<?xml version="1.0" encoding="UTF-8" standalone="no"?><?xml-stylesheet href="http://www.blogger.com/styles/atom.css" type="text/css"?><rss xmlns:itunes="http://www.itunes.com/dtds/podcast-1.0.dtd" version="2.0"><channel><title>Star News Agency</title><description></description><managingEditor>noreply@blogger.com (Star News Agency)</managingEditor><pubDate>Wed, 30 Dec 2009 00:48:55 +0530</pubDate><generator>Blogger http://www.blogger.com</generator><openSearch:totalResults xmlns:openSearch="http://a9.com/-/spec/opensearchrss/1.0/">451</openSearch:totalResults><openSearch:startIndex xmlns:openSearch="http://a9.com/-/spec/opensearchrss/1.0/">1</openSearch:startIndex><openSearch:itemsPerPage xmlns:openSearch="http://a9.com/-/spec/opensearchrss/1.0/">25</openSearch:itemsPerPage><link>/</link><language>en-us</language><itunes:explicit>no</itunes:explicit><itunes:subtitle/><itunes:owner><itunes:email>noreply@blogger.com</itunes:email></itunes:owner><item><title>प्रमोशन के लिए गारंटी के साथ अचूक नुस्खे, आजमाएं जरूर</title><link>/2009/12/blog-post_3702.html</link><category>विविध</category><author>noreply@blogger.com (Star News Agency)</author><pubDate>Mon, 28 Dec 2009 21:19:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-2673854500109758020.post-8027235043900045122</guid><description>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/SzjTg14_mgI/AAAAAAAABsY/hj7EL7fEuT0/s1600-h/man.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" ps="true" src="http://1.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/SzjTg14_mgI/AAAAAAAABsY/hj7EL7fEuT0/s400/man.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;विजय अरोरा &lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;अगर आपको प्रमोशन चाहिए या बॉस की नजरों में चढ़ना है तो इन नुस्खों को जरूर अपनाएं और गारंटी के साथ फायदा उठाएं।&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;1. हमेशा आपके हाथ में काम से संबंधित कागज होने चाहिएं- &lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;वह कर्मचारी जिसके हाथ में सदैव काम के कागज या फाइलें होती हैं, तो वह बहुत ही मेहनती माना जाता है ( हालांकि वह मेहनती होता नहीं है)। इसलिए ऑफिस में खाम-ख्चाह घूमते हुए आपके हाथ में हमेशा कोई कागज होना चाहिए। यदि आपके हाथ में कुछ नहीं है तो लोग समझेंगे कि आप कैंटीन जा रहे हैं और यदि आपके हाथ में अखबार है तो ऐसा प्रतीत होता है कि आप टॉयलेट जा रहे हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि शाम को ऑफिस से जाते समय कुछ फाइलें घर जरूर ले जाएं, ताकि यह भ्रम बना रहे कि आप ऑफिस का काम घर पर भी करते हैं।&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;2. व्यस्त दिखने के लिए कंप्यूटर का उपयोग करें- &lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;जब भी आप कंप्यूटर का उपयोग करते हैं तो लोगों को आप बहुत व्यस्त प्रतीत होते हैं। हालांकि मॉनिटर का मुंह ऐसी तरफ रखें, जहां से कोई यह न देख सके कि आप चैटिंग कर रहे हैं और गेम खेल रहे हैं। कंप्यूटर क्रांति के इस अनोखे सामाजिक उपयोग से आप बॉस की निगाह में चढ ज़ाएंगे। यदि भगवान करे आप पकड़े जाएं (और यह तो कभी न कभी होकर रहेगा ही) तो आप बहाना बना सकते हैं कि मैं इस सॉफ्टवेयर को देखकर इससे सीख रहा था, जिससे कंपनी का ट्रेनिंग का पैसा बच सके।&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;3. काम करने की टेबल हमेशा भरी हुई होनी चाहिए-&lt;/strong&gt; &lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;आपके काम करने की जगह हमेशा भरी हुई और अस्त-व्यस्त होनी चाहिए। टेबल पर ढेर सारे कागज और फाइलें इधर-उधर बिखरे होने चाहिए। कुछ सीडी, कुछ आधे-अधूरे प्रिंट आउट भी बिखरे हों तो सोने पे सुहागा। जब आपको मालूम हो कि किसी व्यक्ति को आपसे किसी फाइल का काम है, तो उस खास फाइल को एक बड़े ढेर में छपा दीजिए और उसके सामने ही ढूंढिए। हो सके तो कंप्यूटर से संबंधित मोटी-मोटी किताबें कहीं से इकट्ठा कर लें (पढ़ने के लिए नहीं) उससे आपकी इमेज विशिष्ट बनेगी। एक बात याद रखें कि पढ़ने वाले को प्रमोशन नहीं मिलता, झांकी जमाने वाले को मिलता है।&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;4. वाइस आंसरिंग का अधिकाधिक उपयोग करें- &lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;संचार तकनीक के एक और वरदान आंसरिंग मशीन का अधिक से अधिक उपयोग करें। जब आपका बॉस या कोई सहकर्मी आपको फोन करे तो जरूरी नहीं कि वह काम आवश्यक ही हो। इसलिए भले ही आप फोन के लिए सिर पर बैठे हों, कभी सीधे जवाब न दें, बल्कि यह काम आंसरिंग मशीन को करने दें। फिर थोडी देर बाद सभी संदेशों को सुनें। उसमें से मुख्य और आवश्यक को छांटकर ठीक से लंच टाइम में सामने वाले को फोन करें, ताकि उसे लगे कि आप लंच टाइम में भी ऑफिस वर्क भूलते नहीं हैं।&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;5. हमेशा असंतुष्ट और तनावग्रस्त दिखें-&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;काम करते समय हमेशा असंतुष्ट और तनावग्रस्त दिखें। जब भी कोई सहकर्मी आपसे कुछ पूछे तो सबसे पहले एक गहरी सांस लें, ताकि उसे लगे कि आप काम के बोझ से बेहद दबे हुए हैं। साथ ही अपने जूनियर को हमेशा सीख देते रहें और उससे हमेशा असंतुष्ट रहें। जूनियर के चार कामों से तीन में जरूर मीन-मेख निकालें औए एक में -हां ठीक है, कहें।&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;6. ऑफिस से हमेशा सबसे देर से निकलें-&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;ऑफिस से हमेशा आपको देर से घर के लिए निकलना चाहिए। खासकर तब जब आपका बॉस ऑफिस में हो। आराम से मैगजीन और किताबें पढ़ते रहें, जब तक कि जाने का समय न हो जाए। ऑफिस टाइम के बाद कोशिश करें कि बॉस के कमरे के सामने से कम से कम दो-तीन बार गुजरें। यदि बॉस की गाड़ी खराब हो जाए और आप उसे उसके घर तक ड्रॉप कर सकें। इससे अधिक पुण्य आपके लिए और कुछ नहीं है। इसलिए हो सके तो साल में तीन बार कुछ ऐसा करें कि बॉस आपकी गाड़ी में लिफ्ट ले। जितनी महत्वपूर्ण ई-मेल हो, उसे हमेशा विषम समय पर ही भेजें, जैसे रात के साढ़ नौ बजे या सुबह सात बजे। बॉस की निगाह जरूर ई-मेल में पड़े समय पर पड़ेगी और वह बेहद इम्प्रेस हो जाएगा।&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;7. अपना भाषा ज्ञान और व्याकरण बढ़ाएं-&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;आपको अंग्रेजी के कुछ मुहावरे और लच्छेदार भाषा कंठस्थ करनी होगी। कंप्यूटर और मैनेजमेंट से संबंधित कुछ भारी-भरकम शब्द और वाक्य रचना यदि आप रट सकें तो बेहतर रहेगा और जब भी बॉस के साथ बात करें इन शब्दों का भरपूर उपयोग करें। इस अंदाज में कि बॉस को लगना चाहिए कि यदि यह बात नहीं मानी गई तो कंपनी में प्रलय आ जाएगा।&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;8. हमेशा दो कोट या जैकेट, जो भी पहनते हों रखें-&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;यदि आप किसी बड़े ऑफिस में काम करते हैं तो आपको हमेशा दो कोट रखने चाहिएं। एक पहनें और दूसरा आपकी कुर्सी पर टंगा होना चाहिए। इससे एक तो आप आराम से घूम-फिर सकते हैं और दूसरे लोग समझेंगे कि आप आस-पास ही कहीं हैं, या आते ही होंगे। अगर देर हो भी जाए तो आप कह सकते हैं कि जरूरी मीटिंग थी।&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;तो साहेबान, इन नुस्खों को आज से ही लागू कर दीजिए। फिर देखिए, आपका बॉस तो आपसे खुश रहेगा ही। आपके सहकर्मी भी आपके प्रमोशन को देख-देख जलेंगे। &lt;strong&gt;(स्टार न्यूंज एजेंसी)&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2673854500109758020-8027235043900045122?l=starnewsagency.in' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</description><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="http://1.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/SzjTg14_mgI/AAAAAAAABsY/hj7EL7fEuT0/s72-c/man.jpg" width="72"/><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">1</thr:total></item><item><title>झारखंड के सफ़ल चुनाव : नक्सलवाद पर भारी पड़ा लोकतंत्र</title><link>/2009/12/blog-post_7835.html</link><category>मुद्दा</category><category>राष्ट्रीय</category><category>विचार</category><author>noreply@blogger.com (Star News Agency)</author><pubDate>Mon, 28 Dec 2009 18:38:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-2673854500109758020.post-7097836920428521360</guid><description>&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/Szit7gQ2AvI/AAAAAAAABsQ/V6viC1_Lb1g/s1600-h/Jharkhand-map.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" ps="true" src="http://3.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/Szit7gQ2AvI/AAAAAAAABsQ/V6viC1_Lb1g/s400/Jharkhand-map.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;strong&gt;दिवाकर कुमार&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;प्राकृतिक संपदाओं से भरपूर झारखंड राज्य के दस साल पूरे होने को हैं। बिहार से अलग कर बनाए गए इस राज्य में विकास की असीम और अपार संभावनाएं हैं, लेकिन नक्सली गतिविधियों और राजनीतिक अस्थिरताओं के चलते राज्य के विकास पर काफी असर पड़ा है। &lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;वन संपदा और खदानों के इस राज्य में हाल में संपन्न विधानसभा चुनाव जनता की ओर से नक्सिलयों को करारा जवाब है। राज्य में विधानसभा की कुल 81 सीटें हैं, जिनमें से 9 सीटें अनुसूचित जाति और 28 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। राज्य में कुल 1 करोड़ 80 लाख 27 हज़ार 476 मतदाता हैं। कुल 24 में से 22 जिले नक्सलियों की चपेट में हैं और आए दिन यहां नक्सलियों का तांडव दिखता रहता है। विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा होते ही सीपीआई ( माओवादी ) और अन्य उग्रवादी संगठनों ने इसके बहिष्कार का एलान कर दिया। साथ ही चुनाव के दौरान घर से बाहर निकलने वाले मतदाताओं को भी अंजाम भुगतने की धमकी दे डाली, लेकिन राज्य की जागरूक जनता ने इन धमकियों को नजरअंदाज करते हुए जमकर चुनाव में भागीदारी दिखाई और वोट डालने के लिए मतदान केंद्रों पर काफी संख्या में पहुंचे। &lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;राज्य में विधानसभा चुनाव कुल पांच चरणों में कराए गए, इस दौरान नक्सलियों ने कई जगह हिंसक कार्रवाई कर जनता को डराने और प्रशासन को नुकसान पहुंचाने की काफी कोशिश की, पर जनता ने मतकेंद्रों तक पहुंचकर नक्सलियों को करारा जवाब दिया और लोकतंत्र में पूरी आस्था प्रकट की। इसी का परिणाम है कि राज्य में कुल 58 प्रतिशत से ज्यादा वोट डाले गए। सभी लोग, चाहे वे युवा हों, महिलाएं हों या फिर बुजुर्ग, मतदान केंद्रों में काफी संख्या में पहुंचे। &lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;नक्सलियों की धमकी और वोट लुटेरों से जनता न डरे और शांतिपूर्ण और निष्पक्ष चुनाव हो, इसके लिए चुनाव आयोग ने भी अपनी तरफ से काफी कोशिशें कीं और सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम किए। इस छोटे से राज्य में चुनाव पांच चरणों में कराए गए। चुनाव आयोग की तरफ से कुल 78 फीसदी मतदाताओं को फोटो पहचान पत्र दिए गए। कहीं किसी तरह की चुनावी धांधली न हो, इसकी रोक के लिए सभी जिलों में वीडियो रिकॉर्डिंग भी करवाई गई। चुनाव आयोग की पूरी टीम राज्य में हर हिस्से में निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव कराने की कोशिश में जुटी रही और जिस तरह से भारी मतदान हुआ उससे ये समझा जा सकता है कि चुनाव आयोग अपनी कोशिशों में सफल भी रहा। &lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;झारखंड नक्सलियों का गढ माना जाता है और इसके पड़ोसी राज्य भी नक्सल प्रभावित हैं। यहां आए दिन नक्सली अपना तांडव दिखाते रहते हैं। नक्सली हिंसा और उनकी धमकियों के बाद हर किसी की नजर यहां के चुनाव पर टिकी थी। खासकर यहां गृह मंत्रालय की पैनी नजर थी। केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम ने नक्सलियों से हिंसा और असहयोग की राह छोड़कर मुख्यधारा में लौटने और जनता से काफी संख्या में मतदान केंद्रों पर पहुंचने की अपील की। सरकार ने जनता को भरोसा दिलाया कि उन्हें किसी से डरने की जरूरत नहीं है और वो बिना डर के मतदान केंद्रों तक पहुंचें। सरकार की इस अपील का असर जनता पर पड़ा और वो काफी संख्या में मतदान केंद्रों तक पहुंचें। इस पर गृह मंत्री पी चिदंबरम ने खासकर खुशी जताई और जनता को धन्यवाद दिया। &lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;राज्य में छिटपुट हिंसा को छोड़कर मतदान शांतिपूर्ण रहा। चुनाव के दौरान हिंसा में 12 पुलिसकर्मी शहीद हुए, जिसमें से केंद्रीय अर्ध-सैनिक बलों के 6 जवान, झारखंड राज्य के 5 पुलिसकर्मी और बिहार पुलिस का 1 जवान शहीद हुए। इन शहीद जवानों के परिवार वालों को गृह मंत्री ने जल्द से जल्द मुआवजा देने के आदेश दिए हैं। साथ ही इसके अनुपालन की रिपोर्ट भी 15 जनवरी 2010 तक प्रस्तुत करने को कहा है।&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&amp;nbsp;नक्सलवादी जिस तरीके से अपना विस्तार करते जा रहे हैं उससे पूरा सरकारी तंत्र चिंतित है... यहां तक कि प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह भी इन नक्सलवादियों से मुख्यधारा में लौटने की अपील कर चुके हैं। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया है कि आदिवासी इलाकों का जितना विकास होना चाहिए था वो नहीं हुआ है और सरकार इस कोशिश में जुटी है कि इन्हें इनका वाजिव हक दिलाया जाए ताकि अब तक विकास की राह में पीछे रहे इन इलाकों में विकास की नई कहानी लिखी जाए और इनकी प्राकृतिक धरोहरों को बचा कर इन्हें नई दुनिया से जोड़ा जाए। &lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;झारखंड में चुनाव पांच चरणों में कराने पर पहले तो सवाल उठे कि इस छोटे से राज्य में इतने लंबे चरणों में चुनाव कराने की क्या जरूरत है। पर जब चुनाव शांतिपूर्वक और निष्पक्ष तरीके से निपट गए तो चुनाव आयोग का ये निर्णय सही लगने लगा। चुनाव की रपऊतार पहले चरण में थोड़ी धीमी जरूर रही पर आखिरी यानि पांचवें चरण तक आते-आते चरम पर पहुंच गई। चुनाव आयोग की तरफ से जारी किए गए आकड़ों पर नजर डालते हैं तो हर चरण में कितने वोट पड़े ये साफ हो जाता है। पहले चरण में 30 सीटों के लिए करीब 53.1 प्रतिशत वोट पड़े। दूसरे चरण में 15 सीटों के लिए 58.8 प्रतिशत वोट, तीसरे चरण में 7 सीटों पर मतदान हुआ और 57.2 प्रतिशत वोट पड़े, चौथे चरण में 14 सीटों पर करीब 64.3 प्रतिशत वोट पड़े और पांचवें व आखिरी चरण में कुल बची 15 सीटों पर मतदान हुआ और 58.12 प्रतिशत जनता ने अपने वोट का इस्तेमाल किया।&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;झारखंड में लोकतंत्र का महापर्व यानि मध्यावधि चुनाव शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न हो गया। राज्य के आधे से ज्यादा लोगों ने इस महापर्व में अपनी आस्था बढ-चढक़र दिखाई है। ऐसे में लोकतंत्र का मजाक बनाने वाले सीपीआई (माओवादी ) और दूसरे उग्रवादी संगठनों को इस तरह के सफल चुनावों से सबक लेना चाहिए और सोचना चाहिए कि आखिरकार सरकारी संपत्तियों और जनता की जान को नुकसान पहुंचाकर वो क्या हासिल करना चाहते हैं ? आखिर इन चुनावों ने ये साफ कर दिया है कि जनता नक्सलियों के डर से न तो घबराती है और न ही उनके अलगाववाद और हिंसा के रास्ते का समर्थन करती है। तो सवाल अब नक्सलियों के सामने है कि वो कौन-सा रास्ता अपनाएं -- लोकतंत्र में विश्वास का या फिर हिंसा का।&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;झारखंड के सफल चुनाव नक्सलियों के लिए एक सबक साबित हो सकते हैं और दूसरे राज्य जो नक्सल प्रभावित हैं उनके लिए प्रेरणास्रोत। सरकार के बार-बार अपील करने के बावजूद नक्सल हिंसा की राह पर आगे ही बढ़ते जा रहे हैं। हिंसा किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। ऐसे में नक्सली अगर अपनी मांग को हिंसा की रणनीति से अलग कर सरकार के साथ बैठकर सुलझाएं तो शायद नक्सलियों का भी भला हो और देश की जनता का भी.... जो जाने - अनजाने में गलत रास्ते पर भटक गए हैं.... और उन्हें वही रास्ता सही लगता है। नक्सली अपने हक की लड़ाई लड़ने की बात करते हैं पर ये कैसी हक की लड़ाई है, जो जनता की जान लेकर लड़ी जा रही है। जिसमें हर किसी का नुकसान ही नुकसान है। तो फिर क्यों न हिंसा का रास्ता छोड़ लोकतंत्र में आस्था जताई जाए! &lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;भारत की जनता का लोकतंत्र में पूरा विश्वास है और झारखंड के सफल चुनाव से ये विश्वास और पक्का और मजबूत होता है। अब नई सरकार की ये जिम्मेदारी बनती है कि वो जनता के इस फैसले पर खरी उतरे और लोकतंत्र में जनता के विश्वास को और मजबूती दे। &lt;strong&gt;(स्टार न्यूज़ एजेंसी)&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2673854500109758020-7097836920428521360?l=starnewsagency.in' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</description><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="http://3.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/Szit7gQ2AvI/AAAAAAAABsQ/V6viC1_Lb1g/s72-c/Jharkhand-map.jpg" width="72"/><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>क्राई ने शिक्षा से जुड़ी मांगों का चार्टर राष्ट्रपति को सौंपा</title><link>/2009/12/blog-post_7310.html</link><category>मुद्दा</category><category>विविध</category><author>noreply@blogger.com (Star News Agency)</author><pubDate>Mon, 28 Dec 2009 18:04:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-2673854500109758020.post-5857971568916701705</guid><description>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/Szil467FeCI/AAAAAAAABsI/4tR-sFLGM6I/s1600-h/CRY.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" ps="true" src="http://3.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/Szil467FeCI/AAAAAAAABsI/4tR-sFLGM6I/s400/CRY.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;शिरीष खरे&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;नई दिल्ली.क्राई के एक प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल से मुलाकात कर बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 में व्याप्त कमियों पर चर्चा की। इस प्रतिनिधिमंडल ने भारत के सभी बच्चों को शिक्षा के अधिकार से जोड़ने के लिए अधिनियम में जरूरी संशोधन किए जाने की वकालत भी की।&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;इस दौरान राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल को वह चार्टर भी सौंपा गया जिसमें देशभर से करीब 8 लाख नागरिकों ने शिक्षा के अधिकार अधिनियम में जरूरी संशोधन किए जाने की मांग का समर्थन किया था। क्राई का मानना है कि बच्चों को उनके मूलभूत अधिकारों से जोड़ने और उनके बीच की असमानताओं को घटाने के लिए अधिनियम में कुछ बातों को शामिल करना होगा। अगर अधिनियम और उसके प्रावधानों में यह संशोधन नहीं हुए तो भारत के बहुत सारे बच्चे शिक्षा जैसे मूलभूत अधिकार से बेदखल होते रहेंगे।&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से लेते हुए यह माना कि "शिक्षा तो मानवीय विकास की बुनियाद है और हर भारतीय बच्चे तक बेहतर शिक्षा पहुंचनी ही चाहिए।" क्राई की डायरेक्टर पूजा मारवाह के मुताबिक ‘‘हमने राष्ट्रपति के साथ 'सबको शिक्षा समान शिक्षा अभियान' से जुड़ी बहुत सारी बातों को साझा किया। हमने उन्हें बताया कि इस अभियान को देशभर में 18 राज्यों के करीब 8 लाख ऐसे नागरिकों का समर्थन मिला है जो चाहते हैं कि सभी भारतीय बच्चों के बीच एक समान और बेहतर गुणवत्ता वाली शिक्षा व्यवस्था कायम हो। अब हमारी कोशिश यह है कि सरकार हमारी मांगों को माने, जिससे शिक्षा का अधिकार महज कागजी शेर बनकर न रह जाए और यह जमीनी स्तर पर भी अपना असर दिखा पाए।’’ उन्होंने यह भी कहा कि ‘‘भारतीय बच्चों के नजरिए से शिक्षा के अधिकार का यह अधिनियम मील का पत्थर साबित हो सकता है, बशर्ते इस अधिनियम में छिपी संभावनाओं को व्यापक स्तर पर देखा और समझा जाए तो।’’&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;क्राई के प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल के सामने शिक्षा के अधिकार अधिनियम में जिन मांगों को शामिल किए जाने पर जोर दिया है , उनमें खास हैं : (एक) 6 साल से नीचे और 15 से 18 साल तक के बच्चों को भी मुख्य प्रावधान में लाया जाए। (दो) हर बस्ती से 1 किलोमीटर के भीतर योग्य शिक्षक और सुविधायुक्त स्कूल हों। (तीन) सकल घरेलू उत्पाद का 10 प्रतिशत शिक्षा पर खर्च हो। &lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2673854500109758020-5857971568916701705?l=starnewsagency.in' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</description><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="http://3.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/Szil467FeCI/AAAAAAAABsI/4tR-sFLGM6I/s72-c/CRY.jpg" width="72"/><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>व्यंग्य : चिराग, रोशनी और महबूबा...</title><link>/2009/12/blog-post_4930.html</link><category>साहित्य</category><category>व्यंग्य</category><author>noreply@blogger.com (Star News Agency)</author><pubDate>Mon, 28 Dec 2009 18:03:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-2673854500109758020.post-6911829561864986442</guid><description>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: justify;"&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/SzilIJesaoI/AAAAAAAABsA/RXW89SMZv_E/s1600-h/smiley-face.gif" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" ps="true" src="http://3.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/SzilIJesaoI/AAAAAAAABsA/RXW89SMZv_E/s320/smiley-face.gif" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;अतुल मिश्र&lt;/strong&gt; &lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;"कोई शेर उस सिचुऐशन पर सुनाएं कि जब किसी की महबूबा ने किसी से मिलने का वायदा तो किया हो, मगर वह आती दिखाई ना दी हो." आधुनिक मजनूं ने अपनी कलाई घड़ी में वह टाइम देखने की कोशिश की, जिसे बीते आधा घंटा हो चुका था और जिससे दुखी होकर यह प्रस्ताव किसी ऐसे गुमनाम शायर से किया गया, जिसके 'दीवान' सिगरेट की डिब्बियों पर मौजूद खाली जगहों पर दर्ज़ होकर ही अपना दम तोड़ देते हैं.&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;"अर्ज़ किया है....."&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;"क्या किया है ?" मन ही मन महबूबा के बाप-भाइयों को कोस रहे महबूब ने उनका बुरा हश्र करने की बाबत कुछ सोचते हुए पूछा.&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;"अर्ज़...... यानि अर्ज़ किया है......" शायर ने क्लीयर करने की कोशिश की.&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;"अच्छा, अर्ज़ किया है ?"&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;"हाँ, वही तो......"&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;"क्या अर्ज़ किया है ?"&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;"अर्ज़ किया है कि 'वो आये वज़्म में, इतना तो सभी ने देखा, फिर उसके बाद चिरागों में रोशनी ना रही." कैसा है यह शेर ?"&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;"यह शेर आपने कहा है ?"&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;"आपको फिलहाल, शेर से मतलब है या शायर से ?"&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;"मेरा इन दोनों में से किसी से कोई मतलब नहीं है. बस, मन कर रहा था कि ना आने वाली महबूबा की शान में कुछ हो जाए."&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;"शेर कैसा लगा आपको ?" मुशायरों में आये श्रोताओं से यह कहकर कि 'शेर अच्छा लगे तो तालियाँ पीटकर मेरी हौंसला अफज़ाई करें', अपनी तारीफ़ कराने वाले शायर ने अपेक्षापूर्ण सवाल किया.&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;"अच्छा लगा, मगर 'इतना तो सभी ने देखा' की जगह 'इतना तो मीर ने देखा', कह देते तो कोई आफत थी ?"&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;"महबूबा जब वज़्म में आ रही है तो मीर साहब के अलावा और लोग भी तो वहां मौजूद रहे होंगे, जिन्होंने देखा होगा कि चिरागों की रोशनी का आलम क्या रहा ?"&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;"यह बात भी सही है, मगर शेर में से मीर का नाम हटाने की क्या ज़रुरत थी कि उन्होंने देखा ?" ताउम्र महबूबा का इंतज़ार करने के हौंसलों से परिपूर्ण महबूब ने टाइम पास करने के लिहाज़ से पूछा.&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;"काहे का देखा ? जब वो वज़्म में आये और चिरागों में रोशनी ही नहीं तो मीर साहब ने अँधेरा ही तो देखा होगा, जिसमें सुनते हैं कि हाथ को हाथ ही नहीं सुझाई देता तो फिर महबूबा की तो बात ही अलग है."&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;"लो, आ गयी वो." महबूब ऐसे चीखा, जैसे मीर की 'वो' के आने पर पूरी वज़्म के लोग भी नहीं चीखे होंगे. बताते हैं कि इस चीख से घबराकर बिजली का एक तार टूटकर कहीं नीचे गिर पड़ा और उसके बाद बिजली के खम्बों ने आगे की सप्लाई बंद कर दी यानि चिरागों में रोशनी ना रही.&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2673854500109758020-6911829561864986442?l=starnewsagency.in' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</description><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="http://3.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/SzilIJesaoI/AAAAAAAABsA/RXW89SMZv_E/s72-c/smiley-face.gif" width="72"/><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>रक्षक ही बने भक्षक,  मजदूर अमानवीय स्थिति में जीने को मजबूर</title><link>/2009/12/blog-post_8465.html</link><category>मुद्दा</category><category>राष्ट्रीय</category><category>राज्य</category><author>noreply@blogger.com (Star News Agency)</author><pubDate>Mon, 28 Dec 2009 07:32:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-2673854500109758020.post-504211146042061443</guid><description>&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/SzgRp5NOr2I/AAAAAAAABr4/SHJMp9-A1Io/s1600-h/labour.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" ps="true" src="http://4.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/SzgRp5NOr2I/AAAAAAAABr4/SHJMp9-A1Io/s400/labour.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;strong&gt;फ़िरदौस ख़ान&lt;/strong&gt; &lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;औद्योगीकरण ने जहां विकास का मार्ग प्रशस्त किया है, वहीं मानव समाज के लिए कई तरह के संकट भी पैदा किए हैं। औद्योगीकरण के बढ़ोतरी के साथ पारंपरिक खेती को बेहद नुकसान पहुंचा है। इतना ही नहीं इससे जहां एक वर्ग को और अमीर बनाया है, वहीं एक बड़े तबके को बंधुआ मजदूर जैसी स्थिति में जीने को मजबूर कर दिया है। &lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;गौरतलब है कि भारत में हर साल काम के दौरान हजारों मजदूरों की मौत हो जाती है। सरकारी, अर्ध सरकारी या इसी तरह के अन्य संस्थानों में काम करते समय दुर्घटनाग्रस्त हुए लोगों या उनके आश्रितों को देर सवेर कुछ न कुछ मुआवजा तो मिल ही जाता है, लेकिन सबसे दयनीय हालत है दिहाडी मजदूरों की। पहले तो इन्हें काम ही मुश्किल से मिलता है और अगर मिलता भी है तो काफी कम दिन। अगर काम के दौरान मजदूर दुर्घटनाग्रस्त हो जाएं तो इन्हें मुआवजा भी नहीं मिल पाता। देश में कितने ही ऐसे परिवार हैं, जिनके कमाऊ सदस्य दुर्घटनाग्रस्त होकर विकलांग हो गए हैं या फिर मौत का शिकार हो चुके हैं, लेकिन उनके आश्रितों को मुआवजे के रूप में एक नया पैसा तक नसीब नहीं हो पाता। कई बार दुर्भाग्यपूर्ण और दुख की बात यह भी रहती है कि मरने वाले मजदूरों के अंतिम संस्कार के लिए उनके परिजनों के पास पैसे तक नहीं होते। ऐसे कितने ही मामले सामने आ चुके हैं। औद्योगीकरण ने ठेका प्रथा को बढ़ावा दिया है, जिससे मजदूरों की और ज्यादा दुर्दशा हुई है। ठेकेदार मजदूरों से महीनों काम कराने के बावजूद उन्हें उनकी मेहनत के पैसे तक नहीं देते। &lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;हरियाणा के हिसार जिले को ही लीजिए, हिसार के लघु सचिवालय स्थित श्रम उपायुक्त कार्यालय के बाहर इंसाफ की गुहार लेकर आए मजदूरों की भीड़ लगी रहती है। मजदूरों का कहना है कि ठेकेदार उनसे काम करा लेता है और फिर उन्हें उनका मेहनताना नहीं देता। एक ठेकेदार रमेश मेहता से जब इस बारे में बात की गई तो उसने कहा कि नहीं देता पैसा कोई मेरा क्या बिगाड़ लेगा। नीचे से ऊपर तक हर अधिकारी को उसका हिस्सा (रिश्वत) दे रहा हूं। &lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;मजदूरों की स्थिति के बारे में जब हिसार के श्रम उपायुक्त आर.के. सैनी से बात की गई तो उसका कहना था कि हमारे यहां तो सारा दिन मजदूरों की भीड़ लगी रहती है। हम कम से कम उनकी शिकायत की अर्जी तो ले लेते हैं, वरना मजदूरों की कौन सुनता है। श्रम उपायुक्त यह भी कहना था कि ठेकेदार तो होते ही ऐसे हैं, हम क्या कर सकते हैं। हैरत की बात तो यह है कि जिस व्यक्ति को प्रशासन से सिर्फ इसलिए नियुक्त किया है कि वह गरीब पीड़ित मजदूरों को न्याय दिलाएगा, वही ठेकेदार की वकालत कर रहा है। ज्यादा जोर देने पर श्रम उपायुक्त मजदूरों से पूछता है कि तुम्हारे पास क्या सबूत है कि तुमने ठेकेदार के पास काम किया है। यह जगजाहिर है कि कोई भी ठेकेदार मजदूरों को काम पर लगाते समय कोई लिखा-पढ़ी नहीं करता। यह बात श्रम उपायुक्त भी जानता है। इसके बावजूद कार्य स्थल पर जाकर निरीक्षण नहीं किया जाता, वजह वही नजराना है जो ठेकेदारों द्वारा उनके घर पहुंचा दिया जाता है।&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;सरकार के तमाम दावों के बावजूद दिहाड़ीदार मजदूर बदहाली में जीने को मजबूर हैं। दिसंबर 2005 में दिहाड़ीदार मजदूरों के संबंध में दिए गए सर्वोच्च न्यायालय के एक फैसले से इस बात की जरूरत महसूस होने लगी है कि इन मजदूरों के लिए भी अलग से एक कानून बनाया जाए, ताकि किसी अनहोनी के घटने पर उनके आश्रितों को भूखे न मरना पड़े। सर्वोच्च न्यायालय ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि श्रमिक मुआवजा कानून-1923 के तहत दिहाडीदार मजदूर 'श्रमिक' की परिभाषा के तहत नहीं आते, इसलिए वे इस कानून के अंतर्गत मुआवजा पाने के हकदार नहीं हैं। गौरतलब है कि 1986 में रामू पासी नामक मजदूर को काम के दौरान अंगुली में चोट लग गई थी। इस पर उसने धनबाद की श्रम अदालत का दरवाजा खटखटाया, जहां से उसे 4001 रुपये का मुआवजा मिला। इस मुआवजे को कम बताते हुए उसने पटना उच्च न्यायालय में अपनी याचिका दायर की। उच्च न्यायालय ने श्रम अदालत के फैसले को सही ठहराया। इस पर उसने सर्वोच्च न्यायालय में गुहार लगाई, जहां न्यायालय ने उसे मुआवजे का हकदार नहीं माना।&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;संयुक्त राष्ट्र संघ की एक रिपोर्ट के मुताबिक दुनियाभर में कार्य संबंधी हादसों और बीमारियों से हर साल करीब 22 लाख मजदूर मारे जाते हैं। इनमें करीब 40 हजार मौतें अकेले भारत में होती हैं, लेकिन भारत की रिपोर्ट में यह आंकड़ा प्रति वर्ष केवल 222 मौतों का ही है। संयुक्त राष्ट्र संघ की एक रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दुनिया में हर साल हादसों और बीमारियों से मरने वालों की तादाद 22 लाख से अधिक हो सकती है, क्योंकि बहुत से विकासशील देशों में सतही अध्ययन के कारण इसका सही-सही अंदाजा नहीं लग पाता। अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के महानिदेशक के मुताबिक कार्य स्थलों पर समुचित सुरक्षा प्रबंधों के लक्ष्य से हम काफी दूर हैं। आज भी हर दिन कार्य संबंधी हादसों और बीमारियों से दुनियाभर में पांच हजार स्त्री-पुरुष मारे जाते हैं। औद्योगिक देशों खासकर एशियाई देशों में यह संख्या ज्यादा है। रिपोर्ट में अच्छे और सुरक्षित काम की सलाह के साथ-साथ यह भी जानकारी दी गई है कि विकासशील देशों में कार्य स्थलों पर संक्र्रामक बीमारियों के अलावा मलेरिया और कैंसर जैसी बीमारियां जानलेवा साबित हो रही हैं। अमूमन कार्य स्थलों पर प्राथमिक चिकित्सा, पीने के पानी और शौचालय जैसी सुविधाओं का घोर अभाव होता है, जिसका मजदूरों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है।&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;हमारे कार्य स्थल कितने सुरक्षित हैं यह बताने की जरूरत नहीं है। ऊंची इमारतों पर चढ़कर काम कर रहे मजदूरों को सुरक्षा बैल्ट तक मुहैया नहीं कराई जाती। पटाखा फैक्ट्रियों, रसायन कारखानों और जहाज तोडने जैसे कामों में लगे मजदूर सुरक्षा साधनों की कमी के कारण हुए हादसों में अपनी जान गंवा बैठते हैं। भवन निर्माण के दौरान मजदूरों के मरने की खबरें आए दिन अखबारों में छपती रहती हैं। इस सबके बावजूद मजदूरों की सुरक्षा पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता। अगर मामला मीडिया ने उछाल दिया तो प्रशासन और राजनेताओं की नींद टूट जरूर जाती है, लेकिन कुछ वक्त बाद फिर वही 'ढाक के तीन पात' वाली व्यवस्था बादस्तूर जारी रहती है।&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;दरअसल देशी मंडी में भारी मात्रा में उपलब्ध सस्ता श्रम विदेशी निवेशकों को भारतीय बाजार में पैसा लगाने के लिए आकर्षित करता है। साथ ही श्रम कानूनों के लचीलेपन के कारण भी वे मजदूरों का शोषण करके ज्यादा से ज्यादा मुनाफा बटोरना चाहते हैं। अर्थशास्त्री रिकार्डो के मुताबिक मजदूरी और उनको दी जाने वाली सुविधाएं बढ़ती हैं तो उद्योगपतियों को मिलने वाले फायदे का हिस्सा कम होगा। हमारे देश के उद्योगपति और ठेकेदार ठीक इसी नीति पर चल रहे हैं। &lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;फिक्की द्वारा कराए गए एक सौ से ज्यादा मुनाफा कमाने वाली कंपनियों के अध्ययन के मुताबिक उदारीकरण से पहले पांच सालों में कंपनियों के शुद्ध मुनाफे में 3.12 फीसदी का इजाफा हुआ था, लेकिन मजदूरी इससे आधी यानी 15.8 फीसदी ही बढ़ पाई। यह कहना कतई गलत न होगा कि ज्यों-ज्यों आर्थिक सुधार की रफ्तार बढ़ती गई त्यों-त्यों मजदूरों की हालत भी बदतर होती गई।&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;आजादी के इतने सालों बाद भी हमारे देश में दिहाड़ी मजदूरों की हालत बेहद दयनीय है। शिक्षित और जागरूक न होने के कारण इस तबके की तरफ किसी का ध्यान नहीं गया। जब तक मजदूर भला चंगा होता है तो वह जैसे-तैसे मजदूरी करके अपना और अपने परिवार का पेट पाल लेता है, लेकिन दुर्घटनाग्रस्त होकर या बीमार होकर वे काम करने योग्य नहीं रहता तो उस पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ता है। सरकार को चाहिए कि वह दिहाड़ी मजदूरों को साल के निश्चित दिन रोजगार मुहैया कराए और उनका मुफ्त बीमा करे। साथ ही उनके इलाज का सारा खर्च भी वहन करे। जब तक देश का मजदूर खुशहाल नहीं होगा तब तक देश की खुशहाली की कल्पना करना भी बेमानी है। &lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2673854500109758020-504211146042061443?l=starnewsagency.in' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</description><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="http://4.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/SzgRp5NOr2I/AAAAAAAABr4/SHJMp9-A1Io/s72-c/labour.jpg" width="72"/><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">1</thr:total></item><item><title>सत्ता की भूख : इसके लालच में कब्रों के, मुर्दे तलक गए हैं सूख</title><link>/2009/12/blog-post_3480.html</link><category>विविध</category><author>noreply@blogger.com (Star News Agency)</author><pubDate>Mon, 28 Dec 2009 07:26:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-2673854500109758020.post-3820515773963138918</guid><description>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/SzgQSXX5DAI/AAAAAAAABrw/46dLrxj10_E/s1600-h/kahbronkikhabar_star.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" ps="true" src="http://1.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/SzgQSXX5DAI/AAAAAAAABrw/46dLrxj10_E/s400/kahbronkikhabar_star.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;strong&gt;नारायण दत्त तिवारी !&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;हम पर जो आरोप लगे हैं, क्या वैसी है उमर हमारी ??&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;सत्ता की भूख !&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;इसके लालच में कब्रों के, मुर्दे तलक गए हैं सूख !!&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कब्रिस्तान-विवाद !&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;मुर्दे बोले,"चैन नहीं है, हमको मरने के भी बाद !! "&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;चाकू मारा !&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;चाकू ने अपराध स्वयं का, थाने में जाकर स्वीकारा ??&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;हरित प्रदेश !&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;'शुष्क प्रदेश' की मांगें इसके, फ़ौरन बाद करेंगे पेश !!&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;मुद्दा गरमाया !&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;तापमान कितना है उसका, मुद्दे ने रोकर समझाया ??&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;गृहमंत्रालय !&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;समस्याओं का बना हिमालय !!&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पी. चिदंबरम !&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;बीस नए मंत्रालय अपने, मंत्रालय से बनवाएं हम !!&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;चौटाला !&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;आरोपों का जूस निकाला ??&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;आलोचना !&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;बाहूबालियों की करने से, पहले भी कुछ सोचना !!&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;सर्दी !&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;जाड़ों में ही क्यों करती है, शुरू स्वयं की गुंडागर्दी ??&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;-अतुल मिश्र&lt;/strong&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2673854500109758020-3820515773963138918?l=starnewsagency.in' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</description><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="http://1.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/SzgQSXX5DAI/AAAAAAAABrw/46dLrxj10_E/s72-c/kahbronkikhabar_star.jpg" width="72"/><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">3</thr:total></item><item><title>प्रशासन की मिलीभगत से पीतल नगरी में हो रहा है बाल-श्रमिकों का शोषण</title><link>/2009/12/blog-post_28.html</link><category>मुद्दा</category><category>राज्य</category><author>noreply@blogger.com (Star News Agency)</author><pubDate>Mon, 28 Dec 2009 07:01:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-2673854500109758020.post-1894818355570719326</guid><description>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/SzgKRi-wAEI/AAAAAAAABro/XqBrchJI2aI/s1600-h/Star_moradabad.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" ps="true" src="http://1.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/SzgKRi-wAEI/AAAAAAAABro/XqBrchJI2aI/s400/Star_moradabad.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;अतुल मिश्र &lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;मुरादाबाद (उत्तर प्रदेश).&lt;/strong&gt; पीतल की कलाकृतियों के निर्यात के लिए दुनियाभर में मशहूर मुरादाबाद का नाम अब बाल-श्रमिकों के शोषण के लिए भी मशहूर हो रहा है. प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस महानगर में आज भी सैकड़ों बाल-मज़दूर चोरी-छिपे अनेक पीतल-निर्यातकों के लिए काम कर रहे हैं. श्रम-विभाग और प्रशासन की मिलीभगत के चलते इन बाल-मज़दूरों को केमिकल-संबंधी और अन्य ख़तरनाक किस्म के ऐसे कामों में लगाया जा रहा है, जो इन बच्चों के जीवन के लिए बहुत ही घातक हैं. &lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;इस बारे में अधिक जानकारियां करने पर कुछ ऐसे तथ्य उभर कर सामने आए, जिनसे बाल श्रम अधिनियम की धज्जियां उड़ती नज़र आती हैं. आज भी अनेक दैनिक बाल-मज़दूर आसपास के गांवों-कस्बों से यहां रोज आते देखे जा सकते हैं. यही नहीं, अनेक दुकानों पर बच्चों को मजदूरी करते आज भी देखा जा सकता है. धनाड्य वर्ग भी तेजी से बाल-मज़दूरों को अपनी कोठियों पर घरेलू काम-काज के लिए रख रहे हैं. इनमें कम उम्र की बच्चियों को भी शारीरिक शोषण करने के लिहाज़ से रखने का चलन अब आम हो गया है.&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;कई मर्तबा अनेक सामाजिक संगठनों ने इस कुप्रथा के खिलाफ आवाज़ भी बुलंद की है, मगर शासन-प्रशासन अपने कानों में तेल डाले बैठा है. एक अनुमान के अनुसार, क़रीब डेढ़ हज़ार बाल-मज़दूर इस समय नियमित तौर पर इस महानगर में कार्यरत हैं. ग़रीब और पिछड़े वर्ग के उत्थान के दावे करने वाली उत्तर प्रदेश सरकार भी इन बाल-मज़दूरों के बारे में कोई सख्त कदम नहीं उठा पा रही है. ऐसे हालत में बाल श्रम अधिनियम सिर्फ कागज़ी औपचारिकता ही बनकर रह गया है.&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2673854500109758020-1894818355570719326?l=starnewsagency.in' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</description><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="http://1.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/SzgKRi-wAEI/AAAAAAAABro/XqBrchJI2aI/s72-c/Star_moradabad.jpg" width="72"/><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">3</thr:total></item><item><title>मुहर्रम पर विशेष : इस्लाम ज़िन्दा होता है हर कर्बला के बाद</title><link>/2009/12/blog-post_721.html</link><category>धर्म</category><author>noreply@blogger.com (Star News Agency)</author><pubDate>Sun, 27 Dec 2009 21:10:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-2673854500109758020.post-3690926658762922422</guid><description>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/Szd_s50MRGI/AAAAAAAABrg/Z49kf9dRYM8/s1600-h/Muharram_Ta%27ziya.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" ps="true" src="http://1.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/Szd_s50MRGI/AAAAAAAABrg/Z49kf9dRYM8/s400/Muharram_Ta%27ziya.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;b&gt;चांदनी &lt;/b&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;em&gt;&lt;strong&gt;हुस्ने-क़त्ल असल में मर्गे-यज़ीद है,&lt;/strong&gt;&lt;/em&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;em&gt;&lt;strong&gt;इस्लाम ज़िन्दा होता है हर कर्बला के बाद...&lt;/strong&gt;&lt;/em&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;इस्लामी कैलेंडर यानि हिजरी सन् का पहला महीना मुहर्रम है. हिजरी सन् का आगाज़ इसी महीने से होता है। इस माह को इस्लाम के चार पवित्र महीनों में शुमार किया जाता है. अल्लाह के रसूल हजरत मुहम्मद (सल्ल.) ने इस माह को अल्लाह का महीना कहा है. साथ ही इस माह में रोज़ा रखने की खास अहमियत बयान की गई है. 10 मुहर्रम को यौमे आशूरा कहा जाता है. इस दिन अल्लाह के नबी हज़रत नूह (अ.) की किश्ती को किनारा मिला था.&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;कर्बला के इतिहास मुताबिक़ सन 60 हिजरी को यजीद इस्लाम धर्म का खलीफा बन बैठा. सन् 61 हिजरी से उसके जनता पर उसके ज़ुल्म बढ़ने लगे. उसने हज़रत मुहम्मद (सल्ल.) के नवासे हज़रत इमाम हुसैन से अपने कुशासन के लिए समर्थन मांगा और जब हज़रत इमाम हुसैन ने इससे इनकार कर दिया तो उसने इमाम हुसैन को क़त्ल करने का फ़रमान जारी कर दिया. इमाम हुसैन मदीना से सपरिवार कुफा के लिए निकल पडे़, जिनमें उनके खानदान के 123 सदस्य यानी 72 मर्द-औरतें और 51 बच्चे शामिल थे. यज़ीद सेना (40,000 ) ने उन्हें कर्बला के मैदान में ही रोक लिया. सेनापति ने उन्हें यज़ीद की बात मानने के लिए उन पर दबाव बनाया, लेकिन उन्होंने अत्याचारी यज़ीद का समर्थन करने से साफ़ इनकार कर दिया. हज़रत इमाम हुसैन सत्य और अहिंसा के पक्षधर थे. हज़रत इमाम हुसैन ने इस्लाम धर्म के उसूल, न्याय, धर्म, सत्य, अहिंसा, सदाचार और ईश्वर के प्रति अटूट आस्था को अपने जीवन का आदर्श माना था और वे उन्हीं आदर्शों के मुताबिक़ अपनी ज़िन्दगी गुज़ार थे. यज़ीद ने हज़रत इमाम हुसैन और उनके खानदान के लोगों को तीन दिनों तक भूखा- प्यास रखने के बाद अपनी फौज से शहीद करा दिया. इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों की तादाद 72 थी. &lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;पूरी दुनिया में कर्बला के इन्हीं शहीदों की याद में मुहर्रम मनाया जाता है. मुहर्रम इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना है। 10 मुहर्रम को यौमे आशूरा कहा जाता है। उसके बाद से यह दिन कर्बला के शहीदों की यादगार मनाने का दिन बन गया और इसी शोक पर्व को भारत में मुहर्रम के नाम से जाना जाता है. इस दिन भारत के अधिकतर शहरों में ताज़िये का जुलूस निकलता है. ताजिया हज़रत इमाम हुसैन के कर्बला (इराक की राजधानी बगदाद से 100 किलोमीटर दूर उत्तर-पूर्व में एक छोटा-सा कस्बा) स्थित रौज़े जैसा होता है. लोग अपनी अपनी आस्था और हैसियत के हिसाब से ताज़िये बनाते हैं और उसे कर्बला नामक स्थान पर ले जाते हैं. जुलूस में शिया मुसलमान काले कपडे़ पहनते हैं, नंगे पैर चलते हैं और अपने सीने पर हाथ मारते हैं, जिसे मातम कहा जाता है. मातम के साथ वे हाय हुसैन की सदा लगाते हैं और साथ ही कुछ नौहा (शोक गीत) भी पढ़ते हैं. पहले ताज़िये के साथ अलम भी होता है, जिसे हज़रत इमाम हुसैन के छोटे भाई हज़रत अब्बास की याद में निकाला जाता है. &lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;मुहर्रम का महीना शुरू होते ही मजलिसों (शोक सभाओं) का सिलसिला शुरू हो जाता है. इमामबाड़ा सजाया जाता है. मुहर्रम के दिन जगह- जगह पानी के प्याऊ और शरबत की शबील लगाई जाती है. भारत में ताज़िये के जुलूस में शिया मुसलमानों के अलावा दूसरे मज़हबों के लोग भी शामिल होते हैं. &lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;विभिन्न हदीसों, यानी हज़रत मुहम्मद (सल्ल.) के कथन व अमल (कर्म) से मुहर्रम की पवित्रता और इसकी अहमियत का पता चलता है. ऐसे ही हज़रत मुहम्मद (सल्ल.) ने एक बार मुहर्रम का ज़िक्र करते हुए इसे अल्लाह का महीना कहा है. इसे जिन चार पवित्र महीनों में से एक माना जाता है. &lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;एक हदीस के मुताबिक़ अल्लाह के रसूल हज़रत मुहम्मद (सल्ल.) ने फ़रमाया कि रमज़ान के अलावा सबसे उत्तम रोज़े (व्रत) वे हैं, जो अल्लाह के महीने यानी मुहर्रम में रखे जाते हैं. यह फ़रमाते वक़्त नबी-ए-करीम हज़रत मुहम्मद (सल्ल.) ने एक बात और जोड़ी कि जिस तरह अनिवार्य नमाज़ों के बाद सबसे अहम नमाज़ तहज्जुद की है, उसी तरह रमज़ान के रोज़ों के बाद सबसे उत्तम रोज़े मुहर्रम के हैं. &lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;मुहर्रम की 9 तारीख को जाने वाली इबादत का भी बहुत सवाब बताया गया है. सहाबी इब्ने अब्बास के मुताबिक़ हज़रत मुहम्मद (सल्ल.) ने फ़रमाया कि जिसने मुहर्रम की 9 तारीख का रोज़ा रखा, उसके दो साल के गुनाह माफ़ हो जाते हैं और मुहर्रम के एक रोज़े का सवाब 30 रोज़ों के बराबर मिलता है.&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;मुहर्रम हमें सच्चाई, नेकी और ईमानदारी के रास्ते पर चलने की प्रेरणा देता है. (स्टार न्यूज़ एजेंसी)&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2673854500109758020-3690926658762922422?l=starnewsagency.in' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</description><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="http://1.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/Szd_s50MRGI/AAAAAAAABrg/Z49kf9dRYM8/s72-c/Muharram_Ta%27ziya.jpg" width="72"/><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">2</thr:total></item><item><title>काव्य : प्रेमी को मिलने नहीं देती, अजब है जग की रीत, सजन से कैसे होगी प्रीत</title><link>/2009/12/blog-post_3894.html</link><category>साहित्य</category><author>noreply@blogger.com (Star News Agency)</author><pubDate>Sun, 27 Dec 2009 21:07:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-2673854500109758020.post-2923788643631178847</guid><description>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/Szd_KE2SrFI/AAAAAAAABrY/lFkkB6bto10/s1600-h/flowers.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" ps="true" src="http://4.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/Szd_KE2SrFI/AAAAAAAABrY/lFkkB6bto10/s320/flowers.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;प्रेमी को मिलने नहीं देती, अजब है जग की रीत।&lt;br /&gt;सजन से कैसे होगी प्रीत? &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;वह घटना होती अद्भुत-सी, प्यार जिसे कहते हैं।&lt;br /&gt;सच्चा प्यार हुआ हो उसके, साथ कहाँ रहते हैं?&lt;br /&gt;जीवन तो बस इक समझौता, हार कहूँ या जीत।&lt;br /&gt;सजन से कैसे होगी प्रीत?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;जाति-धरम की दीवारों संग, और कई उलझन है।&lt;br /&gt;संग जिसके दिन-रात है जीना, उससे क्यों अनबन है।&lt;br /&gt;नैन मिले प्रियतम से वह पल, बन जाये संगीत।&lt;br /&gt;सजन से कैसे होगी प्रीत?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सच प्रायः सबको जीवन में, रहता शेष मलाल।&lt;br /&gt;परम्परा के व्यूह में फँसकर, होते लोग हलाल।&lt;br /&gt;कहते हो रक्षक है काँटा, नहीं सुमन का मीत।&lt;br /&gt;सजन से कैसे होगी प्रीत? &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;-श्यामल सुमन&lt;/strong&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2673854500109758020-2923788643631178847?l=starnewsagency.in' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</description><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="http://4.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/Szd_KE2SrFI/AAAAAAAABrY/lFkkB6bto10/s72-c/flowers.jpg" width="72"/><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>काव्य : यूं तिरे नाम से घबराता हूं, कि सरे-शाम से घबराता हूं,</title><link>/2009/12/blog-post_27.html</link><category>साहित्य</category><author>noreply@blogger.com (Star News Agency)</author><pubDate>Sun, 27 Dec 2009 21:00:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-2673854500109758020.post-4680743408463462265</guid><description>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/Szd9VJB1zDI/AAAAAAAABrQ/66jjdK1joDU/s1600-h/15833_164098566044_592011044_2887668_6371562_n.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" ps="true" src="http://3.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/Szd9VJB1zDI/AAAAAAAABrQ/66jjdK1joDU/s400/15833_164098566044_592011044_2887668_6371562_n.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;यूं तिरे नाम से घबराता हूं,&lt;br /&gt;कि सरे-शाम से घबराता हूं,&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;तेरी यादों में, ख़ुदकुशी कर लूं,&lt;br /&gt;सिर्फ अंज़ाम से घबराता हूं !&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;जिसमें मगरूर मैं कहा जाऊं,&lt;br /&gt;सिर्फ उस काम से घबराता हूं !&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मुझको मजबूर ना करो, साक़ी,&lt;br /&gt;इन दिनों ज़ाम से घबराता हूं !&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अपने आंसू की कसम कहता हूं,&lt;br /&gt;दर्दे-पैग़ाम से घबराता हूं !&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मुझको दर्दे-सुकूं मिले कैसे ?&lt;br /&gt;मैं तो आराम से घबराता हूं !&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अपने ईमां की बता दो कीमत,&lt;br /&gt;मैं कहां दाम से घबराता हूं ??&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;तू किसी रास्ते मिले ना मिले,&lt;br /&gt;मैं सरे-आम से घबराता हूं !&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;-अतुल मिश्र&lt;/strong&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2673854500109758020-4680743408463462265?l=starnewsagency.in' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</description><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="http://3.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/Szd9VJB1zDI/AAAAAAAABrQ/66jjdK1joDU/s72-c/15833_164098566044_592011044_2887668_6371562_n.jpg" width="72"/><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>अंदाज़-ए-बयां : बिछड़ा है जो एक बार तो मिलते नहीं देखा</title><link>/2009/12/blog-post_372.html</link><category>साहित्य</category><author>noreply@blogger.com (Star News Agency)</author><pubDate>Sat, 26 Dec 2009 21:39:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-2673854500109758020.post-5115479153098825107</guid><description>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/SzY06hUMIdI/AAAAAAAABoY/5DmQw1SmXUE/s1600-h/parveen+shakir.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" ps="true" src="http://3.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/SzY06hUMIdI/AAAAAAAABoY/5DmQw1SmXUE/s400/parveen+shakir.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;strong&gt;फ़िरदौस ख़ान&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;आज परवीन शाकिर की बरसी है...परवीन शाकिर ने बहुत कम अरसे में शायरी में वो मुकाम हासिल किया, जो बहुत कम लोगों को ही मिल पाता है. कराची (पाकिस्तान) में 24 नवंबर 1952 को जन्म लेने वाली परवीन शाकिर की ज़िन्दगी 26 दिसंबर 1995 को इस्लामाबाद के कब्रस्तान की होने तक किस-किस दौर से गुज़री...ये सब उनकी चार किताबों खुशबू, खुद कलामी, इनकार और माह तमाम की सूरत में हमारे सामने है...माह तमाम उनकी आखिरी यादगार है...&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;26 दिसंबर 1995 को इस्लामाबाद में एक सड़क हादसे में उनकी मौत हो गई थी. जिस दिन परवीन शाकिर को कब्रस्तान में दफ़नाया गया, उस रात बारिश भी बहुत हुई, लगा आसमान भी रो पड़ा हो...सैयद शाकिर के घराने का ये रौशन चराग इस्लामाबाद के कब्रस्तान की ख़ाक में मिल गया हो, लेकिन उसकी रौशनी और खुशबू अदब की दुनिया में रहती दुनिया तक कायम रहेगी... &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;परवीन शाकिर की एक ग़ज़ल&lt;/strong&gt; &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;बिछड़ा है जो एक बार तो मिलते नहीं देखा &lt;br /&gt;इस जख़्म को हमने कभी सिलते नहीं देखा &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इस बार जिसे चाट गई धूप की ख्वाहिश &lt;br /&gt;फिर शाख पे उस फूल को खिलते नहीं देखा &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;यक लख्त गिरा है तो जड़े तक निकल आईं &lt;br /&gt;जिस पेड़ को आंधी में भी हिलते नहीं देखा &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कांटों में घिरे फूल को चूम आएगी तितली &lt;br /&gt;तितली के परों को कभी छिलते नहीं देखा &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;किस तरह मेरी रूह हरी कर गया आख़िर &lt;br /&gt;वो ज़हर जिसे जिस्म में खिलते नहीं देखा...&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2673854500109758020-5115479153098825107?l=starnewsagency.in' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</description><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="http://3.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/SzY06hUMIdI/AAAAAAAABoY/5DmQw1SmXUE/s72-c/parveen+shakir.jpg" width="72"/><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">1</thr:total></item><item><title>गीतकार वीरेन्द्र सिंह 'ब्रजवासी' की काव्य-कृति 'अंकुर मन' का लोकार्पण</title><link>/2009/12/blog-post_4831.html</link><category>राज्य</category><category>साहित्य</category><author>noreply@blogger.com (Star News Agency)</author><pubDate>Sat, 26 Dec 2009 21:16:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-2673854500109758020.post-3854274453371022470</guid><description>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/SzYv38HLWkI/AAAAAAAABoQ/BOuB4DqulGc/s1600-h/Star_1.JPG" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" ps="true" src="http://3.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/SzYv38HLWkI/AAAAAAAABoQ/BOuB4DqulGc/s400/Star_1.JPG" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;अतुल मिश्र &lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;मुरादाबाद (उत्तर प्रदेश).&lt;/strong&gt; अखिल भारतीय साहित्य कला मंच के तत्वावधान में कल आर.एस.डी. अकादमी में लोकार्पण समारोह का आयोजन किया गया. इस समारोह में गीतकार वीरेन्द्र सिंह 'ब्रजवासी' की काव्य-कृति'अंकुर मन के' का लोकार्पण किया गया. &lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;समारोह में स्थानीय साहित्यकारों ने ब्रजवासी जी की इस पुस्तक पर अपने विचार प्रस्तुत रखे. समारोह की अध्यक्षता डा. जी. कुमार ने की और संचालन अम्बरीश कुमार ने किया. इस मौके पर शहर के अनेक गणमान्य लोग भी मौजूद थे. &lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2673854500109758020-3854274453371022470?l=starnewsagency.in' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</description><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="http://3.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/SzYv38HLWkI/AAAAAAAABoQ/BOuB4DqulGc/s72-c/Star_1.JPG" width="72"/><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>कविता : मैं परिन्दा बन अम्बर को छू लूं, तेज़ हवा के संग</title><link>/2009/12/blog-post_1831.html</link><category>साहित्य</category><author>noreply@blogger.com (Star News Agency)</author><pubDate>Sat, 26 Dec 2009 17:36:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-2673854500109758020.post-7283217727257521919</guid><description>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/SzX8APJAoJI/AAAAAAAABoI/_nZeqx1QTSA/s1600-h/bird.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" ps="true" src="http://4.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/SzX8APJAoJI/AAAAAAAABoI/_nZeqx1QTSA/s400/bird.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;मन करता है&lt;br /&gt;मैं परिन्दा बन&lt;br /&gt;अम्बर को छू लूं&lt;br /&gt;तेज़ हवा के संग&lt;br /&gt;उड़ जाऊं&lt;br /&gt;और&lt;br /&gt;किसी फल से भरे-भरे&lt;br /&gt;पेड़ पे बैठकर एक-एक&lt;br /&gt;करके अनेक फल का&lt;br /&gt;मजा चख&lt;br /&gt;उड़ जाऊं ची चूं का शोर&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मचाऊं और&lt;br /&gt;परिन्दों को इकट्ठा कर&lt;br /&gt;तोता ढोलक बजाता है&lt;br /&gt;का गीत सूना सब&lt;br /&gt;परिन्दों को पेड़ पर बुला के&lt;br /&gt;मन चाही बातें कर अम्बर की&lt;br /&gt;सैर पर जाएं चलो आओ&lt;br /&gt;हम पंख लहराएं&lt;br /&gt;अम्बर की ओर उड़ जाएं&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;-सरफ़राज़ ख़ान&lt;/strong&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2673854500109758020-7283217727257521919?l=starnewsagency.in' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</description><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="http://4.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/SzX8APJAoJI/AAAAAAAABoI/_nZeqx1QTSA/s72-c/bird.jpg" width="72"/><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">5</thr:total></item><item><title>पत्नी-पुराण : पत्नी को खुश रखने के टिप्स, गारंटी के साथ</title><link>/2009/12/blog-post_26.html</link><category>साहित्य</category><category>व्यंग्य</category><author>noreply@blogger.com (Star News Agency)</author><pubDate>Sat, 26 Dec 2009 16:14:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-2673854500109758020.post-3970266840967732870</guid><description>&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/SzX6O2RioyI/AAAAAAAABoA/9OWwg3VVYRg/s1600-h/star-smiley.gif" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" ps="true" src="http://1.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/SzX6O2RioyI/AAAAAAAABoA/9OWwg3VVYRg/s320/star-smiley.gif" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;strong&gt;श्यामल सुमन&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;शेर की शादी में चूहे को देखकर हाथी ने पूछा - "भाई तुम इस शादी में किस हैसियत से आये हो?" चूहा बोला, " जिस शेर की शादी हो रही है, वह मेरा छोटा भाई है।" हाथी का मुंह खुला का खुला रह गया, बोला, "शेर और तुम्हारा छोटा भाई?" चूहा - "क्या कहूं? शादी के पहले मैं भी शेर ही था।" यह तो हुई मजाक की बात, लेकिन पुराने समय से ही दुनिया का मोह छोड़कर, सच की तलाश में भटकने वाले भगोडों को सही रास्ते पर लाने के लिए, शादी कराने का रिवाज हमारे समाज में रहा है। कई बिगडैल कुंवारों को इसी पद्धति से आज भी रास्ते पर लाया जाता है। हम सबने कई बार देखा-सुना है कि तथाकथित सत्य की तलाश में भटकने को तत्पर आत्मा, शादी के बाद पत्नी को प्रसन्न करने के लिए लगातार भटकती रहती है। कहते भी हैं कि "शादी वह संस्था है जिसमें मर्द अपनी 'बैचलर डिग्री' खो देता है और स्त्री 'मास्टर डिग्री' हासिल कर लेती है।"&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;प्रायः शादी के पहले की जिंदगी पत्नी को पाने के लिए होती है और शादी के बाद की जिंदगी पत्नी को खुश रखने के लिए। तकरीबन हर पति के लिए पत्नी को खुश रखना एक अहम और ज्वलंत समस्या होती है और यह समस्या चूंकि सर्वव्यापी है, अतः इसे हम चाहें तो राष्ट्रीय (या अंतर्राष्ट्रीय) समस्या भी कह सकते हैं। लगभग प्रत्येक पति दिन-रात इसी समस्या के समाधान में लगा रहता है, पर कामयाबी बिरलों के भाग्य में ही होती है। सच तो यह है कि आदमी की पूरी जिंदगी पत्नी को ही समर्पित रहती है और पत्नी है कि खुश होने का नाम ही नहीं लेती। अगर खुश हो जाएगी तो उसका बीवीपन खत्म हो जाएगा, फिर उसके आगे-पीछे कौन घूमेगा? किसी ने ठीक ही तो कहा है कि "शादी और प्याज में कोई खास अन्तर नहीं - आनन्द और आंसू साथ-साथ नसीब होते हैं।"&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;पत्नी को खुश रखना इस सभ्यता की संभवतः सबसे प्राचीन समस्या है। सभी कालखंडों में पति अपनी पत्नी को खुश रखने के आधुनिकतम तरीकों का इस्तेमाल करता रहा है और दूसरी ओर पत्नी भी नाराज होने की नई-नई तरकीबों का ईजाद करती रहती है। एक बार एक कामयाब और संतुष्ट-से दिखाई देनेवाले पति से मैंने पूछा-'क्यों भाई पत्नी को खुश रखने का उपाय क्या है?' वह नाराज होकर बोला- 'यह प्रश्न ही गलत है। यह सवाल यूँ होना चाहिए था कि पत्नी को भी कोई खुश रख सकता है क्या?' उन्होंने तो यहाँ तक कहा कि "शादी और युद्ध में सिर्फ एक अन्तर है कि शादी के बाद आप दुश्मन के बगल में सो सकते हैं।"&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;जिस पत्नी को सारी सुख-सुविधाएं उपलब्ध हों, वह इस बात को लेकर नाराज रहती है कि उसका पति उसे समय ही नहीं देता। अब बेचारा पति करे तो क्या करे? सुख-सुविधाएं जुटाए या पत्नी को समय दे? इसके बरअक्स कई पत्नियों को यह शिकायत रहती है कि मेरे पति आफिस के बाद हमेशा घर में ही डटे रहते हैं। इसी प्रकार के आदर्श-पतिनुमा एक इंसान (?) से जब मैंने पूछा कि 'पत्नी को खुश रखने का क्या उपाय है?' तो उसने तपाक से उत्तर दिया-'तलाक।' मुझे लगा कि कहीं यह आदमी मेरी ही बात तो नहीं कह रहा है? मैं सोचने लगा " 'विवाह' और 'विवाद' में केवल एक अक्षर का अन्तर है शायद इसलिए दोनों में इतना भावनात्मक साहचर्य और अपनापन है।"&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;पतिव्रता नारियों का युग अब प्रायः समाप्ति की ओर है और पत्नीव्रत पुरुषों की संख्या, प्रभुत्व और वर्चस्व लगातार बढत की ओर है। यदि इसका सर्वेक्षण कराया जाय तो प्रायः हर दूसरा पति आपको पत्नीव्रत मिलेगा। मैंने सोचा क्यों न किसी अनुभवी पत्नीव्रत पति से मुलाकात करके पत्नी को खुश रखने का सूत्र सीखा जाए। सौभाग्य से इस प्रकार के एक महामानव से मुलाकात हो ही गई, जो इस क्षेत्र में पर्याप्त तजुर्बेकार थे। मैंने अपनी जिज्ञासा जाहिर की तो उन्होंने जो भी बताया, उसे अक्षरशः नीचे लिखने जा रहा हूँ, ताकि हर उस पति का कल्याण हो सके, जो पत्नी-प्रताडना से परेशान हैं -&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;1. ब्रह्ममुहुर्त में उठकर पूरे मनोयोग से चाय बनाकर पत्नी के लिए 'बेड टी' का प्रबंध करें। इससे आपकी पत्नी का 'मूड नार्मल' रहेगा और बात-बात पर पूरे दिन आपको उनकी झिडकियों से निजात मिलेगी। वैसे भी, किसी भी पत्नी के लिए पति से अच्छा और विश्वासपात्र नौकर मिलना मुश्किल है, इसलिए इसे बोझस्वरूप न लें, बल्कि सहजता से युगधर्म की तरह स्वीकार करें। कहा भी गया है कि "सर्कस की तरह विवाह में भी तीन रिंग होते हैं - एंगेजमेंट रिंग, वेडिंग रिंग और सफरिंग।"&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;2. अगर आपका वास्ता किसी तेज-तर्रार किस्म की पत्नी से है तो उनके तेज में अपना तेज (अगर अबतक बचा हो तो) सहर्ष मिलाकर स्वयं निस्तेज हो जाएँ। क्योंकि कोई भी पत्नी तेज-तर्रार पति की वनिस्पत ढुलमुल पति को ही ज्यादा पसन्द करती है। इसका यह फायदा होगा कि आप पत्नी से गैरजरूरी टकराव से बच जाएँगे, अब तो जो भी कहना होगा, पत्नी कहेगी। आपको तो बस आत्मसमर्पण की मुद्रा अपनानी है।&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;3. आपकी पत्नी कितनी ही बदसूरत क्यों न हो, आप प्रयास करके, मीठी-मीठी बातों से यह यकीन दिलाएं कि विश्व-सुन्दरी उनसे उन्नीस पडती है। पत्नी द्वारा बनाया गया भोजन (हलाँकि यह सौभाग्य कम ही पतियों को प्राप्त है) चाहे कितना ही बेस्वाद क्यों न हो, उसे पाकशास्त्र की खास उपलब्धि बताते हुए पानी पी-पीकर निवाले को गले के नीचे उतारें। ध्यान रहे, ऐसा करते समय चेहरे पर शिकायत के भाव उभारना वर्जित है, क्योंकि "विवाह वह प्रणाली है, जो अकेलापन महसूस किए बिना अकेले जीने की सामर्थ्य प्रदान करती है।"&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;4. पत्नी के मायकेवाले यदि रावण की तरह भी दिखाई दे तो भी अपने वाकचातुर्य और प्रत्यक्ष क्रियाकलाप से उन्हें 'रामावतार' सिद्ध करने की कोशिश में सतत सचेष्ट रहना चाहिए।&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;5 . आप जो कुछ कमाएं, उसे चुपचाप 'नेकी कर दरिया में डाल' की नीति के अनुसार बिल्कुल सहज समर्पित भाव से अपनी पत्नी के करकमलों में अर्पित कर दें और प्रतिदिन आफिस जाते समय बच्चों की तरह गिडगिडाकर दो-चार रुपयों की मांग करें। पत्नी समझेगी कि मेरा पति कितना बकलोल है कि कमाता खुद है और रूपये-दो रूपयों के लिए रोज मेरी खुशामद करता रहता है। एक हालिया सर्वे के अनुसार लगभग पचहत्तर प्रतिशत पति इसी श्रेणी में आते हैं। मैं अपील करता हूँ कि शेष पच्चीस प्रतिशत भी इस विधि को अपनाकर राष्ट्र की मुख्यधारा में सम्मिलित हो जाएं और सुरक्षित जीवन-यापन करें।&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;अंत में उस अनुभवी महामानव ने अपने इस प्रवचन के सार-संक्षेप के रूप में यह बताया कि उक्त विधियों को अपनाकर आप भले दुखी हो जाएं, लेकिन आपकी पत्नी प्रसन्न रहेगी और उनकी मेहरबानी के फूल आप पर बरसते रहेंगे। किसी ने बिलकुल ठीक कहा है कि "प्यार अंधा होता है और शादी आंखें खोल देती है।" मेरी भी आंखें खुल गई। कलम घिसने का रोग जबसे लगा, साहित्यिक मित्रों की आवाजाही घर पर बढ़ गई। चाय-पानी के चक्कर में जब पत्नी मुझे पूतना की तरह देखती तो मेरी रूह कांप जाती थी। मैंने इससे निजात पाने का रास्ता ढूंढ ही लिया।&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;आपने फूल कई रंगों के देखे होंगे, लेकिन सांवले या काले रंग के फूल प्रायः नहीं दिखते। मैंने अपने नाम 'श्यामल' के आगे पत्नी का नाम 'सुमन' जोड लिया। हमारे साहित्यिक मित्र मुझे 'सुमनजी-सुमनजी' कहकर बुलाते हुए घर आते। धीरे-धीरे नम्रतापूर्वक मैंने अपनी पत्नी को विश्वास दिलाने में आश्चर्यजनक रूप से सफलता पाई कि मेरे उक्त क्रियाकलाप से आखिर उनका ही नाम तो यशस्वी होता है। अब मेरे घर में ऐसे मित्रों भले ही स्वागत-सत्कार कम होता हो, पर मैं निश्चिन्त हूँ कि अब उनका अपमान नहीं होगा। किसी ने ठीक ही कहा है कि "विवाह वह साहसिक-कार्य है जो कोई बुजदिल पुरुष ही कर सकता है।" &lt;strong&gt;(स्टार न्यूज़ एजेंसी) &lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2673854500109758020-3970266840967732870?l=starnewsagency.in' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</description><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="http://1.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/SzX6O2RioyI/AAAAAAAABoA/9OWwg3VVYRg/s72-c/star-smiley.gif" width="72"/><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">3</thr:total></item><item><title>न्यू इमेजरी कला प्रदर्शनी की पेंटिग लाजवाब है :  इरफान खान</title><link>/2009/12/blog-post_8071.html</link><category>राज्य</category><category>विविध</category><author>noreply@blogger.com (Star News Agency)</author><pubDate>Fri, 25 Dec 2009 06:37:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-2673854500109758020.post-7519479107269293830</guid><description>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/SzQQXUMgODI/AAAAAAAABmI/a0mjJJ_wQ5A/s1600-h/irfan.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" ps="true" src="http://4.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/SzQQXUMgODI/AAAAAAAABmI/a0mjJJ_wQ5A/s400/irfan.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;स्टार न्यूज़ एजेंसी&lt;/strong&gt; &lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;नई दिल्ली. कई प्रदर्शनियों, कार्यशालाओं व सांस्कृतिक आदान-प्रदान के लिए अनगिनत कार्यक्रमों को आयोजित कर चुकी जागृति आर्ट इनिशियेटिव ने हाल ही में ललित कला अकादमी में 60 चित्रकारों व मूर्तिकारों की निर्मित मेटाफोरिक शिफ्ट्स व न्यू इमेजरी कला प्रदर्शनी आयोजित की। &lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;इस प्रदर्शनी का उदघाटन बालीवुड के जाने माने कलाकार इरफान खान, भारत में अरब रिपब्लिक ऑफ इजिप्त के राजदूत माननीय डा. मोहम्मद हिगाजे व ललित कला अकादमी के सचिव डा. सुधाकर शर्मा ने किया। जागृति आर्ट के निदेशक गौरांग जलान ने बताया कि अप्रैल 2006 से शुरू हुआ जागृति आर्ट कला व संस्कृति को बढ़ावा देने व समाज सेवा के कार्यों में सलंग्न है। यहां पर समकालीन व आधुनिक कला का संगम, प्रदर्शन व विक्रय होता है। इन कार्यक्रमों के द्वारा प्रख्यात व उभरते हुए कलाकारों को अपनी कला प्रदर्शन के लिए राष्ट्रीय व अंतराष्ट्रीय स्तर का एक मंच मिलता है। भारत व विदेश में कई प्रदर्शनी आयोजित कर चुका जागृति आर्ट का मुख्य उद्देश्य आर्ट विद हार्ट है इसलिए समाज के उत्थान के लिए यह समय समय पर अपने प्रयास जारी रखता है। वातावरण व पिछड़ी जातियों, गुणवान छात्रों के लिए छात्रवृत्ति का प्रबंध, महिलाओं व बच्चों का कल्याण, पोलियों जैसी बीमारी को जड़ से खत्म करने जैसे विषयों पर जागृति आर्ट ने पूरा सहयोग दिया है और इस प्रदर्शनी से जमा की गई राशि लिटरेसी इंडिया नामक मिशन को दी जाएगी। &lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;फिल्म कलाकार इरफान खान ने कहा कि मुझे देखने का शौक है, लेकिन मैंने आजतक उलटी सीधी लाइन ही डाली है यह पेंटिग लाजवाब व खूबसूरत है। इस अवसर पर पंहुचे मुख्य अतिथियों में प्रो. संदीप मारवाह भी उपस्थित हुए जिन्होनें पेंटिग करते हुए जागृति आर्ट इनिशियेटिव के इस प्रयास की सराहना की और कहा कि ऐसे प्रयास न केवल कला व संस्कृति द्वारा लोगों का मनोरंजन करते है बल्कि समाज का भी उत्थान करते हैं। इस प्रदर्शनी में जाने माने चित्रकार व मूर्तिकार जैसे एम.एफ. हुसैन, सतीश गुजराल, बिजॉन चौधरी, जयश्री चक्रवर्ती, प्रसनजीत सेनगुप्ता, बिकाश भट्टाचार्य आदि की कलाकृतियों को शामिल किया गया।&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2673854500109758020-7519479107269293830?l=starnewsagency.in' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</description><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="http://4.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/SzQQXUMgODI/AAAAAAAABmI/a0mjJJ_wQ5A/s72-c/irfan.jpg" width="72"/><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>त्यौहार : बड़े दिन के रूप में भी मनाया जाता है क्रिसमस</title><link>/2009/12/blog-post_4566.html</link><category>धर्म</category><author>noreply@blogger.com (Star News Agency)</author><pubDate>Fri, 25 Dec 2009 05:08:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-2673854500109758020.post-6766235385630394205</guid><description>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/SzP7c2u86FI/AAAAAAAABlw/lzwJoVqmdPE/s1600-h/christmas.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" ps="true" src="http://1.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/SzP7c2u86FI/AAAAAAAABlw/lzwJoVqmdPE/s400/christmas.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;सरफ़राज़ ख़ान&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;क्रिसमस ईसाइयों का प्रमुख त्यौहार है. यह पर्व ईसा मसीह के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाता है. इसे बड़े दिन के रूप में भी मनाया जाता है. क्रिसमस से 12 दिन के उत्सव क्रिसमसटाइड की भी शुरुआत होती है. 'क्रिसमस' शब्द 'क्राइस्ट्स और मास' दो शब्दों के मेल से बना है, जो मध्य काल के अंगेजी शब्द 'क्रिस्टेमसे' और पुरानी अंगेजी शब्द 'क्रिस्टेसमैसे' से नकल किया गया है. 1038 ई. से इसे 'क्रिसमस' कहा जाने लगा. इसमें 'क्रिस' का अर्थ ईसा मसीह और 'मस' का अर्थ ईसाइयों का प्रार्थनामय समूह या 'मास' है. 16वीं शताब्दी के मध्य से 'क्राइस्ट' शब्द को रोमन अक्षर एक्स से दर्शाने की प्रथा चल पड़ी. इसलिए अब क्रिसमस को एक्समस भी कहा जाता है. भारत सहित दुनिया के ज़्यादातर देशों में क्रिसमस 25 दिसंबर को मनाया जाता है, लेकिन रूस, जार्जिया, मिस्त्र, अरमेनिया, युक्रेन और सर्बिया आदि देशों में 7 जनवरी को लोग क्रिसमस मनाते हैं, क्योंकि पारंपरिक जुलियन कैलंडर का 25 दिसंबर यानी क्रिसमस का दिन गेगोरियन कैलंडर और रोमन कैलंडर के मुताबिक 7 जनवरी को आता है. हालांकि पवित्र बाइबल में कहीं भी इसका ज़िक्र नहीं है कि क्रिसमस मनाने की परंपरा आखिर कैसे, कब और कहां शुरू हुई. एन्नो डोमिनी काल प्रणाली के आधार पर यीशु का जन्म, 7 से 2 ई.पू. के बीच हुआ था. 25 दिसंबर यीशु मसीह के जन्म की कोई ज्ञात वास्तविक जन्म तिथि नहीं है.शोधकर्ताओं का कहना है कि ईसा मसीह के जन्म की निश्चित तिथि के बारे में पता लगाना काफी मुश्किल है. सबसे पहले रोम के बिशप लिबेरियुस ने ईसाई सदस्यों के साथ मिलकर 354 ई. में 25 दिसंबर को क्रिसमस मनाया था. उसके बाद 432 ई. में मिस्त्र में पुराने जुलियन कैलंडर के मुताबिक 6 जनवरी को क्रिसमस मनाया गया था. उसके बाद धीरे-धीरे पूरे संसार में जहां भी ईसाइयों की संख्या अधिक थी, यह त्योहार मनाया जाने लगा. छठी सदी के अंत तक इंग्लैंड में यह एक परंपरा का रूप ले चुका था.&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;क्रिसमस का एक और दिलचस्प पहलू यह है कि ईसा मसीह के जन्म की कहानी का संता क्लॉज की कहानी के साथ कोई संबंध नहीं है. वैसे तो संता क्लॉज को याद करने का चलन चौथी सदी से शुरू हुआ था और वे संत निकोलस थे, जो तुर्किस्तान के मीरा नामक शहर के बिशप थे. उन्हें बच्चों से अत्यंत प्रेम था और वे गरीब, अनाथ और बेसहारा बच्चों को तोहफे दिया करते थे.&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;पुरानी कैथलिक परंपरा के मुताबिक क्रिसमस की रात को ईसाई बच्चे अपनी तमन्नाओं और ज़रूरतों को एक पत्र में लिखकर सोने से पूर्व अपने घर की खिड़कियों में रख देते थे. यह पत्र बालक ईसा मसीह के नाम लिखा जाता था. यह मान्यता थी कि फ़रिश्ते उनके पत्रों को बालक ईसा मसीह से पहुंचा देंगे. क्रिसमस ट्री की कहानी भी बहुत ही रोचक है. किवदंती है कि सर्दियों के महीने में एक लड़का जंगल में अकेला भटक रहा था. वह सर्दी से ठिठुर रहा था. वह ठंड से बचने के लिए आसरा तलाशने लगा. तभी उसकी नजर एक झोपड़ी पर पड़ी. वह झोपडी के पास गया और उसने दरवाजा खटखटाया. कुछ देर बाद एक लकड़हारे ने दरवाजा खोला. लड़के ने उस लकड़हारे से झोपड़ी के भीतर आने का अनुरोध किया. जब लकड़हारे ने ठंड में कांपते उस लड़के को देखा तो उसे लड़के पर तरस आ गया और उसने उसे अपनी झोपड़ी में बुला लिया और उसे गर्म कपड़े भी दिए. उसके पास जो रूख-सूखा था, उसने लड़के को बभी खिलाया. इस अतिथि सत्कार से लड़का बहुत खुश हुआ. वास्तव में वह लड़का एक फरिश्ता था और लकडहारे की परीक्षा लेने आया था. उसने लकड़हारे के घर के पास खड़े फर के पेड़ से एक तिनका निकाला और लकड़हारे को देकर कहा कि इसे ज़मीन में बो दो. लकड़हारे ने ठीक वैसा ही किया जैसा लड़के ने बताया था. लकडहारा और उसकी पत्नी इस पौधे की देखभाल अकरने लगे. एक साल बाद क्रिसमस के दिन उस पेड़ में फल लग गए. फलों को देखकर लकड़हारा और उसकी पत्नी हैरान रह गए, क्योंकि ये फल, साधारण फल नहीं थे बल्कि सोने और चांदी के थे. कहा जाता है कि इस पेड़ की याद में आज भी क्रिसमस ट्री सजाया जाता है. मगर मॉडर्न क्रिसमस ट्री शुरुआत जर्मनी में हुई. उस समय एडम और ईव के नाटक में स्टेज पर फर के पेड़ लगाए जाते थे. इस पर सेब लटके होते थे और स्टेज पर एक पिरामिड भी रखा जाता था. इस पिरामिड को हरे पत्तों और रंग-बिरंगी मोमबत्तियों से सजाया जाता था. पेड़ के ऊपर एक चमकता तारा लगाया जाता था. बाद में सोलहवीं शताब्दी में फर का पेड़ और पिरामिड एक हो गए और इसका नाम हो गया क्रिसमस ट्री अट्ठारहवीं सदी तक क्रिसमस ट्री बेहद लोकप्रिय हो चुका था. जर्मनी के राजकुमार अल्बर्ट की पत्नी महारानी विक्टोरिया के देश इंग्लैंड में भी धीरे-धीरे यह लोकप्रिय होने लगा. इंग्लैंड के लोगों ने क्रिसमस ट्री को रिबन से सजाकर और आकर्षक बना दिया. 19वीं शताब्दी तक क्रिसमस ट्री उत्तरी अमेरिका तक जा पहुंचा और वहां से यह पूरी दुनिया में लोकप्रिय हो गया. क्रिसमस के मौके पर अन्य त्योहारों की तरह अपने घर में तैयार की हुई मिठाइयां और व्यंजनों को आपस में बांटने व क्रिसमस के नाम से तोहफे देने की परंपरा भी काफी पुरानी है। इसके अलावा बालक ईसा मसीह के जन्म की कहानी के आधार पर बेथलेहम शहर के एक गौशाले की चरनी में लेटे बालक ईसा मसीह और गाय-बैलों की मूर्तियों के साथ पहाड़ों के ऊपर फरिश्तों और चमकते तारों को सजा कर झांकियां बनाई जाती हैं, जो दो हजार वर्ष पुरानी ईसा मसीह के जन्म की घटना की याद दिलाती हैं.&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;दिसंबर का महीना शुरू होते ही क्रिसमस की तैयारियां शुरू हो जाती हैं . गिरजाघरों को सजाया जाता है. भारत में अन्य धर्मों के लोग भी क्रिसमस के उत्सव में शामिल होते हैं.&lt;b&gt; (स्टार न्यूज़ एजेंसी) &lt;br /&gt;&lt;/b&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2673854500109758020-6766235385630394205?l=starnewsagency.in' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</description><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="http://1.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/SzP7c2u86FI/AAAAAAAABlw/lzwJoVqmdPE/s72-c/christmas.jpg" width="72"/><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">1</thr:total></item><item><title>मासूम बच्चों का शोषण : मानव तस्करी का खौफनाक चेहरा</title><link>/2009/12/blog-post_3594.html</link><category>मुद्दा</category><category>राष्ट्रीय</category><category>समाज</category><author>noreply@blogger.com (Star News Agency)</author><pubDate>Fri, 25 Dec 2009 00:23:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-2673854500109758020.post-8366145270207022826</guid><description>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/SzO4I5a8i-I/AAAAAAAABjo/XrDtQfgcPsg/s1600-h/child-trafficking.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" ps="true" src="http://1.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/SzO4I5a8i-I/AAAAAAAABjo/XrDtQfgcPsg/s400/child-trafficking.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;शिरीष खरे&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;यह दृश्य बार-बार घटने से अब साधारण लगता है- मुंबई के मशहूर लियोपोर्ड की संगीतभरी रातों के सामने भीख मांगते 10 से 12 साल के 12 से 15 बच्चे खड़े मिलते हैं। ये उन शोषित बच्चों के समूह से हैं जो शहर के फुटपाथों पर जूते या कार चमकाते हैं, फूल, चाकलेट या फिर कई बार अपने आप को बेच देते हैं। ना जाने ये बच्चे इधर से किधर और कितनी बार बिकने वाले हैं। इनकी जिंदगी में वह दिन कभी न आए जब यह अपने परिवार वालों को देखने के लिए भी तरस जाएं। वैसे एक साल के भीतर इसी मुंबई से करीब 8 हजार बच्चे लापता हुए हैं। देखा जाए तो एक दशक से देश और दुनिया की ऐसी ज्ञात घटनाओं या संख्याओं को जोड़ना अब असाधारण हो चुका है। भूमण्डलीकरण के जमाने में बच्चों की तस्करी को नए-नए पंख जो लग गए हैं।&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के एक आंकलन के हवाले से 2002 में दुनियाभर से करीब 12 लाख बच्चों की तस्करी हुई। वहीं युनाइटेड स्टेट्स डिपार्टमेंट आफ स्टेट के आकड़ों (2004) का दावा है कि दुनिया में तस्करी के शिकार कुल लोगों में से आधे बच्चे हैं। अकेले बच्चों की तस्करी से हर साल 10 अरब डालर के मुनाफे का अनुमान है। अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के बाल मजदूरी से जुड़े आकड़ों (2000) का अनुमान है कि सेक्स इंडस्ट्री में 18 लाख बच्चों का शोषण हो रहा है। इनमें भी खासतौर से लड़कियों की तस्करी विभिन्न यौन गतिविधियों के लिए हो रही है। इसी तरह अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन का यह भी अनुमान है कि घरेलू मजदूरी में भी लड़कियों की संख्या सबसे ज्यादा होती है। ऐसे बच्चों की तस्करी करने के लिए इनके परिवार वालों को अच्छी पढ़ाई-लिखाई या नौकरी का झांसा दिया जाता है। युनाइटेड नेशन्स चिल्ड्रंस फंड, फेक्ट शीट (2005) का अनुमान है कि दुनिया के 30 से ज्यादा सशस्त्र संघर्षों में बच्चों का इस्तेमाल किया जाता है। कुछ बच्चों को गरीबी तो कुछ को जबरन उठाकर सेना में भर्ती किया जाता है। 1990 से 2005 के बीच सशस्त्र संघर्षों में 20 लाख से ज्यादा बच्चे मारे गए। युनाइटेड नेशन्स चिल्ड्रंस फंड, फेक्ट शीट (2005) ने यह भी कहा है कि अक्सर पिछड़े, अनाथ, विस्थापित, विकलांग या युद्ध क्षेत्र में रहने वाले बच्चों को सैन्य गतिविधियों में लगा दिया जाता है।&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;प्राकृतिक आपदाओं की ऊहापोह में बच्चों की तस्करी करने वाले गिरोहों की सक्रियता भी बढ रही है। इस दौरान यह गिरोह अपने परिवार वालों से बिछुड़े और गरीब परिवार के बच्चों को निशाना बनाते हैं। इसके अलावा गरीबी के चलते कई मां-बाप अपनी बेटी को आर्थिक संकट से उभरने का उपाय मानते हैं और पैसों की खातिर उसकी शादी किसी भी आदमी के साथ कर देते हैं। इन दिनों अधेड़ या बूढ़े आदमियों के लिए नाबालिग लड़कियों की मांग बढ़ती जा रही है। उन बच्चों के बीच तस्करी की आशंका बढ़ जाती है जिनके जन्म का रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ है। युनाइटेड नेशन्स चिल्ड्रन्स फंड, बर्थ रजिस्ट्रेशन के मुताबिक 2000 में 41 प्रतिशत बच्चों के जन्म का रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ। बच्चों की कानूनी पहचान न होने से उनकी तस्करी करने में आसानी हो जाती है। ऐसे में लापता बच्चों का पता-ठिकाना ढ़ूढ़ना मुश्किल हो जाता है। तस्करी और लापता बच्चों के बीच गहरे रिश्ते का खुलासा एनएचआरसी की रिसर्च रिपोर्ट (2004) भी करती है जिसमें कहा गया है कि भारत में एक साल 30 हजार से ज्यादा बच्चों के लापता होने के मामले दर्ज होते हैं, इनमें से एक-तिहाई का पता नहीं चलता है। तस्करी के बाद ज्यादातर बच्चों का इस्तेमाल खदानों, बगानों, रसायनिक और कीटनाशक कारखानों से लेकर खतरनाक मशीनों को चलाने के लिए किया जाता है। कई बार बच्चों को बंधुआ मजदूरी पर रखने के लिए उनके परिवार वालों को एडवांस पैसा दिया जाता है। इसके बाद ब्याज का पैसा जिस तेजी से बढ़ता है उसके हिसाब से बच्चों को वापिस खरीदना मुश्किल हो जाता है। इसके साथ-साथ अंग निकालने, भीख मांगने और नाजायज तौर से गोद लेने के लिए भी बच्चों की तस्करी के मामले बढ़ रहे हैं।&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;बाल तस्करी की हर अवस्था में हिंसा की सिलसिला जारी रहता है और ऐसे बच्चे आखिरी तक गुलामी का जीवन ढ़ोने को मजबूर रहते हैं। ऐसे बच्चे भरोसेमंद आदमियों के धोखा दिए जाने चलते खुद को ठगा हुआ महसूस करते हैं। यह भी अजीब विडंबना है कि ऐसे बच्चे अपनी सुरक्षा, भोजन और आवास के लिए शोषण करने वालों के भरोसे रहते हैं। यह बच्चे तस्करी करने वाले से लेकर काम करवाने वाले, दलाल और ग्राहकों के हाथों शोषण सहते हैं। ऐसे बहुत सारी परेशानियों के चलते उनमें हताशा, बुरे सपने आने या नींद नहीं आने जैसे विकार पैदा होते हैं। तब कुछ बच्चे नशे की लत में पड़ जाते हैं और कुछ आत्महत्या की कोशिश तक करते हैं।&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;बाल तस्करी से जुडे़ सही और पर्याप्त आकड़े जमा कर पाना बहुत मुश्किल है। ऐसा इसलिए क्योंकि तस्करी के तार अंतर्राष्ट्रीय और संगठित अपराध की बहुत बड़ी दुनिया से जुड़े हैं। यह इतनी भयानक, विकराल और अदृश्य दुनिया है कि इसे ज्यों का त्यों स्वीकार कर लेना आसान नहीं है। यह शारारिक और यौन शोषण के घने जालों से जकड़ी एक ऐसी दुनिया है जिसको लेकर सटीक नतीजे तक पहुंच पाना भी मुश्किल है। कई बार आकड़ों में से ऐसे लोग छूट जाते हैं जिनकी तस्करी देश के भीतर हो रही है। फिर यह भी है कि कई जगहों पर तस्करी के शिकार लोगों की आयु या लिंग का जिक्र नहीं मिलता।&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;दुनिया भर में बच्चों की तस्करी सबसे फायदेमंद और तेजी से उभरता काला धंधा है। क्योंकि एक तो इसमें न के बराबर लागत है और फिर नशा या हथियारों की तस्करी के मुकाबले खतरा भी कम है। इस धंधे में बच्चे कीमती सामानों में बदलते हैं और मांग-पूर्ति के सिद्धांत के हिसाब से देश-विदेश के बाजारों में बिकते हैं। तस्करी में ऐसा जरूरी नहीं है कि बच्चों को अंतर्राष्ट्रीय सीमा के बाहर ही ले जाया जाए। एक बड़ी संख्या में बच्चों की तस्करी गांवों से शहरों में भी होती है। इसके अलावा पर्यटन से जुड़ी मांग और मौसमी पलायन के चलते भी तस्करी को बढ़ावा मिलता है। देश के भीतर या बाहर, दोनों ही प्रकार से बच्चों की तस्करी भयावह अपराध है। इसलिए बच्चों की तस्करी रोकने के लिए सार्वभौमिक न्याय का अधिकार देने वाले कानून की सख्त जरूरत है। फौजदारी कानूनों को न सिर्फ मजबूत बनाने होंगे बल्कि उन्हें कारगर ढ़ंग से इस्तेमाल भी करने होंगे। बच्चों की तस्करी से जुड़ी सभी गतिविधियों, लोगों और एंजेसियों पर फौजदारी कानून के तहत कार्रवाई हो। इसके अलावा शोषण से संरक्षण देने वाले ऐसे कानून और नीतियां हो जो बच्चों की तस्करी रोकने के लिए सीधे असर सकें। इनमें पलायन, बाल मजदूरी, बाल दुरुपयोग और पारिवारिक हिंसा से जुड़े कानून आते हैं। यहां एक और बात स्पष्ट है कि बच्चों की तस्करी रोकने के कानूनी उपाय तब तक बेमतलब रहेंगे जब तक कानूनों को इस्तेमाल करने और उनकी निगरीनी करने की उचित व्यवस्था नहीं रहेगी। साथ ही साथ तस्करी के शिकार बच्चों को तेजी से पहचानने के लिए कारगर तरीके बनाने और उन्हें अपनाने की भी जरुरत है। &lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;तस्करी को पालेर्मो प्रोटोकाल (2000) के अनुच्छेद 3 और 5 में दी गई परिभाषा के मुताबिक : ‘‘व्यक्तियों की तस्करी का अर्थ धमकी या जबरन या अपहरण जालसाजी, धोखे, सत्ता के गलत इस्तेमाल, असहायता की स्थिति, किसी दूसरे व्यक्ति पर नियंत्रण रखने वाले व्यक्ति की सहमति पाने के लिए पैसे, लाभ के लेन-देन के लिए व्यक्तियों की भर्ती, परिवहन, स्थानांतरण, शरण या प्राप्ति है।’’ &lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2673854500109758020-8366145270207022826?l=starnewsagency.in' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</description><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="http://1.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/SzO4I5a8i-I/AAAAAAAABjo/XrDtQfgcPsg/s72-c/child-trafficking.jpg" width="72"/><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>संघ लोक सेवा आयोग की सम्मिलित रक्षा सेवा परीक्षा-2009</title><link>/2009/12/2009_25.html</link><category>राष्ट्रीय</category><author>noreply@blogger.com (Star News Agency)</author><pubDate>Fri, 25 Dec 2009 00:16:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-2673854500109758020.post-77522009583270505</guid><description>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/SzO3CVMdD_I/AAAAAAAABjg/kjcbUG_Z510/s1600-h/UPSC.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" ps="true" src="http://4.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/SzO3CVMdD_I/AAAAAAAABjg/kjcbUG_Z510/s400/UPSC.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;स्टार न्यूज़ एजेंसी &lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;नई दिल्ली.&lt;/strong&gt; संघ लोक सेवा आयोग द्वारा सितम्बर, 2009 में आयोजित सम्मिलित रक्षा सेवा परीक्षा (II), 2009 के परिणाम के आधार पर निम्नलिखित अनुक्रमांक वाले 8591 उम्मीदवारों ने (1) भारतीय सैनिक अकादमी, देहरादून में जुलाई, 2010 में प्रारंभ होने वाले 129 में पाठयक्रम (2) नौ-सेना अकादमी इझीमाला, केरल में जुलाई, 2010 में प्रांरभ होने वाले पाठयक्रम (3) वायु सेना अकादमी, हैदराबाद में जुलाई, 2010 में प्रांरभ होने वाले 188वें एफ (पी) पाठयक्रम के लिए (उड़ान पूर्व) प्रशिक्षण पाठयक्रम (4) अधकारी प्रशिक्षण अकादमी, चेन्नई में अक्टूबर, 2010 में प्रारंभ होने वाले 92 वें अल्पकालिक पाठयक्रम (पुरुषों के लिए) (5) अधिकारी प्रशिक्षण अकादमी चेन्नई, अक्टूबर, 2010 में प्रांरभ होने वाले छठे अल्पकालिक पाठयक्रम (महिला गैर तकनीकी) में प्रवेश के लिए रक्षा मंत्रालय के सेवा चयन बोर्ड द्वारा लिए जाने वाले साक्षात्कार के लिए अर्हता प्राप्त कर ली है। &lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;संघ लोक सेवा आयोग का अपने परिसर में परीक्षा भवन के नजदीक एक सुविधा केन्द्र हैं। उम्मीदवार इस केन्द्र से अपनी परीक्षाभर्ती से संबंधित कोई जानकारीस्पष्टीकरण कार्य दिवसों में पूर्वाह्न 10.00 बजे से सायं 5.00 बजे तक स्वयं आकर अथवा दूरभाष संख्या 011-23385271, 011-23381125 तथा 011-23098543 से प्राप्त कर सकते हैं। उम्मीदवार परीक्षा परिणाम आदि से संबंधित जानकारी आयोग की वेबसाइट http://www.upsc.gov.in से भी प्राप्त कर सकते हैं।&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2673854500109758020-77522009583270505?l=starnewsagency.in' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</description><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="http://4.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/SzO3CVMdD_I/AAAAAAAABjg/kjcbUG_Z510/s72-c/UPSC.jpg" width="72"/><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा के अधिकार कानून में संशोधन की सिफारिश</title><link>/2009/12/blog-post_5856.html</link><category>राष्ट्रीय</category><category>विविध</category><author>noreply@blogger.com (Star News Agency)</author><pubDate>Fri, 25 Dec 2009 00:13:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-2673854500109758020.post-950913637714989976</guid><description>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/SzO2PCb55fI/AAAAAAAABjY/DD5IZFyn1VU/s1600-h/edu-for-children.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" ps="true" src="http://3.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/SzO2PCb55fI/AAAAAAAABjY/DD5IZFyn1VU/s400/edu-for-children.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;b&gt;स्टार न्यूज़ एजेंसी &lt;br /&gt;नई दिल्ली. &lt;/b&gt;केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा के अधिकार कानून, 2009 में संशोधन के लिए संसद में विधेयक लाने का अनुमोदन कर दिया है। छह से चौदह साल के सभी बच्चों को मुपऊत और अनिवार्य शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए संसद ने इस विधेयक को पास किया था और राष्ट्रपति की अनुमति मिलने के बाद इस कानून को 27 अगस्त, 2009 को भारत के राजपत्र में प्रकाशित किया गया था। &lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;विभिन्न संगठनों (1. विकलांग बच्चों के कल्याण के लिए काम करने वाले, 2. जिन्होंने अल्पसंख्यक संस्थाएं स्थापित की हैं ) ने विद्यालय शिक्षा और साक्षरता विभाग से इस कानून में कुछ संशोधन करने की मांग की थी। इस प्रकार की मांगों का परीक्षण करने के बाद बच्चों को मुपऊत और अनिवार्य शिक्षा के अधिकार कानून, 2009 में संशोधन का प्रस्ताव किया गया है। इस कानून में विकलांग बच्चों को वंचित समूह से संबंधित बच्चों के रूप में शामिल करने का प्रस्ताव है। इसके अलावा सहायता प्राप्त अल्पसंख्यक संस्थाओं द्वारा कानून के तहत गठित विद्यालय प्रबंधन समिति परामर्श कार्य करेंगी। इस संबंध में संसद में एक विधेयक लाया जाएगा। &lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2673854500109758020-950913637714989976?l=starnewsagency.in' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</description><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="http://3.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/SzO2PCb55fI/AAAAAAAABjY/DD5IZFyn1VU/s72-c/edu-for-children.jpg" width="72"/><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दी कापीराइट कानून, 1957 में संशोधन को मंज़ूरी</title><link>/2009/12/1957.html</link><author>noreply@blogger.com (Star News Agency)</author><pubDate>Fri, 25 Dec 2009 00:10:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-2673854500109758020.post-1453501872753916312</guid><description>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/SzO1rbjJQzI/AAAAAAAABjQ/VSoTidOj6Wo/s1600-h/Copyright-symbol.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" ps="true" src="http://4.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/SzO1rbjJQzI/AAAAAAAABjQ/VSoTidOj6Wo/s320/Copyright-symbol.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;b&gt;स्टार न्यूज़ एजेंसी &lt;br /&gt;नई दिल्ली. &lt;/b&gt;केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कापीराइट कानून, 1957 में संशोधन के लिए विधेयक लाने की मंजूरी दे दी है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने कुछ बातों को स्पष्ट करने, प्रचालनगत त्रुटियों को दूर करने तथा डिजिटल प्रौद्योगिकी एवं इंटरनेट के संदर्भ में उभरे नए मसलों से निपटने के लिए इस कानून में संशोधन का प्रस्ताव किया है। &lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;कापीराइट कानून को विश्व बौध्दिक संपदा संगठन कापीराइट संधि और विश्व बौध्दिक संपदा संगठन कार्यनिष्पादन एवं फोनोग्राम्स संधि जैसी विश्व बौध्दिक संपदा संगठन इंटरनेट संधियों के अनुरूप बनाने के लिए संशोधित करने का प्रस्ताव है। ये संधियां इन क्षेत्रों में अंतर्राष्ट्रीय मानकों का निर्धारण करती हैं। हालांकि भारत ने अभी तक उक्त संधियों पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं लेकिन डिजिटल माहौल में कापीराइट संरक्षण के विस्तार के लिए घरेलू कानून में संशोधन करना आवश्यक है। &lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;शारीरिक रूप से अक्षम व्यक्तियों को ब्रेल लिपि, बात करने वाले पाठ, इलैक्ट्रानिक पाठ, बड़े प्रिंट इत्यादि के प्रारूप में कापीराइट सामग्री तक पहुंच की आवश्यकता पड़ती है। इसलिए रायल्टी भुगतान संबंधी अतिरिक्त ज़रूरतों के लिए भी कानून में संशोधन का प्रस्ताव है। &lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2673854500109758020-1453501872753916312?l=starnewsagency.in' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</description><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="http://4.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/SzO1rbjJQzI/AAAAAAAABjQ/VSoTidOj6Wo/s72-c/Copyright-symbol.jpg" width="72"/><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>वर्ष 2010 में तोरिया का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1735 रू0 प्रति कुंतल निर्धारित</title><link>/2009/12/2010-1735-0.html</link><category>कृषि</category><category>कारोबार</category><author>noreply@blogger.com (Star News Agency)</author><pubDate>Fri, 25 Dec 2009 00:08:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-2673854500109758020.post-102179700085612605</guid><description>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/SzO0-7wqVRI/AAAAAAAABjI/2z-o9txFBJg/s1600-h/sarso.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" ps="true" src="http://3.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/SzO0-7wqVRI/AAAAAAAABjI/2z-o9txFBJg/s400/sarso.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;स्टार न्यूज़ एजेंसी &lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;नई दिल्ली.&lt;/strong&gt; अच्छी किस्म की तोरिया का न्यूनतम समर्थन मूल्य वर्ष 2009-10 के मौसम के लिए 1735 रुपये प्रति कुंतल निर्धारित किया गया है। तोरिया और रेपसीडसरसों की सामान्य बाजार में कीमतों में अंतर रखने के लिए यह घोषणा की गई है। &lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति की 5-11-2009 की बैठक में वर्ष 2009-10 की रबी फसल के लिए इस मूल्य नीति को मंजूरी दी गई है। आशा है कि नेशनल एग्रीकल्चरल को-आपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन आफ इंडिया लि. (नाफेड) ही केन्द्रीय नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करता रहेगा। &lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2673854500109758020-102179700085612605?l=starnewsagency.in' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</description><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="http://3.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/SzO0-7wqVRI/AAAAAAAABjI/2z-o9txFBJg/s72-c/sarso.jpg" width="72"/><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>मंत्रिमंडल ने दी राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति और उस पर अमल करने की कार्रवाई को मंजूरी</title><link>/2009/12/blog-post_25.html</link><category>पर्यावरण</category><category>राष्ट्रीय</category><author>noreply@blogger.com (Star News Agency)</author><pubDate>Fri, 25 Dec 2009 00:00:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-2673854500109758020.post-5780717927420206477</guid><description>&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/SzOzJFpI1GI/AAAAAAAABjA/mtWVo9PX_lA/s1600-h/Biofuels.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" ps="true" src="http://2.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/SzOzJFpI1GI/AAAAAAAABjA/mtWVo9PX_lA/s400/Biofuels.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;स्टार न्यूज़ एजेंसी &lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;नई दिल्ली.&lt;/strong&gt; केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति और उस पर अमल करने की कार्रवाई को मंजूरी दे दी है। राष्ट्रीय जैव-ईंधन समन्वयन समिति कायम करने तथा जैव ईंधन संचालन समिति कायम करने का भी अनुमोदन कर दिया गया है। &lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;जैव ईंधन से सम्बध्द राष्ट्रीय नीति की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं-&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;ul&gt;&lt;li&gt;&lt;br /&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;गैर-खाद्य तिलहन के बीजों से जैव-डीजल उत्पाद प्राप्त किया जा सकता है। &lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;br /&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;जैव-डीजल तथा जैव - इथनाल - इन दोनों जैव ईंधन मिश्रणों का 20 प्रतिशत लक्ष्य 2017 का प्राप्त कर लेने का प्रस्ताव है। &lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;br /&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;गैर - खाद्य तिलहन के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य और उत्पादकों को उचित मूल्य उपलब्ध कराने के लिए समय-समय पर इनकी संशोधन के साथ घोषणा की जाएगी। &lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;br /&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;बागानों, जैव - ईंधनों के प्रसंस्करण और शोध कार्यों पर जोर दिया जाएगा। &lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;br /&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;जैव-ईंधनों के द्वितीय संस्करण के लिए वित्तीय प्रोत्साहनों पर विचार किया जा सकता है। राष्ट्रीय जैव ईंधन कोष बनाने पर भी विचार किया जा सकता है।&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;br /&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में एक राष्ट्रीय जैव ईंधन समन्वय समिति कायम की जाएगी और नीति निर्देशन तथा समन्वयन के लिए व्यवस्था बनाई जाएगी। &lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;br /&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;मंत्रिमंडल सचिव की अध्यक्षता में जैव ईंधन संचालन समिति कायम की जाएगी जो नीति पर अमल की कार्रवाई पर गौर करती रहेगी। &lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/li&gt;&lt;li&gt;&lt;br /&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;जैव ईंधन विकास और उपयोग के लिए नवीन तथा पुनर्नवीकरण ऊर्जा मंत्रालय को मनोनीत किया गया है।&amp;nbsp;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2673854500109758020-5780717927420206477?l=starnewsagency.in' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</description><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="http://2.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/SzOzJFpI1GI/AAAAAAAABjA/mtWVo9PX_lA/s72-c/Biofuels.jpg" width="72"/><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>क्रिसमस पर प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और राष्ट्रपति ने देशवासियों को दी बधाई</title><link>/2009/12/blog-post_5841.html</link><category>राष्ट्रीय</category><author>noreply@blogger.com (Star News Agency)</author><pubDate>Thu, 24 Dec 2009 23:54:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-2673854500109758020.post-6793353466847288079</guid><description>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/SzOxvPvGuvI/AAAAAAAABi4/PZSKm3glTDs/s1600-h/Manmohan-Singh.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" ps="true" src="http://4.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/SzOxvPvGuvI/AAAAAAAABi4/PZSKm3glTDs/s400/Manmohan-Singh.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;strong&gt;स्टार न्यूज़ एजेंसी &lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;नई दिल्ली.&lt;/strong&gt; प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह, राष्ट्रपति प्रतिभा देवीसिंह पाटिल और मोहम्मद हामिद अंसारी ने क्रिसमस के आनंद भरे अवसर पर राष्ट्र को बधाई दी है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अपने संदेश में प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने कहा कि यह त्योहार हमारे जीवन में शांति, प्यार और नवीन आशाओं का संचार करता है और हमें परिवार व दोस्तों के साथ समय बिताने का आनंद भी प्रदान करता है। यह त्योहार हमें भाईचारा और सहनशीलता सिखाता है और हमें दूसरों के प्रति उदार बनाता है। क्रिसमस की यही पवित्र भावनाएं नये वर्ष में भी समस्त देशवासियों के दिलों में रहें, यही मेरी शुभकामनाएं हैं। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इस अवसर पर अपने संदेश में राष्ट्रपति ने कहा, ' क्रिसमस के अवसर पर मैं सभी देशवासियों को बधाई देती हूं। क्रिसमस का पर्व हम सबको शांति, एकता और समाज में और एक दूसरे से मेलजोल के ईसा मसीह के संदेश की याद दिलाता है। मैं कामना करती हूं कि इस साल क्रिसमस हम सबको देश के समग्र विकास के लिए आपसी समझ के पथ पर चलने की प्रेरणा दे। '&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अपने संदेश में उप-राष्ट्रपति ने कहा है कि ईसा मसीह ने सम्पूर्ण मानवता को करूणा, सहनशीलता, प्रेम, भाईचारे और बलिदान के रास्ते पर चलने का रास्ता दिखाया । उनके संदेश से मानवजाति को अज्ञानता, हिंसा और नैतिक अवनति से हटाकर उनके जीवन को शांति, सद्गुणों तथा आध्यात्मिक पूर्णता की ओर अग्रसर करने का अवसर मिलता है ।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2673854500109758020-6793353466847288079?l=starnewsagency.in' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</description><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="http://4.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/SzOxvPvGuvI/AAAAAAAABi4/PZSKm3glTDs/s72-c/Manmohan-Singh.jpg" width="72"/><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>क्रिसमस के आसपास अधिक होते हैं हृदयाघात : अध्ययन</title><link>/2009/12/blog-post_5001.html</link><category>सेहत</category><author>noreply@blogger.com (Star News Agency)</author><pubDate>Thu, 24 Dec 2009 23:48:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-2673854500109758020.post-2023136190201560312</guid><description>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/SzOwaGrs_0I/AAAAAAAABiw/rLQhqSlXq-w/s1600-h/heart+patient.bmp" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" ps="true" src="http://2.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/SzOwaGrs_0I/AAAAAAAABiw/rLQhqSlXq-w/s400/heart+patient.bmp" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;स्टार न्यूज़ एजेंसी &lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;नई दिल्ली.&lt;/strong&gt; दस फीसदी हृदयाघात के मामले इमरजेंसी में डायग्नाज ही नहीं हो पाते। ऐसे मरीजों और डॉक्टरों के लिए मिनटों की बहुत अहमियत होती है। इसमें 10 प्रतिशत पॉजिटिव रेट की गिरावट स्वीकार्य है। &lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. के के अग्रवाल ने बताया कि क्रिसमस त्योहार के आस पास हृदयाघात अधिक होते हैं और इस दौरान ईसीजी में चूक हो सकती है क्योंकि हृदयाघात के बाद के पहले छह घंटे में यह सामान्य हो सकती है।&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;डॉ. अग्रवाल ने जर्नल ऑफ द अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन में प्रकाशित अध्ययन का हवाला देते हुए हृदयाघात के फाल्स पॉजिटिव या फाल्स निगेटिव डायग्नासिस में कमी लाने के लिए हर संभव प्रयास किये जाने पर जोर दिया। अध्ययन में हेनरी एंड ग्रुप ने 1,345 लोगों में इमरजेंसी पर लिये गये फैसलों को देखते हुए 2003 से लेकर 2006 तक हृदयाघात के आशंकित चिकित्सीय उपचार के रिकॉर्डों को आधार बनाकर अध्ययन किया।&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;सभी आशंकित मरीजों में स्टेमी हार्ट अटैक हुआ, जिसे विशिष्ट इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम के जरिए चिन्हित किया। उनमें से 187 लोगों (14 फीसदी) में कोरोनरी आर्टरी का ब्लॉकेज वास्तव में नहीं हुई साथ ही 127 (9.5 फीसदी) में कोरोनरी आर्टरी डिसीज नहीं पायी गई और 149 लोगों में (11.2 फीसदी) कार्डिएक बायोमार्कर टेस्ट के निगेटिव परिणाम सामने आए। &lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;बचने वाले लोगों में महत्वपूर्ण अंतर यह देखा गया कि जिनकी आर्टरी (धमनी) ब्लॉक हुई, उनमें 30 दिवसीय मौत की दर 4.6 फीसदी थी, जबकि बिना ब्लॉकेज वालों में यह दर 2.7 फीसदी रही। &lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2673854500109758020-2023136190201560312?l=starnewsagency.in' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</description><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="http://2.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/SzOwaGrs_0I/AAAAAAAABiw/rLQhqSlXq-w/s72-c/heart+patient.bmp" width="72"/><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>काव्य : सागर में मिलने से पहले, एक नदी बन जाना सीख</title><link>/2009/12/blog-post_928.html</link><category>साहित्य</category><author>noreply@blogger.com (Star News Agency)</author><pubDate>Thu, 24 Dec 2009 23:44:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-2673854500109758020.post-3133540222417309870</guid><description>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/SzOvZxAlWJI/AAAAAAAABio/s2lndQ0kKGY/s1600-h/8125_1273358156420_1303902174_30853894_2886441_n.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" ps="true" src="http://2.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/SzOvZxAlWJI/AAAAAAAABio/s2lndQ0kKGY/s400/8125_1273358156420_1303902174_30853894_2886441_n.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;हर ग़म में मुस्काना सीख,&lt;br /&gt;खुद को यूं बहलाना सीख,&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;बाधाएं खुद हट जायेंगी,&lt;br /&gt;पर्वत से टकराना सीख !&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;चट्टानें बेजान पड़ी हैं,&lt;br /&gt;हिम जैसा गल जाना सीख !&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सागर में मिलने से पहले,&lt;br /&gt;एक नदी बन जाना सीख !&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मौत कभी भी आ सकती है,&lt;br /&gt;मन को यह समझाना सीख !&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अपनी हुनर भरी ख़ुशबू से,&lt;br /&gt;शब्दों को नहलाना सीख !&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;'अतुल' जहां आदर्श खड़े हों,&lt;br /&gt;अतुल मिश्र कहलाना सीख !&lt;br /&gt;-अतुल मिश्र&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2673854500109758020-3133540222417309870?l=starnewsagency.in' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</description><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="http://2.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/SzOvZxAlWJI/AAAAAAAABio/s2lndQ0kKGY/s72-c/8125_1273358156420_1303902174_30853894_2886441_n.jpg" width="72"/><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item></channel></rss>