<?xml version="1.0" encoding="UTF-8" standalone="no"?><?xml-stylesheet href="http://www.blogger.com/styles/atom.css" type="text/css"?><rss xmlns:itunes="http://www.itunes.com/dtds/podcast-1.0.dtd" version="2.0"><channel><title>सुबीर संवाद सेवा</title><description>ये है साहित्‍य को समर्पित एक ब्‍लाग जहां पर आप सीख सकते हैं ग़ज़लों का व्‍याकरण और जान सकते हैं बहुत कुछ ग़ज़लों के बारे में ।</description><managingEditor>noreply@blogger.com (पंकज सुबीर)</managingEditor><pubDate>Fri, 10 Apr 2026 08:57:20 +0530</pubDate><generator>Blogger http://www.blogger.com</generator><openSearch:totalResults xmlns:openSearch="http://a9.com/-/spec/opensearchrss/1.0/">691</openSearch:totalResults><openSearch:startIndex xmlns:openSearch="http://a9.com/-/spec/opensearchrss/1.0/">1</openSearch:startIndex><openSearch:itemsPerPage 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41 अप्रैल-जून 2026 अंक अब उपलब्ध है। इस अंक में शामिल हैं- संपादकीय। मित्रनामा। साक्षात्कार- कविता असाध्य की साधना है, वरिष्ठ साहित्यकार लीलाधर मंडलोई से आकाश माथुर की बातचीत। विस्मृति के द्वार- लोग छुप-छुप कर प्यार करते हैं...- सूर्यबाला। कथा-कहानी- लौट आओ दा...! - प्रमोद त्रिवेदी, अधूरे घर की चौखट- सुधा जुगरान, ईशू, यह दुनिया ऐसी क्यों है?- अरुण अर्णव खरे, मुँह पर कपड़ा- रामा तक्षक, गिरगिट- रेनू मंडल, कभी यूँ भी- अहमद मुख़्तार, बोधिवृक्ष के पक्षी- भरतचन्द्र शर्मा। लघुकथा- बराबरी- रेखा भाटिया, दांपत्य- सरस दरबारी, बहुमूल्य खज़ाना- डॉ. शिखा अग्रवाल, ज़हर- सरस दरबारी, नया सूरज- सुभाष चंद्र लखेड़ा। भाषांतर- पंजाबी कहानी, मूल लेखक- करनैल सिंह शेरगिल, अनुवाद- डॉ. अमरजीत कौंके। व्यंग्य- यदि यदि महाभारते चुनाव भवति- प्रेम जनमेजय, आओ ! ऐसे करें अपनी ब्रांडिंग- फारूक आफरीदी। ललित निबंध- जरा जन्म दुःखौघ तातप्यमानम- डॉ. वंदना मुकेश। संस्मरण- गर्मियों की छुट्टियों में मामा जी का गाँव- गोविंद सेन। डायरी- पापा की चिट्ठी बेटी के नाम- अभिषेक कुमार। रेखाचित्र- यादों की रोशनी में उत्तर प्रदेश- सृष्टि उपाध्याय। आलेख- निष्पक्ष लेखन का हिन्दी में- कुबेर कुमावत। शहरों की रूह- केसर की क्यारियों वाला कश्मीर- निर्मला दोशी। आख़िरी पन्ना। आवरण चित्र- पंकज सुबीर, डिज़ायनिंग सनी गोस्वामी, शहरयार अमजद ख़ान, सुनील पेरवाल, शिवम गोस्वामी, आपकी प्रतिक्रियाओं का संपादक मंडल को इंतज़ार रहेगा। पत्रिका का प्रिंट संस्क़रण भी समय पर आपके हाथों में होगा।&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;ऑनलाइन पढ़ें पत्रिका- &lt;/p&gt;  &lt;p&gt;&lt;a href="https://www.vibhom.com/pdf/april_june_2026.pdf"&gt;https://www.vibhom.com/pdf/april_june_2026.pdf&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;वेबसाइट से डाउनलोड करें&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;&lt;a href="http://www.vibhom.com/vibhomswar.html"&gt;http://www.vibhom.com/vibhomswar.html&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;फेस बुक पर&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;&lt;a href="https://www.facebook.com/Vibhomswar"&gt;https://www.facebook.com/Vibhomswar&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;ब्लॉग पर पढ़ें- &lt;/p&gt;  &lt;p&gt;&lt;a href="http://shabdsudha.blogspot.com/"&gt;http://shabdsudha.blogspot.com/&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;&lt;a href="http://vibhomswar.blogspot.com/"&gt;http://vibhomswar.blogspot.com/&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;</description><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total><enclosure length="-1" type="application/pdf" url="https://www.vibhom.com/pdf/april_june_2026.pdf"/><itunes:explicit/><itunes:subtitle>मित्रो, संरक्षक तथा प्रमुख संपादक सुधा ओम ढींगरा एवं संपादक पंकज सुबीर के संपादन में वैश्विक हिन्दी चिंतन की अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका विभोम-स्वर का वर्ष : 11, अंक : 41 अप्रैल-जून 2026 अंक अब उपलब्ध है। इस अंक में शामिल हैं- संपादकीय। मित्रनामा। साक्षात्कार- कविता असाध्य की साधना है, वरिष्ठ साहित्यकार लीलाधर मंडलोई से आकाश माथुर की बातचीत। विस्मृति के द्वार- लोग छुप-छुप कर प्यार करते हैं...- सूर्यबाला। कथा-कहानी- लौट आओ दा...! - प्रमोद त्रिवेदी, अधूरे घर की चौखट- सुधा जुगरान, ईशू, यह दुनिया ऐसी क्यों है?- अरुण अर्णव खरे, मुँह पर कपड़ा- रामा तक्षक, गिरगिट- रेनू मंडल, कभी यूँ भी- अहमद मुख़्तार, बोधिवृक्ष के पक्षी- भरतचन्द्र शर्मा। लघुकथा- बराबरी- रेखा भाटिया, दांपत्य- सरस दरबारी, बहुमूल्य खज़ाना- डॉ. शिखा अग्रवाल, ज़हर- सरस दरबारी, नया सूरज- सुभाष चंद्र लखेड़ा। भाषांतर- पंजाबी कहानी, मूल लेखक- करनैल सिंह शेरगिल, अनुवाद- डॉ. अमरजीत कौंके। व्यंग्य- यदि यदि महाभारते चुनाव भवति- प्रेम जनमेजय, आओ ! ऐसे करें अपनी ब्रांडिंग- फारूक आफरीदी। ललित निबंध- जरा जन्म दुःखौघ तातप्यमानम- डॉ. वंदना मुकेश। संस्मरण- गर्मियों की छुट्टियों में मामा जी का गाँव- गोविंद सेन। डायरी- पापा की चिट्ठी बेटी के नाम- अभिषेक कुमार। रेखाचित्र- यादों की रोशनी में उत्तर प्रदेश- सृष्टि उपाध्याय। आलेख- निष्पक्ष लेखन का हिन्दी में- कुबेर कुमावत। शहरों की रूह- केसर की क्यारियों वाला कश्मीर- निर्मला दोशी। आख़िरी पन्ना। आवरण चित्र- पंकज सुबीर, डिज़ायनिंग सनी गोस्वामी, शहरयार अमजद ख़ान, सुनील पेरवाल, शिवम गोस्वामी, आपकी प्रतिक्रियाओं का संपादक मंडल को इंतज़ार रहेगा। पत्रिका का प्रिंट संस्क़रण भी समय पर आपके हाथों में होगा। ऑनलाइन पढ़ें पत्रिका- https://www.vibhom.com/pdf/april_june_2026.pdf वेबसाइट से डाउनलोड करें http://www.vibhom.com/vibhomswar.html फेस बुक पर https://www.facebook.com/Vibhomswar ब्लॉग पर पढ़ें- http://shabdsudha.blogspot.com/ http://vibhomswar.blogspot.com/</itunes:subtitle><itunes:author>noreply@blogger.com (Unknown)</itunes:author><itunes:summary>मित्रो, संरक्षक तथा प्रमुख संपादक सुधा ओम ढींगरा एवं संपादक पंकज सुबीर के संपादन में वैश्विक हिन्दी चिंतन की अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका विभोम-स्वर का वर्ष : 11, अंक : 41 अप्रैल-जून 2026 अंक अब उपलब्ध है। इस अंक में शामिल हैं- संपादकीय। मित्रनामा। साक्षात्कार- कविता असाध्य की साधना है, वरिष्ठ साहित्यकार लीलाधर मंडलोई से आकाश माथुर की बातचीत। विस्मृति के द्वार- लोग छुप-छुप कर प्यार करते हैं...- सूर्यबाला। कथा-कहानी- लौट आओ दा...! - प्रमोद त्रिवेदी, अधूरे घर की चौखट- सुधा जुगरान, ईशू, यह दुनिया ऐसी क्यों है?- अरुण अर्णव खरे, मुँह पर कपड़ा- रामा तक्षक, गिरगिट- रेनू मंडल, कभी यूँ भी- अहमद मुख़्तार, बोधिवृक्ष के पक्षी- भरतचन्द्र शर्मा। लघुकथा- बराबरी- रेखा भाटिया, दांपत्य- सरस दरबारी, बहुमूल्य खज़ाना- डॉ. शिखा अग्रवाल, ज़हर- सरस दरबारी, नया सूरज- सुभाष चंद्र लखेड़ा। भाषांतर- पंजाबी कहानी, मूल लेखक- करनैल सिंह शेरगिल, अनुवाद- डॉ. अमरजीत कौंके। व्यंग्य- यदि यदि महाभारते चुनाव भवति- प्रेम जनमेजय, आओ ! ऐसे करें अपनी ब्रांडिंग- फारूक आफरीदी। ललित निबंध- जरा जन्म दुःखौघ तातप्यमानम- डॉ. वंदना मुकेश। संस्मरण- गर्मियों की छुट्टियों में मामा जी का गाँव- गोविंद सेन। डायरी- पापा की चिट्ठी बेटी के नाम- अभिषेक कुमार। रेखाचित्र- यादों की रोशनी में उत्तर प्रदेश- सृष्टि उपाध्याय। आलेख- निष्पक्ष लेखन का हिन्दी में- कुबेर कुमावत। शहरों की रूह- केसर की क्यारियों वाला कश्मीर- निर्मला दोशी। आख़िरी पन्ना। आवरण चित्र- पंकज सुबीर, डिज़ायनिंग सनी गोस्वामी, शहरयार अमजद ख़ान, सुनील पेरवाल, शिवम गोस्वामी, आपकी प्रतिक्रियाओं का संपादक मंडल को इंतज़ार रहेगा। पत्रिका का प्रिंट संस्क़रण भी समय पर आपके हाथों में होगा। ऑनलाइन पढ़ें पत्रिका- https://www.vibhom.com/pdf/april_june_2026.pdf वेबसाइट से डाउनलोड करें http://www.vibhom.com/vibhomswar.html फेस बुक पर https://www.facebook.com/Vibhomswar ब्लॉग पर पढ़ें- http://shabdsudha.blogspot.com/ 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डॉ. रमाकांत शर्मा, रमेश राजहंस, बलजीत सैली चर्चित कहानियाँ- डॉ. मधु संधु, बलजीत सैली, एक ख़ला है सीने में- (किन्नर विमर्श की कहानियाँ), दीपक गिरकर, सुधा ओम ढींगरा, केंद्र में पुस्तक- ख़ैबर दर्रा- यतीन्द्र मिश्र, डॉ. मधु संधु, अनीता सक्सेना, अमृतलाल मदान, पंकज सुबीर, मन के चौहट्टे पर बोनसाई- संजीव जायसवाल 'संजय', प्रगति गुप्ता, मधु शर्मा कटिहा, सुधा जुगरान, उम्मीद की तरह लौटना तुम- घनश्याम मैथिल 'अमृत', डॉ. नीलोत्पल रमेश, डॉ. जसविन्दर कौर बिन्द्रा पंकज सुबीर। पुस्तक समीक्षा- अनारकली के अश्क- डॉ. जसविंदर कौर बिन्द्रा, अमरीक सिंह दीप, जीवन के चाक पर- डॉ. नीलोत्पल रमेश, नीरज नीर, सफ़ह पर आवाज़- राजेंद्र नागदेव, विनय उपाध्याय, धीरे-धीरे रे मना- सुधा थपलियाल, सरोजिनी नौटियाल, काहू की काठी धरा- हरिराम मीणा, नंद भारद्वाज, पच्चीसवाँ प्रेम पत्र- दीपक गिरकर, आभा श्रीवास्तव, बेतरतीब प्रेम की लिपियाँ- लाल देवेन्द्र कुमार श्रीवास्तव, डॉ. इन्दु गुप्ता, 1947 के बाद भारत, डॉ. जसविन्दर कौर बिन्द्रा, राजमोहन गांधी, ग्रहण काल एवं अन्य कविताएँ- राजेश कुमार सिन्हा, डॉ. रज़िया, लहरों के पूर्वरंग- पूजा अग्निहोत्री, सन्दीप तोमर, राहें मिल गुनगुनाती- डॉ. शैली जग्गी, डॉ. वीणा विज 'उदित', जयप्रकाश परिवर्तन की वैचारिकी- राजेश कुमार सिन्हा, शिव दयाल, तीन किरदार- लाल देवेन्द्र कुमार श्रीवास्तव, राजेश कुमार सिन्हा, सेतु तथा अन्य कहानियाँ- दीपक गिरकर, ज्योति जैन, रूदादे-सफ़र- सरस दरबारी, पंकज सुबीर, कोई मिल गया था- दीपक गिरकर, स्नेह पीयूष, साँझ के घर में किरन- डॉ. गंगा प्रसाद शर्मा 'गुणशेखर', श्याम सुंदर तिवारी। शोध आलेख- सुधा ओम ढींगरा के कथा साहित्य में सामाजिक सरोकार, सांस्कृतिक अस्मिता और जीवन का यथार्थ- दीपक गिरकर। आवरण चित्र- पंकज सुबीर, डिज़ायनिंग- सनी गोस्वामी, सुनील पेरवाल, शिवम गोस्वामी। आपकी प्रतिक्रियाओं का संपादक मंडल को इंतज़ार रहेगा। पत्रिका का प्रिंट संस्करण भी समय पर आपके हाथों में होगा। &lt;/p&gt;  &lt;p&gt;ऑन लाइन पढ़ें-&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;&lt;a href="https://www.vibhom.com/shivna/jan_mar_2026.pdf"&gt;https://www.vibhom.com/shivna/jan_mar_2026.pdf&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;साफ़्ट कॉपी पीडीऍफ यहाँ से डाउनलोड करें &lt;/p&gt;  &lt;p&gt;&lt;a 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वार्षिक लेखाजोखा- समकालीन कथा-साहित्य 2025- एक सिंहावलोकन, दीपक गिरकर। शोध आलोचना- क्या आएँगे कभी ऐसे भी दिन- डॉ. रमाकांत शर्मा, रमेश राजहंस, बलजीत सैली चर्चित कहानियाँ- डॉ. मधु संधु, बलजीत सैली, एक ख़ला है सीने में- (किन्नर विमर्श की कहानियाँ), दीपक गिरकर, सुधा ओम ढींगरा, केंद्र में पुस्तक- ख़ैबर दर्रा- यतीन्द्र मिश्र, डॉ. मधु संधु, अनीता सक्सेना, अमृतलाल मदान, पंकज सुबीर, मन के चौहट्टे पर बोनसाई- संजीव जायसवाल 'संजय', प्रगति गुप्ता, मधु शर्मा कटिहा, सुधा जुगरान, उम्मीद की तरह लौटना तुम- घनश्याम मैथिल 'अमृत', डॉ. नीलोत्पल रमेश, डॉ. जसविन्दर कौर बिन्द्रा पंकज सुबीर। पुस्तक समीक्षा- अनारकली के अश्क- डॉ. जसविंदर कौर बिन्द्रा, अमरीक सिंह दीप, जीवन के चाक पर- डॉ. नीलोत्पल रमेश, नीरज नीर, सफ़ह पर आवाज़- राजेंद्र नागदेव, विनय उपाध्याय, धीरे-धीरे रे मना- सुधा थपलियाल, सरोजिनी नौटियाल, काहू की काठी धरा- हरिराम मीणा, नंद भारद्वाज, पच्चीसवाँ प्रेम पत्र- दीपक गिरकर, आभा श्रीवास्तव, बेतरतीब प्रेम की लिपियाँ- लाल देवेन्द्र कुमार श्रीवास्तव, डॉ. इन्दु गुप्ता, 1947 के बाद भारत, डॉ. जसविन्दर कौर बिन्द्रा, राजमोहन गांधी, ग्रहण काल एवं अन्य कविताएँ- राजेश कुमार सिन्हा, डॉ. रज़िया, लहरों के पूर्वरंग- पूजा अग्निहोत्री, सन्दीप तोमर, राहें मिल गुनगुनाती- डॉ. शैली जग्गी, डॉ. वीणा विज 'उदित', जयप्रकाश परिवर्तन की वैचारिकी- राजेश कुमार सिन्हा, शिव दयाल, तीन किरदार- लाल देवेन्द्र कुमार श्रीवास्तव, राजेश कुमार सिन्हा, सेतु तथा अन्य कहानियाँ- दीपक गिरकर, ज्योति जैन, रूदादे-सफ़र- सरस दरबारी, पंकज सुबीर, कोई मिल गया था- दीपक गिरकर, स्नेह पीयूष, साँझ के घर में किरन- डॉ. गंगा प्रसाद शर्मा 'गुणशेखर', श्याम सुंदर तिवारी। शोध आलेख- सुधा ओम ढींगरा के कथा साहित्य में सामाजिक सरोकार, सांस्कृतिक अस्मिता और जीवन का यथार्थ- दीपक गिरकर। आवरण चित्र- पंकज सुबीर, डिज़ायनिंग- सनी गोस्वामी, सुनील पेरवाल, शिवम गोस्वामी। आपकी प्रतिक्रियाओं का संपादक मंडल को इंतज़ार रहेगा। पत्रिका का प्रिंट संस्करण भी समय पर आपके हाथों में होगा। ऑन लाइन पढ़ें- https://www.vibhom.com/shivna/jan_mar_2026.pdf साफ़्ट कॉपी पीडीऍफ यहाँ से डाउनलोड करें http://www.vibhom.com/shivnasahityiki.html फेसबुक पर- https://www.facebook.com/shivnasahityiki/ ब्लॉग- http://shivnaprakashan.blogspot.com/</itunes:subtitle><itunes:author>noreply@blogger.com (Unknown)</itunes:author><itunes:summary>मित्रों, संरक्षक एवं सलाहकार संपादक- सुधा ओम ढींगरा, संपादक- पंकज सुबीर, कार्यकारी संपादक- शहरयार, सह संपादक- शैलेन्द्र शरण, आकाश माथुर के संपादन में शोध, समीक्षा तथा आलोचना की अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका शिवना साहित्यिकी का वर्ष : 10, अंक : 40, त्रैमासिक : जनवरी-मार्च 2026 अंक अब उपलब्ध है। इस अंक में शामिल हैं- नन्हीं बुलबुल के तराने / आलोक धन्वा, संपादकीय / शहरयार, व्यंग्य चित्र / काजल कुमार, वार्षिक लेखाजोखा- समकालीन कथा-साहित्य 2025- एक सिंहावलोकन, दीपक गिरकर। शोध आलोचना- क्या आएँगे कभी ऐसे भी दिन- डॉ. रमाकांत शर्मा, रमेश राजहंस, बलजीत सैली चर्चित कहानियाँ- डॉ. मधु संधु, बलजीत सैली, एक ख़ला है सीने में- (किन्नर विमर्श की कहानियाँ), दीपक गिरकर, सुधा ओम ढींगरा, केंद्र में पुस्तक- ख़ैबर दर्रा- यतीन्द्र मिश्र, डॉ. मधु संधु, अनीता सक्सेना, अमृतलाल मदान, पंकज सुबीर, मन के चौहट्टे पर बोनसाई- संजीव जायसवाल 'संजय', प्रगति गुप्ता, मधु शर्मा कटिहा, सुधा जुगरान, उम्मीद की तरह लौटना तुम- घनश्याम मैथिल 'अमृत', डॉ. नीलोत्पल रमेश, डॉ. जसविन्दर कौर बिन्द्रा पंकज सुबीर। पुस्तक समीक्षा- अनारकली के अश्क- डॉ. जसविंदर कौर बिन्द्रा, अमरीक सिंह दीप, जीवन के चाक पर- डॉ. नीलोत्पल रमेश, नीरज नीर, सफ़ह पर आवाज़- राजेंद्र नागदेव, विनय उपाध्याय, धीरे-धीरे रे मना- सुधा थपलियाल, सरोजिनी नौटियाल, काहू की काठी धरा- हरिराम मीणा, नंद भारद्वाज, पच्चीसवाँ प्रेम पत्र- दीपक गिरकर, आभा श्रीवास्तव, बेतरतीब प्रेम की लिपियाँ- लाल देवेन्द्र कुमार श्रीवास्तव, डॉ. इन्दु गुप्ता, 1947 के बाद भारत, डॉ. जसविन्दर कौर बिन्द्रा, राजमोहन गांधी, ग्रहण काल एवं अन्य कविताएँ- राजेश कुमार सिन्हा, डॉ. रज़िया, लहरों के पूर्वरंग- पूजा अग्निहोत्री, सन्दीप तोमर, राहें मिल गुनगुनाती- डॉ. शैली जग्गी, डॉ. वीणा विज 'उदित', जयप्रकाश परिवर्तन की वैचारिकी- राजेश कुमार सिन्हा, शिव दयाल, तीन किरदार- लाल देवेन्द्र कुमार श्रीवास्तव, राजेश कुमार सिन्हा, सेतु तथा अन्य कहानियाँ- दीपक गिरकर, ज्योति जैन, रूदादे-सफ़र- सरस दरबारी, पंकज सुबीर, कोई मिल गया था- दीपक गिरकर, स्नेह पीयूष, साँझ के घर में किरन- डॉ. गंगा प्रसाद शर्मा 'गुणशेखर', श्याम सुंदर तिवारी। शोध आलेख- सुधा ओम ढींगरा के कथा साहित्य में सामाजिक सरोकार, सांस्कृतिक अस्मिता और जीवन का यथार्थ- दीपक गिरकर। आवरण चित्र- पंकज सुबीर, डिज़ायनिंग- सनी गोस्वामी, सुनील पेरवाल, शिवम गोस्वामी। आपकी प्रतिक्रियाओं का संपादक मंडल को इंतज़ार रहेगा। पत्रिका का प्रिंट संस्करण भी समय पर आपके हाथों में होगा। ऑन लाइन पढ़ें- https://www.vibhom.com/shivna/jan_mar_2026.pdf साफ़्ट कॉपी पीडीऍफ यहाँ से डाउनलोड करें http://www.vibhom.com/shivnasahityiki.html फेसबुक पर- https://www.facebook.com/shivnasahityiki/ ब्लॉग- http://shivnaprakashan.blogspot.com/</itunes:summary></item><item><title>वैश्विक हिन्दी चिंतन की अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका विभोम-स्वर का वर्ष : 10, अंक : 40 जनवरी-मार्च 2026 अंक</title><link>http://subeerin.blogspot.com/2026/01/10-40-2026.html</link><author>noreply@blogger.com (Unknown)</author><pubDate>Sat, 3 Jan 2026 09:16:52 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-7637784963342720274.post-7909971390591916402</guid><description>&lt;p&gt;मित्रो, संरक्षक तथा प्रमुख संपादक सुधा ओम ढींगरा एवं संपादक पंकज सुबीर के संपादन में वैश्विक हिन्दी चिंतन की अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका विभोम-स्वर का वर्ष : 10, अंक : 40 जनवरी-मार्च 2026 अंक अब उपलब्ध है। इस अंक में शामिल हैं- संपादकीय, मित्रनामा, साक्षात्कार- साहित्य अपने समय और समाज की विडम्बनाओं और अन्याय को दिखाता है, उसके प्रति संवेदना जगाता है- कथाकार मनीष वैद्य से आकाश माथुर की बातचीत। कथा-कहानी- सूखी टहनियों से झड़ते फूल, विकेश निझावन, एक टुकड़ा धूप- मंजुश्री, मैट्रन मैम कहती हैं...- सुनीता मिश्रा, यूँ ही- गोविन्द उपाध्याय, कबाड़ घर- डॉ. रंजना जायसवाल, चार यार- डॉ. प्रेमलता यदु, यक्ष प्रश्न- सुधा आदेश, नए समीकरण- चंद्रकला जैन, श्मशान का भोज- कला कौशल, वजह जीने की- शालिनी खन्ना। लघुकथा- किन्नर विमर्श- चारुमित्रा। भाषांतर- फ्लैट नंबर, पंजाबी कहानी, मूल लेखक- सिमरन धालीवाल, अनुवाद- नीलम शर्मा 'अंशु', बड़े तबके परिंदे गा रहे हैं- मलयालम कहानी, मूल कथाकार- जेकब एब्राहम, अनुवाद- डॉ. षीना ईप्पन। व्यंग्य- जब स्वर्ग में पहुँचे राजनेता- धर्मपाल महेंद्र जैन, अब वह 'नूर' नहीं रहा- सतीश उपाध्याय। रेखाचित्र- मेरे दादाजी- सन्दीप तोमर। संस्मरण- बाबा-अम्मा और मैं- दिव्या माथुर। शहरों की रूह- ब्रिस्बेन और गोल्ड कोस्ट- रीता कौशल। ग़ज़ल- प्रदीप कांत, अशोक अंजुम, विज्ञान व्रत। दोहे- डॉ. गोपाल राजगोपाल। आख़िरी पन्ना। रेखाचित्र- अशोक अंजुम, आवरण चित्र- पंकज सुबीर, डिज़ायनिंग सनी गोस्वामी, शहरयार अमजद ख़ान, सुनील पेरवाल, शिवम गोस्वामी, आपकी प्रतिक्रियाओं का संपादक मंडल को इंतज़ार रहेगा। पत्रिका का प्रिंट संस्क़रण भी समय पर आपके हाथों में होगा।&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;ऑनलाइन पढ़ें पत्रिका- &lt;/p&gt;  &lt;p&gt;&lt;a href="https://www.vibhom.com/pdf/jan_mar_2026.pdf"&gt;https://www.vibhom.com/pdf/jan_mar_2026.pdf&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;वेबसाइट से डाउनलोड करें&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;&lt;a href="http://www.vibhom.com/vibhomswar.html"&gt;http://www.vibhom.com/vibhomswar.html&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;फेस बुक पर&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;&lt;a 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झड़ते फूल, विकेश निझावन, एक टुकड़ा धूप- मंजुश्री, मैट्रन मैम कहती हैं...- सुनीता मिश्रा, यूँ ही- गोविन्द उपाध्याय, कबाड़ घर- डॉ. रंजना जायसवाल, चार यार- डॉ. प्रेमलता यदु, यक्ष प्रश्न- सुधा आदेश, नए समीकरण- चंद्रकला जैन, श्मशान का भोज- कला कौशल, वजह जीने की- शालिनी खन्ना। लघुकथा- किन्नर विमर्श- चारुमित्रा। भाषांतर- फ्लैट नंबर, पंजाबी कहानी, मूल लेखक- सिमरन धालीवाल, अनुवाद- नीलम शर्मा 'अंशु', बड़े तबके परिंदे गा रहे हैं- मलयालम कहानी, मूल कथाकार- जेकब एब्राहम, अनुवाद- डॉ. षीना ईप्पन। व्यंग्य- जब स्वर्ग में पहुँचे राजनेता- धर्मपाल महेंद्र जैन, अब वह 'नूर' नहीं रहा- सतीश उपाध्याय। रेखाचित्र- मेरे दादाजी- सन्दीप तोमर। संस्मरण- बाबा-अम्मा और मैं- दिव्या माथुर। शहरों की रूह- ब्रिस्बेन और गोल्ड कोस्ट- रीता कौशल। ग़ज़ल- प्रदीप कांत, अशोक अंजुम, विज्ञान व्रत। दोहे- डॉ. गोपाल राजगोपाल। आख़िरी पन्ना। रेखाचित्र- अशोक अंजुम, आवरण चित्र- पंकज सुबीर, डिज़ायनिंग सनी गोस्वामी, शहरयार अमजद ख़ान, सुनील पेरवाल, शिवम गोस्वामी, आपकी प्रतिक्रियाओं का संपादक मंडल को इंतज़ार रहेगा। पत्रिका का प्रिंट संस्क़रण भी समय पर आपके हाथों में होगा। ऑनलाइन पढ़ें पत्रिका- https://www.vibhom.com/pdf/jan_mar_2026.pdf वेबसाइट से डाउनलोड करें http://www.vibhom.com/vibhomswar.html फेस बुक पर https://www.facebook.com/Vibhomswar ब्लॉग पर पढ़ें- http://shabdsudha.blogspot.com/ http://vibhomswar.blogspot.com/</itunes:subtitle><itunes:author>noreply@blogger.com (Unknown)</itunes:author><itunes:summary>मित्रो, संरक्षक तथा प्रमुख संपादक सुधा ओम ढींगरा एवं संपादक पंकज सुबीर के संपादन में वैश्विक हिन्दी चिंतन की अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका विभोम-स्वर का वर्ष : 10, अंक : 40 जनवरी-मार्च 2026 अंक अब उपलब्ध है। इस अंक में शामिल हैं- संपादकीय, मित्रनामा, साक्षात्कार- साहित्य अपने समय और समाज की विडम्बनाओं और अन्याय को दिखाता है, उसके प्रति संवेदना जगाता है- कथाकार मनीष वैद्य से आकाश माथुर की बातचीत। कथा-कहानी- सूखी टहनियों से झड़ते फूल, विकेश निझावन, एक टुकड़ा धूप- मंजुश्री, मैट्रन मैम कहती हैं...- सुनीता मिश्रा, यूँ ही- गोविन्द उपाध्याय, कबाड़ घर- डॉ. रंजना जायसवाल, चार यार- डॉ. प्रेमलता यदु, यक्ष प्रश्न- सुधा आदेश, नए समीकरण- चंद्रकला जैन, श्मशान का भोज- कला कौशल, वजह जीने की- शालिनी खन्ना। लघुकथा- किन्नर विमर्श- चारुमित्रा। भाषांतर- फ्लैट नंबर, पंजाबी कहानी, मूल लेखक- सिमरन धालीवाल, अनुवाद- नीलम शर्मा 'अंशु', बड़े तबके परिंदे गा रहे हैं- मलयालम कहानी, मूल कथाकार- जेकब एब्राहम, अनुवाद- डॉ. षीना ईप्पन। व्यंग्य- जब स्वर्ग में पहुँचे राजनेता- धर्मपाल महेंद्र जैन, अब वह 'नूर' नहीं रहा- सतीश उपाध्याय। रेखाचित्र- मेरे दादाजी- सन्दीप तोमर। संस्मरण- बाबा-अम्मा और मैं- दिव्या माथुर। शहरों की रूह- ब्रिस्बेन और गोल्ड कोस्ट- रीता कौशल। ग़ज़ल- प्रदीप कांत, अशोक अंजुम, विज्ञान व्रत। दोहे- डॉ. गोपाल राजगोपाल। आख़िरी पन्ना। रेखाचित्र- अशोक अंजुम, आवरण चित्र- पंकज सुबीर, डिज़ायनिंग सनी गोस्वामी, शहरयार अमजद ख़ान, सुनील पेरवाल, शिवम गोस्वामी, आपकी प्रतिक्रियाओं का संपादक मंडल को इंतज़ार रहेगा। पत्रिका का प्रिंट संस्क़रण भी समय पर आपके हाथों में होगा। ऑनलाइन पढ़ें पत्रिका- https://www.vibhom.com/pdf/jan_mar_2026.pdf वेबसाइट से डाउनलोड करें http://www.vibhom.com/vibhomswar.html फेस बुक पर https://www.facebook.com/Vibhomswar ब्लॉग पर पढ़ें- http://shabdsudha.blogspot.com/ http://vibhomswar.blogspot.com/</itunes:summary></item><item><title>शोध, समीक्षा तथा आलोचना की अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका शिवना साहित्यिकी का वर्ष : 10, अंक : 39, अक्टूबर-दिसम्बर 2025 अंक</title><link>http://subeerin.blogspot.com/2025/10/10-39-2025_10.html</link><author>noreply@blogger.com (Unknown)</author><pubDate>Fri, 10 Oct 2025 08:57:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-7637784963342720274.post-6682600533255092348</guid><description>&lt;p&gt;मित्रों, संरक्षक एवं सलाहकार संपादक- सुधा ओम ढींगरा, संपादक- पंकज सुबीर, कार्यकारी संपादक- शहरयार, सह संपादक- शैलेन्द्र शरण, आकाश माथुर के संपादन में शोध, समीक्षा तथा आलोचना की अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका शिवना साहित्यिकी का वर्ष : 10, अंक : 39, अक्टूबर-दिसम्बर 2025 अंक अब उपलब्ध है। इस अंक में शामिल हैं- आवरण कविता- तुम और मैं / अज्ञेय, संपादकीय / शहरयार, व्यंग्य चित्र / काजल कुमार, शोध आलोचना- समय बोलता है- समीक्षक : डॉ. गोपाल शर्मा 'सहर', संपादक : क़मर मेवाड़ी, साहित्य की गुमटी- समीक्षक : आर पी तोमर, लेखक : धर्मपाल महेंद्र जैन, कगार के आख़िरी सिरे पर- समीक्षक : कुसुम लता पांडेय, संपादक : प्रताप दीक्षित, संदिग्ध- समीक्षक : डॉ. दिलबागसिंह विर्क, लेखक : तेजेन्द्र शर्मा, डेढ़ बूँद पानी- समीक्षक : लाल देवेन्द्र कुमार श्रीवास्तव- लेखक : प्रेमा श्रीवास्तव। केंद्र में पुस्तक- ख़ैबर दर्रा- समीक्षक : अशोक प्रियदर्शी, प्रदीप कान्त, जया जादवानी / लेखक : पंकज सुबीर, नींद और जाग- समीक्षक : डॉ. मधु संधु, मनीषा कुलश्रेष्ठ / लेखक : उजला लोहिया, मन के चौहट्टे पर बोनसाई- समीक्षक : दीपक गिरकर, डॉ. मधु संधु, डॉ. सविता मोहन / लेखक : सुधा जुगरान, उम्मीद की तरह लौटना तुम- समीक्षक : प्रकाश कांत, शैलेन्द्र शरण, मनीष वैद्य / लेखक : पंकज सुबीर। पुस्तक समीक्षा- प्रेम गणित और अन्य कहानियाँ- समीक्षक : पूजा अग्निहोत्री, लेखक : सन्दीप तोमर, मेरी मदरबोर्ड- समीक्षक : सरोजिनी नौटियाल, लेखक : अर्चना पैन्यूली, गुलाबी इच्छाएँ- समीक्षक : दीपक गिरकर, लेखक : मनीष वैद्य, अगम बहै दरियाव- समीक्षक : राजेश कुमार सिन्हा, लेखक : शिवमूर्ति, मेरी तलब का सामान, समीक्षक : दीपक गिरकर, लेखक : रश्मि भारद्वाज, नया सवेरा- समीक्षक : प्रताप सहगल, लेखक : अनिल गोयल, कविता का अक्षांश- समीक्षक : दीपक गिरकर, लेखक : साधना अग्रवाल, धूप से गुज़रते हुए- समीक्षक : पूनम मनु, लेखक : राजेश कुमार सिन्हा, अधजले ठुड्डे- समीक्षक : डॉक्टर विजया सती, लेखक : हंसा दीप, घाघ और उनकी कहावतें- समीक्षक : डॉ. राजकुमार, लेखक : डॉ. सत्य प्रिय पाण्डेय, थैंक यू यारा- समीक्षक : शेफालिका श्रीवास्तव, लेखक : अमिता त्रिवेदी, आईना हँसता है- समीक्षक : संजय वर्मा 'दृष्टि', लेखक : डॉ. दीपा मनीष व्यास, बाँसलोई में बहत्तर ऋतु- समीक्षक : राजेंद्र नागदेव, लेखक : सुशील कुमार। शोध आलेख- सुधा ओम ढींगरा के साहित्य में भारतीय जीवन दृष्टि- शालिनी / डॉ. सीमा शर्मा, अमरकांत का कथा-साहित्य : निम्न मध्यमवर्ग की स्त्री संवेदना का एक महत्त्वपूर्ण दस्तावेज़- दीपक गिरकर। आवरण चित्र- पंकज सुबीर, डिज़ायनिंग- सनी गोस्वामी, सुनील पेरवाल, शिवम गोस्वामी। आपकी प्रतिक्रियाओं का संपादक मंडल को इंतज़ार रहेगा। पत्रिका का प्रिंट संस्करण भी समय पर आपके हाथों में होगा। &lt;/p&gt;  &lt;p&gt;ऑन लाइन पढ़ें-&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;&lt;a href="https://www.slideshare.net/slideshow/shivna-sahityiki-october-december-2025-pdf/283736325"&gt;https://www.slideshare.net/slideshow/shivna-sahityiki-october-december-2025-pdf/283736325&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;&lt;a href="https://www.vibhom.com/shivna/oct_dec_2025.pdf"&gt;https://www.vibhom.com/shivna/oct_dec_2025.pdf&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;साफ़्ट कॉपी पीडीऍफ यहाँ से डाउनलोड करें &lt;/p&gt;  &lt;p&gt;&lt;a href="http://www.vibhom.com/shivnasahityiki.html"&gt;http://www.vibhom.com/shivnasahityiki.html&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;फेसबुक पर- &lt;a href="https://www.facebook.com/shivnasahityiki/"&gt;https://www.facebook.com/shivnasahityiki/&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;ब्लॉग- &lt;a href="http://shivnaprakashan.blogspot.com/"&gt;http://shivnaprakashan.blogspot.com/&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;</description><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total><enclosure length="-1" type="application/pdf" url="https://www.vibhom.com/shivna/oct_dec_2025.pdf"/><itunes:explicit/><itunes:subtitle>मित्रों, संरक्षक एवं सलाहकार संपादक- सुधा ओम ढींगरा, संपादक- पंकज सुबीर, कार्यकारी संपादक- शहरयार, सह संपादक- शैलेन्द्र शरण, आकाश माथुर के संपादन में शोध, समीक्षा तथा आलोचना की अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका शिवना साहित्यिकी का वर्ष : 10, अंक : 39, अक्टूबर-दिसम्बर 2025 अंक अब उपलब्ध है। इस अंक में शामिल हैं- आवरण कविता- तुम और मैं / अज्ञेय, संपादकीय / शहरयार, व्यंग्य चित्र / काजल कुमार, शोध आलोचना- समय बोलता है- समीक्षक : डॉ. गोपाल शर्मा 'सहर', संपादक : क़मर मेवाड़ी, साहित्य की गुमटी- समीक्षक : आर पी तोमर, लेखक : धर्मपाल महेंद्र जैन, कगार के आख़िरी सिरे पर- समीक्षक : कुसुम लता पांडेय, संपादक : प्रताप दीक्षित, संदिग्ध- समीक्षक : डॉ. दिलबागसिंह विर्क, लेखक : तेजेन्द्र शर्मा, डेढ़ बूँद पानी- समीक्षक : लाल देवेन्द्र कुमार श्रीवास्तव- लेखक : प्रेमा श्रीवास्तव। केंद्र में पुस्तक- ख़ैबर दर्रा- समीक्षक : अशोक प्रियदर्शी, प्रदीप कान्त, जया जादवानी / लेखक : पंकज सुबीर, नींद और जाग- समीक्षक : डॉ. मधु संधु, मनीषा कुलश्रेष्ठ / लेखक : उजला लोहिया, मन के चौहट्टे पर बोनसाई- समीक्षक : दीपक गिरकर, डॉ. मधु संधु, डॉ. सविता मोहन / लेखक : सुधा जुगरान, उम्मीद की तरह लौटना तुम- समीक्षक : प्रकाश कांत, शैलेन्द्र शरण, मनीष वैद्य / लेखक : पंकज सुबीर। पुस्तक समीक्षा- प्रेम गणित और अन्य कहानियाँ- समीक्षक : पूजा अग्निहोत्री, लेखक : सन्दीप तोमर, मेरी मदरबोर्ड- समीक्षक : सरोजिनी नौटियाल, लेखक : अर्चना पैन्यूली, गुलाबी इच्छाएँ- समीक्षक : दीपक गिरकर, लेखक : मनीष वैद्य, अगम बहै दरियाव- समीक्षक : राजेश कुमार सिन्हा, लेखक : शिवमूर्ति, मेरी तलब का सामान, समीक्षक : दीपक गिरकर, लेखक : रश्मि भारद्वाज, नया सवेरा- समीक्षक : प्रताप सहगल, लेखक : अनिल गोयल, कविता का अक्षांश- समीक्षक : दीपक गिरकर, लेखक : साधना अग्रवाल, धूप से गुज़रते हुए- समीक्षक : पूनम मनु, लेखक : राजेश कुमार सिन्हा, अधजले ठुड्डे- समीक्षक : डॉक्टर विजया सती, लेखक : हंसा दीप, घाघ और उनकी कहावतें- समीक्षक : डॉ. राजकुमार, लेखक : डॉ. सत्य प्रिय पाण्डेय, थैंक यू यारा- समीक्षक : शेफालिका श्रीवास्तव, लेखक : अमिता त्रिवेदी, आईना हँसता है- समीक्षक : संजय वर्मा 'दृष्टि', लेखक : डॉ. दीपा मनीष व्यास, बाँसलोई में बहत्तर ऋतु- समीक्षक : राजेंद्र नागदेव, लेखक : सुशील कुमार। शोध आलेख- सुधा ओम ढींगरा के साहित्य में भारतीय जीवन दृष्टि- शालिनी / डॉ. सीमा शर्मा, अमरकांत का कथा-साहित्य : निम्न मध्यमवर्ग की स्त्री संवेदना का एक महत्त्वपूर्ण दस्तावेज़- दीपक गिरकर। आवरण चित्र- पंकज सुबीर, डिज़ायनिंग- सनी गोस्वामी, सुनील पेरवाल, शिवम गोस्वामी। आपकी प्रतिक्रियाओं का संपादक मंडल को इंतज़ार रहेगा। पत्रिका का प्रिंट संस्करण भी समय पर आपके हाथों में होगा। ऑन लाइन पढ़ें- https://www.slideshare.net/slideshow/shivna-sahityiki-october-december-2025-pdf/283736325 https://www.vibhom.com/shivna/oct_dec_2025.pdf साफ़्ट कॉपी पीडीऍफ यहाँ से डाउनलोड करें http://www.vibhom.com/shivnasahityiki.html फेसबुक पर- https://www.facebook.com/shivnasahityiki/ ब्लॉग- http://shivnaprakashan.blogspot.com/</itunes:subtitle><itunes:author>noreply@blogger.com (Unknown)</itunes:author><itunes:summary>मित्रों, संरक्षक एवं सलाहकार संपादक- सुधा ओम ढींगरा, संपादक- पंकज सुबीर, कार्यकारी संपादक- शहरयार, सह संपादक- शैलेन्द्र शरण, आकाश माथुर के संपादन में शोध, समीक्षा तथा आलोचना की अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका शिवना साहित्यिकी का वर्ष : 10, अंक : 39, अक्टूबर-दिसम्बर 2025 अंक अब उपलब्ध है। इस अंक में शामिल हैं- आवरण कविता- तुम और मैं / अज्ञेय, संपादकीय / शहरयार, व्यंग्य चित्र / काजल कुमार, शोध आलोचना- समय बोलता है- समीक्षक : डॉ. गोपाल शर्मा 'सहर', संपादक : क़मर मेवाड़ी, साहित्य की गुमटी- समीक्षक : आर पी तोमर, लेखक : धर्मपाल महेंद्र जैन, कगार के आख़िरी सिरे पर- समीक्षक : कुसुम लता पांडेय, संपादक : प्रताप दीक्षित, संदिग्ध- समीक्षक : डॉ. दिलबागसिंह विर्क, लेखक : तेजेन्द्र शर्मा, डेढ़ बूँद पानी- समीक्षक : लाल देवेन्द्र कुमार श्रीवास्तव- लेखक : प्रेमा श्रीवास्तव। केंद्र में पुस्तक- ख़ैबर दर्रा- समीक्षक : अशोक प्रियदर्शी, प्रदीप कान्त, जया जादवानी / लेखक : पंकज सुबीर, नींद और जाग- समीक्षक : डॉ. मधु संधु, मनीषा कुलश्रेष्ठ / लेखक : उजला लोहिया, मन के चौहट्टे पर बोनसाई- समीक्षक : दीपक गिरकर, डॉ. मधु संधु, डॉ. सविता मोहन / लेखक : सुधा जुगरान, उम्मीद की तरह लौटना तुम- समीक्षक : प्रकाश कांत, शैलेन्द्र शरण, मनीष वैद्य / लेखक : पंकज सुबीर। पुस्तक समीक्षा- प्रेम गणित और अन्य कहानियाँ- समीक्षक : पूजा अग्निहोत्री, लेखक : सन्दीप तोमर, मेरी मदरबोर्ड- समीक्षक : सरोजिनी नौटियाल, लेखक : अर्चना पैन्यूली, गुलाबी इच्छाएँ- समीक्षक : दीपक गिरकर, लेखक : मनीष वैद्य, अगम बहै दरियाव- समीक्षक : राजेश कुमार सिन्हा, लेखक : शिवमूर्ति, मेरी तलब का सामान, समीक्षक : दीपक गिरकर, लेखक : रश्मि भारद्वाज, नया सवेरा- समीक्षक : प्रताप सहगल, लेखक : अनिल गोयल, कविता का अक्षांश- समीक्षक : दीपक गिरकर, लेखक : साधना अग्रवाल, धूप से गुज़रते हुए- समीक्षक : पूनम मनु, लेखक : राजेश कुमार सिन्हा, अधजले ठुड्डे- समीक्षक : डॉक्टर विजया सती, लेखक : हंसा दीप, घाघ और उनकी कहावतें- समीक्षक : डॉ. राजकुमार, लेखक : डॉ. सत्य प्रिय पाण्डेय, थैंक यू यारा- समीक्षक : शेफालिका श्रीवास्तव, लेखक : अमिता त्रिवेदी, आईना हँसता है- समीक्षक : संजय वर्मा 'दृष्टि', लेखक : डॉ. दीपा मनीष व्यास, बाँसलोई में बहत्तर ऋतु- समीक्षक : राजेंद्र नागदेव, लेखक : सुशील कुमार। शोध आलेख- सुधा ओम ढींगरा के साहित्य में भारतीय जीवन दृष्टि- शालिनी / डॉ. सीमा शर्मा, अमरकांत का कथा-साहित्य : निम्न मध्यमवर्ग की स्त्री संवेदना का एक महत्त्वपूर्ण दस्तावेज़- दीपक गिरकर। आवरण चित्र- पंकज सुबीर, डिज़ायनिंग- सनी गोस्वामी, सुनील पेरवाल, शिवम गोस्वामी। आपकी प्रतिक्रियाओं का संपादक मंडल को इंतज़ार रहेगा। पत्रिका का प्रिंट संस्करण भी समय पर आपके हाथों में होगा। ऑन लाइन पढ़ें- https://www.slideshare.net/slideshow/shivna-sahityiki-october-december-2025-pdf/283736325 https://www.vibhom.com/shivna/oct_dec_2025.pdf साफ़्ट कॉपी पीडीऍफ यहाँ से डाउनलोड करें http://www.vibhom.com/shivnasahityiki.html फेसबुक पर- https://www.facebook.com/shivnasahityiki/ ब्लॉग- http://shivnaprakashan.blogspot.com/</itunes:summary></item><item><title>वैश्विक हिन्दी चिंतन की अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका विभोम-स्वर का वर्ष : 10, अंक : 39, अक्टूबर-दिसम्बर 2025 अंक</title><link>http://subeerin.blogspot.com/2025/10/10-39-2025.html</link><author>noreply@blogger.com (Unknown)</author><pubDate>Thu, 9 Oct 2025 09:07:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-7637784963342720274.post-2606857084742942346</guid><description>&lt;p&gt;मित्रो, संरक्षक तथा प्रमुख संपादक सुधा ओम ढींगरा एवं संपादक पंकज सुबीर के संपादन में वैश्विक हिन्दी चिंतन की अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका विभोम-स्वर का वर्ष : 10, अंक : 39, अक्टूबर-दिसम्बर 2025 अंक अब उपलब्ध है। इस अंक में शामिल हैं- संपादकीय, मित्रनामा, साक्षात्कार- व्यंग्य अपने स्वभाव में आक्रामक, सायास एवं बौद्धिक आधार ग्रहण किए हुए होता है, वरिष्ठ व्यंग्यकार डॉ. प्रेम जनमेजय (संपादक- व्यंग्य यात्रा) से आकाश माथुर की बातचीत। विस्मृति के द्वार- लिखना मेरे लिए एक यात्रा है, डॉ. शैलजा सक्सेना। कथा-कहानी- जड़खोद- प्रज्ञा, अफ़सोस- डॉ. रमाकांत शर्मा, कुरजाँ के देश में- टीना रावल, मन वीगन- हंसा दीप, कठपुतली के धागे- डॉ. शिखा अग्रवाल, पनडुब्बी- संतोष श्रीवास्तव। लघुकथा- खेल- ज्ञानदेव मुकेश, चश्मे- डॉ. यशोधरा भटनागर। भाषांतर- मुझ पर कहानी लिखो, मराठी कहानी, मूल लेखक- द. बा. मोकाशी, अनुवाद- देवी नागरानी। ललित निबंध- बदलाव, डॉ. कृष्णा कुमारी। व्यंग्य- काव्य संग्रह वाले कवि का लोकार्पण- अशोक गौतम, इन दिनों इतिहास- देवेन्द्र कुमार पाठक। रेखाचित्र- मेरे पिता, प्रताप सहगल। संस्मरण- वह युधिष्ठिर, डॉ. भावना शेखर। शहरों की रूह- लूसर्न कहें या लूज़र्न कहें, रेखा भाटिया। ग़ज़ल- तीन ग़ज़लें, के. पी. अनमोल। दोहे- बहुरंगी दोहे, रघुविन्द्र यादव। गीत- दो गीत, सूर्य प्रकाश मिश्र। आवरण चित्र- पंकज सुबीर, डिज़ायनिंग सनी गोस्वामी, शहरयार अमजद ख़ान, सुनील पेरवाल, शिवम गोस्वामी, आपकी प्रतिक्रियाओं का संपादक मंडल को इंतज़ार रहेगा। पत्रिका का प्रिंट संस्क़रण भी समय पर आपके हाथों में होगा।&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;ऑनलाइन पढ़ें पत्रिका- &lt;/p&gt;  &lt;p&gt;&lt;a href="https://www.vibhom.com/pdf/oct_dec_2025.pdf"&gt;https://www.vibhom.com/pdf/oct_dec_2025.pdf&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;&lt;a href="https://www.slideshare.net/slideshow/vibhom-swar-magazine-october-december-2025-pdf/283716124"&gt;https://www.slideshare.net/slideshow/vibhom-swar-magazine-october-december-2025-pdf/283716124&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;वेबसाइट से डाउनलोड करें&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;&lt;a href="http://www.vibhom.com/vibhomswar.html"&gt;http://www.vibhom.com/vibhomswar.html&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;फेस बुक पर&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;&lt;a href="https://www.facebook.com/Vibhomswar"&gt;https://www.facebook.com/Vibhomswar&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;ब्लॉग पर पढ़ें- &lt;/p&gt;  &lt;p&gt;&lt;a href="http://shabdsudha.blogspot.com/"&gt;http://shabdsudha.blogspot.com/&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;&lt;a href="http://vibhomswar.blogspot.com/"&gt;http://vibhomswar.blogspot.com/&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;कविता कोश पर पढ़ें&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;&lt;a href="http://kavitakosh.org/kk/विभोम_स्वर_पत्रिका"&gt;http://kavitakosh.org/kk/विभोम_स्वर_पत्रिका&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;</description><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total><enclosure length="-1" type="application/pdf" url="https://www.vibhom.com/pdf/oct_dec_2025.pdf"/><itunes:explicit/><itunes:subtitle>मित्रो, संरक्षक तथा प्रमुख संपादक सुधा ओम ढींगरा एवं संपादक पंकज सुबीर के संपादन में वैश्विक हिन्दी चिंतन की अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका विभोम-स्वर का वर्ष : 10, अंक : 39, अक्टूबर-दिसम्बर 2025 अंक अब उपलब्ध है। इस अंक में शामिल हैं- संपादकीय, मित्रनामा, साक्षात्कार- व्यंग्य अपने स्वभाव में आक्रामक, सायास एवं बौद्धिक आधार ग्रहण किए हुए होता है, वरिष्ठ व्यंग्यकार डॉ. प्रेम जनमेजय (संपादक- व्यंग्य यात्रा) से आकाश माथुर की बातचीत। विस्मृति के द्वार- लिखना मेरे लिए एक यात्रा है, डॉ. शैलजा सक्सेना। कथा-कहानी- जड़खोद- प्रज्ञा, अफ़सोस- डॉ. रमाकांत शर्मा, कुरजाँ के देश में- टीना रावल, मन वीगन- हंसा दीप, कठपुतली के धागे- डॉ. शिखा अग्रवाल, पनडुब्बी- संतोष श्रीवास्तव। लघुकथा- खेल- ज्ञानदेव मुकेश, चश्मे- डॉ. यशोधरा भटनागर। भाषांतर- मुझ पर कहानी लिखो, मराठी कहानी, मूल लेखक- द. बा. मोकाशी, अनुवाद- देवी नागरानी। ललित निबंध- बदलाव, डॉ. कृष्णा कुमारी। व्यंग्य- काव्य संग्रह वाले कवि का लोकार्पण- अशोक गौतम, इन दिनों इतिहास- देवेन्द्र कुमार पाठक। रेखाचित्र- मेरे पिता, प्रताप सहगल। संस्मरण- वह युधिष्ठिर, डॉ. भावना शेखर। शहरों की रूह- लूसर्न कहें या लूज़र्न कहें, रेखा भाटिया। ग़ज़ल- तीन ग़ज़लें, के. पी. अनमोल। दोहे- बहुरंगी दोहे, रघुविन्द्र यादव। गीत- दो गीत, सूर्य प्रकाश मिश्र। आवरण चित्र- पंकज सुबीर, डिज़ायनिंग सनी गोस्वामी, शहरयार अमजद ख़ान, सुनील पेरवाल, शिवम गोस्वामी, आपकी प्रतिक्रियाओं का संपादक मंडल को इंतज़ार रहेगा। पत्रिका का प्रिंट संस्क़रण भी समय पर आपके हाथों में होगा। ऑनलाइन पढ़ें पत्रिका- https://www.vibhom.com/pdf/oct_dec_2025.pdf https://www.slideshare.net/slideshow/vibhom-swar-magazine-october-december-2025-pdf/283716124 वेबसाइट से डाउनलोड करें http://www.vibhom.com/vibhomswar.html फेस बुक पर https://www.facebook.com/Vibhomswar ब्लॉग पर पढ़ें- http://shabdsudha.blogspot.com/ http://vibhomswar.blogspot.com/ कविता कोश पर पढ़ें http://kavitakosh.org/kk/विभोम_स्वर_पत्रिका</itunes:subtitle><itunes:author>noreply@blogger.com (Unknown)</itunes:author><itunes:summary>मित्रो, संरक्षक तथा प्रमुख संपादक सुधा ओम ढींगरा एवं संपादक पंकज सुबीर के संपादन में वैश्विक हिन्दी चिंतन की अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका विभोम-स्वर का वर्ष : 10, अंक : 39, अक्टूबर-दिसम्बर 2025 अंक अब उपलब्ध है। इस अंक में शामिल हैं- संपादकीय, मित्रनामा, साक्षात्कार- व्यंग्य अपने स्वभाव में आक्रामक, सायास एवं बौद्धिक आधार ग्रहण किए हुए होता है, वरिष्ठ व्यंग्यकार डॉ. प्रेम जनमेजय (संपादक- व्यंग्य यात्रा) से आकाश माथुर की बातचीत। विस्मृति के द्वार- लिखना मेरे लिए एक यात्रा है, डॉ. शैलजा सक्सेना। कथा-कहानी- जड़खोद- प्रज्ञा, अफ़सोस- डॉ. रमाकांत शर्मा, कुरजाँ के देश में- टीना रावल, मन वीगन- हंसा दीप, कठपुतली के धागे- डॉ. शिखा अग्रवाल, पनडुब्बी- संतोष श्रीवास्तव। लघुकथा- खेल- ज्ञानदेव मुकेश, चश्मे- डॉ. यशोधरा भटनागर। भाषांतर- मुझ पर कहानी लिखो, मराठी कहानी, मूल लेखक- द. बा. मोकाशी, अनुवाद- देवी नागरानी। ललित निबंध- बदलाव, डॉ. कृष्णा कुमारी। व्यंग्य- काव्य संग्रह वाले कवि का लोकार्पण- अशोक गौतम, इन दिनों इतिहास- देवेन्द्र कुमार पाठक। रेखाचित्र- मेरे पिता, प्रताप सहगल। संस्मरण- वह युधिष्ठिर, डॉ. भावना शेखर। शहरों की रूह- लूसर्न कहें या लूज़र्न कहें, रेखा भाटिया। ग़ज़ल- तीन ग़ज़लें, के. पी. अनमोल। दोहे- बहुरंगी दोहे, रघुविन्द्र यादव। गीत- दो गीत, सूर्य प्रकाश मिश्र। आवरण चित्र- पंकज सुबीर, डिज़ायनिंग सनी गोस्वामी, शहरयार अमजद ख़ान, सुनील पेरवाल, शिवम गोस्वामी, आपकी प्रतिक्रियाओं का संपादक मंडल को इंतज़ार रहेगा। पत्रिका का प्रिंट संस्क़रण भी समय पर आपके हाथों में होगा। ऑनलाइन पढ़ें पत्रिका- https://www.vibhom.com/pdf/oct_dec_2025.pdf https://www.slideshare.net/slideshow/vibhom-swar-magazine-october-december-2025-pdf/283716124 वेबसाइट से डाउनलोड करें http://www.vibhom.com/vibhomswar.html फेस बुक पर https://www.facebook.com/Vibhomswar ब्लॉग पर पढ़ें- http://shabdsudha.blogspot.com/ http://vibhomswar.blogspot.com/ कविता कोश पर पढ़ें http://kavitakosh.org/kk/विभोम_स्वर_पत्रिका</itunes:summary></item><item><title>शोध, समीक्षा तथा आलोचना की अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका शिवना साहित्यिकी का वर्ष : 10, अंक : 38, जुलाई-सितम्बर 2025 अंक</title><link>http://subeerin.blogspot.com/2025/07/10-38-2025_3.html</link><author>noreply@blogger.com (Unknown)</author><pubDate>Thu, 3 Jul 2025 09:04:00 +0530</pubDate><guid 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त्रिवेदी। पुस्तक समीक्षा- गुलाबी नदी की मछलियाँ, साधना अग्रवाल, सिनीवाली, तीस की लाइन- दीपक गिरकर, अनुलता राज नायर, ग्यारह कहानियाँ- सूर्यकांत नागर, ज्योति जैन, सूर्यकांत नागर, पत्तियों पर काँपता कोमल गांधार- दीपक गिरकर, पल्लवी त्रिवेदी, आग और पानी- राजेश सक्सेना, व्योमेश शुक्ल, तुम मेरे अज़ीज़ हो- डॉ. आशा सिंह सिकरवार, पंकज त्रिवेदी, अम्मा- ज्योति जैन, दीपक गिरकर, साहित्य की गुमटी- मधुर कुलश्रेष्ठ, धर्मपाल महेंद्र जैन, एक और दुनिया होती- भावना शेखर, शिवदयाल, घुमक्कड़ी- अंग्रेज़ी साहित्य के गलियारों में- उजला लोहिया, मनीषा कुलश्रेष्ठ, मिडिल क्लास मंचूरियन- गरिमा श्रीवास्तव, जयंती रंगनाथन, हथेली पर कर्ण, राकेश भारतीय, नरेंद्र नागदेव, विदेश में हिन्दी पत्रकारिता, विनय उपाध्याय, जवाहर कर्नावट। शोध आलेख- विमर्श दृष्टि- भाग 2, (पंकज सुबीर की कहानियाँ), दीपक गिरकर, शहरयार। आवरण चित्र- पंकज सुबीर, डिज़ायनिंग- सनी गोस्वामी, सुनील पेरवाल, शिवम गोस्वामी। आपकी प्रतिक्रियाओं का संपादक मंडल को इंतज़ार रहेगा। पत्रिका का प्रिंट संस्करण भी समय पर आपके हाथों में होगा। &lt;/p&gt;  &lt;p&gt;ऑन लाइन पढ़ें-&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;&lt;a href="https://www.slideshare.net/slideshow/shivna-sahityiki-july-september-2025-pdf/281189291"&gt;https://www.slideshare.net/slideshow/shivna-sahityiki-july-september-2025-pdf/281189291&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;&lt;a href="https://www.vibhom.com/shivna/jul_sep_2025.pdf"&gt;https://www.vibhom.com/shivna/jul_sep_2025.pdf&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;साफ़्ट कॉपी पीडीऍफ यहाँ से डाउनलोड करें &lt;/p&gt;  &lt;p&gt;&lt;a href="http://www.vibhom.com/shivnasahityiki.html"&gt;http://www.vibhom.com/shivnasahityiki.html&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;फेसबुक पर- &lt;a href="https://www.facebook.com/shivnasahityiki/"&gt;https://www.facebook.com/shivnasahityiki/&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;ब्लॉग- &lt;a href="http://shivnaprakashan.blogspot.com/"&gt;http://shivnaprakashan.blogspot.com/&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;</description><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total><enclosure length="-1" type="application/pdf" url="https://www.vibhom.com/shivna/jul_sep_2025.pdf"/><itunes:explicit/><itunes:subtitle>मित्रों, संरक्षक एवं सलाहकार संपादक- सुधा ओम ढींगरा, संपादक- पंकज सुबीर, कार्यकारी संपादक- शहरयार, सह संपादक- शैलेन्द्र शरण, आकाश माथुर के संपादन में शोध, समीक्षा तथा आलोचना की अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका शिवना साहित्यिकी का वर्ष : 10, अंक : 38, जुलाई-सितम्बर 2025 अंक अब उपलब्ध है। इस अंक में शामिल हैं- आवरण कविता- चरवाहे का गीत / केतन यादव, संपादकीय / शहरयार, व्यंग्य चित्र / काजल कुमार। शोध आलोचना- एक तानाशाह की प्रेमकथा- राहुल देव, ज्ञान चतुर्वेदी, प्रताप सहगल - एक शिनाख्त- अनिल गोयल- शशि सहगल, अधूरी जिरह- राजेश कुमार सिन्हा, मंजुला बिष्ट, अम्बर परियाँ- सन्दीप तोमर, बलजिंदर नसराली, (अनुवाद- सुभाष नीरव), सीता एक नारी- अनिमा दास, प्रताप नारायण सिंह, कोशिशों के पुल- लाल देवेन्द्र कुमार श्रीवास्तव- गरिमा सक्सेना। केंद्र में पुस्तक- ख़ैबर दर्रा, मनीषा कुलश्रेष्ठ, सूर्यकांत नागर, डॉ. जसविन्दर कौर बिन्द्रा, पंकज सुबीर। थैंक यू यारा- डॉ. कुंकुम गुप्ता, मधूलिका श्रीवास्तव, अमिता त्रिवेदी। पुस्तक समीक्षा- गुलाबी नदी की मछलियाँ, साधना अग्रवाल, सिनीवाली, तीस की लाइन- दीपक गिरकर, अनुलता राज नायर, ग्यारह कहानियाँ- सूर्यकांत नागर, ज्योति जैन, सूर्यकांत नागर, पत्तियों पर काँपता कोमल गांधार- दीपक गिरकर, पल्लवी त्रिवेदी, आग और पानी- राजेश सक्सेना, व्योमेश शुक्ल, तुम मेरे अज़ीज़ हो- डॉ. आशा सिंह सिकरवार, पंकज त्रिवेदी, अम्मा- ज्योति जैन, दीपक गिरकर, साहित्य की गुमटी- मधुर कुलश्रेष्ठ, धर्मपाल महेंद्र जैन, एक और दुनिया होती- भावना शेखर, शिवदयाल, घुमक्कड़ी- अंग्रेज़ी साहित्य के गलियारों में- उजला लोहिया, मनीषा कुलश्रेष्ठ, मिडिल क्लास मंचूरियन- गरिमा श्रीवास्तव, जयंती रंगनाथन, हथेली पर कर्ण, राकेश भारतीय, नरेंद्र नागदेव, विदेश में हिन्दी पत्रकारिता, विनय उपाध्याय, जवाहर कर्नावट। शोध आलेख- विमर्श दृष्टि- भाग 2, (पंकज सुबीर की कहानियाँ), दीपक गिरकर, शहरयार। आवरण चित्र- पंकज सुबीर, डिज़ायनिंग- सनी गोस्वामी, सुनील पेरवाल, शिवम गोस्वामी। आपकी प्रतिक्रियाओं का संपादक मंडल को इंतज़ार रहेगा। पत्रिका का प्रिंट संस्करण भी समय पर आपके हाथों में होगा। ऑन लाइन पढ़ें- https://www.slideshare.net/slideshow/shivna-sahityiki-july-september-2025-pdf/281189291 https://www.vibhom.com/shivna/jul_sep_2025.pdf साफ़्ट कॉपी पीडीऍफ यहाँ से डाउनलोड करें http://www.vibhom.com/shivnasahityiki.html फेसबुक पर- https://www.facebook.com/shivnasahityiki/ ब्लॉग- http://shivnaprakashan.blogspot.com/</itunes:subtitle><itunes:author>noreply@blogger.com (Unknown)</itunes:author><itunes:summary>मित्रों, संरक्षक एवं सलाहकार संपादक- सुधा ओम ढींगरा, संपादक- पंकज सुबीर, कार्यकारी संपादक- शहरयार, सह संपादक- शैलेन्द्र शरण, आकाश माथुर के संपादन में शोध, समीक्षा तथा आलोचना की अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका शिवना साहित्यिकी का वर्ष : 10, अंक : 38, जुलाई-सितम्बर 2025 अंक अब उपलब्ध है। इस अंक में शामिल हैं- आवरण कविता- चरवाहे का गीत / केतन यादव, संपादकीय / शहरयार, व्यंग्य चित्र / काजल कुमार। शोध आलोचना- एक तानाशाह की प्रेमकथा- राहुल देव, ज्ञान चतुर्वेदी, प्रताप सहगल - एक शिनाख्त- अनिल गोयल- शशि सहगल, अधूरी जिरह- राजेश कुमार सिन्हा, मंजुला बिष्ट, अम्बर परियाँ- सन्दीप तोमर, बलजिंदर नसराली, (अनुवाद- सुभाष नीरव), सीता एक नारी- अनिमा दास, प्रताप नारायण सिंह, कोशिशों के पुल- लाल देवेन्द्र कुमार श्रीवास्तव- गरिमा सक्सेना। केंद्र में पुस्तक- ख़ैबर दर्रा, मनीषा कुलश्रेष्ठ, सूर्यकांत नागर, डॉ. जसविन्दर कौर बिन्द्रा, पंकज सुबीर। थैंक यू यारा- डॉ. कुंकुम गुप्ता, मधूलिका श्रीवास्तव, अमिता त्रिवेदी। पुस्तक समीक्षा- गुलाबी नदी की मछलियाँ, साधना अग्रवाल, सिनीवाली, तीस की लाइन- दीपक गिरकर, अनुलता राज नायर, ग्यारह कहानियाँ- सूर्यकांत नागर, ज्योति जैन, सूर्यकांत नागर, पत्तियों पर काँपता कोमल गांधार- दीपक गिरकर, पल्लवी त्रिवेदी, आग और पानी- राजेश सक्सेना, व्योमेश शुक्ल, तुम मेरे अज़ीज़ हो- डॉ. आशा सिंह सिकरवार, पंकज त्रिवेदी, अम्मा- ज्योति जैन, दीपक गिरकर, साहित्य की गुमटी- मधुर कुलश्रेष्ठ, धर्मपाल महेंद्र जैन, एक और दुनिया होती- भावना शेखर, शिवदयाल, घुमक्कड़ी- अंग्रेज़ी साहित्य के गलियारों में- उजला लोहिया, मनीषा कुलश्रेष्ठ, मिडिल क्लास मंचूरियन- गरिमा श्रीवास्तव, जयंती रंगनाथन, हथेली पर कर्ण, राकेश भारतीय, नरेंद्र नागदेव, विदेश में हिन्दी पत्रकारिता, विनय उपाध्याय, जवाहर कर्नावट। शोध आलेख- विमर्श दृष्टि- भाग 2, (पंकज सुबीर की कहानियाँ), दीपक गिरकर, शहरयार। आवरण चित्र- पंकज सुबीर, डिज़ायनिंग- सनी गोस्वामी, सुनील पेरवाल, शिवम गोस्वामी। आपकी प्रतिक्रियाओं का संपादक मंडल को इंतज़ार रहेगा। पत्रिका का प्रिंट संस्करण भी समय पर आपके हाथों में होगा। ऑन लाइन पढ़ें- https://www.slideshare.net/slideshow/shivna-sahityiki-july-september-2025-pdf/281189291 https://www.vibhom.com/shivna/jul_sep_2025.pdf साफ़्ट कॉपी पीडीऍफ यहाँ से डाउनलोड करें http://www.vibhom.com/shivnasahityiki.html फेसबुक पर- https://www.facebook.com/shivnasahityiki/ ब्लॉग- http://shivnaprakashan.blogspot.com/</itunes:summary></item><item><title>वैश्विक हिन्दी चिंतन की अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका विभोम-स्वर का वर्ष : 10, अंक : 38, जुलाई-सितम्बर 2025 अंक</title><link>http://subeerin.blogspot.com/2025/07/10-38-2025.html</link><author>noreply@blogger.com (Unknown)</author><pubDate>Wed, 2 Jul 2025 09:32:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-7637784963342720274.post-1162995515900078752</guid><description>&lt;p&gt;मित्रो, संरक्षक तथा प्रमुख संपादक सुधा ओम ढींगरा एवं संपादक पंकज सुबीर के संपादन में वैश्विक हिन्दी चिंतन की अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका विभोम-स्वर का वर्ष : 10, अंक : 38, जुलाई-सितम्बर 2025 अंक अब उपलब्ध है। इस अंक में शामिल है- संपादकीय, मित्रनामा, संपादकीय, मित्रनामा, साक्षात्कार- साहित्य, संगीत और कला त्रिवेणी की आवाजाही साहित्य को ख़ूबसूरत बनाती है, कहानीकार-उपन्यासकार ममता सिंह (रेडियो सखी) से आकाश माथुर की बातचीत। विस्मृति के द्वार- याद आने लगे भूले फ़साने..., रेखा राजवंशी। कथा-कहानी- मिलन, नीलिमा शर्मा, खिड़की के पार की तिलिस्मी दुनिया- डॉ. मंजु शर्मा, एक फूल-गुलमोहर- भरत चन्द्र शर्मा, यह तुम ही हो मेरे दोस्त !- रानी सुमिता, चोर पर मोर- डॉ. वीणा विज 'उदित', पनाह- अब्दुल ग़फ़्फ़ार, मैं कहाँ हूँ- डॉ. मधु संधु। लघुकथा- भिखारी कहीं का- इन्दु सिन्हा &amp;quot;इन्दु&amp;quot;, विषकंठ, अंतिम इच्छा- पूजा अग्निहोत्री, बालकनी- सन्दीप तोमर, मण्डी- भारती शर्मा। भाषांतर- सिर्फ़ गृहिणी- मराठी कहानी, मूल लेखक- सानिया, अनुवाद - डॉ. महेश दवंगे, भाव-अभाव- गुजराती कहानी- मूल लेखक- प्रज्ञा पटेल, अनुवादक-राजेन्द्र निगम। ललित निबंध- प्रदक्षिणाम पदे पदे- डॉ. गरिमा संजय दुबे। व्यंग्य- सजना है मुझे...सोशल मीडिया के लिए- रेखा शाह आरबी, सवालों पर बवाल!- देवेन्द्र कुमार पाठक, विश्वगुरु हो गए फेल- नूपुर अशोक। संस्मरण- मायाजाल- दिव्या माथुर। शहरों की रूह- यॉर्क - तीन दिन और तीन मित्र- शिखा वार्ष्णेय। आख़िरी पन्ना। रेखाचित्र- अनीता सक्सेना, आवरण चित्र- पंकज सुबीर, डिज़ायनिंग सनी गोस्वामी, शहरयार अमजद ख़ान, सुनील पेरवाल, शिवम गोस्वामी, आपकी प्रतिक्रियाओं का संपादक मंडल को इंतज़ार रहेगा। पत्रिका का प्रिंट संस्क़रण भी समय पर आपके हाथों में होगा।&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;ऑनलाइन पढ़ें पत्रिका- &lt;/p&gt;  &lt;p&gt;&lt;a href="https://www.slideshare.net/slideshow/vibhom-swar-july-september-2025-magazine-pdf/281186334"&gt;https://www.slideshare.net/slideshow/vibhom-swar-july-september-2025-magazine-pdf/281186334&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;&lt;a href="https://www.vibhom.com/pdf/july_sep_2025.pdf"&gt;https://www.vibhom.com/pdf/july_sep_2025.pdf&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;वेबसाइट से डाउनलोड करें&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;&lt;a href="http://www.vibhom.com/vibhomswar.html"&gt;http://www.vibhom.com/vibhomswar.html&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;फेस बुक पर&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;&lt;a href="https://www.facebook.com/Vibhomswar"&gt;https://www.facebook.com/Vibhomswar&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;ब्लॉग पर पढ़ें- &lt;/p&gt;  &lt;p&gt;&lt;a href="http://shabdsudha.blogspot.com/"&gt;http://shabdsudha.blogspot.com/&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;&lt;a href="http://vibhomswar.blogspot.com/"&gt;http://vibhomswar.blogspot.com/&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;कविता कोश पर पढ़ें&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;&lt;a href="http://kavitakosh.org/kk/विभोम_स्वर_पत्रिका"&gt;http://kavitakosh.org/kk/विभोम_स्वर_पत्रिका&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;</description><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total><enclosure length="-1" type="application/pdf" url="https://www.vibhom.com/pdf/july_sep_2025.pdf"/><itunes:explicit/><itunes:subtitle>मित्रो, संरक्षक तथा प्रमुख संपादक सुधा ओम ढींगरा एवं संपादक पंकज सुबीर के संपादन में वैश्विक हिन्दी चिंतन की अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका विभोम-स्वर का वर्ष : 10, अंक : 38, जुलाई-सितम्बर 2025 अंक अब उपलब्ध है। इस अंक में शामिल है- संपादकीय, मित्रनामा, संपादकीय, मित्रनामा, साक्षात्कार- साहित्य, संगीत और कला त्रिवेणी की आवाजाही साहित्य को ख़ूबसूरत बनाती है, कहानीकार-उपन्यासकार ममता सिंह (रेडियो सखी) से आकाश माथुर की बातचीत। विस्मृति के द्वार- याद आने लगे भूले फ़साने..., रेखा राजवंशी। कथा-कहानी- मिलन, नीलिमा शर्मा, खिड़की के पार की तिलिस्मी दुनिया- डॉ. मंजु शर्मा, एक फूल-गुलमोहर- भरत चन्द्र शर्मा, यह तुम ही हो मेरे दोस्त !- रानी सुमिता, चोर पर मोर- डॉ. वीणा विज 'उदित', पनाह- अब्दुल ग़फ़्फ़ार, मैं कहाँ हूँ- डॉ. मधु संधु। लघुकथा- भिखारी कहीं का- इन्दु सिन्हा &amp;quot;इन्दु&amp;quot;, विषकंठ, अंतिम इच्छा- पूजा अग्निहोत्री, बालकनी- सन्दीप तोमर, मण्डी- भारती शर्मा। भाषांतर- सिर्फ़ गृहिणी- मराठी कहानी, मूल लेखक- सानिया, अनुवाद - डॉ. महेश दवंगे, भाव-अभाव- गुजराती कहानी- मूल लेखक- प्रज्ञा पटेल, अनुवादक-राजेन्द्र निगम। ललित निबंध- प्रदक्षिणाम पदे पदे- डॉ. गरिमा संजय दुबे। व्यंग्य- सजना है मुझे...सोशल मीडिया के लिए- रेखा शाह आरबी, सवालों पर बवाल!- देवेन्द्र कुमार पाठक, विश्वगुरु हो गए फेल- नूपुर अशोक। संस्मरण- मायाजाल- दिव्या माथुर। शहरों की रूह- यॉर्क - तीन दिन और तीन मित्र- शिखा वार्ष्णेय। आख़िरी पन्ना। रेखाचित्र- अनीता सक्सेना, आवरण चित्र- पंकज सुबीर, डिज़ायनिंग सनी गोस्वामी, शहरयार अमजद ख़ान, सुनील पेरवाल, शिवम गोस्वामी, आपकी प्रतिक्रियाओं का संपादक मंडल को इंतज़ार रहेगा। पत्रिका का प्रिंट संस्क़रण भी समय पर आपके हाथों में होगा। ऑनलाइन पढ़ें पत्रिका- https://www.slideshare.net/slideshow/vibhom-swar-july-september-2025-magazine-pdf/281186334 https://www.vibhom.com/pdf/july_sep_2025.pdf वेबसाइट से डाउनलोड करें http://www.vibhom.com/vibhomswar.html फेस बुक पर https://www.facebook.com/Vibhomswar ब्लॉग पर पढ़ें- http://shabdsudha.blogspot.com/ http://vibhomswar.blogspot.com/ कविता कोश पर पढ़ें http://kavitakosh.org/kk/विभोम_स्वर_पत्रिका</itunes:subtitle><itunes:author>noreply@blogger.com (Unknown)</itunes:author><itunes:summary>मित्रो, संरक्षक तथा प्रमुख संपादक सुधा ओम ढींगरा एवं संपादक पंकज सुबीर के संपादन में वैश्विक हिन्दी चिंतन की अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका विभोम-स्वर का वर्ष : 10, अंक : 38, जुलाई-सितम्बर 2025 अंक अब उपलब्ध है। इस अंक में शामिल है- संपादकीय, मित्रनामा, संपादकीय, मित्रनामा, साक्षात्कार- साहित्य, संगीत और कला त्रिवेणी की आवाजाही साहित्य को ख़ूबसूरत बनाती है, कहानीकार-उपन्यासकार ममता सिंह (रेडियो सखी) से आकाश माथुर की बातचीत। विस्मृति के द्वार- याद आने लगे भूले फ़साने..., रेखा राजवंशी। कथा-कहानी- मिलन, नीलिमा शर्मा, खिड़की के पार की तिलिस्मी दुनिया- डॉ. मंजु शर्मा, एक फूल-गुलमोहर- भरत चन्द्र शर्मा, यह तुम ही हो मेरे दोस्त !- रानी सुमिता, चोर पर मोर- डॉ. वीणा विज 'उदित', पनाह- अब्दुल ग़फ़्फ़ार, मैं कहाँ हूँ- डॉ. मधु संधु। लघुकथा- भिखारी कहीं का- इन्दु सिन्हा &amp;quot;इन्दु&amp;quot;, विषकंठ, अंतिम इच्छा- पूजा अग्निहोत्री, बालकनी- सन्दीप तोमर, मण्डी- भारती शर्मा। भाषांतर- सिर्फ़ गृहिणी- मराठी कहानी, मूल लेखक- सानिया, अनुवाद - डॉ. महेश दवंगे, भाव-अभाव- गुजराती कहानी- मूल लेखक- प्रज्ञा पटेल, अनुवादक-राजेन्द्र निगम। ललित निबंध- प्रदक्षिणाम पदे पदे- डॉ. गरिमा संजय दुबे। व्यंग्य- सजना है मुझे...सोशल मीडिया के लिए- रेखा शाह आरबी, सवालों पर बवाल!- देवेन्द्र कुमार पाठक, विश्वगुरु हो गए फेल- नूपुर अशोक। संस्मरण- मायाजाल- दिव्या माथुर। शहरों की रूह- यॉर्क - तीन दिन और तीन मित्र- शिखा वार्ष्णेय। आख़िरी पन्ना। रेखाचित्र- अनीता सक्सेना, आवरण चित्र- पंकज सुबीर, डिज़ायनिंग सनी गोस्वामी, शहरयार अमजद ख़ान, सुनील पेरवाल, शिवम गोस्वामी, आपकी प्रतिक्रियाओं का संपादक मंडल को इंतज़ार रहेगा। पत्रिका का प्रिंट संस्क़रण भी समय पर आपके हाथों में होगा। ऑनलाइन पढ़ें पत्रिका- https://www.slideshare.net/slideshow/vibhom-swar-july-september-2025-magazine-pdf/281186334 https://www.vibhom.com/pdf/july_sep_2025.pdf वेबसाइट से डाउनलोड करें http://www.vibhom.com/vibhomswar.html फेस बुक पर https://www.facebook.com/Vibhomswar ब्लॉग पर पढ़ें- http://shabdsudha.blogspot.com/ http://vibhomswar.blogspot.com/ कविता कोश पर पढ़ें http://kavitakosh.org/kk/विभोम_स्वर_पत्रिका</itunes:summary></item><item><title>वैश्विक हिन्दी चिंतन की अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका विभोम-स्वर का वर्ष : 10, अंक : 37, अप्रैल-जून 2025 अंक</title><link>http://subeerin.blogspot.com/2025/04/10-37-2025.html</link><author>noreply@blogger.com (Unknown)</author><pubDate>Sat, 19 Apr 2025 08:56:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-7637784963342720274.post-6430128513740785690</guid><description>&lt;p&gt;मित्रो, संरक्षक तथा प्रमुख संपादक सुधा ओम ढींगरा एवं संपादक पंकज सुबीर के संपादन में वैश्विक हिन्दी चिंतन की अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका विभोम-स्वर का वर्ष : 10, अंक : 37, अप्रैल-जून 2025 अंक अब उपलब्ध है। इस अंक में शामिल है- संपादकीय, मित्रनामा, साक्षात्कार- साहित्य और टीवी या फ़िल्मों के लिए लेखन में ज़मीन-आसमान का अंतर है, कहानीकार-उपन्यासकार जयंती रंगनाथन से आकाश माथुर की बातचीत। विस्मृति के द्वार- कहीं दूर खड़ी वह- विकेश निझावन। कथा-कहानी- ए चाँद आसमाँ के- डॉ. पूरन सिंह, शालोम ब्रू- अनुजीत इकबाल, लाल छत वाला घर- ममता त्यागी, थोड़ा सा मज़ा- रोचिका अरुण शर्मा, पुनरागमन- पूजा गुप्ता, मुझे माफ़ कर दो अम्माँ- पद्मा मिश्रा। लघुकथा- बैनर- डॉ. दिलबाग सिंह विर्क, सिसकियाँ- सुशील स्वतंत्र, भरपेट खाना- चारुमित्रा। भाषांतर- अब दिल ख़ुश है- पंजाबी कहानी- रवि शेरगिल, हिन्दी अनुवाद- डॉ. अमरजीत कौंके। प्रथम पग- टीचर- विनीता कुमार। ललित निबंध- जल जलहिं समाना...- डॉ. वंदना मुकेश। व्यंग्य- ये जो टेंशन है- प्रेम जनमेजय, दीनानाथ के हाथ- हरीश नवल, न खाऊँगा....- कमलेश पाण्डेय, दादाजी का हनीमून- अर्चना चतुर्वेदी। संस्मरण- कितने पास कितने दूर- गोविंद शर्मा। रेखाचित्र- कमजोर हाथों से भी सीढ़ी थामने वाले- ज्योति जैन। ग़ज़ल- अंजना वर्मा, सत्यशील राम त्रिपाठी। शहरों की रूह- प्रकृति का डिज़्नी वर्ल्ड-यूटाह- रेखा भाटिया। आख़िरी पन्ना। रेखाचित्र- अनीता सक्सेना, आवरण चित्र- पंकज सुबीर, डिज़ायनिंग सनी गोस्वामी, शहरयार अमजद ख़ान, सुनील पेरवाल, शिवम गोस्वामी, आपकी प्रतिक्रियाओं का संपादक मंडल को इंतज़ार रहेगा। पत्रिका का प्रिंट संस्क़रण भी समय पर आपके हाथों में होगा।&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;ऑनलाइन पढ़ें पत्रिका- &lt;/p&gt;  &lt;p&gt;&lt;a href="https://www.slideshare.net/slideshow/vibhom-swar-magazine-april-june-2025-pdf/278123120"&gt;https://www.slideshare.net/slideshow/vibhom-swar-magazine-april-june-2025-pdf/278123120&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;&lt;a href="http://www.vibhom.com/pdf/jan_mar_2025.pdf"&gt;http://www.vibhom.com/pdf/april_june_2025.pdf&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;वेबसाइट से डाउनलोड करें&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;&lt;a href="http://www.vibhom.com/vibhomswar.html"&gt;http://www.vibhom.com/vibhomswar.html&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;फेस बुक पर&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;&lt;a href="https://www.facebook.com/Vibhomswar"&gt;https://www.facebook.com/Vibhomswar&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;ब्लॉग पर पढ़ें- &lt;/p&gt;  &lt;p&gt;&lt;a href="http://shabdsudha.blogspot.com/"&gt;http://shabdsudha.blogspot.com/&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;&lt;a href="http://vibhomswar.blogspot.com/"&gt;http://vibhomswar.blogspot.com/&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;कविता कोश पर पढ़ें&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;&lt;a href="http://kavitakosh.org/kk/विभोम_स्वर_पत्रिका"&gt;http://kavitakosh.org/kk/विभोम_स्वर_पत्रिका&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;</description><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total><enclosure length="11498171" type="application/pdf" url="http://www.vibhom.com/pdf/jan_mar_2025.pdf"/><itunes:explicit/><itunes:subtitle>मित्रो, संरक्षक तथा प्रमुख संपादक सुधा ओम ढींगरा एवं संपादक पंकज सुबीर के संपादन में वैश्विक हिन्दी चिंतन की अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका विभोम-स्वर का वर्ष : 10, अंक : 37, अप्रैल-जून 2025 अंक अब उपलब्ध है। इस अंक में शामिल है- संपादकीय, मित्रनामा, साक्षात्कार- साहित्य और टीवी या फ़िल्मों के लिए लेखन में ज़मीन-आसमान का अंतर है, कहानीकार-उपन्यासकार जयंती रंगनाथन से आकाश माथुर की बातचीत। विस्मृति के द्वार- कहीं दूर खड़ी वह- विकेश निझावन। कथा-कहानी- ए चाँद आसमाँ के- डॉ. पूरन सिंह, शालोम ब्रू- अनुजीत इकबाल, लाल छत वाला घर- ममता त्यागी, थोड़ा सा मज़ा- रोचिका अरुण शर्मा, पुनरागमन- पूजा गुप्ता, मुझे माफ़ कर दो अम्माँ- पद्मा मिश्रा। लघुकथा- बैनर- डॉ. दिलबाग सिंह विर्क, सिसकियाँ- सुशील स्वतंत्र, भरपेट खाना- चारुमित्रा। भाषांतर- अब दिल ख़ुश है- पंजाबी कहानी- रवि शेरगिल, हिन्दी अनुवाद- डॉ. अमरजीत कौंके। प्रथम पग- टीचर- विनीता कुमार। ललित निबंध- जल जलहिं समाना...- डॉ. वंदना मुकेश। व्यंग्य- ये जो टेंशन है- प्रेम जनमेजय, दीनानाथ के हाथ- हरीश नवल, न खाऊँगा....- कमलेश पाण्डेय, दादाजी का हनीमून- अर्चना चतुर्वेदी। संस्मरण- कितने पास कितने दूर- गोविंद शर्मा। रेखाचित्र- कमजोर हाथों से भी सीढ़ी थामने वाले- ज्योति जैन। ग़ज़ल- अंजना वर्मा, सत्यशील राम त्रिपाठी। शहरों की रूह- प्रकृति का डिज़्नी वर्ल्ड-यूटाह- रेखा भाटिया। आख़िरी पन्ना। रेखाचित्र- अनीता सक्सेना, आवरण चित्र- पंकज सुबीर, डिज़ायनिंग सनी गोस्वामी, शहरयार अमजद ख़ान, सुनील पेरवाल, शिवम गोस्वामी, आपकी प्रतिक्रियाओं का संपादक मंडल को इंतज़ार रहेगा। पत्रिका का प्रिंट संस्क़रण भी समय पर आपके हाथों में होगा। ऑनलाइन पढ़ें पत्रिका- https://www.slideshare.net/slideshow/vibhom-swar-magazine-april-june-2025-pdf/278123120 http://www.vibhom.com/pdf/april_june_2025.pdf वेबसाइट से डाउनलोड करें http://www.vibhom.com/vibhomswar.html फेस बुक पर https://www.facebook.com/Vibhomswar ब्लॉग पर पढ़ें- http://shabdsudha.blogspot.com/ http://vibhomswar.blogspot.com/ कविता कोश पर पढ़ें http://kavitakosh.org/kk/विभोम_स्वर_पत्रिका</itunes:subtitle><itunes:author>noreply@blogger.com (Unknown)</itunes:author><itunes:summary>मित्रो, संरक्षक तथा प्रमुख संपादक सुधा ओम ढींगरा एवं संपादक पंकज सुबीर के संपादन में वैश्विक हिन्दी चिंतन की अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका विभोम-स्वर का वर्ष : 10, अंक : 37, अप्रैल-जून 2025 अंक अब उपलब्ध है। इस अंक में शामिल है- संपादकीय, मित्रनामा, साक्षात्कार- साहित्य और टीवी या फ़िल्मों के लिए लेखन में ज़मीन-आसमान का अंतर है, कहानीकार-उपन्यासकार जयंती रंगनाथन से आकाश माथुर की बातचीत। विस्मृति के द्वार- कहीं दूर खड़ी वह- विकेश निझावन। कथा-कहानी- ए चाँद आसमाँ के- डॉ. पूरन सिंह, शालोम ब्रू- अनुजीत इकबाल, लाल छत वाला घर- ममता त्यागी, थोड़ा सा मज़ा- रोचिका अरुण शर्मा, पुनरागमन- पूजा गुप्ता, मुझे माफ़ कर दो अम्माँ- पद्मा मिश्रा। लघुकथा- बैनर- डॉ. दिलबाग सिंह विर्क, सिसकियाँ- सुशील स्वतंत्र, भरपेट खाना- चारुमित्रा। भाषांतर- अब दिल ख़ुश है- पंजाबी कहानी- रवि शेरगिल, हिन्दी अनुवाद- डॉ. अमरजीत कौंके। प्रथम पग- टीचर- विनीता कुमार। ललित निबंध- जल जलहिं समाना...- डॉ. वंदना मुकेश। व्यंग्य- ये जो टेंशन है- प्रेम जनमेजय, दीनानाथ के हाथ- हरीश नवल, न खाऊँगा....- कमलेश पाण्डेय, दादाजी का हनीमून- अर्चना चतुर्वेदी। संस्मरण- कितने पास कितने दूर- गोविंद शर्मा। रेखाचित्र- कमजोर हाथों से भी सीढ़ी थामने वाले- ज्योति जैन। ग़ज़ल- अंजना वर्मा, सत्यशील राम त्रिपाठी। शहरों की रूह- प्रकृति का डिज़्नी वर्ल्ड-यूटाह- रेखा भाटिया। आख़िरी पन्ना। रेखाचित्र- अनीता सक्सेना, आवरण चित्र- पंकज सुबीर, डिज़ायनिंग सनी गोस्वामी, शहरयार अमजद ख़ान, सुनील पेरवाल, शिवम गोस्वामी, आपकी प्रतिक्रियाओं का संपादक मंडल को इंतज़ार रहेगा। पत्रिका का प्रिंट संस्क़रण भी समय पर आपके हाथों में होगा। ऑनलाइन पढ़ें पत्रिका- https://www.slideshare.net/slideshow/vibhom-swar-magazine-april-june-2025-pdf/278123120 http://www.vibhom.com/pdf/april_june_2025.pdf वेबसाइट से डाउनलोड करें http://www.vibhom.com/vibhomswar.html फेस बुक पर https://www.facebook.com/Vibhomswar ब्लॉग पर पढ़ें- http://shabdsudha.blogspot.com/ http://vibhomswar.blogspot.com/ कविता कोश पर पढ़ें http://kavitakosh.org/kk/विभोम_स्वर_पत्रिका</itunes:summary></item><item><title>होली के मिसरे की बहुत ही प्रचलित बहर है और गायी जाने वाली बहर है तो इस पर काम करने में आप लोगों को कोई परेशानी नहीं आयेगी।</title><link>http://subeerin.blogspot.com/2025/02/blog-post.html</link><author>noreply@blogger.com (Unknown)</author><pubDate>Fri, 28 Feb 2025 16:27:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-7637784963342720274.post-8278117859506560333</guid><description>&lt;p&gt;ब्लॉगिंग का सुनहरा समय तो अब लगभग बीत चुका है, मगर यादें कब पीछा छोड़ती हैं। कुछ न कुछ ऐसा होता है जिसके कारण बस फिर से यहाँ आने की इच्छा हो जाती है। जैसे कोई त्योहार आ जाता है और याद आ जाता है कि पहले हम किस प्रकार यहाँ पर सारे त्योहार मनाते थे। अब तो ख़ैर वह समय एक सुनहरी याद बन कर मन में बसा हुआ है। अब उतने लोग तो नहीं आते हैं मगर फिर भी जितने आ जाते हैं, उनके साथ ही एक बार फिर से हम उन यादों को ताज़ा कर लेते हैं। होली का त्योहार सामने आ चुका है, इस बार मिसरा देने में कुछ देर हो गयी है, मगर विश्वास है कि पन्द्रह दिनों में आप लोग ग़ज़लें तैयार कर लेंगे। &lt;/p&gt;  &lt;p&gt;इस बार मुशायरा एक बहुत ही लोकप्रिय बहर पर होने वाला है- बहरे हज़ज मुसम्मन सालिम, मतलब मुफाईलुन-मुफाईलुन-मुफाईलुन-मुफाईलुन, 1222-1222-1222-1222&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;होली के मिसरे की बहुत ही प्रचलित बहर है और गायी जाने वाली बहर है तो इस पर काम करने में आप लोगों को कोई परेशानी नहीं आयेगी। &lt;/p&gt;  &lt;p&gt;मिसरा कुछ इस प्रकार है-&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;कहा दिल तोड़ कर उसने बुरा मानो न होली है&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;कहा दिल तो (मुफाईलुन-1222) ड़ कर उसने (मुफाईलुन-1222) बुरा मानो (मुफाईलुन-1222) न होली है (मुफाईलुन-1222)&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;अब इसमें जो क़ाफ़िया की ध्वनि है वह है शब्द ‘उसने’ में आ रही ‘ए’ की मात्रा, मतलब बैठे, चलते, देखे, गिरते, के, ले, आए, जाए, आओगे, जाओगे, पहनाए, लगाओगे, दिखाओगे, उतरवाए, उतारेंगे और रदीफ़ है उसके आगे का पूरा ‘बुरा मानो न होली है’ । मतलब आपको क़ाफ़िया रखना है 2 जैसे ‘के’ या 22 जैसे ‘आए, देखे’ या 222 जैसे ‘पहनाए, आओगे’ या 1222 जैसे ‘लगाओगे, उतरवाए’ मतलब कुल मिलाकर यह कि मात्रिक वज़न यही हो मगर अंत में ‘ए’ की मात्रा पर शब्द समाप्त हो रहा हो। और इस प्रकार से हो रहा हो कि उसके आगे जब रदीफ़ आये ‘बुरा मानो न होली है’ तो एकदम ठीक से कनेक्ट भी हो जाए। वाक्य पूरा हो जाए। &lt;/p&gt;  &lt;p&gt;चलिए अब इस बहर पर गानों की बात करते हैं-&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;ख़ुदा भी आस्मां से जब ज़मीं पर देखता होगा &lt;/p&gt;  &lt;p&gt;बहारो फूल बरसाओ मेरा महबूब आया है,&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;सुहानी चाँदनी रातें, हमें सोने नहीं देतीं   &lt;br /&gt;    &lt;br /&gt;मुझे तेरी मुहब्बत का सहारा मिल गया होता    &lt;br /&gt;और यदि आपको मुशायरों की धुन चाहिए तो कोई दीवाना कहता है कोई पागल समझता है इसी बहर पर है। &lt;/p&gt;  &lt;p&gt;तो मेरे विचार में इतना कुछ काफ़ी है कि आप काम शुरू कर सकें। तो लिख डालिए आपनी ग़ज़ल और भेज दिजिए 12 मार्च तक &lt;a href="mailto:subeerin@gmail.com"&gt;subeerin@gmail.com&lt;/a&gt; पर। इंतज़ार रहेगा। कृपया कमेंट बॉक्स में न भेजें ग़ज़ल को मेल पर ही भेजें।    &lt;/p&gt;</description><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">3</thr:total></item><item><title>शोध, समीक्षा तथा आलोचना की अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका शिवना साहित्यिकी का वर्ष : 9, अंक : 36, जनवरी-मार्च 2025 अंक</title><link>http://subeerin.blogspot.com/2025/01/9-36-2025_27.html</link><author>noreply@blogger.com (Unknown)</author><pubDate>Mon, 27 Jan 2025 10:37:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-7637784963342720274.post-1322126132697899746</guid><description>&lt;p&gt;मित्रों, संरक्षक एवं सलाहकार संपादक- सुधा ओम ढींगरा, संपादक- पंकज सुबीर, कार्यकारी संपादक- शहरयार, सह संपादक- शैलेन्द्र शरण, आकाश माथुर के संपादन में शोध, समीक्षा तथा आलोचना की अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका शिवना साहित्यिकी का वर्ष : 9, अंक : 36, जनवरी-मार्च 2025 अंक अब उपलब्ध है। &lt;/p&gt;  &lt;p&gt;इस अंक में शामिल हैं- आवरण कविता / नव वर्ष / रामदरश मिश्र, संपादकीय / शहरयार, व्यंग्य चित्र / काजल कुमार। शोध आलोचना- संदिग्ध / दीपक गिरकर / तेजेन्द्र शर्मा, क़मर मेवाड़ी की कविताएँ / प्रो. मलय पानेरी / क़मर मेवाड़ी, साज-बाज़ / डॉ. दिलबागसिंह विर्क / प्रियंका ओम, अंजलि भर उजास / रूपसिंह चन्देल / माधव नागदा, हिडिंबा / डॉ. हनी दर्शन / सुमन केशरी। केंद्र में पुस्तक - ज़ोया देसाई कॉटेज / वंदना गुप्ता, दीपक गिरकर, नीरज नीर / पंकज सुबीर। पुस्तक समीक्षा- पिकासो की उदास लड़कियाँ / सुधीर देशपांडे / शैलेन्द्र शरण, अम्मा / सतीश राठी / दीपक गिरकर, चहट चंपा / रमेश शर्मा / उर्मिला आचार्य, लमही जुलाई-दिसम्बर 2024 विशेषांक / डॉ. दया दीक्षित / विजय राय, इक्कीसवीं सदी की कहानियाँ समीक्षा / डॉ. रंजना गुप्ता / सुधा जुगरान, डोर अंजानी सी / डॉ. दिनेश पाठक 'शशि' / ममता त्यागी, रास्ता इधर से भी है / अंतरा करवड़े / अश्विनीकुमार दुबे, ग़ज़लकार अशोक 'अंजुम' / डॉ. विनोद प्रकाश गुप्ता 'शलभ' / अशोक अंजुम, बिखरे हुए लम्हात / के. पी. अनमोल / शिज्जू शकूर, अंजामे-गुलिस्ताँ क्या होगा / दीपक गिरकर / पल्लवी त्रिवेदी, सरई के फूल / अनुराग अन्वेषी / अनीता रश्मि, खाकी में स्थितप्रज्ञ / सरोजिनी नौटियाल / अनिल रतूड़ी, वे लोग / मंजुश्री / सुमति सक्सेना लाल, कहानी का रास्ता / राजेन्द्र नागदेव / संतोष चौबे, राहुल सांकृत्यायन अनात्म बेचैनी का यायावर / प्रियंवदा पाण्डेय / अशोक कुमार पांडेय, मुझे सूरज चाहिए / दीपक गिरकर / आकाश माथुर, जिस लाहौर वेख लेया / दीपक गिरकर / प्रितपाल कौर, विदुर कुटी का संत / डॉ. वेदप्रकाश अमिताभ / योगेन्द्र शर्मा। शोध आलेख / नाटककार रमेश उपाध्याय / प्रो. प्रज्ञा। आवरण चित्र- पंकज सुबीर, डिज़ायनिंग- सनी गोस्वामी, सुनील पेरवाल, शिवम गोस्वामी। आपकी प्रतिक्रियाओं का संपादक मंडल को इंतज़ार रहेगा। पत्रिका का प्रिंट संस्करण भी समय पर आपके हाथों में होगा। &lt;/p&gt;  &lt;p&gt;ऑन लाइन पढ़ें-&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;&lt;a href="https://www.slideshare.net/slideshow/shivna-sahityiki-january-march-2025-pdf/275170679"&gt;https://www.slideshare.net/slideshow/shivna-sahityiki-january-march-2025-pdf/275170679&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;&lt;a href="http://www.vibhom.com/shivna/jan_mar_2025.pdf"&gt;http://www.vibhom.com/shivna/jan_mar_2025.pdf&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;साफ़्ट कॉपी पीडीऍफ यहाँ से डाउनलोड करें &lt;/p&gt;  &lt;p&gt;&lt;a href="http://www.vibhom.com/shivnasahityiki.html"&gt;http://www.vibhom.com/shivnasahityiki.html&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;फेसबुक पर- &lt;a href="https://www.facebook.com/shivnasahityiki/"&gt;https://www.facebook.com/shivnasahityiki/&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;ब्लॉग- &lt;a href="http://shivnaprakashan.blogspot.com/"&gt;http://shivnaprakashan.blogspot.com/&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;</description><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total><enclosure length="13337103" type="application/pdf" url="http://www.vibhom.com/shivna/jan_mar_2025.pdf"/><itunes:explicit/><itunes:subtitle>मित्रों, संरक्षक एवं सलाहकार संपादक- सुधा ओम ढींगरा, संपादक- पंकज सुबीर, कार्यकारी संपादक- शहरयार, सह संपादक- शैलेन्द्र शरण, आकाश माथुर के संपादन में शोध, समीक्षा तथा आलोचना की अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका शिवना साहित्यिकी का वर्ष : 9, अंक : 36, जनवरी-मार्च 2025 अंक अब उपलब्ध है। इस अंक में शामिल हैं- आवरण कविता / नव वर्ष / रामदरश मिश्र, संपादकीय / शहरयार, व्यंग्य चित्र / काजल कुमार। शोध आलोचना- संदिग्ध / दीपक गिरकर / तेजेन्द्र शर्मा, क़मर मेवाड़ी की कविताएँ / प्रो. मलय पानेरी / क़मर मेवाड़ी, साज-बाज़ / डॉ. दिलबागसिंह विर्क / प्रियंका ओम, अंजलि भर उजास / रूपसिंह चन्देल / माधव नागदा, हिडिंबा / डॉ. हनी दर्शन / सुमन केशरी। केंद्र में पुस्तक - ज़ोया देसाई कॉटेज / वंदना गुप्ता, दीपक गिरकर, नीरज नीर / पंकज सुबीर। पुस्तक समीक्षा- पिकासो की उदास लड़कियाँ / सुधीर देशपांडे / शैलेन्द्र शरण, अम्मा / सतीश राठी / दीपक गिरकर, चहट चंपा / रमेश शर्मा / उर्मिला आचार्य, लमही जुलाई-दिसम्बर 2024 विशेषांक / डॉ. दया दीक्षित / विजय राय, इक्कीसवीं सदी की कहानियाँ समीक्षा / डॉ. रंजना गुप्ता / सुधा जुगरान, डोर अंजानी सी / डॉ. दिनेश पाठक 'शशि' / ममता त्यागी, रास्ता इधर से भी है / अंतरा करवड़े / अश्विनीकुमार दुबे, ग़ज़लकार अशोक 'अंजुम' / डॉ. विनोद प्रकाश गुप्ता 'शलभ' / अशोक अंजुम, बिखरे हुए लम्हात / के. पी. अनमोल / शिज्जू शकूर, अंजामे-गुलिस्ताँ क्या होगा / दीपक गिरकर / पल्लवी त्रिवेदी, सरई के फूल / अनुराग अन्वेषी / अनीता रश्मि, खाकी में स्थितप्रज्ञ / सरोजिनी नौटियाल / अनिल रतूड़ी, वे लोग / मंजुश्री / सुमति सक्सेना लाल, कहानी का रास्ता / राजेन्द्र नागदेव / संतोष चौबे, राहुल सांकृत्यायन अनात्म बेचैनी का यायावर / प्रियंवदा पाण्डेय / अशोक कुमार पांडेय, मुझे सूरज चाहिए / दीपक गिरकर / आकाश माथुर, जिस लाहौर वेख लेया / दीपक गिरकर / प्रितपाल कौर, विदुर कुटी का संत / डॉ. वेदप्रकाश अमिताभ / योगेन्द्र शर्मा। शोध आलेख / नाटककार रमेश उपाध्याय / प्रो. प्रज्ञा। आवरण चित्र- पंकज सुबीर, डिज़ायनिंग- सनी गोस्वामी, सुनील पेरवाल, शिवम गोस्वामी। आपकी प्रतिक्रियाओं का संपादक मंडल को इंतज़ार रहेगा। पत्रिका का प्रिंट संस्करण भी समय पर आपके हाथों में होगा। ऑन लाइन पढ़ें- https://www.slideshare.net/slideshow/shivna-sahityiki-january-march-2025-pdf/275170679 http://www.vibhom.com/shivna/jan_mar_2025.pdf साफ़्ट कॉपी पीडीऍफ यहाँ से डाउनलोड करें http://www.vibhom.com/shivnasahityiki.html फेसबुक पर- https://www.facebook.com/shivnasahityiki/ ब्लॉग- http://shivnaprakashan.blogspot.com/</itunes:subtitle><itunes:author>noreply@blogger.com (Unknown)</itunes:author><itunes:summary>मित्रों, संरक्षक एवं सलाहकार संपादक- सुधा ओम ढींगरा, संपादक- पंकज सुबीर, कार्यकारी संपादक- शहरयार, सह संपादक- शैलेन्द्र शरण, आकाश माथुर के संपादन में शोध, समीक्षा तथा आलोचना की अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका शिवना साहित्यिकी का वर्ष : 9, अंक : 36, जनवरी-मार्च 2025 अंक अब उपलब्ध है। इस अंक में शामिल हैं- आवरण कविता / नव वर्ष / रामदरश मिश्र, संपादकीय / शहरयार, व्यंग्य चित्र / काजल कुमार। शोध आलोचना- संदिग्ध / दीपक गिरकर / तेजेन्द्र शर्मा, क़मर मेवाड़ी की कविताएँ / प्रो. मलय पानेरी / क़मर मेवाड़ी, साज-बाज़ / डॉ. दिलबागसिंह विर्क / प्रियंका ओम, अंजलि भर उजास / रूपसिंह चन्देल / माधव नागदा, हिडिंबा / डॉ. हनी दर्शन / सुमन केशरी। केंद्र में पुस्तक - ज़ोया देसाई कॉटेज / वंदना गुप्ता, दीपक गिरकर, नीरज नीर / पंकज सुबीर। पुस्तक समीक्षा- पिकासो की उदास लड़कियाँ / सुधीर देशपांडे / शैलेन्द्र शरण, अम्मा / सतीश राठी / दीपक गिरकर, चहट चंपा / रमेश शर्मा / उर्मिला आचार्य, लमही जुलाई-दिसम्बर 2024 विशेषांक / डॉ. दया दीक्षित / विजय राय, इक्कीसवीं सदी की कहानियाँ समीक्षा / डॉ. रंजना गुप्ता / सुधा जुगरान, डोर अंजानी सी / डॉ. दिनेश पाठक 'शशि' / ममता त्यागी, रास्ता इधर से भी है / अंतरा करवड़े / अश्विनीकुमार दुबे, ग़ज़लकार अशोक 'अंजुम' / डॉ. विनोद प्रकाश गुप्ता 'शलभ' / अशोक अंजुम, बिखरे हुए लम्हात / के. पी. अनमोल / शिज्जू शकूर, अंजामे-गुलिस्ताँ क्या होगा / दीपक गिरकर / पल्लवी त्रिवेदी, सरई के फूल / अनुराग अन्वेषी / अनीता रश्मि, खाकी में स्थितप्रज्ञ / सरोजिनी नौटियाल / अनिल रतूड़ी, वे लोग / मंजुश्री / सुमति सक्सेना लाल, कहानी का रास्ता / राजेन्द्र नागदेव / संतोष चौबे, राहुल सांकृत्यायन अनात्म बेचैनी का यायावर / प्रियंवदा पाण्डेय / अशोक कुमार पांडेय, मुझे सूरज चाहिए / दीपक गिरकर / आकाश माथुर, जिस लाहौर वेख लेया / दीपक गिरकर / प्रितपाल कौर, विदुर कुटी का संत / डॉ. वेदप्रकाश अमिताभ / योगेन्द्र शर्मा। शोध आलेख / नाटककार रमेश उपाध्याय / प्रो. प्रज्ञा। आवरण चित्र- पंकज सुबीर, डिज़ायनिंग- सनी गोस्वामी, सुनील पेरवाल, शिवम गोस्वामी। आपकी प्रतिक्रियाओं का संपादक मंडल को इंतज़ार रहेगा। पत्रिका का प्रिंट संस्करण भी समय पर आपके हाथों में होगा। ऑन लाइन पढ़ें- https://www.slideshare.net/slideshow/shivna-sahityiki-january-march-2025-pdf/275170679 http://www.vibhom.com/shivna/jan_mar_2025.pdf साफ़्ट कॉपी पीडीऍफ यहाँ से डाउनलोड करें http://www.vibhom.com/shivnasahityiki.html फेसबुक पर- https://www.facebook.com/shivnasahityiki/ ब्लॉग- http://shivnaprakashan.blogspot.com/</itunes:summary></item><item><title>वैश्विक हिन्दी चिंतन की अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका विभोम-स्वर का वर्ष : 9, अंक : 36, जनवरी-मार्च 2025 अंक</title><link>http://subeerin.blogspot.com/2025/01/9-36-2025.html</link><author>noreply@blogger.com (Unknown)</author><pubDate>Fri, 24 Jan 2025 10:09:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-7637784963342720274.post-240349640693687768</guid><description>&lt;p&gt;मित्रो, संरक्षक तथा प्रमुख संपादक सुधा ओम ढींगरा एवं संपादक पंकज सुबीर के संपादन में वैश्विक हिन्दी चिंतन की अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका विभोम-स्वर का वर्ष : 9, अंक : 36, जनवरी-मार्च 2025 अंक अब उपलब्ध है। इस अंक में शामिल है- संपादकीय, मित्रनामा, साक्षात्कार- हम साहित्य में गहरे और व्यापक होने की जगह उथले हो रहे हैं, कहानीकार-उपन्यासकार मनीषा कुलश्रेष्ठ से आकाश माथुर की बातचीत। विस्मृति के द्वार- स्मृतियों के झरोखे से, अरुणा सब्बरवाल। कथा-कहानी- दरवाज़े- उर्मिला शिरीष, एक धड़कन चूक गई- लक्ष्मी शर्मा, किसी और मिट्टी की बनी- डॉ. रमाकांत शर्मा, रेड सिग्नल- सुधा आदेश, मैं तुम्हें गाता रहूँगा- रंजना अनुराग, दस्तूर- विवेक द्विवेदी, सूरज की तरह नहीं ढलते पिता... विनीता राहुरीकर, यूँ ही चलते चलते- छाया श्रीवास्तव, प्रायश्चित- राजा सिंह। लघुकथा- सिग्नल- सौरभ सोनी, तुरपाई- रचना श्रीवास्तव, साहस- वीरेंद्र बहादुर सिंह, रानी गोटी- टि्वंकल तोमर सिंह, बुझी हुई मोमबत्ती- डॉ. मृदुल शर्मा। ललित निबंध- अप्प दीपो भव, डॉ. वंदना मुकेश। संस्मरण- स्मृति शेष - ज़ाकिर हुसैन, जब ताल-तलैयों की नगरी में जागा ताल के उस्ताद का तिलिस्म, विनय उपाध्याय। ग़ज़ल- जयप्रकाश श्रीवास्तव, अशोक 'अंजुम'। व्यंग्य- खट्टे-मीठे संपादक जी, धर्मपाल महेंद्र जैन। शहरों की रूह- तुर्की यात्रा, प्रतिभा अधिकारी। आख़िरी पन्ना। रेखाचित्र- अशोक अंजुम, आवरण चित्र- पंकज सुबीर, डिज़ायनिंग सनी गोस्वामी, शहरयार अमजद ख़ान, सुनील पेरवाल, शिवम गोस्वामी, आपकी प्रतिक्रियाओं का संपादक मंडल को इंतज़ार रहेगा। पत्रिका का प्रिंट संस्क़रण भी समय पर आपके हाथों में होगा।&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;ऑनलाइन पढ़ें पत्रिका- &lt;/p&gt;  &lt;p&gt;&lt;a href="https://www.slideshare.net/slideshow/vibhom-swar-patrika-januray-march-2025-pdf/275093566"&gt;https://www.slideshare.net/slideshow/vibhom-swar-patrika-januray-march-2025-pdf/275093566&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;&lt;a href="http://www.vibhom.com/pdf/jan_mar_2025.pdf"&gt;http://www.vibhom.com/pdf/jan_mar_2025.pdf&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;वेबसाइट से डाउनलोड करें&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;&lt;a href="http://www.vibhom.com/vibhomswar.html"&gt;http://www.vibhom.com/vibhomswar.html&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;फेस बुक पर&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;&lt;a href="https://www.facebook.com/Vibhomswar"&gt;https://www.facebook.com/Vibhomswar&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;ब्लॉग पर पढ़ें- &lt;/p&gt;  &lt;p&gt;&lt;a href="http://shabdsudha.blogspot.com/"&gt;http://shabdsudha.blogspot.com/&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;&lt;a href="http://vibhomswar.blogspot.com/"&gt;http://vibhomswar.blogspot.com/&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;कविता कोश पर पढ़ें&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;&lt;a href="http://kavitakosh.org/kk/विभोम_स्वर_पत्रिका"&gt;http://kavitakosh.org/kk/विभोम_स्वर_पत्रिका&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;</description><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total><enclosure length="11498171" type="application/pdf" url="http://www.vibhom.com/pdf/jan_mar_2025.pdf"/><itunes:explicit/><itunes:subtitle>मित्रो, संरक्षक तथा प्रमुख संपादक सुधा ओम ढींगरा एवं संपादक पंकज सुबीर के संपादन में वैश्विक हिन्दी चिंतन की अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका विभोम-स्वर का वर्ष : 9, अंक : 36, जनवरी-मार्च 2025 अंक अब उपलब्ध है। इस अंक में शामिल है- संपादकीय, मित्रनामा, साक्षात्कार- हम साहित्य में गहरे और व्यापक होने की जगह उथले हो रहे हैं, कहानीकार-उपन्यासकार मनीषा कुलश्रेष्ठ से आकाश माथुर की बातचीत। विस्मृति के द्वार- स्मृतियों के झरोखे से, अरुणा सब्बरवाल। कथा-कहानी- दरवाज़े- उर्मिला शिरीष, एक धड़कन चूक गई- लक्ष्मी शर्मा, किसी और मिट्टी की बनी- डॉ. रमाकांत शर्मा, रेड सिग्नल- सुधा आदेश, मैं तुम्हें गाता रहूँगा- रंजना अनुराग, दस्तूर- विवेक द्विवेदी, सूरज की तरह नहीं ढलते पिता... विनीता राहुरीकर, यूँ ही चलते चलते- छाया श्रीवास्तव, प्रायश्चित- राजा सिंह। लघुकथा- सिग्नल- सौरभ सोनी, तुरपाई- रचना श्रीवास्तव, साहस- वीरेंद्र बहादुर सिंह, रानी गोटी- टि्वंकल तोमर सिंह, बुझी हुई मोमबत्ती- डॉ. मृदुल शर्मा। ललित निबंध- अप्प दीपो भव, डॉ. वंदना मुकेश। संस्मरण- स्मृति शेष - ज़ाकिर हुसैन, जब ताल-तलैयों की नगरी में जागा ताल के उस्ताद का तिलिस्म, विनय उपाध्याय। ग़ज़ल- जयप्रकाश श्रीवास्तव, अशोक 'अंजुम'। व्यंग्य- खट्टे-मीठे संपादक जी, धर्मपाल महेंद्र जैन। शहरों की रूह- तुर्की यात्रा, प्रतिभा अधिकारी। आख़िरी पन्ना। रेखाचित्र- अशोक अंजुम, आवरण चित्र- पंकज सुबीर, डिज़ायनिंग सनी गोस्वामी, शहरयार अमजद ख़ान, सुनील पेरवाल, शिवम गोस्वामी, आपकी प्रतिक्रियाओं का संपादक मंडल को इंतज़ार रहेगा। पत्रिका का प्रिंट संस्क़रण भी समय पर आपके हाथों में होगा। ऑनलाइन पढ़ें पत्रिका- https://www.slideshare.net/slideshow/vibhom-swar-patrika-januray-march-2025-pdf/275093566 http://www.vibhom.com/pdf/jan_mar_2025.pdf वेबसाइट से डाउनलोड करें http://www.vibhom.com/vibhomswar.html फेस बुक पर https://www.facebook.com/Vibhomswar ब्लॉग पर पढ़ें- http://shabdsudha.blogspot.com/ http://vibhomswar.blogspot.com/ कविता कोश पर पढ़ें http://kavitakosh.org/kk/विभोम_स्वर_पत्रिका</itunes:subtitle><itunes:author>noreply@blogger.com (Unknown)</itunes:author><itunes:summary>मित्रो, संरक्षक तथा प्रमुख संपादक सुधा ओम ढींगरा एवं संपादक पंकज सुबीर के संपादन में वैश्विक हिन्दी चिंतन की अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका विभोम-स्वर का वर्ष : 9, अंक : 36, जनवरी-मार्च 2025 अंक अब उपलब्ध है। इस अंक में शामिल है- संपादकीय, मित्रनामा, साक्षात्कार- हम साहित्य में गहरे और व्यापक होने की जगह उथले हो रहे हैं, कहानीकार-उपन्यासकार मनीषा कुलश्रेष्ठ से आकाश माथुर की बातचीत। विस्मृति के द्वार- स्मृतियों के झरोखे से, अरुणा सब्बरवाल। कथा-कहानी- दरवाज़े- उर्मिला शिरीष, एक धड़कन चूक गई- लक्ष्मी शर्मा, किसी और मिट्टी की बनी- डॉ. रमाकांत शर्मा, रेड सिग्नल- सुधा आदेश, मैं तुम्हें गाता रहूँगा- रंजना अनुराग, दस्तूर- विवेक द्विवेदी, सूरज की तरह नहीं ढलते पिता... विनीता राहुरीकर, यूँ ही चलते चलते- छाया श्रीवास्तव, प्रायश्चित- राजा सिंह। लघुकथा- सिग्नल- सौरभ सोनी, तुरपाई- रचना श्रीवास्तव, साहस- वीरेंद्र बहादुर सिंह, रानी गोटी- टि्वंकल तोमर सिंह, बुझी हुई मोमबत्ती- डॉ. मृदुल शर्मा। ललित निबंध- अप्प दीपो भव, डॉ. वंदना मुकेश। संस्मरण- स्मृति शेष - ज़ाकिर हुसैन, जब ताल-तलैयों की नगरी में जागा ताल के उस्ताद का तिलिस्म, विनय उपाध्याय। ग़ज़ल- जयप्रकाश श्रीवास्तव, अशोक 'अंजुम'। व्यंग्य- खट्टे-मीठे संपादक जी, धर्मपाल महेंद्र जैन। शहरों की रूह- तुर्की यात्रा, प्रतिभा अधिकारी। आख़िरी पन्ना। रेखाचित्र- अशोक अंजुम, आवरण चित्र- पंकज सुबीर, डिज़ायनिंग सनी गोस्वामी, शहरयार अमजद ख़ान, सुनील पेरवाल, शिवम गोस्वामी, आपकी प्रतिक्रियाओं का संपादक मंडल को इंतज़ार रहेगा। पत्रिका का प्रिंट संस्क़रण भी समय पर आपके हाथों में होगा। ऑनलाइन पढ़ें पत्रिका- https://www.slideshare.net/slideshow/vibhom-swar-patrika-januray-march-2025-pdf/275093566 http://www.vibhom.com/pdf/jan_mar_2025.pdf वेबसाइट से डाउनलोड करें http://www.vibhom.com/vibhomswar.html फेस बुक पर https://www.facebook.com/Vibhomswar ब्लॉग पर पढ़ें- http://shabdsudha.blogspot.com/ http://vibhomswar.blogspot.com/ कविता कोश पर पढ़ें http://kavitakosh.org/kk/विभोम_स्वर_पत्रिका</itunes:summary></item><item><title>आइए आज तरही मुशायरे को आगे बढ़ाते हैं मन्सूर अली हाश्मी जी के साथ, जो अपनी दूसरी ग़ज़ल लेकर हमारे बीच उप​स्थित हुए हैं</title><link>http://subeerin.blogspot.com/2024/11/blog-post_11.html</link><author>noreply@blogger.com (Unknown)</author><pubDate>Mon, 11 Nov 2024 13:27:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-7637784963342720274.post-755809257156774821</guid><description>&lt;div style="text-align: center;"&gt;&lt;b&gt;बस अब दीपावली का पर्व बीत रहा है। कल देव प्रबोधिनी एकादशी है जिसके साथ ही आंशिक रूप से दीपावली का पर्व समाप्त हो जाता है। कहीं-कहीं यह कार्तिक पूर्णिमा तक भी चलता है। इस प्रकार हमारे यहाँ भी दीपावली का पर्व अभी भी चल रहा है। &lt;br /&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg-venc-7wN-mSsuuFDAToSm3uq7Hbu4iygRVxz0_orf4-yq2HCLRWdTaJqH9jS_FbTReUgeDcBNcyfk_9CWCx0J3IZ8P-pWWYaVAu1GoIYQ8Jm6KmqX0NbbNweGRLxR2lu4Z5JLo0_OxHUgJBhMhmPT83e9MlUlrOiWetiFG2auV9-9UBghuT3Mgf23ojW/s248/deepawali.gif" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="68" data-original-width="248" height="68" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg-venc-7wN-mSsuuFDAToSm3uq7Hbu4iygRVxz0_orf4-yq2HCLRWdTaJqH9jS_FbTReUgeDcBNcyfk_9CWCx0J3IZ8P-pWWYaVAu1GoIYQ8Jm6KmqX0NbbNweGRLxR2lu4Z5JLo0_OxHUgJBhMhmPT83e9MlUlrOiWetiFG2auV9-9UBghuT3Mgf23ojW/s1600/deepawali.gif" width="248" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;b&gt; &lt;br /&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgUfuKmrkQ1Kaqm3z6SAKwtcalZEqHBqyUGTJAkoN2tIQAKu8IIWCO-yXNP2ffCz1bSS8H2DRsYrZMMGX1T0Zezpkq2b3kU7Uhyphenhypheneo7mdIvhzRHGZHlB7m3dcr8qSZBshONW8GtKRZj5KEm0YGlIAlUOgs4wXfG_U6puPYU-ZrHQK4OyvMHqchgD6UPxNoRi/s473/diwali-lamps.gif" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="308" data-original-width="473" height="208" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgUfuKmrkQ1Kaqm3z6SAKwtcalZEqHBqyUGTJAkoN2tIQAKu8IIWCO-yXNP2ffCz1bSS8H2DRsYrZMMGX1T0Zezpkq2b3kU7Uhyphenhypheneo7mdIvhzRHGZHlB7m3dcr8qSZBshONW8GtKRZj5KEm0YGlIAlUOgs4wXfG_U6puPYU-ZrHQK4OyvMHqchgD6UPxNoRi/s320/diwali-lamps.gif" width="320" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: center;"&gt;&lt;a 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href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEh1oA8fVrjYctimbw5ofgJ1Hv3lUSbwEptAbDgLVpCoaB1v2HMsS5o3jhYU4ICBkoAefSL1qbit_F3QPvrS1fdp2rZt4jvkIS5cbYGLb4dAqGWlZnmdGVJHztqqqq89rrG_zOnPwb7g5CWPjKHPgboCwXFVL5wTivn42X2mvRd-qsMosPTSPG1wF6LO84Ny/s1468/MANSOOR%20ALI%20HASHMI.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="1468" data-original-width="1135" height="143" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEh1oA8fVrjYctimbw5ofgJ1Hv3lUSbwEptAbDgLVpCoaB1v2HMsS5o3jhYU4ICBkoAefSL1qbit_F3QPvrS1fdp2rZt4jvkIS5cbYGLb4dAqGWlZnmdGVJHztqqqq89rrG_zOnPwb7g5CWPjKHPgboCwXFVL5wTivn42X2mvRd-qsMosPTSPG1wF6LO84Ny/w110-h143/MANSOOR%20ALI%20HASHMI.jpg" width="110" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: center;"&gt;&lt;span style="color: #2b00fe;"&gt;&lt;b&gt;मन्सूर अली हाश्मी&lt;br /&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: center;"&gt;&lt;a 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कछुए को चलना है अब रात भर &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;दोपहर, सह पहर बल्कि आठों पहर&lt;br /&gt;दिल ए नादां मचलना है अब रात भर&lt;span style="color: #2b00fe;"&gt; &lt;br /&gt;दिन मटर गश्तियों में गुज़ारा तो फिर &lt;br /&gt;बच्चा तुतलाया, 'ढुलना है अब लात भल'&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;दिन में खेला किये है जो गैजेट्स से&lt;br /&gt;थक के आंखें मसलना है अब रात भर&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #2b00fe;"&gt;'ट्रम्प' का कार्ड चल ही गया बिल अख़ीर&lt;br /&gt;सब उथलना-पुथलना है अब रात भर&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;जब बुढ़ऊ कह दिया है तो देखे गुलांट &lt;br /&gt;बंदरों को उछलना है अब रात भर !&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #2b00fe;"&gt;कच्चा-पक्का पढ़ा, कुछ तो लिख भी दिया&lt;br /&gt;'हाश्मी' को उगलना है अब रात भर&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjWZWFkzh7eaXIs3mH3eaO9B5UtlHEpSvzfZoKCgYkmjdvrYAa2AbkvhQk1ECGA1Dg6WO4bWf4mN5b9ydpz_9SBcry-AVdDvSaKxvcU-0CpLbUx3M7cfl4EJZjnF1k7U3PWVPtCddk7u9mEnNkBb8flB0mdCZ-ySmY_qbEYq2Fb-XqtR6v18QDEWTb8CDeb/s123/deepawali%20(1).gif" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="44" data-original-width="123" height="44" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjWZWFkzh7eaXIs3mH3eaO9B5UtlHEpSvzfZoKCgYkmjdvrYAa2AbkvhQk1ECGA1Dg6WO4bWf4mN5b9ydpz_9SBcry-AVdDvSaKxvcU-0CpLbUx3M7cfl4EJZjnF1k7U3PWVPtCddk7u9mEnNkBb8flB0mdCZ-ySmY_qbEYq2Fb-XqtR6v18QDEWTb8CDeb/s1600/deepawali%20(1).gif" width="123" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;b&gt;इस बार हाश्मी जी सिरदार ग़ज़ल लेकर उपस्थित हुए हैं। पिछली बार बेमतला ग़ज़ल लेकर आये थे। मतले में ही चरागों के माध्यम से आरज़ुओं के पलने का दृश्य बहुत सुंदरता के साथ उपस्थित किया गया है। और अगले ही शेर में ख़रगोश का सोना और कछुए का आगे निकलना प्रतीक के माध्यम से बहुत अच्छे से आया है। इश्क़ में दिल का आठों पहर मचलना ख़ूब है। और बच्चे के तुतलाने को अगले शेर में बहुत अच्छे से पिरोया गया है। यह अपनी तरह का अनूठा प्रयोग है। फिर दिन भर मोबाइल पर आँखें दुखाने के बाद रात का मंज़र भी अगले शेर में सुंदर आया है। ट्रम्प के साथ ग़ज़ल का शेर ग्लोबल होकर सामने आ रहा है। बंदर की गुलाँट को भी अगले शेर में बहुत अच्छे से पिरोया है। मकते में अपने आप को ही कें​द्र में रख कर अपनी ही आलोचना करने का अच्छा प्रयास है। बहुत सुंदर ग़ज़ल, वाह वाह वाह।&lt;br /&gt;&lt;/b&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg-venc-7wN-mSsuuFDAToSm3uq7Hbu4iygRVxz0_orf4-yq2HCLRWdTaJqH9jS_FbTReUgeDcBNcyfk_9CWCx0J3IZ8P-pWWYaVAu1GoIYQ8Jm6KmqX0NbbNweGRLxR2lu4Z5JLo0_OxHUgJBhMhmPT83e9MlUlrOiWetiFG2auV9-9UBghuT3Mgf23ojW/s248/deepawali.gif" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="68" data-original-width="248" height="68" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg-venc-7wN-mSsuuFDAToSm3uq7Hbu4iygRVxz0_orf4-yq2HCLRWdTaJqH9jS_FbTReUgeDcBNcyfk_9CWCx0J3IZ8P-pWWYaVAu1GoIYQ8Jm6KmqX0NbbNweGRLxR2lu4Z5JLo0_OxHUgJBhMhmPT83e9MlUlrOiWetiFG2auV9-9UBghuT3Mgf23ojW/s1600/deepawali.gif" width="248" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;b&gt;तो आज की इस सुंदर ग़ज़ल ने जैसे दीपावली का माहौल ही रच दिया है। आप दिल खोल कर दाद दीजिए और इंतज़ार कीजिए अगले अंक का।&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEi94S9q5luYFUV2XMTvZoc5s9batW7T_6MEoQx0RfBYlvCiJhxAjfdEuR2ArF4k96IH1hDHuOVaLqQ6sD3LRVYz45AKEiVL-5aWg85q1DanMSFfVucXU_YXzgZz_QKmBinB0uPLcIYsNG_GR8HZ2GGcHkhFT-Lg8qH1dCF0jiMaJE7vKacW0nSP-Vc76JdI/s400/6843.gif" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="300" data-original-width="400" height="240" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEi94S9q5luYFUV2XMTvZoc5s9batW7T_6MEoQx0RfBYlvCiJhxAjfdEuR2ArF4k96IH1hDHuOVaLqQ6sD3LRVYz45AKEiVL-5aWg85q1DanMSFfVucXU_YXzgZz_QKmBinB0uPLcIYsNG_GR8HZ2GGcHkhFT-Lg8qH1dCF0jiMaJE7vKacW0nSP-Vc76JdI/s320/6843.gif" width="320" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;b&gt; &lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg-venc-7wN-mSsuuFDAToSm3uq7Hbu4iygRVxz0_orf4-yq2HCLRWdTaJqH9jS_FbTReUgeDcBNcyfk_9CWCx0J3IZ8P-pWWYaVAu1GoIYQ8Jm6KmqX0NbbNweGRLxR2lu4Z5JLo0_OxHUgJBhMhmPT83e9MlUlrOiWetiFG2auV9-9UBghuT3Mgf23ojW/s248/deepawali.gif" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="68" data-original-width="248" height="68" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg-venc-7wN-mSsuuFDAToSm3uq7Hbu4iygRVxz0_orf4-yq2HCLRWdTaJqH9jS_FbTReUgeDcBNcyfk_9CWCx0J3IZ8P-pWWYaVAu1GoIYQ8Jm6KmqX0NbbNweGRLxR2lu4Z5JLo0_OxHUgJBhMhmPT83e9MlUlrOiWetiFG2auV9-9UBghuT3Mgf23ojW/s1600/deepawali.gif" width="248" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;</description><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg-venc-7wN-mSsuuFDAToSm3uq7Hbu4iygRVxz0_orf4-yq2HCLRWdTaJqH9jS_FbTReUgeDcBNcyfk_9CWCx0J3IZ8P-pWWYaVAu1GoIYQ8Jm6KmqX0NbbNweGRLxR2lu4Z5JLo0_OxHUgJBhMhmPT83e9MlUlrOiWetiFG2auV9-9UBghuT3Mgf23ojW/s72-c/deepawali.gif" width="72"/><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">2</thr:total></item><item><title>आइए आज तरही मुशायरे को आगे बढ़ाते हैं प्रवासी रचनाकार गुणी कवयित्री रेखा भाटिया के साथ, जो अमेरिका से हमारे बीच उप​स्थित हुई हैं</title><link>http://subeerin.blogspot.com/2024/11/blog-post_8.html</link><author>noreply@blogger.com (Unknown)</author><pubDate>Fri, 8 Nov 2024 12:15:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-7637784963342720274.post-4639923892825330195</guid><description>&lt;div style="text-align: center;"&gt;&lt;b&gt;चूँकि अभी देव प्रबोधिनी एकादशी नहीं हुई है, इसलिए हम कह सकते हैं कि दीपवली का पर्व अभी भी जारी है। वैसे तो दीपावली का पर्व पूरे अठारह दिन का होता है, जो धन तेरस से लेकर कार्तिक पूर्णिमा तक चलता है। इस हिसाब तो अभी दीपावली के इस पर्व के और भी कुछ दिन बचे हुए हैं। अभी तो हम कार्तिक पूर्णिमा तक दीपावली का पर्व मना सकते हैं। कार्तिक पूर्णिमा पर दीपदान के बाद पर्व संपन्न होता है। &lt;br /&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg-venc-7wN-mSsuuFDAToSm3uq7Hbu4iygRVxz0_orf4-yq2HCLRWdTaJqH9jS_FbTReUgeDcBNcyfk_9CWCx0J3IZ8P-pWWYaVAu1GoIYQ8Jm6KmqX0NbbNweGRLxR2lu4Z5JLo0_OxHUgJBhMhmPT83e9MlUlrOiWetiFG2auV9-9UBghuT3Mgf23ojW/s248/deepawali.gif" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="68" data-original-width="248" height="68" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg-venc-7wN-mSsuuFDAToSm3uq7Hbu4iygRVxz0_orf4-yq2HCLRWdTaJqH9jS_FbTReUgeDcBNcyfk_9CWCx0J3IZ8P-pWWYaVAu1GoIYQ8Jm6KmqX0NbbNweGRLxR2lu4Z5JLo0_OxHUgJBhMhmPT83e9MlUlrOiWetiFG2auV9-9UBghuT3Mgf23ojW/s1600/deepawali.gif" width="248" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;b&gt; &lt;br /&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgUfuKmrkQ1Kaqm3z6SAKwtcalZEqHBqyUGTJAkoN2tIQAKu8IIWCO-yXNP2ffCz1bSS8H2DRsYrZMMGX1T0Zezpkq2b3kU7Uhyphenhypheneo7mdIvhzRHGZHlB7m3dcr8qSZBshONW8GtKRZj5KEm0YGlIAlUOgs4wXfG_U6puPYU-ZrHQK4OyvMHqchgD6UPxNoRi/s473/diwali-lamps.gif" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="308" data-original-width="473" height="208" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgUfuKmrkQ1Kaqm3z6SAKwtcalZEqHBqyUGTJAkoN2tIQAKu8IIWCO-yXNP2ffCz1bSS8H2DRsYrZMMGX1T0Zezpkq2b3kU7Uhyphenhypheneo7mdIvhzRHGZHlB7m3dcr8qSZBshONW8GtKRZj5KEm0YGlIAlUOgs4wXfG_U6puPYU-ZrHQK4OyvMHqchgD6UPxNoRi/s320/diwali-lamps.gif" width="320" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: center;"&gt;&lt;a 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href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjDdsqIyCjsdHihxbpLqFBR8tdHvqQWxm2_3lMtduGSEdM-JNt-3c2Sc9yXlTu_khTundFpm3L2SiyzjBVh0Vr-xfN69ZNv9m2V-tcd8QoHGJBqJ3o_ozKVKtlMPGV3QtjDNQla4i8OTi3WQruyWkiBT6yHKMRvWN72JvaXVpNo7mgzPNxh8TmCxR5bAhqf/s132/deepawali%20(16).gif" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="132" data-original-width="111" height="61" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjDdsqIyCjsdHihxbpLqFBR8tdHvqQWxm2_3lMtduGSEdM-JNt-3c2Sc9yXlTu_khTundFpm3L2SiyzjBVh0Vr-xfN69ZNv9m2V-tcd8QoHGJBqJ3o_ozKVKtlMPGV3QtjDNQla4i8OTi3WQruyWkiBT6yHKMRvWN72JvaXVpNo7mgzPNxh8TmCxR5bAhqf/w51-h61/deepawali%20(16).gif" width="51" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="color: #2b00fe;"&gt;इन चराग़ों को जलना है अब रात भर &lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjDdsqIyCjsdHihxbpLqFBR8tdHvqQWxm2_3lMtduGSEdM-JNt-3c2Sc9yXlTu_khTundFpm3L2SiyzjBVh0Vr-xfN69ZNv9m2V-tcd8QoHGJBqJ3o_ozKVKtlMPGV3QtjDNQla4i8OTi3WQruyWkiBT6yHKMRvWN72JvaXVpNo7mgzPNxh8TmCxR5bAhqf/s132/deepawali%20(16).gif" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="132" data-original-width="111" height="54" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjDdsqIyCjsdHihxbpLqFBR8tdHvqQWxm2_3lMtduGSEdM-JNt-3c2Sc9yXlTu_khTundFpm3L2SiyzjBVh0Vr-xfN69ZNv9m2V-tcd8QoHGJBqJ3o_ozKVKtlMPGV3QtjDNQla4i8OTi3WQruyWkiBT6yHKMRvWN72JvaXVpNo7mgzPNxh8TmCxR5bAhqf/w46-h54/deepawali%20(16).gif" width="46" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;b&gt;&lt;br /&gt;आइए आज तरही मुशायरे को आगे बढ़ाते हैं प्रवासी रचनाकार गुणी कवयित्री रेखा भाटिया के साथ, जो अमेरिका से हमारे बीच उप​स्थित हुई हैं।&amp;nbsp; &lt;br /&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg-venc-7wN-mSsuuFDAToSm3uq7Hbu4iygRVxz0_orf4-yq2HCLRWdTaJqH9jS_FbTReUgeDcBNcyfk_9CWCx0J3IZ8P-pWWYaVAu1GoIYQ8Jm6KmqX0NbbNweGRLxR2lu4Z5JLo0_OxHUgJBhMhmPT83e9MlUlrOiWetiFG2auV9-9UBghuT3Mgf23ojW/s248/deepawali.gif" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="68" data-original-width="248" height="68" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg-venc-7wN-mSsuuFDAToSm3uq7Hbu4iygRVxz0_orf4-yq2HCLRWdTaJqH9jS_FbTReUgeDcBNcyfk_9CWCx0J3IZ8P-pWWYaVAu1GoIYQ8Jm6KmqX0NbbNweGRLxR2lu4Z5JLo0_OxHUgJBhMhmPT83e9MlUlrOiWetiFG2auV9-9UBghuT3Mgf23ojW/s1600/deepawali.gif" width="248" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgZycfZMxc-CwO7CUgzdhOXHApmLNr7soU_mYvNH-Pf8IhPRQSUlSsijd8lD6SzskPRhZ8eOv3kpLkeAijjBBPU_05PqP2-tvDgYM3VD4VxYuU4WOW4pK0W0oyIWUiHRXVcaOzRwVQq_-QRokADY5dbOfZMu-NDJf5_Jb0kIBcdybdjrH1Gythyphenhyphen9pxE0WVO/s552/REKHA%20BHATIYA.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="552" data-original-width="468" height="147" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgZycfZMxc-CwO7CUgzdhOXHApmLNr7soU_mYvNH-Pf8IhPRQSUlSsijd8lD6SzskPRhZ8eOv3kpLkeAijjBBPU_05PqP2-tvDgYM3VD4VxYuU4WOW4pK0W0oyIWUiHRXVcaOzRwVQq_-QRokADY5dbOfZMu-NDJf5_Jb0kIBcdybdjrH1Gythyphenhyphen9pxE0WVO/w125-h147/REKHA%20BHATIYA.jpg" width="125" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;span style="color: #2b00fe;"&gt;&lt;b&gt;रेखा भाटिया&lt;br /&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiKPF4hbxSCB9mO_dLOVidDZMT-n1e1spbrtMd4Q6zugw0Pf1W6ZekFUPrYzIW7eDIh6h502qcWJDwtKdtaDRnpomC8zECl7shyphenhyphenKCP_FbDjosbLHpeF2r7q4pRBlnMSPL_DrtOo5gGdZAfZbEK5x9F9-cMr7WPPZT-5uBsSDIFGQIT-ivVHNXGDIy6oRdXt/s400/deepawali%20(3).gif" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="138" data-original-width="400" height="50" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiKPF4hbxSCB9mO_dLOVidDZMT-n1e1spbrtMd4Q6zugw0Pf1W6ZekFUPrYzIW7eDIh6h502qcWJDwtKdtaDRnpomC8zECl7shyphenhyphenKCP_FbDjosbLHpeF2r7q4pRBlnMSPL_DrtOo5gGdZAfZbEK5x9F9-cMr7WPPZT-5uBsSDIFGQIT-ivVHNXGDIy6oRdXt/w144-h50/deepawali%20(3).gif" width="144" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;b&gt;&amp;nbsp;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: center;"&gt;&lt;b&gt;दिन के फूलों को ढलना है अब रात भर &lt;br /&gt;और कलियों को खिलना है अब रात भर &lt;br /&gt;&lt;span style="color: #2b00fe;"&gt;मछलियाँ पेड़ पर, पानियों में विहग &lt;br /&gt;सृष्टि को ही बदलना है अब रात भर &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;नींद तो उड़ चुकी, ख़्वाब भी गुम हुए &lt;br /&gt;सिर्फ़ डर को ही पलना है अब रात भर &lt;br /&gt;&lt;span style="color: #2b00fe;"&gt;ज़िंदगी के नशे में है घायल ये मन &lt;br /&gt;मोम बन कर पिघलना है अब रात भर &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;उत्सवों का है मेला फ़कत ज़िंदगी &lt;br /&gt;रौशनी से बहलना है अब रात भर &lt;br /&gt;&lt;span style="color: #2b00fe;"&gt;है चुनावों की बेला, खरा क्या करे &lt;br /&gt;खोटा सिक्का उछलना है अब रात भर &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;जाग उठे हैं वो जो कब से सोए ही थे&lt;br /&gt;जाग कर उनको चलना है अब रात भर &lt;br /&gt;&lt;span style="color: #2b00fe;"&gt;रौशनी तेरे हिस्से की मुझसे है ली&lt;br /&gt;'इन चराग़ों को जलना है अब रात भर'&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjWZWFkzh7eaXIs3mH3eaO9B5UtlHEpSvzfZoKCgYkmjdvrYAa2AbkvhQk1ECGA1Dg6WO4bWf4mN5b9ydpz_9SBcry-AVdDvSaKxvcU-0CpLbUx3M7cfl4EJZjnF1k7U3PWVPtCddk7u9mEnNkBb8flB0mdCZ-ySmY_qbEYq2Fb-XqtR6v18QDEWTb8CDeb/s123/deepawali%20(1).gif" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="44" data-original-width="123" height="44" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjWZWFkzh7eaXIs3mH3eaO9B5UtlHEpSvzfZoKCgYkmjdvrYAa2AbkvhQk1ECGA1Dg6WO4bWf4mN5b9ydpz_9SBcry-AVdDvSaKxvcU-0CpLbUx3M7cfl4EJZjnF1k7U3PWVPtCddk7u9mEnNkBb8flB0mdCZ-ySmY_qbEYq2Fb-XqtR6v18QDEWTb8CDeb/s1600/deepawali%20(1).gif" width="123" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;b&gt;मतले में ही दिन भर के खिले हुए फूलों के रात भर मुरझाकर ढलने और नयी कलियों के खिलने के बहाने बहुत अच्छे से ज़िंदगी का दर्शन प्रस्तुत किया गया है। और अगले ही शेर में उलटबाँसी विधा का बहुत अच्छे से प्रयोग कर स्वप्न विज्ञान को दिखाया है। जब आँखों से नींद और ख़्वाब दोनों चले जायें तो सिर्फ़ डर ही शेष रह जाता है। ज़िंदगी का अपना ही एक नशा है जो जब उतरता है तो घायल मन मोम सा पिघलता रहता है। हमारी ज़िंदगी उत्सवों का एक मेला ही तो है, हम सब रौशनी से जिसमें रात भर बहलते रहते हैं, बहुत ही सुंदर। अमेरिका में भी चुनाव का समय है, ऐसे में चुनाव के दौरान खरों का छुप जाना और खोटे का सामने आ जाना, बहुत सुंदर। जब तब इंसान सोया रहता है, तब तक सफ़र उसके हिस्से में नहीं आता, मगर जागते ही उसको सफ़र में उतर जाना पड़ता है, सुंदर दर्शन जीवन का। और अंत में प्रेम के शेर में बहुत ही सुंदर गिरह बाँधी गयी है तरही मिसरे की। वाह वाह वाह, बहुत सुंदर ग़ज़ल।&lt;br /&gt;&lt;/b&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg-venc-7wN-mSsuuFDAToSm3uq7Hbu4iygRVxz0_orf4-yq2HCLRWdTaJqH9jS_FbTReUgeDcBNcyfk_9CWCx0J3IZ8P-pWWYaVAu1GoIYQ8Jm6KmqX0NbbNweGRLxR2lu4Z5JLo0_OxHUgJBhMhmPT83e9MlUlrOiWetiFG2auV9-9UBghuT3Mgf23ojW/s248/deepawali.gif" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="68" data-original-width="248" height="68" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg-venc-7wN-mSsuuFDAToSm3uq7Hbu4iygRVxz0_orf4-yq2HCLRWdTaJqH9jS_FbTReUgeDcBNcyfk_9CWCx0J3IZ8P-pWWYaVAu1GoIYQ8Jm6KmqX0NbbNweGRLxR2lu4Z5JLo0_OxHUgJBhMhmPT83e9MlUlrOiWetiFG2auV9-9UBghuT3Mgf23ojW/s1600/deepawali.gif" width="248" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;b&gt;तो आज की इस सुंदर ग़ज़ल ने जैसे दीपावली का माहौल ही रच दिया है। आप दिल खोल कर दाद दीजिए और इंतज़ार कीजिए अगले अंक का।&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEi94S9q5luYFUV2XMTvZoc5s9batW7T_6MEoQx0RfBYlvCiJhxAjfdEuR2ArF4k96IH1hDHuOVaLqQ6sD3LRVYz45AKEiVL-5aWg85q1DanMSFfVucXU_YXzgZz_QKmBinB0uPLcIYsNG_GR8HZ2GGcHkhFT-Lg8qH1dCF0jiMaJE7vKacW0nSP-Vc76JdI/s400/6843.gif" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="300" data-original-width="400" height="240" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEi94S9q5luYFUV2XMTvZoc5s9batW7T_6MEoQx0RfBYlvCiJhxAjfdEuR2ArF4k96IH1hDHuOVaLqQ6sD3LRVYz45AKEiVL-5aWg85q1DanMSFfVucXU_YXzgZz_QKmBinB0uPLcIYsNG_GR8HZ2GGcHkhFT-Lg8qH1dCF0jiMaJE7vKacW0nSP-Vc76JdI/s320/6843.gif" width="320" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;b&gt; &lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg-venc-7wN-mSsuuFDAToSm3uq7Hbu4iygRVxz0_orf4-yq2HCLRWdTaJqH9jS_FbTReUgeDcBNcyfk_9CWCx0J3IZ8P-pWWYaVAu1GoIYQ8Jm6KmqX0NbbNweGRLxR2lu4Z5JLo0_OxHUgJBhMhmPT83e9MlUlrOiWetiFG2auV9-9UBghuT3Mgf23ojW/s248/deepawali.gif" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="68" data-original-width="248" height="68" 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(Unknown)</author><pubDate>Mon, 4 Nov 2024 11:07:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-7637784963342720274.post-3757700764753372122</guid><description>&lt;div style="text-align: center;"&gt;&lt;b&gt;दीपावली का पर्व बीत भी गया और उसके साथ ही पाँच दिनों का रौशनी का पर्व समाप्त हो गया। मगर देर से गाड़ी पकड़ने वालों को देर से ही गाड़ी पकड़ कर बासी त्योहार मनाने में आनंद आता है। तो आज भी कुछ रचनकार अपनी रचनाएँ लेकर आ रहे हैं, इन्होंने देर से गाड़ी पकड़ी है, मगर रचनाएँ दुरुस्त हैं। मतलब यह कि कहावत को पूरा किया है कि देर आयद दुरुस्त आयद। वैसे भी हमारे यहाँ तो परंपरा रही है बासी त्योहार मनाने की। तो आइए आज बासी दीपावली के पटाखे चलाते हैं।&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: center;"&gt;&lt;a 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href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjDdsqIyCjsdHihxbpLqFBR8tdHvqQWxm2_3lMtduGSEdM-JNt-3c2Sc9yXlTu_khTundFpm3L2SiyzjBVh0Vr-xfN69ZNv9m2V-tcd8QoHGJBqJ3o_ozKVKtlMPGV3QtjDNQla4i8OTi3WQruyWkiBT6yHKMRvWN72JvaXVpNo7mgzPNxh8TmCxR5bAhqf/s132/deepawali%20(16).gif" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="132" data-original-width="111" height="54" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjDdsqIyCjsdHihxbpLqFBR8tdHvqQWxm2_3lMtduGSEdM-JNt-3c2Sc9yXlTu_khTundFpm3L2SiyzjBVh0Vr-xfN69ZNv9m2V-tcd8QoHGJBqJ3o_ozKVKtlMPGV3QtjDNQla4i8OTi3WQruyWkiBT6yHKMRvWN72JvaXVpNo7mgzPNxh8TmCxR5bAhqf/w46-h54/deepawali%20(16).gif" width="46" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;b&gt;&amp;nbsp;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: center;"&gt;&lt;b&gt;आइए आज तरही मुशायरे को आगे बढ़ाते हैं तीन रचनाकारों तिलक राज कपूर, मन्सूर अली हाशमी, और पारुल सिंह के साथ।&lt;/b&gt;&lt;br /&gt;&lt;b&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg-venc-7wN-mSsuuFDAToSm3uq7Hbu4iygRVxz0_orf4-yq2HCLRWdTaJqH9jS_FbTReUgeDcBNcyfk_9CWCx0J3IZ8P-pWWYaVAu1GoIYQ8Jm6KmqX0NbbNweGRLxR2lu4Z5JLo0_OxHUgJBhMhmPT83e9MlUlrOiWetiFG2auV9-9UBghuT3Mgf23ojW/s248/deepawali.gif" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="68" data-original-width="248" height="68" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg-venc-7wN-mSsuuFDAToSm3uq7Hbu4iygRVxz0_orf4-yq2HCLRWdTaJqH9jS_FbTReUgeDcBNcyfk_9CWCx0J3IZ8P-pWWYaVAu1GoIYQ8Jm6KmqX0NbbNweGRLxR2lu4Z5JLo0_OxHUgJBhMhmPT83e9MlUlrOiWetiFG2auV9-9UBghuT3Mgf23ojW/s1600/deepawali.gif" width="248" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgO8j8al0KQ01spZtMjmqkqpqqyYCVnh-YbgQ1JIO3kUnM8pDxviLumVGLn-3ARserBnuQUtvIawe4PyckcawnmvC6ncusd2DgHUinCZKL3lsf2eDbkjywQyBx3nzwrhEpTvgKqVl5lMWv2azz2bIraQ46xtQ6UAmAVwoJW7NZvzRqGWIikMwLKzEHC5qZc/s1000/TILAK%20RAJ%20KAPORR%20JI.JPG" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="1000" data-original-width="747" height="161" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgO8j8al0KQ01spZtMjmqkqpqqyYCVnh-YbgQ1JIO3kUnM8pDxviLumVGLn-3ARserBnuQUtvIawe4PyckcawnmvC6ncusd2DgHUinCZKL3lsf2eDbkjywQyBx3nzwrhEpTvgKqVl5lMWv2azz2bIraQ46xtQ6UAmAVwoJW7NZvzRqGWIikMwLKzEHC5qZc/w121-h161/TILAK%20RAJ%20KAPORR%20JI.JPG" width="121" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: center;"&gt;&lt;span style="color: #2b00fe;"&gt;&lt;b&gt;तिलक राज कपूर&lt;br /&gt;&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="color: #2b00fe;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiKPF4hbxSCB9mO_dLOVidDZMT-n1e1spbrtMd4Q6zugw0Pf1W6ZekFUPrYzIW7eDIh6h502qcWJDwtKdtaDRnpomC8zECl7shyphenhyphenKCP_FbDjosbLHpeF2r7q4pRBlnMSPL_DrtOo5gGdZAfZbEK5x9F9-cMr7WPPZT-5uBsSDIFGQIT-ivVHNXGDIy6oRdXt/s400/deepawali%20(3).gif" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="138" data-original-width="400" height="50" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiKPF4hbxSCB9mO_dLOVidDZMT-n1e1spbrtMd4Q6zugw0Pf1W6ZekFUPrYzIW7eDIh6h502qcWJDwtKdtaDRnpomC8zECl7shyphenhyphenKCP_FbDjosbLHpeF2r7q4pRBlnMSPL_DrtOo5gGdZAfZbEK5x9F9-cMr7WPPZT-5uBsSDIFGQIT-ivVHNXGDIy6oRdXt/w144-h50/deepawali%20(3).gif" width="144" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;b&gt;आदतों को बदलना है अब रात भर&lt;br /&gt;उलझनों से निकलना है अब रात भर। &lt;br /&gt;&lt;span style="color: #2b00fe;"&gt;अवसरों से भरी दोपहर में उठी&lt;br /&gt;चाहतों को कुचलना है अब रात भर।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;सूर्य की रौशनी में जमी बर्फ़ ने&lt;br /&gt;धीरे-धीरे पिघलना है अब रात भर।&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #2b00fe;"&gt;ख़्वाब की जिंदगी हम बहुत जी लिए&lt;br /&gt;इक हक़ीक़त में ढलना है अब रात भर।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;दिल को समझा रहा हूँ कि ए दिल तुझे&lt;br /&gt;पिय मिलन को मचलना है अब रात भर।&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #2b00fe;"&gt;शाम तक तो न जाने कहाँ गुम रहे&lt;br /&gt;तेरी राहों पे चलना है अब रात भर।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;युग प्रवर्तन की आशा इन्हें सौंप दी &lt;br /&gt;'इन चराग़ों को जलना है अब रात भर।&lt;br /&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjWZWFkzh7eaXIs3mH3eaO9B5UtlHEpSvzfZoKCgYkmjdvrYAa2AbkvhQk1ECGA1Dg6WO4bWf4mN5b9ydpz_9SBcry-AVdDvSaKxvcU-0CpLbUx3M7cfl4EJZjnF1k7U3PWVPtCddk7u9mEnNkBb8flB0mdCZ-ySmY_qbEYq2Fb-XqtR6v18QDEWTb8CDeb/s123/deepawali%20(1).gif" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="44" data-original-width="123" height="44" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjWZWFkzh7eaXIs3mH3eaO9B5UtlHEpSvzfZoKCgYkmjdvrYAa2AbkvhQk1ECGA1Dg6WO4bWf4mN5b9ydpz_9SBcry-AVdDvSaKxvcU-0CpLbUx3M7cfl4EJZjnF1k7U3PWVPtCddk7u9mEnNkBb8flB0mdCZ-ySmY_qbEYq2Fb-XqtR6v18QDEWTb8CDeb/s1600/deepawali%20(1).gif" width="123" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;b&gt;मतले में ही बहुत अच्छे से आदतों को बदल कर उलझनें समाप्त करने की बात कही गयी है। और उसके बाद दिन के उजाले में जागी हसरतों को रात के अँधेरे में कुचलने का प्रयोग बहुत अच्छा है। एक विरोधाभास के रूप में सूर्य की रौशनी में बर्फ़ का जमना और रात को पिघलना बहुत सुंदर है। और ख़्वाब की दुनिया से वापस हक़ीक़त में आना बहुत​ अच्छे से शेर में आया है। पिय मिलन को मचलने को उतारू दिल को रात की सच्चाई बताने का शेर भी सुंदर बना है। जो शाम तक कहीं दिखाई दिए उनकी राहों पर चलने का प्रयोग अच्छा है। और अंतिम शेर में गिरह के साथ मिसरा ऊला बहुत सुंदर बना है। विशेष कर युग-प्रवर्तन यह शब्द युग्म बहुत सुंदरता के साथ मिसरे में बाँधा गया है। बहुत सुंदर ग़ज़ल वाह वाह वाह।&lt;br /&gt;&lt;/b&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg-venc-7wN-mSsuuFDAToSm3uq7Hbu4iygRVxz0_orf4-yq2HCLRWdTaJqH9jS_FbTReUgeDcBNcyfk_9CWCx0J3IZ8P-pWWYaVAu1GoIYQ8Jm6KmqX0NbbNweGRLxR2lu4Z5JLo0_OxHUgJBhMhmPT83e9MlUlrOiWetiFG2auV9-9UBghuT3Mgf23ojW/s248/deepawali.gif" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="68" data-original-width="248" height="68" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg-venc-7wN-mSsuuFDAToSm3uq7Hbu4iygRVxz0_orf4-yq2HCLRWdTaJqH9jS_FbTReUgeDcBNcyfk_9CWCx0J3IZ8P-pWWYaVAu1GoIYQ8Jm6KmqX0NbbNweGRLxR2lu4Z5JLo0_OxHUgJBhMhmPT83e9MlUlrOiWetiFG2auV9-9UBghuT3Mgf23ojW/s1600/deepawali.gif" width="248" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;b&gt;&amp;nbsp;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: center;"&gt;&lt;b&gt;&amp;nbsp;&lt;/b&gt;&lt;a 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href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiKPF4hbxSCB9mO_dLOVidDZMT-n1e1spbrtMd4Q6zugw0Pf1W6ZekFUPrYzIW7eDIh6h502qcWJDwtKdtaDRnpomC8zECl7shyphenhyphenKCP_FbDjosbLHpeF2r7q4pRBlnMSPL_DrtOo5gGdZAfZbEK5x9F9-cMr7WPPZT-5uBsSDIFGQIT-ivVHNXGDIy6oRdXt/s400/deepawali%20(3).gif" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="138" data-original-width="400" height="50" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiKPF4hbxSCB9mO_dLOVidDZMT-n1e1spbrtMd4Q6zugw0Pf1W6ZekFUPrYzIW7eDIh6h502qcWJDwtKdtaDRnpomC8zECl7shyphenhyphenKCP_FbDjosbLHpeF2r7q4pRBlnMSPL_DrtOo5gGdZAfZbEK5x9F9-cMr7WPPZT-5uBsSDIFGQIT-ivVHNXGDIy6oRdXt/w144-h50/deepawali%20(3).gif" width="144" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="color: #2b00fe;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;शौर कर के पटाख़े तो बुझ भी गये&lt;br /&gt;'इन चराग़ों को जलना है अब रात भर'&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #2b00fe;"&gt;कुछ मुरादें न बर आईं दिन ढल गया&lt;br /&gt;कुछ इरादों को टलना है अब रात भर&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;जूँए* होतीं अमल-पैरा क्यूँ रात में *Lice&lt;br /&gt;करवटें ही बदलना है अब रात भर&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #2b00fe;"&gt;शब्द के अर्थ दिन में, न ढूँढे मिले&lt;br /&gt;काफ़िये में तो ढलना है अब रात भर&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;गर्मी-ए-शम्स, शबनम उड़ा ना सकी&lt;br /&gt;चाँदनी में पिघलना है अब रात भर&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #2b00fe;"&gt;बन सके ना दरोग़ा न सैनिक तो फिर&lt;br /&gt;लठ ही लेकर टहलना है अब रात भर&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;'हाश्मी' दिन में सोये! चलो ठीक है&lt;br /&gt;ग़फ़्लतों से निकलना है अब रात भर&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjWZWFkzh7eaXIs3mH3eaO9B5UtlHEpSvzfZoKCgYkmjdvrYAa2AbkvhQk1ECGA1Dg6WO4bWf4mN5b9ydpz_9SBcry-AVdDvSaKxvcU-0CpLbUx3M7cfl4EJZjnF1k7U3PWVPtCddk7u9mEnNkBb8flB0mdCZ-ySmY_qbEYq2Fb-XqtR6v18QDEWTb8CDeb/s123/deepawali%20(1).gif" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="44" data-original-width="123" height="44" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjWZWFkzh7eaXIs3mH3eaO9B5UtlHEpSvzfZoKCgYkmjdvrYAa2AbkvhQk1ECGA1Dg6WO4bWf4mN5b9ydpz_9SBcry-AVdDvSaKxvcU-0CpLbUx3M7cfl4EJZjnF1k7U3PWVPtCddk7u9mEnNkBb8flB0mdCZ-ySmY_qbEYq2Fb-XqtR6v18QDEWTb8CDeb/s1600/deepawali%20(1).gif" width="123" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;b&gt;हाश्मी जी की ग़ज़लों में व्यंग्य का पुट हमेशा होता है, इस बार भी है। उनकी व्यंग्य की ही भाषा में कहा जाये तो उन्होंने इस बार सिरकटी (बे-मतला) ग़ज़ल कही है। पहले ही शेर में पटाखों और दीपक की तुलना के साथ सुंदर गिरह बाँधी है। और अगले ही शेर में मुरादों में दिन का बीतना और इरादों को रात आने पर टालना, बहुत अच्छे से व्यक्त हुआ है। रात भर अगर सिर में जूँए काटती रहेंगी तो करवटें बदलने के अलाव और चारा ही क्या है। सूरज की तपिश को शबनम उड़ाने में असमर्थ हो जाये तो चाँद की चाँदनी में पिघलना ही होता है। और यदि आप दरोग़ा या सैनिक नहीं बन सके तो लठ हाथ में लेकर यूँ ही टहलना है। और मकते में दिन में सोने वालों को रात की ग़फ़लतों से होशियार करने की बात अच्छी है। बहुत सुंदर ग़ज़ल, वाह वाह वाह।&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg-venc-7wN-mSsuuFDAToSm3uq7Hbu4iygRVxz0_orf4-yq2HCLRWdTaJqH9jS_FbTReUgeDcBNcyfk_9CWCx0J3IZ8P-pWWYaVAu1GoIYQ8Jm6KmqX0NbbNweGRLxR2lu4Z5JLo0_OxHUgJBhMhmPT83e9MlUlrOiWetiFG2auV9-9UBghuT3Mgf23ojW/s248/deepawali.gif" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="68" data-original-width="248" height="68" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg-venc-7wN-mSsuuFDAToSm3uq7Hbu4iygRVxz0_orf4-yq2HCLRWdTaJqH9jS_FbTReUgeDcBNcyfk_9CWCx0J3IZ8P-pWWYaVAu1GoIYQ8Jm6KmqX0NbbNweGRLxR2lu4Z5JLo0_OxHUgJBhMhmPT83e9MlUlrOiWetiFG2auV9-9UBghuT3Mgf23ojW/s1600/deepawali.gif" width="248" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiP9J3YemValnefmEXIAlnXss61uVIULdPRwFtXqIOSN_EENJ2tcCD-f0GcqK-zrvy39hKsjUpU9D5quyA8cHYOwDsnIHb5OoamryXzwIKReBo66pksR1-0mNZkNdnMeAL0MrDskyDNMW0EgbszLh4nJtkVV7D4MkpwXnLAm7EqP8ho6K0PCKswCmWAxU1i/s400/parul%20singh.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="400" data-original-width="300" height="151" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiP9J3YemValnefmEXIAlnXss61uVIULdPRwFtXqIOSN_EENJ2tcCD-f0GcqK-zrvy39hKsjUpU9D5quyA8cHYOwDsnIHb5OoamryXzwIKReBo66pksR1-0mNZkNdnMeAL0MrDskyDNMW0EgbszLh4nJtkVV7D4MkpwXnLAm7EqP8ho6K0PCKswCmWAxU1i/w113-h151/parul%20singh.jpg" width="113" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="color: #2b00fe;"&gt;पारुल सिंह&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiKPF4hbxSCB9mO_dLOVidDZMT-n1e1spbrtMd4Q6zugw0Pf1W6ZekFUPrYzIW7eDIh6h502qcWJDwtKdtaDRnpomC8zECl7shyphenhyphenKCP_FbDjosbLHpeF2r7q4pRBlnMSPL_DrtOo5gGdZAfZbEK5x9F9-cMr7WPPZT-5uBsSDIFGQIT-ivVHNXGDIy6oRdXt/s400/deepawali%20(3).gif" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="138" data-original-width="400" height="50" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiKPF4hbxSCB9mO_dLOVidDZMT-n1e1spbrtMd4Q6zugw0Pf1W6ZekFUPrYzIW7eDIh6h502qcWJDwtKdtaDRnpomC8zECl7shyphenhyphenKCP_FbDjosbLHpeF2r7q4pRBlnMSPL_DrtOo5gGdZAfZbEK5x9F9-cMr7WPPZT-5uBsSDIFGQIT-ivVHNXGDIy6oRdXt/w144-h50/deepawali%20(3).gif" width="144" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;b&gt;रौशनी ले के चलना है अब रात भर &lt;br /&gt;इन चरागों को जलना है अब रात भर &lt;br /&gt;&lt;span style="color: #2b00fe;"&gt;मेहँदी लगने लगी है किसी नाम की &lt;br /&gt;ख़्वाब आँखों में पलना है अब रात भर &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;चेहरा उनका है और हैं दो आँखें मेरी &lt;br /&gt;सुब्ह को तो टलना है अब रात भर &lt;br /&gt;&lt;span style="color: #2b00fe;"&gt;चाँद आया तो छक कर के पी चाँदनी &lt;br /&gt;बाँहों में ही पिघलना है अब रात भर &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;बेख़ुदी पूछ बैठी पता आपका &lt;br /&gt;हमको काँटों पे चलना है अब रात भर &lt;br /&gt;&lt;span style="color: #2b00fe;"&gt;जिस पे दुनिया मरे मुझपे मरता है वो &lt;br /&gt;मुझको मुझ से ही जलना है अब रात भर &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;ज़िन्दगी रात काली, बुझी दोस्ती &lt;br /&gt;हिम्मतों को ही बलना है अब रात भर &lt;br /&gt;&lt;span style="color: #2b00fe;"&gt;चारा-गर कह गया रात भारी है ये &lt;br /&gt;दिल को गिरना सँभालना है अब रात भर&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjWZWFkzh7eaXIs3mH3eaO9B5UtlHEpSvzfZoKCgYkmjdvrYAa2AbkvhQk1ECGA1Dg6WO4bWf4mN5b9ydpz_9SBcry-AVdDvSaKxvcU-0CpLbUx3M7cfl4EJZjnF1k7U3PWVPtCddk7u9mEnNkBb8flB0mdCZ-ySmY_qbEYq2Fb-XqtR6v18QDEWTb8CDeb/s123/deepawali%20(1).gif" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="44" data-original-width="123" height="44" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjWZWFkzh7eaXIs3mH3eaO9B5UtlHEpSvzfZoKCgYkmjdvrYAa2AbkvhQk1ECGA1Dg6WO4bWf4mN5b9ydpz_9SBcry-AVdDvSaKxvcU-0CpLbUx3M7cfl4EJZjnF1k7U3PWVPtCddk7u9mEnNkBb8flB0mdCZ-ySmY_qbEYq2Fb-XqtR6v18QDEWTb8CDeb/s1600/deepawali%20(1).gif" width="123" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;b&gt;चराग़ रात भर जलते नहीं हैं, वे तो रौशनी का एक कारवाँ लेकर चलते हैं, यह बात मतले में बहुत अच्छे से सामने आयी है। और जब हाथों में किसी के नाम की मेहँदी लग जाये तो आँखों में ख़्वाब ही पलते हैं। अगले ही शेर में किसी का चेहरा और उसे देखते हुए सुब्ह के टलने की बात बहुत सुंदर है। बेखुदी ने किसी का पता पूछ लिया तो रात भर काँटों पर चलना, बहुत सुंदर। अगले शेर में सारी दुनिया के चहेते की चाहत पाकर ख़ुद से ही जलने की बात बहुत ही सुंदरता के साथ कही गयी है। ज़िंदगी और दोस्ती ये दोनों जब साथ छोड़ दें तो हिम्मतों के सहारे रात काटी जाती है, बहुत ही सुंदर। और अंतिम शेर में चिकित्सक के कहने पर कि आज की रात भारी है, दिल को रात भर गिरना और सँभलना ही तो है। बहुत ही सुंदर ग़ज़ल, वाह, वाह वाह।&lt;br /&gt;&lt;/b&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg-venc-7wN-mSsuuFDAToSm3uq7Hbu4iygRVxz0_orf4-yq2HCLRWdTaJqH9jS_FbTReUgeDcBNcyfk_9CWCx0J3IZ8P-pWWYaVAu1GoIYQ8Jm6KmqX0NbbNweGRLxR2lu4Z5JLo0_OxHUgJBhMhmPT83e9MlUlrOiWetiFG2auV9-9UBghuT3Mgf23ojW/s248/deepawali.gif" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="68" data-original-width="248" height="68" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg-venc-7wN-mSsuuFDAToSm3uq7Hbu4iygRVxz0_orf4-yq2HCLRWdTaJqH9jS_FbTReUgeDcBNcyfk_9CWCx0J3IZ8P-pWWYaVAu1GoIYQ8Jm6KmqX0NbbNweGRLxR2lu4Z5JLo0_OxHUgJBhMhmPT83e9MlUlrOiWetiFG2auV9-9UBghuT3Mgf23ojW/s1600/deepawali.gif" width="248" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;b&gt;तो ये आज के तीनों शायरों की दीपावली है। बहुत सुंदर ग़ज़लें तीनों ने कही हैं। आप दिल खोल कर इनको दाद दीजिए और इंतज़ार कीजिए अगले अंक का।&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEglMFqYt02FjUtYu5rVnO8ocBNHLDvKEA8Py_0Uw0sz7gvUyUl5h6OBzsYfJJIMhfGWMliZPsxtJGZcLmQKVXAFNV-hiYBrBl4gHLKXmWPd3GS-EBp32r8ykbOPlBlQpJLXSJsZ2lH6jx7V67cLUjjF0BMNY6PaiyVH97gue6z3QWGgBeTg7bx3PVNjREad/s115/8455-003-03-1027.gif" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="115" data-original-width="115" height="115" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEglMFqYt02FjUtYu5rVnO8ocBNHLDvKEA8Py_0Uw0sz7gvUyUl5h6OBzsYfJJIMhfGWMliZPsxtJGZcLmQKVXAFNV-hiYBrBl4gHLKXmWPd3GS-EBp32r8ykbOPlBlQpJLXSJsZ2lH6jx7V67cLUjjF0BMNY6PaiyVH97gue6z3QWGgBeTg7bx3PVNjREad/s1600/8455-003-03-1027.gif" width="115" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;b&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: center;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;b&gt; &lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg-venc-7wN-mSsuuFDAToSm3uq7Hbu4iygRVxz0_orf4-yq2HCLRWdTaJqH9jS_FbTReUgeDcBNcyfk_9CWCx0J3IZ8P-pWWYaVAu1GoIYQ8Jm6KmqX0NbbNweGRLxR2lu4Z5JLo0_OxHUgJBhMhmPT83e9MlUlrOiWetiFG2auV9-9UBghuT3Mgf23ojW/s248/deepawali.gif" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="68" data-original-width="248" height="68" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg-venc-7wN-mSsuuFDAToSm3uq7Hbu4iygRVxz0_orf4-yq2HCLRWdTaJqH9jS_FbTReUgeDcBNcyfk_9CWCx0J3IZ8P-pWWYaVAu1GoIYQ8Jm6KmqX0NbbNweGRLxR2lu4Z5JLo0_OxHUgJBhMhmPT83e9MlUlrOiWetiFG2auV9-9UBghuT3Mgf23ojW/s1600/deepawali.gif" width="248" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;</description><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" 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दिन सुबह जल्दी उठ कर उबटन लगा कर स्नान करना है। इसे रूप में निखार आता है। उन दिनों दीपावली पर ठंड आ चुकी होती थी, तो सुबह से उठ कर नहाना बहुत कष्टदायक होता था। अब तो ख़ैर दीपावली तक भी ठंड का कोई पता नहीं होता और उस पर गीज़र के गरम पानी से नहाना होता है। बचपन में बहुत कुछ वह सब जो हमें मिला वह हमारे बच्चों को नहीं मिला। कितना कुछ खो दिया है इन बच्चों ने। ख़ैर आइए आज छोटी दीवाली मनाते हैं।&amp;nbsp;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg-venc-7wN-mSsuuFDAToSm3uq7Hbu4iygRVxz0_orf4-yq2HCLRWdTaJqH9jS_FbTReUgeDcBNcyfk_9CWCx0J3IZ8P-pWWYaVAu1GoIYQ8Jm6KmqX0NbbNweGRLxR2lu4Z5JLo0_OxHUgJBhMhmPT83e9MlUlrOiWetiFG2auV9-9UBghuT3Mgf23ojW/s248/deepawali.gif" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="68" data-original-width="248" height="68" 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भर&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjWZWFkzh7eaXIs3mH3eaO9B5UtlHEpSvzfZoKCgYkmjdvrYAa2AbkvhQk1ECGA1Dg6WO4bWf4mN5b9ydpz_9SBcry-AVdDvSaKxvcU-0CpLbUx3M7cfl4EJZjnF1k7U3PWVPtCddk7u9mEnNkBb8flB0mdCZ-ySmY_qbEYq2Fb-XqtR6v18QDEWTb8CDeb/s123/deepawali%20(1).gif" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="44" data-original-width="123" height="44" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjWZWFkzh7eaXIs3mH3eaO9B5UtlHEpSvzfZoKCgYkmjdvrYAa2AbkvhQk1ECGA1Dg6WO4bWf4mN5b9ydpz_9SBcry-AVdDvSaKxvcU-0CpLbUx3M7cfl4EJZjnF1k7U3PWVPtCddk7u9mEnNkBb8flB0mdCZ-ySmY_qbEYq2Fb-XqtR6v18QDEWTb8CDeb/s1600/deepawali%20(1).gif" width="123" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;b&gt;कितना सुंदर मतला है तमस में सँभालना और दीप के भावों से जलना यदि इंसान सीख ले तो उसके लिए हर दिन दीपावली हो जाए। और अगले ही शेर में कितनी सुंदरता के साथ कहा गया है कि हर अँधेरा केवल कालिमा ही नहीं होता। एकपक्षीय प्रेमिल विचारों जैसी सुंदर बात के साथ क्या ही सुंदर गिरह बाँधी गयी है। वाह। और अगले ही शेर में एक बार फिर से निर्निमेषी नयन का निवेदन लिए मन से मन तक टहलना वाह वाह क्या सुंदर प्रयोग किया गया है। और अगले ही शेर में मोम जैसे पिघलने की बात और उस पर शर्त कि देह को देह की अनुभूति तक न हो। अंतिम शेर में अल्पनाओं की गोद में दीप का बलना... कितने सारे अर्थ लिए हुए है यह एक शेर। बहुत ही सुंदर ग़ज़ल, वाह, वाह, वाह।&lt;br /&gt;&lt;/b&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg-venc-7wN-mSsuuFDAToSm3uq7Hbu4iygRVxz0_orf4-yq2HCLRWdTaJqH9jS_FbTReUgeDcBNcyfk_9CWCx0J3IZ8P-pWWYaVAu1GoIYQ8Jm6KmqX0NbbNweGRLxR2lu4Z5JLo0_OxHUgJBhMhmPT83e9MlUlrOiWetiFG2auV9-9UBghuT3Mgf23ojW/s248/deepawali.gif" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="68" data-original-width="248" height="68" 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</title><link>http://subeerin.blogspot.com/2024/10/blog-post_29.html</link><author>noreply@blogger.com (Unknown)</author><pubDate>Tue, 29 Oct 2024 10:17:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-7637784963342720274.post-8433946291413548443</guid><description>&lt;div&gt;&lt;div style="text-align: center;"&gt;&lt;b&gt;आइए आज से दीपावली का यह तरही मुशायरा प्रारंभ करते हैं। अब लगभग बीस वर्ष होने जा रहे हैं इस ब्लॉग पर हम सभी को साथ रहते हुए, साथ चलते हुए। जैसी की रीत होती है, कुछ नये जुड़ते हैं तो कुछ पुराने छूट जाते हैं। मिलना बिछड़ना रीत यही है। ख़ैर यह क्रम तो चलता ही रहेगा। हम पर्व पर इसी प्रकार मिलते रहेंगे, जो लोग समय निकाल कर आ जायेंगे उनके साथ पर्व की ख़ुशियों को साझा कर लेंगे। इस बार जिन रचनाकारों ने समय निकाल कर पर्व पर उपस्थिति दर्ज करवाई है उनके साथ आइए आज से हम यह पाँच दिवसीय ज्योति पर्व का शुभारंभ करते हैँ।&amp;nbsp;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEisvv2fevTZU4jHiF-WaRMVzSPpe9dTjcLjiHJtjG72FiAItWaWVn_WnGO6Dy2s-H-H4e8tqnWPNmD7_fl0iXgFkcCAJXt0NRapgCVQNcx6kMS-Xa3ZAsT2ZC9MWKc6a0bl17hV3az6bkjn-fJ5fU5Qj6OeBbPvHPaU-XktzLdekVgj6mpoXl9HeE0vW9bH/s248/deepawali.gif" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="68" data-original-width="248" height="68" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEisvv2fevTZU4jHiF-WaRMVzSPpe9dTjcLjiHJtjG72FiAItWaWVn_WnGO6Dy2s-H-H4e8tqnWPNmD7_fl0iXgFkcCAJXt0NRapgCVQNcx6kMS-Xa3ZAsT2ZC9MWKc6a0bl17hV3az6bkjn-fJ5fU5Qj6OeBbPvHPaU-XktzLdekVgj6mpoXl9HeE0vW9bH/s1600/deepawali.gif" width="248" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: center;"&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a 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href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgt9LuqcMxexH2pr4PO-qe_Npp3BQTlPJVa3gkT-pjoeF25ucQudjP8lZB1uF6r4z_8Wr7uemPOcvXfb-sl1UnysEdqhgrb8U0kZTydbZhyEWzSvDu7AteIDhq3Y2RaGxezx6IZDwD9QM88NciQcYY79J6JgBiJY4Cf1wBQ-hEQvDFulzIjdea1EaG-e8AT/s132/deepawali%20(16).gif" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="132" data-original-width="111" height="61" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgt9LuqcMxexH2pr4PO-qe_Npp3BQTlPJVa3gkT-pjoeF25ucQudjP8lZB1uF6r4z_8Wr7uemPOcvXfb-sl1UnysEdqhgrb8U0kZTydbZhyEWzSvDu7AteIDhq3Y2RaGxezx6IZDwD9QM88NciQcYY79J6JgBiJY4Cf1wBQ-hEQvDFulzIjdea1EaG-e8AT/w51-h61/deepawali%20(16).gif" width="51" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;b&gt;&lt;br /&gt;&lt;/b&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEisvv2fevTZU4jHiF-WaRMVzSPpe9dTjcLjiHJtjG72FiAItWaWVn_WnGO6Dy2s-H-H4e8tqnWPNmD7_fl0iXgFkcCAJXt0NRapgCVQNcx6kMS-Xa3ZAsT2ZC9MWKc6a0bl17hV3az6bkjn-fJ5fU5Qj6OeBbPvHPaU-XktzLdekVgj6mpoXl9HeE0vW9bH/s248/deepawali.gif" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="68" data-original-width="248" height="68" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEisvv2fevTZU4jHiF-WaRMVzSPpe9dTjcLjiHJtjG72FiAItWaWVn_WnGO6Dy2s-H-H4e8tqnWPNmD7_fl0iXgFkcCAJXt0NRapgCVQNcx6kMS-Xa3ZAsT2ZC9MWKc6a0bl17hV3az6bkjn-fJ5fU5Qj6OeBbPvHPaU-XktzLdekVgj6mpoXl9HeE0vW9bH/s1600/deepawali.gif" width="248" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;b&gt; &lt;br /&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: center;"&gt;&lt;b&gt;आइए आज तरही मुशायरे का आरंभ करते हैं चार रचनाकारों देवी नागरानी, डॉ. रजनी मल्होत्रा नैय्यर, गिरीश पंकज और डॉ. संजय दानी के साथ। &lt;br /&gt;&lt;/b&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhUrOm4eOyb70PA3th83jBVElWi_aeXeUSmfx8lWmjUgA77COSbcw7PkOksNLX4Gagpjic2XDUWdNvSpjAxX9zObQr8cj2uYH4qcm2S18071oM8Xpy-qQBNesJsIfbrydqxdwRkboL4i9zc2oHOz00HbiqRb84KIqmOMvoMPmUlFSvZ310kqzQe9prRmLUO/s181/devi_nangrani.jpg" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="181" data-original-width="131" height="129" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhUrOm4eOyb70PA3th83jBVElWi_aeXeUSmfx8lWmjUgA77COSbcw7PkOksNLX4Gagpjic2XDUWdNvSpjAxX9zObQr8cj2uYH4qcm2S18071oM8Xpy-qQBNesJsIfbrydqxdwRkboL4i9zc2oHOz00HbiqRb84KIqmOMvoMPmUlFSvZ310kqzQe9prRmLUO/w93-h129/devi_nangrani.jpg" width="93" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="color: #2b00fe;"&gt;देवी नागरानी&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjZsU6pH3Jv8IeFXdb5k7Ydqe01_sbGVYzsKgLFMSzNCAJjNPLMrgxbghiKjL3x7MZiQ4dkoYEjkD1cRmsPlHml94MVqiHReSGHrvTTaaCfeBClKN3R3x8MRveb6whW4OdFsYF3fKgGaD-XGjj5mHXm3U5d_iWdB57LXXdbDVo4qySQuSsMY0FFoX9LH_0J/s400/deepawali%20(3).gif" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="138" data-original-width="400" height="34" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjZsU6pH3Jv8IeFXdb5k7Ydqe01_sbGVYzsKgLFMSzNCAJjNPLMrgxbghiKjL3x7MZiQ4dkoYEjkD1cRmsPlHml94MVqiHReSGHrvTTaaCfeBClKN3R3x8MRveb6whW4OdFsYF3fKgGaD-XGjj5mHXm3U5d_iWdB57LXXdbDVo4qySQuSsMY0FFoX9LH_0J/w100-h34/deepawali%20(3).gif" width="100" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;b&gt;“इन चरागों को जलना है अब रात भर”&lt;br /&gt;आँच में उनको गलना है अब रात भर &lt;br /&gt;&lt;span style="color: #2b00fe;"&gt;देती क़ुदरत इशारे मुसलसल हमें &lt;br /&gt;उन इशारों पे चलना है अब रात भर&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;नीम बेहोशी भी इतनी अच्छी नहीं&lt;br /&gt;होश रहते संभलना है अब रात भर&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #2b00fe;"&gt;फ़लसफ़ा ज़िंदगी का समझ लीजिए &lt;br /&gt;उस समझ में ही ढलना है अब रात भर&lt;/span&gt; &lt;br /&gt;ज़िन्दगी एक जलता हवन ही तो है &lt;br /&gt;जागकर ही पिघलना है अब रात भर&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #2b00fe;"&gt;कैसे कह दूँ कथा इन चराग़ों की मैं &lt;br /&gt;इनको ‘देवी’ यूँ जलना है अब रात कर&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEi5xlcBoSAgvbs4YIvunvjCbPV4Q5kmUS5xphJPEZbNIONQSXj_Tg337k400tCzSUaRzZi74E67P5el28qN2HjaU19XivizHWyFuLwZPKZY9MiP9P-DAFiEAlCppV2pNswMvuit7nyB1Ub6PFrWGnalNgBdmGX_kcqPlT2-N79PXJRUFIFCeSsOR7qUavw-/s123/deepawali%20(1).gif" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="44" data-original-width="123" height="44" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEi5xlcBoSAgvbs4YIvunvjCbPV4Q5kmUS5xphJPEZbNIONQSXj_Tg337k400tCzSUaRzZi74E67P5el28qN2HjaU19XivizHWyFuLwZPKZY9MiP9P-DAFiEAlCppV2pNswMvuit7nyB1Ub6PFrWGnalNgBdmGX_kcqPlT2-N79PXJRUFIFCeSsOR7qUavw-/s1600/deepawali%20(1).gif" width="123" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;b&gt;मतले के मिसरा ऊला से ही गिरह लगा कर शुरुआत की है। और मिसरा सानी में उन चराग़ों की आँच में गलने का दृश्य सुंदर है। और यह भी सच है कि क़ुदरत तो हमें लगातार इशारे कर रही है, मगर हम ही उन इशारों को नहीं समझ पा रहे हैं। एक विचित्र प्रकार की बेहोशी में हम सब चले जा रहे हैं, शायद दीप पर्व पर सँभल जायें। ज़िंदगी का फ़लसफ़ा समझ कर उसमें ढलना ही ज़िंदगी है। ज़िंदगी एक अनवरत सा हवन है जिसमें हमें पिघलते रहना है। और मकते के शेर में चराग़ों की कथा की बात बहुत सुंदर आयी है। वाह, वाह, वाह, सुंदर ग़ज़ल।&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEisvv2fevTZU4jHiF-WaRMVzSPpe9dTjcLjiHJtjG72FiAItWaWVn_WnGO6Dy2s-H-H4e8tqnWPNmD7_fl0iXgFkcCAJXt0NRapgCVQNcx6kMS-Xa3ZAsT2ZC9MWKc6a0bl17hV3az6bkjn-fJ5fU5Qj6OeBbPvHPaU-XktzLdekVgj6mpoXl9HeE0vW9bH/s248/deepawali.gif" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="68" data-original-width="248" height="68" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEisvv2fevTZU4jHiF-WaRMVzSPpe9dTjcLjiHJtjG72FiAItWaWVn_WnGO6Dy2s-H-H4e8tqnWPNmD7_fl0iXgFkcCAJXt0NRapgCVQNcx6kMS-Xa3ZAsT2ZC9MWKc6a0bl17hV3az6bkjn-fJ5fU5Qj6OeBbPvHPaU-XktzLdekVgj6mpoXl9HeE0vW9bH/s1600/deepawali.gif" width="248" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg4cL09xqIWzVNsnLexX9ifCeHccnGRnQPl_sCe9awON81lOdCiGguKoMWncyGkkbBhqlC8g8RUcQYcNvWA7fYqr1VSG7pqSBrX7i8x_QZy-Z9m-AynQZ9GJF2DQrczSerUfVCANgGO0uDTpxEIwjxMC_RNPSuKkHuJewzpvJVG-tJvkgGb6Mkn777q_MQy/s960/rajni%20naiyyar%20malhotra.jpg" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="960" data-original-width="931" height="145" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg4cL09xqIWzVNsnLexX9ifCeHccnGRnQPl_sCe9awON81lOdCiGguKoMWncyGkkbBhqlC8g8RUcQYcNvWA7fYqr1VSG7pqSBrX7i8x_QZy-Z9m-AynQZ9GJF2DQrczSerUfVCANgGO0uDTpxEIwjxMC_RNPSuKkHuJewzpvJVG-tJvkgGb6Mkn777q_MQy/w140-h145/rajni%20naiyyar%20malhotra.jpg" width="140" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="color: #2b00fe;"&gt;डॉ. रजनी मल्होत्रा नैय्यर&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjZsU6pH3Jv8IeFXdb5k7Ydqe01_sbGVYzsKgLFMSzNCAJjNPLMrgxbghiKjL3x7MZiQ4dkoYEjkD1cRmsPlHml94MVqiHReSGHrvTTaaCfeBClKN3R3x8MRveb6whW4OdFsYF3fKgGaD-XGjj5mHXm3U5d_iWdB57LXXdbDVo4qySQuSsMY0FFoX9LH_0J/s400/deepawali%20(3).gif" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="138" data-original-width="400" height="34" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjZsU6pH3Jv8IeFXdb5k7Ydqe01_sbGVYzsKgLFMSzNCAJjNPLMrgxbghiKjL3x7MZiQ4dkoYEjkD1cRmsPlHml94MVqiHReSGHrvTTaaCfeBClKN3R3x8MRveb6whW4OdFsYF3fKgGaD-XGjj5mHXm3U5d_iWdB57LXXdbDVo4qySQuSsMY0FFoX9LH_0J/w100-h34/deepawali%20(3).gif" width="100" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;b&gt;लो शमा को पिघलना है अब रात भर&lt;br /&gt;इन चरागों को जलना है अब रात भर&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #2b00fe;"&gt;मेरे ख्वाबों में तुम सामने आ गए&lt;br /&gt;दिल का मौसम बदलना है अब रात भर&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;तुम हक़ीक़त में मुझसे मिलो न मिलो&lt;br /&gt;ख़्वाब में संग चलना है अब रात भर&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #2b00fe;"&gt;नींद आयेगी कैसे तेरी याद में&lt;br /&gt;करवटें ही बदलना है अब रात भर&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;मैने शब्दों में कब से तराशा तुम्हें&lt;br /&gt;तुमको ग़ज़लों में ढलना है अब रात भर&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEi5xlcBoSAgvbs4YIvunvjCbPV4Q5kmUS5xphJPEZbNIONQSXj_Tg337k400tCzSUaRzZi74E67P5el28qN2HjaU19XivizHWyFuLwZPKZY9MiP9P-DAFiEAlCppV2pNswMvuit7nyB1Ub6PFrWGnalNgBdmGX_kcqPlT2-N79PXJRUFIFCeSsOR7qUavw-/s123/deepawali%20(1).gif" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="44" data-original-width="123" height="44" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEi5xlcBoSAgvbs4YIvunvjCbPV4Q5kmUS5xphJPEZbNIONQSXj_Tg337k400tCzSUaRzZi74E67P5el28qN2HjaU19XivizHWyFuLwZPKZY9MiP9P-DAFiEAlCppV2pNswMvuit7nyB1Ub6PFrWGnalNgBdmGX_kcqPlT2-N79PXJRUFIFCeSsOR7qUavw-/s1600/deepawali%20(1).gif" width="123" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;b&gt;रात भर अँधेरे से लड़ने के लिए शमा और दीपक दोनों को ही जलना और पिघलना होता है, बहुत सुंदर मतला। कोई रात को सोते में ख़्वाब में आ जाये तो दिल का मौसम एकदम बदल जाता है। और कोई सचमुच मिले या नहीं मिले मगर यह भी सच है कि वह ख़्वाब में हमारे संग चलता रहता है। और किसी की याद में करवट बदलने का नाम ही तो प्रेम होता है, और जब प्रेम होता है तब नींद आँखों से उड़ जाती है। जिसे शब्दों में तराशा है वही रात भर ग़ज़ल में ढलेगा, बहुत सुंदर। वाह, वाह, वाह, सुंदर ग़ज़ल।&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEisvv2fevTZU4jHiF-WaRMVzSPpe9dTjcLjiHJtjG72FiAItWaWVn_WnGO6Dy2s-H-H4e8tqnWPNmD7_fl0iXgFkcCAJXt0NRapgCVQNcx6kMS-Xa3ZAsT2ZC9MWKc6a0bl17hV3az6bkjn-fJ5fU5Qj6OeBbPvHPaU-XktzLdekVgj6mpoXl9HeE0vW9bH/s248/deepawali.gif" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="68" data-original-width="248" height="68" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEisvv2fevTZU4jHiF-WaRMVzSPpe9dTjcLjiHJtjG72FiAItWaWVn_WnGO6Dy2s-H-H4e8tqnWPNmD7_fl0iXgFkcCAJXt0NRapgCVQNcx6kMS-Xa3ZAsT2ZC9MWKc6a0bl17hV3az6bkjn-fJ5fU5Qj6OeBbPvHPaU-XktzLdekVgj6mpoXl9HeE0vW9bH/s1600/deepawali.gif" width="248" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEicbykBmGYHwpmjq48kr1EK-9ezAGBwJo3u9SfSFwSuES32erZd-AAqCwZR5McDRkNypLkoKIh0melXqwHrppvQPGzhyphenhyphenb9GANdOf5dvJle9u8zGE6Lqa1jNDYivuHg_5zPuY1ZOO9up3greA1N9SFIiq8UVE31p_QhIcGV1LTXslndlaoTVuf1MQihMexYg/s469/girish%20pankaj.jpg" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="469" data-original-width="400" height="169" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEicbykBmGYHwpmjq48kr1EK-9ezAGBwJo3u9SfSFwSuES32erZd-AAqCwZR5McDRkNypLkoKIh0melXqwHrppvQPGzhyphenhyphenb9GANdOf5dvJle9u8zGE6Lqa1jNDYivuHg_5zPuY1ZOO9up3greA1N9SFIiq8UVE31p_QhIcGV1LTXslndlaoTVuf1MQihMexYg/w144-h169/girish%20pankaj.jpg" width="144" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="color: #2b00fe;"&gt;गिरीश पंकज&lt;/span&gt;&amp;nbsp;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjZsU6pH3Jv8IeFXdb5k7Ydqe01_sbGVYzsKgLFMSzNCAJjNPLMrgxbghiKjL3x7MZiQ4dkoYEjkD1cRmsPlHml94MVqiHReSGHrvTTaaCfeBClKN3R3x8MRveb6whW4OdFsYF3fKgGaD-XGjj5mHXm3U5d_iWdB57LXXdbDVo4qySQuSsMY0FFoX9LH_0J/s400/deepawali%20(3).gif" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="138" data-original-width="400" height="34" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjZsU6pH3Jv8IeFXdb5k7Ydqe01_sbGVYzsKgLFMSzNCAJjNPLMrgxbghiKjL3x7MZiQ4dkoYEjkD1cRmsPlHml94MVqiHReSGHrvTTaaCfeBClKN3R3x8MRveb6whW4OdFsYF3fKgGaD-XGjj5mHXm3U5d_iWdB57LXXdbDVo4qySQuSsMY0FFoX9LH_0J/w100-h34/deepawali%20(3).gif" width="100" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;b&gt;स्याह सूरत बदलना है अब रात भर &lt;br /&gt;दीप लेकर ही चलना है अब रात भर&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #2b00fe;"&gt;वो अँधेरे से लड़ने चले आए हैं &lt;br /&gt;"इन चिरागों को जलना है अब रात भर"&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;देख इसको अँधेरा भी घबराएगा &lt;br /&gt;एक दीपक को बलना है अब रात भर&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #2b00fe;"&gt;चाँद की रौशनी हमको भी मिल सके&lt;br /&gt;बन के बच्चा मचलना है अब रात भर &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;ये बुरा है समय पर बदल जाएगा&lt;br /&gt;हाँ इसे ही बदलना है अब रात भर &lt;br /&gt;&lt;span style="color: #2b00fe;"&gt;अब ये सपने हमें खूब तरसाएँगे &lt;br /&gt;खुद को ही हमको छलना है अब रात भर &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;एक बेहतर समय कल खड़ा सामने &lt;br /&gt;मेरे सपने को पलना है अब रात भर&amp;nbsp;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEi5xlcBoSAgvbs4YIvunvjCbPV4Q5kmUS5xphJPEZbNIONQSXj_Tg337k400tCzSUaRzZi74E67P5el28qN2HjaU19XivizHWyFuLwZPKZY9MiP9P-DAFiEAlCppV2pNswMvuit7nyB1Ub6PFrWGnalNgBdmGX_kcqPlT2-N79PXJRUFIFCeSsOR7qUavw-/s123/deepawali%20(1).gif" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="44" data-original-width="123" height="44" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEi5xlcBoSAgvbs4YIvunvjCbPV4Q5kmUS5xphJPEZbNIONQSXj_Tg337k400tCzSUaRzZi74E67P5el28qN2HjaU19XivizHWyFuLwZPKZY9MiP9P-DAFiEAlCppV2pNswMvuit7nyB1Ub6PFrWGnalNgBdmGX_kcqPlT2-N79PXJRUFIFCeSsOR7qUavw-/s1600/deepawali%20(1).gif" width="123" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;b&gt;स्याह सूरत को बदलने के लिए दीप लेकर ही चलना होता है। और जो दीप अँधेरे से लड़ने आये हैं, उनको रात भर जलना ही होता है। यह भी सच है जब दीपक बाला जाता है तो अँधेरा उसे देख कर घबरा जाता है। उम्र कुछ नहीं होती, जब भी आप चाँद पाने को मचल जायें तभी आपका बचपन एक बार फिर से वापस आ जाता है। हर बुरा समय कभी न कभी बदल जाता है बशर्ते हम उसे बदलने का प्रयास करें। सपने तरसाते भी हैं और वही रात भर आँखों में पलते भी हैं। वाह, वाह, वाह, सुंदर ग़ज़ल।&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEisvv2fevTZU4jHiF-WaRMVzSPpe9dTjcLjiHJtjG72FiAItWaWVn_WnGO6Dy2s-H-H4e8tqnWPNmD7_fl0iXgFkcCAJXt0NRapgCVQNcx6kMS-Xa3ZAsT2ZC9MWKc6a0bl17hV3az6bkjn-fJ5fU5Qj6OeBbPvHPaU-XktzLdekVgj6mpoXl9HeE0vW9bH/s248/deepawali.gif" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="68" data-original-width="248" height="68" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEisvv2fevTZU4jHiF-WaRMVzSPpe9dTjcLjiHJtjG72FiAItWaWVn_WnGO6Dy2s-H-H4e8tqnWPNmD7_fl0iXgFkcCAJXt0NRapgCVQNcx6kMS-Xa3ZAsT2ZC9MWKc6a0bl17hV3az6bkjn-fJ5fU5Qj6OeBbPvHPaU-XktzLdekVgj6mpoXl9HeE0vW9bH/s1600/deepawali.gif" width="248" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiXetQ6nprbp4lw3dxROi9T6hJ2zng7e_bsOlpneP69DEKYPH91jIJaJnJ2Cg2vItV3Zw-nxDknY-rAi_PKYavyLJM5tqlW7f9sA-GLgZB4JLNUJV2cwiofcouAyUFAnQdBL6zcNxPLe4YZ3lHL-sOuvWFP1QBjdl4pV-V-FoHGYej_c4SydbfZ5_IFEcgm/s220/sanjay%20dani.png" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="220" data-original-width="168" height="147" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiXetQ6nprbp4lw3dxROi9T6hJ2zng7e_bsOlpneP69DEKYPH91jIJaJnJ2Cg2vItV3Zw-nxDknY-rAi_PKYavyLJM5tqlW7f9sA-GLgZB4JLNUJV2cwiofcouAyUFAnQdBL6zcNxPLe4YZ3lHL-sOuvWFP1QBjdl4pV-V-FoHGYej_c4SydbfZ5_IFEcgm/w112-h147/sanjay%20dani.png" width="112" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="color: #2b00fe;"&gt;डॉ. संजय दानी दुर्ग&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjZsU6pH3Jv8IeFXdb5k7Ydqe01_sbGVYzsKgLFMSzNCAJjNPLMrgxbghiKjL3x7MZiQ4dkoYEjkD1cRmsPlHml94MVqiHReSGHrvTTaaCfeBClKN3R3x8MRveb6whW4OdFsYF3fKgGaD-XGjj5mHXm3U5d_iWdB57LXXdbDVo4qySQuSsMY0FFoX9LH_0J/s400/deepawali%20(3).gif" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="138" data-original-width="400" height="34" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjZsU6pH3Jv8IeFXdb5k7Ydqe01_sbGVYzsKgLFMSzNCAJjNPLMrgxbghiKjL3x7MZiQ4dkoYEjkD1cRmsPlHml94MVqiHReSGHrvTTaaCfeBClKN3R3x8MRveb6whW4OdFsYF3fKgGaD-XGjj5mHXm3U5d_iWdB57LXXdbDVo4qySQuSsMY0FFoX9LH_0J/w100-h34/deepawali%20(3).gif" width="100" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;b&gt;हम चराग़ों को जलना है अब रात भर&lt;br /&gt;हाँ अँधेरे से लड़ना है अब रात भर &lt;br /&gt;&lt;span style="color: #2b00fe;"&gt;ख़ूब दीपावली ये मनाएँ मगर&lt;br /&gt;ग़ैर का दुःख भी हरना है अब रात भर&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;सो गये लोग, सन्नाटे का शोर है&lt;br /&gt;फिर भी हमको न डरना है अब रात भर&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #2b00fe;"&gt;रावणों की अदालत से बचने हमें&lt;br /&gt;राम का नाम जपना है अब रात भर &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;मान सम्मान हमको मिले ना मिले&lt;br /&gt;काम बस अपना करना है अब रात भर &lt;br /&gt;&lt;span style="color: #2b00fe;"&gt;अहमियत अपनी समझे न समझे जहाँ&lt;br /&gt;घर उजालों से भरना है अब रात भर&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEi5xlcBoSAgvbs4YIvunvjCbPV4Q5kmUS5xphJPEZbNIONQSXj_Tg337k400tCzSUaRzZi74E67P5el28qN2HjaU19XivizHWyFuLwZPKZY9MiP9P-DAFiEAlCppV2pNswMvuit7nyB1Ub6PFrWGnalNgBdmGX_kcqPlT2-N79PXJRUFIFCeSsOR7qUavw-/s123/deepawali%20(1).gif" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="44" data-original-width="123" height="44" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEi5xlcBoSAgvbs4YIvunvjCbPV4Q5kmUS5xphJPEZbNIONQSXj_Tg337k400tCzSUaRzZi74E67P5el28qN2HjaU19XivizHWyFuLwZPKZY9MiP9P-DAFiEAlCppV2pNswMvuit7nyB1Ub6PFrWGnalNgBdmGX_kcqPlT2-N79PXJRUFIFCeSsOR7qUavw-/s1600/deepawali%20(1).gif" width="123" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;b&gt;क़ाफिया में थोड़े हेर-फेर के साथ ग़ज़ल कही गयी है। चराग़ों को जब जलाया जाता है तब यही उम्मीद होती है कि ये अब रात भर जलेंगे। मगर जब आप दीपावली मना रहे हों तो यह याद रहे कि दूसरों के लिए भी कुछ करना है। जब रात गहरी हो जाती है और सन्नाटा छा जाता है, तब भी डरना मना होता है। और बड़ी बात यह कही गयी है कि हमें बस अपना काम ही करते रहना है, मान सम्मान की परवाह किये बग़ैर। कोई अहमियत समझे न समझे हमें उजालों से सबके घर भरना है। वाह, वाह, वाह, सुंदर ग़ज़ल।&lt;br /&gt;&lt;/b&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEisvv2fevTZU4jHiF-WaRMVzSPpe9dTjcLjiHJtjG72FiAItWaWVn_WnGO6Dy2s-H-H4e8tqnWPNmD7_fl0iXgFkcCAJXt0NRapgCVQNcx6kMS-Xa3ZAsT2ZC9MWKc6a0bl17hV3az6bkjn-fJ5fU5Qj6OeBbPvHPaU-XktzLdekVgj6mpoXl9HeE0vW9bH/s248/deepawali.gif" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="68" data-original-width="248" height="68" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEisvv2fevTZU4jHiF-WaRMVzSPpe9dTjcLjiHJtjG72FiAItWaWVn_WnGO6Dy2s-H-H4e8tqnWPNmD7_fl0iXgFkcCAJXt0NRapgCVQNcx6kMS-Xa3ZAsT2ZC9MWKc6a0bl17hV3az6bkjn-fJ5fU5Qj6OeBbPvHPaU-XktzLdekVgj6mpoXl9HeE0vW9bH/s1600/deepawali.gif" width="248" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: center;"&gt;&lt;b&gt;तो ये आज के चारों शायरों की दीपावली है। बहुत सुंदर ग़ज़लें चारों ने कही हैं। आप दिल खोल कर इनको दाद दीजिए और इंतज़ार कीजिए अगले अंक का।&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgg4qzTAU4_iJwQM0bLVcNMnWzLQlQaxAaEDeav8Sf5u3Y-p955-397dDEKqfs8n9cvcYmZgfVgtzdVlhQdSqTaIiHuJbfMs3xJzYdAPPDmqzgce94wcxvFJagatBAo3EQK5DwHxym1OXg4bzFxAMu_Ae1HQ7OdOeJoInxtiqmT4fujcWMjOYdQhOWDgoHI/s380/orkut%20scrap%20diwali%20ki%20shubhkamane%20hindi%20greeting%20card.jpg" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="300" data-original-width="380" height="253" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgg4qzTAU4_iJwQM0bLVcNMnWzLQlQaxAaEDeav8Sf5u3Y-p955-397dDEKqfs8n9cvcYmZgfVgtzdVlhQdSqTaIiHuJbfMs3xJzYdAPPDmqzgce94wcxvFJagatBAo3EQK5DwHxym1OXg4bzFxAMu_Ae1HQ7OdOeJoInxtiqmT4fujcWMjOYdQhOWDgoHI/s320/orkut%20scrap%20diwali%20ki%20shubhkamane%20hindi%20greeting%20card.jpg" width="320" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;b&gt;&lt;br /&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;b&gt;&lt;br /&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;</description><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEisvv2fevTZU4jHiF-WaRMVzSPpe9dTjcLjiHJtjG72FiAItWaWVn_WnGO6Dy2s-H-H4e8tqnWPNmD7_fl0iXgFkcCAJXt0NRapgCVQNcx6kMS-Xa3ZAsT2ZC9MWKc6a0bl17hV3az6bkjn-fJ5fU5Qj6OeBbPvHPaU-XktzLdekVgj6mpoXl9HeE0vW9bH/s72-c/deepawali.gif" width="72"/><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">16</thr:total></item><item><title>आइए दीपावली के तरही मुशायरे के मिसरे पर बात करते हैं</title><link>http://subeerin.blogspot.com/2024/10/blog-post.html</link><author>noreply@blogger.com (Unknown)</author><pubDate>Sat, 19 Oct 2024 09:24:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-7637784963342720274.post-5494727361666270975</guid><description>&lt;div&gt;&lt;div style="text-align: center;"&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg474nOXKIJD89VWQCwjViAoCUHOXf7YHEWi00ImN1taegBtNa9J4iUdhP0A3VV0KXXqJtNx-ny9B9OV4Krov7ramhRGNcr_L7v8bPU8r0k8lZvljOzrqIAVj3a3c6cEZtp_Knr7fmgL8a02aBqUqnaI3wRrGJaomSr0rfN4TX0iSc-zaTfiyHA6Q6JLUem/s759/diwali-7595.jpg" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="422" data-original-width="759" height="178" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg474nOXKIJD89VWQCwjViAoCUHOXf7YHEWi00ImN1taegBtNa9J4iUdhP0A3VV0KXXqJtNx-ny9B9OV4Krov7ramhRGNcr_L7v8bPU8r0k8lZvljOzrqIAVj3a3c6cEZtp_Knr7fmgL8a02aBqUqnaI3wRrGJaomSr0rfN4TX0iSc-zaTfiyHA6Q6JLUem/s320/diwali-7595.jpg" width="320" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;b&gt;दोस्तों समय की अपनी ही गति होती है, और उस गति में सब कुछ पीछे ही छूटता जाता है। जो आज है वह कल नहीं रहेगा यह तय है। कल कुछ और होगा और उसके बाद कुछ और होगा। यही तो ज़िंदगी है। जो पल हम जी रहे हैं, वही तो असल ज़िंदगी है। राकेश खंडेलवाल जी हर दीपावली के लगभग एक माह पूर्व मुझे मेल करके पूछते थे कि तरही का मिसरा कब देंगे आप। इस बार कोई पूछने वाला नहीं था तो इस बार देर हो गयी। हालाँकि बहुत देर तो नहीं हुई है मगर समय सच में ही अब कम है। राकेश जी की रचना हर तरही में सबसे पहले मिलती थी और फिर एक के बाद एक उनकी कई रचनाएँ प्राप्त होती थीं। मगर अब तो बस उनकी यादें ही शेष हैं। मगर वे जहाँ भी हैं, वहीं से हमारे इस तरही मुशायरे में शामिल होंगे। दीपावली का पर्व इस बार ऐसे समय में आया है, जब हमारे इलाक़े में बरसात का मौसम अभी भी पूरी तरह से विदा नहीं हुआ है। पिछले कुछ सालों से ऐसा हो रहा है कि दीपावली के अवसर पर ही बरसात होती है। जैसे इस बार हमारे यहाँ दशहरे पर रावण को जलाया नहीं गया बल्कि गलाया गया। शायद यही ग्लोबल वॉर्मिंग है। जो भी हो हमें तो दीपावली का पर्व मनाना है और वैसे ही मनाना है जैसे हम पहले मनाते रहे हैं। &lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;p style="text-align: center;"&gt;&lt;b&gt;इस बार का तरही मुशायरा होगा बहरे मुतदारिक मुसमन सालिम पर। यह एक बहुत ही मधुर और गाई जाने वाली बहर है। तरन्नुम में ग़ज़ल पढ़ने वाले सभी शायर इस बहर पर ज़रूर लिखते हैं। इसको कई अलग-अलग तरन्नुम में गाया जा सकता है। इसका वज़न होता है- फाएलुन-फाएलुन-फाएलुन-फाएलुन या 212-212-212-212। जगजीत सिंह की गायी हुई एक बहुत प्रसिद्ध ग़ज़ल इसी बहर पर है- आपको देख कर देखता रह गया। इस&amp;nbsp;मिसरे का सौंदर्य इस बात में है कि इसमें रुक्न में शामिल होने वाला हर शब्द पूर्ण है, मतलब टूट कर दूसरे रुक्न में नहीं जा रहा है। आपको 212, देख कर 212, देखता 212, रह गया 212। इस मिसरे की एक और बात यह है कि इसमें कहीं कोई दीर्घ&amp;nbsp;मात्रा गिरा कर लघु नहीं की&amp;nbsp;गयी है।यह एक शुद्ध मिसरा है। इस प्रकार के मिसरे कहना बहुत मुश्किल होता है। असल में यदि आप इस प्रकार से वज़न को साधने की कोशिश करेंगे तो आपके हाथ से कहन चली जायेगी। मगर मुझे तो इस प्रकार के शुद्ध मिसरे बहुत पसंद आते हैं, जिनमें कोई शब्द टूट कर दो रुक्नों में नहीं बँटा हो और कहीं कोई दीर्घ मात्रा को गिरा कर लघु नहीं किया गया हो। ख़ैर आइए अब चलते हैं अपने मिसरे की तरफ़।&amp;nbsp;&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;p style="text-align: center;"&gt;&lt;b&gt;&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;b&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhFU-L6ctymxDAi84jdDcu_tPn7MjuAULytAbKu14SnDh24tbR_9J6C-XCSuoyr-OAXuGwapkLDamc2Dt1LNo-TFob2gY-Z54bdgLNiNsXc9M_wN5CnE3crsbRny6nmplg9NTrtLvvJ4IsmxyUYAVaQnKO44I82VyoEDxH0cff2GGIU85uyCSvwVsUaQsu_/s4288/Deepavali-haNate.jpg" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="2848" data-original-width="4288" height="213" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhFU-L6ctymxDAi84jdDcu_tPn7MjuAULytAbKu14SnDh24tbR_9J6C-XCSuoyr-OAXuGwapkLDamc2Dt1LNo-TFob2gY-Z54bdgLNiNsXc9M_wN5CnE3crsbRny6nmplg9NTrtLvvJ4IsmxyUYAVaQnKO44I82VyoEDxH0cff2GGIU85uyCSvwVsUaQsu_/s320/Deepavali-haNate.jpg" width="320" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;b&gt;&lt;br /&gt;&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: center;"&gt;&lt;b&gt;&amp;nbsp;इन चराग़ों को जलना है अब रात भर &lt;/b&gt;&lt;/div&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;p style="text-align: center;"&gt;&lt;b&gt;यह है हमारा इस बार का मिसरा। इस मिसरे में जो क़ाफ़िया ध्वनि है वह है ‘लना’ और रदीफ़ है ‘है अब रात भर’। इसमें आप 22 और 122 या 2122 वज़न के क़ाफ़िये ले सकते हैं। जैसे- चलना, ढलना, पलना, गलना जैसे 22 के वज़न वाले क़ाफ़िये और निकलना, पिघलना, बदलना जैसे 122 के वज़न वाले क़ाफ़िये। थोड़ी मुश्किल दिखाई दे रही होगी पर ग़ज़ल कहना शुरू करेंगे तो उतनी मुश्किल नहीं आएगी। &lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;p style="text-align: center;"&gt;&lt;b&gt;एक ग़ज़ल तो मैंने ऊपर आपको सुना ही दी- ‘आपको देख कर देखता रहा गया’, एक पुरानी फ़िल्म त्रिदेव का गाने का मुखड़ा&amp;nbsp;भी गुनगुना सकते हैं आप ‘रात भर जाम से जाम टकराएगा, जब नशा छाएगा तब मज़ा आएगा’। &lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;p style="text-align: center;"&gt;&lt;b&gt;तो यह है इस बार का तरही मुशायरा &lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;p style="text-align: center;"&gt;&lt;b&gt;बहर- बहरे मुतदारिक मुसमन सालिम &lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;p style="text-align: center;"&gt;&lt;b&gt;वज़न- फाएलुन-फाएलुन-फाएलुन-फाएलुन या 212-212-212-212&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;p style="text-align: center;"&gt;&lt;b&gt;मिसरा- इन चराग़ों को जलना है अब रात भर &lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;p style="text-align: center;"&gt;&lt;b&gt;क़ाफ़िया ध्वनि- ‘लना’ &lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;p style="text-align: center;"&gt;&lt;b&gt;रदीफ़- ‘है अब रात भर’&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;p style="text-align: center;"&gt;&lt;b&gt;इंतज़ार रहेगा आपकी ग़ज़लों का, समय कम है इसलिए अगर जल्दी भेज सकें तो बेहतर रहेगा। &lt;/b&gt;&lt;/p&gt;</description><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg474nOXKIJD89VWQCwjViAoCUHOXf7YHEWi00ImN1taegBtNa9J4iUdhP0A3VV0KXXqJtNx-ny9B9OV4Krov7ramhRGNcr_L7v8bPU8r0k8lZvljOzrqIAVj3a3c6cEZtp_Knr7fmgL8a02aBqUqnaI3wRrGJaomSr0rfN4TX0iSc-zaTfiyHA6Q6JLUem/s72-c/diwali-7595.jpg" width="72"/><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">9</thr:total></item><item><title>शोध, समीक्षा तथा आलोचना की अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका शिवना साहित्यिकी का वर्ष : 9, अंक : 35, अक्टूबर-दिसम्बर 2024</title><link>http://subeerin.blogspot.com/2024/10/9-35-2024_18.html</link><author>noreply@blogger.com (Unknown)</author><pubDate>Fri, 18 Oct 2024 09:55:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-7637784963342720274.post-1365435505366914752</guid><description>&lt;p&gt;मित्रों, संरक्षक एवं सलाहकार संपादक- सुधा ओम ढींगरा, संपादक- पंकज सुबीर, कार्यकारी संपादक- शहरयार, सह संपादक- शैलेन्द्र शरण, आकाश माथुर के संपादन में शोध, समीक्षा तथा आलोचना की अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका शिवना साहित्यिकी का वर्ष : 9, अंक : 35, अक्टूबर-दिसम्बर 2024 अंक अब उपलब्ध है। &lt;/p&gt;  &lt;p&gt;इस अंक में शामिल हैं- &lt;/p&gt;  &lt;p&gt;आवरण कविता - जब यह दीप थके- महादेवी वर्मा। संपादकीय- शहरयार, व्यंग्य चित्र- काजल कुमार।&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;साक्षात्कार- कविता के केंद्र में आलोचना की संगत, कवि-आलोचक विजय कुमार से साधना अग्रवाल की बातचीत।&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;केंद्र में पुस्तक- आधी दुनिया पूरा आसमान- सुप्रिया पाठक, डॉ. बी. मदन मोहन, जयपाल / ब्रह्मदत्त शर्मा, चलो फिर से शुरू करें- दीपक गिरकर, ममता त्यागी, रेखा भाटिया / सुधा ओम ढींगरा, डोर अंजानी सी- संदीप तोमर, रेखा भाटिया / ममता त्यागी, टूटी पेंसिल- दीपक गिरकर, जसविन्दर कौर बिन्द्रा / हंसा दीप, ज़ोया देसाई कॉटेज- अमृतलाल मदान, डॉ. वेदप्रकाश अमिताभ, गोविन्द सेन / पंकज सुबीर, उत्कृष्ट लघुकथा विमर्श- डॉ. सुरेश वशिष्ठ, ब्रजेश कानूनगो, डॉ. शील कौशिक / दीपक गिरकर।&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;पुस्तक समीक्षा- तस्वीर जो नहीं दिखती- दीपक गिरकर / कविता वर्मा, अब न नसैहों- सुधा जुगरान / सरोजिनी नौटियाल, चाँद गवाह- सुषमा मुनीन्द्र / उर्मिला शिरीष, यायावरी- शैलेन्द्र शरण / शेर सिंह, कुछ चेहरे, कुछ यादें- सुरेश रायकवार / ज्योति जैन, एजी ओजी लोजी इमोजी- लाल देवेन्द्र कुमार श्रीवास्तव / अरुण अर्णव खरे, 21 श्रेष्ठ नारी मन की कहानियाँ- डॉ. कुमारी उर्वशी / डॉ. अनिता रश्मि, कुछ तो बचा रहे- रमेश खत्री / रामदुलारी शर्मा, गतिविधियों की रेल- ओम वर्मा / रवि खंडेलवाल, सुगंधा- एक सिने सुंदरी की त्रासद कथा- डॉ. रेवन्त दान / मुरारी गुप्ता, तट पर हूँ तटस्थ नहीं- शैलेन्द्र शरण / डॉ. शोभा जैन, विदेश में हिंदी पत्रकारिता- डॉ. पिलकेन्द्र अरोरा / जवाहर कर्नावट, वांग छी- डॉ. उपमा शर्मा / मनीष वैद्य, शनिवार के इंतज़ार में- ज्योत्स्ना कपिल / नीलिमा शर्मा। &lt;/p&gt;  &lt;p&gt;नई पुस्तक- फूल को याद थे सारे मौसम / विजय बहादुर सिंह, सुधा ओम ढींगरा का साहित्य... / प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी, डॉ. योगेन्द्र सिंह, इश्क़ कंबल बन गया है / सुधीर मोता, काली धार / महेश कटारे, थे मज़ा करो म्हाराज / कौसर भुट‍्टो, हरसिंगार सा झरूँगा मैं / मनीष शर्मा, धार्मिक मेले और पर्यटन / विमल कुमार चौधरी, ग्रामीणा के संघर्ष और सफलता की यात्रा / रूबी सरकार, प्रेम का घर : प्रेम की यात्रा / भालचन्द्र जोशी, दण्ड से न्याय तक / प्रवीण कक्कड़, अर्बन नक्सल बीवी / रजनीगंधा, गुमशुदा चाबियों की तलाश / अरुण सातले।&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;पुस्तक पड़ताल- विमर्श- रूदादे-सफ़र- दीपक गिरकर / सुधा ओम ढींगरा।&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;आवरण चित्र- पंकज सुबीर, डिज़ायनिंग- सनी गोस्वामी, सुनील पेरवाल, शिवम गोस्वामी। आपकी प्रतिक्रियाओं का संपादक मंडल को इंतज़ार रहेगा। पत्रिका का प्रिंट संस्करण भी समय पर आपके हाथों में होगा। &lt;/p&gt;  &lt;p&gt;ऑन लाइन पढ़ें-&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;&lt;a href="https://www.slideshare.net/slideshow/shivna-sahityiki-october-december-2024-pdf/272515989"&gt;https://www.slideshare.net/slideshow/shivna-sahityiki-october-december-2024-pdf/272515989&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;&lt;a href="http://www.vibhom.com/shivna/jul_sep_2024.pdf"&gt;http://www.vibhom.com/shivna/jul_sep_2024.pdf&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;साफ़्ट कॉपी पीडीऍफ यहाँ से डाउनलोड करें &lt;/p&gt;  &lt;p&gt;&lt;a href="http://www.vibhom.com/shivnasahityiki.html"&gt;http://www.vibhom.com/shivnasahityiki.html&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;फेसबुक पर- &lt;a href="https://www.facebook.com/shivnasahityiki/"&gt;https://www.facebook.com/shivnasahityiki/&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;ब्लॉग- &lt;a href="http://shivnaprakashan.blogspot.com/"&gt;http://shivnaprakashan.blogspot.com/&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;</description><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total><enclosure length="10023297" type="application/pdf" url="http://www.vibhom.com/shivna/jul_sep_2024.pdf"/><itunes:explicit/><itunes:subtitle>मित्रों, संरक्षक एवं सलाहकार संपादक- सुधा ओम ढींगरा, संपादक- पंकज सुबीर, कार्यकारी संपादक- शहरयार, सह संपादक- शैलेन्द्र शरण, आकाश माथुर के संपादन में शोध, समीक्षा तथा आलोचना की अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका शिवना साहित्यिकी का वर्ष : 9, अंक : 35, अक्टूबर-दिसम्बर 2024 अंक अब उपलब्ध है। इस अंक में शामिल हैं- आवरण कविता - जब यह दीप थके- महादेवी वर्मा। संपादकीय- शहरयार, व्यंग्य चित्र- काजल कुमार। साक्षात्कार- कविता के केंद्र में आलोचना की संगत, कवि-आलोचक विजय कुमार से साधना अग्रवाल की बातचीत। केंद्र में पुस्तक- आधी दुनिया पूरा आसमान- सुप्रिया पाठक, डॉ. बी. मदन मोहन, जयपाल / ब्रह्मदत्त शर्मा, चलो फिर से शुरू करें- दीपक गिरकर, ममता त्यागी, रेखा भाटिया / सुधा ओम ढींगरा, डोर अंजानी सी- संदीप तोमर, रेखा भाटिया / ममता त्यागी, टूटी पेंसिल- दीपक गिरकर, जसविन्दर कौर बिन्द्रा / हंसा दीप, ज़ोया देसाई कॉटेज- अमृतलाल मदान, डॉ. वेदप्रकाश अमिताभ, गोविन्द सेन / पंकज सुबीर, उत्कृष्ट लघुकथा विमर्श- डॉ. सुरेश वशिष्ठ, ब्रजेश कानूनगो, डॉ. शील कौशिक / दीपक गिरकर। पुस्तक समीक्षा- तस्वीर जो नहीं दिखती- दीपक गिरकर / कविता वर्मा, अब न नसैहों- सुधा जुगरान / सरोजिनी नौटियाल, चाँद गवाह- सुषमा मुनीन्द्र / उर्मिला शिरीष, यायावरी- शैलेन्द्र शरण / शेर सिंह, कुछ चेहरे, कुछ यादें- सुरेश रायकवार / ज्योति जैन, एजी ओजी लोजी इमोजी- लाल देवेन्द्र कुमार श्रीवास्तव / अरुण अर्णव खरे, 21 श्रेष्ठ नारी मन की कहानियाँ- डॉ. कुमारी उर्वशी / डॉ. अनिता रश्मि, कुछ तो बचा रहे- रमेश खत्री / रामदुलारी शर्मा, गतिविधियों की रेल- ओम वर्मा / रवि खंडेलवाल, सुगंधा- एक सिने सुंदरी की त्रासद कथा- डॉ. रेवन्त दान / मुरारी गुप्ता, तट पर हूँ तटस्थ नहीं- शैलेन्द्र शरण / डॉ. शोभा जैन, विदेश में हिंदी पत्रकारिता- डॉ. पिलकेन्द्र अरोरा / जवाहर कर्नावट, वांग छी- डॉ. उपमा शर्मा / मनीष वैद्य, शनिवार के इंतज़ार में- ज्योत्स्ना कपिल / नीलिमा शर्मा। नई पुस्तक- फूल को याद थे सारे मौसम / विजय बहादुर सिंह, सुधा ओम ढींगरा का साहित्य... / प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी, डॉ. योगेन्द्र सिंह, इश्क़ कंबल बन गया है / सुधीर मोता, काली धार / महेश कटारे, थे मज़ा करो म्हाराज / कौसर भुट‍्टो, हरसिंगार सा झरूँगा मैं / मनीष शर्मा, धार्मिक मेले और पर्यटन / विमल कुमार चौधरी, ग्रामीणा के संघर्ष और सफलता की यात्रा / रूबी सरकार, प्रेम का घर : प्रेम की यात्रा / भालचन्द्र जोशी, दण्ड से न्याय तक / प्रवीण कक्कड़, अर्बन नक्सल बीवी / रजनीगंधा, गुमशुदा चाबियों की तलाश / अरुण सातले। पुस्तक पड़ताल- विमर्श- रूदादे-सफ़र- दीपक गिरकर / सुधा ओम ढींगरा। आवरण चित्र- पंकज सुबीर, डिज़ायनिंग- सनी गोस्वामी, सुनील पेरवाल, शिवम गोस्वामी। आपकी प्रतिक्रियाओं का संपादक मंडल को इंतज़ार रहेगा। पत्रिका का प्रिंट संस्करण भी समय पर आपके हाथों में होगा। ऑन लाइन पढ़ें- https://www.slideshare.net/slideshow/shivna-sahityiki-october-december-2024-pdf/272515989 http://www.vibhom.com/shivna/jul_sep_2024.pdf साफ़्ट कॉपी पीडीऍफ यहाँ से डाउनलोड करें http://www.vibhom.com/shivnasahityiki.html फेसबुक पर- https://www.facebook.com/shivnasahityiki/ ब्लॉग- http://shivnaprakashan.blogspot.com/</itunes:subtitle><itunes:author>noreply@blogger.com (Unknown)</itunes:author><itunes:summary>मित्रों, संरक्षक एवं सलाहकार संपादक- सुधा ओम ढींगरा, संपादक- पंकज सुबीर, कार्यकारी संपादक- शहरयार, सह संपादक- शैलेन्द्र शरण, आकाश माथुर के संपादन में शोध, समीक्षा तथा आलोचना की अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका शिवना साहित्यिकी का वर्ष : 9, अंक : 35, अक्टूबर-दिसम्बर 2024 अंक अब उपलब्ध है। इस अंक में शामिल हैं- आवरण कविता - जब यह दीप थके- महादेवी वर्मा। संपादकीय- शहरयार, व्यंग्य चित्र- काजल कुमार। साक्षात्कार- कविता के केंद्र में आलोचना की संगत, कवि-आलोचक विजय कुमार से साधना अग्रवाल की बातचीत। केंद्र में पुस्तक- आधी दुनिया पूरा आसमान- सुप्रिया पाठक, डॉ. बी. मदन मोहन, जयपाल / ब्रह्मदत्त शर्मा, चलो फिर से शुरू करें- दीपक गिरकर, ममता त्यागी, रेखा भाटिया / सुधा ओम ढींगरा, डोर अंजानी सी- संदीप तोमर, रेखा भाटिया / ममता त्यागी, टूटी पेंसिल- दीपक गिरकर, जसविन्दर कौर बिन्द्रा / हंसा दीप, ज़ोया देसाई कॉटेज- अमृतलाल मदान, डॉ. वेदप्रकाश अमिताभ, गोविन्द सेन / पंकज सुबीर, उत्कृष्ट लघुकथा विमर्श- डॉ. सुरेश वशिष्ठ, ब्रजेश कानूनगो, डॉ. शील कौशिक / दीपक गिरकर। पुस्तक समीक्षा- तस्वीर जो नहीं दिखती- दीपक गिरकर / कविता वर्मा, अब न नसैहों- सुधा जुगरान / सरोजिनी नौटियाल, चाँद गवाह- सुषमा मुनीन्द्र / उर्मिला शिरीष, यायावरी- शैलेन्द्र शरण / शेर सिंह, कुछ चेहरे, कुछ यादें- सुरेश रायकवार / ज्योति जैन, एजी ओजी लोजी इमोजी- लाल देवेन्द्र कुमार श्रीवास्तव / अरुण अर्णव खरे, 21 श्रेष्ठ नारी मन की कहानियाँ- डॉ. कुमारी उर्वशी / डॉ. अनिता रश्मि, कुछ तो बचा रहे- रमेश खत्री / रामदुलारी शर्मा, गतिविधियों की रेल- ओम वर्मा / रवि खंडेलवाल, सुगंधा- एक सिने सुंदरी की त्रासद कथा- डॉ. रेवन्त दान / मुरारी गुप्ता, तट पर हूँ तटस्थ नहीं- शैलेन्द्र शरण / डॉ. शोभा जैन, विदेश में हिंदी पत्रकारिता- डॉ. पिलकेन्द्र अरोरा / जवाहर कर्नावट, वांग छी- डॉ. उपमा शर्मा / मनीष वैद्य, शनिवार के इंतज़ार में- ज्योत्स्ना कपिल / नीलिमा शर्मा। नई पुस्तक- फूल को याद थे सारे मौसम / विजय बहादुर सिंह, सुधा ओम ढींगरा का साहित्य... / प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी, डॉ. योगेन्द्र सिंह, इश्क़ कंबल बन गया है / सुधीर मोता, काली धार / महेश कटारे, थे मज़ा करो म्हाराज / कौसर भुट‍्टो, हरसिंगार सा झरूँगा मैं / मनीष शर्मा, धार्मिक मेले और पर्यटन / विमल कुमार चौधरी, ग्रामीणा के संघर्ष और सफलता की यात्रा / रूबी सरकार, प्रेम का घर : प्रेम की यात्रा / भालचन्द्र जोशी, दण्ड से न्याय तक / प्रवीण कक्कड़, अर्बन नक्सल बीवी / रजनीगंधा, गुमशुदा चाबियों की तलाश / अरुण सातले। पुस्तक पड़ताल- विमर्श- रूदादे-सफ़र- दीपक गिरकर / सुधा ओम ढींगरा। आवरण चित्र- पंकज सुबीर, डिज़ायनिंग- सनी गोस्वामी, सुनील पेरवाल, शिवम गोस्वामी। आपकी प्रतिक्रियाओं का संपादक मंडल को इंतज़ार रहेगा। पत्रिका का प्रिंट संस्करण भी समय पर आपके हाथों में होगा। ऑन लाइन पढ़ें- https://www.slideshare.net/slideshow/shivna-sahityiki-october-december-2024-pdf/272515989 http://www.vibhom.com/shivna/jul_sep_2024.pdf साफ़्ट कॉपी पीडीऍफ यहाँ से डाउनलोड करें http://www.vibhom.com/shivnasahityiki.html फेसबुक पर- https://www.facebook.com/shivnasahityiki/ ब्लॉग- http://shivnaprakashan.blogspot.com/</itunes:summary></item><item><title>वैश्विक हिन्दी चिंतन की अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका विभोम-स्वर का वर्ष : 9, अंक : 35, अक्टूबर-दिसम्बर 2024 अंक</title><link>http://subeerin.blogspot.com/2024/10/9-35-2024.html</link><author>noreply@blogger.com (Unknown)</author><pubDate>Wed, 16 Oct 2024 09:52:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-7637784963342720274.post-561243672580289080</guid><description>&lt;p&gt;मित्रो, संरक्षक तथा प्रमुख संपादक सुधा ओम ढींगरा एवं संपादक पंकज सुबीर के संपादन में वैश्विक हिन्दी चिंतन की अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका विभोम-स्वर का वर्ष : 9, अंक : 35, अक्टूबर-दिसम्बर 2024 अंक अब उपलब्ध है। इस अंक में शामिल है- संपादकीय। मित्रनामा। साक्षात्कार- साहित्य-व्यवहार, साहित्य-व्यापार की ओर बढ़ता दिखता है, कहानीकार-उपन्यासकार महेश कटारे से आकाश माथुर की बातचीत। विस्मृति के द्वार- अभिव्यक्ति की प्रबलता- अर्चना पैन्यूली। कथा-कहानी- एक दरवाज़ा नया सा- विकेश निझावन, ज़रा सा...डांस- टीना रावल, लम्हों के साए- अरुणा सब्बरवाल, पेंटिंग्स- जिज्ञासा सिंह, बिगड़ी हुई लड़की- शराफ़त अली ख़ान, जब उनसे मुलाकात हो गई- डॉ. विमला व्यास, करवा चौथ- कादम्बरी मेहरा, अन्तर्मन में नागफ़णी- रेणु गुप्ता। भाषांतर- इतनी-सी बात (पंजाबी कहानी), मूल लेखक- बलीजीत, अनुवाद- गीता वर्मा। लघुकथा- मिडिल क्लास स्त्री-पुरुष का प्रेम उत्सव- सन्दीप तोमर, पैरों तले ज़मीन- मनमोहन चौरे, मध्यम- मनप्रीत मखीजा, लाल बत्ती- कमलेश भारतीय। ललित निबंध- एक बिजली का बल्ब और दो पतंगे- गोविंद गुंजन, नृत्य और अनुष्ठान- विनय उपाध्याय। रेखाचित्र- समझदारों की दुनिया में वह पग्गल- ज्योति जैन। व्यंग्य- बड़ा चोर: छोटा चोर- डॉ. गिरिराज शरण अग्रवाल, हॉस्पिटल का इंस्पेक्शन- डॉ. मुकेश 'असीमित'। शहरों की रूह- अमेरिका यात्रा के बहाने- डॉ. जसविन्दर कौर बिन्द्रा। ग़ज़ल- जय चक्रवर्ती, सत्यशील राम त्रिपाठी। आख़िरी पन्ना। आवरण चित्र- पंकज सुबीर, डिज़ायनिंग सनी गोस्वामी, शहरयार अमजद ख़ान, सुनील पेरवाल, शिवम गोस्वामी, आपकी प्रतिक्रियाओं का संपादक मंडल को इंतज़ार रहेगा। पत्रिका का प्रिंट संस्क़रण भी समय पर आपके हाथों में होगा।&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;ऑनलाइन पढ़ें पत्रिका- &lt;/p&gt;  &lt;p&gt;&lt;a href="https://www.slideshare.net/slideshow/vibhom-swar-patrika-october-december-2024-pdf/272450782"&gt;https://www.slideshare.net/slideshow/vibhom-swar-patrika-october-december-2024-pdf/272450782&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;&lt;a href="http://www.vibhom.com/pdf/july_sep_2024.pdf"&gt;http://www.vibhom.com/pdf/oct_dec_2024.pdf&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;वेबसाइट से डाउनलोड करें&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;&lt;a href="http://www.vibhom.com/vibhomswar.html"&gt;http://www.vibhom.com/vibhomswar.html&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;फेस बुक पर&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;&lt;a href="https://www.facebook.com/Vibhomswar"&gt;https://www.facebook.com/Vibhomswar&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;ब्लॉग पर पढ़ें- &lt;/p&gt;  &lt;p&gt;&lt;a href="http://shabdsudha.blogspot.com/"&gt;http://shabdsudha.blogspot.com/&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;&lt;a href="http://vibhomswar.blogspot.com/"&gt;http://vibhomswar.blogspot.com/&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;कविता कोश पर पढ़ें&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;&lt;a href="http://kavitakosh.org/kk/विभोम_स्वर_पत्रिका"&gt;http://kavitakosh.org/kk/विभोम_स्वर_पत्रिका&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;</description><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total><enclosure length="8689916" type="application/pdf" url="http://www.vibhom.com/pdf/july_sep_2024.pdf"/><itunes:explicit/><itunes:subtitle>मित्रो, संरक्षक तथा प्रमुख संपादक सुधा ओम ढींगरा एवं संपादक पंकज सुबीर के संपादन में वैश्विक हिन्दी चिंतन की अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका विभोम-स्वर का वर्ष : 9, अंक : 35, अक्टूबर-दिसम्बर 2024 अंक अब उपलब्ध है। इस अंक में शामिल है- संपादकीय। मित्रनामा। साक्षात्कार- साहित्य-व्यवहार, साहित्य-व्यापार की ओर बढ़ता दिखता है, कहानीकार-उपन्यासकार महेश कटारे से आकाश माथुर की बातचीत। विस्मृति के द्वार- अभिव्यक्ति की प्रबलता- अर्चना पैन्यूली। कथा-कहानी- एक दरवाज़ा नया सा- विकेश निझावन, ज़रा सा...डांस- टीना रावल, लम्हों के साए- अरुणा सब्बरवाल, पेंटिंग्स- जिज्ञासा सिंह, बिगड़ी हुई लड़की- शराफ़त अली ख़ान, जब उनसे मुलाकात हो गई- डॉ. विमला व्यास, करवा चौथ- कादम्बरी मेहरा, अन्तर्मन में नागफ़णी- रेणु गुप्ता। भाषांतर- इतनी-सी बात (पंजाबी कहानी), मूल लेखक- बलीजीत, अनुवाद- गीता वर्मा। लघुकथा- मिडिल क्लास स्त्री-पुरुष का प्रेम उत्सव- सन्दीप तोमर, पैरों तले ज़मीन- मनमोहन चौरे, मध्यम- मनप्रीत मखीजा, लाल बत्ती- कमलेश भारतीय। ललित निबंध- एक बिजली का बल्ब और दो पतंगे- गोविंद गुंजन, नृत्य और अनुष्ठान- विनय उपाध्याय। रेखाचित्र- समझदारों की दुनिया में वह पग्गल- ज्योति जैन। व्यंग्य- बड़ा चोर: छोटा चोर- डॉ. गिरिराज शरण अग्रवाल, हॉस्पिटल का इंस्पेक्शन- डॉ. मुकेश 'असीमित'। शहरों की रूह- अमेरिका यात्रा के बहाने- डॉ. जसविन्दर कौर बिन्द्रा। ग़ज़ल- जय चक्रवर्ती, सत्यशील राम त्रिपाठी। आख़िरी पन्ना। आवरण चित्र- पंकज सुबीर, डिज़ायनिंग सनी गोस्वामी, शहरयार अमजद ख़ान, सुनील पेरवाल, शिवम गोस्वामी, आपकी प्रतिक्रियाओं का संपादक मंडल को इंतज़ार रहेगा। पत्रिका का प्रिंट संस्क़रण भी समय पर आपके हाथों में होगा। ऑनलाइन पढ़ें पत्रिका- https://www.slideshare.net/slideshow/vibhom-swar-patrika-october-december-2024-pdf/272450782 http://www.vibhom.com/pdf/oct_dec_2024.pdf वेबसाइट से डाउनलोड करें http://www.vibhom.com/vibhomswar.html फेस बुक पर https://www.facebook.com/Vibhomswar ब्लॉग पर पढ़ें- http://shabdsudha.blogspot.com/ http://vibhomswar.blogspot.com/ कविता कोश पर पढ़ें http://kavitakosh.org/kk/विभोम_स्वर_पत्रिका</itunes:subtitle><itunes:author>noreply@blogger.com (Unknown)</itunes:author><itunes:summary>मित्रो, संरक्षक तथा प्रमुख संपादक सुधा ओम ढींगरा एवं संपादक पंकज सुबीर के संपादन में वैश्विक हिन्दी चिंतन की अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका विभोम-स्वर का वर्ष : 9, अंक : 35, अक्टूबर-दिसम्बर 2024 अंक अब उपलब्ध है। इस अंक में शामिल है- संपादकीय। मित्रनामा। साक्षात्कार- साहित्य-व्यवहार, साहित्य-व्यापार की ओर बढ़ता दिखता है, कहानीकार-उपन्यासकार महेश कटारे से आकाश माथुर की बातचीत। विस्मृति के द्वार- अभिव्यक्ति की प्रबलता- अर्चना पैन्यूली। कथा-कहानी- एक दरवाज़ा नया सा- विकेश निझावन, ज़रा सा...डांस- टीना रावल, लम्हों के साए- अरुणा सब्बरवाल, पेंटिंग्स- जिज्ञासा सिंह, बिगड़ी हुई लड़की- शराफ़त अली ख़ान, जब उनसे मुलाकात हो गई- डॉ. विमला व्यास, करवा चौथ- कादम्बरी मेहरा, अन्तर्मन में नागफ़णी- रेणु गुप्ता। भाषांतर- इतनी-सी बात (पंजाबी कहानी), मूल लेखक- बलीजीत, अनुवाद- गीता वर्मा। लघुकथा- मिडिल क्लास स्त्री-पुरुष का प्रेम उत्सव- सन्दीप तोमर, पैरों तले ज़मीन- मनमोहन चौरे, मध्यम- मनप्रीत मखीजा, लाल बत्ती- कमलेश भारतीय। ललित निबंध- एक बिजली का बल्ब और दो पतंगे- गोविंद गुंजन, नृत्य और अनुष्ठान- विनय उपाध्याय। रेखाचित्र- समझदारों की दुनिया में वह पग्गल- ज्योति जैन। व्यंग्य- बड़ा चोर: छोटा चोर- डॉ. गिरिराज शरण अग्रवाल, हॉस्पिटल का इंस्पेक्शन- डॉ. मुकेश 'असीमित'। शहरों की रूह- अमेरिका यात्रा के बहाने- डॉ. जसविन्दर कौर बिन्द्रा। ग़ज़ल- जय चक्रवर्ती, सत्यशील राम त्रिपाठी। आख़िरी पन्ना। आवरण चित्र- पंकज सुबीर, डिज़ायनिंग सनी गोस्वामी, शहरयार अमजद ख़ान, सुनील पेरवाल, शिवम गोस्वामी, आपकी प्रतिक्रियाओं का संपादक मंडल को इंतज़ार रहेगा। पत्रिका का प्रिंट संस्क़रण भी समय पर आपके हाथों में होगा। ऑनलाइन पढ़ें पत्रिका- https://www.slideshare.net/slideshow/vibhom-swar-patrika-october-december-2024-pdf/272450782 http://www.vibhom.com/pdf/oct_dec_2024.pdf वेबसाइट से डाउनलोड करें http://www.vibhom.com/vibhomswar.html फेस बुक पर https://www.facebook.com/Vibhomswar ब्लॉग पर पढ़ें- http://shabdsudha.blogspot.com/ http://vibhomswar.blogspot.com/ कविता कोश पर पढ़ें http://kavitakosh.org/kk/विभोम_स्वर_पत्रिका</itunes:summary></item><item><title>शोध, शोध, समीक्षा तथा आलोचना की अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका शिवना साहित्यिकी का वर्ष : 9, अंक : 34, जुलाई-सितम्बर 2024 अंक</title><link>http://subeerin.blogspot.com/2024/07/9-34-2024_22.html</link><author>noreply@blogger.com (Unknown)</author><pubDate>Mon, 22 Jul 2024 10:05:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-7637784963342720274.post-2574040944469240322</guid><description>&lt;p&gt;मित्रों, संरक्षक एवं सलाहकार संपादक- सुधा ओम ढींगरा, संपादक- पंकज सुबीर, कार्यकारी संपादक- शहरयार, सह संपादक- शैलेन्द्र शरण, आकाश माथुर के संपादन में शोध, शोध, समीक्षा तथा आलोचना की अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका शिवना साहित्यिकी का वर्ष : 9, अंक : 34, जुलाई-सितम्बर 2024 अंक अब उपलब्ध है। &lt;/p&gt;  &lt;p&gt;इस अंक में शामिल हैं- &lt;/p&gt;  &lt;p&gt;आवरण कविता, हम तो निर्जन के खंडहर हैं- बलबीर सिंह 'रंग'। &lt;/p&gt;  &lt;p&gt;संपादकीय - शहरयार। &lt;/p&gt;  &lt;p&gt;व्यंग्य चित्र- काजल कुमार। &lt;/p&gt;  &lt;p&gt;शोध आलेख- कठिनतर होते समय में मदन कश्यप की कविताएँ, उमाशंकर चौधरी। &lt;/p&gt;  &lt;p&gt;शोध आलोचना- काँधों पर घर, समीक्षक : अमिता, लेखक : प्रज्ञा, हेति सुकन्याः अकथ कथा- समीक्षक : सुमन बाजपेयी, लेखक : सिनीवाली, अन्तिम नीबू- समीक्षक : डॉ. जसविन्दर कौर बिन्द्रा, लेखक : उदय प्रकाश, कथा सप्तक - अनिलप्रभा कुमार- समीक्षक : डॉ. मनोज मोक्षेंद्र, संपादक : आकाश माथुर, और तुझे क्या चाहिए- समीक्षक : सरोजिनी नौटियाल, लेखक : उषा राजे सक्सेना। &lt;/p&gt;  &lt;p&gt;केंद्र में पुस्तक- चलो फिर से शुरू करें, समीक्षक : प्रकाश कान्त, विजय कुमार तिवारी, अदिति सिंह भदौरिया, लेखक : सुधा ओम ढींगरा, डोर अंजानी सी- समीक्षक : दीपक गिरकर, विजय कुमार तिवारी, अनीता सक्सेना, लेखक : ममता त्यागी, ऐ वहशते दिल क्या करूँ- समीक्षक : डॉ. मधु सन्धु, जसविन्दर कौर बिन्द्रा, आकाश माथुर, लेखक : पारुल सिंह, ज़ोया देसाई कॉटेज- समीक्षक : प्रकाश कान्त, जसविन्दर कौर बिन्द्रा, रमेश शर्मा, लेखक : पंकज सुबीर।&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;पुस्तक समीक्षा- एकांत का इकतारा, समीक्षक : ज्योति जैन, लेखक : शिरीन भावसार, चुप क्यों हो बसंती- समीक्षक : दीपक गिरकर, लेखक : जयंती रंगनाथन, पंख से छूटा- समीक्षक : दीपक गिरकर, लेखक : प्रज्ञा पांडेय, कथा सप्तक - दिव्या माथुर, समीक्षक : रेनू यादव, संपादक : आकाश माथुर, नीलकंठी प्रार्थनाएँ- समीक्षक : डॉ. रंजना गुप्ता, लेखक : रघुवीर शर्मा, देह-गाथा- समीक्षक : रेखा भाटिया, लेखक : पंकज सुबीर, रेखांकन : अनिता दुबे, श्वेत योद्धा- समीक्षक : दीपक गिरकर, लेखक : ज्योति जैन, सभ्यता के अवशेष- समीक्षक : गोविंद गुंजन, लेखक : क्रांति कनाटे, मुझे पंख दे दो- समीक्षक : रमेश शर्मा, लेखक : इला सिंह, नकटौरा- समीक्षक : डॉ. उमा मेहता, लेखक : चित्रा मुद्गल, करवाचौथी औरतें- समीक्षक : निर्मला डोसी, लेखक : सुधा अरोड़ा, संभावनाओं का शहर- समीक्षक : डॉ. नीलोत्पल रमेश, लेखक : सुशील स्वतंत्र। आवरण चित्र- पंकज सुबीर, डिज़ायनिंग- सनी गोस्वामी, सुनील पेरवाल, शिवम गोस्वामी। आपकी प्रतिक्रियाओं का संपादक मंडल को इंतज़ार रहेगा। पत्रिका का प्रिंट संस्करण भी समय पर आपके हाथों में होगा। &lt;/p&gt;  &lt;p&gt;ऑन लाइन पढ़ें-&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;&lt;a href="https://www.slideshare.net/slideshow/shivna-sahityiki-july-september-2024-pdf/270395072"&gt;https://www.slideshare.net/slideshow/shivna-sahityiki-july-september-2024-pdf/270395072&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;&lt;a href="http://www.vibhom.com/shivna/jul_sep_2024.pdf"&gt;http://www.vibhom.com/shivna/jul_sep_2024.pdf&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;साफ़्ट कॉपी पीडीऍफ यहाँ से डाउनलोड करें &lt;/p&gt;  &lt;p&gt;&lt;a href="http://www.vibhom.com/shivnasahityiki.html"&gt;http://www.vibhom.com/shivnasahityiki.html&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;फेसबुक पर- &lt;a href="https://www.facebook.com/shivnasahityiki/"&gt;https://www.facebook.com/shivnasahityiki/&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;ब्लॉग- &lt;a href="http://shivnaprakashan.blogspot.com/"&gt;http://shivnaprakashan.blogspot.com/&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;</description><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total><enclosure length="10023297" type="application/pdf" url="http://www.vibhom.com/shivna/jul_sep_2024.pdf"/><itunes:explicit/><itunes:subtitle>मित्रों, संरक्षक एवं सलाहकार संपादक- सुधा ओम ढींगरा, संपादक- पंकज सुबीर, कार्यकारी संपादक- शहरयार, सह संपादक- शैलेन्द्र शरण, आकाश माथुर के संपादन में शोध, शोध, समीक्षा तथा आलोचना की अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका शिवना साहित्यिकी का वर्ष : 9, अंक : 34, जुलाई-सितम्बर 2024 अंक अब उपलब्ध है। इस अंक में शामिल हैं- आवरण कविता, हम तो निर्जन के खंडहर हैं- बलबीर सिंह 'रंग'। संपादकीय - शहरयार। व्यंग्य चित्र- काजल कुमार। शोध आलेख- कठिनतर होते समय में मदन कश्यप की कविताएँ, उमाशंकर चौधरी। शोध आलोचना- काँधों पर घर, समीक्षक : अमिता, लेखक : प्रज्ञा, हेति सुकन्याः अकथ कथा- समीक्षक : सुमन बाजपेयी, लेखक : सिनीवाली, अन्तिम नीबू- समीक्षक : डॉ. जसविन्दर कौर बिन्द्रा, लेखक : उदय प्रकाश, कथा सप्तक - अनिलप्रभा कुमार- समीक्षक : डॉ. मनोज मोक्षेंद्र, संपादक : आकाश माथुर, और तुझे क्या चाहिए- समीक्षक : सरोजिनी नौटियाल, लेखक : उषा राजे सक्सेना। केंद्र में पुस्तक- चलो फिर से शुरू करें, समीक्षक : प्रकाश कान्त, विजय कुमार तिवारी, अदिति सिंह भदौरिया, लेखक : सुधा ओम ढींगरा, डोर अंजानी सी- समीक्षक : दीपक गिरकर, विजय कुमार तिवारी, अनीता सक्सेना, लेखक : ममता त्यागी, ऐ वहशते दिल क्या करूँ- समीक्षक : डॉ. मधु सन्धु, जसविन्दर कौर बिन्द्रा, आकाश माथुर, लेखक : पारुल सिंह, ज़ोया देसाई कॉटेज- समीक्षक : प्रकाश कान्त, जसविन्दर कौर बिन्द्रा, रमेश शर्मा, लेखक : पंकज सुबीर। पुस्तक समीक्षा- एकांत का इकतारा, समीक्षक : ज्योति जैन, लेखक : शिरीन भावसार, चुप क्यों हो बसंती- समीक्षक : दीपक गिरकर, लेखक : जयंती रंगनाथन, पंख से छूटा- समीक्षक : दीपक गिरकर, लेखक : प्रज्ञा पांडेय, कथा सप्तक - दिव्या माथुर, समीक्षक : रेनू यादव, संपादक : आकाश माथुर, नीलकंठी प्रार्थनाएँ- समीक्षक : डॉ. रंजना गुप्ता, लेखक : रघुवीर शर्मा, देह-गाथा- समीक्षक : रेखा भाटिया, लेखक : पंकज सुबीर, रेखांकन : अनिता दुबे, श्वेत योद्धा- समीक्षक : दीपक गिरकर, लेखक : ज्योति जैन, सभ्यता के अवशेष- समीक्षक : गोविंद गुंजन, लेखक : क्रांति कनाटे, मुझे पंख दे दो- समीक्षक : रमेश शर्मा, लेखक : इला सिंह, नकटौरा- समीक्षक : डॉ. उमा मेहता, लेखक : चित्रा मुद्गल, करवाचौथी औरतें- समीक्षक : निर्मला डोसी, लेखक : सुधा अरोड़ा, संभावनाओं का शहर- समीक्षक : डॉ. नीलोत्पल रमेश, लेखक : सुशील स्वतंत्र। आवरण चित्र- पंकज सुबीर, डिज़ायनिंग- सनी गोस्वामी, सुनील पेरवाल, शिवम गोस्वामी। आपकी प्रतिक्रियाओं का संपादक मंडल को इंतज़ार रहेगा। पत्रिका का प्रिंट संस्करण भी समय पर आपके हाथों में होगा। ऑन लाइन पढ़ें- https://www.slideshare.net/slideshow/shivna-sahityiki-july-september-2024-pdf/270395072 http://www.vibhom.com/shivna/jul_sep_2024.pdf साफ़्ट कॉपी पीडीऍफ यहाँ से डाउनलोड करें http://www.vibhom.com/shivnasahityiki.html फेसबुक पर- https://www.facebook.com/shivnasahityiki/ ब्लॉग- http://shivnaprakashan.blogspot.com/</itunes:subtitle><itunes:author>noreply@blogger.com (Unknown)</itunes:author><itunes:summary>मित्रों, संरक्षक एवं सलाहकार संपादक- सुधा ओम ढींगरा, संपादक- पंकज सुबीर, कार्यकारी संपादक- शहरयार, सह संपादक- शैलेन्द्र शरण, आकाश माथुर के संपादन में शोध, शोध, समीक्षा तथा आलोचना की अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका शिवना साहित्यिकी का वर्ष : 9, अंक : 34, जुलाई-सितम्बर 2024 अंक अब उपलब्ध है। इस अंक में 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लेखक : शिरीन भावसार, चुप क्यों हो बसंती- समीक्षक : दीपक गिरकर, लेखक : जयंती रंगनाथन, पंख से छूटा- समीक्षक : दीपक गिरकर, लेखक : प्रज्ञा पांडेय, कथा सप्तक - दिव्या माथुर, समीक्षक : रेनू यादव, संपादक : आकाश माथुर, नीलकंठी प्रार्थनाएँ- समीक्षक : डॉ. रंजना गुप्ता, लेखक : रघुवीर शर्मा, देह-गाथा- समीक्षक : रेखा भाटिया, लेखक : पंकज सुबीर, रेखांकन : अनिता दुबे, श्वेत योद्धा- समीक्षक : दीपक गिरकर, लेखक : ज्योति जैन, सभ्यता के अवशेष- समीक्षक : गोविंद गुंजन, लेखक : क्रांति कनाटे, मुझे पंख दे दो- समीक्षक : रमेश शर्मा, लेखक : इला सिंह, नकटौरा- समीक्षक : डॉ. उमा मेहता, लेखक : चित्रा मुद्गल, करवाचौथी औरतें- समीक्षक : निर्मला डोसी, लेखक : सुधा अरोड़ा, संभावनाओं का शहर- समीक्षक : डॉ. नीलोत्पल रमेश, लेखक : सुशील स्वतंत्र। आवरण चित्र- पंकज सुबीर, डिज़ायनिंग- सनी गोस्वामी, सुनील पेरवाल, शिवम गोस्वामी। आपकी प्रतिक्रियाओं का संपादक मंडल को इंतज़ार रहेगा। पत्रिका का प्रिंट संस्करण भी समय पर आपके हाथों में होगा। ऑन लाइन पढ़ें- 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साक्षात्कार- जीवन का आंतरिक संसार केवल लेखक ही अपनी संवेदनशीलता और अंतरात्मा से व्यक्त कर पाता है, कहानीकार-उपन्यासकार उर्मिला शिरीष से आकाश माथुर की बातचीत। विस्मृति के द्वार- मैं और मेरा समय..., तेजेन्द्र शर्मा एम. बी. ई.। कथा-कहानी- मारियूपोल की ज़ुबानी, मंजुश्री, चाबी- स्वाति तिवारी, क्रूज़ पर उपजा प्रेम, ममता त्यागी, मृत्यु धुन, हरभगवान चावला, कार्ड, पूजा गुप्ता, नहीं उतारूँगी पायड़ी, रजनी शर्मा बस्तरिया, सीढ़ियाँ, विजय कुमार तिवारी, पेइंग गेस्ट, दीपक गिरकर। भाषांतर- ममा ! मुझे भी डेट पर जाना है !, पंजाबी कहानी, मूल लेखक : अजमेर सिद्धु, अनुवाद : नीलम शर्मा 'अंशु' । लघुकथा- भय की मृत्यु, ज्ञानदेव मुकेश, मॉर्निंग टी, मृत्युंजय कुमार मनोज, सॉरी, राजेश पाठक। ललित निबंध- फेसबुक मोहल्ला, डॉ. वंदना मुकेश। व्यंग्य- शू का शो, मूल रचना : इब्न-ए-इंशा, अनुवाद : अखतर अली। शहरों की रूह- एडिनबरा की सड़कों पर, बीस हज़ार कदम, पल्लवी त्रिवेदी। आख़िरी पन्ना। आवरण चित्र- पंकज सुबीर, डिज़ायनिंग सनी गोस्वामी, शहरयार अमजद ख़ान, सुनील पेरवाल, शिवम गोस्वामी, आपकी प्रतिक्रियाओं का संपादक मंडल को इंतज़ार रहेगा। पत्रिका का प्रिंट संस्क़रण भी समय पर आपके हाथों में होगा।&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;ऑनलाइन पढ़ें पत्रिका- &lt;/p&gt;  &lt;p&gt;&lt;a href="https://www.slideshare.net/slideshow/vibhom-swar-july-september-2024-magazine-pdf/270218028"&gt;https://www.slideshare.net/slideshow/vibhom-swar-july-september-2024-magazine-pdf/270218028&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;&lt;a href="http://www.vibhom.com/pdf/july_sep_2024.pdf"&gt;http://www.vibhom.com/pdf/july_sep_2024.pdf&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;वेबसाइट से डाउनलोड करें&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;&lt;a href="http://www.vibhom.com/vibhomswar.html"&gt;http://www.vibhom.com/vibhomswar.html&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;फेस बुक पर&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;&lt;a href="https://www.facebook.com/Vibhomswar"&gt;https://www.facebook.com/Vibhomswar&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;ब्लॉग पर पढ़ें- &lt;/p&gt;  &lt;p&gt;&lt;a href="http://shabdsudha.blogspot.com/"&gt;http://shabdsudha.blogspot.com/&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;&lt;a href="http://vibhomswar.blogspot.com/"&gt;http://vibhomswar.blogspot.com/&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;कविता कोश पर पढ़ें&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;&lt;a href="http://kavitakosh.org/kk/विभोम_स्वर_पत्रिका"&gt;http://kavitakosh.org/kk/विभोम_स्वर_पत्रिका&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;</description><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total><enclosure length="8689916" type="application/pdf" url="http://www.vibhom.com/pdf/july_sep_2024.pdf"/><itunes:explicit/><itunes:subtitle>मित्रो, संरक्षक तथा प्रमुख संपादक सुधा ओम ढींगरा एवं संपादक पंकज सुबीर के संपादन में वैश्विक हिन्दी चिंतन की अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका विभोम-स्वर का वर्ष : 9, अंक : 34, जुलाई-सितम्बर 2024 अंक अब उपलब्ध है। इस अंक में शामिल है- संपादकीय, मित्रनामा, साक्षात्कार- जीवन का आंतरिक संसार केवल लेखक ही अपनी संवेदनशीलता और अंतरात्मा से व्यक्त कर पाता है, कहानीकार-उपन्यासकार उर्मिला शिरीष से आकाश माथुर की बातचीत। विस्मृति के द्वार- मैं और मेरा समय..., तेजेन्द्र शर्मा एम. बी. ई.। कथा-कहानी- मारियूपोल की ज़ुबानी, मंजुश्री, चाबी- स्वाति तिवारी, क्रूज़ पर उपजा प्रेम, ममता त्यागी, मृत्यु धुन, हरभगवान चावला, कार्ड, पूजा गुप्ता, नहीं उतारूँगी पायड़ी, रजनी शर्मा बस्तरिया, सीढ़ियाँ, विजय कुमार तिवारी, पेइंग गेस्ट, दीपक गिरकर। भाषांतर- ममा ! मुझे भी डेट पर जाना है !, पंजाबी कहानी, मूल लेखक : अजमेर सिद्धु, अनुवाद : नीलम शर्मा 'अंशु' । लघुकथा- भय की मृत्यु, ज्ञानदेव मुकेश, मॉर्निंग टी, मृत्युंजय कुमार मनोज, सॉरी, राजेश पाठक। ललित निबंध- फेसबुक मोहल्ला, डॉ. वंदना मुकेश। व्यंग्य- शू का शो, मूल रचना : इब्न-ए-इंशा, अनुवाद : अखतर अली। शहरों की रूह- एडिनबरा की सड़कों पर, बीस हज़ार कदम, पल्लवी त्रिवेदी। आख़िरी पन्ना। आवरण चित्र- पंकज सुबीर, डिज़ायनिंग सनी गोस्वामी, शहरयार अमजद ख़ान, सुनील पेरवाल, शिवम गोस्वामी, आपकी प्रतिक्रियाओं का संपादक मंडल को इंतज़ार रहेगा। पत्रिका का प्रिंट संस्क़रण भी समय पर आपके हाथों में होगा। ऑनलाइन पढ़ें पत्रिका- https://www.slideshare.net/slideshow/vibhom-swar-july-september-2024-magazine-pdf/270218028 http://www.vibhom.com/pdf/july_sep_2024.pdf वेबसाइट से डाउनलोड करें http://www.vibhom.com/vibhomswar.html फेस बुक पर https://www.facebook.com/Vibhomswar ब्लॉग पर पढ़ें- http://shabdsudha.blogspot.com/ http://vibhomswar.blogspot.com/ कविता कोश पर पढ़ें http://kavitakosh.org/kk/विभोम_स्वर_पत्रिका</itunes:subtitle><itunes:author>noreply@blogger.com (Unknown)</itunes:author><itunes:summary>मित्रो, संरक्षक तथा प्रमुख संपादक सुधा ओम ढींगरा एवं संपादक पंकज सुबीर के संपादन में वैश्विक हिन्दी चिंतन की अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका विभोम-स्वर का वर्ष : 9, अंक : 34, जुलाई-सितम्बर 2024 अंक अब उपलब्ध है। इस अंक में शामिल है- संपादकीय, मित्रनामा, साक्षात्कार- जीवन का आंतरिक संसार केवल लेखक ही अपनी संवेदनशीलता और अंतरात्मा से व्यक्त कर पाता है, कहानीकार-उपन्यासकार उर्मिला शिरीष से आकाश माथुर की बातचीत। विस्मृति के द्वार- मैं और मेरा समय..., तेजेन्द्र शर्मा एम. बी. ई.। कथा-कहानी- मारियूपोल की ज़ुबानी, मंजुश्री, चाबी- स्वाति तिवारी, क्रूज़ पर उपजा प्रेम, ममता त्यागी, मृत्यु धुन, हरभगवान चावला, कार्ड, पूजा गुप्ता, नहीं उतारूँगी पायड़ी, रजनी शर्मा बस्तरिया, सीढ़ियाँ, विजय कुमार तिवारी, पेइंग गेस्ट, दीपक गिरकर। भाषांतर- ममा ! मुझे भी डेट पर जाना है !, पंजाबी कहानी, मूल लेखक : अजमेर सिद्धु, अनुवाद : नीलम शर्मा 'अंशु' । लघुकथा- भय की मृत्यु, ज्ञानदेव मुकेश, मॉर्निंग टी, मृत्युंजय कुमार मनोज, सॉरी, राजेश पाठक। ललित निबंध- फेसबुक मोहल्ला, डॉ. वंदना मुकेश। व्यंग्य- शू का शो, मूल रचना : इब्न-ए-इंशा, अनुवाद : अखतर अली। शहरों की रूह- एडिनबरा की सड़कों पर, बीस हज़ार कदम, पल्लवी त्रिवेदी। आख़िरी पन्ना। आवरण चित्र- पंकज सुबीर, डिज़ायनिंग सनी गोस्वामी, शहरयार अमजद ख़ान, सुनील पेरवाल, शिवम गोस्वामी, आपकी प्रतिक्रियाओं का संपादक मंडल को इंतज़ार रहेगा। पत्रिका का प्रिंट संस्क़रण भी समय पर आपके हाथों में होगा। ऑनलाइन पढ़ें पत्रिका- https://www.slideshare.net/slideshow/vibhom-swar-july-september-2024-magazine-pdf/270218028 http://www.vibhom.com/pdf/july_sep_2024.pdf वेबसाइट से डाउनलोड करें http://www.vibhom.com/vibhomswar.html फेस बुक पर https://www.facebook.com/Vibhomswar ब्लॉग पर पढ़ें- http://shabdsudha.blogspot.com/ http://vibhomswar.blogspot.com/ कविता कोश पर पढ़ें http://kavitakosh.org/kk/विभोम_स्वर_पत्रिका</itunes:summary></item><item><title>शोध, शोध, समीक्षा तथा आलोचना की अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका शिवना साहित्यिकी का वर्ष : 9, अंक : 33 अप्रैल-जून 2024 अंक</title><link>http://subeerin.blogspot.com/2024/04/9-33-2024_23.html</link><author>noreply@blogger.com (Unknown)</author><pubDate>Tue, 23 Apr 2024 10:44:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-7637784963342720274.post-351953877380364458</guid><description>&lt;p&gt;मित्रों, संरक्षक एवं सलाहकार संपादक- सुधा ओम ढींगरा, संपादक- पंकज सुबीर, कार्यकारी संपादक- शहरयार, सह संपादक- शैलेन्द्र शरण, आकाश माथुर के संपादन में शोध, शोध, समीक्षा तथा आलोचना की अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका शिवना साहित्यिकी का वर्ष : 9, अंक : 33 अप्रैल-जून 2024 अंक अब उपलब्ध है। इस अंक में शामिल हैं- संपादकीय / शहरयार / व्यंग्य चित्र / काजल कुमार, शोध आलोचना- संदिग्ध / मनोज मोक्षेन्द्र / तेजेन्द्र शर्मा, समय के बाहर पतझर है / राजेश सक्सेना / नीलोत्पल। इन दिनों जो मैंने पढ़ा- सुधा ओम ढींगरा- पॉर्न स्टार और अन्य कहानियाँ / वीणा वत्सल सिंह, एक्स वाई का ज़ेड / प्रभात रंजन, देह गाथा / पंकज सुबीर, अनीता दुबे। पुस्तक समीक्षा- चलो फिर से शुरू करें / अनीता सक्सेना / सुधा ओम ढींगरा, पंख से छूटा / अभिषेक चटर्जी / प्रज्ञा पांडेय, थके पाँव से बारह कोस / डॉ. नीलोत्पल रमेश / नीरज नीर, सर्जक, आलोचक और कोशकार डॉ. मधु संधु / डॉ. राकेश प्रेम / डॉ. दीप्ति, आधी दुनिया पूरा आसमान / राधेश्याम भारतीय / ब्रह्म दत्त शर्मा, जंगल / नीरज नीर / अशोक प्रियदर्शी, ज़ोया देसाई कॉटेज / अनीता सक्सेना / पंकज सुबीर, अरविंद की चुनिंदा कहानियाँ / रूपसिंह चन्देल / डॉ. अरविंद, ऐ वहशते-दिल क्या करूँ / पंकज सुबीर / पारुल सिंह, देह-गाथा / गीताश्री / पंकज सुबीर, मुझे सूरज चाहिए / पारुल सिंह / आकाश माथुर, डोर अंजानी सी / मीरा गोयल / ममता त्यागी, लौट-लौट कर आते हैं परिंदे / गोविन्द सेन / राजेंद्र नागदेव, कि आप शुतुरमुर्ग बने रहें / ब्रजेश कानूनगो / शांतिलाल जैन, ब्रजेश कानूनगो चयनित व्यंग्य रचनाएँ / ओम वर्मा / ब्रजेश कानूनगो, कुछ यूँ हुआ उस रात / रतन चंद 'रत्नेश' / प्रगति गुप्ता। शिवना प्रकाशन की घोषणाएँ। नई पुस्तक- टूटी पेंसिल / हंसा दीप, सुनो नीलगिरी / शैली बक्षी खड़कोतकर, पीली पर्ची / शिवेन्दु श्रीवास्तव। शोध आलेख- डॉ. शिवेन्द्र कुमार मिश्र, कमलेश, सुनील कुमार, सना फ़ातिमा, कु. मोनिका, देवेन्द्र कुमार, शुभम कुमार, स्मृति कुमारी, डॉ. मीनाक्षी राना, माने अनिल लक्ष्मण, घनश्याम साहू, इन्दुबाला, डॉ. जागृति बहन ए पटेल, प्रकाश महादेव निकम, पिंकी देवी, कुलदीप कुमार, पिंकी, पल्लवी देवी, डॉ. रीता दूबे, डॉ. हेमंतकुमार ए पटेल, डॉ. सीमा रानी, ईशान चौहान, प्रेरणा त्यागी, लक्ष्मीकांत नागर, नागेन्द्र रावत, राजपाल सिंह नेगी, मेधा भट्ट, डॉ. मंटू कुमार साव, डॉ. पीयूष कमल, अंकित उछोली, अनुपम सिंह, नवनीत कुमार सिंह, डॉ. अरुण कुमार, डॉ. पूजा, डॉ. सविता, षमीना. टी, शैलेन्द्र जाटव, अभिषेक बेंजवाल, आयुषी थलवाल, डॉ. दीप सिंह, मनीषा देवी, जितेन्द्र कुमार कुशवाहा, आशा शौग्राक्पम, राजेश कुमार, डॉ. मेरली. के.पुन्नुस, डॉ. राजेश कुमार, अमन वर्मा, प्रो. राखी उपाध्याय, अरुणिमा ए.एम, डॉ.संतोष गिरहे, अभिरामी सी जे, डॉ. गिरीश कुमार के के, डॉ. ज्योति सिंह, ममता देवी, श्वेता कपूर, रमेश वर्मा, विवेक नैथानी, सागर जोशी एवं देवेन्द्र सिंह, शिबानी राजभूषण, डॉ. ज्योति, डॉ. धीरेन्द्र कुमार श्रीवास्तव, भाष्करानन्द पन्त, डॉ. अमित गौतम, डॉ. मनीषा, डॉ. राजेश कुमार, सौरभ कुमार सिंह, दीपक सिंह, आयुषी थलवाल, प्रो. चंद्रकांत सिंह, आशीष कुमार मौर्य। आवरण चित्र- राहुल पुरबिया, डिज़ायनिंग- सनी गोस्वामी, सुनील पेरवाल, शिवम गोस्वामी। आपकी प्रतिक्रियाओं का संपादक मंडल को इंतज़ार रहेगा। पत्रिका का प्रिंट संस्करण भी समय पर आपके हाथों में होगा। &lt;/p&gt;  &lt;p&gt;ऑन लाइन पढ़ें-&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;&lt;a href="https://www.slideshare.net/slideshow/shivna-sahityiki-april-june-2024-magazine/267443653"&gt;https://www.slideshare.net/slideshow/shivna-sahityiki-april-june-2024-magazine/267443653&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;&lt;a href="http://www.vibhom.com/shivna/apr_june_2024.pdf"&gt;http://www.vibhom.com/shivna/apr_june_2024.pdf&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;साफ़्ट कॉपी पीडीऍफ यहाँ से डाउनलोड करें &lt;/p&gt;  &lt;p&gt;&lt;a href="http://www.vibhom.com/shivnasahityiki.html"&gt;http://www.vibhom.com/shivnasahityiki.html&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;फेसबुक पर- 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वीणा वत्सल सिंह, एक्स वाई का ज़ेड / प्रभात रंजन, देह गाथा / पंकज सुबीर, अनीता दुबे। पुस्तक समीक्षा- चलो फिर से शुरू करें / अनीता सक्सेना / सुधा ओम ढींगरा, पंख से छूटा / अभिषेक चटर्जी / प्रज्ञा पांडेय, थके पाँव से बारह कोस / डॉ. नीलोत्पल रमेश / नीरज नीर, सर्जक, आलोचक और कोशकार डॉ. मधु संधु / डॉ. राकेश प्रेम / डॉ. दीप्ति, आधी दुनिया पूरा आसमान / राधेश्याम भारतीय / ब्रह्म दत्त शर्मा, जंगल / नीरज नीर / अशोक प्रियदर्शी, ज़ोया देसाई कॉटेज / अनीता सक्सेना / पंकज सुबीर, अरविंद की चुनिंदा कहानियाँ / रूपसिंह चन्देल / डॉ. अरविंद, ऐ वहशते-दिल क्या करूँ / पंकज सुबीर / पारुल सिंह, देह-गाथा / गीताश्री / पंकज सुबीर, मुझे सूरज चाहिए / पारुल सिंह / आकाश माथुर, डोर अंजानी सी / मीरा गोयल / ममता त्यागी, लौट-लौट कर आते हैं परिंदे / गोविन्द सेन / राजेंद्र नागदेव, कि आप शुतुरमुर्ग बने रहें / ब्रजेश कानूनगो / शांतिलाल जैन, ब्रजेश कानूनगो चयनित व्यंग्य रचनाएँ / ओम वर्मा / ब्रजेश कानूनगो, कुछ यूँ हुआ उस रात / रतन चंद 'रत्नेश' / प्रगति गुप्ता। शिवना प्रकाशन की घोषणाएँ। नई पुस्तक- टूटी पेंसिल / हंसा दीप, सुनो नीलगिरी / शैली बक्षी खड़कोतकर, पीली पर्ची / शिवेन्दु श्रीवास्तव। शोध आलेख- डॉ. शिवेन्द्र कुमार मिश्र, कमलेश, सुनील कुमार, सना फ़ातिमा, कु. मोनिका, देवेन्द्र कुमार, शुभम कुमार, स्मृति कुमारी, डॉ. मीनाक्षी राना, माने अनिल लक्ष्मण, घनश्याम साहू, इन्दुबाला, डॉ. जागृति बहन ए पटेल, प्रकाश महादेव निकम, पिंकी देवी, कुलदीप कुमार, पिंकी, पल्लवी देवी, डॉ. रीता दूबे, डॉ. हेमंतकुमार ए पटेल, डॉ. सीमा रानी, ईशान चौहान, प्रेरणा त्यागी, लक्ष्मीकांत नागर, नागेन्द्र रावत, राजपाल सिंह नेगी, मेधा भट्ट, डॉ. मंटू कुमार साव, डॉ. पीयूष कमल, अंकित उछोली, अनुपम सिंह, नवनीत कुमार सिंह, डॉ. अरुण कुमार, डॉ. पूजा, डॉ. सविता, षमीना. टी, शैलेन्द्र जाटव, अभिषेक बेंजवाल, आयुषी थलवाल, डॉ. दीप सिंह, मनीषा देवी, जितेन्द्र कुमार कुशवाहा, आशा शौग्राक्पम, राजेश कुमार, डॉ. मेरली. के.पुन्नुस, डॉ. राजेश कुमार, अमन वर्मा, प्रो. राखी उपाध्याय, अरुणिमा ए.एम, डॉ.संतोष गिरहे, अभिरामी सी जे, डॉ. गिरीश कुमार के के, डॉ. ज्योति सिंह, ममता देवी, श्वेता कपूर, रमेश वर्मा, विवेक नैथानी, सागर जोशी एवं देवेन्द्र सिंह, शिबानी राजभूषण, डॉ. ज्योति, डॉ. धीरेन्द्र कुमार श्रीवास्तव, भाष्करानन्द पन्त, डॉ. अमित गौतम, डॉ. मनीषा, डॉ. राजेश कुमार, सौरभ कुमार सिंह, दीपक सिंह, आयुषी थलवाल, प्रो. चंद्रकांत सिंह, आशीष कुमार मौर्य। आवरण चित्र- राहुल पुरबिया, डिज़ायनिंग- सनी गोस्वामी, सुनील पेरवाल, शिवम गोस्वामी। आपकी प्रतिक्रियाओं का संपादक मंडल को इंतज़ार रहेगा। पत्रिका का प्रिंट संस्करण भी समय पर आपके हाथों में होगा। ऑन लाइन पढ़ें- https://www.slideshare.net/slideshow/shivna-sahityiki-april-june-2024-magazine/267443653 http://www.vibhom.com/shivna/apr_june_2024.pdf साफ़्ट कॉपी पीडीऍफ यहाँ से डाउनलोड करें http://www.vibhom.com/shivnasahityiki.html फेसबुक पर- https://www.facebook.com/shivnasahityiki/ ब्लॉग- http://shivnaprakashan.blogspot.com/</itunes:subtitle><itunes:author>noreply@blogger.com (Unknown)</itunes:author><itunes:summary>मित्रों, संरक्षक एवं सलाहकार संपादक- सुधा ओम ढींगरा, संपादक- पंकज सुबीर, कार्यकारी संपादक- शहरयार, सह संपादक- शैलेन्द्र शरण, आकाश माथुर के संपादन में शोध, शोध, समीक्षा तथा आलोचना की अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका शिवना साहित्यिकी का वर्ष : 9, अंक : 33 अप्रैल-जून 2024 अंक अब उपलब्ध है। इस अंक में शामिल हैं- संपादकीय / शहरयार / व्यंग्य चित्र / काजल कुमार, शोध आलोचना- संदिग्ध / मनोज मोक्षेन्द्र / तेजेन्द्र शर्मा, समय के बाहर पतझर है / राजेश सक्सेना / नीलोत्पल। इन दिनों जो मैंने पढ़ा- सुधा ओम ढींगरा- पॉर्न स्टार और अन्य कहानियाँ / वीणा वत्सल सिंह, एक्स वाई का ज़ेड / प्रभात रंजन, देह गाथा / पंकज सुबीर, अनीता दुबे। पुस्तक समीक्षा- चलो फिर से शुरू करें / अनीता सक्सेना / सुधा ओम ढींगरा, पंख से छूटा / अभिषेक चटर्जी / प्रज्ञा पांडेय, थके पाँव से बारह कोस / डॉ. नीलोत्पल रमेश / नीरज नीर, सर्जक, आलोचक और कोशकार डॉ. मधु संधु / डॉ. राकेश प्रेम / डॉ. दीप्ति, आधी दुनिया पूरा आसमान / राधेश्याम भारतीय / ब्रह्म दत्त शर्मा, जंगल / नीरज नीर / अशोक प्रियदर्शी, ज़ोया देसाई कॉटेज / अनीता सक्सेना / पंकज सुबीर, अरविंद की चुनिंदा कहानियाँ / रूपसिंह चन्देल / डॉ. अरविंद, ऐ वहशते-दिल क्या करूँ / पंकज सुबीर / पारुल सिंह, देह-गाथा / गीताश्री / पंकज सुबीर, मुझे सूरज चाहिए / पारुल सिंह / आकाश माथुर, डोर अंजानी सी / मीरा गोयल / ममता त्यागी, लौट-लौट कर आते हैं परिंदे / गोविन्द सेन / राजेंद्र नागदेव, कि आप शुतुरमुर्ग बने रहें / ब्रजेश कानूनगो / शांतिलाल जैन, ब्रजेश कानूनगो चयनित व्यंग्य रचनाएँ / ओम वर्मा / ब्रजेश कानूनगो, कुछ यूँ हुआ उस रात / रतन चंद 'रत्नेश' / प्रगति गुप्ता। शिवना प्रकाशन की घोषणाएँ। नई पुस्तक- टूटी पेंसिल / हंसा दीप, सुनो नीलगिरी / शैली बक्षी खड़कोतकर, पीली पर्ची / शिवेन्दु श्रीवास्तव। शोध आलेख- डॉ. शिवेन्द्र कुमार मिश्र, कमलेश, सुनील कुमार, सना फ़ातिमा, कु. मोनिका, देवेन्द्र कुमार, शुभम कुमार, स्मृति कुमारी, डॉ. मीनाक्षी राना, माने अनिल लक्ष्मण, घनश्याम साहू, इन्दुबाला, डॉ. जागृति बहन ए पटेल, प्रकाश महादेव निकम, पिंकी देवी, कुलदीप कुमार, पिंकी, पल्लवी देवी, डॉ. रीता दूबे, डॉ. हेमंतकुमार ए पटेल, डॉ. सीमा रानी, ईशान चौहान, प्रेरणा त्यागी, लक्ष्मीकांत नागर, नागेन्द्र रावत, राजपाल सिंह नेगी, मेधा भट्ट, डॉ. मंटू कुमार साव, डॉ. पीयूष कमल, अंकित उछोली, अनुपम सिंह, नवनीत कुमार सिंह, डॉ. अरुण कुमार, डॉ. पूजा, डॉ. सविता, षमीना. टी, शैलेन्द्र जाटव, अभिषेक बेंजवाल, आयुषी थलवाल, डॉ. दीप सिंह, मनीषा देवी, जितेन्द्र कुमार कुशवाहा, आशा शौग्राक्पम, राजेश कुमार, डॉ. मेरली. के.पुन्नुस, डॉ. राजेश कुमार, अमन वर्मा, प्रो. राखी उपाध्याय, अरुणिमा ए.एम, डॉ.संतोष गिरहे, अभिरामी सी जे, डॉ. गिरीश कुमार के के, डॉ. ज्योति सिंह, ममता देवी, श्वेता कपूर, रमेश वर्मा, विवेक नैथानी, सागर जोशी एवं देवेन्द्र सिंह, शिबानी राजभूषण, डॉ. ज्योति, डॉ. धीरेन्द्र कुमार श्रीवास्तव, भाष्करानन्द पन्त, डॉ. अमित गौतम, डॉ. मनीषा, डॉ. राजेश कुमार, सौरभ कुमार सिंह, दीपक सिंह, आयुषी थलवाल, प्रो. चंद्रकांत सिंह, आशीष कुमार मौर्य। आवरण चित्र- राहुल पुरबिया, डिज़ायनिंग- सनी गोस्वामी, सुनील पेरवाल, शिवम गोस्वामी। आपकी प्रतिक्रियाओं का संपादक मंडल को इंतज़ार रहेगा। पत्रिका का प्रिंट संस्करण भी समय पर आपके हाथों में होगा। ऑन लाइन पढ़ें- https://www.slideshare.net/slideshow/shivna-sahityiki-april-june-2024-magazine/267443653 http://www.vibhom.com/shivna/apr_june_2024.pdf साफ़्ट कॉपी पीडीऍफ यहाँ से डाउनलोड करें http://www.vibhom.com/shivnasahityiki.html फेसबुक पर- https://www.facebook.com/shivnasahityiki/ ब्लॉग- http://shivnaprakashan.blogspot.com/</itunes:summary></item><item><title>वैश्विक हिन्दी चिंतन की अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका विभोम-स्वर का वर्ष : 9, अंक : 33 अप्रैल-जून 2024 अंक</title><link>http://subeerin.blogspot.com/2024/04/9-33-2024.html</link><author>noreply@blogger.com (Unknown)</author><pubDate>Thu, 18 Apr 2024 09:16:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-7637784963342720274.post-452855308718182531</guid><description>&lt;p&gt;मित्रो, संरक्षक तथा प्रमुख संपादक सुधा ओम ढींगरा एवं संपादक पंकज सुबीर के संपादन में वैश्विक हिन्दी चिंतन की अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका विभोम-स्वर का वर्ष : 9, अंक : 33 अप्रैल-जून 2024 अंक अब उपलब्ध है। इस अंक में शामिल है- संपादकीय, मित्रनामा, कथा-कहानी- अधूरेपन के उस पार- रमेश शर्मा, चिड़ियाँ दा चम्बा- कमलेश भारतीय, काँघी-कढ़ाई- आकाश माथुर, नक़्क़ाशी- अनुजीत इकबाल, मोहभंग- शैल अग्रवाल, पेट्स केयर होम- सुनीता मिश्रा, कर्ज़- डॉ. मलिक राजकुमार, गुमशुदा सपने- डॉ. रंजना जायसवाल। भाषांतर- बाहर कुछ जल रहा है, हंगेरियन कहानी, मूल लेखक : लैस्ज़्लो क्रैस्ज़्नअहोरकाइ, अनुवाद : सुशांत सुप्रिय, भूमि- पंजाबी कहानी, मूल लेखक : सुरिन्दर नीर, अनुवाद : जसविंदर कौर बिन्द्रा। लघुकथा- ज़िंदा- विजयानंद विजय, मूक अन्तरात्मा- बसन्त राघव, रिश्तों का आर्थिक गणित- सुभाष चंद्र लखेड़ा, कवच- प्रगति त्रिपाठी, संस्मरण- कोंपल के कंधों पर चमकती धूप- हंसा दीप, 'दुर्घटना पुरुष' - गोविन्द सेन, ललित निबंध- रोटी एक आख्यान, एक महाकाव्य- डॉ. गरिमा संजय दुबे। शिवना प्रकाशन की घोषणाएँ। रेखाचित्र- कलई वाला- ज्योति जैन। व्यंग्य- सद्य जागृत का साक्षात्कार- कमलेश पाण्डेय। आलेख- आलोचना रचना का सुविधावादी संस्करण नहीं- डॉ. शोभा जैन। ग़ज़ल- शुभम 'शब’, नुसरत मेहदी, इस्मत ज़ैदी 'शिफ़ा'। शहरों की रूह- सिडोना-लाल पत्थरों का स्वर्ग- रेखा भाटिया। रपट- शिवना साहित्य समागम- आकाश माथुर। आख़िरी पन्ना। आवरण चित्र- राहुल पुरबिया, डिज़ायनिंग सनी गोस्वामी, शहरयार अमजद ख़ान, सुनील पेरवाल, शिवम गोस्वामी, आपकी प्रतिक्रियाओं का संपादक मंडल को इंतज़ार रहेगा। पत्रिका का प्रिंट संस्क़रण भी समय पर आपके हाथों में होगा।&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;ऑनलाइन पढ़ें पत्रिका- &lt;/p&gt;  &lt;p&gt;&lt;a href="https://www.slideshare.net/slideshow/vibhom-swar-april-june-2024-hindi-literature/267317279"&gt;https://www.slideshare.net/slideshow/vibhom-swar-april-june-2024-hindi-literature/267317279&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;&lt;a href="http://www.vibhom.com/pdf/april_june_2024.pdf"&gt;http://www.vibhom.com/pdf/april_june_2024.pdf&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;वेबसाइट से डाउनलोड करें&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;&lt;a href="http://www.vibhom.com/vibhomswar.html"&gt;http://www.vibhom.com/vibhomswar.html&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;फेस बुक पर&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;&lt;a href="https://www.facebook.com/Vibhomswar"&gt;https://www.facebook.com/Vibhomswar&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;ब्लॉग पर पढ़ें- &lt;/p&gt;  &lt;p&gt;&lt;a href="http://shabdsudha.blogspot.com/"&gt;http://shabdsudha.blogspot.com/&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;&lt;a href="http://vibhomswar.blogspot.com/"&gt;http://vibhomswar.blogspot.com/&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;कविता कोश पर पढ़ें&lt;/p&gt;  &lt;p&gt;&lt;a href="http://kavitakosh.org/kk/विभोम_स्वर_पत्रिका"&gt;http://kavitakosh.org/kk/विभोम_स्वर_पत्रिका&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;</description><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">0</thr:total><enclosure length="14461113" type="application/pdf" url="http://www.vibhom.com/pdf/april_june_2024.pdf"/><itunes:explicit/><itunes:subtitle>मित्रो, संरक्षक तथा प्रमुख संपादक सुधा ओम ढींगरा एवं संपादक पंकज सुबीर के संपादन में वैश्विक हिन्दी चिंतन की अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका विभोम-स्वर का वर्ष : 9, अंक : 33 अप्रैल-जून 2024 अंक अब उपलब्ध है। इस अंक में शामिल है- संपादकीय, मित्रनामा, कथा-कहानी- अधूरेपन के उस पार- रमेश शर्मा, चिड़ियाँ दा चम्बा- कमलेश भारतीय, काँघी-कढ़ाई- आकाश माथुर, नक़्क़ाशी- अनुजीत इकबाल, मोहभंग- शैल अग्रवाल, पेट्स केयर होम- सुनीता मिश्रा, कर्ज़- डॉ. मलिक राजकुमार, गुमशुदा सपने- डॉ. रंजना जायसवाल। भाषांतर- बाहर कुछ जल रहा है, हंगेरियन कहानी, मूल लेखक : लैस्ज़्लो क्रैस्ज़्नअहोरकाइ, अनुवाद : सुशांत सुप्रिय, भूमि- पंजाबी कहानी, मूल लेखक : सुरिन्दर नीर, अनुवाद : जसविंदर कौर बिन्द्रा। लघुकथा- ज़िंदा- विजयानंद विजय, मूक अन्तरात्मा- बसन्त राघव, रिश्तों का आर्थिक गणित- सुभाष चंद्र लखेड़ा, कवच- प्रगति त्रिपाठी, संस्मरण- कोंपल के कंधों पर चमकती धूप- हंसा दीप, 'दुर्घटना पुरुष' - गोविन्द सेन, ललित निबंध- रोटी एक आख्यान, एक महाकाव्य- डॉ. गरिमा संजय दुबे। शिवना प्रकाशन की घोषणाएँ। रेखाचित्र- कलई वाला- ज्योति जैन। व्यंग्य- सद्य जागृत का साक्षात्कार- कमलेश पाण्डेय। आलेख- आलोचना रचना का सुविधावादी संस्करण नहीं- डॉ. शोभा जैन। ग़ज़ल- शुभम 'शब’, नुसरत मेहदी, इस्मत ज़ैदी 'शिफ़ा'। शहरों की रूह- सिडोना-लाल पत्थरों का स्वर्ग- रेखा भाटिया। रपट- शिवना साहित्य समागम- आकाश माथुर। आख़िरी पन्ना। आवरण चित्र- राहुल पुरबिया, डिज़ायनिंग सनी गोस्वामी, शहरयार अमजद ख़ान, सुनील पेरवाल, शिवम गोस्वामी, आपकी प्रतिक्रियाओं का संपादक मंडल को इंतज़ार रहेगा। पत्रिका का प्रिंट संस्क़रण भी समय पर आपके हाथों में होगा। ऑनलाइन पढ़ें पत्रिका- https://www.slideshare.net/slideshow/vibhom-swar-april-june-2024-hindi-literature/267317279 http://www.vibhom.com/pdf/april_june_2024.pdf वेबसाइट से डाउनलोड करें http://www.vibhom.com/vibhomswar.html फेस बुक पर https://www.facebook.com/Vibhomswar ब्लॉग पर पढ़ें- http://shabdsudha.blogspot.com/ http://vibhomswar.blogspot.com/ कविता कोश पर पढ़ें http://kavitakosh.org/kk/विभोम_स्वर_पत्रिका</itunes:subtitle><itunes:author>noreply@blogger.com (Unknown)</itunes:author><itunes:summary>मित्रो, संरक्षक तथा प्रमुख संपादक सुधा ओम ढींगरा एवं संपादक पंकज सुबीर के संपादन में वैश्विक हिन्दी चिंतन की अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका विभोम-स्वर का वर्ष : 9, अंक : 33 अप्रैल-जून 2024 अंक अब उपलब्ध है। इस अंक में शामिल है- संपादकीय, मित्रनामा, कथा-कहानी- अधूरेपन के उस पार- रमेश शर्मा, चिड़ियाँ दा चम्बा- कमलेश भारतीय, काँघी-कढ़ाई- आकाश माथुर, नक़्क़ाशी- अनुजीत इकबाल, मोहभंग- शैल अग्रवाल, पेट्स केयर होम- सुनीता मिश्रा, कर्ज़- डॉ. मलिक राजकुमार, गुमशुदा सपने- डॉ. रंजना जायसवाल। भाषांतर- बाहर कुछ जल रहा है, हंगेरियन कहानी, मूल लेखक : लैस्ज़्लो क्रैस्ज़्नअहोरकाइ, अनुवाद : सुशांत सुप्रिय, भूमि- पंजाबी कहानी, मूल लेखक : सुरिन्दर नीर, अनुवाद : जसविंदर कौर बिन्द्रा। लघुकथा- ज़िंदा- विजयानंद विजय, मूक अन्तरात्मा- बसन्त राघव, रिश्तों का आर्थिक गणित- सुभाष चंद्र लखेड़ा, कवच- प्रगति त्रिपाठी, संस्मरण- कोंपल के कंधों पर चमकती धूप- हंसा दीप, 'दुर्घटना पुरुष' - गोविन्द सेन, ललित निबंध- रोटी एक आख्यान, एक महाकाव्य- डॉ. गरिमा संजय दुबे। शिवना प्रकाशन की घोषणाएँ। रेखाचित्र- कलई वाला- ज्योति जैन। व्यंग्य- सद्य जागृत का साक्षात्कार- कमलेश पाण्डेय। आलेख- आलोचना रचना का सुविधावादी संस्करण नहीं- डॉ. शोभा जैन। ग़ज़ल- शुभम 'शब’, नुसरत मेहदी, इस्मत ज़ैदी 'शिफ़ा'। शहरों की रूह- सिडोना-लाल पत्थरों का स्वर्ग- रेखा भाटिया। रपट- शिवना साहित्य समागम- आकाश माथुर। आख़िरी पन्ना। आवरण चित्र- राहुल पुरबिया, डिज़ायनिंग सनी गोस्वामी, शहरयार अमजद ख़ान, सुनील पेरवाल, शिवम गोस्वामी, आपकी प्रतिक्रियाओं का संपादक मंडल को इंतज़ार रहेगा। पत्रिका का प्रिंट संस्क़रण भी समय पर आपके हाथों में होगा। ऑनलाइन पढ़ें पत्रिका- https://www.slideshare.net/slideshow/vibhom-swar-april-june-2024-hindi-literature/267317279 http://www.vibhom.com/pdf/april_june_2024.pdf वेबसाइट से डाउनलोड करें 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क्रम को आगे बढ़ाते हैं। &lt;br /&gt;&lt;/b&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhgB5508PXYayJnaZ970Tw_F2FlB2xsIS-cbHV-MyeCUukVi4UdcO9CgI2kNyrumoCEYhQeadkspTW9l93DxM2AM2KHQB-RcyafEjYkElS8BtjP_BVtCaa5gH_NMZehbClSD5eze2LT10VLGKHNN8zSN1YpFTLlayzOgFiF2BPAIcN1AGTy8SI1tcrTvgAV/s958/Holi-Festival-colour-run.jpg" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="512" data-original-width="958" height="171" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhgB5508PXYayJnaZ970Tw_F2FlB2xsIS-cbHV-MyeCUukVi4UdcO9CgI2kNyrumoCEYhQeadkspTW9l93DxM2AM2KHQB-RcyafEjYkElS8BtjP_BVtCaa5gH_NMZehbClSD5eze2LT10VLGKHNN8zSN1YpFTLlayzOgFiF2BPAIcN1AGTy8SI1tcrTvgAV/s320/Holi-Festival-colour-run.jpg" width="320" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="color: #2b00fe;"&gt;"रंग इतने कभी नहीं होते”&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;आइए आज मनाते हैं बासी होली डॉ. रजनी मल्होत्रा नैय्यर और तिलक राज कपूर जी के साथ।&lt;br /&gt;&lt;/b&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiYz2POTY5Cub0JllwXA0obE9H3i4XSbJDwa8dgVzAGsFkxs00zqW34S6ctQEqYotIRo8YU-3Xitk3ws5JFicqYdMPHjpjwOKH-uymHk8XiSJvWsBMFOCaM7Dzr6sUcJUNXwoAHM8FAGzYbpM6ggwBC4gaSqw6n1YGNsyIYf7FJT-08W27MBTRT5EgCzom9/s960/rajni%20naiyyar%20malhotra.jpg" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="960" data-original-width="931" height="117" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiYz2POTY5Cub0JllwXA0obE9H3i4XSbJDwa8dgVzAGsFkxs00zqW34S6ctQEqYotIRo8YU-3Xitk3ws5JFicqYdMPHjpjwOKH-uymHk8XiSJvWsBMFOCaM7Dzr6sUcJUNXwoAHM8FAGzYbpM6ggwBC4gaSqw6n1YGNsyIYf7FJT-08W27MBTRT5EgCzom9/w113-h117/rajni%20naiyyar%20malhotra.jpg" width="113" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="color: #2b00fe;"&gt;डॉ. रजनी मल्होत्रा नैय्यर&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;लोग यूँ पारखी नहीं होते&lt;br /&gt;आप जैसे सभी नहीं होते&lt;br /&gt;इश्क़ होता नहीं तो ग़ज़लों में&lt;br /&gt;रंग इतने कभी नहीं होते&lt;br /&gt;ज़िंदगी होती जब बहुत आसाँ&lt;br /&gt;कायदे लाज़िमी नहीं होते &lt;br /&gt;चूक होती है खुदा से भी तो &lt;br /&gt;फैसले सब सही नहीं होते&lt;br /&gt;&amp;nbsp;&lt;br /&gt;मतले में बहुत अच्छे से तुलनात्मक बात कही है। सच है कि दुनिया में पारखी नज़रों वाले बहुत कम होते हैं। और यह भी सच है कि गीतों में ग़ज़लों में जो कुछ भी रंग होते हैं, प्रेम के कारण होते हैं। ज़िंदगी जब बहुत आसान होती है तब क़ायदों की ज़रूरत सच में नहीं होती है। और अंत में यह भी यही है कि फ़ैसले सब सही कभी नहीं हो सकते, ग़ल​तियाँ सभी से होती हैं। बहुत ही शानदार ग़ज़ल वाह वाह वाह।&lt;br /&gt;&lt;/b&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgD0OvG9M8PhPYurfxz02zSk9OArnQagAYnrTVxMnzm5ZJztoXM7BMzyOtImEJ0yxyCP4thmS3BNQwXUCvH4SuSiyryY2OLNF48Ox8uCsRHxcFfFmb2IkbaTg6sE45y80qlvJSRDUiDcMKrHUh2wM8T7h06BszklXXicI-eyc6Di-l2ohMmqJpb-wjg0HRf/s1000/TILAK%20RAJ%20KAPORR%20JI.JPG" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="1000" 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तो&lt;br /&gt;हम न होते अजी नहीं होते।&lt;br /&gt;गीत में रंग जो दिए तुमने&lt;br /&gt;“रंग इतने कभी नहीं होते”।&lt;br /&gt;मतला ही इतना शानदार है कि आज के समय की पूरी कहानी कह रहा है। जो आरसी होते हैं वे ही किरकिरी हो जाते हैं। मस्अले सच में दिल्लगी नहीं होते है, बहुत अच्छे से इस बात को शेर में पिरोया गया है। मौसम जब ख़राब हो रहा हो तो हमें अपने आप को तो संभालना ही पड़ेगा, क्योंकि उसके बाद ही अच्छा मौसम है। और एक शेर तो एकदम जानलेवा टाइप का बन पड़ा है- जिसमें गुनाह का दोष किसी के होंठों के शरबती होने को दिया जा रहा है। कमाल। अगले ही शेर में मिसरा सानी में दोहराव से सौंदर्य पैदा करने का प्रयास बहुत सुंदर है। अंत में गिरह का शेर राकेश जी को समर्पित है, बहुत ही सुंदर गिरह है। वाह वाह वाह सुंदर ग़ज़ल। &lt;br /&gt;&lt;/b&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEh1sxGzUYosjySdOdgXU97Q-Pb3GK8cq_NP1ETljXDFGM3sDj-H-tscbgB_soOcJVzTaiopOAIy74KCPb7qUb6VWZ0AqZTfKErfRgfWve-INAwVx_bBoMpyJnordYhpTmxIiBTqD4V3tA7XJy3V6JLnxzpSuuBgQNydFPteI_1w9ddI8hKjc3oUvAjColk_/s385/GettyImages-487919691-56f121a03df78ce5f83ba137.jpg" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="257" data-original-width="385" height="214" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEh1sxGzUYosjySdOdgXU97Q-Pb3GK8cq_NP1ETljXDFGM3sDj-H-tscbgB_soOcJVzTaiopOAIy74KCPb7qUb6VWZ0AqZTfKErfRgfWve-INAwVx_bBoMpyJnordYhpTmxIiBTqD4V3tA7XJy3V6JLnxzpSuuBgQNydFPteI_1w9ddI8hKjc3oUvAjColk_/s320/GettyImages-487919691-56f121a03df78ce5f83ba137.jpg" width="320" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;b&gt;आज के दोनों शायरों ने रंग जमा दिया है। दाद देते रहिए और इंतज़ार कीजिए कि बासी होली का एक अंक और आ जाये शायद।&lt;/b&gt;&lt;/div&gt;</description><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhgB5508PXYayJnaZ970Tw_F2FlB2xsIS-cbHV-MyeCUukVi4UdcO9CgI2kNyrumoCEYhQeadkspTW9l93DxM2AM2KHQB-RcyafEjYkElS8BtjP_BVtCaa5gH_NMZehbClSD5eze2LT10VLGKHNN8zSN1YpFTLlayzOgFiF2BPAIcN1AGTy8SI1tcrTvgAV/s72-c/Holi-Festival-colour-run.jpg" width="72"/><thr:total xmlns:thr="http://purl.org/syndication/thread/1.0">6</thr:total></item><item><title>आइए मनाते हैं होली राकेश खण्डेलवाल जी, धर्मेंद्र कुमार सिंह, सुधीर त्यागी, संजय दानी, दिनेश नायडू, मंसूर अली हाशमी और रेखा भाटिया के साथ।</title><link>http://subeerin.blogspot.com/2024/03/blog-post_23.html</link><author>noreply@blogger.com (पंकज सुबीर)</author><pubDate>Sat, 23 Mar 2024 17:39:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="false">tag:blogger.com,1999:blog-7637784963342720274.post-4467736096847531152</guid><description>&lt;div&gt;&lt;div style="text-align: center;"&gt;दोस्तों इस बार का तरही मुशायरा आदरणीय राकेश खंडेलवाल जी की स्मृति में आयोजित किया जा रहा है। इस बार होली का रंग कुछ फीका है क्योंकि इस बार राकेश जी इस होली में शामिल नहीं हैं। राकेश जी के गीतों से अब हमारे मुशायरों में छंदों का जादू नहीं जगेगा। होली क्या वे तो हर मुशायरे में एक माह पहले से उत्साहित होकर अपने संदेश भेजना प्रारंभ कर देते थे। इस बार यह हुआ है कि होली तो है पर अंदर उनके जाने का सूनापन बसा हुआ है। आइए आज होली के तरही मुशायरे को प्रारंभ करते हैं।&lt;br /&gt;इस बार मुशायरे के लिए मिसरा देते समय मन इतना उदास था कि मैं रदीफ़ और क़ाफ़िये के बारे में बताना ही भूल गया कि क़ाफ़िया है 'कभी' शब्द में आ रही 'ई' की मात्रा और रदीफ़ है 'नहीं होते'। ख़ैर अब सब ने अपने हिसाब से रदीफ़ काफ़िया लेकर ग़ज़लें भेज दी हैं।&amp;nbsp; &lt;br /&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="color: #2b00fe;"&gt;"रंग इतने कभी नहीं होते”&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;br /&gt;आइए आज मनाते हैं होली राकेश खण्डेलवाल जी, धर्मेंद्र कुमार सिंह, सुधीर त्यागी, संजय दानी, दिनेश नायडू, मंसूर अली हाशमी और रेखा भाटिया के साथ।&lt;br /&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgo1c60wP7n-wqlqvAH3Kj_XOPd7GzjF_EWV1oYG9dWf_nojC3eFAHL6A43nSQKpAVdiB4RYryGk6Hpo5BuWbDIWPIDJI27Gn8HSsaeMv3zJfKvoCqC_tS0VUgB23OPt2S5arN73EuLvOBj8_iUyG-agfWWUhmrb-GKG-Sj7t6RLbqoeg6-deN6rUWngwMz/s300/colours-of-holi.jpg" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="195" data-original-width="300" height="195" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgo1c60wP7n-wqlqvAH3Kj_XOPd7GzjF_EWV1oYG9dWf_nojC3eFAHL6A43nSQKpAVdiB4RYryGk6Hpo5BuWbDIWPIDJI27Gn8HSsaeMv3zJfKvoCqC_tS0VUgB23OPt2S5arN73EuLvOBj8_iUyG-agfWWUhmrb-GKG-Sj7t6RLbqoeg6-deN6rUWngwMz/s1600/colours-of-holi.jpg" width="300" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;शुरुआत करते हैं राकेश जी के एक गीत से जो उन्होंने दीपावली के मुशायरे के लिए भेजा था तथा उस समय यह लग नहीं पाया था। शायद आज के लिए ही छूट गया था। &lt;br /&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhrqDHOafT-HWH0sDNVBR3jBGDvOwD8orYX6ILZhCVXILeP6tkecxtB1Q_bsjkofZotlbN3QMby9-LYb8ZPE3_IvjhSew0OprVseEDx3qwTxy23kWycL4tEborMfF0_U38xeLTUtRJWS0Hpqb2qKG3FpneFtJlAjcbJo0o6PMw_UtHMmUPFJXxBrr5egU4-/s600/rakesh%20khandelwal%20ji.jpg" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="600" data-original-width="448" height="186" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhrqDHOafT-HWH0sDNVBR3jBGDvOwD8orYX6ILZhCVXILeP6tkecxtB1Q_bsjkofZotlbN3QMby9-LYb8ZPE3_IvjhSew0OprVseEDx3qwTxy23kWycL4tEborMfF0_U38xeLTUtRJWS0Hpqb2qKG3FpneFtJlAjcbJo0o6PMw_UtHMmUPFJXxBrr5egU4-/w139-h186/rakesh%20khandelwal%20ji.jpg" width="139" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #2b00fe;"&gt;&lt;b&gt;राकेश खंडेलवाल &lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;संस्कृतियों का एक बीज था जन्मभूमि ने किया अंकुरित&lt;br /&gt;कर्मभूमि ने देखभाल की और। नया कुछ रूप निखारा &lt;br /&gt;अनुभवों की इक कसौटी ने उन्हें जाँचा, परख कर&lt;br /&gt;इक अनूठे शिल्प की अनमोल कृति देकर संवारा &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;यह पथिक विश्वास वह लेकर चला अपनी डगर पर&lt;br /&gt;साथ में जिसको लिए दीपक तमस से लड़ रहा है&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;ज़िंदगी के इस सफ़र में मंज़िलें निश्चित नहीं थी &lt;br /&gt;एक था संकल्प पथ में हर निमिष गतिमान रहना&lt;br /&gt;जाल तो अवरोध फैलाये हुए हर मोड़ पर थे &lt;br /&gt;संयमित रहते हुए बस लक्ष्य को था केंद्र रखना&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कर्म का प्रतिफल मिला इस भूमि पर हर इक दिशा से &lt;br /&gt;सूर्य का पथ पालता कर्तव्य अपना बढ़ रहा है&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;चिह्न जितने सफलता के देखते अपने सफ़र में&lt;br /&gt;छोड कर वे हैं गए निर्माण जो करते दिशा का&lt;br /&gt;चीर पर्वत घाटियों को, लांघ कर नदिया, वनों को&lt;br /&gt;रास्ता करते गए आसान पथ की यात्रा का&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सामने देखो क्षितिज के पार भी बिखरे गगन पर&lt;br /&gt;धनक उनके चित्र में ही रंग अद्भुत भर रहा है &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अनुसरण करना किसी की पग तली की छाप का या&lt;br /&gt;आप अपने पाँव के ही चिह्न सिकता पर बनाना&lt;br /&gt;पृष्ठ खोले ज़िंदगी में नित किसी अन्वेषणा के &lt;br /&gt;या घटे इतिहास की गाथाओं को ही दोहराना &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आज चुनना है विकल्पों में इसी बस एक को ही&lt;br /&gt;सामने फ़ैला हुआ यह पथ, प्रतीक्षा कर रहा है&lt;br /&gt;क्या कहा जाए इस गीत को लेकर, यह गीत नहीं है, यह तो मानों उस पूर्वाभास से उपजा हुआ संदेश है, जो शायद उनको हो चुका था। गीत की अंतिम पंक्ति में सामने फैला हुआ पथ जो प्रतीक्षा कर रहा है, शायद उस प्रतीक्षा में यही भाव है। राकेश जी को एहसास हो गया था कि अब कहीं कोई पथ प्रतीक्षा कर रहा है, उनको एक और लंबी यात्रा पर जाना है। इसीलिए यह गीत उन्होंने बहुत पहले ही भेज दिया था। यह गीत जैसे उनका प्रयाण गीत है। क्या कहूँ, बस मौन हूँ। &lt;br /&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjilb51CwtajOYbZbbO3rOJeyAK78znLzrrjnQyJiBN5yxkRx8qWUUcXWJaAf7zMuC9JjitQyZLagSCP7a_rx9cVxHTDTQunofBEiLUh68vbp60yLD6Iei96hWPsUTmSoG5p_Xi_vMv-6HPahqA3BLcsHUP6IgJPaVHl9dB0vOFUHShWQj3Suz-xtHJEfQT/s990/dharmendra%20kuma%20(1).jpg" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="990" data-original-width="705" height="193" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjilb51CwtajOYbZbbO3rOJeyAK78znLzrrjnQyJiBN5yxkRx8qWUUcXWJaAf7zMuC9JjitQyZLagSCP7a_rx9cVxHTDTQunofBEiLUh68vbp60yLD6Iei96hWPsUTmSoG5p_Xi_vMv-6HPahqA3BLcsHUP6IgJPaVHl9dB0vOFUHShWQj3Suz-xtHJEfQT/w138-h193/dharmendra%20kuma%20(1).jpg" width="138" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #2b00fe;"&gt;&lt;b&gt;धर्मेन्द्र कुमार सिंह&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;गीत यूँ कुदरती नहीं होते&lt;br /&gt;गर जो राकेश जी नहीं होते&lt;br /&gt;हम भी यूँ कीमती नहीं होते&lt;br /&gt;वो अगर पारखी नहीं होते&lt;br /&gt;गीत बनकर हमारे बीच हैं वो&lt;br /&gt;इसलिए हम दुखी नहीं होते&lt;br /&gt;वो तो लाखों में एक थे साहब&lt;br /&gt;उन के जैसे कई नहीं होते&lt;br /&gt;हम से छोटों को मानते थे बहुत &lt;br /&gt;वो थे जैसे, सभी नहीं होते&lt;br /&gt;वो जो होते न गर तो गीतों में&lt;br /&gt;रंग इतने कभी नहीं होते&lt;br /&gt;स्नेह उनका अगर नहीं मिलता&lt;br /&gt;‘सज्जन’ इतने धनी नहीं होते&lt;br /&gt;राकेश जी का नाम मतले में ही बहुत सुंदरता के साथ गूँथा गया है। और उसके बाद हुस्ने-मतला भी उतना ही सुंदर बन पड़ा है, क्या बात है। यह भी सच है कि राकेश जी के गीत हमारे साथ हैं, हम कैसे मान लें कि वे हमारे साथ नहीं हैं, दुखी होने की कोई बात ही नहीं है। और इस बात को भी शत प्रतिशत सच माना जाये कि वे लाखों में एक ही थे, उनके जैसे कई नहीं हो सकते। अपने से छोटों को भी मान-सम्मान देना, दुलार देना यह उनके जैसे बड़े लेखक ही कर सकते हैं। और तरही का शेर बहुत ही सुंदर तरीक़े से गूँथा गया ह। अंत में मकता भी बहुत कमाल है। इस मुसलसल ग़ज़ल ने समाँ बाँध दिया है। वाह वाह वाह बहुत ही सुंदर ग़ज़ल।&lt;br /&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjZNWFnttUX2IKZx8_jnpkD6iB8rELjRzqofgi6UjWVRRvBmsF8ZfP27pn4QVukb7F2hjpKgfIK96oiTn22FdjGh7fqwAgiHNLmA5iWtYSl2VDt7kXglBMFheEw9XcQPzyZRViaYejxBLKv-AWJwLkTdiDQ_ol-uMPUyySLK_XT5B9aRpE8LoOYhhWUfQzq/s1141/sudhir%20tyagi.jpg" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="1141" data-original-width="800" height="200" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjZNWFnttUX2IKZx8_jnpkD6iB8rELjRzqofgi6UjWVRRvBmsF8ZfP27pn4QVukb7F2hjpKgfIK96oiTn22FdjGh7fqwAgiHNLmA5iWtYSl2VDt7kXglBMFheEw9XcQPzyZRViaYejxBLKv-AWJwLkTdiDQ_ol-uMPUyySLK_XT5B9aRpE8LoOYhhWUfQzq/w140-h200/sudhir%20tyagi.jpg" width="140" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #2b00fe;"&gt;&lt;b&gt;डॉ. सुधीर त्यागी &lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;काफ़िए हम सलीके से ढोते,&lt;br /&gt;और सृजन के बीज भी बोते।&lt;br /&gt;खास महफिल उरूज पर होती,&lt;br /&gt;साथ में काश आप भी होते।&lt;br /&gt;आप रौनके बहार थे वरना,&lt;br /&gt;रंग इतने कभी नहीं होते।&lt;br /&gt;याद आते हैं आप गीतों को,&lt;br /&gt;आप के गीत आप बिन रोते।&lt;br /&gt;चलता तो है सुबीर जी का ब्लॉग,&lt;br /&gt;सब मगर आप की कमी ढोते। &lt;br /&gt;जैसा कि मैंने पहले ही कहा है कि इस बार पोस्ट में मैं लिख नहीं पाया कि रदीफ़ और क़ाफ़िया क्या रहेगा, तो इसलिए सभी ने अपने हिसाब से रदीफ़ क़ाफ़िया ले लिया है। सुधीर जी ने बिना रदीफ़ की ग़ज़ल कही है और बहुत अच्छे से कठिन क़ाफ़िया को निभा लिया है। विशेषकर गिरह का शेर बहुत अच्छा बना है। सबसे अच्छा शेर है जिसमें कहा गया है कि आपके गीत भी आपके बिना रोते हैं। बहुत ही सुंदर ग़ज़ल वाह वाह वाह।&lt;br /&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiynRfcnmNpEVjSiUK0dXA19n-dDxNIVlBOTi45LuO318Ht7tx0-iZM_BMvP5oj9jKfyxqmdj4UL7ex348bw1YWIJOp7Z1aOdV_iuq-ZOAMDNrt_fva8rE_a2TPhoCDsdutnw4PnzDCN_xW71Zw2R4alrBk2JVTGwPmGRiMsqs9ApbqxGiBzzovvMtcJk9S/s220/sanjay%20dani.png" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="220" data-original-width="168" height="162" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiynRfcnmNpEVjSiUK0dXA19n-dDxNIVlBOTi45LuO318Ht7tx0-iZM_BMvP5oj9jKfyxqmdj4UL7ex348bw1YWIJOp7Z1aOdV_iuq-ZOAMDNrt_fva8rE_a2TPhoCDsdutnw4PnzDCN_xW71Zw2R4alrBk2JVTGwPmGRiMsqs9ApbqxGiBzzovvMtcJk9S/w123-h162/sanjay%20dani.png" width="123" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #2b00fe;"&gt;&lt;b&gt;डॉ संजय दानी दुर्ग&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;आप गर सारथी नहीँ होते,&lt;br /&gt;रंग इतने कभी नहीं होते।&lt;br /&gt;छोड़ हमको न जल्द तुम जाते,&lt;br /&gt;तो यूँ हम आंसू ना बहाते।&lt;br /&gt;माना इक दिन सभी को जाना है,&lt;br /&gt;सबका अंतिम वही ठिकाना है।&lt;br /&gt;वक़्त से पहले जाना ठीक नहीं, &lt;br /&gt;अपनों का दिल दुखाना ठीक नहीं। &lt;br /&gt;होली अब कैसे हम मनायेंगे,&lt;br /&gt;रंगों से दूरियां बढ़ायेंगे। &lt;br /&gt;संजय जी ने अपने ही तरीक़े से राकेश जी को याद किया है। तरही मिसरे को अच्छे से पहली दो पंक्तियों में बांध कर आगे स्वतंत्र दो दो पंक्तियों में बात कही है। यह भी सच है कि किसी एक के बिना सच में होली जैसा पर्व एकदम अधूरा हो जाता है। रंगों से दूरियाँ सी हो जाती हैं। बहुत ही अच्छे से संजय जी ने याद किया है राकेश जी को। बहुत ही सुंदर रचना वाह वाह वाह।&lt;br /&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiboYaCtdwmXhwd7-jEdDt4mrG0S4wbTt8uQ5aQUowbn1Gfl93rrAuR42oD2F9mrAv02gVD5_hObuV0eW-8cmVmS0bjqOPFIt7KCEUypL_F66-iXiRUTQ7xzOF6FrOz65spEFdtc_UiqynJpj21IKH9BGz4JsYhGQInVq2gURC-aCFpHQvmZTHhNzJWEICK/s427/DINESH%20NAYDU.jpg" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="427" data-original-width="357" height="159" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiboYaCtdwmXhwd7-jEdDt4mrG0S4wbTt8uQ5aQUowbn1Gfl93rrAuR42oD2F9mrAv02gVD5_hObuV0eW-8cmVmS0bjqOPFIt7KCEUypL_F66-iXiRUTQ7xzOF6FrOz65spEFdtc_UiqynJpj21IKH9BGz4JsYhGQInVq2gURC-aCFpHQvmZTHhNzJWEICK/w133-h159/DINESH%20NAYDU.jpg" width="133" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #2b00fe;"&gt;&lt;b&gt;दिनेश नायडू&lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;हैं मगर.. वाक़ई नहीं होते&lt;br /&gt;सारे मंज़र सही नहीं होते !&lt;br /&gt;वो भी तो रौशनी नहीं होते &lt;br /&gt;हम अगर तीरगी नहीं होते &lt;br /&gt;उसकी तस्वीर कैसे हो पूरी&lt;br /&gt;रंग इतने कभी नहीं होते&lt;br /&gt;आह मेरी सदा नहीं बनती&lt;br /&gt;अश्क मेरे नदी नहीं होते&lt;br /&gt;मैं तेरी बात मान लेता हूँ&lt;br /&gt;इतने अच्छे सभी नहीं होते&lt;br /&gt;शेर मेरे बहुत ही सादे हैं &lt;br /&gt;मायने फ़लसफ़ी नहीं होते &lt;br /&gt;वो जो सच में ख़ुदा के बन्दे हैं&lt;br /&gt;वो कभी मज़हबी नहीं होते&lt;br /&gt;एक बहुत ही सधी हुई ग़ज़ल, एकदम उस्तादाना रंग लिए हुए है यह ग़ज़ल। मतला ही इतना ग़ज़ब बनाया है कि उफ़्फ़। और उसके बाद का हुस्ने मतला तो एकदम कमाल है हम अगर तीरगी नहीं होते तो वे रौशनी कैसे होते। और अगले शेर में गिरह भी एकदम ग़ज़ब है। मैं तेरी बात मान लेता हूँ में मिसरा ए सानी तो एकदम कमाल को बना है। और ख़ुदा के बंदों का मज़हबी न होना, एक बड़ा ​अर्थ लिए हुए शेर है। बहुत ही सुंदर ग़ज़ल वाह वाह वाह।&lt;br /&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhlgCJyEWyQy8qeNjyIehw3WOLHcIlTLvmoteMZ3GUfuoYWscYaleaQSmJFrxJTT77ss-r0zdGK9LjS_NzkaK58I7it9M_eU2gqI3GDvsq_NtBcu64kVXVormQffDL3Y_5C2ZBSZkX5ZDuZAhpfAjYIJJj9S2jG-npWp_6RLvlfSztw8eQQVVkBJcwB7cS3/s1468/MANSOOR%20ALI%20HASHMI.jpg" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="1468" data-original-width="1135" height="145" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhlgCJyEWyQy8qeNjyIehw3WOLHcIlTLvmoteMZ3GUfuoYWscYaleaQSmJFrxJTT77ss-r0zdGK9LjS_NzkaK58I7it9M_eU2gqI3GDvsq_NtBcu64kVXVormQffDL3Y_5C2ZBSZkX5ZDuZAhpfAjYIJJj9S2jG-npWp_6RLvlfSztw8eQQVVkBJcwB7cS3/w112-h145/MANSOOR%20ALI%20HASHMI.jpg" width="112" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;b&gt;&lt;span style="color: #2b00fe;"&gt;मंसूर अली हाश्मी&lt;/span&gt;&lt;/b&gt;&lt;br /&gt;कैसे खेलेंगे दोस्तो होली&lt;br /&gt;भाई राकेश अब नहीं होंगे&lt;br /&gt;तरही सूनी रहेगी अब उन बिन&lt;br /&gt;रंग इतने तो अब नहीं होंगे!&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;वो नहीं पास जब कभी होते&lt;br /&gt;फिर भी होते हैं, बस वही होते।&lt;br /&gt;भर के 'राशी चुनावी' छ्प जाते&lt;br /&gt;काश इतने तो हम 'लकी' होते!&lt;br /&gt;(इलेक्टोरल बांड की)&lt;br /&gt;उनकी तासीर दूध से मिलती &lt;br /&gt;फट भी जाए तो हैं दही होते।&lt;br /&gt;वो चतुर्वेदी भी कहे जाते&lt;br /&gt;पुस्तकें चार गर पढ़ी होते।&lt;br /&gt;हम को भी गुनगुनाया जाता ही&lt;br /&gt;गर किसी गीत की लड़ी होते।&lt;br /&gt;कैसे दावा करें हमी सब कुछ&lt;br /&gt;हम ग़लत तो कभी सही होते।&lt;br /&gt;ज़िन्दगी बे मज़ा नहीं होती&lt;br /&gt;आप भुजिया जो हम कढ़ी होते&lt;br /&gt;हो के शाइर तुझे मिला क्या है?&lt;br /&gt;काम करते तो आदमी होते &lt;br /&gt;कर दिया है दही दिमागों का!&lt;br /&gt;अच्छा होता न गर कवि होते !!&lt;br /&gt;मंसूर जी ने पहली राकेश जी को बहुत सुंदर शेरों के द्वारा श्रद्धांजलि प्रदान की है उसके बाद थोड़ा बदले हुए रदीफ़ काफ़िया के साथ ग़ज़ल कही है। मतला ही बहुत सुंदर है कि जब वे नहीं होते तब भी वही होते हैं। इलेक्टोरल बांड का शेर और उसके बाद दूध और दही का शेर भी सुंदर बना है। चतुर्वेदी होने का और किसी गीत की लड़ी होने का अंदाज़ भी गुदगुदाता है। भुजिया और कढ़ी के साथ शाइर के बदले आदमी होने का शेर भी बहुत अच्छा है। बहुत ही सुंदर ग़ज़ल वाह वाह वाह।&lt;br /&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhia18MkRT6VmP4za8FTXW9wtQT4_r6MxjQFS-uhjcoXVGT7QKyrg_KmwErDlKzq3Em6jehaw9XD_stxljIg3vOwBXSxniky7Upn6hwwbuaFZhd5UgFYuLSe0QQ-0hrJmP1zDA26w3M_P7HUrXlBxAp_o3SL3EmRrk5Y8TnA-Qm0i_D3Qctyc2hPgVcjh1n/s552/REKHA%20BHATIYA.jpg" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="552" data-original-width="468" height="175" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhia18MkRT6VmP4za8FTXW9wtQT4_r6MxjQFS-uhjcoXVGT7QKyrg_KmwErDlKzq3Em6jehaw9XD_stxljIg3vOwBXSxniky7Upn6hwwbuaFZhd5UgFYuLSe0QQ-0hrJmP1zDA26w3M_P7HUrXlBxAp_o3SL3EmRrk5Y8TnA-Qm0i_D3Qctyc2hPgVcjh1n/w148-h175/REKHA%20BHATIYA.jpg" width="148" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #2b00fe;"&gt;&lt;b&gt;रेखा भाटिया &lt;/b&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;वो भी एक रंग था जीवन में &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;वो भी एक रंग था जीवन में &lt;br /&gt;गुज़र गया तो फिर क्या हुआ &lt;br /&gt;साँझ-सवेरे खिलता चमन में &lt;br /&gt;आज छोड़ इस चमन वो चला &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;वो भी एक रंग था जीवन में &lt;br /&gt;खूब हँसता, खूब रुलाता &lt;br /&gt;प्यार वो भरपूर लुटाता &lt;br /&gt;अँधियारों को रोशन करता &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;वो भी एक रंग था जीवन में &lt;br /&gt;गई दिवाली परदेस चला था &lt;br /&gt;बाबुल का अँगना सूना था &lt;br /&gt;सोचा आएगा वो फिर से &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;खिल जाएगी बगिया फिर से &lt;br /&gt;होली के रंगों में डूबो कर मन &lt;br /&gt;हँसी ठिठोली में मगन करेगा &lt;br /&gt;साँझ ढली अब वो नहीं आया &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;जाने किस दिशा डाला डेरा &lt;br /&gt;महफ़िल अब सज न पाएगी &lt;br /&gt;जहाँ भी होगा झूम रहा होगा &lt;br /&gt;वो भी एक रंग था जीवन में &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;दुआएँ लेकर जा रे मितवा &lt;br /&gt;हँसते खिलते हर पल बीते &lt;br /&gt;गुज़रा रंग गुलाल कर गया &lt;br /&gt;गुज़र गया तो फिर क्या हुआ &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;साथ रंग इतने कभी नहीं होते &lt;br /&gt;घुलता था हर रंग में नादान &lt;br /&gt;वो भी एक रंग था जीवन में &lt;br /&gt;हर मर्ज़ की वो दवा दे गया ! &lt;br /&gt;बहुत ही सुंदर कविता के साथ दार्शनिक अंदाज़ में रेखा भाटिया जी ने राकेश खंडेलवाल जी को अपनी भावांजलि प्रदान की है। एक रंग जीवन में जब कम हो जाता है तो हमें ऐसा लगता है कि सब कुछ तो वैसा ही है, लेकिन उस एक रंग की कमी हर बार महसूस होती है।यह पूरा गीत इसी भाव से भरा हुआ है। एक रंग को कवयित्री का मन कहाँ-कहाँ नहीं तलाश कर रहा है। पूरा गीत एकदम भावों से भरा हुआ है। बहुत ही सुंदर, वाह वाह वाह।&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhH0l8OpqsUhciaDRyCWD236TbwsMwFdzruaOiRm3lU591k9x1xiqIcAaHDYEJzdwnwuRsODEjz0TnV56OkBTX-11zmGerLbCsVQneWY3FYXqgAk5P02ZhpuquZFTaO3J8lhqOJ-_LvcLKpPkZ4XX_3WSYHROI-swc5uWZEsgpsi6Ef7akccyZmnQMgBpF0/s651/holi2.jpg" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" data-original-height="386" data-original-width="651" height="190" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhH0l8OpqsUhciaDRyCWD236TbwsMwFdzruaOiRm3lU591k9x1xiqIcAaHDYEJzdwnwuRsODEjz0TnV56OkBTX-11zmGerLbCsVQneWY3FYXqgAk5P02ZhpuquZFTaO3J8lhqOJ-_LvcLKpPkZ4XX_3WSYHROI-swc5uWZEsgpsi6Ef7akccyZmnQMgBpF0/s320/holi2.jpg" width="320" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: center;"&gt;होली है भाई होली है रंगों वाली होली है। आप सभी को होली की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ। आज के रचनाकारों ने होली का रंग जमा दिया है। आप भी दाद दीजिए। और यदि आगे रचनाएँ आती हैं, तो हम होली के बासी मुशायरे का भी आनंद लेंगे।&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;</description><media:thumbnail xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" height="72" 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