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	<title>हिंदिनी</title>
	
	<link>http://hindini.com/hindini</link>
	<description>हिन्दी मे वेब-पत्रिका व ब्लाग समूह</description>
	<lastBuildDate>Sat, 10 Oct 2009 22:04:54 +0000</lastBuildDate>
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		<title>वीडियो: ब्लाग्स सोशियल नेटवर्किंग के लिये नाकाफ़ी हैं</title>
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		<comments>http://hindini.com/hindini/archives/223#comments</comments>
		<pubDate>Sat, 10 Oct 2009 22:04:54 +0000</pubDate>
		<dc:creator>eswami</dc:creator>
				<category><![CDATA[ब्लॉगिंग और वेबजीवन]]></category>
		<category><![CDATA[सोशियल नेटवर्क्स]]></category>
		<category><![CDATA[हिंदिनी चिट्ठाकार स�]]></category>
		<category><![CDATA[FOAF]]></category>
		<category><![CDATA[social networks]]></category>
		<category><![CDATA[XFN]]></category>

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		<description><![CDATA[व्यव्हारिक रूप से हिन्दी चिट्ठे वालों का सोश्यल नेटवर्क ब्लाग-एग्रीगेटर्स पर बहुत हद तक निर्भर है और ब्लाग –एग्रीगेटर्स अपने ब्लाग-लिंक डाटाबेस पर… ये अच्छी स्थिती नही है, इन कुछ ब्लाग-लिंक डाटाबेसेज़ का स्थान एकाधिक फ़्रेंण्ड्‍‍स नेटवर्क्स को लेना होगा – क्यों? यदि कोई एग्रीगेटर तकनीकी अनुपलब्धता के चलते चालू नही है तो आपका नेटवर्क भी गया खड्डे में… तो इसका निदान और कैसे संभव है?]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>यह पोस्ट डॉ. अनुराग के एक प्रश्न के उत्तर मे लिख रहा हूं.  वे <a href="http://hindini.com/hindini/archives/218/comment-page-1#comment-9110">पूछते हैं </a>ब्लाग को सोश्यल नेटवर्क की तरह प्रयोग करने वालों को मेरा क्या संदेश है?</p>
<p>छोटा उत्तर है कि ब्लाग सोशियल नेटवर्किंग के लिये नाकाफ़ी है! खास तौर पे हिंदी ब्लाग.</p>
<p>उदाहरण के रूप में – यदि मै अमरीका में हूं, तो मेरे अमरीकी मित्र हिन्दी नही जानते समझते &#8211; वे मेर विचार कैसे जानेंगे &#8211; यदि दिलचस्पी हो. दूसरे यदि कोई छद्म नाम से लिखते हैं तो उनके निजी नेटवर्क और छद्मनाम वाला नेटवर्क अलग-अलग हुए. तीसरे सारे लोग ब्लाग पढने-लिखने मे रुचि रखते हों जरूरी नही है.</p>
<p><img class="alignleft" src="http://farm4.static.flickr.com/3294/3138179694_dfde88ff3f_o.jpg" alt="" width="189" height="187" />अब आपका नेट-प्रेजेन्स क्या है – आपका ब्लाग, आपकी ई-मेल, आपके चैट-अकाऊंट, यू-ट्य़ूब अकाऊंट, फ़्लिकर अकाऊंट, ट्विट्टर अकाऊंट, फ़ेसबुक अकाऊंट या आर्कुट अकाऊंट आदी – यानी वे तमाम संसाधन जो आप और आप जैसे दूसरे सदस्यता ले कर प्रयोग मे ला रहे हैं ताकि अपनी सामग्री दूसरों को दिखा सकें और दूसरों की देख सकें – दूसरों से मिल सकें और नये मित्र बना सकें. अमेजान पर आपने किसी उत्पाद का रीव्यू किया हो तो वो,डिलिशियस पर आपकी स्वादिष्ट कडियां, आपके स्टंबल्ड अपान पेजेस .. इन संसाधनो की कतार बहुत लंबी होती जानी है.. और अभी तो हैंड हेल्ड डिवाईसेज को मुख्यधारा मे आना  है! तो निश्चित ही आने वाले समय मे आपका ब्लाग आपने नेट-प्रेज़ेन्स का एक छोटा हिस्सा भर हो कर रह जाएगा. आप कोशिश कर सकते हैं कि अपने तमाम दूसरे तरीकों से उपलब्ध होने कि जानकारी अपने ब्लाग पर उपलब्ध करवा दें लेकिन वहां तक कोई पहुंचेगा क्या जरूरी है?</p>
<p>व्यव्हारिक रूप से हिन्दी चिट्ठे वालों का सोश्यल नेटवर्क ब्लाग-एग्रीगेटर्स पर बहुत हद तक निर्भर है और ब्लाग –एग्रीगेटर्स अपने ब्लाग-लिंक डाटाबेस पर… ये अच्छी स्थिती नही है, इन कुछ ब्लाग-लिंक डाटाबेसेज़ का स्थान एकाधिक फ़्रेंण्ड्‍‍स नेटवर्क्स को लेना होगा – क्यों? यदि कोई एग्रीगेटर तकनीकी अनुपलब्धता के चलते चालू नही है तो आपका नेटवर्क भी गया खड्डे में… तो इसका निदान और कैसे संभव है?</p>
<p>निकट भविष्य में सोश्यल नेटवर्क बनाने के तरीके और भी उन्नत हो जाएंगे – और आप आज जो काम स्वयं करते हैं वो अनुप्रयोग कर दिया करेंगे – जैसा कुछ हद तक फ़ेसबुक करता है – साझा मित्रों के मार्फ़त नए मित्र सुझाने का काम, लेकिन वो फ़ेसबुक तक ही सीमित है और अभी भी उसकी अपनी डाटाबेसेस पर निर्भरता है – जो निकट भविष्य में तो क्या आगे लंबे बनी रहनी है. आपके साथ एक बढिया और आसान वीडियो साझा करना चाहता हूं जिसकी मदद से आप देख सकेंगे कि सोश्यल नेटवर्क को कैसे आद्यतन रखा जा सकेगा और उन्नत किया जा सकेगा – हां पूरे बडे परिदृश्य में ब्लाग की भूमिका महत्वपूर्ण किन्तु सीमित होगी.</p>
<p>ये सब होगा फ़्रेंण्ड्‍‍स नेटवर्क (XFN) और फ़्रेंड-ऑफ़-ए-फ़्रेंड (FOAF) जैसी तकनीकों के माध्यम से. हवा मे कई सारे आईडिये उछाले गए हैं – जो बचेगा वही रचेगा! या बकौल फ़ुरसतिया – जब खिलेगा तब देखेंगे <img src='http://hindini.com/hindini/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /> </p>
<p>(तकनीकी बात: संलग्न वीडियो <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/XHTML_Friends_Network" target="_blank">XFN</a> और <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/FOAF_(software)" target="_blank">FOAF</a> के बारे मे है जिन पर गूगल मे सोश्यल ग्राफ़्स API बनाने केलिये भी कुछ काम किया गया है.)</p>
<p><object classid="clsid:d27cdb6e-ae6d-11cf-96b8-444553540000" width="425" height="344" codebase="http://download.macromedia.com/pub/shockwave/cabs/flash/swflash.cab#version=6,0,40,0"><param name="allowFullScreen" value="true" /><param name="allowscriptaccess" value="always" /><param name="src" value="http://www.youtube.com/v/LabCylbapuM&amp;hl=en&amp;fs=1&amp;" /><param name="allowfullscreen" value="true" /><embed type="application/x-shockwave-flash" width="425" height="344" src="http://www.youtube.com/v/LabCylbapuM&amp;hl=en&amp;fs=1&amp;" allowscriptaccess="always" allowfullscreen="true"></embed></object></p>
]]></content:encoded>
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		<item>
		<title>एग्रीगेटर्स के जमाने में पाठकों को आत्मीय स्पर्श दें!</title>
		<link>http://feedproxy.google.com/~r/titletagsHindin/~3/ChfK7karLZc/218</link>
		<comments>http://hindini.com/hindini/archives/218#comments</comments>
		<pubDate>Fri, 09 Oct 2009 22:39:01 +0000</pubDate>
		<dc:creator>eswami</dc:creator>
				<category><![CDATA[ब्लॉगिंग और वेबजीवन]]></category>
		<category><![CDATA[referer detector]]></category>
		<category><![CDATA[wordpress plugin]]></category>

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		<description><![CDATA[कोई भी तकनीक तभी सफ़ल होती है जब वो अंतत: जीवन के किसी मानवीय फ़लक को छू ले. और यह जुगत ठीक यही करती है.]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>मुल्लाजी आएं तो ‘सलाम वालिकुम’</p>
<p>पंडिज्जी आएं तो ‘राधे-कृष्ण’</p>
<p>और कोई दोस्त यार आए तो – ‘क्या चल रहा है भई!’</p>
<p>हमारे सलाम-नमस्ते व्यक्ति को देख कर बदलते रहते हैं.</p>
<p><img style="display: inline; margin-left: 0px; margin-right: 0px" src="http://farm4.static.flickr.com/3592/3361413196_53c355e34c_s.jpg" alt="" align="left" /> इसी तर्ज पर वर्डप्रेस वालों के लिये आया है एक नया प्लग-इन! कोई भी तकनीक तभी सफ़ल होती है जब वो अंतत: जीवन के किसी मानवीय फ़लक को छू ले. और वेब-तकनीक का ये आसान अनुप्रोग ठीक यही करता है.</p>
<p>प्लग-इन का नाम है <a href="http://www.phoenixheart.net/wp-plugins/referrer-detector/" target="_blank">रेफ़रर-डिटेक्टर [referer detector]</a> &#8211; पोस्ट लिखते समय हम इसे हिंदिनी पर प्रयोग कर रहे हैं.</p>
<p>जब कोई ब्लागवाणी/चिट्ठाजगत या किसी और परिचित स्थान से साईट पर आता है तो उसे जहां से वह कडी पर चटका लगा कर आया है उसी के अनुसार संदेश मिलता है. यह संदेश और भी व्यक्तिगत किया जा सकता है [ संदेश यदि आप किसी एग्रीगेटर से आए हैं तो, इस पोस्ट के नीचे दिखाई देगा]</p>
<p>इस जुगत की कुछ खासियतें इस प्रकार हैं -</p>
<p><img style="display: inline; margin-left: 0px; margin-right: 0px" src="http://content.screencast.com/users/premchop/folders/Jing/media/2abe8eb8-eb3c-4e0a-bba4-3cde5dce7cef/2009-10-09_1533.png" alt="" width="410" height="178" align="left" /></p>
<p>१. एजेक्स आधारित</p>
<p>२. स्वागत संदेश को बदलने का विकल्प</p>
<p>३. भौगोलिक आधार पर अलग-अलग संदेश दिखाने की सुविधा</p>
<p>४. कौन कहां से आया इसका लेखा जोखा रकने वाला एडमिन पेज</p>
<p>५. पहले से दिए गए ज्यों के त्यों प्रयोग मे लाए जा सकने वाले स्वागत संदेश.</p>
<p>पाठकों से प्रश्न है कि क्या ऐसे अनुप्रयोग सचमुच आपके जाल-भ्रमण अनुभव में कोई फ़र्क पैदा करते हैं? या मात्र एक चमत्कृत कर देने का उपक्रम ही जान पडते हैं [कि अरे इसे कैसे पता मैं कहां से चटका लगा कर आया?]</p>
<p><strong> </strong></p>
]]></content:encoded>
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		<item>
		<title>चिट्ठाकारी, आपका व्यक्तिगत शब्द-भंडार और शब्दाडंबर का भय</title>
		<link>http://feedproxy.google.com/~r/titletagsHindin/~3/Q45lCmTWNk4/212</link>
		<comments>http://hindini.com/hindini/archives/212#comments</comments>
		<pubDate>Fri, 09 Oct 2009 18:35:18 +0000</pubDate>
		<dc:creator>eswami</dc:creator>
				<category><![CDATA[ब्लॉगिंग और वेबजीवन]]></category>
		<category><![CDATA[चिट्ठाकारी]]></category>
		<category><![CDATA[शब्द भंडार]]></category>

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		<description><![CDATA[अच्छा लेखन सटीक शब्दों के चुनाव के बिना संभव नहीं है. वर्तनी की गलतियां अभ्यास से जाती हैं – चिट्ठाजगत में रमण कौल, आलोक जैसे वरिष्ठों ने इस पर काफ़ी जोर दिया है. यह कमी मुझ जैसे कई पुरानों मे भी है. वाक्य विन्यास चाहे जितना अच्छा हो, सही जगह, सही शब्द पिरोना एक कला है.]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><img style="display: inline; margin-left: 0px; margin-right: 0px" src="http://farm3.static.flickr.com/2109/2181732845_e2d031aaed.jpg" alt="" width="186" height="324" align="left" />क्या आप अपने व्यक्तिगत शब्द-भंडार पर गर्व कर सकते हैं? हम मे से अधिकतर लोग इस हालत मे नही हैं!<strong> </strong></p>
<p><strong>हिन्दी पट्टी वालों की मुख्य समस्याएं ये हैं -</strong></p>
<ol>
<li>
<ol>
<li>कोई शब्द अंग्रेजी मे पहले सूझना और उसका हिन्दी जानने का प्रयास ही ना करना.</li>
<li>हिन्ग्लिश को ही हिन्दी मान लेना और अपनी कमी को “चलता है” कह कर चलने देना.</li>
<li>टीवी और समाचार पत्रों द्वारा हिन्ग्लिश मान्य होने पर अनुकूलित हो लेना.</li>
<li>आसान लिखने कि कोशिश और क्लिष्टता से बचने कि कोशिश को नए शब्दों के ना सीखने से जोडना.</li>
<li>अच्छा लेखन कम पढना.</li>
<li>खुद को सुधारने के आग्रह मे कमी.</li>
<li>वर्तनी की गलतियां</li>
</ol>
</li>
</ol>
<p>अच्छा लेखन सटीक शब्दों के चुनाव के बिना संभव नहीं है. वर्तनी की गलतियां अभ्यास से जाती हैं – चिट्ठाजगत में रमण कौल, आलोक जैसे वरिष्ठों ने इस पर काफ़ी जोर दिया है. यह कमी मुझ जैसे कई पुरानों मे भी है. वाक्य विन्यास चाहे जितना अच्छा हो, सही जगह, सही शब्द पिरोना एक कला है.</p>
<table border="0" cellspacing="0" cellpadding="2" width="410">
<tbody>
<tr>
<td width="220" valign="top"><strong>अच्छे व्यक्तिगत शब्द-भंडार के फ़ायदे</strong></td>
<td width="188" valign="top"><strong>कमजोर शब्द-भंडार के नुकसान</strong></td>
</tr>
<tr>
<td width="220" valign="top">सटीक संप्रेषणसटीक अभिव्यक्ति</p>
<p>उन्नत भाषा</p>
<p>बेहतर छवि</p>
<p>आत्मविश्वास</td>
<td width="188" valign="top">पठनीयता मे कमीगलत समझा जाना</p>
<p>आत्मविश्वास मे कमी</p>
<p>कमतर लेखन</p>
<p>छवि पर कुप्रभाव</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p><strong> </strong></p>
<p><strong>शब्दाडंबर का भय बनाम अच्छा लेखन </strong></p>
<ol>
<li>हिंग्लिश ना लिखने कि गुहार को  “ट्रेन के लिये लौहपथगामिनी तो प्रयोग नही कर सकते” छाप तर्कों से दबाया जाता है. हां ट्रेन को ट्रेन ही कहिये लेकिन इस्केपिस्ट को पलायनवादी ही कहिये – क्यों? आप जब पलायनवाद को इस्केपिज्म कहते हैं तो अगली पीढी कि भाषा के साथ वही करते हैं जो पिछली पीढी ने हमारी भाषा के साथ किया.</li>
<li>विचारों की स्पष्टता+ सटीक शब्दों का चयन = अच्छा लेखन</li>
<li>विचारों की स्पष्टता + क्लिष्ट शब्दों का चयन = शब्दाडंबर</li>
<li>विचारों की स्पष्टता + कमजोर शब्दों का चयन = पठनीयता मे कमी +  गलत समझे जाने की अधिक संभावना.</li>
</ol>
<p><strong>अपनी सहायता स्वयं करें – इस तरह -</strong></p>
<ol>
<li>कई शब्दों के लिये एक शब्द  ढूंढने का प्रयास – बिना क्लिष्टता या संयुक्ताक्षरों वाला.</li>
<li>पर्यायवाची/समानार्थी शब्द -  हिंदी/उर्दू/संस्कृत मे से ढूंढने का प्रयास.</li>
<li>अच्छे शब्द्कोशों मे निवेश.</li>
<li>आनलाईन शब्दकोशों का प्रयोग.</li>
<li>प्रकाशन से पूर्व किसी अभिरुचिपूर्ण मित्र को लेख दिखाना.</li>
</ol>
]]></content:encoded>
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		<feedburner:origLink>http://hindini.com/hindini/archives/212</feedburner:origLink></item>
		<item>
		<title>वीडियो: अपने हिन्दी चिट्ठे के लिये चित्र कबाडने कि देसी ट्रिक्स</title>
		<link>http://feedproxy.google.com/~r/titletagsHindin/~3/GBRLUcATt_s/203</link>
		<comments>http://hindini.com/hindini/archives/203#comments</comments>
		<pubDate>Tue, 06 Oct 2009 19:41:39 +0000</pubDate>
		<dc:creator>eswami</dc:creator>
				<category><![CDATA[ब्लॉगिंग और वेबजीवन]]></category>

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		<description><![CDATA[एक टिप्स और ट्रिक्स वीडियो - क्रियेटिव कॉमन्स वाले हिन्दी भाषा के चित्र कैसे ढूंढें. एक मिनट मे ज्ञान प्राप्त करें! मनी बैक ग्रांटी. ]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>सीधे बात पर आते हैं. आपने अपने ब्लाग पर कोई मसौदा लिखा है अब आप चाहते हैं कि उसके मूड के साथ जाता हुआ चित्र भी चेप दें. कई बार मेरे चित्र चयन पर अच्छी प्रतिक्रिया मिली है, इसलिये सोचा कि अपना तरीका सब से बांट लूं. </p>
<p>सबसे पहली बात: फ़ोटोशेयरिंग साईट्स मे क्रियेटिव कामन्स के तहत उपलब्ध चित्रों के अलावा जो चित्र हों उनकी हाटलिंकिंग ना करें. संभव है कि वहां पर स्पेसबाल [ब्लैंक] चित्र मिले. </p>
<p>&#160;</p>
<p>तीन चार तरह के चित्र आपको आनलाईन मुहैया होते हैं &#8211; </p>
<p>१. वो चित्र जिन पर वाटरमार्क लगा है और उन्हे उपलब्ध करवाने वाला नही चाहता कि आप उसे खरीदे बिना अपने ब्लाग पर चेपें – ऐसे चित्र हमारे काम के नही हैं. </p>
<p>२. वो चित्र जो किसी और साईट पर प्रयोग किये जा रहे हैं – ना हाटलिंकिंग करें ना आप उन्हे उतार कर अपने आनलाईन स्टोरेज स्पेस मे चढा कर प्रयोग ना करें – वे किसी और कि संपत्ती होते हैं. (इसको चुराने का भी एक लीगल तरीका है वो फ़िर कभी <img src='http://hindini.com/hindini/wp-includes/images/smilies/icon_wink.gif' alt=';-)' class='wp-smiley' />  )</p>
<p>३. न्यूज साईट्स से चित्र लेने मे समस्या कम है, लेकिन मुद्दा वही है – हाटलिंकिंग ना करें. </p>
<p>४. फ़ोटोशेयरिंग साईट्स से चित्र कबाडना सबसे आसान है. </p>
<p>&#160;</p>
<p>चित्र दो तरह के हो सकते है &#8211; </p>
<p>फ़ोटो या इल्युस्ट्रेशन यानी तस्वीर या रेखाचित्र. बस अपनी कोशिश हो की एक ही पोस्ट मे इनका घालमेल ना हो. </p>
<p>&#160;</p>
<p>आज हम आसान तरीका देखते हैं&#160; </p>
<p>मान लीजिये मुझे दान पेटी का चित्र खोजना है – </p>
<p>हम चाहते हैं कि अच्छा हो की दानपेटी फ़न्नी दिखे </p>
<p>हम चाहते हैं कि अच्छा हो कि हिन्दी वाला कोई चित्र मिल जाए. </p>
<p>&#160;</p>
<p><a href="http://search.creativecommons.org" target="_blank">सबसे पहले क्रियेटिव कामन्स सर्च पर जाएं -</a></p>
<p>इस उदाहरण में हम फ़्लिकर की मदद लेंगे, देखते हैं कि किस्मत कितना साथ दे रही है, अन्यथा दूसरा तरीका लगाएंगे &#8211; [इस उदाहरण मे मुझे एक मिनट लगे] <strong>इसमे कयासबाजी का काम अधिक है! तो मैने कयास लगाया “India donate”. </strong></p>
<p>बडा वीडियो देखने के लिये विडियो पर माऊस ले कर जाएं और फ़िर नीचे दाएं से फ़ुल-स्क्रीन का चय्न करें या <a href="http://www.screencast.com/t/d7IwIgTQhfS0" target="_blank">यहां क्लिक करें</a></p>
<p><object width="600" height="450"><param name="movie" value="http://content.screencast.com/users/premchop/folders/Jing/media/a2eb2db1-87c9-4fa1-bb09-d96164834400/jingswfplayer.swf"></param><param name="quality" value="high"></param><param name="bgcolor" value="#FFFFFF"></param><param name="flashVars" value="thumb=http://content.screencast.com/users/premchop/folders/Jing/media/a2eb2db1-87c9-4fa1-bb09-d96164834400/FirstFrame.jpg&#038;containerwidth=980&#038;containerheight=914&#038;content=http://content.screencast.com/users/premchop/folders/Jing/media/a2eb2db1-87c9-4fa1-bb09-d96164834400/2009-10-06_1410.swf&#038;advseek=true"></param><param name="allowFullScreen" value="true"></param><param name="scale" value="showall"></param><param name="allowScriptAccess" value="always"></param><param name="base" value="http://content.screencast.com/users/premchop/folders/Jing/media/a2eb2db1-87c9-4fa1-bb09-d96164834400/"></param>  <embed src="http://content.screencast.com/users/premchop/folders/Jing/media/a2eb2db1-87c9-4fa1-bb09-d96164834400/jingswfplayer.swf" quality="high" bgcolor="#FFFFFF" width="600" height="450" type="application/x-shockwave-flash" allowScriptAccess="always" flashVars="thumb=http://content.screencast.com/users/premchop/folders/Jing/media/a2eb2db1-87c9-4fa1-bb09-d96164834400/FirstFrame.jpg&#038;containerwidth=600&#038;containerheight=450&#038;content=http://content.screencast.com/users/premchop/folders/Jing/media/a2eb2db1-87c9-4fa1-bb09-d96164834400/2009-10-06_1410.swf&#038;advseek=true" allowFullScreen="true" base="http://content.screencast.com/users/premchop/folders/Jing/media/a2eb2db1-87c9-4fa1-bb09-d96164834400/" scale="showall"></embed></object></p>
<p><strong></strong></p>
<p><strong></strong></p>
<p>&#160;</p>
<p>अगर इस तरह से काम का चित्र ना मिले तो क्या करेंगे? जानना चाहते हैं तो </p>
<ul>
<li>साईडबार मे प्रदर्शित शादी.काम के विज्ञापन पर क्लिक कर के (फ़िर से) शादी कर लें और हमे सूचित करें, या </li>
<li>हमारे इधर के विज्ञापन पर क्लिक कर के सिटी बैंक मे अकाऊं खोलें और हमे सूचित करें, या </li>
<li>सिंपली टिप्पणी कर के बताएं. <img src='http://hindini.com/hindini/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /> </li>
</ul>
]]></content:encoded>
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		<slash:comments>2</slash:comments>
		<feedburner:origLink>http://hindini.com/hindini/archives/203</feedburner:origLink></item>
		<item>
		<title>हिन्दी दिवस: अंग्रेजी कुंजीयों से हिन्दी लिखने की चुनौतियाँ व हिंग्लिश घुसेड परिवर्तक की जरूरत!</title>
		<link>http://feedproxy.google.com/~r/titletagsHindin/~3/DIZShXuVBaA/179</link>
		<comments>http://hindini.com/hindini/archives/179#comments</comments>
		<pubDate>Mon, 14 Sep 2009 18:28:30 +0000</pubDate>
		<dc:creator>eswami</dc:creator>
				<category><![CDATA[ब्लॉगिंग और वेबजीवन]]></category>
		<category><![CDATA[Blogging]]></category>
		<category><![CDATA[features]]></category>
		<category><![CDATA[tools]]></category>
		<category><![CDATA[Transliteration]]></category>

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		<description><![CDATA[इस लेख में मै प्रयास करुंगा कि तकनीकी/गैर तकनीकी और प्रदाता/प्रयोक्ता जैसे  भिन्न दृष्टीकोणों में संतुलन बिठा कर हिन्दी चिट्ठाकारों को कुछ काम की जानकारी दे  सकूं.
“यदि आपको लगता है कि समस्या का हल आसान है तो आप उसे समझे ही नही” 
हिन्दी चिट्ठाकारी को बढावा देने के शुरुआती दिनो मे हम इस [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>इस लेख में मै प्रयास करुंगा कि तकनीकी/गैर तकनीकी और प्रदाता/प्रयोक्ता जैसे  भिन्न दृष्टीकोणों में संतुलन बिठा कर हिन्दी चिट्ठाकारों को कुछ काम की जानकारी दे  सकूं.</p>
<blockquote><p><strong>“यदि आपको लगता है कि समस्या का हल आसान है तो आप उसे समझे ही नही” </strong></p></blockquote>
<p>हिन्दी चिट्ठाकारी को बढावा देने के शुरुआती दिनो मे हम इस प्रकार के लेख लिखते  थे कि “अब आपके कंप्यूटर से हिंदी मे लिखना बहुत ही आसान”. आपने थोडा प्रयास किया  और देखा कि यह सचमुच ही आसान है.</p>
<p>आपको यह आसान क्यों लगा? अधिकतर प्रयोगकर्ताओं ने हिंदी में लिखने के लिये  ट्रांसलिटरेशन का सहारा लिया. आपको हिंदी और अंग्रेजी के हिज्जों की जानकारी थी और  आप ये जानते थे कि “t+h” से “थ” बनेगा. फ़िर भी आपको थोडा प्रयास ही क्यों ना करना पडा हो, आप जल्दी सीख गए.</p>
<p><strong>वैसे आसान की परिभाषा क्या है? </strong></p>
<p>आसान का अर्थ ये है कि आप अंग्रेजी के कीबोर्ड से हिंदी में सहजज्ञ हो कर लिख  सकें. यह सहजज्ञ या इन्ट्यूटिव हो कर किसी मशीन का प्रयोग कर पाना आपके काम को आसान  बनाता है. वहीं एक इंजीनियर के लिये, किसी अनुप्रयोग को सहजज्ञ बनाना सबसे बडी  चुनौती होती है – उसकी सफ़लता और असफ़लता का मपदंण्ड यह सहजज्ञ होना ही है.  ट्रांसलिटरेशन ने आपको यह सजज्ञता प्रदान की, यदि आप फ़ोनेटिक तरीके से शब्द को सोच  सकें.</p>
<p>हाल ही में अंकुर गुप्ता ने अपने ब्लाग पर ट्रांसलिटरेशन टूल बरह का प्रयोग करने  वालों की सहायता करने के लिये <a href="http://ankurthoughts.blogspot.com/2009/09/blog-post_07.html" target="_blank">एक लेख</a> लिखा था.</p>
<p>लेख अच्छा था लेकिन टिप्पणी मे मैने उनसे पूछा था कि ट्रांसलिटरेशन तकनीक से  ‘अइयइया’ कैसे लिखेंगे? आप अगर बरह या कोई और ट्रांसलिटरेशन टूल प्रयोग करते हैं तो  कर देखिए, समझ मे आ जाएगा कि ये सीधा संभव क्यों नही है! साथ ही इससे पहले की  इंस्क्रिप्ट के हिमायती ये कहें कि ट्रांसलिटरेशन मे अधिक कुंजिया दबनी होती हैं,  इन्स्क्रिप्ट तेज है और उसमें ये बहुत आसान है तो मै उनसे कहूंगा – फ़िलहाल आगे  पढें!</p>
<p>जब कोई साईकल चलाना शुरु करता है तो कुछ समय उसे संतुलित करवाने के लिये साईड  व्हील्स की जरूरत पडती है, देरसवेर यही बच्चा हर प्रकार का वाहन चलाने लायक हो जाता  है. ट्रांसलिटरेशन वही है और मुझ जैसे ‘राईट ब्रेण्ड’ लोग जो फ़ोनेटिकली सोचने मे  माहिर हैं उनके लिये तो एकदम मुफ़ीद है ये – मुझे कुंजीयां याद रखने मे बहुत कोफ़्त  होती है यही वजह है कि लिनक्स के जिस महान vi एडिटर के नाम पे लोग दिवाने हो जाते  हैं मुझे कतई नापसंद है! यदि मुझे कहा जाता कि हिन्दी लिखने के लिये इन्स्क्रिप्ट  सीखना ही होगी तो मै कभी का राम-राम कर चुकता.</p>
<p>ट्रांसलिटरेशन जगत में इस <strong>‘अइयइया’</strong> पर दोबारा आते हैं.</p>
<p>गूगल और क्विल्ल्पैड[जो तथाकथित आर्टिफ़िशियल इन्टेलिजैंस तार्किकता से लैस होने  का दम भरता है] दोनो कि <strong>दरिद्रता </strong>एक झटके मे उजागर हो जाती है जब  आप गूगल पर कोई <strong>गडबडझाला</strong> शब्द लिखने की कोशिश करते हैं या  टेस्टिंग के लिये ही सही, क्विल-पैड पर कोई गाली! <img src='http://hindini.com/hindini/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /> </p>
<p><img src="http://farm4.static.flickr.com/3514/3919660693_60924948dc_o.png" alt="" align="left" />१. गूगल  ट्रांसलिटरेशन लेज़ी ट्रांसलिटरेशन करता है – पहले आप पूरा शब्द लिख लो फ़िर वह अपने  कोश मे से उसके अनुरूप शब्द व उसके विकल्प दिखाने की कोशिश करता है – यदी शब्द उनके  कोश मे नही है तो वो लटक गया समझो!  लेजी ट्रांसलिटरेशन में, टूल अपनी तरफ़ से तो  सहायता ही करने कि कोशिश करता है, ऐसा करने की वजह है कि आपको शिफ़्ट की का प्रयोग  ना करना पडे और आप द और</p>
<p><img class="alignright" style="float: right;" src="http://farm3.static.flickr.com/2465/3920445080_c07b6d0410_o.jpg" alt="" align="left" /></p>
<p>ड के लिये d ही दबा कर काम कर लो.</p>
<p>२.  क्विल-पैड और भी श्याणा बनने का प्रयास करता है, वो आप क्या लिखने वाले हो ये जानने  को उद्यत दिखता है और इस प्रक्रिया मे आपका ध्यान बंटाता रहता है अंतत:  लिस्ट में  बहुधा गलत शब्द ही रखता है. यदी सही शब्द होगा भी तो उसे चुनना कष्टप्रद है.</p>
<p><strong>इन दोनो से बिना कई बार खीजे “अइयइया” लिखवा पाना असंभव है!</strong> फ़िर भी ये दोनो टूल अपने-अपने तरीके से प्रयास करते हुए बडे क्यूट लगते हैं.</p>
<p>३. ऐसे में क्विक ट्रांसलिटरेशन करने वाले बरह की जीत सुनिश्चित लगती है जो हर  दबाई गई कुंजी को त्वरित ही हिंदी में बदलता है. लेकिन रुकिये!  “अइयइया करूं मैं  क्या सुकू सुकू.. खो गया दिल मेरा सुकू सुकू” [गाना सुना है कभी ये वाला?] रफ़ी साहब  ऐयैया नही गाते “अइयइया” गाते हैं. लिखते हैं तो यहां भी “अइयइया” कि बजाय ऐयैया हो  जाता है. यह जुगत अपने आप में बहुत कठिन काम कर रही होती है – मुझे इसलिये पता है  की मैने ऐसी जुगत को दो अलग अलग तरीको से सफ़लता से कोड किया है, तीसरे को खारिज  कर के अब सही चौथे तरीके का आईडिया कुलबुला रहा है. मुझे मालूम था यही होगा जब अब  स्वरों को जोड कर मात्रा बनाओगे – कोई ना कोई ऐसा शब्द  पूरे तर्क की वाट लगा देगा.  इसलिये <a href="http://www.hindini.com/tool/hug2.html" target="_blank">मैने अपने  घरेलू टूल में दो-दो कुंजियां दूसरे क्रम पर आने वाली मात्राओं को दी थीं</a>!  चलिये ये भी बता दू कि बरह मे “अ इ य इ या” लिखिये और स्पेसेज़ हटा दीजिये ये तरीका  है. फ़िर से अगर इन्स्क्रिप्ट-प्रेमी ज्यादा खुश हो रहे हैं .. तो मै कहूंगा  शान्ती.. शान्ती!</p>
<p>तो क्या करें? रातों रात इन्स्क्रिप्ट सीखने लग पडें? और मै तो सीखना चाहता ही  नहीं – क्यों सीखूं?? क्यों ना कंप्यूटर को सिखाऊँ – लेकिन अभी उसमे वक्त है! अभी  इन टूल्स को और निखरना, सुधरना, संवरना है!</p>
<p>इन्स्क्रिप्ट की सबसे बडी खासियत है तीव्रता और इसकी सबसे बडी कमजोरी  है “शिफ़्ट” कुंजी, कौन सा अक्षर कहां है ये तो खैर थोडे अभ्यास से याद हो जाएगा  लेकिन शिफ़्ट कुंजी पर आप ५०% अक्षरों को दिखाने के लिये निर्भर हैं, अगर किसी टूल  में इसके साथ त्वरित वर्तनी जांचक मिले तो ये रेस मे सबसे आगे हो! हां शुरुआती  लर्निंग-कर्व धीमा होगा.</p>
<p><strong>गूगल और क्विल्लपैड</strong> इस शिफ़्ट कुंजी पर निर्भरता खत्म करने  कि और आपके लिये त्वरित वर्तनी जांचक का काम करने कि कोशिशों में और वक्त बरबाद  करते हैं. कभी सफ़ल होते हैं कभी असफ़ल.</p>
<p><strong>बरह</strong> एकदम आसान शुरुआत देता है लेकिन मात्राओं  के लिये आपको अधिक कुंजियां दबाने होती हैं – शिफ़्ट की से यहां भी पूरी निजात नही  मिलती. यदि आप तेजी से टाईपिंग कर सकते हैं और धडा-धड फ़ोनेटिक तरीके से सोच सकते  हैं तो ये ठीक है.</p>
<p>जब तक वो हो, अनुभवी चिट्ठाकारों को यह बताने का समय आ गया है कि फ़ोनेटिक और  इंस्क्रिप्ट शैली से लिखने में किन तकनीकों का प्रयोग होना चाहिए.</p>
<p><strong>अब ये देखें की एक आदर्श इन्डिक भाषा के टूल मे क्या क्या होना चाहिए? </strong></p>
<p>१. वो एकदम मुफ़्त हो और हवा की तरह से हरवक्त तरोताजा[अपडेटेड] मुहैया हो. देसी  आदमी ऐसी वाहियात चीजों पे पैसा खर्च नही करता – वैसे फ़ोकट की मिले तो धन्यवाद भी  नहीं करता.</p>
<p>२. वो टूल रिच टेक्स्ट एडिटिंग करता हो, तमाम युनिकोड फ़ाण्ट्स से सुसज्जित  हो.</p>
<p>३. वो बहुभाषी और बहु-कुंजीपटल वाला हो.</p>
<p>४. ट्रांसलिटरेशन की कुंजियों को री-प्रोग्राम करने की सुविधा देता हो जैसे  अं की  मात्रा विन्डोज़ आई.एम.ई में ‍^ से लगती है और बरह मे M से तो आवश्यकता पडने पर लोग  उसे अपने तरीके से सेट कर सकें.</p>
<p>५. हिन्दी वर्तनी की जांच करता हो.</p>
<p>६. अंग्रेजी-हिन्दी शब्दकोश की सुविधा भी देता हो और <strong>हिंग्लिश घुसेड  परिवर्तक हो! </strong></p>
<p>७. आनलाईन, ऑफ़लाईन चले. प्लग-इन्स बन सकें.</p>
<p><strong></strong></p>
<p><strong><img class="alignleft" style="float: left;" src="http://farm1.static.flickr.com/45/117304054_e606ef3449.jpg" alt="" width="250" height="230" />हिंग्लिश घुसेड परिवर्तक मतलब क्या? </strong></p>
<p>एक आम भारतीय प्रयोक्ता हिंग्लिश मे सोचता है. मतलब क्या? मतलब ये कि आप एक ही वाक्य को तीन तरीके से लिख सकते हैं – जैसे कि</p>
<p><strong>आप सोचते कैसे हैं</strong> &#8211; मेरी train late थी और घुसने पर पाया कि  मेरी berth पर एक भैंस जैसी महिला लेट गई थी. [पहला late अंग्रेजी वाला दूसरा  लेट  हिंदी वाला अलग अलग हैं]</p>
<p><strong>आप लिखते क्या हैं</strong> &#8211; मेरी ट्रेन लेट थी और घुसने पर पाया  कि मेरी बर्थ पर एक भैंस जैसी महिला लेट गई थी [पहला लेट अंग्रेजी का है दूसरा लेट  हिंदी का लेकिन इनका और बर्थ (यानी जन्म था या शायिका?) का मतलब निकालना आप पाठक पर छोड देते हैं]</p>
<p><strong>आपको लिखना क्या चाहिये था</strong>- मेरी ट्रेन विलम्ब से थी और घुसने  पर पाया कि मेरी शायिका पर एक भैंस जैसी महिला लेट गई थी.   [ट्रेन के लिये  लौहपथगामिनी लिखना ओवर हो जाएगा – पापुलर चलेगा]</p>
<p><strong></strong></p>
<p>तो टूल को बहुत समझदार होना चाहिए वो आपका हिंदी असिस्टेंट हो यानी एक समझदार  हिंग्लिश घुसेड परिवर्तक का काम भी करे -</p>
<p><strong> </strong></p>
<p><strong>आपको टाईप कैसे करना पडे</strong>- मेरी ट्रेन =late थी और घुसने पर  पाया कि मेरी =berth पर एक भैंस जैसी महिला लेट गई थी.</p>
<p><strong>और टूल क्या दिखा दे</strong> &#8211; मेरी ट्रेन विलम्ब से थी और घुसने पर  पाया कि मेरी शायिका पर एक भैंस जैसी महिला लेट गई थी.</p>
<p>यानी  टूल ने =late के स्थान पर विलम्ब से और =berth के स्थान पर शायिका लिख  दिया – जरूरत पडे तो वो किसी शब्द विशेष के विकल्प भी दिखा दे. ये हुई रीयल  कलाकारी! ये आपको जबरदस्ती ज्ञान बघारने वाले हिंग्लिशिये ब्लागर्स की खिचडी भाषा  से बचाने का काम भी करेगा.</p>
<p>२००९ में मात्र ट्रांसलिटरेशन vs इन्स्क्रिप्ट में उलझे रहना कल्पनाशीलता की घोर कमी होगी! मै ऐसा टूल बना सकता हूं लेकिन समय कि कमी है – यदी कुछ  प्रोग्रामर्स साथ जुडें तो मै ऐसे किसी प्रोजेक्ट पर काम जरूर करना चाहूंगा. ऐसी  सुविधा होने से आप इतना तेज लिख सकेंगे और बढिया हिन्दी कि बाकी बहस अर्थहीन हो  जाएगी. वैसे इस आईडिये पर मेरा कोई कॉपीराईट नही है (ये मोह भी छोडा) – लेकिन मै  ऐसी सुविधाएं देखना जरूर चाहता हूं! पाठकों के विचार भी जानना चाहूंगा.</p>
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		<item>
		<title>सौ या अधिक चिट्ठा-प्रविष्टियां लिख चुके नये चिट्ठाकारों के लिये</title>
		<link>http://feedproxy.google.com/~r/titletagsHindin/~3/bigSVKSSfy0/177</link>
		<comments>http://hindini.com/hindini/archives/177#comments</comments>
		<pubDate>Mon, 07 Sep 2009 22:23:18 +0000</pubDate>
		<dc:creator>eswami</dc:creator>
				<category><![CDATA[ब्लॉगिंग और वेबजीवन]]></category>
		<category><![CDATA[Blogging]]></category>
		<category><![CDATA[features]]></category>
		<category><![CDATA[tips & tricks]]></category>

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		<description><![CDATA[सौ या उस से अधिक चिट्ठा प्रविष्टियां लिखे चिट्ठाकारों ने कुछ महत्वपूर्ण  परिस्थितियों का समाना जरूर कर लिया होगा – यह पोस्ट कुछ साझा समस्याओं और उनके  निदान के बारे मे है –  आशा है कि इन्टरनेट पर नये सक्रिय हुए हिंदीभाषी मित्रों के  किसी काम आएगी.
(१)
प्रश्न: मेरे अच्छे लेखों को कम टिप्पणियां क्यों मिलती हैं?
प्रसंग: आप [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>सौ या उस से अधिक चिट्ठा प्रविष्टियां लिखे चिट्ठाकारों ने कुछ महत्वपूर्ण  परिस्थितियों का समाना जरूर कर लिया होगा – यह पोस्ट कुछ साझा समस्याओं और उनके  निदान के बारे मे है –  आशा है कि इन्टरनेट पर नये सक्रिय हुए हिंदीभाषी मित्रों के  किसी काम आएगी.</p>
<p>(१)</p>
<p>प्रश्न: मेरे अच्छे लेखों को कम टिप्पणियां क्यों मिलती हैं?</p>
<p>प्रसंग: आप किसी स्थापित चिट्ठाकार का चिट्ठा पढते हैं. लेख औसत लगता है और आप  देखते हैं कि इस गौण लेखन के बावजूद उनके यहां बहुत टिप्पणीप्रेम बरस रहा है. आपको  लगता है कि आपने उससे अच्छे जो लेख लिखे थे उन पर भी किसी ने ध्यान नही दिया था. या  कम से कम उस स्थापित चिट्ठाकार के इस वाले लेख से तो आप बेहतर ही लिख सकते थे. आप  शिकायत करना चाहते हैं पर कहें तो किससे? आप श्मशान वैराग्य कि स्थिती को प्राप्त  हो चुका महसूस करते हैं.</p>
<p>कुछ जाने पहचाने सच:  सौ या अधिक लेख लिख चुकने के बाद आप टिप्पणियों का  मनोविज्ञान समझ चुके हैं. आप जानते हैं कि टिप्पणी विनिमय ने कई स्थापित  चिट्ठाकारों को स्थापित किया है. फ़िर भी आप इस लेन देन से परहेज करते हैं और संभव  है चाहे-अनचाहे इसे अजमा भी चुके हैं. हर पढे चिट्ठे पर “बढिया पोस्ट” “अच्छा  विचार” आदी करने का आपका मन नही होता.</p>
<p><img class="alignleft" style="float: left;" src="http://farm3.static.flickr.com/2182/2508000101_be0a7d6c3b.jpg" alt="" width="250" height="215" />ये भी जानिये: टिप्पणियों की संख्या से कोई स्थापित नही होता. प्रभावित करने की  क्षमता से स्थापित होता है. आपकी प्रभावित करने की क्षमता जैसे जैसे बढेगी  टिप्पणियों की संख्या अपने आप बढेगी और फ़िर ये ग्राफ़ एक पठार का सा रूप लेगा  &#8211;  टिप्पणियों की संख्या स्थिर हो जाएगी. लेकिन आपके पाठक स्थायी &#8211; एक दम पक्का जोड!.  आपके अच्छे लेखों  की संख्या महत्वपूर्ण है.</p>
<p>इसका यह अर्थ भी है कि अपने आप को तभी स्थापित मानें जब आपके पाठक आपसे किसी खास  पसंदीदा विषय पर लिखने कि मांग करें, पुराने लेखों का जिक्र हो और आपसे अपेक्षाएं  रखी जाएं.</p>
<p>दोहराव से बचते हुए अपनी विशिष्टता गढने का समय लें. अन्यथा अगर बहुधा लोग आपके  टिप्पणीदान का हिसाब बराबर करने मात्र “अच्छा है” “अच्छा है” कर रहे हैं तो आप  खुशफ़हमी में रहने के लिये स्वतंत्र हैं.</p>
<p>(२)</p>
<p>प्रश्न: जब ब्लागिंग स्वांत: सुखाय लिखने का माध्यम है तो इस पर हर वक्त इतना  विचार-विमर्श क्यों?</p>
<p>प्रसंग: आप एकाधिक एग्रीगेटर्स में पंजीबद्ध हैं और आए दिन चिट्ठाकारी के बारे  मे ही लिखे चिट्ठे पढ कर उकता चुके हैं. आपको आप पर थोपी जा रही इन  स्वयंभू फ़्रेंड-फ़िलासाफ़र्स-गाईड्स की फ़ौज से चिढ होने लगी हैं. पढने पर आपको लगता  है कि चिट्ठा लिखा ही गया था सबका ध्यान आकर्षित करने के लिये जबकी दी गई जानकारी  में कुछ खास नही था. आप तीखी प्रतिक्रिया जताना चाहते हैं लेकिन चुप रह जाते हैं.</p>
<p>कुछ जाने पहचाने सच: ऐसे प्रसंग चिट्ठाकारी से ही आपका मोह भंग कर सकते हैं.  इनको ले कर अधिक संवेदनशीलता दिखाने से बचें.</p>
<p><img class="alignleft" style="float: left;" src="http://farm1.static.flickr.com/163/343568210_c9f3c922bd.jpg" alt="" width="250" height="215" />ये भी जानिये: <strong>मेटा-ब्लॉगिंग </strong>और साधारण ब्लागिंग का फ़र्क  समझें – जैसे कि हिंदिनी/हिन्दिनी अब एक मेटाब्लाग है – ब्लागिंग के बारे में ब्लाग  और ई-स्वामी या फ़ुरसतिया व्यक्तिगत ब्लाग्स. व्यक्तिगत ब्लाग्स पर की गई  मेटाब्लागिंग अधिकतर ध्यानाकर्षणा और गैर तकनीकी ही होगी – कुछ अपवादों को छोड कर.  मेटाब्लाग्स की संख्या भी कम नहीं है – अत: अपनी पसंद के चुन लें. वैसे अगर आप यह लेख पढ रहे हैं तो आपका चुनाव सही है! <img src='http://hindini.com/hindini/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /> </p>
<p>दोहरी रणनीति का प्रयोग कर अपने आपको बचाएं. अपने चुने-चुनाए पसंदीदा  ब्लागर्स को किसी व्यक्तिगत एग्रीगेटर के माध्यम से फ़ीड जोड कर पढें और अच्छे नये  लेखकों को जानने पढने के लिये वेब आधारित एग्रीगेटर्स का सहारा लें – और बर्न-आऊट  से बचें, समय सीमा निर्धारित कर के चलें.</p>
<p>(३)</p>
<p>प्रश्न: ब्लागर्स ब्लाक का सत्य क्या है?</p>
<p>प्रसंग: आप स्वयं पाते हैं कि कई बार आपके पास लिखने के लिये अच्छा विषय नही है  लेकिन आप लिखना चाहते हैं. कई बार देखते हैं कि जनता “यूं ही” दे पोस्ट पे  पोस्ट ठेले जा रही है जबकि वे सनातन ब्लागर्स ब्लाक के मारे हुए लग रहे हैं. ऐसे  में आप क्या करें?</p>
<p><img class="alignleft" style="float: left;" src="http://farm1.static.flickr.com/60/154832339_6ec7811348.jpg" alt="" width="250" height="215" /></p>
<p>कुछ जाने पहचाने सच: खुद पर लिखने की नियमितता थोपे जाने या दूसरों को लगातार  लिखता देख स्वयं कि सृजनशीलता पर शक करने कि वजह से चिट्ठाकार परेशान हो जाता है.</p>
<p>ये भी जानिये: आप स्वयं जानते हैं कि दो प्रकार के ब्लाक्स हैं – एक – लिखने का  मन है लेकिन सामग्री नही है और दो – लिखने की सामग्री है लेकिन लिखने का मन नही है.वैसे दोनो ही परिस्थितियां बहुत अच्छी हैं. ब्लागिंग से ब्रेक लें और एक पाठक  बनें या स्वयंसेवक – असक्रियाता से बचाव भी होगा और कई किस्म के काम हैं.</p>
<p>किसी विकी पेज का अनुवाद कर दें, तकनीकी व्यक्ति हैं तो श्रमदान कर दें. भाषा कि  उपलब्धता बढाएं. या कुछ और मनपसंद करें. लगातार लिखने का कोई दवाब स्वयं पर ना  थोपें.</p>
<p>दूसरी ओर, विचार आते ही बिना योजना बनाए लिखना – तली में आया गली में खाया  प्रवृत्ती है. हर प्रविष्ठी के प्रस्तुतिकरण की एक ५-१० मिनट की योजना, उसका  संयोजन आपको एक बेहतर ब्लागर बनाता है.</p>
<p>(४)</p>
<p>प्रश्न: बे~टिंग और ट्रालिंग से कैसे बचें और प्रतिक्रिया कब करें?</p>
<p>प्रसंग: सौ या अधिक लेख लिख कर और इस दौरान दूसरों को पढ कर अब आपकी नज़रें अब  इतनी विकसित हो चुकी हैं की आप सनसनीखेज, उकसानेवाले, मजेलेने वाले, चाबी-बाज,  काडीबाज्, ध्यानाकर्षणा (या ये भी संभव है कि व्यक्तिगत हो कर) लिखे गए शीर्षकों और  लेखों को सौ मील दूर से ताड लेते हैं और चिट्ठाकार की मंशा भी. आप देखते हैं कि  अन्य कई ब्लागर्स इस प्रकार के लेखन के लपेट में आ गए हैं – आप इस स्थिती को विधा  के लिये अच्छा नही मानते और अगर हिस्सा लिया तो आप भी उसी चक्र का हिस्सा बन जाएंगे  ये जानते समझते हैं. अब आप क्या करें समझ नही पा रहे. इससे आपका चिट्ठाकारी की  तरफ़ मोहभंग भी होता है.</p>
<p>कुछ जाने पहचाने सच: छोटे समूहों में, अच्छे चिट्ठाकारों में जुगुप्सा जगाने  वाले  ये बडे कारण हैं.</p>
<p><img class="alignleft" style="float: left;" src="http://farm1.static.flickr.com/116/302040071_d3b75b30cb.jpg" alt="" width="250" height="215" />ये भी जानिये: तीन कारागर तरीके हैं – अपने व्यक्तित्व के हिसाब से चुनें -</p>
<p>पहला: नजर-अंदाज़ कर दें और आगे से उस चिट्ठाकार को पढना कतई बंद कर दें.</p>
<p>दूसरा: डरें बिल्कुल नहीं – मुखर हों. इस प्रकार कि हरकतों के खिलाफ़ आप अपनी  प्रतिक्रिया ससम्मान जता सकते हैं – आपके साहस की तारीफ़ ही होगी.  किसी और  चिट्ठाकार ने यदि पहले प्रतिक्रिया कर दी है तो आप अपनी सहमती भर जाहिर कर के अपना  पक्ष रख सकते हैं.</p>
<p>तीसरा: सही समय आने पर अपने विचार अपने चिट्ठे पर रखें. और सोची समझी रणनीति के  तहत संतुलित लिखें – मात्र भावुक हो कर नहीं.</p>
<p>(५)</p>
<p>प्रश्न: मेरे ब्लाग कि छबि का प्रबंधन कैसे करूं?</p>
<p>प्रसंग: चिट्ठा प्रारंभ करते समय आप प्रायोगिक मूड मे थे और अधिक उत्साह में भी.  फ़िर जैसे जैसे लिखा स्वयं की सोच में परिवर्तन भी आया और प्रस्तुतिकरण के तरीके में  भी. लेकिन तब तक आपके चिट्ठे की, लेखन की और आपकी छवि बन चुकी थी पाठकों के मन में.  वो वैसी नहीं जैसी आपने सोचा था, आप बदलाव लाना चाहते हैं – अब आप क्या करेंगे?</p>
<p><img class="alignleft" style="float: left;" src="http://farm3.static.flickr.com/2364/1709390794_24b426e6ea.jpg" alt="" width="250" height="215" /></p>
<p>कुछ जाने पहचाने सच: इस दौर से अधिकतर चिट्ठाकार गुज़रते हैं. ये नेचुलर  प्रोग्रेशन है.</p>
<p>कुछ शुरुआती तकनीकें:</p>
<p>१) नई केटेगरीज बनाएं और उनमें अधिक लिखें.</p>
<p>२) चिट्ठे का कलेवर बदलें और अपने ब्लागरोल्स में नए/अलग सदस्य जोडें.</p>
<p>३) HTML सीखें और बेहतर प्रस्तुतिकरण कि टिप्स व ट्रिक्स के बारे में जानें.</p>
<p>४) अपना डॉमेन नेम, पेड होस्टिंग आदे के विकल्पों पर भी विचार करें.</p>
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		<title>ब्लॉग फ़ार्मेट टिप्स: मैं कैसे हिंदी चिट्ठे नहीं पढता</title>
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		<comments>http://hindini.com/hindini/archives/176#comments</comments>
		<pubDate>Tue, 14 Jul 2009 17:30:04 +0000</pubDate>
		<dc:creator>eswami</dc:creator>
				<category><![CDATA[ब्लॉगिंग और वेबजीवन]]></category>
		<category><![CDATA[प्रस्तुति]]></category>
		<category><![CDATA[फ़ाण्ट]]></category>
		<category><![CDATA[फ़ार्मेट]]></category>
		<category><![CDATA[font]]></category>
		<category><![CDATA[format]]></category>

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		<description><![CDATA[बात पठनीयता की नहीं कर रहा, बात प्रस्तुति की कर रहा हूं.
मन तो होता है कि जितने हो सके उतने हिन्दी चिट्ठे पढूं लेकिन मैने नोट किया है  कि मैं प्रस्तुति के आधार पर कुछ चिट्ठों को पढ ही नही सकता, चाहे वो हिंदी में हों  या किसी और भाषा में.
तो कैसे चिट्ठे चाहे उनका मसौदा [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>बात पठनीयता की नहीं कर रहा, बात प्रस्तुति की कर रहा हूं.</p>
<p>मन तो होता है कि जितने हो सके उतने हिन्दी चिट्ठे पढूं लेकिन मैने नोट किया है  कि मैं प्रस्तुति के आधार पर कुछ चिट्ठों को पढ ही नही सकता, चाहे वो हिंदी में हों  या किसी और भाषा में.</p>
<p>तो कैसे चिट्ठे चाहे उनका मसौदा अच्छा ही हो पाठक जुगाडने में असफ़ल हो सकते  हैं आईये देखें -</p>
<p>१. काले पार्श्व पर सफ़ेद या हरे या किसी ऐसे ही रंग में लिखे गए चिट्ठे – इन्हें  अपनी आंखों की सुरक्षा के खयाल से नहीं पढता. ऐसे चिट्ठे भी नहीं जिनके पार्श्व का  रंग आंखों को चुभता हो.</p>
<p>२.  बिलावजह पूरा चिट्ठा जब <em>इटेलिक्स</em> में लिखा जाता है – एक पुराने  ब्लागर हैं उन्हें इटालिक्स से इतना प्यार है कि उनकी टिप्पणियां भी गर्दन तेढी कर  के पढनी पडती हैं.</p>
<p>३. रंग-बिरंगी फ़ॉंट में लिखे गए चिट्ठे – ऐसे चिट्ठे देखने में बहुत बचकाने लगते  हैं – चाह कर भी नहीं पढ पाता!</p>
<p>४. ऐसे चिट्ठे जिनका शीर्षक हिंदी और अंग्रेजी दोनो भाषाओं मे लिखा होता है –  इन्हें भी नहीं पढता, एक किनारा पकड भई नहीं तो दो अलग-अलग भाषा के ब्लॉग बना.</p>
<p>५. चिट्ठा जो पूरा का पूरा एक ही पैराग्राफ़ में लिखा गया हो – ना जी  धन्यवाद!</p>
<p>६. चिट्ठा जो बडे बडे पैराग्राफ़्स में लिखा गया हो और उनके बीच व्हाईट स्पेस ना  हों, उस पेज को बंद करते देर नहीं लगती.</p>
<p>७.  झिलमिल करते एनिमेशन्स या बिज्ञापनों की घुसेड से भरपूर चिट्ठे भी गंभीर नही  लगते.</p>
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		<title>माईकल जेक्सन का निधन!</title>
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		<pubDate>Fri, 26 Jun 2009 00:30:50 +0000</pubDate>
		<dc:creator>eswami</dc:creator>
				<category><![CDATA[सूचना]]></category>
		<category><![CDATA[माईकल जेक्सन]]></category>

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		<description><![CDATA[&#8230;ईश्वर दिवंगत की आत्मा को शान्ती प्रदान करे!
महान कलाकार, विवादग्रस्त व्यक्तित्व और विसंगतियों से भरपूर जीवन का दु:खद अंत.

]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>&#8230;ईश्वर दिवंगत की आत्मा को शान्ती प्रदान करे!</p>
<p>महान कलाकार, विवादग्रस्त व्यक्तित्व और विसंगतियों से भरपूर जीवन का दु:खद अंत.</p>
<p><img src="http://groupieblog.files.wordpress.com/2009/02/michael-jackson.jpg" alt="माईकल जेक्सन" /></p>
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		<title>माईक्रोपोस्ट: इस जुगत में है जिंग!</title>
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		<pubDate>Fri, 21 Nov 2008 05:48:21 +0000</pubDate>
		<dc:creator>eswami</dc:creator>
				<category><![CDATA[सूचना]]></category>

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		<description><![CDATA[मेरी पहली माईक्रोपोस्ट!
  
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			<content:encoded><![CDATA[<p>मेरी पहली माईक्रोपोस्ट!<br />
<object classid="clsid:D27CDB6E-AE6D-11cf-96B8-444553540000" width="496" height="166"><param name="movie" value="http://content.screencast.com/users/premchop/folders/Jing/media/2d383247-52f9-4ef3-9b16-8ed86f1fce85/bootstrap.swf"></param><param name="quality" value="high"></param><param name="bgcolor" value="#FFFFFF"></param><param name="flashVars" value="thumb=http://content.screencast.com/users/premchop/folders/Jing/media/2d383247-52f9-4ef3-9b16-8ed86f1fce85/FirstFrame.jpg&#038;width=496&#038;height=166&#038;content=http://content.screencast.com/users/premchop/folders/Jing/media/2d383247-52f9-4ef3-9b16-8ed86f1fce85/2008-11-20_2351.swf"></param><param name="allowFullScreen" value="true"></param><param name="scale" value="showall"></param><param name="allowScriptAccess" value="always"></param><param name="base" value="http://content.screencast.com/users/premchop/folders/Jing/media/2d383247-52f9-4ef3-9b16-8ed86f1fce85/"></param>  <embed src="http://content.screencast.com/users/premchop/folders/Jing/media/2d383247-52f9-4ef3-9b16-8ed86f1fce85/bootstrap.swf" quality="high" bgcolor="#FFFFFF" width="496" height="166" type="application/x-shockwave-flash" allowScriptAccess="always" flashVars="thumb=http://content.screencast.com/users/premchop/folders/Jing/media/2d383247-52f9-4ef3-9b16-8ed86f1fce85/FirstFrame.jpg&#038;width=496&#038;height=166&#038;content=http://content.screencast.com/users/premchop/folders/Jing/media/2d383247-52f9-4ef3-9b16-8ed86f1fce85/2008-11-20_2351.swf" allowFullScreen="true" base="http://content.screencast.com/users/premchop/folders/Jing/media/2d383247-52f9-4ef3-9b16-8ed86f1fce85/" scale="showall"></embed></object></p>
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		<title>पठनीयता, लोकप्रियता, रुचि और विषयों की जानकारी देती फ़ीड आधारित साईट!</title>
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		<pubDate>Wed, 27 Aug 2008 00:32:38 +0000</pubDate>
		<dc:creator>eswami</dc:creator>
				<category><![CDATA[ब्लॉगिंग और वेबजीवन]]></category>
		<category><![CDATA[जुगत]]></category>
		<category><![CDATA[जुगाड]]></category>
		<category><![CDATA[ब्लॉगिंग]]></category>
		<category><![CDATA[Blogging]]></category>
		<category><![CDATA[features]]></category>
		<category><![CDATA[RSS]]></category>

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		<description><![CDATA[खुशी हो रही ये देख कर की हिंदी ब्लागर्स नये अनुप्रयोगों और जुगतों को  अपनाने में बिल्कुल झिझक नहीं रहे &#8211; पिछली पोस्ट में एप्चर के बारे में बताने के  बाद जैसी अप्रत्याशित प्रतिक्रियाएं मिलीं हैं &#8211; दिल बाग-बाग हुआ है. आज की पोस्ट  है एक और धांसू साईट के बारे में! इसकी [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>खुशी हो रही ये देख कर की हिंदी ब्लागर्स नये अनुप्रयोगों और जुगतों को  अपनाने में बिल्कुल झिझक नहीं रहे &#8211; पिछली पोस्ट में एप्चर के बारे में बताने के  बाद जैसी अप्रत्याशित प्रतिक्रियाएं मिलीं हैं &#8211; दिल बाग-बाग हुआ है. आज की पोस्ट  है एक और धांसू साईट के बारे में! इसकी भी एक मजेदार कहानी है &#8211; दर-असल ये साईट तो  बनी थी किसी और काम के लिये लेकिन जुगाडू जनता नें इसे दूसरे ही कामों के लिये  प्रयोग करना शुरु कर दिया, फ़ायदा हुआ और जैसा की होना चाहिये इस आईडिये का प्रसाद  बंटने लगा.</p>
<p>हम यहां इस साईट के दोनो गुणों की बात करेंगे &#8211; एक ब्लागर के और एक पाठक के  दृष्टीकोण से!</p>
<p>पहले बात करते हैं की एक ब्लागर होने के नाते आपको अपने लेखन के बारे में क्या  जानना चाहिए और अपने लेखों को आंकने का तरीका क्या हो?</p>
<p>कोई लेख जिस पर ज्यादा प्रतिक्रियाएं मिलीं जरूरी नहीं है की अच्छा लेख हो.</p>
<p>कोई लेख जिस को लोग गूगल से खोजते हुए पहुंचे जरूरी नहीं है की अच्छा लेख हो.</p>
<p>कोई लेख जिस पर सबसे अधिक रेटिंग मिली &#8211; हां ये एक बहुत अच्छा, मानवीय तरीका है  पसंद किये गये जानने का.</p>
<p>कोई विषय जिस पर उपरोक्त तीनों आधार पर अच्छे परिणाम और प्रतिक्रियाएं प्राप्त  हुए हों -निश्चित रूप से चाहे एक अच्छा विषय ना हो पर लोकप्रिय विषय जरूर हो सकता  है. जनता की रुचि का पैमाना भी.  ये मेरे जैसे ब्लागर्स के लिये बहुत काम की  जानकारी होती है जिनके ब्लाग्स एकाधिक विषयों पर होते हैं.</p>
<p>हम दूसरी पसंदीदा साईट्स को भी इन्हीं पैमानों पर तौलें तो पता लगा  सकते हैं की कौन से विषय अभी अधिक लोकप्रिय हैं और अपना ट्रैफ़िक बढानें में उनका  चतुराईपूर्ण प्रयोग कर सकते हैं. इसका ये मतलब नहीं है की हमारी पढनीयता को ठोस  बढावा मिलेगा लेकिन एक शुरुआती आधार जरूर मिल सकता है जिससे कोशिश कर, नये पाठकों  को हम अपना लंबे समय का ग्राहक बना सकते हैं - भई जो हमारी फ़ीड ग्रहण करे वो ग्राहक  ही हुआ ना! और ग्राहक भगवान होता है.</p>
<p>ये तो था ब्लागर का दृष्टीकोण &#8211; अब एक पाठक के नज़रिये से देखें तो सारे ब्लागर्स  अपनी अपनी रेहडी सजा के बैठे हैं- कहां किसके माल में दम है ये कैसे पता करें?  हिंदी ब्लाग जगत के ब्लागवाणी, चिट्ठाजगत, नारद जैसे एग्रीगेटर्स सांख्यिक और  मानवीय पसंद के भिन्न भिन्न पहलूओं पर छांट कर पोस्ट दिखाते हैं. टैग क्लाऊड की मदद  से लोकप्रिय विषयों के बारे में बताते हैं - लेकिन वो हमारी व्यक्तिगत पसंद के  विषयों से नंबरवार मिलते जुलते हों जरूरी नहीं.</p>
<p><strong>एक पाठक के लिये रुचि के आधार पर पहले तीन प्रकार के ब्लाग्स यूं हो  सकते हैं &#8211; कविता, हास्य, राजनीति </strong></p>
<p><strong>दूसरे के हिसाब से हो सकता है  &#8211; तकनीक,राजनीति,खेल&#8230; लेकिन एक ट्विस्ट  ये है की दूसरे ब्लागर को सिर्फ़ सुपरहिट हास्य वाला लेख ही पढने में रुचि है! </strong></p>
<p><strong>हां अब ऐसी जरूरत के लिये हमें एक खास किस्म के सहयोगी की जरूरत होगी जो  हमारी पसंद के हिसाब का माल छांट के बता दे. </strong></p>
<p>aideRSS वो वेबसाईट है जो उपरोक्त दोनो कामों को आसान बनाती है &#8211; एक ब्लागर और  एक पाठक के लिये! एक ब्लागर अपने और दूसरों के ब्लाग्स के हिट होने के ट्रैंड देख  सकता है, पाठक वर्ग की रुचि के बारे में जान सकता है और अपने लेखन में सुधार ला  सकता है! साथ ही अपने काम के फ़िल्टर सेट कर के सिर्फ़ खास और चुनिंदा पोस्ट्स को पढ  कर अपने समय का सदुपयोग और अपनी उत्पादकता बढा सकता है. चलिये जी ये लीजिये एक  अच्छा वीडियों तो यहीं बांच लीजिये!</p>
<p>aideRSS के फ़ायरफ़ाक्स एक्स्टेंशन और गूगल रीडर के साथ काम करने के अनुप्रयोग  उपलब्ध हैं. आगे की पूरी जानकारी के लिये आप सीधे aideRSS की साईट पर जाईये, उसे  आज़माईये और हमेशा की तरह अपने अनुभव हमसे बांटिये जरूर!</p>
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