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Tuesday, August 22, 2119

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    Thursday, July 2, 2020

    फतेहपुर : सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के शैक्षिक अभिलखों के आधार पर नियुक्त अध्यापकों की सूचना निर्धारित प्रारूप पर उपलब्ध कराने के सम्बन्ध में

    फतेहपुर : सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के शैक्षिक अभिलखों के आधार पर नियुक्त अध्यापकों की सूचना निर्धारित प्रारूप पर उपलब्ध कराने के सम्बन्ध में।






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    फतेहपुर : मानव सम्पदा पर विभाग के अधिकारियों, शिक्षकों एवं कर्मियों का सेवा विवरण ऑनलाइन अपलोड किए जाने के सम्बन्ध में

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    विदेश जाने वाले छात्रों को अब देश में ही पढ़ाने की तैयारी


    विदेश जाने वाले छात्रों को अब देश में ही पढ़ाने की तैयारी

    विदेश जाने वाले करीब एक लाख छात्रों को अब देश में ही पढ़ाने की तैयारी, जानें क्‍या हो रहा है बदलाव

    केंद्र सरकार ने चालू शैक्षणिक सत्र में ही विदेश जाने वाले करीब एक लाख छात्रों को देश में रोकने की योजना बनाई है।...


    नई दिल्ली। कोरोना संकट की चुनौतियों के बीच कुछ नई उम्मीदें भी जगी है। इनमें ही उच्च शिक्षा के लिए हर साल विदेशों को होने वाला पलायन भी है। जिसे पिछले कई सालों से चाहकर भी सरकार नहीं रोक पा रही है, लेकिन कोरोना काल ने इसकी राह आसान की है। सरकार भी इस मौके का फायदा उठाने के लिए पूरी ताकत से जुटी हुई है। इसके तहत चालू शैक्षणिक सत्र में ही विदेश जाने वाले करीब एक लाख छात्रों को देश में रोकने की योजना बनाई है। साथ ही इसे लेकर नए-नए कोर्स शुरू करने से लेकर आकर्षक पैकेज तैयार करने का काम भी तेजी से चल रहा है। 


    चालू शैक्षणिक सत्र में करीब एक लाख छात्रों को रोकने का लक्ष्य
    मंत्रालय की एक रिपोर्ट के मुताबिक देश से हर साल करीब सात लाख छात्र उच्च शिक्षा के लिए विदेशों में जाते है। जहां पढ़ाई पर हर साल वह करीब एक लाख करोड़ खर्च करते है। वहीं पढ़ाई के बाद इनमें से ज्यादा छात्र वहीं जॉब भी हासिल कर लेते है। ऐसे में उनकी प्रतिभा का पूरा फायदा दूसरे देश को मिलता है। इसके चलते देश को प्रतिभा और पैसे दोनों ही मोर्चे पर नुकसान उठाना पड़ता है। कोरोना संकटकाल में मंत्रालय के भीतर इन छात्रों को रोकने की कवायद तब जोर पकड़ी, जब विदेशों में पढ़ाई की योजना बनाए बैठे छात्रों और उनके अभिभावकों ने मंत्रालय से संपर्क कर देश में ही बेहतर पाठ्यक्रम और मौके उपलब्ध कराने की मांग की। 


    नए पैकेज को घोषित कर सकती है सरकार 
    सूत्रों की मानें तो मंत्रालय ने इसके बाद तुंरत ही सकारात्मक रूख दिखाते हुए जेईई मेंस और नीट जैसी परीक्षा के आवेदन की समयसीमा को बढाया था। जिसके बाद डेढ़ लाख से ज्यादा छात्रों के नए आवेदन आए हैं। माना जा रहा है कि यह सारे ऐसे ही छात्र है, जो विदेशों के बजाय अब देश में पढ़ना चाहते है। सूत्रों के मुताबिक आने वाले दिनों में सरकार विदेशों में पढ़ाई के लिए कराए गए रजिस्ट्रेशन को रद्द कराने वाले छात्रों को लेकर कुछ और नए पैकेज भी घोषित कर सकती है।

    आउट ऑफ स्कूल बच्चों को चिह्नित करेंगे शिक्षक, लेंगे ऑनलाइन प्रशिक्षण भी

    आउट ऑफ स्कूल बच्चों को चिह्नित करेंगे शिक्षक, लेंगे ऑनलाइन प्रशिक्षण भी



    प्रयागराज : बुधवार से बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालय खुल गए। शिक्षक और कर्मचारी विद्यालय जाने लगे मगर बच्चे भी स्कूल नहीं आएंगे। ऐसे में शिक्षकों और व कर्मचारियों को आउट ऑफ स्कूल बच्चों को चिह्नित करने, दिव्यांग बच्चों का विवरण जुटाने समेत अन्य जिम्मेदारी सौंपी गई है। शिक्षक कैचमेंट एरिया में जाकर छह से 14 आयु वर्ग के आउट ऑफ स्कूल बच्चों को चिह्नित कर उनका विद्यालयों में पंजीकरण कराएंगे। 


    समर्थ कार्यक्रम के तहत गांव, बस्तियों और मजरों में दिव्यांग बच्चों का विवरण इकट्ठा कर उनका मोबाइल एप्लीकेशन पर रजिस्ट्रेशन कराएंगे। मिशन प्रेरणा के तहत संचालित ई-पाठशाला के लिए शिक्षक प्रतिदिन कम से कम 10 अभिभावकों से मिलकर दीक्षा एप उनके मोबाइल में डाउनलोड कराएंगे। प्रधानाध्यापकों और शिक्षकों ने कितने अभिभावकों को दीक्षा एप डाउनलोड कराया, इसका ब्योरा विभाग को नियमित देना होगा। मानव संपदा पोर्टल पर बचे शिक्षकों व कर्मियों का सेवा विवरण भी ऑनलाइन फीड कराने का काम करना होगा। शिक्षकों के ऑनलाइन प्रशिक्षण के भी कार्यक्रम होंगे।

    यूपी बोर्ड के अंक सहप्रमाणपत्र पर हिंदी का बोलबाला, डिजिटल मार्कशीट जैसा ही होगा मूल अंक सहप्रमाणपत्र

    यूपी बोर्ड के अंक सहप्रमाणपत्र पर हिंदी का बोलबाला, डिजिटल मार्कशीट जैसा ही होगा मूल अंक सहप्रमाणपत्र।

    प्रयागराज : देश के हिंदी भाषी राज्य उत्तर प्रदेश के अहम शिक्षा संस्थान यूपी बोर्ड के अंक सह प्रमाणपत्र में अब हिंदी का बोलबाला है। डिजिटल अंकपत्र में अभ्यर्थी व उनके माता-पिता का नाम हिंदी में भी दर्ज किया गया है। इससे पहले अंग्रेजी में ही परीक्षार्थी आदि का नाम लिखा जाता था। बोर्ड ने यह कदम हाईकोर्ट के आदेश पर उठाया है। इसके लिए पिछले वर्ष कई बार अभ्यर्थी आदि के नामों को दुरुस्त कराने की प्रक्रिया चली। यूपी बोर्ड की हाईस्कूल व इंटर परीक्षा 2020 का परिणाम 27 जून को जारी हुआ। कोरोना की वजह से करीब 51 लाख से अधिक परीक्षार्थियों का परिणाम वेबसाइट पर अपलोड तो हो गया लेकिन, अंक सह प्रमाणपत्र अब तक छप नहीं सके हैं। ऐसे में अगली कक्षा में प्रवेश दिलाने के लिए डिजिटल अंक पत्र देने का निर्णय हुआ। बुधवार से परीक्षार्थियों ने अपने कालेज के प्रधानाचार्य को मार्कशीट के लिए प्रार्थना पत्र दिया। प्रधानाचार्यों ने यूपी बोर्ड सचिव के डिजिटल हस्ताक्षर वाली कॉपी को डाउनलोड कर उसका प्रिंट निकाला और उसे रिकॉर्ड से मिलाकर सत्यापित करके सौंपा है। यह मार्कशीट परीक्षार्थियों के लिए अस्थाई तौर पर मूल मार्कशीट की तरह ही काम करेगी। इतना ही नहीं डिजिटल मार्कशीट मूल अंकपत्र की तरह ही है। हाईस्कूल उत्तीर्ण परीक्षार्थियों को कक्षा 11 और इंटर पास करने वालों को स्नातक में दाखिले के लिए यह मान्य होगी। 15 जुलाई से हाईस्कूल के अंक सही प्रमाणपत्र की हार्ड कॉपी मिलेगी और 30 जुलाई से इंटर की मिलेगी।








    सभी 75 जिलों के अभिलेख अपलोड : यूपी बोर्ड की ओर से कहा गया कि देर शाम तक सभी 75 जिलों के हाईस्कूल व इंटर के परीक्षार्थियों का डिजिटल अंकपत्र अपलोड हो गए हैं।


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    गोरखपुर : कम्पोजिट स्कूल ग्राण्ट के उपभोग के सम्बन्ध में

    गोरखपुर : कम्पोजिट स्कूल ग्राण्ट के उपभोग के सम्बन्ध में

    गोरखपुर : 2010 एवं 2011 में नियुक्त/अंतर्जनपदीय स्थानांतरण से आये शिक्षको के सभी अभिलेखों की स्वप्रमाणित छाया प्रति जमा करने के सम्बंध में

    गोरखपुर : 2010 एवं 2011 में नियुक्त/अंतर्जनपदीय स्थानांतरण से आये शिक्षको के सभी अभिलेखों की स्वप्रमाणित छाया प्रति जमा करने के सम्बंध में

    गोरखपुर : मध्यान्ह भोजन योजनान्तर्गत खाद्यान्न छात्रों को वितरित किये जाने के सम्बन्ध में

    गोरखपुर : मध्यान्ह भोजन योजनान्तर्गत खाद्यान्न छात्रों को वितरित किये जाने के सम्बन्ध में

    गोरखपुर : मध्यान्ह भोजन योजनान्तर्गत परिवर्तन लागत की धनराशि छात्रों को वितरित किये जाने के सम्बन्ध में

    मध्यान्ह भोजन योजनान्तर्गत परिवर्तन लागत की धनराशि छात्रों को वितरित किये जाने के सम्बन्ध में

    उच्च शिक्षा के विद्यार्थियों को प्रोन्नति में मिलेंगे औसत अंक, समिति की रिपोर्ट पर मुख्यमंत्री से मंथन के बाद होगा निर्णय

    उच्च शिक्षा के विद्यार्थियों को प्रोन्नति में मिलेंगे औसत अंक समिति ने सरकार को सौंपी रिपोर्ट, आज मुख्यमंत्री से मंथन के बाद होगा निर्णय


    कोरोना संक्रमण के चलते राज्य विश्वविद्यालयों में नहीं होंगी परीक्षाएं


    लखनऊ। प्रदेश विश्वविद्यालयों और डिग्री कॉलेजों के विद्यार्थियों को उनके पिछली कक्षाओं में प्राप्त अंकों के औसत अंक के आधार पर प्रोन्नत किया जाएगा। विश्वविद्यालयों की परीक्षाओं के आयोजन के लिए चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एनके तनेजा की अध्यक्षता में बनी समिति ने अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपी है। समिति की रिपोर्ट पर बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सहमति लेकर निर्णय किया जाएगा। 


    कोरोना संक्रमण के चलते इस वर्ष राज्य विश्वविद्यालयों की परीक्षाएं नहीं होगी। ऐसे में सभी विद्यार्थियों को प्रोन्नत करने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए गठित समिति ने स्नातक तृतीय वर्ष के विद्यार्थियों को प्रथम और द्वितीय वर्ष में प्राप्त अंकों के औसत अंक, द्वितीय वर्ष के विद्यार्थियों को प्रथम वर्ष में प्राप्त अंकों के औसत अंक देकर प्रोन्नत करने का सुझाव दिया है। इसी प्रकार प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों को इस वर्ष केवल प्रोन्नत करने का सुझाव हैं, उनके प्रथम वर्ष के अंकों का निर्धारण अगले वर्ष द्वितीय वर्ष की परीक्षा में मिले अंकों के औसत से किया जाए। 


    समिति ने यह भी सुझाव दिया है कि जिन विषयों की अनुसार वास्तविक प्राप्तांक दिए परीक्षाएं लॉकडाउन से पहले हो गई थीं, उनकी उत्तर पुस्तिकाओं जाएं। समिति ने अन्य प्रदेशों में औसत अंक देकर विद्यार्थियों को का मूल्यांकन हो गया तो विद्यार्थियों पदोन्नति देने का उदाहरण भी प्रस्तुत को उस विषय में उनकी मेहनत के किया है।


    48 लाख विद्यार्थियों पर होगा असर 
    समिति ने पूर्व में शासन को दी अपनी रिपोर्ट में कहा था कि विश्वविद्यालय की परीक्षाएं सोशल डिस्टेंसिंग के माध्यम से करा पाना संभव नहीं है। इससे शिक्षकों और विद्यार्थियों में कोरोना संक्रमण बढ़ने का खतरा रहेगा। समिति ने दूसरे प्रदेशों की तर्ज पर यूपी में भी विश्वविद्यालयों की परीक्षाएं नहीं कराने और विद्यार्थियों को बिना परीक्षा के प्रोन्नत करने का सुझाव दिया है। समिति ने अपनी रिपोर्ट में विद्यार्थियों को प्रोन्नत करने का फार्मूला भी दिया है। 


    प्रदेश में 18 राज्य विश्वविद्यालय, 27 निजी विश्वविद्यालय, 169 राजकीय महाविद्यालय, 331 सहायता प्राप्त महाविद्यालय, 6531 वित्तविहीन महाविद्यालयों में करीब 48 लाख से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। इस मामले में उप मुख्यमंत्री डॉ.दिनेश शर्मा ने समिति के अध्यक्ष प्रो. तनेजा से सभी विश्वविद्यालयों की स्थिति के अनुसार प्रोन्नत करने का सुझाव मांगा था।


    MHRD : इस महीने ऑनलाइन ही चलेगी पाठशाला शोधकर्ता व शिक्षक घर से ही करेंगे काम

    MHRD : इस महीने ऑनलाइन ही चलेगी पाठशाला शोधकर्ता व शिक्षक घर से ही करेंगे काम


    नई दिल्ली। सरकार ने सभी शिक्षण संस्थान को 31 जुलाई तक बंद रखने का फैसला लिया है। इसे देखते हुए उच्च शिक्षा सचिव अमित खरे ने अनलॉक-2 आदेश के तहत सभी राज्यों, यूजीसी, एआईसीटीई, एनटीए सहित सभी अधीनस्थ विभागों को पत्र लिखा है। इसके तहत इस अवधि में ऑनलाइन क्लास होगी। इसके अलावा शोधकर्ता, शिक्षक व कर्मी घर से काम करेंगे। 



    घर से काम करने वाले एडहॉक शिक्षकों और अन्य कर्मियों को ड्यूटी पर माना जाएगा। अमित खरे ने लिखा है कि संस्थान बंद रहने के कारण स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय ऑनलाइन क्लास लेते रहेंगे। अन्य गाइडलाइन पूर्ववत रहेंगी। नियम का पालन करते हुए सभी छात्रों और शिक्षकों को आरोग्य सेतु एप डाउनलोड करना होगा

    ऑनलाइन कक्षा के चलते बच्चों के साथ न हो जाए यौन शोषण, NCERT ने बचने के लिए जारी की गाइडलाइन

    ऑनलाइन क्लास के लिए गाइडलाइन जारी, बच्चों को यौन शोषण से बचाने के लिए एनसीईआरटी ने की पहल, कई उपयोगी सुझाव दिए।


     ऑनलाइन कक्षा के चलते बच्चों के साथ न हो जाए यौन शोषण, NCERT ने बचने के लिए जारी की गाइडलाइन


    चाइल्ड पोर्न... सेक्सी चाइल्ड... टीन सेक्स वीडियो.... इन कीवर्ड की सर्च लॉकडाउन में 95 फीसदी बढ़ गई। लॉकडाउन के शुरुआती 11 दिनों में चाइल्ड इंडिया हेल्पलाइन पर 92 हजार से ज्यादा शिकायतें आईं। ऑनलाइन कक्षाओं और कम्पनियों के डबल डाटा ने बाल यौन शोषण को बढ़ा दिया है। इण्डिया चाइल्ड प्रोटेक्शन फण्ड की रिपोर्ट के बाद एनसीईआरटी ने ऑनलाइन कक्षाओं के लिए गाइडलाइन जारी की है। 


    इसमें मजबूत पासवर्ड रखना, पासवर्ड बदलना, फोटो या वीडियो पूरी सुरक्षा के साथ सोशल मीडिया पर डालना, नेटवर्क सिक्योरिटी अच्छी करना और किसी भी तरह के खतरे के समय नेटवर्किंग साइट की सपोर्ट टीम को रिपेार्ट किया जा सकने सुझाव शामिल हैं। ओपन  सोर्स या लाइसेंस सॉफ्टवेयर इस्तेमाल करने का सुझाव भी दिया गया है। कम्प्यूटर में एंटीवायरस डालने और ऑटो अपडेट का विकल्प भी रखें।


    अपनी या किसी भी दोस्त की व्यक्तिगत जानकारी जैसे स्कूल, उम्र, फोन नंबर साझा न करने, पर्सनल डिवाइस जैसे पेन ड्राइव, हार्ड ड्राइव आदि पब्लिक कम्प्यूटर पर इस्तेमाल न करने, कुछ एक्सटेंशन वाली (.bat, .cmd, .exe, .pif ) वाली फाइलें न खोलते हुए उन्हें ब्लॉक कर दें। अपने एकाउंट से लॉगआउट करके ही उठें। 

    साइबर बुलिंग से ऐसे बचें
    यदि कोई साइबर बुलिंग कर रहा है तो उसे अनदेखा करें। किसी भी तरह का जवाब देने से बचे।

    यदि कोई आपको अश्लील फोटो या ऐसा कुछ भेज रहा है तो उसे ब्लॉक करें और सोशल नेटवर्किंग साइट में इसे रिपोर्ट करें। यदि आपको लगता है कि साइबर बुलिंग हो रही है तो  स्क्रीन शॉट लें। इसका रिकार्ड रखें। अपने अभिभावकों व शिक्षकों को बताएं, उनकी मदद लें। सोशल मीडिया एकाउंट की प्राइवेसी सेटिंग कड़ी करें। ऐसे किसी से भी बात न करें जिसे आप असल जिंदगी में न जानते हों। यदि कोई आपको परेशान करे तो 112 पर फोन करें

    लखनऊ में भी बाल यौन शोषण वाले कंटेंट की है मांग
    आईसीपीएफ का सर्वे 3 से 14 दिसम्बर 2019 में किया गया था लेकिन लॉकडाउन में अन्य स्रोतों व एआई के टूल्स के जरिए प्राप्त जानकारी को शामिल करते हुए बच्चों के प्रति यौन हिंसा के प्रति सावधान रहने की हिदायत दी है। पोर्नहब वेबसाइट के मुताबिक 24 से 26 मार्च के बीच भारत से इस वेबसाइट पर आने वालों में 95 फीसदी का उछाल आया।

    वहीं आईसीपीएफ का सर्वे देश भर के 100 शहरों में 14,28,531 लोगों पर किया गया। आर्टीफिशियल इंटेलीजेंस के टूल्स के जरिए ऐसे लोगों को ट्रैक किया गया। फेसबुक, गूगल व इंस्टा से ऐसे लोगों को चिह्नित किया गया। सर्वे के मुताबिक यूपी के लखनऊ व आगरा में भी सीएसएएम कंटेंट (चाइल्ड सेक्स एब्यूसिंग मैटिरियल ) की मांग बहुत ज्यादा है। सर्वे में सामने आया कि इस्तेमाल करने वालों में 90 फीसदी पुरुष हैं। चूंकि भारत सरकार ऐसे मामलों को लेकर गतिरोध पैदा करती है लिहाजा ज्यादातर लोग वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क इस्तेमाल कर रहे हैं। 
     

    फतेहपुर : हाटस्पॉट से आने वाले शिक्षकों से खतरा!, कानपुर व लखनऊ समेत दूसरे जनपदों से आ रहे शिक्षक

    फतेहपुर : हाटस्पॉट से आने वाले शिक्षकों से खतरा!, कानपुर व लखनऊ समेत दूसरे जनपदों से आ रहे शिक्षक।

    फतेहपुर : शासन के आदेश पर बुधवार से परिषदीय स्कूल सिर्फ शिक्षकों के लिए खुल गए। अधिकांश स्कूलों में ऑपरेशन कायाकल्प का काम शुरू न होने से शिक्षक फुर्सत में बैठे रहे तो कुछ कागजी लिखापढ़ी में व्यस्त दिखे। इस बीच दूसरे जिलों के हॉटस्पॉट वाले क्षेत्रों से आने वाले शिक्षकों की आमद से उनके साथी भयग्रस्त दिखे। सफर के लिए साधनों की खोज में भी मुश्किलों की बात सामने आई। परिषदीय स्कूलों के ताले खुलने के बाद अब हॉटस्पॉट वाले क्षेत्रों से आने वाले शिक्षकों को लेकर नया खतरा सामने आ रहा है। सूत्र बताते हैं कि जिले में सैकड़ों शिक्षक कानपुर, रायबरेली, उन्नाव में दूरस्थ जिलों के हैं। कुछ ऐसे शिक्षक भी हैं जिनके घर उनके शहरों में हॉटस्पॉट वाले इलाकों में हैं। आवाजाही बंद होने के बावजूद सरकारी आदेश का पालन करने के लिए यह शिक्षक अपने घरों से तो निकल आए लेकिन अपने साथ कोरोना वायरस के खतरे को भी ला सकते हैं। लोगों ने कहा कि दूरदराज से यात्रा कर आने वाले शिक्षकों को तो पहले 14 दिन के लिए क्वारंटीन होना चाहिए इसके बाद दूसरे साथियों के बीच जाना चाहिए लेकिन विभागीय आदेश के चलते पहले दिन ही वह अपने साथियों यात्रा के दौरान दूसरे व्यक्तियों से घुल मिल गए।





    चिंताजनक : कानपुर व लखनऊ समेत दूसरे जिलों से आ रहे हैं शिक्षक, दुधमुंहे बच्चों के साथ महिला शिक्षकों को हो रही परेशानी।


    न तो सेनेटाइज नहीं कायाकल्प : जनपद के अधिकांश परिषदीय स्कूलों में ऑपरेशन कायाकल्प के अन्तर्गत इस समय काम नहीं हो रहा है। शिक्षकों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उनके द्वारा दिए गए प्रस्तावों पर ग्राम प्रधान ने अभी तक कोई पहल नहीं की है। लखनऊ से आने वाली आईवीआरएस कॉल में इस बारे में बताया गया है। डीएम के आदेश के बावजूद सेनेटाइजेशन का कार्य भी नहीं हुआ है। जिसके चलते शिक्षक संक्रमण की शंका से घिरे हैं।


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    मदरसा बोर्ड रिजल्ट : वार्षिक परीक्षाओं में बालिकाओं ने मारी बाजी, टॉपर छात्र-छात्राओं को मिलेंगे एक लाख रुपए, टैबलेट, मेडल और प्रशस्ति पत्र

    मदरसा बोर्ड : वार्षिक परीक्षाओं में बालिकाओं ने मारी बाजी, टॉपर छात्र-छात्राओं को मिलेंगे एक लाख रुपए, टैबलेट, मेडल और प्रशस्ति पत्र।


    रिजल्ट

    लखनऊ  :: उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद की वर्ष 2020 की वार्षिक परीक्षाओं में बालिकाओं ने बाजी मारी है। इन परीक्षाओं में उत्तीर्ण परीक्षार्थियों में बालिका परीक्षार्थियों की संख्या 55,457 है और पास होने वाली बालिकाओं का प्रतिशत 84.42 है। कल पास होने वाले बालक परीक्षार्थियों की संख्या-60175 है और पास हुए बालकों का प्रतिशत 79.86 रहा है। टॉपर छात्र-छात्राओं को एक लाख रुपये की धनराशि, टैबलेट, मेडल व प्रशस्ति पत्र दिया जाएगा।





    प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी ने लखनऊ में समाज कल्याण निदेशालय के सभागार में उ.प्र. मदरसा शिक्षा परिषद के शैक्षिक सत्र 2019 20 की वार्षिक परीक्षा के परिणाम घोषित किए। उन्होंने कहा कि यूपी सरकार श्रेष्ठ शिक्षा और संसाधनों के साथ मदरसों के आधुनिकीकरण के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा उद्देश्य है की मदरसा छात्रों को रोजगारपरक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त हो, जिससे वे राष्ट्र की प्रगति में अपना योगदान सुनिश्चित कर सकें।

    उन्होंने कहा कि मदरसा शिक्षा परिषद लखनऊ की वर्ष 2020 की सेकंडरी (मुंशी-मौलवी), सीनियर सेकंडरी (आलिम), कामिल एवं फाजिल की परीक्षा में उत्तीर्ण होने प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान प्राप्त मेधावी छात्र-छात्राओं को एक लाख रुपये की राशि के चेक, टैबलेट, मेडल एवं प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया जाएगा। इस सम्मान राशि का व्यय अरबी-फारसी मदरसा विकास निधि से किया जाएगा। सेकंडरी और सीनियर सेकंडरी के गणित एवं विज्ञान विषय में प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को 51,000 रुपये का चेक, एक टैबलेट, मॉडल एवं प्रशस्ति पत्र दिया जाएगा। मदरसा शिक्षा परिषद लखनऊ की सेकंडरी (मुंशी-मौलवी) सीनियर सेकंडरी (आलिम), कामिल व फाजिल की वर्ष 2020 की बोर्ड परीक्षाएं इस वर्ष 25 फरवरी से शुरू होकर पांच मार्च तक प्रदेश के 552 परीक्षा केन्द्रों में हुई थीं।

    प्रमुख बातें : परीक्षार्थियों में कुल 1,38,241 छात्र-छात्राएं संस्थागत तथा 44,017 छात्र-छात्राएं व्यक्तिगत परीक्षार्थी के रूप में सम्मिलित हुए। परीक्षा वर्ष में कुल सम्मिलित परीक्षार्थियों ( 1,82,259) में कुल 41,207 परीक्षार्थी अनुपस्थित रहे। कुल 1,15,650 परीक्षार्थी उत्तीर्ण तथा कुल 25,402 परीक्षार्थी उत्तीर्ण हुए।

    उत्तीर्ण परीक्षार्थियों का कुल प्रतिशत 81.99

    टॉपर छात्र-छात्राओं को एक लाख रुपये मिलेंगे, प्रोत्साहन के लिए टैबलेट, मेडल और प्रशस्ति पत्र मिलेगा।


    01 लाख 82 हजार 259 परीक्षार्थी मदरसा वार्षिक परीक्षा में सम्मिलित हुए

    97 हजार 348 छात्र तथा 84 हजार 911 छात्राएं शामिल हुए





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    गोरखपुर : 25 फर्जी शिक्षकों ने हजम किया सात करोड़ का वेतन, अब ऐसे की जाएगी रिकवरी

    • बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से वेतन रिकवरी का ब्योरा किया जा रहा तैयार

    • अगले सप्ताह तक इसे राजस्व विभाग को भेजे जाने की तैयारी
    • कूटरचित दस्तावेजों के सहारे परिषदीय विद्यालयों में नौकरी हासिल करने वाले फर्जी शिक्षकों के खिलाफ वेतन रिकवरी की कार्रवाई बेसिक शिक्षा विभाग ने शुरू कर दी है। अब तक 25 शिक्षकों से वेतन रिकवरी की फाइल तैयार की जा रही है।

      फर्जी दस्तावेज के सहारे नौकरी हासिल कर इन शिक्षकों ने दशकों में सात करोड़ आठ लाख 29907 रुपये का वेतन भुगतान लिया है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक खासकर जंगल कौड़िया ब्लॉक के तीन शिक्षकों पर सर्वाधिक 72-77 लाख रुपये की सर्वाधिक रिकवरी बनेगी।

      वर्ष-2019 में एसटीएफ की छापेमारी के बाद से बेसिक शिक्षा विभाग को कूटरचित दस्तावेजों के सहारे नौकरी करने वाले शिक्षकों के खिलाफ अधिक मात्रा में शिकायतें मिलने का सिलसिला शुरू हुआ। जांच के बाद अब तक 51 फर्जी शिक्षकों को बर्खास्त कराने के लिए साथ ही 37 शिक्षकों पर बीएसए के तहरीर पर राजघाट थाने में मुकदमा दर्ज हुआ है।

      वहीं प्राथमिक जांच में संदिग्ध मिलने पर 30 शिक्षक निलंबित किए जा चुके हैं। इसके अलावा करीब 20 से अधिक शिक्षकों के खिलाफ जांच चल रही है। नियम के मुताबिक फर्जी शिक्षक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के बाद ही विभाग की ओर से वेतन रिकवरी की फाइल तैयार की जाती है।

      पिछले वर्ष मुकदमा दर्ज होने के बाद से विभाग की ओर से फाइल मार्च में ही तैयार कर ली जानी थी लेकिन लॉकडाउन की वजह से इसमें देरी हुई। अब विभाग 25 शिक्षकों से वेतन रिकवरी की फाइल को अंतिम रूप दिया जा रहा है। जिसके बाद इसे राजस्व विभाग को भेज दिया जाएगा।

      पहले चरण में 12 फर्जी शिक्षकों की भेजी जाएगी फाइल
      पहले चरण में 12 फर्जी शिक्षकों से वेतन रिकवरी के रूप में 3,64,90,025 रुपये की रिकवरी की फाइल भेजी जाएगी। दूसरे चरण में 13 शिक्षकों के 3,43,39,882 रुपये की रिकवरी भेजी जाएगी।

      सर्वाधिक वेतन लेने वाले शिक्षक
      जंगल कौड़िया ब्लॉक पर तैनात रहे फर्जी शिक्षक जयप्रकाश मिश्रा पर 77,17,784 रुपये, रामप्रसाद पर 74,17,982 और राकेश सिंह पर 72,23,022 रुपये की सर्वाधिक रिकवरी बनती है।

      जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी बीएन सिंह ने कहा कि फर्जी शिक्षकों से वेतन रिकवरी की प्रगति शासन स्तर से तलब की गई है। फाइल तैयार कराई जा रही है। जल्द ही इसे रिकवरी के लिए आगे भेजने के साथ ही इसकी सूचना शासन को भेजी जाएगी। बाकि बचे फर्जी शिक्षकों के वेतन रिकवरी की फाइल भी जुलाई में तैयार कराई जाएगी।

    Wednesday, July 1, 2020

    निजी स्कूलों के शिक्षक-कर्मियों के वेतन में 50 फीसद कटौती, फीस न आने से उपजे हालात, आधे वेतन पर करना होगा काम

    निजी स्कूलों के  शिक्षक-कर्मियों के वेतन में 50 फीसद कटौती, फीस न आने से उपजे हालात, आधे वेतन पर करना होगा काम


    लॉकडाउन से उपजे हालात का असर निजी स्कूलों के शिक्षकों और कर्मचारियों के वेतन पड़ेगा। अनएडेड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने शिक्षक कर्मचारियों के वेतन में 50 प्रतिशत कटौती के फरमान जारी किए हैं।


    इसके पीछे बच्चों की फीस न जमा होने को कारण बताया जा रहा है। गौरतलब है कि पहली जुलाई से राजधानी के निजी स्कूल सिर्फ शिक्षकों व कर्मचारियों के लिए ही खोले जाएंगे। वेतन आधा किये जाने और संक्रमण खतरे के बावजूद स्कूल बुलाए जाने के विरोध की आहट भी सुनाई देने लगी है। कोरोना संक्रमण के चलते 22 मार्च के बाद से स्कूल बंद चल रहे हैं। शिक्षक अपने अपने घरों से ऑनलाइन क्लासेज संचालित कर रहे थे।


    एक जुलाई से शिक्षकों को बुलाया गया है। कोरोना से निपटने के लिए सभी जरूरी एहतियात अपनाए जाएंगे। -अनिल अग्रवाल, चेयरमैन, अनएडेड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन

    आगरा : दो शिक्षकों की दो-दो जिलों में तैनाती, जांच के आदेश

    आगरा : दो शिक्षकों की दो-दो जिलों में तैनाती, जांच के आदेश


    आगरा। बेसिक शिक्षा विभाग में आगरा में दो ऐसे शिक्षक तैनात मिले हैं जिनकी तैनाती दूसरे जिलों में भी है। जांच में पता चला है कि इनमें से एक मनोज कुमार की तैनाती कासगंज में भी है। संतोष कुमारी की तैनाती कन्नौज में भी है। अनामिका शुक्ला जैसे इस फर्जीवाड़े का पता चलते ही बेसिक शिक्षा अधिकारी राजीव कुमार यादव ने जांच के आदेश दिए हैं। 


    वित्त एवं लेखाधिकारी पंकज कुमार सिंह ने इन शिक्षकों के बारे में रिपोर्ट बेसिक शिक्षा अधिकारी को दी है। प्रारंभिक तौर पर की गई जांच पड़ताल में मनोज कुमार की तैनाती सैंया ब्लॉक के उच्च प्राथमिक विद्यालय, जाजऊ के सहायक अध्यापक के पद पर होने के साथ कासगंज में भी है। दोनों जगह पर्सनल अकाउंट नंबर (पैन) एक ही दिया गया है हालांकि जन्मतिथि, आधार संख्या, नियुक्ति तिथि और खाता संख्या अलग-अलग हैं। 

    यूपी बोर्ड सचिव नीना श्रीवास्तव सेवानिवृत्त, चार्ज दिव्यकान्त शुक्ल को

    यूपी बोर्ड सचिव नीना श्रीवास्तव सेवानिवृत्त, चार्ज दिव्यकान्त शुक्ल को 



    प्रयागराज। यूपी बोर्ड की सचिव नीना श्रीवास्तव शिक्षा विभाग में अपनी 29 वर्ष की सेवा के बाद मंगलवार को सेवानिवृत्त हो गई। इसके बाद सचिव का पद प्रभार यूपी बोर्ड के नवनियुक्त विशेष कार्याधिकारी (ओएसडी) एवं संयुक्त शिक्षा निदेशक प्रयागराज मंडल दिव्यकांत शुक्ल को दिया गया है। 


    वह सचिव के पद पर स्थाई नियुक्ति होने तक संयुक्त शिक्षा निदेशक प्रयागराज मंडल के साथ वर्तमान पद का दायित्व संभालेंगे। नीना श्रीवास्तव 31 मार्च 2020 को अवकाश ग्रहण कर रहीं थीं, लेकिन शासन ने यूपी बोर्ड परीक्षा को देखते हुए उनका कार्यकाल 30 जून तक बढ़ा दिया था।

    डरे-सहमें शिक्षक आज से खोलेंगे विद्यालयों के ताले, क्वारन्टीन सेंटर बने विद्यालय नहीं हुए अब तक सेनेटाइज

    फतेहपुर : डरे-सहमें शिक्षक आज से खोलेंगे विद्यालयों के ताले, क्वारन्टीन सेंटर बने विद्यालय नहीं हुए अब तक सेनेटाइज


    फतेहपुर : कोरोना संक्रमण को लेकर करीब तीन माह से बंद चल रहे बेसिक शिक्षा विभाग के प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों को एक जुलाई से खोलने का फरमान जारी हो चुका है। संक्रमण को देखते हुए अभी भी परिषदीय शिक्षक स्कूल जाने में सहमें नजर आ रहे हैं। इनका कहना है कि करीब सभी विद्यालयों को क्वारंटीन सेंटर बनाया गया था, जिसमें कई सेंटर से कोरोना पॉजिटिव केस भी निकले हैं। अभी तक विद्यालयों को सेनेटाइज तक नहीं कराया गया है।


     ऐसे में विद्यालय में संक्रमण फैलने की अशंका प्रबल हो रही है। करीब साढ़े तीन महीने की लंबी छुट्टी के बाद बुधवार से जिले भर के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों के ताले स्टाफ के लिए खुल जाएंगे। सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं, अनुदेशक व शिक्षामित्रों को विद्यालय समय से आना होगा। यह शिक्षक स्कूल पहुंचकर विद्यालयों की रंगाई पुताई, कायाकल्प के तहत कार्य, यूनीफार्म, पुस्तक वितरण समेत अन्य कार्यों को निपटाएंगे। खोले जा रहे विद्यालयों को लेकर शिक्षकों के बीच कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। शिक्षकों की मानें तो संक्रमण काल के दौरान बच्चों के न आने पर शिक्षण कार्य तो होगा नहीं, ऐसे में शिक्षकों को विद्यालय में बुलाना ठीक नहीं है। वहीं शिक्षक नेताओं ने शिक्षकों को स्कूल बुलाए जाने का विरोध किया है और कहा है कि इसका कोई औचित्य नहीं नहीं है।

    विविंग टाइम पर रहती है नजर :  विभाग दीक्षा ऐप के डाउनलोड एवं विविंग टाइम(देखा जाने वाला समय) के आंकड़ों की लगातार समीक्षा करता है। विभाग ने प्रत्येक शिक्षक व स्मार्टफोन धारक अभिभावक के मोबाइल फोन में दीक्षा ऐप डाउनलोड सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए हैं। प्रत्येक विषय के हर पाठ में मौजूद क्यूआर कोड को स्कैन करने पर दीक्षा एप का लिंक खुल जाता है। वहां उस पाठ से सम्बन्धित विषय सामग्री मौजूद रहती है। पुस्तक वितरण के बाद बच्चों के लिए इस दौर में पढ़ना आसान होगा। हालांकि ग्रामीण इलाकों में नेटवर्क, स्मार्टफोन की उपलब्धता जैसी व्यवहारिक समस्याएं भी हैं।


    क्वारंटीन सेंटर बने विद्यालय नहीं हुए अब तक सेनेटाइज : जनपद के कई स्कूलों को क्वारंटीन सेंटर भी बनाया गया था। उस समय बाहर से आने वाले व्यक्तियों को 14-14 दिन के लिए यहां रोका गया। हालांकि बाद में नियम बदलकर 21 दिन के लिए होम क्वारंटीन हो गया है। जो स्कूल क्वारंटीन सेंटर या अस्थाई आश्रय स्थल बने, उनको सेनेटाइज भी नहीं कराया गया है। बीएसए ने बताया कि काफी पहले स्कूलों को क्वारंटीन सेंटर बनाया गया था। 21 दिन से अधिक हो गए हैं। डीएम ने विद्यालयों को सेनेटाइज किए जाने को लेकर निर्देश जारी किए हैं।


    गैर जिलों से भी आएंगे शिक्षक :  परिषदीय स्कूलों में अधिकांश शिक्षक गैर जिलों से भी आते हैं। लॉकडाउन के दौरान अपने अपने घरों में पहुंचे शिक्षक स्कूल खुलने पर वापस आएंगे। तमाम ऐसे जिले हैं जहां अधिकांश स्थान हॉटस्पॉट घोषित हैं। जिले के परिषदीय विद्यालयों में करीब दस हजार से अधिक शिक्षक शिक्षिकाएं तैनात हैं। ऐसे में गैर जिलों से आने वाले शिक्षकों के सम्पर्क में तमाम लोग होंगे। जिसको लेकर शिक्षक सहमें नजर आ रहे हैं।

    क्या बोले शिक्षक नेता : शासन प्रशासन के आदेश का पालन तो किया जाएगा, लेकिन कोरोना संक्रमण के बचाव को लेकर कोई ठोस कदम न उठाया जाना दुखद है। मांग के बाद भी अभी तक विद्यालयों को सेनेटाइज नहीं कराया गया है। यदि किसी भी शिक्षक को संक्रमण होता है तो इसका जिम्मेदार कौन होगा। विभाग द्वारा जल्दबाजी में विद्यालय खोले जा रहे हैं। जो कतई ठीक नहीं है। - विजय त्रिपाठी महामंत्री प्राशिसं


    शासन के निर्देशों का पालन कराया जा रहा है। बुधवार से विद्यालय खोले जाएंगे। डीएम के आदेश में कई ब्लाकों के विद्यालयों को सेनेटाइज भी किया गया है। सभी विद्यालय सेनेटाइज होंगे। संक्रमण बचाओ को लेकर विभाग गंभीर है।- शिवेंद्र प्रताप सिंह, बीएसए


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    फर्रुखाबाद : ARP के अवशेष पदों पर चयन हेतु पुनः विज्ञप्ति हुई जारी, देखें

    फर्रुखाबाद : ARP के अवशेष पदों पर चयन हेतु पुनः विज्ञप्ति हुई जारी, देखें।









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    यूपी बोर्ड :आज से मिलेंगे 10वीं- 12वीं के डिजिटल अंकपत्र

    यूपी बोर्ड :आज से मिलेंगे 10वीं- 12वीं के डिजिटल अंकपत्र।

    प्रयागराज : यूपी बोर्ड की परीक्षा में सम्मिलित हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट के छात्र-छात्राओं को बुधवार से डिजिटल हस्ताक्षर वाले अंकपत्र सह प्रमाणपत्र मिलेंगे। बोर्ड ने आवश्यक इंतजाम कर दिए हैं। प्रधानाचार्य लॉगइन आईडी व पासवर्ड से अंकपत्र निकालकर और उसे प्रतिहस्ताक्षरित करना जारी कर सकते हैं।




    बच्चों को हिन्दी व अंग्रेजी दोनों भाषाओं में अंकपत्र सह प्रमाणपत्र छपवाकर भेजा जाएगा। कोरोना से हार्ड कॉपी भेजने में हो रही अड़चन को देखते हुए डिजिटल प्रमाणपत्र जारी करने का निर्णय लिया गया है।

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    कोरोनाकाल में बेसिक शिक्षा की अस्त्र बन गयी "दीक्षा"

    कोरोना काल में बेसिक शिक्षा की अस्त्र बन गई 'दीक्षा'


    फतेहपुर : कोरोना काल में जब बच्चों की स्कूलों में आमद पर सख्त पाबंदी है, ऐसे दौर में बच्चों की शिक्षा के लिए दीक्षा बड़ा अस्त्र बनकर उभरी है। बेसिक शिक्षा विभाग ने अब इस ऐपके जरिए बेसिक शिक्षा को ऑनलाइन प्लेटफार्म पर लगभग लांच ही कर दिया है। 


    पिछले कई महीनों से इस मोबाइल ऐप को शिक्षकों के अलावा अभिभावकों के स्मार्टफोन में डाउनलोड कराने पर जोर दिया जा रहा है ताकि बच्चों की इसकी डिजिटल सामग्री का लाभ मिल सके। दीक्षा ऐप का दायरा पिछले कई माह में बढ़ गया है। यह मोबाइल ऐप अपनी लाचिंग के साथ ही बेसिक शिक्षा का अनिवार्य अंग बन गया था। सभी कक्षाओं की किताबों में दिए गए क्यूआर कोड के जरिए पाठ्यक्रम से सम्बन्धित ऑडियो विजुअल सामग्री बच्चों को दिखाई व सुनाई जाती थी। 



    कोरोना के प्रकोप के चलते जब स्कूल बंद हो गए तो स्कूली शिक्षा महानिदेशक व अन्य उच्च अधिकारियों ने बच्चों की पढ़ाई घर पर सुनिश्चित करने के लिए शिक्षकों की ऑनलाइन क्लास के अलावा दीक्षा ऐपका प्रयोग करने का फैसला किया। तय किया गया कि अभिभावकों के स्मार्टफोन पर भी इसे डाउनलोड करें जाए जिससे बच्चों को घर बैठे सभी विषयों की पाठ्य सामग्री मिल सके। दीक्षा के माध्यम से ऑनलाइन प्रशिक्षण इन दिनों विभाग बेसिक शिक्षकों की ऑनलाइन ट्रेनिंग दीक्षा ऐप के माध्यम से करा रहा है। 

    बच्चों की भाषा, कैलेंडर से गणित व उपचारात्मक शिक्षण जैसे ट्रेनिंग प्रोग्राम दीक्षा ऐप के जरिए ही कराए जा रहे हैं। 20 जुलाई से शिक्षकों की ट्रेनिंग का कार्यक्रम तय किया गया है। इससे विभाग के साथ ही शिक्षकों को भी सहूलियत होगी व कोरोना का खतरा कम होगा।


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    आगरा : एसआईटी जांच में फंसे 24 फर्जी शिक्षकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज, होगी वेतन रिकवरी

    आगरा : एसआईटी जांच में फंसे 24 फर्जी शिक्षकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज, होगी वेतन रिकवरी।

    आगरा : आगरा में 24 फर्जी शिक्षकों के खिलाफ शाहगंज थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया है। मुकदमे में आठ महिला शिक्षिका भी नामजद हैं। सभी के खिलाफ पुख्ता साक्ष्य हैं। एसआईटी ने अपनी जांच में खेल पकड़ा था। इन लोगों की नौकरी फर्जी दस्तावेज पर लगी थी। सभी आरोपित डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के वर्ष 2004-05 सत्र के बीएड परीक्षा चार्ट में हेराफेरी करके नौकरी के लिए पात्र बने थे। अब कानूनी शिकंजे में फंसे हैं। बेसिक शिक्षा अधिकारी राजीव कुमार ने यह मुकदमा शाहगंज थाने में दर्ज कराया है। दर्ज मुकदमे के अनुसार एक्जीक्यूटिव काउंसिल ने 28 जून 2019 को 3637 फर्जी अभ्यर्थी, 1084 टेंपर्ड अभ्यर्थी, 45 डुप्लीकेट अभ्यर्थियों की सूची विवि की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड की थी। अखबारों में नोटिस देते हुए इन अभ्यर्थियों से 15 दिन में ऑनलाइन रजिस्टर्ड डाक से उनका पक्ष मांगा था। इनमे सिर्फ 814 ने ही अपना पक्ष भेजा। बाकी 2823 अभ्यर्थियों ने अपना पक्ष नहीं भेजा था। ऐसे अभ्यर्थियों को जिन्होंने जवाब नहीं दिया, विवि फर्जी घोषित कर दिया था। इनमें 24 अभ्यर्थी आगरा के थे। अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा विभाग की अध्यक्षता में एसआईटी ने बीएड में फर्जीवाड़े की जांच की थी। जनवरी 2020 में एसआईटी की जांच में फर्जी पाए गए शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की कहा गया था। मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) ने विवि द्वारा उपलब्ध कराई गई हार्ड और सॉफ्ट कापी बेसिक शिक्षा अधिकारी को उपलब्ध कराकर आरोपित शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई को लिखा था। इन फर्जीवाड़ा करने वाले 24 अभ्यर्थियों की 15 मई 2020 में सेवा समाप्त कर दी गयी थीं।





    आरोपित शिक्षकों के खिलाफ धोखाधड़ी और कूटरचित दस्तावेज तैयार करने का मुकदमा दर्ज किया गया है। विवेचना की जा रही है। साक्ष्यों के आधार पर एक-एक करके सभी को गिरफ्तार करके जेल भेजा जाएगा। जो धाराएं हैं उनमें सात साल से अधिक सजा का प्रावधान है। गिरफ्तारी जरूरी है। - बोत्रे रोहन प्रमोद, एसपी सिटी

    15 मई को शासन से एफआईआर का आदेश हुआ था। इसके बाद संबंधित ब्लॉक के बीएसए को जिम्मेदारी दी गई थी। किन्हीं कारणवश एफआईआर नहीं हो सकी। जिम्मेदारी बाबुओं को दी, लेकिन फिर भी सभी ब्लॉकों से एफआईआर नहीं हुई। मंगलवार को अपने स्तर से एफआईआर कराई है। जल्द ही रिकवरी की जाएगी। - राजीव कुमार यादव, बेसिक शिक्षा अधिकारी


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    Tuesday, June 30, 2020

    गोरखपुर : 2010 के बाद नियुक्त/अंतर्जनपदीय स्थानांतरण से आये शिक्षको के सभी अभिलेखों की स्वप्रमाणित छाया प्रति जमा करने के सम्बंध में

    2010 के बाद नियुक्त/अंतर्जनपदीय स्थानांतरण से आये शिक्षको के सभी अभिलेखों की स्वप्रमाणित छाया प्रति जमा करने के सम्बंध में

    महराजगंज : विभिन्न विषयों में सहयोगात्मक पर्यवेक्षण के लिए चयनित नौ शिक्षक अभ्यर्थियों को 'एकडमिक रिसोर्स पर्सन' पद पर पदस्थापन हेतु आदेश जारी

    महराजगंज : विभिन्न विषयों में सहयोगात्मक पर्यवेक्षण के लिए चयनित नौ शिक्षक अभ्यर्थियों को 'एकडमिक रिसोर्स पर्सन' पद पर पदस्थापन हेतु आदेश जारी।


    वर्चुअल शिक्षा...ऑनलाइन क्लास, कोर्स लैपटॉप के लिए MHRD ने मांगा 63 हजार करोड़ का फंड

    वर्चुअल शिक्षा...ऑनलाइन क्लास, कोर्स लैपटॉप के लिए MHRD ने मांगा 63 हजार करोड़ का फंड


    कोरोना के कारण पारंपरिक शिक्षा प्रभावित होने और ऑनलाइन शिक्षा पर जोर को लेकर पहली बार शिक्षा बजट तैयार हो रहा है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने ऑनलाइन क्लास, विशेष कोर्स तैयार करने और छात्रों को लैपटॉप, मोबाइल देने के लिए बित्त मंत्रालय से 63,206.4 करोड़ रुपये की मांग की है।


     इसके अलावा नई शिक्षा नीति लागू करने के लिए 1,13,684.51 करोड़ रुपये का फंड मांगा है। कोबिड-19 के चलते शिक्षा प्रणाली पूरी तरह बदलने वाली है। बजट को लेकर वित्त आयोग के चेयरमैन एनके सिंह और मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक समेत मंत्रालय के अधिकारियों कौ बैठक हुई। ऑनलाइन शिक्षा की योजनाओं के लिए बित्त आयोग से बजट की मांग की गई है। उच्च शिक्षा सचिव अमित खरे ने बैठक में प्रेजेंटेशन भी दी

    69000 फर्जीवाड़ा : मोस्टवांटेड चंद्रमा यादव की तलाश में कौशांबी में छापेमारी


    UP Shikshak Bharti News : मोस्टवांटेड चंद्रमा यादव की तलाश में कौशांबी में छापेमारी 


    UP Shikshak Bharti News शातिर चंद्रमा मोबाइल का इस्तेमाल नहीं कर रहा है। इस कारण उसकी सटीक लोकेशन ट्रेस करने में परेशानी हो रही है। ...


    प्रयागराज । सहायक शिक्षक भर्ती फर्जीवाड़ा के मोस्टवांटेड चंद्रमा यादव की तलाश में स्पेशल टॉस्क फोर्स (एसटीएफ) ने कौशांबी में छापेमारी की। पिपरी, करारी और पूरामुफ्ती समेत कई संदिग्ध ठिकानों पर दबिश दी गई, लेकिन चंद्रमा नहीं मिला। इस दौरान उसके कुछ रिश्तेदारों को पूछताछ के लिए उठाया गया है। इसके साथ ही एसटीएफ फरार अभियुक्तों के बैंक खाते समेत दूसरे दस्तावेजों की भी जांच कर रही है।


    कहा जा रहा है कि कुछ दिन पहले स्कूल प्रबंधक चंद्रमा यादव लखनऊ गया था। इसके बाद वहां से लौटकर कौशांबी आया। इसकी जानकारी मिलने पर सोमवार को एसटीएफ की टीम ने ताबड़तोड़ छापेमारी की, पर सफलता नहीं मिल सकी। यह भी कहा जा रहा है कि शातिर चंद्रमा मोबाइल का इस्तेमाल नहीं कर रहा है। इस कारण उसकी सटीक लोकेशन ट्रेस करने में परेशानी हो रही है। अब मुखबिरों की मदद से ही फरार अभियुक्तों को पकडऩे की कवायद की जा रही है।


    बैंक खातों की डिटेल खंगाल रही पुलिस
    एसटीएफ के अधिकारियों का यह भी कहना है कि फरारी के दौरान आरोपित खर्च चलाने के लिए या कहीं दूर भागने के लिए पैसे निकाल रहे होंगे। इसे देखते हुए उनके बैंक खातों के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है। साथ ही दूसरे रिकार्ड भी खंगाले जा रहे हैं। प्रदेश के परिषदीय स्कूलों में 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती फर्जीवाड़ा मामले में सरगना डॉ. केएल पटेल समेत 12 अभियुक्तों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है, लेकिन चंद्रमा यादव, मायापति दुबे, दुर्गेश पटेल व संदीप पटेल अभी फरार चल रहे हैं।

    रिजल्ट घोषित करने के साथ शताब्दी वर्ष में प्रवेश कर गया यूपी बोर्ड


    रिजल्ट घोषित करने के साथ शताब्दी वर्ष में प्रवेश कर गया यूपी बोर्ड


    वर्ष 2020 के हाईस्कूल और इंटर का रिजल्ट घोषित होने के साथ ही दुनिया की सबसे बड़ी परीक्षा कराने वाला यूपी बोर्ड अपने शताब्दी वर्ष में प्रवेश कर गया। प्रदेश में शिक्षा का विस्तार करने के उद्देश्य से इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम 1921 के तहत माध्यमिक शिक्षा परिषद गठित किया गया था। बोर्ड ने 1923 में पहली बार परीक्षा कराई थी जिसमें हाईस्कूल के 5655 और इंटर के 89 छात्र-छात्राएं शामिल हुए थे। 2020 की परीक्षा बोर्ड की 98वीं परीक्षा थी। 2022 में परीक्षा के 100 साल पूरे हो जाएंगे।


    परीक्षार्थियों की संख्या बढ़ने के साथ ही सरकार ने 1972 में मेरठ, 1978 में वाराणसी, 1981 में बरेली, 1986 में इलाहाबाद (वर्तमान प्रयागराज) तथा 2017 में गोरखपुर क्षेत्रीय कार्यालयों की स्थापना की। छात्रसंख्या के लिहाज से यह दुनिया की सबसे बड़ी परीक्षा होती है। 2020 की परीक्षा के लिए 56,07,118 छात्र-छात्राएं पंजीकृत थे। जितने छात्र 10वीं-12वीं की परीक्षा देते हैं उतनी दुनिया के 80-85 देशों की आबादी नहीं है।


    हर दो दशक में ऐसे बढ़ी परीक्षार्थियों की संख्या
    वर्ष         10वीं           12वीं ( छात्र-छात्राओं की संख्या)
    1923      5655         89
    1939      15545       5447
    1959      155211     100970
    1979      874438    516047
    1999      2276571   1114301
    2019      3192587   2603169



    समय के साथ बदला काम का तरीका
    समय के साथ बोर्ड ने अपने काम का तरीका भी बदला है। पिछले कुछ सालों में बोर्ड ने तकनीक का भरपूर इस्तेमाल कर नकल पर रोक लगाई है। वहीं, परीक्षार्थियों को सहूलियत दी है। उदाहरण के तौर पर इस साल से स्क्रूटनी के लिए ऑनलाइन आवेदन लिए जा रहे हैं। जनहित गारंटी अधिनियम 2011 के अंतर्गत छात्र-छात्राओं को अंकपत्रों एवं प्रमाणपत्रों में संशोधन, द्वितीय प्रतिलिपि आदि घर बैठे मिल रही है। परीक्षा के लिए केंद्रों के आवंटन से लेकर डिजिटल हस्ताक्षर वाली मार्क्सशीट तक ऐसे दर्जनों काम हैं जो बोर्ड ने तकनीक के माध्यम से बेहतर किए हैं।


    प्रमुख बदलाव
    2018 से बोर्ड परीक्षा केंद्रों का निर्धारण कम्प्यूटर के जरिए ऑनलाइन
    2019 से सीसीटीवी के साथ वॉयस रिकॉर्डर की निगरानी में परीक्षा 
    2020 में परीक्षा केंद्रों की वेबकास्टिंग कराने की शुरुआत की गई
    2018-19 सत्र से मान्यता संबंधी कार्रवाई ऑनलाइन कराई गई
    2017-18 से फर्जी पंजीकरण रोकने को बच्चों के आधार नंबर लिए गए
    2019 में 39 विषयों की परीक्षा में दो की जगह एक पेपर देना पड़ा
    2018-19 सत्र से कक्षा 9 से 12 तक में एनसीईआरटी कोर्स लागू किया गया

    संक्रमण के खतरे के कारण स्कूल खुलने को लेकर घबरा रही अध्यापिकाएं

    फर्रुखाबाद : संक्रमण के खतरे के कारण स्कूल खुलने को लेकर घबरा रही अध्यापिकाएं