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		<title>चालीस पीढ़ी से जगन्नाथ भगवान की सेवा में चित्रकारी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Morning News India]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 17 Sep 2026 06:23:06 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[भारत]]></category>
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					<description><![CDATA[रोशनलाल शर्मा भुवनेश्वर। उड़ीसा जीडीपी के मामले में चाहे देश में विकसित राज्यों से कहीं पीछे हो लेकिन परम्परागत कलाओं के संरक्षण में आज भी उड़ीसा देश के उन्नत राज्यों में शामिल हैं जहां एक गांव को यूनेस्को जैसी विश्वस्तरीय संस्था ने वर्ल्ड हेरिटेज में स्थान दिया है। रघुराजपुरा उड़ीसा की जगन्नाथपुरी से करीब 13 [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>रोशनलाल शर्मा<br />
भुवनेश्वर। उड़ीसा जीडीपी के मामले में चाहे देश में विकसित राज्यों से कहीं पीछे हो लेकिन परम्परागत कलाओं के संरक्षण में आज भी उड़ीसा देश के उन्नत राज्यों में शामिल हैं जहां एक गांव को यूनेस्को जैसी विश्वस्तरीय संस्था ने वर्ल्ड हेरिटेज में स्थान दिया है।<br />
रघुराजपुरा उड़ीसा की जगन्नाथपुरी से करीब 13 किमी की दूरी पर है। गांव की विशेषता ये है कि यहां हर तीसरा घर करीब ढाई सौ सालों पुरानी पट चित्र शैली की पेंटिग के लिए दुनिया के नक्शे पर बहुत इज्जत के साथ देखा जाता है।<br />
पुरी के समुद्र तट से महज पांच किमी दूरी पर स्थित इस गांव में घुसते ही पहला घर इस मशहूर परम्परागत चित्र शैली के कलाकार विजयकुमार बारीकी का है। दरअसल घर नहीं ये अपने आप में एक चित्र म्यूजियम है। बारीकी 2017 में राष्ट्रपति अवार्ड से सम्मानित चित्रकार हैं। वे बताते हैं कि उनकी 40 पिढियां जगन्नाथ भगवान की सेवा में गुजर गई। पट चित्रकला का उद्भव दरअसल भगवान जगन्नाथ की मंदिर की स्थापना से हुआ है।<br />
इसलिए जुड़ा इस कला का भगवान जगन्नाथ से नाम<br />
ज्येष्ठ मास की देवस्नान पूर्णिमा के बाद जब भगवान जगन्नाथ बीमार माने जाते हैं, तब मंदिर के कपाट बंद रहते हैं। ऐसे में दर्शन के लिए मंदिर में भगवान के पटचित्र जिन्हें &#8216;पट्ट-दीर्घ&#8217; या &#8216;अनसॅक पट&#8217; कहा जाता है, स्थापित किए जाते हैं। पटचित्र में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा, उनकी विभिन्न लीलाओं, दशावतार और कृष्ण कथाओं का अत्यंत सूक्ष्म और सुंदर चित्रण किया जाता है। पटचित्र में देवताओं का रंग-रूप और उनके चेहरे की बनावट पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर की मूर्तियों से मिलती-जुलती होती है। रघुराजपुर गाँव इस कला का सबसे बड़ा केंद्र है, जहां के 40 पीढ़ियों से इस परंपरा को भगवान जगन्नाथ की सेवा के रूप में जीवित रखे हुए हैं।<br />
इसलिए नाम पड़ा पट चित्र<br />
सूती कपड़े को इमली के बीजों के लेप और खड़िया मिट्टी के मिश्रण से कई परतों में सख्त बनाया जाता है। इसमें सफेद रंग के लिए समुद्र के शंख का चूर्ण काम में लिया जाता है। सूखने के बाद इसे चिकने पत्थरों या सीपियों से रगड़कर चमकीला और चिकना कैनवास बनाया जाता है। काला रंग दीपक के काजल या जले हुए नारियल के छिलके से तैयार किया जाता है। वहीं पीला हरिताल पत्थर से और लाल रंग गेरु से तैयार होता है। हरा रंग पत्तियों और हरी जड़ी-बूटियों से बनता है। जबकि रेखाएं खींचने के लिए गिलहरी या चूहे के बालों से बने बारीक ब्रश का प्रयोग किया जाता है।<br />
कला को संरक्षण की दरकार<br />
इसी तरह की कला पीपीली गांव में भी देखने को मिलती है। इस हस्तकला को खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जियो टैगिंग दी है।</p>
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		<title>जगन्नाथ भगवान के विग्रह में उनका हृदय नहीं, नाभि कमल</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Morning News India]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 17 Sep 2026 06:02:10 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[भारत]]></category>
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					<description><![CDATA[पूरी की विश्व प्रसिद्ध फेक न्यूज का खंडन बड़े भ्राता के मंदिर लिंगराज आया]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>रोशनलाल शर्मा<br />
भुवनेश्वर। पूरी दुनिया में खबर ये फैली है कि भगवान जगन्नाथ के विग्रह में श्रीकृष्ण का हृदय धड़कता है और हर 12 से 19 साल के दौरान एक विशेष मुहुर्त में जगन्नाथपुरी में रात को अंधेरा करके इस हृदय यानि ब्रह्म पदार्थ को ट्रांसफर किया जाता है। ये एक फेक न्यूज है और इसका खंडन भगवान जगन्नाथ के बड़े भाई लिंगराज मंदिर से आया है।<br />
लिंगराज मंदिर में अपनी सेवाएं दे रहे इतिहासकार प्रफुल्ल पंडित ने बताया, दरअसल कलियुग के अन्त में जब श्रीकृष्ण ने अपनी देह त्यागी तो पांडवों ने उनका अन्तिम संस्कार किया। उस समय उनकी देह तो भस्म हो गई लेकिन उनका वह नाभि कमल बच गया। जिसे उनके पौत्र ने समुंद्र में बहा दिया। कालान्तर में भगवान कृष्ण द्वारा एक राजा को स्वप्न में दर्शन देकर समुद्र में मौजूद उस दिव्य अवशेष को बाहर निकालकर उसकी प्रतिष्ठा करने का दिया। आगे विश्वकर्मा द्वारा दिव्य स्वरूप के निर्माण की कथा जुड़ती है।<br />
हरि और हर की पूजा एक साथ सिर्फ इसी मंदिर में<br />
‘लिंगराज’ का अर्थ ही है—लिंगों के राजा। लेकिन यहां धार्मिक परंपरा केवल शिव के एकांगी स्वरूप तक सीमित नहीं रहती। मंदिर के आराध्य को हरिहर के रूप में भी देखा जाता है। हर’ भगवान शिव का नाम है और ‘हरि’ भगवान विष्णु का। इस तरह हरिहर की अवधारणा दोनों प्रमुख हिंदू परंपराओं के मिलन का प्रतीक बन जाती है। सबसे खास बातें की मंदिर की ध्वजा पर भगवान श्री राम के धनुष की आकृति लहराती है। यहां भगवान शिव अपने शरीर और भगवान हरि अपने सालिग्राम स्वरूप के साथ उपस्थित हैं। ओडिशा पर्यटन विभाग भी लिंगराज मंदिर को शैव और वैष्णव परंपराओं के समन्वय का महत्वपूर्ण उदाहरण बताता है। मंदिर के इतिहास में समय के साथ वैष्णव तत्वों का समावेश हुआ और इसी कारण हरिहर स्वरूप की धार्मिक व्याख्या को विशेष महत्व मिला। एक तरफ दस्तावेजों में दर्ज इतिहास है और दूसरी तरफ पीढ़ियों से चली आ रही धार्मिक स्मृतियां।<br />
जगन्नाथ पुरी से लिंगराज का धार्मिक रिश्ता<br />
लिंगराज मंदिर की चर्चा भगवान जगन्नाथ की परंपरा के बिना अधूरी मानी जाती है। लिंगराज को भगवान जगन्नाथ के ज्येष्ठ भ्राता के रूप में भी देखा जाता है। हालांकि पुरी की मुख्य परंपरा में बलभद्र को भगवान जगन्नाथ का बड़ा भाई माना जाता है।<br />
पूजा और परंपरा<br />
लिंगराज मंदिर आज भी जीवंत धार्मिक स्थल है। यहां पूजा-अर्चना निर्धारित परंपराओं और सेवायत व्यवस्था के अनुसार होती है। मंदिर में गैर-हिंदुओं के प्रवेश की अनुमति नहीं है। ऐसे श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए बाहर से मंदिर के दर्शन की व्यवस्था है।<br />
इतिहास, स्थापत्य और आस्था—तीनों का संगम<br />
भुवनेश्वर का लिंगराज मंदीर कलिंग स्थापत्य शैली का सर्वोत्तम और सबसे भव्य प्रतीक माना जाता है। यह ओडिशा के सबसे प्राचीन और विशालतम मंदिरों में से एक है। वर्तमान भव्य संरचना 11वीं शताब्दी की है, लेकिन संस्कृत ग्रंथों और पुरातात्विक साक्ष्यों के अनुसार इस स्थल पर 6ठी–7वीं शताब्दी (शैलेंद्र व भौम-कर राजवंशों के समय) से ही पूजा-अर्चना के प्रमाण मिलते हैं। वर्तमान मंदिर का निर्माण सोमवंशी राजवंश के काल में हुआ था इतिहासकार मानते हैं कि मंदिर का मुख्य निर्माण सोमवंशी राजा ययाति द्वितीय के समय (लगभग 1025–1040 ईस्वी) शुरू हुआ था। इसे उनके उत्तराधिकारी राजा ललाटेंदु केसरी (उद्योत केसरी) ने 11वीं शताब्दी के उत्तरार्ध (लगभग 1065 ईस्वी) में पूरा कराया।</p>
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		<title>कोरोना की जांच के लिए आई आरटीपीसीआर मशीनों से होगी डेंगू-मलेरिया की जांच</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Morning News India]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 17 Sep 2026 05:36:56 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[भारत]]></category>
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					<description><![CDATA[डेंगू वैक्सीन का एक फेज पूरा, दूसरे फेज में इंसानों पर परीक्षण चल रहा ]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>रोशनलाल शर्मा<br />
भुवनेश्वर। कोरोना महामारी के समय बनी 1300 जांच लैब्स और उनके लिए खरीदी गई करीब 1500 आरटीपीसीआर मशीनें अब डेंगू-मलेरिया की जांच के काम में ली जाएंगी।<br />
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद यानि आईसीएमआर की एडीजी डा. संघमित्रा पति ने राजस्थान और केरल से आए पीआईबी के पत्रकार दल से बात करते हुए कहा कि कोरोना के समय भारी भरकम बजट से खरीदी गई आरटीपीसीआर मशीनों को अब महामारी के लगभग खत्म होने के बाद नई महामारी का रूप ले रहे डेंगू और मलेरिया की जांच में उपयोग किया जाएगा। इसके लिए आवश्यक बदलाव के काम आईसीएमआर ने शुरू कर दिया है। डा. संघमित्रा के अनुसार डेंगू की वैक्सिन का एक चरण पूरा हो चुका है और दूसरे चरण में इंसानों पर ट्रायल शुरू हो गया है। इसके मायने ये है कि अब कभी भी डेंगू की वैक्सीन सामने आ सकती है। आईसीएमआर ने इसके लिए कई कम्पनी के साथ करार करने के बाद उन्हें अपनी रिसर्च सौंप दी।<br />
साथ ही पूरे देश में स्वास्थ्य, पशु, वन और खाद्य सुरक्षा विभागों के समन्वय एक ऐसा पूरा सिस्टम तैयार किया जा रहा है ताकि भविष्य में जानवरों से आने वाले सभी प्रकार के वॉयरस के बारे में पूर्वानुमान हो सके। खांसी और डायरिया जैसे पिछड़े इलाकों में पनपने वाले रोगों पर भी सरकार विशेष फोकस कर रही है।<br />
अपनी रिचर्स की वजह से देशभर में पहचान बना चुके क्षेत्रीय चिकित्सा अनुसंधान केंद्र भुवनेश्वर का नाम बदलकर अब &#8216;राष्ट्रीय स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थान&#8217; कर दिया गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के अंतर्गत कार्यरत यह संस्थान पिछले चार दशकों से पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत की क्षेत्रीय स्वास्थ्य चुनौतियों के समाधान का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है।<br />
स्वदेशी मलेरिया वैक्सीन भी तैयार, कभी भी हो सकती है लांच<br />
संस्थान ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मलेरिया रिसर्च और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इम्यूनोलॉजी के साथ मिलकर भारत की पहली स्वदेशी मल्टी-स्टेज मलेरिया वैक्सीन तैयार की है। यह वैक्सीन प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम परजीवी के दो संवेदनशील चरणों को लक्षित करती है, जिससे संक्रमण रुकने के साथ ही सामुदायिक प्रसार भी थमता है। यह मौजूदा अंतरराष्ट्रीय टीकों की तुलना में अधिक समय तक कमरे के तापमान पर स्थिर रह सकती है। प्री-क्लिनिकल ट्रायल में प्रभावी पाए जाने के बाद इसकी तकनीक बायोलॉजिकल ई, भारत इम्यूनोलॉजिकल्स, जायडस लाइफ, टेकवेंशन और पैनासिया बायोटेक जैसी 5 शीर्ष कंपनियों को हस्तांतरित की गई है।<br />
राजस्थान के दस शहरों में चलेगा विशेष स्वास्थ्य अभियान<br />
डा. संघमित्रा ने बताया की राजस्थान के दस जनजाति बहुल जिलों में विशेष स्वास्थ्य अभियान चलाने की तैयारी की गई है। इनमें उदयपुर, बारां, दौसा, सवाई माधोपुर, करौली सहित दस आदिवासी बहुल क्षेत्रों का चयन किया जा चुका है। जल्द ही भारत सरकार और राज्य सरकार के विभिन्न विभाग मिलकर इस पर काम शुरू करने जा रहे हैं। ट्राइबल हेल्थ ऑब्जर्वेटरी के नाम से इस कार्यक्रम को जनजातीय कार्य मंत्रालय ने देश के 95 जिलों के 8 लाख विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के स्वास्थ्य अध्ययन के लिए आईसीएमआर को नोडल केंद्र बनाया है।<br />
कोविड-19 महामारी में निभाई अग्रणी भूमिका<br />
कोरोना महामारी के दौरान आईसीएमआर ने मात्र 3 दिन के रिकॉर्ड समय में बीएसएल-थर्ड प्लस कोबास लैब स्थापित की और ओडिशा के 10 लाख व झारखंड के 15 हजार से अधिक सैंपलों की जांच की। संस्थान ने देश में पहली बार आरटी-पीसीआर के लिए लार (Saliva) के विकल्प और कोबास 6800 प्लेटफॉर्म पर &#8216;पूल्ड टेस्टिंग&#8217; की उपयोगिता को वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित किया।</p>
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		<item>
		<title>तीन साल में अपने 900 साल पुराने वैभव में लौटेगा कोणार्क का सूर्य मंदिर</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Morning News India]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 16 Sep 2026 14:46:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[भारत]]></category>
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					<description><![CDATA[-12 साल में 1200 मजदूरों ने किया था तैयार, एक मजदूर की आत्महत्या की वजह से कभी नहीं हुई पूजा रोशनलाल शर्मा भुवनेश्वर। विश्व प्रसिद्ध कोणार्क सूर्य मंदिर तीन साल में अपना 900 साल पुराना वैभव पुनः प्राप्त कर लेगा। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण एवं संरक्षण विभाग यानी एएसआई इस काम के युद्धस्तर पर करने को [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>-12 साल में 1200 मजदूरों ने किया था तैयार, एक मजदूर की आत्महत्या की वजह से कभी नहीं हुई पूजा<br />
रोशनलाल शर्मा<br />
भुवनेश्वर। विश्व प्रसिद्ध कोणार्क सूर्य मंदिर तीन साल में अपना 900 साल पुराना वैभव पुनः प्राप्त कर लेगा। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण एवं संरक्षण विभाग यानी एएसआई इस काम के युद्धस्तर पर करने को जुटा है।<br />
दरअसल, मंदिर का मुख्य शिखर लगभग 200–225 फीट ऊंचा था, जो विदेशी आक्रांताओं के आक्रमणों के कारण 16वीं–17वीं शताब्दी के आसपास ढह गया। तब मुख्य मूर्ति हटा ली गई और पूजा बंद हो गई।ब्रिटिश काल में 1903–1904 के दौरान जगमोहन के अंदर नदी की रेत भर दी गई थी और सभी दरवाजे सील कर दिए गए थे। अब 120 से अधिक वर्षों बाद, ASI ने CBRI रुड़की और IIT मद्रास के सहयोग से ज़ीरो-वाइब्रेशन तकनीक से यह रेत धीरे-धीरे निकालने की परियोजना शुरू की है।<br />
रेत हटाने और आंतरिक ढांचे को सुरक्षित करने के लिए करीब 3 साल की समयसीमा तय की गई है। काम पूरा होने के बाद आंतरिक भाग को पर्यटकों के देखने के लिए खोलने की योजना है। इसके बाद इस मंदिर को दुनिया अंदर से भी देख पाएगी।<br />
पूजा अर्चना पर संशय<br />
हालांकि इसके बाद भी यहां पूजा अर्चना शुरू हो पाएगी, इसमें संशय है। दरअसल मंदिर में कोई विग्रह नहीं है। एंशिएंट मॉन्यूमेंट्स एंड आर्कियोलॉजिकल साइट्स एंड रिमेन्स एक्ट के तहत जिन संरक्षित स्मारकों में अधिग्रहण के समय पूजा नहीं होती थी, उन्हें &#8220;गैर-जीवंत&#8221; माना जाता है और वहां नई धार्मिक परंपराएं शुरू नहीं की जाती। इसके अलावा, मुख्य गर्भगृह का ढांचा और मुख्य विग्रह सदियों पहले ही नष्ट हो चुके हैं।<br />
चुंबकीय शक्ति पर टिका था ढांचा<br />
मंदिर के निर्माण के समय पत्थरों को जमा कर तराशा गया था। आज भी वो मूर्तियां सुरक्षित है। साथ में लोहा डाला गया। आसपास 5 अन्य मंदिर बने जिन्हें मैगनेट के जरिए मुख्य सूर्य मंदिर के साथ बैलेंस किया गया। जब कोणार्क मंदिर ढहाया गया तब मैग्नेटिक बैलेंस टूटने से बाकी के पांचों मंदिर भी खंडहर हो गए।<br />
क्या काम कर रहा है एएसआई<br />
दरअसल, भीतर भरी हुई रेत 12 से 17 फीट तक नीचे धंस गई थी और पत्थर चटकने का खतरा था। मंदिर के जगमोहन की दीवार पर लगभग 80 फीट की ऊंचाई पर करीब 4 बाई 4 का छेद बनाकर रेत निकालने का रास्ता तैयार किया गया है। रेत निकलने के बाद खाली हुए स्थान में पत्थरों को सहारा देने के लिए हल्के और मजबूत स्टेनलेस स्टील के बीम व आधुनिक सपोर्ट लगाए जाएंगे, ताकि मंदिर बिना रेत के सुरक्षित खड़ा रह सके।<br />
जानिए कोणार्क मंदिर का इतिहास<br />
मंदिर 13वीं में 1238 में बनना शुरू हुआ। राजा नरसिंहदेव प्रथम द्वारा 1200 मजदूरों ने 12 साल में पूरा किया।<br />
स्थापत्य शैली का सबसे बड़ा और पुराना उदाहरण<br />
कलिंग शैली की वास्तुकला का शिखर है। इसे 24 नक्काशीदार पहियों और 7 घोड़ों वाले एक विशाल सूर्य रथ के रूप में तराशा गया था, जिसके पहिये धूपघड़ी का काम करते हैं। यूनेस्को ने 1984 में इसे विश्व धरोहर स्थल घोषित किया था।</p>
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		<title>ग्रैंड सफारी में पक्की भायली का भव्य आयोजन</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Morning News India]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 01 Jun 2026 14:39:53 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[मनोरंजन]]></category>
		<category><![CDATA[वुमन]]></category>
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					<description><![CDATA[&#160; जयपुर। ग्रैंड सफारी में 30 मई को पक्की भायली फाउंडेशन की ओर से भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में संस्कृति, मनोरंजन, सामाजिक संदेश और पर्यावरण संरक्षण की अनूठी झलक देखने को मिली। पक्की भायली फाउंडेशन की फाउंडर एंड डायरेक्टर सोनू अग्रवाल ने बताया कि यह आयोजन सभी के सहयोग से सफलतापूर्वक [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<div style="width: 848px;" class="wp-video"><video class="wp-video-shortcode" id="video-42070-1" width="848" height="478" preload="metadata" controls="controls"><source type="video/mp4" src="https://www.morningnewsindia.com/wp-content/uploads/2026/06/02.mp4?_=1" /><a href="https://www.morningnewsindia.com/wp-content/uploads/2026/06/02.mp4">https://www.morningnewsindia.com/wp-content/uploads/2026/06/02.mp4</a></video></div>
<p><strong>जयपुर।</strong> ग्रैंड सफारी में 30 मई को पक्की भायली फाउंडेशन की ओर से भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में संस्कृति, मनोरंजन, सामाजिक संदेश और पर्यावरण संरक्षण की अनूठी झलक देखने को मिली। पक्की भायली फाउंडेशन की फाउंडर एंड डायरेक्टर सोनू अग्रवाल ने बताया कि यह आयोजन सभी के सहयोग से सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।</p>
<p>कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक रूप से गणेश वंदना के साथ की गई। गणेश जी को भजन, प्रोसेशन और श्रद्धा भाव के साथ विराजमान किया गया। उपस्थित सभी लोगों ने गणेश जी की पूजा-अर्चना कर कार्यक्रम को आध्यात्मिक और सकारात्मक ऊर्जा से भर दिया। इसके बाद पंचुअलिटी निकाली गई और सभी ने मिलकर राष्ट्रगान “जन गण मन” का गायन किया।</p>
<p>कार्यक्रम में कई लघु नाटिकाओं की शानदार प्रस्तुतियां दी गईं। इनमें “आओ लौट चलें” और “शालीनता की ओर” जैसी नाटिकाओं ने दर्शकों को भावुक करने के साथ सामाजिक संदेश भी दिया। नाटिकाओं में सास-बहू, दामाद और पारिवारिक रिश्तों के पारंपरिक व आधुनिक पहलुओं को खूबसूरती से दर्शाया गया। देशभक्ति से जुड़ी प्रस्तुतियों ने भी दर्शकों का मन मोह लिया।</p>
<p>कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण महा रास रहा। इसमें गोपी-गोपिकाओं की प्रस्तुति, ठिठोली और पारंपरिक रासलीला ने माहौल को भक्तिमय और मनोरंजक बना दिया। ढोल-नगाड़ों की थाप पर कलाकारों ने शानदार नृत्य प्रस्तुत किया, जिसका दर्शकों ने भरपूर आनंद लिया।</p>
<p>पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी कार्यक्रम में विशेष संदेश दिया गया। पर्यावरण जागरूकता के लिए रैली निकाली गई, जिसमें प्रकृति संरक्षण और स्वच्छ वातावरण के महत्व को समझाया गया। इस पहल ने यह संदेश दिया कि सांस्कृतिक आयोजनों के साथ सामाजिक जिम्मेदारी भी उतनी ही जरूरी है।</p>
<p>कार्यक्रम में मुख्य अतिथि लता तिवारी का सम्मान किया गया। साथ ही चीफ संरक्षक बसंत जैन, एग्जीक्यूटिव्स आभा बाढ़धार, भावना गहलोत, अनीशा गोयल, सरोज सामरिया, उषा शिनॉय सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। अतिथियों में डॉ. नीरज अग्रवाल, डॉ. राकेश केदावत, ब्रांड आइकन नीतू जैन, ब्रांड एम्बेसडर पूजा शर्मा, प्रीति गोयल, मीनाक्षी जैन, परवीन हीरा, दीपा यादव, मनजीत अरोड़ा, ग्रैंड सफारी के मालिक पवन गोयल, सुमित तिवारी, डालेंद्र, रेनू, ललिता भारती सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही।</p>
<p>कार्यक्रम स्थल पर विभिन्न स्टॉल भी लगाए गए, जिनमें कान्हा की ड्रेस, आंवला चूरन, हींग, ज्वेलरी और बेडशीट जैसे उत्पाद प्रदर्शित किए गए। इन स्टॉल्स के माध्यम से स्थानीय उत्पादों और संस्कृति को बढ़ावा मिला, साथ ही लोगों को खरीदारी का अवसर भी प्राप्त हुआ।</p>
<p>गायक आजाद ने अपनी मधुर आवाज से कार्यक्रम में चार चांद लगाए। P3NEWS से बाबूलाल जाट ने फोटोग्राफी की, वहीं कमांडो टीम ने भी कार्यक्रम की फोटोग्राफी की जिम्मेदारी संभाली। एंकर नेहा पारख ने पूरे कार्यक्रम का संचालन बेहतरीन तरीके से किया।</p>
<p>अंत में पक्की भायली फाउंडेशन की संस्थापक निदेशक सोनू अग्रवाल ने कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी अतिथियों, सदस्यों, कलाकारों और उपस्थित जनों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में सांस्कृतिक प्रेम, एकता और जागरूकता को बढ़ावा देते हैं।</p>
<p>यह आयोजन दर्शाता है कि भारतीय संस्कृति, मनोरंजन और सामाजिक संदेश को एक मंच पर लाकर समाज में सकारात्मक बदलाव की दिशा में प्रभावी प्रयास किए जा सकते हैं।</p>
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			<media:title type="plain">ग्रैंड सफारी में पक्की भायली का भव्य आयोजन - Morning News India</media:title>
			<media:description type="html"><![CDATA[जयपुर। ग्रैंड सफारी में 30 मई को पक्की भायली फाउंडेशन की ओर से भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में संस्कृति, मनोरंजन, सामाजिक संदेश और पर्यावरण संरक्षण की अनूठी झलक देखने को मिली। पक्की भायली फाउंडेशन की फाउंडर एंड डायरेक्टर सोनू अग्रवाल ने बताया कि यह आयोजन सभी के सहयोग से सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।]]></media:description>
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		<title>पश्चिम बंगाल में बीजेपी सरकार, शुभेंदु अधिकारी बने मुख्यमंत्री</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Morning News India]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 09 May 2026 08:12:25 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[भारत]]></category>
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					<description><![CDATA[बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर राज्य की सत्ता संभाल ली। राज्यपाल आर.एन. रवि ने कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित भव्य समारोह में उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, यूपी के [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p data-start="144" data-end="405">बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर राज्य की सत्ता संभाल ली। राज्यपाल आर.एन. रवि ने कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित भव्य समारोह में उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई बड़े नेता मौजूद रहे। समारोह में भारी भीड़ और बीजेपी कार्यकर्ताओं का उत्साह देखने लायक था।</p>
<p data-start="650" data-end="879">राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की रही कि शुभेंदु अधिकारी ने भवानीपुर सीट से पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को हराकर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया। प्रोटोकॉल के तहत ममता बनर्जी को भी शपथ समारोह का निमंत्रण भेजा गया था।</p>
<p data-start="881" data-end="1008">शुभेंदु अधिकारी के साथ दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, निसिथ प्रामाणिक, खुदीराम टुडू और अशोक कीर्तनिया ने भी मंत्री पद की शपथ ली।</p>
<p data-start="1010" data-end="1209">बताया जा रहा है कि 8 मई को अमित शाह ने कोलकाता पहुंचकर विधायक दल की बैठक में शुभेंदु अधिकारी के नाम का ऐलान किया था। इसके बाद शुभेंदु अधिकारी ने राज्यपाल से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया।</p>
<p data-start="1211" data-end="1392">विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 207 सीटों पर जीत दर्ज कर प्रचंड बहुमत हासिल किया, जबकि टीएमसी महज 80 सीटों पर सिमट गई। इसके साथ ही बंगाल में 15 साल पुरानी टीएमसी सरकार का अंत हो गया।</p>
<h2 data-section-id="1j9io13" data-start="1394" data-end="1409">बड़ी बातें</h2>
<ul data-start="1410" data-end="1637">
<li data-section-id="a1qxkx" data-start="1410" data-end="1464">शुभेंदु अधिकारी बने पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री</li>
<li data-section-id="1fi9ng9" data-start="1465" data-end="1519">ब्रिगेड परेड ग्राउंड में हुआ भव्य शपथ ग्रहण समारोह</li>
<li data-section-id="byrfox" data-start="1520" data-end="1555">पीएम मोदी और अमित शाह रहे मौजूद</li>
<li data-section-id="alpoz3" data-start="1556" data-end="1593">टीएमसी का 15 साल पुराना शासन खत्म</li>
<li data-section-id="ca5gup" data-start="1594" data-end="1637">बीजेपी को 207 सीटों के साथ प्रचंड बहुमत</li>
</ul>
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		<title>​पिंजरापोल गौशाला में सवा दो करोड़ का बड़ा &#8216;अनुदान घोटाला&#8217; !</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Morning News India]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 09 May 2026 05:25:19 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[भारत]]></category>
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					<description><![CDATA[जयपुर। राजधानी जयपुर की टोंक रोड स्थित पिंजरापोल गौशाला एक बार फिर गंभीर वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं को लेकर विवादों में आ गई है। महालेखाकार (AG) राजस्थान की अनुपालना लेखापरीक्षा रिपोर्ट में गौशाला प्रबंधन पर करीब 2.21 करोड़ रुपये के अनुदान में गड़बड़ी और नियम विरुद्ध भुगतान लेने के आरोप सामने आए हैं। मृत पशुओं [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p data-start="90" data-end="596"><strong data-start="90" data-end="100">जयपुर।</strong> राजधानी जयपुर की टोंक रोड स्थित पिंजरापोल गौशाला एक बार फिर गंभीर वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं को लेकर विवादों में आ गई है। महालेखाकार (AG) राजस्थान की अनुपालना लेखापरीक्षा रिपोर्ट में गौशाला प्रबंधन पर करीब 2.21 करोड़ रुपये के अनुदान में गड़बड़ी और नियम विरुद्ध भुगतान लेने के आरोप सामने आए हैं।</p>
<h2 data-section-id="y8qax6" data-start="598" data-end="640">मृत पशुओं के नाम पर अनुदान लेने का आरोप</h2>
<p data-start="642" data-end="911">लेखापरीक्षा रिपोर्ट के अनुसार वित्तीय वर्ष 2022-23 से 2024-25 के बीच गौशाला सहायता अनुदान योजना के तहत 2,21,55,820 रुपये का भुगतान कथित रूप से नियमों के विपरीत किया गया। जांच में सामने आया कि अनुदान प्राप्त करने के लिए प्रपत्र-5 और ऑनलाइन रिकॉर्ड में भारी हेरफेर की गई।</p>
<h2 data-section-id="n3j7oe" data-start="1207" data-end="1234">भौतिक सत्यापन पर भी सवाल</h2>
<p data-start="1236" data-end="1444">नियमों के अनुसार गौशालाओं को अनुदान केवल उन्हीं पशुओं पर मिलता है जो निर्धारित अवधि तक गौशाला में मौजूद रहें। लेकिन नोटिस में आरोप लगाया गया है कि कई ऐसे पशुओं पर भी अनुदान लिया गया जो मौके पर मौजूद नहीं थे।</p>
<p data-start="1446" data-end="1643">विधिक नोटिस में विभागीय अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि भौतिक सत्यापन के दौरान मृत और अपंजीकृत पशुओं को भी सत्यापित मान लिया गया, जिससे सरकारी धन के दुरुपयोग को बढ़ावा मिला।</p>
<h2 data-section-id="ytpr9w" data-start="1645" data-end="1695">गौसेवा की आड़ में व्यावसायिक गतिविधियों का आरोप</h2>
<p data-start="1697" data-end="1950">नोटिस में गौशाला परिसर में व्यावसायिक गतिविधियों के संचालन का भी आरोप लगाया गया है। बताया गया है कि श्रद्धालुओं द्वारा दान किए गए हरे और सूखे चारे को दोबारा बेचने का काम किया जा रहा है। इसके लिए लगभग 30 लाख रुपये का ठेका दिए जाने का भी दावा किया गया है।</p>
<h2 data-section-id="1ndu86p" data-start="2205" data-end="2249">प्रदूषित पानी से उगाए जा रहे चारे का दावा</h2>
<p data-start="2251" data-end="2494">विधिक नोटिस में यह भी कहा गया है कि गौशाला में पशुओं को दिया जाने वाला चारा कथित रूप से नाले के प्रदूषित और रासायनिक अपशिष्टयुक्त पानी से उगाया जा रहा है। इससे पशुओं के स्वास्थ्य और दूध की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई गई है।</p>
<h2 data-section-id="ypb37" data-start="2673" data-end="2704">स्वतंत्र ऑडिट और FIR की मांग</h2>
<p data-start="2706" data-end="2953"><strong>शिकायतकर्ता ने </strong>सरकार से पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने पिछले दस वर्षों का विशेष ऑडिट, पशुओं की वास्तविक संख्या की दोबारा जांच, प्रदूषित जल के उपयोग पर रोक और अवैध निर्माण हटाने की मांग उठाई है। नोटिस में वर्तमान कार्यकारिणी को भंग कर सरकारी प्रशासक नियुक्त करने की मांग भी की गई है ताकि रिकॉर्ड और साक्ष्यों से छेड़छाड़ रोकी जा सके।</p>
<p data-start="3146" data-end="3423" data-is-last-node="" data-is-only-node="">
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		<title>जनगणना 2027 का कार्य 16 मई से होगा शुरू</title>
		<link>https://www.morningnewsindia.com/india/news/work-on-census-2027-will-begin-on-may-16/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Morning News India]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 18 Apr 2026 03:35:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[भारत]]></category>
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					<description><![CDATA[प्रथम चरण में मकानसूचीकरण और मकानों की गणना की जाएगी राज्य में भारत की जनगणना 2027 के प्रथम चरण अर्थात मकानसूचीकरण का कार्य दिनांक 16 मई 2026 से 14 जून 2026 के मध्य करवाया जाएगा। यह जानकारी जनगणना कार्य निदेशालय के निदेशक बिष्णु चरण मल्लिक ने जयपुर में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में दी। उन्होंने बताया [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff6600;"><strong>प्रथम चरण में मकानसूचीकरण और मकानों की गणना की जाएगी</strong></span></p>
<p>राज्य में भारत की जनगणना 2027 के प्रथम चरण अर्थात मकानसूचीकरण का कार्य दिनांक 16 मई 2026 से 14 जून 2026 के मध्य करवाया जाएगा। यह जानकारी जनगणना कार्य निदेशालय के निदेशक बिष्णु चरण मल्लिक ने जयपुर में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में दी। उन्होंने बताया कि जनगणना के प्रथम चरण &#8220;मकानसूचीकरण और मकानों की गणना (HLO)&#8221; को पूर्णतः डिजिटल और सहभागी बनाने की दिशा में भारत सरकार द्वारा एक अभिनव पहल करते हुए &#8216;स्व-गणना&#8217; (Self-Enumeration) की सुविधा प्रदान की गई है। &#8216;स्व-गणना&#8217; (Self-Enumeration) पोर्टल का उपयोग 1 मई 2026 से 15 मई 2026 तक डेस्कटॉप अथवा स्मार्टफोन के माध्यम से किया जा सकेगा। संबंधित पोर्टल का पता https://se.census.gov.in है।</p>
<p>मल्लिक ने जानकारी देते हुए कहा कि स्व-गणना सुविधा का उद्देश्य कार्यरत, व्यस्त अथवा सुविधा अनुसार स्वयं विवरण उपलब्ध कराने के इच्छुक परिवारों को डिजिटल माध्यम से अपनी जानकारी भरने का अवसर प्रदान करना है। तथापि, यह स्पष्ट किया जाता है कि स्व-गणना किए जाने के उपरांत भी संबंधित प्रगणक द्वारा फील्ड स्तर पर सत्यापन एवं डाटा जांच की प्रक्रिया अनिवार्य रूप से संपादित की जाएगी।</p>
<p>साइबर सुरक्षा की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए जनगणना कार्य निदेशालय के निदेशक ने आमजन को ध्यान रखने के लिए कहा कि वे स्व-गणना पोर्टल पर जाने के लिए निर्धारित वेब एड्रैस का उपयोग ही करें, किसी सर्च इंजन की सहायता से न जाएं, https तथा .gov.in पर विशेष ध्यान दें। लॉग इन करते समय आपके पास ओटीपी आएगा उसे किसी से साझा न करें। स्व-गणना डेटा के सत्यापन के लिए आने वाले प्रगणक अथवा जनगणना विभाग द्वारा भी आप से ओटीपी नहीं मांगा जाएगा, न ही कोई लिंक उपलब्ध करवाया जाएगा। स्वगणना हेतु SE ID तथा OTP संदेश के लिए ध्यान दें कि वे RGICEN से प्राप्त होंगे।</p>
<p>राजस्थान में जनगणना 2027 के प्रथम चरण के फील्ड कार्य में करीब 1 लाख 60 हजार प्रगणक एवं पर्यवेक्षक, सम्पूर्ण राजस्थान में घर-घर जाकर जनगणना के अधिसूचित प्रश्नों के डेटा संग्रहण का कार्य करेंगें। राज्य सरकार द्वारा 29 जनवरी 2026 को जनगणना के प्रथम चरण में पूछे जाने वाले प्रश्नों (कुल 33) &#8220;की अधिसूचना जारी की गई है।</p>
<p>श्री मल्लिक ने बताया कि मकानसूचीकरण कार्य के अंतर्गत राज्य के समस्त भवनों, जनगणना मकानों एवं परिवारों की पहचान कर उनका व्यवस्थित सूचीकरण किया जाएगा, साथ ही प्रगणक द्वारा घर-घर जाकर मकान की स्थिति, परिवार को उपलब्ध सुविधाएँ एवं परिवार द्वारा धारित परिसंपत्तियाँ, परिवार द्वारा उपभोग किए जाने वाले मुख्य अनाज से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न पूछे जाएंगे।</p>
<p>उपरोक्त महत्वपूर्ण सूचनाओं के आंकड़े प्राप्त करने के साथ साथ, जनगणना के प्रथम चरण &#8220;मकानसूचीकरण और मकानों की गणना (HLO)&#8221; का उद्देश्य आगामी जनसंख्या गणना हेतु एक सम्यक एवं विश्वसनीय मास्टर फ्रेम तैयार करना है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि जनगणना के द्वितीय चरण- जनसंख्या गणना (PE) चरण में कोई भी व्यक्ति अथवा परिवार गणना से वंचित न रह जाए।</p>
<p>मल्लिक ने बताया कि जनगणना के सफल क्रियान्वयन हेतु विभिन्न स्तरों पर बहुस्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। फील्ड कार्य में डेटा संग्रहण की प्रक्रिया एवं गुणवत्ता के लिए रखी जाने वाली सावधानियों के लिए प्रथम स्तर पर 103 मास्टर ट्रेनर्स का राज्य स्तरीय प्रशिक्षण दिनांक 7 अप्रैल से 10 अप्रैल 2026 तक आयोजित किया गया। इन मास्टर ट्रेनर्स के द्वारा 41 जिलों एवं 10 नगर निगमों में 2550 फील्ड ट्रेनर्स का प्रशिक्षण प्रगति पर है। इन फील्ड ट्रेनर्स के द्वारा 01 मई से 15 मई 2026 के मध्य 1.6 लाख प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों को तहसील, नगर परिषद एवं नगर पालिका स्तर पर प्रशिक्षित किया जाएगा</p>
<p>मल्लिक ने बताया कि जनगणना 2027 को आधुनिक एवं डिजिटल स्वरूप प्रदान करने के उद्देश्य से जनगणना प्रबंधन एवं निगरानी प्रणाली (Census Management &amp; Monitoring System CMMS) पोर्टल, मकानसूचीकरण ब्लॉक निर्माण (HLBC) वेब पोर्टल एवं मकान सूचीकरण ऐप (HLO app) विकसित किए गए हैं। CMMS पोर्टल का उपयोग चार्ज अधिकारियों (तहसीलदार/आयुक्त नगर परिषद/अधिशासी अधिकारी नगर पालिका/उपायुक्त नगर निगम) द्वारा सम्पूर्ण जनगणना कार्य की योजना बनाने, फील्ड कार्य की लगभग वास्तविक समय पर निगरानी करने तथा आंकड़ों की गुणवत्ता बनाये रखने के लिए किया जायेगा। HLBC वेब पोर्टल के माध्यम से जनगणना कार्य की सबसे छोटी कार्यात्मक इकाई मकानसूचीकरण ब्लॉक को जियो टैगिंग करने तथा सैटेलाइट इमेज पर सीमांकन करने के लिए किया जायेगा जबकि HLO मोबाइल एप का उपयोग प्रगणकों/पर्यवेक्षकों द्वारा अपने मोबाइल उपकरण के माध्यम से आंकड़ों के संग्रहण के लिए किया जाएगा।</p>
<p>जनगणना 2027 को सफल बनाने में आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी पर बल् देते हुए मल्लिक ने कहा कि सामान्य जन से अपेक्षा की जाती है कि वे जनगणना कार्य में संलग्न अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सही, पूर्ण तथा तथ्यात्मक जानकारी उपलब्ध कराएँ। उन्होंने कहा कि नागरिकों से यह भी अनुरोध है कि वे अपने निवास पर आने वाले प्रगणक से उनका अधिकृत परिचय-पत्र देखने के उपरांत ही जानकारी साझा करें। परिचय पत्र में QR code भी अंकित किए गए हैं जिसे स्कैन कर प्रगणक की जानकारी की पुष्टि की जा सकती है। जनगणना के दौरान प्राप्त समस्त व्यक्तिगत जानकारी पूर्णतः गोपनीय रखी जाएगी तथा उसका उपयोग केवल सांख्यिकीय प्रयोजनों के लिए किया जाएगा।</p>
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		<title>आशा भोसले का अंतिम संस्कार आज</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Morning News India]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 13 Apr 2026 05:25:55 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[भारत]]></category>
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					<description><![CDATA[सिंगर आशा भोसले का आज 4 बजे मुंबई के शिवाजी पार्क में अंतिम संस्कार किया जाएगा। उनका रविवार को मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में निधन हो गया था। वे 92 साल की थीं। आशा को कई मेडिकल समस्याएं होने के चलते शनिवार रात अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनके कई अंगों ने काम [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p class="">सिंगर आशा भोसले का आज 4 बजे मुंबई के शिवाजी पार्क में अंतिम संस्कार किया जाएगा। उनका रविवार को मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में निधन हो गया था। वे 92 साल की थीं। आशा को कई मेडिकल समस्याएं होने के चलते शनिवार रात अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनके कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था। यानी मल्टी-ऑर्गन फेल्योर के कारण उनकी मौत हुई।</p>
<p class="">आशा भोसले ने 82 साल के सिंगिंग करियर में 9 फिल्फमेयर समेत 100 से अधिक अवॉर्ड जीते। उन्हें देश के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था। ऐसे में उनका अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा।</p>
<p class="">आशा भोसले क्लासिकल सिंगर दीनानाथ मंगेशकर की बेटी और लता मंगेशकर की छोटी बहन थीं। जब वो सिर्फ 9 साल की थीं तब उनके पिता का निधन हो गया था। इस कारण लता की तरह आशा को भी कम उम्र में ही सिंगिंग की शुरुआत करनी पड़ी। आशा ने पहला गाना 10 साल की उम्र में गाया था।</p>
<p class="">आशा भोसले ने अपने करियर में 20 से अधिक भाषाओं में 12,000 से ज्यादा गाने गाए। उनके गाने &#8216;इन आंखों की मस्ती&#8217;, &#8216;दम मारो दम&#8217;, &#8216;पिया तू अब तो आजा&#8217; और &#8216;चुरा लिया है तुमने&#8217; आज भी लोकप्रिय हैं।</p>
]]></content:encoded>
					
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		<item>
		<title>आईएएस के तबादले: सीएम ने बदली अपनी टीम</title>
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		<dc:creator><![CDATA[roshanlal sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 01 Apr 2026 14:18:38 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[भारत]]></category>
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					<description><![CDATA[-25 जिला कलक्टर भी बदले, जयपुर का जिम्मा संदेश नायक को
-ओमप्रकाश कसेरा नगर निगम जयपुर के आयुक्त, अरविन्द पोसवाल हाउसिंग बोर्ड आयुक्त, डॉ. गौरव सैनी होंगे जेडीए सचिव
-जितेन्द्र सोनी मुख्यमंत्री के नए सचिव बने]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>जयपुर।</strong> मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बुधवार तड़के अपनी पूरी टीम बदल दी। साथ ही कई जिलों के कलक्टर भी बदल डाले। कार्मिक विभाग ने 65 आईएएस अधिकारियों की सूची जारी की है। सरकार में तबादले होना आम बात है लेकिन चर्चा का विषय ये है कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की टीम के सभी चेहरों को आखिर क्यों बदला गया? सिर्फ वरिष्ठ आईएएस अखिल अरोड़ा को छोड़कर सभी को बदला गया है। अखिल अरोड़ा एक संजीदा और वित्तीय मामलों के जानकार आईएएस अधिकारी के रूप में जाने जाते हैं।</p>
<p>अब सीएमओ में नई और युवा टीम की एंट्री हुई है, जिसमें जितेंद्र सोनी और रिया डाबी जैसे चर्चित नाम शामिल हैं। जितेन्द्र सोनी को जयपुर जिला कलक्टर से सीधे सीएमओ में लाया गया है। इससे ये साबित होता है कि राजधानी जयपुर में उनका लम्बे समय का कार्यकाल सीएम भजनलाल शर्मा को पसन्द रहा।<br />
मुख्यमंत्री के सचिव सचिव जितेंद्र सोनी अपनी नवाचार शैली और जिलों में शानदार काम के लिए पहचाने जाते हैं। राजधानी जयपुर में कलक्टर के रूप में उनकी जनता से नजदीकी उनको विशेष बनाती है। विशिष्ट सचिव मुकुल शर्मा हैं। वहीं ओएसडी के रूप में रिया डाबी जैसी युवा आईएएस को जिम्मेदारी सौंपी गई है। सोशल मीडिया पर रिया डाबी के हजारों फॉलोअर हैं। उनके साथ रजत यादव और अक्षत कुमार सिंह को भी ओएसडी बनाया गया है। ज्वाइंट सैक्रेटरी के रूप में उत्सव कौशल और अमिता शर्मा को जिम्मेदारी दी गर्ह है। सिर्फ सीएमओ ही नहीं, बल्कि राजस्थान के कई महत्वपूर्ण जिलों के कलक्टर भी बदल दिए गए हैं। सूची में अधिकांश जिलों की कमान नए और युवा हाथों में सौंपी गई है। जैसे सौम्या झा जो टोंक कलक्टर के रूप में अपनी कार्यप्रणाली का लोहा मनवा चुकी हैं वे अब दौसा की कलक्टर होंगी। सरकार का उद्देश्य जिलों में जनसुनवाई को प्रभावी बनाना और सरकारी योजनाओं की अंतिम छोर तक पहुंच सुनिश्चित करना है। मुख्यमंत्री के विशिष्ट सचिव संदेश नायक का तबादला जयपुर कलक्टर और विशिष्ट सचिव अरविंद कुमार पोसवाल को हाउसिंग बोर्ड के आयुक्त की जिम्मेदारी दी गई है। जनजाति क्षेत्रीय विकास (टीएडी) आयुक्त केएल स्वामी का तबादला जोधपुर के संभागीय आयुक्त के पद पर किया गया है। आबकारी आयुक्त नकाते शिवप्रसाद मदन का तबादला अक्षय उर्जा निगम के एमडी के पद पर किया गया है। उदयपुर कलक्टर नमित मेहता को आबकारी आयुक्त बनाया गया है।</p>
<p><strong>आईएएस की तबादला सूची</strong></p>
<p>डॉ. जोगा राम : सचिव एवं आयुक्त, पंचायतीराज, मिशन निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, राजस्थान<br />
राजन विशाल : मिशन निदेशक, जल जीवन मिशन<br />
डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी : सचिव, मुख्यमंत्री एवं सचिव, डीआईपीआर<br />
कन्हैया लाल स्वामी : संभागीय आयुक्त, जोधपुर<br />
नकाते शिवप्रसाद मदन: एमडी, ऊर्जा विकास एवं आई.टी. सर्विसेज लिमिटेड, जयपुर<br />
संदेश नायक : जिला कलक्टर जयपुर<br />
शिवांगी स्वर्णकार: विशिष्ट सचिव, वित्त (बजट) एवं सीईओ, पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट ट्रेनिंग सोसायटी, जयपुर<br />
अनुपमा जोरवाल: जिला कलक्टर जैसलमेर<br />
ओम प्रकाश कसेरा :आयुक्त, नगर निगम, जयपुर एवं सीईओ जयपुर स्मार्ट सिटी<br />
नमित मेहता :आयुक्त, आबकारी, उदयपुर<br />
नम्रता कृष्ण : विशिष्ट सचिव, खान एवं पेट्रोलियम विभाग, राजस्थान, जयपुर<br />
आलोक रंजन: जिला कलक्टर जोधपुर<br />
अरविन्द कुमार पोसवाल :आयुक्त, राजस्थान आवासन मण्डल, जयपुर<br />
डॉ. रश्मि शर्मा राज्य : परियोजना निदेशक, समग्र शिक्षा अभियान, आयुक्त स्कूल शिक्षा, जयपुर एवं विशिष्ट सचिव, सांख्यिकी विभाग, राजस्थान<br />
लक्ष्मी नारायण मंत्री: आयुक्त, टी.ए.डी. एवं आयुक्त, देवस्थान विभाग, उदयपुर<br />
कल्पना अग्रवाल : निदेशक एवं पदेन विशिष्ट सचिव, जल ग्रहण विकास एवं भू संरक्षण विभाग, जयपुर<br />
मुकुल शर्मा : विशिष्ट सचिव, मुख्यमंत्री,<br />
गौरव अग्रवाल : जिला कलक्टर उदयपुर<br />
चिन्मयी गोपाल : जिला कलक्टर बाड़मेर<br />
शुभम चौधरी : जिला कलक्टर प्रतापगढ़<br />
सुरेश कुमार ओला: एमडी, राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास एवं विनियोजन निगम एवं आयुक्त, दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, जयपुर<br />
आशीष मोदी: जिला कलक्टर सीकर<br />
अंकित कुमार सिंह : जिला कलक्टर डूंगरपुर<br />
प्रियंका गोस्वामी :स्टेट मिशन निदेशक, आजीविका परियोजनाएं<br />
राजेन्द्र कुमार वर्मा: संयुक्त सचिव, गृह विभाग, जयपुर<br />
अल्पा चौधरी : भू प्रबंध आयुक्त एवं पदेन निदेशक, बन्दोबस्त, राजस्थान,<br />
बाबूलाल गोयल: आयुक्त, चिकित्सा शिक्षा विभाग, राजस्थान, जयपुर<br />
बाल मुकुन्द असावा: जिला कलक्टर बारां<br />
बचनेश कुमार अग्रवाल : आयुक्त, कोटा विकास प्राधिकरण<br />
नीलाभ सक्सेना : आयुक्त, उद्योग, वाणिज्य एवं कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी एवं आयुक्त (विनियोजन एवं अप्रवासी भारतीय), निवेश संवर्धन ब्यूरो<br />
निशांत जैन : जिला कलक्टर बीकानेर<br />
सौरभ स्वामी : प्रबंध निदेशक, राजफैड, जयपुर<br />
अंजली राजोरिया: संयुक्त सचिव, गृह विभाग, जयपुर<br />
टीना डाबी : जिला कलक्टर टोंक<br />
डॉ. अमित यादव : जिला कलक्टर श्रीगंगानगर<br />
प्रताप सिंह : संयुक्त सचिव, वित्त (व्यय द्वितीय)<br />
डॉ. मंजु : जिला कलक्टर चित्तौडग़ढ़<br />
डॉ. रविन्द्र गोस्वामी: जिला कलक्टर पाली<br />
रोहिताश्व सिंह तोमर : जिला कलक्टर सिरोही<br />
हरफूल सिंह यादव : जिला कलक्टर बूंदी<br />
ललित कुमार : निदेशक सामाजिक न्याय व अधिकारिता विभाग<br />
उत्सव कौशल : संयुक्त सचिव, मुख्यमंत्री<br />
डॉ. गौरव सैनी : सचिव, जयपुर विकास प्राधिकरण, जयपुर<br />
श्वेता चौहान : आयुक्त, उद्यानिकी, राजस्थान, जयपुर<br />
अवधेश मीणा : जिला कलक्टर डीडवाना कुचामन<br />
देवेन्द्र कुमार : जिला कलक्टर नागौर<br />
अक्षय गोदारा : जिला कलक्टर करौली<br />
डॉ. सौम्या झा : जिला कलक्टर दौसा<br />
डॉ. महेन्द्र खडग़ावत: संयुक्त शासन सचिव, श्रम, कारखाना एवं बॉयलर निरीक्षण एवं चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं<br />
अतुल प्रकाश : जिला कलक्टर खैरथल-तिजारा<br />
देशल दान : जिला कलक्टर डूंगरपुर<br />
मुहम्मद जुनैद पी पी : जिला कलक्टर सलुम्बर<br />
मयंक मनीष : जिला कलक्टर डीग<br />
अपर्णा गुप्ता : जिला कलक्टर कोटपूतली-बहरोड़<br />
अमिता शर्मा : संयुक्त सचिव, मुख्यमंत्री<br />
नरेश कुमार गोयल : आयुक्त, कृषि एवं पंचायती राज (कृषि) विभाग<br />
राहुल जैन : आयुक्त, नगर निगम, जोधपुर<br />
सिद्धार्थ पालानीचामी: आयुक्त, नगर निगम, बीकानेर<br />
सोहन लाल अतिरिक्त आयुक्त, वाणिज्यिक कर (कर अपर्वचन)<br />
जयदेव सी. एस. : सचिव, राज्य मानवाधिकार आयोग, जयपुर<br />
रिया डाबी : ओएसडी, मुख्यमंत्री<br />
शैलजा पांडे : सीईओ, जिला परिषद् बीकानेर<br />
रजत यादव : ओएसडी, मुख्यमंत्री<br />
अक्षत कुमार सिंह : ओएसडी मुख्यमंत्री, राजस्थान, जयपुर<br />
गरिमा नरूला : ओएसडी, मुख्य सचिव कार्यालय, जयपुर</p>
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