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<?xml-stylesheet type="text/xsl" media="screen" href="/~d/styles/atom10full.xsl"?><?xml-stylesheet type="text/css" media="screen" href="http://feeds.feedburner.com/~d/styles/itemcontent.css"?><feed xmlns="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:openSearch="http://a9.com/-/spec/opensearch/1.1/" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:gd="http://schemas.google.com/g/2005" xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0" xmlns:feedburner="http://rssnamespace.org/feedburner/ext/1.0" gd:etag="W/&quot;CUMCSX06fip7ImA9WhRUF0s.&quot;"><id>tag:blogger.com,1999:blog-8033919830443655972</id><updated>2012-01-28T20:41:08.316+05:30</updated><category term="सेना" /><category term="मतदाता" /><category term="बीडी कानून तोड़ना" /><category term="राजनीती अत्याचार" /><category term="कन्या भ्रूण हत्या" /><category term="गाँव" /><category term="क्रिकेट आतंक" /><category term="आन्दोलन" /><category term="वन्य जीव" /><category term="महिला दिवस" /><category term="टी वी" /><category term="कविता" 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/><author><name>Dr Ashutosh Shukla</name><uri>https://profiles.google.com/100257269155750831732</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel="http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail" width="32" height="32" src="//lh4.googleusercontent.com/-m8s_63KhFOs/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAIZM/0q2igsTmGHc/s512-c/photo.jpg" /></author><generator version="7.00" uri="http://www.blogger.com">Blogger</generator><openSearch:totalResults>1028</openSearch:totalResults><openSearch:startIndex>1</openSearch:startIndex><openSearch:itemsPerPage>25</openSearch:itemsPerPage><atom10:link xmlns:atom10="http://www.w3.org/2005/Atom" rel="self" type="application/atom+xml" href="http://feeds.feedburner.com/SeedhiKhariBaat" /><feedburner:info uri="seedhikharibaat" /><atom10:link xmlns:atom10="http://www.w3.org/2005/Atom" rel="hub" href="http://pubsubhubbub.appspot.com/" /><entry gd:etag="W/&quot;DEQGRHo5eCp7ImA9WhRUF0w.&quot;"><id>tag:blogger.com,1999:blog-8033919830443655972.post-396822956583614086</id><published>2012-01-28T07:35:00.000+05:30</published><updated>2012-01-28T07:35:25.420+05:30</updated><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2012-01-28T07:35:25.420+05:30</app:edited><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="अधिकार" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="सुधार" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="चुनाव" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="उपयोग" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="उम्मीद" /><title>नेगटिव वोटिंग</title><content type="html">&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;
&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; इस बार ५ राज्यों के चुनावों में चुनाव आयोग ने नेगटिव वोटिंग के अधिकार को जिस तरह से महत्त्व देना शुरू किया है आने वाले समय में यह बड़े चुनाव सुधार की तरफ़ एक बड़ा कदम हो सकता है. अभी तक जिस तरह से कम जानकारी के कारण मतदाता को यह नहीं पता होता था कि उसके पास इन नेताओं में से किसी को भी न चुनने का भी अधिकार है या दूसरी भाषा में कहें तो मतदाता के पास नेगटिव वोटिंग करने कभी अधिकार काफ़ी दिनों से है पर जागरूकता के अभाव में न तो चुनाव करने वाले अधिकारियों और न ही मतदाताओं को इस बात की जानकारी होती थी कि वे इस तरह से भी अपना वोट दे सकते हैं. मतदाता को यह लगता था कि एक बार मतदान केंद्र में जाने के बाद उसे मत तो डालना ही होगा जबकि मत देना या फिर मत देने से मना करने का अधिकार संविधान ने हर नागरिक को दे रखा है. नेताओं द्वारा जिस तरह से मतदान अपने पक्ष में करने की कोशिशें रहती हैं उसमें यह विचार अगर जनता तक पहुँच जाये तो इससे देश का राजनैतिक भविष्य बदल सकता है. जानकारी के अभाव में लोग इस अधिकार का प्रयोग नहीं कर पाते हैं. &lt;br /&gt;
&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; आज के समय में नेताओं को इस बात का कोई ख़तरा नहीं है कि उन्हें एक बार प्रत्याशी बनने के बाद कोई रोक नहीं सकता है पर आने वाले समय में अगर नेगटिव वोटिंग के साथ कुछ कड़े प्रावधान भी आयोग द्वारा लागू किये गए तो ये नेता जो अपने लिए वोट मानते नज़र आते हैं नेगटिव वोट न करने की गुहार लगाते घूमेंगें. केवल एक बार मतदाताओं द्वारा नकारा जाना इस बात के लिए काफ़ी किया जाना &lt;span id="22_TRN_8p"&gt;चाहिए  कि &lt;span id="22_TRN_8t"&gt;आने वाले १० वर्षों तक इन प्रत्याशियों के किसी भी तरह के चुनाव को लड़ने पर रोक भी लगायी जाये तभी किसी उम्मीदवार को सही तरह से नकारा जा सकेगा. केवल एक चुनाव में कुछ उम्मीदवारों के विरुद्ध मत देने से कोई हल नहीं निकलने वाला है क्योंकि इससे वे अन्य चुनावों में फिर से ख़ुद भी लड़ने के पात्र हो जायेंगें और जनता को एक बार फिर से उसी प्रक्रिया से गुज़ारना होगा. अब इस प्रस्ताव के बारे में जिस तरह से आयोग ने मतदाताओं को जागरूक करना शुरू किया है उससे यही लगता है कि आयोग आने वाले समय में राइट टू रिजेक्ट पर भी काम करने का मन बना चुका है. पर चुनाव आयोग द्वारा सुझाये गए इस तरह के किसी भी प्रस्ताव पर अभी तक सरकार ने कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं दिखाई है जिससे यही लगता है कि अभी यह पूरा मसला लागू होने में काफ़ी समय लगने वाला है.&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;span id="22_TRN_8p"&gt;&lt;span id="22_TRN_8t"&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp; आज जब देश का कानून हर नागरिक को हर तरह की आज़ादी देता हैं तो ऐसे में मतदाता से मत देने या किसी को भी न देने का अधिकार कैसे वापस लिया जा सकता है. अगर इस फैसले के लागू होने के दूरगामी असर की बात की जाये तो आने वाले समय में नेताओं पर यह दबाव तो बन ही जायेगा कि वे अपने क्षेत्र की जनता की उम्मीदों पर खरे उतरें क्योंकि जब तक जनता के मन की बात नहीं होगी तब तक कुछ भी सुधर नहीं पायेगा. इस बार इन नकारात्मक वोटों की गिनती भी की जाएगी और उनके आंकड़े भी तैयार किये जायेंगें जिनका उपयोग भविष्य में इस बारे में और सटीक निर्णय लेने में किया जायेगा. अब जब धीरे धीरे ही सही चुनाव आयोग मतदाता को सर्वोपरि बनाने में बहुत मेहनत कर रहा है तो हम सभी मतदाताओं की भी यह ज़िम्मेदारी बनती है कि आने वाले समय में ऐसे किसी भी उम्मीदवार को किसी भी संसदीय चौखट तक न पहुँचने दें जो इस लायक नहीं हैं. अगर संभव हो तो इस तरह के बटन को ही ईवीएम में लगाने के आदेश जारी कर दिए जाएँ जिससे मतदातों में किसने नकारात्मक वोट दिया यह पता भी न चले और रजिस्टर पर नाम आदि लिखने की औपचारिकता से भी बचा जा सके. हो सकता है कि किसी क्षेत्र में काफी बड़ी संख्या में लोग प्रत्याशियों को नकारना चाहते हों तो वैसी दशा में मतदान की गति भी प्रभावित हो सकती है जिससे निपटने के लिए बटन ज़रूरी है पर हमेशा कानून के दायरे में भी अपने हितों ढूँढने वाले नेता क्या यह चाहेंगें कि ऐसा कुछ हो जाये ? &amp;nbsp; &amp;nbsp; &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&amp;nbsp; &lt;span id="22_TRN_1g"&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8033919830443655972-396822956583614086?l=seedhikharibaat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel="replies" type="application/atom+xml" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/feeds/396822956583614086/comments/default" title="टिप्पणियाँ भेजें" /><link rel="replies" type="text/html" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/01/blog-post_28.html#comment-form" title="3 टिप्पणियाँ" /><link rel="edit" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/396822956583614086?v=2" /><link rel="self" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/396822956583614086?v=2" /><link rel="alternate" type="text/html" href="http://feedproxy.google.com/~r/SeedhiKhariBaat/~3/UePiqdUPk3A/blog-post_28.html" title="नेगटिव वोटिंग" /><author><name>Dr Ashutosh Shukla</name><uri>https://profiles.google.com/100257269155750831732</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel="http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail" width="32" height="32" src="//lh4.googleusercontent.com/-m8s_63KhFOs/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAIZM/0q2igsTmGHc/s512-c/photo.jpg" /></author><thr:total>3</thr:total><feedburner:origLink>http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/01/blog-post_28.html</feedburner:origLink></entry><entry gd:etag="W/&quot;A08AQ3k8eyp7ImA9WhRUFk8.&quot;"><id>tag:blogger.com,1999:blog-8033919830443655972.post-4800805562167140207</id><published>2012-01-27T07:34:00.000+05:30</published><updated>2012-01-27T07:34:02.773+05:30</updated><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2012-01-27T07:34:02.773+05:30</app:edited><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="कर्तव्य" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="अधिकार" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="समाज" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="सुधार" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="चुनाव" /><title>अनिवार्य वोटिंग क्यों ?</title><content type="html">&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;
&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; गणतंत्र दिवस पर नई दिल्ली में अपने आवास पर झंडा रोहण करने के बाद भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने वोटिंग को अनिवार्य बनाये जाने की चुनाव आयोग की मंशा का पूरी तरह से समर्थन किया जिसके बाद से कई दलों ने काफ़ी तीख़ी प्रतिक्रियाएं ज़ाहिर की हैं. जब देश में शिक्षा को मौलिक अधिकार बनाया जा चुका है और अन्य कई बातों को कानून के घेरे में बाँधने की कोशिश की जा रही है तो फिर इस तरह से वोट देने को कानूनी रूप से आवश्यक बनाये जाने में क्या दिक्कत है ? जिस तरह से कानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने इसे गंभीर मामला बताता है उससे यही लगता है कि अभी सरकार के लिए इसे कानूनी जामा पहनाना मुश्किल है या फिर सरकार इसे अभी लागू नहीं करवाना चाहती है. दिग्विजय सिंह ने जिस तरह से इसे जबरन किया जाने वाला काम बताया है वह भी समझ से परे है क्योकि क्या देश के लिए देश के नागरिक कुछ सालों में एक बार निकल कर देश के भविष्य को सुधारने के लिए वोट भी नहीं दे सकते है ? मुलायम सिंह को इससे भी ज़रूरी अन्य काम नज़र आ रहे हैं क्योंकि शायद इससे उनकी संभावनाओं पर असर पड़ सकता है ? और कोई भी दल किसी भी परिस्थिति में आज की स्थिति में बदलाव नहीं चाहता है क्योंकि इससे वह नुकसान में जा सकता है.&lt;br /&gt;
&amp;nbsp; &amp;nbsp; आज के समय में अगर देखा जाये तो अनिवार्य वोटिंग से किस तरह से देश का परिदृश्य बदल सकता है तो मुलायम, माया, वामपंथी जैसे अन्य छोटे स्तर पर काम करने वाले दलों के लिए मुश्किल बढ़ जाने वाली है क्योंकि जिस तरह से इन दलों के वोटर बड़ी संख्या में वोट डालते रहे हैं और अन्य दलों के वोट उदासीनता के चलते घरों में बैठे रहते हैं तो अनिवार्य मतदान से वे भी बाहर निकल आयेंगें जो कि इन दलों कि सीमित संभावनाओं के लिए बहुत घातक सिद्ध हो जायेगा. इन दलों के पास जाति पर आधारित जो भी आंकड़े हैं उनमें यह उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है. शिक्षित और समाज के अन्य वर्गों के लोगों के बड़ी संख्या में वोट देने से निश्चित तौर पर इन दलों के लिए मुसीबत बढ़ जाने वाली है क्योंकि कम वोट प्रतिशत हमेशा समाज के पढ़े लिखे,उच्च और माध्यम वर्ग के कारण ही रहता है और यदि ये बाहर आकर वोट देने लगे तो इन छोटे वोट समूहों पर टिके हुए दलों के सामने अस्तित्व का संकट आ जायेगा. जिसका सबसे बड़ा लाभ भाजपा को ही मिलने वाला है क्योंकि उसका वोट घरों में बैठकर चुनाव के दिन टीवी पर फ़िल्म देखना पसंद करता है और उसे वोट के दिन की छुट्टी ज्यादा अच्छी लगती है. कांग्रेस के लिए अधिक वोट प्रतिशत मिली जुली स्थिति लेकर आने वाला है क्योंकि उसके पास समाज के अन्य वर्गों के साथ शहरी और अन्य क्षेत्रों में भी वोट उपलब्ध हैं इसलिए वह इससे कुछ खास लाभ-हानि वाली स्थिति में नहीं है.&lt;br /&gt;
&amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp; आख़िर आयोग के इस विचार का समर्थन क्यों नहीं किया जाना चाहिए क्यों हमेशा राजनैतिक दल अपनी सुविधा के अनुसार देश के संवैधानिक ढांचे को ढालना चाहते हैं ? क्यों कुछ ऐसा नहीं सोचा जाता जिससे देश के नेतृत्व को चुनने में पूरे देश की भागीदारी सुनिश्चित की जा सके ? बात चाहे कुछ भी हो जब सभी लोग वोट देने के लिए बाध्य होंगें तो अच्छे लोग भी और बड़ी संख्या में फिर से राजनीति में आना चाहेंगें क्योंकि जब उनको लगेगा कि अब जातीय मुद्दे कुछ प्रभाव नहीं दिखा पायेंगें तो वे भी आगे आने की हिम्मत दिखा पायेंगें. अभी तक केवल धर्म जाति और अन्य समीकरणों पर ही चुनाव जीते जाने के कारण देश के लिए अच्छे से काम करने वाले लोग कभी भी संसद/ विधान सभा तक नहीं पहुँच पाते हैं क्योंकि वे जिस क्षेत्र में पैदा हुए हैं वहां पर उनका आज के समय में काम करने वाला समीकरण काम ही नहीं कर पाता है ? अब इस बात के लिए प्रयास करने ही होंगें क्योंकि जब स्थानीय निकाय और ग्राम पंचायत के चुनाव होते हैं तो मत का प्रतिशत बहुत बढ़ जाता है क्योंकि उस समय एक एक वोट हार जीत के लिए अहम होता है और कोई भी प्रत्याशी इस तरह का खतरा मोल नहीं लेना चाहता है. जब छोटे चुनाव में यह अपने आप ही लागू हो जाता है तो बड़े चुनाव में इसे लागू करवाने में क्या समस्या है ?&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &lt;br /&gt;
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8033919830443655972-4800805562167140207?l=seedhikharibaat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel="replies" type="application/atom+xml" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/feeds/4800805562167140207/comments/default" title="टिप्पणियाँ भेजें" /><link rel="replies" type="text/html" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/01/blog-post_27.html#comment-form" title="1 टिप्पणियाँ" /><link rel="edit" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/4800805562167140207?v=2" /><link rel="self" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/4800805562167140207?v=2" /><link rel="alternate" type="text/html" href="http://feedproxy.google.com/~r/SeedhiKhariBaat/~3/CroMKJxPibE/blog-post_27.html" title="अनिवार्य वोटिंग क्यों ?" /><author><name>Dr Ashutosh Shukla</name><uri>https://profiles.google.com/100257269155750831732</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel="http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail" width="32" height="32" src="//lh4.googleusercontent.com/-m8s_63KhFOs/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAIZM/0q2igsTmGHc/s512-c/photo.jpg" /></author><thr:total>1</thr:total><feedburner:origLink>http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/01/blog-post_27.html</feedburner:origLink></entry><entry gd:etag="W/&quot;CUQGRng6fip7ImA9WhRUFUk.&quot;"><id>tag:blogger.com,1999:blog-8033919830443655972.post-7546412705320934686</id><published>2012-01-26T07:32:00.000+05:30</published><updated>2012-01-26T07:32:07.616+05:30</updated><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2012-01-26T07:32:07.616+05:30</app:edited><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="कर्तव्य" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="सुरक्षा" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="अधिकार" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="सुधार" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="उपयोग" /><title>पहचान का संकट</title><content type="html">&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;
&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; जिस तरह से योजना आयोग और गृह मंत्रालय के बीच राष्ट्रीय जनसँख्या रजिस्टर और आधार को लेकर गतिरोध बना हुआ था उस पर प्रधानमंत्री की पहल पर उनकी अध्यक्षता में हुई बैठक में कुछ सहमति बन गयी है और अब संभवतः ये दोनों परियोजनाएं एक साथ भी चलायी जा सकती हैं. अभी तक योजना आयोग अपने लिए आधार की बात कर रहा था जिससे उसे सभी नागरिकों की सही पहचान और उनकी वास्तविक स्थिति का पता लग सके पर सरकारी योजनाओं की गति को देखते हुए ही इस सरकार ने यह भी सोचा कि पूरे देश के नागरिकों को एक पहचान संख्या दे दी जाये जिससे आने वाले समय में पहचान का संकट पूरी तरह से समाप्त हो जाये. इस मामले में जिस तरह से योजनायें बनायीं गयी वे अपने स्तर पर बिलकुल ठीक थीं पर इनके अनुपालन में जो भी व्यावहारिक कठिनाइयाँ आने लगीं और सुरक्षा का मुद्दा बनने लगा उसके बाद आधार पर एकदम से काम रुक सा गया था. आशा है कि अब यह काम फिर से पटरी पर वापस लौट आएगा और आने वाले समय में इससे देश को बहुत लाभ भी होगा. &lt;br /&gt;
&amp;nbsp;&amp;nbsp; यह सह है कि भारत जैसे विशाल देश में इस तरह की किसी विशिष्ट पहचान की बहुत आवश्यकता है पर जब तक इस पूरी परियोजना को धरातल पर ठीक ढंग से नहीं उतारा जायेगा तब तक कोई भी इस बारे में इसके लाभ की बात नहीं कर सकता है. इस पूरे मसले में क्यों नहीं दोनों परियोजनाओं को एक साथ धन अवमुक्त किया जाये और दोनों को ही यह आदेश दे दिया जाये कि दोनों परियोजनाओं में आवश्यक पूरे आंकड़ों को ठीक ढंग से एकत्रित किया जाये और इस मसले को विभागों की खींचतान के बजाय पूरे मनोयोग से चलाया जाये जिससे आने वाले समय में कोई भी भारतीय अपनी पहचान आसानी से सिद्ध कर सके. अभी तक जिस तरह से सरकारी दस्तावेज़ बनाये जाते हैं उससे यही पता चलता है कि कहीं न कहीं भ्रष्टाचार के कारण अपात्र लोगों को भी भारतीय होने के प्रमाण दे दिए जाते हैं जिससे सुरक्षा सम्बन्धी समस्याएं उत्पन्न होने लगती हैं. अभी तक जिस तरह से पूरे देश में विभिन्न तरीके के पहचान पत्रों को उपयोग में लाया जा रहा है और सभी को अलग अलग संस्थाएं जारी करती हैं जिससे इनमें भ्रष्टाचार की बहुत गुंजाईश रहती है और देश के संसाधनों का सही उपयोग भी नहीं हो पाता है साथ ही सुरक्षा से जुडी चिंताएं अपने स्थान पर बनी रहती हैं.&lt;br /&gt;
&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; अब इस बात पर विचार किये जाने की आवश्यकता है कि क्या देश को इन दो तरह की पहचान संख्याओं की आवश्यकता है या फिर दोनों को एक साथ जोड़कर चलाया जाना चाहिए क्योंकि दोनों के उद्देश्य एक जसे ही हैं पर उनको अलग अलग विभागों द्वारा संचालित किया जा रहा है. अगर इसमें किसी विभाग की प्रतिष्ठा का कोई मसला बन रहा हो तो उसे भी समझा जाना चाहिए क्योंकि देश की प्रतिष्ठा से बढ़कर किसी की भी प्रतिष्ठा नहीं हो सकती है. साथ ही एक जैसा काम करने में देश का पैसा दो बार खर्च करने की भी क्या आवश्यकता है क्योंकि जब तक कोई एक समाधान नहीं निकलता है तब तक इन मदों में खर्च किये जाने वाले पैसे का क्या उपयोग है ? अच्छा तो यह रहेगा कि इस पूरी परियोजना को विभागों की खींचतान से अलग कर एक नए नाम से विभाग बना दिया जाए जो केवल इससे जुड़े मसलों पर ही विचार करे और साथ ही इसके लिए एक न्यायालय या न्यायिक आयोग भी बना दिया जाये जो पहचान से जुड़े किसी भी विवाद को समयबद्ध तरीके से निपटाने के लिए बाध्य हो. जब इतने बड़े स्तर पर काम हो रहा है तो आने वाले समय में इस तरह के मसले भी सामने आ सकते हैं और उनको सामान्य अदालतों में निपटाने की बाध्यता भी नहीं होनी चाहिए जिससे यह योजना पूरी तरह से और पूरे देश में लागू हो सके. &amp;nbsp; &lt;br /&gt;
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8033919830443655972-7546412705320934686?l=seedhikharibaat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel="replies" type="application/atom+xml" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/feeds/7546412705320934686/comments/default" title="टिप्पणियाँ भेजें" /><link rel="replies" type="text/html" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/01/blog-post_26.html#comment-form" title="1 टिप्पणियाँ" /><link rel="edit" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/7546412705320934686?v=2" /><link rel="self" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/7546412705320934686?v=2" /><link rel="alternate" type="text/html" href="http://feedproxy.google.com/~r/SeedhiKhariBaat/~3/mvtQ25StAaM/blog-post_26.html" title="पहचान का संकट" /><author><name>Dr Ashutosh Shukla</name><uri>https://profiles.google.com/100257269155750831732</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel="http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail" width="32" height="32" src="//lh4.googleusercontent.com/-m8s_63KhFOs/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAIZM/0q2igsTmGHc/s512-c/photo.jpg" /></author><thr:total>1</thr:total><feedburner:origLink>http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/01/blog-post_26.html</feedburner:origLink></entry><entry gd:etag="W/&quot;DUAGRH87eyp7ImA9WhRUFEg.&quot;"><id>tag:blogger.com,1999:blog-8033919830443655972.post-4283941446346108763</id><published>2012-01-25T07:45:00.000+05:30</published><updated>2012-01-25T07:45:25.103+05:30</updated><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2012-01-25T07:45:25.103+05:30</app:edited><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="संविधान" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="कर्तव्य" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="अधिकार" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="अराजकता" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="चुनाव" /><title>राष्ट्रीय मतदाता दिवस</title><content type="html">&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;
&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; चुनव आयोग ने देश के संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकार मतदान के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए पिछले वर्ष राष्ट्रीय मतदाता दिवस २५ जनवरी को मनाया जाना शुरू किया गया है. जिस तरह से आम लोग मतदान से विमुख रहा करते थे उससे बाहर आने और हर १८ साल से ऊपर के युवा को वोटर बनाने की चुनाव आयोग की मुहिम ने पिछले साल काफ़ी सफलता पायी थी ऐसे में इस वर्ष जब देश की सबसे बड़ी आबादी वाले राज्य यूपी समेत ५ राज्यों में चुनाव होने जा रहे हैं तो इस दिवस की महत्ता और अधिक बढ़ जाती है. आयोग के मोटे अनुमान के अनुसार इस बार लगभग ३ करोड़ नए मतदाताओं के नाम जुड़ने वाले हैं जिनमें से आधे से अधिक वे हैं जो इस बार मतदान देने की उम्र पार कर रहे हैं. जिस तरह से चुनाव आयोग अपने प्रयासों से लगातार जनता को जागरूक करने में लगा हुआ है और जो भी सुधार चुनाव से जुड़ी दिशा में किये जा रहे हैं उनका आने वाले समय में देश को बहुत लाभ मिलने वाला है. अघोषित रूप से जो ज़िम्मेदारी हमारे नेताओं को दी गयी थी कि वे स्वतः ही हर व्यक्ति को वोटर बनवाने का प्रयास करते रहेंगें वह भी कहीं न कही पीछे छोड़ दी गयी थी.&lt;br /&gt;
&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; देश में दो दशक पहले जिस तरह से मतदान केंद्र पूरी तरह से अराजक तत्वों की भेंट चढ़ गए थे उसके बाद यही लगने लगा था कि अब देश में कभी भी मतदाता सम्मानपूर्वक अपने मत का उपयोग कर सकेगा क्योंकि उस समय होने वाली हिंसा ने मतदाताओं को वोट देने से काफ़ी हद तक रोक दिया था पर शेषन के चुनाव आयुक्त बनने के बाद ही इसमें सुधार होने शुरू हो गए थे फिर भी शेषन की नियुक्ति पर विपक्षी दलों ने बहुत हो हल्ला मचाया था क्योंकि वे किसी समय राजीव गाँधी के खास अधिकारियों में रह चुके थे. आज देश शेषन का सम्मान करता है कि उन्होंने देश को चुनावी अराजकता से बाहर निकाल लिया और पूरे चुनावी परिदृश्य को बदल कर रख दिया. उस समय भी आलोचना वादियों के पास यही सुर था कि शेषन के जाने के बाद सब कुछ पुराने जैसा ही हो जाने वाला है पर अच्छा ही हुआ कि उनके बाद आने वाले सभी चुनाव आयुक्तों ने उस परंपरा को आगे बढ़ाया और आज देश में लगभग हिंसा रहित चुनाव होना आम बात हो गयी है. अब जिस तरह से आयोग इस बात पर भी जोर दे रहा है कि जो भी मतदाता हैं वे मतदान के दिन घरों से निकलें और देश के बेहतर भविष्य के लिए अपनी पसंद के व्यक्ति को वोट दें.&lt;br /&gt;
&amp;nbsp;&amp;nbsp; आज जिस तरह से राजनीति में गिरावट देखी जा रही है उसके पीछे कहीं न कहीं से आम जनता के वोट देने के रुझान में कमी से भी असर आया है क्योंकि जो अराजक तत्व धर्म/जाति या समूह आधारित चुनाव लड़ते हैं उनके लिए मतदान का कम प्रतिशत हमेशा ही लाभकारी होता है और वे यह नहीं चाहते कि सभी लोग अपने घरों से निकल कर वोट देने के लिए आ जाएँ क्योंकि तब उनके समर्थक कम पड़ जाते हैं और लोकतंत्र व आम जनता की जीत के साथ संविधान की भावना की जीत हो जाती है. अब यह हर वोटर का कर्तव्य है कि वो वोट देने के लिए ज़रूर जाये क्योंकि जो भी वोट देने नहीं जा रहा है वह कहीं न कहीं से इस बात का समर्थन कर रहा है कि देश में अराजक तत्व हावी हो जाएँ. अब चेत जाने का समय है क्योंकि चुनाव आयोग ने जिस तरह से मतदाताओं को इस राष्ट्रीय पर्व में सबसे आगे कर दिया है उसका लाभ उठाते हुए अब सभी को देश के प्रति अपने कर्तव्य का पालन करना चाहिए जिससे आने वाले समय में कोई यह न कह सके कि पहले के लोगों ने अपनी ज़िम्मेदारियों का निर्वहन ठीक से नहीं किया जिस कारण से ऐसी स्थिति बन गयी है. आइये गणतंत्र दिवस से पहले गणतंत्र को मज़बूत करने के इस क़दम में चुनाव आयोग के साथ क़दम मिलकर चलें. &amp;nbsp; &amp;nbsp; &lt;br /&gt;
&amp;nbsp; &lt;br /&gt;
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8033919830443655972-4283941446346108763?l=seedhikharibaat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel="replies" type="application/atom+xml" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/feeds/4283941446346108763/comments/default" title="टिप्पणियाँ भेजें" /><link rel="replies" type="text/html" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/01/blog-post_25.html#comment-form" title="0 टिप्पणियाँ" /><link rel="edit" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/4283941446346108763?v=2" /><link rel="self" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/4283941446346108763?v=2" /><link rel="alternate" type="text/html" href="http://feedproxy.google.com/~r/SeedhiKhariBaat/~3/B6BAiGidZTg/blog-post_25.html" title="राष्ट्रीय मतदाता दिवस" /><author><name>Dr Ashutosh Shukla</name><uri>https://profiles.google.com/100257269155750831732</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel="http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail" width="32" height="32" src="//lh4.googleusercontent.com/-m8s_63KhFOs/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAIZM/0q2igsTmGHc/s512-c/photo.jpg" /></author><thr:total>0</thr:total><feedburner:origLink>http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/01/blog-post_25.html</feedburner:origLink></entry><entry gd:etag="W/&quot;CEcBQ387eip7ImA9WhRUE0o.&quot;"><id>tag:blogger.com,1999:blog-8033919830443655972.post-8006176119326637631</id><published>2012-01-24T07:57:00.000+05:30</published><updated>2012-01-24T07:57:32.102+05:30</updated><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2012-01-24T07:57:32.102+05:30</app:edited><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="इस्लाम" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="कर्तव्य" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="अधिकार" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="समाज" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="उपयोग" /><title>मुसलमान, विकास और राष्ट्र</title><content type="html">&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;
&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; चुनावी माहौल में जहाँ हर तरफ़ केवल मुस्लिम वोट बैंक की बातें ही हो रही हैं उससे यही लगता है कि अभी आने वाले काफी समय तक राजनैतिक दल मुस्लिम वर्ग को एक काल्पनिक भय में जिंदा रखना चाहते हैं जिससे वे अपने निहित स्वार्थों की पूर्ति कर सकें. क्या कारण है कि सदियों से भारत में रहने के बाद भी आज मुसलमानों पर क्षण भर में ही संदेह किया जाने लगता है ? क्यों उनकी निष्ठा को देश के साथ जोड़कर नहीं देखा जाता और क्यों उनके बारे में हमेशा इस तरह की बातें की जाती हैं कि वे देश के प्रति समर्पित नहीं हैं ? आज जब पूरी दुनिया तेज़ी से आगे जा रही है और इसमें इस्लाम के उदय से जुड़ा देश सऊदी अरब भी शामिल है तो इस परिवर्तन की बयार आख़िर भारत के मुसलमानों तक क्यों नहीं पहुँच रही है ? आज भी देश के मुस्लिम समाज को विकास की बातों के स्थान पर केवल धार्मिक भावनाओं से जुड़ी संवेदनशील बातों में ही उलझाने का काम क्यों किया जाता है ? क्या देश की आज़ादी में मुसलमानों का योगदान नहीं था ? पर केवल विभाजन की बात ने पूरी कौम पर संदेह का प्रश्नचिन्ह लगा दिया ? इस सभी बातों का जवाब केवल देश के मुसलमानों के पास ही है क्योंकि इस सबसे वे ही सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं.&lt;br /&gt;
&amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp; सबसे पहले मुसलमानों को अपने पर भरोसा करना सीखना होगा कि वे इस देश का अहम् हिस्सा हैं और अगर उन्हें तरक्की करनी है तो उन्हें देश के विकास में अपनी हिस्सेदारी निभानी पड़ेगी. जब देश कि लगभग २०% आबादी देश के विकास में योगदान नहीं देगी तो उनका व देश का कैसे भला हो पायेगा ? आज हर तरफ़ मुसलमानों पर पिछड़े होने का आरोप लगाया जाता है पर कभी इस बारे में ध्यान नहीं दिया जाता कि वे किन मामलों में पिछड़े हैं ? मुसलमानों में समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा की कोई कमी नहीं है क्योंकि वे जिस तरह से अपने धार्मिक रिवाजों को श्रद्धा से मानते हैं उससे यही पता चलता है कि वे पूरी तरह से जिंदा कौम हैं पर इसके बाद भी वे अपनी शक्ति को पहचान नहीं पा रहे हैं तो इसके पीछे क्या कारण है ? मुसलमानों ने अपने को जिस तरह से पार्टी या व्यक्ति विशेष के लिए अपने को वोट बैंक में तब्दील कर दिया है आज वही उसके गले का फन्दा बनती जा रही है क्योंकि इससे राजनैतिक लोग उनके मन में भय उत्पन्न कर देते हैं जो आगे चलकर उनमें असुरक्षा का माहौल उत्पन्न करती है. जिस तरह से छोटी छोटी बातों से मुसलमाओं को बहलाने की कोशिश की जाती है उससे उनके भविष्य में अच्छी संभावनाओं पर रोक लग जाती है पर तात्कालिक लाभ दिखाकर कुछ चुनावों तक मुसलमानों से वोट बटोरने का काम करने वाले दल उनके लिए वास्तव में कुछ भी नहीं करना चाहते हैं.&lt;br /&gt;
&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp; अब समय है कि मुसलमानों को अपनी इस तरह की छवि को तोड़ना होगा जिससे कुछ लोगों को उन पर उँगली उठाने का अवसर मिलता है. कश्मीर में मुसलमानों ने ही जब सुरक्षा बलों के साथ सहयोग शुरू किया तभी उनकी ज़िन्दगी बेहतर हुई और वहां पर आज पहले की अपेक्षा काफी शांति है. ठीक इसी तरह से पूरे देश के मुसलमानों को अपने बेहतर भविष्य और राष्ट के संसाधनों में व्यापक हिस्सेदारी के लिए अपने में शिक्षा का प्रसार करना ही होगा क्योंकि पिछले कुछ वर्षों से राजनेताओं ने केवल मदरसों की बात की है उससे आम मुसलमान की रोज़ी रोटी पर असर पड़ा है. आज इन मदरसों में दीनी तालीम के साथ ऐसी तालीम भी दी जानी चाहिए जो आज के समय में रोज़गार परक हो. अलीगढ़ मुस्लिम विश्विद्यालय की स्थापना मुसलमानों की बेहतरी के बारे में सोचकर ही की गयी थी पर उसके बाद से इस स्तर पर कोई काम क्यों नहीं हुआ यह सवाल आज हर मुसलमान को देश के राजनैतिक तंत्र से पूछना चाहिए ? इसका कोई जवाब उनके पास नहीं है क्योंकि उन्हें देश में डरा और सहमा हुआ मुसलमान चाहिए जो छोटी छोटी बातों के लिए उनकी तरफ़ ताकता रहे वे कभी भी नहीं चाहेंगें कि उनका इतना बड़ा वोट बैंक ख़ुद आगे बढ़कर देश की मुख्यधारा में शामिल हो जाये और उनसे अपने और अपनी कौम के बारे में ऐसे सवाल पूछे जिनका जवाब वे देना ही नहीं चाहते हैं.....&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &lt;br /&gt;
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8033919830443655972-8006176119326637631?l=seedhikharibaat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel="replies" type="application/atom+xml" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/feeds/8006176119326637631/comments/default" title="टिप्पणियाँ भेजें" /><link rel="replies" type="text/html" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/01/blog-post_24.html#comment-form" title="2 टिप्पणियाँ" /><link rel="edit" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/8006176119326637631?v=2" /><link rel="self" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/8006176119326637631?v=2" /><link rel="alternate" type="text/html" href="http://feedproxy.google.com/~r/SeedhiKhariBaat/~3/Hp6CLTowBOU/blog-post_24.html" title="मुसलमान, विकास और राष्ट्र" /><author><name>Dr Ashutosh Shukla</name><uri>https://profiles.google.com/100257269155750831732</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel="http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail" width="32" height="32" src="//lh4.googleusercontent.com/-m8s_63KhFOs/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAIZM/0q2igsTmGHc/s512-c/photo.jpg" /></author><thr:total>2</thr:total><feedburner:origLink>http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/01/blog-post_24.html</feedburner:origLink></entry><entry gd:etag="W/&quot;CU4ERH84fSp7ImA9WhRUEkU.&quot;"><id>tag:blogger.com,1999:blog-8033919830443655972.post-3440748907294123713</id><published>2012-01-23T07:28:00.000+05:30</published><updated>2012-01-23T07:28:25.135+05:30</updated><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2012-01-23T07:28:25.135+05:30</app:edited><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="इस्लाम" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="कर्तव्य" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="अधिकार" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="उपयोग" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="उम्मीद" /><title>मुसलमान और अल्पसंख्यक ?</title><content type="html">&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;
&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; देश के ५ राज्यों के चुनावी माहौल में जहाँ सभी दल कुछ वोट पक्के करने के लिए कुछ भी बोलने से परहेज़ नहीं कर रहे हैं उसमें ही राज्यसभा के उप-सभापति के. रहमान खान ने बिहार में मुसलमानों की समस्याओं पर विचार करने के लिए बुलाये गए एक सम्मलेन में जो कुछ कहा अब उस पर देश के मुसलमानों को गंभीरता से सोचना होगा. उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि अब देश के मुसलमानों को अपने ऊपर लगा हुआ माइनारिटी का ठप्पा ख़ुद ही हटाना होगा और यह समझना होगा कि वे इस देश में अल्पसंख्यक नहीं बल्कि दूसरी सबसे बड़ी आबादी हैं. उन्होंने मुसलमानों से आज के परिवेश में शिक्षा के महत्त्व को भी समझने का आह्वाहन किया क्योंकि उनके अनुसार मुसलमानों के पिछड़ेपन का सबसे बड़ा कारण अशिक्षा ही है और जब तक उनमें साक्षरता का प्रतिशत नहीं बढ़ेगा तब तक कौम तरक्की नहीं कर पायेगी. ऐसा कह कर के. रहमान खान ने मुसलमानों की सही स्थिति के बारे में जैसे पूरी कौम को आईना दिखा दिया है क्योंकि अभी तक आज़ादी के बाद से मुसलमान राजनेताओं के हाथों बंधक बने हुए हैं जिससे उनकी तरक्की के सभी रास्ते बंद होते जा रहे हैं. मुसलमानों के विकास को उनकी शिक्षा से जोड़ दिया जाना चाहिए और देश में अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में सही शिक्षा दिलाने की व्यवस्था की जानी चाहिए क्योंकि जब शिक्षा बढ़ेगी तो पूरी कौम की सोच भी बदल जाएगी और वे नेताओं के इन भ्रामक प्रचारों से भी बच पायेंगें. &amp;nbsp; &lt;br /&gt;
&amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp; देश में आज जिस तरह से मुसलमानों के वोटों को लेकर खींचतान मची रहती है उसमें यह बयान बहुत कुछ अपने आप ही कह देता है. जिस रंगनाथ मिश्र और सच्चर समिति की सिफारिशों की बातें तो की जाती हैं पर उनके बारे में कुछ भी विस्तार से नहीं बताया जाता है जस कारण से मुसलमानों को यह लगता है कि जैसे इन सिफारिशों में कोई अलादीन का चिराग़ है जिसे सत्ताधारी दल छिपा कर रखते हैं ? अगर किसी समिति की सिफारिश से ही लोगों की स्थिति में परिवर्तन होने वाला होता तो देश पता नहीं कहाँ पहुँच गया होता पर आज जिस तरह से मुसलमानों को डराकर उनसे वोट लिए जाते हैं वह प्रवृत्ति देश और समाज के लिए घातक है. देश में ईसाई, पारसी, जैन और बौद्ध आदि वास्तव में अल्पसंख्यक हैं पर वे कभी भी सरकार पर भेदभाव का आरोप नहीं लगाते हैं क्योंकि उनमें शिक्षा का स्तर बहुत ऊंचा है और वे आज़ादी के पहले से ही शिक्षा में आगे रहे हैं जबकि मुसलमानों के लिए केवल बातें ही की जाती हैं और उन्हें पल पल इस अंदेशे में जिंदा रखा जाता हैं कि हमारे साथ रहो वरना नहीं बचोगे ? यह मुद्दा बिलकुल सही समय पर उठाया गया है भले ही इसका कोई बहुत बड़ा असर इन चुनावों में न दिखाई दे पर आने वाले समय में यह देश के लिए एक मुद्दा तो बन ही सकता है.&amp;nbsp; &amp;nbsp; &lt;br /&gt;
&amp;nbsp;&amp;nbsp; अच्छा ही है कि यह बात ख़ुद एक मुस्लिम की तरफ़ से आई है और अब पूरे मुस्लिम समुदाय को यह समझने की ज़रुरत है कि वे भी इस देश के सामान्य नागरिक हैं और उन्हें भी वही सुविधाएँ मिली हुई हैं जो अन्य लोगों को मिली हैं. साथ ही उन्हें अपने को अल्पसंख्यक कहलाने से परहेज़ भी करना चाहिए क्योंकि इससे यही लगता है कि जैसे वे पता नहीं कितने कम हैं और नेता अपने स्वार्थ के लिए उन्हें वास्तव में उनकी शक्ति से वंचित किये हुए हैं ? देश में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने भी बहुत कुछ किया है पर उसके बारे में कितने लोग जानते हैं ? देश का राजनैतिक चरित्र ही कुछ इस तरह का हो गया है किसी आतंकी के मुसलमान होने की ख़बर तो तेज़ी से उड़ती है पर खुशबू मिर्ज़ा कौन हैं और किस परिवार से हैं यह बहुत कम लोग जानते हैं ? इस तरह की ख़बरों से मुसलमानों को भी यह लगने लगता हैं कि वे वास्तव में अब भी भारत में बहुत असुरक्षित हैं जबकि वास्तविकता इससे बहुत दूर है. अब देश के मुस्लिम वर्ग को अपनी शिक्षा, पिछड़ेपन और कौमी तालीम में आधुनिकीकरण के लिए सरकार पर दबाव डालना चाहिए जिससे भारत में केवल कुछ इदारे ही इस बात के गवाह न रहें बल्कि पूरी दुनिया में इस्लाम की सही रौशनी फ़ैलाने का काम भी यहीं के मुसलमान करें.&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &lt;br /&gt;
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8033919830443655972-3440748907294123713?l=seedhikharibaat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel="replies" type="application/atom+xml" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/feeds/3440748907294123713/comments/default" title="टिप्पणियाँ भेजें" /><link rel="replies" type="text/html" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/01/blog-post_23.html#comment-form" title="1 टिप्पणियाँ" /><link rel="edit" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/3440748907294123713?v=2" /><link rel="self" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/3440748907294123713?v=2" /><link rel="alternate" type="text/html" href="http://feedproxy.google.com/~r/SeedhiKhariBaat/~3/XGAVXfEId1E/blog-post_23.html" title="मुसलमान और अल्पसंख्यक ?" /><author><name>Dr Ashutosh Shukla</name><uri>https://profiles.google.com/100257269155750831732</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel="http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail" width="32" height="32" src="//lh4.googleusercontent.com/-m8s_63KhFOs/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAIZM/0q2igsTmGHc/s512-c/photo.jpg" /></author><thr:total>1</thr:total><feedburner:origLink>http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/01/blog-post_23.html</feedburner:origLink></entry><entry gd:etag="W/&quot;Dk8GRngzfCp7ImA9WhRUEkU.&quot;"><id>tag:blogger.com,1999:blog-8033919830443655972.post-2229341573128347263</id><published>2012-01-22T06:30:00.000+05:30</published><updated>2012-01-23T07:43:47.684+05:30</updated><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2012-01-23T07:43:47.684+05:30</app:edited><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="अधिकार" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="समाज" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="संशोधन" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="उपयोग" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="उम्मीद" /><title>तेल क्षेत्र में आरक्षण</title><content type="html">&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;
&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; जिस तरह से पेट्रोलियम मंत्रालय ने आने वाले समय में पेट्रोल पम्प और गैस एजेंसियों के आवंटन में नए सिरे से बदलाव के बारे में स्थिति स्पष्ट की है उससे यही लगता है कि एक और अच्छा प्रयास केवल नियमों की भेंट चढ़ जाने वाला है. जिस तरह से अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए कोटा बढ़ाकर २७ % किये जाने का प्रस्ताव है वह निश्चित तौर पर बहुत ही अच्छा है पर इससे होने वाले वास्तविक लाभ को ज़मीन पर जब देखा जायेगा तो वे नगण्य ही होंगें. जिस तरह से सरकार ने इस क्षेत्र में सभी की भागीदारी के बारे में फिर से सोच वह कहीं से भी ग़लत नहीं है पर आज के समय में इन खुदरा केन्द्रों को खोलने के लिए जितने धन की आवश्यकता होती है वह कैसे जुटाई जाएगी इस बात पर अभी भी संदेह बना हुआ है. योजनाओं में कमी नहीं होती पर जब उसके क्रियान्वयन की बात की जाती है तो सब कुछ गड़बड़ा जाता है. समाज के वंचितों के लिए इस तरह के प्रयास किये जाएँ इसमें कोई संदेह नहीं है पर इसमें भी क्रीमीलेयर का ध्यान रखा जाये वरना जिनको लाभ देने के लिए यह कवायद की जा रही है वह वंचित ही रह जायेंगें.&lt;br /&gt;
&lt;div style="text-align: left;"&gt;
&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; क्या आज देश में अन्य पिछड़ा वर्ग के लोग या अन्य श्रेणियों में आरक्षण पाने वाले वर्ग के पैसे वाले लोग इन सुविधाओं को नहीं लपक लेंगें ? कौन होगा जो इस तरह की बातों पर अंकुश लगा सकेगा कि यह लाभ वास्तव में उन लोगों तक पहुंचे जो इसके हकदार हैं ? आज तक विभिन्न सरकारी योजनाओं में जितनी भी सुविधाएँ पिछड़ों के लिए बनायीं गयी हैं उनमें से कितनी वास्तव में इस वर्ग की सहायता कर पाने में सफल हुई हैं ? कहीं भी किसी के पास इस बात के आंकड़े नहीं होंगें कि नियम के अनुसार आरक्षण का पालन करने के बाद भी कितने नए लोगों को इसका लाभ मिल पाया है ? ऐसा सिर्फ इसलिए है कि आम लोग यह सब जान ही नहीं पाते हैं और उनके लिए यह सब सपने जैसा ही होता है कि सरकार के स्तर पर कहाँ क्या चल रहा है ? ऐसे में इस बात की सबसे बाद चुनौती होती है कि किस तरह से वास्तविक पात्रों तक इन लाभों को पहुँचाया जाये ? पूरे देश में अगर किसी भी आरक्षित श्रेणी से दिए गए खुदरा केन्द्रों की लिस्ट बनायीं जाये तो उसमें ९०% वही लोग होंगें जिनके रिश्तेदार इसमें पहले से थे या फिर वे किसी नेता/ अधिकारी के रिश्तेदार थे ? &lt;/div&gt;
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&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; इस तरह के आवंटन को करने में अगर सहकारिता का समावेश कर दिया जाये और सम्बंधित आरक्षित वर्ग की समितियां बनाकर यह तय किया जाये कि इस तरह के लाभ को समिति में बांटा जायेगा और समिति में उसी वर्ग के लोग होंगें जिनके लिए यह आवंटित श्रेणी है तो इससे जहाँ सहकारिता को बल मिलेगा वहीं दूसरी तरफ़ इससे मिलने वाले लाभ को एक व्यक्ति तक जाने से रोका जा सकेगा और इसके माध्यम से कई अन्य लोगों को भी लाभ मिल सकेगा. इस क्षेत्र से जुड़ी तमाम गतिविधियाँ होती हैं जिन्हें इस केंद्र के साथ ही जोड़ा जा सकता है और समिति की आय को बढ़ाया जा सकता है. इस तरह के काम को शुरू करने में अनुभव की कमी के कारण हो सकता है कि सफलता आसानी से न मिले पर सहकारिता विभाग से जोड़ने के कारण इस क्षेत्र में भी सहभागिता को आज़माया जा सकता है. आज देश के अधिकांश राज्यों में सहकारिता ने दम तोड़ दिया है ऐसे में इस पर भरोसा करना भी कितना सही होगा यह भी नहीं कहा जा सकता है ? फिलहाल इस काम को इस तरह से प्रायोगिक तरीके से चलने में कोई बुराई नहीं है और हो सकता है यह तंत्र बहुत अच्छे से काम करना शुरू कर दे और समाज के पिछड़े वर्ग को भी इसका वास्तविक लाभ मिल सके. &lt;/div&gt;
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&amp;nbsp; &lt;/div&gt;
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है..&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8033919830443655972-2229341573128347263?l=seedhikharibaat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel="replies" type="application/atom+xml" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/feeds/2229341573128347263/comments/default" title="टिप्पणियाँ भेजें" /><link rel="replies" type="text/html" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/01/blog-post_22.html#comment-form" title="1 टिप्पणियाँ" /><link rel="edit" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/2229341573128347263?v=2" /><link rel="self" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/2229341573128347263?v=2" /><link rel="alternate" type="text/html" href="http://feedproxy.google.com/~r/SeedhiKhariBaat/~3/ccxb77VRHhE/blog-post_22.html" title="तेल क्षेत्र में आरक्षण" /><author><name>Dr Ashutosh Shukla</name><uri>https://profiles.google.com/100257269155750831732</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel="http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail" width="32" height="32" src="//lh4.googleusercontent.com/-m8s_63KhFOs/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAIZM/0q2igsTmGHc/s512-c/photo.jpg" /></author><thr:total>1</thr:total><feedburner:origLink>http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/01/blog-post_22.html</feedburner:origLink></entry><entry gd:etag="W/&quot;DUEEQ3Y5fyp7ImA9WhRUEU0.&quot;"><id>tag:blogger.com,1999:blog-8033919830443655972.post-3474950569826248484</id><published>2012-01-21T06:30:00.000+05:30</published><updated>2012-01-21T06:30:02.827+05:30</updated><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2012-01-21T06:30:02.827+05:30</app:edited><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="कर्तव्य" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="कृषि" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="विकास" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="सुधार" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="उपयोग" /><title>इन्टरनेट और विकास गति</title><content type="html">&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;
&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; क्या देश में इन्टरनेट की पहुँच बढ़ने का सीधा सम्बन्ध देश की विकास गति से हो सकता है ? सुनने में यह भले ही अटपटा लगे पर यह सच्चाई है जो दिल्ली में इन्टरनेट और मोबाइल एसोसियेशन ऑफ़ इंडिया के एक अध्ययन में सामने आई है. अभी तक इन सभी के बारे में यह माना जाता था कि इनसे केवल शहरी क्षेत्रों में रोज़गार के अवसर पैदा होते हैं पर अब यह बात सामने आई है कि जिन राज्यों में इन्टरनेट और मोबाइल का जितना अधिक फैलाव होगा भविष्य में उसका सीधा लाभ उस राज्य के विकास पर पड़ता हुआ  दिखाई देगा. इस अध्ययन के लिए कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोज़गार और सामुदायिक सेवाओं को मानक के रूप में चुना गया. यह सही है कि देश में इन सभी क्षेत्रों में विकास करने की असीम संभावनाएं है और जिस तरह से हमारा देश कृषि प्रधान है अगर इस मूलभूत काम को किसी तरह से इससे जोड़ा जा सके तो आने वाले समय में इसका बहुत बड़ा प्रभाव दिखाई देने लगेगा.&amp;nbsp; समय पर होने वाली बारिश किस तरह से सकल घरेलु उत्पाद पर असर डालती है यह हम सभी जानते हैं तो इस क्षेत्र की उपेक्षा करके अब केवल शहरों में बसने वाला भारत देश को आगे नहीं ले जा सकता है. &lt;br /&gt;
&amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp; देश के गाँवों में कृषि उत्पाद आसानी से मिल जाया करते हैं पर वहां पर आज भी सरकारी कृषि विभाग केवल खानापूरी करने के लिए ही हैं जबकि अगर ये विभाग अपना काम ठीक ढंग से करना शुरू कर दें तो पूरे देश की तकदीर केवल कृषि क्षेत्र ही बदलने की शक्ति रखता है. इसके लिए जितने मनोयोग से कृषि अनुसन्धान के नए आयामों को आम किसान तक पहुँचाना होगा वहीं उसके साथ उर्वरक आदि अन्य ज़रूरतों की भी पूर्ति समय से करनी होगी. नेट के माध्यम से उत्पाद को बेचे जाने के लिए ये किसान स्वतंत्र होंगें जिससे उनकी आमदनी में वृद्धि होगी और उनकी क्रय शक्ति भी बढ़ेगी जो अंत में देश के बाज़ार को मज़बूत करने का काम ही करेगी. आज भी देश में हर क्षेत्र में मूलभूत सुविधाओं में बहुत सुधार की गुंजाइश है पर इस बारे में जो भी योजनायें बनायीं जाती हैं वे अपने उद्देश्यों को नहीं पूरा कर पाती हैं. अच्छा है कि सरकार इस दिशा में दृढ़ता से काम कर रही है और आने वाले कुछ वर्षों में जिस तरह से हर चीज़ नेट पर आधारित होने जा रही है उसके लिए देश तैयार हो रहा है.&lt;br /&gt;
&amp;nbsp; &amp;nbsp; इस तरह के काम को केवल सरकारी स्तर पर ही पूरा नहीं किया जा सकता है क्योंकि वहां पर व्याप्त भ्रष्टाचार के कारण एक बार हर काम रुक जाता है इसलिए अब निजी क्षेत्र के लिए हर तरह के दरवाज़े खोलने ही होंगें और सरकार को उन पर कड़ी नज़र रखनी होगी जिससे निजी क्षेत्र मनमानी पर न उतर आये ? इस अवसर पर इस रिपोर्ट से सहमत दूर संचार सचिव आर चंद्रशेखर ने भी यह कहा कि इस तरह की अधिकांश बातों और योजनाओं पर सरकारी अभी से सचेत है और कई क्षेत्रों में काम पहले से ही शुरू किया जा चुका है. देश को आगे बढ़ाने में देश के युवाओं की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होने वाली है और ऐसी स्थति में अभी ये इस युवा ऊर्जा को सही ढंग से समायोजित करने और उचित दिश दिखने की आवश्यकता है बाकी का सारा काम ये खुद ही कर पाने में सक्षम है. अब उन लोगों को भी चुप होकर बैठ जाना चिय जो केवल परंपरागत तरीके से विकास की बातें किया करते हैं क्योंकि अब देश की बड़ी आबादी की शक्ति का सही उपयोग ही हमें फिर से दुनिया में आगे ला सकता है. &amp;nbsp; &lt;br /&gt;
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8033919830443655972-3474950569826248484?l=seedhikharibaat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel="replies" type="application/atom+xml" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/feeds/3474950569826248484/comments/default" title="टिप्पणियाँ भेजें" /><link rel="replies" type="text/html" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/01/blog-post_21.html#comment-form" title="1 टिप्पणियाँ" /><link rel="edit" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/3474950569826248484?v=2" /><link rel="self" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/3474950569826248484?v=2" /><link rel="alternate" type="text/html" href="http://feedproxy.google.com/~r/SeedhiKhariBaat/~3/xlSHkTEEAsc/blog-post_21.html" title="इन्टरनेट और विकास गति" /><author><name>Dr Ashutosh Shukla</name><uri>https://profiles.google.com/100257269155750831732</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel="http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail" width="32" height="32" src="//lh4.googleusercontent.com/-m8s_63KhFOs/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAIZM/0q2igsTmGHc/s512-c/photo.jpg" /></author><thr:total>1</thr:total><feedburner:origLink>http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/01/blog-post_21.html</feedburner:origLink></entry><entry gd:etag="W/&quot;A0QEQX8yfCp7ImA9WhRVGU4.&quot;"><id>tag:blogger.com,1999:blog-8033919830443655972.post-7432138686580797347</id><published>2012-01-19T06:30:00.001+05:30</published><updated>2012-01-19T07:45:00.194+05:30</updated><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2012-01-19T07:45:00.194+05:30</app:edited><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="कानून" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="रेल" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="अधिकार" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="सुविधा" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="उपयोग" /><title>रेलवे और सुरक्षा</title><content type="html">&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;
&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; जिस तरह से रेलवे ने एसी कोच में यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए यात्रा के समय अपने मूल पहचान पत्र साथ में रखने का आदेश पर १५ फरवरी से अमल लाने को कहा है उससे यही लगता है कि आने वाले समय में इन दर्जों में यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए कुछ सुकून भरे दिन आने वाले हैं. अभी तक जो कुछ भी चल रहा था उससे यही लगता था कि यात्री आरक्षण के मसले पर रेलवे ने बहुत कुछ ठीक कर लिया है पर अभी भी इस तरह की शिकायतें&amp;nbsp; मिल रही थीं कि किसी और के टिकट पर कोई और यात्रा कर रहा था. अभी तक आरक्षण के नियमों के तहत केवल उन्हीं यात्रियों को अपना पहचान पात्र दिखाना होता था जिन्होंने इन्टरनेट या तत्काल के माध्यम से टिकट लिया होता था पर अब आगे से इन श्रेणियों में सभी को अपनी पहचान साबित करनी होगी. रेलवे आज भी यह मानती है कि बड़े पैमाने पर नियमों की कमी का लाभ उठाकर लोग इस तरह अवैध तरीके से यात्रा करते हैं और इसको रोकने के लिए अब रेलवे ने यह जुगत भिड़ाई है. &amp;nbsp; &lt;br /&gt;
&amp;nbsp;&amp;nbsp; इस तरह के आदेश के साथ अगर रेलवे थोड़े दिन अमल करने के बाद इसका परिणाम देखे और किसी भी तरह की आरक्षित श्रेणी में हर व्यक्ति के लिए पहचान पत्र लेकर चलना अनिवार्य कर दिया जाये तो आने वाले समय में सुरक्षा से जुड़ी बहुत सारी खामियां खुद ही दूर हो जायेंगीं. आज जिस तरह से आरक्षित श्रेणी में अन्य लोग घुसने का प्रयास करते हैं उससे यही लगता है कि इस कमी का लाभ उठाकर किसी भी तरह की घटना को अंजाम दिया जा सकता है क्योंकि बड़े स्टेशनों पर इतनी भीड़ को एकदम से नियंत्रित करना भी कठिन काम है और जिस तरह से बड़े शहरों में रोज़ ही लाखों लोग अपने काम काज के सिलसिले में आते-जाते हैं तो वैसे में रेलवे के पास करने के लिए बहुत कुछ बचता भी नहीं है. सुरक्षात्मक दृष्टि से कुछ गाड़ियों में इस तरह की व्यवस्था की जानी चाहिए और हवाई अड्डों की तरह यात्रियों को टिकट देखकर ही अन्दर जाने की अनुमति दी जानी चाहिए हालांकि इस तरह की व्यवस्था में पूरी तैयारी न होने से लोगों की ट्रेन भी छुट सकती है पर इसके लिए अब किसी न किसी तंत्र को विकसित करना ही होगा.&lt;br /&gt;
&amp;nbsp; केवल आदेश जारी करने और उसे धरातल पर उतारने में बहुत बड़ा अंतर होता है जिस कारण से इस तरह के आदेश पूरी तरह से लागू नहीं हो पाते हैं. अच्छा हो कि इस बात का प्रचार रेलवे खुद ही करे और अब जो भी टिकट छाप कर दिए जाएँ उनमें इस बात का भी ज़िक्र हो कि एसी में सफ़र अकरने के लिए अब पहचान पत्र आवश्यक है. जो लोग किसी भी तरह के माध्यम से इस जानकारी को पाचुके हैं उनके लिए तो कोई समस्या नहीं है पर जिन्हें इस बारे में कुछ अन्हीं पता है और उन्होंने टिकट भी पहले से बुक कराया है तो रेलवे को उनके फोन पर सन्देश भेजकर सचेत कर देना चाहिए. इस सुविधा से जहाँ आने वाले समय में सही यात्रियों की पहचान करने में आसानी हो जाएगी वहीं दूसरी तरफ़ बिना पहचान पत्र वाले यात्रियों से सुविधा शुल्क भी लिया जाने लगेगा ? आज के भ्रष्ट माहौल में ऐसे आदेश किस हद तक यात्रियों और रेलवे की समस्या को दूर कर पायेंगें यह तो समय ही बताएगा फिर भी यह एक अच्छा कदम तो है ही जो आने वाले समय में कुछ न कुछ सकारात्मक परिणाम लेकर ही आएगा.&amp;nbsp; &amp;nbsp; &lt;br /&gt;
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8033919830443655972-7432138686580797347?l=seedhikharibaat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel="replies" type="application/atom+xml" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/feeds/7432138686580797347/comments/default" title="टिप्पणियाँ भेजें" /><link rel="replies" type="text/html" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/01/blog-post_2242.html#comment-form" title="0 टिप्पणियाँ" /><link rel="edit" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/7432138686580797347?v=2" /><link rel="self" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/7432138686580797347?v=2" /><link rel="alternate" type="text/html" href="http://feedproxy.google.com/~r/SeedhiKhariBaat/~3/IQuUS3SPhVw/blog-post_2242.html" title="रेलवे और सुरक्षा" /><author><name>Dr Ashutosh Shukla</name><uri>https://profiles.google.com/100257269155750831732</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel="http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail" width="32" height="32" src="//lh4.googleusercontent.com/-m8s_63KhFOs/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAIZM/0q2igsTmGHc/s512-c/photo.jpg" /></author><thr:total>0</thr:total><feedburner:origLink>http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/01/blog-post_2242.html</feedburner:origLink></entry><entry gd:etag="W/&quot;Dk8EQX08fSp7ImA9WhRVGU4.&quot;"><id>tag:blogger.com,1999:blog-8033919830443655972.post-7006733008797334216</id><published>2012-01-19T06:30:00.000+05:30</published><updated>2012-01-19T06:30:00.375+05:30</updated><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2012-01-19T06:30:00.375+05:30</app:edited><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="अधिकार" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="समाज" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="सरकार" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="अराजकता" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="उपयोग" /><title>आधार और पासपोर्ट</title><content type="html">&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;
&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; विशिष्ट पहचान संख्या "आधार" के बारे में भले ही आज देश में कुछ विभागों के कारण असमंजस की स्थिति बन गयी है पर इसके प्रमुख नंदन नीलकेणी आज भी इसके भविष्य को लेकर आशान्वित हैं क्योंकि उनके द्वारा प्रस्तावित इस पूरे कार्यक्रम में भारतीय नागरिकों को ऐसी सुविधा मिलने जा रही है जो आज तक नहीं थी. इसकी प्रामाणिकता के बारे में नंदन बताते हैं कि यह केवल देश में ही नहीं वरन विदेशों में भी किसी भारतीय का पासपोर्ट गुम हो जाने की स्थिति में उसकी समस्याओं को जल्दी ही कम करने का काम करेगा. आज विदेश यात्रा के समय पासपोर्ट गुम हो जाने की स्थिति में बहुत बड़ी समस्या हो जाती है पर इस संख्या के द्वारा कोई भी भारतीय विदेश में पुलिस को सूचित कर सकता है और इसके ही आधार पर भारतीय दूतावास शीघ्र ही उस व्यक्ति की पहचान को बता देगा जिससे विदेशों की यात्रा के समय अनावश्यक रूप से होने वाली परेशानियों से बचा जा सकेगा.  इस विशिष्ट पहचान संख्या के माध्यम से देश में मिलने वाले लाभों के साथ विदेश में भी इस तरह की मदद के बारे में अभी तक किसी को जानकारी नहीं थी पर भारत सरकार जब इस संख्या को पूरी तरह से पहचान के रूप में मान्यता दे ही चुकी है तो इसका पूरी तरह से उपयोग भी किया जाना चाहिए.&lt;br /&gt;
&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; अगर इसे समयबद्ध तरीके से क्रियान्वित किया जाये तो देश के अन्दर भी भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों से निपटने में भी यह काफ़ी कारगर होने वाला हथियार बन सकता है क्योंकि आज के समय में देश में बनने वाली योजनायें सिर्फ इसलिए ही सफल नहीं हो पाती हैं क्योंकि उनके बारे में जो कुछ कहा जाता है उस स्थिति में सही लाभार्थियों को चुन पाना ही आज के समय में सबसे बड़ी चुनौती है. देश में निचले स्तर के सरकारी कर्मचारियों और कार्यालयों में जिस तरह से भ्रष्टाचार ने अपने पाँव जमा रखे हैं उससे निपटने में भी यह महत्वपूर्ण दिशा निर्धारित कर सकता है. आज जिस तरह से विभिन्न योजनाओं में पैसा नीचे की तरफ़ जाता है उसका पूरा लाभ वंचितों तक नहीं पहुँच पाता है जिसका खामियाजा आज़ादी के बाद से ये भुगतते रहे हैं. इस संख्या के द्वारा बैंक में खाता खोलने में भी ग्राहक की सही पहचान पता चल पायेगी और वह व्यक्ति किस तरह की योजनाओं से लाभ पाने का पात्र है यह बात भी सामने आ जाएगी जिससे सरकार सही व्यक्ति के खाते में पूरी धनराशि पहुंचा सकेगी और बीच में दलाली के माध्यम से गरीबों को परेशान करने वालों पर भी अंकुश लग सकेगा.&lt;br /&gt;
&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp;  अब इस बात की आवश्यकता है कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना को समय रहते पूरा किया जाये और इसके लिए धन की व्यवस्था अतिशीघ्र की जाये क्योंकि इस पर एक बार में जो धन लगने वाला है भविष्य में उससे कहीं अधिक धन यह परियोजना बचाने वाली भी है. अब इस मसले पर केवल राजनैतिक कारणों से होने वाले विरोध को पूरी तरह से नज़रंदाज़ किया जाना चाहिए और आने वाले समय में इस परियोजना के साथ देश को आगे बढ़ाने का काम किया जाना चाहिए. आज अगर इसका विरोध किया जा रहा है तो उसके पीछे केवल यही मुख्य कारण है कि इसके माध्यम से नेताओं और अधिकारियों की निरंतर चलने वाली दुकाने बंद हो सकती है और जनता के लिए अच्छे दिन आ सकते है. देश में लोकपाल की जितनी ज़रुरत है उतनी ही इस परियोजना की भी क्योंकि लोकपाल के लिए हमेशा ही बहुत अधिक धन और संसाधनों की आवश्यकता पड़ेगी जबकि इस परियोजना में एक बार धन लग जाने के बाद केवल देश की जनसख्या में जुड़ने वाले नए बच्चों के लिए ही इसे बनाने की आवश्यकता रहेगी. अब देखना यह है कि संसद में कुछ नेता केवल कानूनी दांवपेंच का सहारा लेकर इसे रोकने का प्रयास करते हैं या फिर इसे अपनी गति से बनने देते हैं.&amp;nbsp; &amp;nbsp; &lt;br /&gt;
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8033919830443655972-7006733008797334216?l=seedhikharibaat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel="replies" type="application/atom+xml" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/feeds/7006733008797334216/comments/default" title="टिप्पणियाँ भेजें" /><link rel="replies" type="text/html" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/01/blog-post_19.html#comment-form" title="0 टिप्पणियाँ" /><link rel="edit" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/7006733008797334216?v=2" /><link rel="self" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/7006733008797334216?v=2" /><link rel="alternate" type="text/html" href="http://feedproxy.google.com/~r/SeedhiKhariBaat/~3/PY8MYhXg0Vs/blog-post_19.html" title="आधार और पासपोर्ट" /><author><name>Dr Ashutosh Shukla</name><uri>https://profiles.google.com/100257269155750831732</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel="http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail" width="32" height="32" src="//lh4.googleusercontent.com/-m8s_63KhFOs/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAIZM/0q2igsTmGHc/s512-c/photo.jpg" /></author><thr:total>0</thr:total><feedburner:origLink>http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/01/blog-post_19.html</feedburner:origLink></entry><entry gd:etag="W/&quot;AkMEQHs7eyp7ImA9WhRVGEk.&quot;"><id>tag:blogger.com,1999:blog-8033919830443655972.post-7695467150978473375</id><published>2012-01-18T06:30:00.000+05:30</published><updated>2012-01-18T06:30:01.503+05:30</updated><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2012-01-18T06:30:01.503+05:30</app:edited><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="संसाधन" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="कर्तव्य" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="विरोध" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="उपयोग" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="उम्मीद" /><title>क्रिकेट और बाज़ार</title><content type="html">&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;
&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; जिस तरह से आस्ट्रेलिया में बीसीसीआई की &lt;span id="22_TRN_7"&gt; क्रिकेट टीम की भद्द पिटी है उसके बाद क्रिकेट के खिलाड़ियों को भगवान का दर्ज़ा देने वाले बाज़ार की आँखें भी खुल गयी हैं और अब बड़ी कम्पनियों ने इस बारे में मंथन करना शुरू कर दिया है कि किस तरह से क्रिकेट खिलाड़ियों से सम्बंधित विज्ञापनों को रोका जाये ? यह ठीक ही है क्योंकि जब इतने पैसे खर्च करके ये कम्पनियां अपने ब्रांड के लिए इन खिलाड़ियों को अपनाती हैं तो इनके पिट जाने पर भला कोई कम्पनी कैसे अपने पैसों को बर्बाद करना चाहेगी ? अब यह सही समय है कि इस बात पर विचार किया जाए कि देश के कानून से भी अपने को ऊपर समझने वाले इस बोर्ड का आख़िर क्या किया जाये क्योंकि कई अवसरों पर इसने देश के सम्मान के साथ खिलवाड़ किया है और कई बार भारत की अंतर्राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय छवि को अपने मनमाने रवैये से धूमिल भी किया है. देश में खेलों को बढ़ावा मिले इससे किसी को कोई आपत्ति नहीं है पर इस तरह से खेल के नाम पर एक समानांतर व्यवस्था से कानून का लगातार उल्लंघन करने वाले इस तरह के बोर्ड के परिचालन का आख़िर क्या औचित्य है ?&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;span id="22_TRN_7"&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp; देश में बाज़ार ने क्रिकेट को पैसे वाला खेल बना दिया जिससे बड़ी बड़ी कम्पनियों ने भारत के बड़े खिलाड़ियों से समझौते किये और उन पर अरबों रूपये पानी की तरह बहाए पर अब जब ये टीम पूरी तरह से ठिकाने लगी हुई है तो बाज़ार अपना काम करना शुरू कर चुका है जिससे इन खिलाड़ियों की कमाई पर असर होने वाला है. एक तरफ़ जहाँ ख़राब प्रदर्शन के कारण इनके सामने अपनी साख बचाने का संकट है वहीं दूसरी तरफ़ आर्थिक नुक्सान भी होने वाला है क्योंकि बिना अच्छे प्रदर्शन के बोर्ड तो पैसा दे सकता सकता है पर जब विज्ञापन में इनका उपयोग करने वाली कम्पनियों की बात आती है तो इनके साथ कोई भी नहीं होगा. अब बोर्ड की यह टीम देश के लिए नहीं खेलती है क्योंकि उसे और बोर्ड को केवल  पैसों से ही मतलब है देश के सम्मान की इन सभी को कोई परवाह कभी से नहीं रही इन्हें केवल खेलने और पैसे पैदा करने में ही सारी दिलचस्पी है. ऐसे में उस बोर्ड के चुने हुए ये पैसों के भूखे लोग आख़िर कब तक देश के साथ न्याय कर सकेंगें ?&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;span id="22_TRN_7"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; यह सारी बातें अभी अप्रैल से शुरू होने वाले आई पी एल के घोटाले में सामने आने वाली है इन्हीं खिलाड़ियों का प्रदर्शन खेल के इस प्रारूप में अचानक ही निखर जाया करता है और आज के दगे हुए कारतूस कल पूरी गर्जना के साथ सामने आने को बेताब दिखाई देने लगेंगें ? कहीं ऐसा तो नहीं है कि क्रिकेट खेल के स्थान पर वास्तव में सट्टा बाज़ार के हाथों बिक गया है क्योंकि बोर्ड की टीम जिस तरह से अनियमित पदर्शन करती है उससे यही संदेह होते हैं कि कहीं बाज़ार की मंदी में कुछ कारोबार करने वाले सट्टा बाज़ार में इसी तरह से पैसा बनाने में लगे हुए हों ? अभी फिलहाल चाहे कुछ भी हो पर इस खेल में बहुत कुछ ऐसा भी होता है जिसे खेल के पीछे का दूसरा खेल कहा जा सकता है क्रिकेट के नाम पर देश के नौजवानों को जो अफीम चटाई जा रही है वह देश की ऊर्जा को नष्ट कर रही है और जो युवा आगे बढ़कर देश के लिए कुछ कर सकते हैं वे इस खेल की चका-चौंध में फंसकर अपने भविष्य को बिगाड़ने में लगे हुए हैं. &amp;nbsp; &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8033919830443655972-7695467150978473375?l=seedhikharibaat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel="replies" type="application/atom+xml" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/feeds/7695467150978473375/comments/default" title="टिप्पणियाँ भेजें" /><link rel="replies" type="text/html" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/01/blog-post_18.html#comment-form" title="0 टिप्पणियाँ" /><link rel="edit" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/7695467150978473375?v=2" /><link rel="self" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/7695467150978473375?v=2" /><link rel="alternate" type="text/html" href="http://feedproxy.google.com/~r/SeedhiKhariBaat/~3/x6lyI_4bMP4/blog-post_18.html" title="क्रिकेट और बाज़ार" /><author><name>Dr Ashutosh Shukla</name><uri>https://profiles.google.com/100257269155750831732</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel="http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail" width="32" height="32" src="//lh4.googleusercontent.com/-m8s_63KhFOs/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAIZM/0q2igsTmGHc/s512-c/photo.jpg" /></author><thr:total>0</thr:total><feedburner:origLink>http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/01/blog-post_18.html</feedburner:origLink></entry><entry gd:etag="W/&quot;CEcEQHw4fip7ImA9WhRVF0s.&quot;"><id>tag:blogger.com,1999:blog-8033919830443655972.post-7900728151300528116</id><published>2012-01-17T06:30:00.000+05:30</published><updated>2012-01-17T06:30:01.236+05:30</updated><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2012-01-17T06:30:01.236+05:30</app:edited><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="संविधान" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="नियम" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="समाज" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="चुनाव" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="नेता" /><title>चुनाव का सजीव प्रसारण</title><content type="html">&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;
&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; चुनाव में धांधली रोकने के लिए इस बार आयोग बिलकुल नए तरह का प्रयोग करने जा रहा है जिससे कुछ राजनैतिक दलों द्वारा लगाये जा रहे उन आरोपों को जवाब दिया जा सके क्योंकि पूरी दुनिया में अपनी प्रामाणिकता सिद्ध कर चुकी ईवीएम आज भी कुछ दलों को धांधली का कारण नज़र आती हैं. चुनाव में आज सब कुछ कितने पारदर्शी तरीके से किया जाता है उसके बाद भी केवल अपनी घटती संभावनाओं के चलते राजनेता इस तरह के आरोप लगाने से भी नहीं चूकते हैं.  बीएसएनएल द्वारा नेट कनेक्टिविटी वाले क्षेत्रों में आयोग इस बार परीक्षण के तौर पर चुनाव का सजीव प्रसारण करवाने की कोशिश कर रहा है और इस बार तकनीकी रूप से सक्षम क्षेत्रों में यह परीक्षण किया भी जाना है जिससे कहीं से भी बैठकर चुनाव के बारे में पूरी जानकारी आसानी से जुटाई जा सकेगी. इससे जहाँ मतदाताओं को अपने मताधिकार का उपयोग करने में आसानी होगी वहीं किसी भी तरह का अनावश्यक दबाव बनाने वाले भी तुरंत ही स्वयं आयोग की नज़र में आ जायेगें.&lt;br /&gt;
&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; देश में चुनाव आयोग ने शेषन के समय से आज तक जो कुछ भी सुधार लागू किये हैं उनके कारण कुछ दलों और नेताओं को बहुत कष्ट होने लगे हैं चूंकि सरकारी मशीनरी का दुरूपयोग हमेशा से ही सत्ताधारी दल किया करता है वैसे में उसे हमेशा ही आयोग खलनायक लगा करता है जबकि ये दल भूल जाते हैं कि सत्ताधारी दलों को आयोग से कोई शिकायत नहीं होनी चाहिए क्योंकि आयोग सभी दलों के लिए एक सामान अवसर दिलाने के लिए प्रतिबद्ध रहा करता है. नेताओं को संवैधानिक संस्थाएं भी उनके हिसाब से काम करती हुई चाहिए जबकि वे इस बार का ढिंढोरा पीटने में पीछे नहीं रहते हैं कि उनसे बड़ा संविधान का रखवाला कोई और है ही नहीं. असल में चुनाव को राष्ट्रीय पर्व की तरह से मनाया जाना चाहिए क्योंकि इससे मिलने वाली शक्ति हमेशा से ही &lt;span id="5_TRN_9x"&gt;देश के भविष्य को निर्धारित करने का काम किया करती है. अभी तक जो कुछ भी होता आया है उसमें आयोग की मंशा तो साफ़ रहा करती है पर नेता अपने हितों के अनुसार आयोग के क़दमों को देखना चाहते हैं जो कहीं से भी सही नहीं होता है.&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;span id="5_TRN_9x"&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp; आने वाले समय में चुनाव आयोग को वोटरों को इन्टरनेट से भी वोट डालने का अधिकार दिया जाना चाहिए जिससे मतदान केन्द्रों पर उमड़ने वाली भीड़ कम की जा सके और साथ ही आज के समय में प्रचलित तरीकों से आयोग की मंशा के अनुरूप चुनाव भी संपन्न कराये जा सकें. प्रायोगिक तौर पर आयोग उन वोटरों को यह विकल्प दे सकता है जो पिछले ३ या अधिक वर्षों से इन्टरनेट उपयोग में ला रहे हैं इसके लिए आयोग की नेट पर उपलब्ध मतदाता सूची के अनुसार इच्छुक मतदातों को यह बताया जाए कि वे कैसे मत डाल सकते हैं. मोबाइल के बढ़ते उपयोग को देखते हुए आने वाले समय में मोबाइल से भी वोट देने की व्यवस्था की जा सकती है और मतदातों की संख्या को देखते हुए मत प्रतिशत बढ़ाने के लिए यह एक अच्छा साधन हो सकता है. इन चुनावों में अगर संभव हो सके तो आयोग को हर विधान सभा क्षेत्र में इस विधि से मत देने के इच्छुक लोगों में से १०० लोगों को छाँट कर इसका प्रयोग तो शुरू करना ही चाहिए जिससे आने वाले समय में इस विधि से हर इच्छुक मतदाता को मत देने का अधिकार मिल सके और आयोग का जो धन इन चुनावों में लगता है उस पर भी नियंत्रण पाया जा सके.&amp;nbsp; &amp;nbsp; &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8033919830443655972-7900728151300528116?l=seedhikharibaat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel="replies" type="application/atom+xml" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/feeds/7900728151300528116/comments/default" title="टिप्पणियाँ भेजें" /><link rel="replies" type="text/html" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/01/blog-post_17.html#comment-form" title="0 टिप्पणियाँ" /><link rel="edit" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/7900728151300528116?v=2" /><link rel="self" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/7900728151300528116?v=2" /><link rel="alternate" type="text/html" href="http://feedproxy.google.com/~r/SeedhiKhariBaat/~3/U1XnRWsU_T4/blog-post_17.html" title="चुनाव का सजीव प्रसारण" /><author><name>Dr Ashutosh Shukla</name><uri>https://profiles.google.com/100257269155750831732</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel="http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail" width="32" height="32" src="//lh4.googleusercontent.com/-m8s_63KhFOs/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAIZM/0q2igsTmGHc/s512-c/photo.jpg" /></author><thr:total>0</thr:total><feedburner:origLink>http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/01/blog-post_17.html</feedburner:origLink></entry><entry gd:etag="W/&quot;D0EEQHs4fip7ImA9WhRVFko.&quot;"><id>tag:blogger.com,1999:blog-8033919830443655972.post-2903434243360591207</id><published>2012-01-16T06:30:00.000+05:30</published><updated>2012-01-16T06:30:01.536+05:30</updated><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2012-01-16T06:30:01.536+05:30</app:edited><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="संविधान" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="कर्तव्य" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="राजनीति" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="चुनाव" /><title>चुनाव, नेता और नीतियां</title><content type="html">&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;
&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; आजकल ५ प्रदेशों में चुनावी बुख़ार जोरों पर है और इसी क्रम में चुनाव से पूर्व चलने वाला प्रहसन/नाटक भी खूब चल रहा है. जिस तरह से हमारे नेता केवल अपने स्वार्थ के लिए पल पल निष्ठाएं बदलते रहते हैं उसे यही लगता है कि आने वाले समय में नीतियों और विचारधारों की कोई पूछ ही नहीं होगी क्योंकि चुनाव के समय अपने या दूसरों के काले धंधों पर पर्दा डालने के लिए अचानक ही कहीं किसी नेता का ह्रदय परिवर्तन हो जाता है और पिछले ४/५ वर्षों में जिनके चरणों में झुके झुके उन्हें दर्द होने लगी थी वे अचानक अपनी दर्द को कम करने के लिए सीधे खड़े होकर किसी नए दल का दामन थाम लेते हैं और साथ ही पिछले दल को बिना पानी पिए ही कोसते नज़र आने लगते हैं. ऐसा नहीं है कि आज के समय में नीतियों पर चलने वाले नेताओं की कमी है पर जिस तरह से पूरे नेता समाज में ये कुछ लोग चुनावी सर्कस दिखाते रहते हैं उससे जनता के मन में नेताओं के प्रति आदर घटता ही जाता है. क्या कारण है कि जब देश में भ्रष्टाचारियों के बारे में सर्वेक्षण होता है तो नेता उसमें अव्वल आते हैं ?&lt;br /&gt;
&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; यदि इसके पीछे के कारणों को तलाशा जाये तो एक बात सामने आती है कि आज केवल सुख और सुविधाओं की चाह में ही लोग राजनीति में आते हैं जबकि पहले ये लोग नीतियों के चलते ही किसी दल का समर्थन करते हुए उसमें शामिल हुआ करते थे. क्या कारण है कि आज हर प्रदेश में चुनाव के समय एक जैसा माहौल होता है जिन्हें टिकट नहीं मिल वे दूसरे से सांठ-गाँठ करके अपने लिए एक अदद टिकट और सीट का जुगाड़ करके अचानक ही प्रेस को बुलाकर अपनी घुटन के बारे में खुलकर बोलते हैं ? अगर भारत में सभी को व्यक्तिगत आज़ादी दी गयी है तो उसका नाजायज़ लाभ नेता क्यों उठाते रहते हैं ? नीति पर नेता की महत्वकांक्षाएं इतनी हावी हो चुकी हैं कि वे इस परिवर्तन के बाद जनता की अदालत में बेशर्मों की तरह जाने से भी नहीं चूकते हैं ? ऐसा नहीं है कि सभी दलों में सभीके साथ न्याय होता रहता है पर अपने स्वार्थ को न्याय के तराजू पर तौलने से क्या हासिल किया जा सकता है ? अगर देश के कानून ने इन नेताओं को कहीं भी आने जाने की छूट दी है तो कम से कम इन्हें जनता और कानून के बारे में सोचना तो चाहिए. &lt;br /&gt;
&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp; अगर केवल यूपी के इतिहास को ही देखा जाया तो पिछले कुछ चुनावों से कुछ नेता ऐसे हैं जो हमेशा से ही सत्ता पक्ष के साथ रहे हैं और सत्ता का उन्होंने जमकर लाभ भी उठाया है जिससे आज उनकी पकड़ क्षेत्र में मज़बूत तो है ही साथ ही वे ऐसे क्षत्रप बन चुके हैं जो अपने लोकसभा या विधान सभा क्षेत्र में अपने हिसाब से राजनीति चलाने की स्थिति में आ चुके हैं और उनके यहाँ पर नीतियों की कोई बात करना ही बेईमानी हो चुकी है ? देश और समाज नीतियों से ही चला करते हैं जिस तरह से आज हमारे देश में विभिन्न विचारधाराएँ पल रही हैं उनको पोषित करने के लिए उनसे सहमत होने वाले लोग भी चाहिए होते हैं पर आज के समय में केवल कुछ वोट बटोरू और जिताऊ नेताओं को सभी पार्टियाँ प्राथमिकतायें देने लगी हैं जिससे नीतियों पर इनके अपने भाव भारी पड़ने लगे हैं ? देश के लिए सही नीतियां होंगीं तो समाज का भला भी होगा पर केवल अपने कुछ निहित स्वार्थों की ख़ातिर देश के संविधान की भावना से खिलवाड़ करने वाले नेता आखिर किस दिशा में देश को ले जाना चाहते हैं ? &amp;nbsp; &lt;br /&gt;
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8033919830443655972-2903434243360591207?l=seedhikharibaat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel="replies" type="application/atom+xml" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/feeds/2903434243360591207/comments/default" title="टिप्पणियाँ भेजें" /><link rel="replies" type="text/html" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/01/blog-post_16.html#comment-form" title="0 टिप्पणियाँ" /><link rel="edit" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/2903434243360591207?v=2" /><link rel="self" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/2903434243360591207?v=2" /><link rel="alternate" type="text/html" href="http://feedproxy.google.com/~r/SeedhiKhariBaat/~3/l-d-5OEsX0E/blog-post_16.html" title="चुनाव, नेता और नीतियां" /><author><name>Dr Ashutosh Shukla</name><uri>https://profiles.google.com/100257269155750831732</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel="http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail" width="32" height="32" src="//lh4.googleusercontent.com/-m8s_63KhFOs/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAIZM/0q2igsTmGHc/s512-c/photo.jpg" /></author><thr:total>0</thr:total><feedburner:origLink>http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/01/blog-post_16.html</feedburner:origLink></entry><entry gd:etag="W/&quot;A0UEQ34-cSp7ImA9WhRVFUU.&quot;"><id>tag:blogger.com,1999:blog-8033919830443655972.post-4191430358876032722</id><published>2012-01-15T06:30:00.000+05:30</published><updated>2012-01-15T06:30:02.059+05:30</updated><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2012-01-15T06:30:02.059+05:30</app:edited><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="विचारधारा" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="कर्तव्य" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="अधिकार" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="चुनाव" /><title>परदे में रहने दो...</title><content type="html">&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;
&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; चुनाव आयोग की बातों पर लखनऊ विकास प्राधिकरण किस तरह से काम कर रहा है इस बात का अंदाज़ा इसी बात से लग गया है कि वहां स्थिति स्मारकों में केवल मूर्तियों को ढकने का काम करने के आदेश के अनुपालन में उन्होंने पूरे स्मारक ही बंद करा दिए हैं जिससे प्राधिकरण को टिकट के माध्यम से होने वाली लगभग २० हज़ार रुपयों की चपत रोज़ ही लगने वाली है. जिस तरह से राजनैतिक लाभ के लिए इनको लगवाया गया और अब इनको ढकने से भी जिस तरह से राजनैतिक लाभ उठाने की कोशिश की जा रही हैं उससे संविधान की मूल भावना का सम्मान कैसे हो सकता है ? यह सही है कि विरोधी दल चुनाव में सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं रखना चाहते हैं उन्होंने इसी क्रम में चुनाव आयोग से मायावती और हाथियों की मूर्तियों की शिकायत की थी पर अब बसपा इस बात को भी दलित वोटों तक ले जाने की फिराक में है. वैसे भी प्रदेश में बसपा का दलित जनाधार आज भी बना हुआ है तो ऐसे में जितना प्रचार इस मुद्दे का होगा उससे बसपा के वोट तो बढ़ने वाले नहीं है पर विपक्षी इसे मुद्दा बनाने में नहीं चूकेंगें.&lt;br /&gt;
&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; देश में राजनीति इस हद तक गिर चुकी है कि अब जब चुनाव में देश/प्रदेश के सामने आने वाले मुद्दे आगे आने चाहिए तो यहाँ पर जनता को मूर्तियों के चक्कर में फँसाने का प्रयास किया जा रहा है. आज देश और प्रदेश में बेरोज़गारी बड़ा मुद्दा नहीं है किसी को भी मंहगाई से मतलब नहीं है किसी को ख़राब पड़ी सड़कों और बिजली की कमी मुद्दे के रूप में नहीं दिखाई देती है और आज वे जिस तरह की छोटी छोटी बातों में महाबहस को ख़त्म करने का प्रयास कर रहे हैं वह किस तरह से देश को आगे ले जाने का काम करेंगें ? आज भी देश को जिन मूलभूत सुविधाओं की ज़रुरत है उन पर कौन बात करेगा ? कोई नहीं क्योंकि नेता नहीं चाहते कि किसी भी स्थिति में देश की जनता के सामने ये मुद्दे आयें ? आज बहस होनी चाहिए थी कि काले धन को देश में कैसे वापस लाया जाये ? कैसे खुदरा क्षेत्र में विदेशी पूँजी निवेश को बढ़ावा दिया जाये ? लोकपाल को किस स्वरुप में जनता के सामने लाया जाये ? पर ये ऐसे मुद्दे हैं जो नेताओं की नाक में दम कर दिया करते हैं इसलिए कोई भी इन पर खुली बहस करने को तैयार नहीं दिखता है ?&lt;br /&gt;
&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; सड़क पर आन्दोलन करना और जनता के सामने मुद्दों पर आधारित वोट माँगना दोनों अलग अलग हैं जिससे देश के सामने आने वाले बड़े बड़े मुद्दे भी पीछे छूट जाया करते हैं. जिस लोकपाल को लाने के नाम पर संसद में कोई काम ठीक से नहीं हुआ जिस भ्रष्टाचार को लेकर बड़े बड़े नेता गलियों में ख़ाक छानते घूमें आज चुनाव के समय भी वे मुद्दे के रूप में नहीं दिख रहे हैं ? आख़िर कब जनता इस मूर्छा से बाहर आएगी कि उसे वास्तव में सही मुद्दों पर राजनैतिक दलों की राय मिल सकेगी ? जो मुद्दे देश के जनमानस को उद्देलित कर रहे थे आज वे गौण हो चुके हैं और किसी भी प्रकार से कुछ अधिक सीटें पाने के जुगाड़ ने प्रदेश के भविष्य को बंधक बना लिया है. सच ही है कि मूर्तियों और हाथियों को ढकने के बहाने से राजनेताओं ने निरर्थक बहस की शुरुआत करके बहस के योग्य मुद्दों को बड़ी चालाकी से परदे में डाल दिया है. ये पर्दा मूर्तियों पर नहीं वरन ज्वलंत मुद्दों पर पड़ गया है और सभी दल सुकून की सांस ले रहे हैं और कह भी रहे हैं कि परदे में रहे दो..... &amp;nbsp; &lt;br /&gt;
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8033919830443655972-4191430358876032722?l=seedhikharibaat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel="replies" type="application/atom+xml" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/feeds/4191430358876032722/comments/default" title="टिप्पणियाँ भेजें" /><link rel="replies" type="text/html" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/01/blog-post_15.html#comment-form" title="1 टिप्पणियाँ" /><link rel="edit" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/4191430358876032722?v=2" /><link rel="self" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/4191430358876032722?v=2" /><link rel="alternate" type="text/html" href="http://feedproxy.google.com/~r/SeedhiKhariBaat/~3/kKpOFugyv2U/blog-post_15.html" title="परदे में रहने दो..." /><author><name>Dr Ashutosh Shukla</name><uri>https://profiles.google.com/100257269155750831732</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel="http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail" width="32" height="32" src="//lh4.googleusercontent.com/-m8s_63KhFOs/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAIZM/0q2igsTmGHc/s512-c/photo.jpg" /></author><thr:total>1</thr:total><feedburner:origLink>http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/01/blog-post_15.html</feedburner:origLink></entry><entry gd:etag="W/&quot;CE8EQXY_eip7ImA9WhRVFU0.&quot;"><id>tag:blogger.com,1999:blog-8033919830443655972.post-7279357088211487253</id><published>2012-01-14T06:30:00.000+05:30</published><updated>2012-01-14T06:30:00.842+05:30</updated><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2012-01-14T06:30:00.842+05:30</app:edited><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="बाहुबली सुधार" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="राजनीति" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="शुचिता" /><title>यूपी और बाहुबली</title><content type="html">&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;
&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; जिस तरह से यूपी में हमेशा से ही बाहुबली अपने बल को सियासी क्षेत्र में आजमाते रहते हैं उससे यही लगता है कि इस बार भी स्थिति में कुछ खास परिवर्तन नहीं होने वाला है क्योंकि  हमेशा की तरह बड़ी बड़ी बातें करने वाले राजनैतिक दल आवश्यकता पड़ने पर अचानक ही भूलने की बीमारी से ग्रस्त हो जाते हैं और चुनाव छोड़ कर पूरे समय केवल बाहुबलियों और गुंडों का विरोध करने वाली उनकी बातें कहीं गायब हो जाती हैं ? जब देश की राजनीति को सुधारने की बातें होती हैं तो ये सभी  लम्बी लम्बी हांकने में नहीं चूकते हैं पर जब सरकार बनाने के लिए कुछ सीटों का जुगाड़ करने की बात आती है तो यह सब आदर्श की बातें केवल क़िताब और बहस तक ही सिमट जाया करती हैं. इस सबसे देश को कितना नुकसान हो रहा है इस बात का कोई हिसाब नहीं लगाया करता है और कुछ नेता लोग अपने मन की करते रहते हैं जिससे देश के सामने आने वाले अवसर बेकार में ही कतम हो जाया करते हैं. &lt;br /&gt;
&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; आज के समय कोई भी दल इस बात को पक्के तौर पर नहीं कह सकता है कि उसके टिकट पर कोई बाहुबली नहीं मैदान में उतरेगा क्योंकि सभी को पता है कि इन बाहुबलियों के हाथों कुछ सीटों को गाढ़े समय के लिए हथिया लेने का जुगाड़ हमेशा से ही काम आता है और इस बार जिस तरह से यूपी में चुनावी खेल चल रहा है उससे यही लगता है कि शायद किसी दल को पूर्ण बहुमत न मिल पाए और उस स्थिति में सत्ता के निकट पहुँचने वाले दल को किसी भी तरह से कुछ विधायकों की ज़रुरत पड़ेगी ही और ऐसे में अपने काम या गुंडई के दम पर सीटों को बचाने में सफल रहने वाले ये बाहुबली नेता हमेशा ही किसी न किसी दल के काम आते रहते हैं. जब देश में सुधार करने की बात होती है तो सभी को आदर्श याद आते हैं पर जब कुछ करने का समय आता है तो ये सभी अचानक ही गिरगिट कि तरह अपने रुख़ को बदल दिया करते हैं. इस तरह की स्थिति देश में किसी बड़े सुधार को आने से रोकती हैं और आने वाले समय में इन बाहुबलियों के राजनीति में बढ़ते प्रभाव को और आगे बढ़ने का काम करती है. &lt;br /&gt;
&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; अब जिस तरह से राजनैतिक दल अपनी बातों को भूल जाते हैं उसमें किसी भी तरह से बाहुबलियों को सदन में पहुँचने से रोकने की ज़िम्मेदारी पूरी तरह से जनता पर ही आ जाती है जिससे निपटने में जनता अपने हिसाब से कुछ खास नहीं कर सकती क्योंकि इन बाहुबलियों के सामने अच्छे लोग चुनाव लड़ने से कतराते रहते हैं और वोट देने वालों के सामने कोई ऐसा विकल्प नहीं बचता है कि वे अपने लिए सही नेता का चुनाव कर सकें. वैसे तो चुनाव आयोग ने मतदाताओं को ४९-ओ के तहत यह अधिकार दे रखा है कि वे अपने लिए अच्छे प्रत्याशियों का चुनाव करें और कोई भी प्रत्याशी समझ में न आने पर अपने इस हक़ का प्रयोग करके इन सभी के विरोध में अपना मत दें पर जानकारी के अभाव में कोई भी यह काम नहीं कर पाता है. जिन क्षेत्रों में केवल बाहुबली ही चुनाव मैदान में हैं वहां पर इस बात का प्रचार करना &lt;span id="22_TRN_ds"&gt;चाहिए कि मतदाता किस तरह से सभी&lt;/span&gt; प्रत्याशियों का विरोध कर सकता है. अब यह जनता पर ही है कि वह इन बाहुबलियों को सदन में जाने से रोकने के लिए अपने मत का प्रयोग करे और राजनीति में शुचिता लाने की शुरुआत करे. &amp;nbsp;  &amp;nbsp; &lt;br /&gt;
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8033919830443655972-7279357088211487253?l=seedhikharibaat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel="replies" type="application/atom+xml" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/feeds/7279357088211487253/comments/default" title="टिप्पणियाँ भेजें" /><link rel="replies" type="text/html" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/01/blog-post_14.html#comment-form" title="0 टिप्पणियाँ" /><link rel="edit" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/7279357088211487253?v=2" /><link rel="self" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/7279357088211487253?v=2" /><link rel="alternate" type="text/html" href="http://feedproxy.google.com/~r/SeedhiKhariBaat/~3/Ma0YaVFeEC4/blog-post_14.html" title="यूपी और बाहुबली" /><author><name>Dr Ashutosh Shukla</name><uri>https://profiles.google.com/100257269155750831732</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel="http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail" width="32" height="32" src="//lh4.googleusercontent.com/-m8s_63KhFOs/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAIZM/0q2igsTmGHc/s512-c/photo.jpg" /></author><thr:total>0</thr:total><feedburner:origLink>http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/01/blog-post_14.html</feedburner:origLink></entry><entry gd:etag="W/&quot;DEMEQXw-eip7ImA9WhRVFEw.&quot;"><id>tag:blogger.com,1999:blog-8033919830443655972.post-6473782948256409522</id><published>2012-01-13T06:30:00.000+05:30</published><updated>2012-01-13T06:30:00.252+05:30</updated><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2012-01-13T06:30:00.252+05:30</app:edited><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="राज्य" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="समाज" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="सुधार" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="अराजकता" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="उपयोग" /><title>राहुल भावी सीएम क्यों नहीं ?</title><content type="html">&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;
&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; उत्तर प्रदेश में जिस तरह से लगातार कांग्रेस अपने खोये हुए जनाधार को वापस पाने की तरफ बढ़ती जा रही है उसे अब समीक्षक भी मानने लगे हैं अभी तक जो लोग राहुल को केवल पोस्टर बॉय के रूप में देख या दिखा रहे थे अब उन्हें यह पता चल रहा है कि जिन बातों को पिछले दो वर्षों में केवल हथकंडे के रूप में देखा जा रहा था आज वे वोट में बदलते हुए दिखाई दे रहे हैं. ऐसी स्थिति में प्रदेश के लिए बहुत अच्छी खबर सामने आ सकती है कि आने वाले समय में बिहार की तरह यूपी भी जाति/ बिरादरी की इस बेडी को तोड़ फेंके ? पिछले दो चुनावों में जिस तरह से बिहार ने अपने आप को पूरी तरह से इस छोटी जकड़न दूर कर लिया है वह उल्लेखनीय है और अब समय है कि देश के विकास के साथ यूपी भी इस जकड़न से बाहर निकल आये. वर्तमान चुनाव में जिस तरह से अब राजनीतक समीक्षक भी राहुल को अधिक गंभीर नेता और विपक्षियों के लिए बड़ी चुनौती मानने लगे हैं वह कांग्रेस के लिए शुभ संकेत है. अब प्रदेश की जनता भी यह चाहती है कि देश में यूपी फिर से अपने पुराने गौरव को पा सके और आने वाले समय में प्रदेश की वही हैसियत लौट आये जो आज से २५ वर्ष पहले हुआ करती थी.&amp;nbsp; &lt;br /&gt;
&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; अभी तक कांग्रेस भी इस बात को नहीं समझ पायी है कि वह यूपी में कितने बड़े लाभ की स्थिति में है क्योंकि अब हर तरह के बंधनों से मुक्त होकर प्रदेश की जनता भी एक मज़बूत जनादेश के साथ आगे बढ़ने की आशा कर रही है पर शायद कांग्रेस अभी भी इस बात को भांप नहीं पा रही है. यह सही है कि केवल बसपा को छोड़कर किसी भी दल ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि अगर उनके दल को बहुमत मिलता है तो मुख्यमंत्री कौन होगा ? ऐसे में जो लाभ मज़बूत नेता के रूप में किसी को पेश करके पाया जा सकता है वह सभी दल खोये दे रहे हैं. आज के समय में जब आम कांग्रेसी राहुल को केवल प्रधानमंत्री पद पर ही देखना चाहता है वह यह नहीं समझ पा रहा है कि यूपी में राहुल आख़िर किस तरह का रोल अदा करें ? राहुल के करने से जो कुछ भी होने वाला है वह हो रहा है और आने वाले समय में कांग्रेस को भी उन्हें बड़ी चुनौतियाँ लेने के लिए ख़ुद ही तैयार कर देना चाहिए जिस तरह से राहुल अपनी गंभीर शैली से विरोधियों के खेमे में हलचल मचाये दे रहे हैं उससे भी सभी को कुछ सीखना चाहिए. अभी तक जिसे विपक्षी दल राहुल की नौटंकी बताते थे आज वे उसको एक समझी हुई रणनीति का हिस्सा मानने लगे हैं. मायावती को शुरू से ही इस तरह की बातों का अंदेशा था तभी उन्होंने ख़ुद और पार्टी के स्तर पर राहुल पर हमले करना जारी रखा था.&amp;nbsp; &lt;br /&gt;
&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; आज जिस तरह से पूरे प्रदेश में राहुल की सभाओं में लोगों का समर्थन दिखाई दे रहा है अगर कांग्रेस को उसका पूरा लाभ उठाना है और राहुल की नेतृत्व क्षमता को परखने में दिलचस्पी है तो बिना देर किये अब कांग्रेस को उन्हें यूपी में बहुमत मिलने की स्थिति में सीएम के रूप में पेश कर ही देना चाहिए. जिन लोगों को यह डर सताता है कि पता नहीं राहुल कैसा कर पायें उन्हें अब यह सोचना ही होगा कि उन पर पूरा भरोसा करने का समय आ गया है और जैसा कि देश के लिए कुशल नेतृत्व की बात करने वाले लोगों में राहुल की भी गिनती होती है तो उन्हें इस समय यूपी की इस ज़िम्मेदारी को चुनौती पूर्वक स्वीकार करना ही चाहिए क्योंकि आज राहुल पार्टी के लिए वोट मांग रहे हैं और जनता भी जानती है कि कांग्रेस के बड़े दल के रूप में उभरने पर राहुल तो कम से कम सीएम नहीं बनने जा रहे हैं जो कि प्रदेश में कांग्रेस के ख़िलाफ़ जा सकता है. अब राहुल को आगे बढ़कर ख़ुद ही यह कहना चाहिए कि वे इस चुनौती के लिए तैयार हैं क्योंकि अगर वे जीत जाते हैं तो उन्हें आगे आने वाले समय में प्रधानमंत्री पद के राजनीति का अनुभव भी हो जायेगा और हार की स्थिति में उनके पास २०१४ के आम चुनाव और बड़ी चुनौती के रूप में स्वीकार करने की स्थिति भी होगी. राजनीति में इस तरह के क़दम बिना नफ़े नुकसान के देखे जाने चाहिए क्योंकि जब तक यह पूरा नहीं हो पायेगा तब तक देश में अच्छे नेतृत्व को विकसित करने में सफलता नहीं मिलेगी. &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &lt;br /&gt;
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8033919830443655972-6473782948256409522?l=seedhikharibaat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel="replies" type="application/atom+xml" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/feeds/6473782948256409522/comments/default" title="टिप्पणियाँ भेजें" /><link rel="replies" type="text/html" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/01/blog-post_13.html#comment-form" title="1 टिप्पणियाँ" /><link rel="edit" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/6473782948256409522?v=2" /><link rel="self" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/6473782948256409522?v=2" /><link rel="alternate" type="text/html" href="http://feedproxy.google.com/~r/SeedhiKhariBaat/~3/c-2GxzJytuY/blog-post_13.html" title="राहुल भावी सीएम क्यों नहीं ?" /><author><name>Dr Ashutosh Shukla</name><uri>https://profiles.google.com/100257269155750831732</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel="http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail" width="32" height="32" src="//lh4.googleusercontent.com/-m8s_63KhFOs/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAIZM/0q2igsTmGHc/s512-c/photo.jpg" /></author><thr:total>1</thr:total><feedburner:origLink>http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/01/blog-post_13.html</feedburner:origLink></entry><entry gd:etag="W/&quot;CkcEQXc8eip7ImA9WhRVE04.&quot;"><id>tag:blogger.com,1999:blog-8033919830443655972.post-4245021098575930531</id><published>2012-01-12T06:30:00.000+05:30</published><updated>2012-01-12T06:30:00.972+05:30</updated><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2012-01-12T06:30:00.972+05:30</app:edited><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="भ्रष्टाचार" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="अराजकता" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="उपयोग" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="नेता" /><title>आय के साधन और सीएम</title><content type="html">&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;
&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; गरीबों और दलितों के नाम पर सत्ता में आई बसपा की सुप्रीमो मायावती ने चुनाव आयोग को दिए गए अपने संपत्ति के ब्योरे में जो तथ्य दिए हैं उससे कोई भी हिल सकता है. आज उन्होंने अपनी संपत्ति ८७ करोड़ बताई है और वे फिलहाल चुनाव वाले राज्यों में सबसे अमीर मुख्यमंत्री हो गयी हैं उनके सामने संपन्न राज्य पंजाब के बादल और गोवा के कामत कहीं भी नहीं टिकते हैं क्योंकि ये दोनों मिलकर भी १० करोड़ का आंकड़ा नहीं छू पा रहे हैं ? किसी के पास संपत्ति कैसे आती है यह जान पाने का कोई यन्त्र नहीं है फिर भी शुक्र है चुनाव आयोग का कि हमारे नेता कुछ भी कहने से पहले बहुत कुछ सोचने लगे हैं क्योंकि अब इस बात का खुलासा जनता के सामने होने लगा है कि कैसे हमारे ये नेता लोग कितने समय में कितने अमीर हो जाते हैं. आख़िर क्या कारण है कि कोई भी किसी भी तरीके से अचानक ही अमीर हो जाता है और हमारी जनता गरीब ही बनी रहती है ? शायद इस बात का जवाब अभी तक जनता ने जाने की कोई कोशिश ही नहीं की जिससे आज भी नेता अमीर और जनता गरीब ही हुई जा रही है ? &lt;br /&gt;
&amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; अब समय है कि नेता लोग अपने जीवन में भी शुचिता का प्रयोग करें और आने वाले समय में कुछ ऐसा करना शुरू करें जिससे उनकी संपत्ति के बारे में जनता के मन में कोई संदेह उत्पन्न न होने पाए और नेता लोग पहले के नेताओं की तरह कुछ उदाहरण पेश करना शुरू करें जिससे उनके मन में पहले की तरह आदर आ सके. ऐसा नहीं है कि किसी को इस बात से आपत्ति है कि किसी नेता के पास इतनी संपत्ति कहाँ से आई बल्कि जनता को इस बात से अधिक परेशानी होती है कि केवल वोट लेने के लिए इस तरह की बातें करने वाले नेता लोग अपना काम निकल जाने पर किस तरह से व्यवहार करने लगते हैं और खुद भी भ्रष्टाचारियों की जमात में खड़े नज़र आते हैं ? दूसरों को उपदेश देने के लिए पूरी दुनिया में बहुत सारे लोग हमेशा ही तैयार रहा करते हैं पर अपने आचरण से दूसरों के लिए प्रेरणा बनने वाले कितने लोग अब आज बचे हुए हैं? जब बात सार्वजनिक जीवन की होती है तो उसमें और भी अधिक सावधानी की आवश्यकता हुआ करती है पर आज इस बात को या तो हमारे नेता समझना नहीं चाहते या फिर उन्हें इस बात की ग़लतफ़हमी है कि जनता कुछ भी नहीं कर सकती है ?&lt;br /&gt;
&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; केवल दूसरों पर कीचड़ उछालने के स्थान पर आज इस बात की आवश्यकता है कि हम सभी अपने क्षेत्र के नेताओं पर पूरा ध्यान रखें क्योंकि अगर कोई भी नेता कम समय में इतना अमीर हुआ जा रहा है कि उसका कोई मुकाबला नहीं कर पा रहा है तो इसका सीधा सा मतलब यही है कि वह हमें हमारे विश्वास को धोखा दे रहा है और आने वाले समय के लिए हमारा विश्वास भी खो रहा है. अब केवल इस बात का इंतजार नहीं करना चाहिए कि कभी अन्ना हजारे हमारे क्षेत्र में आयेंगे और पलक झपकते ही हमारी समस्याओं का समाधान कर देंगें ? हर व्यक्ति को अमर शहीद भगत सिंह बहुत अच्छे लगते हैं पर सभी यह भी चाहते हैं कि वो उनके घर के स्थान पर पड़ोसियों के घर में जन्म लें ? देश हमारा है तो हमें ही सपूत पैदा करने ही होंगें जो किसी भी स्थिति में देश के लिए कुछ करने का जज़्बा रखते हों ? आज देश को किसी आन्दोलनकारी के स्थान पर देश के बारे में केवल सोचने वाले ही चाहिए क्योंकि बिना उनके अब यह देश सही दिशा में नहीं चल पायेगा और कभी कोई तो कभी कोई भ्रष्टाचारी का रूप रखकर हमारे संसाधनों को लूटने का काम करता रहेगा... &amp;nbsp; &amp;nbsp;  &lt;br /&gt;
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8033919830443655972-4245021098575930531?l=seedhikharibaat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel="replies" type="application/atom+xml" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/feeds/4245021098575930531/comments/default" title="टिप्पणियाँ भेजें" /><link rel="replies" type="text/html" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/01/blog-post_12.html#comment-form" title="1 टिप्पणियाँ" /><link rel="edit" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/4245021098575930531?v=2" /><link rel="self" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/4245021098575930531?v=2" /><link rel="alternate" type="text/html" href="http://feedproxy.google.com/~r/SeedhiKhariBaat/~3/xjkamrxAwTU/blog-post_12.html" title="आय के साधन और सीएम" /><author><name>Dr Ashutosh Shukla</name><uri>https://profiles.google.com/100257269155750831732</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel="http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail" width="32" height="32" src="//lh4.googleusercontent.com/-m8s_63KhFOs/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAIZM/0q2igsTmGHc/s512-c/photo.jpg" /></author><thr:total>1</thr:total><feedburner:origLink>http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/01/blog-post_12.html</feedburner:origLink></entry><entry gd:etag="W/&quot;CUEEQHs7fCp7ImA9WhRVEkk.&quot;"><id>tag:blogger.com,1999:blog-8033919830443655972.post-3202836877698526935</id><published>2012-01-11T06:30:00.000+05:30</published><updated>2012-01-11T06:30:01.504+05:30</updated><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2012-01-11T06:30:01.504+05:30</app:edited><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="विचारधारा" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="समझौता" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="आतंक" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="अराजकता" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="उपयोग" /><title>इसराइल और भारत</title><content type="html">&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;
&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; इसराइल ने जिस तरह से भारत की सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता का खुले आम समर्थन किया है उससे लगता है कि आने वाले समय में अमेरिका और पश्चिमी देश मिलकर भारत के लिए परिषद में कुछ बड़े दायित्व के बारे में सोचना शुरू कर चुके हैं क्योंकि जिस तरह से अमेरिका हमेशा ही पश्चिमी देशों के साथ मिलकर भारत को सुरक्षा परिषद में रोकने की कोशिश करता रहता है उसमें यह परिवर्तन बहुत महत्वपूर्ण है. ऐसा भी नहीं है कि कहीं से अचानक ही भारत के प्रति पश्चिमी दुनिया का प्रेम जागने वाला है पर आज के समय जिस तरह से किसी भी देश के लिए भारत की अनदेखी करना आने वाले समय में बहुत मंहगा पड़ सकता है उसे ही &lt;span id="5_TRN_1o"&gt;देखते हुए शायद इस तरह से ये देश अब भारत की शक्ति को पहचानने की कोशिश में लगे हुए हैं. भारत के कुछ गुण ऐसे हैं जो पूरी दुनिया में किसी भी अन्य देश में नहीं मिलते हैं और पहले इन गुणों को हमारी कमज़ोरी मानने वाले लोग आज इन्हें हमारी&amp;nbsp; शक्तियों के रूप में देखने लगे हैं. तकनीक के क्षेत्र में इसराइल बहुत आगे है और वहां की ऐसी ही बहुत सारी तकनीक हमारे लिए सुखद भविष्य को लेकर आ सकती है. &amp;nbsp; &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;span id="5_TRN_1o"&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; इसराइल के साथ भारत के सम्बन्ध बहुत पुराने नहीं है फिर भी आने वाले समय में इस सम्बन्ध से पूरी दुनिया में नयी इबारत लिखी जा सकती है क्योंकि जिस तरह से अस्तित्व के लिए जूझने की शक्ति से इसराइल भरा हुआ है और भारत के पास पूरी दुनिया में ऐसा इतिहास है जिसकी कोई देश बराबरी नहीं कर सकता है. कुछ देश अपने स्वार्थ के कारण कई बार भारत की इस शक्ति की अनदेखी करना शुरू कर देते है पर जब आज उन्हें भविष्य के लीडर के तौर पर भारत दिखाई देता है तो वे अपने फैसले पर पुनर्विचार के लिए मजबूर हो जाते हैं ? वैसे इसराइल ने आज तक भारत के ख़िलाफ़ कुछ भी नहीं किया है और ऐसे में उससे बिना बात के ही सशंकित होने से कोई लाभ नहीं होने वाला है. भारत की तरह इसराइल भी हमेशा से ही आतंक और अलगाववाद का शिकार रहा है और भारत की तरह उसका रवैया शांतिपूर्ण नहीं वरन हमेशा ही आक्रामक रहता है पर आज भी वहां के नेता भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के शांतिप्रिय आन्दोलन से बहुत प्रभावित हैं.&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;
&lt;span id="5_TRN_1o"&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; आज के समय में अगर इसराइल इतनी लम्बी लड़ाई लड़ने के बाद भारत के शांतिपूर्ण सह आस्तित्व का समर्थक है तो इसके पीछे कोई अन्य कारण नहीं वरन भारत की अपनी शक्ति ही है जो उसे हर परिस्थिति से आराम से निकाल देती है. आज भी इसराइल के लोगों के लिए भारत एक पहेली जैसा है जहाँ पर सब कुछ अलग होते हुए भी सीमित संसाधनों में बहुत अच्छे से तरक्की की जा रही है. सबको साथ लेकर चलने की भारत की इस शक्ति की पूरी दुनिया कायल है. अब समय है कि नरसिम्हा राव के समय में शुरू किये इसराइल के साथ के संबंधों को और तेज़ी से मज़बूत करने का काम किया जाये क्योंकि भारत के सामने जिस तरह से आतंकी गतिविधियों को रोकने की चुनौती हैं उससे निपटने में इसराइल ने महारत हासिल कर रखी है आज के वैश्विक आतंक के परिदृश्य में अगर भारत अपने सम्बन्ध इसराइल से मज़बूत करता है तो आतंकियों से निपटने में दोनों देश एक दूसरे के अनुभवों को साझा कर सकते हैं. अब समय है कि इस बारे में दोनों ही देश विचार करें और भविष्य की दुनिया में अपनी हैसियत को ठीक से समझने की कोशिश भी करें. &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &lt;/span&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &lt;br /&gt;
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8033919830443655972-3202836877698526935?l=seedhikharibaat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel="replies" type="application/atom+xml" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/feeds/3202836877698526935/comments/default" title="टिप्पणियाँ भेजें" /><link rel="replies" type="text/html" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/01/blog-post_11.html#comment-form" title="1 टिप्पणियाँ" /><link rel="edit" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/3202836877698526935?v=2" /><link rel="self" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/3202836877698526935?v=2" /><link rel="alternate" type="text/html" href="http://feedproxy.google.com/~r/SeedhiKhariBaat/~3/kdaAleaTiEg/blog-post_11.html" title="इसराइल और भारत" /><author><name>Dr Ashutosh Shukla</name><uri>https://profiles.google.com/100257269155750831732</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel="http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail" width="32" height="32" src="//lh4.googleusercontent.com/-m8s_63KhFOs/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAIZM/0q2igsTmGHc/s512-c/photo.jpg" /></author><thr:total>1</thr:total><feedburner:origLink>http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/01/blog-post_11.html</feedburner:origLink></entry><entry gd:etag="W/&quot;CkEARnk9fyp7ImA9WhRVEUs.&quot;"><id>tag:blogger.com,1999:blog-8033919830443655972.post-4855703133698579960</id><published>2012-01-10T07:27:00.000+05:30</published><updated>2012-01-10T07:27:27.767+05:30</updated><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2012-01-10T07:27:27.767+05:30</app:edited><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="पर्यावरण" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="संसाधन" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="अन्तरिक्ष" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="उपयोग" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="बिजली" /><title>बिजली में नयी संभावनाएं</title><content type="html">&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;
&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; पूर्व राष्ट्रपति डॉ0 ए पी जे अब्दुल कलाम ने  भविष्य की ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने के लिए जिस तरह के प्रस्ताव का सुझाव दिया है अगर उस पर अमल किया जा सके तो पूरी दुनिया के ऊर्जा परिदृश्य को बदलने में बहुत बड़ी सहायता मिलने वाली है. चेन्नई के अन्ना विश्वविद्यालय में २० वें लेज़र सिम्पोसियम में बोलते हुए उन्होंने कहा कि अगर सूरज की रौशनी का एक हिस्सा भी हम सही तरह से इस्तेमाल करना सीख पाए तो ऊर्जा की इस तरह की ज़रूरतों को पूरा करने में सफलता निश्चित तौर पर मिलेगी. इस तरह के अनुसन्धान से आने वाले समय में हमें ऊर्जा की ज़रूरतों के साथ ही सूरज के बारे में और अधिक जानने का अवसर भी मिलने वाला है. जैसा कि हम सभी जानते हैं कि सौर ऊर्जा अक्षय ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत है पर अभी तक जिस तरह से हम सौर ऊर्जा को उपयोग में ला रहे हैं वह काफी खर्चीली प्रक्रिया है जिससे इस क्षेत्र में बहुत तेज़ी से अनुसन्धान नहीं हो पा रहे हैं.&amp;nbsp; पर अब समय है कि धरती के सीमित संसाधनों पर विचार करते हुए इस तरह के अन्य कार्यक्रमों के लिए सरकार और शीर्ष वैज्ञानिक संस्थाएं तेज़ी से काम करें. &lt;br /&gt;
&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; जिस तरह से अन्तरिक्ष में स्थापित ये सोलर पॉवर प्लांट काम करने वाले हैं उससे इनकी सफलता पर भी संदेह नहीं किया जा सकता हैं क्योंकि धरती के मुकाबले अन्तरिक्ष में २४ घंटे सौर ऊर्जा उपलब्ध रहती है साथ ही वहां पर धरती के मौसम की तरह भी कोई अन्य प्रभाव काम नहीं करता है जिससे ये प्लांट २४ घंटे ऊर्जा उत्पादन में सफल हो सकेंगें. इस तरह के सौर ऊर्जा के पॉवर प्लांट अभी तक अन्तरिक्ष केन्द्रों को ऊर्जा देते रहते हैं और अभी तक इन्होंने सफलता पूर्वक अपना काम किया है जिससे यह बात तो साबित हो ही जाती है कि भविष्य में ऊर्जा ज़रूरतों के लिए अन्तरिक्ष की तरफ देखा जा सकता है. इस पूरे कार्य में सबसे बड़ी चुनौती अन्तरिक्ष में बनायीं गयी बिजली को धरती तक लाने की होने वाली है क्योंकि वहां पर बिजली बनाना मुश्किल नहीं है बल्कि वहां से बिजली को धरती पर लाकर अपने उपयोग में लाने का काम आज भी चुनौती बना हुआ है.&amp;nbsp; इस क्षेत्र में दुनिया भर में काम चल रहा है क्योंकि इस तरह से बनायीं गयी बिजली पर्यावरण को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचा पायेगी. &lt;br /&gt;
&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; इस सम्बन्ध में डॉ कलाम कहते हैं कि इस बिजली को हम धरती तक भेजने के लिए माइक्रोवेव या लेज़र तकनीक का इस्तेमाल कर सकते हैं जिससे यह हमें सुगमता से उपलब्ध हो जाये. इस बारे में अब यही अनुसन्धान का विषय होना चाहिए कि किस तरह से माइक्रोवेव या लेज़र तकनीक को इतना उन्नत बनाया जाए कि वह ऊर्जा का बड़े पैमाने पर प्रवाह कर सके और इस ऊर्जा को हम ज़मीन पर इकठ्ठा करके अपने काम में ले सकें. इस आयु में भी डॉ कलाम जिस तरह से मानवता के कल्याण बारे में अपने वैज्ञानिक मस्तिष्क को लगाये हुए हैं वह प्रेरणा के क़ाबिल है क्योंकि आज लोगों में केवल अपने हित के बारे में सोचने के बाद कुछ और करने की इच्छा शक्ति ही नहीं रह जाती है फिर देश के शीर्ष वैज्ञानिक के बाद राष्ट्रपति के पद से रिटायर होकर भी वे आज जिस तरह से लगातार वैज्ञानिक कामों और अनुसंधानों में लगे हुए हैं वह अपने आप में अद्भुत है. आशा की जानी चाहिए कि आने वाले समय में हमारे युवा वैज्ञानिक इस बारे में सोचेंगें और इनकी इस तरह की वैज्ञानिक सोच को मूर्त रूप देने में सफल हो सकेंगें. &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &lt;br /&gt;
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8033919830443655972-4855703133698579960?l=seedhikharibaat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel="replies" type="application/atom+xml" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/feeds/4855703133698579960/comments/default" title="टिप्पणियाँ भेजें" /><link rel="replies" type="text/html" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/01/blog-post_10.html#comment-form" title="1 टिप्पणियाँ" /><link rel="edit" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/4855703133698579960?v=2" /><link rel="self" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/4855703133698579960?v=2" /><link rel="alternate" type="text/html" href="http://feedproxy.google.com/~r/SeedhiKhariBaat/~3/6cYo-_xNCoo/blog-post_10.html" title="बिजली में नयी संभावनाएं" /><author><name>Dr Ashutosh Shukla</name><uri>https://profiles.google.com/100257269155750831732</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel="http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail" width="32" height="32" src="//lh4.googleusercontent.com/-m8s_63KhFOs/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAIZM/0q2igsTmGHc/s512-c/photo.jpg" /></author><thr:total>1</thr:total><feedburner:origLink>http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/01/blog-post_10.html</feedburner:origLink></entry><entry gd:etag="W/&quot;D0AHRns9fip7ImA9WhRVEEo.&quot;"><id>tag:blogger.com,1999:blog-8033919830443655972.post-214402843961444949</id><published>2012-01-09T07:37:00.000+05:30</published><updated>2012-01-09T07:52:17.566+05:30</updated><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2012-01-09T07:52:17.566+05:30</app:edited><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="रेल" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="विकास" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="सुधार" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="उपयोग" /><title>रेलवे की नयी सुविधा</title><content type="html">&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;
&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;
&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/-a_z-P7Kx5f4/TwpLTYFp5WI/AAAAAAAAIWs/HyC8I6O8a6c/s1600/%25E0%25A4%25B8%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B0%25E0%25A5%2580%25E0%25A4%25A8%25E0%25A4%25B6%25E0%25A5%2589%25E0%25A4%259F-12.png" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" height="200" src="http://4.bp.blogspot.com/-a_z-P7Kx5f4/TwpLTYFp5WI/AAAAAAAAIWs/HyC8I6O8a6c/s320/%25E0%25A4%25B8%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B0%25E0%25A5%2580%25E0%25A4%25A8%25E0%25A4%25B6%25E0%25A5%2589%25E0%25A4%259F-12.png" width="320" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;
&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;br /&gt;
उत्तर रेलवे के दिल्ली मंडल की तरफ़ से जिस तरह से यात्रियों को नयी नयी सुविधाएँ देने की शुरुआत की गई वह रेलवे के साथ साथ यात्रियों के लिए भी बहुत लाभकारी साबित होने वाली है. दिल्ली स्थिति सभी स्टेशन अब इन्टरनेट से इस तरह से जोड़ दिए गए हैं कि किसी भी जगह से चलने वाली गाड़ी में चार्ट बनने के बाद भी ख़ाली रह जाने वाली सीटों की संख्या नेट से ही पता चल जाएगी और यात्री सम्बंधित स्टेशन पर जाकर अपने लिए टिकट बनवा सकता है. अभी तक इन सीटों के बारे में कोई जानकारी न होने के कारण यात्रियों से अवैध ढंग से वसूली करके उन्हें स्थान उपलब्ध कराया जाता था जिससे रेलवे का कई बार बहुत नुकसान हो जाया करता था. अब चार्ट बनने और गाड़ी छूटने के ४ घंटों में यात्री इन ख़ाली सीटों का पता लगाकर अपने लिए टिकट बुक कर सकते हैं जिससे दिल्ली जैसी जगह से पूरे देश में जाने वाले यात्रियों को कुछ हद तक सहूलियत तो मिल ही जाएगी. &lt;br /&gt;
&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; जिस तरह से रेलवे का विशाल नेटवर्क है और उसमें बहुत जगहों पर नियमों की कमी का लाभ उठाकर भ्रष्टाचार को अभी तक बढ़ावा मिलता रहता है उस पर इन क़दमों से काफी हद तक रोक लगाने में मदद मिलेगी और यात्रियों को कुछ हद तक सुविधा भी मिले लगेगी. जिन जगहों पर &lt;a href="http://122.252.248.145:8182/RW/%20"&gt;करेंट बुकिंग&lt;/a&gt; की सुविधा है वहां पर इस तरह से किसी को यह पता नहीं चल पाता था कि चार्ट बनने के बाद कितनी सीटें ख़ाली रह गयी हैं क्योंकि अधिकतर यात्री ये मानते हैं कि चार्ट बनने के बाद टिकट मिल ही नहीं सकते हैं. आज इस सुविधा से यात्री खुद ही जानकारी लेकर सम्बंधित स्टेशन से इस तरह के टिकट ले कर अपनी यात्रा को सुगम बना सकते हैं. सबसे बड़ी बात यह भी है कि इस तरह के तंत्र को बड़े शहरों में विकसित करने के लिए जिस तरह की सुविधाएँ चाहिए अभी रेलवे के पास नहीं हैं जबकि रेलवे के पास पूरे भारत में एक अलग से स्पेक्ट्रम है जो उनके सञ्चालन के लिए दिया गया है अब समय है कि इन संसाधनों का रेलवे और बेहतर तरीके से उपयोग करना सीख ले जिससे उसकी आमदनी भी बढ़ जाये और किसी भी यात्री को समय रहते ये सीटें आसानी से दी जा सकें.&lt;br /&gt;
&amp;nbsp; &amp;nbsp; करेंट सीट के बारे में एक बात यह भी ध्यान देने योग्य होती है कि इसे उसी स्टेशन से ही बुक कराया जा सकता है जहाँ से इसकी उपलब्धता दिखाई दे रही है. अभी तक रेलवे ने इस बारे में कुछ नहीं सोचा है क्योंकि ये ख़ाली पड़ी सीटें भरने के लिए चार्ट बन जाने के बाद टिकट बनाने की कोई नेट से सुविधा नहीं दी जा सकती है. फिर भी दिल्ली जैसे बड़े शहर में लोग जाने के लिए कुछ समय पहले निकल कर इस सुविधा का लाभ तो उठा ही सकते हैं . हो सकता है कि आने वाले समय में रेलवे को इस बात में भी कामयाबी मिल जाये और वह इन टिकटों को भी नेट से बेच सके ? फिलहाल जिस तरह से रेलवे यात्रियों के लिए बेहतर सुविधा लेकर आ रही है उससे पहले के मुक़ाबले अधिक सहूलियत तो होने ही लगी है और यात्रियों में से कुछ लोगों की समस्या का समाधान तो होने ही लगा है. इसे प्रायोगिक तौर पर देखने के बाद इस बात की कोशिश होनी चाहिए कि इसे पूरे भारत में लागू करवाया जाये जिससे टिकट बनने और यात्रा करने के दौरान जिस भ्रष्टाचार की सम्भावना रहती है वो तो ख़त्म हो सके. &lt;br /&gt;
&amp;nbsp;&lt;br /&gt;
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8033919830443655972-214402843961444949?l=seedhikharibaat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel="replies" type="application/atom+xml" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/feeds/214402843961444949/comments/default" title="टिप्पणियाँ भेजें" /><link rel="replies" type="text/html" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/01/blog-post_09.html#comment-form" title="0 टिप्पणियाँ" /><link rel="edit" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/214402843961444949?v=2" /><link rel="self" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/214402843961444949?v=2" /><link rel="alternate" type="text/html" href="http://feedproxy.google.com/~r/SeedhiKhariBaat/~3/ZXZQtO1Fl_s/blog-post_09.html" title="रेलवे की नयी सुविधा" /><author><name>Dr Ashutosh Shukla</name><uri>https://profiles.google.com/100257269155750831732</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel="http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail" width="32" height="32" src="//lh4.googleusercontent.com/-m8s_63KhFOs/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAIZM/0q2igsTmGHc/s512-c/photo.jpg" /></author><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="http://4.bp.blogspot.com/-a_z-P7Kx5f4/TwpLTYFp5WI/AAAAAAAAIWs/HyC8I6O8a6c/s72-c/%25E0%25A4%25B8%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B0%25E0%25A5%2580%25E0%25A4%25A8%25E0%25A4%25B6%25E0%25A5%2589%25E0%25A4%259F-12.png" height="72" width="72" /><thr:total>0</thr:total><feedburner:origLink>http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/01/blog-post_09.html</feedburner:origLink></entry><entry gd:etag="W/&quot;DkMEQ3kzfip7ImA9WhRWGUU.&quot;"><id>tag:blogger.com,1999:blog-8033919830443655972.post-9069572754598917322</id><published>2012-01-08T06:30:00.000+05:30</published><updated>2012-01-08T06:30:02.786+05:30</updated><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2012-01-08T06:30:02.786+05:30</app:edited><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="विचारधारा" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="कानून" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="अभिव्यक्ति" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="चुनाव" /><title>हाथी, माया और चुनाव आयोग</title><content type="html">&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;
 &amp;nbsp;&amp;nbsp; लगता है कि चुनाव आयोग के &lt;span id="22_TRN_c"&gt;सामने की गयी विपक्षी दलों की शिकायतों &lt;/span&gt;  का असर जल्दी ही उत्तर प्रदेश में दिखाई देने लगेगा जिसके तहत पूरे प्रदेश में लगायी गयी हाथी और मायावती की मूर्तियों को चुनाव संपन्न होने तक परदे में रहना होगा. विपक्षी दलों ने आयोग से शिकायत की थी कि जिस तरह से माया सरकार ने पूरे प्रदेश में अपनी और अपने चुनाव निशान हाथी की मूर्तियाँ लगा रखी हैं उससे मतदाता को प्रभावित किया जा सकता है और आने वाले चुनाव में मतदाता इसके प्रभाव में आ सकते है. चुनाव आयोग सैद्धांतिक रूप से इस बात से सहमत भी है और सम्भावना है कि अगले एक दो दिनों में इस सम्बन्ध में आदेश भी जारी हो सकते हैं. जिस तरह से पूरे देश में राजनेता हर प्रकार से अपने चुनावी हितों को जनता के पैसों से पूरा करना चाहते हैं वह अपने आप में बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है. अभी भी इस बात का अंदाज़ा नेता नहीं लगा पा रहे हैं कि आख़िर किस तरह से वे जनता के पैसे का पूरे ५ वर्षों तक दुरूपयोग करते रहते हैं और चुनाव आते ही उसका लाभ उठाने की भी सोचते हैं ? अब समय है कि इस तरह की ओछी राजनीति के स्थान पर मुद्दों और विकास की राजनीति की जाये. &lt;br /&gt;
&amp;nbsp; &amp;nbsp; हर स्थान पर नेता लोग जनता के हितों की बात ही करते नहीं थकते हैं पर जब भी जनता से सही बात कहने और करने का समय आता है तो ये सभी अपने आप ही यह तय करने में लग जाते हैं कि क्या सही है और क्या ग़लत है ? इस बात से कोई भी इनकार नहीं कर सकता है कि जब देश हित की बात आती है तो हमारा मूर्छित पड़ा राजनैतिक तंत्र सन्निपात में चला जाता है जिस कारण से देश के हित हमेशा ही पीछे छूट जाया करते हैं ? आख़िर देश के नेताओं को यह बात क्यों समझ नहीं आती है कि चाहे जिस भी दल की सरकार हो जनता को खाना, पानी, बिजली, सड़क से अधिक और कुछ नहीं चाहिए होता है पर आज तक अनियंत्रित विकास के कारण देश का पैसा ग़लत तरीके से खर्च करने की परंपरा बनती जा रही है ? ऐसा भी नहीं है कि सभी योजनायें किसी काम की न हों पर आम तौर पर जिन योजनाओं का ढिंढोरा पीता जाता है वे पूरी तरह से खोखली साबित होती हैं और जनता का किसी भी तरह से कोई भला नहीं होता है हाँ इन योजनाओं से नेताओं के खज़ाने ज़रूर भर जाया करते हैं ?&lt;br /&gt;
&amp;nbsp; &amp;nbsp; देश के कानून में ऐसा कुछ अवश्य होना चाहिए कि कोई भी पार्टी कहीं पर भी इस तरह से किसी के स्वाभिमान के बारे में बातें करते करते ऐसे कदम न उठाने लग जाए जिसका स्वाभिमान से कोई मतलब ही नहीं है ? क्या किसी समूह दल या नेता का स्वाभिमान केवल कुछ मूर्तियों से ही पूरा हो सकता है ? आज अगर माया के सामने यह मुद्दा आया है तो इसके पीछे उनकी अपने चुनाव निशान और अपनी मूर्तियाँ लगाने कि ज़िद ही बड़ा कारण है क्योंकि अभी तक देश में किसी पार्टी ने किसी भी तरह से सरकारी धन का उपयोग सार्वजानिक भूमि पर सार्वजानिक पैसे से अपने चुनाव निशान लगवाने में नहीं किया है ? अगर यहाँ पर डॉ आंबेडकर और कांशीराम की मूर्तियाँ ही लगी होती तो उनको ढकने या छिपाने की बात ही नहीं उठती पर जब उनके साथ हाथी और माया की ख़ुद की मूर्तियाँ भी लगी हुई हैं तो सैद्धांतिक तौर पर यह बात ग़लत भी लगती है. किसी नेता के जनसभा में किये गए खर्च को आयोग पूरी तरह से चुनावी खर्च में जोड़ने की बातें करता है तो ऐसे स्थिति में आख़िर किस तरह से इन हाथियों और माया की मूर्तियों का खर्च किस प्रत्याशी के खाते में जोड़ा जायेगा ? फिलहाल यह देश का दुर्भाग्य ही है कि विकास और प्रगति के स्थान पर आज हम चुनाव में हाथियों को ढकने के मुद्दे पर बात कर रहे हैं ? &amp;nbsp; &amp;nbsp; &lt;br /&gt;
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8033919830443655972-9069572754598917322?l=seedhikharibaat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel="replies" type="application/atom+xml" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/feeds/9069572754598917322/comments/default" title="टिप्पणियाँ भेजें" /><link rel="replies" type="text/html" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/01/blog-post_08.html#comment-form" title="0 टिप्पणियाँ" /><link rel="edit" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/9069572754598917322?v=2" /><link rel="self" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/9069572754598917322?v=2" /><link rel="alternate" type="text/html" href="http://feedproxy.google.com/~r/SeedhiKhariBaat/~3/llziNqLOAHU/blog-post_08.html" title="हाथी, माया और चुनाव आयोग" /><author><name>Dr Ashutosh Shukla</name><uri>https://profiles.google.com/100257269155750831732</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel="http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail" width="32" height="32" src="//lh4.googleusercontent.com/-m8s_63KhFOs/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAIZM/0q2igsTmGHc/s512-c/photo.jpg" /></author><thr:total>0</thr:total><feedburner:origLink>http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/01/blog-post_08.html</feedburner:origLink></entry><entry gd:etag="W/&quot;C0EERHYzeCp7ImA9WhRWGU0.&quot;"><id>tag:blogger.com,1999:blog-8033919830443655972.post-5420763782821694586</id><published>2012-01-07T07:24:00.000+05:30</published><updated>2012-01-07T07:30:05.880+05:30</updated><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2012-01-07T07:30:05.880+05:30</app:edited><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="कानून" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="अराजकता" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="चुनाव" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="आन्दोलन" /><title>यूपी और नोट</title><content type="html">&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;
&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; इस बार चुनाव आयोग की काले धन की आवाजाही पर की गयी सख्ती का असर यूपी में साफ़ तौर पर दिखाई देने लगा है अभी तक के चुनावों में हमेशा ही काले धन का दुरूपयोग चुनावों में मतदाताओं को लुभाने के लिए ही किया जाता था पर इस बार आयोग की सख्ती का ही असर है कि अभी चुनाव रंग में नहीं आये हैं और इतनी बड़ी मात्रा में बरामदगी शुरू हो चुकी है ? यह तो सभी जानते हैं कि चुनाव में गरीबों को लुभाने के लिए नेता कितने सारे हथकंडे अपनाया करते हैं पर इस बार जिस तरह से चुनाव आयोग ने इनके धन के प्रवाह पर बाँध बना दिए हैं उससे नेताओं में बेचैनी साफ़ तौर पर देखी जा सकती है. अभी तक जो नेता इस बात के लिए चिल्लाते थे कि चुनाव में पैसे के दम पर धांधली की जाती है इस बार उनकी भी बोलती बंद है और उन्हें भी समझ में आने लगा है कि देश में कानून नाम की कोई चीज़ भी है और उसे लागू करा पाने का दम रखने वाली संस्था भी. ऐसा नहीं है कि देश के कानूनों में कमी है क्योंकि अगर कमी होती तो इस तरह की व्यवस्था उसी तंत्र से कैसे संभव हो पा रही है जो पूरे ५ साल तक देश में भ्रष्टाचार का ग़दर मचाये रखता है ?&amp;nbsp; आज आवश्यकता इस बात की है कि कुछ ऐसा हो जो इस पूरे तंत्र को सही दिशा में चलाने का काम कर सके और देश को एक नयी दिशा भी दे सके.&lt;br /&gt;
&amp;nbsp;&amp;nbsp; मामला बिलकुल साफ़ है कि हमारे नेताओं में दम नहीं बचा है कि वे देश के कानूनों को सही ढंग से लागू करवा पायें ? जिन कानूनों को पारित करने के लिए ये संसद और विधान मंडलों में जितने बड़े स्तर पर ढोंग रचाते रहते हैं अगर उसका एक हिस्सा भी इनके अनुपालन में लगा दें तो देश की किस्मत केवल ५ वर्षों में ही बदल सकती है पर तब इनके पैसे के दम पर चलने वाले खेल शायद ही पूरे हो पायेंगें और आम जनता के लिए विभिन्न योजनाओं में आने वाला पैसा हड़पने में इन्हें अपने तंत्र समेत दिक्कत होने लगे ? अब देश की जनता को यह देखने की ज़रुरत है कि आख़िर क्या कारण है कि जिन्हें हम अपना मत देकर प्रदेश और देश की बागडोर थमाते हैं आख़िर में वे ही किस तरह से इतने संवेदन हीन हो जाते हैं कि उन्हें यह भी दिखाई नहीं देता कि सही क्या है और ग़लत क्या ? ऐसा भी नहीं है कि देश के सभी नेता इस तरह के काम में लगे हुए हैं पर जो नहीं लगे हुए हैं अब उन पर ही बड़ी ज़िम्मेदारी है कि वे लोगों को यह दिखा दें कि आने वाले समय में अगर कुछ किया जा सकता है तो उसकी शुरुआत करने का सही समय अब आ ही गया है. केवल संसद में हल्ला मचाने और बहिर्गमन करने से ही कोई लोकतंत्र का रखवाला साबित नहीं हो जाता है ? देश में अब नेताओं को यह जवाब देना भी सीखना होगा कि अगर वे किसी बात का विरोध कर रहे हैं तो उसके लिए उनकी क्या अच्छी योजना है जो सरकार नहीं कर पा रही है ?&lt;br /&gt;
&amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp; जिस तरह से नकदी और चाँदी पकड़े जाने का सिलसिला चल रहा है उससे यह भी पता चलता है कि कितने व्यापारी अवैध ढंग से कर चोरी करते हुए आज भी अपना काम कर रहे हैं ? ऐसा भी नहीं है कि जो पैसा पकड़ा जा रहा है वह सारा का सारा नेताओं का काला धन ही है इसमें बहुत बड़ी मात्रा में कर चोरी के द्वारा किये जाने वाले काम भी शामिल हैं क्योंकि अब बिना इसके कोई भी व्यापारी काम ही नहीं कर रहा है ? इस बहाने से देश को इस बात पर भी विचार करना चाहिए कि कर ढांचे को इतना तर्क संगत बनाया जाए कि आम लोगों को कर देने में कोई दिक्कत न हो ? देश में आम तौर पर कर ढांचा ऐसा है कि सम्बंधित विभाग के लोग ही कुछ धन लेकर एक समान्तर अर्थ-व्यवस्था का सञ्चालन करने में लगे हुए हैं क्या सरकार की नज़रें इस पर भी पड़ने वाली हैं या जनहित में सर्वोच्च्च न्यायालय या किसी राज्य का उच्च न्यायालय इस बात को संज्ञान में लेना चाहेगा कि सरकार इस तरफ भी सोचे क्योंकि आम जनता के कहने से सरकारों को कुछ सुनाई देना बंद हो चुका है अब काम केवल न्यायालय की अवमानना के डर से ही समयबद्ध तरीके से हो पाते हैं ? फिलहाल तो देश के ५ राज्यों में चुनाव के चलते सभी इस उत्सव में शामिल हैं ही पर आयोग के डंडे ने इनके रंग में भंग तो डाल ही दिया है. &amp;nbsp; &amp;nbsp; &lt;br /&gt;
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8033919830443655972-5420763782821694586?l=seedhikharibaat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel="replies" type="application/atom+xml" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/feeds/5420763782821694586/comments/default" title="टिप्पणियाँ भेजें" /><link rel="replies" type="text/html" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/01/blog-post_07.html#comment-form" title="1 टिप्पणियाँ" /><link rel="edit" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/5420763782821694586?v=2" /><link rel="self" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/5420763782821694586?v=2" /><link rel="alternate" type="text/html" href="http://feedproxy.google.com/~r/SeedhiKhariBaat/~3/AIuwFjAbaG8/blog-post_07.html" title="यूपी और नोट" /><author><name>Dr Ashutosh Shukla</name><uri>https://profiles.google.com/100257269155750831732</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel="http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail" width="32" height="32" src="//lh4.googleusercontent.com/-m8s_63KhFOs/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAIZM/0q2igsTmGHc/s512-c/photo.jpg" /></author><thr:total>1</thr:total><feedburner:origLink>http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/01/blog-post_07.html</feedburner:origLink></entry><entry gd:etag="W/&quot;C0EEQX86fyp7ImA9WhRWGEw.&quot;"><id>tag:blogger.com,1999:blog-8033919830443655972.post-4712991298208558068</id><published>2012-01-06T06:30:00.000+05:30</published><updated>2012-01-06T06:30:00.117+05:30</updated><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2012-01-06T06:30:00.117+05:30</app:edited><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="कर्तव्य" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="अभिव्यक्ति" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="उपयोग" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="आन्दोलन" /><title>चुनाव और अन्ना</title><content type="html">&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;
&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; अच्छा ही हुआ कि अन्ना हजारे ने देश के कुछ राजनैतिक दलों के हाथों का खिलौना बनने से इनकार कर दिया है जिससे उनकी और उनके भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ आन्दोलन की धार आगे के लिए बची रहेगी. जिस तरह से अन्ना के आन्दोलन से कुछ राजनैतिक दल और लोग केवल अपने स्वार्थ के लिए जुड़ गए थे उनको अन्ना के इस कदम से बहुत निराशा होने वाली है. यह सही है कि अन्ना ने अपने आन्दोलन से देश की जनता के सामने भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने की शक्ति का एहसास ज़रूर करा दिया है पर उनके इस आन्दोलन का जिस तरह से स्वार्थी लोगों ने लाभ उठाना शुरू किया उसकी कोई दूसरी मिसाल नहीं मिलती है. अन्ना के सामने कोई चुनौती नहीं थी क्योंकि उनके मन में जो संकल्प है उसकी कोई बराबरी नहीं कर सकता है पर जिस तरह से कुछ लोगों ने पूरे देश को केवल दिल्ली ही समझ रखा है उससे उनके आन्दोलन को बहुत बड़ा नुकसान होने वाला था पर अन्ना के इस कदम से देश को ज़रूर लाभ होने वाला है. भ्रष्टाचार आज देश में स्थायी भाव बन चुका है कोई भी दल इस बात से इनकार नहीं कर सकता क्योंकि सत्ता तक पहुँचते ही सभी दल एक जैसा व्यवहार करने लगते हैं इसलिए विरोध भ्रष्टाचार का होना चाहिए न कि दल का ? उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का विरोध करके अन्ना को क्या हासिल होने वाला था शायद यह उन्हें पता चल गया और उन्होंने अपने कदम रोक लिए. &lt;br /&gt;
&amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp; अन्ना के आन्दोलन के दिल्ली और टी वी न्यूज़ तक सिमटने से जो होने वाला था वह हो चुका है इस आन्दोलन से आम लोगों का पूरे देश में कितना जुड़ाव हुआ यह कहना मुश्किल है पर आम लोगों ने अन्ना की बातों को बहुत सराहा था. किसी भी स्तर पर दिल्ली में अनशन करना तो आसान है पर उसे एक आन्दोलन के रूप में पूरे देश में पहुंचा पाना बहुत मुश्किल है. जिस तरह से अन्ना ने ख़ुद या अपनी टीम के दबाव में ५ राज्यों में कांग्रेस के ख़िलाफ़ प्रचार करने की बात कहीं थी उसकी कोई ज़रुरत नहीं थी क्योंकि जब तक अन्ना के पास इस आन्दोलन की ऊर्जा को सँभालने वाले मज़बूत लोग नहीं होंगें तब तक पूरे देश में इसे संभाल पाना मुश्किल ही होगा ? टीवी पर आन्दोलन जितना बड़ा दिखाई देता था वास्तव में वह पूरी ऊर्जा के साथ पूरे देश में नहीं दिखाई दिया उसके पीछे कहीं न कहीं से टीम अन्ना के कुछ लोगों की महत्वकांक्षाएं या निजी स्वार्थ आड़े आ गए और साथ ही अन्ना ने जिस तरह से देश के राजनेताओं पर भरोसा किया उससे भी कुछ हासिल नहीं हो पाया क्योंकि देश के नेता अब किसी के भरसे लायक रह ही नहीं गए हैं ? &lt;br /&gt;
&amp;nbsp; &amp;nbsp; यह सही है कि अन्ना की देश को बहुत ज़रुरत है और उनके स्वस्थ रहने से उनके पूरे आन्दोलन पर गहरा असर पड़ने वाला है पर क्या यही बात उनकी टीम के अन्य लोग समझना चाह रहे हैं ? एक हिसार की जीत को इन लोगों ने अपनी जीत बताया जबकि वह कुलदीप विश्नोई और भजनलाल के परिवार की व्यक्तिगत जीत थी पर जब रतिया की सीट पर कंग्रेस ने २९ साल बाद कब्ज़ा जमाया तो कोई उस हार को अपने सर लेने को तैयार नहीं दिखा ? आज देश को एक मज़बूत और ईमानदार राजनैतिक तंत्र की आवश्यकता है पर साथ ही एक अन्ना जैसे आन्दोलन की भी उतनी ही आवश्यकता है जो समय समय पर भ्रष्ट हो रहे तंत्र की खामियों से जनता को अवगत करने की क्षमता रखता हो. अगर अब अन्ना के काम को देश के लिए हमेशा के लिए चलाना है तो उनकी टीम को यह समझना ही होगा कि इस आन्दोलन को किसी दल /सरकार के ख़िलाफ़ करने के स्थान पर भ्रष्टाचार और अनीति के ख़िलाफ़ लड़ने के लिए तैयार किया जाना चाहिए और इससे उन लोगों को जोड़ा जाना चाहिए जो किसी भी राजनैतिक दल से संपर्क न रखते हों और अपने क्षेत्र में ईमानदारी से काम कर रहे हो. &amp;nbsp; &lt;br /&gt;
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8033919830443655972-4712991298208558068?l=seedhikharibaat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel="replies" type="application/atom+xml" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/feeds/4712991298208558068/comments/default" title="टिप्पणियाँ भेजें" /><link rel="replies" type="text/html" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/01/blog-post_06.html#comment-form" title="0 टिप्पणियाँ" /><link rel="edit" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/4712991298208558068?v=2" /><link rel="self" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/4712991298208558068?v=2" /><link rel="alternate" type="text/html" href="http://feedproxy.google.com/~r/SeedhiKhariBaat/~3/xOhtlAbsdHE/blog-post_06.html" title="चुनाव और अन्ना" /><author><name>Dr Ashutosh Shukla</name><uri>https://profiles.google.com/100257269155750831732</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel="http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail" width="32" height="32" src="//lh4.googleusercontent.com/-m8s_63KhFOs/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAIZM/0q2igsTmGHc/s512-c/photo.jpg" /></author><thr:total>0</thr:total><feedburner:origLink>http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/01/blog-post_06.html</feedburner:origLink></entry><entry gd:etag="W/&quot;D0UEQX8yfyp7ImA9WhRWF08.&quot;"><id>tag:blogger.com,1999:blog-8033919830443655972.post-4035861278040788231</id><published>2012-01-05T06:30:00.000+05:30</published><updated>2012-01-05T06:30:00.197+05:30</updated><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2012-01-05T06:30:00.197+05:30</app:edited><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="भ्रष्टाचार" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="अधिकार" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="सरकार" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="अराजकता" /><title>मेरे साथ तो गंगा दूसरे के साथ तो नाला...</title><content type="html">&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;
&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; देश में राजनीति में कितना कीचड़ हो चुका है इस बात का अब अंदाज़ा लगाना बहुत मुश्किल हो गया है क्योंकि अब यहाँ पर मुद्दे बड़े नहीं रह गए हैं उनेक स्थान पर केवल कुछ सीट जिताऊ नेता ही ज्यादा काम के साबित होने लगे हैं. वैसे ऐसा पूरे देश में होता है पर जब राजनीति के नाम पर शुचिता की धज्जियाँ उड़ाने वाले उ०प्र० की बात हो रही हो तो कुछ न कुछ तो अलग से होना ही है ? उत्तर प्रदेश में आगामी विधान सभा में चुनाव के पहले इस तरह की अजीब सी पर नेताओं को रास आने वाली गतिविधियाँ अचानक ही बढ़ जाया करती हैं ताज़ा मामले में बसपा से निकले गए नेताओं को भाजपा द्वारा अपनाये जाने से जहाँ एक तरफ भाजपा की बहुत किरकिरी हुई है वहीं दूसरी तरफ़ अन्य दलों को भाजपा पर निशाना साधने का मौका भी मिल गया है. अभी पिछले साल ही भ्रष्टाचार के मुद्दे पर भाजपा के वरिष्ठ नेता आडवाणी ने जिस तरह से कांग्रेस के ख़िलाफ़ माहौल बनाने के लिए  पूरे देश की ख़ाक छानी अब उसका वे क्या उत्तर देंगें क्योंकि कुशवाहा ने माया के कहने से या अपने आप ही जो कुछ भी किया उसे इस दम पर सही गलत नहीं कहा जा सकता की अब कुशवाहा किस दल के साथ हैं ?&lt;br /&gt;
&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; अभी तक संसद और अन्ना के आन्दोलन में भाजपा जिस सुर में बात कर रही थी अब उसका पर्दाफाश तो हो ही चुका है क्योंकि अब भाजपा का दोहरा चरित्र सामने आ गया है ? कुशवाहा अपने समाज में बहुत इज्ज़त से देखे जाते हैं पर इसका मतलब यह नहीं माना जाना चाहिए कि कोई भी समाज अपने बेईमान नेता को भी उतना ही सम्मान देना चाहेगा ? किसी भी समाज पर इस तरह की तोहमत लगाने का हक़ किसी राजनैतिक दल को किसने दिया है ? इस मामले में सीबीआई अपना काम करने में लगी हुई है और इस पर विभिन्न तरह के राजनैतिक दुरूपयोग के आरोप लगाने वले दल क्या कुशवाहा के साथ अन्य लोगों के घरों और दफ्तरों में मारे गए छापे को भी इसका दुरूपयोग ही बतायेंगें ? कुशवाहा के भाजपा में जाने से सीबीआई के लिए भी समस्या खड़ी हो गयी है क्योंकि बसपा से निकाले जाने के बाद उनके ख़िलाफ़ कुछ भी कदम उठाने से एजेंसी को भेदभाव के आरोप नहीं झेलने पड़ते पर अब जब कुशवाहा भाजपा में हैं तो सीबीआई पर फिर से दबाव आ गया है ? ऐसे में जांच कितनी निष्पक्ष हो पायेगी यह तो समय ही बताएगा पर अब भाजपा को कुशवाहा को टिकट नहीं देकर अपनी तरफ़ से शुचिता तो दिखने का प्रयास करना ही चाहिए.&amp;nbsp; &lt;br /&gt;
&amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; इस मसले कि केवल भ्रष्टाचार की नज़रों से देखे जाने की दृष्टि अभी भी देश में विकसित नहीं हो पाई है क्योंकि सभी को केवल तात्कालिक लाभ ही दिखाई देने लगे हैं और कोई भी दल चुनाव में कुछ वोट बटोरने वाले खिलाड़ियों की तलाश में जाल बिछाकर बैठना चाहते हैं ? अब देश की जनता में इतनी समझ आ चुकी है कि लोकपाल विधेयक बनाने और भ्रष्टाचारियों को साथ में लेने से क्या होने वाला है ? उत्तर प्रदेश में आज भी जो कुछ हो रहा है उसका अन्ना के आन्दोलन से क्या लेना है ? कोई भी दल आज तक यह निश्चय नहीं कर पाया है कि आवश्यकता पड़ने पर किसी भी हालत में अपराधियों और दागियों को टिकट नहीं देगा क्योंकि उसे केवल कुछ सीटें चाहिए जो चुनाव के बाद बनने वाले किसी भी माहौल में उनके दल को सहारा दे सकें ? अभी तक जो कुछ भी चल रहा है उसमें लोकतंत्र और शुचिता की हार हो रही है और कलमाड़ी, राजा आदि पर आरोप लगाने वाले किस तरह से अपने को कुछ अलग कैसे कह सकते हैं ? अब देश की जनता को यह फैसला करने का समय आ गया कि नेताओं के इस तरह के दोहरे चरित्र के बारे में कुछ सोच लें क्योंकि अब मेरे साथ गंगा और दूसरे के साथ नाला वाली कहानी ज्यादा दिन नहीं चलने वाली है....&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &lt;br /&gt;
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8033919830443655972-4035861278040788231?l=seedhikharibaat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel="replies" type="application/atom+xml" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/feeds/4035861278040788231/comments/default" title="टिप्पणियाँ भेजें" /><link rel="replies" type="text/html" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/01/blog-post_05.html#comment-form" title="0 टिप्पणियाँ" /><link rel="edit" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/4035861278040788231?v=2" /><link rel="self" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/4035861278040788231?v=2" /><link rel="alternate" type="text/html" href="http://feedproxy.google.com/~r/SeedhiKhariBaat/~3/4qFW26-C6nM/blog-post_05.html" title="मेरे साथ तो गंगा दूसरे के साथ तो नाला..." /><author><name>Dr Ashutosh Shukla</name><uri>https://profiles.google.com/100257269155750831732</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel="http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail" width="32" height="32" src="//lh4.googleusercontent.com/-m8s_63KhFOs/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAIZM/0q2igsTmGHc/s512-c/photo.jpg" /></author><thr:total>0</thr:total><feedburner:origLink>http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/01/blog-post_05.html</feedburner:origLink></entry><entry gd:etag="W/&quot;Ak8EQ3g8fCp7ImA9WhRWFk4.&quot;"><id>tag:blogger.com,1999:blog-8033919830443655972.post-1090883376403154656</id><published>2012-01-04T06:30:00.000+05:30</published><updated>2012-01-04T06:30:02.674+05:30</updated><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2012-01-04T06:30:02.674+05:30</app:edited><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="संसाधन" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="राजनीति" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="उपयोग" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="विज्ञान" /><category scheme="http://www.blogger.com/atom/ns#" term="उम्मीद" /><title>वैज्ञानिक अनुसन्धान और भारत</title><content type="html">&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;
&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; भुवनेश्वर आईआईटी में ९९ वीं इंडियन साइंस कांग्रेस में बोलते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने देश में जिस तरह से विज्ञान के क्षेत्र में और अधिक निवेश किये जाने पर बल दिया उससे यही लगता है कि अगले वित्तीय वर्ष में शायद सकल घरेलू उत्पाद के ०.९९ % के आंकड़े से आगे बढ़कर सरकार कुछ अधिक करने का मन बना चुकी है. आज से १५ वर्ष पहले तक देश में कुल राजस्व इतना नहीं होता था कि कोई भी सरकार इस तरह के कामों के लिए बहुत अधिक धन जुटा सके फिर भी पिछले दशक में जिस तरह से नए मदों से राजस्व आना शुरू हुआ है उसके बाद अब सरकार कि ज़िम्मेदारी तो बनती ही है कि अब विज्ञान और अनुसन्धान के लिए और अधिक धन का आवंटन किया जाये क्योंकि अब देश की मेधा को अगर देश में ही अच्छे अनुसन्धान केंद्र देने हैं तो इस बारे में अब विचार करना ही होगा. मनमोहन सिंह ने जिस तरह से इस क्षेत्र में सकल घरेलू उत्पाद का २% खर्च करने की बात कही और साथ ही यह भी कहा कि अब उद्योग जगत को आगे आकर इस क्षेत्र के लिये कुछ करना ही होगा क्योंकि बिना इसके कुछ अधिक किये जाने की संभावाएं कम ही हैं.&lt;br /&gt;
&amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; सरकार के अपने खर्च करने के अलग तरीके होते हैं और पिछले कुछ दशकों से जिस तरह से अपने राजनैतिक हितों को साधने के लिए राजस्व को मनमाने तरीके से खर्च किया जाने लगा है उससे भी देश का बहुत नुकसान हो चुका है. अब इस मसले पर सोचने की आवश्यकता है क्योंकि आज चीन ने विज्ञान के क्षेत्र में हमें पीछे छोड़ दिया है ऐसे में अब हमें विज्ञान के लिए एक राष्ट्रीय नीति बनानी ही होगी और बिना किसी कोताही के अन्य मदों में कटौती करके इसे पूरा सहयोग देना ही होगा. जिस तरह से बात बात पर राजनैतिक दल केवल अपने हितों की बातें ही करते रहते हैं और केवल आवश्यकता पड़ने पर मजबूरी में ही देश के इस तरह के विकास की बातें सोचते हैं वह देश के लिए घातक है. अब संसद में या सर्वदलीय बैठक में देश के शीर्ष वैज्ञानिकों से विचार करके ५-५ वर्षों के लिए विज्ञान के लक्ष्य निर्धारित किये जाने चाहिए जिससे यह जाना जा सके कि देश इस चरण बद्ध तरीके से आख़िर कितना आगे जा सकता है और इसके लिए कितने धन की आवश्यकता होगी ? इस धन की उपलब्धता अब आगे आने वाली हर सरकार को करनी ही होगी.&lt;br /&gt;
&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; देश में विज्ञान उन्नत हो इस बारे में किसी भी नेता या दल को कोई आपत्ति नहीं होगी पर जब इसके लिए नियमित रूप से धन उपलब्ध करने की बात सामने आएगी तो पता नहीं कितने दल या नेता इस बात का समर्थन कर पायेंगें ? देश को विज्ञान के बारे में एक स्पष्ट नीति की आवश्यकता है और देश की मेधा को संवारने की ज़रुरत भी है क्योंकि कई विशेषज्ञ अब इस बात को मानने लगे हैं के अब देश के शीर्ष पढ़ाई के केंद्र उतने अच्छे विद्यार्थी नहीं दे पा रहे हैं जैसे २ दशक पहले आया करते थे. आज कुछ तरीके अपना कर इन संस्थानों में प्रवेश तो पाया जा सकता है पर जिस वैज्ञानिक बुद्धि की आवश्यकता इस सबके लिए होती है वह पूरी तरह से नदारत है और इसका खामियाज़ा देश में चलने वाले अनुसन्धान को झेलना पड़ रहा है. देश में राजनीति को किनारे करके अब विज्ञान को पूरी तरह से सामने लाने की ज़रुरत है क्योंकि हमारे यहाँ की मेधा बहुत दिनों तक विदेशों में काम कर चुकी है और अगर हम अब भी इसके लिए अपने यहाँ पर अवसर उपलब्ध कराने में असफल रहते हैं तो आने वाले कई दशकों तक हमारी पूरी तैयारियां बहुत पीछे रह जाने वाली हैं और हम नयी तकनीक के लिए विदेशों पर निर्भर होने को मजबूर ही रहेंगें.&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &lt;br /&gt;
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8033919830443655972-1090883376403154656?l=seedhikharibaat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel="replies" type="application/atom+xml" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/feeds/1090883376403154656/comments/default" title="टिप्पणियाँ भेजें" /><link rel="replies" type="text/html" href="http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/01/blog-post_04.html#comment-form" title="0 टिप्पणियाँ" /><link rel="edit" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/1090883376403154656?v=2" /><link rel="self" type="application/atom+xml" href="http://www.blogger.com/feeds/8033919830443655972/posts/default/1090883376403154656?v=2" /><link rel="alternate" type="text/html" href="http://feedproxy.google.com/~r/SeedhiKhariBaat/~3/zFBrdIokHPc/blog-post_04.html" title="वैज्ञानिक अनुसन्धान और भारत" /><author><name>Dr Ashutosh Shukla</name><uri>https://profiles.google.com/100257269155750831732</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel="http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail" width="32" height="32" src="//lh4.googleusercontent.com/-m8s_63KhFOs/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAIZM/0q2igsTmGHc/s512-c/photo.jpg" /></author><thr:total>0</thr:total><feedburner:origLink>http://seedhikharibaat.blogspot.com/2012/01/blog-post_04.html</feedburner:origLink></entry></feed>

