थी, इसलिए पहले वह कार्य हो जाये फिर हम मन्दिर के लिए सोचेंगे, एक समय निश्चय किया गया, की सारे काम निपटा कर ही हम मन्दिर में हाथ लगाएंगे.......&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;और सारे काम निपटाते हुए लगभग छ: महीनो का वक्त लगने वाला था.... और इन छ महीनो के बाद मन्दिर का निर्माण शुरु होने को था,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;मीणा मन ही मन हर दिन गिनती करती, वह चाहती थी बस जल्द से जल्द मुझे मेरा मन्दिर मिले, जहाँ मै शान्ति से अपने दिन रात ब्यतीत करू,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;देखते देखते वह छ माह भी जैसे तैसे कट गये, आज से मन्दिर का निर्माण चालू होने को था,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;मीणा ने ससुराल के सभी लोगो के लिए ईश्वर से एक मन्नत मांगी " की हे प्रभु आप यदी मेरी मनोकामना जल्द पूर्ण कर दे तों मै द्वारकाधीश के दर्शन सहपरिवार कर आऊं, द्वारकाधीश का मन्दिर पोरबंन्द्रर से कुछ घंटो की दुरी पर था,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;मन्दिर निर्माण कार्य शुरु हो गया, मन्दिर से ठीक सटा एक बड़ा बगीचा भी बनवाया जा रहा था, जिसमे सुंन्द्र सुंदर क्यारियों वाले गाच्छ तथा छोटे मोटे पौधे लगवाने के लिए मीणा ने पहले ही सोच रखा था,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;मन्दिर बनने की ख़ुशी और बेचैनी ने जैसे मीणा का सुकून ही अस्त ब्यस्त कर दिया हो, आखिर मन्दिर भी बड़े बड़े विघ्न को टालते हुए बन रही थी, क्युकि भगवान स्वम् अपने घर को बनवा रहे थे,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;कई तरह के निर्माण कार्य होने थे, जिसमे इंतज़ार पथर के कार्य, मार्बल के कार्य, और विधुत के कार्य और छोटी मोटी कलाकारी के कार्य भी होने को थे,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;मीणा बस उस क्षण की प्रतीक्षा में थी के बस अब मेरा मन्दिर मुझे कोई पुरी तरह बनाकर सौप दे, ताकि मै इसे अपनी पसंद के अनुसार बाकी साज श्रीगार कर सकू,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;मरम्मत के कार्य के दौरान एक बड़ी विचित्र घटना हो रही थी, जैसे ही निर्माण कार्य आरम्भ होता, ठीक उसी समयानुसार जाने खान से एक पक्षी वहां उपस्थित हो जाता, और सीधा साँझ ढलने के बाद ही वहां से हटता, पहले कुछ दिनों किसी की नजर नहीँ गयी,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;फिर एक दिन कार्य कर रहे मजदूर ने उस पक्षी को कंकर मरते हुए कहा.."क्या रें तु तुम आज भी यहां आ गये, "&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;"क्या मिलता है दिनभर येसब देखकर " पक्षी चुपचाप एक् जगह बैठा सौ सीधा साँझ 4 बजे ही वहां से हटा......&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;अब यौ यह हरदिन की बात थी....&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;सभी जान गये उस पक्षी की लीला..... और सभी उसे भगवान का दूत समझकर प्यार से स्वागत करते,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;अब निर्माण कार्य समाप्त होने को था.........&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;मीणा की तमन्ना पुरी होने को थी,,,,, भगवान ने मीणा की मन की बेचैनी समझते हुए उसे दर्शन देने के लिए उपस्थित थे,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;रात को अर्धरात्रि में मीणा की क्षण भर आंखे बंधोते ही प्रभु ने उसे दर्शन दिए,,,, कहा कुछ नहीँ बस आँखों को दर्शन देकर उन्होंने ये बताने का प्रयास किया अब तुम निश्चिंत रहो........ मै आ गया हु, सब अच्छा होगा,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;आनंद मना रही मीणा प्रभु के इशारे समझ जाती है, परन्तु उसके सामने अभी एक और चुनौती आने को थी.......&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;शुभ दिन तारीख निकाल कर मन्दिर का आरम्भ करने के लिए ज़ब उसकी ससुराल वालो ने पंडित जी को बुलवाया तों..... उन्होंने कहा की आप ने मन्दिर तों निर्माण करवा लिया है, लेकिन अभी एक महीने में मात्र एक दिन ही शुभ मुहूर्त है वो भी दो घंटो के लिए जो की असम्भव है........ और इधर मन्दिर को ज्यादा दिन तक बंद या बिना पूजा पाठ के रखना भी शुभ नहीँ माना जायेगा...या तों आप एक माह रुक जाये,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;भगवान की स्थापना करना बड़ा फलदाई कार्य है,&amp;nbsp;&lt;/span&gt;जिसके लिए इस माह के मध्य में एक अच्छा दिन तों है मगर मात्र दो घंटो के लिए या तों आप उस दिन कर लो, या महीने बाद ही होगा,&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;तों सबने पूछा की कोई ऐसा उपाय जो हमारे और मन्दिर के हित में हो...... तब पंडित जी ने बताया की आप उस दिन एक कार्य कर सकती है जिससे सारी अपवित्रता स्वम् कट जाएगी, और स्थापना भी सफल रहेगी,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;मीणा ने पूछा वह कौन सा उपाय है,,, जो पंडित जी ने कहा तुम्हे प्रथम नीले रंग की बड़ी मछली द्वार पर रख रख कर सारे काम करने होंगे....उससे सारी अशुभता नष्ट हो जाएगी, यह मछली जीवित होनी चाहिए, और पानी से भरे पात्र में प्रथम इसे पूज कर तब देव पूजन करना होगा,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;
  &lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiPwnXx8EXtSms3hZLaTxbKlAwlhs8-2Nvn4-j7szIzC___QVE2lhnNSUdf7HJFss0E8uiEymknJRItUNOOR9LzyUaVjCsiqYoCrTfc5lckbTexgTtt_HJSG6ddDORHXW05ACLD-sKH3ZU/s1600/1640260273423517-1.png" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;
    &lt;img alt="देवता का आगमन" border="0" height="270" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiPwnXx8EXtSms3hZLaTxbKlAwlhs8-2Nvn4-j7szIzC___QVE2lhnNSUdf7HJFss0E8uiEymknJRItUNOOR9LzyUaVjCsiqYoCrTfc5lckbTexgTtt_HJSG6ddDORHXW05ACLD-sKH3ZU/w400-h270/1640260273423517-1.png" title="देवत्व का आगमन" width="400"&gt;
  &lt;/a&gt;
&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;मीणा व सभी जन आश्चर्य में पड़ गये,,, फिर सबने सोचा सायद यह भी कोई भगवान की महिमा होंगी.... जो हमें इस तरह कुछ करना पड़ रहा है... वे राजी हो गये....&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;पंडित जी के बताये अनुसार नीले रंग की बड़ी मछली कहीं नजर नहीँ आया, उधर पूजा की तैयारी की जा रही थी... परन्तु मछली तों मिल रही थी क्युकि सबका रंग मेलछा था, नीले रंग में बड़ी मछली किसी ने देखि ही नहीँ, सभी ऐसा केह रहे थे, मीणा के पति ने सोचा की यदी मछली ना होती तों पंडित जी हमें क्यूँ बताते,फिर वह घर आ गये, और सारी बात मीणा को बताया,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;जो भी हो ..... हमें ऐसी मछली तों ढूढ़ना ही होगा ये सोच मीना निकल पड़ी, सामने के बड़े बड़े जलाषयो से निकली स्वेत वरणीय मछलिया मे से एक मछली को जल से भरे बर्तन में लाकर घर ले आई..... सब देख कर बोले ये तों नीली मछली नहीँ है,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;मीणा ने कहा " मछली तों है " हमें कार्य पूरा करना है.... समय भी निकला जा रहा था इसलिए मै बस इस मछली को ले आई,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;सबने कहा " कोई बात नहीँ, ना से भला हाँ "&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;फिर मछली को अच्छे से नहलाया गया, उसे दाना पानी देकर साफ और स्वच्छ बर्तन में पानी भरकर मन्दिर के द्वार से लगाकर रख दिया....&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;यह मछली एक मीटर लम्बी थी जबकि चौड़ाई में बिल्कुल कम थी, देखने में साँप की तरह इधर उधर घूम रही थी,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;सभी एक जुट हो गये, सुंदर भजन कीर्तन के साथ सभी सुहागन महिलाओ ने पुजारी जी के साथ मन्दिर में पहले मछली को फिर भगवान की प्रतिमा का पूजन किया,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;पूजन आरती के साथ वहा का रौनक देखने लायक था,,,,, मछली के माथे पर सिंदूर के टिके लगाये जाने के बाद वह मछली लाल हो गयी,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;लाल पानी में मछली चहलकदमी करती जा रही थी,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;मन्दिर में दिब्य गंध और दिब्य ज्योति फैली थी, जैसे भगवान भी उपस्थित हो,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;पूजन के बाद मछली को पुनः सरोवर में छोड आने की बात थी, परन्तु किसी का दिल ना किया की इस सुंदर और प्यारी से मछली को खुद से अलग करे,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;उस मछली के उचित उसी मन्दिर में एक स्थान बनवाया गया.......... जहाँ वह आराम से रह सके... सभी उस मछली को भी पूजनीय मानते, और प्यार से सहलाते,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;मछली की चहलकदमी मन्दिर की शोभा बड़ा देती, मीणा के जीवन की सबसे बड़ी तमन्ना पूर्ण हो चुकी थी, इसलिए वह सह परिवार द्वारका धीश हो आई,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&amp;nbsp;अब वह घर मन्दिर और अपनी आस्था के झूले में झूल रही थी, एक तरफ वह भगवान की प्रतिमा को देखती दूसरी और उस प्यारी मछली को,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;सुबह सुबह दर्शन करके ही मन खुशीयों से भर जाता,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;वह मछली बड़ी प्रजाति की थी, और वृद्ध हो चली थी, धूप की तेज रौशनी पड़ते ही उसका चिकना शरीर चमकने लगता ,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;सबने देखा की इस मछली के ऊपर एक नीले रंग की लकीर उभरने लगी थी, जो ठीक वैसा था जैसा पंडित जी ने बताया था, सभी हैरान थे की हमने तों साधारण मछली लाया था, लेकिन भगवान की कृपा पाकर यह भी असाधारण हो गयी थी,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;एक दिन वह मछली जल में हमेशा के लिए स्थिर हो गयी जिसके बाद उसी बगीचे में मछली रानी को स्थान दिया गया....&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;और मन्दिर पहले से अधिक दिब्यता से भर गया, क्युकि अब वह मछली भी अपना पूर्ण आशीर्वाद दे रही थी,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;मीणा ने अपना पूरा जीवन ईश्वर के चरणों में बिताया,,,,,,,,, जिसके बाद उसकी कोई इच्छा अधूरी नहीँ रही, वह भी मरने के बाद वैकुंठ गयी&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;br&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;</description><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEig2TUuMU1DpHm_DnVOK1KsWfgQKWpE54ZFxalAGShfSL-LX8KpIk9QDIOkkyBOSOweO9XUgw-AXIHJ61n2rN2zX3gECRNpAoAzGypxHb62bfBEQeuHeQyAXPQww8xSxBh1ObBoFTkNdQk/s72-w329-h400-c/1640260277836763-0.png" width="72"/><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item></channel></rss>