<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?>
<?xml-stylesheet type="text/xsl" media="screen" href="/~d/styles/rss2enclosuresfull.xsl"?><?xml-stylesheet type="text/css" media="screen" href="http://feeds.feedburner.com/~d/styles/itemcontent.css"?><rss xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:itunes="http://www.itunes.com/dtds/podcast-1.0.dtd" version="2.0"><channel><title>Star News Agency</title><link>http://www.starnewsagency.in/</link><atom10:link xmlns:atom10="http://www.w3.org/2005/Atom" rel="self" type="application/rss+xml" href="http://feeds.feedburner.com/starnewsagency/PfBU" /><description></description><language>en</language><managingEditor>noreply@blogger.com (Star News Agency)</managingEditor><lastBuildDate>Tue, 09 Mar 2010 20:14:07 PST</lastBuildDate><generator>Blogger http://www.blogger.com</generator><openSearch:totalResults xmlns:openSearch="http://a9.com/-/spec/opensearch/1.1/">926</openSearch:totalResults><openSearch:startIndex xmlns:openSearch="http://a9.com/-/spec/opensearch/1.1/">1</openSearch:startIndex><openSearch:itemsPerPage xmlns:openSearch="http://a9.com/-/spec/opensearch/1.1/">25</openSearch:itemsPerPage><feedburner:info xmlns:feedburner="http://rssnamespace.org/feedburner/ext/1.0" uri="starnewsagency/pfbu" /><atom10:link xmlns:atom10="http://www.w3.org/2005/Atom" rel="hub" href="http://pubsubhubbub.appspot.com/" /><itunes:owner><itunes:email>noreply@blogger.com</itunes:email></itunes:owner><itunes:explicit>no</itunes:explicit><itunes:subtitle></itunes:subtitle><feedburner:emailServiceId xmlns:feedburner="http://rssnamespace.org/feedburner/ext/1.0">starnewsagency/PfBU</feedburner:emailServiceId><feedburner:feedburnerHostname xmlns:feedburner="http://rssnamespace.org/feedburner/ext/1.0">http://feedburner.google.com</feedburner:feedburnerHostname><item><title>भारतीय बाघ संरक्षित क्षेत्र : पाखुई बाघ संरक्षित क्षेत्र</title><link>http://www.starnewsagency.in/2010/03/blog-post_10.html</link><category>पर्यावरण</category><category>पर्यटन</category><author>noreply@blogger.com (Star News Agency)</author><pubDate>Tue, 09 Mar 2010 18:27:35 PST</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-2673854500109758020.post-6696473424257052351</guid><description>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/S5Zq2NLtiiI/AAAAAAAAFFk/0BiYbp9DCLg/s1600-h/tiger.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" src="http://2.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/S5Zq2NLtiiI/AAAAAAAAFFk/0BiYbp9DCLg/s320/tiger.jpg" vt="true" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;सरफ़राज़ ख़ान&lt;/strong&gt; &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;पूर्वोत्तर भारत में अरुणाचल प्रदेश के कामेंग जिले में पाखुई बाघ संरक्षित क्षेत्र एक सुरक्षित क्षेत्र है। यहां दूर-दूर तक हरियाली फैली है और विभिन्न वन्य जीव रहते हैं। इस बाघ संरक्षित क्षेत्र का मुख्यालय सीजुसा है, जो असम के साइबारी से 21 किलोमीटर की दूरी पर है। यह बाघ संरक्षित क्षेत्र पश्चिम और उत्तर में कामेंग नदी, पूर्व में पक्के नदी तथा दक्षिण में असम की दुर्गम सीमा से घिरी है। इसमें काफी घने वन हैं। इसमें कई तरह के पर्यावास क्षेत्र, जैसे निचले अर्ध्द सदाबहार, सदाबहार और पूर्वी हिमालय हैं। पूर्वी हिमालय वाले इलाके में चौड़े पत्ते वाले पेड़ पाये जाते हैं। इस बाघ संरक्षित क्षेत्र से असम का नामेरी बाघ संरक्षित क्षेत्र भी लगा हुआ है। &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;संरक्षित वन से बाघ संरक्षित क्षेत्र&lt;/strong&gt; &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;पहले, यह पक्के संरक्षित क्षेत्र के नाम से जाना जाता था। इसके सीमावर्ती क्षेत्र से कामेंग और पक्के नदियों के बहने के कारण ही इसे सन 1966 में यह नाम दिया गया था। सन 1977 मे इसका नाम बदलकर कोमो अभयारण्य कर दिया गया। बाद में 2002 में इसे पाखुई वन्य जीव संरक्षित क्षेत्र घोषित कर दिया गया। अंतत: 18 फरवरी, 2002 को इसे भारत सरकार की प्रोजेक्ट टाइगर स्कीम के अंतर्गत ले आया गया और उसके महज पांच दिन बाद ही इसे पाखुई बाघ संरक्षित क्षेत्र नाम दिया गया। &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;चैम्पियन एवं सेठ के वर्गीकरण के अनुसार इस संरक्षित क्षेत्र को निम्नलिखित वर्गों में बांटा गया है-&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;1. असम घाटी उष्णकटिबंधीय अर्ध्द सदाबहार वन &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;2. उप हिमालयी अल्प कछार अर्ध्द सदाबहार वन (92 बीसी151) &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;3. पूर्वी छोटी पहाड़ी वाले वन (3152(बी) )&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;4. ऊपरी असम घाटी उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन ( आईबीसी 2बी ) &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;5. उष्णकटिबंधीय नदी क्षेत्र वन ( 4ईआरएसआई) &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;6. द्वितीयक नम बांस क्षेत्र ( ई12एसआई )&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;वनस्पति &lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;इस संरक्षित क्षेत्र का निचला इलाका दलदली तथा वर्षा वाले वनों, बड़े पेड़ों जैसे हुलॉक, बोला तथा बड़े-बड़े बांसों, आकिर्ड, क्लाइम्बर्स (बेंत) आदि से ढका है। इस इलाके में बेंत की कैलामस क्रेक्टस, कैलामस टन्यूस तथा कैलामस पऊलैजेला प्रजातियां पाई जाती हैं। &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;बांस &lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;यहां खासकर उपरी क्षेत्रों में बड़े-बड़े बांस मिलते हैं। अरूणाचल प्रदेश में बांस की 30 प्रजातियां पायी जाती हैं। डेंड्रोकैलामस हेमिटोन्नी, बंबूसा पेलिडा, स्यूडोस्टाकेम पोलीमारफिज्म बांस की महत्वपूर्ण प्रजातियां हैं। हजार से तीन हजार की ऊंचाई पर पर्णपाती एवं अर्ध्द-पणपाती वन हैं। यहां, अखरोट, बांज, चेस्टनट स्प्रूस और डोडेन्ड्रस जैसे पौधे पाये जाते हैं। 4000 मीटर की ऊंचाई पर छोटे रोडोडेन्ड्रस पाये जाते हैं तथा पांच हजार मीटर की ऊंचाई के आसपास अल्पाइन घास पायी जाती है। &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;आकिर्ड &lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;आकिर्ड के वन प्रारंभिक, अछूते तथा छेडछाड़ से मुक्त है। एक बहुत बड़े वन यात्री श्रुति रवीन्द्रन लिखते हैं, 'आकिर्ड में ऐसा कुछ है जो हमारे मस्तिष्क में स्त्रियोचित भाव पैदा करता है। यह हमें कस्तूरी के गंध का या गर्मी में भनभनाती मधुमक्खियों-सा भान कराता है। इसकी सुंदरता बहुविध होती है। यह हमें सनसनाती पत्तियों से घोसलें में पड़े कीड़े तक की याद दिलाता है।' दुनियाभर में आकिर्ड की 35000 वन्य प्रजातियां हैं, जिनमें से 1450 प्रजातियां भारत में हैं। इन 1450 प्रजातियों में 900 दुलर्भ एवं उत्तम प्रजातियां अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, नगालैंड, मणिपुर, सिक्किम तथा पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग में पायी जाती हैं। कृषि योग्य बहुविध जलवायवीय अवस्थाएं, उच्च आद्रता और वर्षा एवं सीमावर्ती चीन और बर्मा की प्रजातियों का प्रसार इस इलाके को विभिन्न प्रकार के आकिर्ड के लिए आदर्श पर्यावास बनाते हैं। आकिर्ड जमीन पर उगते हैं। आकिर्ड दो प्रकार के होते हैं। अधिपादप यानि चट्टानों एवं पेड़ों पर उगने वाले आकिर्ड तथा मृतजीवी यानि वन अपशिष्ट पर उगने वाले आकिर्ड। भारत के दुर्लभ आकिर्ड लोस्ट लेडिज स्लीपर तथा नीले वांडा (धारीदार) पेड़ों पर उगते हैं। आकिर्ड साहित्य के अनुसार ब्रिटिश इंडियन आर्मी के एक जवान ने सबसे पहले 19वीं सदी के अंतिम वर्षों में लोस्ट लेडिज स्लीपर देखा था। लाल और नीले वांडा दूसरे दुर्लभ आकिर्ड हैं जो विलुप्त होने के कगार पर हैं। डिप्लोमेरिस हिरसूट यानि बफीर्लें आकिर्ड को पूर्वी हिमालय में तीन दिनों की यात्रा के बाद देखा जा सकता है। &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;पेड़ों की प्रमुख प्रजातियों में बड़े पेड़ टर्मिनालिया मायरियोकार्पा (हॉलाक), ऐलांथस इजसेला (बारापेट), दुभानगगरांडिपऊलोरा (खोकान), केनेरियम रेसिनफेरम, ट्रेविया नूडिपऊलोरा, टेट्रोमिलूस नूडिमपऊलोरा, स्टेरकूलिया विल्लोसा, मैक्रोपैनेक्स डेपरमस, सिजिगियमएक्रोकारपम, गार्सिनिया, स्पेशीज, क्यूरकस लामा लियोसा आदि कई प्रकार के वृक्ष शामिल हैं। &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;वन्य जीव&lt;/strong&gt; &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;इस संरक्षित क्षेत्र में बाघ, चीते, बादलों के रंगवाले चीते, जंगली बिल्लियां, जंगली कुत्ते, सियार, भारतीय लोमड़ियां, हमालयी काले भालू, हाथी, गौर, बिटूरोंग, सांभर, पाढा, बाकिर्गं डीयर, स्लो लोरिस, पीले गले वाले अबाबील, मलयालन बड़ी गिलहरी, उड़ने वाली गिलहरी, गिलहरी, मुष्क बिलाव, लंगूर, रियसस मैकेक, असमी मैकेक आदि जानवर पाये जाते हैं। एक अनुसंधानकर्ता ने इस क्षेत्र में पूंछ पर छाप वाले मैकेक के पाये जाने की बात कही है। &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;चिड़िया &lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;इस संरक्षित क्षेत्र में रंग-बिरंगे पक्षी पाये जाते हैं। उनमें हार्नबिल, सफेद पंख वाले काले बतख, जंगली मुर्गियां, महोख, पंडुक, बसंता, गरूड, बाज आदि शामिल हैं। कुछ सरीसृप जैसे अजगर और करैत सांप भी यहां मिल जाते हैं।&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;भारत में बाघ अभयारण्य -: नमेरी बाघ अभयारण्य- व्हाईट विंग्ड वुड डक का अंतिम घर&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;असम का सोनितपुर जिला पूर्वी हिमालय पर्वत श्रृंखलाओं की तराई में स्थित है, जहां नमेरी बाघ अभयारण्य मौजूद है। यह क्षेत्र पूरी दुनिया में फूल-पौधों और वन्य प्राणियों के खजाने के तौर पर जाना जाता है, लेकिन यह सबसे ज्यादा खतरे में भी है। इस पूरे इलाके को जिया भोरोली और दिजी, दिनाई, दोइगुरंग, नमेरी, दिकोराई, खारी आदि सहायक नदियों से पानी मिलता है। अभयारण्य 200 वर्ग किलोमीटर में फैला है। इससे बालीपारा संरक्षित वन क्षेत्र भी सटा हुआ है, जिससे इसका क्षेत्रफल बढ़ जाता है। बालीपारा संरक्षित वन क्षेत्र जिया भोरोली की उलटी दिशा में 64 वर्ग किलोमीटर और नदुआर संरक्षित वन क्षेत्र के 80 वर्ग किलोमीटर के इलाके में पड़ता है। यह इलाका ऊंचा-नीचा है। नदी के किनारे-किनारे कहीं-कहीं ऊंचाई 80 मीटर है तो मध्य व उत्तरी हिस्से में ऊंचाई 225 मीटर है। &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;यह पारिस्थितिकी क्षेत्र नार्थ बैंक लैंडस्केप और ईस्टर्न हिमालयन मेगा बायोडाइवर्सिटी हॉटस्पॉट का अंग है। पौधों की किस्मों और पौधों की जटिल संरचना के मामले में यह क्षेत्र दुनिया में सबसे ज्यादा मालामाल है। क्षेत्र पर ऊष्णकटिबंधीय वर्षा का खासा प्रभाव है, जहां मौसमी व भारी वर्षा होती है। मई और सितम्बर के बीच औसतन 3400 मिलीमीटर वर्षा होती है। असम की जिया भोरोली नदी अंग्रेजों के समय से ही महासीर मछली पकड़ने के लिए प्रसिध्द रही है। अरुणाचल प्रदेश के कठोर पर्वतों से बल खाती हुई यह नदी असम के भालुकपुंग के मैदान में उतरती है। यह नदी भारतीय नदियों के बाघ के नाम से प्रसिध्द -सुनहरी महासीर का घर है। एचएस थॉमस ने अपनी पुस्तक में लिखा है कि महासीर अपने वजन और चपलता में मेरे वतन की शानदार सालमन से बहुत बेहतर है। &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;जंगलों के प्रकार व बनावट&lt;/strong&gt; &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;· असम वेली ट्रापिकल एवरग्रीन फॉरेस्ट - आई आरसी 2 बी मेसुआ सब टाइप &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;· असम ऐल्युवियल प्लेन्स सेमी एवरग्रीन फॉरेस्ट्स - 2 बीसीआईए फोवे-अनूरा एसोशिएसन &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;· सब-हिमालयन लाइट एल्युवियल सेमी एवरग्रीन फॉरेस्ट्स, 2बीआईएसआई मेकाही सब टाइप &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;· ईस्टर्न एल्युवियल सेकेन्डरी सेमी एवरग्रीन फॉरेस्ट्स - 2बी2 एस &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;· केन ब्रेक्स 2बीईआई &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;· वैट बेम्बू ब्रेक्स 2बीके 2&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;· नार्दन सेकेन्डरी मोइस्ट मिक्स, डेसीडूअस फॉरेस्ट्स 3सी2 एसआई&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;· लो एल्यूवियल सवान्ना वुड लैंड - 3आईएसआई&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;· इर्स्टन हॉल्लॉक फॉरेस्ट्स - 3आईएस 2बी&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;· 4 डीएसएसआई ईस्टर्न सीजनल स्वॉम्प फॉरेस्ट्स&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;· ईस्टर्न डिल्लेनिया स्वॉम्प फॉरेस्ट्स 4डीएसएस डिल्लेनिया एल्टिनजिया एसोशिसन &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;· ईस्टर्न वैट एल्यूवियल ग्रास लैंड 4डी2.5.2.&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;यह राष्ट्रीय उद्यान असम का दूसरा बाघ अभयारण्य है। नमेरी को 17 अक्तूबर, 1978 को संरक्षित वन घोषित किया गया था। इसकी स्थापना 18 सितम्बर, 1985 को नमेरी अभयारण्य के तौर पर हुई, जिसका रकबा 137 वर्ग किलोमीटर रखा गया जो वास्तव में नदुआर संरक्षित वन का अंग था। इसके बाद इसमें 75 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र जोड़ दिया गया, और इस तरह यह रकबा कुल 212 वर्ग किलोमीटर हो गल। 15 नवम्बर, 1988 को इसे आधिकारिक तौर पर राष्ट्रीय उद्यान के रूप में गठित किया गया, जिसका रकबा 200 किलोमीटर रखा गया। वर्ष 2002 की गणना के अनुसार अभयारण्य में 26 बाघ हैं। &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;वर्षा काल के दौरान वहां कुछ झीलें भी बन जाती हैं। वर्षा काल में जब ऊंचाई वाले स्थानों पर लगातार बारिश होती है तो जिया भोरोली और उसकी सहायक नदियां उफन उठती हैं। एक तो यहां पहुंचना कठिन है और दूसरे अगल-बगल भी जंगल है, जिसने नमेरी में वन्य जीवन को फलने-फूलने में मदद की। यहां सांभर, हिरणों की प्रजातियां, जंगली सूअर और गौर जैसे शिकार भी बाघों के लिए उपलब्ध हैं। बाघों और चीतों के लिए लगभग 3000 मवेशी भी उपलब्ध हैं। &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;पादप &lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;नमेरी का पर्यावास उष्णकटिबंधीय क्षेत्र है, जहां सदैव हरे-भरे रहने वाले वर्षा वन हैं। बांसों और नदियों के किनारे-किनारे तंग खुले घास के मैदान हैं। वर्षा वन में 600 से भी ज्यादा प्रजातियां हैं, जिसमें गामारी, टिटोचोपा, अमारी, बोगीपोमा, अजर, यूरियम पोमा, भेलौ, अगारू, रूद्राक्ष, बोंजोलोकिया, हातीपोलिया अखाकन, एहोलॉक, नाहोर, सिया नाहर, सेमल, बॉनसम आदि शामिल हैं। यहां डेंड्रोबियम, सिमबीडियम, लेडीज स्लीपर आदि ऑर्काइड्स भी हैं। लताओं में ट्री फर्न, लियानास वहां की कुछ विशेषताएं हैं। &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;प्रमुख पादप प्रजातियों में शामिल हैं - अलबिजिया, लुसीडा, अलबिजिया प्रोकेरा, अमूरा, वालिची, जावानिका, बॉमबैक्स सेबा, कनेरियम स्ट्रिक्टम, कैस्टानोपसिस इंडिका, कॉर्डिया डिकोटोमा, सिनामोमम सेसिकोडाफनिया, डेंड्रोकेलेमस हैमिलटोनी, डिलेनिया इंडिका, दुआबंगा ग्रेडीपऊलोरा, दुआबंगा सोनेरेटायड्स, डाइसोक्सीलम प्रोकेरम, इंडोस्पेरमम चिनेनसे, लागरस्ट्रोमिया फलॉस-रेगिने, लिटसी सेबीफेरा, मेसुआ फेरा, मोरस रॉक्सबरगी, प्रेमना बेंगालेनसिस, सूडोस्टेनियम पोलीमारफम, पेटरोस्परमम एसिरीफोलियम, सेपियम बकैटम, शोरिया असामिका, स्टरकुलिया हेमिलटोनीद्ग, आईजिम कुमिनी, टरमिनालिया सिटरीना, टरमिनालिया मायरिकारपा, ट्रेविया नूडीपऊलोरा और वैटिका लेंसियेफोलिया। &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;प्राणी &lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;नमेरी वन्य जीवों के मामले में भी मालामाल है। यहां 30 से अधिक स्तनपायी प्रजातियां देखी गई हैं और यह राष्ट्रीय उद्यान बाघों व हाथियों के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है। अन्य पशुओं में चीता, काला शेर, क्लाउडेड लेपर्ड, लैस्से कैट, स्लॉथ बियर, हिमालयन ब्लैक बियर, इंडियन बाइसन, धोल, सांभर, बाकिर्गं डियर, डॉग डियर, फॉक्स, हिसपिड हेयर, इंडियन हेयर, कैप्ड लंगूर, स्लो लॉरिस, असमीज मैकाक्यू, रेहसस मैकाक्यू, हिमालय यलो थ्रोटेड मार्टिन, मलायन बड़ी गिलहरी, उड़ने वाली गिलहरी, जंगली सूअर आदि आते हैं। &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;यहां पक्षियों की विभिन्न प्रजातियां भारी तादाद में हैं। इस समय लगभग 315 प्रजातियां देखी गई हैं और इनकी सूची बढ़ती जा रही है। नमेरी के पक्षियों में सबसे महत्त्वपूर्ण सफेद पंखों वाली बतख है। नमेरी राष्ट्रीय उद्यान को व्हाइट विंग्ड वुड डक के अंतिम आवास के रूप में भी जाना जाता है। वुड डक की खोज बहुत शानदार और निराली है। जंगल के नालों के आस-पास वुड डक की अच्छी खासी तादाद है। यहां इस लुप्तप्राय प्रजाति के 150 जोड़े हैं। &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;अन्य प्रमुख पक्षियों में व्हाइट चीक्ड पैट्रिज, ग्रेट, वीदेद व रूफोस नेक्ड हार्नबिल, रडी, ब्लू इयर्ड, ओरियंटल डॉर्फ किंगफिशर, ओरियंटल हॉबी, एमुर फॉलकन, जार्डन व ब्लैक बाज़ा, पलास, ग्रे हेडेड व लेसर हेडड फिश ईगल, सिल्वर बैक्ड नीडलटेल, माउंटेन इंपीरियल पिजन, ब्लू नेप्ड पिट्टा, स्लेंडर बिल्ड ओरियोल, हिज ब्लयू पऊलाईकैचर, व्हाईट क्राउन्ड फार्कटेल, सुल्तान टिट, ब्लैक बैलिड टर्न, जर्डन बैबलर, सफोस कैम्ड़ सिबिया, यलो बैलीड पऊलॉवर पैकर, रेड थ्रोटेड पिपिट, लांग बिल्ड प्लोवर, ब्लैक स्टॉर्क किंग वल्चर, लोंग बिल्ड किंग प्लोवर, क्लेज फीसेन्ट, हिल मैना, पिन टेल्ड ग्रीन पिजन, हिमालयन पाइड किंगफिशर, थ्री-टोड किंगफिशर, फेयरली ब्लू बर्ड, कॉमन मर्जनसर आदि।&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;नमेरी हाथियों के झुंडों के लिए भी प्रसिध्द है । उद्यान में हाथियों की अच्छी खासी तादाद है। 1997 की गणना के अनुसार हाथियों की संख्या 225 थी। &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;नमेरी रेंगने वाले जीवों का भी घर है। किंग कोबरा, कोबरा, पिट वाइपर, रसेल वाइपर, बैंडेड करैत, पायथन, रैट स्नेक, असम रूफ टर्टल, मलायन बॉक्स टर्टल, कील्ड बॉक्स टर्टल, एशियन लीफ टर्टल, नैरो हैडेड सॉपऊट शैल्ड टर्टल, इंडियन सॉपऊट टर्टल भी यहां रहते हैं। गोल्डन माहसीर, शाओर्ट गिल्ड माहसीर, सिलगोरिया जैसी मछलियां भी यहां के जल में पाई जाती हैं। &lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2673854500109758020-6696473424257052351?l=www.starnewsagency.in' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;p&gt;&lt;a href="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/WT9DhvMAz8yeikT8-p-hEksTWBU/0/da"&gt;&lt;img src="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/WT9DhvMAz8yeikT8-p-hEksTWBU/0/di" border="0" ismap="true"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt;&lt;br/&gt;
&lt;a href="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/WT9DhvMAz8yeikT8-p-hEksTWBU/1/da"&gt;&lt;img src="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/WT9DhvMAz8yeikT8-p-hEksTWBU/1/di" border="0" ismap="true"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;</description><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2010-03-10T07:57:35.763+05:30</app:edited><media:thumbnail url="http://2.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/S5Zq2NLtiiI/AAAAAAAAFFk/0BiYbp9DCLg/s72-c/tiger.jpg" height="72" width="72" /><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>पास होना एक विधेयक का</title><link>http://www.starnewsagency.in/2010/03/blog-post_7111.html</link><category>व्यंग्य</category><author>noreply@blogger.com (Star News Agency)</author><pubDate>Tue, 09 Mar 2010 20:09:47 PST</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-2673854500109758020.post-6649314805587110655</guid><description>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/S5cbbmVGpRI/AAAAAAAAFIA/UlfEaGhbDZo/s1600-h/india-women-vote.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" src="http://2.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/S5cbbmVGpRI/AAAAAAAAFIA/UlfEaGhbDZo/s320/india-women-vote.jpg" vt="true" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;strong&gt;अतुल मिश्र &lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;जिस 'महिला-आरक्षण विधेयक' के बारे में यह विश्वास हो चला था कि वह अब कभी पास नहीं हो पाएगा, वह अमिताभ बच्चन के पप्पू की तरह पास हो गया. जिस विधेयक ने अपने पास होने से पहले संसद के दोनों सदनों को यू.पी. और बिहार की विधान सभाओं जैसे हालातों में पहुंचा दिया था, वह आज बहुत खुश था और बाक़ायदा मुस्करा रहा था. जिस विधेयक की वजह से सभापति के सामने रखा माइक उखाड़कर फेंक दिया गया और बाद में माफ़ी मांग ली गयी कि वह बिना किसी प्रयास के अपने आप ही हमारे हाथ में आ गया था, वह विधेयक पास हो गया. जिस विधेयक की प्रतियां माननीय सभापति के मुंह की तरफ जाने के बाद अपने आप फटकर सदन में बिखर गयी थीं, वह विधेयक बिना किसी शोर-शराबे के पास हो गया.&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;"आप अब कैसा महसूस कर रहे हैं, इस विधेयक के पास होने पर?" संसद के बाहर खड़े रामभरोसे लाल ने एक पत्रकार की हैसियत से किसी ऐसे सांसद से पूछा, जो अपने इसी जन्म के कुछ समसामयिक कर्मों की वजह से संसद से निलंबित हो चुके थे और अब बाहर खड़े होकर मीडिया की मार्फ़त अपनी बात देशवासियों के सामने रखने के लिए उसका मुंह ताक रहे थे.&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;"अच्छा, बहुत अच्छा महसूस कर रहे हैं. यह तो होना ही चाहिए था. भाई, महिलाओं को आरक्षण नहीं दीजिएगा तो क्या पुरुषों को दीजिएगा आप?" निलंबन की पीड़ा से वाक़िफ सांसद ने अपने चेहरे को हंसने लायक बनाते हुए सवालपूर्ण जवाब दिया.&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;"लेकिन आपने तो सबसे ज़्यादा हंगामा काटा था कि इसे हरगिज़ पारित नहीं होने देंगे और ईंट से ईंट बजा देंगे ?" रामभरोसे ने अपनी तरफ से 'ईंट से ईंट बजा देने' वाला अपना वह प्रिय मुहावरा इस्तेमाल करते हुए पूछा, जो वे अपने स्थानीय चैनल के मालिक के सामने अपनी तनख्वाह बढ़वाने की मांग के तहत अकसर ही इस्तेमाल कर लिया करते थे.&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;"हमने ऐसा कुछ नहीं कहा, ग़लत बात है यह." जो बात ग़लत है, वह हमेशा ग़लत रहेगी, इस बात को सिद्ध करने के अंदाज़ में जवाब मिला.&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;"लेकिन कल तो आपने कहा था कि इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा?" रामभरोसे ने अपने चैनल मालिक के भतीजे रुपी कैमरामैन को कोहनी से घसीटते हुए उस तरफ खड़ा किया, जिधर से सांसद महोदय का चेहरा दिखाने के लिए सांसद को खुद अपना मुंह कैमरे के सामने ना लाना पड़े.&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;"अब वो तो कल की बात थी. कल की बात कल कीजियेगा, फिलहाल, आप आज की बात करिए. आज हम बहुत खुस हैं कि हमारे दिल की जो बात है, वो मान ली गयी. महिलाओं को तो यह बहुत पहले ही मिल जाना चाहिए था. इस सरकार में बैठे चंद चापलूसों की वजह से यह जो फैसला है, वो देर से लिया गया." सरकार को समर्थन देने के बावजूद संसद से निलंबित सांसद ने पुनः वापसी की उम्मीद में बिना कैमरे में अपना मुंह घुसाए बिना अपनी बात स्थानीय चैनल के माध्यम से देश की तमाम महिलाओं को खुश करने लिहाज़ से कह डाली.&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;"सच क्या होता है और झूठ क्या होता है, यह समझाए बिना हमने अभी सदन से निष्काषित सांसद से अपनी बेबाक बातचीत सुनवाई. अब हम उन महिला सांसदों से भी बात करेंगे, जो इस विधेयक के पारित होने से वाक़ई काफी खुश हैं." कैमरे के सामने इतना कहकर अपने माइक को अपने हाथों में दबोचे राम भरोसे लाल तेज़ी से महिलाओं के समूह की तरफ चल दिए.&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2673854500109758020-6649314805587110655?l=www.starnewsagency.in' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;p&gt;&lt;a href="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/eq5zcujXG-H1NJLHvZAS3XW4oZs/0/da"&gt;&lt;img src="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/eq5zcujXG-H1NJLHvZAS3XW4oZs/0/di" border="0" ismap="true"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt;&lt;br/&gt;
&lt;a href="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/eq5zcujXG-H1NJLHvZAS3XW4oZs/1/da"&gt;&lt;img src="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/eq5zcujXG-H1NJLHvZAS3XW4oZs/1/di" border="0" ismap="true"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;</description><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2010-03-10T09:39:47.006+05:30</app:edited><media:thumbnail url="http://2.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/S5cbbmVGpRI/AAAAAAAAFIA/UlfEaGhbDZo/s72-c/india-women-vote.jpg" height="72" width="72" /><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>राज्यसभा में महिला आरक्षण विधेयक पारित</title><link>http://www.starnewsagency.in/2010/03/blog-post_4280.html</link><category>राष्ट्रीय</category><category>विविध</category><category>*</category><author>noreply@blogger.com (Star News Agency)</author><pubDate>Tue, 09 Mar 2010 20:06:08 PST</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-2673854500109758020.post-3098945794923893152</guid><description>&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/S5caqFzhNqI/AAAAAAAAFH4/FFxXo8iNN90/s1600-h/parliament.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" src="http://3.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/S5caqFzhNqI/AAAAAAAAFH4/FFxXo8iNN90/s320/parliament.jpg" vt="true" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;strong&gt;स्टार न्यूज़ एजेंसी &lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;नई दिल्ली.&lt;/strong&gt; लंबी जद्दो-जहद के बाद आखिर आज राज्यसभा में महिला आरक्षण विधेयक भारी बहुमत से पारित होने से एक नया इतिहास रचा गया है. महिला आरक्षण के पक्ष में 186 मत डाले गए, जबकि इसके खिलाफ़ सिर्फ़ एक वोट ही दिया गया. &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;पहली बार 12 सितंबर 1996 को तत्कालीन प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा के नेतृत्व में संयुक्त मोर्चा सरकार ने महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण संबंधी विधेयक लोकसभा में पेश किया था. इसके बाद 9 दिसंबर 1996 को भाकपा की गीता मुखर्जी की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने महिला आरक्षण पर अपनी रिपोर्ट पेश की. विपक्षी दलों का समर्थन न मिलने की वजह से लोकसभा में यह विधेयक पारित नहीं हो पाया. इसके बाद दिसंबर 1998 में एनडीए सरकार के दौरान प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने महिला आरक्षण से संबंधित विधेयक दोबारा पेश किया, लेकिन इसका वही हश्र हुआ. फिर 23 दिसंबर 1999 को लोकसभा में विपक्षी सांसदों ने महिला आरक्षण विधेयक को तत्कालीन कानून मंत्री राम जेठमलानी के हाथ से छीन लिया और सदन में शोर-शराबा किया. करीब एक दशक बाद जून 2008 में राष्ट्रपति ने 15वीं लोकसभा के गठन पर अपने अभिभाषण में महिला आरक्षण पर मौजूदा यूपीए सरकार की प्रतिबद्धता का ज़िक्र करते हुए इस मुद्दे को एक बार फिर से ज़िंदा कर दिया. फरवरी 2010 में कैबिनेट ने नए संशोधन के साथ महिला आरक्षण विधेयक को मंजूरी दे दी. इसी माह 4 मार्च को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने विधेयक पास करने का आह्वान करते हुए महिलाओं के हक़ की बात की. अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस ८ मार्च को भारी हंगामे के बीच महिला आरक्षण विधेयक राज्यसभा में पेश किया गया. हालांकि इस विधेयक को लेकर संसद के दोनों सदनों में काफ़ी शोर-शराबा हुआ. राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और समाजवादी पार्टी (सपा) सांसदों ने इसका जमकर विरोध किया. इतना ही नहीं महिला आरक्षण विधेयक से नाराज़ राष्ट्रीय जनता दल और समाजवादी पार्टी ने केंद्र की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) की सरकार से समर्थन भी वापस ले लिया. &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;क़ाबिले-गौर है कि किसी भी विधेयक पारित होने के लिए सदन में मौजूद सांसदों की दो तिहाई संख्या उसके पक्ष में होनी चाहिए. इसलिए लोकसभा व विधानसभाओं में महिलाओं को 33 फ़ीसदी आरक्षण दिलाने वाले इस विधेयक की मंज़ूरी के लिए 233 की 155 मतों की ज़रूरत थी और इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी, उसके सहयोगी दलों, वाम दलों व यूपीए के एक मंच पर आ जाने से इसकी सारी रुकावटें दूर हो गईं. &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;बहुजन समाजवादी पार्टी के राज्यसभा में सभी 15 सदस्यों ने भी इसका बहिष्कार किया, वहीं तृणमूल कांग्रेस ने भी इस विधेयक के मतदान में हिस्सा नहीं लिया. अपने तर्क में पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने कहा कि उनकी पार्टी को विधेयक पारित कराने के तरीके की जानकारी नहीं दी गई थी. साथ ही प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने उन्हें आश्वासन दिया था कि पहले इस मामले पर एक सर्वदलीय बैठक होगी. &lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2673854500109758020-3098945794923893152?l=www.starnewsagency.in' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;p&gt;&lt;a href="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/iyuTM3HXXOMxhhAa5v8an-47vrw/0/da"&gt;&lt;img src="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/iyuTM3HXXOMxhhAa5v8an-47vrw/0/di" border="0" ismap="true"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt;&lt;br/&gt;
&lt;a href="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/iyuTM3HXXOMxhhAa5v8an-47vrw/1/da"&gt;&lt;img src="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/iyuTM3HXXOMxhhAa5v8an-47vrw/1/di" border="0" ismap="true"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;</description><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2010-03-10T09:36:08.876+05:30</app:edited><media:thumbnail url="http://3.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/S5caqFzhNqI/AAAAAAAAFH4/FFxXo8iNN90/s72-c/parliament.jpg" height="72" width="72" /><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>महिला आरक्षण पर कांग्रेस कर रही पाखंड : माहेश्वरी</title><link>http://www.starnewsagency.in/2010/03/blog-post_944.html</link><category>राष्ट्रीय</category><author>noreply@blogger.com (Star News Agency)</author><pubDate>Tue, 09 Mar 2010 19:16:06 PST</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-2673854500109758020.post-5127734262298027569</guid><description>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/S5cO027OgBI/AAAAAAAAFHs/ft1WRkhSXGk/s1600-h/kiran.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" src="http://3.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/S5cO027OgBI/AAAAAAAAFHs/ft1WRkhSXGk/s320/kiran.jpg" vt="true" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;स्टार न्यूज़ एजेंसी &lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;नई दिल्ली.&lt;/strong&gt; भाजपा महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष किरण माहेश्वरी ने कहा है कि विगत 15 वर्षों से कांग्रेस महिला आरक्षण पर पाखंड की राजनीति कर रही है। सदन में हो-हल्ला करने वाले सदस्य कांग्रेस के समर्थक दलों के ही है। पूर्व में भी कई महत्वपूर्ण विधेयक बिना चर्चा के शोर-गुल के मध्य भी सरकार ने पारित करवाए थे। सर्वदलीय बैठक के बहाने कांग्रेस महिला आरक्षण को ठंडे बस्ते में डालना चाहती है। &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;आज भारतीय जनता पार्टी राष्ट्रीय महिला मोर्चा द्वारा 33 प्रतिशत महिला आरक्षण बिल पास न होने पर सैकड़ों की तादाद में महिला कार्यकताओं ने अपनी गिरफ्तारी संसद के बाहर दी। महिलाओं का नेतृत्व किरण माहेश्वरी एवं महिला मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष&amp;nbsp;सरिता चौधरी ने किया। प्रदर्शन में महामंत्री रेखा गुप्ता एवं पार्षद तथा बड़ी संख्या में महिलाएं मौजूद थीं। सैकड़ों की संख्या में महिलाएं संसद पर इक­ट्ठी हुईं तथा अपनी मांग प्रधानमंत्री को बताना चाहती थीं, लेकिन बीच में ही पुलिस द्वारा रोक लिया गया।&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;किरण माहेश्वरी ने कहा कि सरकार भविष्य में महिलाओं के साथ मजाक बंद करें अन्यथा भाजपा महिला मोर्चा द्वारा पूरे देश में आंदोलन चलाया जाएगा तथा बिल को पास करवाने के लिए सरकार पर दबाव बनाया जाएगा। &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;महिला मोर्चा प्रदेश अध्यक्षा, सरिता चौधरी ने कहा कि उन्हें सरकार की नीयत में खोट नजर आ रहा है अन्यथा बहुमत होने पर भी बिल का पास न होना कहीं न कहीं सरकार की कमजोरी दिखाता है। महिलाओं को संसद में, विधान सभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण मिलना ही चाहिए। भारतीय जनता पार्टी द्वारा बिल का समर्थन करना अपनी भूमिका का सकारात्मक तरीके से निवर्हन है तथा भाजपा चाहती है कि यह बिल तुरंत पास होना चाहिए।&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2673854500109758020-5127734262298027569?l=www.starnewsagency.in' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;p&gt;&lt;a href="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/WhcVnNhb2_9okVxwQgD6a6i6KnA/0/da"&gt;&lt;img src="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/WhcVnNhb2_9okVxwQgD6a6i6KnA/0/di" border="0" ismap="true"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt;&lt;br/&gt;
&lt;a href="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/WhcVnNhb2_9okVxwQgD6a6i6KnA/1/da"&gt;&lt;img src="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/WhcVnNhb2_9okVxwQgD6a6i6KnA/1/di" border="0" ismap="true"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;</description><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2010-03-10T08:46:06.724+05:30</app:edited><media:thumbnail url="http://3.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/S5cO027OgBI/AAAAAAAAFHs/ft1WRkhSXGk/s72-c/kiran.jpg" height="72" width="72" /><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>बीटी कपास की खेती से उपज में 31 फ़ीसद का इज़ाफ़ा</title><link>http://www.starnewsagency.in/2010/03/31.html</link><category>कृषि</category><author>noreply@blogger.com (Star News Agency)</author><pubDate>Tue, 09 Mar 2010 07:11:07 PST</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-2673854500109758020.post-4762211936120817697</guid><description>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/S5Zk8c1YN7I/AAAAAAAAFFU/7DV96OR_S6I/s1600-h/cotton_india.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" src="http://2.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/S5Zk8c1YN7I/AAAAAAAAFFU/7DV96OR_S6I/s320/cotton_india.jpg" vt="true" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;स्टार न्यूज़ एजेंसी&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;नई दिल्ली.&lt;/strong&gt; बीटी कपास के तहत क्षेत्र 2002-03 में 29,000 हैक्टेयर से बढ़कर 2009-10 में 80,000 हैक्टेयर (अनुमानित) हो गया है। बीटी कपास की औसत उपज भी 2001-02 में 300 किलोग्राम प्रति हैक्टेयर से बढ़कर 2007-08 में 560 किलोग्राम प्रति हैक्टेयर हो गई है। बीटी कपास की खेती से उपज में 31 प्रतिशत वृध्दि हुई है, कीटनाशकों के प्रयोग में 39 प्रतिशत की कटौती हुई है तथा किसानों की लाभप्रदता में 80 प्रतिशत से अधिक की वृध्दि हुई है। &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;कृषि मंत्रालय तथा उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय में राज्य मंत्री प्रो. के.वी. थामस ने आज लोकसभा में में यह जानकारी दी. उन्होंने बताया कि केन्द्रीय कपास अनुसंधान संस्थान, नागपुर राज्य स्तर पर 9 प्रमुख कपास उत्पादक राज्यों के राज्य कृषि विश्वविद्यालयों से सहयोग करते हुए विस्तृत अध्ययन कराता रहा है। अब तक एकत्रित की गई जानकारी से पता चलता है कि बीटी कपास के प्रयोग से इन कपास उत्पादक राज्यों में उपज में वृध्दि हुई है। समूचे देश में कपास में बॉलवार्य की समस्या में महत्त्वपूर्ण कमी आई है तथा कपास में प्रयोग में लाये जाने वाले कीटनाशकों के मंडी अंश में कटौती हुई है।&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2673854500109758020-4762211936120817697?l=www.starnewsagency.in' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;p&gt;&lt;a href="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/yyGLBns6CAK_R6TA33M_pRCytJs/0/da"&gt;&lt;img src="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/yyGLBns6CAK_R6TA33M_pRCytJs/0/di" border="0" ismap="true"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt;&lt;br/&gt;
&lt;a href="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/yyGLBns6CAK_R6TA33M_pRCytJs/1/da"&gt;&lt;img src="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/yyGLBns6CAK_R6TA33M_pRCytJs/1/di" border="0" ismap="true"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;</description><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2010-03-09T20:41:07.772+05:30</app:edited><media:thumbnail url="http://2.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/S5Zk8c1YN7I/AAAAAAAAFFU/7DV96OR_S6I/s72-c/cotton_india.jpg" height="72" width="72" /><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>देहरादून में सामुदायिक रेडियो केन्द्र शुरू</title><link>http://www.starnewsagency.in/2010/03/blog-post_3849.html</link><category>राज्य</category><category>विविध</category><author>noreply@blogger.com (Star News Agency)</author><pubDate>Tue, 09 Mar 2010 06:55:27 PST</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-2673854500109758020.post-7921006920794591512</guid><description>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/S5ZhSXGXU6I/AAAAAAAAFFM/khTmGq9-MQ0/s1600-h/map-location.gif" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" src="http://1.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/S5ZhSXGXU6I/AAAAAAAAFFM/khTmGq9-MQ0/s320/map-location.gif" vt="true" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;स्टार न्यूज़ एजेंसी &lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;देहरादून (उत्तराखंड).&lt;/strong&gt; भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने देहरादून के दृष्टिबाधितों के लिए राष्ट्रीय संस्थान में एक सामुदायिक रेडियो केन्द्र स्थापित करने, उसका रखरखाव करने और उसके संचालन के लिए अनुमति समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं।&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;अन्तर्मंत्रालय समिति की सिफारिशों और अनेक मंत्रालयों से आवश्यक मंजूरी मिलने के बाद इस संस्थान को सहमति पत्र जारी किया गया। इस समझौते के अनुसार सामुदायिक रेडियो केन्द्र तीन महीनों के भीतर काम करने लगेगा। इसके साथ ही देश में सामुदायिक रेडियो केन्द्रों की तादाद बढ़कर 66 हो जाएगी। &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;यह सामुदायिक रेडियो केन्द्र नेत्रहीन लोगों, उनके परिवारों और सामुदायिक संस्थानों के लिए शिक्षा, प्रशिक्षण, रोजगार और अन्य उपलब्ध सुविधाओं पर सूचना सम्प्रेषित करने के उद्देश्य से किया जाएगा और यह नेत्रहीन लोगों की प्रतिभा दर्शाने के लिए एक मंच के रूप में काम करेगा। यह सामुदायिक रेडियो महिलाओं के सशक्तीकरण, दृष्टिबाधित लोगों की शिक्षा और पुनर्वास के सभी पहलुओं पर अध्ययन आयोजित, प्रायोजित, समन्वित या आर्थिक सहायता देने के लिए और दृष्टिबाधित बच्चों और वयस्कों को क्रमश: स्कूलों और समाज में एकीकृत करने के लिए एक अवसर प्रदान करता है। सूचना प्रसारण मंत्रालय सामुदायिक रेडियो केन्द्रों की स्थापना को प्रोत्साहन देता है, क्योंकि इससे स्थानीय समुदायों को अपने विचार प्रकट करने का, अपनी बातों को बांटने का अवसर प्रदान करता है और खासतौर पर महिला, युवा और सीमान्त समूहों को स्थानीय स्वशासन और क्षेत्र के पूर्ण सामाजिक-आर्थिक और सांस्कृतिक विकास में भागीदार बनने की शक्ति प्रदान करता है। &lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2673854500109758020-7921006920794591512?l=www.starnewsagency.in' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;p&gt;&lt;a href="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/NUJOsMJukTwpEtasPsK5cBbcCJ8/0/da"&gt;&lt;img src="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/NUJOsMJukTwpEtasPsK5cBbcCJ8/0/di" border="0" ismap="true"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt;&lt;br/&gt;
&lt;a href="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/NUJOsMJukTwpEtasPsK5cBbcCJ8/1/da"&gt;&lt;img src="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/NUJOsMJukTwpEtasPsK5cBbcCJ8/1/di" border="0" ismap="true"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;</description><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2010-03-09T20:25:27.153+05:30</app:edited><media:thumbnail url="http://1.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/S5ZhSXGXU6I/AAAAAAAAFFM/khTmGq9-MQ0/s72-c/map-location.gif" height="72" width="72" /><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title></title><link>http://www.starnewsagency.in/2010/03/blog-post_4210.html</link><category>राष्ट्रीय</category><author>noreply@blogger.com (Star News Agency)</author><pubDate>Tue, 09 Mar 2010 07:20:49 PST</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-2673854500109758020.post-6230744070690525828</guid><description>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/S5ZnQOwKh5I/AAAAAAAAFFc/aFXX2PvS9CU/s1600-h/untitled.bmp" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" src="http://3.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/S5ZnQOwKh5I/AAAAAAAAFFc/aFXX2PvS9CU/s320/untitled.bmp" vt="true" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;स्टार न्यूज़ एजेंसी&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;नई दिल्ली.&lt;/strong&gt; नेशनल एल्युमीनियम कंपनी लिमिटेड (नालको) ने दामनजोड़ी, जिला कोरापुट में नालको की परियोजनाओं की स्थापना के कारण कुल 600 परिवार विस्थापित हुए थे। उनकी जिला प्रशासन और कंपनी द्वारा संयुक्त रूप से पहचान की गई थी। समय के उस बिन्दु पर राज्य सरकार द्वारा निर्धारित दर के अनुसार नालको द्वारा अधिग्रहीत भूमि और घरों के लिए सभी विस्थापित/प्रभावित परिवारों को देय मौद्रिक मुआवजा अदा कर दिया गया है।&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;खान मंत्री और पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री बिजय कृष्ण हांडिक ने आज लोकसभा में बताया कि भूमि अधिग्रहण के समय कंपनी की आरंभिक वचनबध्दता के अनुसार पहचान किए गए कुल 600 विस्थापित परिवरों में से 598 परिवारों को दामनजोड़ी मे विशेष रूप से निर्मित दो पुनर्वास कालोनियों में पुनवार्सित किया गया और शेष दो परिवारों ने अपने जन्मजात स्थान में ठहरने को तरजीह दी। 596 भूमि विस्थापित परिवारों से प्रत्येक एक नामित व्यक्ति को कंपनी में रोजगार प्रदान किया गया है। शेष चार मामलों में नालको जिला प्रशासन द्वारा नामांकन को अंतिम रूप न दिए जाने की बाधा के कारण आज तक रोजगार प्रदान नहीं कर सका है। &lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2673854500109758020-6230744070690525828?l=www.starnewsagency.in' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;p&gt;&lt;a href="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/KrucNar6h_-kGa4FFvjLw_66eOA/0/da"&gt;&lt;img src="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/KrucNar6h_-kGa4FFvjLw_66eOA/0/di" border="0" ismap="true"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt;&lt;br/&gt;
&lt;a href="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/KrucNar6h_-kGa4FFvjLw_66eOA/1/da"&gt;&lt;img src="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/KrucNar6h_-kGa4FFvjLw_66eOA/1/di" border="0" ismap="true"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;</description><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2010-03-09T20:50:49.443+05:30</app:edited><media:thumbnail url="http://3.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/S5ZnQOwKh5I/AAAAAAAAFFc/aFXX2PvS9CU/s72-c/untitled.bmp" height="72" width="72" /><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>हज़रत मौलाना रहमतुल्लाह कैरानवी</title><link>http://www.starnewsagency.in/2010/03/blog-post_4518.html</link><category>अंतर्राष्ट्रीय</category><category>धर्म</category><author>noreply@blogger.com (Star News Agency)</author><pubDate>Tue, 09 Mar 2010 06:36:36 PST</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-2673854500109758020.post-2900411624277260114</guid><description>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/S5Yhpi2UcGI/AAAAAAAAFE8/P_u1WU5tl1M/s1600-h/kairanvi-madrsa-saulatiya.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" src="http://3.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/S5Yhpi2UcGI/AAAAAAAAFE8/P_u1WU5tl1M/s320/kairanvi-madrsa-saulatiya.jpg" vt="true" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;मुहम्‍मद उमर कैरानवी&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;em&gt;क़लम और ज़बान से धर्म की तो तलवार से देश के लिए अंग्रेजों से टक्‍कर लेने वाली शख्सियत, जिसे शिया, सुन्‍नी, बरेलवी और देवबंदी यहां तक कि इस्‍लाम से निकाले गए. अहमदी भी अपना मानते हैं कि बारे में जरूरी है जान लिया जाए, मेरी जानकारी में नये उलमा यानी गदर से अब तक ऐसी कोई आलिम शख्सित नहीं हुई जिसे दूसरे मसलकों वालों ने भी इतना प्‍यार दिया हो, साजिश के तहत इन से संबंधित बहुत कुछ मिटा दिया गया था, यही एक कारण है शायद इनके बारे में अधिकतर अनजान हैं.&lt;/em&gt; &lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;योद्धा सृष्टा, इमामुल मनाजिरीन और बानीये दारूल उलूम हरम मदरसा सौलतिया मक्क़ा मुअज्जमा हज़रत मौलाना रहमतुल्लाह कैरानवी जमादीउल अव्वल 1233 हिजरी को कस्बा कैराना (जिला मुजफ़्फ़रनगर, यू.पी.) में पैदा हुये। आप के जद्दे आला (पूर्वज) शेख अब्दुर्रहमान गाजरोनी थे, जो सल्तनत महमूद के साथ हिन्दोस्तान आए और पानीपत में निवास कर लिया आप के जन्म से पूर्व माता ने सपना देखा कि तेरे यहां चांद समान पुत्र पैदा होगा और उसका प्रकाश समस्त संसार में फैलेगा! मौलाना रहमतुल्ला ने 12 वर्ष की आयु में कुरान मजीद स्मरण कर दीनियात और फारसी की प्राथमिक पुस्तकें अपने बड़ों से पढ़ी. तत्पश्चात शिक्षा ग्रहण हेतु देहली प्रस्थान किया और मौलाना मोहम्मद हयात साहब के मदरसे में प्रविष्ट हुए. मौलाना मोहम्मद हयात के मदरसे के विषय में सर सैयद ने लिखा है कि आप की शिक्षा के प्रसार से निम्न श्रेणी का शिक्षार्थी उस वक्त के विद्वानों से उच्च कोटि का माना जाता था। दूसरे महत्वपूर्ण शिक्षक मौलाना अब्दुर्रहमान चिश्ती थे जो उस्ताद शाहे वक्त हयात साहब के शिष्यों मे थे और सम्पूर्ण ज्ञान में दक्षता रखते थे। हकीम फैज मौहम्मद साहब जो कि अपने जमाने के प्रसिद्ध एवं योग्य चिकित्सक थे, उन से ज्ञानर्जन किया। आप का शजरा नसब (वंश लता) से ज्ञात होता है कि हर युग में इस वंश ने चिकित्सा सेवा की है मुगल बादशाह जहांगीर के वज़ीर नवाब मुकर्रब खां कैरानवी ने चिकित्सकीय सेवा के साथ साथ महत्वपूर्ण कार्य सम्पन्न किये थे। लेखक लोकारनम से गणित की शिक्षा पाई. दूषित वातावरण और हिन्दोस्तान में ईसाईयत के बढ़ते हुए प्रभुत्व को रोकने की चिंता ने आपको इस का अवसर न दिया कि आप अपनी शिक्षा को यथावत जारी रख सकें। दरबार कैराना की मस्जिद में मौलाना ने एक दीनी मदरसा स्थापित किया. इस मदरसे से लाभान्वित शिक्षार्थियों में मौलाना अब्दुस्समी, लेखक ‘हम्द बारी’ योग्य विद्यार्थी प्रसिद्ध हुए। मौलाना मरहूम की शादी 1256 हिजरी में अपनी खाला की लड़की से हुई. देहली में महाराजा हिन्दुराव के यहां अमीर मुंशी बनकर रहे कुछ घरेलू मजबूरियों के कारण मौलाना को कैराना वापस आना पड़ा. कैराना पहुंचकर पठन तथा पाठन के साथ रददे नसारा, ईसाईयत के विरोध में युद्ध पर महत्वपूर्ण पुस्तक, इजालतुल औहाम लिखनी शुरू की. इस पुस्तक की छपाई के दौरान ही मौलाना बहुत बीमार हो गए. एक रोज़ मौलाना फ़ज्र की नमाज़ के पश्चात रोने लगे. संबंधियों ने समझा कि आप जीवन से निराश हो गए हैं। आपने बताया कि बखुदा स्वस्थ होने का कोई लक्षण नहीं, परन्तु आराम होगा इंशा अल्लाह. रोने का कारण यह है कि सपने में हज़ूर सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम तशरीफ लाए, हज़रत सददी के अकबर साथ हैं। हज़रत फ़रमाते हैं "ए जवान तेरे लिए रसूलुल्लाह की यह खुशखबरी है अगर तकलीफ़ ‘इजालतुल औहाम’ की वजह है तो वह आराम की वजह भी होगी, अल्हम्दु लिल्लाह वह स्वस्थ हो गए। इस पुस्तक में ईसाइयत के अकसर प्रश्नों के उत्तर हैं। इजालतुल औहाम के छपने से पहले ही देहली में काफ़ी प्रसिद्ध हो गई, जिस का विरोध भी प्रारंभ हो गया. इस कारण मौलाना रहमतुल्लाह कैरानवी ने उस समय के योग्य विद्वान मौलाना नूरूल हसन साहब कांधलवी को छपाई हेतु तैयार कागजात संशोधन के लिये भेजे थे, मौलाना रहमतुल्लाह साहब इजालतुल औहाम की छपाई के विषय में देहली आए तो उन की भेंट काक्टर वजीर खां से हुई, जो मौलाना रहमतुल्लाह के सच्चे सहायक मित्र सिद्ध हुए। डाक्टर साहब आगरे में अंग्रजी चिकित्सालय में प्रतिष्ठित पद पर सुशोभित थे। अंग्रेजी की उच्च शिक्षा के कारण अंग्रेजी अवतरणों की व्याख्या करने में मौलाना के सहायक बन गए. मौलाना ने उनको कई स्थान पर रहमत के फरिशत जैसा बताया है। डाक्टर वज़ीर खां जब डाक्टरी की डिग्री लेने इंग्लैंड गए तो वहां से ईसाईयों की बहुत-सी धार्मिक पुस्तकें साथ लेते आए. उन पुस्तकों का अवलोकन आगरे के मुनाजिरे (तर्क वितर्क) में बहुत काम आया, डाक्टर साहब अंग्रेजी के अलावा इबरानी यहूदी भाषा भी जानते थे। आगरे में ईसाई पादरी, उलमा के मौनधारण से अनुचित लाभ उठाते थे और जनता में परोपेगन्डा करते फिरते थे कि हमारे धर्म की सत्यता का भय इतना है कि हिन्दोस्तानी विद्वान हमारे तर्क का उत्तर नहीं दे सकते और अपने धर्म इस्लाम की सत्यता सिद्ध नहीं कर सकते. इसी बीच मौलाना रहमतुल्लाह वजीर खां के निमंत्रण पर आगरे गए. आगरे में मौलाना के दो मुनाजरे हुए जो कि छोटा मुनाजरा, बड़ा मुनाजरा के नाम से प्रसिद्ध हैं। छोटा मुनाजरा दो तीन पादरी मौलाना रहमतुल्लाह और डाक्टर वज़ीर खां के बीच हुआ जिस में पादरियों को पराजय का मुंह देखना पड़ा, लेकिन यह बात उन लोगों तक ही सीमित रही इस कारणवश मौलाना ने बड़े मुनाजरे की तैयारी की, ताकि दुनिया देखे और सुने। मौलाना की कोशिशों से पादरी फन्डर आम मुनाजरे के लिए तैयार हुआ. शर्त यह तय पाई कि जो हार जाएगा दूसरे का धर्म स्वीकार कर लेगा। मुनाजरा तीन दिन चलना था, मगर दो रोज की पराजय ने पादरियों को तीसरे दिन मुंह दिखाने के काबिल न छोड़ा और वह न आए। मौलाना रहमतुल्लाह कैरानवी और डाक्टर वजीर खां ने इन्जील, बाईबिल के जो नुस्खे जमा किए थे, उन्हें भरे मजमे में दिखाकर यह साबित किया कि किसी में कुछ हटा दिया गया किसी में कुछ बढा दिया गया, भरे मजमे में पादरियों के इन्जील में परिवर्तन स्वीकार करना पडा। मुनाजिरे (तर्क-वितर्क) से पादरियों की शिकस्त का लाभ यह हुआ कि पादरियों का जोर शोर घट गया और उन्होंने धर्म प्रचार व प्रसार की पुस्तकें जो अधिकतर बांटते थे. एकदम बांटना छोड़ दी, मौलाना और भी बड़ा मुनाजरा करना चाहते थे, मगर पादरी फान्डर हिन्दुस्तान ही से चला गया बाद में मौलाना रहमतुल्ला कैरानवी साहब से कुस्तुनतुनिया में पादरी फान्डर टकराता के मौलाना की आगमन की खबर मिलते ही वह वहां से भी चला गया। ईसाईयत की रही सही कसर मौलाना के शागिर्दो ने तोड़ दी। मौलाना शरफुल हक़ वालिद इमदाद साबरी ने मौलाना रहमतुल्लाह से मुनाजरे की इइजाज़त लेकर इसाईयों से सैकडों मुनाजरे किये अल्हमदु लिल्लाह सबमें पादरियों को हार हुई। मौलाना रहमतुल्लाह साहब की पुस्तकें और मुनाजरे ईसाईयों के उत्तर में कलमी जिहाद था और प्रथम स्वतंत्रता संग्राम 1857 की भूमिका साबित हुई। मेरठ के धर्म योद्धाओं ने स्वतंत्रता का युद्ध प्रारम्भ कर दिया। अन्य यौद्धओं के साथ मौलाना रहमतुल्ला कैरानवी ने भी स्वतंत्रता संग्राम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और जंग में अपने मित्रा डा.वजीर खां और मौलवी फेज अहमद बदांयूनी के साथ स्वतंत्रता संग्राम मे सम्मिलित हुए। कस्बा कैराना में जमींदारी शेखों व गूजरों के हाथों में थी, जिनमें नैतिक गुण तथा उत्साह यौवन पर था। थाना भवन और कैराना का एक मोर्चा स्थापित किया गया योद्धा मुकाबला करते रहे। शामली की तहसील पर हमला किया गया। थाना भवन का मोर्चा हाजी इमदादुल्ला मुहाजिर मक्की तथा कैराना का मोर्चा मौलाना रहमतुल्ला कैरानवी संभाले हुए थे। उस जमाने में शाम की नमाज के बाद धर्म योद्धाओं के संगठन व दीक्षा के लिए नक्कारे की आवाज पर एकत्रित किया जाता और ऐलान होताः ‘‘मुल्क खुदा का और हुक्म मौलवी रहमतुल्लाह का’’ शामली की तहसील तोड़ने में हाफिज जामिन साहब शहीद हुए, इन्हीं कारणवश मौलाना रहमतुल्लाह कैरानवी का वारन्ट जारी कर दिया गया, मौलाना रहमतुल्लाह कैरानवी ने पंजीठ में पनाह ली। अंग्रेज फौज ने गांव वालों को परेशान किया जिस पर मौलाना ने कहा इस से अच्छा हो कि मैं गिरफ़्तार हो जाऊं, इस पर गांव के चैधरी अज़ीम साहब ने कहा कि अगर पूरा गाँव भी गिरफ़्फतार हो जाए और उनको फाँसी पर लटका दिया जाए तो ऐसे वक्त भी आपको फौज के हवाले नहीं किया जाएगा, ऐसे बलिदानी थे मौलाना के मित्रगण, यहाँ यह तथ्य उल्लेखनिय है कि इन महान स्वतंत्रता सेनानियों की पाठय पुस्तकों के इतिहास में उपेक्षा की जा रही है इन्हीं दिनों में मौलाना रहमतुल्लाह अपना नाम मुसलिहुददीन रख कर दिल्ली रवाना हुए और जयपुर व जोधपुर के खतरनाक जंगलों को पैदल तय करते हुए सूरत बन्दरगाह पहुंचे, सूरत से हज के लिए रवाना हुए एक लम्बे और कठिनाइयों से परिपूर्ण यात्रा करके अल्लाह पर विश्वास करते हुए मक्का मुअज्जमा पहुंचे, ताकि अल्लाह के घर शान्त वातावरण में इस्लाम को फैला सकें।&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;1857 में शिक्षा जगत के नायक मौलाना मोहम्मद कासिम थे, जिन्होंने देवबन्द में स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए एक छावनी स्थापित की. बाद में उसका नाम मदरसा देवबंद रखा गया। जिसे दारूल उलूम देवबंद के नाम से एतिहासिक प्रसिद्धी प्राप्त है। मौलाना मोहम्मद कासिम का दृष्टिकोण था ‘‘शिक्षा एक शक्ति है’’ मौलाना रहमतुल्लाह कैरानवी ने भी इसी दृष्टिकोण के अनुसार एक मदरसा स्थापित किया जिसका नाम मदरसा सौलतिया रखा गया। धार्मिक शिक्षा मक्का से चलकर हिन्दुस्तान आई और हिन्दुस्तानी विद्वान मौलाना रहमतुल्लाह कैरानवी का यह चमत्कार है कि उन्होंने इस ज्ञान को पुनः मक्का पहुंचा दिया. उनके समय के पश्चात ये शिक्षा केन्द ज्ञान की ज्योति तथा धर्म की सेवा निरन्तर कर रहा है। कैराना व आसपास के इलाके के हाजी जब मक्का जाते हैं तो इस मदरसे को देखकर गर्व महसूस करते हैं।&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;वर्तमान काल के लोकप्रिय कवि कलीम अहमद ‘आजिज’ मदरसा सौलतिया का परिचय अपनी रचना ‘यहां से मदीना, मदीना से काबा’ में यूं देते हैं ‘‘ये मदरसे का मदरसा है खानकाह की खानकाह है, दफ्तर का दफ्तर है, सराय की सराय है जो जिस कैफियत का इच्छुक हो वो मिलेगी। ये एक ऐसी संस्था है जो सदियों पहले हुआ करती थी यहां शिक्षा का अभिलाषी ज्ञानार्जन कर सकता है बुद्धि के इच्छुक को बुद्धि मिलेगी, जुनूं के दिवानों के जुनून प्राप्त होता है, मुहब्बत चाहिए तो जितनी चाहिए उससे ज़्यादा मिले रोटी, कपड़ा, मकान चाहिए तो बकदरे जर्फ वो भी मौजूद है फ़तवा चाहिए तो फ़तवा हाज़िर, अमानत रखनी हो तो आजाओ छोड जाओ ये घर तुम्हारा घर है, अमानत वापस लेनी चाहो तो वह पड़ी है उठा लो, साहित्य चाहिए तो सुबहान अल्लाह वो भी हाज़िर, संक्षिप्त ये कि मानवता का डिपार्टमेन्टल स्टोर है’’।&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;मौलाना रहमतुल्ला की कई रचनाएं बाजार में उपलब्ध नहीं वर्तमान में फ़रीद बुक डिपो,नई दिल्ली ने उर्दू में ‘‘मुजाहिद-ए-इस्लाम मौलाना रहमतुल्लाह कैरानवी’’ पुस्तक छापकर इस कमी को दूर किया है। मौजूदा अध्यक्ष मौलाना हशीम साहब ने एक बार टेलीफोन वार्ता में बताया कि मौलाना से मुताल्लिक पुस्तकें आदि पोस्ट बाक्स न. 114, मदरसा सौलतिया, मक्का से मुफ़्त मंगाई जा सकती हैं। मदरसे की वेसाईट http://www.alsawlatiyah.com/ जो अभी अरबी में है उसे जल्द ही उर्दू और इंडोनेशियन में भी कर दिया जाएगा। उपलब्ध पुस्तकें ‘इजालतुश्शुकूक’’ में ईसाइयों के 29 सवालों के जवाब हैं और उसमें मोहम्मद सल्लल्लाहू अलैहि वसल्ल्म के नबी होने पर और इन्जील ईसाइयों की धार्मिक पुस्तक में रददो बदल साबित की गयी है। पुस्तक ऐजाज-ए-ईसवी में मौलाना ने इन्जील का अविश्वसनीय होना सिद्ध किया है।&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;पुस्तक 'इज़हार उल हक़' जो असल अरबी भाषा में है मौलाना की अन्तिम आयु की है जिसका कई भाषाओं में अनुवाद हो चुका है। अंग्रेजी संस्करण लंदन से छपा है जिसका विवरण कैराना वेबसाईट कैराना डोट नेट पर देख सकते हैं। इस पुस्तक की तैयारी में मौलाना ने अरबी,फारसी, उर्दू और दूसरी भाषाओं की पुस्तकों का अवलोकन करने के पश्चात जब ईसाईयत पर अन्तिम बार कलम उठायी तो वो गौरवशाली रचना बन गयी जिसने ईसाई संसार में तहलका मचा दिया, लन्दन टाईम्स ने पुस्तक 'इज़हार उल हक़' पर टिप्पणी करते हुए लिखा है ‘अगर लोग इस पुस्तक को पढ़ते रहे तो मज़हबे-ईसा की तरक्क़ी बंद हो जाएगी’. इस्लामी विद्वानों की ओर से जितनी पुस्तकें ईसाईयत की रोकथाम में लिखी गईं. सब ''इज़हार उल हक़' की रोशनी में लिखी गईं।&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;मौलाना अशरफ अली थानवी बयानुल कुरआन में, मौलाना हिफजुर्रहमान ने किससुल कुरआन में, मौलाना मोहम्मद अली ने पैगाम-ए- मोहम्मदी में आपकी पुस्तकों की बहुत प्रशंसा की है।&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;कादनियत के मुकाबले में अल्लामा कश्मीरी मैदान में आये तो आपके अवलोकन में मौलाना रहमतुल्ल कैरानवी की रचनाएं रहा करतीं और प्रार्थना किया करते ‘ अल्लाह मौलाना रहमतुल्ला को जजाऐ खैर अता फ़रमाया कि उनकी पुस्तकें इस्लामी विचारधारा की सुरक्षा में अद्वितीय हैं. खुदा न करे वक़्त पड़ने पर हमारे धार्मिक विद्वानों को परेशान होने की आवश्यकता नहीं। मौलाना का देहान्त रमजानुल मुबारक में 1308 हिजरी, 1861 ई0 में हुआ। आपकी कबर मक्का जन्नतुल मुअल्ला नामक कब्रिस्तान में है. आपके पहलू में हाजी इमदादुल्लाह महाजिर मक्की भी दफ़न हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;strong&gt;&lt;span style="color: #cc0000;"&gt;विशेष सूचना : हम दुनिया के सभी मज़हबों का समान रूप से सम्मान करते हैं. हम न किसी विशेष मज़हब का प्रचार कर रहे हैं और न ही विरोध... संपादक&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt; &lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2673854500109758020-2900411624277260114?l=www.starnewsagency.in' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;p&gt;&lt;a href="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/JLHG3sSpJmOnNBGWPSXNRrzPf7c/0/da"&gt;&lt;img src="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/JLHG3sSpJmOnNBGWPSXNRrzPf7c/0/di" border="0" ismap="true"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt;&lt;br/&gt;
&lt;a href="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/JLHG3sSpJmOnNBGWPSXNRrzPf7c/1/da"&gt;&lt;img src="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/JLHG3sSpJmOnNBGWPSXNRrzPf7c/1/di" border="0" ismap="true"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;</description><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2010-03-09T20:06:36.649+05:30</app:edited><media:thumbnail url="http://3.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/S5Yhpi2UcGI/AAAAAAAAFE8/P_u1WU5tl1M/s72-c/kairanvi-madrsa-saulatiya.jpg" height="72" width="72" /><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">2</thr:total></item><item><title>मां</title><link>http://www.starnewsagency.in/2010/03/blog-post_7034.html</link><category>साहित्य</category><author>noreply@blogger.com (Star News Agency)</author><pubDate>Tue, 09 Mar 2010 20:14:07 PST</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-2673854500109758020.post-8504690635406660056</guid><description>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/S5ZgGT2v-XI/AAAAAAAAFFE/Ez7zhZEA5i0/s1600-h/mother.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" src="http://1.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/S5ZgGT2v-XI/AAAAAAAAFFE/Ez7zhZEA5i0/s320/mother.jpg" vt="true" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;मेरे गीतों में तू मेरे ख्वाबों में तू,&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;इक हकीकत भी हो और किताबों में तू।&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;तू ही तू है मेरी जिन्दगी।&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;क्या करूं मां तेरी बन्दगी।।&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;तू न होती तो फिर मेरी दुनिया कहां ?&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;तेरे होने से मैंने ये देखा जहां।&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;कष्ट लाखों सहे तुमने मेरे लिए,&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;और सिखाया कला जी सकूं मैं यहां।&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;प्यार की झिरकियां और कभी दिल्लगी।&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;क्या करूं मां तेरी बन्दगी।।&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;तेरी ममता मिली मैं जिया छांव में।&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;वही ममता बिलखती अभी गांव में।&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;काटकर के कलेजा वो मां का गिरा,&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;आह निकली उधर, क्या लगी पांव में?&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;तेरी गहराइयों में मिली सादगी।&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;क्या करूं मां तेरी बन्दगी।।&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;गोद तेरी मिले है ये चाहत मेरी।&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;दूर तुमसे हूं शायद ये किस्मत मेरी।&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;है सुमन का नमन मां हृदय से तुझे,&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;सदा सुमिरूं तुझे हो ये आदत मेरी।&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;बढ़े अच्छा इयां दूर हो गन्दगी।&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;क्या करूं मां तेरी बन्दगी।। &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;-श्यामल सुमन&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2673854500109758020-8504690635406660056?l=www.starnewsagency.in' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;p&gt;&lt;a href="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/vkM9LjY-ceVzFDfqGZA6fdkCM5s/0/da"&gt;&lt;img src="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/vkM9LjY-ceVzFDfqGZA6fdkCM5s/0/di" border="0" ismap="true"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt;&lt;br/&gt;
&lt;a href="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/vkM9LjY-ceVzFDfqGZA6fdkCM5s/1/da"&gt;&lt;img src="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/vkM9LjY-ceVzFDfqGZA6fdkCM5s/1/di" border="0" ismap="true"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;</description><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2010-03-10T09:44:07.177+05:30</app:edited><media:thumbnail url="http://1.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/S5ZgGT2v-XI/AAAAAAAAFFE/Ez7zhZEA5i0/s72-c/mother.jpg" height="72" width="72" /><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>देह प्रदर्शन का पर्याय बनते विज्ञापन</title><link>http://www.starnewsagency.in/2010/03/blog-post_8186.html</link><category>मुद्दा</category><category>राष्ट्रीय</category><category>समाज</category><category>*</category><author>noreply@blogger.com (Star News Agency)</author><pubDate>Mon, 08 Mar 2010 20:47:31 PST</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-2673854500109758020.post-903953991002956900</guid><description>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/S5M4ZAXcKQI/AAAAAAAAE_8/6t9TOI-BqRg/s1600-h/advt.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" kt="true" src="http://2.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/S5M4ZAXcKQI/AAAAAAAAE_8/6t9TOI-BqRg/s320/advt.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;फ़िरदौस ख़ान&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;अबला जीवन हाय तुम्हारी यही कहानी / आंचल में है दूध् और आंखों में पानी। हिन्दी कविता की ये पंक्तियां पारंपरिक भारतीय समाज में महिलाओं की स्थिति को बखूबी बयान करती हैं। भारत में ‘यत्र नार्यस्तु पूजयन्ते’ के आधार पर महिलाओं को देवी की संज्ञा देकर उनका गुणगान किया गया है। लेकिन, आधुनिक समाज में नारी का एक और रूप उभरकर सामने आया है, जहां उसे मात्र भोग की वस्तु बनाकर रख दिया गया है। &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;काफी हद तक इसका श्रेय विज्ञापन जगत को जाता है। मौजूदा दौर में विज्ञापनों में उत्पाद का कम और नारी काया का ज्यादा से ज्यादा प्रदर्शन कर दौलत बटोरने की होड़ मची हुई है।&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;पुरुषों के द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली शेविंग क्रीम, अंत:वस्त्र, सूट के कपड़े, जूते, मोटर साइकिल, तम्बाकू, गुटखा, सिगरेट और शराब तक के विज्ञापनों में नारी को दिखाया जाता है। जबकि, यहां उनकी कोई जरूरत नहीं है। इन वस्तुओं का इस्तेमाल मुख्यत: पुरुषों द्वारा किया जाता है। इसके बावजूद इसमें नारी देह का जमकर प्रदर्शन किया जाता है। इसके लिए तर्क दिया जाता है कि विज्ञापन में आर्कषण पैदा करने के लिए नारी का होना बेहद जरूरी है, यानी पुरुषों को गुमराह किया जाता है कि अगर वे इन वस्तुओं का इस्तेमाल करेंगे तो महिलाएं मधुमक्खी की तरह उनकी ओर खिंची चली आएंगी।&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;ऐसा नहीं है कि विज्ञापन में नारी देह के प्रदर्शन से उत्पाद की श्रेष्ठता और उसके टिकाऊपन में सहज ही बढ़ोतरी हो जाती है या उसकी कीमत में इजाफा हो जाता है। दरअसल, इस प्रकार के विज्ञापन कामुकता को बढ़ावा देकर समाज को विकृत करने का काम करते हैं। शायद इसका अंदाजा उत्पादक विज्ञापनदाताओं को नहीं है या फिर वे लोग इसे समझना ही नहीं चाहते। आज न जाने कितने ही ऐसे विज्ञापन हैं जिन्हें परिवार के साथ बैठकर नहीं देखा जा सकता। अगर किसी कार्यक्रम के बीच ‘ब्रेक’ में कोई अश्लील विज्ञापन आ जाए तो नजरें शर्म से झुक जाती हैं। परिजनों के सामने शर्मिंदगी होती है। विज्ञापन क्षेत्र से जुड़े लोगों का मानना है कि विज्ञापन को चर्चित बनाने के लिए कई चौंकाने वाली कल्पनाएं गढ़ी जाती हैं।&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;यह माना जा सकता है कि आज विज्ञापन कारोबार की जरूरत बन गए हैं। लेकिन, इसका यह भी मतलब नहीं कि अपने फायदे के लिए महिलाओं की छवि को धूमिल किया जाए। निर्माताओं को चाहिए कि वे अपने उत्पाद को बेहतर तरीके से उपभोक्ताओं के सामने पेश करें। उन्हें उत्पाद की जरूरत के साथ ही उसके फायदे, गुणवत्ता और विशेषता बताएं। लेकिन, निर्माताओं की मानसिकता ही आज बदल गई है। उन्हें लगता है कि वे विज्ञापनों में माडल को कम से कम कपड़े पहनवा कर ही अपने उत्पाद को लोकप्रिय बना सकते हैं। लेकिन, हकीकत में ऐसा कतई नहीं है।&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;पश्चिम में हुए कई सर्वेक्षणों से यह साबित हो चुका है कि सामान्य दृश्यों वाले विज्ञापन ही उपभोक्ताओं और उत्पाद के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करते हैं। दुनिया के बड़े मनोवैज्ञानिक विशेषज्ञों में एक ब्रैंड बुशमन ने अपने अध्ययन में पाया है कि टेलीविजन शो के हिंसक और कामुकता भरे विज्ञापन के प्रदर्शन से विज्ञापित उत्पाद का कोई बेहतर प्रचार नहीं हो पाता। अगर विज्ञापन में खूनखराबे वाले दृश्य हों तो दर्शकों को विज्ञापित उत्पाद का नाम तक याद नहीं रहता। यही हाल यौन प्रदर्शन वाले विज्ञापनों का पाया गया है। आथोवा स्पेस विश्वविद्यालय के स्नातक की छात्रा एंजालिका बआंनक्सी ने हिंसा और यौन प्रदर्शन वाले विज्ञापनों के दर्शकों को 40-45 मिनट तक ऐसे विज्ञापन दिखाए।&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;इन विज्ञापनों में 18 ऐसे विज्ञापन कुश्ती फेडरेशन, नाइट कल्ब और मिरैकल पेट्स जैसे हिंसक व कामुक शोज के थे। बाद में उन्हें सामान्य तटस्थता वाले विज्ञापन दिखाए गए जिनमें उत्पादों का प्रचार शामिल था। दर्शकों के आकलन में पाया गया कि हिंसा-यौन दृश्यों वाले विज्ञापनों में दर्शकों को उत्पाद का नाम याद रहने की प्रवृत्ति नगण्य पाई गई। उनके मुकाबले सामान्य तटस्थता वाले उत्पाद विज्ञापनों के आंकलन में पाया गया कि दर्शकों में उत्पादों का नाम याद रहने की क्षमता उनसे 17 फीसदी ज्यादा है। यौन दृश्यों वाले विज्ञापनों के मुकाबले सामान्य दृश्यों में निहित उत्पादों का नाम याद रखने की उनकी क्षमता 21 फीसदी अधिक देखी गई। निष्कर्ष यह रहा कि हिंसा से जुड़े विज्ञापनों में उत्पादों का नाम याद रहने की उनकी क्षमता जहां 21 फीसदी कम हो जाती है, वहीं तटस्थता के विज्ञापनों के मुकाबले में यौन विज्ञापनों में स्मरण क्षमता 17 फीसदी कम हो जाती है। इन आकलनों में ब्रांड के पहचान की कोई समस्या नहीं रखी गई थी। क्योंकि, सारे उत्पादों के नाम बराबर दिखाए जाते रहे। चाहे वे सामान्य थे, हिंसा वाले दृश्यों के थे या यौन दृश्यों वाले विज्ञापनों के थे।&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;यह नहीं भूलना चाहिए कि नारी को भारत में एक समय सती प्रथा के नाम पर पति के साथ चिता में जलकर मरने को मजबूर किया गया था। देवदासी प्रथा की आड़ में उनसे वेश्यावृत्ति कराई गई थी। सदियों के बाद महिलाओं में जागरूकता आई है। अब जब वे अपने सम्मानजनक अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रही हैं तो ऐसे में देह प्रदर्शन के जरिए उन्हें भोग की वस्तु के रूप में पेश करना अपमानजनक है। यह देश के सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों पर भी कुठाराघात करने के समान है।&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;एक अनुमान के मुताबिक भारत के करीब 40 करोड़ लोग टेलीविजन देखते हैं और हर घर में यह आठ से दस घंटे तक चलता है। यानी विज्ञापन देश की करीब आधी आबादी को सीधे रूप से प्रभावित करते हैं। इसलिए टेलीविजन पर किस तरह के विज्ञापन दिखाएं इस पर नजर रखने और नियमों की अवहेलना करने वालों के खिलाफ सख्ती बरतने की जरूरत है। बेहतर समाज के निर्माण के लिए सरकार को अपना दायित्व ईमानदारी के साथ निभाना चाहिए।&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2673854500109758020-903953991002956900?l=www.starnewsagency.in' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;p&gt;&lt;a href="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/URHNmZDFXYCGIpQ6N-Raq6GKGAc/0/da"&gt;&lt;img src="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/URHNmZDFXYCGIpQ6N-Raq6GKGAc/0/di" border="0" ismap="true"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt;&lt;br/&gt;
&lt;a href="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/URHNmZDFXYCGIpQ6N-Raq6GKGAc/1/da"&gt;&lt;img src="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/URHNmZDFXYCGIpQ6N-Raq6GKGAc/1/di" border="0" ismap="true"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;</description><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2010-03-09T10:17:31.318+05:30</app:edited><media:thumbnail url="http://2.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/S5M4ZAXcKQI/AAAAAAAAE_8/6t9TOI-BqRg/s72-c/advt.jpg" height="72" width="72" /><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>हजकां के आंदोलन को दबाने की कोशिश कर रही है पुलिस : बिश्नोई</title><link>http://www.starnewsagency.in/2010/03/blog-post_09.html</link><category>राज्य</category><author>noreply@blogger.com (Star News Agency)</author><pubDate>Mon, 08 Mar 2010 20:46:42 PST</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-2673854500109758020.post-576171801168428372</guid><description>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/S5T7s2_W9DI/AAAAAAAAFD8/SfCyuZo9IJI/s1600-h/Star.JPG" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" kt="true" src="http://4.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/S5T7s2_W9DI/AAAAAAAAFD8/SfCyuZo9IJI/s320/Star.JPG" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;ईश्वर धामु&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;चंडीगढ़.&lt;/strong&gt; हरियाणा जनहित कांग्रेस के अध्यक्ष कुलदीप बिश्नोई ने कहा कि जनहितों के लिए पार्टी द्वारा शुरू किए गए आंदोलन को दबाने के लिए पुलिस ने हजकां नेताओं व कार्यकर्ताओं पर लाठियां बरसाईं और वाहन क्षतिग्रस्त कर दिए। अपनी इस बर्बरतापूर्ण कार्रवाई पर पर्दा डालने व दबाव बनाने के लिए पार्टी नेताओं पर झूठे व आपराधिक मुकदमे दर्ज किए गए। उन्होंने कहा कि पार्टी के सभी नेता व कार्यकर्ता निहत्थे थे और वे प्रदर्शन स्थल के दायरे में थे तथा पार्टी के पास प्रदर्शन स्थल की अधिकारिक अनुमति भी थी। इन सबके बावजूद उन पर कहर बरपाया गया। कुलदीप बिश्नोई सेक्टर-25 में भूख हड़ताल व धरने पर पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। इस अवसर पर पार्टी नेता पूर्व सांसद धर्मपाल सिंह मलिक, पूर्व विधायक रण सिंह मान, देवीलाल बिश्नोई, रमेश गोदारा, कमल सिंह तोशाम, कुसुम शर्मा, प्रोफेसर रोशनलाल यादव, नरेश ढांडे, शशि शर्मा, दलबीर वाल्मीकि, गुलजार काहलों, मंगतराम लालवास, तेजपाल गर्ग, धर्मबीर खत्री, योगेंद्र नाथ मल्होत्रा, रामफल गुर्जर, राकेश भडाना, बलबीर शर्मा, ज्ञान काजल, ठेकेदार रामसिंह, संतोष ढुल आदि भूख हड़ताल पर बैठे जबकि उनके साथ भारी संख्या में पार्टी नेताओं व कार्यकर्ताओं ने धरने में हिस्सा लिया।&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;उन्होंने कहा कि जनहितों के लिए पार्टी नेता व कार्यकर्ता संघर्ष करने से कभी पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा कि शुक्रवार को पुलिस द्वारा किए गए अत्याचार में पार्टी के पांच हजार नेता व कार्यकर्ता घायल हो गए और इनमें से करीब 50 को गंभीर चोटें आई हैं। उन्होंने कहा कि लोगों को बर्बरता पूर्ण पीट कर भी जब पुलिस का मन नहीं भरा तो उन्होंने वाहनों पर लाठियां व पत्थर बरसाने शुरू कर दिए जिससे करीब एक हजार वाहन बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए। उन्होंने कहा कि इस समूचे घटनाक्रम की न्यायिक जांच होनी चाहिए तथा मामले में दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों को तुरंत बर्खास्त किया जाए। इसके अतिरिक्त बेकसूर हजकां कार्यकर्ताओं पर दर्ज किए गए झूठे मुकदमे वापस रद्द किए जाएं और इस घटना में क्षतिग्रस्त वाहनों व घायल हुए पार्टी कार्यकर्ताओं को राहत स्वरूप पांच करोड़ रुपए क्षतिपूर्ति के लिए प्रदान किए जाएं।&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;पार्टी अध्यक्ष ने कहा कि पुलिस ने पार्टी के विरोध प्रदर्शन में लाठियां बरसाकर भी एक-तरफा कार्रवाई की। उन्होंने कहा कि हजकां नेताओं पर तो हत्या प्रयास जैसे गंभीर आपराधिक मुकदमे दर्ज कर दिए गए जबकि पार्टी के घायल कार्यकर्ताओं की शिकायत भी दर्ज नहीं की। उन्हांने कहा कि मामले में न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया जाएगा। &lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2673854500109758020-576171801168428372?l=www.starnewsagency.in' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;p&gt;&lt;a href="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/2HnmAJGl0gfcFCUvB34WatNgAEo/0/da"&gt;&lt;img src="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/2HnmAJGl0gfcFCUvB34WatNgAEo/0/di" border="0" ismap="true"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt;&lt;br/&gt;
&lt;a href="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/2HnmAJGl0gfcFCUvB34WatNgAEo/1/da"&gt;&lt;img src="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/2HnmAJGl0gfcFCUvB34WatNgAEo/1/di" border="0" ismap="true"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;</description><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2010-03-09T10:16:42.599+05:30</app:edited><media:thumbnail url="http://4.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/S5T7s2_W9DI/AAAAAAAAFD8/SfCyuZo9IJI/s72-c/Star.JPG" height="72" width="72" /><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>साहित्य अकादमी के पुरस्कारों की घोषणा, काका हाथरसी पुरस्कार इरफ़ान को मिलेगा</title><link>http://www.starnewsagency.in/2010/03/blog-post_1388.html</link><category>राष्ट्रीय</category><category>साहित्य</category><author>noreply@blogger.com (Star News Agency)</author><pubDate>Tue, 09 Mar 2010 18:19:00 PST</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-2673854500109758020.post-8656244302208527895</guid><description>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/S5cAmXlbDpI/AAAAAAAAFF0/43UGSC8cpSU/s1600-h/irfan.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" src="http://2.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/S5cAmXlbDpI/AAAAAAAAFF0/43UGSC8cpSU/s320/irfan.jpg" vt="true" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;स्टार न्यूज़ एजेंसी &lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;नई दिल्ली.&lt;/strong&gt; हिंदी अकादमी दिल्ली ने इस साल (2009-2010) और पिछले साल (2008-2009) के पुरस्कारों की घोषणा कर दी है. काका हाथरसी सम्मान से स्टार कार्टूनिस्ट इरफ़ान खान को दिया जाएगा. यह पुरस्कार 23 मार्च को श्रीराम सेंटर में पुरस्कार वितरण समारोह के दौरान दिए जाएंगे. समारोह में अकादमी की अध्यक्ष व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित तथा प्रख्यात लेखिका महाश्वेता देवी मौजूद रहेंगी. &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;अकादमी के सचिव प्रो. रवींद्रनाथ श्रीवास्तव परिचयदास ने बताया कि इस साल प्रो. केदारनाथ सिंह को शलाका पुरस्कार (दो लाख) की घोषणा की जा चुकी है. नए नियमों के मुताबिक़ अन्य सात पुरस्कारों की घोषणा की जा रही है, जिनमें हिन्दी अकादमी विशिष्ट योगदान सम्मान (प्रो. नजीब रिज़वी), हिन्दी अकादमी काव्य सम्मान (डा. कन्हैया लाल नंदन), हिन्दी अकादमी गद्य विधा सम्मान (प्रो. सुधीश पचौरी), हिन्दी अकादमी नाटक सम्मान (डा. असगर वज़ाहत), हिन्दी अकादमी हास्य व्यंग्य सम्मान (डा.ज्ञान चतुर्वेदी), हिन्दी अकादमी बाल साहित्य सम्मान (रेखा जैन) और हिन्दी अकादमी ज्ञान प्रौद्योगिकी सम्मान (बालेंदु दाधीच) शामिल हैं. इन सभी पुरस्कारों की राशि नए प्रारूप के मुताबिक़ 50 हज़ार रुपए रखी गई है. &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;उन्होंने बताया कि शलाका पुरस्कार नहीं दिया जा रहा है. अन्य पुरस्कारों के तहत साहित्यकार सम्मान 11 लोगों को दिया जा रहा है, जिनमें प्रो. पुरुषोत्तम अग्रवाल, प्रो. कृष्ण कुमार, गगन गिल, पंकज सिंह, द्रोणवीर कोहली, प्रो अब्दुल बिस्मिल्लाह, लीलाधर मंडलोई, बनवारी, प्रो इन्द्रनाथ चौधरी, डा.रामेश्वर प्रेम, सुरेश सलिल शामिल हैं. &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;वर्ष 2007-2008 के साहित्यिक कृति पुरस्कारों में विशिष्ट कृति का पुरस्कार कृपाशंकर सिंह की किताब ‘ऋगवेद, हडप्पा सभ्यता और सांस्कृतिक निरंतरता’ को दिया जा रहा है. कहानी संग्रह के लिए प्रियदर्शन के संग्रह ‘उसके हिस्से का जादू’, कविता संग्रह के लिए सूरजपाल सिंह चौहान की कविता संग्रह ‘कब होगी वह भोर’, मधु वर्मा के संग्रह ‘ये लहरें घेर लेती हैं’, मुकेश शर्मा के संग्रह ‘पसीने की बूंद’, उपन्यास के लिए अशोक गुप्ता की रचना ‘उत्सव अभी शेष है’ तथा नाटक के लिए दया प्रकाश सिन्हा के नाटक ‘रक्त अभिषेक’ को पुरस्कृत किया जा रहा है. &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;अन्य विधाओं में पुरस्कृत किताबों में विमल कुमार की ‘सत्ता समाज और बाजार’, आदित्य अवस्थी की ‘दिल्ली क्रांति के 150 वर्ष’, प्रो पवन माथुर की ‘शब्द बीज’ और प्रो पीके आर्य की ‘इलेक्ट्रॉनिक मीडिया’। इस वर्ष की बाल एवं किशोर साहित्यिक सम्मान से पुरस्कृत की जा रहीं किताबें हैं - चित्र का रहस्य (कुसुम लता सिंह), खुशी के पल (सरस्वती बाली), कहावतों की कहानियां (राधाकांत भारती), फूलों के बाबूजी (मधुलिका अग्रवाल), मोबाइल के जादूगर (अखिल चंद्र), बचपन की बुनियाद (पूरनचंद्र काण्डपाल) शामिल है.&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2673854500109758020-8656244302208527895?l=www.starnewsagency.in' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;p&gt;&lt;a href="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/cqBxmxls_m6PBMhDZ8I9v87PtKU/0/da"&gt;&lt;img src="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/cqBxmxls_m6PBMhDZ8I9v87PtKU/0/di" border="0" ismap="true"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt;&lt;br/&gt;
&lt;a href="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/cqBxmxls_m6PBMhDZ8I9v87PtKU/1/da"&gt;&lt;img src="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/cqBxmxls_m6PBMhDZ8I9v87PtKU/1/di" border="0" ismap="true"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;</description><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2010-03-10T07:49:00.468+05:30</app:edited><media:thumbnail url="http://2.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/S5cAmXlbDpI/AAAAAAAAFF0/43UGSC8cpSU/s72-c/irfan.jpg" height="72" width="72" /><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>पंचायतों का सशक्तीकरण</title><link>http://www.starnewsagency.in/2010/03/blog-post_6769.html</link><category>राष्ट्रीय</category><category>ग्रामीण भारत</category><author>noreply@blogger.com (Star News Agency)</author><pubDate>Mon, 08 Mar 2010 06:58:33 PST</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-2673854500109758020.post-8792467474204990936</guid><description>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/S5UQarIi5CI/AAAAAAAAFEc/D-15cEBFZhY/s1600-h/panchayat.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" kt="true" src="http://4.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/S5UQarIi5CI/AAAAAAAAFEc/D-15cEBFZhY/s320/panchayat.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;सुधीर तिवारी&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;पंचायती राज संस्थायें भारत में लोकतंत्र की मेरूदंड है। निर्वाचित स्थानीय निकायों के लिए विकेन्द्रीकृत, सहभागीय और समग्र नियोजन प्रक्रिया को बढ़ावा देने और उन्हें सार्थक रूप प्रदान करने के लिए पंचायती राज मंत्रालय ने अनेक कदम उठाए हैं।&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;पिछड़ा क्षेत्र अनुदान कोष (बीआरजीएफ)&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;इस योजना के तहत अनुदान प्राप्त करने की अनिवार्य शर्त विकेन्द्रीकृत, सहभागीय और समग्र नियोजन प्रक्रिया को बढ़ावा देना है। यह विकास के अन्तर को पाटता है और पंचायती राज संस्थाओं (पीआरआई) और उसके पदाधिकारियों की क्षमताओं का विकास करता है। हाल ही में हुए एक अध्ययन से पता चला है कि स्थानीय आवश्यकताओं को पूरा करने में बीआरजीएफ अत्यधिक उपयोगी साबित हुआ है और पीआरआई'ज तथा राज्यों ने योजना तैयार करने एवं उन पर अमल करने का अच्छा अनुभव प्राप्त कर लिया है। बीआरजीएफ के वर्ष 2009-10 के कुल 4670 करोड़ रुपए के योजना परिव्यय में से 31 दिसबर, 2009 तक 3240 करोड़ रुपए जारी किये जा चुके हैं।&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;ई-गवर्नेंस परियोजना&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;एनईजीपी के अन्तर्गत ईपीआरआई की पहचान मिशन पध्दति की परियोजनाओं के ही एक अंग के रूप में की गई है। इसके तहत विकेन्द्रीकृत डाटाबेस एवं नियोजन, पीआरआई बजट निर्माण एवं लेखाकर्म, केन्द्रीय और राज्य क्षेत्र की योजनाओं का क्रियान्वयन एवं निगरानी, नागरिक-केन्द्रित विशिष्ट सेवायें, पंचायतों और व्यक्तियों को अनन्य कोड (पहचान संख्या), निर्वाचित प्रतिधिनियों और सरकारी पदाधिकारियों को ऑन लाइन स्वयं पठन माध्यम जैसे आईटी से जुड़ी सेवाओं की सम्पूर्ण रेंज प्रदान करने का प्रस्ताव है। ईपीआरआई में आधुनिकता और कार्य कुशलता के प्रतीक के रूप में पीआरआई में क्रान्तिकारी परिवर्तन लाने और व्यापक आईसीटी (सूचना संचार प्रविधि) संस्कृति को प्रेरित करने की क्षमता है।&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;ईपीआरआई में सभी 2.36 लाख पंचायतों को तीन वर्ष के लिए 4500 करोड़ रुपए के अनन्तिम लागत से कम्प्यूटरिंग सुविधाएं मय कनेक्टिविटी (सम्पर्क सुविधाओं सहित) के प्रदान करने की योजना है। चूंकि पंचायतें, केन्द्र राज्यों के कार्यक्रमों की योजना तैयार करने तथा उनके क्रियान्वयन की बुनियादी इकाइयां होती हैं, ईपीआरआई, एक प्रकार से, एमएमपी की छत्रछाया के रूप में काम करेगा। अत: सरकार, ईएनईजीपी के अन्तर्गत ईपीआरआई को उच्च प्राथमिकता देगी। देश के प्राय: सभी राज्यों (27 राज्यों) की सूचना और सेवा आवश्यकताओं का आकलन, व्यापार प्रक्रिया अभियांत्रिकी और विस्तृत बजट रिपोर्ट पहले ही तैयार की जा चुकी हैं और परियोजना पर अब काम शुरू होने को ही है।&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;राष्ट्रपति ने 4 जून, 2009 को संसद में अपने अभिभाषण में कहा था कि वर्ग, जाति और लिंग के आधार पर अनेक प्रकार की वर्जनाओं से पीड़ित महिलाओं को पंचायतों में 50 प्रतिशत आरक्षण के फैसले से अधिक महिलाओं को सार्वजनिक क्षेत्र में प्रवेश का अवसर प्राप्त होगा। तद्नुसार मंत्रिमंडल ने 27 अगस्त, 2009 को संविधान की धारा 243 घ को संशोधित करने के प्रस्ताव का अनुमोदन कर दिया ताकि पंचायत के तीनों स्तर की सीटों और अध्यक्षों के 50 प्रतिशत पद महिलाओं के लिए आरक्षित किये जा सकें। पंचायती राज मंत्री ने 26 नवम्बर, 2009 को लोकसभा में संविधान (एक सौ दसवां) सशोधन विधेयक, 2009 पेश किया।&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;वर्तमान में, लगभग 28.18 लाख निर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों में से 36.87 प्रतिशत महिलायें हैं। प्रस्तावित संविधान संशोधन के बाद निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों की संख्या 14 लाख से भी अधिक हो जाने की आशा है।&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;पंचायती राज संस्थाओं को कार्यों, वित्त और पदाधिकारियों का हस्तान्तरण&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;पंचायतें जमीनी स्तर की लोकतांत्रिक संस्थायें हैं और कार्यों, वित्त तथा पदाधिकारियों के प्रभावी हस्तांतरण से उन्हें और अधिक सशक्त बनाए जाने की आवश्यकता है। इससे पंचायतों द्वारा समग्र योजना बनाई जा सकेगी और संसाधनों को एक साथ जुटाकर तमाम योजनाओं को एक ही बिन्दु से क्रियान्वित किया जा सकेगा। &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;ग्राम सभा का वर्ष&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;पंचायती राज के 50 वर्ष पूरे होने पर 2 अक्तूबर, 2009 को समारोह का आयोजन किया गया। स्वशासन में ग्राम सभाओं और ग्राम पंचायतों में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व के महत्व को देखते हुए 2 अक्तूबर, 2009 से 2 अक्तूबर, 2010 तक की अवधि को ग्राम सभा वर्ष के रूप में मनाया जाएगा। ग्राम सभाओं की कार्य प्रणाली में प्रभाविकता सुनिश्चित करने के सभी संभव प्रयासों के अतिरिक्त, निम्नलिखित कदम उठाए जा रहे हैं--पंचायतों, विशेषत: ग्राम सभाओं के सशक्तीकरण के लिए आवश्यक नीतिगत, वैधानिक और कार्यक्रम परिवर्तन, पंचायतों में अधिक कार्य कुशलता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने हेतु सुव्यवस्थित प्रणालियों और प्रक्रियाओं को और ग्राम सभाओं तथा पंचायतों की विशिष्ट गतिविधियों को आकार देना और ग्राम सभाओं तथा पंचायतों की विशिष्ट गतिविधियों के बारे में जन-जागृति फैलाना।&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;न्याय पंचायत विधेयक, 2010&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;वर्तमान न्याय प्रणाली, व्ययसाध्य, लम्बी चलने वाली प्रक्रियाओं से लदी हुई, तकनीकी और मुश्किल से समझ में आने वाली है, जिससे निर्धन लोग अपनी शिकायतों के निवारण के लिए कानूनी प्रक्रिया का सहारा नहीं ले पाते। इस प्रकार की दिक्कतों को दूर करने के लिए मंत्रालय ने न्याय पंचायत विधेयक लाने का प्रस्ताव किया है। प्रस्तावित न्याय पंचायतें न्याय की अधिक जनोन्मुखी और सहभागीय प्रणाली सुनिश्चित करेंगी, जिनमें मध्यस्थता, मेल-मिलाप और समझौते की अधिक गुंजाइश होगी। भौगोलिक और मनोवैज्ञानिक रूप से लोगों के अधिक नजदीक होने के कारण न्याय पंचायतें एक आदर्श मंच संस्थायें साबित होंगी, जिससे दोनों पक्षों और गवाहों के समय की बचत होनी, परेशानियां कम होंगी और खर्च भी कम होगा। इससे न्यायपालिका पर काम का बोझ भी कम होगा।&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;पंचायत महिलाशक्ति अभियान&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;यह निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों (ईडब्ल्यूआर) के आत्मविश्वास और क्षमता को बढ़ाने की योजना है ताकि वे उन संस्थागत, समाज संबंधी और राजनीतिक दबावों से ऊपर उठकर काम कर सकें, जो उन्हें ग्रामीण स्थानीय स्वशासन में सक्रियता से भाग लेने में रोकते हैं। बाइस राज्यों में कोर (मुख्य) समितियां गठित की जा चुकी हैं और राज्य स्तरीय सम्मेलन हो चुके हैं। योजना के तहत 9 राज्य समर्थन केन्द्रों की स्थापना की जा चुकी है। ये राज्य हैं-- आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, सिक्किम, केरल, पश्चिम बंगाल और अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह। योजना के तहत 11 राज्यों में प्रशिक्षण के महत्त्व के बारे में जागरूकता लाने के कार्यक्रम हो चुके हैं। ये राज्य हैं-- आंध्र प्रदेश, अरूणाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, गोवा, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, मणिपुर, केरल, असम, सिक्किम और अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह।&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;संभागीय स्तर के 47 सम्मेलन 11 राज्यों (छत्तीसगढ, ग़ोवा, हरियाणा, आंध्र प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, सिक्किम, मणिपुर, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल और अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह) में आयोजित किए गए हैं। गोवा और सिक्किम में निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों और निर्वाचित युवा प्रतिनिधियों (ईडब्ल्यूआर्स ईवाईआर्स) के राज्य स्तरीय संघ गठित किये जा चुके हैं।&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;ग्रामीण व्यापार केन्द्र (आरबीएच) योजना&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;भारत में तेजी से हो रहे आर्थिक विकास को ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायती राज संस्थाओं के माध्यम से पहुंचाने के लिए 2007 में आरबीएच योजना शुरू की गई थी। आरबीएच, देश के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए विकास का एक ऐसा सहभागीय प्रादर्श है जो फोर पी अर्थात पब्लिक प्राईवेट पंचायत पार्टनरशिप (सरकार, निजी क्षेत्र, पंचायत भागीदारी) के आधार पर निर्मित है। आरबीएच की इस पहल का उद्देश्य आजीविका के साधनों में वृध्दि के अलावा ग्रामीण गैर-कृषि आमदनी बढ़ावा और ग्रामीण रोजगार को बढ़ावा देकर ग्रामीण समृध्दि का संवर्धन करना है।&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;राज्य सरकारों के परामर्श से आरबीएच के अमल पर विशेष रूप से ध्यान केन्द्रित करने के लिए 35 जिलों का चयन किया गया है। संभावित आरबीएच की पहचान और उनके विकास के लिए पंचायतों की मदद के वास्ते गेटवे एजेन्सी के रूप में काम करने हेतु प्रतिष्ठित संगठनों की सेवाओं को सूचीबध्द किया गया है। आरबीएच की स्थापना के लिए 49 परियोजनाओं को वित्तीय सहायता दी जा चुकी है। भविष्य में उनका स्तर और ऊंचा उठाने के लिए आरबीएच का मूल्यांकन भी किया जा रहा है।&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2673854500109758020-8792467474204990936?l=www.starnewsagency.in' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;p&gt;&lt;a href="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/ZAY-sbOa6uV7nPMd4C6GzgcoTro/0/da"&gt;&lt;img src="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/ZAY-sbOa6uV7nPMd4C6GzgcoTro/0/di" border="0" ismap="true"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt;&lt;br/&gt;
&lt;a href="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/ZAY-sbOa6uV7nPMd4C6GzgcoTro/1/da"&gt;&lt;img src="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/ZAY-sbOa6uV7nPMd4C6GzgcoTro/1/di" border="0" ismap="true"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;</description><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2010-03-08T20:28:33.448+05:30</app:edited><media:thumbnail url="http://4.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/S5UQarIi5CI/AAAAAAAAFEc/D-15cEBFZhY/s72-c/panchayat.jpg" height="72" width="72" /><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">1</thr:total></item><item><title>रामधन सिंह बीज फार्म को स्वत: पोषी बनाने की योजना</title><link>http://www.starnewsagency.in/2010/03/blog-post_9722.html</link><category>कृषि</category><category>राज्य</category><author>noreply@blogger.com (Star News Agency)</author><pubDate>Mon, 08 Mar 2010 06:46:51 PST</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-2673854500109758020.post-4479518373587002114</guid><description>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/S5UNzif-SiI/AAAAAAAAFEU/j_-O0bklxeU/s1600-h/HAU.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" kt="true" src="http://4.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/S5UNzif-SiI/AAAAAAAAFEU/j_-O0bklxeU/s320/HAU.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;सरफ़राज़ ख़ान &lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;हिसार (हरियाणा).&lt;/strong&gt; चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय&amp;nbsp;प्रशासन 4020 एकड़ के अपने रामधन सिंह बीज फार्म को स्वत: पोषी बनाने के लिए इसे कार्पोरेशन में बदलने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। इसके लिए एक कमेटी गठित की गई है जो उन संस्थानों जहां कार्पोरेशन की तर्ज पर बीज उत्पादन किया जा रहा है, का दौरा कर इसका बारीकी से अध्ययन करेगी।&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;इस संबंध में कुलपति डॉ. के.एस. खोखर ने आज उक्त बीज फार्म पर विश्वविद्यालय की फार्म सलाहकार समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए उक्त कमेटी को अध्ययन का कार्य शीघ्र निपटाने को कहा है। उन्होंने कहा कि गत अनेक वर्षों से संभवत: धन व मानव बल अभाव के कारणों से इस फार्म का विकास आज तक पूरा नहीं हो पाया है। उन्होंने कहा कि कार्पोरेशन बन जाने से फार्म पर आर्थिक व मानव संसाधन जुटाने में मदद मिलेगी तथा फार्म की भूमि का पूरा व सही ढंग से उपयोग हो पाएगा। उन्होंने कहा हरियाणा सरकार भी रामधन सिंह फार्म को कार्पोरेशन बनाए जाने की पक्षधर है। उन्होंने कहा कि पंतनगर स्थित गोविन्द बल्लभ पंत कृषि विश्वविद्यालय में बीज का उत्पादन इसी पध्दति पर हो रहा है तथा इस कमेटी को शीघ्र वहां जाकर अध्ययन करना चाहिए।&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;कुलपति ने उक्त फार्म पर सिंचाई जल की बचत के लिए फव्वारा प्रणाली जैसे सिंचाई की आधुनिक विधियों को प्राथमिकता देने को कहा है। उन्होंने कहा कि जहां बहुत जरूरी है, केवल उन्हीं क्षेत्रों में सिंचाई के लिए लोर लैंड लेवलिंग की जानी चाहिए अन्यथा फव्वारा प्रणाली को ही महत्त्व दिया जाना चाहिए। डॉ. खोखर ने उक्त फार्म पर वैज्ञानिकों की कमी को शीघ्र दूर करने का भी आश्वासन दिया।&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;रामधन सिंह बीज फार्म के निदेशक डॉ. अशोक यादव ने बैठक में कहा कि फार्म विकास की गति धीमी जरूर है लेकिन सही दिशा में चल रही है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष खरीफ व रबी फसलों का करीब 13 हज़ार क्विंटल बीज उत्पादित होने की संभावना है जो गत वर्ष से करीब तीन हज़ार क्विंटल अधिक है। इसी प्रकार फार्म की आमदनी पिछले वर्ष की तीन करोड़ रुपये से बढ़कर चार करोड़ रूपए होने की उम्मीद है। उन्होंने फार्म पर सिंचाई व्यवस्था सुधार तथा अन्य गतिविधियों का ब्यौरा दिया। उन्होंने कहा कि फार्म पर घने जंगल को साफ करने का कार्य प्रगति पर है जो इस माह के अंत तक पूरा हो जाएगा। उन्होंने इस अवसर पर उपस्थित अधिकारियों तथा वैज्ञानिकों फार्म के विकास के लिए सुझाव भी मांगे। बैठक में रजिस्ट्रार डॉ. आर.एस. दलाल, अनुसंधान निदेशक डॉ. आर.पी. नरवाल, कृषि कालेज के डीन डॉ. एस. एस. पाहुजा, वेटेरनरी कालेज के डीन डॉ. एस.के. नागपाल, कंपट्रोलर नवीन जैन सहित विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के अध्यक्ष व वैज्ञानिक उपस्थित थे। &lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2673854500109758020-4479518373587002114?l=www.starnewsagency.in' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;p&gt;&lt;a href="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/ZzcJe92fA9MwyEvtWBDluoHFfb4/0/da"&gt;&lt;img src="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/ZzcJe92fA9MwyEvtWBDluoHFfb4/0/di" border="0" ismap="true"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt;&lt;br/&gt;
&lt;a href="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/ZzcJe92fA9MwyEvtWBDluoHFfb4/1/da"&gt;&lt;img src="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/ZzcJe92fA9MwyEvtWBDluoHFfb4/1/di" border="0" ismap="true"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;</description><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2010-03-08T20:16:51.178+05:30</app:edited><media:thumbnail url="http://4.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/S5UNzif-SiI/AAAAAAAAFEU/j_-O0bklxeU/s72-c/HAU.jpg" height="72" width="72" /><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>मुख्यमंत्री ने महिलाओं को किया सम्मानित</title><link>http://www.starnewsagency.in/2010/03/blog-post_9748.html</link><category>राज्य</category><author>noreply@blogger.com (Star News Agency)</author><pubDate>Mon, 08 Mar 2010 06:29:44 PST</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-2673854500109758020.post-3980248109406530089</guid><description>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/S5UJwgHAcTI/AAAAAAAAFEM/AfWbqXI1aTo/s1600-h/bhupendra+singh+hooda.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" kt="true" src="http://2.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/S5UJwgHAcTI/AAAAAAAAFEM/AfWbqXI1aTo/s320/bhupendra+singh+hooda.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;स्टार न्यूज़ एजेंसी &lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;चंडीगढ़.&lt;/strong&gt; हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर महिलाओं को अपनी पसंद के क्षेत्रों में प्रोत्साहित एवं सम्मानित करने के लिए तीन राज्य पुरस्कार शुरू करने की घोषणा की है।&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;मुख्यमंत्री ने हरियाणा की उत्कृष्ट महिलाओं को सम्मानित करने के लिए यहां आयोजित एक राज्य स्तरीय समारोह में कहा कि 'इंदिरा गांधी महिला शक्ति पुरस्कार' नामक प्रथम राज्य स्तरीय पुरस्कार के तहत एक लाख रुपये की नकद राशि दी जाएगी। 51,000 रुपये का दूसरा पुरस्कार 'कल्पना चावला शौर्य पुरस्कार' कहा जाएगा तथा यह पुरस्कार हरियाणा में जन्मी अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला की स्मृति में दिया जाएगा। इसी प्रकार, तीसरे पुरस्कार का नाम हरियाणा विधान सभा की पहली महिला अध्यक्ष शन्नो देवी के नाम पर रखा जाएगा और इसके तहत भी 51,000 रुपये की नकद राशि दी जाएगी।&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;मुख्यमंत्री ने अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर महिलाओं को बधाई दी तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए यह दिवस विश्वभर में मनाया जाता है। उन्होंने हिन्दू पौराणिक कथाओं में से कुछ उदाहरण देते हुए कहा कि प्राचीन काल में भी महिलाओं को पुरूषों के बराबर अधिकार प्राप्त थे। उन्होंने कहा कि आज भी, विशेषकर हमारे देश में महिलाएं उच्च पदों पर आसीन हैं जैसे सोनिया गांधी, यूपीए सरकार की अध्यक्ष हैं, भारत की राष्ट्रपति भी एक महिला है और लोकसभा की अध्यक्ष भी महिला ही है। इससे स्पष्ट होता है कि हमारे देश में महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए प्रयास जारी हैं। उन्होंने कहा कि हरियाणा में भी अनेक महिलाएं उच्च पदों पर आसीन हैं, जैसेकि मुख्य सचिव उर्वशी गुलाटी जिनकी बहन ने भी इसी पद पर कार्य करते हुए प्रदेश की सेवा की। उन्होंने प्रदेश में उच्च पदों पर आसीन कुछ अन्य वरिष्ठ महिला अधिकारियों का भी जिक्र किया। &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला आरक्षण बिल उस समय से अधर में लटका है, जब वे सांसद थे। उन्होंने कहा कि यह बहुत ही आश्चर्यजनक है कि कई बार कुछ महिलाओं ने ही स्वयं इस बिल का विरोध किया है। वे चाहते हैं कि अब यह बिल पास हो जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं के शैक्षणिक एवं सामाजिक-आर्थिक स्तर को ऊंचा उठाने के लिए राज्य सरकार ने अनेक अनूठी योजनाएं शुरू की हैं। इन योजनाओं ने लिंगानुपात को संतुलित करने तथा कन्या भ्रूण हत्या को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;मुख्यमंत्री ने राज्य की उत्कृष्ट महिलाओं को भी सम्मानित किया. उन्होंने कहा कि यह बहुत ही उत्साहजनक है कि हरियाणा की एक महिला डॉ. सुनीता देवी, हॉस्टल वार्डन, महर्षि विश्वविद्यालय, रोहतक को आज नई दिल्ली में भारत की राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल 'रानी लक्ष्मी बाई पुरस्कार' प्रदान करके सम्मानित कर रही हैं। मुख्यमंत्री ने डा. सुनीता देवी (जो इस अवसर पर उपस्थित नहीं थीं0) को सम्मान स्वरूप 51,000 रुपये देने की घोषणा की। डा. सुनीता देवी आज राष्ट्रपति से पुरस्कार प्राप्त करने के लिए दिल्ली में हैं। रानी लक्ष्मी बाई पुरस्कार के तहत तीन लाख रुपये की नकद राशि तथा प्रशस्ति प्रमाण प्रत्र प्रदान किया जाता है। इस अवसर पर बताया गया कि डा. सुनीता देवी एक दुर्घटना में अपने दोनों हाथ खो चुकी हैं, लेकिन उन्होंने अपनी शिक्षा जारी रखी और आज वे पीएचडी हैं। स्वयं शारीरिक रूप से विकलांग होने के बाबजूद महिलाओं एवं बच्चों के उत्थान के लिए उन द्वारा किए जा रहे उत्कृष्ट कार्यों के लिए उन्हें इस पुरस्कार से नवाजा गया है।&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;हरियाणा की महिला एवं बाल विकास मंत्री गीता भुक्कल ने महिलाओं के कल्याणार्थ अनेक योजनाएं क्रियान्वित करने के लिए मुख्यमंत्री की सराहना की तथा उनसे महिलाओं को प्रोत्साहित करने के लिए केन्द्र सरकार की तर्ज पर राज्य पुरस्कार शुरू करने का आग्रह किया।&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;महिला एवं बाल विकास विभाग की मुख्य संसदीय सचिव अनिता यादव ने लोगों से आग्रह किया कि वे दहेज प्रथा एवं कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के लिए एक जन आंदोलन चलाएं। उन्होंने हरियाणा राज्य बाल कल्याण परिषद की उपाध्यक्ष आशा हुड्डा की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने सदा उन्हें महिलाओं एवं बच्चों के लिए कल्याणकारी कार्यक्रम क्रियान्वित करने के लिए प्रेरित किया है। &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;हरियाणा की मुख्य सचिव उर्वशी गुलाटी ने कहा कि मुख्यमंत्री ने महिलाओं, विशेषकर सरकारी कर्मचारियों के लिए अनेक कल्याणकारी कार्यक्रम क्रियान्वित किए हैं। अब महिला कर्मचारी अपने अर्जित अवकाश के अलावा 730 दिनों का बाल अनुरक्षण अवकाश प्राप्त कर सकती हैं। सरकारी नौकरी में आने के लिए अविवाहित महिलाओं की आयु सीमा को बढाकर 45 वर्ष कर दिया गया है। &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;महिला एवं बाल विकास विभाग की वित्तायुक्त एवं प्रधान सचिव शकुन्तला जाखू ने कहा कि महिला सशक्तिकरण पर विशेष बल देने तथा महिलाओं के लिए नये अवसर सृजित करने के लिए हमें विकास के एजेंडे को एक नये दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ाना होगा। सरकार के अधिकारियों को ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों की ऐसी महिलाओं से बातचीत करनी चाहिए, जिन्हें अवसर नहीं मिल रहे हैं ताकि वे उनकी आवश्यकताओं को समझ सकें। &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर 'आशा- आहार है औषध, औषध है आहार' नामक पुस्तक भी जारी की, जो हरियाणा के आयुष विभाग द्वारा तैयार की गई है।&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;मुख्यमंत्री ने हरियाणा की उत्कृष्ट महिलाओं को पुरस्कार भी दिए। डा. सुनीता देवी के अलावा जिन अन्य तीन महिलाओं को स्त्री शक्ति पुरस्कार से सम्मानित किया गया, उनमें सोमवती (गांव बालसमन्द, जिला हिसार), नेहा शर्मा ( गांव सागरपुर, जिला फरीदाबाद) तथा एस आर थरेशा (विगास, मंडी डबवाली) शामिल हैं। उन्हें 11-11 हजार रुपये की नकद राशि दी गई। अर्जुन अवार्ड प्राप्तकर्ता गीता युत्शी, सुनीता शर्मा, प्रितम सीवाच, ममता खरब, गीतिका जाखड़, शिल्पा सिंह, नीलम जय सिंह एवं अंजु दुआ को 5100-5100 रुपये प्रदान कर सम्मानित किया गया। साहसिक खेलों की श्रेणी में जिला कैथल की ममता सौदा को सम्मानित किया गया।&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;वर्ष 2008-09 में लिंगानुपात में सुधार लाने में प्रथम तीन स्थान प्राप्त करने के लिए झज्जर, गुडगांव एवं फरीदाबाद की तीन उपायुक्तों को क्रमश: पांच लाख रुपये, तीन लाख रुपये एवं दो लाख रुपये प्रदान कर सम्मानित किया गया। सिरसा की साधना मित्तल को दस बाल विवाह रोकने के लिए 11,000 रुपये का नकद पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया। उद्यमियों की श्रेणी में चन्द्रिका थाटिया, सुनीता हांडा एवं रेनू कालड़ा को 11,000-11,000 रुपये प्रदान कर सम्मानित किया गया। समाज में अपना उल्लेखनीय योगदान देने के लिए जिन तीन साक्षर महिला समूहों को सम्मानित किया गया, उनमें सीमा रानी ( गांव गिद्दावाली, जिला सिरसा), बालकिशा ( गांव सुबरी, जिला करनाल) तथा पिंकी ( गांव कामी, जिला सोनीपत) शामिल हैं। प्रत्येक समूह को 11,000-11,000 रुपये दिए गए। श्रेष्ठ आंगवाड़ी वर्कर पुरस्कार के तहत नारायण देवी ( गांव पन्नीवाला मोटा, जिला सिरसा), विजय रानी ( गांव इंदिरा नगर, जिला फतेहाबाद) तथा मधुबाला ( गांव खेड़ी बरकी, जिला हिसार) को 5100-5100 रुपये दिए गए। &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;सम्मानित की गई एएनएम तथा आशा वर्कर्स में कृष्णा देवी (एएनएम उप केन्द्र, मोतलाकलां, जिला रेवाड़ी), अनीता रानी (एएनएम, वजीराबाद, जिला गुड़गांव), लाजवंती (एएनएम उप केन्द्र, नंगल चौधरी, जिला महेन्द्रगढ़), वंदना, आशा (वर्कर, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, कालका, जिला पंचकूला), सुनीता जैन (आशा वर्कर, समुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, उगराखेड़ी, जिला पानीपत) तथा राजरानी, आशा (वर्कर, समुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, इन्द्री, जिला करनाल) शामिल हैं। प्रत्येक को 5100-5100 रुपये दिए गए। &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;सरकार ने पहली बार 6 मार्च, 2010 को पंचकूला में राज्य स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिता का आयोजन किया। इसलिए, विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं में प्रथम तीन स्थान प्राप्त करने वाली 18 महिलाओं को सम्मानित किया गया। 400 मीटर की दौड़ में सोनीपत की योति ने प्रथम, हिसार की ऋतु ने द्वितीय तथा करनाल की रिंकू ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। 400 मीटर रिले दौड़ में भिवानी की मंजू, सोनिया, मंजू एवं रेनू ने प्रथम, पानीपत की मुनेश, माफी एव कविता ने द्वितीय तथा कैथल की कविता, रानी, बीरा एवं रेनू तृतीय स्थान प्राप्त किया। साईकिल दौड़ में फतेहाबाद की प्रोमिला, अंबाला की निधि एवं गुड़गांव की नीरज मित्तल ने क्रमश: प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान हासिल किया। इसी प्रकार, मटका दौड़ में भिवानी की बीरमती, रोहतक की रानी तथा भिवानी एवं रोहतक की नीरजा एवं अनिल ने क्रमश: प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त किया। 100 मीटर दौड़ में भिवानी की बिमला, रेवाड़ी की सुमन एवं जीन्द की कविता क्रमश: प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान पर रही। सभी को 2100-2100 रुपये के नकद पुरस्कार दिए गए।&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2673854500109758020-3980248109406530089?l=www.starnewsagency.in' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;p&gt;&lt;a href="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/H5qf2MGdKErCtCwQ_sTR608tnkY/0/da"&gt;&lt;img src="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/H5qf2MGdKErCtCwQ_sTR608tnkY/0/di" border="0" ismap="true"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt;&lt;br/&gt;
&lt;a href="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/H5qf2MGdKErCtCwQ_sTR608tnkY/1/da"&gt;&lt;img src="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/H5qf2MGdKErCtCwQ_sTR608tnkY/1/di" border="0" ismap="true"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;</description><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2010-03-08T19:59:44.002+05:30</app:edited><media:thumbnail url="http://2.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/S5UJwgHAcTI/AAAAAAAAFEM/AfWbqXI1aTo/s72-c/bhupendra+singh+hooda.jpg" height="72" width="72" /><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>दीक्षांत समारोह विद्यार्थी के जीवन का अनमोल क्षण : पहाड़िया</title><link>http://www.starnewsagency.in/2010/03/blog-post_89.html</link><category>राज्य</category><author>noreply@blogger.com (Star News Agency)</author><pubDate>Mon, 08 Mar 2010 05:39:53 PST</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-2673854500109758020.post-7209379428601747809</guid><description>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/S5T9uNN12UI/AAAAAAAAFEE/Nqed38RiK14/s1600-h/star.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" kt="true" src="http://4.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/S5T9uNN12UI/AAAAAAAAFEE/Nqed38RiK14/s320/star.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;अजय धामु&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;भिवानी (हरियाणा).&lt;/strong&gt; हरियाणा के राज्यपाल जगन्नाथ पहाड़िया ने कहा है कि दीक्षांत समारोह विद्यार्थी के जीवन में वह क्षण है, जो न केवल उसमें उल्लास भरता है, अपितु भविष्य की चुनौतियों का सामना करने की उसे प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि परिश्रम और साधना के द्वारा ही सफलता की मंजिल तक पहुंचा जा सकता है। &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;राज्यपाल आज भिवानी के टेक्नोलॉजिकल इंस्टीच्यूट ऑफ टैक्सटाइल एंड साइंसिज के वार्षिक दीक्षांत समारोह में छात्र-छात्राओं को सम्बोधित कर रहे थे। समारोह में राज्य की प्रथम महिला शांति पहाड़िया भी उपस्थित थीं। विद्यार्थियों को भावी जीवन की शुभकामनाएं देते हुए राज्यपाल ने कहा कि प्राचीनकाल में भी गुरुकुल में जब विद्यार्थी की शिक्षा पूर्ण हो जाती थी तो गुरु उसे जीवन के मूलमंत्र देते हुए दीक्षित किया करता था। दीक्षांत समारोह हमारी प्राचीन परम्परा है और यह विद्यार्थी के साथ-साथ शिक्षण संस्थान के लिए भी अति महत्वपूर्ण स्थान रखती है। उन्होंने उपाधि प्राप्त विद्यार्थियों को उद्यमशीलता की प्रेरणा देते हुए कहा कि स्वाभाविक और सहजता से ही चुनौतियों का सामना किया जा सकता है। वैदिक उक्ति तमसो मा योर्तिगमय: को उध्दृत करते हुए उन्होंने कहा कि ज्ञान ही मनुष्य को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाता है। विद्या के बिना मानव समाज का सर्वांगीण विकास संभव नहीं है। विश्व में आज जितने भी विकसित देश है वे शिक्षा के क्षेत्र में उतने ही प्रगतिशील है। &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;राज्यपाल ने कहा कि केन्द्र सरकार ने शिक्षा तंत्र को सुदृढ़ करने के लिए बजट में 16 प्रतिशत वृध्दि की है। गत वर्ष जहां शिक्षा पर 26 हजार 800 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था, वहीं वर्ष 2010-11 के लिए केन्द्र ने 31 हजार 36 करोड़ रुपये का निर्धारण किया है। इसके अतिरिक्त शिक्षा के लिए बजट में 3 हजार 675 करोड़ रुपये अनुदान के लिए देने की व्यवस्था की गई है। हरियाणा प्रदेश में शिक्षा के आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के लिए सरकार ने सोनीपत जिला के कुंडली में राजीव गांधी एजुकेशन सिटी स्थापित करने, दीनबंधु सर छोटूराम इंजीनिरयरिंग कालेज मुरथल को तकनीकी विश्वविद्यालय का दर्जा देने, गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय, हिसार का दर्जा बढ़ाने, खानपुर में उत्तर भारत का पहला महिला विश्वविद्यालय खोले जाने जैसे ठोस कदम उठाए है। प्रदेश सरकार वैश्वीकरण के युग को ध्यान में रखते हुए अत्याधुनिक व गुणात्मक शिक्षा मुहैया करवाने के लिए सतत प्रयासरत है। &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;राज्यपाल ने पद्म विभूषण से सम्मानित स्व. डा. जी.डी. बिड़ला द्वारा देशभर में स्थापित किए गए तकनीकी शिक्षण संस्थानों की सराहना करते हुए कहा कि उन्हें भी बिड़ला से मुलाकात करने का अवसर प्राप्त हुआ। डा. बिडला शिक्षा के प्रति विशेष लगाव रखते थे। राज्यपाल ने इस मौके पर अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस की बधाई देते हुए कहा कि हमारी बेटियों, माताओं और बहनों ने पुरुषों के साथ न केवल कंधे से कंधा मिलाकर काम किया है, बल्कि कुछ क्षेत्रों में वे उनसे आगे भी निकल गई है। समारोह में रायपाल ने टीआईटी संस्थान के विद्यार्थियों को विभिन्न विषयों में स्नातक एवं स्नात्तकोत्तर की उपाधि प्रदान की तथा राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर संस्थान का नाम रोशन करने वाले छात्र-छात्राओं तथा प्राध्यापकों को सम्मानित भी किया। समारोह में टीआईटी के चेयरमैन आर.के. डालमिया ने राज्यपाल का स्वागत करते हुए बताया कि वर्ष 1943 में डा. घनश्याम दास बिड़ला ने युवाओं को उत्तम श्रेणी की शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से भिवानी में टीआईटी की स्थापना की थी, ताकि छात्र पढाई के साथ-साथ कपड़ा मिल में व्यवहारिक ज्ञान भी प्राप्त कर सके। &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;कार्यक्रम में कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. आर.पी.बाजपेई ने कहा कि भिवानी और कानपुर को किसी समय में भारत का मानचेस्टर कहा जाता था। उन्होंने डिग्रीधारक छात्रों से आह्वान किया कि वे बंगलादेश की मलमल से उत्तम श्रेणी का कपड़ा तैयार करें और वस्त्र उत्पादन में भारत को विश्व में पहले स्थान पर खड़ा करने का संकल्प लें। समारोह में विशिष्ट अतिथि बिट्स पिलानी के कुलपति प्रो. एल.के. माहेश्वरी ने छात्रों को समझाया कि उन पर एक वैश्विक नागरिक होने का दायित्व है तथा वे देश की ही नहीं, बल्कि विश्व स्तर पर व्याप्त चुनौतियों को समझते हुए मानव कल्याण की दिशा में कार्य करें। समारोह में टीआईटी के निदेशक डा. ऋषि प्रकाश जमदगि् ने संस्थान की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की व भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डाला। टीआईटीएस भिवानी के संयुक्त अध्यक्ष एस.के. कपूर ने अतिथिगण का आभार प्रकट किया। &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;इसके बाद स्थानीय संवाददाताओं से बातचीत करते हुए राज्यपाल ने कहा कि महिलाओं ने हर क्षेत्र में तरक्की की है। लिंगानुपात की स्थिति को सुधारने के लिए कानून के साथ-साथ सामाजिक संस्थाओं द्वारा आम नागरिकों को सचेत एवं जागरूक करना चाहिए। उन्होंने लोगों से अनुरोध किया कि कोई भी व्यक्ति कन्या भ्रूण हत्या के घिनौने अपराध में संलिप्त पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कार्यवाही अमल में लाने में सरकार का सहयोग करें। एक अन्य जवाब में महामहिम ने कहा कि हरियाणा सरकार ने चिकित्सा, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए बजट में वृध्दि करने जा रही है। &lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2673854500109758020-7209379428601747809?l=www.starnewsagency.in' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;p&gt;&lt;a href="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/oHx0LTGpvY7SL2TrVy0ljcae95g/0/da"&gt;&lt;img src="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/oHx0LTGpvY7SL2TrVy0ljcae95g/0/di" border="0" ismap="true"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt;&lt;br/&gt;
&lt;a href="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/oHx0LTGpvY7SL2TrVy0ljcae95g/1/da"&gt;&lt;img src="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/oHx0LTGpvY7SL2TrVy0ljcae95g/1/di" border="0" ismap="true"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;</description><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2010-03-08T19:09:53.948+05:30</app:edited><media:thumbnail url="http://4.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/S5T9uNN12UI/AAAAAAAAFEE/Nqed38RiK14/s72-c/star.jpg" height="72" width="72" /><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>तस्लीमा, रुश्दी और फिदा हुसैन</title><link>http://www.starnewsagency.in/2010/03/blog-post_4178.html</link><category>राष्ट्रीय</category><category>विचार</category><author>noreply@blogger.com (Star News Agency)</author><pubDate>Mon, 08 Mar 2010 04:43:47 PST</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-2673854500109758020.post-4944337467697856741</guid><description>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/S5TdY9e7F3I/AAAAAAAAFDk/dAkN4c4o65M/s1600-h/M-F-Hussain.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" kt="true" src="http://1.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/S5TdY9e7F3I/AAAAAAAAFDk/dAkN4c4o65M/s320/M-F-Hussain.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;सलीम अख्तर सिद्दीकी&lt;/strong&gt; &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;मुझे पेंटिंग समझ में नहीं आती हैं। आड़ी-तिरछी लकीरों के बीच चित्रकार क्या कहना चाहता है, इसे आज तक नहीं समझ सका हूं। और जो लोग, मकबूल फिदा हुसैन पर रोज तीर चला रहे हैं, उनमें से अधिकतर की हालत भी शायद मेरी जैसी ही हो। सब कुछ सही चल रहा था। हुसैन की पेंटिंग महंगी से महंगी बिक रही थी, लेकिन 'विचार मीमांसा' नाम की हद दर्जे की एक घटिया पत्रिका ने एक बार कवर स्टोरी छापी थी, 'यह चित्रकार है या कसाई'. बस इस स्टोरी के छपने के बाद फिदा हुसैन द्वारा खींची गईं आड़ी-तिरछी लकीरों में कुछ लोगों को भारत माता की नंगी तस्वीर दिखाई दे गई तो कुछ लोगों को मां सरस्वती का नग्न अक्स नजर आ गया था। उसके बाद से फिदा हुसैन हिन्दूवादी संगठनों के निशाने पर आ गए थे। हालांकि यही वे लोग हैं, जो तस्लीमा नसरीन और सलमान रुश्दी पर मुस्लिम कट्टरपंथियों के हमले को अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला मानते थे। यही लोग तस्लीमा नसरीन को भारत की नागरिकता दिलाने की पुरजोर मांग करते थे, लेकिन इसके विपरीत यही हिन्दूवादी संगठन एमएफ हुसैन की कलाकृतियों को आग के हवाले करके उन पर ताबड़तोड़ मुकदमे करने से भी बाज नहीं आए थे। यहां पर उनके लिए अभिव्यक्ति की आजादी कोई मायने नहीं रखती थी। सवाल यह है कि तस्लीमा का समर्थन और हुसैन का विरोध क्यों? क्या तस्लीमा का समर्थन इसलिए किया जाता है, क्योंकि वे इस्लाम और मुसलमानों को कठघरे में खड़ा करती रही हैं। क्या एमएफ हुसैन का विरोध इसलिए, क्योंकि हिन्दूवादी संगठनों को लगता है कि हुसैन हिन्दू देवी-देवताओं की नग्न तस्वीरें अपने कैनवास पर उकेर रहे हैं। बात अगर अभिव्यक्ति की आजादी की है तो तस्लीमा के साथ ही हुसैन का समर्थन भी किया जाना चाहिए। दरअसल, हिन्दूवादी संगठन हर उस आदमी को अपना स्वाभाविक मित्र मान लेते हैं, जो इस्लाम पर प्रहार करता है। इसीलिए वे तस्लीमा नसरीन, सलमान रुश्दी और डेनमार्क के कार्टूनिस्ट की हिमायत में खड़े नजर आते हैं और इन्हें अभिव्यक्ति की आजादी की चिंता सताने लगती है। &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;एमएफ हुसैन की कतर की नागरिकता लेने के बाद जो बहस फिदा हुसैन को लेकर चलाई जा रही है, उसमें कुछ बातें ऐसी हैं, जिन्हें पढ़कर हंसी आती है। मसलन, इस बात को बार-बार उठाया जा रहा है कि हुसैन में हिम्मत है तो हजरत मुहम्मद साहब की तस्वीर बना कर दिखाएं। इस तर्क पर हंसी आती है। सब जानते हैं कि इस्लाम में तस्वीर बनाने की मनाही है, पैगम्बरों की तो किसी भी सूरत में तस्वीर नहीं बनाई जा सकती। इसके पीछे शायद कारण यह है कि इस्लाम ने बुतपरस्ती को सख्ती से मना किया है। लेकिन हिन्दू धर्म में तस्वीर बनाना न केवल जायज है, बल्कि सभी देवी देवताओं की तस्वीरें, मौजूद हैं, जिनके सामने खड़े होकर पूजा की जाती है। ऐसे में यह कहना कि हुसैन किसी पैगम्बर की तस्वीर बनाकर दिखाएं, कुतर्क के अलावा कुछ नहीं है। चलो मान लिया यदि हुसैन ऐसा कर सकें तो क्या हुसैन के विरोधी उनके समर्थक हो जाएंगे? क्या हुसैन का सरस्वती को नंगा चित्र बनाना जायज ठहरा दिया जाएगा? &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;जब कोई चित्रकार कोई चित्र बनाता है तो उसके दिमाग में यह तो होता ही होगा कि वह चित्र के माध्यम के क्या कहना चाहते है। इस सारे विवाद के बाद भी सम्भवतः हुसैन से किसी ने यह सवाल नहीं किया कि आखिर जिस तरह की चित्रकारी वे करते हैं, उसके पीछे उनकी क्या भावना रहती है? विवाद के दौरान हुसैन की तरफ से भी आज तक यह नहीं कहा गया कि जिन विवादित पेंटिंगों पर बवाल किया जा रहा है, उन्हें बनाने के पीछे उनकी अपनी क्या सोच रही थी? मसलन, मां सरस्वती का कथित चित्र उन्होंने क्या सोच कर बनाया था। इस प्रकार का कोई स्पष्टीकरण आ जाता तो शायद इतना बखेड़ा खड़ा नहीं होता। मैं यहां यह भी स्पष्ट कर दूं कि मैं न तो एमएफ हुसैन का समर्थक हूं और न ही तस्लीमा नसरीन का, क्योंकि मेरा मानना रहा है कि कला के नाम पर किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना सही बात नहीं है। भारत बहुधर्मी और विविधताओं से भरा देश है। यहां धर्म और आस्था के नाम दंगा-फसाद आम बात है। जिस देश में मात्र अफवाह से पूरे देश में गणेश जी दूध पीने लगते हों, दुल्हेंडी के दिन दोबारा से होली का पूजन किया जाता हो, किसी जीव के विचित्र बच्चा पैदा होने पर उसे पूजा जाने लगता हो, वहां पर धार्मिक प्रतीकों से छेड़छाड़ बवाल का कारण तो बनता ही है। और फिर अफवाह को आग में तब्दील करने वाले कट्टरपंथियों की पूरी फौज भी तो मौजूद है। एक बात और, तस्लीमा नसरीन, सलमान रुश्दी और एमएफ हुसैन जैसे कलाकारों पर विवाद इनकी मार्कीट वैल्यू बढ़ाने में मदद करता है। तस्लीमा नसरीन के 'लज्जा' और सलमान रुश्दी के 'द सैटेनिक वर्सेज' पर कट्टपंथी बवाल नहीं करते तो ये दोनों कृतियां कूड़े में फेंकने लायक हैं। जरा बताइए तो इन दोनों का और कौन-सी किताब कितने लोगों को याद है, और कितने लोगों ने पढ़ी है? &lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2673854500109758020-4944337467697856741?l=www.starnewsagency.in' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;p&gt;&lt;a href="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/KwgFgFG7zl3P1j7gEi4cD4GrX-E/0/da"&gt;&lt;img src="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/KwgFgFG7zl3P1j7gEi4cD4GrX-E/0/di" border="0" ismap="true"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt;&lt;br/&gt;
&lt;a href="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/KwgFgFG7zl3P1j7gEi4cD4GrX-E/1/da"&gt;&lt;img src="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/KwgFgFG7zl3P1j7gEi4cD4GrX-E/1/di" border="0" ismap="true"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;</description><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2010-03-08T18:13:47.142+05:30</app:edited><media:thumbnail url="http://1.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/S5TdY9e7F3I/AAAAAAAAFDk/dAkN4c4o65M/s72-c/M-F-Hussain.jpg" height="72" width="72" /><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">3</thr:total></item><item><title>हंगामे के बीच महिला आरक्षण विधेयक राज्यसभा में पेश</title><link>http://www.starnewsagency.in/2010/03/blog-post_2368.html</link><category>राष्ट्रीय</category><category>अंतर्राष्ट्रीय</category><category>*</category><author>noreply@blogger.com (Star News Agency)</author><pubDate>Tue, 09 Mar 2010 19:36:28 PST</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-2673854500109758020.post-5836628600106184818</guid><description>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/S5TbmRW-9xI/AAAAAAAAFDc/Kqw9DzpKNpc/s1600-h/Indian-Parliament.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" kt="true" src="http://2.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/S5TbmRW-9xI/AAAAAAAAFDc/Kqw9DzpKNpc/s320/Indian-Parliament.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;फ़िरदौस ख़ान&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;नई दिल्ली.&lt;/strong&gt; भारी हंगामे के बीच महिला आरक्षण विधेयक राज्यसभा में पेश हो ही गया. हालांकि इस विधेयक को लेकर संसद के दोनों सदनों में हंगामा चल रहा है. राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और समाजवादी पार्टी (सपा) सांसदों ने इसका जमकर विरोध किया है. राज्यसभा की कार्रवाई को शाम छह बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया है. उम्मीद ज़ाहिर की जा रही है कि शाम छह बजे राज्यसभा में महिला आरक्षण विधेयक पर मतदान होगा. इसी तरह लोकसभा की कार्यवाही भी मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दी गई है. इतना ही नहीं महिला&amp;nbsp;आरक्षण विधेयक से नाराज़ राष्ट्रीय जनता दल और समाजवादी पार्टी ने केंद्र की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) की सरकार से समर्थन भी वापस ले लिया है.&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;क़ानून मंत्री वीरप्पा मोईली ने आज ये विधेयक पेश किया. इस दौरान राजद और सपा के सांसदों ने जमकार शोर-शराबा और हंगामा किया. कुछ सांसद तो राज्यसभा के सभापति उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी के आसन तक पहुंच गए और उनसे फ़ाइल छीनने की कोशिश तक कर डाली. कुछ सांसदों ने विधेयक की प्रतियां फाड़ डालीं. बाद में राज्यसभा को तीन बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया, लेकिन तीन बजे भी कमोबेश यही हालत रही और सदन को चार बजे तक के लिए और फिर इसके बाद इसे छह बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया है.&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;इसी तरह लोकसभा में भी इस विधेयक को लेकर सांसदों ने ख़ूब हंगामा किया. राष्ट्रीय जनता दल, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के सांसद इस विधेयक का विरोध करते हुए अध्यक्ष के आसन तक पहुंच गए और उन्होंने काफ़ी हंगामा किया. शोर-शराबे को देखते हुए लोकसभा की भी कार्यवाही मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दिया गया है. &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;क़ाबिले-गौर है कि पहली बार महिला आरक्षण विधेयक क़रीब 14 साल पहले 1996 में संसद में पेश किया गया था, लेकिन सियासी दलों की रस्साकशी के चलते यह विधेयक पारित नहीं हो पाया. तब से लेकर इस मुद्दे को लेकर खूब सियासी रोटियां सेंकी जाती रही हैं. आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर यूपीए सरकार ने महिलाओं को आरक्षण का तोहफ़ा देने का मन बनाया हुआ था. अगर यह विधेयक पारित हो जाता है तो इतिहास बन जाएगा. महिला दिवस के इतिहास में भारत का नाम भी स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा. &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;गौरतलब है कि यह दिवस 8 मार्च को दुनियाभर में मनाया जाता है. सबसे पहले यह दिवस 28 फ़रवरी 1909 को अमेरिका में मनाया गया था. इसका आह्वान अमेरिका की सोशलिस्ट पार्टी ने किया था. इसके बाद महिला दिवस फ़रवरी के आखिरी रविवार को मनाया जाने लगा. साल 1910 में सोशलिस्ट इंटरनेशनल के कोपेनहेगन में हुए सम्मेलन में इसे अंतर्राष्ट्रीय दर्जा देते हुए दुनियाभर में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाए जाने का ऐलान किया गया. उस समय इसका प्रमुख ध्येय महिलाओं को मताधिकार दिलवाना था, क्योंकि, उस वक़्त ज़्यादातर देशों में महिला को वोट देने का अधिकार नहीं था. &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;इससे महिलाओं में जागरूकता बढ़ने लगी. वे अपने अधिकारों को लेकर आवाज़ बुलंद करने लगीं. इसी का नतीजा था कि साल 1917 में रुस की महिलाओं ने महिला दिवस पर रोटी और कपड़े के लिए हड़ताल करने फ़ैसला किया. यह हड़ताल भी ऐतिहासिक थी. रूस के ज़ार ने सत्ता छोड़ दी और फिर रूस में सत्ता में आई अंतरिम सरकार ने महिलाओं को वोट देने का अधिकार दिया. उस वक़्त रुस में जुलियन कैलेंडर चलता था और बाकी दुनिया में ग्रेगेरियन कैलेंडर. इन दोनों की तारीखों में काफ़ी फ़र्क है. जुलियन कैलेंडर के मुताबिक 1917 की फ़रवरी का आख़िरी रविवार 23 फ़रवरी को था जब की ग्रेगेरियन कैलैंडर के मुताबिक़ उस दिन 8 मार्च था. मौजूदा दौर में रूस सहित दुनियाभर में ग्रेगेरियन कैलैंडर चलता है. इसलिए 8 मार्च को महिला दिवस के तौर पर मनाया जाने जाता है. आज महिला दिवस पर भारत में महिलाओं को सियासी तौर पर अधिकार दिए जाने की पहले की गई है, बस इसके नतीजे का इंतज़ार है. &lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2673854500109758020-5836628600106184818?l=www.starnewsagency.in' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;p&gt;&lt;a href="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/1xulrQy7gy-m_WRoI92ETqzAAwo/0/da"&gt;&lt;img src="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/1xulrQy7gy-m_WRoI92ETqzAAwo/0/di" border="0" ismap="true"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt;&lt;br/&gt;
&lt;a href="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/1xulrQy7gy-m_WRoI92ETqzAAwo/1/da"&gt;&lt;img src="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/1xulrQy7gy-m_WRoI92ETqzAAwo/1/di" border="0" ismap="true"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;</description><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2010-03-10T09:06:28.703+05:30</app:edited><media:thumbnail url="http://2.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/S5TbmRW-9xI/AAAAAAAAFDc/Kqw9DzpKNpc/s72-c/Indian-Parliament.jpg" height="72" width="72" /><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>लाहौर में बम धामाका, पांच मरे, 60  ज़ख्मी</title><link>http://www.starnewsagency.in/2010/03/60.html</link><category>अंतर्राष्ट्रीय</category><author>noreply@blogger.com (Star News Agency)</author><pubDate>Sun, 07 Mar 2010 21:28:46 PST</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-2673854500109758020.post-929741384366171643</guid><description>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/S5SK_9IlDCI/AAAAAAAAFDE/uWj4YC8RJQs/s1600-h/lahore.gif" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" kt="true" src="http://3.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/S5SK_9IlDCI/AAAAAAAAFDE/uWj4YC8RJQs/s320/lahore.gif" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;स्टार न्यूज़ एजेंसी &lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;लाहौर (पाकिस्तान).&lt;/strong&gt; स्थानीय पुलिस की विशेष जांच इकाई के कार्यालय में आज सुबह हुए&amp;nbsp;एक शक्तिशाली बम विस्फोट में 5 लोगों के मारे जाने व 60 के घायल होने की खबर है. घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में पहुंचाया गया है. &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;बताया जा रहा है कि विस्फोटकों से भरी एक गाड़ी संघीय जांच एजेंसी (एफआईए) की इमारत से जा टकराई और जोरदार धमाके के साथ इमारत धराशायी हो गई और उसमें कई लोग दब गए. विस्फोट की जगह पर 17 फुट गहरा गड्ढा़ हो गया है. पूरे शहर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई&amp;nbsp;है. &lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2673854500109758020-929741384366171643?l=www.starnewsagency.in' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;p&gt;&lt;a href="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/Zxj4iRllHcY_y91n7JcES0n4p6E/0/da"&gt;&lt;img src="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/Zxj4iRllHcY_y91n7JcES0n4p6E/0/di" border="0" ismap="true"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt;&lt;br/&gt;
&lt;a href="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/Zxj4iRllHcY_y91n7JcES0n4p6E/1/da"&gt;&lt;img src="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/Zxj4iRllHcY_y91n7JcES0n4p6E/1/di" border="0" ismap="true"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;</description><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2010-03-08T10:58:46.728+05:30</app:edited><media:thumbnail url="http://3.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/S5SK_9IlDCI/AAAAAAAAFDE/uWj4YC8RJQs/s72-c/lahore.gif" height="72" width="72" /><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>याद रहेगी बेगम हज़रत महल की क़ुर्बानी</title><link>http://www.starnewsagency.in/2010/03/blog-post_5003.html</link><category>विरासत</category><author>noreply@blogger.com (Star News Agency)</author><pubDate>Sun, 07 Mar 2010 19:02:52 PST</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-2673854500109758020.post-7265915896188490239</guid><description>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/S5Ro0W-pwLI/AAAAAAAAFC8/LXRwl329RXI/s1600-h/hazrat+mahal.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" kt="true" src="http://1.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/S5Ro0W-pwLI/AAAAAAAAFC8/LXRwl329RXI/s320/hazrat+mahal.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;पेशकश : चांदनी&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;जंगे-आज़ादी के सभी अहम केंद्रों में अवध सबसे ज्यादा वक़्त तक आज़ाद रहा। इस बीच बेगम हज़रत महल ने लखनऊ में नए सिरे से शासन संभाला और बगावत की कयादत की। तकरीबन पूरा अवध उनके साथ रहा और तमाम दूसरे ताल्लुकदारों ने भी उनका साथ दिया। बेगम अपनी कयादत की छाप छोड़ने में कामयाब रहीं।&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;फैज़ाबाद के एक बेहद ग़रीब परिवार में पैदा हुई इस लडक़ी (बेगम) को नवाब वाजिद अली शाह के हरम में बेगमात की खातिरदारी के लिए रखा गया था, लेकिन उनकी खूबसूरती और अक्लमंदी पर फ़िदा होकर नवाब ने उसे अपने हरम में शामिल कर लिया। बेटा होने पर नवाब ने उसे 'महल' का दर्जा दिया। ब्रिटिश संवाददाता डब्ल्यू। एच. रसेल के मुताबिक़ बेगम अपने शौहर वाजिद अली शाह से कहीं ज़्यादा क़ाबिल थीं। वाजिद अली ने भी इसे मानने में कोई हिचकिचाहट महसूस नहीं की।&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;बेगम की हिम्मत का इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि उन्होंने मटियाबुर्ज में जंगे-आज़ादी के दौरान नज़रबंद किए गए वाजिद अली शाह को छुड़ाने के लिए लार्ड कैनिंग के सुरक्षा दस्ते में भी सेंध लगा दी थी। योजना का भेद खुल गया, वरना वाजिद अली शाह शायद आज़ाद करा लिए जाते। इतिहासकार ताराचंद लिखते हैं कि बेगम खुद हाथी पर चढक़र लडाई के मैदान में फ़ौज का हौसला बढ़ाती थीं।&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;जंगे-आज़ादी की कमान संभालने से पहले बेगम हज़रत महल ने अपने बारह साला बेटे शहजादे बिरजिस कद्र को अवध का नवाब घोषित कर दिया था। इसकी मान्यता उन्होंने आखिरी मुगल बादशाह बहादुरशाह ज़फ़र से भी ली, ताकि उन्हें कानून उनका हक मिल सके। ऐसा इसलिए भी किया गया कि इससे पहले गाजिउद्दीन हैदर (1814-1827) ने मुगलों से नाता तोड़कर खुद को इंग्लैंड के राजा के अधीन घोषित कर दिया था। वे 1819 में अवध के प्रभु संपन्न राजा बने थे। इसलिए जंगे-आज़ादी के वक़्त नवाब की कानूनन हालत मुल्क के दूसरे सूबेदारों से अलग थी।&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;बेगम के सामने कई दिक्कतें थीं। वे खुद भी नवाब का ओहदा संभाल सकती थीं। उन्हें यह भी समझाया गया कि अगर वे बगावत करेंगी तो मटियाबुर्ज में वाजिद अली शाह की जान पर बन सकती है। उनकी राह में उनकी बाकी सौतों रोड़ा बनी हुई थीं। इन्हीं हालात के बीच उन्होंने फ़ैसला लिया। इसमें उनका सबसे ज़्यादा साथ वाजिद अली शाह के हरम के दरोगा मम्मू खान और नवाबों के पुश्तैनी वफ़ादार रहे राजा जयलाल सिंह ने दिया। राजा जयलाल सिंह ने अवध के ताल्लुकदारों को बेगम के इरादों से वाकिफ कराते हुए भरोसा दिलाया और उन्हें बेगम के समर्थन में लामबंद कर लिया। मम्मू खान ने बाकी बेगमों की तऱफ से हो रहे विरोध को भी संभाला। तब बिरजिस कद्र को जुलाई में अवध का नवाब बनाया गया और शासन की कमान बेगम ने ख़ुद संभाली।&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;शुरुआती अव्यवस्था से निपट कर बेगम ने अवध के शासन को व्यवस्थित करने का काम संभाला। उनके सामने कई चुनौतियां थीं। शहर की बिगडती क़ानून व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए बेगम ने अली राजा बेग को शहर कोतवाल नियुक्त किया। शहर में अमन-चैन कायम होने लगा। राजधानी होने के नाते लखनऊ की सुरक्षा का काम काफी मुश्किल था, क्योंकि जंगे-आज़ादी के नेताओं में आपस में और बेगम व मौलवी अहमदुल्ला में मतभेद पैदा हो गए थे। कैसरबाग की कई बेगमें भी हज़रत महल के ख़िलाफ़ थीं और रेजिडेंसी में रह रहे अंग्रेज़ सेनापतियों को गुप्त सूचनाएं भेज रही थीं, क्योंकि उन्हें अपनी सुरक्षा और जागीरों की फ़िक्र अवध की बजाय ज़्यादा थी।&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;हालांकि ज़्यादातर अंग्रेज़ लखनऊ को छोड़ चुके थे, फिर भी अवध के कई ज़िलों में ताल्लुकदारों से उनका संघर्ष जारी था। इन सेनानियों को मदद पहुंचानी थी। यह जाहिर था कि अंग्रेज अवध पर अपना वर्चस्व फिर कायम करने के लिए जोरदार हमला करेंगे, इसलिए सुरक्षा की मुकम्मल रणनीति भी बनानी थी। बेगम की सरकार की माली हालत खस्ता थी, जिसे बेहतर करना था। साथ ही अवध की लड़ाई में साथ देने के लिए कानुपर और दिल्ली वगैरह से बंगाल आर्मी के काफ़ी तादाद में जो सिपाही लखनऊ पहुंच चुके थे, उनकी तनख्वाह और रसद का इंतज़ाम भी बेगम को करना था। मशहूर लेखक रोशन तकी के मुताबिक़ ताल्लुकदारों की मदद से बेगम इस काम में काफ़ी हद तक कामयाब रहीं।&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;इन चुनौतियों से निपटने के लिए 26 से 28 नवंबर 1857 के बीच बेगम ने फ़ौरी तौर पर कई काम किए। 26 नवंबर को ही राजा देवीबख्श सिंह की फ़ौज ने लखनऊ में चिनहट की लड़ाई के बाद बची रह गई फौज के हमले को नाकाम कर बनी गांव की तरफ खदेड दिया। 27 नवंबर को सूचना मिली कि कॉलिन कैंपबेल कानुपर से लखनऊ के लिए चल पड़ा है। इसी बीच जनरल आउटरम भी आलमबाग में डेरा डाल चुका था। उनको पीछे धकेलने के लिए कई ताल्लुकदारों की सेना राजा देवीबख्श सिंह की अगुवाई में तैनात की गई। साथ ही अवध के समृध्द इलाके के ताल्लुकदारों को उनके इलाके में रवाना किया गया कि वे रसद और सेना का इंतज़ाम करें।&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;इन शुरुआती कदमों के बाद बेगम ने एक रक्षा परिषद बनाई। इसने तय किया कि कैसरबाग को मुख्य दुर्ग माना जाए। इसके अलावा सात और ऐसी जगहों की निशानदेही की गई, जहां से अंग्रेजी सेना लखनऊ में दाखिल को सकती थी। यहां पर सेना की तैनाती के साथ-साथ खाई भी खुदवाई गई। इसी रणनीति का यह नतीजा रहा कि लंबे वक्त तक रेजिडेंसी घिरी रही। नतीजतन, दूसरी अहम लड़ाई मार्च 1858 में ही हो पाई, जिसमें अवध की सेना को पीछे हटना पड़ा।&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;हालात बिगड़ते देख ताल्लुकदारों ने बेगम को उनके बेटे बिरजिस कद्र के साथ सुरक्षित नेपाल भेज दिया और लडाई जारी रखी। बेगम के प्रमुख सेनापति राजा जयपाल सिंह और राना बेनीमाधव दरगाह पर लगे मोर्चे पर पहुंचे और कसम खाई कि वे आखिरी दम तक लडेंग़े। जंगे-आज़ादी के तमाम नेता महीनों गुरिल्ला लड़ाई लड़ते रहे। आखिरकार इनमें से ज़्यादातर फांसी पर चढ़ा दिए गए। खुद लार्ड कैनिंग ने कुबूल किया कि तमाम कोशिशों के बावजूद हम 1859 तक अवध को एक हद तक शांत और व्यवस्थित कर सके। उधर, 1879 में नेपाल में बेगम का इंतकाल हो गया।&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2673854500109758020-7265915896188490239?l=www.starnewsagency.in' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;p&gt;&lt;a href="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/Jrk-qwDnFOeBbeiW9yeRFotnwbA/0/da"&gt;&lt;img src="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/Jrk-qwDnFOeBbeiW9yeRFotnwbA/0/di" border="0" ismap="true"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt;&lt;br/&gt;
&lt;a href="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/Jrk-qwDnFOeBbeiW9yeRFotnwbA/1/da"&gt;&lt;img src="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/Jrk-qwDnFOeBbeiW9yeRFotnwbA/1/di" border="0" ismap="true"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;</description><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2010-03-08T08:32:52.371+05:30</app:edited><media:thumbnail url="http://1.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/S5Ro0W-pwLI/AAAAAAAAFC8/LXRwl329RXI/s72-c/hazrat+mahal.jpg" height="72" width="72" /><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>हमारा एक टी.वी. इंटरव्यू</title><link>http://www.starnewsagency.in/2010/03/blog-post_6743.html</link><category>व्यंग्य</category><author>noreply@blogger.com (Star News Agency)</author><pubDate>Mon, 08 Mar 2010 02:44:43 PST</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-2673854500109758020.post-8114178309782529016</guid><description>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/S5TUuRayzrI/AAAAAAAAFDU/WxFbiSiJbFU/s1600-h/reporter.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" kt="true" src="http://2.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/S5TUuRayzrI/AAAAAAAAFDU/WxFbiSiJbFU/s320/reporter.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;अतुल मिश्र&lt;/strong&gt; &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;सक्रिय पत्रकारिता में निष्क्रिय रहने के बाद जब हमने स्वतंत्र स्तम्भ-लेखन में बिना किसी की परमीशन के पदार्पण कर दिया तो एक टी.वी. चैनल ने हमें इस लायक समझा कि हमारा बाकायदा एक इंटरव्यू लिया जाये. जुगाडू संस्कृति में आस्था रखने वाले हमारे एक मित्र ने अपने चैनल के ऑफिस से फ़ोन करके बताया कि यार, तुम्हारा इंटरव्यू लेना है, तैयार रहना. हमने अपनी साप्ताहिक शेव को साफ़ करने में इतना वक़्त दिया कि शीशे के सामने विभिन्न किस्म के सवालों के जवाब में बनाए जाने वाले विभिन्न किस्म के चेहरे बना कर देख सकें. इसके बाद जो दूसरा सबसे अहम काम हमने किया, वह यह था कि कोई ऐसा कुरता-पायजामा अपनी अलमारी के किसी अज्ञात कोने से ढूंढ़ निकाला जिससे, यह बात साफ़ तौर पर ज़ाहिर हो कि हम वाक़ई स्वतंत्र-लेखन के क्षेत्र में आने के दंश झेल रहे हैं.&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;वक़्त की पाबंदी से कोई वास्ता ना रखने वाले हमारे वह मित्र निर्धारित वक़्त के आसपास ही घर पहुंच गए. विडियोग्राफर ने अपने और कमरे के आकार के हिसाब से अपनी पोज़ीशन ले ली. मित्र ने अपना माइक हमारे मुंह में बिना घुसेड़े हमसे बातचीत शुरू की.&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;"खोजी पत्रकारिता से इस तरह संन्यास लेने की वजह ?" मित्र ने पहला सवाल ही कुछ इस किस्म का किया कि हमने शीशे के सामने चूंकि उसका कोई रियाज़ ही नहीं किया था, इसलिए सकपका गए.&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;"अच्छा सवाल किया आपने." हमने यह कहते हुए इसका सही लगने वाला जवाब तलाशने की कोशिश में एक निगाह शून्य की तरफ इस उम्मीद से डाली कि शायद वहीँ से कुछ हासिल हो जाये. "अब यह तो वक़्त की बात है," वक़्त पर इल्ज़ाम लागते हुए हमने कहा, "दरअसल, खोजी पत्रकारिता में अब वह बात नहीं रही, जो कभी हमारे ज़माने में हुआ करती थी." इस ज़माने को कोसे बिना हमने अपनी बात कहने की कोशिश की.&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;"चलिए माना, लेकिन आपने व्यंग्य को ही अपने स्वतंत्र-लेखन के लिए क्यों चुना ? और भी तो विधाएं थीं ?" यह सवाल भी अनापेक्षित था और इसका कोई पूर्वाभ्यास हम शीशे के सामने नहीं कर पाए थे.&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;"मेरी शुरुआत ही व्यंग्यचित्र और व्यंग्य कविताओं के लेखन से हुई थी, तब में नवीं क्लास में पढ़ता था, जब पहला कार्टून नवभारत टाइम्स में छपा. इसके बाद फिर लगातार छपता रहा. खोजी पत्रकारिता 'माया' पत्रिका के दिनों की बात है. तब दिल्ली में 'हिन्द्वार्ता' न्यूज़ एंड फीचर्स का सम्पादक भी था. वे जवानी के दिन थे." हमने अपनी जवानी के दिनों की खुराफातों का स्मरण करते हुए हंसकर जवाब दिया और जिसका हम शीशे के सामने रियाज़ कर ही चुके थे.&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;"अब कैसा महसूस कर रहे हैं ?" हमें रुलाने वाला सवाल पूछकर हमारे मित्र को जो सुकून मिल रहा होगा, उसका हमने अंदाजा लगा लिया था.&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;"बहुत अच्छा. इतना अच्छा कि आपको बता भी नहीं सकते. कोई बंधन नहीं. कोई बौस नहीं कि यह काम दस दिन से यूं ही पड़ा है और क्यों नहीं हुआ ? अपने मन के राजा हैं अब हम." अपना यह जवाब देते हुए हमने उन तमाम दुश्वारियों को एक साथ गिन डाला, जो इन दिनों 'मन के राजा' होने की वजह से ही हमारे सामने पेश आ रही थीं.&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;हमारा इंटरव्यू लेने के बाद टी.वी. चैनल वाला मित्र तो नाश्ता करके चला गया, मगर हमारे सामने कई सवाल खड़े कर गया और जो स्वतंत्र-लेखन, अखबारी घाटों, राशन और महंगाई से संबंध रखता था.&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2673854500109758020-8114178309782529016?l=www.starnewsagency.in' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;p&gt;&lt;a href="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/1G4OkSaUn1ZaW6LxT_96pYP7kkU/0/da"&gt;&lt;img src="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/1G4OkSaUn1ZaW6LxT_96pYP7kkU/0/di" border="0" ismap="true"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt;&lt;br/&gt;
&lt;a href="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/1G4OkSaUn1ZaW6LxT_96pYP7kkU/1/da"&gt;&lt;img src="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/1G4OkSaUn1ZaW6LxT_96pYP7kkU/1/di" border="0" ismap="true"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;</description><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2010-03-08T16:14:43.332+05:30</app:edited><media:thumbnail url="http://2.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/S5TUuRayzrI/AAAAAAAAFDU/WxFbiSiJbFU/s72-c/reporter.jpg" height="72" width="72" /><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>जीवन में योग का महत्व</title><link>http://www.starnewsagency.in/2010/03/blog-post_5883.html</link><category>सेहत</category><author>noreply@blogger.com (Star News Agency)</author><pubDate>Mon, 08 Mar 2010 05:07:46 PST</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-2673854500109758020.post-3263523735164710360</guid><description>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/S5T2j9qBkGI/AAAAAAAAFDs/N4EmW7TvC-E/s1600-h/meditation.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" kt="true" src="http://3.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/S5T2j9qBkGI/AAAAAAAAFDs/N4EmW7TvC-E/s320/meditation.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;संजय आहूजा&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;हज़ारों साल पहले जब मुग़ल भी भारत नहीं आए थे और जब भारत सोने की चिड़िया भी नहीं बना था, हमारे संतों और वैद्यों ने गहन अध्ययन के बाद योग और चिकित्सा का एक ऐसा तंत्र तैयार किया था जिसे जीवन शैली में उतारने के बाद छोटी-मोटी बीमारियों से तो बचा ही जा सकता था. बल्कि यह कहना सही होगा कि निरोगी जीवन बिना किसी अधिक परिश्रम के जीने का साधन बनाया था. यह पद्धति आज भी उतनी ही माननीय है जितनी शताब्दियों पहले. इसका मुख्य कारण है कि इसे बनाते समय हमारे पूर्वजों ने शरीर को एक मंदिर मानकर उसकी नियमित पूजा कैसे की जाए इसका विधान बनाया था. &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;योग क्या है. यह योग और कुछ नहीं है, इसका अर्थ है जोड़ना. जो भी चीज़ हमारे पास नहीं है और हम पाना चाहते हैं और किसी साधन से हम उसे पाते हैं तो उसे योग कहते हैं. इसी पद्धति में हमारे शरीर के सभी अंगों को निरोग और स्वस्थ बनाने की व्यवस्था है. हमारा शरीर पांच ज्ञानेन्द्रियों से ही सब कार्य करता है जो क्रमशः शब्द, स्पर्श, रूप, रस और गंध हैं. इनके लिए जो अंग प्रयुक्त होते हैं वे क्रमशः कान, त्वचा, आंखें, जीभ और नाक हैं. &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;यदि हम ध्यान दें तो केवल एक ही अंग ऐसा है जिसके लिए कोई भेद-भाव नहीं है और जिसे सभी समान रूप से ही उपयोग में लाते हैं. नाक को छोड़कर सभी अंग व्यक्तिगत रूप से प्रयुक्त होते हैं. वायु जैसी है सब उसका सामान रूप से बिना भेद के उपयोग करते हैं. और नाक हमारे व्यस्ततम अंगों में भी आती है. हम खाए बिना कुछ दिन तो जी ही सकते हैं, पानी के बिना भी कई घंटे आराम से निकल जाते हैं. मगर सांस लिए बिना कुछ पल भी निकालना कठिन हो जाता है. और हमारी नाक यह कार्य बिना किसी व्यवधान के इतनी शांति से करती है कि हमारे संतों ने सांसों को ही जीवन का पैमाना मान लिया कि हमारी सांसें ही हैं जो हमारा जीवन काल निर्धारित करती हैं.&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;वायु प्रदूषण : इस पृष्ठभूमि में देखा जाए तो हमारे लिए वायु का स्वच्छ होना कितना आवश्यक है. बल्कि सबसे आवश्यक वायु का ही शुद्ध होना है. मगर इसे भाग्य की विडम्बना कहें, मानव प्रगति का मूल्य या लालच का फल कि हम मानवों ने इस धरती से पेड़ों के वन काटकर इसे भवनों का वन बना दिया है. फलस्वरूप, जहां एक ओर हमने जन्गल के प्राणियों को उनके घर से निकालकर भटकने और मरने पर मजबूर कर दिया वहीँ दूसरी ओर हमने अपनी वायु को भी प्रदूषित करने के लिए दोहरे कदम उठा लिए. एक तो हरियाली घटने से पेड़ जो हमारी वायु को शुद्ध करने का कार्य करते थे उन्हें हटा दिया और दूसरी ओर वृक्षों की जड़ जो भू-स्खलन रोकती थी उसे वायु में मिलने का न्यौता दे दिया.&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;हमारी प्रगति के एक और स्तम्भ "औद्योगीकरण" ने रही-सही कसार भी पूरी कर दी. इसके कारण वायु में ज़हरीले रसायनों का मिश्रण होने से मानो त्रिकोणीय आक्रमण सा हो गया और हमारी वायु इतनी विषाक्त हो गई कि हमारे आस-पास श्वास रोगियों की जैसे भरमार ही हो गई.&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;भगवान ने जब हमें बनाया तब उनहोंने कुछ हद तक इससे सुरक्षा प्रदान करने के लिए हमारी नाक में बाल भी दिए जिससे हमारी सांस शरीर में जाने से पहले ही छन जाए (यहाँ एक बात और कहना चाहूँगा कि हमारे शरीर में जहां भी बाल हैं उनका वहां कुछ कार्य अवश्य है). मगर प्रगति की गति ने वो कण भी छोटे करके श्वास-रोगों को बढ़ावा दे दिया. &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;श्वास-रोग और योगिक क्रिया : इन रोगों में सबसे आम है "दमे का रोग". उपरोक्त कारणों से दमे के रोग ने छोटे-छोटे बच्चों को भी अपनी चपेट में ले लिया है. हमारे पूर्वजों ने इस बीमारी या सांसों कि और भी बीमारियों से बचने के लिए साधारण सी योगिक क्रिया की व्यवस्था की थी जो आज भी उतनी ही कारगर है. इस क्रिया का नाम है "जलनेति". इसे करने के लिए एक लोटा, जिसकी जड़ से एक नली निकलती है, उसकी ज़रूरत होती है. यह लोटा किसी भी योग साधना केंद्र से आसानी से मिल जाता है.&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;इस क्रिया को करने के लिए लोटा भर पानी बड़ी इलायची डालकर गर्म कर लें. पानी सामान्य से थोड़ा अधिक गर्म (मगर नासिका सह सके) गर्म हो. उसे लेकर उसमें आधी चम्मच नमक दाल लें. फिर लोटे की नली दाईं नासिका में डालकर सर बाएं कंधे की ओर झुका लें और बाईं नासिका बंद करके धीरे-धीरे श्वास खींचें. पानी ऊपर चढ़कर दूसरी नासिका से बाहर आने लगेगा. यही क्रिया बायीं नासिका से दोहराएं . इससे नासिका से दिन भर की मैल बाहर आ जाएगी और पूरा दिन भर नाक में मल भी नहीं जमेगा. पूरा लोटा ख़त्म होने के बाद "वस्त्रिका" ज़रूर करनी चाहिए. इसके करने की विधि है एक नासिका को बंद करके थोड़ा ज़ोर से सांस चोदें ताकि नाक से बचा हुआ पानी बाहर आ जाए. दोनों नासिकाओं से ऐसा करने के बाद नाक पोंछ लें.&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;आश्चर्य है इतना सरल उपाय होने पर भी हम साल भर में सैकड़ों रुपयों की दवा खाकर अपने शरीर को स्वस्थ बनाने के बजाय रसायनों का आश्रित और घर बना देते हैं. वैसे पश्चिमी संस्कृति के पुजारियों की जानकारी के लिए बताना चाहूँगा कि वहां के डाक्टरों ने भी दमे के लिए इस क्रिया को सबसे उपयोगी दवा के रूप में स्वीकार कर लिया है और वहां के बड़े डाक्टर दमे के मरीज़ों को यह क्रिया करने की ख़ास हिदायत दे रहे हैं. इससे लाभ का शोध तो अभी चल रहा होगा पर इससे उनके मरीज़ों को काफी आराम आने के समाचार मिले हैं. मैं तो कहता हूँ यही क्रिया यदि पश्चिम के किसी डाक्टर ने विकसित की होती तो जाने आज हमें उसके पेटेंट की कितनी कीमत चुकानी पड़ रही होती. मगर क्योंकि यह क्रिया भारत में विकसित हुई है, यह सारे संसार के लिए मुफ्त है. ऐसे लेख भारत के जन-जन तक पहुंचें तभी भारत में स्वास्थ्य लौटेगा और भारत की शान बढ़ेगी. &lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2673854500109758020-3263523735164710360?l=www.starnewsagency.in' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;p&gt;&lt;a href="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/NdugKzfE1tMvDNR3BIBYZeGPT34/0/da"&gt;&lt;img src="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/NdugKzfE1tMvDNR3BIBYZeGPT34/0/di" border="0" ismap="true"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt;&lt;br/&gt;
&lt;a href="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/NdugKzfE1tMvDNR3BIBYZeGPT34/1/da"&gt;&lt;img src="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/NdugKzfE1tMvDNR3BIBYZeGPT34/1/di" border="0" ismap="true"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;</description><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2010-03-08T18:37:46.228+05:30</app:edited><media:thumbnail url="http://3.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/S5T2j9qBkGI/AAAAAAAAFDs/N4EmW7TvC-E/s72-c/meditation.jpg" height="72" width="72" /><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>दहलीज़ से सियासत तक ख्वातीन</title><link>http://www.starnewsagency.in/2010/03/blog-post_08.html</link><category>मुद्दा</category><category>राष्ट्रीय</category><category>समाज</category><category>*</category><author>noreply@blogger.com (Star News Agency)</author><pubDate>Sun, 07 Mar 2010 10:31:00 PST</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-2673854500109758020.post-3039061280881041372</guid><description>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/S5M7GVi45EI/AAAAAAAAFAE/Tt5eemSwNNI/s1600-h/shabana.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" kt="true" src="http://3.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/S5M7GVi45EI/AAAAAAAAFAE/Tt5eemSwNNI/s320/shabana.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;b&gt;फ़िरदौस ख़ान&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;सदियों की गुलामी और दमन का शिकार रही भारतीय नारी अब नई चुनौतियों का सामना करने को तैयार है। इसकी एक बानगी अरावली की पहाड़ियों की तलहटी में बसे अति पिछड़े मेवात ज़िले के गांव नीमखेडा में देखी जा सकती है। यहां की पूरी पंचायत पर महिलाओं का कब्जा है। ख़ास बात यह भी है कि सरपंच से लेकर पंच तक सभी मुस्लिम समाज से ताल्लुक़ रखती हैं। जिस समाज के ठेकेदार महिलाओं को बुर्के में कैद रखने के हिमायती हों, ऐसे समाज की महिलाएं घर की चारदीवारी से बाहर निकलकर गांव की तरक्की के लिए काम करें तो वाक़ई यह काबिले-तारीफ़ है।&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;गांव की सरपंच आसुबी का परिवार सियासत में दखल रखता है। क़रीब 20 साल पहले उनके शौहर इज़राइल गांव के सरपंच थे। इस वक्त उनके देवर आज़ाद मोहम्मद हरियाणा विधानसभा में डिप्टी स्पीकर हैं। वे बताती हैं कि यहां से सरपंच का पद महिला के लिए आरक्षित था। इसलिए उन्होंने चुनाव लडने का फैसला किया। उनकी देखा-देखी अन्य महिलाओं में भी पंचायत चुनाव में दिलचस्पी पैदा हो गई और गांव की कई महिलाओं ने पंच के चुनाव के लिए परचे दाखिल कर दिए।&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;पंच मैमूना का कहना है कि जब महिलाएं घर चला सकती हैं तो पंचायत का कामकाज भी बेहतर तरीके से संभाल सकती हैं, लेकिन उन्हें इस बात का मलाल जरूर है कि पूरी पंचायत निरक्षर है। इसलिए पढाई-लिखाई से संबंधित सभी कार्यों के लिए ग्राम सचिव पर निर्भर रहना पड़ता है। गांव की अन्य पंच हाजरा, सैमूना, शकूरन, महमूदी, मजीदन, आसीनी, नूरजहां और रस्सो का कहना है कि उनके गांव में बुनियादी सुविधाओं की कमी है। सडक़ें टूटी हुई हैं। बिजली भी दिनभर गुल ही रहती है। पीने का पानी नहीं है। महिलाओं को क़रीब एक किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ता है। नई पंचायत ने पेयजल लाइन बिछवाई है, लेकिन पानी के समय बिजली न होने की वजह से लोगों को इसका फ़ायदा नहीं हो पा रहा है।सप्लाई का पानी भी कडवा होने की वजह से पीने लायक़ नहीं है। स्वास्थ्य सेवाओं की हालत भी यहां बेहद खस्ता है। अस्पताल तो दूर की बात यहां एक डिस्पेंसरी तक नहीं है। गांव में लोग पशु पालते हैं, लेकिन यहां पशु अस्पताल भी नहीं है। यहां प्राइमरी और मिडल स्तर के दो सरकारी स्कूल हैं। मिडल स्कूल का दर्जा बढ़ाकर दसवीं तक का कराया गया है, लेकिन अभी नौवीं और दसवीं की कक्षाएं शुरू नहीं हुई हैं। इन स्कूलों में भी सुविधाओं की कमी है। अध्यापक हाज़िरी लगाने के बावजूद गैर हाज़िर रहते हैं। बच्चों को दोपहर का भोजन नहीं दिया जाता। क़रीब तीन हज़ार की आबादी वाले इस गांव से कस्बे तक पहुंचने के लिए यातायात की कोई सुविधा नहीं है। कितनी ही गर्भवती महिलाएं प्रसूति के दौरान समय पर उपचार न मिलने के कारण दम तोड़ देती हैं। गांव में केवल एक दाई है, लेकिन वह भी प्रशिक्षित नहीं है। पंचों का कहना है कि उनकी कोशिश के चलते इसी साल 22 जून से गांव में एक सिलाई सेंटर खोला गया है। इस वक़्त सिलाई सेंटर में 25 लड़कियां सिलाई सीख रही हैं।&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;गांववासी फ़ातिमा व अन्य महिलाओं का कहना है कि गांव में समस्याओं की भरमार है। पहले पुरुषों की पंचायत थी, लेकिन उन्होंने गांव के विकास के लिए कुछ नहीं किया। इसलिए इस बार उन्होंने महिला उम्मीदवारों को समर्थन देने का फ़ैसला किया। अब देखना यह है कि यह पंचायत गांव का कितना विकास कर पाती है, क्योंकि अभी तक कोई उत्साहजनक नतीजा सामने नहीं आया है। खैर, इतना तो जरूर हुआ है कि आज महिलाएं चौपाल पर बैठक सभाएं करने लगी हैं। वे बड़ी बेबाकी के साथ गांव और समाज की समस्याओं पर अपने विचार रखती हैं। पंचायत में महिलाओं को आरक्षण मिलने से उन्हें एक बेहतर मौका मिल गया है, वरना पुरुष प्रधान समाज में कितने पुरुष ऐसे हैं जो अपनी जगह अपने परिवार की किसी महिला को सरपंच या पंच देखना चाहेंगे। काबिले-गौर है कि उत्तत्तराखंड के दिखेत गांव में भी पंचायत पर महिलाओं का ही क़ब्जा है।&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;गौरतलब है कि संविधान के 73वें संशोधन के तहत त्रिस्तरीय पंचायतों में महिलाओं के लिए 33 फ़ीसदी आरक्षण की व्यवस्था है। केंद्रीय पंचायती राज मंत्री मणिशंकर अय्यर द्वारा जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक़ पंचायती राज संस्थाओं में 10 लाख से ज़्यादा महिलाओं को निर्वाचित किया गया है, जो चुने गए सभी निर्वाचित सदस्यों का लगभग 37 फ़ीसदी है। बिहार में महिलाओं की यह भागीदारी 54 फ़ीसदी है। वहां महिलाओं के लिए 50 फ़ीसदी आरक्षण लागू है। मध्यप्रदेश में भी गत मार्च में पंचायत मंत्री रुस्तम सिंह ने जब मध्यप्रदेश पंचायत राज व ग्राम स्वराज संशोधन विधेयक-2007 प्रस्तुत कर पंचायत और नगर निकाय चुनाव में महिलाओं को 50 फ़ीसदी आरक्षण देने की घोषणा की। पंचायती राज प्रणाली के तीनों स्तरों की कुल दो लाख 39 हज़ार 895 पंचायतों के 28 लाख 30 हज़ार 46 सदस्यों में 10 लाख 39 हज़ार 872 महिलाएं (36।7 फ़ीसदी) हैं। इनमें कुल दो लाख 33 हजार 251 पंचायतों के 26 लाख 57 हज़ार 112 सदस्यों में नौ लाख 75 हज़ार 723 (36.7 फ़ीसदी) महिलाएं हैं। इसी तरह कुल छह हज़ार 105 पंचायत समितियों के एक लाख 57 हज़ार 175 सदस्यों में से 58 हजार 328 (37.1 फ़ीसदी) महिलाएं हैं। कुल 539 ज़िला परिषदों के 15 हज़ार 759 सदस्यों में पांच हज़ार 821 (36.9 फ़ीसदी) महिलाएं हैं। क़ाबिले-गौर यह भी है कि भारत में पंचायतों में महिलाओं के लिए आरक्षण की व्यवस्था लागू होने की वजह से ही वे आगे बढ़ पाईं हैं।&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;हालांकि देश की सियासत में आज भी महिलाओं तादाद उतनी नहीं है, जितनी कि होनी चाहिए। यह कहना भी क़तई गलत नहीं होगा कि अपने पड़ौसी देश पाकिस्तान, बांग्लादेश और चीन के मुकाबले संसद में महिलाओं के प्रतिनिधित्व के मामले में भारत अभी भी बहुत पीछे है। दुनियाभर में घोर कट्टरपंथी माने जाने वाले पाकिस्तान और बांग्लादेश में महिलाएं प्रधानमंत्री पद पर आसीन रही हैं। यूनिसेफ द्वारा कई चुनिंदा देशों में 2001-2004 के आधार पर बनाकर जारी की गई एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में संसद में महिलाओं का प्रतिनिधित्व 8।3 फ़ीसदी, ब्राजील में 8.6 फ़ीसदी, इंडोनेशिया में 11.3 फ़ीसदी, बांग्लादेश में 14.8 फ़ीसदी, यूएसए में 15.2 फ़ीसदी, चीन में 20.3 फ़ीसदी, नाइजीरिया में सबसे कम 6.4 फ़ीसदी और पाकिस्तान में सबसे ज़्यादा 21.3 फ़ीसदी रहा। इस मामले में पाकिस्तान ने विकसित यूएसए को भी काफी पीछे छोड़ दिया है। वर्ष 1996 में भारत की लोकसभा में महिलाओं का प्रतिनिधित्व 7.3 फ़ीसदी और 1999 में 9.6 फ़ीसदी था। हालांकि चुनाव के दौरान कई सियासी दल विधानसभा और लोकसभा में भी महिलाओं को आरक्षण देने के नारे देते हैं, लेकिन यह महिला वोट हासिल करने का महज़ चुनावी हथकंडा ही साबित होता है। बहरहाल, उम्मीद पर दुनिया कायम है। फिलहाल यही कहा जा सकता है कि नीमखेडा और दिखेत की महिला पंचायतें महिला सशक्तिकरण की ऐसी मिसालें हैं, जिनसे दूसरी महिलाएं प्रेरणा हासिल कर सकती हैं।&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2673854500109758020-3039061280881041372?l=www.starnewsagency.in' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;p&gt;&lt;a href="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/rErNJPrWXQJ1MXsoqtE9FrWbEHo/0/da"&gt;&lt;img src="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/rErNJPrWXQJ1MXsoqtE9FrWbEHo/0/di" border="0" ismap="true"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt;&lt;br/&gt;
&lt;a href="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/rErNJPrWXQJ1MXsoqtE9FrWbEHo/1/da"&gt;&lt;img src="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/rErNJPrWXQJ1MXsoqtE9FrWbEHo/1/di" border="0" ismap="true"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;</description><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2010-03-08T00:01:00.301+05:30</app:edited><media:thumbnail url="http://3.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/S5M7GVi45EI/AAAAAAAAFAE/Tt5eemSwNNI/s72-c/shabana.jpg" height="72" width="72" /><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>मथुरा में विदेशी श्रद्धालु से लूटमार</title><link>http://www.starnewsagency.in/2010/03/blog-post_5387.html</link><category>पर्यटन</category><category>राज्य</category><category>धर्म</category><author>noreply@blogger.com (Star News Agency)</author><pubDate>Mon, 08 Mar 2010 09:42:24 PST</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-2673854500109758020.post-855207042707650707</guid><description>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/S5U2vwbpfKI/AAAAAAAAFEk/GY3Fl-RxWec/s1600-h/Star+News+Agency_Videshi+Paryatak+2.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" kt="true" src="http://4.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/S5U2vwbpfKI/AAAAAAAAFEk/GY3Fl-RxWec/s320/Star+News+Agency_Videshi+Paryatak+2.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/S5U21SEO6cI/AAAAAAAAFEs/6UT5vdPbGmk/s1600-h/Star+News+Agency_Videshi+Paryatak+1.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" kt="true" src="http://3.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/S5U21SEO6cI/AAAAAAAAFEs/6UT5vdPbGmk/s320/Star+News+Agency_Videshi+Paryatak+1.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;संदीप माथुर &lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;मथुरा (उत्तर प्रदेश).&lt;/strong&gt; "अतिथि देव भव: " का मंत्र जपने वाले देश में अतिथियों के साथ किस तरह बर्ताव हो रहा है, इसका अंदाज़ा कान्हा की नगरी मथुरा में विदेशी पर्यटक से हुई मारपीट और लूटमार से सहज ही लगाया जा सकता है. &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;गौरतलब है कि देश-विदेश से काफी संख्या में विदेशी श्रध्दालु भगवान श्री कृष्ण के दर्शन करने के लिए यहां आते हैं और अपने देश में वापस लौट कर यहां की तारीफ करते हैं, लेकिन अगर इन्हीं विदेशी श्रध्दालुओं के साथ कोई अभद्र व्यवहार करे तो उसके मन को कितनी ठेस पहुंचेगी. ऐसा ही हुआ है आज कृष्ण की नगरी मथुरा में थाना सदर बाजार के अर्न्तगत नरसीपुरम कालौनी के निकट किन्ही अज्ञात लोगों ने मथुरा भगवान के दर्शन करने आए एक विदेशी श्रध्दालु के साथ मारपीट कर लूटपाट की और उसे बेहोशी की हालत में सड़क पर ही पड़ा छोड़ गए. काफी देर बाद एक किसी राहगीर ने उस बेहोश पड़े विदेशी युवक को देखा और तब राहगीरों ने पुलिस को सूचना दी तब एक दरोगा जी आए और उस बेहोश विदेशी युवक को जिला अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया इस बेहोश युवक का नाम आस्ट्रीया निवासी बर्टस मारियो बाताया गया है, लेकिन अफसोस की बात ये है कि इस घटना के बाद प्रशासन का कोई भी आलाधिकारी उस बेहोश पड़े विदेशी युवक को देखने तक नहीं आया. अगर कृष्ण की नगरी मथुरा मे ऐसा ही होता रहा तो कोई विदेशी श्रध्दालु भगवान के दर्शन करने नही आएगा और इस पावन नगरी की छवि धूमिल हो जाएगी. &lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2673854500109758020-855207042707650707?l=www.starnewsagency.in' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;p&gt;&lt;a href="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/_VmjCiU9MXYvrQXGcxhhifk8dx0/0/da"&gt;&lt;img src="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/_VmjCiU9MXYvrQXGcxhhifk8dx0/0/di" border="0" ismap="true"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt;&lt;br/&gt;
&lt;a href="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/_VmjCiU9MXYvrQXGcxhhifk8dx0/1/da"&gt;&lt;img src="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/_VmjCiU9MXYvrQXGcxhhifk8dx0/1/di" border="0" ismap="true"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;</description><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2010-03-08T23:12:24.888+05:30</app:edited><media:thumbnail url="http://4.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/S5U2vwbpfKI/AAAAAAAAFEk/GY3Fl-RxWec/s72-c/Star+News+Agency_Videshi+Paryatak+2.jpg" height="72" width="72" /><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><item><title>अनोखा गांव : मांस-मदिरा के सेवन पर किया जाता है तड़ीपार</title><link>http://www.starnewsagency.in/2010/03/blog-post_2243.html</link><category>राज्य</category><category>विविध</category><author>noreply@blogger.com (Star News Agency)</author><pubDate>Sun, 07 Mar 2010 06:36:16 PST</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-2673854500109758020.post-4127105049177929725</guid><description>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/S5O5z09uZKI/AAAAAAAAFAc/Unso8hDsm2w/s1600-h/Sheikhpura.png" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" kt="true" src="http://3.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/S5O5z09uZKI/AAAAAAAAFAc/Unso8hDsm2w/s320/Sheikhpura.png" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;अरुण साथी &lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;शेखपुरा (बिहार).&lt;/strong&gt; वैष्णव जन तो तेने कहिए पीर परायी जाने जे, गांधी जी के इस गीत को अब किसी सरकारी कार्यक्रम में बजता हुआ ही सुना जा सकता है, पर गांधी जी के इस गीत के साथ पूरा एक गांव जी रहा है। शेखपुरा जिला मुख्यालय से सात किलोमिटर की दूरी पर स्थित है मय-अमरपुर गांव। इस गांव की आबादी कुल 1500 सौ है और पूरा का पूरा गांव वैष्णव है। मांस, मदिरा और मछली यहां के लोगों ने स्वेच्छा से वर्जित कर रखा है, वह एक दो तीन नहीं बल्कि पूरे 60 सालों से। &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;इस गांव में विभिन्न जाति के लोग रहते हैं, जिसमें यादव, मुसहर और पासवान की संख्या अधिक, पर इस गांव के लोग दशकों से एक अजीब परंपरा को अपनाए हुए हैं और वह है मांस, मछली और मदिरा का सेवन नहीं करने का। यदि गांव के इस परंपरा को कोई तो ड़ता है तो पंचायत कर उसे तड़ीपार की सजा दी जाती है और इसके बाद समझौते के तहत बाद में पंचायत के द्वारा जुर्माना लगाकर गांव में प्रवेश करने दिया जाता है। इस परंपरा का निर्वहन यहां के मुसहर समुदाय के लोग भी करते हैं जिनका की मुख्य पेशा ही चूहे पकड़कर खाना है, पर इस गांव के मुसहर भी अपने पैतृक पेशे से दूर रहते हैं। इस गांव में किसी के द्वारा मुर्गा अथवा सुअर पालने का काम भी नहीं किया जाता है। स्वेच्छा से वैष्णव हुए इस गांव के लोग अपनी इस परंपरा के बारे में बताते हुए कहते हैं कि उनके पूर्वज में कोई कबीरपंथी धर्म को मानने वाला हुआ और उसी ने कोशिश कर गांव वालों को मांस, मछली अथवा मदिरा का सेवन नहीं करने के लिए प्रेरित किया और इसके बाद कायम यह परंपरा छह दशक बाद भी कायम है।&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;इतना ही नहीं अपनी इस परंपरा को कायम करने के लिए गांव के लोगों ने करीब तीस साल पहले मछलियों का समुहिक दाह-संस्कार कर एक मिसाल पेश की। ग्रामीण रामदेव यादव बताते हैं कि एक साल सुखे की वजह से गांव के तलाब की सभी मछलियां मर गईं। उसके बाद गांव के लोगों ने प्रत्येक मछली को कफन में लपेट उसे जमीन में गाड़ कर उसका दाह-संस्कार किया। युवक मनोहर की माने तो उसके बाप-दादा के द्वारा बनाई गई इस परंपरा को उसके द्वारा निभाया जा रहा है और उसके बच्चे भी इसको निभाएंगे।&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;कुछ भी हो पर शाकाहार को लेकर जहां आज विश्व स्तर पर कई संगठनों के द्वारा आन्दोलन किया जा रहा है और कई धार्मिक संगठन भी शाकाहार और मदिरा सेवन नहीं करने को लेकर जागरूकता अभियान चला रहें है पर सुदूर ग्रामीण इलाके में रहने वाले गरीब और भोले-भाले ग्रामीण एक अनूठी मिसाल पेश कर रहे हैं।&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2673854500109758020-4127105049177929725?l=www.starnewsagency.in' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;
&lt;p&gt;&lt;a href="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/s55YdKImXNfxG3eh0H7Xc2NjUQ4/0/da"&gt;&lt;img src="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/s55YdKImXNfxG3eh0H7Xc2NjUQ4/0/di" border="0" ismap="true"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt;&lt;br/&gt;
&lt;a href="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/s55YdKImXNfxG3eh0H7Xc2NjUQ4/1/da"&gt;&lt;img src="http://feedads.g.doubleclick.net/~a/s55YdKImXNfxG3eh0H7Xc2NjUQ4/1/di" border="0" ismap="true"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;</description><app:edited xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app">2010-03-07T20:06:16.927+05:30</app:edited><media:thumbnail url="http://3.bp.blogspot.com/_TzMT74dRZYA/S5O5z09uZKI/AAAAAAAAFAc/Unso8hDsm2w/s72-c/Sheikhpura.png" height="72" width="72" /><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total></item><media:rating>nonadult</media:rating></channel></rss>
